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भाग ६९
पिलानिंग कल की,ननदों की
12,26,775
कुछ भौजाइयां भी अपने अपने घर के ओर, पर हम आठ दस लोग दूबे भाभी के घर रुक गए कल का प्लान बनाने। मैं, मंजू भाभी, दूबे भाभी, रज्जो और मोहिनी भाभी, चमेलिया, गुलबिया, रामजानिया और दो चार और लोग।
अब लग रही थी थकान, सब को भी मुझे थोड़ी और, सुबह सुबह चंदू देवर ने चोद चोद करके थेथर कर दिया था, जिस मूसल के आगे चार बच्चों की माँ भोंसड़ी वाली चिल्लाती थी, उसे दो बार मैंने घोंटा, पूरे जड़ तक वो भी हँसते मुस्कराते, अपने देवर की माँ बहिन गरियाते,... लेकिन उस के बाद जो निकली तो मेंड़ पर सीधे पैर नहीं पड़ रहे थे, फिर चुन्नू और उसके बाद कब्बडी और उसके बाद की मस्ती, और कल रात में भी कहाँ, ये भी और ननदोई जी भी, अगवाड़ा पिछवाड़ा कुछ नहीं बचा था,... थकान के बावजूद, मैं मुस्करा उठी,...
दूबे भाभी मुझे मुस्कराते देख के मुस्करा उठीं,... बोलीं अभी सब थकान दूर हो जायेगी,... उनके घर बाहर एक कूंवा था, कूंवा क्या कुइंया उसी ओर चरखी लगी थी,... चमेलिया से दूबे भाभी बोलीं,
" सब को एक एक डोल नहलवा दो "
बाद में पता चला की मान्यता यही थी जो ननदें,. मेरी जेठानियाँ घर गयीं थीं सब पहले नहा के ही कुछ और,... कबड्डी के मैदान की मस्ती और देवी के दरसन के बाद का असर,... लेकिन बाद में मेरे समझ में असर धुलता नहीं था,... वो रोम रोम में होकर देह में घुल जाता था, हाँ वो सब नशा थोड़ा कम हो जाता था तो रोज मर्रा की जिंदगी की ओर लौटना शुरू हो जाता था,
और जब सिर्फ भौजाइयां हों या एक दो बियाहिता ननदें,... तो मजाक का असर एकदम नए लेवल पर पहुँच जाता है, बजाय गरियाने और चिढ़ाने के सीधे देह के स्तर पर और अब सब के चिढ़ाने का सेंटर मैं ही थी, ... और सबसे ज्यादा मेरी दोनों पक्की सहेलियां, चमेलिया और गुलबिया यहाँ तक की दूबे भाभी भी ,...
कपडे तो किसी के ठीक से नहीं बचे थे, कुछ कबड्डी में फटे कुछ कबड्डी के बाद और कुछ ननदों को चुसवाने चटवाने में उतर गए, बस किसीकी फटी साड़ी का टुकड़ा किसी ने बस लपेट लिया था, बाग़ से निकलने के पहले और यहाँ नहाने के पहले वो सब भी उतर गए,... दूबे भाभी ने चमेलिया से कहा, मेरी ओर इशारा करके,
' अरे नयकी के बुर महरानी में एक डोल पानी डाल दो, बहुत गरमाई है "
चमेलिया ये मौका क्यों छोड़ती, और मैं भी,... मैंने जाँघे अच्छी तरह फैला दीं और चमेलिया डोल का पानी सीधे जांघों के बीच डालती मुझे चिढ़ाते दूबे भाभी से बोली,
" ये हमरी जेठानी और तोहरी देवरानी क बुर महारानी का गरमी कल जब देवरन का पानी से नहाइएं न तब सांत होई। आठ दस देवरन क मलाई पड़ी ऊपर तक बजबजायी न तभी कुछ ठंडक पहुंची "
" अरे हमार एकलौती देवरानी, तोहरे मुंह में घी गुड़,... हमार देवर रोज तोहें रगड़े,... कउनो दिन बिन मलाई के न जाये"
मैं चमेलिया से हँसते हुए बोली। मेरे बगल में मोहिनी भाभी को गुलबिया पानी डाल के नहला रही थी,... मैंने सीधे अपनी जेठानी की बिल में रगड़ते हुए गुलबिया से कहा,
" तू पानी डाल हम दोनों की जेठानी है, मैं रगड़ रगड़ के नहला दे रही हूँ " और दो ऊँगली अंदर घुसेड़ दी.
रमजानिया दुबे भाभी को नहला रही थी, उनकी बिल पे हथेली से रगड़ती चिढ़ा रही थी, आज तो ननदन क ऊँगली गयी है,... कल देवर क लंड जाएगा,...
मैंने भी छेड़ा, वैसे तो उमर में हम लोगों से काफी बड़ी थीं, मेरी सास से दो चार साल ही छोटी होंगी,... पर मज़ाक के मामले में एकदम समाजवाद चलता है,...
" भौजी आप सबसे बड़ी हैं,... तो आप पहले बता दीजिये कौन देवर पसंद है, हम लोग उधर मुंह भी नहीं करेंगे सीधे चढ़ा देंगी,... "
" अरे नयको इहो पूछने की बात है,... भौजी सबसे बड़ी हैं तो जिसका सबसे बड़ा होगा, सबसे कड़ा होगा,... बस उसी को चढ़ा देंगे और जो सबसे छोटी होगी,... " रज्जो भाभी ने बोला
लेकिन कहीं वो मेरा नाम न ले लें तो मैं उनकी बात बीच में काट दी और बोली,
" सही कहा आपने, चमेलिया सबसे छोट है, गाँव में हमारी अकेली देवरानी, हमरे बाद गौने उतरी है है,... ओहि के जिम्मे ये काम रहेगा, देवरन क नाप जोख कर के,... सीधे हम सबकी जेठानी के ऊपर,... "
चमेलिया ने एक डोल पानी सीधे दूबे भाभी के जांघ के बीच में डाला और बोली मंजूर,
"अपने जेठानी के लिए ये कौन बड़ा काम है, और एक से का होगा, तीनो छेद के लिए तीन पकड़ के लाऊंगी,... जैसे आज ये पानी जा रहा है वैसे कल हमरे देवरन क मलाई से नहलाईब,..."
मोहिनी भाभी सबसे पहले नहां के निकली, ... अभी कुछ सरम लाज का मामला नहीं था, मर्दों को आने में अभी भी घंटे दो घंटे की देर थी, सास सब, उन को हाँक के मेरी सास हम लोगों की छावनी ले गयी थीं अभी गाँव में हमी लोग थे,... मोहिनी भाभी का घर दूबे भाभी के घर से एकदम सटा था वो आधी बाल्टी गरम गरम चाय, ... और हम सब लोगों के लिए साड़ियाँ ले आयीं,...
हम सब लोग दूबे भाभी के घर में नहा के पहुंचे थे की थोड़ी देर में गुलबिया और मोहिनी भाभी चाय और कपडे,... कपडे में सिर्फ साड़ी थी,... बस हम सब लोगों ने देह में लपेट लिया,... चाय पी के फुर्ती आ गयी,...
पहला सवाल ये था की कौन कौन आएगा, कल
सबसे पहले मंजू भाभी ने बोला की वो नहीं आ पाएंगी,
मुझे पहले लगा शायद चुन्नू के चक्कर में, जैसे मैंने बेला की गाँठ चुन्नू से जोड़ने का तय किया था,.... वो अकेला लड़का था जिसे वो बचपन से राखी बांधती थी, न बेला का कोई भाई, न चुन्नू की कोई बहन,... और रिश्ते में चचेरी बहन ही लगती थी,.... दोनों सुकुवार,... तो जब मैंने मंजू भाभी से पूछा की कल चुन्नू को ले आऊं,... तो मुझे बहुत जोर की डांट पड़ गयी, वो एकदम असली जेठानी के रूप में आ गयीं। बोलीं तोहार देवर है की नहीं
सम्हल के बोली मैं,...एकदम है। आज ही तो मैंने उस हाईस्कूल वाले की नथ उतारी थी सुबह सुबह।
" तो मुझसे काहे पूछ रही है ? " मुस्कराते हुए बोलीं फिर जोड़ा लेकिन तोहरे हवाले रहेगा, तोहार जिम्मेदारी,...
मैं समझ गई उनकी बात और हँसते हुए बोली, आप चिंता मत करिये, कल वो लौंडे से पूरा मरद बन जायेगा,... असली सांड़ "
लेकिन मंजू भाभी के न आने का कारण दूसरा था वो उन्होंने मुझे बाद में अलग से फुसफुसा के बताया,...
" कल तोहरे जेठ आ रहे हैं तिझहरिया में, और यह गाँव के मर्दों को तो तुम जानती ही हो उन्हें एक ही चीज चाहिए और सब के सब एकदम सांड़ हैं,... और वो तो महीने में एक बार आते हैं चार दिन की छुट्टी इकट्ठे लेते हैं,... पहले पूछ लेते हैं की मेरी वो पांच दिन वाली छुट्टी तो नहीं चल रही है और आते ही चालू तो कल दिन में थोड़ा सो लूंगी उनके आने के पहले, तुम हो, दूबे भाभी हैं कल देख लेना। "
तो हमारी कबड्डी टीम के ११ में से ५ कल नहीं आने वाले थे, ...
६ जो आने वाले थे, दूबे भाभी, मोहिनी और रज्जो भाभी, मैं, चमेलिया और गुलबिया।
छुटकी के आने का सवाल ही नहीं था न तो वो भाभी थी न ननद और वैसे भी उसका दूसरा प्रोग्राम चल रहा था, मंजू भाभी मेरे जेठ के आने की तैयारी करेंगी। चननिया पहले ही चली गयी बगल के गाँव में किसी की भैंस बियाने वाली थी आज रात बिरात। रमजानिया को भी कुछ काम था, वो आएगी लेकिन आधे एक घंटे में उसे जाना था, उस की भी कहीं बुलाहट थी.
हाँ बाकी भौजाइयों में कुछ के आने की बात थी लेकिन दूबे भाभी बोली, उनकी चिंता हम लोग न करें कुछ न कुछ सबसे बाद में उनके बारे में सोच लेंगे, लेकिन पहले ननद और देवर,
पिलानिंग कल की,ननदों की
12,26,775
कुछ भौजाइयां भी अपने अपने घर के ओर, पर हम आठ दस लोग दूबे भाभी के घर रुक गए कल का प्लान बनाने। मैं, मंजू भाभी, दूबे भाभी, रज्जो और मोहिनी भाभी, चमेलिया, गुलबिया, रामजानिया और दो चार और लोग।
अब लग रही थी थकान, सब को भी मुझे थोड़ी और, सुबह सुबह चंदू देवर ने चोद चोद करके थेथर कर दिया था, जिस मूसल के आगे चार बच्चों की माँ भोंसड़ी वाली चिल्लाती थी, उसे दो बार मैंने घोंटा, पूरे जड़ तक वो भी हँसते मुस्कराते, अपने देवर की माँ बहिन गरियाते,... लेकिन उस के बाद जो निकली तो मेंड़ पर सीधे पैर नहीं पड़ रहे थे, फिर चुन्नू और उसके बाद कब्बडी और उसके बाद की मस्ती, और कल रात में भी कहाँ, ये भी और ननदोई जी भी, अगवाड़ा पिछवाड़ा कुछ नहीं बचा था,... थकान के बावजूद, मैं मुस्करा उठी,...
दूबे भाभी मुझे मुस्कराते देख के मुस्करा उठीं,... बोलीं अभी सब थकान दूर हो जायेगी,... उनके घर बाहर एक कूंवा था, कूंवा क्या कुइंया उसी ओर चरखी लगी थी,... चमेलिया से दूबे भाभी बोलीं,
" सब को एक एक डोल नहलवा दो "
बाद में पता चला की मान्यता यही थी जो ननदें,. मेरी जेठानियाँ घर गयीं थीं सब पहले नहा के ही कुछ और,... कबड्डी के मैदान की मस्ती और देवी के दरसन के बाद का असर,... लेकिन बाद में मेरे समझ में असर धुलता नहीं था,... वो रोम रोम में होकर देह में घुल जाता था, हाँ वो सब नशा थोड़ा कम हो जाता था तो रोज मर्रा की जिंदगी की ओर लौटना शुरू हो जाता था,
और जब सिर्फ भौजाइयां हों या एक दो बियाहिता ननदें,... तो मजाक का असर एकदम नए लेवल पर पहुँच जाता है, बजाय गरियाने और चिढ़ाने के सीधे देह के स्तर पर और अब सब के चिढ़ाने का सेंटर मैं ही थी, ... और सबसे ज्यादा मेरी दोनों पक्की सहेलियां, चमेलिया और गुलबिया यहाँ तक की दूबे भाभी भी ,...
कपडे तो किसी के ठीक से नहीं बचे थे, कुछ कबड्डी में फटे कुछ कबड्डी के बाद और कुछ ननदों को चुसवाने चटवाने में उतर गए, बस किसीकी फटी साड़ी का टुकड़ा किसी ने बस लपेट लिया था, बाग़ से निकलने के पहले और यहाँ नहाने के पहले वो सब भी उतर गए,... दूबे भाभी ने चमेलिया से कहा, मेरी ओर इशारा करके,
' अरे नयकी के बुर महरानी में एक डोल पानी डाल दो, बहुत गरमाई है "
चमेलिया ये मौका क्यों छोड़ती, और मैं भी,... मैंने जाँघे अच्छी तरह फैला दीं और चमेलिया डोल का पानी सीधे जांघों के बीच डालती मुझे चिढ़ाते दूबे भाभी से बोली,
" ये हमरी जेठानी और तोहरी देवरानी क बुर महारानी का गरमी कल जब देवरन का पानी से नहाइएं न तब सांत होई। आठ दस देवरन क मलाई पड़ी ऊपर तक बजबजायी न तभी कुछ ठंडक पहुंची "
" अरे हमार एकलौती देवरानी, तोहरे मुंह में घी गुड़,... हमार देवर रोज तोहें रगड़े,... कउनो दिन बिन मलाई के न जाये"
मैं चमेलिया से हँसते हुए बोली। मेरे बगल में मोहिनी भाभी को गुलबिया पानी डाल के नहला रही थी,... मैंने सीधे अपनी जेठानी की बिल में रगड़ते हुए गुलबिया से कहा,
" तू पानी डाल हम दोनों की जेठानी है, मैं रगड़ रगड़ के नहला दे रही हूँ " और दो ऊँगली अंदर घुसेड़ दी.
रमजानिया दुबे भाभी को नहला रही थी, उनकी बिल पे हथेली से रगड़ती चिढ़ा रही थी, आज तो ननदन क ऊँगली गयी है,... कल देवर क लंड जाएगा,...
मैंने भी छेड़ा, वैसे तो उमर में हम लोगों से काफी बड़ी थीं, मेरी सास से दो चार साल ही छोटी होंगी,... पर मज़ाक के मामले में एकदम समाजवाद चलता है,...
" भौजी आप सबसे बड़ी हैं,... तो आप पहले बता दीजिये कौन देवर पसंद है, हम लोग उधर मुंह भी नहीं करेंगे सीधे चढ़ा देंगी,... "
" अरे नयको इहो पूछने की बात है,... भौजी सबसे बड़ी हैं तो जिसका सबसे बड़ा होगा, सबसे कड़ा होगा,... बस उसी को चढ़ा देंगे और जो सबसे छोटी होगी,... " रज्जो भाभी ने बोला
लेकिन कहीं वो मेरा नाम न ले लें तो मैं उनकी बात बीच में काट दी और बोली,
" सही कहा आपने, चमेलिया सबसे छोट है, गाँव में हमारी अकेली देवरानी, हमरे बाद गौने उतरी है है,... ओहि के जिम्मे ये काम रहेगा, देवरन क नाप जोख कर के,... सीधे हम सबकी जेठानी के ऊपर,... "
चमेलिया ने एक डोल पानी सीधे दूबे भाभी के जांघ के बीच में डाला और बोली मंजूर,
"अपने जेठानी के लिए ये कौन बड़ा काम है, और एक से का होगा, तीनो छेद के लिए तीन पकड़ के लाऊंगी,... जैसे आज ये पानी जा रहा है वैसे कल हमरे देवरन क मलाई से नहलाईब,..."
मोहिनी भाभी सबसे पहले नहां के निकली, ... अभी कुछ सरम लाज का मामला नहीं था, मर्दों को आने में अभी भी घंटे दो घंटे की देर थी, सास सब, उन को हाँक के मेरी सास हम लोगों की छावनी ले गयी थीं अभी गाँव में हमी लोग थे,... मोहिनी भाभी का घर दूबे भाभी के घर से एकदम सटा था वो आधी बाल्टी गरम गरम चाय, ... और हम सब लोगों के लिए साड़ियाँ ले आयीं,...
हम सब लोग दूबे भाभी के घर में नहा के पहुंचे थे की थोड़ी देर में गुलबिया और मोहिनी भाभी चाय और कपडे,... कपडे में सिर्फ साड़ी थी,... बस हम सब लोगों ने देह में लपेट लिया,... चाय पी के फुर्ती आ गयी,...
पहला सवाल ये था की कौन कौन आएगा, कल
सबसे पहले मंजू भाभी ने बोला की वो नहीं आ पाएंगी,
मुझे पहले लगा शायद चुन्नू के चक्कर में, जैसे मैंने बेला की गाँठ चुन्नू से जोड़ने का तय किया था,.... वो अकेला लड़का था जिसे वो बचपन से राखी बांधती थी, न बेला का कोई भाई, न चुन्नू की कोई बहन,... और रिश्ते में चचेरी बहन ही लगती थी,.... दोनों सुकुवार,... तो जब मैंने मंजू भाभी से पूछा की कल चुन्नू को ले आऊं,... तो मुझे बहुत जोर की डांट पड़ गयी, वो एकदम असली जेठानी के रूप में आ गयीं। बोलीं तोहार देवर है की नहीं
सम्हल के बोली मैं,...एकदम है। आज ही तो मैंने उस हाईस्कूल वाले की नथ उतारी थी सुबह सुबह।
" तो मुझसे काहे पूछ रही है ? " मुस्कराते हुए बोलीं फिर जोड़ा लेकिन तोहरे हवाले रहेगा, तोहार जिम्मेदारी,...
मैं समझ गई उनकी बात और हँसते हुए बोली, आप चिंता मत करिये, कल वो लौंडे से पूरा मरद बन जायेगा,... असली सांड़ "
लेकिन मंजू भाभी के न आने का कारण दूसरा था वो उन्होंने मुझे बाद में अलग से फुसफुसा के बताया,...
" कल तोहरे जेठ आ रहे हैं तिझहरिया में, और यह गाँव के मर्दों को तो तुम जानती ही हो उन्हें एक ही चीज चाहिए और सब के सब एकदम सांड़ हैं,... और वो तो महीने में एक बार आते हैं चार दिन की छुट्टी इकट्ठे लेते हैं,... पहले पूछ लेते हैं की मेरी वो पांच दिन वाली छुट्टी तो नहीं चल रही है और आते ही चालू तो कल दिन में थोड़ा सो लूंगी उनके आने के पहले, तुम हो, दूबे भाभी हैं कल देख लेना। "
तो हमारी कबड्डी टीम के ११ में से ५ कल नहीं आने वाले थे, ...
६ जो आने वाले थे, दूबे भाभी, मोहिनी और रज्जो भाभी, मैं, चमेलिया और गुलबिया।
छुटकी के आने का सवाल ही नहीं था न तो वो भाभी थी न ननद और वैसे भी उसका दूसरा प्रोग्राम चल रहा था, मंजू भाभी मेरे जेठ के आने की तैयारी करेंगी। चननिया पहले ही चली गयी बगल के गाँव में किसी की भैंस बियाने वाली थी आज रात बिरात। रमजानिया को भी कुछ काम था, वो आएगी लेकिन आधे एक घंटे में उसे जाना था, उस की भी कहीं बुलाहट थी.
हाँ बाकी भौजाइयों में कुछ के आने की बात थी लेकिन दूबे भाभी बोली, उनकी चिंता हम लोग न करें कुछ न कुछ सबसे बाद में उनके बारे में सोच लेंगे, लेकिन पहले ननद और देवर,