Vihaan Aur Ashita - Bhai Behen ki kahani - Page 8 - SexBaba
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Vihaan Aur Ashita - Bhai Behen ki kahani

अपडेट 45 अशिता गेट्स ा गिफ्ट

कॉलेज के लंच टाइम के वक़्त विहान कॉलेज पहुंचा. गेटकीपर ने उस्सको अंदर जाने से रोका, मगर विहान ने ग़ुस्से में उस्सको ढाका दिया अंदर जाने के लिए, और गेटकीपर ने विहान का गिरेहबान पाकर के उस्सको घसीटा गेट से दूर तो विहान ने उस्सको एक मुक्का मारा और बात बिगड़ गयी. वो गेटकीपर कोई 40 या 45 साल का तगड़ा आदमी था, स्ट्रांग था और विहान एक 20 साल का लड़का उस आदमी के हाथ से नहीं निकल पाया, उस्सने इतने ज़ोर से विहान को पाकर रखा था के उसस्के पंजे से छूटने के लिए विहान उसको घूंसा मारते जा रहा था कहीं भी, चेहरे पर, छाती पर, पथ में और आदमी ने कैसे भी करके अपने कीओस्क के अंदर एक बटन दबाया जिस्सकी वह से दो सिक्योरिटी गार्ड्स आये और विहान को कीओस्क के अंदर रोका, उन् में एक विहान को जानता था अस ex-student.

अब क्यूंकि उस गेटकीपर को घूंसा लगा था चेहरे पर उसस्के होंठ फूल गए थे इस लिए मैनेजमेंट को बताना पारा, और डीन आये गेट के पास गेटकीपर की हालत को देखने के लिए, तब विहान को डांटते हुए कहा के अब वो स्टूडेंट नहीं रहे यहाँ तो उस्सको अंदर आना मन है, एक परमिशन लेटर होना चाहिए तब अंदर दाखिल हो सकता है, तब विहान ने समझाया के उस्सको अशिता से मिलना है फिर उसस्के बाद अशिता को बुलवाया गया और विहान ने उस्सको मोबाइल दिया. प्रिय भी साथ आयी थी. बुसस सिर्फ मोबाइल लेकर वापस जाना पारा अशिता को क्यूंकि डीन वही खड़ा सब देख रहा था, और दोनों लड़कियां अंदर चले गए तो विहान को वापस जाने को कहा डीन ने और वारं किया के फिर कभी उस तरह से बेहवे किया तो पुलिस में रिपोर्ट किया जाएगा जिस्सके लिए उस्सको जेल भी हो सकता है. विहान ने सॉरी कहा और वहां से निकल लिए.

अशिता कैंपस के अंदर मोबाइल को खोलके सबसे पहले उस मैसेज को hi पढ़ा और रो पारी. प्रिय उस्सको गले से लगाते हुए कहा,

“तू बहोत लकी है ऐसा लवर मिला है तुझे खुद अपने घर में यार. अब रोना बांध कर और उस्सको एक प्यारी सी रिप्लाई कर नाह तू भी.”

अशिता के समझ में नहीं आरही थी के किआ लिखे! तो प्रिय ने कहा,

“आरी पागल लड़की उस्सको प्यार से थैंक यू तो बोल और दिल में जो हैं केहड़े तू भी!”

अशिता ने ेंसू पोंछते हुए प्रिय से पीठ किया और कहा,

“तू मत देख नाह, मुझे अकेली चोरर दे अब!”

प्रिय ने उस्सको चिढ़ाते हुए कहा,

“अरे वह ऋ भाई की मेहबूबा, बड़ी शर्म आरही है तुझे अपने आशिक को प्रेम पात्र लिखने में मेरे सामने, ठीक है लिख दे तब दिखाना किआ लिख कर सेंड किया, और सुन, उस्का नंबर मुझे भी दीजियो मैं भी थोड़ा सेक्स चाट करुँगी तेरे आशिक से हाहाहाहा!”

अशिता ने प्रिय को गाली देते हुए भगाया वह से और विहान को यह लिख कर सेंड किया,

“भाई आप ने तो मुझे रुला दिया, मैं अभी ेंसू भरे ेंखों से लिख रही हूँ, बहोत बहोत शुक्रिया भाई, यू प्रोवेद हाउ मच यू लव में, एंड ी लव यू मिलियंस टाइम मोरे भाई. हमेशा मेरा बांके रहना कभी मुझको मत चोरर्ण, मुझसे कभी दूर नाह होना, मरते दम तक मुझसे ऐसे hi प्यार करना भाई, तुम मेरे ज़िन्दगी की सबसे बड़ी ख़ुशी हो, तुम्हारे बिना मैं अधूरी हूँ भाई यह हमेशा याद रखना. ी लव यू वैरी वैरी मच भाई. थैंक्स अगेन एंड अगेन. मुउउउउउउआआआआह.”

कुछ देर बाद प्रिय उसस्के पास आयी और उसस्के हाथ से मोबाइल छीन कर पढ़ने लगी के किआ लिख कर सेंड किया अशिता ने और पढ़ने के बाद फिर अशिता को चरते हुए कहा,

” वाओ, व्हाट ा लव लेटर सेंत तो योर लवर. आशु तू भी इतना प्यार करती है उस से तो साली क्यों उस्सको इतने दिनों तक तड़पाया था तूने भला, तू भी नाह धत!”

और फिर दोनों एक दूसरे को बाँहों में भर लिए, अशिता फिर रोने लगी तो प्रिय उस्सको तस्सली देते हुए छुप करने लगी.

व्हाट्सअप एक्टिवटे कर दिया था विहान ने, और सिर्फ चाट करना बाकी था अशिता तो क्लास में जाने के बाद बार बार अशिता अब विहान की मेसज का वेट करने लगी और दोनों चाट करने लगे. अशिता ने अपने क्लास में बैठे हुए सेल्फी लेकर सेंड किया विहान ko….vihaan को बहोत ाचा लगने लगा, बिल्कुल वही फील आने लगे जैसे कोई भी गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड चाट करते हैं नोर्मल्ली एक्साक्ट्ली वही फीलिंग दोनों तरफ हो रहे थे.

लुञ्चतिमे से लेकर क्लासेज एन्ड होने तक 300 से ऊपर मैसेज दोनों तरफ किये जा चुके और बहोत सारे पिक्स सेंड कर दिया था अशिता ने विहान को, उन् में एकांत सेक्सी पिक्स भी मांगे विहान ने और कहा के अपने जांघों के बिच मोबाइल करके सेल्फी लें जिस में अशिता के जाँघों के बिच उस्सको दिखे पिछ में, कुछ वैसे पिक्स भी सेंड किया अशिता ने विहान को, मगर सेंड करने के बाद अपनी मोबाइल में पिक्स डिलीट कर देती थी हर बार और उधर विहान उन् पिक्स को गैलरी में सेव करने के बाद व्हाट्सैप पर डिलीट करता. डिलीट वाली बात विहान ने hi अशिता को कहा था चाट के दौरान.

और शाम को कॉलेज रिलीज़ होने के टाइम विहान आलरेडी मौजूद था अशिता को वेट करते हुए गेट के पास.

अशिता ने बिल्कुल भी नहीं सोचा था के विहान उस्सको लेने भी आएगा.

दोनों फिर मिले और बस से नहीं पैदल गए घर मगर उस जगह पर गए जहाँ जाया करते थे कभी उस पार्क जैसे जगह पर बड़े बड़े दरख़तों के बीच, फूल पौधों के बीच जो सच में एक रोमांटिक जगह था, और कोई 15 /20 मिनट गुज़ारे वहां दोनों ने प्यार करते हुए, किश करते, एक दूसरे को बाहों में भरके…. एकांत लोग कभी कभार गुज़रते उधर से ख़ास कर उन् दोनों के तरह लवर्स hi जाते थे उस तरफ छुप छुप कर मिलने के लिए मगर कुछ ऐसे भी लोग जाते थे, जिससे वोएयर्स कहते हैं, चुम्मा छाती देखने वाले, लड़कियों के बूब्स, जांघें , पंतय देखने के लिए क्यूंकि कुछ लोग सेक्स भी करते थे, छुप छुपा के उस तरफ…. तो किआ उन् लोगों में से कोई विहान अशिता को जान्ने वाले भी हो सकते थे मगर दो प्यार में डूबे हुए प्राणी को कभी यह होश नहीं रहता के कोई उनको देख भी रहा है कहीं से यह सब को पता है, तो किसी ने अगर देखा होगा तो बाद में ज़रूर इस्सके पता चल hi जाएगा.

विहान ने फिर अशिता को कभी कमर से थामते हुए चलता तो कभी हाथ पाकर के, वो यूनिफार्म में थी और विहान सादे लिबास में तो जब वहां से चलते हुए वापस घर के तरफ जाने लगे तो कीबेरसफ़े के पास से गुज़ारना था… और जब वहां से गुज़रे तो अमित अंदर साफé से देख रहा था और जब उस्सने अशिता को देखा तो उसस्के दिल के धड़कन बढ़ गए और वो देखता गया अशिता को ऊपर से निचे तक…. उस्सकी हर एक जिस्म के हिस्से को अमित ने इस तरह से देखा के जैसे वो उसस्के करीब थी, अशिता की उँगलियों को देखा जो विहान की मुठी में कैद थे, उस्सकी चेहरे पर उस्सकी बालों को लहराते हुए देखा, अशिता की गाल को देखा, निहारा, उस्सकी कान और उस्सकी बाली को देखा, फिर नज़रों को आशिता के ब्लाउज पर फेर्रा अमित ने उस्सकी बूब्स के फॉर्म उस सफ़ेद ब्लाउज पर देखा जो दो ग़ुब्बारे की तरह फुल्ले हुए थे और उस्सकी चलने की हरकत से हिल रहे थे और तब उस्सकी तंग को देखा वो गोरी गोरी part जहाँ उस्सकी यूनिफार्म की स्कर्ट एन्ड होती है ठीक घुटनों पर, और उस्सकी सॉक्स और शूज देखे अमित ने….. और ग़ौर से देखता गया जीतनेय वक़्त में दोनों ने साइबर साफé को क्रॉस करने के लिए टाइम लिए उतने टाइम में अमित को लगा के एक घंटे से दोनों को देख रहा था…. मगर लास्ट part में अमित ने देखा के विहान ने अशिता का हाथ चोरर कर उस्सकी कमर में हाथ डाला और उस्सको खुद से चिपकाया जिस दौरान अशिता की छाती विहान के छाती पर क्रश हुए मतलब उसस्के बूब्स विहान के छाती पर डब्बे और हँस्ते हुए अशिता ने विहान के गाल को सहलाया….

अमित के दिमाग़ में उस वक़्त तो कोई भी बुरा ख्याल नहीं आया, वो तो सिर्फ अशिता को निहार रहा था दिल जो दे चूका था उससे, उस्का मैं तो बहोत किया के बाहर निकल के विहान से बात करने के बहाने ात लीस्ट अशिता को hello करे मगर हिम्मत नहीं हुई उससे. विहान ने सोचा भाई बेहेन में बहोत प्यार है और वैसे hi दोनों का प्यार था. उस वक़्त सब नार्मल था अमित के लिए….

मगर उस शाम को जब अमित ने कुछ पेग उतार लिया हलक़ के अंदर और जब उसस्के खून में शराब ने काम करना शुरू किया तब अमित ने याद किया के आशिता ने कहा थे के उस्सकी ज़िन्दगी में आलरेडी कोई है…. और अमित ने सोचा किआ उस्सने विहान को मैं किया था?!!

तो बे कॉन्टिनोएड………….
 
अपडेट 46 सुमन तोरमेन्ट्स अशिता मोरे

मगर उस शाम को जब अमित ने कुछ पेग उतार लिया हलक़ के अंदर और जब उसस्के खून में शराब ने काम करना शुरू किया तब अमित ने याद किया के आशिता ने कहा थे के उस्सकी ज़िन्दगी में आलरेडी कोई है…. और अमित ने सोचा किआ उस्सने विहान को मैं किया था?!!

अब आगे…

घर आकर hi अशिता बहोत hi खुश थी और बार बार विहान को थैंक्स करते जा रही थी. वो ख़ुशी से पहली नहीं समां रही थी, बार बार विहान की पिक्स ले रही थी, घर का, अपने रूम का , लाउन्ज का सोफे का हर तरह की पिक्स लेते जा रही थी, बिल्कुल वैसे जैसे एक बचे को खिलौना मिलने पर होता है उसी तरह से अशिता खुश हो रही थी, और विहान उस्सको मुस्कुराते हुए ख़ुशी से देखे जा रहा था.

तो फिर आज बारी थी अशिता का विहान के फोटोज लेने की, उस्सने शरारत करते हुए कहा,

“भाई आज आप कपडे बदलो और मैं आप की पिक्स लुंगी कपडे बदलते हुए.”

विहान ने हँस्ते हुए कहा,

“अरे मैं तो अपने नार्मल कपडे में हूँ क्यों उतरूं इससे? तू यूनिफार्म में है, तू उतार और मैं तेरे पिक्स लूंगा”

फिर हुआ यह के विहान ने hi अशिता को यूनिफार्म चेंज करते हुए रिकॉर्ड किया पहले की तरह और अदाओं से अशिता ने कई पोज़ दिए अपने भाई को खुश करते हुए. उसस्के बाद होना किआ था; माँ बाप के आने से पहले दोनों ने इश्क फरमाए कोई घंटा भर तक बीएड पर रहे प्यार में डूबे हुए.

पेरेंट्स के आने के बाद, अशिता ने अपने बाप को मोबाइल दिखाने को सोचा, मगर पहले विहान से पूछा तो उस्सने हाँ कहा, मगर दोनों ने बात कर लिए थे के अपनी माँ को नहीं पता चलने देंगे वार्ना वो ज़रूर बहोत साड़ी बातें सुनाएगी.

तो मौका पा कर अशिता ने अपने पापा को अपनी नई मोबाइल दिखाए और अपने पापा के सेल नंबर ऐड किया अपने कॉन्टेक्ट्स में और खुद के नंबर ऐड किया अपने पापा के फ़ोन पर अपने नाम से. बाप ने कहा यह बहोत अच्छी बात है अब वो भी कहीं से भी अशिता को कांटेक्ट कर सकेगा ज़रुरत पड़ने पर. अगर अशिता ने होशियारी से कहा,

“हम्म्म पापा अब जब भी आप और मम्मी घर वापस आने लगे, तो मुझको एक मिस्स्कॉल करना तब हम दोनों को पता चल जाएगा के आप दोनों आ रहे हो तो हम एक दूसरे से दूर हो जाएंगे, आईडिया ाचा है नाह?!”

अनिरुद ने हँस्ते हुए कहा,

“वाओ तुम तो बहोत hi होशियार हो गयी हो अब मोबाइल से मैं तुम दोनों को आगाह करूँगा हैं? इसी लिए ख़रीदा किआ मोबाइल तेरे लिए उस्सने? किआ औज़ार है यह मोबाइल भी देखो किश तरह के काम आगया यह तुमको, चलो ठीक है मिस कॉल कर दिया करूँगा तुमको हहहहए!”

अनिरुद ने सोचते हुए खुद से कहा,

“मैं जैसे इन् दोनों का एक दोस्त हूँ और यह कोई काम छिप कर कर रहे हैं और मैं दोनों को उस काम करने में मदद कर रहा हूँ! किआ करें इनके ख़ुशी के लिए तो कुछ भी करना पड़ेगा मुझे. चलो माँ अगर इतनी निर्दय नहीं होती तो शायद मुझे इतना प्रोटेक्ट नहीं करना पड़ता दोनों को…”

उस रात को भी सुमन ने फिर टोका अशिता को के क्यों स्ट्राप वाली ड्रेस पहनी है जिस में उस्सकी काँधे पर उस्सकी ब्रा के स्ट्रैप्स भी नज़र आरहे हैं.

अस्सल में यह वाला ड्रेस विहान की चॉइस थी आज के लिए. जब यूनिफार्म चेंज किया था तो अशिता के समझ में नहीं आरही थी के किआ पहनें तो विहान ने चोसे किया था उस ड्रेस को उसस्के लिए. अब दन्त खानी पद रही थी अपनी माँ से उसस्के लिए, तो अशिता को ग़ुस्सा आया और चीला कर अपनी माँ से कहा,

“तो क्यों ख़रीदा था यह ड्रेस फिर? आग लगा दूँ किआ अपने सारे कपड़ों में मैं? जला दूँ सब और नंगी रहूँ किआ एहि चाहती हो आप?!”

अनिरुद और विहान ने अशिता को उस तरह से ऊंची आवाज़ में बात करते हुए कभी नहीं सुना था, दोनों हैरान रह गए उस्सको वैसे जवाब देते हुए सुनकर, और विहान जल्दी से जाकर उस्सको गले से लगते हुए वहां से अपने कमरे में लगाया. अशिता रोने लगी थी वो कहने के बाद और अनिरुद तो टूट hi पड़ा सुमन पर उसस्के बाद.

अनिरुद ने दांत पीसते हुए ग़ुस्से मकें सुमन से कहा,

“बिल्कुल सही जवाब दिया उस्सने तुमको, आखिर चाहती किआ हो तुम? क्यों उसस्के पीछे पड़ी हुई हो? उस्सको पढ़ना है क्यों उस्सको इतना परेशान कर रही हो, बेचारी पढ़ नहीं पाएगी….”

सुमन ने कहा,

“देखा किश तरह से विहान उस्सको अपने साथ सत्ता कर लगाया? वो नहीं दिखा तुमको, मुझको सुनाने चले आये!”

अनिरुद: “तुमको क्यों उस्सकी सौतेली माँ के जैसे बेहवे कर रही हो? लगता है के वो तुम्हारी बेटी नहीं किसी और की औलाद है? एक माँ अपनी बची के साथ कैसे ऐसा बेहवे कर सकती है? तुम तो ऐसी नहीं थी उसस्के साथ आज कल क्यों ऐसे पेश अति हो उसस्के साथ?”

सुमन: “क्यूंकि मुझे उस्सकी लक्षण ठीक नहीं दिख रहे हैं. वो विहान से प्यार करती है, समझते हो वही आशिको वाला प्यार, मुझे तो शक है दोनों कुछ आगे hi बढ़ चुके हैं, पता नहीं ईन्सेस्तुओस रिलेशनशिप होगा मुझे लगता है दोनों के बीच, और सुलाओ अपनी beti-bete को एक hi बीएड पर, एक hi रूम में, अगर कुछ हुआ, अगर वो प्रेग्नेंट हुई या कोई भी ऐसी चीज़ हुई जिस में वो दोनों बदनाम हुए तो सुनलो जी मैं इस घर से हमेशा के लिए निकल जाउंगी कह देती हूँ सुना आप ने?!”

अनिरुद को फिर अपनी जवानी याद आयी, बिल्कुल ऐसे hi शब्द सुन्ना पड़ता था उससे और उस्सकी छोटी बेहेन को अपने घर में, माँ से, बाप से, दादा से, दादी से, बड़े भाई से, चाचा से, चची से…… फिर गाओं वालों से! तंग आगया था वो, वैसे बातें सुनते हुए, फिर उस्सकी बेहेन उम्र में छोटी थी उस से सेहेन नहीं हुआ था वो सब ताने!! अनिरुद अपने सर पककर कर बैठ गया और उस्सकी पिछली ज़िन्दगी के दृष्ट उसस्के नज़रों के सामने घूमने लगे, उसस्के माथे पर पसीने के बूँदें नज़र आये और उस्सको एक दर्द महसूस हुआ सीने के अंदर जिस से उस्सको एक कमज़ोरी महसूस हुई पुरे बदन में और उस्सको सांस लेने में कुछ तकलीफें हुई मगर उस्सने किसी से कुछ नहीं कहा बैठा रहा कोई आधे घंटे तक जब तक उस्सको आराम नहीं मिला.

कुछ देर बाद अनिरुद बाहर निकला ठंडी हवा खाने के लिए. अपने घर के आँगन में वो उस पत्थर पर बैठा और रास्ते के तरफ देख रहा था के अशिता ने कमरे के अंदर से अपने पापा को बाहर देखा तो विहान से कहा के पापा बाहर बैठे हुए हैं.

सुमन किचन में थी उस वक़्त तो दोनों भाई बेहेन बाहर गए अपने पापा के पास. अशिता उसस्के पास बैठी और उसस्के काँधे पर अपने बाहों को करते हुए पूछा,

“किआ हुआ पापा आप बाहर क्यों बैठे हो? परेशान दिख रहे हो आप कुछ हुआ किआ?!”

विहान अपने डैड के चेहरे में देखते हुए उसस्के रिप्लाई का वेट कर रहा था और अशिता और विहान फिर एक दूसरे को देखने लगे तब बाप ने कहा,

“बीटा मुझे डर है के अगर मुझे कुछ हो गया तो तुम दोनों का किआ होगा! – मैं बिल्कुल नहीं चाहता के तुम दोनों पर वो बीते जो मुझ पर बीता था…. मेरे सीने में एक दर्द हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ था, मुझे डर है के कहीं यह हार्ट से रिलेटेड तो नहीं, स्ट्रेस लेने से या ज़्यादा ग़ुस्सा करने से इस उम्र में ऐसा होता है मैं ने पढ़ा हुआ है…”

विहान ने तुरंत कहा,

“पापा अभी इसी वक़्त हॉस्पिटल चलो चेक उप करने से सब पता चल जाएगा, चलो पापा!”

अशिता ने भी चलने को कहा. मगर अनिरुद ने मन किया के सीरियस नहीं था बुसस उस्सको वैसा लगा, अगर फिर कभी वैसा होगा तब जायेगा हॉस्पिटल चेक करने के लिए.

अशिता ने तब पूछा,

“यह मम्मी की वजह से हुआ नाह?”

अनिरुद: “आरी नहीं रे, मैं अपने खुद के बारे में सोचने लगा था….. कुछ बातें याद आगये थे…”

अशिता: “तो वो मम्मी के बातों की वजह से hi बातें याद आये नाह आप को?”

अनिरुद ने मुस्कुराते हुए, अशिता के काँधे पर हाथ रख के सहारा लेते हुए खड़ा हुआ और कुछ बोलने जा रहा था के सुमन ने दरवाज़े से सब देखते हुए कहा,

“सब देख रही हूँ और सुन भी रही हूँ किआ चल रहा है तीनों के बीच मेरी बातें किये जा रहे हैं? किआ किया मैं ने? और आप को बड़ा मजा ारः है उस्सकी नंगी काँधे पर वैसे हाथ रखने से नाह?!”

अनिरुद ने तुरंत अशिता के काँधे से अपना हाथ हटाते हुए कहा,

“किआ बक रही है तू?!”

और विहान ने अपनी मम्मी को ग़ुस्से से देखते हुए कहा,

“माँ विल यू प्लीज शट उप? व्हाट थे हेलल इस थिस दमन आईटी?!!”

और अशिता भागते हुए घर के अंदर चली गयी अपनी ड्रेस बदलने को तुरंत!

तो बे कॉन्टिनोएड इन थे नेक्स्ट पोस्ट इम्मेडिएटली….
 
अपडेट 47 अनिरुद गोत क़ुएस्तिओनेड

उस रात को विहान और अशिता ने कुछ नहीं किया, मतलब रोमांस नहीं किये क्यूंकि दोनों अपनी माँ की बेहेवियर को लेकर बहोत परेशान थे.

अशिता जब अपनी होमवर्क्स और रविशंस कर रही थी तो विहान को नींद आगये थे और बाद में अशिता आहिस्ते से उसस्के बगल में सो गयी.

सुबह को माँ और बाप काम के लिए निकल गए. और अनिरुद ने जाते वक़्त अशिता की मोबाइल पर यह मैसेज भेजा,

“वे अरे आउट आलरेडी, वेक उप ों टाइम एंड don’t गेट स्ट्रेस्ड अबाउट लास्ट night’s इश्यूज, कंसन्ट्रेट ों योर स्टडीज एंड तेल्ल विहान आल्सो नॉट तो वोर्री, एवरीथिंग विल बे फाइन.”

उस मैसेज की बीप ने अशिता को जगाया. विहान भी मैसेज की टोन सुनकर जाएगा और पूछा,

“तुझे मैसेज आने भी स्टार्ट हो गए? किश किश को नंबर दे दिया तुमने ऋ?”

तब अशिता ने ख़ुशी से मुस्कुराते हुए कहा,

“सुनों मैसेज पढ़ती हूँ…. और उस्सने रीड किया विहान को सुनाते हुए मैसेज को.”

विहान ने तब कहा,

“ओह पापा की है. चलो हमको वेक उप के लिए मैसेज किया है!”

अशिता ने एक अंगड़ाई लेते हुए कहा,

“no, वेक उप के लिए नहीं, हमको stress-free होने के लिए मैसेज किया, खुद सभी अपने काँधे पर ले रहे हैं पापा हमको आराम देने के लिए, मम्मी उस्सको बहोत सत्ता रही है मुझको लेकर भाई! मम्मी क्यों एकदम से उस तरह से रियेक्ट करने लगी है भाई?”

वाशरूम के तरफ जाते हुए विहान ने कहा,

“क्यूंकि मम्मी को हमारे बारे में सब पता है!”

अशिता बैठी रही कुछ देर बीएड पर सोचते हुए के उस्सकी मम्मी को सच में सब पता है, वो डाउट नहीं करती, उस्सको पूरा यकीन है. और अशिता फिर लेट गयी बीएड पर विहान को बाहर निकलने के लिए वेट करते हुए.

जब अशिता कॉलेज के लिए तैयार होने लगी तो विहान उस्सको फिर रिकॉर्ड करने लगा तो अशिता ने कहा,

“भाई हर रोज़ शामे शामे वीडियोस बना के किआ करोगे? शामे तो हैं सब हर सुबह की तरह नाह?!”

विहान ने कहा,

“बिल्कुल भी शामे नहीं है स्वीटहार्ट, हर वीडियो में तुम्हारे अलग अलग शेप हैं, अलग रिएक्शंस हैं, डिफरेंट स्माइल हैं, पोस्चर अलग होते हैं, तुम्हारे फेसिअल एक्सप्रेशन डिफरेंट होता है, तुम्हारे चेहरे का रंग अलग होता है, तुम्हारी अदा अलग होता है, जैसे के अभी तुमने बात किया और मेरे बातें भी साथ में रिकॉर्ड होते हैं नाह? सब अलग होते हैं…. नाउ स्माइल ा बिट प्लीज ब्यूटीफुल सीस!”

अशिता ने हँस्ते हुए कैमरा में लुक दिया और कैमरा के पास आकर उस को किश किया. वो भी रिकॉर्ड हुए, उस्का पूरा चेहरा जैसे ज़ूम हुआ उस्सकी उस हरकत से.

तब दोनों एक दूसरे के बाहों में जाकर और किश किये कुछ देर तक. अशिता ने तब कहा,

“ोफो भाई तुम मेरे बाल ख़राब कर रहे हो और देखो नाह यूनिफार्म भी कुचल गया अभी अभी स्त्री किया इस्को, चोर्रो मुझे अब!”

विहान ने मुस्कुराते हुए कहा,

“अपनी वाइफ को कॉलेज यूनिफार्म में देख रहा हूँ, सुबह सुबह कितनी अछि दिखती है मेरी लवली वाइफ हेहेहे!”

अशिता का मुंह खुला रह गया यह सुन कर और विहान के चेहरे में देखते हुए कहा,

“भाई? किआ कह गए तुम? वाइफ? हीहीहीहीहीही! मुझको वाइफ बना दिया तुमने भाई? सीस से वाइफ बन गयी मैं?”

विहान ने कहा,

“तुम तो शुरू से hi मेरी वाइफ हो, जब तुम पैदा हुई तो मेरी वाइफ hi पैदा हुई थी, मगर किआ तुमको पता है के मैं तुमको देखना भी नहीं छठा था तब? भागता था तुमसे क्यूंकि मुझको एक भाई चाहिए था उस वक़्त हाहाहाहा!”

अशिता ने अपने टिफ़िन लेते हुए मुड़कर कहा,

“रियली भाई? तुम मुझको पसंद नहीं करते थे जब मैं बेबी थी?”

विहान उसस्के तरफ बढ़ते हुए कहा,

“बिल्कुल भी नहीं पसंद करता था, ग़ुस्सा था मुझे के क्यों मेरा भाई नहीं हुआ? मुझे बेहेन नहीं चाहिए था!”

तब तक विहान अशिता के पास चला गया था और फिर से उस्सको बाहों में भरते हुए उसस्के गर्दन को किश किया और अशिता ने पूछा,

“फिर कैसे तुम मुझको पसंद करने लगे भाई? तुम मुझको मारते तो नहीं थे नाह जब मैं बेबी थी?”

विहान ने अशिता को ज़ोर से जकरते हुए कहा,

“तुमको क्यों मारता मुझे तो तुमको देखते hi तुमसे प्यार हो गया था, पता चल गया था तभी के तुम मेरी वाइफ हो, पता है तब मम्मी ने फर्स्ट थिंग किआ किया था? मुझको तुझे दूध पिलाने को दिया था बोतल में और मैं ने पिलाया था और तुमने मेरा हाथ पाकर लिया था, तुमको भी पता था के तेरा हस्बैंड हूँ!”

अशिता ने हँस्ते हुए कहा,

“चलो और फेंको मत, मैं बेबी थी तो मुझे किआ पता होगा उस वक़्त हीहीहीहीही! …. मगर तुम ने कैसे मुझको एक्सेप्ट किया जब तुमको भाई चाहिए था?”

विहान ने अशिता के गालों को चूमते हुए और उसस्के जिस्म पर हाथ फरते हुए कहा,

“मम्मी ने जब देखा के मैं तुमको बिल्कुल पसंद नहीं करता, तुम्हारे पास नहीं रहना चाहता, अपने रूम सोना बांध कर दिया था, तो उस्सने मुझे pre-primary स्कूल भेज दिया और वहां एक नर्सरी भी था नेक्स्ट रूम में. वहां भी बेबीज और वही रोना जिस से मुझे चिढ हो गयी तुम्हारे रोने को सुन सुन कर; फिर धीरे धीरे मैं छुप छुप कर उन् बेबीज को देखने लगा क्यूंकि वहां के टीचर pre-primary के बच्चों को उस बेबीज से कहने को लेजाते थे और बेबीज खुश होते थे दूसरे बच्चों को देख कर, उस तरह से धीरे धीरे मैं भी जाने लगा और एक बेबी थी बिल्कुल तुम्हारी तरह वहां भी, तो उस्सको मैं ने दूध पिलाया था बोतल से टीचर के कहने पर… उस दिन मैं घर वापस आया तो छुप कर तुमको देखने आया था. वो पहली बार थी के मेरा इंटरेस्ट तुम्हारे तरफ गया था… फिर मैं मम्मी से छुपा कर तुम्हारे पास अत, तुमको छूटा, तुमको घुररता, तुमको नींद में सोये हुए देखता…. काश उस वक़्त मेरे पास मोबाइल होता तो तुमको रिकॉर्ड किया होता तभी; मेरी बेबी वाइफ थी तब तुम हहहहए!”

अशिता ने वापस विहान के गाल को किश करते हुए कहा,

“तुम मुझसे सिर्फ 4 साल बड़े थे तो तुमको वो सब याद है इतनी क्लेअर्ल्य बता रहे हो?!”

विहान: “100 % सब डिटेल में याद है मुझे, शायद इस लिए के मैं ने जो चाहा था मुझसे उस से भी प्यारी चीज़ मिली थी उस रोज़… उन् दिनों को मैं छोटा भाई चाहता था, तुम्हारे आने से पहले जब मम्मी प्रेग्नेंट थी तो मैं तुमको एक छोटा भाई सोचता था, के तुम्हारे साथ खेलूंगा, तुम मेरे तरह होंगे ेट्स…. और तुम आयी तो लड़की निकली… जब मम्मी ने कहा के तुम लड़की हो बेहेन हो भाई नहीं तो मैं ने कदम पीछे कर लिया था और वहां से भाग गया था….. सब कुछ बहोत अछि तरह से याद है मुझे.”

दोनों एक दूसरे को बाहों में थामे हुए काफी देर तक खड़े रहे. एक दूसरे के दिल के धड़कनों को जैसे कांटेक्ट करा रहे थे उस तरह से जाकर रह कर.

और आखिर में दोनों घर से निकले. आज विहान उसस्के साथ नहीं जा रहा था, उस्सने अशिता को बस तक चोर्रा और घर वापस आया.

अशिता बस में जाते वक़्त विहान के उस बात को याद करते हुए गयी के किश तरह से विहान ने उस्सको वाइफ कहा, अपने आप में मुस्कुराते हुए विहान के बातों को सोचते हुए कॉलेज गयी…. कॉलेज पहुँचते hi विहान को टेक्स्ट किया के वो पहुँच गयी और bye कहा. दोनों ने डीडे कर लिया था के क्लासरूम से टेक्स्ट नहीं करेंगे, विहान नहीं चाहता था के अशिता की स्टडीज में हरकत हो. ब्रेक और लंच टाइम में टेक्स्ट करने को डीडे किये दोनों ने.

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बैंक में अनिरुद के कुछ दोस्तों ने उस से बात करने के लिए कहा उनके ब्रेक में. अनिरुद जब उन् लोगों से मिले तो उन् में से दो दोस्तों ने कहा,

“किआ तुमको पता है के तुम्हारे बेटे और बेटी में किआ चल रहा है? पूरा मोहल्ला इस बारे में बात कर रहे हैं अरे यू अवेयर अबाउट थिस अनिरुद?!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………
 
अपडेट 48 थे ट्रबल स्टार्टस
सॉरी फ्रेंड्स टुडे इतस सिंगल अपडेट ओनली

बैंक में अनिरुद के कुछ दोस्तों ने उस से बात करने के लिए कहा उनके ब्रेक में. अनिरुद जब उन् लोगों से मिले तो उन् में से दो दोस्तों ने कहा,

“किआ तुमको पता है के तुम्हारे बेटे और बेटी में किआ चल रहा है? पूरा मोहल्ला इस बारे में बात कर रहे हैं अरे यू अवेयर अबाउट थिस अनिरुद?!”

अब आगे…..

अनिरुद को उनके बातों को सुनकर ज़बरदस्त झटका लगा और उसस्के पसीने चुत गए. पसीने के बूँदें उसस्के पेसाहि से टपकते हुए उसस्के कमीज़ पर गिर्री और उसस्के कान के पीछे और गर्दन भी भीगे हुए नज़र आये…. उस्सको लगा के उस्सको अब दिल का दौड़ा hi पड़ने वाला है और जब उनके दोस्तों ने देखा के उस्का चेहरा का रंग बदल रहा है तो जल्दी से उस्सको संभाला उन्हों ने और पीछे लगाए, बिठाया उस्सको और एक को हाई किया गया अनिरुद को आराम देने के लिए.

कोई आधे घंटे तक अनिरुद वैसे बैठा रहा वहां और जब उनके साथी एम्बुलेंस को फ़ोन करना चाहा तो उस्सने मन्ना किया, फिर आधे घंटा के बाद जाकर खुद को संभालते हुए अपने दोस्तों से कहा उससे सब समझाने को.

उन् लोगों ने कहा के किसी ने एक दिन मोटरसाइकिल पर जाते हुए विहान और अशिता को किश करते हुए देखा था खुद के घर के सामने गेट के पास, तब उस आदमी ने अशिता पर नज़र रखना शुरू किया और बाद में कुछ दोस्तों के साथ अशिता और विहान को कॉलेज के सामने देखा, वॉचमन से लड़ाई करते हुए देखा, फिर दोनों को गार्डन में किश करते हुए देखा और विहान को अशिता के बूब्स दबाते हुए देखा उस्सकी यूनिफार्म की स्कर्ट को ऊपर उठाकर जाँघों पर और पंतय पर हाथ डालते हुए देखा…. 5 आदमियों ने देखा और बात पुरे मोहल्ले में फैला दिया गया है. सब मोहल्ले के लोग अब अशिता और विहान पर नज़र रखे हुए हैं!!

यह सब सुनकर अनिरुद ने काम से लीव लिया घर जाने को कहते हुए के उस्सकी तबियत ठीक नहीं.

उस्सने घर जाने से पहले अशिता को मैसेज किया के उस्सकी मैसेज को डीन को बता कर फ़ौरन घर आये क्युके उस्का तबियत ठीक नहीं है. और विहान को मैसेज किया के घर पर hi रहे उस से तुरंत मिलना है इसी वक़्त.

मैसेज मिलने पर विहान और अशिता ने एक दूसरे को कांटेक्ट किया अपने पापा के मैसेज के बारे में. विहान तुरंत गया कॉलेज के सामने अशिता को लेने, यह उस्सको पता नहीं था के एक ग़लती कर रहा था उस वक़्त. उस्सने सोचा के बाप बीमार हुआ होगा तो अशिता को लेने गया पहले.

अशिता को परमिशन मिल गयी घर जाने के लिए और विहान उस्का वेट कर रहा था गेट के पास. दोनों मिले मगर उनको पता नहीं था के अब भी उन् पर नज़र रखे जा रहे थे, तो बस से सफर किया दोनों ने और तब तक अनिरुद घर पहुँच गया था इंतज़ार करने लगा दोनों को, उस्सने सोचा था के विहान घर पर hi मिलेगा मगर उस्सको ना पाकर समझ गया के वो अशिता को hi लेने गया होगा और सोचने लगा पता नहीं अब और कितने लोग देखेंगे दोनों को.

विहान और अशिता जिस बस से वापस घर लौट रहे थे उस में भी लोग उन् दोनों को hi देख रहे थे जो मोहल्ले के पससंजर्स थे और दोनों को कुछ भी पता नहीं था. दोनों एक दूसरे को सीट पर जाकर हुए थे और किश भी किये… लोगों ने देखा….. किसी ने सेल से पिछ भी ले लिए, कॉलेज के पास भी पिछ लिए दोनों के, उस वक़्त विहान का हाथ अशिता के कमर में था बस स्टॉप के तरफ बढ़ते वक़्त, वो पिक्स लिए गए….. बस के अंदर जाकर हुए और किश करते हुए पिछ लिए गए….

इस से पहले के विहान और अशिता घर पहुँचते अनिरुद को वो पिक्स सेंड कर दिया गया उसस्के मोबाइल पर!!

अनिरुद का बुरा हाल था. वेट करने लगा दोनों का घर में वो.

जब दोनों घर पहुंचे तो जल्दी से अपने बाप के पास गए फिकरमंद होते हुए और पूछे के किआ बात हो गयी, किआ वो बीमार है ेट्स….

बाप ने दोनों को अपने मोबाइल पर उनके किश करते हुए और कमर में हाथ डाले चलते हुए कॉलेज के पास वाले पिक्स दिखाए!

अशिता और विहान के चेहरे के रंग बदल गए, दोनों को झटका लगा और खामोश बैठ गए एक दूसरे को देखते हुए!”

बाप भी बिल्कुल खामोश था काफी देर तक. तीनों के तीनों काफी देर तक जैसे के एक इलेक्ट्रिक शॉक लगने के बाद इंसान का जिस्म सुन हो जाता है उस पोजीशन में रहे.

फिर अपने आप को संभालते हुए अनिरुद ने कहा,

“यह सब किआ है यार?! किआ कर रहे हो तुम दोनों? मैं ने इतना समझाया था उस रात को तुम दोनों को, घर के अंदर किश तरह से रहने को समझाया था, यहाँ संभल गए तो बाहर यह सब कर रहे हो तुम दोनों? दुन्या के सामने? भाई बेहेन होकर कोई यह सब पब्लिक में करता है? पता है आज बैंक में मुझको दोस्तों से पता चला के पुरे मोह्हले को तुम दोनों के बारे में पता है? किसी ने तुम दोनों को गेट पर किश करते हुए देखा था किसी दिन, उस्सने तुम दोनों पर उस दिन के बाद नज़र रखना शुरू किया और दूसरे लोगों को भी कह दिया तुम दोनों पर नज़र रखने को तब से पता नहीं कितने बार तुम दोनों को एक साथ पता नहीं किआ किआ करते हुए देखा यहाँ तक के आज, अभी तुम्हारे पिक्स लेकर मुझको सेंड किया!!”

अशिता रोने लगी और कहा,

“मम्मी को पता चलेगा तो बहोत बुरा होगा पापा, आप को किश ने पिछ सेंड किया उस से कहो के प्लीज इन् पिक्स को किसी के साथ शेयर नाह करें केहदो के आप हम दोनों से बात करोगे, केहदो के आप की इज़त का सवाल है…..”

अनिरुद ने कहा,

“मेरे एक दोस्त के बेटे ने सेंड किया पिक्स मैं ने उस्सको बता दिया नहीं शेयर करने को उस्सने तुरंत मेसज सेंड किया के कोई फ़िक्र करने की बात नहीं है, वो सिर्फ अपने डैड के कहने पर पिछ लिया था मुझको दिखाने के लिए और मुझे सेंड करने के बाद उस्सने पिक्स डिलीट कर दिया सिर्फ अपने डैड को सेंड किया और मुझे. तब उसस्के डैड ने वही पिक्स मुझे भेजा…. तुम्हारे आने से पहले मैं ने बात कर लिया हैं उंनसे….. कब तक बचाऊंगा मैं तुम दोनों को? और कितना बचा पाउँगा? यू अरे एडल्ट्स बेहवे लिखे एडल्ट्स, टेक केयर, बे केयरफुल ऑफ़ व्हाटएवर यू अरे दोंग? छोटे बचे हो किआ तुम दोनों? अब बुसस तुम्हारे मम्मी को पता नाह चले अगर किसी ने उस्सको कुछ भी बताया तो बखेड़ा खड़ा हो जाएगा और तब पता नहीं मैं कैसे बचाऊंगा तुम दोनों को उस से!!”

विहान का दिमाग़ नहीं काम कर रहा था, बहोत गिलटी फील कर रहा था और उस्सको बहोत फ़िक्र होने लगा था के अब उस्सकी माँ तो जानेगी hi जानेगी इस बात को…. सोच रहा था के अब कैसे इस बात से इंकार करेंगे दोनों अपनी मम्मी से उस्सको तो पहले से hi शक था……

विहान ने यह भी सोचा के अब उस्सकी मम्मी उसस्के पापा पर टूट पड़ेगी यह कहते हुए वो सही थी हमेशा से और बाप को बहोत सुनाएगी फिर बाप की तबियत को रिस्क हो सकता है… यह सब सोचते हुए विहान बहोत hi परेशां हो रहा था….. अशिता उसस्के चेहरे में देखते हुए पूछने लगी के किआ हुआ….

विहान के ेंसू निकल पड़े और अशिता के हाथ थाम कर अंदर कमरे में गया, अंदर जाते hi अशिता को ज़ोर से बाहों में भर कर रोने लगा. अशिता ने भी रट हुए पूछा,

“भाई किआ हो गया, बताओ नाह मुझे, तुम क्यों रोने लगे अब?

विहान ने रट हुए hi कहा,

“अब हम दोनों को जुड़ा किया जाएगा आशु, हमको एक दूसरे से दूर किया जाएगा देख लेना मम्मी हमको बिल्कुल अलग करेगी और हम कुछ भी नहीं कर पाएंगे आशु, पापा भी कुछ नहीं कर पाएगा; तुम से मैं कैसे दूर रह पाउँगा आशु?! – मम्मी नाना, नानी और दादा दादी को फ़ोन करके सब बताएगी, और पुरे फॅमिली हमारे खिलाफ होंगे….. आशु हमको शायद यहाँ से अभी के अभी भाग जाना चाहिए नहीं तो हमारा मिलान नहीं होगा कभी भी, हम हमेशा के लिए जुड़ा हो जाएंगे माय बेबी….”

तो बे कॉन्टिनोएड…………..
 
अपडेट 49 अनिरुद मानगेस थे सिचुएशन

“अब हम दोनों को जुड़ा किया जाएगा आशु, हमको एक दूसरे से दूर किया जाएगा देख लेना मम्मी हमको बिल्कुल अलग करेगी और हम कुछ भी नहीं कर पाएंगे आशु, पापा भी कुछ नहीं कर पाएगा; तुम से मैं कैसे दूर रह पाउँगा आशु?! – मम्मी नाना, नानी और दादा दादी को फ़ोन करके सब बताएगी, और पुरे फॅमिली हमारे खिलाफ होंगे….. आशु हमको शायद यहाँ से अभी के अभी भाग जाना चाहिए नहीं तो हमारा मिलान नहीं होगा कभी भी, हम हमेशा के लिए जुड़ा हो जाएंगे माय बेबी….”

अब आगे….

अशिता घबराई हुई थी विहान के बात को सुनकर फिर कहा,

“भाई पापा को शॉक लग जाएगा उस्सको दिल का दौड़ा पर गया तो हम कहीं और होंगे और उस्सको देख भी नहीं पाएंगे, हम ऐसा कैसे कर सकते हैं भाई? यह ग़लत नहीं होगा किआ?”

विहान: “तो किआ करें हम अब आशु? मम्मी तुमको ज़बरदस्ती किसी से भी जल्दी से शादी करवा देगी, तुम्हारा कॉलेज जाना तुरंत बढ़ करवा देगी, दादा दादी, नाना नानी, चाचा चची, सब लोग मम्मी का साथ देंगे, सब पुराने खयालात के हैं सब एहि कहेंगे के तुम्हारी शादी करना चाहिए, हम अलग हो जाएंगे माय लव, मैं मर्डर जाऊंगा, मैं टूट जाऊंगा बेबी! चलो भागते हैं नाह!”

अशिता: “okay मगर चलो पापा को बता के जाते हैं मम्मी के आने से पहले, अगर उस्सने हाँ कहा तो चलते हैं!”

विहान: “पापा मन करेगा आशु, हमको बिना उन्हें बताए जाना होगा!”

अशिता ने रट हुए कहा,

“No! मैं पापा को बताए बिना नहीं जाउंगी भाई, प्लीज, मैं पापा को बहोत प्यार करती हूँ, वो हमारा इतना सपोर्ट कर रहा है अगर हम उस्सको बिना बताये गए तो यह उस्सको धोका देना होगा उस्सको तो कम से कम पता होना चाहिए हमारे बारे में भाई!”

दोनों के दिल बड़े ज़ोरों से धड़क रहे थे, बहोत hi घबराये हुए थे दोनों, किसी का दिमाग़ ठीक से काम नहीं कर रहा था उस वक़्त, उनके समझ में बिल्कुल नहीं ारः था के किआ करें, तो आखिर में डीडे किया के अपने पापा को बता दें.

दोनों लाउन्ज में गए और अनिरुद को कहा के दोनों भाग रहे हैं.

अनिरुद को एक और झटका लगा, उठ खड़ा हुआ यह कहते,

“तुम पागल हो गए हो किआ दोनों? हरगिज़ नहीं जाना है कहीं भी!”

विहान ने सर झटकते हुए अशिता को देखा और कहा,

“देखा? अब किआ?!”

अनिरुद दोनों के करीब आये और आराम से कहा,

“बचो, यह जल्दबाज़ी में लिए हुए डिसिशन ग़लत साबित होगा. कहीं नहीं जाना है, तुम दोनों की ज़िन्दगी नरक बन जाएगी अगर अकेले जा कर जीना चाहोगे तो, ऐसे नहीं जाते. बहोत मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा, मैं तुम दोनों को दर दर के ठोकरें खाते हुए नहीं देख पाउँगा. तुम दोनों फ़िक्र मत करो. मैं हूँ नाह, मैं कुछ नाह कुछ तो करूँगा, तुम दोनों आराम करो, स्टॉप तोरमेण्टिंग यौरसेल्वेस.”

विहान ने हताश होते हुए अपने बाप से कहा,

“पापा मम्मी को पता चल hi जाएगा घर आते आते; मुझे यकीन है वो अशिता की शादी करना चाहेगी, मुझसे दूर कर देगी इस्को, मैं पागल हो जाऊंगा पापा मैं आशु के बिना नहीं जी सकता पापा प्लीज हमको जुड़ा मत होने देना पापा!” यह कहकर विहान अपने घुटनों पर आगया और सिसकते हुए रोने लगा. उस्सको वैसा देख कर अशिता ने भी रोना शुरू किया और उसस्के पास बैठ कर उसस्के सर को अपने सीने से लगा कर उस्सको तस्सली देने की कोशिश करने लगी तब तक अनिरुद भी आकर दोनों को अपने सेने से लगाते हुए कहा,

“किआ मज़ाक है आशु की शादी कर देगी? मैं होने दूंगा किआ? ऐसा कुछ नहीं होगा!”

विहान ने रट हुए hi कहा,

“पापा आप कुछ नहीं कर पाओगे, आप मजबूर हो जाओगे क्यूंकि मम्मी पुरे फॅमिली को एकता करके सब बताएगी, और दादा दादी, नाना नानी भी मम्मी से सहमत होंगे…. “

अनिरुद ने विहान के चेहरे से बहते ेंसू को पोंछते हुए पूछा,

“तुमको कैसे पता वो यह सब करेगी?”

विहान: “अरे पापा आप उस्सको नहीं जानते किआ? मम्मी है वो मुझे सब पता होता है उसस्के सोच के बारे में, वो बिल्कुल ऐसा hi करना चाहेगी.”

अनिरुद ने विहान के बालों में अपने उँगलियों को फरते हुए उस्सको दिलाशा देते हुए कहा,

“मैं हूँ नाह बीटा? कुछ नहीं करेगी वो. हाँ चलो तुम्हारे दादा दादी और नाना नानी को बताएगी चलो ok वो ठीक है बताने दो, मगर शादी तो नहीं करवाने दूंगा, कोई भी डिसिशन लेने से पहले मुझको तो बताएंगे नाह वो लोग?!”

अनिरुद फिर बैठ गया सोफे पर और अपने खुद के बारे में सोचने लगा. गुज़र चूका था वो एक्साक्ट्ली ऐसे hi सिचुएशन से. जो विहान और अशिता पर अभी बीत रहा है अनिरुद पर बीत चूका था पहले. अपने सर को सोफे से टेकते हुए अनिरुद ने पूछा,

“अभी टाइम किआ हुआ है?!”

अशिता ने जवाब में कहा,

“पापा आईटी इस 2 p.m”

अनिरुद ने कहा,

सुमन शाम के 5 बजे आएगी, टाइम है मेरे पास चलो आज तुम दोनों को अपने और मेरी बेहेन के बारे में बताता हूँ, ावो दोनों इधर सोफे पर मेरे साथ बैठो.”

तब तक वह दोनों ने रोना बढ़ कर दिया था मगर अब भी बहोत टेंशन में थे, और अपने पापा के बात को सुनकर जैसे दोनों को एक सुकून सा हासिल हुआ पता नहीं क्यों. दोनों को कुछ ाचा फील हुआ. और दोनों ने एक साथ गहरे सांस लिए और सोफे के तरफ बढे अपने पापा के पास. अनिरुद बहोत स्ट्रांग दिखने लगा था अचानक और अपने छाती को चौड़ा करते हुए कहा,

“यू हैवे तो बे बोल्ड एंड वैरी स्ट्रांग बोथ ऑफ़ यू. वो ग़लती मत करना जो मैं ने किये थे. मैं कमज़ोर पर गया था क्यूंकि मैं बिल्कुल अकेला और कम उम्र का था. तुम तो 20 के ऊपर के हो गए हो विहान मैं सिर्फ 18 का था जब मेरे साथ यह सब हुआ था जो अभी तुम दोनों के साथ हो रहा है. तब 16 का था जब से हम छुप छुप कर अपने प्यार को परवान चढ़ते महसूस करने लगे थे…..”

अशिता ने अपने पापा के बात को काटते हुए कहा,

“पापा मैं कुछ पीने की लिए बना लाऊँ?”

विहान ने अपने पापा की जगह जवाब दिया,

“हाँ ठीक है तीनों के लिए जूस ले आओ!”

जब अशिता गयी जूस बनाने तो, अनिरुद ने बहोत स्ट्रॉन्ग्ली विहान के काँधे पर हाथ रख कर कहा,

“अब तुम मर्द बन गए हो बीटा, मुझे पता है अगर तुम उस्सको लेकर कहीं भी चले गए तो उस्सको बहोत खुश रखोगे यकीन है मुझे, मगर अभी यह करना बिल्कुल सही नहीं है. वो पढ़ रही है उस्का एजुकेशन का किआ होगा? ात लीस्ट उस्सको अपनी डिग्री तो पा लेने दो, वो तुम दोनों के ज़िन्दगी के फ्यूचर के लिए एक प्लस पॉइंट होगा अगर अशिता को डिग्री मिल गयी तो. तुमने तो कम्पलीट नहीं किया अपने स्टडीज, उस्सको तो कर लेने दो. मानलो कभी आगे चल कर लाइफ में तुमको प्रोफेशनल प्रॉब्लम हुआ तो अशिता तुम्हारे घर को चला तो पाएगी…. एक लड़की को भी उतना hi फ्रीडम देना चाहिए जितना एक मर्द को मिलता है. वो बहोत कुछ कर पाएगी आगे चल कर, और वो तुम्हारे लिए बड़ा हेल्प होगा, तुम दोनों के लिए एक बहोत बड़ा प्लस पॉइंट होगा. तुम दोनों एक दूसरे से किसी भी हालत में अलग तो नहीं रह पाओगे तो किआ अगर कभी तुम्हारे लाइफ में नौकरी वाले प्रॉब्लम आये तो वो तुम्हारा साथ नहीं देगी? देगी नाह? तो कैसे देगी? एक अछि नौकरी होगी उसस्के पास तब नाह देगी? इस लिए उस्का डिग्री हासिल करना बहोत ज़रूरी है. इस लिए मैं कभी भी उस्सकी शादी नहीं होने दूंगा जब तक उस्सकी स्टडीज पूरी नहीं होती. अभी 3 साल पूरा उस्सको स्टडी करना है.!”

विहान अपने पापा के बातों को अछि तरह से समझ गया और उस से बिल्कुल राज़ी था अब.

अशिता जूस लेकर आयी और तीनों जूस पीते हुए बैठे और अनिरुद ने अपनी कहानी बताना शुरू किया.

तो बे कॉन्टिनोएड इम्मेडिएटली इन थे नेक्स्ट पोस्ट….
 
अपडेट 50 अनिरुद कॉन्टिनुएस तो तेल्ल

अनिरुद ने जूस के एकांत सिप लेकर गिलास को अपने सामने वाले टेबल पर रखा और दोनों के तरफ देखते हुए कहा,

“मैं भी स्टूडेंट था तब. पूजा मुझसे 3 साल छोटी थी. हमको खुद पता नहीं चला कब हम एक दूसरे से प्यार करने लगे थे. जब भी मैं कॉलेज से वापस अत वो मेरी राह तकती थी. गाओं शहर से 20 कंस की दूरी पर था और मुझको वापस एते आते शाम के 5/6 बज जाते थे. वो 4 बजे से मेरा वेट करना शुरू कर देती थी. एक बड़ा सा पीपल के पेयर के निचे बैठ कर वो रास्ते पर नज़र जमाये रहती के कब बस रुके और वो वहां से दौड़ती हुई मेरे पास आये. शहर से एक बस गुज़रता था गाओं के पास जहाँ से उतर कर मुझे कोई 100 मेट्रेस चलना पड़ता तब घर अत था. वो पीपल के पेयर जिस्सके निचे पूजा बैठती थी हमारे घर से कोई 15 मेट्रेस के दूरी पर था. घर के अंदर से वो पेयर दीखता था और मेरे माता पिता, घर में से पूजा से ऊंची आवाज़ में बात करते थे, तुम्हारे दादी अक्सर कहती,

‘अरे गद्य अभी से बैठ गयी अपने भैया को देखने, अभी तो 4 बजा है ऋ वो तो 5 से 6 बजे आएगा तू 2 घंटे तक उस पेयर के निचे बैठी रहेगी चल आ अंदर एक घंटे के बाद जाना!’

मगर पूजा वहां से बिल्कुल नहीं हिलती थी जब तक मेरा बस उस्सको दिखाई नहीं दे. जैसे मेरा बस एते हुए उस्सको दिखती थी उस्का दौड़ना शुरू होता था और जब तक मैं बस से उतरता वो मुझसे लिपट जाती थी. बस के बाकी के पैसेंजर्स को पता चल जाता था के पूजा अभी दौड़ती हुई दिखाई देगी बस के तरफ एते हुए मुझे रिसीव करने के लिए. बस में वही शामे पैसेंजर्स होते थे हर रोज़. सब काम से वापस आते थे और मैं कॉलेज से. ड्राइवर और कंडक्टर शामे होता था. सब को बहोत ाचा लगता था जिस तरह से पूजा मेरा वेट किया करती थी. पूजा बहोत hi सुन्दर थी, बेहद खूबसूरत, भोली, सीरत की तो बात मत पूछो, वो इतनी अच्छी थी के फरिश्ता शायद उतने अचे नहीं होंगे.”

अशिता ने विहान के बाहों में अपने बाज़ू को लपेट कर अपने सर को उसस्के काहदे पर कर दिया था अपने पापा के चेहरे में देखते हुए और उस्सको लग रहा था के उस्का पापा उस्सको कोई फेयरी टेल कहानी सुना रहा है. विहान को भी वैसा फील होने लगा था. तो अशिता ने सवाल किया,

“पापा आप के पास भुआ की कोई तस्वीर नहीं है? ी वांट तो सी हेर, शी मस्ट बे लुकिंग वैरी ब्यूटीफुल नाह? हाउ वास् शी ड्रेस्ड ठोस डेज पापा?”

अनिरुद ने मुस्कुराते हुए अशिता के चेहरे में देखा, एक लम्बी सांस लिया और कहा,

“एहि तो रिग्रेट है मुझे के उन् दिनों क्यों मोबाइल नहीं था मेरे पास! अगर होता तो हज़ारों की तादात में उस्सकी पिक्स लेता मैं!”

तुरंत अशिता ने विहान को देखा और उसस्के गाल को चुम्मा वो इस लिए के अब वो समझी के विहान क्यों उस्सकी इतने सरे पिक्स लेता रहता है.

अनिरुद समझ गया और कहा,

“विहान ज़रूर तेरा बहोत सारे पिक्स लेता होगा है नाह? तभी तो मैं कहता हों के तुम दोनों मेरे सपने को पूरा कर रहे हो”

विहान ने कहा,

“पापा आगे बताओ नाह!”

अनिरुद ने फिर एक लम्बी सांस लेकर कहा,

“वो गाओं की ट्रेडिशनल ड्रेस पहनती थी, एक घागरा चोली टाइप, वैरी कॉर्फूल; जब दौड़ती थी तो अपने दोनों हाथों से घागरे को उठाते हुए मेरे तरफ दौड़ते हुए आती. बहोत दौड़ती थी. जब देखो भागती रहती थी. बहोत स्पेस था गाओं में चारों तरफ, बड़ा मैदान, खुला आसमान, दूर में बहोत बड़ा खेत और बगीचा, चरों तरफ फूल पौधे, एक बहोत गहरा कुंवा जहाँ गाओं के सभी महिलाएं पानी भरने जाते, एक ठंडी पानी से बेहटा हुआ नदी, एक लम्बा सा माउंटेन रेंज जो हमारे घर के पीछे से गुज़रता था और दूसरे गाओं को मिलता था. नदी हर रोज़ महिलाओं से भरी रहती, सब कपडे धोने जाते और नहाने भी. कुछ जवान लड़के उस तरफ लड़कियों को देखने जाते थे नहाते हुए, कुछ लड़के पेयर के उपोयर चढ़ कर छुप छुप कर देखते, कई की तो उन् में बहनें, मायें भी होते थे नहाते हुए मगर उनके बीच उन् लड़कों के सजनी भी होते इस लिए सब झाँकने जाते…. कोई झाड़ के पीछे से छुप कर देखता, और कभी कभी बड़े बुज़ुर्ग लोग डंडा लेकर उन् लड़कों को भगाते थे हाहाहाहा! किआ दिन थे वह दिन भी ज़िन्दगी के!”

अशिता और विहान बड़े दिलचस्पी से सुन रहे थे और मुस्कुराने लगे थे फिर अशिता ने कहा,

“पापा आप तो आउट ऑफ़ सब्जेक्ट जाने लगे अपने और अपने सीस के बारे में कहो नाह!”

तो विहान ने कहा,

“क्यों? सही तो बता रहा है पापा गाओं के वातावरण के बारे में भी तो बोलना hi चाहिए, ठीक है पापा ऐसे hi बोलो, फिर आगे पापा?!”

अपने पापा के बातों को सुनते हुए दोनों अपने प्रेजेंट मुसीबत को बिल्कुल hi भूल गए थे. दोनों को एक सुकून सा फील होने लगा था और खुद अनिरुद भी भूल गया था के अभी कुछ देर पहले उस पर एक पहाड़ टुटा है. उस्सने बताना जारी रखा,

“वीकेंड्स में मैं भी उन् लकड़ों में शामिल होता क्यूंकि मेरी माँ पूजा को लेकर नदी जाती थी. पूजा को पता होता था के मैं पेयर के ऊपर से उस्सको देख रहा होता था. जब वो नहाती तो बार बार मेरे तरफ देखती तो माँ उस्सको अक्सर टोकती के क्यों टुकुर टुकुर पेयर को देखती रहती है. जिस पेयर पर मैं चढ़ता था कभी किसी और लड़के को नहीं चढ़ने देता क्यूंकि मैं नहीं चाहता था के कोई और पूजा को देखे. मगर मुझे मालूम था के किसी और पेयर से बाकी के लड़के भी देख रहे होंगे.

ऐसे सालों तक चलता गया. मुझे भी कई बार डंडे खाने पड़े चाचा लोगों से जब उनको पता चला के मैं भी लड़कियों और महिलाओं को नदी में नहाते देखने जाट हूँ तो. पूजा जब मेरे तरफ देखती नदी से तो माँ उस्सको हर बार टोकती रहती और जब मुझे डंडा पड़ा तो पूजा नदी से भागती हुई मुझे बचाने आयी थी तब माँ को पता चला क्यों वो हर बार पेयर के तरफ देखा करती थी. और पूजा से माँ ने सव्वल किये. वो मुझसे 3 साल छोटी थी और इतनी भोली थी के उस्सको पता नहीं चला के यह बात नहीं बताना चाहिए था मगर उस्सने बता दिया के मैं उस्सको देखता था पेयर के ऊपर से….. ये बात मेरे दादा के कान में गए.

हमारा एक जॉइंट फॅमिली था. घर एक बड़ी हवेली जैसी थी. दादा ज़मींदार टाइप था, बहोत सारे खेत थे दादा के. मेरे 7 भाई और 4 बहनें थे. मेरे 4 चाचा भी रहते थे साथ में, चाचियां और उनके बचे. मेरे कौसिन्स, कजिन सिस्टर्स, पूजा और सब एक साथ एक hi घर के अंदर.

मेरी सबसे बड़ी ग़लती एहि थी के मैं पूजा को वहां देखने जाट था. वार्ना किसी को कभी कुछ पता नहीं था हमारे बारे में. हम 3 साल पहले से एक दूसरे से बेइंतेहा प्यार करते थे और गाओं के जंगलों में हमारा प्यार परवान चढ़ता था. घर के अंदर तो बिल्कुल भी नहीं कुछ कर सकते थे कभी कभी छोर्री छुपके मिल लेते, एक दूसरे को बाँहों में जाकर लेते वो भी फ़ास्ट वाले झप्पियाँ वार्ना कोई देख लेता तो मुसीबत होता. बहोत सारे लोग होते थे नाह घर में इस लये घर में नामुमकिन था एक साथ रहना. हम बाहर एन्जॉय करते थे.

हमारा एक लव कार्नर है जंगल में. कभी कभी तो रात देर तक वहां रहते. क्यूंकि मेरे कॉलेज से वापस आने के बाद अंधेरा शुरू हो जाता था तो हमको मिलना होता और शाम को सूरज ढलने के बाद घर से निकलते तब जंगल में जाते प्यार करने के लिए, तो रात हो जाता आते आते….. कभी किसी को कोई शक नहीं हुआ था तब. सब समझते थे हम यूँही टहलने जाते हैं. मगर वीकेंड्स में हम दिन में घंटों बिताते थे उस लव कार्नर में जिस्सको हम ने सजाया था फूलों से और बहोत सारे चीज़ों से. चटाई बिछाया हुआ था वहां, चटाई के निचे घांस काट कर एक गद्दे की तरह बनाया था और वहां सोते थे बहोत आराम मिलता था हमको वहां. वो जगह हमारे लिए एक घर से कम नहीं था.

पूजा को मेरे जिस्म की गर्माहट बहोत पसंद थी. उस्सको बहोत ठण्ड लगती टी हमेशा और उसस्के हाथ और पाऊँ हमेशा ठण्ड रहते थे. मैं हमेशा उस्सको अपने हाथ में या अपने जाघों के बीच दबाया करता था ताके वो गरम रहे. कभी कभी तो वो खुद अपने दोनों हाथों को मेरे बाज़ुओं के निचे करके मुझे बाज़ू दबाने को कहती ताके उसस्के हाथ गरम हो जाए.

मगर सिर्फ एक वक़्त होता था जब उसस्के हाथ पेयर दोनों गरम होते थे, वो था हमारे लव मेकिंग के दौरान. तो घर में हमारा एक कोड वर्ड था. वो सिर्फ यह कहती, ‘भाई मेरे हाथ पेयर को गरम करना है चलो’ तो मैं समझ जाता शी वांटेड तो मेक लव. तब हम जाते थे अपने लव कार्नर में.

मैं कॉलेज में दिन भर उसस्के याद में रहता था, हर जगह सिर्फ पूजा मेरे ख्यालों में रहती थी, और उस्का भी एहि हाल था रात दिन उसस्के मैं में, दिल में ख्यालों में सिर्फ मैं बसा हुआ था. वो हर बार यह कहती रहती थी. इसी लिए घंटों भर मेरा वेट किया करती थी. एक दिन बस का ब्रेकडाउन हो गया था, मुझे 15 कंस पैदल वापस आना पड़ा तो दो घंटे बाद आया था उस दिन वो बहोत बहोत रोई थी, घंटों भर रोटी रही माँ, पिताजी, दादा, दादी सब उस्सको समझाने में लगे हुए थे के मैं रास्ते में ज़रूर ारः हूँगा… मगर वो कहती के मुझे कुछ बुरा हुआ होगा, कहीं मेरा एक्सीडेंट वग़ैरा हुआ होगा उस्सको बहोत डर लग रही थी के मुझे कुछ हो जाये तो उस्का किआ होगा.

मेरे बिना नहीं रह पाती थी और वही हाल मेरा भी था. सालों तक किसी को कुछ पता नहीं चला था हमारे प्यार के बारे में, मगर उस दिन नदी वाली बात हुई और माँ ने जब उस से पूछा, और दादा को पता चला तो मुझको घर में पुरे परिवार के सामने एक मुजरिम की तरह खड़ा करके सवाल किया गया. पूजा भी वहीँ थी. उस्सको बहोत डर लग रही थी. वो यह सोच कर ज़्यादा डर रही थी के कहीं मैं यह नाह समझूँ के उस्सने मुझको धोका दिया वो बात बता कर. मगर मुझे पता था वो भोली थी और उसस्के मुंह से ऐसे hi निकल गया था के उस्सको पता था के मैं उस पेयर पर था और उस्सको देख रहा था.

उस दिन के सवाल जवाब के बाद हम दोनों को एक साथ रहने से मन किया गया. पुरे परिवार के नज़रें हम पर रहने लगे. हम नाह मिल पाते, नाह एक दूसरे से बात कर पाते. मैं कॉलेज से वापस आता तो उस पीपल के पेयर के पास उदास नज़रों से देखता, के काश आज पूजा वाहन होगी, के आज उस्सको मेरे तरफ दौड़ती हुई देख पाऊं, बस के पैसेंजर भी उस तरफ देखते जहाँ से उस्सको दौड़ते हुए बस के तरफ आते हुए देखा करते the…ek दिन एक आदमी ने पूछा के अब तुम्हारी बेहेन तुझको लेने नहीं आती. तो मेरे ेंखों से ेंसू निकल पड़े उसस्के जवाब में……

एक महीना गुज़रा जब से हमको अलग किया गया था, हम एक बात भी नहीं कर पाए थे एक दूसरे से, मुझको वो कुछ भी नहीं बता पायी थी. सबके नज़र हम दोनों पर रहते थे उन् दिनों. जैसे मैं कॉलेज से वापस अत तो पूजा को कमरे के अंदर कर दिया जाता था. मुझको उस से मिलना, उस्सको देखना, उसस्के तरफ जाना सब मन था. सब हम दोनों पर नज़र रखते थे. डिनर के वक़्त पूजा का खाना कमरे के अंदर लेजाया जाता था, और मुझे सबके साथ डाइनिंग टेबल पर डिनर करना होता था…. एक महीने तक मैं ने उस्का चेहरा नहीं देखा था. मैं पागल होने लगा था. चिल्ला कर ज़ोर से रोटा था अपने लव कार्नर में अकेले jaakar…Pooja सेहम गयी थी, एक प्रिजनर की तरह रहती थी घर के अंदर. जब मैं कॉलेज चला जाता था तब उस्सको बाहर आंगन में जाने को अल्लोवेद था मगर दूसरों की निगरानी में. और जब मेरे वापस आने का टाइम करीब होता तो कोई नाह कोई था उस्सको कहने के लिए के अब वो अपने कमरे में चली जाए. वो डर गयी थी, एक डर के साथ जीने लगी थी. मेरा नाम कभी किसी के जुबां से सुनती तो रोने लगती. जब शाम होता और मेरे वापस आने का वक़्त अत तो वो कांपने लगती थी, उस्सको पता था कोई अभी उस्सको चिल्ला कर कहने hi वाला है के वो अंदर जाए अब. मगर कभी वो कोई चमत्कार का वेट करती के मैं उस दिन को उसस्के अंदर जाने से पहले प्रकट हो जॉन उसस्के सामने, या कॉलेज में स्ट्राइक की वजह से किसी दिन सवेरे अजौं जब वो आँगन में होती है… वो प्रे करती ऐसा होने के लिए मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं. हुआ वह जो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था… पता चला के पूजा प्रेग्नेंट है….

तो बे कॉन्टिनोएड….(3600 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 51 सुमन गेट्स इन एंड सुरपरिसेस आल ऑफ़ थम

मेरा नाम कभी किसी के जुबां से सुनती तो रोने लगती. जब शाम होता और मेरे वापस आने का वक़्त अत तो वो कांपने लगती थी, उस्सको पता था कोई अभी उस्सको चिल्ला कर कहने hi वाला है के वो अंदर जाए अब. मगर कभी वो कोई चमत्कार का वेट करती के मैं उस दिन को उसस्के अंदर जाने से पहले प्रकट हो जॉन उसस्के सामने, या कॉलेज में स्ट्राइक की वजह से किसी दिन सवेरे अजौं जब वो आँगन में होती है… वो प्रे करती ऐसा होने के लिए मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं. हुआ वह जो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था… पता चला के पूजा प्रेग्नेंट है….

अब आगे….

जब पूजा की प्रनन्सी की खबर मिली तो घर में सब ने मुझको इस तरह देखा जैसे मैं ने कोई कत्तल कर दिया, जैसे किसी का घर लूटा या कोई बहोत बड़ा गुनाह कर दिया.

घर में किश तरह के हलचल मच गए यह तो बताने की ज़रुरत नहीं पूरा परिवार मुझ पर और पूजा पर थू थू करने लगे, मैं पापी कहलाने लगा, लूटेरा कहलाने लगा, मुझको लगता था के मुझको फांसी होने वाला है, वो वाला फीलिंग आने लगा था, घर में रहना मुश्किल हो गया था, सब मुझसे नज़रें चुर्राने लगे थे… पूजा की तो पूछो मत उस्सको इतनी गालियां पड़ती थी और इतना मारा जाता था के मेरा जी करता था उसस्के कमरे में घुस कर सबको मार डालूं, पिताजी, मम्मी, दादा, दादी सब बारी बारी उस्सको मारने जाते और उस्सकी रोने और चिल्लाने की आवाज़ मेरे कानों तक आते थे.

एक बार तो मैं गया भी था रट चिल्लाते पूजा के कमरे को ठोकने जब दादी उससे मार रही थी हर तरह के कड़वे शब्द बोलते हुए. जिस वक़्त मैं ने पूजा के दरवाज़े पर लात ग़ुस्सा मरर्ते हुए ठोका तो पूजा ने अंदर से मेरी आवाज़ सुनी और भाग कर रट हुए दरवाज़ा खोलने आयी और बुसस सिर्फ मेरा हाथ थाम सकीय थी के दादी ने उस्सको पीछे से उस्सकी बाल पाकर कर इतने ज़ोर से खिंचा के उस्सकी कलाई मेरे हातनः से छूठ गयी क्यूंकि मुझे पीछे से पिताजी ने पाकर लिए था ेँ वक़्त पर…..

दोनों को अपने तरफ खींचे जा रहे थे, पूजा के बहते ेंसू देख कर और उस्सकी वो आवाज़ सुनते हुए, “भैया, भैया!” वो सालों तक मुझे सुनाई देते रहे, उस वक़्त जैसे मेरे दिल को चीरा जा रहा था, मैं ने पूजा को उस दिन एक महीने के बाद देखा, बल्कि हम दोनों ने एक महीने बाद एक दूसरे को देखा था उस एक पल के लिए, उस्का चेहरे का रंग बदल गया था, और पतली हो गयी थी उस एक महीने में, आज भी मुझे उस्सकी फुंकार सुनाई देती hai…jiss नज़र से उस्सने मुझे देखा था जैसे उसस्के लिए उस वक़्त मैं एक मसीहा था, उस्सको जैसे यह उम्मीद थी के अब उस्सको बसहा लूंगा, जैसे अब उस्सकी तकलीफें का अंत होगा, उसस्के उस रट हुए चेहरे को देख कर मेरा पूरा शरीर कांप उठा था और जब दादी ने उस दरवाज़े को बंद किया और उस तरफ पिताजी ने मुझ घसीट कर वहां से लगाया, तो मैं बिल्कुल टूट गया और पता चला के मैं कितना मजबूर था के अपने प्यारी पूजा के लिए कुछ भी नहीं कर पाया.

उस्का वो चेहरा, चेहरे में एक उम्मीद मुझे देखने के बाद, उसस्के ेंसू, उस्का चिल्लाना, मेरे तरफ बढ़ने की कोशिश करना, उस्सकी पतली पतली उँगलियों का मेरे हाथ में आना वो सब बुसस एक पल के लिए हुआ था मगर मेरे दिल को जैसे कुचला जा रहा था आज भी सोचता हूँ तो मेरे कलेजे में आग भड़कती है और खून की ेंसू रोटा हूँ अपने पूजा की उस हालत को देख कर…….”

यह कहते हुए अनिरुद ज़ोरों से रोने लगा, एक छोटे से बचे की तरह रोने लगा और विहान और अशिता झपट कर उस्सको संभालने गए खुद दोनों रट हुए. विहान ने अपने पापा को ज़ोर से गले लगाते हुए उसस्के पीठ सेहला रहा था जबकि एक तरफ से अशिता रट हुए अपने पापा के चेहरे से ेंसू पांच रही थी.

कुछ देर बाद जूस निंगलने के बाद अनिरुद ने बताना जारी रखा यह कहते हुए,

“वे वेरे बोथ हेल्पलेस, लिखे प्रिसनर्स. फिर बात गाओं में फैली के पूजा प्रेग्नेंट है और पंचायत बैठायी गयी. मुझको और पूजा को समझलो के कथेरे में खड़ा किया गया, हम दोनों आमने सामने थे, फिर एक बार एक दूसरे को देखने का मौका मिला था हमें. और उसी पीपल के पेयर के निचे जहाँ पूजा मेरा वेट करती थी वही पंचायत लगी थी, पूजा को उस जगह से लगाओ था, वो बार बार उस और देख रही थी जहाँ मैं बस से उतरता था, ऐसा लग रहा था के वो मुझे उस तरफ से आते हुए देख पायेगी जबकि मैं उसस्के सामने कोई 3 मेट्रेस के दूरी पर था, मेरा नज़र सिर्फ उस पर ठीके हुए थे, पिताजी ने मुझको दो बार थपड भी मारा उसस्के लिए, मतलब मेरा पूजा को उस तरह से ताकने के लिए.

पंचायत एन्ड हुई तो फैसला यह सुनाया गया के या मुझको बोर्डिंग भेज दिया जाए या कहीं किसी दूर के रिश्तेदार के पास, या पूजा को कहीं बहोत दूर किसी रिश्तेदार के पार या अनाथालय भेज दिया जाए और जो उसके पथ में पल रही थी उस्सको गिरा दिया जाए, मतलब उस्सकी गर्व को मिटा दिया जाए.

मुझको पंचायत वालों ने पापी कहा, पूजा को शैतान कहा, हम दोनों को बिल्कुल गुनेहगार ठहराया गया. सभी गाओं वाले हम पर हंस रहे थे ताना मार रहे थे. गाओं की लड़कियां और औरतें पूजा को बुरा भला कह रहे थे, उस पर थू थू कर रहे थे हर तरह की गन्दी गन्दी बातें सुनाई दे रहे थे उस वक़्त… मेरा खून खौल रहा था, मैं करता था के एक बन्दूक मिलता उस पल को तो मैं सभी को एक एक करके गोली मार देता और अपनी पूजा को लेकर वहां से कहीं दूर चला जाता, जी करता था के एक एटॉमिक बम गिरा दिया जाए वहां और सबको भस्म कर दिया जाए…..

अगले सुबह उसी पीपल के पेयर पर लटकते हुए पूजा की लाश मिली! वो रात को कैसे घर से निकली, कितने बजे निकली, कैसे वहां पहुंची किसी को पता भी नहीं चला. मैं तो जैसे पागल हो गया था उस्सकी लाश देख कर इतना रोया, इतना चिल्लाया उस्सको अपने गॉड में लेकर के मेरी आवाज़ जा चुकी थी एक हफ्ते के लिए. पूजा अपने पथ में अपने बचे के साथ दुन्या चोरर गयी.

बाद में मुझे थोड़ा ग़ुस्सा आया के क्यों उस रात को जब वो निकली तो मुझसे नहीं मिली? क्यों मेरे पास नहीं आयी? क्यों मुझको अकेला चोरर कर चली गयी. मैं उस से इस बात पर नाराज़ था. अगर उस्सको वैसा मौका मिल गयी थी बीच रात में निकलने को तो मेरे पास तो आ सकती थी…. फिर सोचा के पहरा था मेरे कमरे के बाहर, वो किसी को जगा सकती थी अगर मेरे कमरे में आती तो…. मैं कई दिन तक उस्सकी याद में रोटा रहा और एक दिन मेरी एक सिस्टर कजिन ने मेरे कान में धीरे से कहा, “पूजा ने कुछ तुम्मो देने के लिए दिया है मुझे मैं ने बहोत संभल कर रखे हैं!”

मैं चहुँक गया और पूछा किआ दिया है? कब दिया?!” तो उस्सने धीरे से मेरे कान में कहा पंचायत वाली रात को, बीच रात को बारह बजे मुझे दिया था, मैं इतने दिनों से डर रही थी तुमसे बात करने के लिए और यह बताने के लिए. सब तुमपर नज़र रख रहे थे और फिर पूजा के साथ जो तुमने किया तो सोचा के मैं भी तेरी बेहेन हूँ तो कहीं कोई मुझ पर ऊँगली नाह उठाये जब तेरे पास आऊं तो, इसी लिए डर रही थी तुझसे यह सब कहने के लिए…. आज मौका मिला तो कह रही हूँ…. और उस्सने अपने ब्लाउज के अंदर से कुछ निकला और चारों तरफ देखने के बाद मेरे हाथ में थमा गयी वहां से भागते हुए.

वो एक 13 पेजेज की चिठ्ठी थी जो पंचायत से घर लौटने के बाद पूजा ने मेरे लिए लिखा था. मेरी कजिन सिस्टर, चाचा की बेटी रेनू ने क्यों और कैसे उस चिठ्ठी को मुझ तक पोहचने के लिए राज़ी हुई यह मुझे आज तक पता नहीं चला. कभी भी रेनू से इस बारे में बात करने का मौका hi नहीं मिला मुझे. किसी दिन पूछूंगा ज़रूर उस से. बात यह थी के घर में सभी भाई बहनों के बिच एक रेनू hi थी जिस पर पूजा भरोसा कर सकती थी शायद इस लिए उस्सने वो चिठ्ठी उस्सको सौंपा था मुझ तक पोंछने के लिए. अब पूजा के मरने के बाद एक हफ्ते तक रेनू ने उस चिठ्ठी को अपने पास रखा क्यूंकि उन् दिनों घर में ज़्यादा लोग थे मरने के बाद वाले रीत रिवाज के अनुसार वाले विधियों को पूरा करने के लिए और मामला गरम था तो रेनू किआ सब घर के लोग मुझसे दूर रहते थे मैं पापी जो था. इस लिए एक हफ्ते के बाद मुझे रेनू ने वो चिठ्ठी दिया. देखने से लगता था के रेनू ने चिठ्ठी को पढ़ी होगी, और पढ़ने के बाद hi उस्सको लगा के चिठ्ठी को मेरे हवाले करना hi था उससे.

मुझे बहोत ख़ुशी हुई उस चिठ्ठी को पाकर. लगा के मेरी पूजा मेरे पास वापस आगयी है. मैं उस चिठ्ठी को लेकर अपने लव कार्नर में गया. उस चटाई पर बैठ कर कोई 30/40 बार उस्सको रट हुए पढ़ा. इतना रोया, इतना रोया के के मेरे हलक सुख गए थे और थूक भी निंगलने को तकलीफ होने लगी थी, लगता था के मेरा मौत भी उस रोज़ आने वाला था.

उसी चिठ्ठी में मुझे सब पता चला के मेरी पूजा किश तरह से एक महीने तक मुझे देखने के लिए तड़पती रही, उस्सने सब लिखा था के किश तरह से उस्सको घर के कमरे में बांध रखा जाता है, किश तरह उस्सको मुझे नहीं देखने दिया जाता, किश तरह से शाम को मुझे बस से उतारते हुए देखने को तड़पती थी, किश तरह उस पीपल के पेयर के निचे बैठने को उस्का मन करता था, कितना मुझको मिस करती थी, अपने लव कार्नर में मेरे साथ रहना चाहती थी. मुझसे कितना प्यार करती थी, मेरे बिना जीने को नहीं सोच सकती थी. मुझसे माफ़ी भी मांगी थी, और प्रेगनेंसी का पता चलने के बाद लिखा था पूजा ने के तब उस्सको बहोत डर लगने लगा था और हमारे प्यार की निशानी को जनम देना चाहती थी, उस्सको यकीन था के लड़का होगा और वो बिल्कुल मेरी तरह होगा… मगर पंचायत से वापस आने के बाद पूजा ने लिखा के हम दोनों पापी हैं हमने पाप किया है तो उस्सको जीने का कोई हक़ नहीं. क्यूंकि हमको मिलने तो कभी नहीं देते यह दुन्या वाले और उस्सकी गर्व को गिराने वाले थे इस लिए पूजा ने मरना बेहतर पसंद किया.

लास्ट पेज में सीधे मुझसे बात किया था के मुझको पढ़के बड़ा आदमी बनना है, शो यादों में बसा कर जीना होगा मुझे, किसी से शादी करके जो ख़ुशी उस्सको देने वाला था वो अपनी पत्नी को देने को कहा था. अपने बच्चों से प्यार करने को और उनके देख भाल करने को कहा था और मुझसे माफ़ी मांगी थी मुझे चोरर कर जाने के लिए.

उसस्के बाद मैं पागल जैसा हो गया. अपने कमरे में खुद को 45 डेज बांध रखा मैं ने, बहोत रोटा था, दिमाग़ जैसे हिल गया था मेरा. सब सुन हो गया था, हर रोज़ पूजा की खत को पढता था मैं और रोटा था. मुझको कमरे में पूजा दिखाई देने लगी थी. मैं हवा में उस से बात करने लगा था, सब समझने लगे थे के मैं पागल हो गया हूँ. मेरी बड़ी बेहेन अकेली थी जो मेरे पास आती थी, मुझे खाना देने, नहाने के वक़्त पर मुझको बाथरूम लेजाने, मेरे सर दबाने, तेल लगाने सर में, और वो अकेली थी जो मेरे साथ रोटी थी और मुझे समझती थी.

आखिर में 45 डेज के बाद घरवालों ने डीडे किया मुझको एक साइकेट्रिस्ट के पास लेजाने को, फिर उसस्के बाद साइकोलोजिस्ट के पास…

3 महीने तक मैं पागल जैसा रहा…. तब एक दिन पता नहीं कैसे सुबह को उठा तो खुद सोचा के मुझे संभालना होगा और पूजा के लिए ज़िंदा रहना होगा और कुछ करना होगा….

तब मैं ने स्टडीज रीस्टार्ट किया और कॉलेज वापस जाने लगा. शुरू में हार्ड था मगर धीरे धीरे सब मामूल पर आगया… पिताजी मुझसे नफरत करते रहे… माँ और बाकी के लोगों ने जैसे मुझे माफ़ कर दिए थे मगर घर के सभी दूसरे लड़कियों से मुझे दूरी रखना पड़ा के कहीं कोई और बात नाह बन जाए या किसी में मुझको पूजा नाह मिल जाए……

आखिर में मेरी शादी तय हुई, सब ने सोचा के शादी करने के बाद मैं bilkool,normal हो जाऊंगा…. और मैं ने तब फैसला किया के उन् लोगों के साथ नहीं रहूँगा, अपने खुद के जीवन जीना चाहा मैं ने, सब कुछ चोर चार के यहाँ चला आया और नयी जीवन शुरू किये मैं ने तुम्हारे मम्मी के साथ!!!!

अनिरुद ने गहरी सांस लेते हुए विहान और अशिता के तरफ देखा. दोनों रो रहे थे, अपने अपने आँखों को पांच रहे थे, अशिता तो सिसक रही थी विहान के बाहों में, फिर अनिरुद ने कहा,

“सो हेरे यू अरे किड्स, अब तुम दोनों सोचो, इन् सब से गुज़र पाओगे तुम दोनों? देखा किआ हाल हुआ था मेरा? तुम विहान किआ अशिता को उस तरह से दुखी देखना चाहते हो? और तुम आशु किआ विहान को उस तरह से पागल होते हुए देखना चाहती हो?”

विहान और अशिता ने एक दूसरे को बहोत ज़ोर से बाहों में जाकर हुए थे उस वक़्त. और नाह में सर हिल्ला रहे थे. तो अनिरुद ने कहा,

“थें यू बोथ मस्ट लिसेन तो आल तहत ी से okay? जो भी होगा, या होने वाला है, कठिन होने वाला है, वे विल गेट तो फेस टफ मोमेंट्स इन थे डेज तो के, इस लिए तुम दोनों कोई भी ऐसी कदम उठाने से पहले मुझको पहले बताओगे, कोई भी ऐसा कदम तुम दोनों में से कोई नहीं उठाएगा…. No डिशन्स विल बे ताकें विथाउट माय कंसेंट okay?”

दोनों ने एक सात कहा, “यस पापा”

ठीक तभी सुमन काम से वापस आयी और सीधे अशिता के तरफ ग़ुस्से में बढ़ी और उस्सको उस्सकी बाल से पाकर कर विहान के बाहों से अलग करके उस्सको पीटने लगी चिलाते हुए, रट हुए, यह सब कहते हुए,

“यह किआ किया तुमने? किआ किया? चर्बी चढ़ गयी थी तुझ में बड़ी आग लगी हुई है तेरे में मार डालूंगी तुझे, कुट्टी कहीं की, रंडी बनना है किआ तुझे? मुंह दिखने लायक नहीं चोर्रा, इज़त मिटटी में मिला दी लोग थू थू कर रहे बाहर किआ किया तुम ने?!

विहान और अनिरुद दोनों अशिता को सुमन के पंजहों से छुर्राने की कोशिश में लगे हुए थे मगर सुमन पर जैसे एक भूत संवार था वो अशिता बहोत पीठ रही थी….

विहान ने चुर्राटे हुए कहा,

“मां चोर्रो मेरी आशु को मत मारो माआआआ!”

फिर सुमन ने अशिता को बाहों में भर लिया और एक हाथ से विहान के सर को अपने काँधे पर करते हुए ज़ोरों से चिलाते हुए रोने लगी और कहती गयी रट हुए,

“यह किआ कर दिया तुम दोनों मेरे बचो? किआ कर दिया? मुझे शक तो था, हाँ पता भी था मगर मेरा दिल तुम दोनों को जुड़ा नहीं करना चाहती थी, अब किआ मुंह दिखाएंगे हम दुन्या को? तुम दोनों का जीना मुश्किल हो जाएगा मेरे bacho….Vihaan किआ यह सिर्फ तुम्हारी आशु? मेरी नहीं? तुम दोनों मेरे जिगर के टुकड़े हो!! हे भगवान् अब किआ होगा? पूरा मोहल्ला थू थू कर रहे हैं सब हंस रहे हैं, यहाँ से दूर दूर तक लोगों में बात फेल गयी है!!!! अब किआ करूँ मैं? हे भगवान्!!!” लोग हमारे घर के सामने ग्रुप बना के खड़े हैं सब अंदर झाँक रहे हैं…… “

तो बे कॉन्टिनोएड….. (2712 वर्ड्स)
 
किशन भाई एंड नैना, सॉरी फ्रेंड्स.

वैसे मैं उपदटेस सिर्फ मंडे तो फ्राइडे देता हूँ. लास्ट 2 सतुरदेस वेरे एक्सेप्शन्स वेयर ी गोत सम फ्री टाइम एंड रोट. वार्ना माय वीकेंड्स अरे डिवोटेड तो थे फॅमिली. ी रिज़र्व वीकेंड्स फॉर माय फॅमिली ओनली. तो लिखने को टाइम बिल्कुल भी नहीं मिलता.

टुमारो थे थ्रेड विल बे अपडेटेड नोर्मल्ली.

थैंक्स फॉर अंडरस्टैंडिंग गाइस.
 
अपडेट 52 सुमन….

“यह किआ कर दिया तुम दोनों मेरे बचो? किआ कर दिया? मुझे शक तो था, हाँ पता भी था मगर मेरा दिल तुम दोनों को जुड़ा नहीं करना चाहती थी, अब किआ मुंह दिखाएंगे हम दुन्या को? तुम दोनों का जीना मुश्किल हो जाएगा मेरे bacho….Vihaan किआ यह सिर्फ तुम्हारी आशु? मेरी नहीं? तुम दोनों मेरे जिगर के टुकड़े हो!! हे भगवान् अब किआ होगा? पूरा मोहल्ला थू थू कर रहे हैं सब हंस रहे हैं, यहाँ से दूर दूर तक लोगों में बात फेल गयी है!!!! अब किआ करूँ मैं? हे भगवान्!!!” लोग हमारे घर के सामने ग्रुप बना के खड़े हैं सब अंदर झाँक रहे हैं…… “

अब आगे…..

अनिरुद बहोत हैरान हुआ सुमन को उस तरह से विहान और अशिता को गले लगाते हुए देख कर. सुमन ज़मीन पर बैठी थी अशिता को अपने अंचल में छुपाये हुए और विहान के सर को अपने काँधे पर हाथ से पकड़े हुए और रोटी जा रही थी दोनों बच्चों को सहलाते हुए. खुद अनिरुद के ेंख से पानी आगये वो मंज़र देख कर. अब सुमन में माँ की ममता चालक रही थी, अब अनिरुद को लगा के वो अकेले नहीं है अपने बच्चों को सपोर्ट करने के लिए, तो अब उस्सको और एक सहारा मिल गया था उस से अनिरुद को एक ताक़त मिली और जल्दी से अपने घर के सामने गया उन लोगों को फेस करने जो ग्रुप बना कर उसस्के घर के सामने खड़े थे.

और जब तीनों ने अंदर से सुना अनिरुद को उन् लोगों को गलियां देते हुए तो सुमन ने कहा,

“बीटा लो, तुम्हारे पापा उन् लोगों से भीड़ रहे हैं जल्दी जाओ देखो कहीं कुछ हो नाह जाए.”

विहान ग़ुस्से में उठा और अपने आंगन के गेट खोल कर चिल्लाते हुए उन् सबको कुछ यूँ कहा,

“क्यों बे मादरचोदों जाओ अपने घर में अपने माँ बेहेन को देखो यहाँ किआ मेला लगा हुआ है?!”

तब तक अशिता भी निकली अपने गेट के पास अपने पापा के सीने से लगते हुए, जबकि विहान करीबन रास्ते पर निकल गया था बहोत hi ग़ुस्से में था, तो उन् लोगों में से 3 लोग बाइक पर थे; और उन् में से एक अशिता को देखते हुए हंसा और कहा,

“अरे वो रही, यहीं इसी गेट के पास मुंह में मुंह इस्को को किश कर रही थी उस्सकी चुहियों को देखो भाई ने दबा दबा कर कितना बड़ा कर दिया है, हाय छमिया भाई से किआ मजा मिलेगा हमारे पास अजा तुझे खुश कर देंगे हम!”

और एक दूसरे ने कहा,

“देख कैसे बाप से चिपकी हुई है शायद वो भी पेलता होगा रे इस्को घर के अंदर किआ पता?!”

विहान ने एकांत पत्थर उठाये और चिल्लाते हुए चलाये उन् लोगों पर, तब तक सुमन भी निकली एक लोहा लेकर और दौड़ती हुई उन् लोगों के तरफ बढ़ी तो सब भागने लगे कुछ दौड़ते हुए और बाइक वाले बाइक स्टार्ट करके……

जिस वक़्त सुमन रास्ते पर थी उस वक़्त विहान और अशिता अपने पापा के करीब थे तो अनिरुद ने दोनों से कहा,

“एक लव्ज़ भी नहीं बताना मेरे और पूजा के बारे में, ग़लती से भी उस्का ज़िक्र नहीं होना चाहिए समझे तुम लोग, उस्सको इस बारे में कुछ भी नहीं पता!”

विहान अपनी माँ को वैसे देख कर उसस्के पीछे दौड़ा, उसस्के हाथ से लोहा खुद लिया और जो भाग रहे थे उनके पीछे लगा और उन् में से एक को पकड़ा और ले धनधन दिया उस्सको वो गिर्र पड़ा निचे, लोहे से उस्सकी हड्डियां टूट रहे थे वो चिल्ला रहा था तब तक अनिरुद वहां आगया और विहान के हाथ से लोहा छिना और वो आदमी लंगड़ाते हुए वह से भागा….

यह सब होते हुए जो पड़ोस के लोग थे अपने खिड़कियों से सब कुछ देख और सुन रहे थे. जब विहान अपने मम्मी पापा के साथ अपने घर के अंदर वापस जा रहे थे तब तक सभी पड़ोस के खिड़कियां बंद होने लगे.

उन् खिड़कियों में से एक था मिश्रा जी जिस ने अनिरुद को आवाज़ दिया. उंनका तालुकात अनिरुद से काफी अछि थी और उस्सने हाथ के इशारे से अनिरुद को बुलाया अपने घर के तरफ.

इस मोहल्ले के लोग ज़्यादा एक दूसरे से भिड़ते नहीं थे, हर कोई अपने अपने घर के अंदर रहते और सिर्फ उत्सव के टाइम पर सब इकठे होते या किसी प्रॉब्लम के दौरान सिर्फ एक दूसरे से मिलते और डिसकस करते. रोज़ मारा की ज़िन्दगी में किसी को किसी से मिलने या पुराने ज़माने की तरह एक दूसरे से खड़े होकर बात करने का टाइम hi नहीं था किसी के पास आज की ज़माने में. सभी पड़ोस के लोग हर सुबह घर से निकलते काम पर जाते और शाम को थके हारे वापस आते और घर के अंदर जाते तो बाहर निकलने का टाइम hi नहीं होता था किसी के पास. हाँ जो नौजवान लोग थे इधर उधर भटकते थे कभी जैसे विहान जाता था part टाइम जॉब करने….

मगर एक बात थी – मोहल्ले की सोसाइटी ग्रुप वाले. कोई 4000 घर थे इस सोसाइटी में और अनिरुद भी था इस सोसाइटी में. इलेक्शन के टाइम कई बार अनिरुद को सोसाइटी की प्रेजिडेंट के लिए खड़ा होने को कहा गया था मगर उस्सने हर बार इंकार किया. सिर्फ एक मेंबर रहा. एक्चुअल प्रेजिडेंट सोसाइटी की मिस्टर रघुनाथ थे और मिश्रा जी असिस्टेंट था.

अनिरुद गया मिश्रा जी से मिलने और जाते hi कहा,

“मिश्रा जी अगर इस इशू के बारे में आप को बात करनी है तो भाई मैं मूड में नहीं हूँ इस वक़्त बात करने की प्लीज कुछ और हो तो बताइयेगा.”

मिश्रा जी ने कहा,

अरे भाई मैं तो हमेशा की तरह तुमको फ़ोन करके hi कहने वाला था के कमिटी है और प्रसिडेंट साहब ने सबको बोलने को कहा तुम बाहर दिख गए तो बुला लिया बताने को.”

मोहल्ले में कमिटी तब होता था जब मोहल्ले में कोई इशू हो जैसे इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई या वाटर सप्लाई को लेकर इश्यूज होते थे या त्यौहार जैसे दिवाली, होली या गणेश चतुर्थी या ईद के मौके पर कुछ तैयारियां करने को होता तब बैठक लगता था कमिटी मेंबर्स के और इस बारे में डिसकस किया जाता था के कैसे किआ किया जाए, चंदा एकता होता था हर एक मेंबर से और धूम धाम से सब मनाया जाता था.

कमिटी वालों ने सिर्फ दो बार पेरोनल इशू को लेकर बैठक लगाए गए थे वो थे मोहल्ले का एक नौजवान जो ड्रग एडिक्ट था और मोहल्ले के दूसरे नौजवनों को उस ड्रग से मुताबिक एक्सेस कराने की कोशिश कर रहा था. उस इशू को लेकर आखिर में पुलिस वालों की मदद ली गयी थी और उस नौजवान को रेहाब सेंटर लेजाया गया था. उस नौजवान के माता पिता बहोत गिड़गिड़ाए थे कमिटी वालों से के पुलिस को इन्वॉल्व नाह करे, मगर किसी ने उनकी नहीं सुनी थी, कमिटी वाले ने जो डीडे किया सो किया! दूसरा केस था एक लड़की थी मोहल्ले में जो धंदा करती थी उस्सको लेकर बैठक लगे थे और उस्सको मोहल्ले से बहार किया गया था.

तो अभी अनिरुद ने पूछा,

“किश बारे में बैठक है भाई?”

मिश्रा जी ने कहा,

“अनिरुद भाई आप आये तो सही पता चल hi जायेगा नाह? सब आरहे हैं आज रात को hi है बैठक 9 बजे.”

अनिरुद वापस घर गया तो सुमन ने पूछा मिश्रा जी किआ कह रहे थे, तो अनिरुद ने कहा आज कमिटी है रात को 9 बजे. तो सुमन ने कहा,

“मत जाना. इसी बारे में बैठक लगेगा, विहान और अशिता को लेकर बात करेंगे सब! तमाशा बनाएँगे सब आप का!”

सब लाउन्ज में बैठे थे उस वक़्त. विहान और अशिता भी वहीँ थे. विहान और अशिता एक दूसरे से सत् के बैठे थे, अशिता का सर विहान के सीने पर था, और विहान कर हाथ उस्का सर सेहला रहा था. बिल्कुल हस्बैंड वाइफ दिख रहे थे दोनों, बहोत प्यार चालक रहे थे दोनों के बीच तो सुमन दोनों के तरफ देखते हुए कहा,

“देखो, एहि मैं पिछले 4/5 सालों से कहती आरही थी के यह दोनों पति पत्नी की तरह रहते हैं इस घर में, सब दीखता था मुझे, सब समझ रही थी मैं मगर तुम दोनों इतने करीब थे, इतना प्यार था दोनों में के एक दूसरे को दुःख नहीं देना चाहती थी, और तुम सब किआ समझते हो के मुझे तुम्हारे पापा और उस्सकी बेहेन पूजा के बारे में नहीं पता है किआ? ज़रूर िस्सने तुम दोनों को बता दिया होगा है नाह? मुझे सब पता था और तुम दोनों को बचपन से एक साथ देख कर मुझे वही डर था के तुम दोनों के बीच भी कहीं वैसा नाह हो जो तुम्हारे पापा और इस्सकी बेहेन के बीच हुए थे…. इस्सके मुझे बहोत डर था सिर्फ इसी लिए मैं तुम दोनों को अलग करना चाहती थी, मगर मैं नाकामयाब रही क्यूंकि यह तुम दोनों के साइड ले रहे थे हर वक़्त, मगर इनका भी कुसूर नहीं यह अपनी खुद की सपने को पूरा करना चाहते थे तुम दोनों के ज़रिए.!”

तीनों को बड़ा झटका लगा यह सुनकर के सुमन उस बात से वाक़िफ़ था.

तो बे कॉन्टिनोएड इन थे नेक्स्ट पोस्ट इम्मेडिएटली….
 
अपडेट 53 थे कमिटी

अशिता और विहान अपने पापा के चेहरे में देख रहे थे और उस्का मुंह खुला के खुला रह गया था सुमन की बातों को sunkar.Ashita ने अपने पापा को छुआ और कहा,

“पापा! अब किआ?!”

अनिरुद ने अपने सर को झटका और सुमन के चेहरे में देखते हुए पूछा,

“तुमको कैसे पता इस बारे में? मैं ने तो कभी तुमको पता नहीं होने दिया!”

अब सुमन की बारी थी सब बताने को और उस्सने कहा,

“जब हमारे रिश्ते की बात चल रही थी तो मेरे पिता तुम्हारे गाओं के कुछ लोगों से मिलकर तुम्हारे चल चलन के बारे में पता किया था तो उस्सको खबर मिली थी के तुम अपनी बेहेन से प्यार करते थे और उस्सने आत्महतिया किया था… और पिता जी ने उस रिश्ते को तोड़ने के लिए कहा था. मगर मैं ने तुमको पसंद कर लिया था जिस दिन तुम मुझे देखने आये थे और दिल दे बैठी थी, तुमको अपने मैं में बसा चुकी थी तो मैं ने पिता जी से कहा के वो पुराणी बात थी गड़े मुर्दे उखाड़ने से कुछ नहीं होगा. तो पापा ने जाने दिया उस बात को. जब मैं शादी करके आप के घर आयी थी तब उस बात के बारे में मुझको बहोत ज़्यादा पता चला था के पूजा प्रेग्नेंट थी, और जो कुछ बीता था आप के और पूजा के बीच सब कुछ डिटेल में पता चला था मुझको और पूजा की उस खत को पढ़ा भी था मैं ने जिस्सको आप ने पिछले 25 साल से अभी तक संभाल कर रखे हुए हैं…. मुझे आप पर बहुत ज़्यादा प्यार आया और मैं खुद बहोत रोई थी उस चिठ्ठी को पढ़कर और सोच लिया था के आप को इतना प्यार दूंगी के आप अपने पूजा को बिल्कुल भूल जाओगे!”

जब सुमन यह सब कह रही थी तो अनिरुद, विहान और अशिता तीनों रोने लगे थे, और जब सुमन ने बात ख़तम किये तो तीनों ने उस्सको अपने बाहों में भर लिए. विहान और अशिता अपने मम्मी को हज़ार चुम्मियाँ देने लगे जबकि अनिरुद बहोत ज़ोर से अपनी पत्नी को बाहों में कैद किया हुआ था अश्क बहाते हुए.

अशिता ने अपने मम्मी से रट हुए कहा,

“मम्मी यू अरे थे बेस्ट मम्मी ऑफ़ थे वर्ल्ड, आप ने पापा को इतना प्यार किया, सब कुछ पता होते हुए भी आप ने एक लव्ज़ नहीं कहा पापा को, उस से प्यार करते रहे और उस्सको तकलीफ और शर्मिंदगी नाह हो इस लिए आप ने आज तक इस बात को अपने अंदर छुपाये रखे, यू अरे ग्रेट मम्मी! ी लव यू सो मच!”

विहान ने कहा,

“इससे कहते है सच्चा प्यार मम्मी यू अरे जस्ट ग्रेट, लव यू सो मच माय डार्लिंग मम्मी, मुउउउउआआआह!”

सुमन ने मुस्कुराते हुए दोनों को और ज़ोर से अपने सीने से चिपकाया और अनिरुद के तरफ बहोत प्यार से देखा और उसस्के ेंसुओं को पोंछा.

*********************************************************

रात को करीब 9 बजे अनिरुद घर से निकलने को था जब विहान और अशिता लाउन्ज में सोफे पर बैठे टीवी देख रहे थे तो सुमन ने अनिरुद से कहा,

“मैं फिर कहती हूँ के आप उस कमिटी में नाह जाएँ, विहान और अशिता को लेकर hi बात करेंगे सब और आप हुमिलियते होंगे!”

तब विहान ने कहा,

“पापा मैं भी चलता हूँ आप के साथ!”

अनिरुद ने दोनों के तरफ देखते हेउ कहा,

“हम इस समझ का एक हिस्सा है, जाना तो पड़ेगा, अउ विहान अभी तुमको नहीं चलना है, ज़रूर दोनों को भी बुलाया जाएगा नेक्स्ट टाइम, तब हम सब चैलेंज, फिलहाल मुझको निपटने दो!”

ात थे मीटिंग पॉइंट.

एक स्कूल का हॉल था जहाँ बैठक लगाया जाता था. करीब 1000 लोग हाज़िर थे. होना तो 4000 लोग चाहिए था अगर हर घर से एक आते तो, मतलब बाकी के लोगों को कोई इंटरेस्ट नहीं था इस Vihaan/Ashita वाले केस से.

रघुनाथ जो प्रेजिडेंट थे, मिश्रा जी के पास बैठे थे एक टेबल के पास बाकी के सभी लोग जैसे एक क्लास अटेंड कर रहे थे.

अनिरुद को उस टेबल के दूसरे साइड में बैठने को कहा गया और कुछ एग्जीक्यूटिव मेंबर्स भी आये हुए थे उसी टेबल के पास बैठे.

बात डायरेक्ट शुरू की गयी और रघुनाथ ने पूछा के किआ चल रहा है अनिरुद के घर में और किआ बात चल रही है पुरे मोहल्ले में और उस से भी दूर दूर तक. बात को सीधे अनिरुद से पूछा गया था.

अनिरुद छुप रहे. फिर आपस में कमिटी के मेंबर्स ने बात किये और बाकी के लोग बहोत शोर मचाने लगे कुछ ऐसे बातें करते हुए जो अनिरुद के कान तक पहुँच रहे थे,

“ - दोनों को एक साथ नहीं रहने देना चाहिए

- हमारे मोहल्ले के बच्चों पर किआ एस्सार पड़ेगा

- शर्म की बात है

- मेरी बेटी ऐसा करती तो उस्सको जान से मार डालता मई

- कहाँ आगया यह दुन्या आज

- तर्रकी का ज़माना है भाई लोग आगे बढ़ रहे हैं

- मुझे बहोत सावधान रहना पड़ेगा भाई मेरे भी एक बीटा और बेटी है घर में

- अरे सुना तुमने उस मोहल्ले में एक बीटा और माँ के बीच सुना नाजाइज़ ताल्लुकात है, बाप शिप पर काम करता है घर में बीटा माँ का खूब ख्याल रखता है बीएड पर bhi,jawaan औरत है यार कमाल की है 36 के आस पास की उम्र है!? “

यह सब बातें सुन्नते हुए अनिरुद ने अपने कानों पर हाथ दबा लिए.

कमिटी के एग्जीक्यूटिव मेंबर्स ने डीडे किया के दो दिन बाद विहान और अशिता को भी सामने लाया जाए बैठक में और बाकी के प्रेजेंट मेंबर्स को आने को कहा गया.

अनिरुद ने कहा के वो उन् दोनों को इन् सभी के बीच नहीं लाएगा, अगर उनके बच्चों से बात करना है तो सिर्फ एग्जीक्यूटिव मेंबर्स के बीच बात करना होगा तब वह दोनों को लाएगा.

रघुनाथ ने कहा,

अनिरुद भाई आप हमारे कमिटी के रूल्स से वाकिफ हैं अच्छी तरह से, हम ने अगर इंटरनल भी किये तो 20 मेंबर्स को एग्जीक्यूटिव मेंबर्स के बीच प्रेजेंट होना hi होगा!”

अनिरुद ने कहा, के हाँ तब ठीक होगा मतलब टोटल सिर्फ 28 मेंबर्स होंगे तब अशिता और विहान को साथ लाएगा.

उन् 28 मेंबर्स में 8 लेडीज होते हैं.

रघुनाथ ने तब कहा,

“अनिरुद जी, जब उस धंदा करने वाली लड़की की केस हुई थी तब तो सारे मेंबर्स प्रेजेंट थे और आप ने खुद कहा था के सबको आना चाहिए ताके हम एक नतीजे पर पहुँच सके और आज आप की बारी आयी तो क्यों आप कुछ और कह रहे हैं?”

अनिरुद ग़ुस्से में टेबल पर घूंसा मारते हुए खड़ा हुआ और चिल्ला कर कहा,

“इस लिए के यह एक धंदे करने वाली की केस नहीं है, यह एक सीधा साधा घरेलु केस हैं जो हम आपस में डिसकस कर सकते हैं, अगर मंज़ूर है तो ठीक है वार्ना मैं इस सोसाइटी की मेम्बरशिप से निकलता हूँ!”

तब रघुनाथ जी ने बड़े आराम से धीमी आवाज़ में कहा,

“अगर आप इस सोसाइटी से बाहर निकलते हो तो केस हम पुलिस को सौंपते हैं किआ आप यह चाहते हो? हमारा सोसाइटी इस लिए बैठक लगाते हैं के हम आपस में किसी इशू को सोल्वे कर सकें बिना पुलिस या गवर्नमेंट को इन्वॉल्व करके, इस से आप अच्छी तरह से वाक़िफ़ हो तो ग़ुस्सा क्यों कर रहे हो आप? ठन्डे दिमाग़ से सोचिये किआ ाचा लगेगा अगर पुलिस आप के बच्चों से सवाल जवाब करेंगे और ईन्सेस्तुओस रिलेशनशिप पर कोर्ट में केस फाइल करेंगे?”

यह सुनकर अनिरुद सेहम गया और धीरे से कहा,

“ठीक है आप कुछ ऐसा बंदोबस्त कीजिये के एग्जीक्यूटिव और उस 20 मेंबर्स के बीच में hi डिस्कशन चले प्लीज!”

रघुनाथ ने अपने एक्सेक्यूटिबे मेंबर्स से आपस में कुछ बातें किये और रिजल्ट यह निकला के दो दिन बाद सिर्फ एग्जीक्यूटिव और 20 मेंबर्स के बीच अशिता और विहान से पूछ ताज किया जाएगा उसस्के बाद डीडे किया जाएगा के किआ करना होगा आगे.

उन् 20 मेंबर्स में अमित भी शामिल था जो 2 दिन बाद आने वाला था, और आज भी भीड़ में शामिल था….

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
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