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- Dec 5, 2013
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सुमित:- Aarav...Ye गिलास पकड़.
इतना कह कर सुमित गिलास आरव की और फेंकता hai...Aarav पकड़ लेता है.
सुमित:- बहुत सही Aarav...Agar गिरा देता तो 100 रुपैया का चुना लग जाता.
मेघा को समझ में नहीं आ रहा था की आखिर सुमित कर क्या रहा है.
आरव:- क्या भैया आप भी? अब्ब इतना कमाते हो फिर भी 100 की फ़िक्र?
सुमित:- अपने म्हणत का एक एक रुपैया का महत्वा hai...Abb थोड़ी न बाप के कमाई का ऐश कर सकता हूँ. :डी
एक नजर सुमित ने मेघा की और dekha...Kuch खुराफात दिमाग में आया.
सुमित:- वैसे भी शादी हो जाएगा तो बीवी और बच्चे छैन से जीने कहा देंगे.
बच्चे बाप का पैसे हवा में उड़ाएंगे जैसे मई उड़ाता था और Biwi...Ghar चलाने के लिए पूरा का पूरा जेब खाली कर degi...Fir भी उसका मन नहीं bharega...Behtar है अभी से एक एक रुपैया बचा कर रखो.
ये लाइन सुमित ने सिर्फ मेघा की और देख कर bola...Megha बस सुमित को घूरती है.
तब तक सुमित बड़े hi चालाकी से कोक की बोतल से स्टीकर फाड़ कर फेंक देता है और बोतल को हवा में उछाल कर दूसरे से पकड़ लेता है.
फिर आरव और अपना गिलास को अच्छे से साफ़ करके दोनों में कोक दाल कर मेघा और अनीता की तरफ बढ़ा देता है.
अनीता गिलास पकड़ लेती है लेकिन मेघा नहीं.
अनीता:- ये क्या है जीजू?
सुमित:- इतनी देर से तुम दोनों यहाँ हो लेकिन ठंडा या गरम भी पूछ नहीं sakta...Kyuki गरम के लिए चाय और कॉफ़ी बनाने की सामान नहीं hai...Issi लिए ठंडा hi दे रहा हूँ.
मेघा:- और ठंडा में दुसरो को वोडका पिलाया जाता है?
मेघा सामने आरव के पास के ब्लैक वोडका के बोतल को घूरती हुई बोली.
सुमित:- अरे कुछ नहीं hota...Bas जातक जाओ. :डी
मेघा:- अपने जैसा hi बेवड़ा समझ रखा है क्या?
इस बार मेघा की आवाज में गुस्सा tha...Maahaul एकदम से शांत हो gaya...Fir सुमित अनीता को इशारा करता है पीने के लिए.
अनीता:- नहीं jiju...Mai नहीं पीती हूँ.
सुमित:- मुझ पर भरोसा है?
अनीता:- मेघा से भी ज्यादा. :lol1:
मेघा:- बहुत हंसी आ रही है तुझे :माध:
सुमित:- फिर क्या hai...Bas जीजू पर भरोषा रखो और जातक जाओ.
अनीता एक बूँद पीती hai...Usse स्वाद जाना पहचाना लगता hai...Ek घूंट पीने के बाद पूरी गिलास जातक जाती है.
मेघा को अजीब लगता hai...Jis लड़की ने आज तक दारु को हाथ नहीं लगाया उसने पूरी गिलास ख़त्म कर दी ...कन्फूसिओं में खुद से hi बोलती है.
मेघा:- 42% कंसंट्रेशन :हम्म:
ये सुनते hi सुमित हसने लगता hai...Megha सुमित की हाथ से गिलास चीन कर एक घूंट पीती है.
फिर जैसे hi मेघा सुमित को देखती hai...Sumit के साथ साथ सभी हसने लगते है.
सुमित:- माफ़ कीजिये madam...Aapke साथ छोटा से बिना कैमरा वाला प्रैंक हुआ hai...Aap चाहे तो कैमरा की जगह मुझे देख सकती है. :डी
इस बात पर अनीता और आरव हनते है.
मेघा:- चल अनीता यहाँ से.
सुमित:- लेकिन तुम कुछ बताने आयी thi...Shayad जरुरी tha...Warna फ़ालतू की बात तुम बताने इतनी दूर क्यों आती?
इस बार सुमित की आवाज में व्यंग था.
मेघा फिर सुमित के पास आ जाती है.
मेघा:- जरुरी बात hi hai...Lekin तुम बोलने डोज तो ना!!
सुमित:- Bolo...Kaan खड़ा कर के सुन्न रहा हु.
मेघा:- मजाक बंद करो.
इस बार मेघा का गुस्सा देख..
सुमित:- अच्छा बताओ.
मेघा:- उस दिन तुमने राजू के साथ जो किया था उस वजह से राजू और सूरज गुस्से में hai..Tumhe सबक सिखाने की सोच रहे है.
सुमित:- Accha...Mai तो दर hi गया. :lol1:
सुमित इस बार सीरियस होने की एक्टिंग नहीं कर paaya...Aur आखिर में जोर जोर से हसने लगा.
मेघा:- हर बात मजाक नहीं hota...Samjha रही hu...Samajh जाओ.
सुमित:- Hmm...aur बताओ.
मेघा:- ये कोई कहानी है जो सुनाती रहूंगी?
बस सावधान रहो.
सुमित:- सतर्क भी रहूँगा. :डी
फिर सुमित को हंसी आ गया.
मेघा:- ये क्या मजाक लग रहा है तुम्हे? :माध:
सुमित:- Nahi...Tum मुझसे रूठने की दवा करती हो और मेरी फ़िक्र के लिए यहाँ तक आ gayi...Bas इसी ख़ुशी में.
इस बार सुमित की आवाज में सुकून था.
मेघा:- ज्यादा खुश मत ho...Baad में तुम्हारा हाल देख कर अफसोश ना ho...Issi लिए पहले hi बताने आ गयी.
इतना कह कर मेघा जाने लगी.
सुमित:- पिछली बार आया था तो शोल्डर डिस्लोकेशन कर के भेजा tha...Iss बार हिप डिस्लोकेशन कर के भेजूंगा.
उसका इलाज तो सर्जरी hi hai...Aise hi खेल खेल में ठीक नहीं hoga...Fir सोचता रहेगा बैठना कैसे है और उठना कैसे है.
मेघा पीछे मुद कर कहती है.
मेघा:- इस बार वो अकेला नहीं hai...Mera भाई सूरज भी उसके साथ होगा.
सुमित:- शायद कुछ भूल रही हो?
मेघा:- क्या?
सुमित:- याद है हमारे पहला गांव bhraman...Ussi वक्त तुम्हारे भाई के बारे में कुछ कहा था.
इस बार मेघा को याद करने में कोई दिक्कत नहीं हुआ.
सुमित:- और कैसा भाई है ये तुम्हारा सूरज? दीदी की ख़ुशी के लिए जीजू से मार भी नहीं खा सकता?
सुमित ने हँसते हुए कहा लेकिन मेघा उतना hi गुस्सा हो गयी.
मेघा:- खबरदार जो मेरे भाई को हाथ भी लगाया तो.
सुमित:- पता है तुमसे बुरा कोई नहीं होगा. :डी
इस बात से मेघा का गुस्सा और भड़क gaya...Wo गुस्से में सीधे वह से निकल गयी.
अनीता:- इतना क्यों तंग करते हो usse...Dekha न आपने गुस्सा हो गयी वो.
सुमित:- गुस्से से हो सही कुछ तो बोलती hai...Warna कान तरस गए है उसकी आवाज सुनने के liye...Aankhe भी थक जाते है उसके एक झलक के लिए.
3 दिन हो गए उससे mile...Milne भी तो नहीं aati...Intejaar में पूरा दिन निकल जाता hai...Bas यही क्लिनिक का थोड़ा सहारा है वक्त काटने के लिए.
अब्ब ऐसे में एक यही तो रायता है थोड़ा परेशान कर दो गुस्सा dilaao...Jo भी दिल में है सब पता चल जाएगा.
अनीता:- वाह jiju...Bahut चलाख हो आप.
सुमित:- अभी तुमने चलाखी देखा hi कब है :डी
अनीता:- देखने के लिए उत्सुकः हूँ.
इतना कह कर अनीता भी वह से निकल जाती है.
आरव:- वाह bhaiya...Aap तो कमाल ho...Thoda हमे भी सीखा दीजिये लड़की पटाने की कला.
सुमित:- जो बाँदा अपनी रूठी हुई प्रेमिका को मनाने के लिए इस काफी धुप में दिमाग खुजाये जा रहा है :hmm:...Abb उससे सीखेगा तू?
आरव:- आपको अभी भी लगता है की भाभी आपसे प्यार नहीं करती?
सुमित:- इतना बेवकूफ भी नहीं हु की मेघा की दिल की बात अभी भी समझ न पाउ.
आरव:- फिर?
सुमित:- क्या फिर?
आरव:- मुझे भी सिखाइये.
सुमित:- फुर्सत mein...Abhi सो जा.
आरव:- अब्ब आप भाव खा रहे है.
सुमित:- सो जा abhi...Warna रात को मेरा दिमाग खायेगा तू.
आरव:- मतलब?
सुमित:- शाम को मेला है गांव mein...Jo रात तक chalega...Mai तो अपने मेघा के साथ बिजी हो jaaunga...Tu बोर हो कर मेरा दिमाग खायेगा वापस लौटने के लिए की तुझे नींद आ रहा है.
आरव:- और आप सूरे कैसे है की भाभी भी आएँगी?
सुमित:- इंटेलिजेंस रिपोर्ट है.
आरव फिर हँसते हुए जाता है आराम करने के लिए.
शाम
मेला का तैयारी सुरु हुआ hi था की सुमित की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं tha...Megha जो दिख गया था उससे.
मेघा के पास जैसे hi वो पहुंचा मेघा वह से निकल जाती है.
जैसे hi रोड के दूसरी और खड़ा सूरज ये देखता है उसका गुस्सा नियंत्रण के बाहर चला जाता है.
गुस्से में वो सुमित की तरफ बढ़ hi रहा था की एक आउट ऑफ़ कण्ट्रोल ओवरस्पीड जीप सूरज को टक्कर मार देता hai...Aawaj इतना तेज था की सभी का ध्यान आकर्षण उस तरफ हो जाता है.
करीब 20 मीटर दूर जा कर गिरा Suraj...Girte hi खून से लेथ पथ थोड़ी देर में hi होश खो baitha...Jeep भी मौका का फायदा उठा कर भाग गया.
मेघा दौड़ कर सूरज के पास पहुँच जाती hai...Doctor होने की वजह से सूरज को देख उसके हालात का अंदाजा हो गया tha...Aur आखिर में हार मान कर सूरज के पास hi बैठ कर रोने लगती है...2 मिनट में hi मेघा की माँ और पापा भी आ जाते है जो यही मेला में thhe...Sabhi का हाल वैसा hi था.
शायद सुमित का bhi...Wo भी बस एक जगह बैठ देख रहा tha...Usne अपने करियर में बहुत लोगो को मरते देखा tha...Lekin ऐसे अपने आँखों के सामने कभी नहीं.
सुमित:- Aarav...Ye गिलास पकड़.
इतना कह कर सुमित गिलास आरव की और फेंकता hai...Aarav पकड़ लेता है.
सुमित:- बहुत सही Aarav...Agar गिरा देता तो 100 रुपैया का चुना लग जाता.
मेघा को समझ में नहीं आ रहा था की आखिर सुमित कर क्या रहा है.
आरव:- क्या भैया आप भी? अब्ब इतना कमाते हो फिर भी 100 की फ़िक्र?
सुमित:- अपने म्हणत का एक एक रुपैया का महत्वा hai...Abb थोड़ी न बाप के कमाई का ऐश कर सकता हूँ. :डी
एक नजर सुमित ने मेघा की और dekha...Kuch खुराफात दिमाग में आया.
सुमित:- वैसे भी शादी हो जाएगा तो बीवी और बच्चे छैन से जीने कहा देंगे.
बच्चे बाप का पैसे हवा में उड़ाएंगे जैसे मई उड़ाता था और Biwi...Ghar चलाने के लिए पूरा का पूरा जेब खाली कर degi...Fir भी उसका मन नहीं bharega...Behtar है अभी से एक एक रुपैया बचा कर रखो.
ये लाइन सुमित ने सिर्फ मेघा की और देख कर bola...Megha बस सुमित को घूरती है.
तब तक सुमित बड़े hi चालाकी से कोक की बोतल से स्टीकर फाड़ कर फेंक देता है और बोतल को हवा में उछाल कर दूसरे से पकड़ लेता है.
फिर आरव और अपना गिलास को अच्छे से साफ़ करके दोनों में कोक दाल कर मेघा और अनीता की तरफ बढ़ा देता है.
अनीता गिलास पकड़ लेती है लेकिन मेघा नहीं.
अनीता:- ये क्या है जीजू?
सुमित:- इतनी देर से तुम दोनों यहाँ हो लेकिन ठंडा या गरम भी पूछ नहीं sakta...Kyuki गरम के लिए चाय और कॉफ़ी बनाने की सामान नहीं hai...Issi लिए ठंडा hi दे रहा हूँ.
मेघा:- और ठंडा में दुसरो को वोडका पिलाया जाता है?
मेघा सामने आरव के पास के ब्लैक वोडका के बोतल को घूरती हुई बोली.
सुमित:- अरे कुछ नहीं hota...Bas जातक जाओ. :डी
मेघा:- अपने जैसा hi बेवड़ा समझ रखा है क्या?
इस बार मेघा की आवाज में गुस्सा tha...Maahaul एकदम से शांत हो gaya...Fir सुमित अनीता को इशारा करता है पीने के लिए.
अनीता:- नहीं jiju...Mai नहीं पीती हूँ.
सुमित:- मुझ पर भरोसा है?
अनीता:- मेघा से भी ज्यादा. :lol1:
मेघा:- बहुत हंसी आ रही है तुझे :माध:
सुमित:- फिर क्या hai...Bas जीजू पर भरोषा रखो और जातक जाओ.
अनीता एक बूँद पीती hai...Usse स्वाद जाना पहचाना लगता hai...Ek घूंट पीने के बाद पूरी गिलास जातक जाती है.
मेघा को अजीब लगता hai...Jis लड़की ने आज तक दारु को हाथ नहीं लगाया उसने पूरी गिलास ख़त्म कर दी ...कन्फूसिओं में खुद से hi बोलती है.
मेघा:- 42% कंसंट्रेशन :हम्म:
ये सुनते hi सुमित हसने लगता hai...Megha सुमित की हाथ से गिलास चीन कर एक घूंट पीती है.
फिर जैसे hi मेघा सुमित को देखती hai...Sumit के साथ साथ सभी हसने लगते है.
सुमित:- माफ़ कीजिये madam...Aapke साथ छोटा से बिना कैमरा वाला प्रैंक हुआ hai...Aap चाहे तो कैमरा की जगह मुझे देख सकती है. :डी
इस बात पर अनीता और आरव हनते है.
मेघा:- चल अनीता यहाँ से.
सुमित:- लेकिन तुम कुछ बताने आयी thi...Shayad जरुरी tha...Warna फ़ालतू की बात तुम बताने इतनी दूर क्यों आती?
इस बार सुमित की आवाज में व्यंग था.
मेघा फिर सुमित के पास आ जाती है.
मेघा:- जरुरी बात hi hai...Lekin तुम बोलने डोज तो ना!!
सुमित:- Bolo...Kaan खड़ा कर के सुन्न रहा हु.
मेघा:- मजाक बंद करो.
इस बार मेघा का गुस्सा देख..
सुमित:- अच्छा बताओ.
मेघा:- उस दिन तुमने राजू के साथ जो किया था उस वजह से राजू और सूरज गुस्से में hai..Tumhe सबक सिखाने की सोच रहे है.
सुमित:- Accha...Mai तो दर hi गया. :lol1:
सुमित इस बार सीरियस होने की एक्टिंग नहीं कर paaya...Aur आखिर में जोर जोर से हसने लगा.
मेघा:- हर बात मजाक नहीं hota...Samjha रही hu...Samajh जाओ.
सुमित:- Hmm...aur बताओ.
मेघा:- ये कोई कहानी है जो सुनाती रहूंगी?
बस सावधान रहो.
सुमित:- सतर्क भी रहूँगा. :डी
फिर सुमित को हंसी आ गया.
मेघा:- ये क्या मजाक लग रहा है तुम्हे? :माध:
सुमित:- Nahi...Tum मुझसे रूठने की दवा करती हो और मेरी फ़िक्र के लिए यहाँ तक आ gayi...Bas इसी ख़ुशी में.
इस बार सुमित की आवाज में सुकून था.
मेघा:- ज्यादा खुश मत ho...Baad में तुम्हारा हाल देख कर अफसोश ना ho...Issi लिए पहले hi बताने आ गयी.
इतना कह कर मेघा जाने लगी.
सुमित:- पिछली बार आया था तो शोल्डर डिस्लोकेशन कर के भेजा tha...Iss बार हिप डिस्लोकेशन कर के भेजूंगा.
उसका इलाज तो सर्जरी hi hai...Aise hi खेल खेल में ठीक नहीं hoga...Fir सोचता रहेगा बैठना कैसे है और उठना कैसे है.
मेघा पीछे मुद कर कहती है.
मेघा:- इस बार वो अकेला नहीं hai...Mera भाई सूरज भी उसके साथ होगा.
सुमित:- शायद कुछ भूल रही हो?
मेघा:- क्या?
सुमित:- याद है हमारे पहला गांव bhraman...Ussi वक्त तुम्हारे भाई के बारे में कुछ कहा था.
इस बार मेघा को याद करने में कोई दिक्कत नहीं हुआ.
सुमित:- और कैसा भाई है ये तुम्हारा सूरज? दीदी की ख़ुशी के लिए जीजू से मार भी नहीं खा सकता?
सुमित ने हँसते हुए कहा लेकिन मेघा उतना hi गुस्सा हो गयी.
मेघा:- खबरदार जो मेरे भाई को हाथ भी लगाया तो.
सुमित:- पता है तुमसे बुरा कोई नहीं होगा. :डी
इस बात से मेघा का गुस्सा और भड़क gaya...Wo गुस्से में सीधे वह से निकल गयी.
अनीता:- इतना क्यों तंग करते हो usse...Dekha न आपने गुस्सा हो गयी वो.
सुमित:- गुस्से से हो सही कुछ तो बोलती hai...Warna कान तरस गए है उसकी आवाज सुनने के liye...Aankhe भी थक जाते है उसके एक झलक के लिए.
3 दिन हो गए उससे mile...Milne भी तो नहीं aati...Intejaar में पूरा दिन निकल जाता hai...Bas यही क्लिनिक का थोड़ा सहारा है वक्त काटने के लिए.
अब्ब ऐसे में एक यही तो रायता है थोड़ा परेशान कर दो गुस्सा dilaao...Jo भी दिल में है सब पता चल जाएगा.
अनीता:- वाह jiju...Bahut चलाख हो आप.
सुमित:- अभी तुमने चलाखी देखा hi कब है :डी
अनीता:- देखने के लिए उत्सुकः हूँ.
इतना कह कर अनीता भी वह से निकल जाती है.
आरव:- वाह bhaiya...Aap तो कमाल ho...Thoda हमे भी सीखा दीजिये लड़की पटाने की कला.
सुमित:- जो बाँदा अपनी रूठी हुई प्रेमिका को मनाने के लिए इस काफी धुप में दिमाग खुजाये जा रहा है :hmm:...Abb उससे सीखेगा तू?
आरव:- आपको अभी भी लगता है की भाभी आपसे प्यार नहीं करती?
सुमित:- इतना बेवकूफ भी नहीं हु की मेघा की दिल की बात अभी भी समझ न पाउ.
आरव:- फिर?
सुमित:- क्या फिर?
आरव:- मुझे भी सिखाइये.
सुमित:- फुर्सत mein...Abhi सो जा.
आरव:- अब्ब आप भाव खा रहे है.
सुमित:- सो जा abhi...Warna रात को मेरा दिमाग खायेगा तू.
आरव:- मतलब?
सुमित:- शाम को मेला है गांव mein...Jo रात तक chalega...Mai तो अपने मेघा के साथ बिजी हो jaaunga...Tu बोर हो कर मेरा दिमाग खायेगा वापस लौटने के लिए की तुझे नींद आ रहा है.
आरव:- और आप सूरे कैसे है की भाभी भी आएँगी?
सुमित:- इंटेलिजेंस रिपोर्ट है.
आरव फिर हँसते हुए जाता है आराम करने के लिए.
शाम
मेला का तैयारी सुरु हुआ hi था की सुमित की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं tha...Megha जो दिख गया था उससे.
मेघा के पास जैसे hi वो पहुंचा मेघा वह से निकल जाती है.
जैसे hi रोड के दूसरी और खड़ा सूरज ये देखता है उसका गुस्सा नियंत्रण के बाहर चला जाता है.
गुस्से में वो सुमित की तरफ बढ़ hi रहा था की एक आउट ऑफ़ कण्ट्रोल ओवरस्पीड जीप सूरज को टक्कर मार देता hai...Aawaj इतना तेज था की सभी का ध्यान आकर्षण उस तरफ हो जाता है.
करीब 20 मीटर दूर जा कर गिरा Suraj...Girte hi खून से लेथ पथ थोड़ी देर में hi होश खो baitha...Jeep भी मौका का फायदा उठा कर भाग गया.
मेघा दौड़ कर सूरज के पास पहुँच जाती hai...Doctor होने की वजह से सूरज को देख उसके हालात का अंदाजा हो गया tha...Aur आखिर में हार मान कर सूरज के पास hi बैठ कर रोने लगती है...2 मिनट में hi मेघा की माँ और पापा भी आ जाते है जो यही मेला में thhe...Sabhi का हाल वैसा hi था.
शायद सुमित का bhi...Wo भी बस एक जगह बैठ देख रहा tha...Usne अपने करियर में बहुत लोगो को मरते देखा tha...Lekin ऐसे अपने आँखों के सामने कभी नहीं.