Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 14 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 112

सुमित:- Aarav...Ye गिलास पकड़.

इतना कह कर सुमित गिलास आरव की और फेंकता hai...Aarav पकड़ लेता है.

सुमित:- बहुत सही Aarav...Agar गिरा देता तो 100 रुपैया का चुना लग जाता.

मेघा को समझ में नहीं आ रहा था की आखिर सुमित कर क्या रहा है.

आरव:- क्या भैया आप भी? अब्ब इतना कमाते हो फिर भी 100 की फ़िक्र?

सुमित:- अपने म्हणत का एक एक रुपैया का महत्वा hai...Abb थोड़ी न बाप के कमाई का ऐश कर सकता हूँ. :डी

एक नजर सुमित ने मेघा की और dekha...Kuch खुराफात दिमाग में आया.

सुमित:- वैसे भी शादी हो जाएगा तो बीवी और बच्चे छैन से जीने कहा देंगे.

बच्चे बाप का पैसे हवा में उड़ाएंगे जैसे मई उड़ाता था और Biwi...Ghar चलाने के लिए पूरा का पूरा जेब खाली कर degi...Fir भी उसका मन नहीं bharega...Behtar है अभी से एक एक रुपैया बचा कर रखो.

ये लाइन सुमित ने सिर्फ मेघा की और देख कर bola...Megha बस सुमित को घूरती है.

तब तक सुमित बड़े hi चालाकी से कोक की बोतल से स्टीकर फाड़ कर फेंक देता है और बोतल को हवा में उछाल कर दूसरे से पकड़ लेता है.

फिर आरव और अपना गिलास को अच्छे से साफ़ करके दोनों में कोक दाल कर मेघा और अनीता की तरफ बढ़ा देता है.

अनीता गिलास पकड़ लेती है लेकिन मेघा नहीं.

अनीता:- ये क्या है जीजू?

सुमित:- इतनी देर से तुम दोनों यहाँ हो लेकिन ठंडा या गरम भी पूछ नहीं sakta...Kyuki गरम के लिए चाय और कॉफ़ी बनाने की सामान नहीं hai...Issi लिए ठंडा hi दे रहा हूँ.

मेघा:- और ठंडा में दुसरो को वोडका पिलाया जाता है?

मेघा सामने आरव के पास के ब्लैक वोडका के बोतल को घूरती हुई बोली.

सुमित:- अरे कुछ नहीं hota...Bas जातक जाओ. :डी

मेघा:- अपने जैसा hi बेवड़ा समझ रखा है क्या?

इस बार मेघा की आवाज में गुस्सा tha...Maahaul एकदम से शांत हो gaya...Fir सुमित अनीता को इशारा करता है पीने के लिए.

अनीता:- नहीं jiju...Mai नहीं पीती हूँ.

सुमित:- मुझ पर भरोसा है?

अनीता:- मेघा से भी ज्यादा. :lol1:

मेघा:- बहुत हंसी आ रही है तुझे :माध:

सुमित:- फिर क्या hai...Bas जीजू पर भरोषा रखो और जातक जाओ.

अनीता एक बूँद पीती hai...Usse स्वाद जाना पहचाना लगता hai...Ek घूंट पीने के बाद पूरी गिलास जातक जाती है.

मेघा को अजीब लगता hai...Jis लड़की ने आज तक दारु को हाथ नहीं लगाया उसने पूरी गिलास ख़त्म कर दी ...कन्फूसिओं में खुद से hi बोलती है.

मेघा:- 42% कंसंट्रेशन :हम्म:

ये सुनते hi सुमित हसने लगता hai...Megha सुमित की हाथ से गिलास चीन कर एक घूंट पीती है.

फिर जैसे hi मेघा सुमित को देखती hai...Sumit के साथ साथ सभी हसने लगते है.

सुमित:- माफ़ कीजिये madam...Aapke साथ छोटा से बिना कैमरा वाला प्रैंक हुआ hai...Aap चाहे तो कैमरा की जगह मुझे देख सकती है. :डी

इस बात पर अनीता और आरव हनते है.

मेघा:- चल अनीता यहाँ से.

सुमित:- लेकिन तुम कुछ बताने आयी thi...Shayad जरुरी tha...Warna फ़ालतू की बात तुम बताने इतनी दूर क्यों आती?

इस बार सुमित की आवाज में व्यंग था.

मेघा फिर सुमित के पास आ जाती है.

मेघा:- जरुरी बात hi hai...Lekin तुम बोलने डोज तो ना!!

सुमित:- Bolo...Kaan खड़ा कर के सुन्न रहा हु.

मेघा:- मजाक बंद करो.

इस बार मेघा का गुस्सा देख..

सुमित:- अच्छा बताओ.

मेघा:- उस दिन तुमने राजू के साथ जो किया था उस वजह से राजू और सूरज गुस्से में hai..Tumhe सबक सिखाने की सोच रहे है.

सुमित:- Accha...Mai तो दर hi गया. :lol1:

सुमित इस बार सीरियस होने की एक्टिंग नहीं कर paaya...Aur आखिर में जोर जोर से हसने लगा.

मेघा:- हर बात मजाक नहीं hota...Samjha रही hu...Samajh जाओ.

सुमित:- Hmm...aur बताओ.

मेघा:- ये कोई कहानी है जो सुनाती रहूंगी?

बस सावधान रहो.

सुमित:- सतर्क भी रहूँगा. :डी

फिर सुमित को हंसी आ गया.

मेघा:- ये क्या मजाक लग रहा है तुम्हे? :माध:

सुमित:- Nahi...Tum मुझसे रूठने की दवा करती हो और मेरी फ़िक्र के लिए यहाँ तक आ gayi...Bas इसी ख़ुशी में.

इस बार सुमित की आवाज में सुकून था.

मेघा:- ज्यादा खुश मत ho...Baad में तुम्हारा हाल देख कर अफसोश ना ho...Issi लिए पहले hi बताने आ गयी.

इतना कह कर मेघा जाने लगी.

सुमित:- पिछली बार आया था तो शोल्डर डिस्लोकेशन कर के भेजा tha...Iss बार हिप डिस्लोकेशन कर के भेजूंगा.

उसका इलाज तो सर्जरी hi hai...Aise hi खेल खेल में ठीक नहीं hoga...Fir सोचता रहेगा बैठना कैसे है और उठना कैसे है.

मेघा पीछे मुद कर कहती है.

मेघा:- इस बार वो अकेला नहीं hai...Mera भाई सूरज भी उसके साथ होगा.

सुमित:- शायद कुछ भूल रही हो?

मेघा:- क्या?

सुमित:- याद है हमारे पहला गांव bhraman...Ussi वक्त तुम्हारे भाई के बारे में कुछ कहा था.

इस बार मेघा को याद करने में कोई दिक्कत नहीं हुआ.

सुमित:- और कैसा भाई है ये तुम्हारा सूरज? दीदी की ख़ुशी के लिए जीजू से मार भी नहीं खा सकता?

सुमित ने हँसते हुए कहा लेकिन मेघा उतना hi गुस्सा हो गयी.

मेघा:- खबरदार जो मेरे भाई को हाथ भी लगाया तो.

सुमित:- पता है तुमसे बुरा कोई नहीं होगा. :डी

इस बात से मेघा का गुस्सा और भड़क gaya...Wo गुस्से में सीधे वह से निकल गयी.

अनीता:- इतना क्यों तंग करते हो usse...Dekha न आपने गुस्सा हो गयी वो.

सुमित:- गुस्से से हो सही कुछ तो बोलती hai...Warna कान तरस गए है उसकी आवाज सुनने के liye...Aankhe भी थक जाते है उसके एक झलक के लिए.

3 दिन हो गए उससे mile...Milne भी तो नहीं aati...Intejaar में पूरा दिन निकल जाता hai...Bas यही क्लिनिक का थोड़ा सहारा है वक्त काटने के लिए.

अब्ब ऐसे में एक यही तो रायता है थोड़ा परेशान कर दो गुस्सा dilaao...Jo भी दिल में है सब पता चल जाएगा.

अनीता:- वाह jiju...Bahut चलाख हो आप.

सुमित:- अभी तुमने चलाखी देखा hi कब है :डी

अनीता:- देखने के लिए उत्सुकः हूँ.

इतना कह कर अनीता भी वह से निकल जाती है.

आरव:- वाह bhaiya...Aap तो कमाल ho...Thoda हमे भी सीखा दीजिये लड़की पटाने की कला.

सुमित:- जो बाँदा अपनी रूठी हुई प्रेमिका को मनाने के लिए इस काफी धुप में दिमाग खुजाये जा रहा है :hmm:...Abb उससे सीखेगा तू?

आरव:- आपको अभी भी लगता है की भाभी आपसे प्यार नहीं करती?

सुमित:- इतना बेवकूफ भी नहीं हु की मेघा की दिल की बात अभी भी समझ न पाउ.

आरव:- फिर?

सुमित:- क्या फिर?

आरव:- मुझे भी सिखाइये.

सुमित:- फुर्सत mein...Abhi सो जा.

आरव:- अब्ब आप भाव खा रहे है.

सुमित:- सो जा abhi...Warna रात को मेरा दिमाग खायेगा तू.

आरव:- मतलब?

सुमित:- शाम को मेला है गांव mein...Jo रात तक chalega...Mai तो अपने मेघा के साथ बिजी हो jaaunga...Tu बोर हो कर मेरा दिमाग खायेगा वापस लौटने के लिए की तुझे नींद आ रहा है.

आरव:- और आप सूरे कैसे है की भाभी भी आएँगी?

सुमित:- इंटेलिजेंस रिपोर्ट है.

आरव फिर हँसते हुए जाता है आराम करने के लिए.

शाम

मेला का तैयारी सुरु हुआ hi था की सुमित की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं tha...Megha जो दिख गया था उससे.

मेघा के पास जैसे hi वो पहुंचा मेघा वह से निकल जाती है.

जैसे hi रोड के दूसरी और खड़ा सूरज ये देखता है उसका गुस्सा नियंत्रण के बाहर चला जाता है.

गुस्से में वो सुमित की तरफ बढ़ hi रहा था की एक आउट ऑफ़ कण्ट्रोल ओवरस्पीड जीप सूरज को टक्कर मार देता hai...Aawaj इतना तेज था की सभी का ध्यान आकर्षण उस तरफ हो जाता है.

करीब 20 मीटर दूर जा कर गिरा Suraj...Girte hi खून से लेथ पथ थोड़ी देर में hi होश खो baitha...Jeep भी मौका का फायदा उठा कर भाग गया.

मेघा दौड़ कर सूरज के पास पहुँच जाती hai...Doctor होने की वजह से सूरज को देख उसके हालात का अंदाजा हो गया tha...Aur आखिर में हार मान कर सूरज के पास hi बैठ कर रोने लगती है...2 मिनट में hi मेघा की माँ और पापा भी आ जाते है जो यही मेला में thhe...Sabhi का हाल वैसा hi था.

शायद सुमित का bhi...Wo भी बस एक जगह बैठ देख रहा tha...Usne अपने करियर में बहुत लोगो को मरते देखा tha...Lekin ऐसे अपने आँखों के सामने कभी नहीं.
 
अपडेट 113

सुमित तेजी से उठ कर सूरज के पास पहुँचता है और थोड़ा एग्जामिनेशन करने के बाद...

सुमित:- प्राइमरी सर्वे कर लिया hai...Airway और ब्रीथिंग ठीक hi लग रहा hai...Bleeding को रोकना जरुरी hai...Sir पे चोट लगा नहीं hai...Bach सकता है.

अचानक hi आत्मविश्वाश से सुमित ने कहा.

मेघा:- लेकिन...

सुमित:- लेकिन वेकिन कुछ nahi...Abhi एक्सप्लनेशन देने का भी टाइम नहीं है.

जल्दी से किसी गाडी तैयार करो.

यहाँ हॉस्पिटल भी तो होना चाहिए.

बिच में से एक आदमी बोलै.

20 कम दूर है.

दूसरे आदमी ने जवाब दिया.

लेकिन वो तो हड्डी और एक्सीडेंट के लिए है.

पहला आदमी ने कहा.

सुमित:- काम हो jaayega...Koi गाडी की व्यवस्था कीजिये.

पहला आदमी:- पगला गए हो kya...Keh रहा हूँ उस हॉस्पिटल में हड्डी के डॉक्टर है और इसका (सूरज) खून पेट और छाती से बह रहा है.

सुमित:- मई हूँ.

आदमी:- जहर फुख करने या फिर प्राथना?

सुमित:- सर्जरी.

इस बार सुमित को भी गुस्सा आ गया लेकिन वो फिलहाल गाडी की जुगाड़ में लगा tha...Abb तक मेघा के पापा उठ कर गाडी की व्यवस्था के लिए निकल पड़े थे.

आदमी:- अब्ब तो कोई भी ऐरा गैर सर्जरी करने की बात कर रहा hai...Dekho बीटा ऐसे इमोशनल होने की जरुरत नहीं hai...Thande दिमाग से काम लो और वास्तविकता को स्वीकार कर लो.

एक तो पहले से तनाब का माहौल ऊपर से ये बकवास baatein...Abb सुमित से रहा नहीं गया.

सुमित:- अब्ब सर्जन सर्जरी नहीं करेगा तो क्या आप जैसे बड़बोला करेगा?

आदमी:- Surgeon...Dekhne से तो नहीं लगता.

सुमित:- दिखने में तो आप भी गधा लगते hai...Lekin है क्या?

सुमित की इस बात पर सभी हसने लगते है.

सुमित:- फ्री का कॉमेडी शो चल रहा hai...Abb अगर किसी के पास थोड़ा भी वक्त हो सही काम के लिए तो राष्ट बताने का कष्ट करेंगे?

हर बीत रहा पल सुमित की बेचैनी बढ़ा रहा था.

एक आदमी आ कर सुमित को राष्ट बताता hai...Tab तक मेघा की पापा भी एक गाडी ले कर आ चुके थे.

म. डैड:- ये रहा बीटा गाडी.

गाडी में सूरज को बिठाने के बाद..

सुमित:- कोई तेजी से गाडी चला सकता है?

आरव:- Mai...Accha एक्सपीरियंस hai...Aapse hi कम्पटीशन tha...Aap बाइक तेज चलाते थे तो मई कार...

आरव कुछ बोलता उससे पहले hi...

सुमित:- ये बातें बाद mein...Tu तेज चला सकता है यही बड़ी बात hai...Megha तुम भी गाडी में baitho...Bas याद रखना प्रेशर से किसी भी आर्टरी और वीन का ब्लीडिंग रोका जा सकता hai...Koshish करो बाहर के ब्लड वेसल्स के ज्यादा से ज्यादा ब्लीडिंग रोकने की.

मेघा सर हां में हिलाती है.

सुमित:- (तो आरव) हाँ याद आया गांव के थोड़ा hi बाहर एक जगह है जहा से तू कोई भी फ्लूइड रिंगेर्स लैटते या फिर नार्मल सेलाइन ले कर सूरज को चड्ढा dena...Circulation मेन्टेन करना इम्पोर्टेन्ट है.

(तो मेघा) ब्लड ग्रुप क्या है सूरज का.

मेघा:- ा पॉजिटिव.

सुमित:- तुम लोग जल्दी pahucho...Mai उस ट्रामा हॉस्पिटल में जा कर बात करता हूँ और सभी प्रिपरेशन जल्द hi सुरु करता हूँ जो भी जरुरी है.

इतना कह कर थोड़ी दूर पार्क अपनी बाइक की और जाता hai...Kuch hi सेकंड में सुमित की बाइक हवा से बात करने लगता है.

मेघा की हालत ख़राब tha...Aur वैसा hi उसके माँ और पापा का भी.

अभी भी मेघा के दिल और दिमाग में बहुत सी बातें चल रहा tha...Dar पर भी कोई काबू नहीं tha...Bas एक चमत्कार की hi उम्मीद था.

सुमित को सर्जिकल गाउन में देख उम्मीद तो बढ़ा लेकिन सूरज की हालत याद आते hi दर फिर से हावी कर दिया.

वो सुमित के करीब जा hi रही थी की सुमित ने इशारा से रोक दिया.

सुमित:- पूरी तरह से स्टेराइल हूँ अभी दूर raho...Infection का रिस्क नहीं ले sakta...Suraj के लिए ठीक नहीं होगा.

सूरज के ओट रूम पहुँच जाने के बाद.

सुमित:- भरोषा rakho...Ek एक पल अमूल्य है ... बेकार जाने नहीं दूंगा.

फिर सुमित ओट रूम में चला देता hai...Assist करने के लिए आरव और वही के ओर्थपेडीक सर्जन भी थे.

बाहर का माहौल नाजुक tha...Aur उसको बढ़ाने के काम धीमी गति से बढ़ रहा वक्त कर रहा था.

मेघा एक कोने में कड़ी thi...Uske पापा पास आते है.

मेघा:- Papa...Suraj को कुछ होगा तो...

वो आगे कुछ बोलता उससे पहले...

म. डैड:- भरोषा है mujhe...Sumit सब कुछ ठीक कर dega...Abb तो इतना मुलाकात हो चूका है की वो क्या क्या कर सकता है और कितनी काबिलियत है ये आसानी से बता सकता हूँ.

एक्सीडेंट के टाइम से hi देखा है उसका जोश सूरज को बचने के liye...Vishwash है की वो कुछ भी कर सकता है अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए राष्ट भले hi कितना भी मुश्किल हो.

मेघा:- सुमित की काबिलियत पर शक नहीं hai...Lekin सूरज का हाल देख कर बहुत दर लग रहा hai...Khoon बहुत बह चूका hai...Aur शायद डॉक्टर नहीं होती तो भरोषा करके सब कुछ सुमित पर छोड़ देती लेकिन डॉक्टर होने की वजह से पता है की कितना नाजुक केस है.

म. माँ:- वो कितना अच्छा डॉक्टर बन सकता है इस बात का अंदाजा उसी वक्त हो गया था जब पहले hi मुलाक़ात में तेरी दादी को दम (अस्थमा) की दवाई कैसे लेना है वो सीखा diya...Jab की तुम लोग का पढाई सुरु hi हुआ था.

बस ऐसे hi बातों से मनोबल को बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे sab...Bich बिच में दर भी हावी होता था तो कभी उम्मीद की किरण.

अब्ब सर्जरी को 5 घंटे से भी ज्यादा हो गया tha...Sabhi के मन बिचलित होने के साथ धैर्य भी जवाब देने लगा था.

तभी ओट रूम का गेट खुल gaya...Aur सबसे पहले बाहर nikla...Sumit.

सुमित को देखते hi सब उसके पास पहुँच गए.

सभी को देख सुमित के होंठ में एक मुस्कान aaya...Muskaan ऐसा था की किसी को समझ में नहीं आया की ये ख़ुशी का है या दुःख ka...Surgery सफल होने की ख़ुशी की मुस्कान या इतनी कोशिश के बावजूद असफल होने की दुःख का मुस्कान.

सुमित आँखें बंद कर लेता है...2 बूँद आंसू आँखों से निचे गिर पड़ता है.

मेघा:- क्या हुआ सुमित?

दर भरी आवाज में मेघा ने पूछा.

सुमित कुछ बोलने hi वाला था लेकिन अचानक से वो वह से निकल गया और थोड़ी दूर बेंच में जा कर हाथ से आँखों को बंद कर वही बैठ गया.

इससे सभी दर gaye...Megha सुमित के पास जाने hi वाली थी की गेट से ओर्थपेडीक सर्जन भी आ गए.

मेघा:- Doctor...Kya हुआ? अब्ब कैसा है मेरा भाई?

ो. सर्जन:- तो आप है उनके रिलेटिव?

मेघा:- Haan...Abb प्लीज बताइये कैसा है सूरज?

मेघा से और रहा नहीं जा रहा था.

ो. सर्जन:- ये एक होपलेस केस tha...Pehle hi पता चल गया था की कुछ नहीं होने वाला इस केस mein...Khoon hi इतना बह चूका tha...Upar से मल्टीप्ल इंटरनल इंजरीज bhi...Grade 2 लिवर एंड स्प्लीन injury...Aur साथ hi बहुत जगह से ब्लड वेसल रप्चर और ब्लीडिंग जिसको इतने काम टाइम में रिपेयर करने के लिए एक एक्सपेरिएंस्ड ट्रामा सर्जन की जरुरत पड़ता जो की यहाँ नहीं था.

अब्ब शायद सबको उनका जवाब मिल गया tha...Kuch hi पल में आँखों से आंसू की धरा बहने लगा और गले से रोने की आवाज निकलता उससे पहले hi

ो. सर्जन:- आपको वह बैठे सर्जन (सुमित) को शुकिर्या कहना चाहिए जिसने एक होपलेस केस में भी जान फंक दिया और मुझे गलत साबित कर diya...Uska वो Surgery...Gyaan और कला का वो drishya...Itne साल के अनुभव में बहुत hi काम देखा है.

पहले तो मई इस सर्जरी के बिलकुल खिलाफ tha...Time वास्ते लग रहा tha...Lekin उसकी baatein...Pata नहीं कैसे लेकिन अपनी बात मना hi liya...Baat करने सेले कर हर एक चीज बिलकुल perfect...Knowledge और Skill...Bataane के लिए शब्द काम पद जायेंगे.

जैसे hi पेट को चिर कर अंदर बढ़ा हर एक आर्टरी और उसका ब्रांच का नॉलेज था उससे. यहाँ तक की आर्टरी के आखिर तक के ब्रांच को लगते (सतोप्पिंग ब्लीडिंग बी सर्जिकल प्रोसीजर) किया. हमारा ऑपरेशन सेंटर इतना भी एडवांस्ड नहीं hai...Electrocautery नहीं hai...Jisse आसानी से ब्लीडिंग स्टॉप किया जा sake...Bas लीगतिओं hi एक ऑप्शन tha...Jismein उससे महारथ हासिल tha...Itne काम टाइम में इतने आर्टरीज और वीन को लगते कर दिया देख कर hi हैरानी हो रहा था.

उस सर्जन की आवाज में अभी भी हैरानी tha...Kabhi वो सुमित को देखते तो कभी मेघा और उसके परिवार की और देख सुमित की भर भर के तारीफ़ करते.

म. डैड:- आपसे भी अच्छा सर्जरी किया सुमित ने?

ो. सर्जन:- मेरा तो मैं फोकस ओर्थपेडीक सर्जरी में hai...Ye उसका फील्ड था मई तो बस असिस्ट कर रहा tha...Lekin विश्वाश कीजिये इसके फील्ड में आज जो इसने कर दिखाया है बहुत काम सर्जन कर पाते hai...Wo भी इतने काम एक्सपीरियंस में.

अब्ब मेघा तेजी से सुमित की और बढ़ती है.

सुमित:- Paani...Jaldi से पानी ले कर aao....Thanda paani...Fridge का.

दर्द भरी आवाज में सुमित ने कहा.

मेघा पानी ला कर देती hai...Sumit वो पानी पीने की जगह तेज गति से चल कर ओट के पास के वाशरूम में जाता है.

2 मिनट बाद वापस निकलता hai...Chehra और बाल पूरी तरह से भींगा हुआ था.

सुमित:- माफ़ kijiye...Tabhi बात करने की हालत में नहीं tha...Thak चूका hun...Mentally...Ek तो कल रात भर सोया नहीं था और आज ये accident...Suraj को बचने के लिए खुद की थकान से भी एक युद्ध लड़ रहा tha...Jo भोलेनाथ की कृपा से सब कुछ ठीक रहा.

ो. सर्जन:- कितना भी बड़ा सर्जन क्यों ना ho...Har सर्जरी के पहले ऊपरवाला हमेशा याद आते hai...Especially इमरजेंसी सर्जरी में. :)

म. डैड:- पता नहीं beta...Kya जाहु कुछ समझ में नहीं आ रहा hai...Bas तुम्हारा ये एहसान....

सुमित:- एहसान की बातें फिर कभी करेंगे uncle...Abhi हालात ठीक नहीं hai...Aankh और सर में बहुत दर्द हो रहा hai...Neend की बहुत शख्त जरुरत है.

मेघा:- कल रात क्यों नहीं सोये?

मेघा की आवाज में बहुत बदलाव आया.

सुमित:- तुम सोने डौगी तो न?

किसी तरह मुस्कुरा कर सुमित ने कहा.

सुमित:- तुमने जो बम फोड़ा था की तुम्हारा शादी होने वाली hai...Neend कहा से आएगी :वेरिसद:

फिर सुमित वह से निकलने लगा.

ो. सर्जन:- कुछ कांटेक्ट तो देते जाओ?

सुमित:- कल आऊंगा sir...Abhi कुछ देर और रहूँगा तो सच में पागल हो jaaunga...Fir आपको मेरे लिए साइकियाट्रिक वार्ड अलग से खोलना पड़ेगा. :डी

इस बात पर सभी मुस्कुराने लगे.

सब खुश thhe...Jo उम्मीद मेघा और उसके माँ, पापा और घर बैठी दादी छोड़ चुके थे वो चमत्कार आखिर हो hi gaya...Sumit के लिए सभी की इज्जत और बढ़ gaya...Abb बस उन्हें सूरज से मिलना tha...Jiske लिए कुछ देर का इंतजार और बाकी था.
 
अपडेट 114

अभी कितना वक्त सूरज को हॉस्पिटल में रखना पड़ेगा?

अगला दिन सुबह सुमित हॉस्पिटल में आते hi मेघा की पापा ने पूछा.

सुमित:- शॉक.

एक नजर सुमित ने सभी को देखा और फिर कहना सुरु किया.

सुमित:- शॉक मतलब शरीर के अंग (ऑर्गन) में खून बहुत काम जाना होता hai...Pehle एक्सीडेंट के टाइम सबसे खतरनाक चीज था ह्य्पोवोलेमिक shock...Matlab खून ज्यादा बह गया tha...Khoon की कमी से ऑर्गन फेलियर की वजह से जान जाने की बहुत ज्यादा चांस tha...Sahi वक्त में ब्लीडिंग को रोक कर वो खतरा तो ताल गया.

अब्ब एक और खतरा hai...Septic shock...Matlab इन्फेक्शन की वजह से ब्लड वेसल्स में इंजरी होता है और उसकी वजह से खून हर एक अंग में नहीं पहुँच पाटा है और उसी के साथ इन्फेक्शन हर एक अंग में फैलने के कारण multi-organ फेलियर हो सकता है.

सूरज का स्किन पहले hi कंटामिनटेड था जहा से खून बह रहा था.

सुमित का इतना hi कहना था की...

म. माँ:- खतरा अभी भी बाकी है.

एकदम से सभी के चेहरे में दर के भाव आ गए.

सुमित:- हाँ भी और नहीं भी.

एक लम्बा सांस ले कर सुमित ने समझाना सुरु किया.

सुमित:- सर्जरी के वक्त hi कंटामिनटेड part को साफ़ कर दिया tha...Aur एंटीबायोटिक्स भी चल रहा hai...Abhi तक स्टेबल है Suraj...Lekin हॉस्पिटल में अभी रखना padega...Iske अलावा कुछ पोस्ट ऑपरेटिव केयर भी बाकी है.

कुछ दिन मॉनिटरिंग में रखने के बाद डिस्चार्ज हो जाएगा.

इस बात से सभी को सुकून मिला.

सुमित:- कल रात की तूफ़ान के बाद भी सब कुछ ठीक है मतलब खतरा ताल चूका है.

कल अपने प्रैक्टिस से भी काफी ज्यादा म्हणत करना पड़ा था वक्त को ध्यान में रख कर बाकी तो बस सही वक्त में सही कदम चलने का hai...Kuch नहीं होगा सूरज को.

आत्मविश्वाश से भरी आवाज के साथ सुमित ने मेघा की माँ और पापा को देख कर कहा.

इसके बाद ओर्थपेडीक सर्जन से कुछ बातें करने के बाद.

आरव:- यकीं नहीं होता है bhaiya...Mai तो हार मान hi चूका था.

सुमित:- मेरे अलावा सभी हार मान चुके थे क्या? :डी

सभी की तरफ देख मुस्कुराते हुए सुमित ने पूछा.

सुमित:- खैर ये बात भी काफी देर से hi सीखा की कभी भी हार नहीं मानना chahiye...Acche दिन और वक्त हमेशा हमारा इंतजार कर रहा होता है.

ये बात सुमित ने मेघा को देख कर kaha...Megha को समझ में अनहि आ रहा था की कैसे रियेक्ट करे.

सुमित:- अगर यहाँ पर हार मान गया तो जिंदगी से hi हार जाऊँगा. :डी

अब्ब मेघा सुमित से नजर हटा लेती है.

सुमित:- मेघा.

मेघा:- हम्म.

सुमित:- एक जरुरी बात hai...Chalo मेरे साथ.

सभी के आगे मेघा को कुछ समझ में नहीं आ रहा tha...Wo अपने पापा की और देखती है.

म. डैड:- जाओ.

.

.

.

.

मेघा:- हाँ कहो.

सुमित:- याद है जब कीर्ति से मई अलग हो गया था तब तुमने कहा था "जो होता है अच्छे के लिए होता है." उस वक्त तो बहुत गुस्सा आया था ये सुन kar...Lekin अब्ब सही लग रहा है.

मेघा:- ये कौनसी नयी बात है? बिना बात को सोचे समझे रियेक्ट करना तो तुम्हारा आदत है?

मेघा की इस बात पर सुमित कुछ देर तो चुप रहा फिर मुस्कुराने लगा.

मेघा:- वैसे क्या अच्छा हो गया तुम्हारे लिए?

सुमित:- मेरे लिए नहीं तुम्हारे लिए?

मेघा:- क्या?

सुमित:- याद है जब रेजीडेंसी के आखिरी महीने में तुम्हे इग्नोर करता tha...Wo तुम्हारे लिए अच्छा hi था.

मेघा:- हाँ अब्ब अपना गलती को छुपाने के लिए कोई भी नयी कहानी सुना दो.

सुमित:- देखा इस बार तुमने बिना सोचे समझे गुस्से में रियेक्ट कर दिया.

फिर सुमित हसने लगता है जिससे मेघा और छिड़ जाती है.

मेघा:- काम की बात karo...Bakwas नहीं.

सुमित:- उस टाइम hi मैंने वैस्कुलर सर्जरी (ब्लड वेसल्स) सीखा tha...Bahut hi टफ सर्जरी लगता है personally...Uss वक्त थोड़ा बहुत सिख तो गया था.

बस उसी एक्सपीरियंस पर विश्वाश करके सूरज का सर्जरी कर रहा tha...Jo अच्छे से हो गया.

मेघा:- इस में मेरा क्या अच्छा हुआ? तुम्हारा सर्जरी सफल रहा, तुम्हारा आत्मविश्वाश बढ़ा hai...Accha तो तुम्हारे लिए हुआ?

सुमित:- भाई तुम्हारा है, देखा था तुम्हारा दर्द जो मुझसे सहा नहीं जा रहा tha...Mera तो साला hai...Jisse मुझे कोई खास लगाव नहीं है.

मेघा इस बात पर सुमित को गुस्से से घूरती है.

सुमित:- सच यही hai...Baad में अच्छा लग जाए अलग बात hai...Aur वैसे भी आत्मविश्वाश बढ़ाने के लिए कोई भी सर्जन इतना इमरजेंसी सर्जरी और ऐसे उन्स्तब्ले कंडीशन वाला केस तो अपने हाथ में बिलकुल नहीं लेता है.

मेघा:- मुझे लगा तुम यहाँ बुला कर हमदर्दी बटोर कर मुझे मनाने की कोशिश करोगे? लेकिन तुम तो मुझे और भी गुस्सा दिला रहे हो?

सुमित:- ग़लतफहमी है tumhara...Jo मुझे किसी को मनाने के लिए ऐसी नीच हरकत करना pade...Agar मुझे लग गया की सामने वाला मानने को तैयार नहीं तो मई खुद उससे दूर चला jaaunga...Kirti की वक्त के गलती नहीं दोहराऊंगा.

मेघा:- तो तुम्हे उम्मीद है की मई मान जाउंगी?

सुमित:- है इसी लिए लगा हूँ.

मेघा:- अगर ये उम्मीद टूट गया तो?

सुमित:- चला जाऊँगा.

दर्द भरी आवाज में hi सही लेकिन मेघा की आँखों में देख कर कहा सुमित ने.

मेघा:- और वो दिल टूटने की दर्द?

सुमित:- वो तो सेहत hi आ रहा हूँ पिछले 10 साल से. :D...Aur झेल लूंगा कुछ saal...Lekin फैसला कर लिया है की जिंदगी में हमेशा खुश rahunga...Chahe ख़ुशी की नयी वजह क्यों ना ढूंढ़ना पड़े.

अभी मेरे लिए सबसे बड़ी ख़ुशी तुम ho...Abhi मेरे दिल का जो हाल है वो भले hi शब्दों से दिखा न पाउ लेकिन पिछले कुछ वक्त से तुम्हारे लिए जो प्यार है मेरे दिल में वो बहुत hi ख़ास hai...Tumhara साथ मिल गया तो सिर्फ ख़ुशी नहीं जिंदगी के हर एक पल नयी उचाई साथ साथ चढ़ने की मजा hi कुछ और होगा.

हाँ कभी कभी छोटे मोठे झगडे भी होंगे जैसे अभी हो रहा है उससे भी संभाल lenge...Do पल का साथ थोड़ी न है जिंदगी भर ka...Budhaape में बहके hi शरीर कमजोर हो कर चल न सके लेकिन दिल उतना मजबूत जरूर होगा की तब तक भी एक दूसरे को समझ सके और आखिरी सांस तक एक दूसरे का साथ बना रहे.

सुमित की ये बात मेघा की दिल को छू gaya...Abb आवाज में नरमी के साथ.

मेघा:- सच bataao...Ye सर्जरी तुमने क्या सिर्फ मेरे लिए किया था?

सुमित:- सिर्फ तुम्हारे लिए तो nahi...Haan लेकिन तुम्हारे वजह से अपना सारा कुछ झोंक दिया tha...Kisi भी तरह से सूरज को बचाना tha...Tumhare liye...Tumhare ख़ुशी के लिए.

वैसे मैंने इमरजेंसी सर्जरी कभी अस ा लीड नहीं kiya...Residency में भी अस ा असिस्टेंस hi किया tha...Kismat अच्छा है की आज तक सभी में पेशेंट की जान बचा है.

आगे का सोचा नहीं tha...Iss बार जान बचा पाया हूँ तो इसी मोटिवेशन से मुश्किल से मुश्किल कंडीशन में भी पेशेंट की जान बचाने की पूरी कोशिश रहेगा.

कुछ देर के चुप्पी के बाद.

सुमित:- सूरज से ज्यादा बातें नहीं हुआ होगा tumhara...Chalo चलते है.

मेघा:- एक मिनट.

सुमित बिना कुछ कहे बस वही खड़ा रहता है.

मेघा:- कुछ कहना है tumse...Lekin कैसे समझ में नहीं आ रहा है?

सुमित:- अब्ब बता भी दो सच और अपनी दिल की baat...Kab तक ऐसे hi झूट बोल कर अपने पीछे घुमाती रहोगी? :डी

मेघा:- वो बात नहीं है.

सुमित:- फिर.

कुछ देर चुप रहने के बाद मेघा कहना सुरु करती है.

मेघा:- तुम बहुत अच्छे हो...

सुमित:- कुछ नया bolo...Ye तो मई जानता हूँ. :डी

मेघा:- अगली बार बिच में कुछ बोलै तो देख लेना.

फिर मेघा बोलना जारी रखती है.

मेघा:- जानती हूँ रम मुझसे बहुत प्यार करते ho...Aur मुझे खुश रखने के लिए कुछ भी करोगे.

लेकिन मुझे लगता है मई फिर भी तुम्हारे साथ खुश नहीं रह पाउंगी.

सुमित:- क्यों?

हैरानी में एकदम से सुमित की मुंह से निकला.

मेघा:- बहुत डिफरेंसेस नजर आ रहे है हमारे bich...Jab से तुम मुझसे अलग होने की कोशिश कर रहे थे उसी वक्त से बहुत कुछ मुझे ऐसा महसूस होने लगा की हमारे बिच शायद सब कुछ ठीक नहीं rahega...Galti किसी की भी नहीं hai...Fir भी.

इसी लिए तुम्हे बिना बताये hi वपव चली aayi...Mujhe महसूस हो गया की हमें अलग हो जाना hi ठीक रहेगा.

सुमित भी अब्ब सोच में पद गया.

सुमित:- इसका सलूशन क्या है फिर?

मेघा:- हमारा अलग हो जाना?

सुमित:- कुछ और ? ये कैसा सलूशन है?

इस बार सुमित की आवाज में भी थोड़ा गुस्सा था.

मेघा:- वो तुम जानो.

कुछ देर सोचने के बाद सीमित ने कहा.

सुमित:- एक तरीका तो hai...Lekin तुम नहीं मानोगी.

मेघा:- क्या?

सुमित:- हम अलग थे इस वजह से ये विश्वाश भी टूटा होगा.

कुछ समय और साथ बिताना hoga...Ek बार फिरसे एक दूसरे को जानना समझना hoga...Shayad काम बन जाए.

मेघा:- इतने साल से साथ hi तो थे? तब कुछ नहीं हुआ तो अब्ब कुछ वक्त में क्या हो जाएगा?

सुमित:- उस वक्त मई वो सुमित नहीं tha...Tab तुमसे प्यार नहीं करता था और जब करता था तो तुम्हारे पास आना नहीं चाहता था.

लेकिन अब्ब तो तुमसे प्यार करता हूँ तुम्हे एहसास कराना चाहता हूँ की तुम मेरे लिए क्या हो? मई तुम्हारे लिए क्या क्या कर सकता हूँ?

सुमित की ये बात सुनने और कुछ देर सोचने के बाद.

मेघा:- मुझे नहीं लगता है ये काम करेगा?

सुमित:- अगर सोचने भर से सब कुछ वैसा hi हो जाता तो हर कोई सिर्फ सोचता कोई कुछ नहीं करता.

सुमित की आवाज में अब्ब बेचैनी बी साफ़ दिख रहा था.

सुमित:- कर के देखने में क्या hi जाता hai...Agar बात नहीं बना तो वैसे भी चला hi जाऊँगा.

वादा करता हूँ अगर मुझे लगा की सच में हमारे बच डिफरेंस है और हम साथ नहीं रह सकते क्यों की तुम्हे परेशानी hai...Yaa फिर जब भी तुम कहो मई हमेशा के लिए तुमसे दूर चल जाऊँगा.

कुछ देर सोचने के बाद.

मेघा:- ठीक hai...Lekin कितनी देर?

सुमित:- दिन में 6 घंटा.

मेघा:- पागल हो क्या?

सुमित:- मैंने अपना टाइम bataya...Abb तुम बताओ.

मेघा:- 2 घंटा.

सुमित:- चलो ना तुम्हारा न मेरा...4 घंटा.

मेघा कुछ नहीं बोली.

सुमित:- बार्गेनिंग का फायदा प्यार में भी होता है. :डी

मिलते है आज शाम से 4 घंटा की डेली डेट के लिए.

मेघा:- लेकिन कब तक?

सुमित:- ये बातें बाद mein...Abhi तो ये पल को जियो.

और एक baat...Tumhe मेरे साथ वैसे hi बेहवे करना होगा जैसे पहले करती thi..Aise खड़ूस बन कर nahi...Jo बिलकुल hi डिमोटिवेट कर देता है.

मेघा:- अच्छा ठीक है. :डी

फिर दोनों हॉस्पिटल की और जाते है.

सुमित आज बहुत खुश tha...Usse जो चाहिए था वो मिल gaya...Megha का vakt...Warna मेघा के इंतजार में तो कभी कभी पूरा दिन निकल जाता tha...Aur मेघा की एक झलक भी नहीं मिल पाटा था.

अब्ब सुमित का विश्वाश भी बढ़ गया था की वो मेघा को जरूर मनाएगा.
 
अपडेट 115

ये क्या कर रहे हो!! लोग आ रहे hai...Utro निचे!!

गांव से थोड़ा बाहर एक आम (मानगो) के पेड़ पर चढ़ रहा सुमित को देख मेघा बोली.

लेकिन सुमित बात को नजर अंदाज़ करके और ऊपर चढ़ने laga...Kuch पका हुआ आम और कुछ कच्चा मेघा की और फेकने लगा.

मेघा का दर बढ़ रहा था जैसे जैसे लोग उनकी तरफ आ रहे thhe...Thodi hi देर में कुछ लोग चिल्लाने लगे.

चोर चोर.

और वो तेजी से पेड़ की तरफ भागने लगे.

मेघा:- अब्ब तो उतरो.

इस बार मेघा की आवाज में दर के साथ गुस्सा भी tha...Jawaab में सुमित सिर्फ मुस्कुराता hai...Jisse मेघा और भी गुस्सा हो जाती है.

जब वो लोग बहुत पास आ गए तो सुमित ने पेड़ से छलांग लगा कर मेघा के हाथ पकड़ liya...Aur तेजी से भागने लगा.

जब कुछ देर भागने के बाद भी उन् लोगो ने पीछा नहीं छोड़ा और मेघा भी थक गयी तो सुमित ने मेघा को अपने बाहो में उठा liya...Thodi देर भागने के बाद अब्ब रफ़्तार में कमी भी आने लगा लेकिन पीछे से आ आया आवाज ने सुमित के पाँव को एकदम से रोक दिया.

गरीब को hi लूटो और भाग जाओ.

सुमित ने मेघा को निचे utaara...Aur पीछे मुदा.

2 आदमी thhe...Ek सुमित के hi उम्र का था और एक बुजुर्ग थे.

सुमित:- अरे chacha...Itne बड़ा खेत है आपका और हर एक पेड़ में इतने आम है की गिनते गिनते गिनती hi भूल जाऊँगा. 4 आम लेने से गरीब हो जाएंगे :डी

चाचा:- तुमने 4 आम churaya...Tumhare जैसे सौ चोर आ गए तो खेत hi साफ़ हो jaayega...Thodi देर बाहर क्या गए थे आ गए चोरी करने.

सुमित:- चोर :डी

मुस्कुराते हुए सुमित ने बस इतना hi जवाब दिया.

चाचा:- तो फिर क्या कहना चाहिए तुम्हारे इस काम को?

सुमित ने इस बार कोई जवाब नहीं दिया.

चाचा:- अब्ब चुप क्यों हो? देखने में तो अच्छे खासे घर के लगते ho...Pehnaawa (ड्रेसिंग) से भी यही लगता hai...Aur फिर ये chori...Sharm नाम की कोई चीज है hi नहीं.

चाचा की इस बात पर मेघा भी सुमित को गुस्से से देखती hai...Sumit के कारण hi उससे भी शर्मिंदा होना पद रहा था.

सुमित सिर्फ मुस्कुरा hi रहा था.

चाचा:- और अभी भी बेशर्म की तरह हसे जा रहे हो. :माध:

उनका गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.

सुमित:- Chacha...Phone है आपके पास?

चाचा:- Haan...Kyu किसी से धमकी दिलवाना है?

सुमित:- Nahi...Ek सरप्राइज है.

चाचा:- कैसा सरप्राइज?

सुमित:- अपने किसी आदमी को फ़ोन कीजिये? और जिस पेड़ से आम तोडा था पूछिए उसके निचे क्या है?

सुमित जैसा कहता है वो वैसा hi करते है.

फ़ोन करने के बाद हैरानी से चाचा सुमित को देखते hai...Wo सच में सरप्राइज हो गए.

चाचा:- कुछ समझ में नहीं आया.

सुमित:- क्या मिला वह?

चाचा:- कुछ चॉकलेट्स है 200 रस के.

सुमित:- अब्ब तो गांव का नजारा कभी कभी hi मिलता hai...Bachpan के कुछ पल hi गांव में रहने को मिला है.

उन् पल को आज भी याद करता hun...Bahut से शरारत करता tha...Shayad hi कोई पडोसी होगा जिसे परेशान ना किया ho...Unn में से एक शरारत ये भी था की गर्मी के मौसम में स्कूल से आने के बाद खेत से आम चोरी कर के भाग jaana...Aur तब तक भागना जब तक खेत के मालिक पलाद ना ले या फिर वो थक न जाए.

बहुत दिन बाद गांव आया हूँ तो ये काम करने का एकदम से मन kiya...Lekin चोरी कर के भाग जाने का क्या मजा? इसी लिए पहले तो आप का इंतजार किया और आपके पास आने के बाद hi भागा और तब तक जब तक आप थक नहीं गए.

ये सुनते hi चाचा कुछ बोलने वाले थे लेकिन सुमित ने कहना जारी रखा.

सुमित:- पहले तो बच्चा tha...Bacchon वाला मस्ती करता tha...Abb थोड़ा समझदारी wala...Aam चुराने से आप लोग का नुकशान समझता hun...Issi लिए सरप्राइज के तौर पर चॉकलेट्स रख diya...Surprise hi रखना चाहता था उस चॉकलेट को लेकिन बताना पड़ा.

आपके घर में बच्चे तो honge...Aajkal कोले बच्चे चॉकलेट से खुश होते है जैसे हम शरारत करके खुश होते थे.

बस बचपन वाला वो एहसास दुबारा चाहता था जो ये करके फिर से मिल गया.

ये कहने के बाद चाचा भी मुस्कुराने lage...Megha भी हैरानी से सुमित को देखने लगी.

सुमित:- अगर कुछ ज्यादा hi गरीब है आप या नुकशान हो रहा है तो वापस ले लीजिये.

सुमित फिर मेघा के हाथ से आम उठा कर वापस देने लगा.

चाचा:- रख लो.

सुमित:- आपका तो नुकशान हो रहा था. :डी

चाचा:- 3-4 आम से क्या नुकशान hoga...Nukshan तब होता है जब चोर पुरे के पुरे गाछ को खाली कर देते है.

वैसे भी कुछ नया सुनने को mila...Accha laga...Rakh लो उपहार समझ कर.

सुमित:- शुक्रिया.

चाचा:- तुम इस गांव के नहीं लगते हो? कहा से हो?

सुमित:- सही kaha...Darasal मई अपने ससुराल आया हूँ.

ये सुन कर पीछे बैठी मेघा सुमित को जोर से पिंच कर देती है जिसे चाचा देख नहीं पाते hai...Sumit का दर्द बस आँखों में hi रह gaya...Aawaj में आने नहीं दिया.

चाचा:- बहुत अच्छा जोड़ी hai...Lekin तुम्हे (मेघा) भी कभी नहीं देखा है.

फिर मेघा अपने पापा का नाम बताती है.

चाचा:- बस नाम पता है और थोड़ा बहुत जानता hun...Issi लिए तुम्हे नहीं पहचान पाया.

सुमित:- गांव में भी एक दूसरे को लोग काम पहचानते hai...Hairaani की बात है. :एक्स:

चाचा:- बीटा दुनिया hi तेजी से बदल रहा hai...Aise में तो लोगो को अपने से फुर्सत मिलता कहा hai...Unn में से मई भी एक हूँ.

और वैसे तुम काम क्या करते हो?

सुमित:- आपको परेशान जरूर किया hai...Lekin मेरा काम लोगो की परेशानी दूर करना है.

चाचा:- मतलब?

सुमित:- कुछ दिन के लिए गांव में hun...Agli बार की मुलाक़ात में बताऊंगा.

चाचा:- अभी बताने में क्या परेशानी है?

सुमित:- कुछ nahi...Aapki जल्दबाज़ी की वजह से वो चॉकलेट वाली सरप्राइज सरप्राइज नहीं raha...Abb इस बात को hi सरप्राइज समझ लीजिये.

चाचा:- चलो ये भी सही hai...Lekin अगली बार मुलाकात होगी या नहीं ये भी तो पता नहीं.

सुमित:- जरूर होगा.

चाचा:- इतनी विश्वाश से कह रहे हो तो होना hi चाहिए.

फिर बाकी की बातें कर सुमित और मेघा वह से आगे बढ़ जाते है.

मेघा:- तुम्हे कुछ आये या नहीं आये लोगो को अपने बात से आकर्षित जरूर कर लेते ho...College के गुस्से वाला प्रोफेस्सोर्स से ले कर गांव के अनजान aadmi...Harkisi को अपने शब्द से घेर लेते हो.

सुमित:- ये टैलेंट तो बचपन से है.

फिर कुछ सोच कर.

सुमित:- सिर्फ अपने प्रेमिका को छोड़ kar...Chahe वो तुम हो या कीर्ति. :(

मेघा:- अभी भी कीर्ति?

सुमित:- जलन :डी

मेघा:- मई क्यों jalungi...Naa तुम्हे कीर्ति मिली और ना hi मई मिलूंगी :बीए:

सुमित:- मेरा फूटा kismat...Kasam से अगर कीर्ति आस पास भी होती तो तुम्हे इतना जलाता की तुम बर्षो तक याद रखती उस बात को. :डी

मेघा गुस्से से सुमित को घूरती है.

सुमित:- उस चाचा ने भले hi चोरी के लिए माफ़ कर दिया ho...Lekin तुम संभल के रहना.

मेघा:- क्या मतलब?

सुमित:- अगला चोरी तुम्हारे hi कीमती चीज का होने वाला hai...Ho सकता है फिर तुम मुख्य माफ़ ना कर पाओ..

मेघा:- क्या?

सुमित:- तुम्हारा dil...Kab चुरा लूंगा तुम्हे खुद पता नहीं चलेगा..

मेघा:- बहुत अच्छा जोके था. :माध:

सुमित:- तो फिर हसो.

मेघा अब्ब कुछ ज्यादा hi इर्रिटेट हो gayi...Chehra से तो यही लग रहा था.

कुछ दूर और आगे चलने के बाद.

मेघा:- और बचपन की यादें. दोहराने की मौन सा नया भूत चढ़ा है तुम्हे?

सुमित:- नया नया चढ़ा hai...Lekin काफी लम्बे समय तक चढ़ा रहेगा.

व्यस्त रहना, पैसे कमाना hi जिंदगी नहीं hai...Samay निकाल कर अपनों के साथ वक्त bitaana...Har छोटी बड़ी इच्छा पूरा karna...Chahe वो कितना hi बचपना और पागलपन lage...Har एक चीज पूरा करना अपना भी और अपनों का bhi...Ek बार की जिंदगी है हसी ख़ुशी जीना चाहिए.

क्या कहती हो?

मेघा:- अभी तो कह रहे ho...Lekin बाद में बदल रही दुनिया के रफ़्तार के बराबरी करने के लिए एक पल का फुर्सत नहीं होगा तुम्हे बाकी लोगो के जैसे.

सुमित:- Priority...Har लोगो की अलग प्रायोरिटी होता hai...Kisi का हो सकता है दुनिया जितना, किसी को अमीर होना तो किसी को वक्त से आगे rehna...Wo अपनी जगह सही है लेकिन मेरा प्रायोरिटी है, जिंदगी को हसी ख़ुशी बिताना और बढ़ते वक्त के साथ कुछ नया सीखना.

वर्ण कीर्ति के पीछे न जाने कितने साल बर्बाद करने वाला बेवकूफ तो हु nahi...Bas अपनी ख़ुशी के लिए.

फिर सुमित अपने मोबाइल में कुछ खोल कर मेघा को दिखता है.

सुमित:- मरने से पहले दुनिया के इन् जगह घूमना hai...Aasmaan को छूने वाले इन् हिमालय से ले कर उनके निचे से बहने वाली ये jaldhara...Inn पहाड़ियों के हरियाली में खोना है तो इन् गुफा की गहराई में जा कर ध्यान लगाना है.

इन् ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के भ्रमण को अपने मन में बसाना है तो इन् महान इंसान से मिल कर उनसे कुछ सीखना hai...Alag अलग देश और अलग अलग लोगो से मिलना hai...Unko जानना है और उनके रेहान sahan...Jindagi के हर एक चीज को जीना है जिसे ख़ुशी भी मिले और कुछ नया सिखने को भी मिले.

और आखिर में जिंदगी के आखिरी वक्त में अकेला हो गया तो जिंदगी के आखिरी पल एक सन्यासी की तरह बिताना है और मरते वक्त होंठो में मुस्कान और दिल में ये सतोष होना चाहिए की हाँ मेरा सभी इच्छा पूरा हो गया.

इतना कह कर सुमित चुप हो gaya...Megha सुमित को देख रही thi...Sumit की इच्छा में से बहुत चीज मेघा के साथ भी मिल रहा था.

सुमित:- और तुम जानती हो मई अपना इच्छा पूरा करने के लिए कितना जिद्दी हूँ.

मेघा को भी सुमित की बातों में उसकी सच्चाई नजर आ रहा था.

मेघा:- तुम कहते हो की अपनों का साथ हमेशा देते ho...Lekin उस चाचा के आम चुरा कर आज hi फसा diya...Wo तो किस्मत अच्छा था की बच....

मेघा आगे कुछ बोलती उससे पहले...

सुमित:- मैंने बचाया था.

मेघा:- फसाया भी तुमने hi.

सुमित:- जिंदगी हर वक्त अपने इच्छा अनुसार चले तो क्या majaa...Kabhi कभी कोई मुशीबायंट आ jaaye...Saamna करने का मौका mile...Aur उससे जीत कर आगे निकल गए तो विश्वाश करो बहुत सिखने को मिलेगा और यादगार पल तो बन hi जाएगा.

ये आम चुराने की वजह बचपन की याद दोहराना तो था hi साथ में तुम्हे ये एहसास दिलाना भी था की जब तक मई तुम्हारे साथ हु तुम्हारी जिंदगी में उत्साह हमेशा रहेगा.

शरारत में तुम्हे परेशां करने से ज्यादा ये सोचता हूँ की कभी कोई परेशानी तुम्हारे पास से भी ना gujre...Warna सूरज का जब सर्जरी कर रहा था उसका हर काम होता धड़कन में तुम्हारा आंसू दिख रहा tha...Kaise भी बचाना था.

और तुम भी मेरे लिए ऐसा hi सोचोगी तो सोने में सुहागा.

मेघा:- क्या बात है? आज कुछ अलग hi नजर आ रहे हो?

सुमित:- अब्ब में वो डिप्रेस्ड सुमित नहीं hun...Abb वो सुमित हूँ जिसे तुम मब्ब्स के वक्त पहली बार मिली thi...Tumhare भासा में कहु तो सुमित सफस यानी की स्ट्रैट फॉरवर्ड सुमित.

दोनों आगे hi बढ़ रहे थे की आगे एक सांप dikha...Karib 1 मीटर का...30 मीटर की दुरी पर.

सुमित:- Saamp...Saamp.

सुमित की आवाज में थोड़ा दर था.

मेघा:- कुछ देर पहले तो बहुत उड़द रहे thhe...Bol रहे थे बचपन में गांव में ये करते थे वो करते थे.

गांव में सांप भी होते hai...Sirf खेत में आम नहीं. :डी

सुमित:- और मारो ताना. :बीए:

मेघा:- अच्छा ये बताओ गांव में सांप देख कर क्या करते थे तुम बचपन में?

सुमित:- भाग जाता था. :(

मेघा:- :lol1::lol1:

तभी मेघा को एक शरारत सूझता है.

मेघा:- कीर्ति के लिए तो तुम उस तेज बहाव वाले नदी में कूद गए thhe...Mere लिए इस सांप को छू कर दिखाओ.

सुमित डरते हुए मेघा को देखती है.

सुमित:- फिर मान जाओगी?

मेघा:- पहले छू कर dikhaao...Fir सोचूंगी.

सुमित डरते हुए सांप के पास जाता hai...Alag सा जूनून था शायद मेघा को मनाने ki...Chehre में दर तो था फिर भी आगे बढ़ रहा था.

मेघा मुस्कुरा रही thi...Usse यकीं था की सुमित दर कर लौट आएगा लेकिन जब सुमित सांप के बहुत पास पहुँच गया तो मेघा गौर से एक नजर सांप को देखती hai...Achanak से उसके चेहरे में दर के भाव साफ़ दिखने लगता है.

दर से कुछ बोल भी नहीं पा रही थी की तभी सुमित मुस्कुराने लगता है.

अपना हाथ सांप की और बढ़ा hi रहा था की मेघा का थूक उसके गले में अटक रहा था.

वो बोलने hi वाली थी की सुमित सांप को ना सिर्फ छूटा है बल्कि सांप को सर से पकड़ कर अपने गले में लपेट लेता है.

मेघा:- फेको usseeee....Kkkkrait है वोऊ.

मेघा दर कर पसीना पसीना हो गयी thi...Khud को hi कोष रही थी की सांप को ले कर ऐसा मजाक क्यों kiya...Lekin Sumit...Usse क्या फर्क पड़ता.
 
अपडेट 116

सुमित:- महादेव का भक्त hun...Saamp से क्या डरना?

हँसते हुए सुमित ने जवाब दिया.

मेघा:- भक्त ho...Swayam महादेव nahi...Aur वो सांप करैत है नाग नहीं.

दर में भी मेघा गुस्से हो गयी सुमित को मजाक करता dekh...Dar अभी भी वैसा hi था.

सुमित कुछ कहने hi वाला था की जो सांप को वो गले में लपेट चूका था मौका मिलते hi उसने सुमित को काट लिया.

एक baar...Do baar...Pure चार बार सुमित को कान्त liya...Lekin सुमित ने अभी तक सांप को खुद से दूर नहीं किया.

मेघा की हालत इतना ख़राब था को वो कुछ बोल नहीं पा रही thi...Dar से पूरा चेहरा पसीना हो गया.

मेघा:- हटाओ उससे.

किसी तरह मेघा इतना hi बोल पायी.

सुमित अब्ब सांप को गले से उतार कर हाथ में hi पकडे रहता है.

मेघा:- चलो हॉस्पिटल.

सुमित की पास आ कर वो बोली.

सुमित:- क्या faaidaa...Kuch देर में उपरवाले को प्यारा हो जाऊँगा.

मेघा:- चलो jaldi...Nahi तो...

सुमित का दूसरा हाथ पकड़ कर मेघा खींचने लगती है.

सुमित:- नहीं तो क्या हो jaayega...Tumhare बाहो में अपना दम तो दूंगा....

सुमित आगे कुछ बोलता उससे पहले hi मेघा सुमित के गाल में एक जोरदार थप्पड़ लगा देती है.

मेघा:- मजाक लग रहा है तुम्हे ये...

मेघा को गुस्सा और इतना डरते देख अब्ब सुमित एक लम्बा सांस लेता है.

सुमित:- ये करैत नहीं है?

मेघा:- फिर क्या है?

सुमित:- करैत जैसा hi दीखता hai...Band भी वैसा hi hai...Jaanta था तुम इससे करैत hi समझोगी इसी लिए मजे ले रहा था.

मेघा:- करैत hi है ye...Aur तुम कैसे यकीं के साथ कह सकते हो की ये करैत नहीं है?

सुमित:- करैत की तरह ये बिलकुल hi काला नहीं hai...Aur सर भी थोड़ा चपटा hai...Jaha मेरे गर्दन पर काटा है वह अभी करैत की तरह बाईट मार्क नहीं hoga...Ye करैत नहीं करैत जैसा hi दिखने वाला वुल्फ स्नेक है.

मेघा:- फिर भी हॉस्पिटल चलो.

सुमित:- क्यों?

मेघा:- अगर जेहटीला होगा तो एंटी धोटे milega...Observation में रहना बहुत जरुरी है.

सुमित:- जैसे की मुझे तो पता hi नहीं.

मेघा:- पता hai...Lekin तुम कभी सीरियस रहते हो?

सुमित इस बार कुछ नहीं kehta...Bas वो सांप को निचे जमीन में रख देता है और वो सांप अपना राष्ट बना कर निकल जाता है.

मेघा:- चलो अब्ब.

सुमित:- नहीं मेरा मूड नहीं है. :बीए:

मेघा:- चलो नहीं to....:mad:

सुमित:- नहीं तो क्या? :डी

मेघा:- दूसरा गाल भी लाल कर dungi...Chalo जल्दी से. :एंग्री++:

सुमित:- गाल hi क्यों? पूरा का पूरा तुम्हारा hun...Bas एक बार हां कर दो. :)

मेघा:- अगर मेरे हो to...Meri बात क्यों नहीं मानते?

सुमित:- तुमने हां भी तो नहीं कहा?

मेघा:- अब्ब ऐसे इमोशनल ब्लैकमेल करोगे?

सुमित:- Chalo...Ye कोशिश भी कर के देख केते है.

मेघा:- बिलकुल nahi...Jo मर्जी वो करो.

इतना कह कर मेघा भी गुस्से में दूसरी और मदद जाती है.

सुमित:- सोच lo...Mai बिलकुल नहीं मानूंगा.

मेघा:- मुझे क्या मतलब? जो मर्जी वो करो.

सुमित:- अच्छा ठीक है फिर.

इतना कह कर सुमित निचे जमीन में बैठ जाता है.

मेघा दूसरी तरफ देख रही thi...Lekin उसकी शरीर की हलचल से सुमित आसानी से अंदाजा लगा सकता था की वो कितनी बेचैन है.

और ज्यादा परेशान ना करने का सोच कर.

सुमित:- अच्छा गुस्सा थूक दो.

मेघा कुछ जवाब नहीं देती लेकिन एकदम से उसका बेचैनी भी बंद हो जाता है.

सुमित मेघा के पास जाता है.

सुमित:- करैत का जहर न्यूरोटॉक्सिक होता hai...Laghbhag आधा घंटा से दो घंटा तक जहर होगा तो सिग्नस एंड सिम्पटम्स दिख jaayega...Agar सिग्नस दिखा तो हॉस्पिटल जरूर jaaunga...Aadha घंटा है यहाँ से हॉस्पिटल...15 मं में पहुँच जाऊँगा.

मेघा:- लेकिन अभी जाने में क्या परेशानी है?

सुमित:- मौसम dekho...Aas पास के नज़ारे dekho...Kitne रोमांटिक है? इस पल को तुम्हारे साथ बातें कर बिताना चाहता hun...Naa की हॉस्पिटल के बीएड में बैठ कर बोर होना चाहता हूँ.

मेघा:- सांप ने काटा है तो रिस्क तो है hi.

सुमित:- करैत है hi नहीं तो क्या रिस्क? अब्ब बोर मत करो यार तुम bhi...Agar जहर का लक्षण दिखा तो चला जाऊँगा हॉस्पिटल हवा की रफ़्तार में.

मेघा:- Nahi...Hospital तो चलना पड़ेगा hi.

सुमित:- अगर ऐसे hi बोर करती रही तो मई चला jaaunga...Hospital nahi...Yahi खेतो mein...Abhi तो तुम्हारे ऑब्जरवेशन में hu...Kuch होगा तो बचा भी logi...Socho अगर चला गया और सांप सच में जेह्रीला था तो अगली दिन किसी खेत से मेरा लाश मिलेगा.

मेघा गुस्से से सुमित को देखती है.

सुमित:- विश्वाश karo...Kuch नहीं होगा.

फिर दोनों की बातचीत सुरु होता hai...Megha सुरु में तो काम बोलती hai...Lekin धीरे धीरे वो भी साथ देने लगती है.

जब 2 घंटे बीत गए मेघा की परेशानी काम होने लगा.

लेकिन tabhi...Sumit की दोनों आँखें फड़फड़ाने लगा.

मेघा:- डेल्हा मैंने कहा tha...Abb तुम्हारे आँखें फड़फड़ा रहा hai...Ptosis...1st न्यूरोटॉक्सिक सिग्न ऑफ़ स्नेक बाईट.

मेघा का दर एकदम से बढ़ गया.

सुमित:- उस में नया क्या hai...Tumhe डेल्ह कर तो हमेशा मेरा आँख फड़फड़ाता है.

एक बार फिरसे सुमित को ऐसा करता देख मेघा गुस्से से सुमित की पीठ पर मुक्को की बरसात सुरु कर देती है.

सुमित:- अभी समय कितना हुआ?

मेघा:- 8 बज चूका है.

सुमित:- हम मिले कब थे?

मेघा:- 2 बजे.

अब्ब मेघा हैरानी से सुमित को घूरती है.

सुमित:- मतलब 6 घंटा का milan...Tum तो कहती थी 4 घंटा से 1 भी मिनट ज्यादा नहीं milega...Lekin पहली hi मिलान में?

मेघा कुछ जवाब नहीं देती.

सुमित:- इस प्यार को क्या नाम डौगी?

मेघा:- कोई प्यार वीआर नहीं है.

सुमित:- अच्छा तो सांप का मुझे काटने के बाद मुझसे ज्यादा तुम्हे घबराहट होना और ये 6 घंटे कब बीत गए इसका भी कोई एहसास ना होना? इसका क्या जवाब है.

मेघा:- Pyaar...Jo तुम कभी समझ hi नहीं पाए थे.

सुमित:- अब्ब समझा हूँ तो खुद मुझसे दूर होते जा रही हो.

मेघा:- लेकिन अब्ब लगता है की तुम्हारे साथ कम्फर्टेबले नहीं हु जो मई पहले भी बता चुकी हु.

सुमित:- अभी के लिए तो तुमने माना है की तुम अभी भी मुझसे प्यार करती हो?

मेघा:- हाँ.

सुमित:- ठीक hai...Mai चाहु तो एक दिन में hi तुम्हे कम्फर्टेबले फील करवा du...Lekin इतना जल्दी भी क्या है? थोड़ा इस खेल का मजा लिया जाए.

मेघा:- इतना विश्वाश?

सुमित:- बिलकुल.

मेघा:- एक बात bataao...Tum भी मुझसे प्यार करते हो?

ये पूछते वक्त मेघा की होंठो में कुछ अलग सा मुस्कान था.

सुमित:- येभी कोई पूछने की बात है?

मेघा:- एक काम करोगे?

सुमित:- बोलो.

मेघा:- स्नेक बाईट का ज्यादातर लक्षण 8 घंटे में आते hai...Lekin ऑब्जरवेशन के लिए 24 घंटा बेस्ट है.

इसी लिए हवा के रफ़्तार से हॉस्पिटल जाओ और बाकी के 22 घंटे ऑब्जरवेशन में रह कर अपना प्यार साबित करो.

ये सुनते hi सुमित का चेहरा उतर गया.

सुमित:- ये तो ना इंसाफ़ी है. :(

मेघा:- मुझे इतना डराया था tumne...Kya वो तुम्हारा इन्साफ था?

सुमित कुछ बोल नहीं पाया.

मेघा:- और हाँ no cheating...Jitne मिनट तुम वह हॉस्पिटल से बंक karoge...Utne घंटे तुमसे मिलना काम कर dungi...Faisla तुम्हारा है. :डी

इतना कह कर मेघा वह से चली gayi...Sumit बेचारा सर खुजाते हुए अपने बाइक की और बढ़ने लगा.
 
अपडेट 117

आफ्टर 2 वीक्स

ऐसे hi 2 हफ्ते बीत gaye...Sumit के लिए ये 2 हफ्ता काफी अच्छा beeta...Roj के 4 घंटे मेघा के साथ...4 घंटे तो कहने के लिए tha...Kisi भी दिन ऐसा नहीं गया जब दोनों ने 5 घंटे से काम का वक्त साथ बिताया ho...Kabhi कभी तो 7 से 8 घंटे भी हो जाते थे.

लेकिन वक्त बदलते समय नहीं lagta...Sumit तो खुश tha...Shayad मेघा bhi...Baahar से भले hi सब सही दिख रहा हो लेकिन अंदर मन में क्या चल रहा होता है किसी को भी पता नहीं.

आज सुबह सुबह बुला लिया तुमने? क्या बात है.

हमेशा की तरह खुश आवाज में सुमित ने कहा.

मेघा:- कुछ बातें करनी है.

सुमित:- वो तो हमेशा करते hai...Kuch और करना हो...

सुमित की बात बिच में hi काट कर मेघा कहती है.

मेघा:- मई सीरियस हूँ.

सच में मेघा सीरियस थी इस baar...Aawaj से भी और चेहरे के भाव से भी.

सुमित:- हाँ kaho...Kya बात है?

इस बार सुमित भी सीरियस हो गया.

मेघा:- बहुत हो गया है Sumit...Abb और नहीं.

सुमित:- खुल कर bataao...Aisa लगता है की तुम कुछ कहना चाहती हो और साथ hi हिचकिचा रही हो.

मेघा:- वही समझ में नहीं आ रहा है.

सुमित:- ऐसा लग रहा है जैसे कोई शिकायत है mujhse...Kaho जो भी बात hai...Mujhe अच्छा लगे या फिर बुरा.

मेघा:- हाँ शिकायत hi hai...Shayad तुम्हे बुरा भी लग सकता hai...Lekin अभी तुम्हे ये बात साफ़ बता देना बहुत जरुरी है.

सुमित:- बताओ.

मेघा:- तुम्हे नहीं लगता हम एक hi जगह आ कर अटक गए hai...Pyaar की बातें करते hai...Roj साथ रहते है एक दूसरे के साथ वक्त बिताते hai...Lekin मुख्या चीज से hi दूर भाग रहे है.

सुमित:- किस चीज से?

मेघा:- बात ये नहीं था की तुम्हारा प्यार मेरे लिए सच्चा है या nahi...Ye भी नहीं की मई तुमसे प्यार करती हु या nahi...Balki ये था की हम हमेशा साथ रह पाएंगे या नहीं?

आज प्यार है? कल होगा या nahi...Vakt के साथ लोग बदलते है और साथ hi प्यार भी बदलेगा या nahi...Pyaar का रूप भी समय के साथ बदलता hai...Aaj हम दोनों की प्यार दीवानगी वाला hai...Kal शादी होने के बाद प्यार वैसा hi गहरा होगा लेकिन ये दीवानगी से बदल कर जिम्मेदारी वाला hoga...Fir बच्चे होने के बाद भी रूप बदलेगा और बुढ़ापे में bhi...Kya इतने वक्त भी हम दोनों का प्यार वैसा hi होगा?

सुमित:- तुम्हारा सभी सवाल के जवाब मेरे पास है...

मेघा:- अभी बात ख़त्म नहीं हुआ hai...Kuch और सवाल है.

सुमित बिना कुछ बोले अब्ब आगे की सवाल सुनने लगता है.

मेघा:- तुम में ये ऐटिटूड है की जब दुसरो को तुमसे मतलब नहीं तो तुम्हे भी nahi...Ye बहुत सही hai...Lekin क्या ये प्यार में सही रहेगा?

जैसे कीर्ति ने तुम्हे कोई मतलब नहीं दिया और छोड़ दिया तुम्हे देर से hi सही इस बात को मान लिया की तुमसे गलती हुई थी और तुमने भी कीर्ति को मतलब देना छोड़ diya...Jise तुम एक वक्त हद्द से ज्यादा प्यार करते थे आज उसकी कोई मूल्य नहीं hai...Sahi है लेकिन.

लेकिन अगर ये हम दोनों के बिच भी हुआ तो?

सुमित:- पागल हो क्या? हमारे बिच क्यों होगा ऐसा?

मेघा की इस सवाल ने सुमित की धैर्यता एक बार में hi तोड़ दिया.

मेघा:- क्यों नहीं हो sakta...Aaj नहीं hoga..Lekin kal...Abhi तो हम लवर्स hai...Aur अभी तुम्हे मुझे पाने की जिद्द hai...Aise में मेरी कोई भी गलती को तुम नजर अंदाज़ कर doge...Lekin कल जब शादी हो जाएगा और तुम मुझे पा चुके होंगे तब?

तब छोटी छोटी बात पर लड़ाई हो सकता है? और वही छोटी बात जब हद्द से पार हो जाएगा तब से दूरियां बनना सुरु हो jaayega...Man की duriyan...Aur वही कीर्ति वाली बात क्यों नहीं हो सकता है? पास भले hi रहेंगे लेकिन मन से? मन से जैसे तुमने कीर्ति को निकाला मुझे नहीं निकलोगे इस बात की क्या गारंटी है जब मई भी भाव देना बंद कर दूंगी.

सुमित कुछ कहने के लिए मुंह खोलने hi वाला था ki...Megha फिर से कहना सुरु करती है.

मेघा:- तुम्हारा गलती की बात नहीं कर रही hun...Abhi तो तुम्हारा कोई गलती नहीं है.

मैंने जो भी कहा उससे तुम मुझ से बदल do...Tumhari गलती की जगह वैसे hi मेरा गलती भी हो सकता hai...Lekin दोनों hi केस mein...Galti हमारा होगा.

और आखिर बात ये hi है की मैंने तुम्हे कहा था मुझे ये एहसास दिलाओ की मई तुम्हारे साथ कम्फर्टेबले रहूंगी या नहीं?

इसका जवाब ये 2 हफ्ते में बिलकुल भी नहीं mila...Agar कुछ समझ में आया तो तुम मुझसे कितना प्यार करते ho...Pyaar तो मई भी तुमसे करती hun...Ghum कर सवाल यही आता है की आज जो इतना प्यार है कल भी रहेगा?

और क्या गारंटी है की जो तुम्हारा ऐटिटूड दबा हुआ है कल छोटी छोटी बातों पर ये हावी हो काट हमारे बिच मन मुटाव नहीं होगा?

बस यही सवाल के जवाब चाहिए मुझे.

सुमित:- तुम्हारे सभी सवाल के जवाब मेरे पास hai...Jab प्यार में आज तक इतना कुछ झेल लिया है तो अब्ब साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा है सब कुछ.

2 हफ्ते से मई तुम्हे अपना प्यार नहीं दिखा रहा tha...Tumhare सवाल का जवाब hi दे रहा tha...Tumhare मेटि जिंदगी में होने से मेरा जिंदगी कैसे पूरा हो जाएगा और तुम्हारी जिंदगी में मई क्यों जरुरी हु? जो शायद समझा नहीं पाया. :(

मेघा:- जब इतने दिन से ये समझा नहीं पा रहे हो तो मुझे नहीं लगता की आगे समझा paaoge...Waise भी वक्त कुछ ज्यादा hi लग चूका है.

सुमित ने इस बार जवाब नहीं दिया.

मेघा:- आज रात तक का समय है तुम्हारे पास.

सुमित अभी भी शांत था.

मेघा:- आज 4 नहीं 5 घंटे तक का समय देती hun...Jarurat पड़ा तो कुछ aur...Lekin फिर भी हमे सवाल का जवाब नहीं मिला तो क्या फायदा आगे बढ़ कर.

जो बात आगे जा कर मुश्किल हो उससे अच्छा है की अभी कदम रोक de...Mushkil होगा लेकिन बेहतर भी यही होगा जिससे कुछ दिनों में भुला देंगे.

सुमित:- (इन हिज मंद) कितना आसान है न. :(

लेकिन सुमित ने ये नहीं कहा.

सुमित:- देखते है.

इतना कह कर सुमित वह से निकल गया.

वो बहुत उदास tha...Megha को जिस बात का एहसास वो कराना चाहता था उसमें वो असफल raha...Samjha नहीं पाया मेघा को एक दूसरे की जरुरत और महत्वा.

वो आगे बढ़ तो रहा था लेकिन अब्ब उससे समझ में नहीं आ रहा था की आगे क्या करना hai...Abb कैसे 5 घंटा में मेघा को उसके सवाल का जवाब देना है? बातो से नहीं बल्कि एहसास से.
 
थैंक्स लिओहेअर्त भाई फॉर योर सपोर्ट एंड review...Ye शिकायत मुझे भी खुद से है की टाइम में अपडेट नहीं दे पा रहा hun...Kuch न कुछ हो hi जाता hai...Mai भी स्टोरी को जल्द से जल्द कम्पलीट करना चाहता हूँ जो की नहीं हो पा रहा hai...Update लेंथ तो ऐसा hi hai...Ek फिक्स टॉपिक पर लिखता hun...Koshish ये है की अपडेट जल्द से दे saku...Abhi भी कोशिश hi कर रहा हु.
 
अपडेट 118

शाम हो गया और साथ hi सुमित और मेघा की मिलने का वक्त.

मेघा सुमित की इंतजार करती रही...5 मिनट...10 मिनट...20 मिनट...30 मिनट.

लेकिन सुमित अभी तक नहीं आया.

मेघा:- देरी से आने की आदत अभी तक गया नहीं.

मेघा फिर से इंतजार करने लगी.

2 घंटे से भी ज्यादा हो गए.

मेघा:- Hmm...Attitude problem...Koi बात नहीं.

अब्ब 5 घंटे से भी ज्यादा हो gaya...Lekin सुमित का कुछ आता पता नहीं.

मेघा:- कही कुछ हो तो नहीं गया...

ये ख्याल आते hi मेघा सुमित को फ़ोन लगाती hai...Do बार सुमित फ़ोन काट देता hai...Uske बाद फ़ोन उठाना hi छोड़ देता है.

मेघा को गुस्सा तो बहुत आता hai...Lekin सुमित के साथ कुछ गलत तो नहीं हो गया ये सोच कर डरते हुए सुमित की रूम की और जाती है.

सुमित का रूम में ताला लगा tha...Sumit के साथ क्या हुआ? कहा है कुछ अंदाजा नहीं लग रहा था? रात भी बहुत हो गया tha...Mobile का फ़्लैश लाइट ों कर के देखने के बाद खिड़की थोड़ा खुला दिखा.

पूरा खोलने के बाद सामने का दृश्य और भी हैरान कर देने वाला tha...Pura रूम hi खली था.

सुमित चला गया है यहाँ se...Aascharya तो बहुत हुआ मेघा ko...Lekin उससे ज्यादा परेशानी.

अभी भी यकीं नहीं हो रहा था की सुमित यहाँ दे चला गया hai...Wo भी बिना बताये.

इतनी जल्दी हार मानने वालो में से तो नहीं था wo...Fir क्यों?

कुछ देर वह बैठने के बाद वो निराश मन से वो अपने घर लौट आयी.

रात भर सुमित के बारे में hi सोच कर बीत gaya...Kya सुमित उससे गुस्सा हो गया है? उसने सुमित के साथ सही किया या गलत? यही ख्याल उससे सोने नहीं दे रहा था.

सुबह होते hi लाल आँखों के साथ मेघा घर से निकल कर उस झील की और जाने लगी जहा पर वो और सुमित कभी साथ समय बिताते थे.

झील के पास वो पहुँचने hi वाली थी की तभी पीछे से एक तेज आवाज करता बाइक एकदम से आ कर ruka...Ekdum से डरते हुए वो पीछे मुड़ी.

सीधा नजर उस इंसान पर pada...Helmet लगा हुआ उस इंसान का चेहरा तो नहीं dikha...Lekin शरीर और बाइक देख कर एकदम से चेहरे में मुस्कान आ गया.

तुम.

ख़ुशी से बस इतना hi कह पायी.

सुमित ने कोई जवाब नहीं diya...Bike से उतर कर हेलमेट और बैग को बाइक में रख कर मेघा के पास आया.

मेघा:- जब गए नहीं थे तो मिलने क्यों नहीं आये?

सुमित:- और मिलने से क्या हो जाता?

मेघा:- एक आखिरी koshish...Shayad मई मान जाती.

सुमित:- Accha...Fir कितना वक्त फिया था तुमने इस मिलान का?

मेघा:- 5 घंटा.

सुमित:- और ये भी कहा था की कुछ घंटे और दे सकती हो?

मेघा:- हाँ 1 या 2 घंटा aur...Kyu काफी नहीं था?

सुमित:- 5 और 2...कुल मिला कर 7 ghante...Kaafi लग रहा hai...Tum मेरे साथ पिछले 7 साल से भी ज्यादा ho...Wo काफी नहीं था समझने के लिए की तुम मेरे साथ कम्फर्टेबले हो या नहीं तो ये 7 घंटा काफी होगा?

मेघा के पास इस सवाल का जवाब नहीं था.

सुमित:- ी गावे up...Haar मान लिया मैंने...7 साल में भी ये महसूस नहीं करवा पाया की मई तुम्हे खुश रख सकता hun...Tum मेरे साथ कम्फर्टेबले महसूस karogi...Ye मेरा गलती hai...Jo चीज 7 साल में नहीं कर सका वो 7 घंटा मई कैसे कर पाऊंगा.

सोचा हार मान लेना सही hai...Kabhi कभी हार मान लेना भी जरुरी hai...Kirti की वक्त भी यही गलती किया tha...Haar मान लेना चाहिए tha...Lekin नहीं लगा रहा खुद पर कुछ ज्यादा hi भरोषा karke...Shayad उस वक्त तक हारना नहीं सीखा tha...Vishwash था कोशिश करूँगा तो दुनिया को अपने चरण पर ला कर रख दूंगा.

लेकिन अब्ब जब हार चूका हूँ तो हार मान लेता hun...Wohi गलती नहीं करूँगा.

और साथ hi तुम्हारा फैसला का भी samman...Jab तुम्हारा मन hi नहीं है मेरे साथ रहने का उनकंफर्टबले होने की वजह से तो जबरदस्ती क्यों?

मेघा:- मेरे फैसले का samman...Lekin ऐसा लग रहा है तुम्हारे बातों से तुम्हारा दर्द ज्यादा झलक रहा है.

इस बात से सुमित के चेहरे में भी मुस्कान aaya...Dard भरी मुस्कान.

सुमित:- वो तो झलकेगा hi...Dard हो रहा है तुमसे दर्द हो kar...Pyaar किया है tumse...Sab कुछ हारने के बाद छोड़ रहा हूँ ना की ईगो में आ कर.

जाने से पहले सोचता था मेरे जाने के बाद तुम्हारा क्या होगा? लेकिन भूल गया की वो तुम थी जिसकी जरुरत मुझे tha...Har मुश्किल mein...Jab जब कमजोर पड़ता था साथ तुम thi...Naa की तुम्हे मेरा जरुरत tha...Mai राहु या ना राहु तुम अपना जिंदगी जी सकती हो.

जब ये समझ गया तो सब कुछ साफ़ दिखाई देने laga..Mera जाने का समय आ चूका है.

कीर्ति से प्यार kiya...Tumse kiya...Abb खुद से करने का वक्त आया hai...Kaise खुश रहना hai...Jindagi के साथ आगे बढ़ना है ये सीखना hai...Ummeed है सिख लूंगा.

मेघा की तरफ एक नजर देख कर.

सुमित:- और कोई ऑप्शन भी तो नहीं. :(

मेघा बस सुमित को देख रही थी.

सुमित:- जब सोचा 7 साल से कुछ नहीं कर पाया यो 7 घंटे में भी कुछ नहीं hoga...Behtar यही होगा 7 सेक् तुम्हे कही से देख कर जिंदगी भर के लिए एक याद बना lu...Kal रात भर यही गौ में tha...Jaha जहा हम घूमे है वह एक बार फिर से जा जार याद ताजा करना tha...Aakhiri मौका है.

जब जाने की वक्त आया तो 7 सेक् देखने के बाद भी मन नहीं bhara...Socha 7 मं बात करके सब कुछ अच्छे से ख़त्म करे जब सब ख़त्म hi हो रहा है.

7 मं भी ख़त्म हो gaya...Abhi भी मन नहीं bhara...Icchhaa तो है 7 जन्म साथ रहने ki...Jo ये संभव नहीं. :(

इस बात पर मेघा भी मुस्कुराई.

मेघा:- बात तो सही hai...Lekin अभी भी मुझे वही दर है कम्फर्टेबले न होने की.

सुमित:- समझता hun...Issi लिए हार मान कर जा रहा हूँ.

और साथ hi एक आखिरी बात.

सुमित:- तुम्हारे साथ बिठाये पल बहुत ख़ास thhe...Abb उन् यादों की hi सहारा hai...Tum हमेशा खुश rehna...Aur यही प्राथना है की तुम्हे जिंदगी में हमेशा कम्फर्ट मिले.

मेघा:- यादें तो हमेशा ख़ास है तुम्हारे साथ के bhi...Bhale hi शादी नहीं कर पाए दोस्त तो हमेशा है hi...Aage भी मुलाक़ात होती रहेगी.

सुमित:- Nahi...Tum मेरी दोस्त nahi...Premika ho...Abb यही नजर से देखता hun..Dost बना कर खुद को hi धोखा नहीं दे पाऊंगा.

और ये रिक्वेस्ट है की कभी मुझसे मत मिलना आगे kabhi...Aage नहीं बढ़ पाऊंगा.

अपने लिए bhi...Bhale hi दर्द हो आगे बढ़ना चाहता hun...Jindagi में और भी कई सपने hai...Unhe पूरा करना hai...Tumse भी बढ़ कर आगे जिंदगी को महसूस करना है.

साथ hi माँ, पापा और बेहेन भी hai...Unka भी कुछ एक्सपेक्टेशन hai...Mushkil है पर आगे बढूंगा.

सुमित की इस बात का कोई जवाब नहीं था मेघा के पास.

सुमित:- अगर कभी मन बदला तो आ जाना फिर se...Darwaaja खुला rahega...Lekin 3 महीने तक.

माँ हमेशा शादी के लिए कह रही hai...Aur सही समय में वो भी जरुरी hai...Jisse भी शादी होगी प्यार का तो पता नहीं लेकिन पति का जिम्मेदारी अच्छे से nibhaaunga...Baad में जो होगा वो तो होगा hi.

जब कदम आगे बढ़ता है तो बेहतर है आगे hi चलता रहे.

अब्ब सुमित अपने बाइक पर बैठ कर जाने की तयारी करने लगा.

मेघा इस बार भी सुमित को hi देखती rahi...Kuch बोल नहीं पायी.

सुमित:- अच्छा चलता hun...Baatein तो कभी ख़त्म होगी nahi...Wo भी tumse...Pura जिंदगी बीत jaayega...Lekin बातें? वो नहीं.

गुड Bye!!

इतना कह कर सुमित ने एक बार फिर मेघा को देख कर आँखें बंद कर liya...Shayad कभी ना भूलने की याद बनाना चाहता था.

मेघा:- Bye!

बस इतना hi कहना था की सुमित का बाइक हवा से बातें करते हुए आगे निकल gaya...Aur हैरानी तो तब हुआ मेघा को जब सुमित ने एक बार भी पीछे मुद कर नहीं dekha...Kuch hi पल में सुमित मेघा की नजरो से भी दूर हो गया.

ये सब सुन कर कीर्ति की भी हैरानी की कोई सीमा नहीं था.

कीर्ति:- ये क्या बेवकूफी किया मेघा ने?

अनीता:- वही जो तुमने किया.

कीर्ति एकदम से चुप हो गयी.

कुछ देर बाद.

कीर्ति:- मैंने तो गलती किया hi tha...Maine वो ईगो में kiya...Lekin Megha...Usne मजाक मजाक में सब कुछ जाने दिया.

अनीता:- मेघा की प्यार मजाक नहीं था.

एकदम से कीर्ति की दिमाग में एक सवाल आया.

कीर्ति:- और संजना? सुमित ने तो उसके साथ सब कुछ ख़त्म कर लिया tha...Fir वो कैसे आ गयी सुमित की जिंदगी में ? जितना सुमित को जानती हूँ उतना भी कमजोर नहीं है की पीछे मुद जाए हार मान kar...Wo खुद hi कहता था कदम आगे बढ़ जाए तो बेहतर है आगे hi बढ़ता रहे.

अनीता:- कहानी अभी बाकी है?

अनीता आगे कुछ सुनाती उससे पहले मैं गेट पर दूर बेल्ल बजा.

अनीता ने खोलने के बाद hi कहा.

अनीता:- नाम लिया शैतान हाजिर.

सुमित:- देखो Sanjana...Tumhe शैतान कह रही है.

संजना नाम सुनते hi कीर्ति गेट की और ध्यान से देखने lagi...Sumit और एक अनजान लड़की घर के अंदर आये.

कीर्ति:- तो ये है संजना...

ये कहा hi था कीर्ति ने की साथ hi मेघा को भी आते देख कीर्ति को कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

जब सुमित ने मेघा को उसके शादी के बाद ना आने के लिए कहा था तो वो यहाँ क्या कर रही है? ये सवाल उससे छैन की सांस नहीं लेने दे रहा था.
 
अपडेट 119

कीर्ति से थोड़ा hi hello करने के बाद सभी अपने काम में लग गए.

सुमित भी मेघा और संजना में hi ज्यादा ध्यान दे रहा था.

कीर्ति बस ये देख कर समझने की कोशिश कर रही थी लेकिन उससे कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

आज कीर्ति को बहुत अजीब भी लग रहा tha...Aaj से पहले तक जितना भी वक्त वो सुमित के साथ थी सीट का नजर उससे हैट ता नहीं tha...Hamesha अपने लिए प्यार hi दिखत था उससे सुमित की आँखों में.

लेकिन आज? आज तो 2 सेकंड से भी ज्यादा नहीं टिक रहा था सुमित की नजर उस par...Aur प्यार तो दूर की बात कोई भाव hi नहीं दिख रहा था आज सुमित की आँखों में उसके लिए.

क्या थोड़ा देर हो गया? बस यही सवाल उससे खाये जा रहा tha...Sawaal का जवाब मिल भी गया तो ये परिस्थिति तो बदल नहीं सकता ये जान कर वो और भी दुखी थी.

कुछ देर से वो देख रही थी की सुमित मेघा से कुछ ज्यादा hi प्यार से पेश आ रहा hai...Aakhir मेघा से अलग हो जाने के बाद भी दोनों आज इतने पास क्यों है? जब की सुमित ने मेघा को साफ़ कह दिया था की अब्ब उसके जिंदगी में नहीं आने के liye...Lekin फिर भी?

जो गलती उसने किया था वो मेघा ने भी तो किया tha...Lekin आज मेघा सुमित के इतने करीब और वो इतनी dur...Ye बात उससे बहुत खटक रहा था.

जब उससे और रहा नहीं गया तो...

कीर्ति:- Sumit...Tumne अपने पत्नी से अभी तक नहीं मिलवाया.

सुमित:- तुम्हारे सवाल का जवाब hi दे रहा था एक खुली किताब की tarah...Jise तुम खुद पता कर सको.

कीर्ति:- समझ तो आ रहा hai...Lekin तुम्हारा खेल तुम्हारे अलावा और कौन समझ सकता है?

सुमित:- है एक? मुझसे भी ज्यादा मुझे समझने वाली. :डी

सुमित की इस बात पर सभी हसने लगते है कीर्ति के अलावा.

कीर्ति:- पहेली बुझाने के लिए नहीं कह रही hun...Waise भी तुमने पहले से hi कंफ्यूज कर के रखा hai...Abb साफ़ साफ़ बताओ.

सुमित फिर मेघा को खिंच कर अपने बाहो में भर लेता है.

सुमित:- पराई औरत को बाहो में भर lu...Itna हिम्मत कहा है मुझ में?

जवाब में मुस्कुराते हुए...

मेघा:- सोचना भी मत. :अंगरीवीफे:

कीर्ति:- मतलब मेघा.

सुमित:- अब्ब इससे और साफ़ बता तो नहीं सकता. :डेड:

फिर कीर्ति संजना को देखती hai...Wo भी कम्फर्टेबले थी.

कीर्ति:- फिर तुमने ये क्यों कहा मुझसे दोबारा मुलाक़ात में की तुम्हारे जाने के बाद मेरी लाइफ में संजना आयी.

सुमित:- सही hi तो कहा tha...Bas जान बुझ कर अधूरा कहा.

पूरा शब्द ये था.

तुम्हारे जाने के बाद मेरे लाइफ में संजना आयी एक बार फिर दिल में प्यार के दरवाजा पर दस्तक dene...Lekin अफ़सोस वो भी अधूरा रह gaya...Shayad प्यार करने से hi डरने लग गया था mein...Itna ज्यादा की जब बहुत देर से hi सही एक बार फिर सच्चा प्यार का एहसास हुआ तो उससे भी अपनाने से डरने लगा.

वो मेरा नहीं मेघा के प्यार की ताकत था जो आज फिर से हँसता खेलता तुम्हारे सामने हूँ.

अब्ब कीर्ति को सब समझ में आ गया.

सुमित:- वैसे भी ये कहानी न जाने कितनो को सुनाई hai...Thoda मजा लेने के लिए मिर्च मसाला जरुरी hai...Wohi मिर्च मसाला लगा कर तुम्हे भी सुना दिया.

कुछ देर चुप रहने के बाद.

कीर्ति:- लेकिन मेघा कैसे मान gayi...Usne भी तो तुम्हे छोड़ दिया था?

इसका जवाब मेघा ने दिया.

मेघा:- मई कीर्ति थोड़ी hun...Jo ये बेवकूफी करुँगी.

कीर्ति को ये बात अच्छा तो नहीं लगा लेकिन इस बात पर ख़ास ध्यान न देते हुए वो आगे सुनने के लिए मेघा की बोलने की इंतजार करने लगी.

(फ्रेंड्स जानता हु अपडेट बहुत छोटा hai...Navratri में घर गया था तो बहुत hi लम्बा गैप हो gaya...Waapas आया हु तो अभी इतना hi लिख पाया hu...Ye अपडेट थोड़ा लम्बा होने वाला hai...Issi लिए कुछ दिन और lagenge...Itna वेट नहीं करवाना चाहता तो अभी के लिए इतना पोस्ट कर रहा hu...Koshish काटूंगा 2-3 दिन में बाकी के भी पोस्ट कर du...Next अपडेट में सब क्लियर होगा.)
 
अपडेट 120

मेघा से आखिरी मिलान के बाद सुमित अपने बाइक को गांव के सिमाना में रोक देता है.

बाइक से उतर कर एक दारु की बोतल खरीदता है और खेत के पास एक पत्थर पर बैठ जाता है.

आँखों से आंसू की बाढ़ सुरु हो जाता है जो उसने बहुत देर से रोक कर रखा था.

सुमित:- पता नहीं क्या कमी है मुझ me...Jo मई अपने प्यार का विश्वाश नहीं दिला paaya...Itne दिन साथ रहने के बाद भी मेघा को मेरे साथ कम्फर्टेबले फील नहीं होता है.

दर्द में वो दारु की बोतल खोल केता है.

सुमित:- न जाने कब पिया था आखिरी baar...Tumne hi इस आदत को छुड़वाया था लेकिन aaj...Aaj फिर तुम्हारी वजह से सुरु कर रहा हूँ.

एक दर्द भरी मुस्कान के साथ सुमित दारु पीने के लिए हाथ को उठाता hi है की एक बाद फिर मेघा की चेहरा उसके सामने आ जाता है.

तुरंत वो बोतल से निकलती दारु की धार का निशाना को अपने मुंह से बदल कर जमीन की और कर देता है.

और दारु को उसी पत्थर में फेंक कर तोड़ देता है.

सुमित:- ये दारु को छोड़ना शायद तुम्हारे साथ बिठाये पल में से एक बहुत अच्छा सीख hai...Jo पिछली जिंदगी था अकेलेपन का डिप्रेसिव ka...Usse भी निकलने में मदद की है इस दारु ने.

तुम मेरी लाइफ में सिर्फ अच्छाई hi लायी ho...To जाने के बाद बुराई की सुरुवात क्यों? और तुमसे बड़ी बड़ी बात भी तो की है की हमेशा खुश रहूँगा. :डी

कोशिश तो hai...Lekin दर भी है की अगर कुछ हो जाए तो सँभालने के लिए तुम हो hi नहीं. :(

दर लग रहा है मेघा तुम्हे खो kar...Abb तो सोने से भी दर लगता है ये सोच कर की जब आँख खुलेगा तो तुम नहीं rahogi...Pata नहीं कैसे संभाल पाऊंगा खुद को.

मजबूत दिखाना और मजबूत होने में बहुत फर्क होता hai...Abb समझ में आ रहा है.

भाई क्या हुआ?

पीछे से एक आदमी सुमित की आँखों में आंसू देख कर पूछ लेता है.

सुमित:- कुछः न्नहीई.

इसी के साथ सुमित होश में आता है.

सुमित:- (इन हिज मंद) एक पल का भी प्राइवेसी नहीं.

फिर सुमित बाइक में बैठ कर आगे निकलने hi वाला था की.

मेरे बिना hi जाओगे?

इस आवाज ने सुमित के पुरे शरीर को जाम कर diya...Piche तक मुद नहीं पा रहा था.

जब कुछ देर बाद समझ में आया तो भी पीछे नहीं मुद paaya...Kahi ये भी कोई सुन्दर सपना की तरह एक पल में ना टूट जाए इस बात का दर था.

कुछ देर में मेघा को खुद के सामने पाया.

मेघा को अपने सामने देख कर ख़ुशी का कोई सिमा नहीं था साथ hi दर भी और गहराता जा रहा था की कही ये ख़ुशी हमेशा की तरह सिर्फ दो पल का तो नहीं.

आअह्हह्ह्ह्ह...

सुमित का ये चीख दर्द से भरा हुआ tha...Aankho से इस बार आंसू निकल aaye...Dard का आंसू या फिर ख़ुशी का?

मेघा:- अब्ब तो सच मान लो.

जैसे hi सुमित को यकीं हो गया बाइक से उतर कर सीधे मेघा के गले जा लगा.

मेघा को कास कर अपने बाहो में भर liya...Munh से एक शब्द नहीं निकल रहा tha...Aur साथ hi मेघा पर पकड़ और भी कसता जा रहा tha...Shayad दर था की इस बार भी कही मेघा निकल ना जाए.

मेघा को भी थोड़ा दर्द हो रहा था लेकिन सुमित की ख़ुशी को देख वो चुप hi रही.

थोड़ा तो शर्म karlo...Beech राश्ते में लगे हुए हो...

ये सुन कर सुमित होश में aaya...Megha से थोड़ा अलग हो कर उसकी आँखों में देखने laga...Aaj पहली बार सुमित को वो प्यार दिखा मेघा की आँखों में जो वो इतने दिनों से देखना चाहता था.

वो मेघा का हाथ पकड़ कर आगे बढ़ने hi वाला था की...

मेघा:- बाइक को लॉक कर के सही जगह पार्क कर लो.

सुमित:- कोई बात nahi...Tum मिल गयी ho...Isse बड़ी...

सुमित की बात को बिच में hi काट कर.

मेघा:- अभी भी मिडिल क्लास hi ho...Baad में मेरे खर्चे उठाने के बाद बात मत बदलना.

सुमित मुस्कुरा कर बाइक पार्क करता है और फिर से मेघा का हाथ थाम जार कही एकांत की और बढ़ने लगता है.

सुमित:- तुम इतनी जल्दी कैसे पहुंच गयी? मुझे तो बाइक से 15 मिनट लग गया.

मेघा:- कौनसी बड़ी बात hai...Ghar से पैदल 5 मिनट का रास्ता है.

सुमित का मुंह खुला का खुला रह गया.

सुमित:- मुझे तो कभी पता नहीं चला और बताया क्यों नहीं.

मेघा:- बता देती तो तुम्हारे साथ बातें करने का मौका कैसे मिलता.

एक बार फिरसे सुमित की दिमाग में वो साड़ी यादें ताजा हो गया जब पहली बार वो इस गांव में आया था और तब से ले कर आज तक मेघा के साथ उस रास्ते भर की बातें.

सुमित:- और अचानक से तुम्हारा दिल कैसे पिघल गया?

मेघा:- अब्ब जा कर तुमने सही सवाल पूछा.

फिर मेघा किसी को फ़ोन लगा कर सुमित को देती है.

आवाज कुछ ज्यादा hi जाना पहचाना था.

अननोन:- लगा न झटका.

सुमित:- अबे कमीने.

इस बार सुमित की हैरानी का कोई सीमा नहीं था.

सुमित:- इस बार तेरा टाइमिंग एकदम ूनप्रेडिक्टेबले था.

अननोन:- हर बार घटिया थोड़ी न होगा?

सुमित:- सस्पेंस में दिमाग का नासा फैट जाए इससे पहले बता de...Bahut तड़पाया hai...Hisaab बाद में बराबर करूँगा.

अननोन:- सर्जन है tu...Aur फ्यूचर में Neurosurgeon...Ye बात तू भी जानता है की सस्पेंस में दिमाग का नासा नहीं फटता है.

सुमित:- चाट मत yaar...Jaldi बता.

अननोन:- अगर दिमाग का नासा फैट जाए तो उससे हेमोररहागिस स्ट्रोक बोलते hai...Bahut hi डेंजरस सिचुएशन hai...Tune hi तो बताया था.

सुमित:- अब्बी....

आगे बोलने से पहले सुमित कण्ट्रोल कर लेता hai...Megha ये सुन कर अपनी हंसी रोक नहीं पाती है.

सुमित:- बता दे यार Ashish...Baad में कभी मजे ले lena...Abhi रहा नहीं जा रहा है.

आशीष:- चल ठीक hai...Ye बात तो तू भी जानता है की तू लात की बहुत है बात से मानने वालो में से तो है नहीं.

कितनी बार समझाया मेघा की प्यार को अपना le...Lekin तू? अलग hi सोच बना कर बैठ गया tha...Mere पास एक hi रास्ता था और वो है तेरे पिछवाड़े में अच्छे से लात मार कर समझाना.

मेघा का फ़ोन नंबर किसी तरह ले कर उसको समझाया की तुझसे दुरी बना le...Tab तेरी अकाल में बात घुसेगा.

ये भी तुझसे काम नहीं thi...Bahut मुश्किल से samjhaya...Aur जब वो तुझसे दूर होने लगी तब जा कर तेरे जो दिमाग घुटनो में चला गया था वो सही जगह पर वापस आ gaya...Tujhe समझ में आया की तू क्या खोने जा रहा है.

में तो चाहता था की कुछ दिन तू और तड़पे तब अच्छे से समझ आएगा tujhe...Lekin मेघा नहीं maani...Aakhir कार तुझ पर दया आ hi गया.

चल अब्ब सब ठीक हो गया hai...Mahe कर.

अगली बार ऐसी बेवकूफी किया तो अगला लात बहुत कास कर पड़ने वाली है तुझे.

इतना कह कर आशीष फ़ोन कट कर देता hai...Ye सुनने के बाद सुमित के मुंह से इतना बी निकला.

सुमित:- Kamina...Ye तो मुझसे भी आगे निकल गया.

फिर मेघा की और देख कर.

सुमित:- और tum....Jab जानती थी की मुझे एहसास हो गया है की मई तुमसे सच्च में प्यार करने लगा हूँ और गलती का एहसास हो gaya...Fir भी मुझे तड़पाती रही.

मेघा:- क्यों न करू? तुमने मुझे इतने साल से तड़पाया उसका क्या?

चुन चुन कर बदला लिया है.

सुमित इसका कोई जवाब नहीं दे पाया.

मेघा:- बदला से भी ज्यादा तुम्हारा pyaar...Ye hi मुझे रूठे रहने के लिए मजबूर करता tha...Itne वक्त के बाद तुम्हारा प्यार देख जार सच में बहुत अच्छा लगता था.

तुम्हारा मेरे लिए कुछ भी कर जाने की जिद्द ये देख कर बहुत गर्व होता था खुद par...Tumhare साथ बातें करना, वक्त बिताना जैसे दुनिया भर की साड़ी ख़ुशी मिल गयी हो.

और तुम जो मुझे मनाने के लिए मुझे इतना स्पेशल फील करवाते थे इससे मई ऐसे कैसे जाने deti...Bas एहि देखना था की तुम मेरे लिए क्या कुछ कर सकते ho...Mujhe कितना प्यार करते हो? मेरे बिना कैसा हाल हो सकता है?

बस ये hi देखना था.

सुमित:- और साथ hi मेरा जान निकलना भी. :(

मेघा:- और रही बात रूठने की to...Agar सच में रूत जाती तो इतने दिन जो तुम मेरे आस पास थे एक hi पल में तुम्हारी जिंदगी से चली जाती बहुत दूर...

सुमित मेघा की होंठो पर ऊँगली रख देता है.
 
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