भाग ६५
भाभियों की जीत का जश्न
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सब भौजाइयां कम्मो का साथ दे रही थीं,
"पेल साल्ली के, पेल कस के अरे अभी तो हम लोग मुट्ठी डालेंगे, ... पूरा ठेल दे,"
गाँव के मरद एक से एक चुदक्क्ड़ सब एक से एक,... मोटे लंड निलुवा घोंट चुकी थी,... और कभी दस बारह मिनट के पहले झड़ती नहीं थी, लेकिन कम्मो की ऊँगली से गीली तो हो ही रही थी चूत उसकी पनिया रही थी, -और कुछ नीलू की पट्टी वाली नीलू को भी ललकार रही थी,
"अरे स्साली कल की लौंडिया से हार जाओगी , जिस की झांटे भी ठीक से नहीं आयी हैं, पलट, पलट निलुआ, ... पलट कम्मो छिनार को,... "
नीलू लाख कोशिश कर रही थी लेकिन कम्मो की हाथ की पकड़ बहुत तगड़ी थी,... दोनों हाथों को नीलू के कम्मो ने अपने दाएं हाथ से जकड़ रखा था,... नीलू कितना भी कसर मसर करे,
मोहिनी भाभी ने बोला सिर्फ डेढ़ मिनट बचा है,...
नीलू ने अपनी देह ढीली कर दी, और कम्मो का ध्यान भी पूरी तरह से बुर में ऊँगली करने में था, कम्मो चुदी नहीं थी, झिल्ली नहीं फटी थी लेकिन बाकी अपनी समौरियों की तरह अनजान नहीं थी, ... ऊँगली करने के साथ अब वो अंगूठे से नीलू की क्लिट भी रगड़ने लगी लेकिन उसका ध्यान जरा सा हटा, और नीलू ने पूरी ताकत से और, कम्मो अलग हो गयी,...
पर नीलू कम्मो के ऊपर नहीं चढ़ी,.. वो सरक कर दूर कम्मो के पैरों के पास हट गयी,... और जैसे कोई मरद गौने की रात अपनी दुलहन की दोनों टांगों को फैला के अपने दोनों कंधो पे चढ़ा के चोदने तैयारी करता है,
बिलकुल उसी तरह, फरक इतना था की लंड की जगह नीलू के होंठ थे कम्मो की चिकनी चूत पे , कुछ देर तक तो उसने जीभ से पहले पनियाया, थूक कर के गीला किया , फिर सीधे दोनों फांकों को पकड़ के चूसना शुरू किया और शुरू से ही पूरी रफ़्तार से,
बाएं हाथ का अंगूठा कम्मो की क्लिट पे, और दाएं हाथ से कम्मो की चूँची पकड़ के,... क्या कोई मर्द मसलेगा, बीच में निप्स को पकड़ के खींच लेती कम्मो सिसक पड़ती,...
कम्मो थक भी गयी थी और ये तिहरा मजा उसे कभी एक साथ नहीं मिला था, थोड़ी देर में तन मन से उसने सरेंडर कर दिया,
मोहिनी भाभी ने ३० सेकेण्ड का टाइम बोला,... और नीलू ने हलके से क्लिट काट ली,
फिर तो जैसे ज्वालामुखी फूट पड़ा हो, कम्मोउछल रही थी चूतड़ बित्ते भर उछाल रही थी, झड़ रही थी, चाशनी निकल कर गोरी गोरी जाँघों पर बह रही थी,... थोड़ी देर पहले कबड्डी में भी आखिरी राउंड में उसको भौजी लोगों ने जबरदस्त झाड़ा था और अब दुबारा,... वो उठने की हालत में नहीं थी,
नीलू ही उठी, मोहिनी भाभी ने नीलू को जीता हुआ घोषित किया,
लेकिन अब उनका मन भी ललचा रहा था बस कम्मो को पकड़ के उठा के जहाँ पास में दूबे भाभी रेनू को अपनी बुर चटा रही थीं वहीँ बगल में पेटीकोट उठा के सीधे कम्मो के मुंह पे बैठ गयीं,...
बिना कहे कम्मो जानती थी वो हारी हुयी टीम की है उसे क्या करना है , हलके हलके अपनी जीभ से मोहिनी भाभी की बुर चाटने लगी।
कच्ची कलियों से ननदों से बुर चटाने का मजा ही अलग है,... और आज तो शुरुआत थी अब ननद सब भी जानती थीं, साल भर तक,... रात भर भौजाइयां ननदों के भाई से चुदवाएंगी तीन बार चार बार उनकी मलायी बुर में घोंटेंगी , और सुबह सुबह वही उनके भाई की रबड़ी मलाई से बजबजाती बुर अपनी ननदों से चटवाएंगी , तोहरे भाई क है बोल कैसा स्वाद है,
मिश्राइन भाभी सब भौजियों को ललकार रही थी अरे कोई ननद कम से कम आधा दर्जन भौजाई क बूर चूस के झाड़े, .. अरे आँख बंद कर के एक बार के चाट के बताय दें कौन भौजाई की बुर है तब बात है, ... छोड़ना मत कउनो को, ... आज मौका आया है
लीला और नीलू दोनों थक के चूर पड़ी थीं , हिलने की भी ताकत नहीं थी , इत्ती लम्बी कबड्डी के बाद दो राउंड कुश्ती में उनका दम निकल गया था, बस यही लग रहा था अब कोई उठने को न कहे,
उनके पास ही चमेलिया और गुलबिया खड़ी थीं,... थोड़ी दूर पे कजरी चननीया को एक बार चूस के झाड़ चुकी थी.
मिश्राइन भाभी ने हड़काया,
अरे चमेलिया, गुलबिया चननिया, दो दो ननद छिनार निसूती टांग फैलाये बुर चियारे पड़ी हैं देख का रही हो चढ़ जाओ,...
बस उन तीनों ने चमेलिया, गुलबिया चननिया, ने नीलू और लीला को छाप लिया और फ्री फॉर ऑल शुरू हो गया।
मिश्राइन भौजी के साथ मंजू भाभी, रज्जो भाभी और बाहर बैठीं भौजाइयां भी चमेलिया गुलबिया को ललकार रही थी,
फाड़ दे लीलवा क,... पेल दे पूरा , अबकी क होली याद रखे निलुवा,...
अब आया है ऊंट पहाड़ के नीचे,...
और सच में ऊंट पहाड़ के नीचे आ गया था,... अब तक लीलवा और निलुवा कच्ची कलियों से लड़ रही थीं और अब जबरदंग भौजाइयां सामने थीं देह की करेर, खूब तगड़ी और और रगड़ने में भी कोई कोर कसर नहीं रखने वाली,... और लीला और नीलू इत्ती देर की कबड्डी और फिर दो राउंड की कुश्ती के बाद थक गयी थीं,... और सबसे बड़ी बात अब तो ननदें हार गयी थीं, तो सिर्फ आज नहीं साल भर तक उन्हें रगड़वाना था, मरवाना था, किसी भी भौजाई की किसी बात को ना नहीं कह सकती थीं,...
चमेलिया, गुलबिया दोनों लीला पे चढ़ीं,..
चमेलिया ने अपनी बुर खोल के अपनी ननद के मुंह पे रगड़ना शुरू किया और दोनों हाथों से ननद की दोनों गेंदों से खेलने लगी,
और गुलबिया ने पहले तो कुछ देर तक अपनी बुर से लीला की चूत रगड़ी, फिर हथेली पे थूक लगा के जोर जोर से, लीला की बुर मसली और चिढ़ाने लगी,
" अरे ननद रानी, तीन महीना भौजाई क मयके क मजा ले लो फिर जेठ में तो ससुरे में रोज कबड्डी खेलोगी चलो तोहें सिखाय दूँ कैसे पिया पेलेंगे,... " और गच्चाक से एक साथ तीन ऊँगली अंदर,...
कुछ दर्द से कुछ मजे से लीला उछली, पर अभी तो ये शुरुआत थी, गुलबिया ने पहले तो कैंची की फाल की तरह उँगलियों को फैलाया, और फैलाती गयी, फिर गोल गोल, लीला की बुर में घुमाने लगी, और साथ में खेल तमाशा देख रही ननदों को ललकारने लगी,...
"देखो देखो देखो तमाशा देखो,... अरे अभी तुम सब की गाँड़ भी मारी जाएगी मुट्ठी से और बुर भी,... और फिर हमरे भाई लोगन से भी, सब छिनार ननद अपने भाई से रोज बिना नागा चुदवाती हैं तो भाभी के भैया से भी,...."
और थोड़ी देर में चौथी ऊँगली भी घुस गयी, लीला बहुतों से चुदी थी लेकिन तब भी चार उँगलियाँ बहुत होती हैं और गुलबिया की कलाई की ताकत भी बहुत थी,... और अब चार ऊँगली से ,... क्या कोई मर्द लंड पेलेगा जिस तरह गुलबिया उँगलियाँ ठेल रही थी,... और फिर चम्मच की तरह मोड़ के करोच भी रही थी अंदर,...
उसके मुंह पे बुर रगड़ती चमेलिया हलके हलके लीला की चूँची पे मार रही थी,...
" हे छिनरो और जोर से चूस तोहार महतारी क भोंसड़ा न हो,नयी नयी भौजी क चूत हो झाड़ जल्दी, ... नहीं तो दोनों मुट्ठी एक साथ गाँड़ में पेल दूंगी,..."
लेकिन चमेलिया को झाड़ने के बाद भी लीलवा को छुट्टी नहीं मिली,... और चमेलिया अपने बड़े बड़े चूतड़ फैला के सीधे गाँड़ का छेद फैला के लीला के मुंह पे
" अरे जीभ अंदर डाल के अरे और अंदर तक "
और गालियां अलग, तोहार भाई गांडू, ... गंडचट्टो, अरे अभी सब खिलाऊंगी पिलाऊंगी सबके सामने,...
उधर चननिया ने नीलू को निहुरा दिया,...