बातें मेरी सास की, सास ज्ञान
बस रज्जो और मोहिनी भाभी ने मेरी सास की साड़ी पेटीकोट पलट दिया और मेरे साजन की मातृभूमि दिख गयी,...
गुलबिया बगल में ही खड़ी थी, मिश्राइन भाभी ने उसे ललकारा अरे बाहर थोड़ी पता चलता है अंदर हाथ डाल के देख,...लेकिन मैं तो बस एक ही बात सोच रही थी, बस आज की रात और,.... कल की रात मेरे साजन इसी में अंदर जायेंगे, मेरे सामने ठेलंगे , पेलेंगे अपना,... जहाँ से निकले हैं वहीँ से अंदर
कुछ देर में कोई सास नहीं बची थी, जिसको बहुएं मुठिया नहीं रही हों,
किसी किसी पे तो दो बहुएं चढ़ी थीं, अगवाड़ा पिछवाड़ा,... दोनों,
दो तीन पे तो बहुओं ने पकड़ के ननदों से ही उनको मुठियावा,
कुछ सास के मुंह के ऊपर चढ़ी चुसवा रही थीं , गरिया भी रही थीं अरे रोज तोहार बेटवा चाटता चूसता है तो आज आप भी जरा स्वाद चख लीजिये,...
मैंने भी पहले लीला और रूपा दोनों बहनों की माँ को, लगती तो मेरी सास ही थीं,
उसके बाद मेरी एक चचिया सास को,... आधे पौन घंटे तक एकदम फ्री फॉर आल रहा,...
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गौने की रात से ही मैं समझ गयी थी इस घर में मेरी अच्छी निभेगी, खास तौर से सास से लेकिन अगले दिन जिस तरह से मुझसे खुल के बतियाया उन्होंने,...
सुहागरात के पहले ही मेरी सास ने जिस तरह से बोला था और अगले दिन भी जब मैं सुबह इनके पास से आयी थी, और ननदें जेठानियाँ चली गयी थी खाली मैं और सासू जी थे, समझाते हुए, मुस्करा कर बोलीं,...
" अरे काहें इतना लजा रही थी, ननद को पलट के गरिया के जवाब देना चाहिए,... " फिर अपनी बात उन्होंने आगे बढ़ाई और समझाया
" देखो हमार घर खेती किसानी का है और अब तुम्ही को सब देखना है, बड़ा वाला तो बम्बइये का हो गया है,... गाय गोरु का है,... जब जमीन में हल चलता है , तो जमींन का हल चलने से घबड़ाती है,.... "
मैं भी मुस्कराते हुए उन्ही के अंदाज में बोली,... " नहीं अपनी जाँघे फैला के हल को स्वीकार कर लेती है, .... "
वो खिलखिलाने लगीं,... बोलीं " हो तो शहर की लेकिन एक दिन में ही समझ गयी, देहात की बात,... और जो जमीन हल को नहीं चलने देती, कड़ी, पथरीली,... उसकी कोई कीमत होती है, क्या उसमें कोई बीज डालेगा,... "
" एकदम नहीं बीज की बर्बादी, ऊसर बंजर पथरीली जमीन की खेती के लिए का कीमत " समझते हुए मैं बोली,...
"किसान के लिए हल बैल और अब भले ट्रैक्टर आ गया हो तो ओहु की पूजा होती है, .... क्यों क्योंकि , वो जमीन जोतता है,... और जब बीज पड़ता है पानी पड़ता है तो जमीन लहलहाने लगती है , किसान हो या उसके घर के सब लहलहाती फसल देख के सब हरषाते हैं, एक बीज डालो और हजारों बीज,... और ये काम करता है कौन,... "
" धरती,... " मैं बोली
" बस हम तुम उसी तरह से हैं " मुझे अँकवार में भरती बोलीं,
"धरती की तरह, ... जितना लेते हैं सौ हजार गुना लौटाते हैं। तो धरती लजाती है का , अरे जउने दिन खेत में पहली बार हल चलता है समझो त्यौहार होता है ख़ुशी का मौका, उसी तरह धान की जब रोपनी होती है खूब गा गा कर खुसी से " फिर कुछ रुक के बोलीं
" देख तोहरे तरह तो हम इंटर पास नहीं है, लेकिन इतना जानते हैं की हजारो साल से पता नहीं कौन जमाने से खेत जोता जाता है , बीज डाला जाता है और फसल होती है,... और यही फसल होना बंद हो जाए तो , अरे जो बकरा मुर्गी खाते हैं उस बकरा मुर्गी को भी तो घास दाना चाहिए। ... उसी तरह इंसान की जात कैसे चल रही है ऐसे ही तो खेत की तरह,
मरद हल चलाता है, बीज डालता है,... और फिर नौ महीने,... हम सब जो आये हैं जाएंगे लेकिन हमारी जगह दूसरे, तीसरे, चौथे, ...जैसे गेंहू तो काट पीट के चक्की में पीस के लेकिन बीज उसका किसान बचा के रखता है,... "
मैं ध्यान से उनकी बातें सुन रही थी, बात सोलहो आने सही थी।
और गाय गोरु भी, सास मेरी अब प्यार से बतिया रही थीं जो कोई अपनी बिछड़ी सहेली से बतियाये,... वो बोलीं,
जब बछिया हुड़कती है तो कउनो ये पूछता है उसकी उमर का है कब बियाई थी, अरे ओह लायक हो गयी है तब तो हुड़क रही है फिर,... और जल्दी से सांड़ के पास न ले जाओ "
" तो खूंटा तोड़ा देती है " हँसते हुए मैंने अपनी सास की बात पूरी की. और सास भी बड़ी देर तक खिलखिलाती रहीं मेरे साथ,... और बोलीं
और सांड़ के चढ़ने के बाद जब बछिया गाभिन होती है पूरा घर खुस ,...
" की बियायेगी तो दूध मिलेगा, खीर बनेगी " मैंने एक बार फिर उनकी बात पूरी की और सास ने बात दूसरी ओर मोड़ दी,...
" गाय गोरु, खेत खलिहान छोड़ा, फूल काहें को खिलते हैं इसी लिए न की कउनो भौंरा लुभाये,... लेकिन फूल को भौंरा क लोभ नहीं होता, असली लोभ है बीज का, ओकर पंखुड़ी के बीच में से,...
बॉटनी पढ़ी इंटर में यूपी बोर्ड से, मैंने बात पूरी की , ... " पराग, परागण "
" हाँ वही,... तो फूल तो कउनो कोठरी नहीं ढूंढते, न रात क इन्तजार करते है न बछिया ढूंढती है न खेत में हल छुपा के कोई चलाता है लेकिन मनई मेहरारू,... अइसन लाज , ... चलो लाज तो थोड़ बहुत ठीक है लेकिन मेरे समझ में यही नहीं आता की उसको बुरा जो मानते हैं, छुप के बात करते हैं, इशारे में , ... कुँवार लड़की कतो देख न ले,... काहें न देखे, देखेगी नहीं तो सीखेगी कैसे,... तो फिर औरतन में लड़कियों में कौन बात क लाज,.,... जउन इतना घुमाय फिराय के, खास तौर से जब लड़कियां औरते ही हों,... अब बताओ चुदवाने में लाज नहीं, कउनो बुराई नहीं तो चुदवाना बौलने में कौन लाज,.... अरे तोहार ननद चिढ़ावत रही न की भौजी रात भर कुठरिया में का हुआ,... तो बोल देती तोहरे भैया से चोदवावत रहे, और तोहरी बुरिया में बहुत खुजली मची हो, तो अपने मायके से अपने भैया के बोलाय देई, चौथी में तो आएंगे ही , सगे नहीं है तो चचेरे ममेरे चुदवाना मन भर के,... और अपने भैया से मन हो तो भी, ... पता चल जाएगा की रात भर भैया कुठरिया में का करते हैं "
हँसते हुए मेरी सास मेरा गाल जहाँ इनके दांतो के निशान थे उसे सहलाते बोलीं
सास ने अब खुल के अपनी बात बतायी और मान गयी उनकी बात समझ गयी इस गाँव में कम से कम लड़कियों औरतों के बीच किसी चीज का कोई पर्दा नहीं और सास ने आगे कारण भी बताया,...
" देख लड़किया सब बचपन कातिक में कुतिया के ऊपर कुत्ता, बछिया के ऊपर सांड़ चढ़ते देखती हैं, रतजगा में बियाह में एकदम खुल्ल्म खुला गारी और भौजाइयां माँ के सामने बिटिया को , और माँ खुद नयी भौजाई को उसकाती है,... तो सहर का पता नहीं लेकिन यहाँ बचपन से ही सब सीख जाती हैं और हम लोग भी कुछ बुरा नहीं मानते, जिस चीज से हमारी जिंदगी चलती है, खेत में बीज न बोओ, बछिया पे सांड़ न चढ़े तो कहाँ से फसल आएगी कहाँ से दूध? और उसी तरह मर्द औरत,... "
मैंने बात दूसरी और मोड़ दी " लेकिन खेत में एक बीज से इतने बीज तो औरत,... के "
और बात बीच में काट के हँसते हुए बोली , " अरे गाँव गाँव में तो आशा बहू हैं लड़की के खून खच्चर हुआ नहीं की पहुंच गयी आशा बहू के पास,... गोली,... बियाहिता कुँवार नहीं देखती, ... लेकिन एक बात साफ़ है बल्कि दो बात,... तोहरे लिए तोहार महतारी बोल रहीं थीं पांच साल तक नाती पोता नहीं लेकिन हमरे जिद्द करने पर मान गयी तीन साल तक कुछ नहीं,
ये बात माँ ने भी मुझे बतायी थी
सास थोड़ी देर चुप रहीं फिर सीरियस हो के बोलीं,... लेकिन मैं कुछ और चाहती हूँ,...
मैं घबड़ायी कहीं वो नौ महीने में ही तो नहीं लेकिन जो सास ने बोला मेरा मन खुश हो गया,...
" देखो ये फैसला न तो हमार बेटवा करेगा, न तोहार सास न हमार समधन, इसका फैसला सिर्फ एक जनि के पास, ... हमार बहू,... तोहार फैसला,... जिसकी कोख उसका फैसला, नौ महीने तोहें संभालना है,... तो फैसला कोई और करे,... लेकिन खेत, बछिया और फूल की तरह चुदवाने पे कोई रोक टोक नहीं , जब जहाँ , चाहो,... लेकिन उसमें भी एक बात और ये मेरी नहीं पूरे गाँव का चलन है , जिसकी देह उसका फैसला, लड़की शायद करे तो मतलब नहीं। जबतक तोहार मन नहीं,... "
मेरे मन की बात कह दी उन्होने हँसते हुए। मैंने मुस्करा के पूछा,... और मेरा मन आ जाये तो,
" पटक के चोद दो स्साले को,... अइसन चाँद अस बहू काहें को लायी हूँ " हंसती हुयी वो बोलीं लेकिन मेरी टोकने की आदत
मैंने पूछ लिया , पर आपने दो बात कही थी,...
हंसने लगी वो, बोलीं,... अरे तुम भी न, मेरा मन है की वो रबड़ वबड़ के चक्कर में मत पड़ना,... उंहा मन कर रहा है वहां दूसर जनि बरसाती की तरह पहन रहे हैं छाता तान रहे हैं,... अइसन उलझन होती है और फिर फेको कहाँ, मलाई का मजा नहीं,... "
मेरी सास को मालूम था की उनकी समधन ने शादी के डेढ़ महीने पहले से ही मेरी गोली शुरू करवा दी थी।
वही बोलीं वो,... " अभी गोली वोली खाती हो तो खाती रहो, लेकिन महीना भर बाद हम आशा बहू को बोलेंगे, तोहे ले जाय घंटा भर भी नहीं लगता है, तांबे क ताला लगवा लो,... रोज रोज क गोली क छुट्टी। "
और उस दिन से मैं ही सिर्फ अपनी सास को न अच्छी तरह समझ गयी थी उनसे अच्छी दोस्ती हो गयी बल्कि गाँव का भी चलन, रीत रिवाज,... जहां ये सब बुरा कोई नहीं मानता, लेकिन उस से भी अच्छी बात जोर जबरदस्ती एकदम नहीं। लड़के लड़की की चूँची आयी नहीं लाइन मारना चालू कर देते हैं हर जगह की तरह, लुभाना पटाना , लेकिन जबतक वो साफ़ साफ़ हाँ नहीं बोले , हाथ पकड़ना तो दूर छू भी नही सकते।
मेरी सास ही नहीं गाँव की हर औरत मानती थीं, बुरा वो जिसमें जोर जबरदस्ती हो, लड़की को औरत को पसंद न आये,... उसको मजा न मिले,...
और अच्छा वो जिसमें दोनों की मर्जी हो , मजा मिले अच्छा लगे,...
और बाकी सब के लिए आशा बहू थीं न उन्हें सब पता रहता था की गाँव में कौन लड़की स्कर्ट पसार रही है तो उसे खुद गोली खिलाने, … और अब तो इस्तेमाल के बाद बाली भी गोली मिलती है,... और किससे करवाना है नहीं करवाना है ये फैसला भी लड़की का, औरत का। देवर नन्दोई जीजा का तो हक़ भी होता है लेकिन उसके साथ भी मर्जी वाली बात रहती थी.
लेकिन फागुन लगते ही ऐसी फगुनाहट चढ़ती थी न,...
जैसे आम बौराता है, जवान होती लड़कियां, भौजाइयां सब बौरा जाती थीं, न रिश्ता न नाता, सिर्फ मस्ती।
जेठ ससुर जिनसे बाकी ११ महीने थोड़ा दूरी रहती है उनके साथ भी एकदम खुल के मजाक, छेड़छाड़,... और अगर कहीं रिश्ते में, गाँव के रिश्ते से देवर मिल गया, गली गैल में, कहीं नन्दोई आ गए, और लड़कियां भी अपने न हों तो सहेली के जी जीजा, गाँव में किसी के जीजा, और भाभी के भाई भी,...
( आखिर मेरे ममेरे भाई चुन्नू ने इनकी सबसे छोटी बहन की बिल का फीता काट दिया था, जब वो होली में लेने आया था मुझे,... और मंझली ननद ने खुद चढ़ के,... उसे ).
जैसे जैसे होली नजदीक आती है चट चट कर के बंधन टूटने लगते हैं , फिर होली और रंग पंचमी के पांच दिन तो,...
और सबसे बढ़कर औरतों और लड़कियों में रिश्तों का भी सिर्फ ननद भौजाई नहीं, सास बहू भी, सहेलियां भी आपस में,... अगर पाहुन आये, और घर में साली सलहज है, फिर तो सलहज ही साली का नाड़ा अपने नन्दोई से खुलवाती थी नहीं तो खुद तोड़ देती थी , और अगर सलहज न हुयी तो सास ही अपनी बेटी का हाथ पीछे से पकड़ के आ रहे कच्चे टिकोरे, ऑफर कर देती थी
" अरे तनी ठीक से सही जगह पे रंग लगावा,... " इसके बाद कौन जीजा चोली में हाथ डालने से अपने को रोक सकता था और एक बार चोली खुली तो नीचे का नंबर,...
पिछला हफ्ता इसी मस्ती में और कल का दिन भी, लेकिन अभी जो होना था उसके बारे में मुझे कुछ नहीं मालूम था,