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आरती के सास ससुर वाले बीएड रूम के बाथरूम का गेट खुलने की आवाज़ होती है जिसकी आवाज़ से हम दोनों का भी धयान उदार जाता है और मैं किश करना रोकते हुए आरती से आवाज़ मत करना वर्ण हम दोनों पकडे जायँगे?, आरती अब क्या बोलती उसकी तो खुद की hi बोलती बंद हुई पड़ी थी, मेरी छेद चाँद ुर हरकतों की वजह से इधर थोड़ी देर में जो भी कोई बाथरूम में गया था वो वापिस आता है और गेट बंद होने की आवाज़ आती तो हम समझ जाते है, लेकिन हम दोनों की हवा टाइट हो चुकी थी क्यों की हम दोनों यहाँ बड़े hi अजीब सिचुएशन में खड़े थे और यही इसी घर के बाजु वाले रूम में आरती के सास ससुर सो रहे थे इधर थोड़ी देर हम दोनों एक दूसरे के बहो में एक दम चिपके हुए थे और इस बिच आरती ने न तो खुद को छुड़ाया और न hi मेरा कोई विरोध की इससे जाहिर हो जाता है की..
आरती को डर था की उसके सास ससुर ने हमे इस सेतुएशन में देख लिया तो वो कुछ गलत न समझ बैठे और उसकी अच्छी खासी शादी टूट जाये?, इधर थोड़ी देर बाद आवाज़ बंद होते hi मैं, फिर से आरती के चेहरे के पास अपना चेहरा ले जाने लगता हु तभी आरती, को पता नहीं कहाँ से अपनी पूरी ताकत इखट्टा करके एक दम से मुझे धक्का देती है हालां की माय ज़्यादा दूर नहीं होता, इधर आरती, मेरी बाँहों में से निकल के हॉल रूम के थोड़ी दुरी पर कड़ी होक गुस्से से कमीने कहीं के तुम्हारी हिम्मत कैसी हुई मुझे चुने की. ये बात थोड़े गुस्से में बोली लेकिन मैं, उसे गौर से देखा तो पाया की उसकी सांसे तेज चल रही थी उसके ब्लाउज़ में कैद ुचे उसकी सांसो तेज होने से तेज तेज ऊपर निचे हो रहे थे और ये देख माय समझ गया की आरती लगभग गरम हो चुकी है और वो मेरी पकड़ से..
आज़ाद होने के बाद वो अपने रूम में नहीं भाग रही? इसे देखते हुए मैं, अब बिना वक़्त गवाए फिर से उसकी और आगे बढ़ने लगा और आरती ये देख के वो अपनी धीरे आवाज़ में प्लीज अब ऐसा वैसा कुछ मत करिये पापा जी आप मेरे बाप सामान है और अपने भी तो मुझे चाचा न कहने को बोल के पापा जी बोलने को बोलै और पापा जी उसी को बोलै जाता है जो बाप सामान हो उसी का लिहाज करके मुझे छोड़ दो प्ल्ज़?, यह कह के वो पलटी और वह से भागने की कोशिश करने लगी और माय तभी उसे पीछे से अपनी बहो में कैद कर लेता हु मेरे हाँथ उसकी पतली पेट पे थी और मेरा सर उसके कंधो पे और मेरा लुंड आरती के साड़ी के ऊपर से उसकी दोनों गांड के बिच में फसा हुआ था वही माय उसके कान के पास फुस फूसा के "तेरी जैसी खूबसूरत अगर मेरी बेटी भी होती तो उसे भी चोदे बिना नहीं छोड़ता"?, (ये मेरी अब तकिया..
कलम बन गया था) अब चुप चाप सीधी खडी रह? मुझे इतना करीब और कान में इस तरह बोलने से आरती फिर से मदहोश सी होने लगती है और उसे फिर से मेरी मरदाना गंध की स्ट्रांग स्मेल आने लगती है साथ hi साथ मेरे रौपड़ार आवाज़ को सुन के डर सी जाती है इधर मैं, अब उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगता हु उसकी पीठ मुझे बहुत hi सॉफ्ट लगी लेकिन ऐसा करने से आरती के जिस्म में कुछ हलचल सी होने लगती है मेरे स्ट्रांग और हार्ड हाथों के अहसास से hi उसको अंदर hi अंदर से हिला रहा था और मान hi मान सोच रही थी की (ऐसा टच उसने अपने पति के साथ में भी कभी महसूस नहीं किया था आखिर क्यों ऐसे हो रहा था मेरे साथ? बिरजू तो मुझसे कितना ज्यादा प्यार करते है ुर माय भी फिर भी क्यों गैर मर्द के चुने से hi मेरा बदन बेचैन हो रहा है),
इधर मैं, अपने सख्त हाथ उसके पीठ से होते हुए गर्दन तक भी लेजाने लगता हु. मेरी इस छुअन से आरती की ऑंखें अब जैसे मदहोशी से धीरे धीरे बंद होने लगती है दिल की धड़कन फिर एक बार तेज सी होने लगती है ुर वो भूलने लगती है खुद को की वो शादी सुदा और किसी को अमानत है?, इधर मुझे आरती की तेज़ सांसों को पीछे खड़े हुए hi फील कर रहा था मुझे पता था वो इस वक़्त बड़े hi वल्नरेबल सिचुएशन में थी वही पीछे से थोड़ी देर हाँथ चलने के बाद मैं आगे आ जाता हु और अब उसकी कमर में अपना एक हाथ डालता हु और उसको अपने से सत्ता लेता हु जिसकी वजह से आरती एकदम से मेरे सख्त छाती से चिपक जाती है ुर उसके जिस्म से आ रही इरोटिक महक को सूंघ रहा था जैसे नशा कर रहा हो और संत माहौल को देखते हुए मैं धीरे से..
आरती को डर था की उसके सास ससुर ने हमे इस सेतुएशन में देख लिया तो वो कुछ गलत न समझ बैठे और उसकी अच्छी खासी शादी टूट जाये?, इधर थोड़ी देर बाद आवाज़ बंद होते hi मैं, फिर से आरती के चेहरे के पास अपना चेहरा ले जाने लगता हु तभी आरती, को पता नहीं कहाँ से अपनी पूरी ताकत इखट्टा करके एक दम से मुझे धक्का देती है हालां की माय ज़्यादा दूर नहीं होता, इधर आरती, मेरी बाँहों में से निकल के हॉल रूम के थोड़ी दुरी पर कड़ी होक गुस्से से कमीने कहीं के तुम्हारी हिम्मत कैसी हुई मुझे चुने की. ये बात थोड़े गुस्से में बोली लेकिन मैं, उसे गौर से देखा तो पाया की उसकी सांसे तेज चल रही थी उसके ब्लाउज़ में कैद ुचे उसकी सांसो तेज होने से तेज तेज ऊपर निचे हो रहे थे और ये देख माय समझ गया की आरती लगभग गरम हो चुकी है और वो मेरी पकड़ से..
आज़ाद होने के बाद वो अपने रूम में नहीं भाग रही? इसे देखते हुए मैं, अब बिना वक़्त गवाए फिर से उसकी और आगे बढ़ने लगा और आरती ये देख के वो अपनी धीरे आवाज़ में प्लीज अब ऐसा वैसा कुछ मत करिये पापा जी आप मेरे बाप सामान है और अपने भी तो मुझे चाचा न कहने को बोल के पापा जी बोलने को बोलै और पापा जी उसी को बोलै जाता है जो बाप सामान हो उसी का लिहाज करके मुझे छोड़ दो प्ल्ज़?, यह कह के वो पलटी और वह से भागने की कोशिश करने लगी और माय तभी उसे पीछे से अपनी बहो में कैद कर लेता हु मेरे हाँथ उसकी पतली पेट पे थी और मेरा सर उसके कंधो पे और मेरा लुंड आरती के साड़ी के ऊपर से उसकी दोनों गांड के बिच में फसा हुआ था वही माय उसके कान के पास फुस फूसा के "तेरी जैसी खूबसूरत अगर मेरी बेटी भी होती तो उसे भी चोदे बिना नहीं छोड़ता"?, (ये मेरी अब तकिया..
कलम बन गया था) अब चुप चाप सीधी खडी रह? मुझे इतना करीब और कान में इस तरह बोलने से आरती फिर से मदहोश सी होने लगती है और उसे फिर से मेरी मरदाना गंध की स्ट्रांग स्मेल आने लगती है साथ hi साथ मेरे रौपड़ार आवाज़ को सुन के डर सी जाती है इधर मैं, अब उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगता हु उसकी पीठ मुझे बहुत hi सॉफ्ट लगी लेकिन ऐसा करने से आरती के जिस्म में कुछ हलचल सी होने लगती है मेरे स्ट्रांग और हार्ड हाथों के अहसास से hi उसको अंदर hi अंदर से हिला रहा था और मान hi मान सोच रही थी की (ऐसा टच उसने अपने पति के साथ में भी कभी महसूस नहीं किया था आखिर क्यों ऐसे हो रहा था मेरे साथ? बिरजू तो मुझसे कितना ज्यादा प्यार करते है ुर माय भी फिर भी क्यों गैर मर्द के चुने से hi मेरा बदन बेचैन हो रहा है),
इधर मैं, अपने सख्त हाथ उसके पीठ से होते हुए गर्दन तक भी लेजाने लगता हु. मेरी इस छुअन से आरती की ऑंखें अब जैसे मदहोशी से धीरे धीरे बंद होने लगती है दिल की धड़कन फिर एक बार तेज सी होने लगती है ुर वो भूलने लगती है खुद को की वो शादी सुदा और किसी को अमानत है?, इधर मुझे आरती की तेज़ सांसों को पीछे खड़े हुए hi फील कर रहा था मुझे पता था वो इस वक़्त बड़े hi वल्नरेबल सिचुएशन में थी वही पीछे से थोड़ी देर हाँथ चलने के बाद मैं आगे आ जाता हु और अब उसकी कमर में अपना एक हाथ डालता हु और उसको अपने से सत्ता लेता हु जिसकी वजह से आरती एकदम से मेरे सख्त छाती से चिपक जाती है ुर उसके जिस्म से आ रही इरोटिक महक को सूंघ रहा था जैसे नशा कर रहा हो और संत माहौल को देखते हुए मैं धीरे से..