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- Dec 5, 2013
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आफ्टर 2 वीक्स
ऐसे hi 2 हफ्ते बीत gaye...Sumit के लिए ये 2 हफ्ता काफी अच्छा beeta...Roj के 4 घंटे मेघा के साथ...4 घंटे तो कहने के लिए tha...Kisi भी दिन ऐसा नहीं गया जब दोनों ने 5 घंटे से काम का वक्त साथ बिताया ho...Kabhi कभी तो 7 से 8 घंटे भी हो जाते थे.
लेकिन वक्त बदलते समय नहीं lagta...Sumit तो खुश tha...Shayad मेघा bhi...Baahar से भले hi सब सही दिख रहा हो लेकिन अंदर मन में क्या चल रहा होता है किसी को भी पता नहीं.
आज सुबह सुबह बुला लिया तुमने? क्या बात है.
हमेशा की तरह खुश आवाज में सुमित ने कहा.
मेघा:- कुछ बातें करनी है.
सुमित:- वो तो हमेशा करते hai...Kuch और करना हो...
सुमित की बात बिच में hi काट कर मेघा कहती है.
मेघा:- मई सीरियस हूँ.
सच में मेघा सीरियस थी इस baar...Aawaj से भी और चेहरे के भाव से भी.
सुमित:- हाँ kaho...Kya बात है?
इस बार सुमित भी सीरियस हो गया.
मेघा:- बहुत हो गया है Sumit...Abb और नहीं.
सुमित:- खुल कर bataao...Aisa लगता है की तुम कुछ कहना चाहती हो और साथ hi हिचकिचा रही हो.
मेघा:- वही समझ में नहीं आ रहा है.
सुमित:- ऐसा लग रहा है जैसे कोई शिकायत है mujhse...Kaho जो भी बात hai...Mujhe अच्छा लगे या फिर बुरा.
मेघा:- हाँ शिकायत hi hai...Shayad तुम्हे बुरा भी लग सकता hai...Lekin अभी तुम्हे ये बात साफ़ बता देना बहुत जरुरी है.
सुमित:- बताओ.
मेघा:- तुम्हे नहीं लगता हम एक hi जगह आ कर अटक गए hai...Pyaar की बातें करते hai...Roj साथ रहते है एक दूसरे के साथ वक्त बिताते hai...Lekin मुख्या चीज से hi दूर भाग रहे है.
सुमित:- किस चीज से?
मेघा:- बात ये नहीं था की तुम्हारा प्यार मेरे लिए सच्चा है या nahi...Ye भी नहीं की मई तुमसे प्यार करती हु या nahi...Balki ये था की हम हमेशा साथ रह पाएंगे या नहीं?
आज प्यार है? कल होगा या nahi...Vakt के साथ लोग बदलते है और साथ hi प्यार भी बदलेगा या nahi...Pyaar का रूप भी समय के साथ बदलता hai...Aaj हम दोनों की प्यार दीवानगी वाला hai...Kal शादी होने के बाद प्यार वैसा hi गहरा होगा लेकिन ये दीवानगी से बदल कर जिम्मेदारी वाला hoga...Fir बच्चे होने के बाद भी रूप बदलेगा और बुढ़ापे में bhi...Kya इतने वक्त भी हम दोनों का प्यार वैसा hi होगा?
सुमित:- तुम्हारा सभी सवाल के जवाब मेरे पास है...
मेघा:- अभी बात ख़त्म नहीं हुआ hai...Kuch और सवाल है.
सुमित बिना कुछ बोले अब्ब आगे की सवाल सुनने लगता है.
मेघा:- तुम में ये ऐटिटूड है की जब दुसरो को तुमसे मतलब नहीं तो तुम्हे भी nahi...Ye बहुत सही hai...Lekin क्या ये प्यार में सही रहेगा?
जैसे कीर्ति ने तुम्हे कोई मतलब नहीं दिया और छोड़ दिया तुम्हे देर से hi सही इस बात को मान लिया की तुमसे गलती हुई थी और तुमने भी कीर्ति को मतलब देना छोड़ diya...Jise तुम एक वक्त हद्द से ज्यादा प्यार करते थे आज उसकी कोई मूल्य नहीं hai...Sahi है लेकिन.
लेकिन अगर ये हम दोनों के बिच भी हुआ तो?
सुमित:- पागल हो क्या? हमारे बिच क्यों होगा ऐसा?
मेघा की इस सवाल ने सुमित की धैर्यता एक बार में hi तोड़ दिया.
मेघा:- क्यों नहीं हो sakta...Aaj नहीं hoga..Lekin kal...Abhi तो हम लवर्स hai...Aur अभी तुम्हे मुझे पाने की जिद्द hai...Aise में मेरी कोई भी गलती को तुम नजर अंदाज़ कर doge...Lekin कल जब शादी हो जाएगा और तुम मुझे पा चुके होंगे तब?
तब छोटी छोटी बात पर लड़ाई हो सकता है? और वही छोटी बात जब हद्द से पार हो जाएगा तब से दूरियां बनना सुरु हो jaayega...Man की duriyan...Aur वही कीर्ति वाली बात क्यों नहीं हो सकता है? पास भले hi रहेंगे लेकिन मन से? मन से जैसे तुमने कीर्ति को निकाला मुझे नहीं निकलोगे इस बात की क्या गारंटी है जब मई भी भाव देना बंद कर दूंगी.
सुमित कुछ कहने के लिए मुंह खोलने hi वाला था ki...Megha फिर से कहना सुरु करती है.
मेघा:- तुम्हारा गलती की बात नहीं कर रही hun...Abhi तो तुम्हारा कोई गलती नहीं है.
मैंने जो भी कहा उससे तुम मुझ से बदल do...Tumhari गलती की जगह वैसे hi मेरा गलती भी हो सकता hai...Lekin दोनों hi केस mein...Galti हमारा होगा.
और आखिर बात ये hi है की मैंने तुम्हे कहा था मुझे ये एहसास दिलाओ की मई तुम्हारे साथ कम्फर्टेबले रहूंगी या नहीं?
इसका जवाब ये 2 हफ्ते में बिलकुल भी नहीं mila...Agar कुछ समझ में आया तो तुम मुझसे कितना प्यार करते ho...Pyaar तो मई भी तुमसे करती hun...Ghum कर सवाल यही आता है की आज जो इतना प्यार है कल भी रहेगा?
और क्या गारंटी है की जो तुम्हारा ऐटिटूड दबा हुआ है कल छोटी छोटी बातों पर ये हावी हो काट हमारे बिच मन मुटाव नहीं होगा?
बस यही सवाल के जवाब चाहिए मुझे.
सुमित:- तुम्हारे सभी सवाल के जवाब मेरे पास hai...Jab प्यार में आज तक इतना कुछ झेल लिया है तो अब्ब साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा है सब कुछ.
2 हफ्ते से मई तुम्हे अपना प्यार नहीं दिखा रहा tha...Tumhare सवाल का जवाब hi दे रहा tha...Tumhare मेटि जिंदगी में होने से मेरा जिंदगी कैसे पूरा हो जाएगा और तुम्हारी जिंदगी में मई क्यों जरुरी हु? जो शायद समझा नहीं पाया.
मेघा:- जब इतने दिन से ये समझा नहीं पा रहे हो तो मुझे नहीं लगता की आगे समझा paaoge...Waise भी वक्त कुछ ज्यादा hi लग चूका है.
सुमित ने इस बार जवाब नहीं दिया.
मेघा:- आज रात तक का समय है तुम्हारे पास.
सुमित अभी भी शांत था.
मेघा:- आज 4 नहीं 5 घंटे तक का समय देती hun...Jarurat पड़ा तो कुछ aur...Lekin फिर भी हमे सवाल का जवाब नहीं मिला तो क्या फायदा आगे बढ़ कर.
जो बात आगे जा कर मुश्किल हो उससे अच्छा है की अभी कदम रोक de...Mushkil होगा लेकिन बेहतर भी यही होगा जिससे कुछ दिनों में भुला देंगे.
सुमित:- (इन हिज मंद) कितना आसान है न.
लेकिन सुमित ने ये नहीं कहा.
सुमित:- देखते है.
इतना कह कर सुमित वह से निकल गया.
वो बहुत उदास tha...Megha को जिस बात का एहसास वो कराना चाहता था उसमें वो असफल raha...Samjha नहीं पाया मेघा को एक दूसरे की जरुरत और महत्वा.
वो आगे बढ़ तो रहा था लेकिन अब्ब उससे समझ में नहीं आ रहा था की आगे क्या करना hai...Abb कैसे 5 घंटा में मेघा को उसके सवाल का जवाब देना है? बातो से नहीं बल्कि एहसास से.
आफ्टर 2 वीक्स
ऐसे hi 2 हफ्ते बीत gaye...Sumit के लिए ये 2 हफ्ता काफी अच्छा beeta...Roj के 4 घंटे मेघा के साथ...4 घंटे तो कहने के लिए tha...Kisi भी दिन ऐसा नहीं गया जब दोनों ने 5 घंटे से काम का वक्त साथ बिताया ho...Kabhi कभी तो 7 से 8 घंटे भी हो जाते थे.
लेकिन वक्त बदलते समय नहीं lagta...Sumit तो खुश tha...Shayad मेघा bhi...Baahar से भले hi सब सही दिख रहा हो लेकिन अंदर मन में क्या चल रहा होता है किसी को भी पता नहीं.
आज सुबह सुबह बुला लिया तुमने? क्या बात है.
हमेशा की तरह खुश आवाज में सुमित ने कहा.
मेघा:- कुछ बातें करनी है.
सुमित:- वो तो हमेशा करते hai...Kuch और करना हो...
सुमित की बात बिच में hi काट कर मेघा कहती है.
मेघा:- मई सीरियस हूँ.
सच में मेघा सीरियस थी इस baar...Aawaj से भी और चेहरे के भाव से भी.
सुमित:- हाँ kaho...Kya बात है?
इस बार सुमित भी सीरियस हो गया.
मेघा:- बहुत हो गया है Sumit...Abb और नहीं.
सुमित:- खुल कर bataao...Aisa लगता है की तुम कुछ कहना चाहती हो और साथ hi हिचकिचा रही हो.
मेघा:- वही समझ में नहीं आ रहा है.
सुमित:- ऐसा लग रहा है जैसे कोई शिकायत है mujhse...Kaho जो भी बात hai...Mujhe अच्छा लगे या फिर बुरा.
मेघा:- हाँ शिकायत hi hai...Shayad तुम्हे बुरा भी लग सकता hai...Lekin अभी तुम्हे ये बात साफ़ बता देना बहुत जरुरी है.
सुमित:- बताओ.
मेघा:- तुम्हे नहीं लगता हम एक hi जगह आ कर अटक गए hai...Pyaar की बातें करते hai...Roj साथ रहते है एक दूसरे के साथ वक्त बिताते hai...Lekin मुख्या चीज से hi दूर भाग रहे है.
सुमित:- किस चीज से?
मेघा:- बात ये नहीं था की तुम्हारा प्यार मेरे लिए सच्चा है या nahi...Ye भी नहीं की मई तुमसे प्यार करती हु या nahi...Balki ये था की हम हमेशा साथ रह पाएंगे या नहीं?
आज प्यार है? कल होगा या nahi...Vakt के साथ लोग बदलते है और साथ hi प्यार भी बदलेगा या nahi...Pyaar का रूप भी समय के साथ बदलता hai...Aaj हम दोनों की प्यार दीवानगी वाला hai...Kal शादी होने के बाद प्यार वैसा hi गहरा होगा लेकिन ये दीवानगी से बदल कर जिम्मेदारी वाला hoga...Fir बच्चे होने के बाद भी रूप बदलेगा और बुढ़ापे में bhi...Kya इतने वक्त भी हम दोनों का प्यार वैसा hi होगा?
सुमित:- तुम्हारा सभी सवाल के जवाब मेरे पास है...
मेघा:- अभी बात ख़त्म नहीं हुआ hai...Kuch और सवाल है.
सुमित बिना कुछ बोले अब्ब आगे की सवाल सुनने लगता है.
मेघा:- तुम में ये ऐटिटूड है की जब दुसरो को तुमसे मतलब नहीं तो तुम्हे भी nahi...Ye बहुत सही hai...Lekin क्या ये प्यार में सही रहेगा?
जैसे कीर्ति ने तुम्हे कोई मतलब नहीं दिया और छोड़ दिया तुम्हे देर से hi सही इस बात को मान लिया की तुमसे गलती हुई थी और तुमने भी कीर्ति को मतलब देना छोड़ diya...Jise तुम एक वक्त हद्द से ज्यादा प्यार करते थे आज उसकी कोई मूल्य नहीं hai...Sahi है लेकिन.
लेकिन अगर ये हम दोनों के बिच भी हुआ तो?
सुमित:- पागल हो क्या? हमारे बिच क्यों होगा ऐसा?
मेघा की इस सवाल ने सुमित की धैर्यता एक बार में hi तोड़ दिया.
मेघा:- क्यों नहीं हो sakta...Aaj नहीं hoga..Lekin kal...Abhi तो हम लवर्स hai...Aur अभी तुम्हे मुझे पाने की जिद्द hai...Aise में मेरी कोई भी गलती को तुम नजर अंदाज़ कर doge...Lekin कल जब शादी हो जाएगा और तुम मुझे पा चुके होंगे तब?
तब छोटी छोटी बात पर लड़ाई हो सकता है? और वही छोटी बात जब हद्द से पार हो जाएगा तब से दूरियां बनना सुरु हो jaayega...Man की duriyan...Aur वही कीर्ति वाली बात क्यों नहीं हो सकता है? पास भले hi रहेंगे लेकिन मन से? मन से जैसे तुमने कीर्ति को निकाला मुझे नहीं निकलोगे इस बात की क्या गारंटी है जब मई भी भाव देना बंद कर दूंगी.
सुमित कुछ कहने के लिए मुंह खोलने hi वाला था ki...Megha फिर से कहना सुरु करती है.
मेघा:- तुम्हारा गलती की बात नहीं कर रही hun...Abhi तो तुम्हारा कोई गलती नहीं है.
मैंने जो भी कहा उससे तुम मुझ से बदल do...Tumhari गलती की जगह वैसे hi मेरा गलती भी हो सकता hai...Lekin दोनों hi केस mein...Galti हमारा होगा.
और आखिर बात ये hi है की मैंने तुम्हे कहा था मुझे ये एहसास दिलाओ की मई तुम्हारे साथ कम्फर्टेबले रहूंगी या नहीं?
इसका जवाब ये 2 हफ्ते में बिलकुल भी नहीं mila...Agar कुछ समझ में आया तो तुम मुझसे कितना प्यार करते ho...Pyaar तो मई भी तुमसे करती hun...Ghum कर सवाल यही आता है की आज जो इतना प्यार है कल भी रहेगा?
और क्या गारंटी है की जो तुम्हारा ऐटिटूड दबा हुआ है कल छोटी छोटी बातों पर ये हावी हो काट हमारे बिच मन मुटाव नहीं होगा?
बस यही सवाल के जवाब चाहिए मुझे.
सुमित:- तुम्हारे सभी सवाल के जवाब मेरे पास hai...Jab प्यार में आज तक इतना कुछ झेल लिया है तो अब्ब साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा है सब कुछ.
2 हफ्ते से मई तुम्हे अपना प्यार नहीं दिखा रहा tha...Tumhare सवाल का जवाब hi दे रहा tha...Tumhare मेटि जिंदगी में होने से मेरा जिंदगी कैसे पूरा हो जाएगा और तुम्हारी जिंदगी में मई क्यों जरुरी हु? जो शायद समझा नहीं पाया.
मेघा:- जब इतने दिन से ये समझा नहीं पा रहे हो तो मुझे नहीं लगता की आगे समझा paaoge...Waise भी वक्त कुछ ज्यादा hi लग चूका है.
सुमित ने इस बार जवाब नहीं दिया.
मेघा:- आज रात तक का समय है तुम्हारे पास.
सुमित अभी भी शांत था.
मेघा:- आज 4 नहीं 5 घंटे तक का समय देती hun...Jarurat पड़ा तो कुछ aur...Lekin फिर भी हमे सवाल का जवाब नहीं मिला तो क्या फायदा आगे बढ़ कर.
जो बात आगे जा कर मुश्किल हो उससे अच्छा है की अभी कदम रोक de...Mushkil होगा लेकिन बेहतर भी यही होगा जिससे कुछ दिनों में भुला देंगे.
सुमित:- (इन हिज मंद) कितना आसान है न.
लेकिन सुमित ने ये नहीं कहा.
सुमित:- देखते है.
इतना कह कर सुमित वह से निकल गया.
वो बहुत उदास tha...Megha को जिस बात का एहसास वो कराना चाहता था उसमें वो असफल raha...Samjha नहीं पाया मेघा को एक दूसरे की जरुरत और महत्वा.
वो आगे बढ़ तो रहा था लेकिन अब्ब उससे समझ में नहीं आ रहा था की आगे क्या करना hai...Abb कैसे 5 घंटा में मेघा को उसके सवाल का जवाब देना है? बातो से नहीं बल्कि एहसास से.