अपडेट 35 Ruhi’s फादर केस बैक
“वो व् किश ने किया तेरे साथ?”
रूही ने जाते जाते जवाब में यह कहा अभी को,
“नहीं, मैं तो कभी नहीं बताउंगी, मगर आप हो सके तो खुद पता लगा लेना!”
और रूही चली गयी.
अभी सोचने लगा के क्यों रूही ने उस्सको खुद पता लगाने को कहा के किस्सने उस्सकी विर्जिनिटी ली है? अभी कैसे पता लगा पाएगा?
और अभी ने यह भी सोचा के रूही क्यों मेहबूब से इतना दरर्ति है? क्यों? मेहबूब ने कुछ किया होगा? कुछ कहा होगा अभी के खिलाफ? किआ मेहबूब ने रूही को अभी से मिलने और बात करने के लिए मन किया है? तो इस लिए, अभी ने मेहबूब से बात करने को डीडे किया. और वो गया उस से रूही के बारे में बात करने एक मर्द के बचे की तरह.
अभी ने सोचा जब मेहबूब से 75 हज़ार के बदले 3 लाख निकलवा सकता है तो कौन सी बड़ी बात है उस से रूही के बारे में बात करने को. यह मर्दानगी वाला बात हमेशा था अभी में, वो डरता तो बिल्कुल नहीं था किसी से भी जहाँ मर्दों वाली बा अत था तो, तो बे झिझक वो गया और मेहबूब से कहा,
“मेहबूब भाई, आप रूही के चाचा लगते हो नाह? हाँ पता है उसस्के पिता आप के लिए भाई से बढ़कर है और उस्सकी ग़ैर हाज़िरी में रूही आप की बेटी जैसी है और आप का हक़ बनता है उस्सकी देख भाल करना. तो उस हैसियत से उसस्के पिता नहीं है तो आप उसस्के पिता जैसे हुए है नाह?!”
मेहबूब को तो सब पता था के अभी उस से किआ कहने वाला है, और उसने बुसस हाँ में सर हिलाते हुए अभी से कहा,
“हाँ अभी सही कह रहे हो वो मेरी बेटी से बढ़कर है, और मुझे यह भी पता है के तुम मुझसे किआ कहने आये हो”
और यह कहकर मेहबूब हंससने लगा और अभी के कंधे पर हाथ रख कर आराम से कहा,
“बोलो अभी किआ कहना है, दर्रो मत बोलो!”
अभी: “डरता तो मैं बिल्कुल भी नहीं मेहबूब भाई, आप से फिर यह कहना है के मैं जल्द hi आप का रिश्तेदार बनने वाला हूँ, आप को पता चल गया होगा के मैं रूही की बात कर रहा हूँ!”
मेहबूब ने मुस्कुराते हुए कहा,
“क्यों नहीं अभी इंशा अल्लाह, क्यों नहीं, मुझे पता था तुम एहि कहने आये हो, मगर आज रूही के पिता ारः है नाह तो उसी से यह बात कहना बहुत बेहतर होगा है नाह?!”
अभी: “हाँ मेहबूब भाई उस से भी बात करूँगा ज़रूर, मगर वो तो इतने दिनों से यहाँ था नहीं तो उस्सको कुछ नहीं पता पर आप को तो सब पता है नाह? इतने दिनों से सब आप के आँखों के सामने तो हो रहा है नाह, तो इस लिए मुझे आप की मदद की ज़रुरत पड़ेगी मेहबूब भाई!”
मेहबूब: “हाँ ठीक है मगर कैसा मदद अभी?”
अभी: “अरे भाई रूही के पिता को नहीं पता के पिछले देर महीनों से मैं और रूही एक दूसरे से प्यार करते हैं, आप को तो पता है. तो आप को रूही के पिता से कहना होगा के हाँ दोनों एक दूसरे को चाहते हैं रिश्ता कर देनी चाहिए दोनों के; इतना तो कर सकते हो नाह भाई?!”
मेहबूब मुस्कुराते हुए अभी को सुन रहा था और कहा,
“बहुत दम है तुझ में अभी, खुद अपने शादी की बात कर रहे हो? वह. मगर मेरे नज़र से इस बात को देखो और समझो अभी, रूही के पिता ने मुझ पर एक ज़िम्मेदारी चोरर के गया था के मैं उसस्के बच्चों का ख्याल रखूं है नाह? तो जब मैं उस से कहूंगा के देर महीने तक तुम मेरे लिए काम करते हुए उस्सकी बेटी के साथ इश्क कर रहा था तो वो किआ सोचेगा मेरे बारे में? कहेगा नाह के मैं ने यह किश तरह का ख्याल रकह उस्सकी बेटी का?!”
अभी ने कहा,
“अरे भाई ग़लत ट्रैक पर क्यों लेजा रहे हो बात को? सही तरीके से सिर्फ हम दोनों को सपोर्ट तो कर सकते हो भाई यह कहते हुए के इन देर महीनों में यहाँ काम करते हुए मुझे प्यार हो गया रूही से और उस्सको मुझसे, तो मैं ने रूही का हाथ माँगा शादी के लिए, इतना तो कर सकते हो नाह आप मेहबूब भाई?!”
मेबूब: “अभी एहि बात तुमने मुझको पहले क्यों नहीं बताया? क्यों देर महीने तक छुपाया तुमने मुझसे? पहले कह दिया होता, 1 महीने पहले, कह देते मुझे तो मुझे पता होता पहले से, शायद मैं फ़ोन करके उस्सको बता चूका होता.. क्यों तुमने आज hi का दिन चुना मुझे यह बात बताने के लिए अभी?”
अभी: “भाई मुझे पता था के आप को इस बात का आलरेडी पता है इसी लिए कुछ नहीं बताया, बल्कि मैं तो सोच रहा था के किसी दिन आप मुझसे इस बारे में सवाल करोगे…. अब आज या कल आखरी दिन है यहाँ काम करने का इस लिए अब बता रहा हूँ आप को, इस में किआ है भाई इतना तो बताओ नाह के मेरा सपोर्ट कर सकोगे नाह मेहबूब भाई?”
मेहबूब: “okay ठीक है सपोर्ट तो करना पड़ेगा, और कोई रास्ता चोर्रा hi नहीं तुमने… और हाँ तुम्हारे घरवालों का भी पता लगाना है नाह हमको अब?”
Abhi:”haan भाई, पहले रूही के पिता से बात करलूं तब अपने पेरेंट्स के साथ आऊंगा रूही का हाथ मांगने, तब मांगनी वग़ैरा को मिलकर डीडे करेंगे ठीक रहेगा नाह भाई?!”
मेहबूब ने मुस्कुराते हुए और सईद के तरफ देखते हुए हाँ कहा अभी को.
टोनी और सुनील ने सब सुना और जल्दी से अभी को आकर हाथ मिलाते हुए कॉंग्रट्स किये.
अभी को एक उम्मीद की किरण नज़र आयी और थोड़ा खुश फील किया के ात लीस्ट अब वो कामयाब होने जा रहा है.
और वो गया रूही को बताने के उस्सने मेहबूब से बात कर लिए और उस्सने okay कह दिया है.
जब अभी ने सब रूही को बताया तो रूही ने कहा,
“वो सिर्फ आप से ऐसे बात करता है आप के पीठ पीछे कुछ और hi कहता है आप के बारे में, ह्य्पोक्रिटे है वो उस्का यकीन मत कीजिये आप. वो तो खुद खिलाफ है हम दोनों से हे इस अगेंस्ट अभी”
अभी को और एक झटका लगा अब!! उस्का उलझन और बढ़ गया.
*********************************************************
अभी को कुछ लोहे को काटना था और लोहे रूही के किचन के पास थे. तो अभी गया काटने लोहों को. रूही और उस्सकी माँ उस्सको देख रहे थे. अभी रूही से बात करते हुए काम कर रहा था. रूही कभी उस से बात करती, कभी मुस्कुराती तो कभी छुप जाती.
रेडियो पर “आप की पसंद” प्रोग्राम चल रहा था जिस में फमाईश किये गानों को बजवाते थे चैनल वाले. रूही के किचन में रेडियो बज रहा था जिस्सको रूही सुन रही थी और बाहर अभी भी सुनते हुए काम कर रहा था और यह गण चल रहा था, “ेय गुलबदन फूलों की महक काँटों की चुभन तुझे देख के कहता है मेरा मैं कहीं आज किसी से मुहबत नाह हो जाए” रूही उस गाने को सात साथ गए रही थी…. और उस्सने अभी को देखा, शर्मायी, मुस्कुरायी और चेहरा छुपा लिया दरवाज़े के पीछे, तो अभी ने उस से कहा,
“हाँ तुम खुद सब कुछ कहोगी अब!” अभी का मतलब गाने से था के रूही कह रही थी “कहीं आज किसी से मुहबत नाह हो जाए”
तो रूही ने हँस्ते हुए अभी से कहा,
“मैं आप के लिए नहीं गए रही थी!”
अभी ने कहा,
“मैं ने इस गाने को उस दिन गया था जिस दिन तुमको पहली बार देखा था यहाँ – “कहीं आज किसी से मुबाहात नाह हो जाए”
तब रूही ने अभी से कहा,
“ी दीद नॉट तेल्ल यू तो फॉल इन लव विथ में!”
अभी ने जवाब दिया,
“no ओने फाल्स इन लव इंटेंशनली, आईटी जस्ट हप्पेंस…. प्यार किया नहीं जाता हो जाता है रूही डिअर!”
तब रूही ने हँस्ते हुए कहा,
“मुझे पता है मैं आप से जीत नहीं सकती आप बहोत तेज़ हो मानती हूँ!”
अभी ने कहा,
“और कौन बदनसीब लड़की होगी जो मुझ जैसे तेज़ लड़के की पत्नी नहीं बनना चाहेगी?!”
रूही: “वो बदनसीब मेरे सिवा कौन हो सकता है?!”
अभी: “जब मैं खुद तुमको खुशनसीब बनाना चाहता हूँ तो तुम कैसे बदनसीब हो सकती हो रूही?”
रूही: “मैं ने कहा था एक बार आप से के मुझको यह सब रास नहीं अति, मनहूस हूँ मैं देख लेना हम कामयाब नहीं होंगे!”
अभी: “रूही मैं बहोत पॉजिटिव इंसान हूँ, ी ऑलवेज एक्सपेक्ट थे बेस्ट तो हैपन, ी ऍम वैरी ऑपटिमिस्ट ऑलवेज, बुसस तुम साथ देते रहना फिर देखना के कैसे कामयाब नहीं होंगे, बुसस तुम्हारा साथ चाहिए, अकेला तो फ़ैल hi हो जाऊंगा, तुम साथ डौगी तो कोई हमको अलग नहीं कर सकता रूही”
रूही ने तब अपना सर निचे झुका लिया. और कुछ देर वहीँ कड़ी रही अपनी मम्मी के साथ अभी को देखते hue.Tab रूही गयी अपनी चूल्हे पर कुछ पका रही थी उससे देखने, और उधर अचानक अभी के ऊँगली में लग गयी हथोड़े se….Abhi ने एक हाथ में उस घायल ऊँगली को ज़ोर से दबाते हुए दर्द से तड़पने लगा. इस्स्स्सस्शह्ह्ह करते हुए…. तो रूही की माँ ने कहा,
“रूही देखो देखो किआ हुआ अभी को, उस वक़्त रूही एक पल के लिए चूल्हे पर कुछ करने गयी थी, तो जल्दी से रूही आयी और जब अभी के ऊँगली में खून देखा तो कहा,
“कहा नाह मैं मनहूस हूँ, मुझे यहाँ खड़ा होना hi नहीं चाहिए था आप को डिस्टर्ब कर रही हूँ काम करने से.”
अभी ने उस घायल ऊँगली को ज़ोर से अपने दूसरे हाथ में दबाया हुआ था और अब भी उस्सको दर्द हो रहा था, उस्सने अपने निचे वाले होंठ को ज़ोर से अपने दांतों में दबाया हुआ था और रूही उस्सको कुछ इस तरह से देख रही थी जैसे खुद रूही को दर्द हो रही थी, और रूही ने कहा,
“आप उस ऊँगली को ठन्डे पानी के निचे डालो तो, तब तक मैं दवा लाती हूँ उफ़!!”
अभी ने भुनभुनाते हुए कहा,
“क्यों केयर कर रही है अगर जुड़ा होना है तो, प्यार नहीं करती तो क्यों उस्सको दर्द हो रहा है मेरे लिए? अब क्यों मेहबूब से डर नहीं लग रहा उससे? अब क्यों सब भूल गयी? अब कैसे मेरा इतना ख्याल रख रही है….?? रूही तुम मुझसे बहोत प्यार करती हो रूही…. मगर मुझे नहीं पता क्यों छुपाने की कोशिश करने लगी हो कुछ दिनों से – कुछ तो बात हुई होगी…..”
यह सब अभी खुद से कहता रहा तब तक रूही आयी एक छोटी सी सीसी लेकर जिस में दवा था घाव पर लगाने के लिए.. अभी निचे बैठा हुआ था, तो रूही को भी निचे अपने टांगों पर बैठना पड़ा अभी के सामने, और अभी को उस ऊँगली को सामने करने को कहा रूही ने…. जब रूही बैठी तो अभी रूही के टांगों को देख रहा था अपने ऊँगली को उसस्के सामने करते हुए, रूही ने देखा के अभी की नज़र उसस्के ड्रेस के निचे गए, और अपने होंठ को रूही ने दांतों में दबाते हुए कहा,
“वो सब अब बूल जाओ आप, आप के किस्मत में वो सब नहीं था शायद, आप को मौका मिला भी था मगर आप ने उस मौके को गंवा दिया…”
और रूही ने अभी के घायल ऊँगली पर फूँका, दवा लगाने से पहले तो अभी उसस्के चेहरे में देखते हुए आँखों में भरे हुए आंसू से, दर्द भरी आवाज़ में कहा,
“रूही मेरे कलेजे में भी फूक मार दो नाह यार बहोत दर्द हो रहा है वहां, नहीं सहा जाता यार…”
रूही के आँखों से जहर जहर आंसू बहने लगे और सर निचे झुकाते हुए अपनी नज़रों को चुराने लगी अभी से तो अभी ने उस्का हाथ थाम कर उस्सको रोकते हुए कहा,
“बताओ अभी कैसे मेरे इतना करीब बैठी हो जबकि वहां बस के पास मेहबूब खड़ा देख रहा है, इस वक़्त क्यों तुमको उस से डर नहीं लग रहा? अभी क्यों तुम्हें उस्का कोई खौफ्फ़ नहीं है?”
रूही वहीँ बैठी रही और पीछे मूढ़ कर अपनी माँ को एक बार देखा और बहते आंसोओं में अभी के चेहरे में देखते हुए कहा,
“अभी, आप मुझे भूल जाओ प्लीज, आप को बहोत सारे खूबसूरत लड़कियां मिल जायेंगे, मैं आप के लिए सही लड़की नहीं हूँ…”
यह कहते हुए रूही इतना रोई के अभी उस से ज़्यादा रोने लगा. अभी से रहा नाह गया और रूही से लिपटना चाहा, मगर ठीक जब अभी के बाहें रूही के तरफ हुआ रूही एक कदम पीछे हो गयी और कहा,
“नहीं अभी यह सही नहीं है, अपनी ऊँगली इधर करो मैं दवा लगा दूँ…”
अभी के गाल पर आंसू बहने लगे थे, उसस्के नाक से पानी निकल पड़े थे और उसी हाल में अभी बोलै,
“दिल पर भी दवा लगा दो नाह रूही वहां तो इस से भी ज़्यादा चोट लगी है मुझे…. किआ यार अगर मेरा दर्द नहीं देखा गया तुमसे, इतनी केयरिंग हो तो क्यों तुमसे मेरा दिल का दर्द नहीं दिख रहा? केयर करती हो मेरा तो दिल का भी केयर करो नाह रूही…”
अभी की रोने की आवाज़ निकल गयी, तो रूही ने अपने हथेली को अभी के मुंह से लगाते हुए कहा,
“स्स्स्सह्ह्हह्ह किआ कर रहे हो आप सब लोग सुन लेंगे, स्स्स्सह्ह्ह्ह छुप हो जाओ नाह”
अभी ने रूही के हथेली को चुम लिया और कहा,
“लगता है एक ज़माना हुआ तुम्हारे किसी अंग को अपने होंठ से लगाए हुए…. मुझे ऐसे मत तड़पाओ रूही, मुझको अपने सीने से लागलो नाह रूही मुझको बहुत आराम मिलेगा, प्लीज रूही, तुम्हारे जिस्म की खुशभू को अब ख्यालों में बसाया हुआ हूँ, एक बार अपने जिस्म की खुस्भू लेने दो नाह मुझे….”
रूही ने तब अभी के ऊँगली पर दवा लगाते हुए कहा, और रट हुए hi कहा,
“मैं ने कहा नाह के आप मुझे भूल जाओ….”
अभी रोटा रहा , आंसू जारी रहे उसस्के आँखों से, रुक रुक कर रट हुए और रूही के चेहरे में देखते हुए टूटी आवाज़ में कहा,
“तो क्यों मुझे किश करने दिया था, क्यों मुझको इतने बार अपने बाहों में भरने दिया था, क्यों मुझको जीब से चिढ़ाती थी, क्यों मुझसे इतने मीठी मीठी बातें करती थी, क्यों मेरे सीने पर अपना सर रखती थी, क्यों मेरे चेस्ट के बाल से खेलती थी, और कहूं रूही? और बहोत कुछ कह सकता हूँ…….”
रूही की बारी थी अब रोने की, सर झुकाये रोने लगी थी और इस बार उस्सकी आवाज़ आयी रट हुए तब तक मेहबूब वहां आगया और रूही से नाराज़ होते हुए कहा,
“तमाशा बनाना है? सब को दिखाना है? किआ हुआ है तुम दोनों को बच्चों की तरह रोने लगे हो? अपने बाप को आने दो फिर अपना तमाशा बनाना, या घर के अंदर जा कर रो लो रोना है तो, सबके सामने क्यों तमाशा बना रही हो?!”
रूही फिल्मों की हेरोइनों की तरह उठ कर भागते हुए घर के अंदर चली गयी…..
और मेहबूब ने अभी से कहा,
“अभी मैं ने तुमसे अभी कुछ देर पहले बात किया नाह? उसस्के पिता से बात कर लेना भाई क्यों इतना तमाशा कर रहे हो सबके सामने तुम?! अपने काम पर ध्यान दो भाई मुझे कल बस चलना है, इस्को रोड पर लाना है कल!”
तब तक सुनील और टोनी वहां आगये थे अभी को संभालने, मगर सुनील ने जब रूही की माँ को वहां किचन में देखा तो उस से बात करने लगा रूही और अभी के बारे में.
और टोनी अभी को लगाया बस में और वो खुद उन् लोहों को काटने चला गया. उन् लोहों से बस के निचे एक सेपरेट बॉक्स बना के वेल्ड करना था क्यूंकि उस्सको एडिशनल मेहबूब ने लगाने को कहा वहां कुछ ख़ास रखने के लिए. वैसा काम शुरू में होता है, बस फिनिशिंग पर था फिर भी वो काम किया जा रहा था जो पहले दिन किया जाता है…. अभी बस के अंदर सीट पर बैठ कर रोटा रहा कुछ देर, बाकी के सारे लोग उस के पास गए पूछने के किआ हुआ, अभी बता नहीं पा रहा था, जॉर्ज ने कहा,
“रूही के फादर को आने दो हम सब उस से बात करेंगे”
तब सईद ने जॉर्ज से कहा,
“अरे नहीं जॉर्ज, हम लोग उस से नहीं कर सकते कोई बात, हम बाहर के लोग हैं, उसस्के फादर को ऐतराज़ हो सकता है….”
अभी ने देखा के सुनील ने रूही की माँ के साथ कोई 15 मीन्स तक बात किया, और सुनील वापस बस में आया तो अभी ने उस से पूछा के किआ कहा उस्सकी मम्मी ने मगर अब सुनील बताना नहीं छह रहा था….
सुनील और अभी की इतनी अछि दोस्ती हो गयी थी, और सुनील ने कहा था के वो खुद अभी के लिए बात करेगा रूही के पेरेंट्स से, तो ऐसा किआ कह दिया था रूही की माँ ने सुनील से के अब सुनील अभी को बताना नहीं छह रहा था?
अभी सुनील से काम करते हुए पूछता गया बार बार मगर सुनील एहि जवाब देता के उसस्के और रूही के बारे में कोई बात नहीं हुई थी.
अभी को पता था के 15 मीन्स तक सिर्फ और सिर्फ अभी और रूही के बारे में hi बात किये थे सुनील और रूही की माँ ने मगर अभी नहीं समझ रहा था के अब सुनील क्यों उस्सको नहीं बता रहा था के रूही की माँ ने किआ कहा.
अभी ने पूछा,
“सुनील प्लीज बता नाह किआ उस्सकी माँ ने यह कहा के उस्सको खबर मिली के मैं निकम्मा हूँ, लज़ी हूँ, काम नहीं करता हूँ? ऐसा कहा किआ उस्सने? उस्सने मुझसे यह सब कह दिया है और मैं ने सफाई भी दे दिया है बता नाह मेरे दोस्त किआ कहा उस्सकी मम्मी ने यार!”
सुनील ने तब कहा,
“देख अभी यार, रूही की फादर ारः है नाह, तू उस से बात करना, एहि कहा उस्सकी माँ ने मुझे के बाप डिसिशन लेगा, और वो ाचा आदमी है तू आसानी से उस से बात कर लेगा मुझे यकीन है.”
अभी: “यार सुनील 15 मिनट्स तक किआ इतना hi बात किया उस्सने तुमसे? क्यों छुपा रहा है यार बता नाह? तू यह मत सोच के मेरा दिल टूट जाएगा, मुझ पर किआ बीतेगा, दिल आलरेडी चुर्र चुर्र हो चूका है मेरे भाई तू बता नाह किआ कहा रूही की माँ ने मेरे और रूही के रिश्ते के बारे में? यार रूही भी नहीं बता रही मुझको, उस्सने तो मुझे उस्सको भूल जाने को भी कह दिया यार, तो तू मत छुपा मुझसे मेरे दोस्त!”
सुनील: “रूही ने तुझको ऐसा कहा? उससे भूल जाने को कहा? अभी यह उस्सने नहीं कहा तुझे, उस से केहेलवाया गया है!”
अभी: “मुझे पता है यार रूही ऐसा नहीं कह सकती तो कौन है जो रूही को नचा रहा या रही है यार? किआ उस्सकी माँ ने रूही को मुझसे दूर किया? किआ वही नचा रही है रूही को? मगर क्यों यार?!”
सुनील ने बात बदलते हुए फिर कहा,
“तू रूही के पिता से बात करना भाई सब ज़रूर ठीक हो जाएगा, फ़िक्र मत कर तू अभी!”
अभी लापरवाह के जैसे काम करता गया. उस्सको लगता था वो गिर्र पड़ेगा, उस्सको खुद को संभालने की ताक़त नहीं थी…..
कुछ देर बाद रूही की बड़ी बेहेन और उस्सकी हस्बैंड आये, सब तैयार थे एयरपोर्ट से रूही के पिता को पिक उप करने के लिए. आज पहली बार अभी ने रूही की बड़ी बेहेन को देखा था. वो बिल्कुल भी रूही जैसी नहीं दिखती थी. थोड़ी खड़ूस दिखी वो अभी को. 2 छोटे बच्चों की माँ थी, थोड़ी सी मोती थी और नाती थी, रूही से भी कद में छोटी थी. अभी को नहीं पता था कौन हैं उस्सको सुनील ने बस में कहा के रूही की बड़ी बेहेन आरही है.
जिस वक़्त वो आयी तो अंदर रूही रो रही थी क्यूंकि वो अभी से दूर होने के बाद ऊँगली पर दवा देने के बाद अंदर रोटी रही, बड़ी बेहेन को पता चला सारे माजरा तो वो भी आयी थी स्टैर्स पर अभी को देखने. सुनील ने अभी से कहा,
“देख उस्सको सब पता चल गया, अब वो भी तुमको देखने आयी है वो जानना चाहती होगी के उस्का to-be brother-in-law कौन है कैसा है…..”
और वहां से बस में उतने सारे लोग थे तो बेहेन को कैसे पता चलता के इन सब में से अभी कौन है, तो उस्सने सुनील को बुलाया. सुनील गया उस से बात करने स्तैर के पास और वहां से सुनील ने अभी को इशारा किया बस के बाहर आने को ताके रूही की बेहेन उस्सको देख सके….
अभी बस से निकला और कुछ देर बाहर खड़ा रहा ताके रूही की बेहेन उस्सको देख सके… लगता था अभी की नुमाईश किया जा रहा था!
अब सोचने की बात है के अभी उस वक़्त अपने काम करने वाले गंदे कपड़ों में था, उस्का लुक एक ग़रीब नौकर जैसा दिख रहा होगा…. इम्प्रेस करने के लिए सिर्फ अभी का हाइट और गोरा रंग था… तो रूही की सिस्टर को बेशक अभी चाह नहीं दिखा होगा और उस्सकी राये लेना होता तो वो 100% नाह कहती यह सूरे था.
कुछ देर बाद रूही की सिस्टर और उस्सकी माँ बस के पास आये थे तो अभी ने रूही की माँ से पूछा
“यह आप की बेटी है!”
रूही की माँ ने मुस्कुराते हुए कहा,
“हाँ एहि है रूही की बड़ी बेहेन मेरी पहली बेटी”
तो अभी ने उस्सको सर झुकाते हुए hello किया
रूही की माँ ने उसस्के सामने अभी से कहा,
“और यह सिगरेट बिल्कुल चोरर्ण होगा हमेशा के लिए समझे?”
अभी ने कहा,
“इस बारे में रूही से बात हो चुकी है आप फ़िक्र नाह करें हमेशा के लिए hi चोर दूंगा, रूही से पूछ लेना के कब”
अभी को ाचा लगा के रूही की माँ ने जताते हुए उस से वो बात कही और वो भी रूही की बड़ी बेहेन के सामने, लग ऐसा रहा था उस वक़्त के माँ अपनी बड़ी बेटी को लेकर अपने नए होने वाले जमाई को मिलाने आयी थी…. वो अभी को बहोत अच्छा लगा…
फिर तुरंत मनोज, रूही की माँ और दामाद चले गए एक कार में एयरपोर्ट से रूही के पिता को पिक उप करने.
रूही, उस्सकी बड़ी बेहेन और महेश नहीं गए थे… अभी खुश था के रूही नहीं गयी और वो उस्सको कुछ देर और देख पाएगा अगर वो सामने आयी तो…. चिठ्ठी में अभी ने रूही से कहा था के अपने पिता के वापस आने की ख़ुशी में मुझको नाह भूल जाना…. और अब लग रहा था के बिल्कुल वही होने जा रहा था. सब वहां बहोत थ्रिल्लेद थे रूही के पिता को रिसीव करने के लिए, उस घर में काफी हलचल था उस वक़्त.
रूही की डैड शाम 6 बजे घर आये. सब एक एक करके उस से मिल रहे थे आँगन में hi….. अभी रूही को देख रहा था उस्सको पता था के रूही रोयेगी, और वो अपने पिता को सबके गले मिलते हुए देख कर कड़ी रो रही थी, और अभी उस्सको देखे जा रहा था…..
रूही के पिता अपने छोटे भाई, और बेटों से गले मिल रहा था, कोई रो रहा था तो कोई उसस्के पीठ थपथपा रहा था, महेश रोने लगा उस से गले मिलने से, वो आखरी छोटा बीटा जो था… और आयी बारी रूही की अपने पिता से गले मिलने की तो उसस्के चाँद आंसू के करते गिरे, अभी ने सोचा सिर्फ पिता के लौटने की वजह से रो रही है या अभी को भी याद कर रही है , अभी से जुड़ा होने के घूम में भी रो रही है….. और अभी ने देखा रूही अपने पिता के सीने से लगी हुई तो थी मगर कम से कम 7 बार रूही की नज़रें अभी पर गए थे उस दौरान….
तो बे कॉन्टिनोएड…. (3829 वर्ड्स)