महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड) - Page 6 - SexBaba
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महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड)

विनोद अपनी ऊँगली को महीन की छूट की सूराख पी फैरती होय बोलै ............ महीन मुझी यक़ीन नहीं आ रहा की अभी थोड़ी देर पहली मैं इस सूराख की अंदर दाल चूका हों ............... uuuuuuuuffffffffff ......... इतना छोटा ........... जैसी कभी इसकी अंदर कुछ गया hi ना हो ..............

महीन अपनी तारीफ सुन की शर्मा गए .............. और खुश भी होइ ...........

महीन वीर्य सी बोली ....... अब इसकी हालत ख़राब ना क्र देना ....... बुहत संभाल की रखा है इसी मैं न्य ..........

विनोद मुस्करा की अब अपनी जुबां की नौक की महीन की छूट की सूराख को सहलाना शुरू क्र दया .......... चाटना शुरू क्र दया ....... और जैसी hi महीन की छूट की दांय को अपनी जुबां सी छेड़ना शुरू क्या तो महीन का जिसम तो बीएड सी उचलण्य लगा ........ उसी नहीं पता था की इस सुब मैं कितना मज़ा है ........... उसकी लय यह पहला मौका था .......... उसकी हालत ख़राब हो रही थी ............ उसकी सांसें तेज़ हो रही थीं ....... और उसकी नंगी बूब्स ऊपर नीची हो रही थय ........... वह आंखें बंद कए अपना हाथ विनोद की सर की बलून मैं रखी कैंम्प रही थी ........... जैसी hi विनोद न्य अपनी जुबां की नौक महीन की छूट की अंदर डाली तो महीन न्य विनोद की सर की बलून को अपनी मुठी मैं भींच की उसकी सर को अपनी छूट पी खींच लय ........... और अपनी छूट को ऊपर को उठानी लगी ............. उउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ............ क्याआआआआ करररररर रही हो Vinodddddddddddd ............ aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh ............ pllllllllllllllllzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzz ............... bbbbbbbusssssssssss क्र dooooooooooooooooo ...........

महीन की छूट अब पानी चूर्ण शुरू हो गए होइ थी ............ जैसी विनोद अपनी जुबां सी छाती जा रहा था ............... अब महीन सी भी इस सुब को बर्दाश्त करना ......... और खुद पी कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था ................ उसका दिल बस यही छह रहा था की विनोद अपना मोटा लुंड उसकी छूट की अंदर दाल दी ............ और एक बार फिर सी उसको छोड़ डाली ........ जैसी पहली उसी छोड़ा था उसनी ............... मगर वह अपनी शर्म और झिझक की वजह सी विनोद को यह करनी का बोल नहीं पा रही थी .......... विनोद को महीन की छूट की चोर रही होय पानी सी उसकी हालत का अंदाजा हो रहा था ....... मगर वह आज अपनी जुबां सी एक बार फिर सी उसकी छूट का पानी निकाल देना छह रहा था ............ अपनी जुबां का जादू महीन की छूट पी चलाय जा रहा था ........ कभी उसकी छूट की दांय पी जुबां फेरते होय उसकी छूट की अंदर ऊँगली अंदर बहार करनी लगता ............. तो कभी छूट की दांय को अपनी ऊँगली सी रगड़ती होय उसकी छूट की सूराख मैं अपनी जुबां सी छोड़नी लगता ........... विनोद न्य महीन की छूट की दांय को अपनी दांतों की बीच मैं लय की हल्का सा काटा तो महीन की मुंह सी ज़ोर की चीख निकल गए .......... और उसका पूरा जिसम hi बीएड सी जैसी उछाल पारा .......... और विनोद का मुंह भी उसकी छूट सी हैट गया ......... महीन की हालत देख की विनोद मुस्करानी लगा ........ उसकी आँखों मैं देखा तो जैसी वह उस सी रहम की भीक मांग रही थी .......... विनोद न्य मुस्करा की उसकी तरफ देखा और फिर सी अपनी होंठों को महीन की छूट सी लगा दया ..........

कोई 15 मिनट तक विनोद महीन की छूट को ऐसी hi चाट ता रहा .......... और आखिर महीन उसकी जुबां की ताक़त की ाग्य हार गए ......... उसका पूरा जिसम कंम्पनी लगा ............. और उसकी छूट न्य पानी चोर दया ............. जो विनोद की मुंह मैं जांय लगा ............. महीन निढाल हो चुकी होइ थी ............ उसकी आंखें बंद थीं ........ जिसम हल्का हल्का कैंम्प रहा था ....... और सांसें तेज़ चल रही थीं ........... महीन हैरान हो रही थी की यह सुब क्या होआ है ....... विनोद न्य बिना अपना लुंड डाली hi उसकी छूट सी पानी निकाल दया था ........... विनोद की साथ उसकी पहली रात मैं उसका यह तीसरा ओर्गास्म था ............. जब भी वह आसिफ की साथ सेक्स करती थी तो हर बार hi झाड़ जाती थी ............ मगर ऐसा कभी नहीं होआ था की आसिफ न्य एक बार उसकी साथ करनी की बाद दोबारा भी सेक्स क्या हो ............... और उसकी साथ जब भी वह झड़ती थी ..... तो कभी भी इतना सीवियर ओर्गास्म नहीं होआ था जैसी उसी विनोद की साथ हो रहा था .............. वह आंखें बंद कए बस लम्बी सांसें लय रही थी ............. . खुद को नार्मल करनी की लये .............

विनोद उसकी हालत देख की मुस्कराया ........ और आहिस्ता आहिस्ता महीन की जिसम पी ऊपर की तरफ अन्य लगा ........ उसकी मुलायम जिसम को सहलाती होय ........ ऊपर आ की ......... उसकी बूब्स की निप्पल्स को एक बार चूमा औ फिर अपनी होंठों को महीन की होंठों पी रख दया ............ और उनको चूमनी लगा ................

महीन की कान की पास आपनी होंठों को लय जा की आहिस्ता सी बोलै .......... महीन ............ अरे यू ऑलराइट .............

महें का चेहरा शर्म सी लाल हो गया .............. उसनी आहिस्ता सी अपनी आंखें खोलीं ............. विनोद का चेहरा उसकी बिलकुल सामन्य था .......... उसकी आँखों मैं देख रहा था .............. मुस्कराती होय बोलै ............. कैसा लगा महीन ................

महीन की होंठों पी शर्मीली सी मुस्कराहट दौड़ गए .............. और आहिस्ता सी बोली .............. क्या था यह विनोद .............

विनोद मुस्कराया ........... नीची झुक की महीन की होंठों को चूमा ....... और बोलै .......... ाचा लगा या नहीं ............

महीन की आँखों सी hi दिख रहा था की उसी कितना मज़ा आया था उस सुब मैं ............. विनोद मुझी अभी भी यक़ीन नहीं आ रहा जो होआ है ........... मेरी जिसम न्य कभी ऐसी रियेक्ट नहीं किआ ............

विनोद मुस्करया .............. इतस हॉनर फॉर में महीन ............

महीन न्य मुस्कराती होय अपनी ऊँगली सी विनोद की होंठों को टच क्या और बोली .......... जादू है तुम्हारी होंठों मैं .........

विनोद न्य मुस्करा की अपनी होंठ महीन की होंठों पी रख डाई .......... और उसकी होंठों को चूसनी लगा .............. महीन न्य भी विनोद की गले मैं अपनी बहिन दाल दिन ............. और किश मैं विनोद का साथ देंय लगी .............. विनोद अपनी जुबां को महीन की मुंह की अंदर दाल रहा था और कभी उसकी होंठों को चूस रहा था ................ महीन को अजीब सा ज़ाइक़ा आ रहा था अपनी मुंह मैं ....... मगर वह फिर भी विनोद की जुबां को चूस रही थी ........... तारापत्य होय ............ सिसाअक्ती होय ......... क्यों की नीची विनोद अपनी कार्रवाई फिर सी शुरू क्र चूका होआ था .............. उस न्य अपनी लुंड को महीन की छूट पी टिक्के होय छूट पी रगड़ना शुरू क्र दया था .................... महीन की छूट सी निकलती होय पानी सी उसका लुंड गीला होता जा रहा था ...............

विनोद की लुंड का अपनी छूट पी लम्स महसूस कृत्य होय महीन की हालत फिर सी ख़राब होनी लगी थी ............. उसकी छूट फिर सी गरम हो रही थी ....... अभी चाँद मिनट पहली होय ओर्गास्म की बावजूद भी ............ कुछ ऐसा जादू चला रहा था विनोद महीन की ऊपर .......... अपनी होंठों ....... अपनी हाथों ........ और अपनी लौड़ी सी ............ महीन का दिल छह रहा था की बस अब विनोद का लुंड जो उसकी छूट पी रगड़ रहा है .......... विनोद इसी बस अब उसकी छूट मैं दाल दी ................ दूसरी बार ............ और वैसी hi छोड़ी जैसी पहली बार छोड़ा था ............. वैसा hi मज़ा दी जैसी पहली बार छोड़ती होय दया था ............ uuuffffffffff ........ कितना मज़ा देता है न विनोद का लुंड ........... पता नहीं कैसा है इसका ........... मैं न्य तो अभी तक एक बार भी नहीं देखा ....... और यह दूसरी बार मेरी अंदर जांय वाला है ...................... पता नहीं कैसा हो गए ...............
 
विनोद न्य शायद उसकी दिल की बात सुन ली थी .............. उसनी लुंड को महीन की छूट पी रगड़ती होय उसकी टोपे को आहिस्ता सी महीन की छूट की छोटी सी सूराख पी रखा ........... और आहिस्ता सी बोलै ...

विनोद ........ महीनंणंन्न .........

महीन .......... sssssssssssssss ह्ह्ह्हह्म्ममम्मम्म्म्म ......

विनोद ...... दाल दोनंन्नं क्या.............

महीन सिसकी ......... स्स्स्सस्स्स्स आआआआअह्हह्ह्ह्ह ....... आहिस्ता ...

विनोद न्य अपनी लुंड सी हल्का सा धक्का लगाया ............ महीन की छूट अपनी hi पानी सी गीली हो रही थी ............ महीन की छूट की पानी सी चिकनी हो रही होय लुंड की टोपे पी हल्का सा ज़ोर लगाया तो वह फिसल क्र महीन की छूट की अंदर चला गया ............ और साथ hi महीन की मुंह सी हलकी सी चीख निकल गए ............ लकिन इस चीख की साथ भी लज़्ज़त का अहसास भी था ............ जो उस तरप की ख़तम होनी की वजह सी था .......... जिस मैं वह पिछली आद्य घंटी सी जल रही थी .............

विनोद न्य आहिस्ता आहिस्ता अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर डालना शुरू क्र दया ........... थोड़ा सा लुंड अंदर डालता और फिर उसी बहार को खींच लेता ........ और फिर सी लुंड को अंदर डालता तो इस बार पहली सी ज़्यादा अपना लुंड महीन की छूट की अंदर क्र देता ........... ऐसी hi अंदर बहार कृत्य होय वह महीन की छूट को छोड़ रहा था .......... वीर्य वीर्य ............. और ऐसी hi चुदाई कृत्य होय वह अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर दाल रहा था .......... ाग्य ... और ाग्य ........... महीन की तंग और टाइट छूट विनोद की मोटे लुंड को जक्कर रही थी .... उसी दबा रही थी अपनी अंदर .......... विनोद की लय अपनी लुंड को महीन की छूट मैं अंदर बहार करना मुश्किल हो रहा था ....... इतनी टाइट छूट मैं .......

कुछ hi देर मैं विनोद की 8 इंच की लुंड मई सी आद्य सी ज़्यादा महीन की छूट की अंदर था .......... क़रीब 5 इंच तक ........... जितना आसिफ का लुंड था .......... उतना hi महीन की छूट विनोद की लुंड को जगा दी पा रही थी ........ ाग्य अब विनोद का लुंड नहीं जा रहा था ............ विनोद को रेजिस्टेंस फील हो रही थी ............ मुश्किल लग रहा था लुंड को अंदर डालना .............. जितना लुंड महीन की छूट की अंदर गया था ........उस सी भी महीन को अपनी छूट मैं हल्का हल्का दर्द महसूस हो रहा था ............ और उसी अपनी छूट बुहत स्ट्रेच होती होइ महसूस हो रही थी ............ क्यों की यह उसी अंदाज़ा हो गया था की विनोद का लुंड आसिफ की लुंड सी मोटा है ............ मगर आसिफ की लुंड सी विनोद की लुंड की लम्बाई कितनी ज़्यादा है ........ इस बात का महीन को अभी अंदाज़ा नहीं होआ था .............. वह हल्की हल्की छूट मैं हो रही दर्द सी सिसक रही थी ............ और विनोद की साथ लिपटी जा रही थी ..............

विनोद ढक्की लगाती होय अपनी लुंड को पूरा महीन की छूट की अंदर डालनी की कोशिश क्र रहा था ............ उसकी धक्को की शिद्दत बढ़ती जा रही थी ............. हर बार पहली सी ज़्यादा ज़ोर सी धक्का मार रहा था अपना लुंड अंदर डालती होय ........... मगर उसी ज़्यादा कामयाबी नहीं हो रही थी ................ महीन को तकलीफ हो रही थी ............ दर्द महसूस हो रहा था अपनी छूट मैं .....................

महीन सिसकी .............. sssssssssssss ................ ऊऊओफ़्फ़फ़फ़फ़फ़फ़फ़फ़ ........... आहिस्ता Vinoddddddddddd ..............

विनोद न्य उसकी दर्द की परवाह ना कृत्य होय अपनी हाथों को महीन की बाज़ूओं की नीची डाला और उसकी दोनों शोल्डर्स को अपनी हाथों मैं पाकर लय ........... महीन की दोनों टांगें खुली होइ थीं ....... और ऊपर को उठी होइ थीं पहली hi............. विनोद न्य इस पोजीशन मैं थोड़ा और ाग्य को होती होय महीन की जिसम को थोड़ा और दोहरा क्र दया .......... फोल्ड क्र दया ............. अब महीन की टांगें हवा मैं थीं ........ और उसकी कांद्य विनोद की मज़बूत हाथों की ग्रिफ्ट मैं थय .............. विनोद न्य इसी पोजीशन मैं अपनी लुंड को महीन की छूट सी बहार निकलना शुरू क्र दया ............ विनोद न्य अपनी लुंड को बहार निकला और सिर्फ अपनी लुंड की टोपे को महीन की छूट की सूराख मैं फंसा रहंय दया ........... और फिर महीन की आँखों मैं देखनी लगा ........... महीन को कुछ अंदाज़ा नहीं था की उसकी साथ क्या होनी जा रहा है ............

विनोद ............ क्या होआ है .......... दर्द हो रहा है क्या .......

महीन न्य दर्द सी आंखें बंद कृत्य होय हाँ मैं सर हिलाया ........

विनोद ........ पहली कभी नहीं होआ क्या ............

महीन न्य इंकार मैं सर हिलाया .......... थोड़ा शर्माती होय .........

विनोद ........ तो आज थोड़ा बर्दाश्त क्र लो न .............

महीन उसकी आँखों मैं देखती होय बोली ......... क्या तो है ........

विनोद ........... बस थोड़ा और ........

यह कहती होय विनोद न्य महीन को अपनी ग्रिफ्ट मैं लय .............. महीन की होंठों पी अपनी होंठ रखती होय उसकी होंठों को बंद क्या ............ और उसका लुंड जिसका सिर्फ टोपा उसकी छूट की अंदर था ........... उसी एक ज़ोर दार झटकी की साथ महीन की छूट मैं उतार दया .............. दर्द की मारी महीन की हलक़ सी ज़ोर दार चीख निकली ....... मगर वह विनोद की होंठों मैं hi जज़ब हो गए ............ विनोद का पूरा लुंड महीन की छूट मैं उतर चूका होआ था ........ बस एक इंच बाक़ी था पिच्य ................ महीन बुरी तरह सी तरप रही थी ........... उसका जिसम मचल रहा था ................ उसी लग रहा था की जैसी विनोद न्य उसकी छूट की अंदर कोई गरम मोती लम्बी रोड घुसा दी हो ..............

विनोद न्य अपनी होंठों को हटाया ............ क्या होआ महीन ........ बस थोड़ा सा दर्द बर्दाश्त क्र लो ............

महीन टर्पी ........... नहीं .......... प्लीज निकालो इसी बहार ............. uuuuuffffffffffff ................ बुहत दर्द हो रहा है ........... aaaaaahhhhhhhhhhhhhh ..........

विनोद ........... ाचा ाचा निकालता हों मेरी जान ...... तुम घबराओ नहीं ........... यह कहती होय विनोद न्य अपनी लुंड को महीन की छूट सी बहार निकलना शुर क्र दया .......... पिच्य को कृत्य होय ............ और फिर सी उसकी लुंड का सिर्फ टोपा hi महीन की छूट की अंदर रह गया ............

विनोद ........ बस ........ अब ठीक है न ...........

महीन ........ अभी भी तकलीफ मई थी फिर भी हाँ मैं सर हिला दया ............. वह लम्बे लम्बे सांस लय रही थी ....... उसकी आँखों सी पानी भी निकल रहा था ........

विनोद न्य अपनी हाथों को महीन की शोल्डर्स सी हटाया और उसकी नीची रखी होय hi उसकी सर की बलून को सहलानी लगा ........... और फिर अपनी होंठों को महीन की होंठों पी रखती होय उसको किश करनी लगा ............. कुछ नहीं हो गए मेरी जान तुमको .................... मैं हों न तुम्हारी पास ................ महीन विनोद की किश मैं और उसकी बातों मैं खोय लगी .......... तो विनोद न्य दोबारा सी उसकी कन्धों को अपनी गृप मैं लय ........ और इस बार पहली सी भी ज़ोर का धक्का मारती होय अपनी पूरी लुंड को महीन की छूट की अंदर घुसा दया ............. जुड़ तक ............ जहाँ तक उसका लुंड महीन की छूट मैं लास्ट टाइम गया था उस सी भी ाग्य तक ............ जहाँ तक कभी भी लुंड नहीं गया था महीन की छूट मैं वहां तक ............

इस ज़ोर की झटकी सी महीन एक बार फिर तरप उठी .......... मगर वह विनोद की मज़बूत ग्रिफ्ट मैं थी ............ विनोद न्य उसी हिलनी नहीं दया ............ उसकी कन्धों को पकड़ी रखा ........... और ऊपर सी अपनी जिसम सी महीन की टांगों को दबाय रखा .......... और नीची उसी अपनी लुंड को पूरी का पूरा महीन की छूट मैं गांधी रखा ........... इस सुब की होती होय महीन जैसी नाज़ुक सी लड़की भला कहाँ हिल सकती थी विनोद की नीची ............. वह तारापत्य होय विनोद की सैन्य पी अपनी हाथ रख की उसी दूर करनी की कोशिश क्र रही थी .......... और कभी उसकी कमर और कन्धों पी थप्पड़ मार रही थी ........... मगर विनोद तस सी मास नहीं हो रहा था ........... चाँद लम्हों मैं जैसी hi महीन की छूट विनोद की लुंड की आदि होइ तो विनोद न्य अपनी लुंड को अंदर बहार करना शुरू क्र दया ......... तेज़ी की साथ ....... और हर बार पूरा लुंड अंदर दाल देता ....... आखिर तक ............ महीन को लग रहा था की जैसी उसकी छूट आज एक बार फिर पहात गए है ............. जैसी पहली रात आसिफ की साथ फटती थी ............ मगर उसी आज आसिफ की साथ पहली रात सी ज़्यादा तकलीफ हो रही थी .........

विनोद अपनी लुंड को महीन की छूट मैं अंदर बहार क्र रहा था ......... और उसी छोड़ी जा रहा था .............

विनोद ........... बुसस महीन .......... अब दर्द नहीं हो गए ........... पूरा चला गया है अंदर अब ..........

महीन की आँखों सी आंसू निकल रही थय ............ वह सिसाकत्य होय बोली .......... प्लीज विनोद निकाल लो इसी बाहिर ........ बुहत दर्द हो रहा है ...........

विनोद महीन की गळून को चूमती होय बोलै ............. बस अब नहीं हो गए ............. बस थोड़ा सा बर्दाश्त क्र लो .......... अभी सारा दर्द ख़तम हो जाय गए .......... और सिर्फ मज़ा hi आय गए ..............

महीन की छूट अब विनोद की लुंड सी खुल चुकी होइ थी .......... अब विनोद का लुंड आसानी की साथ महीन की छूट मैं अंदर बहार हो रहा था ........... विनोद पूरी लुंड को अंदर बहार क्र रहा था ....... मगर अब बुहत hi आहिस्ता आहिस्ता सी ............ उसकी छूट को अपनी मोटे लुंड सी रगड़ती होय .................

वीर्य वीर्य महीन को भी मज़ा अन्य लगा था ........ उसकी छूट का दर्द ख़तम हो रहा था ........... विनोद की मोटे लुंड की रगड़ उसी बुहत मज़ा दी रही थी .......... छूट की अंदर फिर सी आग लगानी लगी थी ........... वही आग जो थोड़ी देर पहली की शदीद तकलीफ की वजह सी ख़तम हो गए थी ................ मगर अब फिर सी उसकी छूट गरम होनी लगी थी ............. महीन की हाथ जो कुछ देर पहली विनोद को खुद सी दूर क्र रही थय ............ उन्ही हाथों को महीन न्य विनोद की गले मैं दाल की उसी अपनी तरफ खींचना शुरू क्र दया था ............. और उसकी होंठों और गळून को चूमनी लगी थी ...................... महीन अपनी छूट को ऊपर को उठा रही थी .............. उसकी छूट एक बार फिर सी पानी चोरनी वाली थी ............... एक बार और वह झाड़नी वाली थी ........ विनोद की मोटे लुंड की चुदाई सी .................. महीन न्य एक बार ज़ोर सी विनोद को जक्कर लय ............ और साथ hi उसकी छूट न्य पानी चोर दया ................. गाढ़ा सुफैद पानी ............ विनोद की लुद्न की गिर्द ........ जो उसकी छूट मैं फंसा होआ था .................... विनोद भी रुक चूका होआ था ....... अपनी लुंड को पूरा महीन की छूट की अंदर डाली होय .......... रुका होआ था ........... महीन को अपना ओर्गास्म पूरा करनी का वक़्त दी रहा था ............. उसकी टाइट छूट की अपनी मोटे लुंड पी ग्रिफ्ट का मज़ा लय रहा था ........... जैसी उसकी छूट उसकी लुंड को दबा रही थी ............ उसको एन्जॉय क्र रहा था .............. महीन की चेहरी की तरफ देखती होय .............. जिसकी आंखें बंद थीं ........ मगर साफ़ लग रहा था की आंखें ऊपर को चढ़ी होइ हैं .............. और उसकी चेहरी की इम्प्रेशंस बुहत अलग सी हो रही थय ................ बुहत टेंस सी ............ दांतों को भींची होय ................. और थोड़ी देर बाद आहिस्ता ाहसिता उसका चेहरा पुरसुकून होनी लगा ............... और विनोद की लुंड पी उसकी छूट की मसल्स की ग्रिफ्ट रिलैक्स होनी लगी .............

कुछ देर बाद ाहसिता ाहसिता महीन न्य आंखें खोलीं तो सामन्य विनोद का मुस्कराता होआ चेहरा था ............... अपनी नज़रों की बिलकुल सामन्य .......... अपनी बिलकुल क़रीब विनोद का चेहरा देखती होय महीन शर्मा गए ............. और फिर सी अपनी आंखें बंद क्र लीन ............. विनोद न्य आहिस्ता सी अपनी होंठ महीन की गुलाबी होंठों पी रख डाई ........... और उसी चूम लय ............. महीन की चेहरी को अपनी दोनों हाथों मैं लय ........ और बुहत hi वीर्य वीर्य ........... बुहत hi प्यार सी अपनी मोटे लम्बी लुंड को महीन की नाज़ुक सी छूट मैं अंदर बहार करनी लगा .............. विनोद की इस तरह सी लुंड अंदर बहार करनी सी महीन को ाचा लग रहा था ............. फिर सी मज़ा अन्य लगा था ................ वह विनोद की कमर पी हाथ पहिरण्य लगी ........... प्यार सी ............

विनोद फिर सी महीन सी बोलै ........... अब तो ठीक लग रहा है न ........

महीन न्य अपनी आंखें खोल क्र विनोद की तरफ देखा ........ और बनावटी गुस्से की साथ उसकी शोल्डर पी हल्का सा थप्पड़ मारती होय बोली ........... तो पहली ऐसी नहीं क्र सकती थय क्या आराम सी .........

विनोद हंसनी लगा .......... और महीन भी ............. उसकी साथ लिपट टी होइ ........ विनोद की लुंड की हरकत अहिस्त आहिस्ता तेज़ होती जा रही थी ........ महीन की छूट की अंदर .............. मगर अब महीन को कोई दर्द महसूस नहीं हो रहा था .......... वह भी विनोद का साथ दी रही थी ........... कुछ देर तक ऐसी hi छोड़नी की बाद विनोद सीधा होआ ....... महीन की टांगों को खोलती होय अपनी लुंड को बहार को निकला .......... सिर्फ अपनी लुंड का टोपा महीन की छूट मैं रहंय दया और फिर सी एक झटकी मैं लुंड अंदर क्र दया ........... महीन की होंठों सी हलकी सी अह्ह्ह्हह निकली ............ 15 मिनट तक मज़ीद चुदाई करनी की बाद विनोद न्य एक बार फिर अपनी लुंड का पोटेंट पानी महीन की फर्टाइल छूट मैं चोर दया ........... और महीन भी उसकी साथ hi एक बार फिर डिस्चार्ज हो गए ........

विनोद एक बार फिर महीन की जिसम की ऊपर लेता होआ था ...... अपनी लुंड का पानी उसकी छूट मैं गिरानी की बाद ........ आखरी ड्राप तक उसकी छूट मैं टपकाती होय ........ और महीन की छूट भी उसकी मोटे लुंड को ऐसी दबा रही थी की जैसी उसकी लुंड सी उसकी माननी का आखरी क़तरा तक निचोड़ लेना चाहती हो .............

कुछ देर की बाद विनोद भी महीन की ऊपर सी उतर क्र उसकी साथ hi लेट गया ....... उसकी तरफ करवट लय क्र .......... अपना बाज़ू उसकी नंगी बूब्स की ऊपर रखती होय .............. बुहत hi रोमांटिक मंज़र था विनोद की बैडरूम का ............ बैडरूम की हलकी हलकी लाइट मैं .............. महीन बुरी तरह सी निढाल हो चुकी होइ थी ............ उसका जिसम थक चूका होआ था ........ उसकी अंदर अब हिलनी जुलनी की कोई ताक़त नहीं बची थी ........... दोनों hi कोई बात नहीं क्र रही थय ......... बस एक दूसरी की बहून मैं पारी होय थय .............. एक hi दिन मैं ........ बल्कि 2-3 घंटों की अंदर hi कितनी बार महीन को ओर्गास्म होआ था ........... यह उसी भी याद नहीं था ............ मगर इतनी बार ओर्गास्म होनी की बाद अब उसकी जिसम मैं कोई ताक़त नहीं रही थी .................... ना कोई प्यास बची थी उसकी जिसम मैं ........... और ऐसी ाच्य तरीक़ी सी प्यास बुझनी की बाद महीन पुरसुकून हो गए थी ............. और आंखें बंद कए होय विनोद की बहून मैं लेती होइ थी ............

विनोद महीन की एक खूबसूरत, तनय होय , नंगी बूब पी हाथ फैरती होय और उसकी निप्पल को अपनी उंगलयों मैं आहिस्ता आहिस्ता सहलाती होय बोलै ................ महीन .............. सो गए ............

महीन ाहसिता सी .......... mmmmmmmmmmmm ........... ह्ह्ह्हहई

फिर उसनी अपनी आंखें खोलीं और विनोद की तरफ देखती होय बोली ........... विनोद ........... क्या यह सुब कुछ ठीक होआ है ...........

विनोद न्य अपनी ऊँगली महीन की होंठों पी रख दी और बोलै ......... ssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ...............

थोड़ी देर की बाद महीन उठ की बाथरूम मैं गए ....... और खुद को वाश क्र की आ की विनोद की बैडरूम मैं hi आगये ...... उसनी अपनी शर्ट और शॉर्ट्स पहन लय होय थय ............. और थोड़ी देर की बाद दोनों एक दूसरी की साथ चिपकी होय नींद की वाद्यों मैं चली गए .........
 
अपडेट NO: 22

सुबह विनोद की आँख पहली खुली ............. उसनी देखा की महीन उस सी लिपट क्र सो रही है ......... अपनी बैडरूम मैं ........ अपनी बीएड पी ...... अपनी बहून मैं महीन को देख क्र विनोद की चेहरी पी एक मुस्कराहट फैल गए ............ अपनी देरीना खवाब की पूरी होनी की मुस्कराहट ........... महीन जैसी हसीं लड़की को हासिल क्र लेने की मुस्कराहट ........... और वह भी ज़बरदस्ती नहीं बल्कि महीन की रज़ामंदी सी ..... प्यार सी ............. महीन की मासून चेहरी पर बुहत सुकून था ............ आंखें बंद थीं ......... फिर भी जैसी चेहरी पर हलकी सी मुस्कान रुकी होइ हो .............. बलून की एक लत उसकी चेहरी पी बिखरी होइ थी ............... विनोद न्य बुहत hi वीर्य सी महीन की बलून को उसकी चेहरी पर सी हटा दया ........... और महीन का मासूम खूबसूरत चेहरा उसकी सामन्य आज्ञा .............. महीन की जिसम पी सिर्फ एक बेडशीट थी ........ वह भी उसकी शोल्डर्स सी नीची .......... और उसकी खूबसूरत बूब्स उस बेडशीट सी बहार थय ........ रात को तीसरे राउंड की चुदाई की बाद महीन मैं उठ की वाशरूम मैं जांय की हिम्मत नहीं रही थी और उसी हालत मैं hi उसकी आँख लग गए थी ...... विनोद की नज़र महीन की बूब्स पी जैम गए .......... खूबसूरत सुफैद उभार ...... जिनकी टॉप पी गुलाबी निप्पल्स ............ जो की इस वक़्त तनय होय नहीं थय .......... बुहत hi प्यारी लग रही थय ............ विनोद महीन की गूरी गूरी जिसम और मासूम चेहरी को देखी जा रहा था .......... बुहत hi प्यार सी ............ उसी देखती होय विनोद का लुंड फिर सी खरा हो रहा था ........... उसी यक़ीन नहीं आ रहा था की महीन जैसी खूबसूरत कलेग ....... आज उसकी बीएड पी है ....... और वह उसकी साथ पिछली रात ........ अपनी जनम दिन पी .......... इस खूबसूरत लड़की की जिसम का लुत्फ़ उठा चूका था ............ वह हमेशा सी इसको पानी का खवाब देखता था ........ और आज उसकी जनम दिन पी उसका यह खवाब पूरा हो गया था ............ विनोद अपनी खरी होती होय लुंड को सहलाती होय महीन की बूब्स और निप्पल्स को देख रहा था ............... .. विनोद का दिल चाहा की वह उनको छु लय ................ उसनी आहिस्ता सी अपना हाथ ाग्य बढ़ाया ........ और अपनी ऊँगली सी महीन की निप्पल को छूआ ............. जैसी hi विनोद की फिंगर महीन की निप्पल सी टच होइ तो महीन की सोया होय जिसम न्य हलकी सी झुरझुरी ली ............ मगर उसकी नींद नहीं खुली ............ विनोद न्य जल्दी सी अपना हाथ हटा लय ...... और महीन को मुस्करा की देखती होय बीएड सी उतर गया .......... नीची पारा होय अपनी शॉर्ट्स को उठाया और उसी पहन लय .......... बुहत hi वीर्य वीर्य ....... बिना आवाज़ पैदा कए वह अपनी बैडरूम सी निकल गया .............

विनोद वाशरूम सी फ़ारिग़ हो क्र किचन की तरफ बढ़ा चाय बनानी की लय .......... फिर गणेश जी की मूर्ती की सामन्य रुक की अपनी हाथ बाँध की सर झुका की शुक्रया बोलै और मुस्कराता होआ किचन मैं दाखिल हो गया ............. गुनगुनाती होय चाय बनानी लगा ........... चाय बना की 2 कप्स मैं दाल की वापिस अपनी बैडरूम मैं आया तो महीन अभी भी सो रही थी ......... उसी हालत मैं ............ विनोद बीएड पी अपनी साइड पी चला गया ......... उसी तरफ की साइड टेबल पी चाय की दोनों कप रखी और बीएड पी बेथ गया ............. बीएड की बैक सी कमर टिक्का क्र .......... महीन की चेहरी सी बाल हटाती होय उसी जगानी लगा ..........

विनोद ......... महीन ...... उठ जाओ मेरी जान ...... चाय लय लो ..........

विनोद की नज़र फिर सी महीन की बूब्स पी पारी ........... तो एक बार फिर सी महीन की एक खूबसूरत, तनय होय , नंगी बूब पी हाथ फैरती होय और उसकी निप्पल को अपनी उंगलयों सी सहलाती होय बोलै ................ महीन .............. उठ जाओ यार ............

महीन आंखें खोली बिना hi अपनी बाज़ू ऊपर उठा की एक अंगराई लेती होइ बोली .......... mmmmmmmmmmmm ........... ह्ह्ह्हहई ............... kroooooooooooooo सोनिययययय दो न .................

विंड महीन की इस अदा को देख की तो जैसी फ़रेफ्ता hi हो गया ............ उसी मुस्कराती होय देखनी लगा ........ और फिर नीची झुकती होय आहिस्ता सी अपनी होंठ महीन की गुलाबी होंठों पी रख डाई ........... और उनको चूमनी लगा ............. पहली तो हल्का सा किश क्या ........ और फिर जैसी hi महीन की निचली होंठ को अपनी होंठों मैं लय और चूसा तो महीन न्य आंखें खोल दिन .......... और विनोद को पिच्य हटानी लगी ...........

विनोद को अपनी इतनी क़रीब देख क्र एक लम्हे की लय hi बस महीन को हैरानी होइ ....... थोड़ा सा शॉक लगा ...... मगर फिर उसी पिछली दिन और रात मैं जो कुछ होआ था वह सुब याद आज्ञा तो महीन शर्मा गए .......... अपनी नंगी हालत को देखती होय जल्दी सी चादर अपनी ऊपर खींच ली .......... अपनी बूब्स को छुपानी की लये ...........

विनोद उसकी माथै सी बाल हटा तय होय बोलै .......... क्या होआ .......... शर्मा क्यों रही हो ........

महीन आहिस्ता सी बोली ........... और क्या तुम्हारी तरह बिहाराम हों क्या मैं ............

विनोद हंसा और महीन की जिसम पी ली होइ चादर की ऊपर सी hi उसकी बूब्स पी हाथ रख की उसको सहलाती होय बोलै ........... तो बन जाओ ..........

महीन न्य बनावटी गुस्से सी विनोद की हाथ पी थप्पड़ मार की उसका हाथ अपनी बूब्स पर सी हटा दया ............. क्या क्र रही हो ............ हटो भी अब .............. सुबह सुबह hi शुरू होनी लगी हो ........... मेरी शर्ट दो

विनोद ...... ऐसी hi रहंय दो न प्लीसीईई

महीन ..... नहीं पलज़्ज़ज़ ..... मुझी शर्म आती है .......

विनोद हंसा और बोलै ाचा चलो पहली चाय लय लो .......... महीन बीएड सी अपनी कमर टिक्का की ऊंची होइ ........... और बेडशीट की साथ hi अपनी जिसम को कवर कए रखा ........... विनोद न्य चाय का कप उसको दया और वह उसकी सिप लेंय लगी ............... और थोड़ी सीरियस होनी लगी .............

विनोद महीन की चेहरी की तरफ देख रहा था ........... वह उसकी परेशानी को समझ रहा था ............ बोलै ............ महीन क्या सोच रही हो ............

चाय का एक सिप लय क्र महीन कप की तरफ hi देखती होइ बोली .......... ........ विनोद ........... क्या यह सुब कुछ ठीक होआ है ...........

विनोद न्य अपना बाज़ू फैला की महीन की पिच्य रखा और उसकी बलून को सहलाती होय बोलै ........ तुम इतना क्यों सोच रही हो ............ यह सुब कुछ हम न्य जान बूझ की तो नहीं क्या न .......... आईटी वास् आल नेचुरल ............ नेचर खुद हमें एक दूसरी की क़रीब लाइ है ...... आहिस्ता आहिस्ता ............ अगर यह हमारी ग़लती होती ...... या हम न्य खुद सी इस तरफ क़दम बढ़ाया होता तो हम पहली दिन hi यह सुब कुछ कर गुज़रती जब हम दोनों इस घर मैं अकेली शिफ्ट होय थय .......... मगर ऐसा नहीं होआ ........ हम न्य खुद पी कण्ट्रोल रखा ... यह सुब नैचुरली होआ है .................

महीन .......... ह्म्मम्म्म्म

विनोद ........ महीन तुमको नहीं लगता की तुम इतनी दिंनो सी आसिफ सी दूर रहंय की बाद इस सुब की लय तरस रही थी जो अभी हमारी बीच होआ है ............ महीन यह सुब जिस्मानी ज़रूरत है ......... मेरी जिसम की भी और तुम्हारी भी .............. तुम्हारा क्या ख्याल है की आसिफ एहि एक्सपेक्ट क्र रहा हो गए की तुम डेढ़ साल तक अपनी जिसम की प्यास को दबाय रखो गई ........ और वह भी लंदन जैसी आज़ाद और ओपन माहोल मैं ............. ी क्नोव की वह एक समझदार इंसान है .......... वह समझता है तुम्हारी जिसम की ज़ररयात को ......... इसकी प्यास को ........... नेचर की रूल्स को ........ . इसलय वह ना कभी तुम सी इस बारी मैं बात क्रय गए और ना hi कभी ज़्यादा प्रोब करनी की कोशिश क्रय गए तुमको .............. उसनी तुमको इसी लय तो यहाँ रहंय दया है की तुम अपनी लाइफ को अपनी हिसाब सी जी सको ........... और तुम्हारा क्या ख्याल है की की मैं इतना अरसा तक खुद की खवाहिश को दबा सकूं गए ........... कभी भी नहीं ............. कहीं न कहीं तो मुझी भी कुछ करना हो गए न अपनी इस प्यास को बुझानी की लय .............. कहीं भी बाहिर .......... ी होप तुम समझ रही हो ............... तुम्हारा साथ मिलनी की वजह सी मैं उस सुब सी बच सकूं गए .............

महीन वीर्य सी मुस्कराई .......... ाचा जी प्रोफेसर सब ...... बुहत लेक्चर देना आता है आप को सही और ग़लत पी ............... और वह जो क्या है वह भी सुब ठीक था क्या .........

विनोद ....... वह क्या ......

महीन शर्माती होय ...... मुंह की साथ वहां पी .......

विनोद ...... ाचा ... वह ............. आर्य वह तो प्यार का हिस्सा है ...... मुझी लगता है की आसिफ न्य तुमको ठीक सी प्यार नहीं किआ कभी ..... और ना hi सेक्स करना सिखाया है ............. कोई बात नहीं ......... अब मैं हों न ....... सुब कुछ सीखा डॉन गए ..............

महीन .......जी नहीं मुझी नहीं सीखना कुछ भी तुम सी ............. अपनी पास hi रखो अपनी गन्दी गन्दी हरकतें ........... मैं कुछ नहीं करनी वाली तुम्हारी कहनी पी ............. तुम तो वहशी हो वहशी ...........

विनोद उसी अपनी साथ लगाती होय बोलै ........... हहहह .......... क्यों क्या होआ ..........

महीन न्य उसी घूरा .......... क्या होआ ??? यह तुम पूछ रही हो .......... पता भी है कितना दर्द क्या था तुम न्य रात को ............ ज़रा भी मेरी चीखों की परवाह नहीं की ...........

विनोद अपनी कानों को पकर्त्य होय बोलै ............ माफ़ क्र दो .......... आइंदा वाहशयों की तरह नहीं करों गए ..............

महीन हंस पारी ....... कुछ नहीं करनी देंय वाली मैं अब ाग्य सी .......... ना hi तुम्हारी बातून मैं अन्य वाली हों ............. खवाब hi देखती रहना बस अब ..........

विनोद हंसा और महीन की गाल को चूम की बोलै ............. उफ्फ्फ महीन खवाब hi तो देख रहा था इतनी ारस्य सी तुम्हारी क़रीब अन्य की ...... तुम्हें पानी की ..........

महीन मुस्करानी लगी .......

महीन न्य चाय ख़तम क्र की कप साइड टेबल पी रखा ........ और बीएड सी उतनी लगी तो विनोद न्य उसका हाथ पाकर की अपनी तरफ खींच लय ........ आर्य कहाँ जा रही हो .............

महीन खिलखिला की हंसी जा रही थी .............. चोरो मुझी ...... जाना है मुझी अपनी रूम मैं ........

विनोद न्य महीन को बीएड पी गिराया और खुद उसकी ऊपर आज्ञा ............ और अपनी होंठों को महीन की होंठों पी रखनी लगा ............. महीन इधर उधर सर हिला रही थी ....... उसी अपनी होंठों पी होंठ नहीं रखनी दी रही थी ............. हंसती होइ .............

विनोद ............ थोड़ा सा तो प्यार करनी दो न ..........

महीन ........ कुछ नहीं करना मुझी ................ सुबह सुबह तुमको यही काम है क्या ............ हटो जांय दो मुझी ............

मगर विनोद कहाँ मान न्य वाला था ........... उसनी महीन की जिसम पर सी उसकी बेडशीट हटा दी और उसकी गूरी गूरी बूब्स को नंगा क्र दया .......... और दोनों को अपनी हाथों मैं लय क्र आहिस्ता ाहसिता सहलानी लगा ............ दबानी लगा ............. उसकी हाथों की जादू सी महीन की निप्पल ाकर्ण्य लगी ............ विनोद न्य झुक क्र अपनी होंठ महीन की एक निप्पल पी रखी और उसी चूसनी लगा .............. महीन अभी भी हंसती होइ विनोद की सर को पिच्य को धकेल रही थी ............. मगर विनोद उसकी निप्पल को चूस रहा था ........ आहिस्ता सी उसकी निप्पल को अपनी दांतों मैं लय क्र काटा तो महीन तरप उठी ............. और उसकी मुंह सी तेज़ सिसकारी निकल गए ............... और विनोद की सर की पिच्य अपना हाथ रख की उसकी सर को अपनी निप्पल पी दबानी लगी ............. विनोद का दूसरा हाथ महीन की दूसरी निप्पल को सहला रहा था ............. और महीन न्य भी अपना दूसरा हाथ विनोद की हाथ पी रखा होआ था ....... उसकी हाथ को रोकनी की लय नहीं ............ बल्कि सहलानी की लय .............

विनोद अब कभी एक निप्पल को चूसता तो कभी दूसरी को ........... और महीन की मज़ाहिमत अब ख़तम हो चुकी होइ थी .......... वह विनोद को नहीं रोक रही थी ........ बस सुखी सर की बलून मैं हाथ फेर रही थी .......... विनोद की होंठों की जादू सी महीन की छूट फिर सी गीली होनी लगी थी ............. उसका जिसम फिर सी गरम होनी लगा था ............ विनोद न्य अपनी होंठों को महीन की निप्पल्स सी हटा की महीन की होंठों पी रख दया ........... और उनको चूमनी लगा ............. अब की बार महीन न्य अपनी होंठों को थोड़ा खोल दया ......... और विनोद का साथ देंय लगी ......... उसकी किश करनी मैं ........ विनोद न्य अपनी जुबां महीन की होंठों की दरम्यान डाली तो महीन न्य उसी चूसना शुरू क्र दया ........ अपनी जुबां को विनोद की जुबां की साथ तरकानी लगी ............. विनोद की जुबां महीन की मुंह की अंदर तक इधर उधर जा रही थी ........ और दोनों का सलीवा एक दूसरी की मुंह मई जा रहा था ............. महीन अपनी दोनों बहिन विनोद की गले मैं डाली होय उसका साथ दी रही थी ..............

नीची महीन की टांगें खुली होइ थीं ....... और विनोद का लुंड उसकी शॉर्ट्स की अंदर सी hi महीन की छूट को रगड़ रहा था ............ सहला रहा था ........ पूरी तरह सी एकरा होआ लुंड ............. जैसी जैसी महीन की छूट को रगड़ रहा था तो महीन की प्यास फिर सी जागती जा रही थी ......... और वह फिर सी बैचैन होती जा रही थी ........... अपना कण्ट्रोल खूटी जा रही थी ...........

विनोद को महीन की हालत का अंदाज़ा हो रहा था ............ उसनी अपनी एक हाथ को नीची लय जा की महीन की छूट पी रखा .......... और अपनी ऊँगली सी उसी सहलानी लगा ........... महीन का पूरा जिसम आकर गया ........... विनोद न्य अपनी एक ऊँगली को महीन की छूट की अंदर डाला तो उसी फोरि अंदाज़ा हो गया की महीन की छूट गीली हो रही है ........... विंडो अपनी ऊँगली को महीन की छूट की अंदर बहार करनी लगा ............ महीन सिसकंय लगी ............. और विनोद की साथ और भी चिपकनी लगी ..........
 
महीन की बैचैनी को देखती होय विनोद न्य आहिस्ता ाहसिता अपनी शॉर्ट्स को अपनी टांगों सी नीची उतरना शुरू क्र दया .......... और उसी अपनी टांगों सी निकाल दया ........... अब वह भी महीन की तरह बिलकुल नंगा था ........... उसका नंगा लुंड अब महीन की छूट को रगड़ रहा था ..........

महीन टर्पी ............ naheeeeeeeeeeeeeee kroooooooooooooo pleaseeeeeeeeeee Vinoddddddddddd naheeeeeeeeeeee

विनोद उसकी कानों को चूमती होय बोलै .......... क्या नहीं करों ..........

महीन .......... उसी हटा लो वह सी ............

विनोद उसकी कान पी अपनी जुबां की नौक फैरती होय बोलै ........... मगर तुम्हारी वह तो कुछ और hi कह रही है ............ वह तो उसी अंदर बुला रही है ............... देखो तो उसकी स्वागत की लय कैसी गीली हो रही है .......

महीन का चेहरा शर्म सी लाल हो गया ............. तुम्हें मेरी बात सुन नई है की उसकी ...........

विनोद अपनी लुंड की टोपे को महीन की छूट की सूराख पी रखती होय बोलै ............. उसकी जो मेरा स्वागत क्रय गई ..............

जैसी hi विनोद का लुंड महीन की छूट की सूराख पी फिट होआ तो महीन का जिसम तो जैसी और भी जलनी लगा ........... कंम्पनी लगा ............ उसकी हिप्स खुद बा खुद hi ऊपर को हिलनी लगी ......... जैसी खुद सी hi विनोद की लुंड को अपनी अंदर लेना चाहती हों ............. विनोद न्य हल्का सा धक्का लगया और अपनी लुंड को महीन की चोट की अंदर दाल दया ........... aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ............ ssssssssssssssssssss ........... की साथ महीन की मुंह सी सुकून की आवाज़ निकली .............. विनोद न्य अपनी होंठों को महीन की होंठों पी रखा और उसको किश कृत्य होय अपनी लुंड को महीन की छूट मई अंदर बहार करनी लगा ...............

महीन की टांगें फैली होइ थीं ....... और उनकी बीच मैं विनोद झुका होआ अपना लुंड महीन की छूट की अंदर डाली होय उसी छोड़ रहा था ............ विनोद का लुंड तीसरी बार महीन की छूट की अंदर था ........... और महीन विनोद की उन देखी लुंड सी तीसरी बार छुड़वा रही थी ..........

महीन ाहसिता सी बोली ............ विनोद आराम सी करना प्लीज........

विनोद उसकी बात सुन की मुस्कराया ....... और फिर अपनी लुंड को अंदर बहार कृत्य होय पूरी लुंड को महीन की छूट की अंदर उतारनी की कोशिश करनी लगा ............. विनोद न्य महीन की टांगों को ऊपर की तरफ खींचा उसकी पेट की साथ और एक बार फिर सी ज़ोर ज़ोर सी ढक्की लगाती होय अपना पूरा लुंड महीन की छूट की अंदर दाल दया ........ और फिर सी महीन को छूट मैं दर्द होआ मगर उतना नहीं जितना रात को होआ था ............. विनोद महीन की चीखों की परवाह कए बिना hi अपनी पूरी लुंड को महीन की छूट की अंदर डाली होय उसी छोड़नी लगा .............. अपनी पूरी लुंड को महीन की छूट सी बहार निकालता और फिर सी उसी अंदर पुश क्र देता ........... एक hi झटकी मैं ......... अब तो महीन उसकी लुंड की आदि होती जा रही थी ........... उसी अंदाज़ा था की विनोद की लुंड न्य उसकी अंदर खान तक जाना है ............ इतनी hi देर मैं महीन की छूट न्य एक बार पानी चोर दया ........... और वह झाड़ गए .......... मगर विनोद अभी कहँ झाड़नी वाला था .......... वह मुसलसल महीन की छूट छोड़ी जा रहा था ..............

महीन आंखें बंद कए होय सिसकी .......... बस करो विनोद ............

विनोद ............ अभी नहीं होआ मेरा ...........

झाड़नी की बाद महीन अब सुकून मई थी ........ उसी अब विनोद की लुंड सी दर्द भी नहीं हो रहा था ........... वह विनोद की तरफ hi देख रही थी .......... मगर उसी नीची विनोद की लुंड की तरफ देखनी की हिम्मत नहीं हो रही थी जो उसकी छूट मैं अंदर बाहर होती होय उसी छोड़ रहा था ........... विनोद का लुंड पूरा महीन की छूट की अंदर तक जा रहा था ....... और महीन की बचा दानी की मुंह मैं दाखिल होनी की कोशिश क्र रहा था ......... जैसी hi महीन की बचा दानी की मुंह सी टकराता तो महीन की मुंह सी लज़्ज़त सी भरी होइ सिसकारी निकल जाती ....... यह लज़्ज़त उसी आज तक आसिफ की साथ नहीं मिली थी ........ क्यों की विनोद का लुंड जहाँ टच क्र रहा था वहां तक आसिफ का लुंड कभी नहीं पोहंचा था ........

20 मिनट तक की चुदाई की बाद आखिर कार विनोद की लुंड भी झरनी वाला हो गया ........... उसनी एक ढक्की की साथ अपना पूरा लुंड महीन की छूट की अंदर क्या .......... अपनी लुंड की टोपे को महीन की बचा दानी की मुंह मुंह पी फंसाया .......... और अपना पानी सीधा महीन की अंदर गिरानी लगा ........... अपनी छूट की अंदर विनोद की लुंड का गरम गरम पानी गिरनी सी महीन को इस क़दर मज़ा आया की उसकी छूट न्य एक बार फिर सी पानी चूर्ण शुरू क्र दया ......... और विनोद की साथ hi वह अपनी ओर्गास्म का भी मज़ा लेनी लगी ................ आंखें बंद की होय ....... विंड सी चिपकी होय ..........

महीन की छूट विनोद की लुंड को अंदर hi दबाय होय थी .......... उसकी लुंड न्य जितना मज़ा दया था अभी तो उसका भी दिल नहीं छह रहा था की विनोद अपनी लुंड को उसकी छूट सी निकाली ......... विनोद भी अपनी लुंड की पानी का आखरी क़तरा तक महीन की छूट मैं गिरा की आखिर महीन की साथ hi लेते गया ........ और लम्बी लम्बी सांस लेनी लगा .......... उसका सीना उसकी साँसों की साथ फूल रहा था ........

महीन की नज़रें विनोद की सीने पर थीं ....... जिस पी उभरी होय मसल्स को अपनी नज़रों की इतना क़रीब देख रही थी .......... पहली भी उसकी सीने को नंगा देख चुकी थी कई बार ........ मगर चाहंय की बावजूद भी कभी उसकी सैन्य को छु नहीं सकीय थी ....... मगर आज वह अपनी इस खवाहिश को पूरा क्र सकती थी ........आज उसी कोई रोकनी वाला नहीं था ................ उसनी अपना हाथ ाग्य बढ़ाया और विनोद की सैन्य पी रख दया ....... और उसकी सैन्य को सहलानी लगी ........ ... अपनी हाथों की साथ विनोद की सीने की मज़बूत मसल्स को महसूस करनी लगी .......... उसकी निप्पल्स को सहलानी लगी ............ उसी बुहत ाचा लग रहा था ............

थोड़ी देर की बाद महीन उठी ........ साइड टेबल सी टिश्यू पेपर्स लय क्र अपनी छूट सी बहती होय विनोद की लुंड की पानी को साफ़ क्या ....... और तिसुएस को बीएड की साथ hi राखी होइ डस्टबिन मैं दाल दया ....... और फिर कुछ टिश्यू और अपनी छूट पी रखी और उनको दबाय होय hi विनोद की बैडरूम सी निकल गए ............ नंगी hi ................
 
महीन न्य वाशरूम मैं जा की खुद को ाच्य सी वाश क्या और फिर शावर लेनी लगी ............. शावर की नीम गरम पानी की नीची खरी होइ वह एक बार फिर सी सोचनी लगी जो कुछ उस न्य पिछली रात क्या था ............ उसी खुद पी हैरत हो रही थी की इतनी दिन सी वह जो विनोद की साथ रह रही थी मगर कुछ भी नहीं होआ था उनकी बीच और आज एक hi रात मैं वह विनोद सी तीन बार चुद गए थी ............... उसी कभी खुद पी शर्मिंदगी होनी लगती तो कभी अहसास होता की जो भी होआ है ठीक hi होआ है ............. विनोद की शून्य की बाद जैसी वह पिघली थी ....... जैसी उसनी खुद को विनोद की सुपुर्द क्र दया था .......... उस सी उसी खुद का ाच्य सी अंदाज़ा था की वह आसिफ सी दूर रहंय को कितना मिस क्र रही थी ........ एक मर्द की ज़रूरत कितनी महसूस हो रही थी उसी ............. कितना प्यासा था उसका जिसम ................ वह सोच रही थी की क्या वह इतना अरसा तक आसिफ सी दूर रहती होय अपनी जिसम की प्यास को कण्ट्रोल रख सकती थी .......... ??? और वह भी विनोद जैसी मर्द की साथ रहती होय ........... ??? नहीं कभी भी नहीं ............ उसी आसिफ का ख्याल तो आ रहा था मगर अजीब बात यह थी की उसी कुछ बुहत ज़्यादा गिल्ट फील नहीं हो रहा था ........... हाँ तो आसिफ न्य भी तो खुद hi मुझी अन्य दया है न यहाँ लंदन मैं ....... अकेली विनोद की साथ .......... तो क्या उसी नहीं पता था की मैं कैसी उसकी बग़ैर इतना अरसा गुज़ार सकूं गई .......... ठीक hi तो कहता है विनोद ............ आसिफ को सुब पता है की की क्या परेशानी हो गई मुझी यहाँ आ की ....... कैसी मैं खुद को कण्ट्रोल क्र पाऊँ गई ....... लकिन उसनी फिर भी तो मुझी अन्य दया है न विनोद की साथ ..... खुद hi तो मुझी विनोद की हवाले क्या है ....... और फिर अगर यह सुब कुछ हो गया है ...... साड़ी बॉउंड्रीज़ क्रॉस हो गए हैं तो इस मैं मेरा क्या दोष है ....... और फिर विनोद ....... कितनी अछि नेचर का है ...... कितना ख्याल रखता है मेरा ........... कितनी केयर करता है ....... तो अगर उसकी साथ .......... उसकी साथ यह सुब क्र भी लय तो क्या हर्ज है ....... वह भी तो प्रिय सी दूर है न ....... उसकी बिना वह भी कैसी रह सकता है ........... बस ठीक है ............ जैसी विनोद कहता है न की जो हो रहा है होनी दो बस उसी ........... मुझी भी बस अब ज़्यादा नहीं सोचना है ...... तो बस क्या विनोद की लुंड सी चुदवाती राहों .......... लो जी ...... कितनी अजीब बात है न की तीन बार विनोद न्य मुझी छोड़ दया है और मैं एक बार भी उसका लुंड नहीं देख पाई ........ हहहहए ........ पता नहीं कैसा हो गए .......... जैसा भी हो गए लकिन है कोई ज़बरदस्त चीज़ hi ........ जो इतना मज़ा देता है मुझी ......... महीन मुस्कराई और नहा क्र एक टॉवल सी अपनी जिसम को साफ़ क्या ........ और फिर उसी टॉवल को अपनी नंगी जिसम पी लेपित लय ....... आंय मैं खुद को देखा तो मुस्करानी लगी ....... टॉवल उसकी आर्मपिट्स की नीची था ...... उसकी बूब्स सी ऊपर का उसका सीना नंगा और शोल्डर्स और बाज़ू नंगी थय ......... बिलकुल नंगी ........ और टॉवल उसकी गूरी गूरी बूब्स को कवर क्र रहा था ........ और नीची सिर्फ उसकी छूट को कवर क्र रहा था ...... हाफ तइस तक भी नहीं आ रहा था ......... उस सी नीची पूरी टांगें नंगी हो रही थीं .......... और वाशरूम सी बहार आगये ............

अपनी रूम की तरफ जाती होय महीन को कुछ ख्याल आया वह मुस्कराई ........... और विनोद को तैसे करनी की लय विनोद की रूम की तरफ बरही और उसका दरवाज़ा खोल की बोली उठ जाओ विनोद जल्दी सी नहा लो फिर नाश्ता कृत्य हैं ......... उसी पता था की विनोद उसी इस कंडितों मैं देख की फिर सी तरप उठी गए ....... और होआ भी वही ........ विनोद महीन को टॉवल मई लिपटी होय देख की उछाल की बीएड सी उठा और महीन की तरफ दौड़ा ........... रुको ...... रुको तो सही महीन .............

महीन न्य उसी अपनी तरफ आती देखा तो हंसती होइ अपनी रूम की तरफ भागी ........ जी नहीं ........ जा की नहाओ तुम ..........

महीन न्य जल्दी सी अपनी रूम मई जा की दरवाज़ा बंद क्र लय ....... विनोद नॉक करनी लगा ........... महीन प्लीज थोड़ी देर तो खोलो ........ एक बार तो देखनी दो न ...........

महीन दरवजी की अंदर खरी हंस रही थी ........... उसी विनोद को तारपानी मई मज़ा आ रहा था .......... जी नहीं ...... कुछ नहीं देखना ........ सुब कुछ तो देख रही हो कल सी ........... अब पहली नहाओ जा की ऐसी फिर मुझी गन्दा क्र दो गए ................

विनोद ........ प्लीज महीन खोलो तो सही ............ सिर्फ एक मिनट ....

महीन ........ no वे ............. कहा है न की नहा की आओ ....... फिर नाश्ता कृत्य हैं ...........

विनोद मायूसी भारी लहजी मैं .......... ाचा जा रहा हों .........

महीन हंसती होइ अपनी वार्डरोब की तरफ बढ़ गए .......... महीन अपनी लय ड्रेस सेलेक्ट करनी लगी ............. महीन को समझ नहीं आ रही थी की वह क्या पहनी ......... भला अब विंडो की सामन्य कुछ पहन न्य की ज़रूरत भी रही है कोई ..... वह मुस्कराई और फिर..... महीन न्य एक सिंपल सा पजामा और शर्ट निकाली, फिर ब्लैक ब्रस्सिएर की साथ उसी पहन लय .......... अपनी बलून को ब्रश क्र की हल्का सा मेक उप करनी लगी ............. महीन आंय की सामन्य ऐसी सज संवर रही थी जैसी वह अपनी शादी की पहली सुबह खुद को संवर रही थी ........ वह चाहती थी की विनोद को वह अब भी अछि लगी ........... अपनी होंठों पी रेड लिपस्टिक लगा की और बलून को खुला चोर की वह बैडरूम का दरवाज़ा खोल की बहार आगये .......... और किचन मैं जा की नाश्ता बनानी लगी ........

थोड़ी देर मैं विनोद किचन मैं आया ..... और आती साथ hi पिच्य सी महीन को हुग क्र लय ....... अपनी बहून मैं भर लय ........ महीन मुस्करानी लगी ........ चोरो न विनोद ...... मुझी नाश्ता बनानी दो ........

विनोद महीन की बूब्स को दबाती होय बोलै ....... आओ न बैडरूम मैं जा की नाश्ता कृत्य हैं ..........

महीन हंसी ....... जी नहीं ........ उस नष्त्य सी पेट नहीं भरनी वाला ............ सीढ़ी तरह नाश्ता बनानी मैं मेरी हेल्प करो बुहत भूक लग रही है ............ रात सी बुरी हालत क्र दी होइ है जनाब न्य मेरी ..........

विनोद हंसनी लगा ........ अभी तो कुछ भी नहीं क्या मेरी जान .......... आज का सारा दिन बस तुम्हारी साथ hi राहों गए .......

महीन ....... ऊऊफफफफ .............. मुझी लगता है की मुझी जल्द hi अपनी लय अलग फ्लैट लेना पारी गए ......... वर्ण तुम तो अब मुझी सुकून सी जेएनय नहीं दो गए ...... महीन हंसी ...........

विनोद अब उसका हाथ बतानी लगा नाश्ता बनानी मैं ............ कुछ देर मैं दोनों टेबल पी बैठी होय नाश्ता क्र रही थय ....... विनोद बारी hi प्यार सी महीन को अपनी हाथों सी नाश्ता करवा रहा था ........ और महीन को भी बुहत ाचा लग रहा था यह सुब ............ उसी विनोद का खुद को इतना प्यार देना बुहत ाचा फील हो रहा था ........... विनोद की इज़्ज़त उसकी दिल मई और बढ़ रही थी .............

नाश्ता करनी की बाद महीन चाय बना की लाइ तो विनोद सोफे पी बैठा होआ टीवी देख रहा था ............ विनोद न्य महीन को अपनी बिलकुल पास बैठा लय ......... अपनी जिसम की साथ महीन की कमर टिक्का क्र ...... अपनी एक बाज़ू की घैर्य मैं लय क्र ........ और दोनों चाय पीनी लगी ........ बुहत hi रोमांटिक अंदाज़ मैं ........ बीच बीच मई विनोद महीन को किश भी क्र रहा था उसकी गळून को ........... और महीन बस मुस्करा रही थी ......... ........... महीन को आज बुहत ाचा लग रहा था .......... ऐसी विनोद की साथ बैठना ......... ऐसी तो उसी कभी आसिफ न्य भी अपनी साथ नहीं बिठाया था ............. जैसी प्यार सी और रोमांटिक अंदाज़ मैं विनोद उसी अपनी पास बिठाय होय था .............. महीन अब बिलकुल पुरसुकून थी ........ बिलकुल कम्फर्टेबले थी विनोद की साथ ...........

विनोद का एक हाथ महीन की बाज़ू की नीची सी गुज़र की उसकी एक बूब पर था ......... जैसी वह आहिस्ता आहिस्ता सहला रहा था ..........

विनोद बोलै ........... महीन .......... पता है ी ऍम एक्सट्रेमेली लकी जो मैं तुमको हासिल क्र सका हों ............ वर्ण पता नहीं कितनी लोग हैं जो सिर्फ तुम्हारी खवाब hi देखती हैं आज तक ...........

महीन मुस्कराई ........ रियली ....... ???? मुझी नहीं लगता की कोई ऐसा सोच सकता है ...........

विनोद ....... महीन तुम्हें नहीं पता की इंडिया मई ऑफिस की लोग कैसी तुम पी मर्त्य थय ....... मगर सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी रिज़र्व बेहेवियर की वजह सी वह कभी तुम्हारी क़रीब अन्य की कोशिश नहीं कृत्य थय ........

महीन मुस्कराई ........ और उन मैं तुम भी शामिल थय न ....... ???

विनोद ....... हाँ मैं भी था ........ मैं कभी सोच भी नहीं सकता था की एक दिन तुम इस तरह सी मेरी बहून मैं हो गई ......... और मैं तुम्हारी इस हसीं जिसम का भरपूर लुतफ उठा सकूं गए ..........

महीन मुस्कराई ...... ब्लश करती होइ बोली ....... पर आज तो तुम न्य हासिल क्र hi लय न मुझी ..........

विनोद .......... हाँ ...... क्र लय हासिल ...... लकिन अभी तक मुझी यक़ीन नहीं आ रहा की यह सुब कुछ हो चूका होआ है .........

महीन हंसी ........... ाचा जी ........ साड़ी रात मुझी सोनी नहीं दया और अभी तक जनाब को यक़ीन नहीं हो रहा .......... तो कैसी आय गए यक़ीन आप को ..........

विनोद महीन की एक बूब को अपनी मुठी मैं दबाती होय बोलै ........... एक बार और करनी की बाद ................ हाहाहा

महीन उसकी हाथ को झटकती होय बोली ........ ना बाबा ना ........ मुझ सी नहीं हो सकता फिर सी ............ अभी भी पैन है मुझी ........

विनोद ........ क्यों दर्द क्यों हो रहा है अभी तक ........

महीन ..... हाँ तो जब ऐसी बी दर्दी सी करो गए तो दर्द hi हो गए न ........ कितना अंदर तक तो क्र रही थय .......

विनोद ........ क्यों आसिफ ऐसी नहीं करता क्या ........

महीन थोड़ा गुस्से की एक्टिंग कृत्य होय ........... जी नहीं ..... वह प्यार सी hi करता है ........ तुम्हारी तरह जानवरों जैसी नहीं ...........

विनोद हंसनी लगा ........... हाहाहाहा ............. मैं क्या क्र सकता हों अब पूरा तो करना hi था न अंदर .......

महीन गुस्से सी ....... तो क्या ज़रूरी था पूरा करना .......

विनोद अपनी कानों को पकर्त्य होय ........ ाचा मैडम जी सॉरी ......

महीन भी हंसनी लगी ...... अब तुम्हारी सॉरी का क्या फ़ायदा ...........

दोनों ऐसी hi मस्तियाँ कृत्य ........ बातें कृत्य ....... छेद चाँद कृत्य होय चाय पी रही थय टेबल पी रखा होआ महीन का मोबाइल बजनी लगा ....... विनोद न्य टेबल सी मोबाइल उठा की देखा तो आसिफ की कॉल थी ..........

विनोद न्य महीन की तरफ मोबाइल बढ़ाती होय बोलै ........ लो जी शैतान का जिक्कर हो रहा था और शैतान हाज़िर हो गया ...... ः .......

महीन की भी हंसी निकल गए ...... फिर उसकी थिगह पी एक थप्पड़ मारती होइ बोली ...... ख़बरदार जो आसिफ को कुछ बोलै तो .......... वह नहीं शैतान तो तुम हो जो उसकी मासूम सी बीवी को बहका दया है ......... ..........

विनोद न्य हंसती होय उसकी मोबाइल की तरफ इशारा क्या .......... महीन मुस्करा दी .......... और जिस सोफे पी वह बैठी होइ थी उस की दूसरी एन्ड पी चली गए और अपनी पाऊँ उठा क्र विनोद की गौड़ मैं रख डाई .......... और अपनी हस्बैंड की कॉल अटेंड क्र ली ..........

विनोद न्य मुस्करा की महीन की पैरों को अपनी हाथों मैं लय और उनको सहलानी लगा ............ वौइस् कॉल थी तो महीन आसिफ सी बातें करनी लगी ....... विनोद महीन की गूरी गूरी पैरों को देख रहा था फिर....... महीन की एक पेअर को ऊपर उठाया ...... और उसी चूम लय ...... महीन विनोद की इस हरकत को देख क्र मुस्करा दी .......... उसी ाचा लगा था ......... महीन न्य अपना पेअर पिच्य को हटानी को कोशिश की मगर विनोद न्य उसी पाऊँ पिच्य नहीं करनी दया ............ और फिर सी अपनी होंठ उसकी पेअर की ऊपर रख की उसी किश क्र लय ............. महीन बारी hi प्यार सी मुस्कराती होय विनोद को और उसकी हरकतों को देख रही थी ........... उसी ाचा लग रहा था विनोद का यह सुब करना ........... कुछ देर तक बात करनी की बाद महीन न्य कॉल बंद क्र दी

महीन बोली ....... यह क्या क्र रही हो ....... पाऊँ को भी कोई चूमता है भला .......

विनोद मुस्कराया ........ तुम्हारी पैरों जैसी खूबसूरत और चिकनी पाऊँ हों तो बाँदा सारा दिन भी इनको किश करता रही तो काम है .......

महीन हंसी ....... पता नहीं क्या क्या कृत्य हो तुम ........ और कहाँ कहाँ पी किश कृत्य हो ................ हद है वैसी तुम्हारी भी ..............

विनोद बोलै ........ महीन तुम हो hi इतनी प्यारी की तुमरी जिसम की हर हर हिस्से को किश करनी को दिल करता है ............

महीन मुस्कराई और सोफे पी विनोद की क़रीब आ क्र उसकी होंठों को चूमा ........... बिलकुल hi पागल हो तुम तो ................. यह कह क्र सोफे सी उठ गए .......... और कप लय क्र किचन मैं चली गए .............
 
अपडेट NO: 23

महीन किचन मैं चाय की बर्तन धू रही थी की बहार विनोद का फ़ोन बजनी लगा .......... और फिर उसकी किसी सी बातें करनी की आवाज़ें अन्य लगीं ............. किचन सी फ़ारिग़ हो क्र महीन बहार आई तो विनोद बोलै .........

विनोद ........ महीन ...... वह नीतू की कॉल थी ........

महीन ...... ओह ाचा ..... क्या कह रही थी ..........

विनोद ....... नीतू और राजीव आ रही हैं यहाँ ........... मुझी बर्थडे विश करनी की लय ...............

महीन ..... ओह्ह ..... कब आ रही हैं ......

विनोद ........ एक बाजी तक ........

महीन ...... kyaaaaaaaaaaa ............ और अब तो 12:30 हो रही हैं ....... इतना शार्ट नोटिस ............

विनोद ....... हाँ मैं न्य बोलै था ....... तो वह बोली की बहार निकली होय हैं और बस इधर hi आ रही हैं ............. तुम जल्दी सी तैयार हो जाओ

महीन .......... तैयार क्या होना है ...... ठीक नहीं लग रही मैं क्या .........

विनोद ........ अछि लग रही हो लकिन चेंज क्र लो ......... कुछ ाचा ड्रेस पहन लो ........

महीन ........ तो फिर क्या पहनों मैं .......... बताओ आप .....

विनोद कुछ सोच की .......... कल वाली साड़ी पहन लो ....... बुहत अछि लगो गई ........

महीन ाहसिता सी चिल्लाई ........... no wayyyyyyyyyyy ........ मैं वह कैसी पहन सकती हों पता है राजीव भी आ रहा है साथ मैं ...... और उस साड़ी का ब्लाउज कितना रेवेलिंग है पता है न तुमको ...........

विनोद ....... हाँ पता है ........ पर कल भी तो पहनी थी न ......

महीन शरमाई ....... वह तो मैं न्य तुम्हारी लय पहनी थी ..........

विनोद .......... और वह पहन की मुझी घायल क्र दया ........ हाहाहा .......

महीन हंसी ............ हहहह .......... और अगर आज वही साड़ी पहन न्य सी राजीव घायल हो गया तो ............. हहहहए ..........

विनोद हंसा .............. होनी दो होता है तो .......... इसी लय तो कह रहा हों की वही साड़ी पहनो ............. राजीव को भी तो पता चली न की मेरी महीन कितनी हॉट है ............. कितना प्यारा जिसम है इसका ......

महीन मुस्करा की आंखें नचाती होइ बोली .............. MERIIIIIIIIIIII MAHEEENNNNNNNNNNNNN ............... वह जी वह ............. एक hi रात मैं क्या तुम्हारी महीन हो गए हों मैं ..............

विनोद हंसा और उसी अपनी बहून मैं भर्ती होय बोलै ........... हाँ तो और क्या ......... अब सी तुम मेरी hi हो ............. यह कहती होय वह एक बात फिर सी महीन की होंठों को चूमनी लगा ......... चाँद लम्हों तक तो महीन न्य विनोद का साथ दया और फिर उस सी अलग होती होइ बोली ............ बस करो ........ मेरी पास टाइम नहीं है तुम्हारी इन मस्तों का ........... वह लोग अन्य वाली हों गए ........... सीरियसली बताओ क्या पहनों ..........

विनोद ...... यार सीरियसली बता रहा हों न की वह साड़ी पहन लो .......

महीन विनोद की आँखों मैं देखती होइ बोली .......... अरे यू सीरियस विनोद ...... ???

विनोद ....... यस 100 % सीरियस

महीन ....... लकिन विनोद सीरियसली उस मैं जिसम बुहत एक्सपोज़ होता है ........... मैं कैसी पहन सकती हों राजीव की सामन्य .........

विनोद ........ महीन कल भी तो बहार पहन की गए थी न ........ सुब लोगो की सामन्य ........... तो फिर राजीव का क्या है ......

महीन ........ वह तो सुब अनजान लोग थय न ........ और राजीव तो जान न्य वाला है ............ नीतू का पति है ....... उसकी सामन्य मुझी पेहनतय होय शर्म आ रही है ...........

विनोद ...... आर्य यार बोल्ड बनो ............ खा नहीं जाय गए वह तुमको ........ बस मैं उसकी एक्सप्रेशंस को देखना चाहता हों की कैसी वह रिस्पांस करता है तुम्हारी खूबसूरत जिसम को देख क्र ...........

महीन शर्मा गए .......... तुम तो पागल हो गए हो .......... पता नहीं क्या सोचें गए वह दोनों मेरी बारी मैं ........

विनोद .......... कुछ नहीं सोचें गए ....... कहाँ है साड़ी पहनो उसी .......

महीन ......... वहीँ होनी है जहाँ उतारी थी रात तुम न्य ........ तुम्हारी बैडरूम मैं ..................... यह कहती होय महीन की चेहरी पी हल्का सा रंग लहरा गया ......... और वह मुस्करा दी ..........

विनोद ..... तो चलो अंदर सी लय लेती हैं साड़ी और ब्लाउज ........

महीन विनोद की बात को समझती होइ बोली ........ जी नहीं ....... मैं नहीं जा रही तुम्हारी बैडरूम मैं ........... खुद hi उठा की लाओ ......... अंदर चली गए न तो बस फिर ................

विनोद हंसनी लगा .............. ाचा ठीक है .......... मैं भी देखता हों कब तक बचती हो मुझ सी ...........

महीन मुस्कराती होइ बोली ....... जब तक बचा जा सकता है तब तक तो बच्चों न ............... ठेहीह ..............

विनोद अपनी बैडरूम मैं गया और महीन की साड़ी, ब्लाउज और उसक पति कोट उठा लाया ............... महीन न्य वह लये और अपनी बैडरूम मई चली गए ............ विनोद भी उसकी पिच्य पिच्य hi था ........... अपनी दूर पी रुक की महीन बोली ............ तुम कहाँ .......... तुम न्य तैयार नहीं होना क्या बर्थडे बॉय ............

विनोद मुस्कराया ............ पहली तुम तैयार हो जाओ फिर मैं भी हो जाओं गए .............

महीन ......... नहीं मैं खुद hi हो जाऊँ गई तैयार ............ तुम्हारी हेल्प की ज़रूरत नहीं है .........

विनोद .......... मैं सिर्फ अंदर बेथ की तुमको देखौं गए बस ........

महीन उसकी तरफ ऊँगली उठा की इशारा करती होइ बोली ........... okay ......... लकिन कोई चाणक्य पनकी नहीं करनी ........... आई समझ .......

विनोद मुस्कराया ........ प्रॉमिस ......

महीन मुस्कराती होइ अपनी बैडरूम मैं आगये और विनोद भी उसकी पिच्य पिच्य ............ अंदर आ की विनोद महीन की बीएड पी चढ़ की बेथ गया बीएड की बैक की साथ अपनी कमर टिक्का की .......... और महीन को देखनी लगा जो की ड्रेसिंग टेबल की सामन्य खरी थी ........... और आंय मैं विनोद को देखती होय शर्मा रही थी ............ जो उसकी बीएड पी लेता होआ था ........... जैसी ........... जैसी उसका पति हो ............

महीन आंय मैं hi विनोद को देखती होइ बोली ............ विनोद प्लीज तुम जाओ यहाँ सी ........... मुझ सी नहीं हो गए तुम्हारी सामन्य ..........

विनोद ....... कुछ नहीं होता न प्लेससे.......

महीन ......... नहीं प्लीज ........... आज अभी जाओ ........... फिर कभी ..........

महीन साड़ी रात विनोद की साथ गुज़ार चुकी थी ....... अब तक 3 बार उस सी छुड़वा भी चुकी थी ........... मगर वह सुब कुछ अंधेरी मैं या बुहत काम लाइट मैं होआ था ......... मगर अभी दिन की वक़त उस की हिम्मत नहीं हो रही थी विनोद की सामन्य अपनी कपड़े उतारनी की .............. विनोद भी उसकी झिझक को समझ रहा था ......... उसनी भी कुछ इसरार नहीं क्या और खामोशी सी अपनी जगा सी उठा ........... महीन की पिच्य आ की खरा होआ ............ और महीन की चेहरी को आंय मैं देखनी लगा ............. दोनों की नज़रें आंय मैं hi मिली होइ थीं ........... महीन की चेहरी पी हलकी सी लाली हो रही थी ......... शर्म सी ........ विनोद न्य महीन की नैक पी अपनी होंठ रख की किश क्या .......... और बोलै ........... इतस okay महीन ........... जैसी तुम कम्फर्टेबले फील करो ..........

यह बोल की विनोद महीन की बैडरूम सी निकल गया ........... और महीन उसी जाता होआ देख रही थी .............. बुहत प्यार सी ............. उसी ाचा लगा था विनोद का इस तरह सी उसका ख्याल करना और उसकी बात मान न ........... विनोद की जांय की बाद महीन न्य अपनी कपड़े उतारनी लगी ............ उस न्य दूर को लॉक करनी की ज़रूरत भी महसूस नहीं की ........... क्यों की उसी विनोद पी ऐतमाद था की वह अब अंदर नहीं आय गए ............

महीन न्य अपनी शर्ट उतार की बीएड पी राखी ........ खुद को आंय मैं देखनी लगी ........... ब्लैक कलर की ब्रस्सिएर उसकी जिसम पर बुहत जांच रही थी ............. और उस मैं सी उसकी गूरी गूरी बूब्स आद्य बहार निकल रही थय .............. बुआहट hi सेक्सी क्लीवेज बना रही थय ............ महीन न्य अपनी हाथ पिच्य लय जा की अपनी ब्रा की हुक खोल की वह भी उतार दी ............. और फिर ब्लाउज उठा की पहन न्य लगी ........... ब्लाउज की हुक्स को अपनी कमर पी लगा की खुद को देखनी लगी ......... उस खूबसूरत और सेक्सी ब्लाउज मैं उसका जिसम और भी निखारा होआ नज़र आ रहा था ....... गोरा गोरा जिसम उस ब्लाउज सी चालक रहा था ........... नंगा नज़र आ रहा था .......... चिकना पेट नंगा था .......... और नाभि भी............ महीन मुस्कराई ........... और फिर अपना पजामा भी उतार दया ........ एक पंतय निकाल की पहनी ...... उस की ऊपर पति कोट पहन लय ........ उसकी दूरी बाँध क्र साड़ी उठा की पहन न्य लगी ........... थोड़ी सी म्हणत की बाद साड़ी भी उसकी जिसम पी एडजस्ट हो गए थी ............. ट्रांसपेरेंट पालू अपनी सीने पी डालनी की बाद भी उसका बूब्स और ब्लाउज साफ़ दिख रही थय ...............

महीन सोचनी लगी ............. पता नहीं क्या सोची गए राजीव मेरी बारी मैं .......... कितना अजीब है न इस तरह का ड्रेस पहन न किसी जान न्य वाले की सामन्य .............. अगर आसिफ या अब्बू मुझी इस साड़ी मई देख लाइन तो मुझी तो मार hi डालें ............... महीन वीर्य सी हंसी .......... मगर अछि भी तो लग रही है न यह साड़ी .............. मुझी पता है की नीतू मंद नहीं क्रय गई ............ और मैं कोनसा राजीव की लय पहन रही हों यह साड़ी ........... यह तो बस विनोद की कहनी पी उसकी लय पहन रही हों ........... उसका दिल रखनी की लय ............... महीन मुस्कराई ........... और फिर मेक उप करनी लगी ........... इतनी मैं दरवाज़ा नॉक होआ ........

महीन ............ एसससससससस ........... ाजाओ ........

विनोद दूर खोल की अंदर आज्ञा .......... महीन को विनोद का यह अंदाज़ भी ाचा लगा ............... वह दिल hi दिल मई सोच रही थी की उसी तो हमेशा एहि सिखाया और बताया गया था बचपन सी hi की हिन्दूओ मर्द कितनी बुरे होती हैं .......... मगर विनोद तो बिलकुल भी वैसा नहीं है .......... कितना सोबर, कितना समझदार, कितना केयरिंग और कितना ाचा है न ............ शायद मुझी ग़लत hi सिखाया गया आज तक ............ महीन अपनी मेक उप मैं बिजी रही ............... विनोद को आंय मैं देखती होय ........ विनोद भी ड्रेस चेंज क्र की आया था ............

विनोद अंदर आ की फिर सी महीन की बीएड पी बेथ गया ......... और महीन को मेक उप कृत्य होय देखनी लगा .......... महीन की बैकलेस ब्लाउज मैं उसकी गोरी गोरी कमर नंगी थी ........... सिर्फ एक छोटा सा स्ट्राप था जो उसकी कमर पी बंधा होआ था ........ और दो स्ट्रैप्स उसकी शोल्डर्स सी नीची आ रही थय .......... उसकी इलावा बाक़ी कमर नंगी थी ............ सुफैद .... चिकनी कमर .......... मस्त लग रही थी ....... महीन उसी देख क्र मुस्करानी लगी ............. क्या देख रही हो ऐसी ........

विनोद ...... देख रहा हों की तुम कितनी हसीं लग रही हो ..........

महीन मुस्कराई ........ जब तुम राजीव को जाताना चाहती हो की मैं ज़्यादा खूबसूरत हों नीतू सी तो फिर कुछ न कुछ तो तैयार होना hi पारी गए न तुम्हारी बात को साबित करनी की लय ...............

विनोद मुस्कराया ............ महीन तुमको कुछ भी ज़रूरत नहीं है मेक उप की तुम उसकी बग़ैर भी सुब सी हसीं हो .................

महीन खुश होती होइ ........... बस करो .......... अब इतनी भी हसीं नहीं हों मैं .............. यह बताओ उनकी लय खाना क्या बनाना है ..........

विनोद अपनी सर पी एक हल्का सा हाथ मारती होय बोलै ....... ओह हो ....... एहि तो पूछनी आया था मैं तुम्हारी रूम मैं और यहाँ आ की तुम्हारी हुसैन मैं खो गया ..............

महीन भी जलतरंग बजाती होय हंस पारी .............

विनोद ....... मैं सोच रहा हों की कुछ बहार सी hi आर्डर क्र देती हैं .....

महीन ........ हाँ ठीक है ........ जो दिल करता है मंगवा लो ........

विनोद न्य मोबाइल सी hi खाना आर्डर क्र दया .......... और महीन भी तैयार हो की आंय की पास hi मुद की विनोद की सामन्य खरी हो गए ........ बीएड की निचली एन्ड की क़रीब ... और मुस्कराती होइ बोली .......... कैसी लग रही हों ........

विनोद ........... क़यामत .............. क़यामत लग रही हो क़यामत .......... बुहत hi खूबसूरत ......... बुहत hi हसीं .......

विनोद मुस्कराया ........ और बीएड पी hi सिरकटा होआ महीन की क़रीब आज्ञा ....... उसकी सैन्य पी पारा होआ उसकी साड़ी का ट्रांसपेरेंट पालू उसकी सीने सी हटाया ........ और उसकी चिकनी सुफैद पेट को नंगा क्र दया ............ और उसकी नंगी कमर को अपनी हाथों मैं लय क्र उसी थोड़ा और अपनी क़रीब खींचा ...... और उसकी पेट पी एक किश कृत्य होय बोलै .......... उउउउउफफ्फ्फ्फ़ महीन ........... बुहत हॉट लग रही हो ...............

विनोद की गरम होंठों सी महीन की मुंह सी सिसकारी निकली ........... ssssssssssssssssss ................. aaaaaaaaaaaahhhhhhh ............... विनोडडडडडडडड .............. देखो न कितना एक्सपोसिंग है न यह ब्लाउज ........... क्या यह ठीक रही गए राजीव की सामन्य ...........

विनोद ........ हाँ बिलकुल ठीक रही गए .............. कुछ नहीं होता ........ कोई कुछ नहीं कही गए .............

महीन विनोद की सर की बलून मैं हाथ फेरती होइ बोली .......... विनोद ........ मैं न्य कभी अपना जिसम ऐसी किसी को नहीं दिखाया .......... मुझी अजीब लग रहा है ................

विनोद ........ कुछ नहीं होता मेरी जान ............ तुम्हें पता है न यह सुब कितना कॉमन है ...... हर लड़की ऐसी hi ड्रेस पहनती है न अब तो इंडिया मैं भी ........

महीन ........... हाँ पर हमारी मई नहीं न ........

विनोद ....... आर्य भूल जाओ तुम क्या हो ........... जो भी हो वह इंडिया मैं थी ........... यहाँ तुम आज़ाद हो ........ बिलकुल आज़ाद ........... जस्ट चिल एंड एन्जॉय ................ यहाँ कोई तुमको जज नहीं क्रय गए .......... कोई तुम पी कमेंट नहीं क्रय गए ........... कोई ऐतराज़ नहीं क्रय गए ...........

महीन मुस्करा दी .......... और झुक की आहिस्ता सी विनोद की सांवले गाल पी एक किश क्र लय अपनी लिपस्टिक लगी होय होंठों सी .............

उसकी होंठों सी हलकी सी लिपस्टिक विनोद की गाल पी लग गए .......... जिसे महीन न्य अपनी ुग्णल्यूं सी उसकी गाल पी hi रगड़ की साफ़ क्र दया ............ इस सुब की बीच विनोद की हाथ अब तक महीन की जिसम की नंगी हिस्सों को सहला रही थय .................

विनोद ........... थैंक्स महीन .............. मेरी ज़िन्दगी मैं रंग भरनी की लय ...............

महीन मुस्कराई .......... और विनोद की आँखों मैं देखती होइ बोली ....... थैंक्स तो यू तू विनोद ............... मेरी लय इतना सुब कुछ करनी की लय .......... मुझी ज़िन्दगी का असल मज़ा देंय की लय ...............

दोनों एक दूसरी मैं ऐसी hi खोय होय थय की अपार्टमेंट की बेल्ल बज उठी ............. दोनों चौंक की अलग होय .......

महीन ........ विनोद तुम दूर खोलो ...... मैं रूम समेत की आती हों ...........

विनोद ........ okay डार्लिंग ............. बोल की विनोद महीन की बैडरूम सी निकल गया ..............

महीन विनोद की डार्लिंग बोलनी पी मुस्करा दी ........... और जल्दी सी अपनी बिखरी होय कपड़े समयतनय लगी .............. चाँद hi मिनट्स मैं उसनी रूम को सेट क्र दया ............ और फिर आंय की सामन्य खरी हो क्र अपनी मेक उप को फाइनल टॉचेस देंय लगी ........
 
इतनी मैं हल्का सा बैडरूम का दरवाज़ा नॉक होआ और अगली hi लम्हे दरवाज़ा खुला और नीतू रूम मैं दाखिल हो गए .......... जैसी hi उसकी नज़र महीन पी पारी तो वह कुश हो गए ..........

नीतू ...... hello महीन ................. गुड डे ........

नीतू महीन की तरफ आई और उसी हुग कृत्य होय hello बोलै ........ फिर वह महीन का जायज़ा लेंय लगी ........

नीतू ....... वववववववव ....... महीन ........ तुम तो कमल लग रही हो इस साड़ी मई ............... मैं न्य कहा था न की बुहत सूट क्रय गई यह साड़ी .......

महीन शरमाई ...... हाँ मगर देखो न कितना रेवेलिंग ब्लाउज है इसका ........... पूरा जिसम तो दिख रहा है ........

नीतू महीन की ब्लाउज मैं सी दिखती होय उसकी नंगी पेट पी हलकी सी चुटकी काट टी होइ बोली ....... हाँ जिसम hi तो दिखाना है न यह ब्लाउज पहन क्र ............. वैसी महीन क्या सुच मैं तुम न्य कल यह साड़ी पहनी थी विनोद की जनम दिन पी ........

महीन न्य शर्माती होय हाँ मई सर हिलाया और नीची देखनी लगी ..........

नीतू न्य महीन की चेहरी को ऊपर उठाया .......... ववव महीन ............ सुच मई ............ मुझी तो यक़ीन hi नहीं हो रहा ............ मैं समझ सकती हों की क्या हालत होइ हो गई विनोद की तुम को देख क्र .............

महीन हंसी ........ उसकी तो जो हालत होनी थी सो होइ पर जो हालत मेरी ख़राब होइ वह ............

नीतू ........ क्या मतलब ............ कुछ होआ क्या तुम दोनों की बीच ........

महीन का चेहरा ब्लश करनी लगा ............... जिस सी नीतू समझ गए की महीन और विनोद की बीच जिस्मानी सम्बन्ध बांध चूका है ........ वह खुश भी होइ और हैरान भी ............... महीन रियली ी can't बेलीवे आईटी की तुम दोनों एक hi दिन मैं सुब कुछ क्र गए .............

महीन .......... हाँ यक़ीन तो मुझी भी नहीं आ रहा .......... पर हो गया ...... बहक गए मैं .......... नहीं कण्ट्रोल रख सकीय खुद पी और ना hi विनोद को रोक सकीय ............. महीन की लेहजी मैं थोड़ा गिल्ट महसूस हो रहा था नीतू को ...........

नीतू फौरन hi महीन की हाथ अपनी हाथों मैं लेती होइ बोली ........... महीन ....... तुमको ज़रा सा भी परेशान होनी की ज़रूरत नहीं है ....... जो भी होआ यह होना hi था ............ हम अपनी जिसम की ज़रूरयत को किल नहीं क्र सकती ............... जो भी होआ है ठीक hi होआ है ..........

महीन नीतू की तरफ देखती होय आहिस्ता सी बोली .......... लकिन वह आसिफ ...........

नीतू ....... आसिफ को क्या होना है ......... कुछ भी नहीं ........ उसकी हैस्यत वही रही गई तुम्हारी लाइफ मैं ........... जब तक की तुम खुद उसी चेंज न करो .............. वह हमेशा तुम्हारा पति और लाइफ पार्टनर रही गए .......... यह सुब तो जस्ट टाइम पास है डिअर ............ जस्ट लाइफ की एन्जॉयमेंट ........ और बिना सोची और बिना खुद को दोषी थराय अपनी लाइफ को एन्जॉय करो ...................

महीन न्य सर झुकती होय हाँ मई सर हिला दया ...........

नीतू ......... यह होइ ना बात ............. तो इसका मतलब यह होआ की मेरी बेस्ट फ्रेंड न्य विनोद की साथ सुहाग रात मना hi ली आखिर ......

महीन का चेहरा शर्म सी लाल होनी लगा .............

नीतू ........... महीन वैसी कितनी बार किआ तुम दोनों न्य ........

महीन शरमाई ........ और आहिस्ता सी बोली ........... तीन बार अब तक .......

नीतू ....... ओह माय गॉड ............. अब खुद hi देख लो की तुम दोनों कितनी प्यासी थय अब तक .............. पता नहीं कैसी दबाय होय थय अपनी अपनी प्यास को यौन इतनी दिंनो सी अकेली एक hi घर मैं रहंय की बावजूद भी .............. और जब सुब कुछ खुला है तो एक hi रात मई तीन बार ............ वैसी हाउ इस विनोद इन बीएड ....... ???

महीन शरमाई ............. जंगली है पूरा ............. हहहहह ........ बुहत दर्द दया उसनी मुझी ..........

नीतू हंसी ........... हहहहह ........... आर्य यार एहि जंगली पैन तो पसंद होता है हम लक्यों को ............... क्या तुमको ाचा नहीं लगा उसका जंगली पैन ............. जिस तरह सी उसनी तुम्हारी जिसम को रोंडा ........

महीन न्य मुस्कराती होय हाँ मैं सर हिला दया ...........

नीतू हंसी ........... और फिर तुम जैसी खूबसूरत हसीना को ऐसी सेक्सी साड़ी मई देख क्र कोनसा मर्द हो गए जो जंगली नहीं बन जाय गए तुम को पानी की लय ................ अभी तो देखना तुमको देख क्र राजीव की क्या हालत होती है .............. हहहहए .............

महीन ........ तो मैं चेंज क्र लून क्या फिर ......... मुझी तो खुद शर्म आ रही है सुच मई ऐसी ड्रेस मई राजीव का सामना करनी मई ...........

नीतू ....... आर्य क्या हो गया है तुमको ............ राजीव है तो क्या होआ .......... हिम्मत करो ........ खुद मई कॉन्फिडेंस लाओ .......... सामना करो उसका इसी ड्रेस मई ............ जब तुम्ही भगवन न्य इतना प्यारा जिसम दया है तो इसको छुपानी का क्या मतलब ............... अपनी लाइफ को एन्जॉय करो ............. और दूसरों को भी एन्जॉय करनी दो ................ चलो आओ बहार चलती हैं ............

दोनों साथ साथ बहार आईं ............ विनोद और राजीव त्रि सीटर सोफे पर बैठी होय थय ....... सामन्य hi टेबल पर एक गिफ्ट पैक मैं व्राप्पेड कोई बोतल राखी होइ थी ...... जो की राजीव और नीतू .. विनोद की लय लाय थय उसका बर्थडे गिफ्ट ......... लकिन महीन को उसका कुछ अंदाज़ा नहीं था की उस मैं कोनसी बोतल हो गई ...... .. महीन न्य झिझकती होय सोफे की पास जा क्र राजीव को hi बोलै .......... वह महीन को ऐसी सेक्सी साड़ी मई देख क्र स्तोत्र सा हो गया ............. जब भी पहली वह महीन सी मिला था तो वह शलवार कमीज मई hi थी .......... मगर आज इस खूबसूरत मुस्लिम लड़की को पहली बार ऐसी सेक्सी साड़ी पहनी होय देख क्र हैरान रह गया था ................ उसकी नज़रें महीन की नंगी हो रही होय जिसम को देख रही थीं ............ कभी उसकी नंगी बाज़ूओं को ....... तो कभी उसकी नंगी हो रही होय सीने को ............ और कभी उसकी नंगी चिकनी पेट को ............ राजीव की नज़रों को खुद की जिसम का जायज़ा लेती होय देख क्र महीन को बैचैनी हो रही थी ............ घबराहट हो रही थी ........... मगर उसकी साथ साथ अपनी हुसैन का एक और मर्द पर इस तरह जादू चलता होआ देख क्र उसी ाचा भी लग रहा था ............ उसी अंदर सी सटिस्फैक्शन फील हो रही थी ............... दिल hi दिल मई खुश हो रही थी ........... और यह ख़ुशी उसकी चेहरी पर हलकी सी मुस्करान की सूरत मई दिख रही थी विनोद और नीतू को ...............

नीतू शरारत सी राजीव सी बोली ............ राजीव ...... इन सी मिलो यह महीन हैं ............ विनोद जी की दुल्हन .......

यह सुनती hi महीन चौंक पारी और नीतू की बाज़ू को ज़ोर सी खेंचा ......... नीतू हंसनी लगी ..........

राजीव ....... ककककककक कयय्यआआअ ....... क्या बोल रही हो नीतू ........ इस आईटी टुरे विनोद ........... राजीव हैरान होती होय विनोद सी बोलै......... विनोद बस मुस्कराता रहा .........

नीतू ...... ही हाँ ........ बिलकुल सुच है ......... और यह दोनों कल रात अपनी सुहाग रात भी मना चुकी हैं ........ बिना किसी को बताय होय ............ हहहह

राजीव ........ वूवववववव .......... यह तो बुहत ज़बरदस्त खबर है ........ और बुहत hi ख़ुशी की ........... कोंग्रटुलतिओन्स विनोद .......... कोंग्रटुलतिओन्स महीन ............ एंड बेस्ट विशेष फॉर योर नई लाइफ फ्रेंड्स ........

महीन शर्म सी ज़मीन मैं गढ़ी जा रही थी ......... उसी समझ नहीं आ रही थी की नीतू को यह सुब राजीव को बतानी की क्या ज़रूरत थी ........ ठीक है उसको नीतू न्य बताना hi था ....... मगर बाद मई बता देती ......... अभी तो चुप रहती न ...........

राजीव ........ आर्य यार विनोद ..... काम आज काम हमीं तो बुला लेती अपनी शादी मैं ........... हम तो दोस्त हैं तुम्हारी ...........

विनोद अब बोलै ...... नहीं नहीं यार .......... कोई शादी वादी नहीं होइ हमारी ...... यह तो बस .......

नीतू ...... हाँ हाँ राजीव ....... कोई शादी नहीं होइ .... बल्कि ीन्हो न्य एक दूसरी को फेरों की बिना hi सुकार क्र लय है .........

राजीव ......... यह तो बुहत अछि बात है ....... जब रहना hi साथ साथ है तो फिर इस सुब मई क्या हर्ज है .......... एहि तो लाइफ है ...... अपनी मर्ज़ी की ........ क्यों नीतू ............

नीतू न्य भी मुस्करा की हाँ मई सर हिला दया ..........

महीन सी वहां ज़्यादा देर रुकना मुश्किल हो रहा था ........... वह कुछ पीनी को लानी का कह क्र किचन की तरफ जांय लगी ............. तो यह फिर सी मुसीबत थी उसकी लय ............. क्यों की अब उसकी गोरी गुर कमर ........ बिलकुल नंगी थी दोनों मर्दों की नज़रों की सामन्य ............. विनोद तो उसकी पूरी जिसम को नंगा देख चूका था ........... तीन बार छोड़ भी चूका था ............ मगर पहली बार ........ महीन की जिसम को इस तरह नंगा देख क्र राजीव की तो हालत ख़राब हो रही थी ........... मगर वह बरी मुश्किल सी खुद पी कण्ट्रोल क्र रहा था ................ महीन किचन मैं चली गए तो नीतू भी उसकी पिच्य पिच्य अंदर आगये .............

नीतू को देखती hi महीन तेज़ी सी बोली ......... नीतू ..... पागल हो क्या तुम ... तुमको क्या ज़रूरत थी अभी सी राजीव जी को बतानी की इस सुब की बारी मैं ...... पता नहीं क्या सोचती हों गए वह मेरी बारी मैं ......

नीतू हंसी ...... आर्य यार ...... हम सुब दोस्त हैं ...... खुली दिल की लोग हैं ...... इन बातून सी कोई किसी को जज नहीं करता ........

महीन ........ पर फिर भी नीतू ........ क्या यह ाचा लगता है .....

नीतू हंसती होइ ........ क्यों ाचा नहीं लगता ......... महीन देखि नहीं थी तुम न्य राजीव की हालत यह बात सुन क्र और तुमको देख क्र ........

महीन भी हंसनी लगी ........... हाँ ....... उनका तो मुंह खुली का खुला hi रह गया था ............

नीतू ....... हाँ तो उसी तो यक़ीन hi नहीं हो रहा था की तुम भी कभी इस तरह की ड्रेसिंग क्र सकती हो ............ ऐसी एक्सपोसिंग एंड रेवेलिंग साड़ी पहन सकती हो ............... लकिन सुच कहां महीन तुम बुहत hi खूबसूरत लग रही हो इस साड़ी मई ............. रियली स्तुन्निंग

महीन मुस्कराई ........ थैंक्स नीतू .......... लकिन सुच बताऊँ तो यह सुब ........ और जो भी मेरी और विनोद की बीच होआ है ...... वह मेरी लये डाइजेस्ट करना अभी भी मुश्किल हो रहा है ............

नीतू महीन की कंधी पी हाथ रखती होइ बोली ....... मैं समझ सकती हों महीन ............ तुम्हारा कन्सेर्वटिवे फॅमिली बैक ग्राउंड ....... और तुम्हारा कल्चर ........... यह सुब कुछ हिन्ड्रन्स तो है तुम्हारी लय ज़रूर ........... लकिन तुमको इन सुब चीज़ो को पिच्य चोरटी होय अपनी दिमाग़ सी निकालती होय अपनी लाइफ को एन्जॉय करनी की लय .......... यहाँ अपनी स्टे को एन्जॉय करनी की लय ाग्य बढ़ना हो गए ............

महीन ........ लकिन नीतू वह विनोद .......... ी मैं तो से ....... डिफरेंस ऑफ़ ..................

नीतू ........ हाँ हाँ मैं समझ रही हों तुम्हारी बात को ........... यह डिफरेंस ऑफ़ फैट्स और कल्चर्स तो ज़रूर है लकिन सुच बताना क्या तुम न्य विनोद की साथ एन्जॉय नहीं क्या .............

महीन न्य आहिस्ता सी हाँ मई सर हिला दया .......

नीतू ....... अब होनेस्त्ली यह भी बताओ की तुमको विनोद की साथ ज़्यादा ाचा लगा या आसिफ की साथ ...........

महीन कुछ ना बोली ........ मगर उसका चेहरा नीतू को उसका जवाब साफ़ बता रहा था .................

नीतू .......... महीन एहि तो चीज़ है .......... की फोर्बिडन फ्रूट इस ऑलवेज मोरे टेस्टी .............. सो जस्ट एन्जॉय ........ विथाउट थिंकिंग एनीथिंग अबाउट अन्य डिफरेंसेस................

महीन ........ और अगर आसिफ को पता चल गया तो .....

नीतू......... अब तक तो नहीं चला न पता ....... तो ाग्य भी नहीं चली गए ...... बस तुम दोनों को थोड़ा और केयरफुल रहना पारी गए ......... बाक़ी सुब ठीक है .........

महीन मुस्कराई दी .........

नीतू ....... महीन आज मुझी तुमको एक बात बतानी है ......

महीन ... हम्म बोलो .......

नीतू न्य अपना फ़ोन ओपन क्या और उस मैं एक मर्द की पिक्चर निकाल की महीन की ाग्य क्र दी ........

महीन उस को देखनी लगी ........ एक 35 इयर्स का मेल था ........ थोड़ी भरी जिसम का ....... ठीक था मगर बुहत हैंडसम नहीं था ...........

महीन उसी देखती होय बोली ........... यह कौन है नीतू .....

नीतू मुस्कराई ........... माय हस्बैंड ......

महीन न्य घूर की नीतू की तरफ देखा और बोली ..... क्या मतलब है तुम्हारा ......

नीतू ..... बता तो रही हों की यह मेरी पति हैं ...... सुनील

महीन अब हैरानी सी बोली ....... और राजीव ........ ??

नीतू मुस्कराई ...... जस्ट बॉय फ्रेंड ............

महीन हैरान हो गए .......... कहना क्या चाहती हो तुम .......

नीतू मुस्कराई ......... यार आईटी इस सिंपल .......... सुनील मेरा पति है जो इंडिया मैं है ........ और मैं यहाँ हों तुम्हारी तरह hi जॉब की लय ........ और यहाँ मैं राजीव की साथ रह रही हों ........ अस बॉय फ्रेंड एंड गर्ल फ्रेंड ...... हे इस नॉट माय हस्बैंड ........

महीन ........ लकिन ......... यह सुब .......

नीतू ........ यह सुब उसी तरह है जैसी तुम्हारी और विनोद की बीच हो चूका है अब ............. नथिंग डिफरेंट और कॉम्प्लिकेटेड .........

महीन ...... लकिन ....... क्या सुनील को पता है इस बात का ......

नीतू .... no वे ....... कुछ भी नहीं पता उसी .......... बस कभी अगर वह ुक चक्कर लगता है मुझी मिलनी की लय तो उन दिंनो मैं राजीव कहीं और शिफ्ट हो जाता है कुछ दिन की लय ......

महीन बस गम शूम सी नीतू को देख रही थी .......... नीतू न्य महीन को अपनी और सुनील की शादी की कुछ पिक्स दिखाएं ........ जिस सी महीन को यक़ीन हो गया की नीतू सुच बोल रही है ...........

नीतू ......... महीन कैसी हैं सुनील .....

महीन ..... ाच्य हैं ..... पर ी थिंक राजीव इस मोरे हैंडसम थान सुनील .... महीन ब्लश क्र गए यह बात कृत्य होय ........

नीतू मुस्कराई ..... हाँ ठीक बोल रही हो तुम ........ इसी लय तो उसकी साथ हों मैं अभी तक ............ वैसी क्या तुमको भी राजीव पसंद तो नहीं आज्ञा कहीं ....... अगर कोई ऐसी वैसी बात है तो हम एक्सचेंज क्र लेती हैं विनोद और राजीव को ............

महीन न्य शर्माती होय उसी थप्पड़ मारा ........... जी नहीं मुझी कोई नहीं करना एक्सचेंज ..........

नीतू महीन को छेड़ती होइ ....... वववव ....... एक hi रात मैं तुम इतनी पोस्सेस्सिवे हो गए हो विनोद को लय की .............

नीतू शर्मा गए ........

नीतू ...... तुम को बतानी का मक़सद यह है की किसी को कुछ पता नहीं चलता आप जो भी यहाँ क्र रही हो ...... इस लय डोंट वोर्री अबाउट अन्य ओने ...... जस्ट एन्जॉय योर लाइफ विथ विनोद ........... एंड विथ एनीवन ेल्स व्होम यू लिखे ......

महीन न्य मुस्करा की नीतू की बाज़ू पी एक थप्पड़ मारा ........ पर यह बात तुम न्य मुझी पहली क्यों नहीं बताई .......

नीतू मुस्कराई ..... महीन की चेहरी को ऊपर करती होइ उसकी आँखों मैं देखती होइ बोली ..... तुम्हारी और विनोद की बीच यह सुब होनी सी पहली मैं तुमको यह बता देती तो तुम मेरी बारी मैं क्या सोचती ?????????? और कभी भी इस रिलेशनशिप को ना समझ सकती और ना hi एक्सेप्ट क्र सकती ............ क्यों ठीक कह रही हों न .........

महीन न्य मुस्करा की नीतू की तरफ देखा ........ और ब्लश कृत्य होय हाँ मैं सर हिला दया ........

नीतू बोली ..... इसी लय तो तुमको बोल रही हों की राजीव तैसे होता है तो होनी दो .... उसी और भी तैसे करो ....... अपनी हुसैन सी ...... जलनी दो उसी तुम्हारी हुसैन की आग मैं ........... और माज़ी लो ....... उसको तैसे करनी की .....

महीन बोली ..... लकिन क्या तुमको बुरा नहीं लगे गए क्या यह सुब ...... की तुम्हारा बॉयफ्रेंड किसी और को देखी .......

नीतू .... no वे ...... एक्चुअली हम दोनों ओपन रिलेशनशिप मई हैं ..... हमें दोनों को आज़ादी है अपनी चॉइस की मुताबिक़ जेएनय की ...... और अपनी मर्ज़ी सी किसी सी भी मिलनी की ........... वे don't गेट जेलस ............

महीन मुस्कराई ......... पर विनोद को तो बुरा लगी गए न ........

नीतू ........ ी don't थिंक सो ....... मुझी नहीं लगता की उसी बुरा लगी गए ..... अगर ऐसा होता तो वह तुमको कभी भी इतनी सेक्सी साड़ी राजीव की सामन्य पहन न्य को नहीं बोलता ...........

महीन ........ hmmmmmmmmmm ........

नीतू ...... सो जस्ट रिलैक्स ...... एंड एन्जॉय .....

महीन हंसी ...... नीतू .... पता नहीं तुम क्या सी क्या बना रही हो मुझी ...... कुछ समझ नहीं आ रही ..........

नीतू .... चोरो इन बातों को और चलो कोल्ड ड्रिंक्स लय क्र चलती हैं उनकी लय ........ और राजीव को तुम खुद सर्वे करना .........

महीन मुस्करा दी ........ और फिर कोल्ड ड्रिंक्स ट्रे मैं रख क्र दोनों बहार ागीण ........... महीन की लये नीतू और राजीव की रिलेशनशिप का यह नया इंकिशाफ़ बुहत बारे झटका था ........ मगर पता नहीं उसी यह सुब ग़लत नहीं लग रहा था अब ..........

महीन राजीव की सामन्य जा की झुकी ..... थोड़ा सा ..... और ट्रे उसकी ाग्य की ..... उसकी झुकनी सी उसकी ब्लाउज की खुले होय गले सी महीन की बूब्स का कुछ हिस्सा और क्लीवेज दिखनी लगा .......... राजीव की नज़रें वहीँ पर थीं ...... यह महीन को भी पता चल रहा था ....... वह शर्मा गए ......... राजीव न्य गिलास उठाया और महीन जल्दी सी उसकी पास सी हैट गए ..... फिर नीतू को सर्वे क्या ..... और विनोद को गिलास दी क्र खुद भी अपना गिलास लय क्र विनोद की पास hi बेथ गए ......... बिना कुछ सोची ........ बिलकुल ग़ैर इरादी तोर पी .......... मगर उसी बाद मई अहसास होआ की वह तो विनोद की साथ आ की ऐसी बेथ गए है जैसी वह उसकी पत्नी हो ....... और वह उसका पति .......... अपनी इस ख्याल पी वह खुद hi मुस्करा दी .......... उसकी इस हरकत को नीतू और राजीव न्य भी महसूस क्र लय था ......... और नीतू उसी देख क्र मुस्करा दी एक आँख मारती होय ........ और महीन शर्मा गए .........

कोल्ड ड्रिंक एन्जॉय कृत्य होय सुब इधर उधर की बातें क्र रही थय ....... और महीन एक पहली दिन की दुल्हन की तरह hi शर्मा रही थी ..........

नीतू ....... राजीव ..... देखो तो एक hi रात मैं महीन की चेहरी पी कैसा ग्लो आ गया है ..... कैसी चमक रही हैं इसकी आंखें .......... विनोद क्या जादू क्या है तुम न्य एक hi रात मई महीन पी ......

विनोद मुस्करा की बोलै ........ जादू तो महीन न्य क्या है मेरी ऊपर ............ अपनी हुसैन सी ............

महीन नीतू और विनोद की बात सुन की शर्मा गए .........

राजीव बोलै ...... विनोद मेरा ख्याल है की तुम दोनों को कुछ दिन की लय आउटिंग पी जाना चाहिए ...........

नीतू फौरन hi बोली .......... तुम्हारा मतलब है की हनीमून ट्रिप ....... वव्वव्वव्वववव ...........

महीन शर्मा गए ........

राजीव ...... हाँ कह इसी होनेमूद ट्रिप भी कह सकती हैं वैसी तो ....... ताकि तुम लोग कुछ दिन अपनी रूटीन सी हैट की गुज़ारनी और एक दूसरी को समझनी का मौका मिल सकी ...........

नीतू ....... हाँ यह बात तो ठीक है ........ विनोद .. महीन तुम लोग फ्राइडे का ऑफ करो और तीन दिन की लय लॉन्ग वीकेंड पी जाओ किसी अछि जगा पी .......... खूब घूमो फिरो और एन्जॉय करो .............

विनोद महीन की तरफ देखती होय ........... नहीं नीतू मेरा नहीं ख्याल की इसकी कोई ऐसी ज़रूरत है ........

नीतू ...... no वे विनोद ...... तुम मेरी फ्रेंड की साथ ऐसा नहीं क्र सकती ........ उसकी लय यह सुब पहला मौका है ....... और वैसी भी जब सी वह यहाँ आई है तो कहीं भी नहीं घूमनी फिरनी .......... अब अगर वह तुम्हारी साथ कम्फर्टेबले हो गए है तो तुमको भी उसको उसका पूरा हक़ देना हो गए ....... महीन न्य अपना सुब कुछ तुम को सोंम्प दया है ....... तो यह हनीमून तो उसका हक़ बनता है न ......... कोई कंजूसी नहीं चले गई ......... कोई एक्सक्यूज़ नहीं चली गए ........ यू लव बर्ड्स शुड एन्जॉय यार ......

महीन नीतू को अपनी हिमायत कृत्य होय देख क्र खुश होइ ....... और मुस्करा की विनोद को देखनी लगी ........... पता नहीं क्यों अंदर सी उसका भी दिल छह रहा था की वह विनोद की साथ कहीं घूमनी की लय जाय ........ एन्जॉय करनी ...........

ऐसी hi गुप् शूप कृत्य होय सुब न्य खाना खाया ........ और फिर नीतू और राजीव दोनों न्य अब जांय का इरादा क्या ........ महीन और विनोद दोनों hi उनको सी ऑफ करनी दूर तक आय .......... चरों न्य हैंड शेक क्या ....... महीन को राजीव सी भी हाथ मिलाना पारा ........ उनकी जांय की बाद विनोद न्य दरवाज़ा लॉक क्या ........... महीन टेबल की तरफ जांय लगी ............ विनोद न्य उसी बाज़ू सी पाकर की अपनी तरफ खींच लय ....... और अपनी सैन्य सी लगा की उसकी होंठों पी अपनी होंठ रख डाई ........ महीन मुस्कराती होइ उसकी बाज़ूओं मैं कसमसानी लगी ...........

महीन ....... चोरो विनोद क्या हो गया है .......... फिर सी शुरू हो गए हो तुम ........

विनोद ....... महीन सुबह सी तुमको चोअ तक नहीं है मैं न्य ........ एक किश भी नहीं करनी दया ............ प्लीज एक किश तो लेनी दो ........

महीन को विनोद का यह प्यार भरा अंदाज़ ाचा लग रहा था ....... उसनी भी अपनी मज़ाहिमत तर्क क्र दी .......... किश करनी मैं विनोद का साथ देंय लगी ............ विनोद न्य महीन की होंठों को चूमना शुरू क्र दया ....... और उसकी निचली होंठ को अपनी होंठों मैं लय क्र चूसनी लगा ...... आहिस्ता आहिस्ता ....... और महीन न्य भी विनोद की ऊपर वाले होंठ को अपनी होंठों मैं दबा लय ............ विनोद की हाथ महीन की नंगी कमर को सहला रही थय ........ विनोद की परफ्यूम की खुसबू महीन की साँसों मैं उतर रही थी ........... वह एक बार फिर सी विनोद की बहून मैं पिघलनी लगी थी ........... उसकी साथ चिपकनी लगी थी ........ उसकी किश मैं उसका साथ दी रही थी ................ विनोद की जुबां महीन की मुंह की अंदर थी ..... और वह उसी खुद सी hi चूसनी लगी थी ........... उसी ाचा लग रहा था विनोद की मुंह की थूक का अपनी अंदर अहसास ........... एक hi दिन मई महीन को विनोद की छेद चाँद और उसका प्यार ाचा लगनी लगा था ........... वह यह भूल चुकी होइ थी की विनोद उस सी अलग कल्चर और रेलगिओं का है ............. एक ऐसी रेलगिओं का जिस की साथ उसकी घर वालों न्य हमेशा नफरत करना सिखाया था ........... मगर विनोद वैसा नहीं था जैसी उसी उन की बारी मैं बताया जाता रहा था .......... वह विनोद की साथ लिपटी जा रही थी ..........

कुछ देर की बाद महीन विनोद सी अलग होइ .......... बस करो विनोद ........ प्लीज काम तो मुकमल करनी दो किचन समयतनय का ...........

विनोद न्य एक आखरी बार महीन की गाल को चूमा और उसी चोर दया ........ महीन न्य विनोद की नोज को पाकर की खींचा और मुस्कराती होइ बोली ....... दिल नहीं भरता क्या तुम्हारा ...........

विनोद मुस्कराया ........... तुम सी तो कभी भी नहीं भारी गए डार्लिंग .......

महीन मुस्कराई और अपनी बैडरूम की तरफ जांय लगी ...........

विनोद बोलै ........ कहाँ जा रही हो ..........

महीन उसकी तरफ देख की बोली .......... अपनी रूम मई ......... चेंज करनी ..........

विनोद न्य okay बोलै और लाउन्ज की टेबल की तरफ बढ़ गया ........... महीन अपनी रूम मई गए और अपनी साड़ी उतार की एक लाउन्ज वियर पहन लय ......... फुल लेंथ पजामा और शर्ट ........... अपनी बलून की पोनी टेल बनाई .......... और फिर अपनी रूम सी बहार आगये ......... विनोद टेबल सी तमाम बर्तन समेत चूका होआ था ......... महीन मुस्कराती होइ किचन मैं गए तो विनोद वहां बार्टन धू रहा था ........ महीन उसी बोली ........ हटो आप मैं धूति हों ........ बस करो आप ......

विनोद ...... नहीं बस ख़तम हो गए हैं ......... तुम चाय बना लो उतनी देर मैं ...........

महीन न्य चाय का पानी रखा और फिर विनोद की पास खरी हो की उसी देखनी लगी ............ आसिफ उसकी साथ किचन का काम नहीं करवाता था ......... मगर विनोद पहली दिन सी उसका साथ देता आया था किचन मैं ....... और अब उसी विनोद की यह आदत और भी अछि लगनी लगी थी ........... वह मुस्करा की विनोद को देख रही थी ............. चाय बनाती होय ............ दोनों एक साथ hi फ़ारिग़ होय अपनी अपनी काम सी ............. विनोद बहार चला गया .......... और महीन चाय मग्स मैं डालनी लगी ................ महीन चाय लय कर लाउन्ज मई आई तो विनोद नज़र नहीं आ रहा था ......... वह समझ गए की विनोद अपनी रूम मई हो गए ............. महीन न्य टाइम देखा तो 9:30 पं हो रही थय ........... वह चाय की मग लये होय विनोद की बैडरूम की तरफ बढ़ गए ...........
 
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महीन
 
अपडेट NO: 24

महीन विनोद की बैडरूम की दरवाज़ी पी रुक गए .......... अंदर जांय की ख्याल सी उसका दिल फिर सी ज़ोर ज़ोर सी धरकनी लगा .......... क्यों की वह जानती थी की उसकी अंदर जांय का क्या मतलब हो गए ....... और अंदर जांय पर विनोद उसकी साथ क्या क्रय गए ............. यह सुब सोचती होय महीन की जिसम मैं लज़्ज़त की एक लहर सी दौड़ गए ........... और वह मुस्करानी लगी ..... मगर यह सुब बातें उसकी अंदर जांय की िरादय को ना रोक सकीं .......... क्यों की वह तो अब खुद उसी लज़्ज़त मैं डूब जाना चाहती थी एक बार फिर सी...... फिर सी विनोद की बहून मैं खू जाना चाहती थी ............. उसनी मुस्कराती होय दूर पी नॉक क्या .......... और फिर दरवाज़ा खोल क्र विनोद की बैडरूम मैं दाखिल हो गए ....... विनोद बीएड पी लेता होआ था ........ और अपना मोबाइल देख रहा था ..........

महीन को अंदर आता होआ देख क्र बोलै .......... महीन तुमको अब नॉक क्र की अन्य की ज़रूरत नहीं है ........... तुम ऐसी hi आ सकती हो ............

महीन मुस्करा दी ............ और विनोद की बीएड की क़रीब आ कर चाय का मग उसकी तरफ बढ़ा दया ........... विनोद न्य मग लय क्र अपनी साइड की टेबल पी रख दया .............. और महीन को बीएड पर अपनी क़रीब बेथनी का इशारा क्या ..............

महीन मुस्कराई ........... वह किस लये ..........

विनोद उसी आँख मारती होय बोलै ...... बातें करें गए चाय पीती होय और क्या ......

महीन शरारत सी उसकी तरफ देखती होइ बोली ........ पक्का न ...... सिर्फ बातें करें गए न ............

विनोद हंस पारा .......

महीन न्य भी हंसती होय अपना चाय का मग साइड टेबल पी रखा और बीएड पी बेथ गए .......... बीएड की बैक सी अपनी कमर लगा क्र ........ विनोद की बिलकुल बराबर मैं ....... जैसी दो पति पत्नी एक साथ बीएड पी बैठी हों ......... विनोद महीन की तरफ देख रहा था ....... महीन न्य शर्माती होय अपना चाय का कप उठाया और उसकी सिप लेनी लगी ............ विनोद भी अपना मग उठा क्र चाय पीनी लगा ........ महीन को इस तरह सी विनोद की साथ बैठना ाचा लग रहा था .......... बिलकुल ऐसी जैसी फील हो रहा था उसी जैसी विनोद hi उसका पति हो ........... वह बुहत hi नाज़ की साथ और बुहत hi प्यार की साथ विनोद को देख रही थी .......

विनोद ............ महीन .............. ???

महीन ........... हम्म्म ........

विनोद ........... महीन आप को यह सुब बुरा तो नहीं लगा न जो कल सी हमारी बीच होआ है .............

महीन नीची सर झुकाय अपनी मग मई देख रही थी .......... दिल hi दिल मई बोली ........... पागल ........ अगर बुरा लगता तो क्या इस वक़त मैं तुम्हारी बैडरूम मैं ....... तुम्हारी बीएड पी .......... तुम्हारी पास बैठी होती ............... मगर वह बोली ...........

महीन ........ विनोद ......... बुरा ना भी लगी फिर भी यह सुब ठीक तो नहीं है न ..............

विनोद महीन की तरफ देखती होय बोलै .......... लकिन इस मैं ग़लत भी क्या है ........... ????? तुमको नीतू न्य भी तो बता दया है अपनी और राजीव की बारी मैं ........... और फिर यहाँ इस सुब को बुरा नहीं समझा जाता महीन .......

महीन ......... लकिन सुब एक ग़लत चीज़ को ठीक समझें तो वह ठीक तो नहीं हो जाती न .............

विनोद ............. ठीक है महीन ............ अगर आप की यही खयालात हैं तो फिर मैं कुछ नहीं कहूँ गए आप को ............ विनोद की लेहजी मैं थोड़ी मायूसी थी ............

महीन उसकी लेहजी को भानमप गए थी ........... जल्दी सी बोली ............ मेरा यह मतलब नहीं था .......... मुझी भी यह सुब ाचा लगा तो आप की साथ हों न अब तक ........... लकिन आसिफ और प्रिय का क्या .......... अगर उनको पता चला तो .............

विनोद न्य हाथ बढ़ा की महीन का हाथ अपनी हाथ मई लय लय और बोलै ............ ना उन दोनों को कुछ हो गए ........ और ना hi उन दोनों को पता चली गए .............. अब तक भी तो हम न्य उन सी बुहत कुछ छुपाया होआ है न ..............

महीन ............. हम्म्म्म .......... लकिन विनोद ....... जो भी फिजिकल रिलेशन होआ है हमारी बीच ........ क्या सुच मई वह सुब नार्मल लगता है तुमको .............. महीन उसकी आँखों मैं देखती होइ बोली ........

विनोद ........... हाँ यह सुब नार्मल है .......... हमारी ज़रूरत है ........ और जैसी हम दोनों यहाँ एक साथ रह रही थय तो यह सुब तो होना hi था न एक न एक दिन ........... आखिर हम दोनों एडल्ट हैं ........... जवान हैं .......... कब तक अपनी प्यास को दबा सकती थय ........ तुम एक बुहत ज़्यादा मजहबी घराण्य की बुहत स्ट्रिक्ट माहोल मैं रही हो इसी लय तुमको यह सुब अजीब लग रहा है ......... लकिन याद रखो हम अपनी अपनी मजहब की बासी होनी सी पहली इंसान हैं ....... और हमारी जिस्मों की ज़ररयात हैं ........... जिनका पूरा होना ज़रूरी होता है ......... अब नीतू और राजीव को hi देख लो तुम ...........

महीन हंसी ........... उनकी तो बात hi ना करो न आप .......... वह तो है hi बिहाराम ...........

विनोद हंसा ............. हहहहह ..... क्यों क्या होआ

महीन ....... देखा नहीं था कैसी उसनी राजीव की सामन्य सुब कुछ बोल दया था हमारी बारी मैं ........... मुझी तो बुहत hi शर्मिंदगी हो रही थी ..............

विनोद हंसा ........... हाहाहाहा ....... हाँ यह तो है ........ बुहत ओपन माइंडेड और नॉन सतोपबले है नीतू ............

महीन .......... पता नहीं क्या क्या सोचता हो गए राजीव मेरी बारी मैं ............

विनोद उसी तैसे कृत्य होय बोलै ......... जो वह सोच रहा था तुम्हारी बारी मैं वह तो वैसी उसकी चेहरी सी hi दिख रहा था ..........

महीन ब्लश करती होइ ........... क्या दिख रहा था ...........

विनोद ........ पागल हो रहा था वह तुमको देख क्र ..........

महीन विनोद की थिगह पी हल्का सा थप्पड़ मारती होइ बोली ........ तुम न्य hi बोलै था मुझी वह साड़ी पहन न्य को ........ कहा भी था मैं न्य की वह नहीं पहन नई ........

विनोद हंसती होय ........ आर्य यार तो फिर क्या हो गया ........... फ्रेंड्स हैं वह हमारी ............ कुछ नहीं होता .......... सुब चलता है दोस्तों मैं ...........

महीन ........... शर्म तो नहीं आती न तुमको भी ........... तुम भी उनकी साथ hi शामिल हो गए हो ......... जाओ मुझी नहीं करनी तुम सी कोई भी बात .......... जा रही हों मैं अपनी बैडरूम मैं ........... महीन भी उसी तैसे करती होइ बोली ............

विनोद न्य फौरन hi उसका हाथ पकड़ा और उसी अपनी क़रीब खींच लय ......... अपनी साथ लगा लय ........... महीन डार्लिंग अब सी तुम्हारा बैडरूम एहि है ................. और तुम मेरी पास hi सोया करो गई ..........

महीन हंसी ........... जी नहीं ............. मुझी नहीं सोना तुम्हारी पास ..........

मगर विनोद न्य उसकी बात को पूरा होनी नहीं दया और उसकी होंठों पी अपनी होंठ रख की उसी किश करनी लगा ........ महीन हलकी मज़ाहिमत क्र रही थी .......... मगर उसी विनोद की बहून और उसकी होंठों का लमस ाचा लग रहा था .......... वह भी आहिस्ता ाहसिता विनोद का साथ देंय लगी थी ....... उसकी होंठों को चूमती होय ............. विनोद न्य अपनी जुबां महीन की मुंह की अंदर डाली तो महीन उसी चूसनी लगी ............. विनोद का एक हाथ महीन की बूब्स पर आज्ञा .......... और वह उसी उसकी शर्ट की ऊपर सी hi सहलानी लगा ........... ाहसिता ाहसिता दबानी लगा ............. महीन भी गरम होनी लगी थी ........ उसकी सांसें तेज़ होनी लगी थीं .............. वह अब पूरी तरह सी विनोद का साथ दी रही थी ........... उसकी सांस फूलनी लगी थी ............

कोई पांच मिनट तक बिना रुकी ...... बिना एक दूसरी सी अलग होय दोनों किश कृत्य रही ..... विनोद न्य अपनी जुबां महीन की मुंह मैं दाल दी ...... उसकी होंठों की बीच .... जैसी महुँ न्य चूसना शुरू क्र दया ........ विनोद की जुबां सी उसका सलीवा महीन की मुंह मैं जा रहा था ....... जैसी वह अपनी हलक़ सी नीची उतारी जा रही थी ..... बिना कुछ भी सोचे ..... बिना उसको ग़लत समझी होय ........... फिर दोनों सांस लेनी की लय अलग होय तो महीन आहिस्ता सी बोली ............. नहीं विनोद प्लीज आज नहीं .............

विनोद उसकी गाल पर किश कृत्य होय बोलै ........... क्यों मेरी जान ...... आज क्यों नहीं ...........

महीन शर्माती होइ .......... दर्द हो रहा है अभी भी ............

विनोद मुस्कराया ............ ाचा अब पैन नहीं करों गए .............

महीन ........ जी नहीं .......... पता है मुझी जैसी कृत्य हो तुम ...........

विनोद ....... कैसी करता हों मैं जी ........ बताना ज़रा ........

महीन उसकी तरफ देखती होइ बोली ....... जंगलों की तरह ......

विनोद उसी तैसे करनी की लय बोलै ...... ओह्ह्ह हूँ ........ मुझी नहीं पता था की तुम न्य जंगलों की साथ भी क्या होआ है ........

महीन उसकी बात पी हंस पारी और उसकी ऊपर चढ़ की उस पी घूँसी मारण्य लगी ......... प्यार सी अपना गुस्सा दिखाती होइ ........ अभी बताती हों तुमको ........ रुको ज़रा ........

महीन उस पी घूँसी मार रही थी और वह हंस रहा था ...... महीन भी हंस रही थी .......

विनोद ............. ाचा ाचा बाबा ठीक है जैसी तुम बोलो गई वैसी hi करों गए ...... और जब बोलो गई तब करों गए ........ बस अब ............ लकिन सो गई तो मेरी पास hi न ...........

महीन ........ अगर तुम मुझी तंग ना करनी का प्रॉमिस करो तो ............

विनोद मुस्कराया .......... हाँ पक्का प्रॉमिस ............

महीन भी हंस पारी .......... विनोद न्य जल्दी सी उठ क्र लाइट ऑफ क्र दी ....... और नाईट बल्ब ों क्र दया ............. और बीएड पी आज्ञा महीन की पास ........... महीन उसकी फुर्तीओं को देख रही थी ............ और मुस्करा रही थी ................ महीन बीएड पी सीढ़ी हो की लेट गए ........ और विनोद भी उसकी बिलकुल साथ आ की लेट गया ........ अपना बाज़ू उसकी पेट पी रख की उस सी लिपट की .............
 
विनोद ........... थोड़ा तो टच क्र hi सकता हों न ...........

महीन सिर्फ मुस्करा दी ........ सिर्फ टच ...... और कुछ नहीं ......

विनोद बातें कृत्य होय महीन की सैन्य की उभारों को सहलानी लगा ....... उन पी हाथ पहिरण्य लगा ............. आहिस्ता ाहसिता महीन की नाईट शर्ट की बटन खोलनी शुरू क्र डाई ............. महीन न्य उसी नहीं रोका ......... विनोद न्य ऊपर की बटन खोली और अपना हाथ महीन की नाईट शर्ट की अंदर दाल की उसकी बिना ब्रस्सिएर की बूब्स पर रख दया ........... और उनको सहलानी लगा ............. महीन को भी ाचा लग रहा था इस तरह सी विनोद की साथ लेटना और उसका अपनी बूब्स और जिसम को सहलाना ........... विनोद उसकी बिलकुल साथ लग की लेता होआ था ......... अपनी टांग विनोद न्य महीन की तइस की ऊपर रख दी होइ थी ........ और महीन को विनोद का लुंड भी अकर्ता होआ उसकी थिगह पी महसूस हो रहा था ............ विनोद की लुंड का अहसास भी महीन को ाचा लग रहा था ........... और उसी गर्म क्र रहा था ............ उसकी जिसम और दिल मैं फिर सी हलचल सी पैदा क्र रहा था .......... विनोद का घुटना महीन की छूट की उभार पी था ....... जैसी वह आहिस्ता आहिस्ता अपनी घुटनी सी रगड़ रहा था ......... और महीन की छूट भी आहिस्ता आहिस्ता गीली हो रही थी

विनोद ............ महीन फिर नीतू की सुग्गेस्टिव की बारी मई क्या ख्याल है ..............

महीन ......... कोनसी सुग्गेस्टिव ............

विनोद मुस्करा की ........ वह हनीमून ट्रिप की .......

महीन शरमाई ............. यह कोई ाचा लगी गए क्या जब सुब को पता चली गए ऑफिस मई की हम कहाँ जा रही हैं .............

विनोद ........ वह तो नीतू न्य कल hi सुब को बता hi देना है ..... वह तो रुकनी वाली नहीं है ............ हाहाहा ............

महीन ....... बुहत hi बी शर्म लड़की है वैसी यह नीतू ......

विनोद ...... लकिन उसकी तजवीज़ तो अछि है ....... मेरा भी दिल क्र रहा है की तुम्हारी साथ कुछ वक़त गुज़ारों ...... एक साथ घूमें ...... सैर करें ..... कितना ाचा लगी गए न ........... क्या तुमको मेरी साथ जाना ाचा नहीं लग रहा .......

महीन भी सोचती होइ ......... नहीं नहीं ......... यह बात नहीं है ....... मुझी भी ाचा लगी गए आप की साथ जाना ........ लकिन मुझी सुब की बातून का ख्याल आ रहा है न ..........

विनोद महीन की गाल को किश कृत्य होय बोलै ........ यहाँ किसी को कुछ ऐतराज़ नहीं होता डार्लिंग ....... यह कोई इंडिया नहीं है ......... देखना सुब लोग हमारी इस नै फ्रेंडशिप को अप्प्रेसियते hi करें गए ..........

महीन विनोद की तरफ देख क्र मुस्करा दी ............. ठीक है जैसी आप को ाचा लगी .........

गूदडडडडडड ........ यह होइ न बात ...... यह कहती होय विनोद न्य महीन को अपनी तरफ टर्न क्या और उसी अपनी बहून मैं भर की अपनी सीने सी लगा लय और उसकी होंठों पी अपनी होंठ रख डाई ............ और उसी किश करनी लगा .......... महीन भी मुस्कराती होइ विनोद का साथ देंय लगी ............ उसनी खुद सी hi अपनी जुबां विनोद की होंठों की अंदर दाल दी ...... और वह उसी चूसनी लगा ........ अपनी हाथ को महीन की नंगी कमर पी लय जा की सहलाती होय .... उसकी नाईट शर्ट की नीची सी ............ महीन का हाथ भी विनोद की नंगी कमर पी था ....... वह उसकी जिसम को सहला रही थी ....... और उसकी मज़बूत मसल्स को फील क्र रही थी ........ अपनी नरम नरम हाथों की साथ .......... दोनों की होंठ आपस मैं जुड़े होय थय और उनको चूस रही थय ......... नीची विनोद का लुंड खरा हो कर महीन की छूट सी टकरा रहा था ......... महीन की छूट गीली होती जा रही थी ........... गरम होती जा रही थी ............ वह खुद भी आहिस्ता आहिस्ता अपनी छूट को विनोद की लुंड सी रगड़ रही थी ........ खुद को रोक नहीं पा रही थी .............

कुछ देर की बाद महीन न्य अपनी होंठों को हटाया ..... और हंम्पटी होइ सीढ़ी हो क्र लेट गए ...... लम्बी लम्बी सांस लेनी लगी ........ उसकी सांसें और जज़्बात फिर सी बेहकनी लगी थय ............ विनोद न्य महीन की तरफ hi करवट ली होइ थी ........ उसनी महीन की सैन्य पर सी उसकी खुली होइ शर्ट को हटाया और नाईट बल्ब की हलकी हलकी रौशनी मैं उसकी सैन्य की उभारों को नंगा क्र दया ............ aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ............ महीन की मुंह सी आवाज़ निकली ........

विनोद महीन की बूब्स को देखनी लगा .......... बिना उनको चूय ...... जब कुछ देर तक वह कुछ नहीं बोलै तो महीन बोली .......... क्या होआ ..... पहली बार देख रही हो क्या ..........

विनोद ..... महीन बुहत मस्त बूब्स हैं तुम्हारी क़सम सी .... कैसी तन की खरी हैं ...... और इनकी ऊपर गुलाबी निप्पल्स ........... क्या दिलकश मंज़र है यह ........ महीन शर्मा गए ......... और विनोद न्य आहिस्ता सी अपनी हाथ को महीन की सीने और उसकी बूब्स पर फैरना शुरू क्र दया ......... उनको महसूस करनी लगा ........ सहलानी लगा ........ उनकी निप्पल्स को ाहसिता आहिस्ता मसलनि लगा .......... फिर महीन की खुली होइ नाईट शर्ट को और भी हटाती होय बोलै ....... महीन इसी उतार दो प्लीज ..........

महीन न्य मुस्करा क्र विनोद की तरफ देखा ....... no वे ..... मैं न्य बोलै था न कुछ नहीं करना आज ........

विनोद महीन की शर्ट को उसकी कन्धों सी नीची कृत्य होय बोलै ........ लकिन बिना कपड़ों की तो मेरी पास लेट तो सकती हो न ...........

महीन न्य उठ क्र अपनी शर्ट उतार दी .......... आहिस्ता ाहसिता तुम फिर सी वही सुब कुछ करनी जा रही हो ........... वह मुस्कराई .......... और दोबारा लेट गए विनोद की पास ....... बिना शर्ट की ........ सिर्फ एक पजामा पहनी होय ..... अपना नंगा ऊपरी जिसम विनोद की नंगे जिसम की साथ चिपकाती होय ........

विनोद भी मुस्करया और महीन की नंगी शोल्डर को चूमनी लगा ......... बुहत मुलायम और चिकना जिसम है तुम्हारा महीन ............ वह बोलै ....... महीन मुस्करा दी............ विनोद न्य महीन की बाज़ू को ऊपर क्या ..... अब महीन की बिलकुल साफ़ .... चिकनी आर्मपिट विनोद की सामन्य थी ....... वह उसकी सफाई और खूबसूरती को देख क्र दांग रह गया ........... आहिस्ता सी अपना हाथ वह रखा और उसकी चिकनी पैन को महसूस करनी लगा .......... वहां उंगलयां फैरती होय ......... महीन को ाचा लग रहा था ........... विनोद न्य आहिस्ता सी अपनी होंठ महीन की आर्मपिट मैं रखी और उसी चूम लय ........

ssssssssssssssssss ......... aaaaaaaaaaahhhhhh ........ विनोद यह क्या क्र रही हो ......

विनोद ........ किश क्र रहा हों यहाँ ......

महीन ......... यहाँ कोण किश करता है .........

विनोद ....... तुम्हारी जितनी चिकनी हो यह जगा तो कौन किश कए बिना रह सकता है यहाँ पी ........... महीन मुस्करा दी ........

विनोद अब महीन की आर्मपिट को किश क्र रहा था और दूसरी बाज़ू की नीची अपना हाथ फेर रहा था .......... विनोद न्य अपनी जुबां निकाली और महीन की आर्मपिट मई अपनी जुबां पहिरण्य लगा ............ oooooooooooooooooooo hhhhhhhhhhhhh aaaaahhhhhhhhhhhhh ............... महीन की होंठों सी आवाज़ निकली मगर उसनी विनोद को नहीं रोका ........... विनोद महीन की आर्मपिट को चैतन्य लगा ......... उसी बुहत ाचा लग रहा था महीन की चिकनी बलून सी बग़ैर आर्मपिट को चाटना ....... उसी किश करना ............. महीन को भी मज़ा आ रहा था ...... लज़्ज़त की लहरें उसकी जिसम मई दौड़ रही थीं ............ उसका जिसम गरम हो रहा था ........... छूट गीली हो रही थी ............ विनोद कभी उसकी बग़लों मैं अपनी जुबां पहिरण्य लगता और कभी अपनी हाथ सी उनको फील करनी लगता ...... वहां उसी ज़रा सा भी बलून का अहसास नहीं हो रहा था ..........

विनोद ............ महीन .....

महीन ........ हम्म्म्म

विनोद ......... महीन तुम्हारी यहाँ पी बाल नहीं आती क्या .....

महीन मुस्कराई और शरमाई ......... आती हैं ...... क्यों नहीं आती .......

विनोद ...... लकिन यह तो बिलकुल साफ़ हैं .......... जैसी कभी यहाँ पी बाल आय hi न हों ....... तुम्हारी अंडर आर्म्स मैं .....

महीन मुस्कराई ....... साफ़ कए हैं बुद्धू ............ बुहत लाइट बाल होती हैं मेरी ........... इसी लय लग रहा है तुमको ............

विनोद शरारत सी महीन की छूट को छूती होय बोलै ........... यहां भी बुहत लाइट होती हैं क्या ..........

महीन हंसी ....... जब वहां आईं गए तो देख लेना खुद hi ........

विनोद न्य अपना दूसरा हाथ नीची लय जा की महीन की पजामी की ऊपर सी उकसी छूट पर रख दया था ............ aaaaaaaaaaahhhhhhhhh .......... साथ hi महीन की सिसकारी निकल गए .............. विनोद महीन की पेममय की ऊपर सी hi उसकी छूट को सहलानी लगा .......... उसकी छूट की लकीर पी अपनी ऊँगली पहिरण्य लगा .......... महीन सिसकंय लगी ...... उसनी अपना हाथ विनोद की हाथ पी रखा उसकी हाथ को हटानी की लय ........ मगर विनोद न्य उसका हाथ पाकर की हटाया और उसी अपनी तरफ लय जा की अपनी लुंड की ऊपर रख दया ................. अपनी कॉटन शॉर्ट्स की ऊपर सी .......... अपनी एकराय होय डांडी जैसी लौड़े पर .......... मोटे और तगड़े लुंड पी .............
 
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