Vihaan Aur Ashita - Bhai Behen ki kahani - Page 12 - SexBaba
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Vihaan Aur Ashita - Bhai Behen ki kahani

अपडेट 81 अशिता इन ट्रबल (ा)


अशिता कॉलेज से वापस आरही थी, उस्सको इस दिन को चलने का मैं था तो वो और प्रिय चलते हुए घर जा रहे थे बस नहीं लिया था इस दिन को दोनों ने.

विहान के बारे में प्रिय पूछ रही थी अशिता से जिस ने जवाब में कहा प्रिय को,

“आज कल बहोत कम कम्यूनिकेट कर रहा है वो मुझसे, काम करने लगा है किसी ऑफिस में, वर्कलोड ज़्यादा है अउ एक दो टेक्स्ट में कह देता है के थका हुआ है सोने जा रहा है. मगर हर सुबह को जब तक मैं कॉलेज नहीं रीच होती मुझसे बात करता है, हीहीहीही जेलस है शायद इस लिए मेरा बॉडी गार्ड बना रहता है के कहीं कोई और मुझसे बात नाह करे या बस में मैं किसी लड़के के पास नाह बैठूं वग़ैरा.”

प्रिय: “अरे तो उस्सको कैसे पता चलेगा अगर तेरे पास कोई लड़का बैठा भी तो? उस्सको दिख तो नहीं रहा होता है नाह?”

अशिता: “पूछता है हर सुबह के किश के पास बैठी हूँ, और मैं उस से झूट तो बोल hi नहीं सकती, और कोई भी बात करता है बस में तो सब सुनाई देता है नाह उससे…. एक रोज़ एक आदमी के पास सीट मिली थी तो उस से कहा के एक मिस्टर के पास बैठी हूँ तो कहने लगा के किआ बस में और कोई सीट नहीं मिली मुझे हाहाहा!”

प्रिय: “तो अभी हम चल रहे हैं और अभी कोई तुमको मिल गया और तुमने बात किया तब तो उस्सको कुछ पता नहीं चलेगा नाह?”

अशिता: “अरे उस्का नाम मत लो उस्का फ़ोन आजाएगा, चल चुप चाप!”

इतना hi कहा था के अशिता की मोबाइल बजी और देखा तो विहान का था! अशिता ने मोबाइल प्रिय को दिखाया और फुस्फुसाते हुए कहा,

“यह लो अब सवाल पर सवाल करेगा के क्यों बस से नहीं जा रही हूँ, मैं ने सोचा आज भी फ़ोन नहीं करेगा क्यूंकि मेरे घर पहुँचने के बहुत देर बाद फ़ोन करता है वो भी हर रोज़ फ़ोन करना बांध कर दिया है, तो आज hi क्यों फ़ोन किया उस्सने उफ़!!”

प्रिय: “केहदो के मेरे साथ हो और मुझे भी बात करने को देना, जब उस्सको पता चलेगा के मैं तेरे साथ हूँ तब जेलस नहीं होगा वो!”

अशिता ने चलते हुए विहान से बात किया,

“किआ भाई तुम तो ईद का चाँद हो गए हो, तड़प जाती हूँ तुम से बात करने को!”

विहान: “अरे पगली सुबह तो बात किया था नाह तुझसे?!”

अशिता: “वो तो रूटीन है नाह भाई, उसस्के इलावा कहाँ फ़ोन करते हो मुझे?!”

विहान: “आज इतनी जल्दी तू घर रीच हो गयी?!”

अशिता: “कहाँ रीच हुई हूँ अभी तो आधा रास्ता बाकी है भाई”

विहान: “व्हाट? तो क्यों बस की इंजन की आवाज़ नहीं सुनाई दे रहा है आज? कहाँ हो तुम आशु?”

अशिता ने मुस्कुराते हुए कहा,

“भाई आज मैं पैदल जा रही हूँ, प्रिय मेरे सात चल रही है!”

विहान: “ोफो आशु तुमसे कहा था नाह के बिल्कुल भी लोगों को ओप्पोर्तुनिटी मत देना तुमको देखने और बकवास करने के लिए? अभी उस मोहल्ले वालों में से किसी ने तुमको कुछ उल्टा फूलता कहा तो किआ करोगी तब घर जाकर रोओगी तुम?”

अशिता: “भाई प्रिय तुमसे बात करना चाहती है मैं फ़ोन उस्सको देती हूँ एक दो बात कर लो उस से भी”

प्रिय ने फ़ोन लेते हुए एक चुलबुली आवाज़ में कहा,

“Hi विहान कैसे हो? सुना है ऑफिस में काम करने लगे हो? हम्म साहब बन गए किआ उधर जा कर?”

विहान: “ी ऍम फाइन प्रिय, अरे नहीं ऐसे hi छोटा सा काम मिला है बेकार बैठने से कुछ करना बेटर है नाह, अरे सुनों तुम आशु का ख्याल रखती हो नाह? उस्सको कोई चेररता वीरता तो नहीं नाह?!”

प्रिय ने अस्शिता को मुस्कुराते हुए देख कर जवाब दिया,

“मेरे होते हुए किसी की मजाल है जो तुम्हारी आशु को छर्रे, मैं उस्सकी आँख नोच लुंगी हेहेहे! और फिर मेरा मां तो है नाह!”

विहान ने हंस दिया और कहा,

“अछि बात है ाचा आशु को फ़ोन दे नाह मैं हैंग करने वाला हूँ अब.”

तो प्रिय ने वापस फ़ोन अशिता को दे दिया और विहान ने एक दो बात करके कट कर दिया क्यूंकि उधर विहान को अपने दादा जी से बात करना था उस पहाड़ वाले घर और लोगों के बारे में…..

प्रिय का घर पहले अत था तो वो चली गयी और अशिता को कोई और देर कंस चलना था तो वो आगे बढ़ने लगी. मगर उस्सको अमित के कीबेरसफ़े के पास से गुज़ारना था, और जब वो वहां रीच हुई तो अमित ने साफé के अंदर से अशिता को देख लिया और जल्दी से बाहर निकला अशिता से मिलने के लिए.

हमेशा की तरह अपनी कलगे यूनिफार्म में अशिता बहोत hi हॉट दिख रही थी, ख़ास कर उस्सकी उभरे हुए बूब्स उस्सकी ब्लाउज पर बहोत फॉर्म में दिठ्टी थे और लास्ट टाइम उसी को देख कर अमित दीवाना हुआ था…. हालां के अमित ने विहान और अशिता को सपोर्ट किया था भूलना नहीं चाहिए के अमित का दिल आगया था अशिता पर और उस्सको प्रोपोज़ भी किया था उस्सने मगर अशिता ने रेफुसे किया था उस्सको यह कहकर के उस्सकी लाइफ में कोई और है और बाद में अमित को पता चला था के वो कोई और उस्का अपना भाई विहान था.

तो इस वक़्त अमित का दिल बड़े ज़ोरों से धड़का था अशिता को देख कर, क्यों के पिछले समिति वाले रात के बाद आज पहली बार था के अमित अशिता को देख रहा था, वो हर रोज़ इंतज़ार में रहता के कब उस्सको अशिता दिखेगी और आज वो दिन आया था और वो बाहर रास्ते पर निकल कर अशिता के सामने हाज़िर हुआ!

अशिता ने उस से मुस्कुराकर “HI” कहा और अमित ने पूछा,

“आज वाक करते जा रही हो बस नहीं लिया?!”

अशिता ने निचे सर झुका लिया और चलते हुए रिप्लाई किया,

“हाँ आज मेरी सहेली का मैं चलने को था तो उस्सको ैकपेनी किया उसस्के घर तक.”

अमित ने कहा,

“बुरा नाह मानों तो तुम्हारे घर तक तुम्हारे साथ चल सकता हूँ?”

अशिता: “okay no प्रॉब्स चलिए!”

1 कम का साथ मिल गया अमित को उसस्के साथ चलने को और बातें करते हुए दोनों साथ जाने लगे. अशिता बार बार लोगों के नज़रों में देखती जा रही थी के कहीं कोई उस्सको घुर्र तो नहीं रहा क्यूंकि अब लोग यह बात करना भी शुरू कर सकते हैं के वो दूसरों के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी hai….aur अशिता को याद आया के अगर अचानक विहान ने उस्सको कॉल किया तो अमित को पता चल जाएगा के उसस्के पास मोबाइल है और उस्का नंबर मांगेगा, तो अशिता ने अपने हाथ को बैग में दाल कर किसी तरह से अपने मोबाइल को स्विच ऑफ किया ताके विहना कॉल करे तो सुनाई नाह दे….

अमित ने पूछा के विहान किधर है किआ कर रहा है ेट्स.

अशिता ने उस्सको बता दिया के वो गाओं के पास वाले छोटे शहर में किसी ऑफिस में काम कर रहा है आज कल.

ऐसे बात करते करते अशिता अपने घर को रीच हुए, तो अमित ने कहा,

“यहाँ तक आ hi गया हूँ तो एक कप चाय तो बनता है क्यों?!”

अशिता कैसे रेफुसे करती? उस्सने सोचा के एक तो अमित विहान का ex-boss था और फिर उस्सने अकेले दोनों के फवौर में समिति वालों से बात किया था, और फिर वो पहले उसस्के घर आ चूका था विहान से मिलने तो अशिता ने उस्सको okay कहा चाय के लिए.

अशिता ने घर का दरवाज़ा खोलते हुए उस्सको वेलकम कहा और अमित को लाउन्ज में बैठने को कहकर अपनी रूम में गयी अपना बैग रखने….. और तभी अशिता को वो सपना याद आया के अमित उसस्के साथ सेक्स करने लगा था इसी तरह वो यहाँ अशिता का वेट कर रहा था और उस्सको घर के अंदर पाकर कर बीएड पर लेटाया था….

अशिता उस सपने को सोच कर सिहर गयी और उस्सको गरम लगने लगी, उस्सको ठंडी पानी में नहाने को मैं किया उसी वक़्त…. अब उसस्के समझ में नहीं ारः था के वो किआ करें…..

अशिता याद करने लगी अमित वाले ड्रीम को के वो भी खूब एन्जॉय कर रही थी अमित के साथ अपने बीएड पर, और आज उसी तरह अमित को उस्सने घर के अंदर ले आयी थी और अब उस सपने को सोचते हुए घबरा रही थी और उसस्के जिस्म के अंदर जैसे सेक्स की चाहत भी फील होने लगी थी… अशिता जैसे एक दो रहे पर कड़ी थी इस वक़्त सोच रही थी के एक बार अपने जिस्म की आग को बुझा लिया जाए या किआ करें…. वो अपने विहान को भी सोचने लगी, अपनी सच्चे प्यार जो उसस्के दिल में विहान के लिए था उस्सको सोचने लगी, उसस्के दिल की घेहरायी में तो सिर्फ विहान बसा हुआ था, मगर क्यूंकि सेक्स का मज़ा चख लिख्या है अब उस्सकी जिस्म की मांग कुछ और कह रही थी, इस दोराहे से कैसे अशिता निकले इस कश्मकश में थी अशिता….

अमित लाउन्ज में बैठा अपने तरफ से वो भी सोचने लगा था के अशिता का भाई तो अब उसस्के पास नहीं है, मतलब उस के साथ सेक्स करने वाला कोई नहीं, किआ पता अब अशिता उस्सको अपने करीब आने देगी, किआ पता अशिता ने एहि सोचकर उस्सको घर के अंदर चाय के लिए आने के लिए राज़ी हुई. अमित अपने ख्यालों में अशिता की जिस्म को सोचने लगा था और उस्का खड़ा हो गया और अब उस्सको अशिता को पाने का मैं किया…. मर्द होते hi ऐसे हैं के जहाँ एक मौका मिला उस्सको सिर्फ छोड़ने को मैं कर दिया, एक अकेली लड़की को घर में किआ पा लिया तो शैतान दिल ो दिमाग़ में घर बसा लेता है और इसी तरह का ख्याल दिमाग़ में आने लगता है के लड़की अकेली है फिर भी मुझको घर के अंदर आने दिया तो मतलब रगीन लम्हे बिताया जा सकता है….

अमित यह भी सोचने लगा के अगर अशिता वर्जिन होती तो वो उस से यह मांग नहीं कर पाटा मगर अब क्यूंकि अशिता खुद अपने भाई से छुड़वा चुकी है तो किआ पता के इस वक़्त अशिता को भी बीएड पर लेटने का मैं कर रहा हो….

अमित ने सोचा के अगर इस वक़्त अशिता के करीब नहीं हुआ तो अशिता भी उस्सको उल्लू समझेगा के ऐसा मौका मिला उस्सको फिर भी उस्सने जाने दिया तो अमित ने खुद से कहा,

“आज तो आगे बढूंगा, एनीवे ात लीस्ट तरय तो करना चाहिए मुझे; किआ पता वो भी इसी इंतज़ार में हो के मैं उस्सको बीएड पर लेयताओं, तो तरय करने में कोई हर्ज नहीं है, कम से कम किआ होगा मन करेगी, वार्ना मान जाएगी, तो एक चांस ज़रूर लेना चाहिए मुझे… हाँ मुझे लगता है के करने देगी और शो इस्सकी ज़रुरत भी होगी, किआ कर रही है अंदर कहीं कपडे तो नहीं बदल रही, अरे यार मैं उस्सको इसी यूनिफार्म में लेना चाहता हूँ, उस्सकी ब्लाउज के बटन एक एक करके खोलूंगा, तब उस्सकी ब्रा को अपने हाथों से उन्हुक करूँगा, कॉलेज की यूनिफार्म में एक लड़की को लेटाने में एक अलग मज़ा आता hai….aja अशिता आजा वेट कर रहा हूँ चाय को मार्रो गोली तेरी दूध और निचे का मलाई खाने को मन कर रहा है अब तो….”

तो बे कॉन्टिनोएड इन थे नेक्स्ट पोस्ट इम्मेडिएटली
 
अपडेट 82 अशिता इन ट्रबल (बी)

अशिता अपनी कमरे में वक़्त लगा रही थी, उस्सको कुछ अजीब लगने लगा था सब सोचते हुए, सपने को सोचते हुए और खुद उस्सकी जिस्म जैसे उस्का साथ नहीं दे रही थी, आग तो भड़की थी मगर अपने प्यार और दिल के रिश्ते को सोच रही थी विहान के साथ….

फिर एक बार अशिता ने खुद से कहा,

“ड्रेस चेंज करलूं किआ? यूनिफार्म उतार दूँ और अपनी घर के कपडे पेहेन कर तब उस्सको चाय देने जॉन? किआ करूँ…. हाँ शायद एहि ठीक होगा, घर के कपडे में ब्रा तो नहीं पहनती हूँ तो अगर उस्सको मुझे पाना है जैसे सपने में देखा था तो वो खुद मुझे छूने की कोशिश करेगा और मैं सिमट जाउंगी उसस्के बाहों में तो वो समझ जाएगा के मैं उसस्के लिए तैयार हूँ… नहीं नहीं मैं हरगिज़ ऐसा नहीं कर सकती!!”

अशिता अपने अंतर आत्मा से लड़ रही थी, अजीब कश्मकश में थी, और वैसे hi यूनिफार्म में कमरे से निकलने hi वाली थी के अमित की वाअज़ आयी,

“अरे कहाँ हो डिअर, मैं वेट कर रहा हूँ मुझे भूल गयी किआ यहाँ बिठा कर?”

अशिता मुस्कुराते हुए कमरे से निकली और कहा,

“हाँ अभी चाय बनाती हूँ बस 3 मिनट में हो जाएगा”

और वो किचन के तरफ बढ़ने hi लगी थी के अशिता ने देखा अमित को सोफे से उठ कर उसस्के पीछे आते हुए, उस्का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा फिर भी वो किचन तक गयी नज़रों को तिरछी करके अमित को अपने पीछे आते हुए देखते….

जब केतली में पानी भरने लगी थी तभी उसस्के पीछे से अमित ने उस्सको बाहों में भरते हुए कहा,

“आशु मैं तुमको इतने दिनों से देखना चाहता था, तुमको बहोत सोचा पर तुम नज़र hi नहीं आरही थी तुमसे मिलना था यार!”

यह सब कहते वक़्त अमित के बाहों ने पीछे से अशिता को भर लिया था और उस्का पूरा जिस्म अशिता के पीठ पर दबा हुआ था और उस्का मुंह अशिता के गर्दन के पीछे वाले हिस्से पर जैसे उस्सको सूंघ रहा था….

और अशिता ने तप को बांध करते हुए थोड़ा झुक कर जैसे अमित के जिस्म से अलग होने की कोशिश में थी और अपने केहुनी से अमित की छाती को थोड़ा पुश करते हुए कहा,

“किआ कर रहे हो आप चोरडिये नाह, चोरडिये मुझे प्लीज…”

अशिता अछि स्वभाव की थी, उस्सको किसी को डांटना या ऊंची आवाज़ में बात करने की बिल्कुल आदत नहीं थी, और किसी को धित्कारणा यह भी उस्सकी आदत थी hi नहीं और फिर इस ख़ास मौके पर अशिता की जिस्म और दिल के बीच एक कस्मकश भी तो चल रही थी, उस्सकी जिस्म की मांग थी के सेक्स करना चाहिए, और उस्का दिल उस्का साथ नहीं दे रहा था, यह सब एक उलझन की तरह अशिता के मैं को अशांत किये हुए थे और ऊपर से अब अमित की जिस्म को उसस्के जिस्म से उस तरह से चिपकना, सब अशिता को असमंजश में दाल रहे थे….

कैसे भी करके अशिता अमित के बाहों से निकली और दो कदम दूर खड़े होकर सर निचे झुकाते हुए, नज़रों को निचे करके कहा,

“आप ऐसा मत कीजिये प्लीज मुझे नहीं ाचा लगता यह सब!”

अशिता ने इतने आराम और नार्मल तरीके से वो सब कहा के अमित ने सोचा के अगर उस्सको नहीं पसंद होता तो ग़ुस्सा करती, उस्सको थपड मारती, ऊंची आवाज़ में ुसस्पर चिल्लाती, मगर क्युके अशिता ने आराम से वो सब कहा तो अमित ने खुद से दिल में कहा,

“शांत है यह लड़की मतलब मन तो नहीं कर रही मगर थोड़ा बहोत ढोंग कर रही है जैसे उस्सको नहीं पसंद… मुझे शायद ज़बरदस्ती से लेना होगा इससे तब खामोश हो जाएगी, अगर इस्सकी ब्लाउज को उतारने में कामयाब हो गया, और इस्सकी स्कर्ट को ऊपर कर दिया, हाथ को जाँघों से होकर पंतय को छह लिया तो सक्सेस समझूंगा तब आगे बढूंगा….”

यह सोच कर अमित ने उस दो कदम के फासले को एन्ड करते हुए दोबारा अशिता को बाहों में लिया मगर इस बार पीछे से नहीं उसस्के सामने से थामा अशिता को क्यों के अशिता उसी को फेस कर रही थी उस से बात करते हुए… तो इस बार जब अमित ने उस्सको जकरा, तो अशिता ने अपने दोनों बाज़ुओं को अपने छाती पर करके उसस्के छाती से चिपकने से रोकने की कोशिश कर रही थी…

मगर अमित ने फिर भी अशिता को जाकर लिया अपने जिस्म से दबाते हुए और उस्का मुंह अशिता के कभी गाल को तो कभी मुंह को या गर्दन को चूमते हुए जा रहा था और अशिता उसस्के बाहों में स्ट्रगल कर रही थी निकलने के लिए….

अमित ने उस्सको वैसे जाकर हुए hi कभी जीब उसस्के गाल पर फेरर कर तो कभी उसस्के गर्दन को चाट कर कहता गया,

“हे बेबी देख नाह हम दोनों अकेले हैं एक ाचा मौका है, तू भी तो चाहती होगी करने को नाह? तेरा भाई तो अब यहाँ है नहीं तेरी भी तो ज़रुरत होगी नाह तो इस में किआ है थोड़ा एन्जॉय कर लेते हैं दोनों किसी को कुछ नहीं पता चलेगा, क्यों अपने आप को तकलीफ दे रही हो? अपने जिस्म को खुश करो स्वीटहार्ट, पता है तुमसे कब से प्यार करने लगा हूँ हैं? चल अब दोनों कुछ देर एन्जॉय करते हैं डार्लिंग….”

अशिता उस्सको पुश करने की कोशिश करते हुए कहा,

“नहीं मुझे कुछ नहीं करना है आप चोर्रो मुझे क्यों ऐसा कर रहे हो, मैं वैसी नहीं हूँ आप ग़लत समझ रहे हो मुझे चोरडिये नाह प्लीज!”

तब तक अमित का हाथ उस्सकी छाती पर चला गया था उस्सकी ब्लाउज की एक दो बटन खुल चुके थे और अमित अपना सर उस्सकी क्लीवेज पर दबाने लगा था, अशिता के नितम्बों पर दोनों हाथों से ज़ोर से उस्सको अपने जिस्म पर दबाते हुए…

अशिता उस से ज़्यादा ताक़तवर थी तो नहीं इस लिए उस्का अमित के बाहों से निकलना आसान नहीं था बिल्कुल, और अमित का एक हाथ तब तक अशिता के जाँघों पर चले गए थे वो हाथ ऊपर उस्सकी पंतय के तरफ बढ़ने लगा था और साथ साथ अमित का मुंह अशिता की क्लीवेज पर फेरर रहे थे, यह सब एक स्ट्रगल में होता जा रहा था और बहुत फ़ास्ट हो रहा था जिस के दौरान अशिता उसस्के बाहों में जैसे चटपटा रही थी मगर शोर नहीं कर रही थी….

अमित का बिल्कुल खड़ा हो गया था और अपने लुंड को पंत के अंदर से hi वो अशिता के जाँघों पर दबाते हुए रागढ भी रहा था, अशिता फील कर सकती थी सब कुछ मगर जैसे के अशिता की जिस्म की आग भी तेज़ हो गयी थी पहले hi; उस्सको उस दोराहे से निकलने में तकलीफ हो रही थी और अमित उस मौके का भरपूर फायदा उठाते चला जा रहा था….

जब अमित का हाथ अशिता की पंतय तक पहुंचा और उस्सने पंतय की इलास्टिक के अंदर अपने ऊँगली दाल कर पंतय को निचे करने की कोशिश किया तब अशिता निचे बैठ गयी जल्दी से ज़मीन पर अमित को पोजीशन नहीं देने के लिए के वो उस्सकी पंतय को निकाल पाए, अशिता हांफने लगी थी स्ट्रगल करते हुए, और अमित भी हांफ रहा था क्यूंकि उस्सको बहोत ज़्यादा ज़ोर लगाना पढ़ रहा था….

ज़मीन पर बैठने से अशिता को थोड़ा आराम फील हुआ क्यूंकि तब अमित को अपने हाथ को उस्सकी स्कर्ट के निचे से निकालना पड़ा तो अशिता ने जैसे रट हुए कहा,

“आप ज़बरदस्ती कर रहे हो, मैं राज़ी नहीं हूँ, इस्को रपे कहते हैं अगर आप ने मुझको ज़बरदस्ती लिया तो वो रपे होगा, किआ आप मेरे घर के अंदर आकर मेरा रपे करोगे, विहान की बेहेन का रपे करोगे आप?”

रपे वर्ड सुनकर झट से अमित ने अशिता को चोरर दिया… वैसे निचे बैठने से अशिता की स्कर्ट बिल्कुल ऊपर उठ गयी थी और उस्सकी गोरी उभरे हुए जांघें अमित के इन्हों के सामने था यहाँ तक की अशिता की सफ़ेद पंतय दिखने लगे थे, तो अमित ने एक हाथ को अशिता के जाँघों पर किया और दूसरे हाथ को अपने पंत के ऊपर लुंड पर रख कर सहलाते हुए अशिता से कहा,

“किआ यार, रपे कह रही हो? मैं प्यार कर रहा हूँ तुमसे, सच कहो के किआ तुमको इस्सकी ज़रुरत नहीं है इस वक़्त? इतने दिनों से अकेली हो और सब कर चुकी हो तो ज़रुरत तो होगी नाह? जिस्म की आग को कैसे बुझाती हो? मस्टुर्बते करती हो किआ हम्म बोलो नाह!”

अशिता ने अपने ब्लूज़ को बटन लगाते हुए नाह में सर हिलाया और अछि तरह से देख रही थी अमित के मोठे लुंड को पंत के अंदर जिस्सको अमित सहलाते हुए उस्सको दिखा रहा था, तब अशिता ने उस्का हाथ हटाया अपने जांघ से और स्कर्ट को ठीक किया और अमित ने तब कहा,

“देखो अगर तुम अंदर नहीं लेना चाहती तो इस्को मुंह में ात लीस्ट लेकर मुझको तो खुश कर सकती हो नाह प्लीज इतना तो कार्डो मेरे लिए, मत कहना के विहान को नहीं चुस्ती हो, तुम एक्सपेरिएंस्ड होगी मुझे पता है, वो ख़ुशी देदो मुझे, मैं चला जाऊंगा तब!”

अशिता उठ कढ़ी हुई एक तरफ देखते हुए क्यूंकि उस्सने देख लिया के अमित अपना ज़िप खोलने लगा था, तो अशिता वहां से एक कदम जम्प करते हुए कुछ दूर हुई hi थी के अमित उसस्के पास अपने लुंड को हाथ में थामे आगया और अशिता को अपने मोठे लुंड को dikhaya….Ashita ने देखा मगर तेज़ क़दमों से चलते हुए दरवाज़े तक गयी और घर के बाहर निकल गयी…..

अब अमित का खेल तो एन्ड हो गया किआ करता अब वो अकेले घर के अंदर? अशिता बाहर अपने आँगन के गेट के पास जा कर कड़ी हो गयी वहां तो अमित कुछ नहीं कर पायेगा क्यूंकि रास्ते पर चलते लोगों को सब दिखाई देगा!

मजबूरन अमित को भी बाहर निकलना पड़ा और वो समझ गया के कुछ नहीं हासिल होगा उस्सको अशिता से. बाहर आकर अमित ने कहा,

“चलो ठीक है मैं समझ गया के तुम नहीं चाहती हो यह सब मगर एक बात कहूं, अगर कभी भी ज़रुरत पड़े तो हिचकिचाना मत बस मेरे साफé में अजना मैं समझ जाऊंगा के तुमको किआ चाहिए और तब खूब मज़ा करेंगे ठीक है स्वीटहार्ट? हम्म बोलो नाह वो तो ठीक होगा नाह?!”

उस्सको वहां से भगाने के लिए एशिया ने कह दिया,

“हाँ अगर मैं आप के साफé में आयी तब समझ लेना के राज़ी हूँ!”

अमित ने जाते हुए कहा,

“3 साल अकेली बिताना है कितने दिनों तक वेट करोगी, तुम ज़रूर होगी मेरे पास और मैं इंतज़ार करूँगा बेबी. Bye!”

अमित चला गया तो अशिता वापस घर में गयी और दरवाज़े को अंदर से लॉक किया फिर अपने बीएड पर जाकर बैठ कर सोचते हुए खुद से कहा,

“इस्को मैं ने सपने में देखा था यह सब करते हुए मेरे साथ, और सपने में मैं राज़ी थी और खूब एन्जॉय कर रही थी, इस्को करने दे रही थी, और आज सच में यह आगया वही सब करने के लिए….. तो मैं ने पापा को भी मेरे साथ करते हुए देखा था सपने में तो किआ पापा भी ऐसा करना चाहेगा मेरे साथ?... आज पापा वापस आएगा तो उस्सको ऑब्सेर्वे करुँगी के किआ उस्का भी ऐसा मैं है, किआ वो भी मुझे गुरर्ता होगा नज़रें चुरा कर? किआ अगर उस्सने यह सब करना चाहा तो उसस्के साथ किआ राज़ी हो जाउंगी??!”

तो बे कॉन्टिनोएड….(3750 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस).
 
अपडेट 83 अशिता त्रिएस समथिंग...

अशिता अपने आप में बैठी यह सोच रही थी खुद से बात करते हुए…

“इस्को मैं ने सपने में देखा था यह सब करते हुए मेरे साथ, और सपने में मैं राज़ी थी और खूब एन्जॉय कर रही थी, इस्को करने दे रही थी, और आज सच में यह आगया वही सब करने के लिए….. तो मैं ने पापा को भी मेरे साथ करते हुए देखा था सपने में तो किआ पापा भी ऐसा करना चाहेगा मेरे साथ?... आज पापा वापस आएगा तो उस्सको ऑब्सेर्वे करुँगी के किआ उस्का भी ऐसा मैं है, किआ वो भी मुझे गुरर्ता होगा नज़रें चुरा कर? किआ अगर उस्सने यह सब करना चाहा तो उसस्के साथ किआ राज़ी हो जाउंगी??!”

अब आगे….

फिर अशिता ने खुद अपने पंतय के अंदर हाथ डाला और पाया के गीली हो चुकी थी और फिर सोचने लगी के अमित ने उसस्के जिस्म को छुआ, वो तो नहीं चाहती थी फिर भी गीली क्यों हो गयी और याद करने लगी के जिस वक़्त वो निचे बैठ चुकी थी और उस्सकी स्कर्ट बिल्कुल ऊपर थी और उस्सकी पंतय भी दिख रही थी तो किश तरह अमित उस्सकी जांघें और पंतय देख रहा था, और उस्सको अपने लुंड दिखा रहा था जो अशिता ने बिल्कुल अच्छी तरह से देखा भी था… यह सब सोच सोच गर अशिता और भी गीली होती जा रही थी और खुद से सवाल करने लगी,

“ऐसा क्यों हो रहा है मेरे साथ? किसी ग़ैर मर्द ने मुझको ऐसे छुआ, उस्सकी ऑर्गन को देखा मैं ने तो किआ उस्सने मुझे उत्तेजित कर दिया? किसी ग़ैर के छूने से भी मेरा जिस्म उत्तेजित कैसे हो सकता है? मेरी समझ में नहीं अत किआ मैं चाहती थी के अमित मेरे साथ सेक्स करे? किआ मैं उससे करने देती अगर वो कुछ देर और मेरे साथ ज़बरदस्ती करता तो? अगर मैं बाहर नहीं जाती तो किआ होता? किआ वो कामयाब हो जाता और मैं सरेंडर कर देती खुद को? किआ मेरे जिस्म को सेक्स की ज़रुरत है? उफ़ यह किआ हो रहा है मुझे?!!”

अशिता अब भी उसी कश्मकश में थी और सोचा के आज रात को कैसे भी करके उससे विहान से सेक्स चाट करना hi होगा ताके अपनी जिस्म की आग को ठंडी कर सके… और याद किया के एक बार विहान ने उससे कहा था के जिस्म की आग भड़के तो ठंडी पानी में नहाना चाहिए तब सब नार्मल हो जाता है, तो अशिता ने नहाने को डीडे किया, वैसे तो गरम पानी से नहाती है पर आज ठंडा पानी से नहाने को डीडे किया और अपनी यूनिफार्म उतारने लगी…

यूनिफार्म उतारते वक़्त अशिता अपनी खुद की जिस्म को देखने लगी, एक एक करके अपने कपडे उतारे उस्सने अपनी बॉडी को देखते हुए मगर यह दिमाग़ में सोचते हुए के अभी अमित उसस्के किश किश part को देखता….

जब अपनी ब्लाउज को खोला अशिता ने और, अपनी बूब्स को ब्रा में कैद देखा तो सोचा के अमित ने काफी कुछ देखा था जब उस्सकी दो बटन्स ब्लाउज की ओपन हो गए थी, उस्सकी ब्रा की कप और काँधे पर स्ट्रैप्स साफ़ नज़र आरहे थे, फिर अशिता ने आईने के सामने खड़े होकर अपनी ब्रा को उन्हुक करते हुए अपने आप को आईने में देखते हुए ब्रा को निकला आहिस्ते आहिस्ते खुद की बूब्स को देखते हुए और उस्सकी आग और भड़की और उस्सने फील किया के निचे पानी निकल रही है….

अशिता के साथ ऐसा पहले कभी भी नहीं हुआ था. आज पहली बार था के अशिता अपने खुद की जिस्म देख कर उत्तेजित हो रही थी, ऐसे फीलिंग्स कभी भी नहीं हुआ था उसस्के साथ. इस से पहले तो हमेशा विहान उस्सको छूटा था तब वो गीली होती थी, बहुत पहले से hi कम उम्र में रात को सोते वक़्त जब विहान उसस्के जिस्म को बाहों में भर के रगड़ता था तब वो गीली होती थी यह उस्सको पता है और रीज़न भी पता है के विहान के उन् छुवन के कारण वैसा होता था मगर अभी अशिता समझ नहीं पा रही थी इस वक़्त क्यों ऐसा हो रहा है के जैसे जब विहान उस्सको छूटा था तब होता था…..

आईने में वैसे hi देखते हुए अशिता ने अपनी स्कर्ट को निचे किया और अपने पथ के निचे देखा फिर पंतय के ऊपर नज़र गयी तो उस्सको बिल्कुल भीगा हुआ पाया… और उफ़ करके अशिता ने अपने हाथ को पंतय के ऊपर अपनी योनि से लगाया और खुद को थोड़ा सा करेस किया और अपने मुंह को अपनी खुद की काँधे पर करके अपनी काँधे को चूसा अशिता ने, और दिमाग़ में यह सोचा के कैसे कुछ देर पहले उस्सको अमित वहां चूस रहा था, तो अशिता की जिस्म कांप उठी….. उसस्के दोनों पेय्रर थरथरा उठे और उस्सकी उँगलियाँ उस्सकी पंतय को उस्सकी योनि के अंदर थुश डाले…. और आज पहली बार अशिता ने बिना विहान के, खुद से अकेली अपने को ऊँगली किया…. पंतय को निचे घुटने तक किया और अजीब बात यह थी के अमित को सोचते हुए अपनी ऊँगली को छूट पर पहले रगड़ा, गोआल गोआल घुमाया और फिर दो उँगलियों को गीली क्लीट के ऊपर मसला फिर छूट की चढ़ में ग़ुस्सा दिया और अंदर बाहर करने लगी आईने के सामने कड़ी एक हाट से अपने बूब्स को मसलते हुए खुद को आईने में देखते हुए और दिमाग़ में अमित को सोचते हुए….. 3 मिनट्स भी नहीं लगे और उस्का पानी छूट से बहते हुए जाँघों के बीच बहते हुए देखा अशिता ने और सिसकारियां छोड़ते हुए बैठ गयी ज़मीन पर हांफते …..

अशिता ने फील किया के अभी अभी अमित ने उस्सको छोड़ा! यह पहली बार थी के अशिता विहान के इलावा किसी और को दिमाग़ में बॉसके ओर्गास्म हासिल किये थे, और खुद को कुछ देर बाद आईने में देख कर मुस्कुरा दिए अशिता ने उसस्के बाद नहाने गयी….

नहाने के बाद अशिता ने घर में हमेशा की तरह बिना ब्रा के ड्रेस पहना, ड्रेस तो नहीं बल्कि एक टीशर्ट पहना उस्सने जो उस्सकी जाँघों तक रीच होता था, उस टीशर्ट में बिना ब्रा के उसस्के बूब्स के दोनों निप्पल्स टीशर्ट के ऊपर दो अंगूर के दानों की तरह साफ़ दिख रहे थे और 5 बजे अनिरुद और सुमन घर आये जब अशिता किचन में कुछ पका रही थी.

जैसे के अशिता ने सोचा था के अपने पापा को आज ऑब्सेर्वे करेगी के किआ उसस्के मैं में भी अमित की तरह उसस्के लिए वैसा सेक्स वाला चाहत है किआ, तो इस लिए जान बूझकर आज उस्सने उस टीशर्ट को पहना हुआ था और सोचा के आज वो खुद सेक्सी दिखे और देखे के अनिरुद की नज़रें कहाँ तक उस्सको देखता है… अशिता उस टीशर्ट में बिना ब्रा के ऐसी दिख रही थी, जांघें इतना दिख रहे थे ….

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देखा उस अंगूर की दाने को? और जांघें?

आज अशिता केहर ढाने वाली थी अपने पापा पर….

मामला उल्टा होने वाला था, कहाँ अशिता अपने पापा को ऑब्सेर्वे करने वाली थी हालात कुछ ऐसे हुए के अशिता अपने पापा को सडके कर बैठी, कैसे? चलो देखते हैं….

अनिरुद की आदत थी जैसे वो घर आये तो अशिता को सीने से लगा कर उसस्के गाल चूमता था और अशिता उसस्के काँधे पर हाथ रख कर वापस अपने पापा को किश करती थी उसस्के गाल पर, एक दूसरे को कुछ पल के लिए सीने से लगाते थे दोनों यह रूटीन था हर रोज़ की, जब विहान साथ था तब भी ऐसा होता था नार्मल तरीके से, और सुमन भी जानती थी के दोनों हर रोज़ वैसे मिलते हैं.

तो जब माँ बाप घर आये और अशिता किचन में थी तो बाप किचन के तरफ बढ़ा अशिता से मिलने के लिए और सुमन ने “hello बीटा” कहकर अपनी रूम में चली गयी. सुमन को आदत थी आते hi बीएड पर लेट कर कोई 20 मीन्स तक रेस्ट करने की तब किचन में जाती थी.

और अनिरुद जब अशिता से मिला तो उस्सको सीने से लगाते हुए उसस्के गाल को चूमा, और वापस अशिता ने अनिरुद को चूमते हुए अपने पापा के नज़रों को फॉलो किया तो देखा के अनिरुद की नज़रें निचे अशिता के टांगों पर थे.

जो टीशर्ट अशिता ने आज पहना था उस पर वो हमेशा एक लेग्गिंग पहनती थी, क्यूंकि यह वाला टीशर्ट बाकी के टीशर्ट से ज़्यादा छोटा था, बाकी के टीशर्ट उसस्के घुटनों के थोड़ा ऊपर होते थे जिस में जांघें तो दीखते थे मगर उतना नहीं जितना इस टीशर्ट में नज़र आरहे हैं…

अशिता घर में ब्रा नहीं पहनती थी यह अनिरुद को पता था बहोत पहले से hi.

आज अशिता ग़ज़ब धा रही थी अपने पापा पर. खुद सोचा था पापा को ऑब्सेर्वे करेगी मगर अब अशिता ने यह सोच लिया के क्यूंकि वो उस टीशर्ट में है तो क्यों नाह जान बुझ कर कुछ ऐसे हालात पैदा करें जिस में उसस्के पापा के ज़्यादा करीब हॉवे और तब देखे पापा कैसे बेहवे करता है और उस्सकी नज़रें कहाँ कहाँ अशिता के जिस्म पर जाता है….. यह सब सिर्फ उस सपने की वजह से और अमित की आज की हरकतों की वजह से अशिता कर रही थी…

अशिता को पता था के उस्सकी माँ 20 मिनट्स के बाद कमरे से निकलेगी, इस लिए इन् 20 मिनटों में अशिता ने सोच लिया के किआ करना है उस्सको.

अव्वल तो जिस वक़्त सीने से लगी थी अपने पापा के, हर बार कुछ पल के लिए hi गले मिलते हैं मगर आज अशिता ने जब देखा के उस्सकी पापा की नज़रें उसस्के जाँघों पर था गले मिलते वक़्त तो अशिता उसस्के सीने से लगे रहे उसस्के काँधे पर हाथ लपेट कर… समझ लें के 20 सेकण्ड्स के लिए गले मिलते हैं हर रोज़ फिर अलग होते हैं मगर आज 2 मिनट्स तक अशिता की बाहें अनिरुद के कांधो पर hi रहे, और उस्सकी बूब्स के निपल्स कुचले हुए थे अनिरुद के सीने पर, अनिरुद ने एक हाथ से अपने बैग को एक कुर्सी पर रखते हुए अशिता के पीठ को थपथपाया और पूछा,

“अब चोरर भी किआ हुआ? आज बहोत प्यार ारः है किआ तुझे?!”

अशिता ने बचकानी आवाज़ में कहा,

“हम्म्म आज नहीं छोड़ूंगी आप को ऐसे hi मेरे गले लगे रहो आप!”

अनिरुद ने आराम से कहा,

“क्यों आज कोई नया दिन है किआ तेरी लाइफ की? तेरी बर्थडे तो नहीं नाह आज?”

तब अशिता ने जान बुझ कर अपने एक तंग को अपने पापा के जांघ से लगाया और हलके से अपने जांघ को उसस्के लुंड के तरफ किया यह देखने के लिए के किआ उसस्के पापा का लुंड खड़ा हुआ है के नहीं….

जब अनिरुद के फील किया के अशिता की नंगी जांघ उसस्के जांघ पर थोड़ा रागढ खा रही है तो वो तुरंत अलग हुआ अशिता से उसस्के हाथों को अपने काँधे से हटाते हुए, तो अशिता ने वो नहीं फील किया जो करना चाहती थी, क्यूंकि अनिरुद मूढ़ गया यह कहते हुए,

“तू अब भी एक छोटी सी बची की तरह क्यों बेहवे कर रही है आशु, मुझे एक कप चाय पीला नाह!”

तब तक अनिरुद कुर्सी को खिंच रहा था बैठने के लिए. और उस्सने अशिता से पीठ कर लिया था तो अशिता देख भी नहीं पायी के उसस्के पापा का खड़ा हुआ था के नहीं….

अब अशिता का पीठ अनिरुद से हुआ जब वो कप में चाय दाल रही थी तो अनिरुद अशिता के पीठ को देख रहा था और उस्सकी गांड को कुछ हिस्सा नज़र ारः था उससे क्यूंकि टीशर्ट बहोत छोटी थी, तब तक अशिता ने कप को टेबल पर रखा अनिरुद के सामने तो अनिरुद ने कहा,

“आज तुमने इस टीशर्ट पर लेग्गिंग या शार्ट क्यों नहीं पहना है आशु?”

अशिता के समझ में नहीं आया के अब किआ जवाब दे, फिर भी अपने टीशर्ट को थोड़ा निचे के तरफ खींचते हुए मुस्कुराकर कुछ चुलबुली ऐडा में कहा,

“क्यों? ाचा नहीं दिख रही हूँ किआ मैं पापा?!”

अनिरुद ने चाय का एक सिप लेते हुए कहा,

“तू अब एक छोटी बची तो नहीं रही नाह? चलो घर के अंदर हो तो कोई बात नहीं, मगर अब तुम एक औरत बन गयी हो बीटा ऐसे कपडे मेरे सामने तो मत पहना करो, विहान होता तो और बात होती, अभी ज़रूर तुम्हारे मम्मी तुमको कुछ सुनाएगी क्यूंकि तुम्हारी टांगें कुछ ज़्यादा hi दिख रहे हैं इस में!”

यह सुनकर अशिता समझने की कोशिश में थी के किआ उसस्के पापा को वो एक्साइट कर रही है इस लिए वैसा कह रहा है या एक बाप होने के नाते नसीहत दे रहा है, और अशिता ने एक चंचल ऐडा में चल कर अपने पापा के पास गयी और उसस्के पास वाले कुर्सी को खिंच कर उसस्के पास बैठी और उसस्के काँधे पर हाथ रख कर उसस्के पंत के ऊपर देखने की कोशिश किया के उस्सको अनिरुद के पंत के अंदर कुछ तना हुआ दिखे या नहीं….

आशिता ने एक छोटी बची की तरह hi बेहवे करते हुए अपने पापा के काँधे पर हाथ रख के अपनी थोड़ी को उसस्के काँधे पर किया और कहा,

“मैं कोई औरत वैराट नहीं मैं बुसस आप की छोटी सी वही बेटी हूँ हम्म्म!”

उस दौरान अशिता की नज़रें वो धुंध रही थी के उस्सको पता चले किआ अनिरुद उस से उत्तेजित होता है? किआ अनिरुद भी अमित की तरह अशिता को उस सेक्स की नज़र से देखता है, किआ अनिरुद भी कभी अशिता को घर में अकेली पाकर उसस्के और करीब होने की कोशिश करेगा?

मगर उस वक़्त अशिता को कुछ नज़र नहीं आया क्यूंकि अनिरुद का लोअर part बिल्कुल टेबल के निचे था, वो देखने के लिए अशिता को टेबल के निचे जाना पड़ता मगर वो तो नहीं कर सकती थी, तो अशिता उसी नटखट बचकानी आवाज़ में पूछा,

“पापा किआ मैं आप को सेक्सी लगती हूँ हम्म्म सच बताना प्लीज…..”

अशिता को नहीं पट्ठा के वो आग से खेल रही है…. अनिरुद ने किआ जवाब दिया और उसस्के बाद किआ हुआ बाद में पता करेंगे फिलहाल विहान के पास चलते हैं….

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उधर विहान ने अपने दादा से सवाल किया

“दादा जी प्लीज आज मुझे उस पहाड़ वाले इलाका और उस घर के बारे में मुझे कुछ बताइये नाह प्लीज”

दादा जी ने कहा,

“उस मनहूस जगह और घर के बारे में मत पूछना फिर कभी बीटा; मुझे उस जगह से नफरत है और एक बहोत लम्बी और पुराणी कहानी है, बुसस समझलो के दुःख भरे दिन थे उन् दिनों, तब से शुरू हुई थी वहां की कहानी और इस लिए सब गाओं के लोग उस जगह से नफरत करते हैं. फिर कभी आराम से समझाऊंगा, अभी मुझे उसस्के बारे में बात करने का बिल्कुल मैं नहीं है.”

विहान: “दादा जी सब लोग नफरत करते हैं यब दररते है उस जगह से?”

दादा जी: “अस्सल में नफरत है मगर पुराने लोगों ने आज के बच्चों के मैं में उस नफरत को डर बता के बनाया है बात को….. बुसस तुमको बाद में बताऊंगा.”

विहान बहोत मायूस होकर वहां से निकला और उस चौराहे पर जाकर सूरज ढलने का मंज़र देखने लगा…. तभी एक चमचमाती मेरसेदेज़ कार उसस्के पास आकर रुका और यूनिफार्म में ड्राइवर कार से निकला और विहान से पूछा,

“फूलवती का घर इन् सड़कों में से कौन सा रोड में है बता सकते हो किआ?”

विहान ने दिखाया के कौन सा फूल का घर है, तो ड्राइवर फूल के घर के सामने रुका और एक बड़ी सी ग्रे एनवलप लेकर फूल के आगाँ में गया. जिस जगह विहान खड़ा था वहां से बुसस इतना hi दिख रहा था उससे. ड्राइवर को एनवलप लेकर अंदर जाते हुए देखा बुसस इतना hi…. और कुछ देर बाद कार वापस चला गया. विहान सोचने लगा के अब फूल की कौन सी कांटेक्ट हैं के एक मेरसेदेज़ में उस्का कूरियर आया था…..

इग्नोर करते हुए विहान वापस घर जाने लगा, पीपल के पेड़ के पास पहुंचा था के पीछे से फूल की आवाज़ आयी, मुड़कर विहान ने फूल को अपने तरफ आते हुए देखा हाथ में कुछ लिए हुए…..

पास आकर फूल ने कहा,

“यह रहा तुम्हारी रूचि, लो सम्भालो अब!”

विहान ने कांपते हुए हाथ में एक दूसरा ग्रे एनवलप को लिया जो फूल ने उससे थमाया…. और फूल ने कहा.

“रूचि ने भेजा है तुम्हारे लिए देखो तुम्हारा नाम लिखा है, एक बड़ा एनवलप था, उस में एक चिठ्ठी थी मेरे नाम की यह रही, इस में रूचि ने लिखा है के तुम्हारे लिए कुछ भेज रही है और मैं तुम तक इससे पहुंचा दूँ!”

विहान ने तुरंत उस एनवलप को खोला तो एक असाइनमेंट जैसा कुछ निकला, जिस में तक़रीबन 100 पेजेज प्रिंट किये हुए थे, वो सब रूचि ने टाइप करके प्रिंट किया हुआ था और विहान को सेंड किया उस ड्राइवर के ज़रिए. अब विहान पचता रहा था के क्यों उस ड्राइवर से बात नहीं किया, क्यों उस मेरसेदेज़ की नंबर को नहीं नोट किया, उस से रूचि का पता तो चल जाता के वो किधर है…..

फूल ने कहा,

“अँधेरा हो रहा है मैं घर वापस जाती हूँ तुम जाओ आराम से पढ़ो रूचि ने किआ लिखा है कल मुझे बताना okay?”

और वो चली गयी.

विहान अपने कमरे में जाकर, पहला पेज से पढ़ना शुरू किया,

लिखा था,

“Hello विहान जी. सॉरी ऐसे अचानक आप की लाइफ से ग़ायब होने के लिए. मुझे पहले से hi पता था के मुझे ग़ायब होना है इसी लिए आप को पहले hi आगाह कर दिया था……

विहान जी मैं अपने बाप की रखेल हूँ…..

मैं एक डाकू की बेटी हूँ

मेरे दादा पर दादा डाकू थे,

मेरे स्टेप बरोथेर का बाप भी डाकू था

मगर आज का डाकू मॉडर्न डाकू बन गया है

माफिया का डॉन है मेरे पिता और मैं उस्सकी अमानत हूँ…..

सॅटॅलाइट से सब कुछ देख रहा था मेरा बाप.

मैं जो भी करती, जहाँ भी जाती सब देखता था वो

मुझे आप से प्यार हुआ इस लिए आप के साथ प्यार के कुछ पल बीतने चाहती थी तो पिता से गुज़ारिश किये मैं ने और वो मान गए और आप से प्यार करने की इजाज़त दे दिए मगर कह गए के सिर्फ कुछ दिन हैं मेरे पास आप से प्यार करने के लिए… हमारे पहाड़ वाले घर में सेंसर्स लगे हुए हैं, हिडन कामर्स हैं जिस से वो सब कुछ देखता था हमारा सेक्सुअल एनकाउंटर भी…. उस्सको देखने में मज़ा अत था इस लिए वो राज़ी था के मैं वो सब करूँ और आप को करने दूँ…. ठरकी है वो…..”

नेक्स्ट अपडेट में और डिटेल्स रूचि के बारे में…

तो बे कॉन्टिनोएड…. (3500 वर्ड्स)
 
अपडेट 84 व्हाट रूचि हद रिटेन

विहान पेजेज पलट पलट कर कुछ ढूंढ़ने की कोशिश कर रहा था, किआ ढूंढ रहा था उससे खुद पता नहीं था. शायद सोच रहा था रूचि ने कोई एड्रेस या फ़ोन नंबर लिखा होगा कहीं, मगर वैसा कुछ नहीं दिखा, मगर, पेजेज ऐसे लिखे थे जैसे एक बुक. Chapter थे, पेजेज नुम्बेरेद थे. Part 1, part 2 थे. जैसे हम यहाँ उपदटेस लिखते हैं कुछ इस तरह से लिखा हुआ था और हर 5/6 पेजेज के बाद एक टाइटल होता था नेक्स्ट chapter के liye….To विहान ने एक chapter देखा जो बीच में था और टाइटल था “ी सॉ विहान फॉर थे फर्स्ट टाइम”

तो विहान ने उस chapter को पढ़ना शुरू किया, और लिखा कुछ यूँ था….

“संडे था उस दिन. मैं मंदिर गयी थी और एक नया चेहरा दिखा मुझे मंदिर के पास, और वो लड़का तुम थे विहान. बाद में पता चला वो लड़की तेरी बेहेन थी, मगर उस वक़्त मैं समझी थी तेरी गर्लफ्रेंड होगी तो दिल में एक तीस सी हुई थी. मुझे उसी पल को लगा के तुमको मेरे लिए और सिर्फ मेरे लिए होना चाहिए था….”

विहान ने इतना पढ़ा फिर वापस पेज 1 पर गया और सोच लिया के शुरू से, आर्डर में पढ़ेगा तब सब कुछ समझ में आएगा.

और पढ़ना शुरू किया के आखिर रूचि ने कहा किआ है उससे. – लिखा था;

“विहान सब कुछ 100 साल पहले शुरू हुआ था मेरे पर दादा जब पहला डाकू बना था. उसी टाइप का डाकू जो फिल्मों में देखते हैं घोड़े पर सवाल, बन्दूक से लैस, और एक गिरोह का होना, मतलब कुछ सातियाँ. फिर यह खानदानी पेशा हो गया, पर दादा के बाद उसस्के बेटे, उन् में मेरा अपना दादा, उसस्के बाद मेरा, उस दादा का बीटा और उन् में था मेरा baap….mere बाप से पहले उसस्के भाई और मेरे स्टेप बरोथेर का बाप जो मेरे बाप का कजिन था वो भी साथ डाकू hi था शामे ग्रुप में.

अब जीन दिनों मेरा दादा डाकू था उन् दिनों वो लोग सभी गाओं में जाते और सामान तो लूटते hi थे शादी बियाह में और ट्रैन लूटते थे, तब अंग्रेज़ों का ट्रैन हुआ करता था, सोना भी लुटते थे. पैसा भी, खाने का सामान भी. मेरे दादा के ज़माने में डाकू के ग्रुप में 100 से ऊपर मेंबर्स हो गए थे, मतलब 100 डाकू थे तब.

तब उन् में खुद प्रोब्लेम्स हुए सरदार बनने के लिए और वह 4 ग्रुप में डिवाइड हो गए म्यूच्यूअल अरेंजमेंट करके अपने आप में. 1000 किलोमीटर्स के इलाके को शेयर किया गया उन् 4 ग्रुप्स को और हर ग्रुप का सरदार हमारे खानदान का hi एक मेंबर था.

फिर हुआ यह के औरतों की ज़रुरत पढ़ने लगे हर ग्रुप में खाना पकाने के लिए, कपडे धोने के लिए स्टार्ट में. बाद में हर किसी को एक जोरू चाहिए होते थे तो सभी डाकू लड़कियां उठाने लगे आस पास के गाओं से.

पुलिस उस ज़माने में ज़्यादा इंटरफेरे नहीं करते थे डाकुओं के बीच. डाकू दहशत फैलाते थे गाओं वालों के बीच और अगर एक लड़की को गाओं से उठा लिया गया तो उस्सको कभी भी ज़िन्दगी भर वापस नहीं किया जाता था, उस लड़की की शादी होती थी उसी डाकू से जिस ने उस्सको उठाया और बचे पैदा होते थे डाकू की संख्या बढ़ाने के लिए.

और अबाउट 45 ईयर एगो उस जगह जहाँ मेरा घर है पहाड़ पर वो जगह बुसस एक जंगल हुआ करता था जिस गाओं में अभी रहते हो और आस पास के सभी गाओं के निशान भी नहीं थे सब सिर्फ घने जंगल थे.

तो मेरे स्टेप बरोथेर का बाप जो मेरे पापा का कजिन था चचेरा भाई, उस्सने अपना अड्डा बनाया उस पहाड़ पर. और बहोत साल बाद एक लड़की को उठाया था उस्सने कहीं 500कंस अवे की गाओं से उस्सको अपनी पत्नी बनाया, याने के मेरी माँ को, उस से मेरा स्टेप बरोथेर पैदा हुआ….

तब तक इस गाओं में और आस पास के गाओं में लोग आकर बस्सने लगे थे, उन् में था तुम्हारा दादा का बाप, और तब तुम्हारा दादा यंग बीटा था…. और उस्सने एक दिन गोली चलाई थी मेरे दादा के काँधे पर… बहुत हंगामा हुआ था सभी डाकू की टोली चले गए थे तुम्हारे पर दादा के घर और बहोत गोलियों की बरसात हुई थी, मगर तुम्हारा पर दादा के भी आदमी थे और सब के पास बंदूकें थे तो वो सब मतोड़ जवाब दे रहे थे डाकुओं को गोलियों से यह मैं तुम्हें इस लिए बता रहा हूँ के यह सब तुम्हारे दादा को पता है वो जवान था तब. अब पूछोगे के मुझे यह सब कैसे पता. ये सब मेरे दादा जी मुझे सुनाया करते थे जब मैं छोटी थी. सब मेरे दिमाग़ में कैद हैं अब भी. आज सबको कागज़ पर लिख रही हूँ.

फिर मेरे पापा ने अपने कजिन की वाइफ से नाजाइज़ रिश्ता बनाया और मैं पैदा हुई. याने के मेरे स्टेप बरोथेर की माँ से उस्का अफेयर था. मेरा पापा सबसे डेंजरस था डाकुओं में सब उस से डरते थे. बाकी के सभी दूसरे ग्रुप के सरदार भी डरते हे मेरे पापा से. उसस्के ज़माने में घोड़ों का इस्तेमाल करना रोक दिए थे डाकू लोगों ने, शहर में शिफ्ट हो गए थे गैंगस्टर बन गए थे मगर यहाँ की और बाकी के गाओं के अड्डों को रखा गया था. तभी मेरा दादा शहर नहीं गया और पहाड़ों में हमारे साथ तेह गया था, और मुझे कहानी की तरह सब सुनाता था.... वह लोग रेस्ट करने को आते थे इधर. या कभी पुलिस का लफड़ा होता तो गाओं के, या पहाड़ी वाले अड्डों में छुपने आते थे मामला के ठंडा होने तक…

मेरे पापा ने अपने कजिन को गोली मार कर मार डाला था मेरी मम्मी के साथ शादी करने के लिए. मेरी मम्मी बेहद खूबसूरत थी. मेरे स्टेप बरोथेर के पापा के पीठ के पीछे तो उस्का अफेयर था hi मेरी मम्मी के साथ मगर वो मेरी मम्मी की, मतलब मेरे स्टेप बरोथेर की मम्मी को या अपने कजिन की वाइफ को हमेशा के लिए पाना चाहता था इस लिए अपनी कजिन का खून कर दिया और तब मेरी मम्मी से शादी किया उस्सने, और मेरी मम्मी उस्सकी हो गयी हमेशा के लिए.

जब पापा ने अपने कजिन को मारा जो उसका सरदार था तो सभी डाकुओं के ग्रुप्स को खतरा लगने लगा मेरे पापा से, वो इतना खतरनाक था के किसी को भी गोली मार देता tha….baaki के ग्रुप्स के सरदार सब उस से बहोत दररते थे…..

एक बार तो पापा ने एक मला को गोली मार के कतल किया था यह बात पुरे देश में मशहूर हुआ था. जिस दिन तुमने मेरा सुर्नामे पूछा था और मैं ने बताया था तो मैं ने सोचा था के तुमको पता होगा वो मला वाला काण्ड और मुझसे पूछोगे के किआ मैं उस दासगुप्ता को जानता हूँ जिस ने मला का खून किया था….”

ये पढ़ने के बा यहां ने सर खुजाते हुए खुद से कहा,

“यह पकड़ा सलत तभी तो मैं सोच रहा था के यह सुर्नामे कहीं सुना है, मीडिया वालों ने कितना उछाला था इस मर्डर केस को और दासगुप्ता नाम कितना मशहूर हुआ था उन् दिनों….”

और विहान ने पढ़ना जारी रखा…

“मैं, मेरी मम्मी और स्टेप बरोथेर जिस्सको मैं अपना रियल भाई समझता था बचपन से वहीँ रहे उस पहाड़ी वाले घर में जिस्सको आहिस्ते आहिस्ते पापा ने मॉडर्न और टेक्नोलॉजी एनहान्स करवाया सबसे बेस्ट टेक्निशंस से. पापा एक अंगूठा चाप है, हे इस कम्प्लीटली इल्लितेराते. और उसस्के पैसे अरबों में गिने जाते हैं दुन्या भर के कई देशों के बैंकों में उस के पैसे जमा हैं, स्वित्थेरलैंड, फ्रांस, उसे, इटली, ऑस्ट्रेलिया, मेक्सिको, ग्वाटेमाला, सोमालिया….. किश देश में उस्का बैंक अकाउंट नहीं है….

और वो सालों में एक या दो बार हमसे मिलने आते थे यहाँ उस पहाड़ वाले घर पर, ज़्यादा टर्र विदेश में रहता था. फिर मम्मी की डेथ के बाद जब मैं कोई 11 साल की थी तो वो आया और मुझे उठा ले गया जैसे डाकू लड़कियां उठाते हैं. हाँ और आज भी वह लोग लड़कियां उठाते हैं, गाओं से भी और शहर से भी, मगर मेरे पापा को मैं भा गयी थी, उस्सको मुझसे hi इश्क हो गया तो मुझे उठा लगाया उसे जब मैं 11 साल की थी तब. मुझको वहां पढ़ने को भेजा. क्यों मुझको पढ़ना चाहता था, इस लिए के कोई नहीं था उसस्के बैंक बैलेंस की कण्ट्रोल करने वाला कुछ उसस्के साथी उसस्के पैसे लुटते थे उस्सको ठग कर क्यूंकि उस्सको पढ़ना नहीं अत था. इस लिए मुझे पढ़ा रहा था के बाद में मैं उसस्के सभी फाइनेंसियल ट्रांसक्शन्स को संभल सकूँ…. और इस लिए फ्रेंच भी पढ़ी मैं क्यूंकि देश विदेश जाना पड़ता था उसस्के साथ, फ्रांस में भी….

और कुछ साल बाद उस्सने मुझसे शारीरिक सम्बन्ध बनाया…. मैं कुछ नहीं कर पायी…. उसी के साथ अकेली रहती थी, और मुझसे बहोत प्यार करता था. बाकी लोगों के साथ बहोत बुरा था मगर मेरे साथ सबसे ाचा था, हमेशा मुझसे नरमी से पेश अत था…. मैं उस्सको मन भी नहीं कर पाती क्यूंकि मुझे पता था वो कितना डेंजरस है और कुछ भी कर सकता है… तो मैं सेक्सुअली उस्सकी हो गयी …. हम हस्बैंड वाइफ जैसे रहते थे उसे में… हर रात सेक्स, जहाँ भी हम जाते, दूसरे देशों में भी जाते थे तो सेक्स, सेक्स सेक्स…. मुझे चोररटा hi नहीं था…. मुझको एक मॉडल की तरह ड्रेस करता और चलने को कहता और मेरी पिक्स लेता, मुझे रिकॉर्ड करता… बीएड पर मुझसे सेक्स करते वक़्त रिकॉर्ड करता. जब मैं स्कूल में होती तो वो हमारे खुद की वीडियोस को देखता और जब मैं वापस आती तो मुझे दिखता के किश तरह हम दोनों ने सेक्स किये थे. वो एक आदत बन गयी थी….

फिर अपना देश गए…. और लास्ट ईयर से मैं उस गाओं में थी और उस कॉलेज को ज्वाइन किया था, और तुम मिले mujhe…tumko पहली नज़र में देख कर hi प्यार हो गया था मुझे…. क्यूंकि मैं एक अधेड़ आदमी के साथ सोती थी तो मुझे पता नहीं था एक जवान हैंडसम आदमी के साथ सोकर कैसा महसूस होगा, मैं वो जानना चाहती थी…. और जीन दिनों हम दोनों करीब आये तो मैं तुम्हारे साथ सोना चाहती थी….. वो सब देखता था हमारा मिलना बस में बैठना, बातें करना… मेरे मोबाइल में भी एक अलग सेंसर था लोकेशन ट्रेस करने के इलावा, उस से उस्सको सब पता चलता था… हमारे पहाड़ वाले घर में एक अंडरग्राउंड है जहाँ एक स्पेशल सर्वर टाइप सॅटॅलाइट की एनहांस्ड, एडवांस्ड कनेक्शन वाला मशीन है जो मेरा स्टेप बरोथेर कण्ट्रोल करता है चाहे मैं वहां हूँ या नहीं 5000 कंस की रेडियस तक सब कुछ देख सकता है उस मशीन से, और जो कुछ भाई देकता है वही इमेजेज एक्साक्ट्ली पापा दुन्या के किसी भी कार्नर से देख सकता है…. ऐसा कनेक्शन सिर्फ हमारे देश में नहीं बल्कि जिस जिस देश में भी पापा के बिज़नेस हैं वहां भी शामे टाइप के कनेक्शंस और मचिनेस हैं…. वो अपने बिज़नेस के लिए उसे करता है मगर ात थे शामे टाइम मुझ पर भी नज़र रख पाटा था….

जीन रातों को हम चाट करते या बात करते थे उस्सको सब पता होता था…. और एक दिन उस्सने मुझसे पूछा के किआ मैं तुमको लव करती हूँ तो मैं ने सच बता दिया…. मैं ने उस से साफ़ कहा होनेस्त्ली के मैं उसस्के साथ सोती हूँ तो लाइफ में कभी यह महसूस नहीं कर पाऊँगी के प्यार करना किआ होता है और एक यंग हैंडसम लड़के के साथ सेक्स करना कैसा होता है… और मैं ने सोचा के लाइफ में ात लीस्ट कुछ दिनों के लिए hi सही वैसे प्यार और सेक्स को एक्सपीरियंस तो कर सकूँ ात लीस्ट एक बार लाइफ में क्यों के बाकी के लाइफ तो उसी के साथ गुज़ारना था…

तो उस्सने कहा okay वो सब समझ गया मगर एक टारगेट रखा उस्सने क्यूंकि उस्सको डर था के कहीं मैं इतनी भी प्यार में दीवानी नाह हो जॉन के अब उसस्के पास वापस जाने से इंकार करूँ, और फिर वो एक दिन तुमको भी आकर गोली मार दे…. इस लिए उस्सने मुझे दो हफ्ते दिए, और कह दिया के ठीक दो हाफों के बाद मुझको लेने आएगा और फिर कभी भी वापस इस देश में नहीं आएंगे…. और ये डिसिशन उसी रात को लिया गया था जिस रात को तुम मुझसे मिलने पहली बार आये थे पहाड़ वाले घर पर…. उस्सको सब पता था…. तुम्हारे हर कदम का चलना देख रहा था, इसी लिए मैं तुमसे कह रही थी के बहोत सावधान रहना चलते वक़्त चारों तरफ अछि तरह से देखना, क्यूंकि मेरे पापा का भरोसा नहीं, वो तुमको मेरे पास रीच होने से पहले भी मार सकता था…. मुझे वही डर tha….Mere कमरे के उस खिड़की में स्पेशल सेंसर्स हैं जिस से और भी ज़्यादा क्लियर सब कुछ देखता है. कोई भी अगर मुझसे मिलने की कोशिश करता तो तुरंत उस्सको पता चल जाता… और उसी ने मुझे तुमको खिड़की से आने जाने को केहेलवाया था. हमारे घर और आँगन में चरों तरफ हिडन कक्तव कैमरा और सेंसर्स हैं. कोई चिडया भी आता तो सब दीखता है उस्सको…..

मगर जब तुम यहाँ सेफ रीच हो गए उस रात को तो मुझे पता चला के वो ठरकी बाप सच में मुझको तुम्हारे साथ सेक्स करना देखना चाहता था और रिकॉर्ड कर रहा होगा जो मुझको बाद में मिलने पर dikhayega….(tum बिल्कुल फ़िक्र मत करना कोई मंस दुन्या के किसी भी इंटरनेट साइट पर अपलोड नहीं होंगे, यह उस्सकी पर्सनल कलेक्शंस हैं, और उसस्के मरने के बाद मैं सब डिस्ट्रॉय कर दूंगी यह उसी ने कहा है मुझे.)

मैं जो कुछ भी तुमको लिख रही हूँ सब उस्सको पता है. उसी के ड्राइवर से सेंड करुँगी ये सब कुछ. कुछ देर पहले अब तक जो कुछ लिख चुकी हूँ उस्सने मुझे पढ़ कर उससे सुनाने को कहा. मैं ने किया. वो बहोत खुश हुआ सुनकर, उसस्के ेंखों में एक अलग किसम की चमक थी सब सुनते हुए जैसे के उस्सने तुमको हरा दिया, तुमसे मुझको वापस चीन लिया या तुमको मुझसे शेयर किया कुछ दिनों के liye…yeh जैसे उसस्के लिए एक किसम का गेम था जो कुछ मैं और तुम कर रहे थे…

जिस दिन कॉलेज में हम दोनों ने किश किया था वो भी उस्सने देखा था और जो तुम ने फूल के सात सेक्स किया वो भी रिकार्डेड है, अब पूछोगे वो कैसे रिकॉर्ड किया उस्सने तो आसान है उसस्के सॅटॅलाइट सिस्टम में वो होता है नाह किआ कहते हैं उससे, सीसीडी सेंसर्स infra-red रिकॉर्डिंग जिस से रात के अँधेरे में शूट करते हैं नाईट विज़न जैसा, और थर्मल वीसों सेंसर्स भी उसे करते हैं कामर्स में सब कुछ दीखता है, एक ऐसा देवीसे भी हैं जिस से दीवार के पीछे की इमेज भी अत है उनको और उस से भी पावरफुल कैमरा है जो एक बिल्डिंग के अंदर देख सकते हैं उस से…. उस्सने तुम और फूल को उस कैमरा से देखा, और फूल का घर तो तीन के हैं आसानी से सब दिख गया उससे…..

चाह किया तुमने फूल को भी वो ख़ुशी देकर, बेचारी के नसीब में कहाँ होती वैसा प्यार जो तुम से मिलता है…. मुझे ख़ुशी हुई तुम दोनों के बारे में जान कर….

विहान का पसीना चुत गया यह सब पढ़ कर…..

और उस्सने पेजेज पलटना शुरू किया, इधर उधर देखा… उस्सको यकीन नहीं हो रहा था के वो ऐसा कुछ पढ़ रहा था….. मगर अब उसस्के समझ में सब आने लगा था के क्यों उस्का दादा भी नफरत करता है उस पहाड़ी वाले घर से और शायद दादा को सब पता भी होगा के मिस्टर दासगुप्ता अपने उस अड्डे को किश लिए इस्तेमाल करता है और क्यूंकि वो इतना खतरनाक आदमी है कोई उस के बीच आना नहीं चाहता…..

और बाकी के पेजेज में रूचि ने अपने प्यार और विहान के इश्क के बारे में लिखा था, बहोत सारे कविताएं थे, कितना विहान को चाहने लगी थी पहले दिन से ेट्स…

और लास्ट में रूचि ने लिखा के अभी वो कनाडा में है, फिर इटली जाएगी और कुछ साल ऑस्ट्रेलिया रहेगी.

और लास्ट पेज में यह लिखा है रूचि ने:

“मेरा तुम्हारा साथ यहीं तक का था विहान मुझे बिल्कुल भूल जाना, हमेशा खुश रहना, किसी अच्छी लड़की से शादी करना, अगर तुम्हारी बेटी हुई तो उस्का नाम रूचि ज़रूर रखना. मुझे कभी भी ढूंढ़ने की कोशिश नहीं करना, पापा को सब पता चल जाएगा उस से पहले. मैं नहीं चाहती के तुमको कोई गोली मारे. मैं चाहती हूँ तुम हमेशा सलामत रहो. तुमको मेरे प्यार का वास्ता, हमारे मिलान को एक सपना समझ कर हमेशा के लिए भूल जाना. सोचना के सपने में तुम एक रूचि नाम के लड़की से मिले थे कभी. आप से मैं तुमको तू कहने लगी, फ्रॉम वॉयस तो तू :डी

जे वॉयस ैमे विहान एंड विल ऑलवेज लव यू आल माय लाइफ. अगर पापा मेरे लाइफ मैं नहीं होते तो मैं तुम्हारी वाइफ बन जाती अब तक. मगर कोई बात नहीं मेरे दिल में तुम हमेशा रहोगे, कभी भी इस दिल से तुमको नहीं निकाल पाऊँगी. Bye विहान, और तुमको मेरी कस्सम है अगर तुमने मुझे ढूंढ़ने की कोशिश किया तो मैं तुमसे रूत जाउंगी हमेशा के लिए. सो बे ा गुड बॉय एंड लाइव हैप्पिली एंड लेट में आल्सो लाइव. बोथ विल बे हैप्पी इन थेइर कार्नर. लव यू मुऊआआह.”

सब पढ़ने के बाद विहान के आँखें नुम हुए और एक गहरी सांस लेकर वो तुरंत उस कॉपी को लेकर फूल के घर गया रात को hi. रात हो चुके थे.

फूल के यहाँ उस्सको सब कुछ समझाया विहान ने और उस्सको वो बुक दे दिया और कहा हमेशा के लिए उस्सको वो अपने hi पास रखें.

विहान ने कहा,

“फूल इस्को एक दिन जला देना मरने से पहले, इस्को किसी और के हाथ मत लगने देना कभी भी. मैं अब इस्को कभी भी नहीं लूंगा तुमसे. चाहो तो पढ़ने के बाद अभी hi जला देना. रूचि को जो कहना था सब कह दिया उस्सने और अब मैं उस्सको भूल गया अभी से hi. वो एहि चाहती है तो एहि सही. थैंक्स वैरी मच फूल तुम्हारे साथ के लिए इन् दिनों. मैं पता नहीं कितने दिन और यहाँ रहूँगा मगर जो भी ख़ुशी तुम और रूचि ने मुझे दिए वो ज़िन्दगी भर नहीं भूलूंगा. तुम भी एक ाचा लड़का देख कर ज़रूर शादी कर लेना, और तुम्हारी भी बेटी हुई तो रूचि नाम रखना उस्का और बीटा हुआ तो विहान और दो बेटियां हुई तो एक का नाम अशिता ज़रूर रखना…..”

यह सब कहकर विहान वहां से निकल रहा था के फूल उसस्के पीछे दौड़ी और विहान को बाहों में भर कर रोने लगी और कहा,

“अब तुम किआ करने जा रहे हो विहान? कुछ ग़लत मत करना प्लीज…. सुनों शायद मैं लाइफ में कबि शादी hi नाह करुँगी… कभी भी मेरी याद आये तो चले आना मेरे द्वार. यह द्वार तुम्हारे लिए हमेशा के लिए खुला रहेगा विहान.”

विहान ने फूल के गाल को चूमते हुए कहा,

“मैं बिल्कुल नहीं चाहता के तुम अकेली रहो, एक लाइफ पार्टनर सबको चाहिए होता है, जैसे मैं ने रूचि को भुला दिया तुम भी मुझे भुला देना okay. एंड दो हैवे किड्स इन लाइफ, थे विल मेक योर लाइफ हैप्पी.”

फूल ने पूछा,

“मगर हम कल तो मिलेंगे नाह? कॉलेज तो आओगे नाह विहान? ऐसे क्यों जा रहे हो जैसे यह हमारा लास्ट मिलना है?”

विहान: “हम ज़रूर मिलेंगे फूल मगर ऐसे नहीं जैसे मिलते आये हैं. हम सिर्फ दोस्त होंगे और कुछ नहीं, bye”

विहान वहां से घर जाकर अपने दादा से कहा के उस्सको अपने बड़े चाचा की 4क्ष4 चाहिए क्यूंकि वो अपने शहर जा रहा है अशिता से मिलने.

दादा ने पूछा,

“तुमको ड्राइव करना अत है किआ? लाइसेंस है तेरे पास?!”

विहान: “हाँ दादाजी लाइसेंस है तीन साल पहले hi ड्राइविंग सीख लिया था मैं ने.”

दादा खुश हुआ और कहा,

“अरे वह तुमने कभी बताया hi नहीं वेट मैं बंदोबस्त करता हूँ उस्सकी 4क्ष4 मंगवाता हूँ अभी, क्यों आज तुझे घरवालों की बहोत याद आ रही है बीटा हम्म? ठीक है चला जा मिलने और सुबह जल्दी अजना उस्सको अपने व्हीकल की ज़रुरत पड़ेगा okay?!”

विहान का कजिन 4क्ष4 लेकर आया 10 मीन्स के बाद.

विहान उस्सको उसस्के घर ड्राप करने गया और अशिता को टेक्स्ट किया,

“स्वीटहार्ट ी ऍम किंग होम टुनाइट, विल स्लीप विथ यू टिल मॉर्निंग, थें विल रेतुर्न, मिस यू ा लोट, नीड यू हनी, गेट रेडी ी ऍम ों थे वे वूहू, फीलिंग तू हैप्पी, कितने दिनों बाद तुमसे इश्क करूँगा आज वह मज़ा आएगा नाह आशु!! और मम्मी पापा को कुछ मत बताना ी वांट तो सरप्राइज थम हेहेहे”

तो बे कॉन्टिनोएड…………. (3400 वर्ड्स)
 
अपडेट 85 अशिता & डैड +विहान मीट्स अशिता

जिस दिन अशिता उस टीशर्ट में थी और अपने पापा को सडके कर रही थी तब कुछ ऐसा हुआ था:

मगर उस वक़्त अशिता को कुछ नज़र नहीं आया क्यूंकि अनिरुद का लोअर part बिल्कुल टेबल के निचे था, वो देखने के लिए अशिता को टेबल के निचे जाना पड़ता मगर वो तो नहीं कर सकती थी, तो अशिता उसी नटखट बचकानी आवाज़ में पूछा,

“पापा किआ मैं आप को सेक्सी लगती हूँ हम्म्म सच बताना प्लीज…..”

अशिता को नहीं पट्ठा के वो आग से खेल रही है…. अनिरुद ने किआ जवाब दिया और उसस्के बाद किआ हुआ बाद में पता करेंगे ……..

तो हुआ कुछ ऐसा था उसस्के बाद….

अनिरुद ने अशिता को कमर से पाकर कर कहा,

“तू तो मेरी बहोत हॉट बेटी है, क्यों? विहान ने नहीं बताया के तू कितनी सेक्सी है मेरी गद्य? हम्म तू विहान को ज़रूर मिस कर रही है, है नाह?”

अशिता ने उसी नटखटी और दुलार करने वाली ऐडा में अपने पापा के सीने से चिपक कर कहा,

“हम्म्म नै, आप मुझे बताओ नाह के मैं आप को किसी लगती हूँ और आप मेरे बारे में किआ सोचती हो!”

अनिरुद बाप था और अशिता से रियल में बहोत प्यार करता तो था ऊपर से उस में वो अपने पूजा को भी देखता था मगर अब अपनी खुद की बेटी को अपने बेटे की पत्नी के रूप में देखता था तो उसस्के मन में कोई ऐसी वैसी ख्याल नहीं था इस लिए वो समझ गया के अशिता कहाँ आना चाहती है क्यों के ठीक उसी वक़्त अशिता की जांघ अनिरुद की क्रॉत्च पर डब्बा, और अशिता ने अपने पापा के लुंड को अपने जांघ पर रियल में फील किया और उस्सकी जिस्म में एक लेहेर दौड़ी थी, मगर अनिरुद वैसा कुछ भी नहीं चाहता था तो उस्सने अशिता को अपने आप से अलग करते हुए आराम से कहा,

“देख आशु बीटा, मैं तेरा बाप हूँ ऋ, तू मेरी बेटी, मुझसे तू वो पाने की कोशिश नाह कर जो मैं तुझे नहीं दे सकता, प्लीज मुझको सडके करने की कोशिश नाह कर आशु, मैं विहान नहीं हूँ, मुझको कमज़ोर मत समझ…. एक बात बताऊँ तुझे? हाँ अगर तू विहान से और विहान तुझसे प्यार नहीं करता तो हो सकता था के मैं तुझसे प्यार कर बैठता क्यूंकि तुझ में मैं अपनी पूजा को देखता हूँ. हो सकता है विहान की जगह तू मेरी होती, मगर अब नहीं, मेरे दिमाग़ में बिल्कुल तेरे लिए कोई ऐसी बात नहीं है स्वीटहार्ट. मैं तो तुम दोनों को अपने घर में बीटा और बहु की तरह देखना चाहता हूँ ऋ पगली! प्यार बहोत करता हूँ तुम दोनों से मैं. तुम दोनों मेरा सपना पूरा कर रहे हो नाह? मुझे उस दिन का इंतज़ार है अब के मैं तुम दोनों की शादी करूँ और तू मुझे मेरा पोता और पोती दे….. तुझे नहीं पता मैं किआ पका रहा हूँ इन् दिनों तुम दोनों के लाइफ सेट करने के लिए, यह एक सीक्रेट है, तुम दोनों को बहोत बाद में पता chalega…tum दोनों की लाइफ प्रेपर कर रहा हूँ मैं बहोत कुछ कर रहा हूँ तुम्हारे और विहान के लिए मैं….”

अपनी पापा के बातों को सुनकर अशिता की जिस्म की गर्मी बिल्कुल ठंडी हो गयी और बेटी वाला प्यार ने जगह ले लिया और अपने पापा के सीने से बड़े ज़ोर से चिपक गयी ेंख से ेंसू बहते हुए और अनिरुद के गाल को चूमते हुए, अपने ेंसू पोंछते हुए अशिता ने कहा,

“यू अरे थे बेस्ट पापा इन थे वर्ल्ड पापा दो यू क्नोव तहत? लव यू पापा!”

तब अनिरुद ने कहा,

“एंड यू अरे थे बेस्ट डॉटर हु इस फुलफिलिंग हेर dad’s ड्रीम, अब जाओ एक जीन वाला शार्ट या एक लेग्गिंग पेहेन कर आओ वार्ना तेरी माँ अभी गाली देगी तुमको!”

अशिता ने मुस्कुराते हुए कहा,

“आप की हुकुम सर आँखों पर सर!”

और अशिता ने जाकर टीशर्ट hi चेंज करके एक मिडी ड्रेस पेहेन कर वापस आयी.

और शाम को उससे विहान का मैसेज मिला के वो ारः है तो ख़ुशी से पहली नाह समां रही थी विहान का वेट करते हुए……

*********************************************************

विहान तेज़ रफ़्तार से ड्राइव करते हुए जा रहा था. 2 एंड ा हाफ ऑवर का ड्राइव था और वो उससे लेस्स थान 2 हॉर्स में कवर करना चाहता था. मगर क्यूंकि रात था और रोड ऑलमोस्ट खली थे तो मुमकिन था जितना जल्दी वो रीच होता चाहता था उतने में रीच होना ख़ास कर जब हाईवे को पाकर लिया था.

उस्सकी दिमागी हालत नार्मल नहीं था उस वक़्त. वो रूचि से दूर होने की और उस्सको ज़िन्दगी में फिर कभी नहीं मिलने या देखने का ग़म खाये जा रहा था. मगर वो दिखा नहीं रहा था अपने उस दुःख को. फूल से मिला तब और भी ग़म में डूबा हुआ था.

उस्सको रोना आगया ड्राइव करते हुए, रट हुए ड्राइव कर रहा था. और एक रेस्टोरेंट के पास रुका और चाँद बियर के कैन्स ख़रीदे और पीते हुए ड्राइव करते गया. और उस्का रोना जारी रहा और ग़ुस्सा भी करने लगा यह सोच कर के रूचि ने उस्सको धोका दिया….. चिलाने laga,car के दोनों तरफ के विंडोज डाउन कर दिया और हाईवे पर जितना ज़ोर हो सके उतना ज़ोर से चिलाते हुए गया, उस्सकी आवाज़ हाईवे पर जैसे हवा उदा के ला जा रहे थे..

कोई एक जानते के ड्राइव के बाद उस्का रोना बंद हुआ, और बिल्कुल खामोश ड्राइव किये जा रहा था, कार हवा से बातें कर रही थी. 150कंस पैर ऑवर को 190 कर दिया था, स्पीडोमीटर पर नज़र गयी तो सोचा 200कंस कर दें और एक्सेलरेटर और भी दबाता गया फुल लिमिट तक मगर 200 नहीं रीच हो रहा था…. 190 से ज़्यादा हुआ hi नहीं के एक राउंड अबाउट आगया और कम्पलीट स्टॉप होना पारा फिर दोबारा फुल स्पीड पकड़ा और फिर 190 के स्पीड से hi जा रहा tha,vehicle डीजल था इस लिए शायद ज़्यादा नहीं जा रहा था अगर पेट्रोल या गैस होता तो 250 भी जा सकता था ऐसा विहान ने सोचा.

और फिर विहान अब अशिता को सोचने लगा. अब वो अशिता को डीपली मिस कर रहा था और खुद से विहान ने यह कहा,

“तुझे मैं ने धोका दिया नाह आशु इसी लिए मेरे साथ ऐसा हुआ है. तुझसे प्यार किया, कभी नहीं सोचा था के कोई और मेरी लाइफ में आएगी और मैं उसस्के तरफ झुक जाऊंगा ऐसा बिल्कुल नहीं सोचा था मैं ने सॉरी आशु मुझे माफ़ करना. सोच रहा हूँ के तुझे बताऊँ या नहीं रूचि के बारे में, तू कैसे रियेक्ट करेगी किआ तुमको दुःख होगा, मगर मैं तुमको दुःख नहीं देना चाहता, तो बताऊँ के नहीं बताऊँ?!”

यह सब सोचते और भड़भड़ाते ड्राइव किये जा रहा था विहान. और एक टाउन से गुज़रा तो उसस्के बियर एन्ड हो गए थे तो फिर से रुका एक जगह और 4 कैन बीयर्स के और ख़रीदे और पीते हुए ड्राइव करता गया…. ड्राइविंग अच्छा करता था, फुल कण्ट्रोल था हालां के हल्का सा नशा होने लगा था… और 30 मीन्स ड्राइव करना बाकी था और एक्सेलरेटर से उस्का पाऊँ हट hi नहीं रहा था. ब्रेक तो जैसे था hi नहीं उस 4क्ष4 में! और अचानक उस्का मोबाइल की मेसज वाला रिंगटोन बजा. उस्सने उठाया ड्राइव करते हुए hi देखने को, अशिता ने अब पूछ रही थी के कहाँ तक रीच हुआ है जब 20 मीन्स रह गया था रीच होने में. विहान ने मोबाइल लेकर मेसज रीड करना चाहा, और उसस्के कार के एक साइड के दोनों व्हील पेवमेंट पर पड़े और एक ऐसा ज़िग जग हुआ के तुरंत अगर विहान ने कण्ट्रोल नहीं लिया होता या सामने अगर एक और कार होती तो सीरियस एक्सीडेंट्स हो सकता था उस्का जान भी जा सकता था – इसी लिए कहते हैं के ड्राइविंग करते वक़्त कभी भी, किसी भी हालत में मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, अगर इम्पोर्टेन्ट हो तो कार को स्टॉप करना चाहिए, साइड में लेना चाहिए तब मोबाइल की इस्तेमाल करें! ऊपर से बियर पी रहा था यह भी 100% ग़लत है. ऐथेर यू ड्रिंक और यू ड्राइव. पीते हुए कभी भी ड्राइव नहीं करना चाहिए. किसी मासूम की जान जा सकती है नशे में ड्राइव करने से.

तो गाड़ी रोक कर उस्सने एक लम्बी सांस लिया, उस्का दिल बड़े ज़ोरों से धधकने लगा था उस वक़्त और तंग कांपने लगे थे क्यूंकि उसस्के समझ में आगया के अभी वो ों थे स्पॉट मर सकता था.

मैसेज रीड किया; अशिता ने अपनी ख़ुशी का इज़हार किया था यह जान कर के वो घर ारः है, और पूछ रही थी कहाँ तक रीच हुआ है. विहान ने रिप्लाई नहीं किया क्यूंकि उस्सको पता था के 15/20 मीन्स में रीच होने वाला था. तो वापस ड्राइव करने लगा और स्पीड भी कम कर दिया इस बार….. और अपने घर पहुंचा…. 4क्ष4 को रास्ते पर चोरर गर आँगन का गेट को खोला और उससे पता नहीं था के 4क्ष4 आंगन में घुसेगा या नहीं तरय करने जा रहा था…..

रात के 10 बजे थे, और जब आगाँ के अंदर घुस रहा था तो कार जे हेडलाइट्स जब अनिरुद के घर पर पड़ा तो वो, सुमन और अशिता लाउन्ज में आये देखने के लिए के कौन उसस्के यार्ड में कार ला रहा है, अशिता समझ गयी के विहान है और बहोत खुश हो रही तो तो अनिरुद समझ गया और अशिता से पूछा, वहां है किआ ऋ?”

अशिता ने हँस्ते हुए कहा, “खुद hi देखलो पापा एएएएएआआअह्हह्ह्ह्ह!”

और विहान ने कार सक्सेस्स्फुल्ली गेट के अंदर डाला जो एक्साक्ट्ली गेट के लिए hi बनाया गया था जैसे, सिर्फ 5 इनचेस की डिस्टेंस थे कार और गेट के दरमियान. विहान ने तब चरों तरफ देखा के मोहल्ले के किसी ने भी उस्सको देखा तो नहीं, और देखा के रास्ता खली था और किसी के घर से लाइट ों नहीं हुए मतलब किसी को पता नहीं चला के वो इधर आया हुआ है….

अशिता ने जल्दी से लाउन्ज का दरवाज़ा खोला और निकलने hi वाली थी के अनिरुद ने उस्का हाथ पकड़ा और बाहर जाने से मन किया के कहीं किसी ने देख लिया तो समिति वाले उस्सको फिर बुलाएंगे….

सुमन रो पड़ी और विहान को अपने बाहों में भर कर रोने लगी, अनिरुद ने तब उस्सको सीने से लगा कर उसस्के पीठ थपथपाये…. तब तक अशिता बेचैन हो रही थी विहान से लिपटने के लिए और जैसे अनिरुद ने विहान को चोर्रा कुढ़ कर अशिता विहान पर गयी और विहान ने उस्सको गॉड में उठा लिया और दोनों किश करने लगे अपने पेरेंट्स के सामने hi….Suman और अनिरुद ने एक दूसरे को देख कर मुस्कुराये और एक तरफ जाने लगे…

अशिता ने फिर विहान को मारते हुए कहा,

“भाई तुम ने पी है!”

विहान: “अरे बुसस दो कैन बियर पिया है उस में किआ है यार!”

लाउन्ज में सोफे पर बैठे अनिरुद ने पूछा,

“4क्ष4 तेरे बड़े चाचा की है नाह? उस्सने तुझे दे दिया यहाँ आने के लिए?!”

विहान अशिता को अपने ऊपर से निचे करते हुए अपने पापा को मुस्कुराते हुए रिप्लाई किया,

“पापा मैं ने चाचा से माँगा hi नहीं, हाहाहा, मैं ने तो दादाजी से कहा, और उस्सने चाचा को फ़ोन करके 4क्ष4 को मंगवाया, अब चाचा दादा को रेफुसे तो नहीं कर सकते थे नाह हाहाहाहा!

अनिरुद और सुमन हंस पड़े अशिता के साथ के विहान ने किश चतुराई से 4क्ष4 को पाया यहाँ आने के लिए.

कुछ 15 मिनट्स तक सब लाउन्ज में मिलकर बातें किये फिर अशिता ने विहान का हाथ पाकर के उस्सको अपने कमरे में लगाई और अंदर जाते hi फिर से लिपट गयी विहान के गले में बाहें दाल कर उसस्के मुंह को अपने मुंह में लेते हुए…….

तो बे कॉन्टिनोएड…… (2024 वर्ड्स)
 
अपडेट 86 आफ्टर 4 मोनथस अशिता मैक्स लव

तक़रीबन 4 महीने बाद आज की रात विहान और अशिता मिले थे इश्क फरमाने के लिए. विहान ने तो रूचि और फूल से मज़े किये थे मगर अशिता लास्ट टाइम गाओं में उस रात को एक hi कमरे में जब माँ बाप साथ थे तब आखरी बार सेक्स किया था विहान के साथ, उसस्के बाद किसी से कभी भी सेक्स नहीं किया था; हाँ एक बार वीडियो चाट से विहान के साथ मरतुरबते किया था और कल एक बार ऊँगली किया था उस्सने मगर उस्सकी जिस्म आज 4 महीनों के बाद विहान फिर छूने जा रहा था.

कमरे में अशिता ने जाते hi विहान के गले में बाहें दाल कर किश करने लगी थी उस से चिपक कर, उस्का हाथ विहान के पीठ पर फेरर रहे थे और उस्सकी नाख़ून जैसे विहान के पीठ को चीरना चाहते थे…. मुंह से विहान की जीब को इस कदर चूस रही थी जैसे कुछ लजतदार चीज़ मिल गयी थी उससे बरसों बाद….

विहान ने किश रोकते हुए कहा,

“आरी उफ़, रुक तो यार किआ इतनी भूकी है, मुझे hi खा जाएगी किआ आज रात को तू?!”

अशिता ने अपने जीब को होंठों पर फरते हुए मुस्कुराकर थोड़ी सी शर्मायी और वैसे hi शर्माते हुए कहा,

“भूकी नहीं हूँगी किआ, कितने दिनों बाद आज किश कर रही हूँ तुम्हें मैं, किआ तुमको वो भूक नहीं है भाई?!”

विहान ने तब रीलीज़ किया के अगर उस्सने किसी के साथ यह सब नहीं किया होता तो वो भी अशिता की तरह भूका hi होता, और अब अशिता को पता नहीं चलना देना था के उस्सको वो भूक नहीं है तो उस्सने कहा,

“नहीं वो बात नहीं बेबी, भूक तो बराबर मुझ में भी है, हम 4 महीने बाद जो मिल रहे हैं, मगर थोड़ा सा थका हुआ हूँ इतनी लम्बी ड्राइव जो करके आ रहा हूँ…. चल अजा बीएड पर मेरी विफिए!”

अशिता से वेट नहीं हो रहा था, तो विहान पहले बीएड पर बैठा और अशिता उसस्के सामने घुटनों के बल आ गयी और उसस्के पंत के बेल्ट को निकलने लगी, और पंत को खोला और उस्सकी पंत की ज़िप को ओपन करके अपने मुलायम हाथ को उसस्के अंडरवियर पर उसस्के ऑर्गन पर दबाया अपने जीब को होंठों पर फरते हुए और एक नज़र ऊपर करके विहान के चेहरे में देखा….

विहान ने एक लम्बी सांस लेते हुए आहें भरे… तब उस्सको उस हाल में देख कर अशिता मुस्कुरायी और उसस्के पंत को निकालने लगी जिस्सको विहान ने टांग उठाकर निकलने में हेल्प किया. तब विहान अपने अंडरवियर और टीशर्ट में बीएड पर बैठे हुए अशिता के चेहरे में देख रहा था के कितना प्यास है उस में, और सोचा के उस ने ज़िआदातती किया है अशिता को वैसे प्यासी चोरर कर इतने दिनों तक….

और तब अशिता ने फील किया के विहान उस्सको देख रहा है तो ऊपर उसस्के चेहरे में देखते हुए उसस्के अंडरवियर के ऊपर hi उसस्के सेक्स को किश करके पूछा,

“किआ हुआ? किआ देख रहे हो भाई? मैं अजीब लग रही हूँ यह सब करते हुए किआ?!”

विहान ने खुद अपने टीशर्ट निकालते हुए जवाब दिया,

“नहीं ऋ, मुझे बहोत ाचा लग रहा है और तुझे इतने दिनों बाद देख रहा हूँ नाह तो देखते रह जाने को मैं कर रहा है.”

सच बात था, विहान अशिता को घुर्र इस लिए रहा था के उस्सको अशिता में अपनी प्यारी मेहबूबा वापस दिख रहे थे, उस्सको अफ़सोस भी हो रहा था के उस्सने अशिता को धोका दिया किसी और लड़की के साथ सोकर और उस्सको अशिता बेहद खूबसूरत और बहोत प्यारी लग रही thi.Wo अशिता को अप्प्रेसियते कर रहा था और निहार रहा था.

अशिता उस वक़्त एक सिंपल सी ड्रेस में थी जो उसस्के घुटनों तक रीच हुआ था और क्यों के वो निचे बैठी हुई थी तो ड्रेस ऊपर उठे थे जिस से उस्सकी खूबसूरत उभरे हुए जांघें दिख रहे थे और उस्सकी क्लीवेज विहान के नज़रों के सामने थे, क्यूंकि अशिता ने ब्रा तो नहीं पहना था और दो गोआल गोआल चूचियां विहान के स्पर्श का इंतज़ार कर रहे थे….. विहान ने नोट किया के अशिता के निप्पल्स जैसे तन्ने हुए थे जैसे एक लुंड खड़ा होता है वैसे उस्सकी दोनों निप्पल्स सख्त जैसे खड़े हुए थे और विहान से जैसे कह रहे थे, ‘किआ देख रहा है मुझे अपने मुंह में लेकर चूस!’

अशिता उस वक़्त विहान के अंडरवियर पर अपना जीब चला रही थी काफी देर तक बिना लुंड को बाहर निकाले hi वो चाट रही थी लुंड के फॉर्म को जो अब तक अंडरवियर के अंदर hi था, अपने उँगलियों से अशिता करेस कर रही थी और छाते जा रही थी जैसे लुंड को प्यार कर रही थी, जैसे, उस्सको टाइम दे रही थी सँभालने के लिए तब उस्सको बाहर निकालती….

विहान की आहें सुनाई दे रहे थे अशिता की उस छुवन से, और बार बार अशिता ऊपर विहान के चेहरे में भी देख रही वो सब करते हुए…. फिर विहान बीएड पर लेट गया, वो इस इंतज़ार में था के अशिता खुद उस्का अंडरवियर को बाहर निकाले.

तो जब विहान लेट गया तब अशिता विहान को देख नहीं पा रही थी, इस लिए उस्सको ाचा नहीं लग रहा था तो वो कड़ी हुई, और बीएड के ऊपर गयी और बीएड पर भी घुटनों के बल होकर, झुक गयी विहान के अंडरवियर को निकालने के लिए. अशिता अब सब कुछ जैसे स्लो मोशन में करने लगी थी… जिस वक़्त धीरे धीरे वो विहान का अंडरवियर निकालने में लगी, तब विहान का हाथ अशिता के ड्रेस के निचे गया और उस्सकी नितम्बों पर अपना हाथ दबाया जिस से अशिता के जिस्म में एक लेहेर दौड़ी….

अशिता ने जब अंडरवियर को निचे के तरफ खिंचा तो विहान का तना हुआ लुंड में अटक गया अंडरवियर की इलास्टिक में, और अशिता को अपने उँगलियों को इस्तेमाल करके लुंड को दबाना पारा ताके अंडरवियर को निकल सके, और लुंड एक स्प्रिंग की तरह बाउंस हुआ जिस्सको देख कर अशिता ने हंस दिए और विहान भी मुस्कुराया….

तब तक विहान का हाथ अशिता की पंतय के अंदर चला गया था और उस्सकी योनि पर फरने लगा था जिस से अशिता की आह निकली और विहान ने फील किया के उस्सकी उँगलियाँ भीग गए अशिता की योनि को छूटे hi… अशिता बिल्कुल गीली हो चुकी थी, वो कब से गरम हो चुकी थी और लुंड को अपने अंदर लेने के लिए बिल्कुल तैयार थी पता नहीं कब से, शायद विहान के आने से पहले hi यह सब करने को सोचने लगी थी और तब से गीली होकर उस्का वेट कर रही थी….

अंडरवियर निकल फेंका अशिता ने तब बिना देर किये उस्सने विहान के लुंड को पहले हाथ में लिया, उस पर अपना जीब चलाया, उसस्के बॉल तक गयी जीब चलाते हुए और बॉल्स को छठा फिर बॉल्स को मुंह में लेकर चूसा उस्सने जिस से विहान कसमसा गया और, अशिता ने ख्याल नहीं किया के विहान को दर्द भी हो सकता है, तो जोश में अशिता उसस्के अंडे को मुंह में ले लिया था और चूस रही थी…. एक बॉल लेफ्ट साइड वाला फुल अशिता के मुंह के अंदर था और अशिता के मुंह में उसस्के प्लेट और जीब के बीच दबा हुआ था जिस से विहान की दर्द भरी आवाज़ निकली, “आआह्ह्ह स्स्स्सस्शह्ह्ह!”

तो झट से अशिता ने बॉल को चोररटे हुए विहान के चेहरे में देखा और कहा,

“आईएईए सॉरी भाई दर्द हुआ?!”

विहान ने मुस्कुराते हुए कहा,

“आरी यार वो एक सेंसिटिव चीज़ है उस्सको तुमने मुंह में लेकर दबाया तो दर्द तो होगा नाह!”

तब अशिता ने बॉल को करेस करते हुए उस्सको सहलाया और किश किया तब जाके विहान के लुंड को मुंह में लिया और चुस्सने लगी अपने सर को ऊपर निचे करते हुए, वैसे hi झुक कर बीएड पर…..

जब तक अशिता उस्सको चूस रहा था विहान ने धीरे धीरे अशिता की पंतय को निकला और उसस्के उस हिस्से को अपने मुंह के पास किया और उस्का जीब अब अशिता की योनि से उस्का पानी चाट और चूस रहा था जिस से अशिता विहान के लुंड पर और जोश से चूसे जा रही थी…. अशिता को नंगी कर दिया फिर विहान ने और उस्सकी बूब्स के निप्पल्स को खूब चूसा; फिर वापस निचे उस्सकी योनि चुस्सने लगा

दोनों एक दूसरे को चूस रहे थे और पोज़ 69 की हो गयी अपने आप.

हुआ ऐसा था के अशिता विहान के ऊपर थी, विहान अपने पीठ पर लेता हुआ था और अशिता की दोनों टाँगें विहान के चेहरे पर फैले हुए थे और विहान का सर अशिता के दोनों टांगों के बीच में उस्सकी छूट पर था और अशिता विहान के ऊपर उस्का लुंड चूस रही थी.

विहान अपने उँगलियों से उस्सकी पंखुड़ियों को खोलके चाटते हुए, उस्सकी चढ़ के अंदर अपना जीब घुसेड़ रहा था ात थे शामे टाइम चूस रहा था जो भी रस निकल रहे थे… उस से बार बार अशिता अपनी गांड ऊपर उठा रही थी फिर निचे करती फिर ऊपर उठाती जा रही थी….

अशिता बहुत एन्जॉय कर रही थी और उस्सको लग रहा था के झाड़ जाएगी बिना पेनेट्रेशन के hi, इतना जोश में थी उस वक़्त वो. और अशिता को यह भी पता था के जैसे hi विहान अपने लुंड को उसस्के अंदर डालेगा तीन चार बार अंदर बाहर होते hi अशिता अपनी ओर्गास्म हासिल कर लेगी यह अशिता को पक्का यकीन था…..

कुछ देर तक एक दूसरे को वैसे चुस्सने के बाद अशिता ने रुकते हुए कहा,

“भाई मेरा मुंह दुःख गया हम्म्म”

उस्सकी होंठों से लाड टपक रहे थे… वो वापस नार्मल पोजीशन में आयी और अब अपनी पीठ पर लेट कर विहान को बाहों में भरके अपने ऊपर आने को कहा उससे और एक दूसरे के मुंह में मुंह लेकर विहान अपनी प्यारी अशिता के ऊपर हो गया…. किश किये दोनों के कुछ देर और फिर अशिता ने रोक कर कहा,

“उफ़ मुंह दुःख रहा है इतना चुस्सने से हीहीही, निचे चुस्सना और होंठ और जीब चुस्सना यह तो मेरा जबड़ा हैंडीकैप हो जाएगा भाई हीहीहीही!”

विहान हंस पड़ा और कहा ,

“ok रुकते हैं और कुछ और काम करते हैं नाह मेरी प्यारी आशु…”

तो भोली बनते हुए आशु ने पूछा,

“अब किआ काम करना है भाई?!”

विहान उस्सकी मस्करी समझ गया और कहा,

“ठहर अभी बताता हूँ किआ काम करना बाकी यह इस्को तेरे अंदर घुसेड़ना है तेरी सिसकारियां निकलवाना है, तुझको झड़ना है अब एहि काम करना है हहहहए!”

अशिता ने हँस्ते हुए कहा,

“नाह बाबा नाह मैं वो सब नहीं करने दूंगी तुझे!”

तब तक विहान ने अशिता को अपने निचे दबाया और उसस्के ऊपर चढ़ कर उसस्के दोनों हाथों को ऊपर अपने हाथों से दबा कर अपने टांगों से अशिता के दोनों टांगों को फैलाया और अपने कमर को अशिता के दोनों टांगों के बिच किया और लुंड दबा कर उस्सकी योनि पर रखा…..

जब तक वो यह सब कर रहा था अशिता मुस्कुराते हुए उस्सको देख रही थी और उस्सको वो सब करने दे रही थी और जिस वक़्त विहान ने अपने लुंड को उस्सकी छूट के अंदर धँसाया अशिता की आवाज़ निकली ेंखों को बांध करते हुए,

“ोूउऊउउउइइइइइइइ स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्ह आआआआहहहहह भाआईईईई ऊऊफफफफ्फ्फ्फ्फ़!”

विहान ने लुंड को अंदर बाहर करना शुरू किया और अशिता ने अपने बाहों को उसस्के गले में लपेट लिया और विहान के गर्दन को अपने मुंह के पास खिंच कर उसस्के गले को चुस्सने लगी लुंड को अपने गहराई में आते जाते हुए महसूस करते हुए…. फिर उस्सकी आह ज़ोर से सुनाई दिए, विहान ज़ोरदार ढके दिए जा रहा था, अशिता की छूट बिल्कुल गीली थी जिस वजह से विहान का लुंड बड़े आसानी से फिसलते हुए अंदर बाहर हो रहा था, विहान को ज़्यादा ज़ोर नहीं लगाना पड़ा क्यों के कुछ hi देर में अशिता चिल्लाई,

“आआह्ह्ह भाआईईई ी ऍम कुम्म्म्मीईईइंग भईई…. स्स्स्सस्छ्हःहःहः एइस्स्स्सस्स भईईई इतस सूऊओ गूऊऊद फहुउउउउउउ आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह”

और अशिता ने अपने दोनों टांगों को ज़ोर से विहान के कमर पर कस लिया झड़ते हुए……

विहान को पता चल गया के अशिता ने ओर्गास्म हासिल कर लिए थे… मगर उस्का नहीं हुआ था अब तक… फिर भी वो रुका और अशिता के ऊपर लेता रहा बिना कोई मूवमेंट किये….. विहान कह नहीं रहा था मगर उस्सको रूचि रह रह कर याद आरही थी, क्यूंकि विहान रूचि से सेक्स करना बहोत पसंद करता था, और रूचि भी बहोत ाचा सेक्स करती थी, विहान को बहोत प्लीज करती थी….

विहान नहीं बता रहा था मगर अशिता को महसूस हो गयी के वो कुछ एब्नार्मल है…. अशिता को पता था के विहान किश जोश से उसस्के साथ सेक्स करता था हमेशा, और अभी करते वक़्त अशिता को पता चला के उस्सको प्लीज करने के बाद विहान ने खुद अपने लिए नहीं किया है अब तक…. और विहान का उस तरह से लेते रहने से उस्का लुंड नरम हो गया अशिता के अंदर hi…..

तो कुछ देर बाद अशिता उसी तरह विहान को बाहों में भाड़े हुए hi पूछा,

“भाई तुमने नहीं किया है अभी!”

विहान ने झूट कहा,

“नहीं हो तो गया मेरा बी तेरे साथ hi!”

अशिता ने अपने बाहों को उसस्के गले से निकालते हुए कहा,

“व्हाट? किआ भाई तुम मेरे अंदर झाड़ गए यह तो तुम नहीं करते कभी और अगर तुम मेरे अंदर झड़ते तो मुझे पता चलता, तुम्हारे गरम वीर्य मेरे गहराई में मैं फील करती, क्यों झूट बोल रहे हो भाई? किआ इतने महीनों बाद भी मुझसे करने को मैं नहीं किया तुमको?!”

विहान तब अपने पीठ पर लेट गया बिना कोई जवाब दिए….

तो अशिता उसस्के छाती पर अपना सर रख कर पूछा,

“भाई तुम किआ करते थे मेरे बिना? कैसे अपने आप को खुश करते थे तुम?”

विहान: “व्हाट? किआ जानना चाहती हो?”

अशिता: “तुम मुझे सोच कर मस्टुर्बते करते थे नाह बोलो सच है नाह?

यह सुनकर विहान को आईडिया मिल गया और कहा,

“यह भी कोई पूछने की बात है बेबी, हर रोज़ एहि करता था कभी दिन में दो बार करता था….”

अशिता ने तब मुस्कुराते हुए कहा,

“हम्म्म तभी तो नहीं कर पा रहे हो अभी यह बात है!”

और अशिता ने छोटे छोटे घूंसे मारे विहान के छाती पर….

तो बे कॉन्टिनोएड…… (2350 वर्ड्स)
 
अपडेट 87 बोथ स्टिल टुगेदर

उस वक़्त दोनों नंगे थे बीएड पर और अशिता ने अपने जांघ को विहान के नरम सेक्स पर रखते हुए विहान के चेहरे को चूमते हुए प्यार से कहा,

“हम्म्म देखो तो भाई मैं अभी इस्को खड़ा कर सकती हूँ, करूँ किआ हीहीही!”

विहान ने कहा,

“नहीं थोड़ा रुक नाह, सुन मुझे कुछ बताना है तुझे, बल्कि बहोत कुछ कहना यार! इसी लिए आया हूँ मैं!”

विहान सीरियस था तो अशिता भी सीरियस होकर विहान के चेहरे में देखते हुए कहा,

“अरे तुम तो बहोत hi सीरियस लग रहे हो भाई किआ बात करनी है? फ़ोन से नहीं कर सकते थे किआ? और क्यों हर रात को अब कहते हो के थक गए हो सोना है, नींद आरही है ेट्स?”

विहान ने अशिता को ज़ोर से बाहों में लेकर उस्का सर अपने चेस्ट पर दबाते हुए उसस्के सर को किश किया, फिर, उसस्के गाल को चूमा और कहा,

“सुन स्वीटहार्ट, बहोत बहोत कुछ बताना है तुझे मगर समझ में नहीं अत कहाँ से शुरू करूँ, सब से पहले तो यह चादर को अपने ऊपर करते हैं क्यूंकि थोड़ा ठण्ड भी लगने लगा है अब तो!”

और विहान ने चादर से खुद को और अशिता को कवर किया और सिर्फ दोनों के चेहरे बाहर रहे. अशिता ने कहा,

“हम्म्म मैं वेट कर रही हूँ भाई बोलिए किआ कहना है मुझसे!”

विहान ने कहा,

“तुझे पता है किआ काम करता हूँ उधर?”

अशिता, विहान के सीने पर सर सताये हुए, उसस्के गर्दन को किश करके कहा,

“हाँ किसी ऑफिस में कोई काम है मगर एक्साक्ट्ली किआ काम है नहीं पता तुम बताओ!”

विहान मुस्कुराया और कहा,

“नाह बिल्कुल ग़लत, मैं कुछ और करता हूँ बेबी!”

अशिता थोड़ा हैरान होते हुए पूछा,

“तो किआ करते हो तुम्ही बताओ नाह भाई!”

विहान ने पूछा,

“मैं उस दिन जब तुमसे घर की चाभी लेने आया था तो घर क्यों आया था और किआ किआ लगाया तुमको पता नहीं चला?”

अशिता: “हाँ मैं ने बहोत ढूंढा, सारे जगह तलाश किया तो तुम्हारे जूते और कुछ चीज़ें मिसिंग लगे तो वोही सब पता चला क्यों तुम कुछ और लगाए थे किआ?”

विहान: “आरी पगली अपनी बुक्स और कॉपी बुक्स, नोट्स कॉलेज की सब लगाया था नहीं दिखा तुम्हें? मेरे कॉलेज लेजाने वाले बुक्स, सब्जेक्ट बुक्स, नोट्स वाले सभी सामान लगाया नहीं देखा तुमने?”

तब अशिता ज़्यादा हैरान हुई और उठ बैठी फिर विहान के चेहरे में देखते हुए कहा,

“भाई मगर उस का किआ काम वो सब क्यों लगाए थे तुम?”

विहान: “इस लिए के मैं अपने डिग्री पाना चाहता हूँ और कोर्स भी फॉलो कर रहा हूँ याः!”

अशिता का चेहरे चमक उठा और ख़ुशी से विहान का हाथ पाकर कर एक सांस में ज़ोर से कहा,

“whaaaaaaaaaaat तुम कोर्स कर रहे हो? तुम पढ़ रहे हो भाई? कॉलेज जाते हो किआ उधर भाई?!”

अशिता को उस तरह से खुश देख कर विहान को ाचा लगा और कहा,

“हाँ कॉलेज जाता हूँ मगर पढ़ने नहीं पढ़ाने और फ्री पीरियड्स में अपना एक क्रैश कोर्स कर रहा हूँ नेक्स्ट 10 मोनथस में एग्जाम है मेरा थें डिग्री इन हैंड िफ़ ी सक्सीड!”

अशिता और ज़्यादा शॉकेड हुई और इस बार ऑलमोस्ट चिल्ला उठी ख़ुशी से कहते हुए,

“किआआआआ तुम पढ़ा रहे हो कॉलेज में किआ पढ़ा रहे हो थिस इस फनी!”

विहान ने कहा,

“J’enseigne ले फ्रांसेस, जे सुइस प्रोफ दू फ्रांसेस”

मतलब, “मैं फ्रेंच पढ़ता हूँ, मैं एक फ्रेंच टीचर हूँ”

अशिता को भी फ्रेंच अति थी तो झूमते हुए जवाब दिया,

“कोई? तू इंसिग्नेस ले फ्रांसेस? तू इस प्रोफ भाई?”

मतलब, “किआ? तुम फ्रेंच पढ़ते हो? तुम टीचर हो भाई?

विहान: “ोी माँ चेरी जे सुइस प्रोफ दे फ्रांसेस डांस उन कॉलेज ेट j’eseigne ले 10तह, 11तह, ेट ले 12तह.

मतलब: “हाँ मेरी जान, मैं फ्रेंच टीचर हूँ एक कॉलेज में और फ्रेंच सीखता हूँ 10तह, 11तह, और 12तह में.

यह सुन कर अशिता ख़ुशी से विहान के ऊपर चढ़ गयी और उस्सको चारों तरफ चूमने लगी मुंह पर, गाल पर, गर्दन पर…. विहान के ऊपर चादर था और अशिता नंगी थी, तो विहान के बाहों ने अशिता को जाकर लिया, मतलब अब अशिता फिर से विहान के सीने पर सर रख कर उस्सको सुन रहा था … फिर कुछ देर आराम करने के बाद अशिता को चूमते हुए विहान ने धीरे से कहा,

“एक लड़की थी वहां…..”

अशिता ने उस वक़्त अपने सर को विहान के चेस्ट पर रखा हुआ था और बिना विहान को देखे उसी पोजीशन में रहते हुए पूछा,

“हम्म्म्म एक लड़की थी? मतलब गर्ल्स स्टूडेंट्स भी हैं केदुकातिओं वाला कॉलेज है भाई?”

विहान ने एक गहरी सांस लेते हुए कहा,

“हाँ और एक लड़की थी रूचि….” और रुक गया.

अशिता भी उसस्के सीने पर वैसे hi सर रखे हुए सुन रही थी बिना कुछ कहे.

तो जब विहान ने देखा के अशिता कुछ नहीं पूछ रही है तो कहा,

“तुझे नींद आरही है किआ आशु?”

अशिता ने जवाब यह दिया उसस्के सीने पर उसी पोजीशन में रहते हुए,

“नींद कैसे आएगी भाई जब तुम्हें किसी रूचि नाम की लड़की में इंटरेस्ट है तो?!”

विहान ने अशिता के सर के बालों में हाथ फरते हुए कहा,

“अब वो नहीं है आशु, वो चली गयी, मुझे चोरर कर चली गयी कहीं दूर हमेशा के लिए चली गयी मैं अकेला हो गया इस लिए तेरे पास आया आशु मुझे माफ़ करना प्लीज…." और विहान रोने लगा सिसकते हुए अशिता को बाहों में भरके….

अशिता कुछ देर वैसे hi विहान के छाती पर अपना सर रखे रही और जब अपने भाई को उस तरह से रट हुए सुना तो बैठ कर विहान के सर को अपने छाती से लगा लिया अशिता ने उसस्के सर पर अपना हाथ फरते और उस्सको चूमते हुए….

उस वक़्त ऐसा लग रहा था के अशिता विहान की माँ या उस्सकी बड़ी बेहेन है, क्यूंकि विहान एक छोटे बचे की तरह रो रहा था और अशिता उसस्के सर सहलाते हुए उस्सको छुप कराने की कोशिश में लगी हुई थी और अशिता ने कहा,

“कोई बात नहीं भाई होता है. चली गयी तब नाह तुम मेरे पास वापस आये, अगर नहीं जाती तो हम नहीं मिलते अभी नाह? उस्सने तो एहसान किया मुझ पर भाई, मैं तो उस्सको थैंक्स कहूँगी भाई….”

विहान ने अशिता के चेहरे को अपने चेहरे के तरफ मुड़कर उस्सकी आँखों में देखते हुए पूछा,

“तुझे कुछ नहीं हुआ? तुझे दुःख नहीं हुआ के मैं किसी और लड़की के सात था इतने दिनों तक आशु?”

अशिता ने आराम से और बड़े प्यार से जवाब दिया,

“मुझे पक्का यकीन था के कोई आयी होगी तुम्हारे लाइफ में भाई…. जब तुमने फ़ोन करना, चाट करना और मुझको मिस करना बांध किया तो मेरी समझ में आगयी के कोई मिली होगी तुम्हें…. और मैं ने सोचा के तुम लड़का हो, मर्द को, तो ऐसा होता है, मैं ने सोचा जाने दो कोई भी आये तेरी लाइफ में वापस तो तू मेरे पास hi आएगा नाह…. क्यों के तुम दूर थे मैं ने सोचा अगर कोई लड़की मिली हो टाइम पास के लिए, तो चलता है मुझे ऑब्जेक्ट नहीं करना चाहिए इसी लिए मैं ने कभी कुछ नहीं कहा, पता था तुम वापस मेरे hi पास आओगे नाह भाई!”

विहान ने अशिता को सुनकर उस्सको बहोत ज़ोर से जकरा और उस्का रोना जारी रहा.

तब अशिता ने पूछा,

“वो तेरी स्टूडेंट थी?”

विहान: “हाँ, मगर हम ने एक दूसरे को पहले देख लिया था, उस दिन जब दादा जी हम दोनों को मंदिर लगाया था याद है? मंदिर के पास एक लड़की निकल रही थी पूजा करके?”

अशिता ने कहा,

“हम्म्म हाँ पीली गहरा में थी नाह? याद है मगर उस्का चेहरा याद नहीं… हम तो तालाब के पास चले गए थे नाह उस दिन?”

विहान: “हाँ बस एक पल के लिए देखा था उससे उस दिन को…. और बाद में….”

विहान की बात काट कर अशिता ने पूछा,

“भाई तुमको उस से प्यार हो गया था या ऐसे hi टाइम पास कर रहे थे तुम?”

विहान: “शुरू में सिर्फ चेरर रहा था, मैंने उससे, वो दूसरे दिन मुझे कॉलेज से वापस आते हुए दिखी और तू याद आयी, और उस में मुझे थोड़ा बहोत तू दिखने लगी, तो हर रोज़ मैं उस्का वेट करने लगा, मगर अस्सल बात बाद में पता चला के उस्सने मुझे पहले दिन जब मंदिर के पास देखा था तो उससे मुझसे उसी वक़्त प्यार हो गया था…..”

अशिता: “मैं समझी नहीं भाई, बताओ किश ने पहल किया तुमने या उस ने?”

विहान: “ोफो अब मैं कैसे समझों तुमको बेबी…. वेट तुमको सब शुरू से एन्ड तक बताता हूँ, उठ, बैठ सब बताता हूँ उसस्के बारे में और एन्ड में वो कैसे ग़ायब हुई सब समझाता हूँ…..”

अशिता ने कहा, “ग़ायब हुई? ग़ायब मतलब डिसअप्पेअर हुई? किआ मैजिक गर्ल थी किआ?”

विहान ने अशिता को अपने पास बिठाया बीएड पर, दोनों ने तकिये लगाए अपने पीठ के पीछे, और चादर से विहान ने अशिता को और खुद को ढाँखा टांगों से चेस्ट तक और वैसे बैठ कर विहान ने रूचि के बारे में सब कुछ शुरू से एन्ड तक बताया, जो कुछ रूचि ने उस बुक टाइप चिठ्ठी में लिखा था सब कुछ डिटेल में बता दिया विहान ने अशिता को.

जब सब कुछ बोल दिया विहान ने तो दोनों कुछ देर बिल्कुल खामोश रहे… कोई कुछ नहीं बोल रहे थे और अशिता ने एक गहरी सांस लिया और विहान को गले से लगाते हुए कहा,

“तुम्हारा दिल दुःख रहा है भाई इस लिए के रूचि खो गयी है और तुम मुझसे सहारा लेने आये हो? इमोशनल सपोर्ट के लिए आये हो मेरे पास हम्म्म? इसी लिए ड्रिंक भी किया है? भाई ऐसा होता है फॉरगेट हेर नाउ…. तुम तो मेरे लिए हो नाह? तो इसी लिए गॉड भी नहीं चाहता था के तुम उसस्के साथ रहो…. जैसे मैं तुम्हारे लिए हूँ वैसे वो अपने पापा के लिए हैं नाह? तो ऐसा hi होना था सो हो गया, मैं हूँ नाह तुम्हारे लिए तुम्हारे पास हम्म्म? तो क्यों रोना है तुम्हें उसस्के लिए भाई?! अब जाने दो नाह भाई!”

अपनी अशिता की इतने मीठे और अचे बातों को सुन कर विहान ने और भी कसके अशिता जो गले से लगाया और उसस्के चेहरे को, गालों को, गले को, चारों तरफ चूमने लगा उस्सको थैंक्स करते हुए और वैसे hi किश करते करते एक दूसरे के मुंह को ले लिया दोनों ने और अशिता लेट गयी और विहान उसस्के ऊपर चढ़ गया और इस बार विहान का फुल इरेक्शन हुआ था और अशिता को पेनेत्रते किया, अशिता ने उफ्फ्फ किया ज़ोर से और विहान उसस्के अंदर ढाका देने लगा… दोनों फिर से गरम हो चुके थे और चादर को विहान ने निचे फेंक दिया और अशिता से खूब प्यार किया और इस बार दोनों एक साथ ओर्गास्म को रीच हुए और विहान ने अपने सेक्स को बाहर जल्दी से निकाल कर अपने वीर्य को अशिता के बॉडी पर चोर्रा……

अब अशिता को लगा के उस्का विहान उस्सको वापस मिला!!

कुछ देर बाद दोनों एक दूसरे को बाहों में लेकर लेते रहे और दोनों के आँख लग गए….

कोई एक घंटे बाद अशिता को सुसु आयी तो वो उठकर टॉयलेट गयी, वापस आयी तो विहान नींद में था. सुबह के 2 बज चुके थे. अशिता ने सोचा के विहान को करीब 4 या 4.30 को निकलना होगा ताके वो अपने चाचा की 4क्ष4 को वापस कर सके मतलब सुबह के 6 साढ़े 6 बजे उस्सको गाओं पहुँच जाना चाहिए क्यों के विहान ने उससे बता दिया था सुबह जल्दी निकलना होगा कार वापस करने के लिए क्यूंकि चाचा जी को कार की ज़रुरत पड़ेगी उससे.

अस्सल में यह बात चाचा ने नहीं बल्कि सिर्फ दादा जी ने कहा था के कार की ज़रुरत पड़ेगी उसस्के चाचा को. तो अब यहाँ अशिता का मैं नहीं भरा था विहान से बात करके, उस्सको और बात करनी थी उस से और सोच रही थी के विहान अब उठेगा तो जल्दी से निकल जाएगा और दोनों फिर पता नहीं कब मिलेंगे. तो अशिता ने उससे उठाने को सोचा मगर फिर सोचा के वो थका हुआ है इतनी लम्बी ड्राइव करके आया और फिर रूचि को अभी अभी खोया है तो उस्का दिमाग़ी हालत सही नहीं है तो उससे आराम करने देना चाहिए फिर भी अशिता का दिल नहीं मान रहा था के वो विहान से इतनी जल्दी फिर दूर हो जाएगी…

वो बीएड पर चढ़ गयी और विहान के ऊपर चादर सही कर रही थी के विहान ने आँखें खोला और पूछा किआ हुआ, तो अशिता ने उस्का सर थपथपाते हुए कहा,

“कुछ नहीं तुम सो जाओ मैं टॉयलेट गयी थी….”

विहान ने एक करवट लिया अशिता के तरफ मूढ़ते हुए और उस्सको बाहों में ले लिया और सोने लगा, अशिता ने उसस्के गाल को किश किया, और अब विहान को नींद नहीं आरही थी….. तो उस्सने आँख फिर खोला और अशिता को देखने लगा….. अशिता ने फिर उस्सको सोने को कहा…. मगर विहान नहीं सोया और कहा,

“मुझे बहोत हल्का फील हो रहा है तुम्हें सब कुछ बताने के बाद, जैसे एक बोझ था सीने पर और अब दिल को चैन मिला है….”

और दोनों बातें करने लगे. अशिता ने मुंह बनाते हुए कहा,

“ी ऍम नॉट एनफ ऑफ़ यू और तुम थोड़ी देर में चले जाओगे, वे दीद नॉट इवन टॉक प्रॉपरलय भाई!”

विहान ने उसस्के गाल सहलाते हुए कहा,

“आरी करीब एक घंटे तक तो मैं ने तुमको रूचि के बारे में कितने सारे बात किये नाह?!”

अशिता: “वो तुम ने किये नाह, मैं ने तुमसे बात hi नहीं किये!”

विहान: “ाचा okay ठीक है बोल किआ बात करनी है सब बोल!”

अशिता: “मगर तुमको सोना चाहिए तुमको ड्राइव करके इतने दूर जाना है भाई!”

विहान: “वेट मैं कजिन को मैसेज करके पूछता हूँ के कितने बजे उसस्के पापा को कार चाहिए कल क्यूंकि दादा जी ने कहा था के उस्सको 4क्ष4 की ज़रुरत पड़ेगी सुबह को चाचा ने तो नहीं कहा है मुझे के जल्दी कार वापस करना चाहिए…”

विहान ने अपने उस कजिन को मेसज किया और पूछा के सुबह को कितने बजे उसस्के पापा कार उसे करता है.

अशिता ने कहा,

“वो अभी नींद में होगा तो तुमको कैसे रिप्लाई करेगा?”

विहान: “मैं ने उस से पूछा था इतने दूर जा रहा हूँ कहीं कुछ प्रॉब्लम हुई तो उस्सको अन्य टाइम कॉल कर सकता हूँ के नहीं तो उस्सने कहा चाहे कितना भी बजा हो उस्का मोबाइल रात भर ों रहता है और वो अन्य टाइम कॉल लेगा या मेसज रिप्लाई करेगा, उसस्के गिर्ल्फ्रेंड्स हैं रात भर चाट करता रहता है कहा था उस ने मुझे हेहेहे!”

और उसस्के कजिन का मैसेज आया तुरंत, लिखा था,

“पापा कल बिल्कुल कार नहीं उसे करेगा कल मेरी बारी है खेत जाने को, और मैं उसे करूँगा तुम चाहे जीतनेय बजे वापस आना खेत करीब है मैं बाइक पर चला जाऊंगा no वोर्री बीआरओ!”

उस्का मैसेज पढ़के विहान बहोत खुश हुआ और अशिता को सुनाया, तो विहान ने डीडे किया के कल सुबह अशिता को कॉलेज चौररने जाएगा 4क्ष4 में तब वहां से वापस गाओं जाएगा, और कल कॉलेज नहीं जाएगा या लेट जाएगा. बहोत खुश था वो और अशिता भी बहोत खुश हुई के उन् दोनों के पास टाइम है कल सुबह 9 बजे तक साथ रहने को.

फिर अशिता ने मोहल्ले वालों की बात की के वो लोग दोनों को एक साथ देखेंगे तो बात करेंगे तो विहान ने कहा के कार में होंगे तो कोई नोटिस hi नहीं करेगा.

तो कुछ देर बाद अशिता ने कहा,

“पता है भाई कल पापा ने मुझसे कहा के वो हम दोनों के लाइफ सेट करने के लिए वो कुछ स्पेशल इंतेज़ाम कर रहा है, नहीं बताया के किआ कर रहा है मगर सीक्रेट है उस्सने कहा और टाइम आने पर बताएगा!”

विहान: “रियली? किआ कर रहा होगा हम दोनों के लिए?”

अशिता: “पता नहीं और कहा के वो हम दोनों के बच्चों के साथ खेलेगा, उस्सको हमारे तरफ से पोता पोती चाहिए हीहीही!”

विहान: “वो तो चाहिए hi होगा उससे, और हमें देना hi पड़ेगा उस्सको वो!”

अशिता ने मुस्कुराते हुए थोड़ा शर्मीली अंदाज़ में कहा,

“हम्म्म मुझे शर्म आएगी जब मैं प्रेग्नेंट होकर पापा के सामने या मम्मी के सामने रहूंगी तो!”

विहान “आरी पुगली तुझे आदत हो जाएगी यह सब नेचुरल बातें हैं देखना सब नार्मल लगेगा तुझे उस वक़्त”

अशिता: “मगर भाई यहाँ इस मोहल्ले में तो यह सब मुमकिन नहीं होगा नाह?”

विहान: “ऑफ़ कोर्स यहाँ सब बेच बाच कर हमें कहीं और जाना होगा, मई बे पापा एहि सब इंतज़ाम कर रहा है और एहि कहना चाहता था वो तुझे!”

अशिता: “हम्म्म मई बे और हाँ लास्ट वीक और उस से पहले वाले वीक भी वो सुबह बहोत अर्ली घर से निकल गए थे और रात को घर वापस आये थे मई बे वो कुछ ऐसा hi इंतज़ाम कर रहा होगा….”

और दोनों ऐसे बातें करते करते नींद के आगोश में खो गए….

तो बे कॉन्टिनोएड…… (2602 वर्ड्स)
 
अपडेट 88 विहान बैक तो विलेज

सुबह 4.30 को अनिरुद उठ गया था ख़ास कर विहान के लिए क्यूंकि उस्सने कल रात को कह दिया था के ात लेटेस्ट 5 बजे उस्सको घर से निकल जाना चाहिए.

मगर जब 4.45 तक विहान अशिता नहीं उठे थे तो उस्सने दरवाज़ा खटखटाया अशिता की रूम की, और दोनों तो लेट सोये थे इस लिए बिल्कुल गहरे नींद में थे दोनों. तो अनिरुद को कमरे के अंदर जाना hi पारा…. शुक्र है के दोनों कम्बल के निचे थे वार्ना अनिरुद दोनों को नंगे अवस्था में देखता… दोनों ने एक भी कपडा नहीं पहने हुए थे मगर ठण्ड लगने लगे थे सुबह 3 बजे जब कम्बल के निचे ग़ुस्से थे दोनों!

अनिरुद ने देखा जैसे पहले दोनों एक दूसरे से चिपक के सोते थे बचपन से वैसे hi चिपके हुए थे एक दूसरे से, और सुमन कितना ग़ुस्सा करती थी उन् दोनों को वैसे सोते हुए देख कर, यह सोचा अनिरुद ने, मगर उस्सको बहोत प्यार आया दोनों पर और उस्सने दुआ किया के दोनों की जोड़ी सलामत रहे.

अनिरुद ने बीएड के पास जाकर विहान को फुकरा… तो विहान चहुंका, और जब अपने पापा को सामने देखा तो समझ गया के वो उस्सको उठाने आया है तब उस्सने समझाया के रात को उस्सने बात कर लिया है और लेट वापस जाएगा. तो अनिरुद ने लाइट ऑफ कर दिया और दोनों को सोने दिया.

तब तक सुमन भी जाग गयी थी किचन में थी तो पूछा के क्यों विहान नहीं उठा है अभी तक तो अनिरुद ने बात बतायी सुमन को भी.

जब अनिरुद और सुमन काम पर चले गए, तो बैंक से करीब 8 बजे अनिरुद ने अशिता की मोबाइल पर फ़ोन किया उस्सको जगाने के लिए…. वो सच में गहरी नींद में थी तब तक…. विहान के ेंखें भी खुले रिंगटोन सुनकर और एक उबासी लेते हुए अशिता से पूछा कौन है तो अशिता धडपडाते हुए उठी यह कहते हुए,

“भाई ी हैवे नॉट ा सिंगल क्लोथे ों में 8 बज गए भाई रेडी होना है कॉलेज के लिए, ब्रश करना है, बाथ लेना है, चाय लेनी है टिफ़िन लेना है, कितना कुछ करना है, uff…hurry उप bhai!!Papa ने जगाया फ़ोन करके!”

विहान अशिता को नुदे खड़े होकर अपनी ड्रेस पहनते हुए देख रहा था और कहा,

“चल एक साथ बाथ लेते है नाह!”

अशिता ने कहा,

“भाई ी वोउल्ड लव तो बूत अभी टाइम कम है रोमांस के लिए, अगर हम दोनों नहाने गए तो घंटा लग जायेंगे!”

विहान ने कहा,

“अरे के ों, एक क्विकी मारेंगे नाह! रैपिड सब हो जाएगा, जाते जाते तुम्हारे यादों को लेता चलूँगा…!”

अशिता के समझ में नहीं आया के किआ जवाब दे विहान को बुसस उसस्के चेहरे में सवाली नज़रों से देखती रही तब तक विहान कम्बल के निचे से नंगा निकला और वैसे hi अशिता को बाहों में उठके बाथरूम में लगाया…. और होना किआ था दोनों ने कोई 20 मिनट्स तक बाथरूम में गुज़ारे और विहान ने अशिता को फिर से ओर्गास्म दिलाया और खुद भी संतुष्ट हुआ…. कल रात की तरह कुछ कमी नहीं थी, विहान खड़ा रहा पुरे एनकाउंटर के दौरान और अशिता कहार्टी रही उसस्के ऑर्गन को अपने गहराई में लेकर जब तक एन्ड नहीं हुआ सेक्सुअल एनकाउंटर. फिर दोनों ने एक दूसरे को नहलाया और उसस्के बाद दोनों जल्दी जल्दी तैयार हुए, विहान ने अशिता की हेल्प किया और 9 बजे दोनों घर से निकले.

विहान ने कार गेट के बाहर निकला और अशिता आकर उसस्के बगल में बैठी. आज पहली बार लाइफ में अशिता नाह बस में और नाह पैदल जा रही थी बल्कि एक 4क्ष4 में कॉलेज जा रही थी वो भी विहान के बगल में बैठ कर. बहोत खुश थी अशिता, एक तो सुबह सुबह विहान से लव मेकिंग किया वो भी बाथरूम में, और अब कॉलेज जा रही थी उसस्के साथ कार में…. सोच रही थी के तीन बार ओर्गास्म हुई उस्सकी कल रात से अब तक… अपनी गहराई में उस्सको ख़ुशी फील हो रही.

कॉलेज के द्वार पर कार रुका, और अशिता ने विहान के गले में बाहें दाल दिए अपने और उस्सकी ेंखें भीग गए और कहा,

“तुमसे दूर होने को मैं बिल्कुल नहीं कर रहा भाई, काश तुम मेरे साथ रहते हर रोज़. फिर आना भाई कैसे भी करके फिर ज़रूर आना, मैं वेट करुँगी, bye भाई ी लव यू वैरी मच, विल मिस यू ा लोट.”

विहान ने भी अशिता को ज़ोर से बाहों में भर लिया था और उसको चुम रहा था. उस्सने भी bye कहा, ी लव यू कहा और उस्सको जाना था.

अशिता गेट के पास कड़ी टपकते ेंसुओं के साथ विहान को bye वेव कर रही थी, और 4क्ष4 को ेंखों से ओझल होने तक देखती रही.

अशिता ने अमित वाली बात बताने को सोचा था विहान को, मगर क्यूंकि अमित ने उन् दोनों का साथ दिया था समिति में और वो विहान का एक्स बॉस और दोस्त भी था, और कुछ ख़ास हुआ भी नहीं था तो अशिता ने सोचा कुछ हुआ तो नहीं तो नहीं बताना बेहतर समझा क्यूंकि वो विहान की मूड ख़राब नहीं करना चाहती थी, वो नहीं चाहती थी के विहान वहां दूर रहकर उसस्के बारे में उस तरह से सोचे के कोई उस्सको इधर मोलेस्ट कर रहा है, वो नहीं चाहती थी के विहान अब पढ़ रहा है तो उस्सको किसी किस्सम की फ़िक्र करने का मौका दें, इस लिए अशिता ने कुछ नहीं बताने का फैसला किया.

वापस जाते वक़्त विहान ने ज़्यादा स्पीड नहीं किया और दादा जी को फ़ोन कर के बता दिया था पहले hi के लेट आएगा क्यूंकि चाचा को कार की ज़रुरत नहीं है.

11.30 को गाओं रीच हुआ, तो कॉलेज जाना तो बेकार था, सो नहीं गया. चाचा के घर उसस्के 4क्ष4 चौररने गया तो पहली बार अपनी बड़ी चची से मिला वो और उस्सको पता भी नहीं था के उस्का एक छोटा कजिन भी था वहां. वो भी स्कूल नहीं गया था थोड़ा सा फीवर था उस्सको इस लिए.

उसस्के बाद चाचा ने उस्सको वहीँ लंच करने को कहा. तो वो रुक गया. जिस गाओं में ये चाचा रहता था वो कोई 3 कंस के दूरी पर था उसस्के दादा के घर से. तो लंच के बाद कुछ देर उस गाओं में टहलने गया विहान और करीब 3 बजे डीडे किया वापस जाने को तब तक उस्का कजिन भी आगया बाइक पर मगर अब विहान को एक और शॉक लगा, कजिन के साथ बाइक पर उस्सकी बेहेन थी जिस्सको कॉलेज से पिक करने गया था उस्का भाई…. मतलब यहाँ विहान की एक कजिन सिस्टर भी रहती थी जिस के बारे में विहान को अभी पता चला! अशिता की आगे की hi होगी. विहान से इंट्रोडस करवाया उसस्के भाई ने तो कजिन सिस्टर ने कहा के वो अनिरुद चाचा, सुमन चची और विहान अशिता सब को जानती है.

विहान ने उस से पूछा के कैसे जानती है तो कजिन सिस्टर ने कहा,

“मैं छोटी थी तो कई बार मुझको पापा तुम्हारे घर शहर लेजाते थे और हम तीनों मिलकर खेला करते थे तुमको कुछ याद नहीं विहान?!”

विहान ने नाह में सर हिलाया, तब तक उस्का बड़ा चाचा आगया और कन्फर्म किया जो विहान की कजिन सिस्टर कह रही थी. विहान को कजिन सिस्टर से मिलकर ाचा लगा, और उस्सको उस घर में भी एक अपनेमन फील हुआ बिल्कुल जैसे अपने घर में होता है, यहाँ पर भी एक चाचा, चची और 2 के बदले 3 बचे थे एक छोटा लड़का ज़्यादा था, और उस्का कजिन और कजिन सिस्टर उसस्के हमउम्र थे!

और जब उस्का कजिन उस्सको दादाजी के घर वापस चौररने गया तो कजिन सिस्टर भी साथ गयी और पीछे विहान के साथ बैठी थी और बातें करते हुए दादा जी के घर पहुंचे और कजिन सिस्टर अपने दादा जी से मिलने गयी, उसस्के बाद वापस अपने भाई के साथ घर गयी.

विहान के मोबाइल पर 25 मॉस्कल्स थे फूलवती के तरफ से, और मेस्सगेस भी कोई 10 थे. फूल पूछ रही थी के कहाँ है और क्यों कॉलेज नहीं आये आज! इस लिए विहान फूल को hello कहने गया शाम को.

विहान आँगन के बाहर से पहले की तरह बात किया अंदर नहीं गया. सिर्फ कुछ कासुअल बातें किये उस ने फूल के साथ उस्सको यह कहकर के कल वापस कॉलेज जाएगा, वापस आगया.

वापस घर जा कर विहान ने अशिता को कॉल किया और घंटा भर दोनों ने बातें किये. अशिता बहोत खुश थी के विहान पहले दिन की तरह अब उस्सको कॉल करके बात करने लगा, और रात को भी कॉल करने का वादा किया विहान ने.

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अनिरुद शाम को काम से वापस आया तो अशिता से पूछा विहान के बारे में के वो कितने बजे वापस गया ेट्स. जब अशिता ने बताया के विहान सुबह उस्सको कॉलेज चौररने गया था तो सुमन ने कहा के अगर किसी मोहल्ले वालों ने देखा होगा तो ज़रूर वह लोग फिर से बुलाएँगे समिति में!

मगर अनिरुद ने सुमन से कहा,

“समिति वालों की ऐसी की तैसी इनको पता भी नहीं के मैं किआ करने वाला हूँ कुछ दिनों बाद, सब के गांड में लात मार दूंगा देखना किआ करता हूँ!”

जब सुमन और अनिरुद अकेले अपने कमरे में गए लेट रात को तो सुमन ने पूछा,

“आप का काम हुआ के नहीं?”

अनिरुद: “अभी बहोत कुछ करना बाकी है मगर धीरे धीरे आगे बढ़ रहा है सब कुछ.”

सुमन: “कब तक सब फाइनल हो जाएगा?”

अनिरुद: “आरी अभी अशिता की फाइनल तो हो जाने दो, अगले 8 महीनों में उस्सको डिग्री मिल जायेगी तब तक इधर भी सब फाइनल हो जाएगा तब देखना!”

सुमन: “और विहान को कब बताओगे आप?”

अनिरुद: “उस्सको आराम से वहां रहने दो नाह, जब वक़्त आएगा तो दोनों को एक साथ बताऊंगा, उनको भी तो तैयारियां करने होंगे सब के लिए.”

सुमन: “इतने बार आप वहां गए तो विहान को कोई भी शक नहीं हुआ क्यूंकि कल वो आया तो एक बात भी नहीं पूछा उस्सने, पिता जी ने भी उस्सको कुछ नहीं बताया, आप के पिता ज़ुबान के पक्के हैं है नाह?”

अनिरुद: “वो विहान को एक बच्चा मानता है और बड़ों की बातों में विहान को वो कभी भी शामिल नहीं करेगा, हाँ अगर मैं ने कहा बताने को तब बताएगा!”

सुमन: “चलो मुझे नींद आरही है, उम्मीद है के सब सही तरह से निपट जाएँ और आप कामयाब हो जाओ तो हमें सुकून मिले और इस रन्झ से हम आज़ाद हो जाए, बस उस दिन का इंतज़ार है अब मुझे!

Anirud:”are 75% सब आलरेडी सही हो गए हैं, उस तरफ से भी सब जवाब आगये हैं पॉजिटिव में, अन्य टाइम कहा है उस तरफ के लोगों ने. बुसस अशिता की डिग्री मिल जाए तो सब तमान शुद्ध.”

और अपने रूम में अशिता विहान से सेक्स चाट कर रही थी वीडियो कॉल से, निघ्त्य में थी, बिना ब्रा के और सडके कर रही थी विहान को अपने जिस्म दिखाते हुए….

तो बे कॉन्टिनोएड……
 
अपडेट 89 Anirud’s प्लान

दूसरे दिन विहान कॉलेज चले गए और सब रूटीन हो गया हर रोज़ की तरह बुसस एक कमी थी के रूचि नहीं थी. हाँ बस में सुबह फूल के बगल में बैठ कर गए विहान. फूल खुश थी के विहान वापस कॉलेज आगया.

क्लासेज में सब नार्मल गुज़रे और अपने कोर्स भी किये विहान ने और अगले 7 महीनों बाद उस्सको दिसेर्ततिओन देना था. असाइनमेंट्स दे चूका था एक बार कुछ और बाकी थे. और उधर अशिता के भी दिसेर्ततिओन थे शामे डेट्स ko…donon एक साथ एक्साम्स दे रहे थे अपने ग्रेजुएशन के लिए.

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अनिरुद जो कर रहा था उसस्के लिए उस्सको 3 साल का इंतज़ार नहीं करना था. अनिरुद अपने बच्चों को 3 साल के लिए अलग नहीं रखना चाहता था. उस्का प्लान यह था के जैसे अशिता ग्रेजुएशन कर लेगी विहान और अशिता एक साथ रहेंगे. मगर इस के लिए वो कुछ ऐसा कर रहा था के समझलो जैसे एक डाव लगा रहा था अपने पुरे लाइफ की अपने बच्चों के लिए, अपने विहान और अशिता के लिए.

सबसे पहले अनिरुद ने इंटरनेट से उन् देशों को सर्च किया जीन देशों में इन्सेस्ट रिलेटेड रिलेशनशिप पर कोई पाबंदी नहीं है, जहाँ कोई भी ईन्सेस्तुओस रिलेशनशिप में जीते हैं और नाह उस देश का सर्कार नाह सोसाइटी खिलाफ होता है. जहां इन्सेस्ट रिलेशन में शादी भी होते हैं.

मेजोरिटी यूरोपियन कन्ट्रीज थे उन् में और वहां के कॉस्ट ऑफ़ लिविंग ज़्यादा हाई थे. अनिरुद ने बहोत इंटेंस सर्च करके, ब्लोग्स ऑफ़ उन् देशो के फ़ोरम्स पर डिसकशंस करके फाइनल रउलटस यह लाया:

कोनसेन्सुअल इन्सेस्ट इस फुल्ली लीगल इन स्पेन, रूस, एंड इस नॉट स्ट्रिक्टली प्रोहिबिटेड अंडर पोर्तुगी लॉ.

तेरे इस आल्सो no लॉ प्रोहिबिटिंग कोनसेंटिंग रिलेटिव्स फ्रॉम हैविंग सेक्स इन फ्रांस, बेल्जियम एंड लक्सेम्बर्ग…….

एअरलिएर थिस मंथ वे रिवील्ड हाउ ा डैड इन नार्थ कैरोलिना लेफ्ट हिज वाइफ फॉर हिज ओन डॉटर, एंड अलगेडली फाथेरेद हेर चाइल्ड.

वास् आल्सो रिपोर्टेड हाउ ा गर्ल इन स्पेन है रिपोर्टेड़लय गिवेन बिरथ तो हेर 14-year-old brother's बेबी.

यह सब पढ़ने के बाद अनिरुद ने स्पेन को सेलेक्ट किया और वहां के कई लोगों से ऑनलाइन दोस्ती किये स्पेन की इन्सेस्ट साइट पर और अपने बच्चों की कहानी सुनाये. उन् में से दो स्पेनिश लोगों ने अनिरुद को पूरा सपोर्ट और हेल्प करने की प्रॉमिस किये और वहां की इमीग्रेशन से बात करके फाइनल करवाए के वो परिवार समेत वहां आ कर रह सकते हैं ज़िन्दगी भर के लिए. मगर वहां ज़मीन, घर खरीदने के लिए बहोत ज़्यादा पैसा लगता है, वहां यूरो करेंसी चलता है और 50 गुनाह ज़्यादा कॉस्ट ऑफ़ लिविंग होता है मतलब वहां एक घर खरीदने के लिए कम से कम 5 करोड़ रूपए के ज़रुरत थे अनिरुद को.

पुरे यूरोप कन्ट्रीज में से स्पेन की कॉस्ट ऑफ़ लिविंग सब से लौ था, रिजल्ट यह मिला सर्च के बाद:

कॉस्ट ऑफ़ लिविंग इन स्पेन इस ओने ऑफ़ थे लोवेस्ट इन वेस्टर्न यूरोप, इवन इन थे सिटीज. (एंड थे फेमस स्पेनिश सनशाइन यू गेट फॉर फ्री.) लीविंग आसीदे रेंट और मॉर्गेज payments—and डेपेंडिंग ों योर lifestyle—a कपल कुड ैसिलय लाइव ों $20,000 तो $22,000 ा ईयर एंड स्टिल बात आउट रेगुलरली.

स्पेन के ऑफिसियल िमंगरेशन ऑफिसर्स से फ़ोन पर बात होने लगे थे अनिरुद के. वहां के ऑफिसर्स ने कहा के अगर वो वहां आकर एक घर खरीद लेगा अपने पैसों से तो उस्सको रहने की परमिशन मिल जाएगा लाइफटाइम के लिए. और जेईई के अनिरुद ने बता दिया के उस्का एक लड़की है जो ग्रेजुएट हैं तो नौकरी की बी बंदोबस्त हो जाएगा और उन् लोगों को स्पेन की सिटीजनशिप भी मिल जाएगी उस इन्सेस्ट रिलेशन की खातिर.

अनिरुद ने बैंक में लाइफ इन्शुरन्स पॉलिसीस लिए थे अपने घर के सभी फॅमिली मेंबर्स के. चरों के पॉलिसीस मिला कर हाफ करोड़ होता था. अब अनिरुद की रिटायरमेंट स्कीम में से उस्सको 1.5 करोड़ मिलता अगर वो रिटायरमेंट आगे तक काम करता तब, मगर अभी सिचुएशन यह हुआ था के अनिरुद pre-retirement लेना चाहता था इस लिए उस्सको सिर्फ 1 करोड़ मिलेगा 1.5 की बजाए.

अब अनिरुद ने अपने बाप से गाओं जाकर अपने हिस्से की ज़मीन की मांग किया था और उस्सको बेचने को कहा था. इसी वजह से कई दिनों से वो भाग दौर कर रहा था अपने पिता के यहाँ, और इसी बारे में कल रात को सुमन और अनिरुद बात कर रहे थे.

गाओं में हुआ यह था के बात हिस्से की होने लगे थे जब अपने पिता से अनिरुद ने बात चेर्रा था. तो आखिर में अनिरुद के पिता ने कहा अगर उस्सको देगा तो बाकी के सभी भाइयों को भी देना पड़ेगा, सबके हिस्से करने पड़ेंगे उस्सको. आज तक किसी को कोई हिस्सा अपने नाम पर नहीं मिला था सब अनिरुद के पिता के नाम पर थे जो ऑटोमेटिकली उसस्के नाम हुए थे अनिरुद के दादा के मरने के बाद.

और ऐसे hi वीरबल्ली उस्सने सभी भाइयों को ज़मीन के देख भाल करने के लिए दे दिए थे, बुसस ज़ुबानी, कोई पेपर वग़ैरा नहीं हुआ था. तो जो अनिरुद का हिस्सा था उस्सको दो बड़े भाइयों के बीच बनता गया था जीन पर गन्ने के खेत थे. उन् गन्नों के खेत से जो पैसा मिलता था सब अनिरुद के पिता के अकाउंट में जमा हुआ करता था.

5 बार गाओं जाकर बात करने के बाद आखरी फैसला यह हुआ था के अनिरुद के पिता ने सभी बेटों को एकता किया और पूछा के किआ सबको अपना अपना हिस्सा चाहिए, किआ हर कोई अपने आप खुद सब संभाल पाएंगे?

तो कौन होगा जो इतने सारे ज़मीन को अपने नाम पर लीगली नहीं पाना चाहेगा? सब भाई राज़ी थे तो लीगल कागज़ात तैयार किये गए थे, और हर किसी को अपना अपना हिस्सा मिल गया था, मतलब बटवारा हो गया था सभी भाइयों के बीच. बहनों के हिस्से भी मिले थे.

अब जब वक़्त आया था अनिरुद को अपने हिस्से की ज़मीन बेचने की तो, अनिरुद के पिता ने कहा के ग़ैरों से क्यों बेचना, अपने भाइयों से बेच देने को कहा था अनिरुद के पिता ने. एहि लास्ट बार बात हुई थी जब अनिरुद गाओं गया था. और इसी बारे में रात को सुमन पूछ रही थी अनिरुद से. जीतनेय ज़मीन अनिरुद के हिस्से में आये थे उस्का दाम कुमसे कम 7 करोड़ का था.

जब अनिरुद वापस आगया था तो अनिरुद के पिता ने अपने बाकी के बेटों से बात किये थे के किआ सब मिलके अनिरुद को 7 करोड़ पाय कर पाएंगे या नहीं? कुछ डिस्कशन हुए थे सब के बीच के पुरखों की ज़मीन हैं तो क्यों नाह उस्सको नाह बेचा जाए. तो बाप ने एहि कहा के इसी लिए वो उन् लोगों को hi खरीदने को कह रहा है ताके ज़मीन अपने लिए hi रहे कोई ग़ैर बाहर से आकर ज़मीन को नाह ख़रीदे! और सब ने मिलकर यह डीडे किया था के कोई नाह ज़मीन खरीदेगा, और नाह अनिरुद बेचेगा. सबने मिलकर सोचा के अनिरुद को ऐसे hi पैसा दे देंगे, जैसे उधार, फॉरेन जाकर वो अगर कमा कर वापस करें तो उस्सकी ज़मीन उसी के नाम रहेगा हमेशा. अनिरुद के बाप को यह बहोत पसंद आया था और उस्सने खुद अपने तरफ से 2 कोर देने वाला था, और बाकी के भाइयों ने मिलकर 5 करोड़ जमा कर लिए थे अनिरुद को देने के लिए.

और आज का दिन था जब अनिरुद को गाओं जाना था फाइनल डील करने और भाइयों से अपनी खुद के ज़मीन बेचने और 7 करोड़ लेने. मगर उस्सको नहीं पता था के वहां भाइयों और उसस्के पिता ने मिलकर उसस्के लिए किआ प्लान किया था.

तो बे कॉन्टिनोएड…….
 
अरे जॉनी भाई आप ने सवाल किया इस लिए अभी hi रिप्लाई कर देता हूँ. भाई ढिंढोरा तो नहीं पीटा बिल्कुल भी. किसी को कुछ भी नहीं पता सब बहोत सेक्रेटली किया इंटरनेट और फ़ोन से वह भी फोरेइग्नेर्स के साथ जो अनिरुद को जानते भी नहीं. अब रही बात किसी दूसरे शहर में जाकर रहने की तो भाई ज़रा सोचो,

1. भाई बेहेन क सुर्नामे एक हैं. माँ बाप के नाम एक हैं. शादी होगी तो पता चल जाएगा दोनों एक hi माँ बाप की औलाद हैं हो देश में कानूनन जुर्म है.

2. दूसरी शहर में कितने भी दूर चले गए तो दादा, दादी, इतने सारे चाचा, कौसिन्स, नाना, नानी, मां, ममी उधर क कौसिन्स इन् सब में से कोई एक तो एक दिन इनसे मिलने उस दूसरी शहर में जाते नाह? नहीं भी बता क जाते तो कभी आमना सामना होने का रिस्क था नाह?

और एक दिन विहान क साथ अशिता और उसस्के बचे मिल गए साथ में तो पुरे फॅमिली को पता चल जाता क विहान और अशिता क बचे हैं. तमाशा होता, कोई पुलिस में रिपोर्ट करता विहान को जेल होता अनिरुद और सुमन पर भी केस चलता. स्पेन में कुछ भी नहीं होता. वहां सब अल्लोवेद है. उम्मीद है आप क सवाल का जवाब दे दिया मैं ने :डी
 
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