लीला -रेनू, नीलू -कम्मो,..
लीला के साथ रेनू और नीलू के साथ कम्मो,...
लीला ने रेनू के थकने का पूरा फायदा उठाया, कबड्डी में भले दांव पेंच में रेनू आगे हो लेकिन गन्ने और अरहर के खेत में लीला उससे मीलों आगे थी. बस किसी तरह उसने रेनू को धर दबोचा और अपना पूरा वजन, और दोनों हाथों का जोर लगा के रेनू की गोरी गोरी रेशमी जाँघे खोल दी, सबकी आँखे उन खुली जांघो के बीच टिक गयी, चूत की फांके एकदम चिपकी,... खूंटा क्या ऊँगली भी नहीं गयी थी ढंग से,... खूब गोरी मखमली,
लीला ने पूरी जाँघे खोल के चारो पर घेरे भाभियों को रेनू ननदिया की चूत का दर्शन करा दिया, लेकिन अब ज्यादा समय चोर सिपाही का नहीं था, रेनू पूरी तरह से उछल रही थी, दूसरी कोई होती तो रेनू उसे उलट देती पर ये लीला थी,...
और लीला ने अपने दोनों होठ रेनू की अनचुदी चूत की फांको पर, हलके से होंठों से से उस की चूत को सहलाया,
चूस ले चूस ले , झाड़ दे, अब सब भौजाइयां लीला को ललकार रही थीं, और लीला ने कस कस के रेनू की गोरी चिकनी मक्खन मलाई ऐसी चूत को चूसना शुरू कर दिया, सच में लीला चूसने में एक्सपर्ट थी, रेनू पिघल रही थी अपने चूतड़ पटक रही थी,
चूत में ऊँगली करना मना था लेकिन जीभ पेलना थोड़े ही और अब दोनों उँगलियों से लीला ने रेनू की कसी टाइट फांको को पूरी ताकत से फैला दिया, बहुत से भौजाइयों की देख के सिसकी निकल गयी, एकदम गुलाबी गली, और लीला ने जीभ ठेल दी अंदर और गोल गोल घुमाने लगी,
दूबे भाभी, चम्पा और रामजनिया भी खड़े हो गए थे और रेनू लीला की कुश्ती देख रहे थे, लेकिन जहाँ बाकी भौजियां लीला को चढ़ा रही थीं दूबे भाभी रेनू को सपोर्ट कर रह थीं साथ में चंपा और रमजनिया भी,
रेनू नीचे थी और लीला ऊपर एकदम ६९ की तरह, दूबे भाभी उकसा रही थीं
" अरे रेनू पेल दे ऊँगली लीलवा की बुरिया में, पेल दे कस के ससुरी का गौने के पहले भोंसड़ा हो गया है पेल, चूस ले,... "
सच्च में लीला की बुर में ऊँगली करने में रेनू को कोई मनाही तो नहीं थी लेकिन न कभी किसी ने उसके ऊँगली की न रेनू ने किसी की बिल में ऊँगली ठेली पर दूबे भाभी और चंपा उसकी सहेली थी, दोनों के उकसाने पे उसने दो ऊँगली लीला के बुर में ठेल दी,... और रमजनिया के साथ एक दो भौजाइयां भी लीलवा को गरियाने लगी
" अरे लीलवा लील, आज ऊँगली लीला कल मोट मोट लंड लीला, ... आपने मायके क तो बहुत लीला है अब हमरे मायके क हमरे भाइयों क लंड लीला,..."
उधर से मिश्राइन भौजी सारी भौजाइयों को चढ़ा रही थी,
"अरे ठकुराइन, अरे मुन्ने की अम्मा, अरे रज्जो, कुल अभी आज ही अपने मायके खबर करवा दो, हमरे गाँव में कुल ननदियाँ कातिक क कुतीया अस गरमाय रही हैं आय जाओ चोद जाओ,... अपने अपने भाई लोगन के एक एक पे जब तक तीन चार चढ़ेंगे नहीं तो भौजाई लोगों के जीतने का क्या फायदा,..."
पर लीलवा ने एक से एक मोटे लंड घोंट रखे थे,... रेनू एक तो नौसिखिया फिर पूरी ताकत से ऊँगली कर भी नहीं पा रही थी और जिस तरह लीला की जीभ उस्की चूत के अंदर बाहर हो रही थी, रेनू की हालत खराब हो रही थी ,
" अरे साथ में चूस भी कस के चूस, खाली ऊँगली से कउनो लौंडिया नहीं झड़ती,... कस के चूस "
दुबे भाभी ने रेनू को उकसाया,...
रेनू ने चूसना शुरू किया और लीला भी समझ रही थी बस अभी उसने खेल नहीं ख़तम किया तो,... तो अब क्लिट को कुछ देर लीला ने रगड़ा और फिर दोनों होंठों के बीच ले ले के कस के चूसना शुरू कर दिया साथ में ऊँगली से दोनों फांको को मसलना,,
रेनू की आँखे बंद हो हो गयी, देह ढीली पड़ने लगी , पर लीला का चूसना कम नहीं हुआ ... रेनू ने झड़ना शुरू कर दिया, तूफान में पीपल के पत्ते की तरह रेनू की देह काँप रही थी चाशनी का जैसे झरना फूट पड़ा और अब लीला खुद अपनी बुर रेनू के मुंह पर रगड़ रही थी,... लेकिन रेनू की देह ढीली पड़ी थी,... लीला कभी जीभ की टिप से रेनू की क्लिट छू लेती तो कस के अगले पल दुबारा चूसना शुरू कर देती, फैसला हो गया था पर लीला अभी भी रेनू को रगड़ रही थी,
रेनू दुबारा झड़ रही थी, बड़ी मुश्किल से चमेलिया और गुलबिया ने पकड़ के जबरदस्ती लीला को रेनू के ऊपर से उठाया, और मोहिनी भाभी ने उसका हाथ पकड़ के उसे जीता घोषित कर दिया,..
रेनू की आँखे बंद थी, जिंदगी में शायद पहली बार झड़ी होगी, वो भी सबके सामने,...
रमजनिया ने पकड़ के रेनू को उठाया और दूबे भाभी के हवाले कर दिया, दूबे भाभी का पेटीकोट पहले ही उठ गया था, रमजानिया ने रेनू का सर पकड़ के दूबे भाभी की जाँघों के बीच, ...
और दूबे भाभी प्यार दुलार से रेनू को पुचकार रही थीं
" अरे इतना दिन से कह रही थी अब तक तोहें चूसने चाटने में पक्की कर दिए होतीं, चलो कोई बात नहीं हाँ बस हलके जीभ निकाल के बस छुआ छुआ के और जोर लगाओ, चल चाटो, ... "
रमजनिया कस के रेनू का सर पकडे थी और जब रेनू ने अपने से चाटना शुरू कर दिया तभी रामजनिया ने छोड़ा, दूबे भाभी ने कितनी कच्ची कलियों को अपने भोसड़े का रस चखाया चुसाया होगा, रेनू अब तक बची थी इसलिए वो रेनू के आउट होने का इन्तजार कर रही थीं,
और जब भौजी ननद को जब चुसवाती है तो उसके बाकी अंगो का भी तो रस लेगी, और फिर रेनू तो बारह में पढ़ती थी, जोबन जबरदंग थे, दुबे भाभी उसे भी कस कस के दबा रही थीं, मसल रही थीं
उधर अब कम्मो और नीलू की कुश्ती कगार पर थी, मोहिनी भाभी, चमेलिया और गुलबिया तीनो लोग वहीँ खड़े थे
कम्मो और नीलू का मामला उल्टा था, कम्मो नीलू के ऊपर चढ़ी थी और नीलू की दोनों टांगों के बीच टाँगे डाल के उसने टाँगे खुलवा रखी थीं और एक हाथ से नीलू के दोनों हाथों को दबोच रखा था, दूसरा हाथ रेंगते हुए दोनों जाँघों के बीच,... नीलू लाख कोशिश कर रही थी की जांघों को चिपका ले पर कम्मो ने इस तरह जाँघों के बीच अपनी टाँगे घुसेड़ रखी थी, उसे कैंची की फाल की तरह धीरे धीरे फैला रही थी, ... कम्मो का हाथ नीलू की चूत पर पहुँच गया,
नीलू की चूत में इतने लंड गौने के पहिले ही घुस चुके थे,... गप्प से कम्मो ने दो ऊँगली पेल दी, ... और आगे पीछे आगे पीछे,...
सब भौजाइयां कम्मो का साथ दे रही थीं, पेल साल्ली के, पेल कस के अरे अभी तो हम लोग मुट्ठी डालेंगे, ... पूरा ठेल दे,
गाँव के मरद एक से एक चुदक्क्ड़ सब एक से एक मोटे लंड निलुवा घोंट चुकी थी,... और कभी दस बारह मिनट के पहले झड़ती नहीं थी, लेकिन कम्मो की ऊँगली से गीली तो हो ही रही थी चूत उसकी पनिया रही थी, -और कुछ नीलू की पट्टी वाली नीलू को भी ललकार रही थी,
"अरे स्साली कल की लौंडिया से हार जाओगी , जिस की झांटे भी ठीक से नहीं आयी हैं, पलट, पलट निलुआ, ... पलट कम्मो छिनार को,... "
नीलू लाख कोशिश कर रही थी लेकिन कम्मो की हाथ की पकड़ बहुत तगड़ी थी,... दोनों हाथों को नीलू के कम्मो ने अपने दाएं हाथ से जकड़ रखा था,... नीलू कितना भी कसर मसर करे,
मोहिनी भाभी ने टाइम बोलै सिर्फ डेढ़ मिनट बचा है,...
नीलू ने अपनी देह ढीली कर दी, और कम्मो का ध्यान भी पूरी तरह से बुर में ऊँगली करने में था, कम्मो चुदी नहीं थी, झिल्ली नहीं फटी थी लेकिन बाकी अपनी समौरियों की तरह अनजान नहीं थी, ... ऊँगली करने के साथ अब वो अंगूठे से नीलू की क्लिट भी रगड़ने लगी लेकिन उसका ध्यान जरा सा हटा, और नीलू ने पूरी ताकत से और, कम्मो अलग हो गयी,... पर नीलू कम्मो के ऊपर नहीं चढ़ी,.. वो सरक कर दूर कम्मो के पैरों के पास हट गयी,... और जैसे कोई मरद गौने की रात अपनी दुलहन की दोनों टांगों को फैला के अपने दोनों कंधो पे चढ़ा के चोदने तैयारी करता है,
बिलकुल उसी तरह, फरक इतना था की लंड की जगह नीलू के होंठ थे कम्मो की चिकनी चूत पे , कुछ देर तक तो उसने जीभ से पहले पनियाया, थूक कर के गीला किया , फिर सीधे दोनों फांकों को पकड़ के चूसना शुरू किया और शुरू से ही पूरी रफ़्तार से, बाएं हाथ का अंगूठा कम्मो की क्लिट पे,
और दाएं हाथ से कम्मो की चूँची पकड़ के,... क्या कोई मर्द मसलेगा, बीच में निप्स को पकड़ के खींच लेती कम्मो सिसक पड़ती,...
कम्मो थक भी गयी थी और ये तिहरा मजा उसे कभी एक साथ नहीं मिला था, थोड़ी देर में तन मन से उसने सरेंडर कर दिया,
मोहिनी भाभी ने ३० सेकेण्ड का टाइम बोला,... और नीलू ने हलके से क्लिट काट ली,
फिर तो जैसे ज्वालामुखी फूट पड़ा हो, कम्मोउछल रही थी चूतड़ बित्ते भर उछाल रही थी, झड़ रही थी, चाशनी निकल कर गोरी गोरी जाँघों पर बह रही थी,... थोड़ी देर पहले कबड्डी में भी आखिरी राउंड में उसको भौजी लोगों ने जबरदस्त झाड़ा था और अब दुबारा,... वो उठने की हालत में नहीं थी,
नीलू ही उठी, मोहिनी भाभी ने नीलू को जीता हुआ घोषित किया लेकिन अब उनका मन भी ललचा रहा था बस कम्मो को पकड़ के उठा के जहाँ पास में दूबे भाभी रेनू को अपनी बुर चटा रही थीं वहीँ बगल में पेटीकोट उठा के सीधे कम्मो के मुंह पे बैठ गयीं,... बिना कहे कम्मो जानती थी वो हारी हुयी टीम की है उसे क्या करना है , हलके हलके अपनी जीभ से मोहिनी भाभी की बुर चाटने लगी।
कच्ची कलियों से ननदों से बुर चटाने का मजा ही अलग है,... और आज तो शुरुआत थी अब ननद सब भी जानती थीं, साल भर तक,...
रात भर भौजाइयां ननदों के भाई से चुदवाएंगी तीन बार चार बार उनकी मलायी बुर में घोंटेंगी , और सुबह सुबह वही उनके भाई की रबड़ी मलाई से बजबजाती बुर अपनी ननदों से चटवाएंगी ,
तोहरे भाई क है बोल कैसा स्वाद है,
मिश्राइन भाभी सब भौजियों को ललकार रही थी अरे कोई ननद कम से कम आधा दर्जन भौजाई क बूर चूस के झाड़े, .. अरे आँख बंद कर के एक बार के चाट के बताय दें कौन भौजाई की बुर है तब बात है, ... छोड़ना मत कउनो को, ... आज मौका आया है
लीला और नीलू दोनों थक के चूर पड़ी थीं , हिलने की भी ताकत नहीं थी , इत्ती लम्बी कबड्डी के बाद दो राउंड कुश्ती में उनका दम निकल गया था, बस यही लग रहा था अब कोई उठने को न कहे,
उनके पास ही चमेलिया और गुलबिया खड़ी थीं,... थोड़ी दूर पे कजरी चननीया को एक बार चूस के झाड़ चुकी थी.
मिश्राइन भाभी ने हड़काया, अरे चमेलिया, गुलबिया चननिया, दो दो ननद छिनार निसूती टांग फैलाये बुर चियारे पड़ी हैं देख का रही हो चढ़ जाओ,...