Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga - Page 10 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga

अपडेट 89

डिनर के बाद जब पायल किचन में बर्तनों को धो रही थी तो ससुर उसस्के पास गया कुछ कहने को जब सरजू टीवी के सामने ेंखें गड़ाए बैठा था बाकी परिवार के साथ. पायल ने देखा के बूढ़ा रसोई के अंदर ारः है, पर वो अपना काम करती रही. साडी के पल्लू को कमर में डाला हुवा था और उस्सकी गोरी कमर ऊपर तक दिख रहे तो थे hi और बूढ़ा पीछे से अपने हाथों को उस्सकी कमर पर फेरते हुवे उस्सको अपने जिस्म से लगते हुवे और अपने मोठे लुंड को उस्सकी गांड पर दबाते हुवे कहा, “क्यों जानम अब तो बीटा भी जवान होगया है घर में और साथ कमरे में सोता है कहीं तेरा आशिक खुद न बन जाये सरजू तेरा!” पायल को हैरानी हुवी के आज ससुर क्यों सरजू के बारे में बात कर रहा था…. वो खुद hi मैं में सोचा था कुछ देर पहले के सरजू के व्योहार के बारे में उस से बात करें मगर अब खुद ससुर उसस्के बारे में बात कर रहे थे तो पायल को कुछ अजीब लगा मगर बात को ताल दिया उस्सने एक मुस्कराहट के साथ और ससुर को अपने लुंड को उस्सकी छात्रों पर रगड़ने दिया यह कहते हुवे, “ज़रा बाहर के तरफ भी ध्यान रखियो कहीं कोई अंदर न टपक परे ससुर जी!”

क्यूंकि पायल वाश बसीं में बर्तनों को साफ़ करने में लगी हुवी थी तो उसस्के हाथ दोनों भीगे हुवे थे और व्यस्त थे तो बूढ़े ने पीछे के तरफ से उसी एक्शन में अपने गर्दन को पायल के पीछे वाले गले के हिस्से पर झुकाते हुवे उसस्के गर्दन को किश करते हुवे अपने दोनों हाथों को पीछे से पायल के चूचियों को दबाते हुवे अपने जीभ को उस्सकी पीछे के गले पर फेरता गया लुंड को चुतरों पर रगड़ते हुवे और धीमी धीमी तृप्ति आवाज़ में. पायल कुछ कसमसाती गयी और एक नज़र बार बार दरवाज़े पर भी करती गयी कुछ अपने जिस्म को ससुर के जिस्म से खुद रगड़ते हुवे और अपने होंठों को डेंटन में दबाते हुवे…… पायल को मन कर रहा था के वहीँ ज़मीन पर लेथ कर बूढ़े से chudwale….bilkool गरम हो गयी थी पर मौका नाज़ुक था, नामुमकिन था उस वक़्त यह सब करना, कोई भी अंदर आसक्त था…..

मगर ससुर का इरादा कुछ और hi था- वो तो गया था सरजू के बारे में बात करने, वो यह जानना चाहता था के, किआ पायल सरजू को छोड़ने देगी… ससुर बातों बातों में पायल की रिएक्शंस और जवाब सुनने के लिए गया था वहां छोड़ने को नहीं….. उस ने कहा, “तेरे सरजू के छोटे छोटे मूछें निकल आयी हैं अब मर्द बन रहा है लौंडा तेरा!” पायल मुस्कुराते हुवे बोली, “किआ? मैं ने कभी ख्याल नहीं किया के उसस्के मूछें उगने लगे हैं…. सच?” तो ससुर अपने लुंड को उसस्के चुतरों के बीच ो बीच ज़ोर से दबाते हुवे बोलै, “अरे हाँ, अब नीचे कितने लम्बे बाल होंगे उसस्के यह तो मुझे नहीं पता तुमको तो होगा नाह?!” यह सुनकर पायल हंसी और अपने ससुर को एक छोटा सा थपड उसस्के हाथ पर मारे हुवे बोली, “धत!! मुझको कैसे पता होगा के निचे उसस्के कितने लम्बे बाल गए हैं किआ बात कर रहे हो आप?!!” तो ससुर ने कहा, “अरे जब वो नाहटा होगा तो किआ कभी भी तुम ने उस्सको नंगा नहीं देखा होगा किआ इस उम्र में?” पायल ने कहा, “नहीं अब इतने उम्र के छोकरे को नंगा क्यों देखूंगी भला?” ससुर जानने के लिए उतावला था किआ पायल ने कभी अपने bête के लुंड को देखा या चुवा है, तो उस्सने बात को बदला और कहा, “अरे जानेमन, किआ वो तेरे बिस्तर पर तेरे साथ नहीं सोता कभी? तो किआ जब वह नींद में होता होगा तो तुम ने कुछ तो देखा होगा hi नाह?!” पायल ससुर के बाँहों से निकलने की कोशिश करते हुवे उस रात को याद किया जब सरजू के लुंड को देख रही थी और कहा, “नहीं, कभी कुछ नहीं देखा, यह किआ बातें लेकर बैठ गए आज आप भी?”

ससुर का दिल यह चाहता था के पायल सरजू के बारे में कुछ ऐसी बातें केहड़े जिस से ससुर को पता चले के दोनों माँ bête में कुछ होता है मगर पायल कुछ नहीं कह रही थी और बूढ़े अपने तने हुवे लुंड को रगड़ता जा रहा था अपने बहु के चुतरों पर और दन्त काट रहा था उस्सकी गर्दन पर पीछे के तरफ, और अचानक पायल की मुंह को अपने तरफ किया और उस्सकी जीभ अपने मुंह में लेकर चुस्सने लगा एक गरम सांस चोर्तेय हुवे…. पायल ने भी कुछ देर के लिए ेंखें मुंध ली और ससुर के जीभ को चूसने लगी अपने जिस्म को उसस्के जिस्म से दबाये अपनी चूचियों को उसस्के छाती से रगड़ते हुवे….. ससुर के दोनों हाथ तब पायल के गांड पर गया और वो वहां मसलने लगा और अब उस्का लुंड पायल के छूट के ठीक ऊपर कपडे समेत रागढ रहे थे और पायल ने अपने दोनों बाज़ुओं को ससुर के काँधे पर किया और किश में डूबती गयी…..

किश के बाद पायल ने एक लम्बी सांस लेते हुवे अचानक कहा, “उस्का वो आप की तरह मोटा और लम्बा है….” ससुर का लुंड एकदम से उठ गया जैसे एक जवान लड़का का लुंड हो यह सुनकर और बहोत दिलचस्पी से पुछा, “अरे वह रे मेरी बहु, बीटा भी छोड़ने लगा तुमको? बहोत मज़ा अत होगा नाह? कब करता है तेरे साथ साला लौंडा?” पायल न में सर हिलाते हुवे कहा, “किसी गंदे बातें करते हो aap…main ने एक रात को देखा था जब वह सो रहा था गहरी नींद mein…woh उस्का खड़ा हुवा था नींद में hi….” ससुर मायूस होकर कहा, “हाय रे और मैं समझा के उस्सने भी शुरू कर दी तेरे साथ, वैसे लगता है के वह बहोत hi चाहता है तुमको, किआ कोई ऐसा इशारा नहीं किया कभी के वह bhi…..”To पायल सोचने लगी किआ अपने ससुर से वो बातें करें जो उसस्के मैं को सत्ता रहे हैं या नहीं….. फिर कहा, “प्यार तो मैं भी बहोत करती हूँ अपने bête को, क्यों न करूँ एक hi बीटा है मेरा, मेरा लाडला है वो….” मगर ससुर ने पुछा, “और वो किआ सिर्फ वैसा hi प्यार करता है तुझसे या कुछ और भी करना चाहता है? यह बटवो किआ उस्सने कभी तेरे जिस्म को ऐसे चुवा है? अपने हाथों को तेरे ऊपर ऐसे फेरा है कभी?” यह सब ससुर ने अपने हाथों को पायल के कमर और चूचियों पर फेरते हुवे पुछा. और पायल ने झट से उसस्के हाथों को हटते हुवे कहा, “नहीं कभी नहीं!” ससुर पायल की ेंखों में पहरने की कोशिश कर रहा था और उस्सको लग रहा था के पायल कुछ छुपा रही है, उस्सको यह लग रहा था के वो अपने bête से अपने जिस्म को खूब मसलवटी है मगर इकरार नहीं करना चाहती है ससुर से….

ससुर ने पुछा, “ाचा यह बता के क्यों तुम ने अचानक यह कहा के सरजू का वो लम्बा और मोटा है मेरे जैसा?” पायल बोली, “यह मैं ने इस लिए कहा के इतनी सी उम्र में किआ आप जैसा मोटा और लम्बा हो सकता है किआ छोटा सा तो है वो abhi…usske बाप का भी नहीं था वैसा! बस इसी लिए कहा आप से….” ससुर ने मैं hi मैं कहा, “बहु तू अपने hi bête के लुंड को चाहने लगी है, तेरे मैं में तो लाडू फहुत रहे होंगे के कब उस लुंड को चुसो और अपने अंदर घुसाओ मगर मुझसे नहीं कहना chahti…magar मुझको तो सब पता चल hi जाएगा , मैं ने तो सरजू को तैयार कर दिया है के जब वो तुझको छोड़ेगा वह मुझको वह दृष्ट देखने देगा….. हाय रे हाय कब वह दिन ayega….main इंतज़ार मैं हूँ ऋ बहु अपने bête से जल्दी से छुड़वा तू!!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………….
 
अपडेट 90

रात को कमरे में सरजू होमवर्क्स कर रहा था डिनर के कुछ देर बाद और पायल टीवी सेट के सामने बैठी एक सीरियल देख रही थी और ससुर उस्सको घर रहे थे हर वक़्त. पायल की दिमाग़ में कई तरह की खयालात आरहे थे ससुर के साथ उस बात चीत के बाद. वह अपने सरजू को hi सोच रही थी और सिर्फ सेक्स के बारे में उसस्के ख़याल जा रहे the…Sarjoo के जिस्म को सोच रही थी, कैसे उसस्के प्राइवेट पार्ट्स को देखा था, कैसे सरजू को मुठ मारते हुवे देखा था, कैसे सरजू उस के साथ चिपकता रहता है प्यार करते वक़्त, कैसे रातों को नींद में सरजू का तना हुवा लुंड उसस्के जिस्म से टकराता है, सिर्फ ऐसे hi बातें सोच रही थी पायल जब से ससुर ने उस बारे में बात की उस के साथ.

पायल सरजू को सच में दिल से बेहद प्यार करती थी क्यों के एक सरजू hi था उस्का अपना जीवन में. पति का एक hi निशानी था, और सरजू को बहोत दुलार करती थी बचपन से hi. अब उस दुलार के कारण सरजू अपनी माँ के बहोत hi करीब था इतना करीब के अपनी माँ को कभी भी बाँहों में ले लेता था कभी भी किश करता था औरउससका जिस्म का कोई भी हिस्सा पायल के किसी भी जिस्म के हिस्से से लगता रहता था अक्सर. मगर कभी भी ऐसी स्तिथि नहीं आयी थी जो अब हो रहा है…. इस लिए पायल थोड़ा बहोत परेशान भी थी के किआ किया जाये, कैसे इस स्तिथि से बाहर निकला जाये… कैसे वह सरजू को अपने आप से दूर करें, यह सब बातें पायल को परेशान कर रही थी. पायल नहीं चाहती थी के किसी भी वजह से उसका लाडला उस से नाराज़ होजाये, या रूत जाये, या बात करना बांध करदें या फिर ऐसी कोई बात हो जिस से सरजू और उसस्के बीच दूरी पैदा हो. एक लम्बी सांस लेकर पायल ने एक नज़र ससुर के तरफ किया तो उस्सने चुपके से एक ेंख मरी पायल को. पायल ने अपने होंठों को ट्विस्ट कर के उस्सको चरते हुवे मोती मोती ेंखों से उस्सको देखा. ससुर ने फिर एक मौका पाकर पायल को इशारा किया कॉरिडोर में आने के लिए जब सब लोगों के ेंख टीवी पर गड़े हुवे थे, मगर पायल ने इशारे से मन किया उस्सको, और इशारे से hi कुछ रूठने की अंदाज़ में उस्सको कोयल के पास जाने को कहा क्यूंकि ज़्यादा वक़्त तो वह अब उसी को छोड़ता है…..

मगर ससुर गया तो सरजू के कमरे में, याने पायल के hi कमरे में, फिर से कुछ सवाल करने सरजू से. बूढ़े को खलबली हो रही थी सोच सोच कर के कितना मज़ा अत होगा सरजू को अपने माँ के साथ सोने में और वह जानना चाहता था के सरजू ने किआ किआ किया है अब तक, कहाँ तक पोंछा है वह ये सब पूछना चाहता था लौंडे से तो गया उसस्के पास टेबल पर जहाँ सरजू होमवर्क्स कर रहा था.

«बीटा बड़ा किस्मत वाला है तू !» बूढ़े ने कहा सरजू को उस के पास वाली कुर्सी पर बैठकर.

«क्यों दादू ? » सरजू ने पुछा.

«अरे बीटा इस लिए के पायल जैसी मम्मी है तेरी और क्यों?» दादा ने रिप्लाई किया.

सरजू मुस्कुराते हुवे कहता है, “दादू वैसे तो आप भी बड़े किस्मत वाले हो क्यों के आप को मम्मी जैसी बहु मिली है!”

दादू ने कहा, “तेरा रिश्ता उस के साथ बहोत ज़्यादा गरम वाला है पुत्र. माँ और bête के बीच ऐसे रिश्ते से किसी को भी गर्मी च जाये और कोई भी दीवाना होजाये उस के बाद….”

सरजू बोलै, “दादू मगर मुझको तो ससुर और एक जवान बहु का ऐसा रिश्ता बहोत ज़्यादा गरम लगता है, और मुझको यह दुन्या की सब से हॉट और सेक्सी रिलेशनशिप लगता hai….jab मैं आप की उम्र को और मम्मी की उम्र को सोचता हूँ और आप दोनों के रिलेशनशिप को सोचता हूँ तो ेकडून एक्साइट हो जाता हूँ और आप को मम्मी के साथ सेक्स करते हुवे देखने को मैं करता hai….aap को बहोत मज़ा आया होगा न इतनी जवान बहु को अपने बीएड पर लेने को? कैसे शुरू किया था आप ने मुझको बटवोगे दादू आईटी इंटरेस्ट में ा लोट तो क्नोव!”

दादू ने कहा, “हाँ ज़रूर बताउंगा मगर शर्त यह है के पहले तू मुझको बता के तुम ने किआ किआ किया है अब तक अपने जवान मम्मी के साथ, कुछ डिटेल में बता फिर मैं तुमको अपने बारे में बोलूंगा.”

सरजू ने कहा, “दादू किआ बतावूं अभी तो कुछ भी नहीं किया, शुरुवात है, करने की कोशिश में लगा हुवा हूँ अभी……..”

बूढ़ा उतावले होकर पुछा, “ाचा, यह बता किश किश छुपे हुवे हिस्से को देख पाया है या छह पाया है उस्सकी? और एक बात बता डिटेल में मुझको तो मैं तुमको बता सकूंगा के वह किआ चाहती है, मुझको यह बता के किसी किसी ड्रेस पहनती है जब तेरे साथ अकेली होती है कमरे में? कुछ ऐसी ड्रेसस पहनती है जिस में उस्सकी सेक्सुअल पार्ट्स तुझको दिखे? या छुपाती है? तुमको किआ किआ पार्ट्स दिखे हैं? तुम ने किआ किआ देखा जैसे उस्सकी चूचियां, जांघें, पथ, पीठ…. और उस्सकी किसी व्योहार रहा जब उस्सने देखा के तुम उस्सकी उन् हिस्सों को देख रहे हो… ऐसे बातों को मुझको बताओ तब मैं तुमको बता सकूंगा के वह भी तुझसे वही चाहती है या नहीं….. बता बीटा डिटेल्स में बता मुझको……”

सरजू अपने दादा से छोटा से hi इतना दुलारा था के कुछ भी बकने में उस्सको कोई संकोच नहीं होता था, कुछ भी बक देता था दादा के साथ तो यह सब बातें करना उसस्के लिए एक मामूली सी बात थी क्यों के दोनों में बहोत अछि दोस्ती थी. दोनों एक दूसरे के कम्प्लीके थे! बिना झिझक, बिना शर्माए सरजू ने कहा,

“हम्म बहोत बार ऐसा हुवा है दादू के मेरा चीज़ उस्सकी जांघ पर ज़ोर से दबा है, वह जानती है मगर अनजान बनती है….. उस्सकी निघ्त्य कई बार बिल्कुल ऊपर उठ जाती है सोते वक़्त और मैं उस्सको निचे करके ढंकता हूँ, मगर पहले खूब निहारता हूँ, चुहता भी हूँ थोड़ा करेसस्स भी करलेता हूँ मगर जब वह नींद में रहती हो तब….. ड्रेस तो वह कोई भी पेहेन लेती है जब कमरे में होती है तो…. बहोत बार उस्सकी चूचियों पर मेरे नज़र गड़े रहते है और वह अछि तरह से जानती है के मैं किआ देखता हूँ मगर कुछ नहीं कहती, बस कभी कभी मुझको ‘बदमाश’ कहती है हँसते हुवे….. एक बार तो दादू, मम्मी ने एक छोटी से स्कर्ट पहनी हुवी थी नहाने के बाद, और एक टाइट ब्लाउज. वह मेरे पास यहीं आयी थी दूत देने को और जब वह झुक कर दूध का गिलास रख रही थी तो ब्लाउज के दोनों बटन्स लूसे होगये तो उस्सकी दोनों चूचियां बिल्कुल लटक गए मेरे ेंखों के सामने और मेरी नज़र उसी पर जमे रहे, मैं ने सोचा के वह जल्दी से शर्माकर अपनी ब्लाउज के बटन्स लगाएगी मगर वह वैसे hi झुके रहे मेरे कॉपी बुक्स के पेजेज को चेक करने लगी और मैं उस्सकी दोनों बूब्स को दिल भर के देखता raha…mann कर रहा था के अब उन् को चुम लून और चूस loon…haye दादू किआ बूब्स है मम्मी की आप ने तो खूब मज़े लूटे होंगे नाह?”

दादू बहोत दिलचस्पी के साथ सुन रहा था अपने लुंड को अपने पंत में सीधा करते हुवे और कहा, “हाय रे सरजू तुझको दूध देने आयी थी और नेचुरल दूध तेरे ेंखों के सामने लटक रहा था और तू ने नहीं पिया किआ रे सरजू ऐसे मौके को हाथ से क्यों जाने दिया बे!! हु एहि तो चाहती थी के तू उस दूध को पिए मगर तू ने नहीं ली!!” सरजू ने तब पुछा, “किआ आप के ख़याल से वह चाहती थी के मैं उस्सकी चूचियों को छुवन?” दादा ने जवाब दिया, “बिल्कुल हाँ! क्यों वह अपने जवान बेटे के सामने ब्लाउज की बटन्स को वैसे HI छोड़ देगी, ज़रूर उस्सको तुरंत लगाती, उस्सने इस लिए नहीं लगाया क्यों के वह देखना चाहती थी के तू उस्सको चुवेगा या नहीं बुरबक कहीं का!” सरजू ने जवाब दिया, “आप ठीक केगते हो दादू, मैं hi नादान हूँ, उस रात को सोचता हूँ तो अपने आप पर ग़ुस्सा अत है

मुझको, मुझे चुहना चाहिए था कम से कम उसस्के इरादों का तो पता चल जाता नाह!”

फिर दादू ने कहा, “और दूसरे वाक़ेया सुना मुझको ज़रा!” तो सरजू ने कहा, «एक रोज़ वह शावर ले रही थी. टॉवल भूल गयी थी, रात के 10 बज चुके थे और मैं उस रात को अपने बीएड पर था तो उस्सने फुकरा मुझको के टॉवल लावून उसस्के लिए…. तो मैं अलमारी से टॉवल लेकर गया उस्सको देने बाथरूम तक, मैं एक तरफ देखते हुवे उस्सको अपने हाथ से टॉवल देने लगा तो उस्सने मेरे हाथ को hi पाकर कर अपने पास खिंचा, वह नंगी नहीं थी मगर भीगे हुवे एक छोटी सी सफ़ेद ड्रेस में थी जो उस्सकी जिस्म पर पानी से चिपकी हुवी थी और उस्सने मुझको गले लगाकर कहा, “ आज तुझ पर बहोत प्यार ारः है रे सरजू मेरे….” तब मैं ज़्यादा छोटा था दादू!!”

यह सब सुनकर बूढ़ा बेहाल हो रहा था और अपने लुंड को संभाले जारहा था हाथों से पंत के अंदर सीधा करते हुवे. और उस ने सरजू से पुछा, “चाह बीटा यह बता किआ इन् दिनों तुम ने अपने जिस्म को, या अपने लुल्ली को उसस्के साथ कभी चिपकाया या रगड़ने की कोशिश की? अगर की तो उस्सने कैसे रियेक्ट किया उस वक़्त यह बता मुझको!” दादू बहोत hi एक्साइट हो रहा था, बेकाबू हो रहा था और चाहता था के सरजू उस्सको कुछ चाह सुनाये जिस से उस्का लुंड और भी ऊंचा उठ जाये सुनकर…… उस्सको पायल जैसी जवान माँ और सरजू के बीच सिर्फ सेक्स दिख रहा था और वह चाहता था के किसी भी कीमत पर सरजू पायल को चोदे… और उस्का मैं उतावला हो रहा था देखने को के पायल कैसे रियेक्ट करती है अपने जवान बचे के लुंड को अपने छूट के अंदर लेने पर….. बूढ़ा देखना चाहता था के किआ पायल की छूट गीली होती है सरजू के टच से, किआ वह वैसे hi सेक्स के लिए तृप्ति है सरजू के साथ जैसे उस के साथ छह से तृप्ति है या नहीं…..

तो सरजू ने अपने मैं में उस रात को सोचा जिस रत को उस्सने अपनी माँ पर अपना पानी छोड़ा tha…magar दादा को वह नहीं बताया…. उस्सने कहा कैसे कभी कभार उसस्के लुंड उस्सकी माँ के जाँघों पर चुहता है और पायल अपने पेयर हटा लेती है…… सरजू ने दादा से पुछा, “दादू मम्मी इतनी यंग कैसे हैं? सब लोग उस्सको मेरी सिस्टर समझते है, किआ मैं उस्का बीटा हूँ सच में या कोई और मेरी मम्मी है? कभी कभी मुझको डाउट होता है के मैं किसी और माँ का बीटा hoon….itni यंग मम्मी कैसे है मेरी?” दादू उस्सको समझाता है के 14 साल की उम्र में हु प्रेग्नेंट हो गयी थी शादी से पहले hi तो 15 होने से पहले hi उस्सको जनम दे दिया था तो यंग तो होगी hi!! ऊपर से वह ज़्यादा hi खूब सूरत है और अपना फिगर को मेन्टेन करती है, फिर सेक्सी भी है और उस्सकी जिस्म एकदम से हॉट और सेक्सी तो है hi तो यंग नहीं लगेगी तो और किआ ! ुसस्पर सरजू बोलै, “तब तो मैं बहोत hi किस्मत वाला हूँ सच्ची में दादू!!.... मुझको मम्मी एक सेक्सी गर्लफ्रेंड की तरह दिखती hai…lagta है के एक गर्लफ्रेंड के साथ वक़्त गुज़र रहा हूँ जब वह मुझसे मीठी मीठी बातें करती है रातों को अकेले mein…bahot मज़ा अत hai…ek बार मैं उस्सकी छाती पर सर रख के सोगया था जब वह बातें कर रही थी मुझसे, उस रात को बहोत मज़ा आया था क्यों के जिस निघ्त्य में वह थी उसस्के अंदर उस्सने ब्रा नहीं पहनी थी और मैं उसस्के बूब्स को बिल्कुल फील कर रहा था और वह बहोत नरम थे और मज़ा ारः था दादू”….. यह कहकर सरजू ने भी अपने लुंड को पंत में सीधा किया और बूढ़ा बहोत खुश हुवा यह सुनकर और पुछा, “तो उस वक़्त तू खड़ा नहीं हुवा था? तेरी मम्मी को पता नहीं चला?” तो सरजू ने कहा, “कैसे खड़ा नहीं होगा दादू ज़बरदस्त खड़ा हुवा था और मैं बार बार सीधा कर रहा था, और मम्मी को ज़रूर पता चला होगा…..” तब दादू ने सरजू से कहा, “देखा एहि तो कह रहा हूँ तुझको के वह तेरे लिए तैयार है और इंतज़ार में है के कब तू उस के साथ काम तमाम करे, तू hi देर लगा रहा है…..”

बस इतने में पायल अंदर आती है टीवी देख कर और बूढ़ा कमरे से निकल जाता है सरजू को धीरे से यह कहकर, “बिल्कुल नहीं बताना के हम किआ बातें कर रहे थे, सिर्फ कहना के तुमको होमवर्क्स बता रहा था.” सरजू ने भी धीरे से जवाब दिया, “हाँ दादू एहि कहूंगा आप जाओ.”

जब दादा निकल गया तो पायल मुस्कुराते हुवे सरजू के पास गयी और उसस्के बालों में उँगलियाँ फेरते हुवे पुछा, “क्यों रे किआ बातें कर रहा था अपने दादू के साथ?” सरजू के जिस्म में जैसे एक आग दौड़ गया और उस्सने रिप्लाई किया, “कुछ नहीं मम्मी बस स्कूल के वर्क्स बता रहा था दादू…..” पायल ने उसस्के ेंखों में देखते हुवे कहा, “चल झूठा, मुझसे छुपता है, मुझे पता है तेरे दादू और तू मेरे बारे में बातें करते हो है नाह?” सरजू कुछ चॉहोंकते हुवे पूछता है, “क्यों मम्मी हम तेरे बारे में क्यों बातें करने लगे?!” पायल तिरछी नज़र से उस्सको देखते हुवे जाने लगती है यह कहकर, “चाह मैं एक शावर लेकर आती हूँ, तू भी अब बस कर होमवर्क्स सुबह जल्दी उठकर कम्पलीट करलेना अब सोने का वक़्त होगया है चल जा बीएड पर मैं अति हूँ थोड़ी देर में.”

यह सुनकर सरजू उत्तेजित हुवा और कहा, “मम्मी थेरो नाह…..” पायल रुक गयी तो सरजू उसस्के पास जाकर उस्सको अपने बाँहों में जाकर कर दुलार से कहता है, “मम्मी आज वह वाला निघ्त्य पहनों नाह मेरी खातिर प्लीज…” दोनों खड़े थे उस वक़्त, और पायल भी प्यार से अपने सरजू को अपनी बाँहों में लिया हुवा था मगर उस ने कुछ नखरें जैसी अंदाज़ में कहा, “हम्म नहीं वह वाला नहीं क्यों चाहते हो के उस निघ्त्य को पहनूं?” उस वक़्त सरजू के दोनों बाहें पायल के कमर को दोनों तरफ से जकरा हुवा था और सरजू का सर माँ की कांधों पर थे और पायल उस के सर को सेहला रही थी और एक हाथ से उस के पीठ को थपथपा रही थी……. सरजू ने ज़िद की के वह वही वाला निघ्त्य पहनें जो ससुर ने पायल को दिया था जो बहोत छोटी थी जाँघों के ऊपर और जिस्सकी एक डीप व् कट थी छाती पर और पूरा चूचियों का नज़ारा सामने होता था जब उस्सको पहनती थी वह….

पायल ने थोड़ा शरमाते हुवे कहा, “बीटा मुझको उस निघ्त्य में तेरे सामने शर्म आएगी…. गन्दी है वह वाला निघ्त्य.” सरजू ने थोड़ा झूठ मूठ के घुसा दिखते हुवे कहा, “क्यों जब दादा के सामने पहनती हो तो उस से शर्म नहीं अति और मुझसे शर्म आएगी? चलो वही पेहेनना नहीं तो मैं तुमसे बात नहीं करूँगा!” पायल हँसते हुवे उस्सको ज़ोर से अपने सीने से लगते हुवे कहती है, “अले मेला लजा बीटा मम्मी से बात नहीं कलेजा, हम्म क्यों नालाज होता है मेला बीटा!!” और सरजू जल्दी से अलमारी में से उस निघ्त्य को निकाल कर अपनी माँ को देती है यह कहते, “लो नाहा कर निकलो तो इस को पेहेन कर निकलना और सीधे बीएड पर आना मैं वेट करूँगा तुम्हारा…..” पायल हँसते हुवे सरजू को दांग होकर देख रही थी उसस्के चेहरे मैं और कहा, “वह बीटा जैसे के मेरा हस्बैंड मुझको आर्डर दे रहा हो!! किआ बात है हम्म?” फिर सरजू पिघल गया और बच्चों की तरह कहा, “मम्मी जाओ नाह प्लीज क्यों सत्ता रही हो…. जाओ और जल्दी से आना नहीं तो मुझको नींद आजायेगी…….”

तो बे कॉन्टिनोएड…………………………..
 
अपडेट 91

पायल उस निघ्त्य को लेकर नहाने तो चली जाती है मगर नहाते वक़्त सरजू के बर्ताव के बारे में सोचती रहती है और अपने आप मुस्कुराती है. सोचने लगी के सरजू आखिर चाहता कई है? ऐसी छूती सी निघ्त्य में उसस्के साथ एक hi बीएड पर सोना पायल को बिल्कुल ठीक नहीं लग रहा था. पायल ने उस दृष्ट को याद किया जहाँ सरजू उस्सकी पंतय को अपने लुंड पर रगड़ते हुवे मुठ मार रहा था…. पायल को पता था के वह जवान और बेहद खूबसूरत है.. उस्सको यह भी पता था के सरजू का खड़ा होता है क्यों के बहोत बार उस्सने सरजू को अपने लुंड पंत में सीधा करते हुवे देखा है… पायल की यह भी अछि तरह से मालूम था के उस्का बीटा सरजू उसस्पी मरता है… मगर पायल नहीं चाहती के अपने bête के साथ शारीरिक सम्बन्ध रखे, वह अपने तरफ से पूरी कोशिश करती रहती के सरजू को वैसे खलायात और बर्ताव से रोकें… मगर सरजू बहोत आगे बाहर चुक्का था और जैसे के बॉर्डर लाइन पर था अपने माँ को छोड़ने में….

पायल कभी कभी ख्यालों में खुद वैसे दृष्ट को देख लेती थी जहाँ सरजू उस्सको छोड़ रहा है…. उस्सकी छूट उस वक़्त पानी पानी हो जाता था और मन hi मैं हु खुद सरजू को मिस करने लगती थी, फिर भी वह नहीं चाहती थी के हकीकत में वैसा हो. ख्यालों में अपने bête से छुड़वाना और मज़े लेना उसस्के लिए ठीक था मगर हकीकत में वैसा करना पायल को बहोत घिनौनी लगती थी और नहाते वक़्त वह एहि सब बातों को सोच रही थी…..

उधर सरजू बिस्तर पर अपने माँ को सोच सोच कर एक्साइट हो रहा था, अपने लुंड को हाथ में लिए सहलाये जा रहा था पायल को उस निघ्त्य में सोचते. मैं hi मैं सोच रहा था के कैसे शुरू करेगा, पहले अपनी माँ की जाँघों को चुवेगा, या उस्सकी कांधों पर से उस निघ्त्य की स्ट्रैप्स को अपने ऊँगली से निकलेगा, और अपने सर को माँ की छाती पर लगाए उस्सकी चूचियों की ऊपरी हिस्से को चूमेगा….. यह सब सोचते सोचते और हाथ में लुंड को सहलाते हुवे सरजू के लुंड से प्रेकम निकल आयी…. अपने अंगूठे से उस्सने प्रेकम को रगड़ा और खुद की प्रेकम को जीब से लगाकर छाता और सोचा के अपनी माँ को भी चखना है वह नमकीन लाज़त……

बैठे बैठे सरजू ने अपने दोस्तों के बातों को भी याद किया, वह सब उस्सकी माँ को पसंद करते हैं और सबको उस्सकी माँ जवान और हॉट दिखती है… और सरजू ने सोचा के अगर दीपक को हल्का सा अंदाज़ा भी हुवा के सरजू अपने माँ के साथ वैसी निघ्त्य m,ein सोता सोता है तो दीपक उस्सकी माँ को छोड़ने को ज़रूर कोशिश करेगा…. सरजू ने उन् दिनों को भी याद किया जब जब हु अपने माँ के साथ माल्स जाते या कहीं भी साथ घूमने को जाता तो उस्सकी जोड़ी अपने माँ के साथ एक बॉयफ्रेंड/ गर्लफ्रेंड की जोड़ी दिखाई देती थी. सब लोग एहि समझते के पायल सरजू की गर्लफ्रेंड है…. पायल थी hi ितंबी यंग और खूबसूरत ऊपर से बहोत हॉट!! सरजू को बेहद पसंद अत था अपनी के साथ घूमना फिरना… हु ज़्यादा तर अपनी माँ से चिपक कर रहता था कहीं भी जाते थे दोनों, चलते वक़्त हाथों में हाथ लेता था या अपनी माँ क9 कांधों पर अपने बाज़ुओं को रख कर चलता…..

कैसे भी करके हमेशा पायल से चिपकता रहता था और दूसरे मर्दों की नज़रों को देखता रहता के कौन कौन उस्सकी मम्मी को और उस्सको देख रहे हैं…. अपने आप पर ख़ुशी से गर्व करता था के उसस्के पास इतनी हॉट और खूबसूरत जवान माँ है जिससे हर कोई उस्सकी गर्लफ्रेंड समझते थे….. बहोत फक्र था सरजू को अपने आप पर और अपनी जवान माँ पर…..

पायल नहाते वक़्त अपने जिस्म पर शैम्पू मलते दौरान यह फील किया के सरजू के हाथ उसस्के मुलायम जिस्म की हर अंग पर फेर रहा है और सिसकियों के सात उस्सने बाथ लिया और छूट नल की और खुद की पानी भीग चुकी…… मगर नहाने के बाद जब पायल ने उस छोटी सी महीन सा निघ्त्य को पहना तो आईने में देखा के उस्सकी पूरी चूचियां, निप्पल्स सब बराबर दिख रहे हैं जैसे के कुछ भी नहीं पहना हो, और निचे उस्सकी सफ़ेद पंतय साफ़ दिख रही थी… पायल शर्म से लाल होगयी और सोचा के अपने सरजू के पास वह वैसे नहीं जा सकती…… पायल बाथरूम से बाहर निकली लाल चेहरा लिए टॉवल में लिपटी अपने बिस्तर के तरफ कदम बढ़ाते जहाँ सरजू गहरी सेंसें लेते हुवे अपनी माँ को घूर रहा था….. सरजू की ेंखें पहले माँ की टांगों पर पारी, फिर धीरे धीरे ऊपर के तरफ उठता गया, माँ की आधा जांघ दिख रहे थे, फिर टॉवल नज़र aayi…to सरजू ने सोचा के वह निघ्त्य कहाँ है? टॉवल के निचे या माँ ने निघ्त्य पहनी hi नहीं और टॉवल में बिल्कुल नंगी है….. सरजू का लुंड ज़बरदस्त खड़ा होगया अपनी माँ की जिस्म को ख्यालों में लेट hi….. वो गोरी बदन, कोमल, मुलायम त्वचा… हाय रे हाय सरजू दीवाना होता जा रहा tha…kia उस्का सपना आज रात को पूरा होगा भी या नहीं……

पायल धीरे से बीएड तक पोह्ची और सरजू पर एक नज़र फेर कर अपनी परफ्यूम की शीशी लेकर नाक से लगाकर खुशभू को सुंघा… तब तक सरजू धीरे से बिस्तर से उतर कर पायल की तरफ बाहरणे लगा, जहाँ पायल आईने में खुद को देख कर बालों को सवार रही थी….. पायल ने आईने में सरजू को देख लिया के वह धीरे धीरे उसस्के तरफ ारः है और इस से पहले के वह उस तक पोहोचता पायल झट से वहां से हट गयी और सरजू खड़े देखता रह गया….. पायल ज़ोर से हंसी यह देख कर के सरजू कैसे डिसअप्पोइंट हो गया…… सरजू अपनी माँ को हँसते देख कर कहा, “चाह मम्मी यह बात है, छुपा छुपी खेल रही हो मेरे साथ अभी देखता हूँ….” यह कहकर दौड़ते हुवे वह अपनी माँ के तरफ jhapta…aur पायल भी दौड़ते हुवे बीएड के चरों तरफ दौड़ने लगी… दोनों कमरे में दो छोटे बच्चों की तरह दौड़ कूद रहे थे… सरजू पूरा कोशिश कर रहा था अपनी माँ को पकड़ने के लिए और पायल खुद को बचने की कोशिश किये जा रही थी…. एक हाथ से पायल ने टॉवल को थमा हुवा था अपने छाती पर और भाग रही थी सरजू के आगे आगे…..

उधर दादा जी उतावला हो रहा था जान्ने को के किआ सरजू काम तमाम कर पायेगा या नहीं? वह सोच रहा tha,“Kia कर रहा होगा वह इस वक़्त? किआ उस्सने अपनी माँ को छोड़ा या नहीं….. कैसे देखूं? कम से कम सुन तो सकता हूँ… चलो कमरे के दरवाज़े पर कान लगा कर सनटैन हूँ….”

काफी दौड़ भाग के बाद पायल थक गयी और बिस्तर पर बैठ गयी हम्प्टी हुवे… और सरजू अपने पुरे जिस्म के साथ अपने माँ पर झपटा और पायल बिस्तर पर लेथ गयी सरजू की जिस्म के वज़न से….. दोनों बहोत ज़ोर से हम्प रहे थे और सरजू का जिस्म माँ की जिस्म पर चिपका हुवा था, और दोनों हँसते हुवे एक दूसरे के ेंखों में देखते जा रहे थे…….

जब दादा ने कमरे के दरवाज़े पर कान लगाया तो ज़ोर से हांपने की आवाज़ सुना तो सोचा के चुदाई हो गयी……. और कहा, “लो !! bête ने आखिर माँ को छोड़ hi दिया! वह रे पायल, पति से छोड़ने के बाद ससुर से छुड़वाई, फिर सभी पति के भाइयों से छुड़वाई और अब लो बेटे से भी छुडवाली वह वह किआ बात है ऋ पायल !! अब तुझको छोड़ने को और भी मज़ा आएगा…. »

तो बे कॉन्टिनोएड……………….
 
अपडेट 92

सरजू पूरी तरह से अपनी माँ के जिस्म पर लेता हुवा था ज़ोरों से हम्प रहा था हँसते हुवे और पायल भी हंसती जा रही थी एक दूसरे के पीछे भागने के बाद. पायल की टॉवल छाती पर से खुल गयी थी और उस्सने अपने हाथों को छाती पर टॉवल को दबाया हुवा था, और उसस्के हांपने की वजा से उस्सकी छाती निचे ऊपर उठ बैठ रहे थे और सरजू की नज़रें उन् पर hi जमे हुवे थे….. वैसे तो दोनों हंस रहे थे मगर फिर भी पायल को पता था के सरजू के दिमाग़ में किआ चल रहा है उस वक़्त. वह पूरी कोशिश कर रही थी के सरजू को आगे बाहरणे से रोके मगर अब और किआ कर सकती थी….. सरजू का जिस्म माँ पर दबा हुवा था और उस ने अपने कमर को हलके से दबाया अपनी माँ के ऊपर, उस वक़्त उसस्का लुंड माँ की जाँघों पर पारा हुवा था तो पायल ने जैसे hi उस्सकी मोठे चीज़ को फील किया तो एक तरफ किस्सक गयी और सरजू बिस्तर पर पर गया अकेले और पायल जल्दी से उठकर फिर आईने के पास चली गयी…..

सरजू अब भी हम्प्टी जा रहा था मगर उस्सकी ेंखें अपनी माँ पर लगी हुवी थी…. बिस्तर पर बैठे अपनी माँ को निहार रहा था, पायल अपने बालों को सवारने में लग गयी फिर से. सरजू आहिस्ते आहिस्ते उसस्के पास गया और पीछे से पायल को अपने बाँहों में जकरा और पायल की कांधों को चुम्मन लगा. पायल आईने में सरजू की एक्सप्रेशंस को देख रही थी और खुद अपने जिस्म में एक लेहेर फील किया जिस वक़्त सरजू के होंठ उस्सकी कांधों की मुलायम स्किन को चुवा…. सरजू के दोनों हाथ उस वक़्त पायल के पथ पर से फेरते हुवे ऊपर तक पोंहचा और जैसे hi दोनों हाथ पायल की छाती तक पोंहचा पायल ने जल्दी से अपने bête के दोनों हाटों को अपनी हाटों में जाकर लिया उस्सको रोकते हुवे…. और सरजू की जिस्म उस वक़्त पूरी तरह से उस्सकी माँ के जिस्म के पीछे तरफ दबा हुवा था और सरजू का लुंड एकदम मस्त तन्ना हुवा था जो ठीक पायल के चुतरों पर मसल रहा था….. पायल ने अच्छी तरह से फील किया के उसस्के bête का मोटा चीज़ उसस्के गांड पर मॉल रहा है और उस्सने अपने जिस्म की पोजीशन को चेंज करने की कोशिश तो की मगर सरजू का जाकर्र मज़बूत था तो वह कामयाब नहीं हुवी…..

सरजू अपने आप को संभाल नहीं प् रहा था और कांधों को चूमकर उसस्के होंठ अपनी माँ की पीछे वाले गले के हिस्से पर ponhcha…jiss वक़्त पायल ने सरजू के होंठों को अपने बालों के नीचे पीछे गले पर महसूस किया तो थरथरा गयी और एक ‘ईश’ निकली उसस्के होंठों से और धीरे से कहा, “सरजू चोरो मुझे, प्लीज ऐसा मत करो, यह ठीक नहीं है बीटा…..” मगर सरजू कहाँ सुनने वाला था उस वक़्त वह अपने कमर को हिलता जा रहा था अपनी माँ की चुतरों पर अपने तन्ने हुवे लुंड को रगड़ते और उस्सकी काँधे और गले को चूमते…. फिर सरजू का हाथ उस टॉवल के उस हिस्से पर गया जहाँ उस्सने ज़ोर से खींचने की कोशिश की, मगर पायल ने अपने दोनों हाथों से उससे दबाया हुवा था तो सरजू ने बड़े दुलार से अपनी माँ से कहा, “मम्मी अब तो इस टॉवल को निकालो नाह प्लीज” पायल मुस्कुराते हुवे बोली, “मगर तू क्यों मुझको इस निघ्त्य में देखना चाहता है? मुझे तुम्हारे सामने इससमे आने को बहोत शर्म लग रही है सरजू…..” और ठीक उसी वक़्त सरजू ने ज़ोर लगाया और टॉवल पायल की जिस्म से ज़मीन पर गिर पारी और जल्दी से पायल झुकी टॉवल को उठाने के लिए उस वक़्त तो वह रे वह किआ नज़ारा था… सरजू उस पोज़ में था जब पायल झुकी तो बिल्कुल जैसे वह खड़ा होकर अपनी माँ को पीछे से ले रहा है क्यों के वह तो पीछे से उस्सको जकरा हुवा था और वह झुकी तो उस्सकी गांड तो बिल्कुल सरजू के लुंड से दबा हुवा था और सरजू के दोनों हाथ उस वटक उसस्के माँ के कमर पर पोहोंच गए उसस्के झुकने से….. अब सरजू मोठे मोठे ेंखों से अपनी माँ की पंतय देख रहा था उस छोटी सी निघ्त्य में, और पायल की पीठ तो आधी नंगी थी hi, निघ्त्य की पतली पतली स्ट्रैप्स ने निघ्त्य को कांधों पर सम्भला हुवा था और सरजू ने जल्दी से सर को आगे झुका कर अपनी माँ की चूचियों को देखने की कोशिश की जिस वक़्त हु झुकी थी टॉवल को उठाने के लिए और वह देख कर तो सरजू का लुंड बेकाबू हो गया और ज़्यादा ज़ोर से उस्सने रगड़ा अपनी माँ की चुतरों पर…..

पायल ने खूब महसूस की जब सरजू का तन्ना हुवा लुंड उसस्के चुतरों पर रागढ रहा था और उस पतली, महीन सी निघ्त्य उसस्के चुतरों के बीच ो बीच घुस गयी जिस से सरजू को और भी मज़ा आगया देख कर और महसूस करके….. अब क्यूंकि पायल ने टॉवल को हाथ में लिए सीधा खड़ा हुवा तो सरजू ने टॉवल का एक हिस्सा अपने हाथों में पकड़ा और अपने तरफ खींचने लगा और उधर पायल ने दूसरे एन्ड को अपने हाथों में लिए अपने तरफ खींच रही thi…lo दोनों में एक दूसरा खेल शुरू हुवा अब टॉवल खींचने का….. अब उस दौरान दृष्ट किआ था यह तो पूछो mat….Paayal उस छोटी सी पतली निघ्त्य में सरजू के सामने हाथ में टॉवल का एक हिस्सा पकड़े अपनी तरफ खींचते हुवे, और सरजू उसस्के ठीक सामने निहारते हुवे….. सरजू की ेंखें अपनी माँ की छाती पर फिर जाँघों पर गया… उस्सको समझ में नहीं ारः था के किधर देखें…. ऊपर पायल ने ब्रा नहीं पहनी हुवी थी और दोनों चूचियां निप्पल समेत बिल्कुल साफ़ दिख रहे थे, उस्सकी उभरे हुवे, गोरी, मोठे जांघ एकदम सरजू के ेंखों के सामने थे सरजू दीवाना हो रहा tha…upar से पायल हंस रही थी टॉवल को खींचते वक़्त क्यों के सरजू अपने तरफ कलहीच रहा था और वह भी हंस पड़ा…. दोनों ज़ोर लगा रहे थे… सरजू वक़्त वक़्त पर ेंखों को दौड़ा रहा था अपनी माँ की जिस्म पर और पायल को खूब पता था वह किआ किआ देख रहा है…. आखिर में सरजू ने कुछ ज़्यादा ज़ोर से टॉवल को खिंचा के पायल के हाथ से टॉवल छूट गयी और सरजू टॉवल को एक तरफ फेंक कर अपनी माँ के तरफ बढ़ा…. और पायल हँसते हुवे बिस्तर के एक दौड़ी…. सरजू उसस्के पीछे भगा, और अब बीएड के एक तरफ पायल थी और दूसरे तरफ सरजू, जैसे दो बचे खेलते हैं एक दूसरे को पकड़ने के लिए वैसे hi दोनों पोजीशन पर थे, सरजू को पकड़ना था और पायल को खुद को बचाना, वह बीएड को थामे झुकी हुवी थी सरजू की ेंखों में देखते के वह किश तरफ से उस्सको पकड़ने आएगा, और जिस वक़्त हु झुकी तो 75% से ज़्यादा उस्सको बूब्स नज़र आरहे थे और सरजू पागल होता जा रहा था उस नज़ारे को देख kar…usski समझ में नहीं ारः था के कैसे अपनी माँ को पकड़े सोचा के काश वह एक टाइगर या चीता होता तो झट से लपक जाता वह ुसस्पर बिना दौड़े hi….. एक हाथ से सरजू अपने लुंड को पंत के अंदर सीधा कर रहा था और एक हाथ बीएड पर थे वह भी झुका हुवा था और कोशिश में था अपनी माँ को कैच करने ki…donon हंस भी रहे थे रह रह कर और सरजू ने एक कदम जैसे hi उठाया दौड़ने को पायल दौड़ने लगी बीएड की दूसरे तरफ मुड़कर सरजू को देखते और सरजू तेज़ी के साथ उसस्के पीछे भगा मगर पायल दूसरी एन्ड तक जा पोंछी थी फिर दोनों रुके और हम्प्टी और हँसते हुवे एक दूसरे को देख रहे थे और हम्प्टी हम्प्टी पायल बोली, “ बचपन में मैं ऐसे खेला करती थी अपने सहेलियों के साथ बहोत मज़ा ारः है, आज बहोत दिनों के बाद इससे खेल रही हूँ बस सांस फूल रही है मगर मैं तब तक दौडूंगी जब तक दम है तू आ पाकर मुझको देखती हूँ कितना भाग सकती हूँ….” यह कहकर वह फिर दौड़ने लगी बीएड के दूसरे तरफ और सरजू हम्प्टी और हँसते हुवे कहा, “ठीक है मम्मी मुझे मंज़ूर है…. मैं तो तुमको इतना थकावुंगा के तुम बीएड पर खुद लेथ जाओ तब मैं एन्जॉय करूँगा हेहेहे!!” फिर दौड़ते वक़्त पायल ने कहा, “किआ एन्जॉय करेगा?” “तुमको एन्जॉय करूँगा मुंय!” सरजू ने हँसते और हम्प्टी हुवे जवाब दिया.

तक़रीबन 5 मीन्स तक दोनों वैसे भागे एक दूसरे के पीछे कभी बीएड को पकड़ते कभी अलमारी को थामते और आखिर में सच में पायल बीएड पर लेथ गयी ज़ोर से हम्प्टी हुवे…… जब वह लेती तो सरजू उस के ठीक सामने आकर रुके और अपनी मम्मी के सामने खड़े ज़ोर से हम्प्टी हुवे उस्सकी जाँघों को देखता रहा क्यूंकि वह निघ्त्य बहोत ज़्यादा ऊपर उठ चुके थे पायल के लेटने से और सिर्फ एक इंच थी उसस्की पंतय साफ़ दिखने को….. सरजू वहीँ पर निचे ज़मीन पैट घुटनों पर बैठा और अपनी माँ की जाँघों के बीच उस्सकी सफ़ेद पंतय को घूरने लगा….. पायल हम्प्टी हुवे अपने छाती पर हाथ रखे सरजू के चेहरे के तरफ देखने की कोशिश कर रही थी क्यों के उस्सको पता था के वह किआ देख रहा है….. जब पायल ने सरजू की ेंखों में वह भूक और प्यास देखि तो उस्सको एक तरस सा आया ऐन उसी वक़्त सरजू ने अपने हाथ को माँ की जांघ पर हलके से फेरा और ऊपर की तरफ अपने हाथ को बढ़ाता गया पंतय की तरफ…. और पायल ने अपने हाथ से उसस्के हाथ को रोका….. दोनों के हाथों की उँगलियाँ एक दूसरे के उँगलियों में जाकर और पायल ने सरजू को ऊपर बीएड की तरफ खिंचा……. दोनों के साँस फूल रहे थे और जब सरजू बीएड के ऊपर गया तो पायल ने धीरे से उस से कहा, “थेर नाह! सांस तो लेने दे! देख तेरा भी सांस फूल रहा है, रुक थोड़ी देर फिर बात करते हैं…..” तो मुस्कुराते हुवे सरजू भी पीठ पर लेथ गया अपने माँ के बगल में दोनों के हाथों की उँगलियाँ तब भी एक दूसरे में जाकर हुवे थे और दोनों गहरी गहरी सांस लेकर हँसते रहे कुछ देर तक….

तो बे कॉन्टिनोएड.... (3000 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 93

जब दोनों मामूल तरह से सांस लेने लगे तो सरजू ने एक करवट लेकर पायल के तरफ मूढ़ कर उस्सकी गाल को चूमते हुवे अपने बाँहों को अपनी माँ के जिस्म के ऊपर रकते हुवे अपने एक तंग को माँ की जाँघों के ऊपर किया, और पायल ने कहा, “सरजू तू एक गर्लफ्रेंड क्यों नहीं ढूंढ़ता अपने लिए स्कूल में?” उस पर सरजू ने पायल के गालों पर अपने जीब फेरते हुवे कहा, “गर्लफ्रेंड? अरे तुम hi तो हो मेरी गर्लफ्रेंड मम्मी और क्यों गर्लफ्रेंड चाहिए मुझको!” पायल मुस्काई और कहा, “चल हट बदमाश, मम्मी किआ गर्लफ्रेंड होती है?” तब तक सरजू पुरे जिस्म के साथ अपनी मम्मी पर सवार होगया और पायल की गले पर अपने जीब को फेरने लगा फिर कहा, “मम्मी तुम इतने यंग क्यों को? बिल्कुल एक 17/18 की लड़की दिखती हो कोई नहीं मानता के तुम मेरी मम्मी हो….”

पायल अपने आप को संभालने की पूरी कोशिश करते हुवे कुछ दुलार से सरजू से कहा, “हम्म्म किआ कर रहे हो सरजू, हत्तो नाह!! तुम्हारा वज़न बाहर गया है, भारी हो गए हो! हत्तो तुम!!” मगर सरजू नशे के हालत में जैसे था और एक हाथ से पायल की निघ्त्य को उस्सकी जांघ पर ऊपर उठा रहा था और दूसरे हाथ से कांधों पर से स्ट्राप को निचे करने की कोशिश में लगा था जब उस्का जीब माँ की छाती पर फेरते जा रहा था… उस्का लुंड बिल्कुल मोटा, लम्बा तन्ना हुवा माँ की जाँघों के बीच रागढ रहा था सब करते वक़्त और पायल अपने आप को जैसे खो रही थी फिर भी बोलने की कोशिश जारी राखी, “सरजू, मत करो ऐसा, प्लीज रुको न, मैं तुम्हारी माँ हूँ रुको तो बीटा यह ठीक नहीं है रुको सरजू….” मगर सरजू सुनने वाला कहाँ था उस waqt…usske सर जैसे भूत सवार था और उस्सने तो अब पायल की होंठ पर अपने जीब को फेरते हुवे एक हाथ से अपनी माँ की मुंह को खोलने की कोशिश में लग गया…

पायल गर्दन को इधर से उधर घुमा रही थी ताके सरजू को किश न दे मगर सरजू ने ज़बरदस्ती कैसे भी करके माँ की होंठों को किश किया और अपने जीब को माँ की मुंह के अंदर डालने की कोशिश की मगर पायल ने मुंह नहीं खोला…. सरजू ने निचे के तरफ अपनी माँ की निघ्त्य को बिल्कुल ऊपर उठा दिया था उस्सकी पंतय बिल्कुल दिख रही थी और सरजू का लुंड कपडे समेत माँ की पंतय पर रागढ रहे थे.. पायल ने दोनों जाँघों को साथ चिपकाया हुवा था सरजू जाँघों को एक तरफ करने की कोशिश कर रहा था मगर पायल नहीं खोल रही थी अपने जाँघों को…. पायल सरजू के बालों में ऊँगली फेरते हुवी बोली, “रुकजा bête, यह ठीक नहीं है, ऐसा मत करो नाह मुझे कुछ हो रहा है रुको नाह प्लीज…” सरजू को मज़ा आया और घुर्राटे हुवे माँ की छाती में अपना सर मलते हुवे बोलै, “एहि तो मैं चाहता हूँ मम्मी के तुमको कुछ हॉवे और तू मुझसे और करने की मांग करे……”

पायल सरजू का मोटा लुंड अपने ठीक छूट पर पंतय के ऊपर रगड़ते हुवे महसूस कर रही थी और उस्सकी सांसें तेज़ होती जा रही थी और सिसकियों में उस्सने फिर सरजू से रुकने की बिनती की पर सरजू अपने एक्शन में रुके नहीं बिल्कुल….. फिर सरजू ने अपना पंत उतार दिया और चड्डी भी और अब उस्का पूरा लुंड माँ की पंतय पर मसल रहा था पायल ने अपने हाथ से चुकार देखने की कोशिश की तो समझा के उस्सने चड्डी निकल दिया और पायल की मुंह से “उफ़, िस्सश्श्श” की आवाज़ निकली और कहा, “सरजू, किआ कर रहा है तू उफ़ मेरी माँ मैं किआ करूँ इस लड़के को हाय….” पायल की सांसें तेज़ होती जा रही थी और अब सरजू ने माँ की चूचियों पर अपना जीब फेरा तो पायल दीवानी हो गयी और चिलायी, “ाः!! ोूउउउइइइ माआ सरजू मत करो ऐसा रे ाआईईईई” मगर तब तक उस्सकी निप्पल सरजू के मुंह में था और वह अपनी माँ की निप्पल को चुस्सने लगा फिर तो पायल बेहाल हो गयी बिस्तर पर एक सांप की तरह रेंगने लगी सरजू के सर को अपने हाथों में जाकर……

और जब सरजू ने महसूस किया के उस्सकी मम्मी अब बेहाल हो गयी है तो आहिस्ते आहिस्ते उस्सने उस्सकी निघ्त्य कंधे से बिल्कुल उतार दिया और जाँघों के तरफ से निचे खींचने लगा निचे के तरफ और उसी वक़्त माँ की जाँघों पर अपने जीब फेरता गया निघ्त्य को खींचते वक़्त और पायल बेकाबू ेंखों को बांध किया गहरी सांसें ले रही थी तड़पते हुवे धीमी धीमी आवाज़ में, “उफ्फ्फ, ाआअह, इस्स्स्सह्ह ofo….haye रे…. मैं मर जावून…… उफ़ मेरी माँ…….” पायल की उन् तड़पते आवाज़ों ने सरजू को बढ़ावा दिया आगे बढ़ने को और अब वह माँ की पंतय को चूस रहा था, और अपने डेंटन से पंतय की इलास्टिक को आहिस्ते आहिस्ते खींचने लगा और जब पंतय आधे जांघ तक पोंहचा तो सरजू रुक कर झट से माँ की छूट को चाटने लगा जाँघों को दोनों तरफ करते हुवे और इस बार पायल ने मन नहीं किया और अपने जाँघों को दोनों तरफ फैला दिया…. सरजू ने सर उठाकर ऊपर पायल के चेहरे को देखा और समझ गया के अब वह रास्ते पर आगयी है…..

पायल की दोनों ेंखें बांध थी और वह तृप्ति जा रही थी….. जब सरजू ने माँ की छूट का रास अपने जीब से चखा तो ऊपर देखते माँ से कहा, “मम्मी तू इतनी गीली क्यों हो गयी है?” पायल ने एक ेंख खोल कर उस्सको देखते हुवे तृप्ति आवाज़ में कहा, “चुप कर बदमाश कहीं का जैसे तुमको नहीं पता मुझको इतना छह रहा है पुरे जिस्म पर और पूछता है शैतान!” तब सरजू ने बिल्कुल एक शैतानी मुस्कराहट के साथ पायल की छूट की पंखुरियों को अपने उँगलियों से एक तरफ करते हुवे अपने जीब को उन् के बीच फेरा और पायल बेहाल होती गयी बिस्तर पर अपने एक मुठी में चादर को जाकर और दूसरे मुठी में सरजू के बालों को और सिसकारियों के सात तड़पते हुवे पायल की आवाज़ सुनाई दी, “आआआह!! सशशशशशशशशशसस!! ोूउऊउउउउइइइइइइइ maaaaaa….aaaaaaaah!!”

कुछ देर माँ की छूट को चाटने और चुस्सने के बाद सरजू जाँघों को चाटते हुवे निचे के तरफ गया और माँ के पैरों को चाटने लगा और पायल के एक तलवे को छाता जिस से पायल का और बुरा हाल हुवा और पायल उठ बैठी फिर सरजू के हाथ पाकर कर उस्सको अपने तरफ खिंचा ज़ोर से……. सरजू माँ के ऊपर पोंहचा और पायल ने बग़ैर कुछ कहे अपने bête के चेहरे को हाथों में बहोत प्यार से लेते हुवे उस्सको जल्दी जल्दी चुम्मा माथे पर, गालों पर, सर पर, बालों पर, गले पर होंठों पर फिर मुंह पर और सरजू ने मुंह खोला, जीब निकला और पायल ने अपने bête की जीब को अपने मुंह में लिया और चुस्सने लगा… दोनों काफी देर तक किश में मुब्तेला रहे और आखिर में सरजू ने माँ की हाथ को अपने हाथ में लेकर उस्सको अपने लुंड तक लगाया और कहा, “इस्को छुवो न मम्मी…..” पायल ने अपने सरजू का लुंड तो देखा था और उस्सको छूने की बड़ी ख्वाहिश थी और अब वह भी मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहती थी तो उस्सने जल्दी से अपने सरजू की लुंड को अपने मुलायम हाथों से स्पर्श किया…. जैसे hi माँ का हाथ सरजू के लुंड पर पारा सरजू तरप उठा और उसस्के पुरे जिस्म में जैसे एक करंट दौड़ gaya….kuch हद तक सरजू कांप गया और पायल अपने तजुर्बे वाली हाथों से अपने bête के लुंड को सहलाने लगी और बिना कहे उस्सने खुद उठ कर अपने सरजू के लुंड के तरफ अपना मुंह लगाई…. आग दोनों तरफ बराबर लगी हुवी थी सरजू भी उसी आग मैं अब तरप रहा था जिस में उस्सकी माँ थी….

जैसे hi पायल ने लुंड को होंठों से लगाया सरजू पागल हो उठा और कांपने लगा… पायल मुस्कुराते हुवे सर उठा कर अपने सरजू को देखा और धीरे से कहा, “डर मत कुछ नहीं होगा बस ज़रा कण्ट्रोल कर ले रे!” सरजू काम्पे जा रहा था और हलके से, हौले से पायल ने अपना जीब निकला, ऊपर सरजू के ेंखों में देखा और बिल्कुल ऐडा के साथ फिल्मों की वैम्प एक्ट्रेस के जैसे बेहवे करते हुवे शैतानी मुस्कान के साथ उस्सने अपना जीब अपने bête के लुंड पर फेरना शुरू किया…. सरजू बैठा हुवा था और झट से खड़ा होगया बीएड पर hi उसस्के दोनों तंग कांपने लगे थरथराहट सी हो गयी उसस्के पुरे बदन में और उस्सकी आवाज़ फीमेल आवाज़ में निकली, “उफ़ मम्मी आआआह” पायल हंसी और bête के लुंड को मुंह में ले लिया……

सरजू कांपते हुवे, तारत्प्ति आवाज़ में बोलै, “मम्मी!! मम्मी मुझसे सेहेन नहीं होगा, मैं झाड़ जावूंगा, बस करो प्लीज बस करो माँ!!!” मगर अब पायल की बारी थी वह तो रुकने वाली नहीं थी… सरजू के दोनों तंग थरथर कांप रहे थे और तरप रहा था वह…. उस्सको लगता था के वह अपनी माँ के मुंह के अंदर hi झाड़ जाएगा, वह अपने लुंड को बाहर खींचने की कोशिश कर रहा था मगर पायल की मुंह का जाकर ज़बरदस्त था और वह दीवानगी के हालत में थी जैसे किसी नशीले चीज़ के हालत में बेहोश थी और पता नहीं किआ कर रही thi…Sarjoo अपनी माँ के चेहरे पर देखे जा रहा था और रुकने की बिनती किये जा रहा था, पायल नशीली ेंखों से सरजू को देख तो रही थी मगर जैसे कहीं और गम थी, किसी और दुन्या में……. आखिर अपने bête को ज़्यादा तड़पते हुवे देख कर उस्सने चुस्सना बंद किया और उस के मुंह को अपने मुंह में लिया और दोनों एक लम्बे किश में डूब गए…..

किश के कुछ देर बाद पायल ने फिर सरजू की लुंड को सहलाते हुवे बोली, “मुझे हैरानी है के इतनी छोटी सी उम्र में यह तेरा इतना मोटा और लम्बा कैसे हैं रे सरजू? हम्म?” सरजू ने मुस्कुराते हुवे जवाब दिया, “तुझे पसंद है मम्मी?” पायल ने हाँ में सर हिलाते हुवे “हम्म्म” कहा. और सरजू ने अपने माँ को बिस्तर पर लेटाया और उस के ऊपर चार गया…. अब दोनों बिल्कुल नंगे थे पायल की पंतय निकाल फेंका सरजू ने और खुद नंगा हो गया…. उस्का लुंड तो छोटा हो hi नहीं रहा था बिल्कुल खम्बे की तरह एकदम सीधा खड़ा था और जब अपने मम्मी पर लेता वह तो लुंड उस्सको डिस्टर्ब कर रहा था बीच में आकर….. पायल ने जब देखा के वह खुद अपने लुंड से डिस्टर्ब हो रहा है तो कहा, “किआ हुवा यंग मन? खुद की चीज़ से डिस्टर्ब हो रहे हो? उस्सकी अपनी जगह के वहां चला गया तो डिस्टर्ब नहीं करेगा तुझको!” सरजू बहोत खुश हुवा और देखा के उस्सकी मम्मी ने दोनों जाँघों को ओपन करके जैसे उस्सकी लुंड को अंदर इन्विते कर रही है……

तो सरजू माँ की जाँघों के बीच गया और हौले से अपने लुंड को माँ की छूट से लगते हुवे सर ऊपर उठा कर अपने मम्मी के चेहरे में देखा और वह मुस्कुराते हुवे सरजू के कमर पर अपने हाथों को हलके हलके फेर रही थी जैसे उस्सको ेन्सॉरगे कर रही हो…… फिर सरजू ने आहिस्ते से अपने कमर से एक हल्का सा ढाका दिया और उस्का लुंड मम्मी के छूट के अंदर आधा ग़ुस्सा और पायल ने अपने ेंखों को मूंडकर ‘आआह’ की धीमी आवाज़ दी फिर सरजू ने और एक ढाका दिया और जब उस्का लुंड पूरी माँ की छूट के अंदर घुस गया तो वह बेहद खुश होकर कहा, “ाः मम्मी बहोत गरम है आपके अंदर!! ऐसे hi गरम रहता है किआ?” पायल हंसी और कहा, “हम्म यह तेरा पहली बार है नाह!! ऐसा hi रहता है अंदर रे paagal..ab जल्दी जल्दी ढाका दे मेरे अंदर मुझको भी चाहिए ये अब आआह जल्दी कर रे मेरा सरजू अपनी माँ को खुश कर न बीटा मेरे उफ्फफ्फ्फ़… इस्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्ह!”

और सरजू एक पर एक ढाका देता गया और पायल तृप्ति आवाज़ में बोली, “तेरा वाला बिल्कुल तेरे दादा वाला जैसे है, तेरे पापा का इतना मोटा और लम्बा नहीं था रे…… तू अपने दादा पर गया है इसी लिए उसी की तरह मुझे छोड़ रहा है तू शैतान कहीं का…. तेरा लौड़ा तो अब मुझे हर रोज़ चाहिए रे Sarjoo…apni मम्मी को हर रोज़ खुश रखेगा किआ? हम्म बोल रे मेरा बॉयफ्रेंड अपने इस गर्लफ्रेंड को हर रोज़ छोड़ेगा नाह?” सरजू छोड़ते हुवे अपनी मम्मी को जवाब दिया कहँरते हुवे, “हाँ मम्मी मैं तो बरसों से एहि चाहता था के तुमको chodun…magar तू नहीं करने देती थी अब तो हर रात को छोडूंगा तुमको मम्मी, मेरी सेक्सी गर्लफ्रेंड, मेरी हॉट सेक्सी mummy…aaaaaaaaah!! आआआआह मम्मी मैं झड़ने वाला हूँ अअअअअअअ!! हाय रे MUMMMYYYYYYYYYYYYYYYYYYYYY!!” पायल ने अपने जिस्म को हिलाते हुवे बहोत जल्दी से सरजू के निचे से निकली यह कहते हुवे, “बाहर निकल बाहर निकाल जल्दी अंदर मैट झड़ना…..” और सरजू का लुंड ने पिचकारी चोरी अपनी माँ की पुरे जिस्म पर और बिस्तर पर चारों taraf…ek ज़बरदस्त प्रेशर से निकले उस्सकी पानी और टर्र टर्र कर दिया अपनी माँ को…….

कुछ देर बाद पायल सरजू की लुंड को छाती चूस्ते दिखाई देती है अपनी बीएड पर जब के सरजू खर्राटे मार रहा होता है नंगा अपनी माँ के बगल में लेता हुवा……..

उस रात को सरजू बेखबर सोता रहा अपने माँ के बगल में मगर पायल को काफी देर तक नींद नहीं आयी. काफी देर तक सोचती रही के किआ अब सच में वह अपने bête से चुदवाती रहेगी ज़िन्दगी भर? वैसे तो वह पूरी कोशिश में लगी हुवी थी के सरजू उस के साथ वैसा सम्बन्ध न रखे, वह टालती रही कितने महीनों से मगर उससे पता था के एक न एक दिन सरजू कामयाब हो जाएगा… मगर पायल ने सोचा था शायद जब वह कोई 20 साल का होगा तब उस्सको छोड़ेगा उस ने बिल्कुल नहीं सोचा था के इतनी छोटी सी उम्र से hi उस्सको छोड़ने लगेगा वह….. पायल इंकार तो कर रही थी महीनों से सरजू को मगर दिल की गहरायी में, किसी एक कोने में वह चाहती थी के सरजू उस्सको चोदे….. मगर कह तो नहीं सकती थी उस से इसी लिए उस्सको रोकती रहती थी…..

अब इस रात को बहोत खुश थी पायल. खुद सोचने लगी के एक जवान मर्द मिलगया उस्सकी बिस्तर पर हर रात के लिए… ऐसा छोटा सा मर्द जिस्का लुंड उतना hi बड़ा और मोटा है जितना उस्सकी छूट को ज़रुरत है…. उम्र में छोटा, जवान गरम खून, मर्दानगी भरपूर, छोड़ने को किसी वक़्त भी तैयार और किआ चाहिए था पायल को? बहोत खुश थी वह यह सोचते हुवे के अब तो हर रात दिवाली और हर दिन होली जैसा होगा……. सरजू नींद में था और पायल उस्सको निहारे जा रही थी, उस्सकी छाती पर चुम्बन का बरसात करते और अपनी मुलायम हाथों से उसस्के जिस्म को सहलाती जा रही थी….. सरजू को बहोत hi चैन और सुकून की नींद आयी थी….. पहली बार चुदाई जो की उस्सने. रात बारह बजने के बाद भी पायल सोई नहीं थी और सोच में डूबी हुवी थी बहोत दूर तक सोचने लगी थी पायल…. यह भी सोच रही थी के एक दिन सरजू की शादी हो जाएगी और उस्सकी अपनी पत्नी होगी, तब तो वह अपनी पत्नी के बिस्तर पर सोवेगा और तब पायल फिर अकेली हो जाएगी, किआ तब सरजू उस्सको छोड़ेगा जैसे आज छोड़ा? या उस्सको धित्कार देगी तब? यह सब सोचकर पयाल के मैं में एक डर सी बैठ गयी और सरजू को लेकर जलन सी भी महसूस huwi…dil में सोचा के किसी दूसरी ाव्रत को सरजू का प्यारा सा लुंड नहीं चखने देगी…. यह सोचते सोचते पायल की ेंख लग गयी….

तो बे कॉन्टिनोएड………….
 
अपडेट 94

सुबह के 3 बजे सरजू की नींद टूटी और देखा के उस्सकी माँ उसी निघ्त्य में उसस्के बगल में गहरी नींद में है….. काँधे पर से एक निघ्त्य की स्ट्राप ढला हुवा था और सरजू अपनी मम्मी को निहारता रहा कुछ देर तक और रात का मज़ा अब भी महसूस कर रहा था और अपनी माँ की जिस्म को आहिस्ते आहिस्ते देखते हुवे उस्का लुंड फिर से ज़बरदस्त खड़ा होगया…… उस्सने धीरे से माँ की पैरों को चूमा निचे के तरफ जाकर, और आहिस्ते आहिस्ते चूमते हुवे ऊपर के तरफ बढ़ता गया, घुटनों तक आया, फिर जाँघों को चूमा और सर उठाये ऊपर माँ की चेहरे पर देखता रहा और पायल ने एक बहोत सेक्सी अंगराई ली नींद में hi अपने बाहों को ऊपर उठाते हुवे और उस एक्शन से उस्सकी निघ्त्य जाँघों के बिल्कुल ऊपर उठ गयी और सरजू ने देखा के पायल ने पंतय नहीं पहनी हुवी है, नंगी है निचे तो सरजू ने अपना अंडरवियर जो उस्सकी माँ ने उस्सको नींद में पहनाई थी, फिर से उतरा और अपना मोटा लौड़ा माँ की छूट पर रगड़ना शुरू किया मगर बहोत हौले हौले…….

सरजू को लग रहा था के सब एक सपना hai….woh कितने दिनों से इस का इंतज़ार में था और अब जब के सपना पूरा हो रहा है तो सोच रहा था के सब एक सपना है… खुद यकीन नहीं कर रहा था के अपनी जवान माँ को छोड़ने में कामयाब हो गया! तो धीरे धीरे वह अपना लुंड माँ की छूट पर रागढ रहा था निघ्त्य को पथ के ऊपर उठाये हुवे और अपनी ेंखों को पायल की जिस्म पर चरों तरफ दौड़ा रहा था निहारते हुवे, पथ को अछि तरह से देखा अपनी माँ की, जाँघों को हाथ फेरते हुवे देखा, चूचियों को छह कर देखा, जब पायल सेंसें ले रही तो उस्सकी छाती की ऊपर निचे उठना बैठना देख रहा था सरजू….. अपनी माँ की बेहद खूब सूरत बेदाग़ चेहरे को देखता रहा, गालों को चूमा हलके से, माँ की कान को किश किया, अपनी माँ की खूबसूरत घने काळा बालों को सहलाया और अपनी माँ की खूबसूरती को निहारता रहा कुछ देर तक लुंड को छूट पर रगड़ते हुवे और लुंड मोटा से भी मोटा होता गया….. सरजू ने मैं hi मैं सोचा के उस्सकी माँ इतनी जवान और खूब सूरत है के कोई भी उस से शादी कर सकता है अब भी…… और फिर सोचा के वह खुद क्यों छोटा है, अगर बड़ा होता तो अपनी माँ को लेकर कहीं बहोत दूर चला जाता और पति पत्नी की तरह रहते दोनों…. वह अपनी माँ को छोड़ कर बचह भी पैदा कर सकता…. और उसस्के मैं में अपने बच्चों को देखने का मैं किया और सोचा के खुद तो वह हैंडसम है hi और उस्सकी माँ ठहरी हद से ज़्यादा खूब सूरत और सोचा के अगर अपनी माँ को उस्सने प्रेग्नेंट किया तो उसस्के बचे तो बहोत hi खूब सूरत होंगे…..

फिर सरजू के मैं में अजीब सी शैतानी खयालात aye…ussne यह भी सोचा के अगर लड़की पैदा हुवी तो माँ जैसी hi खूब सूरत होगी और शायद ज़्यादा खूब सूरत और क्यूंकि सरजू अभी छोटी उम्र की है तो लड़की पैदा हुवी तो जब वह जवान होगी तो सरजू भी जवान होगा तो उस्सको भी छोड़ पायेगा वह…. यह सोचते हुवे माँ की छूट में उस्का लुंड ग़ुस्सा और पायल की ेंखें खुल गयी तो देखा के लाडला बीटा उस्सको फिर छोड़ रहा है….. पायल ने एक अंगराई लेते हुवे अपने सरजू को बाँहों में ज़ोर से लिया और उस्सको चरों तरफ चूमने लगी अपने कमर को भी हिलाते हुवे सिसकियों के साथ…..

सरजू माँ की चूचियों को चुस्ती हुवे अपने कमर से छूट में ज़ोरों से ढाका देता गया और पायल भी उस्का साथ देते हुवे अपणु दोनों पैरों को अपने bête के कमर पर बाँध कर अपनी कमर को सरजू के कमर के रफ़्तार से साथ हिलाते हुवे तृप्ति गयी इस कहंर्ती हुवी आवाज़ में, “ाआअह स्स्स्सस्स्स्शस्स्सस्स मेरा सरजू, मेरा बीटा सरजू, मां को इतना ख़ुशी दे रहा है…… आआआह हाँ मेरे लाल और ज़ोर से और ज़ोर से ढाका दे, आआआह्ह्ह्ह हाँ बहोत मज़ा ारः है रे Sarjoo…tujhko छोड़ना कैसे आया रे सरजू अपनी माँ को छोड़ रहा है रे तू…. आआआआआहहहहहहहह” और सरजू ने चूचियों को चोर कर माँ की कांधों को चाटते हुवे वह भी अब तृप्ति आवाज़ में माँ को जवाब देता गया, “उफ्फ्फफ्फ्फ़ आआआअह्ह्ह्हह हाँ मम्मी, तुम हो hi इतनी हॉट और सेक्सी के तुझको चोदे बिना रहा नहीं गया मम्मी, जब दादा और चाचाओं को तुम्हें छोड़ते हुवे देखता तो उसी वक़्त तुमको छोड़ने को मैं करता mummy…main ने तो ठान लिया था के मैं भी दादा और चाचाओं की तरह तुमको एक दिन ज़रूर छोडूंगा….. जब मेरे सभी दोस्त तुमको छोड़ना चाहते हैं तो मैं तो तुम्हारे साथ रहता हूँ तो मैं क्यों नहीं मम्मी…… आआआआअह्हह्ह्ह्ह मैं अब झड़ने वाला hoooooooooooooooooooooon अंदर hi डालदून मम्मी डालने दो ना आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह”

पायल फिर अपनी कमर को एक तरफ खिसकते हुवे चिल्लाई, “नाहीइइइइइइइन इस्स्स्सस्स्स्शष्ठ पागल है है किआ मुझको प्रेग्नेंट करेगा किआ रे!! तेरी अवलाद तेरे भाई बेहेन होंगे या बीटा बेटी? बाहर निकाल मेरे लाल!!” तब तक पायल ने लुंड को अपने हाथों में ले लिया था और अपने मुंह तक लाकर उस्सको चुस्सने लगी और सरजू अपने माँ की मुंह में hi झाड़ गया तड़पते हुवे छत्त पर देखते हुवे इस आवाज़ में “यह!! यह!! सशः!! सससस!! हां!! आइए!!! हाँ माँ चुस्सलो aur….sssssss अपने जीभ को उस पर फेरो मम्मी आआअह्ह्ह बहोत मज़ा ारः है…… आआआआहहहहहहह!!!” और पायल ने साडी वीर्य को चूसा और छाता अपने सरजू की लुंड को हाथ से सहलाते हुवे फिर थूक दिया पानी को नीचे और सरजू ने अपनी माँ की जीभ को चुस्सने लगा उस्सको ज़ोरों से बाँहों में जाकर हुवे………

दोनों हम्प्टी हुवे एक दूसरे को बाँहों में लिए बिस्तर पर लेथ गए और सरजू अपने माँ की चूचियों पर सर रख कर धीरे से कहा, “बहोत बहोत शुक्रिया मम्मी तुमने आज मुझको बेहद खुश किया” और पायल ने कहा, “शुक्रिया तो मुझे तुमको करना चाहिए रे सरजू तुमने अपने विद्वा माँ को वह ख़ुशी दी जो पति देता hai…hmmm! मेरा प्यारा सरजू” और उस्सको ज़ोर से अपने सीने से दबाया….. और पता नहीं कब दोनों नींद के अघोष में खो गए…….

तो बे कॉन्टिनोएड…. (3600 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 95

सुबह को सरजू सो रहा था जब पायल उठकर नहाने चली गयी सरजू के जिस्म को चारों तरफ चूमते चाटते…. यहाँ तक के उस्का लुंड भी थोड़ा सा चूसा पायल ने और सरजू गहरी नींद में अंगराई लेते हुवे कहर रहा था ुसस्स वक़्त….. पायल को एक बार और करने को मैं कर तो रहा था मगर सोचा के अपने दुलारे को थका देगी और उस्सको स्कूल भी तो जाना है इस लिए नहाने चली गयी सरजू को सोते हुवे चोर कर….. जब वापस आयी एक छोटे से कपडे अपने जिस्म पर लपेटे हुवे तो देखा के सरजू ज़ोर ज़ोर के खर्राटे ला रहा है तो अब उस्सको उठाने का वक़्त था क्यों के उस्सको भी तो नहाना था और स्कूल के लिए तैयार होना था तो पायल उस्सको हिल्ला कर उठाने की कोशिश करने लगी….. मगर सरजू नखरें कर रहा था उठने को और जब अपनी मम्मी को अपने पास उस छोटे से कपडे में देखा तो उस्सको बाँहों में जाकर कर अपने पर खिंचा और चूमने लगा अपने सर को अपनी माँ की नंगी छाती में ग़ुस्सा कर…… पायल ने उस्सको चूमा मगर जल्दी से हट गयी उस्सको उतने के लिए कहकर और वह चली गयी अलमारी के बगल में ड्रेस पहने के लिए….. सरजू तब जाग चुक्का था और एक कोने से अपनी माँ की नंगी जिस्म को देख रहा था….

पायल को अब सरजू से शर्म नहीं लग रही थी और एक नज़र उठाकर उस्सने भी सरजू को देखा और जब दोनों के नैन मिले तो दोनों एक दूसरे से मुस्काये फिर सरजू ने कहा, “मम्मी, ज़रा झुको तो!” पायल ने मुस्कुराते हुवे पुछा, “क्यों रे बदमाश?” सरजू ने कहा, “मम्मी जब इस टॉप को पहनती hi तो हमेशा वहां झाकंता रहता हूँ और एक बार मैं ने बड़े चाचा को देखा था जब उस्सने आप की इस टॉप को नीचे करके आप के दूदू को चूसा था…. ज़रा झुकिए नाह मम्मी” सरजू ने छोटे बचे की आवाज़ मैं कहा फिर से….. पायल को पता था के उस टॉप मैं वह सच मूछ hi बहोत हॉट और सेक्सी लगती है इसी लिए पेहेन रही थी अपने सरजू को रिझाने के लिए hi….. और वह अपने bête को खुश करने के लिए बिल्कुल निचे झुकी ज़मीन की तरफ और सरजू की ेंखों में उस्सकी भूक को देखती गयी जब के सरजू ने अपने लुंड को सहलाना शुरू किया अपनी मम्मी की चूचियों को उस टॉप के अंदर से जैसे बाहर निकलने की कोशिश करते हुवे….

गोआल गोआल चूचियां ब्रा में अटके जैसे उस टॉप से निकलने को झगर रहे हो… सरजू ने फिर अपना मोटा तन्ना हुवा लौड़े को चादर हत्ता कर मलने लगा अपनी माँ को दिखते हुवे……… पायल हंस कर सीधा खड़े होते हुवे सरजू से कहा, “बस अब, रात को खूब मज़ा कर चुक्का है जा अब नाहा धोकर स्कूल के लिए तैयार हो……” सरजू अपने लुंड को मसलते हुवे नटखटी अदा से अपनी माँ से कहता है, “नहीं मम्मी आज स्कूल नहीं जावूंगा आज दिन भर तेरे साथ गुज़ारने को दिल करता है, तेरे साथ रहने को मैं करता है, स्कूल मैं तुंहारी याद बहोत आएगी, बहोत मिस करूँगा तुमको….. आज तुम्हारे साथ रहूँगा दिन भर…..” पायल कुछ देर सोचने के बाद कहती है, “और दादा दादी से किआ कहेगा, क्यों स्कूल नहीं गए” तब सरजू पूछता है, “चाह ये बताओ किआ आज तुम्हारा रसोई में रहने का दिन है या दूसरे चची लोग की बारी है?” पायल ने कहा, “अरे कल hi तो मैं दिन भर रसोई में थी आज मेरी बारी नहीं है!” तो सरजू बोलै, “तब तो बिल्कुल स्कूल नहीं जावूंगा क्यों के तुम मेरे साथ रह सकोगी दिन भर!” पायल ने फिर पुछा के दादा लोग से किआ कहा जाये तो सरजू ने कहा, “केहडेना के मेरे पथ में दर्द है और आराम चाहिए मुझको बस…” तब तक पायल बीएड पर सरजू के पास बैठ गयी थी और सरजू अपने लुंड को माँ की जाघों पर रागढ रहा था और पायल की गर्दन पर अपने जीब को फेरता जा रहा था अपने हाथों से उस्सकी चूचियों को टॉप के ऊपर से मसलते हुवे…. और पायल ने उस्सको बाँहों में लेकर जोरसे दबाते हुवे उस्सको गले पर चूमते हुवे कहा, “चाह ठीक है, मैं उन् लोगों से कहूँगी के तुम को रात को हल्का सा बुखार था और आज भी तुम्हारा जिस्म कुछ गरम है इस लिए तू स्कूल नहीं जाएगा ठीक है? अब जा नहाकर वापस अजा बिस्तर पर hi तुमको दिन गुज़ारना होगा क्यों के तू बीमार जो है!!”

सरजू बहोत खुश हुवा और बाथरूम के तरफ चला गया मुस्कुराते हुवे…… और जब नहाकर वापस अपने कमरे के तरफ जा रहा था तो दादा जी मिलगया उस्सको कॉरिडोर में….. दादा ने उस्सको रोका पूछने को के रात को काम तमाम किया के नहीं…… अब सरजू के समझ में नहीं ारः था के किआ जवाब दे अपने दादा ko…kia उस्सको सब सच सच बतादें या उस से छुपाएं! और दादा जी तो उतावला हो रहा था यह जाने को के पायल ने किआ अपने bête को भी उससे छोड़ने diya…yeh दादा को बहोत hi एक्साइट कर रहा था और बस सिर्फ यह सोचते hi उस्का लुंड ज़बरदस्त खड़ा हो रहा tha….ek जवान माँ एक जवान बीटा एक साथ बिस्तर पर ….किआ नज़ारा होगा देखने ko…dada के लिए यह एक अनमोल बहाना था छोड़ने के लिए , यह उस्सको छोड़ने की प्रेरणा देता था उसस्के लुंड सिर्फ ऐसे नाजाइज़ तालुकात को सोचकर hi बहोत उठत्ता था और सोचता था पायल को छोड़ते वक़्त उस्सको और ताक़त मिलेगी उन् दोनों के बारे में सोचते हुवे और अगर ेंखों से देखा तब तो महीनों तक उसस्के लुंड के लिए जैसे वियाग्रा गोली मिल जाएगा…..

तो दादा ने सरजू से धीमी आवाज़ में पुछा, “बोल रे सरजू काम पूरा किया नाह रात को? हँ? मुझे पता है तुम ने कर दिया वह मेरा बीटा! शाबाश!” सरजू सर को निचे झुकाये खड़ा था और दादा की बात सुनकर सर ऊपर उठाकर दादा जी के ेंखों में देखते हुवे आहिस्ते से कहा, “दादा कल रात को मुझे हलकी सी बुखार होगयी माँ ने कहा मैं रात भट तप्त रहा और तड़पता रहा, आज स्कूल नहीं जा रहा हूँ, तो कुछ नहीं कर पाया दादा…. अब आज दिन में शायद कुछ हो….” दादा कुछ हैरान नज़रों से सरजू को देखा और सोचा कल रात को जो उस्सने सुना था हु किआ था? किआ सरजू दर्द से तरप रहा था बुखार से या यह सरजू झूट बोल रहा है अपने दादा से…… दादा जी को अब सरजू पर शक होने लगा…… वह पुराण खिलाडी था उस से ऐसी बातों को छुपाना आसान तो नहीं था मगर सरजू ने सोचा के देखते हैं कब तक उस से यह बात छुपा सकता है अब और खुद सोचा के वक़्त आने पर बताना hi पड़ेगा….. सरजू ने कमरे में दाखिल होते वक़्त सोचा के दादा को बतादेना बेहतर होगा, क्यूंकि दादा को पता चल गया तो वह उस्सको डिस्टर्ब तो नहीं करेगा जब अपनी माँ के साथ अकेले होगा तो…..

एक घंटे बाद घर में सब को पता चल गया के सरजू को बुखार है और वह स्कूल नहीं जा रहा है… सब चची लोग उस्सको कमरे में देखने को आये.. रोशन और कोयल काम पर जाने से पहले उस से मिलने आये कमरे में…. रोशन ने अपनी चची से ेंख मिलाई और कमरे से निकलते वक़्त उस्सकी गांड पर अपना हाथ फेरा और पायल ने हलके से उस के हाथ को पिंच किया….. याद होगा के हॉस्पिटल में कैसे रोशन ने अपने पायल चची को छोड़ा tha…usske बाद और कई बार उस्सको पायल को छोड़ने का मौका मिला घर में hi…… यह बात सरजू को पता नहीं चला tha…magar जिस वक़्त रोशन ने उस्सकी माँ की गांड पर हाथ फेरा और उस्सकी माँ ने उस्सको पिंच किया तो सरजू ने खूब अच्छी तरह से देखा और यह सोच कर के उस्का कजिन बरोथेर भी उस्सकी माँ को छोड़ता है, उस्का लुंड तन्न गया अचानक और उस्सको अब उन दोनों को एक साथ देखने का मैं kiya….phir उस्सने सोचा के वैसे hi दादा जी को भी उस्सको अपने माँ के साथ देखने को मैं कर रहा होगा… सरजू ने सोचा के जिस तरह वह हमेशा अपनी माँ को दादा और चाचाओं के साथ छोड़ते हुवे देखना पसंद करता है वैसे hi दादा को भी मैं कर रहा होगा उनको देखने को…… और जैसे सरजू ने अपनी माँ को रोशन के साथ छोड़ते हुवे देखने का मैं किया वैसे hi उस ने सोचा के दादा का भी मैं होगा…… यह छोड़ते हुवे देखना और छोड़ने में अलग मज़ा होता hai…dekhne के बाद फिर छोड़ना एक अलग मज़ा hai….inn सब बातों पर सरजू ने अछि तरह से ग़ौर किया और डीडे किया के अब दादा को सब बतादेगा सच में…..

तो बे कॉन्टिनोएड……………..
 
अपडेट 96

सरजू कुछ देर बिस्तर पर झूट मूठ के बीमार बनकर लेता रहा क्यों के दोनों चहियाँ और दादी उस के कमरे में उस्सको देखने के लिए ए हुवे थे और बैठ कर बातें कर रहे थे सब. पायल कुछ दूर कड़ी सरजू को देख कर हंस रही थी क्यूंकि उस्सको पता था मुफ्त में सरजू को विजिट्स मिल रहे हैं और सरजू बोर हो रहा था उन् सब के मौजूदगी से मगर किआ करता मजबूरन एक्सेप्ट करना पर रहा था, इस लिए पायल खूब हंस रही थी……

कुछ देर बाद पद्मिनी चची तो कोई काढ़ा दवा लेकर चली आयी और सरजू को पिने को कहा गया !! अब सरजू इंकार तो कर hi रहा था मगर दादी और दूसरी चची उस्सको पिने के लिए मजबूर कर रहे थे तब सरजू की माँ उस्सको बचने के लिए आयी यह कहकर, «नहीं नहीं रहने दीजिये, काढ़ा दवा पिने से उस्सकी स्तोमच खराब हो जाती है मैं अभी ड्रग हाउस से उसस्के लिए एक सिरप और गोलियां खरीद कर लवंगी. » जब चची और दादी वापस चले गए तो सरजू अपनी मम्मी की गले में बाहें डालकर पूछने लगा, «तो किआ अब तुम सच में कहीं जा रही हो किआ ? »

तो पायल ने कहा, «अब तो जाना hi पड़ेगा, नहीं तो तुझको वह काढ़ा दवा मजबूरन पीना परता, और मुझको बिजली का बिल भी पाय करना है और कुछ सब्ज़ियां भी लेनी है एक घंटे से पहले वापस ाजावूँगी तुम आराम करो तब तक ठीक है… » सरजू ने ज़िद किया के वह भी साथ में जाएगा मगर मम्मी ने कहा के सब को शक हो जाएगा के वह बीमार नहीं है इस लिए उस्सको बिस्तर पर hi लेते रहना chahiye….Sarjoo को एक पल भी अब अपनी माँ के बिना चाह नहीं लग रहा था और उस के साथ साथ रहना चाहता था अब ख़ास कर बाहर घूमने को तो और भी ज़्यादा मैं कर रहा था, जब के उस्सको पता है के जब अपनी माँ के साथ जब भी वह बाहर कहीं भी जाता है तो सब मर्दों की ेंखें उस्सकी माँ पर और उस पर रहते है और उस्सको बहोत मज़ा अत है के सब समझते हैं के वह उस्सकी गर्लफ्रेंड है या सिस्टर है…… और उस्सको बहोत चाह लगता है जब दूसरे मर्द उस्सकी मम्मी को सेक्सी नज़रों से देखते hein…Sarjoo मैं hi मैं सोचता रहता है के वह लोग उस्सकी मम्मी की जिस्म को अंदर देखने की कोशिश करते हैं और सरजू इस बात से खुश होता है के उस्सको वह मौका नसीब होता है मगर सब मर्दों को नहीं…. वह अपने आप पर उस वक़्त बहोत गर्व महसूस करता है के जिस सेक्सी लेडी को देख कर सब मुठ मारते हैं वह उसस्के बगल में साथ साथ रहती है…..

कैसे भी कर के पायल कुछ देर बाद घर से निकली फार्मेसी जाने के लिए. वैसे अक्सर जब वह बाहर जाती है तो ससुर जी उसस्के साथ जाते हैं….. गैलेंट तो ठहरा वह भी अक्सर गलियों में चलते वटक पायल की कमर पर हाथ फेरते चलता है जब गली सुनसान हो तो… और बस में तो जब सीट एक साथ मिलता हो तो रास्ते भर पायल की जाँघों पर hi ससुर के हाथ रहते हैं….. पायल भी एन्जॉय करती है ससुर के साथ बाहर जाना….. तो जब आज जाने के लिए तैयार होक निकली तो सोचा के बूढ़ा साथ चलेगा मगर बूढ़ा ने कहा के आज वह नहीं आ रहा है उसस्के साथ….. तो पायल अकेली चली गयी….. अब सरजू का दादा क्यों नहीं गया यह तो ज़ाहिर है के वह सरजू से सभी बातों का खुलासा लेना चाहता था क्यूंकि उस्सको शक था के सरजू ने उस से झूट बोलै था सुबह को.

पायल के जाने के कुछ देर बाद hi दादू जी सरजू के कमरे में ए. सरजू भी एक्सपेक्ट कर रहा था के दादू उस से फिर बात करने ज़रूर आएगा. तो दादू को कमरे के अंदर एते hi सरजू ने कहा, “चाह हुवा दादू के आप आगये, मैं आप से कुछ कहना चाहता हूँ.” दादू ने मुस्कुराते हुवे कहा, “पता है बीटा के तुम ने सुबह को मुझ से झूट कहा और उम्मीद है के अब सब सच सच बताओगे मुझे.” दादू बिस्तर के बगल में बैठा सरजू के पास और कहा, “देख सरजू तू अब मर्द बन रहा है, और हम दोनों के बीच मर्दों वाली बातें हो चुकी है, हम दोनों को अच्छी तरह पता है के तेरी मम्मी कितनी हॉट और जवान सेक्सी है, और तुमको मेरे और उस के बारे की तालूकात का सब पता है बचपन से hi, तुम ने सब देखा हुवा है तो इस से तेरे लिए बहोत आसान होना चाहिए सभी बातों को मुझे बताना. क्यों छुपता है रे? मुझको कितनी ख़ुशी और सुकून मिलेगा सब जानकार तू नहीं समझ सकता…. मेरे लिए किआ एक्ससिटेमेंट होगा, कितनी बरी पुश उप होगा सेक्स के लिए तू तब समझेगा जब तू मेरे उम्र का होवेगा….. और हम दोनों ने तो तय किया था के तुम मुझे सब चुप कर देखने भी डोज, मगर तू तो कहने से घबरा रहा है तो देखने कैसे और कब देगा मुझको रे Sarjoo?”Sarjoo ने मुस्कुराते हुवे दादा जी के बातों को सुना और कहा, “अरे दादा जी मैं बीमार विमार कुछ नहीं हूँ! यह सब बहाना है कल रात को मैं ने काम तमाम करदी इसी लिए आज दिन भर मम्मी के साथ रहने को मैं किया तो घर में rehgaya….bahot मज़ा आया दादू आप ठीक कहते थे मम्मी ने तो मुझे सब कुछ करने दिया और उस ने भी खूब एन्जॉय की…. रात को दो बार किया दादू बहोत मज़ा आया!!” बूढ़े की ेंखों में वह ख़ुशी और एक्ससिटेमेंट दिख रहा था के उस्सने सरजू के हाथों को ज़ोर से पाकर कर कहा, “अरे वह रे पुत्र, अब मुझको डिटेल्स में बता, शुरुवात से बता नाह, कैसे किया, किआ वह एक hi झटके में मान गयी…. किआ हुवा कैसे हुवा बता नाह रे!!” सरजू थोड़ा सा शर्माता हुवा बोलै, “दादू कैसे सब डिटेल्स में बोलूं आप को आप समझ जाईये नाह!!” दादू ने कहा , “अरे सब नहीं मुझको बता शुरुवात कैसे हुवा, कब तुम ने उस्सको चुवा, कब उस्सकी चूचियों को दबाया, कब उन् को चूसा, कब उस्सकी जाँघों को छाता, किआ उस्सने सब करने दिया बोल न रे सरजू मैं उतावला हूँ सब जान्ने को… मेरे लिए यह एक बहोत बड़ी बात बोल न रे…..”

सरजू ने धीरे धीरे सभी बातें बताई दादा को….. दादा अपने लुंड को बार बार अपने पंत में सीधा करते हुवे बार बार सरजू को रोक रोक कर और ज़्यादा पूछता रहा के, «उस्सने मुस्कुराया या कुछ खफा सी थी, उस्सने यह किया, उस ने वह किया, उस ने तुझको यहाँ चुम्मा, उस ने तेरे लुंड को सहलाया, किआ तुम ने उस्सको पहले चूसा या उस ने तेरे लुंड को पहले अपने मुंह में लिया…. उस्सकी निप्पल हार्ड हो गयी थी ? किआ तुम ने नोटिस किया के वह थार थार कम्प रही थी ? किआ उस ने तेरे जीभ को अपने मुंह में खूब लेकर चूसा?.....” ऐसे ऐसे सवाल कर रहे थे दादू के सरजू का मैं भर गया और दादू से कहा, «अब मैं ने सब बता दिया न दादू अब कितना पूछोगे ?»

अब दोनों दादा पोता में तय हुवा के कब और कैसे सरजू अपने दादा को कमरे में माँ को छोड़ते हुवे देखने देगा बग़ैर पायल को जाने. दादा ने पुछा किआ आज दिन में भी करेगा अपने माँ के साथ. तो सरजू ने कहा के इसी लिए तो वह स्कूल नहीं गया है नाह! तो जब दादा ने दिन में hi देखने को सोचा तो ठीक नहीं लगा क्यों के पायल को पता चल सकती है… और सरजू ने दादा से यह भी कहा के कभी भी जब वह अपने माँ के साथ कमरे में बांध हो तो उस्सको डिस्टर्ब नहीं करने का. दादा जी फुल एग्री हुवा इस बात पर. बात यह भी हुवी के जैसे सरजू अक्सर दादा को उस्सकी माँ को छोड़ते हुवे देखा है बचपन से वैसे hi दादा को भी बहोत मैं कर रहा है उस्सको अपनी माँ को छोड़ते हुवे देखने को. सरजू ने यह भी पुछा दादा से के वह बताएं के उस ने कब और कैसे उस्सकी ंयममय को छोड़ा शुरू किया और किआ वह तब भी राज़ी थी उस के साथ करने को…. तो दादा ने सरजू को बताया, “अरे वह तो तेरे पैदा होने से पहले hi मैं ने उस्सको छोड़ दिया था रे…. वह तो बहोत गरम थी और किआ चीज़ थी, जैसे के एक नयी फूल खिला है हमारे आँगन में…..” सरजू ने कहा काश उस वक़्त मैं ने मम्मी को देखा hota…papa ने उस्सको 14 साल की उज्मार में hi छोड़ दिया था नाह दादू? काश मैं पापा होता उस वक़्त!!” दादू ने कहा, “ अरे एहि बात तो मैं ने तेरे मम्मी से कहा था के काश मैं तेरा बाप होता और उस्सको 14 साल की उम्र में उस्सकी सील तोड़ी होती!! वह कितना मज़ा अत!! तुम्हारे और मेरे खयालात कितने मिलते हैं रे सरजू, तू बिल्कुल मुझपर गया है रे बदमाश, शैतान कहीं का!” सरजू ने कहा, “हाहाहा, मम्मी भी एहि कहती है दादू के मैं आप पर hi गया hoon!hehehe”

दादू ने यह भी कहा, “मगर अब अगर तुम हर रात को अपनी मम्मी को छोड़ने लगा तब तो मेरा रात में आना बिल्कुल बांध होजाएगा किआ?” सरजू ने कहा, “अरे नहीं दादू मैं भी तो आप को मम्मी के साथ एन्जॉय करते हुवे देखना पसंद करता हूँ….. तो आप फ़िक्र न करें जिस रात को मैं चाहूंगा के आप ायें तो आप से पहले hi कह दिया करूँगा, उस रात को मैं अपने बीएड पर सोऊंगा तो आप अजना!” दादा बहोत खुश हुवा. और तय यह हुवा के आज रात को hi सरजू दादा के लिए रूम का कर्मा खोल देगा और अलमारी का दरवाज़ा भी ताके दादा रात को कमरे में घुस कर उस्सको अपनी मम्मी को छोड़ते हुवे देख सके….. सब प्लान अछि तरह से बनाया गया, के बाद में जब करने के बाद पायल टॉयलेट जाएगी तब दादू को चुपके से सरजू बाहर वापस निकलने देगा….. टाइम भी फिक्स किया गया के ठीक रात के ग्यारह बजे सब शुरू होगा…… सरजू ने सब प्लान बनाया अपने दादू से मिलकर के कब और कैसे सब प्लान के मुताबिक किया जाएगा……..

उधर पायल मोहल्ले के दुकानों में घूम रही थी इधर उधर और तमान मर्दों की नज़र उस पर थे…. वह एक खूब सूरत पिली साड़ी में थी और ब्लाउज अध् नाँघि थी कुछ क्लासेस पीठ पर बंधे हुवे…. उस्सकी चाल से उस्सकी गांड का हिलना डोलना तो मर्दों के लुंड का नस तोड़ रहे थे और पायल बलखाती चली जा रही थी इस दूकान से उस दूकान……

तो बे कॉन्टिनोएड……………. (3400 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस वर्ड्स)
 
वेलकम बीआरओ एंड थैंक्स फॉर जोइनिंग एंड ऍम होनोरेड तो हैवे योर फर्स्ट पोस्ट ों माय थ्रेड.

गोत योर पं तू. हैप्पी तहत यू जोइनेड माय डिअर. ी वास् मिसिंग यू तू एंड मिसिंग मान्य इतर फ्रेंड्स तू.

िफ़ यू के ैक्रोस बंगाली भाई एंड ब्रेगो बीआरओ, एंड खेमुंच उन् लोगों को भी लीक्ड देना यारा

बे थे मोस्ट वेलकम दोस्त :हुग: :लव:
 
ुपड़तै 97

सरजू बेसब्री से अपनी मम्मी का इंतज़ार कर रहा था अपने बीएड पर. काफी देर हो चुकी थी और वह वापस नहीं आयी थी. सरजू बेचैन था और पायल को सोच सोच कर उस्का लुंड मचल रहा था. रात की सभी उन् लम्हों को सोच रहा था कैसे कैसे उस ने किआ किआ किया था अपने मम्मी के साथ और सोच रहा था यह बेहतर कर सकता था या वह ज़्यादा कर सकता था, इधर जल्दबाज़ी की वह ठीक नहीं kiya…ab सब सुधारना है…… फिर सोचने लगा के अब दादा जी को भी दिखवाना है के कैसे वह अपने मम्मी के साथ सेक्स करेगा…. यह सोचकर के उस्का दादा उस्सको देख रहा है एक एक्ससिटेमेंट और भी बाहर जाता है उसस्के अंदर…..

पायल तक़रीबन बारह बजे घर वापस आयी. सरजू बहोत नाराज़ हुवा उस से और सवाल पर सवाल करता गया के कहाँ थी अब तक. पायल ने समझाया के रास्ते में एक एक्सीडेंट हो गया था वापस एते वक़्त तो जिस बस में वह थी उस बस को आगे बाहरणा नामुमकिन था जब तक के एक्सीडेंट हुवे व्हीकल्स को हटाया नहीं गया. तक़रीबन 2 घंटे लगे रास्ते को साफ़ होने में नहीं तो वह दो घंटे पहले hi घर आजाती. मगर सरजू कुछ और hi सोच रहा था, उसस्के मैं में अब शक पैदा होने लगा अपनी मम्मी को लेकर. वह सोच रहा था के किसी दूसरे आदमी के साथ उस्सकी मूमी मौज मस्ती कर रही होगी…… अब जैसे के उसस्के दोस्त लोग अक्सर कहा करते हैं के अगर उन् लोगों को पायल मिली तो ज़रूर छोड़ेंगे उस्सको, तो सरजू के दिमाग़ में वैसी hi बात चल रही थी कहीं अगर उनके किसी दोस्त ने भी स्कूल बंक किया हो और घूम रहे हो टाउन में और उस्सकी माँ से मुलाकात हो गयी हो और वह पायल को लेकर कहीं एन्जॉय करने चला गया हो तो!! ऐसे ऐसे खयालात आरहे थे सरजू के दिमाग़ में….. वह अपनी मम्मी से जल रहा था……. घर के मर्दों के साथ उस्सकी मम्मी शारीरिक सम्बन्ध रखें इस से उस्सको कोई प्रॉब्लम नहीं था, मगर जब वह किसी ग़ैर को अपने मम्मी के साथ सोचता था तो उस्सको तकलीफ होती थी….. वह चाहता था के उस्सकी मम्मी घर के लिए रहे बस!

खैर, पायल ने उस्सको मनाया अपने प्यार से दुलार कर कर के! अब सरजू का ग़ुस्सा जाइज़ भी था क्यों के वह स्कूल नहीं गया अपने मम्मी के साथ दिन बिताने के लिए मगर आधा दिन तो मम्मी बाहर रही.

खैर, लंच करने के बाद दोनों माँ बीटा कमरे में फिर अकेले हुवे, और शाम तक साथ गुज़ारना था. दादा और दादी एक बार उस्सको देखने को ए और चुपके से दादा ने इशारे से पुछा के किआ अभी छोड़ेगा, तो सरजू ने फुस्फुसाते दादा से कहा, “अब तुम लोग इस कमरे से निकलोगे तब नाह करूँगा!” तो दादा जी हंस्कार अपनी पत्नी से कहा, “चलो जी इनको आराम करने दो, पायल भी ठक्की है आधे दिन तक बाजार में फंस गयी थी इस्को भी आराम करने दो, चलो चलते हैं.”

तो उसस्के बाद दोनों माँ बीटा कमरे में अकेले हुवे और पायल ने दरवाज़े की लॉक लगायी और बीएड पर गयी अपने सरजू के पास. सरजू बीएड के लेफ्ट साइड में था और पायल राइट साइड पे, तो उस्सने सरजू के बगल में लेथ कर अपने बाज़ू को सरजू के सर के नीचे करके उसस्के गले को अपने दाएं बाँहों में लेकर उस्सको अपने छाती से लगाया और तुरंत सरजू ने अपना मुंह अपनी माँ की चूचियों पर कर दिया और धीरे धीरे अपने जीभ से चूचियों के ऊपरी हिस्सों को चाटने लगा…… पायल को एक सुकून सी महसूस हुवी जब सरजू के होंठ और जीभ उस्सकी जिस्म पर पारी और एक इससष निकली पायल के हलक से….. फिर सरजू ने कहा, “मम्मी तुम इस कपडे को बदल दो प्लीज.” उस वक़्त पायल ने एक ड्रेस पहना हुवा था तो टाइट थी ुसस्पर और चूचियां एकदम फॉर्म में दिख रहे थे क्लीवेज साफ़ दिख रहे थे क्यों के लौ कट नैक था.

पायल ने कहा, “अरे इस वक़्त निघ्त्य तो नहीं पेहेन सकती मैं, अगर किसी ने दरवाज़ा खटखटाया तो जल्दी से उठकर खोलना पड़ेगा और निघ्त्य को बदलने में वक़्त लगेगा….” सरजू बोलै, “नहीं मम्मी, निघ्त्य नहीं तुम अपने वह ब्लू वाला स्कर्ट और सफ़ेद वाला ब्लाउज पहेँलो, उस में एक दम यंग गर्लफ्रेंड लगती हो, वैसे अब भी अछि hi दखती हो बल्कि हमेशा यंग और अछि दिखती हो hi मगर उस ड्रेस में लगता है के तुम एक कॉलेज की यूनिफार्म में हो…..” पायल हंस कर बोली, “कमाल है तुम्हारे और तेरे दादा के टास्ते की! वह भी कहता है के उस में मैं एक स्कूल गर्ल दिखती हूँ!” यह कहकर पायल ड्रेस बदल चली गयी अलमारी के पिछवाड़े में.

और जब वापस आयी तो वह किआ बात थी उस ड्रेस की, एक ड्रेस एक जिस्म की पूरी नक्शा बदल देती है, रूप और रंग निखार गयी थी पायल की उस two-piece में. सच में बिल्कुल एक स्कूल गर्ल दिखती थी और लगता था के एक कॉलेज की यूनिफार्म में थी वह. उस्सको देखते hi सरजू अपने लुंड को सहलाने लगा जो मचल रहा था एक दम से…… वह स्कर्ट उस्सकी जाँघों को नहीं ढँक रही थी, मोठे, उभरे गोर जांघ ेंखों के सामने थे और सरजू के मुंह से लार टपक पड़े….. ऊपर ब्लाउज के दो बटन्स खुले हुवे थे जिस में से ब्रा की स्ट्रैप्स और कप दिख रहे थे और बूब्स के वह ज़्यादा सफ़ेद, गोर रंग जो ज़्यादा तर ढके रहते हैं उन् हिस्सों को देखते hi किसी का भी लुंड उठ जाये…… सरजू ने अपने बाँहों को खोला और अपनी मम्मी को उन् बाँहों में इन्विते किया, और पायल एक अनोखी छोटी लड़की की ऐडा में अपने bête के बाँहों में गयी कुछ नखरें करते हुवे…… सरजू ने तुरंत उस्सको बाँहों में लेकर गालों को किश करते हुवे धीरे धीरे अपने होंठों को गालों से फेरते हुवे गर्दन तक गया और आहिस्ते आहिस्ते गले से निचे के तरफ चूचियों तक चूमता गया अपनी माँ को… पायल उस वक़्त कसमसाती अपने मुठी में सरजू के सर के बाल को कसके जाकर रही थी अपनी ेंखों को छठ के तरफ नशीले ढंग से देखते हुवे…..

पायल ने भी अपने हाथ को आहिस्ते आहिस्ते सरजू के छाती पर किया और वहां से धीरे धीरे उस्सकी हाथ निचे सरजू के लुंड के तरफ बहरति गयी और सरजू ने अपने माँ की चूचियों पर हलके से अपने डेंटन को गिराया और पायल ने एक छोटी सी चीख दिया जिस से सरजू का मज़ा और भी बढ़ गया और ज़ोर से अपने मम्मी को दोनों बाज़ुओं में जाकर लिया और उस्सको अपने ऊपर खींच लिया…. अब सरजू बीएड पर अपने पीठ पर लेता था और पायल उसस्के ठीक ऊपर पुरे जिस्म पर लेती थी और उस का सर ठीक सरजू के सर तक थी तो दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, ेंखों ेंखों में…. पायल के ज़ुल्फ़ें सरजू के चेहरे पर आ रहे थे और खुद पायल उस्सको हर वक़्त हत्ता रही थी सरजू के ेंखों में मुस्कुराते हुवे देखते……. पायल के दोनों जांघ ठीक सरजू के जाँघों पर थे, और सरजू ने अपनी मम्मी की जाँघों को दोनों तरफ किया और उसस्के बाद पायल की छूट ठीक सरजू के लुंड पर पर गए मगर दोनों कपडे के अंदर थे उस वक़्त…… बहोत हौले हौले एक्शन्स चल रहे थे…..

पायल तो लुत्फ़ उठा रही थी उस इरोटिक मोमेंट को के अपने जवान bête के ऊपर लेती हुवी थी और वह तो उस वक़्त सरजू के ेंखों में कुछ तलाश रही थी हालां के उस्सको मालूम था के सरजू का तना हुवा लुंड उस्सकी भीगी छूट पर रागढ रहा था….. सरजू भी उस वक़्त अपनी मम्मी की ेंखों में hi देख रहा था बिना कुछ कहे, कोई भी बात नहीं कर रहे थे सिर्फ उन् दोनों के सेंसें की चलने की आवाज़ सुनाई दे रही थी, तेज़ धड़कन, ेंखों का मिलना, मुंह से सेंसों की गर्मी एक दूसरे के चेरे को गर्म कर रहे थे और जिस्म की गर्मी भी एक दूसरे को जैसे और गरम किये जा रहे थे……. कुछ देर तक दोनों वैसे hi लेते रहे एक दूसरे को देखते, निहारते और उस वक़्त दोनों के दिमाग़ में किआ चल रहा था किसी को नहीं पता… देखने से तो लगता था के एक यंग कपल इन लव है जो अभी अभी सुहाग रात के बिस्तर पर इश्क फरमाने वाले हैं…….

तो बे कॉन्टिनोएड…………..
 
Back
Top