Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 29 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 157

लेखक की जुबानी



एक ओर जहा अनुज और राहुल अपनी अपनी मा के करीब जाने के लिए परेशान थे तो वही राज के पापा रंगीलाल की बेचैनी उनकी बीवी रागिनी ने बढा दी थी ।

बन्द कमरे मे अपने पति के लण्ड पर सवार होकर बडी कामुकता से रागिनी अपने नरम मोटे चुतडो को हिला रही थी और रंगीलाल अपनी बीवी के इस रूप से बहुत ही उत्तेजित मह्सूस कर रहा था कि तभी रागिनी अपने पति के उपर झुकते हुए उसके सर के पास रखे तकिये के निचे से एक पैंटी निकाली और बडी ही अदा से उसे अपने पति के नथनो पर रखकर उसे उसकी गन्ध लेने का इशारा किया ।








रंगीलाल को अह्सास हुआ कि ये गन्ध कुछ नयी थी और उसने अपने बीवी के हाथो से वो पैंटी लेके वापस से उसे फैलाकर फिर से सुँघा

रन्गीलाल का लण्ड उस नयी कामुक गन्ध और अकडने लगा जिससे रागिनी सिस्क पड़ी

रंगीलाल मुस्कुरा कर - जान ये तुम्हारा तो नही है ,

रागिनी बडी ही मादकता से अपने गाड़ को घिसते हुए रन्गीलाल के मोटे लण्ड को अपनी चुत मे कसते हूये मुस्कुरा कर ना मे सर हिलायि ।

रन्गीलाल - आह्ह तो किस्काह्ह है येह्ह्ह बहुत मस्त खुस्बु है उम्म्ंम

रागिनी मुस्करा कर - आपकी होने वाली समधन का

रागिनी की बाते सुन कर रंगीलाल चहका और उसके लण्ड मे और भी जान आ गयी । वो वापस से उस पैंटी को अपने चेहरे पर मलता हुआ तेज धक्के लगाने लगा

रागिनी समझ गयी कि अब ज्यादा देर नही रुकने वाला वो तो उसने अपने पति को और भी जोश दिलाना शुरु कर दिया

रागिनी - आह्ह मेरे राजा सूंघो अपनी समधन की पैंटी ,इसी मे वो अपने नरम गुलाबी भोस्ड़े को छुपाये रखती है

रन्गीलाल की ऊततेजना रागिनी के कामुक शब्दो से बढती ही जा रही थी और वो तेजी से निचे से अपनी कमर उठाए अपनी बीवी को चोदे जा रहा था ।

रागिनी सिसकिया लेते हुए - आह्ह मेरे राजा और तेज उम्म्ंम ऐसे ही अहाह्ह्ह उम्म्ं आज इस पैंटी से काम चला लो ,,देखना एक दिन उसकी चुत भी लाउन्गी उसे भी अच्छे से सूंघ लेना

रागिनी की बाते रन्गीलाल को चरम पर ले जा रही थी ,,,उसका सारा बदन उत्तेजना से काफ रहा था ,,चेहरे लाल पडने लगे थे

और लण्ड की कसावट के साथ साथ उसकी तपन रागिनी अपने चुत मे मह्सुस कर रही थी ।

रागिनी - अह्ह्ह माह्ह बोलो ना मेरे राजाह्ह सून्घोगे ना अपनी समधन की रसिली चुत उम्म्ंम अह्ह्ह बोलो ना

रन्गीलाल अपना पुरा जोर लगाये चोद रहा था और उसका चेहरा लाल हुआ जा रहा था - आह्ह मेरी जान उस रन्डी की चुत सुन्घूगा भी और चुसकर पेलून्गा भी अह्ह्ह तुने तो आह्ह जानू ओह्ह्ह मै आ रहा हू अह्ह्ह

ये बोलते हुए रंगीलाल आखिरी कुछ धक्के के साथ रागिनी की चुत मे झटके खाते हुए झड़ने लगा और उस्का गरम माल चुत से रिसने ल्गा






दोनो इस कदर थक गये कि कोई भी अपनी हालत से कुछ पलो के लिए हिल नही पाया ।

कुछ ही पलो मे दोनो के बदन स्थिर हुए और मुस्कुराते हुए रन्गीलाल ने अपनी बीवी के होठ चुम लिये

रागिनी उसे छेड़ते हुए - क्यू मजा आया ना हिहिहिही

रन्गीलाल उसके नरम नरम गाड को मसलकर - हा मेरी जान ,,लेकिन ये तो बताओ ये पैंटी मिली कैसे

रागिनी मुस्कुरा कर - अरे आप एक बार अपनी समधन से माग के तो देखो ,,, भोसडा खोल के बैठ ना जाये तो कहना हिहिहिही

रागिनी की बात सुन कर रन्गीलाल लण्ड फिर से सर उठाने लगा ।

रन्गीलाल - तो फिर आगे क्या सोचा है उम्म्ं

रागिनी - ओहो मेरे राजा थोडा सबर करो ,,, और फिलहाल इस गिफ्ट (पैंटी ) के बदले अपनी समधन को कुछ तो दो स्पेशल

रन्गीलाल कुछ सोचता हुआ - क्या गिफ्ट दू समझ नही आ रहा है

रागिनी खिलखिला कर - अरे बुद्धू बड़े शहर जाकर अपनी समधन के नाप का अच्छा सा ब्रा पैंटी लेलो और हा पैंटी का साइज़ इससे बड़ा रहे

रंगीलाल चहक कर - क्या !! इससे भी बड़ा ,, मतलब साइज़ क्या है उनका

रागिनी - 44D की ब्रा और 48 की पैंटी

रन्गीलाल अपनी सम्धन का नाप सुन कर जोश से भर गया और उसका लण्ड पूरी तरह से फिर से तन कर रागिनी की चुत पर ठोकर मारने लगा - आह सच मे इतनी बड़ी गाड़ है मेरी समधन की

रागिनी हस कर - गाड़ ही नही भोस्डा भी बड़ा होगा ,,, खुब डुबकी लेना

रागिनी की बात पर रंगीलाल भी हस पडा और दोनो एक बार फिर से अपने सपने संजोते हुए चुदाई के नये तराने लिखने लगे ।


राज की जुबानी


देर रात तक मै और मौसा मिल कर मौसी के मस्त गुदाज जिस्म पर अपनी भड़ास निकालते रहे और मौसी ने भी भरपुर मजे किये

अगली सुबह मेरी निद खुली तो मैने उसी अवस्था मे खुद को पाया जैसा रात मे नंगे सोया हुआ था ।

अगल बगल देखा तो कोई नजर नही आया ,,हा कमरे का दरवाजा बन्द था

मै उठा और मोबाइल चेक किया तो सुबह के 9 बज रहे थे ।

मैने जल्दी से कपडे पहने और सीधा कमरे से निकल कर उपर के बाथरूम मे फ्रेश होने के लिए चला गया और फिर निचे आकर चाय नास्ते के हाल मे आया

तो पता चला कि रमन भैया दुकान के लिए जा चुके है और मौसा जी किसी काम से बाजर गये है

किचन मे मौसी और रिना भाभी काम कर रही थी ।

मै धीरे से मौसी के पीछे खड़ा होकर रीना भाभी से छिप कर उनके नरम नरम गाड के पाटो को हल्का सा छुआ कि मौसी सिसकी

मै समझ गया कि मौसा ने रात मे जितना बेरहमी से मौसी को चोदा था उनकी हालत कुछ दिनो तक ऐसी ही रहने वाली है ।

मौसी की सिसकी से मै तुरंत वहा से हट गया और अंजान बनते हुए रीना भाभी को देख कर - क्या हुआ मौसी ,, कुछ दिक्कत है क्या ?

मौसी ने एक नजर मुझे देखा और फिर भाभी को देखकर मुस्कुराने लगी

रिना भाभी जो आज साड़ी मे थी वो भी मौसी की फिकर करते हुए बोली - क्या हुआ मम्मी जी ,, कही चोट लगी है क्या ?

मौसी अब क्या ही बताती वो बस शर्म से मुस्कुरा दी और मुझे देख कर - तु चल बैठ मै नासता लाती हू

मै भाभी के सामने बिना कोई रिएक्ट किये हाल मे आ गया और वही भाभी मौसी आपस मे बात करने लगी

इतने मे पता नही क्या हुआ कि भाभी ने रमन भैया को फोन किया और वही मौसी शर्मा कर मुस्कुरा रही थी ।

मैने एक दो बार इशारे से पुछा तो मौसी ने ना मे सर हिलाया । फिर मैने चुपचाप नास्ता किया और रमन भैया के दुकान पर चला गया ।


लेखक की जुबानी

CHAMANPURA



सुबह सुबह राहुल का परिंदा का अपने घोसले से आजाद होने के लोवर के अंदर फड़फडा रहा था ।

दो चार करवट लेके राहुल उठा और उबासी लेते हुए साथ ही अपने लण्ड को लोवर मे व्यवस्थित करते हुए उपर जीने की ओर जाने लगा कि उसे अपनी मा का ख्याल आया और वो लपक कर एक नजर अपनी मा के कमरे मे झाका तो उसे निशा दिखी जो कुछ काम कर रही थी

फिर राहुल उसे नजरअन्दाज कर 5 6 सीढि उपर चढा ही था कि उसका दिमाग ठनका और साथ ही दिल की धडकने भी तेज होने लगी ।

वो वापस तेजी से निचे उतरा और अपने जोरो से धडकते हुए दिल के साथ वापस से अपनी मा के कमरे मे झाका तो देखा वहा कमरे मे निशा नही बल्कि निशा के कपडो मे उसकी मा झुक कर काम कर रही थी ।






लोवर और टीशर्ट मे कसा हुआ अपनी मा का बदन देख कर राहुल का लंड फौलादी हुआ जा रहा था और उसे अपने स्थिति का थोडा भी ज्ञान नही था वो बस अपनी मा के लोवर मे फैले हुए चुतडो और गुदाज जांघो की ओर खीचा जा रहा था

तभी शालिनी को कमरे मे आहट आई तो वो उसने नजरे उठा कर देखा कि ये तो राहुल है और वो बस उसकी ओर चलता आ रहा है और लोवर मे उसका मुसल अपना आकार ले रहा था तो उसने राहुल की नजरो का पीछा किया तो वो थोडी लजा गयी और फौरन वो सीधी खड़ी हो गयी बिना ये सोचे कि उसने उपर से कोई दुपट्टा नही ले रखा और उसका निप्प्ल पूरी तरह से उभरा हुआ है ।

राहुल ने जैसे ही मा को हरकत करते हुए देखा वो थोडा ध्यान भंग हुआ लेकीन अगले ही पल वो अपनी मा के स्तनो के उन मोटे अंगूर के दाने जैसे नुकीले निप्प्ल्स पर फोकसड हो गया ।

उस्के दिल की गति फिर से बढ गयी और साथ ही उसका लण्ड लोवर मे और भी उछलने लगा ।

शालिनी अब पूरी तरह से समझ चुकी थी कि उसका बेटा उसकी ओर मोहित हो चुका था और उसके मन मे भोगने की भरपुर लालसा है ।

वो राहुल के लोवर मे सास लेते हुए उस मोटे कीडे की लम्बाई का जायजा ले रही थी कि राहुल बोल पडा - अरे वाह मा आप कितनी प्यारी लग रही हो।

शालिनी अपने बेटे के बात सुन कर शर्म से हस दी

राहुल - देखा मै नही कहता था कि निशा दीदी के कपडे आपको एकदम फिट होगे

शालिनी ने शर्म से मुस्कुराते हुए सहमती दी और उसने राहुल की ओर देखा कि वो अब भी उसके नुकीले चुचो पर नजरे गड़ाये हुए है तो ऐसे मे उसने राहुल को परेशान करने के इरादे - अब क्या देख रहा है उम्म्ं

राहुल पहले थोडा चौक लेकिन फिर मुस्करा कर - अरे वो तो मै इस टीशर्ट पर जो लिखा है वही पढ रहा था । बिल्कुल सही लिखा है और आप पर शूट भी करता है । "I DO WHAT I WANT "








शालिनी भी अचरज से अपने जिस्मो पर देखने लगती है और फिर राहुल से उसका मतलब पुछती है ।

राहुल हस कर - इस्का मतलब मा की आप जो चाहो वो कर सकते हो और देखो आपने वही किया जो आपको पसंद है ।

शालिनी राहुल की बात पर थोडा खिलखिलाई और बोली - हमम ये बात तो है हिहिहिही ,,चल अब जा तु भी नहा धो कर आ मै नास्ता बना लू

ये बोलकर शालिनी कमरे से बाहर निकल गयी








राहुल वही खडे खड़े अपनी मा के भारी चर्बीदार चुतडो को थिरकता हुआ देखता रहा ।

सुबह की शुरुवात तो अनुज के यहा भी हो चुकी थी ।

सुहाने सपनो में खोया हुआ अनुज अंगड़ाई लेके उठता है और लोवर मे बने तम्बू को देखकर वापस से अपनी मा को याद करने लग जाता है

फिर वो उठ कर रोज की तरह फ्रेश होकर ब्रश करते हुए अपनी मा के छत पर आने का इन्तजार करने लग्ता है और आज फिर उसकी मा मैक्सि मे अपने मदमस्त चुतडो को मटका कर अनुज की हालात खराब कर देती है ।

अनुज अपने लण्ड के साथ साथ अपनी भावनाये दबाता हुआ नहाने चला जाता है और फिर नासता करके दुकान के लिए निकल जाता है ।

एक ओर जहा वो अपनी माँ के लिए बेचैन हुआ जा रहा था वही वो राहुल से मिलकर उसकी योजना भी जानना चाह रहा था कि राहुल कैसे अपनी मा को पटा रहा होगा ।


जानीपुर


राज तो अपने रमन भैया के दुकान पर जा चुका था ।

घर मे अब दोनो सास बहू थी ।

रीना ने अपनी सास रज्जो को उनके कमरे मे आराम करने का बोल दिया था ।

थोडी ही देर मे रीना ने जो रमन से कहके सामान मग्वाया था वो दुकान का ही एक नौकर देने आया ।

उसके बाद रीना ने वो समान निकाला जो कि एक कूलिंग पैड था जिसमे बर्फ भर कर सेकाई की जाती थी ।

रीना ने सारी तैयारिया की और अपने कमरे से एक तेल की शीशी भी ली

फिर अपनी सास के कमरे मे चली गयी जो अपनी चुतडो को उठाए पेट के बल सोयी हुई थी ।

अपनी बहू को कमरे मे आता देख रज्जो मुस्करा कर - अरे बहू तु परेशान ना हो मैने दवाइयां ली है सही हो जायेगा

रीना जिद दिखाते हुए - नही मा जी ,, आपको जितनी तकलिफ हो रही है मै सब जान रही हू

रीना अपनी सास के पास आकर - चलिये ये मैकसी उपर करिये

रज्जो अपनी स्थिति पर हस्ती हुई - आह्ह बहू वो दरवाजा तो बन्द कर दे ना

रीना हस कर अपने माथे पर हाथ मारते हुए दरवाजे की ओर घूम कर उसे भिड्काते हुए वापस घूमी तो सामने का नजारा देख कर उसकी आंखे फैल गयी






रीना अपनी फटी हुई आंखो से अपने सास के उभरे हुए मोटे मोटे बडे भड़कीले चुतडो को निहार रही थी और उनके पाटो पर लाल पड़े हुए पंजो के थपेडों से उसका पुरा बदन गनगना गया ।

वो थुक गटक कर धीरे धीरे अपनी सास के करीब आई और रज्जो के चुतडो के बिच उसकी गाड़ के मोटे सुराख को निहारते हुए मन मे बड़बड़ाई- हाय दईया ससुर जी ने क्या हालत कर दी है मा जी ,,, ना जाने क्या सोच कर उन्हे इतना जोश आया होगा ।

रीना मन मे - कही मा जी की जगह मै होती तो मर ही जाती ....

रीना अपने ख्यालो से ही नकारते हुए - नही नही छीई ये मै क्या सोच रही हू ,,,मै मेरे ससुर के नीचे

रीना अभी अपने ख्यालो ने गुम थी कि उसके सास ने आवाज दी - क्या हुआ बहू ,, जल्दी से जो करना है कर ले ,,मुझे शर्म आ रही है हिहिहिही

अपनी सास को हस्ता देख कर रीना भी मुस्कुरा दी - क्या मा जी ,,आप भी ना मुझ्से क्या शरमाना ।

रज्जो - हा लेकिन तु जिस तरह से मेरे नितम्बो को निहार रही है ,,, उस्से मुझे थोडा अटपटा लग रहा है

रीना हस कर अपनी सास का मजा लेते हुए - वो तो मै पापा जी की मेहनत देख रही थी ,,पता नही क्या खाकर उन्होने इतनी बेरहमी से ....हिहिहिहिही

रज्जो हस कर - धत्त बदमाश कही की , अब जल्दी से कर जो करना है

रीना हस कर वो कूलिंग पैड को अपनी सास के नरम नरम चुतडो पर रखा और सेकाई करने लगी

रज्जो सिसकी - सीईई अह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह

रीना अपनी सास की सिस्किया सुन कर धीरे धीरे हस रही थी

रज्जो उसकी हसी सुन कर - तु बड़ा हस रही है

रिना अपनी हसी को अपने होठो मे दबाते हुए - उह्ंम्ं हिहिही नही मा जी

रज्जो - अह्ह्ह जब तेरा भी किसी दिन ऐसा हाल होगा ना तब पता चलेगा

रीना अपनी सास की बात पर शर्म से लाल हो गयी और धीरे से फुसफुसाकर मन मे - आपके बेटे का मुसल इतना बड़ा नही कि मेरे गाड़ की सुराख को इतना फैला सके हिहिहिही

रज्जो - क्या हुआ उम्म्ं

रीना हस कर - धत्त मा जी आप कैसी बाते कर रही है । मुझे शर्म आ रही है

रज्जो - जब किसी दिन रमन तेरे पिछवाड़े में 3 4 बार ऐसे दसत्क दे देगा ना तो सारि शर्म हवा हो जायेगी

रीना की आंखे फैल गयी उसकी सास ने बीती रात मे 4 बार अपनी गाड़ मरवाई

रीना हस कर - तो क्या सच मे रात मे पापा जी ने 4 बार ....हिहिहिहिह

रज्जो शर्म से लाल होकर हसने लगी

रीना ने बर्फ की सेकाई के बाद तौलिये से अच्छे से अपनी सास के चुतडो को साफ किया और फिर तेल से उसके चुतडो की भरकर मालिश करने लगी






रज्जो अभी भी हल्की हल्की मादक सिसकिया ले रही थी और उसके गाड़ की सुराख पर घूमती उसके बहू की ऊँगलीया उसे और भी उत्तेजित किये जा रही थी।

रज्जो कसमसा कर - अह्ह्ह बहू रुक जा नही तो अह्ह्ह

रीना समझ गयी कि उसकी सास थोडी गरम होने लगी इसिलिए वो हस कर मजे लेते हुए - ह्म्म्ं ठिक है हो गया अब आप आराम कर लो ,,,और पापा जी से कहियेगा की थोडा हिहिहिही

रज्जो अपने कपडे ठीक करते हुए- उन्हे कहा चैन मिलने वाला है ,,, एक रात ना मिले तो निद ना आये उन्हे

रीना हस कर - हा लेकिन फिर भी कम से कम इधर 3 4 दिन तक कुछ मत करने दिजियेगा

रज्जो हस कर हा मे सर हिला दी और फिर रीना भी निचे चली गयी ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 158


अब तक के अपडेट मे आप समझ ही गये होगे कि किस जगह कौन से किरदार किस तरह से अपनी अपनी कहानी आगे बढ रहे है । चमनपुरा की बात करे तो अनुज और राहुल दोनो अपनी मम्मी के लिए व्याकुल है तो रन्गीलाल अपनी समधन के लिए । वही जानीपुर मे बीती रात हुए थ्रीसम चुदाई समारोह ने एक नया अध्याय शुरु कर दिया है । तो देखते है कहानी का ये भाग लेखक के हिसाब से कैसा मोड लेता है ।

चुकि कहानी इस समय कई शाखाओ को एक साथ लिये आगे बढ रही है तो शायाद यहा से कुछ अपडेट आपके प्यारे कहानी पात्र राज से जुडी अपडेट कम ही मिले ( राज की जुबानी वाले ) ,, लेकिन कहानी मे जो कुछ भी आगे होगा वो सब बिना राज के सहयोग के आगे नही बढ सकेगा ।

हालकि राज इस कहानी का नायक तो नही है हा लेकिन एक बहुत ही अहम किरदार है जिसके अनुभव मे ही ये कहानी आगे बढ रही है ।

अब आगे



लेखक की जुबानी


JAANIPUR

रीना अपनी सास की मालिश करने के बाद हस्ती खिल्खिलाती हुई कमरे से बाहर निकाली और निचे किचन मे चली गयी ।

उसके जहन मे अपनी सास की कुछ बाते घूम ही रही थी और उन्ही पर वो हसे जा रही थी ।

रीना शुरु से अपनी सास के मजाकिया व्यव्हार से परिचित थी ,, शादी के पहले भी जब उसकी मा और सास पर बाते होती तो वो भी उन हसी ठिठोली भरि बातो कर भरपुर आननद लेती थी ।

फिर शादी के बाद रज्जो ने अपनी बहू को कभी अह्सास ही नही होने दिया कि वो पराये घर आई है । हमेशा वो उसे एक सहेली के जैसे ही व्यव्हार करती थी और समय के साथ दोनो सास बहु बहुत खुल चुकी थी ।

अक्सर उनकी ऐसे अश्लील मुद्दो को लेके बाते होती रहती थी ।

रीना अपने ख्यालो मे मगन होकर किचन मे दोपहर के खाने की तैयारी कर रही थी कि तभी मेन गेट खुलने की आवाज आई और रीना के ससुर कमलनाथ बाजार से वापस आ गये

कमलनाथ ने एक नजर घर के सब हिस्सो पर मारा और फिर किचन मे काम कर रही अपनी बहू के कसे हुए पिछवाड़े को देखते ही कमलनाथ सिहर उठा ।






उसकी नजरे अपनी बहू के नंगी गोरि मुलायम मखमली कमर पर जमी हुई थी । कमलनाथ का मन तो उसे अभी दबोच लेने का था लेकिन उसने खुद के जज्बात को काबू मे रखा और पजामे मे सर उठाते अपने लिंग को सही करते हुए अपनी बहू को आवाज दी फिर हाल मे बैठ गये ।

कमलनाथ - अरे बहू जरा पानी देना

रीना अपने ससुर की आवाज सुन कर प्रतिक्रिया दी और फिर एक ग्लास और जग मे पानी लेके हाल मे चली गयी ।

वहा जाकर उसने अपने ससुर के सामने ही झुक कर जग से ग्लास मे पानी भरने लगी कि उसकी नजर अपने ससुर की ओर गयी ।






जो आंखे फाडे उसे डीप कट वाले ब्लाउज के गले से झाकते उसके गोरे चुचो को निहार रहे थे ।

रीना एक पल को सकपका गयी और फौरन पानी देके किचन मे चली ।

वही जन्गीलाल अपनी बहू के नरम गोरे चुचो को निहारने के बाद उसकी मदमस्त थिरकति गाड़ को देखते हुए पानी पीने लगता है ।

रीना तेज कदमो से चलते हुए किचन मे पहुचती है और गहरी सास लेते हुए मन मे बड़बड़ाइ- ये रमन की वजह से मुझे ऐसे तंग कपडे पहनने पडते है ,,खुद तो देखते नही है पुरा घर ( कमलनाथ और राज ) भले मेरे जोब्नो मे आंखे गड़ाये रहता है ।

रीना तुनक कर मन मे - आने दो आज ,, मै भी साफ मना कर दूँगी ऐसे कपडे पहनने से अब , हा नही तो ।

रीना अगले ही पल उदास होकर - लेकिन अगर ये सब नही पहनूँगी तो क्या है ही मेरे पास । सारे कपडे तो रमन ने ही अपने हिसाब से सिलवाये है मेरे ।

रीना अभी अपने ख्यालो मे गुम थी कि उसके ससुर ने एक बार फिर आवाज दी

कमलनाथ - अरे बहू ये रमन की अम्मा कहा है ?

रीना किचन से बाहर आकर - जी पापा जी वो मम्मी की तबीयत नही ठिक है तो वो आराम कर रही है ।

कमलनाथ थोडा परेशान होकर - क्यू क्या हुआ उसको ,,सुबह तो ठिक थी

रीना को थोडी हसी आ रही थी अब वो अपने ससुर से क्या ही कारण बताये - जी पापा वो उन्के कमर मे दर्द है इसिलिए

कमलनाथ - अच्छा ठिक है मै देखता हू

ये बोल कर कमलनाथ उपर अपने कमरे मे चला गया ,,जहा रज्जो वैसे ही पेट के बल लेटी हुई सो रही थी ।

कमलनाथ उसके पास बैठ कर बडे प्यार से उसका हाल लेते हुए - क्या हुआ मेरी जान उम्म्ं

रज्जो ने आंखे खोली और अपने पति को देख कर मुस्कुराते हुए - खुद ही दर्द देते हो और खुद ही पुछते हो

कमलनाथ समझ गया कि बीती रात उसका और राज का एक साथ इतनी देर तक रज्जो को चोदना भारी पड गया ।

कमलनाथ - ओह्ह सॉरी जानू वो तो जोश मे कल रात ,,, अच्छा बताओ कहा दर्द है लाओ मै मालिश कर दू

रज्जो तुनक कर - हुउह रहने दो ,,,आपसे पहले ही बहू के मालिश कर दी है और अब 3 4 दिन दुर रहियेगा मुझसे कुछ नही मिलने वाला

कमलनाथ - क्या !! क्यू ? लेकिन वो तो रात तक सही हो जायेगा ना !

रज्जो - नही बहू ने मना किया है कि कुछ दिन तक वो नही करवाना है

कमलनाथ थुक गटक कर - तो क्या बहू ने खुद से तुम्हरे पीछे वहा पर देख कर मालिश की है

रज्जो तुनक कर - हा तो और उसी ने कहा भी है मना करने को "और ये भी बोला है कि अगर पापा जी ज्यादा जिद करे तो मुझे बताना ", रज्जो ने अपनी ओर जोडा ।

कमलनाथ चौक कर - क्या सच मे

कमलनाथ का चेहरा उतर गया और वही रज्जो अपने पति का उतरा हुआ चेहरा देख कर मुस्कुराने लगी ।



राज की जुबानी


देर शाम तक मै और रमन भैया घर आये और फिर रमन भैया अपने कमरे मे चले गये ।

मै फ्रेश होकर हाल मे आया तो मौसा जी का चेहरा उतरा हुआ था और मौसी कही दिख नही रही थी ।

मै मौसा के पास बैठ कर उन्के ऐसे गुमशुम होने के बारे पुछा और फिर मौसी के बारे मे

फिर मौसा जी ने जब मुझे सारि बाते बताई तो मै भी परेशान हो गया कि अब आज क्या होगा ।

मै - तो अब मौसा क्या होगा

मौसा जो कि किचन मे रीना भाभी के साड़ी मे कसे हुए चुतडो को निहार रहे थे

मौसा - अब क्या बताऊ बेटा , शायद कल रात जोश जोश मे मैने ही कुछ ज्यादा कर दिया

मै - हम्म्म शायद ,,, कोई बात नही मौसा जी मौसी को आराम करने दीजिये । फिर कभी हम लोग

ये बोल कर मै मुस्कुरा दिया और मौसा भी मेरी जांघ पर हाथ रखकर हस दिये ।

फिर हम लोग ऐसी आगे की बात चित करने लगे क्योकि अगले दिन मुझे अपने नये सफर के लिए आगे बढना था और अपनी बुआ के यहा जाना था ।


लेखक की जुबानी


CHAMANPURA

हालांकि एक ओर जहा अनुज के जीवन चीजे बहुत धीमी गति से हो रही थी । वही राहुल अपने मंसूबो मे बहुत तेज बढत हासिल किये जा रहा था ।

जब भी राहुल को मौका मिलता वो अपनी के करीब आने की कोसिस करता और हमेशा अपना खड़ा लण्ड लिये घूमता रहता ।

शाम हो चुकी थी और अभी अभी थोडे देर पहले आये एक फोन ने राहुल के घर के सभी सदस्यों को उल्झा कर रख दिया था ।

फोन राज की मा रागिनी का था और उन्होने निशा को कल से शादी वाले दिन तक अपने घर रहने के लिए बुला लिया था क्योकि शादी को बस दो ही हफते रह गये थे । तो ऐसे मे निशा के रहते रागिनी की काफी मदद हो जाती और सोनल को भी कम्पनी मिल जाती ।

इस खबर की सूचना घर के सभी सदस्यों के कानो मे पहुच चुकी थी और आज रात मे निशा के लिए दिक्कत बढने वाली थी कि वो कैसे अपने भाई और बाप दोनो से चुद पायेगी । क्योकि दोनो ही आज रात अपनी भड़ास निकालने के लिए पागल हुए रहेंगे । राहुल को वो एक पल के लिए वो मैनेज कर भी लेती लेकिन उसका ठरकी बाप ये खबर सुनने के बाद से अपना लण्ड मसले जा रहा था और बार बार घर मे चक्कर काट रहा था ।

डर तो शालिनी को भी था कि जिस तरह से राहुल उसकी ओर ताक झाक कर रहा था उस हिसाब वो भी यही चाह रही थी कि निशा की भनक राहुल को ना लग पाये ।

वही राहुल पूरी तैयारी मे लगा था कि किसी तरह से वो अपनी मा को नंगी देख पाये ।

क्योकि आज दिन मे उसने कयी दफा अपने पापा को घर मे आते जाते देखा और उसकी मा के नरम चुतडो को लोवर के उपर से मसलते देखा था तो उसे अपने बाप की बेचैनी से पुरा संज्ञान था कि आज उसकी मा और पापा चुदाई करने वाले है।

कसमकस हर तरफ थी और शालिनी निशा के जहन मे एक ही बात चल रही थी कि कैसे भी करके जन्गीलाल निशा की चुदाई कर ले और निशा को उसके कमरे मे ना आना पडे ।

इसिलिए शाम का नास्ता बनाने के दौरान ही शालिनी निशा से - मै क्या कह रही हू निशा ,,,मुझे ना ये राहुल का डर हो रहा है । रोज रोज कैसे हो पायेगा

निशा बहाना करते - हा मम्मी मुझे ,,, वो रात मे कभी भी मेरे कमरे मे मेरा मोबाइल लेने आ जाता है

शालिनी - हम्म्म और जबसे वो सोनल ने तुझे अपने घर रहने के लिए बोला है वो सुन कर तो तेरे पापा और भी परेशान होने लगे कि कल से तु यहा नही होगी

निशा - हा मा ,,,मै भी नही जाना चाहती और आप लोगो के साथ मस्ती करना चाहती हू । लेकिन सोनल दीदी की शादी को अब ज्यादा दिन है कहा ।

शालिनी - अरे बेटा आगे का आगे देख लेंगे लेकिन आज का कैसे मैनेज करे

निशा अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाने लगी और कुछ ऐसा उपास सोचने लगी ताकी राहुल से बच भी जाये और पापा के साथ मस्ती भी जाये ।

निशा चहक कर - आईडीया मम्मी

शालिनी उसको चुप कराती हुई - सीईई चुप पागल ,,,धीरे बोल

निशा हस कर - मै ये कह रही थी कि क्यू ना आज रात वाला प्रोग्राम आपके रूम के बजाय मेरे कमरे मे हो

शालिनी - हा लेकिन तेरे कमरे , कही राहुल आया तो मोबाइल लेने और हमे (शालिनी और जंगीलाल ) देख लिया तो

निशा - इसिलिए तो कह रही हू मा ,,,अगर वो आयेगा भी तो हम लोग उसे बोल देंगे की कल मै सोनल दीदी के यहा जा रही हू तो उसी की पैकिंग चल रही है ।

शालिनी निशा के गाल खिच कर -बहुत चालाक हो गयी है तु

निशा हस कर - आपकी ही लाडली हू ना हिहिहिही

शालिनी मुसकराने लगी और मन मे सोचने लगी - थैंक गॉड ये प्रोब्लम खतम हुई इस्से राहुल को शक भी नही होगा हम पर और इसके पापा भी चैन से मजे कर पायेंगे ।

दोनो मा बेटी ने अपनी गुप्त गुप्त बातो को प्रमुखता देते हुए अपने काम मे लग गये और निशा ने एक-दो बार राहुल के सामने अपनी मा से पैकिंग मे हैल्प करवाने के लिए बोला ।

जिसपर शालिनी ने बोला की वो रात मे खाने के बाद आयेगी उसके पास

जिस पर राहुल का चेहरा उतर गया और वो समझ गया कि शायद वो जो सोच रहा था आज नही हो पायेगा ।

ना ही उसे निशा की चुत मिल पायेगी और ना ही अपनी मा के जिस्मो को देखने का सुख मिल पायेगा ।

रात हुई और दोनो मा बेटी अपने मुद्दे पर कायम रहते हुए निशा के ही कमरे मे सारी प्लानिंग की देर रात तक जहा जन्गीलाल ने अपनी बेटी की दोनो सुराखे लाल की वही दुसरे कमरे मे लेटा राहुल अपनी मा को पटाने के तरीके से उत्तेजित होकर कयी बार मुट्ठि मार कर थक कर सो गया ।

JAANIPUR

चेहरे उदास सिर्फ चमनपुरा मे ही नही जानीपुर मे भी थे

कमलनाथ और राज भी मजबुर और मायूस होकर अपने अपने कमरे सो गये ।

लेकिन वही घर के एक कमरे मे मिया बीवी वाली मीठी नोकझोक चल रही थी ।

रमन - ओहो मेरी जान तु मुझे अच्छी लगती हो इन कपड़ो मे इसिलिए तो मै कहता हू पहनने को

रीना तुनक कर - आपकी वजह से पता है मुझे लोगो की नजरो से खुद के जोबनो को छिपाना पडता है । हुउह

रमन हस कर रीना को पीछे से पकडता हुआ - ओहो अब किसने ताड लिया मेरी गुलाबो को उम्म्ंम ,,,






" किसने देख लिया इन नरम नरम नाजुक दूध को " , रमन ने अपनी बीवी के चुचो पर ब्लाउज के उपर से हाथ फेरते हुए कहा ।

रमन की इस हरकत से रीना सिहर गयी और कसमसा कर - कल वो राज बाबू ,, ऐसे देख रहे थे जैसे खा ही जायेंगे

रमन हस कर - हाह्हा अरे छोटा देवर है और भाभी पर आधा हक उसका भी तो है ।

रमन की बात कर रीना तुन्की -और पापा जी क्या ! उनका कितना हिस्सा ये भी बता दो । हा नही तो

रमन चौक कर - क्या पापा भी !

रीना उखड़कर - हा और क्या ,,,

फिर रीना ने आज सुबह की बात बताई जब कमलनाथ एक टक उसके चुचे निहारने लगा था ।

रमन को भी एक पल को उसके बाप का व्य्व्हार ठिक नही लगा ,,लेकिन अगर इस मुद्दे पर वो अगर रीना का साथ देता तो शायाद उसकी पारिवारिक जीवन मे कोई ना कोई बखेडा हो ही जाता ।

इसिलिए उसने ये बात भी मजाक में बनाये रखना उचित समझा

रमन मुस्कुरा कर वाप्स से उसे अपनी बाहो मे भरते हुए - अच्छा और क्या किया पापा ने उम्म्ंम

रीना मासूमियत से - धत्त मैने देखा थोडी मै तो डर गयी थी और जल्दी से किचन मे आ गयी

रमन हस कर - अरे पगलू इसमे इतना डरने वाली कौ बात नही है ,,,घर के लोगो मे ऐसे छोटे-मोटे अजीबोगरीब स्थितिया आती रहती है ।

रीना ने आंखे उठा कर रमन को घूरा तो वो मुस्कुराकर सफाई देता हुआ - अब देखो ना मै घर मे मेरी मा भी है और कयी दफा वो जब मेरे सामने से आती जाती है तो उनके bums हिलते रहते है और मेरी नजर अटक जाती है इसका ये मतलब थोडी की मेरी मा के प्रति खराब मानसिकता है

रीना अपनी सास की ने पिछवाड़े की बात पे हस दी और उसे सुबह वाली मालिश की बात याद आ गयी ।

रमन उसके गाल खीच कर - क्या हुआ हस क्यो रही हो उम्म्ंम

रीना हस कर - अरे मम्मी जी bums की हालत ना पुछो हिहिही

रमन - क्यू! क्या हुआ ?

रीना हस कर - आप गुस्सा नही होगे तो बताऊ हिहिहिही

रमन अचरज से मुस्कुराता हुआ - हा बोलो ना जान

रीना हस कर - वो कल रात पापा जी ने मम्मी जी को पीछे से 4 बार हिहिहिही और आज सुबह उनकी सूज गयी थी हाअहहह्जा

रमन हसा तो सही लेकिन कुछ देर के लिए असमंजस मे था

रमन हस कर- लेकिन तुमको कैसे पता

रीना हस कर फिर सुबह की सारी बाते बताने लगी ।

सारी बाते सुनने के बाद उसे आश्चर्य हुआ कि इतने कम समय मे उसकी मा और बीवी के सम्बंध कैसे अच्छे हो गये

रमन को अपनी मा बाप की चुदाई भरी बाते सुन कर बहुत झिझक भी हो रही थी लेकिन वही रीना ठहाके लेके हसे जा रही थी ।

रीना हस कर - मुझे तो लगता है मम्मी जी का इतना बड़ा इसिलिए हुआ है कि पापा जी रोज ....हिहिहिही

रमन को अपनी बीवी के सामने अपनी मा के चुतडो के बारे मे सुन कर शर्म आ रही थी और वो बस मुस्कुरा रहा था ।

रमन - क्या तुम भी कुछ भी बोलती हो ,,,वो तो मम्मी का शरिर ही भारी है शुरु से ही

रीना हस के - हा तभी तो पापा जी ने चार बार ली उनकी हिहिहिहिही






रमन उसको अपनी ओर करके उसके चुतडो को मसलता हुआ - क्यू तुम्हे भी अपने चुतड वैसे ही करवाना है क्या ... लोगि चार बार उम्म्ंम

रीना अपने पति के बातो पर उसके खड़े लण्ड को उपर से मसलकर - कर पाओगे रोज चार बार उम्म्ंम

रीना के स्पर्श से रमन काफी ऊततेजित हो गया था और उसी नशे मे वो क्या बोल गया उसे खुद समझ नही आया - मै नही कर पाया तो क्या ,,,,पापा है ना वो कर देंगे

रीना अपने पति के मुह से ऐसी बाते सुन कर एक पल को सिहर गयी और अगले ही पल उसे होश आया तो हस कर उससे अलग हो कर - धत्त क्या जी आप भी ना ।

रीना के अलग होने से रमन भी होश मे आया कि अभी अभी वो क्या बोल गया लेकिन जैसा भी हुआ उससे रीना को बुरा नही लगा उसने इस बात को इन्जाय किया और बस यही रमन के जहन मे एक नये ख्वाब ने अपनी जगह बना ली

जिससे उसके तन बदन मे एक अलग ही जोश आ गया उसका सुपाडा कड़ा होने लगा । लण्ड की नसे उभरने क्गी और दिल की धडकनें तेज सी हो गयी ।

क्या है वो ख्वाब

क्या वो हकिकत मे हो भी पायेगा

जानेंगे अगले अपडेट मे ।
 
अपडेट 159



बीती रात लण्ड की कसावट ने अच्छे से सोने नही दिया और मुझे पता था कि मौसी के यहा कुछ दिन तक कुछ भी नही हो सकता था, हा मै चाहता तो थोडा रुक कर रीना भाभी के रसिले जोबनो और उनकी थिरकते कूल्हो को देख कर अपना लण्ड मसल सकता था लेकिन मुझे कुछ जरुरी काम भी सौपे गये थे और उन्हे पुरा करना भी जरुरी था ।

इसिलिए सुबह के नास्ते के बाद मैने सबसे विदा लिया और अपने अगले सफ़र के लिए निकल पड़ा ।

हालाकी मंजिल मेरे घर चमनपुरा से काफी नजदीक ही थी लेकिन यहा जानीपुर से बुआ के घर जाने का अलग लम्बा रास्ता था ।

तो मौसा जी ने मुझे डिरेक्ट मीरगंज के लिए बस पकडवा दिया , चूकि सफ़र लम्बा था तो मैने कुछ स्नैक्स वगैरह भी रख लिये ।

बस का सफ़र शुरु हो गया था और मै मुस्कुराता हुआ अपने बुआ के घर के बारे मे सोचने लगा

काफी सालो बाद मै वहा जा रहा था ,

पात्र परिचय

मानसिंह - बड़े फूफा , इनका अपना इंटर कालेज है

शिला - बड़ी बुआ (पूर्व परिचित)





उम्मीद करता हू इनकी बलखाती भारी भरकम चुतडो की थिरकन को भूले नही होगे आप सब

नीलू - शिला बुआ की बेटी , दिल्ली मे रह कर पढाई करती है ।

रामसिंह - छोटे फूफा , वैसे ये और मानसिंह जुड़वा है लेकिन समाज और परिवार की नजर मे मानसिंह का जन्म इनसे कुछ मिंट पहले हुआ था । ये भी अपने भाई के साथ कालेज का मैनेजमेंट देखते हैं ।

कामिनी देवी उर्फ कम्मो - छोटी बुआ , लाजवाब जबरदस्त जिन्दाबाद ।





जिस तरह ये अपने गदराये जिस्म को साड़ी मे कस कर रखती है कालेज के हर वर्ग के लड़को की ड्रीम गर्ल बनी हुई है । जी हा ! ये कालेज मे अध्यापिका है ।

चारु - छोटी बुआ की बेटी , ये भी अपनी बड़ी बहन नीलू के साथ पढाई करती है

अरुण - छोटी बुआ का लड़का , अभी 11वी मे है ।



लेखक की जुबानी


CHAMANPURA

सुबह की शुरुवात आज कुछ खास थी क्योकि निशा कुछ ही देर बाद सोनल के यहा जाने वाली थी और वही दोनो मा बेटे ( शालिनी और राहुल ) के जज्बात उमड उमड कर बाहर आ रहे थे ।

राहुल का लण्ड तो सुबह से बैठने का नाम नही ले रहा था क्योकि आज उसकी मा ने फिर से निशा के कपडे पहन रखे थे ।

टीशर्ट और लोवर मे उसका गदराया कल जैसा ही गदर किये हुआ था और वो उसने आज भी कोई अंडरगार्मेंट्स नही लिये थे ।

हालाकी निशा को अपने कपडे छोड कर जाना पसंद नही आ रहा था लेकिन रात मे पैकिंग के टाईम शालिनी ने उससे ये कह कर उसके एक दो सेट कपडे रखवा लिये कि वो निशा के ना होने पर उसके पापा को उसकी कमी नही महसूस होने देगी और जन्गीलाल भी इनसब से बहुत उत्तेजित हुआ जा रहा था ।

खैर नासता खतम हुआ और राहुल निशा को सोनल के घर छोडने चला गया ।

इधर अनुज रोज की तरह आज भी अपनी तडप और लण्ड को अपने कच्छे मे दबाता हुआ गुमसुम अपने दुकान पर व्यस्त था ।

लेकिन निशा को छोडने के बाद राहुल बहुत खुश था और अपनी खुशी जाहिर करने के लिए अनुज के पास उसकी दुकान पर चला जाता है ।

राहुल - क्या हुआ भाई तु ऐसे उखड़ा हुआ क्यू है ?

अनुज अपने जजबात छिपा कर - भाई काफी दिन से चुदाई नही की है तो अच्छा नही लग रहा है ।

राहुल हस कर - अरे तो टेन्सन क्यू ले रहा है ,,अभी जस्ट दीदी को तेरे घर छोड कर आ रहा हू ,,अब तो शादी तक रोज मजे लेते रहना

अनुज की आंखे एक पल को चमकी लेकिन अगले ही पल वो शांत हो गया क्योकि वो जानता था उसकी सोनल दीदी के रहते कहा ये सब हो पायेगा और उपर से उसकी अपनी मा को लेके एक अलग ही कामना पनप रही थी ।

राहुल अपने खुशी जाहिर करता हुआ - भाई भाई भाई ! हिहिहिही अब मजा आयेगा ,,,अब पुरा दिन मै और मम्मी घर मे अकेले होगे और मै उनको अच्छे से समय दे पाऊन्गा

अनुज उखड़ कर - हा जैसे आंटी तुझसे सच मे ...

राहुल इधर उधर देख कर - भाई मै सच कह रहा हू ,,इधर मा कुछ बदली बदली लग रही है और उसने तो ब्रा पैंटी तक पहनना छोड़ दिया

फिर राहुल अपने मा के साथ हुए कुछ हसिन यादो को अनुज से बाटता है और जिस्से अनुज का नुनी लण्ड का आकार लेने लगता है । लेकिन उसे अभी भी यकीन नही हो रहा था कि राहुल के सब कुछ इतनी आसानी से हो जा रहा है ।

अनुज - चल चल मै नही मानता ,,,

राहुल - तो चल अभी घर मै दिखा दू कि मम्मी कैसे कपडो मे है

अनुज हिचक कर - अरे मै दुकान छोड कर कैसे जाऊ

राहुल - अच्छा ठिक है अब इधर दो चार दिन मे तुझे जब भी समय मिले मेरे घर आ जाना ,, और खुद देख लेना

अनुज अटक कर - दो चार दिन ही क्यू ?

राहुल हस कर - क्योकि उसके बाद हो सकता है वो और मै पुरा दिन बन्द कमरे मे रहे हिहिही

राहुल की इस मस्ती से अनुज चिढ़ जाता है और राहुल भी इस बात को बखूबी समझ रहा था ।

थोडी देर बाद राहुल अपने घर के लिए निकल जाता है ।

और अनुज उखड़ा हुआ दुकान पर लग जाता है । राहुल की बाते सुनने के बाते सुनकर ना ही उसका लण्ड बैठने का नाम ले रहा था और ना ही उसकी हिम्मत बन पा रही थी वो अपनी मा के लिए कुछ कदम बढा सके ।

JAANIPUR

राज के जाने के बाद सब अपने अपने कामो मे व्यस्त हो गये ।

रमन अपनी दुकान पर निकल गया था और रीना अपनी सास के कूल्हो की मालिश करने के लिए उसके कमरे मे जाती है

अपनी बहू के हाथ मे तेल की शीशी और कूलिंग पैड देख कर रज्जो मुस्कुराकर - अरे बहू मै ठिक हू अब तु क्यू परेशान हो रही है

रीना बिस्तर पर करवट लेके सोयी हुई अपनी सास को देखते हूए - हा दिख रहा है कितना आराम है सही से लेट भी नही पा रही है आप ।

रीना - चलिये अब पेट के बल लेट जाईये

रज्जो हस्ते हुए पेट के बल लेट गयी और अपनी मैक्सी को उपर खीचते हुए - आ हह बहू थोह्ह येह्ह

रीना - रुकिये मै करती हू

ये बोलकर रीना अपनी सास की मैकसी को उसके कमर तक ले जाती है ।

रीना अपनी सास के उभरे हुए भारी भरकम चुतडो की सूजन मे आई कमी को देखकर - हम्म्म देखिये आज सूजन काफी कम हो गयी है

दो चार दिन मे ऐसे ही मालिश करवालेगी तो अच्छी हो जायेगी आप

रज्जो मुस्कुरा कर - अब जो तुझे सही लगे कर ले ,,,लेकिन इन बाकी के दिनो मे रमन के पापा की हालत तो हिहिहिही

रीना तुनक कर - नही नही बिल्कुल भी नही , अपनी हालत देखीये और आपको अभी भी पापाजी की पडी है

इधर सास बहू की बाते जारी थी वही कमलनाथ राज को छोड कर अपने घर वापस आ चुका था और अपने कमरे की ओर बढ रहा था

इस बात से बेखबर की उसी बहू उसके कमरे मे मौजूद होगी

अब अपने कमरे मे जाने मे कैसी झिझक होती उसको , बिना कोई कुंडी खड़काये सीधा अन्दर घुस गये राजा जी

सामने देखा तो लण्ड आंख और मुह सब एक साथ फैल गया ,, वही रीना शर्म से पानी पानी हो गयी और लाज से अपना मुह फेर कर मुस्कुरा दी ।

होती भी क्यू ना उसके दोनो पंजे उसकी सास के चुतडो पर घूम जो रहे थे और दोनो अंगूठे उन गहरी दरारो मे अटकी हुई सुराख को मल रही थी ।

वही रज्जो अपनी बहू के हाथो से चरम पर पहुची ही थी कि उसके पति की उपस्थिति ने सारा नशा उतार दिया और वो अपने माथे पर हाथ रख कर दी

स्थिति काफी विकट हो चुकी थी

कमलनाथ को जोरो की पेसाब लगी हुई थी और वह अब चाह कर भी नही रोक पाया और बिना अपनी बहू की ओर देखे सीधा बाथरूम मे चला गया

रीना बहुत ही असहज महसुस कर रही थी और अपने ससुर को बाथरूम मे जाते देख रीना ने फौरन अपने हाथ अपनी सास के चुतडो से हटा लिये और बोली - मम्मी जी मै जाती हू

रज्जो भलीभांति समझ पा रही थी रीना की मनोस्थिति को और वो नही चाह रही थी अब घर के ही लोग आपस ने नजरे चुराते फिरे ।

इसिलिए रज्जो उसे रोकती हुई - अरे नही बहू रुक तु,,,

फिर रज्जो वैसी हुई अपनी खुली हुई गाड़ को फैलाये हुए अपने पति को आवाज दी - क्या जी आप भी ,,,आपको देख कर आना चाहिए ना

कमलनाथ बाथरूम मे अपने लण्ड को खाली कर चुका था लेकिन वो अभी भी इसिलिए रुका था कि शायद रीना कमरे से निकल जाये तो वो बाहर आए। लेकिन रज्जो की बात सुनकर वो भी मजबुर होकर बाहर आया और एक नजर रज्जो की उभरी हुई गाड़ को देखा तो उसके लण्ड की नसे फिर तेज हो गयी ।

रज्जो - अब बोलोगे भी

रज्जो - बहू जरा वो ढक दोगी

कमलनाथ सकपका जाता है जिससे रीना खिस्स से हस देती है और लपक कर एक तौलिये से अपनी सास के नंगी चुतडो को ढक देती है ।

कमलनाथ हिचक कर एक नजर रीना को देखता है और वो फौरन नजरे फेर लेती है ।

कमलनाथ - सॉरी रमन की मा वो मुझे बहुत जोर की लगी थी और मुझे नही पता था कि बहू भी यही है

कमलनाथ रीना की ओर देख कर - माफ करना बहू प्लीज

रीना समझ रही थी ये सब बस एक अटप्टा सा संयोग है और कुछ नही इसिलिए वो मुस्कुरा कर - अरे नही पापाजी कोई बात नही ,,, गलती मेरी है मुझे ही दरवाजा अच्छे से बन्द कर देना चाहिये था ,,, सॉरी

रीना - मा जी मालिश हो गयी है तो मै किचन मे जा रही हू और आपके लिए गरम पानी लाती हू

कमलनाथ - अह बहू तुम परेशान ना हो गर्म करके रखो मै लेते आऊंगा

रीना ने हा से सर हिलाते हुए कमरे से बाहर निकल कर दरवाजा भिड़काती है और अपने तेजी से धडकते दिल को शांत करते हुए हस्ती हुई किचन मे चली जाती है ।

वही कमरे मे रज्जो कमलनाथ को डांट लगा कर - क्या जी आप भी ,,,थोडा तो देख कर आते

कमलनाथ अपने लण्ड को सेट करता हुआ - अब मुझे क्या पता था कि तुम बहू से अपने इन मखमली चुतडो को मसलवा रही थी

रज्जो थोडा झेप जाती है और मुस्कुरा कर - धत्त क्या जी आप भी ,,,,वो मालिश कर रही थी और उस्से मुझे बहुत आराम मिला है

कमलनाथ अपनी बीवी के पास जाकर तौलिया उठाकर उसके चुतडो को नंगा करता हुआ - हा तभी ये चमक रही है ,,,,आह्ह्ह जानू एक बार चूम लू

रज्जो - नही!! मुझे पता है आप वही तक नही रुकेन्गे

कमलनाथ याचिका के भाव मे - प्लीज ना जानू बस एक बार

रज्जो ना चाह कर भी हस कर इजाजत दे देती है और कमलनाथ थोडा पीछे जाकर रज्जो के चुतडो को फैलाकर एक बार उसके सुराख के पास मे चुंबन करता है और रज्जो सिहर जाती है

वही कमलनाथ को मह्सूस होता है कि रज्जो की चुत तो पहले से ही बह रही है तो वो चेक करने के लिए एक ऊँगली को उसकी जांघो के बिच से चुत के किनारो पर ले जाता हुआ - अरे जानू ये कैसे ?

रज्जो शर्मा कर - वो बहू जिस तरह से मेरे पीछे के सुराख को छेड़ती है कि मेरा ....

कमलनाथ लालची होता हुआ - ओह्ह जान अब निकल गया है तो अच्छे से चाट लेने दो ना

रज्जो भी यही चाह रही थी और वो अपने घुटने आगे घसीटे हुए घोडी बन गयी और कमलनाथ की आंखे चमक उठी ।





कमलनाथ ने फौरन अपनी बीवी के रसभरे भोसड़े मे मुह दे दिया और लपालप जीभ से चाटता हुआ सारा माल साफ कर दिया और रज्जो एक गहरी सास लेते हुए मुस्कुराने लगी ।

वही कमलनाथ का लण्ड अब फैलादी हुआ जा रहा था और उसे चुदाई की चसक बढ रही थी

कमलनाथ - जानू अगर तुम कहो तो मै

रज्जो सचत होकर फौरन करवत हो लेती है - नही !! बिल्कुल भी नही

कमलनाथ अपने लण्ड को बाहर निकालकर - तो इसका क्या करू देखो ना शांत ही नही हो रहा है ।

रज्जो मुस्कुरा कर लपकते हुर अपने पति के लण्ड को थाम लेती है - अच्छा लाओ देखू तो





ये बोल कर वो लण्ड सीधा अपने मुह मे भर लेती है और कमलनाथ की नसे फड़कने लगति है ।

वो हवाओ मे उड़ने लगता है और उसके हाथ रज्जो के सर को पकड लेते है ।

अब वो खुद भी हल्का हलका उसके मुहमे ही पेले जा रहा था

अपना लण्ड निकाल कर रज्जो के होठो पर रगड़ कर





उसके गालो पर पटक रह था

दरवाजा खुलने की फिर से आवाज हुई दोनो चौके क्योकि सामने रीना गर्म पानी लेके आई थी ।

जारि रहेगी
 
अपडेट 160

बस का सफ़र शुरु हुए एक घन्टा बीत चुका था और मैने पापा को फोन करके सूचना दे दी कि मै जानीपुर से ही बुआ के घर के लिए निकल गया हू ।

स्टाप दर स्टाप पर सवारियो की आवा जाहि लगी रही ,, सफर के कुछ गिने चुने लोग थे जो शायद मेरे साथ बुआ के टाउन तक जाने की पूरी टिकट कराये हुए थे ।

कितने हसिन चेहरे और उनके मादक कुल्हो को मैने बस के गलियारे मे आना जाना करते देखा ,,,लेकिन मेरी नजरे सामने दो सीट आगे बैठी एक महिला पर बार बार रुक रही थी ।

उसकी कदकाठी काफी ठिक थी और उसने सल्वार कमीज पहन रखा था । शायद वो अपने एक बुजुर्ग के साथ मेरे ही तय मंजिल तक जाने का इरादा लिये बस पर चढ़ी थी ।

चेहरे पर कोई पर्दा नही होने से मुझे लगने लगा था कि ये जरुर बाप बेटी ही होगे और कुछ समय मे मेरा अंदाजा सही हुआ क्योकि उस खातुन की एक छोटी बेटी ने उस बुजुर्ग को नानू बोला ।





मेरी नजरे उसपे तबसे थी जबसे मै बस मे चढा था और उसके कूल्हो ने दो सीट की जगह ले रखी थी । चुचे तो दुपट्टे को भी बेपर्दा किये हुए साफ साफ झलक रहे थे ।

उसकी बेटी उन बुढऊ के गोदी मे बैठी थी ।

इस घन्टे भर के सफ़र के दौरान मेरी चाह थी कि काश मेरी सीट की अदला-बदली हो जाती और मै उसके साथ हो पाता ।

लण्ड के भी अपने अरमान उभर रहे थे ।

करीब आधे घंटे बाद एक बड़ा बस स्टाप आया । चुकि दोपहर का वक़्त हो चला था तो बस conductor और ड्राईवर ने बस खड़ी कर दी और सबको खाने पीने के लिए बोल दिया ।

शायद ये उनका रोज का खाने का जगह था जैसा कि आम सरकारी बस मे होता है वो दोपहर मे कही ना कही किसी बस स्टाप पर आधे घंटे के लिए रुकते ही है ।

बस रुकते ही सारे यात्री तेजी से उतरने लगे और कुछ नये यात्री भी चढ़ रहे थे ।

इसी कस्सीकस्सा ने गलियारे मे एक दो महिलाए भी दबी हुई थी ।

मै साफ साफ देखा दो आदमियो को उन औरतो के कुल्हे के बीच के उंगलियाँ करते और वो औरते भी गुस्से में पलट कर देखी लेकिन वो दोनो आदमी बड़ी बेशरमी से दान्त दिखा कर हस दिये और बोले - अरे भाई धक्का ना दो ,,, कही किसी के कुछ चुभ गया तो


वो दोनो औरते बेबस अपने गुस्से को पी गयी और करती भी क्या ही बेचारी ,,जो स्थिति थी बस मे ।

इस भीड़ मे भी मेरी नजरे उस खातुन पर जमी हुई थी कि वो निचे उतरी क्या ?

लेकिन वो बैठी हुई थी और उसके चेहरे पर बेचैनी के भाव थे । शायद वो भी निचे उतरना चाह रही थी ,,,लेकिन इन मर्दो की भीड़ मे वो भी पीस ही जाती और जो कोई भी उसके करीब होता उससे दुरी तो बिल्कुल भी नही बनाता ।

तभी उसकी नन्ही बेटी ने फिर से कुछ कहा तो वो खातुन बोली - हा बेटा चल रही हू ,,,सबको उतर तो जाने दे

तबतक वो दोनो आदमी भी उस खातुन के पास पहुच गये थे और उन्होने नजरें गड़ा कर उस खातुन के भड़कीले जिस्मो को तबतक निहारा जब तक पीछे के लोग के आगे बढने को नही बोला ।

हालाँकि ये मजह कुछ पलो की बात थी लेकिन वो खातुन थोडी शर्मिंदा थी क्योकि उन आदमियो की वजह से अब जितने भी लोग आगे बढ रहे थे वो सब उस खातुन को एक नजर निहार कर ही जा रहे थे और सबकी निगाहे चमक उठती थी यहा तक कि महिलाओ की भी ।

पुरा बस खाली हुआ और मै अभी भी बैठा रहा ।

फिर वो खातुन खड़ी हुई और जिसके भारी बदन को देख कर मेरी आंखे फैल गयी , गले मे थुक भरने लगा और लण्ड उसका हाल ही ना पुछो ।

उस खातुन ने पूरी बस का मुआयना किया और एक पल को हमारी नजरे टकराई तो मैने खुद से ही नजरे निची कर ली ।

फिर वो खातुन अपने बाप से कुछ बोल्कर सीट से बाहर निकाली और मुझे उसके सूट मे फैले हुए चुतड दिखे ।





अब तक के अनुभव मे मैने इतना बड़ा कुल्हा मेरे मुहल्ले की वो रुबीना काकी का देखा था । लेकिन उसके मुकाबले ये खातुन काफी जवाँ थी ,,महज 35 साल ही उम्र होगी और 50 इन्च मे फैली हुई गाड़ ने जब पहली थिरकन ली तो मेरे लण्ड की नसे फड़क उठी ।

वो उतर कर निचे गयी तो मैने खिड़की से बाहर झाका तो पाया कि साला ये जगह तो काफी खस्ता हालत मे है ।

ना कोई शौचालय ना कुछ खास खाने पीने की जगह ।

बस स्टैंड के परिसर मे ही एक ओर जहा की फर्श टूट चुकी थी ,,सारे मर्द जन खडे होकर मुते जा रहे थे और एक ही नल था जिससे पानी लेने वाले खडे थे । एक बार जिसने हैंडल पकड लिया समझो 50 हैंडल बाद ही कही अपना बॉटल भर पायेगा ।

वही एक तरफ झुग्गी टाइप क एक ढाबा था । वहा भी लोग टुट पड़े थे ।

परिसर मे एक दो बसे और रुकी हुई थी इसिलिए भीड़ कुछ ज्यादा थी ।

वही जहा से वो खातुन गुजर रही थी सारे लोग उसके भड़कीले जिस्म को निहार रहे थे ।

यहा कोई था ही कि किसी को रोके कि क्यू उसे देख रहे हो ,,,सब चोर नजरो से उसके मादक कूल्हो की थिरकन को देख कर आहे भर रहे थे ।

कुछ औरते तो उसके जिस्म पर चर्चाये भी छेड़ चुकी थी ।

मैने देखा कि वो खातुन काफी समय से इधर उधर भटक रही है और उसकी बेटी पैर पटक कर जिद कर रही थी

मै समझ गया कि शायद उसको अपनी बेटी के लिये शौचालय की तालाश थी

मैने देखा सब कोई अपने मे मस्त था और किसी ने उसकी सुध नही ली ,,,और ना ही वो किसी से मदद के लिए पुछ पा रही थी । जिस तरफ वो जाती सब पलके झपकाये बिना उसके गदराये जोबनो की निहारते थे ।

वही वो दोनो आदमी जिन्होने बस मे बदतमिजी की थी ,,,वो एक पान की दुकान पर खडे होकर उस खातुन को ही ताडे जा रहे थे ।

मुझसे रहा नही गया और मै उतर कर निचे आया और फिर मै बस स्टाप के बाहर आया तो देखा एक बडी सी बिल्डिंग यहा से 20 मिटर की दुरी पर है और उधर ही कुछ औरते पेसाब के लिये गयी थी ।

मैने हिम्मत किया और उस खातुन की ओर गया ।

उसने भी मुझे अपनी आता देखकर थोडा सहमी और दुसरी ओर मुड़ी थी

मै - भाभी जी सुनिये

जैसे ही मैने उस खातुन को भाभी जी बोला वो हस दी

खातुन मुस्कुरा कर - हा बोलो ,,मै तुम्हे भाभी दिखती हू क्या

मै मुस्कुरा कर - सॉरी मुझे नही पता कि मै आपको क्या कह कर बुलाऊ

मै - वो मै बस मे था और देखा कि आप काफी समय से परेशान है और इधर उधर भटक रही है

वो खातुन थोडा असहज हुई और इधर उधर देखने लगी तो मै समझ गया कि वो सामने से नही बोलेगी

मै धीमी आवाज मे - अगर आप वाशरूम खोज रही है तो ये बससटाप के बाहर एक बिल्डिंग है कुछ लेडिज लोग उधर गयी थी ।

वो खातुन समझ गयी और मुस्कुरा कर बोली - किस तरफ

मैने उसे बससटाप के एक तरफ इशारा किया और फिर खुद चाय पीने के लिए बस सटाप के बाहर निकल गया उसी झुग्गी मे ।

वो खातुन भी बाहर निकली और एक नजर मुझे देखा और फिर उस बिल्डिंग की ओर चल दी ।





मै उसे सड़क पर से देखे जा रहा था उसके गदराये चुतड़ बहुत ही जबरजस्त तरीके के हिचकोले खा रहे थे ।

करीब 20 मीटर जाने के बाद वो खातुन उस बिल्डिंग के पास खड़ी हो गयी , शायद उसे पता नही था कि औरते किधर गयी थी ।

वो फिर से मेरी देखने लगी और मै समझ गया कि मुझे वहा जाना ही पडेगा ।

मै चल कर उधर आगे गया और पान के स्टाल पर खड़े उन दोनो आदमियो ने मुझे देखा भी लेकिन मैने उन्हे नजरअन्दाज किया।

मै - क्या हुआ

खातुन - यहा तो कोई नही है

मै थोडा मुस्कुरा कर - वो आपको इस बिल्डिंग के पीछे की ओर जाना पडेगा ।

खातुन - अच्छा तो क्या आप जरा मेरी बेटी को थोड़ी देर के लिए देखेंगे ,,मै जरा

मै चौका - क्या ? म म मेरा मतलब आपको जाना है , मुझे लगा इस गुड़िया को जाना है इसिलिए जिद कर रही है

वो खातुन थोडा शर्म से लाल होकर मुस्कुरा कर - अरे इसको चॉकलेट चाहिये , अच्छा तो क्या वहा मै नही जा सकती क्या मतलब

मै थोडा असहज होकर मुस्कुरा कर - अरे नही नही जाईए ना ,,मै हू इसके साथ

खातुन - बेटा अंकल के साथ रहो मै अभी आ रही हू ना

वो छोटी लड़की जिद करने लगी कि वो भी उसके साथ जायेगी ,,,

आखिरकार वो खातुन अपने बेटी की जिद पर हार गयी और उसे लेके बिल्डिंग के बगल के पहुच गयी ।

खातुन - बस बेटा यही रहो मै सुसु करके आती हू ,, बस यही बगल मे हू ,,अंकल के साथ रहो ना

इससे पहले वो बच्ची अपना जिद स्टार्ट करती कि वो खातुन तेज कदमो से चल कर करीब 5 6 मिटर आगे से बिल्डिंग के पीछे चली गयी ।

मै उस छोटी बच्ची का हाथ पकड कर उसका नाम घर पुछने लगा ,,, वो लगातार हाथ छुड़ाने की कोसिस कर रही थी लेकिन मै उसको पकडे हुए खड़ा था

इतने मे मेरे फोन की घंटी बजी और मै उसे उठाने के लिए उसका हाथ छोड कर जेब से मोबाइल निकालने को हुआ कि वो सरपट बिल्डिंग के पीछे की ओर भागी और मै उसको पकडने के लिए उसको आवाज देता हुआ लपका

मै - अरे बेटा रुको !!!

लेकिन तबतक देर हो चुकी थी





मै भी बिल्डिंग के पीछे आ चुका था और सामने वो खातुन अपना लेग्गिंग्स को खोले अपनी बडी सी चुतड को फैलाये मुत रही थी

और जैसे ही उसे हमारे आने की भनक हुई वो गरदन घुमा कर हमारी ओर देख - हाय अल्लाह !!

मेरी नजरे एक बार उसपे गयी और फिर एक बार मैने उसके गुदाज नरम गोरी चिकनी गाड़ को देखा ,,,उसके हल्के भूरे सुराख को देखकर साफ लग रहा था कि कोई बहुत तबियत से उन छेदो मे अपना मुसल भरता होगा ।

अगले ही पल मैने नजरे फेर ली और उस बच्ची को गोद मे पकड कर अपनी जगह पर वापस आ गया ,,,वो बच्ची मुझे दौडा कर खुश थी और थोडी देर मै उसकी खुशी मे शामिल हुआ

तभी वो खातुन मेरी ओर आती दिखी ,,,मैने उसकी बेटी को निचे उतारा और नजरे नीची करके - सॉरी वो आपकी बेटी भागने लगी थी तो

वो खातुन भी शर्म से लाल थी और मेरी नियत देख कर मुस्कुरा कर - कोई बात नही हो जता है ,,,तुम अच्छे लडके लगते हो । कहा घर है तुम्हारा

फिर बस सटाप तक आते आते मैने अपना घर और बस के सफ़र की वजह बतायी ।

उसने मेरी बहन की शादी के लिए बधाई दी और बताया कि वो यहा अपने अब्बू के इलाज के लिए आई थी अब वापस घर जाना है ।

फिर मैने उस बच्ची को चॉकलेट दिलाने के लिए उसी पान वाले स्टाल पर गया । जहा वो दोनो हरामी अभी भी खडे थे ,

मैने उस बच्ची को चॉकलेट दिलाया और खुद के लिए एक दो स्नैक्स के पैकेट ले लिये ।

फिर हम बस की ओर जाने को हुए ही थे कि पीछे से उन दोनो मे से एक ने कमेंट किया

आदमी 1 - यार कोई हमसे मदद माग लेता ,, मेरी नजर मे भी एक मस्त पेसाबघर था

आदमी 2 - हा यार वहा तो कोई चाह कर भी कुछ देख नही पाता

मै समझ गया कि वो साले मेरा ही मजा ले रहे है । मैने एक नजर उस खातुन को देखा तो वो चुप थी ।

खातुन - जाने दो बाबू इनकी बाते ध्यान ना दो ,, बहुत दुष्ट है ये सब ,,अभी बस मे थोडी देर पहले ही

मै उसकी बात काटकर - हा देखा था मैने भी , चलिये अन्दर चलते है ।

फिर मै मेरी सीट पर आ गया और कुछ ही देर मे बस का सफ़र फिर शुरु हो गया ।


लेखक की जुबानी

CHAMANPURA

राहुल अपने घर आ चुका था और शालिनी दोपहर के खाने की तैयारी मे जुटी हुई थी ।

राहुल आते ही अपने कमरे मे गया और वहा से एक रेजर और सिर्फ एक तौलिया लेके उपर छत पर नहाने के लिए निकल गया ।

बाथरूम मे जाकर राहुल ने अच्छे से अपने लण्ड के बालो को साफ किया और बाथरूम को वैसा ही छोड दिया ताकी जब भी उसकी मा आये तो उसको भनक लगे कि राहुल ने अपने झाट के बाल बनाये है ।

फिर वो अपना लण्ड ख्दा करके तौलिया लपेटे हुए सीढ़ी से निचे आता है और एक नजर किचन मे देखता है कि उसकी मा खाना बनाने मे व्यस्त है

अपनी मा के गाड को लोवर मे कसा हुआ देख कर वो अपने तौलिये के उपर से ही अपना मुसल मसल देता है और फिर अपने कमरे मे चला जाता है ।

फिर वो तैयार होकर किचन मे आता है और अपनी मा के पास सट कर खड़ा होता है ।

राहुल - तो बताओ मम्मी मुझे क्या करना है

शालिनी मुस्कुरा कर - तुझे क्या हुआ ,,,जो काम करने का मन कर रहा है

राहुल - अरे अब कुछ दिनो के लिए दीदी नही है तो मैने सोचा क्यू ना मै आपकी मदद करू

शालिनी हस कर - अच्छा ऐसी बात है तो चल ये सारे नास्ते वाले बर्तन धुल दे

राहुल का मन थोडा उखड़ा जरुर लेकिन मा के करीब जाने के लिए उसे जो करना पडे सब करना ही था ।

इधर वो बरतन धुल रहा था और शालिनी बखूबी उसकी चालाकिया समझ रही थी ।

और वो राहुल के बोलने का इन्तजार कर रही थी ।

राहुल - अरे मम्मी दीदी अपने कपडे नही लेके गयी क्या ,,,आपने उसके कपडे पहने है और छत पर नही सुखने के लिए कपडे डाले है

शालिनी समझ गयी कि अब खेल शुरु हो चुका है - हा वो मैने उसके एक दो सेट कपड़े ले लिये ,,, इसमे मुझे बहुत आराम मिलता है

राहुल हस कर - मै तो कहता ही हू की आप ऐसे ही कपडे पहनो , अच्छा दीदी का स्कर्ट ट्राई किया आपने

शालिनी सोच कर - नही !! शायद वो लेके भी नही गयी है

राहुल की आंखे चमक उठी और वो गीले हाथो से ही अपना लण्ड सेट करके फिर से बरतन धुलने लगा - तो ट्राई करो ना मम्मी अच्छा लगेगा वो भी आप और वो नाइटी तो जरुर पहनना आप प्लीज

शालिनी हस कर खुले लहजे मे - धत्त पागल देखी भी है वो नाइटी,,, छिनी सी है औ उसमे मेरा पुरा पिछवाडा दिखेगा

राहुल को उम्मीद भी नही थी कि उसकी मा ऐसे शब्द भी यूज़ करेगी । जिसने उसके लण्ड मे और कसावट भर दी

राहुल थोडा शरमाता हुआ - क्या मम्मी आप भी ,,, इतना भी छोटा नही है ।

शालिनी - नही नही बाबा रहने दे मुझे नही ट्राई करना उसे ,,,कही तेरे पापा की नजर पड़ गयी तो ...

राहुल जिज्ञासु होकर - तो क्या हुआ पापा देख लेंगे तो

शालिनी अब मुस्कुराने लगी और इतराते हुए - अरे तु नही समझेगा , तेरे पापा बहुत वो है

राहुल - वो है ! मतलब

शालिनी हस कर - अब बंद कमरे मे वो क्या क्या करते हैं मै सब नही ना बता सकती तुझे ,,,,

राहुल सब समझ रहा था कि इन कपडो मे उसकी मा को देख कर किसी के अरमान जाग जायेंगे और वो हैवानो के जैसे चोदेगा तो उसका बाप कहा पीछे रहने वाला था ।

राहुल हस कर - हिहिहिही अच्छा समझ गया

शालिनी उसकी ओर घूम कर अपनी कमर पर हाथ रखते हुए - क्या समझ गया तु,,, तुझे पता है क्या होता है उम्म्ं

राहुल हस कर - क्या मा मै इतना भी छोटा नही हू अब ,,,

शालिनी हस कर - तु भी तेरे पापा से कम नही है ,,,बदमाश कही का ।

राहुल - हिहिही तो क्या पापा अभी भी शरारत करते है

शालिनी - हा तो ,,, ये बस बाहर ही बडे शरीफ है नही तो रात मे कमरे मे तो पुछो ही मत

राहुल चहक कर -हिहिही बताओ ना मम्मी क्या करते है पापा

शालिनी शर्मा कर - धत्त बदमाश ,,, तु जा मुझे काम करने दे

राहुल जिद करते हुए अपनी मा के पीछे आ गया और उसके बाजू पकड कर अपना लण्ड का नुकीला भाग सीधा अपनी मा के गुदाज गाड की दरारो मे चुभोता हुआ - मम्मी प्लीज बताओ ना

शालिनी अपने बेटे के लण्ड के स्पर्श से गनगना गयी उसे लगा कि





जैसे राहुल ने अपना लण्ड बाहर निकाल कर उसके गाड़ मे घुसा दिया हो वो सिस्क कर हस्ते हुए - उम्मममं आआह हट पागल कही का ,,जा अपने पापा से पुछ हा नही तो

राहुल - तो पक्का आप नही बताओ

शालिनी उसे छेड़ते हुए - ऊन्हु ,,,

राहुल - तो मै रात मे छिप कर देख लूंगा हिहिहिही

ये बोल कर राहुल दुकान मे भाग गया और शालिनी उसको आवाज तो दी फिर खुद हसने लगी

शालिनी मन मे - ये तो बड़ा चालू निकला ,,,मेरे कमरे मे ताका झाकी करेगा उम्म्ंम

फिर शालिनी ने राहुल को परेशान करने का कुछ प्लान बनाया और अपने काम मे लग गयी ।

JAANIPUR

कमरे की स्थिति बहुत ही असहज हो गयी थी

रीना की निगाहे





अपने ससुर से मोटे काले लण्ड पर जमी थी जिसकी फूली हुई नसे उसको और भी फौलादी किये जा रही थी । सुपाड़े का कालापन साफ बता रहा था कि वो बहुत बार चुदाई कर चुका था और उसपे लसराई हुई रज्जो की थुक से वो चमक रहा था ।

कमलनाथ के हाथ मे अब भी रज्जो के बाल थे और रज्जो के मुह पर जहा जहा उसने अपना गीला लण्ड रगड़ा था वो सब थुक से लसराय हुआ था ।

रज्जो के चेहरे की हालत और अपने ससुर के विकराल लण्ड को देख कर रीना का कलेजा धकधक होने लगा ,,, वो आंखे फाडे निहार रही थी

कुछ पलो के संयोग मे सब कुछ थम सा गया था कि तभी रीना के साथ से वो ट्रे कब सरक कर फरस पर गिरा और पानी की गिलास तेज छनछनाहट ने सबको जड़ से होश मे लाया

कमलनाथ ने लपक कर तकिया लेके अपना लिंग ढक किया , रज्जो भी फटाफट से अपने मुह को पोछने लगी और मैक्सि ठिक करते हुए तौलिया अपने पति को दिया ।

इस दौरान रीना ने बडी ही शर्मीन्दगी से मुह फेर लिया था और नजरे झुकाये निचे बैठ कर फर्श से गिलास और ट्रे उठाया ।

फिर निचे ही नजरे दौडा कर पानी साफ करने के लिए कुछ कपडा ढ़ूंढ़ने लगी

रज्जो - अह बहू रहने दो अभी मै वो साफ कर लूंगी ,, तुम जाओ

रीना बिना कुछ बोले नजरे झुकाये कमरे के बाहर चली गयी और बाहर आते ही उसने अपनी तेज धडकती सासो को बराबर किया - हे भगवान आज क्या हो रहा है मेरे साथ ,,, ना जाने क्या होगा अब ।

रीना - पापा जी के सामने मै फिर कैसे जाऊंगी ,,, मुझे एक बार दरवाजा नॉक कर लेना चाहिये था

रीना अपने ही ख्यालो मे बड़ब्डाती किचन मे चली गयी और वही कमरे मे दोनो मिया बीवी की बाते शुरु हो गयी ।

कमलनाथ अपना पाजामा पहनते हुए- रज्जो मेरे ख्याल से हमे बहू से बात करनी चाहिए

रज्जो - हा जी ,,, पहले वाला तो चलो ठिक था लेकिन अब ये । अभी नयी नयी आई है और उसके विचार हम लोगो के लिए बदल जायेन्गे तो ठिक नही होगा ।

मै बात करती हू उससे आप यही आराम करिये ।

फिर रज्जो कमरे से निकल कर निचे किचन मे चली जाती है ,,, जहा रीना सब्जी काटते हुए बार बार अपने ससुर के मोटे काले लण्ड के बारे मे सोच रही थी ।

रीना मन मे - उफ्फ़ पापा जी का कितना डरावना था ,,, ऐसे हथियार से चार लेने पर मा जी क्या किसी हाथी का भी सूज जायेगा , और कही ये मेरे मे घुसा तो अह्ह्ह नही नही ,,मै नही ले पाऊंगी इतना मोटा ,,, रमन का ही बहुत मुशकिल से झेल पाती हू

रीना अपने ख्यालो मे खोई हुई थी कि रज्जो किचन मे आती है ।

रज्जो - क्या बना रही हो बहू आज दोपहर के लिये

रीना नजरे चराते हुए - मा जी दाल चढा दिया है मैने और ये सब्जिया काट रही हू

रज्जो उसके बगल मे खड़े होकर - अह देखो बहू उपर कमरे मे जो हुआ उसके लिए हमे माफ करना ,,, तुम तो जानती ही हो कि रमन के पापा कितने उतावले रहते है

रीना शर्म से लाल होती हुई - अरे मा जी गलती तो मेरी है ,,,मै वो हाथ मे ट्रे पकडे हुए थी तो खटखटाने के बजाय कोहनी से धक्का दे दिया

रज्जो चिढ़ कर - हा जो भी हुआ हो ,,,लेकिन अगर रमन के पापा उतावले नही होते तो ये सब नही होता ना

रीना अपनी सास की बात सुन कर मन मे - खुद गपागप उनका मुसल घोट रही थी और उनको बोल रही थी हिहिही

रीना की खिस्स्खिसाह्त भरी हसी रज्जो ने सुन ली और वो मुस्कुरा कर - हा मतलब मै भी थी , अब इतना मोटा मुसल देख कर किसका जी नही ललचाएगा

रीना हस कर - धत्त मा जी आप भी ना ,,मै ऐसा कुछ नही सोच रही थी ।

रज्जो - लेकिन मै अपनी गलती तो मान सकती हू ना

रीना बस मुस्कुरा कर एक नजर अपनी सास को देखा और खाना बनाने मे लग गयी ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 161

बस का सफर दुबारा से शुरु हो चुका था ।

मै वापस अपनी सीट पर आ चुका था ।

वो खातुन बीच बीच मे एक दो बार मेरी ओर देख लेती थीं ,,, मगर जब भी वो मुझे देखती तो मै उन अपने पीछे ही बैठे उन दोनो आदमियो की ओर भी देखता और वो बस हीही करते हुए मिलते ।

मुझे थोडा अजीब भी लग रहा था ।

धीरे धीरे सफ़र आगे बढने लगा और सवारिया उतरती रही ,, मै जिस तरफ था वो थ्री सीटर थी और मेरे पास के बैठे जन भी अपने सटाप पर उतर गये थे ।

इसी बीच वो बच्ची मेरे पास मेरी सीट पर आ गयी तो मैने उसकी मा को देख कर उसे इत्मीनान किया कि मेरे पास ठिक रहेगी ।

फिर थोडा समय बीता और एक स्टाप आया ।

हालाकी यहा बस ज्यादा देर नही रुकने वाली थी लेकिन इस बार मुझे जोरो की पेसाब लगी थी और अगले 2 घंटे तक कोई स्टाप नही था । बस हाईवे से होकर जाने वाली थी ।

इसिलिए मै उस बच्ची को उसकी मा के पास छोड कर बस स्टैंड के ही पेसाब घर मे गया और वापस चला आया ।

इस स्टाप पर काफी ज्यादा स्वारिया उतर चुकी थी ।

मै अपने जगह पर वापस आ गया और वो बच्ची मेरे पास फिर से आ गयी क्योकि उसे खिडकी के पास बैठना था और उसके वाले सीट पर खिडकी की तरफ वो बुढऊ बैठे थे ।

चुकी बस अभी शुरु नही हुई

तो खातुन भी चल कर मेरे पास आ गयी तो मैने उन्हे अपने पास ही बैठने का आग्रह किया

उसने एक बार मेरे पीछे की सीट पर देखा तो वो दोनो आदमी नही थे

फिर वो मुस्कुरा कर पहले अपने अब्बू को बताया और मेरे बगल मे बैठ गयी ।

मै - तो आपका घर कहा पर है

खातुन - बस अगला स्टाप पर जहा ये बस रुकेगी , जलालपुर

मै - ओह्ह फिर भी का लम्बा सफर है ,, मुझे भी उससे आगे जाना है हरपुर

हमारी बाते शुरु हो गई थी कि और पहल मेरे तरफ से हुई तो मैने मेरे घर वालो के बारे मे बताना शुरु कर दिया ।

बातो ही बातो मे उसने बताया कि उसके अब्बू की दिमागी हालत अब ठिक नही है और उसकी अम्मी के गुजर जाने के बाद वो उसके साथ ही रहते है ।

इधर बस भी चालू हुई और ड्राईवर ने हार्न बजाया

जल्दी जल्दी सारे लोग उपर चढ़ गये और मैने देखा कि वो दोनो आदमी वापस से बस पर चढ़ गये है ।

वो खातुन ने भी उन्हे देखा और वो थोडा असहज होने लगी ।

मै भी थोडा परेशान होने लगा कि साले ये सब फिर से कमेंट करेंगे ।

खातुन - तुम परेशान ना हो ऐसे लोगो के लिए,,, सफर मे एक दो नमुने मिल जाते है

उसकी बात सुन कर मै थोडा हस दिया और वो भी मुस्कुरा दी ।

बस निकल पडी

हम ऐसे ही इधर उधर की बाते किये जा रहे थे और समय गुजर रहा था कि तभी बस की स्पीड कम हुई और ब्रेकर पर बस उछल पडा

वो खातुन मेरे बगल मे बैठी हुई सीट पर उछ्ल पडी जिससे उसका दुपट्टा सामने से हट गया और पहली मुझे उसके बडे बडे थन जैसे चुचो को उसके सूट के गले से देखने का मौका मिला ।

और रम्बल स्ट्रिप की उछाल से वो थोडा मेरे ओर गयी थी और उसके जांघो से उसका कुरता हट गया था ।

उसकी चिपकी हुई leggings मे उसके सुडौल जान्घे साफ साफ दिखने लगे और मेरे मुह मे पानी आने लगा ।

जैसे ही सब शांत हुआ उसने

सबसे खुद को सहेजा और अपने कपडे ठिक करते हुए मुस्करा कर मुझे देखने लगी

खातुन - ये सड़क के हचके भी ना ,,, सम्भाल के ना रहो तो चोट लग जाये

इधर हमारी बाते चल रही थी कि पीछे से एक आदमी ने कमेंट किया

आदमी - जब किसी को दिल से चाहो तो पूरी कायनात क्या बस ही उनको मिलाने की साजिश मे लग जाती है हाहाहा क्यो भाई

दुसरा आदमी हस्ता हुआ उसकी हा मे हा मिलाता है ।

उनकी आवाज सुन कर मै एक बार उस खातुन को देखता हू तो वो इग्नोर करने का इशारा करती है ।

तभी दुसरा आदमी बोलता है - भाई मै क्या कहता हू ,,, ये लम्बे सफर मे सबको एक साथी जरुर मिलना चाहिए ताकी बोरियत ना हो

पहला आदमी - हा भाई और जान पहचान अच्छे से हो जाये तो रात बेरात घर आने जाने का भी एक ठिकाना मिल जाता है

दुसरा आदमी -हा लेकिन फिर भी एक दिन के पहचान वाले के यहा रात कोई क्यू रुकेगा

पहला आदमी - अरे भाई साहब तभी तो समाज मे प्रेम बढता है ,,,लोग एक दुसरे की मदद करते ,,सफर मे जुड़ जाते है और फिर धीरे धीरे नजदीक भी होने लगते है ।

उनकी बात सुन कर अब मेरे साथ साथ उस खातुन का भी पारा चढ़ने लगा था

इस बार मैने उन्हे शांत होने का इशारा किया

खातुन - ये लोग बहुत दुष्ट है राज ,,, तुमको पता नही है ये मेरा नही तुम्हारा मजाक बना रहे है ।

मै हस कर - अरे जल रहे है साले ,,, आपको मेरे साथ देख कर हिहिहिही

इस पर वो खातुन थोडा लाज से मुस्कुरा दी और मेरे ओर सरकते हुए - चलो उनको थोडा और जलाते है

मै चौक कर - मतलब

वो खातुन एक बार अपने बगल वाले साइड की खाली सीट पर देखा और पीछे देखा तो सिर्फ वो दोनो ही बैठे थे ।

फिर उसने मेरा हाथ पकड कर अपने कन्धे पर रख दिया

मै चौक कर - ये ये क्याआ कर रही है आप ,,,कोई देख लेगा

खातुन - अरे मै ये सब उनको जलाने के लिए कर रही हू हिहिहिही और हमारे पीछे ये दोनो ही है तो कोई नही देखने वाला

मैने भी थोडा ताक झाक किया और फिर इत्मीनान से उसके कन्धे पर हाथ रखे रहा ।

थोडे पल की शान्ति रही और पीछे से कोई आवाज नही आई

तो मौका देख कर मैने भी ताना मारा - भाभी जी ,,, कुछ जलने की बू आ रही है क्या

खातुन मुस्कुरते हुए

हा थोडा मुझे भी लग रहा है

इतने वो खिलखिलाकर हस पड़ी तो मै उनको ताली देने के लिए दुसरा खाली वाला हाथ मारा ,,,मगर वो समझ नही पाई और मेरे हाथ सीधा उनकी नरम नरम चर्बीदार जांघ पर चट्ट से पड़ गयी

खातुन हल्का सा सिसकी - आऊच,, आराम से राज

मै तुरंत सॉरी बोलकर उसकी जगह पर सहलाने लगा ।

जिस पर पहले तो उसने कोई ध्यान नही दिया लेकिन जब काफी समय तक मैने वैसे ही हाथ रखे रहा

तो वो गले को खरास कर - उहू राज तुम अपना हाथ हटा सकते हो ,,,

मै चौक कर - ओह्ह हा सॉरी वो मै

खातुन - कोई बात नही

तभी पीछे बैठे उन आदमियो ने मेरी हरकत देख ली थी इसिलिए

आदमी 1 - भाई कुछ लोग इतने चुतिये होते है कि थोडे से मजे के बात बात मे सामने वाले की चाटते रहते है

आदमी 2 - हा भाई अब इन चमन चुतीयो को कौन समझाए हाहाहा कि जो देने वाली होगी वो नखरे नहीं करती

उन आदमीयो की बाते सुन कर मैने अपना हाथ भी अब उसके कन्धे से हटा लिया और थोडा देर तकचुप रहा

और वो खातुन भी कुछ सोचती रही

फिर अचानक से उसने मेरा हाथ पकड कर मेरी जांघ पर रखते हुए कहा - क्या राज तुम दुर क्यू बैठे हो ,,,थोडा करीब रहो ना

मै मुस्कुरा कर इस बार उसकी जांघो को अच्छे से मसलकर उसके पास आ गया

हम दोनो जान रहे थे हमारी इस हरकत की जाच करने के लिए वो दोनो आदमी कोई ना कोई बहाना करेंगे

आदमी 1 - भाई जरा वो मेरा बैग उतार के देना

उसकी बात सुनकर आदमी 2 फौरन खड़ा हुआ

मै जान रहा था वो मेरे हरकते देखने के लिए ही खड़ा हुआ है इसिलिए मैने उस खातुन की कुर्ती के नीचे हाथ डाल कर जान्घो पर घुमा रहा था और मुस्कुरा रहा था ।

हुआ भी वही जैसे ही वो बैठा वो फुसफुसा कर अपने पहले साथी को ब्ताया तो तुरंत वो देखने के लिए खड़ा हुआ ।

वो खातुन भी मेरा ही साथ दे रही थी और जैसे ही दोनो बैठे हम होठो मे ही के हस दिये






लेकिन उस खातुन को क्या पता था कि मेरे हाथ कुछ अलग ही जादू करने के फिराक मे उसके जांघो के चौडे हिस्से की तरफ बढ रहे थे ।

जैसे ही उसको अह्सास हुआ वो सहम गयी और उसके दिल की धडकनें तेज हो गयी और उसकी चुचिय फूलने लगी ।

मैने हौले से दुसरे हाथ को उसके दुप्प्टे मे घुसा कर उसके चुचो को थाम लिया

खातुन कापती आवाज - अह्ह्ह नही राआअज्ज यहाआ नही उम्म्ंम

मैने फौरन वो हाथ वापस खीच लिया लेकिन जांघों की घिसाई अब भी जारी थी ।

थोडी देर की चुप्पी के बाद वो मेरे करीब आकर मेरे कान मे बोली - आज तुम मेरे घर चल सकते हो क्या ?

मेरा लण्ड पुरा टनं हो गया और दिल की धडकनें भी तेज हो गयी

मैने धीरे से - हा लेकिन मुझे बुआ के यहा जाना है

तो उस खातुन ने मेरे जीन्स मे उभरे लण्ड पर अपना हाथ रख कर - प्लीज राज मना मत करो ,,,मेरे शौहर 4 महीने से घर नही आये है और मै ।

मुझे थोडा डर भी लग रहा था कि क्या मुझे उस पर भरोसा करना चाहिए भी या नही ।

क्योकि अंजान सफर मे किसी के घर जाना !

मै थोडी देर चुप रहा । फिर मै दिमाग से बिल्कुल भी नही सोच रहा था

एक तो परसो रात के बाद से मैने चुदाई नही थी उपर से इतना रसिला माल सामने से हाथ बढा रहा था ।

लण्ड मेरा जीन्स मे अकड कर कस गया था और मुझे काफी सारे बहाने दिमाग आ रहे थे ।

पहली ये कि बुआ के यहा किसी को खबर नही कि मै आज आ रहा हू

दुसरा ये कि पापा कोई बहाना बना के देना पड़ेगा

थोडी देर मे वो खातुन फिर से मेरे जांघ को छुते हुए - क्या हुआ राज

मै थोडा चिढ़ कर - अरे यार कोई बहाना आने तो दो ,,,घर पर क्या बोलूंगा

मेरे जवाब पर वो खातुन हस दी और हा मे सर हिला कर मुस्कुराने लगी ।

थोडी देर बाद मैने तय किया कि बस खराब होने का बहाना ठीक रहेगा ,,,हा थोडा पापा को समझाना पडेगा लेकिन काम बन जायेगा

ये भी कि बोल दूँगा एक होटल मे रुका हू

और फोन मे मै देर रात मे ही करूंगा ताकी गाडी बदल कर जाने का बहाना ना रहे ।

सफ़र के आखिरी कुछ मिंट बचे हुए थे और जलालपुर बस स्टाप आने ही वाला था ।

वो दोनो आदमी जिन्होने मेरी और उस खातुन की पूरी जाच पडताल की थी तो उन्होने फिर से मेरा मजा लेने के लिए अपनी बकैती शुरु कर दी ।

और जब स्टाप आया तो वो खातुन अपना सारा समान उतारने लगी ।

आदमी 2 - ये दर्द की आहे

आदमी 1 - जुदा हुई राहे

आदमी 1 & 2 - भुला देंगे तुमको सनम धीरे धीरे

. मुहब्बत की सारे सितम धीरे धीरे

मै वो खातुन समझ रहे थे कि ये सब हमारे लिये ही गाया जा रहा था

लेकिन वो खातुन शांत रही और निचे उतर गयी फिर मै भी अपना बैग लिया और खड़ा होकर जाने लगा

Conductor- अरे बाबू ये जलालपुर है । हरपुर आयेगा तो बता देंगे ,,जाओ बैठो

मै मुस्कुराया और एक नजर उन आदमियो को देखा और बोला - नही अंकल ,,, मुझे यही काम है

Conductor- बेटा लेकिन टिकट बन गया है उसका पैसा नही वापस होगा

मै मुस्कुरा कर - अरे कोई बात नही अंकल मै जान रहा हू ,,

फिर मै उतर गया और चल कर उस खातुन के पास चला गया ,,,फिर हमाने मुड कर देखा तो वो दोनो आदमीयो खिडकी से बाहर हमे ही झाक रहे थे

तो मैने भी मजे लेने के लिए खातुन की बेटी को बोला - बेटा उन दोनो अंकल को बाय बोल दो तो

और वो उनको बाय करने लगी और हम दोनो खिलखिला कर हस पड़े ।

फिर हम सब उसके घर के लिए निकल पड़े ।


लेखक की जुबानी

JAANIPUR

सुबह की घटना के बाद कमलनाथ दोपहर तक निचे नही आया । लेकिन जब खाने का समय हुआ तो मजबूरन उसे निचे आना पड़ा ।

वो और रज्जो हाल मे बैठे हुए थे और रीना ने दो थाली लगाई । फिर वो खाना लेके हाल मे चली गयी ।

पहले उसने रज्जो के सामने फिर कमलनाथ के सामने खाना रखा । उसने देखा कि उसका ससुर नजरे चुरा रहा है तो वो मुस्कुरा कर अपनी सास को देखने लगी ।

फिर दोनो खाना खाने लगे और रीना वही किचन मे बाकी काम निपटा रही थी ।

इधर दोनो खाना खतम कर चुके थे

रज्जो - सुनिये जी जल्दी जाईये और रमन को भी खाने के लिए भेज दीजिए । उसके बाद फिर हमे सोनल की शादी के लिए शॉपिंग भी करनी है ना

रज्जो - बहू जरा इधर आओ

रीना किचन से बाहर आई - जी मा जी

रज्जो - देखो रमन के पापा अभी दुकान से वापस आये तो इनके साथ मिलकर सोनल बिटिया की शादी के पर्चे बनवा लेना

रज्जो की बात सुन कर रीना और कमलनाथ एक दुसरे को शर्म भरी निगाहो से देखते है जिसपर रज्जो बोल पड़ती है ।

रज्जो कड़े शब्दो मे - ओहो आप अब ये एक दुसरे से नजरे चुराना बन्द करेंगे ।

रज्जो - भई हमे एक ही घर मे रहना है ,,,अब जो हो गया उसको लेके एक दुसरे से बात करना नही ना बन्द कर दोगे आप लोग

रीना दबे आवाज मे - जी नही मा जी ऐसी कोई बात नही है

मै पापा जी के साथ सारी लिस्ट बना दूंगी

रज्जो कमलनाथ को डांट कर - अरे आप भी कुछ बोलोगे

कमलनाथ हड़बड़ा कर - हा हा ठिक है ,,मै जाता हू रमन को भेज देता हू

इतना बोल कर कमलनाथ घर से दुकान पर निकल जाता है ।

रज्जो हस कर - और बहू तु क्यू इत्ना झिझक रही है । अब क्या अच्छा लगता है तुम दोनो ऐसे रहो घर मे ,,,,कही रमन को भनक लगी तो

रीना - नही नही मा जी मै ख्याल रखुन्गी

रज्जो - हमम ठिक है चल मै आराम करने जा रही हू ।

करीब 3 बजे कमलनाथ दुकान से वापस आया और रीना हाल मे बैठी हुई चावल साफ रही थी ।

कमलनाथ सोफे पर बैठकर - बहू जरा पानी देना ,, गल सुख रहा है

रीना अपने ससुर की बात सुन कर फौरन भागकर किचन मे जाती है और पानी लाकर देती है ।

दोनो की नजरे मिलती है और दोनो ही मुस्कुरा देते है ।

पानी पीने तक रीना वही साम्ने खड़ी होती है और फिर गिलास लेके किचन मे जाने को होती है

कमलनाथ - बहू ऐसा करो वो मेरी डायरी और पेन लेके आओ और हम लोग जल्दी से वो लिस्ट बना ले

रीना बिना कुछ बोले किचन मे चली जाती है और फिर एक डायरी पेन लेके आती है और सोफे पर रख कर वही खड़ी हो जाती है ।

कमलनाथ देख कर रीना अभी भी उस्से बात नही कर रही है

कमलनाथ - अरे बहू तुम भी बैठो ना और बताओ क्या क्या लेना है ,

"क्या क्या बताया है रमन की मा ने ", कमलनाथ पेन खोल कर डायरी के पन्ने उलटता है ।

रीना अभी भी चुप होकर ही सोफे पर बैठ जाती है ।

कमलनाथ मुस्कुरा कर - तो क्या सुबह के लिए तुम अभी भी मुझ्से नाराज हो ।

रीना दबी आवाज मे - न नही पापा जी वो बात नही है ।

कमलनाथ - देखो बहू आज जो कुछ भी हुआ है उसमे कही ना कही मेरी ही गलती है और थोडा बहुत संयोग की बात है । तुम खुद को इसमे कसुरवार ना समझो

कमलनाथ झिझक कर - मै तुम्हे समझा भी नही सकता कि उस समय मै कैसे खुद को रोक नही पाया । तुम तो जान ही रही हो कि पिछले दो दिनो से मै और रमन की मा ...

" पापा जी मुझे मा जी सब बताया है " , रीना ने नजरे चुराते हुए कमलनाथ को बीच मे टोका ।

रीना झिझक कर - छोडिए ना ये सब , हम लोग पर्ची बना लेते है ।

कमलनाथ खुश होकर - वही तो मै भी कह रहा हू हाहाहा

कमलनाथ - बताओ क्या क्या लेना है ।

फिर रीना एक एक करके सामान की लिस्ट बना लेती है । फिर सोनल के लिए शगुन के समान की लिस्ट बनने लगती है

कमलनाथ हस कर - हे भगवान इतना सारा मेकअप का समान

रीना हस कर - अरे पापा जी ये सब अभी कम है और भी होता है लेकिन वो सब जरुरी नही है ।

कमलनाथ - सारी चीजे हो गयी एक बार तुम भी देख लो

रीना ने अपनी गरदन आगे बढा कर डायरी मे नजर मारी तो उसे समझ आया कि उसने सोनल के लिए ब्रा पैंटी तो लिख्वाई ही नही ।

रीना अब अपने ससुर से ब्रा पैंटी को बोले भी तो कैसे । उसको हसी भी आ रही थी कि आज का दिन ही उसके लिए खराब जाने वाला है शायद ।

कमलनाथ - क्या हुआ बहू कुछ बाकी नही है ना ,,,

"तो मै ये सारे समान कल लेते आऊंगा ", कमलनाथ वो समान वाली लिस्ट का पेज फाड़ कर अपनी जेब मे रखते हुए बोला

रीना उसे ऐसा करते देख कर मन मे ( हे भगवान )

रिना - पापा जी वो एक समान रह गया है

कमलनाथ जेब से वो पर्ची निकाल कर खोलता हुआ - हा बोलो मै लिख ले रहा हू

रीना हिचक कर - वो एक सेट ब्रा पैंटी ले लिजियेगा सोनल बहिनी के साइज़ का

रीना की बात सुन कर कमलनाथ की उंगलिया रुक गयी , कान और लण्ड दोनो खडे हो गये और आंखे बडी हो गयी साथ ही होठो पे स्माइल आ गयी ।

कमलनाथ बात को सामान्य ही रखने की कोसिस मे - अच्छा ठिक है ,,,साइज़ बताओ क्या लेना

रीना चौकी - साइज़ मुझे नही पता , मैने उनको उतना ध्यान से कभी देखा नही है

कमलनाथ पर्ची को देखता हुआ उसपे अपने कलम की नोक ठोकता हुआ - अरे बहू ,, सोनल बिटिया बिल्कुल तुम्हारे नाप की ही है ,,,अप्ना ही बता दो ना । वैसे भी इनसब पे कोई खास ध्यान नही देता है

रीना अब ही करती वो शर्म से लाल हुई जा रही थी और फिर उस्ने झिझकते हुए - जी वो 34C की ब्रा और 36 की पैंटी

अपनी बहू की नाप सुन कर कमलनाथ का लण्ड और भी ठुमक उठा । उसने कनअखियो से एक नजर रीना के साडी से झाकते ब्लाउज पर मारा और जल्दी से नोट किया

कमलनाथ- और कुछ बाकी है

रीना - नही पापा जी

इतना सुनते ही कमलनाथ वो परची जेब मे रखते हुए तुरंत खड़ा हुआ - ये डायरी पेन रख देना ,, मै इसको रमन की मा को दिखा दू एक बार

इधर कमलनाथ एक झटके मे खड़ा हुआ तो रीना के ठिक सामने उसके पजामे मे तना हुआ लण्ड साफ उभरा हुआ दिखने लगा ।

रीना मुस्कुरा दी और कमलनाथ उपर चला गया ।

रीना हस्ती हुई मन मे - हे भगवान पापा जी का इस उम्र ने भी हमेशा हिहिहिही

फिर वो अपने काम मे लग गयी ।

CHAMANPURA

एक बन्द कमरे मे दो रसिले जिस्म एक दुसरे को चूसे जा रहे थे । उनके चर्बीदार अन्गो पर कपडो के नाम पर धागा नही था ।





उफ्फ़ निशा तेरे कुल्हे तो पहले से ज्यादा नरम हो गये है रे , सोनल ने निशा के चर्बीदार गाड़ को मसलते हुए कहा और फिर उसके रसिले होठो को चूसने लगी ।

सोनल - और ये तेरे चुचे ,,उम्मममं पहले तो ऐसे नही फुले थे ,,,आआह लगता है राज तेरी जम कर ले रहा है





निशा थोडा उतर कर अपने हाथ उसकी चुत पर मलते हुए - क्यू जैसे तुने तो उससे चुदना ही बंद कर दिया क्या उम्म्ंं बोल ना

ये कहकर निशा सोनल ने नरम नरम फुले हुए 34 साइज़ के चुचे को मुह भर लेती है






निशा - उम्म्ंम सोनल तेरे दूध बहुत नरम है उम्म्ंम्ं अह्ह्ह साला अमन भी ब्डा नसीब वाला है ,,ऐसा गदराय माल पा गया

सोनल निशा से अपनी चुत मसल्वा कर बस सिससिस्किया लिये जा रही थी और जिस तरह से निशा उसके चुचियो के निप्प्ल अपनी जीभ से नचा रही थी

निशा - क्यू मेरी रान्ड दिखाया की नही इनहे अमन को उम्म्ंम वीडियो काल पर कभी नंगी हुई या नही बोल ना साली

सोनल हस कर - नही यार ,, वो थोडा नटखट है लेकिन जिद नही करता , मना कर दो तो मान जाता है ।





निशा उसकी चुत मे ऊँगली पेलते हुए - और तुने क्भी देखा है उसका मोटा लण्ड उम्म्ं

सोनल नशे से अकडती हुई - अह्ह्ह नही यार उम्म्म्ं सीईई मै उसे छेड़ती हू तो वो शर्त रखता है कि पहले मै शुरुवात करु

निशा उसके चुत मे उंगलिया पेलते हुए -ओह्हो फिर क्या सुहागरात पर तुम लोग बस मीठी बाते करोगे ,,, शादी के सेज पर मिलने की तडप का मजा तो लो ।

एक्दुसरे के लिए मूठ तो मारो तभी तो मजा आयेगा ना ।





सोनल अपनी गाड़ निशा के मुह पर दरते हुए -आह्ह नही यार मुझ्से ये नही हो पायेगा । मै पहले क्भी भी उससे ऐसे पेश नहो आई हू उम्म्ंं और चाट सीईई अह्ज्ज्ज

निशा - ओहू मेरी जान अगर अभी से खलेगी नही और उसे बतायेगी नही कि तुझे अप्नी चुत और गाड़ चटवाना कितना पसन्द है तो क्या वो शादी के बाद ये सब करेगा

सोनल निशा के उपर झुकी हुई कसमसा कर -उह्ह्ह सीईई तो तु ही बता क्या कर उम्म्ंम्ं





निशा ने पोजीशन बदला और सोनल की चुत से अप्नी चुत रगड़ती हुई - मै जो कहुन्गी वो करेगी तो अभी शादी को 10 दिन है इतने मे काम बन जायेगा

सोनल चरम पर पहुंच रही थी तो वो अप्नी कमर को अक्ड़ा कर तन गयी और निशा लगातार उसके चुत के होठों से अपने चुत मल रही थि और थोडी ही देर मे दोनो झड़ने लगे और थक कर आपस मे लिपट कर बिस्तर पर ढल गये ।

निशा - तो बता ये अमन कॉल कब करेगा

सोनल - वो हम लोग रात मे ज्यादा बाते करते है , लेकीन तु करेगी क्या ?

निशा - बस तू देख ना रात मे मेरा कमाल हिहिहिही

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आज की ये रात बहुत ही कामुक होने वाली थी ।

एक ओर जहा निशा सोनल और अमन के बिच कुछ मस्तियाँ करने का मूड बना चुकी थी ।

वही शालिनी और राहुल की अपनी अगल ही प्लानिंग हो रही थी ।

और राज ने एक गदराई हसिना को पूरी रात भोगने का इतेजांम कर लिया था ।

सपने तो काफी देखे जा चुके थे लेकिन किसका सपना हकीकत होगा ये अगले अपडेट मे पता चलेगा ।

जारी रहेगी
 
देसी न्यू ईयर पार्टी :jerker:

अपने शैम्पेन की धार से अपनी मा को नहलाता उसका बेटा







आप सभी को नये साल की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ

उम्मीद करता हूँ कि इस नये वर्ष में आपके देखे सभी सपने हकिकत हो ।

हैप्पी नई ईयर 2023
 
में हु वृत्तिंग उपदटेस कॉन्टिनुएस फॉर लास्ट 4 डेज.

मैंने व्हील माय नुनु :आउच: व्हिच इस असलो कन्टिन्यूसली रोब्बिंग अंडर माय पैन्ट्स .


बे लिखे :एंग्री: :



 
इतना सन्नाटा :hide1:

लगता है सबने new year resolution ले लिया है :lol:



अगला अपडेट आज रात मे आयेगा :online:
 
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