अपडेट - 55
अब तक...
तनीषा फौरन निशा के गले लग जाती है,
तनीषा (जोरर से रट हुए) : मायआ जीई!!!! हआ!! हआ में आपके घर की बहु बन न चाहती हु, में राहुल की पत्नी बन्न न चाहती हु.
निशा (तनीषा को हुग करते हुए) मेरी बेटी!!! जग जग जियो!
अब आगे...
नीचे लिविंग रूम में राहुल इंतज़ार कर रहा था की आखिर उसकी माँ और तनीषा के बीच क्या बातें चल रही होंगी? उससे ये बात जान ने की बेहद बेसब्री थी. खयालो में डूबे राहुल सोच hi रहा था की इतने में निशा और तनीषा दोनों hi नीचे आ गयी.
राहुल (मैं में) : हैं? चेहरे पर तोह ख़ुशी झलक रही है दोनों के, क्या इसका मतलब सब कुछ सही तरह से हुआ? या मेरी लगने वाली है?
राहुल : माँ?
निशा : बेतु रात बोहत हो गयी है, अब सो जाओ. तनीषा यही रुकेगी हमारे साथ.
राहुल : o..ok!
राहुल (मैं में) : बच गया रे... मतलब सब कुछ सही था. कोई दिक्कत नहीं है अब. ी गेस!?
फिर निशा और कुछ नहीं कहती और सीधे अपने रूम में चली जाती है.
तनीषा राहुल को पकड़ के उसके रूम ले जाती है. नीचे से वंशु भी राहुल के रूम में आ जाती है. तोह अब सन कुछ ऐसा था. नेहा और राहुल दोनों के रूम में एक एक बीएड था. राहुल के रूम का बीएड किंग साइज का था. जबकि नेहा के रूम का बीएड थोड़ा सा छोटा था. तोह 3 लोगो को लेटने में दिक्कत होती है. पर मैनेज तोह करना था.
तोह ये डीडे हुआ की तानिया और अंशु नेहा के साथ उसके रूम में सोएंगी. और इधर राहुल के साथ तनीषा और वंशु सोएंगी. इस बात से तानिया और अंशु दोनों hi ना खुश थी, क्युकी न जाने दोनों ने कितना तरय किया होगा की काम से काम एक बार वो राहुल के साथ सो सके.
खर्र! उस रात कुछ नहीं हुआ बस थोड़ी बोहत कुड्लिंग हुई जो की तनीषा और वंशु साइड साइड से राहुल के साथ कर रही थी. वंशु जानती थी तनीषा उसकी कॉम्पिटिटर है, तनीषा को भी पता था की वंशु राहुल से बोहत प्यार करती है. इसलिए दोनों बिना बोले अपना प्यार राहुल से कुड्लिंग कर के जाता रही थी.
निशा ने तनीषा को बता दिया था की उसका बीटा ऋचा से भी बेहद प्यार करता है, जिसके बदले में तनीषा ने कोई आपत्ति नहीं जताई. दिवाली के एक दिन बाद भाई डोज था. पर हैरानी वाली बात ये थी की किसी का भी मैं राहुल को टिका लगाने का नहीं कर रहा था. भला ऐसा क्यों? नेहा का तोह समझ में आता है पर बाकी सब?
वंशु (मैं में) : में तोह कुटी से प्यार करती हु, उससे टिका लगाउंगी तोह वो मेरा भाई hi रहेगा. क्या करू अब?
तानिया (मैं में) : आज मुझे हो क्या गया है? आज पहली बार मेरा इस चपडगंजु को भाई मान ने का मैं नहीं कर रहा है, पर ऐसा क्यों?
अंशु (मैं में) : मैं तोह नहीं है मेरा भी पर मेरे प्लान की शुरुआत यही से करनी होगी तभी तोह भाई मुझे मिल पाएंगे हिहि...
राहुल : अरे!? आप सब लोग कड़ी क्यों हो? लगाइये जल्दी! मुझे काम से जाना है बाहर अभी.
तभी अंशु आगे बढ़ राहुल के सामने बैठ जाती है,
"में लगाउंगी न अपने प्यारे भैया को टिका"
राहुल भी बदले में मुस्कुरा कर उस से टिका लगवा लेता है बदले में शगुन के रूप में उससे पैसे थमा देता है जो अंशु नहीं ले रही थी फिर भी राहुल ज़बरदस्ती उससे थमा देता है
"मुझे पैसे थोड़ी न चाहिए भाई! मुझे तोह सिर्फ 'आप' चाहिए" मैं में अंशु ने सोचा.
उसकी देखा देखि में तानिया भी फिर उससे टिका लगा देती है, और एन्ड में वंशु भी आखिर लगा hi देती है.
नेहा (मैं में) : आ गया एक और मनहूस दिन. मुझसे यदि किसी ने इसको टिका लगाने बोलै न तोह में सही में... हम्फ!!!
जब तनीषा ने कोई टिका नहीं लगाया तोह वंशु को आश्चर्य हुआ,
"अरे! आप भी तोह कुटी को भाई मानती हो न? आप क्यों नहीं लगा रही?"
बदले में तनीषा ने निशा की और देखा, उससे कुछ सूझ नहीं रहा था की क्या जवाब दे तोह निशा ने फिर ऐसा बेम फोड़ा की सभी एक बार में साइलेंट हो गए
निशा : वो इसलिए क्युकी वो बेतु से प्यार करती है, और आगे चल के दोनों की शादी होएगी एक दूसरे से.
*बूम*
लो भाई पहात गया बम. नेहा को चोरर के सभी भौचक्की सी निशा को घूरने लगी. फिर राहुल को देखती और फिर तनीषा को जो शर्मा के नज़रे नीचे किये हुई थी.
सबसे बड़ा सदमा तोह वंशु को लगा था, उससे उम्मीद नहीं थी की तनीषा उस से इतने कदम आगे निकल जाएगी. एकदम से उससे अपने दिल में अत्यंत दर्द महसूस हुआ. और वो बिना कुछ बोले hi अंदर चली गयी. राहुल समझ गया था क्या बात है इसलिए उसने तनीषा को इशारा कर उससे समझाने के लिए भेज दिया. नेहा तोह तिलक लगाने वाली थी नहीं तोह किसी ने भी उस से कुछ नहीं कहा.
दर्द तोह तानिया को भी हुआ. एक अजीब सी घबराहट या यु कहे की घुटन सी हो रही थी उससे अंदर hi अंदर ये खबर सुन्न के. अंशु hi एकमात्र थी जिससे ये सुन्न के कोई दुःख नहीं हुआ बल्कि वो खुश थी क्युकी ये खबर उसके प्लान में मदद जो करने वाली थी. क्या प्लान था उसका? ये तोह वही जाने.
इधर से फुर्सत होक राहुल अपनी बाइक उठा के चल दिया मास्टर के घर की और. उन्होंने राहुल को दिवाली के बाद बुलाया था इसलिए उसका जाना आज ज़रूरी था.
मास्टर के घर पॅहुचते hi राहुल ने बाइक साइड में लगायी और अंदर चल दिया
अंदर आते hi उससे दरवाज़े पे hi भीमा मिल गया,
"अरे राहुल बाबू!? आप? आइये आइये! मास्टर आपका hi इंतजार कर रहे थे"
राहुल : जी भीमा अंकल. और हैप्पी दिवाली आपको!
भीमा : आपको भी दिवाली की हार्दिक शुभकामनाये राहुल बाबू.
लिविंग रूम में आते hi राहुल की नज़र किचन से आती हुई मोनिका पर पद गयी और मोनिका ने भी उससे देख लिया,
"आ गए तुम? हीरो??"
लम्बे कदमो के साथ मोनिका दौड़ते हुए आयी और राहुल के कंधो पर अपने हाथ डालते हुए बोली,
"तोह बताओ!? क्या सरप्राइज है मेरे लिए?"
मोनिका को इतने पास से देख बेचारे राहुल के गाल लाल हो गए. बोहत सुन्दर जो थी.
राहुल (मैं में) : वाक़ई! मिस मोनिका मेरी हैसियत से बाहर है अभी.
राहुल : सरप्राइज? कोण सा सरप्राइज?
मोनिका : व्हाट??? तुम hi ने तोह कहा था न की मेरे लिए सरप्राइज प्लान किया है तुमने..!?
"ोू सहित! मर्डर गयी गांड! बोल तोह दिया था पर अब क्या बोलू, में तोह भूल hi गया था की मेने मिस मोनिका को प्रॉमिस दिया था दिवाली के दिन" मैं में राहुल ने खुदसे कहा.
राहुल : miss...miss मोनिका! सरप्राइज है न... बिलकुल है... पहले में... में मास्टर से तोह मिल लू.
मोनिका (मुँह फुला के) : हम्म! जाओ जल्दी ऊपर. मास्टर वेट कर रहे है. फिर नीचे आके मुझे मेरा सरप्राइज देना.
ऊपर आते hi राहुल ने मास्टर के रूम को बाहर से hi नॉक किया तोह अंदर से एक आवाज़ आयी, "आ जाओ"
अंदर आते hi राहुल मास्टर को देखता है जो सोफे पे बैठे हुए एक किताब पढ़ रहे थे.
राहुल : मास्टर!?
मास्टर : हम्म! बैठो राहुल!
राहुल : जी!! *सीट्स*
मास्टर : तोह बताओ!? दिवाली किसी थी?
राहुल : बढ़िया मास्टर! और आपकी?
मास्टर : मेरी भी बोहत अच्छी थी. भीमा, मोनिका और वो तुम्हारे द्वारा भेजे गए बुज़ुर्ग और उसकी पोती रोमा, हम सबने साथ में hi एन्जॉय किया.
राहुल : ये तोह बड़ी hi अच्छी बात है मास्टर.
मास्टर : हम्म! तोह तुम बाहर जा रहे हो?
राहुल : जी मास्टर!
मास्टर : मेरा अनुमान है अभी तुम 5-6 महीने तक तोह यही रहोगे क्युकी तुम्हारा आखिरी सेमेस्टर जो बचा हुआ है.
राहुल : जी मास्टर!
मास्टर : उसके बाद!?
राहुल : उसके बाद जैसा की मेने आपको बताया. में ये शहर चोरर के चला जाऊंगा. खुद के पेर्रो पे खड़ा होकर एक महान आदमी बनूँगा.
मास्टर : हम्म! बढ़िया है. पर उस से पहले की तुम यहाँ से जाओ में तुम्हे कुछ सिखाना भी चाहता हु और बताना भी चाहता हु.
राहुल : कहिये न मास्टर!
मास्टर : सबसे पहले बताने वाली बात कर लेते है. तोह ये बताओ तुम मेरे बारे में क्या क्या जानते हो? सब कुछ बताओ!
राहुल : यही की आप एक मार्टिकल आर्टिस्ट हो. आपको टायक्वोंडो, करते और कुंग फु आता है. आप स्टूडेंट्स को ट्रैन करते हो. आप की आगे 42 है. आप का एक बिज़नेस भी है जिसके बारे में मुझे नहीं पता और मिस मोनिका है जो आपके बिज़नेस को ज़्यादातर संभालती है. आपकी शहर में बोहत ज़्यादा पहचान है और आप एक सच्चे, होशियार, बड़े दिल वाले व्यक्ति है.
मास्टर : हाहाहाहा! तुमने अंत में मेरी तारीफ कर hi दी आखिर! पर जितना तुमने बताया वो बस पूरे सच का कुछ हिस्सा है. आज मेने तुम्हे यहाँ इसलिए बुलाया है क्युकी मुझे लगता है की मुझे तुम्हे मेरे बारे में सब कुछ बता देना चाहिए.
राहुल : हँ?
मास्टर : हम्म तोह कैसे शुरू करू!? हम्म!
तोह बात राहुल कई सालो पुरानी है जब में बहुत छोटा था. लगभग 11 साल का. में अनाथ था. मेरा असली नाम मास्टर चेन नहीं है, मेरा असली नाम है चन्द्रगुप्त. हां सही सुना तुमने!
राहुल : चन्द्रगुप्त? चन्द्रगुप्त मौर्या...
मास्टर (जोरर से हस्ते हुए) : हाहाहाहाहा अरे नहीं नहीं! में सिर्फ चन्द्रगुप्त हु. ना की चन्द्रगुप्त मौर्या. तोह बात वही से शुरू होती है जब में 11 साल का था. उस वक़्त एक चीनी जापानी सा व्यक्ति हमारे आश्रम के पास से रोज़ गुज़रता था जिससे देख कर आश्रम के सभी बच्चे उसकी छोटी छोटी आँखों का मज़ाक उड़ाते थे सिर्फ मुझे चोरर कर. में जब भी उससे देखता मुझे एक अलग hi अनुभूति होती थी. ऐसा लगता मानो उस व्यक्ति में कुछ तोह बात थी. ऐसा लगता उसमे किसी प्रकार का तेज था.
राहुल : ......!???
मास्टर : एक दिन वो ऐसे hi गुज़रा और उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और वो मुझे थोड़ी देरर तक घूरता रहा. में भी उससे घूरता रहा. और अगले hi पल उसने आश्रम के ओनर से बात करके मुझे गॉड ले लिया. उसकी इस हरकत से में काफी हैरान था. अंत में मुझे पता चला की वो साधारण सा दिखना वाला व्यक्ति चीन का एक महान कुंग फु मास्टर था, जो यहाँ भारत में किसी काम से आया हुआ था.
राहुल : पर उन्होंने आपको गॉड क्यों लिया मास्टर? और उनका नाम क्या है? अब कहा है वह?
मास्टर : शांत beta...shaant! बताता हु. सुनते जाओ. उनका नाम था मास्टर ली, उन्होंने hi मुझे कुंग फु और बाकी साड़ी कलए सिखाई और उन्होंने hi मेरा नाम चन्द्रगुप्त से चेन रख दिया. मुझे नहीं पता की अब वो कहा है. में कई सालो से उनकी तलाश में हु पर अब तक नाकाम हु. उनकी उम्र अब तक 90 के ऊपर की हो चुकी होगी. उन्होंने मुझसे वादा किया था की जब उनका आखिरी समय नज़दीक होगा तब वो मुझे खुद बता देंगे की वह कहा पर मौजूद है. अब तक ऐसा हुआ नहीं है इसका मतलब अभी वो एकदम स्वस्थ है.
राहुल : पर मास्टर उन्होंने आपको मार्टिकल आर्ट्स क्यों सिखाया? और आपको अडॉप्ट क्यों किया?
मास्टर : वो यहाँ भारत में कुछ काम से आये थे. उन्हें आये हुए 2 साल हो गए थे और उन्हें यहाँ का वातावरण, हमारे देश की हर्र एक बात उन्हें लुभा गयी थी. बदले में वह इस देश के लिए कुछ यहाँ दान करके जाना चाहते थे. और जब उन्होंने मुझे देखा, तब उन्हें मेरे अंदर कुछ ऐसा दिखा जिसके चलते उन्होंने मुझे तुरंत अपना शिष्य बना लिया, और दान के रूप में उन्होंने अपनी चीन की कुंग फु की विद्या मुझे सिखाई.
राहुल : ओह्ह्ह्ह!!! तोह ये बात थी. फिर तोह मास्टर ली बोहत स्ट्रांग होंगे मास्टर.
मास्टर : बोहत! में आज तक उन्हें कभी नहीं हरा पाया. मेरा उनको देखने का बड़ा मैं है... *गहरी सास लेकर* खर्र! बात यहाँ ख़त्म नहीं होती. असली बात तोह अब शुरू होती है.
राहुल : किसी बात?
मास्टर : मास्टर ली मुझे अपने साथ चीन ले गए थे. में उनके साथ 7 साल तक वही रहा जब तक की में 18 बरस का नहीं हो गया. उन्होंने मुझे हर एक विद्या सिखाई जो उन्हें सही लगी. कुछ ऐसी विद्याए भी है जो उन्होंने किसी को नहीं सिखाई और सिर्फ वही जानते है. मेरे 18 साल के होते hi उन्होंने मुझे मेरे हाल पर चोरर दिया और वो बिना कुछ कहे निकल गए. उन्होंने सिर्फ इतना कहा था की जब उनके प्राण जाने वाले होंगे उसके पहले वो मुझ से एक बार ज़रूर मिलेंगे.
राहुल : मुझे तोह पता hi नहीं था मास्टर की आपकी कहानी ऐसी है. आपका पास्ट तोह बोहत hi रहस्यों से भरा हुआ है.
मास्टर : हाहाहा! मैं बात बताऊंगा अभी तोह तुम और शॉकेड हो जाओगे.
राहुल : कोण सी मैं बात?
मास्टर : सुनते जाओ सब बताऊंगा! तोह जब वह मुझे मेरे हाल पे चोरर के गए, मेने सब कुछ अपने बल बूते पर किया, रहना धोना खाना पीना, सब खुद करता, खुद hi पैसे कमाता जो भी काम मिलता वो करता. चीन में तोह चिनेसे hi चलती है, तोह में मास्टर के साथ 7 साल रह रह के चिनेसे सीख चूका था. अब चुकी मेने आश्रम में थोड़ी बोहत hi पढ़ाई की हुई थी, मुझे ज़्यादा समझ नहीं थी. इसलिए मास्टर ने मुझे उतना ज्ञान दे दिया था जितना बहार की दुनिया में रहने के लिए आवश्यक था.
राहुल : फिर?
मास्टर : फिर एक दिन मेरी लड़ाई कुछ दुकानवालों से हो गयी थी जिसके चलते मेने उन्हें कुछ ज़्यादा hi धो दिया था, मेरी ये हरकत दुकानवालों को भले पसंद न आयी हो पर एक शक्श को बेहद पसंद आ गयी थी
राहुल : कोण?
मास्टर : उसका नाम था माइक. वो एक पर्सन डीलर था.
राहुल : पर्सन डीलर?
मास्टर : हां! सुन्न ने में मुझे आज भी बड़ा अटपटा लगता है पर वो खुद को यही कह के इंट्रोडस करता था. पर्सन डीलर मतलब, मान लो की मुझे एक ऐसे व्यक्ति की तलाश है जो मेरे लिए मेरा बिज़नेस संभाल सके. तोह यदि में फ़ालतू की इंटरव्यू प्रोसेस को नहीं रखना चाहता और में जल्द से जल्द एक ऐसा व्यक्ति चाहता हु जो एक दो दिन बाद hi मेरा बिज़नेस संभालने में मेरी मदद करे और एकदम भरोसेमंद हो तोह में क्या करूँगा?
राहुल : आप अपने किसी परचित से बोलोगे की वो आपके लिए ऐसा व्यक्ति ढूंढ के दे
मास्टर : बिलकुल सही कहा. यही काम माइक करता था. वो हर तरह के लोगो को ढूंढ़ता था और जब रईस लोगो को ऐसे व्यक्ति की तलाश होती थी तोह वह उन्हें उनसे मिलवाता था जिसके बदले उससे रईसों से धेरर सारा पैसा मिलता था.
राहुल : ये तोह कमाल का धंदा है.
मास्टर : हां! पर उतना hi खतरनाक भी है. खर्र! उस दिन माइक ने मुझे लड़ते हुए देखा और मुझ से बात करि की वो मुझे नौकरी दिलवा सकता है जिसमे मेरी लड़ने की स्किल्स का इस्तेमाल होएगा और में उनसे पैसे कमा सकता हु
राहुल : ऐसी कोनसी नौकरी?
मास्टर : बॉडीगार्ड!
राहुल : हँ?
मास्टर : सबसे चौकाने वाली बात ये थी की तब में सिर्फ 20 साल का था और मुझे एक बॉडीगार्ड की नौकरी मिल रही थी. मेने माइक को हां कह दिया और अगले दिन से शुरू हुई मेरी बॉडीगार्ड की नौकरी जिसमे मेरा 3 साल का कॉन्ट्रैक्ट था एक बिजनेसमैन को प्रोटेक्ट करना. उसका बिज़नेस बोहत बड़ा नहीं था पर उसका अंडरग्राउंड माफिया से कनेक्शन था. उसने कुछ पैसे खाए हुए थे जिसके चलते माफिया के लोग आये दिन कुछ न कुछ उसके लिए मुसीबत कड़ी करते और उन् सब से छुटकारा उससे में दिलाता था.
राहुल : अंडरग्राउंड माफिया?
मास्टर : हां! हर्र शहर में एक न एक अंडरग्राउंड माफिया गैंग रहती hi है. खर्र उन् 3 सालो में मेरी जान 2 बार जाते जाते बची थी. तब मुझे समझ आया था की ये नौकरी मेरी जान कभी भी ले सकती है. पर एक अच्छी बात थी वो ये की यदि आप किसी रईस के बॉडीगार्ड हो तोह पैसा बोहत मिलता था.
राहुल : ओह्ह्ह्ह
मास्टर : 3 साल के कॉन्ट्रैक्ट के बाद मेरे भी माफिया के साथ कनेक्शंस बढ़ गए थे. मेरी एक पहचान बन चुकी थी. और फिर माइक ने मुझे अगले कॉन्ट्रैक्ट थमा दिया. मिशन था, एक बेहद hi ख़ूबसूरत 22 साल की लड़की को प्रोटेक्ट करना.
राहुल : लड़की?
मास्टर : हां! तब में 23 साल का था. उसका नाम सुजय था. एक सिंगर. रईस घर की बेटी. एक बेहद hi ख़ूबसूरत लड़की. मुझे उसको प्रोटेक्ट करना था एक साल के लिए. उस एक साल में मेरे लिए सब कुछ बदल गया.
राहुल : ????
मास्टर : सुजय के दादा जी बीमार रहते थे और सुजय के माता पिता हादसे में गुज़र चुके थे. उसके दादा जी की जितनी भी प्रॉपर्टी और सारा पैसा था, उन्होंने आधा आधा सुजय और उसके भाई को दे दिया था. पर उसके भाई और उसके माता पिता सुजय को कैसे भी करके रास्ते से हटाना चाहते थे. ताकि साड़ी की साड़ी प्रॉपर्टी उनकी हो जाए.
राहुल : फिर?
मास्टर : सुजय के एक शुभचिंतक ने माइक से बॉडीगार्ड की गुज़ारिश की और तब माइक ने मुझे सुजय से मिलवाया. कई महीने बीत गए, में सुजय को हर एक मुसीबत से बचाता था. धीरे धीरे हमारी नज़दीकिया बढ़ती गयी और हमें एक दूसरे से प्यार हो गया.
राहुल (सुरप्रीसेड) : वाओ!!!
मास्टर : एहम...! धीरे धीरे समय बीता और सुजय का भाई और उसके माता पिता सुजय को मारने में असफल रहे. सुजय ने अपनी 50% की प्रॉपर्टी का आधा हिस्सा पूरा मुझे दे दिया. और फिर वो दिन आया जब हम दोनों की एक बेटी हुई...
राहुल : हम्म्म! बेटी!? हैं ??????
*जोरर से चिल्ला के*
क्या कहा बेटीई???? Aaap...aapki बेटी?
मतलब आपने और मिस सुजय ने...
मास्टर (ब्लश) : एहम एहम...!! हां! मेरी और सुजय की एक बेटी हुई. जिसका नाम हमने ख़ुशी रखा. पर एक ख़ुशी आयी तोह साथ में एक दुःख का पहाड़ भी गिर पड़ा.
राहुल : केसा दुःख???
मास्टर (नाम आंको से) : जन्म देते वक़्त सुजय ने अपने प्राण खो दिए.
राहुल : व्हाआआअत्ततत्तत्त?? ये...
मास्टर : हम्म! उसके जाने के बाद में टूट सा गया था. क्युकी ख़ुशी का जन्म चीन में हुआ था और उसकी माँ भी चिनेसे hi थी. इसलिए मेने ख़ुशी को चीन में hi पढ़ाने का निर्णय लिया. जब तक ख़ुशी 18 की नहीं हो जाती तब तक वो चीन में hi अपनी पढ़ाई करेगी और वही रहेगी, उसको हिंदी सिखाने के लिए भी मेने एक टुटर रखा हुआ है. में चाहता हु उससे अपनी माँ की मातृभाषा और अपने पिता की मातृभाषा दोनों hi आणि चाहिए.
राहुल : ओह्ह्ह्हह्हह
मास्टर : जो प्रॉपर्टी सुजय ने मुझे दी थी मेने वो उपयोग करके अपना बिज़नेस खड़ा किया. चीन में मेरे नाम पर एक बोहत बड़ा सिटी मॉल है, एक स्कूल है और एक हॉस्पिटल है.
राहुल : व्हाआआअत्ततत्तत्त??? इतना?? इतना सारा?
मास्टर : हां! मेरे hi स्कूल में ख़ुशी पढ़ती है, या यु कहे... वो उसका hi स्कूल है. अगले साल वो 18 की हो जाएगी. उसका बस एक साल बचा हुआ है.
राहुल : पर आप यहाँ क्यों आ गए?
मास्टर : क्युकी में टूट सा गया था. मुझे चीन में हमेशा सुजय की याद आती और हर्र दिन दुखदायी रहता. इसलिए में वापस अपने देश लौट आया, यहाँ आके मेरी मुलाक़ात भीमा से हुई, जिससे मेने बचाया था पर अफ़सोस उसकी बीवी को न बचा सका.
राहुल : जी मास्टर! भीमा अंकल ने मुझे बताया था.
मास्टर : फिर मोनिका से मुलाक़ात हुई, और उससे मेने अपने चीन के बिज़नेस की देख बाल करने के लिए रख लिया. और फिर एक दिन तुमसे मुलाक़ात हुई, तुम्हे देख के मुझे वही अनुभूति हुई थी जो उस वक़्त मास्टर को मुझे देख के हुई थी. इसलिए मेने तुम्हे अपना शिष्य चुना. और अब वक़्त आ गया है की में तुम्हारे यहाँ जाने से पहले तुम्हे कुछ सिखौ और तुमसे कुछ मांगू.
राहुल : k...kya?
मास्टर : मेने तुम्हे जितना भी अभी कुछ सिखाया है उसमे मेने तुम्हे कही भी कोई भी जानलेवा मूव नहीं सिखाया. पर उस दिन तुम एक लड़के से चोटिल हो गए थे. इसलिए ये शहर चोरर के जाने से पहले, इन् 5-6 महीनो में में तुम्हे बोहत कुछ सिखाने वाला हु. तुम तैयार हो?
राहुल : जी मास्टर!
मास्टर : गुड! अब बात आती है गुरु दक्षिणा की. तोह वह में तुमसे तब मांगूंगा जब तुम ये शहर चोरर के जाने लगोगे.
राहुल : जी मास्टर...
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आज के लिए इतना hi गाइस!
थैंक यू! पसंद आए तोह लिखे ज़रूर कीजियेगा!