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- Dec 5, 2013
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अब तक...
बाकी सभी लड़किया भी बस दोनों के होंठ और जीभ आपस में लिपटे हुए देख रही थी और धीरे धीरे वो भी गरम हो गयी और उनकी पकड़ भी राहुल पर ढीली हो गयी. उर्वशी भी अपने निचले होंठ को दांत से दबा कर राहुल और रूपा के हो रहे चुम्बन को देख कर के उसका एहसास लेने की कोशिश कर रही थी. ऐसे पहले उनके साथ कभी नहीं हुआ था.
सभी सामने हो रहे नज़ारे में घूम थे की इतने में राहुल ने मौका देख के रूपा को एकदम से घुमा दिया और अपनी खुद की चाकू जो उसके जेब में राखी हुई थी उससे निकाल कर रूपा के गले पर लगा दी.
अब आगे...
इस पल भर में जो बदलाव हुआ उस से उर्वशी के साथ साथ उसकी सहेलिया भी भौचक्की रह गयी. अब घबराने की बारी उनकी थी. क्युकी रूपा के गले पर छुरी की नोक जो लगी हुई थी.
"मेने कभी नहीं सोचा था की ये आम सा दिखने वाला लड़का इतना शातिर होगा. ऊपर से इसके पास चाक़ू भी है. ये कोई आम लड़का नहीं हो सकता. मुझ से बोहत बड़ी भूल हो गयी है. मेने न केवल खुद को खतरे में डाला है बल्कि साथ hi साथ रूपा और मेरी सहेलियों को भी जोखिम में दाल दिया है. क्या करू में? यदि मेने अभी कुछ नहीं किया तोह rupa...rupa",
उर्वशी ने सामने की स्थिति का जायज़ा लेते हुए मैं hi मैं सोचा.
ये बात तोह साफ़ थी की उसने ये बोहत बड़ी भूल कर दी जो राहुल को हलके में ले लिया. उर्वशी को लगा था की राहुल केवल एक आम लड़का है जो ख़ुशी के साथ रहने के लिए नियुक्त किया गया है पर ये उसकी सबसे बड़ी भूल थी. राहुल न केवल शातिर निकला साथ hi साथ एक फाइटर भी है जो की उर्वशी जेसो को कुछ hi पल में धुल छठा सकता है.
अब उर्वशी पचता रही थी. ये क्या हो गया उस से? मन की पैसो के लिए वो ये काम कर रही थी पर वो कभी भी अपने सहेलियों की जान डाव पर नहीं लगाती थी और न hi लगने देती थी.
उर्वशी (शांत होकर) : रूपा को जाने दो. में अपनी हार स्वीकार करती हु. तुम जो चाहे मेरे साथ कर सकते हो पर रूपा को चोरर दो.
राहुल (स्माइल्स) : वाह! अब जब अपने लोग को बचाने की बारी आयी तोह कह रही हो चोरर दो. ये भूल गयी क्या? की थोड़ी देरर पहले में भी इसी तरह तुम्हारे चंगुल में था?
कहते हुए राहुल चाक़ू को थोड़ा और गले के पास लगा देता है जिससे देख के उर्वशी की सिटी पित्ती गुल हो जाती है और बाकी कड़ी सभी सहेलिया भी दर्रे हुए राहुल को देखती रहती है. यदि उन्होंने एक कदम बढ़ाया तोह रूपा की जान जा सकती है.
उर्वशी की आँखों में ासु आ hi गए. उसने खुद को फिरसे कण्ट्रोल करते हुए कहा, "प्लीज!!! में तुम्हारे परर पड़ती हु. उससे जाने दो. चोरर दो उससे"
कहते हुए उर्वशी राहुल के पेर्रो पर गिर पड़ी और उसके परर पकड़ कर अपना सर झुका लिया.
रूपा (रट हुए) : दीदी! ये तुम क्या कर रही हो?? उठो... दुश्मन के पेर्रो पर क्यों गिर रही हो? आगे बढ़ो और सामना करो.
उर्वशी (गुस्से में) : शट ऊऊप्प्प!!! में जो कर रही हु अच्छे से जानती हु.
रूपा (मैं में) : बॉस मुझे बचाने के लिए... ये सब...
सभी लड़कियों की आँखों में ासु थे. इस से पहले कभी भी वो ऐसी सिचुएशन में नहीं फास्सी थी.
राहुल : तोह ठीक है! मेरी दो शर्त है.
उर्वशी : कहो!
राहुल : पहली ये... की तुम मुझ पर या मेरे साथ वालो पर कभी भी हमला नहीं करोगी. ख़ुशी भी मेरी साथ वाली hi है...
उर्वशी : मुझे मंज़ूर है.
रूपा : पर बॉस...
उर्वशी (चिल्ला कर) : शट ुप्प्प!!
रूपा बेचारी दांत सुन्न कर शांत हो जाती है.
राहुल : गुड!!
उर्वशी : दूसरी शर्त??
राहुल : वो में समय आने पर बताऊंगा. ये लो सम्भालो अपनी रूपा को...
कहते हुए राहुल रूपा को चोरर देता है तोह वो रट हुए दौड़ के उर्वशी और बाकी सभी सहेलियों के जाकर गले लग जाती है. कितना सुन्दर दृश्य था. सभी सुबक सुबक कर एक दूसरे को गले लगा रही थी.
राहुल (मैं में) : इतनी कोमल है ये सभी. और ये हरकते करने चली थी? मेरी समझ में नहीं आ रहा की इनकी मजबूरी क्या है?
राहुल : क्या कुछ सवाल पूछ सकता हु?
उर्वशी : हम्म!
राहुल : तुम सभी को देख के में दावे के साथ ये कह सकता हु की तुम लोगो ने आजतक किसी को नहीं मारा. तुम सब नाटक कर रही थी. और रही बात मुझे ठिकाने लगाने की तोह वो भी एक झूट था मुझे दर्राने के liye...hai न?
उर्वशी (शॉकेड) : tumhe?...kese??...
राहुल : कोई भी देख के बता सकता है.
राहुल : तोह ये सब करने की पीछे क्या मजबूरी है?
उर्वशी : .......
उर्वशी बिना कुछ कहे सर झुका लेती है,
रूपा : हम अनाथ है.
उर्वशी : rupa...tum...
रूपा : मुझे कहने दीजिये बॉस! वैसे भी अब हमारा मिशन फ़ैल हो चूका है और आप ने वादा भी किया है की आप इसके साथ वालो को और इससे चोट नहीं पहुचाएंगी तोह ये बताने में अब कोई हर्ज़ नहीं.
राहुल : अनाथ??
रूपा : हां!! हम सब अनाथ है. उर्वशी दीदी ने हम सबको रोड से तोह किसी मोहल्ले से िखहात्ता किया. हमको जीना सिखाया, हमको लड़ना सिखाया, हमको ज़िन्दगी का सच समझाया की ये दुनिया कितनी क्रूर है और यदि हमे ज़िंदा रहना है तोह कैसे... ये सब हमे हमारी दीदी ने hi सिखाया. हमारे पास रहने की कोई जगह नहीं थी, पहन ने के लिए कोई कपडे नहीं थे, खाने के लिए कोई खाना नहीं था, प्यार देने के लिए कोई माँ बाप नहीं थे, सहारा देने के लिए कोई भाई बहिन नहीं था, शिक्षा देने के लिए कोई गुरु नहीं, हमे अपनाने वाला hi कोई नहीं था. हम रस्ते पर भटकते भीक मांगते, और जो मिल जाता तोह उसमे अपने दिन काट रहे थे.
रूपा के कहते hi जैसे सभी लड़कियों को अपना अतीत याद आ गया और वो फुट फुट कर रोने लगी.
रूपा : हमारी उर्वशी दीदी hi हमारी सब कुछ है. हमने चोरी करना शुरू किया, जानकारी ढूंढ़ना, निगरानी करना, हम सब वो काम करते थे जिसमे जान लेने का विषय न हो. उर्वशी दीदी की नज़रो में ये काम बोहत गलत है, उन्हें पता था की वो जो हमे सीखा रही है वो एक गलत रास्ता था. पर उनके पास हमे देने के लिए उस वक़्त और कुछ भी नहीं था. वो नहीं चाहती थी की हम भूखे मरे. वो ज़रूर इस बात पे रातो रात शर्मिंदा होती रहती होंगी. रोटी भी होंगी... पर दीदी! हमे इस बात से कोई भी आपत्ति नहीं है, बल्कि हम सब आपके शुक्र गुज़ार है.
रूपा की बात सुन्न उर्वशी बोहत भावुक हो गयी और उस से गले लग के रोने लगी.
राहुल (मैं में) : जैसा की मेने सोचा था. ये वाक़ई बोहत कोमल है. अनाथ होने के कारण इन्होने ये सब किया. मजबूरी इंसान से क्या क्या नहीं करवाती...
राहुल : तोह अब क्या? फिरसे वही काम करोगे?
रूपा : में तोह वही करुँगी जो दीदी कहेंगी करने को चाहे वो गलत hi क्यों न हो. मुझे पता है दीदी कभी गलत काम नहीं करती. मतलब हम ने कभी भी किसी की हत्या नहीं करि. हां चोरी डकैती ये सब काम बुरे है पर यदि एक अमीर के घर कोई धन चुरा के गरीबो में बाँट रहा है तोह मेरी नज़रो में वह चोरी नहीं है.
राहुल : तोह उर्वशी जी! बताइये! अब आगे क्या?
उर्वशी : mein...mein और अपनी बहनो की जान जोखिम में नहीं दाल सकती. ये काम अब यही रोक दूंगी. पर इनके लिए मुझे कुछ न कुछ तोह करना hi होगा. वर्ण ये सब कहा जाएंगी?
राहुल : तोह क्या करोगी इनके लिए?
उर्वशी : मुझे नहीं पता...
राहुल आगे बढ़कर उर्वशी की चीन अपने हाथो में लेता है ठीक वैसे hi जैसे उर्वशी ने थोड़ी देरर पहले राहुल के साथ किया था.
राहुल : मेरे साथ काम करोगी??
राहुल को अपने इतना करीब पा कर बेचारी उर्वशी के गाल लाल पद जाते है, थोड़ी देरर पहले उसने भी यही किया था पर अब जब राहुल ने किया तोह ये एक अलग hi अनुभव था उसके लिए
उर्वशी और उसकी सहेलिया, हमेशा अपने आप में hi बड़ी हुई, लड़को से न ज़्यादा बात चीत, न ज़्यादा मिलाव हुआ उनका. ये सब उनके लिए नया था. और फिर राहुल जैसा भला चंगा स्मार्ट लड़का तोह उन्हें पहली बार मिला था, इतने करीब पाकर न जाने उर्वशी को क्या हुआ की वो ठीक से नज़रे hi नहीं मिला पायी. पर इस से भी खराब स्तिथि रूपा की थी, बेचारी की पहली किश भी हो गयी उससे समझ नहीं आ रहा था की वो केसा फील करे बस दिल में हल चल हो रही थी अजीब सी जिससे वो समझ नहीं पा रही थी.
उर्वशी (ब्लश) : ke..kesa काम?
राहुल : मेरा साथ देना है बस तुम्हे. में वादा करता हु जब में सक्सेसफुल हो जाऊंगा तोह तुम सभी को अपनी खुद की कंपनी में रख लूंगा. फिर तुम्हे ये सब करने की कोई ज़रुरत नहीं है.
उर्वशी (स्माइल्स) : और कब सक्सेसफुल होइगे तुम?
राहुल : बोहत जल्द. तोह बोलो...?
उर्वशी : ठीक है. मुझे मंज़ूर है.
राहुल : अच्छा पहले सभी से इंट्रोडस तोह करवाओ...
उर्वशी : में उर्वशी, ये रूपा, ये तारा है, सलोनी, मीनल, दीपाली, हिना, ज्योति, ऋतू, और ये पालक.
राहुल : मिलकर ख़ुशी हुई. में राहुल. उम्मीद करता हु अब से हमारे बीच कोई मैं मुटाव नहीं रहेगा और हम साथ में मिलकर अच्छे से काम कर पाएंगे.
उर्वशी : तोह? क्या करना है हमे?
राहुल : क्या आप लोगो के पास अभी रहने के लिए जगह, पैसे वगैरह है?
उर्वशी : हां! अभी तोह हमारे पास इतना है की हम करीब एक साल तक बिना कुछ किये आराम से बिता सकते है.
राहुल : बोहत बढ़िया. में चाहता हु अभी आप कुछ दिनों तक अंदर hi रहे. मतलब ज़्यादा बाहर न निकले.
उर्वशी : पर वो क्यों?
इस से पहले की राहुल जवाब देता उसका फ़ोन बजने लगता है. कॉलर थी प्रीती,
राहुल : hello?
जैसे hi राहुल hello कहता है वह दूसरी और से रोने की आवाज़ आती है,
राहुल : hello? प्रीती??
प्रीती (रट हुए) : राहुल्ल्ल... किधर हो तुम??
राहुल : hello? क्या हुआ प्रीती? में कॉलेज में hi हु, तुम रो क्यों रही हो?
प्रीती : ख़ुशी... ख़ुशी कही नहीं मिल रही है राहुल...
प्रीती की बात सुन्न के राहुल को एक तेज़्ज़ झटका लगता है. उसकी शरीर काँप उठता है. वो भी एक लड़का था, आज से पहले उसने कभी भी एक बॉडीगार्ड की नौकरी नहीं की थी. उसका मिशन था 3 महीने तक अपने गुरु की बेटी को प्रोटेक्ट करना जो की उसने गुरु दक्षिणा में करने का वादा किया था. पर अब क्या? बोल तोह दिया... असली खेल तोह अब शुरू हो रहा था. राहुल को पता था की इन् 3 महीनो में ऐसा कुछ न कुछ होक hi रहेगा पर ये सब इतनी जल्दी होएगा ये उसने नहीं सोचा था.
राहुल : क्या मतलब? तुमने सब जगह चेक किया?
प्रीती (रट हुए) : लंच चल रहा है राहुल. कहा जाएगी ख़ुशी? मेने हर्र वाशरूम चेक कर लिए, सब जगह ढूंढा कही नहीं मिली, फ़ोन भी नहीं उठा रही है. वो मुझसे कह के गयी थी की वाशरूम जा रही है पर वह नहीं है वह.
राहुल के शरीर के इस वक़्त रोंगटे खड़े हो चुके थे. यदि ख़ुशी को कुछ हो गया तोह क्या जवाब देगा वो मास्टर को?
राहुल : तुम कहा पर हो?
प्रीती : क्लास रूम में.
राहुल : में आता हु...
*चालक एंड्स*
इधर राहुल फ़ोन काटते hi गुस्से से उर्वशी को देखता है,
उर्वशी : k..kya हुआ?
राहुल (गुस्से में) : ख़ुशी कही नहीं मिल रही है.
उर्वशी : नहीं... इसमें... इसमें हमारा कोई हाथ नहीं है, यकीन मानो.
रूपा : दीदी सही कह रही है. इसमें हमारा कोई दोष नहीं है
राहुल (शांत होकर) : हम्म! ी बिलीव यू! मेरी हेल्प करो... और यहाँ फ्लोर पर सब जगह छान मारो. यदि वो मिले तोह मुझे बताना. में नीचे वाली फ्लोर पर हु.
उर्वशी हां में सर हिला देती है, और राहुल दौड़ते हुए भाग कर नीचे फुल स्पीड में जाता है, क्लास रूम में एंटर करते hi उससे प्रीती नज़र आ जाती है, राहुल को देख वो दौड़ कर उसके पास आ जाती है और अपने आसुओ को कण्ट्रोल करने की पूरी कोशिश कर रही थी.
राहुल : किसी को बताया?
प्रीती : अभी सिर्फ तुम्हे...
राहुल : हम पहले अच्छे से ढूंढ लेते है, हो सकता है वो कॉलेज में hi हो
प्रीती : हम्म!!
जब थोड़ी देरर ढूंढ़ने पर भी ख़ुशी का कोई अत पता नहीं लगा, तोह राहुल को यकीन हो गया की उसके साथ कुछ हुआ है, किसी ने उससे किडनैप कर लिया है और ये जो कोई भी है, ख़ुशी और मास्टर का शुभचिंतक तोह बिलकुल भी नहीं है.
ऊपर का फ्लोर पूरा देख लेने के बाद जब उर्वशी और बाकी सब राहुल के पास आयी तोह प्रीती थोड़ा चौंक गयी, अब एक साथ 10 लड़की को ऐसे यु आते देख तोह कोई भी चौक जाएगा.
प्रीती : ये सब k..kaun है?
राहुल : लम्बी कहानी है प्रीती... पर ये हमारे साथ वाली hi है.
उर्वशी : ऊपर तोह ख़ुशी नहीं है...
प्रीती : क्या???
एक बार फिरसे उसकी आँखों में ासु आ जाते है, ऐसा क्यों था? ऐसा इसलिए था क्युकी ख़ुशी केवल उसकी दोस्त नहीं थी. ख़ुशी उसकी सब कुछ थी. एक दोस्त, एक बहिन, एक साथी, सब कुछ.
प्रीती के माँ बाप का देहांत उसकी बचपन की उम्र में hi हो गया था. तब से मास्टर hi प्रीती का सब खर्चा उठाते है और प्रीती ख़ुशी के प्रति बोहत hi पोस्सेस्सिवे रहती है.
राहुल : उर्वशी! क्या एक बार प्लीज कैंपस में चेक कर सकती हो?
उर्वशी : ठीक है.
कहते हुए वो और बाकी सब चली जाती है, और इधर प्रीती की रुलाई फुट पड़ती है. वो सिसक सिसक का रोने लगती है.
राहुल : प्रीती देखो... रो मत!
प्रीती रट हुए राहुल की बाहो में चली जाती है और उससे कस के भींच लेती है. पता नहीं क्यों पर उससे अभी राहुल पर अटल विश्वाश था.
प्रीती (रट हुए) : ra..rahul... देखो! प्लीज!!! Mein...mein जानती हु की मेरा और ख़ुशी का रवैया तुम्हारे प्रति कोई ख़ास नहीं था... पर प्लीज! उससे बचा लो. में तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हु. प्लीज! उससे बचा लो... यदि उससे कुछ हो गया तोह में नहीं जी पाऊँगी...
प्रीती पैनिक कर रही थी. उसका शरीर काँप रहा था. पेर्रो से ताकत जा रही थी, और वो अपने होश खो रही थी...
राहुल : प्रीती लिसेन तो में.. प्रीती ...
राहुल ने प्रीती को झंझोरते हुए कहा पर इसका तोह जैसे कोई फायदा hi नहीं हुआ, वो अभी भी पैनिक कर रही थी. जब कोई और विकल्प नहीं मिला राहुल को तोह उसने प्रीती को जोरर से पकड़ा और अपने होंठ उसके होंठो से भिड़ा दिया.

अचानक हुए हमले से प्रीती की आँखें फटी की फटी रह गया, उससे प्रोसेस करने में hi समय लग गया की अभी अभी हुआ क्या, जब उससे समझ आया तोह उसकी आँखों से ासु फिरसे बहने लगे पर इस बार उसकी आँखें बंद हो गयी और उसका शरीर ढीला पद गया और साथ hi उसके हाथ जाकर राहुल की गर्दन के इर्द गिर्द लेपित गए.
उससे अंदर hi अंदर विश्वाश था की अब राहुल hi है जो कुछ कर सकता है और वो इस पल भर के लिए अपने आप को राहुल पर समर्पित कर देना चाहती थी.
करीब आधे मिनट की चुम्बन के बाद जैसे प्रीती शांत हुई और उसने अपनी आँखें खोली तोह सामने राहुल का चेहरा था.
राहुल : don't वोर्री! ी विल सेव हेर.
प्रीती हां में सर हिला कर राहुल के गले लग जाती है, और ऊपर वाले से दुआ करती है की जल्द से जल्द ख़ुशी उससे सही सलामत मिल जाए.
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आज के लिए इतना hi गाइस!!
धन्यवाद्!
अब तक...
बाकी सभी लड़किया भी बस दोनों के होंठ और जीभ आपस में लिपटे हुए देख रही थी और धीरे धीरे वो भी गरम हो गयी और उनकी पकड़ भी राहुल पर ढीली हो गयी. उर्वशी भी अपने निचले होंठ को दांत से दबा कर राहुल और रूपा के हो रहे चुम्बन को देख कर के उसका एहसास लेने की कोशिश कर रही थी. ऐसे पहले उनके साथ कभी नहीं हुआ था.
सभी सामने हो रहे नज़ारे में घूम थे की इतने में राहुल ने मौका देख के रूपा को एकदम से घुमा दिया और अपनी खुद की चाकू जो उसके जेब में राखी हुई थी उससे निकाल कर रूपा के गले पर लगा दी.
अब आगे...
इस पल भर में जो बदलाव हुआ उस से उर्वशी के साथ साथ उसकी सहेलिया भी भौचक्की रह गयी. अब घबराने की बारी उनकी थी. क्युकी रूपा के गले पर छुरी की नोक जो लगी हुई थी.
"मेने कभी नहीं सोचा था की ये आम सा दिखने वाला लड़का इतना शातिर होगा. ऊपर से इसके पास चाक़ू भी है. ये कोई आम लड़का नहीं हो सकता. मुझ से बोहत बड़ी भूल हो गयी है. मेने न केवल खुद को खतरे में डाला है बल्कि साथ hi साथ रूपा और मेरी सहेलियों को भी जोखिम में दाल दिया है. क्या करू में? यदि मेने अभी कुछ नहीं किया तोह rupa...rupa",
उर्वशी ने सामने की स्थिति का जायज़ा लेते हुए मैं hi मैं सोचा.
ये बात तोह साफ़ थी की उसने ये बोहत बड़ी भूल कर दी जो राहुल को हलके में ले लिया. उर्वशी को लगा था की राहुल केवल एक आम लड़का है जो ख़ुशी के साथ रहने के लिए नियुक्त किया गया है पर ये उसकी सबसे बड़ी भूल थी. राहुल न केवल शातिर निकला साथ hi साथ एक फाइटर भी है जो की उर्वशी जेसो को कुछ hi पल में धुल छठा सकता है.
अब उर्वशी पचता रही थी. ये क्या हो गया उस से? मन की पैसो के लिए वो ये काम कर रही थी पर वो कभी भी अपने सहेलियों की जान डाव पर नहीं लगाती थी और न hi लगने देती थी.
उर्वशी (शांत होकर) : रूपा को जाने दो. में अपनी हार स्वीकार करती हु. तुम जो चाहे मेरे साथ कर सकते हो पर रूपा को चोरर दो.
राहुल (स्माइल्स) : वाह! अब जब अपने लोग को बचाने की बारी आयी तोह कह रही हो चोरर दो. ये भूल गयी क्या? की थोड़ी देरर पहले में भी इसी तरह तुम्हारे चंगुल में था?
कहते हुए राहुल चाक़ू को थोड़ा और गले के पास लगा देता है जिससे देख के उर्वशी की सिटी पित्ती गुल हो जाती है और बाकी कड़ी सभी सहेलिया भी दर्रे हुए राहुल को देखती रहती है. यदि उन्होंने एक कदम बढ़ाया तोह रूपा की जान जा सकती है.
उर्वशी की आँखों में ासु आ hi गए. उसने खुद को फिरसे कण्ट्रोल करते हुए कहा, "प्लीज!!! में तुम्हारे परर पड़ती हु. उससे जाने दो. चोरर दो उससे"
कहते हुए उर्वशी राहुल के पेर्रो पर गिर पड़ी और उसके परर पकड़ कर अपना सर झुका लिया.
रूपा (रट हुए) : दीदी! ये तुम क्या कर रही हो?? उठो... दुश्मन के पेर्रो पर क्यों गिर रही हो? आगे बढ़ो और सामना करो.
उर्वशी (गुस्से में) : शट ऊऊप्प्प!!! में जो कर रही हु अच्छे से जानती हु.
रूपा (मैं में) : बॉस मुझे बचाने के लिए... ये सब...
सभी लड़कियों की आँखों में ासु थे. इस से पहले कभी भी वो ऐसी सिचुएशन में नहीं फास्सी थी.
राहुल : तोह ठीक है! मेरी दो शर्त है.
उर्वशी : कहो!
राहुल : पहली ये... की तुम मुझ पर या मेरे साथ वालो पर कभी भी हमला नहीं करोगी. ख़ुशी भी मेरी साथ वाली hi है...
उर्वशी : मुझे मंज़ूर है.
रूपा : पर बॉस...
उर्वशी (चिल्ला कर) : शट ुप्प्प!!
रूपा बेचारी दांत सुन्न कर शांत हो जाती है.
राहुल : गुड!!
उर्वशी : दूसरी शर्त??
राहुल : वो में समय आने पर बताऊंगा. ये लो सम्भालो अपनी रूपा को...
कहते हुए राहुल रूपा को चोरर देता है तोह वो रट हुए दौड़ के उर्वशी और बाकी सभी सहेलियों के जाकर गले लग जाती है. कितना सुन्दर दृश्य था. सभी सुबक सुबक कर एक दूसरे को गले लगा रही थी.
राहुल (मैं में) : इतनी कोमल है ये सभी. और ये हरकते करने चली थी? मेरी समझ में नहीं आ रहा की इनकी मजबूरी क्या है?
राहुल : क्या कुछ सवाल पूछ सकता हु?
उर्वशी : हम्म!
राहुल : तुम सभी को देख के में दावे के साथ ये कह सकता हु की तुम लोगो ने आजतक किसी को नहीं मारा. तुम सब नाटक कर रही थी. और रही बात मुझे ठिकाने लगाने की तोह वो भी एक झूट था मुझे दर्राने के liye...hai न?
उर्वशी (शॉकेड) : tumhe?...kese??...
राहुल : कोई भी देख के बता सकता है.
राहुल : तोह ये सब करने की पीछे क्या मजबूरी है?
उर्वशी : .......
उर्वशी बिना कुछ कहे सर झुका लेती है,
रूपा : हम अनाथ है.
उर्वशी : rupa...tum...
रूपा : मुझे कहने दीजिये बॉस! वैसे भी अब हमारा मिशन फ़ैल हो चूका है और आप ने वादा भी किया है की आप इसके साथ वालो को और इससे चोट नहीं पहुचाएंगी तोह ये बताने में अब कोई हर्ज़ नहीं.
राहुल : अनाथ??
रूपा : हां!! हम सब अनाथ है. उर्वशी दीदी ने हम सबको रोड से तोह किसी मोहल्ले से िखहात्ता किया. हमको जीना सिखाया, हमको लड़ना सिखाया, हमको ज़िन्दगी का सच समझाया की ये दुनिया कितनी क्रूर है और यदि हमे ज़िंदा रहना है तोह कैसे... ये सब हमे हमारी दीदी ने hi सिखाया. हमारे पास रहने की कोई जगह नहीं थी, पहन ने के लिए कोई कपडे नहीं थे, खाने के लिए कोई खाना नहीं था, प्यार देने के लिए कोई माँ बाप नहीं थे, सहारा देने के लिए कोई भाई बहिन नहीं था, शिक्षा देने के लिए कोई गुरु नहीं, हमे अपनाने वाला hi कोई नहीं था. हम रस्ते पर भटकते भीक मांगते, और जो मिल जाता तोह उसमे अपने दिन काट रहे थे.
रूपा के कहते hi जैसे सभी लड़कियों को अपना अतीत याद आ गया और वो फुट फुट कर रोने लगी.
रूपा : हमारी उर्वशी दीदी hi हमारी सब कुछ है. हमने चोरी करना शुरू किया, जानकारी ढूंढ़ना, निगरानी करना, हम सब वो काम करते थे जिसमे जान लेने का विषय न हो. उर्वशी दीदी की नज़रो में ये काम बोहत गलत है, उन्हें पता था की वो जो हमे सीखा रही है वो एक गलत रास्ता था. पर उनके पास हमे देने के लिए उस वक़्त और कुछ भी नहीं था. वो नहीं चाहती थी की हम भूखे मरे. वो ज़रूर इस बात पे रातो रात शर्मिंदा होती रहती होंगी. रोटी भी होंगी... पर दीदी! हमे इस बात से कोई भी आपत्ति नहीं है, बल्कि हम सब आपके शुक्र गुज़ार है.
रूपा की बात सुन्न उर्वशी बोहत भावुक हो गयी और उस से गले लग के रोने लगी.
राहुल (मैं में) : जैसा की मेने सोचा था. ये वाक़ई बोहत कोमल है. अनाथ होने के कारण इन्होने ये सब किया. मजबूरी इंसान से क्या क्या नहीं करवाती...
राहुल : तोह अब क्या? फिरसे वही काम करोगे?
रूपा : में तोह वही करुँगी जो दीदी कहेंगी करने को चाहे वो गलत hi क्यों न हो. मुझे पता है दीदी कभी गलत काम नहीं करती. मतलब हम ने कभी भी किसी की हत्या नहीं करि. हां चोरी डकैती ये सब काम बुरे है पर यदि एक अमीर के घर कोई धन चुरा के गरीबो में बाँट रहा है तोह मेरी नज़रो में वह चोरी नहीं है.
राहुल : तोह उर्वशी जी! बताइये! अब आगे क्या?
उर्वशी : mein...mein और अपनी बहनो की जान जोखिम में नहीं दाल सकती. ये काम अब यही रोक दूंगी. पर इनके लिए मुझे कुछ न कुछ तोह करना hi होगा. वर्ण ये सब कहा जाएंगी?
राहुल : तोह क्या करोगी इनके लिए?
उर्वशी : मुझे नहीं पता...
राहुल आगे बढ़कर उर्वशी की चीन अपने हाथो में लेता है ठीक वैसे hi जैसे उर्वशी ने थोड़ी देरर पहले राहुल के साथ किया था.
राहुल : मेरे साथ काम करोगी??
राहुल को अपने इतना करीब पा कर बेचारी उर्वशी के गाल लाल पद जाते है, थोड़ी देरर पहले उसने भी यही किया था पर अब जब राहुल ने किया तोह ये एक अलग hi अनुभव था उसके लिए
उर्वशी और उसकी सहेलिया, हमेशा अपने आप में hi बड़ी हुई, लड़को से न ज़्यादा बात चीत, न ज़्यादा मिलाव हुआ उनका. ये सब उनके लिए नया था. और फिर राहुल जैसा भला चंगा स्मार्ट लड़का तोह उन्हें पहली बार मिला था, इतने करीब पाकर न जाने उर्वशी को क्या हुआ की वो ठीक से नज़रे hi नहीं मिला पायी. पर इस से भी खराब स्तिथि रूपा की थी, बेचारी की पहली किश भी हो गयी उससे समझ नहीं आ रहा था की वो केसा फील करे बस दिल में हल चल हो रही थी अजीब सी जिससे वो समझ नहीं पा रही थी.
उर्वशी (ब्लश) : ke..kesa काम?
राहुल : मेरा साथ देना है बस तुम्हे. में वादा करता हु जब में सक्सेसफुल हो जाऊंगा तोह तुम सभी को अपनी खुद की कंपनी में रख लूंगा. फिर तुम्हे ये सब करने की कोई ज़रुरत नहीं है.
उर्वशी (स्माइल्स) : और कब सक्सेसफुल होइगे तुम?
राहुल : बोहत जल्द. तोह बोलो...?
उर्वशी : ठीक है. मुझे मंज़ूर है.
राहुल : अच्छा पहले सभी से इंट्रोडस तोह करवाओ...
उर्वशी : में उर्वशी, ये रूपा, ये तारा है, सलोनी, मीनल, दीपाली, हिना, ज्योति, ऋतू, और ये पालक.
राहुल : मिलकर ख़ुशी हुई. में राहुल. उम्मीद करता हु अब से हमारे बीच कोई मैं मुटाव नहीं रहेगा और हम साथ में मिलकर अच्छे से काम कर पाएंगे.
उर्वशी : तोह? क्या करना है हमे?
राहुल : क्या आप लोगो के पास अभी रहने के लिए जगह, पैसे वगैरह है?
उर्वशी : हां! अभी तोह हमारे पास इतना है की हम करीब एक साल तक बिना कुछ किये आराम से बिता सकते है.
राहुल : बोहत बढ़िया. में चाहता हु अभी आप कुछ दिनों तक अंदर hi रहे. मतलब ज़्यादा बाहर न निकले.
उर्वशी : पर वो क्यों?
इस से पहले की राहुल जवाब देता उसका फ़ोन बजने लगता है. कॉलर थी प्रीती,
राहुल : hello?
जैसे hi राहुल hello कहता है वह दूसरी और से रोने की आवाज़ आती है,
राहुल : hello? प्रीती??
प्रीती (रट हुए) : राहुल्ल्ल... किधर हो तुम??
राहुल : hello? क्या हुआ प्रीती? में कॉलेज में hi हु, तुम रो क्यों रही हो?
प्रीती : ख़ुशी... ख़ुशी कही नहीं मिल रही है राहुल...
प्रीती की बात सुन्न के राहुल को एक तेज़्ज़ झटका लगता है. उसकी शरीर काँप उठता है. वो भी एक लड़का था, आज से पहले उसने कभी भी एक बॉडीगार्ड की नौकरी नहीं की थी. उसका मिशन था 3 महीने तक अपने गुरु की बेटी को प्रोटेक्ट करना जो की उसने गुरु दक्षिणा में करने का वादा किया था. पर अब क्या? बोल तोह दिया... असली खेल तोह अब शुरू हो रहा था. राहुल को पता था की इन् 3 महीनो में ऐसा कुछ न कुछ होक hi रहेगा पर ये सब इतनी जल्दी होएगा ये उसने नहीं सोचा था.
राहुल : क्या मतलब? तुमने सब जगह चेक किया?
प्रीती (रट हुए) : लंच चल रहा है राहुल. कहा जाएगी ख़ुशी? मेने हर्र वाशरूम चेक कर लिए, सब जगह ढूंढा कही नहीं मिली, फ़ोन भी नहीं उठा रही है. वो मुझसे कह के गयी थी की वाशरूम जा रही है पर वह नहीं है वह.
राहुल के शरीर के इस वक़्त रोंगटे खड़े हो चुके थे. यदि ख़ुशी को कुछ हो गया तोह क्या जवाब देगा वो मास्टर को?
राहुल : तुम कहा पर हो?
प्रीती : क्लास रूम में.
राहुल : में आता हु...
*चालक एंड्स*
इधर राहुल फ़ोन काटते hi गुस्से से उर्वशी को देखता है,
उर्वशी : k..kya हुआ?
राहुल (गुस्से में) : ख़ुशी कही नहीं मिल रही है.
उर्वशी : नहीं... इसमें... इसमें हमारा कोई हाथ नहीं है, यकीन मानो.
रूपा : दीदी सही कह रही है. इसमें हमारा कोई दोष नहीं है
राहुल (शांत होकर) : हम्म! ी बिलीव यू! मेरी हेल्प करो... और यहाँ फ्लोर पर सब जगह छान मारो. यदि वो मिले तोह मुझे बताना. में नीचे वाली फ्लोर पर हु.
उर्वशी हां में सर हिला देती है, और राहुल दौड़ते हुए भाग कर नीचे फुल स्पीड में जाता है, क्लास रूम में एंटर करते hi उससे प्रीती नज़र आ जाती है, राहुल को देख वो दौड़ कर उसके पास आ जाती है और अपने आसुओ को कण्ट्रोल करने की पूरी कोशिश कर रही थी.
राहुल : किसी को बताया?
प्रीती : अभी सिर्फ तुम्हे...
राहुल : हम पहले अच्छे से ढूंढ लेते है, हो सकता है वो कॉलेज में hi हो
प्रीती : हम्म!!
जब थोड़ी देरर ढूंढ़ने पर भी ख़ुशी का कोई अत पता नहीं लगा, तोह राहुल को यकीन हो गया की उसके साथ कुछ हुआ है, किसी ने उससे किडनैप कर लिया है और ये जो कोई भी है, ख़ुशी और मास्टर का शुभचिंतक तोह बिलकुल भी नहीं है.
ऊपर का फ्लोर पूरा देख लेने के बाद जब उर्वशी और बाकी सब राहुल के पास आयी तोह प्रीती थोड़ा चौंक गयी, अब एक साथ 10 लड़की को ऐसे यु आते देख तोह कोई भी चौक जाएगा.
प्रीती : ये सब k..kaun है?
राहुल : लम्बी कहानी है प्रीती... पर ये हमारे साथ वाली hi है.
उर्वशी : ऊपर तोह ख़ुशी नहीं है...
प्रीती : क्या???
एक बार फिरसे उसकी आँखों में ासु आ जाते है, ऐसा क्यों था? ऐसा इसलिए था क्युकी ख़ुशी केवल उसकी दोस्त नहीं थी. ख़ुशी उसकी सब कुछ थी. एक दोस्त, एक बहिन, एक साथी, सब कुछ.
प्रीती के माँ बाप का देहांत उसकी बचपन की उम्र में hi हो गया था. तब से मास्टर hi प्रीती का सब खर्चा उठाते है और प्रीती ख़ुशी के प्रति बोहत hi पोस्सेस्सिवे रहती है.
राहुल : उर्वशी! क्या एक बार प्लीज कैंपस में चेक कर सकती हो?
उर्वशी : ठीक है.
कहते हुए वो और बाकी सब चली जाती है, और इधर प्रीती की रुलाई फुट पड़ती है. वो सिसक सिसक का रोने लगती है.
राहुल : प्रीती देखो... रो मत!
प्रीती रट हुए राहुल की बाहो में चली जाती है और उससे कस के भींच लेती है. पता नहीं क्यों पर उससे अभी राहुल पर अटल विश्वाश था.
प्रीती (रट हुए) : ra..rahul... देखो! प्लीज!!! Mein...mein जानती हु की मेरा और ख़ुशी का रवैया तुम्हारे प्रति कोई ख़ास नहीं था... पर प्लीज! उससे बचा लो. में तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हु. प्लीज! उससे बचा लो... यदि उससे कुछ हो गया तोह में नहीं जी पाऊँगी...
प्रीती पैनिक कर रही थी. उसका शरीर काँप रहा था. पेर्रो से ताकत जा रही थी, और वो अपने होश खो रही थी...
राहुल : प्रीती लिसेन तो में.. प्रीती ...
राहुल ने प्रीती को झंझोरते हुए कहा पर इसका तोह जैसे कोई फायदा hi नहीं हुआ, वो अभी भी पैनिक कर रही थी. जब कोई और विकल्प नहीं मिला राहुल को तोह उसने प्रीती को जोरर से पकड़ा और अपने होंठ उसके होंठो से भिड़ा दिया.

अचानक हुए हमले से प्रीती की आँखें फटी की फटी रह गया, उससे प्रोसेस करने में hi समय लग गया की अभी अभी हुआ क्या, जब उससे समझ आया तोह उसकी आँखों से ासु फिरसे बहने लगे पर इस बार उसकी आँखें बंद हो गयी और उसका शरीर ढीला पद गया और साथ hi उसके हाथ जाकर राहुल की गर्दन के इर्द गिर्द लेपित गए.
उससे अंदर hi अंदर विश्वाश था की अब राहुल hi है जो कुछ कर सकता है और वो इस पल भर के लिए अपने आप को राहुल पर समर्पित कर देना चाहती थी.
करीब आधे मिनट की चुम्बन के बाद जैसे प्रीती शांत हुई और उसने अपनी आँखें खोली तोह सामने राहुल का चेहरा था.
राहुल : don't वोर्री! ी विल सेव हेर.
प्रीती हां में सर हिला कर राहुल के गले लग जाती है, और ऊपर वाले से दुआ करती है की जल्द से जल्द ख़ुशी उससे सही सलामत मिल जाए.
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आज के लिए इतना hi गाइस!!
धन्यवाद्!


