अपडेट 142
पिछले अपडेट मे आपने पढा जहा एक ओर राज ने काम के बहाने सरोजा की लचिली गाड मे अपना मुसल घुसा दिया और वही निशा के यहा जंगीलाल का लण्ड अभी भी उसकी बेटी के लिए फड़फडा रहा है ।
लेखक की जुबानी
नास्ते के बाद जंगीलाल दुकान मे व्यस्त हो गया लेकिन नास्ते के दौरान जो कुछ भी हुआ उसको लेके वो काफी परेशान रहा ।
कारण था कि वो मन के एक कोने मे अपने लाडो के लिए ऐसी कोई भावना नही रखना चाहता था और इसिलिए तो उसने कल रात मे शालिनी को सब कुछ बता दिया । उसे लगा कि शायद जब उसे उसके मर्जी के हिसाब से सेक्स मिलेगा तो वो इनसब से दुर हो जायेगा ।
मगर वो गलत था , निशा के प्रति उसका आकर्षण हर पल हवस का रूप ले रहा था ।
निशा को देखते ही जंगीलाल की आंखे चमक जाती और दिल मे अजीब से बौख्लाहट सी होने लगता । लण्ड अपने आप ही सर उठाने लगता था और पल भर के लिए ही सही वो तस्वीर बार बार उसके जहन मे आती जब वो अपनी कल्पना मे अपनी बेटी को बडी बेदर्दी से रौद रहा होता है ।
जन्गीलाल इस्से परेशान हो चुका था । इस मसले पर वो खोया खोया सा रहने लगा और तो और दुकान के कामो और हिसाबो मे भुल्चुक हुई दो तीन बार ।
एक दो बार शालिनी के सामने भी जंगीलाल ने गल्तिया की और ग्राहको को समझाते सुना कि आज आप बहुत खोये खोये से क्यू है ।
जंगीलाल ने हस कर वो बात टाल दी लेकिन शालिनी समझ रही थी कि ये सब निशा की ओर उसपे पति का आकर्षण ही करवा है और उसका पति बहुत परेशान है ।
शालिनी को भी अब चिंता हो रही थी खैर वो दोपहर के खाने मे व्यस्त हो गयी ये तय करके कि आज दोपहर मे वो अपने पति को थोडा समझायेगी । उसे ही उनकी मदद करनी होगी नही तो वो किसी मानसिक तनाव से ना घिर जाये ।
शालिनी ने मन ही मन भगवान से उसे राह दिखाने की प्रार्थना की और दोपहर का खाना तैयार होने के बाद वो जन्गिलाल को अपने कमरे मे ही खाने के लिए बुलाया ।
शालिनी थाली और पानी लेके कमरे मे गयी और अपने हाथो से अपने पति को खाना खिलाया और उन्हे थोडा आराम करने को बोला ।
शालिनी ने घर के बाकी के काम निपटाये और सबको खिला पिला कर एक घन्टे बाद कमरे मे गयी तो जंगीलाल सो रहा था । वो मुस्कुरा कर उसे बडे प्यार से देखी और उसने सोचा अभी आराम करने दो । बाद मे बात कर लूंगी ।
शाम होने को आ गयी और गर्मी का मौसम था तो शालिनी ने ठंडा शर्बत तैयार किया और निशा को आवाज दी कि वो पापा को जगाये ।
निशा जैसे ही अपने पापा के पास जाने को हुई तो शालिनी ने उसे टोका - नही तु रहने दे मै जाती हू ।
शालिनी ये सोच कर रोका कि निशा को जंगीलाल से थोडा दुर ही रखू ताकि उसके पति को फिर से परेशानी ना हो ।
मगर निशा को अपनी चंचलता मे ये सुझा कि कही उसके पापा और मम्मी ने दोपहर मे कुछ काण्ड किये होगे और पापा ने कुछ पहने नही होगे । इसिलिए उसकी मा ने उसे रोक लिया ।
निशा मुस्कुराते हुए - नही पापा को मै ही जगाऊगी हिहिही
शालिनी - नही तु रुक मै जा रही हू ना
निशा तेजी से भागती हुई कमरे मे घुस गयी और भाग कर आने की वजह से उसके सास के साथ साथ उसकी चुचिया भी उपर निचे हो रही थी
कमरे मे आवाज होने से जन्गिलाल चौक कर उठा तो बगल मे निशा को खड़ा देखा और उसकी नजरे निशा के टीशर्ट मे सास लेते चुचो पर गयी , तभी दरवाजे पर शालिनी शरबत लेके आ गयी और उसने अपने पति को निशा के उपर निचे होते चुचो को घुरता देखकर । निशा पर उसे थोडा गुस्सा आया लेकिन पति के सामने वो क्या ही कर सकती थी ।
उसने निशा को गुस्से मे बाहर जाने को कहा और राहुल को शर्बत देने को कहा । फिर दरवाजा बंद करके जंगीलाल के पास गयी ।
जन्गीलाल जो इनसब से अंजान था वो जिज्ञासू होकर - क्या हुआ शालिनी तुमने लाडो को डाटा क्यू और वो यहा क्यू आई थी ।
शालिनी फिर उसे थोडे मिंट के पहले ही घटना बताती है ।
जंगीलाल शालिनी की भावना समझ जाता है और उसे अपने पास बिठा कर - जानू हम एक ही घर मे रहते है और कब तक मै अपनी ही बेटी से भागता रहूंगा ।
शालिनी उखड़े हुए मन से - लेकिन आप भी तो परेशान हो ना , आज देखा मैने दुकान मे कैसे आप हिसाब किताब मे गड़बड़ी कर रहे थे । यहा तक कि ग्राहको ने भी टोका आपको । इसिलिए मुझे लगा कि मै निशा को आपके साम्ने आने ही ना दू तो आपको दिक्कत नही होगी ।
जन्गीलाल मुस्कुरा कर शालिनी को अपने बाहो मे भर लेता है - ओह्ह मेरी जान, तुम अपने हिसाब से ठिक कर रही हो लेकिन ये भी तो सोचो कि जब लाडो को लगेगा कि मै उस्से दुरी बना रहा हू तो उसे कितना बुरा लगेगा और कही उसने हमसे पुछा तो क्या जवाब देंगे हम
शालिनी को अपने पति की बात सही लगी ।
जंगीलाल- तुम चिंता ना करो मेरी जान हम इस्का कुछ ना कुछ रास्ता निकाल ही लेंगे
शालिनी -हम्म्म्म
जंगीलाल - अब उदास ना हो तुम भी कुछ सोचो , मै भी कुछ बिचार कर रहा हू ।
शालिनी मुस्कुरा कर उठती हुई - ठिक है चलिये फ्रेश हो लिजिये और फिर ये शरबत पी लिजिए
जंगीलाल उसक हाथ पकड कर - आज दोपहर मे कुछ और भी पिलाने वाली थी तुम जान
शालिनी शर्मा कर - धत्त वो सब अब रात मे ,,,जो सोवत है वो खोवत है हिहिहिही
जंगीलाल - और सुनो
शालिनी - हा कहिये
जंगीलाल - और तुम मेरी वजह से लाडो पर गुस्सा ना हो प्लीज , ना उसे कोई भनक लगे इसका
शालिनी मुस्कुरा कर - हा जी ठिक है , आप जल्दी से फ्रेश होकर आईये
फिर शालिनी मुस्कुराते हुए अपने रूम से बाहर निकाली और उसकी नजरे निशा से टकराई जो किचन के दरवाजे पर खड़ी शर्बत की सिप ले रही थी और उसने अपनी मम्मी को आंखो से इशारे से पूछा क्या हुआ ।
शालिनी शर्म से लाल हो गयी और बेजवाब हो कर उसकी हसी छुट गयी । वो क्या ही जवाब देती निशा को ,,, अब तो जंगीलाल ने भी मना कर दिया था डांटने बोलने को ।
शालिनी बिना कुछ बोले किचन मे घुस गयी और निशा घूम कर अपनी मा को घूर रही थी और मुस्कुरा रही थी ।
शालिनी की नजर जब वाप्स से निशा पर गयी तो वो हस्ते हुए - तु मुझे ऐसे क्यू देख रही है ,,,मत कर भई , हा नही तो
निशा शर्बत का घूंट लेके - ओहो देखो तो कैसे शर्म से लाल हो रही है मेरी मम्मी ,,,उम्म्म्म्माआह्ह
निशा के अपनी मा के गालो को चुम लिया ।
शालिनी - तु ना एकदम अपनी शिला बुआ पर गयी है ,,,शादी के बाद जब भी मै उन्के कमरे से बाहर आती वो भी ऐसे ही छेड़ती थी ।
निशा मुस्कुरा कर - लेकिन आप बार बार पापा के कमरे मे क्यू जाती थी ।
शालिनी हस कर - तु बडी भोली बन रही है ,,
निशा हस्ते हुए - मुझे सच मे नही पता मा , कि रात तो रात दिन मे भी पापा और आप कमरे मे रहते थे ???? करते क्या थे आप लोग ....हिहिहिही।
शालिनी - धत्त बदमाश , जब तेरी शादी हो जायेगी तो तेरा पति भी दिन मे तुझे कमरे मे बन्द रखेगा हिहिहिही
निशा अपनी मा के कूल्हो पर हाथ घुमा कर - तो मेरा भी ऐसे निकल जायेगा क्या हिहिहिही
शालिनी हस कर - छोड पागल कही की ,,,तुझे कहा से ये सब सूझ रहा है
निशा - मै तो बस पुछ रही थी कि क्या वो सब करने से ही ये बाहर आता है
शालिनी - हा थोडा बहुत , लेकिन सब कोई तेरे पापा जैसा ....।
शालिनी बोलते हूए रुक गयी और शर्मा गयी कि वो क्या बोलने जा रही थी ।
निशा अपनी मा से कबूलवाते हुए - क्या मा ,,पापा के जैसे क्या ??
शालिनी- ओह्हो भई छोड़ मुझे तन्ग ना कर ,,और तु मेरी बेटी है मै तुझसे ये सब थोडी ना बोल सकति हू ।
निशा - अभी तो उस दिन कहा रही थी कि आप मेरी दोस्त हो , जो कुछ पुछना जानना हो मुझसे कह देना
निशा थोडा सा उदास होने का नाटक करते हुए - अब आप नही ब्ताओगे ,,समझाओगे तो कौन मुझे इनसब के बारे मे बतायेगा हुउह
निशा तुनक कर जानबुझ कर किचन से निकल गयी और अपने कमरे मे चली गयी ।
क्योकि वो जानती थी कि उसकी मा उसे मनाने जरुर आयेगी ।
इधर शालिनी को लगा शायद निशा उतनी होशियार नही हुई है और उसे सही जानकारी नही है । बस थोडी बहुत चंच्ल है ।
शालिनी अपनी लाडो को मनाने उसके पास चल दी ।
कमरे मे निशा मोबाइल लेके बैठी हुई थी और अपनी मा के आने का इंतजार ही कर रही थी ।
दरवाजा खुला और शालिनी मुस्कुरा कर कमरे मे आई और दरवाजा ब्नद करके अपने लाडो के पास बैठ गयी ।
निशा ने जानबुझ कर अपनी मा की ओर ध्यान नही दिया ।
शालिनी उसके पास आकर - क्या हुआ मेरी लाडो नाराज
निशा मोबाइल पर कोई गेम खेल रही थी - हुह , मुझे आपसे बात नही करनी है
शालिनी मुस्कुरा कर - अच्छा बोला तुझे क्या जानना
निशा ने तिरछी नजरो से मुस्कुरा कर अपनी मा को देखा और उस्से लिपट गयी ।
शालिनी निशा ऐसे अचानक से लिपट जाने से उसका भार सह ना सकी और दोनो बिसतर पर लोट गये ।
शालिनी हस्ते हुए - अच्छा अब बता तो क्या जानना है तुझे
निशा को तो सब पता था लेकिन हाल ही दिनो से उसे उसकी मा को छेड़ने मे और उस्से ऐडल्ट बाते करने मे बहुत मजा आ रहा था । तो उसकी चंचल मन में ना जाने क्यू हाल ही उसके पापा मम्मी के रोमांस को देखने के बाद से उनकी सेक्स लाइफ के बारे जानने की चुल होने लगी थी ।
निशा अपनी मा के सीने पर लिपटी हुई अपने हाथ उसकी चुचो पर घुमा कर - मम्मी , क्या मेरे भी ये शादी के बाद बडे हो जायेंगे
शालिनी मुस्कुरा कर उसके गालो पर हल्के से चपट लगाते हुए - बदमाश कही की ,,मुझे पता था तेरे दिमाग मे यही सब चल रहा है ।
निशा खिलखिला कर हसी - बताओ ना मा प्लीज
शालिनी - हा शायद
निशा - शायद क्यू
शालिनी मुस्कुरा कर - शायद इसिलिए कि तेरे मुझसे भी बडे हो जाये ,,,वो तो तेरे पति के प्यार पर निर्भर करेगा
निशा भी थोडा शर्मा रही थी - तो क्या पापा आपको प्यार नही करते जो आपको अभी छोटे लगते है
शालिनी हस कर - धत्त पागल , वो इन्हे .... छोड और बता क्या जानना है ?
निशा - नही पहले ये बताओ ,, पापा इन्हे क्या ???
शालिनी - तु मेरी बेटी है ,,और कैसे मै तुझे वो बस बताऊ
निशा - तो अपनी सहेली मान के बताओ ना ,,,कि जीजू इन्हे क्या
शालिनी हस कर - धत्त बदमाश कही की
निशा हस कर - यार प्लीज ना बता दे हिहिहिही
शालीनी को लगा शायद ये तरीका ही सही रहेगा जो निशा कह रही है और वो मुस्कुरा कर - वो तेरे जीजू इन्हे बहुत प्यार करते है
निशा चहक उठी और मुस्कुरा कर - प्यार मतलब कैसे ??
शालिनी मुस्कुरा कर - मतलब इनको छूते है थोडा सहलाते है और कभी कभी जोर से ....।
निशा - क्या ??? जोर से
शालिनी - मतलब जोर से मसल भी देते है ,,,हा नही सब कबूलवा रही है मुझसे
निशा हसने लगी है और पुछती है - तो आपको दर्द नही होता , जब पापा मेरा मतल्ब जीजू ऐसे कस के मसल देते है ।
शालिनी शर्मा कर - नही होता है थोडा थोडा लेकिन तेरे पापा का स्पर्श,,मतलब तेरे जीजू का स्पर्श
निशा - ओह्हो ये छोडो जीजू विजु ,, अब पापा है तो है हिहिही
शालिनी हस देती है - तु ही कह रही थी ,हा नही तो
निशा मुस्कुरा कर - अच्छा तो बताओ ना मम्मी , पापा का स्पर्श???
शालिनी - वो तेरे पापा जब मुझे छुते है तो भले ही वो कितना जोर से मसले दर्द का पता नही चलता ,,बस मजा आता है ।
अपनी मा से पापा के बारे तारिफ सुन कर निशा के चुचे कडे होने लगे थे और मस्ती मे उसने अपनी मा की चुची को दबाया जिस्से शालिनी सिसकी
शालिनी - सीईई धत्त क्या कर रही है तू
निशा हस कर - देख रही थी कि मेरे दबाने पर भी मजा आता है कि नही आपको,, हिहिहिही
शालिनी शर्म से लाल होने लगी - धत्त पागल कही कि,,एक मर्द का स्पर्श अलग ही होता है ।
निशा अपनी मा की बाते सुन कर अपने पापा की ओर खीची ही जा रही थी ।
निशा - मम्मी यार मेरी भी शादी करवा दो ना
शालिनी हस कर - अभी हिहिहिही
निशा हस कर - हा मुझे भी अब मन कर रहा है कि मेरा पति मुझे ऐसे छुए कितना अच्छा लगता होगा ना जब पापा आपको सहलाते होगे ।
शालिनी निशा के भोलेपन पर हस कर - तुझे बस सहलाना अच्छा लग रहा है ,,असली दर्द भी पति ही देता है हिहिही
निशा - मतल्ब
शलिनी- तुझे क्या लगता है तेरा होने वाला पति बस तुझे सहलायेगा , दुलारेगा उम्म्ंम
निशा - हा पता है सेक्स भी करेगा तो दर्द कैसा ,,उसमे भी मजा आता होगा ना
शालिनी हस कर - हा आता तो है लेकिन जब पहली बार हो तो बेहिसाब दर्द ही दर्द मिलता है
निशा डरने का नाटक करती हुई - क्या??? नही तो मै शादी नही करंगी कभी । मुझे तो मेरे पापा ने भी कभी नही मारा
शालिनी हस कर - लेकिन आज नही तो कल कभी ना कभी तु उस दर्द से गूजरेगि ही
निशा को सब पता था ही और उस दर्द का मजा वो राज के संग ले ही चुकी थी । लेकिन इतना ड्रामा करने का प्लान उस्का कुछ और ही था ।
निशा जिज्ञासू भाव से - तो क्या आप जब पापा के साथ पहली बार की थी तो आपको भी बहुत दर्द हुआ था
शालिनी हस कर - नही ,,बहुत हल्का सा ही ,,,वो तेरे पापा बहुत रोमांटिक है ना तो बहुत प्यार से वो किये थे ।
निशा मुस्कुरा कर अपने मा से लिपट गयी और बोली - फिर मेरे लिए भी पापा जैसे ही पति खोजना हिहिहिही
शालिनी - अरे वो तो मेरी किस्मत थी कि तेरे पापा मुझे मिल गये और मेरी तो लव मैरिज थी ना
निशा आंखे उठा कर - तो क्या आप लोगो ने शादी से पहले ही ??
शालिनी शर्म से लाल हो गयी और मुस्कुराने लगी ।
निशा - क्या शादी के पहले ये सब कर सकते है मम्मी ??
शालिनी उसे समझाते हुए - हा कर सकते है अगर कोई भरोसे का आदमी हो और जीवन के हर मोड पर तुम्हारा साथ निभाये । तो कर सकते है ।
निशा हसते हुए - आप कितनी लकी हो मम्मी आपको पापा मिले हिहिहिही
शालिनी - क्यू वो तेरे पापा है तो तु भी लकी हुई ना
निशा शर्मा कर - नही वो आपके पति है और उन्होंने आपको थोडा भी दर्द नही दिया और ....।
शालिनी - और क्या ??
निशा उदास होकर - मुझे पता नही पापा जैसा कोई मिलेगा भी या नही ।
शालिनी उसे देखकर मुस्कुरा रहती है
निशा अपनी मा को कसते हुए - मा मुझे अब डर लग रहा है ,,मै शादी नही करूंगी ।
शालिनी जान रही थी कि अभी ये सब दुर की बाते है तो उसने भी हा कह दिया कि चलो ठिक है मत करना ।
फिर वो दोनो रात के खाना बनाने लग गये ।
राज की जुबानी
सरोजा की चुदाइ के बाद दिन भर की थकान लेके मै घर आया
घर पर वही शादी को लेके चर्चाये बनी हुई थी ।
मा - सुनिये जी ये लिस्ट रज्जो दीदी ने बनवाई है ये सारे बर्तन आप निकलवा लो और कुछ ना हो तो उन्हे मगवा लेना
पापा वो पर्ची थाम कर - अच्छा ठिक है और वो पंडित जी से बात हो गयी है । कल वो एक पर्ची बनवा कर भिजवा देंगे । फिर परसो नरसो भी वो सामान भी लेके रख्वा लिया जाये ।
मा - हा ये सब इसी हफते लेके रख लिया जाये और अगले हफ्ते तक हमे अपने कपडे लेने जाने है
पापा - साड़ीया तो जन्गी के यहा मिल जायेगी ,,बाकी ये दूल्हा दुल्हन और बाकी जिसको जो चाहिये चल कर संजीव भाई के माल से ले लेना
मा - हा ये भी ठिक है ।
राज - मा आप चिंता ना करो , इस हफते मे मै सारे काम कर लूंगा फिर शॉपिंग तक ये महिना बीत ही जायेगा । अगले महिने से कार्ड भी देने चला जाऊंगा
फिर ऐसे ही थोडी बाते चलती रही ,,खैर अगले कुछ दिनो तक राज का परिवार तो शादी की तैयारियो मे व्यस्त रहने वाला था ।
थोडी देर बाद सब खाना खा कर अपने अपने कमरो मे सोने चले गये ।
जारी रहेगी