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- Dec 5, 2013
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अपडेट 71
तो यह था कैसे बापू से पद्मिनी ने पहली बार किया था. यह सब बातें पद्मिनी ने सर्वनाड़ को बताया. सर्वानंद सुनते सुनते अपना लुंड पद्मिनी के अंदर दाल चूका था और ढाका दे रहा था जब पद्मिनी बातें सुना रही थी….. कितना एन्जॉय किया उस्सने सब सुनते वक़्त के कैसे उस के खुद के पिता न अपने बेटी को छोड़ा था और जब पद्मिनी सब सुना रही थी तो सर्वनाड़ उस्सको छोड़ते हुवे सुन्न रहा था और पद्मिनी सर्वनाड़ के लुंड अपने छूट में लिए बोले जा रही thi…aur सर्वनाड़ ढाका पे ढाका देता जा रहा था सुनते हुवे और अचहनक चिलाय , “ाघ्घ्घ!!! मज़ा आगया जानी…. वह किआ मस्त चुदाई की है आज तेरे साथ ऋ पद्मिनी !! मज़ा आगया बस !! ाहः!!” और सर्वनाड़ ने अपना पानी सब पद्मिनी के पथ और छूट के ऊपर छोरा……..
छोड़ने के बाद, दोनों बिस्तर पर लेते हुवे एक दूसरे के बाहों में, एक दूसरे के किसी न किसी जिस्म के हिस्से को सेहला रहे थे. तब सर्वानंद सोचते हुवे पूछता है, “मगर मेरी समझ में यह बात नहीं आयी के क्यों तुम्हारे पिता राज़ी हुवी तुम्हारे शादी के लिए जब के वह खुद तुझको अपने लिए रखना चाहता है, हर रात को तेरे साथ सोता है, छोड़ता है तुझको तो शादी क्यों?”
पद्मिनी: “ बाबू, पिछले 4 साल से मैं उसस्के साथ सो रही हूँ, और बापू कब से फ़िक्र में है के लोग बातें कर रहे हैं के जवान बेटी को घर में बिठाया है कब शादी करेगा अपनी बेटी का? कई शादी के प्रस्ताव भी ए मगर बापू नहीं mane…aakhir में उस्सने सोचा और हम दोनों ने डीडे किया के कोई बड़ी बात नहीं अगर मेरी शादी हो गयी तो, फिर भी जब भी वह चाहे मेरे साथ आकर सो सकता है मेरे पति के ग़ैर हाज़िरी में या मैं खुद उस के पास जा सकती हूँ जब वह बुलावे तो…….
सर्वानंद: “तो फिर तुम ने जान बूझकर मुझको पहली बार फंसा था?
पद्मिनी: “यह किसी बातें कर रहे हो आप? मेरा बापू आप से उम्र में बड़ा है और आप उस के हिसाब से बहोत ज़्यादा जवान लगते हो बौब्जी और आप की दीवानी हो गयी थी आप को देखते hi उस दिन झूले पर……. अब मैं अपने बापू के साथ यह सब तो करती hi थी तो जब आप को मैं में बसाया तो एहि सब दिमाग़ में आया पहले…. मैं तो चाहती थी आप मेरे गहरायी में जाये मगर आप ने मुझको कुंवारी समझ लिया था तो मैं कैसे शुरू शुरू में यह सब बताती आप को….?”
सर्वानंद: “और उस टीचर का किआ हुवा गाओं वाले तो तेरे बारे में बहोत साड़ी बातें कर रहे थे तो सब कैसे खामोश हुवे?”
पद्मिनी: “जब बापू मेरे साथ यह रिश्ता रखने लगा, तो फिर भी टीचर मेरे साथ सोना चाहता था….. और मैं बापू से प्यार करने लगी थी तो नहीं चाहती थी के वह मुझे चुवे, तब मैं ने बापू से कहा के टीचर ज़बरदस्ती करना चाहता है…… तब बापू एक दिन कॉलेज गया और टीचर से बात की उस्सने टीचर को धमकी दी के अगर मुझको चुवा तो उस्सको पुलिस के हवाले करदेगा चार्ज लगा कर……. टीचर ने एक हफ्ते बाद अपनी ट्रांसफर करवाली!! हीहीही!!”
सर्वानंद: “हम्म्म, तब तू अपनी बापू की पत्नी बनकर रेहगाई और अब वह अपनी पत्नी की शादी करवाना चाहता है…….. कोई और होता तो तुझको चोर कर हमेशा के लिए चला जाता मगर मैं तुझको हासिल करना चाहता hoon….mere लिए यह एक बहोत बड़ी बात होगी के तुम मेरी बहु होगी, मेरे घर में रहेगी मेरे bête से शादी करके और मैं तुमको chodunga….iss रिश्ते में जो मज़ा है छोड़ने के लिए किसी और रिश्ते में नहीं है, इसी लिए मैं कैसे भी करके रमेश से तेरा शादी करवाउंगा…. ज़रूर karwawunga…tu मेरे घर आएगी और मेरी बहु बनेगी और मेरी माशूका बन के रहेगी उस घर में……” यह कहकर सर्वानंद ने पद्मिनी को ज़ोर से गले लगते हुवे किश किया जीब को चूसते हुवे और हाथों को उस्सकी चूचियों को मसलते हुवे……. फिर एक सवाल किया, “और ऐसी छोटी स्कर्ट और तंग ब्लाउज किआ तू हमेशा hi से…….”
पद्मिनी ने उस का सवाल पूरा होने से पहले जवाब दिया, «बापू चाहता था के मैं हमेशा ऐसे ड्रेस पहनूं और वह पसंद करते थे जब गाओं के दूसरे लड़के और मर्द मुझको, मेरी जांघ को देखा करते थे वह कहा करते, ‘आज बहोत लड़कों ने तेरे नाम पर मुठ मारा होगा, बहोत बूढ़ों ने भी लुंड सहलाया होगा तुझको देख कर’ फिर वह मेरे साथ हमबिस्तर होता यह सब बातें कर कर के…. और मुझसे पुछा करता किश किश ने मुझको निचे से ऊपर देखा और पूछता के किसी ने मुझको या मेरी जांघ को चुवा के नहीं वग़ैरा वग़ैरा….. »
सर्वानंद : «अरे वह तेरा बापू तो बड़ा कमीना है, पूरा ठरकी है साला बूढ़ा !! »
पद्मिनी: “हे मेरे बापू को बूढ़ा मत कहो, मेरी जान है वह, बहोत खुश रखा है मुझको, बहोत मज़ा भी दिया है, मेरी जवानी को निखारा है मेरे प्यारे बापू ne…han….”
सर्वानंद: “चाह ठीक है आज के बाद वही सब अब मैं करूँगा और तू मुझ में अपने बापू को भी ढूंढ लेना मेरी जान”……..
तो बस उसस्के बाद सर्वानंद ने रमेश और पद्मिनी की मांगनी करवाई, फिर रमेश 4 महीनों तक पद्मिनी से मिलने को आया हफ्ते में एक बार. हर बार सर्वानंद साथ अत अपने ज़मीन के मुआएना करने के बहाने, और कभी कभी जिस दिन रमेश इधर उधर जाता सर्वनाड़ पद्मिनी को छोड़ता अपने बग़ीचे में, और उस्सने पद्मिनी को कहा के रमेश से शादी से पहले hi छुड़वा ले….. इस लिए के उस्सकी सील पहले से टूटी हुवी थी तो कहीं कोई बखेड़ा न होजाये सुहाग रात के रात…… तो दोनों ने प्लान किया, जिस दिन रमेश पद्मिनी को छोड़ने को था बग़ीचे में hi, सर्वनाड़ ने एक इंजेक्शन से अपना खून थोड़ा सा निकाल कर एक छोटा सा शीशी में पद्मिनी को दिया और सब नाटक करने को कहा जैसे उस्सको दर्द हो रहा है, जाँघों को कसके एक दूसरे जांघ को जोड़ने को कहा और उस शीशी में से खून को छूट पर लगाने को कहा….. पद्मिनी ने वैसा hi किया और रमेश को कुछ भी पता न चला के पद्मिनी वर्जिन थी भी या नहीं क्यों के वह भोला था और पहली बार किसी लड़की को छोड़ रहा था….. बाप ने खुद अपने बेटे को धोका दिया, उल्लू बनाया एक ाव्रत के लिए !!
इस तरह से दोनों की शादी हुवी और पद्मिनी बहु बनकर सर्वानंद के घर में आयी जहाँ पूनम पहले से बहु थी. अब किसी और मौके पर देखेंगे कैसे पद्मिनी और सर्वानंद ने कैसे मौके निकले अपने लिए, फिलहाल वापस चलते हैं अब पायल, कोयल रोशन और दूसरों के बीच. यह था पद्मिनी के बारे में के उस्सकी इस घर से नाता कैसे ज़ुरा था….. तो अगले अपडेट में पायल, कोयल ेट्स के बीच फिर से घुल मिलेंगे……
तो बे कॉन्टिनोएड…………………………..
तो यह था कैसे बापू से पद्मिनी ने पहली बार किया था. यह सब बातें पद्मिनी ने सर्वनाड़ को बताया. सर्वानंद सुनते सुनते अपना लुंड पद्मिनी के अंदर दाल चूका था और ढाका दे रहा था जब पद्मिनी बातें सुना रही थी….. कितना एन्जॉय किया उस्सने सब सुनते वक़्त के कैसे उस के खुद के पिता न अपने बेटी को छोड़ा था और जब पद्मिनी सब सुना रही थी तो सर्वनाड़ उस्सको छोड़ते हुवे सुन्न रहा था और पद्मिनी सर्वनाड़ के लुंड अपने छूट में लिए बोले जा रही thi…aur सर्वनाड़ ढाका पे ढाका देता जा रहा था सुनते हुवे और अचहनक चिलाय , “ाघ्घ्घ!!! मज़ा आगया जानी…. वह किआ मस्त चुदाई की है आज तेरे साथ ऋ पद्मिनी !! मज़ा आगया बस !! ाहः!!” और सर्वनाड़ ने अपना पानी सब पद्मिनी के पथ और छूट के ऊपर छोरा……..
छोड़ने के बाद, दोनों बिस्तर पर लेते हुवे एक दूसरे के बाहों में, एक दूसरे के किसी न किसी जिस्म के हिस्से को सेहला रहे थे. तब सर्वानंद सोचते हुवे पूछता है, “मगर मेरी समझ में यह बात नहीं आयी के क्यों तुम्हारे पिता राज़ी हुवी तुम्हारे शादी के लिए जब के वह खुद तुझको अपने लिए रखना चाहता है, हर रात को तेरे साथ सोता है, छोड़ता है तुझको तो शादी क्यों?”
पद्मिनी: “ बाबू, पिछले 4 साल से मैं उसस्के साथ सो रही हूँ, और बापू कब से फ़िक्र में है के लोग बातें कर रहे हैं के जवान बेटी को घर में बिठाया है कब शादी करेगा अपनी बेटी का? कई शादी के प्रस्ताव भी ए मगर बापू नहीं mane…aakhir में उस्सने सोचा और हम दोनों ने डीडे किया के कोई बड़ी बात नहीं अगर मेरी शादी हो गयी तो, फिर भी जब भी वह चाहे मेरे साथ आकर सो सकता है मेरे पति के ग़ैर हाज़िरी में या मैं खुद उस के पास जा सकती हूँ जब वह बुलावे तो…….
सर्वानंद: “तो फिर तुम ने जान बूझकर मुझको पहली बार फंसा था?
पद्मिनी: “यह किसी बातें कर रहे हो आप? मेरा बापू आप से उम्र में बड़ा है और आप उस के हिसाब से बहोत ज़्यादा जवान लगते हो बौब्जी और आप की दीवानी हो गयी थी आप को देखते hi उस दिन झूले पर……. अब मैं अपने बापू के साथ यह सब तो करती hi थी तो जब आप को मैं में बसाया तो एहि सब दिमाग़ में आया पहले…. मैं तो चाहती थी आप मेरे गहरायी में जाये मगर आप ने मुझको कुंवारी समझ लिया था तो मैं कैसे शुरू शुरू में यह सब बताती आप को….?”
सर्वानंद: “और उस टीचर का किआ हुवा गाओं वाले तो तेरे बारे में बहोत साड़ी बातें कर रहे थे तो सब कैसे खामोश हुवे?”
पद्मिनी: “जब बापू मेरे साथ यह रिश्ता रखने लगा, तो फिर भी टीचर मेरे साथ सोना चाहता था….. और मैं बापू से प्यार करने लगी थी तो नहीं चाहती थी के वह मुझे चुवे, तब मैं ने बापू से कहा के टीचर ज़बरदस्ती करना चाहता है…… तब बापू एक दिन कॉलेज गया और टीचर से बात की उस्सने टीचर को धमकी दी के अगर मुझको चुवा तो उस्सको पुलिस के हवाले करदेगा चार्ज लगा कर……. टीचर ने एक हफ्ते बाद अपनी ट्रांसफर करवाली!! हीहीही!!”
सर्वानंद: “हम्म्म, तब तू अपनी बापू की पत्नी बनकर रेहगाई और अब वह अपनी पत्नी की शादी करवाना चाहता है…….. कोई और होता तो तुझको चोर कर हमेशा के लिए चला जाता मगर मैं तुझको हासिल करना चाहता hoon….mere लिए यह एक बहोत बड़ी बात होगी के तुम मेरी बहु होगी, मेरे घर में रहेगी मेरे bête से शादी करके और मैं तुमको chodunga….iss रिश्ते में जो मज़ा है छोड़ने के लिए किसी और रिश्ते में नहीं है, इसी लिए मैं कैसे भी करके रमेश से तेरा शादी करवाउंगा…. ज़रूर karwawunga…tu मेरे घर आएगी और मेरी बहु बनेगी और मेरी माशूका बन के रहेगी उस घर में……” यह कहकर सर्वानंद ने पद्मिनी को ज़ोर से गले लगते हुवे किश किया जीब को चूसते हुवे और हाथों को उस्सकी चूचियों को मसलते हुवे……. फिर एक सवाल किया, “और ऐसी छोटी स्कर्ट और तंग ब्लाउज किआ तू हमेशा hi से…….”
पद्मिनी ने उस का सवाल पूरा होने से पहले जवाब दिया, «बापू चाहता था के मैं हमेशा ऐसे ड्रेस पहनूं और वह पसंद करते थे जब गाओं के दूसरे लड़के और मर्द मुझको, मेरी जांघ को देखा करते थे वह कहा करते, ‘आज बहोत लड़कों ने तेरे नाम पर मुठ मारा होगा, बहोत बूढ़ों ने भी लुंड सहलाया होगा तुझको देख कर’ फिर वह मेरे साथ हमबिस्तर होता यह सब बातें कर कर के…. और मुझसे पुछा करता किश किश ने मुझको निचे से ऊपर देखा और पूछता के किसी ने मुझको या मेरी जांघ को चुवा के नहीं वग़ैरा वग़ैरा….. »
सर्वानंद : «अरे वह तेरा बापू तो बड़ा कमीना है, पूरा ठरकी है साला बूढ़ा !! »
पद्मिनी: “हे मेरे बापू को बूढ़ा मत कहो, मेरी जान है वह, बहोत खुश रखा है मुझको, बहोत मज़ा भी दिया है, मेरी जवानी को निखारा है मेरे प्यारे बापू ne…han….”
सर्वानंद: “चाह ठीक है आज के बाद वही सब अब मैं करूँगा और तू मुझ में अपने बापू को भी ढूंढ लेना मेरी जान”……..
तो बस उसस्के बाद सर्वानंद ने रमेश और पद्मिनी की मांगनी करवाई, फिर रमेश 4 महीनों तक पद्मिनी से मिलने को आया हफ्ते में एक बार. हर बार सर्वानंद साथ अत अपने ज़मीन के मुआएना करने के बहाने, और कभी कभी जिस दिन रमेश इधर उधर जाता सर्वनाड़ पद्मिनी को छोड़ता अपने बग़ीचे में, और उस्सने पद्मिनी को कहा के रमेश से शादी से पहले hi छुड़वा ले….. इस लिए के उस्सकी सील पहले से टूटी हुवी थी तो कहीं कोई बखेड़ा न होजाये सुहाग रात के रात…… तो दोनों ने प्लान किया, जिस दिन रमेश पद्मिनी को छोड़ने को था बग़ीचे में hi, सर्वनाड़ ने एक इंजेक्शन से अपना खून थोड़ा सा निकाल कर एक छोटा सा शीशी में पद्मिनी को दिया और सब नाटक करने को कहा जैसे उस्सको दर्द हो रहा है, जाँघों को कसके एक दूसरे जांघ को जोड़ने को कहा और उस शीशी में से खून को छूट पर लगाने को कहा….. पद्मिनी ने वैसा hi किया और रमेश को कुछ भी पता न चला के पद्मिनी वर्जिन थी भी या नहीं क्यों के वह भोला था और पहली बार किसी लड़की को छोड़ रहा था….. बाप ने खुद अपने बेटे को धोका दिया, उल्लू बनाया एक ाव्रत के लिए !!
इस तरह से दोनों की शादी हुवी और पद्मिनी बहु बनकर सर्वानंद के घर में आयी जहाँ पूनम पहले से बहु थी. अब किसी और मौके पर देखेंगे कैसे पद्मिनी और सर्वानंद ने कैसे मौके निकले अपने लिए, फिलहाल वापस चलते हैं अब पायल, कोयल रोशन और दूसरों के बीच. यह था पद्मिनी के बारे में के उस्सकी इस घर से नाता कैसे ज़ुरा था….. तो अगले अपडेट में पायल, कोयल ेट्स के बीच फिर से घुल मिलेंगे……
तो बे कॉन्टिनोएड…………………………..