Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 17 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 104

अभी मुश्किल से रात के 8बजे थे और हम सब खाना खा कर हाल मे बैठे हुए दिन भर की विषयो पर चर्चा और आगे के कामो के लिये तैयारियो के बारे मे बाते कर रहे थे ।

सोनल और निशा उपर जा चुकी थी सोने और मै बहुत ही ज्यादा थक गया था तो मै मा को बोल कर अपने कमरे मे आ गया सोने ।

मैने मेरे कपडे निकाले और गर्मी के वजह से सिर्फ़ अंडरवियर मे सो गया ।

रात मे करीब साढ़े नौ बजे के करीब मेरा मोबाइल बजने की वजह से मेरी नीद खुली और मैने फोन चेक किया तो सरोजा जी का फोन था ।

मै पहले तो फोन देख कर उठाया ही नही ,,क्योकि मेरी नाराजगी जो थी उनसे लेकिन मन मे भड़ास भी निकालनी थी तो आखिरी रिंग तक मैने फोन पिक की ।

सरोजा - हाय हीरो कैसे हो


मै तुनक कर - हुउह आपसे मतलब ,,मै जैसा हू अच्छा हू

सरोजा - अरे सॉरी बाबा ,,,मै नही आ पाई ,मुझे एक डील के लिए बनारस आना पड गया था और भैया भी नही थे नही तो मै उनको ही भेज दी होती ।

सरोजा - तो सॉरी ना मेरे राजा ,,,माफ कर दो ना प्लीज

मै - हम्म्म ठीक है , जाओ माफ किया , लेकिन आप वापस कब आ रहे हो ।

सरोजा - बस यही कुछ एक हफते मे ,,,और बताओ सब कुछ कैसा रहा

मै - सब ठीक रहा , बस मा को बडी इच्छा थी आपसे मिलने की हुउउह आप आये नही

सरोजा - अच्छा बाबा नेक्स्ट टाईम पक्का हम्म्म

मै - हम्म्म

सरोजा - लग रहा है कि आज बात करने का मूड नही है,,,मूड बनाऊ क्या मेरे राजा का

मै मुस्कुरा कर - नही ,वो मै थक गया हू ना तो निद आ रही है

सरोजा - ओह्ह सॉरी , ठीक है तुम आराम करो ,हम बाद मे बात करते है । बाय गुड नाइट मेरे हीरो उउउउमम्मम्ंआआआह्ह


मै - ह्म्म्ं गुड नाइट

फिर मै फोन रख कर लेट जाता हू ।

तभी मेरा ध्यान मेरे खाली पड़े बिस्तर पर जाता और कुछ सोच कर मेरी निद पूरी तरह से गायब हो जाती है ।

मै मन मे - अरे मेरे साथ कोई सोया नही है ,,मौसी कही पापा के साथ तो

मै मुस्कुरा कर - ओह्ह तो आज जम कर थ्रीसोम हो रहा होगा ।

मै इसपे ज्यादा ध्यान नही दिया ,,लेकिन थ्रीसोम से मुझे ध्यान आया कि आज क्यू ना सोनल और निशा के साथ एक थ्रीसोम कर लिया जाये ।

मै बडी ताजगी के साथ उथा और एक टीशर्त और लोवर पहन लिया । जेब मे अपना मोबाइल रख लिया ताकि उपर जाकर बाहर से फोन करके दीदी को जगा सकू और अनुज को भी पता ना चले ।

मै बाहर हाल मे आया तो पापा के कमरे से कुलर के चलने की आवाज आ रही थी और मै सीधा निकल गया उपर एक बार अनुज का कमरा चेक किया तो सब कुछ शांत मिला ,,,क्योकि अनुज और राहुल भी बहुत थक गये थे तो आराम कर रहे थे ।

मै दिदी के कमरे के पास गया और दरवाजे पर खटखट किया । मगर कोई रेस्पोंस नही मिला ।

मैने फौरन दिदी के मोबाइल पर कॉल किया तो मोबाइल बिजी बताने लगा ,,, जाहिर सी बात थी कि वो अमन से ही बात कर रही होगी ।

मेरे फोन की रिंग पाते ही अमन को होल्ड पर रख के वो फोन पिक की

दीदी - हा भाई क्या हुआ ???

मै खुसफुसा कर - दिदी दरवाजा खोलो

दीदी अचरज से - दरवाजा खोलू ? मतलब ???

मैने बिना कोई रिप्लाई के थोडा जोर से खटखट किया

दीदी - तू बाहर है क्या भाई ?

मै खीझ कर - हा मेरी मा अब खोलो

दीदी ओके बोल कर दरवाजा खोली लेकिन तब तक वो मेरा फोन काट कर अमन से बात करने लगी ।

दिदी फोन पे - हा वो राज फोन किया था ,, नही बस ऐसे ही , हा

मै मुस्कुरा कर कमरे मे घुसा और दरवाजा बंद कर दिया ।

दिदी इस वक़्त एक इनर टेप और शोट्स पहने हुए थी ,,,वही बिस्तर पर लेती निशा भी वही पहने हुए थी ।जो कि सोनल की ही थी ।

दीदी अमन से बात करते हुए मुझे इशारे बोली क्या बात है ।

मै एक शैतानी मुस्कान दी और वो समझ गयी तो अमन का कॉल म्यूट पर डाल कर बोली - भाई मै बात कर रही हू

मै हस कर निशा की ओर इशारा किया तो बोली - ठीक है लेके जाओ फिर

मैने मुस्कुरा कर ना मे गरदन हिलायि ,,वही बिस्तर पर लेती निशा मे मेरे आने से ही खुमारि चढ़ने लगी थी ।

सोनल मेरे ना मे गरदन हिलाने पर निशा को देखती है जो इतरा रही होती है ।

मै हस कर - आप बात करो ना दिदी ,,हम आपको डिस्टर्ब नहीं करेंगे , बिना कोई आवाज के

सोनल मेरी बातो पर कोई प्रतिक्रिया देती उससे पहले ही अमन की आवाज सुनाई देने लगी जो काफी समय से सोनल की प्रतिक्रिया का इंतजार मे था ।

सोनल ने उसको अनम्यूट कर उससे बाते करने लगी और मै निशा की ओर बढ गया ।

सोनल वापस मोबाइल मे लग गयी ।

इधर मै निशा के पास गया तो वो उठ कर बैठ गई और हम दोनो एक गहरे लिपलॉक मे खो गये ।

धीरे धीरे उसके होठो को चुसते हुए मै उसे बिस्तर के किनारे तक ले आया और वो समझ गयी ।

उसने अपने पैर बिस्तर से लटकाये और मेरे लोवर को पकड कर खिच कर निचे किया ।

मेरा लण्ड जो पहले से ही खड़ा था वो निशा के हाथो का स्पर्श पाकर और टनटना गया ।

निशा बड़ी उत्सुकता से मेरे लण्ड को थाम कर उसकी चमडी को आगे पीछे करते हुए मेरी आंखो मे देखा और मुस्कुराने लगी ।

मैने भी उसके बालो मे हाथ फेरा और उसने झुक कर सुपादा खोलते हुए लण्ड को मुह मे ले लिया ।

इधर सोनल अमन से फोन पर बाते कर रही थी और उसकी नजरे मेरे और निशा पर ही जमी थी ।

यहा निशा धीरे धीरे पुरा लण्ड मुह मे लेने लगी वही सोनल की हालत खराब होने लगी और वो अमन की बातों का कोई खास जवाब नही दे रही थी ।

निशा बडे आराम से हौले हौले अपनी अदा से मेरे लण्ड को गिला करना शुरु कर दिया था और मेरे भी हाथ उसकी चुचियॉ पर थे जो टेप के उपर से ही उन्हे सहला रहे थे ।

मेरी नजर जब भी सोनल से टकराती तो वो बस एक मुस्कान देती और मै उसे पास आने का इशारा करता तो वो मुझे फोन दिखा देती ।

इधर थोडी देर तक निशा से अपना लण्ड चुसवाने के बाद मैने उसे खड़ा किया और उसके होठ चूसने शुरु कर दिया और होठ चुस्ते हुए शॉटस के उपर से उसकी कसी हुई गाड को मसलना शुरु कर दिया ।

हाथो मे भर भर के उस्के गाड़ के पाटो को फैलाने लगा ।

फिर मैने निशा को पीठ की ओर घुमाया और सामने लाकर निचे से हाथ ले गया और उसकी चुचियॉ को पकड कर मसल दिया जिस्से निशा की तेज सिसकी निकल गयी ।

निशा की सिसकी सुन कर सोनल ने चौक कर हमे देखा तो मै धीरे धीरे सोनल को दिखाते हुए निशा का टेप उपर कर देता हू और खुली कडक चुचियॉ को हाथो मे भर कर मसलने लगता हू ।

सोनल इस सीन को देख कर कामुकता से भर जाती है और उसके हाथ खुद ब खुद उसकी चुचियॉ पर चले जाते है । उसे हमारा रोमांस देख कर नशा सा होने लगता है और वो अमन से उसकी बाते सुन कर बस हू हा मे जवाब देते हुए हमे देखकर अपनी चुचियॉ को सहलाने लग जाती है ।

यहा निशा की हालात खराब थी क्योकि मेरी सख्त खुरदरी हथेलिया उसकी कडक निप्प्ल पर घूम रही थी और वो सिसक जा रही थी । निशा मादकता बस अपनी गाड़ को मेरे लण्ड पर घिसने लगी । अपने लण्ड पर उसके मुलायम गाड़ का स्पर्श पाकर मै और उत्तेजित होने लगा और एक हाथ निशा की चुत को शोट्स के उपर से ही सहलाने लगा ।

यहा निशा और भी अठखेलियां खाने लगी मेरे बाहो मे और वही सोनल ने धीरे धीरे अपने जिस्मो के हर हिस्से को छूना शुरु कर दिया और हल्की सिसकिया भी ले रही थी ।

मेरे हाथ निशा की चुचियॉ को मसल रहे थे और वो लाल होने लगे थे और दुसरे हाथ ने उसकी चुत को रगड़ रखा था ,,,,निशा की सिसकियाँ काफी कामुक थी ,,,उसका एक हाथ मेरे लण्ड को अपनी मुथ्ठी मे कस कर उसे भींच रहा था । ये सब देख के सोनल को रहा ना गया और उसने अपनी चुचिय बाहर निकाल दी टेप से और उन्हे मसलने लगी ,,,मगर अब भी उसने फोन नही काटा था , ना जाने क्या बाते हो रही थी ।

यहा मेरे हाथ निशा के शोट्स मे घुस कर उसकी पैंटी मे भी घुस गये थे और उसके चुत के दाने को सहला रहे थे ,,,उस्की चुत पानी बहा रही थी।

मैने बिस्तर की ओर झुकाया और उसकी शॉटस को पैंटी सहित जांघो तक सरका दिया ।

फिर मै घुटने के बल बैठ कर उसके गोरे मुलायम गाड़ के पाटो को सहलाते हुए उन्हे फैलाया और अपनी जीभ पर खुब सारा लार एक्थ्था कर निशा की गाड़ के गुलाबी सुराख को गिला करने लगा ।

अपनी गाड़ के सुराख पर मेरी गीली जीभ का स्पर्श पाते ही निशा तिलमिला उठी और काँपने लगी ।

मैने उसके कूल्हो को थामा और अच्छे से जीभ चलाना शुरु कर दिया ।

निशा की हालत खराब हो रही थी और वो अपने चुतड के पाटो को सखत करते हुए एठने लगी ,,,मगर मेरी मजबूत पकड से मै उसके चुतड के मुलायम गोरे पाटो को फैलाये चुत से निचले सिरे से गाड की सुराख तक मुह धन्साये जीभ फेर रहा था ,,वही सोनल की हालत भी कुछ खास ठीक नही थी ,,,वो तो अमन की बातो को पूरी तरह से नकार चुकी थी , वो क्या बके जा रहा था उससे सोनल को कोई मतलब नही था ,,,वो ब्स हमारी कामलीला देख कर बहुत ही गरम होने लगी थी ,,,उस्के हाथ उसकी खुली चुचियॉ से सरक कर उसकी चुत तक आ गये ।

सोनल बिसतर का टेक लेके अपनी जान्घे खोल कर बैठी हुई थी और एक हाथ से शॉटस के उपर से ही अपनी चुत को सहलाते हुए ,,,बहुत ही कामुक भरी सिसकिया ले रही थी ।

इधर निशा के पैर अकडने शुरु हो गये ,,,उसका सन्तुलन बिगड़ने लगा था । मुझे अहसास हुआ कि अब वो झड़ रही है यो मैने अपनी गर्दन निचे कर उसके चुत के निचले सिरो पे लगा दिया और चपड चपड़ जीभ चलाने लगा ।

निशा अपनी सासे बन्धे झडने लगी और यही मौका मुझे सही लगा और मैने खड़ा हुआ ।

फिर मैने निशा कर एक पैर फ़ोल्ड करके बेड पर रखा और लण्ड को उसकी चुत के टिका कर एक झटके मे आधा लण्ड उतार दिया ।

निशा की आंखे बाहर हो आने लगी और उसकी सिसकी इत्नी तेज थी कि उसने मुह पर हाथ रख लिया ,,,,मै एक पल को लण्ड को ऐसे ही रोके रखा और सोनल को देखा तो वो समझ गयी कि उसे अब फोन रख देना चाहिए

सोनल - सुनो मै बाथरूम जा रही हू अभी बात करते है ,,

ये बोल कर सोनल ने फोन काट दिया और मुस्कराकर मेरी ओर इशारा किया की मै आगे बढ जाऊ ।

मैने एक बार फिर निशा से कुल्हो को सहलाते हुए थामा और एक ताकत भरा धक्का निशा की चुत मे पेल दिया ,,,मेरा लण्ड निशा की चुत को चिरता हुआ उसकी जड़ तक चला गया ।

निशा दर्द से तडप उथी ,,,उसकी सिस्कियो मे दर्द की अह्ह्ह भरी थी ।

धीरे धीरे मैने ध्कके देने शुरु किये और पेलना जारी रखा

वही सोनल ने अपने सारे कपडे निकाले और नंगी होकर अपनी चुत को निशा के सामने ले गयी ।

निशा ने भी देरी किये बिना तुरंत अपना मुह उसकी चुत मे भिड़ा दिया ।

ये सब देख कर मुझमे और भी उत्तेजना आ गयी और मै निशा के दुसरे पैर को भी उठा कर बेड पर कर दिया

अब मेरा लण्ड सीधा निचे की तरफ निशा की चुत मे उतरने लगा ,,,,जिससे और भी पागल होने लगी ।

सोनल भी जो कि हमारी चुदाई से मदहोश हुई जा रही थी वो मुझे जोरदार धक्के लगाते देख कर और भी गरम होने लगी ।

उसने निशा के बाल को पकड कर उसके चेहरे को अपनी चुत पर बडी बेरहमी से दरने लगी ,,वही मेरे लम्बे लम्बे धक्के खाने से निशा बुरी तरह से तडप जा रही थी ।

इधर सोनल भी निशा के चेहरे को अपनी चुत पर दरते हुए झड़ रही थी और मै भी लगभग चरम पर ही था ।

एक झटके मे मैने अपना लण्ड निकाल कर निशा को झटका ।

वो दोनो समझ गयी कि क्या होने वाला है और वो फटाफत अपनी मेहनत का इनाम लेने घुटनो के बल फर्श पर बैठ गयी और अपना मुह खोल कर जीभ बाहर निकाल दिया ।

निशा का चेहरा बुरा तरह से बिखरा हुआ पडा था क्योकि मैने और सोनल ने मिल कर जो बेरहमी से मजे दिये थे ,,,

इधर मेरा माल निकलने को था और मैने अपनी एडिया उच्काई और लण्ड को मुठियाते हुए पिचकारी को दोनो के मुह पर छोडा और आखिर मे लण्ड को झाड़ कर खड़ा हो गया ।

दोनो ने बारी बारी से मेरे लण्ड को निचोड़ा और किसी पेशेवर लेस्ब्न पोर्नस्टार की तरह आपस मे मेरे माल को साझा कर एक दुसरे के होठ चूसे ।

फिर हम सब उठे और बेड पर बैठ गये ।

थोडा आराम करने के बाद वो दोनो अपने कपडे पहनने लगी ।तभी मेरी नजर एक पैक हुए बैग पर गयी जो दीदी की थी ।

मै - दीदी ये बैग क्यू निकाला है ।

सोनल - अरे हा ,,वो मुझे परसो मौसी के साथ उनके घर जाना है ना ,,तो कल उसी के लिए पैकिंग करनी है ।

मै - अरे लेकिन अभी से क्यू ,,,रमन भैया की शादी मे अभी तिन हफते है ना ।

सोनल - भाई मन तो मेरा भी नही है जाने का ,,,मगर मौसी मा से बोल दी है और मा ने भी हा कर दी है । तो कल मुझे उन्ही के साथ जाना पड़ रहा है ।

मै खुश होकर - अरे कोई बात नही मौसी के यहा जाओ ,,,वैसे भी वो अकेली पड जाती है ना काम करने के लिए ।

सोनल - हा इसिलिए मा ने अनुज को भी लेके जाने को कहा है ।

मै - लेकिन अनुज को क्यू

सोनल - पता नही , और कल हम सब लोग शॉपिंग के लिए भी जायेंगे ,,,फिर परसो यही से गाडी बुक करके मौसी के यहा सारा सामान लेके निकल जायेंगे ।

मै उलझन में - लेकिन ये सब प्लानिंग कब हुई

सोनल - अरे वो तो कल शाम को ही जब मौसी आई तो तभी । उस वक़्त तू था नही ना और इतने काम पड़े थे तो किसी को ध्यान मे ही नही आया ।

मै - हा ये भी है ,,,,कोई बात नही कल मै बात कर लूंगा मम्मी से ,,,

फिर मै उन दोनो को सोने का बोल कर नीचे चला आया ।

वैसे भी थक ही चुका था और कल फिर से भागा दौडी होनी थी । इसिलिए मै भी सो गया ।

सुबह 6 बजे मोबाईल का अलार्म बजा और मेरी निद खुली तो मै उठकर बाथरूम मे की ओर गया तो दरवाज बंद था ।

बाथरुम के दरवाजे पर खटपट सुन कर अन्दर से रज्जो मौसी की आवाज आई और मै इत्मीनान हो गया ।

फिर मै कमरे से निकल कर बाहर आया तो देखा कि चाचा चाची निशा राहुल सब लोग अपने घर निकल रहे है और मा भी एक मैकसी पहने बाहर गयी थी ।

मै - क्या हुआ सब लोग इतनी सुबह क्यू जा रहे हो

मा - पुछ वही अपनी चाची से पता नही कौन सी जल्दी है

चाची सफाई देते हुए - अरे बेटा बहुत काम पड़ा है ,,,इतने दिन से यही थी तो घर मे सारा समान बिखरा है ,,सारा कुछ साफ सफाई भी करना पडेगा ना

मै भी उनकी सम्स्या को समझा आखिर वो लोग हमारे लिए ही तो अपना काम सब कुछ छोड कर हमारे साथ लगे थे ।

तो मैने भी उनको जाने की इजाजत दी ।

फिर मै भी 8 बजे तक नहा धो कर फ्रेश हुआ और नास्ते के लिए आया ।

सभी लोग नासता कर रहे थे तो मैने मौसी से नाराजगी जताते हुए बोला कि कयू आखिर उन्होने मुझे नही बताया कि वो सोनल और अनुज को लिवा के जा रही है ।फिर मा ने मुझे प्यार से दुलारा और समझाया कि वहा ज्यादा लोग नही है ना तो ये लोग रहेंगे तो काम मे हाथ बट जायेगा ।

नासता करने के बाद मै और पापा अपने दुकान के लिए निकल गये थे और मैने बोल दिया कि वो लोग अनुज को ही लिवा जाये शॉपिंग के लिए ।

मा ने भी मेरी हालत समझी क्योकि मै बहुत थक गया था और मुझे दुकान भी देखना था । चुकी इस समय शादियो का समय चल रहा है तो अकेले अनुज के बस था नही कि वो सम्भाल ले ।

फिर मै दुकान पर निकल गया और देखते ही देखते आज का दिन बीत गया ।

रात को 8 बजे तक मै घर गया तो हाल मे काफी सारे समान की पैकिंग चल रही थी ।

मै - मौसी यहा से क्यू इत्ना सब ढो रही हो आप ,,, वहा शहर मे तो सब बडी आसानी से मिल जाता आपको

मौसी - अरे लल्ला ,,वहा मै अकेले घूम कर कितना और क्या क्या लेती ,,यहा तेरी मा ने मेरी मदद कर दी है अब कल हम लोग निकल जायेंगे गाडी बुक करके

मै - हा ये भी सही है ।

इधर मा और दीदी किचन मे खाना बना रही थी और अनुज मौसी के साथ समान की पैकिंग कर रहा था ।

इतने मे पापा भी आ गये और वो भी इतनी सारी शॉपिंग के लिए वही सब पुछताछ किये जो मैने की थी और मैने उन्हे जवाब देके संतुष्ट किया ।

रात मे 9 बजे तक खाना के बाद हम सब अपने अपने कमरो मे सोने चले गये ।

रात मे मौसी मेरे साथ ही सोयी और एक राउंड की जोरदार चुदाई के बाद मैने उन्हे पापा के पास भेज दिया और खुद उपर दीदी के पास चला गया ।

जारी रहेगी ।
 
सभी पाठक बन्धुओ को नये साल की पलंगतोड और गाड़ फाड़ बधाई एवं शुभकामनाएं :happy:

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उम्मीद करता हूँ ये साल भी पिछ्ले साल की अपेक्षा बेहतर हो और बढते दिनो के साथ आपके स्पर्म काउंट भी बढे ।।। :shag:

आज दिन एन्जॉय करिये ,, रात रंगीन करने की जिम्मेदारी हमारी रहेगी ।

मिलते है रात मे एक जोरदर अपडेट के साथ

धन्यवाद
 
अपडेट 105

💥चोदामपुर स्पेशल अपडेट💥


रात में रज्जो मौसी को एक राउंड चोदने के बाद मैने उन्हे पापा के पास भेज दिया ,,,, और खुद दीदी से मिलने उपर चला गया ।

मगर किस्मत उतनी अच्छी नही थी ,,,क्योकि उपर दीदी के कमरे मे अनुज और दीदी दोनो अपनी पैकिंग मे लगे थे ।

मैने दीदी को इशारा किया तो वो मना कर दी ,,,आखिरकार मन गिरा कर मै थोडा बहुत बाते कर अपने कमरे मे आया ।

मुझे सूझ ही नही रहा था कि क्या करू ,,, मौसी को एकबार चोद कर भी मेरे लण्ड की तडप नही मिट रही थी ।

मै सोचा सरोजा जी इंटेरेक्ट करू लेकिन वो कही बिज़ी थी ,,,फिर मैने कोमल को ट्राई किया लेकिन वो फोन पिक नही की ,,,क्योकि रात के साढ़े दस हो रहे थे ।

मुझे नीद नही आ रही थी ,,,बार बार मेरा ख्याल बगल के कमरे मे चल रहे चुदाई के बारे मे ही जा रहा था ।

इसिलिए मैने भी मोबाइल पर मूवी लगाई और देखते देखते सो गया ।

अगले दिन बड़े सवेरे ही किचन मे छौका भूनना सुरु हो गया । मै भी 8 बजे तक तैयार हुआ और 9 बजे तक नाश्ता करने के बाद मौसी सोनल और अनुज सब एक बोलोरो मे बैठ गये और समान कुछ अंदर तो कुछ उपर बान्ध दिया गया । फिर वो लोग भी निकल गये जानिपुर शहर के लिए ।

उनके जाने के बाद मै और पापा भी अपने अपने दुकान के लिए निकल गये ।

दोपहर मे 12 बजे तक मा टिफ़िन लेके दुकान पर आई और फिर मै पापा का खाना लेके उनको देने गया तो पापा ने बताया कि मौसी का फोन आया था और वो लोग भी पहूच गये सकुशल घर ।

मै खुश हुआ और मा को सूचना दी ।

शाम को करीब 4 बजे मा के जाने के बाद चंदू मेरे पास आया ।

चंदू - अबे साले कब पेलेगा मेरी दीदी को ,, चली जायेगी तब

मै हस कर - मुझसे ज्यादा तू उतावला है साले अपनी बहिन चूदवाने के लिए हिहिहिही

चंदू कुछ सोच कर एक आह्ह भरता है और उत्तेजित होकर अपना खड़ा लण्ड लोवर के उपर से दबाते हुए कहता है - भाई मै तो कब से चाहता हू कि कोई मेरी बहन और मा को चोदे और मै छिप कर देखू ,

मै भी चन्दू की बाते सुन के काफी उत्तेजित मह्सूस करता हू और चम्पा की फैली हुई गाड़ याद आ जाती है ।

चंदू - भाई बता ना कब लेके आऊ यहा

मै कुछ सोच कर मुस्कराया - भई देख इस समय किसमत मेहरबां है और चौराहे वाले घर पर मम्मी के अलावा कोई नही है और अगर मै उन्हे किसी काम का बहाना बना के बुला दू तो काम बन जायेगा ।

चंदू खुश होकर - भाई तब तो कोई दिक्कत ही नही है ,,,क्योकि परसो मै मम्मी और दीदी हमारे चौराहे वाले घर जा रहे है और वही से मै दीदी को तेरे पास भेज दूँगा

मै कुछ सोचकर - लेकिन रज्नी दीदी ने पुछा तो

चंदू हस कर - अबे जब मा के गाड मे मेरा लण्ड घुसा रहेगा ना तो उसे किसी की फिकर नही रहेगी

चंदू की बात से मै भी सहमत हुआ और हमने हाईफाइ किया ।

रात को खाना खाने के बाद मै और पापा हाल मे बैठे थे । वही मा किचन मे बर्तन खाली कर रही थी ।

इधर हमारी और पापा की आपसी सहमति हो गयी थी रात मे मा की धमाकेदार चुदाई के लिए, वही मा भी इस बात से बखुबी वाकिफ थी।

इसी बीच सोनल दीदी का फोन आया ।

मै - हा दीदी बोलो


सोनल हस्ते हुए - भाई पता है आज हमारे यहा आने के बाद बडी मजेदार बात हुई है ।

मै ह्स कर - अरे क्या हुआ बताओ तो

सोनल - भाई यहा मौसी की ननद नन्दोई और उनकी बेटी आई है । बडे ही मजेदार लोग है और ममता बुआ तो मौसी से ऐसे ऐसे गंदे मजाक कर रही थी कि पुछो मत

मै ह्स कर - हा वो सब तो कामन है दीदी ननद-भौजाई मे हिहिही

सोनल - अरे भाई उनके गाव का नाम सुनेगा तो और भी मजा आयेगा

मै अचरज से हस के - मतलब ऐसा क्या खास गाव है हिहिही

सोनल ह्सते है - हिहिहिही चोदमपूर गाव का नाम सुना है भाई हाहहहा

मुझे तो हसी आई बडी जोर की - हिहिही चो चो चोदमपुर

सोनल - हा भाई हिहिही , लेकिन उनकी बेटी पल्लवि बडी खुबसुरत और बडी फिट भी है , लगता ही नही कि गाव से है ।

मै हस कर - चलो आपको मिल गया ना कोई टाईमपास के लिए,,, मौज करो

सोनल - हा , चलो मै रखती हू मम्मी पापा का ख्याल रखना बाय


मै - हा बाय

इधर दिदी ने फोन काटा और मुझे मेरी जिज्ञासा ने बहुत मजबुर कर दिया कि मै ये बात पापा से पूछू लेकिन मै दीदी को इसमे नही लाना चाहता था । मगर और कोई रास्ता नही था ।

मै पापा से - पापा आप किसी चोदमपुर गाव के बारे मे जानते है क्या

पापा ह्स कर - हाह्हा नही बेटा ,, मै तो पहली बार सुना हू

मै - मै भी ,,वो अभी अनुज बता रहा था कि रज्जो मौसी के यहा कोई रिशतेदार आये है चोदमपुर गाव से हिहिहिही

पापा थोडा सोचते हुए - बेटा मेरी जानकारी मे नही है , हा अगर तेरी मौसी के यहा की बात है तो तेरी मा को जरुर पता होगा

तब तक मा भी किचन का काम खतम करके हाल मे आई और हमे बाते करता देख बोली - क्या बात हो रही है जी दोनो बाप बेटे मे

मै उतावला होकर - मा आप जानते हो क्या चोदमपुर गाव कहा है ??

मा बहुत ही सरलता से बोली - हा जानती हू , क्यू ???

मै और पापा एक दुसरे को देखने लगे।

मै उत्सुकता से - अरे लेकिन इतना अजीब नाम है ना और रज्जो मौसी की क्या रिशतेदारि है वहा ??

मा हस कर - अरे इसमे अजीब क्या है बेटा, गाव का नाम क्या , ना जाने कितने शहरो और देशो के नाम भी अजीब होते है । तू इतना पढ लिख कर मुझसे पुछ रहा है । ये अजीब है हिहिहिहिही

मै सामान्य होता हुआ - हम्म्म ये भी सही है मा ,,लेकिन आपको कैसे पता उस गाव के बारे मे ??

पापा भी जिज्ञासू भाव से - हा रागिनी तुम कैसे जानती हो ये चोदमपुर गाव को

मा मुस्कुरा कर - अरे जी आप को कुछ याद भी रहता है

पापा सोचते हुए - मतलब

मा मुस्कुरा कर - अरे रज्जो जीजी की ननद ममता का व्याह उसी गाव मे तो हुआ है ना ।

मै और पापा एक दुसरे को देखते हुए - ओह्ह्ह ये बात है ।

इधर मा चोदमपूर के लोगो के बारे मे कुछ बताने लगी ।

वही मै और पापा ये सोचने लगे कि चोदमपूर से आये लोग कैसे होंगे ,उन्का व्यव्हार और वहा की औरते । अह्ह्ह्ह

सूचना - इस अपडेट और आगे के सभी चोदमपुर स्पेशल अपडेट मे कहानी का दिशा निर्देश और वाचन कभी राज और कभी लेखक के माधय्म से होगा । तो बिना स्किप किये शब्दो पर ध्यान जरुर दे । जब चोदमपूर स्पेशल अपडेट समाप्त होगे तब वापस से कहानी का मूल वाचक राज को बना दिया जायेगा । वैसे भी आपको ज्यादा परेशानी नही होगी क्योकि फॉन्ट कलर मै अलग रखूंंगा ।


लेखक की जुबानी

अगर चमनपुरा मे राज के परिवार मे चोदमपुर से आये मेहमानो की चर्चा हो रही है तो आईये हम लोग भी एक नजर उन किरदारो पर मार लेते है कि कौन है क्या है और किस रंग ढंग के है ।

परिचय

ममता - रज्जो मौसी की ननद , बड़ा चौड़ा भूगोल है और काफी खुली विचार की है । चोदमपुर मे काफी काण्ड कर चुकी है देखते है अपनी भौजाई के यहा क्या रंगमंच बान्धने वाली है ।

राजन - ममता के पति और रज्जो मौसी के नंदोई, काफी खुशमिजाज इन्सान हैं और भाव्नाओ के मामले बहुत ही गुप्त है लेकिन हार्मोनल रसायनो पर इनका भी संयम एक स्तर तक ही है ।

पल्लवि उर्फ पल्ली - सेक्सी , हॉट , चुलबुली और झन्नाटेदार माल है , काफी लण्ड घोंट चुकी हैं । उम्र 18+ है । ये ममता और राजन की एक्लौती लाडली सुपुत्रि है ।

तो ये है चोदमपुर से आये किरदार , अधिक जानकारी के हमारे
TharkiPo भाई साहब द्वारा लिखित कहानी कथा चोदामपुर की पर जाये । क्योकि ये सारे किरदार मूल रूप से उन्ही की कहानी के पात्र है ।

वापस कहानी पर

रात के 10 बजे का समय

स्थान - राज के मौसी का घर , जानीपुर शहर

एक नजर राज के मौसी के घर पर :


सिटी के एक मध्यम वर्गीय मुहल्ले मे एक बड़ा सा दो मंजिला मकान । ग्राउंड फ्लोर पर 3 तिन कमरे , एक किचन एक हाल और पीछे की ओर खुला आँगन है । उपर की मन्जिल पर 3 कमरे , एक स्टोर रूम और पीछे के आगन वाले हिस्से को बाल्किनी मे कर दिया गया । रज्जो मौसी का कमरा उपर के फ्लोर पर है जबकि रमन निचे के फ्लोर पर रहता है । उपर टेरिस पर खुली छ्त है और पीछे की तरफ बाथरुम की वयवस्था की गयी है ।

राज के मौसी के घर की उपर की टेरिस पर राज मौसा कमलनाथ और उनके जीजा यानी राजन एक साथ बैठे हुए रात का मौसम बना रहे थे ।

राज के मौसा कमलनाथ ने काफी समय से पंजाब मे नौकरी करते है और शहर मे लम्बा जीवन यापन के कारण ड्रिंक की आदत है उनको । कमलनाथ अपने बहनोई राजन से उम्र मे भले ही बड़े थे लेकिन फिर भी बडे ही रंगदार किसम के इन्सान थे । वही राजन गाव से सम्बंधित थे तो थोडा खुद्दार थे और अपने साले का सम्मान भी करते थे ।

कमलनाथ दो प्लास्टिक के ग्लास मे अपनी कोई ब्रांड की दो पैक बनाई और राजन को आफर किया ।

राजन - अरे नही भाईसाहब मै नही लेता ,,हा ये नमकीन खा लेता हू ,

कमलनाथ अपनी पैग को एक बार मे ही खतम करते हुए - अरे क्या यार राजन तुम भी ,,भाई जीजा हो और हमारे यहा आये हो थोडा तो लो , ऐसे मजा नही आयेगा ।

राजन - जी नही भाईसाहब, अगर मै पीता तो आपका साथ जरुर देता

कमलनाथ हसता हुआ - भई तुम तो बड़े सीधे निकले हाहहहह कोई बात नही मै तो लूंगा ही ।

इधर थोडी देर मे धीरे धीरे करके कमलनाथ ने 375ml की बॉटल खाली कर दी और पूरी तरह से टनं हो गये । इतना पी लिये की बॉडी पर नियंत्रण ही नही रहा ।

राजन अकेले उनको सम्भाल पाने मे असमर्थ हो रहा था कि इतने मे राज की मौसी रज्जो वहा पहुचती है ।

रज्जो - अरे जी कहा है ,,सोना नही है क्या

रज्जो जब अपने पति को नशे मे टल्ली देखती है तो अपने नंदोई के सामने उसे बहुत ही शर्मीन्दगी होती है ।

रज्जो इस वक़्त एक ढीली मैकसी मे थी और बिना कोई दुप्प्टे के । हालाकि उपर छत पर ज्यादा उजाला नही था लेकिन फिर भी पहचान हो सकती थी ।

राजन हस्ते हूए - अरे भाभी आज लग रहा है भाईसाहब ने ज्यादा ले ली है

रज्जो राजन को हस्ता देख थोडा राहत मह्सूस करती है और चल कर अपने पति को सम्भालती है ।

रज्जो अपने पर गुस्सा करते हुए - क्या जी आपको कुछ ध्यान है कि नही ,,घर मे चार मेहमान आये है और आप छीईई

रज्जो - चलो निचे कमरे मे सोवो

राजन हस कर - अरे भाभी जी इन्हे पकड कर ले जाना पड़ेगा ,, आप रमन को बुला दीजिये

रज्जो - वो क्या है जीजाजी , रमन और अनुज बाहर गये है कुछ सामान लाने ,,हमे ही इन्हे लेके जाना पडेगा

राजन - कोई बात नही भाभी ,,चालिये पकडिए

फिर दोनो ने बारी बारी से एक एक तरफ से कमलनाथ को पकड़ा और खिंचते हुए निचे लेके जाने लगे ।

जीने पर उतरते हुए कमलनाथ अपनी लड़खड़ाती हुई जुबान मे बड़ब्डाता है - कहा ले जा रही हो रमन की अम्मा हमको

रज्जो अपने पति को कसके पकड कर गुस्सा कर बोली - हमारे कमरे मे और कहा

कमलनाथ - ओह्ह माफ करना जान आज मै तुम्हे चोद नही पाऊन्गा , मैने ज्यादा पी ली है सोओओरीरीईईई

नशे मे धुत कमलनाथ के मुह से ऐसी बाते सुन कर राजन और रज्जो दोनो आवाक रह जाते हैं और दोनो एक-दूसरे को एक पल देखते है ।

मजबूरी मे रज्जो को इस बात को काटने के लिए मुस्करा कर राजन को जवाब देना पड़ता है - लग रहा है कि आज सच मे बहुत चढ़ गयी है इनको हिहिही

रज्जो झल्लाते हुए कमलनाथ को कमरे मे ले जाती है - क्या कह रहे है आप जी आपको पता है कुछ

कमलनाथ लड़खड़ाते हुए जुबान मे - सोओओरीईईई जान,,सोओओरीईई राजन ,,, वो मैने रज्जो से वादा किया था कि आज मै उसे चोदूँगा ,,,सॉरी तुमको बुरा तो नही लगा

रज्जो अपना माथा पीट लेती है और झटक कर अपने पति को बिस्तर पर धकेल देती है ।

अपने पति को धकेलते वक़्त रज्जो की मैकसी के बटन खुल जाते है और ऐन मौके पर राजन की नजर रज्जो के मोटी मोटी बडी बड़ी हिलती चुचियॉ के क्लिवेज पर जाती है और राजन जी एक पल को खो जाते है ।

रज्जो को इसका आभास होते ही वो फटाक से घूम जाती है और अब कमरे की रोशनि मे राजन के सामने रज्जो के फैले हुए बडे चुतड थे ।

रज्जो बडी ही शर्म से राजन की ओर घूमती है - माफ करियेगा जीजाजी , ये सब थोडा अजीब है ।

राजन मानो किसी कलपना से उभरा हो - अह क्या कह रही है भाभी ,,,ये सब घर की बाते है ,हो जाता है कभी कभी । उसकी चिन्ता ना करे आप

रज्जो मुस्कुरा कर - ह्म्म्ं

राजन - ठीक है भाभी मै भी अपने कमरे मे जा रहा हू

रज्जो - जी ठीक है

तभी राजन कमरे से बाहर निकल रहा होता है कि कमलनाथ बडबड़ाता है - सॉरी मेरी जान,,मै आज तेरी गाड नही मार पाऊन्गा ,,माफ कर दो ना रमन की मा

राजन फौरन पलट कर रज्जो को देखता है ,,रज्जो शर्म से पानी पानी हो गयी और कर भी क्या सकती थी आखिरकार वो भी राजन को देख कर हस दी ।

राजन हस कर - ठीक है मै चलता हू भाभी , कोई दिक्कत होगा आवाज दीजिये

राजन भी मुस्कुरा कर बाहर निकल गया ।


जारी रहेगी
 
अपडेट 106

चोदामपुर स्पेशल अपडेट


पीछले अपडेट मे आप सभी ने पढा कि जहा एक तरफ चमनपुरा मे राज ने चंदू के साथ उसकी बहन को चोदने का खाका तैयार कर लिया वही राज के मौसी के यहा यानी कि जानीपुर मे आये चोदमपुर के मेहमानो की मौज हुई पडी है । कमलनाथ ने पीने के बाद अपने जीजा के सामने नशे मे अपनी बीवी को शर्मीन्दा कर दिया । देखते है ये घटना क्या नये हंगामे खड़ी करेगी ।

अब आगे

राजन के कमरे से जाने के बाद रज्जो मन ही मन खुब मुस्कुराइ और थोडा बहुत अपने पति को गुस्से से लताड़ा भी ।

रज्जो मन मे - लग रहा है इनकी बकबक ऐसे ही रात भर चलेगी , और नंदोई जी के सामने क्या क्या बक गये । ना जाने क्या क्या सोच रहे होगे वो भी ।

रज्जो कुछ सोच कर रमन के पास फोन ल्गाती है और जल्दी घर आने को कहती है ।

रज्जो मन मे बुदबुदा कर - मै कहा सोने जाऊ अब , देख रही हू क्या हो सकता है ।

रज्जो ऐसे ही सोचते हुए सबसे निचे हाल मे आती है । जहा ममता राजन , पल्लवि और सोनल बैठ कर बाते कर रहे होते है ।

रज्जो - अरे भाई आप लोगो को सोना नही है क्या , कल और भी काम है ना ।

ममता रज्जो से मजे लेते हुए बोली - हम औरते और ये बच्चे तो सो तो जाये भाभी ,,लेकिन अपने नंदोई जी को कहा सुलाएंगि

रज्जो की नजर वापस से राजन से मिली और वो शर्म से झेप कर मुस्कुरा दी ।

रज्जो - अरे यहा कमरो की कमी नही है ।

बस थोडी साफ-सफाई नही हो पाई है कमरो की

फिलहाल दो ही कमरे साफ है । एक मेरा कमरा है तो वहा रमन के पापा सोये है , और एक रमन का कमरा है ।

राजन - ऐसा करिये भाभी , यही हाल मे ही बिस्तर लगवाईये ,,यही सोया जाये ।

ममता राजन को छेड़ते हुए - ओहो क्या बात है , हमारी भाभी के साथ सोने का प्लान बना रहे हैं

ममता - क्या भाभी , कुछ जादू कर दी हो क्या इनपे

रज्जो और राजन की नजरे मिलती है और रज्जो शर्म से लाल हो जाती है , मगर उसे भी अपनी ननद का जवाब देना ही था ।

रज्जो - अरे जादू तो तुम की अपने भैया पे ,,,की दारु पी टूल्ल है और तुमको ही याद कर रहे है ।

ममता भी अपने भाभी की मस्तीयो से खुब खिलखिलाई , वही सोनल और पल्लवि थोडा असहज मह्सूस कर रहे थे तो वो उठ कर जाने लगे ।

सोनल - मौसी हम आते है अभी फ्रेश होकर ,,तब तक आप लोग देख लो कहा सोना है हिहिहिही । चलो पल्लवि

फिर सोनल पल्ल्वी को लिवा कर पिछे आँगन मे लेके चली गयी ।

इधर हाल मे राजन - अब बस कर ममता , देख नही रही बच्चे है ।

रज्जो अब थोडा खुल कर - अरे जीजा जी , बच्चे समझदार थे तो चले गए , क्यू ननद रानी जाना है अपने भैया के पास

ममता भी मौका देख कर बहुत तगडा जवाब देती है वो भी खुल कर - अरे जब आपके जैसी भारी गाड वाली नही खुश कर पाई हमारे भैया को तो हमारा तो बहुत छोटा सामान है भाभी हाहहह्हहा

रज्जो पूरी तरह से झेप सी गयी और ममता के कन्धे को ठोकर मारकर सामने बैठे हुए राजन की ओर इशारा किया

ममता रज्जो को शर्माते देख और मजे लेती हुई बोली - अरे अपने नंदोई से क्या शर्माना भाभी , उन्होने तो हमारा नाप भी रखा है ,,क्यो जी

रज्जो ममता की बात सुन कर आंखे उठाकर राजन को ऐसे देखती है कि मानो पुछ रही हो कि ममता सच कह रही है क्या ।

राजन रज्जो को ऐसे घूरता देख सकपका जाता है - अब ब ब क् क क क्या कह रही हो ममता तुम ये सब

रज्जो हस कर - लग रहा है हमारी ननद रानी को भी उनके भैया की तरह चढ़ गयी है

राजन रज्जो की बात पर हसने लगता है

रज्जो - मै तो कह रही हूँ कि आज दोनो भाई बहन को मजे ले लेने दो ,,,क्यू जीजा जी

ममता - हा हा मुझे किनारे कर दो ताकि आप मेरे पति से अपनी मनमानी कर सको ,,खुब समझ रही हू भाभी आपकी चालाकी

इधर बाते आगे बढती की अनुज और रमन कुछ सामान लेके हाल मे घुसते है तो सारे लोग चुप हो जाते है ।

थोडी देर की झिकझिक और जद्दोजहेद के बाद रमन अनुज को लेके अपने कमरे मे चला जाता है । और बाकी लोग हाल मे हो बिस्तर डाल के सो जाते है ।

अब हाल मे स्थिति ये थी कि

एक तरफ पल्लवि फिर सोनल फिर रज्जो मौसी , फिर ममता और राजन ।

सारी लाईटस ऑफ़ की गयी और नाइट बलब जला दिये गये । फिर सारे लोग धीरे धीरे सोने लगे ।


एकतरफ जहा जानीपुर मे ये सब काण्ड हो रहे थे कि वही चमनपुरा मे राज के घर मे घमासान थ्रीसोम चुदाई हो रही थी

राज की जुबानी

एक राउंड पापा के साथ मा को चोदने के बाद हम तीनो एक दुसरे को देख कर हाफ रहे थे और मुस्कुरा रहे थे।

पापा - आह्ह आज कितने दिनो बाद मजा आया ओह्ह्ह

मै - मजा तो आपका रोज ही था पापा , पहले बुआ और इधर तिन रात मे मौसी भी हिहिहिही

पापा - हा बेटा सच मे मजा तो बहुत आया , तेरी मौसी और बुआ सच मे बहुत ही चुदवासी माल है

मै रज्जो मौसी को याद कर फिर से गर्म होने लगा - पापा एक बार मौसी या बुआ के साथ मुझे भी शामिल करो ना

मा गुस्सा दिखाते हुए - पागल हो गया है क्या तू

पापा - ओहो जान उसका भी मन है , वो भी बडा हो रहा है ना

मै उखड़ कर - हा वही ना

मा चिंता के भाव मे - लेकिन ये सब कैसे ,, आखिर रज्जो दीदी कैसे मानेगी इनसब के लिए,, और कही गुस्स्सा हो गयी तो

पापा हस कर मा के गाल को चूमते हुए - अरे मेरी जान रज्जो दीदी तो एक नम्बर की चुदक्क्ड है ,,वो भला एक साथ दो लण्ड के लिए क्यू मना करने लगी

मा - फिर भी

पापा - ओह्ह जानू अब मजा ना किरकिरा करो आओ चुसो इसे ,,,देखो रज्जो दीदी की याद मे खड़ा हो रहा है

पापा की बात पर मै और मा हसने लग जाते है ।

एक बार फिर हमारी धक्कम्पेल चुदाई होती है और हम लोग भी सो जाये है ।

अगली सुबह उठ कर हम सब अपने रोज के कामो मे लग जाते है ।


लेखक की जुबानी

एक तरफ जहा चमनपुरा की सुबह बहुत ही शांत और व्यस्त गुजरी ,, वही राज के मौसी के यहा कुछ अलग ही हंगामे के साथ सुबह की शुरुवात होने वाली थी ।

भई चोदमपूर से किरदार आये और मस्तीया ना हो ऐसे कैसे हो जाये ।

राजन और ममता तो गाव मे रहने के आदी थे तो उनको आदत थी सुबह ही उठने की ।

इसिलिए सबसे पहले राजन की नीद सुबह सुबह 4 बजे के करीब खुली और उसके साथ ही उन्के लण्ड ने पायजामे मे अंगड़ाई ली ।

हल्की रोशनी मे राजन मे एक बार गरदन घुमा कर सबको देखा और फिर उठ कर धीरे से पीछे आँगन की ओर चला गया । थोडी देर बाद फ्रेश होने के बाद वो वापस आता है और तभी ममता भी उठ जाती है ।

ममता कुनमूनाते हुए - उम्म्ंम उठ गये क्या आप जी

राजन - हा ममता अब रोज की आदत है तो ,,,

ममता उबासी लेते हुए - ठीक है आप सो जाओ थोडा देर ,मै आती हू पाखाने से

राजन ने उबासी लेते हुए वापस अपनी जगह लेट गया ।

मगर उसको नीद कहा थी , उसकी नजरे तो उससे एक हाथ की दुरी पर लेती उसकी गदराई सेक्सी सल्हज रज्जो पर थी ,,जिसकी गाड फैली हुई थी और वो करवट लेके राजन की ओर पीठ करके सोयी हुई थी ।

राजन अपनी सल्हज रज्जो के उभरे हुए कुल्हे और कमर देख कर उत्तेजित हो जाता है और पायजामे मे उसका लण्ड बगावात पर आजाता है ।

राजन मन मे - आह्ह रज्जो भाभी की गाड कितनी बड़ी है ,, मेरा साला कमलनाथ तो बहुत ही किस्मत वाला है । पता नही ये सो रही है कि जाग रही है। कल रात मे तो उसकी चुचीयो की उपरी झलक ही देखी थी । इनकी चुचियॉ की दरार बहुत गहरी है ।

राजन एक बार हौले से लण्ड को पायजामे है उपर से सहलाता तो उसे और भी उत्तेजना मह्सूस होती है ।

राजन स्वभाव से बहुत शान्त और समान्य दिखता हो ,,लेकिन कामूकता हावी होने पर वो अपना सन्तुलन खोने लगता है ।
[ उदाहरण के लिए KATHA CHODAMPUR KI मे अपडेट 115 पढ़े । जहा राजन के बारे मे उसके हवसी चरित्र का सुन्दर वर्णन हमारे TharkiPo भाई द्वारा किया गया है ]

राजन मन पर हवस हावी होने लगा था और वो आगे बढ़ कर रज्जो के गाड को मह्सूस करना चाहता था । वो थोडा खसक कर रज्जो की ओर बढा ,,कि रज्जो ने करवट बदली और सीधी लेट गयी ।

राजन थोडा सतर्क हुआ और उसकी नजर रज्जो की लम्बी लम्बी सांस लेती भारी छातियो पर गयी । जिससे राजन के लण्ड का कडकपन और बढ गया ।

राजन अब रज्जो के बिल्कुल करीब था उसकी तरफ करवत लिये हुए ।

उसमे थोडी हिम्मत की और एक हाथ से धीरे धीरे रज्जो की उस चुची पर ले गया जो मैक्सि के अंदर उसकी तरफ फैला हुआ था ।

बहुत ही हौले से राजन ने मैकसी के उपर से रज्जो की सास लेती चुची पर हथेली को रखा और उसको पुरे बदन मे कपकपी सी मह्सूस हुई । हवस राजन के दिमाग पर हावी होने लगा था ,,, और थोडा हिम्मत करके रज्जो की चुची को ऊँगलीयो से दबाया ,,, राजन को बहुत ही मुलायम सा अह्सास हुआ और रज्जो के कोई हरकत ना करने पर उसकी हिम्मत बढ़ी ,,उसमे वापस से एक बार अपने पंजो को फैला कर चुची को पकड लिया और हल्का हल्का दबाने लगा ।

राजन को बहुत ही उत्तेजना मह्सूस हो रही थी ।

वो एक हाथ से तेजी से अपना लण्ड मुठीयाये जा रहा था पायजामे के उपर से और वही दुसरा हाथ रज्जो को मुलायम चुची को पकड़े हुए था ।

तभी रज्जो थोडी कूनमूनाई और राजन ने अपनी पकड़ ढीली कर दी लेकिन हाथ वैसे ही रहने दिया रज्जो की छाती पर ।

इधर रज्जो की नीद खुल गयि और उसे इसका आभास होते ही कि उसके नंदोई का हाथ उसकी छाती पर है वो सिहर उठी ,उसकी सांसे तेज हो गयी ।

रज्जो मन मे - ये नंदोईजी का हाथ यहा कैसे ,,और ममता कहा चली गयी । कही ये नीद मे तो नही है ना

रज्जो एक बार धीरे से चेक करने के लिए बोली- जीजा जी

राजन को ये आभास हुआ कि रज्जो जाग गयी तो उसकी फट गयी और उसे समझ नही आ रहा था कि क्या करे ,, उसने अपने पायजामे से लण्ड की पकड को ढिला किया और वैसे रुका रहा ।

राजन से जवाब ना पाकर रज्जो को लगा शायद उसका हाथ नीद मे ही आ गया तो उसने बडी सावधानी से राजन का हाथ अपनी छाती से हटाया और वापस उसी की ओर करवट लेके घूम गयी ।

लेकिन रज्जो को अभी भी शक था कि राजन कही जाग तो नही रहा इसिलिए वो लगातार आंखे खोले राजन को निहार रही थी ।

वही राजन अपनी आंखे भींचे डर रहा था कि कही उसकी सल्हज ने शक तो नही किया एक बार देखू क्या ,,,

तभी ममता हाल मे आ जाती है और रज्जो को ऐसे अपने पति के करीब और सामने से उसको घूरता देख मुस्कुराती है । फिर वो राजन के पीछे की खाली जगह पर लेट जाती है और अपने कोहनी के बल पर सर टिका कर करवट लेके रज्जो की ओर मुह कर लेती है ।

ममता हस कर खुसफुसाते हुए - क्या बात है भाभी , बडे ध्यान से निहार रही है मेरे पति को

रज्जो मुस्कुरा कर - नजर रख रही हू , कही तुमको समझ कर मुझे ही ना दबोच ले इसिलिए

तभी ममता राजन के पीछे से चिपक कर रज्जो के सामने ही राजन के पायजामे के उपर से लण्ड पकड कर बोली - नजर तो आपकी सिर्फ इसपे है भाभी हिहिहिही ,,लेकिन मिलेगा नही ।

राजन जो अबतक किसी तरह गुमसुम होकर सोने का नाटक करते हुए अपनी कामोत्तेजना को रोके हुए था ,वो ममता के हाथो का स्पर्श अपने लंड पर पाकर गनगना गया ।

रज्जो हस कर - मेरे लिए तुम्हारे भैया ही काफी है ,,हा तुम्हे कम पड रहा हो तो कहो ,,बात करू तुम्हारे भैया से

ममता ह्स कर - क्या भाभी आप भी शुरु हो गयी सुबह सुबह

रज्जो मुस्कुरा कर खुसफुसा कर बोली - शुरु तो मेरी ननदरानी हो गयी है ,,,जो सुबह सुबह ही जीजा जी का खुन्टा पकड लिया ।

ममता हस कर धीमी आवाज मे - आपका मन हो तो आप भी पकड लो ,,आपके जीजा जी बुरा नही मानेगे ।

ये बोल कर ममता रज्जो के सामने ही राजन का लन्ड़ पाजामे के उपर से मुठीयाति है और ये देख कर रज्जो की सांसे भारी होने लगती है ।

रज्जो तो एक नम्बर की रान्ड औरत थी ,,खड़ा लण्ड उसकी कमजोरी थी चाहे किसी का भी क्यो ना हो । धीरे धीरे उसके हाथ चटाई पर निचे की ओर सरक रहे थे ।

ममता ये सब बखूबी देख रही थी और उसने आगे की ओर लपक कर मस्ती मे रज्जो का हाथ पकड कर राजन मे खडे लण्ड पर रख कर दबा दिया ।

रज्जो मे मुह से सिसकी निकल गयी और वही राजन की हालत बहुत ही ज्यादा खराब होने लगी । ममता की मस्ती उसपे भारी पडने लगी और रज्जो के हाथो का स्पर्श पाकर वो बहुत उत्तेजित होने लगा था ,,जिससे उसका लण्ड फड़कने लगा ।

लण्ड के फड़कने से रज्जो का ध्यान टूटा तो वो अपना हाथ ममता के हाथ से छूड़ाने की कोसिस करती हुई - ओह्ह्ब पागल ,ये क्या कर रही है ममता ,,जीजाजी जग जायेंगे छोड

ममता भी हस्ते हुए एक बार अच्छे से रज्जो की हथेली को राजन से आड़ो तक पकड कर रगड़ा और छोड दिया ।

ममता हस कर धीमी आवाज मे - हिहिहिही क्यू भाभी मजा आया ना

रज्जो शर्म से लाल होते हुए धीमी आवाज मे हस्ते हुए बोली - बहुत मजा ले रही है ना तू ,, मैने भी तेरे भैया का लण्ड तुझसे ना पकडवाया तो मेरा नाम रज्जो नही ।

यहा ननद भौजाई की मस्ती और जोक जारी रहे वही दोनो के बीच थोडी सी मस्ती के चक्कर मे राजन की हालात बहुत खराब हो गयी थी ।

हालत खराब तो रज्जो की भी हो गयी थी इसिलिए वो बाथरूम का बहाना मार कर निकल गयी । वही रज्जो के जाते ही राजन पलट कर ममता पर झूठ का गुस्सा दिखाता हुआ - ये क्या पागलपन है ममता हा

ममता ने वापस से राजन के लण्ड को आड़ो सहित दबोचते हुए बोली - उम्म्ंम्ं क्यू अपनी सल्हज का स्पर्श पसन्द नही आया हम्म्म

राजन सिहर उथा और उसने ममता को दबोच कर उसकी गाड़ को मसलने लगा ।

ममता - ओह्ह बस करिये मेरे राजा ,,बच्चे है पास मे

राजन ममता की साडी के उपर से उसकी चुचिया दबाते हुए बोला - अभी तक बच्चे नही थी क्या हम्म्म ,, अब ये खड़ा हो गया है ,इसे शान्त तो कर दे ।

ममता - क्या जी मै तो ब्स मजाक कर रही थी ,,यहा कैसे मै ,समझो ना आप

राजन कसमसा कर - मुझसे रहा नही जा रहा है ममता ,,,तू इसे चुस दे बस

ममता - अरे भाभी आँगन मे गयी है आती ही होगी ।

राजन - अरे अंधेरा है ममता ,,जल्दी से कर दे ना , मै काफी गरम हू ज्यादा समय नही लगेगा

ममता मुस्कुराइ और उठ कर राजन के पैर के पास बैठ गयी । तब तक राजन ने अपना पाजामा खोल कर लण्ड बाहर निकाल दिया ।

ममता मे लपक कर वो लण्ड मुह मे भर लिया और चूसने लगी । इधर राजन और ममता बगल मे सोते हुए बच्चो से ही क्या जागती हुई रज्जो से भी बेखबर थे ।

वही रज्जो धीरे धीरे हाल मे आ चुकी थी ।

रज्जो ने सोचा अब सुबह होने को है तो हाल की बत्ती जला दू और वो धीरे से बोर्ड के पास गयी और स्विच ऑन कर दिया ।

अचानक से उसकी नजर ममता पर गयी जो राजन का लण्ड आधा मुह मे भरी हुई थी , वही राजन गरदन उठाये रज्जो की ओर देख रहा था ।

रज्जो को अपनी गल्ती का अह्सास हुआ और वो फौरन बत्ती बुझा दी ।

रज्जो मुस्कराती हुई दबी हुई हसी के साथ - सॉरी ममता , मुझे नही पता था ।

इधर ममता राजन पर गुस्सा थी और वो उसे धीमी आवाज मे डांट रही होती है ।

रज्जो मारे शर्म के उपर चली जाती है अपने पति के कमरे मे । जहा कमलनाथ अभी भी खर्राटे भर कर सो रहा होता है ।

मगर निचे से आने के बाद वो इतनी गरम मह्सूस कर रही थी कि उसे बिना लण्ड के सुकून कहा । वही कमलनाथ का लण्ड भी उसके पायजामे में सुबह की बेला मे तनमनाया हुआ था ।

रज्जो को लण्ड की बहुत ही ज्यादा तलब मह्सूस हो रही थी , इसिलिए वो जल्दी मे दरवाजे को बस भिड्का दी और फटाफट कमलनाथ का लण्ड निकाल कर उसे चूसना शुरु कर दी ।

वही निचे हाल मे राजन और ममता काफी शर्मिंद्गी मह्सूस कर रहे थे ।

राजन - ममता ये ठीक नही हुआ ,,,हम मेहमान है और भाभी जी ने हमे ऐसे देख के उपर चली गयी । हसी मजाक तो अपने जगह पर

ममता भी राजन के बातो मे आ गयी - हम्म्म मुझे भी कुछ अजीब सा लग रहा है,ना जाने भाभी क्या सोच रही होंगी

राजन - चलो हम लोग उपर चलते है , एक बार माफी मांगना हमारी जिम्मेदारी बनती है ।

ममता भी उतरे मन से - हा जी सही कह रहे है,,नही तो अभी शादी तक हमे यही रहना है तो कब तक नजर चूराते हुए फिरेंगे ।

फिर वो दोनो सीढि से उपर कमलनाथ के कमरे की ओर आये ,,,जहा अंदर रज्जो सबसे बेफ़िकर होकर पूरी तरह से पागलो के जैसे अपने पति का लण्ड गले तक उतारे हुए उसके मोटे बडे बडे आड़ो को सहलात रही होती है ।

उसी समय ममता और राजन दरवाजा खोल कर बिना दस्तक के ही कमरे मे घुस जाते है और कमरे का सीन देख कर ठीठक कर रह जाते है ।


ममता और राजन की आंखे फटी रह जाती है जब वो रज्जो को कमलनाथ का 7 इन्च का लण्ड अपने गले से निकालता हुआ देखते है ।

ममता की नजरे अपने सोये हुए भाई के मोटे काले लण्ड पर जमी होती है ,वही राजन के दिल की धड़कन ये सोच कर बढने लगती है कि अगर रज्जो उसका लण्ड मुह मे लेगी तो क्या होगा ।

वही रज्जो एक बार फिर से खुद को शर्मिंदा कर लेती है और फटाक से अपने पति का काला लण्ड पर पायजामा चढाते हूए - अरे आप लोग यहा

मगर पायजामा चढ़ाने के बाद भी लण्ड बहुत साफ दिख रहा था और ममता की निगाहे वही जमी थी । रज्जो को इसका अह्सास होते ही वो कमलनाथ का कुर्ता ही खिच कर सही करती है ।

इधर राजन बिना कुछ बोले खसक लेता है बाहर की ओर

रज्जो फटाक से उठती है दरवाजा बन्द कर देती है ।

ममता खीसखीसा कर हसी और बोली - माफ करना भाभी ,,मेरी वजह से आपका अधूरा रह गया

रज्जो मुस्कुरा कर - तू यहा क्या करने आई थी ,,,अपने भैया का खुन्टा पकडने हम्म्म

ममता ह्स्ते हुए - मै कैसे पकड सकती हू भाभी ,,भैया का खुन्टा तो आपने हड़प रखा था

रज्जो आंखे बडी करके हस कर ममता को देखने लगती है ।

वही ममता को अभी थोडी देर पहले हुए हंगामे से इतनी हसी आ रही थी की वो क्या बोल गयी फलो मे उसे खुद नही समझ आया और जब रज्जो ने उसे घूरा तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और वो अपना माथा पीट कर बोली ।

ममता - माफ करना भाभी मै जा रही हू ,, पता नही आज का दिन ही ऐसे सुरु हुआ तो आगे क्या होगा ।

मगर रज्जो ऐसे कैसे जाने देती वो लपक कर ममता को पकडते हुए बिस्तर तक खिच कर ले आई ।

रज्जो ममता का हाथ पकड कर - ऐसे कैसे मेरी लाडो ननद रानी , इतना अरमान लेके आई हो तो बिना भैया का खुन्टा पकडे चली जाओगी ।

ममता समझ गयी कि क्या होने वाला है तो हस कर छ्टकने लगी ।

रज्जो उसका हाथ पकड कर - देख ममता अभी तेरे भैया सोये है तो जो मै कह रही हू कर दे ,,,नही अगर जग गये तो मै तो बोल दूँगी की आपकी बहन मुझे छिप कर आपका काला लण्ड चुसते हुए देख रही थी ।

ममता तो सकपका गयी और हसने लगी - ये ये क्या कह रही हो भाभी,,भैया है वो मेरे

ममता ने बार बार मिन्नते की मगर रज्जो ने ठान लिया था कि हिसाब बराबर करवाना है और ममता भी अपने भाभी रज्जो की जिद और मस्तियो से वाकिफ थी ,,,वो जानती थी कि अगर वो यहा मना करेगी तो आगे जाकर उसकी भाभी उसके लिए कुछ बड़ा प्लान कर लेंगी ।

इसिलिए ममता ने भी ना नुकुर करते हुए अपने हाथ को ढिला कर दिया और मौका पाते ही रज्जो ने फटाक से एक हाथ से कुरता हटाया और पायजामे को हटा दिया और कमलनाथ का काला मोटा लण्ड सर उठाए टनटना गया ।

इधर ममता को इस बात की उम्मिद ही नही थी कि उसकी भाभी उसका हाथ मे उसके भैया का खुले लण्ड थमा देंगी ।इसके लिए ममता फिर से खिलखिलाते हुए कसमसाइ, मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी ।

ममता - यीईई भाभी ये गलत है उम्म्ंम्ं उह्ह्ह्ह

रज्जो ममता मी हथेली को उसके भैया के काले

लण्ड पर निचे झुलते आड़ो से लेकर उपर सुपाडे तक अच्छे से हाथो मे भर कर सहलवाने लगी ।

वही ममता अपने भैया के गरम सलाख से तपते लण्ड की सख्ती अपनी हथेली मे मह्सूस करके गनगना गयी ।

रज्जो की नजर ममता की तेजी से उपर निचे होती छातियों पर गयी और उसकी खराब हालत के चलते उसने उसे छोड दिया ।

ममता मौका पाते ही खीलखिलाते हुए कमरे से भागी और भागते हुए बोली - भाभी इसका बदला मै भी लूंगी देखना ।


रज्जो अपनी नन्द को भागता देख कर खिलखिलाई ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 107

चोदामपुर स्पेशल अपडेट


पिछ्ले अपडेट मे आपने पढा कि जहा एक तरफ चमनपुरा की सुबह काफी शांत और बिना कोई धमाके के निकली । वही भोर मे ही राज के मौसी के यहा हंगामा हो गया ।

देखते है ये ननद भौजाई की मस्तियाँ क्या नया आयाम देती है इस कहानी को ।

अब आगे

ममता के कमरे से भाग कर जाने के बाद रज्जो खुब हसी और थोडी देर बाद नहाने के लिए निचे चली गयी ।

9 बजे तक सारे लोग नहा धोकर कर तैयार हुए और फिर नाश्ते के दौरान तय हुआ कि कमलनाथ राजन और रमन ये तिन लोग कुछ सामान की लिस्ट है , वो लेने बाजार जायेंगे । बाकी सारे लोग निचे रहने के लिए सारे कमरो की साफ सफाई मे रज्जो की हैल्प करेंगे ।

थोडी देर मे ही कमलनाथ अपने बेटे रमन और जीजा राजन को लिवा कर बाजार के लिए निकल गया और इधर रज्जो मौसी अपनी साड़ी का पल्लू कमर मे खोस कर सबको क्या क्या करना है ये बताने लगी ।

फिर सबसे पहले उपर की मंजिल से शुरु हुआ ।

जहा एक कमरे मे सारे लोग यानी रज्जो ,ममता ,पल्लवि ,सोनल और अनुज पहुचे ।

फिर रज्जो बगल से स्टोर रूम से कुछ झाडू और जाले साफ करने वाली ब्रशो को लेके आई और अनुज ने फुर्ती दिखाते हुए फटाक से रज्जो के हाथ से एक जाले साफ करने वाला ब्रश लिया और लेके भीड़ गया काम मे । ऐन मौके पर पल्लवि भी एक झाडू लेके खिडकीयो के पास लग गयी ।

ममता हस कर - लो ये लोग तो लग गये ,,,मै तो कह रही हू भाभी , दो लोग यहा लगे हैं तो मै और सोनल बेटी बगल वाला कमरा देख ले रहे है , इससे काम भी जल्दी हो जायेगा और फिर दोपहर का खाना भी बनाना है ना

रज्जो को उसकी ननद का सुझाव जमा तो बोली - हा ममता ठीक कह रही है तू ,,,आ सोनल तू इधर आ

इधर रज्जो , ममता और सोनल को लेके अलग कमरे मे चली गयी और उधर उनके जाते ही अनुज और पल्लवि एक दुसरे को देख कर मुस्कुराते है और वापस काम मे लग जाते है ।

जहा अनुज एक तरफ बंद कमरे मे अकेले एक लडकी के साथ काम करने मे असहज मह्सूस कर रहा था , वही पल्लवि को बहुत ही बोरीयत सी लग रही थी कि अनुज इतना गुमसुम क्यू है । क्या शहर के लड़के ऐसे होते है ।

पल्लवि को चुल होती है और मुस्कुरा कर काम के बहाने ही उससे बाते करने का सोचती है - अनुज सुनो

अनुज - हा पल्लवि दिदी कहिये

पल्लवि - हा जरा ये पंखे के पास भी साफ कर दो फिर मै निचे झाडू लगा देती हू ।

अनुज मुस्करा कर - जी दीदी

पल्लवि हस कर - अरे तुम मुझे दीदी क्यू कह रहे हो ,हम्म्म

अनुज थोडा हिचक कर - क्योकि आप मुझसे बड़े हो शायद !!!!

पल्लवि चहक कर कमर पर हाथ रखकर- शायद !! इसका क्या मतलब हम्म्म

अनुज को मह्सूस हुआ कि मानो उसने पल्लवि को दीदी बोल कर कोई बडी गलती कर दी हो और वो सफाई देते हुए - वो आप मेरे सोनल दीदी जैसी हो ना दिखने मे तोओओ ...

पल्लवि हस कर - धत्त मै तो बहुत छोटी हू सोनल दीदी से हिहिही , और उन्होने बताया था हमदोनो की उम्र करीब करीब ही है ।

अनुज उलझन भरे लहजे मे - तो फिर ...

पल्लवि - अरे तो तुम मुझे नाम से बुला सकते हो हिहिहिही

अनुज थोडा सा हसा और वापस काम मे लग गया ।

चोदमपुर मे जहा बुढे जवान और जवानी की दहलिज पर पाव रखते लौंडे तक पल्लवि की सेक्सी फिगर से उससे बात करने को लालायित रहते थे ,,यहा आने के बाद वो रुझान पल्लवि को नही मिल पा रहा था ।

पल्लवि मन मे बुदबुदाइ - ये तो पुरा साधू है ,, बात करना तो दुर देखता तक नही मेरी ओर । यहा दो हफते तक मेरी जिन्दगी कैसे कटेगी ।

ना चाहते हुए भी मन को तसल्ली देते हुए पल्लवि ने फिर कोसिस की - तब अनुज बहुत गुमसुम हो ,,, गर्लफ्रेंड की याद आ रही है क्या हिहिहिही

अनुज को उम्मीद ही नही थी कि पल्लवि उससे ऐसा कुछ पुछ लेगी ।

अनुज सकप्का कर - ना ना नही तो ,,मेरी कोई गर्लफ्रैंड नही है दीदी, ओह्ह सॉरी मतलब पल्लवि

पल्लवि - सच मे या डर रहे हो कि मै तुम्हारी दीदी को बता दूँगी ।

अनुज से पहली बार किसी लडकी ने ऐसे बात किये थे और वो भी सीधे व्यकितगत सवाल ।

अनुज को एक अलग तरह की उत्सुकता और मन मे खुशि हो रही थी कि पल्लवि उस्से बात कर रही है । हालकी उसकी नजर कल से ही उसपर थी । मगर उसके भरे जिस्म को देखकर वो पल्ल्वी को अपने से ज्यादा उम्र की जानकर उससे किनारा कर रहा था ।

अनुज ने फिर भी अपने जज्बातो को दिल ने ही थामा और इस बार थोडा आत्मविश्वास के साथ बोला - नही ऐसी कोई बात नहीं है ।

पल्लवि अचरज से - तुम तो शहर मे रहते हो ना लेकिन ,

अनुज ह्स कर - शहर मे रहता हू तो क्या , मै ये सब नही करता हू हिहिहिही

फिर अनुज वापस काम मे लग जाता है ।

इधर इनका काम चल रहा होता है कि थोडी देर बाद पल्लवि अनुज को फिर से आवाज देती है ।

पल्लवि - अनुज सुनो

अनुज - हा बोलो पल्लवि क्या हुआ

पल्लवि एक लोहे की आलमारी के पीछे साफ सफाई कर रही थी तो वहा कुछ कचरा फसा था तो वो निकल नही रहा था ।

पल्लवि - जरा ये आलमारी थोडा झुकाओगे ,, वहा कचरा पडा है मै झाडू से निकाल लू ।

फिर अनुज हम्म्म बोल कर आल्मारि को आगे की ओर झुका लेता है और पल्लवि झाडू से ढेर सारा कचरा बाहर निकालती है , जिसमे चूहो द्वारा एकठ्ठा किया काफी सारा कचरा और गन्दगी थी । तभी अनुज की नजर आलमारी के निचे एक बैगनी रंग के कपडे पर गयी जो वही फसा हुआ था ।

अनुज - पल्लवि , देखो वहा कोई कपडा भी है ,उसे भी निकाल लो तो ।

पल्लवि हा मे सर हिला कर निचे बैठ गयी और हाथ डाल कर उस कपडे को निकाल कर खड़ी हुई ।

अनुज को वो कपडा अभी नया दिख रहा था ।

अनुज - कैसा कपडा है पल्लवि ये ,,नया लग रहा है ।

पल्लवि ने वो कपडा एक बार देखा और फौरन उसे फ़ोल्ड करके मुठ्ठि मे छिपाने लगी ।

अनुज को अचरज हुआ वो आलमारी को सही से लगा कर फिर से पल्लवि से बोला - क्या हुआ ,,कैसा कपड़ा है ये ।

पल्लवि शर्म से मुस्कुराने लगी और बोली - नही कुछ नही । चलो ये कचरा उस बालटी मे भर दो और मै बाकी का झाडू मार देती हू ।

अनुज को अजीब सा लगता है कि आखिर क्या है जो पल्लवि छिपा रही है ।

अनुज एक बार फिर उत्सुकता से बोला - तुमने बताया नही कैसा है वो कपडा । क्यू छिपा रही हो उसे । लाओ मै देखू

फिर अनुज आगे बढ कर पल्लवि के हाथ से वो कपडा लेने के लिए उसके करीब जाता है और पल्लवि हस कर - अरे नही अनुज रहने दो ना ,वो तुम्हारे काम का नही है ।

अनुज अचरज से - मेरे काम का नही है क्या मतलब ।

फिर वो पल्लवि के और करीब जाता है तो पल्लवि उसे वो कपड़ा दे देती है ।

अनुज उस मुलायम कपडे को फैला कर देखता हुआ - मै भी तो देखू ये क्या .....

वो कपडा खोलते ही अनुज की आवाज वही रुक गयी और वही पल्लवि खिलखिला कर मुह पर हाथ रख कर हसने लगी ।

वो कपड़ा दरअसल राज के मौसी रज्जो की पैंटी थी और अभी नयी थी ।

अनुज को अब खुद पर शर्मिंदगी हो रही थी और वो पल्लवि को हस्ता देख कर खुद भी हस देता है और वापस उसे पल्लवि को देते हुए कहता है।

अनुज - हम्म्म पकड़ो मौसी को दे देना , अभी नया ही है हिहिहिही

पल्लवि शर्म से हसी और वो पैंटी अनुज के हाथ से लेते हुए - तुमको कैसे पता कि ये मामी की है ।

अनुज शर्मा कर मुस्कुराते हुए - उसपे साइज़ लिखा है ना 42" , और यहा कौन पहनेगा इतनी बडी साइज़ हिहिहिही

पल्लवि इतरा कर - तुमको बड़ा पता है साइज़ के बारे मे

अनुज बहुत ही स्वाभिमान होकर - हा मेरी दुकान है ना चमनपुरा मे इनसब की ।

पल्लवि हस कर अनुज से मजे लेते हुए - फिर तो तुमको मेरी साइज़ भी पता होगी ।

अनुज पल्लवि के सवाल से चौक गया और वो हड़ब्डाने लगा ,,,वही एक तरफ पल्लवि के इस सवाल ने उसको कुछ हद तक कामोतेजक कर दिया और लोवर मे उसका लण्ड अंगड़ाई लेने लगा था ।

अनुज - अब ब ब हा ना नही नही ,,मुझे कैसे पता रहेगा

पल्लवि ह्स कर - अरे तुम इतना परेशान क्यू हो ,,मै तो ऐसे ही पुछ ली , क्योकि तुम दुकान चलाते हो ना तो दुकानवालो को पता होता है ।

अनुज को ये सब बहुत उत्तेजक भी लग रहा था , साथ ही उसे थोडा अजीब भी मह्सूस हो रहा था कि वो ऐसी बाते अपनी बहन समान जैसी लड़की से कर रहा है । इसिलिए वो पल्लवि से पीछा छुड़ाने के लिए बोला ।

अनुज - नही मै उतना रहा हू दुकान पर ,,हा मेरे राज भैया को पता है । वही दुकान पर ज्यादा रहते है ना ।

पल्लवि एक बार को राज नाम सुन कर थोडा फिल्मी हेरोइन की तरह इतराई । क्योकि राज नाम काफी शहरी और आधुनिक था और पल्लवि को आधुनिक चीज़ो से खासा लगाव था ।

पल्लवि - हम्म्म तो तुम्हारे भैया ये जो है राज , वो क्यू नही आये ।

अनुज - वो क्या है ना हमारी दो दुकान है तो एक बरतन की और एक ये सब वाली ।

पल्लवि हसी - मतलब तुम अपनी दुकान पर यही सब कच्छी ही बेचते हो क्या हिहिहिही

अनुज को थोडी शर्म आई - नही , वो सृंगार वाला दुकान है हिहिहिही

पल्लवि इस बातचीत को और दिलचस्प बनाने मे लगी थी लेकिन अनुज इस बात को और आगे नही ले जाना चाहता था ,,इसलिए

अनुज - चलो जल्दी से ये कमरा खतम कर लो , हमे निचे भी जाना है ।

पल्लवि को भी ध्यान आया और वो भी जल्दी जल्दी काम करने लगी

ये दोनो अपना काम खतम कर रहे होते है कि रज्जो इनके कमरे मे आती है ।

रज्जो - अरे वाह ,,तुम दोनो ने तो बहुत बढिया साफ किया है ।

अनुज बहुत खुशी होती थी जब कोई उसकी तारिफ कर देता था और वो भावनाओ मे बह कर वो सामने वालो और भी खुश करने की बचकानी हरकत कर देता था ।

यहा रज्जो उसकी तारिफ कर ही रही थी कि अनुज फौरन वो पैंटी उठा कर रज्जो को देता है ।

अनुज बडी मासूमियत से - लो मौसी ,ये आपका कच्छी मिला है यहा आलमारी के पीछे,,चूहा लेके गया था ।

पल्लवि अनुज के इस हरकत पर हस देती है । रज्जो के चेहरे पर ही हसी के भाव आ जाते है मगर वो अपने प्यारे भतीजे का मजाक नही बनाना चाहती है ।

रज्जो उसके सर पर हाथ फेर कर -हिहिह्ही ,,इन चूहो को ना जाने क्या मिलता है , अभी दुसरे मे भी मेरा एक पैंटी लेके गया था और उसको तो पुरा काट दिया है ।

फिर रज्जो उन दोनो के सामने ही अपनी पैंटी फैला कर देखती है कि कही चूहे ने काटा नही है

अनुज वापस से चालाकी दिखाते हुए बोला - नही मौसी ये सही है ,मैने चेक किया है इसको

रज्जो ह्स कर - तू ब्डा देख रहा है मेरी कच्छी हा ,,,

पल्लवि को रज्जो की बात पर बडी हसी आती है और उसे हस्ता देख अनुज को अपनी गलती समझ आ जाती है ।

रज्जो - चलो ये कचरा और झाडू लेके निचे आओ ,, जल्दी

फिर रज्जो निकल जाती है बाहर और उस्के जाते ही अनुज और पल्लवि एक दुसरे को देखते है ।

पल्ल्वी की फौरन हसी छूट जाती है और अनुज भी शर्माते हुए हस देता है ।

अनुज - अब बस भी करो ,,मजे ले रहे हो , चलो मौसी निचे बुलाई है ।

फिर वो दोनो निचे जाते है

इधर 11 बजे तक सारे काम हो जाते है और फिर रज्जो सबको पानी पिलाती है । फिर सारे लोग गर्मी से परेशान होते है तो नहाने के लिए कहते है ।

मगर अनुज बहुत थक जाता है तो वो वही हाल मे थोडा सोने लग जाता है ।

इधर अनुज हाल मे आराम कर रहा होता है और यहा महिला मंडल ने अपनी अपनी जोडिया बना लेती है । सोनल और पल्लवि न्हाने के लिए टेरिस वाले बाथरूम मे चली जाती है, वही रज्जो और ममता निचे आंगन मे ही नहाने के लिए चले जाते है ।

इधर अनुज को सोये ज्यादा समय नही हुआ था कि लाईट भाग जाने से उसकी नीद खुल जाती है । वो भी गर्मी से परेशान था तो नहाने के लिए रमन के कमरे से कपडे लेके पीछे आँगन की ओर जाने लगता है । वहा आँगन के मुहाने के जाने से पहले ही उसे अपने रज्जो मौसी की खिलखिला कर बात करने की आवाज आई तो अनुज वही रुक गया और ये सोच कर वापस आने लगा कि ये लोग नहा ले फिर मै जाऊंगा ।

अनुज वापस मुड़ा ही था कि तभी उसे अपनी रज्जो मौसी की आवाज सुनाई दी जो वो ममता से कह रही थी ।

रज्जो हस्कर - तब ननद रानी ,,मजा आया था ना सुबह अपने भैया का लण्ड पकड कर हिहिहिही

रज्जो मे मुह से ऐसी बात सुन कर अनुज के कान खडे हो गये और उसकी दिल की धडकनें तेज होने लगी । वो थुक गटकने लगा और ना चाह कर भी उसके हाल की ओर बढते कदम रुक जाते है और वो वापस दबे पाँव आँगन की ओर चल देता है ।

तभी उसे ममता की भी आवाज सुनाई देती है ।

ममता - हालत तो आपकी भी खराब हो गयी थी अपने नंदोई जी का पकड कर हिहिहिही

अनुज की आंखे चौडी हो गयी । कि ये लोग क्या बाते कर रहे है । क्या सच मे रज्जो मौसी ने राजन फूफा का वो पकड़ा था और क्या ममता बुआ ने मौसा का ???

रज्जो ह्स कर - वैसे मानना पडेगा , नंदोई जी खुन्टा है जबरजस्त ,, बहुत गहराई कर दिये होंगे तेरे चुत मे तो हिहिहिहिही

अनुज को यकीन ही नही हो रहा था कि उसकी सगी मौसी ऐसी है , वही उसका ये सोच कर लण्ड खड़ा हुआ जा रहा था कि ममता बुआ ने अपने भैया का ही लण्ड पकड लिया था ।

अनुज के दिलो दिमाग में कौतूहल मच गया था । उसके मन मे भी ना जाने क्यू ये ख्याल आया कि काश उसकी दीदी भी जब अपने मुलायम गोरे हाथो से उसके गर्म आड़ो को सहलाएगी तो उसे कितनी गुदगुड़ी मह्सूस होगी और इस भावना से अनुज के पुरे बदन मे सिहरन सी दौड़ जाती है

मगर अगले ही पल अनुज को होश आया तो वो खुद को धिक्कारा ।

तभी अनुज ने और कुछ सुना

ममता रज्जो की बात का जवाब देते हुए - कही आपका दिल तो नही आ गया अपने नंदोई पर ,,, कोशिस बेकार है भाभी , वो नही आने वाले आपके झांसे मे हिहिही , आप बस भैया से ही काम चलाओ

रज्जो हस कर - मुझे तो लग तू कुछ ज्यादा ही अपने भैया के मोटे काले लण्ड के लिए तरस रही है हिहिहिही ,, अगर सुबह देख कर मन नही भरा तो रात मे चली आना , हमारा शो चालू रहेगा हिहिहिही

ममता हस कर - शो तो आज रात हमारा भी होने वाला है भाभी हिहिहिही ,

ममता - वैसे आपने तो अपने ननदोई का खुला नही देखा है ,,,दरवाजा खुला ही छोड दूँगी देख लेना हाहाहा

अनुज का लण्ड उसके लोवर मे एकदम तन कर खड़ा हो गया था । उसे समझ नही आ रहा था कि क्या करे । बार बार उसके दिमाग मे रात मे होने वाली दोनो खुले कमरे मे होने वाली चुदाई की तलब होने लगी और उसका लण्ड बार बार फड़क रहा था और वो बहुत उत्तेजित होकर रात का इन्तजार करने लगा ।

मगर अपनी उत्तेजना और खडे लण्ड से परेशान होकर अनुज वापस हाल मे आ गया और तबतक बिजली भी आ गयी थी तो वही थोडी देर लेटा रहा था । फिर अपनी बारी आने पर वो भी नहाने के लिए आँगन मे चला गया ।

एक तरफ जहा राज के मौसी के यहा ये सब घटनाओं का संगम हो रहा था , वही दुसरी तरफ चमनपुरा मे भी कुछ खास होने वाला था ।



राज की जुबानी


सुबह का नासता करके मै दुकान पर आ गया था । शादियो के सीजन मे दुकान पर भीड़ भी बहुत थी ।

दोपहर के करीब मा खाना लेके आई और वो दुकान मे लग गयी ।

थोडी देर खाली होने के बाद मा ने मुझे पहले खाना खाने को बोला ।

मै पीछे के कमरे मे जहा पापा का रूम हुआ करता था ,,वहा जाकर टिफ़िन खोल कर बैठ गया और इधर धीरे धीरे दुकान मे फिर से भीड़ होने लगी । मा ने मुझे आवाज दी की मै जल्दी खा कर आऊ ।

मै भी फटाफत खाकर दुकान मे गया था तो मेरे चेहरे पर एक गजब की मुस्कान आ गयी । कारण था कि चन्दू की बहन चंपा आई थी दुकान मे ।

वो भी मुझे देख कर शर्मा कर मुस्कुराइ । उसका मूल कारण था कल की होने वाली चुदाई जो मेरे और चंपा के बीच होने वाली थी । इधर हम दोनो आपस मे स्माइल पास करने का और आंखो से इशारे मे हाल चाल लेने का गेम खेल रहे थे कि मा बोली ।

मा - बेटा आ गया तू ,,,जरा इस चंपा को इसकी नाप की ब्रा पैंटी दिखा देना तो ,,बेचारी कबसे खड़ी है ।

मा की बाते सुन कर चम्पा शर्मा सी गयी और मुझे भी हसी आने लगी थी ,मगर मैने खुद पर नियन्त्रण किया । वही मा एक शादी के दुलहन का समान निकाल रही थी तो काफी समय से व्यस्त थी ।

मैने भी अपनी हसी को होठो मे दबाया और गला खरास कर बोला - कौन सा साइज़ दू

चंपा शर्मा के - 34C की स्टोबेरी कपडे मे दिखाना

मैने फौरन दो चार उसकी पसन्द और साइज़ का बढिया डिज़ाइन का बॉक्स उसको दिया और बोला की अन्दर कमरे मे देख ले ,,क्योकि दुकान पर और जेन्स लोग भी थे ।

वो मुस्करा कर वो डब्बे लेके चली गयी ।

मै थोड़ा बाकी ग्राहको मे व्यस्त हो गया और उनको निपटा कर चम्पा के पास कमरे मे गया ,,,जो इस वक़्त एक रेड ब्रा खोल कर देख रही थी ।

मौका देखकर मै धीमी आवाज शरारती अंदाज मे बोला - लेलो कोई भी ,उतारना मुझे ही है ना हिहिहिही

चम्पा शर्मा कर झेप सी गयी - पागल हो ,,जाओ बाहर नानी क्या सोच रही होगी ।

मै हस कर - अच्छा पैंटी का साइज़ क्या लाऊ ,, 38"

चम्पा आंखे बडी करके - पागल हो क्या ,,,इतनी मोती नही हू मै ,,

मै एक बार उसके सामने ही उसकी कमर और चुत के हिस्से पर नजर मारते हुए - तो फिर क्या 32" हिहिही

चंपा हस कर धीमी आवाज मे - नही पागल 36 नम्बर ,,अब जाओ

मै मुस्करा कर अपनी हसी को दबाते हुए बाहर दुकान मे आया और जानबुझ कर तीन बॉक्स अलग अलग टाइप की पैंटी का लेके वापस कमरे मे चला गया ।

मा अभी भी उन्ही ग्राहक मे व्यस्त थी जो दुल्हन के शादी का समान निकलवा रहे थे ।

मै आकर सबसे पहले ब्लूमर का बॉक्स खोल कर मुस्कराते हुए - लो इसमे से कलर देख लो ।

चंपा भी मुस्कुराइ और एक मरून कलर का ब्लूमर निकाल कर उसकी पैकिंग खोली ---अरे ये वाला नही जी ,,,वो वाला दो छोटा वाला

मै हस कर - छोटा वाला मतलब ,कैसा ??? वो जो पहनी है वैसा क्या ??

मै ब्रा के एक बॉक्स पर छ्पी एक लडकी को दिखाया जो वी शेप की पैंटी पहने थी ।

चंपा शर्म से लाल हो गयी और हा मे सर हिलाया ।

मै वो बॉक्स बन्द किया और दुसरा बॉक्स खोला जिसमे वी-शेप पैंटी तो थी लेकिन सब लाईट कलर मे - लो इसमे से निकाल लो कोई

चंपा थोडा संकुचित होकर - और कोई कलर नही क्या ,,,

मै हस कर - क्यू इनमे क्या बुराई है ,,ये तो अच्छे भी लगेंगे तुम पर ,,, सावली हो तो हिहिहिही

चंपा मेरे सर पर हल्के हाथो से चपट लगाते हुए - मजाक ना करो ,,सही बताओ

मै जिद करते हुए - अरे इनमे क्या दिक्कत है ये बताओ

चंपा हिचक कर - वो इनमे दाग लग जाता है ना इसिलिए

मै जानबुझ कर उस्का मजा लेता हुआ - तुम घर मे सिर्फ़ पहन कर खाना खाती हो और काम करती हो क्या ,जो दाग लग जाता है हिहिहिही

चंपा शर्म से लाल हो गयी - बक्क तुम मजाक ना करो ,,वहा निचे दाग लग जाता है ,हा नही तो

मै उसकी मासूमियत चेहरे को परेशान होता देख दुसरा डार्क कलर वाला बॉक्स खोल कर देता हू और वो उसमे से भी दो सेट निकाल लेती है ।

फिर मै सारे बॉक्स बन्द करके बाहर जाने को होता हू ।

मै - अच्छा ये बताओ इनमे से कौन सा पहन के अओगी कल हिहिहिही

चंपा बार बार मेरे छेड़ने से पक गयी थी तो तुनक कर बोली - एक भी नही

मै हस कर - सच मे हिहिही

चम्पा को अह्सास होता है कि वो क्या बोल गयी और वो झेप सी जाती है ।

मै हस कर बाहर आ जाता हू ।

थोडी देर बाद वो भी चली जाती है । फिर समय बितता है शाम होने लगति है ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 108

चोदामपुर स्पेशल अपडेट


पिछ्ले अपडेट मे आपने पढा कि एक ओर जहा पल्लवि और अनुज एक दुसरे से खुल रहे थे और वही अनुज धीरे धीरे कुछ नये रिश्तो के बारे मे नयी चीजे सिख रहा था ।

इनसब से अलग चमनपुरा मे राज और चंपा आने वाले कल के लिए कुछ तैयारियो मे लगे थे । देखते है ये तैयारियाँ कितनी मजेदार मौहाल बनाने वाली है ।

अब आगे

चम्पा के जाने के बाद मै वापस दुकान मे लग जाता हू ।

शाम को 7बजे तक मै चौराहे वाले घर पहुचता हूँ और मा किचन मे सिर्फ साड़ी ब्लाउज मे किचन मे काम कर रही होती है ।

मा की उभरे हुए हिलते कूल्हो को देख कर मुझे बडी उत्तेजना मह्सूस होती है

मै किचन मे घुसा और मा से चिपक के अपने फन उठाते लंड को मा के गाड़ में चिपका दिया ।

मा मेरे स्पर्श से कसमसाइ- उह्ह्ह बेटा रुक जा ना

मै मा से और चिपक कर अपने हाथ आगे ले जाकर मा की चुचियॉ को हाथो मे भर लिया ।

मा सिस्क कर - सीईई उम्म्ंम्म्ं बेटा बस कर उम्म्ंम्म्ं बना लेने दे ना खाना , देख सब्जी जल जा रही है

मै मुस्कुरा कर वापस हट गया ।

मा - तू जा नहा ले , तेरे पापा भी आ गये है नहा रहे हैं वो भी ।

मै मुस्कुरा के - ठीक है मा

फिर मै भी नहाने चला गया और नहा कर सिर्फ अंडरवियर पहन कर बाहर आया ।

तो हाल मे पापा भी एक फुल बाजू की बनियान और जांघिया पहने हुए बैठे थे ।

तभी दरवाजे पर खटखट हुई ।

पापा ने एक नजर मुझे देखा -बेटा कुछ पहन ले ,,ऐसे अच्छा नही लगता

फिर पापा एक गम्छा लपेट लिये जो बहुत पतला ही था ।

मै भी कमरे मे गया टीशर्ट हाफ़ लोवर डाल के आ गया । तब तक हाल मे शकुन्तला ताई एक झोला लेके आई थी ।

मैने उनको नमस्ते किया ।

शकुन्तला ताई , एक टाइट नाय्लान मैक्सि पहनी थी ,,जिसमे उनकी चुचियॉ का उभार साफ दिख रहा और दोनो तरफ बटन जैसे उभरे निप्प्ल के दाने बता रहे थे कि ताइ ने निचे कुछ नही पहना था ।

वही पापा जो ताई बगल मे ही थोडी दुर पर बैठे थे और ताई को निहारे जा रहे थे । उनके लण्ड मे तनाव इत्ना था कि गम्छा के उपर से भी उभार पता चल रहा था ।

शकुन्तला ताई बहुत ही हिचक के बात कर रही थी ।

मै - और बताओ ताई ,कैसे आना हुआ

शकुन्त्ला मुस्कुरा कर - कुछ नही बेटा वो तेरी मा से काम था ।

मै - हा कहिये न , मा अभी नहाने गयी है उनको समय लगेगा ।

शकुन्तला जल्द से जल्द मेरे पापा के हवसी नजरो से बच कर निकल जाना चाहती थी ।क्योकि बार बार उसका ध्यान पापा के लण्ड के उभार पर ही जा रहा था ।

शकुन्तला हिचक कर - हा वो बेटा मै कह रही थी कि दो मेरे साइज़ की कच्छी लेते आना तो कल

मै मुस्कुरा- अच्छा ठीक है , साइज़ बता दीजिये

शकुन्तला एक बार पापा को देखी और फिर मुझे देख कर मुस्कुराते हुए - साइज़ तो मुझे ध्यान नही है बेटा लेकिन

मै - लेकिन क्या

शकुन्तला झिझक कर पहले पापा को देखी ,जो मुस्कुरा रहे थे और फिर झोले मे से अपनी एक पैंटी निकाल के मुझे दिखाती हुई - ये देख इसी साइज़ की लेते आना

मुझे उम्मिद नही थी कि शकुन्तला ताई ऐसा कुछ करेंगी ,, उनकी मुलायम पैंटी को हाथ मे लेते ही लण्ड ने फौरन सिर उठाना शुरु कर दिया ।

मै थुक गटक कर उस मरून पैंटी को उन्के सामने ही खोलकर देखने लगा ।

मै खुद को सामान्य रखते हुए - ताई ये बहुत ढीली हो गयी है और साइज़ का लेबल भी नही है ।

तब तक पापा को भी मस्ति सुझी और मुझसे बोले - अरे नही बेटा , उसमे होगा , ला मुझे दे मै देखता हू ।

मै बिना कोई प्रतिक्रिया के वो पैंटी पापा को उछाल दी ।

शकुन्तला को बहुत ही अजीब लगा , लेकिन वो कया कर सकती थी सिवाय मुस्कुराने के ।

पापा भी उसको देख कर मुस्कराते हुए - जानती है भाभी ,, इन टाइप की कच्छीओ मे अंदर की तरफ एक छोटा सा लेबल लगा होता है ,,रुकिये मै दिखाता हू ।

फिर पापा शकुन्तला के सामने ही उसकी पैंटी को उलटने लगे और निचे की सिलाई के पास एक रोल हुआ छोटा सा स्टीकर था ।

पापा उस स्टीकर को खोलते हुए - हाहाहा देखिये मिल गया , 40 नम्बर है आपका

मै मुस्कुरा कर - ठीक है ताई मै कल दुकान से वापस लेते आऊंगा ।

शकुन्तला - हा लेकिन थोडा गाढ़ा रंग ही लेना ना बेटा

मै ह्स कर - अरे ताई आप चिन्ता ना करो ,,मेरे पास काजल भाभी का नम्बर है ,मै सारे रंग का फ़ोटो खीच कर कल व्हाटसअप पर भेज दूँगा ,,,आपको जो रंग पसन्द होगा बता देना

शकुन्तला को बडी खुशी हुई और फिर वो पापा को देखी जो उसकी पैंटी को अपने हाथो मे मिज रहे थे ।

शकुन्तला मुस्कुरा कर - लाईये , अब मै चलती हू

पापा को भी ध्यान आया और वो मुस्कुरा कर - हा लिजिए भाभी जी ,,,

फिर शकुन्तला ने वो पैंटी झोले मे रख दी और उठ कर जाने वाली थी कि मा हाल मे नहा कर एक मैकसी डाले हुए आती है ।

मा - अरे दीदी आप आई है क्या , बैथिये मै चाय लाती हू

शकुन्तला - नही नही सोनल की अम्मा रहने दो । कहा इस गर्मी मे चाय

मा मुस्कुरा कर - अच्छा ठीक है ,,ये बताईए आज हमारे यहा कैसे आना हुआ ।

तभी मै और पापा एक साथ बोले - वो कच्छी के लिए

मा हस कर - मतलब

शकुन्तला पूरी तरह से शर्मा गयी ।

शकुन्तला - अरे वो मुझे दो कच्छी चाहिये थी ,, तो सोचा क्या उसके लिए बाजार जाऊ ,,यही कह दूँगी तो कोई भी लेते आयेगा ।

मा - हा सही कहा ।

फिर ऐसे ही थोडी बाते हुई और फिर वो चली गयी ।

उनके जाने के बाद मा मुस्कुरा कर - आप बड़ा लेबल खोज रहे थे अपनी भौजी की कच्छी मे हिहिहिही

पापा हस कर - मतलब तुमने सब सुन लिया हाहाहा

मा ह्स कर - हा तो नजर रखनी पड़ेगी ना कि मेरे पति कहा कहा नजर मार रहे है ।

मा की बातो से मै हसने लगा ।

पापा हस कर - अरे इसमे क्या नजर मारना ,,हम तो वैसे ही मजे ले रहे था हाहाहा

मा - हमम ले लिये मजा फिर हा

पापा - हा साली की पैंटी ने मेरा लण्ड खड़ा कर दिया ,,अब आओ इसको शांत करो

मा ह्स कर - धत्त आपको तो वही लगा रहता है ,, चलो पहले खाना खा लो फिर कुछ

फिर हम सब खाना खाकर पापा के कमरे मे चले गये अपने रात की चुदाई का कोटा पुरा करने ।


लेखक की जुबानी

जहा एक तरफ चमन मे ये सब घटित हो रहा था वही राज के मौसी के यहा भी हसी ठिठोली और मस्तियाँ भी कम नही हो रही थी ।

पल्लवि और अनुज काफी खुल रहे है एक दुसरे से

हर कोई काम के लिए पल्लवि पहले अनुज को ही आवाज देती थी या किसी ना किसी बहाने से वो अनुज के आस पास मडराती रहती थी ।

शाम होते होते कमलनाथ , राजन और रमन काफी सारा समान एक टेम्पो मे लाद कर आ गये थे । फिर उपर एक खाली कमरे मे सारे समान को रखवा दिया गया ।

फिर रात का खाना बनाने की तैयारी होने लगी । इधर पल्लवि अनुज के लिए हर चीज़ का ध्यान करने लगी ,,चाय नाश्ता खाना सब खुद उसको देने लगी ।

अनुज को भी काफी अच्छा मह्सूस हो रहा था लेकिन जब सब लोग के साथ मे भी पलल्वी उसका नाम लेती तो वो बडा अटपटा मह्सूस करता था, उसको डर सा लगने लगता था कि कही कोई उसे चिढा ना दे या कोई उसको शक की निगाह से ना देखे । इसिलिए अनुज थोडा सा किनारा ही कर रहा था ।

अनुज से अपनी मन मुताबिक प्रतिक्रिया ना पाकर पल्लवि तुनक जाती थी ,,और फिर हस कर ना जाने कितने दुलार से अनुज को देखती थी कि मानो कीतना भोला सा लड़का है वो ।

खैर खाने का दौर खतम हुआ और फिर सोने की बारी आई तो निचे का एक कमरे सोनल और पल्लवि को दिया गया , साथ मे बिस्तर भी ।

फिर पल्लवि सोनल के साथ निकल गयी और जाते हुए वो पलट कर अनुज को देखती है एक कातिल मुस्कान के साथ ,,अनुज झेप सा जाता है ।

फिर रज्जो और ममता ने आपस मे ना जाने कौन सी आंख मिचोली की । कि रज्जो ने ममता और राजन को उपर कमरा दे दिया ।

अनुज इनसब बातो को देख समझ रहा था और वो जान रहा था कि उसे उपर नही बल्कि निचे ही सोने को दिया जायेगा ,,,मगर वो रमन के साथ नही सोना चाहता था क्योकि आज रात दो खुले कमरो मे चुदाई होने वाली थी और उसके बारे मे सोच सोच कर दोपहर से ही अनुज का लार और लण्ड दोनो टपक रहे थे ।

रज्जो बोली - ठीक फिर अनुज रमन के साथ सो जायेगा

अनुज - नही मौसी मै इस कमरे मे सोउँगा ,,कल रात मे रमन भैया को दिक्कत हो रही थी सोने ,,,

हालाकि रमन को दिक्कत कुछ और बात से थी ,,भले उसने अपनी मा की चुत चोद ली थी फिर भी वो एक शर्मिला लड़का था और वो नये लोगो ने मिलने जूलने मे असहज महसूस करता था । कल अनुज उसके साथ सोया था तो वो अपनी होने वाली बीबी से रात मे मीठी मीठी बात नही कर पाया था ।

रमन - हा मा , अनुज सही कह रहा है

रज्जो - ठीक है फिर , ले अनुज ये अपना एक तखिया और बिस्तर ,,,अच्छे से लगा लेना और पंखा चला कर सो जाना ।

अनुज खुशी से - जी मौसी

फिर रमन और अनुज अपने कमरे मे चले गये और वही रज्जो ममता राजन और कमलनाथ उपर चले गये सोने के लिए

थोडी देर मे पुरे घर मे चुप्पी सी छा गयी । सोनल और पल्लवि एक कमरे मे जाकर सोने की तैयारी करने लगे ।

रमन अपने कमरे मे जाते ही अपनी होने वाली बीबी से फोन पर लग गया ।

इधर अनुज को बेचैनी सी होने लगी कि उपर क्या होगा , क्या सच मे रज्जो मौसी और ममता बुआ दरवाजा खुला रख कर सेक्स करने वाले है । अनुज की लण्ड ने फिर से हुन्कार भरनी शुरु कर दी ।

थोडी ही देर मे उसका लण्ड तन कर कडक हो गया ।

उसे बहुत गर्मी सी मह्सूस होने लगी तो बंद कमरे मे होने के कारण उसने अपना लण्ड बाहर निकाला और हल्का हल्का सहलाने लगा । धीरे धीरे वो कल्पना मे डूबने लगा कि उपर अभी क्या हो रहा होगा

वही उपर के कमरो मे रज्जो और ममता ने बडी ही चालाकी से दरवाजे खुले रख कर बस पर्दा बंद कर दिया था और अपने अपने पतियो के साथ रासलीला मे लगी हुई थी । दोनो कमरो मे गजब की लण्ड चुसाई हो रही थी । रज्जो और ममता ने जानबुझ कर अपने पतियो को ऐसे जगह पर खड़ा किया था कि कोई भी अगर हल्का सा पर्दा खोल कर अंदर झाँकेगा तो सबसे पहले उसकी नजरे उनके पतियो के लण्ड पर ही जायेगी । इनसब के बीच जहा रज्जो चुदवाने को तडप रही थी वो बस अपने काम मे लगी रही और उसे फ़िकर ही नही थी कि ममता आयेगी या नही ।

वही दुसरे कमरे मे ममता को बडी आश थी कि रज्जो उसके कमरे मे झांकने आये ,,मगर बितता समय उसको बेचैन कर रहा था ,, बार बार उसका ध्यान अपने पति के लण्ड से हट कर बगल के कमरे मे हो रहे चुदाई माहौल को देखने को उत्सुक हो रहा था । कि आखिर ऐसा क्या हो रहा होगा जो अब तक रज्जो आई नही देखने ।

राजन को अहसास हुआ कि उसकी बीवी का मन सही से उसका लण्ड चुसने मे नही है और वो बार बार दरवाजे पर क्यू देख रही है ।

राजन - क्या हुआ ममता ,,कुछ परेशान हो

ममता एक दम से चौकी और बोली - हा वो मेरा पेट खराब लग रहा,,मै जरा उपर पाखाने से आती हू ।

ममता ने फौरन राजन का लण्ड छोड कर खड़ी हो गयी।

राजन जल बीन मछली के जैसे तडप कर रह गया । उसका खड़ा लण्ड एकदम से तप सा रहा था और उसे चुत की तलब सी हो रही थी ।

राजन सिस्क कर उखड़े मन से -ओह्ह ठीक है जाओ जल्दी आना

ममता - हा बस अभी आई

ममता ये बोल कर कमरे से बाहर निकल गयी और राजन वही बिस्तर पर लेट गया ।

ममता कमरे से निकल कर तुरंत अपने बगल के कमरे के दरवाजे पर गयी और कान लगाते ही उसे अपने रज्जो भाभी की सिसकियाँ सुनाई दी । ममता के दिल की धड़कन तेज हो गयी और उसके चुचक कड़े हो गया ,,,उसके जांघो मे सिहरन सी होने लगी । एक अन्जाना सा डर और कपकपी उसके पेट मे होने लगी । उसने बडी हिम्मत करके एक गहरी सास ली और हल्का सा पर्दा अपनी उंगलियो मे पकड कर हटाया तो उनकी आंखे चौडी हो गयी ।

अंदर कमलनाथ बिस्तर पर लेटा हुआ था और रज्जो उसके मुह पर अपना भारी गाड रखे हुए उसके लण्ड की ओर झुकी हुई थी । कमलनाथ अपना मुह अपनी गदराई बिबी के गाड़ और भोसदे मे घुसाये हुए चुस रहा था ,,वही रज्जो कमलनाथ का लण्ड को आड़ो से लेकर उपर सुपाडे तक सहला रही । उसने अपनी लार से कमलनाथ का लण्ड पुरा चिकना कर दिया था और बडी बेरहमी से अपनी गाड को कमलनाथ मे मुह पर दरते हुए सिसक कर उसके सुपाडे से चमडी उपर निचे कर रही थी ।

कमरे के अंदर अपने भैया भाभी का इतना कामुक सीन देख कर ममता की सासे फुलने लगी ,,

उसकी नजरे अपने भैया के मोटे काले लण्ड पर गयी जो लार से लिपटा हुआ चमक रहा था और वही उसकी भाभी उसके भैया के आड़ो को हलोरते हुए लण्ड को गले तक ले जा रही थी ।

ममता पागल सी होने लगी ,,उसकी चुचीयो मे झुनझुनी सी होने लगी ,,और वो खुद अपनी चुचियॉ को ब्लाउज के उपर से सहलाना शुरु कर दी

धीरे धीरे ममता को नशा होने लगा ,,वो पागल सी होने लगी ,,,उसकी चुत अपने भैया का लण्ड देख कर कुलबुलाने लगी

और धीरे धीरे उसका हाथ अपनी चुत तक चला गया और वो खुद अपनी चुत को मसलने लगी और मादक सिसकिया लेने लगी ।

इधर राजन भी कम बेताब नही था ,,,एक तो सुबह जबसे उसने अपनी सल्हज रज्जो की मुलायम चुची को सह्लाया और उसने उसका लण्ड थामा था ,वो परेशान था और अभी उसकी बीबी उसका खड़ा लण्ड छोड कर बाथरूम चली गयी ।।

राजन की हालत खराब थी वो जल्द से जल्द ममता की चुत मे घूसना चाहता था इसिलिए वो उठा और ये सोच कर बाहर निकलने लगा की उपर छत पर ही जैसे ममता पाखाने से बाहर आयेगी उसकी चुत मे लण्ड घुसा देगा ।

मगर जैसे ही राजन कमरे से बाहर आया ,,उसकी नजर बगल के कमरे मे अन्दर की तरफ झांकती ममता पर गयी । जो अबतक अपना ब्लाउज खोल चुकी थी और अपनी चुचियॉ को मसल्ते हुए अन्दर की 69 पोजीशन मे चल रही क्रीड़ा देख रही थी।

राजन एक पल को ममता को रज्जो के कमरे के बाहर देख कर चौक गया ,,,मगर जब उसने अपनी बीबी की स्थिति देखी तो समझ गया कि जरुर कुछ गरम क्रियाकलाप चल रहा है अंदर ।

राजन का लण्ड वापस से तन गया ,,उसकी भी सान्से भारी हो गयी कि अन्दर ऐसा क्या देख रही है ममता ,,कही रज्जो नंगी होकर चुदवा तो नही रही ।

राजन इस कल्पना मात्र से गनगना गया

राजन दबे पाव ममता के पीछे गया और हल्का सा गरदन को उचका कर पर्दे से वो भी अन्दर झाँका तो वही सीन जारी था,, जहा कमलनाथ रज्जो की भारी गाड को सहलाते हुए अपना नथुना और मुह उस के भोसडे मे घुसाये हुए थे और वही रज्जो उसका लण्ड गुउउउऊ गुउउऊ करके पुरा गले तक ले जा रही थी और कामुकता वश अपनी गाड़ को कमलनाथ के मुह पर दर रही थी ।

राजन की आंखे फैल गयी उसने फौरन अपना पाजामा खोलकर निचे गिरा दिया और पीछे से ममता की चुचियॉ पकड ली ।

ममता को इसका अह्सास होते ही वो हल्की सी सिस्की ,तो फौरन राजन ने उसके मुह पर हाथ रख बोला - मै हू ,,,यहा क्या कर रही हो

राजन ममता की चुचियॉ को मसलते हुए बोला

ममता राजन की इस हरकत से उसकी बाहो मे पिघलती चली गयी और उसका हाथ अनजाने मे राजन के लण्ड को स्पर्श कर गया ।

ममता ने फौरन राजन का लण्ड हाथ मे भर कर मुठियाने लगी और उसकी नजरे अभी भी अपने भैया के लण्ड पर ही जमी थी ,,,वही राजन की नजर रज्जो के उभरे हुए हिलते कूल्हो पर थी म

राजन ममता की चुचिया मिज्ते हुए धीमी आवाज मे उसके कान मे बोला - तू यहा क्या कर रही है ,,,

ममता जो अब पकड़ी गई थी तो झूठ बोलते हुए - वो मै पाखाने से आई तो मुझे भाभी की सिस्किया सुनाई दी तो देखने लगी अह्ह्ह उम्म्ंम्ं

राजन ममता की चुत को पेतिकोट के उपर से सहलाते हुए - अह्ह्ह ममता ,,रज्जो भाभी तो बहुत गरम लग रही है ,,,तू भी चुस ना वैसे ही मेरा लण्ड

ममता अपने पति की भावना बखूबी समझ रही थी ,,वो जान रही थी की उसका पति की नजरे उसके भाभी के जिस्मो पर है ।

वो मुस्कुरा कर घूमी और वही राजन के पैरो मे बैठ गयी और उस्का लण्ड चूसना शुरु कर दी ।

राजन को बडी शान्ति मिली जब ममता ने उसका लण्ड मुह मे भर लिया तो ।

इधर उपर ये सब प्रोग्राम चल रहा था और निचे अनुज की हालत भी कुछ खास नही थी । उसे बहुत मन था कि उपर जाकर देखे , खासकर की उसकी रज्जो मौसी ,,कैसे नन्गी होकर चुदवा रही होगी ।

अनुज ने बडी हिम्मत करके उठा और दबे पाव तक जीने के पास गया ,,, वो उपर जाने को हुआ लेकिन फिर उसे डर लगने लगा ,,,कही कोई जाग ना रहा हो । इसिलिए वो वापस कमरे की ओर जाने लगा ,,,मगर उसका लण्ड इसके लिये तैयार नही था ।

वो वापस से जीने की ओर गया और दबे पाव बिना कोई आहट के वो उपर की ओर जाने लगा म

वही उपर का माहौल थोडा बदल चुका था ,,, कमरे मे रज्जो घोडी बनी हुई थी और कमलनाथ उसके भारी गुदाज गाड़ को थामे हुए बहुत जोरदार तरीके से पेल रहा था ।वही राजन भी ममता को दरवाजे की ओर झुका कर उसका पेतिकोट उठाकर पीछे से पेलता हुआ ,,अन्दर कमरे मे देख रहा था । एक तरफ जहा राजन को रज्जो की बडी चर्बिदार गाड और लटकी हुई भारी भारी चुचिया जोश दे रही थी ,,वही ममता को उसके भैया कमलनाथ का उसके भाभी को ताबड़तोड़ धक्के लगा कर चोदने का अंदाज पसन्द आ रहा था ।

उन्होने से हल्का सा पर्दा खोल रखा था और दोनो अंदर का नजारा देख कर बहुत ही उत्तेजना के साथ अपनी चुदाई कर रहे थे ।

इतने मे अनुज उपर जिने के मुहाने के करीब पहुच गया और उसकी नजर सीधा अपनी मौसी के कमरे मे बाहर गयी । वहा का नजारा देख कर वो फौरन निचे झुक गया ।

अनुज के दिल की धड़कन तेज हो गयी । उसका लण्ड पूरी तरह से कडक हो गया । उसको कमरे के बाहर और पर्दे के किनारे से कमरे के अन्दर दोनो सीन एक साथ दिख रहे थे । उसका दिल ये सोच कर बहुत तेज धडक रहा था कि ममता बुआ सच मे अपने भैया का लण्ड देखकर चुदाई करवा रही ।

अनुज ने वही सीढ़ी पर बैठ जाना ही उचित समझा और अपना लण्ड निकाल कर सहलाने लगा ।

उधर कमरे के अन्दर और बाहर जबरदस्त चुदाई चल रही थीं और यहा अनुज उन्हे देखते हुए काफी उत्तेजित हो रहा था और आज उसके जीवन का पहला वीर्यपात हो रहा था । अनुज के लण्ड ने वही सीढ़ी पर ही भल्भला कर गरम पानी उगलना शुरु कर दिया और थोडी ही देर मे अनुज एकदम थक सा गया ।

थोडी देर मे उसकी सासे बराबर हुई तो उसे ध्यान आया कि उसने ये क्या कर दिया ।उसको खुद पर बहुत घिन मह्सूस हुई और उसे अपने राज भैया की बात याद आई की मूठ मारने से बाल झड़ता है ।

अनुज ने एक नजर वापस से कमरे की ओर देखा तो राजन अपना लण्ड ममता के मुह पर झाड़ रहा था ,,वही कमरे मे कमलनाथ रज्जो की कमर पर झड़ कर ढह गया था ।

अनुज को लगा यही सही समय है ।।उसने फौरन जेब से रुमाल निकाल कर मुह बनाते हुए अपना वीर्य सीढि से साफ किया और फौरन दबे पाव अपने कमरे मे चला गया ।

इधर अनुज अपने कमरे मे आया और उधर राजन ममता को लेके अपने कमरे मे आ गया और थोडी ही देर मे उसे नीद आने लगी ।

जो जाग रहे थे उन्हे भी थकान की वजह से नीद आ रही थी । सवाल सब्के मन मे थे और कुछ सवाल तो अभी नयी सुबह का इन्तजार भी कर रहे थे । देखते हैं कि क्या होता है आगे ।




जारी रहेगी
 
पाठको के ही अनुरोध पर कहानी का रेगुलर अपडेट शुरु करने के बाद भी कोई खास प्रतिक्रिया नही मिल रही है ।

ऐसे मे कहानी को होल्ड पर रखना ही उचित है । अगर ये कहानी मुझे सिर्फ अपने लिये ही लिखनी है तो मै क्यू ना अपने हिसाब से अपडेट करू। ताकि जिसको पढना है पढे नाही तो कोई मतलब ।

400+ पेज होने के बाद इतनी कम प्रतिक्रिया सोचने पर मजबूर करती है ।

बाकी अगला अपडेट सब आप की प्रतिक्रयाओ पर निर्भर है ।
 
Next update coming soon ....

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अपडेट 109



चोदामपुर स्पेशल अपडेट



पीछले अपडेट मे आपने पढा कि जहा एकतरफ चमनपूरा मे रंगीलाल ने शकुन्तला की पोल खोल दी वही राज के मौसी के यहा रात मे गजब की रोमांचक घटनाये घटी और कुछ गहरे सवालो की उधेड़बुन के साथ रात बित गयी ।

अगली सुबह राजन की नीद करीब करीब 5 बजे तक खुली , वो उठा और एक नजर ममता को देखा । फिर उसे रात की घटना याद आई और उसका लण्ड कड़क हो गया ।

वो भी अन्गडाई लेके उठा और कमरे से बाहर आकर वो जीने से छ्त पर जाने के लिए मूड़ा ही था कि उसे रज्जो के कमरे से रोशनी बाहर आती दिखी ।

राजन की आंखे चमक उठी और वो लपक के रज्जो के कमरे की ओर गया ,,तो देखा दरवाजा और पर्दा कल रात मे जैसे था ,वैसे का वैसा ही पडा है और अंदर कमरे मे रज्जो और कमलनाथ नंगे एक-दूसरे से चिपके सोये है ।

राजन का लण्ड रज्जो की फुली हुई चुत देख कर खड़ा हो गया । तभी कमरे मे 5 बजे का अलार्म बजा और रज्जो उठ कर बैठ गयी । राजन फौरन दरवाजे से हट गया । मगर अन्दर रज्जो को आभास हो गया कि दरवाजे पर कोई है।

राजन भी वहा से तुरंत छत की ओर निकला मगर तब तक रज्जो उठा कर पर्दे के पीछे से राजन को सीढि से उपर जाते देख चुकी थी ।

रज्जो मन मे - कही जीजा जी ही तो नही थे ??

रज्जो को अब खुद पर बडी शर्मिंदगी हो रही थी और कि उसकी लापरवाही मे आज सुबह सुबह नंदोई जी ने उसको नंगा देख लिया होगा ।

अब ना जाने कैसे वो उनका सामना करेगी ।

वहा से हट कर रज्जो ने दरवाजा बंद कर दिया और एक मैकसी डाल कर , कमलनाथ को एक चादर से ढक कर ,खुद निचे के बाथरुम में फ्रेश होने के लिए चली गयी ।

थोडी देर बाद धीरे धीरे सब उठ कर अपने अपने कामो मे लग गये । रज्जो भी फ्रेश होकर उपर गलियारे मे झाडू लगा रही थी कि उसकी नजर अपने कमरे के बाहर दरवाजे पर टपके वीर्य की कुछ बूंदो पर गयी जो सूख चुकी थी और उसे देख कर रज्जो को भोर के समय का ख्याल आया जब उसने राजन को दबे पाव उसके कमरे के बाहर से सीढ़ी की ओर जाते देखा था ।

रज्जो मन मे मुस्करा कर - मतलब जीजा जी ने पुरा मजा लिया सुबह सुबह ,,, नजर रखनी पड़ेगी अब मुझे भी हिहिहिही

फिर रज्जो ने वो दाग एक गीले कपडे से साफ करके बाकी का काम खतम करके नहाने के लिए अपने कपडे लेके उपर चली गयी ।

जहा ममता और राजन पहले से ही मौजुद थे। राजन जो कि अभी अभी नहा कर निकला था और सिर्फ एक गम्छा लपेट कर अपना जांघिया झाड कर छत की अरगन पर फैला रहा था ।

रज्जो इस समय एक मैकसी मे थी और उसके चुचिय चलने पर बहुत हिल दुल रही थी ।इधर राजन की नजर रज्जो पर पड़ते ही उसे सुबह और रात मे रज्जो का रन्डीपना याद आ गया कि कितनी भुखी है लण्ड की ।

ये सोचते ही राजन के लण्ड ने एक बार फिर से अंगड़ाई ली और ऊभार उपर से साफ दिखने लगा ।

राजन एक गाव का किसान आदमी था ,उसने खेतो मे बहुत मेहनत किया था तो उसका बदन बहुत कसा हुआ था ।

रज्जो की नजरे भी एक बार अपने नंदोई की नंगी चौडी छाती पर गयी फिर उसके लण्ड के उभार पर मारा और फिर जब राजन से नजरे मिली तो अनायास ही उसकी एक मुस्कुराहत निकल पडी ,जिस्मे शर्माहट भरी हुई थी ।

रज्जो नजरे चुराते हुए बाथरूम की ओर निकल गयी जहा ममता नहाने बैठी हुई थी ।

राजन ने भी मुस्करा कर अपना कपडा लेके निचे चला गया ।

रज्जो बाथरूम के पास जाकर देखा तो ममता भी लगभग नहा चुकी थी और एक पेतिकोट को अपनी छातियों पर बाँधे हुए कपडे खंगाल रही थी ।

रज्जो इतरा कर - ओह्हो लग रहा है रात मे भैया का खुन्टा देख कर बहुत गरम हो गयी थी ,,जो बडे सवेरे नहा ली हम्म्म

ममता रज्जो की बात सुन कर मुस्कुराते हुए - हा देखा मैने कैसे जुल्म करती हो मेरे भैया पर आप ,, इतना बड़ा तबेले जैसा गाड रख दी बेचारे के मुह पर

रज्जो ममता को छेड़ते हुए - ओहो मतलब सच मे आई थी देखने अपने भैया का खुन्टा हम्म्म्म

ममता रज्जो की बाते सुन कर शर्मा कर झेप सी गयी और उसे अपनी गलती का अहसास हुआ कि जल्दीबाजी मे उसने क्या क्या बोल दिया ।

रज्जो ममता को शर्म से लाल होता देख - ओह्हो देखो कैसे शर्मा रही है ,,जैसे रात मे अपने भैया से सुहागरात मना के आई हो

ममता ह्स कर - अरे भाभी आप छोडो तब ना मै कुछ करू ,,,आपने ही पुरा कब्जा कर रखा था ।

रज्जो वापस ममता को छेड़ कर - ओहो मतलब पुरा मन है अपने भैया को सईया बनाने का हम्म्म

ममता फिर से शर्म से लाल हो गयी ,,वो जान रही थी कि बातो मे वो अपने भाभी से नही जीत सकती ,,, वो कुछ भी बोले उसकी चित ही होनी है । इसिलिए उसने फिल्हाल के लिए किनारा करना ही सही समझा

ममता बालटी मे कपडे लेके - अरे भाभी हटो ,,क्या सुबह सुबह आप भी हिहिहिही

रज्जो किनारे होकर - अरे मेरी ननद रानी ,,एक बार लेके तो देखो अपने भैया का ,,फिर क्या सुबह क्या रात हिहिहिही

ममता बस हस दी और जानबुझ कर कोई जवाब नही दिया क्योकि वो फिर से अपनी भाभी के जाल मे फंसना नही चाहती थी ।

रज्जो भी कोई प्रतिक्रिया ना पाकर समझ गयी कि अब उसकी ननद शर्मा रही है तो उसने भी ज्यादा खिंचाई नही की और अपने कामो मे लग गयी ।

थोडी देर बाद सारे लोग हाल मे एक्ठ्ठा हुए , तब तक पल्लवि और सोनल ने नाश्ता तैयार कर लिया था ।

फिर सबने नाश्ता कर लिया और आज के काम के बारे मे चर्चा होने लगी कि आगे क्या होना है क्या बाकी है ।

कुछ सामनो की पर्चीया बनाई गयी और रज्जो ने तय किया कि आज छोटे मोटे काम निपटा लिया जाये और कल का लाया हुआ सामान सही जगह रख कर सहेज लिया जाय । फिर कल सारे लोग माल चलेंगे , वही रमन के लिए दूल्हे का कपडा और बाकी जिसको जरुरत होगी उसके हिसाब सब कोई ले लेगा ।

माल जाने की बात सुन कर पल्लवि अनुज सोनल बहुत ही चहक उठे । हालांकि अनुज पहले भी जानिपुर आ चुका था मगर पल्लवि और सोनल के लिए ये पहला अनुभव था ।

सारे लोग खुशी खुशी अपने अपने कामो मे लग गये । कमल्नाथ और राजन फिर से बाहर निकल गये कुछ अधूरे कामो के लिये ।

रमन अनुज को लिवा कर ब्रेकरी वाले दुकान पर चला गया और बाकी महिला मंडल घर के कामो मे लग गयी ।

इधर जहा ये सब घटित हो रहा था वही चमनपुरा मे दो जवाँ दिलो के धडकते अरमाँ अपनी उड़ान भर रहे थे ।

राज की जुबानी

रात मे अपना चुदाई का कोटा पुरा करके हम सब लोग सो गये ।

सुबह उठकर सारे लोग नाश्ते के बाद अपने अपने कामों में लग गये ।

मै भी 8 बजे तक दुकान खोलकर बैठ गया और थोडा साफ सफाई करते वक़्त मेरी नजर पैंटी के डब्बे पर गयी तो मुझे शकुन्तला ताई की बात याद आई । मेरे चेहरे पर अनायास मुस्कुराहत आ गयी ।

मैने थोडी देर बाद सारा काम खतम किया और कुछ ग्राहको से काम निपटा कर फ्री हुआ ।

फिर मैने शकुन्तला ताई के नाप की कुछ पैंटी के रंग का फ़ोटो निकाल कर काजल भाभी के व्हाटसअप पर भेज दिया और तुरंत उनको फोन भी लगा दिया ।

ये मेरा काजल भाभी को पहला काल था जो मैने सगाई के दिन ही पंखुडी भाभी के माध्यम से उनका नम्बर लिया था ।

तिन बार रिंग जाने के बाद ही फोन पिक हुई

काजल भाभी - हा हैलो ,कौन

मै काजल भाभी की मीठी धीमी आवाज सुन कर ही गदगद हो गया - नमस्ते भाभी मै बोल रहा हू राज

काजल थोडा हस कर - अरे बाबू आप हो ,,मै सोची किसका नम्बर है , कहिये फोन क्यू किया

मै हस कर - बस आपकी याद आई तो कर लिया हिहिहिही

काजल भाभी शर्मा गयी और थोडा असहज होकर - मतलब बाबू ,हम समझे नही

मै ह्स कर - अरे आप तो परेशान हो गयी होहिहिही ,,वो कल शाम को ताई जी आई थी घर ना ,तो उनको कुछ अंडरगारमेंट्स के कपडे चाहिये थे ,, साइज़ तो मुझे पता है आप रंग उनको दिखा दो ,मैने व्हाटसअप किया है आपको

काजल अंडरगारमेंट्स की बात पर फिर से शर्मा गयी मगर उसकी सास की बात थी तो - जी बाबू , रुकिये हम अभी मम्मी जी को दिखा कर फोन करते है ।

फिर फोन कट गया ।

मै बाकी के कामो मे लग गया और थोडी ही देर मे काजल भाभी का फोन आने लगा तो मेरे चेहरे पर मुस्कान छा गयी ।

मै फोन उठा कर - हा भाभी बोलिए

काजल भाभी - हा बाबू ,वो एक नेवी ब्लू और एक ब्राउन कलर वाला कर देना ।

मै खुश होकर - ठीक है भाभी , और कुछ आपके लिए

काजल हस कर - अरे मेरे लिए क्या हिहिहिही

मै - अरे वही बाली , रिंग ,लिपस्टिक, आईलाईनर , सिन्दूर बिन्दी हिहिहिहिही

काजल भाभी हस कर - अरे नही नही बाबू कुछ नही ,,कुछ चहिये होगा तो हम बता देंगे,,आपका नम्बर है ना हिहिहिही

मै खुश होकर - जी ठीक है भाभी ,रखता हू फिर ।

काजल भाभी - हा बाबू रखिये बाय ।

फिर फोन कट गया और मेरे चेहरे पर मुस्कुराहत थोडी देर छायी रही ।

मै वापस दुकान के कामो मे लग गया । करीब 11बजे चंदू का मेरे पास फोन आया की वो चौराहे वाले घर पहुच गया है और थोडी देर मे मै भी पहुच जाऊ । मैने भी उसको 12बजे तक आने को बोलकर फोन रख दिया ।

थोडी देर बाद मा दोपहर का खाना लेके आई और मैने चौराहे पर जाने के लिए नया बहाना खोज लिया था ।

मै - मा वो मै कह रहा था कि चंदू का फोन आया था , हमारे स्कूल पर कोई काम है ,,तो मै जाकर देख लू , एक घंटा लग जायेगा ।

मा थोडा सोच कर- अच्छा ठीक है , लेकिन पहले ये खाना खा ले और पापा का टिफ़िन देके उधर से ही निकल जाना ।

मै भी खाना खाकर और पापा का टिफ़िन देते हुए निकल गया चौराहे की ओर ।

थोडी ही देर मे मै चौराहे वाले घर पर पहुचा और गेट खोल कर घर मे प्रवेश किया और सबसे पहले जाकर मम्मी पापा का कमरा सही किया क्योकि उनके कमरे बेड का गद्दा बहुत मोटा था और रोज रात मे मा की चुदाई मे बहुत मजा आता था ।

कमरा सेट करने के बाद मैने चंदू को फोन किया ,,मेरे दिल की धड़कने तेज हो गयी थी और आने वाले रोमांच को लेके लण्ड ने भी अंगड़ाई लेनी शुरु कर दी थी ।

मैने दो बार फोन किया लेकिन चंदू ने फोन नही उठाया ,, मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था कि ये साला फोन क्यू नही उठा रहा है ।

मै वही हाल मे चक्कर काटने लगा और फिर थोडी शंका हुई तो बाथरूम मे जाकर पेशाब करने लगा ,,,खडे लण्ड से पेशाब निकलने मे भी मुझे थोडी जलन सी हुई ।

मैने वही बाथरूम से निकल्ते ही फिर से ट्राई किया और आखिरी रिंग जाते जाते चंदू ने फोन पिक किया ।

मै गुस्से से तिलमिला कर - अबे साले फोन क्यू नही उठा रहा है ।

चन्दू - भाई मै झडने के करीब था तो कैसे उठा लेता , और मै तेरे भी तो जुगाड मे लगा था ना । जल्दी से दरवाजा खोल बाहर ही हू ।

मै चौक कर खुश हुआ और खुद को ठीक किया और फिर दरवाजा खोला तो सामने चंदू और चंपा थे । दोनो मुस्कुरा रहे थे ।

फिर चंदू मुझे हटा कर चम्पा का हाथ पकड कर अंदर जाने लगा

।मै उसे रोकते हुए - अबे तू कहा जा रहा है ,,दीदी को कौन देखेगा फिर ।

चंदू हस कर - मैने मा को घर जाने के लिए बोल दिया। ये बोलकर दीदी को लाया हू कि मुझे कालेज पर काम है और दीदी को वही अपने एक सहेली से मिलना है ।

मैने मुस्करा कर एक नजर चम्पा को देखा तो वो शर्मा कर मुस्कुरा रही थी ।

चंदू - भाई जल्दी कर ले 1 बजे तक पापा के आने का समय है ,,वो घर पर दीदी को नही देखेंगे तो मा पर गुस्सा करेंगे ,तू तो जानता ही है ना पापा को मेरे ।

मै चंदू की बातो पर ध्यान नही दे रहा था ,,मेरी नजारे तो चंपा के टीशर्ट मे उभरे हुए उसकी 34C की ब्ड़ी ब्ड़ी चुचियॉ के नुकीले निप्प्ल पर थी । चंपा की नजर जब मुझ पर गयी तो उसके दिल की धडकनें तेज हो गयी और चुचिय टीशर्ट को उपर उठाने लगी ।

चंदू ने भी मेरी नजर को भाप लिया तो तपाक से चंपा के पीछे गया और उसका टीशर्ट उठा कर चुचियॉ को नंगा कर दिया ।

चंदू - भाई तरस क्यू रहा है ,,ऐसे देख ले ना ,

चंदू के इस हरकत से चंपा सिहर गयी और उसकी आंखे बंद हो गयी । मेरी नजरे चंपा के गोल गोल हल्के सावले चुचो पर थी ,,,उसके निप्प्ल बहुत सख्त थे ।

मै थुक गटक कर एक बार पैंट के उपर से अपने सर उठाते लण्ड को दबाया तो मेरे तन बदन मे सरसराहट और तेज हो गयी । मै धीरे से एक कदम आगे बढा , तबतक चंदू ने चंपा की चुचिया निचे से थाम ली और वही अपने भाई का स्पर्श अपनी चुचियॉ पर पाकर चम्पा चंदू की बाहो मे पिघल गयी ,,वो लम्बी लम्बी सासे लेने गयी जिससे उसकी थन जैसी चुचिया उपर निचे होने लगी ।

मै अब चम्पा के सामने आ चुका था और मैने हौले से हाथ बढा कर अपनी कड़क हथेली को चंपा के नुकीले निप्प्ल पर साम्ने से रखा

चंपा - सीईई उम्म्ंम्ं ,,,फिर वो तेजी से सासे लेने लगी ।

उसकी बेताबी देखकर मैने अपना लण्ड एक हाथ से पैंट के उपर से सहलाते हुए दुसरे हाथ की हथेली को उसकी चुची पर अच्छे से फिराया और फिर उसको निचे से उठाया तो काफी वजनदार था वो ।

मेरे बदन मे एक कपकपी सी होने लगी ,, एक नया सा अह्सास था और मेरे अन्दर का हवस मुझ पर हावी हो रहा।

इतने मे चंदू ने चम्पा को मेरी तरफ धकेला ,मै बडी मुस्किल से चम्पा को लेके संभला ,, मगर इस घटना मे चंपा की चुची पर मेरी पकड और तेज हो गयी थी ,,जिससे चम्पा की सिसकी निकल गयी ।

चंदू - ले भाई मजा कर ,,मै यही हू हिहिहिजी

चम्पा जो कि अब मेरी बाहो मे थी ,,उसकी कमर के निचले हिस्से और कूल्हो पर मेरा हाथ रेंग रहा था और दुसरा हाथ अब भी वैसे ही उसकी चुची पर कसा हुआ था ।

चन्दू के मुह से ऐसी बाते सुन कर हम दोनो एक दुसरे को देख कर मुस्कुराये और मैने चम्पा के होठो से अपने होठ जोड लिये

उफ्फ्फ क्या गरम तपते होठ थे उसके ,,चंपा ने तेजी से मेरे होठो को चूसने लगी, उसकी गरमी देख कर मै भी जोश मे आ गया और एक हाथ को उसी चुची पर मस्ल्ते हुए दुसरे हाथ को चम्पा के गाड पर फिराने लगा ।

स्कर्ट के उपर से सहलाने पर मुझे चंपा की गाड अन्दर से बिल्कुल नंगी मह्सूस हुई जिससे मेरे तन और लण्ड में गर्मी बढ गयी ।

मैने अपने दोनो हाथ पीछे ले जाकर चम्पा की गाड नोचने लगा ,,बदले मे चंपा अपनी एडिया उठा कर मेरे होठ चूसे जा रही थी ।

मैने धीरे धीरे स्कर्ट को उपर उठा दिया और उसके नंगी मुलायम गाड के सहलाते हुए उन्हे मसलने लगा ।

उधर चंदू वही हाल मे लगे सोफे पर बैठ कर अपना लण्ड निकाल कर उसे सहलाने लगा ।

चंपा की सिसकियाँ बहुत ही कामुक थी और वो खुद का जिस्म मेरे बदन पर घिसने लगी ।

मैने उसके गाड के पाटो को फैलाया और बीच वाली ऊँगली को उसकी गाड़ मी गहरी दरारो मे डाल कर रगड़ने लगा ।

चंपा ने एक गहरी अह्ह्ह भरी और मेरे कंधो को पकड मजबूत कर ली ,,उसके नुकीले नाखून टीशर्ट मे घूस कर चुबने लगे । मेरे हर बार अपनी उन्गली उसके गाड की दरारो से उसकी सुराख तक ले जाते वक़्त वो तेजी अपने चुतडॉ को सख्त कर लेती और गहरी सिसकिया लेने लगती ।

मै जितना सोच रहा था चम्पा उससे कही ज्यादा गरम लडकी थी , उसके हाथ अब मेरे पैंट के उपर से लण्ड के उभार को टटोलने लगे थे । मैने उसकी आंखो मे एक नशा सा देखा , वो सिस्कते हुए मुस्कुराई और निचे मेरे पैरो मे सरकती चली गयी ।

चम्पा की आवाज भारी थी और उसकी मादक सिस्कियो से भरी हसी मुझे और भी उत्तेजीत कर रही थी । उसने जल्दी जल्दी मेरे बेल्ट खोल कर पैंट निचे कर दिया और अंडरवियर मे उभरे हुए लण्ड को उपर से सहलाया ।

मै उसकी अदा से पूरी तरह काप गया , मेरे बदन मे झुरझुरी सी होने लगी ,,पाव कांपने लगे ,,अगले ही पल चम्पा ने अंडरवियर मे हाथ डाल कर मेरे मुसल को निकाला जो पूरी तरह से तीर के जैसे सीधा और नुकीला हिल रहा था ।

चम्पा ने एक बार बडी मादकता से अपनी नाक के मेरे सुपाडे के पास रख कर उसकी गर्मी और गन्ध को आंखे बंद कर मह्सूस किया और उसके चेहरे पर एक मुस्कान छा गयी ।

जब उसने अप्नी आन्खे खोली तो वो एक नशे मे थी और उसकी वो मुस्कान मेरे दिल की धडकनें तेज कर रही थी ,, उसने अपनी नशीली आंखो और उसी कातिल मुस्कान के साथ मुझे देखते हुए अपनी नुकीले नाखूनों से मेरे आड़ो को खरोचते हुए इठलाई ।

मेरी आंखे इस अहसास से बंद सी हो गयी और मेरे हाथ उसके सर पर चले गये । मैने अपनी एड़ियो को उचकाया और उसके सर को अपने लण्ड की तरफ खीचा ।

एक गरम भाप और फिर मानो मुलायम बर्फ की खोल मे मेरा लण्ड सरकने ।

आंखे खोला तो चम्पा मेरा आधा लण्ड घोट चुकी थी और उसकी आंखे बंद थी ,,, लण्ड को इतनी चाव से चूसने पर मुझे गीता की याद आई ,,,वो भी ऐसे ही मेरे लण्ड को चुसती थी ,,मगर उसके छोटे हाथो और नरम होठ का स्पर्श कुछ अलग था ,,,जबकी यहा तो चंपा एक माहिर खिलाडी लग रही थी ।

उसने मेरे आड़ो को अपने एक मुठ्ठि मे कस रखा था जिससे मेरे लण्ड की लम्बाई मे हल्का इजाफा था ,,जिसे वो पुरा गले तक उतार चुकी थी ।

मै पागल सा होने लगा उसकी मुठ्ठि मेरे आड़ो को और कस रही थी ,,एक मीठा दर्द सा हो रहा था क्योकि मेरे आड़ो मे रस निकल कर मेरे सुपाडे की ओर जाने चाहते थे । मगर चम्पा ने ऐन जगह पर मेरे लण्ड को कसा हुआ था ।

ऐसा अनुभव मैने आज तक नही किया था ,, चम्पा जैसी गरम लड़की को भोगना आसान नही था , उसके लण्ड चुसने का अंदाज निराला था ,,

मै धीरे धीरे चरम की ओर बढ रहा था ,

ऐसे मे चंपा ने हौले से मेरा लण्ड अपने मुह से निकालते हुए मेरे आड़ो से पकड ढीली की

जिससे तेजी से सारा वीर्य मेरे आड़ो से सुपाडे मे भरने लगा । मेरे लण्ड मे गरमी बढने लगी और मै दुगनी ताकत से अपने लण्ड की निचली नशो पर काबू करने लगा ,, मेरा चेहरा तप रहा था ,,एडिया उठ चुकी थी, लण्ड पूरी तरह से तन गया था ,,सुपाडे मे गर्मी बढ गयी थी ।।

ऐसे मे चंपा ने मेरे लण्ड को उपर करके निचले हिस्से मे सूपाडे की गांठ पर जीभ फिराने लगी और मेरा सारा सन्तुलन और ताकत एक साथ एक गाढ़े फब्बारे के जैसा फुट पडा ,,, मेरा सुपाडा सारा माल एक साथ चंपा के मुह पर ऊड़ेलने ,,,आज तक मैने इतनी ऊततेज्ना मह्सूस नही की थी ।

मेरा लण्ड झटके दे रहा था और चम्पा के चेहरा मेरे वीर्य से टपक रहा था ।

मेरे हाथ आनायास ही मेरे लण्ड पर गये और मैने अच्छे से उसे झाड़ते हुए एक गहरी सास ली ,,,मै संतुष्ट था कि मै उस दर्द से आजाद था ।

वही जब नजर चंपा पर गयी तो वो मुस्कुरा रही थी और अपने मुछो के पास से टपकते बीर्य को जीभ से साफ कर रही थी ।

मै एक बार हल्का सा हसा और दो कदम पीछे होकर बेड पर बैठ गया ।

वही चंदू बस अपना लण्ड सहलाते हुए मुस्कुरा रहा था ।

चंपा उठी और मुझसे बाथरूम का पुछ कर मेरे कमरे की ओर चली गयी ।

मैने धीरे धीरे अपनी सास बराबर की और एक नजर चंदू को देखा तो वो मुझे इशारे से मेरा हाल पुछ रहा था ।

मै भी मुस्कुरा दिया ,, थोडी देर बाद चंपा बाहर आई

फिर मैने अपने कपड़े सही किये और सबको ठण्डा पानी पीने को दिया ।

फिर चंपा के बगल मे जाकर बैथ गया । चंपा मुझसे ऐसे चिपक गयी मानो मेरी प्रेमिका हो । हमने कोई बाते नही की बस एक दुसरे को देख कर मुस्कराये ।

चंदू हस कर - फिर भाई क्या इरादा है हाह्हहहा

मै थोडा शर्मा कर हसा - आज बस इतना ही भाई ,,बहुत थकान सी लग रही है हिहिहिही

चंदू हस कर - होता है भाई ,,तेरा पहली बार है ना ,,तो थकान तो होगा ही हिहिहिही

चंदू की बात पर चंपा ने मुझे ऐसे घूरा मानो मेरी चोरी पकड ली हो । मै उसकी आंखो मे देखकर इशारा से बोला क्या हुआ

वो बस मुस्कुरा दी ,,मुझे पता था कि चंपा जान रही थी कि ये मेरा पहली बार नही था ।

चंदू - तो फिर कब की प्लानिंग करनी है ।

मैने एक अंगड़ाई ली और चम्पा को देख कर उसके पुछते हुए - कल ???

वो शर्मा कर हा मे इशारा कर दी

फिर हम लोग मार्केट वाले घर के लिए एक साथ ही निकल गये ।

रास्ते मे काफी लोगो ने टीशर्ट मे उभरी हुई चंपा की नुकीली चुचिया और उसकी पतली स्कर्ट मे हिलते गाड को घूरा,,मगर हम तीनो ने उन पलो को भी इंजॉय किया ।

थोडी देर बाद मै दुकान पर चला गया और अपने कामो मे लग गया ।

शाम को 7 वजे तक शकुन्तला ताई की पैंटी लेके मै और मा साथ मे ही अपने चौराहे वाले घर वापस आ गये ।

मै पैंटी का थैला जानबुझ कर अपने कमरे मे रख दिया और नहाने चला गया ।

हम दोनो नहा के आये कि इतने मे पापा भी आ चुके थे ।

फिर पापा ने वही हाल मे ही अपने कपडे निकालने शुरु कर दिये । और एक तौलिया लपेट कर बनियान डाल ली ।

इधर मा भी कीचन मे भीड़ गयी और पापा को नहाने जाने को बोला ,,,मगर ऐन मौके पर डोर बेल बजी ।

हम तीनो जान रहे थे कि इस वक्त कौन आया होगा और हमारे चेहरे मुस्कुरा रहे थे ।

जारी रहेगी

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अपडेट 110



चोदामपुर स्पेशल अपडेट



पीछले अपडेट मे आपने पढ़ा जहा एक तरफ जानिपुर मे राज की मौसी रज्जो को ये पता चल गया था कि उसका नंदोई राजन उसको नंगी देख कर अपना रस टपका चुका था और वही चमनपुरा मे चंपा ने राज को अपना ऐसा जलवा दिखाया कि एक ही बार मे राज बाबू ढेर गये । फिलहाल राज के घर पर कोई मेहमान आया है तो देखते है राज की जुबानी वहा का हाल ।

अब आगे

मा किचन मे जाने लगी और पापा को नहाने जाने को बोला ,,ऐन मौके हमारे घर की बेल बजती है।

हम तीनो की नजरे आपस मे मीलती है और हम एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते है ।

मा ह्स कर - जा बेटा देख शकुन्तला दिदी आई होंगी ।

मै - हा वही होंगी

मै दरवाजे की ओर जाने तभी मा पापा से - और आप ऐसे ही रहेंगे क्या

पापा ने एक अंगदायी ली और बोले - अरे अब भाभी आई है तो रुक कर नहा लेता हू

मा ह्स कर - मै खुब समझ रही हू आपकी चालाकी

इधर तब तक राज शकुन्तला को लिवा कर हाल मे आता है ।

मा - अरे दीदी आप ,,आईये बैठीए मै पानी लाती हू।

पापा एक नजर शकुन्तला पर डालते है जो आज साडी पहन कर आई थी और पल्लू के अन्दर से झांकते ब्लाउज के बटन का रंग देखने का प्रयास करते है ।

पापा - और बताईए भाभी क्या हाल चाल है

शकुन्तला - सब ठीक है भाईसाहब,

मा तब तक हाल मे पानी लेके आती है - अरे दीदी कभी कभी काजल बिटिया को भी भेज दिया करिये ।

शकुन्तला - आने को तो तुम भी आ सकती हो ,कभी आती हो

मा ह्स कर - हा अब दुकान से घर , घर से दुकान ,,फुर्सत नही मिलती ,,वैसे रोहित कब तक आ रहा है ।

शकुन्तला अपने बेटे की चर्चा सुन कर काफी लालयित हुई - हा वो अगले हफते आने वाला है ।

मा खुश होकर - अरे वाह फिर तो हम लोग भी मिल लेंगे ,, कभी मिलना नही हुआ उससे

शकुन्तला - हा हा क्यू नही ,,जैसे ही वो आयेगा मै खुद खबर करूंगी ।

पापा ह्स कर - अरे हा वैसे भाई साहब क्या करते है ,,मुलाकात तो उसने भी नही हुई क्यू रागिनी

शकुन्तला पापा के सवाल से एक दम चुप हो गयी

मा ने शकुन्तला की हालत देखी तो वो समझ गयी तो उसने फौरन बात को बदल दिया ।

मा - अरे दीदी आप पानी पीजिए ,, और राज बेटा वो जरा झोला लाओ जिसमे दीदी का समान है ।

पापा ने बहुत गौर से मा को बात बदलते देखा और मुझे भी कुछ अटपटा सा लगा ।

फिर मै अपने कमरे से वो पैन्टी का पैकेट लाकर मम्मी को दिया ।

मा शकुन्तला को वो पैकेट देने लगी तो पापा - अरे रागिनी एक बार दिखा तो दो खोल कर भाभी को ,वो भी संतुष्ट रहेगी ना ।

शकुन्तला शर्मा कर पापा को देख कर मुस्कुराने लगी ,,मै और मा तो पापा की नियत से अन्जान थे नही तो हम भी मुस्कुराने लगे ।

शकुन्तला - अरे नही कोई बात नही मै घर देख लूंगी ।

पापा - अरे भाभी बस दो मिंट की बात है । खोलो रागिनी

फिर मा ने मुस्कुरा कर वो पैकेट खोल कर एक पैंटी निकाल कर शकुन्तला को दी ।

शकुन्तला बडी झिझक कर पापा को देखते हुए वो पैंटी मा के हाथ से ली और उसे देखने लगी तभी उसकी नजर पैंटी के लेबल पर गयी जिस्पे साइज़ 42 लिखा था ।

शकुन्तला थोडा सोचते हुए - अरे रागिनी ये तो 42 नम्बर है ना

मा ह्स्ते हुए - अरे आपने अपनी कच्छी की हालत देखी भी थी दीदी ,,कैसे लास्टीक ढीली हो गयी थी ,, मेरे ख्याल से आपका साइज़ बढा है इसिलिए 42 दे रही हू ।

मा की बाते सुनकर शकुन्तला की आंखे बडी हो गयी और वो एक नजर पापा को देखती है जो मुस्कुरा रहे थे और फिर शर्मा कर खुद भी मुस्कुराने लगती है ।

शकुन्तला पापा की ओर इशारा कर - क्या रागिनी तू भी हिहिहिही देख कर तो बोल

मा हस कर - क्या दीदी इसमे क्या शर्माना आप भी ना ,कपडे तो है और क्या ? हिहिहिही

फिर ऐसे ही हमारी थोडी बाते चली और फिर शकुन्तला अपने घर चली गयी ।

मा हस कर - कर ली ना अपने मन,,आपको बड़ा शौक है दूसरो की कच्छीया देखने ,, आपको तो कास्मेटिक वाले दुकान पर ही बैठना चाहिये, ठरकी कही के हिहिही

मा की बाते सुन कर मै हस पडा और पापा मुस्कुरा कर अपने उपर खिच लेते है ।

पापा - अरे जान थोडा मस्ती मजाक तो चलता ही है ,,आखिर भाभी है मेरी हाहहहा

मा पापा की बाहो मे कसमसा कर - ओह्ह हो अब छोडिए ,,मुझे खाना ब्नाना है ,,

पापा मा के गाल को चूम कर - अरे छोड दूँगा जान ,,पहले ये बताओ कि तुमने भाईसाहब के बारे मे पूछने से क्यू रोका ।

पापा की बातो पर मैने भी सहमती दिखाई तो मा सिरिअस होकर पापा की गोद से उतरते हुए - वो क्या है ना जी , शकुन्तला दीदी के पति करीब 15 सालो से दुबई मे है और वही सेटल है और अभी पिछले साल पता चला कि उन्होने वही किसी खातुन से शादी कर ली है ।

मा की बाते पापा और मै चौक गये ।

पापा - क्या सच मे ,,,

मा - हा जी ,,इसिलिए पिछ्ले ही शकुन्तला दीदी ने अपना ससुराल छोड दिया और अपने बेटे के पास रहने चली गयी थी । फिर जब यहा चमनपुरा मे उनके बेटे रोहित ने घर बनवा दिया तो वो अपनी बहू के साथ यहा चली आई ।

मा की बाते सुन कर पापा और मै बहुत शौक मे थे । कि आखिर इतना अच्छा परिवार कोई छोड कैसे सकता है वो भी अपना भी बेटा और बीवी को ।

मामले को गंभीर होता देख मा बोली - चलो भाई तुम लोगो ने तो मजा ले लिया अब खाना अकेले मुझे बनाना है ।

मै चहक कर - मा मै भी मदद करू

पापा भी खुश होकर - हा जानू आज तुम रहने दो, आज खाना हम बनायेन्गे , क्यू बेटा

मै खुशी से - हा क्यू नही पापा हिहिहिहीही

फिर हम सब किचन मे चले गये और मा को वही मैने डायनिंग टेबल पर बिठा दिया । मा हस कर हमे क्या कया करना है बताती रही और हम वैसे वैसे खाना बनाते रहे ।

रोटीओ मे कभी मिनी श्रीलंका तो कभी आस्ट्रेलिया बनता , मगर जिद थी तो बनाना ही था । कौन सा कोई बाहरी आने वाला था ।

20 रोटिया और आलू गोभी सब्जी बनाने मे हम बाप बेटे की हालत खराब हो गयी ।

लेकिन जैसा भी था मस्ती भरा समय बिता । खाने के बाद मा ने बर्तन खाली किये और फिर हम सब अपने रात के कामो मे लग गये ।



लेखक की जुबानी


एक तरफ चमनपुरा मे ये सब घटित हो रहा था वही जानीपुर मे राज के मौसी के यहा भी मस्तिया कम नही थी ।

घर मे रज्जो ने सबसे कामो की वसूली करवाई और सोनल की शादी को लेके बहुत खिचाई हुई । पल्लवी तो थी ही चुलबुली , उसने भी थोडे बहुत मजे लिये ।

शाम को 7 बजे तक सारे लोग एकजुट हुए और कल के लिए प्लानिंग होने लगी कि कैसे कैसे काम होना है ।

रमन और अनुज अभी भी दुकान से वापस नही आये थे क्योकि शहर की दुकानो पर बिक्री देर रात तक चल्ती है ।

सोनल और पल्लवि किचन मे चले गये क्योकि रात के खाने का इन्तेजाम होना ।

कमलनाथ ने मौका देखकर राजन को उपर चलने का इशारा किया जिसे रज्जो समझ गयी ।

रज्जो - कहा जी कहा जी ,,हम्म्म

कमलनाथ अंगड़ाई लेने के हाथ उपर किया कि रज्जो की नजर अपने पति के कुर्ते के बाहर झांकी दारु की शिसी के लेबल पर गयी ।

कमलनाथ -बस ऐसे ही टहलने और क्या ।

रज्जो मुस्कुरा कर - ठीक है जाईये ,,अभी ममता के हाथ से चखना भिजवा रही हू ।

कमलनाथ रज्जो की बात पर चौक गया और फटाक से हाथ निचे कर दारु के शिसी को पकड कर चेक किया कि समान है या नही ।

कमलनाथ की इस हरकत से रज्जो हसने लगी - अरे जाईये ,,कब्जा नही करूंगी मै उसपे ,,मेरा कब्जा कही और है वो ममता जानती है ,,,क्यू ममता सही है ना

ममता अपने भाभी का मतलब समझ गयी और उसे सुबह बाथरूम के पास अपनी भाभी से हुई बातचीत याद आ गयी ।

ममता मुस्कुरा कर अंजान बनते हुए - नही तो भाभी मुझे ऐसा कुछ नही पता

राजन - कैसा कब्जा भाभी जी हमे तो बताईए

ममता को मानो मौका मिल गया रज्जो को छेड़ने का तो वो हस्ते हुए - हा हा भाभी बताओ ना कैसा कब्जा

रज्जो भी कहा कम थी वो हस्कर - है जीजा जी एक जगह , जहा से मुझे हटा कर ममता खुद कब्जा चाहती है ,,,क्यू ममता बता दू हिहिहिही

ममता की हालत खराब हो गयी और वो एक बार फिर से खुद को कोसने लगी कि आखिर वो क्यू अपने भाभी से उलझ पड़ती है ।

ममता बात को बदलते हुए - क्या भाभी आप कब्जा कब्जा की हो , इनको जाने दीजिये ,,चलिये किचन मे खाना बनाना है अभी ।

रज्जो ममता की मजबूरी पर ह्स्ते हुए उठकर किचन मे जाने लगी ।

कमलनाथ - सुनो रमन की मा ,, वो जरा नमकीन वाला पैकेट दे दोगी क्या ।

रज्जो ममता को लेके किचन मे चली गयी और खुद एक नमकीन का पैकेट और डिसपोजल ग्लास लेके आई ।

रज्जो वो समान राजन को देते हुए - जीजा जी लिजिए ,, आपकी जिम्मेदारी है कि ज्यादा ना पिए ठीक है ।

रज्जो की बात पर राजन बहुत हल्की आवाज मे बोला - हा अब ज्यादा पी लेंगे तो आपकी ठुकाई नही हो पायेगी ना

रज्जो ना मानो आखिर के श्बदो को भाप लिया हो तो वो तपाक से बोल पडी - कुछ कहा आपने जीजा जी

राजन हड़बड़ा कर - अब ब नही भाभी ,, वो मै सोच रहा था कि बच भी गया तो क्या मतलब ,, खुली बोतल खराब हो जायेगी

रज्जो हस कर -अरे तो क्या हुआ एक एक पैग हम दोनो लगा लेंगे हिहिहिहिही

कमलनाथ - कभी हमारे साथ ये ऑफ़र नही रखा

रज्जो इतरा कर - अब जीजा जी मेहमान है ,,इनके लिए तो ऑफ़र रखना ही पडेगा ।

राजन रज्जो के इतराने से सिहर गया कि उसकी सलहज तो खुल्लम खुलल लाईन दे रही है । मगर क्यू ।

रज्जो ह्स कर - तो जीजा जी लगायेंगे ना मेरे साथ हिहिही

राजन ने सोचा इससे अच्छा मौका क्या हो सकता है ,,आज थोडा बहुत नशे के नाटक कर इनकी गुदाज गदराई जिस्मो का मजा तो ले ही सकता हू ।

राजन - हा हा क्यू नही ,,लेकिन खाने के बाद हिहिही

रज्जो - आप जब कहे जीजा जी ,हिहिही

फिर रज्जो किचन मे चली गयी और राजन कमल्नाथ के साथ उपर उसके कमरे मे ही चला गया ।

फिर कमलनाथ ने पैग बनाए और आधी शिसी ही खतम की । आज का माल और भी तगडा था तो कमलनाथ वही बैठे हुए बाते करते हुए सोफे पर ही सो गया ।

राजन ने समय देखा तो 9 बजे गये थे तो उसने आधी खाली बोतल बंद की और उसे अपने कुरते मे रख लिया ।

फिर वो गुनगुनाते हुए निचे हाल मे उतर आये ।

तभी ममता हाल मे अपने पति को देख कर - अरे आ गये,,भैया कहा है ?? आप चलिये किचन मे बैठीये भाभी खाना लगा रही है ।

राजन ममता को कुछ सम्झाता उससे पहले ही ममता सीढियो से उपर अपने भैया को बुलाने के लिए चली गयी ।

कमरे मे जाते ही ममता को उसके भैया सोये हुए दिखे ।

ममता उन्के पास गयी तो उसे शराब की हल्की गन्ध आई तो उसने बुरा सा मुह बना कर - ओह्हो ये भैया भी ना ,,खाना भी नही खाये और सो गये ।

ममता कमलनाथ के सामने जाकर खड़ी हो गयी और झुक कर उसका कन्धा पकड कर हिलाते हुए- भैया उठिए ,,,चलिये खाना नही खाना क्या

दो चार हिलाने पर कमलनाथ की नीद खुली मगर नशे से उसकी आंखे पूरी नही खुल रही थी और दारु का असर भी बहुत था ।

कमलनाथ को अपनी धुन्धली आन्खो से अपने सामने झुकी हुई ममता को रज्जो समझ लिया - अरे जानू तुम आ गयी काम खतम करके ,,,, चलो ना अब मेरा लण्ड चुसो ,, लो मै खोल रहा हू ,,,

ममता की सासे अटक गयी कि उसके भैया नशे मे उसे पहचान नही रहे ।

डर से उसकी आवाज नही निकल रही थी ,,वो क्या बोले और वो जल्दी से अपना हाथ छुड़ा कर निचे भाग गयी ।

वही कमलनाथ जल्दी जल्दी बड़ब्डाते हुए अपना पैजामा खोल कर लण्ड बाहर निकाल देता है और फिर वैसे ही बडबड़ाते हुए सो जाता है ।

कमरे से भागते हुए ममता आखिर की सीढिओ से पहले रुकती है और अपनी सांसे बराबर कर अभी उपर हुए हादसे हो सोच कर हसने लगती है ।

ममता मन मे - उफ्फ्फ ये भाईयाआआ भीईई ना हिहिहिहिही

ममता हाल मे आती है और फिर किचन मे खाने के लिए बैठ जाती है । अनुज और रमन भी आ चुके थे ।

ममता - भाभी वो भैया सो गये , शायद खाना नही खायेन्गे

रज्जो अपना माथा पीट कर - मतलब आज भी ज्यादा ले लिये ।

रज्जो राजन से - क्या जीजा जी आपको ध्यान देना चाहिए ना

राजन - अब ब मैने तो रोका लेकिन वो माने नही ,,, अब मै क्या कर सकता था ।

रज्जो - हमम चलिये छोडिए खाना खाते है हम लोग

फिर सबने खाना खाया और धीरे धीरे सारे लोग अपने अपने कमरो मे जाने लगे । सिवाय राजन , ममता और रज्जो के ।

राजन वही हाल मे बैठ कर किचन मे खड़ी अपनी सल्हज रज्जो को निहार रहा था और अपना लण्ड कस रहा था ।

वही किचन मे ममता को अपने भैया की चिंता हो रही थी कि वो बिना खाये ही सो गये ।

रज्जो बर्तन धुलते हुए - क्या हुआ ममता क्या सोच रही हो ?

ममता - वो भाभी ,,भैया ने कुछ खाया नही

रज्जो ह्स कर - क्या तू भी ,,उनकी आदत है वो जाने दे ।

ममता - लेकिन फिर भी भाभी रोज रोज ऐसे तो उनकी तबियत खराब हो जायेगी

रज्जो हस कर - नही रे , वो हमेशा नही पीते बस घर पर फ्री रहते है तो हो जाता है कभी कभी हिहिही

रज्जो ममता को मुरझाए देख मुस्कुराई- अगर इत्नी ही चिन्ता है तो एक थाली मे खाना लेले और जा अपने भैया को खिला देना और वही सो जाना

ममता रज्जो की बात पर मुस्कुराइ- फिर आप कहा सोयेन्गी हिहिही

रज्जो ह्स कर - आज तो मेरा जीजा जी के साथ पैग लगाने का मूड है हिहिहिजी

ममता चौक कर - क्या सच मे आप दारु पियेन्गी

रज्जो हस कर - अब अपने नंदोई का दिल कैसे तोड दू

ममता मुह बना कर - छीईईई फिर तो मै नही आने वाली उनके कमरे मे आज ,,,,

रज्जो हस कर - मै तो कह ही रही हू तू आज अपने भैया के साथ सो जा हिहिही

ममता उखड़ कर - क्या भाभी आप भी ,, मै आज पल्लवी के साथ ही सो जाती हू ,,

रज्जो हस कर - जैसी तेरी मर्जी हिहिहिहिही

ममता हाल मे आई और गुस्से मे तिलमिला कर राजन को देखा तो उसे कुछ समझ नही आया और वो सीधा पल्लवि के कमरे की ओर बढ गयी ।

राजन को कुछ समझ नही आया और वो भौचक ही देखता रहा ।

वही किचन मे रज्जो ने सारा काम खतम कर हाथ पोछते हुए हाल मे आती है ।

राजन - वो ममता को क्या हुआ

रज्जो मुस्कुरा कर - उसको मुझे आपके साथ देख कर जलन हो रही है हिहिहिही

राजन असमंजस मे मुस्कुराते हुए - मै समझा नही

रज्जो हस कर - हिहिहिही अरे वो मैने उसको हमारे पैग लगाने के बारे मे बता दिया तो वो पल्लवि के पास सोने चली गयी ।

राजन हस कर - ओह्ह्ह हाहहहा कोई बात नही ,,उसे भी मेरा पीना पसंद नही

रज्जो हस कर - कोई बात नही मै हू ना साथ देने के लिए हीहिहिही ,,तो चले

राजन उठ कर - हा क्यू ही

रज्जो मुस्कुरा कर - ठीक है आप ऊपर चलिये कमरे मे ,,यहा बच्चे आ गये तो उनके सामने अच्छा नही लगेगा ,,,

राजन ने भी रज्जो की बात पर सहमती दिखाइ तो रज्जो हस कर बोली - ठीक है फिर आप चलिये मै ग्लास और कुछ खाने का लाती हू हिहिही

राजन मुस्कुरा कर उपर की ओर चल दिया ।

राजन सीढिया चढ़ते हुए आगे की प्लानिंग करते हुए सोच रहा था - अच्छा हुआ ममता चली गयी , नही तो उसके सामने मै कुछ कर नही पाता ,,,और देखता हू आज कितना काम बन पाता है ।

धीरे धीरे राजन उपर आया तो पहले कमलनाथ का कमरा था जो हल्का खुला था । राजन मे एक नजर कमरे मे मारा तो कमलनाथ वैसे ही सोया हुआ था ।

राजन मन ही मन हस कर - इनको देखो ,,,इतनी गदराई मालदार बीवी के रहते दारु के नशे मे पडा है हाहाहाहा ,, आज अगर मौका मिल गया तो आज ही पेल दूँगा भाभी जी को ,,, लेकिन क्या इतनी जल्दीबाजी ठीक रहेगी । कुछ योजना तो बनानी पडेगी ।

राजन वही विचार करते हुए अपने कमरे मे गया और फिर एक योजना के तहत अपने सारे कपडे निकाल के एक जान्घिये और फुल बाजू की बनियान डाल ली । फिर रज्जो के आने का इन्तजार करने लगा ।

जैसे ही रज्जो की आहट मिलती ही वो वैसे ही बिस्तर के पास खडे होकर अपने कपडे फ़ोल्ड करने लगता है ।

इतने मे रज्जो एक ट्रे मे ग्लास और थोडा च्खना लेके पर्दा हटाकर राजन को आवाज देते हुए कमरे मे प्रवेश कर जाती है । मगर राजन की हालात देख कर वो फौरन मुह फेर लेती है ।

राजन नाटक करते हुए - अरे आप आ गयी क्या ,,,ओह्हो ये तौलिया नही मिल रहा है । रुकियेगा भाभी थोडा ।

रज्जो वही खडी खडी मुस्कुरा रही थी और कुछ सोच कर बोली - अरे नही मिल रहा है कोई बात नही , आईये बैथिये ।

रज्जो बिना राजन की ओर देखे सोफे पर बैठ कर सामने की टेबल पर ट्रे रखा ।

राजन भी अपना कुर्ता लेके, उससे अपने रोयेंदार सख्त जान्घो को धक कर बैठ गया ।

रज्जो को भी थोडी सुविधा हुई ।

राजन अपने कपड़ो के लिए बहाना बनाता हुआ - वो सोचा कि अब सोने का समय है तो कपडे निकाल दू ,,मगर तौलिया नही मिला

रज्जो मुस्कुरा कर - अरे कोई बात नही ,,, चलिये फिर शुरु करिये

राजन हस कर - मै बनाऊ फिर

रज्जो हस कर - हा आप ही बनाईए ,,मैने बनाने लगी तो नशा ज्यादा हो जायेगा आपको हिहिही

राजन रज्जो की बात से सम्भला और उसे याद आया कि उसे बहकना नही है बल्कि मौके का फ़ायदा लेना है ।

राजन हस कर - अरे नही नही मेरे रहते अब आपको काहे की तकलिफ ,, आप साथ दे रही हैं वही काफी है ।

फिर राजन एक हल्का पैग बनाया और रज्जो को पेश किया ।

रज्जो - शुक्रिया ,

एक सिप लेके ग्लास रख दी । हम्म्म बहुत नोर्मल है ये तो

राजन - हा लेकिन भाईसाहब का ब्राण्ड बहुत तेज है ,, पकड रहा है ।

धीरे धीरे बाते शुरु हुई कि किसने कब पहली बार शुरु की थी और करीब आधे घंटे मे रज्जो को बहुत ही हलका नशा होने लगा था ।

राजन - लग रहा है भाभी आपको नशा हो रहा है हिहिहिही ,,

रज्जो हस कर - हिहिहिही अरे ठीक है जीजा जी कोई बात नही ,,,अभी एक पैग और चलेगा

राजन इस बार और भी हल्का डोज वाला बनाया और रज्जो के हाथ मे थमाया , अचानक रज्जो के हाथ से वो दिस्पोजल ग्लास सरका और उसकी साड़ी पर ही गिर गया ।

राजन - ओह्ह हो भाभी ,,,ये तो गिर गया ,,,साडी खराब हो जायेगी ।

रज्जो - अरे कोई बात नही जीजा जी आप बैथिए मै अभी अपने कमरे मे जाकर इसको बदल देती हू ।।

राजन इस मौके को हाथ से जाने नही देना चाहता था इसिलिए - अरे कहा जा रही है ,, अच्छा खासा मूड बना लिया हिहिहिहिही ,,,यही ममता की कोई सादी पहन लिजिए ।

रज्जो मुस्कुराई और मन मे बुदबुदाइ - जान रही हू नंदोई जी आपकी चालाकी ,, ऐसा जलवा दिखाऊंगी की याद रखोगे अपनी सल्हज को ।

रज्जो - हा सही कह रहे , फिर रज्जो खडी हुई और पहले अपना पल्लू और फिर कमर से सारी साड़ी निकाल ली । फिर पेतिकोट मे ही कुल्हे मटकाते हुए आल्मरि तक गयी । चुकी राजन ने पहले ही तौलिये को अल्मारी मे रख कर चाभी छिपा दी थी इसिलिए आल्मारि बंद थी ।

रज्जो- अरे ये तो बंद है

राजन - अरे हा चाभी ममता के पास होगी ,,, रुकिये मै लाता हू

रज्जो मुस्कुरा राजन की ओर चलती हुई आई - अरे कोई बात नही ,, ऐसे ही ठीक है कौन यहा कोई बाहरी है हिहिही

राजन ने भी चैन की सास ली और अबतक उसने अपना कुर्ता भी जान्घ से हटा दिया था जिससे उसके जान्घिये मे उभार हल्का हल्का दिख रहा था ।

रज्जो राजन को देख कर मुस्कुराई- लाईए मै बनाती हू पैग

फिर रज्जो ने पैग बना के राजन को दिया ।

राजन हस कर - वैसे आप भाईसाहब के साथ क्यू नही लेती हिहिहिजी

रज्जो थोडा खुल के- परसो देख ही रहे थे ना उनकी हालत हिहिहिही वो बस अनाब स्नाब बोलते है ।

राजन एक नजर रज्जो के फैले हुए कूल्हो पर डाला और सिप लेते हुए- सही ही तो बोलते है भाई साहब हिहिहिही

रज्जो समझ गयी राजन की बात - क्या जीजा जी आप भी, कुछ भी बोलते है । हिहिहिही

राजन रज्जो की मोटी मोटी चुचियो को निहारते हुए हल्का सा जान्घिये के उपर से लण्ड के सर को दबाया और बोला - अब क्या कहू भाभी ,, मेरा बोलना उचित नही है ऐसे मामलो मे हिहिहिहीही आप समझ ही रही होंगी ।

रज्जो की नजर राजन के हाथ पर गयी जिस्से वो अपना लण्ड सहला रहा था ।

रज्जो हस कर- हा देख रही हू कि अब आपको ममता की जरुरत मह्सूस हो रही हैं हिहिहिही क्यू जीजा जी

राजन रज्जो को खुलता देख कर - क्यू आपको भाईसाहब के पास नही जाना क्या हाहहहा

रज्जो सिप लेते हुए और नजरे राजन के हाथो पर रखे हुए बोली - वो तो सो गये है ,,उनसे कहा कुछ होगा हिहिही

राजन रज्जो की हरकतो पर बराबर नजर बनाये रखा था और जब उसने देखा कि रज्जो लगातार उसके हाथो की क्रिया को घूरे जा रही है तो उसने अच्छे से लण्ड को पकड कर जान्घिये के उपर से ऐसे सहलाना शुरु किया जिससे लण्ड की मोटाई लम्बाई रज्जो को अच्छे से दिखे ।

राजन की इस क्रिया से रज्जो सिहर उठी ।

रज्जो मुस्कुरा कर - लग रहा है आपकी तलब ज्यादा है ,,,तभी शादी के बाद से मेरी ननद रानी के तबले को बड़ा कर दिया हिहिही

राजन ममता का मजाक समझ गया और बोला - वैसे कसर तो भाई साहब ने भी नही छोड़ी है कोई हिहिहीहीही

रज्जो राजन की बातो से शरमा के मुस्कुराने लगती है ।

फिर वो अपना ग्लास खतम कर उठने लगती है ।

राजन - अरे क्या हुआ कहा जा रही हैं भाभी जी

रज्जो ने बाथरूम जाने के इशारे वाली ऊँगली दिखाई और मुस्कुराइ

राजन हस कर - हाहाहा ,,चलिये मै भी चलता हू ,,मै भी फ्रेश हो लूंगा

फिर राजन अपने पैग का ग्लास लेके रज्जो के पीछे पीछे चल देता है । रज्जो उपर की सीढि लेके जान बुझ कर अपने चुतड मटका कर चल रही थी और राजन बडे ध्यान से उसके गाड का दोलन निहार रहा

छत पे पहुचते ही बहुत हल्की चांदनी रात मे ठंडी हवा चल रही थी। हलका हल्का सा ही कुछ दिख रहा था ।

छत पर जाते ही अरगन पर पडी तौलिये को देखकर रज्जो बोली - हिहिही देखिये ,,यहा है तौलिया

राजन ने मुस्कुरा कर हा तो कहा, लेकिन वो जानता था कि ये उसका तौलिया नही है ।

वही रज्जो अपने कुल्हे हिलाते बाथरुम तक गयी और लाईट जलाकर बिना दरवाजा बंद किये जान बुझ कर वही बैठ गयी ।

राजन बाथरूम के बाहर ही खड़ा हो गया और थोडी ही देर मे रज्जो ने सुरीली धुन छेड़ दी । राजन मन मुग्ध हो गया और दरवाजे पर आकर एक बार अन्दर झाका तो रज्जो की फैली हुई गाड देख कर उसका लण्ड तन गया और वो अपना लण्ड जांघिये के उपर से मुठियाने लगा ।

रज्जो उठी और राजन फौरन हट गया ।

रज्जो बाहर आई - जाईये आप भी फ्रेश हो लिजिए

राजन ने अपना पैग रज्जो को थमाते हुए - इसे जरा पकड़ेगी भाभी मुझे नाड़ा खोलना पडेगा ना

रज्जो हस कर राजन का ग्लास ले लेती है और राजन मस्ती मे बाथरूम मे जाके नाड़ा खोलने के बजाय उसे कस देता है ।

दो तिन मिंट तक रज्जो कोई प्रतिक्रिया ना पाकर दरवाजे के पास आकर - जीजा जी सब ठीक है ना

राजन - हा वो जरा मेरा नाड़ा तंग हो गया है खुल नही रहा

रज्जो हस कर - मै मदद करू क्या

राजन की तो चान्दी हो गयी ।

राजन - हा अगर आपको एतराज ना हो तो ,

रज्जो फौरन बाथरूम मे आई ग्लास को राजन को देते हुए - ये पकड़ीये आप इसे मै खोलती हू ।

रज्जो झुक कर राजन के नाडे के गांठ को खोलने लगी मगर उसकी नजरे बराबर जान्घिये मे खडे लण्ड के तनाव पर बनी थी

यहा सच मे राजन का प्रेसर तेज था और वो खुद चाह रहा था किसी तरह नाड़ा खुल जाये । उसकी मस्ती अब उसपे ही भारी थी ।

रज्जो कुछ समय झुक रही तो उसके कमर मे दर्द होने लगा ,,इसिलिए वो एड़ियो के बल राजन के ठीक सामने बैठ गयी और गांठ खोलने लगी ।

राजन की लण्ड ने लीकेज शुरु कर दिया था ,,वो कभी भी अपना नियन्त्रण खो सकता था ।

राजन परेशान होकर कर - क्या हुआ भाभी ,,जल्दी करिये बहुत तेज उम्म्ंम्म्ं

रज्जो हड़ब्डा कर - हा हा बस खुल रहा है ,,लो खुल गया

रज्जो के इत्ना बोल के जांघिया निचे की ही थी और लण्ड अभी पूरी तरह से बाहर निकला ही नही था कि राजन के सबर का बान्ध फुट पड़ा, उसके सुपाडे से पेसाब की तेज धार जन्घिये को चिरते और छिटकारे मारते हुए रज्जो के गले और छातियो पर जाने लगी ।

रज्जो चिल्लाई - यीईई जिजाआआआ जीईई ये क्याह्ह्ह्ह

राजन को रज्जो की बात का ध्यान आया तो उसने निचे देखा और फौरन अपनी मुठ्ठि से सुपाड़े को दबा लिया,,जिससे पेसाब के छीटें और छिटके ,,,कुछ रज्जो के चेहरे पर बाकी राजन की बनियान और जान्घिये मे

राजन फौरन दुसरी ओर घुम गया और पेसाब की तेज धार छोड़ते हुए एक राहत ही सास ली

राजन ने पेसाब करके जांघिया को उपर किया और हल्का सिंगल गांठ ही दिया था ।

राजन रज्जो को देखकर जो अभी निचे ही बैथी हुई अपने सीने से पेसाब को हटाने की कोसिस कर रही थी ।

राजन - माफ कीजिएगा भाभी जी वो अन्जाने मे ,,मुझसे रोका नही गया ,,,हे भगवान ये क्या अनर्थ हो गया मुझसे ।

राजन रज्जो को पकड कर उठाते हुए - उठिए भाभी जी आप आईये

तभी रज्जो को उठाने के चक्कर मे राजन का जांघिया सरक जाता है और रज्जो खिलखिला पडती है ।

रज्जो - पहले खुद का समान सम्भालिये हिहिही

राजन फौरन अपना जांघिया उठा कर उसे अच्छे से बान्धता है ।

राजन - माफ कीजिएगा भाभी जी वो गलती से हो गया , आईये इधर मै धुला देता हू

रज्जो मुस्कुरा कर राजन को देख रही होती है । उसका ब्लाउज भी थोडा भीग गया था ।

राजन और रज्जो एक पानी भरे टब के पास आते है तो राजन मग से पानी निकाल कर रज्जो के सामने गिराता है जिसे रज्जो अपनी अंजुली मे भर कर गले और सीने को धोने की कोशिस करती है ।

वही राजन का लण्ड रज्जो की लटकी हुई चुचियो को देख कर टनटना गया था ।

राजन - मेरे ख्याल से आपको नहा लेना चाहिए भाभी जी

रज्जो एक नजर राजन के पेसाब से भिगे कपडे देख कर - नहाने की जरुरत तो आपको भी है हिहिहिही

राजन - हा सही कह रही है , ऐसे गंदगी लेके निचे जाना उचित नही है , मगर हमारे कपडे भी तो नही

रज्जो हस कर - अब भी आपको कपड़ो की पडी है हिहिहिही

राजन रज्जो की बात समझ गया ।

रज्जो ह्स कर - आप न्हायिये , मै तैलिया लेके आती हू

रज्जो बाथरुम से निकल गयी और राजन ने सोचा की अब क्या फर्क पडने वाला है इसिलिए वो फटाफट अपने सारे कपडे निकाल कर नंगा हुआ और टोटी चालू कर नहाने लगा ।

इतने मे रज्जो तौलिया लेके बाथरूम के दरवाजे तक गयी तो देखा कि राजन उसकी ओर पीठ करके नंगा खड़ा है और साबुन लगा रहा है ।

रज्जो मुस्कुराइ और राजन के नहा कर बाहर आने का इन्तेजार करने लगी ।

थोडी देर बाद राजन नहा कर दरवाजे की ओर घुमा था रज्जो उसकी ओर पिठ करके खड़ी थी ।

राजन दरवाजे का ओट लेके - हा भाभी तौलिया दीजिये

रज्जो मुस्कुरा कर उसे तौलिया दी और राजन उसे लपेट कर बाहर आ गया ।

राजन - आप नहा लिजिए भाभी ,,मै अभी बदन पोछ कर देता हू आपको

रज्जो मुस्कुराई और बाथरूम मे घुसकर दरवाज बंद कर लिया ,,,राजन की उम्मीदो पर पानी फिर गया मानो ,,,

वही एक तरफ जहा उपर खुले छत पर नंदोई सलहज का ये कामुक ड्रामा हो रहा था वही पल्लवि और सोनल के साथ सोयी ममता अपने भैया को लेके बहुत ही बेचैन थी ।

और उसे नीद नही आ रही थी कि उसके भैया बिना खाये सो गये है । ममता गाव से जुडी थी और खुद खेती करती थी तो उसे बिल्कुल नही पसंद था कि शराब या गलत आदतो की वजह से अनाज का अनादर करे और फिर उसके भैया भुखे सोये ये उसे रास नही आ रहा था ।

इसिलिए उसने ठाना कि उसे एक बार फिर अपने भैया के पास जाना चाहिए खाना लेके ।

एक नयी उम्मीद के साथ किचन मे गयी और एक थाली मे खाना निकाल के एक जग पानी लेके उपर कमरे की ओर गयी ।

ममता ने नजर अपने कमरे की ओर मारी तो उसे राजन और रज्जो का ख्याल आया कि वो लोग भी आज दारु पी रहे होंगे ।

इसिलिए मुह बिच्का कर ममता सीधा खाना लेके अपने भैया कमलनाथ के कमरे मे गयी ।

उसने कमलनाथ पर बिना ध्यान दिये सामने की टेबल पर खाना रखा और अपने भैया के बगल मे बैठते हुए बडे प्यार से कमलनाथ को पुचकारा

ममता - भैया उठो ,,, भईआआ ऊ

ममता की आवाज रुक गयी ,,उसकी सांसे तेज होने लगी , क्योकि उसकी नजरे इस वक़्त उसके भैया के पैजामे से बाहर निकले लण्ड पर थी । जिसे वो आंखे फाडे देखे जा रही थी ।

जारी रहेगी

आप सभी की प्रतिक्रयाओ का इंतजार रहेगा


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