इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड) - Page 9 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड)

इतना अच्छा लिखने के लिए धन्यवाद् आपको!

आपने एकदम सही एस्टीमेट बताया की 4-5 घंटे आराम से लग जाते है, साथ hi साथ थ्रेड में रीडर्स के रेविएवस का जवाब देना और तोह और मेरे साथ एक और बात है, वो ये की मुझे पिक्स और गिफ्स भी डालने पड़ते है जो बिलकुल भी सरल काम नहीं है.

मेरा मोटिवेशन फिर से बूस्ट उप करने के लिए धन्यवाद्!! जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी उपदटेस दे दिया करूँगा में अब.

( ꈍᴗꈍ)
 
भाई आपके कहने से तोह मुझे यही समझ आ रहा है की आपका कहना ये है की मेने आज तक कभी भी टाइम पे अपडेट नहीं दिया. शायद आप शुरुआत से इस थ्रेड में नहीं है. यदि होते तोह आपको पता चलता की शुरू के उपदटेस मेने रेगुलरली दिए थे. और मेने थ्रेड के फर्स्ट पेज पर लिखा भी है की में 2 से 3 दिन में hi उपदटेस दूंगा. मेरी कोशिश जारी रहेगी जल्द से जल्द उपदटेस देने की. बस इतना hi कहूंगा!!
 
अपडेट - 52

अब तक...

निकिता : पर तूने अपने क्राइटेरिया में कही भी ये मेंशन नहीं किया की तेरा बर्फ पैसे वाला होना चाहिए. बोल? है न? मुझे पता है तुझे पैसे में कोई इंटरेस्ट नहीं है. वो लकी तेरे ऊपर न जाने कितने पैसे उड़ाया पर तूने कभी पैसो की लालच में आके कभी कुछ नहीं किया. तूने हमेशा से उससे इग्नोर hi मारा है. मतलब साफ़ है की तुझे पैसे से कोई मतलब नहीं है. बोल?

निकिता की बात सुन्न नेहा के मुँह पे ताला लग जाता है. ना चाहते हुए भी उसका ख़याल राहुल की तरफ चला जाता है और उसके दिमाग में उसकी छवि बन्न के दिखने लगती है.

अब आगे...

न चाहते हुए भी नेहा के मैं में राहुल का चेहरा मंडराने लगा और पल भर के लिए उसके सामने अतीत का एक किस्सा सामने आ गया जहा वो और राहुल दोनों छोटी उम्र के थे और अपने घर के बाहर खेल रहे थे.

छोटी नेहा : भाई भाई... देखो न, आइस क्रीम वाला... मुझे आइस क्रीम कहानी है, प्लीज दिलाए दोऊ

राहुल : गुड़िया को आइस क्रीम खानी है?

छोटी नेहा : हां भाई!

तभी राहुल उसकी ऊँगली पकड़ के आइस क्रीम वाले के पास जाता है और उसकी मैं पसंद आइस क्रीम दिला देता है, खुश होक नेहा राहुल के गाल चुम लेती है.

नेहा : भाई थैंक youuu...muaaahhh!

नेहा आइस क्रीम खाने में लगी हुई थी और राहुल उससे छेड़ने के लिए आइस क्रीम ले लेता है और उससे डराते हुए उसकी आइस क्रीम खाने के लिए आगे बढ़ने लगता है,

नेहा (रट हुए) : भाई वो मेरी आइस क्रीम है

राहुल : हां तोह अपने भाई को नहीं खिलाओगी?

नेहा को आइस क्रीम शेयर करना पसंद नहीं था. फिर भी अपने भाई के लिए वो बुझे मैं से अपने हाथो से आइस क्रीम उसके मुँह की तरफ आगे कर बढ़ा देती है, राहुल को ये देख बड़ी हस्सी आती है की नेहा उस से कितना प्यार करती है. अपनी मैं पसंद आइस क्रीम की क़ुर्बानी तक देदी. यदि उसकी जगह कोई और होता तोह नेहा कभी भी उसको अपनी आइस क्रीम नहीं देती. राहुल hi था बस एक जिसके लिए नेहा सब क़ुर्बान कर देती थी.

तभी राहुल आगे बढ़ के उसके एक गाल को धीरे से नोचता है और उसके कान में कहता है,

"अभी नहीं गुड़िया! फिर कभी"

जब भी नेहा अपने मैं के विरोध में जाके बुझे हुए मैं से राहुल के लिए कोई काम करती थी, राहुल हमेशा उसके गाल नोचता और यही वाकया कह देता था.

अभी नेहा यही पुरानी यादें सोच रही थी की एक आवाज़ ने उससे होश में लाया,

"ोये!! किधर खो गयी!?"

सामने निकिता को बैठा देख नेहा को ध्यान आया की वो अतीत में चली गयी थी.

निकिता : क्या हुआ तुझे?

नेहा : ku..kuch नहीं!

निकिता : तोह बता? मेने सच कहा न? हहै!

नेहा : क्या?

निकिता : की राहुल भैया hi तेरे क्राइटेरिया में फिट बैठ रहे है

नेहा : शट उप निक्की! दुबारा ऐसा मज़ाक मत करना, यू गोत आईटी?

निकिता : अब मेने तोह वही कहा जो मेरे हिसाब से सच है

नेहा : I'm गोइंग नाउ!

और नेहा निकिता के घर से निकल आती है, मैं में उथल पुथल मची हुई थी

नेहा (मैं में) : ये निकिता की बच्ची! जो मैं में आया बोलती रहती है. आने दो कल इसको, चोरडूंगी नहीं में. वो बास्टर्ड और बर्फ मटेरियल? वैसे भी वो मेरा भाई है, सो... एक मिनट! ये में क्या कह रही हु? वो बास्टर्ड मेरा भाई हो hi नहीं सकता, भला में कबसे उससे अपना भाई मान ने लगी? ऐसा भाई होता है किसी का?... ये निकिता की बच्ची ने मेरा दिमाग खराब कर दिया है. व्हाट थे हेलल!! ी हेट तहत बास्टर्ड! मेरा बस चले तोह घर से बहार निकाल दू usse...hmph!

इधर घर पर राहुल नेवसपपेर पढ़ रहा था क्युकी थोड़ी देरर बाद उससे बाकी की शॉपिंग करने जो जाना था. समय बोहत काम था और कल hi दिवाली है. अभी बोहत सा ऐसा सामान था जो उससे लेने जाना था.

तभी घर में नेहा एंट्री मारती है, लिविंग रूम में सिर्फ राहुल था बाकी सभी निशा के साथ अंदर पकवान बनाने में उसकी मदद कर रहे थे.

और राजेश घर की शॉपिंग करने बहार गए हुए थे.

राहुल को लिविंग रूम में नेवसपपेर पढ़ते देख नेहा वही ृक्क जाती है और न चाहते हुए भी वो राहुल का चेहरा देखने लगती है और उसके कानो में निकिता की बातें गूंजने लगती है.

राहुल को आहात होते hi वो अपनी नज़रे ऊपर कर के देखता है तोह पाटा है की नेहा आ चुकी है और उससे hi घर रही है.

*साइलेंस*

दोनों एक दूसरे को चाँद सेकण्ड्स तक देखते रहते है.

नेहा (मैं में) : ये में क्या सोचने लगी? ी हेट हिम! हां! सब इसी का किया धरा है.

और तभी नेहा आगे बढ़ राहुल के हाथ से नेवसपपेर छिना के नीचे फेक देती है और गुस्से में जाने लगती है की पीछे से राहुल उसका हाथ पकड़ लेता है.

राहुल (गुस्से से देखते हुए) : उठा उससे

नेहा (गुस्से में) : चोरर मुझे!

राहुल : नेवसपपेर उठा!

नेहा : नहीं उठाउंगी, क्या कर लेगा?

तभी राहुल नेहा का हाथ मरोड़ देता है जिसके चलते नेहा की हलकी सी चींख निकल जाती है और राहुल उससे धकेलते हुए उसके साथ नेवसपपेर के पास पोहचता है और नेहा को झुका देता है.

राहुल : उठा जल्दी!

नेहा (चिल्लाते हुए) : चोरर मुझे! यू बास्टर्ड!!

तभी राहुल नेहा का हाथ और तेज़्ज़ मरोड़ देता है जिसके कारण एक बार फिर उसकी चींख निकल जाती है और आँखों में ासु आ जाते है.

राहुल : उठा अब!

नेहा (रट हुए) : यू बास्टर्ड!!! ी हेट यू! हेट यू...

अभी राहुल एक बार फिर से हाथ मोड़ने वाला था की इतने में नेहा नेवसपपेर उठाती है तोह राहुल उससे वापस टेबल की तरफ घसीट के ले जाता है जहा नेहा नेवसपपेर रख देती है. राहुल फिर नेहा के कान के करीब आता है और कहता है,

"ये मत सोचना की तुम जो चाहोगी हो जाएगा समझी? कुछ भी करलो, तुम हमेशा मुझसे नीचे hi रहोगी. I'll बे ऑलवेज बेटर थान यू. अहिंदा से कोई हरकत की न, तोह उसका जवाब तुम्हारी hi भाषा में तुम्हे दूंगा. यू गेट तहत?"

और राहुल उससे थोड़ा धक्का देके उससे चोरर देता है, नेहा पलटकर राहुल को खा जाने वाली नज़रो से देख रही थी

आँखें एकदम लाल, और आँखों में हलके हलके ासु. ऐसा लग रहा था देख के hi वो किसी की जान ले लेगी.

गुस्से में नेहा पलटकर चली जाती है ऊपर, उसके जाते hi अंशु बाहर आती है तोह राहुल उस से कहता है,

राहुल : अंशु... वंशु दीदी मेरा कॉल नहीं उठा रही है, में कई दिन से उन्हें तरय कर रहा हु, लगता है तुम्हारी बात से उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा है और वो काफी दर्री हुई है, मुझे उनकी बहुत याद आ रही है. तुम उन्हें कॉल करके कहो न की दिवाली हमारे साथ यही पर मनाए.

अंशु : क्या? दीदी आप का कॉल नहीं उठा रही? लगता है वाक़ई मेने दी को कुछ ज़्यादा hi दर्रा दिया. ठीक है भाई में उन्हें बोल दूंगी.

फिर राहुल बाकी की शॉपिंग करने चला जाता है. इधर अंशु फौरन अपना फ़ोन निकाल के टेरेस पे चली जाती है और वंशु को कॉल लगाती है.

अंशु : hello?

वंशु : he..hello छोटी?

अंशु : दी आप भाई का कॉल क्यों नहीं उठा रही?

वंशु : हँ? वो.. वो.. वो साइलेंट पर था इसलिए.

अंशु : दी मुझे बेवक़ूफ़ समझा है क्या? और आप को घबराने की कोई ज़रुरत नहीं है.

वंशु : .........

अंशु : मेने आपके और भाई के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया है. और मुझे आपसे और भाई से कोई शिकायत नहीं है

वंशु (शॉकेड) : हँ?

अंशु : सही सुना आपने! साड़ी बातें आपसे मिलकर करुँगी, फ़ोन पर नहीं. आप दिवाली के दिन यहाँ आ रही है. ठीक है?

वंशु : नहीं छोटी, में नहीं आ सकती

अंशु : में कुछ नहीं सुन्न न चाहती, आप यदि नहीं आयी तोह सोच लेना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. कल आप मुझे यहाँ पर दिखेंगी. That's आईटी. Bye bye! टेक केयर!!

वंशु : छोटी?.. hello? Hello?

और कॉल कट हो जाता है.

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

इधर एक बड़े से घर में एक लड़का सोफे पर बैठ के बड़े hi गुस्से में बात कर रहा था.

"व्हाट थे हेलल डैड??? में आखिर कब तक ऐसे hi घर में पड़ा सड़ता रहूँगा?"

आदमी : बीटा लकी! तू अभी घर में है इसलिए बचा हुआ है, वर्ण अभी सलाखों के पीछे होता

जी हां ये लकी hi है. राहुल का एकमात्र दुश्मन!

लकी : सहित!!

आदमी : तेरी हरकतों के कारण मेरी एक दारु की दूकान बंद होने को आ गयी है, पता नहीं किस से उलझ के आया है साला इतना दिमाग ख़राब कभी नहीं हुआ

लकी : किस से क्या डैड? वही हरामी राहुल है और कोण!! साला हर बार प्लान पे पानी फेरर देता है.

Lucky's डैड (लड़) : लौड़ा मेरा राहुल है. साले वो अकेले मुझे इतना नहीं हिला सकता. पक्के से उसका कोई सुप्पोर्टर है. साला पोलिसवाले तक कटरा रहे है मेरी मदद करने में.

लकी : डैड एक बार उसकी बहिन मिल जाए बस.

लड़ : अभी उलटी सीढ़ी हरकतों के बारे में सोचना भी मत. कुछ महीनो तक तुम कॉलेज नहीं जाओगे, सिर्फ एग्जाम देने जाओगे. वर्ण तुम्हे भी तुम्हारे दोस्त की तरह सलाखों के पीछे दाल देंगे.

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

ऐसे hi ये रात भी गुज़र गयी और आखिर वो दिन आ hi गया. जी हां! आज दिवाली है और राहुल के घर में बहुत hi ख़ुशी और उल्लास का माहौल है, आस पड़ोस में भी बोहत चहल पहल है, कुछ बच्चे तोह अभी से पटाखे फोड़ना स्टार्ट कर दिए. राहुल भी फ्रेश होक नीचे आता है तोह देखता है नाश्ता तैयार हो रहा है और किचन में तानिया और अंशु भी है निशा के साथ

राहुल पीछे से एकदम से अपनी माँ निशा को गले लगा लेता है, और उसके गालो पे पप्पी जड़ देता है,

"गुड मॉर्निंग माँ! एंड हैप्पी दिवाली!"





निशा भी पलटकर राहुल को गले लगाकर उसके गालो को भर के चूमती है और बदले में हैप्पी दिवाली विश कर देती है.

चूमना तोह वह होठो को चाहती थी पर उसने सही टाइम पर खुदको संभल लिया और अपने होंठ पीछे कर लिए थे पर उसकी ये हरकत किसी ने परख ली थी.

अगले hi पल अंशु ज़ोर से राहुल से चिपक गयी और उसके दो अनमोल रत्न राहुल की छाती में समा गए,

"हैप्पी दिवाली भईई!!"

"हैप्पी दिवाली अंशु!!", बदले में राहुल ने भी उसकी पीठ सहलाते हुए कहा.

अब बची थी तोह सिर्फ तानिया, जो अजीब नज़रो से राहुल को देख रही थी और फिर उसने शर्म के मारे अपनी नज़रे फेरर ली

थोड़ी देरर की शांति के बाद उससे लगा की राहुल शायद जा चूका है पर अचानक तानिया को पीछे से किसी ने जम्म के हुग कर लिया, और तानिया को पहचान ने में देरर न लगी की ये मज़बूत हाथ, ये मर्दानगी वाली महक, ये सुडोल छाती का एहसास, कोई और नहीं ये राहुल hi था.





उससे उम्मीद नहीं थी की राहुल उससे अपने आप से हुग करेगा, अंदर hi अंदर उससे बेहद ख़ुशी हो रही थी, उसके हाथ अपने आप hi राहुल के हाथ के ऊपर चले गए और उनको कास के कस लिया.

राहुल ने आगे बढ़ कर उसके कान में कहा,

"हैप्पी दिवाली तानिया!!"

और तुरंत hi उसके गुलाबी गाल को चुम लिया.

इस हमले से तानिया की हलकी सी आह निकल गयी जो सिर्फ राहुल को सुनाई दी

बेचारी के गाल लाल टमाटर की तरह लाल हो गए थे.

तभी पीछे से अंशु की बनावटी गुस्से में आवाज़ आयी,

"भईईई! ये चीटिंग है! आपने चची और तानिया दीदी को किश किया पर मुझे नहीं?? मुझे भी चाहिए मेरी किश!!"

अंशु का बनावटी गुस्सा देख दोनों तानिया और निशा की हस्सी छूट गयी.

"हां बाबा! देता हु तुम्हे भी किश!" राहुल ने पास जाकर अंशु के गाल को भी चुम लिया, बदले में अंशु ने भी राहुल के गालो को भर भर के चूमा.

अंशु : आज दी भी आएंगी भाई मेने उन्हें बुलाया है

राहुल : बोहत अच्छा किया!

तभी अंशु राहुल के कान के पास आकर धीरे से कहती है,

अंशु : आप उन्हें बोहत मिस कर रहे हो न?

राहुल (धीरे से) : हम्म!

अंशु : उन्हें मिस कर रहे हो या उनकी किश को?

राहुल पलट के अंशु को घर के देखने लगता है और अंशु खिल खिलाती हुई हस्ती हुई वापस निशा के साथ पकवान बनाने में लग जाती है.

तभी राहुल के फ़ोन पर कॉल आता है, कॉलर नाम था - मिस मोनिका

(मोनिका मास्टर चेन की सेक्रेटरी है यदि आप सभी लोगो को याद हो तोह)

राहुल : hello?

मोनिका : hello हीरो!! और कैसे हो?

राहुल : मिस मोनिका?? में ठीक हु आप बताइये!

मोनिका : हम्फ! मेरी क्या पूछ रहे हो? तुम्हे मुझसे मतलब भी रहता है?

राहुल : किसी बात कर रही हो आप?

मोनिका : सही तोह कह रही हु, तुम बताओ तुमने मुझे काम के अलावा किसी चीज़ को लेकर बात की हो तोह...

बात तोह सही थी. राहुल केवल मतलब की और काम की hi बात करता था मोनिका से. वो मोनिका को अदमीरे और उसकी बोहत रेस्पेक्ट करता था. मोनिका उस से बस कुछ साल hi बड़ी थी फिर भी वो मास्टर के बिज़नेस को और तोह और बाकी सभी कामो को बड़ी hi सरलता से संभालती थी. इसलिए राहुल उसकी बड़ी इज़्ज़त करता था. जब राहुल मार्टिकल आर्ट्स सीखने जाता था तोह कई बार मोनिका राहुल से फ़्लर्ट करती थी, राहुल यही समझता था की मोनिका जैसी लड़की उसकी लीग से बाहर है और उससे मैं में वैसे ख़याल नहीं लाना चाहिए वर्ण बाद में उसका hi दिल दुखेगा. इसलिए राहुल सिर्फ काम से काम रखता था और उसकी फ्लिर्टिंग का जवाब नहीं देता था. आज भी यही सन चलता है.

राहुल : ुहम्म!! वैसे हैप्पी दिवाली मिस मोनिका

मोनिका : हैप्पी दिवाली!! हम्फ!! ये लो मास्टर से बात करो.

मोनिका की टोन से साफ़ नज़र आ रहा था की वो राहुल की बात से चिढ गयी है.

राहुल : he..hello? मास्टर?

मास्टर : hello राहुल! कैसे हो?

राहुल : में ठीक हु मास्टर!

मास्टर : गुड! एंड हैप्पी दिवाली!!

राहुल : आपको भी मास्टर!

मास्टर : तुमने उस बुज़ुर्ग और बच्ची को भेजा था मेरे यहाँ...

राहुल : हां मास्टर! वैरी सॉरी मेने आपसे बिना पूछे उनको आपके यहाँ भेज दिया

मास्टर : नहीं बीटा इसमें माफ़ी मांगने वाली कोई बात नहीं है. मेरे घर के पीछे जो लॉन में छोटा घर है वो काफी टाइम से बंद पड़ा था क्युकी अब नौकर तोह रहते नहीं है मेरे यहाँ, मोनिका ने मन कर के जो रखा है. बस एक बटलर रहता है जो खाना बनाता है और घर का काम करता है. इसलिए में सोच रहा था की वो घर किराये पर देदू पर तुमने उनको सही टाइम पर भेजा. मेने उन्हें वो घर रहने के लिए दे दिया है, उनके हालात देख के उनसे कोई किराया नहीं लूंगा. बच्ची को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी भी मेने ले ली है.

राहुल : बोहत बोहत धन्यवाद् मास्टर!

मास्टर : धन्यवाद् की कोई बात नहीं बीटा! वो छोटी बच्ची मुझे बड़ी पसंद आयी. तुम्हे जब भी उस से मिलना हो तोह तुम अब मिल सकते हो, वो पीछे वाले घर में hi अपने दादा के साथ रहेगी अब से.

राहुल : में आपका कैसे धन्यवाद् करू मास्टर? में आप पे देपेंद होता जा रहा हु.

मास्टर : बीटा ये सिर्फ थोड़े समय की बात है, जहा तुम अपने पेर्रो पर खड़े हो जाओगे देखना तुम सबको 10 गुना लौटाओगे. में जानता हु तुम्हे अच्छे से

राहुल : जी मास्टर!

मास्टर : और उस लकी की टेंशन लेने की ज़रुरत नहीं है तुम्हे! उसके बाप का कारोबार मेने थोड़ा हिला के रख दिया है, इसलिए अभी वो काफी टेंशन में होगा. फिलहाल वो अपने लड़के लकी को अपने घर में छुपाकर रखा है.

राहुल : जी मास्टर! थैंक यू!

मास्टर : फिरसे थैंक यू?

राहुल : एहम... मास्टर एक और बात थी. में ये शहर कुछ महीनो बाद चौररने वाला हु. ी मैं, मेरी डिग्री कम्पलीट होते hi में निकल जाऊंगा.

मास्टर : हम्म! मेने अनुमान लगा लिया था. जाने से पहले में कुछ तुम्हे सिखाना चाहता हु और कुछ बताना भी चाहता हु. दिवाली के बाद आना तब सब कुछ समझ आ जाएगा.

राहुल : जी ok मास्टर!

मास्टर : वैसे ये मोनिका को क्या बोलै है तुमने? कब से मुँह फुलाए उधर बैठी है.

मोनिका जो सही में मुँह फुलाए हुई बैठी हुई थी एकदम से चौंक जाती है, उससे बिलकुल भी अंदाजा नहीं था की मास्टर उसके एक्सप्रेशंस पढ़ लेंगे. खुद पे शर्म आ रही थी उससे.

राहुल : हैं?? आप... आप ज़रा फ़ोन दीजिये न उनको

मास्टर : मोनिका ये लो बात करो

मोनिका धीरे धीरे चल के आयी और फ़ोन लेके अपने कानो से लगाया,

राहुल : hello? मिस मोनिका? क्या हुआ आपको?

मोनिका : हम्फ! कुछ भी तोह नहीं! में रख रही हु

राहुल : अरे अरे एक मिनट! आप नाराज़ हो न मुझसे?

मोनिका : उम् नहीं तोह?

राहुल : अच्छा मेने आपके लिए एक सरप्राइज रखा था. पर आप अब नाराज़ नहीं हो तोह उससे देने का कोई मतलब नहीं

मोनिका : हँ? क्या? केसा सरप्राइज?

राहुल (मैं में) : ये भी बिलकुल तनीषा दीदी की तरह hi है. बाहर से सख्त, अंदर से बिलकुल चंचल और बच्ची की तरह.

राहुल : पर अब तोह आप नाराज़ नहीं हो न तोह...

मोनिका : किसने कहा में नाराज़ नहीं हु, में तुमसे बोहत नाराज़ हु

दूसरे साइड से हस्सन की आवाज़ आने लगती है. मोनिका को पता चलता है की वो राहुल के बनाए जाल में गिर चुकी है और मास्टर, राहुल दोनों hi हस्स रहे है तोह उसके गाल लाल पद जाते है.

मोनिका (गुस्से में) : स्टुपिड कही के...

राहुल (धीरे से) : दिवाली के बाद आपके लिए सरप्राइज है एक. वेट करना मेरा. Bye bye!

मोनिका (ब्लश) : हम्म्म!

*कॉल एंड्स*

अभी राहुल ने कॉल कट किया hi था की उसने व्हाट्सप्प चेक किया तोह ढेर्रो मेस्सगेस की लाइन लगी हुई थी. सब हैप्पी दिवाली के मेस्सगेस और फोटोज भरे पड़े हुए थे. त्यौहार में ये भी एक बड़ा hi चिकल्लस का काम रहता है.

राहुल ने देखा की उसकी टीचर रोशिनी ma'am का भी मैसेज आया हुआ था,

"हैप्पी दिवाली राहुल! आने वाला समय तुम्हारे लिए शुभ हो और धेरर साड़ी खुशिया और तरक्की लाये तुम्हारे लिए. कभी भी मेरी ज़रुरत पड़े तोह be-jhijak मुझसे बात कर लेना. मेरा सपोर्ट हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा"

Ma'am का मैसेज पढ़ राहुल को ma'am पर बोहत प्यार आया और उसने भी बदले में एक अच्छा सा मैसेज लिख के भेज दिया.

अभी राहुल और मेस्सगेस देख hi रहा था की उससे निकिता का मैसेज दिख गया,

"हैप्पी दिवाली मेरे प्यारे भैया! शाम को में और दीदी आपके यहाँ आएँगे सेलिब्रेट करने. दीदी के साथ अपना माहौल बना लेना...

हेहेहे *2 लाफिंग एमोजिस*"

राहुल : ओह्ह तोह निकिता और रीचु भी आ रही है. ः! सब साथ में सेलिब्रेट करेंगे... सब साथ में... सब??? साथ में?? ोोोू शीट्ट्ट्ट!!!! ऋचा???? वंशु दी??? तनीषा दी??? हे bh@gw@@n!! में तोह गया... पता नहीं आज रात में क्या होगा!!? उपरवाले!! मेरी रक्षा करना!!

.

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi दोस्तों!
 
आपको स्टोरी इतनी पसंद आयी की आपने एक बार में hi सारे उपदटेस पढ़ लिए? क्या बात है भाई! बोहत बोहत धन्यवाद् आपको. मुझे बेहद ख़ुशी हुई की आपको मेरी कहानी पसंद आयी. आगे कहानी इंटेंस और इमोशनल होने वाली है. शुक्रिया! ऐसे hi सपोर्ट करते रहिये. मेरा मोटिवेशन बोहत बढ़ता है!
 
अपडेट - 53

अब तक...

अभी राहुल और मेस्सगेस देख hi रहा था की उससे निकिता का मैसेज दिख गया,

"हैप्पी दिवाली मेरे प्यारे भैया! शाम को में और दीदी आपके यहाँ आएँगे सेलिब्रेट करने. दीदी के साथ अपना माहौल बना लेना...

हेहेहे *2 लाफिंग एमोजिस*"

राहुल : ओह्ह तोह निकिता और रीचु भी आ रही है. ः! सब साथ में सेलिब्रेट करेंगे... सब साथ में... सब??? साथ में?? ोोोू शीट्ट्ट्ट!!!! ऋचा???? वंशु दी??? तनीषा दी??? हे bh@gw@@n!! में तोह गया... पता नहीं आज रात में क्या होगा!!? उपरवाले!! मेरी रक्षा करना!!

अब आगे...

दिनभर का टाइम कैसे गुज़र गया ये पता hi नहीं चला. आपके साथ भी ऐसा hi होता है न? अक्सर जब त्योहारों का माहौल रहता है तोह समय कैसे गुज़र जाता है पता hi नहीं चलता. कुछ यही हाल हमारे राहुल का भी था. समय इतनी तेज़्ज़ी से बीता की वक़्त का पता hi नहीं चला और शाम होने को आ गयी.

पर नेहा के लिए यही बात कहना थोड़ा गलत होगा. वो इसलिए क्युकी महारानी जी जबसे अपने कमरे में जो थी. सुबह राहुल ने ज़बरदस्ती करके उसका हाथ मरोड़ के नेवसपपेर जो उठवाया था. गुस्सा तोह उस वक़्त उससे इतनी आयी थी की यदि बगल में कोई लाठी राखी होती तोह वो पक्के से राहुल का सर फोड़ देती.

गुस्सा अभी भी आ रहा था उससे, ऊपर से निकिता की बात और घूम रही थी उसके मैं में जो उसका दिमाग खराब करने पर तुली थी.

पर नेहा गुस्से के साथ साथ थोड़ी कन्फ्यूज्ड भी थी. वो इसलिए क्युकी आज से पहले राहुल ने उसके साथ ऐसा कभी नहीं किया था. वो हर्र वक़्त राहुल को ताने मारती, उससे चोट पहुँचाती, खरी खोटी सुनाती, बुराई करती, इलज़ाम लगाती, और न जाने क्या क्या, पर कभी भी राहुल ने पलट के ऐसे रियेक्ट नहीं किया था. वो हमेशा चुप चाप नेहा की हरकतों को सेहत जाता और कभी पलट कर विरोध नहीं करता था. पर आज क्या हुआ उससे? आज तोह उसने केवल विरोध hi नहीं, यहाँ तक की नेहा का हाथ भी मरोड़ दिया. और तोह और नेहा को ये भी कहा की "वो कभी भी राहुल से बेहतर नहीं बन सकती, हमेशा उसके नीचे hi रहेगी". क्यों कहा ऐसा राहुल ने? और वो भी आज? इसका जवाब नेहा धुंध तोह ज़रूर रही थी पर अफ़सोस वो नाकामयाब रही.

खयालो में डूबे नेहा उत्तर की तलाश में थी की एक आवाज़ ने उसकी तन्द्रा को भांग किया,

"नेहाआआ!? ोोोू नेहाआआ"

नीचे से आती निशा की आवाज़ से नेहा फौरन अपने खयालात से बाहर निकली और नीचे की और चल दी.

"क्या हुआ माँ?" दुखी सी आवाज़ में नेहा ने नीचे आते हुए पूछा.

निशा : अरे!? ये तेरा मुँह क्यों लटका हुआ है बीटा?

नेहा : कुछ नहीं. आप बताइये! क्यों बुलाया आपने?

निशा : अरे क्यों बुलाया क्या... 4 बज गया है, तुझे रंगोली नहीं डालनी बाहर!?

नेहा : ोुह्ह्ह हां माँ! जाती हु...

हर्र दिवाली को नेहा hi अपने घर के बाहर खूब सुन्दर सी रंगोली डालती थी. इस काम में निशा उसकी हमेशा मदद करती थी. पर आज निशा कामो में व्यस्त थी इसलिए आज रंगोली डालने की पार्टनरशिप में अंशु और तानिया नेहा की पार्टनर्स थी.

थोड़ी hi देरर में ये तीनो भी रंगोली डालने में व्यस्त हो गयी. राहुल भी बाहर आकर देखा तोह पाया उसकी तीनो बहने रंगोली दाल रही है.





राहुल (छेड़ते हुए) : ये क्या टट्टी बना दी?

नेहा : *घूर के राहुल को देखती है*

तानिया : व्हाट थे हेलल? दिख नहीं रहा तुम्हे? रंगोली है, अभी पूरी नहीं बानी है. और तुम फ़ालतू की बकवास नहीं करो. चपडगंजु कही का.

अंशु : वैरी फनी! राहुल भैया! अब आप हमको तंग मत करो. आप देख नहीं रहे? हम सभी कितनी म्हणत कर रहे है इससे बनाने में?

राहुल : ......

ऐसे hi कुछ और समय बीत गया और 6 बज चुके थे. इधर हमारी लड़कियों ने रंगोली भी दाल दी थी जो वाक़ई बोहत सुन्दर बानी थी. राहुल ने उसके बाद कोई कमेंट पास नहीं किआ, सभी लोग फिर फ्रेश उप होने और तैयार होने अपने अपने रूम्स में चले गए.

करीब 7 बजे सभी लोग तैयार होक बाहर आए, और अब करनी थी पूजा की तैयारी जिसमे निशा और सभी लड़किया लग गयी. राहुल भी बाहर लिविंग रूम में बैठ के व्हाट्सप्प पर मेस्सगेस का रिप्लाई दे रहा था. राजेश कुछ पूजा की सामग्री लेने बाहर गए हुए थे.

तभी बाहर कार की आवाज़ आयी, राहुल को लगा की शायद उसके डैड होंगे इसलिए उसने ध्यान नहीं दिया और फ़ोन में hi व्यस्त था. भगवा रंग का कुरता आज उसपे बड़ा hi जांच रहा था.





तभी एक आवाज़ ने उसके शरीर के रोये खड़े कर दिए.

"क... कुटी!?"

दरवाज़े के पास वंशु लाइट ग्रीन कलर के सुन्दर से सलवार सूट में कड़ी हुई थी





उससे देख राहुल की मानो धड़कन बढ़ गयी. कितने दिनों बाद आज उसकी वंशु दी उसकी आँखों के सामने थी. कितनी उदास और घबराहट में वो यहाँ से गयी थी, और तबसे राहुल की बात उस से नहीं हुई थी. पर आज वो यहाँ उसके सामने थी.

राहुल ने फौरन उठ के लम्बे कदमो के साथ दौड़ते हुए वंशु को कस के अपने गले से लगा लिया,

"ओह्ह्ह डीई"

सुकून. वंशु को गले लगाने के बाद जो अंतर आत्मा से आवाज़ आयी वो यही थी. इस वक़्त राहुल को असीम सुकून प्राप्त हो रहा था.

राहुल : आपने मेरा कॉल क्यों नहीं उठाया दी? हां? मैंने आपसे नाराज़ हु बहुत.

वंशु : ......

राहुल : दी? कुछ बोलती क्यों नहीं? क्या आप मुझसे नाराज़ हो?

वंशु : na...nahi कुटी! हरगिज़ नहीं!

राहुल : तोह फिर क्या बात है? यदि आप अंशु की बात से डर रही है तोह बिलकुल भूल जाइये उस बात को. अंशु कुछ नहीं बताएगी.

वंशु : ी... ी क्नोव कुटी.

राहुल : तोह अब तोह मुस्कुराइए?

वंशु : *फीकी सी स्माइल करती है*

राहुल आगे बढ़ उसके होंठ चूम लेता है.

वंशु : कुटी??? कोई देख लेगा.

राहुल : देख ले तोह देख ले. में आपको उदास नहीं देख सकता.

वंशु (सुरप्रीसेड) : कुटी??

राहुल : हां!

भावनाओ में बहके वंशु भी राहुल को जोरर से भींच लेती है,

"ोू भाई!! मेरे कुटी!! मुझे bas...bas डर लगा रहता है.. कही कुछ.."

राहुल : अब जो होगा सो देखा जाएगा. आप सिर्फ मेरी हो. सिर्फ मेरी! और आपको किसी से दररने की ज़रुरत नहीं है. आपके साथ में हमेशा खड़ा रहूँगा.

राहुल के इतना कहने से वंशु की आँखें नाम हो गयी और उसने भी एक ज़ोरदार पप्पी राहुल के होंठों पर जड़ दी.

वंशु (मैं में) : ठीक hi तोह कहा कुटी ने. मेरा प्यार यदि सच्चा है तोह में भाग क्यों रही हु? मुझे कुटी के साथ रहके साड़ी प्रोब्लेम्स फेस करनी चाहिए, और अब तोह कुटी ने भी कह दिया की वो मेरे साथ हमेशा रहेगा. थैंक यू मेरे भाई! में अब हमेशा के लिए तेरे साथ hi रहूंगी. तूने सही कहा! में सिर्फ तेरी हु.

राहुल (मैं में) : अबे बोल तोह दिया! पर अभी रीचु और तनीषा दी भी आने वाली है. पता नहीं क्या होगा? पर जो भी हो, में दी के साथ हमेशा रहूँगा.

राहुल : वैसे! हैप्पी दिवाली दी!

वंशु : हैप्पी दिवाली कुटी! बाकी सब कहा है?

राहुल : सभी अंदर पूजा की तैयारी में लगे हुए है.

वंशु : अच्छा! में भी कर देती हु उनकी मदद.

राहुल : जी! आप जाइये में यही बहार हु.

फिर वंशु अंदर सभी की मदद करवाने चली जाती है. राजेश भी पूजा की कुछ बची हुई सामग्री ले आते है और वो भी अंदर चले जाते है. एन्ड में राहुल भी अंदर चला जाता है की तभी तनीषा भी फाइनली आ जाती है.

राहुल का गिफ्ट किया हुआ सूट hi पहना हुआ था उसने. कसम से बोहत कमाल की लग रही थी.





वही दूसरी तरफ नेहा ने पिंक कलर की ड्रेस पहनी हुई थी. जिसमे वो भी किसी पारी से काम नहीं लग रही थी. गोर रंग पे गुलाबी रंग चार चाँद लगा रहा था.





अंशु भी बोहत स्वीट लग रही थी. उसकी सुंदरता कुछ हटके hi थी. उसका चेहरा सबसे मोह लेने वाला था.





तानिया तोह जैसे बोम्ब्शेल लग रही थी.

ट्रेडिशनल ड्रेस में उसकी हॉटनेस और भी ज़्यादा बढ़ गयी थी. उसका फिगर तोह था hi कातिलाना, ऊपर से तीखे नैन और जलवा बिखेर रहे थे.





यदि राहुल को हर्र लड़की की पर्सनालिटी और उनकी सूरत के हिसाब से उनको डेस्क्रिबे करना होता तोह वो कुछ ऐसे डेस्क्रिबे करता-

वंशु - वैनिला केक

अंशु - स्ट्रॉबेरी डिजर्ट

तानिया - गरम मसाला

नेहा - हॉट रेड चिल्ली

तनीषा - फ्रूट वाइन

ऋचा - एप्पल पाई

खर्र! वंशु और तनीषा ने सभी से मुलाक़ात की और सभी लोग पूजा में बैठ गए. पटाखों की आवाज़ें शुरू हो चुकी थी. पूजा समाप्त होते ही राहुल और बाकी सभी लड़कियों को दिया रखने का काम सौपा गया.

थाली में दिए लिए सभी ने घर में जगह जगह दिए रखे और अब बारी थी थोड़ा हल्का फुल्का नाश्ता और पकवान खाने की क्युकी उसके बाद सभी पटाखे फोड़ने में व्यस्त होने वाले थे.

सभी ने थोड़ा थोड़ा नाश्ता भी कर लिया और तभी ऋचा और निकिता भी आ गयी.

आज ऋचा ने भी बोहत सुन्दर सी ड्रेस पहनी हुई थी. गज़ब की धा रही थी. उसकी स्माइल इतनी प्यारी थी की पूछो मत

बेचारा राहुल सिर्फ देख hi सकता था फिलहाल तोह.

निकिता ने भी सुन्दर सी ड्रेस पहनी हुई थी. एक परफेक्ट छोटी बहिन के जैसी hi दिख रही थी वह. क्यूट और प्रीटी.

नेहा (गले लगते हुए) : निक्कीय...

निकिता : हहै! हैप्पी दिवाली! में मेरे पटाखे भी ले आयी थोड़े से.

नेहा : हम्म! शामे तो यू! चलो कुछ खा लो फिर पटाखे फोड़ते है.

निकिता : न बाबा न! अभी खा के hi आयी हु. अब पटाखे फोड़ने के बाद hi खाउंगी.

नेहा : अच्छा तोह चल फिर बाहर चलते है.

राहुल : माँ डैड? चलिए! पटाखे फोड़ने

निशा : न बाबा न! बेतु! तुझे पता है न मुझे पटाखों से डर लगता है. में नहीं फोड़ने wali...tum सभी लोग जाओ में यही बैठूंगी.

राहुल : क्या माँ?? साल में एक बार hi आता है ये त्यौहार और उसमे भी आप ऐसा करोगी तोह कैसे चलेगा? आज तोह आपको पटाखे फोड़ना hi होगा.

निशा : अच्छा ठीक है बाबा. तुम जाओ अभी पहले तुमलोग फोड़ लो मुझे फिर बाद में तू ले चलना और फुड़वा लेना okay?

निशा ने एक नॉटी सी स्माइल देते हुए कहा, जो राहुल समझ चूका था.

राहुल (नॉटी स्माइल) : बिलकुल माँ! में बाद में आपको लेके जाऊंगा और जम्म के पटाखे फोड़ूंगा और फुड़वाउंगा भी.

निशा (ब्लश) : okay बेतु! फोड़ लेना!

फिर सभी लोग बाहर चले जाते है निशा को चोरर कर. सबसे ज़्यादा एक्ससिटेड निशिता थी. क्युकी उससे इन् सब का बोहत शौक था.

सभी लड़किया फुलझड़िया जलाने लगी, लड़कियों की ज़्यादातर पसंद वही तोह रहती है. राहुल और निकिता बम फोड़ने में लग गयी. सभी मस्ती कर रहे थे और एक दूसरे में भरपूर एन्जॉय कर रहे थे.

वंशु, ऋचा और तनीषा चुपके से राहुल के शरीर से खुदको भिड़ाती रहती थी, और फिजिकली टच बनाते जा रही थी, जो बाकी लोग भी देख पा रहे थे. जैसे hi वंशु राहुल को उसके गालो पर किश करती तोह तनीषा और ऋचा एक प्यारी सी स्माइल पास कर देती थी, जो की स्माइल तोह नहीं रहती थी. राहुल के पसीने चूत जाते थे उनकी स्माइल देख के. इतनी खतरनाक स्माइल तोह एक डेविल hi करता है.

बाद में जब सभी लड़किया ज़मीन चाकरी में बिजी थी तब राहुल ने चुपके से बड़ी सी 1000 बेम वाली लड़ी लगा दी, ये प्लान उसने निकिता के साथ मिलके बनाया था. एकदम से धेरर सारे पटाखे फूटने पर सभी लड़किया डर गयी, नेहा राहुल के पास में थी इसलिए अनजाने में एकदम से वो राहुल के गले लग गयी.

aa8f47f53e8b19ead7e9733e0755d54f.gif


सरप्राइज की बात ये थी की अनजाने में राहुल ने भी एकदम से नेहा को अपनी बाहो में ले लिया और उससे भींच लिया.

सिर्फ पटाखों की आवाज़ hi आ रही थी बाकी साड़ी लड़किया तोह सामने का नज़ारा देख के hi शांत पद गयी थी.

राहुल और नेहा? एक दूसरे की बाहो में? सच में? उन्हें अपनी आँखों पर विश्वाश hi नहीं हो रहा था की सामने जो दृश्य चल रहा है वो असल में घटित हो रहा है. क्या ये चमत्कार था? या सिर्फ कुछ पल की ख़ुशी?

जब नेहा को राहुल का मज़बूत शरीर महसूस हुआ तोह वो उस एहसास में खो सी गयी थी, न जाने कितने सालो बाद उससे ये एहसास की अनुभूति वापस हुई थी, ऊपर से ये उसका कॉलेज की लाइफ में किसी भी लड़के के साथ पहला हुग था वो भी अपने hi भाई के साथ. यदि आज तक नेहा ने किसी भी लड़के को हुग या किश किया है तोह वो बेशक राहुल hi था. पर जैसे hi उससे होश आया की वो अभी किसकी बाहो में है, उससे एक झटका सा लगा. नेहा को खुद से hi ये उम्मीद नहीं थी की वो कुछ ऐसा करेगी. फौरन उसने अपने आप को राहुल की बाहो में से खुद को आज़ाद किया और बिना राहुल से नज़रे मिलाए वो निकिता की और चली गयी.

इधर राहुल कन्फ्यूज्ड और शॉकेड दोनों था. उससे भी पता नहीं क्या हो गया था की जैसे hi नेहा उसकी बाहो में आयी उसके हाथ खुड़बा खुद खुल गए. क्या ये स्नेह था?

पटाखों से फुर्सत होने के बाद जब सभी लोग अंदर वापस आए खाना खाने के लिए तोह राहुल ने कहा की वो निशा को पटाखे फुड़वाएगा.

निशा : बेतु पहले खाना खा ले?

राहुल : माँ! बाकी सब को खा लेने दो, आप आइये टेरेस पे वह काम से काम अनार और ज़मीन चाकरी hi जला लेना.

निशा : अच्छा ठीक है बेतु. चलो!

निकिता : राहुल भैया में भी... में भी चलूंगी.

राहुल : नहीं निकिता! तुम खाना खाओ. हम अभी आ जाएंगे थोड़ी देरर में.

निकिता राहुल की बात सुन्न उदास हो जाती है. राहुल और निशा अपना सीक्रेट टाइम एन्जॉय करने ऊपर चल देते है. इधर तनीषा और वंशु सभी को खाना परोसने लगती है.

ऊपर टेरेस पर...

राहुल निशा को लेके दिए के पास आता है और एक फूलजड़ी निशा को जला के पकड़ा देता है. दोनों माँ बेटे दिवाली का अवसर एन्जॉय करते हुए फूलजड़ी जला रहे थे. निशा आज डार्क ग्रीन साड़ी में थी जो उसके ऊपर बोहत जांच रही थी.





राहुल : आज आप बोहत ख़ूबसूरत लग रही हो माँ!

निशा (ब्लश) : बदमाश कही के! मुझे पटाखे hi फोड़ने लाया है न तू या फिर...!?

राहुल (स्माइल) : पटाखे hi फोड़ूंगा माँ! बोहत जम्म के!

राहुल माँ को लेके स्टैर्स के पास आता है.

निशा : क्या हुआ? नीचे जाना है क्या अब?

राहुल : नहीं माँ! इधर पर रहेंगे तोह आप देख सकती हो की कोई आ तोह नहीं रहा.

निशा : ....!???

तभी राहुल आगे बढ़ के निशा के होंठ मुँह में भर लेता है.

"Ummmmmmmmmmmmmm"

और जोरर जोरर से किश करने लगता है. निशा भी कबसे इसी इंतज़ार में थी. और आज सभी लोगो की मौजूदगी में वो यहाँ ऊपर अपने बेटे के साथ मस्ती कर रही है, इस बात से उसकी उत्तेजना और बढ़ चुकी थी.

तभी राहुल निशा की साड़ी पकड़ के उससे ऊपर उठाता है और नीचे बैठ कर साड़ी के अंदर घुस जाता है.

निशा की पंतय नीचे सरका कर वो अपना मुँह फौरन निशा की छूट में लगा देता है और किसी भूके भेड़िये की तरह चाटने लगता है.

"हाई दैयाआ! मेरा मुन्न्नणा ाःह"

निशा हलकी आवाज़ में सिसकारियां भरने लगती है.

निशा : क्या कर रहा है बेतु? ाअहाः

राहुल : आपके साथ प्यार!

निशा : ोोू अच्छा!? आआह्ह्ह इतना प्यार करता है मुझसे?

राहुल : बोहत ज़्यादा माँ! उम्मम्मम

निशा : आआअह्हह्ह्ह्ह तोह फिर चूस मेरे मुन्ना. चूस aaaahhhhhhhhhhh... खा जा, हां ऐसे hi aaaahhhhhhhhhhh चूस मेरे लाल.

राहुल : उम्म्म्म युम्म्मम्म yummmmmmmmmm

निशा : आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बेतु! में झरने वाली हु, मेरी साड़ी खराब हो जाएगी बेतु ....उईईईईई

राहुल : नहीं होगी माँ! में सारा पानी पी जाऊंगा...

निशा राहुल की बात सुन्न जहर जाती है और उसका सर अपनी साड़ी के ऊपर से पकड़ उससे अपनी छूट में दबा देती है,

"हायईएएए में गईइइइइइइइ....."

राहुल फिर साड़ी से बहार निकल कर आता है और अपना लुंड पयजामे से निकाल देता है जो बिलकुल रोड की तरह खड़ा हुआ था.

निशा फौरन झुक के राहुल के लुंड को मुँह में भर उससे गीला करने लगती है.

लुंड गीला हो जाने के बाद राहुल फौरन निशा को घुमाता है और उससे झुका देता है. उसके बाद उसकी साड़ी ऊपर कर देता है. अब राहुल के सामने उसकी माँ निशा की गीली छूट मौजूद थी.

देररि न करते हुए उसने फौरन लुंड छूट से सताया और एक ज़ोरदार धक्का मार लुंड पूरा का पूरा अंदर कर दिया

"उईईईईई maaaaaaaaaa........."

*फट फट* की आवाज़ हर धक्के के साथ आ रही थी.

राहुल : देखो माँ! इससे कहते है पटाखे फोड़ना!

निशा : हाईए! तू बोहत जोरर से पटाखे फोड़ता है बेतु... एआईईईई

राहुल : ाः! और आप बे फ़ालतू में डर रही थी. मज़ा आया न माँ?

निशा : ाः हां बेतु! और जोरर से फोड़

*फट फट फट*

राहुल ने छोड़ने के धक्के और तेज़्ज़ कर दिए. निशा के सामने खुला आसमान था जहा राकेट ऊपर जाकर रंग बिरंगे कलर में फुट रहा था पर निशा यहाँ टेरेस पर अपने बेटे का राकेट पीछे से लेके फुड़वा रही थी. और उसके राकेट से एक hi कलर निकलने वाला था, वो था सफ़ेद.

निशा : और तेज़्ज़ बेतु... आह्ह्ह्ह माँ के साथ तुझे मज़ा आता है न?

राहुल : बोहत माँ! आह ी लव यू!

निशा : ी लव यू तू मेरा बच्चा!! तेरी आआह जब शादी हो जाएगी तोह... तोह मुझे भूल तोह नहीं जाएगा न बेतु? बोल?

राहुल : नहीं माँ! कभी नहीं! सबसे छुप कर आपके साथ किया करूँगा. आप को हर ख़ुशी dunga...aah माँ में आने वाला हु.

निशा : आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह में भी बेतु! और छोड़ जोरर से, छोड़ अपनी माँ को, हां ऐसे ही, बेतु में गईइइइइइइइ

*फट फट फट*

और राहुल भी अपना सारा का सारा वीर्य निशा की छूट में उड़ेल देता है की तभी निशा को किसी के कदमो की आवाज़ सुनाई देती है.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi दोस्तों!

थैंक्स!
 
भुला नहीं था भाई, बल्कि जान बुझ के नहीं डाले.

क्युकी मुझे निशा और राहुल के सेक्स से रिलेटेड गिफ्स नहीं मिल पाए. में चाह रहा था की बिलकुल सन से रिलेटेड गिफ्स मिल जाए मुझे, पर ना मिलने पर मेने फिर गिफ्स ना डालने का निर्णय लिया. गिफ्स तभी डालूंगा जब मुझे सन से मिलते जुलते गिफ्स मिलेंगे. ऐसे में सभी रीडर्स को पढ़ने में और भी मज़ा आएगा.
 
अपडेट - 54

अब तक...

निशा : आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह में भी बेतु! और छोड़ जोरर से, छोड़ अपनी माँ को, हां ऐसे ही, बेतु में गईइइइइइइइ

*फट फट फट*

और राहुल भी अपना सारा का सारा वीर्य निशा की छूट में उड़ेल देता है की तभी निशा को किसी के कदमो की आवाज़ सुनाई देती है.

अब आगे...

आवाज़ सुनते hi निशा एकदम से घबरा गयी,

निशा : बेतु! कोई आ रहा है

निशा की बात सुन्न राहुल एकदम से अपना लुंड निशा की छूट से निकालता है और अपने पयजामे के अंदर कर लेता है. वो तोह अच्छा हुआ की आज वो कुरता पहना हुआ था जिस कारण उसका उभार थोड़ा बोहत छुप गया. निशा भी हड़बड़ा कर फौरन अपनी साड़ी नीचे कर लेती है, पर उसकी पंतय अभी भी उसकी जांघ तक उत्तरी हुई उन् जांघो में hi फास्सी हुई थी और छूट से सफ़ेद रास अभी भी टपक रहा था.

राहुल पलट कर पटाखों की थैली में हाथ टटोलने लगा ताकि ऐसा प्रतीत हो की वह पटाखों में व्यस्त है.

ऊपर आते कदमो की आवाज़ तेज़्ज़ हुई और कुछ सेकण्ड्स बाद एक चेहरा सामने आया, ये ऋचा थी.

ऋचा : आंटी, राहुल!? चलिए न आप भी, मेने खाना सर्वे कर दिया है सबको, बस आप दोनों hi बाकी हो.

निशा : बे.. बीटा तुमने नहीं खाया?

ऋचा (राहुल को देख कर) : आपके बिना कैसे खा सकती हु?

निशा : ठीक है बीटा चलो नीचे हम आते है.

ऋचा : जी

जाते जाते ऋचा राहुल को एक बार और देखती है.

निशा (छेड़ते हुए) : क्यों रे!? ये तोह पूरी पत्नी बन्न गयी तेरी. आपके बिना कैसे खा सकती हु? हां?? इतना प्यार??

राहुल (ब्लश) : माँ... बताया तोह था न आपको. ी लव हेर एंड शी लव्स में.

निशा : हां हां! पर में तनीषा के साथ अन्याय नहीं होने दूंगी. कान खोल कर सुन्न ले तू...

राहुल : ी क्नोव माँ. में उनसे भी प्यार करता हु.

निशा : तुझे पता है न? की हमारे देश में दो दो बीविया अल्लोवेद नहीं है. तू किसी एक को hi अपनी पत्नी बना सकता है. हम मुस्लिम नहीं है. मुस्लिम्स को अल्लोवेद है. तोह अब क्या करेगा तू?

राहुल : ी क्नोव माँ. आप उसकी टेंशन मत लो माँ. में सभी को अपनी बीवी बना के रहूँगा.

निशा (सुरप्रीसेड) : सभी को? और कोण है इन् दो के अलावा?

राहुल (मैं में) : ोू सहित!!

रहहल : k..koi नहीं माँ. में तोह उन्ही दोनों की बात कर रहा था.

निशा : और कैसे बनाएगा उन् दोनों को अपनी बीवी? मेने बताया न अभी... की हमारे यहाँ दो दो बीविया...

राहुल : ी क्नोव माँ. उसकी टेंशन आप मत लो. आप देखना, में उनको अपनी बना के रहूँगा और कोई कुछ नहीं कर पाएगा.

निशा : इतना कॉन्फिडेंस बच्चू?

राहुल (स्माइल्स) : आपका बीटा हु माँ

निशा (स्माइल्स) : अच्छा चल अब. तेरी बीवी से रहा नहीं जा रहा है.

फिर दोनों माँ बेटे नीचे आ जाते है, डाइनिंग टेबल पूरी तरह से भरी हुई थी बस 2 चेयर्स hi खाली थी जो की निशा और राहुल के लिए hi बची हुई थी.

डाइनिंग टेबल की 1 मैं साइड पर राजेश विराजमान थे, निशा भी उनकी अपोजिट साइड में जाके विराजमान हो जाती है.

निशा के बगल से तानिया बैठी हुई थी, तानिया के बगल से राहुल बैठ जाता है, और राहुल के बगल में ऋचा और फिर निकिता.

राहुल के सामने अंशु थी, उसके राइट में तनीषा, लेफ्ट में वंशु और वंशु के hi लेफ्ट में नेहा.

10 की 10 चेयर्स भर चुकी थी और फिर चालु हुआ डिनर. मस्त मस्त सब्ज़िया, स्वादिष्ट व्यंजन बनाये थे आज निशा ने. उसका खाना तोह पूरे परिवार में फेमस था. खाना खाते वक़्त सभी के मुँह से निशा की तारीफ निकल रही थी, जिससे सुन्न निशा बेहद खुश हो रही थी. ऐसी कोण सी औरत होगी जो अपनी तारीफ सुन्न न पसंद नहीं करेगी? निशा भी अपने आप में बोहत प्राउड फील कर रही थी. बस दिक्कत थी तोह थोड़ा बैठने में... उसकी छूट अभी भी गीली जो थी. थोड़ा उनकंफर्टबले लग रहा था उससे.

राहुल ने नोटिस किया की अंशु उसके सामने बैठ के उससे फ्लिर्टी टाइप के लुक्स दे रही है. कभी स्पून को मुँह में लेती और आँख मार देती, कभी नीचे नज़रे कर के मुस्कुराती, कभी किश करने के एक्सप्रेशन देती. सभी से चुप्प कर वो ये सब कर रही थी. राहुल की कुछ समझ में hi नहीं आ रहा था की एकदम से अब इससे क्या हो गया? बगल में तानिया भी बीच बीच में उससे देख रही थी. रही बात ऋचा की, तोह वो बिलकुल पत्नी की तरह बेहवे कर रही थी, कोई भी सब्ज़ी या कुछ भी राहुल को चाहिए होता तोह ऋचा फौरन आगे बढ़ के राहुल को सर्वे कर देती. इस बात पर राजेश और नेहा को चोरर सभी ने ध्यान दिया था.

खर्र! खाना ख़तम होते hi ऋचा और निकिता वापस घर जाने के लिए होते है,

राजेश : बीटा! तुम चोरर आओ इनको. 12 बज गए है. समय का पता hi नहीं चला. विनोद का फ़ोन आया था मेरे पास, तोह मेने कह दिया था की खाना खिलवा के भिजवा दूंगा. वैसे तोह त्यौहार का माहौल है, पर फिर भी रात में अकेले नहीं भेजूंगा में इन्हे. तुम कार में इन्हे चोरर आओ.

निकिता : पर अंकल हमारा घर तोह पास में hi है. आते वक़्त भी पैदल hi आये थे हमलोग. ज़्यादा से ज़्यादा 15 मिनट hi लगता है.

राजेश : बीटा! भूल गयी तुम्हारी बहिन के साथ क्या हुआ था?

ऋचा के किडनैप की बात याद आते hi निकिता सेहम जाती है, वाक़ई... ऋचा सिर्फ अपने कॉलेज गयी थी और किडनैप हो गयी थी. तब तोह फिर भी शाम का वक़्त था और अभी तोह रात के 12 बज रहे है. अपने ऊपर उससे गुस्सा आने लगता है की उसने अपनी बहिन के बारे में ज़रा भी नहीं सोचा.

निकिता : डीडू... I'm सॉरी

बेचारी की आँखें नम्म हो जाती है

ऋचा (प्यार से गाल पर हाथ फेरते हुए) : कोई बात नहीं निक्की! It's okay!

ऋचा फिर राहुल को प्यार से देखती है, उसी ने तोह बचाया था उस दिन उसको. वर्ण वो आज क्या ये दिन देख रही होती? वो तोह ज़िंदा hi नहीं होती. पर राहुल ने hi उससे बचाया. और आज वो यहाँ सबके बीच खुसियो में शामिल है.

राहुल : जी डैड! में कार से hi ड्राप कर देता हु.

फिर राहुल कार निकालता है और ऋचा राहुल के बगल से बैठ जाती है और निकिता पीछे. कुछ देरर में hi उनका घर भी आ गया, काफी पास जो था.

निकिता बाहर निकलती है पर ऋचा अभी भी बैठी हुई थी और राहुल को hi निहार रही थी.

निकिता : अरे डीडू चलना नहीं है क...

बोलते बोलते वो एकदम से ृक्क जाती है और उससे ध्यान आता है की अब तोह राहुल और ऋचा gf-bf है, और आज उन्हें कोई भी पर्सनल टाइम नहीं मिला स्पेंड करने शायद इसलिए ऋचा अंदर hi थी कार में और कुछ बातें करना चाह रही थी.

"निकिता! तू भी कितनी बुद्धू है" उसने अपने hi मैं में सोचा और फिर ऋचा को कार के बाहर से hi कहा,

"आप दोनों बात करिये में चलती हु. Bye bye!!"

कहते हुए वो घर के अंदर चली गयी, पर नहीं... वो तोह पोर्च में चुप्प कर कड़ी हुई थी. क्यों? ये तोह वही जाने.

उसके जाते hi ऋचा वापस से राहुल की तरफ देखती है, उसकी आँखों में प्यार का समुन्दर नज़र आ रहा था. आगे बढ़ के ऋचा राहुल का हाथ थाम लेती है और अपने गालो से लगा लेती है. आंखें थोड़ी नाम थी.

राहुल भी आगे बढ़ उसका हाथ थाम लेता है,

"क्या हुआ रीचु?"

ऋचा : एक डर है

राहुल : केसा डर?

ऋचा : डर है की... की में तुम्हारी नहीं हो पायी तोह?

राहुल : पागल! तुम तोह मेरी थी, मेरी हो, और मेरी hi रहोगी.

ऋचा : क्या सच में तुम मुझे अपनी बीवी बनाओगे? बोलो राहुल?

राहुल : बेशक! क्यों? तुम्हे मेरी बीवी नहीं बन्न न क्या?

राहुल की बात सुनते hi ऋचा उसके गले से लग जाती है,

ऋचा : दुबारा ऐसा मत कहना कभी राहुल. तुम मुझे अपना लो, इस से बड़ी बात मेरे लिए और क्या हो सकती है? में तोह चाहती hi हु की तुम मुझे जल्द से जल्द अपना बना लो. तुम्हारे साथ hi साड़ी ज़िन्दगी गुज़ारना चाहती हु में राहुल. प्लीज! अपना लो मुझे राहुल!

राहुल : बोहत जल्द! बोहत जल्द रीचु. ी लव यू!

ऋचा : ी लव यू तू राहुल. ी लव यू सोऊ मच! में कोई जॉब वेब करने नहीं जाउंगी. सिर्फ तुम्हारे साथ hi रहूंगी.

राहुल : ये क्या कह रही हो रीचु?

ऋचा : हां राहुल! मुझे सिर्फ तुम्हारे साथ hi रहना है.

राहुल : नहीं रीचु. तुम जॉब करने ज़रूर जाओगी. तुमने ये जॉब अपनी म्हणत से पायी है.

ऋचा : तुम्हे चोरर के कैसे जा सकती हु राहुल? नहीं! कभी नहीं!

राहुल : अरे पागल! में वैसे भी यहाँ से जाने वाला हु. आखिर मुझे भी तोह पैसे कमाना है न? तुमको रखूँगा कहा? खिलाऊंगा क्या? बोलो? उसके लिए मुझे भी तोह कमाना पड़ेगा न? और जब में अपना पूरा एम्पायर खड़ा कर लूंगा तब तुम मेरे पास रहोगी.

ऋचा : पर राहुल...

राहुल : पर वॉर कुछ नहीं. तुम जॉब करने जाओगी. okay!?

ऋचा (बुझे मैं से) : हम्म्म! पर मेरी भी एक शर्त है, में जो भी कमाऊंगी उसका आधा तुम्हे लेना होगा.

राहुल : ये क्या बात कर रही हो? पागल हो क्या? तुम सेव क्या करोगी फिर? घर का रेंट? खाना पीना? शॉपिंग? इलेक्ट्रिसिटी बिल? गैस सिलिंडर? ट्रैवेलिंग का खर्चा... कहा से पाय करोगी?

ऋचा : में मैनेज कर लुंगी. में और कुछ नहीं सुन्न न चाहती. मेरा सब कुछ तुम्हारा है. तुम्हे भी तोह पैसे चाहिए होंगे न आगे बढ़ने के लिए?

राहुल : हां पर, तुम्हे ये सब करने की कोई ज़रुरत नहीं है. आधे पैसे मुझे दे डौगी तोह बचेगा hi क्या तुम्हारे पास?

ऋचा : अच्छा ठीक है. में जितना दूंगी, उतना तुम्हे लेना पड़ेगा. अब आगे कुछ नहीं.

राहुल : पर रीचु...

ऋचा : एकदम चुप्प. डिअर! जो मेरा है वो तुम्हारा है. में अपने प्यार को ऐसे कैसे देख सकती हु? तुम्हारा बोझ में नहीं शेयर करुँगी तोह और कोण करेगा? कभी मुझपर भी तोह निर्भर रहो. में तुम्हारी hi तोह hu...dear!

राहुल की आँखें नाम हो जाती है,

"रिचुउ..."

और ऋचा आगे बढ़ उसके होंठ अपने होंठो में ले लेती है. और पशनातेली किश करने लगती है. आज कितने दिनों बाद उससे अपने प्यार के साथ ये मौका मिला था.



tenor4aa450b2026f8230.gif




पोर्च में छिपी निकिता सब कुछ देख रही थी, थोड़ी शॉकेड भी थी. क्युकी उसने पहले कभी भी एक लड़का लड़की को लाइव किसिंग करते हुए जो नहीं देखा था. और आज तोह अपनी hi बड़ी बहिन को राहुल के साथ किसिंग करते देख उससे जोश सा चढ़ने लगा था. और अपने निचले होंठ को वो डाट से दबा लेती है, ना जाने क्या सोच रही थी इस वक़्त.

किसिंग के बाद दोनों एक दूसरे को bye कहते है और राहुल फिर अपनी कार लेके निकल जाता है. अंदर ऋचा आती है तोह देखती है की निकिता अभी भी वही कड़ी है, इस बात से वो थोड़ी सुरप्रीसेड थी पर फिर उसने और कुछ सवाल जवाब नहीं किये और दोनों अंदर की और चल दिए.

वापस जब राहुल घर आया तोह पाया की उसके डैड अपने कमरे में जा चुके है, लिविंग रूम पूरा खाली पड़ा हुआ था.

किचन में वंशु और तानिया बर्तन रख रही थी. वो जब अपने रूम में पहुचा तोह देखा की रूम अंदर से लॉक्ड है. इसलिए उसने दूर नॉक किया तोह अंदर से उसकी माँ निशा की आवाज़ आयी की वो और तनीषा अंदर है और थोड़ी देरर बाद बाहर आएंगी. जब तक वो नीचे वेट करे.

शायद माँ तनीषा दीदी से मेरे सुर उनके रिलेशनशिप की बात कर रही है

यह सोचके राहुल नीचे आ जाता है.

यदि वंशु और तानिया नीचे है. इसका मतलब अंशु नेहा के साथ उसके कमरे में है.

इधर राहुल जब ऋचा को चौररने गया था तब निशा तनीषा को लेके राहुल के कमरे में आ गयी थी. उस बीच इनका वार्तालाप कुछ इस प्रकार था,

निशा : तोह बीटा! में ज़्यादा पहेलियाँ नहीं करुँगी. सीधे सीधे hi पूछ लेती हु. तुम्हे मेरा बीटा राहुल केसा लगता है?

निशा के डायरेक्ट सवाल से तनीषा थोड़ी घबरा जाती है. वो इसलिए क्युकी वो अबतक राहुल को भाई मानती आयी है और अब वो उस से प्यार करने लगी है, यहाँ तक की सेक्स भी कर चुकी है. सामने राहुल की माँ उस से पूछ रही है की राहुल उससे केसा लगता है? अब क्या जवाब दे वो? उससे बोहत डर लग रहा था पर प्यार के आगे डर केसा? हिम्मत जूता के आखिर उसने कह hi दिया.

तनीषा : आंटी! I'm सॉरी!! I'm सॉरी की मेने आपसे ये सब नहीं बताया... पर... पर... में आपके बेटे से प्यार करती हु आंटी... ी... ी लव हिम... मुझे पता है में उससे भाई मानती थी पर... पर मुझे धीरे धीरे उस से प्यार हो गया. और अब में उस से बेहद प्यार करती हु आंटी. ी क्नोव ki...aap...aap गुस्सा होंगी. पर में और कुछ नहीं जानती आंटी. में राहुल से अत्यंत प्रेम करती हु.

उसकी बात सुन्न निशा के चेहरे पर मुस्कराहट आ जाती है.

निशा : मुझे पता है की तुम उस से बेहद प्यार करती हो, और वो भी तुमसे बेहद प्यार करता है. मुझे ये भी पता है की तुम्हारे मेरे बेटे के साथ शारीरिक सम्बन्ध भी है...

तनीषा ये बात सुन्न पूरी लाल टमाटर हो जाती है और अपनी नज़रे नीचे कर लेती है, जिससे देख निशा एक बार फिर मुस्कुरा देती है.

निशा : इसमें शर्माने की कोई बात नहीं है बीटा! क्युकी अब तोह तुम मेरी बेटी जो बन्न ने वाली हो. और अपनी सासु माँ से क्या शर्माना?

निशा की ये बात सुन्न तनीषा की मानो दिल की धड़कन hi ृक्क गयी.

क्या कहा अभी अभी निशा ने? सासु माँ? वो भी निशा? मतलब वो इस घर ki...bahu बनेगी?

तनीषा की आँखों से ासु लबालब बहते हुए टपकने लगते है

तनीषा : आ... आंटी aap...aapne क... kya...kya कहा अभी?

निशा (स्माइल्स) : मेने कहा की तुम अब मेरी बेटी बन्न ने वाली हो तोह अब मुझसे क्या शर्माना?

तनीषा : be..beti? M..matlab?

निशा : तुम्हे मेरा बीटा पसंद है, उससे तुम पसंद हो, दोनों एक दूसरे से प्यार करते हो. तोह बताओ बेटी तनीषा! क्या तुम मेरे घर की बहु नहीं बन्न न चाहोगी? में चाहती हु की तुम मेरे बेटे की पत्नी बनो और इस घर की बहु.

निशा का हर्र एक शब्द तनीषा के कानो में गूंज रहा था. आसुओ की धाराए और तेज़्ज़ बहने लगती है. और वो एकदम से निशा के गले लग जाती है.

तनीषा (रट हुए) : बिलकुल आंटी... क्यों नहीं!? आपने आज ऐसा कह के मेरे भाग्य hi खोल दिए... में किस मुँह से आपका शुक्रिया अदा करू? मेरा ये सपना था की में राहुल की पत्नी बनु. जो मुझे पता था की शायद कभी पूरा नहीं होगा... पर आज...

निशा : अभी भी आंटी hi बोलोगी? अब तोह माँ जी कहो, या मम्मी जी, या सासु माँ... जो तुम्हे पसंद आए. पर आंटी नहीं.

तनीषा : माँ जी!!! Par...par... मुझे तोह घर से निकाल दिया गया था माँ जी, में तोह अकेली रहती हु माँ जी, में तोह राहुल से 5 साल बड़ी भी हु माँ जी. क्या तब भी आप मुझे स्वीकार करेंगी माँ जी??

निशा (मैं में) : पहले मुझे एक बात और जान नई है इस से. यदि उस टेस्ट में ये पास हो गयी. तोह फिर ये बेटी है आज से मेरी.

निशा : मुझे पता है की तुम अकेली हो बीटा, तुम्हे घर से निकाल दिया गया था, उसके बावजूद आज तुम अपने पेर्रो पर कड़ी उत्तरी हो और एक काबिल सर्जन भी हो. यहाँ तक पहुचने में तुमने न जाने कितना परिश्रम किया होगा, कितनी कठनाईयो का सामना किया होगा. रही बात तुम्हारी उम्र की, तोह प्यार में उनर नहीं देखि जाती. अब राहुल के डैड खुद मुझसे 4 साल बड़े है. और वैसे भी 5 साल कोई बड़ा अंतर नहीं होता. मुझे तुमसे एक सवाल करना है.

तनीषा : जी माँ जी पूछिए...

निशा : यदि राहुल ने कहा की तुम अपनी डॉक्टर की पोस्ट चोरर दो और घर में hi रहो एक हाउसवाइफ की तरह तोह तुम्हारा फैसला क्या होगा?

निशा की बात सुन्न तनीषा थोड़ी चौंक जाती है. फिर अगले hi पल मुस्कुराते हुए कहती है,

तनीषा : यदि राहुल ऐसा चाहेगा. तोह में ख़ुशी ख़ुशी डॉक्टर की पोस्ट से रिजाइन कर दूंगी.

तनीषा की बात सुन्न निशा एक पल के लिए चौंक जाती है, फिर मैं में सोचती है,

"मुझे इससे थोड़ा और घुमाना पड़ेगा"

निशा : तनीषा! मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी. क्या इतना hi दर्द संकल्प है तुम में? आज यहाँ तक तुम अपनी म्हणत कर के आयी हो और यदि राहुल तुमसे ये कह दे की अपनी नौकरी चोरर दो तोह तुम वो भी चोरर डौगी? क्या तुम्हारे अंदर बिलकुल भी खुद के उसूल नहीं है? क्या तुम्हारे अंदर वो नारी शक्ति नहीं है? की नहीं! तुम भी जॉब कर सकती हो, तुम भी घर खर्च चला सकती हो. क्या ये सारे उसूल तुम्हारे अंदर नहीं है? यदि ऐसा है, तोह में तुम्हारी शादी राहुल से नहीं होने दे सकती.

निशा की ये बात सुन्न तनीषा स्तब्ध सी उससे hi घूरती रहती है. आखिर कहा पे गलत कह दिया उसने? तनीषा ने बोहत सोचा, आखिर ये सवाल उसकी शादी से रिलेटेड था.

निशा (मैं में) : कुछ ज़्यादा तोह नहीं कह दिया मेने?

तनीषा (स्माइल्स) : यदि ऐसी बात है, तोह कोई बात नहीं माँ जी. आप राहुल की शादी अपनी पसंद की लड़की से कर दीजियेगा. पर मेरा उत्तर हमेशा यही रहेगा की... यदि राहुल चाहेगा तोह में अपनी नौकरी चोरर दूंगी.

निशा : ऐसा क्यों?

तनीषा : क्युकी सब कुछ उसी का तोह दिया हुआ है. यदि वो मुझे ना मिलता, उसने मेरी पढ़ाई न पूरी करवाई होती, उसने मुझे घर न दिलवाया होता, मेरा ध्यान न रखा होता, मेरी इतनी परवाह न की होती, मुझे इस क़ाबिल न बनाया होता, मुझे संभाला न होता तोह kya...toh क्या में आज यहाँ पर होती? हर्गिज़ज़ नहीं! सब कुछ उसी ने तोह दिया है. मेने तोह अपनी ज़िन्दगी उस दिन से hi उसके लिए समर्पित कर दी थी. तोह यदि वो चाहेगा की में जॉब चोरर दू, तोह में ख़ुशी ख़ुशी चोरर दूंगी.

बोलने के बाद तनीषा उदास मैं से नीचे देखने लगती है, शायद उसकी और राहुल की शादी होना लिखा hi नहीं है उसकी किस्मत में. यदि यही उपरवाले को मंज़ूर है तोह यही सही.

निशा (स्माइल्स) : तुम पास हो गयी!

तनीषा : हँ?

निशा : मेने कहा तुम पास हो गयी. माफ़ करना बेटी, में सिर्फ तुम्हे परख रही थी. पर मेरे इतना कंफ्यूज करने के बाद भी तुम मेरे टेस्ट में पास हो गयी. तुमने ना केवल अपने मैं की, बली अपने दिल की भी बात सुनी और अंत तक तुमने केवल राहुल के बारे में hi सोचा. मुझे बेहद ख़ुशी है की मेरे बेटे को इतनी प्यार करने वाली स्त्री मिली. तोह अब बताओ तनीषा, में निशा मिश्रा तुम से तुम्हारा हाथ अपने बेटे राहुल मिश्रा के लिए मांगती हु. क्या तुम उसकी पत्नी और मेरे इस घर की बहु बनोगी?

तनीषा को यकीन hi नहीं हो रहा था की वो निशा के टेस्ट में पास हो गयी. उससे तोह लगा था की अब वो और राहुल कभी भी शादी के बैंडबान में नहीं बांध पाएंगे पर यहाँ तोह चमत्कार हो गया.

तनीषा फौरन निशा के गले लग जाती है,

तनीषा (जोरर से रट हुए) : मायआ जीई!!!! हआ!! हआ में आपके घर की बहु बन न चाहती हु, में राहुल की पत्नी बन्न न चाहती हु.

निशा (तनीषा को हुग करते हुए) मेरी बेटी!!! जग जग जियो!

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi दोस्तों!

धन्यवाद्!
 
अपडेट - 55

अब तक...

तनीषा फौरन निशा के गले लग जाती है,

तनीषा (जोरर से रट हुए) : मायआ जीई!!!! हआ!! हआ में आपके घर की बहु बन न चाहती हु, में राहुल की पत्नी बन्न न चाहती हु.

निशा (तनीषा को हुग करते हुए) मेरी बेटी!!! जग जग जियो!

अब आगे...

नीचे लिविंग रूम में राहुल इंतज़ार कर रहा था की आखिर उसकी माँ और तनीषा के बीच क्या बातें चल रही होंगी? उससे ये बात जान ने की बेहद बेसब्री थी. खयालो में डूबे राहुल सोच hi रहा था की इतने में निशा और तनीषा दोनों hi नीचे आ गयी.

राहुल (मैं में) : हैं? चेहरे पर तोह ख़ुशी झलक रही है दोनों के, क्या इसका मतलब सब कुछ सही तरह से हुआ? या मेरी लगने वाली है?

राहुल : माँ?

निशा : बेतु रात बोहत हो गयी है, अब सो जाओ. तनीषा यही रुकेगी हमारे साथ.

राहुल : o..ok!

राहुल (मैं में) : बच गया रे... मतलब सब कुछ सही था. कोई दिक्कत नहीं है अब. ी गेस!?

फिर निशा और कुछ नहीं कहती और सीधे अपने रूम में चली जाती है.

तनीषा राहुल को पकड़ के उसके रूम ले जाती है. नीचे से वंशु भी राहुल के रूम में आ जाती है. तोह अब सन कुछ ऐसा था. नेहा और राहुल दोनों के रूम में एक एक बीएड था. राहुल के रूम का बीएड किंग साइज का था. जबकि नेहा के रूम का बीएड थोड़ा सा छोटा था. तोह 3 लोगो को लेटने में दिक्कत होती है. पर मैनेज तोह करना था.

तोह ये डीडे हुआ की तानिया और अंशु नेहा के साथ उसके रूम में सोएंगी. और इधर राहुल के साथ तनीषा और वंशु सोएंगी. इस बात से तानिया और अंशु दोनों hi ना खुश थी, क्युकी न जाने दोनों ने कितना तरय किया होगा की काम से काम एक बार वो राहुल के साथ सो सके.

खर्र! उस रात कुछ नहीं हुआ बस थोड़ी बोहत कुड्लिंग हुई जो की तनीषा और वंशु साइड साइड से राहुल के साथ कर रही थी. वंशु जानती थी तनीषा उसकी कॉम्पिटिटर है, तनीषा को भी पता था की वंशु राहुल से बोहत प्यार करती है. इसलिए दोनों बिना बोले अपना प्यार राहुल से कुड्लिंग कर के जाता रही थी.

निशा ने तनीषा को बता दिया था की उसका बीटा ऋचा से भी बेहद प्यार करता है, जिसके बदले में तनीषा ने कोई आपत्ति नहीं जताई. दिवाली के एक दिन बाद भाई डोज था. पर हैरानी वाली बात ये थी की किसी का भी मैं राहुल को टिका लगाने का नहीं कर रहा था. भला ऐसा क्यों? नेहा का तोह समझ में आता है पर बाकी सब?

वंशु (मैं में) : में तोह कुटी से प्यार करती हु, उससे टिका लगाउंगी तोह वो मेरा भाई hi रहेगा. क्या करू अब?

तानिया (मैं में) : आज मुझे हो क्या गया है? आज पहली बार मेरा इस चपडगंजु को भाई मान ने का मैं नहीं कर रहा है, पर ऐसा क्यों?

अंशु (मैं में) : मैं तोह नहीं है मेरा भी पर मेरे प्लान की शुरुआत यही से करनी होगी तभी तोह भाई मुझे मिल पाएंगे हिहि...

राहुल : अरे!? आप सब लोग कड़ी क्यों हो? लगाइये जल्दी! मुझे काम से जाना है बाहर अभी.

तभी अंशु आगे बढ़ राहुल के सामने बैठ जाती है,

"में लगाउंगी न अपने प्यारे भैया को टिका"

राहुल भी बदले में मुस्कुरा कर उस से टिका लगवा लेता है बदले में शगुन के रूप में उससे पैसे थमा देता है जो अंशु नहीं ले रही थी फिर भी राहुल ज़बरदस्ती उससे थमा देता है

"मुझे पैसे थोड़ी न चाहिए भाई! मुझे तोह सिर्फ 'आप' चाहिए" मैं में अंशु ने सोचा.

उसकी देखा देखि में तानिया भी फिर उससे टिका लगा देती है, और एन्ड में वंशु भी आखिर लगा hi देती है.

नेहा (मैं में) : आ गया एक और मनहूस दिन. मुझसे यदि किसी ने इसको टिका लगाने बोलै न तोह में सही में... हम्फ!!!

जब तनीषा ने कोई टिका नहीं लगाया तोह वंशु को आश्चर्य हुआ,

"अरे! आप भी तोह कुटी को भाई मानती हो न? आप क्यों नहीं लगा रही?"

बदले में तनीषा ने निशा की और देखा, उससे कुछ सूझ नहीं रहा था की क्या जवाब दे तोह निशा ने फिर ऐसा बेम फोड़ा की सभी एक बार में साइलेंट हो गए

निशा : वो इसलिए क्युकी वो बेतु से प्यार करती है, और आगे चल के दोनों की शादी होएगी एक दूसरे से.

*बूम*

लो भाई पहात गया बम. नेहा को चोरर के सभी भौचक्की सी निशा को घूरने लगी. फिर राहुल को देखती और फिर तनीषा को जो शर्मा के नज़रे नीचे किये हुई थी.

सबसे बड़ा सदमा तोह वंशु को लगा था, उससे उम्मीद नहीं थी की तनीषा उस से इतने कदम आगे निकल जाएगी. एकदम से उससे अपने दिल में अत्यंत दर्द महसूस हुआ. और वो बिना कुछ बोले hi अंदर चली गयी. राहुल समझ गया था क्या बात है इसलिए उसने तनीषा को इशारा कर उससे समझाने के लिए भेज दिया. नेहा तोह तिलक लगाने वाली थी नहीं तोह किसी ने भी उस से कुछ नहीं कहा.

दर्द तोह तानिया को भी हुआ. एक अजीब सी घबराहट या यु कहे की घुटन सी हो रही थी उससे अंदर hi अंदर ये खबर सुन्न के. अंशु hi एकमात्र थी जिससे ये सुन्न के कोई दुःख नहीं हुआ बल्कि वो खुश थी क्युकी ये खबर उसके प्लान में मदद जो करने वाली थी. क्या प्लान था उसका? ये तोह वही जाने.

इधर से फुर्सत होक राहुल अपनी बाइक उठा के चल दिया मास्टर के घर की और. उन्होंने राहुल को दिवाली के बाद बुलाया था इसलिए उसका जाना आज ज़रूरी था.

मास्टर के घर पॅहुचते hi राहुल ने बाइक साइड में लगायी और अंदर चल दिया

अंदर आते hi उससे दरवाज़े पे hi भीमा मिल गया,

"अरे राहुल बाबू!? आप? आइये आइये! मास्टर आपका hi इंतजार कर रहे थे"

राहुल : जी भीमा अंकल. और हैप्पी दिवाली आपको!

भीमा : आपको भी दिवाली की हार्दिक शुभकामनाये राहुल बाबू.

लिविंग रूम में आते hi राहुल की नज़र किचन से आती हुई मोनिका पर पद गयी और मोनिका ने भी उससे देख लिया,

"आ गए तुम? हीरो??"

लम्बे कदमो के साथ मोनिका दौड़ते हुए आयी और राहुल के कंधो पर अपने हाथ डालते हुए बोली,

"तोह बताओ!? क्या सरप्राइज है मेरे लिए?"

मोनिका को इतने पास से देख बेचारे राहुल के गाल लाल हो गए. बोहत सुन्दर जो थी.

राहुल (मैं में) : वाक़ई! मिस मोनिका मेरी हैसियत से बाहर है अभी.

राहुल : सरप्राइज? कोण सा सरप्राइज?

मोनिका : व्हाट??? तुम hi ने तोह कहा था न की मेरे लिए सरप्राइज प्लान किया है तुमने..!?

"ोू सहित! मर्डर गयी गांड! बोल तोह दिया था पर अब क्या बोलू, में तोह भूल hi गया था की मेने मिस मोनिका को प्रॉमिस दिया था दिवाली के दिन" मैं में राहुल ने खुदसे कहा.

राहुल : miss...miss मोनिका! सरप्राइज है न... बिलकुल है... पहले में... में मास्टर से तोह मिल लू.

मोनिका (मुँह फुला के) : हम्म! जाओ जल्दी ऊपर. मास्टर वेट कर रहे है. फिर नीचे आके मुझे मेरा सरप्राइज देना.

ऊपर आते hi राहुल ने मास्टर के रूम को बाहर से hi नॉक किया तोह अंदर से एक आवाज़ आयी, "आ जाओ"

अंदर आते hi राहुल मास्टर को देखता है जो सोफे पे बैठे हुए एक किताब पढ़ रहे थे.

राहुल : मास्टर!?

मास्टर : हम्म! बैठो राहुल!

राहुल : जी!! *सीट्स*

मास्टर : तोह बताओ!? दिवाली किसी थी?

राहुल : बढ़िया मास्टर! और आपकी?

मास्टर : मेरी भी बोहत अच्छी थी. भीमा, मोनिका और वो तुम्हारे द्वारा भेजे गए बुज़ुर्ग और उसकी पोती रोमा, हम सबने साथ में hi एन्जॉय किया.

राहुल : ये तोह बड़ी hi अच्छी बात है मास्टर.

मास्टर : हम्म! तोह तुम बाहर जा रहे हो?

राहुल : जी मास्टर!

मास्टर : मेरा अनुमान है अभी तुम 5-6 महीने तक तोह यही रहोगे क्युकी तुम्हारा आखिरी सेमेस्टर जो बचा हुआ है.

राहुल : जी मास्टर!

मास्टर : उसके बाद!?

राहुल : उसके बाद जैसा की मेने आपको बताया. में ये शहर चोरर के चला जाऊंगा. खुद के पेर्रो पे खड़ा होकर एक महान आदमी बनूँगा.

मास्टर : हम्म! बढ़िया है. पर उस से पहले की तुम यहाँ से जाओ में तुम्हे कुछ सिखाना भी चाहता हु और बताना भी चाहता हु.

राहुल : कहिये न मास्टर!

मास्टर : सबसे पहले बताने वाली बात कर लेते है. तोह ये बताओ तुम मेरे बारे में क्या क्या जानते हो? सब कुछ बताओ!

राहुल : यही की आप एक मार्टिकल आर्टिस्ट हो. आपको टायक्वोंडो, करते और कुंग फु आता है. आप स्टूडेंट्स को ट्रैन करते हो. आप की आगे 42 है. आप का एक बिज़नेस भी है जिसके बारे में मुझे नहीं पता और मिस मोनिका है जो आपके बिज़नेस को ज़्यादातर संभालती है. आपकी शहर में बोहत ज़्यादा पहचान है और आप एक सच्चे, होशियार, बड़े दिल वाले व्यक्ति है.

मास्टर : हाहाहाहा! तुमने अंत में मेरी तारीफ कर hi दी आखिर! पर जितना तुमने बताया वो बस पूरे सच का कुछ हिस्सा है. आज मेने तुम्हे यहाँ इसलिए बुलाया है क्युकी मुझे लगता है की मुझे तुम्हे मेरे बारे में सब कुछ बता देना चाहिए.

राहुल : हँ?

मास्टर : हम्म तोह कैसे शुरू करू!? हम्म!

तोह बात राहुल कई सालो पुरानी है जब में बहुत छोटा था. लगभग 11 साल का. में अनाथ था. मेरा असली नाम मास्टर चेन नहीं है, मेरा असली नाम है चन्द्रगुप्त. हां सही सुना तुमने!

राहुल : चन्द्रगुप्त? चन्द्रगुप्त मौर्या...

मास्टर (जोरर से हस्ते हुए) : हाहाहाहाहा अरे नहीं नहीं! में सिर्फ चन्द्रगुप्त हु. ना की चन्द्रगुप्त मौर्या. तोह बात वही से शुरू होती है जब में 11 साल का था. उस वक़्त एक चीनी जापानी सा व्यक्ति हमारे आश्रम के पास से रोज़ गुज़रता था जिससे देख कर आश्रम के सभी बच्चे उसकी छोटी छोटी आँखों का मज़ाक उड़ाते थे सिर्फ मुझे चोरर कर. में जब भी उससे देखता मुझे एक अलग hi अनुभूति होती थी. ऐसा लगता मानो उस व्यक्ति में कुछ तोह बात थी. ऐसा लगता उसमे किसी प्रकार का तेज था.

राहुल : ......!???

मास्टर : एक दिन वो ऐसे hi गुज़रा और उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और वो मुझे थोड़ी देरर तक घूरता रहा. में भी उससे घूरता रहा. और अगले hi पल उसने आश्रम के ओनर से बात करके मुझे गॉड ले लिया. उसकी इस हरकत से में काफी हैरान था. अंत में मुझे पता चला की वो साधारण सा दिखना वाला व्यक्ति चीन का एक महान कुंग फु मास्टर था, जो यहाँ भारत में किसी काम से आया हुआ था.

राहुल : पर उन्होंने आपको गॉड क्यों लिया मास्टर? और उनका नाम क्या है? अब कहा है वह?

मास्टर : शांत beta...shaant! बताता हु. सुनते जाओ. उनका नाम था मास्टर ली, उन्होंने hi मुझे कुंग फु और बाकी साड़ी कलए सिखाई और उन्होंने hi मेरा नाम चन्द्रगुप्त से चेन रख दिया. मुझे नहीं पता की अब वो कहा है. में कई सालो से उनकी तलाश में हु पर अब तक नाकाम हु. उनकी उम्र अब तक 90 के ऊपर की हो चुकी होगी. उन्होंने मुझसे वादा किया था की जब उनका आखिरी समय नज़दीक होगा तब वो मुझे खुद बता देंगे की वह कहा पर मौजूद है. अब तक ऐसा हुआ नहीं है इसका मतलब अभी वो एकदम स्वस्थ है.

राहुल : पर मास्टर उन्होंने आपको मार्टिकल आर्ट्स क्यों सिखाया? और आपको अडॉप्ट क्यों किया?

मास्टर : वो यहाँ भारत में कुछ काम से आये थे. उन्हें आये हुए 2 साल हो गए थे और उन्हें यहाँ का वातावरण, हमारे देश की हर्र एक बात उन्हें लुभा गयी थी. बदले में वह इस देश के लिए कुछ यहाँ दान करके जाना चाहते थे. और जब उन्होंने मुझे देखा, तब उन्हें मेरे अंदर कुछ ऐसा दिखा जिसके चलते उन्होंने मुझे तुरंत अपना शिष्य बना लिया, और दान के रूप में उन्होंने अपनी चीन की कुंग फु की विद्या मुझे सिखाई.

राहुल : ओह्ह्ह्ह!!! तोह ये बात थी. फिर तोह मास्टर ली बोहत स्ट्रांग होंगे मास्टर.

मास्टर : बोहत! में आज तक उन्हें कभी नहीं हरा पाया. मेरा उनको देखने का बड़ा मैं है... *गहरी सास लेकर* खर्र! बात यहाँ ख़त्म नहीं होती. असली बात तोह अब शुरू होती है.

राहुल : किसी बात?

मास्टर : मास्टर ली मुझे अपने साथ चीन ले गए थे. में उनके साथ 7 साल तक वही रहा जब तक की में 18 बरस का नहीं हो गया. उन्होंने मुझे हर एक विद्या सिखाई जो उन्हें सही लगी. कुछ ऐसी विद्याए भी है जो उन्होंने किसी को नहीं सिखाई और सिर्फ वही जानते है. मेरे 18 साल के होते hi उन्होंने मुझे मेरे हाल पर चोरर दिया और वो बिना कुछ कहे निकल गए. उन्होंने सिर्फ इतना कहा था की जब उनके प्राण जाने वाले होंगे उसके पहले वो मुझ से एक बार ज़रूर मिलेंगे.

राहुल : मुझे तोह पता hi नहीं था मास्टर की आपकी कहानी ऐसी है. आपका पास्ट तोह बोहत hi रहस्यों से भरा हुआ है.

मास्टर : हाहाहा! मैं बात बताऊंगा अभी तोह तुम और शॉकेड हो जाओगे.

राहुल : कोण सी मैं बात?

मास्टर : सुनते जाओ सब बताऊंगा! तोह जब वह मुझे मेरे हाल पे चोरर के गए, मेने सब कुछ अपने बल बूते पर किया, रहना धोना खाना पीना, सब खुद करता, खुद hi पैसे कमाता जो भी काम मिलता वो करता. चीन में तोह चिनेसे hi चलती है, तोह में मास्टर के साथ 7 साल रह रह के चिनेसे सीख चूका था. अब चुकी मेने आश्रम में थोड़ी बोहत hi पढ़ाई की हुई थी, मुझे ज़्यादा समझ नहीं थी. इसलिए मास्टर ने मुझे उतना ज्ञान दे दिया था जितना बहार की दुनिया में रहने के लिए आवश्यक था.

राहुल : फिर?

मास्टर : फिर एक दिन मेरी लड़ाई कुछ दुकानवालों से हो गयी थी जिसके चलते मेने उन्हें कुछ ज़्यादा hi धो दिया था, मेरी ये हरकत दुकानवालों को भले पसंद न आयी हो पर एक शक्श को बेहद पसंद आ गयी थी

राहुल : कोण?

मास्टर : उसका नाम था माइक. वो एक पर्सन डीलर था.

राहुल : पर्सन डीलर?

मास्टर : हां! सुन्न ने में मुझे आज भी बड़ा अटपटा लगता है पर वो खुद को यही कह के इंट्रोडस करता था. पर्सन डीलर मतलब, मान लो की मुझे एक ऐसे व्यक्ति की तलाश है जो मेरे लिए मेरा बिज़नेस संभाल सके. तोह यदि में फ़ालतू की इंटरव्यू प्रोसेस को नहीं रखना चाहता और में जल्द से जल्द एक ऐसा व्यक्ति चाहता हु जो एक दो दिन बाद hi मेरा बिज़नेस संभालने में मेरी मदद करे और एकदम भरोसेमंद हो तोह में क्या करूँगा?

राहुल : आप अपने किसी परचित से बोलोगे की वो आपके लिए ऐसा व्यक्ति ढूंढ के दे

मास्टर : बिलकुल सही कहा. यही काम माइक करता था. वो हर तरह के लोगो को ढूंढ़ता था और जब रईस लोगो को ऐसे व्यक्ति की तलाश होती थी तोह वह उन्हें उनसे मिलवाता था जिसके बदले उससे रईसों से धेरर सारा पैसा मिलता था.

राहुल : ये तोह कमाल का धंदा है.

मास्टर : हां! पर उतना hi खतरनाक भी है. खर्र! उस दिन माइक ने मुझे लड़ते हुए देखा और मुझ से बात करि की वो मुझे नौकरी दिलवा सकता है जिसमे मेरी लड़ने की स्किल्स का इस्तेमाल होएगा और में उनसे पैसे कमा सकता हु

राहुल : ऐसी कोनसी नौकरी?

मास्टर : बॉडीगार्ड!

राहुल : हँ?

मास्टर : सबसे चौकाने वाली बात ये थी की तब में सिर्फ 20 साल का था और मुझे एक बॉडीगार्ड की नौकरी मिल रही थी. मेने माइक को हां कह दिया और अगले दिन से शुरू हुई मेरी बॉडीगार्ड की नौकरी जिसमे मेरा 3 साल का कॉन्ट्रैक्ट था एक बिजनेसमैन को प्रोटेक्ट करना. उसका बिज़नेस बोहत बड़ा नहीं था पर उसका अंडरग्राउंड माफिया से कनेक्शन था. उसने कुछ पैसे खाए हुए थे जिसके चलते माफिया के लोग आये दिन कुछ न कुछ उसके लिए मुसीबत कड़ी करते और उन् सब से छुटकारा उससे में दिलाता था.

राहुल : अंडरग्राउंड माफिया?

मास्टर : हां! हर्र शहर में एक न एक अंडरग्राउंड माफिया गैंग रहती hi है. खर्र उन् 3 सालो में मेरी जान 2 बार जाते जाते बची थी. तब मुझे समझ आया था की ये नौकरी मेरी जान कभी भी ले सकती है. पर एक अच्छी बात थी वो ये की यदि आप किसी रईस के बॉडीगार्ड हो तोह पैसा बोहत मिलता था.

राहुल : ओह्ह्ह्ह

मास्टर : 3 साल के कॉन्ट्रैक्ट के बाद मेरे भी माफिया के साथ कनेक्शंस बढ़ गए थे. मेरी एक पहचान बन चुकी थी. और फिर माइक ने मुझे अगले कॉन्ट्रैक्ट थमा दिया. मिशन था, एक बेहद hi ख़ूबसूरत 22 साल की लड़की को प्रोटेक्ट करना.

राहुल : लड़की?

मास्टर : हां! तब में 23 साल का था. उसका नाम सुजय था. एक सिंगर. रईस घर की बेटी. एक बेहद hi ख़ूबसूरत लड़की. मुझे उसको प्रोटेक्ट करना था एक साल के लिए. उस एक साल में मेरे लिए सब कुछ बदल गया.

राहुल : ????

मास्टर : सुजय के दादा जी बीमार रहते थे और सुजय के माता पिता हादसे में गुज़र चुके थे. उसके दादा जी की जितनी भी प्रॉपर्टी और सारा पैसा था, उन्होंने आधा आधा सुजय और उसके भाई को दे दिया था. पर उसके भाई और उसके माता पिता सुजय को कैसे भी करके रास्ते से हटाना चाहते थे. ताकि साड़ी की साड़ी प्रॉपर्टी उनकी हो जाए.

राहुल : फिर?

मास्टर : सुजय के एक शुभचिंतक ने माइक से बॉडीगार्ड की गुज़ारिश की और तब माइक ने मुझे सुजय से मिलवाया. कई महीने बीत गए, में सुजय को हर एक मुसीबत से बचाता था. धीरे धीरे हमारी नज़दीकिया बढ़ती गयी और हमें एक दूसरे से प्यार हो गया.

राहुल (सुरप्रीसेड) : वाओ!!!

मास्टर : एहम...! धीरे धीरे समय बीता और सुजय का भाई और उसके माता पिता सुजय को मारने में असफल रहे. सुजय ने अपनी 50% की प्रॉपर्टी का आधा हिस्सा पूरा मुझे दे दिया. और फिर वो दिन आया जब हम दोनों की एक बेटी हुई...

राहुल : हम्म्म! बेटी!? हैं ??????

*जोरर से चिल्ला के*

क्या कहा बेटीई???? Aaap...aapki बेटी?

मतलब आपने और मिस सुजय ने...

मास्टर (ब्लश) : एहम एहम...!! हां! मेरी और सुजय की एक बेटी हुई. जिसका नाम हमने ख़ुशी रखा. पर एक ख़ुशी आयी तोह साथ में एक दुःख का पहाड़ भी गिर पड़ा.

राहुल : केसा दुःख???

मास्टर (नाम आंको से) : जन्म देते वक़्त सुजय ने अपने प्राण खो दिए.

राहुल : व्हाआआअत्ततत्तत्त?? ये...

मास्टर : हम्म! उसके जाने के बाद में टूट सा गया था. क्युकी ख़ुशी का जन्म चीन में हुआ था और उसकी माँ भी चिनेसे hi थी. इसलिए मेने ख़ुशी को चीन में hi पढ़ाने का निर्णय लिया. जब तक ख़ुशी 18 की नहीं हो जाती तब तक वो चीन में hi अपनी पढ़ाई करेगी और वही रहेगी, उसको हिंदी सिखाने के लिए भी मेने एक टुटर रखा हुआ है. में चाहता हु उससे अपनी माँ की मातृभाषा और अपने पिता की मातृभाषा दोनों hi आणि चाहिए.

राहुल : ओह्ह्ह्हह्हह

मास्टर : जो प्रॉपर्टी सुजय ने मुझे दी थी मेने वो उपयोग करके अपना बिज़नेस खड़ा किया. चीन में मेरे नाम पर एक बोहत बड़ा सिटी मॉल है, एक स्कूल है और एक हॉस्पिटल है.

राहुल : व्हाआआअत्ततत्तत्त??? इतना?? इतना सारा?

मास्टर : हां! मेरे hi स्कूल में ख़ुशी पढ़ती है, या यु कहे... वो उसका hi स्कूल है. अगले साल वो 18 की हो जाएगी. उसका बस एक साल बचा हुआ है.

राहुल : पर आप यहाँ क्यों आ गए?

मास्टर : क्युकी में टूट सा गया था. मुझे चीन में हमेशा सुजय की याद आती और हर्र दिन दुखदायी रहता. इसलिए में वापस अपने देश लौट आया, यहाँ आके मेरी मुलाक़ात भीमा से हुई, जिससे मेने बचाया था पर अफ़सोस उसकी बीवी को न बचा सका.

राहुल : जी मास्टर! भीमा अंकल ने मुझे बताया था.

मास्टर : फिर मोनिका से मुलाक़ात हुई, और उससे मेने अपने चीन के बिज़नेस की देख बाल करने के लिए रख लिया. और फिर एक दिन तुमसे मुलाक़ात हुई, तुम्हे देख के मुझे वही अनुभूति हुई थी जो उस वक़्त मास्टर को मुझे देख के हुई थी. इसलिए मेने तुम्हे अपना शिष्य चुना. और अब वक़्त आ गया है की में तुम्हारे यहाँ जाने से पहले तुम्हे कुछ सिखौ और तुमसे कुछ मांगू.

राहुल : k...kya?

मास्टर : मेने तुम्हे जितना भी अभी कुछ सिखाया है उसमे मेने तुम्हे कही भी कोई भी जानलेवा मूव नहीं सिखाया. पर उस दिन तुम एक लड़के से चोटिल हो गए थे. इसलिए ये शहर चोरर के जाने से पहले, इन् 5-6 महीनो में में तुम्हे बोहत कुछ सिखाने वाला हु. तुम तैयार हो?

राहुल : जी मास्टर!

मास्टर : गुड! अब बात आती है गुरु दक्षिणा की. तोह वह में तुमसे तब मांगूंगा जब तुम ये शहर चोरर के जाने लगोगे.

राहुल : जी मास्टर...

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

थैंक यू! पसंद आए तोह लिखे ज़रूर कीजियेगा!
 
भाया रीयलिस्टिक स्टोरी से मेरा मतलब था की स्टोरी लॉजिक बेस्ड है, इसमें कोई मैजिक वगैरह नहीं है, सब कुछ जो हो रहा है वो आज की दुनिया के हिसाब से hi हो रहा है मतलब की जो चीज़े पॉसिबल है. 2 से ज़्यादा लड़कियों का आना कोई इम्पॉसिबल बात नहीं है ी गेस!?

इसलिए तोह स्टोरी हरम बेस्ड है भाया.
 
जी हां भाई, लास्ट अपडेट का मक़सद वही था की आप सभी को मास्टर के करैक्टर की स्टोरी बताना. यदि आप सब ने गौर किया हो, तोह आपको पता चलेगा की हर्र एक करैक्टर की स्टोरी सामने आ रही है, तनीषा और ऋचा का पास्ट भी देखा हमने. अंशु का भी देखा आपने कैसे वो घटना के बाद राहुल से बात करने लगी. धीरे धीरे सब कुछ सामने आता जाएगा. धन्यवाद्
 
Back
Top