इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड) - Page 16 - SexBaba
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इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड)

वो सिद्धार्थ की फोटो इमरान की नहीं थी मित्र! वो अपने हीरो की थी. यदि आपने नोटिस किया हो तोह सिद्धार्थ के लिप्स पर खून लगा है जो मेने राहुल के लिप्स से निकले खून को दर्शाने के लिए उसे किया है. ( ꈍᴗꈍ)
 
अपडेट 74



अब तक...

राहुल : हां! झूला झूलते टाइम जो आवाज़ आती है... मुंबई आते टाइम में उस पार्क में घूमने गया था. अंकल रजनीश को पता है ये बात. मुझे इतना तोह पता था की वो इमरान सेंट्रल रेलवे स्टेशन के पास है. और उस झूले की आवाज़ ने सब कुछ क्लियर कर दिया. पर हां... वो मेरी गेस्सिंग थी. यदि गलत निकलती तोह बोहत बुरा हो सकता था...

कहते हुए राहुल ख़ुशी और प्रीती को लेके कॉलेज से लेके चला जाता है और इधर उर्वशी आँखें फाड़े उसको जाते हुए उसकी पीठ को देखती रहती है...

अब आगे...

अगली सुबह राहुल थोड़ा देरर से उठा, अभी सुबह के 8 बज रहे थे, उसने सबसे पहले फ्रेश उप होने के बाद एक्सरसाइज की और फिर ब्रेकफास्ट के लिए चल दिया पर यहाँ तोह किचन में आके उससे ब्रेकफास्ट तोह दिखा hi नहीं. जब राहुल ने रजनीश अंकल के रूम में जाके देखा तोह पता चला उनका रूम अंदर से लॉक है और वो शायद अभी भी सो रहे है.

राहुल (मैं में) : आज रजनीश अंकल उठे hi नहीं? कमाल है!! माना की आज संडे है पर इसमें इतनी देरर तक सोना?? अरे... कही ऐसा तोह नहीं की कल रजनीश अंकल सारा काम निपटा का लेट आए हो और अभी उनकी नींद पूरी नहीं हुई होगी... हां! ये दोनों ख़ुशी और प्रीती भी सो रही है! चलो फिर! आज ब्रेकफास्ट सबके लिए में hi बना देता हु. माँ ने मुझे कुछ अच्छी डिशेस बनाना सिखाया hi है... आज उनमे से hi कुछ बना देता हु.

राहुल इधर ब्रेकफास्ट बनाने की तैयारी में लग गया, उधर ऊपर ख़ुशी और प्रीती एक दूसरे के अगल बगल लेती हुई सो रही थी. ख़ुशी की नींद पहले खुली और उसने देखा की प्रीती उसके बगल से लेती हुई है, राहुल ने कल प्रीती के सो जाने के बाद ख़ुशी को बताया था की प्रीती उसके लिए कितनी परेशान थी. यही सब सोच ख़ुशी प्रीती को टेंशन फ्री सोता देख मुस्कुरा देती है और उठ के अंगड़ाई लेते हुए बैठ जाती है, तभी उससे कल प्रीती की राहुल को गाल पर किश करने वाली बात याद आ जाती है और फिरसे उसके मैं में कुछ कुछ चलने लगता है.

वो प्रीती को हिला के उठाती है और फ्रेश उप होक नीचे जाने लगती है तोह उससे खाना पकने की बहुत hi अद्भुत सी सुगंध आती है और वो दौड़ते हुए किचन में जाती है तोह पाती है की राहुल कुछ बना रहा है...

ख़ुशी (सुरप्रीसेड) : तुम?? रजनीश अंकल कहा है?

राहुल : वो शायद कल के काम से थके हुए है, इसलिए अभी तक सो रहे है.

ख़ुशी : ओह्ह्ह्ह!

रजनीश का नाम लिया और रजनीश भी हाज़िर हो गया,

रजनीश : माफ़ करना मिस्टर राहुल... कल में रात में लेट आया इसलिए लेट उठा, आपको ये सब करने की कोई ज़रुरत नहीं है. लाइए में कर देता हु.

राहुल : अरे नहीं नहीं! रजनीश अंकल! आज आप बैठिये, आज में खाना परोसूँगा आपको.

रजनीश : अरे नहीं! पर...

राहुल : क्या हुआ? अब ये मत कहना की ख़ुशी ने आपको पहले कभी पारस के नहीं खिलाया...

*साइलेंस*

ख़ुशी उदास सा मुँह बना के सर झुका लेती है, बात सही थी राहुल की. आज तक रजनीश hi सब कुछ बना के खिलाता था और ख़ुशी ने आज तक रजनीश के लिए कुछ नहीं किया था.

ख़ुशी धीरे धीरे चल के रजनीश के सामने आती है और उसके लिए एक प्लेट रख देती है,

ख़ुशी (धीमी सी आवाज़ में) : आप बैठिये अंकल, में आप को सर्वे कर दूंगी.

रजनीश : पर मिस...

ख़ुशी : प्लीज!!!

रजनीश (मैं में) : मिस के बेहेवियर में कितना चेंज आ गया है. ये सब मिस्टर राहुल की वजह से... यदि इन् दोनों की शादी हुई तोह वाक़ई दोनों बोहत अच्छे कपल बनेंगे. मिस्टर राहुल मिस को बोहत अच्छे से संभाल सकते है...

रजनीश भी बिना बोले बैठ जाता है तभी ऊपर से प्रीती कूदती फांदती आती है और ख़ुशी के गले लग जाती है उसके बाद राहुल को भी पीछे से जकड लेती है. ये देख के तोह ख़ुशी की आँखें hi चौड़ी हो जाती है.

जब प्रीती को ध्यान आता है की उसने क्या किया तोह वो बिना कुछ बोले सर झुका के डाइनिंग टेबल पर बैठ जाती है. इधर बेचारी ख़ुशी अपने आप को दोष दे रही थी की उसने hi शुरू में राहुल से अच्छे से बात नहीं की और अब प्रीती और राहुल का रिश्ता कितना स्मूथली जा रहा था दोनों आपस में हुग कर लिए बिना कोई रोक टोक के. पर क्या वो ऐसा कर सकती है? उसके पिछले बर्ताव को ध्यान में रखते हुए तोह बिलकुल भी नहीं और इसी बात को लेकर अब वो रिग्रेट कर रही थी.

ब्रेकफास्ट खा के तोह जैसे सबका मैं hi प्रफ्फुल्लित हो गया. निशा की डिशेस ने जैसे जादू hi कर दिया. आज राहुल को अपनी माँ पे बड़ा गर्व हो रहा था. प्रीती खाने के बाद वापस से अपने रूम में चली गयी. रजनीश उठ कर जब प्लेट्स धोने लगा तोह राहुल ने उससे भी भेज दिया और वो साड़ी प्लेट्स धोने लगा. ख़ुशी भी उठ के आयी और उसकी मदद करने लगी.

तिरछी नज़रो से वो राहुल को देखती, और फिर शर्मा के सर झुका लेती. उससे समझ नहीं आ रहा था की वो कैसे एप्रोच करे राहुल को. कैसे बात करे उस से? कल जब वो साड़ी उम्मीद चोरर चुकी थी तब अकेला एक राहुल hi आया था उसके लिए वह पर और उसकी ये एंट्री जैसे हमेशा के लिए ख़ुशी के दिल के अंदर के छाप चोरर गयी.

राहुल : तोह? आज केसा लगा?

राहुल के कहने पर जैसे ख़ुशी होश में आयी और एकदम से पूछे गए सवाल से हड़बड़ा गयी,

ख़ुशी : हां? Wo...wo में...

राहुल : रिलैक्स!! मेने पूछा की आज केसा लगा सबको अपने हाथो से सर्वे करके?

ख़ुशी (धीमी सी आवाज़ में) : अच्छा लगा...

राहुल उसकी ये हरकत देख मैं hi मैं मुस्कुराता है और फिर अनजाने में hi उसके सर के ऊपर हाथ रखकर कहता है,

"कभी कभी दुसरो के साथ भी घुला मिला करो. आज की तरह उन्हें भी कभी कभी सर्वे किया करो. उन्हें भी अच्छा लगेगा और तुम्हे भी. वो उम्र में हमसे बोहत बड़े है, तोह हमारा भी फ़र्ज़ बनता है की हम उनकी हर्र रोज़ की म्हणत के बदले कुछ करे उनके लिए."

उसकी ये बात सुनते hi जैसे ख़ुशी खो सी गयी राहुल के चेहरे में. बेचारी को न माँ का प्यार मिला, और बाप का प्यार भी नहीं मिल पाया सही से क्युकी मास्टर तोह ग्वालियर में hi स्थित हो गए पर बेचारी ख़ुशी अकेले hi सब कुछ करती आ रही थी. कोई भाई बहिन नहीं, केवल प्रीती hi थी उसके साथ जो उसके साथ हर दम रहती. आज उससे लगा जैसे उसके पास बोहत कुछ नहीं था. पर जब राहुल उसके लिए उससे बचाने आया तोह उसके दिल ने जैसे कहा की कोई तोह है जो उसके लिए खड़ा हुआ उससे बचाने.

सब्र का बाँध टूटा और ख़ुशी रो पड़ी. अपने सर पर राहुल का हाथ महसूस करके अभी उससे इतना आनंद आ रहा था की वो ये पल थमने नहीं देना चाहती थी. अब उस से जैसे रहा hi नहीं गया और उसने अपने दोनों हाथ फैलाये और ज़ोर से राहुल की छाती में घुस गयी.

उसकी पकड़ देख के तोह राहुल भी एक पल के लिए हैरान हो गया, इतनी तिघ्टलय ख़ुशी ने उसकी शर्ट जकड़ी हुई थी. न जाने कब से वेट कर रही थी इस पल का.

ख़ुशी (रट हुए) : I'm सुर्रिययययय.... I'm सोर्रीयययययय.... ी.. am...soryyyyy...

राहुल : और वो किस लिए?

ख़ुशी : तुम्हे बुरा भला कहने के लिए... स्टार्टिंग में मेने tumhe...kitna...kitna बुरा कहा, उसके लिए... सररररययययय...

राहुल ने बड़े hi प्यार से उसके सर पर हाथ फेरा और उससे चुप कराया और अपने सीने से लगाए रखा.

कुछ देरर बाद hi ख़ुशी खिलखिला के हस्सन लगी, तोह राहुल ने उसका कारण पूछा,

ख़ुशी : में आज बोहत खुश हु... बोहत खुश..

क्या हम शाम को शॉपिंग पर चले? प्लीहाससीई!???

राहुल : ुहममम... ठीक है.

ख़ुशी : थैंक यू!!!

वो कहते हुए ऊपर चली गयी. सुबह गयी, दिन हुआ और दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दे दी...

राहुल उठ के दूर खोलने के लिए गया तोह दूर खोलते hi उसपे कोई झपट पड़ा. लम्बे काले बाल, जानी पहचानी सी खुशबू, ये एहसास, नरम स्तनों का अनुभव.

"तुम ठीक हो?? इडियट कही ke...mujhe लगा तुम्हे ज़्यादा चोट आती है? कोई काम ढंग से नहीं होता तुमसे, मुझे यहाँ तक आना पड़ा..."

राहुल ने देखा तोह पाया ये कोई और नहीं मोनिका hi थी.

राहुल (सुरप्रीसेड) : आप यहाँ?

मोनिका : हां! में यहाँ! कल रजनीश अंकल ने सब बताया. बताया की तुम्हे भी चोट आयी है थोड़ी और मुझे तोह कुछ दिन बाद आना था पर ये जान ने के बाद में खुद को रोक नहीं पायी. और फ्लाइट लेके यहाँ आ गयी.

राहुल : ओह्ह! अंदर आइये पहले.

*कुछ देरर बाद*

मोनिका : मास्टर को तुमपर बड़ा गर्व है. वो बेहद खुश है और रजनीश अंकल ने उस इमरान से सब कुछ उगलवा लिया है. मास्टर के दुश्मन का पता लग गया है. अब तुम्हे और कुछ करने की ज़रुरत नहीं है, तुम चाहे तोह ये सब यही चोरर कर अपने करियर पर ध्यान दे सकते हो. आगे का मास्टर सब संभाल लेंगे.

राहुल : व्हाट??? मतलब? में फ्री हु??

मोनिका (स्माइल्स) : हां!!

इस से पहले की राहुल कुछ जवाब दे पाटा, पीछे से आयी ख़ुशी ने सब सुन्न लिया था.

ख़ुशी : मोनिका दीदी आप??

मोनिका : hello ख़ुशी!! किसी हो?

ख़ुशी : में अच्छी हु दीदी. पर ये में क्या सुन्न रही हु... Rahul...rahul जा रहा है?

मोनिका : हां! उसका काम अब यहाँ ख़तम है. बाकी का तुम्हारे पापा डील कर लेंगे. तोह अब राहुल का कोई काम नहीं है.

ये सुनते hi ख़ुशी दौड़ के राहुल का हाथ जोरर से अपने हाथ में ले लेती है,

ख़ुशी : नाहीईई... डैड ने 3 महीने का कहा था न? तोह फिर अभी 3 हफ्ते में hi राहुल कैसे जा सकता है? में... में कही नहीं जाने दूंगी.

मोनिका थोड़ी सुरप्रीसेड थी. ख़ुशी कितनी एंटिमटेली राहुल के हाथ को पकडे हुए थी. राहुल का हाथ ख़ुशी के बूब्स में धस्स रहा था.

ये बात मोनिका नोटिस कर रही थी की कैसे ख़ुशी राहुल के हाथ को पकडे हुए है, न जाने क्यों पर ख़ुशी को राहुल के इतना क्लोज देख उससे कुछ अच्छा सा नहीं लगा. आगे बढ़ कर उसने राहुल का दूसरा हाथ पकड़ा और कहा,

"हां! यदि राहुल ने चाहा तोह वो जा सकता है आखिर उसका भी तोह करियर है न? वो सिर्फ तुम्हारे लिए hi तोह नहीं रह सकता यहाँ ज़िन्दगी भर. है न?"

दोनों की बहस सुन्न राहुल समझ गया था की उससे क्या करना है,

राहुल : okay okay! फाइन!! मेने मास्टर को 3 मोनथस का कहा था, अब में पीछे नहीं हट सकता. सो ी विल बे विथ ख़ुशी फॉर 3 मोनथस.

ख़ुशी : एससससससससस...

मोनिका : अस यू विश!!

*कॉल इनकमिंग*

राहुल (मैं में) : तानिया का कॉल? मेरी छिपकली से बोहत दिनों से बात भी नहीं हुई है

बात कर लेता हु...

राहुल : hello?

तानिया : he....hello?

राहुल : और छिपकली! किसी हो?

तानिया (ब्लश) : me..mein ठीक हु. तुम?

राहुल : में भी भला चंगा हु. पर तुम्हे क्या हुआ? इतने धीरे धीरे क्यों बोल रही हो?

तानिया : nahi...wo... धत्त्त!! चपडगंजु कही का...

राहुल : हाहाहाहाहा!! ये हुई न बात. अब बोलो!

तानिया (स्माइल्स) : हम्म! वो... रूचि दीदी की शादी की डेट फिक्स हो गयी है.

राहुल : व्हाटट? वूवव!! ये तोह बड़ी hi ख़ुशी की बात है!

तानिया : हां! डेट 5 महीने बाद की है. मतलब विंटर की स्टार्टिंग में.

राहुल : okay!! हम ज़रूर आएँगे!

तानिया : हम्म्म! माँ ने बुआ को बता दिया है, मेने सोचा तुम्हे में खुद hi बता दू.

राहुल : थैंक्स! तोह अब हम तभी मिलेंगे.

तानिया (ब्लश) : हम्म्म! में तुम्हारा वेट करुँगी.

राहुल : ओह्ह होओओओ... छिपकली तू कबसे इतने मीठे बोल बोलने लगी? हहै..!

तानिया (ब्लश) : उस दिन पार्क के बाद से hi!!

राहुल : ???

तानिया : तुम्हे पता है न? राहुल?? तुम्हे याद है न? मेने क्या कहा था तुमसे? भूले तोह नहीं हो न?

राहुल : मुझे याद है!

तानिया (स्माइल्स) : I'll वेट फॉर यू!! Bye!!

राहुल : bye!!

*कॉल एंड्स*

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आज के लिए इतना hi गाइस!

ी क्नोव ये अपडेट थोड़ा छोटा है बूत इसका एक रीज़न है. ये नए अर्च के लिए एक सपोर्टिंग अपडेट की तरह है. मतलब की नेक्स्ट अपडेट से असली अर्च शुरू है जिसमे मसाला और रोमांस है और कहानी अब असली सत्य के बोहत hi करीब है. इसलिए इसमें आपको ज़्यादा कुछ देखने को नहीं मिला. और ये शार्ट इसलिए रखा है क्युकी परसो यानी वेडनेसडे को hi नेक्स्ट अपडेट आ जाएगा.

तोह बार बार कहना मत की भाई छोटा अपडेट चिपका दिए ಡ ͜ ʖ ಡ
 
अपडेट - 75



अब तक...

तानिया : तुम्हे पता है न? राहुल?? तुम्हे याद है न? मेने क्या कहा था तुमसे? भूले तोह नहीं हो न?

राहुल : मुझे याद है!

तानिया (स्माइल्स) : I'll वेट फॉर यू!! Bye!!

राहुल : bye!!

*कॉल एंड्स*

अब आगे...

शाम हुई और वाडे के अनुसार राहुल को ख़ुशी को शॉपिंग पे लेकर जाना था. तोह ये डीडे हुआ की साथ hi साथ प्रीती और मोनिका भी जाएंगी, राहुल ने कार निकाली बगल में मोनिका बैठी और ख़ुशी और प्रीती पीछे की सीट पर विराजमान हो गयी.

कुछ hi देरर में ये सभी मॉल के सामने थे, ख़ुशी बेहद hi खुश थी, आज बड़े दिनों बाद वो किसी अपने के साथ यु शॉपिंग करने आ रही थी और ये सब कुछ पॉसिबल हुआ राहुल की वजह से.

आगे आगे उछलते हुए वो साड़ी चीज़ो का जायज़ा ले रही थी, उसका साथ निभाने के लिए प्रीती भी उसके साथ hi थी. राहुल और मोनिका धीरे धीरे पीछे hi चल रहे थे.

ख़ुशी : हम अपने लिए कुछ ड्रेसेस देखने जा रहे है, मोनिका दीदी चलिए न आप भी

मोनिका : नहीं ख़ुशी! मुझे फिलहाल कोई ड्रेस नहीं लेनी...

ख़ुशी : वेल okay!!

कहते हुए ख़ुशी और प्रीती चली गयी, लेडीज वियर सेक्शन में और यहाँ बाहर एक बेंच पर राहुल और मोनिका अगल बगल बैठ जाते है.

राहुल : तोह? उस इमरान का क्या हुआ?

मोनिका : होना क्या था? उसने साड़ी डिटेल्स दे दी बाद में. पता चला तोह पाया की मास्टर का पुराना दुश्मन जो चीन की मॉल की प्रॉपर्टी पे पहले से hi हाथ धो के पीछे पड़ा था, उसी ने ये सब करवाया है.

राहुल : ओह्ह? तोह अब उसका क्या?

मोनिका : don't वोर्री! फिलहाल अभी वो कुछ नहीं करेगा. मास्टर ने उस से डील करने के लिए प्लान सोच लिया है. वो देख लेंगे सब.

राहुल : हम्म!!

मोनिका : वैसे...

राहुल : ????

मोनिका : में देख रही हु तुम्हारी और ख़ुशी की काफी बन्न रही है एक दूसरे के साथ

राहुल (स्माइल्स) : हां! जबसे मेने उससे बचाया है तबसे उसका रवैया मेरे प्रति बदल गया है.

मोनिका : मुझे तोह कुछ और hi लग रहा है...

मोनिका ने थोड़ा राहुल की तरफ झुकते हुए कहा

राहुल : क्या मतलब?

मोनिका (स्माइल्स) : कुछ नहीं...

राहुल : बताइये तोह सही...

मोनिका राहुल की हथेली के ऊपर अपना हाथ रखती है,

मोनिका : देखो राहुल! ख़ुशी वाक़ई एक बोहत hi प्यारी लड़की है. उससे बचपन से hi माँ बाप का प्यार नहीं मिला और ना hi किसी भाई बहिन का. मुझे तोह फिर भी माँ बाप का थोड़ा बोहत प्यार मिला जब तक मेरे माँ बाप की मृत्यु नहीं हो गयी. पर ख़ुशी की माँ तोह उससे जन्म देने के बाद hi चल बसी. और मास्टर ने भी शुरू से hi ख़ुशी को साथ नहीं रखा. ऐसे में यदि उससे कोई ऐसा मिलता है जो उससे प्यार दे सके तोह ये बोहत hi अच्छी बात है.

राहुल : तोह?

मोनिका : par...par... पता नहीं क्यों... मुझे लगता है की... डर सा लगता है...

राहुल : केसा डर??

मोनिका : ki...kahi...mein तुम्हे खो न दू

राहुल : ः! में थोड़ी न कही जा रहा हु, में तोह यही हु

मोनिका (तेनसेद) : वैसे नहीं...

राहुल : तोह??

मोनिका : मुझे एक बात बताओ... ख़ुशी तुम्हे किसी लगती है?

राहुल : किसी लगती है मतलब? अच्छी लड़की है! प्यारी है... और क्या?

मोनिका : अरे... मतलब... तुम्हे अस ा गफ किसी लगती है?

राहुल : व्हाटट??? देखिये मोनिका दीदी... ख़ुशी यदि में उसको अस ा लड़की डिफाइन करू तोह इतना कहूंगा की वो एक बोहत hi प्यारी लड़की है.

मोनिका : और यदि अस ा लव इंटरेस्ट डिफाइन करना चाहो तोह?

राहुल : मेने उससे कभी अस ा लव इंटरेस्ट नहीं देखा. मेरा काम है उससे प्रोटेक्ट करना, जो में कर रहा हु.

मोनिका : हम्म!

मोनिका (मैं में) : असली इंटेंशन्स मास्टर के में अब समझ पायी हु. वो चाहते है की तुम्हारी और ख़ुशी की शादी हो जाए. पर... न जाने क्यों... मेरा मैं घबराता है इस विचार पर hi...

राहुल बैठा हुआ बगल में मोनिका को देख रहा था की वो कैसे सोच विचार में पड़ी हुई है, उसने देखा की मोनिका अस उसुअल शर्ट और जीन्स में hi थी और हर्र बार की तरह कमाल लग रही थी. ये बात तोह सच थी की मोनिका की सुंदरता का कोई कपरिसों hi नहीं था. अंशु hi उससे टक्कर दे पाती बस. पर मोनिका की आगे भी राहुल से ज़्यादा थी इसलिए वो अभी अपने खूबसूरती के दौर में थी.

राहुल उठ के आगे बढ़ा जहा लेडीज वियर के लिए ढेर्रो ड्रेसेस लगी हुई थी. उसने एक ओने पीेछे ब्लैक ड्रेस उठायी और फिर एक शामे ओने पीेछे वाइट ड्रेस उठायी और उनको लेके मोनिका को आवाज़ लगायी, आवाज़ सुनके मोनिका उसके पास आयी...

मोनिका : क्या हुआ?

राहुल : ये तरय करिये न आप?

मोनिका (सुरप्रीसेड) : में??

राहुल : हां! करिये न! ये दोनों...

मोनिका : पर...

राहुल : आप मेरे लिए नहीं पहनोगी?

मोनिका (स्माइल्स) : तुम्हारे लिए तोह कुछ भी...

राहुल : अरे वाह!! में क्या इतना महत्व रखता हु आपके लिए? ः!!

उसके इतना कहते hi मोनिका उसका हाथ कस के पकड़ लेती है और आँखों में आँखें दाल सीरियस टोन में कहती है,

मोनिका : ऐसा भद्दा सवाल दुबारा मत पूछना राहुल कभी...

राहुल : हँ??

मोनिका : तुम मेरे लिए क्या महत्व रखते हो... ये सिर्फ में hi जानती हु. तुम मेरे लिए मेरा..

राहुल : ???

मोनिका : तुम मेरे लिए बोहत महत्वपूर्ण हो. अब चलो...

मोनिका दोनों ड्रेसेस लेकर पास में hi बने चेंजिंग रूम में चली गयी, कुछ hi देरर बाद अंदर से उसकी आवाज़ आयी जो राहुल को पुकार रही थी.

राहुल जब चेंजिंग रूम के पास पहुचा तोह मोनिका ने उससे अंदर आने के लिए कहा. पहले तोह राहुल झिजका पर मोनिका के फाॅर्स करने पर उससे अंदर जाना hi पड़ा. इस वक़्त दोनों एक hi चेंजिंग रूम के अंदर थे. मोनिका के कंधे पूरे नग्न थे और उसने अपने हाथो से अपने स्तनों के ऊपर ब्लैक ड्रेस को पकड़ के रखा हुआ था. ये नज़ारा देख मानो राहुल के होश hi उड़द गए.

राहुल : k..kya हुआ?

मोनिका (ब्लश) : peeche...peeche एक हुक है. उससे लगा दो... तभी में इससे पहन पाऊँगी.

राहुल (ब्लश) : o...ok!

राहुल ने धीरे धीरे हुक को पकड़ा, इस वक़्त उससे भी बोहत शर्म आ रही थी. मोनिका के इतना करीब वो पहली बार आ रहा था. इस से पहले मोनिका ने राहुल को गालो पर कई बार किश दिया था पर यु इतना करीब राहुल उसके कभी नहीं आया था. मोनिका की गोरी मखमली पीठ का एहसास hi पागल कर रहा था राहुल को.

उसकी सुंदरता का असली एहसास तोह राहुल को अभी हुआ hi नहीं था. और वो एहसास तोह उसी लकी इंसान को मिलने वाला था जो मोनिका का प्रेमी बनेगा. ये सोचके न जाने क्यों राहुल को भी कुछ अच्छा नहीं लगा.

उसने धीरे से हुक को लगाया, हुक लगाते वक़्त उसकी उंगलिया मोनिका की मखमली पीठ से कई बार टकराई, कई बार रगड़ खायी, और हर्र एक संपर्क होते hi मोनिका की आँखें बंद हो जाती, उसकी सासें तेज़्ज़ चल रही थी. दोनों के hi गाल शर्म से गुलाबी हो चले थे.

हुक के लगते hi, राहुल ने मोनिका को जताया की हुक लग चूका है, बदले में मोनिका ने दोनों क्लासेस को उसके कंधो के ऊपर चढाने को कहा तोह अंदर hi अंदर राहुल खुश हो गया. राहुल ने साइड में देखा तोह मोनिका की ब्रा पड़ी हुई थी जिससे देख राहुल के लुंड महाराज जाग उठे. मतलब अभी मोनिका ब्रा नहीं पहनी हुई थी. वाक़ई! ड्रेस भी कुछ ऐसी hi थी, की उसमे ब्रा पहन ने पर उसका स्ट्राप कंधो से झलकता. क्युकी ड्रेस में जो कंधो के लास थे वो काफी पतले थे. तोह ब्रा पहन ने का तोह सवाल hi नहीं उठता. राहुल ने धीरे धीरे लास को ऊपर खींचा तोह उसने पीछे से देखा की हर्र बार लास को एडजस्ट करते hi मोनिका के दूध भी हिलते.

जितना जोरर से राहुल लास को खींचता उतनी जोरर से मोनिका के स्तन ऊपर को उठ जाते. राहुल ने फुर्ती में दोनों क्लासेस मोनिका के नग्न कंधो पर जैसे तैसे सेट किये. पर बेचारा राहुल ये भूल गया की सामने मिरर लगा हुआ है. उसकी नज़रे पूरे वक़्त कहा थी ये मोनिका भली भाति देख पा रही थी. पर इस वक़्त मोनिका ना hi गुस्सा थी, न hi उससे राहुल की हरकत से कोई घिन आयी वो इस वक़्त खुश हो रही थी. वो ये जान गयी थी की राहुल उससे अस ा गर्ल भी देखता है

जब मोनिका ने पलट के ड्रेस दिखाई तोह राहुल की आँखें hi चौड़ी हो गयी.





राहुल : ब्यूटीफुल...

मोनिका (ब्लश) : थैंक्स!! अब वाइट वाली तरय कर लू?

राहुल : हां! में.. में बाहर वेट करता हु.

राहुल बाहर निकल के आ जाता है, इधर मोनिका जल्दी से ब्लैक ड्रेस को हटा के वाइट वाली फिरसे उसी पोजीशन तक पहनती है और फिरसे राहुल को आवाज़ देकर अंदर बुला लेती है.

राहुल फिरसे अपने आप को कण्ट्रोल करते हुए मोनिका को ड्रेस अच्छे से पहनाता है.

राहुल : ये तोह और भी ख़ूबसूरत लग रही है. आप पे वाइट जचता है.

मोनिका (ब्लश) : यू थिंक सो?

राहुल से और कण्ट्रोल नहीं हुआ और उसके मुँह से निकल hi गया,

राहुल : कसम से... आप जिस को भी एक्सेप्ट करोगी अपने लवर के रूप में वो बोहत hi लकी होगा.

उसकी ये बात सुनते hi मोनिका एक तक राहुल को देखने लगती है. राहुल को लगता है जैसे वो कुछ ज़्यादा hi बोल गया तोह वो चेंजिंग रूम से सॉरी बोल के बाहर आ जाता है. पीछे पीछे मोनिका भी आ जाती है और उससे धीरे से पुकारती है.

राहुल : I'm सॉरी अगेन मोनिका दीदी. में कुछ ज़्यादा hi बोल गया. मुझे ऐसा...

इस से पहले की राहुल आगे बोल पाटा, मोनिका अपनी हथेली उसके होंठो पर रख देती है.

मोनिका : it's okay!





मोनिका राहुल को झुका के उसके दोनों गालो पर एक लम्बी किश करती है और उसके गले लग जाती है.





पर इन्हे एक दूसरे की बाहो में लिपटे पीछे से कोई देख रहा था.





salvage history car

कुछ देरर बाद राहुल को अपनी पीठ पर ऐसा महसूस हुआ जैसे उसकी कोई शर्ट का भाग पकड़ा हुआ है.

पलट के देखा तोह ख़ुशी थी... अपना सर झुकाए एक हाथ से राहुल की शर्ट का छोटा सा भाग पकड़ी हुई थी. ऐसा लग रहा था जैसे एक क्यूट सी बच्ची टॉफ़ी की ज़िद्द करते हुए सर झुकाए कड़ी है.

राहुल : ख़ुशी??

ख़ुशी ने दुसरे हाथ से अपनी पसंद की हुई ड्रेस उठायी और अपने ऊपर लगा के दिखाई, उसकी नज़रे अभी भी नीचे थी. जिस प्रकार से वो ये सब कर रही थी उस से यही प्रतीत हो रहा था की वो राहुल और मोनिका के बीच के पल में आना नहीं चाहती थी पर उसको आना पड़ा क्युकी उस से ज़्यादा देरर देखा नहीं गया.

राहुल को भी थोड़ा अटपटा सा लगा और उसने ख़ुशी पर ध्यान दिया. यहाँ इनकी शॉपिंग तोह चल hi रही थी तब तक आइये हम अपने हीरो के शहर हो आते है वह का हाल भी देख लेते है.

एक घर में एक लड़की किचन में शाम का नाश्ता बनाने की तैयारी कर रही थी. तभी उसके घर पर खत खटाने की आवाज़ आयी...

दरवाज़ा खोलते hi उसने देखा की एक जवान लड़की खड़े हुए है...

"नेहा तुम??" ये हमारी रौशनी ma'am hi थी राहुल की पूर्व अध्यापिका और नेहा की वर्तमान अध्यापिका.

नेहा : h...hello ma'am!

रौशनी : नेहा?? तुम यहाँ?

नेहा : हां ma'am!! रियली सॉरी... यहाँ यु ऐसे में आपके यहाँ...

रौशनी : pehle..andar आओ नेहा.

*कुछ देरर बाद*

रौशनी : तोह यहाँ कैसे आना हुआ नेहा? कोई डाउट था क्या पिछले लेक्चर में? और तुम्हे मेरा घर का एड्रेस कैसे पता चला?

नेहा : ma'am I'm रियली सॉरी. मेरे कोई वैसे इंटेंशन्स नहीं है. दरअसल मुझे आपका एड्रेस कॉलेज से hi पता चला.

रौशनी : okay! बूत कोई इम्पोर्टेन्ट रीज़न?

नेहा : एक्चुअली ma'am! कॉलेज में कभी टाइम hi नहीं मिलता बात के लिए और फ़ोन पे ऐसी बातें करना सही नहीं लगता. में एक्चुअली आपसे मेरे बड़े भाई के बारे में जान न चाहती हु.

रौशनी (सुरप्रीसेड) : राहुल के बारे में? ः! पर मुझसे ज़्यादा अच्छे से तोह तुम जानती होगी उससे नेहा. ये क्या रीज़न हुआ मुझ से बात करने का...

नेहा : No ma'am. एक्चुअली मुझे उसकी कॉलेज लाइफ के बारे में कुछ नहीं पता, इसलिए आप से जान न चाहती हु.

रौशनी : ओह्ह! इतना प्यार है अपने भैया से? ः!!

नेहा : *ावक्वार्ड स्माइल*

रौशनी : वेल!! उसके बारे में बातें करने लायक तोह ढेर्रो किस्से है. सुबह हो जाएगी यदि मेने बोलना स्टार्ट किया तोह ः...

बी थे वे! ी रियली मिस हिम... कहा है आज कल वह?

नेहा : वो... वो मुंबई में है.

रौशनी : ओह्ह हां! उसने कहा था मुझसे की वो खुद से hi कुछ करेगा. जब से संजय सर ने उसकी जॉब हटवाई है तब से hi उसने ये डिसिशन ले लिया था.

नेहा (सुरप्रीसेड) : संजय सर ने जॉब हटवाई मतलब?

रौशनी : अरे तुम्हे नहीं पता? तुम तोह उसकी बहिन हो न?

नेहा : नहीं मुझे कुछ नहीं पता...

रौशनी : हम्म! एक्चुअली अभी कैंपस के टाइम संजय सर ने राहुल की जॉब हटवाई थी, उस लकी के कहने पर. बोहत बहस हो गयी थी, उसके बाद राहुल ने विथ प्रूफ संजय सर का सच सबके सामने लाया और उनको अंदर करवाया.

नेहा (शॉकेड) : लकी???

रौशनी : हां! राहुल की लाइफ के बारे में तोह इतने किस्से है, हर्र एक दिन कुछ न कुछ होता था. अब क्या hi बताऊ तुम्हे... ः! एक दिन तोह में उसके साथ डेट पे भी गयी थी.

नेहा (शॉकेड) : व्हाट??

रौशनी : हां! ये उसी दिन की बात है जब राहुल का मूड ऑफ था, जॉब न लगने की वजह से... तोह मेने hi उसका मूड फ्रेश करने के लिए कैफ़े में चलने को कहा था. वो कैफ़े कपल वाला था और एन्ड में हम दोनों की वो एक डेट टाइप की हो गयी ... इतना शर्मा रहा था तुम्हारा भाई

कहते हुए रौशनी पुरानी बातें याद करते हुए हस्सन लगती है.

इधर नेहा अपनी पुरानी बातें याद करने लगी. जब वो राहुल को बेरोज़गार कहके मज़ाक उड़ाती थी, उसको हर्र पल बेइज़्ज़त करती थी की उसकी नौकरी नहीं लगी. पर असली कारण तोह ये था की उसकी नौकरी उस लकी के कहने पर उस संजय ने लगने hi नहीं दी और यहाँ नेहा खुश होक उसका उपहास उड़ाती थी की उस से कोई काम नहीं होता. अभी नेहा को लकी पे इतना गुस्सा आ रहा था. उस लकी के चक्कर में नेहा ने अपनी बेस्ट फ्रेंड निकिता की भी बात नहीं मानी थी. एयर फिर एन्ड में नेहा को भी भोगना पड़ा.

रौशनी : बी थे वे! मेने नूडल्स बनाए है, तुम खा के hi जाना.

नेहा : अरे नहीं ma'am! इसकी कोई ज़रुरत नहीं है.

रौशनी : अरे ऐसे कैसे? राहुल आता था तोह बिना खाए जाता नहीं था मेरे घर से. और तुम तोह उसकी बहिन हो... यहाँ आती रहा करो. मुझे भी अच्छा लगेगा.

नेहा : ुहम्म... जी! आप यहाँ अकेली रहती हो?

रौशनी : हां! में पहले होस्टलर थी, मेने तुम्हारे hi कॉलेज से ग्रेजुएशन की उसके बाद मुझे वही पे hi अस ा प्रोफेसर की जॉब मिल गयी तोह मेने ज्वाइन कर लिया. उसके एक साल बाद hi मुझे तुम्हारे भाई की क्लास संभालने को मिली और फिर toh...rest इस हिस्ट्री. ः!!

रौशनी नेहा के लिए नूडल्स लेने किचन में जाती है तोह इतने में hi नेहा को फ़ोन आ जाता है.

नेहा : hello?

निकिता : hello... नेहा!!

नेहा : हां बोल निक्की!

निकिता : रात को दी जाने वाली है.

नेहा : क्या? आज? सहित! में अभी आती हु तेरे यहाँ. उनसे मिलने के लिए.

निकिता : हां यार! आ जाना! दी की जोइनिंग है 4 दिन बाद से तोह डैड उनको लेकर बैंगलोर जा रहे है. उनको सेटल करवाने.

नेहा : हां! में आती हु बस अभी.

निकिता : okay!

*कॉल एंड्स*

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आज के लिए इतना hi गाइस!!

नया अर्च शुरू हो गया है. ये अर्च तानिया की बड़ी बहिन रूचि की शादी पर फोकस्ड रहेगा साथ hi साथ राहुल अपना बिज़नेस भी स्टार्ट कर देगा. इसमें राहुल सभी से दुबारा रूचि की शादी में मिलेगा. क्या रिएक्शन होगा सबका राहुल से मिलने के बाद? क्या होगा शादी के दौरान? ये सब इस अर्च में देखने को मिलेगा.

धन्यवाद्!!
 
I'll बे रियली बिजी फॉर 2 डेज.

हैवे सम वर्क फ्रॉम होम तो दो.

ी हैवे तो कम्पलीट ा रिपोर्ट एंड सबमिट आईटी तो माय सुपेरियर्स.

सो प्लीज डील विथ आईटी.

नेक्स्ट अपडेट मिगहत के ों संडे.

ी won't बे अबले तो के ऑनलाइन फॉर व्होले सैटरडे that's व्हाई I'm इन्फोर्मिंग यू गाइस बिफोर. थैंक्स!! पीस! (◍•ᴗ•◍)
 
गाइस! में अभी जस्ट फुर्सत हुआ हु.

मुझे लगा नहीं था की मुझे इतना टाइम लग जाएगा काम में. मेने ासुमे किया था की संडे की सुबह तक काम फिनिश हो जाएगा और दिन में में अपडेट लिख के रात में पोस्ट कर दूंगा. बूत काम थोड़ा लम्बा खींच गया और अब जाके फुर्सत हुआ हु. तोह अभी में बस लिखने hi जा रहा हु अपडेट. यदि रात 10 के पहले रेडी हो गया तोह आज hi पोस्ट हो जाएगा वर्ण कल तोह होना hi है फिर.
 
भाई इसलिए मेने कहा था की अपडेट संडे को आ सकता है, ये नहीं कहा था की संडे को hi आएगा.

में अपडेट को रश नहीं करना चाहता

इत्मीनान से सही शब्दों से लिखूंगा उससे इसलिए टाइम लगता है.
 
आपने जो जो ख़ुशी के बारे में कहा एकदम सत्य कहा. मेने यही रीडर्स को दिखाने की कोशिश करि है पिछले अपडेट में की कैसे ख़ुशी एक मासूम सी बच्ची की तरह बेहवे करती है राहुल के सामने. आपने बखूबी उसको समझा, मतलब में सफल हो गया अपने विचार व्यक्त करने में. उसके लिए आपका धन्यवाद!!
 
छोटा नहीं है भाई. बोहत म्हणत से इतना बड़ा लिखता हु. यदि आप शुरू के उपदटेस पढोगे और अब के पढोगे तोह आपको साइज समझ आ जाएगा की कितना बढ़ गया है. में कोशिश कर रहा हु ज़्यादा से ज़्यादा कीवर्ड्स के अपडेट लिखने की.
 
अपडेट - 76



अब तक...

निकिता : रात को दी जाने वाली है.

नेहा : क्या? आज? सहित! में अभी आती हु तेरे यहाँ. उनसे मिलने के लिए.

निकिता : हां यार! आ जाना! दी की जोइनिंग है 4 दिन बाद से तोह डैड उनको लेकर बैंगलोर जा रहे है. उनको सेटल करवाने.

नेहा : हां! में आती हु बस अभी.

निकिता : okay!

*कॉल एंड्स*

अब आगे...

नेहा रौशनी ma'am के घर से जल्दी जल्दी उनके हाथ की बनायीं नूडल्स खा के सीधे निकिता के घर की और प्रस्थान करती है. वह पॅहुचते hi वो देखती है की ऋचा अपने बैग में सामान सेट कर रही है.

नेहा : ऋचा दीदी?

ऋचा : नेहा?? आ गयी तुम?





नेहा आगे बढ़ के ऋचा के गले लगती है और वही सोफे पर बैठ जाती है, निकिता और उसके माँ डैड से बात चीत शुरू हो जाती है,

आरती (ऋचा और निकिता की माँ) : और बीटा? निशा किसी है? ठीक है न?

नेहा : हां आंटी सब बढ़िया...

आरती : चलो अच्छा है. और राहुल किधर है?

निकिता (जोरर से) : माँ...

निकिता के जोरर से कहते hi आरती को ध्यान आता है की नेहा और राहुल की आपस में नहीं बनती और उससे ये सवाल नहीं पूछना चाहिए था नेहा से पर अब क्या? अब तोह मुँह से निकल गया. अब उससे वापस थोड़ी लाया जा सकता है. पर आश्चर्य की बात ये थी की नेहा ने बिना कोई गुस्सा दिखाए नोर्मल्ली hi जवाब दे दिया.

नेहा : वो मुंबई में है आंटी.

नेहा के इस जवाब से सभी हैरान थे, खासकर निकिता. वो तोह आश्चर्य जानिक भाव से नेहा को घूर रही थी. नेहा ने राहुल के बारे में नोर्मल्ली आंसर दिया? ऐसा कैसे?

खर्र! निकलने का समय हुआ, अपनों से गले मिलते हुए ऋचा कैब में विनोद (निकिता और ऋचा के डैड) के साथ बैठ गयी और आरती ने रट रट उससे विदा किया. नेहा भी थोड़ी देरर बैठने के बाद निकिता को उसके रूम में ले गयी.

निकिता : हां बोल अब. क्या बात है? अब तोह कमरे में भी आ गए.

नेहा : में रौशनी ma'am के घर गयी थी.

निकिता : रौशनी ma'am के? वो क्यों?

नेहा : उनसे राहुल की कॉलेज लाइफ के बारे में पूछने...

निकिता (शॉकेड) : वेट!!! दीद यू?? दीद यू जस्ट कॉल्ड हिम 'राहुल'??

नेहा : .....

निकिता : ी can't बिलीव थिस! तुम तोह हमेशा उनको बास्टर्ड कहकर बुलाती थी न? ये... ये सुद्दीन चेंज कैसे? क्या हुआ? तुम्हारी और उनकी सलाह हो गयी क्या? या फिर तेरी तबियत कबराब है?

नेहा : नूवो वैयय्य निक्की! शट उप! Don't टॉक नॉनसेंस! में बस पूछने गयी थी और मुझे कुछ पता चला है...

निकिता : क्या??

नेहा : यही की उसकी जॉब वो संजय सर ने हटवाई थी और फिर उसने संजय सर का राज़ खोला और संजय सर के खिलाफ फिर भी हुई... यही सब...

निकिता : ओह्ह वो बात! वो तोह मुझे पता है.

नेहा (शॉकेड) : क्या मतलब तुम्हे पता है? तुम्हे पता था तोह मुझे बताया क्यों नहीं निक्की?

निकिता : यार! तू hi तोह कहती है की मेरे से कभी भी उसके बारे में बात मत किया करो तोह में फिर क्या करू? मेने राहुल भैया के बारे में बात करना इसलिए चोरर दिया है तेरे से...

नेहा : बूत... ठीक है फाइन! I'm गोइंग नाउ.

नेहा वह से मुँह लटका के फिर वापस अपने घर लौट जाती है

इधर ट्रैन में बैठने के बाद जब विनोद टॉयलेट गए तोह ऋचा ने राहुल को फ़ोन किया,

राहुल : हां रीचु!!

ऋचा : कैसे हो हनी?

राहुल : में ठीक हु रीचु पर तुम्हारी याद लगी रहती है...

ऋचा (स्माइल्स) : मुझे भूल गए हो क्या?

राहुल : ये किसी बात हुई?

ऋचा : तुम मुझे याद कर रहे हो न? मतलब तुम मुझे भूल गए, तभी तोह याद कर रहे हो

राहुल (स्माइल्स) : पगली... ऐसा कभी हो सकता है? तुम तोह मेरी हो. तुम्हे कैसे भूल सकता हु में?

राहुल के ये कहने से की ऋचा सिर्फ उसकी है पता नहीं क्यों पर ऋचा के दिल की धड़कन तेज़्ज़ हो गयी, मैं प्रफ्फुल्लित हो उठा.

ऋचा (ब्लश) : ऑफ़ कोर्स में तुम्हारी हु. अच्छा सुनो! I'm लीविंग!! में अभी ट्रैन में हु डैड के साथ.

राहुल : ओह्ह!! थें हैवे ा सेफ जर्नी. वह पहुँच के कॉल करना मुझे. और सेफ रहना okay? कोई भी प्रॉब्लम हो मुझे बिना झिजक के कॉल कर देना okay?

ऋचा : अच्छा बाबा ठीक है. अब रखती हु, डैड आ रहे है. Bye bye, टेक केयर... मऊआअह्ह्ह्हह

राहुल (स्माइल्स) : hmmm...bye!!

*कॉल एंड्स*

ऐसे hi समय का पहिया आगे बढ़ा और इन् बीते हुए दिनों में बोहत सी बातें हुई, बोहत से चंगेस आए सभी की लाइफ में.

राहुल ने अपना बिज़नेस सौरभ के साथ मिलकर स्टार्ट कर दिया था. उसके 4 साल के बनाये हुए सॉफ्टवेयर में थोड़े बोहत चंगेस सौरभ ने अपनी तरफ से किये और एक सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर बनाया. सौरभ की मदद से वो सॉफ्टवेयर खुद की ऑफिसियल साइट पे डाला अस ा ट्रायल वर्शन. न केवल इतना hi पर राहुल ने ख़ुशी के कॉलेज को अपना सॉफ्टवेयर लेने के लिए इंसिस्ट किया और कॉलेज मान भी गया. अब सन कुछ ऐसा था की राहुल स्कूल्ज, कॉलेजेस, हॉस्पिटल्स हर्र एक जगह जहा पर डाटा को सिक्योर रखना पड़ता है सिस्टम में उनको अपना सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर बेचने लगा. धीरे धीरे उसकी साइट पर ट्रैफिक बढ़ने लगा और बोहत से पर्सनल उसेर्स, अथवा छोटी कम्पनीज भी सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने लगी. राहुल ने एक अमाउंट रख दिया पेड वर्शन के लिए. और इस से दोनों को काफी पैसा मिलने लगा. आगे के प्लान के लिए दोनों hi तैयार थे पर उसके लिए उनको रेवेनुए गेनेराते करना था जो की अच्छा ख़ासा हो रहा था बस अब वेट करना था थोड़े दिन.

इधर 3 मोनथस हो चुके थे तोह राहुल ख़ुशी के घर से वापस से सौरभ के पास आ गया. ख़ुशी काफी रोई बूत राहुल ने उससे प्रॉमिस किया हुआ था की जब चाहे वो राहुल के पास आ सकती है और जब भी उससे राहुल की ज़रुरत हो तोह राहुल उसके लिए आ जाएगा. बेचारी इन् बीते हुए महीनो में राहुल के बोहत क्लोज हो गयी थी और अब तोह राहुल उससे एक परिवार के हिस्से की तरह लगने लगा था. राहुल उसके लिए हर्र एक टाइप का रोले प्ले कर रहा था. राहुल उससे किचन में एक माँ की तरह डिश बनाना, सब्ज़िया काटना, सर्वे करना सब कुछ सिखाता, एक बाप की तरह उससे सीख देता, कब और कोण सी चीज़ कैसे करनी चाहिए, बुद्धिमत्ता से कैसे चलना चाहिए, प्यार से जब भी राहुल उसके सर पर हाथ फेरता तोह ख़ुशी को एक अलग hi फीलिंग मिलती. एक भाई की तरह वो ख़ुशी को प्रोटेक्ट करता, कोई भी आंच नहीं आने देता उसपे, और एक लवर की तरह उसका ख़याल रखता उसकी बातें मानता, और उससे प्यार भी देता.

राहुल ये सब अपने नार्मल करैक्टर की वजह से hi करता था, उसका कोई मक़सद नहीं था की ख़ुशी को पटना है. पर ख़ुशी के पॉइंट ऑफ़ व्यू से राहुल उसके लिए एक कम्पलीट पैकेज था वो बोहत प्रोटेक्टिव फील करती जब जब वो राहुल के साथ रहती. कब 3 महीने कम्पलीट हो गए और राहुल जब उसके सामने जा रहा था तोह वो सबके सामने hi रो पड़ी. बोहत समझाने बुझाने पर वो मानी. ख़ुशी एक जंगली बिल्ली की तरह थी जिससे राहुल ने पूरी तरह कण्ट्रोल कर लिया था और अब तोह जैसे ख़ुशी राहुल के बिना रह hi नहीं सकती थी ये हाल हो गया था.

प्रीती भी काफी क्लोज हो गयी थी राहुल के पर वो हमेशा थोड़ा डिस्टेंस बना के रखती थी. उससे पता था ख़ुशी के अंदर राहुल के प्रति कोई फीलिंग्स है और वो राहुल के करीब जाकर ख़ुशी को दुखी नहीं करना चाहती थी.

मोनिका ने राहुल को उसकी पेमेंट 3 मोनथस के हिसाब से आलरेडी दे दी थी और वो वापस से ग्वालियर चली गयी थी. दोनों टच में बने हुए थे.

नेहा की लाइफ भी कुछ नार्मल नहीं थी. वो रौशनी ma'am से समय मिलने पर राहुल के बारे में पूछती और फिर उसके बारे में सोच विचार करती बूत फिर वापस से राहुल के गंदे बोल और व्यवहार को याद करके फिरसे गुस्से से आग बबूला हो जाती.

वादे के अनुसार राहुल को 3 महीने के बाद अब घर लौट आ जाना चाहिए था निशा से मिलने पर 2 महीने बाद रूचि दीदी की शादी थी इसलिए ये डीडे हुआ की राहुल सभी से रूचि दीदी के घर पर hi मिलेगा. निशा काफी नाराज़ हुई राहुल के इस डिसिशन से बूत फिर बाद में मान गयी.

ऋचा बैंगलोर सेटल हो चुकी थी और उसका वह सब बढ़िया चल रहा था. टाइम तो टाइम वो राहुल को कॉल कर उस से बातें करती और राहुल के मन करने के बाद भी जान बुझ के अपनी पेमेंट में से कुछ हिस्सा राहुल के अकाउंट में ट्रांसफर कर देती.

तनीषा भी राहुल को काफी मिस कर रही थी. अपने दिनचर्या से वो काफी बोर होने लगी थी. निशा से मिलने वो ज़रूर जाती रहती और दोनों निशा और तनीषा में शादी के पहले से hi काफी तगड़ी बॉन्डिंग बन्न चुकी थी.

अंशु और वंशु भी अपनी डेली लाइफ में बिजी रहने लगी पर वो दोनों भी राहुल को काफी मिस कर रही थी. केवल कॉल पे hi बात होती. पर तानिया ने अंशु और वंशु को भी विथ फॅमिली इन्विते किया हुआ था इसलिए दोनों 2 महीने के बाद का वेट कर रही थी की कब वो राहुल से वह पर मिलेंगी.

ये तोह था पूरा वर्णन की 3 महीने बाद सभी की लाइफ में क्या क्या चंगेस आए. अब इस से पहले की हम अगले दो महीने के टाइम स्किप पे चले, आइये तब तक देखते है की ख़ुशी और प्रीती के बीच क्या वार्तालाप हुआ 3 महीने बाद.

ख़ुशी : प्रीती...

प्रीती : क्या हुआ ख़ुशी? तू हर्र बार मुझे बुलाती है और जब में पूछती हु क्या हुआ तोह मुँह लटका के बैठ जाती है और कुछ बोलती hi नहीं है...

ख़ुशी : I'm sad...very साद...

प्रीती : राहुल चला गया इसलिए?

ख़ुशी : ी थिंक सो...

प्रीती : ी थिंक सो की बच्ची... सीधे सीधे बोल न की तुझे उसके जाने से अच्छा नहीं लग रहा और इसलिए तू साद है. बातें क्यों घुमा रही है?

ख़ुशी : okay okay...! ी एडमिट! प्रीती...

प्रीती : हम्म्म!?

ख़ुशी (ब्लश) : ी थिंक... ी थिंक ी लव हिम

प्रीती (स्माइल्स) : ी क्नोव!!

ख़ुशी (सुरप्रीसेड) : तुझे कैसे पता?

प्रीती : यार! सब को पता है. आलरेडी दीखता है. तेरी हरकते, तेरी नज़रे उसकी तरफ देखते वक़्त, तेरा रवैया उसके प्रति, तेरे बोल चाल सब कुछ दीखता है, और कोई भी बता देगा की तुझे उस से प्यार है.

ख़ुशी (ब्लश) : ......

ख़ुशी एकदम से प्रीती के गले लग जाती है और अपने चेहरा शर्म के मारे उसके कंधो में छुपा लेती है.

ख़ुशी : प्रीती....

प्रीती : हम्म!?

ख़ुशी : यू लव हिम तू राइट?

प्रीती (हकलाते हुए) : wh..wha..whaatt?? N..noo वयय!! Mein...mein क्यों प्यार करने लगी u..usse.??

ख़ुशी : प्रीती! Don't फूल में! ी क्नोव! यू लव हिम! जैसे तू मुझे पढ़ सकती है वैसे hi में भी तुझे पढ़ सकती हु. एंड ी क्नोव... की तुम मेरे खातिर उसके ज़्यादा पास नहीं जाती. है न? बोलो... तुम्हे मेरी कसम!

प्रीती (कुछ देरर बाद) : हम्म!!

ख़ुशी (स्माइल्स) : ी कनेव आईटी. पर में सिर्फ तेरे साथ शेयर कर सकती हु. सिर्फ तेरे साथ okay?

प्रीती : ख़ुशी? तू पागल है क्या? वो कोई टॉफ़ी नहीं है...

ख़ुशी : वो टॉफ़ी hi है हहै!! एक तरफ से में खाउंगी और एक तरफ से तुम

प्रीती (ब्लश) : पागल है क्या? क्या बोले जा रही हो ये तुम?

ख़ुशी (ब्लश) : wtf प्रीती?? मेरा मतलब वो नहीं था. मेरा मतलब छोटी वाली टॉफ़ी से hi था.

प्रीती : हां! वह तोह देख hi लिया था हमने उस दिन कॉलेज के बॉयज टॉयलेट में की कितने साइज की है वो टॉफ़ी?

ख़ुशी (ब्लश) : प्रीत्तटीईई.... धत्त्त!!! बेशरम कही की...

प्रीती : वाह! अब में बेशरम हो गयी?

Khushi(gale लगते हुए) : ी लव हिम. यू लव हिम तू! में सिर्फ तेरी खातिर उससे शेयर कर सकती हु तेरे साथ, बिकॉज़ ी लव यू तू. में नहीं चाहती की तू साद होये.

प्रीती (इमोशनल होते hi) : तुझे मेरे लिए इतना करने की कोई ज़रुरत नहीं पगली. में तोह यही चाहती हु की तू खुश रहे बस और कुछ नहीं.

ख़ुशी : न्यू! वे विल बे हैप्पी टुगेदर.

प्रीती : हम्म!!!

ऐसे hi 2 महीने बीत गए, राहुल और सौरभ की एअर्निंग चालु हो चुकी थी और अब वो आत्मनिर्भर बन्न ने लगे थे पर अभी भी मंज़िल बोहत दूर थी, राहुल ने थोड़ी बड़ी कम्पनीज से कांटेक्ट करने का सोच लिया था, उसके लिए उससे अपना सॉफ्टवेयर उस लेवल का करना पड़ेगा और साथ hi साथ और भी चीज़े लानी पड़ेंगी पर उन् सब के लिए पैसा लगेगा और वो hi रेवेनुए अभी उससे गेनेराते करना है.

खर्र! वो समय आ hi गया, रूचि दीदी की शादी का समय. राहुल ने थोड़े दिन के लिए गैप लेने के लिए सौरभ को भी अपने साथ रख लिया थोड़ा रिफ्रेशमेंट हो जाएगा दोनों का. पिछले कुछ महीनो में बोहत भाग दौड़ जो हो गयी थी.

इधर निशा निकलने की तैयारी में लगी हुई थी.

निशा : नेहा!?? अरे वो स्नैक्स वाला बैग किचन में hi रह गया, बहार ले आ.

नेहा : लायी माँ...

राजेश : सब कुछ रेडी है न? कैब आने hi वाली है...

निशा : आप टेंशन मत लो, सब कुछ रेडी है.

थोड़ी hi देरर में कैब आ जाती है और सभी लोग बैठ के घर लॉक कर के स्टेशन की तरफ निकल पड़ते है.

स्टेशन पर पॅहुचते hi अंदर hi उन्हें अंशु, वंशु, और विनीता, रुपेश और वेदांत (अंशु और वंशु के माँ डैड और छोटा भाई) मिल गए. सभी इन्वितेद थे तोह सभी ने साथ में जाने का प्लान कर लिया था.

रुपेश : छोटे... सब सामान रख लिया न? कोई चीज़ भूले तोह नहीं हो न?

राजेश : हां भैया! सब रेडी hi है.

विनीता : आ गयी मेरी गुड़िया... आजा आजा अपनी तै जी के पास.

नेहा जाके अपनी तै जी के गले मिलती है, उनके चरण स्पर्श करती है वही निशा भी दोनों अंशु वंशु और विशाल को गले से लगाती है.

कुछ hi देरर बाद गपशप में टाइम बीत जाता है और ट्रैन आ जाती है, सभी सामान ांदसर रखवाते है और बिरथ ढूंढ़ने के बाद सामान रख कर सेटल हो जाते है.

लखनऊ तक का सफर तब करना है, उस हिसाब से दोनों hi घर के लोगो ने खाना पीना रेडी कर रखा था, निशा ने कचोरिया और पुलाओ बनाया था तोह वही विनीता ने ट्रैन के सफर के हिसाब से पूरी और आलू की सब्ज़िया ताकि बच्चे भर पेट खा सके.

बड़े लोग अपने में लगे हुए थे तोह वही नेहा, अंशु और वंशु अपने में लगी हुई थी, विशाल तोह मोबाइल में hi गेम खेल रहा था और यहाँ इनकी लड़कियों वाली गॉसिप शुरू हो चुकी थी.

अंशु : कॉलेज केसा चल रहा है नेहु?

नेहा : बढ़िया दीदी! सब कुछ अच्छा है.

अंशु : चलो अच्छा है!!

वंशु : छोटी कुटी आ रहा है न?

अंशु : हां दी! फ़ोन पर तोह बताया था भाई ने की वह आएँगे पर उन्होंने डेट नहीं बताई.

वंशु : ओह्ह्ह!! खर्र वह पहुँच के तोह पता लग hi जाएगा.

इधर ये दोनों अपने में लगी हुई थी और काफी एक्ससिटेड थी वह पहुचने के लिए पर यहाँ हमारी नेहा खिड़की के साइड से बैठे हुए चलती ट्रैन से बाहर के रात के अँधेरे और चाँद की रौशनी से उजागर हो रहे नज़ारे को देख खोयी हुई किसी सोच में पड़ी थी, क्या उसका बड़ा भाई आएगा? यदि आएगा तोह वो कैसे फेस करे उससे? क्या कैच बदला होगा उसके बारे में इतने महीनो में? क्या वो अब भी वैसा hi है? यदि हां तोह सबके मुँह से उसकी तारीफ क्यों सुन्न ने को मिलती है? राहुल की असली पहचान क्या है?

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आज के लिए इतना hi गाइस!

नेक्स्ट अपडेट से बोहत सारा ड्रामा, रोमांस, इमोशनल सीन्स, सेक्स सीन्स देखने को मिलेंगे आपको. एक्शन पहले hi दिखा दिया है मेने तोह आने वाले इस अर्च में एक्शन काम रहेगा, बोहत काम बूत रोमांस, हॉट सीन्स बोहत मिलेंगे, इमोशनल सीन्स भी देखने को मिलेंगे.

तब तक के लिए... धन्यवाद्!
 
अपडेट - 77

मेगा अपडेट

अब तक...


इधर ये दोनों अपने में लगी हुई थी और काफी एक्ससिटेड थी वह पहुचने के लिए पर यहाँ हमारी नेहा खिड़की के साइड से बैठे हुए चलती ट्रैन से बाहर के रात के अँधेरे और चाँद की रौशनी से उजागर हो रहे नज़ारे को देख खोयी हुई किसी सोच में पड़ी थी, क्या उसका बड़ा भाई आएगा? यदि आएगा तोह वो कैसे फेस करे उससे? क्या कैच बदला होगा उसके बारे में इतने महीनो में? क्या वो अब भी वैसा hi है? यदि हां तोह सबके मुँह से उसकी तारीफ क्यों सुन्न ने को मिलती है? राहुल की असली पहचान क्या है?

अब आगे...

कुछ मीलो की दुरी तब करने के बाद आखिर कार ट्रैन लखनऊ पहुची, नेहा समेत बाकी सभी ने अपना अपना सामान कैर्री करके स्टेशन से बहार निकल टैक्सी ढूंढ़ना शुरू किया, और 2 टैक्सी मिलते hi सभी उसमे बैठ के तानिया के घर की और प्रश्तों कर दिए.

अब इस से पहले की ये सभी तानिया के घर पहुचे, आप लोगो को तानिया के घर के मेंबर्स से इंट्रोडस करवाना ज़रूरी है.

इंट्रोडक्शन

डॉ. मुकेश मिश्रा (आगे - 57) : जी हां! सही पढ़ा आपने. ये पेशे से डॉक्टर है, एक बोहत hi जाने माने डॉक्टर अपने शहर के. शहर के मशहूर हॉस्पिटल में काम करते है, पैसे से काफी संपन्न है. ये निशा के बड़े भाई है यानी की राहुल और नेहा के मां जी. इन्होने hi राहुल को तनीषा की डॉक्टरी की पढाई के लिए पैसे दिए थे और तनीषा की पढ़ाई पूरी करवाई थी. सज्जन पुरुष है, कोई पैसो का घमंड नहीं, और अपने बच्चो से बोहत प्रेम करते है.

ललिता मिश्रा (आगे - 53) : मुकेश जी की पत्नी. सुन्दर तोह है hi ये, क्युकी पहले से hi ब्यूटी पार्लर के काम में माहिर है. खुद का पार्लर भी खोला हुआ है, पर नौकर hi चलाते है पार्लर, खुद थोड़ा काम जाती है. पर make-up से लेकर हर्र एक चीज़ आती है इनसे. बच्चो से अत्यधिक प्रेम करती है. सभी के साथ नम्र व्यवहार रखती है.

रूचि मिश्रा (आगे - 27) : मुकेश और ललिता की बड़ी बेटी. पास के hi कॉलेज में प्रोफेसर है. दिखने में बेहद ख़ूबसूरत, नार्मल फिगर, गोरा रंग, लम्बे बाल, माँ और बाप दोनों पे गयी है ये. इनका व्यवहार कभी सख्त तोह कभी नरम रहता है. दिल की बोहत अच्छी है और अपने लोगो से बेहद प्यार करती है. इनकी hi शादी की तैयारी हो रही है घर में.

तानिया मिश्रा (आगे - 22) : मुकेश और ललिता की छोटी बेटी. बेहद ख़ूबसूरत, स्लिम फिगर, उभरे हुए बड़े बूब्स, कातिलाना आँखें, गुलाबी होंठ. कुल मिलाके ये पूरी बोम्ब्शेल है. इसको देखने के बाद एक अजीब सा नशा आता है, जैसे बिलकुल अपने पास बुला रही है. थोड़ी ज़िद्दी है, दोस्तों के लिए दोस्त और दुश्मनो के लिए कट्टर दुश्मन है. मनचाही हरकते करती है. बातो में भी बोहत आगे है, एकदम muh-fatt है. पर अंदर से बोहत hi सेंसिटिव और उतनी hi नरम है. बुरा जल्दी मानती है, हर्ट जल्दी होती है. पर दिल की बोहत अच्छी है. इसको तोह आप सभी जानते hi है अच्छे से अब और क्या बताना.

घर में एक और मेंबर है और वो है इनका एक छोटा भाई जो अभी दसवीं क्लास में है, उसका कहानी में कोई रोले नहीं है इसलिए उसको इन्क्लुडे नहीं किया गया है. तोह अब चलते है वापस से कहानी की तरफ...

टैक्सी अपनी नार्मल रफ़्तार से गुज़र रही थी और नेहा समेत बाकी सभी लखनऊ शहर की बिल्डिंग्स, मार्किट आदि में सभी की नज़रे व्यस्त हो गयी. कही कोई बड़ा सा मॉल दीखता तोह कही पार्क तोह कही fly-overs, तोह कही जाना माना हमारे भारत का ट्रैफिक. टैक्सी कब बताये हुए एड्रेस पर पहुँच गयी, किसी को समय का पता hi नहीं चला, सब नए शहर के नज़ारे में इतना खोए हुए जो थे सिवाए नेहा के.





नेहा और उसका परिवार तोह पहले आ hi चूका था इस शहर कई बार पर अब वो भी कई सालो बाद यहाँ आए है इसलिए बोहत कुछ बदल चूका था. पर अंशु वंशु और उनके परिवार के लिए ये सब कुछ नया था. पहली बार लखनऊ शहर में जो कदम रखा था. दोनों hi बड़ी उत्सुकता से बाहर के नज़ारे को देख रही थी.

टैक्सी रुकी और सभी को उतरना पड़ा, पैसे देने के बाद टैक्सी चली गयी और सभी सामान उठाते हुए आगे बढे, अभी इस वक़्त वो किसी सोसाइटी में थे और राजेश, निशा, नेहा आगे बढ़ते हुए एक घर की और प्रश्तों किये तोह उन्हें देख बाकी सब भी पीछे पीछे चल दिए.





एक घर था, घर नहीं बंगला कहना सही रहेगा क्युकी घर के हिसाब से वो काफी बड़ा था, एक ग्राउंड फ्लोर, एक फर्स्ट फ्लोर, एक सेकंड फ्लोर और फिर टेरेस. घर सजा हुआ था पर बाहर का गेट खुला हुआ था और कुछ लोग दिखाई दे रहे थे, राजेश आगे बढे और तभी सभी के कानो में एक आवाज़ पड़ी...

"अरे!! आइये आइये... किसी हो निशा!??? कैसे हो आप??"

कहते हुए मुकेश आगे आए और निशा को गले से लगा के निशा और राजेश से सवाल किया.

निशा : बस ठीक है भैया! तैयारी तोह बोहत ज़ोर शोर से चल रही है हां?

मुकेश : अब बिटिया की शादी है, कोई कमी कैसे होने दे सकते है? आइये आप सभी... पहले अच्छे से फ्रेश हो लीजिये, सामान में रखवाए देता हु.

राजेश : ठीक...

राजेश ने फिर मुकेश को अपने भैया से और उनकी फॅमिली से भी इंट्रोडस कराया, सारा इंट्रोडक्शन के बाद सभी फर्स्ट फ्लोर पर चले गए, और वह पे hi अपने बैग्स सभी ने रख दिए. घर में पहले से आलरेडी कई और लोग भी रुके हुए थे जो मुकेश के और भी रिलेटिव्स रहे होंगे. तोह कुल मिलाके नेहा और बाकी सभी के लिए बोहत से अननोन लोग भी थे जो घर में रुके हुए थे और बोहत से नोन लोग भी थे, जिनसे निशा और बाकी सभी ने बात चीत की शुरुआत करि.

गड्डो का इंतज़ाम किया गया था सोने के लिए, क्युकी घर में कई लोग थे, और सभी को सिंगल बीएड पे सुलाना तोह हो नहीं पाटा. इसलिए गड्डो का इंतज़ाम किया गया था. फ्रेश हो जाने के बाद निशा और राजेश सहित विनीता और रुपेश बात चीत में लग गए. अब रह गए तोह केवल नेहा और अंशु वंशु.

वंशु : छोटी, राहुल दिखाई नहीं दे रहा!?

अंशु : ी don't क्नोव दी! मय्बे वो शादी वाले दिन hi आए!?

वंशु : कॉल करके पूछ न कहा है

अंशु : मेने किया था अभी थोड़ी देरर पहले hi दी, बूत उन्होंने कॉल पिक नहीं किया, हो सकता है कही बिजी हो?

वंशु : ये कुटी भी न, बताना चाहिए न इसको की कब आ रहा है, आ भी रहा है या नहीं?

अंशु : it's okay दी! आ जाएंगे वो.

कुछ hi देरर बाद तानिया घर में आती है और नेहा और बाकी सभी को देख ख़ुशी से झूम उठती है और दौड़ते हुए उनसे गले मिलती है,

तानिया : कैसे हो आप सब?

अंशु : हम सब बढ़िया है दी, आप बताओ किसी हो? घर तोह आपका बोहत बड़ा है और काफी सुन्दर भी.

तानिया : थैंक्स! में भी अच्छी हु.

वंशु : वैसे तुम थी कहा? हमे यहाँ आए हुए 1 घंटा हो चूका है

तानिया : बस थोड़ा ज़रूरी सामान लेने गयी थी काम तोह करवाना hi पड़ेगा, शादी वाले घर में यही लगा रहता है...

सभी से मिल जल लेने के बाद जहा सभी बातो में अभी भी बिजी रहते है वही नेहा बालकनी में जाकर कड़ी हो जाती है और नीचे देखते हुए किसी खयालो में खो जाती है, होश तोह उससे जब आता है जब उससे पीछे से एकदम से तानिया की आवाज़ पड़ती है,

तानिया : नेहा?? क्या हुआ? यहाँ क्या कर रही हो?

नेहा : हँ??! नहीं... वो... वो में ऐसे hi बस देख रही थी बालकनी...

तानिया : कुछ तोह बात ज़रूर है. सभी लोग अंदर मौज मस्ती कर रहे है और तुम यहाँ पर कड़ी हो अकेले?

नेहा : नहीं दी... में तोह बस ऐसे hi...

तानिया : राहुल से रिलेटेड कुछ बात है क्या?

नेहा : *साइलेंट*

तानिया : ी कनेव आईटी!! देखो नेहा! बे हैप्पी okay? यहाँ आयी हो, तोह काम से काम अपने लिए मोमेंट्स क्रिएट करो, सभी से मिलो जुलो, बातें करो, नए दोस्त बनाओ, तुम्हे अच्छा लगेगा. ऐसे रहोगी तोह तुम्हारे आस पास के लोग भी एफेक्ट होएंगे और उन्हें भी अच्छा नहीं लगेगा.

नेहा : हम्म्म! दी!! थैंक्स! आगे से ऐसा नहीं होगा.

तानिया (स्माइल्स) : मेरी हेल्प की ज़रुरत हो तोह बिना झिजक के आ जाना मेरे पास.

कहते हुए वो चली जाती है और नेहा भी अंदर आकर सभी के साथ घुलने मिलने की कोशिश करने लगती है.

इंगेजमेंट पहले hi हो चुकी थी तोह अब बस बाकी रस्मे बाकी थी. आज की रस्म मेहँदी की रस्म थी, शाम होने का सभी इंतज़ार कर रहे थे. शाम होते hi मेहँदी की रस्म शुरू हुई,

लड़किया एक दूसरे को सुन्दर सुन्दर मेहँदी लगाने में बिजी हो गयी.

अंशु, वंशु और नेहा को भी वह पे आयी हु दूर की रिलेटिव्स में से कोई उन्हें मेहँदी लगाने लगी. रूचि दीदी के हाथो अथवा पेर्रो में भी मेहँदी लगाना शुरू कर दिया.





शाम के माहौल में नाचना गाना भी हुआ, जहा ट्रेडिशनल सांग्स से लेकर कुछ बॉलीवुड सांग्स भी गाये गए और महिलाये एवम लड़किया भी थिरकती हुई मौज मस्ती का आनंद उठाने लगी.

हमारी सभी लड़कियों ने भी मेहँदी लगवाई और खूब एन्जॉय किया और ऐसे hi ये दिन समाप्त हो गया.

अगले दिन संगीत कार्यक्रम रखा गया, ये तोह बना hi महिलाओ के लिए है तोह भला हमारी महिलाए और लड़किया कहा पीछे रहने वाली थी? सब ने अपनी अपनी कोरियोग्राफी स्टेज पर थिरकते हुए दिखाई, एन्जॉयमेंट हुआ सभी ने खूब एन्जॉय किया. नेहा भी अब थोड़ा थोड़ा खुलने लगी थी और अब सभी चीज़ो को एन्जॉय कर रही थी.





निशा इस बात से काफी खुश थी की आखिर नेहा एन्जॉय कर रही है. पर उससे अभी एक चिंता थी और वो थी की राहुल कहा है? अभी तक जो नहीं आया था... फौरन कॉल लगाना hi बेहतर समझा निशा ने.

निशा : hello?

राहुल : हां माँ!

निशा : हां माँ के बच्चे!? किधर है तू? सबको टेंशन में डालके कहा घूम रहा है?

राहुल (मैं में) : अरे बाप रे!! माँ काफी गुस्से में लग रही है...

राहुल : प्यारी माँ! में शादी वाले दिन hi आऊंगा! आपको आपकी नज़रो के सामने दिख जाऊंगा okay!?

निशा (मुँह बनाते हुए) : हम्फ!! घर की शादी में भी दो दिन पहले नहीं आ सकता!?

राहुल : बिजी था माँ! बूत don't वोर्री! में शादी वाले दिन सुबह hi पहुँच जाऊंगा.

निशा : अच्छा ठीक है! अपना ख़याला रखना बेतु! ध्यान से सफर करना.

राहुल : जी माँ! और वह क्या चल रहा है?

निशा : बस अभी संगीत का कार्यक्रम ख़तम हुआ है, सभी थके हारे बैठे है. सोने hi जाने वाले है सब.

राहुल : ओह्ह! चलो बढ़िया है. आप सब सही से हो न?

निशा : हां बेतु! हम सब बढ़िया है. तेरे ताऊ जी और बाकी सब भी हमारे साथ आये हुए है.

राहुल : ओह्ह्ह! ठीक है माँ! अब में रखता हु, आप भी आराम कीजिये. शादी वाले दिन सुबह मिलता हु.

निशा : हम्म! Bye बेतु! ख़याल रखना!!

*कॉल एंड्स*

अगले दिन तिलक रस्म थी जिसमे घर के पुरुष एवम लड़के लोग लड़के वालो के घर गए और उनका तिलक किया और ये दिन भी ऐसे hi गुज़र गया. अगले दिन शादी थी, और सुबह हल्दी की रस्म होने वाली थी.

सुबह होते hi घर में चेहेल पहल की आवाज़ और लोगो की बातो की आवाज़ों से नेहा और अंशु वंशु की नींद खुल गयी. अभी सुबह के 7:30 हुए थे पर अभी से hi घर में चेहेल पहल बानी हुई थी. शादी का घर ऐसा hi होता है भाई साहब.

आँखें मीस्ते हुए अंशु वंशु फ्रेश होने गयी और बहार आके नाश्ता करने बैठी hi थी की बाहर कुछ शोर सा हुआ तोह दोनों उठ के बाहर गयी और दोनों की ख़ुशी का कोई ठिकाना hi नहीं था जब उन्होंने देखा की सामने राहुल है.

सौरभ के साथ राहुल टैक्सी से बाहर आया और टैक्सी वाले को पैसे दिया, आगे बढ़ते hi उससे दरवाज़े के सामने अंशु वंशु दिखाई दे गयी, जो एकदम से दौड़ते हुए उसके पास आयी और उस से जोरर से कूदते हुए लिपट गयी.





वंशु (प्यार से सीने में मुक्का मारते हुए) : किधर था तू कुटी? कब से तेरा इंतज़ार कर रही थी में...

अंशु : केवल आप नहीं दी! हम सब भाई का इंतज़ार कर रहे थे.

राहुल (स्माइल्स) : किसी हो आप सब?

अंशु : बस आपके इंतज़ार में पागल हो रहे थे भाई! अब चलिए अंदर, सब बोहत खुश हो जाएंगे आपको देखने के बाद.

सौरभ : उम्!! ये सब कोण??

राहुल : ओह्ह हां! ये मेरी बहने है. वंशु दी और ये अंशु. और ये सौरभ है वंशु दी मेरा अच्छा फ्रेंड.

अंशु : hello!

वंशु : ही!!

सौरभ : hello...hello!!

जैसे hi राहुल अंदर आता है तोह जो जो लोग सो के उठ चुके थे उनकी नज़रे सीधे राहुल पर जाती है. अभी केवल कुछ लोग hi उठे थे, बाकी बोहत से लोग सो रहे थे अभी भी. कल के संगीत कार्यक्रम की थकान जो बची हुई थी.

नेहा वाशरूम में थी तोह उससे अभी बहार क्या हो रहा है कुछ नहीं पता था.

अंदर से मुकेश जैसे hi निकलते है राहुल को देख सरप्राइज होते है और फिर एकदम खुश होते हुए अपने गले से लगा लेते है...

मुकेश : आ गए तुम!!? कहा रह गए थे भाई इतने दिनों तक? बहिन की शादी में इतना लेट आओगे?

मुकेश का रवैया राहुल के प्रति शुरू से hi ऐसा रहा है, वो राहुल को अपने दोस्त जैसा मानते है. यही वजह थी की इनकी इतनी अच्छी बॉन्डिंग के कारण hi मुकेश ने राहुल को तनीषा के लिए पैसे दिए अथवा उससे पढ़ाया भी.

राहुल : मां जी! में चाह रहा था जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी औ पर आ hi नहीं सका. काम में लगा हुआ था, और फ्री होते hi यहाँ आया हु. आप कैसे है?

मुकेश : सब बढ़िया है बीटा! तुम सबसे पहले फटाफट से नाहा धो लो फ्रेश हो लो, और नाश्ता कर लो. ये सामान में रखवाए देता हु.

मुकेश नौकरो को बोलके राहुल और सौरभ का सामान ऊपर रखवाते है, अंशु वंशु नाश्ता लेकर एक जगह बैठ जाती है. सौरभ को लेकर राहुल ऊपर जैसे hi पोहचता है तोह एक कमरे का दरवाज़ा खुलता है और अंदर से निशा आ रही होती है, जैसे hi वो राहुल को देखती है तोह उसके परर वही जम्म जाते है कुछ सेकण्ड्स के लिए तोह. आँखों में हलके हलके आसुओ को लेकर वो फौरन दौड़ते हुए राहुल को अपने गले से लगा लेती है.





राहुल : माँ!!!

निशा : बेतु... केसा है तू? किधर था? खाना पीना सही से खा रहा है या नहीं? देखो तोह कितना दुबला हो गया है!?

कहते हुए निशा राहुल के पूरे मुँह पर चुम्बनों की बरसात कर देती है, 5 महीने बाद जो देख रही थी अपने बेटे को. हर्र माँ का दिल एक जैसा hi होता है. राहुल कितना भी मोटा क्यों न हो जाए पर क्युकी वो अपनी माँ की नज़रो से दूर था तोह माँ को लगा की दुबला हो गया है. यही तोह है प्यार.

सौरभ भी माँ बेटे के मिलान को देख कर उससे अपनी माँ की याद आ गयी और उसने समझदारी दिखाते हुए दोनों को कुछ कह के डिस्टर्ब नहीं किया. जब दोनों माँ बेटे का मिलाप हो गया तोह सौरभ ने भी आगे बढ़कर निशा के परर छुए और फिर निशा ने दोनों को फ्रेश होने के बाद नीचे आ जाने को कहा.

सौरभ : भाई पहले तू होल फ्रेश! में जबतक बैठ के फ़ोन चला रहा थोड़ी देरर! वाशरूम्स तोह बोहत दिख रहे है मुझे बूत इस फ्लोर पे दो hi वाशरूम है और दोनों में कोई आलरेडी पहले से घुसा हुआ है. तोह में तोह थोड़ी देरर से hi होऊंगा फ्रेश.

राहुल : वेल! जैसा तुझे सही लगे. पर ध्यान रहे ज़्यादा लेट नहीं करना.

सौरभ : ोकायययय! बॉस!!!

अभी राहुल वाशरूम की तरफ जाने hi वाला होता है की उससे पीछे से ललिता की आवाज़ पड़ती है...

ललिता : आ गया मेरा बच्चा!? कहा था तू इतने दिन?

कहते हुए वो राहुल को अपने सीने से लगा लेती है,

राहुल : ममी जी! किसी हो आप?

ललिता : चल चल! अब बात मत घुमा! किधर था तू? अपनी रूचि दीदी से बस इतना hi प्यार है? दो दिन पहले भी नहीं आ सका तू उसकी शादी में हां? बोल!?

राहुल : अब आपसे तोह में जीत नहीं सकता. इसलिए कान पकड़ के माफ़ी मांगता हु आपसे! माफ़ कर दीजिये ममी जी!

इधर ये दोनों बात कर रहे थे और अचानक hi वही पर वाशरूम का दूर खुला और नेहा बाहर से निकली, उसका चेहरा गीला था, हल्का हल्का पानी बालो पर भी लगा हुआ था, उसने जैसे hi वाशरूम का गेट बंद कर के पलट कर देखा तोह उसकी आँखें hi चौड़ी हो गयी.

सामने राहुल ममी से बात करते हुए खड़ा था. राहुल ने अभी नेहा को नहीं देखा था पर नेहा तोह आँखें फाड़े अपने सामने उससे देख रही थी. न जाने कितने विचार उसके मैं में तुरंत उमड़ने लगे. बिना कुछ कहे, बिना कुछ हरकत किये वो बस मूर्ति की तरह खड़े होकर राहुल को देखे जा रही थी. आँखें एकदम फैली हुई थी

अब जब वो ध्यान से देख रही थी तोह उसने गौर किया की राहुल पहले से भी काफी हैंडसम हो गया था, ये कोई और नहीं उसका सागा भाई था. उससे समझ नहीं आ रहा था की वो कैसे रियेक्ट करे. नेहा खुद को इतने दिनों से प्रेपर कर रही थी की वो खुद कैसे रियेक्ट करेगी ये सब सामने आने पर. पर शायद वो प्रेपरेड़ नहीं थी. राहुल के चेहरे पर एक स्माइल थी, वो स्माइल जो घर में बिलकुल भी देखने को नहीं मिलती थी नेहा को.

वो देख रही थी की कैसे उसका भाई और भी चार्मिंग, और स्मार्ट दिखने लगा है. जैसे hi ललिता वापस गयी और राहुल ने पलट कर देखा तोह वो भी चौंक गया सामने नेहा को देख कर.

उसके सामने वही बहिन कड़ी हुई थी जो संसार में उससे सबसे ज़्यादा नफरत करती है, उसकी सगी बहिन नेहा. पहले से काफी ख़ूबसूरत हो चुकी थी, लम्बे बाल, अभी भी पहले की तरह गुलाबी गाल और होंठ, चंचल आँखें, चेहरा और थोड़े बाल अभी गीले होने के कारण और भी ख़ूबसूरत लग रही थी.

दोनों राहुल और नेहा एक दूसरे को आँखें फाड़े घूरे जा रहे थे, दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई थी इन् 5 महीनो में. नेहा को बार बार वो दृश्य याद आने लगा जब मोनिका ने उसकी कल्लोर पकड़ के बताया था की राहुल ने hi उससे बचाया है. और आज वही राहुल उसकी नज़रो के सामने था. वही राहुल जिसके बारे में अभी कुछ दिन पहले hi रौशनी ma'am ने बताया था की संजय सर के कारण उसकी जॉब हटी थी और नेहा ने मज़ाक उड़ाया था. आज वही राहुल उसके सामने था.

पर ये बात भी नहीं झुटलाई जा सकती की ये वही राहुल है जो अपनी बहिन से नफरत करता है, उससे मारना चाहता है और न जाने क्या क्या कर चूका है नेहा के साथ. नेहा के मैं में ये दोनों तरफ के पहलु ध्यान में थे. और शायद इसलिए वो समझ नहीं पा रही थी की कैसे रियेक्ट करे.

आगे कदम बढ़ाते हुए राहुल नेहा की तरफ आगे बढ़ता है, तोह नेहा की धड़कन तेज़्ज़ हो जाती है, उसके सास लेने से उसके ूरोज़ ऊपर नीचे होने लगते है.





जब ेदकुम बगल में राहुल आके खड़ा हो जाता है तोह नेहा की तोह जैसे हालत hi खराब हो जाती है, ऐसा नहीं था की वो बोहत डर गयी थी, ये कुछ अलग hi फीलिंग थी. उसके उभार ऊपर नीचे बड़ी hi तेज़ी से हो रहे थे, सासें एकदम तेज़्ज़. राहुल ने आगे बढ़ते हुए उसके कान में कहा...

"कैसी हो??"

आवाज़ में ना ज़्यादा एक्ससिटेमेंट था, न hi कोई गुस्सा, न hi कोई ख़ुशी, न hi कोई गम पर उस एक सवाल से नेहा की रूह कांप गयी, राहुल के शरीर की महक, और उसकी गरम सास और वही पुरानी आवाज़ जब नेहा के कान में पड़ी तोह उसके रोंगटे खड़े हो गए, बदन पूरा सिहर उठा. सारे चेहरे का पानी उड़द चूका था. गहरी सास लेते हुए उसने खुद को कण्ट्रोल किया और दौड़ते हुए वह से एकदम से भाग के चली गयी.

राहुल ने भी गहरी सास लेते हुए खुद के चेहरे पे अपना हाथ दे मारा...

राहुल (मैं में) : क्यों किया मेने ये? ी shouldn't हैवे दोने तहत... रेस्त्रां राहुल! रेस्त्रां योरसेल्फ!

सोचते हुए वो वाशरूम में चला गया...

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद्!!
 
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