Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 35 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 181 ा

लेखक की जुबानी


शाम के 5 बज गये थे , सारे लोग तैयार होकर नये नये ड्रेस मे तस्वीरें निकलवा रहे थे ।

रंगीलाल ने सभी gents के लिए आज मेहन्दी पर पहनने के लिए खास कुर्ता सेट मगवाया था और बारी बारी से सबको बाट रहा था

रंगीलाल उपर के कमरे मे राहुल और उसके पापा को उनका कपड़ा देके जीने की ओर लौट रहा था कि तभी उसकी नजर जीने से उपर आती शालिनी पर गयी ।





शालिनी का पल्लू उसके सीने से हट चुका था , पिन की वजह से अटका हुआ था और ब्लाऊज मे कैद उसकी चुचिया उछल रही थी

रन्गीलाल शालिनी को ऐसे देखा वही रुक गया और शालिनी उसके पास आकर रुकी तो उसने रन्गीलाल की आंखो मे देखा जो उसको छातियों को निहार रहा था ।

शालिनी ने झट से अपना पल्लू खिंच कर सीने के उपर किया और मुस्कुरा कर रन्गीलाल को देखा । फिर अपनी जुल्फो को कानो मे फसाते हुए साइड से निकल कर शर्माती हुई सोनल के कमरे मे निकल गयी ।

वही रन्गीलाल ने गरदन घुमा कर उसको देखा फिर निचे जाने के बजाय वही हाल मे सोफे पर बैठ गया ।

जहाँ पहले से ही शाकुंतला , विमला रजनी बैठे थे और उनसे बाते करने लगा ।

वही राहुल अनुज और विमला का बेटा मनोज डीजे पर चलाने के लिए भोजपुरी गानो की लिस्ट खोज रहे थे ।

राज और कमलनाथ भी साथ मे तैयार होकर कमरे से बाहर निकल रहे थे कि सामने गेस्ट रूम से शिला एक स्लिवलेस प्लाजो सूट मे तैयार होकर बाहर निकली , उसने एक नेट वाला दुपट्टा साइड से ले रखा था और उसके मोटे मोटे चुचे कसे हुए उभरे थे ।

कुल्हे पर कुरती उठी हुई थि और पलाजो मे जान्घे कसी हुई थी ।





शिला की नजरे जैसे ही कमलनाथ से टकराई वो थोडा शरमाई और फिर इतराती हुई आगे बढ़ती हुई अपने बालो को पीछे से आगे करते हुए अपनी डीप गले वाली बैकलेस कुरती से अपनी गोरी चिकनी पीठ कर दिदार कराते हुए एक शरारत भरी मुस्कराहट के साथ आगे बढ़ गयी ।

राज उन दोनो की आंखे चार होते देख कर मस्ती मे - अरे वाह बुआ आज तो आप बड़ी प्यारी लग रही हो , क्यू मौसा जी ।

राज की बात सुन कर शिला ने नजरे उठा कर कमलनाथ को देखा तो कमलनाथ अटकते हुए स्वर मे - अह हा हा , बहुत अच्छी लग रही है आप

शिला शर्म से लाल होती हुई मुस्कुराई और फिर कमलनाथ ने सबको उपर चलने के लिए बोला ।

कुछ ही देर मे मेहंदी का कार्यकर्म होने लगा , अब ये सब ले देके था औरतो वाला ही प्रोग्राम तो ऐसे मे मर्दो के लिए बोरियत ही था ।

वही जंगी-रंगी दोनो भाईयो मे अपनी प्लानिंग के लिए आंखो से इशारेबाजी चल रही थी ।

कि अभी यहा मेहंदी का प्रोग्राम हो रहा है घन्टे स्वा घन्टे का टाईम है थोडा मूड बना ही लिया जाये ।

रंगी अंगड़ाई लेते हुए उठा और जंगी से बोला - छोटे जरा आओ थोडा काम है तुम्से और फिर जंगी भी निकल गया उसके साथ निचे ,

हसी ठिठौलि मे वय्स्त महिलाए और उनको घुरते लौंडो के बीच एक अकेला मर्द कमलनाथ ।

निशा की गुपचुप निगाहे कमलनाथ को बिच बिच मे देख रही थी और वो ऐसे जगह बैठी थी कि उसकी गुदाज जांघ और आधा चुतड उसकी लेगी से साफ साफ झलके ।

मगर कमलनाथ और शिला की अपनी इशारेबाजी चल रही थी ,

वही राज और रीना

भी आपस मे मुस्कुराहटे पास किये जा रहे थे ।

रन्गी जंगी दोनो निचे के कमरे मे आये और फिर जो जो जरुरी समान था सब एक झोले मे लेके फटाफट घर बाहर निकल गये इस बात से बेखबर कि रज्जो उनका पीछा करते हुए जीने तक आई थी

जैसे ही उसने दोनो को घर से बाहर जाते देखा तो उसे अटपटा लगा कि इस वक़्त ये लोग कहा जा रहे है ।

फिर वो पीछे पीछे मेन गेट तक और देखा तो वो लोग बगल मे चंदू के घर मे घुसरहे थे ।

रज्जो को लगा कि शायद कुछ काम हो क्योकि उस घर मे भी दहेज एवं रसोई का काफी सारा रखा हुआ था तो वो वापस उपर चली गयी ।

वही रन्गी और जंगी दरवाजा भीड़का कर जीने की सबसे उपर वाली चौड़ी सीढि जो दरवाजे से लग कर थी वही आसान जमा लिये ।



अमन के घर



हाल मे सारे लोग एक साथ थे और कल हल्दी के प्रोग्राम पर चर्चा हो रही थी ।

शाम का समय हो गया था और ममता सबको चाय दे रही थी ।

जैसे ही वो भोला को चाय दी दोनो मुस्कुरा दिये ।

फिर वो किनारे खड़ी हो गयी और तभी भोला ने आंखो से इशारा किया और अपने जांघो पर उंगलियाँ पेन की तरह चलाते हुए ममता से इशारा किया कि डायरी लिख दिया है पढ लेना

ममता इतराते हुए मुस्कुराने लगी और उसकी बेचैनी बढने लगी कि क्या लिखा होगा उसके नंदोई ने ।

उसके पाव कांप रहे थे , रोम रोम सिहर रहा था , उसी सिहरन ने उसके चुचे उठाने शुरु कर दिये थे

आखिरकार ममता से रहा नही गया और वो चाय की ट्रे लेके किचन ने गयी और उसने गटागट एक गिलास पानी गले मे उतारा और अपनी उफनाती सासो को थामने लगी ।

एक घबराहट और उत्सुकता ने घर कर लिया था उसको , बेचैनी और उतावलापन उसके चेहरे से साफ पता चल रहे थे ।

कलेजे की धकधक उसके चेहरे पर मुस्कान ला रही थी और वो एक गहरी आह भरती हुई चुपचाप अपने कमरे मे चली गई

उसने आस पास देखा तो उसको तकिये के निचे वो डायरी मिली और उसने झटपट से दरवाजा भीड़काया फिर सर सर पन्ने उलटने शुरु किये ।

आखिर से दो पन्नो से पहले उसको कुछ लिखा मिला , उसने आंख बन्द कर अपने दिल को थामती हुई एक ठंडी सास ली और फिर डायरी मे देखा ।

कुछ शायरी से शुरुवात की थी भोला ने

कुछ आश रखने की हिम्मत कर रहा हु

बोलो पुरा करोगी क्या ?

कुछ कहने की चाहत रख रहा हु

बोलो सुनोगी क्या ?

आज रात मै इंतजार करूंगा बाल्किनी मे

बोलो आओगी क्या ?

शायरी पढ कर ममता हसने लगी और उसने आगे पढना शुरु किया

गर मंजूर हो दोस्ती का ये इकरार

तो पहन के आना सिर्फ़ सलवार

दोस्ती की कसम है तुम्हे , मत करना मुझे सैंटी

गुजारिश है तुमसे ना ब्रा पहनना और ना पैंटी

ममता इस कल्पना से कि बिना ब्रा पैंटी के सिर्फ सूट सलवार मे नंदोई के सामने जाऊंगी तो , हाय हाय ये मै क्या सोच रही हु धत्त ये नंदोई जी भी ना

फिर वो आगे पढती है

अब इस बात से इंकार ना करना कि तुम्हे भनक नही मेरे इरादो का

कितनी ठोकरे तो खा चुकी हो आज मेरे जज्बातों का

ये लाईन पढते ही ममता को वो पल याद आया जब भोला उसके उपर चढ कर उसकी चुत पर लण्ड से ठोकर मार रहा था , वो याद करते ही ममता की चुत पनियाने लगी ।

फिर उसने आखिर के दो लाईन पढे

कहने को बहुत कुछ है मगर ये कलम बहुत छोटी है

आपके दरखक्तों पर हम अपनी कलम चलायेंगे

ममता - धत्त ये जीजा भी ना , उफ्फ्फ गर्म कर दिया मुझे । क्या मुझे भी बदले मे कुछ लिखना चाहिये । अभी तो 5 बजे है और 11 बजने मे तो काफी वक़्त है ,क्यू ना इसी डायरी मे जवाब लिख कर उन्हे भी थोडा परेशान करू ।हिहिहिही


राज के घर



इधर मेहंदी के रस्म हो रही थी वही राज रिना को डांस करने के लिए आने को इशारा कर रहा था

बदले मे रीना मुस्कुरा कर हामी भर रही थी तो राज भागते हुए रिना के पास गया और उसको पकड कर खिंचते हुए हाल के बीच मे ले आया

रिना खिलखिलाकर हस रही थी और बाकी सारे लोग भी हस रहे थे फिर शुरु हुआई देवार भौजाई के ठूमके , आंखो से आंखे टकराई और होठ भी कुछ मनशा लिये मुस्करा रहे थे ।

वही बाकी की लौडो की गैंग ( अनुज , राहुल , मनोज , चंदू ) सिटिया बजा कर शोर कर रहे थे ।

रीना शर्मा कर हस्ती हुई वापस औरतो मे चली गयी ।

इधर निशा काफी देर से देख रही थी कि कमलनाथ का ध्यान उस्की ओर कम और शिला की ओर ज्यादा था ।

उसे भी भनक सी लग रही थी कि दोनो मे कुछ आंख मिचौली चल रही है ।

निशा ने रागिनी को पकड कर खींचा और हाल मे लेके आते हुए डांस करने लगी , रागिनी भी हस हस ठुमके लगा रही थी मगर जल्द ही वो हट गयी और





निशा अकेले ही कमलनाथ की ओर खास करके अपनी गाड़ करके झटके लगाते हुए नाचने लगी , उसकी कुर्ती उठती तो कमलनाथ ने निशा के लेगी से झांकते उसकी पैंटी के भी दिदार हो जाते ।

कमलनाथ का ध्यान अब निशा ने खिच ही लिया और डांस खतम कर निशा बार बार बस कमलनाथ की ओर ही देखे जा रही थी ।

कमलनाथ को थोडा अजीब लगा कि वो उसे क्यू देख रही है , और कमलनाथ उस्से नजरे चुराने लगा । अब तो उसको ये दिक्कत होने लगी कि कही वो शिला को ताडे तो उसकी चोरी पकड़ी ना जाये क्योकि निशा तो लगातार नजर जमाए हुए थी ।

सारे लोग इन्जाय कर रहे थे तो रागिनी ने बातो ही बातो मे पुछा - ये राज के पापा कहा गये अभी आये नही

शालिनी - हा जीजी निशा के पापा भी गये है साथ मे

रज्जो को भी लगा कि अब तो समय काफी हो गया क्या करने गये ये लोग अभी आये नही इसीलिए रज्जो उठ कर निकल गयी दोनो को बुलाने के लिए

चंदू के घर का दरवाजा भिड्का हुआ ही था , हल्का सा जोर और खुल गया

रज्जो गलियारे से होकर कमरे दर कमरे पार करती हुई आगे बढ़ रही थी और उसको दोनो भाईयों की खिलखिलाहट भरी हसी और बातो की गूंज आ रही थी ।

रज्जो जैसे ही सबसे पीछे आंगन मे पहुची तो उपर के जीने से आवाज आई जो जंगी की थी ।

जंगी- भैया सच सच बताओ ना रज्जो भाभी आपको कैसी लगती है

जन्गी का अपने भाई से यू सवाल पुछना रज्जो को थोडा खटका

रंगी - एकदम रसदार है रज्जो भाभी यार , मै तो शादी के समय से ही दीवाना हु

रज्जो ने जीने की ओर झाक कर देखा तो समझ गयी

दोनो भाई सिर्फ बनियान पहने दरवाजे पर बाहर की ओर मुह किये बैठे थे , उनके कुरते जीने की रेलिंग पर रखे हुए थे ।

रज्जो उनकी बाते सुनते हुए धीरे धीरे सीढिया चढने लगी ।

जन्गी - सच भैया , ये कमलनाथ भाई ने क्या किसमत पाई है ना , क्या मस्स्स्त गाड़ है भाभी के उह्ह्ह्ह मन करता है कि झुका के

जन्गी की बाते सुन्कर रज्जो के कान खडे हो गये और वो समझ गयी कि दोनो ड्रिंक किये हुए है

रंगी - हेईई जन्गीईई नहीईई भाभी है ना वो ऐसा नही बोल्ते

जंगी - स्स्स्सोरीईई भैयआआह

रंगी - सोरीई क्यू सॉरी क्यू , अरे रन्डी है एक नं की रंडी देखा नही साली गाड़ कैसे फैली हुई है

"खुब पेलवाति होगी आह्ह" , रंगी ने ग्लास गटकते हुए कहा ।

जन्गी ने भी सिप लेते हुए - हा भैया पता है मैने तो कल रात को ....।

रज्जो को लगा कही उस्का भेद खुल ना जाये और जंगी नशे मे कुछ बोल ना दे

इसीलिए वो पीछे से बोल पड़ी- हम्म्म तो क्या बैठ कर आप लोग मेरे बारे मे ये सब बाते कर रहे है ।

रज्जो की तेज आवाज सुनते ही रंगी जंगी दोनो ने पलट कर देखा तो दोनो की आधी शराब वैसे ही गायब हो गयी और वो फौरान खडे हो गये - भाभीईई जिजीईई

जैसे ही वो खडे हुए उन्के पाजामे मे तना हुआ मुसल भी तम्बू बना कर रज्जो को निहार रहा था और रज्जो की नजर जैसे ही उन्पे गयी दोनो ने अपने पंजे से छिपाने लगे तो रज्जो की हसी छूट गयि ।

रज्जो - छीईई आप लोग मेरे बारे मे ऐसी बाते करते है क्या मै आपको सड़क छाप वो लगती हु , हुउह्ह

रंगी और जंगी दोनो सफाई देते हुए - नही नही जिजीई भाभीईई हमारा वो मतलब नही था , सॉरी ना प्लीज

रज्जो तुन्क कर - हुह , रहने दो सुन लिया मैने सब

ये बोल कर रज्जो निचे जाने लगी तो रंगी - ये भाई रोक रोक जिजीई को

जन्गीलाल सरपट रज्जो के पीछे भागा और आन्गन मे रज्जो की कलाई पकड ली तो रज्जो छुड़ाने की कोसिस करती है इतने मे रंगी भी आ जाता है

रंगी - सॉरी ना जीजी , मान जाओ ना प्लीज

जन्गी - हा भाभी प्लीज , देखीये ये सब शुरु भी इसीलिए हुआ कि आपकी गलती थी

रज्जो ठहर कर - अब मेरी क्या गलती

जंगी - आपको तो पता ही है ना कल रात मे जब मैने आपको खाना के लिए बुलाने आया था तो

इस्से पहले जन्गी अपनी बात पूरी करता उस्से पहले रज्जो ने अपनी आंख दिखाई उसको

जंगी हड़ब्डा कर बात घुमाता हुआ - और आज सुबह मे जब हम नासता कर रहे थे तो हमे आपकी वो दिख गयी और फिर

फिर जंगीलाल ने सारि बाते बताई कि कैसे दोनो भाई बीते लमहे ताज़ा करने के चक्कर मे थे

जंगी - मगर सुबह का वो झलक बार बार मेरे जहन में था और बस मन कर रहा था कि

रज्जो - क्या मन कर रहा था

जन्गी - नही भाभी आप बुरा मान जाओगे

रज्जो तेज अवाज मे - मैने कहा बताओ

रंगी ने इशारे से जंगी को बात रखने को कहा

जन्गी - वो भाभी जबसे सुबह से आपकी चिकनी बुर देखी थी उसको चाटने का इतना मन हो रहा था , ऐसी फूली हुई लम्बी लकीरो वाली चुत मैने आज तक नही देखी थी और देखो ना तबसे मेरा मुसल भी नही बैठ रहा है ।

जन्गीलाल ने अपनी तारिफ सुनकर रज्जो मुस्कुराई जिसे रंगी ने पल भर की नजर मे भाप लिया और वो समझ गया कि रज्जो को इससे कोई फर्क नही पड रहा है क्योकि वो रज्जो के रग रग से वाक़िफ़ था ।

रज्जो - अब छोड़ो मुझे और ये सब क्या बाते कर रहे हो आप लोग । शर्म नही आती एक पराई औरत के साथ ये सब छीई

रन्गी मुस्कुरा कर - जीजी आप पराई कहा हो आप तो अपने हो और जमाई की तो सारी गल्तियां माफ की जाती है ना

रज्जो रंगी की आंख मे झाक चुकी थी और वो मुस्कुरा कर - ऐसे कैसे माफी मिल जायेगी , आप दोनो को सजा मिलेगी ।

जंगी - क्या सजा !!

रज्जो - हम्म्म्म और क्या ,

मुझे भी हिसाब बराबर करना है

जंगी - वो कैसे ?

रज्जो - मै भी आप दोनो को गाली दूँगी और आपके प्राइवेट पार्ट देखूँगी । तब ना होग हिसाब बराबर

रज्जो की बात सुनते ही जन्गी खिल उठा और अपने पजामे का नाड़ा खोलते हुए अपना मुसल बाहर निकाल कर - बस इतनी सी बात , ये लो

जन्गी ने बड़ी बेशर्मी से अपना तनतनाया हुआ लण्ड बाहर निकाल दिया

रज्जो - साले भडवे रंडीबाज , बहिनचोद

जंगी चौक कर रज्जो को देखा

रज्जो - अरे हिसाब बराबर कर रही हु ना

जन्गी - ओह्ह

फिर रज्जो रंगी की ओर घूमी तो वो भी फटाक से अपना मुसल निकाल कर खड़ा हुआ और रज्जो ने वही गाली दुहराई

रज्जो - चलो हो गया अब चलते है , सार लोग खोज रहे है आपको

रंगी - अरे अभी कहा हुआ

रज्जो - तो अब क्या बाकी है ?

रन्गी - क्या जीजी हमने तो उसकी तारिफ भी की थी ना ...तो

रज्जो रंगी की बात सुनकर हस दी - धत्त , ये भी बोलना पडेगा

जंगी हस्ते हुए - हिसाब तभी ना बराबर होगा भाभी

रज्जो ने बड़े गौर से दोनो के लाल सुपाडे वाले लण्ड को निहार रही थी जो दोनो के हाथो मे कैद थे ।

रज्जो कुछ बोलने को हुई मगर उसकी हसी छूट गयी

रंगी - अरे बोलो ना जीजी

रज्जो नजरे गडाये तेज धडकते दिल के साथ - उफ्फ्फ क्या मसत मस्त लण्ड है जी कर रहा है कि अभी चुस चुस कर लाल कर दू और

रज्जो की बातें सुनते हुए दोनो भाईयो के जिस्म मे सुरसूरी सी हुई और दोनो के लण्ड पुरे फौलादी हो गये ।

दोनो अपना मुसल सहलाते हुए - सीईई और क्या भाभीई/जिजीई

रज्जो अपने बेकाबू होते दिल को मह्सूस करती हुई अपनी उफ्नाती सासो के साथ एक आह भरती हुई - और इनको उसी रसिले चुत मे भर लू जिसको आप दोनो चुसना चाहते थे

रज्जो की बाते सुन्कर दोनो भाई के दिल की धड़कने तेज हो गयी और दोनो सिस्कते हुए तेजी से अपना मुसल मसल रहे थे और रज्जो की निगाहे वही अटकी थी

दोनो भाईयो ने एक दुसरे को खुमारी भरे नजरो से देखा और रज्जो के करिब आ गये

रज्जो की सासे और चढने लगी , वो नजरे घुमा कर दोनो तरफ खडे दोनो भाईयो की आंखो मे मदहोश नजरो से देख रही थी ।

" भाभीईई ",जन्गी की गरम सासों से भरी आवाज रज्जो के गरदन से टकराई और वो आंखे बन्द कर सिहर उठी ।

वही रंगी ने रज्जो का एक हाथ पकड़ा और अपने मुसल पर रख दिया , जिससे रज्जो ने अपनी आंखे भीच कर सीने मे सासो को भर लिया ।

जन्गी ने वही किया और इस बार रज्जो ने अपने होठ भी दबा लिये ।

दोनो भाईयो ने एक साथ उसके गरदन को चूमा और दोनो के एक एक हाथ उसकी उभरी हुई चरबीदार गाड़ पर फिराने लगे ।

रज्जो ने दोनो के लण्ड को मुठ्ठि मे भर लिया दोनो भाई भी सिहर उठे ।

रज्जो ने उनकी लिंग की चमडीया खिस्कानी शुरु की और रज्जो के गर्म हाथो की मुलायम हथेली ने उन्हे मदहोश कर दिया ।

रज्जो अब आंखे खोल के दोनो भाईयो के चेहरे पढते हुए उन्के लण्ड को भीच रही थी और दोनो को भनक भी नही लगी कि कब रज्जो निचे बैठ गयी , सबसे पहले जंगी का कालेज ध्क्क हुआ जब उसको अपने लण्ड की सतह पर नरम ठंडे होठो का स्पर्श मिला

वो एडिया उचका कर सिहरा - उह्ह्ह भाभीईई उम्म्ंम्ं सीईई अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह





रज्जो ने कुछ देर बाद रंगी का लण्ड मुह मे लेके चूसने लगी ।तो रंगी ने भी आहे भरनी शुरु कर दी ।

जंगी - ऊहह भाभीईई क्या मस्त चुस्ती हो जब आपके उपर के होठ ऐसे है तो निचे के होठ कितने नरम होंगे

रज्जो मुह से लण्ड निकालती हुई - वो आप खुद चुस के देख लो ना भाई साहब

ये बोल के रज्जो उठकर अपना साड़ी पेतिकोट एक साथ उठाते हुए आंगन की एक चौकी पर लेट कर जान्घे खोल दी - आह्ह आओ ना भाई साहब चुस के देखो ना

जन्गी मुस्कुरा कर रंगी की ओर इजाजत भरी नजरो से देखता है तो रंगी भी उसको हामी भर कर अपना मुसल मसलने लगता है ।

जन्गी फौरन घूटने के बल होकर अपना मुह रज्जो की बुर मे दे देता है और रज्जो आहे भरने लगती है - उह्ह्ह माह्ह्ह सीईई ऐसे हीई उह्ह्ह्ह उम्म्ं और चुसो भाईसाहब उह्ह्म्ंं

जंगी अपने होठो से रज्जो के बुर के फाके निचोडते हुए जीभ से लकीर चाट रहा था और रज्जो उसकी थूथ को अपने फुले हुए भोस्ड़े पर रगड़ रही थी - उह्ह्ह और चुसो उह्ह्ह ऊहह सीईई ऐसे ही उम्म्ंम माह्ह्ह

रंगी वही खड़ा खड़ा मुसल मसल रहा था और उससे रहा नही गया वो अपना लण्ड थामे चौकी पर चढ गया ।

रज्जो ने देर ना करते हुए उस्का लण्ड मुह मे भर लिया और रंगीलाल उसके ब्लाउज खोलकर उसकी चुचिया आजाद करके उन्हे मसलने लगा

रंगी- भाई सारा माल तू ही खा जायेगा क्याह्ह उह्ह्ब

जंगी मुह हटा कर देखा कि उसके भैया ने रज्जो के मुह मे लण्ड पेल रखा और चुचिया नंगी खुली हिल रही है ।

जंगी खड़ा होकर अपना मुसल मसलते हुए - आह्ह भैया इस रंडी की बुर बहुत रस है उह्ह्ह सच मे बहुत गर्म माल है

जंगी की बात सुनकर रज्जो मुह से लण्ड निकालती हुई - तो चोद ना साले रन्डीबाज पेल दे ना मुझे उह्ह्ह बहिन ंचोद

जन्गी अपना लण्ड उसके चुत पर रगड़ता हुआ - क्या बोली मादरचोद हाह

रज्जो उसकी आंखो मे देखते हुए साफ साफ लहजे मे झल्ला कर बोली - मैने कहा पेल ना बहिनचोद

बहिनचोद शब्द सुनते ही जंगी को सुरुर सा छा गया और वो कस के एक ही झटके आधे ए ज्यादा लण्ड घुसा दिया और और रज्जो के गले मे आवाज घूंट कर रह गयी क्योकि रंगि ने पहले ही उसका मुह भर दिया





जंगी हच्क ह्च्क कर रज्जो की रस फेकती चुत मे लण्ड पुरा जोर देके जड़ तक घुसाये हुए था - लेझ्ह साली रन्डी अह्ह्ह चुदक्क्ड उह्ह्ह लेह्ह्ह क्या मस्त बुर है तेरी उह्ह्ह

इधर जंगी कस कस के पेल रहा था वही रंगी का मुसल पूरी तरह फौलादी हुआ जा रहा था और वो रज्जो के मुह से लण्ड निकाल कर जंगी की ओर लाचारी भरी नजरो से देख कर हिला रहा था कि एक बार उसका छोटा भाई उसे भी मौका देदे

जंगी की नजर जब अपने भैया पर गयी तो उसने मुस्कराते हुए अपनी पोस्ट खाली कर दी फिर क्या रंगी ने

खडे होकर वही पास रखे सोफे पर अपना आसान टिका लिया और रज्जो भी खडी होकर अपना साड़ी पेतिकोट निकाल कर रन्गीलाल पर सवार हो गयी ।

लण्ड को चुत मे लगाते ही वो सरक कर भीतर घुस गया और बाकी का काम रज्जो ने खुद करने लगी ।

रन्गीलाल उसके नरम चुतडो को सहलाते हुए उसके चुचो को मुह मे भर कर चुसने लगा और रज्जो सिसकिया लेते हुए उसके लण्ड को अपनी बुर मे भरे हुए गाड़ घिसने लगी





रज्जो की चिकनी फैली हुई गाड़ को बड़ी अदा से लण्ड पर आगे पीछे होते हुए देख जंगीलाल वही चौकी पर बैठा हुआ अपना मुसल मसलने लगा ।

रज्जो जब भी पीछे होती उसकी गाड के पाटे खुल जाते और उसके गाड़ की भरी सुराख ही हल्की झलक उसे मिलती और उसका मुह लार छोडता ।

वही रंगीलाल निचे से झटके लगाता हुआ अब गति और बढा चुका था जिससे रज्जो की चिखे कमरे मे गूंज रही थी ।

रज्जो की कामुक चिख और सिसकियाँ जंगीलाल को अब और बेसबर किये जा रही थी वो उसकी चिखो को और बढ़ाना चाह रहा था और वो अपनी जगह से उठकर रज्जो के पास पहुचा ।

उस्ने रज्जो की चर्बीदार गाड़ की लकीरो मे हाथ लगाया तो रज्जो सिसकी और गरदन घुमा कर मुस्कुराते हुए जन्गीलाल को देखा ,वो समझ रही थी कि बस जंगी को उकसाने की देर है और वो अपना लण्ड उसकी गाड़ मे घुसाने से बाज नही आयेगा ।

रज्जो - क्या हुआ बहिनचोद ऊहह सीईई अह्ह्ह ऐसे क्या देख रहा है कभी गाड़ नही देखी क्या उम्म्ंम सुईई आअहह

जंगी मे चट्ट से उसके गाड़ पर चपत लगाई और उसके नरम नरम पाटो को फैलाते हुए - बहुत देखी है साली लेकिन तेरी जैसी चुद्क्क्ड की गाड़ पहली बार देखी है , उह्ह्ह कितना नरम है उह्ह्ह

रज्जो - कभी अपने दीदी का भी छू लेना , मुझसे भी नरम है अह्ह्ज साले क्या कर रहा है बहिनचौद उह्ह्ज

जंगीलाल सुखा सुखा ही लण्ड उसके गाड़ के मुहाने लगा कर धकेलने लगा

जंगी उसके गाद के सुराख पर थुक कर अपने सुपाड़े से उसको छेद पर फैलाते हुए हल्का सा जोर देके पचकक्क से लण्ड को भीतर घुसेडा - अह्ह्ह क्या कसी हुईई गाड़ है भाभी उह्ह्ह्ह उम्म्ंम कितनी गर्मी है भीतर है उह्ह्ह ओह्ह्ह्ह





रज्जो की तो आंखे उलटने लगी , उपर निचे दोनो तरफ दोनो भाइयो ने अप्ने मुस्तैद मसलो को उसके दोनो छेड़ो मे भर दिया था ,

जन्गीलाल हल्का हल्का झटका देता हुआ - आह्ह लेह्ह पुरा लेह्ह्ह ऊहह भैया आअप भी पेलो ऊहह मस्त चुदाई होगी

रंगीलाल - हा भाई घुसा घुसा और कस कस फ़ाड इसकी गाड़ उह्ह्ह क्या मस्त चुदवाती है आज तो दिन ही बन गया उह्ह्ह जिजीईई उम्म्ं

रज्जो - ह्म्म्ं और पेलो और घुसाआअऊओ उह्ह्ह माह्ह दिखाओ ना कितना जोर है तू भोसडीवालो मे उह्ह्ह पेलो ना सालो बहिन चोदो

रंगीलाल ने उसके कमर को थाम कर तड़तड़ कमर उठा कर लण्ड उसकी चुत मे डालने लगा और जंगी भी उसके कन्धे पकड कर गाड़ मे पुरा लण्ड भर भर के पेले जा रहा था ।

रज्जो भर भर दोनो को गालिया बकते हुए उन्हे चढा रही थी और दोनो भाई बस गालीया सुनकर बहुत ऊततेजित होकर रज्जो को पेले जा रहे थे ।

रज्जो की चुत हलाहल तीसरी बार रस छोड चुकी थी मगर दोनो भाई अभी तक लगे हुए थे ,

रज्जो - अरे कम होगा तुम्हारा उह्ह्ज माह्ह फाड़ कर रख दिये हो उह्ह्ह

जन्गिलाल उसके लाल हो चुके गाड़ के पाटो को मसलता हुआ

जंगीलाल - क्यू भाभीई अभी से थक गयी ,देख लिया हमारे खुन का जोर उम्म्ंम

रज्जो ने अपनी आन्खे महिन की और अपने दोनो छेदो के छल्ले सिकोड़कर टाइट कर - अच्छा ऐसी बात है अब पेलो देखू तो

एक बार फिर दोनो छेद पूरी तरह कस चुके थे और दोनो घिसावट मे तंगी होने लगी , दोनो के सुपाड़े पर जोर पड़ने लगा और जंगी की नसे अब ये रगड़ बर्दाश्त ना कर सकी और उसने कुछ ही झटको मे अपना फव्वारे को छोड़ दिया ,

रज्जो ने गाड़ की जड़ मे जन्गी के झड़ते लण्ड के फुलते सुपाड़े की मोटाई महसूस की और एक बार फिर से वो झड़ने लगी और वही नीचे गर्म लावे का स्पर्श पाते ही रंगीलाल भी भलभला कर झटके खाने लगा

रज्जो ने दोनो के लण्ड को भर पुर निचोड़ा और फिर अलग होकर उन्हे साफ भी किया ।

रज्जो - आप लोगो का तो हो गया अब ये साफ कहा करू ,

रंगी अपना जांघिया चढाता हुआ - आयिए जीजी मै साफ करवा देता हू

ये बोल कर वो रज्जो को वही जीने के निचे लगे पानी के मोटर के पास ले जाता है

रंगी - जीजी आप झुक कर खडे हो जाओ , मै पानी डालता हु

रज्जो हस कर झुक कर खडी हो गयी और रंगी ने मोटर चालू कर पानी की पाइप की तेज धार के उसके चुतडो पर मारी की रज्जो गनगना गयी - आह्ह आऊच ऊहह आराम से ना

रंगी - अरे जीजी वो आप अपना फैलाओ ना तब तो धुलेगा

रज्जो - क्या फैलाऊ

जंगी - अपनी गाड़ फैलाओ ना भाभीईई

रज्जो शर्मा कर हस्ते हुए - धत्त

फिर उसने झुक कर वैसे अपने गाड़ के पाटे फैलाये और रंगी को उसके भूरे गाड़ से रिसता हुआ सफेद वीर्य दिखा ।





कुछ पल को रंगी कोअजीब सा लगा मगर जैसे पानी की मोटी धार उसपर गयी वो एक ही पल मे साफ हो गया और रंगी सीधा रज्जो की गाड के सुराख पर धार मारने लगा , फिर उपर निचे करते हुए उसके चुत के फाको को भी धूलने लगा

ये सब देख कर जंगी का लण्ड एक बार फिर से कसने लगा ।

उससे रहा नही गया और वो आगे बढ़ते हुए अपना सुपाडा खोलकर एक बार फिर से अपना लण्ड रज्जो की गाड़ मे भर दिया





रज्जो अपने हाथ घुटने पर रख कर झुकी हुई थी , गाड़ मे लण्ड जाते ही उसकी सिकुडी हुई गाड़ के सुराख फैलने लगे और लण्ड पुरे तेजी से भीतर घुसता चला गया ।

रज्जो - उह्ह्ह भाईसाहब अभी तो किया था नाअह्ह उह्ह्ह माअह्ह

जन्गी कस कस के गाड़ मे झटके लगाता हुआ - ओह्ह भाभीईई आपकी गाड़ इत्नी मस्त है किहहह ऊहह मजा आ रहा है कितनी गर्मी है भीतर उह्ह्ह लग रहा है पिघल ही जायेगा

ये सब देख कर रंगी का लण्ड भी फौलादी होने लगा और वो भी अपना मुसल निकाल कर हिलाने लगा

रज्जो उसको देख कर चेहरे भिच्कर आहे भरते हुए - मै नही लेने वाली ,अह्ह्ह माअह्ह्ह जाओ अपनी बहिन के भोसड़े मे घुसाओ ओह्ह्ह मह्ह्ह सीईई उह्ह्ह उह्ह्ह जल्दी करो भाई साहब

रंगी का मुह उतर गया और

जन्गीलाल रज्जो की कसी हुई गाड मे जल्दी जल्दी पेलने लगा और कुछ ही मिनटो मे एक बार फिर से उसकी गाड़ को अपने वीर्य से भर दिया ।

रज्जो पास के दिवाल से सहारा लेते हुए अपनी कमर और पैर सीधा करती है - आह्ह माह्ह्ह तोड कर रख दिया तुम दोनो ने ऊहह सीईईई

रज्जो की बाते सुनकर दोनो भाई हस दिये

रज्जो - अरे अब धुला दो ना , हो गया काम तो सरक रहे हो

जन्गी आगे बढ कर - अरे आओ भाभी धुला देता हु

इस बार जंगी ने खुद पाइप से पानी डाल कर हाथ लगा कर रज्जो की गाड़ साफ की और फिर तैयार होने लगा ।

रंगी - भाभी हम लोग निकल रहे है आप तैयार होकर आईये ऐसे साथ मे निकलना उचित नही है

रज्जो कराह भरी आवाज मे अपने खुले हुए चुतड को चौकी पर टिकाते हुए - आप लोग चलो मै आती हु

फिर दोनो भाई बाहर निकल गये ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 181 बी



राज की जुबानी


घर का माहौल चहल पहल भरा हुआ था और दीदी के हाथों पर मेहंदी लगाई जा रही थी ।

लगाने वाली भी कौन "काजल" भाभी ?

एक सर्वगुण संपन्न वही बहु , छरहरी सी पिला ब्लाउज और हरि सिफान की साडी, चिकनी गुदाज कमर और पेट दिख रहे थे ।

मेरा भी मन ललचाया और लपक कर थोडा समय उनके पास बैठ गया ।

गजब की कलाकारी चल रही थी दीदी के पैरो मे

उसके तुरंत बगल मे रीना भाभी भी बैठी थी जो मम्मी के हाथ पर मेहंदी लगा रही थी ।

मै - भाभीईई

काजल और रीना दोनो ने एक साथ हम्म्म किया और सब हस दिये

काजल - हेई बाबू जरा हटियेगा यहा से मेहँदी खराब हो जायेगी बहिनी की

मै कुछ नहीं बोला बस





धीरे से उनकी चिकनी कमर पर एक ऊँगली रेंगा कर उठ गया और काजल सिस्क कर मुह बनाते हुए मुझे देखी और मै हस्ता हुआ रीना भाभी के बगल मे गया ।

रीना भाभी ने मेरी शरारत समझ गयी लेकिन मम्मी के नाते चुप रही ।

मै - अरे भाभी हमे भी लगाओ ना मेहंदी

रीना तुनक कर - जाओ अपने भौजी से लगववाओ

रीना की बात सुनके मम्मी भी हस दी

मै हौले से मम्मी से छिप कर रीना के कमर पर भी उंगली घुमाई और धीरे से उसके कान मे - आपको पसंद नही आया ना जब मैने उनको ऐसे छुआ तो

रीना अगले ही हस पड़ी और लाज के मारे मुह फेर ली ।

मम्मी - क्या तु परेशान कर रहा है , बैठ जा किनारे अभी बहु भी ल्गा देगी तुझे

मै वहा से खसकता हुआ बाकी महिला मंडली की ओर घूम गया जहा चाची , विमला , रजनी और शकुन्तला की मंडली जमी थी ।

वहा चाची रजनी दीदी के हाथो पर मेहंदी रख रही थी और विमला शकुन्तला बस आपस मे बाते कर रहे थे ।

उन्हे मेहंदी नही रखवाणी थी ।

मै - अरे मौसी और ताई आप लोगो को मै लगा दू क्या मेहंदी

विमला - धत्त बदमाश , नही मै नही लगा सकती ना मेहंदी

मै समझ गया कि कोमल के पापा तो है नही तो उनकी बात जायज है मगर शकुन्तला ताई क्यू नही लगा रही है ।

मै - अरे ताई आप क्यू नही लगवा रही हो

शकुन्तला थोडा हिचक रही थी - वो बस ऐसे ही ,छोड़ ना तु

मै - ऐसे कैसे आपको भी लगवाना पड़ेगा आईये इधर मै लगा देता हु

शकुन्तला - अह बेटा रहने दे जिद नही करते ,

मै - अरे सारे लोग लगवा रहे है आप क्यू नही ?

शकुन्तला- जाने दे ना बेटा तु नही सम्झेगा

मै - कोई एलर्जी है क्या आपको मेहंदी से , लेकिन ये तो नेचुरल होता है ना

शकुन्तला खीझ कर - तु नही समझेगा छोड जाने दे । मै घर जा रही हु

ये बोल कर शकुन्तला घर के लिए निकल गयी और मै विमला, चाची और रजनी दीदी सब एक दूसरे का मुह ताकते रह गये ।

मुझे कुछ सही नही लगा , बहुत कुछ पता तो नही था शकुन्तला के बारे मे मगर हा यहा चौराहे वाले घर पर पडोसीयो मे सबसे खास वही थी हमारे लिये ।

बात जो भी थी मगर उन्हे मनाना मेरी जिम्मेदारी थी ।

मगर पहले कभी भी मैने शकुन्तला का ऐसा व्यव्हार नही देखा था , शुरु से ही वो काफी मिलनसार महिला रही है हमारे यहा ।

मम्मी से उसकी बहुत जमती थी और ऐसे मे मुझे मम्मी की सलाह की जरूरत थी तो मैने इंतजार किया कि मम्मी की मेहंदी पूरी हो जाये ।

इधर मेरी खास सहेली मेरी रज्जो मौसी कही गायब थी , मैने मौसा से भी पूछा तो बोले निचे गयी होगी काम से

मगर वो कही नही दिखी ।

दिल बेचैन था मेरा और फिर मैने मम्मी के पास जाके साफ दिल से उनको बताया ।

वो थोड़ा चुप रही - और बोली तु जा और उनको बोल मैने बुलाया ।

मै उनकी बात सूनके सरपट भाग कर उनके घर गया ।

दो बार दरवाजा खटखटाया तब जाके शकुन्तला ने दरवाजा खोला और उसके सुजे हुए गाल और लाल हुई आंखे बयां कर रही थी कि वो कितना रोई थी ।

मै आवाक होकर - अरे ताई क्या हुआ ? आप ऐसे क्यू ? मेरी वजह से तो !!

शकुन्तला अपनी छलकती आंखे पोछती हुई - अरे नही बेटा ऐसी कोई बात नही है , आजा अन्दर आजा ।

मै उनके पीछे पीछे उनके कमरे मे गया - तो फिर आप ऐसे क्यू चली आई

शकुन्तला - कुछ नहि बेटा बस अच्छा नही लग रहा था

मै - अरे कितनी खुश तो थी आप , बस मेरी जिद की वजह से आप चली आई, आप मत लगवान मेहंदी लेकिन चलो आप मेरे साथ

शकुन्तला - नही बेटा मै नही जाउगी

मै - अरे आपकी बेस्ट फ्रेंड ने बोला है नही आयेगी तो उठा के लाना

शकुन्तला मेरी बात पर हस दी - तु उठाएगा मुझे

मै - हा तो कोसिस तो करूंगा ही , नही तो मौसी को बुला लाउन्गा वो उठा लेगी हिहिहिही देखा है ना मेरी पहलवान मौसी को

शकुन्त्ला हस कर बाहर निकली और बेसिन पर अपना मुह धूलने लगी

मै - अब मान भी जाओ ना ताई प्लीज

शकुंतला- अरे अब आ गयी हु घर और चलने के लिए फिर तैयार होना पड़ेगा कितना झंझट है

मै - अरे आप तो ऐसी ही हीरोइन लग रही हो , हिहिहीही चलो ना ताई प्लीज

शकुंतला हस कर - तु पिटेगा अब बहुत बोल रहा है

मै - आप मेरी मम्मी की बेस्ट फ्रेंड हो तो आप भी मेरी मम्मी जैसी हुई ना , हुई की नही

शकुन्तला मुस्कुरा कर - हम्म्म हुई

मै उनके पास जाकर उनका एक हाथ अपने हाथो मे लेके उनकी आंखो मे देख कर - और मुझसे यानी अपने बेटे से प्यार करती है ना

शकुन्तला - हम्म्म

"तो चलो ना प्लीज", मै जिद करते हुए उनके सीने से चिपक गया ।

पहले तो चौकी मगर मुझे बच्चो की तरह जिद करते देख कर हस कर जकड लिया ।

मै उनके सीने से चिपका हुआ - तो आप चल रहे हो ना

शकुन्तला हस कर - उठा कर ले चलेगा तब हिहिहिही

मै सीधा होकर - पक्का ना ?

शकुंतला को लगा मै मजाक कर रहा हु तो वो हस कर - हा पक्का ।

मै फौरन उनको बेड के पास लेके गया - आप इसके खडे हो जाओ और मेरी पीठ पर आजाना

शकुन्तला- धत्त नही , चल मै चल रही हु

मै - नही नही अब तो आपको आना ही पड़ेगा , एक बार ट्राई करते है ना प्लीज

शकुन्त्ला हस कर - अच्छा ठिक है लेकिन गिरायेगा नही ना

मै - पहले आओ तो

फिर शकुन्तला बेड पर खड़ा होकर पीछे से मेरे गले मे हाथ डाल कर मेरे उपर झोल गयी ।

उसके सुडौल कसे हुए चुचे मेरे पीठ पर चिपक गये और मै उसके मुलायम स्पर्श से ही हिल गया और हाथ पीछे ले जाकर उसकी जांघो को पकड कर अपने आगे करता हुआ झुक गया ।

फिर मैने अपने हाथ पीछे लेके उसके चुतडो को उठाते हुए - अरे ताई और उपर होवो ना सरक रही हो आप

शकुन्तला मेरे हाथो का स्पर्श अपने गाड़ पर पाकर थोडा सिहरि मगर वो चाह कर भी उपर नही जा पा रही थी , नतीजा उसके हाथो की पकड ढीली होने लगी और वो सरकने लगी

इस बीच उसकी चुचिया बुरी तरह से मेरे पीठ मे दरी जा रहि थी जिसकी घिसट शकुन्तला को भी हो रही और उससे जलन बर्दाश्त ना हुआ वो झटके से नीचे उतर कर अपनी चुचिया पकड कर उन्हे दबाते हुए घूम गयि ।

मैने उन्हे देखा तो वो मानो किसी तेज दर्द मे हो

मै उनकी ओर लपका - क्या हुआ ताई

शकुन्तला - अह्ह्ह वो पीठ पर दरकचा लग गया है जलन हो रहा है उह्ह्ह

मै हड़बड़ाता हुआ - अच्छा आप बैठो ये बताओ फ्रिज कहा है , मै बर्फ लाता हु

शकुन्तला - वोह्ह बहु के कमरे मे है , उपर जीने के बगल मे

मै - फ्रिज किचन मे रखना चाहिए ना

शकुन्तला - अरे किचन भी उपर ही है उसके कमरे के सामने

मै - अच्छा आप बैठो मै आता हु

फिर मै लपक कर उपर गया और जीने से सटा हुआ एक कमरा दिखा मैने फौरन अन्दर घुस कर फ्रिज खोला और फ्रिजर ने आइस क्यूब निकालने लगा कि मेरी नजर फ्रिजर मे रखे एक पिंक के बॉक्स पर गयी , जो थोड़ी मोटी और चौकोर थी

फ्रिजर मे प्लास्टिक बॉक्स रखने का मतलब मुझे समझ नही आया और चुकि ये काजल भाभी का कमरा था तो चुल और भी उठने लगी

मैने हाल डाल कर वो बॉक्स निकाल और खोल कर देखा तो - अरे बहिनचोद बवाल हिहिहिही





समाने उस प्लास्टिक डिब्बा मे एक कन्डोम मे पानी भर कर एक लण्ड की शेप मे बर्फ जमाया हुआ था और मुझे समझते देर नही लगी कि इतनी खतरनाक फैंटेसी इस घर मे किसकी है , वही जिसका कमरा था ।

मै मन मे बड़बड़ा- बहिनचोद ये औरत चीज क्या है बे , साला कैसी कैसी फैंटेसी । बर्फ का लण्ड लेती है , साला कितनी गर्मी है इसमे । वैसे तो बड़ी संस्कारी है । बेटा राज इसको तो नही छोड़ना है ।

मै अभी अपने ख्यालो मे गुम था कि निचे से ताई की आवाज आई और मै फटाक से आ गया ।

वही निचे का नजारा अलग ही था

शकुन्तला ताई तो अपना ब्लाऊज उतार चुकी थि और अपनी नंगी चुचियो के बाई निप्प्ल के पर ठंडी फुक मार रही थी ।





अभी उपर काजल भाभी के फैंटसी के बारे मे सोच कर लण्ड सुरसुरा रहा था कि ताई के खुले पपीते जैसे चुचे देख कर लण्ड पजामे मे तम्बू बना लिया , वो तो सुकर था कि कुर्ता ढीला और लम्बा था नही तो मेरी जवानी और नियत को ताई अच्छे से भाप लेती।

अब ताई ने थोडा अपना लिबरलपना दिखाया था तो मेरी भी बारी थी उनके विचारो को सम्मान दू और फिर सम्स्या पर ध्यान दू ।

मगर ये मै खुद को समझा सकता था मेरे बिना दिमाग वाले लौडे को थोड़ी

शकुन्तला सिस्कर कर - देख तेरी जिद की वजह से लाल हो गया ,

मै - सॉरी ताई , लाओ मै लगाता हु बर्फ

फिर मैने हौले से ताई के निप्प्ल पर फुक मारी जिससे वो सिहर गयि और पहली बार उन्हे अह्सास हुआ

कि वो किसी जवाँ मर्द के आगे अपने जोबन खोल चुकी थी , मगर मैने अपने चेहरे पर भीतर अठखेलियां खाते हवस को हावी नही होने दिया और सच मे मुझे भी थोड़ी फ़िकर सी हो रही थी ।





मैने हौले से उनके बाये चुचे को निचे से हथेली मे भरा और मेरे नरम हथेली के स्पर्श से वो सिसक पड़ी

मै उनके भिचे हुए चेहरे को देखा - क्या हुआ ताई दर्द हो रहा है ज्यादा ?

शकुन्तला ने फूलती सांसो से लाल हुए नथुनो मे अपनी सिहरन को दबाती हुई ना मे सर हिलाई , मगर उसके चेहरे पर कुछ अलग ही भाव थे । ठिक वैसे ही जैसे सुहागरात पर जब बीवी के स्तन को जब पति हाथो मे भरता और वो उसके जिस्म मे एक कपकपी सी होने लगती है वही हाल ताई का था ।

वो बुरी तरह से हिल रही थी , उनकी नाभि पैर चुचे सब काप रहे थे ।

मैने बिना कोई खास प्रतिक्रिया के निरापराध भाव से एक आईस क्यूब उठाया और उसको ताई के तने हुए निप्प्ल के काले घेरो पर हल्का सा स्पर्श कराया और वो चिहुक उठी

शकुन्तला हस कर - सीईईई अह्ह्ह बहुत ठंडा है

मै उनकी अवस्था पर मुस्कुराकर - अरे उसी के लिये लाया हु ना जलन सही कर देगा

फिर मैने वापस से ताई के निप्प्ल कर वो बर्फ का टुकडा रखा और उसे निप्प्ल के चारो को घुमाने लगा





ताई के भिगते निप्प्ल को देख कर मेरा लण्ड फौलादी हुआ जा रहा थ और मेरे मुह मे पानी भर रहा था

वही ताई आंखे बन्द कर अपना सिन उठाये गहरी आह भर रही थी ।

धीरे धीरे उनकी सासे मादक हुई जा रही थी और ऐसे मे मैने हौले से एक दुसरि आईस क्यूब को सीधा उन्के निप्प्ल के नोक पर रख दिया और वो एक गहरी सिसकी लेते हुए थरथराकर मेरे कन्धे को कस कर जकड ली ।

मै मुस्कुराया और उसी आइस क्यूब को ताई के निप्प्ल पर दबाया तो वो अपने होठ भीचने लगी , जान्घे आपस मे कसने लगी , साफ पता चल रहा था कि निप्प्ल की नसो से भीतर जा रही थी ठंडक कैसे उनकी चुत की गर्मी भडका रही थी ।

धीरे धीरे 5 मिंट के करीब हो गये और उन्होंने एक बार भी नही रोक मुझे और ना ही कोई अलग प्रतिक्रिया दी ।

मै समझ गया कि उन्हे मजा रहा है और मैने अब वो क्यूब उन्के गोरे चुचो पर रेंगाने लगा जिससे उनकी शारिर फिर से सिहरने लगा ।

मैने एक बार उनका मन परखना चाहा और बोला - ताई हो गया आराम

और उन्होने पहली बार अपनी मदहोश आंखे खोली और उन्के चेहरे पर एक मादक मुस्कान थी - उह्ह्ह क्या कह रहा है बेटा

मै मुस्कुरा कर - वो मै कह रहा था कि अगर बर्फ से ना ठिक हो तो एक और इलाज है मेरे पास , उससे पक्का सही हो जायेगा

बहती चुत और रोम रोम इस नये कामुक अहसास से रंगी हुई ताई ने मादकता भरी सास लेके मेरे नये करतब के लिए और भी उत्साही हो गयी - क्याअह्ह्ह बेटाअह्ह्ह बोल नाआ

मै थोडा हिचका और बोला - वो जब मै छोटा था तो अगर हाथ मे खरोच या ऐसे रगड़ हो जाती थी तो मम्मी वहा पर थुक लगाने के लिए बोलती थी और उससे तुरंत ही आराम मिल जाता था

जैसी ही मेरी बात खतम हुई मैने देखा कि ताई के चेहरे पर लाली और बढ गयी , उनकी जान्घे और कस्ने लगी और सीने मे सासे चढनी शुरु हो गयी ।

मै - तो लगा दू ताई

शकुन्तला ने मदहोशि मे मुस्करा कर हा मे गरदन हिलाया

मै समझ गया कि ताई पूरी तरह से गर्म हो चुकी है और मैने मुस्कुराकर अपने होठ सिकोड़ कर ढेर सारा थुक मुह मे बटोरा और फिर अपने उंगलियो पर लेके दो उंगलियो से ताई के निप्प्ल पर घुमाने लगा

ताई ने मजबूती से मेरे कंधो को जक्डा और मेरि रेंगती हुई गीली उंगलियो ने उनकी सिसकिया तेज कर दी - अह्ह्ह बेटाहहह उउह्ह्ह उम्म्ंम्ं

मैने उनके चेहरे के भाव पढता हुआ उन्के निप्प्ल पर उंगलियाँ रेगाता रहा

ताई अपनी आंखे बंद कर अपनी जान्घे कस्ती रही और सिसकिया लेती मैने सोचा क्यू ना इस मौके का फायदा लिया जाए और मैने वापस से एक आइस क्यूब उठाया और उसको निप्प्ल पर लगाया ।





ताई ने एक बार फिर से जोर की सिस्की लेके अपनी चुचिया उठाई और मैने जीभ निकालते हुए उनके निप्प्ल को मुह मे भर लिया ।

मेरे नरम होठो का स्पर्श पाते ही ताई पागल हो गयी और उम्होने मेरे सर को अपने सीने से दबाने लगी - अह्ह्ह बेटा उह्ह्ह सीईई उह्ह्ह

मैने मुह भर कर उन्के निप्प्ल चुबलाने लगा और ताई को मेरे नरम और गीले होठो का स्पर्श उत्तेजित कर गया और वो बैठे बैठे ही अपनी गाड़ उचकाने लगी फिर अपना हाथ तेजी से अपनी साडी के उपर रखकर जोर से अपनी चुत भीचती हुई झड़ने लगी - अह्ह्ह्ह माह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह आह्ह उह्हुंंंंं उम्म्ंम्ं

मै समझ गया कि ताई झड़ रही है और उनकी पकड मुझपे ढीली होने लगी थी फिर मै खुद से ही हट गया

सामने ताई मेरे सामने अपनी जांघो के बीच हाथ डाले हुए कस कर अपनी चुत दबाए हुए थी और झटके खा रही थी , उनकी आंखे उलट रही थी ।

मैने भी हौले से अपना मुसल मसल दिया और ताई के मजे लेता हुआ - क्या हुआ ताई आपको क्या हुआ

ताई की रस छोडती बुर की नसे जब थमी तो ताई की चेतना वापस आई और उन्होने पुरे होश मे मुझे सामने खड़ा पाया और अभी भी उनका हाथ चुत पर था ।

शकुन्तला मारे शर्म के हस दी और बिना कुछ बोले खडी होकर ब्लाऊज चढाने लगी ।

मै उनसे पुछता रहा है - आपको क्या हुआ था ताई

वो बस मुस्कुराती हुई बाथरूम मे घुस गयी ।

फिर जब वो बाहर आई तो आईने के सामने अपने बाल सवार रही थी । चुत बहाने के बाद से उनका चेहरा अब खिला खिला दिख रहा था ।

चेहरे पर मुस्कान भी थी मै पीछे गया और बोला - क्या हुआ ताई ठिक हो गया आपका

शकुन्तला इतराते हुए मुस्कुराकर आईने मे देखती हुई - क्यू तुझे नही पता , सारी डाक्टरि तो तू ही कर रहा था ना

उनकी बात सुनते ही मैने जितनी भी कोसिस करके खुद को सिरिअस दिखाने मे लगा था उसपे पानी फिर गया और मै शर्मा कर हस पड़ा ।

शकुन्तला - तु बस दिखाता है खुद को कि मासूम है लेकिन तु एक नम्बर का चालू है

मै हस कर - अच्छा मैने क्या चालाकी की अब ह्म्म्ं

शकुन्तला तैयार होकर - चल रहने दे , खुब समझती हु मै , ये बता कैसी लग रही हु मै

मैने उनको उपर से निचे निहारा - हम्म्म।

फिर आगे बढ़ कर उनका खुले हुए सिफान साडी के पल्लू के समेट कर उपर कर दिया जिससे उनकी गुदाज नाभि दिखने लगी ।

ताई मेरी हरकते निहार कर मुस्कुराये जा रही थी और मै उनकी साडी सेट करने के बाद थोडा पिछे होकर उनकी गहरी गुदाज नाभि को देखता हुआ - हम्म्म सेक्सी ।

ताई हस पड़ी और वापस से अपनी साडी फैला दी - धत्त बदमाश कही का ।

मै - अरे रहने दो ना सेक्सी लग रहा है

ताई मुस्कुरा कर - सेक्सी लग रहा है तो क्या सबको दिखाती फिरू

मै - सबको क्यू दिखाना है वो मै अपने लिये हिहिहिह्ही

ताई शर्मा कर - चुप कर शैतान कही का , चल अब ।

फिर मै और ताई वापस घर के लिए निकल गये ।



लेखक की जुबानी



अमन के घर



भोला की शायरी ने ममता के चुत को रसिला कर दिया था और वो अपने कमरे मे बैठी डायरी खोल कर सोच रही थी क्या लिखे ।

तभी उसकी नजर अपने पति के मोबाइल पर गयी जो कमरे मे बेड के पास ही चार्ज लगाई गयी थी ।

ममता मुस्कुराइ और उसने लपक कर मोबाइल उठाया और अपने नंदोई का नम्बर खोजने लगी

तभी उसको भोला जीजा के नाम से नम्बर सेव मिल गया और उसने एक मिसकाल मार कर हस दी ।

उधर हाल मे सब्के साथ बैठे भोला की मोबाइल रिंग हुई तो उसने जेब मे हाथ डाला और देखा कि उसके बड़े साले मुरारी ने मिसकाल किया था ।

मगर उसने जब मुरारी को देखा तो वो मदन से बातो मे व्यस्त था और उसके हाथ मे एक काफी थी जिसमे दोनो भाई कुछ हिसाब समझ रहे थे ।

तभी भोला का दिमाग ठनका कि कही ममता ने तो

और उसकी आंखे चमक उठी । उसने वापस से मिसकाल किया ।

ममता मिसकाल देख कर खुश हुई मगर काल उठाने से पहले से भोला ने काल काट दिया ।

ममता - लग रहा है मुझे ही करना पड़ेगा

ममता ने पूरी रिंग दी और भोला काल उठाने के लिए हाल से उठ कर कही सुरक्षीत जगह तालाशने लगा

वही हर रिंग के साथ ममता का बेताब दिल और परेशान होने लगा , उसे लगा कि कही भोला ये ना समझ रहा हो कि अमन के पापा उसे फोन कर रहे है ।

मगर आखिर की रिंग जाते ही भोला ने फोन पिक कर लिया

भोला - हा हैलो

ममता का कलेजा धक कर गया ,एक ही घर मे और सालो के रिश्ता होने बाद भी ममता की हिम्मत नही हो पा रही थी कि वो भोला से बात कर पाये ।

भोला हस कर - अरे भाभीजान बोलिए

ममता भोला की बात पर हस दी और बोली - क्या बोले जरा फिर से कहिएगा

भोला इस बार अपने उफानाते लण्ड को दबाते हुए - मैने कहा जानेमन बोलो ना

ममता हस कर - हां !! अभी तो भाभीजान बोले ना

भोला - मुझे लगा तुम्हे यही सूनना था

ममता शर्मा कर अपने धडकते कलेजे पर हाथ रख कर - मैने आपको क्या लिखने को बोला था और आप ये डायरी क्या लिखे हो उम्म्ंम

भोला - तुम्ही ने तो कहा था कि दिल की बात लिखने को

ममता - तो यही सब है आपके दिल मे उम्म्ं

भोला - अब क्या क्या बताऊ क्या क्या भरा है इस दिल मे सीईईई आह्ह

ममता ने भोला की सिस्क भरी आह सुनी तो उसकी चुचिया भी उठने लगी - अच्छा जी तो रात मे 11 बजे वही सब बताने वाले हो क्या ?

भोला ममता की शरारत भरे अंदाज से वाक़िफ़ था और ममता से बाते करते हुए उस्का मुसल पुरा तना हुआ था मगर कबतक वो घर के मेन गेट के पास खड़ा होकर बाते कर पाता

भोला - आह्ह जानू 2 मिंट रुको मै फोन कर रहा हु

ये बोल कर भोला ने फोन काट दिया और ममता के दिल मे उबलते अरमान गर्म तवे पर पड़े पानी की छीटें के जैसे छरछरा कर रह गये ।

ममता अभी सोच रही थी कि क्यू फोन कटा कि तभी वापस से मोबाईल बजने लगा और भोला का ही फोन आया देख ममता के गाल फिर से खिल गये ।

ममता - क्या हुआ काट क्यू दिये

भोला - अरे वो मै मेन गेट के पास खड़ा होकर बाते कर रहा था ना

ममता - तो क्या हुआ

भोला मुस्कुरा कर अपने तने हुए मुसल को पजामे के उपर से मसलते हुए - अरे तुम नही सम्झोगी जान

ममता - धत्त बोलो ना किस लिये बुला रहे है रात मे और वो भी ऐसे कपड़ो मे उम्म क्या इरादा है

भोला ममता ने दबी हुई मादक गर्म सांसो मे भीनी हुई आवाज से पुरा गनगना उठा और अपना मुसल जोर से भीच कर - साफ साफ बोल दू

ममता भी भोला के उफानाते जज्बातो से अपनी गीली बुर को सलवार के उपर से भिचे हुए - हम्म्म्म

भोला - मै तुम्हारे मोटे मोटे चूतड़ मे अपना 8 इंच का खीरे जैसा लण्ड घुसाना चाहता हु , बोलो लोगि ना

ममता को उम्मीद ही नही थी कि भोला ऐसे एकदम से खुलकर बोल देगा और ये सुनते ही उसका जिस्म थरथरा गया और निप्प्ल तन गये ।

पल भर के लिए सही उसे चांदनी रात मे बाल्किनी मे झुक कर अपने फैले हुए गाड़ के दरारो की फ़ाडता हुआ भोला का 8 इंच का मुसल छेद मे घुसने का सिन छाप गया और वो सिहर गयी ।

ममता की चुप्पी पर भोला ने फिर अपनी बात दूहराई- बोलो ना जान लोगि ना

ममता हस कर - धत्त ऐसे कोई बोलता है , शर्म नही आती है आपको

भोला - मै तो तुम्हे बेशर्मी की हदे पार कर चोदना चाहता हु मेरी जान

ममता का दिल कापने लगा उसके गला सुखने लगा

भोला अपना मुसल मुठीयाते हुए - देखो जान अब शर्माओ मत , और अगर सीधा सीधा नही हा कर सकती तो ....

भोला के अधूरे वाक़य को पुरा होने का ममता भी इन्तेजार कर रही थी

भोला - देखो मै तुम्हारे कमरे की ओर आ रहा हु और तुम बस दरवाजा हल्का सा खुला रखना और

ममता तेज धडकती सासो से - हम्म्म और

भोला - और अपनी सलवार खोलकर अपनी बड़ी सी गाड़ फैला कर रखना , मै उसी को हा समझूँगा

ममता शर्मातेहस कर - धत्त नही !!!

भोला - मै अभी उपर अपने कमरे मे हु फोन रख रहा हु और बस 2 मिंट बाद निचे आकर तुम्हारे कमरे के बाहर से गुजरता हुआ बाथरुम की ओर निकल जाऊंगा । अगर तुम्हे हा है तो प्लीज

इससे पहले ममता कुछ बोल बाती भोला ने फोन काट दिया और ममता की सासे चढ़ने लगी । भोला ने उसकी बेचैनी बढ़ा दी

ममता बड़बड़ाते हुए - ओहो नंदोई जी ने ये कैसी शर्त रख दी इससे अच्छा मै तभी हा बोल देती , अब मै कैसे खुले दरवाजे की ओर । और अगर इतना सब होने के बाद भी मैने ना कर दिया तो शायद हम दोनो ही जिंदगी भर असहज हो जाये एक दुसरे के सामने । नही नही ममता तुझे करना ही होगा , बस दो मिंट की ही तो बात है

ममता एक नये जोश के साथ खडी हुई और दरवाजा महज 5-6 इंच गैप के साथ खोल दिया फिर दरवाजे गैप के हिसाब से उसने बेड के एक ओर दिवाल से लगते हुए अपनी जगह चुन ली ।

फिर उसने बड़ी हिम्मत से अपने सलवार का नाड़ा खोलने लगी

इधर ये ननदोई सलहज की प्लानिंग चल रही थी मगर सिर्फ इन्सान के चाहे क्या ही हो सकता था ।

इसी बीच मुरारी को अपनी फोन की जरुरत मह्सूस हुई और अपना जेब टटोलने लगा ।

उसी समय भोला भी सीढियो से नीचे आ रहा था ।

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ना जाने आगे क्या होने वाला है ? आप भी थोड़ी अपने कलपनाओ के घोड़े दौड़ाईए



मुरारी





भोला





ममता





जारी रहेगी
 
अपडेट 181 स



लेखक की जुबानी

अमन के घर



इधर ममता-भोला की अपनी मस्ती भरी योजना चल रही थी मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था ।

एक ओर जहा ममता अपनी चुतड़ अपने नंदोई के आगे फैलाने वाली थी तो वही भोला भी अपनी चालाकी से बहुत खुश था कि उसने ममता को फसा ही दिया और वो भी अपने कमरे से निकल कर सीढियो से नीचे आने लगा

मगर उसी वक़्त हाल मे बैठा मदन के साथ हिसाब कर रहे मुरारी को अपने मोबाईल की जरुरत आन पड़ी और वो अपने जेब तलाशने लगा ।

मुरारी - अह अमन बेटा, जरा देख मेरा मोबाइल मेरे कमरे मे होगा लेके आना तो एक जन से बात करना है

सामने सोफे पर बैठा अमन उठ कर हाल से गैलरी की ओर जाने लगा जिधर ममता का रूम था ।

अमन जैसे ही अपनी मा के कमरे के सामने पहुचा तो उसे दरवाजा आधा भिड़का मिला तो उसने दरवाजे का हैंडल पकड कर हल्का सा ढकेला और सामने का नजारा देख कर उसकी आंखे फैल गयी ।

सामने ममता जो बाजार अपने नंदोई के लिये सजाए हुए खड़ी थी , उसपे अब उसके बेटे की नजर पड चुकी थी और अमन की निगाहे उसकी मा के खुली सलवार से बाहर पूरी नंगी फैली हुई बड़ी सी गाड पर अटक गयी ।





वही ममता ने जब दरवाजे से चुउऊ की आवाज सुनी तो उसे लगा कि भोला ही आया मगर भोला तो वही हाल मे खड़ा खड़ा अमन को अपनी मा के कमरे मे झांकता हुआ देख रहा था ।

भोला - अबे साला हो गया कांड

इससे पहले अमन अपनी गरदन बाहर करके हाल की ओर देखता भोला फौरन जीने की ओर छिप गया ।

वही अमन कमरे मे आ जाके बाथरूम की ओर बढ़ गया , उसकी आंखो मे अभी भी उसके मा की भरी भरकम चुतड की छवि बस गयी थी और उसका लण्ड लगातार फौल्दी हुआ जा रहा था ।

अमन मन ही मन बड़बड़ाता हुआ बाथरूम मे घुस गया - मम्मी लेकिन ऐसे क्यू है और उनकी गाड़ कितनी बड़ी है उह्ह्ह यार्रर ओह्ह्ह मुम्मीईई आपकी गाड़ ने तो मेरे मुसल को बेकाबू कर दिया ।

इधर भोला ने वापस गैलरि मे झाका तो देखा अमन बाथरूम मे घुसा गया था तो वो लपककर तेज कदमो से ममता के कमरे के बाहर पहुच गया और उसने देखा अभी तक ममता अपने चुतड़ खोले हुए थी । जिसे देख कर भोला का लण्ड मस्त हो गया और

इससे पहले कि अमन बाथरूम से वापस आता भोला ने कमरे मे मुह डाल कर हस्कर बोला - थैंक्स जानू हिहिहिही

फिर दरवाजा खिंच कर हाल मे भाग कर आ गया

भोला की आवाज सुनते ही ममता शर्म से लाल हो गयी और जल्दी से अपना सलवार बान्ध कर खडी हो गयी ।

कि तभी अमन ने दरवाजा खटखटाया ।

ममता ने दरवाजा खोला तो सामने अमन को पाया ।

ममता ने मन ही मन शुकर किया कि सही समय पर भोला आ गया और उसने दरवाजा बन्द कर दिया वरना अमन तो उसको ऐसे ....नही नही ,

ममता - क्या हुआ बेटा बोल

अमन की आंखो मे अभी भी उसकी की नंगी चर्बीदार गाड़ बसी हुई थी वो एक टक अपनी मा को निहार जा रहा था ।

ममता उसको ऐसे अपनी ओर देखता पाकर हस कर - क्या हुआ बोल ना

अमन होश मे तो आया मगर उसे समझ नही आ रहा था कि वो यहा किस लिये आया ।

उसके जहन मे कामुकता हावी थी और लण्ड ने अपने ही नशे मे उसे उत्तेजित किये जा रहा था ,ऐसे मे अपनी मा को ऐसे सामने पाकर उसके अरमान उफ्नाने लगे ।

तभी उसके जहन मे वो पल याद आया जब वो नहा रहा था और ममता ने सोनल का काल उठा लिया , फिर सोनल से मिली चुम्मिया उसकी मा को देनी पड़ी थी ।

वो पल याद करके अमन चहका और अपनी मा के गालो पर 8-10 चुम्मिया एक साथ दे दिया ।

अमन की इस हरकत से ममता के गाल लाल हो गये - धत्त क्या कर रहा है बेटा तु ये

अमन - क्या मम्मी भूल गयी , जितनी चुम्मी आपकी बहु को मिलेगी उससे एक ज्यादा अपको दूँगा हिहिही

ममता हस कर अपने गाल पोछते हुए - तो तु यहा मेरे हिस्से की चुम्मी देने आया था हम्म्म

अमन हस कर - नही वो पापा ने मोबाइल माग रहे है अपना , है क्या यहा ।

मोबाइल की बात सुनते ही ममता के कान खडे हो गये कि कही उसके पति ने फोनबुक चेक कर लिया तो गड़बड़ हो जायेगी ।

ममता - अरे हा यही है रुक देती हु

ये बोल कर ममता घूमी और अपने चुतड हिलाते हुए तेज कदमो पर बेड पर चढ कर मोबाइल हाथ मे लिया और जल्दी जल्दी भोला से की हुई बात की काल हिस्ट्री डिलीट करने लगी





मगर उसे क्या पता था वो जिस पोजिसन मे आगे झुकी हुई थी उसका सूट उपर चढ गया था और उसकी बड़ी सी गाड एक बार फिर से अमन के सामने सलवार मे फैल गयी थी ।

अपनी मे भारी चुतडो के दुबारा दरशन करते ही अमन का मुसल फौलादी हो गया और वो एक टक दोनो पाटों के बिच दरारो मे फसी हुई सलवार को निहारने लगा ।

उसने हौले से अपना मुसल मसला और फिर ममता उतर कर निचे आई और उसे मोबाईल दे दिया ।

अमन हाल मे वापस आकर बैठ गया जहा भोला भी आ चुका था ।

तभी ममता की एन्ट्री होती है और उसकी नजर भोला को ही तालाश रही होती है , जैसे ही दोनो की निगाहे मिलती है दोनो के होठ खिल जाते है ।

ममता चुपचाप शाम के नास्ते की तैयारी करन्व किचन मे चली जाती है और भोला ममता को देख कर इस बात पर विचार करता है कि क्या उसने जो देखा वो ममता को बता दे ।

मगर उसे डर था कि कही अगर रात मे मिलने से पहले उसने ममता तो बता दिया कि अमन ने भी उसकी गाड़ देखी है तो वो बिल्कुल आगे बढ़ने से इंकार कर दे ।

इसीलिए उसने सोचा कि क्यू ना एक राउंड चोदने के बाद देखा जायेगा ।



राज के घर



इधर एक ओर जहा रंगी-जंगी मिलकर रज्जो की ठुकाई मे व्यस्त थे और उधर राज शकुन्तला के चुचो पर बर्फ घिस रहा था ।

वही जब निशा भी कोमल के साथ मेहँदी रखवाने लगी और राज भी वहा मौजूद नही था तो शिला और कमलनाथ को मौका मिल गया खुलकर इशारे बाजी करने का

कमलनाथ ने इशारे मे शिला को निचे चलने का इशारा किया और शिला ने मुस्कुराकर ना मे सर हिलाया ।

फिर कमलनाथ ने हौले से अपना मुसल मसल दिया जिससे शिला की सान्से चढने लगी और वो बगल मे बैठी रागिनी के कान मे बाथरूम जाने का बोलकर उठ कर निचे जाने लगी ।

कमलनाथ की आंखे चमक उठी और वो मुस्कुरा दिया ।

शिला भी मुस्कुराते हुए अपने बाल कान मे सहेजती हुई निचे जाने लगी ।

इधर कमलनाथ ने भी अंगड़ाई ली और 2 3 मिंट का अंतर लेके उठा ।

निशा ने कमलनाथ को नीचे जाते देखा मगर वो क्या ही कर सकती थी , अधूरी मेहंदी नही ना छोड कर उठ सकती थी ।

खैर कमलनाथ निचे आया और उसने आस नजर घुमाई तो उसे कोई नजर नही आया ।

ना रंगी-जंगी , ना रज्जो , ना राज कोई भी नही ।

एक पल को उसे ये सब खटका मगर तभी उसकी नजर गेस्टरूम मे गयी और वो मुस्कुरा कर तेजी से गेस्ट रूम मे घुस गया ।

शिला - हा बोलिए क्यू बुलाया मुझे

कमलनाथ ने लपक कर शिला की कमर मे हाथ डाल कर अपनी ओर खीचा - अरे यहा आओ ना

शिला कसमसा कर - ओहो छोडिएहहह आह्ह प्लिज्ज ना

कमलनाथ - क्यू छोड दू , तुम्हे नही पता क्यू आई हो

शिला मुसकरा कर शर्माने लगी - उहू

कमलनाथ पलाजो के उपर से उसकी गदराई गाड़ मसलकर - आह्ह अब बहुत हुआ मुझे मत तडपाओ प्लीज दिखा दो ना

शिला - क्याअह

कमलनाथ ने वापस से उसकी चर्बीदार गाड़ को पंजो से फैलाए हुए - येहहहह

शिला ने उसके पंजो की कसावट अपने नरम गुदाज गाडो पर मह्सूस की - सीईईई अह्ह्ह अभी कल तो देखे हो नाअह्ह्ह उम्म्ंम

कमलनाथ - प्लीज ना एक बार

शिला - लेकिन कोई उपर से आ गया तोहहह

कमलनाथ - कोई नही आयेगा सब बिजी है प्लीज ना

शिला इतराई और बोली - बस देखना और कुछ नही

कमलनाथ अपना मुसल भींच कर - हा हा पक्का पक्का

शिला ने उसको लण्ड मसलते देख कर मुस्कुराई और दो कदम पीछे होकर अपना दुप्प्टा सिन से उतार दिया और कमलनाथ को बोली - आप प्लीज एक बार देख लो ना बाहर कोई है तो नही

कमलनाथ ने दरवाजा खोलकर एक बाहर गया और किचन से लेके दोनो कमरो का मुआयना किया , फिर जीने पर गया और फिर एक नजर गैलरी मे मारा ।

फिर निश्चित होकर गेस्टरूम का दरवाजा खोलकर जैसे ही कमरे मे घुसा उसकी आंखे फैल गयी ।





उसने झटके से दरवाजा बन्द किया और सामने शिला को देखा जो पूरी नंगी होकर अपनी एक टांग उठा कर बिस्तर पर रखे हुए थी और उसकी बड़ी सी चर्बीदार फैल कर कमलनाथ के सामने थी ।

कमलनाथ अपना मुसल मसलता हुआ आगे बढ़ा और उसके नरम गुदाज चुतड को सहलाता हुआ उसके गाड़ की कसी दरारो के बिच सुराख मे ऊँगली पेल दी जिस्से शिला सिसकी और फिर कमलनाथ ने चटाक से उसके गाड पर पन्जा जड़ दिया , जिस्से थरथरा गयी । उसकी चरबीदार गाड़ काफी देर तक हिलती रही ।

फिर उसने निचे बैठ कर उसकी गाड को फैलाते हुए उसमे अपना मुह दे दिया ।





शिला की आहे सुरु हो गयी और वो अपनी जीभ निकाल कर उसके गाड़ को फैलाये हुए सुराख को जीब से कुरेद रहा था ।

शिला की चुत उतनी ही रस छोड रही थी , कमल ने उसकी रस छोड़ती चुत पर भी मुह लगा कर उसको चुसने लगा और शिला की सिस्कियाआ तेज होने लगी ।

कमलनाथ का मुसल पुरा फौलादी हुआ जा रहा था और 3 दिनो से उसने जरा भी चुदाई नही की थी , जिसके कारण उसका लण्ड की नसे फूली हुई थी ।

कल शाम की तरह वो ये मौका नही जाने देना चाहता था और इसे पहले कोई उन्हे खोजता आ जाये एक बार शिला की गाड़ मे लण्ड घुसाना ही था ।

उसने देर नही किया और शिला की बुर से रस लेके उसमे अपना थुक मिला कर उसने शिला की गाड़ के सुराख पर उसे मलने लगा और वही शिला समझ गयी ।

वो खुद को तैयार करने लगी , उसकी भी सासे गहरा रही थी और कमलनाथ अपने टोपे पर थुक लगा कर उसको चिकना कर रहा था ।

अगले ही पल he plug it inside 😉

लाल मोटा सुपाडा शिला के गाड़ की सुराख को फैलाता हुआ 3 इंच तक घुस गया और शिला की सासे फुलने लगी । वो अपने होठ भिचे हुए आंख बन्द कर हाथो से बिस्तर नोच रही थी और कमलनाथ ने एक और करारा झटके के साथ लन्ड को घुसा दिया ।





शिला की एक जोर की चिख उठने को थी मगर उसने अपना मुह पर हाथ रख दिया और कमलनाथ को शिला के दर्द मे मजा आने लगा , उसने उसके चर्बीदार कूल्हो को पकड कर अब धक्के लगाने शुरु कर दिये ।

शिला मुह् पर हाथ रखे हुए घुन्टी हुई सिसकिया ले रही थि इस डर मे कि कोई उसकी चिखे ना सुन ले और उसकी चुत लगातार रस बहाये जा रही थी

कमलनाथ ताबड़तोड़ झटके दे रहा था उसकी गाड़ मे , कसी गाड मे लन्ड की घिसावट ने उसके नथुने फुला रखे थे ।

बिना एक भी शब्द बोले वो मुह भीच कर हुमच हुमच कर शिला की गाड़ की जड़ो तक घुसा हुआ था

जल्द ही शिला की सासे सामान्य होने लगी और शारिर पूरी तरह से गर्म होने लगा उसे अब दर्द भी हल्का लगने लगा तो उसने अपने मुह से हाथ हटा कर

गरदन पीछे करके मुस्कुराते हुए देखने लगी

कमलनाथ पुरे जोश मे उसकी गाड़ मे मुसल घुसाये हुए पेल रहा था और शिला ने अपने आंखे महिन करके अपने गाड़ के छ्ल्ले को कसने लगी जिस्से कमलनाथ के लन्ड पर और जोर पडने ल्गा





कमलनाथ सुपाडा भी फूलना शुरु हुआ और वो पूरी ताकत से तेजी से गाड़ मे लन्ड पेलने लगा

शिला की सिस्स्किया फिर से तेज हो गयी और कमलनाथ की नसे भी फुलने लगी

वो अपने चेहरे को भिचे हुए एडिया उचका कर अपने चुतड टाइट किये हुए सटासट पले जा रहा था और आखिरि कुछ झटको के साथ उसने लन्ड को उसकी गाड़ मे जड़ तक पेल दिया और भीतर ही उस्का सुपाडा फ़ूट पड़ा, दोनो की आहे एक साथ निकाली





गर्म लावे ने शिला पागल कर और जब कमलनाथ ने उसकी गाड़ से अपना मोटा मुसल निकाला तो सारा वीर्य बाहर निकल कर उसके चुत से होते हुए फर्स पर गिरने लगा ।

कमलनाथ ने खुद को सम्भाल कर वही बिस्तर पर बैठ गया और शिला ने पास रखी पैंटी से अपनी गाड़ पोछी फिर फर्श पर गिरे वीर्य पर उसको डाल दिया ।

शिला ने अपनी ब्रा पहनी और फिर सूट । फिर बिना पैंटी के ही उसने वो पलाजो पहन लिया जिसमे पहले से हो उसका जिस्म झलक रहा था ।

शिला - आप चलिये मै फ्रेश होकर आती हु

फिर कमलनाथ निकल गया और शिला एक तौलिया लेके रागिनी के कमरे मे चली गयी



राज की जुबानी


मै और शकुन्तला ताई वापस आ गये थे । हम दोनो खुश दिख रहे थे और वही जब मम्मी से सामना हुआ तो उसने साफ झुठ बोल दिया कि वो फ्रेश होने के लिए चली गयि थी ।

मै अचरज भरी नजरो से ताई की ओर मुस्कुरा कर देखा और धीमे से उनसे पूछा- आपने झुठ क्यू बोला

शकुन्तला- अब अपने लाडले बेटे को डांट थोड़ी ना सुनने दूँगी

मै - अच्छा तो इतनी फ़िकर है मेरी तो साड़ी उपर कर लो ना

शकुन्तला हस कर - धत्त शैतान

फिर वो वापस विमला के पास बैठ गयी और रह रह कर मेरी ओर देखे जा रही थी

मै भी वापस मौसा के पास बैठ गया जो काफी खुश लग रहे थे मगर वहा शिला हुआ नही दिखी मुझे । मगर इनसब बातो पर इतना ध्यान नही दिया क्योकि शकुन्तला ताई से मेरी अपनी की इश्क़बाजी चल रही थी और बीच बीच मे ताई से इशारे करता कि नाभि दिखाते और वो इतरा कर मुस्कुरा देती थी ।

लेकिन बार बार आग्रह करने पर उन्होने हल्का सा साडी उठा कर अपनी नरम गोरी गहरी नाभि दिखाई और मैने भी बदले मे अपने होठो पर जीभ फिरा कर अपना इरादा दिखाया तो वो आंखे दिखाने लगी ।

फिर ध्यान रीना भाभी पर गया जो जीने से निचे की ओर जा रही थी

मै भी लपक कर उनके पीछे हो लिया

देखा तो वो किचन मे आई थी एक प्लेट मे मीठा निकाल रही थी , क्योकि उपर कुछ औरते आई थी मुहल्ले की तो मम्मी ने उन्हे भेजा था

मै भी उन्के पीछे खड़ा हुआ और फ्रिज से पानी निकालने के बहाने उनके चुतड़ पर अपने पिछवाड़े हल्का सा धक्का दिया





वो चौक कर घूमी और सामने मुझे मुस्कुराते हुए पाया ।

रीना - क्या देवर जी पीछे से धक्का उम्म्ंम

मै उनकी बाते सुनकर उनको कमर से पकड कर अपनी ओर खिच लिया - आप कहिये तो आगे से भी दे देंगे

भाभी हसते हुए मुझसे अलग होकर - धत्त बहिनचोद , क्या कर रहे हो । कोई देख लेगा तो

मै मुस्कुराकर - तो कमरे मे चले

रीना शर्मा कर - धत्त हटो जाने दो मुझे

मै - अरे मुझे मेहंदी नही लगाई आपने

रीना - अरे बाबू अभी बहुत लोग बाकी है और मैने भी नही रखी देखो

रीना ने अपनी हथेली दिखाई





मैने उसकी हथेली हाथ मे लेके अपना दुसरा हाथ सीधा उनकी साडी मे घुसा कर पेट सहलाता हुआ नाभि पर उंगलिया घुमाई - कहो तो मै रख दू मेहन्दी आपको यहा पर

मेरे छूने से रीना की सासे अटक गयी और वो झटके से मेरे हाथ अलग कर मुझे आंख दिखाते हुए - धत्त बदमाश हटो जाने दो

फिर हसते हुए उपर निकल गयी और मै अपने फुलते लण्ड को दबाते हुए बाथरूम मे चला गया ।

इधर मै कमरे से बाहर आ रहा था कि पापा चाचा एक साथ आते हुए दिखे और उनकी हालत ठिक नही लग रही थी , जैसे ही वो पास आये मै समझ गया कि दोनो भाईयो ने ड्रिंक किया हुआ है

और वो बाते करते हुए उपर जाने लगे कि मैने उन्हे टोका

मै - पापा , कहा जा रहे हो ऐसे

पापा - बेटा उपर !!

मै खीझते हुए - जाओ पहले नहाओ आप दोनो , इतने महक रहे हो आप

पापा और चाचा दोनो एक दुसरे का मुह देखने लगे और फिर पापा चाचा को लेके अपने कमरे मे चले गये ।

मै भी उपर चला गया ।

जारी रहेगी



पोस्ट क्रेडिट सेंस 🤪



शीला इस आलरेडी इन तहत बाथरूम वेयर हेर ब्रोठेर्स अरे गोइंग 🤭
 
अपडेट 182 ा

राज के घर



मेहंदी का प्रोग्राम खतम हुआ और सारे लोग खानाआ खा रहे थे मगर शिला के लिए dildo ना मिलना एक परेशानी बनी हुई थी क्योकि जैसा उसको रज्जो ने समझाया था कि निशा dildo रखने वापस जायेगी तो पकड़ी जायेगी ।

मगर उसको तो इसकी फ़िकर ही नही थी ।

वही खाने के बाद सारे लोग अपने कमरे जाने लगे तो ध्यान आया कि आज फिर जंगीलाल को अकेले उपर सोना पड़ेगा मगर रागिनी को ये पसंद नही आया

रागिनी - ऐसा करिये देवर जी आप अपने भैया के साथ गेस्ट रूम मे सो जाईये और मै दीदी लोगो के साथ अपने रूम मे सो जाऊंगी यहा वाला बेड बडा है तीन लोगो को दिक्कत नही होगी

रागिनी के प्रस्ताव से रंगी का मुह उतर गया वही जंगी को भी आशा था कि कल रात के जैसे रज्जो को आज रात भी चोद पाता ।

खैर ये ऐसा मानवता भरा निर्णय था जिसे कोई टाल नही सकता था और सारे लोग अपने अपने तय कमरे मे चले गये ।



रंगी-जंगी

दोनो भाई बिस्तर पर आ चुके थे , चुकि गेस्ट रूम मे शिला और रज्जो ही रह रही थी और सोने का प्रोग्राम अचानक से बना था तो उन्हे मौका नही मिला था अपने कमरे सहेजने का

कमरे मे जाते ही दोनो भाई अपने कपडे निकाल कर बनियान और जान्घिये मे आ गये । जैसे ही बिसतर पर तकिया सेट करने लगे एक कोने मे उन्हे 44 साइज़ की पैंटी दिखाई दी ।

जंगी ने खिंच कर वो पैंटी बाहर निकालता हुआ - भैया ये कच्छी किसकी होगी

रंगी - इस कमरे मे शिला दीदी और रज्जी जीजी रहती है उन्ही मे से किसी का होगा

जंगी मुस्कुरा कर पैंटी का लेबल देखता है और उसे हथेली मे भर कर सूंघता है - आह्ह भैया ये रज्जो भाभी की चूत की खुस्बु मस्त है ।

रंगी उससे पैंटी छिन कर एक ओर फेक देता है - पागल है क्या तु, अगर शिला जीजी की हुई तो !

जंगी खीझकर - अरे शिला दीदी की कैसे होगी उनकी तो बाथरूम मे ...

जंगी बोल्ते बोलते चुप हो गया और रंगी भी अपनी बहन की पैंटी पर खुद के छोटे भाई से बाते करने मे असहज होने लगा ।

कुछ पल बाद रंगी मुस्कुरा कर - चल छोड आजा सोते है

जंगी - कहा इतनी जल्दी नीद आने वाली है भैया ,

रंगी - क्यू तु थका नही दो दो बार करके हाहहह

जंगी - क्या भैया इन्सब से भला कोई थकता है और जब रज्जो भाभी जैसी जबरदस्त गाड़ हो अह्ह्ह आज तो मजा ही आगया

रन्गी - हा मजे तो तुने अकेले ही लिये हिहिहिही

जंगी हस कर - हा तो गाली भी सबसे ज्यादा मुझको ही मिली

रंगी कुछ सोचता हुआ - ना जाने ये औरतो को चुदते हुए बहिन की गाली देने मे क्या मजा आता है यार समझ नही आया

जंगी - पता नही भैया लेकिन जो भी हो सुन कर जोश भी बहुत आता है

रंगी उसकी पर आहे भरता हुआ - हा भाई , हमने तो कभी अपनी बहन को गलत नजरो से देखा नही होता है और ये औरते एक चुदाई मे बहिनचोद बना देती है

जंगी हस कर - क्या भैया झुठ ना बोलो , अभी शाम को बाथरूम मे दीदी को देख कर आपको कुछ कुछ हुआ नही था , हाहहह

रंगी उस पल को याद करता हुआ अपना मुसल मसलकर - अरे वो तो बस अचानक से नजर चली गयी और दीदी को भी तो चाहिये ना दरवाजा बन्द कर ले । ना कमरे का दरवाजा बंद था और ना ही बाथरूम का ।

रंगी - उपर से डीजे की आवाज मे पता ही नही चला कि बाथरूम मे कोई है और हम लोगो को भी जल्दी से नहाना भी था ।

जंगी - हा भैया कभी कभी ऐसे ऐसे संजोग हो जाते है जीवन मे वहा क्या कहा जाये समझ ही नही आता और मन को तो डाट बोल कर समझा भी लो लेकिन इसको कोई क्या समझाए कि गलती से बहन नंगी गाड़ दिख भी जाये तो खड़ा नही होते हहहाहा

रन्गी उसकी बाते सुन्कर हसता हुआ - हाहाहाहा , सही कह रहा है भाई और दीदी की गाड़ ऐसी है कि .....

जंगी अपने भाइ के अचानक चुप हो जाने से समझ गया कि वो शिला को लेके असहज हो रहा है ।

जंगी - क्या भैया बोलो ना खुल के , वैसे भी कौन सा हम लोग सच मे कुछ करने वाले हैं बताओ ना दीदी के बारे मे

रंगी ने गहरी सास ली - क्या बताऊ भाई दीदी की गाड़ जबसे देखी , अजीब सा हो रहा है जिस्म मे

जंगी अपना मुसल मसल कर - कैसा भैया

रंगी - भाई दीदी की गाड़ का सुराख देखा था तुने कैसे गुलाबी था , मन तो कर रहा था कि बस जीभ लगा कर चाट लू

जन्गी - सीईई भैया सच कह रहे हो , और आपने देखा दीदी कैसे कसे कसे कपडे पहनती है

रंगी अपना मुसल मसलते हुए - हा भाई , मुझे तो समझ नही आता इसके ससुराल वालो का क्या हाल होता है उनकी बडी बड़ी गाड़ देख कर

जंगी - हा भैया शादी के बाद से तो दीदी और भी गदरा गयी है उह्ह्ह्ह

रंगी - हा भाई लगता है जीजा खुब लेता होगा हुम्च कर

जंगी थोडा चुप रहा और कुछ देर बाद हिचकता हुआ - भैया एक बात आ रही है दिमाग मे अगर बुरा ना मानो तो कहू

रंगी - अरे बोल ना भाई अब मुझसे क्या छिपाना

जन्गी तेज धडकते दिल के साथ - भैया आपको नही लगता कि दीदी ने ससुराल एक से ज्यादा लन्ड ली होगी ।

अपने भाई की बात सुनकर रन्गी का शरिर सिहर उठा वो भी थोडा झिझक कर - हा लेकिन जीजा के अलावा और किसका लेगी

जंगी - क्या पता छोटे जीजा का

रंगी - हा हो सकता है भाई , अब तु ही देख ना दीदी और हम लोगो की शादी मे बहुत समय का अन्तर नहीं था । मगर हमारी बिवियो के चुतड देख और दीदी के

जंगी - हा भइया मै तो शालिनी को रोज ही पेलता हु और आप भी भाभी को ? सॉरी बुरा मत मानना भैया

रंगी हस कर - हा भाई रोज ही मगर दीदी जैसी तरक्की नही हुई हाहहहह

जंगी - हा भैया हाहहह

रंगी कुछ सोच कर - वैसे एक बात पूछू छोटे

जंगी - हा भैया बोलो ना

रंगी - अगर मौके मिले ती क्या तु दिदी को चोदना चाहेगा

अपने बडे भाई की बात सुनकर जंगी का सीना जोरो से धडकने लगा और उस्का मुसल पुरा तना हुआ था - क्यू आप नही चाहोगे क्या

रंगी - मन तो मेरा बचपन से रहा है छोटे , याद है स्कूल से आने के बाद कैसे हम लोग दीदी के उपर लद जाते थे , मुझे उनकी गाड़ पर सोना बहुत पसंद था

जंगी - हा भैया , उस समय भी दीदी की चर्चा होती थी गाव मे कि स्कूल का मास्टर उन्को खुब मिजता था ।

रंगी अपना मुसल मसलता हुआ - हा भाई मगर तब भरोसा करना मुश्किल लगता था और अब लग्ता है कि वो सारी बाते सच ही थी ।

जंगी - क्या !

रन्गी - यही कि अपनी दीदी एक नम्बर की रंडी है चुदवाने मे

जंगी अपने भाई की बात सुनकर जोर से अपना मुसल भिचा और फचफचाकर ढेर साला माल उसके हाथ मे आ गया और उसकी सासे उखड़ने लगी

जंगी की हालत देख कर रंगी हस्ता हुआ - हट बहिनचोद यही हिला लिया क्या रे । जा साले धूल के आ

जंगी - सोअओरी भैयाआ अब कहा जाऊ धूलने उपर जाना पड़ेगा, ये कच्छी मे ही पोछ लू क्या

रन्गी ने हस के हामी भर दी

जंगी वही 44 साइज़ की पैंटी से अपना वीर्य साफ करता हुआ - अगर हुआ भी दीदी का तो अब काहे का टेनसन हिहिहीहि



सोनल - निशा - रीना

सोनल - यार भाभी कब तक ये मेहंदी हटेगी , 3 घन्टे हो गये

रीना सोनल को छेड़ती हुई - अरे रात भर रहेगी हिहिहिही

निशा भी दो चूड़ी कस कर - और तुझे क्या करना है , देख अब आज मेहँदी लग गयि है तो तुझे जीजू के सामने शादी तक नही जाना है , क्यू भाभी ?

रीना - हा हा और क्या ? ये वीडियो काल और ये बातचीत बन्द करो ।

सोनल - क्या बात भी नही कर सकती

रीना निशा को हस्ती हुई देख कर सोनल के मजे लेते हुई - हा और क्या , अरे दोनो तड़पे रहोगे तभी तो सुहागरात मे बिस्तर टूटेगा हाअह्हहा

रिना ने हस कर निशा को ताली दी हिहिहिही

निशा - हा और क्या ? अब से तेरा मोबाइल मेरे पास रहेगा

ये बोलकर निशा ने सोनल का मोबाइल ले लिया जिसमे पहले से ही अमन के काफी सारे मैसेज आ रहे रखे थे ।

सेक्सी pics और वीडियो काल के लिए मिन्नते पढी गयी थी ।

निशा - देखो देखो भाभी क्या मैसेज आया है हिहिहिही ,

सोनल निशा की ओर लपकी तो रीना ने उसे डाटा- हेईई बैठो वैसे ही मेहंदी खराब हो जायेगा

सोनल खीझ कर - निशा कमीनी देदे मेरा मोबाइल

निशा दुर हट कर - देखो तो भाभी , मेहंदी की तस्वीरे मागी गयी है हिहिहिही

रीना - अच्छा जी , जरा लगा तो नंदोई जी के पास फोन लेती हु खबर इनकी

सोनल की सांसे अटकी - क्या भाभी !! नही नही प्लीज ना

रीना - लगा ना तु निशा

निशा चहककर फोन का डिस्प्ले रीना को दिखाती हुई - रिन्ग जा रही है हिहिहिही

इधर फोन पिकअप हुआ

अमन - क्या बेबी इतनी देर से वेट कर रहा हु , कहा थी यार

अमन की बात सुनकर रिना और निशा खिलखिलाई , वही सोनल की शर्मिन्दी भरी बेचैनियाँ बढने लगी ।

रीना हस के - अरे नंदोई जी बस दो रात का और इन्तजार कर लो, फिर तो दुल्हनिया लेके ही जा रहे हो ना

अमन को समझते देर नही लगी कि उसे इस नये सम्बोधन से रीना के अलावा कोई और नही बुलाने वाला था तो अमन झेप सा गया और हसकर - अरे भाभी जी नमस्ते , कैसी है आप

रीना - मै तो ठिक हु लेकिन आप बड़े बेकरार लग रहे है , हिहिहीहि

अमन शर्मा कर - अरे नही वो तो बस , और बताईये खाना पीना हुआ

रीना - हा हो गया और आपका

अमन - अभी ज्स्ट मेरा भी हुआ

रीना - अच्छा ये बताईये , अपनी दुल्हनिया की मेहंदी की तस्वीरे क्यू माग रहे है आप हम्म्म

अमन समझ गया कि जरुर उसका मैसेज पढा जा चुका है - अरे बस देखने के लिए

रीना - देखीये नंदोई जी अगर आपकी कोई अपनी पसंदीदा जगह हो तो ब्ता दो वहा भी मेहंदी रख देंगे हिहिहीहि लेकिन देखने को मिलेगा तो सुहागरात पे ही

निशा और रीना ने एक साथ ठहाके लगाये ।

अमन और सोनल शर्म से लाल हुए जा रहे थे ।

अपने पति की खिचाई देखकर सोनल से रहा नही गया और वो भी बोल पड़ी- क्या जी आप क्या शर्मा रहे है आपकी सरहज है बोल दीजिये कि भाभी जी अपनी नाभि पर मेहंदी रख कर विदा करियेगा अपनी ननद को हहाह्हा

रीना और निशा चौकी ये भी बोल पड़ी ।

रीना - हाय हाय देखो तो कैसे पति को बचाने कुद पड़ी अभी तक तो जुबान सिली हुई थी

सोनल हस कर - हा तो मै कम थोड़ी हु आपसे हिहिहीहि बोलिए रखेंगी मेहंदी वहा पे , आपके नंदोई जी की ख्वाईश है

उधर अमन बस कालिंग पर ननद भौजाई की चटपटी नोकझोक सुन्कर हस रहा था ।

रीना तुन्ककर - ठिक है रख दूँगी लेकिन तुम्हे भी एक जगह लगवाना पडेगा

सोनल - कहा

रीना ने बिना आवाज के सोनल से होठो के इशारे से बोली - अपनी बुर पर

सोनल की आंखे फैल गयी और वो हस्ती हुई ना मे सर हिलाने लगी ।

रीना ने हा मे सर हिला रही थी ।

कुछ पल की चुप्पी पर अमन को समझ नही आ रहा था तो उसे लगा कोई नेटवर्क इसू होगा तो उसने फोन काट दिया ।

फोन कटते ही रीना खुलकर - अब पलटो मत रखवाना तो पडेगा ही

सोनल - क्या भाभी नही नही प्लीज !!

रीना - मै तो नंदोई जी की ख्वाईश पूरी करने वाली , निशा अभी तु मेरी नाभि पर मेहंदी लगा देना

निशा हस कर - जी भाभी ,

रीना - मगर ननद रानी तुम्हारी चुत पर गुलाब की पंखुडियां मै ही खिलाउन्गी हिहिहीहि

सोनल - धत्त नही भाभी प्लीज मुझे शरम आयेगी

रीना - निशा जल्दी कोन ला और तुम अच्छे से लेट जाओ नही जबरजस्टि करने से बाज नही आने वाली मै

सोनल अपने हाथ पाव मे लगी मेंह्दी से मजबुर थी और रीना से शर्त लगाना भी महगा पड़ रहा था उसे

मजबुर होकर सोनल को लेटना लड़ा और रीना ने सोनल के क्रॉपटॉप का लहगा उपर करने लगी ।



राज - कमलनाथ



राज - क्या बात है मौसा बड़े खुश लग रहे हो , कुछ काण्ड तो नही ना कर दिया मेरे पीठ पीछे हिहिहीहि

कमलनाथ - यहा कहा कुछ मिल रहा है

राज - अरे मौसी की बात कर रहा हु मै

कमलनाथ - अरे उसे फ़ुरसत कहा है काम से इधर-उधर भागी भागी फिरती है

राज - अरे तो कोई फ़ुरसत वाली तालाश लो हिहिहिहू

कमलनाथ - मतलब

राज - मतलब आप सब समझ रहे हो मौसा बस दिखावा नही कर रहे हो

कमलनाथ - अब तुझसे क्या छिपाना बेटा, आज शाम के प्रोग्राम मे एक से एक हसिन औरते आई ती , एक वो जो तेरे दोस्त की मम्मी थी उसके चुचे तो रज्जो से भी भारी थे

राज हस कर - हम्म्म रजनी दीदी है वो

कमलनाथ - एक बार मरतबा तो हमारी नजरे भी टकराई और उसने मुझे देखा भी कि मै उसके चुचे निहार रहा हु ।

राज - फिर

कमलनाथ- क्या फिर ! अरे घर पर आये मेहमानो को असहज ना लगे तो मैने ध्यान नही दिया । फिर वो एक औरत थी उसने सिन्दर नही लगाया था उसकी आंखे बड़ी कटीली थी साली ने ऐसी अदा से देखा दो चार बार लन्ड खडा हो गया । पक्का चोदू माल है वो

राज खिलखिलाकर हसता हुआ - अरे वो विमला मौसी है उनका भी घर नाना के घर के पास ही है

कमलनाथ - अच्छा और वो भी तो कड़क थी जो उठ कर चली गयी थी , उसे देखकर लगता है कि जैसे उसके चुचे किसी ने मिजे ही ना हो , कितने तने हुए थे कड़क एकदम , उतना तो उस हरी साडी वाली के नही थी जो सोनल बिटिया को मेह्न्दी रख रही थी

राज - हमम्म तो सास बहू दोनो के दूध पकड़ लिये आप हिहिहीहि

कमलनाथ - कहा कोई मिल रहा है यार बस देखो और लन्ड मिजो

राज - अच्छा और किसको किसको ताड़ा आपने

कमलनाथ अब असहज होने लगा क्योकि अब जितने थे सब राज के खास और घर के लोग थे । रागिनी निशा शिला और शालिनी ।

राज - बोलो ना मौसा बेझिझ्क , अच्छा मेरी चाची कैसी लेगी , है ना एकदम फीट

कमलनाथ - हा बेटा वो तो बहुत जवाँ है अभी लगता है निशा उनकी बेटी है दोनो बहाने लगती है

राज समझ गया कि कमलनाथ ने निशा को भी परखा था ।

राज - और बुआ

कमलनाथ शिला के नाम पर थोडा खटका - आह उन्के बारे मे क्या बोलू , तु तो खुद ही जान रहा है मतलब

राज - अरे बोलो ना मौसा

कमलनाथ- सच कहू तो मुझे तेरी बुआ ही सबसे मसत लगी आज , और उनका पिछवाड़ा सीईई

राज - हम्म वो तो है , बुआ की गाड़ मस्त है हिहिहीहि लेकिन आपको मिलेगी नही

कमलनाथ मन मे बडबडाया - अरे बेटा तुझे क्या पता कितनी बड़ी चुद्क्कड है तेरी बुआ , कैसे खुद से खोलकर बैठ गयी थी

राज कमलनाथ को चुप देख कर - क्या हुआ मौसा , सपने ना देखो बुआ के हिहिहिही

कमलनाथ - हाह्हहा ऐसी कोई बात नही है

राज - हम्म सब लोग तो हो गये अब बची मेरी मम्मी !

कमलनाथ - क्या तेरी मम्मी ?

राज - हा ! क्यू ? ऐसा तो होगा नही कि उनके मटकते पिछवाड़े पर आपकी नजर ना गयि हो ।

कमलनाथ - नही वो बात नही है , लेकिन सच मे बेटा कसम से मैने तेरी मा पर ध्यान ही नही दिया एक भी बार

राज - हा बेचारी बिजी जो इतना है

कमलनाथ चुप रहा ।

राज - अब बस आखिरी

कमलनाथ - कौन

राज - अरे रीना भाभी आपकी बहू उम्म्ं

कमलनाथ - उसको तो रोज देखता हु मै

राज - अरे रोज देखते हो तब बात और थी मगर अब जब आप ये जान रहे हो कि आपका बेटा आपकी बिवी चोद रहा है और आपका भी तो हक होता है ना कि अपने बेटे की बीवी चोदो

कमलनाथ - क्या नही नही ! बेचारी बहू को क्यू लाना इनसब मे , मै तो ये बात आपस मे ही रखने वाला हु ।

राज - हम्म्म ठिक है आपकी मर्जी , वैसे छोटा परिवार है आपका । हसी खुशी चारो लोग एक साथ रहो क्या हर्ज है ।

कमलनाथ थोडा सोच मे था

राज - अगर मै आपकी जगह होता और मेरे सामने ये सिचुएशन आती तो मै कुछ ना कुछ करके रमन भैया के साथ मिल कर मौसी को जरुर पेलता

राज की बाते सुनकर कमलनाथ मुसल तन गया कि कैसे वो अपने बेटे के साथ अपनी बीवी चोदेगा

राज - और फिर रीना भाभी को शामिल कर अदला-बदली कर रोज चुदाई करता

कमलनाथ - आह बेटा सोचना आसान है मगर करना मुश्किल

राज - अरे मौसा आप बस रमन भैया को शामिल करो , फिर आगे का आईडिया खुद मिल जायेगा आपको , सोचो ना एक ही कमरे मे एक ही बिस्तर पर आप अपनी बहु को चोद रहे हो और आपका बेटा आपके सामने अपनी मा को पेल रहा होगा

कमलनाथ - ऊहह बेटा मजा आ जायेगा अगर ऐसा हुआ तो

राज - आप बस यहा से जाने के बाद पहले मौसी को रमन भैया के लिए मनाना , सारे प्लान एक साथ मत बता देना । नही तो शायद मौसी मना कर दे ।

कमलनाथ राज की बाते सुनकर रज्जो का उसकी बहू के पोजिसिवनेस याद आया कि कैसे रज्जो इस मामले सख्त थी ।

मगर रमन को शामिल करने के बाद ये सब सच मे आसान हो ही जायेगा और बहू तो हो ही चुकी है उसके लन्ड की दीवानी ।

ये सब सोच कर कमलनाथ ने मुस्कुरा कर - हामी भर दी



रागिनी - रज्जो - शिला



शिला - हम्म्म तो भैया ने अपनी साली के तबसे दीवाने थे

रागिनी हस कर - अरे आपके भैया तो शादी के पहले से ही आपके चुतडो के दीवाने है हिहिहीहि

रज्जो - अरे जब घर मे इतनी गदराई माल रहे तो कोई नामर्द ही होगा जिसके सुपाडे मे खुजली ना उठे

रागिनी - हा और क्या , एक बार मैने हसी हसी मे चुदते समय बहिनचोद क्या बोला , उस रात जो चुदाई हुई अह्ह्ह दीदी क्या बताऊ

शिला - धत्त अब बस भी करो ना

रज्जो - अरे दीदी अब तो ले चुकी हो अपने राजा भैया का लन्ड, अब काहे ही शर्म हाहहहा

शिला - हा लेकिन मै तुम दोनो जैसी बेशर्म नही हु ना ,

रागिनी - ओहोहो , देखो तो कैसे सती सावित्री बन रही है दीदी , अरे जीजी(रज्जो) जब मै गाव गयि थी राखी पर तो फोन करके मुझे सुना सुना कर अपनी गाड़ मे उनका मुसल ले रही थी

रज्जो - वैसे जमाई बाबू देते तो जोर का ही है सीईई आह्ह साली चुत कुलबुलाने लगी सोच कर

शिला - कहिये तो बुला दू भैया को हिहिही

रागिनी- हा हा खुब समझ रही हु जीजी के बहाने आपको अपनी बुर की खुजली मिटानी है हाहहह

शिला - बोल तो ऐसे रही हो कि भैया आयेन्गे और हम दोनो को चोदेगे तो तू भल चुप चाप देखोगी ही उम्म्ंम

शिला की बात पर तीनो हस पडे

रागिनी बात बदलती हुई - अच्छा वो छोड़ो, अरे कल और मेहमान आयेंगे । बाउजी भी कल आने वाले हैं उनके लिए क्या किया जाये । फिर शादिमे सुना है समधन और उसकी ननद भी आ रही है । उनका स्वागत कुछ खास होना चाहिए ना

रज्जो - अरे क्यू नही आने दो ऐसी रगड़ रगड़ के गालिया मिलेंगी ना कि उसी से पेट और भोस्डा दोनो भर देंगे उनके

शिला - हा और क्या , वैसे भी संधन पर 6-6 यार नही 900गदहे चढाने पड़ेन्गे हहहाहा

शिला की बात पर सब हस पड़े और सारे लोग रोमान्स छोड़ शादी पर बाते करने लगे ।



शालिनी - अनुज - राहुल

बन्द कमरे की बत्ती बुझी हुइ थी , और संजोग की बात थी कि किसी के पास टॉर्च या मोबाइल जैसा कुछ भी नही था ।

तीनो एक साथ सोये हुए थे ।

अनुज और राहुल की योजना शुरु करने का वक्त हो गया था ।

अनुज - राहुल भाई मै बाहर सोने जा रहा हु , मुझे यहा दिक्कत हो रही है

शालिनी - क्या हुआ बेटा जगह कम हो रही है क्या

अनुज - हा चाची , मुझे अकेले सोने की आदत है तो , आप लोग आराम करो मै बाहर हाल के सोफे पर सो जाता हु

शालिनी - लेकिन बाहर बेटा मच्छर लगेंगे

अनुज - अरे ये चादर लेके जा रहा हु मै

राहुल - अच्छा ठिक है दरवाजा खुला ही रहेगा , अगर दिक्कत होगी तो वापस आजाना भाई

अनुज - हा भाई

फिर अनुज चुपचाप कमरे से बाहर निकल गया और हाल मे आके गैलरी और हाल की लाईट भी बुझा दी ।

कमरे मे सोई शालिनी को हल्के खुले दरवाजे से बाहर की बन्द होती बत्ती दिखी तो

राहुल सफाई देता हुआ - अरे उसे लाईट मे सोने की आदत नही है ना इसीलिए

शालिनी - हम्म चल सो जा

राहुल लपक कर अपनी मा से चिपक गया - क्या मा सो जाऊ , चलो ना कुछ करते है प्लीज

शालिनी - नही पागल दरवाजा खुला है

राहुल अपनी मा के चुचे मसलता हुआ उसके होठ पर होठ रख दिया और उन्हे चुसने लगा

बेटे के सख्त मुसल को अपने जान्घो पर घिसावट और चुचो पर रग्डाई ने शालिनी को झटके मे सिस्कने पर मजबुर कर दिया था ।

शालिनी - ऊहह बेटा मान जाआह्ह्ह ना

राहुल - मम्मी रहा नही जा रहा है उम्म्ंम प्लीज करने दो ना

शालिनी - उम्म्ंम सीई आह्ह्ह कर ले फिर उह्ह्ह लेकिन कुछ बोलना नही

राहुल - हम्म्म

फिर राहुल ने अपनी मा को मिजना शुरु कर दिया ।



अमन के घर



रात के साढ़े 10 बजने को हो रहे थे और मुरारी अपने कमरे मे सोने की तैयारी कर रहा था ।

ममता भी किचन मे अमन के लिए दूध तैयार करने के बाद उपर जाने को हुई कि उसकी नजर हाल की घड़ी पर गयी जहा पहले से ही साढ़े 10 बजने वाले थे । उस्के जहन मे भोला से किया वादा याद आया और उसकी बुर कुलबुला उठी ।

फिर वो कुछ सोच कर दुध का गिलास किचन मे रखा और कमरे मे चली गयी ।

कमरे मे देखा तो मुरारी बत्ती बुझा कर सोया हुआ था और ममता ने बत्ती जलाई तो मुरारी ने करवट लेके अपने आंखो पर हाथ रख कर तीखी रोशनी लेके सर छिपा कर सोने की कोसिस करने लगा ।

ममता उसको देख कर मुस्कुराई और कमरे से लगे बाथरूम मे ना जाकर वही कमरे मे एक ओर खडी होकर अपने सीने से दुप्प्टा उतार दिया ।

फिर खुद को आईने मे देखा तो थोडा शर्माइ और भोला की बाते याद कर उसके जिस्म मे सुरसुरी उठने लगी ।

उसे भोला की फरमाईशे गुदगुदा रही थी और वो मुस्कुराये जा रही थी । इस बात से बेफिकर की उसी कमरे मे उसका पति भी सोया हुआ है ।

ममता ने आईने मे अपने सलवार का नाड़ा खोला और उसको सरका दिया ।

मगर उसकी गुदाज गाड़ को सूट ने घुटनो तक छिपा रखा था , साइड से उसकी फुल कवर वाली पैंटी उसके चुतड़ो पर चढ़ी हुई थी ।

ममता ने उसको भी खिंच कर निचे कर दिया ।

वही मुरारी जो सोने की कोसिस कर रहा था जब उसने पाया कि काफी समय से कमरे मे एकदम शान्ति सी है और कमरे की लाईट बुझी नही

तो उसने करवट सीधी की और ममता को बत्ती बुझाने को बोलने वाला था कि उसकी नजर अपनी बीवी के बड़ी सी फैली हुई नंगी गाड़ पर गयी ।

ममता अब तक अपना सूट भी उपर कर चुकी थी । वो सिर्फ ब्रा मे आईने के सामने खडी थी ।

अपनी बीवी को यू अचानक से नंगा देख कर मुरारी का लन्ड तन गया और उसने जान्घिये के उपर से अपना लन्ड मसलते हुए खड़ा हो गया ।

उसने ममता को भनक लगे दिये बिना ही अपना लन्ड खडा करके ममता के पीछे खड़ा होकर अपना मुसल उसकी गाड़ के दरारो मे घुसेड़ता हुआ उसको पीछे से दबोच लिया और ममता अपने सपनो से बाहर आती हुई चिहुक उठी ।

उसे समझते देर नही लगी कि उसका पति अभी सोया नही है ।

ममता ने कसमसाते हुए मुरारी का हाथ छुड़ाती हुई - हुह छोडिए ना , आप तो सो गये थे ना

मुरारी अपना लन्ड ममता की गाड़ मे रगड़ता हुआ - तुमने तो नीद हुई भागा दी अमन की मा सीई अह्ह्ह

ममता - धत्त छोडिए , मुझे अभी उपर जाना है अमन को दूध देना है और दीदी के बात करनी है

मुरारी चौक कर - क्या ! तो फिर तुम कपडे क्यू निकाली हो

ममता हस कर - वो तो ये अंडरगार्मेन्ट तंग हो गये है और देखीये ना कैसे ये निशान हो जा रहे है तो रात मे सोने मे दिक्कत होती है

मुरारी - अरे तो नये लेलो ना

ममता - यहा मिलता कहा है मेरे नाप का

मुरारी - अरे अब तो समधि जी कि दुकान है उनसे बोल दो वो मगा देंगे ना

मुरारी की बात सुनते ही ममता को वो पल याद आया जब उस्की समधन मे जबरजस्ती उसकी एक पैंटी लेके गयि थी ये बोलकर वो उसके नाप के अंडरगारमेन्ट देगी

ममता - धत्त क्या आप भी , अब मै क्या उनको अपना साइज़ बताऊ

मुरारी उसके नरम नरम चुतड मसल कर - अरे तुम्हे बताने की क्या जरुरत है वो तो तुम्हे देख कर ही साइज़ बता देंगे ।ये दुकान वाले बॉडी देख कर साइज़ बता देते है ।

ममता ये सोच कर शर्म से लाल होने लगी कि रंगीलाल के सामने वो कई बार गयी है तो क्या वो उसका साइज़ जानता होगा ।

ममता उसको हटा कर अलग हुई और अपना सलवार पहनने लगी - बस करिये आप और सो जाईये । मै अभी दीदी से मिल कर आती हु

मुरारी ने सारे अरमान पल भर मे मुरझाने लगे और वो उम्मीद भरी नजरो से अपना मुसल हिलात हुआ - और इसका क्या कसुर है जो इसे सजा देके जा रही हो।

ममता इतरा कर अपना ब्रा खोलती हुई साइड रख दी और फिर सूट पहनती हुई बोली

ममता हस के - चलो साथ आप भी दीदी से इसका भी इलाज पुछ लूंगी हिहिहीहि

मुरारी झेपता हुआ मुस्कुरा दिया ।

ममता ने आईने ने खुद को देखा और एक नजर सूट मे झलकती बड़ी बड़ी छातियो के मुनक्के को देखकर इतराते हुए - बोलो च्लोगे

मुरारी उसको पीछे से हग करता हुआ उसके कन्धे पर अपने चेहरे को टिका कर सामने आईने मे उसे निहारता हुआ - ठिक है चलूंगा लेकिन एक शर्त है

ममता - क्या बोलो ना

मुरारी - इलाज तुम ही करोगी वो भी दीदी के सामने हाह्हा बोलो मंजूर है

ममता समझ गयी कि वो मुरारी बस तुक्का फेक रहा है मगर ममता ने उसको और उलझाने के लिए मुस्कुरा कर बोली - ठिक है , मुझे कोई प्रोब्लम नही है अगर आपको अपनी दिदी के सामने अपना जांघिया उतारना सही लग रहा है तो

ममता के जवाब से मुरारी झेप गया , उसे लगा कि ममत शर्मायेगी या फिर इंकार करेगी मगर वो तो तैयार हो गयी ।

ममता मे मुरारी को खोया खोया देख कर उसके मजे लेते हुए बोली - अरे आपके लिए कौन सी नयी बात है बचपन मे तो कई बार नंगे हुए ही होगे क्यू ? एक बार और सही ।

ममता की बात पर मुरारी हस दिया - तुम ना एक न्म्बर की बेशर्म हो , चलो जाओ

ममता हस कर - ओहोहो , खुद बोलो तो ठिक और मै बोलू तो बेशर्म

मुरारी- हा तो अब दीदी के सामने मै कैसे नंगा हो जाऊ , अच्छा थोडी ना लगेगा

ममता एक और टोंट मारती हुई - बात अच्छा या बुरा लगने की नही है हिहिही वो तो नियत की बात है ।

मुरारी - मतलब

ममता - अरे मै और आप दोनो मेरी छिनार ननदिया को अच्छे से जानते है , खड़ा लन्ड देखा नही कि झपट पड़ेगी । क्यू इसी का डर है ना आपको हहाहहा

मुरारी - क्या!!! नहीईई! और तुम ये सब .. मजा ले रही हो मेरा अब

ममता खिलखिला कर - नही मै सोच रही हु कि आपको मजा दिला दू , अभी जा रही हु उपर और बोलती हु दीदी को कि आपके भैया थोडा परेशान है , वो जरुर आयेगी हिहिही

ये बोलकर ममता हस कर निकल गयी और

मुरारी उसकी शरारत पर मुस्कुराता हुआ अपना मुसल जान्घिये मे घुसा कर बिस्तर पर लेट गया ।

इधर ममता किचन मे वापस आई और उपर जाने से पहले अपने सीने से दुपट्टा हटा दिया ये सोच कर कि नंदोई जी को रिझाने मे थोडा मजा आयेगा ।

उसने दूध के दो ग्लास लिये

एक ग्लास अमन के लिए और दुसरा नंदोई के लिए

खुद के भीतर उमड़ते जज्बातो को शान्त करती हुई और चेहरे की बेचैनी को मुस्कुराहट मे बदलती हुई ममता जीने से उपर गयी और पहले नंदोई के कमरे मे घुसती है

जारी रहेगी ।
 
अपडेट 182 बी

अमन के घर



इधर नीचे ममता अपनी तैयारी मे थी तो भोला भी अपनी तैयारी मे लगा हुआ था ।

भोला पेशे से मेडिकल फ़ील्ड मे एक सीनियर एम.आर. था और आये दिन उसकी देर रात तक क्लाइंट के साथ लम्बी बात चीत होती रहती थी ।

ऐसे मे संगीता या उसकी बेटी कोई उसे डिस्टर्ब नही करता था ।

इसी बात का फायदा लेके भोला ने संगीता को बोल कर बाल्किनी मे अपना लैपटॉप और मोबाइल लेके चला गया । संगीता और रिंकि सोने के लिए दरवाजा भीडका चुके थे और भोला बेचैन परेशान होकर बाल्किनी से बार उपर की गैलरी मे झाकता और कभी कभी जीने की नजर भर देख लेता । फिर बाल्किनी की ओर टहलता हुआ निकल जाता ।

इधर ममता भी उपर आ रही थी

चुकि उपर जीने पर आने के बाद पहले एक गेस्ट रूम फिर अमन का रूम आता और बाद मे भोला का रूम था ।

ममता ने जीने की सीढियो से भोला को उपर छत पर बाल्किनी की ओर गुजरते हुए देखा तो उसकी सासे चढने लगी और अनायास उसके चेहरे पर मुस्कान फैल गयी ।

ममता जैसे ही जीने से होकर उपर पहुची और उसने बेचैन परेशान भोला को पीछे से गला खराश करते हुए पुकारा

भोला ने पलट कर ममता को सामने बिना दुपट्टे के हाथ मे ट्रे मे दूध के ग्लास के साथ देखा ।

फौरन उसका मुसल तनमना गया और लपक कर वो ममता के करीब गया

भोला - ओह्ह भाभी कितनी देर लगा दी आपने

ममता ने एक नजर खाली गैलरी की ओर देखा और फिर मुस्कुराते हुए - मै कहा लेट हु , अभी तो साढ़े दस हो रहे है ना

भोला उसके करीब होकर उसको साइड से अपनी बाहो मे भरकर उसके गरदन से उसके जिस्म की भीनी खुस्बु लेता हुआ अपना कड़क मुसल ममता के जांघो पर चुबोता हुआ - उम्म्ंम भाभी अब और नही रुक जायेगा मुझसे

भोला के इस अचानक किये हरकत से ममता चौकने के साथ साथ सिहर गयी ।

ममता के दोनो हाथ बन्धे हुए ट्रे के साथ और उसकी सांसे अटक गयी ।

ममता फलती सासो से - उम्म्ं क्या कर रहे है छोडिए ना

भोला अपना मुसल ममता के जांघो पर रगड़ता हुआ उसके गालो को चुम लिया जिस्से ममता सिस्क पड़ी ।

भोला - भाभी अभी चलो ना , ऊहह प्लिज्ज्ज

ममता अपने उफनाती सासो को काबू करती हुई - मान जाओ ना नंदोई जी मै ये दूध देखकर आती हु ना इस्स्स्स उम्म्ं

भोला ममता के कान के आस पास चुमता हुआ - पक्का ना भाभी आओगी

ममता ने बडी मादकता से हामी भरी और भोला ने उसे छोड दिया ।

फिर ममता के ट्रे से दुध का गिलास ले के - जाओ अमन को दे आओ

ममता - अरे ! ये तो मै रिंकि के लिए लाई थी

भोला गर्मागर्म दूध की सिप लेता हुआ - भाभी वो नही पीती है

ममता - ठिक है मै अमन को दे दू फिर

ये बोल कर ममता मुस्कुराते हुए अमन के कमरे की ओर बढ़ गयी और अपनी उफनती सासो को काबू करने लगी ।

अमन के कमरे के पास पहुच कर उसने वापस भोला की ओर देखा जो उसके मटकते भारी कूल्हो को देख कर अपने चढढे के उपर से अपना मुसल मसल रहा था ।

ममता उसकी हरकत देख कर मुस्करा दी और अमन के कमरे का दरवाजा खोलती हुई बेबाक भीतर घुस गयी ।

वही अमन निशा के किये हुए मैसेज पढ़ रहा था , जहा निशा ने उसको बताया था कि आज रात सोनल की चुत पर मेंहदी रखी जायेगी ।

निशा के मैसेज पढकर अमन का मुसल तन गया था । और

अमन ने रिक़्वेस्ट की निशा उसकी फोटो निकाल कर भेजे ।

अमन कुछ और बाते करता इससे पहले उसकी मा दरवाजा खोलकर भीतर आ चुकी थी ।

सामने अमन सोफे पर बैठा हुआ था और अचानक से अपनी मा को देख कर वो चौक कर ।

उसने मोबाइल साइड रख दिया और खड़े होकर अपनी मा के इस नये रूप को देखने लगा ।

जहा उसकी आज पहली बार उसके सामने बिना दुपट्टे के आई थी । वही ममता भी शायद इस बात से अंजान थी कि भोला ने स्पर्श औए चुम्बन ने उसके मोटे मुन्क्के फुला दिये थे जो उसकी सूट को भेडे हुए तन चुके थे ।





अमन ने थुक गटक कर अपनी मा के तने हुए निप्पल देखा और जैसे ही खड़ा हुआ तो उसकी मा की आंखे फैल गयी ।





उसके अंडरवियर मे उसका बडा सा मुसल फुला हुआ था । जिसका सुपाडा भी साफ साफ फड़कता नजर आ रहा था ।

अमन के इस रूप को देख कर ममता शर्मा कर मुस्कुराते हुए - तुझे शर्म नही आती , शादी का माहौल है और घर मे मेहमान है । उपर से तू ऐसे ..

ममता ने अमन को उसके तने हुए लन्ड की ओर दिखा कर बोला ।

फिर घुमकर दरवाजा बन्द करके चटखनी लगाते हुए - अरे घर मे रिंकि है और बुआ है तेरी । कुछ तो शर्म कर

अमन लजाता हुआ हसकर तौलिया लपेट लिया मगर वो उसके फुले हुए मुसल के उभार को छिपाने मे कामयाब ना रहा ।

ममता ने कुछ सोचा और फिर बोली - अच्छा सुन तेरे पास कोई ढीला चढढा है

अमन - क्यू

ममता हसती हुई - अरे कल तेरी मामी भाभी बुआ सब तुझे हल्दी लगायेंगी और तु सिर्फ अंडरवियर मे रहेगा और उस टाईम कही ये ...हिहिहिहिही

अमन शर्माता हुआ - क्या मा आप मजे ले रही हो । एक मुझे डर लग रहा है । याद है ना काजू भैया (अमन की मौसी का लड़का ) की शादी मे कैसे मामी उनको परेशान की थी ।

ममता - वही मै कह रही हु ना उसकी क्या हालत हुई । आज तक तेरी मामी उसका मजाक उड़ाती है हिहिहिही

अमन उखड़ कर - वही ना

ममता - इसीलिए कह रही हु तेरे पास कोई बडा ढीला चढ़ढा है

अमन - बड़े मे तो लोवर होगे मेरे पास , एक शॉर्ट्स है ढीला है थोडा

ममता - ठिक है दिखा मुझे

अमन फौरन उठ कर अपनी आलमारी तालाशने लगा ।

फिर उसने एक शॉर्ट्स और एक लोवर निकाला

ममता - ठिक है इनको बारी बारी से पहन के दिखा

अमन पहले अपना एक शॉर्ट्स लेके बाथरूम जाने लगा तो ममता ने आवाज दी - कहा जा रहा है यही बदल ले

अमन शर्माता हुआ हस कर - क्या!! न्हीईई

अमन ये बोलकर बाथरूम मे घुस गया तो ममता हसने लगी ।

फिर अमन दो मिंट बाद बाथरूम से बाहर आया ।

अमन को देखकर ममता थोडा शर्माते हुए हसने लगी ।

क्योकि उसके बेटे का मोटा 9 इंच का बड़ा सा उस पुराने शॉर्ट्स से बाहर झांक रहा था । निचे से उसके सुपाड़े की लाली साफ नजर आ रही थी मगर अमन को ये फर्क नही नजर आ रहा था ।

उसने अपनी मा से हसने का कारण पूछा तो ममता ने हसकर बोली - ये कबकी निकर है तेरी हिहिहिही

अमन - हाईस्कूल की , क्यू ?

ममता हस कर इशारे से उसको निचे दिखाते हुए बोली - तभी वो झांक रहा है निचे से हाहह्हा

अमन को जैसे ही अहसास हुआ वो लपक कर दोनो हाथो से अपना लन्ड छिपाते हुए बाथरूम मे भाग गया ।

ममता खिलखिलाके हसने लगी ।

अमन - मम्मी यार आप मजाक ना उडाओ प्लीज और मेरा लोवर दोगे

ममता - क्यू

अमन झिझककर - वो मैने गलती से अंडरवियर फर्श पर ही निकाल दिया और वो गीली हो गयी है थोड़ी

ममता हस कर - अब तो बाहर आ ब्च्चु हिहिहिही तभी मिलेगा लोवर

अमन को थोडा झिझक और शर्मीन्दी हो रही थी मगर आज उसके मा के ये खिला हुआ रूप उसे बहुत उत्तेजित कर रहा था । शाम को उसकी मा के चुतड और अब उसके तने हुए चुचे ने अमन को कामरस मे भिगोना शुरु ही कर दिया था ।

अमन ने तय किया कि देखते है ये सब कहा तक जा सकता है वो अपनी मा को नंगा देखने के लिए कुछ भी कर गुजर सकने को फड़फ्ड़ा रहा था ।

इसीलिए उसने अपनी मा की दिलचसपी देखनी चाही ।

अमन ने खुद को शान्त किया और चेहरा गिराते हुए शर्माते मुस्कुराते बाहर आया ।

सामने देखा तो उसकी मा हाथ मे वो लोवर लेके खडी थी जो उसने अभी अभी आलमारी से निकाला था ।

अमन बच्चो जैसे रौंदू शकल और जिद दिखाते हुए - क्या मम्मी दो ना , क्यू तंग कर रहे हो

ममता - तु मुझसे इतना शर्मा क्यू रहा है , भूल गया बचपन मे मेरी गोद मे नंगा पुँगा होकर मूत मूत कर मुझे पुरा भीगा दिया करता था ।

अपनी मा की बात सुनकर अमन हसते हुए - तो क्या आप मै फिर से आपकी गोद मे नँगू पँगू होकर रहु और पेसाब करू हिहिहिहिही

अमन की बातों ने ममता को कुछ पलो के लिए बान्ध दिया और अगले ही पल वो हस दी - चुप कर बदमाश और निकाल इसको बदल मेरे सामने

अमन वापस से बच्चो पैर पटकता हुआ रोतडू सी शकल के साथ - म्ममीईई याररर

ममता ने अपने दोनो हाथ अपनी कमर पे रखते हुए अमन को आंख दिखाई मानो उसकी बात ना मानने पर अमन को सजा मिलेगी ।

अमन फिर से भुनभुनाने लगा और ममता को हसी आने लगी । उसे अपने लाडले का बचपना रिझाने लगा और वो इस पल को इन्जाय कर रही थी ।





अमन ने मुह बनाते हुए अपना जांघिया अपनी मा के सामने धीरे धीरे सरकाने लगा और तभी उसका 9 इंच लम्बा बियर की कैन सा मोटा लन्ड उछलता हुआ बाहर निकल गया ।





ममता अपने बेटे के भयानक लन्ड को देखकर चौकी गयी । लन्ड की फूली हुई नसे देख कर ममता की सासे फुलने लगी और उसका सुर्ख गुलाबी सुपाडा धीरे धीरे और लाली लिये जा रहा था ।

अमन ने नजर भर अपनी मा को देख और मुस्कुरा कर अपना भुनभुनाने वाला नाटक जारी रखा ।

ममता को उम्मीद नही थी उसका लाडला सच मे इतना बड़ा हो गया होगा ।

ममता ने बिना कुछ बोले हाथ बढा कर अमन को लोवर दे दिया और अमन ने मुस्कुराते हुए अपनी निश्ब्द मा को देखने लगा ।

उसमे फौरन जल्दी जल्दी वो लोवर पहन लिया और अपनी मा को दिखाता हुआ बोला - देखो ये सही क्या अब

ममता एक गहरी आह्ह भरती हुई अपनी आंखे भीच कर फैलाती हुई वापस से अमन को देखा ।





इस ढीले लोवर का भी कोई खास फायदा नजर नही आ रहा था , अमन का मुसल अभी ऐसा ही दिख रहा था मानो उसने अपने कमर मे कोई मोटा तंदुरुस्त गन्ना बांध रखा हो ।

ममता - अरे नही , हल्दी तेरे पैर मे भी तो लगेगि ना । फिर इसका बाजू नीचे पतला है ।

अमन - फिर

ममता - कल मै तेरे पापा को बोलकर मगवा दूँगी ।

अमन - ठीक है फिर मै इसको निकाल दू

ममता हस कर - हा निकाल दे लेकिन पहनेगा क्या हिहिहिही

अमन झेप कर - क्या मा आप भी

इधर इनकी बाते हो रही थी और वही लगातार मैसेज कर रही थी , मगर अमन का जवाब ना मिलने के नाते उसने एक बार काल किया ।

फोन रिंग होते ही अमन और ममता दोनो का ध्यान उसपे गया

ममता अमन को छेड़ती हुई - चल भाई मै जा रही हु , अब तुम दोनो लैला मजनू आपस मे चुम्मीया लो दो हिहिहिही

अमन शर्मा कर - क्या मम्मी आप भी , ऐसा कुछ नही है ।

ममता हस के - अच्छा एक बात बता

अमन - हा पूछो

ममता - ये तुम सिर्फ़ गालो पर ही पप्पीया लेते हो क्या ?

अमन अपनी भौहे सिकोड़ते हुए - मतलब

ममता खिलखिलाती हुई हस कर - नही हर बार सिर्फ़ तु मुझे गालो पर ही चुम्मीया देता है ना इसीलिए बोली हहहाहा

अमन - फिर और कहा चुम्मी ली जाती है

ममता - क्यू होठो वाली चुम्मी नही लेते क्या तुम लोग हिहिहिही

अमन - उसको समूच कहते है मम्मी हीहिहिही

ममता - भई मै ठहरी हिन्दी मीडियम वाली , मै तो उसे होठो वाली चुम्मी ही जानती हु ना हिहिहिहिह

अमन - हा लेकिन हमे मौका कहा मिलता है , जब मिलेगे तब ना करेंगे वो सब

ममता - मतलब तुने कभी भी होठो वाली ....

अमन - की है दो तीन बार

ममता - अच्छा ब्च्चु और मुझे बताया भी नही

अमन - लेकिन आपको क्यू बताना

ममता आंखे दिखा के - भूल गया अभी उस दिन बोला कि जितनी तु बहू को चुम्मी देगा उससे एक ज्यादा मुझे

अमन शर्मा कर हसता हुआ - हा मम्मी लेकिन वो मै और सोनल आपका वाला चुम्मी नही करते है ना , हमारा दुसरा होता है

ममता - अच्छा वो कैसी

अमन झिझक के - वो हम लोगो की चुम्मी 5 , 10 कभी कभी तो 15-20 मिंट तक चलती है

ममता के लिए ये कुछ नये जैसा था वो अचरज से - क्या ? मतलब 10 20 मिंट ऐसे होठ से होठ सटाये थकते नही तुम लोग हाहहहा

अमन हस के - अरे मम्मी अब कैसे बताऊ मै आपको

ममता - अरे करके बता ना

अमन - पक्का

ममता मुस्कुरा कर एक उत्सुकता से गहरी सांस लेती हुई उसके करीब गयी और अपनी आंखे बन्द कर अपना चेहरा अपने बेटे के आगे करते हुए - हम्म्म्म

अमन की सांसे चढ रही थी कि वो अपनी मा को कैसे लिप टू लिप किस्स करेगा ।

तभी ममता फिर से उसको डांटते हुए बोली - कर ना !!

अमन ने हौले से अपने मा के नरम नरम गालो को थामा और धीरे से अपने तपते होठ अपनी मा के रसिले सॉफ़्ट होठो से जोड़ दिये और हल्के से अपने होठ खोलता हुआ उसने अपनी मा के निचले होठ को अपने गर्म होठो मे भर कर चुबलाने लगा ।

ममता के रसिले मुलायम होठ मोम के जैसे अमन के मुह मे घुलने लगे और ममता को पहली बार एक नये स्पर्श और नये अनुभव हुए





उसका पुरा जिस्म इस नये रोमांच से गनगना गया , वही अमन अपनी मा के रसिले होठो पर पकड मजबूत करता हुआ उसको चुसने लगा ।

ममता की सासे भारी होती चली गयी और करीब 3 मिंट बाद अमन ने अपनी मा को छोड़ा ।

अमन हाफ्ता हुआ हसकर अपने होठ पोछने लगा और ममता ने शर्माते हुए हसकर उसकी ओर देखा ।

उसके चेहरे पर इस नये अनुभव की चमक साफ दिख रही थी । आज तक उसने ऐसे अनुभव नही किये ।

मुरारी उसे नंगी करके चोदता तो बहुत जबरदस्त ही था , मगर ममता को ह्मेशा से कुछ नया कुछ बेहतर की तालाश थी ज्यादातर वो बस निचे लेटी रहती थी और वो चोद कर झड़ कर सो जाता था ।

ममता ने सालो से अपने भीतर कई अरमान दफना रखे थे और उसी आग को सबसे भोला ने चिन्गारी दी फिर अब उसके बेटे ने एक नई हवा से उसमे आग फूँक दी थी ।

अमन हस कर - देखा ऐसे ही होता है हिहिहिही

ममता अपने होठ पोछ कर - ये तु चुम्मी ले रहा था कि चबा रहा थे मेरे होठ को । सारी लिपस्टिक भी साफ कर दी तुने

अमन खिलखिलाकर - ये नेचुरल लिपस्टिक रिमोवर था हाहहहा

ममता उसकी बात पर हस पड़ी- धत्त शैतान कही का ,

अमन हस कर - फिर मजा आया ना आपको , उम्म्ं कैसा लगा ?

ममता को अपने बेटे से ऐसे सवाल की उम्मीद नही थी और वो शर्माने लगी ।

अमन - क्या मा बोलो ना , ह ना आपकी वाली चुम्मी से एकदम अलग उम्म्ं

ममता हस के - हा भाई , एकदम होश उडा दे ऐसा हाहाह्हा , वैसे तुने कहा से सीखी ये वाली चुम्मी उम्म

अमन हस कर - मोबाइल पे नेट से , वहा सब कुछ मिल जाता है सिखने को

ममता - हम्म्म तो और क्या क्या सिखा है तुने

अमन - आपको क्या सीखना है बताओ

ममता अमन के दोहरे अर्थ वाली बात पर फिर से शर्मा गयी और बोली - हट्ट गन्दा , मुझे नही कुछ सिखना ।

अमन हस के - वैसे एक बात कहू मम्मी

ममता - हा बोल

अमन - आज ये वाली चुम्मी पापा पर ट्राई करना खुश हो जायेंगे वो हिहिहिही

ममता मे लपक के उसके कान ऐंठ कर - चुप कर शैतान कही का , तुझे ऊँगली दी तो हाथ पकड रहा है हम्म्म

अमन खिलखिलाता हुआ - अच्छा सॉरी ना मम्मी हिहिहिही

ममता उसको छोड़ दिया और अपने कान मलता हुआ - ऊहह , क्या मम्मी मै तो बस आइडिया दे रहा था ना । जैसे आप और पापा रोमांस ही नही करते होगे ।

ममता उसकी बात पर हस दी - क्या रोमान्स हिहिहिही , उन्हे कहा आता है रोमान्स वो बस एक ही रोमान्स जानते है ।

अमन अभी भी अपने कान सहलाते हुए - क्या ?

ममता को लगा कि अमन समझ जायेगा मगर उसने जब देखा कि अमन एकदम सामान्य रूप से अपने कान सहलाये जा रहा था तो वो उसकी मासूमियत पर मुस्कुरा दी - कुछ नही छोड़

अमन - क्या मा बताओ ना , इसमे छिपाना कैसा ? देखो मै और सोनल तो बहुत रोमैंटिक है । हम तो खुब सारि बाते करते है और हिहिहिही

ममता अमन के बाजू पर चपत लगाती हुई शर्मा कर- धत्त अरे रोमान्स सिर्फ़ बातो का ही थोड़ी होता है । वो तो साथ रह कर अकेले मे जो किया जाये वो वाला बोल रही हु

अमन अपनी मा को शर्माता देख कर - आपका मतलब हम तुम एक कमरे मे बन्द हो और चाभी खो जाये वाला हिहिहिहिही

ममता शर्मा कर - चुप बेशर्म कही का ,

अमन हस कर ममता के दोनो गुलाबी गाल खिंचता हुआ उसके एक गाल को चुमता हुआ - हिहिहिही मम्मी आप तो शर्माते हुए बहुत क्यूट लगते हो

ममता ने तुनक कर उसका हाथ झटका

अमन - मुझे नही लगता इतनी प्यारी बीवी हो और कोई रोमैंटिक ना हो ।

अमन ने पीछे जाकर अपनी मा को बाहो मे भरते हुए उसके गुबाबी गालो को चुमता हुआ बोला - मै पापा की जगह होता तो ऐसे हग कर खुब सारा प्यार देता उम्म्ंम्ं उम्म्ंम उम्म्ंम

ममता अपने बेटे के स्पर्श और दुलार से सिहर कर मुस्कुरा उठी - हा छोड़ मुझे अब , तु मेरा पति नही है समझा

अमन - क्यू , क्या सिर्फ़ पापा को ही हक है कि आपको प्यार करे , मुझे हक नही मै अपनी मा को प्यार करु

ममता अमन की मीठी मीठी बातो और उसके जिस्म का गर्माहट भरे स्पर्श से घुलने लगी थी - क्यू नही है , सारे बच्चो का हक होता है अपनी मा पर तो तेरा भी है मगर ?

अमन - मगर क्या ?

कुछ पल के लिए कमरे मे चुप्पी सी छा गयी और बस दोनो के दिल में कुछ बाते चलने लगी जिससे दोनो की धडकनें तेज हो रही थी ।

ममता कुछ सोचकर मुस्कुराते हुए बोली - मगर ये कि पति के प्यार मे कोई मर्यादा नही होती है मगर बेटे के प्यार मे होती है ।

अमन - इसमे मर्यादा कैसी ?

ममता मुस्कुराती हुई - मतलब ये कि मा बेटे का प्यार सिर्फ मन की सीमाओ तक ही होता है और एक पति-पत्नी का प्यार मन से आगे बढ़ कर जिस्म को शामिल करता है ।

अमन - ओह आपका मतलब एक मा बेटे जिस्मानी संबध नहीं बना सकते बाकी सारे प्यार कर सकते है

ममता हस कर - हा पागल हिहिहिही

अमन - मगर मै तो आपको कितनी सारी पप्पिया देता हू तो क्या गलत नही है ?

ममता - नही !

अमन - क्यू ?

ममता मुस्कुरा कर - क्योकि मा बेटे का रिशता शरीर से जुड़ा होता है तो कुछ हद तक एक मा अपने बेटे को शारिरीक प्रेम कर सकती है ।

अमन - जैसे ?

ममता अमन की उत्सुकता पर मुस्कुराइ- जैसे जब तु छोटा था तो मै तुझे दूध पिलाती थी और तुझे दुलार करती थी । बस वैसा ही ।

अमन - तो यानी कि मै अभी भी आपके दूध पी सकता हु ना

ममता खिल्खिलाई और हस कर बोली - धत्त अब कहा इसमे दूध आता है और अब तो तु बड़ा भी हो गया है हिहिहिही

अमन - क्या मम्मी , मुझसे मेरे हिस्से का प्यार तो ना छीनो । अभी तो बोली आप कि बेटा अपनी मा के दूध पी सकता है

अमन की जिद भरी बचकानी बाते ममता की सासे फूला रही थी और वो काप रही थी ।

ममता उससे अलग होती हुई हस कर - हा लेकिन वो छोटे बच्चों पर लागू होता है और तु घोड़े जैसा हो गया है हिहिहिही

अमन - क्या मम्मी ये तो गलत है ना

ममता - नही बोला ना तुझे , जा वो वाला दूध पी हिहिहिही

ममता ने बिस्तर के पास रखे हल्दी केसर वाले दूध की ओर इशारा किया ।

अमन - मम्मी प्लीज ना !!!!

ममता अमन को छोटे बच्चों जैसे जिद दिखाता देख हसने लगी और उसने एक नजर घड़ी की ओर देखा तो 11 कबके बज गये थे ।

अमन के साथ उसको समय का पता ही नही चला , उसे भोला की चिन्ता अलग होने लगी ।

उसने यही सोचा कि अमन आखिर उसका बेटा ही है और एक बार की जिद पूरी करने मे कोई हरज नही है

ममता हस कर ऊँगली दिखाती हुई - बस एक बार ठिक है

अमन - हा पक्का

ममता वही बिस्तर पर बैठ गयी और अपने सूट को उपर करने लगी ।

ममता - आजा गोदी मे

अमन खुश हुआ और चहकता हुआ ममता की गोद मे लेट गया और ममता ने अपना सूट उपर करते हुए एक तरफ की अपनी 42 साइज़ की मोटी खरबूजे जैसी चुची बाहर निकाली और उसपे बडा सा गुलाबी भूरा घेरा लिये काले अंगूर के दाने जैसा निप्प्ल अमन के मुह के सामने था । अमन ने जरा भी देरी नही कि और लपक कर उसने अपनी मे निप्प्ल को मुह मे भर लिया ।

ममता सिस्क पड़ी- अह्ह्ह बदमाश आराम से उह्ह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं

अमन ने अपनी मा के निप्प्ल को अपनी जीभ पर रखा और उसके चारो ओर होठो का घेरा बना कर उसको चुसने लगा ।

खुरदरी जीभ की मुलायम रगड़ अपने निप्प्ल पर पाकर ममता सीस्क उठी , उसकी चुत कुलबुलाने लगी ।

वही अमन का लन्ड उसके लोवर मे त्म्बू बना चुका था ।

ममता की नजर अपने बेटे के तने हुए मुसल पर गयी तो उसकी सासे और चढने लगी ।

ममता सिसकते हुए अमन के बालो को सहलाते हुए - बस कर बेटा उह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं

अमन मुह हटा कर - मम्मी ये वाला भी प्लीज

मादकता मे सनी ममता अपने लाडले के प्रेम भरे आग्रह को ठुकरा ना सकी और उसने साइड से दुसरी छाती भी खोलकर उसको अपने बेटे के होठो से लगा दिया ।

एक बार फिर अमन के होठ उसके चुचो पर कस गये और ममता की सिसकिया बढ गयि ।





ममता ने दुलार भरे स्पर्श से अमन के सर मे हाथ फेरने लगी मानो उसके बेटे का बचपन लौट आया हो , मगर अगले ही पल उसकी नजर लोवर मे फड़कते उसके लाडले का 9 इंच का बांस जैसे मोटे लन्ड पर चली जाती जो एक बडा सा तम्बू बनाए हुए था ।

ममता बस उसे निहारते हुए अमन के पीठ को सहला रही थी ।

ममता मदहोशि मे - हो गया बेटा

अमन उसकी चुची मुह हटा के- हम्म्म्म

ममता मुस्कुरा कर - बदमाश कही का ! चल उतर अब , दो दिन मे शादी है और तु यहा अपनी अपने मा के दूध पी रहा है , क्या कहेगी मेरी बहू कि सासु का बेटा तो अभी बच्चा है हिहिहिही

अमन - कहने दो उसको , उसके कहने से मै मेरी मा को प्यार करना नही छोड़ने वाला हु

ममता ह्स कर खड़ी हुई और अपना सूट सही किया - चल बहुत हो गयी बाते अब ये दूध पी कर सो जा

अमन लपक कर अपनी मा के गाल चुमकर - हम्म ओके थैंकू मम्मी

ममता हस कर - तुझे बस मौका चाहिये , गीला कर देता है

अमन हसने लगता है और उसकी मा कुल्हे हिलाते हुए कमरे के बाहर चली जाती है ।

अभी वो अपनी सासे बराबर कर अमन की शरारतो के बारे मे सोच रही होती है कि सामने गैलरी मे भोला उसको खड़ा दिखाई दे रहा होता है ।

उसकी नाराजगी से ममता बखूबी वाकिफ थी और वो जान रही थी कि भोला की नाराजगी और उसे आधे घंटे अतिरिक्त इंतेजार करवाने के लिए कैसे मनाना है ।

वही अपनी मा के जाते ही अमन ने एक गहरी आह भरी और मुस्कुराता हुआ अपना मुसल भींचता हुआ लपककर मोबाइल पकडता है ।

तो देखता है कि निशा ने 3 बार वीडियो काल किये थे करिब 40-45 मिंट पहले ही और अमन ने जब सॉरी बोलते हुए मैसेज किया तो निशा ने गुस्से मे उसे रिप्लाई किया कि उसने वीडियो काल पर लाइव सोनल की बुर पर गुलाब खिलते देखना मिस्स कर दिया ।

अमन को एक पल को बहुत अफसोस हुआ मगर उसे खुशी थी कि उसने अपनी मा के साथ अब तक सबसे बेहतरीन पल गुजारा था ।

फिर उसने फरियाद की निशा से कि वो उसे तस्वीरे भेज दे मगर निशा ने एक ऐसी शर्त रख दी अमन के सामने जिसे वो चाह कर भी मना नही कर सकता था ।

अमन ने मुस्कुराते हुए हामी भर दी और अगले ही काफी सारे सनैप्स निशा ने अमन को भेज दिये धडाधड एक एक करके उसका मोबाईल बिप होने लगा ।

अमन ने फ़ाईल खोलकर देखने लगा और उन तस्वीरो को देख कर उसका लन्ड और भी ज्यादा अकड़ने लगा ।





लम्बे समय से जो सैलाब उसने अपने अंडकोष की थैलियों मे रोके हुए था और वो कुछ बार हाथो से लन्ड रगड़ने पर फूट पड़ा और उसका लोवर उसकी जान्घे सब भीग गये ।

थोड़ी देर सुस्ताने के बाद अमन उठा और बाथरूम मे नहाने चला गया ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 182 स

राज के घर



अन्धेरे कमरे मे शालिनी अपनी साडी कमार तक चढाए हुए घोडी बनी हुइ थी और उसका बेटा राहुल अपनी मा की चुत मे खुब ह्चक हचक कर लंड पेल रहा था ।





शालिनी की घुटी हुई मादक सिसकिया दरवाजे पर कान लगाये खडे अनुज के कानो मे पड रही थी और वो अपना लन्ड बाहर निकाल कर तेजी से उसको भींच रहा था ।

योजना के हिसाब से तय हुआ था कि राहुल पहले अपनी मा को खुब गर्म करके चुदाई के लिए तैयार करेगा और जब चोदने की बारी आयेगी तो वो अनुज को बुला लेगा ।

मगर राहुल की अपनी मा को गर्म करके चुदाई के लिए तैयार करने की योजना तो सफल रही मगर वो खुद अपनी मा को चोदे बिना रह ना सका और कस कस अपनी मा को पेले जा रहा था ।

अनुज की चिडचिडाहट अब बढ़ रही थी कि राहुल ने अपना वादा पुरा नही किया , उसको राहुल पर बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था ।

तभी कमरे मे राहुल के सिस्कने की आवाज आई और वो अपनी मा की बुर मे झड़ने लगा ।

फिर वो अपना लन्ड झाड़ कर पीछे हट गया - मम्मी मै पेसाब करके आ रहा हु

शालिनी जो कि काफी समय से घुटने के बल घोडी बनी हुई थी और बीते दो दिनो की कसर उसके बेटे मे जिस तरह से हचक कर पेल के पुरी की थी ,उससे हिम्मत नही हो पाई कि वो अपने कपडे ठिक कर पाये और वो वैसे ही अधनंगी पेट के बल लेटी रही थी ।

पंखे की सर्द हवाओं से जल्द ही राहुल का वीर्य सुखने लगा ।

इधर राहुल जैसे ही बाहर आया तो जीने के पास अनुज और उसकी फुसफुसाहट भरी कहा सुनी होने लगी ।

राहुल अपने गलती से अनुज से माफी मागने लगा और बोला कि नेक्स्ट बारी कोसिस की जायेगी ।

फिर वो पेसाब के लिए उपर चला गया और अनुज जिसका मूड खराब हो गया था उसने सोचा मूड़ खराब हो ही गया है कम से कम नीद तो अच्छी ली जाये ।

इसीलिए वो हाल से अपना चद्दर तकिया लेके वापस कमरे मे चला गया और बत्ती जला दी ।

बत्ती जलते ही उसकी नजर बिसतर पर पेट के बल लेटी शालिनी पर गयी जिसकी साडी अभी तक कमर तक उपर चढ़ी हुई थी और उसके नरम मुलायम भरे भरे चुतड साफ साफ दिख रहे थे ।





ये नजारा देखते ही अनुज का सोया लन्ड और बिसरे अरमान जाग गये ।

वही कमरे मे बत्ती जला पाकर शालिनी ने बड़बडाते हुए अनुज की ओर घूमी - अरे बेटा लाईट क्यू जला दी , अनुज तु!!

वो फौरन झटके से उठी और जल्दी जल्दी अपनी साडी ठिक करने लगी ।

अनुज अभी भी वैसे ही अपनी चाची को निहार रहा था ।

वही शालिनी को समझ नही आ रहा था कि अनुज को क्या जवाब दे ।

अनुज भी बस चुप था और ऐसा दिखावा कर रहा था मानो उसे कुछ पता नही था ।

शालिनी जबरन की मुस्कान अपने चेहरे पर लाती हुई बोली - अरे वो मेरे पाव मे दर्द था ना तो राहुल को बोला कि थोड़ी मालिश कर दे इसीलिए

अनुज नजरे चुराकर वापस कमरे से जाने लगा - जी चाची

शालिनी - अरे क्या हुआ तु कहा जा रहा है , सोने आया है ना तो यही सो जा चल

अनुज - हम्म्म ठिक है

शालिनी को अनुज की ये चुप्पी खलने लगी थी मगर इस संजोग के लिए वो क्या ही जवाब देती । बस वो शूकर मना रही थी कि अनुज सब कुछ होने के बाद आया ।

थोड़ी देर बाद राहुल भी आया और तीनो वापस बिस्तर पर लेट गये । थका हुआ राहुल बिस्तर पर आते ही जल्द ही सो गया । मगर अनुज और शालिनी के लिए नीद अभी दुर की बात थी ।

अनुज ने बिल्कुल भी नहीं सोचा था कि कुछ ऐसा हो जायेगा और वो इस बात को गुप्त ही रखने वाला था ।

शायद इसके बाद से वो अपनी चाची को चोदना तो दुर नजरे भी ना मिलाए ।

एक कमरे मे जहा ये सब घट रहा था वही बगल के कमरे मे सोनल की मादक सिसकिया ले रही थी ।

खुली टांगो के बिच झुकी हुई रीना ने उसके गर्म चुत के दाने के पास ठंडी ठंडी महँदी के कोन से गुलाब की पंखुडियां बना रही थी ।

वही सोनल हस्ती खिलखिलाती तो कभी चुत के पास ठंडी छरहराहट से अपने कुल्हे पटकती ।

जिस पर रीना उसको डांट देती थी ।

इधर निशा बार बार फोन लगा रही थी अमन को मगर वो फोन उठाने से रहा ।

खीझ कर उसने इस मोमेंट के स्नैपस ले लिये कि इन स्नैपस के बदले मे अमन से कुछ अच्छी वसूली की जा सके ।

रीना - ओह्ह मेरी लाडो रानी जब इस ठंडी ठंडी कोन से ही तुम्हारी मुनिया इतना पानी बहा रही है उम्म्ंम

"और जब नंदोई जी मोटा खुन्टा इसपे रगडेगा तो क्या हाल होगा ", रीना ने मेंह्दी के कोन के पीछे वाले मोटे हिस्से हो घुमा कर सोनल की बजबजाई बुर मे घिसते हुए कहा ।

सोनल अकड़ते हुए सिस्क पड़ी- सीईई अह्ह्ह भाभीईई क्या करती हो उम्म्ंम धत्त





"मै कहा कुछ कर रही हो , ये खुद रो रही है । कहो इसके आंसू पोछ दू " , रीना ने अपनी अंगूठे से सोनल के चुत के दाने उपर की तरफ रगड़ते हुए कहा

सोनल ने जोर से अपनी गाड़ उचकाइ और सिस्क पड़ी

वही ये सब देखकर निशा की भी बुर कुलबुलाने लगी ।

वो अपनी चुत मलते हुए रीना की हरकते निहारने लगी ।

रीना ने वापस से सोनल को पुचकारा - बोलो ना ननद रानी , पोछ दू एकदम से चिकना कर दूंगी

सोनल ने मादकता मे हस कर बोली - उहू नही झुठा हो जायेगा वो

रीना - सल्हज और साली का झुठा तो नंदोई खा ही सकते है , क्यू निशा

निशा अपनी बुर मसलती हुई - हम्म्म्म क्यों नही भाभीईई

सोनल कसमसाती हुई - उम्म्ंम नहीईई भाभीई प्लिज्ज्ज सीईई अह्ह्ह

निशा - भाभी ये साली ऐसे ही नखरे करेगी , आप चाटो ना इसकी रसिली चुत उम्म्ंम्ं

रीना निशा के उतावले पन पर मुस्कुराइ औए बोली - फिर तो तुम ही शुरुवात करो ।

सोनल- क्याह्ह न्हीईई

निशा - अब बस भी कर ना याररर कितना नाटक करेगी , आखिरी बैचलर पार्टी समझ कर इंजॉय कर ना

ये बोलते हुए निशा ने बडे हिसाब से उपर की महँदी खराब ना हो रिसती आइसक्रीम की तरह निचे से उपर की ओर कर के सोनल के फाको पर अपनी जीभ फिराई और सारी मलाई उसके मुह मे





दो बार दाँतो मे जीभ को फिराया और अगली बार गले से सिधा पेट मे ।

सोनल पैर झटक कर रह गयी ।

निशा ने उसकी जान्घे खोलते हुए रिना को आग्रह किया और रिना ने एक बार निशा के जैसे निचे से उपर की ओर अपनी जीभ को नुकीला करते हुए चुत मे धंसाते हुए चाट कर भीतर से मलाई निकाल लाई और चटकारे लिये ।

रीना - उम्म्ंम्ं लाडो रानी , साले नन्दोई की चान्दी हो जायेगी । क्या रसिली बुर मिल रही है उसको

निशा - हा भाभी , जीजा तो किसमत वाला निकला

रीना ने वापस से एक बार फिर सोनल की बुर की गहराई जीभ घुसा कर टटोलकर ढेर सारी रबड़ी निकालती हुई घोट गयी - उम्म्ंम्ं काफी समय बाद ऐसी रसभरी नमकीन चुत मिली

निशा - उम्म्ं भाभी इससे पहले किसका था हिहिहिही

रिना की बात पर सोनल ने भी फूलती सासो के साथ जिज्ञासा दिखाते हुए रिना को ताकने लगी

रीना उसकी बुर मे उंगलिया लगा कर उसको चाटती हुई बोली -अरे वही मेरी कमिनी भाभी

शादी मे मेरी भी ऐसी ही रग्डाई हुई थी और वो मेरे मुह पर बैठ कर अपना भोसडा खुब रगड़ रगड़ कर झड़ी थी मेरे मुह मे

" कैसे भाभी बताओ ना जरा " , निशा ने एक शरारत भरी नजर से सोनल को हस कर देखा

सोनल ने उसको आंख दिखाई

मगर रीना कहा मानने वाली थी आज ,

वो झटके से उठी और अपनी साडी निकाल के ब्लाउज पेतिकोट मे आ गयी ।

फिर अपना पेतिकोट खोलते हुए निचे से पूरी नंगी हो गयी ।

सोनल थुक गटकते हुए पहली बार रिना की तराशे हुए नन्गे जिस्म को निहार रही थी । उसकी चुत की फाके बिल्कुल चिपकी हुई और चिकनी थी ।

सोनल के गले पानी आने लगा मगर वो ऐसे दिखाने लगी कि मानो उसके साथ जबरज्सती हो रही हो ।

सोनल - न्हीईई भभीई प्लिज्ज्ज

रीना - निशा इसके पैर पकड बस , हाथ तो वैसे ही नही चलने वाले

निशा खिलखिलाई और उसने सोनल के पाव पकड लिये

रीना अब अपने दोनो पैर सोनल के चेहरे दोनो ओर करके निशा की ओर अपनी गाड़ करके खडी हो गयी ।

रीना - पता है निशा मेरी भाभी ने सबसे पहले क्या किया था

निशा - क्या भाभी

रीना - उन्होने पहले मुझे अपना भोस्डा सुन्घाया था जिसको मेरे भैया ने खुब चोद चोद के फैलाया हुआ था

ये बोलते हुए रिना सोनल के मुह के ठिक उपर उक्डु होकर बैठ गयी और उसका मुह सामने की ओर था ।

उसने सोनल के बाल पकड़े और उसका सर उठाते हुए उसके नथुने अपनी बुर के पास लाते हुए बोली - सूंघ लो ननद रानी , भौजाई की बुर सुघना अच्छा सगुन है ।

नुकुराती भुनभुनाती पैर झटकती सोनल ने जब रिना की रसाती बुर से आती भीनी खुशबू अपनी नथुनो पर मह्सूस की तो उसकी सासे गहराने लगी और मुह् मे लार बनने लगा

रीना - सच कहू निशा भाभी की चुत सुघने मे अलग ही मजा था

इस पर सोनल ने जवाब दिया - मजा आयेगा ही ना आपको , आपके भैया के लन्ड का पानी जो भरा होता था उसमे ,





रीना सोनल की बात पर सिहरि और उसने सोनल की थूथ पर अपनी बुर के फाके दरते हुए बोली - हा तो इसको चाटो ना , इसमे भी तुम्हारे भैया का पानी भरा हुआ है उह्ह्ह्ह सीईई उम्म्ंम लेहहह उह्ह्ह ओह्ह्ह ओह्ह्ह और चुसस्स उम्म्ंम

सोनल ने भी मौके का फाय्दा लेते हुए खुलने लगी और अपने होठ खोलते हुए रीना की रस छोडती बुर को चुबलाना शुरु कर दिया

रीना कस कस के अपनी बुर सोनल के मुह पर रगड़ रही थी - अह्ह्ह सोनल्ल्ल उह्ह्ह और चाट उह्ह्ह उह्ह्ह

निसा से भी रहा नही गया और वो भी अपना लोवर उतारते हुए अपनी नंगी बुर लेके रिना के सामने खडी हो गयी ।

रिना ने बिल्कुल देरी ना करते हुए निशा की चुत पर अपना मुह दे दिया ।

निशा रीना के सर को जोर से अपने बुर मे दबोचने हुए - ऊहह भभीईई और चाटो ऊहह खा जाओ इसको उम्म्ंम सीईई आह्ह्ह उह्ह्ह

वही सोनल निचे से रिना की बुर अपने रगड़कर - आह्ह भाभी क्या मस्त चुत है आपकी , गरमागरम उम्म्ंम्ं उम्म्ंम्ं

रिना - है ना मजेदार , भाभियो की चुत ऐसी ही होती है मेरी जान और लेह्ह्ह उह्ह्ह उम्म्ंम्ं हा ऐसे ही जीभ डाल ओह्ह्ह ओह्ह्ह्ह उह्ह्ह हा और नचा अन्दर उम्म्ंम फ़क मीईई फककककक फ्क्क्क्क फ्क्क्क मीईईई





सोनल ने अपनी जीभ को टाइट करके नुकिला कर दिया और रिना उसको अपने भितर लेके उसपे उछलने लगी और सोनल की जीभ उसके चुत के फाको को फैलाती हुई अन्दर बाहर होने लगी

रीना - अह्ह्ह अह्ह्ह उह्ह्ह माअह्ह्ह ओह्ह फ्क्क्क मीई सोनल्ल्ल उह्ह्ह मै आ रहीईई हुऊ ओह्ह्ह ओह्ह येस्स्स्स येस्स्स

ऐसे ही जोर जोर से चिखती हुई रीना अपनी गाड़ और चुत सोनल के मुह पर रगड़ने लगी और झड़ने लगी ।

इधर निशा ने भी रीना की सिस्कियो को दबाने के लिए एक बार फिर उसके मुह मे अपनी चुत मे लगा दिया और जल्द ही उसके पाव भी लड़खडाने लगे

वो जल्दी से रीना से अलग हुई और रीना को सोनल के उपर से हटाने लगी

ना रिना को और ना ही सोनल को कुछ समझ आ रहा था

तभी निशा सोनल के उपर आकर घोड़ी बनती हुई 69 पोजीशन मे आ गयी और तेजी से सोनल के मुह के ठिक उपर अपनी चुत रगड़ने लगी ।

इस नये रोमांच ने निशा को इत्ना गर्म कर दिया था वो तेजी से दो उंगलिया अप्नी बुर मे पेलते हुए अपनी बुर के फाको को जोर से कसे हुए रखा और सोनल भी उसके गाड़ को सहलाए जा रही थी

निशा फच्फच अपनी तेज उंगलियाँ तेजो मे अपनी बुर मे पेले जा रही थी और उसके चेहरा भिचा हुआ लाल था हाथ दर्द हो रहे थे नथुने फुले हुए थे

मगर वो ना रुकी तेजी से अपनी बुर मे अपनी ऊंगलियां पेलती रही - ईईईयिया हहहहहह उह्ह्ह्ब उह्ह्ह फ्क्क्क्क फ्क्क्क फ्क्क्क।ईईईई उह्ह्ह्ह उह्ह्ह अह्ह्हा हहह सोनल्ल्ल्ल मुह खोल्ल्ल्ल्ल ओह्ह्ह्ह





और अचानक से झटके से अपनी उंगलिया बाहर खिंच कर आगे कोहनियों के बल झुक गयी और भलभ्ला कर ढेर सारा सोमरस उसकी बुर से गिरने लगा , सोनल ने फौरन उस्के कुल्हे थामते हुए अपना मुह खोल दिया ।

और निशा की चुत से सारा का सारा झटके दर झटके सोनल मे मुह भरने लगा , फिर सोनल ने उसको जमकर उसकी चुत साफ की ।

रीना के लिये ताज्जुब की बात था , निशा को जितना समझ पा रही थी वो उससे कही आगे की थी । वही सोनल का धीरे धीरे खुलना उसे कुछ उलझा भी रहा था ।

मगर जो भी था तीनो के लिए बहुत मजेदार था और ये पल उन्हे और करीब ले आया था ।

उनकी दोस्ती अब और मजबूत हो गयी थी ।

जल्द वो लोग बाते करते हुए सो गये ।



अमन के घर



गेस्ट रूम के दोनो छोरो पर भोला और ममता खडे थे ।

भोला का चेहरा जहा बुरी तरह उखड़ा हुआ था और वही ममता उसकी स्थिति पर मुस्कुरा रही थी ।

वो इठलाती हुई भोला की आंखो मे निहारते हुए उसके पास आई और उसका एक हाथ सूट के निचे था । जिसपर भोला का जरा भी ध्यान नही था ।

ममता ने हौले से भोला के फुले हुए गालो को सहलाया और मुस्कुराते हुए - बोली इसको लेते आना

फिर वो बाल्किनी की ओर आगे बढ़ दी ।

भोला को पहले कुछ समझ नही आया और जब उसने निचे फर्श पर देखा तो ममता अपना सलवार वही भोला के पैरो के पास उतार चुकी थी और कमर के निचे पूरी नंगी थी ।

भोला ने जैसे ममता की ओर देखा , सूट मे उसकी फैली हुई गाड़ गजब के हिल्कोरे खा रही थी , पल भर मे ही उसका सोया लन्ड फौलादी हो गया । वो चहक कर ममता की सलवार को उठाया और उसको सूंघता हुआ ममता के पीछे हो लिया ।

भोला आगे बढ़ कर गैलरी का दरवाजा बाहर से बन्द कर दिया । सामने बाल्किनी की रेलिंग पर ममता आगे झुकी हुई थी । चंदनी रात मे हल्की ठंडी हवा उसके चेहरे को छू रही थी और उसका सूट हिल रहा था ।

सामने सैकड़ो बिघो मे फैला हुआ सिवान था , जी हा दोनो की योजनानुसार ये घर के सामने वाली बालिकिनी नही बल्कि पिछवाड़े की बालिकीनि पर मिलने की योजना थी ।

भोला ने आगे बढ कर ममता को पीछे से हग करते हुए - कितना टाईम लेती हो उम्म्ंम

ममता भोला के स्पर्श से कसमसाइ - वो जरा अमन से शादी के लिए बाते होने लगी थी उम्म्ंम सीईई

अमन का नाम आते ही भोला को शाम की घटना याद आई जब उसकी योजना विफल हुई थी और अमन ने अपनी मा की गाड़ देख ली थी ।

ममता उसको चुप पाकर - क्या हुआ बोलो ,

भोला ममता के कन्धे को चुमत हुआ - कुछ नही ।

ममता - तो क्यू बुलाया मुझे यहा , इतनी रात और ऐसे

भोला - क्यू तुम्हे नही पता तुम यहा क्यू आई हो

ममता - उहू

भोला अपना मुसल उसकी चर्बीदार गाड़ पर दरता हुआ - अच्छा सच मे

ममता - हम्म्म्म हिहिहिही

भोला - वैसे मुझे लगा नही था तुम ऐसे एकदम से मान जाओगी

ममता - इतने सालो से मौके तालाश रहे थे सब मै जानती हु ।

भोला - ओहो फिर तब क्यू नही आई

ममता - तब आपने पूछा ही नही हिहिहिही

भोला ने उसकी मोटी चुचिया मसलता हुआ - वो तो मै इस बार भी नही पुछ पाता अगर वो लिखने वाला संजोग ना बनता

ममता खिलखिलाई - फिर तो मेरा अहसान मानो कि मैने देवर जी के बजाय आपको बुलाया था हिहिहिही

" ओहो तो यानी कि आपको भी मेरी किसी चीज ने ही मोह लिया था , कही ये तो नही " , भोला ने अपना कड़ा मुसल उसकी गाड की दरखतो मे सूट के उपर से भेदते हुए कहा ।

ममता - धत्त, हा मोह तो लिया था मगर वो नही

भोला - फिर ?

ममता - बस आपकी शायरी ने हिहिहिही आपको पता है आज तक किसी ने मुझसे ऐसे बात नही को थी ।

भोला - क्यू सालेसाहब रोमांटिक नही है क्या

ममता हस के - उन्हे उसका एबीसीडी भी नही पता , वो तो बस एक ही काम जानते है

भोला हस - क्या ?

ममता शर्माई - धत्त , चुप रहो ।

ना जाने क्यू भोला से होती बाते ममता को अमन की याद दिला देती है और उसको समूच का याद आता है ।

ममता - अच्छा एक बात पूछे

भोला - हा बोलो ना

ममता - आपको समूच आता है वो होठो वाली चुम्मी करना

भोला - हम्म्म आता है

ममता का दिल एकदम से खुश हो गया - सच मे

भोला ने उसको कस के पकड कर - हा मेरी जान, करना है

ममता - हमे सिखाओगे आप

भोला - हा क्यू नही इधर आओ

भोला ने ममता को अपने पास किया और फिर उसकी कमर मे हाथ डाल कर उसे अपनी ओर खिंच लिया ।

ममता एकदम से उसके करीब थी

भोला - अब अपने हाथ मेरे पीठ पर ले जाओ

ममता ने वैसा ही किया ।

भोला - समूच मे दो होठो के बीच एक होठ रख कर उन्हे दोनो लोगो द्वारा चुबलाया जाता है । जितना धीरे और रस लेके करोगे उतना ही मजा आयेगा , रेडी

ममता ने हा मे सर हिलाया और भोला के करीब गयि ।

भोला ने ममता के दोनो होठ के बीच अपना निचला होठ रख कर उसके उपरी होठ चुबलाने लगा

ममता को लगा भोला उलटा कर रहा है वो अलग होकर

अरे आप उपर वाला क्यू चुबला रहे हो निचे वाला ना करते है

भोला हस कर - नही ऐसा कुछ भी नही है , समूच मे बारी बारि से कभी उपर तो कभी निचे के होठ चुबलाये जाते है , आओ शुरु करो





एक बार फिर दोनो के होठ कस गये और भोला ने उसके गुलाब से मुलायम उपरी होठ चुबलाने लगा और ममता ने भी उसके नीचले होठ चुसने लगी ।

भोला - उहू तेजी से नही एकदम धीरे धीरे

ममता ने हुन्कारि भरी और वापस से किसिन्ग शुरु हुई।

इस्बार धीरे धीरे 2 मिंट गुजरे और ममता को मजा आने लगा वो होठ बदल के चुसने लगी ।

धीरे धीरे भोला के हाथ ममता की कमर से सरक कर उसकी चुतड़ प सूट के उपर से रेंगने लगे ।

अपनी गाड़ पर भोला के पंजे रेंगते पाकर ममता की सासे अटकी और उसकी किस्सिंग रुक गयी तो भोला ने होठ खिच कर उसे जारी करने का इशारा किया ।

ममता वापस से आंख बन्द कर उस गहरे चुम्बन को फील करने लगी , भोला ने धीरे धीरे उसकी सूट को उपर करके उसकी नंगी गाड़ को सहलाने लगा और अपने पंजे से फैलाने लगा ।

करीब 7 मिंट बाद ममता ने चुंबन तोड़ा और हाफने लगी ।

दोनो एक दुसरे को देख कर हाफ रहे थे और मुस्कुरा रहे थे ।

भोला - क्यू मजा आया ।

ममता - हम्म्म

भोला - और करना है

ममता - अभी रुक कर

फिर वो बाल्किनी से लग कर ठंडी हवा खाने लगी और भोला उसके पास खड़ा होकर उसकी नंगी गाड़ पर हाथ घुमा रहा था ।

ममता मुस्कुरा कर उसके हाथ को इशारे कर - आप ये करना बन्द नही करेंगे ना

भोला - तो आई यहा किस लिये हो उम्म्ंम

ममता मुस्कुरा कर - नही पता मुझे , बस चली आई

भोला अचरज से - मै कुछ समझा नही ।

ममता - पता नही उस टाईम आप फोन पे बिना मेरी बात सुने काट दिये और मुझे लगा कि कही आप नाराज ना हो जाओ बस इसीलिए मै वहा कमरे मे खोलकर खडी थी ।

भोला - तो क्या तुम्हे वो सब नही करना जो हम फोन पे बाते कर रहे थे

ममता - पता नही ,

भोला - पता नही ? ये कैसा जवाब ?

ममता - हा उस समय आपकी बाते मुझे खिंच रही थी , क्योकि इन्ही सब पलो के लिए मै तरसी हु । मेरे पति बहुत सीधे और साधारण है । ऐसा नही है कि वो मुझे प्रेम नही करते । वो बहुत ज्यादा चाहते है मगर उनका प्यार जताने का तरीका बहुत सहज है । मुझे जो चाहिये वो मुझे कभी मिला नही । वो कभी मेरी तारिफ नही करते जैसे आज आपने की थी ।

भोला बहुत गम्भीर होकर उसकी बाते सुन रहा था ।

ममता ने अपनी बात आगे बढ़ाई- मै सच मे इनसब पलो के लिए तरसी हु । मुझे नही पता क्या मुझे यहा खिच लाया शायद मै जो खोज रही थी वो आपका ये साथ था । ये बाते ये नयी चीजे जो आपने सिखाई ।

ममता - देखीये मुझे सच मे नही पता कि मै यहा ऐसे आपके सामने बिना कपड़ो के क्यू हु । मुझे आपसे कोई शर्म भी नही हो रही है , एक दोस्ताना सा फील हो रहा है आपके साथ कि आप मेरी मर्जी के बिना मेरे साथ कुछ भी नही करोगे ।

भोला - मै कुछ समझ नही पा रहा हु भाभी

ममता - औरत को समझ पाना आसान नही है नंदोई जी , आप औरत के इस रूप की कल्पना भी नही कर पाये होंगे है ना

भोला अटकते हुए स्वर मे - ह हा !!

ममता मुस्कुरा कर - हर औरत को एक दोस्त चाहिये होता है । शादी के बाद इस घर मे मेरे अतिरिक्त सब मर्द ही थे ।

देवर जी अपनी ड्यूटी मे फ्से रह गये और अमन अपनी पढ़ाई मे , इनको भी मेरे लिए उतना टाईम नही मिला तो मै बहुत लम्बे अरसे से अकेली हु बस मुझे एक दोस्त चाहिये । जिससे मै खुल कर बाते कर सकू और कभी कभी रोमैंस भी हिहिहिही

भोला मुस्कुरा कर - आपने इतनी खुबसूरती से मेरा सारा जोश उतार दिया , यहा तक अब मेरा वो भी सोने लगा

ममता खिलखिलाई - सॉरी हिहिहिही

भोला - तो यानी कि आप अपने पति के लिए वफादार ही है

ममता - हम्म्म कह सकते है अगर किसी गैर मर्द से सिर्फ़ सेक्स ना करने औरत वफादार मानी जाती है तो मै हु हिहिहिही

भोला - यार आप उलझा रहे हो हमको

ममता हस कर - आप औरतो को समझिये मत बस सुन लिजिए । वो अपनी उलझन खुद सुलझा लेती है बस कोई उनकी बाते चुप चाप सुन ले ।

भोला - हम्म्म ठिक है तो आगे ब्तायिये

ममता - फिलहाल तो कुछ ऐसी बात नही है हा अब दोस्ती हुई तो ना आप मुझसे कुछ छिपाना ना मै आपसे

भोला - हा ठिक है

ममता हस के - तो ये बताओ दीदी के बाद मै पहली थी जिस्पे ट्राई कर रहे थे या कोई और भी थी ।

भोला ह्स कर - आप मेरा पेशा जानती ही हो और कभी कभी कलाईन्ट से डील फाइनल करवाने के लिए उनको लालच के नाम पर कुछ महिलाओ की मदद लेनी पड़ती है । आप समझ रही है ना

ममता - हम्म्म

भोला - हम्म तो कभी कभी आउट ऑफ टाउन जाना होता है तो उन्ही मे से किसी एक के साथ मै भी

ममता - ओह और दीदी जानती है ये सब

भोला - हम्म्म मैने कुछ भी नही छिपाया कभी भी , यहा तक कि

ममता - क्या ?

भोला - देखीये आपसे दोस्ती है इसीलिए आपको बता रहा हु , बात दो तीन साल पुरानी है । आप वादा करिये भाईसाहब या किसी से इसका जिक्र नही करेंगी

ममता - दोस्ती की है तो भरोसा करिये हिहिही नही बोलूंगी पक्का वाला वादा

भोला हिचक के - दरअसल कुछ साल पहले मेरे एक सप्लायर मे मुझे ओरिजिनल ब्रांड के नकली दवाए भेज दी और जब मैने वो डील की तो भारी नुकसान उठाना पड़ा मुझे । पुलिस केश का पंगा भी झेलना पडा

ममता ताजुब करती हुई - फिर

भोला - फिर मैने मेरे बॉस से बात की , सिर्फ वही थे जो मुझे उस नर्क से निकाल सकते थे । उनकी वाइफ को मरे काफी साल हो गये थे । पहले भी अकसर वो हमारे घर आया करते थे मगर तब उनकी नियत पर कोई ऐसी बात नही थी । मगर मज्बुर का फायदा कौन नही लेता ।

ममता का सिना जोरो से धडक रहा था इस डर मे कही वो जो सोच रही है वो सच तो नही हो जायेगा - फिर

भोला - बस ऐसे ही एक शाम वो आये हमने डील को लेके बात की । फिर वो उठ कर चले गये । थोड़ी देर बाद उनका ड्राईवर आया और संगीता को लेके बाहर गया ।

मैने देखा तो बॉस संगीता से कुछ बाते कर रहे थे और फिर वो जब वापस आई तो उसने मुझे कुछ नही बताया । बार बार जोर देने पे बोली कि सर ने कहा है कि परेशान होने की जरुरत नही है सब सही हो जायेगा ।

फिर कुछ ही दिन बाद उसने रिंकि को उसकी मौसी के यहा भेज दिया ।

फिर एक दिन मुझे एक डील के लिए थोडा दुर जाने का आदेश हुआ और मैने अगले दिन ही आ पाता ।

संजोग से जिस डील के लिए बॉस ने मुझे भेजा था वो क्लाइंट मेरा मित्र निकला और रास्ते मे फोन पर ही डील फाइनल हो गयी ।

मै आधे रास्ते ही वापस आ गया । मुझे याद उस रात जोर की बारिश हो रही थी ।

मै घर आया तो देखा बॉस की गाड़ी खड़ी है । मुझे समझ नही आया , क्योकि इस बारे मे ना संगीता ने मुझे बताया ना बॉस ने कि वो घर आने वाले थे ।

मेरे पास घर की चाभी थी तो मै अन्दर गया , संगीता को आवाज दी मगर बाहर तेज बारिश की तड़तड़ और बादलो के शोर मे मेरी आवाज दबी हुई थी ।

मैने देखा हाल के टेबल पर मेरी ही फ़ाईल रखी हुई थी जिसे मैने बॉस को दी थी । उसने लिखा था कि क्लाइंट ने केस वापस ले लिया है । मै बहुत खुश हुआ । मगर खुशी में मेरी बिवी कही नही दिखी ।

फिर मै जीने से होकर उपर गया और मुझे मेरे कमरे का दरवाजा खुला हुआ मिला ।

भोला के शब्दो के साथ साथ ममता की सासे भी भारी होती जा रही थी ।

भोला - फिर मैने जैसे ही भीतर मेरे पाव जमीन मे जम गये ,





मेरा बॉस मेरी बीवी की गाड़ मे अपना मोटा लन्ड घुसेड़ कर उसके बाल खींचता बड़ी बेरहमी से उसको चोद रहा था और मेरी संगीता आहे भर रही थी ।

ममता - क्याआ??

भोला - हा और जब मैने उसके सामने गया तो वो उदास चेहरे के साथ यही बोली कि यही एक चारा था आपको बचाने का

मैने अपना माथ पिट लिया , उसने मेरे लिये अपना सतित्व भी त्याग दिया ।

कुछ महीने के बाद मेरा प्रोमोशन हो गया मेरे बॉस के पोस्ट पर और मेरे बॉस का ट्रांसफर हो गया ।

बाद मे मैने जब फ़ाईल देखी तो पता चला जिस केश के लिए मेरी बीवी ने बलिदान किया था वो सारा षड़यंत्र मेरे बॉस ने रचा था , उसने ये सब सिर्फ मेरे साथ ही नही बल्कि और भी कई स्टाफ के साथ किया था ।

मगर अब भी मै कुछ नही कर सकता था और मैने ये बात संगीता को भी नही बताई नही तो वो टूट जाती ।

ममता एक गहरी सास लेते हुए - ऊहह क्या बात है फिर तो आपको उनसे कुछ भी नही छिपाना चाहिये

भोला - मै छिपाता भी नही , यहा तक उसे पता होता है मै किसी औरत के साथ हु

ममता - सच मे और वो नाराज नही होती हिहिही

भोला - नही लेकिन बदला जरुर लेती है मुझसे

ममता - कैसा बदला ?

भोला - उसके बाद जब भी मै घर आता हु तो मेरी सजा होती है कि उसे 3 से 4 राउंड हिहिहिही

ममता - हिहिहिही फिर ये सजा कहा हुई । अच्छा तो क्या मेरे बारे मे भी बता दिये

भोला हस के - नही अभी कहा , हा वो जब आप और मै कमरे मे थे तो जरुर पुछि थी

ममता - क्या ?

भोला - यही कि कही सलहज को चोद तो नही ना रहे थे

ममता - तो आप क्या बोले हिहिहिही

भोला - मै बोला इतनी जल्दी मे कैसे कुछ हो पाएगा , उसके लिए तो पूरी रात ल्गेगि ना

ममता शर्मा कर - धत्त , अरे बोल देते ना क़्विकी था हिहिहिही

भोला - हा लेकिन मेरा क़्विकी नही होता ना

ममता - ओहो सच मे , वैसे कितना टाईमिंग है आपका हिहुहिही

भोला - वो तो इस पर निर्भर करता है ना कि जगह कितनी खुली है और कितनी कसी हुई

ममता अपने होठ दबा कर हस्ते हुए - हम्म्म ये भी सही है

ममता - अच्छा दीदी का फेवरिट पोजिसन क्या है

भोला - डॉगी वो भी बैक एन्ट्री

ममता - वाह गजब

भोला - और आपका

ममता खिलखिलाई - कभी कभी वो अगर मूड मे आ गये तो डॉगी नही तो हमेशा मै ही निचे होती हु हिहिहिहू

भोला - अरे मै भाईसाहब का नही आपका पुछ रहा हु

ममता - मेरी ख्वाईश है कि एक बार मै उन्के उपर आऊ हिहिहिही मगर उनकी सासे फुलने लगती है कहते है बहुत भारी हु हिहिहिही

भोला उसकी गाड़ पे दुबारा से हाथ घुमात हुआ - वैसे भारी तो हो ही आप

भोला की बात पर ममता हसी - धत्त

ममता - अच्छा ये बताओ क्या उसके बाद भी दीदी किसी और से उम्म्ं

भोला - क्यू पुछ रहे हो

ममता - अरे यार मेरी नन्द है पता तो चले कितनी छिनार है हिहिहिही

भोला - प्रोमोशन के बाद कभी ऐसी नौबत नही आई , हा एक बार रिंकि के एडमिशन के लिए दिक्कत हुई थी । इसने ट्रस्टी के बेटे पर डोरे डाले और उसे घर बुलाया । मगर वो बहुत सिधा निकला ।

ममता हसी - ओह्ह जवाँ लन्ड का सपना टुट गया बेचारी का हिहिहिही

भोला - हम्म्म ऐसा ही कुछ समझो , मैने उसे कई बार परखा है वो भी नये टेस्ट के लिए आतुर है मगर डरती है बहुत है कही बदनामी ना हो जाये ।

ममता - हम्म ये भी सही बात है , ऐसी बात है तो घर मे ही ट्राई कर ले , एक भैया उन्के जनमजात कुवारे है हिहिहिही

भोला ठहाका लगा कर हसा - अरे हा यार मुझे तो मदन भाई का कुछ समझ नही आया कि क्यू वो शादी नही किये । यार किसी बीवी और सेक्स नही चाहिये

ममता हसने लगी

भोला - बोलो यार

ममता - अरे उनकी कहानी अलग है । उनकी प्रेमिका थी क्योकि उसका बाप इनसे शादी इसीलिए नही करवाया क्योकि ये आर्मी मे थे कही जान ना नही चली जाये औए बेटी बिधवा ना हो जाये इसी डर से उसकी शादी कही और हो गयी । तबसे इन्होने कही की ही नही ।

भोला - हम्म्म लेकिन फिर मर्द बिना चुत के रह नही पाता

ममता - क्या पता इनका बाहर कही चलता हो पार्ट टाईम हिहिहिही

भोला - अच्छा तो इन्होने आपपर कभी ट्राई नही किया

ममता हस के - धत्त कैसी बात करते है आप

भोला उसकी चरबीदार गाड़ की फैलाता हुआ - अरे घर मे इतनी गदराआई माल हो और किसी का लन्ड खड़ा ना हो ।ऐसे कैसे ?

ममता - हा तो घर मे वही बस थोडी ना है अमन भी है तो क्या वो भी ?

अमन की बात आते भोला के जहन मे वो विचार कौधा कि अब उसे अमन वाली बात बता ही देनी चाहिए ।

ममता - क्या हुआ चुप क्यू है ?

भोला - दरअसल मुझे तुमसे कुछ बताना है ? अमन के बारे मे

ममता - हा कहिये क्या बात है

भोला - दरअसल जब मैने शाम को तुम्हे सलवार खोलकर खडी रहने को बोला था तो

ममता - हा तो

फिर भोला ना सारी बात डीटटो बता दी जिसके बाद ममता शान्त हो गयी उसके जहन मे काफी सारे बाते चल रही थी ।

भोला - देखीये इसमे उसकी कोई गलती नही है , बस हमारी नादानी थी ।

ममता - अरे आप क्यू परेशान हो रहे है , कोई बात नही हो जाता है ये सब

ममता - चलिये अब सोया जाये समय बहुत हुआ है

भोला - हा अभी नीद कहा आने वाली है , आपने निराश कर दिया

ममता बाल्किनी मे झुकती हुई अपनी गाड़ फैला दी - अच्छा ठिक है लिजिए कर लिजिए नाराज ना होवो आप





भोला की सासे चढ़ने लगी उसने अपना मुसल निकाला और थुक लगा कर नाइस ममता के बुर पर रखा था और रुक गया ।

ममता - क्या हुआ

भोला - नही ये उचित नही लग रहा है , आप बस मेरी खुशी के लिए कर रही है , इसमे आपकी मर्जी नही है । मुझे खुशी होती जब आप इसे पकड कर खुद लेती ।

ममता मुस्कुरा कर - ठिक है मै वो भी करूंगी लेकिन एक शर्त है

भोला चहका - क्या ?

ममता - आपको देवर जी के लिए कोई औरत खोजिये जो रिझाने मे माहिर हो और देवर जी उसको मना ना कर पाये । अगर आपने उनके लिए ये कर दिया तो मै खुशी खुशी आपकी हुई ।

भोला - फिर ये काम एक ही औरत कर सकती है , संगीता

ममता चौक कर - क्या दीदी ??

भोला - हा वही एक कर सकती है और मुझे यकीन है उसके आग्रह को मदन भाई नही ठुकरा पायेंगे ।

ममता - मगर क्या ये सही रहेगा , वो दोनो सगे भाई बहन है । हसी मजाक एक है लेकिन

भोला - वैसे रिश्ता तो हमारा आपका भी बहुत खास है मगर हम भी बहके ना

ममता - लेकिन क्या दीदी मानेगी इसके लिये

भोला - वो तुम मुझपे छोड दो , डील डन करे फिर

ममता हस के - ओके डन

ममता - हा और एक बात हमारी इस दोस्ती के बारे मे आप दीदी को भी नही बतायेंगे प्रोमिस

भोला - प्रोमिस , तो समुच हो जाये

ममता - हा क्यू नही हिहिहिही

फिर ममता और भोला के क़्विकी किस्स किया और ममता कपडे पहन के निकल गयी निचे ।

भोला भी अपने कमरे मे चला गया , जहा उसकी बीवी अभी तक उसके आने का वेट कर रही थी ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 183 ा

अमन के घर



ममता से मुलाकात के बाद भोला अपना मुसल सही करता हुआ अपना लैपटॉप लेके कमरे मे आया ।

कमरे मे आहट पाते ही संगीता उठ कर बैठ गयि ।

भोला मुस्कुरा कर - अरे अभी तुम सोई नही

संगीता ने मुस्कुरा कर - आपके बिना कैसे सो जाती

भोला उसके पास आकर गालो को चुमता हुआ उसका हाथ पकड कर अपने लन्ड पर रखता हुआ - मेरे बिना या इसके बिना

संगीता चिहुकी - धत्त क्या आप भी , रिंकि यही पर है ।

रिंकि जो कि बेड के किनारे पर दुसरी करवट लेके लेटी हुई थी - हा पापा और मै सोई भी नही हु

रिंकि की बात सुनकर संगीता हस दी और उसको डांटती हुई - तु अब तक क्यू जाग रही है ।

रिंकि - आज दिन मे सो गयी थी ना तो नीद नही आ रही है ।

संगीता अचरज से - तु कब से दिन मे सोने लगी भइ

रिंकि - आप लोग देर रात तक रोमान्स करते हो और मेरी नीद खराब होगी ही ना

रिंकि की बात सुनते ही संगीता और भोला की आंखे फैल गयी और दोनो मुस्कुरा उठे ।

संगीता झिझकते हुए स्वर मे - तो क्या तु कल रात ?

रिंकि - हम्म्म्म लेकिन पापा आप मम्मी को गाली क्यू देते हो ? बैड मैनर्स ना !!

भोला हसता हुआ बेजवाब हो गया था कि वो इसपे क्या बोले ।

संगीता - चुप कर बहुत आदत बिगड़ गयी है तेरी ,कहा क्या बोलना है कहा नही ये नही समझ तुझे

संगीता ने मामले को दबाने के झूठे गुस्से का सहारा लिया तो रिंकि घूमकर - अब इसमे मेरी क्या गलती ? आप लोग इतना शोर करके क्यू करते हो वो सब । चुप चाप करते तो मेरी नीद नही खुलती ना ?

रिंकि की बात पर भोला और संगीता का चेहरा शर्म से लाल हो गया कि उनकी बेटी उनके सामने कैसी बाते कर रही है ।

भोला उतरे हुए चेहरे के साथ - बेटा सॉरी मुझे लगा कि तु कल सो गयी थी

रिन्की को अपने पापा का यू उदास होना पसंद नही आया

रिंकि - अरे पापा आप सॉरी क्यू बोल रहे है , आप लोग कुछ गलत थोड़ी ना कर रहे थे हिहिहिही बस आप मम्मी को गाली ना दिया करो

रिंकि की बात पर संगीता भोला को देख कर मुस्कराने लगी ।

भोला - हम्म लेकिन तुझे ये सब कैसे पता उम्म

रिंकि - क्या पापा भूल गये मै बायो से हु हिहिहिही आपसे ज्यादा ही जानती हु और मम्मी आप भी थोडा hygenic किया करो ये सब

संगीता शर्माकर हसती हुई - तु पहले अपने दाँत साफ किया कर , मुझे पता है कैसे सफाई रखनी है कैसे नही

रिंकि - छीईई आपको बिलकुल भी साफ सफाई नही रखनी आती , देखा मैने कल पापा जब आपको एनल कर रहे थे तो उसके बाद आपने ब्लोजॉब किया उनको

संगीता और भोला दोनो अचरज से रिंकि की बात पर अटके और समझने की कोसिस करने लगे ।

संगीता - क्या कर रहे थे हम लोग

रिंकि हस कर - अरे ऐनल , वोह्ह हिहिहिही जो पिछवाड़े मे करते है ना और फिर पापा ने वहा से निकालकर आपको चुसने को दे दिया छीईई यक्क कितना गन्दा होता है वो

रिंकि की बाते सुनकर संगीता और भोला दोनो बुरी तरह से झेप गये । उन्हे यकीन नही था कि उनकी बेटी ने उन्हे कैसे कैसे पोजीशन मे सेक्स करते हुए देखा था

उन्हे समझ नही आ रहा था कि अपनी नादान लाडली को कैसे समझाए जिसे वो गंदा बोल रही है सेक्स मे वो सब मोमेंट कितने उत्तेजक होते है

भोला हस कर - अरे ऐसी बात नही है बेटा, उसके लिये लोग बहुत साफ सफाई रखते है पहले से ही

संगीता - हा बेटा और उससे कोई नुकसान नही होता है बल्कि ...।

रिंकि हसकर - तो आप दोनो फेवरिट है ये सब, हिहिहिही कोई नही आप लोग कर सकते हो

भोला - गुड बच्चा , चल सो जा अब

रिंकि हस कर - ठिक है लेकिन आप लोग प्लीज ज्यादा शोर मत करना हिहिहिही

संगीता - चल सो जा अब दादी अम्मा मत बन , आओ जी आप भी सो जाओ सुबह मुझे और भाभी को पानी लेने कुएँ पर जाना है ।

भोला ने इशारे से अपनी लण्ड की ओर दिखाया तो संगीता ने रिंकि की ओर इशारा करके ना मे सर हिलाया

भोला उसके कान मे - बाहर चलते है ना बाल्किनी मे पीछे

संगीता ने हामी भर दी -

बेटा तु सो जा हम अभी आते है

रिंकि - क्या मम्मा आप लोग बाहर क्यू जा रहे हो , मैने बोला ना कर सकते हो ।

भोला कसमसाकर - क्या कह रही हो संगीता

संगीता थोडा शर्माती हुई - धत्त चलो सो जाओ , हा नही तो ।

रिंकि - क्या मम्मा शर्मा क्यू रहे हो एन्जॉय करो ना

संगीता असहज होती हुई

नजरे उठा कर भोला को देखा और पुछा क्या किया जाये तो उसने अपना मुसल मसलकर आगे बढ़ने को कहा ।

संगीता - चल तु उधर मुह कर और इधर देखना मत

रिंकि ने चहह्क कर हस्ते हुए गरदन घुमा ली और वही भोला ने अपना मुसल चढ़ढे से निकाल कर संगीता के मुह मे दे दिया ।

सन्गिता ने उसको झुक कर चुसना शुरु कर दिया ।

आज बेटी के सामने अपनी बीवी से लन्ड चुसवाने का मजा अलग ही था भोला के लिए





रोज के मुकाबले आज उसका मुसल बहुत मोटा हुआ था ।

संगीता की लपल्पाती जीभ के स्पर्श ने भोला के सिसकिया शुरु कर दी ।

वही रिंकि भी अपने पापा की सिस्किया सुन कर अपनी हसी दबा रही थी ।

भोला - आह्ह संगीता उह्ह्ह और च्जुस्स्स उम्म्ंम्ं सीईईई

संगीता समझ रही थी कि भोला थोडा नाटक कर रहा है इसीलिए वो उसके जांघो पर चपट लगाते हुए उसे चुप रहने का इशारा करती है ।

फिर वो अपनी साडी उपर कर बिस्तर के किनारे जान्घे खोल कर लेट जाती है ।

भोला वही निचे खडे खडे ही संगीता की चुत पर अपना मुह लगा कर उसको चुसने लगता है और संगीता की सिस्किया शुरु हो जाती है ।

अपनी मम्मी की तेज सिस्किया सुनकर रिंकि - ओहो मम्मी धीरे धीरे बोलो ना

संगीता खीझ कर - चुप कर कमिनी तू अह्ह्ह सीईई उम्म्ं माअह्ह्ह और चाटो ओह्ह्ह सीईई उम्म्ंम खा जाओ मेरी बुर को उम्म्ंम ऐसे ही ओह्ह्ह रिंकि के पापा उह्ह्ह और चुसोउह्ज्ज





अपनी मा की मादक आवाजे और पापा के बुर चुसाई की तारिफ ने रिंकि की चुत के दाने पर खुजली सी कर दी थी ।

भोला भी संगीता की बुर मे अपनी थूथ रगड़ कर चाट रहा था - ओहहह संगीता तेरी चुत बहुत रसिली है उह्ह्ह उम्म्ं उम्म्ंम्ं सुउउर्रृऊऊओप्प आह्ह

संगीता - अब डाल दो ना मेरे राजा , घुसाओ ना अपना मोटा बास

इधर दोनो मिया बीवी पुरे जोश मे थे तो रिंकि अपनी मा के संवादो पर हसे जा रही थी कि उसकी मा लन्ड छोड़ उसको हर तरह के नाम से बुला रही है ।

भोला खड़ा होकर अपना मुसल संगीता की बुर पर रगड़ने लगता है - बोलो जान चाहिये क्याह्ह्ह उम्म्ं





संगीता - हा रिन्की के पाप दो नह्ह्ह उह्ह्ह घुसाओ ना प्लीज उह्ह्ह

भोला - क्या चाहिये मेरी रानी कोह्ह उम्म्ंम

संगीता अपनी बुर मलती हुई - आअह्ह्ह येहीईई ऊहह प्लीज डालो ना

भोला वापस अपना सुपाड़ा उसके चुत के दाने पर रगड़ता हुआ - पहले बोलो ना क्या चाहिये उह्ह्ह

संगीता बार बार उसको रिंकि की ओर इशारा कर रही थी ।

भोला नही मानने वाला था तो ऐसे मे सन्गीता ने ही हदे पार कर दी और तेजी से अपनी गाड़ उचकाती हुई - आह्ह बहनचोद लन्ड डाल ना उह्ह्ह

रिंकि की चौकी और फौरन घुम कर अपनी मा की ओर देखा

सामने भोला भी जोश मे था और उसने भी लन्ड को मजबूती से एक ही झटके मे उसकी चुत मे उतारते हुए बोली - आह्ह क्या बोली मादरचोद उह्ह्ह फिर से बोल





संगीता - सुना नही क्या बोली मै बहिनचोद है तु अह्ह्ह उह्ह्ह और पेलो मुझे उह्ह्ह ओफ्फ्फ्फ्फ उम्म्ंम्ं फास्ट फास्ट उम्म्ंम

भोला - अच्छा ये लेअह्ह्ह ऊहह और लेह्ह्ह उम्म्ंम क्या गर्म चुत है तेरी जान ओह्ह्ह सीईई किसके लिए इतनी गर्म कर रखा है ऊहह

संगीता - आपके लिये ही तो है मेरे राजा यहा और किसके लिये गर्म होउन्गी उह्ह्ह

भोला जोश मे - क्यू है ना तेरा बहिनचोद भैया , उसका नाम आते ही तेरी बुर और फैल जाती है देख कैसे रस छोड रही है उह्ह्ह साली तु सच मे चुदना चाहती है ना उससे उम्म्ं

रिंकि को यकीन नही हो रहा था कि उसके मम्मी पापा बेखौफ़ होकर ना जाने क्या क्या बाते किये जा रहे थे ।

सन्गिता - हा ले लूंगी तोह्ह्ह क्या कर लेगा उह्ह्ह साले तू जब नही चोदेगा कसके त किसी ना किसी का लूंगी ही ना

भोला - जा लेले ना मदन का लन्ड , बास जैसा है फ़ाड देगा तेरी उह्ह्ह

संगीता - उसके लिए तो आपकी बहिन का भोस्डा लगेगा उसने घुसेगा तो मजा आयेगा अह्ह्ह अह्ह्ह ऊहह मेरे राआज्जाआ मै आ रही हुउउउऊ पेलो नाह्ह

भोला - बोल पहले लेगी ना अपने भैया का लन्ड, घुसायेगी ना अपने बुर मे उह्ह्ह बोल साली रन्डी बोल ना माधरचोद उह्ह्ह

संगीता - हा मेरे राजा ले लूंगी उह्ह्ह जिसका कहोगे लूंगी अह्ह्ह पेलो नाह्ह्ब उह्ह्ह फक्क फ्क्क्क मीई ओफ्फ्फ येस्स्स्स चोद ना बहिनचोद अह्ह्ह

भोला भी संगीता की बाते सुनकर जोर जोर से उसते पेलता हुआ उसकी बुर मे झड़ने लगा और फिर उसके उपर ही गिर गया ।

कुछ देर बाद जब दोनो की सासे बराबर हुई तो रिंकि उन्हे ही देख रही थी ।

दोनो लाज के मारे हस दिये ।

मगर रिंकि का चेहरा

सीरियस था - ये सब क्या मम्मी पापा

भोला - बेटा तु इसपे ध्यान ना दे , वो बस हम लोग जोश जोश मे बोलते है हमारा इरादा गलत नही होता

संगिता - हा बच्चा , तु ये सब मत सोच ठिक है सो जा , हम बाथरूम से आते है

रिंकि ने हामी भर दी और सोने की कोसिस करने लगी मगर नीद उसकी आंखो से दूर थी ।

संगीता बाथरूम मे जाकर दरवाजा लगाती हुई भोला से - ये सब क्या था ,, मदन भैया को बीच मे लाने की क्या जरूरत थी

भोला - यार मुझसे मदन भाई का अकेलापन देखा नही जाता और तुम्हे भी एक नये स्वाद की तालाश है तो मैने सोचा ये सबसे सुरक्षित रहेगा और घर की बात घर मे रहेगी ।

संगीता - तुम पागल हो गये हो मै मदन भैया के साथ कैसे और क्या मदन भैया कभी इसके लिए राजी होगे मै उनकी सगी बहन हु , दिमाग कहा है आपका ?

भोला - ओहो मेरी जान मुझे पता है कि ये आसान नही है लेकिन मेरी जान के लिए मुश्किल भी नही है , मुझे पता है एक तुम ही हो जिसकी बात वो कभी नही टालते । और तुम्हे नही लगता कि उन्हे भी खुश रहना चाहिए ।

संगीता - हा लेकिन मै कैसे ?

भोला मुस्कुरा कर -वैसे मै एक बार उनको पेसाब करते देखा है मेरे से लम्बा और मोटा हथियार है उनका , तेरी बुर भर जायेगी एक ही बार मे

संगीता - धत्त क्या आप भी ,

भोला - प्लीज मान जाओ ना मुझे भी अच्छा लगेगा

संगीता - मतलब

भोला अपना मुसल मसलकर

जान सालो से मेरी तमन्ना है कि कोई तुम्हे कस के मेरे सामने हचक के पेले , प्लीज मान जाओ ना मेरे लिये

सन्गिता - अच्छा ठिक है मै ट्राई करती हु वैसे चांस कम ही होगा

भोला - तुम कर लोगि मुझे यकीन है

संगीता कामुक होकर उसके लण्ड को थामती हुई - बदले मे मुझे ये चाहिये पूरी रात के लिए मेरी गाड़ मे बोलो डालोगे ना उम्म्ंम

भोला - हा मेरी जान चलो सोते है अब

भोला - हा मेरी जान चलो सोते है अब

फिर वो लोग सोने चले गये ।



राज के घर



अगली सुबह ने अपनी अंगडाई ली और वही रागिनी के कमरे मे सोई महिलाए उठ कर बारि बारि से नहाना धोना चालू कर चुकी थी ।

आज मेहमान आने के साथ साथ हल्दी की पूजा और रस्म भी होनी थी ।

राज और कमलनाथ भी बारि बारी से नहा धो कर तैयार हो गये ।

रंगी जंगी ने अपने कपडे लेके चंदू के घर मे नहाने फ्रेश होने के लिए चले गये ।

वही घर की लडकियों ( सोनल , निशा , रीना ) ने भी बड़े सवेरे ही नहाना धोना कर लिया था ।

छत पर हल्की धूप बिखरी थी और राहुल अनुज दातून घिसे जा रहे थे ।

अनुज बेसिन पर कुल्ला कर रहा था कि तभी

शालिनी बाथरूम से नहा कर निकली और उसकी नजरे बेसिन पर कुल्ला कर रहे अनुज से टकराई ।

दोनो के जहन मे बीती रात हुए हादसे की बातें उभर आई और अनुज ने नजरे चुराने लगा ।

शालिनी उसकी सादगी पर मुस्कुरा उठी और राहुल को डांट लगाते हुए बोली - अभी तक तेरा ब्रश नही हुआ । जल्दी से नहा कर निचे आ और अनुज बेटा ।

अपनी चाची के मुह से इतना प्रेम भरा सम्बोधन सुन कर अनुज का दिल मोम सा पिघल गया और वो मुह मे पानी के गरारे करते हुए गरदन घुमा कर अपनी चाची को देखा ।

शालिनी - बेटा तु भी जल्दी से नहा ले , देर मत करना

अनुज ने हा मे सर हिलाया और फिर अपनी चाची को जीने की ओर जाते हुए देखने लगा । साडी मे उनका कुल्हा बहुत ही कामुक तरीके से झटके खा रहा था और अनुज ने निगाहे फेर कर अपने काम मे लग गया ।

राहुल उसके पास आकर बोला - भाई परेशान ना हो मै बोला ना तुझे मम्मी की चुत दिला दूंगा , अब शादी बीत जाने दे एक बार

अनुज भन्नाते हुए - नही मुझे नही करना है ऐसा कुछ भी । मुझे चाची के साथ धोखा नही करना है समझा

राहुल - अरे इसमे धोखे जैसा क्या है यार

अनुज - तु नही स्मझेगा छोड़

ये बोलकर अनुज चुपचाप नहाने के लिए बाथरूम मे घुस गया ।

राहुल को लगा कि अनुज अभी भी कल रात के लिए ही नाराज है उससे और वो उसे मनाने के लिए तरकिबे सोचने लगा ।

देखते ही देखते 10 बज गये सारे लोग इधर उधर भागा दौडी मे लगे थे ।

रागिनी ने सभी लोगो को फोन पर बुला लिया था बस शकुन्तला को बुलाना था ।

तो उसने राज को बोला । ताई के यहा जाने की बात से ही राज चहक उठा और फौरन शकुन्तला के घर की ओर चल दिया ।

3 बार की ठक ठक पर शकुन्तला ने बन्द दरवाजे के पीछे से आवाज दी - कौन है ?

राज - मै हु ताई दरवाजा खोलो

शकुन्तला थोड़ी असहज भाव मे - बेटा तु अकेला है कोई और भी है तेरे साथ

राज को समझ नही आया कि शकुन्तला ने ऐसा क्यू पूछा मगर उसने जवाब दिया - अकेला हु ताई , क्या हुआ ?

तभी शकुन्तला ने दरवाजे के पीछे खडे होकर दरवाजा खोला और गरदन निकाल कर बाहर का जायजा लेते हुए राज को बोली - आजा अन्दर ।

राज अचरज से दरवाजे के भीतर आया और इससे पहले वो कुछ बोलता उसकी नजर सामने खड़ी शकुन्तला पर गयी ।

जो सीधा बाथरूम से आई थी ।





वो अपने हाथो से अपने दोनो बडे बडे चुचे छिपाये हुए खडी थी और राज की नजर उनके अधनंगे जिस्म पर पड़ते ही उसका मुसल तन गया ।

राज- क्या ताई अभी आप तैयार नही हुई ,मम्मी इंतजार कर रही है

शकुन्तला ने इस बात को बिल्कुल भी तब्ज्जो नही दी कि राज के सामने वो सिर्फ पेतिकोट मे थी ।

वो गैलरी मे आगे बढ़ते हुए निचे के बाथरूम की ओर जाती हुई बोली - बस बेटा 5 मिंट रुक जा मै बस नहाने जा रही थी ।

राज भी अपना मुसल मसलते हुए शकुन्तला की मोटी पेतिकोट मे चिपकी हुई गाड़ देखता आगे बढता हुआ बाथरुम के साम्ने आ गया ।





जहा खुले दरवाजे के सामने पानी से भरी बालटी के खडी शकुन्तला खडी थी और उसके 38DD साइज़ के बड़े बड़े चुचे लटके हुए थे ।

शकुन्तला ने सामने राज के पजामे मे तने हुए मुसल को देखा और उसकी चुत मचल उठी , फिर उसने राज के चेहरे को देखा

गहराती सासो से फुलते नथुने , हल्के खुले होठ और चुचो पर गड़ी नजरे ।

शकुन्तला मुस्कुराई और उसे कल शाम वाली बात याद आई जब राज ने बर्फ से उसके चुचो की सेकाई की थी और बडी चतुराई से चुसा भी था ।

शकुन्तला मुस्कुरा कर - दरवाजा खुला ही रहेगा हम्म्म , बैठ जा

शकुन्तला की बात पर राज लाज से थोडा झेप कर मुस्कुराया और फिर वही दरवाजे के गेट पर कोहनी लगाकर हाथो पर अपना सर टिकाते हुए - यही ताई मै यही ठिक हु

शकुन्तला हस कर - धत्त चल उधर भीग जायेगा

राज - अरे तो कपडे निकाल देता हू ना

शकुन्तला - नही बोला ना , चल उधर बैठ

राज हसता हुआ बाथरूम के ठिक सामने एक कुर्सी लेके पाव के उपर पाव रख कर ऐसे बैठा मानो कोई शो शुरु होने वाला हो और वो चीफ गेस्ट हो ।

शकुन्तला उसको देख कर माथा पिट ली और बालटी से पानी निकाल कर अपने उपर गिराने लगी ।

जल्द से पानी ने शकुन्तला के जिस्म को भीगा दिया और उसका पेतिकोट भी गीला हो गया ।

साबुन लेके शकुन्त्ला ने अपने जिसम पर घुमाना शुरु कर दिया , हाथो से शुरु होकर गले और फिर सीने से चुचो पर लगाने लगी ।

राज उसके सामने ही अपना मुसल छिप छिप कर मसल रहा था

शकुन्तला ने बैठे बैठे अपने पेतिकोट का नाड़ा खोला और उसको ढीला करते हुए पेट और नाभि के पास से होते हुए निचे चुत तक हाथ घुसा कर साबुन लगाने लगी

शकुन्तला ने जब राज को उसको ऐसे एक टक निहारते देखा तो वो हस कर बोली - उधर मुह कर , शर्म नही आ रही तुझे

राज ने मुस्कुरा कर ना मे सर हिलाया

शाकुंतला ने अब हाथ पीछे ले जाकर कमर और गाड़ की दरखतो मे भी हाथ घुसा कर पेतिकोट के अंदर साबुन लगाने लगी ।

राज की उत्तेजना अब और भी बढ रही थी ,

राज - ताई मै लगा दू साबुन

शकुन्तला मुस्कुराते हुए - नही हो गया ,

राज उठ कर आया और दरवाजे के पास ख्दा होकर - कहा हो गया , पीठ पर तो आपने लगाया ही नही

शाकुंतला ने सामने खडे राज के पजामे मे तने हुए तम्बू को निहारती हुई - हा वहा मेरा हाथ नही जाता

राज अपने पजामे को उपर करता हुआ बाथरूम मे घुस कर ठिक शकुन्तला के सामने खड़ा हो गया - लाओ मै लगा देता हु दो साबुन

शकुन्तला नजर उठा कर देखा तो राज का लन्ड ठिक उसके नथुनो के पास फुला हुआ था और उसने साबुन की टिक्की उसे दे दी

फिर राज आगे झुकता हुआ अपने पीले कुर्ते की कलाई उपर चढा कर हाथ ले जाकर साबून को लगाने लगा

इस दौरान उस्का लन्ड शकुन्तला के गालो को छू रहा था और वो आंखे भिचे हुए राज के जिद पर हारी जा रही थी ।

तभी राज के हाथ से साबुन फिसला या उसने जानबुझ कर ऐसा किया , मगर साबुन सीधा शकुन्तला की ढीली पेतिकोट मे पीछे की तरफ सरकता हुआ चुतडो के चला गया

शकुन्तला को जैसे ही मह्सूस हुआ तो वो चिहुकी - क्या गिरा राज वहा

राज - ताई वो साबुन निचे गिर गया है रुको निकालता हु

शकुन्तला इससे पहले राज को हटा कर मना कर पाती राज की फुर्तीली उंगलिया उसके गाड़ के दरखतो को टटोलने लगी थी ।

वही आगे ज्यादा झुकने से राज के आड़ शकुन्तला के होठो को छू रहे थे उनकी गन्ध शकुन्तला के नथुनो मे समा रही थी ।

शकुन्त्ला पूरी तरह से गनगना गयी थी , उसकी चुत बजबजा उठी थी

राज - ताई पीछे नही है , लग रहा है आगे आया है साबुन देखो जरा

शकुन्तला ने बेहोशी भरी सतर्कता से राज ने सामने की अपना ढीला पेतिकोट सामने की ओर फैला दिया और राज ने जब निचे देखा तो शकुन्तला की हल्के झान्ट भरे चुत के घाटी और उसके चुत का मोटा दाना साफ दिख रहा था ।

जब तक शकुन्तला की चेतना आती , राज अपनी आन्खे फाडे उसके बुर के बारामदे निहार चुका था , मगर चुत उसके उभरे हुए पेड़ू मे निचे छिपी थी ।

शकुन्तला अब झेपते हुए वो साबुन की टिकिया निकाली और राज को देने लगी - नही हो गया ताई , साबुन लग गया , हाथ धुला दो

शकुन्तला ने लाज से मुस्कुरा कर बिना नजरे मिलाए उसके हाथ पर पानी गिराया । फिर राज हाथ झटक कर बाहर आया

शकुन्तला ने जल्दी से पानी गिराया अपने जिस्म पर और नहा कर राज की ओर पीठ करके खडी हुई

भीगी पेतिकोट मे शकुन्तला के भारी चुतड साफ दिख रहे थे ।

शकुन्तला अपने जिस्म को तौलिये से साफ कर रही थि और राज के बारे सोच रही थी , कि इतनी छुट देने के बाद भी वो क्यू आगे नही बढ़ रहा है । कैसा लड़का है ये ? इतना सब कुछ होने पर कोई भी अपना मुसल निकाल कर खड़ा हो जायेगा ।

कही वो ये तो नही चाहता कि मै पहल करु , क्योकि वो फायदा तो छिप छिप कर खुब ले रहा है लेकिन खुल कर सामने नही आता । कमीने ने मेरी चुत गीली कर दी और उसका मुसल कितना गर्म था ।

शकुन्तला ने सोचा क्यू ना इसको अब और हिन्ट दू और थोडा खुलापन और करु ।

फिर शकुन्तला ने तौलिया फैलाया और पेतिकोट निचे सरकाते हुए उपर की तरफ तौलिया लपेट लिया , इतना उपर कि जैसे ही वो राज के आगे अपना पेतिकोट उठाने के लिए झुकी उसकी पूरी गाड़ फैल कर उसके सामने नंगी हो गयी , फिर शकुन्तला ने कनअखियो से उसकी को नजर भर देखा कि इस नजारे से राज पर क्या असर हुआ है ।





वही राज को भी समझते हुए देर नही लगी कि खेल दुसरी ओर से भी शुरु हो चुका है ।

उसकी जो योजना थी कि ताई को गर्म करके अपने करीब लाने की उस योजना मे ट्विस्ट आ चुका है ।
 
अपडेट 183 बी

अमन के घर

संगीता और भोला की योजना सुबह से ही शुरु हो गयी थी ।

मदन का कमरा नीचे ही हाल से लगा हुआ था । अकेले रहने और हाल से सटे होने के नाते अक्सर उसका कमरा एक गेस्ट रूम मे तौर भी यूज़ हो जाता था ।


दृश्य 01

निचे किचन मे महिलाए मिलकर नास्ते की तैयारियाँ कर रही थी और वही मदन मुरारी और एक दो जन आपस मे बैठे बाते कर रहे थे । भोला अभी उपर अपने कमरे मे था ।

तभी मुरारी और मदन की बात चीत से संगीता को भनक हुई कि मदन कुछ ही देर मे स्टोर रूम से समान लेके उपर छत पर जायेगा ।

संगीता को ये समय अपनी योजना के लिए सही लगा और वो किचन से निकल कर चुपचाप उपर कमरे मे चली गयी । उसने भोला को मदन के उपर आने की खबर दी और दोनो तैयार होने लगे ।

उपर फिल्हाल कोई नही था , संगीता और भोला दरवाजा खोलकर अपने कमरे मे खड़े थे इस इंतेजार मे कि कब मदन उनके बगल के कमरे का दरवाजा खोलता है ।

कुछ ही मिंट मे सीढियो से आहट हुई और जैसे ही बगल एक स्टोर रूम के दरवाजे पर खटपट हुई , दोनो ने अपना ड्रामा शुरु कर दिया ।

भोला तेज फुसफुसाहट भरी आवाज मे - ओहो संगीता सीई अह्ह्ह ठहर जाओ , मुरारी भाई ने मुझे निचे बुलाया है ।

संगीता - नह्ह प्लीज बस थोड़ी देर ना ऊहह प्लीज ना रिंकि के पापा

अपनी बहन और जीजा के फुसफुसाहट भरे संवाद ने मदन का ध्यान उनकी ओर खिंच और उसके गतिमान हाथ जड़ हो गये ।

उसने अपने सतर्क कान गरदन बढा कर अपनी बहन के कमरे की ओर किये इस जिज्ञासा मे कि आखिर किस बात के लिए उसकी दीदी अपने पति से जिद कर रही है ।

भोला - नही संगीता समझो ना , इस समय हम रिस्क नही ले सकते , रात मे देखते है ना ।


भोला की बातो ने मदन की उत्सुकता और बढा दी , उसकी धडकने भी तेज हुई कि आखिर उसके दीदी जीजा किस बारे मे बात कर रहे है । एक रिटार्य आर्मी जवाँ रहने के नाते उसके जहन मे कई सारे नकारात्मक ख्याल आ रहे थे । मगर बिना सच्चाई जाने वो किसी भी निष्कर्ष पर नही जा सकता था । आखिर ये लोग उसके अपने थे ।

तभी संगीता की आवाज आई - रात मे कैसे करोगे ? रात मे रिंकि भी तो यही सोती है प्लीज मान जाओ ना , क्यू तडपा रहे हो देखो ना मेरे दुध भी कडे हो रहे है प्लीज ।

अपनी बहन की बात सुनते ही मदन के कान खड़े हो गये और उसकी आंखे फैल गयी साथ ही चेहरे पर मुस्कान आ गयी कि वो फालतू ही शक कर रहा था , यहा उसकी बहन रोमैंटिक बाते कर रहे है । वही उसे इस बात की भी भनक नही हो पाई कि धिरे धिरे उसका मुसल सर उठाने लगा था ।

भोला - ओहो मेरी जान प्लीज बस दो दिन और रुक जाओ ना , फिर तुम जितना कहोगी उतना चोदूंगा पूरी रात कस कस के

संगीता ने एक गहरी आह भरी - लेकिन मेरा अभी मन है ना

भोला - नही संगीता मुझे जाना होगा मुरारी भाई वेट कर रहे है

मदन को लगा कि भोला अभी निकलेगा इसीलिए वो झटके से दरवाजा खोलकर स्टोर रूम मे घुस गया और भोला सरपट निचे चला गया

तभी संगीता भी दरवाजे से बाहर निकलती है और तुनकते हुए - इनके तो अलग ही नखरे है , ना जाने किस मिट्टी के बने है हुउह

अपनी बहन की किरकिरी होने पर मदन की हसी छुट जाती है और वो उसे औरत का ये रूप देखकर अलग ही तरह का आनंद होता है ।

मगर उसने कभी सोचा भी कि उसकी अपनी सगी बहन इतनी कामुक होगी ।

मदन एक पल को सोचता है कि अगर उसकी प्रेमिका होती तो क्या वो भी ऐसे ही जिद दिखाती । मदन मुस्कुराता है और वापस काम मे लग जाता है ।

इधर भोला और संगीता सीढ़ी पर आकर मिलते है और खिलखिला कर एक दुसरे को ताली देते है ।


दृश्य 02

मदन उपर छ्त पर समान पहुचा रहा होता है इस दौरान मुरारी और अन्य जन नास्ता करके बगल के हाते मे खाने का प्रबंध देखने चले जाते है जहा 500 लोगो को आज दोपहर "हल्दी का भात " खाने का निमंत्रण दिया गया था ।

ममता भोला के लिए नासता लाने को होती है मगर भोला मदन के आने का इन्तेजार करता और जब मदन आता है तो दोनो साथ बैठ जाते है अलग अलग सोफे पर ।

मदन भोला के बाये हाथ के सोफे पर बैठा था । सामने कांच का टेबल रखा हुआ था और जिस पर चाय पकोड़े चिप्स रखे थे ।

तभी भोला ने संगीता को अवाज दी कि वो पानी लेके आये ।

मदन अखबार लेके बैठा हुआ पकोड़े नोच रहा था तभी संगीता पानी लेके आई और भोला देने लगी ।

भोला ने संगीता को मदन की ओर इशारा किया कि ये अख्बार मे ध्यान मगन है इसका ध्यान भंग करो ।

संगीता मुस्कुराई और पानी भरा स्टील गिलास छन्न करके फर्श पर गिरा दिया ।

मदन - अरे क्या हुआ

भोला - कुछ नही भाईसाहब वो रिंकि की मा से पानी गिर गया

"जाओ जल्दी से कपडा लाओ कोई गिर जायेगा भई " , संगीता भागी भागी किचन गयी और अपने चुचे उछालते हुए तेजी से हाल मे आने लगी ।

अपनी बहन की उछलती चुचिय देख कर मदन ने नजरे फेर ली और जबरन अखबार मे नजरे जमाने लगा ।

आन्खे उसकी शब्दो को निहार तो रही थी मगर उसके जहन मे अपने दीदी को देखने की चाह हो रही थी ।

तभी उसने अक्बार का कोना उंगलियो से मोड़ते हुए कनअखियो से संगीता की ओर देखा तो वो झेप गया ।





सामने संगीता अपने पति से नजरे मिलाती हुई उसे रिझाने के इरादे से अपने साडी का पल्लू सीने से थोडा निचे उतारते हुए अपने डीप गले से अपने गोरे स्तन के उभारो का दरशन भोला को करवाति हुई एक पोछा से पानी बालटी मे गार रही थी





तभी मदन की नजर अपनी बहन की गुदाज गहरी नाभि पर गयी जिसे देखते ही मदन का मुसल सर उठाने लगा और उसके मुह मे पानी भरने लगा ।

थुक गटक कर उसने अपनी बहन का कामोत्तेजक रूप देखा उसकी सासे फुलने लगी और फिर संगीता उठी । बालटी लेके अपने मादक कुल्हे हिलाती हुई किचन मे चली गयी ।

वही मदन इस बात से बेफिकर था कि शायद अखबार की आड़ मे उसे किसी ने देखा नही मगर भोला की तेज नजरो ने अपने साले को गरदन घुमा कर उसकी बहन के मटकते चुतड देखता पकड लिया था ।

भोला अपनी योजना पर मुस्कराया और चाय की चुस्की लेने लगा ।

मगर मदन भीतर से पुरा बेचैन हुआ पड़ा था , आज ना जाने कैसे संजोग उसके साथ हो रहे थे उसे जरा भी समझ नही आ रहा था ।

तभी संगीता ने किचन से निकलते हुए ममता को बोला - भाभी मेरी साडी भीग गयी है मै बदल के आती हु ।

फिर उसने एक शरारत भरी नजरो से भोला को देखा और उपर आने का इशारा किया ।

भोला ने मुस्कुरा कर ना मे सर झटक दिया ।

वही मदन इस बात पर खुश हो रहा था कि दोनो कितने नादान है उनहे लग रहा है जैसे उनकी लुकाछिपी कोई देख नही रहा है ।

मगर उसे क्या पता वो खुद अपनी बहन की साजिश मे शिकार हुआ जा रहा था ।

इधर मदन को लगा कि शायद कुछ देर मे भोला उपर जायेगा मगर भोला जरा भी अपनी जगह से नही हिला और मदन को भोला से ईर्ष्या होने लगी कि क्यू वो अपनी बीवी के पास नही जा रहा है जबकी वो उसे रिझाये जा रही है ।

अगर कोई मदन को सामने से बोलता कि " उसे ये जलन भरी भावना इसीलिए हो रही है कि उसे अपनी बहन का जिस्म देखने का मौका नही मिल पाया " , तो शायद मदन इस बात को कभी नही स्वीकारता मगर कारण तो यही था । भोला के जेंटलमैन वाले व्यव्हार ने मदन के जहन मे एक जलन वाली भावना भर दी , उसे लगने लगा कि भोला तो उसकी बहन की कदर ही नही जानता ।

मगर हकिकत से अंजान मदन समझ नही पाया कि उसके भीतर उठ रही भावना भी भी उन दोनो की चाल थी जिससे मदन संगीता के लिए थोडा पोजेसिव हो जाये ।


शकुन्तला के घर

बाथरूम से निकल कर शकुन्तला इतराती हुई अपने चुतड ऐसे ढंग से मटका कर चल रही थी मानो उसकी जवानी के दिन लौट आये ।

सीने मे गजब का फुलाव , कमर तनी हुई पूरी लचक खा रही थी , उसके गीले बालो को झटकते हुए उसने अपने जिस्म को निहारा और आईने मे राज को बेहाल देख कर एक शरारत भरी मुस्करा बिखेर दी ।

सामने जोबन पर लगी तौलिये की गाठ को ऊँगलीयो से उधेड़ते हुए उसने अपने बाहो को फैलाया और पीठ रगड़ती हुई उपर ले गयि ।





इस बात से बखूबी जानकर की उस छीने से तौलिये मे निचे उसके उजले मलायम चुतड बेपरदा हो जायेंगे ।

ताई की नंगी गुदाज गाड़ देख कर राज की सासे फुलने लगी और लन्ड जोर जोर से फुदकने लगा ।

राज ने जोर से अपना मुसल भींच कर मन को तसल्ली दी कि अभी कुछ पल रुक जा





तभी शकुन्तला ने अपने बाहे समेटते हुए तौलिया निचे किया और इस कामुक ढंग से ऐसे शरारती ढंग से किया कि राज को उसके गाड़ भूरे दरारो की शुरुवात झलक मिलती रहे और ऐसे ही उसने गरदन फेर कर उसकी ओर तनिक भर देखा और मन ही मन चहक उठी ।

बिना एक पल गवाये राज की उत्तेजना बढाते हुए उसने वो तौलिया वही जमीन पर गिरा कर आगे बिस्तर की ओर बढ़ गयी





नगन गोरे गुदाज चुतडो की मादक थिरकन देख कर राज का सुपाडा फ़नकार मारने लगा , जोरो की जलन सी होने लगी ।

वही शकुन्तला ने बिना राज की ओर देखे उसके ओर अपने तंदुरुस्त नितंब फैलाये उनपे पैंटी चढाने लगी ।

राज वही हाल के बैठा कमरे के सारे नजारे देखता रहा और धिरे धीरे करके शकुन्तला एक एक करके अपने जिस्म को धकने लगी ।






सुखे नरम चुचो की दरश के आश मे राज के होठ सुखे जा रहे थे मगर शकुन्तला ने छटाक भर ना पलटी और उसकी ओर पीठ किये ब्रा पहन ली और फिर ब्लाऊज के हुक लगाते हुए पलटी ।

उज्ले पेट पर गहरी नाभि के तुरंत निचे पेतिकोट कसा हुआ था और वही से ढलानो पर शकुन्तला की पैंटी की कसी हुई शेप साफ साफ दिख रही थी ।

नगन होकर शकुन्तला राज पर वो छाप नही छोड पाई थी जो असर उसने अपने जोबनो को ढक कर दिया था ।

शकुन्तला साड़ी बान्धने लगी थी और राज को हर पल अपनी चालाकी के लिए अफसोस हुआ जा रहा था कि ना जाने ऐसा संजोग कब बने? कब शकुन्तला अकेले ऐसे मिल पाये ?

मगर कुछ तो था जो उसको अब रोक रहा था , शायद वो हार ही थी राज जो शकुन्तला के सामने वो घुटने टेक चुका था ,

साडी पहन कर शकुन्तला बाल बनाने लगी और राज के चेहरे के उडे हुए भाव देख कर वो बस मुस्कुरा रही थी ।

राज दिखावे के लिए अब मोबाइल चलाने लगा था , मगर उसके जहन मे हर बितता पल ये अहसास दिला रहा था कि इससे अच्छा मौका फिर कभी नही आयेगा ?

शकुन्तला तैयार होकर राज के पास खडी हुई - चल , आजा चलते है

ये बोलकर शकुन्तला अपने मादक कुल्हे हिलाती हुई आगे बढी और उन्हे देख कर राज का लन्ड फिर से बगावत पर आ गया ।

आखिर उसने अपने दिल की सुन ली और शकुन्तला को पकड कर झटके से दिवाल से लगा दिया ।

शकुन्तला इतराती हुई अपने विजयी मुस्कुराहट के साथ सिसकी - अह्ह्ह राज क्या करता है

राज ने अपने होठ से जवाब देते हुए उसकी साडी पेतिकोट सहित उपर करके पैटी के उपर से उसकी गाड पर लगा दिया





शकुन्तला इस स्पर्श से सिस्क पड़ी, राज ने उसके नरम कूल्हो को पकड़ते हुए उसके गाड़ की खुस्बु लेता हुआ उसके गाड़ के मुलायम पाटो को काटने लगा ।

शकुन्तला दिवाल से चिपकी हुई एडिया उठाए घुटी हुई सिस्किया लेने लगी

राज खड़ा हुआ और शकुन्त्ला को हाल की चौकी पर झुका दिया और उसकी कच्छी खिंचने लगा

शकुन्तला ने निर्विरोध अपनी टाँगे ढीली कर दी और राज को अपने गाड़ के आगे घुटनो के बल झुका दिया ।

राज ने उसके चुतदो को थामा और जीभ से एक बार उसकी फैली हुई बुर और गाड़ की सुराख पर जीभ फिराई जिससे शकुन्तला की आख उलटने लगी ,





अगले ही पल उसने अपना पुरा मुह उसकी गाड़ मे देते हुए उसकी गाड़ चाटने लगा और जीभ से कुरेदने लगा ।

शकुन्तला बेबस ऐठती अकड़ती हुई आंखे पटलति सिस्क्ने लगी , राज अपने होठो से उसकी चुत के निचले छोर को सुरकता हुआ जीभ को नुकिला कर उसकी गाड मे भेदने लगा ,

शाकुंतला को ये अह्सास मदहोश कर गया ,

राज ने देरी ना करते हुए खड़ा हुआ और अपना मुसल निकाल कर टिप पर थुक लगाते हुए उसे शकुन्तला की गाड़ के छेद पर टिका दिया

शकुन्तला समझ गयी कि जिस तरह से आज उसने राज को अपनी गाड़ दिखा कर रिझाया है वो नही बक्सने वाला,

और अगले ही राज ने उग्लियो मे ढेर सारा थुक लेके उसके गाड़ की सुराख पर मलने लगा और फिर अपना चिकना सुपाडा पकड कर दबाता हुआ घुसेड़ने लगा ,





शकुन्तला ने भी अपने चुतदो के पाटे दोनो ओर से जोर से पकड कर फैला रखा

लन्ड बड़ी आसानी से उसके गाड़ अन्दर और अन्दर घुसता चला गया ।

शकुन्तला के गाड़ की दीवारे फैलती चली गयी , महिनो बाद उसने लन्ड की गर्माहट महसुस की थी और उसकी चुत पिघलने लगी ,

राज ने उसकी साडी हाथो मे पेतिकोट सहित समेटता हुआ अब झटके लगाने लगा , कसी हुई गाड मे राज मे फुल हुआ सुपाडा रगड़ रगड़ कर जगह बना रहा था और राज हुम्च हुम्च कर कस कस के पेलने लगा ,





हाल मे घुटी हुई मादक सिसकिया अब चिखो मे बदलने लगी और राज कस कस कर पेलने लगा ,

शाकुंतला - आह्ह बेटा और पेल उह्ह्ह हा हा ऐसे हहहह उम्म्ं अह्ह्ह और तेज ऊहह फ़ाड दे उह्ह्ह अमुह्ह

शकुन्त्ला के पहले संवाद पर राज ने भी मुह खोला - ऊहह ताई आपकी गाड़ मस्त कसी हुई है ओह्ह्ह कितने दिनो ने नही पेलवाया उह्ह्ह

शकुन्तला अपनी गाड़ उठाए हुए आहे भरती हुई - सालो से पुछ बेटा ओह्ह्ह उह्ह्ह कितने सालो लन्ड ने छुआ नही मेरे जिस्म को ओह्ह्ह बेटा और पेल ओह्ह्ह और तेज्ज्ज्ज ओह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह तेरा मोटा लन्ड मेरी चुत की दिवारो की खुजली बढा रहा है

शकुन्तला ने अपने बुर के फाको को मसलते हुए कहा ।






राज ने हाथ आगे बढाते हुए उसके बालो को पकडते हुए कस कस के पेल रहा था - अह्ह्ह ताईई ऊहह मस्त माल हो आप उह्ह्ह कितना तड़पाता आपने ओह्ह्ह

शकुन्तला- तड़पाती नही तो क्या तु इतना मजे से पेलता उह्ह्ह बोल ओह्ह्ह

राज- आह्ह ताईई सच कह रही हो , कल से ही मूड था आपको पेलने का अह्ह्ह अह्ह्ह ताई मै आऊंगा ओह्ह्ह

शकुन्तला- ओह्ह बेटा भर दे मेरी गाड़ ओह्ह उह्ह्ह उडेल दे सारा उह्ह्ह उम्म्ंम

राज के लन्ड का फब्बरा शकुन्तला के जोशिले श्बदो के साथ ही फूट पड़ा , गाड़ को सुराख को बड़ा करता हुआ राज का लण्ड उसकी जड़ो मे झटके खाने लगा और उसकी गाड़ मे अपना गर्म गर्म माल भरने लगा ।

आखिरी बूंद आने तल शकुन्तला ने अपने गाड़ के छल्ले को लन्ड पर कसे रखा और फिर ढील दिया , राज लण्ड निचुड़ कर ऊपर रबड़ी लपेटे हुए बाहर निकल आया ।

दोनो ने अपने जिस्म को साफ किया और अपने कपडे सही करके जल्दी से राज के घर के लिए निकल गये ।

राज को आए 30 मिंट से उपर हो गये थे , राज को डर था कि पक्का डांट मिलने वाली थी ।

घर मे गया तो निचे सब कुछ शान्त और खाली था ।

उसने शकुन्तला को उपर की छत भेजते हुए खुद अपनी मा को तालाशने उसके कमरे के दरवाजे को खोलकर जैसे ही कमरे मे झाका सामने आईने के सामने

एक औरत अपने बाल संवार रही थी , जिसकी बड़ी सी चुतड पर साडी कसी हुई थी और उसके ब्लाउज से झांकती नंगी गोरी पीठ साफ नजर आ रही थी ।






तभी वो औरत दरवाजे की आहट पर घूम कर देखती है और उसके कजरारी आन्खे देख कर राज का चेहरा खिल जाता है

जारी रहेगी
 
अपडेट 184




रविवार लिखा है , कि सोमवार लिखा है

तोहर दीदी के 16 गो यार लिखा है

तनीक देख लो !!




"हे तोहार बहिनचोदो सुना " , काजू की औरत दुलारी भाभी ने अमन को छेड़ते हुए उसका चेहरा अपनी ओर किया ।

अमन हल्दी के चौकी पर बैठा हुआ था , जिस्म पर एक बनियान और निचे एक बॉक्सर जो उसकी मा ने आज ही मगवाया था बाजार से ,

एक्का दुक्का लोग हल्दी लगा चुके थे मगर अभी लाईन लम्बी थी और बारि थी दुलारि भाभी की ।

गाव की ठेठ बनारसी क्षेत्र की रहने वाली थी , तो लहजा और रुआब दोनो भोजपूरी ही था ।

दुलारि ने ठंडी हल्दी की उबटन को अमन के गालो पर लगाते हुए अपनी ओर तकाया ।

दुलारि खिलखिलाती हुई - सुनो , भौजी के हाथ से माल लगवा रहे हो , चुम्मा पप्पी दोगे ना कि सब मेहरारू लिये रिजर्ब रखे हो

दुलारि की बाते सुनकर अमन लाज से पानी पानी होकर मुस्कुराने लगा और सभी औरते ठहाका लेके हसने लगी ।

दुलारि हस कर - अच्छा चुम्मा ना देना लेकिन गाना तो सुन लो ।

ये रिंकि के पहुना !!

ये तोहर बहिनचोदो सुना !!

अमन बस हसे जा रहा था ।

दुलारि -
रविवार लिखा है कि सोमवार लिखा है

तोहर बहिन के ... अरे तोहरे रिंकि के सोलह को भतार लिखा है

तनीक देख लो !!

तनिक देख लो ये मोबाइल मे क्या लिखा है

तनीक देख लो !!




दुलारि ने हाथ मे मोबाइल की स्क्रीन पर एक फोटो खोलकर सबसे छिपा कर दिखाया और अमन ने जैसे ही उसको पढने के लिए होठ से बुदबुदाय उसकी हसी छुट गयी ।





" आज रिंकि खोल के देगी देवर जी लोगे क्या "

अमन और दुलारि की खिलखिलाती नजरे आपस मे टकराई और दुलारि ने आंखे उठा कर इशारे से फिर से वही मोबाइल वाला सवाल दुहराया और अमन शर्मा कर मुह फेर लेता है ।

तभी अमन की मामी ने दुलारि को खिंच कर अलग किया - क्या काजू बहू , तु तो मेरे लाड़ले को तन्ग करने का ही सोच कर आई है ।

अमन ने राहत की सान्स ली कि अब उसे कही राहत मिलेगी मगर मामी कहा पीछे रहने वाली थी ।

मामी ने गीत गाते हुए अमन की फ़ोल्ड और सटी हुई टाँगे खोलती हुई जांघो पर ठंडी हल्दी चभोड़ती हुई



हल्दी लगाओ जी

ऊबटन लगाओ जी

अमन बाबू का गोरा बदन चमकाओ जी




साथ मे पीछे औरते भी मामी के दिये हुए लिरिक्स दुहरा रही थी ,

अमन को लग रहा था कि ये राउंड आराम से कट ही जायेगा मगर तभी उसकी मामी



हल्दी लगाओ जी उबटन लगाओ जी

अमन के नुन्नु को भी चमकाओ हिहिहिही ,
अमन की मामी ने लपक कर अमन के बॉक्सर मे हाथ घुसा कर हल्दी लगाने की कोशिश की । मगर सतर्क अमन ने झटके से खिलखिलाते हुए टाँगे जोड़ ली ।

मामी हस कर डांटती हुई - हेयय , पैर खोलो जी

अमन हस कर - नही मामी हाहाहा प्लीज मम्मी देखो ना

मामी ने नजर उठा कर ममता को हस्ता देखा और बोली -


अम्मा अम्मा बोलने से हीरो ना कहाओगे ये दूल्हा

अरे मम्मी मम्मी कहने से हीरो ना कहाओगे ये दूल्हा

तुम तो मऊगा कहाओगे ये दूल्हा

तुम तो मऊगा कहाओगे ये दुल्हा




ममता अपनी भौआई , अमन की मामी की ओर देख कर हसते हुए आंख दिखाती है तो उसको भी लपेटे मे ले लेती है



आंख मटकाने से हीरोइन ना कहाओगी , ये ननदो

अरे मुह बनाने से हीरोइन ना कहाओगी , ये ननदो

तुम तो छिनरे कहाओगी ये ननदो

तुम तो छिनरे कहाओगी ये ननदो




अमन की मामी के शब्दो पर ममता झेप कर हसने लगी और सभी लोग ठहाका लगा कर हसे जा रहे थे ।

इधर औरतो के ठहाके और खिलखिलाहट ने मर्द जनो मे भी कुछ ध्यान खिंच और मौका देख कर भोला मदन को खिंचता हुआ इस डर मे लेके आया कि नही चलोगे तो गाली सुनवा दूंगा ।

मदन हस्ता हुआ भोला के साथ चल दिया और भोला ने जगह देखकर संगीता के ठिक पीछे खड़ा हो गया ।

अपनी बहन को अपने ठिक सामने महज कुछ इंच की दुरी पर पाकर मदन की सान्से चढने लगी, सुबह की बिसरी यादे एक बार फिर से सर उठाने लगी ,

देखते ही देखते उनदोनो के पीछे भी और लोग खडे होकर क्योकि गारी गीत का मुकाबला सा सुरु हो गया था । सबको मजा आ रहा था तभी संगीता ने गरदन घुमा कर एक शरारत भरी मुस्कान के साथ भोला की ओर देखा तो भोला ने मुस्कुरा कर उसका सामने की ओर कर दिया ।

मदन को समझते देर नही लगी कि अभी तक उसके बहन की गर्मी शान्त नही हुई है और वो लगातार संगीता पर नजर बनाये रखा

कुछ ही मिंट की देरी मे उसने भोला के चेहरे पर हरकते मह्सुस की और जब उसने निचे नजर मारी तो देखा उसकी बहन इस भीड की रस्सा कस्सी का फायदा लेके खुलेआम अपना हाथ पीछे ले जाकर भोला का मुसल उसके पजामे के उपर से पकड कर मसल रही थी । भोला के चेहरे के कामोत्तेजक भाव देख कर मदन का लन्ड पूरी तरह से फौलादी होने लगा था ।

तभी महिलाओ की हुल्लड़बाजी हुई और सबकी नजर सामने गयी तो पता चला कि अमन की मामी के जबरजसती उसका चुममा ले लिया था ।

वही जब मदन ने वापस भोला की ओर देखा तो वहा से गायब था और पीछे की भिड़ ने मदन को धकेल कर भोला की जगह पर सेट कर दिया ।

मदन ने इस बात को इंकार किया और गरदन उच्का कर आगे देखने लगा कि तभी उसकी सांसे अटक गयी क्योकि अनजाने मे संगीता ने उसका मोटा लन्ड हाथो मे भर लिया था ।

संगीता को भी समझते देर नही लगी कि ये उसके छोटे भैया का लन्ड है और उसने भर भर बिना पीछे घुमे अपने हथेलियो को आड़ो तक घुमाती रही ।





वही मदन की सांसे अटक गयी थी उसका जिस्म काप रहा था , चेहरा लाल हुआ जा रहा था माथे से पसीना आने लगा था ।

वही उसकी बहन का स्पर्श उसके मुसल को फौलादी किये जा रहा था , संगीता उसके लन्ड को भींचने कोई कसर नही छोड रही थी ।

मदन को समझ नही आ रहा था कि कैसे इस स्थिती से बाहर आये ।

उसे डर था अगर उसकी बहन को पता चल गया कि वो अपने भाई का लन्ड भींच रही है तो ना जाने क्या कयामत आ जाये । दोनो कभी नजरे ना मिला पाये।

मगर जल्द ही मदन को राहत मिली क्योकि संगीता का हल्दी लगाने के लिए बुलावा आ गया था ।

इधर एक एक करके सबने अमन की हल्दी के साथ साथ गारी से भी खुब रग्डाई की और फिर तस्वीरे खिंचने का दौर शुरु हो गया ।



राज के घर



अरे बुआ आप !!!

राज चहकता हुआ लपक कर अपनी कम्मो बुआ को हग कर लेता है ।

अपने लाड़ले से मिल कर कामिनी भी खुश हो जाती है ।

कम्मो के जिस्म की कसावट और नरम अह्सास से राज के सोते अरमान फिर सर उठाने लगे ।

वो हल्के से अपनी बुआ के अलाव होता हुआ - क्या बुआ आप आज आ रहे हो ?

कम्मो अपने नाराज भतीजे के गालो को छू कर दुलार दिखाती हुई - अरे बेटा घर पर भी फुरसत कहा होती है , वो तो मीना थी इसीलिए चली आई ।

राज - तो आप अकेले आये हो ।

कम्मो - नही , अरुण भी तो आया है ना

राज - और फूफा लोग !!

कम्मो - बेटा वो और तेरी दोनो बहने कल साथ मे ही आयेंगे ।

राज चहक कर - क्या सच मे दीदी लोग नोएडा से आ गयी है ।

कम्मो खुश होकर - कैसे नही आती , आखिर उन्के दीदी की शादी है । मैने और दीदी ( शिला) ने डांट कर बुलाया है उन्हे

राज बहुत खुश हुआ कि सालो बाद वो अपनी दो और बहनो से मिलेगा ।

जिनकी ना उस्के पास तस्वीर थी ना कोई पहचान , बचपन कभी देखा था उसने ।

शुरु से ही वो बोर्डिंग स्कूल फिर अब नोएडा मे पढ़ाई करती है ।

उन दोनो से मिलने के लिए राज की एक अलग ही उत्सुकता थी । एक बड़े शहर के रंग मे रंगी दुनिया के लोग कैसे होगे उनसे कैसा वास्ता होगा उसका । बहुत सारि बाते थी ।

फिलहाल सबको छोड कर राज अपनी बुआ को पकड कर उपर ले जाने लगा - चलो बुआ उपर चलते है ।

कम्मो खिलखिलाती हुई मुस्कुराइ- हा बाबा चल रही हु , चल !!

उपर छत के अलग ही हाल से

डीजे पर डांस हुल्लड़बाजी हो रही थी और तस्वीरे खिंची जा रही थी ।

उपर आते ही राज को उसकी मा ने जोर की डांट लगाई कि सारा प्रोग्राम खतम हो गया और तू कहा था ।

मौका देखकर रंगी ने बहाने से राज को बचाया कि उन्होने उसे एक काम से भेजा था ।

वही एक कोने मे शकुन्तला खडी होठ दबाए मुस्कुरा रही थी ।

राज अभी उपर का जायजा ले रहा था कि तभी गीता बबिता ने उसको पीछे से दबोच लिया

भैया भैया !! चलो ना डांस करते है प्लीज

राज चौक कर - अरे मीठी - गुड़िया तुम लोग कब आये ।

गीता - बस थोडा देर पहले , आओ ना भैया

इधर अनुज ने बादशाह का गाना लगा दिया " अभी तो पार्टी शुरु हुई है "

डीजे के धुन पर हम सब भाई बहन थिरक रहे थे , निशा सबको खिंच कर ला रही थी तो राज ने अपनी रसिली मामी को पकड कर डांस किया ।

पाव थके , गला सुखा , पेट मे गुडगुड हुई ।

कुछ ही देर मे एक बजने वाले थे और धिरे धीरे खाने के लिए बाते होने लगी ।

बेचारी सोनल का बुरा हाल था । रीना , पंखुडी, मामी , निशा ने जो रगड़ रगड़ कर उसको हल्दी लगाई थी कि पूछो मत

उसकी साड़ी पूरी लसराई हुई थी ।

सोनल ने अपनी मा को नहाने को बोला तो उसकी मा ने ये बोलकर टाल दिया कि "हल्दी लगवाने के तुरन्त बाद नही नहाते है "

फिर सोनल अपने होने वाले सईया की खोज खबर लेने लगी और अपना हाल बताया

कुछ तस्वीरे साझा हुई और अनुभव भी बाटे गये ।

बन्द कमरे मे कुछ प्यार भरी बाते भी हुई और आने वाले कल के लिए कुछ तैयारिया भी हुई ।

बाते चल रही थी कि बाहर से सोनल का बुलावा आ गया ।

अमन के पुछने पर सोनल ने बताया कि वो अभी खाना खाने जा रही है उसके बाद नहायेगी फिर न्यू ड्रेस मे तस्वीरे भेजेगी ।

इतना मैसेज टाइप करके सोनल ने बिना अमन का मैसेज पढे ही डाटा बन्द कर दिया और मोबाइल लेके चली गयी बाहर ।

इधर राज के यहा मेहमानो की भीड और काम मे सभी लोग फसे हुए थे ।

हल्दी के भात की दावत हो रही थी तो काफी सारे लोग आये हुए थे खाने के लिए ।

लगभग सभी मर्द और औरते लगी हुई थी ।

इधर सबका खाना पीना चल रहा था और रागिनी को ध्यान आया कि उसके बाऊजी यानी राज के नाना कहा है ।

रज्जो से पुछने पर पता चला कि वो उन्हे राज के कमरे मे आराम करने का बोली है ।

रागिनी के पास कामो से फुर्सत कहा थी तो उसने रज्जो को बोला कि जरा बाऊजी को खाना के लिए पुछ लो ।

रज्जो जा रही थी कि उसको सुनीता यानी राज की मामी किसी काम के लिए रोक लिया तो रज्जो ने पास खड़ी शिला को राज के नाना के पास खाना खाने के लिए पुछने भेज दिया ।

घर के बुजुर्ग के सामने जाने के लिए शिला अपने आप को सलिखे से डीप गले वाले सूट से झाकते क्लिवेज पर सिफान का हल्का पिला दुप्प्टा घुमाते हुए सर पर ओढ़ लिया ।

माथे को ढकती हुई शिला राज के कमरे मे प्रवेश करती है

दरवाजे पर आहट होते ही राज के नाना अपनी लेटी हुई अवस्था से उठकर पाव बेड से लटका कर बैठ जाते है और धोती के उपर अपना कुर्ता सही करने लगते है ।

सामने नजर पडती है शिला के कसे हुए फिगर को देख कर उनका मुसल फड़क पड़ता है ।

गहरी सास लेते हुए राज के नाना शिला के परिचय को इच्छुक होते हैं कि शिला मुस्कुराते हुए हाथ जोड कर नमसकार की मुद्रा मे कमरे आती है ।

राज के नाना भी गरदन झुका कर उसका आभार करते हुए उत्सुक होते ही कि वो अपना परिचय दे तब तक शिला उन्के पास आकर निचे बैठने अपना दुप्प्टा खिंच कर उन्के पाव का आशीर्वाद लेने लगती है ।

अजनबी और आकर्षक महिला जिसके मनमोहक रूप पर अभी अभी उनका लन्ड नतमस्तक हुआ जा रहा था वही महिला उन्के पाव मे झुकी हुई अपनी भारी भारी चुचो की गहरी घाटियाँ दिखाती हुई उनके पाव पुज रही थी ।





फूंकारते लन्ड के साथ राज के नाना के मुस्कुरा कर शिला के माथ पर हाथ फेरते हुए आशीर्वाद दिया - खुश रहो बेटा, अच्छा कही तुम जमाई बाबू की छोटी बहन तो नही ।

बनवारी ने जानबुझ कर अपने सवाल को बडे ही शातिर तरिके शब्दो मे चंद हेरफेर करके ऐसे बोला कि शिला की तारिफ भी हो जाये और बाते करने का मुद्दा भी खुल जाये ।

शिला मुस्कुरा कर खडी हुई और अपने दुप्प्टे को सही करती हुई - जी नही बाऊजी हम बड़े है , हमसे छोटी एक है कम्मो ।

बनवारी हस कर - मुझे लगा कि तुम ही छोटी वाली हो ।

शिला ने अपनी तारिफ पर थोडा सा बलश किया और फिर उसे याद आया कि वो यहा किस लिये आयी है ।

शिला - अच्छा बाऊजी वो मै कह रही थी कि आप फ्रेश हो जाईये हम खाना ला रहे है ।

नाना - अरे नही अभी भूख नही है उतना

शिला - क्या नही !! गरम गरम तैयार है , मै लेके आ रही हु आप खा लिजिए ।

बस इतना ही बोलकर शिला घूमी और अपनी मदमस्त बड़ी गाड़ हिलाती हुई बाहर निकल गयी , शिला भी उभरि हुई गाड़ देख कर बनवारी ने एक गहरी आह्ह भरी और अपना मुसल भिंच कर उसको दबाते हुए बडबडाए - हाय क्या कसी हुई गाड़ है इसकी , आह्ह बनवारी अब तेरे जवानी के दिन गये और वो समय भी चला गया जब तुझपे भी ऐसी ही गदराई औरते मर मिटती थी । तु बस किसमत वाला है कि तेरी बेटिया और बहू तेरे बुढापे मे तेरे साथ है । वरना इस बुढापे मे किसे भनक है कि तेरा लन्ड ऐसी चुतडो के लिए कितना मचलता है ।

अपनी बड़बडाहट मे बनवारी बाथरूम मे फ्रेश होने के लिए चला गया और कुछ ही देर मे शिला खाना लेके आ गयी ।

बनवारी ने खाना खाया और शिला थाली लेके बाहर चली गयी । इस आवा जाहि मे बनवारी की नजरे शिला के गुदाज चुतडो को गुपचुप नजरो से निहारती रही ।

बनवारी- अरे बेटा जरा एक ग्लास पानी ला दे और वो बैग मे मेरी दवाईओ की थैली है दे देना

बनवारि ने निचे रखे एक बैग की ओर इशारा करके शिला को दिखाया ।

शिला आगे बढ़ कर गयी , चुकी निचे खाफी सारि बैग रखी हुई थी तो शिला घुटने के बल होती हुई आगे झुक कर वो बैग तालाशने लगी , मगर वो मिल नही रही थी ।





अपने सामने झुकी हुई शिला की फैली हुओ गाड़ देखकर बनवारी का मुसल फौलादी हुआ जा रहा था और वो उसे कस कस कर भींच रहा था ।

शिला - बाऊजी यहा पर वही नाही है वो पिला पाउच आपका ?

बनवारी- ओह लग रहा है रज्जो ने उपर आलमारी मे तो नही रख दिया ।

बनवारि ने कमरे की एक बड़ी आलमारी को देखते हुए बोला ।

शिला उठी और हाल से एक कुर्सी लेके आई

बनवारी - बेटा आराम से , गिरना मत

शिला ने बनवारि की बात पर अपनी स्तर्कता भरी स्पस्टीकरण दिया और उपर चढ कर आलमारी खोल कर देखने लगी ,

इस दौरान उसे जरा भी भनक नही लगी कि कमरे मे हनहनाते हुए पंखे की हवा उसकी सूट को पीछे से उड़ाने लगेगी और बनवारी को उसके गुदाज गोल गोल बड़े चुतडो के साफ साफ और स्पष्ट दरशन होने लगेंगे ।





शिला का सूट तेज हवा से लहरा रहा था और निचे उसकी चुस्त सलवार उसके भारी चुतडो पर कसी हुई उसके गाड़ के दरारो मे फसी हुई थी ।

जिसे देखकर बनवारी अपना मुसल कस कस भीच रहा था ।

बामुशिकलन शिला ने एक बैग निकाल कर उसमे से बनवारी को उसका दवा का पाउच दिया और फिर चली गयी ।

मगर अनजाने मे बनवारी की कामुकता भडका गयी ।

बनवारी भी बेबस अपना सूपाड़ा खुजा कर रह गया ।

जारी रहेगी
 
अति आवश्यक सूचना :डिक्लेअर:

आगामी कुछ महीने मे आपको हिलाने का मौका नही मिलेगा इस कहानी से

जैसा कि पहले ही मैने बोल रखा था कि नवंबर महिने के आखिर तक आते आते ये कहानी होल्ड पर जायेगी

तो उसका वक़्त बस आ ही गया ।

आखिर के कुछ अपडेट जो मैने सोच रखे है

उन्हे लिख कर जल्द ही पोस्ट कर दूंगा ।


अगले महीने मेरा विभागीय प्रमोशन के साथ ट्रांसफर ऑर्डर भी होना है । जिसकी भाग दौड़ मे ही मै व्यस्त हूँ । इसी वजह से अपडेट नही दे पा रहा हु ।

नया जगह नयी पोस्ट नयी जिम्मेदारी
शायद इनसब को सम्भालने मे कुछ समय लग जाये

मगर वापसी तय रहेगी । :good:

शायद नये जगह पर कुछ नये किस्से भी हो आपसे साझा करने को ।
 
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