Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga - Page 9 - SexBaba
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Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga

अपडेट 80

उधर हॉस्पिटल में पायल ने रोशन के हाथ को अपने जाँघों पर रख कर कहा, “कहो कैसा लगता है तुमको मेरी जाँघों को छूटे हुवे? मैं में कुछ होता है रोशन? ”रोशन का मैं तो बहोत कर रहा था के आगे बढ़ें मगर पायल उस्सकी चची थी, वह राजें चाचा को सोच रहा था और नतीजा किआ होगा यह भी सोच रहा था और यह सब उस्सको दुबिधा में दाल रहा था…. उस के पसीने छूट रहे थे और बहोत गरम लग रहा tha…Uss का हाथ चची की जांघ पर था और अपने ेंखों को उठाकर उस्सने चची की छाती पर फिर से देखा, उस्सकी बूब्स और निप्पल्स साफ़ एक डैम तगड़ा फ़्लीम्सय निघ्त्य के थ्रू दिख रहे थे और रोशन का लुंड तो चादर के निचे बिल्कुल खड़ा हुवा था फिर भी उसस्के समझ में नहीं ारः था के वह किआ karein…..Thoda हिचकिचा रहा था पायल चची से…..

पायल के समझ में आगया के लड़का शर्मा रहा है और वह खुद हेल्प करने लगी उस्सको…… अपने हाथ में रोशन का हाथ लिए पायल ने अपने जाँघों पर फेरा, ऊपर और ज़्यादा जाँघों के ऊपर उस्का हाथ फेरती गयी और रोशन पसीना पसीना होता गया और थोड़ा बहोत कम्प भी रहा था…. वैसे तो हमउम्र थे दोनों मगर रोशन की चची लगती थी वह तो रोशन इस रिश्ते की वजह से कुछ घबरा रहा था और फैसला नहीं कर पा रहा था के आगे बढ़ें या नहीं….. पायल को hi ज़्यादा कुछ करना था….. तो धीरे धीरे पायल ने अपना हाथ रोशन के छाती पर रखा रोशन का हाथ अपने जाँघों पर hi रहने दिया और रोशन ने भी अपने हाथ को नहीं हटाया, तब तक पायल का हाथ रोशन के छाती पर फेर रहा था और आहिस्ते आहिस्ते निचे के ओवर बरती गयी….. जब रोशन के पथ पर पायल का हाथ पोहंचा और उस्सकी पयजामे की नैरा को चुवा तो रोशन उत्तेजित हुवा और उस्सको बहोत चाह महसूस हुवा और उस्सने ेंखें मुंडली….

पायल बीएड के ऊपर चाहर गयी और घुटनों के बल रह कर उस्सने रोशन की शर्ट उतरी और उसस्के गले और कांधों को किश किया तब रोशन ने अपने बाहों को अपने चची के कांधों पर करते हुवे चची की गर्दन को चूमा हौले से….. पायल ने रप्शन के छाती को चूमते हुवे उस्सकी पयजामे को निचे के तरफ उतारने की कोशिश में लग गयी और धीरे धीरे रोशन का पायजामा उस्सकी जाँघों तक उतरा तब चची ने उस्सकी अंडरवियर पर अपना हाथ रखा उस्सकी मोटा तन्ना हुवा लुंड को चुनते huwe…Roshan ने ‘सशशशशशशसस” की आवाज़ निकली और पायल मुस्कुराते हुवे अंडरवियर को निकलने लगी उस्सकी पथ को किश करते हुवे…… उस वक़्त वह झुकी हुवी थी घुटनों पर बैठे और रोशन को उस्सकी बूब्स दिख रहे थे लटके हुवे उस पतली सी निघ्त्य के अंदर, थोड़ा हिचकिचाते हुवे रोशन ने अपना हाथ बढ़ाया निघ्त्य के अंदर और चची की चूचियों को सहलाया हलके से…. पायल मुस्कुरायी और कहा, “चाह है, वैसे hi करते जाओ नाह मज़ा ारः है रोशन….” रोशन ने कोयल की चूचियों को सोचा, वह तो छोटी सीट hi, और चची की बूब्स बड़े बड़े और ज़्यादा सख्त थे, निप्पल्स भी तन्ने हुवे थे और कोयल के निप्पल्स से बहोत ज़्यादा मोटा और सख्त the….Roshan अपने उँगलियों में निप्पल्स को दबा रहे थे घूमते हुवे और चूचियों को ज़ोर से दबाते हुवे पुछा, “चची किआ इस में दूध हैं, आप सरजू को अब भी पिलाती हो नाह?” पायल ने मुस्कुराते हुवे कहा, “हाँ है, क्यों पीना चाहते हो?”

रोशन ने थोड़ा शर्माते हुवे हाँ में सर हिलाया. तो पायल ने कहा, “चाह चलो एक गेम खेलते हैं दोनों, तुम ने कॉलेज में ड्रामे में भाग लिया है नाह? एक्टिंग कर सकते हो नाह?” रोशन ने चची की बूब्स को सहलाते और दबाते हुव कहा , “हाँ चची एक्टिंग करता हूँ” तो पायल ने कहा, देखो अपने सारे कपडे उतार दो, बिल्कुल नंगे हो जाओ, मैं भी इस निघ्त्य और पंतय को उतार देती हूँ, तब बताती हूँ किआ गेम है…” तब दोनों ने अपने अपने कपडे बिल्कुल hi उतार दिए, दोनों बिल्कुल नंगे हो गए और चची ने कहा, “देखो तुम मेरा बीटा बन जाओ मैं तुम्हारी माँ….. तुम मेन्टल सिक हो, वह लोग होते हैं नाह जो बड़ा होने पर भी छोटे बचे जैसे बेहवे करते हैं और बिल्कुल छोटे बचे जैसे बातें करते हैं? तो तुम वैसा एक बड़ा बचा हो और और मेरे बीएड में घुस कर मुझसे दूध पिने को मांगो मेरे चूचियों को पाकर कर, बिल्कुल जैसे एक छोटा बचा अपने माँ से दूध मांगता है, और क्यों के तुम्हारा दिमाग़ी हालत ठीक नहीं है मैं तुमको दूध को पीने दूँगी तब धीरे धीरे आगे बहरहेंगे… समझ गए तुम?” रोशन बहोत एक्ससिटेड होगया और उस का लुंड एकदम खड़ा तन्ना हुवा था चची के सामने और पायल उस लुंड को खूब देख रही थी जैसे उस्सको खाने को मैं कर रहा हो जैसे कोई केला खाया जाता है….. तो पायल बीएड पर लेथ गयी और चादर को अपने ऊपर खिंच लिया और रोशन से कहा, “अब तुम कमरे में ावो बाहर से और मुझसे दूध पिने को मांगते हुवे बीएड पर चार जाओ मेरे पास और चादर हटा कर मेरे चूचियों को हाथ में लेकर दूध पिने की मांग करो, देखो बिल्कुल उस किसम के मेन्टल लोग जैसे एक्टिंग करना बिल्कुल, मुझको तब मज़ा आएगा….” रोशन ने कहा, “ठीक है चची अब मेरा एक्टिंग देखो.” वह गया दरवाज़े के पास और ऐसा एक्टिंग किया के बाहर से अब अंदर घुस रहा है और अपने अंगूठे को मुंह में दाल कर चूस्ते हुवे तेज़ क़दमों से बीएड के तरफ बहरते हुवे कहा, “मम्मी मम्मी मुझको दूदू पीना है मुझको दूध पिलाओ नाह प्यास लगी है……” पायल हंस पड़ी उस्सको वैसे एक्टिंग करते देख कर, तब तक रोशन बीएड पर चार गया और चादर हटा कर पायल की चूचियों को हाथ में लेकर अपने मुंह तक लेजा रहा था…. और पायल ने धीरे से उस्का सर सहलाते हुवे कहा, “मेरे लाल, प्यास लगी है मेले bête को, ले, पिले दूध मेला मुन्ना….”….. तब रोशन धीरे धीरे अपने पैरों को सीधा करके चादर के निचे घुसता गया और मुंह में अपने चची की चूचियों को लेकर चुस्सने लगा बिल्कुल जैसे एक छोटा बचा चुस्ता है….. पायल ने उसस्के सर के बालों में उँगलियों को फेरते हुवे उस्सको अपने छाती पर ज़ोर से दबा रही थी और रोशन का खड़ा लुंड अब चची की नंगी जिस्म को छह रहा था…. आहिस्ते आहिस्ते रोशन ने अपने जिस्म को चादर के नीचे अपने चची की जिस्म से चिपकते हुवे अपने बाँहों को चची के पीठ पर किया निप्पल से दूध निचोड़ते हुवे….. उस्का लुंड ठीक चची की पथ के थोड़ा निचे छह रहा था और रोष हौले हौले रागढ रहा था लुंड को उस हिस्से पर चूचियों को चूस्ते हुवे और चची के पीठ पर हाथ फेरते हुवे…. थोड़ी hi देर में रोशन चिल्लाया, «चची दूध, सच में दूध आयी मेरे मुंह में, मगर सवाद वैसा नहीं है, कुछ फीका फीका है, जैसे पानी मिला हुवा हो !!, यह देखो… » उस्सने अपने जीभ निकाल कर उस में अपने चची को सफ़ेद रंग के उसी की दूध दिखाई पायल को… » पायल मुस्कुरायी और एक सिसकारी छोड़ते हुवे रोशन के सर को अपने छाती पर और ज़ोर से दबायी…. और रोशन ज़्यादा चुस्ता गया उस्सकी बूब्स को और दूध पिता गया सरजू के हिस्से का….. और पायल ने उस्सको याद दिलाया, «मत भूलो मैं तुम्हारी माँ हूँ इस वक़्त और तुम मेरे बेटे…..”

फिर रोशन ने एक्टिंग की, “मम्मी तुम ने नीचे कपल नहीं पहने हैं, मेला लुल्ली तुम्हालि जिस्म पल लागढ़ लाहा है, मम्मी देखो मेला लुल्ली खला हो गया hai…kyun?” पायल को बहोत चाह लगा उस्सकी ऐसे बातें सुनकर और उस ने भी जैसे एक छोटे बचे से बातें करते हैं कहा, “चाह मेले bête का लुल्ली खड़ा हो गया? तब तो तू बड़ा हो गया बीटा ज़रा देखूं को मेले bête की लुल्ली कैसा hai?”Aur चादर को बिल्कुल ज़मीन पर फेंक कर पायल रोशन की लुल्ली के तरफ जाती है….. रोशन बिल्कुल एक मेन्टल की तरह फिर से अपने अंगूठे को चुस्सने लगता है और पायल उस्सकी लुंड को हाथों से सहलाती है और कहती है, “अले bête तेल लुंड तो बिल्कुल तैयार होगयी है मम्मी को खुश करने के लिए, किआ तू इस से मम्मी को खुश कलेजा?” रोशन सर हिलाते हुवे कहता है मेन्टल की तरह, “हाँ मम्मी हाँ, खुश कालूँगा मैं अपनी मम्मी को, मगल कैचे मम्मी कैचे खुश कालते हैं मम्मी को? ऑल यह खला क्यों हुवा है, छोटा हो hi नहीं लाहा जब छे मैं दूदू पि लाहा हूँ…” पायल ने कहा, “थेर मैं अभी सिखाता हूँ मेले bête को, सुन मैं इस्को वैसे hi अब चुस्ता हूँ जैसे तू ने अभी मेले चूचियों को चूसा, और देखना कितना मज़ा आएगा तुमको….” रोशन ने कहा, “ठीक है मम्मी चुचो मिली लुल्ली को अब”

पायल घुटनों पर बैठे झुक कर रोशन की लुंड को सहलाते हुवे, पहले अपनी जीभ फेरती है पुरे लुंड पर निचे से ऊपर तक….. रोशन कहँरते हुवे, “उफ्फ्फफ्फ्फ़” करता है फिर पायल सर उठाये ऊपर रोशन के चेहरे पर देखते हुवे लुंड को चाटती जाती है फिर ऊपर वाले हिस्से को अपने मुंह में ले लेती है रोशन की मोठे मोठे ेंखों को देखते हुवे…. जब चुस्सना शुरू करती है एक हाथ से बाकी की लुंड को थामे हुवे रोशन अपने जिस्म को रेंगता है बीएड पर अपने चची के चेहरे में देखते हुवे और मुंह को खोले हुवे कभी चची की पीठ सहलाता है तो कभी उस्सकी चूचियों को दबाता है मगर बेहाल होता जाता था जब चची अपनी एक्सपर्ट मुंह से उस्सको चूस रहा था….. पायल को तजुर्बा था, वह जानती थी किश किश लुंड के हिस्से को कहाँ और कब चुस्सना और दबाना है उस्सको मज़ा आने के लिए इसी लिए वह उस के चेहरे पर उस्सकी रिएक्शंस देख रही थी उस्सको चूस्ते वक़्त…. पायल को बहोत मज़ा ारः था रोशन को वैसे बेहाल होते हुवे देख कर….. कुछ देर में रोशन चिल्लाया एक्टिंग भी साथ करते हुवे, “ाआअह मम्मी, और अंदर लेलो मुंह में, भीतर अपने मुंह में लेलो मिली लुल्ली को बहुत बहुत मज़ा ारः है mummy…aaaaaaah!! Uffffff…mummmyyyyyyyyyyy” यह कहकर रोशन अपना कमर हिलने लगा जैसे पायल के मुंह को छोड़ रहा हो….. पायल को खांसी आयी जब उस्का लुंड उस्सकी गले के अंदर वाली हिस्से को छह गया और लुंड को चोर कर बाहर ज़मीन पर थूकने लगी……. थोड़ी देर बाद फिर भीगे हुवे लुंड को चाट कर रोशन के लुंड के आखरी हिस्से तक गयी और उसस्के बॉल को चाटते हुवे रोशन की ेंखों में देख रही थी…. रोशन जैसे बेहोश होता जा रहा था मज़े से…. पायल ने उस बॉल को अपने मुहं में लिया चुस्सने को और थोड़ा चूसा भी मगर रोशन चिल्लाने लगा, “उफ्फफ्फ्फ़ बस बस BUS….NAHIN सहा जाता अब……” पायल हंसी और ऊपर गयी उसस्के मुंह को अपने मुंह में लिया और दोनों एक लम्बी किश में खो गए जिस्म पर जिस्म चिपकाये हुवे….. रोशन का छाती चची की चूचियों पर दबे हुवे दोनों चूचियों के फॉर्म को बदल दी थी जैसे एक फुटबॉल का हवा निकल गया हो…. और उस्का लुंड चची के जाँघों के बीच ो बीच एते जाते दिख रहे थे और ऊपर दोनों एक दूसरे के जीभ को चूसे जा रहे थे….

काफी देर बाद उस पोजीशन में रहने के बाद, रोशन ने अपने चची को अपने निचे किया बिस्तर पर और उसस्के ऊपर चार गया उस्सकी जाँघों को फैलाते हुवे और अपने लुंड को अपने हाथों में लेकर चची की भीगी हुवी छूट पर पहले रगड़ा फिर छूट की छेद पर दबा कर पुश किया और झट से लुंड चची के अंदर घुस गयी जब के पायल ने आवाज़ दी, “isssssshssss..aaaaaaah…haye…..” और तब तो देखना था के किश मज़े से भतीजा अपने चची को छोड़ रहा था….. ढाका देता गया बहोत मज़ेदार अंदाज़ में अपना रोशन जवान चची की जिस्म को अपने अघोष में लिए, कभी उस्सकी होंठों को चुस्ता छोड़ते वक़्त तो कभी गर्दन को, और कभी तो चूचियों को भी चाटता और कमर हिलाता गया ढाका देता गया, और पायल उसस्के नीचे रेंगती गयी कहँरते हुवे, सिसकते सिसकारियां छोड़ते हुवे और रोशन के गले में अपने बाहों का हार डालते कभी वह भी रोशन के होंठों को चुस्ती तो कभी उसस्के गले को चाटती और आवाज़ भी देती जाती मज़े लेते हुवे…..

रोशन का जवान खून था, गरम खून तो ज़्यादा वक़्त नहीं लगा उस्सको अपने मुकाम तक पोहॉंछने में और हम्प्टी हुवे जल्दी से कहँरते हुवे भी जल्दी से अपना लौड़ा बाहर निकलता है हाथ में दबाये और पायल समझ जाती है के वह झड़ने वाला है तो जल्दी से उठ कर लुंड के पास आती है और उस से कहती है एक्टिंग अंदाज़ में, “मेला बीटा अब तू अपने मम्मी के छाती और चेहरे पर अपना दूध की पिचकारी चोर, फिर मम्मी तेरे इस को चूस कर तुझको आराम देगी….” हामंपते हुवे रोशन हाथ को ढिल्ला करता हाईल ुण्ड के ऊपर और झट से प्रेशर के साथ उस्का वीर्य पायल के चेहरे और गर्दन से होते हुवे छाती पर चिरकता hai…aur पायल जैसे बेहोशी की हालत में अपने कलायिओं को फेरती है सब उन् जागों पर जहाँ रोशन ने अपना पानी छोड़ा, फिर रोशन के लुंड को फिर मुंह में लेकर चुस्सने लगती है जब के रोशन कहंर्ता जाता है तड़पते हुवे, जब तक के उस्का लुंड छोटा न हो जाता है……

तो बे कॉन्टिनोएड………………………( 4680 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 81


तो यह था इस घर के परिवार वालों के रिश्ते जो अब तक आप लोगों ने रीड किया. सरजू की माँ, पायल कैसे इस परिवार में पड़ी, कैसे दोनों पति के भाइयों के साथ तालुकात रखे और ससुर और जेठ के bête रोशन के साथ भी. कैसे कोयल ने अपने भाई और दादा से पिता तक से भी हमबिस्तर हुवे, यह सब मैं ने आप लोगों को सुनाया सिर्फ इस लिए के सभी को पता चले जब सरजू बचपन से देखता चला आ रहा था के कभी चाचा मम्मी के कमरे से निकल रहा है तो कभी दूसरे चाचा, और कभी दादा……. वह बचपन से hi यह सब देखता चला आ रहा था…. तब से सरजू यह सब देखता था जब से उस का पिता व्हीलचेयर पर tha….tab हु कोई 8/10 साल का tha…tabhi से वह मौके का इंतज़ार में रहता के कब वह अपने मम्मी को किसी के साथ देखे…. मगर हर बार जब वह स्कूल में हुवा करता था तो मम्मी तो एन्जॉय कर लेती थी किसी न किसी se…bus कभी कभार वीकेंड में सरजू कुछ न कुछ देखने को कामयाब हो जाता था…..

अब हुवा यह था के दादा जी को और धानंद को कोयल जो मिल गयी थी एन्जॉय करने को तो कुछ पायल से दूरी सी हो गयी थी उन् दिनों, इस लिए सरजू को ज़्यादा कुछ नहीं मिल रहे थे देखने को हालां के वह मौका ढूंढ़ता hi रहता. जिस दिन से सरजू ने दादा जी को मम्मी को किचन में किश करते और उस्सकी चूचियों को दबाते देखा था उस दिन से वह अपने माँ के प्रति सेक्सी सेक्सी खयालात पालने लगा और अपनी माँ को उन् नज़रों से देखने लगा जो एक लड़का एक लड़की को देखता है…… जब नहाने को जाता था तो छोटा hi से पायल उसस्के ुंडेरवेअर्स लेकर बाथरूम में चोर्ने जाती टॉवल के साथ और उस के पीठ पर साबुन लगाती और उस्सको नहलाती…. तो अब जब सरजू ने दादा को अपने मम्मी से वह सब करते देखा तो जब मम्मी उस्सको नहलाता तो सरजू के नज़रों के सामने वही दादा वाली दृष्ट नज़र एते और वह छोटा से hi उत्तेजित होता रहता था अपने माँ के लिए….. सरजू को अपनी माँ में एक हीरोइन दीखता था……

जैसे जैसे दिन गुज़रते गए सरजू अपनी माँ के लिए अपनी ज़हन में अलग सा मुकाम बनाना लगा. उसस्के लिए उस्सकी माँ एक सेक्स सिंबल थी. ाकभी कभी तो हु साफ़ केहड़ेटा अपनी माँ से के , “तुम बहोत hi खूबसूरत हो मम्मी, एक फ़िल्मी हीरोइन की तरह हो, ऐसा hi रहना जब मैं बड़ा हो जावूंगा तब भी!” पायल उस्सकी बात सुनकर सिर्फ हंसती.

अब सरजू को यह तो पता नहीं लगा था के उस का कजिन रोशन भी उस के माँ के साथ मज़े उडाता है…… अब बिल्कुल जैसे अपने चाचाओं को और अपने दादा को अपने माँ के साथ देखा था वैसे hi एक रोज़ रात को जब पायल सोई हुवी thi..(yeh बात सरजू के पिता के देहांत की बाद की है) और सरजू भी गहरी नींद में था, तो उस्सने नींद में hi अपनी माँ की जैसे सिसकारिआं सुनी….. उस्का बिस्तर बिल्कुल उस्सकी माँ बीएड के बगल में hi था और तब वह एहि कोई 16-17 साल का hoga..to अपनी माँ की आवाज़ सुनने के बाद उस्सने सोचा के दादा या कोई एक चाचा आया होगा उस्सकी माँ से एन्जॉय करने को….. उस्सको बड़े ज़ोरों से नींद लगी थी और वह अपने नींद को बर्बाद नहीं करना चाहता था तो हालां के वह अपनी माँ को फ़क होते हुवे देखना बेहद पसंद करता था और कसर मौके में रहता था देखने के लिए, इस वक़्त उस्सने सोना पससंद किया और थोड़ा नींद में, थोड़ा सपने में थोड़ा हकीकत में अपनी माँ की धीमी आवाज़, सिसकारियां, कंहारना, तरपना सब सुना उस्सने…… मैं तो बजट कर रहा था के वह उठ कर, चादर से चेहरा छुपा कर देखे मगर उस्सकी नींद बहोत प्यारी थी उस वक़्त….. अस्सल में रोशन आया था उस वक़्त चची से एन्जॉय करने को और करके चला भी गया और सरजू यह सोचता रहा के दादा या चाचा आया था…….

तो इस तरह से बहोत सरे मौकों पर सरजू ने अपनी माँ को परिवार के कोई न कोई सदस्य से सेक्स करते देखा और देखने की तमना और भी बहरति गयी और वह ऐसे ख्वाहिशों को दिल में पालता गया अपने माँ की प्रति छोटा से hi….. वह मौके के तलाश में रहता के कब कोई चाचा या दादा उसस्के माँ के करीब जाये ताके उस्सको देखने का मौका mile…jab कॉलेज में होता था तब सिर्फ अपनी माँ को सोचता, और कौन किश वक़्त उसस्के साथ एंज्वॉय कर रहा है यह सोचता और स्कूल के बाथरूम जाकर मुठ मारता अपनी माँ को सोचकर, उस्सकी जिस्म को सोचकर, उस्सकी चूचियों को सोचकर, उस्सकी जाँघों को दिमाग़ में तस्वीर बना कर, उसस्के कपडे को सोच कर…

जैसे जैसे सरजू बहरता गया, अपनी माँ के प्रति उस्का लगाव अलग तरीके से बहरता और ज़्यादा ज़बरदस्त होता गया……….. अब चलें देखते हैं के जब सरजू 18 का हुवा तो कैसे वह पायल के करीब जाता है और कैसे उस के और उसस्के माँ के बीच कुछ होता भी है या किआ होता है…… अभी बहोत एपिसोड्स के बाद गहराई तक पोंछेंगे फिलहाल देखते हैं सरजू अपनी माँ के कितना करीब है और हु किआ किआ देखता है और किआ करता है, कैसे बातें करता है अपनी माँ के साथ वग़ैरा वग़ैरा….. हाँ कोयल सरजू का बड़ा कजिन है तो कोयल भी है अभी और सरजू उस को भी एक्शन्स में देख ले शायद! तो हम यह सब देखेंगे और बीच नीच में कुछ घर के बड़ी बहु के बारे में और दोनों भयों ने कैसे स्वैपिंग शुरू की अपने [पत्नियों की यह भी देखेंगे… और ससुर ने पद्मिनी से तो मज़ा उदा लिया था मगर पहली बहु से कब और कैसे उस्सने काम तमाम किया यह भी देखना है हम को….. मगर फिलहाल सरजू पर फोकस करते हैं, आईटी इस हाई टाइम!!

सरजू के पिता के गुजरने के बाद सरजू अपनी माँ की बिस्तर पर उसस्के साथ सोने लगा. तब वह छोटा hi था. मगर चाँद महीनों के बाद पायल ने एक नया बिस्तर लगवाया अपने कमरे में सरजू के लिए, वह इस लिए क्यूंकि जब सरजू उसस्के साथ सोता था तो रात को अगर दादा या छह अत तो सरजू उन् के लिए रुकावट जो होता था…… अब 18 साल के होने पर सरजू ने अपना एक नया ज़्यादा बड़ा बीएड बनवाया. जब हु बीएड बैंकर आया तो दादा ने सरजू एक नया कर्मा ऑफर किया. पायल ने भी सरजू से कहा, “हम्म नया कर्मा मिल रहा है, तू खुश नहीं?” सरजू ने साफ़ इंकार किया यह बहाना करके के उस्सकी माँ बिल्कुल अकेली हो जाएगी जब के उस्का पापा नहीं है, तो उस्सने नए बीएड को माँ की कमरे में hi लगवाया ! दादा कुछ नहीं कह सका क्यूंकि एक तरफ से वह ठीक भी कह रहा था » ! जब सरजू 18 का हुवा तो पायल सिर्फ 34 साल किट hi क्यों के सब को याद होगा के 16 साल की उम्र में hi उस्सने सरजू को जनम दिया था. अब थी 34 साल की मगर दिखती थी 20 साल की. एकदम फ्रेश, ताज़ा, कच्ची काली दिखती थी. बेहद खूबसूरत जो थी बचप्पन से hi, और उस्सकी बॉडी मेन्टेन किया हुवा था उस्सने, सिर्फ एक hi बच्चा हुवा सरजू, और काम वाम तो नहीं करती थी, बस घर में रहती थी और घर की ी काम काज करती थी, तो उस्सकी जवानी बरकरार थी…… और सरजू 18 साल का होने पर छोटा सा हीरो था हमारा हीरो !! अपने माँ से एक दिन बात करते वक़्त सरजू ने कहा, «मां, जानती हो, उस दिन जब तुम स्कूल ए थे मेरे टीचर से मिलने तो मेरे दोस्तों ने किआ कहा ?” पायल ने पुछा, “किआ कहा तुम्हारे दोस्तों ने रे?” सरजू ने बे झिजक कहा, “दोस्तों ने कहा, “तेरी बेहेन तो बहोत सेक्सी है रे सरजू!” पायल ज़ोर से हंस पड़ी यह कलेहते, “मुझको तेरी बेहेन समझा तेरे दोस्तों ने?” सरजू अपने माँ के बिल्कुल करीब जाकर उस्सकी कांधों पर अपने सर रख कर दुलार करते हुवे कहा, “हाँ मम्मी, तू कुछ ज़्यादा hi यंग लगती के मेरी माँ होने के लिए और मैं ज़्यादा hi बड़ा लगता हूँ तेरा bête होने के लिए!! बिल्कुल लगता hi नहीं के तू मेरी माँ है! कितनी खूबसूरत और यंग लगती है तू !!» पायल हंसती गयी और पुछा, «और तुमने किआ कहा अपने दोस्तों को ?» सरजू ने आंसर किया, «कुछ देर तो मैं चुप था और तुमको उस वक़्त देखता रहा के क्यों मेरे दोस्तों ने तुमको मेरी बेहेन समझा, फिर मुझको भी लगा के तुम बहोत यंग और ब्यूटीफुल हो, और जब दोस्तों ने तुमको सेक्सी कहा तो मैं ने सोचा के सच में तुम सेक्सी hi हो !! जो साडी तुमने पहनी थी, जिस तरह से वह तुम्हारे बॉडी को सूट कर रहा था बिल्कुल hi सेक्सी लग रही थी तुम तो मैं दोस्तों को किआ कहता ?!» सरजू उस वक़्त अपने माँ को पकड़ा हुवा था दुलार करने के ब्याहने पीछे से खड़ा हुवा और उस वक़्त पायल आईने के सामने बाल बना रही थी और सामने आईने में सरजू की हरकतों को देख रही थी मुस्कुराते हुवे….. उस ने एक ड्रेस पहनी हुवी थी जो स्लीवलेस थी और जो उस्सकी घुटनों तक आती थी…. सरजू पीछे पायल को थामे खड़ा था, और उसस्के बाहें पायल की कांधों पर पीछे के तरफ से थामे हुवे था और उस्का सर पायल क ीक काँधे पर tha…Sarjoo का जिस्म पायल के पीछे के जिस्म से टकरा रहा था और हमेशा की तरह सरजू तो खड़ा हो चुक्का था और हलके से उस्का खड़ा हुवा लुंड जो पंत के अंदर था पायल के गांड से हलके से तकडया….. पायल ने फील किया, मगर यह पहली बार नहीं tha….aksar ऐसा हुवा है बचपन से….. पायल तब से सरजू के हरकतों को जानती है, उस्सकी हरे क बात को और सोच को पहचानती थी मगर कभी कुछ नहीं कहती थी सरजू को…… पायल ने बस पुछा, “तो तुमने अपने दोस्तों क्लो यह समझने दिया के मैं तेरी बेहेन hi हूँ?” सरजू ने आखिर में जवाब दिया, “नहीं बाद में मैं ने उन् लोगों को बता दिया के तुम मेरी मम्मी हो!” तब किआ कहा उन्हों ने?” पायल ने पुछा. सरजू आहिस्ते आहिस्ते अपने हाथों को अपनी माँ की कमर से लेकर आहिस्ते आहिस्ते ऊपर के अवर लेजा रहा था, मगर इस से पहले के उस्का हाथ पायल की छाती तक पोंहचे, पायल ने उस के दोनों हाथों को अपने हाटों में जाकर लिया और अपने सवाल को दोहराया अपने आप को सरजू के तरफ मूढ़ते हुवे. अब दोनों आमने सामने थे, तो सरजू का चेहरा बिल्कूलो लाल होगया था और उस्सने कहा, “कुछ नहीं तब दोस्तों ने हैरानी में कहा, “इतनी यंग माँ है तेरी?! कितनी मस्त है बाप!” और तुम ने कुछ नहीं कहा जब तुम्हारे दोस्तों ने मेरे बारे में वैसा कहा तो?” पायल ने पुछा. तो सरजू ने कहा, “तुम सच में मस्त तो हो मम्मी तो दोस्तों को किआ कहता मैं? मुझको चाह लगता है जब कोई तुम्हारे बारे में वैसा कहता है तो….. कोई तुमको हॉट कहता है, कोई sexy…yeh सब सुनकर मुझको बहोत अचछह लगता है मम्मी….” पायल थोड़ी सी शर्मा सी गयी जब अपने bête से यह सब सुना और वहां से हैट गयी और कमरे के दूसरे कोने में कुछ काम के बहाने चली गयी……

ऐसे हालात हर रोज़ एते थे घर में सरजू और पायल के बीच…. रातों को कभी हु अपने बीएड से उठकर अपनी माँ की बीएड पर सोने को चला जाता… और जैसे के बचपन में अपनी माँ को जाकर के सोता था वैसे hi अब भी पायल को पाकर के सुजाता है…. पायल भी नींद में हुवा करती है और आधी नींद में सरजू को बचे की तरह बाँहों में लेकर उसस्के सर थपथपाते हुवे सजाती है… बहोत सरे ऐसे सीटुएशन्स हैं जो आप सब को बताना है मैं हॉट सिचुएशन पर पोहोंचे से पहले …कितने hi उपदटेस होजाएंगे तब तक दोस्तों…..

तो बे कॉन्टिनोएड…………………….
 
अपडेट 82

दोस्तों मैं ने सरजू का उम्र अभी 18 का बताया है, मगर आप लोग रीड करते वक़्त अपने दिमाग़ में उस्सको 14/15 की उम्र का सोचें क्यों के मैं तो उसी उम्र में उस्सको स्टोरी में अपनी माँ से क्लोसनेस्स के बारे में लिखने वाला था मगर एक्सबी के रूल्स के खिलाफ होते इस लिए 18 का उम्र लिखा hai…baaki आप लोग खुद समझते हैं कैसे अपने आप में इस को दिमाग़ में संभालें और सोचें……

तो स्टोरी को कंटिन्यू करते हैं……..

एक रात को गर्मी के मौसम में सरजू अपने बिस्तर पर से उठ कर पायल के बिस्तर पर गया बीच रात में, कोई रात के 2 बजे का वक़्त था… नींद में था, ेंखों को मसलते हुवे अपनी माँ के पास बिस्तर पर चला गया और माँ को बाहों में जाकर कर सोगया. पायल की नींद टूट गयी जब उस्सने उस्सको बाहों में जकरा तो….. उस्सने धीरे से कहा, “चोर मुझे सरजू बहोत गर्मी है, उफ़! दूर सो मुझसे!” और सरजू को धकेल दिया कुछ दूरी पर…….. कुछ देर के बाद पायल उठी और बाथरूम गयी फ्रेश होने ko….itni गर्मी थी के एक शावर लेलिया रात के 3 बजे….. एक छोटी सी निघ्त्य पहनी हुवी थी उस्सने और दबे पाऊँ आहिस्ते से वापस अपने बिस्तर पर आयी…… इधर सरजू को पता चला जब उस्सकी माँ बाथरूम गयी तो…. उस्सने जान बूझकर अपने ऊपर से चादर हो बिल्कुल हटा दिया और अपने अंडरवियर में अपने हाथ दाल कर अपने लुंड को धीरे धीरे मसलने लगा…. वह नींद में होने का नाटक कर रहा था…… पायल जब बीएड के पास आयी तो देखा के सरजू के अंडरवियर में उस्का लुंड एक दम खड़ा हुवा था और वह उस्सको मसल रहा था और लुंड का ऊपर वाला हिस्सा अंडरवियर के बाहर था, साफ़ दिख रहा था…… पायल कुछ देर कड़ी देखती रही, कभी सरजू के उस हरकत को और कभी सरजू के चेहरे पर, फिर उसस्के जिस्म को…. बिल्कुल लग रहा था के सरजू गहरी नींद में है….. पायल मुस्कुरायी और धीरे से बीएड पर दूसरे तरफ से ऊपर गयी और फिर से सरजू का लुंड देख कर अपनबे आप से कहा, “इतना मोटा और लम्बा कैसे है इस्सके इस छोटी सी उम्र में? यह अपने दादा और चाचाओं पर गया है अपने पिता पर नहीं!” फिर हँसते हुवे पायल लेथ गयी और सोने की कोशिश की…..

मगर सरजू ने करवट लेते हुवे अपनी माँ के पास पोंहचा और दाएं बाज़ू पर सोते हुवे बाएं बाज़ू को पायल पर रखा जैसे एक बचा अपने माँ को थामता है और हलके से अपने जिस्म को माँ के जिस्म से लगाया….. पायल को दुलार आया ुसस्पर और हलके से अपने एक हाथ से सरजू के बालों को सर पर सहलाया और उसस्के गालों को चूमा और उसस्के कान में कहा, “सजा bête, अभी रात बाकी है” और उसस्के सर को थपथपाने लगी हलके हलके. सरजू को सब पता था और सुन रहा था मगर नींद में होने का नाटक करता जा रहा था और धीरे धीरे अपने कमर को अपने माँ के निचे वाले बदन के हिस्से से लगाने की कोशिश कर रहा था…… जब उस्का लुंड उस्सकी माँ की जाँघों से टकराया, तो जो लुंड का ऊपर वाला हिस्सा अंडरवियर के बाहर था वह पायल ने महसूस किया और सरजू का लुंड और ज़्यादा उठ गया तन्न कर, अपने bête का लुंड अपनी जाँघों पर महसूस करके पायल मुस्कुरायी और थोड़ा सा एक तरफ अपने पैरों को किया ताके सरजू के जिस्म से अलग हो सके…. मगर सरजू घुसता hi चला जा रहा था नींद के बहाने और एक छोटे बचे की तरह नींद में अपनी माँ को अपने बाहों में जाकर लिया था और उस्का मुंह माँ की छाती पर था….. पायल ने अपने गेसुओं को मुठी भर लेके, बालों को अपने गर्दन के निचे किया और सरजू के चेहरे पर देख रही थी के किआ वह नींद में hi है या जाएगा हुवा है…….

मगर सरजू ने तो ऐसा नींद का नाटक किया था के बिल्कुल नींद में hi लग रहा था, तो पायल ने सोचा ‘नींद मैं है तो उसको किआ पता किआ कर रहा है, रहने दो….’ और सरजू के माथे को चूमा, सरजू को बहोत मज़ा आया और अपने सर माँ के छाती में घुसता गया…… पायल ने ब्रा नहीं पहनी हुवी थी, (रात को नहीं पहनती है), सिर्फ एक निघ्त्य में थी, पतली सी स्ट्राप थी कांधों पर और एक कंधे से स्ट्राप निचे बाज़ू पर चली गयी थी और सरजू की सर की मूवमेंट्स से और भी निचे उतर गयी वह स्ट्राप और आधा बूब तो बहार आगयी थी निघ्त्य के….. सरजू का मुंह बिल्कुल उसी जगह रुका माँ की चूचियों पर…… पायल ने सर को ऊपर उठा लिया जब उस ने अपने जवान bête की होंठों को अपने चूचियों पर महसूस किया तो….. एक लम्बी सांस ली पायल ने और सरजू की गरम सांसें महसूस कर रही थी अपने नरम बूब्स पर…… पायल को कुछ अजीब फील हो रही थी…. उस ने धानंद को सोचा और प्रे किया के काश वह या सरजू का दादा आजाता क्यों के उस वक़्त उस्सको सेक्स की ज़रुरत महसूस हो रही थी…… सरजू के समझ में नहीं ारः था के कैसे आगे बढ़ें….. निचे अपना कमर हिल्ला कर माँ के जाँघों के बीच अपने लुंड को रगड़ने की कोशिश कर रहा था मगर पायल हर वक़्त अपने पैरों को पीछे हटा लेती थी जब वह वैसा कोशिश करता था तो…..

तो उस रात के बाद ऐसा अक्सर होता….. सरजू अक्सर रातों को अपने बिस्तर से उठकर अपनी माँ के बिस्तर पर जाता, और वह सिर्फ एहि करने के लिए जाता… एक रात को तो पायल ने पीठ की थी इस तरफ और अपने पैरों को मोड़ा हुवा था तो सरजू ने अपने लुंड को पायल की शूटरों पर रगड़ा जब पायल बिल्कुल नींद में थी और करीब करीब सरजू झाड़ भी गया, उस्का अंडरवियर गिला होगया, और उस्सने लाइट ों करके देखा के उस्सकी माँ की पंतय पर उस्सने अपना पानी थोड़ा सा छोड़ दिया है, तो एक टिश्यू लेकर हलके से पोंछा अपनी माँ की शूटरों को और खुद से कहा के , “अभी नींद मैं है जब तक उठेगी तब तक सुख जाएगी….’ पायल को कुछ पता नहीं चला……

अब सरजू को बहोत मज़ा अत था जब उस्का धानंद चाचा या दादा उस्सकी माँ को छोड़ने एते थे रातों को. वह हर रात सोने का नाटक करता था और इंतज़ार करता था के कब उन् तीनों में से कोई ए और वह अपने चेहरे को चादर से ढँक कर चुपके से सब देखा करता tha…jab उस्सकी माँ तृप्ति थी और कहंर्ती थी तो सरजू को बहोत hi चाह लगता tha….balke उस्सको अपनी माँ को छुड़वाते हुवे देखना बहोत पसंद था….. वह तो छोटा से hi देखता चला ारः था और अब जब के वह hi सब कर सकता है तो बहोत एन्जॉय करता था….. अब हर रात को तो चाचा या दादा नहीं एते थे, एते भी थे तो बहोत देर रात को क्यों के सरजू होमवर्क्स किया करता है 11 बजे तक, और कभी कभी तो पायल खुद चली जाती थी रात को ससुर के पेयर दबाने के बहाने और ससुर खुद अपने कमरे में hi छोड़ देता था पायल ko…Sarjoo चुप चुप कर देकने जाया करता था….

सरजू बहोत कोशिश करता गया अपनी माँ के और भी करीब जाने की उस तरह से, उस्सको इस बारे में पायल से बात करने का मैं भी करता था, मगर समझ में नहीं अत था कैसे करें…. डरता भी था के कहीं पायल इंकार न करदे, या कुछ बुरा भला न केहड़े उस्सको….

एक रात को सरजू और पायल दोनों बातें कर रहे थे….. कोई 11 बजा था रात को और सरजू अपनी माँ की बीएड पर गया जब हु टीवी देख कर वापस आयी तो….. सरजू ने कहा, “आज मैं तेरे साथ सो जावून माँ?” पायल बोली, “तू तो बस दो घंटे अपने बीएड पर सोता है, हर रात को तो मेरे पास hi आजाता है नींद में! हर सुबह को मेरे बीएड पर hi नहीं जागता है तू?” पायल ने कपडे नहीं बदली थी उस वक़्त. तो सरजू ने कहा, “चाह ठीक है फिर आज पूरी रात यहीं सोता हूँ तेरे hi साथ.” पायल मुस्कुरायी और कप्बोर्ड के पीछे गयी ड्रेस बदलने को…… सरजू ने कहा, “कौन सी वाली निघ्त्य पहनोगी मां?” पायल को हैरानी हुवी और कप्बोर्ड के पीछे से पुछा, “क्यों? तुझको मेरे निघटिएस का पता है?” सरजू ने कहा, “और नहीं तो किआ हर सुबह को तेरे बीएड पर जागता हूँ तो देखता नहीं किआ?” पायल हंसी और कहा, “जब तेरे सामने ावुंगा तो देख लेना…” सरजू ने कहा, “नहीं मैं चाहता हूँ के वह वाली पहनों जो मुझको पसंद है…” पायल ने कभी नहीं सोचा था के सरजू को भी उस्सकी किसी एक निघ्त्य पसंद है तो उस्सने जानना चाहा के कौन सा वाला उस्सको पसंद है तो वहीँ से पुछा, “चाह तो कौन सा तुझको पसंद है बता तो ज़रा?” सरजू ने कहा, “वह गुलाबी रंग वाला जो बहोत फ़्लीम्सय है और छोटा सा hai…uss में एकदम फ़िल्मी हीरोइन लगती हो मां….”

पायल को ससुर ने एक बहोत hi सेक्सी निघ्त्य दिया था जो जाँघों के ऊपर तक अत है और एकदम पतली है सारा बूब और निप्पल दीखता है उस में, और जब पायल बीएड पर लेटती है तो निघ्त्य ऊपर उठ जाती है और तक़रीबन पंतय भी दिखती है, उस निघ्त्य के बारे में सरजू बात कर रहा था और वह निघ्त्य सिर्फ ससुर अत है तब पायल पहना करती है…… अब पायल को हैरानी हुवी के कब उस निघ्त्य में सरजू ने उस्सको देखा है…..

तो बे कॉन्टिनोएड………………….. (3575 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 83
पायल को ससुर ने एक बहोत hi सेक्सी निघ्त्य दिया था जो जाँघों के ऊपर तक अत है और एकदम पतली है सारा बूब और निप्पल दीखता है उस में, और जब पायल बीएड पर लेटती है तो निघ्त्य ऊपर उठ जाती है और तक़रीबन पंतय भी दिखती है, उस निघ्त्य के बारे में सरजू बात कर रहा था और वह निघ्त्य सिर्फ ससुर अत है तब पायल पहना करती है…… अब पायल को हैरानी हुवी के कब उस निघ्त्य में सरजू ने उस्सको देखा है…..

अब आगे:……….

तो पायल कप्बोर्ड के पीछे पहले से hi एक निघ्त्य लेकर चली गयी थी पेहेन्ने के लिए, तो उसी को पहनकर बाहर आगयी सरजू के सामने. यह वाला एक कॉटन क्लॉथ मटेरियल था और उतना सेक्सी तो नहीं था फिर भी घुटनों तक अत था और स्लीवलेस था. पायल कबिह भी रातों को ब्रा नहीं पहनती थी, और अब क्यूंकि कॉटन मटेरियल का कपडा था तो उस में तो ज़्यादा बूब्स नहीं दिखाई देता मगर उस्का फॉर्म और निप्पल की पॉइंट साफ़ दीखता था. सरजू ने छोटे बचे की तरह नटखट अंदाज़ में कहा, “मम्मी तुम वह वाला पहनों न जो मैं ने अभी अभी कहा!” एक मुस्कान के साथ और नीचे वाले होंठ को डेंटन में दबाते हुवे पायल ने सरजू को जवाब दिया, “नहीं एहि ठीक है, वह वाला मुझको पसंद नहीं….”

यह कहकर पायल बिस्तर पर गयी सरजू के बगल में और कहा, “चल सजा अब मुझको नींद आरही है” सरजू खफा होगया और अपने पीठ को अपनी माँ से करके चादर अपने ऊपर खिंच कर सोगया. सोया तो नहीं मगर मुंह फूलकर माँ से पीठ कर लिया.

पायल हंसी और दुलार करते हुवे सरजू के बालों में अपने उँगलियों को फेरते हुवे उसस्के पीठ से लगकर कहा, “क्यों? मेला लजा बीटा नॉलाज़ होगया मम्मी से? हम्म?” जब पायल ने वैसा किया तो उस्सकी छाती एकदम से सरजू के पीठ परे दबा हुवा था और सरजू अपनी माँ की चूचियों को बहोत अछि तरह से फील कर रहा था अपने पीठ पर. उस्सको बहोत चाह लग रहा था अपनी माँ की नरम नरम बूब्स को अपने पीठ पर महसूस करते हुवे मगर खफा होने का ढोंग कर रहा था. कैसे भी करके पायल ने उस्सको फुसलाया और वह अपनी माँ से फिर से बातें करने लगा और उस्सकी तरफ मूढ़ गया. तो अब दोनों आमने सामने थे मगर बिस्तर पर लेते हुवे.

पायल सरजू के दाएं तरफ था, तो सरजू पायल की बाएं तरफ, दोनों अपने अपने बाज़ू पर लेते हुवे थे एक दूसरे को देखते हुवे बातें करते…. और सरजू ने फिर अपने माँ से उन् बातों को शुरू किया….. «माँ कोई नहीं मानता के तुम मेरी माँ हो ! मेरे दोस्त लोग कहते हैं के तुम मेरी बड़ी बेहेन हो ! तुम इतनी यंग और फ्रेश जो दिखती हो….. पता है उस दिन जब हम दोनों मॉल गए थे तो मेरे एक दोस्त ने तुमको मेरे साथ देखा था तो स्कूल में पुछा के किश डार्लिंग के साथ डेट पर गया था!!” पायल को बहोत मज़ा ारः था उस्सकी उन् बातों को सुनकर और पुछा, “चाह! तुम्हारे उस दोस्त का नाम किआ है?”

“अरे वही बड़ा बदमाश है, दीपक.” सरजू ने जवाब दिया, तो पायल बोली मुस्कुराते हुवे, “तुझसे कम बदमाश तो नहीं होगा!” तो सरजू फिर से नटखट आवाज़ में बोलै, “मम्मी मैं बदमाश थोड़ा hi हूँ!” पायल हँसते हुवे उसस्के गाल को चूमती है, और सरजू अपने बाएं बाज़ू को अपनी माँ के कांधों पर करके, उस्सकी गले को अपने तरफ खींचते हुवे अपनी माँ की गाल को चूमता है…. तब पायल भी सरजू गले से लगते हुवे और एक किश करती है उसस्के गाल पर और कहती है, “चाह अब सजा मुझको नींद आरही है.”

मगर सरजू कहता है, “नहीं मम्मी और थोड़ी सी बातें करते हैं नाह….” तो पायल ने कहा, «तू बोल, मैं सुनते सुनते सोजावूँगी… » और पायल अपने पीठ पर लेथ जाती है सोने को. सरजू बोलता है, «मेरे दोस्त लोग कहते हैं ‘तेरा मम्मी बहोत हॉट है’ !» यह सुनकर पायल मोती मोती ेंखों से सर उठाकर सरजू को देखती है और ताजूब से पूछती है, “किआ? ऐसा कहते हैं तेरे दोस्त लोग? और किआ किआ कहते हैं मेरे बारे में?” सरजू थोड़ा घबरा सा जाता है जब उस्सकी मम्मी ने हैरान होकर सर उठाकर उसस्के चेहरे में देख कर पूछ रही तो…. और उस ने कहा, “मेरे दोस्तों में से दो दोस्त कहते हैं ‘काश मेरी ऐसी मम्मी होती!” पायल की मुंह खुली रह गयी और पुछा, “और किआ कहते हैं? क्यों काश उस्सकी ऐसी मम्मी होती? यह क्यों कहा उस दोस्त ने?”

तब सरजू ने कहा, “दोस्तों ने कहा के अगर उन् की इतनी यंग और हॉट मम्मी होते तो वह उस को बहोत ज़्यादा प्यार करते…” और पायल ने पुछा, “तो तुम ने नहीं कहा के तुम भी मुहसे बहोत प्यार करते हो?” सरजू बोलै, “हाँ मम्मी कहा नाह! मगर वह लोग उस प्यार के बारे में नहीं न बोल रहे थे!” तब पायल और भी हैरानी से पूछती है, “तो कौन सा वाला प्यार?”

और सरजू ने कहा, “तुम नहीं समझोगी, रहने दो अब सोजावो….” पायल कुछ देर तक बहोत हैरानी से सरजू के चेहरे में देखती रही फिर कुछ सोचने के बाद पुछा, “तेरे उन् दोस्तों का उम्र तेरे hi जितना है या तुम से बड़ा है?” सरजू ने जवाब दिया, “ उन् में से तीन दोस्त मुझसे तीन साल बड़ा हैं!” पायल बोली, “हम्म तभी तो!! गंदे हैं तेरे दोस्त! तुझको गन्दी बातें सिखाते हैं! ाचा तुम कभी अपने दोस्तों को घर क्यों नहीं लता? उन् लोगों को घर पर लाना मुझसे मुलाकात करवाना! मैं भी देखूं तो कौन मुझको हॉट कहता है!!” फिर कुछ और सोचने के बाद पायल ने पुछा,

“किआ तुम उन् लोगों से कहते हो के तुम मेरे साथ एक hi बिस्तर पर सोते हो?” और सरजू ने कहा, “नहीं मैं ने तो नहीं बताया मगर तीनों कहते हैं के अगर तुम उन् लोगों के मम्मी होते तो वह तुम्हारे साथ बीएड पर सोते रात को!” पायल को उन् लड़कों को देखने और मिलने की ज़रुरत महसूस हुवी और एक अजीब सा लेहेर दौड़ा उस्सकी जिस्म में यह सोचकर के इतने जवान बचे उसस्के बारे में ऐसा सोचते हैं….. और उस्सने सरजू को ज़ोर से गले से लगाया और उस्सको सोने के लिए उस्का सर थपथपाने लगी जब तक के सरजू को नींद न लगी……. सरजू अपने माँ के काँधे से हाथ आहिस्ते आहिस्ते खिसकाते हुवे उस्सकी कमर तक किया और थोड़ा निचे अपने हाथ को फेरता गया और अपनी मम्मी की कमर को अपने कमर के तरफ खिंचा ताके उस्का निचे वाला हिस्सा उस्सकी मम्मी की निचे वाले हिस्से से लगे और वैसा करने से उस्सने अपने लुंड को माँ की जाँघों के बीच दबाया और उस्सको वैसे hi नींद लग गयी और पायल सब महसूस कर रही थी क्यों के वह सोई नहीं थी……

तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
अपडेट 84

उस रात को सरजू ने तो कुछ ख़ास नहीं किया मगर बीच रात में उस्सने अपनी माँ को बाँहों में जकरा था और उस का लुंड माँ की निचे वाले हिस्से पर रागढ रहा था….. वह तो नींद में था मगर उस वक़्त पायल जाएगी थी और उस्सने सब महसूस किया…. अब सुबह सुबह कोई 4 पांच बजे लुंड तो अपने आप hi खड़ा होजाता है एकदम से तन कर तो सरजू का भी वैसा hi हुवा था और और वह नींद में अपनी माँ की छूट के काफी नज़दीक उस्सको रागढ दबा रहा था एयर पायल सब फील कर रही थी सरजू के मासूम चेहरे को देखते हुवे……

अब पायल की समझ में नहीं आरही थी के क्यों वह खुद अपने बेटे के लुंड को अपने जिस्म पर महसूर करके अकार्षियत हो रही thi…ussne कभी सपने में भी नहीं सोचा था के अपने बेटे के तरफ उस्का मैं इस तरह पिघलेगा इस मामले में…. वह खुद से हैरान थी उस वक़्त….. बहरहाल उस्सने सरजू को बहोत प्यार से अपने बाहों में ज़ोर से जाकर कर उसस्के माथे को चूमा और उसस्के गले पर अपने होंठों को फेरते हुवे उस्सकी छाती को चूमा….. उस वक़्त पायल उत्तेजित हो गयी थी और उस को बहोत मैं कर रहा था के किसी मर्द के साथ हमबिस्तर हो…..

अब क्यूंकि कोयल जवान हो गयी थी और पायल का ससुर और कोयल का बाप ज़्यादा वक़्त कोयल को देते थे…. वह ज़्यादा जवान थी तो उन् दोनों को बहोत ज़्यादा मज़ा अत था कोयल को छोड़ने में यहाँ तक के कोयल का रमेश चाचा भी उस्सको छोड़ने लगा था, साथ में उस्का भाई रोशन भी….. कोयल की छूट को रेस्ट hi नहीं मिलती थी…. …

रातों को, दिन में भी सब उसस्के पीछे लगे रहते थे… दोनों रोशन और कोयल अब नौकरी करने लगे थे और रोशन ने ऐसी जगह नौकरी की तलाश की जहाँ दोनों hi एक साथ काम करे जेइसवे एक साथ स्कूल जाते थे…. रोशन बिलूल अपनी बेहेन को अपना रखेल बना रखा था, किसी भी मर्द को उसस्के इर्द गिर्द नहीं मंडळाने देता tha…..Magar घर के मर्दों को तो वह कुछ नहीं कहता था क्यूंकि सरजू की तरह उस्सको भी कोयल को छुड़वाते हुवे देखना बहोत ाचा लगता tha.baad में कोयल के बारे में पढ़ेंगे… देखना है के कैसे बाप ने बेटी को अपने भाई के साथ शेयर किया और बहोत कुछ देखना है अभी…… फिलहाल सरजू और उस्सकी माँ को देखते हैं….

मगर इस से पहले के सरजू अपनी माँ को पा सके, बहोत कुछ हुवा था, मैं सभी डिटेल्स को बयान करूँगा इस लिए आप लोग इन् दोनों के बीच छुड़वाई को रीड करने के लिए जल्दबाज़ी न करें, धीरज रखें आप सब लोग वह वक़्त धीरे धीरे आएगा….. कैसे हौले हौले सरजू कामयाब हुवा यह सब डिटेल्स में देखेंगे.

उस रात को जब पायल ने सरजू को नींद में किश किया और उस्सकी जिस्म को खूब निहारा और एक मर्द की ज़रुरत महसूस की क्यों के घर के बाकी मर्द अब उस्सको नेग्लेक्ट करते थे कोयल की वजह से…… पायल उस वक़्त सरजू को सोते चोर कर धानंद के कमरे के तरफ गयी अपना प्यास बुझाने के लिए…… पायल को पता था के उस वक़्त धानंद हमेशा उठ जाता है और कुछ एक्सरसाइजेज करता है बालकनी par……magar जब वह बालकनी पर गयी तो धानंद कोयल को छोड़ रहा था….. उस्सने कोयल को उस्सकी कमरे में से उठाकर ऊपर लगाया छोड़ने को सुबह सुबह 5 baje…Uss वक़्त सब लोग सोते रहते हैं सिर्फ धानंद उस टाइम को उठ जाता है यह पायल को पता था…. पायल को कुछ ग़ुस्सा आया, उस्सको लगा के अब कोयल उस्का हिस्सा मार रही hai…magar किआ कर सकती थी, लाचार, बेबस वापस गयी अपने कमरे में और अपने बेटे को निहारने लगी…..

धीरे धीरे पायल ने सरजू के जिस्म पर से चादर को हटाया और देखा के सरजू का लुंड एकदम तन कर खड़ा हुवा है अंडरवियर में, और ऊपरी हिस्सा उंडीवेअर से बाहर निकला हुवा था…. पायल का मैं बावला होगया और उस्का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा कभी सरजू के चेहरे को देखती तो कभी उसस्के लुंड को, फिर उसस्के पुरे जिस्म को….. पायल बिस्तर पर बैठ गयी अपने बेटे के पास और एक लम्बी साँस लेकर अपने हाथ को उठाया सरजू के लुंड के तरफ बढ़ाने को….. फिर रुक गयी, एक नज़र सरजू के चेहरे पर दौड़ाई, फिर अपने हाथ को आगे किया सरजू के लुंड के तरफ……

पायल हांफ रही थी और उस्सको खुद की दिल की धड़कनें सुनाई दे रहे थे उस खामोश सुबह की तन्हाई में…. ठीक जब उस्का हाथ सरजू के लुंड को चुने को था सरजू ने एक करवट ली और जल्दी से पायल ने अपने हाथ को वापस खिंचा……… करवट लेने के बाद अब सरजू का चेहरा पायल के तरफ था और पायल उसस्के चेहरे को घर रही थी के कहीं उस्का नींद टूट तो नहीं गया है…. वह घबरा रही थी पसीना छूट गयी थी उस्सकी और वह अपने आप को संभल नहीं paayi…dawdtey हुवे बाथरूम गयी और ठंडी शावर के निचे जिस्म की गर्मी को ठण्ड करने की कोशिश की. कपडे समेत खददि तजि शावर के नीचे सर ऊपर उठाये शावर का पानी जहर जहर पायल के सर से बालों को भीगते हुवे चेहरे से गुज़रते हुवे उस्सकी पुरे बदन को तर कर रही thi….Paayal की छाती ऊतक बैठक कर रही थी उस्सकी तेज़ सेंसों की रफ़्तार की वजह से और वह ठंडा पानी जब उस्सकी ड्रेस को भिगो कर चूचियों के दरमियान बह रहे थे तो पायल का एवं और भी निखार गया था और कोई भी मर्द उस वक़्त अगर उस्सको देखता तो उस्सको बस छोड़ना चाहता…… पायल अपने दिल को थामे खुद को सोच कर ज़ोर से रोने लगी शावर के निचे…… आज ऐसे मुक़ाम पर थी के छुड़वाने के लिए तरस रही थी और कुछ साल पहले पति के होते हुवे कितने मर्द उस्सकी जिस्म की आग बुझा रहे थे…..

पायल सोचने लगी के जवान उम्र में माँ बनना शायद ठीक नहीं….. वह अब भी जवान है और उस्का बीटा इतना जवान उसस्के साथ…… पायल को अछि तरह से मालूम था के सरजू का मैं उस के तरफ सेक्स के बारे में उतावला था…. पायल सब जानते हुवे अनजान बनती थी मगर सोच रही थी कब तक सरजू को अवॉयड करेगी……. अब तो वह खुद सरजू के तरफ खींची जार यही थी कैसे इस को रोक lagaye…kia किया jaye…keise आगे barhein…Paayal शावर के टेल रट हुवे सोच रही थी…….

तो बे कॉन्टिनोएड…………………….
 
थैंक्स वैरी मच जीतू भाई.

जीतू भाई आप एक ऑनेस्ट रीडर हो और आप के कमैंट्स ऑनेस्ट होते हैं यह मुझे बहोत पसंद आते हैं आप के कमैंट्स में. मैं आप से एक बात कहना चाहता हूँ भाई. मैं जानता हूँ के किसी भी धर्म में इन्सेस्ट अल्लोवेद नहीं है, और नाह hi अडुल्टेरी. वो चाहे हिन्दू धर्म हो या इस्लाम या तो क्रिश्चियनिटी. मैं पढ़ा लिखा हूँ ावल दर्जे तक. मैं ने बहोत जानकारी हासिल किया हुआ है अलग अलग धर्मों के बारे में.

रही बात मेरे इस तरह के कहानियों को लिखने की तो आप को बताना मुनासिब समझता हूँ के मैं ने ज़िन्दगी में कभी ऐसी कहानियां नहीं लिखे थे एक्सबी ज्वाइन करने से पहले.... 2010 में मैं ने एक्सबी ज्वाइन किया था, बाद में एक्सबी का नाम बदल कर सोस्सिप रखा गया. मैं वहां 2010 से 2014 तक बहोत hi एक्टिव था, और बहुत hi फेमस था वहां पर, मोड़ भी बना था, एलेक्शंस भी लाडे थे, मेरे फैन फोल्लोविंग्स सब से ज़्यादा था एक्सबी पर मेरे कहानियों के बदौलत. हज़ारों के तादात में मेर ेराडर्स और फोल्लोवेर्स हो गए थे, मेरी पहली इन्सेस्ट स्टोरी थी "थे ईन्सेस्तुओस एनकाउंटर ऑफ़ ा बहु जो इंग्लिश में थी और जिससे मैं ने यहाँ भी इंग्लिश सेक्शन में शुरू किया है दोबारा. उस स्टोरी को स्टार्ट किया था तो गूगल पर कोई बहु वर्ड टाइप करता तो मेरे थ्रेड के लिंक ओपन होते थे..... बाद में सरजू स्टार्ट किया तो वही हाल था, गूगल पर कोई इन्सेस्ट टाइप करता तो मेरे सरजू थ्रेड के लिंक ेस्ब्बी के लिंक के साथ ओपन होत्ये थे..... अब सोचिये किश दर्जे के हिट हुए थे यह दो कहानियां और कितने हज़ार लोग पढ़ते थे के खुद गूगल मजबूर हुआ था उन् थ्रेड्स के लिंक को पहले शो करने को... थे मोस्ट रीड , थे मोस्ट विजिटेड एंड थे मोस्ट लव्ड लिंक बन गया था एक्सबी और मेरे कहानियां....

मैं इन्सेस्ट या इरोटिक राइटर नहीं था भाई, मैं तो लव स्टोरीज और ट्राजेडीएस लिखता था. जो एक्सबी पर ज़्यादा नहीं चलते थे... मेरा पहला शार्ट स्टोरी था एनाबेली, जिस्सको बहोत पसंद किया गया था...... फिर मेरे कुछ दोस्त बने एक्सबी पर झनों ने मुझसे कहा के यहाँ अगर थ्रेड और स्टोरी को मशहूर करना है तो सेक्स स्टोरीज लिखो.... क्यूंकि मुझ में लिखने की टैलेंट को एक्सबी के एड्मिसन ने देख लिया था मेरे शार्ट स्टोरीज और लव स्टोरीज से तो मुझसे कहा गया के अगर मैं ने एक सेक्स स्टोरी लिखा तो कितना पसंद किया जाएगा.....

तब मैं ने खुद सोचा के तरय करके देखने में किआ हर्ज है.... तो शुरू में मैं ने एक्सबी के उस वक़्त के एक्सिस्टिंग सेक्स स्टोरीज को थोड़ा पढ़ा के किश तरह के कहानियों को वहां के लोग पसंद कर रहे हैं... तभी मेरे दिमाग़ में " थे ईन्सेस्तुओस ेंकटर ऑफ़ ा बहु" ने जनम लिया... मैं सिर्फ इंग्लिश में लिखता था क्यों के मैं इंडियन नहीं हूँ और मुझको हिंदी लिखना नहीं अत था मगर बोलना अत था और समझता तो 100% था हिंदी और चित चाट थ्रेड्स पर हिंदी में दोस्तों से बातें किया करता था... जब मेरी इंग्लिश वाला एडल्ट स्टोरी सुपर डुपेर हिट हुआ तो हिंदी में वार तालाब करने वाले दोस्तों ने शिकायत किये मुझसे के उन् लोगों के लिए हिंदी में सेक्स स्टोरी नहीं लिखता हूँ और सब ने फरमाईश किये के मैं हिंदी में सेक्स स्टोरी likhun...unn दोस्तों के लिए मैं ने यह सरजू वाला स्टोरी शुरू किया था भाई जो मेरी इंग्लिश स्टोरी से बहुत ज़्यादा ज़बरदस्त हिट रहे थे..... 15 मिलियन वेव्स हुए थे इस कहानी की !!

अब रही बात वैसे l,ikhne की...... तो ऐसा कुछ भी तो असली में नहीं होना था सिर्फ इमेजिनेशन की बात है, दिमाग़ में सोच कर लिखना था और वक सपनों की दुन्या बसाना था तो लिखने में आसानी हुई बुसस एक सपने की तरह सोच कर लिखना शुरू किया था...... मैं जानता हूँ यह सब ग़लत चीज़ें हैं जो लिखता हूँ रिश्तों के बारे में मगर यह सिर्फ कल्पना होता है कुछ भी सच तो नहीं होता भाई.... जब हज़्ज़ारों में लोग पढ़ने लगे और पसंद करने लगे तो मैं समझ गया के सब को एक सपनो की सौदागर की तरह सपने बाँट रहा हूँ जिस से इतने सारे लोगों के दिल बहल जाते हैं और खुश हो जाते हैं ...

फिर साथ साथ हर तरह की फ़रमायिओसें आने लगे इस लिए कई लव स्टोरीज भी लिखे जो बेहद पसंद किये गए, थ्रिलर भी लिखे वो भी पसंद किये गए, पोयम्स भी लिखे वो भी नभ में थ्रेड्स हिट रहे, वीडियोस सेक्शन में इन्सेस्ट रिलेटेड बहोत सारे वीडियोस भी पोस्ट्स किये और वहां भी मेरे वीडियोस की व्यूज और वात्चेर्स के तादात सबसे ज़्यादा रहे.... तो मतलब के मेरे फोल्लोवेर्स मेरे पीछे मैं जो भी पोस्ट करता सब जमा हो जाते थे... उस तरह से मेरे हर पोस्ट की हुई कोई भी चीज़ सुओपेर हिट हो जाते थे.....

तो आप से इतना कुछ कहने का मकसद यह है के जैसे आप ने कहा के आप इस तरह के कहानियों को नहीं पढ़ते थे क्यों के यह धर्म के खिलाफ है, तो बुसस मैं में आया के आप को यह सब बताते चलूँ के मुझे भी तो नहीं पसंद था भाई, बुसस दोस्तों के लिए शुरू किया तब पता चला के कितने सारे लोगों को इस तरह के कहानियों पसंद करते हैं

अस्सल में हुआ यह था के जीन जीन लोगों ने खिलाफत दिखाए थे इस तरह के कहानियों के लिए वही लोग नाम बदल कर मेरे कहानियों को p[adhte थे और ज़बरदस्त कमैंट्स करते थे.... तो मैं समझ गया के यह एक तबू की तरह जो दिल के अंदर होता है मगर अस्सल में दिल के एक कोने में हर किसी को एक काल्पनिक सोच के जैसे , एक सपने के जैसे एक मूवी के जैसे समझ कर पढ़ते हैं...

अब सोचिये यह उदहारण में ने कुछ लोगों को समझाया था के आप मूवी देख रहे हो थिएटर में और शाहरुख़ खान आप की फ़व्वुरीते हीरो है, फिल्म में उस्सने देश की प्रधान मंत्री का खून कर दिया और उस प्रधान मंत्री को आप सब बेहद पसंद करते hai...to किआ वो मूवी देखने के बाद आप लोग शाहरुख़ खान को मारने जाएंगे या समझ जाएंगे के वो तो बुसस एक मूवी था अस्सल में तो तो शाहरुख़ खान ऐसा कुछ नहीं करेगा कभी..... एहि नाह भाई? तो इसी तरह मेरे कहानियां सब एक मूवी की तरह हैं जो सब नकली है और इस से असली ज़िन्दगी और रिश्तों का कोई लेना देना नहीं है... मेरी भी माँ बेहेन हैं, और सब बहोत प्यार और इज़त से रहते हैं हर किसी के माँ और बेहेन की तरह....... तो मेरी कहानियों का कोई भी लेना देना नहीं है असली रिश्तों से, यह सब कहानियां हैं, इस से नाह मेरे जाती ज़िन्दगी पर कोई एस्सार पड़ता है नाह मेरे रिश्तों पर.... सब कुछ जो लिखता हूँ बुसस एक सपना जैसा होता है

आप का बहोत बहोत शुक्रिया अपने ऑनेस्ट कमेंट देने के लिए भाई, और आप के कमैंट्स मुझे शुरू से hi हमेशा से पसंद आया है और अत रहेगा बल्कि मुझे आप के कमैंट्स का इंतज़ार रहता है....

#वैसे आप काफी दिनों से चावला वाले थ्रेड पर नहीं आये हो :डी

थैंक यू वैरी मच फॉर योर टाइम, लव एंड रिलीज जीतू भाई :लव: :हुग:

अगर कहीं कुछ मेरा कहा हुआ बुरा लगा हो तो ंवाफ करना प्लीज.

इतना कुछ लिख डाला इस में एक अपडेट चाप जाता :लोटपोट:
 
अपडेट 85

सरजू का उतने का वक़्त हुवा और वह उठकर अपनी मूमी को हमेशा बाँहों में जाकर कर प्यार करता था मगर जब देखा के उस्सकी मम्मी बीएड पर नहीं है

तो उस्सको आवाज़ दी «मम्मी !मम्मी ! कहाँ हो?» पायल ने शावर के निचे से सुना के सरजू उस्सको पुकार रहा है तो जल्दी से शावर के टेल से निकली आवाज़ वापस देते हुवे सरजू को. वह अपनी निघ्त्य समेत शावर के नीचे चली गयी थी जिस्म की आग बुझाने के लिए और वैसे hi बाहर निकली जल्दी से और एक टॉवल ढूंढ रही थी अपने आप को उस में व्रैप करने के लिए मगर तब तक सरजू बाथरूम तक आ पोंहचा था….. सरजू ने अपनी माँ को उस तरह से भीगे हुवे देख कर और उस्सकी चूचियों को भीगे हुवे निघ्त्य में देखकर मूरत की तरह खड़ा खड़ा रहगया जहाँ था वहीँ अपनी माँ की जिस्म को ऊपर से नीचे तक घूरते हुवे काफी देर तक. पायल की पूरी जिस्म साफ़ दिख रही थी उस भीगी हुवी ड्रेस में, उस्सकी जाँघों पर निघ्त्य चिपका हुवा था, उसस्के बालों से पानी टपक रहे थे, उस्सकी छाती पर दो पहाड़ की तरह दो तरफ उस्सकी चूचियों ने फॉर्म बनाया हुवा था उस्सकी पथ पर चिपकी हुवी निघ्त्य उस्सकी फिगर का खूब फॉर्म दे रहे थे और सरजू दीवाना होता जा रहा था…..

पायल कुछ देर खुद हैरान होगयी उस्सको अपने सामने देख कर और समझ नहीं रही थी के किआ करें, इधर उधर टॉवल तलाश रही थी तब तक सरजू के कदम उस्सकी तरफ बढ़े….. पायल ने कुछ घबराते हुवे सरजू के वापस अंदर जाने को कहा, मगर सरजू उसस्के बिल्कुल करीब चुका था और झट से अपने मुंय को खड़े हुवे बाहों में जाकर लिया. सरजू का कद उसस्के मम्मी से थोड़ा ऊंचा होगया था और पायल की सर अब सरजू के काँधे तक अत था, तो जब सरजू ने उस्सको बाहों में जकरा तो उस्सकी छाती बिल्कुल सरजू के छाती पर था और उस्सकी चूचियां सरजू के जिस्म से रागढ खा राहु थी…… पायल एक पल के लिए सरजू को थामना चाहती थी पुरे मैं से मगर उस्सने सरजू के कांधों पर हाथ रखते हुवे कहा, « बीटा तुम भीग जाओगे, देखो मैं पूरी भीगी हुवी हूँ, अभी प्यार करने की कोई ज़रुरत नहीं मुझे, जाओ तुम मेरे लिए अंदर से एक टॉवल लावो प्लीज…….. सरजू को अपनी मम्मी को चोर्ने का मैं तो नहीं कर रहा था उस्का लुंड एकदम से फुल साइज में खड़ा था और उस्सने जान बूझकर अपने हिप को पायल की हिप पर दबाया और लुंड सीधा मम्मी की भीगी हुवी ड्रेस पर उस्सकी छूट के ठीक बीच में दबाया और हलके से रगड़ा bhi…Paayal ने सब फील किया अछि तरह से मगर उस्सने दोहराया के सरजू उसस्के लिए टॉवल लाये और सरजू को मम्मी को चूर्ण पारा कमरे में से टॉवल लेन के लिए.

जब सरजू अंदर चला गया तो पायल ने एक लम्बी सांस लेते हुवे अपने आप से सर ऊपर उठाकर ऊपर के तरफ देखते हुवे कहा, «हे भगवान मुझे शक्ति दो के मैं इस पाप से बचूं!» मगर जब सरजू वापस आया टॉवल के साथ तो उस्सने फिर से पायल को बाहों में लेते हुवे कहा, «मम्मी मैं तुमसे बहोत बहोत प्यार करता हूँ, मेरा तुम्हारे सिवा और कोई नहीं है तुम्ही मेरे सब कुछ हो और तुम्हारा भी तो कोई नहीं मेरे सिवाए, तो हम दोनों एक दूसरे के साथी है, है नाह मम्मी ?» पायल जैसे अपना सुतबुद्ध खो रही थी और खुद अपने बेटे के बाहों में अपने आप को संभाल नहीं पा रही thi…Sarjoo ने अपने होंठों को अपने मम्मी की भीगे हुवे कांधों पर फेरते हुवे कहा, « कितने मुलायम है आपके स्किन मम्मी, मुझे बहोत पसंद है आप के हर एक जिस्म का हिस्सा…. देखो तो कितनी प्यारी लग रही है यह गोर गोर भीगे हुवे हिस्से…. » यह कहते हुवे सरजू ने उस्सकी कांधों क्लो चूमा, और पाया ल उस जगह पर देख रही थी जिस वक़्त सरजू ने उस्सकी तारीफ़ ki….tab तक टांड से पायल कुछ कम्पनी लगी थी भीगी जो हुवी थी ठंडी पानी में सवेरे सवेरे…. और सरजू ने आहिस्ते आहिस्ते अपने जिस्म को मम्मी के जिस्म से लगाया और अपने मम्मी को ज़ोर से जाकर लिया अपने मज़बूत बाहों में और फिर कहा, « देखो तो मम्मी, यह तुम्हारे बाहें कितने खूबसूरत और जवान है जैसे कोई 16 साल की लड़की की बाहें हो, कौन कह सकता है के तुम मेरी मम्मी ho…tum तो मेरे कॉलेज गिलफ्रैंड्स में गिनी जा सकती हो…. मुझे गर्व है तुम मेरी खूबसूरत यंग मम्मी ho…..agar तुम ओल्ड होती तो मैं तुमको शायद इतना प्यार नहीं करता, पापा ने चाह किया था तुमको अर्ली प्रेग्नेंट कर दिया था और मैं जल्दी पैदा होगया…. » पायल सब सुन रही थी सरजू के चेहरे में देखते हुवे और उस्सकी नज़रों में पहरने की कोशिश कर रही थी के सरजू आखिर किआ एक्सपेक्ट कर रहा था उस से !! सरजू का हाथ धीरे धीरे पायल के काँधे से हाथ कर पीछे के तरफ बढ़ता गया और सरजू ने अपने हाथों को पायल के घुटन पर फेरने hi वाला था के पायल ने जल्दी से उसस्के दोनों हाथों को अपने हाथों में लिया और दोनों सरजू के हाथों को अपने हाथों में लिए हुवे सामने लाते हुवे एक मुस्कान से कहा, «ाचा अब अपनी मम्मी की झूटी तारीफ़ करना बंद कर और जा अपने डेंटन को ब्रश करने मैं तुम्हारे लिए नाश्ता तैयार करती हूँ…. » सरजू का मन तो बिल्कुल उस्सको चोर्ने को नहीं कर रहा था मगर किआ करता अगर माँ की बात नहीं मानता तो दन्त खाना परता और पायल उस से खफा होजाती इस लिए उस्सने कहा माना….. वह चाहता था के उस्सकी मम्मी हमेशा उस से खुश हो और वह चाह बीटा kehlaaye…to मम्मी को नाराज़ नहीं करना चाहता था….. वैसे सरजू ने ठान लिया था के चाहे कितना भी वक़्त लगे मगर वह अपने मम्मी के बिल्कुल करीब जायेगा और एक दिन ज़रूर वह करेगा जो करना चाहता hai…bus वह यह चाहता था के मम्मी भी ख़ुशी ख़ुशी सब करने के लिए तैयार होजाये और दोनों तरफ से वही छह हो !

जब पायल अपने कमरे में गयी ड्रीस्स बदलने को तो एक एक उस हिस्से को अपने बदन पर चूमने लगी जहाँ सरजू ने चूमा था….. खुद कसमसा रही थी और सिसकारियां के बीच अपने hi जिस्म को किश कर रही थी, यहाँ तक के अपने काँधे को चूसा और एक लाल निशाँ होगया अपने आप hi…..Paayal ने अपने चूचियों को टॉवल से पानी सुखाते वक़्त उन् को मसला अपने हाथों से और ेंखों को बांध करके महसूस किया के सरजू के हाथ उन् को मस्सल रहे हैं…… पायल तरप उठी जिस्म की आग को संभाले न संभाल पाती थी…..

स्कूल के जाने के वक़्त सरजू ने फिर मम्मी को बाहों में जकरा और किश किया उस्सकी गालों पर और मम्मी से किश लिया अपने गालों par…magar आज की बात कुछ और thi,,,Sarjoo के पायल के गालों पर किश करते वक़्त एक गाल को थोड़ा सा chussa….auir अपने जीब को अपने मम्मी के गर्दन पर भी फेरा थोड़ा sa…Paayal मुस्कुरायी और हलके से उससे गालों पर मारते हुवे कहा, « चल हैट अब बदमाश कहीं का ! » सरजू मुस्कुराया और चलते वक़्त कहा, « लव यू मम्मी » पायल ने धीरे से जवाब दिया, « लव यू तू बीटा » तब अचानक सरजू रुका और पुछा, « हाँ मम्मी किआ मैं अपने दोस्तों को इस वीकेंड को घर बुलवून?» पायल ने थोड़ा सोचा फिर पुछा, « कितने दोस्तों को ? » सरजू ने भी सोचा फिर कहा, « हम्म्म सिर्फ 3 » फिर पायल ने पुछा, « कौन वह जो कहता है के मैं बहोत यंग और हॉट हूँ ? » सरजू ने मुस्कुराते हुवे कहा, « यह तो सब के सब कहते हैं मम्मी और साहिब hi तो है » फिर पायल ने पुछा, « और उन् तीनों में कितने तुमसे 3 साल बड़े हैं ? » सरजू ने कहा, « तीनों मुझसे बड़े हैं मम्मी, मैं छोटे बच्चों से दोस्ती नहीं करता…. » पायल ने अपने होंठों को डेंटन में दबाते हुवे मुस्कुराकर कहा, चाह ठीक है तुम उन् को ला सकते हो मांगा रिस बारे में शाम को ज़्यादा बातें करेंगे ठीक है ? » सरजू ने कहा okay और फिर से पायल को किश किया और उसस्के कानों में कहा, « आज रात को भी तुम्हारे साथ hi सोऊंगा okay ? » पायल ने सर को हिलाते हुवे हाँ कहा तब सरजू ने कान में कहा, « और आज रात को तुम वह वाला निघ्त्य को पेहेनना मेरे लिए प्लीज… » पायल ने सरजू को धीरे से ढाका देते हुवे कहा, « चल भाग यहाँ से अब तुझको देर हो रही है…… »

तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
अपडेट 86

सरजू स्कूल चला गया और दिन भर अपनी मम्मी को सोचता रहा. उसस्के ेंखों के सामने वह दृष्ट अत था जब पायल शावर से निकल बाहर कड़ी थी उसस्के सामने, और सोच रहा था कैसे उस्सने अपनी माँ की जिस्म पर अपने हाटों को फेरा था और उस्सकी जिस्म की गर्मी को किश तरह से उस्सने महसूस किया था उस वक़्त. वह सिर्फ अपने मम्मी को सोच सोच कर खड़ा हो जाता tha…din भर क्लास में अपने लुंड को सीधा करता रहता… क्लास को फॉलो नहीं कर पाटा था सिर्फ पायल को सोच रहा था…..

अब ब्रेक में उन् के दोस्तों से मिलते हैं. तीन क्लोज फ्रेंड्स थे उसस्के, दीपक, अजमल और शशि. यह तीनों सरजू से 3 साल बड़े थे क्यों के तीनों ने तीन बार क्लासेज रिपीट किये थे. अब सरजू जब इन् तीनों के बीच नहीं होते तो यह तीनों सरजू की मम्मी के बारे में बातें किया करते थे. दीपक सब से बड़ा था और एक दिन पायल को स्कूल जाना पड़ा था सरजू की एक शिकायत आयी थी इस लिए. उस दिन पायल ने एक बहोत खूब सूरत पिली रंग की साडी पहनी थी और कहने की ज़रुरत नहीं है के वह कितनी सेक्सी और हॉट दिख रही थी उस साडी में. उस्सकी गोरी कमर, पीठ का नंगा हिस्सा, उस्सकी उभरे हुवे गांड, उस्सकी खूबसूरत चूचियां की फॉर्म ब्लाउज में… ब्लाउज की क्लासेस और स्ट्रैप्स जो नंगे कांधों को साफ़ दिखा रहे थे….. दीपक उस दिन पायल पर दीवाना होगया …… उस्सने सोचा था के वह सरजू की बड़ी बेहेन hai….ussi दिन उस ने कहा था सरजू से के “तेरी बेहेन बहोत सेक्सी है…..” मगर जब दीपक को पता चला के वह उस्सकी माँ है तो दीपक और दूसरे दोनों दोस्त हैरान होगये थे के इतनी जवान माँ भी होती है और इतनी खूबसूरत और हॉट!

तो धीरे धीरे दीपक, अजमल और शशि, सरजू से उस्सकी मम्मी के बारे में पूछने लगे और कुछ दिनों के बाद तीनों को पता होगया के सरजू का बाप नहीं है और वह अपनी माँ के साथ अकेला रहता है…… तो धीरे धीरे उन् तीनों ने सरजू के दिमाग़ में यह बात डाली के “तेरी मम्मी इतनी यंग है तो उस्सको सेक्स की ज़रुरत होती होगी तो तू hi क्यों न उस्सकी ख्वाहिशों को पूरा करता है” यह तीनों अपने आप में बात कर चुके थे के देखते हैं किआ सरजू खुद अपनी माँ से वैसा रिश्ता रख सकता है के नहीं, और अगर उस ने वैसा रिश्ता कर लिया अपने मम्मी के साथ तो तीनों ने सोचा उन् के लिए रास्ता खुल जाएगा उस्सकी ंयममय को छोड़ने के लिए…… तो हर रोज़ यह तीनों सरजू से सिर्फ उस्सकी माँ के बारे में बातें किया करते थे और सरजू भी किया करता था क्यूंकि उस्सको अपनी मम्मी के बारे में वैसे बातें करना बहोत चाह लगता था और वह गरम होता था सुनकर के उसस्के दोस्त लोग भी उस्सकी मम्मी को कितना चाहते हैं और पसंद करते हैं.

अब, जब सरजू उन् तीनों के साथ नहीं होते थे तो दीपक दोनों दोस्तों के साथ पायल के बारे में बातें करता कुछ इस तरह से, “यार कल में ने सरजू को मॉल में अपने मम्मी के साथ देखा! किआ लग रही थी यार उसी वक़्त बीएड पर पटकने को मैं kiya…ghar जाकर उस्सको सोच कर किआ मुठ मारा यार!! किआ चीज़ है सरजू की माँ yaar..uff!!” साक्षी ने पुछा, “किसी ड्रेस पहनी थी यार? दीपक ने कहा, “एक टाइट ब्लाउज और स्कर्ट में थी यार, उस्सकी चूचियां नज़र आरहे थे बाप!! स्कर्ट में उस्सकी गांड बहोत hi अट्रैक्टिव थी यार…. किआ मस्त चीज़ है यार, अगर वह मेरी माँ होती तो हर रात को मैं उस्सको छोड़ता यार!!” दीपक ने रिप्लाई किया. ुसस्पर अजमल ने कहा, “मुझे तो लगता है सरजू छोड़ता है अपनी मम्मी को मगर हम लोगों को नहीं पता चलने देता वह!” दीपक ने फिर कहा, “यार हम लोग हर रोज़ तो उस से एहि कहते हैं नाह! मगर वह तो अनारी लगता hai…kuch अनजान बनता है, किआ तुम सोचते हो के वह करता होगा?” तब अजमल ने कहा, “ज़रा सोचो उस्सकी चूचियां नज़र आरही थी जब तुम ने देखा मॉल में, और वह अपने जवान bête के साथ थी तो किआ उस्सको पता नहीं के उस्का जवान बीटा उस्सकी चूचियों को देख रहा है? अब मैं तुमको एक बात बताता हूँ, एक दिन पार्क में दोनों घूम रहे थे, मैं फुटबॉल खेल कर वापस ारः था तो देखा बहोत सरे लोग पार्क में टहलने जाते हैं तो मैं भी उधर से गुज़रा, तो मेरी नज़र सरजू पर पड़ा, मैं उस से मिलने को जा रहा था तब देखा के उस्सकी मम्मी उसस्के लिए आइस क्रीम लेकर उसस्के तरफ आरही है, तो मैं एक पेयर के पीछे खड़ा रह गया. दोनों बेंच पर बैठ कर आइस क्रीम खाने लगे…… सरजू की माँ ने वैसे hi एक स्कर्ट पहनी हुवी थी और एक टाइट टीशर्ट. जब वह बेंच पर बैठी तो वह स्कर्ट और ज़्यादा ऊपर उठ गयी और दोनों जाँघों के बीच मेरी नज़र gayi….kia गोरी जांघ है yaar…lagta है एक 16/18 साल की लड़की बैठी है मेरे सामने….. मगर मैं हैरान होगया क्यों के कुछ देर बाद देखा के सरजू का हाथ उस्सकी माँ की जांघ पर hai…woh धीरे धीरे अपने हाथ को जांघ के ऊपर फेरता जा रहा था तब उस्सकी माँ ने उसस्के हाथ को थामा…..” दीपक और साहसी खुले मुंह हैरान अजमल को देख रहे थे और शशि ने पुछा, “ऐसा किआ??” अजमल ने कहा, “एहि नहीं सुनों तो, आइस क्रीम सरजू की माँ की बाँहों में बहने लगे और सरजू ने अपने जीब से अपनी माँ की हाथ और हथेली को छाता बिल्कुल इरोटिक तरीके से…. फिर मैं ने खूब सुना के सरजू ने कहा, ‘मम्मी तुम्हारे होंठों पर भी आइस क्रीम बह रहे हैं वहां भी चाट लेता हूँ’ फिर उस्सकी मम्मी ने कहा, “छुपकर बदमाश इतने सारे लोग हैं यहाँ….” अब इन् सब का किआ मतलब होता है? दोनों एक दूसरे के कितने करीब है? लगता था एक लोविंग कपल बैठे हैं पार्क के बेंच पर और इश्क फार्मा रहे हैं!!” तीनों दोस्त अपने अपने लुंड को पंत में सीधा कर रहे थे साड़ी बातें करने के बाद…..

वह तीनों दोस्त इस तरह से सरजू की माँ को और सरजू को इस नज़र से देखते थे और सरजू को यह पता था!! वह तो जान बूझकर अपनी माँ की बातें करता और करवाता था उन् तीनों के साथ. जब तीनों कुछ बातें नहीं करते थे तो सरजू शुरू होता था, “आअज मम्मी ने मुझको ज़ोर से हुग किया और मेरे कानों में दन्त भी कटा!!” ऐसे ऐसे बातें सरजू करता था बात को शुरू करने के लिए जब तीनों कोई बात नहीं करते थे! जिस दिन दीपक धीरे से सरजू के कानों में कहता, “तेरी मम्मी अगर मेरी मम्मी होती तो मैं उस्सकी पंतय चुरा कर उस पर मुठ मारता….” और सरजू कहता, “यह तो मैं कर चुक्का हूँ कई बार!!” दीपक फिर कहता, “रात को मैं उस्सकी बीएड पर जाता और उस्सकी निघ्त्य ऊपर उठाकर उस्सकी छूट को चाटता!!” इस बात पर सरजू चुप रहता!! खैर ऐसे ऐसे बातें होते थे इन् चारों के बीच सरजू की माँ के बारे में.

तो अब जबकि सरजू तीनों को इन्विते करना चाहता है तो एक प्लान के साथ जो उसस्के दिमाग़ में महीनों से चल रहा था. तो उस्सने इस दिन को ब्रेक में सरजू ने दीपक से कहा, “तुम तीनों इस वीकेंड को मेरे यहाँ ठहरोगे?” तीनों बहोत खुश हुवे और हाँ में जवाब दिया तो यह फ़िनलिसे हुवा के अगले शुक्रवार को स्कूल के बाद यह तीनों सरजू के यहाँ ठहरने को जाएंगे और संडे इवनिंग को अपने घर वापस लौटेंगे.

शाम को स्कूल से घर लौटने पर सरजू दबे पाऊँ किचन के तरफ गया, उस्सकी मम्मी का दिन था रसोई में रहने को उस्सको पता था. हु दबे पाऊँ इस लिए गया यह देखने के कहीं दादा या कोई चाचा उस्सकी मम्मी के पास तो न हो…. मगर कोई नहीं था मम्मी अकेली थी. उस्सने अपने मम्मी के पीछे खड़े होकर पीछे से hi उस्सकी गाल पर किश किया और यह करते वक़्त उस्का लुंड उस्सकी माँ की गांड पर डाब हुवा है….

कुछ देर बाद सरजू पायल ने छाए सर्वे किया कुछ बिस्किट्स के साथ और दोनों बातें करने लगे. सरजू ने कहा के उस्सने अपने 3 दोस्तों को फ्राइडे को इन्विते किया घर पर आने को…. पायल बोली, “यहाँ इन्विते किया? इस घर में?” सरजू कुछ हैरान होकर अपने मम्मी के चेहरे में सवाली नज़रों से देखते हुवे कहा, “हाँ और नहीं तो कहा इन्विते करता?” तब पायल ने धीरे से कहा, “अरे नहीं, यहाँ नहीं. दादा जी की फार्महाउस है नाह गाओं में मैं उस से चाभी मांगलुंगा, किसी से अभी कुछ कहने की ज़रुरत नहीं, नहीं तो सब लोग साथ जाना चाहेंगे, रोशन और कोयल को कुछ मत बताना, मैं किसी को भी कुछ नहीं कहूँगी, बस फ्राइडे को hi दादा जी से फार्महाउस की चाभी मांगूंगी और कहूँगी के तुम अपने दोस्तों के साथ वहां एक छोटा सा पिछ णिच मानाने जा रहे हो और तुम लोगों को झमेला पसंद नहीं है. ठीक है?” यह सुनकर तो सरजू बहोत ज़्यादा खुश हुवा और सोचा अपनी मम्मी के साथ अकेले 3 दोस्तों के साथ रहेगा फुल वीकेंड, तब तो बड़ा hi मज़ा आएगा……. फिर सरजू ने दादा जी की बात चेदि तो पुछा, “मम्मी मैं तुम्हारे और दादा के बारे में, चाचाओं के बारे में सब जानता हूँ, और जानता हूँ के तुमको भी पता है के मैं सब जानता हूँ, मगर बहोत दिनों से मैं ने तुमको उन् लोगों के साथ नहीं देखा, किआ वह लोग दिन में तुम से मिल लेते हैं जब मैं स्कूल में होता हूँ?”

तो बे कॉन्टिनोएड…………………… (3050 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 87


सरजू ने जब अपने दादा और चाचाओं के बारे में पुछा तो पायल बिल्कुल हैरान सरजू की ेंखों में खुले मुंह देखती रही कुछ देर तक तो सरजू ने कहा, “इस में चॉहोंकने वाली कौन सी बात है मम्मी, तुमको तो अछि तरह से पता है के मैं छोटा hi से सब जानता हूँ और देखता चला आया hoon….papa ज़िंदा थे तभी से तो दादा और तुमको एक साथ देखा था मैं ने कई बार, फिर चाचाओं के साथ…….” पायल सरजू के करीब आकर उसस्के गालों पर एक हल्का सा थपड मारती है फिर मुस्कुराते हुवे कहती है, “तू जितना बड़ा होता जा रहा है उतना hi बेशरम… तुझको शर्म नहीं अति मुझसे ऐसे बातें करते हुवे? यह भी कोई बात है अपनी माँ के साथ करने का?! चल जा यहाँ से तेरे कपडे निकल रखे है में ने जा कर नाहा ले फिर अपने होमवर्क्स करना.” सरजू कुछ शरारती अंदाज़ से उठ कर अपने मम्मी को किश करके रसोई से निकल जाता है अपने कमरे के अवर.

कमरे में सरजू ने देखा के कुछ कपडे जो सूखे हुवे थे उस्सकी माँ ने उठा कर बीएड पर रखे हुवे है स्त्री कर के अलमारी में रखने के लिए. उन् कपड़ों में उस्सकी माँ की ुंडेरवेअर्स भी थे. उस्सने बाहर झाँका के कहीं उस्सकी मम्मी नहीं तो आ रहे हैं फिर उस्सने जल्दी से अपने ट्रॉउज़र उतार दिए और अपनी माँ की एक सफ़ेद पंतय बीएड पर से उठाकर अपने लुंड पर रगड़ने लगा. फिर उस पंतय को अपने मुंह तक लाया, उस्सको सुंघा और किश किया, फिर छाता, और फिर उस्सको अपने खड़े लुंड पर रगड़ने लगा जैसे मुठ मार रहा हो अपनी माँ की पंतय से…. अपने ेंखों को बांध कर लिया और ‘मम्मी, मम्मी कब डौगी मुझे mummy…itni जवान क्यों हो mummy…bilkool एक गर्लफ्रेंड जैसी हो aaah…kitna मज़ा अत है तेरे साथ सोने को मम्मी…..’ ऐसा भुनभुनाता गया उस पंतय को अपने लुंड पर रघड़ते हुवे तने हुवे लुंड पर अपने….

अब उधर से पायल कमरे के तरफ आ रही थी, और जब दरवाज़े तक पोह्ची तो सरजू की आवाज़ सुनी जैसे किसी से बातें कर रहा ho…to धीरे धीरे पायल कमरे में दाखिल हुवी और यह देख कर के सरजू उस्सकी पंतय अपने लुंड पर रागढ रहा था, वह चाहोंक गयी और दरवाज़े के पीछे चुप गयी सरजू को देखते हुवे….. पायल का पसीना छूठ गयी उसस्के समझ में नहीं आरही थी के किआ करें उस waqt…na तो बाहर निकल सकती थी और न कमरे के अंदर जा सकती thi….woh सरजू को एक तो डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी और दूजा, वह सोच रही थी कहें भी तो किआ कहें सरजू को, उस्सको शर्म भी आरही थी… बस कोई 5 मिनट्स तक वह छुपे सरजू को मुठ मारते हुवे देख रही थी और अपने bête को खुद का नाम लेते हुवे देख कर और सुनकर पायल गरम सी हो गयी और अपने हाथों से अपने चूचियों को मसलने लगी सरजू को निहारते हुवे और छोटी छोटी सिसकारियां लेते हुवे….. पायल को जी करता था के उसी वक़्त झपक कर सरजू को अघोष में लेलें और वहीँ बिस्तर पर उस्सको धकेल कर सरजू पर चढ़ जाये….. बहोत जातां किया पायल ने अपने आप को संभालने को…… सोच में पर गयी के अब करें भी तो किआ karein…keise सरजू से अपने बारे में सोचने से मन करें? कैसे उस्सको अपनी माँ के बारे में ऐसे खयालात लेन से रोकें ? सरजू बहोत लाडला था और पायल को पता था के वह बेहद प्यार करता था उस से मगर यह वाला प्यार यह तो वासना hai…aur वह भी खुद अपने बेटे के saath…nahhin नहीं पायल ने सोचा यह नहीं हो सकता उस्सको सरजू को रोकना hoga….woh कभी ऐसा नहीं होने देगी उस्सने मैं hi मैं socha…tab तक सरजू ने पिचकारियां छोड़ी अपने कमरे में कुछ अपनी माँ की पंतय पर कुछ ज़मीन पर अउ पायल कड़ी देख रही थी, और सरजू को कुछ पता नहीं था के उस्सकी माँ कमरे में हैं उस वक़्त…..

उसस्के बाद सरजू ने एक टिश्यू लेकर ज़मीन पोंछने लगा उस वक़्त आहिस्ते से पायल कमरे से निकल गयी जब सरजू का सर ज़मीन पर झुका हुवा था…… पायल रसोई में वापस गयी और वह दृष्ट उसस्के नज़रों के सामने घंटों तक घूमते rahe…ussko सिर्फ सरजू hi सरजू नज़र आरही थी चारों तरफ रसोई में… कभी मुस्कुरा रही थी तो कभी उलझन में पर जाती थी… कभी उस्सको चाह लगता था तो कभी दुःख होता tha….bilkool नहीं समझ रही थी के किआ किया जाये…. एक बार सरजू के लुंड को सोचकर पायल के जी में आया के अपने बेटे के वर्जिन लुंड को अपने मुंह में लेकर उस्सको खूब मज़े से चूसें…. उस्सको उस रात की दृष्ट याद आगयी जब सरजू सोया हुवा था और उस का लुंड उसस्के अंडरवियर में तना हुवा था और पायल देख रही थी…… पायल कभी पॉजिटिव तो कभी नेगेटिव सोच रही थी इस बारे में, के अचानक सरजू का दादा किचन में आया और पीछे से पायल को दबोचा अपने मज़बूत हाथों में अपने कमर को उस्सकी गांड पर दबाते हुवे…… पायल उस वक़्त बेहाल तो थी hi अपने सरजू के लुंड के बारे में सोचते हुवे और अब एक मर्द की बाहों में आने से उस्सको कुछ तो सुकून मिली मगर टेम्पररी थी क्यों के सरजू आस पास था घर में hi….. दादा जी ने पायल के मुंह को अपने मुहं में लिया और पायल के मुंह तो जैसे रस से भाड़े हुवे थे चुस्स्वनी के इंतज़ार में बूढ़े ने खूब चूसा उस्सकी जीब को अपने लुंड को कपडे समेत पायल के गांड पर रगड़ते हुवे…..

पायल ने तृप्ति आवाज़ में कहा, «सरजू यहीं है, जाइये अब आप… आप तो कोयल के पीछे पड़े हैं मुझको तो भूल hi गए, नेग्लेक्ट कर दिया है मुझको अब, सब जवान जिस्म चाहते हैं, कोयल की जवानी पर अपने आप को मिटा रहे हो जाओ अपने कोयल के पास….. » बूढ़े ने कहा, «जल क्यों रही जो जानेमन, तुम भी तो वैसी hi ho…aur सरजू अभी नाहा रहा है….. » धीरे धीरे बूढ़ा पायल की ब्लाउज को खोल दिया और और उस्सकी चूचियों को चुस्सने लगा और एक हाथ से पायल के पथ के नीचे हाथ घुसता गया उस्सकी छूट तक और तब भी अपने लुंड को रगड़ता जा रहा था उस्सकी गांड पर कपडे के ऊपर से hi…..

कुछ देर बाद सरजू नाहा कर किचन के तरफ आया अपने माँ को निहारने और अंदर घुसते hi ज़ोर से कहा «मम्मी आज पता है दीपक ने किआ कहा… » इतना कहा के देखा दादा ने माँ की चूचियों को मुंह में लिया हुवा है और दादा का हाथ माँ के छूट को मसल रहा है…… फिर रुक गया और एक कदम पीछे हैट गया और चॉहोंकते हुवे पायल जल्दी से अपने ससुर के बाँहों से निकली और अपनी ब्लाउज की बटन्स लगाने लगी अपने बालों को बनाते हुवे और बूढ़े एक तरफ देखते हुवे कमरे से जल्दी से निकल पड़ा….

सरजू कितने महीनों से अपनी माँ को दादा या चाचाओं के साथ देखना चाहता था, और अभी एक मौका मिला तो उस्सको गँवा diya…apne माटी को पीटते हुवे वह किचन से निकला और खुद से कहता गया, «क्यों ? क्यों में ने आवाज़ दी ? मुझे आहिस्ते से अंदर जाना चाहिए था, तो बहोत कुछ देख पाटा…. दादा ज़रूर मम्मी को वहीँ chodta…ya मुम्ममय उसस्के लुंड को chussti….kitne दिनों से यह सब देखना चाहता हूँ आज एक बहोत चाह मौका मिला भी तो उस्सको खो दिया मैं ने !! क्यों, क्यों में ने आवाज़ दिया अंदर जाने से पहले !! हाय रे मेरी किस्मत !! अब ऐसा मौका फिर कहाँ नसीब होगा mujhko…main जब स्कूल में रहता हूँगा तभी सब एन्जॉय करते होंगे मम्मी के साथ…. » सरजू को बड़ी ख्वाहिश थी अपनी मम्मी को छोड़ते हुवे देखने को जैसे बचपन में देखा करता था…. उस्सको अपनी मम्मी की सेक्सी जिस्म सिर्फ छोड़ने और छोड़वाने के लिए लगता है…. वह सोचता है उस्सकी माँ सिर्फ इसी लिए बनायीं गयी है, नहीं तो इस जवान उम्र में वह उस्का बीटा नहीं होता, उस्सकी एक बेटी होती… बीटा इस लिए हुवे और बाप इस लिए गुज़र गया क्यों के उस्सको अब अपनी माँ के साथ सब करना है जो बाप karta…jab दादा और चाचा लोग कर सकते हैं तो वह क्यों नहीं…. सरजू ऐसा सोचता था, और अब रात के लिए खुद को तैयार कर रहा था… सोचा के आज रात को तो मम्मी को छोड़ने में ज़रूर कामयाब होऊंगा…. आज रात को उस्सको उस सेक्सी वाली निघ्त्य को pehenwawunga…aur बिना ब्रा के उस्सकी चूचियों को मसलूंगा, उस्सकी पंतय तो बिल्कुल नज़र आएगी उस पतली सी निघ्त्य में… वह निघ्त्य वह सिर्फ दादा के लिए पहनती है मुझको मालूम है मगर आज रात को वह मेरे लिए पहनेगी…. आज मैं काम तमाम ज़रूर करूँगा… mummy….aaaah, हाय रे मेरी जवान सेक्सी हॉट मम्मी !!! » सरजू ने तृप्ति आवाज़ में अपने लुंड को दबाते हुवे ऐसे सोचा मैं hi मैं आज रात के लिए…..

तो बे कॉन्टिनोएड………………….
 
अपडेट 88

सरजू ने ख्यालों में अपने माँ को छोड़ने भी लगा उन् सब के बारे में सोचते हुवे और बहोत खुश भी हो रहा तह के आज रात को वह काम तमाम ज़रूर करेगा.

उधर पायल के ेंखों के सामने अपने बेटे का लुंड मुठ मारते हुवे दिख रहा था, जो कुछ भी उस्सने देखा सरजू को करते हुवे उस्सको बेचैन कर रहा tha…Woh सोच रही थी, «इतनी सी उम्र में यह कैसे अपने दादा और चाचाओं की तरह होगया है? उस्का लुंड कितना मोटा और लम्बा है इस छोटी सी उम्र mein….kab उस्सने मुठ मारना सीखा ? कैसे जाना उस्सने के वैसे करने से मज़ा अत है ? किआ उस्सको मज़ा आया होगा ? मुझको क्यों सोच कर मुठ मार रहा था? किआ मैं इतनी सेक्सी हूँ उसस्के लिए ? यह सब कैसे हुवा ? किआ मुझे अपने दादा के साथ देख कर या चाचाओं के साथ देख कर मेरे लिए ऐसे भावनाएं जागे हैं उसस्के मैं में? मैं कैसे अपने बेटे को अपने साथ यह सब करने दूँ भला? हे भगवान् मैं किआ करूँ? किआ मैं यह बात उस के दादा से कहूं? या किसी एक चाचा को बतावूं? तब किआ होगा? वह लोग उस से बात kareinguey…magar वह बुरा मान गया तो? तब किआ होगा? कहीं उन् लोगों ने उस्सको मारा या बुरा भला कह दिया तो किआ होगा? नहीं नहीं मैं उन् लोगों को यह बात नहीं बता सकती… मुझको खुद निपटना होगा इन् बातों से… सरजू से

रात को बात karungi…ussko समझाउंगी के उस्सको एक गर्लफ्रेंड की ज़रुरत है और मैं सिर्फ उस्सकी माँ हूँ…. »

सरजू कुछ और सोच रहा था रात के लिए और पायल तो कुछ और hi सोच रही थी….. जब डिनर का वक़्त हुवा तो पायल के घरवालों को खाना पड़ोस और सब लोग हाज़िर हुवे टेबल पर. घर के सब लोग थे वहां दादा, दादी, दोनों चाचा, उन् के बचे और चाचियां… रोशन और कोयल भी the….sirf सरजू नहीं था….. डाइनिंग रूम से hi पायल ने आवाज़ दी सरजू को, के डिनर सर्वे हो रहा है वो आकर खाना खाएं…. मगर सरजू नहीं ारः था. दादा ने कहा, “वह होमवर्क कर रहा होगा, रोशन जाओ उस्सको बुला लावो, खोया होगा ख्यालों में वह.” उस वक़्त पायल ने अपने ससुर को एक नज़र देखा और कुछ इशारा किया ससुर को….. ससुर समझ गया के उस वक़्त की बात कह रही है जब सरजू ने दोनों को किचन में देखा था उस पोजीशन में….. तब बूढ़े को भी थोड़ा फ़िक्र हुवा के कहीं इसी लिए सरजू खाने के लिए नहीं तो ारः है. रोशन उठ रहा था सरजू के कमरे के तरफ जाने के लिए तो बूढ़े ने कहा, “रुक रोशन मैं hi देखता हूँ सरजू को……” और वह गया सरजू के कमरे में, और देखा के वह तो नींद में है बीएड पर अपनी मम्मी की एक ड्रेस को बाँहों में लिए सोया हुवा है….. धीरे से उस्सने सरजू को जगाया और बीएड पर उसस्के पास बैठ गया. सरजू ने ेंखों को मसलते हुवे पुछा, “किआ जुवा दादा जी, मम्मी तो यहाँ नहीं है…” दादा ने मुस्कुराते हुवे कहा, “अरे मैं तुझको बुलाने आया हूँ तेरी मम्मी से मिलने नहीं, खाना पड़ोस गया है और तू है के सो रहा है इस वक़्त हम्म?” सरजू ने अपनी माँ की ड्रेस जो बाँहों में लिया हुवा था जल्दी से अपने पीछे किया ये ख़याल करके के उस्का दादा ने देख लिया के वो अपनी मम्मी के ड्रेस को बाहों में जाकर सोया हुवा था… जिस वक़्त उस्सने ड्रेस को अपने पीछे किया दादा ने मुस्कुराते हुवे कहा, “क्यों छुपा रहा है? मैं ने तो देख लिया?!” सरजू के दोनों गाल लाल हो गए और अपने नज़रों को चुराने लगा तो दादा ने कहा, “बहोत प्यार करता है अपने मम्मी को नाह? हम्म अरे वह है hi ऐसी, कौन उस से प्यार नहीं करता……” तब सरजू को हिमत हुवी दादा से आगे बात करने की, तो उस ने पुछा, “आप भी मम्मी को बहोत चाहते हूँ न दादू?” दादा ने जवाब दिया, “हाँ बीटा तेरी मम्मी चीज़ hi ऐसी है, बहोत प्यारी है, बहोत ज़्यादा खूब सूरत है, अच्छी है, शर्मीली है, नाज़ुक है, उस में सब कुछ है जो एक मर्द पसंद करता हो, तो मैं भी मर्द हूँ नाह इसी लिए बीटा….” दादा सरजू को फुसलाने की कोशिश में था के उस्सने जो देखा उस बारे में किसी से ज़िक्र न करें. दादा ने फिर कहा, “देख सरजू bête, तू मेरा सब से प्यारा नवासा है सब बच्चों में, छोटा से तुझको hi सब से ज़्यादा प्यार किया है, सब से ज़्यादा चीज़ दिया है तुमको hi…tu मेरा लाडला है, अब तू भी तो दादा को पसंद करता है बचपन से तो अब ज़रा बड़ा होगया तो दादा को भूल तो मत जाना और ग़लती हो तो दादा को माफ़ करदेगा नाह?”

सरजू समझ गया दादा किआ कहना चाहता था तो उस्सने कहा, “अरे दादा आप फ़िक्र मत करो मैं किसी से कुछ नहीं कहने वाला, मैं तो छोटा से hi आप को और मम्मी को एक साथ कई बार देखा है वह करते हुवे, किआ मैं ने कभी किसी से कुछ कहा आज तक भला? यह भी कोई कहने वाली बात है!” दादा मुस्कुराया और सरजू के बालों में अपने उँगलियों को फेरते हुवे कहा, “हम्म बहोत सायना होगया है अब तू तो! मेरा चाह बीटा!” और उस्सको गले लगा लेता है. फिर दादा पूछता है, “अब तू ज़रा अपने बारे में बता तो…. रात को अपने बीएड पर सोता है या मम्मी के साथ?» सरजू कुछ हिचकिचाया फिर धीरे से कहा, “Main…woh…..kabhi कभी मम्मी के पास सुजाता हूँ…..” दादा ने पुछा हँसते हुवे, “हम्म, और किआ करता है? हम्म? बोल तो ज़रा अपने दादू को ? हम्म मज़ा करता है मम्मी के साथ नाह ? बोल तो ज़रा!” सरजू कुछ शर्माता सा है और अपने दादा की ेंखों में उसस्के मुस्कराहट में एक शैतानी चाहत देख पाटा है और उसस्के समझ में नहीं अत है के वह किआ जवाब दें अपने दादा को……

दादा उस्सको बहलाते हुवे कहता है, “देख तुमको एक बात समझाता हूँ…. पता है क्यों मैं तेरे सामने सब कुछ तेरे मुंय से करता था जब तू छोटा था तब से? ज़रा सोच कर बता मुझको तो!” सरजू सोचने के बाद कहता है, “पता नहीं? किआ आप को पता होता था जब मैं आप दोनों को देखा करता था?” दादा ने कहा, “तेरी मम्मी को नहीं मगर मुझको सब पता होता था के तू कब कब हम दोनों को देखता tha…abhi एक एक करके मैं तुमको सभी उन् दिनों को याद दिला सकता हूँ… जीतनेय रातों को तू सोने का नाटक करता था जब जब रात को मैं तेरे कमरे में तेरे मम्मी से हमबिस्तर होने अत था सब पता है मुझको के तू सब देखता tha…chaadar के निचे अपना सर छुपा कर तू एक झरोके से हम दोनों को खूब देखता था, मैं ने कई बार तुमको देखा है…..”

सरजू का पसीना चुत जाता है और लाल पीला होने लगता है तो दादा से पूछता है, “तो आप मुझे क्यों नहीं डांटते या कुछ कहते थे?” दादा ने कहा, एहि तो!! इसी लिए तो कुछ नहीं कहा था तुमको के तुम भी सब सीखो और मैं चाहता था के तुम को तेरी मम्मी की खूब सूरत गरम जिस्म दिखावूं और उस्सकी गर्मी और तरप तुझको sunawun…main चाहता था के तुमको पता चले के तुम्हारी मम्मी कितनी हॉट है और कितनी एन्जॉय करती है मुझको हालां के तेरा पापा ज़िंदा था तब भी और बाद में bhi…tum ने सब देखा और तुझको सब पता है…… अरे मैं तो चाहता था के मेरे सामने मैं कभी तुझको उस बीएड पर बुलवून तेरी मम्मी के पास और सिखावन तुझको के कैसे उस्सको खुश रखना होगा तुमको….. मेरी एक चाहत थी के तुमको उसस्के साथ हमबिस्तर होते देख sakun…ab तो तू कुछ करता होगा नाह तो मुझको एक मौका देगा तुम दोनों को करते हुवे देखने को? हाँ बोल बीटा मेरी बड़ी ख्वाहिश है तुम दोनों को छोड़ते हुवे देखने ko…kab से छोड़ता है अपनी गरम, जवान मम्मी को बोल मुझे यार!!”

सरजू को हैरानी हुवी के जो उस्सकी चाहतें हैं उसस्के दादा के भी वैसे hi चाहतें hein…uss ने कहा, “दादा यह अजीब बात नहीं के जो जो मैं चाहता हूँ आप भी वैसी hi चाहते ho…are मैं भी आप को मम्मी के साथ वह करते हुवे देखना बहोत पसंद करता हूँ, मगर चुप चुप kar…jab मम्मी आप के नीचे सिसकारियां लेती है, जब वह आप को नंगे बाँहों में जकरति है और आप को चूमती है अपने कमर को आप के साथ दबाते हुवे तो मुझको बेहद चाह लगता hai…aur अब आपको वही देखना है जो मुझे पसंद है dekhna…ajeeb बात नहीं है यह!!” तो दादा ने कहा, “अरे तो तू पोता किश का है? मेरा hi नाह? तेरे रगों में भी मेरा hi तो खून है तो तू भी मेरी तरह hi तो होगा न मेरे लाल!! हाहाहा! तू ने मुझको बहोत खुश कर दिया यह सब कहकर रे!! अब बता कब मुझको यह मौका देगा!! बोल!! मैं बस छुप कर तुमको पायल के साथ करते हुवे देखूंगा फिर चला जावूंगा……. सरजू ने सर झुकाते हुवे कहा, “मगर दादा अभी तक मैं ने नहीं किया hai…karne वाला हूँ मगर शुरू नहीं किया अभी तक !” दादा बहोत मायूस, होकर कहता है, “हैट तेरी की!! अभी तक नहीं किया तो किआ बीन बजता है रात को मम्मी का??! कब करेगा? हाय रे सरजू ऐसा मौका किस्को मिलेगा और तेरी जैसी माँ किस्को milega..chod बीटा छोड़ अपनी माँ ko…ussko बहोत ज़रुरत है छोड़ने की!!!”

तो बे कॉन्टिनोएड………………………….
 
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