- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 94,144
अपडेट NO: 14
नेक्स्ट मॉर्निंग महीन उठी और अपनी रूम सी बहार आई ......... विनोद अभी नहीं उठा था ...... महीन जल्दी सी वाशरूम मैं गए और नहा क्र विनोद की hi शॉर्ट्स और अपनी शर्ट पहन क्र बहार आई तो देखा की विनोद अपनी छोटी सी मंदिर की सामन्य खरा होआ पूजा क्र रहा है ...... और टीवी पर बुहत hi मधुर आवाज़ मैं भजन चल रही हैं ...... जिनकी आवाज़ पूरी घर मैं गूँज रही थी ............ महीन मुस्कराई और अपनी गीले बलून की साथ hi विनोद की क़रीब सी गुज़रती होइ किचन मैं आगये .............. और नाश्ता बनानी लगी .......... घर मैं भजन की मधुर आवाज़ गूँज रही थी ....... ऐसी आवाज़ें महीन न्य कभी भी अपनी घर मैं नहीं सुनी थीं ........ ना hi कभी कोई दिलचस्पी थी उसको या उसकी फॅमिली को दूसरी फेथ की इन सुब चीज़ों सी .......... मगर पता नहीं क्यों महीन को ऐसा महसूस हो रहा था की जैसी पूरी घर माँ शान्ति और सुकून की लहर दौड़ रही हो ............ महीन को पता भी नहीं चला की कब वह अपना काम कृत्य होय भजन की आवाज़ की ले मैं आहिस्ता आहिस्ता हिलनी लगी ......... उसी अपन ाजिसम और दिमाग़ बुहत हल्का होता होआ महसूस हो रहा था .................. मगर अपना काम कृत्य होय उसका दिमाग़ उन सुब की तरफ नहीं था ............. इतनी मैं विनोद किचन की दूर पी आया ......
महीन न्य उसी देखा ........ ाजाओ जल्दी नाश्ता तैयार है बस ...
विनोद ......... महीन मैं नहंय जा रहा हों बस अभी आया ........ और तुम्हारी लये पार्षद वहीँ रखा है ........ लय लेना
महीन का जवाब लये बिना hi विनोद नहानी जा चूका होआ था ....... महीन नास्ति की प्लेट्स लय क्र बहार आई ....... और उनको टेबल पी रख दया .... वापिस जाती होय उसकी नज़र गणेश जी की मूर्ती वाली शेल्फ पर पारी .......... जब उसकी पास सी गुज़र रही थी ........ महीन की नज़र आरती वाली थाली पी गए ...... जिस मैं दया जल रहा था ...... कुछ फूल और एक लाडू रखा होआ था .......... महीन की क़दम वहीँ रुक गए ........... गणेश जी की सामन्य ...... भजन की मधुर आवाज़ें उसकी कानों मैं रूस घुल रही थीं ........ महीन न्य गणेश जी की मूर्ती को देखती होय आहिस्ता सी अपना हाथ बढ़ाया ........ और वह लाडू उठा लय ......... और गणेश जी की मूर्ती की तरफ देखती होय ....... बिना कुछ भी सोचे ..... वह लाडू कहानी लगी ........ दूसरी बाईट मैं लाडू मुंह मैं दाल की वह किचन की तरफ बढ़ गए ...........
चाय की कप ला क्र टेबल पर बेथ गए और विनोद का वेट करनी लगी ...... टीवी पर चल रही होय भजन को सुनती और देखती होय ......... इतनी मैं विनोद बाथरूम सी बहार निकला ... उसनी शॉर्ट्स पहने होय थय और अपनी बलून को अपनी टॉवल सी ड्राई क्र रहा था ..... वह अपनी बैडरूम की तरफ बढ़ा तो महीन न्य आवाज़ दी ....
महीन ... विनोद....... पहली नाश्ता क्र लो ....... ठंडा हो रहा है
विनोद न्य महीन की आवाज़ सुनी और ऐसी hi उसकी तरफ आज्ञा ........ टॉवल सोफे पर फेंका और सिर्फ शॉर्ट्स पहनी होय hi आ क्र दिंनिंग टेबल पर बेथ गया ........ महीन उसकी ऊपरी जिसम को देख क्र घबरा गए .........
महीन हंसती होय बोली ... बिहाराम आदमी ..... ऐसी hi आ गए हो तुम तो ...... कुछ पहन तो लेती ......
विनोद ..... ओह ी ऍम सॉरी महीन .......... ख्याल नहीं रहा ...... अभी आता हों पहन की .........
विनोद यह कह क्र उठा तो महीन को अहसास होआ की उसनी बुहत hi रौदे बात की है ........ वह फौरन hi बोली .....
महीन ...... नहीं अब बेथ जाओ और करो नाश्ता ...... पहली hi ठंडा हो रहा है ........
विनोद मुस्करा क्र उसकी सामन्य बेथ गया और महीन न्य नाश्त्य की लय प्लेट उसकी तरफ बढ़ा दी .. नाश्ता करनी लगा ...... उसका ध्यान टीवी पर था ...... और महीन का उसकी नंगी जिसम पी ....... विनोद का सांवला जिसम .... बुहत सॉलिड .... चेस्ट की मसल्स बुहत टाइट और प्रॉमिनेंट थय ....... निप्पल्स छोटी छोटी .. काली और बिलकुल सख्त ........ पॉइंटेड ....... शोल्डर मज़बूत और चौराय ............ बाज़ूओं की मसल्स भी मज़बूत ..... बुहत सॉलिड जिसम लग रहा था विनोद का ......... महीन नाश्ता कृत्य होय नज़रें बचा क्र विनोद की जिसम को hi टाक रही थी ......... विनोद को पता था मगर वह उसी अहसास नहीं होनी देना चाहता था .......... विनोद को देखती होय महीन विनोद की बॉडी को आसिफ सी कपड़े क्र रही थी ..... जिसका रंग बिलकुल सुफैद था ..... बॉडी फिट थी मगर विनोद की तरफ मस्कुलर और सॉलिड नहीं दिखती थी ......... अगर रंग देखा जाय तो विनोद आसिफ की कपरिसों मैं काला hi लगता था ...... मगर फिर भी उसकी बॉडी काफी अट्रैक्टिव थी ........ महीन की दिल की धरकन तेज़ हो रही थी .......... सुच मैं बुहत hi मज़बूत जिसम है विनोद का ........... पता नहीं यार क्यों ऐसी शानदार बॉडी होती है इन हिंद्डु मर्दून की .......... कभी मैं न्य ऐसी जिसम की साथ किसी अपनी मज़हब वाले को नहीं देखा ........... ऐसी hi मुस्लिम्म लड़का इन काफिर मर्दो पी नहीं मार्टिन ..... कुछ तो ख़ास होता hi है इन काफिरों मैं ............... यह मुझी क्या हो रहा है ....... मैं कैसी बातें सोच रही हों ............ वह खुद सी बोली .... और दिल hi दिल मैं खुद सी शर्मिंदाह भी होइ .............
विनोद ....... महीन अब तुम्हारा पाऊँ कैसा है ...
विनोद की आवाज़ सुन क्र महीन चौंक क्र अपनी खयालो सी बहरा आई .... अहहं .... हाँ ..... हाँ .... ठीक है अब बिलकुल ..... बकज़ ऑफ़ योर केयर ..... विनोद ... महीन मुस्कराई .... उसका चेहरा लाल हो रहा था ....
फिर महीन नाश्ता क्र की उठी और प्लेट्स किचन मई रख की अपनी रूम की तरफ चली गए ....... मगर जाती होय विनोद की पिच्य सी उसकी सॉलिड कमर पर नज़र डालनी सी खुद को ना रोक सकीय ......
ऊऊफफफफफफफफफ ...... क्या हो गया है मुझी ...... महीन खुद सी बोली और जल्दी सी चेंज करनी लगी ऑफिस जांय की लय .........
शाम मैं घर आय और दोनों चेंज करनी अपनी अपनी रूम मैं चली गए ......... महीन न्य अपनी घर की कपड़े निकली ....... फिर उसी विनोद की बात याद आई ....... की उसनी उसी कहा था की वह घर पी भी कम्फर्टेबले कपड़े पहन सकती है क्यों की पहली भी वह इसी वजह सी स्टूल सी गिरी थी ............. महीन न्य अपना नाईट पजामा और शर्ट निकाली और उसी पहन लय ........ आज विनोद की शॉर्ट्स नहीं पहनी थय तो उसकी लेग्स कवर थीं पूरी ....... और शर्ट तो वही थी .... हाफ स्लीव और थोड़ा चेस्ट सी ओपन ......... महीन लाउन्ज मैं आई और खाना लगानी लगी ....... विनोद आया तो उसनी आज भी शॉर्ट्स और टी शर्ट पहनी होइ थी ........... मगर वह महीन को उस लॉन्ग पजामा मैं देख क्र थोड़ा मायूसी वाला चेहरा बनानी लगा ....... जो महीन न्य नोट क्र लय .........
महीन मुस्करा की ....... क्या होआ तुम्हारी मूड को .......
विनोद ........ वह आज मेरी वाले शॉर्ट्स नहीं पहनी तुम न्य .....
महीन उसकी बात समझ क्र मुस्कराई और उसी तैसे करती होइ बोली ............. यू can't बे लकी एवरीडे ............ हहहह ...........
विनोद न्य फिर सी मुंह लटकानी की एक्टिंग शुरू क्र दी .... और महीन हंसनी लगी ............. फिर दोनों न्य हंसी मज़ाक़ कृत्य होय खाना खाया ....... महीन अब काफी हद तक कम्फर्टेबले हो चुकी होइ थी विनोद की साथ ..... और इसी लय उसको तैसे भी करनी लगी थी और मज़ाक़ भी .......
नेक्स्ट मॉर्निंग महीन उठी और अपनी रूम सी बहार आई ......... विनोद अभी नहीं उठा था ...... महीन जल्दी सी वाशरूम मैं गए और नहा क्र विनोद की hi शॉर्ट्स और अपनी शर्ट पहन क्र बहार आई तो देखा की विनोद अपनी छोटी सी मंदिर की सामन्य खरा होआ पूजा क्र रहा है ...... और टीवी पर बुहत hi मधुर आवाज़ मैं भजन चल रही हैं ...... जिनकी आवाज़ पूरी घर मैं गूँज रही थी ............ महीन मुस्कराई और अपनी गीले बलून की साथ hi विनोद की क़रीब सी गुज़रती होइ किचन मैं आगये .............. और नाश्ता बनानी लगी .......... घर मैं भजन की मधुर आवाज़ गूँज रही थी ....... ऐसी आवाज़ें महीन न्य कभी भी अपनी घर मैं नहीं सुनी थीं ........ ना hi कभी कोई दिलचस्पी थी उसको या उसकी फॅमिली को दूसरी फेथ की इन सुब चीज़ों सी .......... मगर पता नहीं क्यों महीन को ऐसा महसूस हो रहा था की जैसी पूरी घर माँ शान्ति और सुकून की लहर दौड़ रही हो ............ महीन को पता भी नहीं चला की कब वह अपना काम कृत्य होय भजन की आवाज़ की ले मैं आहिस्ता आहिस्ता हिलनी लगी ......... उसी अपन ाजिसम और दिमाग़ बुहत हल्का होता होआ महसूस हो रहा था .................. मगर अपना काम कृत्य होय उसका दिमाग़ उन सुब की तरफ नहीं था ............. इतनी मैं विनोद किचन की दूर पी आया ......
महीन न्य उसी देखा ........ ाजाओ जल्दी नाश्ता तैयार है बस ...
विनोद ......... महीन मैं नहंय जा रहा हों बस अभी आया ........ और तुम्हारी लये पार्षद वहीँ रखा है ........ लय लेना
महीन का जवाब लये बिना hi विनोद नहानी जा चूका होआ था ....... महीन नास्ति की प्लेट्स लय क्र बहार आई ....... और उनको टेबल पी रख दया .... वापिस जाती होय उसकी नज़र गणेश जी की मूर्ती वाली शेल्फ पर पारी .......... जब उसकी पास सी गुज़र रही थी ........ महीन की नज़र आरती वाली थाली पी गए ...... जिस मैं दया जल रहा था ...... कुछ फूल और एक लाडू रखा होआ था .......... महीन की क़दम वहीँ रुक गए ........... गणेश जी की सामन्य ...... भजन की मधुर आवाज़ें उसकी कानों मैं रूस घुल रही थीं ........ महीन न्य गणेश जी की मूर्ती को देखती होय आहिस्ता सी अपना हाथ बढ़ाया ........ और वह लाडू उठा लय ......... और गणेश जी की मूर्ती की तरफ देखती होय ....... बिना कुछ भी सोचे ..... वह लाडू कहानी लगी ........ दूसरी बाईट मैं लाडू मुंह मैं दाल की वह किचन की तरफ बढ़ गए ...........
चाय की कप ला क्र टेबल पर बेथ गए और विनोद का वेट करनी लगी ...... टीवी पर चल रही होय भजन को सुनती और देखती होय ......... इतनी मैं विनोद बाथरूम सी बहार निकला ... उसनी शॉर्ट्स पहने होय थय और अपनी बलून को अपनी टॉवल सी ड्राई क्र रहा था ..... वह अपनी बैडरूम की तरफ बढ़ा तो महीन न्य आवाज़ दी ....
महीन ... विनोद....... पहली नाश्ता क्र लो ....... ठंडा हो रहा है
विनोद न्य महीन की आवाज़ सुनी और ऐसी hi उसकी तरफ आज्ञा ........ टॉवल सोफे पर फेंका और सिर्फ शॉर्ट्स पहनी होय hi आ क्र दिंनिंग टेबल पर बेथ गया ........ महीन उसकी ऊपरी जिसम को देख क्र घबरा गए .........
महीन हंसती होय बोली ... बिहाराम आदमी ..... ऐसी hi आ गए हो तुम तो ...... कुछ पहन तो लेती ......
विनोद ..... ओह ी ऍम सॉरी महीन .......... ख्याल नहीं रहा ...... अभी आता हों पहन की .........
विनोद यह कह क्र उठा तो महीन को अहसास होआ की उसनी बुहत hi रौदे बात की है ........ वह फौरन hi बोली .....
महीन ...... नहीं अब बेथ जाओ और करो नाश्ता ...... पहली hi ठंडा हो रहा है ........
विनोद मुस्करा क्र उसकी सामन्य बेथ गया और महीन न्य नाश्त्य की लय प्लेट उसकी तरफ बढ़ा दी .. नाश्ता करनी लगा ...... उसका ध्यान टीवी पर था ...... और महीन का उसकी नंगी जिसम पी ....... विनोद का सांवला जिसम .... बुहत सॉलिड .... चेस्ट की मसल्स बुहत टाइट और प्रॉमिनेंट थय ....... निप्पल्स छोटी छोटी .. काली और बिलकुल सख्त ........ पॉइंटेड ....... शोल्डर मज़बूत और चौराय ............ बाज़ूओं की मसल्स भी मज़बूत ..... बुहत सॉलिड जिसम लग रहा था विनोद का ......... महीन नाश्ता कृत्य होय नज़रें बचा क्र विनोद की जिसम को hi टाक रही थी ......... विनोद को पता था मगर वह उसी अहसास नहीं होनी देना चाहता था .......... विनोद को देखती होय महीन विनोद की बॉडी को आसिफ सी कपड़े क्र रही थी ..... जिसका रंग बिलकुल सुफैद था ..... बॉडी फिट थी मगर विनोद की तरफ मस्कुलर और सॉलिड नहीं दिखती थी ......... अगर रंग देखा जाय तो विनोद आसिफ की कपरिसों मैं काला hi लगता था ...... मगर फिर भी उसकी बॉडी काफी अट्रैक्टिव थी ........ महीन की दिल की धरकन तेज़ हो रही थी .......... सुच मैं बुहत hi मज़बूत जिसम है विनोद का ........... पता नहीं यार क्यों ऐसी शानदार बॉडी होती है इन हिंद्डु मर्दून की .......... कभी मैं न्य ऐसी जिसम की साथ किसी अपनी मज़हब वाले को नहीं देखा ........... ऐसी hi मुस्लिम्म लड़का इन काफिर मर्दो पी नहीं मार्टिन ..... कुछ तो ख़ास होता hi है इन काफिरों मैं ............... यह मुझी क्या हो रहा है ....... मैं कैसी बातें सोच रही हों ............ वह खुद सी बोली .... और दिल hi दिल मैं खुद सी शर्मिंदाह भी होइ .............
विनोद ....... महीन अब तुम्हारा पाऊँ कैसा है ...
विनोद की आवाज़ सुन क्र महीन चौंक क्र अपनी खयालो सी बहरा आई .... अहहं .... हाँ ..... हाँ .... ठीक है अब बिलकुल ..... बकज़ ऑफ़ योर केयर ..... विनोद ... महीन मुस्कराई .... उसका चेहरा लाल हो रहा था ....
फिर महीन नाश्ता क्र की उठी और प्लेट्स किचन मई रख की अपनी रूम की तरफ चली गए ....... मगर जाती होय विनोद की पिच्य सी उसकी सॉलिड कमर पर नज़र डालनी सी खुद को ना रोक सकीय ......
ऊऊफफफफफफफफफ ...... क्या हो गया है मुझी ...... महीन खुद सी बोली और जल्दी सी चेंज करनी लगी ऑफिस जांय की लय .........
शाम मैं घर आय और दोनों चेंज करनी अपनी अपनी रूम मैं चली गए ......... महीन न्य अपनी घर की कपड़े निकली ....... फिर उसी विनोद की बात याद आई ....... की उसनी उसी कहा था की वह घर पी भी कम्फर्टेबले कपड़े पहन सकती है क्यों की पहली भी वह इसी वजह सी स्टूल सी गिरी थी ............. महीन न्य अपना नाईट पजामा और शर्ट निकाली और उसी पहन लय ........ आज विनोद की शॉर्ट्स नहीं पहनी थय तो उसकी लेग्स कवर थीं पूरी ....... और शर्ट तो वही थी .... हाफ स्लीव और थोड़ा चेस्ट सी ओपन ......... महीन लाउन्ज मैं आई और खाना लगानी लगी ....... विनोद आया तो उसनी आज भी शॉर्ट्स और टी शर्ट पहनी होइ थी ........... मगर वह महीन को उस लॉन्ग पजामा मैं देख क्र थोड़ा मायूसी वाला चेहरा बनानी लगा ....... जो महीन न्य नोट क्र लय .........
महीन मुस्करा की ....... क्या होआ तुम्हारी मूड को .......
विनोद ........ वह आज मेरी वाले शॉर्ट्स नहीं पहनी तुम न्य .....
महीन उसकी बात समझ क्र मुस्कराई और उसी तैसे करती होइ बोली ............. यू can't बे लकी एवरीडे ............ हहहह ...........
विनोद न्य फिर सी मुंह लटकानी की एक्टिंग शुरू क्र दी .... और महीन हंसनी लगी ............. फिर दोनों न्य हंसी मज़ाक़ कृत्य होय खाना खाया ....... महीन अब काफी हद तक कम्फर्टेबले हो चुकी होइ थी विनोद की साथ ..... और इसी लय उसको तैसे भी करनी लगी थी और मज़ाक़ भी .......