The Story of a Bodyguard (by Naree) - Page 69 - SexBaba
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The Story of a Bodyguard (by Naree)

Episode 24ा,

इधर राधे, अब तेल की कटोरी को साइड मेज पर रख के ज़बी की कमीज को ऊपर जैसे जैसे करने लगा?? वैसे वैसे ज़बी के बदन के सारे रोंगटे खड़े होने लगे क्युकी राधे की ऊँगली उसके नग्गे बदन को छू रही थी, सायद आज पहली बार ज़बी के बदन को कोई छू रहा था जिसकी वजह से उसके बदन में एक्ससिटेमेंट पल पल बढ़ रही थी, मन में अजीब अजीब से ख्याल आने लगते है, दिल में कुछ कुछ होने लगते है होंठ सूखने लगते है, इधर राधे, जैसे कमीज को उसके चुके तक पहुँचता है, वैसे hi ज़बी अचानक अपने कमीज को पकड़ लेती है, क्युकी ज़बी की कमीज और ऊपर होती तो उसकी बिना ब्रा के चुके (बूब्स) एक दम नग्गे हो जाते, इस लिए ज़बी ने अपनी कमीज पकड़ ली, इधर राधे, भी जबरदस्ती नहीं किया और ऊपर उठाने को, वही राधे, अब सलवार निचे करने के लिए उसकी पतली कमर जो करीब 24 से 26 इंच की थी वह अपने खुरदरे

काले और बड़े बड़े हांथो की मोती ऊँगली को लगा के पहले थोड़ा सहलाया उसके बाद, ज़बी बेटी, मेरे हाँथ तुझे अहसास हो तो रहे है की नहीं, ज़बी, धीरे आवाज़ में है साहेब, इसके आगे कुछ नहीं बोलती, इधर मैं, अब सलवार निचे कर रहा हूँ, इतना कह के माय उसकी इलास्टिक वाली जगह पर अपनी ऊँगली घुसा देता हूँ और जैसे hi मेरे उँगलियों का अहसास उसे हुआ वैसे hi ज़बी, अपनी गांड हलके से उठती है उसके ऐसा करते देख के अरे ज़बी बेटी अभी तो तेरी कमर में थोड़ा मूवमेंट हुआ, लगता है ज्यादा छोट नहीं आई है? बस थोड़ी मालिश करना होगा उसके बाद देखना तू दौड़ने लगेगी, ये कह के राधे सलवार को निचे करने लगा आहिस्ते आहिस्ते से, उधर ज़बी, के बदन में कुछ अलग hi एक्ससिटेमेंट अब पैदा हो रही थी जो आज से पहले उसने कभी अहसास नहीं किया था, क्यों की ज़बी कुमारी लड़की थी उसे बदन का इसरा समझ नहीं आ रहा था, की

उसका बदन एक मर्द और एक लम्बे मोठे ताजे लुंड की मांग कर रहा है जो उसके पाक साफ़ सेक्सी बदन को ठंडा कर सके , इधर राधे, सलवार को उसकी गांड के दोनों भागो के बिच की लकीर के निचे जैसे hi करने वाला होता है वैसे hi ज़बी, झट से अपने हांथो की मदत से अपनी सलवार को कास के पकड़ लेती है उसे अहसास हो गया था की अगर सलवार और निचे हुई तो उसकी गांड पूरी तरह से नग्गी हो सकती है, इधर, राधे, ज़बी को ऐसे अचानक अपने सलवार को पकड़ने से वह रुक जाता है और बिना कुछ बोले तेल की कटोरी उठा के एक बार उसके सलवार जो गांड को दोनों लकीर जो आधा नग्गी हो चुकी थी उस पर थोड़ा गरम तेल गिरा देता है और राधे के ऐसा करते hi ज़बी, साहेब थोड़ा और निचे वह दर्द है, मैं, बेटी तेरी सलवार गन्दी हो जायगी अगर और निचे तेल गिराया तो, ज़बी, कुछ सोच कर अपनी सलवार खुद hi थोड़ी और निचे

करते हुए अब ठीक है न साहेब, मैं, मन में (साली ,. तू तो बहुत hi नादाँ है? एक सीकरी के सामने खुद अपना सीकर करवाना चाहती है) यह सोचने के बाद, नहीं नहीं बेटी अगर दर्द को निकलना है तो सलवार को अपनी गांड से पूरी तरह nikal-na होगा नहीं तो सलवार में पूरा तेल लग जायगा, मेरे मुँह से गांड शब्द सुन कर ज़बी के बदन में एक अजीब एक्ससिटेमेंट का संचार सुरु हो जाता है, लेकिन कहती कुछ नहीं क्युकी आज से पहले ज़बी से कोई ऐसी गन्दी बात नहीं की थी, भले hi ज़बी घर में काम करती थी लेकिन जिस घर में वह पहले काम करती थी? वह वह अकेली नहीं करती थी, वह अपने अम्मी के साथ काम करती थी, लेकिन जब से उसकी अम्मी बीमार हुई? तब से उसकी अम्मी घर पर hi रहती थी, इस लिए वह अपने बेटी को किसी के घर पर अकेले कही काम नहीं करने जाने देती, लेकिन गरीबी के कारन आखिर कार उसकी अम्मी ने अनुमति दे दी

अकेले घर में काम करने को, लेकिन उसकी अम्मी ने maid's एजेंसी में साफ़ बोल दी थी की जो शादी सुदा घर हो वही भेजना उसके बेटी को, क्युकी उसकी अम्मी को यह डर था की कही कोई आदमी उसके बेटी को नापाक (छोड़) न कर दे, इधर ज़बी, शर्म से अपनी सलवार पकडे रहती है, वही मैं, अब अपने झांसे में लेने के लिए, बेटी क्या हुआ? तू कुछ बोली नहीं, क्या मैं अब तेरी गांड नग्गी कर सकता हूँ? नहीं तो तेरी सलवार गन्दी हो जायगी वैसे भी अब मेरे से क्या शर्माना माय तो अब 40 साल का हो चूका हूँ, तू तो मेरी बेटी या छोटी बहन क सामान है, इस लिए तू डर मत मेरे से मेरी बात सुन कर ज़बी का डर और शर्म थोड़ा काम तो होता है, लेकिन पहली बार किसी मर्द के सामने अपना न्नग्गा बदन कर देना उसके लिए बहुत बड़ी बात थी, वैसे भी इन मज़हबी ,. लोग अपना चेहरा तक जल्दी से किसी को नहीं दिखती तो नग्गा बदन किसी के सामने परोश्ना

बहुत बड़ी बात होती है, उधर किसी गैर मर्द के मुँह से गंदे शब्द सुनना ज़बी के मन में अंदर hi अंदर एक अजीब सी एक्ससिटेमेंट भर रहा था, इधर राधे अपने काम में लगा हुआ था और जहा तेल गिराया था वह अपने बड़े और खुरदरे हाँथ रख के हलके हलके से अब चलने लगता है और सहलाने भी लगता हूँ जिससे ज़बी जैसी मजहबी ,. को वो गरम भी कर सके (राधे पका हुआ मर्द था उसने अब तक कई औरतो के साथ अपनी मीठी मीठी बातो में फसा के सडके किया था और वह अपने मकसद में कामयाब हो कर बहुतो को पेल चूका था तो फिर ये मज़हबी ,. उसके लिए किस खेत की मूली थी), उधर राधे, के हांथो की हलकी चुभन और सहलाने से ज़बी की हलकी सिसकारियां निकल जाती है आह्हः.. अम्मीईई की और सायद राधे की हलकी हांथो की चुभन, अछि लगती है, इस लिए बिना कोई जवाब दिए वह अपने सलवार पर से हाँथ को हटा लेती है,
 
इधर मैं, उसके ऐसा करना देख के मन hi मन में खुस होता हूँ और खुद से बाते करते हुए (साली बहुत मज़हबी बन रही थी अब क्या हुआ तेरा, मैने तेरे जैसी कई लड़की और औरतो के साथ खेल खेला है), इधर ज़बी का हाँथ हट्टे hi मैं, मौका देख के उसकी सलवार की इलास्टिक में अपनी तेल से सनी ऊँगली लगा कर उसे धीरे धीरे निचे खींचने लगा, वैसे तो बैडरूम में अँधेरा था इस लिए मुझे अचे से उसकी स्किन नहीं दिख रही थी, लेकिन ज़बी का बदन दूध जैसा गोरा होने की वजह से उस डार्क बैडरूम में भी हलकी झलक रही थी, वही सलवार जैसे जैसे निचे आ रही थी वैसे वैसे गांड की दरार दिखने लगती है या यह कह लो बस अनुमान लगा प् रहा था, इधर ज़बी, की धड़कने तेज हो रही थी, सांसे फूल सी रही थी, इधर राधे को कोई जल्दी नहीं थी वह इस मौके को भुलाने के लिए ज़बी के साथ जैसे खेल रहा था और वह जनता था

अछि तरह की यह ,. मजहबी है और उम्र भी सिर्फ 18 साल की वह भी एक दम गरीब, सायद इसने ऐसा कभी किसी के साथ अनुभव भी नहीं लिया होगा इस लिए इसके साथ जोर जबरदस्ती की तो सायद उल्टा हो सकता है साथ hi साथ अगर किसी को राधे की हरकत को बता दी तो पिया का नाम ख़राब हो सकता इस लिए राधे बड़े hi शातिर दिमाग से ज़बी के साथ खेल रहा था, इधर राधे, अब उसकी पूरी गांड पर से सलवार निचे खींच देता है, उसका अहसास ज़बी को भी होता है लेकिन पता नहीं क्यों? वह राधे से कुछ बोलती नहीं, न hi उसका कोई विरोध करती है, वही राधे भी, ज़बी को कुछ बोलता न देख के अब समझ गया की, इस ,. को एक मर्द का अहसास हो चूका है, अब छह कर भी वो खुद को रोक नहीं पा रही है मज़ा लेने से, या फिर डॉक्टर से इंजेक्शन का डर से, जो भी हो यहाँ राधे फायदा था उसके विरोध न करने से,

ज़बी फिगर 34, 24, 36,

इधर मैं, अब देर न करते हुए कटोरी से ढेर सारा तेल हांथो में निकल के अब उसके 36 साइज के बड़े गोल गोल एक दम फुटबॉल जैसे दिखने वाला गांड के दोनों भागो पर लगा के अपने कठोर और बड़े बड़े दोनों हथेलियों से हलके हलके से सहलाने लगता हु, साथ hi कुछ तेल उसकी एक दम गोरी पीठ और गांड के थोड़ा ऊपर जहा एक दम पतली कमर जो करीब 24 इंच की होगी वह गिरा के अपने दोनों हांथो से साथ साथ मोती उँगलियों से सहलाने लगता हूँ, वही ज़बी, को पल पल अजीब सा अहसास हो रहा था, जो आज से पहले उसने अपने लाइफ में भी फील नहीं की थी, राधे के उँगलियों के टच से, वही ज़बी को उस टच से अब अहसास हुआ की राधे की ऊँगली कितनी सख्त है कितनी खुरदरी है, इधर मैं, ज़बी को कुछ बोलता न देख के, धीरे और सेक्सी आवाज़ में, बेटी कैसा लग रहा है तू कुछ बता hi भी नहीं रही है की कहा कहा तुझे दर्द हो रहा है,
 
ज़बी, मेरी आवाज़

ज़बी को डॉक्टर का डर दिखाया,

सुन के जैसे अपने खवाबो से बहार ै और वह धीरे आवाज़ में.. साहेब बताई तो थी की मुझे कहा कहा दर्द हो रहा है. मैं, अरे बेटी जैसे तू बाथरूम में गिरी थी उस हिसाब से तेरी कमर और पीठ में तो दर्द हो सकता है लेकिन तेरे बदन के और हिस्से में भी पहुंच सकता और दर्द का सही इलाज नहीं किया तो यह दर्द नासूर बन सकता है और सायद बाद में तुझे डॉक्टर के पास भी ले जाना पड़े, ुर फिर तुझे वह लोग दर्द को चेक करने के बहाने पहले बेहोश करेंगे उसके बाद तेरे साथ क्या क्या करेंगे इसका तुझे पता भी नहीं चल पाएगा इस लिए तुझे मुझे बताना होगा कहा कहा दर्द हो रहा है जिसका इलाज माय अचे से कर सकू समझी?, ज़बी, जो नासमझ थी उसे राधे की इरादों के बारे में कोई इल्म नहीं था की राधे अपनी मीठी मीठी बात कर के उसके साथ क्या क्या कर सकता है, वही ज़बी, राधे के डरने के बाद साहेब सच में दर्द

का इलाज नहीं किया गया तो बाद में और बुरा हो सकता है, मैं, है बेटी इसी लिए तो पूछ रहा हूँ, वैसे जहा तक मुझे लगता है की ये दर्द और कही भी हो सकती है, लेकिन कही तू मेरे चुने और मालिश करने से गुस्सा हो गई तो?? इस लिए मैं अपना हांथो और उँगलियों को उस दर्द तक नहीं ले जा प् रहा हूँ, ज़बी, मन में (जब साहेब ने मेरे बदन को इतना छू hi लिया है तो अब्ब इनसे और क्या शर्माना वैसे भी मेरा बदन वह तो देख नहीं पा रहे होंगे इतना अंदर जो रूम में है ुर साहेब मुझे बेटी बेटी बोल रहे है, वैसे भी अगर इनकी नियत ख़राब होती तो जितनी देर में माय इनके सामने थी इतनी देर में तो यह मेरे साथ कुछ भी कर सकते थे, लेकिन इन्होने सिर्फ मेरी मदत की और बाथरूम से उठा के मैडम के आलिशान बिस्तर पर लेटाया, जहा मेरी जैसी गरीब कभी सपने में भी ऐसे मोठे गद्दे पर सोने के सिर्फ सपने देखती है, फिर माय ऐसे

इंसान पर भला कैसे शक कर सकती हु, साहेब नेक दिल मर्द है, वह सिर्फ और सिर्फ बस मेरी मदत hi तो कर रहे है फिर इतना सोचना क्यों? अब अपनी सहमति दे hi देती हु, लेकिन साहेब मेरी परमिशन मांग रहे है जहा जहा मेरा बदन में दर्द हो सकता है, वह वह वह अपने हांथो से मेरे नग्गे बदन पर मालिश करेंगे लेकिन मेरे धर्म में सिर्फ मेरा सौहार hi नग्गे बदन को छू सकता है), लेकिन फिर कुछ सोच कर फिर से अपने आप से बात करते हुए (वैसे भी अगर डॉक्टर के पास गई तो वह लोग भी मेरे बदन को छुएंगे, फिर अगर साहेब छू छू कर मेरा दर्द ख़तम कर देते है तो इसमें बुरा hi क्या है? वैसे भी साहेब एक डॉक्टर के पति है उन्हें भी सब कुछ आता होगा? वैसे भी डॉक्टर के पास गई तो वह लोग जैसे साहेब बोल रहे थे की मुझे बेहोश कर के मेरे साथ कुछ भी कर सकते है, यहाँ तो सिर्फ बड़े साहेब है

और वह मेरे से पूछ पूछ कर मेरा दर्द सही कर रहे है, ऐसा इंसान मुझे कही और क्या मिल सकता है इस दुनिया), ज़बी ऐसे सेक्स पर भरोसा करने की सोच रही थी जो पता नहीं कितनी औरतो के साथ ऐसे hi मीठी बाते कर कर के सडके किया उसके बाद अपने खूंखार लौड़े से उनकी छूट का भोसड़ा बना के रख दिया, उधर ज़बी, खुद के मन को मन लेती है ुर वह धीरे आवाज़ में, ठीक है साहेब आपको जहा जहा लगे की मेरा दर्द हो सकता है, आप वह वह मेरी मालिश कर सकते है, ज़बी की बातो सुन के मैं, मन में (ाहहए बस कुछ पल मेरी मज़हबी ,., आज तेरे बदन के दर्द का ऐसा इलाज़ करूँगा की तू बार बार अपने दर्द को मिटने के लिए मेरे पास दौड़ी चली आएगी मेरी रानी,), सोचने के बाद मैं, बेटी उसके लिए अपनी सलवार और कमीज पूरी तरह से उतरना होगा साथ hi साथ तुझे एक दम नग्गी होना पड़ेगा तभी?
 
मेरा हाँथ बिना रुकावट के तेरे बदन पर चल सकते है, वही जो मैने तेल बनाया है वो जहा जहा तेरा बदन का दर्द होगा वह पूरी तरह से खींच लेगा, ज़बी मेरी बात सुन कर फिर से सन्न रह जाती है पहले उसने सोचा था की सलवार और कमीज थोड़ा थोड़ा सरका कर साहेब मालिश कर देंगे लेकिन अब तो सलवार और सूट पूरी तरह से उतरने की बात हो रही थी, लेकिन ज़बी अब राधे के खुरदरे हाँथ जो अभी भी उसके कभी नग्गी पीठ तो कभी उसकी नग्गी गांड के आस पास घूम रहे थे उस वजह से ज़बी के बदन में गर्मी का अहसास हिलोरे मार रहा था, आज से पहले उसने अपने बदन में ऐसी हिलोरे कभी महसूस नहीं की थी, साथ hi उसकी कमर लॉक थी इस लिए वह छह कर भी बिस्तर पर से हिल नहीं प् रही और जब हिलने की कोशिश करती वैसे hi उसे काफी दर्द का सामना करना पड़ता, इधर फिर से ज़बी को कुछ बोलता न देख के..

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मैं, क्या हुआ बेटी कुछ जवाब नहीं दी? वैसे भी तू निचे से लगभग नग्गी hi हो चुकी है बस अब सूट उतरना बाकी है, ज़बी, राधे के हर बात को सुन के शर्म ुर एक्ससिटेमेंट में पल पल मरी जा रही थी, वही ज़बी, कुछ बोलने की हालत में बिलकुल नहीं थी क्युकी वह तो राधे के खुरदरे हाँथ जो कभी उसकी पीठ पर तो कभी उसकी नग्गी गांड के दोनों भागो पर चल रहे थे उसी से पागल हुई पड़ी थी, क्युकी आज किसी मर्द ने उसके बदन को पहली बार छुआ था और चुने भर से hi वह जैसे जन्नत में चली गई थी उसकी छूट इतनी पानी छोड़ रही थी जो आज से पहले कभी छोड़ी नहीं थी और ज़बी अपने बदन के अहसास की समझ नहीं प् रही थी की उसका बदन उससे क्या इसरा करवा रहा है, इधर मैं, ज़बी को खुद में खोया देख के जल्दी से बीएड के ऊपर जाता हूँ और ज़बी के दोनों पैरो के इर्द गिर्द पेअर रख के थोड़ा झुकता हूँ और उसकी सलवार जो उसके गांड के थोड़ा निचे थी?

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उसे पकड़ के एक झटके में खींचता हूँ जिसकी वजह से उसकी सलवार उसके पैरो से निकल जाती है, अब ज़बी निचे से एकदम नग्गी थी वही ज़बी को जब अहसास हुआ तब बहुत देर हो चूका था अब वो कुछ बोल भी नहीं पाती, क्यों की उसने पहले hi राधे को अपनी सहमति दे चुकी थी, इस लिए ज़बी पेट बल सिर्फ लेती रहती है वैसे भी उसकी कमर एक दम लॉक थी वह तो हिल भी नहीं प् रही थी, वही उसका दिल की धड़कन इस वक़्त काफी तेज चल रहा था बस यह सोच कर की साहेब अब उसके साथ आगे क्या करेंगे, इधर मैं, ज़बी के पैरो पर अपनी पतली लुंगी पहने हुए अपनी हलके से गांड टिका कर बैठ जाता हूँ ुर अपने दोनों हांथो से फिर से कटोरी से तेल ले कर उसकी जांघो पर लगता हु और जैसे hi हाँथ रखा वैसे hi ज़बी की मोती मोती जांघो का अहसास हुआ क्युकी रूम में अंदर था इस लिए मुझे ढंग से दिखाई नहीं दे रहा था,

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की ज़बी का जिस्म में कहा कहा और कितनी चर्बी भरी हुई है, बस अब उसके बदन को छू कर hi अनुमान लगा सकता था, वही जांघो को हलके हांथो से मसलते हुए मन में (अह्ह्ह क्या मोठे मोठे जांघ है साली ,. के? साली ,. ने सलवार इतने ढीले पहने हुए थे की मैने तो अनुमान hi नहीं लगा पाया था, वर्ण मेरा लुंड इसके मोठे मोठे जांघ देख कर कही पानी hi न छोड़ देता, वैसे भी यह ,. लोग तो मांस मछली खाने वाले लोग है तो यह स्वभाबिक है, की इन ,.यो के बदन में काफी मांस होगा और वही इनके बदन एक दम गरम होगा और सायद छूट भी काफी गरम होगी, अब बस यह गरम हो जाए उसके बाद इस ,. का वह हाल करूँगा की यह एक हफ्ते तक जब भी अपनी तंग फैला के चलेगी तब वह सिर्फ राधे के बारे में सोचे, वही हाल आज इसका माय करूँगा),
 
यह सोचने के बाद मैं, धीरे धीरे उसकी जांघो से अपनी मजबूत हांथो को गांड के बड़े बड़े उठान पर ले जाने लगता हूँ, अब ज़बी की गांड की साइज का अनुमान हो चूका था और ज़बी की उम्र के मुताबिक गांड की साइज काफी बड़ी लग रही थी, सायद 36 साइज की थी उफ्फ्फ इतनी बड़ी गांड तो शादी सुदा औरतो के भी नहीं होते, हैए यह सोचते हुए थोड़ा झुक के उसकी गांड के दोनों भागो को थोड़ा फैला की अपनी नाक को वह ले जा कर सूंघता हूँ और सूंघते हुए अपनी जुबान निकल कर जैसे hi उसकी गांड की सुराख़ पर रखा वैसे hi ज़बी को अपने सुराख़ पर किसी गीली चीज का अहसास हुआ और वह अपने हाँथ को जैसे hi गांड के पास की वैसे hi उसे समझ आ गया की ये साहेब का मुँह है और वह थोड़ा डर के आह्हः साहेब वह अपना मुँह क्यों लगा रहे है?? हटाइये वह से, ये कह के वह हिलने की कोशिश की लेकिन बस उसका सर hi हिल पता है बाकी सरीर वैसे hi सोया रहता है,

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वही मैं, अरे फ़िक्र मत कर बेटी यह सब माय तेरे दर्द को निकलने के लिए ट्रिक अपना रहा हूँ, वैसे इस ट्रिक को गांड चटाई कहते है, ज़बी, चीई यह कैसे गंदे अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल कर रहे है आप, प्लीज हटाइये वह से अपना मुँह उफ्फ्फ्फ़ आह्हः वह नापाक जगह होती है ूमम.. मैं, अपने दोनों हांथो को उसकी गांड के दोनों भागो को पकड़ के और फैलते हुए अपनी जुबान को उसकी गांड से ले कर उसकी छूट तक फिरते हुए, बेटी ऐसा करने से तेरे नसे जो बाथरूम में गिरने से डाब और जाम हो गई है जिसकी वजह से तेरी कमर लॉक हो चुकी है उसी का इलाज़ करने के लिए यह ट्रिक अपना रहा हूँ, यह कह के फिर से राधे अपनी गन्दी जुबान निकल कर उसकी गोरी गांड के चले को खुरदने लगता है जिसकी वजह से ज़बी, को थोड़ी गुदगुदी और मस्ती चढ़ने लगती है लेकिन खुद पर काबू पाते हुए, आह्हः साहेब यह कैसा इलाज़ आप कर रहे है..

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ऊम्मम.. आह्ह्ह्ह.. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है आठ.. प्लीज अपना मुँह हटाइये, मुझे बहुत गन्दा लग रहा है, यह कहते हुए वह अपनी मुँह को पिलो में घुसा के आहे भरने लगती है, इधर राधे आज कुमारी लड़की की कुमारी गांड का स्वाद चख रहा था वह भी पहली बार किसी ,. का तो इतनी आसानी से कैसे छोड़ देता, वही मैं, कुछ सेकंड और गांड की सुराख़ चाटने के बाद मुँह थोड़ा ऊपर करके, अरे बेटी मैं, एक डॉक्टर का पति हूँ, इस लिए मुझे पता है की इस तरह का दर्द का इलाज़ कैसे किया जाता है, वैसे मेरे ऐसे चाटने का सिर्फ एक मकसद है की तेरे बदन के गर्मी बढ़ाना, ताकि तेरे नसों में जो खून रुक चूका हुआ है वह तेज चलने लगे, मेरे इतना बोलने के बाद ज़बी, जो थोड़ा गुस्सा हुई थी वह अब संत हो जाती है, और वह अब समझ गई थी की राधे बस उसकी मदत कर रहा है,

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न की कोई गन्दी हरकत, इधर मैं, मन में एक और प्लान बना कर ज़बी को थोड़ा और डर दिखते हुए, फिर बेटी माय यह करू या सिर्फ मालिश करू? क्युकी तुझे मेरा ऐसा तेरी गांड चेतना गन्दा जो लग रहा है, वैसे बता दूँ तेल से ऊपर ऊपर का दर्द निकल सकता है? लेकिन अगर नसों में जमा खून रुका रहा तो तुझे ब्रान स्ट्रोक भी हो सकता है या फिर पैरालिसिस भी ा सकता है, यह सब सुनते hi ज़बी, घबराते हुए यह कौन कौन सा बीमारी बता रहे है साहेब क्या बस मेरे गिरने भर से इतनी बीमारी हो जायगी, इधर मैं, जो चाल माय चली थी, वह सही निशाने पर लगने के बाद, है क्यों नहीं, वैसे तू नहीं जानती एक छोटी सी छोट, इंसान अगर इग्नोर किया तो उसका बहुत बड़ा परिदम भुगतना पड़ता है, ज़बी, मेरे डरने से बहुत ज्यादा दर जाती है इधर मैं, बेटी मुझे माफ़ कर देना मैने बिना पूछे hi तेरी नग्गी बड़ी गांड की सुराख़ को छाता,
 
वैसे माय तेरी मदत hi कर रहा हूँ नहीं तो मेरा क्या फायदा की माय किसी की गन्दी चीज को छतु, मेरी बात सुन कर ज़बी शर्म से अपना मुँह पिलो में घुसा लेती है और वह अपने हाँथ को मेरे सर से हटा लेती है जैसे वह अपनी अनुमति दे रही हो की राधे जो कर रहे थे वह तुम करो, इधर मैं, उसके हाँथ हटते hi ज़बी से बेटी अगर अपने टैंगो को थोड़ा फैला सको तो थोड़ा ुर फैला, ज़बी, राधे की बातो को सुन के बिना कुछ बोले अपनी पूरी कोशिश करते हुए साहेब आह्हः मेरे से नहीं हो प् रहा है आप hi कर लो मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं, बेटी अगर माय कुछ बिना पूछे करता हूँ तो तू नाराज़ हो जाती है, ज़बी, क्या करू साहेब आज से पहले आप के अलावा किसी मर्द ने मेरे बदन को इस हालत में कभी किया नहीं, न hi छुआ, इस लिए मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है,

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यह सब, मैं, बेटी माय सिर्फ तेरी मदत करने की कोशिश कर रहा हूँ न की तेरे साथ कुछ गलत करने की, वैसे तू सोच जिस हालत में है मेरे सामने है अगर माय तेरे साथ चुदाई भी कर दूंगा तो तू कुछ नहीं कर पाएगी, लेकिन मैने तेरे साथ कुछ गलत किया क्या?, ज़बी, चुदाई शब्द सुन कर थोड़ा ा सहज होती है, लेकिन कुछ सोच कर, साहेब सच कहु तो आज से पहले माय किसी गैर मर्द के सामने कभी इस हालत में गई hi नहीं थी, ुर मेरी अम्मी जब बीमार हुई तो वह मुझे अकेले काम करने से मुझे रूक दिया, लेकिन घर की हालत ख़राब होने के बाद मजबूरन अम्मी को मुझे परमिशन देनी पड़ी, लेकिन जब आपके यहाँ मुझे काम मिला तो अम्मी को mad's एजेंसी वाली बोली की आप लोग बड़े आदमी के साथ साथ भले इंसान भी ुर आप लोग शादी सुदा भी, तब जा कर मुझे अम्मी ने यहाँ आने पर राज़ी हुई,

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मैं, तुम्हारी अम्मी ने सही किया तुम्हे अकेले कही काम नहीं करने दिया, माय जनता हूँ अकेले में तेरे साथ कुछ भी लोग कर सकते थे तू है hi इतनी खूबसूरत?, सच कहु तो अगर माध एजेंसी वाली लोग अगर ये न बताती की तू काम करने वाली नौकरानी है तो माय तुझे पहचान भी नहीं पता, क्युकी तू जितनी खूबसूरत है उससे किसी भी सूरत में नौकरानी तो बिलकुल नहीं लगती है, बल्कि तू तो मुझे किसी राजकुमारी से काम नहीं लगती सच में, मेरी बात पर ज़बी, शर्मा जाती है वैसे भी किस लड़की को अपनी खूबसूरत किसी आदमी से सुनाने में ाचा नहीं लगेगा, इधर लेट न करते हुए ज़बी, तेरे दर्द को नसों में जो खून का दौडान रुका है उसे जल्दी से सही करना होगा नहीं तो जितना लेट करूँगा उतनी hi प्रॉब्लम बढ़ती जायगी, यह सुन कर ज़बी, थोड़ा शरमाते और हकलाते हुए तट.. ठीक.. हह.. है स.. साहेब,
 
फाइनली अस्स लिकिंग,

यह सुनते hi अब बिना डरे उसकी गांड के सुराख़ पर अपनी जुबान लगा कर कुरेदने लगा और ज़बी, के मुँह से हलकी सिसकारियां निकलते हुए वह पिलो को अपनी मुट्ठी में कास पकड़ लेती है वही मैं, एक हाँथ को उसकी गोरी गोरी पीठ को हलके हांथो से सहलाते हुए उसकी पीठ के निचे धीरे धीरे ले जाने लगा लेकिन इस बार ज़बी कोई विरोध नहीं करती इधर दूसरा हाँथ उसकी कमर पर हलके से चमाट मरने लगा मेरे ऐसा करते hi ज़बी, के मुँह से आह्हः साहेब अब कुछ अहसास हो रहा है, नहीं तो पहले कुछ अहसास नहीं हो रहा था, इधर गांड की सुराख़ को बड़ी सिद्दत से छत्ते हुए रुक जाता हूँ और मुँह ऊपर करके, देखा मेरा इलाज़ और तुझे मैने कहा भी था न जितना तुझे गरम करूँगा उतना तेरी नसों की रुकी खून तेज दौड़ेगी और तू पहले जैसा हो जायगी, यह कह के अब मैं, फिर से गांड सुराख़ के चले को छत्ते हुए आह्हः क्या गंध छोड़ रही है?

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तेरी गांड मेरी मज़हबी ,. यह बात थोड़े तेज से कहा जिसे सुन के ज़बी, थोड़े गुस्से में यह क्या गन्दी बात बोल रहे हो आप, इधर मैं, अरे बेटी तेरा इलाज़ hi कर रहा हूँ, ज़बी, यह कैसा इलाज़ है पहले मेरी गन्दी जगह को छाते उसके बाद अब गन्दी अलफ़ाज़ बोल रहे है है?, मैं, अरे बेटी कुछ लड़किया गन्दी बाते सुन कर गरम होती है तो सोचा तेरे ऊपर आज़मा के देखता हूँ, ज़बी, मुझे ऐसी बाते अछि नहीं लगती जो मेरे धर्म को टारगेट करती हो, समझे आप, मैं, मन में (साली बस कुछ वक़्त और फिर माय जो कहूंगा वह तू करेगी?), इधर मेरा एक हाँथ उसके पीठ से होते हुए उसके चुके के साइड धीरे धीरे टच करने लगे तेल लगाने के बहाने, वही ज़बी, को अहसास तो हो रहा था लेकिन वह छह कर भी मन नहीं कर प् रही थी, क्युकी उसकी कमर लॉक थी इस लिए वह मूव hi नहीं कर प् रही थी,

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इधर मैं, अपनी जुबान को गांड के सुराख़ में जितना हो सके उतना अंदर करने की कोशिश कर रहा था, वही राधे की लुम्बी नाक ज़बी की दो बड़ी फुटबॉल के दरार में यहाँ वह फिलहाल रही थी, उधर Zabi,ko राधे की यह हरकत काफी गरम करती जा रही थी जिसकी वजह से वह अब हलकी हलकी सिसकारियां निकलती है आईईए.. अम्मीईई... ऊम्मम.. सशह्ह्ह्ह.. आह्ह्ह्ह.. नाहीईई.. की वही राधे उसकी सिसकारियां सुन के और भी ज्यादा खुस होता है ुर वह अपनी जुबान और जल्दी जल्दी चलने लगता है उसकी गांड की सुराख़ के ऊपर और ज़बी को, आज पहली बार किसी मर्द ने उसके बदन के साथ ऐसी हरकत कर रहा था जो उसे काफी गरम करती जा रही थी, इधर राधे गांड से होते हुए थोड़ा निचे उसकी बुर की और करने की कोशिश किया लेकिन उसकी इतनी मोती जांघ थी की मेरी जाम्बी जुबान वह तक नहीं पहुंच पाती ह इधर मेरी कोशिश नाकाम होते hi अब कुछ ट्रिक अपनाते हुए गांड चटाई छोड़ कर उठ जाता हूँ,
 
मेरा गीली जुबान अपनी गांड की सुराख़ पर जैसे hi रुका वैसे hi ज़बी अपना मुँह पिलो से निकल के मेरी और अपने सर को घुमा के देखते हुए साहेब हो गया क्या लेकिन मेरी कमर वैसी hi है? है थोड़ा अहसास अब हो रहा है, मैं, बेटी मैने अपनी पूरी कोशिश कर चूका लेकिन तेरे कमर और पीठ का लॉक नहीं खुला अब एक राष्ट बचा है, ज़बी, उत्सुक बस पूछ बैठी, अब क्या बचा है साहेब, मैं, देख बेटी मुझे भी अब अपने आप को नग्गा हो कर तेरे साथ सोना होंगे और अपने सरीर में तेल लगा कर तेरे बदन के हर हिस्से में तेल लगाना होगा साथ hi साथ मेरा अंधरुनि अंग को तेरे अंधरुनि अंग से मिला के सहलाने होगा तभी जा कर तू गरम होगी और तेरा जो बदन की नसों में खून रुका है वह चलने लगेगा ुर तेरा जो कमर लॉक है वह खुल जायगा, ज़बी, गुस्से से यह आप सोचे भी कैसे की माय आपके साथ लेटूंगी वह भी एक दम

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नग्गे हालत में है, यह कभी नहीं होगा समझे आप? मालिश तक तो ठीक था? लेकिन जो अब बोल रहे है, वो बिलकुल hi गलत है, यह कह के ज़बी अब उठने लगती है लेकिन वह बिस्तर से अब उठ भी नहीं पाती है, इधर माय ज़बी को इधर उधर हाँथ लगा के उठने की कोशिश करता देख के, मेरा पास उल्टा पड़ता देख के मैं, जल्दी से हरकत में आता हूँ और ज़बी से, तुम्हे बेटी के सामान देख रहा हूँ और मेरी कोई गलत मकसद नहीं है, बस तेरे दर्द को ठीक करना मेरा मकसद है, अगर फिर भी तुझे यह करना गलत लगता है तो माय तुझे कपडे पहना देता हूँ उसके बाद माय खुद hi तुझे हॉस्पिटल ले कर चलता हूँ? वह माय खुद hi पैसे दूंगा उन डॉक्टर लोगो को तेरे इलाज़ क लिए, लेकिन मेरी एक बात सुन ले वह तेरे साथ कुछ भी हुआ तो माय कोई गारंटी नहीं लूंगा, ये कह माय बिस्तर से उठ के निचे खड़ा हो गया और उठते hi लुंगी में एक बड़ा सा तंब्बु

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बन गया लेकिन अंदर होने की वजह से ज़बी उस उभर को नहीं देख पाती है, वही ज़बी, फिर से सोच में डूबा जाती है, मन में (साहेब तो पहले मेरी सलवार उतरे उसके बाद की मेरी गंदे चीज को छत्ता उसके बाद अब बोल रहे है हम दोनों नग्गे हो कर एक दूसरे के बदन से बदन तेल लगाए, यहाँ तक तो एक बार सोच भी सकती थी करने को लेकिन साहेब अपने अंधरुनि अंग से मेरी शर्मगाह (छूट) को टच करने की कैसे सोच सकते है, यह मेरे लिए कितना गुनाह का सबब है, उपरवाले मुझे कभी माफ़ नहीं करेंगे?), लेकिन दूसरा मन कहता है, यहाँ तो साहेब अपने बदन और अंधरुनि अंग (लुंड) से टच करेंगे लेकिन अगर हॉस्पिटल गई और किसी डॉक्टर का नियत तेरी खूबसूरती देख के ख़राब हो गयी तो वह तेरे साथ क्या क्या करेगा यह कभी सोची है तू, यह तो साहेब बस तुझे ठीक करने के बारे में सोच रहे
 
है, यहाँ तक की तेरे गंदे से गंदे अंग को अपनी जुबान से छाता है, फिर भी इस भले इंसान पर तू शक कर रही है, ठु है तेरे ऐसी सोच पर?), यह कास म कास उसके मन में चलता है खुद के मन को मानते हुए ठीक है साहेब लेकिन इससे क्या गारंटी है की मेरा दर्द ठीक हो जायदा?, इधर मैं, देख बेटी गारंटी तो कोई किसी की नहीं दे सकता है, लेकिन माय इतना बता सकता हूँ की तू आज मेरे फ्लैट से अपने घर चल के जाएगी, वैसे यहाँ से कितना दूर है तेरा घर, ज़बी, बस 2 कम दुरी पर है मेरा घर, मैं, तब तो दूर है लेकिन इतना कह सकता हूँ तू चल फिर पाएगी मेरे इलाज़ से वैसे भी इस रूम म अंदर है हम एक दूसरे को देख नहीं सकते तो फिर शर्माना कैसा वैसे भी हर किसी का धर्म कहता है की जब इलाज़ करवाओ तो धर्म नहीं देखना चाहिए, मेरी बात पर ज़बी कुछ नहीं कहती,

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इधर मैं, तो तू तैयार है अपना इलाज़, ज़बी, कोई और ऑप्शन है आपके पास, मैं, पहले ऑप्शन था मेरे पास जो मैने आज़मा लिया लेकिन तेरा दर्द उससे नहीं गया, अब यह आखरी इलाज़ है, इससे पक्का दर्द चला जायगा, ज़बी, ठीक है इसे भी तरय कर लेती हूँ लेकिन आप वादा करो आप वह वह यह कह के वह चुप हो जाती है, इधर मैं, क्या हुआ तू बोलते बोलते चुप क्यों हो गई, ज़बी, साहेब वह आपका अंधरुनि अंग को मेरे अंदर तो नहीं करोगे न, मैने अपने सहेलियों से सुना है मर्द लोग अपना अंधरुनि अंग औरतो के अंधरुनि अंग में डालते है, मैं, तुम्हारी सहेलिया ठीक कहती है, ऐसा hi होता है लेकिन माय सिर्फ तेरा इलाज़ करने के लिए अपना लुंड तेरे बुर और गांड में सताऊंगा न की तुझे छोड़ के अपनी रण्डी बनाऊंगा, मेरी भासा सुन कर ज़बी, गुस्से से चींईईई यह कैसी अल्फ़ाज़ इस्तेमाल कर रहे है आपको शर्म आणि चाहिए एक

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तरफ अपनी बेटी मुझे कह रहे है वही दूसरी तरफ ऐसी गन्दी अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल कर रहे है, उसकी बात सुन के मन में (अभी इसके सामने सरीफ पेस आना होगा, क्युकी आज से पहले ऐसे शब्द वह सुनी hi नहीं होगी), मैं, देख बेटी माय पहले गरीब था इस लिए ऐसे शब्द मुँह से निकल जाते है, ज़बी, हैरान होते हुए, क्या मतलब पहले गरीब थे, मैं, फिर कभी अपनी स्टोरी तुझे सुनाऊंगा आज मेरे पास टाइम नहीं है, पिया को लेने जाना है, ज़बी, पिया का नाम सुनते hi उसे याद आया, साहेब पिया मैडम तो डॉक्टर है वह मेरा दर्द का इलाज़ तो कर hi देंगी, मैं, मन में यह मेरा मुँह भी न पिया का नाम लेते hi ज़बी ,. को पता चला होगा वैसे भी आज सुबह hi पिया ने अपना इंट्रो दे दिया था, अब क्या बहाना बनाऊ?), फिर कुछ सोच कर देख ज़बी, डॉक्टर अलग अलग तरह के होते है और पिया, एक सर्जन है सिंपल भासा में बोले तो वह चीड़

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फाड़ करने वाली डॉक्टर है, (ज़बी को कुछ समझ नहीं आता क्युकी वह ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी की वो समझे), ज़बी, मतलब डॉक्टर भी अलग अलग बीमारी के होते है क्या? माय तो सोची थी जो डॉक्टर होते है वह सब इलाज़ करने और दवा देना जानते होंगे, मैं, अब सुरु करे वर्ण पिया आ गई तो तुझे डॉक्टर के पास ले जायगी और फिर मैने जो कहा है वह तेरे साथ पक्का होगा क्युकी जब देखंगे तू इतनी खूबसूरत है तो उनका मन बदल जायगा और फिर तेरे साथ कुछ भी हो सकता है, माय बार बार ज़बी के मन में डर भर रहा था हॉस्पिटल और डॉक्टर लोगो के बारे, इधर मेरे डर दिखने पर ज़बी ठीक है साहेब उसके आगे उसके बोलने का हिम्मत hi नहीं होता है की वह कह सके साहेब आओ और मेरे बदन से खेलो जितना मन करे और आज मेरे बदन का हर दर्द निकल दो, और जो इतने सालो से जलन है छूट में वह भी अपने लौड़े से निकल दो?.
 
इधर परमिशन मिलते hi मेरे मन में लड्डू फुट पड़े और मैं, देर न करते हुए पहले पिया जो अक्सर अपने बीएड की सिराने कोकोनट आयल रखती थी उसे उठा के अपने साइड वाले टेबल पर रख के अपनी लुंगगि वही खोल कर एक पल भी नहीं लगता बिस्तर पर लेटने में लेकिन लेटने से पहले ज़बी की आखरी कपडा जो सूट थी, उसे जैसे hi पकड़ा वैसे hi ज़बी, थोड़ी दरी लेकिन समझ गई अब दर्द को हटाने के लिए साहेब जो कह रहे है वह करना होगा, इधर सूट को उसके सर से खींच कर निकल देता हूँ अभी भी ज़बी पेट के बालटी हुई थी उसकी गांड की उठान मुझे अंधेरे भी हलकी झलक दिख रही थी, इधर अब ज़बी पूरी तरह से नग्गी थी वही माय भी एक दम नग्गा हो चूका था, अब देर न करते हुए ज़बी के बगल में लेट के बेटी कोशिश कर पलटने की, ज़बी, साहेब माय कोशिश कर रही हूँ लेकिन मेरा बदन काम नहीं कर रहा ऐसा लग रहा है जैसे पुरे

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बदन मेरा सुन्न हो गया हो, मैं, कोई बात नहीं सब सही कर दूंगा यह कहते हुए उसके बगल यानि कंधे को पकड़ के उसे सीधा लेता देता हूँ अब ज़बी का पीठ बिस्तर में था और फेस मेरे सामने लेकिन रूम में अंदर होने से कुछ दिख नहीं रहा था वही ज़बी, का हाल था वह भी मुझे नहीं देख प् रही थी वैसे भी का ला इंसान उस अंदर रूम म कहा दीखता, इधर मैं, कोकोनट आयल टेबल से ले कर अब ज़बी के आगे के बदन के हर हिस्से जैस बूब्स, पेट, जांघ टैंगो पर गिराने के बाद अपने बदन में हांथो से लगाने लगा तभी ज़बी साहेब बिस्तर में तेल गिर गया और पिया मैडम को पता चल गया तब क्या होगा, इधर तेल लगाने के बाद मैं, तू इतना दर्द में भी यह सब सोच रही है, पहले तेरे दर्द का इलाज़ तो कर लू उसके बाद बिस्तर के बारे में सोचूंगा, वैसे भी इस वक़्त माय तेरे दर्द के बारे में सोच रहा हूँ न की इस बिस्तर के

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बारे में, मेरी बात सुन कर ज़बी को पहली बार राधे, पर प्यार आया और मन hi मन राधे की बातो से एक लगाओ सा हो गया, इधर मैं, ज़बी अब सुरु करू बदन से बदन की घिसाई, ज़बी, जो राधे के खयालो में खोई थी वह बिना कुछ सोचे समझे अपने दोनों हांथो को खोल देती है जैसे वह इसरा कर रही हो की आ जाओ राधे मुझे अपनी बहो में समेत कर मुझे खूब प्यार करो, लेकिन अगले hi पल वह ख्वाब टूट जाता है और अपने हांथो को बिस्तर पर समेत लेती है, इधर मैं, अब अपने हांथो को ज़बी के हांथो के बगल में रख कर उसके ऊपर झुकने लगता हु धीरे धीरे से, उधर ज़बी कुछ बोलने की हालत में नहीं थी, वह राधे के मीठी बातो के ट्रैप में फास चुकी थी, इधर राधे का लौड़ा ज़बी जैसे मज़हबी और एक दम जवान बदन को सोच कर hi कब से खड़ा था वह उसके जांघो को टच होते hi जैसे बे चैन हो गया, उधर
 
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