महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड) - Page 8 - SexBaba
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महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड)

अपडेट NO. 28

विनोद और महीन थिएटर सी निकले ........ शाम सी जो महीन न्य शराब पी थी अब उसका थोड़ा असर हो रहा था ....... बुहत hi काम मिक़्दार मैं थी उसकी मश्रूब मैं शराब मगर फिर भी पहली बार होनी की वजह सी उस पी असर हो रहा था ........ वह नशे मैं नहीं थी मगर उसका दिमाग़ काफी हल्का फील हो रहा था ....... हल्का हल्का सरूर चढ़ रहा था ....... उसकी इन्हिबिशंस और रेजिस्टेंस ख़तम हो रही थीं ....... उसकी जज़्बात बेहकनी लगी थय ......... उसी यह सुब ाचा लग रहा था ..... मगर इसकी साथ साथ hi वह फुल्ली तोर पी अपनी होश ो हवास मैं थी ............. रूम की तरफ जाती होय भी महीन विनोद की साथ चिपकी होइ थी ...... विनोद का बाज़ू महीन की कमर मैं था ..... और वह उसी अपनी साथ लगाय होय रूम की तरफ जा रहा था ... महीन भी उसकी साथ अपनी लवर की तरह hi चिपकी होइ थी .......... उसी यह सुब ाचा लग रहा था .......... और अब तक जितना विनोद न्य उसी मज़ा दया था उसकी बाद तो महीन अब विनोद की देवानी हो चुकी होइ थी .......... या फिर शायद उसकी लुंड की ....

दोनों अपनी रूम मई आय ....... तो विनोद न्य आती hi महीन को अपनी बहून मैं भर लय और उसी किश करनी लगा ......... अपनी होंठ महीन की होंठों पी रखी और उसी चूमनी लगा ....... महीन न्य भी अपनी बाज़ू विनोद की गर्दन मई डाली और उसकी लिप्स को चूसनी लगी ......... अपनी होंठों को उसकी होंठों मैं दी क्र उसका साथ देंय लगी ......... विनोद न्य अपणु जुबां बहार निकाली और महीन न्य जल्दी सी उसी चूसना शुर क्र दया ........ विनोद न्य महीन का हाथ अपनी लुंड पी रख दया ....... महीन उसी सहलानी लगी ......... विनोद का लुंड आकर क्र महीन की हाथ मैं था ...... मोटा और लम्बा लौड़ा .... उसको सहलाना महीन को बुहत ाचा लग रहा था ..... उसकी झिझक ख़तम हो रही थी ..........

महीन की कमर पी हाथ फैरती हो विनोद न्य महीन की बॉडीकॉन ड्रेस की ज़िप खोल दी ....... जो उसकी हिप्स की दराद शुरू होनी तक थी ..... विनोद न्य महीन की ड्रेस को उसकी कांधों सी नीची सिरका दया ...... और महीन न्य अगली hi लम्हे उसी अपनी जिसम सी उतार दया ..... अब वह विनोद की सामन्य उसकी बहून मई सिर्फ अपनी ब्रस्सिएर और पंतय मैं खरी थी ........ विनोद न्य फिर सी उसकी नंगे जिसम को अपनी बहून मैं लय और उसकी जिसम को सहलाती होय उसकी होंठों का रसपान करनी लगा ........... महीन तो पहली सी hi गरम थी ........ अब और भी गरम होनी लगी थी ...... उसकी सांसें तेज़ हो रही थीं .... वह खुद भी विनोद की जिसम को अपनी साथ दबा रही थी ........... उसकी कमर पी हाथ फेर रही थी ....... उस सी बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था ........ उसनी अपनी हाथों को विनोद की टी शर्ट की नीची सी दाल की उसकी नंगी कमर को सहलाना शुरू क्र दया .......... उसकी नंगी मज़बूत बॉडी पी हाथ पहिरण्य लगी ......... aaaaaaahhhhhhhhhhh ............ Vinnnnnnnnnnnoooooooddddddddddddd ............ plllllllllllllzzzzzzzzzzzzzzzzzzz ........... वह तारपीईईईई .......... महीन को विनोद की जिसम पी हाथ फैरना बुहत ाचा लग रहा था ........ साफ़ दिख रहा था की महीन सी अब कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा है ........... विनोद भी उसकी हालत को समझ रहा था ..........

महीन न्य विनोद की टी शर्ट को नीची सी पकड़ा और ऊपर को उतारनी लगी .......... विनोद न्य अपनी बाज़ू ऊपर उठा डाई ........ और महीन विनोद की टी शर्ट को उतार फेंकी ........ और उसकी नंगी जिसम को देखनी लगी ........... हल्के हल्के बलून सी भरा होआ ........ कुशादा ..... चौड़ा सीना ....... मज़बूत ....... चौड़े कांद्य .......... और काली निप्पल .......... गहरा सांवला रंग था विनोद का ............ जबकि आसिफ का गोरा चिट्टा जिसम था ............. महीन की नज़रें विनोद की जिसम पी फिसल रही थीं ........... वह इस जिसम की मज़बूती ...... और इसकी ताक़त को ाच्य सी जानती थी .......... और इस मज़बूत जिसम की अंदर कितना प्यार करनी वाला दिल है ........ वह यह भी जानती थी ............... महीन की नज़रें विनोद की नज़रों सी मिलीं .......... महीन की आँखों मैं प्यास hi प्यास थी .......... तरप hi तरप ......... मगर नशे मैं होनी का या बेहोशी की कोई अलामत नहीं थी .............

विनोद की आँखों मैं देखती होय महीन न्य अपना कांम्पटा होआ हाथ उठाया और उसी विनोद की सैन्य पी रख दया ............. उसकी सीने की बलून मैं ........ अब आहिस्ता आहिस्ता उसकी जिसम को सहलानी लगी .......... उसकी सीने की बलून मैं हाथ पहिरण्य लगी ............ महीन की नज़रें तो हैट hi नहीं रही थीं विनोद की जिसम सी ............... विनोद अब उसकी सामन्य सिर्फ ट्रॉउज़र मैं खरा था ............ महीन ाग्य को झुकी और अपनी गुलाबी पतली पतली होंठ विनोद की सीने पी रखती होय उसकी सीने को चूम लय और बुहत hi हलकी सी आवाज़ मैं बोली ............

महीन .............. Vinoddddddddddddddd ........... कितना सॉलिड है तुम्हारा जिसम ...............

विनोद न्य आहिस्ता सी अपना हाथ महीन की कमर मैं डाला और उसी अपनी क़रीब क्र लय ............ महीन की होंठ अब उसकी सीने पर hi थय .......... वह आहिस्ता आहिस्ता उसकी सीने को चूम रही थी ........ इधर उधर ...... ऊपर नीची ............. विनोद न्य अपना हाथ महीन की सर की पिच्य लय जा की आहिस्ता सी उसकी होंठों को अपनी निप्पल की पास लय गया ........... महीन न्य एक नज़र विनोद की काले हार्ड निप्पल को देखा ........ और फिर विनोद की आँखों मैं देखती होय आहिस्ता सी अपनी होंठ विनोद की निप्पल पी रख डाई .......... और उसी अपन पतली पतली होंठों सी चूम लय ....... एक बार नहीं ....... आहिस्ता आहिस्ता बार बार चूमनी लगी ...... किश करनी लगी ............. aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ........... Maheeeeeeeeeennnnnnnnnnnnn ................. कितनी प्यारी लिप्स हैं tumharyyyyyyyyyy ........................ pleaseeeeeeeeeeee इसी अपनी जुबां सी chaatooooooooooooo ............. विनोद तारपा ............. महीन की नंगी कमर को सहलाती होय ..........

महीन न्य विनोद की आंखों मैं देखती होय अपनी जुबां बहार निकाली ...... और जुबां की नौक सी विनोद की निप्पल को आहिस्ता आहिस्ता चैदंय लगी ......... उस पी पहिरण्य लगी ........ उसकी गिर्द गोल गोल घुमान्य लगी ............. aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh .............. ssssssssssssssssssss ..................... Maaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhheeeeeeeeeeeeeeeeeeeeennnnnnnnnnnnnnnnnnn ....................... mmmmmmmmmmmmmmmm विनोद की मुंह सी सिसकार्यं निकल रही थीं ............. वह तरप रहा था ............. और उसकी पंत मैं उसका लुंड सख्त हो की फटनी वाला हो रहा था .............

विनोद न्य महीन को बीएड पी बिठाया ........ और खुद उसकी सामन्य खरा हो गया .............. उसकी ट्रॉउज़र का उभार ........ फूला होआ लुंड महीन की आँखों की सामन्य था ........ उसकी चेरि की लेवल पी .............. विनोद न्य महीन का हाथ पकड़ा और अपनी ट्रॉउज़र की ऊपर सी अपनी लुंड पी रख दया .............. विनोद न्य ट्रॉउज़र की नीची सी अंडरवियर नहीं पहना होआ था ........... इसलय उसका लुंड सीधा खरा होआ महसूस हो रहा था ........... महीन न्य अपनी हाथ को विनोद की लुंड की ऊपर सी नहीं हटाया .......... आहिस्ता आहिस्ता उसी सहलानी लगी .......... वह जानती थी की उसकी प्यास को ........... उसकी जिसम की तालाब को ............ उसकी छूट की आग को एहि लुंड बुझा सकता है ........... विनोद की आँखों मैं देखती होय महीन न्य उसकी लुंड को अपनी मुठी मैं लय की ज़ोर सी दबा दया ............

विनोद ........ aaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ........... आहिस्ता ........ दर्द होता है .............

महीन वीर्य सी मुस्कराई ............ तो यह भी तो दर्द देता है न ........... वह ............

विनोद मुस्करा दया .......... और महीन को चोर की बीएड पी लेट गया ........... महीन सवालय नज़रों सी उसको देखनी लगी .........

विनोद तकए पी सर रख की लेती होय बोलै ....... खुद hi निकालो इसी ......... देखता हों न की तुमको कितना प्यार है इस सी ..........

महीन विनोद की बात का मतलब समझ गए थी ........... की वह क्या चाहता है .............. वह शर्मा गए ............. महीन भी बीएड पी आगये .......... विनोद न्य उसका हाथ पाकर की उसी अपनी ऊपर खींच लय ......... और एक बार फिर उसकी होंठों को किश करनी लगा ........ निचली होंठ को अपनी होंठों मैं लय और उसी सूचक करनी लगा ............. साथ hi विनोद न्य महीन का हाथ खुद सी hi दोबारा अपनी ट्रॉउज़र की ऊपर सी अपनी लुंड पी रख दया ............... जैसी महीन न्य जल्दी सी अपनी मुठी मई लय लय ................ विनोद न्य अपनी जुबां महीन की होंठों की अंदर दाल दी .......... और वह उसी चूसनी लगी ............. दोनों का सलीवा एक दूसरी की मुंह मई जा रहा था ........... मिक्स हो रहा था ........... मगर दोनों मैं सी किसी को भी इस बात का अहसास नहीं था ........ महीन का नंगा जिसम विनोद की साथ चिपकता जा रहा था ............ उसकी जिसम पी सिर्फ ब्रा और पंतय थी ...........

कुछ देर तक महीन की होंठों का रूस पीनी की बाद विनोद न्य आहिस्ता सी उसकी कान मैं बोलै ........... महीन .............. उसी बहार निकालो ..........

महीन थोड़ा शर्मा की विनोद की लुंड की तरफ देखनी लगी ........... इस लुंड सी वह अछि तरह सी वाक़िफ़ थी ........... कई बार इस लुंड सी छुड़वा चुकी होइ थी ......... इस लुंड का मज़ा लय चुकी होइ थी ............ मगर आज तक उसनी खुद सी इस लुंड को बहार नहीं निकला था .......... खुद सी विनोद का ट्रॉउज़र नहीं उतरा था ................ उसका हाथ अभी भी विनोद की लुंड पी था ..................... वह खुद भी अब विनोद की लुंड को बहार निकालना चाहती थी ........... ताकि वह उसी जल्दी सी इसकी छूट मई दाल दी ........ और उसी छोड़ दी ............. मगर एक झिझक सी थी ........... हिचकचाहट सी थी .............. क्यों की इतनी बार उस लुंड सी छुड़नी की बावजूद भी ठीक सी ...... और क़रीब सी उस लुंड को नहीं देखा था ...............

महीन न्य आहिस्ता सी विनोद की पाजामे को नीची को सिरका दया .......... उसकी लुंड को बहार निकालती होय ............. जैसी hi पजामा नीची होआ तो महीन का दिल उछाल की हलक़ मई आज्ञा ............. विनोद का काला लुंड सीधा खरा लहरा रहा था ............. विनोद न्य अपनी टांगों को हरकत देती होय अपना ट्रोसुएर अपनी टांगों सी निकाल दया ............ और अब वह बीएड पी बिलकुल नंगा हो की लेता होआ था ........... और महीन उसकी पास hi सिर्फ ब्रा और पंतय मैं थोड़ी टेढ़ी हो की लेती होइ थी ............. महीन की नज़रें विनोद की नंगी लुंड पी जमी होइ थीं ............ जो लहरा रहा था ........ हिल रहा था ........ और महीन को अत्त्रक्ट क्र रहा था ............. बैडरूम की फुल लाइट की रौशनी मैं उसका कला लुंड साफ़ दिख रहा था ............. लुंड काफी लम्बा और मोटा लग रहा था ......... आसिफ की लुंड सी मोटा और लम्बा ............ उसका टोपा नहीं दिख रहा था ....... बल्कि उसकी ऊपर स्किन थी ............... जैसी देख क्र महीन को थोड़ी हैरानी हो रही थी ............ मगर वह अपनी नज़र विनोद की लुंड पर सी हटा नहीं पा रही थी ............ आखिर यह लुंड इतनी बार उसकी छूट की अंदर जा की उसकी आग बुझा चूका होआ था .............. वह इस लुंड की करामात सी ाच्य सी वाक़िफ़ थी ................ uuuuuffffffffff देखो तो कैसी नाग की तरह लहरा रहा है ............. महीन दिल hi दिल मैं सोची ..........

विनोद आहिस्ता सी उसकी कानों की पास बोलै ..... महीन इसी पकरो न ............

महीन न्य आहिस्ता आहिस्ता अपना हाथ ाग्य बढ़ाया .......... और विनोद की काले लुंड को अपनी गोरी गोरी मुलायम हाथ मैं लय लय ............ और आहिस्ता आहिस्ता अपना हाथ उसकी ऊपर पहिरण्य लगी ............ विनोद न्य आहिस्ता ाहसिता महीन को नीची की तरफ पुश क्र दया ............. और महीन का चेहरा विनोद की लुंड की क़रीब आज्ञा ......... वह अब उसकी लुंड को बुहत क़रीब सी देख रही थी ........ इतना क़रीब सी उसनी कभी विनोद की लुंड को नहीं देखा था ............... उसका हाथ अभी भी विनोद की लुंड पी था .............. उसकी नज़रें उसकी लुंड पी थीं ........... विनोद की लुंड की टोपे पर मौजूद उसकी स्किन उसकी हाथ की हरकत सी आहिस्ता आहिस्ता ऊपर नीची हो रही थी ........... उसी याद अन्य लगा की वह लड़की कैसी उस लड़के की लुंड को प्यार क्र रही थी ............. कैसी वह अपनी प्यार का इज़हार क्र रही थी ........... उसी याद अन्य लगा की उस लड़के का लुंड चूसती होय उस लड़की की चेहरी औ उसकी आँखों सी और उसकी हरकतों सी नज़र आ रहा था की वह लड़की कितना प्यार करती है उस सी ................

प्यार तो मैं भी करती हों विनोद सी ............. जैसी वह मुझ सी करता है ............ नहीं जैसी वह मुझी प्यार करता है मैं वैसी उसी नहीं कृ आज तक ............ जैसी वह अपनी प्यार का इज़हार करता है मैं न्य वैसी कभी नहीं क्या ............. वह बिना कुछ भी महसूस कए मेरी छूट को किश करता है .......... उसी सूचक करता है ....... उसी लीक करता है ........... मगर मैं न्य कभी भी ऐसा नहीं किआ ............... उसनी कभी कहा भी तो नहीं न मुझी ऐसा करनी को ............ अपनी इस लुंड को प्यार करनी को ............. शायद वह मुझ सी ज़बरदस्ती कुछ नहीं करवाना चाहता इसलय नहीं कहा .............. लकिन उसी भी तो वैसी hi मज़ा आता हो गए न जैसी मुझी आता है ............. उसी भी तो आखिर किसी की होंठों का टच चाहिए न अपनी इस लुंड पी ............... मेरी होंठों का टच ............ मगर मैं कैसी क्र सकती हों .............. यह तो गन्दा होता है न ................ कैसी मैं इसकी ऊपर अपनी होंठ रख सकती हों ............... यह जो मेरी हाथ मैं है ........ जिसनी हमेशा मुझी इतना मज़ा दया ............ जन्नत की सैर करवाई है हमेशा ............. क्या यह गन्दा है ................ नहीं ........ नहीं .......... क्या इसका हक़ नहीं है की मैं इसी अपनी होंठों सी प्यार करों ............ जैसी विनोद मेरी वहां पी प्यार करता है ............. बिल्क्लुल बनता है ...................... विनोद न्य हमेशा अपना प्यार साबित क्या है ........... मुझी भी आज अपना प्यार का सबूत देना है ........... मैं उसी ज़रूर लौटाऊँ गई ............... उसका प्यार ............ उसी की अंदाज़ मैं ...............

यह सुब बातें खुद सी करती होय .......... खुद को आगे कृत्य होय ........ खुद को समझाती होय महीन विनोद की लुंड की और क़रीब जांय लगी ............. और उसी अहसास तब होआ जब उसी अपनी गुलाबी होंठों पी कोई अंगारा सा रखा होआ महसूस होआ ............. तब उसी अहसास होआ की उसकी होंठ विनोद की लुंड की ऊपर हैं ........... ज़िन्दगी मैं पहली बार किसी की लुंड को टच क्र रही हैं ............. ज़िन्दगी मैं पहली बार वह विनोद की लुंड को अपनी होंठों सी छु रही थी ................. महीन न्य विनोद की आँखों मैं देखा और विनोद की लुंड की हल्का सा किश क्र दया .................. विनोद की चेहरी पी ख़ुशी की लहर दौड़ गए ............... और लज़्ज़त और सुकून की मारी उसकी आंखें बंद हो गए ................. महीन विनोद की चेहरी की एक्सप्रेशंस को देख रही थी ............... उनको पढ़ रही थी ............. उसी साफ़ साफ़ अंदाज़ा हो रहा था की उसकी होंठों की टच न्य विनोद को कितना सुकून दया है ............. महीन को ाचा लगा की उसकी वजह सी विनोद को ख़ुशी मिल रही रही है ................. और साथ hi उसी यह अहसास भी होआ की उसी कुछ भी ग़लत नहीं लग रहा है अपनी होंटो सी विनोद की लुंड को छु की ...................

महीन विनोद की लुंड की और क़रीब सिरकटी होय उसकी दोनों टांगों की बीच आगये ....... विनोद की और उसकी लुंड की बिलकुल सामन्य ........... महीन न्य विनोद की लुंड को अपनी हाथ मैं लय ........ और उसी ऊपर सी नीची तक किश करनी लगी ........... उसी अहसास हो रहा था की कुछ भी गन्दा नहीं है ........... जैसी जिसम की बाक़ी स्किन है वैसा hi अहसास है बस ............ विनोद की लुंड की इतना क़रीब अन्य की बाद उसी अब विनोद की लुंड की टोपे की स्किन ऊपर नीची होती होइ नज़र आ रही थी ........... उसी तब पता चला की उसका टोपा उसकी स्किन की अंदर चला जाता है ........... तभी उसी अहसास होआ की विनोद का लुंड उन कट है ............... आसिफ की तरह नहीं है ................. खतना क्या होआ ................ उसी याद आ गया की हींदू लोग खतना नहीं कृत्य न ............... उनकी तरह .............. तभी उसी ख्याल आया की वह एक मुस्लिम हो की एक हींदू सी छुड़वा चुकी होइ है ......... उसकी उन कट लुंड सी ............... उसी अजीब सा लगा ............ मगर फिर खुद सी hi ख्याल आया की इसी उन कट लुंड न्य तो उसी आसिफ की लुंड सी ज़्यादा मज़ा दया था ................... वह आहिस्ता सी मुस्कराई ............. और विनोद की लुंड को फिर सी किश करनी लगी ..............
 
विनोद की लुंड की टोपे की स्किन को नीची कृत्य होय महीन न्य विनोद की लुंड की टोपे को बहार निकला और उसकी ऊपर भी किश क्र दया ................ उसी याद आ रहा था ............ उसकी आँखों की सामन्य वह सन घूम रहा था की कैसी वह लड़की उस लड़के की लुंड को प्यार क्र रही थी ............. महीन न्य भी आहिस्ता सी अपनी जुबां निकाली और विनोद की लुंड की टोपे पी पहिरण्य लगी ............ उसी आहिस्ता आहिस्ता चैतन्य लगी ....... लुंड की नरम नरम जिल्द को अपनी जुबां सी शून्य सी एक अलग सा अहसास हो रहा था महीन को ............... जैसी कभी पहली नहीं होआ था .............. वह आहिस्ता आहिस्ता विनोद की लुंड की टोपे की गिर्द अपनी जुबां घुमान्य लगी ............ मोटा टोपा फूलता जा रहा था ............ फिर महीन की जुबां टोपे सी नीची को जांय लगी ....... लुंड को चाट तय हो .......... ाच्य सी उसी गीला कृत्य होय .............. आहिस्ता आहिस्ता महीन को हर बात का अहसास ख़तम हो गया था ............. उसी ग़रज़ थी तो सिर्फ और सिर्फ विनोद की ख़ुशी सी ............... वह बस उसी खुश करना चाहती थी .......... और अपनी प्यार का इज़हार करना छह रही थी ............... महीन न्य विनोद की लुंड को ऊपर सी नीची तक चाट तय होय आहिस्ता आहिस्ता उसकी लुंड को अपनी मुंह मैं लय लय ............ और मुंह मैं रख की अपनी जुबां उसकी टोपे पी पहिरण्य लगी ..............

जैसी hi विनोद का लुंड महीन की मुंह की अंदर गया तो विनोद की मुंह सी सिसकारी की आवाज़ निजकल गए .............. aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ..................... oooooooooooooooooooooo उसकी आवाज़ सी hi महीन को अंदाज़ा हो गया था की उसकी लुंड को प्यार करनी सी विनोद को कितना ाचा लगा है .............. उसी भी अंदर hi अंदर ख़ुशी का अहसास होआ ......... ाचा लगा .......... वह आहिस्ता आहिस्ता उसी लड़की को फॉलो करती होइ अपनी मुंह को ऊपर नीची कृत्य होय विनोद की लुंड को चूसनी लगी ........... कुछ hi देर मई महीन को भी विनोद का लुंड चूसना ाचा लगनी लगा था ............ उसी बिलकुल भी इस बात का अहसास नहीं हो रहा था की वह कोई ग़लत काम क्र रही है ............. ना hi उसी विनोद का लुंड गन्दा लग रहा था ............ कभी वह उसी अपनी मुंह सी निकाल की अपनी जुबां सी चैतन्य लगती ......... और कभी फिर सी उसी मुंह मई लय लेती .......... उसी विनोद का लुंड चूसना ाचा लग रहा था ......... ......... उसी शिद्दत सी अहसास होनी लगा की आसिफ न्य उसी इस लज़्ज़त सी हमेशा महरूम रखा था ...... महीन की नज़र विनोद की लुंड की नीची लटक रही होय उसकी काली काली बॉल्स पी पारी .......... जो की काफी भारी और बारी थय .............. महीन न्य आहिस्ता आहिस्ता उनको भी सहलाना शुरू क्र दया ............

महीन अपनी ज़िन्दगी मैं पहली बार लुंड को चूस रही थी ........... कभी आसिफ का लुंड मुंह मई नहीं लय था ........... ना उसनी कभी कहा था ............ क्यों की उनकी रेलगिओं मैं तो इसी गन्दा कहती थय न ........ मगर उसी आज अहसास होआ था की इस लुंड को प्यार करनी मई कितना मज़ा आता है ............. कितना ाचा लगता है .............. और अपनी चाहंय वाले को इस सी कितना मज़ा मिलता है ................... महीन को अहसास भी नहीं होआ की उसी कितनी देर हो गए थी विनोद की लुंड को प्यार कृत्य होय ........... उसी चूसती होय ............... विनोद भी मुस्कराती होय ......... महीन जैसी खूबसूरत लड़की को अपना लुंड चूसती होय देख रहा था ............. उसनी कभी सोचा भी नहीं था की कभी उसकी ज़िन्दगी मई ऐसा दिन भी आ सख्त है ............... मगर आज यह हकीकत थी ............. की महीन उसकी सामन्य नंगी थी ............ और उसकी मुंह मैं इसका लुंड था ................

विनोद न्य महीन को पाकर की अपनी तरफ खींचा ....... और अपनी होंठ उसकी होंठों पी रख की उसी चूमनी लगा ................ फिर उसी घुमा की बीएड पी लिटाया ........ और खुद उसकी ऊपर आज्ञा ............... विनोद न्य महीन की पंतय उतारी .......... और और उसकी गुलाबी छूट को देखनी लगा ............. जो रूम की फुल रौशनी मैं चमक रही थी ............. विनोद न्य अपनी लुंड का टोपा महीन की नंगी छूट की ऊपर रखा और उसकी छूट की दांय को अपनी लुंड सी रगड़नी लगा .............. सहलानी लगा ........... महीन की हालत ख़राब हो रही थी ......... वह तो कब सी विनोद की लुंड की लय तरप रही थी ................ वह विनोद की तरफ देखती होय टर्पी ............. सिसकी ................. Vinoddddddddddddddd ................. बस क्र doooooooooooooo ................ और नही tarpaaoooooooooooo ............... plezzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzz .....................

विनोद न्य भी महीन को ज़्यादा तंग करना मुनासिब नहीं समझा ............. उसका लुंड तो पहली hi महीन की थूक और और उसकी छूट की पानी सी गीला हो रहा था .............. उसनी अपनी लुंड को महीन की छूट की सूराख पर रखा .......... और आहिस्ता ाहसिता अपनी लुंड को महीन की छूट मई उतारनी लगा ............ अंदर करनी लगा ............... आधा लुंड अंदर दाल की विनोद न्य अपना लुंड बहार निकला और फिर उसी अंदर क्र दया ............... विनोद आहिस्ता आहिस्ता महीन की ऊपर लेट गया ............ अपनी होंठों को महीन की होंठों की ऊपर रखा और उसी चूमती होय अपना लुंड महीन की छूट मैं अंदर बहार कृत्य होय उसी छोड़ना शुरू क्र दया ............ महीन भी उसका पूरा साथ दी रही थी ........... उसकी गरम छूट तो बस किसी भी वक़त पानी चोरनी वाली थी .......... महीन न्य अपनी दोनों टांगें विनोद की कमर की गिर्द लपेट लीन ......... और उसी अपनी तरफ खींचती होय उसकी लुंड को पूरा अपनी अंदर लेनी की कोशिश करनी लगी ............... उसकी आंखें बंद होनी लगीं ........... क्यों की महीन की छूट न्य पानी चूर्ण शुरू क्र दया था ............. मगर विनोद तो बस अभी स्टार्ट hi होआ था न ............... वह रुक गया .......... और महीन को ाच्य सी झाड़नी दया ............. जो विनोद की लुंड को अपनी छूट मैं भींचती होइ अपनी ओर्गास्म का मज़ा लय रही थी ...............

जैसी hi महीन रिलैक्स होइ तो विनोद न्य दोबारा सी महीन को छोड़ना शुरू क्र दया ........... अपना लुंड अंदर बहार कृत्य होय ढक्की मारण्य लगा ................. उसका लुंड पूरा जड़ तक महीन की छूट मई उतर रहा था ............ और हमेशा की तरह उसकी बचा दानी सी टकरा रहा था ............. हर बार बचा दानी सी तक्राण्य सी महीन को अलगही लज़्ज़त मिलती थी .............. थोड़ी देर तक ऐसी hi छोड़नी की बाद विनोद न्य महीन की छूट सी लुंड निकला ............ और उसी उल्टा क्र की घोड़ी बना दया ........... और खुद उसकी पिच्य आ की उसकी हिप्स को खुल की अपना लुंड उसकी छूट की सूराख पी रखा ............ और महीन की कमर को पाकर की एक धक्का लगाया ........... और अपना पूरा लुंड महीन की छूट मई उतार दया ................. महीन तरप की रह गए .............. मगर विनोद को उसका लुंड अपनी छूट सी बहार निकालनी को नहीं बोलै .................... बस आंखें बंद क्र की खुद को नार्मल करनी की कोशिश करनी लगी ............. aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh ............ oooooooooooooooooghhhhhhhhhhhhhhhhh ................. ggggggggggggggggggggggg............................... महीन की छूट की अंदर लुंड जांय सी महीन की मुंह सी सिसकार्यं निकल रही थीं ............. विनोद का लुंड अपनी छूट मई अंदर बहार होनी सी ............. विनोद की चुदाई करनी सी महीन को मज़ा भी आ रहा था ................ और उसकी मोती लुंड सी हल्का हल्का ........ मीठा मीठा दर्द भी फील हो रहा था .............. मगर वह दर्द भी उसी ाचा लग रहा था ................. विनोद महीन की कमर को पकड़े होय धना धन महीन की छूट छोड़ रहा था ...............

अपनी सामन्य घूरि बानी होइ महीन की छूट मैं लुंड अंदर बहा कृत्य होय विनोद की नज़र महीन की गांड की गुलाबी सूराख पी पारी ............ बिलकुल छोटा सा ............... सूराख था ................ जैसी hi उसकी अंदर कभी कुछ ना गया हो ............. और हकीकत भी यही थी की उसकी गांड की सूराख की अंदर कभी कुछ नहीं गया था ............ और उसी तो यह भी नहीं पता था की गांड की इस सूराख मैं भी कोई चीज़ डाली जा सकती है ................. और यह तो बिलकुल भी उसकी वहां ो गुमान मैं भी नहीं था विनोद जैसा मोटा और लम्बा लुंड भी भला कोई अपनी गांड मई लय सकता है ..............

विनोद न्य अपनी एक ऊँगली को अपनी मुंह मैं दाल की उसी गीला क्या .......... फिर उसी बहार निकाल की उसी ऊँगली की टिप पी अपना थोड़ा सा थूक गिराया ............ और उस ऊँगली को महीन की गांड की गुलाबी सूराख पी रखा और उसी रगड़नी लगा .............. आहिस्ता आहिस्ता अपनी ऊँगली सी महीन की गांड की गुलाबी सूराख को सहलानी लगा ...... उसकी छूट को छोड़ती होय ........... .. महीन को भी इस सी एक नया मज़ा मिलनी लगा ........ छूट की अंदर लुंड दाल की छोड़ती होय उसकी गांड की सूराख को सहलानी सी ............... ऐसा तो विनोद न्य पहली भी किआ था ........... इसी लय तो महीन इसी एन्जॉय क्र रही थी ........... महीन की गांड की छूती सी गुलाबी सूराख को ऊँगली सी सहलाती होय विनोद न्य आहिस्ता सी ऊँगली पी अपना प्रेशर बढ़ाया ........ और अपनी ऊँगली की टिप को महीन की गांड की सूराख की अंदर पुश क्र दया ............... aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh हहहहहह .... महीन की सिसकारी निकल गए .......... ....

विनोद अपनी ऊँगली सी महीन को मज़ा तो दी रहा था ............ मगर महीन को यह नहीं पता था की विनोद तो अपनी ऊँगली की बजाय अपना लुंड उसकी छूट की बाद अब उसकी गांड मई भी उतरना चाहता है ............ आअज नहीं तो कल उसकी गांड भी मारना चाहता है .......... महीन बी चारि को तो यह भी नहीं पता था की गांड की उस छोटी सी सूराख मैं भी लुंड डाला जाता है ............ और वहां भी छोड़ा जाता है .......... उसी तो बस यही पता था की चुदाई तो बस छूट मैं hi होती है ..........

कुछ देर तक ऐसी hi ............ इसी पोजीशन मैं महीन की चुदाई करनी की बाद विनोद न्य महीन की छूट सी अपना लुंड निकला ....... और खुद फिर सी बीएड पी लेट गया ............. और महीन को अपनी ऊपर खींच लय ............ महीन विनोद की सैन्य की ऊपर लेट गए ............ महीन की छूट विनोद की लुंड पी रगड़ रही थी ............... विनोद न्य नीची हाथ लय जा की अपना लुंड पाकर की एक बार फिर सी महीन की छूट पी टिक्का दया ............. और विनोद का लुंड एक बार फिर बुहत आराम सी महीन की छूट की अंदर चला गया ........... विनोद न्य महीन को अपनी बहून मैं भरा ........और नीची सी अपनी लुंड को ऊपर की तरफ ढक्की मारती होय उसी छोड़नी लगा ................... फिर महीन को सीधा क्र की बिठा दया ............. उसका लुंड अभी भी महीन की छूट मई था .......... जैसी hi महीन सीढ़ी हो की बैठी तो विनोद का लौड़ा सीधा अंदर तक उसकी छूट मई उतर गया ................ और महीन तरप की रह गए ................ विनोद उसी आहिस्ता ाहसिता ाग्य पिच्य को हिलानी लगा ............... इसी लज़्ज़त की साथ महीन की छूट न्य एक बार फिर सी पानी चोर दया .............. और वह निढाल हो की विनोद की छाती पी गिर गए ............... और कुछ धक्कों की बाद विनोद भी महीन की छूट की अंदर hi झाड़ गया ................. दोनों एक दूसरी की बहून मैं पारी लम्बी लम्बी सांस लेनी लगी ..............

थोड़ी देर की बाद विनोद बीएड सी उठा और वाशरूम मैं चला गया ........... वह सी फ़ारिग़ हो की आया तो महीन न्य शर्मा की उसी देखा और फिर खुद भी वाशरूम चली गए .............. खुद को ाच्य सी वाश क्या .......... और फिर एक टॉवल अपनी नंगे जिसम पी लपेट क्र बहार आगये ............... विनोद न्य महीन को सिर्फ एक छोटी सी टॉवल मैं लिपटे होय देखा तो अपनी बहिन फैला दिन ........ महीन मुस्कराती होइ उसकी क़रीब आ की बेथ गए ............... बीएड पी ....... टेक लगा की ........... विनोद न्य रूम की छोटी सी रेफ्रीजिरेटर सी बेयर निकाल ली होइ थी और उसकी सिप लय रहा था ................. महीन उसकी क़रीब hi बैठी थी ............... विनोद न्य लेद टीवी ों क्या ....... और उस पी कुछ सर्च करनी लगा .............. और फिर टीवी पी एक सेक्स वीडियो चलनी लगी .............. जिसकी नीची "तुष्य" लिखा होआ था ............

थोड़ी सी वीडियो hi चली तो महीन को अंदाज़ा हो गया की विनोद न्य एक बार फिर सी सेक्स वीडियो चला ली है ...........

महीन न्य विनोद की तरफ देखा और बोली ......... फिर सी वही गन्दी मूवी ........

विनोद मुस्कराया ........... हाँ फिर सी .......... ाचा लग रहा है न तुम्हारी साथ यह सुब देखना ..............

महीन मुस्करानी लगी .............. कितनी गन्दी गन्दी हरकतें कृत्य हैं न यह लोग तो .......... और उनको देखनी की बाद तुम मेरी साथ वही सुब करनी लगती हो ..........

विनोद न्य महीन की नैक की पिच्य सी अपना बाज़ू डाला और उसी अपनी क़रीब खींच लय ........ महीन की जिसम पी बंधा होआ उसका टॉवल खुल गया ...... और महीन का जिसम फिर सी नंगा हो गया ........... विनोद दूसरी हाथ सी आहिस्ता ाहसिता महीन की बूब्स सी खेलनी लगा ...........

महीन भी विनोद की साथ टीवी पी चल रहा होआ सन देख रही थी ............ फिर सी एक बुहत hi खूबसूरत लड़की और एक खूबसूरत मर्द था उसकी साथ ........... दोनों नंगी थय ............ और एक दूसरी को प्यार क्र रही थय ............. महीन की नज़र भी बार बार उस मर्द की लुंड पी जा रही थी ........... अब तो वह इन सेक्स मूवीज को देखनी की आदि होती जा रही थी और उन ग़ैर मर्दों की लौड़े देखनी की भी ............ मूवी मैं लड़की न्य मर्द का लुंड चूसना शुरू क्या .............. महीन को याद अन्य लगा की उसनी भी विनोद का लुंड अपनी मुंह मैं लय था .......... और उसी चूसा था ................ उसी फिर सी वही कुछ याद अन्य लगा ........... विनोद न्य महीन का हाथ पकड़ा और अपनी लुंड पी रख दया ............. नंगी लुंड पी .............

महीन न्य मुस्करा की विनोद की तरफ देखा और फिर उसकी थोड़ी नरम मगर एकराय होय लुंड को अपनी हाथ मैं लेती होइ बोली ............ अब तो यह बुहत शरीफ दिख रहा है ............... और उस वक़त तो कुछ भी रहम नहीं करता .............

विनोद महीन की बात पी हंसनी लगा ............... फिर टीवी की तरफ इशारा कृत्य होय बोलै ........... महीन उधर देखो ............ महीन न्य फौरन hi टीवी की तरफ देखा तो उसकी आंखें हैरत सी फैल गईं ............... सामन्य स्क्रीन पी वह मर्द अपनी लुंड का टोपा उस लड़की की गांड की गुलाबी सूराख पी रगड़ रहा था ............. और फिर आहिस्ता आहिस्ता उसका लुंड उस लड़की की गांड की छोटी सी सूराख मैं जांय लगा ................

महीन की हलकी सी चीख निकल गए .................. Vinoooooooddddddddddd ................. yyyyyeeeeeeeeeeeeee ह्ह्हह्ह्ह्ह ....... yyyyyyyyeeeeeeeeeeeeee ....... kyyyyyyaaaaaaaaaaa ........... kkkkaaaaaaahhhhhhhhhhhh .............

विनोद मुस्कराया .......... और महीन को अपनी साथ लगाती होय उसकी गाल को चूमती होय बोलै ............ तुमको बोलै था न मैं न्य की यह हर तरह सी सेक्स का मज़ा लेती हैं ................

महीन हैरानी सी ............. पपपपपपररररररर ............. विनोवूड .......... वाहनंन कैसियययययय ................ ववववूऊऊऊ तूऊऊऊ ..........

विनोद ............. कृत्य हैं वहां भी ........... चला जाता है वहां पी भी ............ बस पहली बार थोड़ी तकलीफ होती है ............ फिर वहां भी मज़ा hi आता है .....................

महीन ाहसिता सी ................ ी can't बिलीव विनोद ...............

विनोद मुस्कराया ........... अगर यक़ीन नहीं आता तो उस लड़की की चेहरी की तरफ देख लो ............ क्या लग रहा है तुमको ....... उसी दर्द हो रहा है की मज़ा आ रहा है ..............

महीन की नज़रें विनोद की कहनी सी पहली hi उस लड़की की चेहरी पी थीं .......... और महीन को साफ़ लग रहा था की वह लड़की अपनी गांड की सूराख मैं उस मर्द की लुंड को एन्जॉय क्र रही है ............ उस मर्द का मोटा गोरा लुंड भी बारी आराम सी उस गोरी लड़की की गांड की सूराख मैं अंदर बहार हो रहा था .......... बरी hi आसानी की साथ ............. और उस लड़की की मुंह सी सिसकार्यों की आवाज़ें निकल रही थीं ............

विनोद न्य महीन को थोड़ी सी करवट दी .............. उसकी एक टांग को ऊपर को उठाया ....... और उसकी पिच्य सी अपनी लुंड को उसकी छूट की सूराख पी रखा और हल्का सा धक्का लगा की उसी महीन की छूट मैं दाल दया .............. और महीन की पेट पी अपना हाथ दाल की पिच्य सी ढक्की लगाती होय महीन को छोड़नी लगा ................. जैसी hi विनोद का लुंड महीन की छूट मई गया तो महीन की होंठों सी लज़्ज़त भरी सिसकारी निकल गए ................. उसकी नज़रें अभी भी स्क्रीन पी चल रही उस लड़की की चुदाई पी थीं .................. वह हैरानी सी ........ उस लड़की की गांड मैं लुंड को अंदर बहार होता होआ देख रही थी ..................... महीन की हिम्मत नहीं थी अपनी गांड मैं लुंड लेनी की बारी मैं सोचनी की ........... मगर फिर भी उसकी अपनी छूट गीली होती जा रही थी ............. और उसी वजह सी विनोद का लुंड बरी आसानी की साथ महीन की छूट मैं अंदर बहार हो रहा था ................... महीन भी अपनी कमर को थोड़ा बेंड दी क्र विनोद की तरफ क्र की उसका पूरा साथ दी रही थी ..............

आद्य घंटी की क़रीब उनकी चुदाई का यह राउंड चला ............ और फिर एक दूसरी की साथ hi झाड़नी की बाद दोनों एक दूसरी की साथ चिपक की सो गए .............. एक hi चादर की अंदर ................ एक दूसरी की जिसम की गिर्द बाज़ू डाली होय .................
 
अपडेट NO: 29

सुबह महीन की आँख पहली खुली ........ महीन न्य करवट ली और विनोद की तरफ देखनी लगी ......... वह अभी तक सो रहा था ....... बिलकुल शान्ति की साथ ........... महीन बारी प्यार सी विनोद की चेहरी की तरफ देखनी लगी ........... उसकी चेहरी को देखती होय महीन की होंठों पी मुस्कान सी फैल गए ........... महीन न्य वीर्य सी अपना हाथ विनोद की सीने पी रखा और उसकी सैन्य को सहलानी लगी ......... बुहत hi आहिस्ता सी ......... की कहीं विनोद की आँख ना खुल जाय ............ आहिस्ता सी ाग्य को बरही और विनोद की चेहरी पी झुक की महीन न्य विनोद की माथै पी हल्का सा किश क्र दया ......... और बुहत hi धीमी आवाज़ मैं बोली ........ थैंक्स विनोद ........ मेरी इतनी केयर करनी और मुझी इतनी ज़्यादा ख़ुशी देंय की लय ..........

महीन का हाथ अभी भी विनोद की सीने पी था ......... नंगे सीने की घनी बलून मैं ...... जिनको वह प्यार सी सहला रही थी .......... खुद सी hi महीन की नज़र विनोद की जिसम पी नीची को जांय लगी ........... उसकी लौड़े की तरफ ........... जैसी hi विनोद की लौड़े पी महीन की नज़र पारी तो वह फिर सी मुस्करानी लगी ............. विनोद का लुंड उसकी नींद मैं होनी की बावजूद भी तना होआ था ........ एकरा होआ था ......... आहिस्ता आहिस्ता हिल रहा था ...... महीन का हाथ खुद सी hi आहिस्ता आहिस्ता विनोद की पेट सी सिरकटी होय उसकी लुंड की तरफ जांय लगा ............ जैसी hi महीन न्य विनोद की गरम गरम लुंड को अपनी हाथ मैं लय ..... तो विनोद की जिसम न्य बुहत hi हल्का सा झटका लय ....... मगर फिर स्थैतिक हो गया ....... महीन न्य फौरन hi विनोद की चेहरी की तरफ देखा ......... विनोद की आँख नहीं खुली थी ......... महीन न्य अपनी पतली पतली सुफैद उंगलयां ......... विनोद की मोटे काले लुंड की गिर्द लपेट लीन ......... बुहत hi आहिस्ता सी उसी अपनी हाथ मैं दबाया ........ जैसी उसकी मोटाई को फील क्र रही हो ........... फिर आहिस्ता ाहसिता अपनी उंगलयों सी उसकी लुंड को सहलाती होय विनोद की लुंड का जायज़ा लेंय लगी ..........

महीन .............. uuuuffffffffff ......... कितना मोटा और लम्बा है न .......... पता नहीं कैसी मैं अपनी अंदर लय लेती हों ....... शुक्र है की अब दर्द नहीं होता ...... वर्ण पहली बार तो जान hi निकाल दी थी इस न्य मेरी .........

महीन का अंघूटा विनोद की लुंड की टोपे पी घूम रहा था ..... उसी आहिस्ता आहिस्ता सहला रहा था ......... फिर खुद सी बोली ....... यह तो मेरी छूट मैं hi इतनी मुश्किल सी जाता है ...... और कल रात वह लड़की तो कैसी उसी पिच्य लय रही थी ......... मैं तो कभी भी ना लय सकें .......... जान hi निकल जाय गई मेरी तो ......... मुझ सी नहीं हो सकता वह सुब ...... कभी भी ....... इतना मोटा और लम्बा ......... ना बाबा ना .......... इसकी स्किन तो देखो कैसी ऊपर नीची हो रही है ....... मुझी फिर सी इसी क़रीब सी देखना है ..........

महीन न्य खुद सी कहा और फिर सिरकटी होइ विनोद की लुंड की क़रीब आगये ........ और बुहत hi क़रीब सी विनोद की लुंड को देखनी लगी ....... सिर्फ चाँद इनचेस की फ़ासली सी ..... मोटा काला लुंड.... जिसकी टोपे की ऊपर कभी स्किन चढ़ जाती और कभी नीची आजाती .......... आसिफ की लुंड सी लम्बा और मोटा था .......... मगर रंग इसका काला था ........... लकिन काला है तो क्या होआ ..... मज़ा तो आसिफ की लुंड सी ज़्यादा hi देता है न ............ और पता नहीं क्या क्या करवाता है न मुझ सी यह विनोद भी ......... मुझी तो अभी भी यक़ीन नहीं हो रहा की कल रात मैं न्य विनोद की इसी लुंड को अपनी मुंह माय लय की चूसा था ......... छाता था ....... उफ्फ्फ्फ़ ..... कितना गन्दा काम था न .......... हाँ लकिन गन्दा लगा नहीं कुछ भी ......... ठीक hi कहता है विनोद ...... की अपनी लवर की साथ हर तरह सी प्यार कृत्य हैं ........ ऐसी hi तो उन मूवीज मैं वह लडक्यां लुंड नहीं चूस रही होतीं न .........

महीन का दिल क्या की वह एक बार फिर सी विनोद की लुंड को अपनी मुंह मई लय लय .......... उसनी विनोद की चेहरी की तरफ देखा ...... वह अभी सो रहा था आंखें बंद कए होय ........ महीन न्य ाहसिता सी अपनी होंठ विनोद की लुंड पी रखी ....... और एक हल्का सा किश क्र दया ........... और फिर सी विनोद की तरफ देखा ........ वह नहीं जगा तो महीन न्य अब उसकी लुंड की पूरी लेंथ पी किसिंग शुरू क्र दी ...... फिर अपनी जुबां बहार निकाली ... और उसकी टिप को विनोद की लुंड पी पहिरण्य लगी ......... ऊपर सी नीची तक ......... और नीची सी ऊपर की तरफ ........... और कभी उसकी मोटे टोपे पी ........ विनोद का काला लुंड महीन की गोरे गोरे हाथों मैं बुहत hi अजीब सा लग रहा था ........ फिर महीन न्य विनोद की लुंड की टोपे को अपनी होंठों मई लय और आहिस्ता आहिस्ता उसका लुंड अंदर लय जांय लगी ........ थोड़ा सा लुंड मुंह मैं लेनी की बाद अपनी सर को ऊपर नीची करनी लगी ..... विनोद की लुंड को अपनी मुंह मैं अंदर बहार कृत्य होय ......... उसी ाचा लग रहा था ...... मज़ा भी आ रहा था ............. इतना बुरा भी नहीं है इसको प्यार करना ..... कुछ अजीब सा hi लगता है मुंह मैं लुंड ......... लकिन अछि फीलिंग होती है .......... पता नहीं आसिफ न्य कभी क्यों नहीं करवाया मुझ सी यह सुब .......... शायद उसी पता न हो ........ लकिन यह भी तो है न की हमारी मैं तो इन सुब चीज़ों को गन्दा समझती हैं न ........ पर गन्दा काम तो नहीं है यह सुच मई ......... यह तो बस प्यार है ..... सिर्फ प्यार ...........

महीन विनोद की लुंड को अपनी हाथ मैं पकड़े होय अपनी मुंह को ऊपर नीची कृत्य होय उसका लुंड चूस रही थी ...... और कभी बहार निकाल की चैतन्य लगती .......... महीन की मुंह की गर्मी सी विनोद की आँख खुल गए ......... उसनी अपनी आंखें खोल की देखा तो सामन्य महीन उसकी टांगों की पास बैठी होइ उसका लुंड चूस रही थी ...... वह जगती साथ hi इस चीज़ को देख की खुश हो गया ........ जैसी hi दोनों की नज़रें मिलीं तो दोनों मुस्करा डाई ...... मगर महीन न्य उसकी लुंड को चूसना बंद नहीं क्या ..........

विनोद न्य अपना हाथ बढ़ा की महीन की सर की बलून मैं रखा और उसको सहलाती होय बोलै .......... वव्वव्वव्वव्व महीन ....... व्हाट ा वंडरफुल वे तो अवेक में ...........

महीन हंसी ...... हहहहह ......... हाँ जी ....... तुम तो अब जाएगी हो पर तुम्हारा यह तो तुम सी पहली का जाग रहा है ......

विनोद भी महीन की बात पी हंसनी लगा .......... हाहाहाहा .......

महीन विनोद की लुंड को मुंह सी निकाल की अपनी मुठी मैं ऊपर नीची करती होइ बोली ........ चलो उठ जाओ या सोते hi रहना है .......

विनोद महीन की बूब्स सी खेलती होय बोलै ....... उठ जाईं गए .... पहली जो काम शुरू क्या है उसी तो पूरा क्र लेनी दो न ......

महीन ...... ना ना........ सुबह सुबह hi नहीं शुरू हो जाना अब ...... बस जल्दी सी नहाओ और फिर ब्रेकफास्ट कृत्य हैं चल की ......

महीन जैसी hi उतनी लगी तो विनोद न्य उसका हाथ पाकर की उसी अपनी पास गिरा लय ..... और खुद करवट लय क्र उसकी ऊपर आज्ञा ...... महीन हंसती होइ खुद को चुरवानी की कोशिश करनी लगी ........

महीन .... उफ्फ्फ्फ़ नहीं विनोद .... सुबह सुबह hi नहीं प्लीज......

विनोद हंसा ....... बस जल्दी सी क्र लोन गए न ........

महीन उसकी बाज़ू पकृति होइ बोली ....... पता है मुझी कितना जल्दी क्र लेती हो न .........

नीची विनोद अपनी लुंड को महीन की छूट पी रगड़ रहा था ..... उसकी छूट भी गीली होनी लगी थी ......... उसी ाचा लग रहा था ऐसी विनोद का ज़बरदस्ती करना ...... प्यार भरी ज़बरदस्ती ........

विनोद अपनी लुंड को महीन की छूट की सूराख पी टिकाती होय बोलै ...... बोलो दाल डॉन ........

महीन हंसी और एक अदा की साथ बोली ...... जैसी मेरी मन करनी पी तुम बाज़ आ hi जाओ गए न ........

विनोद हंसनी लगा .......... और आहिस्ता आहिस्ता अपना लुंड महीन की छूट की अंदर डालनी लगा .......... aaaaaaahhhhhhhhhhhhh ........... sssssssssssssss .................... की आवाज़ की साथ hi महीन की आंखें बंद हो गए .................

विनोद अपनी होंठों को महीन की कान की पास ला की बोलै .......... महीन तुम्हारी छूट भी तो गीली हो रही है न ..........

महीन उसकी होंठों को चूम की बोली ..... जब ऐसी हरकतें करो गए तो हो गई hi न ........

अब विनोद न्य आहिस्ता आहिस्ता अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर बहार करना शुरू क्र दया ....... और ढक्की लगाती होय उसी छोड़नी लगा ........ महीन भी विनोद की गर्दन मैं बाज़ू डाली होय उसका साथ दी रही थी ....... उसको फुल सपोर्ट क्र रही थी ........ कुछ देर तक चुदाई की बाद पहली महीन जहर गए ...... और उसकी कुछ मिनट्स बाद विनोद की लुंड न्य भी अपना पानी महीन की छूट मैं गिरा दया ................. और दोनों लेट क्र अपनी सांस बहाल करनी लगी ...............
 
कुछ देर की बाद दोनों न्य उठ की एक साथ नहाया ........ अब महीन को विनोद की सामन्य नंगी रहंय ..... उसकी साथ नंगी नहानी ....... नंगी सोने ........... किसी भी बात मई कोई ऐतराज़ नहीं था ........... नहानी की बाद महीन एक टॉवल लपेटी होय hi रूम मैं आई .......... और अपनी बाल ड्राई कृत्य होय विनोद सी बोली .......

महीन ........... विनोद आज कहाँ चलना है घूमनी ........

विनोद .......... कहीं भी नहीं .......... मेरा तो इरादा है की आज रूम मैं hi राहों और तुम्हरी लेता राहों ............ हहहह

महीन हंसती होय बोली ........ पागल हो क्या ............ इस काम की लय तो तुम न्य घर जा की भी मेरी जान नहीं चोरनी ............. मगर अब जो यहाँ आय होय हैं तो इस खूबसूरत जगा की सैर का लुत्फ़ तो लय लाइन न ........

विनोद ....... मुंह बसूरनी की एक्टिंग कृत्य होय बोलै ............ ाचा जैसी आप बोलो ...........

महीन हंसती होइ ............ अब दरमय करनी चोरो और बताओ की क्या पहनों मैं आज ........

विनोद ........... वही फ्लोरल ड्रेस पहनो जो कल लय था हम न्य ........

महीन थोड़ा परेशान होती होइ ........... विनोद वह तो बुहत hi शार्ट है ............ वह कैसी पहन सकती हों मैं .......

विनोद ....... क्यों नहीं पहन सकती ....... यहाँ कोनसा को जान न्य वाला है हमारा जो देख लय गए ............... चलो जल्दी सी पहन की दिखाओ ........

महीन न्य झिझकती होय अपना टॉवल खोला ............ ब्रा और पंतय निकाल की पहनी .......... और फिर वह नया फ्लोरल मिनी ड्रेस पहन लय ........... ड्रेस महीन की हाफ तइस तक था ........... उस सी नीची महीन का जिसम ...... उसकी तइस और टांगें बिलकुल नंगी थीं ............ ड्रेस की निचली हिस्से की नीची महीन की जिसम पी सिर्फ एक छोटी सी पंतय थी ........ उसकी इलावा महीन का पूरा निचला जिसम नंगा था ............ और ऊपर सी महीन की ड्रेस का सामन्य का गाला भी काफी ओपन था ....... सीना नंगा हो रहा था मगर बूब्स या क्लीवेज नहीं दिख रही थय ........ बुहत hi शार्ट स्लीव्स थीं ......... जो सिर्फ उसकी शोल्डर्स को कवर क्र रही थीं ................ महीन न्य वह ड्रेस पहना तो विनोद बुहत खुश होआ और महीन की तारीफ करनी लगा ............ महीन भी आहिस्ता आहिस्ता रिलैक्स हो की मुस्करानी लगी ........ और फिर दोनों अपनी रूम सी बहार ाग्य ............. रूम सी निकलती होय महीन को फिर थोड़ी सी झिझक हो रही थी ........ क्यों की पहली बार वह इतनी ज़्यादा नंगी हालत मैं रूम सी बहार थी .............. दोनों न्य दिंनिंग हॉल मैं ब्रेकफास्ट क्या और फिर दोनों रिसोर्ट सी निकल पारी घूमनी की लय ...............

रिसोर्ट सी निकल क्र महीन विनोद सी चिपक रही थी ........... उसी बुहत शर्म आ रही थी ........ ऐसी अपनी टांगों को एक्सपोज़ कृत्य होय .......... और बिना नीची कुछ पहने होय बहार ओपन मैं फिरनी सी ........... मगर आहिस्ता ाहसिता वह रिलैक्स होनी लगी ........... .......... अलग hi मज़ा अन्य लगा था उसी इस ड्रेस मैं भी ........ दोनों घूमती होय कुछ hi दूर मौजूद लेक पी ाग्य ................ लेक की खूबसूरती को देख क्र महीन की तो आंखें hi खुली रह गईं ............. हर तरफ रंग ब्रांग फूल ........... सर सब्ज़ दरख्त ............ नीला आसमान ........ साफ़ पानी ........... बस इतना खूबसूरत नेचुरल सन था की महीन तो बस मभूत hi हो गए ...............

महीन विनोद का बाज़ू पकर्त्य होय बोली ................ Vinoddddddddddd ............. कितनी खूबसूरत जगा है यह .............. मैं न्य ऐसा जगा आज तक नहीं देखि ................. उउउउउफफ्फ्फ्फ़ ............. क्या ज़बरदस्त मंज़र है नेचर का .....................

विनोद भी मुस्करानी लगा और महीन की बात की हिमायत की ............. दोनों हाथों मैं हाथ डाले लेक की साथ साथ फिरनी लगी .......... और भी टूरिस्ट्स आय होय थय ........ मगर ज़्यादार तर तो कपल्स hi थय ............ उस जगा की ब्यूटी का असर दोनों पी हो रहा था ............. माहोल का असर उनको और भी रोमांटिक क्र रहा था ............. विनोद बार बार महीन की गळून को चूम रहा था ........ और महीन उसी इंकार नहीं क्र रही थी .............. अब उसी अपनी जिसम की नंगे पैन का भी अहसास नहीं रहा था ............... वहां की ठंडी ठंडी हवा .......... महीन को अपनी नंगी टांगों और तइस पी बुहत hi अछि महसूस हो रही थी .......... ठंडी हवा उसकी मिनी ड्रेस की नीची सी उसकी छूट तक जाती होय उसको ठंडक का अहसास दिला रही थी .............. एक स्टाल सी विनोद न्य कॉफ़ी की दो कप लये और दोनों जा की लेक की किनारी पी मौजूद एक बेंच पी बेथ गए ........... और कॉफ़ी की सिप लेती होय उस मंज़र का मज़ा लेनी लगी ............

महीन अपना सर विनोद की कंधी पी रखती होइ बोली ............ विनोद ........ मैं अपनी साड़ी ज़िन्दगी इस जगा और इस ट्रिप को नहीं भूल सकती ........

विनोद न्य अपना बाज़ू महीन की पिच्य सी उसकी कमर की गिर्द डाला और उसकी बलून को चूमती होय बोलै ........ और मैं तुमको कभी नहीं भूल सकता महीन ...........

महीन मुस्कराई ............ हाँ मैं भी ............ लकिन जो हकीकत है हमें उसी याद रखना चाहिए ...........

विनोद ............ हम्म्म्म ........ ठीक कह रही हो तुम महीन ........

महीन अपना सर विनोद की कांदी पी रखी होय बोली ............. विनोद ...... कभी कभी मैं उदास हो जाती हों जब मुझी ख्याल आता है की हम दोनों अलग हो जाईं गए जब वापिस जाईं गए इंडिया ...........

विनोद मुस्करया ......... ठीक कह रही हो ........... मगर जब तक हम लोग यहाँ हैं टब तक तो हम हर तरह सी एन्जॉय क्र सकती हैं न ............ इस वक़्त का इस आज़ादी का भरपूर इस्तेमाल क्र सकती हैं न ............ बिना किसी की दर की ........... बिना किसी की रोक टोक की ...........

महीन ........... हम्म्म ..........

विनोद ......... मुझी पता है की तुम न्य साड़ी ज़िन्दगी कितनी पाबन्दयान और रेस्ट्रिक्शन्स बर्दाश्त की हैं ....... मगर अब जब तक यहाँ हो अपनी इस आज़ादी का भरपूर फ़ायदा उठाओ .............. भरपूर मज़ा लो ज़िन्दगी का .......... जो जो कमी तुम्हारी ज़िन्दगी मैं रह गए ............. इन पाबंदों की वजह सी ........... उन सुब को पूरा करो .......... यह मौका तुमको फिर सी नहीं मिले गए ..............

महीन ......... हाँ सही कह रही हो आप विनोद ........... लकिन मुझी अपनी फॅमिली का ख्याल आ जाता है न .......... की मैं उनकी खिलाफ जा रही हों .......... ुणस्य चीट क्र रही हों .............

विनोद .......... कोई भी चीट नहीं क्र रहा .......... ना तुम ........ ना मैं ........ क्या हम अपनी अपनी फॅमिली की बिना यहाँ खा पी नहीं रही .......... तो अगर हम उसी तरह अपनी जिसम की ज़रूर्यात भी पूरी क्र रही हैं तो इस मैं क्या हर्ज है ................ और यह सुब कुछ यहाँ की आज़ाद माहोल मैं बिलकुल नार्मल है ...............

महीन चुप रही ..........

विनोद न्य अपना हाथ महीन की नंगी थिगह पी रखा ........... और तुम एहि देख लो की क्या तुम ऐसी ड्रेस इंडिया मई पहन सकती हो .......... क्या तुमको आसिफ इजाज़त देता ............. नहीं न ......... और वहां की लोगो का भी क्या रिस्पांस होता ............ मगर यहाँ देखो तो किसी को भी कोई फ़िक्र नहीं है इस बात की की कोई दूसरा क्या क्र रहा है ............. यहाँ भी अपनी िरद गिरद देखो तो हर कोई दूसरी सी बी खबर बस एक दूसरी मैं गम है .............

महीन इधर उधर देखनी लगी ........... और भी कपल्स वाहन इधर उधर बैठी होय थय ............... एक दूसरी की साथ जुड़ की ........... एक दूसरी को किश कृत्य होय ........... प्यार कृत्य होय ...............

महीन मुस्कराई ........... यह लोग तो हैं hi बी शर्म न ........ इनकी क्या बात कृत्य हो ......

विनोद हंसा ....... तो तुम भी बन जाओ न बी शर्म इनकी तरह ........

महीन हंसी ....... जी नहीं ........... मुझी नहीं बन न ..........

फिर विनोद और महीन न्य बोट सी लेक की सैर की ............. काफी देर वहां रहंय की बाद वह लोग वापिस आय ............ दोपहर का खाना उन्हों न्य एक रेस्टुरेंट सी खाया ........... फिर इधर उधर घूमती होय टाइम का पता hi नहीं चला .............. और शाम का खाना बहार hi खा की वह लोग वापिस अपनी रिसोर्ट मैं ाग्य .............
 
महीन वाशरूम मई गए ............ फ्रेश हो की बहार आई उसनी अभी भी वही फ्लोरल मिनी ड्रेस पहना होआ था ............ वह आ की बीएड पी बेथ गए ............. विनोद फ्रेश होनी की लय वाशरूम की तरफ जाती होय बोलै .......... महीन एक काम करो ............ ज़रा रिसेप्शन पी कॉल करो और उनको कहो की रूम मैं बियर तो दी जैन ........

महीन उसी घूरती होइ बोली ......... फिर सी पीनी है आज क्या तुम न्य .....

विनोद ....... प्लीज महीन ........ एन्जॉय करनी दो न ....... आखिर को मेरा हनीमून है यह ........

महीन हंसनी लगी ............ आसिफ और प्रिय को पता चल गया न तो ाच्य सी मना डैन गई तुम्हारा हनीमून ..............

दोनों हंसनी लगी ............... महीन न्य फ़ोन उठा लय और रिसेप्शन को कॉल मिलानी लगी ............. विनोद वाशरूम की दूर मैं hi खरा था ............. दूसरी तरफ सी कॉल अटेंड होइ .......

महीन ........ Hello ............

रिसेप्शन गर्ल ............ यस मम ............ व्हाट कैन वे हेल्प मम

महीन ........... प्लीज हमारी रूम मैं बियर सर्वे करवा डैन ........

रिसेप्शन गर्ल ........... okay मम इन जस्ट ा फ्यू मिनट्स प्लीज .......

महीन ........... okay .......... थैंक्स ...........

विनोद दौर सी hi आहिस्ता सी बोलै ........... रुको एक मींचे .......... उनको कहो की K-Y जेली भी भेज डैन ............

महीन न्य हैरानी सी विनोद की तरफ देखा और रिसीवर पी हाथ रख की बोली ... वह क्या है .....

विनोद ...... तुम बोल दो बस उनको की दी जैन उनको पता है इसका ..........

महीन को विनोद की बताई होइ चीज़ की समझ नहीं आई ........ ना उसनी इस जेल की बारी मैं कभी सुना था ........... फिर भी उसी लगा की कोई मेडिसिन हो गई ........ या कास्मेटिक ......... उसनी फिर भी रिसेप्शन को बोल दया ...........

महीन .......... एंड प्लीज लिसेन ........... K-Y जेली भी भेज डैन रूम मैं ...........

रिसेप्शन गर्ल की थोड़ी हैरत भरी आवाज़ आई ........... व्हाट मम ........ ???

महीन दोबारा सी विनोद की तरफ देखती होइ बोली ........... ी ऍम आस्किंग फॉर K-Y जेली ..........

रिसेप्शन गर्ल ..... okay okay मम .......... मम ओने और तवो ........

महीन न्य विनोद को ईशारी सी पुछा की एक या दो ...... तो विनोद न्य 2 का इशारा क्र दया ..............

महीन फ़ोन पी बोली ........ 2 विल बे एनफ ........

रिसेप्शन गर्ल ....... okay मम .......... बस थोड़ी देर मैं डिलीवर क्र देती हैं आप का आर्डर आप की रूम मई ........... अन्य थिंग ेल्स मम ........

महीन विनोद की तरफ देख रही थी ....... वह उसी बोलै ..... नहीं और कुछ नहीं ..... उनको कहो की आप को यह सुब तो पहली hi रखना चाही न रूम मैं ........

महीन रिसेप्शन गर्ल सी बोली ...... no नथिंग ेल्स ...... लकिन आप को यह चीज़ें तो पहली सी hi रूम मैं रखनी चाही न ......

रिसेप्शन गर्ल ...... जी मम ........ सॉरी फॉर इनकन्वीनेन्स ..... वे शॉल बे केयरफुल ऑनवर्ड .........

महीन न्य थैंक्स बोल की फ़ोन बंद क्र दया .......... विनोद महीन सी बात कए बिना hi रूम मई चला गया ........ वाशरूम मैं जाती होय उसकी चेहरी पी मुस्कराहट थी .................. ...

विनोद अभी वाशरूम मैं hi था की रूम का दूर नॉक होआ ........... महीन न्य देखा की उसी hi खोलना पारी गए दूर ........ वह बीएड सी उठी और जा की दरवाज़ा खोला ............. सामन्य रूम सर्विस बॉय एक ट्रे लये खरा था ............

रूम सर्विस .......... गुड इवनिंग मम ......

महीन ........ गुड इवनिंग .......

महीन न्य उसी अंदर अन्य की लय रास्ता दया .......... वह लड़का मुस्कराता होआ रूम मैं दाखिल होआ ........... रूम मैं आ की वह बेडसाइड टेबल की तरफ बढ़ा ............ वह अभी भी बार बार महीन को देखती होय मुस्करा रहा था ..............

रूम सर्विस बॉय न्य एक एक बियर चैने बीएड साइड टेबल पी रखना शुरू क्र दया ............ ....... एक एक चैने रखती होय वह महीन की hi तरफ देख रहा था और मुस्करा रहा था ............... महीन को अजीब लग रहा था ........ मगर वह खामोश थी ........... फिर उस लड़के न्य ट्रे मैं सी 2 तुबेस की तरह की चीज़ उठा की टेबल पी रख दिन ........ वह K-Y जेली थी ........... उसी रखती होय भी उसनी मुस्करा की महीन की तरफ देखा ........

रूम सर्विस महीन की तरफ देखती होय मैनी खैज़ अंदाज़ मैं मुस्कराती होय बोलै ............ मम ....... आप की आर्डर की मुताबिक़ बियर और K-Y जेली डिलीवर हो गए है .........

महीन उसकी अंदाज़ पी हैरान हो रही थी की वह इतना क्यों मुस्करा रहा है ............ मगर उसनी उसी इग्नोर क्या और बोली ........... okay थैंक्स

विनोद वाशरूम की थोड़ी सी खुले होय दूर सी रूम मैं उस लड़के को देखर रहा था ........... और अंदर hi अंदर हंस रहा था ........... उसकी बातून पी जो वह महीन सी कह रहा था ............ और उस बीचारि को कुछ पता hi नहीं था ...........

रूम सर्विस बॉय फिर बोलै .............. okay मम ........ एन्जॉय योर स्टे इन आवर रिसोर्ट ............... मम किसी भी और चीज़ की ज़रूरत हो तो रिसेप्शन पी कॉल क्र डीजे गए मम ...............

महीन बोली ......... okay थैंक्स ............

फिर वह लड़का उनकी रूम सी चला गया .............. उसकी जाती hi विनोद भी वाशरूम सी निकल आया ............. उसी देख क्र महीन बोली ........

महीन ........... अजीब लड़का था ........... मुस्कराय hi जा रहा था ..........

विनोद अपनी हंसी को कण्ट्रोल कृत्य होय बोलै ....... ....... कस्टमर्स सी मुस्करा की बात करना उनकी जॉब का हिस्सा होता है न डार्लिंग ....................

महीन .............. हम्म्म्म .............

विनोद न्य सिर्फ एक बॉक्सर अंडरवियर पहना होआ था ............ वह भी बीएड पी आज्ञा ........... और टीवी ों क्र दया .............. एक बियर का चैने उठाया ...... और उसी खोल की उसकी सिप लेनी लगा ................ एक सिप लय क्र विनोद न्य चैने महीन की तरफ बढ़ाया ........ मगर माही न्य मुस्करा की इंकार क्र दया .............. वह बियर नहीं पीना चाहती थी ............. उसी अभी भी झिझक हो रही थी ............. जो पहली शराब पी थी वह उसनी खुद को यही तसली दी थी की वह जूस hi है .............. मगर यह तो डायरेक्ट शराब थी न ............. विनोद उसकी इंकार पी मुस्करा दया .............

विनोद न्य महीन को अपनी पास खेंचा और उसकी गर्दन की पिच्य बाज़ू दाल की उसी किश करनी लगा ............ उसकी गालों और गर्दन पर ............ फिर उसनी अपनी होंठ महीन की होंठों पी रखी और उसी किश करनी लगा ............... महीन भी कोई रेजिस्टेंस नहीं दिखा रही थी ........... उसी तो खुद यह सुब ाचा लग रहा था ...................... तभी विनोद न्य बियर चैने सी एक सिप लय ............. और दोबारा सी अपनी होंठ महीन की होंठों पी रख डाई ................ महीन को किश करनी लगा .............. महीन भी उसका साथ दी रही थी ............. विनोद न्य बियर सी गीली हो रही होइ अपनी जुबां महीन की होंठों की दरम्यान डाली और महीन न्य फौरन hi उसी सूचक करना शुरू क्र दया ............. ना चाहती होय भी बियर का टास्ते महीन की मुंह मैं जा रहा था ................ और वह उसी चूसी जा रही थी .............. विनोद की जुबां को चूसती होय ................. ना चाहती होय भी महीन को उसका टास्ते ाचा लग रहा था ............ फिर महीन न्य अपनी जुबां विनोद की मुंह की अंदर दाल दी और उसकी मुंह की अंदर घुमान्य लगी .............. उसी हर जगा सी बियर का टास्ते मिल रहा था ................ और महीन उसी चाट टी जा रही थी ............

विनोद न्य दोबारा सी एक घूँट लय और उसी अपनी मुंह मैं रखती होय hi अपनी होंठ महीन की होंठों सी लगा डाई .............. महीन भी फिर सी विनोद की होंठों को चूमनी लगी ............. इस बार खुद सी hi महीन न्य अपनी जुबां को विनोद की होंठों की दरम्यान दाल दया ........... विनोद की मुंह मैं लय जांय की लय ................ विनोद न्य ऐसी मुंह खोला की बियर उसकी मुंह सी बहार नहीं आय .................. महीन की जुबां विनोद की मुंह की अंदर मौजूद बियर मैं थी ........... उसी हैरानी होइ ....... मगर उसनी अपनी जुबां को विनोद की मुंह की अंदर इधर उधर घुमाना शुरू क्र दया ........... विनोद की मुंह मैं मौजूद बियर अब डायरेक्टली महीन की जुबां पी जा रही थी ............ जैसी वह अपनी अंदर उतारती जा रही थी ............ पीनी की बजाय जैसी उसी चाट तय होय ............. बियर का टास्ते भी उसी बुरा नहीं लग रहा था ................

विनोद न्य अपनी होंठ महीन की होंठों पी रखी होय थय और महीन की जुबां विनोद की मुंह की अंदर जा रही थी .......... बार बार उसकी मुंह मैं रोकी होइ बियर को टास्ते करनी की लय .......... विनोद न्य अब महीन की चेहरी को थोड़ा सा टिल्ट क्या .......... और अपनी होंठों को महीन की होंठों की बीच मैं रखती होय थोड़ा सा खोला ...... और बियर विनोद की मुंह सी महीन की हलक़ मैं जांय लगी .......... महीन न्य फौरन hi विनोद की आँखों मैं देखना शुरू क्र दया ...... मगर कोई भी रेजिस्टेंस नहीं की ......... ना hi विनोद को पिच्य हटानी की कोई कोशिश की ....... ना उसी रोकनी की ...... विनोद की होंठों सी बियर थोड़ी थोड़ी महीन की मुंह मैं जा रही थी ..... जो उसकी हलक़ सी नीची उतरती जा रही थी ........ महीन को कुछ ख़ास बुरा नहीं लग रहा था .......... वह भी बस आहिस्ता आहिस्ता उस बियर का स्वाद लय रही थी .......... साड़ी बियर महीन की मुंह की अंदर डालनी की बाद विनोद न्य अपनी जुबां भी महीन की अंदर दाल दी ...... जैसी महीन न्य सूचक करना शुरू क्र दया ....... अपनी होंठों की ग्रिफ्ट मैं लेती होय ज़ोर ज़ोर सी .......... दोनों एक दूसरी की जुबां को चाट रही थय ..... चूस रही थय ......... कभी विनोद उसकी जुबां को मुंह मैं लय लेता और कभी महीन उसकी जुबां को ........

विनोद न्य अपनी होंठ महीन की होंठों सी हटाय तो महीन हांमप रही थी ...... उसकी सांसें फूल रही थीं ......... उसनी शर्मीली सी मुस्कराहट की साथ विनोद की तरफ देखा और अपनी हाथ सी अपनी होंठों को साफ़ करती होइ बोली ..... मुझी भी तुम अपनी जैसा hi कृत्य जा रही हो विनोद ..........

विनोद मुस्करा दया और महीन की उस ओने पीेछे मिनी ड्रेस को नीची सी पाकर की ऊपर को उठानी लगा ........... महीन न्य भी अपनी बाज़ू ऊपर क्र डाई और अगली hi लम्हे महीन की ड्रेस उसकी जिसम सी अलग हो चुकी होइ थी ........... और वह विनोद की सामन्य एक बार फिर सिर्फ ब्रस्सिएर और पंतय मैं थी ......... विनोद न्य महीन की ब्रा की बीच मैं उसकी दोनों बूब्स की दरम्यानी हिस्से पी अपनी होंठ रख की उसी चूमा और उसी बीएड पी लिटा दया ...........

विनोद महीन की जिसम पी नीची को जांय लगा ....... महीन की नाभि पी किश क्या ....... और अपनी जुबां उसकी अंदर डालती होय उसी अंदर सी लीक करनी लगा .......... विनोद न्य अपना बियर का चैने लय और उसी महीन की नंगे पेट पी पहिरण्य लगा ......... महीन को ठंडा ठंडा अहसास होनी लगा ..... उसी ाचा लग रहा था ...... वह मुस्करा रही थी .......... फिर विनोद न्य उस चैने मैं सी थोड़ी सी बियर महीन की नाभि मैं गिराना शुरू की .......

महीन का जिसम हिला ......... आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ...... विनोदद्ड़ ....... यह क्या क्र रही हो .............

विनोद ..... यहाँ दाल की पीएं गए तो शराब का नशा और भी बारह जाय गए मेरी जान .............. महीन उसकी बात पी हंसनी लगी .......... और विनोद न्य अपनी जुबां महीन की नाभि मैं डाली और उस मैं गिराई होइ शराब को चैतन्य लगा ....... और फिर अपनी दोनों होंठ उसकी नाभि की कीनारून पी जमा की ज़ोर सी सूचक कृत्य होय उसकी अंदर सी शराब को पी गया .......... यही काम विनोद न्य 2,3 बार दोहराया ............. विनोद की हरकतों सी ...... उसकी जुबां की जादू सी ........ महीन का जिसम कैंम्प रहा था ....... उसकी छूट गीली हो रही थी .......... और सांसें भी तेज़ हो रही थीं ............
 
कुछ देर की बाद विनोद न्य महीन की पंतय उतार दी और उसकी निचली जिसम को नंगा क्र दया .............. महीन की बिलकुल छोटी सी ...... बलून सी बिलकुल पाक ......... गोरी और चिकनी छूट विनोद की नज़रों की सामन्य नंगी हो गए ........... उसकी जुड़े होय लिप्स पी हल्का हल्का पानी चमक रहा था ...... जो महीन की छूट सी रिस्ता होआ बहार आ रहा था ......... विनोद न्य महीन की टांगों को फैलाया ......... और उसकी खूबसूरत छूट को देखनी लगा .......... फिर अपनी जुबां की नौक को महीन की छूट की दरम्यानी लकीर पी नीची सी ऊपर की तरफ फैरा .............. तो महीन का पूरा जिसम hi हिल की रह गया ............. aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh .............. aaaaghhhhhhhhhhhhhhhh ............... महीन की मुंह सी आवाज़ें निकालनी लगीं ............

विनोद कुछ देर की लय अपनी जुबां सी महीन की छूट को चाट ता रहा ........... नीची सी ऊपर की तरफ ........... और कभी उसकी छूट की दांय को अपनी जुबां की नौक सी रगता रहा .............. फिर विनोद न्य महीन की छूट की ऊपर की हिस्से पी बियर गिराना शुरू की ......... ठंडी ठंडी बियर गरम गरम छूट पी गिरनी सी महीन का जिसम तो जैसी कंम्पनी लगा .......... उसकी मुंह सी सिसकार्यं निकालनी लगीं ............ विनोद न्य फौरन hi नीची अपनी होंठ रखी और महीन की छूट की ऊपर सी बह क्र आती होइ शराब को चैतन्य लगा ................. महीन का लज़्ज़त की मारी बुरा हाल हो रहा था ................ uuuuuuuuuuuffffffffffffffffff ............... VVVVVVVVVVVVinnnnnnnnnnnnnnnnnooooooooooddddddddddddddd .............. kyyyyyyyyyyyyyyyyyyaaaaaa krrrrrrrrrrrrrrrrr rahyyyyyyyyyyyyy hooooooooooooooooo ...............aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh......... महीन तरप रही थी .................. और सिसक रही थी ......... इसी सुब की दरम्यान महीन की छूट न्य एक बार पानी चोर दया ........ जो उसकी छूट सी निकल की छूट की ऊपर गिराई जांय वाली शराब मैं hi मिल की विनोद की मुंह मई जा रहा था ......... जैसी वह चाट रहा था ........ महीन आंखें बंद कए लम्बे लम्बे सांस लय रही थी ......... उसका जिसम रिलैक्स हो रहा था अपनी ओर्गास्म की बाद ..............

थोड़ी देर की बाद विनोद महीन की टांगों की बीच सी उठा और महीन की सर की तरफ आज्ञा ....... वह अभी भी आंखें बंद कए होय लेती होइ थी .......... विनोद न्य अपना अंडरवियर उतरा और पूरी तरह सी नंगा हो गया ............ उसका लुंड पूरी तरह सी खरा था .......... विनोद न्य अपनी लुंड को आंखें बंद क्र की लेती होइ महीन की होंठों पी लगाना शुरू क्र दया ....... अपनी लुंड सी महीन की होंठों को सहलानी लगा ........ लुंड की टोपे को महीन की होंठों पी पहिरण्य लगा ........... विनोद का गरम गरम लुंड को अपनी होंठों पी महसूस क्र की महीन न्य अपनी आंखें खोल दिन ....... और विनोद की आँखों मैं देखनी लगी .......... मगर विनोद की लुंड को अपनी होंठों सी नहीं हटाया ..............

महीन न्य विनोद की आँखों मैं देखती होय ....... अपनी होंठों पी रगड़ रही होय विनोद की लुंड को आहिस्ता सा चूम लय ......... उसकी होंठों पी मुस्कराहट थी ........... फिर आहिस्ता सी अपनी जुबां निकाली और विनोद की लुंड पी पहिरण्य लगी .......... आहिस्ता आहिस्ता ............ विनोद की तरफ देखती होय महीन न्य अपनी होंठ खोल डाई ........ और विनोद न्य आहिस्ता सी अपनी लुंड का टोपा महीन की होंठों की बीच मैं दाखिल क्र दया .......... जिसे महीन न्य अपनी मुंह की अंदर जगा दी ......... और उसकी गिर्द अपनी होंठों को बंद क्र लय ..... और आहिस्ता ाहसिता विनोद की लुंड को छोस्नी लगी ........... कुछ hi देर की बाद विनोद न्य महीन की होंठों की बीच सी अपना लुंड का टोपा बहार निकला और उसकी ऊपर बियर चैने सी थोड़ी सी बियर गिरा दी महीन की तरफ देखती होय ............. और फिर दोबारा सी उसी महीन की होंठों सी लगा दया ........ महीन न्य बिना कोई ऐतराज़ कए ......... विनोद की शराब सी गीले हो रही होय लुंड को चाटना शुरू क्र दया ........... और फिर उसी अपनी मुंह मैं लय की चूसनी लगी ........ बियर का स्वाद डायरेक्ट महीन की मुंह मैं जा रहा था .......... विनोद थोड़ी थोड़ी बियर अपनी लुंड पी गिरा रहा था ........ जो सीढ़ी महीन की मुंह मैं जा रही थी ........ और वह उसी पीती जा रही थी ...........

विनोद न्य अपनी लुंड को महीन की मुंह मैं अंदर बहार करना शुरू क्र दया ........ आहिस्ता आहिस्ता उसकी मुंह मैं अंदर तक डालती होय ..... महीन की हलक़ सी टकराता तो महीन को थोड़ा उनकंफर्टबले महसूस होता ..... मगर वह विनोद की ख़ुशी की लय उसी बर्दाश्त क्र रही थी ... थोड़ी देर अपना लुंड महीन सी चूस्वांय की बाद विनोद फिर सी महीन की छूट की तरफ आज्ञा ..... और उसकी छूट को चैतन्य लगा ....... महीन का भी अब दिल छह रहा था की विनोद अपना लुंड उसकी छूट मैं दाल की उसी छोड़ डाली .......... मगर विनोद तो कुछ और hi सोच मैं था ....... उसनी महीन को उल्टा हो क्र घोरी बन न्य को कहा .......

महीन ....... वह क्यों ......

विनोद ....... हो जाओ न प्लीज ......... मुझी तुम्हारी इस खूबसूरत गांड को प्यार करना है .......

महीन मुस्कराई और अपनी घुटनो और हाथों पी झुक की घोरी बन गए ......... विनोद महीन की पिच्य आया और उसकी खूबसूरत गांड पी हाथ पहिरण्य लगा ....... सहलानी लगा ......... महीन को ाचा लगनी लगा .......... फिर वह झुक की दोनों हिप्स को चूमनी लगा ........... उन पी जुबां फैरती होय उनको चैतन्य लगा ......... महीन को अपनी जिसम मैं गुदगुदी सी महसूस हो रही थी .......... मगर उसी ाचा लग रहा था ........ फिर विनोद न्य महीन की दोनों हिप्स को खोला और महीन की गांड का छोटा सा गुलाबी सूराख विनोद की नज़रों की सामन्य आज्ञा ..... बिलकुल छोटा सा सूराख था ..... बिलकुल बंद ....... जिस मैं कभी भी कुछ ना गया था ............ विनोद न्य झुक की महीन की गांड की सूराख को अपनी होंठों सी हल्की सी चूम लय ............ महीन का पूरा जिसम कैंम्प गया ........ और वह पिच्य को गर्दन मोड़ की विनोद को देखनी लगी ............

विनोद ......... महीन तुम्हारी गांड बुहत खूबसूरत है ...... और इस का सूराख बुहत hi टाइट है ...... बिलकुल कंवरी गांड है तुम्हारी महीन ........... फिल्म मैं जो लडक्यां थीं उनकी गांड सी भी ज़्यादा खूबसूरत और टाइट है तुम्हारी गांड .........

महीन मुस्कराई ........ हाँ तो मैं कोई उनकी तरह पोर्न एक्ट्रेस तो नहीं हों न जो उनकी जैसी हों गई मैं ............

विनोद ...... सही कह रही हो ....... बुहत टाइट है तुम्हारी गांड क़सम सी महीन ........

महीन मुस्कराई और गर्दन घुमा की विनोद की तरफ देखती होइ बोली ....... विनोद चाहती क्या हो आखिर तुम ..... तुम्हारी िरादय ठीक नहीं लग रही मुझी ............ ......

विनोद अपनी ऊँगली को महीन की गांड की सूराख पी आहिस्ता आहिस्ता घुमाती होय बोलै ........... महीन ....... प्लीज मुझी इसका मज़ा भी लय लेनी दो न ............. pleaseeeeeeeeeeeeee

महीन दर की मारी घबरा गए ........... और जल्दी सी सीढ़ी होती होइ बोली ....... पागल हो गए हो क्या तुम विनोद ......... वहां भी भला कोई करता है .............

विनोद ........ सुब कृत्य हैं महीन ....... तुम न्य खुद देखा hi था न मूवी मैं की यहाँ भी दाल रही थय न ............

महीन ....... पर वह तो यह लोग कृत्य हैं न ........ हमारी तो नहीं न ..........

विनोद महीन की नंगी टांगों पी हाथ फैरती होय बोलै ..... सुब कृत्य हैं महीन ........ और यक़ीन करो बुहत मज़ा आता है इस मैं भी .........

महीन थोड़ा झिझकी ........ लकिन अगर मान भी लोन तो भी तुम्हारा यह इतना बारे है यह कैसी जा सकता है वहां ........ मैं तो मर hi जाऊँ गई विनोद .........

विनोद मुस्कराया ........ नहीं मारण्य डॉन गए मैं तुम को मेरी जान ...... बुहत आराम आराम सी डालूं गए और तुमको बिलकुल भी दर्द नहीं हो गए ............

महीन ....... वह ...... ऐसी कैसी दर्द नहीं हो गए .........

विनोद मुस्कराया ....... मैं गेल लगा की दालों गए न वहां पी ......

महीन हैरत सी बोली ....... क्या मतलब है तुम्हारा ........ कोनसी गेल ..........

विनोद ....... वह गेल ख़ास तोर पी गांड मारण्य की लय उसे होती है ....... उसी गांड की सूराख मैं लगाती हैं ाच्य सी और फिर लुंड डालती हैं .......

महीन ... ऐसी कोनसी गेल है ...... और फिर वह कहाँ सी आय गई इस वक़त .......

विनोद मुस्कराती होय ......... वही K-Y जेली hi है जो तुम न्य अभी रिसेप्शन सी मंगवाई है ..........

महीन विनोद की बात सुन की हैरत सी उछाल पारी .......... क्या मतलब है तुम्हारा ............. तुम न्य मेरी सी यह चीज़ मंगवाई थी रिसेप्शन सी ......... Vinoooooooooodddddddddddddddddd .............. कितनी गंदी हो tummmmmmmmmmmmmmmmmmmm ............ और कितनी बिहाराम हो तुम .......

महीन न्य यह कहती होय अपनी क़रीब पारा होआ तक्क्या उठा की विनोद पी फेंका ...... और फिर खुद उछाल की उस की ऊपर चढ़ गए ..... उसी बीएड पी गिराया और उसकी सीने पी मुक्के मारण्य लगी ............ विनोद हंस रहा था ..............

महीन भी गुस्सा नहीं क्र रही थी ......... उसनी विनोद की सर की बलून को अपनी मुठी मैं लय और उसी झंझोड़ती होय बोली ......... Vinooooooddddddddddd ....... तुमको शर्म तो नहीं आ न मुझ सी यह करवाती होय ................. इसी लय वह कमीना ऐसी नज़रों सी मुझी देख रहा था और बार बार हंस रहा था .............

विनोद हंसती होय ........ सॉरी सरररय ......... महीन ..... सॉरी .....

महीन .......... बुहत बुरे हो तुम विनोद .......... ज़रा भी शर्म नहीं है तुमको क़सम सी ........... पता नहीं वह क्या सोच रही हों गए रिसेप्शन वाले और वह रूम सर्विस वाला लड़का भी ........

विनोद हंसा ....... सोचना क्या है ........ बस एहि न की आज मैडम अपनी गांड का ूबघातां करवानी वाली है अपनी हनीमून पी ............

महीन भी हंस रही थी ......... विनोद न्य उसी बहून मैं भर लय और उसी चूमनी लगा ........... फिर महीन उसकी बाज़ोँ सी निकल क्र बीएड सी टेक लगा की बेथ गए और साइड टेबल पी पारी होइ K-Y जेली की तुबे को उठा की देखनी लगी ........ उस पी सुब कुछ लिखा होआ था ....... लुब्रीकेंट फॉर सेक्स ....... और पता नहीं क्या क्या ..........

विनोद भी उसकी क़रीब बैठा होआ था ........... वह बोलै ...फिर क्या ख्याल है तरय करें ...........

महीन का चेहरा शर्म सी लाल हो गया ........... विनोद मुझी नहीं लगता की मैं यह क्र सकती हों ..............

विनोद महीन की गाल को चूमती होय बोलै ....... क्र लो गई ..... कुछ नहीं हो गए मेरी जान ............

महीन न्य सर झुका दया .......... मुझी नहीं पता ..........

दिल hi दिल मैं वह विनोद की बात मान न्य का इरादा क्र चुकी होइ थी ......... जिसका विनोद को भी अंदाज़ा हो गया था ........

विनोद न्य आहिस्ता सी महीन को घुमाया ....... और उसी फिर सी उसी पोजीशन मैं लय आया ......... महीन गर्दन पिच्य क्र की विनोद को देख रही थी ........ विनोद न्य K-Y जेली की तुबे खोली और उस मैं सी गेल लय क्र महीन की गांड की छूती सी सूराख पी लगानी लगा ........ आहिस्ता आहिस्ता .... और फिर और गेल लय क्र महीन की गांड की सूराख की अंदर अपनी ऊँगली दाल दी .......... और ऊँगली को महीन की गांड की अंदर घुमाती होय उसी ाच्य सी लुब्रिकेट करनी लगा ........ कोई स्पेशल गेल थी ....... महीन को भी ाचा लगनी लगा ..... उसी भी मज़ा अन्य लगा ...........

विनोद ......... महीन ाचा लग रहा है न .....

महीन वीर्य सी बोली ....... हहमममममममम

विनोद न्य अब अपनी लुंड पी भी थोड़ी सी गेल लगाई .... और अपनी लुंड की मोटे टोपे को महीन की गांड की सूराख पी रखनी लगा ........... महीन फिर सी दर गए ............ विनोदद्ड़ ......... pleaseeeeeeeeeee आहिस्ता............ दर्द हो गए बुहत ........

विनोद अपनी लुंड को महीन की गांड की सूराख पी आहिस्ता आहिस्ता रगड़ती होय बोलै ............ आराम सी hi करों गए ...... फ़िक्र नहीं करो तुम ..........

विनोद न्य आहिस्ता आहिस्ता अपनी लुंड का दबाओ महीन की गांड की सूराख पी बढ़ाना शुरू क्र दया ........ विनोद की ज़ोर लगानी की बावजूद भी उसका लुंड महीन की गांड मैं दाखिल नहीं हो पा रहा था ... महीन को थोड़ी तकलीफ भी हो रही थी ....... मगर वह बर्दाश्त क्र रही थी ......... विनोद प्रेशर बढ़ा रहा था ........ और फिर एक प्लॉप की आवाज़ की साथ विनोद की लुंड का मोटा टोपा महीन की कंवरी गांड की टाइट सर्किल को खोलता होआ महीन की गांड की सूराख मैं एंटर हो गया ......... और साथ hi महीन की मुंह सी एक ज़ोर की चीख निकल गए ...... उसनी जल्दी सी ाग्य को हो की खुद को विंडो सी चुरवानी की कोशिश की मगर विनोद न्य महीन की कमर सी पाकर की उसी ाग्य होनी सी रोक लय .....

महीन चीखी ............. मर gyeeeeeeeeeeeeee ........... pleaseeeeeeeeeeee nikaalllllllllllllooooooooooooooooo ...........

विनोद न्य अपनी लुंड की टोपे को महीन की गांड की सूराख की अंदर hi रखा और आहिस्ता आहिस्ता उसकी गांड और नंगी कमर पी हाथ पहिरण्य लगा ................ बस महीन .......... प्लीसीईए थोड़ा सा बर्दाश्त क्र लो ........ अभी यह दर्द ख़तम हो जाय गए ...............

महीन तरप रही थी ........... नहीं pleaseeeeeeeeeeee ........... बुहत दर्द हो रहा है .............. बोहत बारे है तुम्हारा ...........

विनोद न्य थोड़ा सा गेल और लय और उसी अपनी लुंड पी लगानी लगा ........... उस हिस्से पी जो महीन की गांड सी बहार था ........ और फिर आहिस्ता ाहसिता थोड़ा थोड़ा अपना लुंड महीन की गांड की अंदर पुश करनी लगा .......... महें को ऐसा महसूस हो रहा था की जैसी कोई मोटा डंडा उसकी कंवरी गांड मैं दाखिल हो रहा हो ........ महीन को बुहत ज़्यादा तकलीफ हो रही थी ............. मगर वह बर्दाश्त करनी की कोशिश क्र रही थी ................ विनोद भी बस 2 इंच लुंड को महीन की गांड की अंदर दाल की उसी आहिस्ता आहिस्ता अंदर बहार क्र रहा था ............ हल्की हल्की उसी हरकत दी रहा था ......... और महीन की जिसम को सहला रहा था ........ महीन तकलीफ सी सुबक रही थी .......... सिस्क्यान लय रही थी ....... महीन की गांड का सूराख सुच मैं बुहत टाइट था ....... विनोद को भी अपनी लुंड मैं दर्द महसूस हो रहा था ......... महीन की सिस्क्यान आहिस्ता आहिस्ता काम होती जा रही थीं ............ विनोद न्य अपना एक हाथ नीची लय जा की महीन की छूट की दांय को सहलाना शुरू क्र दया ....... ... और ऊपर सी अपनी लुंड को आहिस्ता आहिस्ता महीन की गांड मैं अंदर बहार करनी लगा ............ कुछ hi देर मैं विनोद का आद्य सी ज़्यादा लुंड महीन की गांड की अंदर था ............ मगर विनोद अभी पूरा लुंड महीन की गांड मैं नहीं डालना चाहता था ........... उसी भी अहसास था की महीन का यह पहला मौका है गांड मैं लेनी का ............. और उसी उसकी तकलीफ का अहसास भी था ..........

आहिस्ता आहिस्ता महीन का दर्द काम होनी लगा .......... और विनोद अपनी लुंड सी महीन की गांड मारता रहा ............. अब महीन को भी मज़ा आ रहा था ..........

विनोद अपना लुंड महीन की गांड मैं अंदर बहार कृत्य होय बोलै ........ अब तो दर्द नहीं है न महीन ...........

महीन न्य ना मैं सर हिला दया ............

विनोद ........ अब मज़ा आ रहा है न ..........

महीन ............ hhhmmmmmmmmmmmmmm .........

विनोद .......... महीन बुहत टाइट है तुम्हारी गांड .............. बुहत टाइट .................

महीन वीर्य सी मुस्करा दी .......... मगर तुम न्य टाइट रहंय नहीं देनी न .... कुछ hi देर मैं विनोद की लुंड न्य अपणी साड़ी मणि महीन की गांड की अंदर hi दाल दी ........... और महीन भी झाड़ गए .................

महीन की गांड मारण्य की बाद विनोद बीएड पी लेट गया ....... और महीन भी अपना सर विनोद की बाज़ू पी रख की लेट गए ....... उसकी सैन्य पी अपना बाज़ू दाल की .............. महीन को अपनी गांड मैं दर्द हो रहा था मगर अब इतना नहीं था ................ थोड़ी देर रेस्ट करनी की बाद विनोद न्य महीन को बोलै की चलो दिंनिंग हॉल सी कुछ खा की आती हैं अब फिर सी भूक लगनी लगी है ................... महीन की हालत ठीक नहीं थी ............ मगर फिर भी वह विनोद की साथ जांय की लय रेडी हो गए ................

दोनों रूम सी निकली तो महीन थोड़ा सा लंगड़ा की चल रही थी हल्की हल्की दर्द की वजह सी .............. रिसेप्शन की सामन्य सी गुज़रती होय वह दिंनिंग हॉल की तरफ जांय लगी ............... रिसेप्शन पी खरी होय लड़के उनको hi देख रही थय ............. महीन को थोड़ा सा लंगड़ा की चलता होआ देख की आपस मैं कुछ बातें करनी लगी मुस्कराती होय .............. हंसती होय ............... इस पी महीन को फौरन याद आज्ञा की वह क्या सोच रहें हों गए ............. इस पी महीन को बुहत शर्म भी आई ........... और वह जल्दी सी दिंनिंग हॉल मैं चली गए विनोद का हाथ पाकर की .................

महीन बोली ....... विंडो सुब मुझी देख की हंस रही हैं ..... वहीँ रूम मैं कुछ मंगवा लेती न कहानी को ......... मुझी इतनी शर्म आ रही है

विनोद महीन की कमर मैं बाज़ू डालती होय बोलै ....... षर्मान्य की कोई ज़रूरत नहीं है यह इन सुब का रोज़ का काम है .... हर रोज़ यही सुब कुछ देखती हैं यह लोग

महीन ....... तुम न्य मुझी हर तरह सी hi तब्दील क्र की रहना है विनोद .........

दिंनिंग हॉल मैं हल्का फुल्का कहानी की बाद दोनों रूम मैं जांय लगी ....... दोबारा सी रिसेप्शन की ाग्य सी गुज़री तो रिसेप्शन गर्ल खरी थी ........ जैसी महीन न्य आर्डर बताया था फ़ोन पी ......... वह महीन की तरफ देख की मुस्कराई .......... तो महीन ंभी जवाब मई शर्मीली सी मुस्कराहट की साथ उसको देखती होइ ाग्य जांय लगी .......

रिसेप्शन गर्ल ........ मम ..... ी होप यू अरे okay ...

महीन शरमाई ..... यस ... ी ऍम ऑलराइट .....

रिसेप्शन गर्ल ...... मम िफ़ यू नीड थें ी मई सेंड हॉट वाटर बोतल इन योर रूम ........

महीन शर्मा गए ......... no no .......... no नीड ऑफ़ तहत ...... ी ऍम okay ....... थैंक्स ........

रिसेप्शन गर्ल ...... that's गुड मम ........ हैवे ा नीस स्टे मम........

महीन विनोद का हाथ पाकर की ाग्य बरही ...... जो हंस रहा था ........ और अब महीन भी मुस्करा आरही थी .......

फिर दोनों अपनी रूम मैं वापिस ाग्य ........... साड़ी रात विनोद न्य महीन की छूट और गांड मारण्य का मज़ा लय ............. महीन भी उसका साथ देती रही ............ उसी भी काफी हद तक अब गांड मैं लेनी का तज़र्बा हो गया था ............. उसकी तकलीफ ख़तम हो गए थी ........... यह उनकी हनीमून की आखरी रात थी इसलय भी महीन न्य विनोद को किसी काम सी नहीं रोका ........... और उसका भरपूर साथ देती रही ............... उसी खुद भी तो यह सुब ाचा लग रहा था न विनोद की साथ अपना हनीमून मनाना ............

अगली दिन दोनों दोपहर सी पहली अपनी घर वापसी की लय रवाना हो गए ........ ख़ुशी ख़ुशी ............ अपनी हनीमून की खूबसूरत यादों की साथ .............
 
अपडेट NO: 30

विनोद और महीन 9 बजाय की क़रीब अपनी अपार्टमेंट मैं पोहंची .............. डिनर वह बहार hi क्र आय थय .................. महीन न्य घर मैं एंटर होती hi जैसी सुकून का एक सांस लय .......... जैसी साड़ी वाइव्स अपनी घर वापसी पी सुकून महसूस करती हैं ............ दोनों न्य सामान लाउन्ज मैं hi रखा ........... और फिर महीन जा की दोनों की लय पानी लय क्र आई ............ पानी पीने की बाद विनोद न्य महीन को होंठों पी किश क्या और फिर दोनों मुस्कराती होय अपनी अपनी रूम मई चले गए अपना अपना सामान रखनी ............... महीन अपनी रूम मैं आई और सामान का बैग एक तरफ रख की बीएड पी लेट गए ............ आंखें बंद क्र की ............. उसी अजीब सा फील हो रहा था ........... जैसी कुछ कमी हो .......... कुछ अकेला पैन ............ जैसी उसी अपनी साथ ....... अपनी बीएड पर विनोद की कमी महसूस हो रही हो ............. उसी अपना बीएड खाली खाली लग रहा था ........... आखिर इतनी दिन सी वह विनोद की साथ hi सो रही थी ............. उसकी होंठों पी मुस्कान फैल गए ............. फिर वह अपनी बीएड सी उठी ............. अपना लाउन्ज वियर पहना ............ जो एक कॉटन शर्ट और शॉर्ट्स थय ........... बिना ब्रा और पंतय की ............ और फिर अपनी रूम सी निकल क्र विनोद की रूम मैं आगये ........... क्यों की उसी नहीं लग रहा था की वह अकेली सो सकती है अब ............. विनोद सी अलग हो की ........... उसी रात को विनोद की पास hi तो सोना था ........... विनोद का रूम खाली था ............. महीन जा की उसकी बीएड पी लेट गए ............. थोड़ी hi देर मैं विनोद रूम मैं दाखिल होआ ............ वह वाशरूम सी आया था ............ क्यों की उसनी सिर्फ एक छोटा सा टॉवल बाँधा होआ था अपनी जिसम की निचली हिस्से पी ............... अपनी लुंड को छुपानी की लय ............. हलकी अब उसी यह सुब महीन सी छुपानी को कोई ज़रूरत तो नहीं थी ................... अपनी बीएड पी महीन को लेता होआ देख की विनोद मुस्कराया ..............

विनोद ...... वव्वव्वव्वव्व ...... महीन तुम यहाँ ...... मेरी बीएड पी ........

महीन एक अदा सी मुस्कराई ...... क्यों मैं यहाँ नहीं आ सकती क्या ..........

विनोद ...... क्यों नहीं ......... मेरी जान अब तो यही तुम्हारा बैडरूम है ...........

विनोद फिर ड्रेसिंग टेबल की सामन्य खरी होय की अपनी बाल ब्रश कए और बीएड पी महीन की पास आज्ञा ............. और दोनों एक दूसरी की साथ जुड़ की लेट गए .............

विनोद ........... महीन मैं एक बात सोच रहा हों ........

महीन विनोद की नंगे सीने पी हाथ फेरती होइ बोली ....... वह क्या

विनोद .......... अब जब हम न्य रहना hi एक साथ है और एक hi रूम मैं है तो फिर क्यों न हम ओने रूम अपार्टमेंट मैं शिफ्ट हो जैन ....... उस मैं हम दोनों सारा वक़त एक दूसरे की साथ बीता सकें गए .............. और इकोनोमिकल तो हो गए hi ..............

महीन कुछ सोचती होइ बोली ............. कह तो आप ठीक hi रही हो .......... मुझी भी अपनी रूम मैं अकेला सोना अब ाचा नहीं लगता ........... तो फिर हम न्य रूम्स सिर्फ क्लोथ्स की लय तो नहीं रखनी न .........

विनोद ....... ठीक है फिर हम ब्रोकर सी बात क्र लेती हैं शायद कोई यहीं इसी बिल्डिंग मैं कोई और अपार्टमेंट मिल जाय ............

महीन अपना सर विनोद की सीने पी रखती होय बोली ............. ठीक है .......... जैसी आप का दिल क्रय क्र लो ................ वह तो अब दिल सी विनोद की साथ थी ........ उसी विनोद की छाती पी hi सुकून आता था .......... विनोद भी उसकी कन्धों को सहला रहा था बुहत hi प्यार सी .............

विनोद अपना हाथ महीन की बूब्स पी रखती होय बोलै .......... आज भी करें ............

महीन विनोद की आँखों मैं देखती होइ बोली .......... इतनी दिन मैं दिल नहीं भरा क्या आपका ...........

विनोद न्य ना मैं सर हिला दया ........

महीन मुस्कराई ............ लकिन आज नहीं .............. आज मैं बुहत थक गए हों ................ कल क्र लेना आप .............

विनोद न्य okay बोल दया महीन को और उसी अपनी साथ चिपका की सुलानी लगा ................. महीन को भी ाचा लगा विनोद का अंदाज़ ...... उसकी मर्ज़ी का ख्याल रखना ............. और प्यार करना ............. विनोद की सीने पी सर रखी रखी hi महीन की आँख लग गए .............

सुबह पहली महीन की आँख खुली ...... उसनी वाशरूम सी फ़ारिग़ हो की जा की चाय बनाई ........... और बैडरूम मैं ला की विनोद को जगाया ....... और दोनों मिल की चाय पीने लगी .............. एक दूसरी की बिलकुल साथ बैठी होय .............. महीन को अपनी यह नहीं ज़िन्दगी बुहत अछि लग रही थी ..............

महीन चाय का सिप लेती होइ बोली ......... विनोद मुझी बुहत शर्म आ रही है आज ऑफिस जाती होय ...........

विनोद ...... वह क्यों .......

महीन मुस्कराई ........ वह नीतू और जेनी न्य मुझी ज़रूर तंग करना है ........ तैसे करें गई न हमारी हॉलीडेज को लय क्र ............

विनोद हंसा ........ हाँ यह तो है ........ जो भी हो वह तो बाज़ अन्य वाली नहीं हैं ............. लकिन फिर भी जाना तो है न ............ एक बार तो फेस करना hi पारी गए न उनको ............ हहहह

महीन भी हंसी ....... हाँ यह तो है ............ ाचा चलो अब उठो तैयारी करें ..........

महीन उठ की वाशरूम मई चली गए नहंय की लय ........... और अपनी कपड़े उतार की नहानी लगी ........... चाँद मिनट्स की बाद hi दरवाज़ा खुला और विनोद भी अंदर आज्ञा ............ बिलकुल नंगा ............ महीन को कोई हैरत नहीं होइ ........ वह तो सिर्फ मुस्करा दी ........ क्यों की अब उसी भी आदत हो चुकी होइ थी विनोद की साथ नहानी और एन्जॉय करनी की ......... विनोद न्य क़रीब आ की महीन का नंगा जिसम अपनी बहून मैं भर लय ...... दोनों एक दूसरी की नंगे जिस्मो पी हाथ फैरती होय एक दूसरी को किसिंग करनी लगी ...... शावर की नीची भीगती होय दोनों की नंगे जिसम एक दूसरी सी लिपटे होय थय ....... महीन हाथ नीची लय जा की शावर की पानी मैं गीली हो रही होय उसकी लुंड को सहलानी लगी ............. फिर महीन अलग होइ और बोली ...... चलाओ अब बस करो .... और नहाओ जल्दी .............. दोनों न्य जल्दी जल्दी नहा की नाश्ता बनाया .......... और फिर नाश्ता क्र की दोनों ऑफिस की लय निकल पारी ............. विनोद की बुहत इसरार करनी पर महीन न्य आज एक स्कर्ट और शर्ट पहनी थी .......... स्कर्ट उसकी नीज तक था और नीची की टांगें नंगी थीं .......... इस तरह की ड्रेस मैं ऑफिस जांय का महीन का यह पहला मौका था ........... उसी शर्म भी आ रही थी ............ मगर ाचा भी फील हो रहा था ............ स्कर्ट भी टाइट था ...... जो उसकी हिप्स और तइस की साथ चिपका होआ था ............ और महीन को बुहत hi सेक्सी लुक दी रहा था .............

महीन विनोद की पिच्य पिच्य ऑफिस मैं दाखिल होइ .......... वह किसी नै नवेली दुल्हन की तरह शर्मा रही थी ........... जैसी hi नीतू न्य उसी आती होय देखा तो फौरन hi मुस्कराती होइ उनकी तरफ आई ..........

नीतू ........... वेलकम वेलकम बैक तो थे नई कपल ...........

महीन मुस्करा दी .......... शर्माती होय .......... और जल्दी सी अपनी केबिन की तरफ बढ़ गए ........ विनोद की चेरि पर भी मुस्कराहट थी ........ मगर वह तो जैसी बुहत खुश लग रहा था ......... उसकी आँखों मैं चमक थी ........ और ऐसा लग रहा था की जैसी वह कोई बुहत बरी ट्रॉफी जीत की आया हो ........... उसी ाचा लग रहा था सुब का उसकी तरफ ऐसी देखना ............ उसी ाचा फील हो रहा था की सुब यह जानती हैं की उसनी महीन जैसी खूबसूरत लड़की को हासिल क्र लय है ............. वह अपनी इसी ख़ुशी को एन्जॉय करना चाहता था .......... और वह अपनी इस ख़ुशी को छुपा नहीं रहा था ........ ना hi शर्मा रहा था ............. इसी लय उसनी नीतू को मुस्कराती होय थैंक्स बोलै .........

नीतू महीन की पिच्य पिच्य आ गए ........... वह भला खाना जान चोरनी वाली थी महीन की ........

नीतू ....... हे हे महीन मैं इतनी दिन सी तुम्हारी वापसी का इन्तिज़ार क्र रही हों और तुम भागी जा रही हो .......... that's नॉट फेयर ....

महीन ....... नहीं तो ...... मैं तो कहीं भी नहीं भाग रही अपना काम देखनी लगी हों .............

नीतू .......... काम भी हो जाय गए ..... पर पहली मुझी तो बताओ की कैसा रहा तुम्हारा हनीमून ............

महीन शर्माती होइ ......... ठीक रहा ........

नीतू ........ क्या बस ठीक ........... ??? ऐसी तो बात नहीं बनी गई ........ ठीक सी बताओ न ..............

महीन ...... यार मुझी काम देखनी दो न प्लीज ........ इतनी दिन सी पेंडिंग पारा हो गए काम .............

नीतू ....... okay okay देख लो अपना काम ....... लकिन मैं भी चोरनी वाली नहीं हों .......... टिया ब्रेक मैं सुब बताना पारी गए तुम्हें आई समझ .................. वर्ण तुम्हारी और मेरी कुट्टी ............... नीतू थोड़ा नाराज़ होनी की एक्टिंग करती होइ बोली ...........

महीन मुस्कराई ......... ाचा बाबा अभी तो जाओ न ..............

नीतू मुस्कराती होइ उसकी केबिन सी चली गए ...........

नीतू की जांय की कुछ देर की बाद विनोद उसकी पास आया ........... क्या बोल रही थी नीतू ............ ??

महीन मुस्कराई ............ पूछ रही थी की कैसा रहा हनीमून

विनोद ....... तो बता देती की ाचा रहा

महीन मुस्कराई ....... वह सिर्फ इतनी पी मान न्य वाली नहीं है

विनोद हंसा और महीन को आँख मारती होय बोलै ......... तो फिर और क्या जान न है उसनी ...........

महीन भी उसकी बात पी हंसनी लगी ........... फिर विनोद अपनी डेस्क पी चला गया ..............

महीन अपनी केबिन मैं काम क्र रही थी की जेनी न्य उसी आ की बताया की उसी बॉस बुला रही हैं अपनी ऑफिस मैं ........... जेनी की बात सुनती hi महीन का दिल ज़ोरों सी धारक उठा ........... उसी तो हमेशा hi बॉस की सामन्य जांय सी घबराहट होती थी ....... पता नहीं क्यों वह उसकी पर्सनालिटी सी इतना ज़्यादा इम्प्रेस हो जाती थी ....... उसनी अपनी ज़िम्मे लगी होय काम की फाइल उठाई और निक की ऑफिस की तरफ बरही ........... नॉक क्र की ऑफिस मैं दाखिल हो गए ............

निक अपनी चेयर पी बैठा कंप्यूटर पी कुछ काम क्र रहा था ............. महीन उसी देखनी लगी .......... हमेशा की तरह hi काफी डैशिंग और स्मार्ट लग रहा था ............. काला रंग होनी की बावजूद भी उसकी जिसम और चेहरी की अट्रैक्शन काम नहीं होती थी ........... बल्कि कुछ अलग किसम की hi अट्रैक्शन थी उस मैं ......... जो हमेशा hi महीन को मुतासिर करती थी ............... हालाकि उस जैसी खूबसूरत लड़की न्य इंडिया मैं कभी किसी काले रंग की आदमी की तरफ नज़र उठा की भी नहीं देखा था ......... वह वैसी भी वहां तो ऐसी काले रंग की लोग छोटी काम hi करती थय न ........... निक जैसी पोस्ट पी और इस जैसी पर्सनालिटी की लोग उसनी कभी नहीं देखी थय ............ इसी लय महीन हमेशा hi उसकी सामन्य कमज़ोर फील करनी लगती थी खुद को ......

निक की आवाज़ आई .......... हैवे ा सीट प्लीज मिस महीन .....

महीन ........ थैंक्स सर

निक न्य अपना काम ख़तम क्या और कंप्यूटर सी अपना रुख चेंज क्र की महीन की तरफ हो गया ........ सीधा बेथ की महीन को देखनी लगा ............ महीन की नज़रें निक सी मिलीं तो उसनी अपनी आंखें झुका लीन ....... उसकी दिल की धरकन तेज़ हो रही थी ............

निक मुस्कराय होय बोलै ............. मिस महीन हाउ वेरे योर वकेशंस ......... ???

महीन थोड़ा सा मुस्करा की आहिस्ता सी बोली ....... तहत वास् गुड सर ...

निक ........ घर पी hi गुज़रीन वकेशंस या कहीं गए भी थीं आप आउटिंग की लय .....

महीन ...... जी जी गए थी आउटिंग की लय .....

निक की होंठों पी मुस्कराहट फैल गए .......... उसकी काली होंठों सी उसकी सुफैद दांत चमकनी लगी .............. ओह हाँ याद आया मुझी ........... जेनी न्य बताया था की आप को विनोद की साथ जाना था वकेशंस पी .........

महीन न्य शर्मा की सर झुकाय होय वीर्य सी बोलै ....... यस सर .......

निक फिर सी बोलै ........... .... परहैप्स आईटी वास् योर हनीमून विथ विनोद ...................

महीन को धचका सा लगा .......... वह निक सी यह सवाल एक्सपेक्ट नहीं क्र रही थी ............. उसी अपना थूक अपनी हलक़ मैं अटकता होआ सा महसूस होआ ............... वह कुछ नहीं बोल सकीय ........ उसका चेहरा शर्म सी सुराख़ हो गया ............

निक ....... सो दीद यू एन्जॉय ...... ??

महीन को कुछ समझ नहीं आ रही थी की वह झूट बोली या सुच बोली निक सी ............ आखिर उसकी मुंह सी निकला ........... यययय ......... एस्सस .....

नीच मुस्कराया ........... that's गुड ...........

महीन का सर शर्म सी झुक रहा था ........... वह निक की तरफ नहीं देख पा रही थी ............

निक फिर सी बोलै ............ सो हैवे यू तवो गोत मैरिड??

महीन का दिल ज़ोर सी उछाल की हलक़ मैं आज्ञा निक की बात सुन की ........... वह कुछ देर तक चुप रही .......... फिर आहिस्ता सी बोली ........... न्नन्न ...... न्यूऊऊऊ ...... सर

निक ......... ओह सॉरी ........... मुझी याद आया यू अरे आलरेडी मैरिड ......... तो समवन .......... िफ़ ी ऍम राइट तो रेमेम्बेर फ्रॉम योर डाक्यूमेंट्स ....... सम मर. आसिफ ........ ऍम ी राइट मिस महीन .......

महीन का शर्म सी बुरा हाल हो रहा था ............ उसनी आहिस्ता सी हाँ मैं सर हिला दया ........

निक फिर सी बोलै .......... ओह ी ऍम सॉरी मिस ........... मैं भी पागल hi हों .......... यह नहीं समझ पाया की यू तवो अरे इन ा रिलेशनशिप नाउ ...... नॉट मैरिड ............ तहत इस गुड मिस ...........

महीन का दिल ज़ोर ज़ोर सी धारक रहा था ............. और उसका चेहरा शर्म सी सुराख़ हो रहा था ............

निक ........ और जेनी न्य मुझी बताया था की शायद आप दोनों ीखती hi रह रही हो ......

महीन न्य आहिस्ता सी हाँ मैं सर हिला दया ........ बिना अपना सर ऊपर उठाय .......... वह बुहत परेशान लग रही थी ..... निक की बातों सी

निक ........... ी थिंक आईटी इस ा गुड डेसिओं तो छोपे थे एक्सपेंसेस ओवर हेरे .........

महीन खामोश रही ...........

निक ........... मिस महीन वैसी अगर आप पहली बता देतीं की यह आप का हनीमून ट्रिप है तो मैं आप की वकेशंस बढ़ा देता ताकि आप और लोग और भी टाइम एक साथ स्पेंड क्र लेती ...........

महीन ........ ननननूवो ........ ननननुवू सर ........ आईटी इस okay ........

निक .......... सॉरी मिस ....... ी ऍम रियली सॉरी ........... ी थिंक ी ऍम बोथेरिंग यू ...............

महीन फौरन बोली ........... no no सर ........... इतस okay .......... ी ऍम नॉट डिस्टर्बेद ...........

महीन निक को यह तो बोल रही थी मगर अंदर अंदर hi उसकी हालत ख़राब हो रही थी निक की बातों को सुन की .............. मगर फिर उसकी बाद

निक न्य कुछ ज़्यादा बात नहीं की और काम को डिसकस करनी लगा ........... और थोड़ी देर की बाद महीन निक की ऑफिस सी निकली तो उसका चेहरा शर्म सी सुराख़ हो रहा था .............. और दिल की धरकन तो उसकी काबू मैं hi नहीं आ रही थी ................ जेनी उसकी पास आई और उसी लय क्र टिया रूम मैं आगये ....... जहाँ नीतू भी बैठी होइ उसी का वेट क्र रही थी ......

नीतू .......... क्या होआ महीन ........ तुम्हारा चेहरा तो लाल हो रहा है .......

महीन शर्माती होइ ........ नहीं कुछ नहीं ..........

जेनी ........ क्या निक न्य कुछ कहा है ........

महीन ............ नहीं नहीं .............. उन्हों न्य तो कुछ नहीं कहा .......

जेनी .......... फिर तुम्हारा चेहरा ऐसी क्यों हो रहा है .......... बताओ ........ वर्ण मैं जा की निक सी पूछती हों ..........

महीन ........ नहीं नहीं ............ उनकी पास नहीं जाना ........

जेनी ....... तो फिर बाओ .......

महीन शर्म सी लाल होती होइ बोली ........... वववव .... ववुआहहहह मेरी वकेशंस का पूछ रही थय ..............

नीतू और जेनी मुस्कराय ........... ohhhhhhhhhhh ..... ाचा ....... तो फिर क्या बताया बॉस को ............

महीन जेनी को थोड़ा गुस्सा दिखाती होइ बोली ............. क्या ज़रूरत थी निक को यह बतानी की की मैं विनोद की साथ जा रही हों ..........

जेनी और नीतू दोनों हंसने लगी ...............

नीतू .......... बॉस को तो बता आई हो अपनी हनीमून का अब हमें भी तो कुछ बताओ न ........... की क्या क्या किआ वहां .............

महीन शरमान्य लगी ............. मैं कुछ नहीं बता रही बस ........ हम न्य कुछ अलग तो नहीं किआ न .............. जो सुब कृत्य हैं वही क्या है न ............

नीतू और जेनी इस बात पी हंसनी लगी ..............

जेनी .......... ाचा तो कहीं घूमनी फिरनी भी गए या वहां रूम मैं hi ग़ुस्से रही दोनों ......

महीन भी उनकी बातों पी हंसनी लगी ........ गए थय बहार भी ...... बहार क्यों नहीं जाना था ..........

नीतू .............. वैसी फॉर हाउ मान्य टाइम्स विनोद फुकेद यू ........ ???

महीन शर्मा गए ............. मुझी नहीं पता .......... मैं कोई काउंट क्र रही थी क्या ........

जेनी मुस्कराई ............ ववववव ............. .............. सो हे फुकेद यू फॉर कुंतलेस टाइम्स ............... हाउ लकी यू अरे महीन .............

नीतू .......महीन यह बताओ हु इस बिग्गेर अमंग विनोद एंड आसिफ .....

महीन ब्लश कृत्य होय वीर्य सी बोली .............. विनोद ......

नीतू ........ ोू वव्वव्वव्वव्व ..........

जेनी ........... आईटी मीन्स सम डे वे विल हैवे तो चेक हिम आउट ...... अहहह

महीन भी उनकी साथ हंसने लगी ...........

........ महीन भी एन्जॉय क्र रही थी .......... थोड़ी देर मैं जेनी उठ की चली गए तो नीतू बोली ...........

नीतू .......... महीन मैं देख रही हों की विनोद न्य तुम्हारी ड्रेसिंग को भी थोड़ा बोल्ड क्र दया .............. अछि चेंज है ........ और ाचा लग रहा है तुम पी यह ड्रेस भी ...............

महीन वीर्य सी उस सी बोली ............ लकिन नीतू मुझी बुहत शर्म आ रही है इस ड्रेस मैं .......... कभी भी मेरी जिसम को ऐसी किसी न्य नहीं देखा ........... और आज देखो मैं ऐसी अपनी नेकेड टाँगूं की साथ ऑफिस आई होइ हों .........

नीतू ..... कुछ नहीं होता ....... कोई भी ऑब्सेर्वे नहीं करता यार यहाँ पी ....... सुब अपनी आप मैं मगन रहती हैं ............ तुम भी बस अपनी लाइफ को एन्जॉय करो ............ अपनी ज़िन्दगी की इस नए chapter को भरपूर तरीक़ी सी गुज़ारो ................ विनोद की साथ ........... और जिस किसी की साथ भी दिल चाही उसकी साथ भी ................ नीतू न्य उसी आँख मारी ..........

महीन मुस्करा दी ....... ऐसी hi छेद चार की बाद सुब लोग अपनी अपनी काम पी लग गए ............ और ऑफिस टाइम की बाद महीन और विनोद अपनी अपार्टमेंट की तरफ चल डाई ..............
 
दोनों अपनी अपार्टमेंट मैं पोहंची ............ महीन वाशरूम सी फ्रेश हो क्र ....... मुंह हाथ धो क्र अपनी बैडरूम मैं गए चेंज करनी की लय क्यों की वह सोने की लय तो विनोद की रूम मैं शिफ्ट हो चुकी होइ थी ........... मगर उसकी कपड़े और सामान अभी भी उसकी अपनी रूम मैं hi रखी थय ............... उसनी जा की अपना स्कर्ट और शर्ट उतार दी ......... महीन अब अपनी ब्रा और पंतय मैं थी .......... वह उसी हालत मैं अपनी ऑफिस की कपड़े अपनी कप्बोर्ड मैं हैंग करनी लगी ........ इतनी मैं दरवाज़ा खुला और विनोद अंदर आज्ञा ......... अब तो दोनों मैं दरवाज़ा नॉक करनी का तकल्लुफ भी बाक़ी नहीं रहा था ........... आखिर अब तो दोनों हस्बैंड और वाइफ की तरह जो रह रही थय ............... विनोद न्य सिर्फ अपना शॉर्ट्स और एक संदू बुनयान पहनी होइ थी ........... महीन उसी देख क्र मुस्करानी लगी ............. विनोद न्य अंदर आती hi महीन की बीएड पी बेथ गया ........... जैसी वह बीएड उसी का हो .................

महीन अपनी कपड़े हैंग क्र की उसी ब्रा और पंतय मैं hi ड्रेसिंग टेबल की सामन्य आई और लोशन उठा क्र अपनी हाथों, बाज़ू और चेहरे पी लगानी लगी .......... उसी ज़रा भी झिझक या शर्म महसूस नहीं हो रही थी विनोद सी .......... बल्कि उसी ाचा लग रहा था ........... एक आज़ादी का अहसास हो रहा था ........ क्यों की इस तरह सी तो वह कभी आसिफ की सामन्य भी नहीं रही थी ............. ना कभी आसिफ उसकी साथ इतना ओपन होता था सिवाय रात को सेक्स करनी की टाइम की ........... महीन का अपनी घर का माहोल हमेशा hi सख्ती और पाबंदी वाला रहा था ........ कभी कोई आज़ादी नहीं मिली थी ........ अपनी दोस्तों सी उनकी प्यार मोहबत की क़िस्से सुनती रहती थी मगर कभी भी ना उसी खुद वह सुब करनी का मौका मिला और ना hi कभी हिम्मत होइ .......... घर की माहोल न्य उसको भी उसी मैं ढाल दया था .......... मगर अब जैसी जैसी उसी यहाँ की माहोल की मुताबिक़ आज़ादी मिल रही थी तो उसी अहसास हो रहा था की वह पहली कैसी ज़िन्दगी गुज़ारती रही है ........... कितनी पाबंदों की साथ ........ और लाइफ मैं क्या क्या मिस करती रही है ..................

विनोद की नज़रें महीन की जिसम पी थीं .......... वह महीन की नंगे जिसम को hi देख रहा था ......... महीन का जिसम उसकी नज़रों की सामन्य नंगा था ......... वह सिर्फ ब्रस्सिएर और पंतय मैं विनोद की सामन्य खरी अपनी जिसम पी लोशन लगा रही थी ............ खुद को तैयार क्र रही थी विनोद की लय ........ महीन की पूरी कमर नंगी थी .......... सिर्फ ब्रस्सिएर की स्ट्रैप्स थय ........ नीची महीन की खूबसूरत सादूल गांड पी सिर्फ और सिर्फ एक पंतय थी .............. महीन भी अपनी जिसम पी लोशन लगाती होइ आंय मैं सी विनोद को देख रही थी .............. उसकी तरफ देखती होइ मुस्करा की बोली .............

महीन ............ ऐसी क्यों देख रही हो जैसी पहली कभी नहीं देखा .......

विनोद मुस्कराया ........... अपनी क़िस्मत पी रश्क क्र रहा हों ............

महीन दिल hi दिल मैं बुहत खुश होइ ......... और यह ख़ुशी उसकी चेहरी पी भी नज़र आ रही थी ............ क्यों ऐसी क्या ख़ास बात हो गए है ...

विनोद ............ अभी तक यक़ीन नहीं आ रहा की ऊपर वाला इतना मेहरबान हो जाय गए मेरी पर की तुम जैसी पारी मेरी ज़िन्दगी मैं भेज दी गए ................

महीन मुस्कराई ........... और उसी छेडती होय बोली ........ तुम को तो पारी मिल गए ........... पर मुझी किस बात की सज़ा मिल रही है की तुम जैसे जिन की पास आगये हों ................ जो हालत बुरी क्र देता है मेरी .............

विनोद महीन की बात सुन की हंसनी लगा ............ वह खुश भी होआ .............. हहहहह ................. बीएड सी उठा और महीन की पिच्य जा की खरा हो गया ........... अपनी बाज़ू महीन की बाज़ूओं की नेच्य सी दाल की उसकी पेट पी लपेट लये ......... और अपना चेहरा महीन की कांद्य पी मौजूद उसकी ब्रा की स्ट्राप पी रख दया और बोलै ..............

विनोद ............. महीन जी ........... असली जिन की हाथी तो आप अभी तक चढ़ी hi नहीं हो .................... जिस दिन असली जिन की हाथ आगये न तो फिर तुम को पता चली गए की जिन क्या होता है और वह क्या करता है ........ हाःहाहा

महीन विनोद की बहून मैं खरी होइ hi अपनी माथै पी बल डालती होइ आंय मैं सी विनोद को देखती होइ बोली ................. क्या मतलब ........

विनोद मुस्कराया ........ और महीन की गर्दन को किश कृत्य होय बोलै ........ कुछ नहीं बस ऐसी hi .............

महीन फिर बोली ........... नहीं बताओ मुझी ........... कोण सी जिन की बात क्र रही हो ...............

विनोद मुस्कराया ............... ाचा ाचा बता डॉन गए तुमको .......... बल्कि दिखा भी डॉन गए तुम को आज जिन ..............

विनोद भी हंसनी लगा ........ और महीन को किसिंग करनी लगा ...........

विनोद न्य अपना हाथ महीन की सामन्य खोला ............ महीन न्य उसकी हाथ पी लोशन दाल दया .............. और विनोद वह लोशन अपनी हाथों पी लय क्र महीन की नंगी कमर पी लगानी लगा ........ महीन को ाचा लग रहा था ................ कुछ देर की बाद .....

महीन बोली ........ चलो अब बस करो और मुझी कपड़े पहन न्य दो .......... फिर खाना खाती हैं चल की ...........

विनोद ........... ऐसी hi चलो न ........ ऐसी hi खाना खाती हैं ........

महीन हंसी .......... तुम तो पागल hi हो गए हो ........... मुझी भी बी शर्म बनाती जा रही हो ............... चलो ...........

दोनों बहार ाग्य ............ महीन न्य खाना गरम क्या ........ और फिर दोनों टेबल पी बेथ की खाना कहानी लगी ............. महीन को बुहत नया ........... अजीब .......... मगर ाचा लग रहा था ..............

महीन ............ कितना अजीब लग रहा है न यह सुब ........... दोनों का ऐसी साथ बैठना ............

विनोद मुस्कराया ........... मुझी तो ाचा लग रहा है ............

महीन .......... बुरा तो मुझी भी नहीं लग रहा ............ मगर कभी मैं न्य सोचा भी नहीं था की एक दिन तुम्हारी साथी यह सुब कुछ करों गई ..........

विनोद ....... सोचा तो मैं न्य भी कभी नहीं था ........ मगर तुमको कोई रिग्रेट है क्या इस सुब की करनी का .......... ??

महीन मुस्कराई .......... नहीं ........ बिलकुल भी नहीं .........

विनोद ........ तो फिर एन्जॉय करो इस सुब को ............

महीन मुस्कराई और बोली .............. विनोद पता है आज क्या होआ जब मैं बॉस की ऑफिस मैं गए तो ............

विनोद ........... क्या होआ ..............

महीन न्य विनोद को निक की साथ होइ अपनी साड़ी बात बता दी ....... विनोद भी हंसनी लगा .........

महीन हंसती होइ बोली .......... विनोद पता है मुझी इतनी शर्म आ रही थी न निक की सामन्य ............. की क्या बताऊँ मैं ......... हेहेहे .... पता नहीं क्या सोचता हो गए वह मेरी करैक्टर की बारी मैं ........

विनोद अपना हाथ महीन की हाथ पी रखती होय बोलै ............ कुछ नहीं सोचता हो गए .......... तुम फ़िक्र नहीं करो बॉस की ........

महीन भी मुस्करा दी .................. फिर बोली ............ विनोद फिर अब इस अपार्टमेंट का क्या करना है ........... मंथ तो कम्पलीट होनी वाला है ...

विनोद ........... हाँ ाचा याद करवाया है .......... आज तो थकावट है बस कल ऑफिस सी वापसी पी सीधे ब्रोकर की पास hi जाईं गए ....... और उस सी बात क्र लाइन गए .............. शायद कोई अपार्टमेंट क़रीब hi मिल जाय या इसी बिल्डिंग मैं hi ............

महीन .......... ठीक है ............

खाना कहानी की बाद दोनों न्य बर्तन समेत्य और फिर दोनों hi विनोद की रूम मैं ाग्य ............ और बीएड पी एक दूसरी की बहून मैं लेट गए ........... कल की सफर की थकान भी थी .......... इस लय थोड़ी देर मैं hi दोनों की आँख लग गए ................

शाम मैं महीन की आँख खुली ........... वह खामसहि सी उठ की बैडरूम सी बहार आई ............ अपनी रूम मैं जा की लाउन्ज वियर पहना और फिर किचन मैं जा की चाय बनानी लगी ............ चाय बना की वह विनोद की रूम मैं वापिस आगये ....... और उसी चाय की लय जगाया ................ दोनों न्य बेथ की बातें कृत्य होय चाय पी ....... और फिर महीन न्य विनोद को बोलै की वह कुछ देर आसिफ की साथ बात करनी जा रही है अपनी रूम मैं ........ तो विनोद को भी प्रिय सी कॉल करनी का बोलै ...........

विनोद मुस्कराया .......... हाँ यह ठीक है ...... अभी बात क्र लेती हैं उन दोनों सी ........ ताकि रात को हमें डिस्टर्ब न करें ...........

उसकी बात पी महीन भी मुस्करानी लगी ........... यह भी ठीक है ........ एक तो उस बीचारी की बीवी को पता की उस पी क़ब्ज़ा जमा लय है और अब डिस्टर्ब भी वही क्र रहा है तुम को .......... वह भाई वह ........

विनोद हंसा ........... हाहाहाहा ........... तो फिर उसी अपनी बीवी को मेरी साथ नहीं भेजना चाहे था न ............

महीन मुस्कराई ............ अब उस बीचारी को क्या पता था की जिसकी साथ वह अपनी बीवी को महफूज़ समझ की भेज रहा है वह कितना बारे शिकारी है ...................

विनोद हंसनी लगा ............ और फ्री महीन खाली कप लय क्र रूम सी बहार आगये .............

आसिफ और प्रिय सी बात करनी की बाद दोनों न्य खाना खाया ............ फिर दोनों वाक की लय बिल्डिंग सी बहार ाग्य .............. आधा घंटा तक वाक करनी की बाद ........ घूमनी की बाद वह लोग वापिस आय ..........

विनोद सोफे पी बेथ गया और टीवी ों क्र लय ...........

विनोद ..... महीन आज थोड़ा ड्रिंक करनी को दिल क्र रहा है .......

महीन उसी आंखें दिखाती होइ बोली ........ तुम्हारा दिल कुछ ज़्यादा hi नहीं करनी लग गया ड्रिंक करनी को जब सी तुमको थोड़ी इजाज़त दी है तब सी ......

विनोद मुस्कराया ............ तुम तो बिलकुल ऐसी बेहवे क्र रही हो जैसी की सुच मच मई मेरी पत्नी हो ...........

महीन उसी एक अदा सी देखती होइ बोली .......... तो नहीं हों क्या ???

विनोद मुस्कराया ........... बिलकुल बिलकुल ............ तुम तो प्रिय सी भी बढ़ की हो मेरी लये ................ पर थोड़ी सी तो पीनी दो न ..........

महीन खुश हो गए ............. लकिन ज़्यादा नहीं पीनी बिलकुल भी ........

विनोद हंसती होय ............ okay बॉस ...........

महीन मुस्कराती होइ गए और फ्रिज सी बियर की चैने निकाल लाइ और विनोद को दी ..............

विनोद .......... तुम अपनी लय नहीं लाइ ...........

महीन उसकी क़रीब hi सोफे पी बेथ टी होइ बोली .......... शुक्रया ........ मुझी तुम्हारी तरह एडिक्ट नहीं बन न ............. हेहेहे ....

महीन बिलकुल विनोद की साथ जुड़ की बैठी होइ थी ........... विनोद न्य बियर की चैने खोली और उसकी सिप लेनी लगा ............. फिर उसनी महीन की तरफ बढ़ाई ........... महीन न्य उसकी आँखों मैं देखा ........... बाज़ नहीं आओ गए तुम मुझी पिलाय बिना ...........

विनोद मुस्कराया और महीन न्य उस सी चैने लय और उस मैं सी एक सिप लय क्र चैने वापिस विनोद को पकड़ा दया .......... दोनों अब बारी बारी सिप लय रही थय ................. बीच बीच मैं विनोद महीन को किश भी क्र रहा था .............. महीन को भी ऐसी बुहत ाचा लग रहा था .............. विनोद महीन की बाज़ूओं ....... और उसकी बूब्स को सहला रहा था ............. महीन की कोमल जिसम को सहलाना उसी बुहत ाचा लग रहा था ..............

महीन विनोद की तरफ देखती होइ बोली ....... ाचा तो अब बताओ कांस्य जिन की बात क्र रही थय तुम दोपहर को ......

विनोद महीन की एक बूब को अपनी मुठी मैं लये होय बोलै ........ क्या सुच मैं तुम न्य देखना है ..........

महीन ....... हाँ दिखाओ ..........

विनोद न्य रिमोट लय और लेद की ब्राउज़र मैं कुछ सर्च करनी लगा .......... महीन को कुछ न कुछ अंदाज़ा तो था की वह क्या करनी वाला है ............ और फिर कुछ देर मैं वही होआ ................

महीन ......... लगता है की फिर कोई पोर्न hi लगानी लगी हो ........

विनोद मुस्कराया ........... और हाँ मैं सर हिलाया ..........

महीन ....... पता नहीं तुमको क्या मज़ा आता है पोर्न देखनी मैं .....

विनोद उसी तैसे कृत्य होय बोलै .......... जैसी तुमको तो मज़ा आता hi नहीं है न ..............

महीन उसकी तइस पी मारती होय बोली ......... अपनी जैसा hi कृत्य जा रही हो मुझी भी तुम .............

विनोद ....... तो क्या सुच मैं आसिफ न्य तुमको कभी भी पोर्न नहीं दिखाई .....

महीन ....... नहीं कभी भी नहीं ...........

विनोद हंसा ..... अजीब बुद्धू आदमी है आसिफ भी ........

महीन न्य हंसती होय ज़ोर सी विनोद की थिगह पी चुटकी काटी ........... खबरदार जो आसिफ को कुछ बोलै तो .......... तुम्हारी तरह बी शर्म इंसान नहीं है वह ........... जो पोर्न मैं नए नए लक्यों को नंगी देख क्र एन्जॉय क्रय .........

विनोद हंसती होय बोलै .......... जैसी तुम तो एन्जॉय करती hi नहीं हो न नए नए लुंड देख क्र ...........

महीन हंसती होइ उसकी तइस पी चुटकी काटनी लगी ............

विनोद भी हंसनी लगा ...........

महीन ....... ाचा तो अब क्या ख़ास ढूंढ रही हो .......

विनोद ........ अभी बता ता हों ........... बल्कि दिखाता हों तुमको .......... असली जिन ............. हाहाहा

विनोद न्य टीवी पर एक इंटर्रशियल सेक्स वीडियो चला दी ........... महीन की लय विनोद की साथ पोर्न देखना भी अब नार्मल बात थी .......... मगर आज सी पहली विनोद न्य उसी इंटर्रशियल मूवी नहीं दिखाई थी .......... मगर महीन न्य तो देखि होइ थी न .......... लकिन यह बात उसनी विनोद सी छुपाई थी ........... सामन्य स्क्रीन पी एक बुहत hi लम्बा तरंगा बिलकुल काले रंगा का नगरी ....... एक बुहत hi गोरी लड़की की साथ सेक्स क्र रहा था ............ दोनों अभी तक फुल लिबास मैं थय ...... वह काला अपनी मोटे मोटे काली होंठों की साथ ........... उस लड़की की खूबसूरत पतली पतली गुलाबी होंठों को चूम रहा था ......... और चूस रहा था ............... महीन उस सन मैं महत्व होनी लगी ...... वह थोड़ा सा ऊपर को सिरक की ........ विनोद की सीने सी अपनी कमर टिका की हाफ लेती पोजीशन मैं लेट गए ...........

महीन ............... विनोूऊऊऊडड़डडडडड ........ यह क्या है ..........

विनोद आहिस्ता सी महीन की बूब को दबाती होय उसकी गाल को चूम की बोलै .......... जिन .............. और ........ पारी ............

महीन वीर्य सी मुस्करा दी और थोड़ा और विनोद की ऊपर सिरकटी होय बोली ............... लकिन विनोद .......... ऐसा कैसी हो सकता है ............... तुम समझ रही हो न मेरी बात ............

विनोद ........ हाँ हाँ .......... तुम्हारा मतलब है की वह इतनी खूबसूरत गोरी सुफैद लड़की .......... और वह इतना काला स्याह आदमी ...........

महीन न्य हाँ मैं सर हिलाया ................

विनोद ....... महीन जब सेक्स होता है न ........ ...... तो उस मैं सुब कुछ हो जाता है ......... कुछ भी उंच नीच ........ गोरा काला ...... ाचा या गन्दा नहीं देखा देखा जाता ............. सेक्स मैं किसी भी चीज़ को गन्दा नहीं समझा जाता .............

महीन ........ लकिन ऐसी कैसी न ......

विनोद महीन की शर्ट की ऊपर सी hi उसकी बूब्स को सहलाती होय बोलै ....... देखो तुमको पहली पहली मुंह मैं लौड़ा लेना ाचा नहीं लग रहा था ........... मगर अब तो तुमको ाचा लगता है न

महीन न्य थोड़ा शर्माती होय हाँ मैं सर हिला दया .......

विनोद ............ और ऐसी hi तुमको भी पता चल गया है की इस मैं कोई बुराई नहीं है ...... कुछ भी गन्दा नहीं है .......... बल्कि मज़ा hi मज़ा hi मिलता है दोनों को ..............

महीन मुस्करा दी ......... महीन की नज़रें स्क्रीन पी थीं .......... उसी पता था की उस काली आदमी की पंत सी कैसा लुंड बरामद हो गए ........... जैसी hi उस गोरी न्य उसकी पंत उतारी तो उसका मोटा लम्बा काला लुंड लेहरानी लगा ............... जैसी देखती hi महीन न्य अपनी दोनों हाथ अपनी मुंह पी रख लय ........... oooooooooooppppppppsssssss ..........

विनोद मुस्कराया ...... क्या होआ .........

महीन ............ वववववूऊऊऊ ........ ववववूऊऊह्ह्ह्ह ...........

विनोद मुस्कराया ........... हाँ इतना बारे ............ इन कालों की लुंड इतनी hi बारी होती हैं ...........

महीन ाहसिता सी बोली ........ रियली ???

विनोद ....... हाँ सुच मैं ..... इसी लये तो मैं न्य इनको जिन बोलै था न .............. जिन hi तो हैं न यह इतनी बारी बारी लुंड की साथ ............

माही वीर्य सी ........... पर ..... विनोद ....... यह ...... कैसी ........... ी मैं .......

विनोद अपना हाथ बढ़ा की महीन की कॉटन शॉर्ट्स की अंदर दाल की उसकी छूट पी अपना हाथ रखती होय बोलै .............. महीन ..... तुमको अभी तुम्हारी सवाल का जवाब मिल जाय गए ............. जब एहि इतना बारे लुंड उस खूबसूरत ........ कमसिन सी लड़की की छूट मैं जाय गए ..........

स्क्रीन पी वह गोरी लड़की उस काले का लुंड चूस रही थी ....... उसी चाट रही थी ............. और अपनी मुठी मैं लय की मसल रही थी ............. इधर महीन की भी हालत ख़राब हो रही थी ............. स्क्रीन पी चल रही होय सन को देखती होय ............. विनोद की उसकी छूट को सहलानी सी .......... महीन की छूट भी गीली हो रही थी ........

विनोद महीन की कान पी किश कृत्य होय उसकी कान मैं बोलै ....... महीन तुम्हारी छूट भी गीली हो रही है उसका इतना बारे लुंड देख की ...........

महीन शर्मा गए ....... और हंस पारी ....

विनोद न्य भी अपनी शॉर्ट्स को नीची को सिरकाया ....... और अपना लुंड निकाल लय .......... और उसी महीन की हाथ मैं दी दया ........ महीन न्य बिना कोई भी ऐतराज़ कए उसकी लुंड को पकड़ा और ाहसिता ाहसिता सहलानी लगी ............. टीवी पी उस काली की लुंड को देखती होय ....... क्कुह देर की बाद विनोद न्य महीन को सोफे पर सी नीची को सिरकाती होय उसकी चेहरी को अपनी लुंड की तरफ हल्का सा पुश क्या ............ अब महीन सोफे सी नीची थी ...... और विनोद सोफे पी बैठा होआ था .......... उसकी खुली होइ तइस की बीच मैं नीची महीन बैठी थी ........... विनोद की लुंड की बिलकुल सामन्य .............. महीन को उसकी बोलनी की ज़रूरत नहीं थी .............. उसनी अपना हाथ ाग्य बढ़ा की विनोद का लुंड अपनी हाथ मैं लय लय .......... और उसी आहिस्ता आहिस्ता सहलानी लगी ............ विनोद की लुंड की ऊपर की जिल्द उसकी लुंड की टोपे पी फिसलती होइ ऊपर नीची को हो रही थी ............ कभी उसी धानमप लेती और फिर उसी बहार निकाल देती .......... महीन को विनोद की लुंड पी उसकी चमड़ी की यही मूवमेंट बुहत अछि लगती होती थी .........

महीन न्य आहिस्ता सी झुक की विनोद की लुंड की टोपे को चूम लय .......... उसकी नज़रें अभी भी टीवी की स्क्रीन पी hi थीं .......... और वह वहीँ देखती होय विनोद की लुंड को चूसनी लगी थी .............. उसी लड़की को फॉलो क्र रही थी .......... जैसी जैसी वह उस काले का लुंड चाट टी ......... महीन भी अपनी जुबां विनोद की लुंड पी पहिरण्य लगती ............. और उसी चैतन्य लगती ........... फिर उसी की तरह अपनी मुंह मैं लय की चूसनी लगती .............. विनोद को भी मज़ा आ रहा था ...................

विनोद महीन की सर की बलून को अपनी हाथों सी समेत तय होय बोलै .............. महीन .......... वह हमारी बॉस की बात क्र रही थी न तुम ............. देखनी मैं वह भी जिन hi है ............. मुझी तो लगता है की उसका लुंड भी ऐसा hi हो गए ........... इतना hi बारे और मोटा .............

महीन विनोद की बात सुन की स्क्रीन पी लहरा रही होय उस काले मर्द की काली रंग की लौड़े को देखनी लगी ............. और उस मर्द को भी ........ उसी लग रहा था की निक उस काली सी कुछ ज़्यादा hi बारे हो गए काम नहीं .......... तो फिर हो सकता है उसका लौड़ा भी इस सी मोटा और लम्बा हो ........

महीन न्य विनोद की लुंड को अपनी मुंह सी निकाल की उसकी तरफ देखा ........... बुहत बिहाराम हो गए होय हो तुम .............. बॉस की लय ऐसी बात बोल रही हो .............

विनोद हंसा .......... मैं न्य कोई ग़लत बात तो नहीं की ............ मैं तो यह कह रहा हों की निक इतना लम्बा चौरा इंसान है ........ उस का लौड़ा भी इसी जैसा काला स्याह लम्बा और मोटा हो गए ...............

महीन की जिसम मैं एक झुरझुरी सी आगये ................ वह वीर्य सी बोली ........... हो पारा मुझी क्या .............

विनोद न्य अपनी लुंड को अपनी हाथ मैं लय और उसी महीन की होंठों पी ाहसिता ाहसिता मारती होय बोलै ........... वह तो ठीक है लकिन तुम्हें बस यह ख्याल रखना है की किसी दिन वह जिन तुमको उठा की ना लय जाय ............... फिर पता नहीं तुम्हारी क्या हालत क्रय गए वह ............... हहहहह ...........

महीन हंसी ....... और विनोद की भारी बॉल्स की थैली को अपनी मुठी मैं लय क्र दबा दया ............ बकवास नहीं करो तुम ............

विनोद की हलकी सी चीख निकली दर्द सी ........... ooooooooooooo iiiiiiiiii ........... aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhiiiiii ............. और वह हंसनी लगा ..............

महीन फिर उसकी लुंड को किश क्र की बोली ........ ाचा तो वह जिन मुझी उठा की लय जाय गए अगर तो तुम मुझी लय जांय दो गए उसी क्या???

विनोद मुस्कराया ............ हाँ क्यों नहीं ........ मैं तुम्हारी माज़ी मैं रुकावट क्यों बाणों ........... एन्जॉय करना न .......

महीन हंसी ........ पागल हो क्या तुम .......... इस सी एन्जॉय हो सकता है भला क्या ..........

विनोद मुस्कराया ..... यह तो तब hi पता चली गए जब इतना बारे तुम्हारी अंदर जाय गए ........

महीन शर्माती होइ .......... जी नहीं ना मैं इतना बारे लय सकती हों और ना hi मुझी इतना बारे चाहिए .............. मेरी लय यही काफी है बस ......

विनोद भी उसकी बात पी हंसनी लगा ............. महीन विनोद की लुंड को अपनी हाथ मैं पकड़ी होय उसको अपनी जुबां सी चाट रही थी .......... नीची सी ऊपर तक अपनी जुबां फेर रही थी ............. और कभी उसकी आँखों मैं देखती होय उसकी लुंड की टोपे को मुंह मैं लय क्र चूसनी लगती .............. उसी सुच मैं hi अब मज़ा आता था विनोद का लुंड सूचक क्र की ..................

उधर स्क्रीन पी उस काले न्य अब उस लड़की की चुदाई करनी की लय उसी लिटा दया ........... और अपनी लुंड को उसकी नाज़ुक सी गोरी और गुलाबी छूट पी रगड़नी लगा ................ उसकी लुंड की मोटे टोपे की नीची उस लड़की की छूट बुहत छोटी सी लग रही थी ................ और उस का लुंड उस लड़की की सलीवा सी चमक रहा था .............. वह अपनी लुंड को उस लड़की की छूट पी ऊपर नीची रगड़ रहा था ............

विनोद की लुंड का टोपा महीन की होंठों की बीच मैं था ..... और वह बस अपनी नज़रें स्क्रीन पी जमाय उस सन को देख रही थी ........... विनोद भी महीन को देख रहा था ........... वह उसी देखती होय बोलै ..........

विनोद .... कैसा लग रहा है न .......... उसकी छूट की गुलाबी गुलाबी होंठों पी वह काला मोटा लौड़ा ..............

महीन बिना नज़रें हटाय बोली ..... हम्म्म्म ........... बुहत अजीब ...

विनोद .......... कितना बारे लग रहा है न उसकी सूराख सी ........

महीन वीर्य सी .. .......... हम्म्म

विनोद ....... अभी देखना कैसी यह मूसल इसकी अंदर जाता है ...........

उस काले न्य अपनी मोटे लुंड का फूला होआ काला टोपा ..... उस लड़की की गुलाबी छूट की छोटी सी सूराख पी रखा ...... और ाहसिता आहिस्ता ज़ोर लगाती होय उसी अंदर डालना शुरू क्या ............. पूछ की आवाज़ की साथ .............. महीन की आँखों की सामन्य उस का मोटा लुंड उस लड़की की नाज़ुक सी छूट मैं उतरण्य लगा ............... साथ hi महीन की होंठों सी हलकी सी aaaaaahhhhhhhhhhhh निकल गए ............

विनोद न्य महीन को सोफे की ऊपर खींच लय ........... और उसी सोफे पी लिटा दया ............. महीन की शॉर्ट्स को नीची खींच की उतार दया ....... और उसकी छूट नंगी हो गए ................ विनोद न्य अपनी एक ऊँगली महीन की छूट मई डाली और बोलै ....... देख लय न कैसी जा रहा है उस की अंदर ............. ssssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ............. महीन की भी सिसकारी निकल गए ............... उसकी छूट गीली हो रही थी ............. विनोद को भी अंदाज़ा हो रहा था ............. विनोद न्य महीन की छूट की पानी सी गीली हो रही होइ अपनी ऊँगली निकाली और उसी महीन को दिखाती होय बोलै ............

विनोद ......... देखो तो कैसी गीली हो रही है तुम्हारी छूट .......... उस काले की लुंड को देख देख क्र .............

महीन शर्माती होइ ........... जी नहीं ............ उसकी वजह सी नहीं ........ तुम्हारी वजह सी .............

विनोद ....... क्यों मेरी वजह सी क्यों ........

महीन ...... तो इतनी देर सी जो हरकतें क्र रही हो तो यह तो गीली तो हो गई hi न .......

विनोद हंस पारा ........ और महीन की छूट की पानी सी गीली हो रही होइ अपनी उगंली को अपनी मुंह की पास ला की उसी चाट लय .............. महीन की आँखों मैं देखती होय ..................... महीन उसकी इस हरकत को देख क्र हल्का सा मुस्करा दी ................. और ाहसिता सी बोली ...... गन्दा .....

विनोद न्य महीन की टांगों को फैलाया ....... और खुद उसकी टांगों की बीच मैं बेथ क्र अपनी लुंड को महीन की छूट पी रगड़नी लगा ............... aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ssssssssssss .............. महीन की सिसकार्यं निकालनी लगीं ................... ................. महीन की छूट सी पानी निकल रहा था .............. और विनोद का लुंड गीला होता जा रहा था .............. महीन की नज़रें स्क्रीन पी जमी होइ थीं ............ और वह उस का काला लुंड उस गोरी लड़की की छूट मैं अंदर बहार होता होआ देख रही थी ................ सिसकती होय बोली ...................... Vinoooooooooooddddddddddddd ............. ना tarpaaooooooooooooooooooo ............... aaaaaaahhhhhhhhhhhh

विनोद न्य महीन की हालत को देखती होय आहिस्ता सी अपना लुंड महीन की छूट की अंदर सिरका दया ............ और महीन की टांगों को खोल की आहिस्ता आहिस्ता ाग्य पिच्य को होती होय अपना लुंड महीन की छूट मैं अंदर बहार करनी लगा ............... टीवी पी चल रही होइ चुदाई को देखती होय महीन को भी विनोद सी छुड़नी मैं मज़ा आ रहा था ........... वह भी विनोद का भरपूर साथ दी रही थी ............... विनोद महीन की ऊपर झुका ....... अपनी होंठ महीन की होंठों पी रख डाई ........ और उसको किश कृत्य होय ........ उसकी होंठों को चूसती होय अपनी लुंड को उसकी छूट मैं अंदर बहार करनी लगा ............ महीन न्य भी अपनी बहाएं विनोद की गले मैं दाल दी होइ थीं ........... और उसकी किसिंग का साथ देती होय उसकी चुदाई का आनंद लय रही थी ............... सामन्य चल रही सन को देखती होय पता नहीं कैसी और कब महीन का ज़ेहन भटकनी लगा ........ और उसी स्क्रीन पी निक नज़र अन्य लगा .......... बिलकुल नंगा .... अपनी मोटे लम्बे लुंड की साथ उस गोरी लड़की को छोड़ता होआ ............. अपना लुंड उसकी छूट मैं अंदर बहार करता होआ .......... महीन न्य अपनी नज़र उस लड़की की चेहरी पी जमाई तो ज़रा सी देर मैं hi उसकी जगा महीन को अपना चेहरा नज़र अन्य लगा ......... उसकी जिसम मैं अजीब कररनेट सा दौड़ गया .......... अजीब सी कैफयत होनी लगी ....... यह सोचती होय की निक उसी छोड़ रहा है सामन्य स्क्रीन पी ....... खुद को निक की साथ ...... उसकी नीची ....... उस सी चुदवाती होय सोच क्र महीन की दिल की धरकन और भी तेज़ होनी लगी ........... उसकी हालत ख़राब होनी लगी ......... वह और भी मस्ती की साथ विनोद सी छुडवानी लगी ........ आहिस्ता ाहसिता अपनी छूट को ऊपर उठा रही थी ...... विनोद की लुंड को अपनी छूट मैं अंदर तक लेनी की लय ................ विनोद की लुंड की रगड़ और ढक्की तेज़ होती जा रही थय .............. महीन न्य विनोद को ज़ोर सी अपनी बहून मैं भींच लय ............. और उसकी छूट न्य पानी चूर्ण शुरू क्र दया ............... महीन का पूरा जिसम हिल रहा था ............. हौली हौली कैंम्प रहा था .................... अपनी ओर्गास्म की शिद्दत की साथ ...........

थोड़ी देर की बाद महीन न्य अपणी आंखें खोल की स्क्रीन की तरफ देखा ............ सामन्य वह काला भी अब अपनी लुंड को उस लड़की की गांड की गुलाबी सूराख मैं डाली होय उसकी गांड मार रहा था ............... उस गोरी लड़की की हलकी हलकी चीखें ...... और आवाज़ें निकल रही थीं ........... बुहत hi अलग मंज़र था ........... उस काली का लुंड उस गोरी की सुफैद गांड की तनग सूराख मैं अंदर बहार हो रहा था ..............

महीन फिर सी गरम होनी लगी थी .............. विनोद भी सीधा हो की उसकी छूट मार रहा था ......... और साथ साथ स्क्रीन पी भी देख रहा था ................ कुछ देर की बाद उस काली न्य अपना लुंड उस लड़की की गांड सी निकाला और लुंड को उस लड़की की मुंह मैं दाल दया ........... वह जल्दी सी उसी चूसनी लगी .................... और फिर महीन की आँखों की सामन्य hi उस काले न्य अपनी लुंड सी मणि का चिरकाओ उस गोरी लड़की की चेहरी और उसकी मुंह मैं करना शुर क्र दया .............. और वह लड़की बारी माज़ी सी उस की लुंड का पानी चैतन्य लगी .............

महीन की आंखें खुली की खुली रह गए थीं ............... वह हकलाती होइ बोली ............. kkkkkkkkkkk .. ............ VVvvvvvvvvviiiiinoooddddddd ............ ययययययययःहःहःहःहः kaisyyyyyyyyyyy ..............

विनोद अपना लुंड महीन की छूट मैं अंदर बहार कृत्य होय बोलै ........... थे लव आईटी महीन ..............

महीन ....... पर यह कैसी हो सकता है विनोद ........... ची ची चींईईई ........

विनोद ...... कभी टास्ते क्या है तुम न्य मर्द की पानी को ......

महीन ...... चींईईई chiiiiiiiiiii chiiiiiiiiiiiii ........ कभी भी नहीं ..........

विनोद ....... तो फिर तुम कैसी कह सकती हो की यह गन्दा है ...........

महीन स्क्रीन की तरफ डेक्ठी होइ ाहसिता सी बोली ......... जैसा भी हो ... है तो गन्दा hi न ........... सामन्य वह लड़की उस काली की लुंड पर सी उसकी माननी को साफ़ क्र रही थी अपनी जुबां सी .........

विनोद ....... गन्दा होता तो यह लोग इतनी माज़ी सी इसी चाट तय कभी .....

महीन चुप हो गए ....... और फिर सी आंखें बंद क्र की विनोद की लुंड का आनंद लेनी लगी ...........

थोड़ी hi देर मैं विनोद भी अपनी मंज़िल को पोहनचंय वाला था ........... उसनी अपना लुंड बहार निकाला और महीन की पेट पी अपनी लुंड सी मणि गिरानी लगा ...................... महीन भी उसी को देख रही थी ............ और कभी अपनी पते को ........... जिस की ऊपर विनोद अपनी लुंड सी निकालनी वाली गाढ़ी मणि का पूल बनाता जा रहा था ..........

जब विनोद फ़ारिग़ होआ तो उसनी अपनी ऊँगली ाग्य बढ़ाई ....... और उसी महीन की पते पी पारी होइ अपनी मणि मैं डाला और उस मैं आहिस्ता ाहसिता घुमान्य लगा ...... ............. फिर अपनी भीगी होइ ऊँगली महीन की होंठों की तरफ बारहा दी ................ महीन घबरा गई ............ आज तक उसनी इस चीज़ को टास्ते नहीं क्या था ........... ीसीटो वह हमेशा hi गन्दी चीज़ समझती थी ........... यही उसको आज तक बताया गया था ........ उसकी फेथ की हिसाब सी भी और घर की माहोल की हिसाब सी भी ......... मगर अभी वह विनोद को इंकार नहीं क्र पा रही थी ...............

महीन घबराई होइ आँखों की साथ इंकार मैं सर हिलाती होइ बोली .......... नहीं विनोद ..... प्लीज .......... यह नहीं .......

विनोद अपनी हाथ को हटाय बिना hi बोलै .......... एक बार सिर्फ ..... टास्ते तो करो ...........

महीन फिर सी बोली .......... नहीं ..... प्लीज .......... मुझ सी नहीं हो गए .........

विनोद महीन की आँखों मैं देखती होय बोलै ............. मेरी खातिर भी नहीं ............

विनोद की यह बात सुन क्र महीन खामोश हो गए .. ........ कोई भी जवाब नहीं दया ............ ना इंकार मैं ........... ना इक़रार मैं ............. बस विनोद की आँखों मैं डेक्ठी रही .............. विनोद समझ गया की वह उसी इंकार नहीं क्रय गई अब ............... वह वीर्य सी मुस्कराया .............. और महीन की आंखों मैं hi देखती होय ........... विनोद न्य आहिस्ता सी अपनी वही ऊँगली महीन की होंठों पी लगा दी ................ और आहिस्ता आहिस्ता अपनी ऊँगली को महीन की गुलाबी होंठों पी पहिरण्य लगा ........ विनोद की ऊँगली पी लगा होआ उसकी लुंड का पानी ....... महीन की निचली होंठ पी लगानी लगा ............ उसकी होंठ पी अपनी ऊँगली आहिस्ता ाहसिता फैरती होय ............ महीन को अपनी होंठ पी कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था ........... जैसी कुछ चिपचिपा सा उसकी होंठों पी लग रहा हो ............ जैसी कोई शीरा ............

विनोद न्य अपनी ऊँगली महीन की होंठों सी हटा ली ........

विनोद की आँखों मैं देखती होय ....... ना चाहती होय भी महीन न्य अपनी जुबां को थोड़ा सा बहार निकला ............ और अपनी निचली होंठ पी अपनी जुबां आहिस्ता आहिस्ता पहिरण्य लगी .......... उसकी जुबां अपनी होंठ पी लगी होइ विनोद की लुंड की मणि को फील क्र रही थी ........ महीन न्य फौरन hi अपनी जुबां वापिस अंदर क्र ली .......... उसकी साथ hi विनोद की लुंड की पानी का ज़ाइक़ा महीन की मुंह मैं घुलनय लगा ............ विनोद की लुंड की पानी का ज़ाइक़ा महीन की मुंह की हलक़ मैं जांय लगा .......... उसी उसका टास्ते बुहत अजीब सा लगा ....... गाढ़ा गाढ़ा ........ कसीला सा ........... कुछ थोड़ा नमकीन सा ........ मगर गन्दा नहीं लगा ........... अजीब सा ज़ाइक़ा था ......

महीन विनोद की आँखों मैं देख रही थी ......... फिर सी अपनी होंठों पी अपनी जुबां फैरती होय ............ विनोद न्य अपनी ऊँगली को दोबारा सी महीन की पते पी गिराई होइ अपनी मणि सी भिगोया ...... और फिर सी अपनी ऊँगली महीन की होंठों की तरफ बारहा दी ........ बिलकुल उसकी होंठों की क़रीब ....... आहिस्ता सी उसकी होंठों को टच क्या ........ महीन न्य विनोद की आँखों मैं देखती होय ............ आहिस्ता सी अपनी जुबां बहार निकाली ............. और विनोद की ऊँगली की साथ लगा दी .......... अब उसकी जुबां सीधा विनोद की ऊँगली सी उसकी पानी को चाट रही थी ............... उसकी जुबां विनोद की ऊँगली पी आहिस्ता ाहसिता फिर रही थी ............ विनोद न्य वीर्य सी अपनी वही ऊँगली महीन की होंठों की अंदर दाल दी ............... और महीन की होंठ उस ऊँगली की गिर्द कस गए ......... और वह आहिस्ता आहिस्ता विनोद की उगंली को चूसनी लगी ................ विनोद सी नज़रें मिलाय होय ............. उसी यह सुब अजीब लग रहा था ........... मगर पता नहीं क्यों बुरा नहीं लगा ..............

फिर महीन वीर्य सी बोली ....... अब खुश ......

विनोद मुस्करा दया ............ बुरा लगा या ाचा ........

महीन का चेहरा लाल हो गया .............. पता नहीं ..........

विनोद समझ रहा था की आज की लय इतना hi काफी है की महीन न्य उसकी लुंड की पानी को टास्ते क्र लय है तो कल इसी अपनी मुंह मैं भी पानी निकालनी दी गई ...........

विनोद न्य मुस्कराती होय महीन की नंगे जिसम को अपनी बहून मैं उठाया ............ और टीवी बंद क्र की उसी लय होय बैडरूम मैं आज्ञा ...................
 
डिअर फ्रेंड्स

आप दोस्तों का इस स्टोरी को पसंद करनी का बुहत बुहत शुक्रया. हमेशा की तरह आप न्य इज़्ज़त दी मुझी और मेरी स्टोरी को. पूरी 3 मोनथस तक मेरी स्टोरी को आप दोस्तों न्य ात थे टॉप ऑफ़ थे चार्ट रखा.

जैसी जैसी स्टोरी बिल्ड उप होइ, जो जो चंगेस आईं उनको आप दोस्तों न्य पसंद क्या.

लकिन मुझे बुहत दुखी दिल की साथ कहना पर रहा है की अब एक बार फिर जुदाई का वक़्त आज्ञा है.

इस स्टोरी न्य जहाँ तक पोहंचना था वह पोहंच चुकी है. अपनी पीक तक अपनी इंतेहा तक .

इस लय इस सी पहली की आप दोस्तों की तवज्जह और दिलचस्पी ख़तम हो मैं इस स्टोरी को एन्ड क्र रहा हों जल्द hi.

इस लय दोस्तों नेक्स्ट अपडेट विल बे थे लास्ट अपडेट ऑफ़ थिस ब्यूटीफुल स्टोरी.

देखती हैं की महीन किस अंजाम को पोहंचती है या पोहंचाती है इस स्टोरी को.

पिंकबाबी
 
अपडेट NO: 31

नेक्स्ट डे

ऑफिस सी फ़ारिग़ होनी की बाद दोनों न्य बहार hi एक रेस्टुरेंट सी खाना खाया .......... और कहानी की बाद ........... जिस ब्रोकर न्य उनको यह अपार्टमेंट लय क्र दया था उसकी पास गए और उसको बताया की अब वह दोनों डबल रूम अपार्टमेंट चोर की सिंगल रूम अपार्टमेंट लेना चाहती हैं ............

ब्रोकर हैरानी सी उनकी तरफ देखती होय बोलै ............ पर पहली तो आप को अलग अलग अपार्टमेंट चाहिए था और अब सिंगल रूम ??? क्या आप दोनों अब एक hi रूम मैं रहो गए ........ ??

ब्रोकर की बात सुन की महीन का चेहरा शर्म सी झुक गया ........

विनोद बात को कवर कृत्य की लय जल्दी सी बोलै ........... वह हम एडजस्ट क्र लाइन गए ............ आप बताऐं की कोई अपार्टमेंट इसी बिल्डिंग मैं मिल सकता है क्या ............

ब्रोकर ....... जी जी ........ ज़रूर .......... लकिन अगर आप बुरा ना मनाएं तो एक बात पूछों .......

विनोद ........ जी पूछें ........

ब्रोकर ............ अरे यू तवो नाउ ा कपल ???

महीन का सर फिर नीची झुक गया ........... और वह इधर उधर देखनी लगी ................

विनोद न्य आहिस्ता सी बोलै ........... यस ..........

ब्रोकर ........ that's गुड ............ फिर आप को एक सिंगल रूम का अपार्टमेंट hi सूट क्रय गए ... इस सी आप की सेविंग भी हो गई

विनोद ....... जी ...... इसी लय आप की पास आय हैं की कोई सिंगल रूम अपार्टमेंट दिखा डैन .....

ब्रोकर ........... सर यू अरे लकी ......... फर्स्ट ऑफ़ आल फॉर हैविंग सुच ा ब्यूटीफुल लेडी तो स्टे विथ यू अस योर पार्टनर ............. एंड सेकन्ड्ली बकज़ ...... एक अपार्टमेंट इसी बिल्डिंग मैं खाली है ........... उसी अभी नई पेंट और रेनोवेट करवाया है ........... आप की फ्लोर सी एक फ्लोर ऊपर ............. बुहत ाचा अपार्टमेंट है .......... आप लोगो को पसंद आय गए ................

महीन ......... तो आप वह हमें दिखा डैन ............

ब्रोकर ........ एक्चुअली मुझी एक और जगा जाना है और वहां सी वापसी तक काफी लेट हो जाय गए ........... आप ऐसा करें की यह अपार्टमेंट की एक्स्ट्रा कीस हैं यह आप लय जाईं और आप लोग खुद hi देख लीजै गए ............. फिर मैं आप लोगो की अपार्टमेंट सी कीस कलेक्ट क्र लोन गए ................ और आप लोगो की ओपिनियन भी लय लोन गए ............ अगर वह अपार्टमेंट पसंद नहीं आया तो फिर कोई दूसरा देख लीजै गए ........

विनोद न्य okay बोलै ......... और फिर दोनों अपार्टमेंट की कीस लय क्र ब्रोकर की ऑफिस सी बहार ाग्य ............. शाम हो रही थी .............. बुहत गहमा गहमी थी वहां रोड्स पर ... ............... दोनों टहलती होय ........... सैर कृत्य होय .......... ाग्य जांय लगी ........ महीन न्य विनोद की बाज़ू मैं अपनी बाज़ू डाली होइ थी और उसकी साथ बिलकुल चिपक की चल रही थी ............

महीन ........ विनोद ..... कितना अजीब लगता है न जब सुब को हम्र्य रिलेशनशिप का बताना परता है ........

विनोद हंसा ........ बुरा लगता है क्या ......

महीन मज़बूती सी विनोद की बाज़ू को पाकर की उस सी चिपकती होइ बोली....... बिलकुल भी नहीं ........ बल्कि सुच बताऊँ तो बुहत ाचा लगता है जब कोई मुझी तुम्हारी साथ जोरता है अस ा कपल .......

विनोद भी मुस्कराया और झुक की महीन की माथै पी चूम लय ...... तो फिर क्या प्रॉब्लम है ..........

महीन आहिस्ता सी ......... तो क्या हम ऐसी hi रहती रहें गए साथ साथ ......

विनोद ........ तो फिर हम दोनों शादी क्र लेती हैं ....... क्या ख्याल है ....

महीन हैरानी सी .......... क्या मतलब ........ यह कैसी हो सकता है ........ ी मैं तो से .......... हाउ इस आईटी पॉसिबल ........ आसिफ .... प्रिय ....

विनोद मुस्कराया .......... उनको वहीँ रहंय दो ....... और हम एक हो जाती हैं ......

महीन न्य कुछ देर सोचा ......... ाचा चोरो इसी ....... फिर सोचें गए ......... वैसी हम एक तो हो hi चुके हैं ........... पत्नी तो तुम मुझी अपनी बना hi चुके हो ऐसी hi ...........

दोनों हंसने लगी ............

फिर दोनों विंडो शॉपिंग कृत्य होय एक मॉल मैं आ गए ............... बहार सी hi शॉप्स की अंदर डिस्प्ले कए होय कपड़े देखनी लगी ................. विनोद को एक बुहत hi छोटी सी जीन्स की शॉर्ट्स और टैंक टॉप डिस्प्ले क्या होआ नज़र आया ......................

विनोद ............. महीन यह ड्रेस देखो तो ...........

महीन गिलास विंडो मैं सी देखती होइ बोली ........ अछि है ...... पर काफी शार्ट है ......

विनोद ....... तो क्या ख्याल है लय लाइन .......

महीन हैरानी सी .............. यह तो बुहत hi शार्ट है ........ यह मैं कैसी पहन सकती हों ...............

विनोद ............ जैसी हनीमून पी पहना था .............

महीन मुस्कराई ............. ना बाबा ना ............ मुझी नहीं लेना ......

विनोद न्य महीन का हाथ पकड़ा और उसी शॉप की अंदर लय गया .......... और उसी ड्रेस का आर्डर क्या ............. वह ब्लू कलर की जीन्स शार्ट थी ........... जो की हाफ तइस सी भी ऊपर थी ................. और उसकी साथ पिंक कलर का टैंक टॉप था ............ छोटी छोटी स्ट्रैप्स शोल्डर पी ........... और गाला काफी ओपन था ........... मगर ऐसा नहीं था की बूब्स बिलकुल hi नंगे हो रही हों .......... बस थोड़ा सा क्लीवेज दीखता था उस मैं ....... विनोद न्य सेल्स गर्ल को वह ड्रेस पैक करनी को बोलै .............. महीन उसको रोकती रही ............ मगर महीन की रोकनी की बावजूद विनोद न्य महीन की लय बुहत hi सेक्सी किसम की नाईट ड्रेस और लाउन्ज वियर भी लय लये .................... और शॉप सी बहार ाग्य ............. महीन दिल hi दिल मैं बुहत खुश भी थी ............ विनोद की तरफ सी इतनी केयर और इतना प्यार मिलनी पर .............. विनोद जैसी मर्द को अपनी लाइफ मैं पा की उसी कभी भी आसिफ की साथ चीटिंग करनी पर कोई गिल्ट महसूस नहीं होती थी ......... no डाउट की आसिफ भी बुहत ाचा था मगर जैसी विनोद उसका ख्याल रखता था ....... जैसी उसी प्यार करता था ......... जैसी उसी छोड़ता था ....... वह सुब कुछ आसिफ मैं नहीं था .......... महीन यह सोचती होइ मुस्कराई और मज़ीद विनोद की साथ चिपक गए ...... वह विनोद की बाज़ू मैं अपना बाज़ू डाली उसकी साथ साथ चलती जा रही थी ............... उसी समझ नहीं आ रही थी की इतनी सेक्सी स्माल और रेवेलिंग ड्रेस वह कैसी पहन सकती है .... उसी बस एहि तसली थी की उसनी यह ड्रेस सिर्फ विनोद की सामन्य hi तो पहन न्य हैं न ........... घर की अंदर hi ........... और विनोद तो अब उसकी पति सामान था न .............

मॉल मैं hi चलती होय महीन की नज़र एक शॉप पी पारी .............. जिस पी प्लेअसुरे टॉयज का बोर्ड लगा होआ था ............... महीन न्य पहली भी ुक मैं विनोद और नीतू की साथ मुख्तलिफ माल्स मैं शॉपिंग की लय आती होय हर मॉल मैं ऐसी hi मिलती जुलती नामों की साथ ऐसी hi शॉप्स देखि थीं ............. मगर उसी किसी सी भी उनकी बारी मैं पूछनी की हिम्मत नहीं होइ थी ............... एक झिझक hi रही थी ............. पता नहीं क्यों उसकी अंदर की एक फीलिंग थी की यह कुछ अछि शॉप नहीं हो गई .......... मगर अब तो वह विनोद की साथ हर तरह सी फ्री हो चुकी होइ थी ............... उस की साथ वह सुब कुछ और वह सुब बातें भी क्र पा रही थी जो वह कभी आसिफ की साथ नहीं क्र सकीय थी ...............

महीन ............. विनोद ........... यह शॉप किस चीज़ की है ...........

विनोद न्य महीन की तरफ देखा ............ और उसकी आँखों मैं देखती होय मुस्कराया .............. प्लेअसुरे hi प्लेअसुरे .......... लज़्ज़त hi लज़्ज़त की .......

महीन ........ क्या मतलब .....

विनोद उसका हाथ पकड़े होय शॉप की तरफ जाती होय बोलै .......... चलो तुमको दिखता हों .............

विनोद महीन का हाथ पकड़े होय उस शॉप मैं दाखिल हो गया ....... अंदर जाती hi महीन का तो जैसी दिमाग़ hi घूम गया .......... उसकी तो आंखें hi खुली की खुली ............ बल्कि फटती रह गईं ...............

अंदर हर तरफ मुख़्तिलफ किसम की सेक्स टॉयज डिस्प्ले कए होय थय ........... कुछ खूबसूरत सी नेकेड और शार्ट कपड़ों मैं ड्रेस्ड डॉल्स भी राखी होइ थीं ....... जो की असल गर्ल्स की तरह लग रही थीं ...... और उनकी सेक्स ऑर्गन्स पूरी बनाय होय थ्योर वह सुब कुछ महीन की लये बिलकुल नया था ........ वह तो शॉकेड थी अंदर जा की ............. उसनी ज़ोर सी विनोद का बाज़ू पाकर लय और बुहत हलकी सी आवाज़ मैं बोली ............. विनोद ............. यह सुब क्या है ............ चलो वापिस जल्दी ...........

विनोद मुस्कराया ....... आर्य क्या हो गया है ....... आराम सी देख तो लो ...... फिर चलती हैं ..........

महीन आहिस्ता सी ............. मुझी शर्म आ रही है ....... प्लीज चलो ........

विनोद न्य महीन का हाथ पकड़ा और स्टोर मैं ाग्य को लय जांय लगा ........... देखो तो सही .......... और शरमान्य की कोई ज़रूरत नहीं है ....... यहाँ पी कोई किसी को जज नहीं क्र रहा है ............

महीन इधर उधर देख रही थी ........... विनोद उसी एक शेल्फ की सामन्य लय गया जिस मैं मुख्तलिफ साइज, शेप और कलर की दिलदूस पारी होय थय ..... ............ महीन उन मैं सी कुछ की शेप देख क्र हैरान hi रह गए ........ बिलकुल hi मर्द की लौड़े की शकल की थय ............

महीन वीर्य सी बोली ........... विनोद ........ यययययीएहहहहहह ........ यह क्या है ...........

विनोद मुस्कराया और एक मर्द की लुंड की शेप का रीयलिस्टिक डिल्डो उठा लय और महीन को दिखानी लगा ............

महीन फौरन hi पिच्य हैट टी होइ बोली ....... हटाओ इसी ...... पिच्य करो ..... मुझी नहीं देखना इसी .............

विनोद हंस रहा था ...... यार देखो तो सही प्लीज ............. ऐसी ावक्वार्ड तरीक़ी सी बेहवे नहीं करो ........ लोग क्या कहैं गए की यह कितनी जाहिल लोग हैं ........... विनोद न्य वह डिल्डो महीन की तरफ बढ़ाती होय कहा ...........

महीन का दिल तो छह रहा था उसी देखनी को .......... उसनी ाहसिता सी उसी रीयलिस्टिक डिल्डो को अपनी हाथ मैं लय लय और उसी देखनी लगी ....... बुहत hi सॉफ्ट रुब्बेरय मटेरियल का बना होआ था .......... ऐसी लग रहा था की जैसी ओरिजिनल लुंड को hi हाथ मैं पकड़ा हो .......... बुहत hi नरम नरम था ....... उसकी ऊपर बुहत साड़ी बरी बरी रगें फूली होइ थीं ............. टोपा भी फूला होआ था ........ और स्किन सी बहार था ........ लुंड की नीची गूल्यों की थैली थी ............. बुहत hi खूबसूरत लुंड था ........ उस डिल्डो का साइज विनोद की लुंड सी थोड़ा बारे था ........... महीन न्य उस को अपनी मुठी मैं लय की उसी दबाया तो वह थोड़ा सा डाब भी गया जैसी की असली लुंड हो .................. महीन न्य फिर सी उसी होले सी दबाया तो विनोद न्य शरारत सी आवाज़ निकाली .......... sssssssssssssssss आआआआअह्हह्ह्ह्हह

महीन न्य चौंक की उसकी तरफ देखा और उसकी इस शरारत पी शर्मा गए और हंसती होय उसकी बाज़ू पी एक हल्का सा थप्पड़ मार दया ......... विनोद भी हंसने लगा ...

महीन बारी hi घोर सी और शौक़ सी उस रीयलिस्टिक डिल्डो को देख रही थी ............ उसी तो जैसी अपनी आँखों पी यक़ीन hi नहीं आ रहा था .......... वह वीर्य सी बोली .............. विनोद ........ ये ... यह ....... तो बिलकुल ........ महीन शर्म की मारी अपनी बात पूरी नहीं क्र सकीय

विनोद .......... हाँ यह बिलकुल असली की तरह है दिखनी मैं भी और काम मैं भी ........ इसी लय तो इसको फ्रेमलेस पसंद करती हैं ..............

महीन बी यक़ीनी सी विनोद की तरफ देखती होय बोली .......... ककककक ...ककया मतलब है तुम्हारा की ........ फ्रेमलेस इसकी साथ ..........

विनोद मुस्कराया .......... हाँ ....... फ्रेमलेस रियल लुंड ना अवेलेबल होनी की सूरत मैं इस सी मज़ा लेती हैं ..............

महीन ........ ुंबेलिएवालबे .......

विनोद .......... तो कोई सेलेक्ट क्र लो न तुम भी ........

महीन उसकी तरफ देखती होय बोली ........ क्यों मैं न्य क्या करना है ......

विनोद ..... लय लो बस थोड़ा एन्जॉय करें गए डिफरेंट तरीक़ी सी ......

महीन कुछ बोलती इस सी पहले hi एक फीमेल सेल्स गर्ल वह पी आगये ...... उनकी पास ........ महीन उसी देख क्र घबरा गए ....... और अपनी हाथ मैं पकड़ा होआ वह रबर का लुंड जल्दी सी शेल्फ मैं रख दया ....... उस सेल्स गर्ल न्य एक मिनी स्कर्ट और शर्ट पहनी होइ थी ....... जिसका गाला काफी खुला था और उसकी बूब्स का आद्य सी कुछ काम हिस्सा नंगा नज़र आ रहा था ........ उसकी बूब्स काफी बारी थय जिसकी वजह सी ाचा ख़ासा गहरा क्लीवेज बन रहा था ............ महीन उस लड़की की ड्रेसिंग को देखनी लगी ........... मगर अब उसी इन पी कोई हैरत नहीं होती थी ....... क्यों की अब तो वह हर जगा हर रोज़ ऐसी hi ड्रेस्सिंग्स देखती थी ............

सेल्स गर्ल मुस्कराई ......... आ की वही लुंड उठा लय ...... क्या बात है मम आप को पसंद नहीं आया यह ..........

महीन घबरा रही थी ......... उसका चेहरा शर्म सी लाल हो रहा था ........ आहिस्ता सी बोली .......... नहीं ...... नहीं ऐसी बात नहीं है ........

सेल्स ग्रिल ...... तो फिर क्या साइज का मामला है ........ वह आप कोई दूसरा साइज पसंद क्र लाइन ..........

महीन चुप रही .......... विनोद महीन की पास hi खरा था मगर वह बिलकुल खामोश था ...... उन दोनों की बात चीत मैं कोई धकेल नहीं दी रहा था ......... वह लड़की दोबारा बोली ........

सेल्स गर्ल ...... मम इस आईटी योर फर्स्ट टाइम विथ ा डिल्डो और यू अरे आलरेडी ुसिंग सम इतर साइज और ब्रांड ???

महीन जल्दी सी घबराई होइ आवाज़ मैं बोली .......... no no ....... ी नेवर ुसेड थिस ..........

सेल्स गर्ल ...... ओह ...... okay ....... फिर मुझी आप को कोई एप्रोप्रियेट साइज सेलेक्ट क्र की देना हो गए ........ ताकि आप का फर्स्ट टाइम होनी की वजह सी वह आप की लय कम्फर्टेबले हो ........

महीन ....... no no मिस ......... ी don't नीड आईटी ............. फिर विनोद सी बोली ........ विनोद चलो चलें अब .......... देर हो रही है ...... महीन विनोद का हाथ खींचती होइ बोली ..........

वह सेल्स गर्ल भला अपना कस्टमर कैसी इतनी आसानी सी जांय दी सकती थी ............ जल्दी सी बोली .......... मम ी क्नोव यू हैवे योर बॉयफ्रेंड ........ लकिन सोमेतिमेस कपल्स को भी अपनी एंटरटेनमेंट और एन्जॉयमेंट को बढ़ानी की लय यह चीज़ें उसे करना पार्टी हैं .......

महीन ........... लकिन ............

विनोद हिंदी मई धीमी आवाज़ मई महीन सी बोलै ....... महीन उसकी बात सुन लो वर्ण वह हमें तो कोई देहाती जाहिल hi समझे गई ........ बल्कि समझ hi रही है ........... देखो उसी ........ महीन न्य जल्दी सी उस लड़की की चेहरी की तरफ देखा ....... उसकी चेहरी पी वाक़्या hi ऐसी hi एक्सप्रेशंस थय जैसी वह किसी जाहिल कपल सी डील क्र रही हो ............ महीन न्य उसी देखनी की बाद हेल्पलेस अंदाज़ मैं विनोद की तरफ देखा ............ वह सेल्स गर्ल सी बोलै .......

विनोद ....... मिस ी ऍम सॉरी ........ शी इस ा बिट शाय ...... यू प्लीज हेल्प हेर तो सेलेक्ट समथिंग एप्रोप्रियेट फॉर हेर ........ आईटी हेर फर्स्ट टाइम विथ थी टॉयज .......

वह सेल्स गर्ल खुश हो गए ....... और अब उसकी चेहरी की अपनी प्रोफेशनल स्माइल वापिस आगये ....... सूरे सर ........ यू don't वोर्री ी शॉल हेल्प हेर .....

वह सेल्स गर्ल दोबारा सी महीन की तरफ मतवाज़ह होइ ........ मम .... आईटी इस योर फर्स्ट टाइम ........ विल यू प्लीज शो में थे साइज ऑफ़ योर बॉयफ्रेंड ........ बी शेविंग सम अप्प्रोक्सिमाते साइज डिल्डो फ्रॉम थिस शेल्फ ........

उसकी बात सुन क्र महीन का चेहरा शर्म सी लाल हो गया .......... उसनी एक बार फिर सी विनोद की तरफ देखा ....... उसनी उसी जो अहेड का इशारा क्या ........... वह फिर सी उस सेल्स गर्ल की साथ उस शेल्फ मैं रखी होय उन आर्टिफीसियल रबर की लुंड को देखनी लगी .......... फिर महीन न्य कांम्पत्य हाथों की साथ एक लुंड की तरफ इशारा क्या ........ जो शेल्फ मैं रखा होआ था ......... वह क़रीब क़रीब विनोद की साइज का था ......... महीन न्य आसिफ की बजाय विनोद की लुंड का साइज hi बताया था ............. सेल्स गर्ल न्य वह लुंड उठा लय और विनोद की तरफ एक नज़र डालती होइ बोली .......

सेल्स गर्ल ....... ववव मम ....... यू अरे लकी ....... तहत इस ा गुड साइज ....

महीन उसकी बात पी शर्मा गए ..........

सेल्स गर्ल ...... ी शॉल रेकमेंड तहत यू शुड तरय ा लिटिल बिग्गेर थान थिस साइज अस ा फर्स्ट टाइम यूजर ........ एंड थें ग्रेजुअली विथ थे टाइम एंड एक्सपीरियंस यू मई जो उप तो थे बिग्गेर ओनेस ............

महीन न्य शर्माती होय हाँ मैं सर हिला दया ............ विनोद महीन की हालत को देख की मुस्करा रहा था ....... सेल्स गर्ल न्य एक लुंड सेलेक्ट क्या ....... जो विनोद की लुंड की साइज सी थोड़ा ज़्यादा मोटा और लम्बा था ........ और महीन सी बोली .......

सेल्स गर्ल ........ मम आप यह लय लाइन ........ आईटी इस थे एप्रोप्रियेट साइज फॉर योर प्लेअसुरे ........ इस आईटी okay मम???

महीन शर्मा गए ........ ी don't क्नोव ....

वह सेल्स गर्ल मुस्कराई और विनोद सी बोली ........ सर योर गर्ल फ्रेंड इस तू शाय ..........

महीन शर्मा गए .......... विनोद न्य एक ब्लैक कलर की नेग्रू रीयलिस्टिक डिल्डो को उठाया ... और उसी महीन को दिखाती होय उसकी कान मैं बोलै ..... महीन .......... निक का भी ऐसा hi हो गए ........ हहहहए

माही का चेहरा शर्म सी लाल हो गया .........

वह लड़की भी यह सुब देख रही थी ......... वह बोली ........ मम आईटी इस आल्सो गुड ....... मोस्ट ऑफ़ थे गर्ल्स लिखे थिस नेग्रू डिल्डो ........... अगर आप यह साइज ासूमोदते क्र सकती हैं तो आईटी इस मोए प्लेअसुरफुल ........

महीन जल्दी सी बोली ........... no no ........ ी can't ........... इतस तू बिग .......

और फिर अपनी hi अलफ़ाज़ पी महीन खुद hi शर्मा गए ....... और सर झुका लय ...... वह सेल्स गर्ल मुस्कराई ............. don't वोर्री मम .......... it's नॉट ा बिग डील ......... सम डे यू विल सुरेली बे अबले तो टेक थिस इनसाइड यू .......... फिर महीन की कान की क़रीब झुकी और व्हिस्पर करती होइ बोली ......... अन्य मई बे थे रियल ओने ऑफ़ थिस साइज एंड कलर ............ महीन उसकी बात पी सुराख़ हो गए ......... क्यों की उसकी आँखों की सामन्य निक का चेहरा घूम गया था .......... सेल्स गर्ल न्य उस डिल्डो का नंबर नोट क्र की उसी वापिस शेल्फ मई रख दया .......... और विनोद सी बोली ........

सेल्स गर्ल .......... एनीथिंग ेल्स सर .......

विनोद .......... no ी थिंक आईटी इस एनफ फॉर नाउ

सेल्स गर्ल मुस्कराई ........ लकिन अपनी प्रोफेशनल अंदाज़ मैं कुछ और भी सेल करवानी की कोशिश करती होइ बोली ........ okay सर अस यू विश ...... बूत ी थिंक मम शुड तरय सम इतर टॉयज आल्सो ......... लिखे सम विब्रेटर्स और अनल बीड्स ......

महीन उसकी तरफ हैरानी और शर्म सी देखनी लगी ............. सेल्स गर्ल ाग्य की तरफ बरही तो विनोद उसकी पिच्य पिच्य क़दम बढ़ानी लगा .......... महीन न्य उसका हाथ पकड़ा और उसी पिच्य की तरफ खींचनी लगी वापिस जांय की लय ............. मगर विनोद न्य हंसती होय उसका हाथ पाकर की अपनी तरफ खींचा और उसी अपनी साथ उस सेल्स गर्ल की पिच्य लय जांय लगा .............. महीन गुस्से सी उसकी तरफ देख रही थी .......... मगर वह ाग्य सी हंस रहा था ............ इतनी मैं वह सेल्स गर्ल एक और शेल्फ की क़रीब रुक गए और उनकी तरफ मुड़ी तो फौरन hi महीन न्य अपना चेहरा नार्मल क्र लय .............

सेल्स गर्ल न्य एक सॉलिड रोड टाइप की चीज़ उठाई ...... जिसका अगला हिस्सा टपपेरिंग था ....... वह चीज़ काफी स्मूथ और मुलायम थी .......... उसी तरह की मुख्तलिफ कलर्स की वह टॉयज पारी होय थय ........... उसनी वह इन दोनों को देखना शुरू क्या ........

सेल्स गर्ल ........ मम यू क्नोव आईटी इस ा वाइब्रेटर ......

महीन न्य शायद hi इसकी बारी मैं कुछ सुना हो ........ वह हैरानी सी उस लड़की की तरफ देख रही थी ........... और उसी देखती होय hi इंकार मैं उसका सर खुद सी hi हिल गया ............

सेल्स गर्ल मुस्कराई ...... और वह वाइब्रेटर महीन की हाथ मैं दी दया .......... महीन को ना चाहती होय भी उसी पकड़ना पारा ........ वह उसकी स्मूथनेस और सख्ती को महसूस करनी लगी ........ किसी हार्ड प्लास्टिक का तोय था वह शायद ...........

सेल्स गर्ल मुस्कराई ......... मम इस का साइज उस रीयलिस्टिक डिल्डो सी काम है जो आप न्य पहली पसंद क्या है ............. आईटी इस इजी तो उसे ........ no डाउट की यह शेप मैं उस सी काफी मुख्तलिफ होता है ....... मगर दूसरा डिफरेंस इस मैं यह है की इस की अंदर बेटरी होती है ....... और एक यह ों ऑफ का बटन ........ जैसी hi आप इसी ों करो गई ...... तो यह विबरते करना शुरू क्रय दी गए ............

महीन कुछ ना समझनी वाली नज़रूँ सी उसकी तरफ देख रही थी ...........

सेल्स गर्ल न्य महीन की परेशानी या हैरानी और ला इल्मी को देखती होय महीन की हाथ मैं पकड़े होय उस वाइब्रेटर की बेस पी मौजूद एक छोटी सी बटन को दबा दया ........... वह सॉलिड वाइब्रेटर अचानक सी विबरते करनी लगा ........... और महीन की हाथ सी चोट तय चोट तय बचा ........ महीन न्य बरी मुश्किल सी उसी संभाला और फिर खुद सी hi जल्दी सी वही बटन दबा की उसी बंद क्र दया ...............

महीन ............ ीयीएहहह ... क्या ..... है ......

सेल्स गर्ल मुस्कराई ......... इसी वाइब्रेटर कहती हैं इसकी इसी वाइब्रेशन की वजह सी ........... और ऐसी hi यह जब अंदर जा की विबरते करता है तो सुच मैं हालत ख़राब क्र देता है .............. सेल्स गर्ल न्य महीन को देखती होय विंक क्या ............. और महीन न्य शर्मा की अपनी नज़रें उसकी चेहरी सी हटा की विनोद को देखना शुरू क्र दया .......... जो महीन की हालत का लुत्फ़ लय रहा था ...........

उस सेल्स गर्ल की बार बार कहनी सी विनोद न्य उस मैं सी hi एक डार्क पिंक कलर का वाइब्रेटर भी पसंद क्र लय .......... महीन की रोकनी की बावजूद भी .............. और फिर काउंटर पी जा की पेमेंट की ........ उसी सेल्स गर्ल न्य वह दोनों चीज़ों की पैकेट्स एक हैंड बैग मैं दाल डाई और फिर काउंटर की पिच्य की शेल्फ सी एक की जेली की एक तुबे उठा क्र उसी हैंड बैग मैं डालती होइ बोली .......... मम यह आप की लय कम्प्लीमेंट्री है .......... आईटी विल मेक थे उसे ऑफ़ थी आइटम्स इजी फॉर यू ........... फिर वह हैंड बैग महीन की तरफ बढ़ा डाई ........

सेल्स गर्ल विनोद सी बोली ........ सर विल यू लिखे हैवे ा सेक्स डॉल फॉर योरसेल्फ आल्सो ............ our's गिव सो मच प्लेअसुरे .......

विनोद मुस्कराया ....... महीन की कमर मैं अपना हाथ डाला और उसी अपनी तरफ खींचती होय बोलै ............. ी आलरेडी हैवे माय ओन सेक्स डॉल एंड शी गिवेस ा रियल प्लेअसुरे ............... मोरे थान अन्य डॉल .......

महीन विनोद की इस बात पी शर्मा गए ...........

सेल्स गर्ल मुस्कराई ........ यू बोथ अरे लकी तो हैवे एच इतर ........ अन्य्वयस ..... थैंक्स मम फॉर योर शॉपिंग .......... हैवे ा लोट ऑफ़ प्लेअसुरफुल मोमेंट्स विथ थी .............. ी होप तो सी यू अगेन तो बुय समथिंग मोरे............

महीन न्य ब्लश कृत्य होय उसी थैंक्स बोलै और विनोद का हाथ पाकर की उसी खींचती होइ उस शॉप सी बहार आगये ..............

शॉप सी बहार निकलती hi महीन न्य विनोद की कमर मैं ज़ोर का एक मुक्का मारा और विनोद दर्द की एक्टिंग कृत्य होय उछाल पारा .......... ोोोीीीी ........... माआआआ ........ अब क्या हो गया है ........ वह हंसती होय बोलै .........

महीन उसी गुस्सा दिखाती होइ बोली ....... यह तुम पूछ रही हो ........ पता भी है मुझी कितनी शर्मिंदगी हो रही थी उस सेल्स गर्ल की सामन्य ........ और तुम को माज़ी आ रही थय ............

विनोद हंसा .......... आर्य इस मैं शर्मिंदगी की की बात है ....... यह तो उनका रोज़ का काम है ...........

महीन ाहसिता सी ............ पर मेरी लय तो यह सुब नया था न ....... और फिर इस सुब की भला क्या ज़रूरत थी .............

विनोद मुस्कराया ........ एक बाज़ो महीन की कमर की पिच्य सी उसकी दूसरी तरफ लय जा की उसी अपनी साथ चिपकाती होय बोलै .......... तो वहां लय क्र भी तो तुम hi गए थी न .......

महीन शर्मिंदाह होती होइ बोली ............ हाँ तो अगर किसी चीज़ का मुझी पता नहीं है तो तुम सी ना पूछों क्या मैं ........ ??? और वहां जांय का यह मतलब तो नहीं था न की वहां सी यह सुब खरीदना भी ज़रूरी है ........... बेकार मैं इतनी पैसी जाया क्र डाई ......

विनोद महीन की गाल पी किश करता होआ बोलै .......... कोई जाया नहीं होय मेरी जान ...... जब तुम इनकी साथ एन्जॉय करो गई न तो खुद सी hi पैसी पूरी हो जैन गए ............

महीन ........... मैं कोई कुछ नहीं करनी वाली इन सुब सी ........ पता नहीं क्या क्या सोचती और करवाती रहती हो मुझ सी तुम भी ............

महीन की बात सुन की विनोद हंसनी लगा ...........

महीन भी अब अपना गुस्सा चोर की हंस पारी ........ जल्दी चलो अभी जा की वह अपार्टमेंट भी देखना है ...........

विनोद हाँ हाँ चलो .........
 
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