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अपडेट NO. 28
विनोद और महीन थिएटर सी निकले ........ शाम सी जो महीन न्य शराब पी थी अब उसका थोड़ा असर हो रहा था ....... बुहत hi काम मिक़्दार मैं थी उसकी मश्रूब मैं शराब मगर फिर भी पहली बार होनी की वजह सी उस पी असर हो रहा था ........ वह नशे मैं नहीं थी मगर उसका दिमाग़ काफी हल्का फील हो रहा था ....... हल्का हल्का सरूर चढ़ रहा था ....... उसकी इन्हिबिशंस और रेजिस्टेंस ख़तम हो रही थीं ....... उसकी जज़्बात बेहकनी लगी थय ......... उसी यह सुब ाचा लग रहा था ..... मगर इसकी साथ साथ hi वह फुल्ली तोर पी अपनी होश ो हवास मैं थी ............. रूम की तरफ जाती होय भी महीन विनोद की साथ चिपकी होइ थी ...... विनोद का बाज़ू महीन की कमर मैं था ..... और वह उसी अपनी साथ लगाय होय रूम की तरफ जा रहा था ... महीन भी उसकी साथ अपनी लवर की तरह hi चिपकी होइ थी .......... उसी यह सुब ाचा लग रहा था .......... और अब तक जितना विनोद न्य उसी मज़ा दया था उसकी बाद तो महीन अब विनोद की देवानी हो चुकी होइ थी .......... या फिर शायद उसकी लुंड की ....
दोनों अपनी रूम मई आय ....... तो विनोद न्य आती hi महीन को अपनी बहून मैं भर लय और उसी किश करनी लगा ......... अपनी होंठ महीन की होंठों पी रखी और उसी चूमनी लगा ....... महीन न्य भी अपनी बाज़ू विनोद की गर्दन मई डाली और उसकी लिप्स को चूसनी लगी ......... अपनी होंठों को उसकी होंठों मैं दी क्र उसका साथ देंय लगी ......... विनोद न्य अपणु जुबां बहार निकाली और महीन न्य जल्दी सी उसी चूसना शुर क्र दया ........ विनोद न्य महीन का हाथ अपनी लुंड पी रख दया ....... महीन उसी सहलानी लगी ......... विनोद का लुंड आकर क्र महीन की हाथ मैं था ...... मोटा और लम्बा लौड़ा .... उसको सहलाना महीन को बुहत ाचा लग रहा था ..... उसकी झिझक ख़तम हो रही थी ..........
महीन की कमर पी हाथ फैरती हो विनोद न्य महीन की बॉडीकॉन ड्रेस की ज़िप खोल दी ....... जो उसकी हिप्स की दराद शुरू होनी तक थी ..... विनोद न्य महीन की ड्रेस को उसकी कांधों सी नीची सिरका दया ...... और महीन न्य अगली hi लम्हे उसी अपनी जिसम सी उतार दया ..... अब वह विनोद की सामन्य उसकी बहून मई सिर्फ अपनी ब्रस्सिएर और पंतय मैं खरी थी ........ विनोद न्य फिर सी उसकी नंगे जिसम को अपनी बहून मैं लय और उसकी जिसम को सहलाती होय उसकी होंठों का रसपान करनी लगा ........... महीन तो पहली सी hi गरम थी ........ अब और भी गरम होनी लगी थी ...... उसकी सांसें तेज़ हो रही थीं .... वह खुद भी विनोद की जिसम को अपनी साथ दबा रही थी ........... उसकी कमर पी हाथ फेर रही थी ....... उस सी बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था ........ उसनी अपनी हाथों को विनोद की टी शर्ट की नीची सी दाल की उसकी नंगी कमर को सहलाना शुरू क्र दया .......... उसकी नंगी मज़बूत बॉडी पी हाथ पहिरण्य लगी ......... aaaaaaahhhhhhhhhhh ............ Vinnnnnnnnnnnoooooooddddddddddddd ............ plllllllllllllzzzzzzzzzzzzzzzzzzz ........... वह तारपीईईईई .......... महीन को विनोद की जिसम पी हाथ फैरना बुहत ाचा लग रहा था ........ साफ़ दिख रहा था की महीन सी अब कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा है ........... विनोद भी उसकी हालत को समझ रहा था ..........
महीन न्य विनोद की टी शर्ट को नीची सी पकड़ा और ऊपर को उतारनी लगी .......... विनोद न्य अपनी बाज़ू ऊपर उठा डाई ........ और महीन विनोद की टी शर्ट को उतार फेंकी ........ और उसकी नंगी जिसम को देखनी लगी ........... हल्के हल्के बलून सी भरा होआ ........ कुशादा ..... चौड़ा सीना ....... मज़बूत ....... चौड़े कांद्य .......... और काली निप्पल .......... गहरा सांवला रंग था विनोद का ............ जबकि आसिफ का गोरा चिट्टा जिसम था ............. महीन की नज़रें विनोद की जिसम पी फिसल रही थीं ........... वह इस जिसम की मज़बूती ...... और इसकी ताक़त को ाच्य सी जानती थी .......... और इस मज़बूत जिसम की अंदर कितना प्यार करनी वाला दिल है ........ वह यह भी जानती थी ............... महीन की नज़रें विनोद की नज़रों सी मिलीं .......... महीन की आँखों मैं प्यास hi प्यास थी .......... तरप hi तरप ......... मगर नशे मैं होनी का या बेहोशी की कोई अलामत नहीं थी .............
विनोद की आँखों मैं देखती होय महीन न्य अपना कांम्पटा होआ हाथ उठाया और उसी विनोद की सैन्य पी रख दया ............. उसकी सीने की बलून मैं ........ अब आहिस्ता आहिस्ता उसकी जिसम को सहलानी लगी .......... उसकी सीने की बलून मैं हाथ पहिरण्य लगी ............ महीन की नज़रें तो हैट hi नहीं रही थीं विनोद की जिसम सी ............... विनोद अब उसकी सामन्य सिर्फ ट्रॉउज़र मैं खरा था ............ महीन ाग्य को झुकी और अपनी गुलाबी पतली पतली होंठ विनोद की सीने पी रखती होय उसकी सीने को चूम लय और बुहत hi हलकी सी आवाज़ मैं बोली ............
महीन .............. Vinoddddddddddddddd ........... कितना सॉलिड है तुम्हारा जिसम ...............
विनोद न्य आहिस्ता सी अपना हाथ महीन की कमर मैं डाला और उसी अपनी क़रीब क्र लय ............ महीन की होंठ अब उसकी सीने पर hi थय .......... वह आहिस्ता आहिस्ता उसकी सीने को चूम रही थी ........ इधर उधर ...... ऊपर नीची ............. विनोद न्य अपना हाथ महीन की सर की पिच्य लय जा की आहिस्ता सी उसकी होंठों को अपनी निप्पल की पास लय गया ........... महीन न्य एक नज़र विनोद की काले हार्ड निप्पल को देखा ........ और फिर विनोद की आँखों मैं देखती होय आहिस्ता सी अपनी होंठ विनोद की निप्पल पी रख डाई .......... और उसी अपन पतली पतली होंठों सी चूम लय ....... एक बार नहीं ....... आहिस्ता आहिस्ता बार बार चूमनी लगी ...... किश करनी लगी ............. aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ........... Maheeeeeeeeeennnnnnnnnnnnn ................. कितनी प्यारी लिप्स हैं tumharyyyyyyyyyy ........................ pleaseeeeeeeeeeee इसी अपनी जुबां सी chaatooooooooooooo ............. विनोद तारपा ............. महीन की नंगी कमर को सहलाती होय ..........
महीन न्य विनोद की आंखों मैं देखती होय अपनी जुबां बहार निकाली ...... और जुबां की नौक सी विनोद की निप्पल को आहिस्ता आहिस्ता चैदंय लगी ......... उस पी पहिरण्य लगी ........ उसकी गिर्द गोल गोल घुमान्य लगी ............. aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh .............. ssssssssssssssssssss ..................... Maaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhheeeeeeeeeeeeeeeeeeeeennnnnnnnnnnnnnnnnnn ....................... mmmmmmmmmmmmmmmm विनोद की मुंह सी सिसकार्यं निकल रही थीं ............. वह तरप रहा था ............. और उसकी पंत मैं उसका लुंड सख्त हो की फटनी वाला हो रहा था .............
विनोद न्य महीन को बीएड पी बिठाया ........ और खुद उसकी सामन्य खरा हो गया .............. उसकी ट्रॉउज़र का उभार ........ फूला होआ लुंड महीन की आँखों की सामन्य था ........ उसकी चेरि की लेवल पी .............. विनोद न्य महीन का हाथ पकड़ा और अपनी ट्रॉउज़र की ऊपर सी अपनी लुंड पी रख दया .............. विनोद न्य ट्रॉउज़र की नीची सी अंडरवियर नहीं पहना होआ था ........... इसलय उसका लुंड सीधा खरा होआ महसूस हो रहा था ........... महीन न्य अपनी हाथ को विनोद की लुंड की ऊपर सी नहीं हटाया .......... आहिस्ता आहिस्ता उसी सहलानी लगी .......... वह जानती थी की उसकी प्यास को ........... उसकी जिसम की तालाब को ............ उसकी छूट की आग को एहि लुंड बुझा सकता है ........... विनोद की आँखों मैं देखती होय महीन न्य उसकी लुंड को अपनी मुठी मैं लय की ज़ोर सी दबा दया ............
विनोद ........ aaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ........... आहिस्ता ........ दर्द होता है .............
महीन वीर्य सी मुस्कराई ............ तो यह भी तो दर्द देता है न ........... वह ............
विनोद मुस्करा दया .......... और महीन को चोर की बीएड पी लेट गया ........... महीन सवालय नज़रों सी उसको देखनी लगी .........
विनोद तकए पी सर रख की लेती होय बोलै ....... खुद hi निकालो इसी ......... देखता हों न की तुमको कितना प्यार है इस सी ..........
महीन विनोद की बात का मतलब समझ गए थी ........... की वह क्या चाहता है .............. वह शर्मा गए ............. महीन भी बीएड पी आगये .......... विनोद न्य उसका हाथ पाकर की उसी अपनी ऊपर खींच लय ......... और एक बार फिर उसकी होंठों को किश करनी लगा ........ निचली होंठ को अपनी होंठों मैं लय और उसी सूचक करनी लगा ............. साथ hi विनोद न्य महीन का हाथ खुद सी hi दोबारा अपनी ट्रॉउज़र की ऊपर सी अपनी लुंड पी रख दया ............... जैसी महीन न्य जल्दी सी अपनी मुठी मई लय लय ................ विनोद न्य अपनी जुबां महीन की होंठों की अंदर दाल दी .......... और वह उसी चूसनी लगी ............. दोनों का सलीवा एक दूसरी की मुंह मई जा रहा था ........... मिक्स हो रहा था ........... मगर दोनों मैं सी किसी को भी इस बात का अहसास नहीं था ........ महीन का नंगा जिसम विनोद की साथ चिपकता जा रहा था ............ उसकी जिसम पी सिर्फ ब्रा और पंतय थी ...........
कुछ देर तक महीन की होंठों का रूस पीनी की बाद विनोद न्य आहिस्ता सी उसकी कान मैं बोलै ........... महीन .............. उसी बहार निकालो ..........
महीन थोड़ा शर्मा की विनोद की लुंड की तरफ देखनी लगी ........... इस लुंड सी वह अछि तरह सी वाक़िफ़ थी ........... कई बार इस लुंड सी छुड़वा चुकी होइ थी ......... इस लुंड का मज़ा लय चुकी होइ थी ............ मगर आज तक उसनी खुद सी इस लुंड को बहार नहीं निकला था .......... खुद सी विनोद का ट्रॉउज़र नहीं उतरा था ................ उसका हाथ अभी भी विनोद की लुंड पी था ..................... वह खुद भी अब विनोद की लुंड को बहार निकालना चाहती थी ........... ताकि वह उसी जल्दी सी इसकी छूट मई दाल दी ........ और उसी छोड़ दी ............. मगर एक झिझक सी थी ........... हिचकचाहट सी थी .............. क्यों की इतनी बार उस लुंड सी छुड़नी की बावजूद भी ठीक सी ...... और क़रीब सी उस लुंड को नहीं देखा था ...............
महीन न्य आहिस्ता सी विनोद की पाजामे को नीची को सिरका दया .......... उसकी लुंड को बहार निकालती होय ............. जैसी hi पजामा नीची होआ तो महीन का दिल उछाल की हलक़ मई आज्ञा ............. विनोद का काला लुंड सीधा खरा लहरा रहा था ............. विनोद न्य अपनी टांगों को हरकत देती होय अपना ट्रोसुएर अपनी टांगों सी निकाल दया ............ और अब वह बीएड पी बिलकुल नंगा हो की लेता होआ था ........... और महीन उसकी पास hi सिर्फ ब्रा और पंतय मैं थोड़ी टेढ़ी हो की लेती होइ थी ............. महीन की नज़रें विनोद की नंगी लुंड पी जमी होइ थीं ............ जो लहरा रहा था ........ हिल रहा था ........ और महीन को अत्त्रक्ट क्र रहा था ............. बैडरूम की फुल लाइट की रौशनी मैं उसका कला लुंड साफ़ दिख रहा था ............. लुंड काफी लम्बा और मोटा लग रहा था ......... आसिफ की लुंड सी मोटा और लम्बा ............ उसका टोपा नहीं दिख रहा था ....... बल्कि उसकी ऊपर स्किन थी ............... जैसी देख क्र महीन को थोड़ी हैरानी हो रही थी ............ मगर वह अपनी नज़र विनोद की लुंड पर सी हटा नहीं पा रही थी ............ आखिर यह लुंड इतनी बार उसकी छूट की अंदर जा की उसकी आग बुझा चूका होआ था .............. वह इस लुंड की करामात सी ाच्य सी वाक़िफ़ थी ................ uuuuuffffffffff देखो तो कैसी नाग की तरह लहरा रहा है ............. महीन दिल hi दिल मैं सोची ..........
विनोद आहिस्ता सी उसकी कानों की पास बोलै ..... महीन इसी पकरो न ............
महीन न्य आहिस्ता आहिस्ता अपना हाथ ाग्य बढ़ाया .......... और विनोद की काले लुंड को अपनी गोरी गोरी मुलायम हाथ मैं लय लय ............ और आहिस्ता आहिस्ता अपना हाथ उसकी ऊपर पहिरण्य लगी ............ विनोद न्य आहिस्ता ाहसिता महीन को नीची की तरफ पुश क्र दया ............. और महीन का चेहरा विनोद की लुंड की क़रीब आज्ञा ......... वह अब उसकी लुंड को बुहत क़रीब सी देख रही थी ........ इतना क़रीब सी उसनी कभी विनोद की लुंड को नहीं देखा था ............... उसका हाथ अभी भी विनोद की लुंड पी था .............. उसकी नज़रें उसकी लुंड पी थीं ........... विनोद की लुंड की टोपे पर मौजूद उसकी स्किन उसकी हाथ की हरकत सी आहिस्ता आहिस्ता ऊपर नीची हो रही थी ........... उसी याद अन्य लगा की वह लड़की कैसी उस लड़के की लुंड को प्यार क्र रही थी ............. कैसी वह अपनी प्यार का इज़हार क्र रही थी ........... उसी याद अन्य लगा की उस लड़के का लुंड चूसती होय उस लड़की की चेहरी औ उसकी आँखों सी और उसकी हरकतों सी नज़र आ रहा था की वह लड़की कितना प्यार करती है उस सी ................
प्यार तो मैं भी करती हों विनोद सी ............. जैसी वह मुझ सी करता है ............ नहीं जैसी वह मुझी प्यार करता है मैं वैसी उसी नहीं कृ आज तक ............ जैसी वह अपनी प्यार का इज़हार करता है मैं न्य वैसी कभी नहीं क्या ............. वह बिना कुछ भी महसूस कए मेरी छूट को किश करता है .......... उसी सूचक करता है ....... उसी लीक करता है ........... मगर मैं न्य कभी भी ऐसा नहीं किआ ............... उसनी कभी कहा भी तो नहीं न मुझी ऐसा करनी को ............ अपनी इस लुंड को प्यार करनी को ............. शायद वह मुझ सी ज़बरदस्ती कुछ नहीं करवाना चाहता इसलय नहीं कहा .............. लकिन उसी भी तो वैसी hi मज़ा आता हो गए न जैसी मुझी आता है ............. उसी भी तो आखिर किसी की होंठों का टच चाहिए न अपनी इस लुंड पी ............... मेरी होंठों का टच ............ मगर मैं कैसी क्र सकती हों .............. यह तो गन्दा होता है न ................ कैसी मैं इसकी ऊपर अपनी होंठ रख सकती हों ............... यह जो मेरी हाथ मैं है ........ जिसनी हमेशा मुझी इतना मज़ा दया ............ जन्नत की सैर करवाई है हमेशा ............. क्या यह गन्दा है ................ नहीं ........ नहीं .......... क्या इसका हक़ नहीं है की मैं इसी अपनी होंठों सी प्यार करों ............ जैसी विनोद मेरी वहां पी प्यार करता है ............. बिल्क्लुल बनता है ...................... विनोद न्य हमेशा अपना प्यार साबित क्या है ........... मुझी भी आज अपना प्यार का सबूत देना है ........... मैं उसी ज़रूर लौटाऊँ गई ............... उसका प्यार ............ उसी की अंदाज़ मैं ...............
यह सुब बातें खुद सी करती होय .......... खुद को आगे कृत्य होय ........ खुद को समझाती होय महीन विनोद की लुंड की और क़रीब जांय लगी ............. और उसी अहसास तब होआ जब उसी अपनी गुलाबी होंठों पी कोई अंगारा सा रखा होआ महसूस होआ ............. तब उसी अहसास होआ की उसकी होंठ विनोद की लुंड की ऊपर हैं ........... ज़िन्दगी मैं पहली बार किसी की लुंड को टच क्र रही हैं ............. ज़िन्दगी मैं पहली बार वह विनोद की लुंड को अपनी होंठों सी छु रही थी ................. महीन न्य विनोद की आँखों मैं देखा और विनोद की लुंड की हल्का सा किश क्र दया .................. विनोद की चेहरी पी ख़ुशी की लहर दौड़ गए ............... और लज़्ज़त और सुकून की मारी उसकी आंखें बंद हो गए ................. महीन विनोद की चेहरी की एक्सप्रेशंस को देख रही थी ............... उनको पढ़ रही थी ............. उसी साफ़ साफ़ अंदाज़ा हो रहा था की उसकी होंठों की टच न्य विनोद को कितना सुकून दया है ............. महीन को ाचा लगा की उसकी वजह सी विनोद को ख़ुशी मिल रही रही है ................. और साथ hi उसी यह अहसास भी होआ की उसी कुछ भी ग़लत नहीं लग रहा है अपनी होंटो सी विनोद की लुंड को छु की ...................
महीन विनोद की लुंड की और क़रीब सिरकटी होय उसकी दोनों टांगों की बीच आगये ....... विनोद की और उसकी लुंड की बिलकुल सामन्य ........... महीन न्य विनोद की लुंड को अपनी हाथ मैं लय ........ और उसी ऊपर सी नीची तक किश करनी लगी ........... उसी अहसास हो रहा था की कुछ भी गन्दा नहीं है ........... जैसी जिसम की बाक़ी स्किन है वैसा hi अहसास है बस ............ विनोद की लुंड की इतना क़रीब अन्य की बाद उसी अब विनोद की लुंड की टोपे की स्किन ऊपर नीची होती होइ नज़र आ रही थी ........... उसी तब पता चला की उसका टोपा उसकी स्किन की अंदर चला जाता है ........... तभी उसी अहसास होआ की विनोद का लुंड उन कट है ............... आसिफ की तरह नहीं है ................. खतना क्या होआ ................ उसी याद आ गया की हींदू लोग खतना नहीं कृत्य न ............... उनकी तरह .............. तभी उसी ख्याल आया की वह एक मुस्लिम हो की एक हींदू सी छुड़वा चुकी होइ है ......... उसकी उन कट लुंड सी ............... उसी अजीब सा लगा ............ मगर फिर खुद सी hi ख्याल आया की इसी उन कट लुंड न्य तो उसी आसिफ की लुंड सी ज़्यादा मज़ा दया था ................... वह आहिस्ता सी मुस्कराई ............. और विनोद की लुंड को फिर सी किश करनी लगी ..............
विनोद और महीन थिएटर सी निकले ........ शाम सी जो महीन न्य शराब पी थी अब उसका थोड़ा असर हो रहा था ....... बुहत hi काम मिक़्दार मैं थी उसकी मश्रूब मैं शराब मगर फिर भी पहली बार होनी की वजह सी उस पी असर हो रहा था ........ वह नशे मैं नहीं थी मगर उसका दिमाग़ काफी हल्का फील हो रहा था ....... हल्का हल्का सरूर चढ़ रहा था ....... उसकी इन्हिबिशंस और रेजिस्टेंस ख़तम हो रही थीं ....... उसकी जज़्बात बेहकनी लगी थय ......... उसी यह सुब ाचा लग रहा था ..... मगर इसकी साथ साथ hi वह फुल्ली तोर पी अपनी होश ो हवास मैं थी ............. रूम की तरफ जाती होय भी महीन विनोद की साथ चिपकी होइ थी ...... विनोद का बाज़ू महीन की कमर मैं था ..... और वह उसी अपनी साथ लगाय होय रूम की तरफ जा रहा था ... महीन भी उसकी साथ अपनी लवर की तरह hi चिपकी होइ थी .......... उसी यह सुब ाचा लग रहा था .......... और अब तक जितना विनोद न्य उसी मज़ा दया था उसकी बाद तो महीन अब विनोद की देवानी हो चुकी होइ थी .......... या फिर शायद उसकी लुंड की ....
दोनों अपनी रूम मई आय ....... तो विनोद न्य आती hi महीन को अपनी बहून मैं भर लय और उसी किश करनी लगा ......... अपनी होंठ महीन की होंठों पी रखी और उसी चूमनी लगा ....... महीन न्य भी अपनी बाज़ू विनोद की गर्दन मई डाली और उसकी लिप्स को चूसनी लगी ......... अपनी होंठों को उसकी होंठों मैं दी क्र उसका साथ देंय लगी ......... विनोद न्य अपणु जुबां बहार निकाली और महीन न्य जल्दी सी उसी चूसना शुर क्र दया ........ विनोद न्य महीन का हाथ अपनी लुंड पी रख दया ....... महीन उसी सहलानी लगी ......... विनोद का लुंड आकर क्र महीन की हाथ मैं था ...... मोटा और लम्बा लौड़ा .... उसको सहलाना महीन को बुहत ाचा लग रहा था ..... उसकी झिझक ख़तम हो रही थी ..........
महीन की कमर पी हाथ फैरती हो विनोद न्य महीन की बॉडीकॉन ड्रेस की ज़िप खोल दी ....... जो उसकी हिप्स की दराद शुरू होनी तक थी ..... विनोद न्य महीन की ड्रेस को उसकी कांधों सी नीची सिरका दया ...... और महीन न्य अगली hi लम्हे उसी अपनी जिसम सी उतार दया ..... अब वह विनोद की सामन्य उसकी बहून मई सिर्फ अपनी ब्रस्सिएर और पंतय मैं खरी थी ........ विनोद न्य फिर सी उसकी नंगे जिसम को अपनी बहून मैं लय और उसकी जिसम को सहलाती होय उसकी होंठों का रसपान करनी लगा ........... महीन तो पहली सी hi गरम थी ........ अब और भी गरम होनी लगी थी ...... उसकी सांसें तेज़ हो रही थीं .... वह खुद भी विनोद की जिसम को अपनी साथ दबा रही थी ........... उसकी कमर पी हाथ फेर रही थी ....... उस सी बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था ........ उसनी अपनी हाथों को विनोद की टी शर्ट की नीची सी दाल की उसकी नंगी कमर को सहलाना शुरू क्र दया .......... उसकी नंगी मज़बूत बॉडी पी हाथ पहिरण्य लगी ......... aaaaaaahhhhhhhhhhh ............ Vinnnnnnnnnnnoooooooddddddddddddd ............ plllllllllllllzzzzzzzzzzzzzzzzzzz ........... वह तारपीईईईई .......... महीन को विनोद की जिसम पी हाथ फैरना बुहत ाचा लग रहा था ........ साफ़ दिख रहा था की महीन सी अब कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा है ........... विनोद भी उसकी हालत को समझ रहा था ..........
महीन न्य विनोद की टी शर्ट को नीची सी पकड़ा और ऊपर को उतारनी लगी .......... विनोद न्य अपनी बाज़ू ऊपर उठा डाई ........ और महीन विनोद की टी शर्ट को उतार फेंकी ........ और उसकी नंगी जिसम को देखनी लगी ........... हल्के हल्के बलून सी भरा होआ ........ कुशादा ..... चौड़ा सीना ....... मज़बूत ....... चौड़े कांद्य .......... और काली निप्पल .......... गहरा सांवला रंग था विनोद का ............ जबकि आसिफ का गोरा चिट्टा जिसम था ............. महीन की नज़रें विनोद की जिसम पी फिसल रही थीं ........... वह इस जिसम की मज़बूती ...... और इसकी ताक़त को ाच्य सी जानती थी .......... और इस मज़बूत जिसम की अंदर कितना प्यार करनी वाला दिल है ........ वह यह भी जानती थी ............... महीन की नज़रें विनोद की नज़रों सी मिलीं .......... महीन की आँखों मैं प्यास hi प्यास थी .......... तरप hi तरप ......... मगर नशे मैं होनी का या बेहोशी की कोई अलामत नहीं थी .............
विनोद की आँखों मैं देखती होय महीन न्य अपना कांम्पटा होआ हाथ उठाया और उसी विनोद की सैन्य पी रख दया ............. उसकी सीने की बलून मैं ........ अब आहिस्ता आहिस्ता उसकी जिसम को सहलानी लगी .......... उसकी सीने की बलून मैं हाथ पहिरण्य लगी ............ महीन की नज़रें तो हैट hi नहीं रही थीं विनोद की जिसम सी ............... विनोद अब उसकी सामन्य सिर्फ ट्रॉउज़र मैं खरा था ............ महीन ाग्य को झुकी और अपनी गुलाबी पतली पतली होंठ विनोद की सीने पी रखती होय उसकी सीने को चूम लय और बुहत hi हलकी सी आवाज़ मैं बोली ............
महीन .............. Vinoddddddddddddddd ........... कितना सॉलिड है तुम्हारा जिसम ...............
विनोद न्य आहिस्ता सी अपना हाथ महीन की कमर मैं डाला और उसी अपनी क़रीब क्र लय ............ महीन की होंठ अब उसकी सीने पर hi थय .......... वह आहिस्ता आहिस्ता उसकी सीने को चूम रही थी ........ इधर उधर ...... ऊपर नीची ............. विनोद न्य अपना हाथ महीन की सर की पिच्य लय जा की आहिस्ता सी उसकी होंठों को अपनी निप्पल की पास लय गया ........... महीन न्य एक नज़र विनोद की काले हार्ड निप्पल को देखा ........ और फिर विनोद की आँखों मैं देखती होय आहिस्ता सी अपनी होंठ विनोद की निप्पल पी रख डाई .......... और उसी अपन पतली पतली होंठों सी चूम लय ....... एक बार नहीं ....... आहिस्ता आहिस्ता बार बार चूमनी लगी ...... किश करनी लगी ............. aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ........... Maheeeeeeeeeennnnnnnnnnnnn ................. कितनी प्यारी लिप्स हैं tumharyyyyyyyyyy ........................ pleaseeeeeeeeeeee इसी अपनी जुबां सी chaatooooooooooooo ............. विनोद तारपा ............. महीन की नंगी कमर को सहलाती होय ..........
महीन न्य विनोद की आंखों मैं देखती होय अपनी जुबां बहार निकाली ...... और जुबां की नौक सी विनोद की निप्पल को आहिस्ता आहिस्ता चैदंय लगी ......... उस पी पहिरण्य लगी ........ उसकी गिर्द गोल गोल घुमान्य लगी ............. aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh .............. ssssssssssssssssssss ..................... Maaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhheeeeeeeeeeeeeeeeeeeeennnnnnnnnnnnnnnnnnn ....................... mmmmmmmmmmmmmmmm विनोद की मुंह सी सिसकार्यं निकल रही थीं ............. वह तरप रहा था ............. और उसकी पंत मैं उसका लुंड सख्त हो की फटनी वाला हो रहा था .............
विनोद न्य महीन को बीएड पी बिठाया ........ और खुद उसकी सामन्य खरा हो गया .............. उसकी ट्रॉउज़र का उभार ........ फूला होआ लुंड महीन की आँखों की सामन्य था ........ उसकी चेरि की लेवल पी .............. विनोद न्य महीन का हाथ पकड़ा और अपनी ट्रॉउज़र की ऊपर सी अपनी लुंड पी रख दया .............. विनोद न्य ट्रॉउज़र की नीची सी अंडरवियर नहीं पहना होआ था ........... इसलय उसका लुंड सीधा खरा होआ महसूस हो रहा था ........... महीन न्य अपनी हाथ को विनोद की लुंड की ऊपर सी नहीं हटाया .......... आहिस्ता आहिस्ता उसी सहलानी लगी .......... वह जानती थी की उसकी प्यास को ........... उसकी जिसम की तालाब को ............ उसकी छूट की आग को एहि लुंड बुझा सकता है ........... विनोद की आँखों मैं देखती होय महीन न्य उसकी लुंड को अपनी मुठी मैं लय की ज़ोर सी दबा दया ............
विनोद ........ aaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ........... आहिस्ता ........ दर्द होता है .............
महीन वीर्य सी मुस्कराई ............ तो यह भी तो दर्द देता है न ........... वह ............
विनोद मुस्करा दया .......... और महीन को चोर की बीएड पी लेट गया ........... महीन सवालय नज़रों सी उसको देखनी लगी .........
विनोद तकए पी सर रख की लेती होय बोलै ....... खुद hi निकालो इसी ......... देखता हों न की तुमको कितना प्यार है इस सी ..........
महीन विनोद की बात का मतलब समझ गए थी ........... की वह क्या चाहता है .............. वह शर्मा गए ............. महीन भी बीएड पी आगये .......... विनोद न्य उसका हाथ पाकर की उसी अपनी ऊपर खींच लय ......... और एक बार फिर उसकी होंठों को किश करनी लगा ........ निचली होंठ को अपनी होंठों मैं लय और उसी सूचक करनी लगा ............. साथ hi विनोद न्य महीन का हाथ खुद सी hi दोबारा अपनी ट्रॉउज़र की ऊपर सी अपनी लुंड पी रख दया ............... जैसी महीन न्य जल्दी सी अपनी मुठी मई लय लय ................ विनोद न्य अपनी जुबां महीन की होंठों की अंदर दाल दी .......... और वह उसी चूसनी लगी ............. दोनों का सलीवा एक दूसरी की मुंह मई जा रहा था ........... मिक्स हो रहा था ........... मगर दोनों मैं सी किसी को भी इस बात का अहसास नहीं था ........ महीन का नंगा जिसम विनोद की साथ चिपकता जा रहा था ............ उसकी जिसम पी सिर्फ ब्रा और पंतय थी ...........
कुछ देर तक महीन की होंठों का रूस पीनी की बाद विनोद न्य आहिस्ता सी उसकी कान मैं बोलै ........... महीन .............. उसी बहार निकालो ..........
महीन थोड़ा शर्मा की विनोद की लुंड की तरफ देखनी लगी ........... इस लुंड सी वह अछि तरह सी वाक़िफ़ थी ........... कई बार इस लुंड सी छुड़वा चुकी होइ थी ......... इस लुंड का मज़ा लय चुकी होइ थी ............ मगर आज तक उसनी खुद सी इस लुंड को बहार नहीं निकला था .......... खुद सी विनोद का ट्रॉउज़र नहीं उतरा था ................ उसका हाथ अभी भी विनोद की लुंड पी था ..................... वह खुद भी अब विनोद की लुंड को बहार निकालना चाहती थी ........... ताकि वह उसी जल्दी सी इसकी छूट मई दाल दी ........ और उसी छोड़ दी ............. मगर एक झिझक सी थी ........... हिचकचाहट सी थी .............. क्यों की इतनी बार उस लुंड सी छुड़नी की बावजूद भी ठीक सी ...... और क़रीब सी उस लुंड को नहीं देखा था ...............
महीन न्य आहिस्ता सी विनोद की पाजामे को नीची को सिरका दया .......... उसकी लुंड को बहार निकालती होय ............. जैसी hi पजामा नीची होआ तो महीन का दिल उछाल की हलक़ मई आज्ञा ............. विनोद का काला लुंड सीधा खरा लहरा रहा था ............. विनोद न्य अपनी टांगों को हरकत देती होय अपना ट्रोसुएर अपनी टांगों सी निकाल दया ............ और अब वह बीएड पी बिलकुल नंगा हो की लेता होआ था ........... और महीन उसकी पास hi सिर्फ ब्रा और पंतय मैं थोड़ी टेढ़ी हो की लेती होइ थी ............. महीन की नज़रें विनोद की नंगी लुंड पी जमी होइ थीं ............ जो लहरा रहा था ........ हिल रहा था ........ और महीन को अत्त्रक्ट क्र रहा था ............. बैडरूम की फुल लाइट की रौशनी मैं उसका कला लुंड साफ़ दिख रहा था ............. लुंड काफी लम्बा और मोटा लग रहा था ......... आसिफ की लुंड सी मोटा और लम्बा ............ उसका टोपा नहीं दिख रहा था ....... बल्कि उसकी ऊपर स्किन थी ............... जैसी देख क्र महीन को थोड़ी हैरानी हो रही थी ............ मगर वह अपनी नज़र विनोद की लुंड पर सी हटा नहीं पा रही थी ............ आखिर यह लुंड इतनी बार उसकी छूट की अंदर जा की उसकी आग बुझा चूका होआ था .............. वह इस लुंड की करामात सी ाच्य सी वाक़िफ़ थी ................ uuuuuffffffffff देखो तो कैसी नाग की तरह लहरा रहा है ............. महीन दिल hi दिल मैं सोची ..........
विनोद आहिस्ता सी उसकी कानों की पास बोलै ..... महीन इसी पकरो न ............
महीन न्य आहिस्ता आहिस्ता अपना हाथ ाग्य बढ़ाया .......... और विनोद की काले लुंड को अपनी गोरी गोरी मुलायम हाथ मैं लय लय ............ और आहिस्ता आहिस्ता अपना हाथ उसकी ऊपर पहिरण्य लगी ............ विनोद न्य आहिस्ता ाहसिता महीन को नीची की तरफ पुश क्र दया ............. और महीन का चेहरा विनोद की लुंड की क़रीब आज्ञा ......... वह अब उसकी लुंड को बुहत क़रीब सी देख रही थी ........ इतना क़रीब सी उसनी कभी विनोद की लुंड को नहीं देखा था ............... उसका हाथ अभी भी विनोद की लुंड पी था .............. उसकी नज़रें उसकी लुंड पी थीं ........... विनोद की लुंड की टोपे पर मौजूद उसकी स्किन उसकी हाथ की हरकत सी आहिस्ता आहिस्ता ऊपर नीची हो रही थी ........... उसी याद अन्य लगा की वह लड़की कैसी उस लड़के की लुंड को प्यार क्र रही थी ............. कैसी वह अपनी प्यार का इज़हार क्र रही थी ........... उसी याद अन्य लगा की उस लड़के का लुंड चूसती होय उस लड़की की चेहरी औ उसकी आँखों सी और उसकी हरकतों सी नज़र आ रहा था की वह लड़की कितना प्यार करती है उस सी ................
प्यार तो मैं भी करती हों विनोद सी ............. जैसी वह मुझ सी करता है ............ नहीं जैसी वह मुझी प्यार करता है मैं वैसी उसी नहीं कृ आज तक ............ जैसी वह अपनी प्यार का इज़हार करता है मैं न्य वैसी कभी नहीं क्या ............. वह बिना कुछ भी महसूस कए मेरी छूट को किश करता है .......... उसी सूचक करता है ....... उसी लीक करता है ........... मगर मैं न्य कभी भी ऐसा नहीं किआ ............... उसनी कभी कहा भी तो नहीं न मुझी ऐसा करनी को ............ अपनी इस लुंड को प्यार करनी को ............. शायद वह मुझ सी ज़बरदस्ती कुछ नहीं करवाना चाहता इसलय नहीं कहा .............. लकिन उसी भी तो वैसी hi मज़ा आता हो गए न जैसी मुझी आता है ............. उसी भी तो आखिर किसी की होंठों का टच चाहिए न अपनी इस लुंड पी ............... मेरी होंठों का टच ............ मगर मैं कैसी क्र सकती हों .............. यह तो गन्दा होता है न ................ कैसी मैं इसकी ऊपर अपनी होंठ रख सकती हों ............... यह जो मेरी हाथ मैं है ........ जिसनी हमेशा मुझी इतना मज़ा दया ............ जन्नत की सैर करवाई है हमेशा ............. क्या यह गन्दा है ................ नहीं ........ नहीं .......... क्या इसका हक़ नहीं है की मैं इसी अपनी होंठों सी प्यार करों ............ जैसी विनोद मेरी वहां पी प्यार करता है ............. बिल्क्लुल बनता है ...................... विनोद न्य हमेशा अपना प्यार साबित क्या है ........... मुझी भी आज अपना प्यार का सबूत देना है ........... मैं उसी ज़रूर लौटाऊँ गई ............... उसका प्यार ............ उसी की अंदाज़ मैं ...............
यह सुब बातें खुद सी करती होय .......... खुद को आगे कृत्य होय ........ खुद को समझाती होय महीन विनोद की लुंड की और क़रीब जांय लगी ............. और उसी अहसास तब होआ जब उसी अपनी गुलाबी होंठों पी कोई अंगारा सा रखा होआ महसूस होआ ............. तब उसी अहसास होआ की उसकी होंठ विनोद की लुंड की ऊपर हैं ........... ज़िन्दगी मैं पहली बार किसी की लुंड को टच क्र रही हैं ............. ज़िन्दगी मैं पहली बार वह विनोद की लुंड को अपनी होंठों सी छु रही थी ................. महीन न्य विनोद की आँखों मैं देखा और विनोद की लुंड की हल्का सा किश क्र दया .................. विनोद की चेहरी पी ख़ुशी की लहर दौड़ गए ............... और लज़्ज़त और सुकून की मारी उसकी आंखें बंद हो गए ................. महीन विनोद की चेहरी की एक्सप्रेशंस को देख रही थी ............... उनको पढ़ रही थी ............. उसी साफ़ साफ़ अंदाज़ा हो रहा था की उसकी होंठों की टच न्य विनोद को कितना सुकून दया है ............. महीन को ाचा लगा की उसकी वजह सी विनोद को ख़ुशी मिल रही रही है ................. और साथ hi उसी यह अहसास भी होआ की उसी कुछ भी ग़लत नहीं लग रहा है अपनी होंटो सी विनोद की लुंड को छु की ...................
महीन विनोद की लुंड की और क़रीब सिरकटी होय उसकी दोनों टांगों की बीच आगये ....... विनोद की और उसकी लुंड की बिलकुल सामन्य ........... महीन न्य विनोद की लुंड को अपनी हाथ मैं लय ........ और उसी ऊपर सी नीची तक किश करनी लगी ........... उसी अहसास हो रहा था की कुछ भी गन्दा नहीं है ........... जैसी जिसम की बाक़ी स्किन है वैसा hi अहसास है बस ............ विनोद की लुंड की इतना क़रीब अन्य की बाद उसी अब विनोद की लुंड की टोपे की स्किन ऊपर नीची होती होइ नज़र आ रही थी ........... उसी तब पता चला की उसका टोपा उसकी स्किन की अंदर चला जाता है ........... तभी उसी अहसास होआ की विनोद का लुंड उन कट है ............... आसिफ की तरह नहीं है ................. खतना क्या होआ ................ उसी याद आ गया की हींदू लोग खतना नहीं कृत्य न ............... उनकी तरह .............. तभी उसी ख्याल आया की वह एक मुस्लिम हो की एक हींदू सी छुड़वा चुकी होइ है ......... उसकी उन कट लुंड सी ............... उसी अजीब सा लगा ............ मगर फिर खुद सी hi ख्याल आया की इसी उन कट लुंड न्य तो उसी आसिफ की लुंड सी ज़्यादा मज़ा दया था ................... वह आहिस्ता सी मुस्कराई ............. और विनोद की लुंड को फिर सी किश करनी लगी ..............