अपडेट - 77
मेगा अपडेट
अब तक...
इधर ये दोनों अपने में लगी हुई थी और काफी एक्ससिटेड थी वह पहुचने के लिए पर यहाँ हमारी नेहा खिड़की के साइड से बैठे हुए चलती ट्रैन से बाहर के रात के अँधेरे और चाँद की रौशनी से उजागर हो रहे नज़ारे को देख खोयी हुई किसी सोच में पड़ी थी, क्या उसका बड़ा भाई आएगा? यदि आएगा तोह वो कैसे फेस करे उससे? क्या कैच बदला होगा उसके बारे में इतने महीनो में? क्या वो अब भी वैसा hi है? यदि हां तोह सबके मुँह से उसकी तारीफ क्यों सुन्न ने को मिलती है? राहुल की असली पहचान क्या है?
अब आगे...
कुछ मीलो की दुरी तब करने के बाद आखिर कार ट्रैन लखनऊ पहुची, नेहा समेत बाकी सभी ने अपना अपना सामान कैर्री करके स्टेशन से बहार निकल टैक्सी ढूंढ़ना शुरू किया, और 2 टैक्सी मिलते hi सभी उसमे बैठ के तानिया के घर की और प्रश्तों कर दिए.
अब इस से पहले की ये सभी तानिया के घर पहुचे, आप लोगो को तानिया के घर के मेंबर्स से इंट्रोडस करवाना ज़रूरी है.
इंट्रोडक्शन
डॉ. मुकेश मिश्रा (आगे - 57) : जी हां! सही पढ़ा आपने. ये पेशे से डॉक्टर है, एक बोहत hi जाने माने डॉक्टर अपने शहर के. शहर के मशहूर हॉस्पिटल में काम करते है, पैसे से काफी संपन्न है. ये निशा के बड़े भाई है यानी की राहुल और नेहा के मां जी. इन्होने hi राहुल को तनीषा की डॉक्टरी की पढाई के लिए पैसे दिए थे और तनीषा की पढ़ाई पूरी करवाई थी. सज्जन पुरुष है, कोई पैसो का घमंड नहीं, और अपने बच्चो से बोहत प्रेम करते है.
ललिता मिश्रा (आगे - 53) : मुकेश जी की पत्नी. सुन्दर तोह है hi ये, क्युकी पहले से hi ब्यूटी पार्लर के काम में माहिर है. खुद का पार्लर भी खोला हुआ है, पर नौकर hi चलाते है पार्लर, खुद थोड़ा काम जाती है. पर make-up से लेकर हर्र एक चीज़ आती है इनसे. बच्चो से अत्यधिक प्रेम करती है. सभी के साथ नम्र व्यवहार रखती है.
रूचि मिश्रा (आगे - 27) : मुकेश और ललिता की बड़ी बेटी. पास के hi कॉलेज में प्रोफेसर है. दिखने में बेहद ख़ूबसूरत, नार्मल फिगर, गोरा रंग, लम्बे बाल, माँ और बाप दोनों पे गयी है ये. इनका व्यवहार कभी सख्त तोह कभी नरम रहता है. दिल की बोहत अच्छी है और अपने लोगो से बेहद प्यार करती है. इनकी hi शादी की तैयारी हो रही है घर में.
तानिया मिश्रा (आगे - 22) : मुकेश और ललिता की छोटी बेटी. बेहद ख़ूबसूरत, स्लिम फिगर, उभरे हुए बड़े बूब्स, कातिलाना आँखें, गुलाबी होंठ. कुल मिलाके ये पूरी बोम्ब्शेल है. इसको देखने के बाद एक अजीब सा नशा आता है, जैसे बिलकुल अपने पास बुला रही है. थोड़ी ज़िद्दी है, दोस्तों के लिए दोस्त और दुश्मनो के लिए कट्टर दुश्मन है. मनचाही हरकते करती है. बातो में भी बोहत आगे है, एकदम muh-fatt है. पर अंदर से बोहत hi सेंसिटिव और उतनी hi नरम है. बुरा जल्दी मानती है, हर्ट जल्दी होती है. पर दिल की बोहत अच्छी है. इसको तोह आप सभी जानते hi है अच्छे से अब और क्या बताना.
घर में एक और मेंबर है और वो है इनका एक छोटा भाई जो अभी दसवीं क्लास में है, उसका कहानी में कोई रोले नहीं है इसलिए उसको इन्क्लुडे नहीं किया गया है. तोह अब चलते है वापस से कहानी की तरफ...
टैक्सी अपनी नार्मल रफ़्तार से गुज़र रही थी और नेहा समेत बाकी सभी लखनऊ शहर की बिल्डिंग्स, मार्किट आदि में सभी की नज़रे व्यस्त हो गयी. कही कोई बड़ा सा मॉल दीखता तोह कही पार्क तोह कही fly-overs, तोह कही जाना माना हमारे भारत का ट्रैफिक. टैक्सी कब बताये हुए एड्रेस पर पहुँच गयी, किसी को समय का पता hi नहीं चला, सब नए शहर के नज़ारे में इतना खोए हुए जो थे सिवाए नेहा के.

नेहा और उसका परिवार तोह पहले आ hi चूका था इस शहर कई बार पर अब वो भी कई सालो बाद यहाँ आए है इसलिए बोहत कुछ बदल चूका था. पर अंशु वंशु और उनके परिवार के लिए ये सब कुछ नया था. पहली बार लखनऊ शहर में जो कदम रखा था. दोनों hi बड़ी उत्सुकता से बाहर के नज़ारे को देख रही थी.
टैक्सी रुकी और सभी को उतरना पड़ा, पैसे देने के बाद टैक्सी चली गयी और सभी सामान उठाते हुए आगे बढे, अभी इस वक़्त वो किसी सोसाइटी में थे और राजेश, निशा, नेहा आगे बढ़ते हुए एक घर की और प्रश्तों किये तोह उन्हें देख बाकी सब भी पीछे पीछे चल दिए.

एक घर था, घर नहीं बंगला कहना सही रहेगा क्युकी घर के हिसाब से वो काफी बड़ा था, एक ग्राउंड फ्लोर, एक फर्स्ट फ्लोर, एक सेकंड फ्लोर और फिर टेरेस. घर सजा हुआ था पर बाहर का गेट खुला हुआ था और कुछ लोग दिखाई दे रहे थे, राजेश आगे बढे और तभी सभी के कानो में एक आवाज़ पड़ी...
"अरे!! आइये आइये... किसी हो निशा!??? कैसे हो आप??"
कहते हुए मुकेश आगे आए और निशा को गले से लगा के निशा और राजेश से सवाल किया.
निशा : बस ठीक है भैया! तैयारी तोह बोहत ज़ोर शोर से चल रही है हां?
मुकेश : अब बिटिया की शादी है, कोई कमी कैसे होने दे सकते है? आइये आप सभी... पहले अच्छे से फ्रेश हो लीजिये, सामान में रखवाए देता हु.
राजेश : ठीक...
राजेश ने फिर मुकेश को अपने भैया से और उनकी फॅमिली से भी इंट्रोडस कराया, सारा इंट्रोडक्शन के बाद सभी फर्स्ट फ्लोर पर चले गए, और वह पे hi अपने बैग्स सभी ने रख दिए. घर में पहले से आलरेडी कई और लोग भी रुके हुए थे जो मुकेश के और भी रिलेटिव्स रहे होंगे. तोह कुल मिलाके नेहा और बाकी सभी के लिए बोहत से अननोन लोग भी थे जो घर में रुके हुए थे और बोहत से नोन लोग भी थे, जिनसे निशा और बाकी सभी ने बात चीत की शुरुआत करि.
गड्डो का इंतज़ाम किया गया था सोने के लिए, क्युकी घर में कई लोग थे, और सभी को सिंगल बीएड पे सुलाना तोह हो नहीं पाटा. इसलिए गड्डो का इंतज़ाम किया गया था. फ्रेश हो जाने के बाद निशा और राजेश सहित विनीता और रुपेश बात चीत में लग गए. अब रह गए तोह केवल नेहा और अंशु वंशु.
वंशु : छोटी, राहुल दिखाई नहीं दे रहा!?
अंशु : ी don't क्नोव दी! मय्बे वो शादी वाले दिन hi आए!?
वंशु : कॉल करके पूछ न कहा है
अंशु : मेने किया था अभी थोड़ी देरर पहले hi दी, बूत उन्होंने कॉल पिक नहीं किया, हो सकता है कही बिजी हो?
वंशु : ये कुटी भी न, बताना चाहिए न इसको की कब आ रहा है, आ भी रहा है या नहीं?
अंशु : it's okay दी! आ जाएंगे वो.
कुछ hi देरर बाद तानिया घर में आती है और नेहा और बाकी सभी को देख ख़ुशी से झूम उठती है और दौड़ते हुए उनसे गले मिलती है,
तानिया : कैसे हो आप सब?
अंशु : हम सब बढ़िया है दी, आप बताओ किसी हो? घर तोह आपका बोहत बड़ा है और काफी सुन्दर भी.
तानिया : थैंक्स! में भी अच्छी हु.
वंशु : वैसे तुम थी कहा? हमे यहाँ आए हुए 1 घंटा हो चूका है
तानिया : बस थोड़ा ज़रूरी सामान लेने गयी थी काम तोह करवाना hi पड़ेगा, शादी वाले घर में यही लगा रहता है...
सभी से मिल जल लेने के बाद जहा सभी बातो में अभी भी बिजी रहते है वही नेहा बालकनी में जाकर कड़ी हो जाती है और नीचे देखते हुए किसी खयालो में खो जाती है, होश तोह उससे जब आता है जब उससे पीछे से एकदम से तानिया की आवाज़ पड़ती है,
तानिया : नेहा?? क्या हुआ? यहाँ क्या कर रही हो?
नेहा : हँ??! नहीं... वो... वो में ऐसे hi बस देख रही थी बालकनी...
तानिया : कुछ तोह बात ज़रूर है. सभी लोग अंदर मौज मस्ती कर रहे है और तुम यहाँ पर कड़ी हो अकेले?
नेहा : नहीं दी... में तोह बस ऐसे hi...
तानिया : राहुल से रिलेटेड कुछ बात है क्या?
नेहा : *साइलेंट*
तानिया : ी कनेव आईटी!! देखो नेहा! बे हैप्पी okay? यहाँ आयी हो, तोह काम से काम अपने लिए मोमेंट्स क्रिएट करो, सभी से मिलो जुलो, बातें करो, नए दोस्त बनाओ, तुम्हे अच्छा लगेगा. ऐसे रहोगी तोह तुम्हारे आस पास के लोग भी एफेक्ट होएंगे और उन्हें भी अच्छा नहीं लगेगा.
नेहा : हम्म्म! दी!! थैंक्स! आगे से ऐसा नहीं होगा.
तानिया (स्माइल्स) : मेरी हेल्प की ज़रुरत हो तोह बिना झिजक के आ जाना मेरे पास.
कहते हुए वो चली जाती है और नेहा भी अंदर आकर सभी के साथ घुलने मिलने की कोशिश करने लगती है.
इंगेजमेंट पहले hi हो चुकी थी तोह अब बस बाकी रस्मे बाकी थी. आज की रस्म मेहँदी की रस्म थी, शाम होने का सभी इंतज़ार कर रहे थे. शाम होते hi मेहँदी की रस्म शुरू हुई,
लड़किया एक दूसरे को सुन्दर सुन्दर मेहँदी लगाने में बिजी हो गयी.
अंशु, वंशु और नेहा को भी वह पे आयी हु दूर की रिलेटिव्स में से कोई उन्हें मेहँदी लगाने लगी. रूचि दीदी के हाथो अथवा पेर्रो में भी मेहँदी लगाना शुरू कर दिया.

शाम के माहौल में नाचना गाना भी हुआ, जहा ट्रेडिशनल सांग्स से लेकर कुछ बॉलीवुड सांग्स भी गाये गए और महिलाये एवम लड़किया भी थिरकती हुई मौज मस्ती का आनंद उठाने लगी.
हमारी सभी लड़कियों ने भी मेहँदी लगवाई और खूब एन्जॉय किया और ऐसे hi ये दिन समाप्त हो गया.
अगले दिन संगीत कार्यक्रम रखा गया, ये तोह बना hi महिलाओ के लिए है तोह भला हमारी महिलाए और लड़किया कहा पीछे रहने वाली थी? सब ने अपनी अपनी कोरियोग्राफी स्टेज पर थिरकते हुए दिखाई, एन्जॉयमेंट हुआ सभी ने खूब एन्जॉय किया. नेहा भी अब थोड़ा थोड़ा खुलने लगी थी और अब सभी चीज़ो को एन्जॉय कर रही थी.

निशा इस बात से काफी खुश थी की आखिर नेहा एन्जॉय कर रही है. पर उससे अभी एक चिंता थी और वो थी की राहुल कहा है? अभी तक जो नहीं आया था... फौरन कॉल लगाना hi बेहतर समझा निशा ने.
निशा : hello?
राहुल : हां माँ!
निशा : हां माँ के बच्चे!? किधर है तू? सबको टेंशन में डालके कहा घूम रहा है?
राहुल (मैं में) : अरे बाप रे!! माँ काफी गुस्से में लग रही है...
राहुल : प्यारी माँ! में शादी वाले दिन hi आऊंगा! आपको आपकी नज़रो के सामने दिख जाऊंगा okay!?
निशा (मुँह बनाते हुए) : हम्फ!! घर की शादी में भी दो दिन पहले नहीं आ सकता!?
राहुल : बिजी था माँ! बूत don't वोर्री! में शादी वाले दिन सुबह hi पहुँच जाऊंगा.
निशा : अच्छा ठीक है! अपना ख़याला रखना बेतु! ध्यान से सफर करना.
राहुल : जी माँ! और वह क्या चल रहा है?
निशा : बस अभी संगीत का कार्यक्रम ख़तम हुआ है, सभी थके हारे बैठे है. सोने hi जाने वाले है सब.
राहुल : ओह्ह! चलो बढ़िया है. आप सब सही से हो न?
निशा : हां बेतु! हम सब बढ़िया है. तेरे ताऊ जी और बाकी सब भी हमारे साथ आये हुए है.
राहुल : ओह्ह्ह! ठीक है माँ! अब में रखता हु, आप भी आराम कीजिये. शादी वाले दिन सुबह मिलता हु.
निशा : हम्म! Bye बेतु! ख़याल रखना!!
*कॉल एंड्स*
अगले दिन तिलक रस्म थी जिसमे घर के पुरुष एवम लड़के लोग लड़के वालो के घर गए और उनका तिलक किया और ये दिन भी ऐसे hi गुज़र गया. अगले दिन शादी थी, और सुबह हल्दी की रस्म होने वाली थी.
सुबह होते hi घर में चेहेल पहल की आवाज़ और लोगो की बातो की आवाज़ों से नेहा और अंशु वंशु की नींद खुल गयी. अभी सुबह के 7:30 हुए थे पर अभी से hi घर में चेहेल पहल बानी हुई थी. शादी का घर ऐसा hi होता है भाई साहब.
आँखें मीस्ते हुए अंशु वंशु फ्रेश होने गयी और बहार आके नाश्ता करने बैठी hi थी की बाहर कुछ शोर सा हुआ तोह दोनों उठ के बाहर गयी और दोनों की ख़ुशी का कोई ठिकाना hi नहीं था जब उन्होंने देखा की सामने राहुल है.
सौरभ के साथ राहुल टैक्सी से बाहर आया और टैक्सी वाले को पैसे दिया, आगे बढ़ते hi उससे दरवाज़े के सामने अंशु वंशु दिखाई दे गयी, जो एकदम से दौड़ते हुए उसके पास आयी और उस से जोरर से कूदते हुए लिपट गयी.

वंशु (प्यार से सीने में मुक्का मारते हुए) : किधर था तू कुटी? कब से तेरा इंतज़ार कर रही थी में...
अंशु : केवल आप नहीं दी! हम सब भाई का इंतज़ार कर रहे थे.
राहुल (स्माइल्स) : किसी हो आप सब?
अंशु : बस आपके इंतज़ार में पागल हो रहे थे भाई! अब चलिए अंदर, सब बोहत खुश हो जाएंगे आपको देखने के बाद.
सौरभ : उम्!! ये सब कोण??
राहुल : ओह्ह हां! ये मेरी बहने है. वंशु दी और ये अंशु. और ये सौरभ है वंशु दी मेरा अच्छा फ्रेंड.
अंशु : hello!
वंशु : ही!!
सौरभ : hello...hello!!
जैसे hi राहुल अंदर आता है तोह जो जो लोग सो के उठ चुके थे उनकी नज़रे सीधे राहुल पर जाती है. अभी केवल कुछ लोग hi उठे थे, बाकी बोहत से लोग सो रहे थे अभी भी. कल के संगीत कार्यक्रम की थकान जो बची हुई थी.
नेहा वाशरूम में थी तोह उससे अभी बहार क्या हो रहा है कुछ नहीं पता था.
अंदर से मुकेश जैसे hi निकलते है राहुल को देख सरप्राइज होते है और फिर एकदम खुश होते हुए अपने गले से लगा लेते है...
मुकेश : आ गए तुम!!? कहा रह गए थे भाई इतने दिनों तक? बहिन की शादी में इतना लेट आओगे?
मुकेश का रवैया राहुल के प्रति शुरू से hi ऐसा रहा है, वो राहुल को अपने दोस्त जैसा मानते है. यही वजह थी की इनकी इतनी अच्छी बॉन्डिंग के कारण hi मुकेश ने राहुल को तनीषा के लिए पैसे दिए अथवा उससे पढ़ाया भी.
राहुल : मां जी! में चाह रहा था जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी औ पर आ hi नहीं सका. काम में लगा हुआ था, और फ्री होते hi यहाँ आया हु. आप कैसे है?
मुकेश : सब बढ़िया है बीटा! तुम सबसे पहले फटाफट से नाहा धो लो फ्रेश हो लो, और नाश्ता कर लो. ये सामान में रखवाए देता हु.
मुकेश नौकरो को बोलके राहुल और सौरभ का सामान ऊपर रखवाते है, अंशु वंशु नाश्ता लेकर एक जगह बैठ जाती है. सौरभ को लेकर राहुल ऊपर जैसे hi पोहचता है तोह एक कमरे का दरवाज़ा खुलता है और अंदर से निशा आ रही होती है, जैसे hi वो राहुल को देखती है तोह उसके परर वही जम्म जाते है कुछ सेकण्ड्स के लिए तोह. आँखों में हलके हलके आसुओ को लेकर वो फौरन दौड़ते हुए राहुल को अपने गले से लगा लेती है.

राहुल : माँ!!!
निशा : बेतु... केसा है तू? किधर था? खाना पीना सही से खा रहा है या नहीं? देखो तोह कितना दुबला हो गया है!?
कहते हुए निशा राहुल के पूरे मुँह पर चुम्बनों की बरसात कर देती है, 5 महीने बाद जो देख रही थी अपने बेटे को. हर्र माँ का दिल एक जैसा hi होता है. राहुल कितना भी मोटा क्यों न हो जाए पर क्युकी वो अपनी माँ की नज़रो से दूर था तोह माँ को लगा की दुबला हो गया है. यही तोह है प्यार.
सौरभ भी माँ बेटे के मिलान को देख कर उससे अपनी माँ की याद आ गयी और उसने समझदारी दिखाते हुए दोनों को कुछ कह के डिस्टर्ब नहीं किया. जब दोनों माँ बेटे का मिलाप हो गया तोह सौरभ ने भी आगे बढ़कर निशा के परर छुए और फिर निशा ने दोनों को फ्रेश होने के बाद नीचे आ जाने को कहा.
सौरभ : भाई पहले तू होल फ्रेश! में जबतक बैठ के फ़ोन चला रहा थोड़ी देरर! वाशरूम्स तोह बोहत दिख रहे है मुझे बूत इस फ्लोर पे दो hi वाशरूम है और दोनों में कोई आलरेडी पहले से घुसा हुआ है. तोह में तोह थोड़ी देरर से hi होऊंगा फ्रेश.
राहुल : वेल! जैसा तुझे सही लगे. पर ध्यान रहे ज़्यादा लेट नहीं करना.
सौरभ : ोकायययय! बॉस!!!
अभी राहुल वाशरूम की तरफ जाने hi वाला होता है की उससे पीछे से ललिता की आवाज़ पड़ती है...
ललिता : आ गया मेरा बच्चा!? कहा था तू इतने दिन?
कहते हुए वो राहुल को अपने सीने से लगा लेती है,
राहुल : ममी जी! किसी हो आप?
ललिता : चल चल! अब बात मत घुमा! किधर था तू? अपनी रूचि दीदी से बस इतना hi प्यार है? दो दिन पहले भी नहीं आ सका तू उसकी शादी में हां? बोल!?
राहुल : अब आपसे तोह में जीत नहीं सकता. इसलिए कान पकड़ के माफ़ी मांगता हु आपसे! माफ़ कर दीजिये ममी जी!
इधर ये दोनों बात कर रहे थे और अचानक hi वही पर वाशरूम का दूर खुला और नेहा बाहर से निकली, उसका चेहरा गीला था, हल्का हल्का पानी बालो पर भी लगा हुआ था, उसने जैसे hi वाशरूम का गेट बंद कर के पलट कर देखा तोह उसकी आँखें hi चौड़ी हो गयी.
सामने राहुल ममी से बात करते हुए खड़ा था. राहुल ने अभी नेहा को नहीं देखा था पर नेहा तोह आँखें फाड़े अपने सामने उससे देख रही थी. न जाने कितने विचार उसके मैं में तुरंत उमड़ने लगे. बिना कुछ कहे, बिना कुछ हरकत किये वो बस मूर्ति की तरह खड़े होकर राहुल को देखे जा रही थी. आँखें एकदम फैली हुई थी
अब जब वो ध्यान से देख रही थी तोह उसने गौर किया की राहुल पहले से भी काफी हैंडसम हो गया था, ये कोई और नहीं उसका सागा भाई था. उससे समझ नहीं आ रहा था की वो कैसे रियेक्ट करे. नेहा खुद को इतने दिनों से प्रेपर कर रही थी की वो खुद कैसे रियेक्ट करेगी ये सब सामने आने पर. पर शायद वो प्रेपरेड़ नहीं थी. राहुल के चेहरे पर एक स्माइल थी, वो स्माइल जो घर में बिलकुल भी देखने को नहीं मिलती थी नेहा को.
वो देख रही थी की कैसे उसका भाई और भी चार्मिंग, और स्मार्ट दिखने लगा है. जैसे hi ललिता वापस गयी और राहुल ने पलट कर देखा तोह वो भी चौंक गया सामने नेहा को देख कर.
उसके सामने वही बहिन कड़ी हुई थी जो संसार में उससे सबसे ज़्यादा नफरत करती है, उसकी सगी बहिन नेहा. पहले से काफी ख़ूबसूरत हो चुकी थी, लम्बे बाल, अभी भी पहले की तरह गुलाबी गाल और होंठ, चंचल आँखें, चेहरा और थोड़े बाल अभी गीले होने के कारण और भी ख़ूबसूरत लग रही थी.
दोनों राहुल और नेहा एक दूसरे को आँखें फाड़े घूरे जा रहे थे, दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई थी इन् 5 महीनो में. नेहा को बार बार वो दृश्य याद आने लगा जब मोनिका ने उसकी कल्लोर पकड़ के बताया था की राहुल ने hi उससे बचाया है. और आज वही राहुल उसकी नज़रो के सामने था. वही राहुल जिसके बारे में अभी कुछ दिन पहले hi रौशनी ma'am ने बताया था की संजय सर के कारण उसकी जॉब हटी थी और नेहा ने मज़ाक उड़ाया था. आज वही राहुल उसके सामने था.
पर ये बात भी नहीं झुटलाई जा सकती की ये वही राहुल है जो अपनी बहिन से नफरत करता है, उससे मारना चाहता है और न जाने क्या क्या कर चूका है नेहा के साथ. नेहा के मैं में ये दोनों तरफ के पहलु ध्यान में थे. और शायद इसलिए वो समझ नहीं पा रही थी की कैसे रियेक्ट करे.
आगे कदम बढ़ाते हुए राहुल नेहा की तरफ आगे बढ़ता है, तोह नेहा की धड़कन तेज़्ज़ हो जाती है, उसके सास लेने से उसके ूरोज़ ऊपर नीचे होने लगते है.

जब ेदकुम बगल में राहुल आके खड़ा हो जाता है तोह नेहा की तोह जैसे हालत hi खराब हो जाती है, ऐसा नहीं था की वो बोहत डर गयी थी, ये कुछ अलग hi फीलिंग थी. उसके उभार ऊपर नीचे बड़ी hi तेज़ी से हो रहे थे, सासें एकदम तेज़्ज़. राहुल ने आगे बढ़ते हुए उसके कान में कहा...
"कैसी हो??"
आवाज़ में ना ज़्यादा एक्ससिटेमेंट था, न hi कोई गुस्सा, न hi कोई ख़ुशी, न hi कोई गम पर उस एक सवाल से नेहा की रूह कांप गयी, राहुल के शरीर की महक, और उसकी गरम सास और वही पुरानी आवाज़ जब नेहा के कान में पड़ी तोह उसके रोंगटे खड़े हो गए, बदन पूरा सिहर उठा. सारे चेहरे का पानी उड़द चूका था. गहरी सास लेते हुए उसने खुद को कण्ट्रोल किया और दौड़ते हुए वह से एकदम से भाग के चली गयी.
राहुल ने भी गहरी सास लेते हुए खुद के चेहरे पे अपना हाथ दे मारा...
राहुल (मैं में) : क्यों किया मेने ये? ी shouldn't हैवे दोने तहत... रेस्त्रां राहुल! रेस्त्रां योरसेल्फ!
सोचते हुए वो वाशरूम में चला गया...
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद्!!