कच्ची कोरी बेला
एक और कसी कली फटने के लिए इन्तजार कर रही थी बेला, जिसपे उसका कजिन मेरा देवर चुन्नू चढ़ने वाला था।
बेला कच्ची कलियों में भी सबसे कच्ची, खूब गोरी जैसे दूध में दो बूँद सिन्दूर किसी ने मिला दिया हो, चेहरा देखो तो लगता था की अभी दूध के दांत भी न टूटे होंगे, लेकिन बस आते हुए जोबन जवानी की गवाही दे रहे थे, और जो पिछली होली के बाद रजस्वला हुयी थी जिन्हे होलिका माई ने सबसे पहले आशीष दिया था उनमें तो थी नहीं तो इसका मतलब नीचे खून खच्चर हर महीने वाला शुरू हुए दो साल हो ही चुके थे हाँ एक खून खच्चर होना था, झिल्ली फटने वाला वो आज होना था वो भी मेरे सामने।
और लड़कों से ज्यादा भाभियाँ उस का रस लेने के लिए बेताब थीं,
मैंने दो भौजाइयों के हवाले उसको कर दिया था चूसने चाटने के लिए हाँ बस गरम करना था झाड़ना नहीं था, बस एकदम हालत खराब करनी थी जिसे वो खुद जाँघे फैला दे, और जिसके आगे उसे जाँघे फैलानी थी वो था चुन्नू।
दो भौजाइयां, कविता और सुगना, दोनों रसीली, दोनों जबरदस्त चुदक्क्ड़, और कच्ची कोरी ननदियों को रंडी, छिनार बनाने में एक्सपर्ट,
कविता भाभी ने बेला की खुली टाँगे फैला रखी थीं, और ऊँगली से बस कसी फांको को सहला रही थी, लेकिन उनकी उँगलियों का जादू, थोड़ी देर में ही बेला पनियाने लगी. बिना ऊँगली घुसाए, अंगूठे और तर्जनी के बिच दोनों रसीली नयी नयी फांको को पकड़ के दबा के वो सहला रही थीं, तो कभी दबा भी देतीं।
बेला तड़प उठती,
और उधर सुगना भौजी की उँगलियाँ बेला के नए नए आ रहे जुबना पर, कभी सहलाती तो कभी कस के मरदों की तर्ज रगड़ मसल देती और बेला चीख पड़ती, बेला के निप्स बस आ ही रहे थे, जैसे अभी पूरी तरह तरह नहीं आयी मटर की फलियों के अंदर दूधभरे दाने होते है, एकदम उसी तरह,... और सुगना जब झुक के जीभ की टिप बस उस निपल पर लगा देती तो बेला उछल पड़ती,
थोड़ी देर में सुगना भौजी और कविता भाभी ने जगह बदल ली, अब सुगना, चूसने चाटने में नंबरी,... बेला की चूत कभी सपड़ सपड़ चाटती तो कभी दोनों होठों से बेला के निचले दोनों होंठों को पकड़ के चूसती, और बेला चूतड़
सुगना एकदम रस की जलेबी, वो भी चोटहिया, गुड़ की जलेबी, हरदम रस छलकता रहता, डेढ़ दो साल पहले ही गौने उतरी थी, जोबन कसमसाता रहता, चोली के भीतर जैसे अंगारे दहकते रहते, जैसी टाइट लो कट चोली पहनती सुगना भौजी, सीना उभार के चलतीं, जवान बूढ़ सब का फनफना जाता था, ...
बेला के गोरे गोरे दूध ऐसे चूतड़ सहलाते हुए सुगना भौजी ने चिढ़ाया अपनी कच्ची कोरी ननद को,...
" अइसन मस्त चूतड़, गाँड़ मारने वाले की तो चांदी हो जायेगी,... "
और अपनी जीभ की टिप, बेला की बिल की दोनों फांको में डाल के सुगना ने ऐसे आगे पीछे किया की बेला की बुर एक तार की चासनी फेंकने लगी,
" नाक मत कटाना ननदिया, स्साले चुन्नू की इसी में दबोच के निचोड़ लेना,... "
कविता भाभी कस के नन्द की चूँची चूसते हुए, बेला को चढ़ाया,... " चुन्नू तोहरे ऊपर चढ़ेगा और पीछे से हम उसकी गाँड़ मार लेंगे, जरा भी हमरे ननद को ज्यादा परेशान किया,... "
बेला मस्ती से चूतड़ उचकाते बोली, ... एकदम भौजी, भौजी कस कस के चूसो, लेकिन सुगना और कविता भाभी की जोड़ी, बेला को गर्माती सुलगाती, लेकिन झड़ने नहीं देती, दो बार चार बार बेला को एकदम झड़ने के पास ले जाके दोनों ने रोक दिया, सुगना ने चिढ़ाया
" अरे अभी तोहरे भाई आ रहे हैं न झाड़ देंगे तुझको इतना दिन से राखी बांध रही हो काहें के लिए, "
चुन्नू , उसका एकलौता कजिन, सगे से बढ़कर और उस चुन्नू की नथ भी मैंने कल ही उतारी थी, आज उस की जिम्मेदारी नीलू को सौप दी थी,
नीलू ने पहले तो उसे खूब चिढ़ाया, फिर चूस के खड़ा किया फिर उसके ऊपर चढ़ के और थोड़ी देर में चुन्नू ऊपर चढ़ा था,
" सीख गए बुद्धू, अब धक्के लगा लेकिन जल्दी जल्दी नहीं आराम आराम से " नीलू उसे सिखा रही थी।
नीलू कितने भौजाईयों से ज्यादा मूसल घोंट चुकी थी, और सारे दांव पेंच, गुन ढंग उसे मालूम थे, चुन्नू को सिखाना उसके बाएं हाथ का खेल
" अरे बुद्धू दोनों गेंद काहें के लिए हैं तेरे खेलने के लिए ही न, " कह के नीलू ने चुन्नू के दोनों हाथ पकड़ के अपने जोबन पर रख लिए, और चुन्नू भी समझ गया, चुदाई पूरी देह से की जाती है खाली बुर में लंड डाल के आगे पीछे करना नहीं,... कभी वो नीलू के उभार चूसता, कभी मसलता,...
मैं जानती थी इस गाँव का कच्ची उमर का लौंडा, ठीक से रेख भी नहीं आयी हो, लेकिन उसे चोदना सिखाना नहीं पड़ता, और औजार भी उसका भी बाकी जगह के तगड़े मरदो से भी कम नहीं होता,... नीलू नीचे से गरिया रही थी उसे चढ़ा रही थी,
" स्साले अरे अगर दूसरे तीसरे धक्के में बेला की झिल्ली नहीं फटी तेरे इस लौंड़े में उसका खून नहीं लगा तो सोच मैं तेरी गाँड़ मार लूंगी और वो भी तुझे राखी बांधना बंद कर देगी "
जब तक मैं रेनू और कमल के पास से लौटी उसी के थोड़ा पहले चुन्नू एक बार झड़ चूका था लेकिन नीलू के होंठ और उँगलियाँ, दुबारा तन्ना गया था।
नीलू की जीभ और होंठ, सिर्फ जीभ की टिप से चुन्नू के सुपाडे को बड़ी देर तक चाटती रही,
फिर होंठों के जोर से सपड़ सिर्फ सुपाड़े को चूसती, साथ में चुन्नू की बॉल्स को सहलाती, कभी बदमाशी में मेरे देवर के पिछवाड़े के छेद को भी सहला देती और देवर का एकदम तन्ना जाता,
कुछ नीलू की जीभ का असर कुछ दूबे भाभी के असली शिलाजीत वाले लड्डू का असर, मेरा हाईस्कूल वाला देवर जिसकी कल ही मैंने नथ उतारी थी वो भी जबरदस्ती, ऑलमोस्ट रेप कर के, वो पूरा सांड़ हो रहा था बेताब बहन चोदने के लिए
इधर बेला भी गीली थी, मुझसे नहीं रहा गया, मेरे होंठ बेला के निचले होंठों के साथ और दो तीन मिनट में ही तो तड़पने लगी, भाभी झाड़ दो न , प्लीज भाभी बहुत मन कर रहा है '
" अरे तेरे भाई है न इत्ते दिन से राखी बाँध रही है आज राखी की फ़ीस वसूल कर,... " मैंने चिढ़ाया,..
और थोड़ी देर में बेला की टाँगे उठी हुयी थीं, चुन्नू के कन्धों पर और चुन्नू उसके अदंर, और एक भौजाई चिढ़ा रही थी,
" हे देवर जी जल्दी से अपनी बहिनिया की झिल्ली फाड़ो वरना हम सब तेरी गाँड़ यहीं मार लेंगीं। "