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- Dec 5, 2013
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विनोद अपनी ऊँगली को महीन की छूट की सूराख पी फैरती होय बोलै ............ महीन मुझी यक़ीन नहीं आ रहा की अभी थोड़ी देर पहली मैं इस सूराख की अंदर दाल चूका हों ............... uuuuuuuuffffffffff ......... इतना छोटा ........... जैसी कभी इसकी अंदर कुछ गया hi ना हो ..............
महीन अपनी तारीफ सुन की शर्मा गए .............. और खुश भी होइ ...........
महीन वीर्य सी बोली ....... अब इसकी हालत ख़राब ना क्र देना ....... बुहत संभाल की रखा है इसी मैं न्य ..........
विनोद मुस्करा की अब अपनी जुबां की नौक की महीन की छूट की सूराख को सहलाना शुरू क्र दया .......... चाटना शुरू क्र दया ....... और जैसी hi महीन की छूट की दांय को अपनी जुबां सी छेड़ना शुरू क्या तो महीन का जिसम तो बीएड सी उचलण्य लगा ........ उसी नहीं पता था की इस सुब मैं कितना मज़ा है ........... उसकी लय यह पहला मौका था .......... उसकी हालत ख़राब हो रही थी ............ उसकी सांसें तेज़ हो रही थीं ....... और उसकी नंगी बूब्स ऊपर नीची हो रही थय ........... वह आंखें बंद कए अपना हाथ विनोद की सर की बलून मैं रखी कैंम्प रही थी ........... जैसी hi विनोद न्य अपनी जुबां की नौक महीन की छूट की अंदर डाली तो महीन न्य विनोद की सर की बलून को अपनी मुठी मैं भींच की उसकी सर को अपनी छूट पी खींच लय ........... और अपनी छूट को ऊपर को उठानी लगी ............. उउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ............ क्याआआआआ करररररर रही हो Vinodddddddddddd ............ aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh ............ pllllllllllllllllzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzz ............... bbbbbbbusssssssssss क्र dooooooooooooooooo ...........
महीन की छूट अब पानी चूर्ण शुरू हो गए होइ थी ............ जैसी विनोद अपनी जुबां सी छाती जा रहा था ............... अब महीन सी भी इस सुब को बर्दाश्त करना ......... और खुद पी कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था ................ उसका दिल बस यही छह रहा था की विनोद अपना मोटा लुंड उसकी छूट की अंदर दाल दी ............ और एक बार फिर सी उसको छोड़ डाली ........ जैसी पहली उसी छोड़ा था उसनी ............... मगर वह अपनी शर्म और झिझक की वजह सी विनोद को यह करनी का बोल नहीं पा रही थी .......... विनोद को महीन की छूट की चोर रही होय पानी सी उसकी हालत का अंदाजा हो रहा था ....... मगर वह आज अपनी जुबां सी एक बार फिर सी उसकी छूट का पानी निकाल देना छह रहा था ............ अपनी जुबां का जादू महीन की छूट पी चलाय जा रहा था ........ कभी उसकी छूट की दांय पी जुबां फेरते होय उसकी छूट की अंदर ऊँगली अंदर बहार करनी लगता ............. तो कभी छूट की दांय को अपनी ऊँगली सी रगड़ती होय उसकी छूट की सूराख मैं अपनी जुबां सी छोड़नी लगता ........... विनोद न्य महीन की छूट की दांय को अपनी दांतों की बीच मैं लय की हल्का सा काटा तो महीन की मुंह सी ज़ोर की चीख निकल गए .......... और उसका पूरा जिसम hi बीएड सी जैसी उछाल पारा .......... और विनोद का मुंह भी उसकी छूट सी हैट गया ......... महीन की हालत देख की विनोद मुस्करानी लगा ........ उसकी आँखों मैं देखा तो जैसी वह उस सी रहम की भीक मांग रही थी .......... विनोद न्य मुस्करा की उसकी तरफ देखा और फिर सी अपनी होंठों को महीन की छूट सी लगा दया ..........
कोई 15 मिनट तक विनोद महीन की छूट को ऐसी hi चाट ता रहा .......... और आखिर महीन उसकी जुबां की ताक़त की ाग्य हार गए ......... उसका पूरा जिसम कंम्पनी लगा ............. और उसकी छूट न्य पानी चोर दया ............. जो विनोद की मुंह मैं जांय लगा ............. महीन निढाल हो चुकी होइ थी ............ उसकी आंखें बंद थीं ........ जिसम हल्का हल्का कैंम्प रहा था ....... और सांसें तेज़ चल रही थीं ........... महीन हैरान हो रही थी की यह सुब क्या होआ है ....... विनोद न्य बिना अपना लुंड डाली hi उसकी छूट सी पानी निकाल दया था ........... विनोद की साथ उसकी पहली रात मैं उसका यह तीसरा ओर्गास्म था ............. जब भी वह आसिफ की साथ सेक्स करती थी तो हर बार hi झाड़ जाती थी ............ मगर ऐसा कभी नहीं होआ था की आसिफ न्य एक बार उसकी साथ करनी की बाद दोबारा भी सेक्स क्या हो ............... और उसकी साथ जब भी वह झड़ती थी ..... तो कभी भी इतना सीवियर ओर्गास्म नहीं होआ था जैसी उसी विनोद की साथ हो रहा था .............. वह आंखें बंद कए बस लम्बी सांसें लय रही थी ............. . खुद को नार्मल करनी की लये .............
विनोद उसकी हालत देख की मुस्कराया ........ और आहिस्ता आहिस्ता महीन की जिसम पी ऊपर की तरफ अन्य लगा ........ उसकी मुलायम जिसम को सहलाती होय ........ ऊपर आ की ......... उसकी बूब्स की निप्पल्स को एक बार चूमा औ फिर अपनी होंठों को महीन की होंठों पी रख दया ............ और उनको चूमनी लगा ................
महीन की कान की पास आपनी होंठों को लय जा की आहिस्ता सी बोलै .......... महीन ............ अरे यू ऑलराइट .............
महें का चेहरा शर्म सी लाल हो गया .............. उसनी आहिस्ता सी अपनी आंखें खोलीं ............. विनोद का चेहरा उसकी बिलकुल सामन्य था .......... उसकी आँखों मैं देख रहा था .............. मुस्कराती होय बोलै ............. कैसा लगा महीन ................
महीन की होंठों पी शर्मीली सी मुस्कराहट दौड़ गए .............. और आहिस्ता सी बोली .............. क्या था यह विनोद .............
विनोद मुस्कराया ........... नीची झुक की महीन की होंठों को चूमा ....... और बोलै .......... ाचा लगा या नहीं ............
महीन की आँखों सी hi दिख रहा था की उसी कितना मज़ा आया था उस सुब मैं ............. विनोद मुझी अभी भी यक़ीन नहीं आ रहा जो होआ है ........... मेरी जिसम न्य कभी ऐसी रियेक्ट नहीं किआ ............
विनोद मुस्करया .............. इतस हॉनर फॉर में महीन ............
महीन न्य मुस्कराती होय अपनी ऊँगली सी विनोद की होंठों को टच क्या और बोली .......... जादू है तुम्हारी होंठों मैं .........
विनोद न्य मुस्करा की अपनी होंठ महीन की होंठों पी रख डाई .......... और उसकी होंठों को चूसनी लगा .............. महीन न्य भी विनोद की गले मैं अपनी बहिन दाल दिन ............. और किश मैं विनोद का साथ देंय लगी .............. विनोद अपनी जुबां को महीन की मुंह की अंदर दाल रहा था और कभी उसकी होंठों को चूस रहा था ................ महीन को अजीब सा ज़ाइक़ा आ रहा था अपनी मुंह मैं ....... मगर वह फिर भी विनोद की जुबां को चूस रही थी ........... तारापत्य होय ............ सिसाअक्ती होय ......... क्यों की नीची विनोद अपनी कार्रवाई फिर सी शुरू क्र चूका होआ था .............. उस न्य अपनी लुंड को महीन की छूट पी टिक्के होय छूट पी रगड़ना शुरू क्र दया था .................... महीन की छूट सी निकलती होय पानी सी उसका लुंड गीला होता जा रहा था ...............
विनोद की लुंड का अपनी छूट पी लम्स महसूस कृत्य होय महीन की हालत फिर सी ख़राब होनी लगी थी ............. उसकी छूट फिर सी गरम हो रही थी ....... अभी चाँद मिनट पहली होय ओर्गास्म की बावजूद भी ............ कुछ ऐसा जादू चला रहा था विनोद महीन की ऊपर .......... अपनी होंठों ....... अपनी हाथों ........ और अपनी लौड़ी सी ............ महीन का दिल छह रहा था की बस अब विनोद का लुंड जो उसकी छूट पी रगड़ रहा है .......... विनोद इसी बस अब उसकी छूट मैं दाल दी ................ दूसरी बार ............ और वैसी hi छोड़ी जैसी पहली बार छोड़ा था ............. वैसा hi मज़ा दी जैसी पहली बार छोड़ती होय दया था ............ uuuffffffffff ........ कितना मज़ा देता है न विनोद का लुंड ........... पता नहीं कैसा है इसका ........... मैं न्य तो अभी तक एक बार भी नहीं देखा ....... और यह दूसरी बार मेरी अंदर जांय वाला है ...................... पता नहीं कैसा हो गए ...............
महीन अपनी तारीफ सुन की शर्मा गए .............. और खुश भी होइ ...........
महीन वीर्य सी बोली ....... अब इसकी हालत ख़राब ना क्र देना ....... बुहत संभाल की रखा है इसी मैं न्य ..........
विनोद मुस्करा की अब अपनी जुबां की नौक की महीन की छूट की सूराख को सहलाना शुरू क्र दया .......... चाटना शुरू क्र दया ....... और जैसी hi महीन की छूट की दांय को अपनी जुबां सी छेड़ना शुरू क्या तो महीन का जिसम तो बीएड सी उचलण्य लगा ........ उसी नहीं पता था की इस सुब मैं कितना मज़ा है ........... उसकी लय यह पहला मौका था .......... उसकी हालत ख़राब हो रही थी ............ उसकी सांसें तेज़ हो रही थीं ....... और उसकी नंगी बूब्स ऊपर नीची हो रही थय ........... वह आंखें बंद कए अपना हाथ विनोद की सर की बलून मैं रखी कैंम्प रही थी ........... जैसी hi विनोद न्य अपनी जुबां की नौक महीन की छूट की अंदर डाली तो महीन न्य विनोद की सर की बलून को अपनी मुठी मैं भींच की उसकी सर को अपनी छूट पी खींच लय ........... और अपनी छूट को ऊपर को उठानी लगी ............. उउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ............ क्याआआआआ करररररर रही हो Vinodddddddddddd ............ aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh ............ pllllllllllllllllzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzz ............... bbbbbbbusssssssssss क्र dooooooooooooooooo ...........
महीन की छूट अब पानी चूर्ण शुरू हो गए होइ थी ............ जैसी विनोद अपनी जुबां सी छाती जा रहा था ............... अब महीन सी भी इस सुब को बर्दाश्त करना ......... और खुद पी कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था ................ उसका दिल बस यही छह रहा था की विनोद अपना मोटा लुंड उसकी छूट की अंदर दाल दी ............ और एक बार फिर सी उसको छोड़ डाली ........ जैसी पहली उसी छोड़ा था उसनी ............... मगर वह अपनी शर्म और झिझक की वजह सी विनोद को यह करनी का बोल नहीं पा रही थी .......... विनोद को महीन की छूट की चोर रही होय पानी सी उसकी हालत का अंदाजा हो रहा था ....... मगर वह आज अपनी जुबां सी एक बार फिर सी उसकी छूट का पानी निकाल देना छह रहा था ............ अपनी जुबां का जादू महीन की छूट पी चलाय जा रहा था ........ कभी उसकी छूट की दांय पी जुबां फेरते होय उसकी छूट की अंदर ऊँगली अंदर बहार करनी लगता ............. तो कभी छूट की दांय को अपनी ऊँगली सी रगड़ती होय उसकी छूट की सूराख मैं अपनी जुबां सी छोड़नी लगता ........... विनोद न्य महीन की छूट की दांय को अपनी दांतों की बीच मैं लय की हल्का सा काटा तो महीन की मुंह सी ज़ोर की चीख निकल गए .......... और उसका पूरा जिसम hi बीएड सी जैसी उछाल पारा .......... और विनोद का मुंह भी उसकी छूट सी हैट गया ......... महीन की हालत देख की विनोद मुस्करानी लगा ........ उसकी आँखों मैं देखा तो जैसी वह उस सी रहम की भीक मांग रही थी .......... विनोद न्य मुस्करा की उसकी तरफ देखा और फिर सी अपनी होंठों को महीन की छूट सी लगा दया ..........
कोई 15 मिनट तक विनोद महीन की छूट को ऐसी hi चाट ता रहा .......... और आखिर महीन उसकी जुबां की ताक़त की ाग्य हार गए ......... उसका पूरा जिसम कंम्पनी लगा ............. और उसकी छूट न्य पानी चोर दया ............. जो विनोद की मुंह मैं जांय लगा ............. महीन निढाल हो चुकी होइ थी ............ उसकी आंखें बंद थीं ........ जिसम हल्का हल्का कैंम्प रहा था ....... और सांसें तेज़ चल रही थीं ........... महीन हैरान हो रही थी की यह सुब क्या होआ है ....... विनोद न्य बिना अपना लुंड डाली hi उसकी छूट सी पानी निकाल दया था ........... विनोद की साथ उसकी पहली रात मैं उसका यह तीसरा ओर्गास्म था ............. जब भी वह आसिफ की साथ सेक्स करती थी तो हर बार hi झाड़ जाती थी ............ मगर ऐसा कभी नहीं होआ था की आसिफ न्य एक बार उसकी साथ करनी की बाद दोबारा भी सेक्स क्या हो ............... और उसकी साथ जब भी वह झड़ती थी ..... तो कभी भी इतना सीवियर ओर्गास्म नहीं होआ था जैसी उसी विनोद की साथ हो रहा था .............. वह आंखें बंद कए बस लम्बी सांसें लय रही थी ............. . खुद को नार्मल करनी की लये .............
विनोद उसकी हालत देख की मुस्कराया ........ और आहिस्ता आहिस्ता महीन की जिसम पी ऊपर की तरफ अन्य लगा ........ उसकी मुलायम जिसम को सहलाती होय ........ ऊपर आ की ......... उसकी बूब्स की निप्पल्स को एक बार चूमा औ फिर अपनी होंठों को महीन की होंठों पी रख दया ............ और उनको चूमनी लगा ................
महीन की कान की पास आपनी होंठों को लय जा की आहिस्ता सी बोलै .......... महीन ............ अरे यू ऑलराइट .............
महें का चेहरा शर्म सी लाल हो गया .............. उसनी आहिस्ता सी अपनी आंखें खोलीं ............. विनोद का चेहरा उसकी बिलकुल सामन्य था .......... उसकी आँखों मैं देख रहा था .............. मुस्कराती होय बोलै ............. कैसा लगा महीन ................
महीन की होंठों पी शर्मीली सी मुस्कराहट दौड़ गए .............. और आहिस्ता सी बोली .............. क्या था यह विनोद .............
विनोद मुस्कराया ........... नीची झुक की महीन की होंठों को चूमा ....... और बोलै .......... ाचा लगा या नहीं ............
महीन की आँखों सी hi दिख रहा था की उसी कितना मज़ा आया था उस सुब मैं ............. विनोद मुझी अभी भी यक़ीन नहीं आ रहा जो होआ है ........... मेरी जिसम न्य कभी ऐसी रियेक्ट नहीं किआ ............
विनोद मुस्करया .............. इतस हॉनर फॉर में महीन ............
महीन न्य मुस्कराती होय अपनी ऊँगली सी विनोद की होंठों को टच क्या और बोली .......... जादू है तुम्हारी होंठों मैं .........
विनोद न्य मुस्करा की अपनी होंठ महीन की होंठों पी रख डाई .......... और उसकी होंठों को चूसनी लगा .............. महीन न्य भी विनोद की गले मैं अपनी बहिन दाल दिन ............. और किश मैं विनोद का साथ देंय लगी .............. विनोद अपनी जुबां को महीन की मुंह की अंदर दाल रहा था और कभी उसकी होंठों को चूस रहा था ................ महीन को अजीब सा ज़ाइक़ा आ रहा था अपनी मुंह मैं ....... मगर वह फिर भी विनोद की जुबां को चूस रही थी ........... तारापत्य होय ............ सिसाअक्ती होय ......... क्यों की नीची विनोद अपनी कार्रवाई फिर सी शुरू क्र चूका होआ था .............. उस न्य अपनी लुंड को महीन की छूट पी टिक्के होय छूट पी रगड़ना शुरू क्र दया था .................... महीन की छूट सी निकलती होय पानी सी उसका लुंड गीला होता जा रहा था ...............
विनोद की लुंड का अपनी छूट पी लम्स महसूस कृत्य होय महीन की हालत फिर सी ख़राब होनी लगी थी ............. उसकी छूट फिर सी गरम हो रही थी ....... अभी चाँद मिनट पहली होय ओर्गास्म की बावजूद भी ............ कुछ ऐसा जादू चला रहा था विनोद महीन की ऊपर .......... अपनी होंठों ....... अपनी हाथों ........ और अपनी लौड़ी सी ............ महीन का दिल छह रहा था की बस अब विनोद का लुंड जो उसकी छूट पी रगड़ रहा है .......... विनोद इसी बस अब उसकी छूट मैं दाल दी ................ दूसरी बार ............ और वैसी hi छोड़ी जैसी पहली बार छोड़ा था ............. वैसा hi मज़ा दी जैसी पहली बार छोड़ती होय दया था ............ uuuffffffffff ........ कितना मज़ा देता है न विनोद का लुंड ........... पता नहीं कैसा है इसका ........... मैं न्य तो अभी तक एक बार भी नहीं देखा ....... और यह दूसरी बार मेरी अंदर जांय वाला है ...................... पता नहीं कैसा हो गए ...............