- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 34,477
गीता, छुटकी और थर्ड अम्पायर
( गीता, छुटकी दोनों आउट )
और ऐन मौके पर चमेलिया ने आके उसे बॉडी टैकल किया और मैंने भी अब दूसरा टखना पकड़ा, और लाइन से दूसरी ओर खींच के ले गयी, अब हम चार वो अकेले, और मैदान के दांये कोने,... पल भर के लिए उसकी पीठ लगी तो छुटकी और चमेलिया दोनों उसके ऊपर चढ़ गयीं,... पर लग रहा था की गिरने में गीता के सर में हल्की सी चोट लग गयी है,...
गुलबिया ने उसकी लेगिंग फाड़नी शुरू की तो मैंने मना किया और इशारा किया बस कस के दोनों पैरों को पकड़ के फैला के रख, क्योकि अब वो पैरों के जोर जमींन पर धक्का मार के उठने की पूरी कोशिश करेगी,...
ननदों की टांग फ़ैलाने में किस भौजाई को मज़ा नहीं आएगा, आखिर उनके भाई पहले दिन से हम लोगो की टाँगे फैलाते हैं
तो गुलबिया ने कस के गीता की टाँगे फैलायीं,...
पर हम लोग थक रहे थे , और गीता में गजब की ताकत थी और वो धोबिया पछाड़ ऐसे कितने ही दांव जानती थी, एक साथ दो तीन,.. पर छुटकी तो अब उसकी छोटी बहन थी,...
छुटकी ने उसके कान में अपनी बात रखी,
गीता गुस्सा तो नहीं हुयी पर जोर से सर हिला रही थी न न में, मैं देख रही थी, पर जिस तरह से गीता मुस्करा रही थी, मैं समझ रही थी की बस वो छुटकी को चिढ़ा रही है तंग कर रही है,... और अब मैं भी समझाने में लगी, कुछ मैंने कान में उससे कहा, कुछ वो फुसफुसा के बोली,...
लेकिन कनखियों से मैंने देखा की सासों का अम्पायर का पैनल था उसमें एक को शक हो गया ,और शक होने की बात थी, अगर गीता फंस गयी थी, दबोच ली गयी थी तो अब तक हमें उसके कपड़ें फाड़ने शुरू कर देने चाहिए थे और गीता भी चुपचाप पड़ी छुटकी उसके ऊपर चढ़ी वो उसको हटाने की कोशिश नहीं कर रही थी,... वो थर्ड अम्पायर थी, मेन तो मेरी सास ही थीं, दूसरी को भी आज सुबह छुटकी ने होली में अपनी कच्ची अमिया चखा के उसका दीवाना बना दिया था,... पर ये थर्ड अम्पायर ( बाद में पता चला की वो गीता के भाई कम यार अरविंदवा की चोदी थीं, और ये बात गितवा को भी मालूम थी ) वो तिरछी निगाह से देख रही थीं, और उनके खिलाफ जा के मेरी सास या दूसरी अम्पायर बोलना भी नहीं चाह रही थीं,...
बस मैंने भी गुलबिया को इशारा किया उसकी लेगिंग खींचने के लिए,... लेकिन तबतक वो सास लोगों का पैनल पास में और मैंने झुक के गीता को इशारा किया, ... बस जल्दी से वो हार मान ले,... और उसकी अभी की नहीं आगे की सभी शर्ते हम सब भौजाइयों को कबूल,... छुटकी को भी,...
जब तक जिन को शक था वो पास में पहुंचतीं, गीता ने जमीन पर चार बार हाथ पटक कर अपनी हार मान ली,...
बस हम लोगों ने आपस में हत्थी मारी और पकड़ के गीता को उठाया, मान गयी मैं गीता को असली ननद मेरी, क्या मस्त नाटक किया उसने,... जैसे उसके सर में बहुत जोर से गिरने से चोट लगी हो और चक्कर आ रहा हो, ... और छुटकी देखने लगी की कोई खून तो नहीं निकला,...
लेकिन वो थर्ड अम्पायर बहुत नाराज,...
उन्हें लगा की कुछ नूरा कुश्ती हो गई,... गीता इतनी आसानी से हार मानने वाली नहीं थी,... पर अब कोई कुछ कर भी नहीं सकता था गीता ने खुद हार मान ली थी और इस तरह बैठी की उसके सर में तेज चोट गिरने से लगी,...
बड़ी देर तक उन लोगों में आपस में बात होती रही,... वो गीता को जिन्दा करने पे जिद कर रही थी लेकिन गीता खुद खेल से बाहर हो गई थी,...
पर अब उन्होंने लगाया की छुटकी ने फ़ाउल कर दिया, इसलिए छुटकी को भी गीता के साथ आउट होना पडेगा,...
मुझे बहुत बुरा लगा पर मिश्राइन भाभी ने आंख से इशारा किया की मैं कुछ न बोलूं और ये फैसला मान लूँ,... हमारी लीड दो की बरकरार रहती, और अब सात मिनट सिर्फ बचा था,...
पर जो सास नैना ननदिया को सपोर्ट कर रही थीं उन्होंने बोला की अब नैना की टीम में सिर्फ तीन बची है, तो गीता के साथ उसे फाउल हुआ उसे कम्पनसेट करने के लिए एक किसी को उनकी टीम में जिन्दा करने के लिए,...
मैं डरी की कहीं लीला, नीलू या रेनू में से कोई जिंदा हुयी तो उनकी डिफेंस टीम फिर से जिन्दा हो जायेगी , और जो भी हमारी ओर से जाएगा पक्का पकड़ा जाएगा,... लेकिन मेरी सास थीं न चतुर चालाक, बिना उनकी बात काटे वो बोलीं
" एकदम सही बात,... और जो ननदों की टीम का लास्ट आउट हुआ वो जिन्दा हो जाएगा "
मैंने चैन की सांस ली, यानी पायल।
लेकिन मेरी ओर से अब मिश्राइन भौजी लड़ने पर उतारू हो गयीं,... पायल और कम्मो दोनों फुर्तीली थीं पकड़ने में तो नहीं पर हमला करने में दोनों तेज थी और हमारी टीम के लोग थक रहे थे और वो जरूर किसी को मार के जातीं और ये बात तय हो गयी की पायल रेड करने या हमारे पाले में नहीं आ सकती पर पकड़ सकती है ,
लेकिन सबसे बड़ा नुक्सान ये हुआ की हमारी लीड फिर से एक की हो गई, और एक की लीड तो कभी भी
फिर ड्रा होने पर कैसे फैसला होगा ये अम्पायर ही तय करेंगी,
अब नैना के साथ कम्मो और पायल,...
मेरे साथ मिश्राइन भौजी, गुलबिया और चमेलिया,...
( गीता, छुटकी दोनों आउट )
और ऐन मौके पर चमेलिया ने आके उसे बॉडी टैकल किया और मैंने भी अब दूसरा टखना पकड़ा, और लाइन से दूसरी ओर खींच के ले गयी, अब हम चार वो अकेले, और मैदान के दांये कोने,... पल भर के लिए उसकी पीठ लगी तो छुटकी और चमेलिया दोनों उसके ऊपर चढ़ गयीं,... पर लग रहा था की गिरने में गीता के सर में हल्की सी चोट लग गयी है,...
गुलबिया ने उसकी लेगिंग फाड़नी शुरू की तो मैंने मना किया और इशारा किया बस कस के दोनों पैरों को पकड़ के फैला के रख, क्योकि अब वो पैरों के जोर जमींन पर धक्का मार के उठने की पूरी कोशिश करेगी,...
ननदों की टांग फ़ैलाने में किस भौजाई को मज़ा नहीं आएगा, आखिर उनके भाई पहले दिन से हम लोगो की टाँगे फैलाते हैं
तो गुलबिया ने कस के गीता की टाँगे फैलायीं,...
पर हम लोग थक रहे थे , और गीता में गजब की ताकत थी और वो धोबिया पछाड़ ऐसे कितने ही दांव जानती थी, एक साथ दो तीन,.. पर छुटकी तो अब उसकी छोटी बहन थी,...
छुटकी ने उसके कान में अपनी बात रखी,
गीता गुस्सा तो नहीं हुयी पर जोर से सर हिला रही थी न न में, मैं देख रही थी, पर जिस तरह से गीता मुस्करा रही थी, मैं समझ रही थी की बस वो छुटकी को चिढ़ा रही है तंग कर रही है,... और अब मैं भी समझाने में लगी, कुछ मैंने कान में उससे कहा, कुछ वो फुसफुसा के बोली,...
लेकिन कनखियों से मैंने देखा की सासों का अम्पायर का पैनल था उसमें एक को शक हो गया ,और शक होने की बात थी, अगर गीता फंस गयी थी, दबोच ली गयी थी तो अब तक हमें उसके कपड़ें फाड़ने शुरू कर देने चाहिए थे और गीता भी चुपचाप पड़ी छुटकी उसके ऊपर चढ़ी वो उसको हटाने की कोशिश नहीं कर रही थी,... वो थर्ड अम्पायर थी, मेन तो मेरी सास ही थीं, दूसरी को भी आज सुबह छुटकी ने होली में अपनी कच्ची अमिया चखा के उसका दीवाना बना दिया था,... पर ये थर्ड अम्पायर ( बाद में पता चला की वो गीता के भाई कम यार अरविंदवा की चोदी थीं, और ये बात गितवा को भी मालूम थी ) वो तिरछी निगाह से देख रही थीं, और उनके खिलाफ जा के मेरी सास या दूसरी अम्पायर बोलना भी नहीं चाह रही थीं,...
बस मैंने भी गुलबिया को इशारा किया उसकी लेगिंग खींचने के लिए,... लेकिन तबतक वो सास लोगों का पैनल पास में और मैंने झुक के गीता को इशारा किया, ... बस जल्दी से वो हार मान ले,... और उसकी अभी की नहीं आगे की सभी शर्ते हम सब भौजाइयों को कबूल,... छुटकी को भी,...
जब तक जिन को शक था वो पास में पहुंचतीं, गीता ने जमीन पर चार बार हाथ पटक कर अपनी हार मान ली,...
बस हम लोगों ने आपस में हत्थी मारी और पकड़ के गीता को उठाया, मान गयी मैं गीता को असली ननद मेरी, क्या मस्त नाटक किया उसने,... जैसे उसके सर में बहुत जोर से गिरने से चोट लगी हो और चक्कर आ रहा हो, ... और छुटकी देखने लगी की कोई खून तो नहीं निकला,...
लेकिन वो थर्ड अम्पायर बहुत नाराज,...
उन्हें लगा की कुछ नूरा कुश्ती हो गई,... गीता इतनी आसानी से हार मानने वाली नहीं थी,... पर अब कोई कुछ कर भी नहीं सकता था गीता ने खुद हार मान ली थी और इस तरह बैठी की उसके सर में तेज चोट गिरने से लगी,...
बड़ी देर तक उन लोगों में आपस में बात होती रही,... वो गीता को जिन्दा करने पे जिद कर रही थी लेकिन गीता खुद खेल से बाहर हो गई थी,...
पर अब उन्होंने लगाया की छुटकी ने फ़ाउल कर दिया, इसलिए छुटकी को भी गीता के साथ आउट होना पडेगा,...
मुझे बहुत बुरा लगा पर मिश्राइन भाभी ने आंख से इशारा किया की मैं कुछ न बोलूं और ये फैसला मान लूँ,... हमारी लीड दो की बरकरार रहती, और अब सात मिनट सिर्फ बचा था,...
पर जो सास नैना ननदिया को सपोर्ट कर रही थीं उन्होंने बोला की अब नैना की टीम में सिर्फ तीन बची है, तो गीता के साथ उसे फाउल हुआ उसे कम्पनसेट करने के लिए एक किसी को उनकी टीम में जिन्दा करने के लिए,...
मैं डरी की कहीं लीला, नीलू या रेनू में से कोई जिंदा हुयी तो उनकी डिफेंस टीम फिर से जिन्दा हो जायेगी , और जो भी हमारी ओर से जाएगा पक्का पकड़ा जाएगा,... लेकिन मेरी सास थीं न चतुर चालाक, बिना उनकी बात काटे वो बोलीं
" एकदम सही बात,... और जो ननदों की टीम का लास्ट आउट हुआ वो जिन्दा हो जाएगा "
मैंने चैन की सांस ली, यानी पायल।
लेकिन मेरी ओर से अब मिश्राइन भौजी लड़ने पर उतारू हो गयीं,... पायल और कम्मो दोनों फुर्तीली थीं पकड़ने में तो नहीं पर हमला करने में दोनों तेज थी और हमारी टीम के लोग थक रहे थे और वो जरूर किसी को मार के जातीं और ये बात तय हो गयी की पायल रेड करने या हमारे पाले में नहीं आ सकती पर पकड़ सकती है ,
लेकिन सबसे बड़ा नुक्सान ये हुआ की हमारी लीड फिर से एक की हो गई, और एक की लीड तो कभी भी
फिर ड्रा होने पर कैसे फैसला होगा ये अम्पायर ही तय करेंगी,
अब नैना के साथ कम्मो और पायल,...
मेरे साथ मिश्राइन भौजी, गुलबिया और चमेलिया,...