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लेखक की जुबानी
शाम के 5 बज गये थे , सारे लोग तैयार होकर नये नये ड्रेस मे तस्वीरें निकलवा रहे थे ।
रंगीलाल ने सभी gents के लिए आज मेहन्दी पर पहनने के लिए खास कुर्ता सेट मगवाया था और बारी बारी से सबको बाट रहा था
रंगीलाल उपर के कमरे मे राहुल और उसके पापा को उनका कपड़ा देके जीने की ओर लौट रहा था कि तभी उसकी नजर जीने से उपर आती शालिनी पर गयी ।

शालिनी का पल्लू उसके सीने से हट चुका था , पिन की वजह से अटका हुआ था और ब्लाऊज मे कैद उसकी चुचिया उछल रही थी
रन्गीलाल शालिनी को ऐसे देखा वही रुक गया और शालिनी उसके पास आकर रुकी तो उसने रन्गीलाल की आंखो मे देखा जो उसको छातियों को निहार रहा था ।
शालिनी ने झट से अपना पल्लू खिंच कर सीने के उपर किया और मुस्कुरा कर रन्गीलाल को देखा । फिर अपनी जुल्फो को कानो मे फसाते हुए साइड से निकल कर शर्माती हुई सोनल के कमरे मे निकल गयी ।
वही रन्गीलाल ने गरदन घुमा कर उसको देखा फिर निचे जाने के बजाय वही हाल मे सोफे पर बैठ गया ।
जहाँ पहले से ही शाकुंतला , विमला रजनी बैठे थे और उनसे बाते करने लगा ।
वही राहुल अनुज और विमला का बेटा मनोज डीजे पर चलाने के लिए भोजपुरी गानो की लिस्ट खोज रहे थे ।
राज और कमलनाथ भी साथ मे तैयार होकर कमरे से बाहर निकल रहे थे कि सामने गेस्ट रूम से शिला एक स्लिवलेस प्लाजो सूट मे तैयार होकर बाहर निकली , उसने एक नेट वाला दुपट्टा साइड से ले रखा था और उसके मोटे मोटे चुचे कसे हुए उभरे थे ।
कुल्हे पर कुरती उठी हुई थि और पलाजो मे जान्घे कसी हुई थी ।

शिला की नजरे जैसे ही कमलनाथ से टकराई वो थोडा शरमाई और फिर इतराती हुई आगे बढ़ती हुई अपने बालो को पीछे से आगे करते हुए अपनी डीप गले वाली बैकलेस कुरती से अपनी गोरी चिकनी पीठ कर दिदार कराते हुए एक शरारत भरी मुस्कराहट के साथ आगे बढ़ गयी ।
राज उन दोनो की आंखे चार होते देख कर मस्ती मे - अरे वाह बुआ आज तो आप बड़ी प्यारी लग रही हो , क्यू मौसा जी ।
राज की बात सुन कर शिला ने नजरे उठा कर कमलनाथ को देखा तो कमलनाथ अटकते हुए स्वर मे - अह हा हा , बहुत अच्छी लग रही है आप
शिला शर्म से लाल होती हुई मुस्कुराई और फिर कमलनाथ ने सबको उपर चलने के लिए बोला ।
कुछ ही देर मे मेहंदी का कार्यकर्म होने लगा , अब ये सब ले देके था औरतो वाला ही प्रोग्राम तो ऐसे मे मर्दो के लिए बोरियत ही था ।
वही जंगी-रंगी दोनो भाईयो मे अपनी प्लानिंग के लिए आंखो से इशारेबाजी चल रही थी ।
कि अभी यहा मेहंदी का प्रोग्राम हो रहा है घन्टे स्वा घन्टे का टाईम है थोडा मूड बना ही लिया जाये ।
रंगी अंगड़ाई लेते हुए उठा और जंगी से बोला - छोटे जरा आओ थोडा काम है तुम्से और फिर जंगी भी निकल गया उसके साथ निचे ,
हसी ठिठौलि मे वय्स्त महिलाए और उनको घुरते लौंडो के बीच एक अकेला मर्द कमलनाथ ।
निशा की गुपचुप निगाहे कमलनाथ को बिच बिच मे देख रही थी और वो ऐसे जगह बैठी थी कि उसकी गुदाज जांघ और आधा चुतड उसकी लेगी से साफ साफ झलके ।
मगर कमलनाथ और शिला की अपनी इशारेबाजी चल रही थी ,
वही राज और रीना
भी आपस मे मुस्कुराहटे पास किये जा रहे थे ।
रन्गी जंगी दोनो निचे के कमरे मे आये और फिर जो जो जरुरी समान था सब एक झोले मे लेके फटाफट घर बाहर निकल गये इस बात से बेखबर कि रज्जो उनका पीछा करते हुए जीने तक आई थी
जैसे ही उसने दोनो को घर से बाहर जाते देखा तो उसे अटपटा लगा कि इस वक़्त ये लोग कहा जा रहे है ।
फिर वो पीछे पीछे मेन गेट तक और देखा तो वो लोग बगल मे चंदू के घर मे घुसरहे थे ।
रज्जो को लगा कि शायद कुछ काम हो क्योकि उस घर मे भी दहेज एवं रसोई का काफी सारा रखा हुआ था तो वो वापस उपर चली गयी ।
वही रन्गी और जंगी दरवाजा भीड़का कर जीने की सबसे उपर वाली चौड़ी सीढि जो दरवाजे से लग कर थी वही आसान जमा लिये ।
अमन के घर
हाल मे सारे लोग एक साथ थे और कल हल्दी के प्रोग्राम पर चर्चा हो रही थी ।
शाम का समय हो गया था और ममता सबको चाय दे रही थी ।
जैसे ही वो भोला को चाय दी दोनो मुस्कुरा दिये ।
फिर वो किनारे खड़ी हो गयी और तभी भोला ने आंखो से इशारा किया और अपने जांघो पर उंगलियाँ पेन की तरह चलाते हुए ममता से इशारा किया कि डायरी लिख दिया है पढ लेना
ममता इतराते हुए मुस्कुराने लगी और उसकी बेचैनी बढने लगी कि क्या लिखा होगा उसके नंदोई ने ।
उसके पाव कांप रहे थे , रोम रोम सिहर रहा था , उसी सिहरन ने उसके चुचे उठाने शुरु कर दिये थे
आखिरकार ममता से रहा नही गया और वो चाय की ट्रे लेके किचन ने गयी और उसने गटागट एक गिलास पानी गले मे उतारा और अपनी उफनाती सासो को थामने लगी ।
एक घबराहट और उत्सुकता ने घर कर लिया था उसको , बेचैनी और उतावलापन उसके चेहरे से साफ पता चल रहे थे ।
कलेजे की धकधक उसके चेहरे पर मुस्कान ला रही थी और वो एक गहरी आह भरती हुई चुपचाप अपने कमरे मे चली गई
उसने आस पास देखा तो उसको तकिये के निचे वो डायरी मिली और उसने झटपट से दरवाजा भीड़काया फिर सर सर पन्ने उलटने शुरु किये ।
आखिर से दो पन्नो से पहले उसको कुछ लिखा मिला , उसने आंख बन्द कर अपने दिल को थामती हुई एक ठंडी सास ली और फिर डायरी मे देखा ।
कुछ शायरी से शुरुवात की थी भोला ने
कुछ आश रखने की हिम्मत कर रहा हु
बोलो पुरा करोगी क्या ?
कुछ कहने की चाहत रख रहा हु
बोलो सुनोगी क्या ?
आज रात मै इंतजार करूंगा बाल्किनी मे
बोलो आओगी क्या ?
शायरी पढ कर ममता हसने लगी और उसने आगे पढना शुरु किया
गर मंजूर हो दोस्ती का ये इकरार
तो पहन के आना सिर्फ़ सलवार
दोस्ती की कसम है तुम्हे , मत करना मुझे सैंटी
गुजारिश है तुमसे ना ब्रा पहनना और ना पैंटी
ममता इस कल्पना से कि बिना ब्रा पैंटी के सिर्फ सूट सलवार मे नंदोई के सामने जाऊंगी तो , हाय हाय ये मै क्या सोच रही हु धत्त ये नंदोई जी भी ना
फिर वो आगे पढती है
अब इस बात से इंकार ना करना कि तुम्हे भनक नही मेरे इरादो का
कितनी ठोकरे तो खा चुकी हो आज मेरे जज्बातों का
ये लाईन पढते ही ममता को वो पल याद आया जब भोला उसके उपर चढ कर उसकी चुत पर लण्ड से ठोकर मार रहा था , वो याद करते ही ममता की चुत पनियाने लगी ।
फिर उसने आखिर के दो लाईन पढे
कहने को बहुत कुछ है मगर ये कलम बहुत छोटी है
आपके दरखक्तों पर हम अपनी कलम चलायेंगे
ममता - धत्त ये जीजा भी ना , उफ्फ्फ गर्म कर दिया मुझे । क्या मुझे भी बदले मे कुछ लिखना चाहिये । अभी तो 5 बजे है और 11 बजने मे तो काफी वक़्त है ,क्यू ना इसी डायरी मे जवाब लिख कर उन्हे भी थोडा परेशान करू ।हिहिहिही
राज के घर
इधर मेहंदी के रस्म हो रही थी वही राज रिना को डांस करने के लिए आने को इशारा कर रहा था
बदले मे रीना मुस्कुरा कर हामी भर रही थी तो राज भागते हुए रिना के पास गया और उसको पकड कर खिंचते हुए हाल के बीच मे ले आया
रिना खिलखिलाकर हस रही थी और बाकी सारे लोग भी हस रहे थे फिर शुरु हुआई देवार भौजाई के ठूमके , आंखो से आंखे टकराई और होठ भी कुछ मनशा लिये मुस्करा रहे थे ।
वही बाकी की लौडो की गैंग ( अनुज , राहुल , मनोज , चंदू ) सिटिया बजा कर शोर कर रहे थे ।
रीना शर्मा कर हस्ती हुई वापस औरतो मे चली गयी ।
इधर निशा काफी देर से देख रही थी कि कमलनाथ का ध्यान उस्की ओर कम और शिला की ओर ज्यादा था ।
उसे भी भनक सी लग रही थी कि दोनो मे कुछ आंख मिचौली चल रही है ।
निशा ने रागिनी को पकड कर खींचा और हाल मे लेके आते हुए डांस करने लगी , रागिनी भी हस हस ठुमके लगा रही थी मगर जल्द ही वो हट गयी और

निशा अकेले ही कमलनाथ की ओर खास करके अपनी गाड़ करके झटके लगाते हुए नाचने लगी , उसकी कुर्ती उठती तो कमलनाथ ने निशा के लेगी से झांकते उसकी पैंटी के भी दिदार हो जाते ।
कमलनाथ का ध्यान अब निशा ने खिच ही लिया और डांस खतम कर निशा बार बार बस कमलनाथ की ओर ही देखे जा रही थी ।
कमलनाथ को थोडा अजीब लगा कि वो उसे क्यू देख रही है , और कमलनाथ उस्से नजरे चुराने लगा । अब तो उसको ये दिक्कत होने लगी कि कही वो शिला को ताडे तो उसकी चोरी पकड़ी ना जाये क्योकि निशा तो लगातार नजर जमाए हुए थी ।
सारे लोग इन्जाय कर रहे थे तो रागिनी ने बातो ही बातो मे पुछा - ये राज के पापा कहा गये अभी आये नही
शालिनी - हा जीजी निशा के पापा भी गये है साथ मे
रज्जो को भी लगा कि अब तो समय काफी हो गया क्या करने गये ये लोग अभी आये नही इसीलिए रज्जो उठ कर निकल गयी दोनो को बुलाने के लिए
चंदू के घर का दरवाजा भिड्का हुआ ही था , हल्का सा जोर और खुल गया
रज्जो गलियारे से होकर कमरे दर कमरे पार करती हुई आगे बढ़ रही थी और उसको दोनो भाईयों की खिलखिलाहट भरी हसी और बातो की गूंज आ रही थी ।
रज्जो जैसे ही सबसे पीछे आंगन मे पहुची तो उपर के जीने से आवाज आई जो जंगी की थी ।
जंगी- भैया सच सच बताओ ना रज्जो भाभी आपको कैसी लगती है
जन्गी का अपने भाई से यू सवाल पुछना रज्जो को थोडा खटका
रंगी - एकदम रसदार है रज्जो भाभी यार , मै तो शादी के समय से ही दीवाना हु
रज्जो ने जीने की ओर झाक कर देखा तो समझ गयी
दोनो भाई सिर्फ बनियान पहने दरवाजे पर बाहर की ओर मुह किये बैठे थे , उनके कुरते जीने की रेलिंग पर रखे हुए थे ।
रज्जो उनकी बाते सुनते हुए धीरे धीरे सीढिया चढने लगी ।
जन्गी - सच भैया , ये कमलनाथ भाई ने क्या किसमत पाई है ना , क्या मस्स्स्त गाड़ है भाभी के उह्ह्ह्ह मन करता है कि झुका के
जन्गी की बाते सुन्कर रज्जो के कान खडे हो गये और वो समझ गयी कि दोनो ड्रिंक किये हुए है
रंगी - हेईई जन्गीईई नहीईई भाभी है ना वो ऐसा नही बोल्ते
जंगी - स्स्स्सोरीईई भैयआआह
रंगी - सोरीई क्यू सॉरी क्यू , अरे रन्डी है एक नं की रंडी देखा नही साली गाड़ कैसे फैली हुई है
"खुब पेलवाति होगी आह्ह" , रंगी ने ग्लास गटकते हुए कहा ।
जन्गी ने भी सिप लेते हुए - हा भैया पता है मैने तो कल रात को ....।
रज्जो को लगा कही उस्का भेद खुल ना जाये और जंगी नशे मे कुछ बोल ना दे
इसीलिए वो पीछे से बोल पड़ी- हम्म्म तो क्या बैठ कर आप लोग मेरे बारे मे ये सब बाते कर रहे है ।
रज्जो की तेज आवाज सुनते ही रंगी जंगी दोनो ने पलट कर देखा तो दोनो की आधी शराब वैसे ही गायब हो गयी और वो फौरान खडे हो गये - भाभीईई जिजीईई
जैसे ही वो खडे हुए उन्के पाजामे मे तना हुआ मुसल भी तम्बू बना कर रज्जो को निहार रहा था और रज्जो की नजर जैसे ही उन्पे गयी दोनो ने अपने पंजे से छिपाने लगे तो रज्जो की हसी छूट गयि ।
रज्जो - छीईई आप लोग मेरे बारे मे ऐसी बाते करते है क्या मै आपको सड़क छाप वो लगती हु , हुउह्ह
रंगी और जंगी दोनो सफाई देते हुए - नही नही जिजीई भाभीईई हमारा वो मतलब नही था , सॉरी ना प्लीज
रज्जो तुन्क कर - हुह , रहने दो सुन लिया मैने सब
ये बोल कर रज्जो निचे जाने लगी तो रंगी - ये भाई रोक रोक जिजीई को
जन्गीलाल सरपट रज्जो के पीछे भागा और आन्गन मे रज्जो की कलाई पकड ली तो रज्जो छुड़ाने की कोसिस करती है इतने मे रंगी भी आ जाता है
रंगी - सॉरी ना जीजी , मान जाओ ना प्लीज
जन्गी - हा भाभी प्लीज , देखीये ये सब शुरु भी इसीलिए हुआ कि आपकी गलती थी
रज्जो ठहर कर - अब मेरी क्या गलती
जंगी - आपको तो पता ही है ना कल रात मे जब मैने आपको खाना के लिए बुलाने आया था तो
इस्से पहले जन्गी अपनी बात पूरी करता उस्से पहले रज्जो ने अपनी आंख दिखाई उसको
जंगी हड़ब्डा कर बात घुमाता हुआ - और आज सुबह मे जब हम नासता कर रहे थे तो हमे आपकी वो दिख गयी और फिर
फिर जंगीलाल ने सारि बाते बताई कि कैसे दोनो भाई बीते लमहे ताज़ा करने के चक्कर मे थे
जंगी - मगर सुबह का वो झलक बार बार मेरे जहन में था और बस मन कर रहा था कि
रज्जो - क्या मन कर रहा था
जन्गी - नही भाभी आप बुरा मान जाओगे
रज्जो तेज अवाज मे - मैने कहा बताओ
रंगी ने इशारे से जंगी को बात रखने को कहा
जन्गी - वो भाभी जबसे सुबह से आपकी चिकनी बुर देखी थी उसको चाटने का इतना मन हो रहा था , ऐसी फूली हुई लम्बी लकीरो वाली चुत मैने आज तक नही देखी थी और देखो ना तबसे मेरा मुसल भी नही बैठ रहा है ।
जन्गीलाल ने अपनी तारिफ सुनकर रज्जो मुस्कुराई जिसे रंगी ने पल भर की नजर मे भाप लिया और वो समझ गया कि रज्जो को इससे कोई फर्क नही पड रहा है क्योकि वो रज्जो के रग रग से वाक़िफ़ था ।
रज्जो - अब छोड़ो मुझे और ये सब क्या बाते कर रहे हो आप लोग । शर्म नही आती एक पराई औरत के साथ ये सब छीई
रन्गी मुस्कुरा कर - जीजी आप पराई कहा हो आप तो अपने हो और जमाई की तो सारी गल्तियां माफ की जाती है ना
रज्जो रंगी की आंख मे झाक चुकी थी और वो मुस्कुरा कर - ऐसे कैसे माफी मिल जायेगी , आप दोनो को सजा मिलेगी ।
जंगी - क्या सजा !!
रज्जो - हम्म्म्म और क्या ,
मुझे भी हिसाब बराबर करना है
जंगी - वो कैसे ?
रज्जो - मै भी आप दोनो को गाली दूँगी और आपके प्राइवेट पार्ट देखूँगी । तब ना होग हिसाब बराबर
रज्जो की बात सुनते ही जन्गी खिल उठा और अपने पजामे का नाड़ा खोलते हुए अपना मुसल बाहर निकाल कर - बस इतनी सी बात , ये लो
जन्गी ने बड़ी बेशर्मी से अपना तनतनाया हुआ लण्ड बाहर निकाल दिया
रज्जो - साले भडवे रंडीबाज , बहिनचोद
जंगी चौक कर रज्जो को देखा
रज्जो - अरे हिसाब बराबर कर रही हु ना
जन्गी - ओह्ह
फिर रज्जो रंगी की ओर घूमी तो वो भी फटाक से अपना मुसल निकाल कर खड़ा हुआ और रज्जो ने वही गाली दुहराई
रज्जो - चलो हो गया अब चलते है , सार लोग खोज रहे है आपको
रंगी - अरे अभी कहा हुआ
रज्जो - तो अब क्या बाकी है ?
रन्गी - क्या जीजी हमने तो उसकी तारिफ भी की थी ना ...तो
रज्जो रंगी की बात सुनकर हस दी - धत्त , ये भी बोलना पडेगा
जंगी हस्ते हुए - हिसाब तभी ना बराबर होगा भाभी
रज्जो ने बड़े गौर से दोनो के लाल सुपाडे वाले लण्ड को निहार रही थी जो दोनो के हाथो मे कैद थे ।
रज्जो कुछ बोलने को हुई मगर उसकी हसी छूट गयी
रंगी - अरे बोलो ना जीजी
रज्जो नजरे गडाये तेज धडकते दिल के साथ - उफ्फ्फ क्या मसत मस्त लण्ड है जी कर रहा है कि अभी चुस चुस कर लाल कर दू और
रज्जो की बातें सुनते हुए दोनो भाईयो के जिस्म मे सुरसूरी सी हुई और दोनो के लण्ड पुरे फौलादी हो गये ।
दोनो अपना मुसल सहलाते हुए - सीईई और क्या भाभीई/जिजीई
रज्जो अपने बेकाबू होते दिल को मह्सूस करती हुई अपनी उफ्नाती सासो के साथ एक आह भरती हुई - और इनको उसी रसिले चुत मे भर लू जिसको आप दोनो चुसना चाहते थे
रज्जो की बाते सुन्कर दोनो भाई के दिल की धड़कने तेज हो गयी और दोनो सिस्कते हुए तेजी से अपना मुसल मसल रहे थे और रज्जो की निगाहे वही अटकी थी
दोनो भाईयो ने एक दुसरे को खुमारी भरे नजरो से देखा और रज्जो के करिब आ गये
रज्जो की सासे और चढने लगी , वो नजरे घुमा कर दोनो तरफ खडे दोनो भाईयो की आंखो मे मदहोश नजरो से देख रही थी ।
" भाभीईई ",जन्गी की गरम सासों से भरी आवाज रज्जो के गरदन से टकराई और वो आंखे बन्द कर सिहर उठी ।
वही रंगी ने रज्जो का एक हाथ पकड़ा और अपने मुसल पर रख दिया , जिससे रज्जो ने अपनी आंखे भीच कर सीने मे सासो को भर लिया ।
जन्गी ने वही किया और इस बार रज्जो ने अपने होठ भी दबा लिये ।
दोनो भाईयो ने एक साथ उसके गरदन को चूमा और दोनो के एक एक हाथ उसकी उभरी हुई चरबीदार गाड़ पर फिराने लगे ।
रज्जो ने दोनो के लण्ड को मुठ्ठि मे भर लिया दोनो भाई भी सिहर उठे ।
रज्जो ने उनकी लिंग की चमडीया खिस्कानी शुरु की और रज्जो के गर्म हाथो की मुलायम हथेली ने उन्हे मदहोश कर दिया ।
रज्जो अब आंखे खोल के दोनो भाईयो के चेहरे पढते हुए उन्के लण्ड को भीच रही थी और दोनो को भनक भी नही लगी कि कब रज्जो निचे बैठ गयी , सबसे पहले जंगी का कालेज ध्क्क हुआ जब उसको अपने लण्ड की सतह पर नरम ठंडे होठो का स्पर्श मिला
वो एडिया उचका कर सिहरा - उह्ह्ह भाभीईई उम्म्ंम्ं सीईई अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह

रज्जो ने कुछ देर बाद रंगी का लण्ड मुह मे लेके चूसने लगी ।तो रंगी ने भी आहे भरनी शुरु कर दी ।
जंगी - ऊहह भाभीईई क्या मस्त चुस्ती हो जब आपके उपर के होठ ऐसे है तो निचे के होठ कितने नरम होंगे
रज्जो मुह से लण्ड निकालती हुई - वो आप खुद चुस के देख लो ना भाई साहब
ये बोल के रज्जो उठकर अपना साड़ी पेतिकोट एक साथ उठाते हुए आंगन की एक चौकी पर लेट कर जान्घे खोल दी - आह्ह आओ ना भाई साहब चुस के देखो ना
जन्गी मुस्कुरा कर रंगी की ओर इजाजत भरी नजरो से देखता है तो रंगी भी उसको हामी भर कर अपना मुसल मसलने लगता है ।
जन्गी फौरन घूटने के बल होकर अपना मुह रज्जो की बुर मे दे देता है और रज्जो आहे भरने लगती है - उह्ह्ह माह्ह्ह सीईई ऐसे हीई उह्ह्ह्ह उम्म्ं और चुसो भाईसाहब उह्ह्म्ंं
जंगी अपने होठो से रज्जो के बुर के फाके निचोडते हुए जीभ से लकीर चाट रहा था और रज्जो उसकी थूथ को अपने फुले हुए भोस्ड़े पर रगड़ रही थी - उह्ह्ह और चुसो उह्ह्ह ऊहह सीईई ऐसे ही उम्म्ंम माह्ह्ह
रंगी वही खड़ा खड़ा मुसल मसल रहा था और उससे रहा नही गया वो अपना लण्ड थामे चौकी पर चढ गया ।
रज्जो ने देर ना करते हुए उस्का लण्ड मुह मे भर लिया और रंगीलाल उसके ब्लाउज खोलकर उसकी चुचिया आजाद करके उन्हे मसलने लगा
रंगी- भाई सारा माल तू ही खा जायेगा क्याह्ह उह्ह्ब
जंगी मुह हटा कर देखा कि उसके भैया ने रज्जो के मुह मे लण्ड पेल रखा और चुचिया नंगी खुली हिल रही है ।
जंगी खड़ा होकर अपना मुसल मसलते हुए - आह्ह भैया इस रंडी की बुर बहुत रस है उह्ह्ह सच मे बहुत गर्म माल है
जंगी की बात सुनकर रज्जो मुह से लण्ड निकालती हुई - तो चोद ना साले रन्डीबाज पेल दे ना मुझे उह्ह्ह बहिन ंचोद
जन्गी अपना लण्ड उसके चुत पर रगड़ता हुआ - क्या बोली मादरचोद हाह
रज्जो उसकी आंखो मे देखते हुए साफ साफ लहजे मे झल्ला कर बोली - मैने कहा पेल ना बहिनचोद
बहिनचोद शब्द सुनते ही जंगी को सुरुर सा छा गया और वो कस के एक ही झटके आधे ए ज्यादा लण्ड घुसा दिया और और रज्जो के गले मे आवाज घूंट कर रह गयी क्योकि रंगि ने पहले ही उसका मुह भर दिया

जंगी हच्क ह्च्क कर रज्जो की रस फेकती चुत मे लण्ड पुरा जोर देके जड़ तक घुसाये हुए था - लेझ्ह साली रन्डी अह्ह्ह चुदक्क्ड उह्ह्ह लेह्ह्ह क्या मस्त बुर है तेरी उह्ह्ह
इधर जंगी कस कस के पेल रहा था वही रंगी का मुसल पूरी तरह फौलादी हुआ जा रहा था और वो रज्जो के मुह से लण्ड निकाल कर जंगी की ओर लाचारी भरी नजरो से देख कर हिला रहा था कि एक बार उसका छोटा भाई उसे भी मौका देदे
जंगी की नजर जब अपने भैया पर गयी तो उसने मुस्कराते हुए अपनी पोस्ट खाली कर दी फिर क्या रंगी ने
खडे होकर वही पास रखे सोफे पर अपना आसान टिका लिया और रज्जो भी खडी होकर अपना साड़ी पेतिकोट निकाल कर रन्गीलाल पर सवार हो गयी ।
लण्ड को चुत मे लगाते ही वो सरक कर भीतर घुस गया और बाकी का काम रज्जो ने खुद करने लगी ।
रन्गीलाल उसके नरम चुतडो को सहलाते हुए उसके चुचो को मुह मे भर कर चुसने लगा और रज्जो सिसकिया लेते हुए उसके लण्ड को अपनी बुर मे भरे हुए गाड़ घिसने लगी

रज्जो की चिकनी फैली हुई गाड़ को बड़ी अदा से लण्ड पर आगे पीछे होते हुए देख जंगीलाल वही चौकी पर बैठा हुआ अपना मुसल मसलने लगा ।
रज्जो जब भी पीछे होती उसकी गाड के पाटे खुल जाते और उसके गाड़ की भरी सुराख ही हल्की झलक उसे मिलती और उसका मुह लार छोडता ।
वही रंगीलाल निचे से झटके लगाता हुआ अब गति और बढा चुका था जिससे रज्जो की चिखे कमरे मे गूंज रही थी ।
रज्जो की कामुक चिख और सिसकियाँ जंगीलाल को अब और बेसबर किये जा रही थी वो उसकी चिखो को और बढ़ाना चाह रहा था और वो अपनी जगह से उठकर रज्जो के पास पहुचा ।
उस्ने रज्जो की चर्बीदार गाड़ की लकीरो मे हाथ लगाया तो रज्जो सिसकी और गरदन घुमा कर मुस्कुराते हुए जन्गीलाल को देखा ,वो समझ रही थी कि बस जंगी को उकसाने की देर है और वो अपना लण्ड उसकी गाड़ मे घुसाने से बाज नही आयेगा ।
रज्जो - क्या हुआ बहिनचोद ऊहह सीईई अह्ह्ह ऐसे क्या देख रहा है कभी गाड़ नही देखी क्या उम्म्ंम सुईई आअहह
जंगी मे चट्ट से उसके गाड़ पर चपत लगाई और उसके नरम नरम पाटो को फैलाते हुए - बहुत देखी है साली लेकिन तेरी जैसी चुद्क्क्ड की गाड़ पहली बार देखी है , उह्ह्ह कितना नरम है उह्ह्ह
रज्जो - कभी अपने दीदी का भी छू लेना , मुझसे भी नरम है अह्ह्ज साले क्या कर रहा है बहिनचौद उह्ह्ज
जंगीलाल सुखा सुखा ही लण्ड उसके गाड़ के मुहाने लगा कर धकेलने लगा
जंगी उसके गाद के सुराख पर थुक कर अपने सुपाड़े से उसको छेद पर फैलाते हुए हल्का सा जोर देके पचकक्क से लण्ड को भीतर घुसेडा - अह्ह्ह क्या कसी हुईई गाड़ है भाभी उह्ह्ह्ह उम्म्ंम कितनी गर्मी है भीतर है उह्ह्ह ओह्ह्ह्ह

रज्जो की तो आंखे उलटने लगी , उपर निचे दोनो तरफ दोनो भाइयो ने अप्ने मुस्तैद मसलो को उसके दोनो छेड़ो मे भर दिया था ,
जन्गीलाल हल्का हल्का झटका देता हुआ - आह्ह लेह्ह पुरा लेह्ह्ह ऊहह भैया आअप भी पेलो ऊहह मस्त चुदाई होगी
रंगीलाल - हा भाई घुसा घुसा और कस कस फ़ाड इसकी गाड़ उह्ह्ह क्या मस्त चुदवाती है आज तो दिन ही बन गया उह्ह्ह जिजीईई उम्म्ं
रज्जो - ह्म्म्ं और पेलो और घुसाआअऊओ उह्ह्ह माह्ह दिखाओ ना कितना जोर है तू भोसडीवालो मे उह्ह्ह पेलो ना सालो बहिन चोदो
रंगीलाल ने उसके कमर को थाम कर तड़तड़ कमर उठा कर लण्ड उसकी चुत मे डालने लगा और जंगी भी उसके कन्धे पकड कर गाड़ मे पुरा लण्ड भर भर के पेले जा रहा था ।
रज्जो भर भर दोनो को गालिया बकते हुए उन्हे चढा रही थी और दोनो भाई बस गालीया सुनकर बहुत ऊततेजित होकर रज्जो को पेले जा रहे थे ।
रज्जो की चुत हलाहल तीसरी बार रस छोड चुकी थी मगर दोनो भाई अभी तक लगे हुए थे ,
रज्जो - अरे कम होगा तुम्हारा उह्ह्ज माह्ह फाड़ कर रख दिये हो उह्ह्ह
जन्गिलाल उसके लाल हो चुके गाड़ के पाटो को मसलता हुआ
जंगीलाल - क्यू भाभीई अभी से थक गयी ,देख लिया हमारे खुन का जोर उम्म्ंम
रज्जो ने अपनी आन्खे महिन की और अपने दोनो छेदो के छल्ले सिकोड़कर टाइट कर - अच्छा ऐसी बात है अब पेलो देखू तो
एक बार फिर दोनो छेद पूरी तरह कस चुके थे और दोनो घिसावट मे तंगी होने लगी , दोनो के सुपाड़े पर जोर पड़ने लगा और जंगी की नसे अब ये रगड़ बर्दाश्त ना कर सकी और उसने कुछ ही झटको मे अपना फव्वारे को छोड़ दिया ,
रज्जो ने गाड़ की जड़ मे जन्गी के झड़ते लण्ड के फुलते सुपाड़े की मोटाई महसूस की और एक बार फिर से वो झड़ने लगी और वही नीचे गर्म लावे का स्पर्श पाते ही रंगीलाल भी भलभला कर झटके खाने लगा
रज्जो ने दोनो के लण्ड को भर पुर निचोड़ा और फिर अलग होकर उन्हे साफ भी किया ।
रज्जो - आप लोगो का तो हो गया अब ये साफ कहा करू ,
रंगी अपना जांघिया चढाता हुआ - आयिए जीजी मै साफ करवा देता हू
ये बोल कर वो रज्जो को वही जीने के निचे लगे पानी के मोटर के पास ले जाता है
रंगी - जीजी आप झुक कर खडे हो जाओ , मै पानी डालता हु
रज्जो हस कर झुक कर खडी हो गयी और रंगी ने मोटर चालू कर पानी की पाइप की तेज धार के उसके चुतडो पर मारी की रज्जो गनगना गयी - आह्ह आऊच ऊहह आराम से ना
रंगी - अरे जीजी वो आप अपना फैलाओ ना तब तो धुलेगा
रज्जो - क्या फैलाऊ
जंगी - अपनी गाड़ फैलाओ ना भाभीईई
रज्जो शर्मा कर हस्ते हुए - धत्त
फिर उसने झुक कर वैसे अपने गाड़ के पाटे फैलाये और रंगी को उसके भूरे गाड़ से रिसता हुआ सफेद वीर्य दिखा ।

कुछ पल को रंगी कोअजीब सा लगा मगर जैसे पानी की मोटी धार उसपर गयी वो एक ही पल मे साफ हो गया और रंगी सीधा रज्जो की गाड के सुराख पर धार मारने लगा , फिर उपर निचे करते हुए उसके चुत के फाको को भी धूलने लगा
ये सब देख कर जंगी का लण्ड एक बार फिर से कसने लगा ।
उससे रहा नही गया और वो आगे बढ़ते हुए अपना सुपाडा खोलकर एक बार फिर से अपना लण्ड रज्जो की गाड़ मे भर दिया

रज्जो अपने हाथ घुटने पर रख कर झुकी हुई थी , गाड़ मे लण्ड जाते ही उसकी सिकुडी हुई गाड़ के सुराख फैलने लगे और लण्ड पुरे तेजी से भीतर घुसता चला गया ।
रज्जो - उह्ह्ह भाईसाहब अभी तो किया था नाअह्ह उह्ह्ह माअह्ह
जन्गी कस कस के गाड़ मे झटके लगाता हुआ - ओह्ह भाभीईई आपकी गाड़ इत्नी मस्त है किहहह ऊहह मजा आ रहा है कितनी गर्मी है भीतर उह्ह्ह लग रहा है पिघल ही जायेगा
ये सब देख कर रंगी का लण्ड भी फौलादी होने लगा और वो भी अपना मुसल निकाल कर हिलाने लगा
रज्जो उसको देख कर चेहरे भिच्कर आहे भरते हुए - मै नही लेने वाली ,अह्ह्ह माअह्ह्ह जाओ अपनी बहिन के भोसड़े मे घुसाओ ओह्ह्ह मह्ह्ह सीईई उह्ह्ह उह्ह्ह जल्दी करो भाई साहब
रंगी का मुह उतर गया और
जन्गीलाल रज्जो की कसी हुई गाड मे जल्दी जल्दी पेलने लगा और कुछ ही मिनटो मे एक बार फिर से उसकी गाड़ को अपने वीर्य से भर दिया ।
रज्जो पास के दिवाल से सहारा लेते हुए अपनी कमर और पैर सीधा करती है - आह्ह माह्ह्ह तोड कर रख दिया तुम दोनो ने ऊहह सीईईई
रज्जो की बाते सुनकर दोनो भाई हस दिये
रज्जो - अरे अब धुला दो ना , हो गया काम तो सरक रहे हो
जन्गी आगे बढ कर - अरे आओ भाभी धुला देता हु
इस बार जंगी ने खुद पाइप से पानी डाल कर हाथ लगा कर रज्जो की गाड़ साफ की और फिर तैयार होने लगा ।
रंगी - भाभी हम लोग निकल रहे है आप तैयार होकर आईये ऐसे साथ मे निकलना उचित नही है
रज्जो कराह भरी आवाज मे अपने खुले हुए चुतड को चौकी पर टिकाते हुए - आप लोग चलो मै आती हु
फिर दोनो भाई बाहर निकल गये ।
जारी रहेगी
लेखक की जुबानी
शाम के 5 बज गये थे , सारे लोग तैयार होकर नये नये ड्रेस मे तस्वीरें निकलवा रहे थे ।
रंगीलाल ने सभी gents के लिए आज मेहन्दी पर पहनने के लिए खास कुर्ता सेट मगवाया था और बारी बारी से सबको बाट रहा था
रंगीलाल उपर के कमरे मे राहुल और उसके पापा को उनका कपड़ा देके जीने की ओर लौट रहा था कि तभी उसकी नजर जीने से उपर आती शालिनी पर गयी ।

शालिनी का पल्लू उसके सीने से हट चुका था , पिन की वजह से अटका हुआ था और ब्लाऊज मे कैद उसकी चुचिया उछल रही थी
रन्गीलाल शालिनी को ऐसे देखा वही रुक गया और शालिनी उसके पास आकर रुकी तो उसने रन्गीलाल की आंखो मे देखा जो उसको छातियों को निहार रहा था ।
शालिनी ने झट से अपना पल्लू खिंच कर सीने के उपर किया और मुस्कुरा कर रन्गीलाल को देखा । फिर अपनी जुल्फो को कानो मे फसाते हुए साइड से निकल कर शर्माती हुई सोनल के कमरे मे निकल गयी ।
वही रन्गीलाल ने गरदन घुमा कर उसको देखा फिर निचे जाने के बजाय वही हाल मे सोफे पर बैठ गया ।
जहाँ पहले से ही शाकुंतला , विमला रजनी बैठे थे और उनसे बाते करने लगा ।
वही राहुल अनुज और विमला का बेटा मनोज डीजे पर चलाने के लिए भोजपुरी गानो की लिस्ट खोज रहे थे ।
राज और कमलनाथ भी साथ मे तैयार होकर कमरे से बाहर निकल रहे थे कि सामने गेस्ट रूम से शिला एक स्लिवलेस प्लाजो सूट मे तैयार होकर बाहर निकली , उसने एक नेट वाला दुपट्टा साइड से ले रखा था और उसके मोटे मोटे चुचे कसे हुए उभरे थे ।
कुल्हे पर कुरती उठी हुई थि और पलाजो मे जान्घे कसी हुई थी ।

शिला की नजरे जैसे ही कमलनाथ से टकराई वो थोडा शरमाई और फिर इतराती हुई आगे बढ़ती हुई अपने बालो को पीछे से आगे करते हुए अपनी डीप गले वाली बैकलेस कुरती से अपनी गोरी चिकनी पीठ कर दिदार कराते हुए एक शरारत भरी मुस्कराहट के साथ आगे बढ़ गयी ।
राज उन दोनो की आंखे चार होते देख कर मस्ती मे - अरे वाह बुआ आज तो आप बड़ी प्यारी लग रही हो , क्यू मौसा जी ।
राज की बात सुन कर शिला ने नजरे उठा कर कमलनाथ को देखा तो कमलनाथ अटकते हुए स्वर मे - अह हा हा , बहुत अच्छी लग रही है आप
शिला शर्म से लाल होती हुई मुस्कुराई और फिर कमलनाथ ने सबको उपर चलने के लिए बोला ।
कुछ ही देर मे मेहंदी का कार्यकर्म होने लगा , अब ये सब ले देके था औरतो वाला ही प्रोग्राम तो ऐसे मे मर्दो के लिए बोरियत ही था ।
वही जंगी-रंगी दोनो भाईयो मे अपनी प्लानिंग के लिए आंखो से इशारेबाजी चल रही थी ।
कि अभी यहा मेहंदी का प्रोग्राम हो रहा है घन्टे स्वा घन्टे का टाईम है थोडा मूड बना ही लिया जाये ।
रंगी अंगड़ाई लेते हुए उठा और जंगी से बोला - छोटे जरा आओ थोडा काम है तुम्से और फिर जंगी भी निकल गया उसके साथ निचे ,
हसी ठिठौलि मे वय्स्त महिलाए और उनको घुरते लौंडो के बीच एक अकेला मर्द कमलनाथ ।
निशा की गुपचुप निगाहे कमलनाथ को बिच बिच मे देख रही थी और वो ऐसे जगह बैठी थी कि उसकी गुदाज जांघ और आधा चुतड उसकी लेगी से साफ साफ झलके ।
मगर कमलनाथ और शिला की अपनी इशारेबाजी चल रही थी ,
वही राज और रीना
भी आपस मे मुस्कुराहटे पास किये जा रहे थे ।
रन्गी जंगी दोनो निचे के कमरे मे आये और फिर जो जो जरुरी समान था सब एक झोले मे लेके फटाफट घर बाहर निकल गये इस बात से बेखबर कि रज्जो उनका पीछा करते हुए जीने तक आई थी
जैसे ही उसने दोनो को घर से बाहर जाते देखा तो उसे अटपटा लगा कि इस वक़्त ये लोग कहा जा रहे है ।
फिर वो पीछे पीछे मेन गेट तक और देखा तो वो लोग बगल मे चंदू के घर मे घुसरहे थे ।
रज्जो को लगा कि शायद कुछ काम हो क्योकि उस घर मे भी दहेज एवं रसोई का काफी सारा रखा हुआ था तो वो वापस उपर चली गयी ।
वही रन्गी और जंगी दरवाजा भीड़का कर जीने की सबसे उपर वाली चौड़ी सीढि जो दरवाजे से लग कर थी वही आसान जमा लिये ।
अमन के घर
हाल मे सारे लोग एक साथ थे और कल हल्दी के प्रोग्राम पर चर्चा हो रही थी ।
शाम का समय हो गया था और ममता सबको चाय दे रही थी ।
जैसे ही वो भोला को चाय दी दोनो मुस्कुरा दिये ।
फिर वो किनारे खड़ी हो गयी और तभी भोला ने आंखो से इशारा किया और अपने जांघो पर उंगलियाँ पेन की तरह चलाते हुए ममता से इशारा किया कि डायरी लिख दिया है पढ लेना
ममता इतराते हुए मुस्कुराने लगी और उसकी बेचैनी बढने लगी कि क्या लिखा होगा उसके नंदोई ने ।
उसके पाव कांप रहे थे , रोम रोम सिहर रहा था , उसी सिहरन ने उसके चुचे उठाने शुरु कर दिये थे
आखिरकार ममता से रहा नही गया और वो चाय की ट्रे लेके किचन ने गयी और उसने गटागट एक गिलास पानी गले मे उतारा और अपनी उफनाती सासो को थामने लगी ।
एक घबराहट और उत्सुकता ने घर कर लिया था उसको , बेचैनी और उतावलापन उसके चेहरे से साफ पता चल रहे थे ।
कलेजे की धकधक उसके चेहरे पर मुस्कान ला रही थी और वो एक गहरी आह भरती हुई चुपचाप अपने कमरे मे चली गई
उसने आस पास देखा तो उसको तकिये के निचे वो डायरी मिली और उसने झटपट से दरवाजा भीड़काया फिर सर सर पन्ने उलटने शुरु किये ।
आखिर से दो पन्नो से पहले उसको कुछ लिखा मिला , उसने आंख बन्द कर अपने दिल को थामती हुई एक ठंडी सास ली और फिर डायरी मे देखा ।
कुछ शायरी से शुरुवात की थी भोला ने
कुछ आश रखने की हिम्मत कर रहा हु
बोलो पुरा करोगी क्या ?
कुछ कहने की चाहत रख रहा हु
बोलो सुनोगी क्या ?
आज रात मै इंतजार करूंगा बाल्किनी मे
बोलो आओगी क्या ?
शायरी पढ कर ममता हसने लगी और उसने आगे पढना शुरु किया
गर मंजूर हो दोस्ती का ये इकरार
तो पहन के आना सिर्फ़ सलवार
दोस्ती की कसम है तुम्हे , मत करना मुझे सैंटी
गुजारिश है तुमसे ना ब्रा पहनना और ना पैंटी
ममता इस कल्पना से कि बिना ब्रा पैंटी के सिर्फ सूट सलवार मे नंदोई के सामने जाऊंगी तो , हाय हाय ये मै क्या सोच रही हु धत्त ये नंदोई जी भी ना
फिर वो आगे पढती है
अब इस बात से इंकार ना करना कि तुम्हे भनक नही मेरे इरादो का
कितनी ठोकरे तो खा चुकी हो आज मेरे जज्बातों का
ये लाईन पढते ही ममता को वो पल याद आया जब भोला उसके उपर चढ कर उसकी चुत पर लण्ड से ठोकर मार रहा था , वो याद करते ही ममता की चुत पनियाने लगी ।
फिर उसने आखिर के दो लाईन पढे
कहने को बहुत कुछ है मगर ये कलम बहुत छोटी है
आपके दरखक्तों पर हम अपनी कलम चलायेंगे
ममता - धत्त ये जीजा भी ना , उफ्फ्फ गर्म कर दिया मुझे । क्या मुझे भी बदले मे कुछ लिखना चाहिये । अभी तो 5 बजे है और 11 बजने मे तो काफी वक़्त है ,क्यू ना इसी डायरी मे जवाब लिख कर उन्हे भी थोडा परेशान करू ।हिहिहिही
राज के घर
इधर मेहंदी के रस्म हो रही थी वही राज रिना को डांस करने के लिए आने को इशारा कर रहा था
बदले मे रीना मुस्कुरा कर हामी भर रही थी तो राज भागते हुए रिना के पास गया और उसको पकड कर खिंचते हुए हाल के बीच मे ले आया
रिना खिलखिलाकर हस रही थी और बाकी सारे लोग भी हस रहे थे फिर शुरु हुआई देवार भौजाई के ठूमके , आंखो से आंखे टकराई और होठ भी कुछ मनशा लिये मुस्करा रहे थे ।
वही बाकी की लौडो की गैंग ( अनुज , राहुल , मनोज , चंदू ) सिटिया बजा कर शोर कर रहे थे ।
रीना शर्मा कर हस्ती हुई वापस औरतो मे चली गयी ।
इधर निशा काफी देर से देख रही थी कि कमलनाथ का ध्यान उस्की ओर कम और शिला की ओर ज्यादा था ।
उसे भी भनक सी लग रही थी कि दोनो मे कुछ आंख मिचौली चल रही है ।
निशा ने रागिनी को पकड कर खींचा और हाल मे लेके आते हुए डांस करने लगी , रागिनी भी हस हस ठुमके लगा रही थी मगर जल्द ही वो हट गयी और

निशा अकेले ही कमलनाथ की ओर खास करके अपनी गाड़ करके झटके लगाते हुए नाचने लगी , उसकी कुर्ती उठती तो कमलनाथ ने निशा के लेगी से झांकते उसकी पैंटी के भी दिदार हो जाते ।
कमलनाथ का ध्यान अब निशा ने खिच ही लिया और डांस खतम कर निशा बार बार बस कमलनाथ की ओर ही देखे जा रही थी ।
कमलनाथ को थोडा अजीब लगा कि वो उसे क्यू देख रही है , और कमलनाथ उस्से नजरे चुराने लगा । अब तो उसको ये दिक्कत होने लगी कि कही वो शिला को ताडे तो उसकी चोरी पकड़ी ना जाये क्योकि निशा तो लगातार नजर जमाए हुए थी ।
सारे लोग इन्जाय कर रहे थे तो रागिनी ने बातो ही बातो मे पुछा - ये राज के पापा कहा गये अभी आये नही
शालिनी - हा जीजी निशा के पापा भी गये है साथ मे
रज्जो को भी लगा कि अब तो समय काफी हो गया क्या करने गये ये लोग अभी आये नही इसीलिए रज्जो उठ कर निकल गयी दोनो को बुलाने के लिए
चंदू के घर का दरवाजा भिड्का हुआ ही था , हल्का सा जोर और खुल गया
रज्जो गलियारे से होकर कमरे दर कमरे पार करती हुई आगे बढ़ रही थी और उसको दोनो भाईयों की खिलखिलाहट भरी हसी और बातो की गूंज आ रही थी ।
रज्जो जैसे ही सबसे पीछे आंगन मे पहुची तो उपर के जीने से आवाज आई जो जंगी की थी ।
जंगी- भैया सच सच बताओ ना रज्जो भाभी आपको कैसी लगती है
जन्गी का अपने भाई से यू सवाल पुछना रज्जो को थोडा खटका
रंगी - एकदम रसदार है रज्जो भाभी यार , मै तो शादी के समय से ही दीवाना हु
रज्जो ने जीने की ओर झाक कर देखा तो समझ गयी
दोनो भाई सिर्फ बनियान पहने दरवाजे पर बाहर की ओर मुह किये बैठे थे , उनके कुरते जीने की रेलिंग पर रखे हुए थे ।
रज्जो उनकी बाते सुनते हुए धीरे धीरे सीढिया चढने लगी ।
जन्गी - सच भैया , ये कमलनाथ भाई ने क्या किसमत पाई है ना , क्या मस्स्स्त गाड़ है भाभी के उह्ह्ह्ह मन करता है कि झुका के
जन्गी की बाते सुन्कर रज्जो के कान खडे हो गये और वो समझ गयी कि दोनो ड्रिंक किये हुए है
रंगी - हेईई जन्गीईई नहीईई भाभी है ना वो ऐसा नही बोल्ते
जंगी - स्स्स्सोरीईई भैयआआह
रंगी - सोरीई क्यू सॉरी क्यू , अरे रन्डी है एक नं की रंडी देखा नही साली गाड़ कैसे फैली हुई है
"खुब पेलवाति होगी आह्ह" , रंगी ने ग्लास गटकते हुए कहा ।
जन्गी ने भी सिप लेते हुए - हा भैया पता है मैने तो कल रात को ....।
रज्जो को लगा कही उस्का भेद खुल ना जाये और जंगी नशे मे कुछ बोल ना दे
इसीलिए वो पीछे से बोल पड़ी- हम्म्म तो क्या बैठ कर आप लोग मेरे बारे मे ये सब बाते कर रहे है ।
रज्जो की तेज आवाज सुनते ही रंगी जंगी दोनो ने पलट कर देखा तो दोनो की आधी शराब वैसे ही गायब हो गयी और वो फौरान खडे हो गये - भाभीईई जिजीईई
जैसे ही वो खडे हुए उन्के पाजामे मे तना हुआ मुसल भी तम्बू बना कर रज्जो को निहार रहा था और रज्जो की नजर जैसे ही उन्पे गयी दोनो ने अपने पंजे से छिपाने लगे तो रज्जो की हसी छूट गयि ।
रज्जो - छीईई आप लोग मेरे बारे मे ऐसी बाते करते है क्या मै आपको सड़क छाप वो लगती हु , हुउह्ह
रंगी और जंगी दोनो सफाई देते हुए - नही नही जिजीई भाभीईई हमारा वो मतलब नही था , सॉरी ना प्लीज
रज्जो तुन्क कर - हुह , रहने दो सुन लिया मैने सब
ये बोल कर रज्जो निचे जाने लगी तो रंगी - ये भाई रोक रोक जिजीई को
जन्गीलाल सरपट रज्जो के पीछे भागा और आन्गन मे रज्जो की कलाई पकड ली तो रज्जो छुड़ाने की कोसिस करती है इतने मे रंगी भी आ जाता है
रंगी - सॉरी ना जीजी , मान जाओ ना प्लीज
जन्गी - हा भाभी प्लीज , देखीये ये सब शुरु भी इसीलिए हुआ कि आपकी गलती थी
रज्जो ठहर कर - अब मेरी क्या गलती
जंगी - आपको तो पता ही है ना कल रात मे जब मैने आपको खाना के लिए बुलाने आया था तो
इस्से पहले जन्गी अपनी बात पूरी करता उस्से पहले रज्जो ने अपनी आंख दिखाई उसको
जंगी हड़ब्डा कर बात घुमाता हुआ - और आज सुबह मे जब हम नासता कर रहे थे तो हमे आपकी वो दिख गयी और फिर
फिर जंगीलाल ने सारि बाते बताई कि कैसे दोनो भाई बीते लमहे ताज़ा करने के चक्कर मे थे
जंगी - मगर सुबह का वो झलक बार बार मेरे जहन में था और बस मन कर रहा था कि
रज्जो - क्या मन कर रहा था
जन्गी - नही भाभी आप बुरा मान जाओगे
रज्जो तेज अवाज मे - मैने कहा बताओ
रंगी ने इशारे से जंगी को बात रखने को कहा
जन्गी - वो भाभी जबसे सुबह से आपकी चिकनी बुर देखी थी उसको चाटने का इतना मन हो रहा था , ऐसी फूली हुई लम्बी लकीरो वाली चुत मैने आज तक नही देखी थी और देखो ना तबसे मेरा मुसल भी नही बैठ रहा है ।
जन्गीलाल ने अपनी तारिफ सुनकर रज्जो मुस्कुराई जिसे रंगी ने पल भर की नजर मे भाप लिया और वो समझ गया कि रज्जो को इससे कोई फर्क नही पड रहा है क्योकि वो रज्जो के रग रग से वाक़िफ़ था ।
रज्जो - अब छोड़ो मुझे और ये सब क्या बाते कर रहे हो आप लोग । शर्म नही आती एक पराई औरत के साथ ये सब छीई
रन्गी मुस्कुरा कर - जीजी आप पराई कहा हो आप तो अपने हो और जमाई की तो सारी गल्तियां माफ की जाती है ना
रज्जो रंगी की आंख मे झाक चुकी थी और वो मुस्कुरा कर - ऐसे कैसे माफी मिल जायेगी , आप दोनो को सजा मिलेगी ।
जंगी - क्या सजा !!
रज्जो - हम्म्म्म और क्या ,
मुझे भी हिसाब बराबर करना है
जंगी - वो कैसे ?
रज्जो - मै भी आप दोनो को गाली दूँगी और आपके प्राइवेट पार्ट देखूँगी । तब ना होग हिसाब बराबर
रज्जो की बात सुनते ही जन्गी खिल उठा और अपने पजामे का नाड़ा खोलते हुए अपना मुसल बाहर निकाल कर - बस इतनी सी बात , ये लो
जन्गी ने बड़ी बेशर्मी से अपना तनतनाया हुआ लण्ड बाहर निकाल दिया
रज्जो - साले भडवे रंडीबाज , बहिनचोद
जंगी चौक कर रज्जो को देखा
रज्जो - अरे हिसाब बराबर कर रही हु ना
जन्गी - ओह्ह
फिर रज्जो रंगी की ओर घूमी तो वो भी फटाक से अपना मुसल निकाल कर खड़ा हुआ और रज्जो ने वही गाली दुहराई
रज्जो - चलो हो गया अब चलते है , सार लोग खोज रहे है आपको
रंगी - अरे अभी कहा हुआ
रज्जो - तो अब क्या बाकी है ?
रन्गी - क्या जीजी हमने तो उसकी तारिफ भी की थी ना ...तो
रज्जो रंगी की बात सुनकर हस दी - धत्त , ये भी बोलना पडेगा
जंगी हस्ते हुए - हिसाब तभी ना बराबर होगा भाभी
रज्जो ने बड़े गौर से दोनो के लाल सुपाडे वाले लण्ड को निहार रही थी जो दोनो के हाथो मे कैद थे ।
रज्जो कुछ बोलने को हुई मगर उसकी हसी छूट गयी
रंगी - अरे बोलो ना जीजी
रज्जो नजरे गडाये तेज धडकते दिल के साथ - उफ्फ्फ क्या मसत मस्त लण्ड है जी कर रहा है कि अभी चुस चुस कर लाल कर दू और
रज्जो की बातें सुनते हुए दोनो भाईयो के जिस्म मे सुरसूरी सी हुई और दोनो के लण्ड पुरे फौलादी हो गये ।
दोनो अपना मुसल सहलाते हुए - सीईई और क्या भाभीई/जिजीई
रज्जो अपने बेकाबू होते दिल को मह्सूस करती हुई अपनी उफ्नाती सासो के साथ एक आह भरती हुई - और इनको उसी रसिले चुत मे भर लू जिसको आप दोनो चुसना चाहते थे
रज्जो की बाते सुन्कर दोनो भाई के दिल की धड़कने तेज हो गयी और दोनो सिस्कते हुए तेजी से अपना मुसल मसल रहे थे और रज्जो की निगाहे वही अटकी थी
दोनो भाईयो ने एक दुसरे को खुमारी भरे नजरो से देखा और रज्जो के करिब आ गये
रज्जो की सासे और चढने लगी , वो नजरे घुमा कर दोनो तरफ खडे दोनो भाईयो की आंखो मे मदहोश नजरो से देख रही थी ।
" भाभीईई ",जन्गी की गरम सासों से भरी आवाज रज्जो के गरदन से टकराई और वो आंखे बन्द कर सिहर उठी ।
वही रंगी ने रज्जो का एक हाथ पकड़ा और अपने मुसल पर रख दिया , जिससे रज्जो ने अपनी आंखे भीच कर सीने मे सासो को भर लिया ।
जन्गी ने वही किया और इस बार रज्जो ने अपने होठ भी दबा लिये ।
दोनो भाईयो ने एक साथ उसके गरदन को चूमा और दोनो के एक एक हाथ उसकी उभरी हुई चरबीदार गाड़ पर फिराने लगे ।
रज्जो ने दोनो के लण्ड को मुठ्ठि मे भर लिया दोनो भाई भी सिहर उठे ।
रज्जो ने उनकी लिंग की चमडीया खिस्कानी शुरु की और रज्जो के गर्म हाथो की मुलायम हथेली ने उन्हे मदहोश कर दिया ।
रज्जो अब आंखे खोल के दोनो भाईयो के चेहरे पढते हुए उन्के लण्ड को भीच रही थी और दोनो को भनक भी नही लगी कि कब रज्जो निचे बैठ गयी , सबसे पहले जंगी का कालेज ध्क्क हुआ जब उसको अपने लण्ड की सतह पर नरम ठंडे होठो का स्पर्श मिला
वो एडिया उचका कर सिहरा - उह्ह्ह भाभीईई उम्म्ंम्ं सीईई अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह

रज्जो ने कुछ देर बाद रंगी का लण्ड मुह मे लेके चूसने लगी ।तो रंगी ने भी आहे भरनी शुरु कर दी ।
जंगी - ऊहह भाभीईई क्या मस्त चुस्ती हो जब आपके उपर के होठ ऐसे है तो निचे के होठ कितने नरम होंगे
रज्जो मुह से लण्ड निकालती हुई - वो आप खुद चुस के देख लो ना भाई साहब
ये बोल के रज्जो उठकर अपना साड़ी पेतिकोट एक साथ उठाते हुए आंगन की एक चौकी पर लेट कर जान्घे खोल दी - आह्ह आओ ना भाई साहब चुस के देखो ना
जन्गी मुस्कुरा कर रंगी की ओर इजाजत भरी नजरो से देखता है तो रंगी भी उसको हामी भर कर अपना मुसल मसलने लगता है ।
जन्गी फौरन घूटने के बल होकर अपना मुह रज्जो की बुर मे दे देता है और रज्जो आहे भरने लगती है - उह्ह्ह माह्ह्ह सीईई ऐसे हीई उह्ह्ह्ह उम्म्ं और चुसो भाईसाहब उह्ह्म्ंं
जंगी अपने होठो से रज्जो के बुर के फाके निचोडते हुए जीभ से लकीर चाट रहा था और रज्जो उसकी थूथ को अपने फुले हुए भोस्ड़े पर रगड़ रही थी - उह्ह्ह और चुसो उह्ह्ह ऊहह सीईई ऐसे ही उम्म्ंम माह्ह्ह
रंगी वही खड़ा खड़ा मुसल मसल रहा था और उससे रहा नही गया वो अपना लण्ड थामे चौकी पर चढ गया ।
रज्जो ने देर ना करते हुए उस्का लण्ड मुह मे भर लिया और रंगीलाल उसके ब्लाउज खोलकर उसकी चुचिया आजाद करके उन्हे मसलने लगा
रंगी- भाई सारा माल तू ही खा जायेगा क्याह्ह उह्ह्ब
जंगी मुह हटा कर देखा कि उसके भैया ने रज्जो के मुह मे लण्ड पेल रखा और चुचिया नंगी खुली हिल रही है ।
जंगी खड़ा होकर अपना मुसल मसलते हुए - आह्ह भैया इस रंडी की बुर बहुत रस है उह्ह्ह सच मे बहुत गर्म माल है
जंगी की बात सुनकर रज्जो मुह से लण्ड निकालती हुई - तो चोद ना साले रन्डीबाज पेल दे ना मुझे उह्ह्ह बहिन ंचोद
जन्गी अपना लण्ड उसके चुत पर रगड़ता हुआ - क्या बोली मादरचोद हाह
रज्जो उसकी आंखो मे देखते हुए साफ साफ लहजे मे झल्ला कर बोली - मैने कहा पेल ना बहिनचोद
बहिनचोद शब्द सुनते ही जंगी को सुरुर सा छा गया और वो कस के एक ही झटके आधे ए ज्यादा लण्ड घुसा दिया और और रज्जो के गले मे आवाज घूंट कर रह गयी क्योकि रंगि ने पहले ही उसका मुह भर दिया

जंगी हच्क ह्च्क कर रज्जो की रस फेकती चुत मे लण्ड पुरा जोर देके जड़ तक घुसाये हुए था - लेझ्ह साली रन्डी अह्ह्ह चुदक्क्ड उह्ह्ह लेह्ह्ह क्या मस्त बुर है तेरी उह्ह्ह
इधर जंगी कस कस के पेल रहा था वही रंगी का मुसल पूरी तरह फौलादी हुआ जा रहा था और वो रज्जो के मुह से लण्ड निकाल कर जंगी की ओर लाचारी भरी नजरो से देख कर हिला रहा था कि एक बार उसका छोटा भाई उसे भी मौका देदे
जंगी की नजर जब अपने भैया पर गयी तो उसने मुस्कराते हुए अपनी पोस्ट खाली कर दी फिर क्या रंगी ने
खडे होकर वही पास रखे सोफे पर अपना आसान टिका लिया और रज्जो भी खडी होकर अपना साड़ी पेतिकोट निकाल कर रन्गीलाल पर सवार हो गयी ।
लण्ड को चुत मे लगाते ही वो सरक कर भीतर घुस गया और बाकी का काम रज्जो ने खुद करने लगी ।
रन्गीलाल उसके नरम चुतडो को सहलाते हुए उसके चुचो को मुह मे भर कर चुसने लगा और रज्जो सिसकिया लेते हुए उसके लण्ड को अपनी बुर मे भरे हुए गाड़ घिसने लगी

रज्जो की चिकनी फैली हुई गाड़ को बड़ी अदा से लण्ड पर आगे पीछे होते हुए देख जंगीलाल वही चौकी पर बैठा हुआ अपना मुसल मसलने लगा ।
रज्जो जब भी पीछे होती उसकी गाड के पाटे खुल जाते और उसके गाड़ की भरी सुराख ही हल्की झलक उसे मिलती और उसका मुह लार छोडता ।
वही रंगीलाल निचे से झटके लगाता हुआ अब गति और बढा चुका था जिससे रज्जो की चिखे कमरे मे गूंज रही थी ।
रज्जो की कामुक चिख और सिसकियाँ जंगीलाल को अब और बेसबर किये जा रही थी वो उसकी चिखो को और बढ़ाना चाह रहा था और वो अपनी जगह से उठकर रज्जो के पास पहुचा ।
उस्ने रज्जो की चर्बीदार गाड़ की लकीरो मे हाथ लगाया तो रज्जो सिसकी और गरदन घुमा कर मुस्कुराते हुए जन्गीलाल को देखा ,वो समझ रही थी कि बस जंगी को उकसाने की देर है और वो अपना लण्ड उसकी गाड़ मे घुसाने से बाज नही आयेगा ।
रज्जो - क्या हुआ बहिनचोद ऊहह सीईई अह्ह्ह ऐसे क्या देख रहा है कभी गाड़ नही देखी क्या उम्म्ंम सुईई आअहह
जंगी मे चट्ट से उसके गाड़ पर चपत लगाई और उसके नरम नरम पाटो को फैलाते हुए - बहुत देखी है साली लेकिन तेरी जैसी चुद्क्क्ड की गाड़ पहली बार देखी है , उह्ह्ह कितना नरम है उह्ह्ह
रज्जो - कभी अपने दीदी का भी छू लेना , मुझसे भी नरम है अह्ह्ज साले क्या कर रहा है बहिनचौद उह्ह्ज
जंगीलाल सुखा सुखा ही लण्ड उसके गाड़ के मुहाने लगा कर धकेलने लगा
जंगी उसके गाद के सुराख पर थुक कर अपने सुपाड़े से उसको छेद पर फैलाते हुए हल्का सा जोर देके पचकक्क से लण्ड को भीतर घुसेडा - अह्ह्ह क्या कसी हुईई गाड़ है भाभी उह्ह्ह्ह उम्म्ंम कितनी गर्मी है भीतर है उह्ह्ह ओह्ह्ह्ह

रज्जो की तो आंखे उलटने लगी , उपर निचे दोनो तरफ दोनो भाइयो ने अप्ने मुस्तैद मसलो को उसके दोनो छेड़ो मे भर दिया था ,
जन्गीलाल हल्का हल्का झटका देता हुआ - आह्ह लेह्ह पुरा लेह्ह्ह ऊहह भैया आअप भी पेलो ऊहह मस्त चुदाई होगी
रंगीलाल - हा भाई घुसा घुसा और कस कस फ़ाड इसकी गाड़ उह्ह्ह क्या मस्त चुदवाती है आज तो दिन ही बन गया उह्ह्ह जिजीईई उम्म्ं
रज्जो - ह्म्म्ं और पेलो और घुसाआअऊओ उह्ह्ह माह्ह दिखाओ ना कितना जोर है तू भोसडीवालो मे उह्ह्ह पेलो ना सालो बहिन चोदो
रंगीलाल ने उसके कमर को थाम कर तड़तड़ कमर उठा कर लण्ड उसकी चुत मे डालने लगा और जंगी भी उसके कन्धे पकड कर गाड़ मे पुरा लण्ड भर भर के पेले जा रहा था ।
रज्जो भर भर दोनो को गालिया बकते हुए उन्हे चढा रही थी और दोनो भाई बस गालीया सुनकर बहुत ऊततेजित होकर रज्जो को पेले जा रहे थे ।
रज्जो की चुत हलाहल तीसरी बार रस छोड चुकी थी मगर दोनो भाई अभी तक लगे हुए थे ,
रज्जो - अरे कम होगा तुम्हारा उह्ह्ज माह्ह फाड़ कर रख दिये हो उह्ह्ह
जन्गिलाल उसके लाल हो चुके गाड़ के पाटो को मसलता हुआ
जंगीलाल - क्यू भाभीई अभी से थक गयी ,देख लिया हमारे खुन का जोर उम्म्ंम
रज्जो ने अपनी आन्खे महिन की और अपने दोनो छेदो के छल्ले सिकोड़कर टाइट कर - अच्छा ऐसी बात है अब पेलो देखू तो
एक बार फिर दोनो छेद पूरी तरह कस चुके थे और दोनो घिसावट मे तंगी होने लगी , दोनो के सुपाड़े पर जोर पड़ने लगा और जंगी की नसे अब ये रगड़ बर्दाश्त ना कर सकी और उसने कुछ ही झटको मे अपना फव्वारे को छोड़ दिया ,
रज्जो ने गाड़ की जड़ मे जन्गी के झड़ते लण्ड के फुलते सुपाड़े की मोटाई महसूस की और एक बार फिर से वो झड़ने लगी और वही नीचे गर्म लावे का स्पर्श पाते ही रंगीलाल भी भलभला कर झटके खाने लगा
रज्जो ने दोनो के लण्ड को भर पुर निचोड़ा और फिर अलग होकर उन्हे साफ भी किया ।
रज्जो - आप लोगो का तो हो गया अब ये साफ कहा करू ,
रंगी अपना जांघिया चढाता हुआ - आयिए जीजी मै साफ करवा देता हू
ये बोल कर वो रज्जो को वही जीने के निचे लगे पानी के मोटर के पास ले जाता है
रंगी - जीजी आप झुक कर खडे हो जाओ , मै पानी डालता हु
रज्जो हस कर झुक कर खडी हो गयी और रंगी ने मोटर चालू कर पानी की पाइप की तेज धार के उसके चुतडो पर मारी की रज्जो गनगना गयी - आह्ह आऊच ऊहह आराम से ना
रंगी - अरे जीजी वो आप अपना फैलाओ ना तब तो धुलेगा
रज्जो - क्या फैलाऊ
जंगी - अपनी गाड़ फैलाओ ना भाभीईई
रज्जो शर्मा कर हस्ते हुए - धत्त
फिर उसने झुक कर वैसे अपने गाड़ के पाटे फैलाये और रंगी को उसके भूरे गाड़ से रिसता हुआ सफेद वीर्य दिखा ।

कुछ पल को रंगी कोअजीब सा लगा मगर जैसे पानी की मोटी धार उसपर गयी वो एक ही पल मे साफ हो गया और रंगी सीधा रज्जो की गाड के सुराख पर धार मारने लगा , फिर उपर निचे करते हुए उसके चुत के फाको को भी धूलने लगा
ये सब देख कर जंगी का लण्ड एक बार फिर से कसने लगा ।
उससे रहा नही गया और वो आगे बढ़ते हुए अपना सुपाडा खोलकर एक बार फिर से अपना लण्ड रज्जो की गाड़ मे भर दिया

रज्जो अपने हाथ घुटने पर रख कर झुकी हुई थी , गाड़ मे लण्ड जाते ही उसकी सिकुडी हुई गाड़ के सुराख फैलने लगे और लण्ड पुरे तेजी से भीतर घुसता चला गया ।
रज्जो - उह्ह्ह भाईसाहब अभी तो किया था नाअह्ह उह्ह्ह माअह्ह
जन्गी कस कस के गाड़ मे झटके लगाता हुआ - ओह्ह भाभीईई आपकी गाड़ इत्नी मस्त है किहहह ऊहह मजा आ रहा है कितनी गर्मी है भीतर उह्ह्ह लग रहा है पिघल ही जायेगा
ये सब देख कर रंगी का लण्ड भी फौलादी होने लगा और वो भी अपना मुसल निकाल कर हिलाने लगा
रज्जो उसको देख कर चेहरे भिच्कर आहे भरते हुए - मै नही लेने वाली ,अह्ह्ह माअह्ह्ह जाओ अपनी बहिन के भोसड़े मे घुसाओ ओह्ह्ह मह्ह्ह सीईई उह्ह्ह उह्ह्ह जल्दी करो भाई साहब
रंगी का मुह उतर गया और
जन्गीलाल रज्जो की कसी हुई गाड मे जल्दी जल्दी पेलने लगा और कुछ ही मिनटो मे एक बार फिर से उसकी गाड़ को अपने वीर्य से भर दिया ।
रज्जो पास के दिवाल से सहारा लेते हुए अपनी कमर और पैर सीधा करती है - आह्ह माह्ह्ह तोड कर रख दिया तुम दोनो ने ऊहह सीईईई
रज्जो की बाते सुनकर दोनो भाई हस दिये
रज्जो - अरे अब धुला दो ना , हो गया काम तो सरक रहे हो
जन्गी आगे बढ कर - अरे आओ भाभी धुला देता हु
इस बार जंगी ने खुद पाइप से पानी डाल कर हाथ लगा कर रज्जो की गाड़ साफ की और फिर तैयार होने लगा ।
रंगी - भाभी हम लोग निकल रहे है आप तैयार होकर आईये ऐसे साथ मे निकलना उचित नही है
रज्जो कराह भरी आवाज मे अपने खुले हुए चुतड को चौकी पर टिकाते हुए - आप लोग चलो मै आती हु
फिर दोनो भाई बाहर निकल गये ।
जारी रहेगी



























































