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- Dec 5, 2013
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अपडेट 81 अशिता इन ट्रबल (ा)
अशिता कॉलेज से वापस आरही थी, उस्सको इस दिन को चलने का मैं था तो वो और प्रिय चलते हुए घर जा रहे थे बस नहीं लिया था इस दिन को दोनों ने.
विहान के बारे में प्रिय पूछ रही थी अशिता से जिस ने जवाब में कहा प्रिय को,
“आज कल बहोत कम कम्यूनिकेट कर रहा है वो मुझसे, काम करने लगा है किसी ऑफिस में, वर्कलोड ज़्यादा है अउ एक दो टेक्स्ट में कह देता है के थका हुआ है सोने जा रहा है. मगर हर सुबह को जब तक मैं कॉलेज नहीं रीच होती मुझसे बात करता है, हीहीहीही जेलस है शायद इस लिए मेरा बॉडी गार्ड बना रहता है के कहीं कोई और मुझसे बात नाह करे या बस में मैं किसी लड़के के पास नाह बैठूं वग़ैरा.”
प्रिय: “अरे तो उस्सको कैसे पता चलेगा अगर तेरे पास कोई लड़का बैठा भी तो? उस्सको दिख तो नहीं रहा होता है नाह?”
अशिता: “पूछता है हर सुबह के किश के पास बैठी हूँ, और मैं उस से झूट तो बोल hi नहीं सकती, और कोई भी बात करता है बस में तो सब सुनाई देता है नाह उससे…. एक रोज़ एक आदमी के पास सीट मिली थी तो उस से कहा के एक मिस्टर के पास बैठी हूँ तो कहने लगा के किआ बस में और कोई सीट नहीं मिली मुझे हाहाहा!”
प्रिय: “तो अभी हम चल रहे हैं और अभी कोई तुमको मिल गया और तुमने बात किया तब तो उस्सको कुछ पता नहीं चलेगा नाह?”
अशिता: “अरे उस्का नाम मत लो उस्का फ़ोन आजाएगा, चल चुप चाप!”
इतना hi कहा था के अशिता की मोबाइल बजी और देखा तो विहान का था! अशिता ने मोबाइल प्रिय को दिखाया और फुस्फुसाते हुए कहा,
“यह लो अब सवाल पर सवाल करेगा के क्यों बस से नहीं जा रही हूँ, मैं ने सोचा आज भी फ़ोन नहीं करेगा क्यूंकि मेरे घर पहुँचने के बहुत देर बाद फ़ोन करता है वो भी हर रोज़ फ़ोन करना बांध कर दिया है, तो आज hi क्यों फ़ोन किया उस्सने उफ़!!”
प्रिय: “केहदो के मेरे साथ हो और मुझे भी बात करने को देना, जब उस्सको पता चलेगा के मैं तेरे साथ हूँ तब जेलस नहीं होगा वो!”
अशिता ने चलते हुए विहान से बात किया,
“किआ भाई तुम तो ईद का चाँद हो गए हो, तड़प जाती हूँ तुम से बात करने को!”
विहान: “अरे पगली सुबह तो बात किया था नाह तुझसे?!”
अशिता: “वो तो रूटीन है नाह भाई, उसस्के इलावा कहाँ फ़ोन करते हो मुझे?!”
विहान: “आज इतनी जल्दी तू घर रीच हो गयी?!”
अशिता: “कहाँ रीच हुई हूँ अभी तो आधा रास्ता बाकी है भाई”
विहान: “व्हाट? तो क्यों बस की इंजन की आवाज़ नहीं सुनाई दे रहा है आज? कहाँ हो तुम आशु?”
अशिता ने मुस्कुराते हुए कहा,
“भाई आज मैं पैदल जा रही हूँ, प्रिय मेरे सात चल रही है!”
विहान: “ोफो आशु तुमसे कहा था नाह के बिल्कुल भी लोगों को ओप्पोर्तुनिटी मत देना तुमको देखने और बकवास करने के लिए? अभी उस मोहल्ले वालों में से किसी ने तुमको कुछ उल्टा फूलता कहा तो किआ करोगी तब घर जाकर रोओगी तुम?”
अशिता: “भाई प्रिय तुमसे बात करना चाहती है मैं फ़ोन उस्सको देती हूँ एक दो बात कर लो उस से भी”
प्रिय ने फ़ोन लेते हुए एक चुलबुली आवाज़ में कहा,
“Hi विहान कैसे हो? सुना है ऑफिस में काम करने लगे हो? हम्म साहब बन गए किआ उधर जा कर?”
विहान: “ी ऍम फाइन प्रिय, अरे नहीं ऐसे hi छोटा सा काम मिला है बेकार बैठने से कुछ करना बेटर है नाह, अरे सुनों तुम आशु का ख्याल रखती हो नाह? उस्सको कोई चेररता वीरता तो नहीं नाह?!”
प्रिय ने अस्शिता को मुस्कुराते हुए देख कर जवाब दिया,
“मेरे होते हुए किसी की मजाल है जो तुम्हारी आशु को छर्रे, मैं उस्सकी आँख नोच लुंगी हेहेहे! और फिर मेरा मां तो है नाह!”
विहान ने हंस दिया और कहा,
“अछि बात है ाचा आशु को फ़ोन दे नाह मैं हैंग करने वाला हूँ अब.”
तो प्रिय ने वापस फ़ोन अशिता को दे दिया और विहान ने एक दो बात करके कट कर दिया क्यूंकि उधर विहान को अपने दादा जी से बात करना था उस पहाड़ वाले घर और लोगों के बारे में…..
प्रिय का घर पहले अत था तो वो चली गयी और अशिता को कोई और देर कंस चलना था तो वो आगे बढ़ने लगी. मगर उस्सको अमित के कीबेरसफ़े के पास से गुज़ारना था, और जब वो वहां रीच हुई तो अमित ने साफé के अंदर से अशिता को देख लिया और जल्दी से बाहर निकला अशिता से मिलने के लिए.
हमेशा की तरह अपनी कलगे यूनिफार्म में अशिता बहोत hi हॉट दिख रही थी, ख़ास कर उस्सकी उभरे हुए बूब्स उस्सकी ब्लाउज पर बहोत फॉर्म में दिठ्टी थे और लास्ट टाइम उसी को देख कर अमित दीवाना हुआ था…. हालां के अमित ने विहान और अशिता को सपोर्ट किया था भूलना नहीं चाहिए के अमित का दिल आगया था अशिता पर और उस्सको प्रोपोज़ भी किया था उस्सने मगर अशिता ने रेफुसे किया था उस्सको यह कहकर के उस्सकी लाइफ में कोई और है और बाद में अमित को पता चला था के वो कोई और उस्का अपना भाई विहान था.
तो इस वक़्त अमित का दिल बड़े ज़ोरों से धड़का था अशिता को देख कर, क्यों के पिछले समिति वाले रात के बाद आज पहली बार था के अमित अशिता को देख रहा था, वो हर रोज़ इंतज़ार में रहता के कब उस्सको अशिता दिखेगी और आज वो दिन आया था और वो बाहर रास्ते पर निकल कर अशिता के सामने हाज़िर हुआ!
अशिता ने उस से मुस्कुराकर “HI” कहा और अमित ने पूछा,
“आज वाक करते जा रही हो बस नहीं लिया?!”
अशिता ने निचे सर झुका लिया और चलते हुए रिप्लाई किया,
“हाँ आज मेरी सहेली का मैं चलने को था तो उस्सको ैकपेनी किया उसस्के घर तक.”
अमित ने कहा,
“बुरा नाह मानों तो तुम्हारे घर तक तुम्हारे साथ चल सकता हूँ?”
अशिता: “okay no प्रॉब्स चलिए!”
1 कम का साथ मिल गया अमित को उसस्के साथ चलने को और बातें करते हुए दोनों साथ जाने लगे. अशिता बार बार लोगों के नज़रों में देखती जा रही थी के कहीं कोई उस्सको घुर्र तो नहीं रहा क्यूंकि अब लोग यह बात करना भी शुरू कर सकते हैं के वो दूसरों के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी hai….aur अशिता को याद आया के अगर अचानक विहान ने उस्सको कॉल किया तो अमित को पता चल जाएगा के उसस्के पास मोबाइल है और उस्का नंबर मांगेगा, तो अशिता ने अपने हाथ को बैग में दाल कर किसी तरह से अपने मोबाइल को स्विच ऑफ किया ताके विहना कॉल करे तो सुनाई नाह दे….
अमित ने पूछा के विहान किधर है किआ कर रहा है ेट्स.
अशिता ने उस्सको बता दिया के वो गाओं के पास वाले छोटे शहर में किसी ऑफिस में काम कर रहा है आज कल.
ऐसे बात करते करते अशिता अपने घर को रीच हुए, तो अमित ने कहा,
“यहाँ तक आ hi गया हूँ तो एक कप चाय तो बनता है क्यों?!”
अशिता कैसे रेफुसे करती? उस्सने सोचा के एक तो अमित विहान का ex-boss था और फिर उस्सने अकेले दोनों के फवौर में समिति वालों से बात किया था, और फिर वो पहले उसस्के घर आ चूका था विहान से मिलने तो अशिता ने उस्सको okay कहा चाय के लिए.
अशिता ने घर का दरवाज़ा खोलते हुए उस्सको वेलकम कहा और अमित को लाउन्ज में बैठने को कहकर अपनी रूम में गयी अपना बैग रखने….. और तभी अशिता को वो सपना याद आया के अमित उसस्के साथ सेक्स करने लगा था इसी तरह वो यहाँ अशिता का वेट कर रहा था और उस्सको घर के अंदर पाकर कर बीएड पर लेटाया था….
अशिता उस सपने को सोच कर सिहर गयी और उस्सको गरम लगने लगी, उस्सको ठंडी पानी में नहाने को मैं किया उसी वक़्त…. अब उसस्के समझ में नहीं ारः था के वो किआ करें…..
अशिता याद करने लगी अमित वाले ड्रीम को के वो भी खूब एन्जॉय कर रही थी अमित के साथ अपने बीएड पर, और आज उसी तरह अमित को उस्सने घर के अंदर ले आयी थी और अब उस सपने को सोचते हुए घबरा रही थी और उसस्के जिस्म के अंदर जैसे सेक्स की चाहत भी फील होने लगी थी… अशिता जैसे एक दो रहे पर कड़ी थी इस वक़्त सोच रही थी के एक बार अपने जिस्म की आग को बुझा लिया जाए या किआ करें…. वो अपने विहान को भी सोचने लगी, अपनी सच्चे प्यार जो उसस्के दिल में विहान के लिए था उस्सको सोचने लगी, उसस्के दिल की घेहरायी में तो सिर्फ विहान बसा हुआ था, मगर क्यूंकि सेक्स का मज़ा चख लिख्या है अब उस्सकी जिस्म की मांग कुछ और कह रही थी, इस दोराहे से कैसे अशिता निकले इस कश्मकश में थी अशिता….
अमित लाउन्ज में बैठा अपने तरफ से वो भी सोचने लगा था के अशिता का भाई तो अब उसस्के पास नहीं है, मतलब उस के साथ सेक्स करने वाला कोई नहीं, किआ पता अब अशिता उस्सको अपने करीब आने देगी, किआ पता अशिता ने एहि सोचकर उस्सको घर के अंदर चाय के लिए आने के लिए राज़ी हुई. अमित अपने ख्यालों में अशिता की जिस्म को सोचने लगा था और उस्का खड़ा हो गया और अब उस्सको अशिता को पाने का मैं किया…. मर्द होते hi ऐसे हैं के जहाँ एक मौका मिला उस्सको सिर्फ छोड़ने को मैं कर दिया, एक अकेली लड़की को घर में किआ पा लिया तो शैतान दिल ो दिमाग़ में घर बसा लेता है और इसी तरह का ख्याल दिमाग़ में आने लगता है के लड़की अकेली है फिर भी मुझको घर के अंदर आने दिया तो मतलब रगीन लम्हे बिताया जा सकता है….
अमित यह भी सोचने लगा के अगर अशिता वर्जिन होती तो वो उस से यह मांग नहीं कर पाटा मगर अब क्यूंकि अशिता खुद अपने भाई से छुड़वा चुकी है तो किआ पता के इस वक़्त अशिता को भी बीएड पर लेटने का मैं कर रहा हो….
अमित ने सोचा के अगर इस वक़्त अशिता के करीब नहीं हुआ तो अशिता भी उस्सको उल्लू समझेगा के ऐसा मौका मिला उस्सको फिर भी उस्सने जाने दिया तो अमित ने खुद से कहा,
“आज तो आगे बढूंगा, एनीवे ात लीस्ट तरय तो करना चाहिए मुझे; किआ पता वो भी इसी इंतज़ार में हो के मैं उस्सको बीएड पर लेयताओं, तो तरय करने में कोई हर्ज नहीं है, कम से कम किआ होगा मन करेगी, वार्ना मान जाएगी, तो एक चांस ज़रूर लेना चाहिए मुझे… हाँ मुझे लगता है के करने देगी और शो इस्सकी ज़रुरत भी होगी, किआ कर रही है अंदर कहीं कपडे तो नहीं बदल रही, अरे यार मैं उस्सको इसी यूनिफार्म में लेना चाहता हूँ, उस्सकी ब्लाउज के बटन एक एक करके खोलूंगा, तब उस्सकी ब्रा को अपने हाथों से उन्हुक करूँगा, कॉलेज की यूनिफार्म में एक लड़की को लेटाने में एक अलग मज़ा आता hai….aja अशिता आजा वेट कर रहा हूँ चाय को मार्रो गोली तेरी दूध और निचे का मलाई खाने को मन कर रहा है अब तो….”
तो बे कॉन्टिनोएड इन थे नेक्स्ट पोस्ट इम्मेडिएटली
अशिता कॉलेज से वापस आरही थी, उस्सको इस दिन को चलने का मैं था तो वो और प्रिय चलते हुए घर जा रहे थे बस नहीं लिया था इस दिन को दोनों ने.
विहान के बारे में प्रिय पूछ रही थी अशिता से जिस ने जवाब में कहा प्रिय को,
“आज कल बहोत कम कम्यूनिकेट कर रहा है वो मुझसे, काम करने लगा है किसी ऑफिस में, वर्कलोड ज़्यादा है अउ एक दो टेक्स्ट में कह देता है के थका हुआ है सोने जा रहा है. मगर हर सुबह को जब तक मैं कॉलेज नहीं रीच होती मुझसे बात करता है, हीहीहीही जेलस है शायद इस लिए मेरा बॉडी गार्ड बना रहता है के कहीं कोई और मुझसे बात नाह करे या बस में मैं किसी लड़के के पास नाह बैठूं वग़ैरा.”
प्रिय: “अरे तो उस्सको कैसे पता चलेगा अगर तेरे पास कोई लड़का बैठा भी तो? उस्सको दिख तो नहीं रहा होता है नाह?”
अशिता: “पूछता है हर सुबह के किश के पास बैठी हूँ, और मैं उस से झूट तो बोल hi नहीं सकती, और कोई भी बात करता है बस में तो सब सुनाई देता है नाह उससे…. एक रोज़ एक आदमी के पास सीट मिली थी तो उस से कहा के एक मिस्टर के पास बैठी हूँ तो कहने लगा के किआ बस में और कोई सीट नहीं मिली मुझे हाहाहा!”
प्रिय: “तो अभी हम चल रहे हैं और अभी कोई तुमको मिल गया और तुमने बात किया तब तो उस्सको कुछ पता नहीं चलेगा नाह?”
अशिता: “अरे उस्का नाम मत लो उस्का फ़ोन आजाएगा, चल चुप चाप!”
इतना hi कहा था के अशिता की मोबाइल बजी और देखा तो विहान का था! अशिता ने मोबाइल प्रिय को दिखाया और फुस्फुसाते हुए कहा,
“यह लो अब सवाल पर सवाल करेगा के क्यों बस से नहीं जा रही हूँ, मैं ने सोचा आज भी फ़ोन नहीं करेगा क्यूंकि मेरे घर पहुँचने के बहुत देर बाद फ़ोन करता है वो भी हर रोज़ फ़ोन करना बांध कर दिया है, तो आज hi क्यों फ़ोन किया उस्सने उफ़!!”
प्रिय: “केहदो के मेरे साथ हो और मुझे भी बात करने को देना, जब उस्सको पता चलेगा के मैं तेरे साथ हूँ तब जेलस नहीं होगा वो!”
अशिता ने चलते हुए विहान से बात किया,
“किआ भाई तुम तो ईद का चाँद हो गए हो, तड़प जाती हूँ तुम से बात करने को!”
विहान: “अरे पगली सुबह तो बात किया था नाह तुझसे?!”
अशिता: “वो तो रूटीन है नाह भाई, उसस्के इलावा कहाँ फ़ोन करते हो मुझे?!”
विहान: “आज इतनी जल्दी तू घर रीच हो गयी?!”
अशिता: “कहाँ रीच हुई हूँ अभी तो आधा रास्ता बाकी है भाई”
विहान: “व्हाट? तो क्यों बस की इंजन की आवाज़ नहीं सुनाई दे रहा है आज? कहाँ हो तुम आशु?”
अशिता ने मुस्कुराते हुए कहा,
“भाई आज मैं पैदल जा रही हूँ, प्रिय मेरे सात चल रही है!”
विहान: “ोफो आशु तुमसे कहा था नाह के बिल्कुल भी लोगों को ओप्पोर्तुनिटी मत देना तुमको देखने और बकवास करने के लिए? अभी उस मोहल्ले वालों में से किसी ने तुमको कुछ उल्टा फूलता कहा तो किआ करोगी तब घर जाकर रोओगी तुम?”
अशिता: “भाई प्रिय तुमसे बात करना चाहती है मैं फ़ोन उस्सको देती हूँ एक दो बात कर लो उस से भी”
प्रिय ने फ़ोन लेते हुए एक चुलबुली आवाज़ में कहा,
“Hi विहान कैसे हो? सुना है ऑफिस में काम करने लगे हो? हम्म साहब बन गए किआ उधर जा कर?”
विहान: “ी ऍम फाइन प्रिय, अरे नहीं ऐसे hi छोटा सा काम मिला है बेकार बैठने से कुछ करना बेटर है नाह, अरे सुनों तुम आशु का ख्याल रखती हो नाह? उस्सको कोई चेररता वीरता तो नहीं नाह?!”
प्रिय ने अस्शिता को मुस्कुराते हुए देख कर जवाब दिया,
“मेरे होते हुए किसी की मजाल है जो तुम्हारी आशु को छर्रे, मैं उस्सकी आँख नोच लुंगी हेहेहे! और फिर मेरा मां तो है नाह!”
विहान ने हंस दिया और कहा,
“अछि बात है ाचा आशु को फ़ोन दे नाह मैं हैंग करने वाला हूँ अब.”
तो प्रिय ने वापस फ़ोन अशिता को दे दिया और विहान ने एक दो बात करके कट कर दिया क्यूंकि उधर विहान को अपने दादा जी से बात करना था उस पहाड़ वाले घर और लोगों के बारे में…..
प्रिय का घर पहले अत था तो वो चली गयी और अशिता को कोई और देर कंस चलना था तो वो आगे बढ़ने लगी. मगर उस्सको अमित के कीबेरसफ़े के पास से गुज़ारना था, और जब वो वहां रीच हुई तो अमित ने साफé के अंदर से अशिता को देख लिया और जल्दी से बाहर निकला अशिता से मिलने के लिए.
हमेशा की तरह अपनी कलगे यूनिफार्म में अशिता बहोत hi हॉट दिख रही थी, ख़ास कर उस्सकी उभरे हुए बूब्स उस्सकी ब्लाउज पर बहोत फॉर्म में दिठ्टी थे और लास्ट टाइम उसी को देख कर अमित दीवाना हुआ था…. हालां के अमित ने विहान और अशिता को सपोर्ट किया था भूलना नहीं चाहिए के अमित का दिल आगया था अशिता पर और उस्सको प्रोपोज़ भी किया था उस्सने मगर अशिता ने रेफुसे किया था उस्सको यह कहकर के उस्सकी लाइफ में कोई और है और बाद में अमित को पता चला था के वो कोई और उस्का अपना भाई विहान था.
तो इस वक़्त अमित का दिल बड़े ज़ोरों से धड़का था अशिता को देख कर, क्यों के पिछले समिति वाले रात के बाद आज पहली बार था के अमित अशिता को देख रहा था, वो हर रोज़ इंतज़ार में रहता के कब उस्सको अशिता दिखेगी और आज वो दिन आया था और वो बाहर रास्ते पर निकल कर अशिता के सामने हाज़िर हुआ!
अशिता ने उस से मुस्कुराकर “HI” कहा और अमित ने पूछा,
“आज वाक करते जा रही हो बस नहीं लिया?!”
अशिता ने निचे सर झुका लिया और चलते हुए रिप्लाई किया,
“हाँ आज मेरी सहेली का मैं चलने को था तो उस्सको ैकपेनी किया उसस्के घर तक.”
अमित ने कहा,
“बुरा नाह मानों तो तुम्हारे घर तक तुम्हारे साथ चल सकता हूँ?”
अशिता: “okay no प्रॉब्स चलिए!”
1 कम का साथ मिल गया अमित को उसस्के साथ चलने को और बातें करते हुए दोनों साथ जाने लगे. अशिता बार बार लोगों के नज़रों में देखती जा रही थी के कहीं कोई उस्सको घुर्र तो नहीं रहा क्यूंकि अब लोग यह बात करना भी शुरू कर सकते हैं के वो दूसरों के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी hai….aur अशिता को याद आया के अगर अचानक विहान ने उस्सको कॉल किया तो अमित को पता चल जाएगा के उसस्के पास मोबाइल है और उस्का नंबर मांगेगा, तो अशिता ने अपने हाथ को बैग में दाल कर किसी तरह से अपने मोबाइल को स्विच ऑफ किया ताके विहना कॉल करे तो सुनाई नाह दे….
अमित ने पूछा के विहान किधर है किआ कर रहा है ेट्स.
अशिता ने उस्सको बता दिया के वो गाओं के पास वाले छोटे शहर में किसी ऑफिस में काम कर रहा है आज कल.
ऐसे बात करते करते अशिता अपने घर को रीच हुए, तो अमित ने कहा,
“यहाँ तक आ hi गया हूँ तो एक कप चाय तो बनता है क्यों?!”
अशिता कैसे रेफुसे करती? उस्सने सोचा के एक तो अमित विहान का ex-boss था और फिर उस्सने अकेले दोनों के फवौर में समिति वालों से बात किया था, और फिर वो पहले उसस्के घर आ चूका था विहान से मिलने तो अशिता ने उस्सको okay कहा चाय के लिए.
अशिता ने घर का दरवाज़ा खोलते हुए उस्सको वेलकम कहा और अमित को लाउन्ज में बैठने को कहकर अपनी रूम में गयी अपना बैग रखने….. और तभी अशिता को वो सपना याद आया के अमित उसस्के साथ सेक्स करने लगा था इसी तरह वो यहाँ अशिता का वेट कर रहा था और उस्सको घर के अंदर पाकर कर बीएड पर लेटाया था….
अशिता उस सपने को सोच कर सिहर गयी और उस्सको गरम लगने लगी, उस्सको ठंडी पानी में नहाने को मैं किया उसी वक़्त…. अब उसस्के समझ में नहीं ारः था के वो किआ करें…..
अशिता याद करने लगी अमित वाले ड्रीम को के वो भी खूब एन्जॉय कर रही थी अमित के साथ अपने बीएड पर, और आज उसी तरह अमित को उस्सने घर के अंदर ले आयी थी और अब उस सपने को सोचते हुए घबरा रही थी और उसस्के जिस्म के अंदर जैसे सेक्स की चाहत भी फील होने लगी थी… अशिता जैसे एक दो रहे पर कड़ी थी इस वक़्त सोच रही थी के एक बार अपने जिस्म की आग को बुझा लिया जाए या किआ करें…. वो अपने विहान को भी सोचने लगी, अपनी सच्चे प्यार जो उसस्के दिल में विहान के लिए था उस्सको सोचने लगी, उसस्के दिल की घेहरायी में तो सिर्फ विहान बसा हुआ था, मगर क्यूंकि सेक्स का मज़ा चख लिख्या है अब उस्सकी जिस्म की मांग कुछ और कह रही थी, इस दोराहे से कैसे अशिता निकले इस कश्मकश में थी अशिता….
अमित लाउन्ज में बैठा अपने तरफ से वो भी सोचने लगा था के अशिता का भाई तो अब उसस्के पास नहीं है, मतलब उस के साथ सेक्स करने वाला कोई नहीं, किआ पता अब अशिता उस्सको अपने करीब आने देगी, किआ पता अशिता ने एहि सोचकर उस्सको घर के अंदर चाय के लिए आने के लिए राज़ी हुई. अमित अपने ख्यालों में अशिता की जिस्म को सोचने लगा था और उस्का खड़ा हो गया और अब उस्सको अशिता को पाने का मैं किया…. मर्द होते hi ऐसे हैं के जहाँ एक मौका मिला उस्सको सिर्फ छोड़ने को मैं कर दिया, एक अकेली लड़की को घर में किआ पा लिया तो शैतान दिल ो दिमाग़ में घर बसा लेता है और इसी तरह का ख्याल दिमाग़ में आने लगता है के लड़की अकेली है फिर भी मुझको घर के अंदर आने दिया तो मतलब रगीन लम्हे बिताया जा सकता है….
अमित यह भी सोचने लगा के अगर अशिता वर्जिन होती तो वो उस से यह मांग नहीं कर पाटा मगर अब क्यूंकि अशिता खुद अपने भाई से छुड़वा चुकी है तो किआ पता के इस वक़्त अशिता को भी बीएड पर लेटने का मैं कर रहा हो….
अमित ने सोचा के अगर इस वक़्त अशिता के करीब नहीं हुआ तो अशिता भी उस्सको उल्लू समझेगा के ऐसा मौका मिला उस्सको फिर भी उस्सने जाने दिया तो अमित ने खुद से कहा,
“आज तो आगे बढूंगा, एनीवे ात लीस्ट तरय तो करना चाहिए मुझे; किआ पता वो भी इसी इंतज़ार में हो के मैं उस्सको बीएड पर लेयताओं, तो तरय करने में कोई हर्ज नहीं है, कम से कम किआ होगा मन करेगी, वार्ना मान जाएगी, तो एक चांस ज़रूर लेना चाहिए मुझे… हाँ मुझे लगता है के करने देगी और शो इस्सकी ज़रुरत भी होगी, किआ कर रही है अंदर कहीं कपडे तो नहीं बदल रही, अरे यार मैं उस्सको इसी यूनिफार्म में लेना चाहता हूँ, उस्सकी ब्लाउज के बटन एक एक करके खोलूंगा, तब उस्सकी ब्रा को अपने हाथों से उन्हुक करूँगा, कॉलेज की यूनिफार्म में एक लड़की को लेटाने में एक अलग मज़ा आता hai….aja अशिता आजा वेट कर रहा हूँ चाय को मार्रो गोली तेरी दूध और निचे का मलाई खाने को मन कर रहा है अब तो….”
तो बे कॉन्टिनोएड इन थे नेक्स्ट पोस्ट इम्मेडिएटली