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- Dec 5, 2013
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मेरी सास
सब से पहले सास लोग निकल गयीं कल की होली भौजाई देवर और नंदों की होती उसमें घर का कोई भी बड़ा, सास नहीं होती थीं,...
दो गाँव बाद हम लोगों की एक बड़ी सी छावनी थी, चार पांच कमरे का घर, चारो ओर बाग़,... काम करने वाले,... बड़ा सा आँगन,... मेरी सास अपनी सब देवरानियों को लेकर वहीँ जा रही थीं , आज की रात कल का दिन सब सास बाहर रहतीं, कल रात में ८-९ बजे की वापसी,
सास मेरी अपनी सहेलियों जेठानी देवरानी के साथ निकलने से पहले मेरी ओर आयीं, लहालोट मुझे देख कर. बहुत खुश। बोल नहीं पा रही थीं, बस अँकवार में भर लिया और बोलीं,
"कल रात में आउंगी, ... आठ नौ बजे तक,... आज तू हमार नाक ऊँची कर दी."
लेकिन मैं छेड़ने का मौका क्यों छोड़ती अपने जोबन से उनके जोबन को रगड़ती, चिढ़ाती उन्हें याद दिलाते, जो उन्होंने वादा किया था, कल की रात मेरे साजन के संग,... के लिए बोली,...
" तैयार रखियेगा, खूब तगड़ा सांड़ मिलेगा, तेल वेल लगा के आइयेगा, देखते ही सीधे चढ़ जाएगा "
वो मुझसे भी दो हाथ आगे थीं और अपनी समधन, मेरी माँ को गरियाते खिलखिलाते बोली,... बिना मेरे साजन, अपने बेटे का नाम लिए,...
" अरे मैं उस रंडी, छिनार गदहाचोदी के दामाद से डरूंगी,... देख लूंगी ताकत बस तुम देखना की कही तोहरे महतारी क दमाद ही न भाग जाए,... "
मैं क्यों छोड़ती मामला मेरे साजन पर आ गया था, ... माँ मेरी तो उनकी समधन थी वो दोनों एक दूसरे को खूब चाहती थीं और बिना गारी के बात भी नहीं करती थीं, ... मैंने सास को सुनाया,..
" अरे उस रंडी के जाने मादरचोद, बहनचोद, छिनार के पूत की हिम्मत है, की मेरी महतारी के समधन के ऊपर न चढ़े, अगवाड़े पिछवाडे दोनों ओर कल रात दूध दही की नदी बहेगी, जहाँ से दूध पिया है चुसूर चुसूर, वहीँ अपनी मलाई गिरायेगा, जिस भोंसडे से निकला है उसी में धककम धुक्का होगा, उनके मामा याद आ जायेंगे,... बस आज रात आराम कर लीजियेगा,... "
बगल में सब नयी उम्र की मेरी ननदें , वही जो हाल में ही रजस्वला हुयी थीं और जिन्हे आज आशीष मिला था, बड़े मन से सुन रही थीं और मजे ले रही थीं,...
मेरी सास लोग भी, ...
मेरी सास बोलीं,... " चल कल की कल,... खाना वाना बना के रखना, "
"एकदम पूड़ी बखीर, और कल रतजगा होगा ही और कल से रतजगे की बल्कि शुरुआत होगी,... बहुत दिन आपकी गुलाबो ने आराम कर लिया। "
मैंने बोला, सास लोग सब निकल गयी, मेरी निगाह कच्ची उम्र की नन्दो पर पड़ी वही पांच जिन्हे अभी आशीष मिला था, जो पिछली होली के बाद रजस्वला हुयी थीं, एक लीना तो मेरी ऊँगली ही पकडे थी,...
मेरे मन में एक सवाल उठा था और सास लोगों के जाने के बाद बगल में खड़ी दूबे भाभी ने मैंने पूछ लिए,... उन लड़कियों की ओर इशारा करते हुए,..
" कल इनको बुलाएँगे की नहीं और फिर इनके साथ, आज ही तो इन्हे भभूत चढ़ा है,... "
दूबे भाभी ने जोर का ठहाका लगाया, उनके साथ मंजू भाभी और रमजानिया,... भी मुस्करा रही थीं,... दूबे भाभी ने घंटे हुए बोला,... सबसे पहले तो उन्ही के ऊपर,... नयकी भौजी की सबसे पहली जिम्मेदारी है, अरे भभूत नहीं, भूत चढ़ा है उन सबों के ऊपर, दो चार घंटे के बाद असर होगा और कल सबेरे तो सब एकदम माती रहेंगी, उसके बाद २४ घंटे तक पूरा असर रहेगा, "
मैं कान रोप के सुन रही थी,... और दूबे भाभी मुझे एक पेड़ के नीचे, ननदों के झुण्ड से दूर ले गयीं और समझाया,..
सब से पहले सास लोग निकल गयीं कल की होली भौजाई देवर और नंदों की होती उसमें घर का कोई भी बड़ा, सास नहीं होती थीं,...
दो गाँव बाद हम लोगों की एक बड़ी सी छावनी थी, चार पांच कमरे का घर, चारो ओर बाग़,... काम करने वाले,... बड़ा सा आँगन,... मेरी सास अपनी सब देवरानियों को लेकर वहीँ जा रही थीं , आज की रात कल का दिन सब सास बाहर रहतीं, कल रात में ८-९ बजे की वापसी,
सास मेरी अपनी सहेलियों जेठानी देवरानी के साथ निकलने से पहले मेरी ओर आयीं, लहालोट मुझे देख कर. बहुत खुश। बोल नहीं पा रही थीं, बस अँकवार में भर लिया और बोलीं,
"कल रात में आउंगी, ... आठ नौ बजे तक,... आज तू हमार नाक ऊँची कर दी."
लेकिन मैं छेड़ने का मौका क्यों छोड़ती अपने जोबन से उनके जोबन को रगड़ती, चिढ़ाती उन्हें याद दिलाते, जो उन्होंने वादा किया था, कल की रात मेरे साजन के संग,... के लिए बोली,...
" तैयार रखियेगा, खूब तगड़ा सांड़ मिलेगा, तेल वेल लगा के आइयेगा, देखते ही सीधे चढ़ जाएगा "
वो मुझसे भी दो हाथ आगे थीं और अपनी समधन, मेरी माँ को गरियाते खिलखिलाते बोली,... बिना मेरे साजन, अपने बेटे का नाम लिए,...
" अरे मैं उस रंडी, छिनार गदहाचोदी के दामाद से डरूंगी,... देख लूंगी ताकत बस तुम देखना की कही तोहरे महतारी क दमाद ही न भाग जाए,... "
मैं क्यों छोड़ती मामला मेरे साजन पर आ गया था, ... माँ मेरी तो उनकी समधन थी वो दोनों एक दूसरे को खूब चाहती थीं और बिना गारी के बात भी नहीं करती थीं, ... मैंने सास को सुनाया,..
" अरे उस रंडी के जाने मादरचोद, बहनचोद, छिनार के पूत की हिम्मत है, की मेरी महतारी के समधन के ऊपर न चढ़े, अगवाड़े पिछवाडे दोनों ओर कल रात दूध दही की नदी बहेगी, जहाँ से दूध पिया है चुसूर चुसूर, वहीँ अपनी मलाई गिरायेगा, जिस भोंसडे से निकला है उसी में धककम धुक्का होगा, उनके मामा याद आ जायेंगे,... बस आज रात आराम कर लीजियेगा,... "
बगल में सब नयी उम्र की मेरी ननदें , वही जो हाल में ही रजस्वला हुयी थीं और जिन्हे आज आशीष मिला था, बड़े मन से सुन रही थीं और मजे ले रही थीं,...
मेरी सास लोग भी, ...
मेरी सास बोलीं,... " चल कल की कल,... खाना वाना बना के रखना, "
"एकदम पूड़ी बखीर, और कल रतजगा होगा ही और कल से रतजगे की बल्कि शुरुआत होगी,... बहुत दिन आपकी गुलाबो ने आराम कर लिया। "
मैंने बोला, सास लोग सब निकल गयी, मेरी निगाह कच्ची उम्र की नन्दो पर पड़ी वही पांच जिन्हे अभी आशीष मिला था, जो पिछली होली के बाद रजस्वला हुयी थीं, एक लीना तो मेरी ऊँगली ही पकडे थी,...
मेरे मन में एक सवाल उठा था और सास लोगों के जाने के बाद बगल में खड़ी दूबे भाभी ने मैंने पूछ लिए,... उन लड़कियों की ओर इशारा करते हुए,..
" कल इनको बुलाएँगे की नहीं और फिर इनके साथ, आज ही तो इन्हे भभूत चढ़ा है,... "
दूबे भाभी ने जोर का ठहाका लगाया, उनके साथ मंजू भाभी और रमजानिया,... भी मुस्करा रही थीं,... दूबे भाभी ने घंटे हुए बोला,... सबसे पहले तो उन्ही के ऊपर,... नयकी भौजी की सबसे पहली जिम्मेदारी है, अरे भभूत नहीं, भूत चढ़ा है उन सबों के ऊपर, दो चार घंटे के बाद असर होगा और कल सबेरे तो सब एकदम माती रहेंगी, उसके बाद २४ घंटे तक पूरा असर रहेगा, "
मैं कान रोप के सुन रही थी,... और दूबे भाभी मुझे एक पेड़ के नीचे, ननदों के झुण्ड से दूर ले गयीं और समझाया,..