Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 24 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

इसिलिए मै pics और gif नही डालता हू

किसी को पसंद ही नही आते :lol:
 
अगले अपडेट के लिए कौन कौन तैयार है

हाजिरी लग्वाओ भाई
 
अपडेट 140


पिछले अपडेट मे आपने पढ़ा कि एक ओर जहा जंगीलाल की हालत बहुत ही खराब थी । उसकी असमंजसता ने उसे चिंता मे डाल दिया था वही रंगीलाल अपनी समधन से भेट मुलाकात कर आया था ।

अब आगे



राज की जुबानी


रात को 8 बजे तक मै दुकान बढा कर चौराहे वाले घर पहुचा तो देखा हाल मे मा पापा बैठे हुए थे और मा किसी से फोन पर बाते कर रही थी ।

किचन मे सोनल खाना बना रही थी ।

मै भी फ्रेश होकर हाल मे बैठ गया तो पता चला कि मा , सोनल की होने वाली सास ममता से बाते कर रही थी ।

फिर मा ने फोन रख दिया और हमने थोडी बहुत चर्चा की । बातो ही बातो मे पापा ने बताया कि आज सोनल की सास ने उनसे कहा था कि अमन के चचा बडे शहर जेवर का ऑर्डर देने गये हैं ।

पापा - रागिनी अब हमे भी तैयारियाँ शुरु कर देनी चाहिए । थोडा थोडा करके खरीदारी कर ले और कार्ड छपने भी तो 15 दिन लग जायेंगे ।

मा - हा जी इस बार थोडा पूजा पाठ भी तो होना है ना । याद है गृह प्रवेश मे ज्यादा कुछ हो नही पाया था ।

पापा - हा सोच रहा हू शादी से दो दिन पहले एक पाठ करवा लू भगवान जी का और ये भी कार्ड मे छपवा दूँगा । घर मे मेहमान पहले आयेंगे तो थोडी कामकाज मे राहत रहेगी ।

मा - हा ये सही रहेगा । आप पंडित जी मिल कर शादी के आस पास का समय देख लिजिए और पूजा की लिस्ट बनवा लिजिएगा । पिछ्ली बार भूल गये थे ।

मा की बात पर मै खिखी करके हस दिया ।

मा मुझे डांटते हुए - तु क्या दाँत दिखा रहा है । कल तु भी कार्ड वाले यहा से कुछ डिज़ाइन लेते आ दिखाने के लिए

मै - हा मा हो जायेगा , आप परेशान ना हो । मै और पापा मिल कर सब कर लेंगे । क्यू पापा ?

पापा - हा रागिनी । राज सही कह रहा है ।

मै - मा आप भी सामानो की पर्ची बनाना शुरु कर दीजिये । जो कुछ लाना होगा मै लेते आऊंगा ।

मा - वो तो पहले ही बना चुकी हू और रज्जो दीदी से भी पूछा था शादी के तैयारियो के बारे मे । वो कह रही थी कि तु चिंता ना कर मै एक हफते पहले ही आ जाऊंगी ।

पापा की आंखे चमकी - क्या सच मे रज्जो दीदी एक हफते पहले ही आयेंगी

मा समझ गयी कि पापा का उतावलापन,,तो तुनक कर धीमी आवाज मे बोली - हा लेकिन आप जरा खुद पे संयम रखियेगा । शादी व्याह का दिन रहेगा और वो अकेली थोडी आयेगी ।

पापा - फिर ?

मा मुस्कुरा कर - जीजा उसे और रमन की पतोह दोनो को छोड कर जायेंगे

अब चहकने की बारी मेरी थी - क्या सच मे रीना भाभी भी आ रही है ।

मा - हा मैने जिद की तब रज्जो दीदी हा बोली ।

मै खुश था कि घर मे एक और ताजा माल आने वाला है लेकिन ये सब अभी बहुत दुर था करीब दो महीने का समय ।

हमारी बाते चल रही थी कि मुझे अनुज की सुझी - मा ये अनुज कहा है

मा - अभी तो था निचे ही अब पता नही कहा गया ।

मै किचन मे दीदी को आवाज देकर - दीदी अनुज कहा है ?

सोनल - अरे वो मेरे मोबाइल मे फिल्म देख रहा है ।

मै हस पडा और समझ गया कि वो क्या देख रहा होगा ।

एक पल को मुझे लगा कही अनुज वो वाली साइट खोले ही मोबाइल सोनल को वाप्स कर दिया तो । फिर मुझे ध्यान आया कि नही सोनल तो नोर्मल ब्राऊजर यूज़ करती है ।

मैने सोचा क्यू ना अनुज को भी छोटा मोबाइल दिला ही दू और उसका जन्मदिन भी अगले महीने था । हालाकी हमारे यहा केक काट कर पार्टी देने वाला रिवाज नही था । मा को ये सब पसंद नही था । हा लेकिन सबको कपडे या कोई तोहफा पापा जरुर देते थे । नही तो पॉकेट मनी ही मिल जाती थी ।

मै- पापा मै सोच रहा था कि अनुज को भी एक मोबाइल दे दिया जाये

मा थोडा खिझी - अब उसे क्या जरुरत है मोबाइल की । अभी तो उसने 10वी भी पास नही की ।

पापा मा की बात से सहमत होते हुए - हा बेटा तेरी मा ठिक कह रही है , अभी उसकी उम्र ही क्या है । उसे पढने पर ध्यान देना चाहिये

मै कुछ सोच कर - हा पापा लेकिन अब मेरे जैसा समय तो है नही , उसके साथ के सभी बच्चे लेके चलते है मोबाइल । फिर उसकी पढाई मे मदद हो जायेगी वो होनहार लड़का है और आगे शादी मे इतने सारे काम रहेन्गे किसको कहा कोई खोजेगा

पापा - देख बेटा मेरी सिख गांठ बान्ध ले , दुसरे का देख कर अपना रास्ता तय नही करते । बात अगर पढाई कि है तो मै उसे लैपटाप दिला देता हू

मा भी खुश होकर - हा ये ठिक रहेगा । उसका जन्मदिन भी आ रहा है ।

पापा - और रही बात शादी मे कामो के लिए तो उस समय मे एक टेम्पोररी फोन उसे दे दूँगा ।

पापा की बातो से मै भी प्रभावित हुआ कि वो कितने समझदार है और हर पहलू पर अच्छा सोच लेते है ।

मै खुश हुआ - हा पापा आप सही कह रहे हो

मै मन मे - हा इससे उसकी हरकते लिमिट मे रहेगी । नही तो गलती से भी सोनल को भनक तक लगी अनुज के बारे मे वो निशा के जैसे व्यवहार नही करेगी । सीधा पीट देगी ।

फिर हमारी बाते चली और थोडे समय बाद हम लोग खाना खा कर अपने अपने कमरो मे चले गये ।

आज रात मैने और पापा ने मा की जबरजस्त चुदाई की और सो गये ।





लेखक की जुबानी



राज के यहा तो सब सो गये लेकिन निशा के यहा दो लोगो की रात आज लम्बी होने वाली थी ।

रात के खाने के बाद सभी अपने कमरे चले गये और निशा थोडे समय बाद राहुल के पास चली गयी । उनकी काम क्रीड़ा जारी रही ।

वही दुसरे कमरे मे शालिनी रोज की तरह अपने गहने उतार कर जिस्म ढिला कर रही थी । वो जानती थी कि बिना चुदाई किये जंगीलाल को नीद नही आती थी और उसे भी इसकी आदत थी ।

इधर जंगीलाल बिस्तर टेक लगाकर फुल बनियान और जन्घिया पहने जान्घे खोल कर बैठा हुआ । फर्श निहार रहा था । उस्के जहन मे द्वंद चल रहा था । मन के एक ओर वो शालिनी से सब कुछ पहले जैसे छिपाये रखना चाहता था और दुसरी ओर उसका मन उसे शालिनी को सब सच बताने को सही समझ रहा था । वो डर भी रहा था कि आगे क्या होगा । शालिनी क्या प्रतिक्रिया देगी ।

शालिनी इस समय अपनी साडी निकाल रही थी और उसने बिना ब्लाउज खोले ही बडी तरकिब से ब्रा निकाल दिया । वो समझ रही थी कि पीछे से उसका पति उसे निहार रहा होगा और अभी रोज की तरह उसे अपनी बाहो मे भर लेगा ।

ऐसा नही था कि शालिनी को सेक्स पसन्द न्ही था लेकिन जिस तरह जंगीलाल डिमांड करता था वो उस तरह का सेक्स नही चाहती थी । वो बहुत ही रोमांटिक तरीके से पसंद करती थी सब धिरे धिरे और लम्बे समय तक चले ।

शालिनी ने जब मह्सूस किया कि जन्गिलाल अभी तक उसके पास नही आया तो उसने नजर उठा कर सामने आईने मे देखा कि वो बिस्तर पर पैर फैला कर बैठा हूआ कुछ सोच रहा है ।

शालिनी समझ गयी कुछ गम्भीर बात है नहीं तो ऐसे मौके पर उसका पति हमेशा उससे चिपका ही रहता है ।

शालिनी घूमी और जंगीलाल के पास उसके बगल मे सामने से बैठते हुए उसके पाव को हिला कर - क्या सोच रहे है जी आप

जंगीलाल चौक कर - न न नही कुछ तो नही

शालिनी मुस्कुरा कर - आपको तो झूठ बोलना भी नही आता । आंखे लाल हो रही है और भरी हुई है

जंगीलाल जान गया कि शालिनी ने भाप लिया है कि वो कुछ सोच रहा है । इसिलिए उसने आंखे बंद करके एक गहरी सास ली तो उसकी भरी हुई आंखे नम सी हो गयी ।

शालिनी की चिंता बढ गयी कि क्या बात है ।

शालिनी - अरे क्या हुआ बताईये

जंगीलाल शालिनी के हाथ पकड कर - वो मुझे तुम्हे कुछ बताना है

शालिनी का कलेजा धक धक कर रहा था कि आखीर क्या बात है । कही इनको कोई बिमारी तो नही है ना । नही नही भगवान ऐसा ना करना ।

शालिनी कापते हुए - क क्क्या बोलो जी । मेरा जी घबरा रहा है । आप बोलो ना

जन्गीलाल अटकते हुर स्वर मे - पहले वादा करो कि तुम मुझसे नाराज नही होगी और मुझे छोड कर नही जाओगे । मेरी मजबूरी सम्झोगी ।

शालिनी चौकी - मजबुरी !! कैसी मजबूरी ??

जंगीलाल - पहले तुम हमारी लाडो का कसम खाओ कि तुम मेरे लिए अपना व्यवहार नही बदलोगि ।

शालिनी असमंजस मे थी - हा हा ठिक है कहिये

जंगीलाल नजरे नीची करके - जानती हो शालिनी मे महीने दो महिने पर बडे शहर क्यू जाता हू

शालिनी के मन में शंका घिर रही थी कि कही कोई सौत का चक्कर तो नही - क्क्क्यू बताओ ना ,,आप बात लम्बी क्यू कर रहे हो । मुझे चिंता हो रही है ।

जंगीलाल - हा बताता हू सुनो । वो मै बडे शहर अपनी सेक्स की भड़ास निकालने जाता हू । वो सेक्स जो तुम मुझे नही देती हो ।

शालिनी का कलेजा धक करके रह गया और वो चुप सी हो गयी । उसके हाथ जन्गिलाल के तन से दुर होने लगे ।

शलिनि का स्पर्श कम होता मह्सूस कर जंगीलाल को लगा कि जैसे वो खुद उससे दुर जा रही थी । इसिलिए घबरा कर वो शालिनी के हाथ थाम लेता है और उदास मन से - मुझे माफ कर दो शालिनी । मै मजबुर था और जब व्हा सेक्स कर लेता खुद को सजा ही देता था । हमेशा कोसता रहता था ।

शालिनी की आंखे भर आई थी इसिलिए नही कि उसके पति ने कुछ गलत किया बल्कि इसलिए कि उसके रोकटोक से उसका पति बहक गया । अगर वो चाहती तो जन्गिलाल सिर्फ़ उसका ही रहता ।

जंगीलाल ने जब शालिनी का रुआस चेहरा देखा तो वो भी आसू बहाते हुए - तु काहे आसू बहा रही है । गलती मेरी है तु मुझे सजा दे । लेकिन मुझसे बाते कर रूठना मत

ये कह कर जंगीलाल शालिनी के हाथ पकड कर अपने चेहरे पर चाटे मारने लगा और फफक पडा ।

शालिनी ने चौक कर अपना हाथ खिच लिया और जंगीलाल को अपने सीने से लगा लिया ।

शालिनी - मुझे माफ कर दीजिये । मेरी वजह से आपको इनसब रास्तो चुनना पडा । मै अभागिन किस काम की जब पति को खुश नही रख सकती ।

शालिनी ने रुआसे ही अपने होठ अपने पति से जोड लिये ताकी उसे हिम्मत मिले कि वो उससे नाराज नही है और ना ही उससे दुर जायेगी ।

जंगीलाल ने उसे अपनी बाहो मे भर लिया । शालिनी का ब्लाऊज जन्गिलाल के आसुओ और पसीने से भीग गया था ।

शालिनी जंगीलाल की बाहो मे लिपटी हुई उस पल को याद करती है जब शादी के कुछ साल बाद पहली और आखिरी बार शालिनी ने अपने पति को उसके हिसाब से सब कुछ करने की छुट दी । उसी दिन तो जंगीलाल ने उसकी गाड को खोला था ।

वो पल सोच कर वो मुस्कुरा देती है हालकि उस दिन उसने भी बहुत मजा किया था लेकिन उसका फोकस शुरु से ही अपने जिस्मो को सवारने मे था और उस रात जो हुआ उसने शालिनी को काफी निराश भी किया था ।

शालिनी जंगीलाल के कन्धे पर सर रखे हुए - जानू सुनो ना

जन्गीलाल शालिनी की मीठी आवाज सुन कर उसे अपनी बाहो मे कसते हुए - हा मेरी स्वीटू कहो ना

शालीनी शर्माते हुए - वो मै कह रही थी कि बच्चे अब बडे हो गये हैं और आपको याद है ना उस रात मै कितना चिल्लाई थी ।

जन्गीलाल की भौहे खिल गयी , दिल मचल उठा और लण्ड एक ही बार मे तन कर फौलादी हो गया क्योकि इशारो मे ही शालिनी ने उसकी बात मान ली थी । वो उसके मन चाहे सेक्स के लिए तैयार हो गयी थी ।

जंगीलाल शालिनी के होठ चुस्कर - रोज रोज नही मेरी जान बस हफते मे एक बार

शालिनी जंगीलाल के खडे लण्ड को बडी अदा से हाथो ने भरती हुई नशीली आँखो से उसे देखती है । जन्गीलाल का शरीर कापने लगा था ।

शालिनी अपने हाथ से अपने पति के आड़ो को मुथ्ठी मे भरते हुए अपने चुचो के उभार पर ब्लाऊज के उपर से हाथ फिराते हुए बोली - अपनी रन्डी को हफते मे सिर्फ़ एक ही बार चोदोगे मेरे राजा उम्म्ं बोलो

जंगीलाल शालिनी की हरकत से पूरी तरह गनगना और जोश से भर गया । उस्का लण्ड और भी कसने लगा था । ये वो शब्द थे जिन्हे आखिरी बार उसी रात को जंगीलाल ने शालिनी को कहा था और गालिया दे देकर उसकी जबरदस्त चुदाई की थी । सेक्स के दौरान तो शालिनी ने मदहोशि मे उसका साथ दे दिया था लेकिन अगली सुबह से कुछ दिनो तक वो जंगीलाल के उस व्यवहार से वो खफा थी और खुद को भी उस चीज़ के लिए कोस रही थी । क्योकि उस रात जन्गीलाल बेबाक होकर शालिनी को गालिया देकर उसकी चुदाई की थी और शालिनी ने भी उस रात अपने पति के नये जोश का भरपूर मजा लिया था । मगर जब होश मे आने के बाद उन गालियो का तर्क करने लगी तो उसे बहुत दुख हुआ । तबसे शालिनी ने जंगीलाल से समान्य सेक्स करने की शर्त रख दी थी और अपने प्रेमी जोड़े का महत्व समझाते हुए जंगीलाल को मना भी लिया था ।

जंगीलाल को उम्मिद नही थी कि शालिनी खुद से पहल करेगी ।

जन्गीलाल जोश मे आकर उसे अपने करीब खिच कर उसके चुची को सामने से पकड कर उसके होठ चूसने लगता है ।दोनो एक गहरे चुंबन मे खो जाते है ।

जंगीलाल शालिनी से अलग होकर उसे घुमाते हुए उसे पीछे से पकड लेता है और ब्लाउज के उपर से ही उसकी मोटी कसी हुई गोल गोल चुचो को मिजने लगता है ।

शालिनी कसमसाते हुए खुद को जन्गिलाल के जिस्म पर घिसने लगती है ।

शालिनी - ओह्ह्ह आराम से मेरे राजा उम्म्ंम्म्ं तुम्हारी चुद्क्क्ड रानी कही जायेगी नही ।

जंगीलाल शालिनी के मुह से गंदे और मनचाहे शब्दो को सुन कर और जोश मे आ जाता है और ब्लाउज का गला उपर से पकड कर जोर से खिच कर सारे हुक चटका देता है ।

शालिनी के कांख के पास मे थोडी चमडी खिचने उसे दर्द होता है लेकिन वो अपने पति के लिए सह जाती है और जन्गिलाल उसके नंगे चुचो को पीछे से हाथो मे भर लेता है ।

जंगीलाल - ओह्ह मेरी जान क्या मस्त चुचे है तेरे उम्म्ंम्ं जी कर रहा है नोच लू अह्ह्ह

शालिनी कसमसा कर - उह्ह्ह तो नोच लो ना मेरे राजा अह्ह्ह उम्म्ंम्ं जैसे चाहो प्यार करो मुझे उम्म्ंम्ं

जन्गीलाल शालिनी के कंधो को चुमता हुआ उसके चुचे हाथो मे भर कर मसल रहा था ।

शालिनी उसे और भी उत्तेजित किये जा रही थी - उम्म्ंम्ं मेरे राजा और कस के मसलो ना मेरे चुचो को उम्म्ंम्ं अह्ह्ह ऐसे ही । बना लो मुझे अपनी रन्डी बीवी अह्ह्ह मेरी जान उम्म्ंम्म्ं आह्ह

जन्गीलाल का लण्ड शालिनी कामोत्तेजक शब्दो को सुन कर फड़फडा रहा था ।

उसने शालिनी को खड़ा किया और खुद पैर लटका कर बैठ गया । फिर शालिनी की कमर को बाये हाथ मे थाम कर एक ओर किया और झुक कर उसकी नंगी चुचियो पर टुट पडा ।

वो शालिनी की एक चुची मुह से चुस रहा था तो दूसरी को दाये हाथ से मसल रहा था ।

शालिनी अपने पति का सर उत्तेजना वश अपने चुची पर दबा रही थी जिससे जन्गिलाल और भी उत्तेजित होकर उसका निप्प्ल खिचने लगा ।

शालिनी की गोरी मखमल सी चुचिया चुसाई और रग्डाई से लाल होने लगी थी ।

जंगीलाल ने उसे आजाद किया और निचे जाने का इशारा किया ।

शालिनी मुस्कुरा कर उसके होठो को चुसा और फिर घुटने के बल होकर अपने पति का फौलादी लण्ड जांघिया खोल कर निकालने लगी ।

रोज के मुकाबले जन्गीलाल का लण्ड फुला हुआ था और सुपाडा लाल हुआ जा रहा था ।

शालिनी ने मुह खोलते हुए लण्ड को मुह मे आधा भर लिया और आंखे उठाकर जन्गीलाल के जांघो को सह्लाती हुई लण्ड चूसने लगी

जंगीलाल जोश से भर गया और उसे अपनी बीवी किसी रन्डी से कम नही लग रही थी । लेकिन अभी भी वो अपने जज्बातो को काबू मे किये हुआ था ।

शालिनी थोडी देर मे लण्ड चुसकर जंगीलाल के सामने खड़ी हुई और अपना पेटीकोट खोल कर पूरी नंगी हो गयी ।

और मुस्कुराते हुए जंगीलाल को बिस्तर पर धकेल दिया

जंगीलाल समझ गया कि आज शालिनी खुद उपर आयेगी तो उसने पैर सीधे कर लिये ।

शालिनी बिस्तर पर चढ़ कर अपने पति के कमर के दोनो ओर घुटने के बल हो गयी और उसका लण्ड थाम कर अपनी चुत पर टच करने लगी ।

जन्गिलाल सिहर कर रह गया और देखते ही देखते शालिनी ने बडी कामुकता से अपने पति का गिला मोटा लण्ड अपनी चुत मे ले लिया और बैठ गयी ।

जन्गीलाल आंखे बन्द करके शालिनी के मादक कमर हिलाने की अदा का मजा अपने लण्ड पर मह्सुस कर रहा था ।

शालिनी ने इतना सब के बाद भी जंगीलाल ने एक भी बार उसे गंदे शब्दो से नही पुचकारा ।

शालिनी मुस्कुरा वैसे ही लण्ड को अपनी चुत मे भरे अपने पति के उपर झुक गयी और उसके चुचे जन्गिलाल के मुह के पास झूलने लगे ।

जंगीलाल ने आंखे खोली और हाथ बढा कर चुचो को थाम लिया ।

शालिनी मुस्कुरा कर अपनी कमर आगे पीछे करके लण्ड को अपनी चुत मे घिस रही थी - क्यू मेरे राजा मजा नही आ रहा है क्या हम्म्म

जंगीलाल सिस्क कर - आआह आ रहाआ है जान उम्म्ंम

शालिनी - तो बोलो ना

जंगीलाल -उम्म्ंम सीई क्याअह्ह मेरी जान

शालिनी थोडा गति बढा कर अपने पति के लण्ड पर हुमचने लगी जिससे जन्गिलाल का नशा और भी गहराने लगा ।

शालिनी शब्दो को पीसते हुए - अपनी रन्डी को पेलोगे नही उम्म्ंम अह्ह्ह पेलो ना मुझे मेरे राजा

जंगीलाल शालिनी की सिसकिया सुन कर उत्तेजित हुआ और अपने हाथ उसके दोनो कूल्हो पर ले जाकर पैरो को फ़ोल्ड कर लिया । फिर शालिनी की गाड़ को पकड कर हल्का हल्का निचे से अपनी गाड़ उचका कर पेलने लगा ।

जन्गीलाल - कैसे पेलू मेरी जान उम्म्ंम देखो निचे से पेल रहा हू ,देखो ना ,,,ये देखो अह्ह्ह

जंगीलाल निचे से झटके तेज करता हुआ बोला

शालिनी उसी अवस्था मे झुकी हुई अपने पति के धक्के खाती हुई - अपनी रन्डी बीवी बना के चोदो ना ,खुब हचक के सीईई अह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं

जन्गीलाल जोश मे आ गया और कस कस के चोदने लगा । वो अपनी कमर उठाकर तेजी से ध्क्के मारते हुए - ले साली रन्डी आज ऐसा चोदूंगाअह्ह्ह की याद करेगी उह्ह्ह्ह ले मादरचोद सीई अह्ज्ज साली चुद्क्क्ड ले

जंगीलाल शालिनी को गालिया देते हुए तेजी से चोद रहा था । कमरे मे काफी सालो बाद थपथप की तेज आवाज आ रही थी । शालिनी की सिस्किया हल्क मे रुक गयी थी ।

थोडी देर निचे से धक्का लगाने के बाद जन्गीलाल वैसे ही शालिनी को लण्ड पर बिठाये उठा और उसे सामने लिटा कर खुद उसके उपर आ गया ।

शालिनी - ओह्ह मेरे राजा उम्म्ंम चोदो ना मुझे उम्म्ंम सीईई अह्ह्ह ऐसे ही फाडो मेरी चुत आह्ह रहम मत करो उन्म्म्ं चोदो अपनी रन्डी बिवी को उम्म्ंम

जन्गीलाल शालिनी की जान्घे खोले घपाघ्प लण्ड उसकी चुत की गहराइयो मे ले जा रहा था और पेल रहा था - हा मेरी जान आज तेरी चुत फ़ाड कर भोसडा बना दूँगा उम्म्ं साली रन्डी मादरचोद लेह्ह मेरा लण्ड अपनी बुर मे लेहहह

शालिनी - आह्ह हा भर दो मेरी चुत को मेरे राजाआह्ह

शालिनी - आपको अच्छा लगता है ना ऐसे ही मुझे गन्द गन्दा बोल कर चोदना उम्म्ंं

जन्गीलाल - हा मेरी जान ,,कितने सालो से तुझे ऐसे ही रन्डी के जैसे चोदना चाह रहा था । अह्ह्ह साली मादरचोद उम्म्ंम्ं मस्त भोस्डा है तेरा अह्ह्ह

शालिनी - उम्म्ं तो और गाली दो ना मुझे बहिनचोद नही कहोगे उम्म्ं सिर्फ मादरचोद ही कहोगे उम्म्ंम

जन्गीलाल और भी जोश मे आगय - आह्ह कयू नही , साली बहिनचोद एक नम्बर की अह्ह्ह

शालिनी अपने चुत के छल्ले को जन्गीलाल के लण्ड पर कसने लगी और निचोडते हुए - क्या हू मै मेरे राजा , क्या एक नम्बर की .....।

जन्गीलाल जोर लगा कर आखिरी कुछ धक्के शालिनी के चुत मे पेलता हुआ - साली तु एक नम्बर की चुदक्क्ड है बहिनचोद उम्म्म्ं ले साली आज तेरी बुर भर दूँगा अपने बिज से अह्ह्ह मादरचोद उम्म्ं ले मेरी रन्डी हहह लेह्ह्ह बहिनचोद साली अह्ह्ह्ह जान उम्म्ंम्ं

शालिनी - अह्ह्ह हा मेरे राजा भर दो अपनी जान का भोसडा उम्म्ं अह्ह्ह माआ ओह्ह्ह

जन्गीलाल झड़ कर शालिनी के उपर ढह गया और शालिनी ने उसे अपने से चिपका लिया

थोडी देर शान्ति रही और दोनो एक दुसरे से चिपके हुए लेटे रहे कि तभी शालिनी ने जंगीलाल से कुछ ऐसा पुछा कि उसकी धडकनें फिर से तेज हो गयी।

आखिर क्या था वो सवाल ? जिससे जंगीलाल वापस से परेशान हो गया है ।

परेशानिया जो भी लेकिन एक बात तो क्लियर है कि इसके बाद दोनो पति-पत्नी का जीवन मे बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है ।

तो मै DREAMBOY फिल्हाल आपसे विदा चाहूँगा ।जल्द ही मिलते है अगले अपडेट

पढते रहिये हिलाते रहिये ।
 
आज अपडेट नही मिलेगा :listen:

कल तक उम्मीद है :dontknow:
 
अपडेट 141 कुछ ही देर मे आ रहा है

कौन कौन जाग रहा है
 
अपडेट 141


पिछले अपडेट मे आप सभी ने पढा कि एक ओर जहा सोनल की शादियो की तैयारियो पर आये दिन राज के यहा लम्बी चर्चाये हो रही है । वही जंगीलाल के सालो से अधूरे सपने को उसकी बीवी शालिनी ने कल हकिकत कर दिखाया । मगर बात कुछ आगे भी बढ गई है । देखते है क्या होता है ।



लेखक की जुबानी


जन्गीलाल और शालिनी दो एक दमदार चुदाई से संतुष्ट होकर एक दुसरे से चिपके सोये हुए थे । ऐसे मे शालिनी के दिमाग मे एक सवाल उठा ।

शालिनी - ये जी सुनिये ना , वो मै एक बात पूछू

जंगीलाल - हा कहो ना मेरी जान

शालिनी - वो आप शहर कब से जा रहे है ?

जन्गीलाल थोडा हल्का मन लेके बोला - वो पिछले साल जब तुम राखि पर 2 हफ्तो के लिए मायके गयी थी । तभी लेकिन बस 4 या 5 बार ही गया हू ।

शालिनी मुस्कुरायी - अरे मै वो नही पुछ रही

जंगीलाल - तो ??

शालिनी - मुझे समझ नही आ रहा है कि हर बार तो आप शहर चले जाते थे लेकिन इस बार कैन्सिल क्यू कर दिये ।

शालिनी के सवाल सुन कर जंगीलाल के धडकनें तेज हो गयी और उसे पसीना होने लगा । क्योकि वो कैसे इस बात कारण बता सकता था । कि उसने अपनी लाडो निशा के लिए ये फैसला किया था ।

शालिनी जो जन्गिलाल के सीने से लिपटी हुई थी उसे अपने पति के तेज धड़कन से आभास हो गया कि मामला गम्भीर है ।

शालिनी नजरे उठा कर - क्या हुआ जी बोलिए । देखिये आपको लाडो की कसम है ।

शालिनी जानती थी कि उसका पति निशा को बहुत मानता है क्योकि वो उन दोनो के प्यार की पहली निशानी थी और जंगीलाल चाह कर भी अब कतरा नही सकता था ।

जंगीलाल निशा की कसम से थोडा सा उदास हो गया और नजरे उठाए छत को निहार रहा था ।

शालिनी मुस्कुरा कर - क्या हुआ बोलिए ना

जंगीलाल - वो दरअसल इधर हाल के दिनो मे तुम मुझसे थोडा दुर रह रही थी ना

शालिनी चहक कर - अरे मै कहा गयी थी , मैने तो रोज आपके पास होती हू ना हिहिहिही

जन्गीलाल मुस्करा कर - वो नही । वो इस हफते ह्मारे बीच ज्यादा चुदाइ नही हुई थी तो मै बहुत परेशान रहने लगा । शहर गये भी महीने भर से उपर हो गये थे और तुम मेरे हिसाब से सेक्स के लिए तैयार नही होती थी ।

शालिनी बडे ध्यान से उसकी बाते सुन रही थी - हम्म्म फिर

जंगीलाल - मुझे सन्तुष्टि नही पा रही थी तो मै दुकान मे औरतो के जिस्मो को निहारा कर उत्तेजित हो जाता था और मेरी हवस मुझ पर हावी होने लगी थी ।

शालिनी - फिर

जंगीलाल - फिर उस रात जब तुमने लाडो के अन्दर के कपड़ो के बारे मे मुझसे बात की तो .... ।

शालिनी का कलेजा भी अब धकधक करने लगा - तो फिर ,,,, बोलिए ना

जंगीलाल - देखो मुझे गलत मत समझना मेरी जान । मैने भरसक खुद पर बहुत नियंत्रण किया था मगर ...।

शालिनी परेशान होकर - ये क्या बोल रहे है आप ,,खुल कर बताईये ना और इसमे लाडो कहा से आ गयी ।

जंगीलाल - वो जब उस रात हम दोनो लाडो के अन्दर के कपड़ो और उसके स्तनो की बाते कर रहे थे और तुमने बताया कि लाडो इस समय घर मे बिना ब्रा और अंडरगार्मेंट्स के रहती है तो ना जाने क्यू मेरे मन मे ये लालसा हुई और अगले दिन मैने भी उसके टीशर्ट मे उभरे हुए निप्प्ल देखे ।

शालिनी की दिल की धडकनें तेज हो गयी थी और उसका दिमाग खाली सा हो चुका था ।

जंगीलाल एक एक बारी बारी वो सारी घटनाए बतायी जिससे वो निशा की ओर आकर्षित हुआ ।

जन्गीलाल - लेकिन कल रात मे खाने के समय जो हुआ बस वही एक वजह थी कि मैने तय किया अब सब कुछ तुम्हे सच सच बता दू । नही तो कही गलती मे या बेहोशी मे मेरी लाडो के जीवन ना खराब हो जाये ।

शालिनी थुक गटकते हुए - कल रात खाने के समय क्या हुआ था

जन्गीलाल - वो कल रात मे जब लाडो मुझे खाना परोस कर किचन मे वापस जा रही थी तो उसका नया वाला जो घाघरा है उसमे उसके नितंब साफ दिखे मुझे और ये भी आभास हुआ कि उसने अन्दर कच्छी नही पहनी है और तभी मेरे जहन मे एक तस्वीर सी छप गयी

अपने पति की बाते सुन कर शालिनी चुत भी रिसने लगी थी । शालिनी अटक कर - क्क्या मतल्ब कैसी तस्वीर

जंगीलाल झिझक कर - वो मै उसे चोद रहा था ऐसी तस्वीर थी ।

शालिनी का कलेजा धक्क करके रह गया और वो जंगीलाल से अलग होकर सीधी लेट गयी । उसकी चुचिया तेजी से उपर निचे हो रही थी ।

जन्गीलाल सफाई देता हुआ - मुझे लगा कि शायद ये सब मुझे सेक्स ना मिलने की वजह से हुआ होगा । लेकिन आज सुबह जब मै नहाने गया तो बाथरूम मे लाडो की कच्छी देखी तो एक पल को फिर से जहन मे वही रात वाली तस्वीर छा गयी । तो मैने खुद को धिक्कारा और तय किया कि सब तुमको बता दूँगा ।

शालिनी का सर फटा जा रहा था । उसके दिल की धडकनें तेज हो रही थी ।

जंगीलाल लगातर शालिनी से माफी मांग रहा था और अपनी सफाइ दे रहा था ।

मगर शालिनी के जहन मे फिलहाल कोई और ही बात घूम रही थी , वो अभी खुद को अपने पति के हिसाब से तौल रही थी । क्योकि जाने अन्जाने मे वो भी अपने भतीजे राज के साथ चुद गयी थी और उसका कारण राज का मोटा लण्ड ही था । वो भी तो राज की ओर आकर्षित हुई थी तो अगर उसके पति निशा के लिए आकर्षित हो गये तो इसने उनकी कोई गलती नही । जो कुछ हुआ वो बस सन्योग और थोडी निशा की लापरवाही से हुआ ।

जंगीलाल - क्या हुआ जान कुछ बोलो ना ।

शालिनी चौकी - अह हा क्या । कहिये

जंगीलाल - मैने तो सब सच बता दिया और देखो मेरे मन लाडो के लिए कोई वैसी भावना नही वो मै बस अपने की कमजोरीयो के च्लते बहक रहा था ।

शालिनी - हा जी मै समझ रही हू । मैने ही उसे थोडी छुट दे रखी है अब कल इसको अच्छे से समझाती हु

जन्गिलाल - अरे नही जान इसमे लाडो की क्या गलती है , वो तो बस आरामदायक कपडे पहने हुए थी ।

शालिनी - अरे आप नही जान रहे है उसका मन बहुत बढ गया है । मैने उससे एक दिन ये क्या कह दिया कि तु बडी हो गयी है तो मुझे अपनी दोस्त समझा कर । तब से मुझे चिढाती रहती है कि जब उसकी सहेली हू तो आप उसके जीजू हो गये

जन्गीलाल शालिनी की बात कर ठहाका लेके हस पड़ता है - हाहहहा ये लाडो भी ना

शालिनी भी हस ही देती है आखिर - और तो और आज दोपहर मे उसने हमे साथ खाना खाते देख लिया था तो कहने लगी " मुझे नही पता था कि जीजू इतने रोमांटिक है "

शालिनी जिस अदा से इतरा कर निशा की कापी कर रही थी जंगीलाल अपनी हसी रोक नही पा रहा था ।

शालिनी भी हस्ते हुए गुस्सा कर - कल उसे अच्छे डाट ल्गाउन्गी थोडा तब सुधरेगि हुउह

जन्गीलाल - नही जान तुम भी ना । अरे साल दो साल ही तो है वो हमारे साथ उसे खुश रहने दो । जैसे चाहे रहे जो मन करे पहने और जितनी चाहे मस्ती करे । शादी के बाद वो भी बन्ध कर ही रह जायेगी

शालिनी अपने पति की बाते सुन कर थोडा उदास होने लगी - ये जी आप भी हमारी लाडो के लिए यही आस पास ने कोई रिश्ता देखीयेगा । मुझ्से मेरी बेटी की दुरी नही सही जायेगी

जन्गीलाल हस कर - अभी तो उसे मारने डाटने की बात कर रही थी और अब ब्डा दुलार आ रहा है ।

शालिनी मुस्कुरा कर - हा तो क्या हुआ मेरी बेटी , उसकी सब चीज़ो पर हक मेरा ।

जंगीलाल - सिर्फ तुम्हारा ही ....।

शालिनी जंगीलाल से चिपक कर - हा बाबा आपका भी हिहिहिही

जंगीलाल अब बहुत खुश था क्योकि आज उसका मन बहुत हल्का था । इसका एक कारण शालिनी खुद थी । वो कभी भी अपने पति को दुख या चिंता मे नही देख सकती थी और कोई भी बडी से बडी बात होती थी । उसमे अपने लाडो की चर्चा को जोडकर सारी टेंशन वाली बाते जंगीलाल को भूलवा देती ।

फिर वो दोनो अपनी लाडो के बारे मे और उसे दुनिया की बडी से बडी खुशी देने की चर्चाओ मे उलझ जाते । ये हर बार होता था ।

दोनो की प्यार भरी बाते देर रात तक चलती रही और वो दोनो भी सो गये ।

अगली सुबह वही रोज का रूटीन शुरु तो हुआ लेकिन रोज से हटकर काफी खुशनुमा ।

शालिनी ने किचन ने अपने पति के मन पसंद नास्ते बना रही थी कि तभी निशा नहा धो कर निचे किचन मे आई ।

निशा ने अपनी मा को गुनगुनाते हुए नासता बनाता देखा तो उसे शरारत सुझी ।

निशा मुस्कुरा कर अपनी मा को पीछे से पकड कर अपने हाथ उसके पेट पर ले गयी - मम्मी एक बात पूछू हिहिहिही

शालिनी ने चेहरा फेर कर निशा के गालो को चुमा और फिर नासता बनाते हुए - हा बोल ना बेटा

निशा - आजकल आप और पापा कुछ ज्यादा रोमांटिक नही हो रहे ।

शालिनी शर्मा गयी और हसते हुए - धत्त पागल ऐसे कोई बात करता है अपनी मम्मी से

निशा अपने चेहरे को अपनी मा के कन्धे पर टिका कर - लेकिन आप मेरी सहेली भी हो ना हिहिही , बताओ ना क्या बात है ?? उम्म

शालिनी मुस्कुरा कर - जब तेरी शादी हो जायेगी तो तु भी समझ जायेगी

निशा मुस्कुरा कर अपनी मा के नाभि के पास हाथ घुमा कर - उम्म्ंम लग रहा है जीजू ने फिर से मालगाडी लोड कर दी है हिहिहिही

ये बोलते है निशा अपनी मम्मी को छोड कर किचन से बाहर दरवाजे पर आ गयी

लेकिन शालिनी अभी भी उसके बातो का मतलब समझ रही थी - ये क्या बोल गयी मालगाड़ी लोड हो गयी ,,,,,,

तभी शालिनी का दिमाग ठनका और वो चिल्ला कर तुरंत किचन से निशा की ओर लपकी।

इसी समय जन्गीलाल नहा कर निचे उतर रहा था तो निशा भाग उसके पीछे हो गयी और उसके कंधो को पकड लिया ।

निशा हस्ते हुए अपने पापा के पीछे छिप कर - हिहिहिही पापा बचाओ ना , देखो मम्मी मार रही है मुझे

शालिनी - देख निशा तु इधर आ , नही तो सच मे मार खा जायेगी

शालिनी एक दो सब्जी चलाने वाले कल्छी से निशा को मारने के लिए भाजी लेकिन दोनो बार जंगीलाल के कूल्हो पर जा कर लगी।

जंगीलाल - आह्ह शालिनी ये कर रही हो । मुझे क्यू मार रही हो भाई

शालिनी गुस्से मे - आप हटीए पहले नही तो आपको भी ल्गेगि ,, इसकी बदमाशी बहुत बढ़ गयी है

इधर निशा को मौका मिला और वो अपने कमरे मे भाग गयी ।

जन्गीलाल - अरे अब क्य किया मेरी लाडो ने ?

शालिनी - आपने ही इसे सर पर चढा रखा है ,पता है क्या बोल कर गयी

जंगीलाल - क्या ???

शालिनी - बोल रही है आजकल हम दोनो इतने रोमांटिक क्यू हो गये है , कही जीजू ने मालगाडी लोड तो नही कर दी ।

जन्गीलाल शालिनी के पास जाकर - अरे तो कर देते है ना लोड , लाडो की इच्छा है तो

जंगीलाल भले ही धीरे से बोला लेकिन अपने कमरे के दरवाजे पर कान लगाये खड़ी निशा सब सुन लेती है और खिस्स्स से हस देती है ।

शालिनी निशा की हसी सुन कर शर्म से लाल हो जाती है और तुनकते हुए - क्या जी आप बौरा गये है का इस उम्र मे , धत्त

जन्गिलाल शालिनी को रोकता है लेकिन वो किचन मे चली जाती है बड़बड़ाते हुए और निशा वही दरवाजे पर खड़ी हस रही होती है ।

जन्गीलाल भी थोडा अटपटा मह्सूस करता है कि कुछ ज्यादा हो गया तो वो भी चुपचाप सरक लेता है दुकान मे ।

दुकान मे बैठे हुए जंगीलाल का ध्यान निशा की चंचल हरकतों पर था कि कैसे वो शालिनी की मार से बचने के लिए उसके पीछे हो गयी थी और पहली बार निशा के स्तन उसकी पीठ को छुए थे ।

उस पल को याद करते ही जन्गीलाल का लण्ड फिर से तन गया और वो उठ कर वापस अंदर चला गया ।

किचन मे अभी शालिनी ही थी । जन्गीलाल शालिनी के कूल्हो को सहलाते हुए - जान आज दोपहर मे थोडा समय निकाल लोगि क्या ????

शालिनी समझ गयी कि उसका पति आज दिन मे भी मूड मे है तो वो मुस्कुरा कर हा मे सर हिलाते हुए - अच्छा आप बैठीये मै नास्ता लगाती हू ।

जन्गीलाल हाल मे बैठता है और शालिनी निशा को आवाज देती है । निशा मुस्कुराते हुए अपने कमरे से आती है और किचन मे चली जाती है ।

जंगीलाल की नजरे जैसे ही निशा के महीन स्कर्ट मे हिलती उसकी नंगी चुतडो पर जाती है ,,उस्का लण्ड तन कर खड़ा हो जाता है और फिर से जन्गीलाल के जहन मे वही तस्वीर छा जाती है । जिसमे वो अपनी लाडो को खुब करारे धक्के देके चोद रहा था ।

जन्गीलाल जल्द ही उससे बाहर आया और एक गहरी सास लेते हुए लण्ड को दबाया । इधर शालीनी ने गरमा गरम आलू के पराठे निशा को दिये कि अपने पापा को ले जाकर दे ।

निशा पराठे ले जाकर अपने पापा को देती है और घूम कर वापस किचन मे आती है ।

जंगीलाल की नजरे एक बार फिर निशा के थिरकते चुतडो पर जाती है , लेकिन जैसे ही वो वहा से नजरे हटाता है तो उसकी नजरे शालिनी से टकरा जाती है ।

शालिनी मुस्कुरा कर उसे देख रही होती है , जिस्से जंगीलाल थोड़ा लाज के मारे झेप सा जाता है ।

वही शालिनी मन ही मन मुस्कुरा कर सोचती है - ये मर्द जात एक नम्बर के छिछोरे होते है ,, मौका मिले तो घर की बहू बेटीयो को ना छोड़े हिहिही ,,,देखो तो कैसे अपनी ही लाडो के मटकते चुतड निहार रहे है और अभी रात मे ही कह रहे थे कि नही नही मेरे मन में कोई ऐसी भावना नही है ।

शालिनी तुनक कर मन मे - अभी दोपहर मे इनकी खबर लेती हू ।



राज की जुबानी


सुबह रोज की तरह नास्ते के बाद मै दुकान चला गया ।

दोपहर के समय जब अनुज खाना लेके आया तो मै खाना खा के पापा के पास चला गया । वहा पापा ने पंडित जी से मिल्कर पूजा पाठ की तारीख निकल्वा ली थी और मैने फिर कार्ड के लिए मार्केट मे चला गया ।

जहा प्रिंटिंग प्रेस था वही से 10 कदम पर ही सरोजा कॉम्प्लेक्स भी था तो मैने सोचा क्यू ना एक बार थोदा सरोजा से मिल लू ।

मै फौरन कम्प्लेक्स मे च्ला और सरोजा जी के ऑफिस के दरवाजे पर पहुच कर सरोजा जी को फोन किया ।

मै - हाय मेरी जान

सरोजा - ओहो हीरो कैसे याद किया

मै - बस आपकी चुत की खुस्बु ने याद करने पर मजबुर कर दिया

सरोजा थोड़ा हस कर - धत्त अब परेशान ना करो , एक तो आते नही मिलने उपर से तंग कर रहे

मै - आप बुलाते नही ,,नही तो मै आ ही जाता

सरोजा कसम्सा कर - अभी आ सकते हो

मै - हा क्यू नही

सरोजा - तो आ जाओ

मै दरवाजा खोल कर ऑफ़िस मे घुस्ता हुआ - लो आ गया


सरोजा ने जैसे ही मुझे ऑफ़िस मे अन्दर आते देखा खुशी से उछल पडी और मैने दरवाजा बन्द करके उसकी ओर बढा ।

हम दोनो के होठ जुड़ गये और हमने कस कर एक दुसरे को अपनी बाहो मे भर लिया ।

मैने साडी के उपर से उसके कुलहो को मस्लते हुए - क्यू मेरी जान मिस्स किया मुझे

सरोजा - बहुत ज्यादा ,,आओ बैठो ना

मै मुस्कुरा कर उसकी आंखो के देखते हुए - नही मै बैठने नही आया

सरोजा उदास मन से - तो चले जाओगे क्या ???

मै - ऐसे कैसे बिना अपनी जान को खुश किये जा सकता हु,, पाप लगेगा भाई हिहिहिस

सरोजा - ओह्ह तो मतलब बस उसी के लिए आये हो उम्म्ं

मै उसके कुल्हे मस्लता हुआ - नही आज कुछ और चाहिये

सरोजा - क्या लेलो ना , सब तुम्हारा ही है

मै उसके गाड़ को दबोचकर - ये दोगी आज उम्म्ंम

सरोजा सिस्क कर - सीई उम्म्ंम्ं दर्द होगा थोडा

मै उसके होठ चुस कर - मै बहुत प्यार से लूंगा

सरोजा मुस्कुरा कर - हम्म्म्म ओके

सरोजा ने एक ऑफ़िस स्टाफ को बुलाया और उसे बोल दिया कि जब तक वो ना कहे कोई उसे डिस्टर्ब ना करे ।

फिर हम ऑफ़िस से लगे रेस्ट रूम मे गये और बिस्तर पर जाते ही मै सरोजा को लेके लेट गया ।

सरोजा - ओहो लग रहा है बहूत मूड मे हो उम्म्ं

मै उसका हाथा अपने लण्ड पर पैंट के उपर से रख कर- खुद ही देख लो ना मेरी जान

सरोजा मेरे तने हुए लण्ड का स्पर्श पाते ही सिस्क उठी और पैन्त के उपर से ही उसे सहलाने लगी ।

मैने भी उसके साडी का पिन निकाला और पल्लू को सीने से हटा कर उन्के चुचो के उपरी नंगी उभारो को चूमने लगा साथ ही हाथो मे उसके बडे बड़े चुचो को मसल रहा था ।

सरोजा - ओह्ह राज कहा थे इत्ने दिन उम्म्ंम माअह्ह्ह सीईई ओह्ह और मसलो इन्हे उम्म्ं अह्ह्ह्ज

मैने उसके गरदन और गालो को चुम रहा था । सरोजा का बदन इतना गुदाज था । हर हिस्से मे चर्बी थी और उन्हे छुने मे चूमने मे मसलने मे बहुत मजा आ रहा था ।

मैने उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगा और ब्रा से हलोर कर उसके चुचे निकाल कर मुनक्के जैसे निप्प्ल को मुह मे भर लिया

सरोजा - सीईई ओझ्ह माआआ उम्म्ंम चुसो राज्ज्ज अह्ह्ह और उह्ह्ह्ह माआआआ ओझ्ह्ज पुरा खोल लो ना हा उम्म्ंम

मैने उसका बलाऊज निकाल कर ब्रा उतार दिया और उपर चढ़ कर उसके चुचो को मिज मिज कर मुह मे भरने लगा

वो बस सिस्कती हुई मेरे चेहरे को अपने चुचो मे दर रही थी

मेरे पास ज्यादा समय नही था इसिलिए मैने उपर से उठा और बिस्तर से उतर कर खड़ा हो गया । फिर अपना पैंट खोल्ने लगा ।

सरोजा समझ गयी और उठ कर अपना साडी निकाल कर सिर्फ पेतिकोट मे आगयी । फिर मेरे पैरो के पास मे बैठ मेरे लण्ड को मुह भरने लगी ।

जिस भूख से वो गपागप मेरा लण्ड चुस रही थी ,,साफ लग रहा था कितनी गरम थी वो

उसकी लपलपाती जीभ ने मेरे आड़ो को छूना कर दिया था,,मेरी एडिया उठने लगी और लण्ड का कसाव बढने लगा ।

मै झटके से उस्से अलग हुआ और खड़ा करके घोडी बनाते हुए बिस्तर पर झुका दिया ।

सरोजा - राज थोडा आयल लेलो ना ,,वहा ड्रायर मे है

मै मुस्कुरा कर अपना लण्ड मस्लते हुए एक टेबल की ड्रायर से तेल की शिसी निकालि और वापस सरोजा के पास आया ।

मैने उसके पेतिकोट को उपर उठाया तो ब्रा से मैचींग पैंटी भी पहने हुए थी वो ।

मैने झुक कर पहले उसके गोरे चर्वीदार चुतड को चुमा और फिर उसकी पैंटी को जान्गो तक खिच दिया ।

फिर खुद घुटनो के बल आकर उसके गाड़ के मोटे चर्बीदार पाटो को फैलाते हुए अपनी नाक से उसकी रिसती चुत की खुस्बू ली और जीभ से उसके गाड़ के सुराख पर फिराया

सरोजा - ओह्ह्ह उम्म्ंम्ं हीहीही आराम से गुदगुदी हो रही है सीईई उम्म्ंम्ं ओह्ह्ह उम्म्ंम

मैने उसके कमर को थामे जीभ से गाड़ की सुराख और चुत के निचले हिस्से से टपकति रसमलाई का टेस्ट लिया और खड़ा हो गया ।

मैने अपना लण्ड की चमडी आगे पीछे कर सुपाड़े को सरोजा के गाड़ के सुराख पर रखते हुए तेल को टिप टिप करके सुपाड़े पर गिराने लगा

लगातर तेल मेरे सुपाडे से रिस कर सरोजा के गाड के सुराख पर एकत्र होने लगी , जिससे सरोजा अपने चुतडो के पाटे सख्त करने लगी ।

थोडा तेल गिराने के बाद मैने लण्ड को सरोजा के गाड़ की लकीरो मे घिसा कर फिर सुराख पर दबाब बनाते हुए गपुच से लण्ड अंदर

सरोजा थोडा तेज सिसकी

- ओह्ह्ह माअह्ह अराम्म से राज्ज्ज अह्ह्ह उह्ह्ह दर्द हो रहा है उम्म्ंम

मैने मुस्कुरा कर धीरे धीरे लण्ड को ठेलता हुआ आधा घुसेड़ दिया और वापस खिचकर एक जोर का धक्का पेला ,, इस बार सरोज के गाड का धागा खुल ही गया और मेरा लण्ड उसके गाड की जड़ मे

सरोजा - अह्ह्ह मममीईईई उह्ह्ह्ह उम्म्ं बहुत दर्द हो रहा है सीईई ऊहह

मैने तेजी से उसके कमर और कूल्हो मसलने लगा ताकी गर्मी से उसका दर्द हो सके और हलका हल्का लण्ड गाड मे घीसता रहा

सरोजा सिसिक रही और मैने थोडा तेल और लण्ड पर गिराकर धक्के की स्पीड बढा दी

अब मुझे भी मजा मिलने लगा

सरोजा की चर्बीदार गाड मे धक्का लगाने पर वो लण्ड वापस उछाल देती ,,,जिस्से चोदने का मजा दुगना हो गया था

मै - ओह्ह जान,,क्या मस्त माल है तू ,,और तेरी गाड उम्म्ंम आह्ह ये लेह्ह उम्म्ं

सरोजा - सीईई उम्म्ंम्ं अह्ह्ह ओह्ह्ह हाआ क्यू मजा आ रहा है ना उम्म्ंम और पेलो ना उम्म्ं

मै - बहुत मजा आ रहा है ,,,तेरी गाड़ बहुत कसी हुई है

सरोजा - अभी तो चुत भी लेनी पड़ेगी तुम्हे उम्म्ंम्ं ओह्ह हा और चोदो ओह्ह्ह मस्त लण्ड है राज उन्म्म्ं

सरोजा बार बार मुझे पुचकारती रही और उस्जे कसे गाड मे मै तेज धक्के लगता हुआ झड़ने लगा और उसके उपर ढह गया ।

थोडी देर बाद हम अलग हुआ और फ्रेश होकर वादे के हिसाब से एक बार उसकी चुत भी मारी और फिर वापस अपने दुकान पर चला गया ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 142 इस किंग आफ्टर 11 बजे :डी
 
अपडेट 142


पिछले अपडेट मे आपने पढा जहा एक ओर राज ने काम के बहाने सरोजा की लचिली गाड मे अपना मुसल घुसा दिया और वही निशा के यहा जंगीलाल का लण्ड अभी भी उसकी बेटी के लिए फड़फडा रहा है ।



लेखक की जुबानी


नास्ते के बाद जंगीलाल दुकान मे व्यस्त हो गया लेकिन नास्ते के दौरान जो कुछ भी हुआ उसको लेके वो काफी परेशान रहा ।

कारण था कि वो मन के एक कोने मे अपने लाडो के लिए ऐसी कोई भावना नही रखना चाहता था और इसिलिए तो उसने कल रात मे शालिनी को सब कुछ बता दिया । उसे लगा कि शायद जब उसे उसके मर्जी के हिसाब से सेक्स मिलेगा तो वो इनसब से दुर हो जायेगा ।

मगर वो गलत था , निशा के प्रति उसका आकर्षण हर पल हवस का रूप ले रहा था ।

निशा को देखते ही जंगीलाल की आंखे चमक जाती और दिल मे अजीब से बौख्लाहट सी होने लगता । लण्ड अपने आप ही सर उठाने लगता था और पल भर के लिए ही सही वो तस्वीर बार बार उसके जहन मे आती जब वो अपनी कल्पना मे अपनी बेटी को बडी बेदर्दी से रौद रहा होता है ।

जन्गीलाल इस्से परेशान हो चुका था । इस मसले पर वो खोया खोया सा रहने लगा और तो और दुकान के कामो और हिसाबो मे भुल्चुक हुई दो तीन बार ।

एक दो बार शालिनी के सामने भी जंगीलाल ने गल्तिया की और ग्राहको को समझाते सुना कि आज आप बहुत खोये खोये से क्यू है ।

जंगीलाल ने हस कर वो बात टाल दी लेकिन शालिनी समझ रही थी कि ये सब निशा की ओर उसपे पति का आकर्षण ही करवा है और उसका पति बहुत परेशान है ।

शालिनी को भी अब चिंता हो रही थी खैर वो दोपहर के खाने मे व्यस्त हो गयी ये तय करके कि आज दोपहर मे वो अपने पति को थोडा समझायेगी । उसे ही उनकी मदद करनी होगी नही तो वो किसी मानसिक तनाव से ना घिर जाये ।

शालिनी ने मन ही मन भगवान से उसे राह दिखाने की प्रार्थना की और दोपहर का खाना तैयार होने के बाद वो जन्गिलाल को अपने कमरे मे ही खाने के लिए बुलाया ।

शालिनी थाली और पानी लेके कमरे मे गयी और अपने हाथो से अपने पति को खाना खिलाया और उन्हे थोडा आराम करने को बोला ।

शालिनी ने घर के बाकी के काम निपटाये और सबको खिला पिला कर एक घन्टे बाद कमरे मे गयी तो जंगीलाल सो रहा था । वो मुस्कुरा कर उसे बडे प्यार से देखी और उसने सोचा अभी आराम करने दो । बाद मे बात कर लूंगी ।

शाम होने को आ गयी और गर्मी का मौसम था तो शालिनी ने ठंडा शर्बत तैयार किया और निशा को आवाज दी कि वो पापा को जगाये ।

निशा जैसे ही अपने पापा के पास जाने को हुई तो शालिनी ने उसे टोका - नही तु रहने दे मै जाती हू ।

शालिनी ये सोच कर रोका कि निशा को जंगीलाल से थोडा दुर ही रखू ताकि उसके पति को फिर से परेशानी ना हो ।

मगर निशा को अपनी चंचलता मे ये सुझा कि कही उसके पापा और मम्मी ने दोपहर मे कुछ काण्ड किये होगे और पापा ने कुछ पहने नही होगे । इसिलिए उसकी मा ने उसे रोक लिया ।

निशा मुस्कुराते हुए - नही पापा को मै ही जगाऊगी हिहिही

शालिनी - नही तु रुक मै जा रही हू ना

निशा तेजी से भागती हुई कमरे मे घुस गयी और भाग कर आने की वजह से उसके सास के साथ साथ उसकी चुचिया भी उपर निचे हो रही थी

कमरे मे आवाज होने से जन्गिलाल चौक कर उठा तो बगल मे निशा को खड़ा देखा और उसकी नजरे निशा के टीशर्ट मे सास लेते चुचो पर गयी , तभी दरवाजे पर शालिनी शरबत लेके आ गयी और उसने अपने पति को निशा के उपर निचे होते चुचो को घुरता देखकर । निशा पर उसे थोडा गुस्सा आया लेकिन पति के सामने वो क्या ही कर सकती थी ।

उसने निशा को गुस्से मे बाहर जाने को कहा और राहुल को शर्बत देने को कहा । फिर दरवाजा बंद करके जंगीलाल के पास गयी ।

जन्गीलाल जो इनसब से अंजान था वो जिज्ञासू होकर - क्या हुआ शालिनी तुमने लाडो को डाटा क्यू और वो यहा क्यू आई थी ।

शालिनी फिर उसे थोडे मिंट के पहले ही घटना बताती है ।

जंगीलाल शालिनी की भावना समझ जाता है और उसे अपने पास बिठा कर - जानू हम एक ही घर मे रहते है और कब तक मै अपनी ही बेटी से भागता रहूंगा ।

शालिनी उखड़े हुए मन से - लेकिन आप भी तो परेशान हो ना , आज देखा मैने दुकान मे कैसे आप हिसाब किताब मे गड़बड़ी कर रहे थे । यहा तक कि ग्राहको ने भी टोका आपको । इसिलिए मुझे लगा कि मै निशा को आपके साम्ने आने ही ना दू तो आपको दिक्कत नही होगी ।

जन्गीलाल मुस्कुरा कर शालिनी को अपने बाहो मे भर लेता है - ओह्ह मेरी जान, तुम अपने हिसाब से ठिक कर रही हो लेकिन ये भी तो सोचो कि जब लाडो को लगेगा कि मै उस्से दुरी बना रहा हू तो उसे कितना बुरा लगेगा और कही उसने हमसे पुछा तो क्या जवाब देंगे हम

शालिनी को अपने पति की बात सही लगी ।

जंगीलाल- तुम चिंता ना करो मेरी जान हम इस्का कुछ ना कुछ रास्ता निकाल ही लेंगे

शालिनी -हम्म्म्म

जंगीलाल - अब उदास ना हो तुम भी कुछ सोचो , मै भी कुछ बिचार कर रहा हू ।

शालिनी मुस्कुरा कर उठती हुई - ठिक है चलिये फ्रेश हो लिजिये और फिर ये शरबत पी लिजिए

जंगीलाल उसक हाथ पकड कर - आज दोपहर मे कुछ और भी पिलाने वाली थी तुम जान

शालिनी शर्मा कर - धत्त वो सब अब रात मे ,,,जो सोवत है वो खोवत है हिहिहिही

जंगीलाल - और सुनो

शालिनी - हा कहिये

जंगीलाल - और तुम मेरी वजह से लाडो पर गुस्सा ना हो प्लीज , ना उसे कोई भनक लगे इसका

शालिनी मुस्कुरा कर - हा जी ठिक है , आप जल्दी से फ्रेश होकर आईये

फिर शालिनी मुस्कुराते हुए अपने रूम से बाहर निकाली और उसकी नजरे निशा से टकराई जो किचन के दरवाजे पर खड़ी शर्बत की सिप ले रही थी और उसने अपनी मम्मी को आंखो से इशारे से पूछा क्या हुआ ।

शालिनी शर्म से लाल हो गयी और बेजवाब हो कर उसकी हसी छुट गयी । वो क्या ही जवाब देती निशा को ,,, अब तो जंगीलाल ने भी मना कर दिया था डांटने बोलने को ।

शालिनी बिना कुछ बोले किचन मे घुस गयी और निशा घूम कर अपनी मा को घूर रही थी और मुस्कुरा रही थी ।

शालिनी की नजर जब वाप्स से निशा पर गयी तो वो हस्ते हुए - तु मुझे ऐसे क्यू देख रही है ,,,मत कर भई , हा नही तो

निशा शर्बत का घूंट लेके - ओहो देखो तो कैसे शर्म से लाल हो रही है मेरी मम्मी ,,,उम्म्म्म्माआह्ह

निशा के अपनी मा के गालो को चुम लिया ।

शालिनी - तु ना एकदम अपनी शिला बुआ पर गयी है ,,,शादी के बाद जब भी मै उन्के कमरे से बाहर आती वो भी ऐसे ही छेड़ती थी ।

निशा मुस्कुरा कर - लेकिन आप बार बार पापा के कमरे मे क्यू जाती थी ।

शालिनी हस कर - तु बडी भोली बन रही है ,,

निशा हस्ते हुए - मुझे सच मे नही पता मा , कि रात तो रात दिन मे भी पापा और आप कमरे मे रहते थे ???? करते क्या थे आप लोग ....हिहिहिही।

शालिनी - धत्त बदमाश , जब तेरी शादी हो जायेगी तो तेरा पति भी दिन मे तुझे कमरे मे बन्द रखेगा हिहिहिही

निशा अपनी मा के कूल्हो पर हाथ घुमा कर - तो मेरा भी ऐसे निकल जायेगा क्या हिहिहिही

शालिनी हस कर - छोड पागल कही की ,,,तुझे कहा से ये सब सूझ रहा है

निशा - मै तो बस पुछ रही थी कि क्या वो सब करने से ही ये बाहर आता है

शालिनी - हा थोडा बहुत , लेकिन सब कोई तेरे पापा जैसा ....।

शालिनी बोलते हूए रुक गयी और शर्मा गयी कि वो क्या बोलने जा रही थी ।

निशा अपनी मा से कबूलवाते हुए - क्या मा ,,पापा के जैसे क्या ??

शालिनी- ओह्हो भई छोड़ मुझे तन्ग ना कर ,,और तु मेरी बेटी है मै तुझसे ये सब थोडी ना बोल सकति हू ।

निशा - अभी तो उस दिन कहा रही थी कि आप मेरी दोस्त हो , जो कुछ पुछना जानना हो मुझसे कह देना

निशा थोडा सा उदास होने का नाटक करते हुए - अब आप नही ब्ताओगे ,,समझाओगे तो कौन मुझे इनसब के बारे मे बतायेगा हुउह

निशा तुनक कर जानबुझ कर किचन से निकल गयी और अपने कमरे मे चली गयी ।

क्योकि वो जानती थी कि उसकी मा उसे मनाने जरुर आयेगी ।

इधर शालिनी को लगा शायद निशा उतनी होशियार नही हुई है और उसे सही जानकारी नही है । बस थोडी बहुत चंच्ल है ।

शालिनी अपनी लाडो को मनाने उसके पास चल दी ।

कमरे मे निशा मोबाइल लेके बैठी हुई थी और अपनी मा के आने का इंतजार ही कर रही थी ।

दरवाजा खुला और शालिनी मुस्कुरा कर कमरे मे आई और दरवाजा ब्नद करके अपने लाडो के पास बैठ गयी ।

निशा ने जानबुझ कर अपनी मा की ओर ध्यान नही दिया ।

शालिनी उसके पास आकर - क्या हुआ मेरी लाडो नाराज

निशा मोबाइल पर कोई गेम खेल रही थी - हुह , मुझे आपसे बात नही करनी है

शालिनी मुस्कुरा कर - अच्छा बोला तुझे क्या जानना

निशा ने तिरछी नजरो से मुस्कुरा कर अपनी मा को देखा और उस्से लिपट गयी ।

शालिनी निशा ऐसे अचानक से लिपट जाने से उसका भार सह ना सकी और दोनो बिसतर पर लोट गये ।

शालिनी हस्ते हुए - अच्छा अब बता तो क्या जानना है तुझे

निशा को तो सब पता था लेकिन हाल ही दिनो से उसे उसकी मा को छेड़ने मे और उस्से ऐडल्ट बाते करने मे बहुत मजा आ रहा था । तो उसकी चंचल मन में ना जाने क्यू हाल ही उसके पापा मम्मी के रोमांस को देखने के बाद से उनकी सेक्स लाइफ के बारे जानने की चुल होने लगी थी ।

निशा अपनी मा के सीने पर लिपटी हुई अपने हाथ उसकी चुचो पर घुमा कर - मम्मी , क्या मेरे भी ये शादी के बाद बडे हो जायेंगे

शालिनी मुस्कुरा कर उसके गालो पर हल्के से चपट लगाते हुए - बदमाश कही की ,,मुझे पता था तेरे दिमाग मे यही सब चल रहा है ।

निशा खिलखिला कर हसी - बताओ ना मा प्लीज

शालिनी - हा शायद

निशा - शायद क्यू

शालिनी मुस्कुरा कर - शायद इसिलिए कि तेरे मुझसे भी बडे हो जाये ,,,वो तो तेरे पति के प्यार पर निर्भर करेगा

निशा भी थोडा शर्मा रही थी - तो क्या पापा आपको प्यार नही करते जो आपको अभी छोटे लगते है

शालिनी हस कर - धत्त पागल , वो इन्हे .... छोड और बता क्या जानना है ?

निशा - नही पहले ये बताओ ,, पापा इन्हे क्या ???

शालिनी - तु मेरी बेटी है ,,और कैसे मै तुझे वो बस बताऊ

निशा - तो अपनी सहेली मान के बताओ ना ,,,कि जीजू इन्हे क्या

शालिनी हस कर - धत्त बदमाश कही की

निशा हस कर - यार प्लीज ना बता दे हिहिहिही

शालीनी को लगा शायद ये तरीका ही सही रहेगा जो निशा कह रही है और वो मुस्कुरा कर - वो तेरे जीजू इन्हे बहुत प्यार करते है

निशा चहक उठी और मुस्कुरा कर - प्यार मतलब कैसे ??

शालिनी मुस्कुरा कर - मतलब इनको छूते है थोडा सहलाते है और कभी कभी जोर से ....।

निशा - क्या ??? जोर से

शालिनी - मतलब जोर से मसल भी देते है ,,,हा नही सब कबूलवा रही है मुझसे

निशा हसने लगी है और पुछती है - तो आपको दर्द नही होता , जब पापा मेरा मतल्ब जीजू ऐसे कस के मसल देते है ।

शालिनी शर्मा कर - नही होता है थोडा थोडा लेकिन तेरे पापा का स्पर्श,,मतलब तेरे जीजू का स्पर्श

निशा - ओह्हो ये छोडो जीजू विजु ,, अब पापा है तो है हिहिही

शालिनी हस देती है - तु ही कह रही थी ,हा नही तो

निशा मुस्कुरा कर - अच्छा तो बताओ ना मम्मी , पापा का स्पर्श???

शालिनी - वो तेरे पापा जब मुझे छुते है तो भले ही वो कितना जोर से मसले दर्द का पता नही चलता ,,बस मजा आता है ।

अपनी मा से पापा के बारे तारिफ सुन कर निशा के चुचे कडे होने लगे थे और मस्ती मे उसने अपनी मा की चुची को दबाया जिस्से शालिनी सिसकी

शालिनी - सीईई धत्त क्या कर रही है तू

निशा हस कर - देख रही थी कि मेरे दबाने पर भी मजा आता है कि नही आपको,, हिहिहिही

शालिनी शर्म से लाल होने लगी - धत्त पागल कही कि,,एक मर्द का स्पर्श अलग ही होता है ।

निशा अपनी मा की बाते सुन कर अपने पापा की ओर खीची ही जा रही थी ।

निशा - मम्मी यार मेरी भी शादी करवा दो ना

शालिनी हस कर - अभी हिहिहिही

निशा हस कर - हा मुझे भी अब मन कर रहा है कि मेरा पति मुझे ऐसे छुए कितना अच्छा लगता होगा ना जब पापा आपको सहलाते होगे ।

शालिनी निशा के भोलेपन पर हस कर - तुझे बस सहलाना अच्छा लग रहा है ,,असली दर्द भी पति ही देता है हिहिही

निशा - मतल्ब

शलिनी- तुझे क्या लगता है तेरा होने वाला पति बस तुझे सहलायेगा , दुलारेगा उम्म्ंम

निशा - हा पता है सेक्स भी करेगा तो दर्द कैसा ,,उसमे भी मजा आता होगा ना

शालिनी हस कर - हा आता तो है लेकिन जब पहली बार हो तो बेहिसाब दर्द ही दर्द मिलता है

निशा डरने का नाटक करती हुई - क्या??? नही तो मै शादी नही करंगी कभी । मुझे तो मेरे पापा ने भी कभी नही मारा

शालिनी हस कर - लेकिन आज नही तो कल कभी ना कभी तु उस दर्द से गूजरेगि ही

निशा को सब पता था ही और उस दर्द का मजा वो राज के संग ले ही चुकी थी । लेकिन इतना ड्रामा करने का प्लान उस्का कुछ और ही था ।

निशा जिज्ञासू भाव से - तो क्या आप जब पापा के साथ पहली बार की थी तो आपको भी बहुत दर्द हुआ था

शालिनी हस कर - नही ,,बहुत हल्का सा ही ,,,वो तेरे पापा बहुत रोमांटिक है ना तो बहुत प्यार से वो किये थे ।

निशा मुस्कुरा कर अपने मा से लिपट गयी और बोली - फिर मेरे लिए भी पापा जैसे ही पति खोजना हिहिहिही

शालिनी - अरे वो तो मेरी किस्मत थी कि तेरे पापा मुझे मिल गये और मेरी तो लव मैरिज थी ना

निशा आंखे उठा कर - तो क्या आप लोगो ने शादी से पहले ही ??

शालिनी शर्म से लाल हो गयी और मुस्कुराने लगी ।

निशा - क्या शादी के पहले ये सब कर सकते है मम्मी ??

शालिनी उसे समझाते हुए - हा कर सकते है अगर कोई भरोसे का आदमी हो और जीवन के हर मोड पर तुम्हारा साथ निभाये । तो कर सकते है ।

निशा हसते हुए - आप कितनी लकी हो मम्मी आपको पापा मिले हिहिहिही

शालिनी - क्यू वो तेरे पापा है तो तु भी लकी हुई ना

निशा शर्मा कर - नही वो आपके पति है और उन्होंने आपको थोडा भी दर्द नही दिया और ....।

शालिनी - और क्या ??

निशा उदास होकर - मुझे पता नही पापा जैसा कोई मिलेगा भी या नही ।

शालिनी उसे देखकर मुस्कुरा रहती है

निशा अपनी मा को कसते हुए - मा मुझे अब डर लग रहा है ,,मै शादी नही करूंगी ।

शालिनी जान रही थी कि अभी ये सब दुर की बाते है तो उसने भी हा कह दिया कि चलो ठिक है मत करना ।

फिर वो दोनो रात के खाना बनाने लग गये ।



राज की जुबानी


सरोजा की चुदाइ के बाद दिन भर की थकान लेके मै घर आया

घर पर वही शादी को लेके चर्चाये बनी हुई थी ।

मा - सुनिये जी ये लिस्ट रज्जो दीदी ने बनवाई है ये सारे बर्तन आप निकलवा लो और कुछ ना हो तो उन्हे मगवा लेना

पापा वो पर्ची थाम कर - अच्छा ठिक है और वो पंडित जी से बात हो गयी है । कल वो एक पर्ची बनवा कर भिजवा देंगे । फिर परसो नरसो भी वो सामान भी लेके रख्वा लिया जाये ।

मा - हा ये सब इसी हफते लेके रख लिया जाये और अगले हफ्ते तक हमे अपने कपडे लेने जाने है

पापा - साड़ीया तो जन्गी के यहा मिल जायेगी ,,बाकी ये दूल्हा दुल्हन और बाकी जिसको जो चाहिये चल कर संजीव भाई के माल से ले लेना

मा - हा ये भी ठिक है ।

राज - मा आप चिंता ना करो , इस हफते मे मै सारे काम कर लूंगा फिर शॉपिंग तक ये महिना बीत ही जायेगा । अगले महिने से कार्ड भी देने चला जाऊंगा

फिर ऐसे ही थोडी बाते चलती रही ,,खैर अगले कुछ दिनो तक राज का परिवार तो शादी की तैयारियो मे व्यस्त रहने वाला था ।

थोडी देर बाद सब खाना खा कर अपने अपने कमरो मे सोने चले गये ।

जारी रहेगी
 
आज का अपडेट भी मुश्किल है

कुछ सटीक से संवाद खोज रहा हू ताकि एक सीन को आगे बढाया जा सके। उसी मे उल्झा हुआ हू :?:

देखता हू क्या होता है और कबतक ये कसमकस जारी रहती है :sad:
 
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