Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 30 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 162

लेखक की जुबानी

JAANIPUR

शाम की बात चित के बाद से ससुर बहू के बिच की झिझक काफी कम हो गयी थी लेकिन अभी भी जब उनकी नजरे आपस मे मिलती वो मुस्कुरा देते ।

एक ओर जहा कमलनाथ को अपनी बहू के कसे हुए जोबनो की माप मिलने के बाद से बेचैनी बढ़ी हुई थी ,,वही रीना जब भी अपने ससुर को देखती तो उसकी निगाहे अनायास कमलनाथ के पजामे पर चली जाती , ये जाचने के लिए कि क्या उसका अभी भी खड़ा है क्या और वही कमलनाथ जब भी बहू को देखता उसका लण्ड खुद उछल कूद करने लग्ता था ।

खैर रात हुई और रमन घर आया ।

सब एक साथ बैठ कर खाना खाने लगे और कल की शॉपिंग पर जाने के लिए रज्जो ने रमन से कुछ पैसो की डिमांड की तो उसने हा कह दिया और फिर तय हुआ कि कल रीना और कमलनाथ जायेन्गे खरीददारि के लिए ।

कारण था रज्जो की तबियत कुछ खास ठिक थी नही और शादियो के सीजन की वजह से रमन को दुकान से फुर्सत नही थी ।

फिर उसके बाद दोनो मर्द अपने अपने कमरे मे चले गये ।

इधर रीना और रज्जो किचन मे थे ।

रज्जो - बहू सुनो

रीना - हा मा जी कहिये

रज्जो - देखो लिस्ट मे कुछ मेरे समान भी बढा लो

रीना - लेकिन पर्ची तो पापा जी के पास है ना

रज्जो - ओहो तु पर्ची छोड ज्यादा कुछ नही ,, बस मेरे नाप की दो ब्रा और कच्छी ले लेना

रज्जो - वो क्या है ,, मेरी यहा वाली पुरानी हो गयी है और वहा शादी वाले घर मे छेद वाली कच्छीया टंगी रहे अच्छा नही लगेगा ना

रीना अपनी सास की बात सुन कर हस दी - हिहिही अच्छा ठिक है मा जी ,, मै ले लूंगी

रज्जो - और सुन तु भी ले लेना अपने लिये भी ,वहा के लिए ,

रीना - नही मा जी मेरा वाला ज्यादा दिन का नही है

रज्जो - अरे जो कह रही हू कर , तु नही जानती ये शादी वाले घर के चोचले और नयी बहू की कैसे खिचाई होती ।

रज्जो - अगर गलती से तेरी कच्छी का छेद वहा मेरी बहन के ननदो को दिख गया तो

रीना हस कर - अच्छा ठिक है मा जी मै भी नये ले लूंगी हिहिहिही

रज्जो थोडा झिझक कर हस्ते हुए - अच्छा सुन वो एक हेयर रेमोवर ले लेना मेरे लिये

रीना अपनी सास की बात पर होठ मे अपनी हसी दबा कर खिखियाने लगी

रज्जो उसको ठोकते हुए - क्या हस रही है ,तू नही यूज़ करती है क्या

रीना हस कर - वो बात नही है मा जी ,,,छोडिए

रज्जो जिज्ञासु होकर - अरे बोल ना ,,मुझसे क्या शर्मा रही है

रीना हस कर - नही आप डाटोगे हिहिही

रज्जो - अरे बता तो सही

रीना - वो आपने रेमोवर लेने को बोला तो मुझे कुछ ध्यान मे आ गया हिहिहीही बस इसिलिए हसी आई

रज्जो - अरे तो बता ना

रीना खिलखिलाती हुई - वो मैने सोचा हाहहहा कि जब पापाजी आपको ऐसे ही चार बार हिहिही तो जब रेमोवर यूज़ कर लेंगी तो कित्नी बार हिहिहिही

रज्जो उसके गाल खिचती हुई हस कर - तु बहुत बदमश हो गयी है , तुझे ऊँगली दो तो पुरा हाथ पकड लेती है

रीना अपने गाल छुड़ाते हुए - आह्ह मा जी हिहिही आप ही बोली ना ब्ताने को , मै तो चुप ही थी

रज्जो हस कर - चल चुप कर बदमाश कही की ,, मै उपर जा रही हू तू भी ये काम खतम करके अपने कमरे मे जा

रिना हस्ते हुए अपने गाल सहला कर - ठिक है मा जी

फिर रज्जो अपने कमरे मे चली गयी ।

CHAMANPURA

"ओहो निशा ये क्या भेज दिया तुने ", सोनल निशा द्वारा अपने मोबाइल से अमन को भेजे गये मैसेज को पढती हुई बोली ।





निशा खिलखिला कर - ओहो मेरी जान, बस उसे मैसेज सीन करने दे । सीधा वीडियो काल ही आयेगा

सोनल उखड़ कर - यार मुझ्से नही हो पायेगा ये सब , मैने कभी भी ऐसे कपडो मे उसके सामने नही गयी हू

निशा - अगर तेरी हालत अभी ऐसी है तो शादी के बाद घन्टा मजा ले पायेगी सुहागरात का और मै यही हू ना तेरे साथ ।

इधर इनकी बाते चल रही थी कि उधर से अमन का वीडियो काल आने लगा ।

सोनल घबरा गयी - यार ये सच मे वीडियो काल ही कर रहा है

निशा - अरे उठा ना फिर

सोनल - अरे नही नही

निशा सोनल की ना नुकुर सुनकर खुद ही वीडियो काल उठा देती है

फोन पर

निशा - हाय जीजू हिहिही

अमन - अरे निशा तुम कैसी हो






निशा चहक पर मोबाईल का कैमरा का फोकस अपने टीशर्ट मे कसे हुए बड़े बड़े चुचो पर करते हुए - खुद ही देख लो हिहिहि

अमन समझ गया कि निशा शरारत के मूड मे है और वैसे भी निशा के गदराये जोबनो ने उसका लण्ड खड़ा कर दिया ।

अमन - ओहो अच्छा सोनल कहा है !

निशा तुन्क कर - आपको तो जैसे मै पसन्द ही नही ,,, अरे शादी से पहले तो मुझ्से थोडा बात कर लो ,, शादी के बाद तो ये आपकी ही है ना हुउह

अमन हस कर - अरे ऐसी कोई बात नही है

"लो बात करो अपनी बीवी से मै चली निचे" , अमन की बात को काटते हुए निशा बोली और फोन को सिधा सोनल के हाथ मे दे दिया






वही सोनल के टेप की हालात कुछ खास सही थी नही जो उसे निशा ने पहनाया और निशा ने भी उसे मौका नही दिया की वो उसमे से झाकती अपनी चुचियो को सहेज पाये ।इससे पहले ही कैमरे का फोकस उसके रसिले गोरे मोटे जोब्नो पर जा चुका था और दायी तरफ की चुची के निप्प्ल का घेराव भी साफ दिख रहा था ।

इधर अमन की आंखे फैल गयी थी वो एक टक मोबाइल मे सोनल के बडे बड़े चुचो को निहार रहा था और जब सोनल अपनी स्थिति का आभास हुआ तो फौरान उसने फोन काट दिया ।

सोनल - अरे सच मे पागल है क्या , मै सोयी थी और मेरे दूध बाहर निकलने वाले थे

निशा चहक कर - हिहिही वही तो दिखाना था उसे

सोनल - ले देख फिर से फोन आ रहा है उसका वीडियो काल

निशा - तो उठा और मेरे बारे मे पूछे तो बोलना बाहर गयी हू ।

सोनल ने खुद को सहेजा और बालो को ठिक करके मोबाइल का फोकस अपने चेहरे पर रखते हुए फोन उठा लिया ।

अमन - क्या हुआ बाबू काट क्यू दी

सोनल शर्मा कर - चुप रहो ,,तुमको नही पता क्यू काटा मैने

अमन हस्ता हुआ - अरे मुझे लगा कि शायद वही दिखाने के लिए बोल रही थी ।

सोनल शर्म से लाल होती हुई - वो मैने नही निशा ने मैसेज किया था आपको परेशान करने के लिए

अमन - अच्छा अभी कहा है वो शैतान की बच्ची


सोनल निशा की ओर देखती है तो निशा उसे इशारे से कहती है कि बोल दो मै बाहर हू

सोनल - अरे वो निचे गयी है

अमन- तो अब दिखा दो ना जानू प्लीज


सोनल शर्म से लाल होकर मुस्कुराती हुई ना मे सर हिला रही थी

अमन - ओहो जानू देखो अब तो निशा भी आ गयी है साथ रहने ,,पता नही मौका मिलेगा या नही प्लीज

अमन की गिडगिडाहट सून कर निशा पेट और मुह पकड कर हसे जा रही थी और सोनल उसको देख मुस्कराने के अलावा कुछ नही कर सकती थी ।

निशा इशारे से सोनल को कैमरा थोडा निचे करने को कहती है

सोनल कुछ सेकंड के लिए निचे करती है जिससे अमन को उसकी मोटी चुचियो के बीच की खाई दिखती है ।

इधर अमन के अरमान पुरे होते कि सोनल कैमरा वापस चेहरे की ओर कर लेती है ।

अमन - बक्क क्या जी ,,, दिखा रही हो तो अच्छे से दिखा दो ना क्यू तडपा रही हो

निशा एक बार फिर सोनल को इशारा करती है कि वो फिर से अपने चुचे दिखाये ।

तो सोनल मुस्कुरा कर वापस से मोबाईल को अपने चुचो के सामने कर देती है और इस बार वो अपने एक हाथ को अपने चुचो के उपर घुमाते हुए गरदन तक ले जाती है ।

जिससे अमन सिहर उठता है - ओह्ह बेबी तुम्हारे दूध कितने बडे है उम्म्ंम उम्म्म्माआह उम्म्माह

निशा को जब समझ आता है कि अमन सोनल के चूचियो को चुम रहा है तो वो फिर से मुह पर हाथ रख कर हसने लगती है और जब सोनल को लगता है कि उसकी भी हसी निकल जायेगी ।

सोनल - अच्छा बाबू मै अभी बात करती हू निशा बुला रही है शायद

अमन - ओहो जान ऐसे ना छोड के जाओ ना , कम से कम से इसका तो कुछ सोचो


अमन की आवाज से निशा समझ गयी कि अमन ने जरुर अपना कैमरा खडे लन्ड़ की ओर किया होगा

सोनल तेजी दिखाते हुए - बाद मे बाबू अभी मुझे निचे जाना होगा

अमन - अच्छा तो फिर एक फ़ोटो भेज दो ना ऐसे ही प्लीज


सोनल आंख उठा कर निशा को देखती है तो वो हा बोलने को कहती है ।

सोनल - ओके बेबी ,,भेज दूँगी अभी बाय बाय लव यू

फिर फोन कट जाता है ।

निशा उसके पास जाकर - तो कैसा मेरी जान , अपने आशिक को अपने ये रसिले चुचे दिखा कर

सोनल शरमाती हुई हस कर - यार मेरा दिल कितना तेज धडक रहा था उफ्फ्फ और उसका वो हिहिहिही

निशा आंखे बडी करके - मतलब उसने लण्ड भी बाहर निकाल रखा था ,,, बड़ा तेज है ये तो भाई

सोनल हस कर - धत्त नही रे ,, उसने लोवर मे तना हुआ उसका लण्ड दिखाया

निशा - ओहो फिर क्या साइज़ होगा उम्म्ंम

सोनल - पता नही यार लेकिन तगडा लग रहा था

निशा उसे छेड़ते हुए -अरे मेरी जान आर्मी वाला बन्दा है ,,हल्के मे थोडी ना रहेगा हिहिही

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रात के 10 बज रहे थे और खाना खाने बाद राहुल अपने कमरे में बेचैनी से टहल रहा था कि कब उसकी मा अपने कमरे मे जायेगी ।

थोडे ही देर मे उसे आहट आई तो उसने दरवाजा हल्का सा दरवाजा खोलकर बाहर झाका तो उसके मा का कमरे का दरवाजा खुला था ।

राहुल को पुरा यकीन था कि उसकी मा उसके लिए आज दरवाजा खुला रखने वाली है ।

इधर कमरे मे जाते ही जन्गिलाल ने शालिनी को पीछे से दबोच लिया और टीशर्ट मे कसे हूए बिना ब्रा के 36DD वाले चुचो को मसल कर उसके निप्प्ल को मरोड दिया

शालिनी सिसकी - आह्ह आराम से उम्म्ंम्ं

जन्गीलाल उसके लोवर के उपर से उसके नरम नरम चुतडो को सहलाता हुआ - ये अच्छा किया तुमने कि लाडो के कपडे रख लिये ।

शालिनी अपने पति की बाहो मे कसमसाते हुए - उम्म्ंम मेरे राजा तुमको तुम्हारी बेटी की याद ना इसिलिए तो पुरे दिन पहने रहती हू मै सीईई अह्ह्ह





राहुल अपने मा के कमरे के सामने पहुच चुका था और उसने कमरे मे झाका तो देखा कि उसका बाप उसकी मा के पीछे खडे होकर उसको पकडे हुए है और उसके मुलायम चुतडो को मसल रहा है ।

जन्गीलाल अब आगे बढना चाहता था तो शालिनी उसे रोकते हुए - रुकिये ना , दरवाजा बन्द तो कर दू

फिर शालिनी इतराती हुई दरवाजे की ओर जाती है और जंगीलाल अपने कपडे निकालने लगता है

शालिनी बडी शरारत से इठलाती हुई दरवाजे को बन्द कर रही होती है कि

राहुल उसके सामने आ जाता है -मम्मी प्लीज रहने दो ना ऐसे

शालिनी एक नजर उसके तने हुए लण्ड को देखती है और मुस्कारा कर डांटती हुई - धत्त पागल ,जा सो जा , कही तेरे पापा ने देख लिया तो

राहुल अपने तने हुए लण्ड को अपनी मा के सामने खुजाता हुआ - प्लीज ना मम्मी मै चुप रहूंगा

शालिनी दबी हुई आवाज मे मुस्कुराहट के साथ - देख तो लिया अपने पापा की शरारत अब जा सो जा

ये बोलकर शालिनी ने दरवाजा बंद कर दिया और राहुल उखड़े हुए मन से अपने कमरे मे चला गया ।

वही शालिनी अपने बेटे को छेड़ कर बहुत खुश थी और उसने पति के साथ बाप बेटी का रोल प्ले मे लग गयी ।


राज की जुबानी

रात के करीब 8 बज रहे थे और सादिया ने सबको खाना खिला कर किचन के काम खतम कर रही थी ।

उसने अपनी बेटी को अपने कमरे मे सुला दिया और मुझे एक अलग कमरे मे आराम करने की व्यव्स्था कर दी ।

सादिया - राज तुम यहा आराम करो ,,,मै बरतन खतम करके आ रही हू

मै जो कबसे उसके जिस्मो को भोगने की तडप लिये अपना लण्ड मसल रहा था

मै - भाभी अभी और कितना टाईम कल सुबह कर लेना ना

सादीया मुस्कुरा कर मेरे होठ चुमते हुए - बस बाबू 5 मिंट बैठो मै सब कुछ एक बार चेक करके आ रही हू ।

मैने भी उसके होठ चुभलाये और उसके मस्ताने चुतडो पर हाथ मसलकर - ओके

फिर मै दरवाजा भिड्का कर अपने मोबाइल मे लग गया ।

करीब 7 8 मिंट बीते होगे और दरवाजा खुलने की आवाज आई और मेरे लण्ड फिर से अकडने लगा और जब पुरा दरवाजा खुला तो कमरे के बाहर पुरा अंधेरा । शायद उसने घर की सारी बत्तिया बुझा दी थी ।

तभी उस अंधेरे से सादीया माधरजात नंगी होकर अपने पुरे जिस्म को इठलाती हुई चल कर कमरे के उजाले मे आने लगी

मै उसके गदराये जिस्म को देखकर पूरी तरह से प्थ्थर का हो गया था ।





मैने पुरा उपर से निचे तक उसके मोटे रसिले गोरे चुचो से उसकी नरम गुदाज पेट और सुराहीदार कमर के निचे चर्बीदार जांघो के बिच से झांकती हल्के बालो वाली चुत को देखा ।





मेरा लण्ड फौलादी हुआ जा रहा थ और मैने फौरन खडे होकर अपना लण्ड जीन्स से निकाल कर उसे सादीया के सामने हिलाने लगा ।

मेरे गले थुक भरना शुरु हो गया था और खुमारि पुरे बदन को हिलाये जा रही थी ।

वो बडी अदा से अपने नायाब कूल्हो को मटकाते हुए मेरे नजदीक आई और सीधा मेरे लण्ड को अपने हाथो जकड़ते हुए मेरे होठो से अपने होठ जोड लिये





उसके होठो के रसिले खिचाव मे मै उसके मुह मे घुलने लगा था और मेरे हाथ उसके नरम चौडे कूल्हो पर घुमने लगे ।

उसने मेरे लण्ड के तने को पकड कर अपनी ओर खीचा और होठो की चुसाई ने और जोर दिया ।

मैने भी अपने हाथ से उसके चर्बीदार गाड़ को मसलते हुए उन्हे विपरित दिशा मे खीचने लगा ।

हमारे जिस्म सटे हुए थे ।

मैने उसको कमार से थामा और उसके पीछे हो गया ।





हमारे होठ अभी भी जुड़े हुए थे लेकिन मेरे साथ पीछे से उसके दोनो जबरदस्त 40DD साइज़ के चुचो को मसले जा रहे थे ।

उनकी नरमी मेरे हाथ मे ही नही पुरे शारिर मे मह्सूस हो रही थी ।

उसने अपने हाथ से अभी भी मेरे लण्ड को भिच्ना जारी रखा था ।

फिर मैने उसे अपनी ओर घुमाया और उसके होठो से सरकते हुए अपने जुबान को उसके चुची के मोटे दाने पर ले गया और उन्हे गीला करने लगा ।





पहली बार उसकी मादक सिसकी मेरे कानो मे फड़की और मै उसके चुचो को दबाते हुए उन्हे मुह मे भरने लगा ।

वो मेरे सर को अपने छाती पर दबाते हुए सिसकिया लिये जा रही थी - उम्म्ंम्ं राअज्ज्ज उफ्फ्फ्फ और चुसो काट डालो इन्हे उम्म्ंम्ं कितना मस्त चुस रहे हो ऑफफ़फ उम्मममं अम्म्म्मीईई अह्ह्ह

मै उसके रसिले चुचे बारि बारी चूसे जा रहा था और वो अपना हाथ आगे बढाये मेरे लंड को भीच रही थी ।

मैने उसके रसिले चुचो से थोडा अलग हुआ और उसके होठो को चुसते हुए निचे जाने का इशारा किया





वो मुस्कुराती हुई निचे बैठ गयी और मेरे लण्ड के सुपाड़े को जीभ से घुमाकर मेरी आंखो मे देखते हुए बडी ही कामुक अदा से उसने मुह मे भर लिया और उसे चूसने लगी ।

उसने नरम होठो की ठंडक से मेरे लण्ड की नसे और फड़कने लगी ।

वो लण्ड को मुह मे भरे भरे ही मेरे जीन्स को निचे खीचा और मेरे जांघो को सहलाते हुए अपने दोनो हाथो को मेरे चुतडो पर ले गयी ।

उसके नरम नरम हाथो को स्पर्श मेरे लण्ड को और फौलादी किये जा रहा था और वो बडी आतुरता से उसे चूसे जा रही थी ।

मेरी एडिया उठने लगी थी और हाथो मे उसके सर पर दबाना शुरु कर दिया ।

लण्ड की फड़कड़ी नसे उसे और फौलादी करते हुए सादीया के गले मे चोक कर रही थी और मै उसका सर पकडे बडी बेरहमी मे मुह मे पेलना शुरु कर दिया





उसकी आंखे फटने को आगयी और मैने झटके से उसकी लारो से लसराया हू लण्ड उसके मुह से बाहर निकाला और उसके होठो को चुमते हुए वापस उसके मुह पर अपना लण्ड घिसने लगा

फिर मैने उसे बिस्तर पर पेट के बल धकेला और फिर उसके उभरे हुए पहाड़ जैसे चुतडो मे अपना मुह दे दिया ।

सादीया - उम्म्ंम्ं राआज्ज्ज सीईई उफ्फ्फ अह्ह्ह





मै उसकी चर्बीदार गाड के पाटो को हाथो से मसल्ते हुए अपनी लपलपाती जीभ से उसके गाड़ की सुराख को भेद रहा था और वो सिसकिया लेते हुए अपने चुतडो के नरम नरम गालो को कसे जा रही थी ।

मैने उसके गाड़ के चर्बीदार हिस्सो को भी मुह मे भरना शुरु कर दिया ।

नरम नरम गुलगली गाड़ की चर्बी को मुह मे भर कर मुझे और भी जोश आ रहा था और वही सादीया अपनी गाड़ आगे कि ओर खिचने की बेजोर कोशिस किये जा रही थी ।

लेकिन जैसे ही मेरी जुबान ने उसके रस भरे चुत की मोटी फाको को छुआ वो हल्की पड़ गयी और उसने अपने गाड़ को भी उपर उठाते हुए ढीला छोड दिया ।

मैने अपनी गर्दन का कोण बदला और अपने होठो से उसके मोटे मोटे फाको वाले रस छोडते चुत को मुह मे भरने लगा ।

सादीया - ओह्ह राज तुम मुझे पागल कर दोगे आह्ह्ह अम्मी उह्ह्ह्ह उम्म्ं आज तक मेरे शौहर मे कभी ऐसा सुख नही दिया याआ अल्लाह्ब उम्ममम उफ्फ्फ

वो सिसकिया लेते हुए अब अपनी गाड़ को मेरे मुह की ओर ढकेलने लगी और मैने उस्के कूल्हो को थामकर उसकी डबडबाई बुर मे अपना जीभ घुसा दिया

जिससे उसने अब अपनी जांघो को कसना शुरु कर दिया और झटपटाने लगी

मै देर ना करते हुए अपनी जगह पर खड़ा हुआ और लण्ड को पीछे से उसकी गुदाज चुतडो की दरारो मे घिस्ता हुआ उसके चुत के मुहाने पर लगाया और एक हाथ से उसके बड़े से कुल्हे को थामते हुए करारा धक्का दीया और एक दो घ्क्के बिना रुके दे दिये

सादीया - उफ्फ्फ अम्मीईईई उम्म्ंम ओह्ह्ह बहुत मोटाआह्ह ओह्ह सीई ओह्ह

फिर मैने उसके मखमली गाड़ को दोनो तरफ से पकड़ा और धक्के लगाने शुरु कर दिये । सादीया ने भी कस कस के आअहे भरने लगी






उसके चर्बीदार गाड़ मेरे जांघ की थपेडों को उछाल दे रही थी और लण्ड एक लय मे उसकी गीली चुत मे सटासट जा रहा था

करीब 7 8 मिंट की ध्क्क्म पेल चुदाई मे वो दो बार झडी और अपने कमार को सेट करने लगी

सादीया - ओह्ह्ह राज उम्म्ं रुको ना आह्ह मै ऐसे और नही ले पाऊंगी उम्म्ंम अह्ह्ह अम्मीईई उह्ह्ह

मैने अपने 2 4 करारे झटके लगाते हुए अप्ना लण्ड रोक दिया और लण्ड बाहर निकाल लिया ।

जिससे सादीया बिस्तर पर परस गयी और मै उसके बगल मे लेट कर उसके गालो को चूमने लगा

वो मुस्कुरा कर मेरी ओर देखी और फिर करवट लेते हुए सीधा लेट गयी ।

उसकी 40DD की मोटी मोटी चुची दोनो ओर फैल गयी ।

मैने हरकत की और उसके उपर आगया





और उसके गुदाज नरम खरबूजे जैसे चुचो को मसलते हुए उम्हे फिर से चुसने लगा

सादीया : ओह्ह राज सच बताना , अब कितनो को ऐसे लिटा चुके हो उम्म्ं

मै उसके चुचे मुह मे चुबलाके - क्यू ऐसा क्यू पुछ रही हो , ये तो मेरी पहली चुदाई है हिहिहिही

सादीया शरमा कर - धत्त झूठे सही बताओ ना ,, कहा से सीखी ये सब

मै उसे दोनो काले अंगूर से मोटे मोटे दाने वाले निप्प्ल्स को उंगलियो से मरोड कर उपर खिचता हुआ - क्या क्या सिखा है मै उम्म्ंम

सादीया हल्के मीठे दर्द और मजे से सिसकी - उम्मममं सीईई आह्ह्ह येह्ह्हीई सबब उम्म्ंम अम्म्मीईई ओफ्फ्फ चोद दो न मुझे

मै उसके चुचो पर हथेली घुमाते हुए हस कर - क्या करू उम्म

सादीया अपनी गाड उचका कर मेरे लंड के पास अपनी चुत ले जाने की कसमसाहट करती हुई - ये दो ना अंदर प्लीज , चोदो न मुझे उम्म्ंम

मै थोडा मुस्कराया और लण्ड को उसके चुत में लगाते हुए पुरा उसके उपर चढ़ गया ।

क्या मस्त मख्मली गद्दे जैसा देह था उसका , हर जगह चर्बी फैली हुई थी और मैने उसके चुचे मुह मे भरते हुए एक जांघ को पकड़ कर पेलना शुरु कर दिया ।

मैने कस कस कर अपने कमर को पटकना शुरु किया और वो तेज आहे भरने लगी ।

कमरे मे तेज सिसकिया और थप्प थप्प की आवाज गूंज रही थी ।

हम दोनो के होठ जुड़े हुए थे और मै उसकी दोनो जान्घे अपने उपर खिचे सटासट चोदे जा रहा था । उसके चुत की गरमी से साफ पता चल रहा था कि वो बार बार झड़ रही थी ।

मै इससे पहले रज्जो मौसी को ही इतना गरम और चुदाई के लिए आतुर पाया था । लेकिन रज्जो मौसी का खुद पर बराबर नियंत्रण होता था लेकिन सादीया बेकाबू हो चुकी थी ।

उसके भोस्ड़े से टपकता उसका नमकीन पानी बेडशीट और उसकी चुतड मे लिभ्ड रहा था ।





मैने भी अपनी कमर को सीधा किया और उसके एक जांघ को उपर उठाते हुए करारे धक्के लगाने लगा।

सादीया अपने हाथ अपनी जांघो को थामे दुसरे हाथ से चुत मलने लगी

मै - यार तुम तो झडे ही जा रही हो उफ्फ्फ्फ अह्ह्ह

सादीया मेरे करारे धक्के खाते हुए अपनी चुत को मलते हुए मुस्कुरा कर बोली - आह्ह राज मेरा ऐसे ही होता है उम्म्ंम और पेलो ना उफ्फ्फ तुम बस थकना मत मै पूरी रात चुदवाना चाहती हू

पूरी रात सादीया की चुदाई का सोच कर मै भी जोश मे आ गया और उसे करारे झटके मारने लगा

वो और चिखते हुए एक बार फिर से मेरे लंड पर अपना गर्म पानी छोडने लगी ।

अब मेरा सुपाडा फैलने को हो गया था और मै समझ गया कि अब ज्यादा देर नही लगने वाला है

मै - ओह्ह्ह मेरा भी आने वाला है कहा लोगि उम्म्ंम बोलो न जल्दी

सादीया - मुझे मुह मे चाहिये उम्म्ंम

मै जल्दी से सुपाड़े के मुह पर हथेली रखी और उतर कर निचे खड़ा हुआ , सादीया घुटनो के बल अपना जीभ निकाले मेरे सामने थी और मैने सुपाडा ढीला छोड दिया

इतने मे मेरे बीर्य की एक तेज पिचकारी मेरे उंगलियों को छुती हुई सीधा सादीया के मुह मे गयी और मैने अपना लंड तेजी से हिलाने लगा





और वो आखिरी पिच तक अपनी जुबान बाहर निकाले रही फिर सारा माल गटकते हुए लंड को मुह मे भर उसे अच्छे से सुरक कर निचोड लिया ।

और मै वही बेड पर लेट गया ।

थोडी देर बाद वो कमरे से बाहर गयी और फिर एक ग्लास एनर्जी ड्रिंक लेके आई

मैने उसे पिया और हम फिर से अगले राउंड की तैयारी मे लग गये ।


जारी रहेगी
 
अपडेट 163


सादीया की इच्छास्वरुप मैने सुबह के 3 बजे तक उसकी चुत और गाड मारी और फिर मै सो गया ।

सुबह 9 बजे के बाद ही मेरी आंखे खुली तो उसने ताजा गर्म नाश्ता करवाया और फिर मै सफ़र पर निकलने की तैयार होने लगा ।

इस दौरान वो मेरे पास ही रही और उसने मुझसे वादा लिया कि जब भी मुझे समय मिले वो यहा जरुर आऊ ।

मै भी मुस्कुरा कर हा बोल दिया ।

फिर वो मुझे बस स्टाप तक छोडने आई और 10 बजे वाले बस से मै बुआ के घर की ओर निकल गया ।

मै जा तो बुआ के यहा जा रहा था लेकिन सादीया की यादे मेरा पीछा नही छोड रही थी ।

उसके बारे मे सोचते हुए कब मै सो गया पता ही नही चला

और मेरा सफर भी खतम हो गया ।

मै फाइनली अपने बुआ के शहर आ गया था ।

मैने अपना बैग लिया और निचे उतरा ।

फिर मै चौराहे से होकर टाउन की ओर जाने लगा ।

चुकी मै काफी समय बाद बुआ के यहा आया था तो यहा बहुत कुछ बदल गया था ।

चौराहे से मैने ई-रिक्सा लिया और बुआ के घर के मुहल्ले का नाम ब्ताया और फिर हम (मै और वो रिकशा वाला ) निकल गये ।

रास्ते मे मैने एक बहुत ही बड़ा कालेज देखा , काफी वीआईपी भी था ।

मैने रिक्सेवाले से उस कालेज के बारे मे पुछा तो उसने मेरे बड़े फुफा का नाम बताया तो मै मुस्कुरा दिया ।

फिर वो रिक्सेवाला इस कालेज के साथ साथ मेरे फुफा की भी बड़ाई बतियाने लगा ।

मै चुपचाप सुनता रहा और जब मेरा मुहल्ला आया तो मै उसके पैसे देकर उतर गया ।

मै अपना बैग उठाकर कन्धे पर किया और कालोनी के एक बड़े मकान की ओर देखा ।

फिर मुस्कुरा कर उसी ओर चल दिया ।

काफी बड़ा गेट लगा था और उसमे एक छोटा गेट भी था । मै उस छोटे गेट से अन्दर घुसा ।

अंदर काफी बड़ा घर था

जित्ने मे मेरा चौराहे वाला घर था उतना तो फुफा जी ने खुला छोड रखा था । जिसमे एक ओर कुछ आदमी औरत अनाज का काम कर रहे थे ।

एक ओर फुलवारी भी थी उसकी भी देखरेख दो औरते कर रही थी ।

मै बेधड़क आगे बढ रहा था और घर के बरामदे से होकर एक ब्डा सा दरवाजा फांदते हुए हाल मे पर्वेश किया तो सामने शिला बुआ खडी थी ।

जो सोफे पर रखे हुए कपडो मे से छटाई कर रही थी ।

मैने इधर उधर जरा भी नही देखा ,,बुआ के कुरती ने उभरी हुई गाड़ देखकर मेरा लण्ड वैसे ही तन चुका था

मै दबे पाव गया और बुआ को पीछे से पकड लिया ,

मै चहक कर - बुआआ हिहिहिही

मैने उनको पेट पर से पकड़ा हुआ था और मेरा लण्ड उनकी गाड़ मे चुभ रहा था ।

शिला बुआ ने जैसे ही मेरी आवाज सुनी वो खुश हुई - अरे मेरा लल्ला तु

और वो फिर वो मेरी बाहो मे ही घूम कर मेरे ओर हो गयी ।

अब मेरे हाथ उनकी कूल्हो पर थे ।

मैने तुरंत हग कर लिया और उन्होने मुझे रोका भी नही ।

मै उन्के सीने से चिपका हुआ था कि मेरी नजरे एक जगह अटक गयी।





एक बडी ही गठिले बदन वाली औरत जिसने डीप गले का ब्लाऊज पहन रखा था वो एक कमरे से झाडू लगाते हुए हाल मे आ रही थी ।

मै बुआ से अलग हो गया था और मेरी नजरे उसके झान्कते हुए चुचो मे अटक गयी थी ।

जब बुआ ने मुझे एकदम से चुप देखा तो मेरी नज़र का पीछा किया और वो मुस्कुरा कर मेरे गाल खिचते हुए ।

शिला - शैतान कही का ,,,अभी आये हुए तुझे कुछ मिंट भी नही हुए और तु शुरु हो गया ।

मै हस कर उनकी कमर पर हाथ घुमाते हुए - ये कौन है बुआ

शिला - ये हमारे घर की खास नौकरानी है , मीना

मै बुआ की आंखो मे देखते हुए - खास नौकरानी मतलब हिहिहिही

शिला हस कर - चल अब ज्यादा दिमाग ना लगा ,,और फ्रेश हो ले । मै खाना लगाती हू ।

फिर बुआ ने मुझे एक कमरे मे ले गयी ।

उस कमरे की हालत बहुत खराब थी ।

यहा वहा कपडे बिखरे बड़े एक टेबल पर कम्पयूटर था लेकिन वहा भी सब कुछ तीतर बितिर था ।

मैने बेड पर अपना बैग रखा और थोडा असहज होकर बैठ गया ।

बुआ समझ गयी कि मुझे ये कमरा कुछ खास पसंद नही आया था ।

शिला मुस्कुरा कर - अरे ये कमरा अरुण का है ,, वो ऐसे ही अपने सामान इधर उधर कर देता है ।

शिला - तु हा बाथरूम मे फ्रेश हो ले और मै मीना को बोल कर ये सब सही करवा दे रही हू ।

फिर मैने अपनी बैग से अंडरवियर लिया और अपने कप्डे उतारे और नहाने के लिए कमरे के ही बाथरूम मे चला गया ।

गुनगुने पानी से नहाकर मै तौलिया लपेट कर बाहर आया तो देखा वो कामवाली मीना राहुल के समान सही कर रही थी और बकबकाये जा रही थी ।

मीना कुछ किताबो को एक डिब्बमे रखते हुए- ये अरुण बाबू का ना आदत एकदम खराब है , अरे ऐसी किताबे कोई घर मे रखता है । वो तो शूकर है कि इनका कमरा मै साफ करती हू नही तो अगर माल्किन लोग देख ले तो शामत आ जाये ।

मीना बड़बड़ा रही थी कि उसकी नजरे मुझ पर गयी ।

और वो बिना पलके झपकाये मेरे खुले सीने को निहारे जा रही थी ।

मै थोडा सा शरमाया और लपक कर अपना टीशर्ट उठा लिया ।

मीना - तो आप ही हो वो बाबू जो माल्किन के मायके से आये हो

मुझे उसकी बोलने के तरीके पर हसी आई

मैं मुस्कुरात हुआ - हा मै राज हू ।

मीना - देखो राज बाबू ये अरुण बाबू के साथ रह रहे हो न तो थोडा इनकी हरकतो को नजरअंदाज करना ।

मै थोदा परेशान होकर- क्यू ! क्या हुआ ?

मीना भड़कती हुई - अरे अब मै क्या बताऊ राज बाबू तुमको , खैर छोडो आप अब आराम कर सकते हो ।

फिर मैने लोवर पहना और वही मीना अरुण के कम्प्यूटर को साफ करने लगी ।

कि अनजाने मे उससे डेस्कटॉप का बटन दब गया और डेस्कटॉप ऑन हो गया ।

डेस्कटॉप स्क्रीन की लाईट मुझे महसूस हुई तो मै उस देखा

तो मीना बड़बड़ा रही थी - हे ददा ये कैसे चालू हो गया । कहा से बंद होगा

मैं उसकी परेशानी भरी बड़बड़ाहट सुन ली और उठकर - क्या हुआ , बंद नही हो रहा है क्या

मेरी आवाज सुनते ही मीना desktop स्क्रीन के सामने खड़ी होकर जैसे उसे छिपाने लगी - न न नही वो मै बंद कर लूंगी

मै उसकी ओर बढकर - अरे रुकिये मै बंद कर देता हू ।

ये बोलकर जैसे ही मै मीना के बगल मे खड़ा हुआ तो सामने देखा डेस्कटॉप मे mute मे एक पोर्न वीडियो चल रहा था और उसने एक औरत एक लडके से चुद रही थी ।

मै समझ गया कि मीना की हडबडी का कारण क्या था

तो मैने लपक कर डेस्कटॉप की स्क्रीन ऑफ कर दी ।

मीना मुझसे नजरे चुरा रही थी और मुझे भी थोडा असहज लग रहा था कि अभी मुझे आये 15 20 मिंट भी नही हुए और क्या क्या हो रहा है ।

मैने मीना के रस भरे जोब्नो पर नजरे गडाये रखा और पल भर मे ही मीना ने मेरी नजरो का लक्ष्य भाप लिया ।

जिससे उसकी सासे तेज हो गयी और वो फौरन कमरे से अरुण के गंदे कपडे लेके बाहर निकल गयी ।

मै अपना लण्ड सेट किया और अपना बैग भी एक जगह रख कर बाहर आ गया ।

फिर बुआ ने मुझे खाना दिया और मै खाना खा रहा था ।इसी दौरान मीना मुझे पानी देने के लिए आई

मै मुस्कुरा कर - तो आप अरुण की यही सब हरकतें नजरअंदाज करने को बोल रही थी ।

मीना ने मेरी ओर देखा और मुस्कुरा कर - हम्म्म

मै मुस्कुरा कर - कोई बात नही ये तो लगभग सभी घरो मे होता है ,, बच्चे ये सब देखते ही रहते है

मीना- ओहो अभी आप समझ नही रहे हो कि बात कितनी बडी है ।

ये बोल कर मीना चली गयी ।

और मुझे एक उलझन मे छोड गयी कि आखिर ऐसा क्या करता है अरुण कि वो मीना को अजीब लगता है ।

फिर मै बुआ के पास चला गया और उनके कमरे मे देखा तो कमरा बड़ा ही आलिशान था ।

काफी बड़ा बेड था जिसमे 4 से 5 लोग आसानी से सो सकते थे और गद्दा भी बहुत मुलायम था ।

फिर मै बुआ से बाकी के लोगो के बारे मे बात करने लगा ।

तो पता चला कि कम्मो बुआ और अरुण अभी 2 बजे तक आयेंगे और दोनो फूफा लोग शाम तक आयेंगे क्योकि वो लोग स्कूल मे देर तक रुकते है ।

इधर मै घड़ी देखी और बुआ के गुजारिश की तब तक क्यू ना हम लोग एक राउंड कर ले तो बुआ ने उसके लिए मना नही किया और हमलोग कमरे का दरवाजा बन्द करके शुरु हो गये ।



लेखक की जुबानी


CHAMANPURA

बीती रात अपने बेटे राहुल की बेचैनी देखने बाद आज शालिनी ने उसे तंग करने का नया तरीका निकाला ।

सुबह की चर्या के बाद वो अपने बेटी के कमरे मे गयी और उसने निशा की आलमारी से उसका एक लाईट ट्रांसपैरंस प्लाजो निकाला । फिर इठलाती हुई अपने कमरे मे चली गयी ।

करीब 9 बजे तक राहुल नहा धोकर नास्ते के लिए किचन की ओर गया और जैसे उसने सामने देखा उसकी धडकनें तेज हो गयी ।

उसका मुरझाया चेहरा खिल उठा और लण्ड पल भर मे ही लोवर को भेदने के फड़फडाने लगा ।





क्योकि सामने किचन ने शालिनी निशा की वही पारदर्शी प्लाजो पहने हुए झुक कर फ्रिज से कुछ निकाल रही थी और उसमे से उसके गुदाज फ़ैले हुए चुतडो पर कसी हुई उसकी पैटी साफ झलक रही थी ।

राहुल ने अपना सुपाडा खुजाया और सीधा अपनी मा के पीछे खड़ा हो गया ।

राहुल- क्या बना रही हो मम्मी

शालिनी - बस नासता हो रहा है , तु बता नहा लिया

राहुल - हा मम्मी , हिहिहिही

शालिनी - तो हस क्यू रहा है ,,बैठ मै नास्ता लगा रही हू

राहुल सीधा मुद्दे पे आता हुआ - वो मुझे कल रात के लिए हसी आ रही थी ।

शालिनी मुस्कुरा कर - क्यू उसमे हसने जैसा क्या था ?

राहुल - आप तो कह रही थी कि पापा बड़े शरारती है हिहिहिही





"ये तो कोई भी कर सकता है इसमे कैसी शरारत " , राहुल ने अपने हाथ आगे बढा कर शालिनी के गुदाज गाड़ को हाथ से छुते हुए कहा ।

शालिनी को जैसे ही अपने बेटे के हाथ अपने चुतडो पर मह्सूस हुए उसने अपने गाड़ सख्त कर लिये और कापने लगी ।

" अच्छा तो तेरे हिसाब से शरारत कैसे करते है ", शालिनी ने खुद की सासो को काबू मे करते हुए आगे बढ कर सिंक मे पड़े बरतन खंगालने लगी ।

राहुल हस - हिहिहिही , नही आप गुस्सा करोगे ।

शालिनी तो चाह ही रही थी कि राहुल आगे बढे इसिलिए वो राहुल को मौका देते हुए ।

शालिनी - मान ले तु तेरे पापा की जगह होता तो क्या करता । उम्म्म बोल ।

राहुल के कानो मे जैसे ही वो शब्द पड़े उसका लण्ड ठुमका और दिमाग मे एक पल को अपनी मा को बहुत ही बेरहमी से चोदने के ख्याल आया और फिर वो अपना लण्ड मसलता हुआ ।

राहुल खिखी करता हुआ अपनी मा के पास निचे बैठ गया ।

"अगर मै पापा की जगह होता तो ऐसा करता हिहिहिही ", राहुल ने अपनी के कूल्हो से उसका प्लाजो खिच कर उसके चुतडो को नंगी करते हुए बोला ।





शालिनी चौकी और चिहुकी - हेईई पागल कही का

फिर अपने भिगे हाथो से ही अपने प्लाजो को खिच के अपनी गाड़ पर चढा लिया ।





राहुल निचे बैठा हसे जा रहा था मगर दिल ही दिल मे अपनी मा की नंगी गोरी चिकनी गाड़ को चूमने का अरमाँ अधूरा रह गया था ।

शालिनी अपने हाथ पोछते हुए -चल उठ और ले नास्ता कर । मुझे लगा तु ... और तुने तो मुझे ही

राहुल अपनी मा के हाथ से नास्ते का प्लेट लेता हुआ - हिहिहिही आपने ही पूछा था ना तो हिहिहिही

शालिनी उसके चहकते चेहरे पर खुश थी और शर्मा के काम करने लगी ।

राहुल ने नाश्ता किया और हाथ पोछ कर किचन से जाने पहले अपनी मा के चुतडो पर चट्ट से मारता हुआ - हिहिहिही अगर मै पापा की जगह होता तो ऐसा हमेशा करता

इतना बोलकर राहुल दुकान मे चला गया और शालिनी अपने चुतडो को सहलाते हुए हसने लगी ।

JAANIPUR

सुबह के 10 बज रहे थे और कमलनाथ नासता करके हाल मे खड़ा रीना के निचे आने का इन्तजार कर रहा था ।

घर के बाहर खड़ा ई-रिक्से वाला हार्न पर हार्न दिये जा रहा था ।

कुछ ही पलो मे रीना तेजी से उतरते हुए सीढ़ीओ से निचे आने लगी ।

उस्के मोटे हिल वाली सैन्ड्ल की कट कट से कमलनाथ का ध्यान अपनी बहू की ओर गया और उसकी निगाहे रिना के ब्लाउज ने उछलते चुचो पर अटक गयी ।

रीना सीढियो से निचे आगयी थी और उसकी तेज सासो से अभी भी उसकी चुचिया फूल रही थी और कमलनाथ की निगाहे अभी भी वही अटकी थी ।

रीना थोडा असहज हुई और हस कर - चलिये पापा जी ,

कमलनाथ - हा चलो

फिर रीना अपने सर पर पल्लू करके आगे आगे चल पड़ी और कमलनाथ पीछे से साडी मे थिरकते उसके जबरदस्त कूल्हो को देख कर अपना लण्ड सेट किया और वो भी घर से बाहर निकल गया ।

दोनो ई-रिक्से से बड़े बाज़ार की ओर निकल पड़े ।

रास्ते मे उन्होने तय किया कि पहले साड़ियो की शॉपिंग हो जाये फिर छोटे मोटे आईटेम खरीदने जायेंगे ।

फिर वो शो रूम पर गये और रीना ने टोटल 4 साड़िया पसंद की । एक सोनल और एक उसकी मा रागिनी के लिए , एक अपनी सास रज्जो और एक खुद के लिए ।

साड़ियो की खरिदारि के दौरान रीना की निगाहे शो मे खड़े एक पुतले पर जमी रही थी । जिसे दुकानदार ने बहुत ही खुबसूरत चन्देरी प्रिंट मे क्राप-टॉप लहन्गा पहना रखा था ।

कमलनाथ जिसकी निगाहे रीना पर ही जमी थी उसने भी ये नोटिस किया और समझ गया कि उसकी बहू उससे कहने मे हिचक मह्सूस कर रही है ।

कमलनाथ दुकानदार से - भाईसाहब वो ड्रेस कितने की है, जरा उस मॉडल मे कुछ दिखाईये

रीना ने फैली हुई आंखो से कमलनाथ को मुस्कुरा कर देखा - पापा जी वो बहुत महगा है ,

कमलनाथ - तुझे पसन्द है ना

रीना शर्म से नजरे झुका कर धीमी आवाज मे - हम्म्म , लेकिन मा जी गुस्सा करेंगी । मत लिजिए खर्चा वैसे ही ज्यादा है

कमलनाथ धीरे से रीना के पास होकर - अरे तु रमन की मा को छोड़ उसको कैसे मनाना है मुझे पता है ।

कमलनाथ की बात पर रीना मुह पर हाथ रख कर शर्माते हुए हस दी ।

इसपर कमलनाथ सफाई देने लगा - ओह मेरा वो मतलब भी नही था । तु बहुत शैतान है हिहिहिही

रीना हस्ती हुई - मै तो उस बारे मे कुछ सोचा ही नही हिहिहीही आप ही याद दिला रहे हो

कमलनाथ खुद को शान्त करता हुआ - अच्छा ठिक है तो ये ही कलर लेना है या कोई और

रीना भी खुद को सजग करती हुई - ह्म्म्ं यही रहेगा ।

फिर कमलनाथ सारी पैकिंग करवा कर बिल देता है और सामान लेके दुसरी दुकान के लिए निकल जाते हैं ।

अगला स्टाप था बरतन वाला

वहा भी एक घन्टे बिताने के बाद फाइनली वो सब सृंगार वाले दुकान पर गये ।

चुकि दुकान पर महिलाए ज्यादा थी तो

कमलनाथ एक ओर कुर्सी लेके बैठ गया और रीना समान निकलवाने लगी ।

करीब आधे घन्टे की बोरियत के बाद कमलनाथ के चेहरे पर चमक लण्ड मे कठोरता आई

क्योकि अब दुकान खाली हो चुका था और रीना ब्रा पैंटी देख रही थी ।

कमलनाथ बडी उत्सुकता से अपने चुतड और गरदन उचकाये हुए काउंटर पर फैले हुए लाल नीले मरून गुलाबी रन्गो वाले मुलायम कपडे देख रहा था ।

तभी दुकान पर खड़ी लेडिज ने रीना से पूछा- आपको भी अपने लिये भी चाहिये ।

जैसे ही कमलनाथ के कानो ने वो शब्द पड़े वो चहका और लण्ड मे गुदगुदी हुई

रीना ने कनअखियो से अपने ससुर को देखा और हा मे सर हिलाने लगी ।

तभी उस दुकान वाली लडकी ने रीना से उस्का साइज़ पूछा । तो रीना ने दबी हुई आवाज मे बोला 34D

आवाज इतनी धीमी थी कि उस लड़की ने सही सुना नही तो उसने कन्फर्म करने के लिए थोडा साफ लहजे मे सामान्य होकर पुछा- 34 B या 34D

जिसे कमलनाथ बड़े ध्यान से सुन रहा था और रीना ने बडी हिचक के साथ बोला - B नही D

फिर वो शर्माते हुए अपनी गरदन घुमा कर अपने ससुर की ओर देखा कि कही उन्होंने सुना तो नही ।

फिर वो अपने लिये ब्रा लेने लगी और तभी उसे रज्जो के बारे मे भी ख्याल आया कि उसके लिए भी तो ब्रा पैंटी लेनी है दो जोडी ।

अब असमन्जस कि स्थिति ये थी कि कल उसने अपनी सास से उसका साइज़ पुछा नही और आज वो अपना फोन लेके आई नही थी ।

बड़ी बेबसी से उसने मजबुर होकर कमलनाथ की ओर देखा और अपनी ओर आने का आंखो से इशारा किया ।

कमलनाथ खड़ा होकर रीना के पास आया - हो गया क्या ?

रीना कमलनाथ की ओर झुककर धीमी आवाज मे - वो मा जी के लिए अन्दर के कपडे लेने है । उनका साइज़ क्या था मै पुछना भुल गयी ।

"अरे मुझे पता है ना ", कमलनाथ थोडी तेज आवाज मे चहक कर बोला और फिर अपनी स्थिति को समझकर धीमा हो गया ।

रीना मुह पर हाथ रख कर हसने लगी।

कमलनाथ धिमी आवाज मे मुस्कुरात हुआ - मतलब मुझे पता है , क्या क्या लेना है

रीना मुस्कुरा कर - दोनो लेना दो जोडी

कमलनाथ थोडा खुद को शान्त रखता हुआ - 42DD की वो लेलो और 44 की निचे वाली ।

इतना बोल कर कमलनाथ सीधा खड़ा हो गया और काउंटर पर रखी रीना की दो जोडी ब्रा पैंटी के कलर और डिज़ाइन देखने लगा ।

रीना को जैसे अह्सास हुआ उसे बडी शर्मिंदगी होने लगी

रीना - ठिक है पापा जी आप बैठीये अब

कमलनाथ की निगाहे उस लड़की के हाथो पर जमी थी जो रज्जो के साइज़ की ब्रा पैंटी के बॉक्स उठा कर ला रही थी ।

कमलनाथ उसी ओर इशारा करके - वो जरा कलर देखना था ।

इत्ना बोलकर कमलनाथ मुस्कुरा दिया और रीना भी होठो मे हस्ती रही ।

फिर उस लड्की ने कुछ ब्रा पैंटी के डिज़ाइन दिखाये तो उसमे से कमलनाथ ने दो जोडी सामान्य रेगुलर यूज़ वाले ब्रा पैंटी लिये और एक सेट रेड कलर मे बढिया लैस वाली सेट मे ब्रा पैंटी ली ।

रीना अपने ससुर की चोईस की दाज देते हुए मन मे सोचती है- ऐसे ऐसे सेक्सी कपडे जब मम्मी पहनेगी तो 4 क्या 8 बार कोई भी ...हिहिहिही

कमलनाथ - बस हो गया , बेटा इसका हिसाब बना दो

तभी रीना टोकते हुए - अरे नही , अभी एक और चीज़ चाहिये

कमलनाथ - अब क्या बाकी है बहू

रीना मुस्कुरा कर शरमाती हुई - एक हैयर रेमोवर लेना है

कमलनाथ उसकी बात पर रीना का चेहरा बड़े गौर से देखता है तो रीना तुरंत सफाई देते हुए - वो मा जी को चाहिये था तो

कमलनाथ - अच्छा ठिक है लेलो और कुछ बाकी नही है ना अब क्योकि बहुत लेट हो गया है

रीना - बस पापाजि हो गया , पैसे देके घर ही चलना है अब

फिर वहा का भी हिसाब किताब करके दोनो घर के लिए निकल गये ।

चुकि ई-रिक्से मे आगे की तरफ समान रखा हुआ था तो इस बार दोनो ससुर बहू एक ही सीट पर सट कर बैठे हुए थे ।

और कमलनाथ के जहन मे अभी भी एक बात घूम रही थी कि जब रीना का साइज़ 34C था तो वो 34D की ब्रा क्यू ली ।

कमलनाथ जान रहा था शायद घर जाने पर ये मौका ना मिले तो

कमलनाथ धीमी आवाज मे - अच्छा बहू तुमने तो कल पर्ची मे अपना साइज़ 34C लिखवाया था ना तो फिर आज D क्यू

रीना की चौकी कि उसका ससुर ऐसे क्यू पुछ रहा था ।

हालाकी ये सवाल उसे जमा नही लेकिन वो जवाब देने के लिए बेबस मह्सूस कर रही थी ।

रिना हिचक कर - पापा जी वो मैने सोनल बहिनी के लिए साइज़ लिखवाये थे ना क्योकि अभी उनकी शादी नही हुई है ना

कमलनाथ थोडा हस कर - अच्छा तो तुमने भी शादी के पहले का साइज़ लिखा था समझ गया समझ गया ।

कमलनाथ के इस जवाब पर रीना शर्म से पानी पानी हो गयी और एकदम से चुप हो गयी ।

थोडे ही पल मे उसे अपनी गलती का अहसास हुआ कि वो अनजाने मे क्या बोल गया ।

कमलनाथ मन मे - हे भगवान ये क्या हो गया मुझसे ,, बहु तो यही सोच रही होगी कि मै उसके चुचो को बहुत ध्यान से देखता हू और रोज वो कितना मिज्वाती है ये सब भी मै सोच रहा होउँगा ।

कमलनाथ - ओह्ह सॉरी बेटा मेरा वो मतलब नही था , मै तो बस थोडा उलझा हुआ था

रीना मुस्कुरा कर - कोई बात नही पापा जी । बस आपको ये सब घर पर जाकर पूछ लेना चाहिए था यहा कोई भी सुन सकता है हमारी बाते

कमलनाथ अटकता हुआ - हा बहू तुम सही कह रही हो ,,माफ करना ।

रीना मुस्कुरा कर - कोई बात नही ,

थोडी ही देर बाद दोनो घर पहुच गये ।

हाल मे रज्जो बैठी कुछ अनाज का काम कर रही थी ।

किचन से हल्के फुल्के खाने की खुस्बु आ रही थी ।

रीना - अरे मा जी आपकी तबियत नही ठिक थी तो आप क्यू खाना बना रही थी

रज्जो - ओहो तु भई अम्मा ना बन मेरी ,,, जा फ्रेश हो ले और खाना लगा

रीना हस कर - क्या मा जी आप भी ना

इधर रीना उपर कमरे मे चली गयी और कमलनाथ वही हाल मे झोला खोलकर रज्जो को समान दिखाने लगा ।

कमलनाथ - जानू ये लो मैने खास तुम्हारे लिए ये पसंद किये है ।

रज्जो अपने हाथो मे वो लैस वाली ब्रा को फैला कर देखने लगी ।





कमलनाथ ने हाथ बढा कर मैकसी के उपर से रज्जो के चुचे मसलता हुआ - जान ये नरम नरम दूध जब इसमे कसेन्गे ना तो बहुत मस्त दिखेंन्गे ।

रज्जो इतरा कर - क्या फायदा इसको भी निकाल दोगे आप हिहिहिही

कमलनाथ सरक कर रज्जो के पास आता है और उस को पीछे से पकड कर उसके चुचे मलने को जाता है कि उसकी नजरे सीढि से नीचे आती रीना से टकरा जाती है और दोनो शरम से नजरे चुरा लेते है ।

रीना मुस्कुराती हुई किचन मे चली जाती है और कमलनाथ रज्जो ने थोडा दुर होकर बाते करने लगता है ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 164



लेखक की जुबानी



CHAMANPURA

सुबह की मस्ती के बाद से ही राहुल कई बार दुकान से घर के अन्दर चक्कर लगा चुका था और हर बार मौका देख कर वो अपनी मा चुतडो को मसलने और उसको अपने पंजो मे जरुर कस लेता था ।

इसी दौरान उसने नोटिस किया कि दोपहर के खाने के लिए जब उसके पापा अन्दर गये तो काफी देर से वापस आये और उसके बाद वो भी दो बार और घर गये ।

वो समझ गया कि आज शालिनी ने उसके बाप के भी अरमानो को जगा रखा है और वो बेकाबू होकर घर मे जा रहे है ।

तो ऐसे मे राहुल के दिमाग मे आया कि क्यू ना थोडा मम्मी पापा की मस्ती भी देखी जाए

फिर राहुल अपने पापा के अगली बार घर मे जाने का इन्तजार करने लगता है और करिब 3 बजे के आस पास जब दुकान पर कोई ग्राहक नही होते है तो जंगीलाल उठ कर घर मे चला जाता है ।

अपने पापा को अन्दर जाते देख कर ही राहुल का लंड उछल पडा और वो अपने लोवर मे लण्ड को सेट करते हुए दो चार मिंट इन्तजार किया और वो भी दबे पांव अन्दर गया ।

दुकान के गलियारे से होकर जैसे ही वो हाल के मुहाने पर पहूचा तो सामने का नजारा देखकर उसके सासे थम सी गयी ।

उसने अपने लोवर मे तने लण्ड को निचे की ओर दबाते हुए एक गहरी आह भरी और सुपाड़े को मसलते हुए उसकी कुलबुलाहट कम करने लगा ।





सामने का नजारा बहुत ही कामुक और शानदार था

घुटने के बल बैठी शालिनी के हाथ मे उसके पति जंगीलाल का मोटा मुसल आड़ो सहित था । जिसको बड़े चाव से मुह मे लेके चुबला रही थी ।

राहुल पहली बार अपनी मा के इस रूप को देख रहा था । वो इस बात से भलीभांति परिचित था कि उसकी मा बहुत गरम महिला है लेकिन आज से पहले उसकी मा उसको इस कदर उसको बेताब नही किया था ।

शालिनी पुरा का पुरा लंड गले तक उतार ले रही थी और वो देख कर राहुल अपने बाप की जगह खुद को रखना चाह रहा था ।

एक ओर उसे अपनी मा की कामुक अदाये उसके लण्ड मे कसावट भर रही थी और वही दुसरी ओर वो दुकान पर भी जाने के लिए बेचैन था कि कही कोई ग्राहक आवाज ना देदे ।





डर के साथ कामुक मस्ती भरे अनुभव थे राहुल के इसिलिए वो कभी हाल मे तो कभी दुकान की ओर देख रहा था ।

इसी दौरान शालिनी की नजर गलियारे के मुहाने पर अन्धेरे मे छिपे साये पर पडी और वो सुपाड़े को मुह मे लिये हुए ही अपनी नजरे गलियारे पर जमाए रखी कि राहुल ने वापस से अपनी गरदन फेक कर हाल मे झाका और उसकी नजरे उसकी मा से टकरा गयी ।

एक पल को दोनो मा बेटे ठठक कर रह गये और उसकी सासे अटक सी गयी ।





शालिनी क्रियाहीन होकर थम सी गयी और लण्ड उसके होठो के पास रुक गया।

अगले ही पल उसने नजरे उठा कर जन्गीलाल के बंद चेहरे को देखा और लण्ड को वाप्स मुह मे भरते हुए राहुल को आंखे ब्ड़ी करके इशारे मे डांट लगाई और दुकान मे जाने को कहा





अपनी मा से ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नही थी राहुल को और उसके चेहरे पर मुस्कान फैल गयी ।

राहुल ने मुस्कुरा कर वापस से दुकान की ओर एक नजर देखा और फिर हाल मे देखा तो उसकी मा अब और भी कामुकता से उसके बाप के लण्ड को मुह मे लेके घोंट रही थी ।

जल्द ही उसने जन्गीलाल के नसो की फड़फड़ाहट मह्सूस की और उसने अपने दोनो हाथो ला प्रयोग करना शुरु कर दिया और अपनी जीभ को बाहर निकालते हुए सुपाड़े को उसपे रख दिया ।





कुछ ही देर मे राहुल को उसके बाप की सिसकिया भरी आह आई और लण्ड से मोटी रबड़ी जैसी पिचकारी उसके मा के मुह मे जाने लगी ।

राहुल समझ गया कि अब य्हा नही रुकना ठिक है और वो अपने लण्ड को सेट करता हुआ बाहर आ गया ।

लेकिन उसका लण्ड शान्त नही हो पा रहा था ।

थोडी ही देर बाद जन्गीलाल दुकान मे आ गया और फिर कुछ ग्राहक आने की वजह से राहुल भी दुकान मे फसा रह गया

शाम को करीब 6 बजे नास्ते के लिए शालिनी ने राहुल को आवाज दी तो जन्गिलाल ने उसे घर में जाने को बोला ।

राहुल का मन प्रफुल्लित हो गया और वो अपने ज्ज्बातो के साथ अपने लोवर मे बने त्म्बू को छिपाते हुए घर के अंदर जाने लगा

उधर किचन मे खड़ी शालिनी भी थोडी बेचैन हो रही थी कि उस घटना के बाद वो राहुल के सामने कैसे बात करेगी और उसे ये भी यकीन था कि राहुल उस बात का फायदा जरुर लेगा

शालिनी गरम गरम कचौरीया पलेट मे लगा रही थी और जैसे ही उसने राहुल की आहट किचन के दरवाजे पर पाई ।

वो खुद को सामान्य रखते बिना कोई खास प्रतिक्रिया के ऐसा जताया कि कुछ हुआ ही नही और नास्ते का प्लेट उसके हाथो मे देते हुए - जा ये अपने पापा को देके आ जल्दी

राहुल जो इस उम्मीद मे मुस्कुराते हुए किचन मे घुसा था कि वो अपनी मा से मस्ती भरे पल का लुप्त लेगा लेकिन यहा तो उसकी मा ने कुछ रियेक्ट ही नहीं किया ।

राहुल का उछलता दिल अपने मा के चेहरे के भाव देख कर पल भर मे ही शान्त हो गया और वो चुप चाप नाश्ते का प्लेट लेके दुकान मे जाने लगा ।

इधर शालिनी ने अपने बेटे के चेहरे की बदले हुए भाव देख कर मन में खुश खिलखिला रही थी और राहुल के लिए भी नाश्ते का प्लेट लगाने लगी ।

अब तक राहुल वापस किचन मे आ गया था और उसकी नजरे अब भी अपनी मा के चुतडो पर कसी उस पारदर्शी प्लाजो मे अटकी हुई थी जिसमे से उसकी पैंटी झाक रही थी ।

शालिनी ने नाश्ते का प्लेट लेके उसकी ओर घूमी तो राहुल की निगाहे सीधा उसकी मा के तने हुए चुचो पर गयी जो टीशर्ट फाड़ कर बाहर आना चाह रहे थे और तभी उसकी नजर अपनी मा के टीशर्ट के पडे एक हल्के सफेद छींटे जैसे दाग पर गयी और वो समझ गया कि ये उसके बाप के वीर्य के छींटे है जो झड़ते समय आ गये होगे ।

वो देखते ही राहुल के चेहरे पर मुस्कान आ गयी और शालिनी ने जब उसकी नजर का पीछा किया और उस दाग पर उसका ध्यान गया तो वो भी समझ गयी औद उसकी हसी छुट गयी ।

शालिनी हस कर उसे नाश्ते का प्लेट देते हुए - अब क्या देख रहा है सारा पहले ही तू देख चुका है ,,ले नाश्ता कर

राहुल के कानो मे जैसे ही अपनी मा के खिलखिलाती आवाज आई उसके सारे बुझे हुए अरमान फिर से चहक उठे । लण्ड ने एक नयी अन्गडाई लेली और दिल की शान्त धडकनें फिर से अपनी धुन पर फुदकने लगी ।

राहुल ने एक नजर अपनी मा की आंखो मे देखा और कचौरी को अपनी दान्तो से नोचते हुए हसने लगा ।

राहुल ने आंखो ही आंखो मे अपनी मा को वो सिन याद दिलाया दिया जब वो उसके बाप का लण्ड घोट रही थी ।

शालिनी हस कर शर्माते हुए - अभी पिटूंगी तुझे शान्ति से नासता कर ,,,, हा नही तो

राहुल कचौरिया खाता हुआ अप्ने लण्ड को भी भीच रहा था

और उसकी नजरे अभी भी अपनी मा के पैंटी को निहार रही थी ।

शालिनी किचन साफ करते हुए बिना राहुल की ओर देखे बोली - तुझे शर्म नही आ रही थी जो छिप कर देख रहा था हमे उम्म्ं बोल

राहुल हस कर - रात मे आप देखने ही कहा देते हो हिहिहिही

शालिनी मुस्कुरा कर उसकी ओर आंखो बडी करके देखा - तो तु चाहता है कि अब तेरे पापा की शरारते भी कमरा खोल कर दिखाऊ उम्म्ंम

राहुल चहक कर उठा और पीछे से अपनी मा को पकडते हुए - हा प्लीज ना मम्मी ,, प्लीज प्लीज प्लीज मै कुछ नही बोलूंगा बस चुप चाप देखूँगा ।

राहुल जिस तरह से शालिनी को पेट के पास पकड़ा हुआ था पीछे से उस्का लण्ड गाड़ मे चुभ रहा था और उसे गुदगुदी सी लग रही थी - हिहिहिहिही अरे छोड पहले मुझे ... छोड अभी के अभी

राहुल अपनी मा से अलग हो गया

शालिनी हस्ते हुए - बड़ा आया देखने वाला , चुपचाप नासता कर और दुकान मे जा

राहुल अब तक अपना नासता खतम कर चुका था और वो प्लेट को सिंक मे रखते हुए अपने धुल रहा था ।

शालिनी के हसी भरे जवाब पर - तो आप नही दिखाओगी उम्म्ं

शालिनी मुस्कुरा कर इतराते हुए ना मे सर हिलाया ।

राहुल थोडा रुखे स्वर मे - पक्का मम्मी नही दिखाओगे

शालिनी - हा तो

राहुल चहका और लपक कर वापस से उसने अपनी मा के प्लाजो को निचे जांघो तक खीचा और उसके नरम नरम गोरे मखमाली गाड़ पर एक चुम्मा करके खिलखिला हुआ दुकान मे भाग गया ।

शालिनी हस कर अपनी प्लाजो उपर खिचती हुई - बहुत मजा आ रहा है ना इसे ,,आज रात मे इसको मजा दिखाती हू । मै भी इसको परेशान नही किया ना तो देखना हिहिहिही



राज की जुबानी


शिला बुआ की दो राउंड गाड़ और चुत मारने के बाद मै वही उनके कमरे मे ही सो गया था ।

करीब ढाई बजे कमरे के बाहर शोरगुल होने से मेरी आंखे खुली और मै बाहर आया तो देखा कि कम्मो बुआ अरुण को डांट लगा रही है ।

शिला - रहने दे कम्मो लड़का है अभी

कम्मो नाराज होते हुए - नही दीदी अब बस बहुत हो गया अब और मै इसकी शरारते नही झेल सकती हूँ ।

कम्मो - मैने दिल्ली मे बात कर ली है और इसको मै बोर्डिंग कालेज मे भेज रही हूँ ।

अरुण रुआसा वही हाल के एक कुर्सी पर बैठा हुआ था । मै शिला बुआ मे पास खड़ी मीना को इशारे मे पुछा कि बात क्या है । तो वो मुझे चुप रहने का इशारा करने लगी ।

मैने भी शान्त रहना ठिक समझा ।

अभी तक कम्मो बुआ और अरुण को मेरे आने की खबर नही थी ।

लेकिन जैसे ही कम्मो बुआ ने मीना को इशारा करते देखा तो उनका ध्यान मेरी ओर गया ।

मै उनको देख कर मुस्कुराया और उन्के पास आ कर उन्के पैर छूते हुए - नमस्ते बुआ

कम्मो बुआ ने जैसे ही मुझे देखा वो सब भुल कर हस्ते हुए मुझे पकड कर मेरे गाल छुते हुए - खुश रह बेटा, तु कब आया

फिर मै बुआ को सोनल की शादी को लेके सब बताया और इस दौरान वो बहुत खुश होकर बाते कर रही थी ।

तो अरुण ने जैसे मौका ही पा लिया और उठ कर मेरे पास आया और मुझ्से लिपट गया - देखो ना भैया सब मुझे बोर्डिंग मे भेज रहे , आप बोलो ना मम्मी को

मै हस कर उसको अलग करता हुआ - अब तु इतनी शरारती है तो कोई भी क्या करेगा उम्म्ंम बोल

मै कम्मो बुआ को देखता हुआ - वैसे बुआ इसने किया क्या था ?

मेरे सवाल से क्म्मो बुआ के साथ साथ अरुण , शिला बुआ और मीना के भी चेहरे के भाव बदल गये ।

कम्मो हड़बड़ाती हुई - क क कुछ नही बेटा जाने दे ।

कम्मो अरुण से - तु जा कमरे मे कपडे बदल खाना नही खाना तुझे

अरुण चुपचाप निकल गया और कम्मो बुआ मुझसे घर और शादी की बाते करने लगी ।

मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था कि आखिर क्या बात है जो अरुण के बारे सब छिपा रहे हैं ।

मै तय किया कि ये बात अरुण से ही पता चलेगी ।

लम्बी बात चित मे कब शाम हो गयी पता ही नही चला और फिर इसी दौरान दोनो फूफा भी घर आ गये ।

मै उनसे भी मिला और फिर शाम का नासता करने बाद अरुण के साथ छत पर टहलने के उपर चला गया ।

थोडी देर तक मै उपर से टाउन का नजारा देखता रहा और अरुण से थोडी बाते की उसके टाउन और कालेज की ।

मेरे जहन मे अरुण के बारे जानने की जिज्ञासा बढ़ी हुई थी तो मैने ऐसे ही बातो ही बातो मे उससे पुछ लिया

मै - वैसे तुने आज क्या शरारत की थी क्लास मे हम्म्म

अरुण चुप हो गया और जब मैने फिर से पुछा - अगर तु मुझे बतायेगा तो मै बुआ को मना लूंगा और तुझे बोर्डिंग नही जाना पड़ेगा

मेरी बात सुन कर अरुण के चेहरे के भावो मे हलचल सी हुई और वो हिचकता हुआ - वो भैया मै क्लास मे मोबाइल चला रहा था तो टीचर ने पकड लिया था ।

मैने थोडा विचार किया और सोचा कि अगर बात सिर्फ इतनी थी तो कम्मो बुआ को इसके उपर ऐसे नही भड़कना चाहिये था ,,,साफ था कि अरुण झूठ बोल रहा था ।

मै उसको बिना कोई सफाई का मौका देते हुए तुरंत बोला - और मोबाईल मे तु क्या देख रहा था उम्म्ंम

अरुण की नजरे नीची थी और वो वैसे ही दबी आवाज मे - वो मै गेम खेल रहा था भैया

मै अब उसपर दबाव बनाते हुए - झूठ बोल रहा है तु , देख सच सच बता मुझे और मैने देखा है तेरे कम्पुटर पर कैसी गेम खेल रहा है आजकल तु

मेरी बाते सुन कर अरुण की हालत खराब हो गयी और वो गिडगिडाता हुआ - प्लीज प्लीज भैया मम्मी को मत बोलना प्लीज

मै भौहे सिकोड़ते हुए - तो बता क्या देख रहा था तु

अरुण हिचकते हुए - वो मै और मेरा दोस्त वो वाली वीडियो देख रहे थे और मेरे दोस्त ने अचानक मे मस्ती मे मोबाईल की आवाज बढा दी और हम पकड़े गये ।

मै उसे फटकारता हुआ - तो यही सब देखने जाता है स्कूल ,

अरुण - सॉरी ना भैया , प्लीज मम्मी से बात करो ना आप

मै - हमम ठिक है लेकिन पहले तु अपना मोबाइल मुझे दे मै उसमे से वो सब वीडियो डिलीट कर दू फिर

अरुण उदास होकर - भैया वो मोबाइल मम्मी ने ले लिया है ।

मै - हमम ठिक है

वो तो मै ले लूंगा लेकिन तुझे अपनी आदत सुधारनी पड़ेगी ।

अरुण मुस्कुराता हुआ - हमम ठिक है भैया ।

फिर मै और वो निचे चले गये ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 165 ( ा )


अरुण से बात चीत के बाद मै नीचे चला आया ।

देखा किचन मे शिला बुआ और मीना रात के खाने की तैयारी कर रही थी ।

और कोई हाल मे दिखा ही नही । अरुण अपने कमरे मे जा चुका था ।

मै किचन मे चला गया

मै बुआ के पास खड़ा होकर मीना की चिकनी कमर और उभरी हुई गाड़ की गोलाई पर नजर मारते हुए - बुआ ये छोटी बुआ कहा गयी ।

शिला - अरे बेटा वो उपर अपने कमरे मे होगी ।

" ठीक है तो मै उपर ही जा रहा हू " , ये बोल कर मै जैसे किचन से बाहर निकलने को हुआ कि शिला बुआ ने मुझे टोका

शिला - अह बेटा तु परेशान ना हो , मै मीना को भेज कर बुला देती हू ।

मुझे थोडा अजीब लगा लेकिन मैने कुछ कहा नही वही डायनिंग चेयर पर बैठ गया ।

और मीना अपने चुतड मटकाते हुए उपर चली गयी ।

उसके जाते ही मै बुआ के पास वापस खड़ा होकर धीमी आवाज मे - बुआ आपको अरुण के आज की शरारत के बारे मे पता है ?

फिर मैने अरुण से हुई बात चीत के बारे मे बताया ।

शिला उखड़ कर - हा सब जान रही हू और अभी उसकी ये सब करने की उम्र नही है ।

मै - तो आपको उसे समझाना चाहिए ना बुआ , छोटी बुआ ना सही आप समझाओ ना ।

शिला बुआ - ओह्ह कैसी बाते कर रहा है , मै उसकी मौसी हू और मै कैसे इनसब पर बाते कर सकती हू ।

मै शरारत भरी मुस्कराहट के साथ बुआ के भारी चुतडो को मसलता हुआ - अच्छा और मेरे साथ सब कर सकती हो उम्म्ंम , जितना हक मेरा है उतना ही हक अरुण का भी है बुआ

शिला ने मुस्कुराहट भरी नजरो से बडे ताज्जुब होकर मुझे देखा और बोली - तो तु चाह रहा है कि मै उसके साथ .....।

मै शरारत भरी मुस्कुराहट से - वो आपकी मर्जी है बुआ लेकिन कम से कम उसकी आदते तो सुधारो । उसकी इच्छा को परखो ।

शिला मुस्कुरा कर - इतनी ही फ़िकर है तो तु खुद क्यू नही कर लेता ये सब

मै बुआ के कन्धे पकड़ कर - बुआ मै कल या परसो मे घर चला जाउन्गा लेकिन आप तो रोज उसके साथ हो ना ।

बुआ मेरे हाथ अपने कन्धे से हटाकर - मुझे सारा पता है वो क्या चाहता है ।

मै चौक कर - वो क्या ?

शिला ने शरारत भरी नजरो से मुस्कुरा कर मुझे देखा - हम्म्म्म तुझे सच मे उसकी फिकर है या बस तू यहा मुझसे बाते उगलवा रहा है उम्म्ं बोल

मै हस कर - वो मै हिहिहिही

मै अपनी बात रखता की तब कम्मो बुआ की आवाज आई ।

कम्मो - हा राज बेटा क्या बात है , तु मुझे बुला रहा था ।

मै पलट कर किचन के दरवाजे के पास देखा तो मेरी आंखे फटी रह गयी । क्योकि अभी तक तो मैने कम्मो बुआ को अच्छे से निहारा ही नही था ।





उफ्फ़ क्या कयामत लग रही थी बुआ एक satin silk की नाइटी मे , देखते ही आंखे उनके जबरदस्त ठोस और नुकीले जोबनो पर अटक गयी ।

कम्मो बुआ के चुचे उनकी हल्की ट्रांसपायरेन्ट नाइटी के निचे बिल्कुल नंगे थे और उसमे उनका जिस्म की सारे उतार चढ़ाव साफ साफ झलक रहे थे ।

" क्या हुआ बोल ना बेटा ", कम्मो अपने हाथ में अरुण का मोबाइल चेक करते हुए बोली ।

मै सकपका कर - वो बुआ मै ये कह रहा था कि आप अरुण को मोबाइल देदो ,,, मैने उसे समझाया है और वो बोला कि अब वो ऐसी हरकत नही करेगा ।

कम्मो - ओफो तो तु भी उसके झांसे मे आ गया ना , तुझे पता भी है वो स्कूल मे क्या हरकते करता है और कैसी कैसी चीजे देखता है ।

मै हिचक कर - अब हा उसने बताया मुझे सब

कम्मो बुआ थोडी झिझ्की और मोबाईल मेरे हाथ मे देते हुए - तो तुझे ये सब गलत नही लगता ,

मै हस कर - क्या हुआ बुआ अभी बड़ा हो रहा है और कालेज वाले लड़को की संगत मे ये सब हो जाता है । आप उसे वक़्त दो वो खुद ही समझ जायेगा कि क्या सही है क्या नही ।

ये बोलकर मै बुआ के गालो को छु कर मुस्कुरा दिया और हाल मे आ गया ।

कम्मो बुआ अभी भी चकित थी औए वो मेरे पीछे आते हुए - देख सुन बेटा,,मुझे नही लगता कि उसने सब तुझे बताया होगा । पक्का तेरे हिसाब से ये कोई बडी बात नही है । मुझे तो बडी चिंता है उसकी ।

मै मुस्कुरा कर कम्मो बुआ के कान मे - ओहो बुआ मैने भी दोस्तो के साथ स्कूल मे ऐसी वीडियो देखी है ।

कम्मो बुआ आंखे बडी करके मुझे देखने लगी जैसे उन्हे कितना बड़ा झटका लगा हो और थुक गटकते हुए - तो क्या तु भी अरुण की तरह मेरे साथ मेरा मतलब अपनी मा के साथ वो सब करना चाहता है ।

मै चौक कर - क्याआ न न नही तो मै क्यू ऐसा ,,,,तो क्या अरुण आपके साथ !!

कम्मो बुआ निराश होकर वही सोफे पर बैठ गयी और मै वही खडे खडे अरुण के मोबाईल मे उसके फ़ोल्डर चेक करने लगा ।

जिसमे मॉम सन के काफी सारी पोर्न वीडियो भरी हुई थी और लास्ट वीडियो जो प्ले हुई थी वो थी MY MOM IS A PORNSTAR .

मैने गैलरी चेक की तो वहा अरुण ने कम्मो बुआ के काफी सारे चोरी छिपे तस्वीरे निकाले हुए थे । एक दो ब्रा भी थी ।

मेरी आंखे फटी की फटी रह गयी और मैने मोबाइल बन्द करके जेब मे रखा और बुआ के पास बैठ कर उन्के जांघो पर हाथ रखते हुए - सॉरी बुआ इतना सब मुझे नही पता था और अरुण ये सब कबसे ।

कम्मो बुआ - यही कोई साल भर से बेटा

इतने मे शिला बुआ भी आकर कम्मो बुआ के बगल मे बैठ गयी ।

शिला बुआ - अब समझा तु कि बात कितनी बडी है ।

मै हुन्कारि भरके उनकी बातो से सहमती जताई ।

मै - अच्छा ठिक है आप लोग परेशान ना हो , मै बात करुंगा उससे

मेरी दोनो बुआ उम्मीद भरी नजरो से मुझे देखती है और कम्मो बुआ मेरे गालो को छू कर मुस्कराते हुए - सच कह रही थी दीदी ,, तु सच मे बहुत होनहार है ।

शिला - होनहार ही नही बहुत शैतान भी है और एक नम्बर का बदमाश भी है ।

मै खिलखिला कर - हिहिहिही वो क्यू

शिला - अच्छा वो क्यू ? जो बाते आज तक तेरे फुफा लोगो को पता नही चली तुने एक ही दिन मे हमसे सब उगलवा लिया ,,,

कम्मो बुआ मुझे अपने सीने से लगाते हुए - आखिर मेरा लाडला भतीजा है ,,क्यू बेटा

मै कम्मो बुआ के मखमली जिस्म की नरम नरम अह्सास से सिहरकर उनको पेट से पकडता हुआ - हा बुआ हिहिहीही



लेखक की जुबानी


CHAMANPURA

पुरा दिन शादी की तैयारियो मे व्यस्त होने बाद शाम को कही दोनो बहने फुर्सत मे हुई थी ।

चुकि आज मेहनत ज्यादा हुई थी तो रागिनी ने निशा को आराम करने को कहा और सोनल और वो खाना बनाने मे लग गये ।

खाली चुलबुली निशा आखिर कब तक इधर-उधर भटकती तो उसने सोचा क्यू ना अमन को ही परेशान किया जाये ।

तो उसने सोनल के मोबाइल मे उसका व्हाट्सअप खोला और अमन को मैसेज भेजना शुरु किया ।

मानो अमन भी सोनल के मैसेज की राह देख रहा था

सोनल ( निशा ) : hyy mere saiyan . Kaise ho 😘

अमन : Bas apni suhaagraat ki taiyari kar raha hu 🤩

सोनल ( निशा) : hmmm etne betaab ho gaye the kya kal 🤭

अमन : aahh jaan pucho mat ... aaj bhi dikha do na

सोनल ( निशा ) : huh 😏 bilkul bhi nahi

अमन : kyu 🥺

सोनल ( निशा ) : mera dekh lete ho apna nahi dikhaate 😌🙈

अमन : 😄 kya dekhna hai meri jaaan ko

अमन : ye





अमन अपने लोवर मे तने हुए लंड की वीडियो बना के भेजता है जिसे देखकर निशा की चुत कुलबुलाने लगती है ।

अमन : kya hua 🤩

सोनल (निशा) : dhtt badmaash sidha wahi thodi na dekhna tha 😌🙈

अमन : ops sorry 😛

सोनल (निशा) : koi baat nahi mujhe bura nahi lga

अमन : toh open karke bheju du 😉

अमन की बात सुन कर निशा की धड़कने तेज हो गयी और वो मैसेज टाइप कर कर के cancel कर दे रही थी । उसको तलब सी हो रही थी कि वो अमन का लण्ड देखे ।

अमन : kya hua baby bolo na . Kaho to video call karu

सोनल(निशा) : nahi nahi nisha hai yahi par 😅

अमन : Lo aise hi dekh lo chupke se 🤩





अमन फिर से अपने लंड का फुल तस्वीर भेजता है जिसमे उसके काले तने हुए लंड की नसे तक साफ साफ दिख रही थी और उसका आलू जैसा लाल सुपाडे की मोटाई को निशा ने अपने चुत के मुहाने पर मह्सूस कर लिया था ।

उसकी चुत बहने लगी थी ।

काफी टाईम तक कोई जवाब ना आने पर

अमन : kya hua baby, tum bhi dikha do n ab thoda sa plzz

निशा क्या करे उसे समझ नही आ रहा था, उसे अमन से ऐसे बाते करने मे बहुत मजा आ रहा था और अमन मैसेज से बार बार उसे चुचे दिखाने के लिए मनाये जा रहा था ।

अमन की बेताबी और उसके मोटे लंड को देखकर निशा की चुचिया भी तन गयी थी । उसके निप्प्ल भी उसकी टीशर्ट को फाड कर बाहर आने को बेताब थे ।

निशा ने एक गहरी आह भरी और अपने जोबनो को मसलते हुए उसने अपने कड़े निप्प्ल वाले चुचे जो उसके टीशर्ट को भेद रहे थे उनकी तस्वीर निकाली और अमन को भेज दी । जिसमे उसका चेहरा नही दिख रहा था ।





चुकि सोनल और निशा की कदकाठी एकदम से एक जैसी ही थी तो अमन को जरा भी शक नही हुआ कि इस तस्वीर मे सोनल की जगह निशा है ।

तस्बीर देखते ही

अमन : 🤤 ummm baby t-shirt bhi uthaao na

अमन की डिमांड सुन कर निशा के चुचे और कड़े होने लगे और चुत रसने लगी ।

निशा अपने चुत की फलकों की उंगलियों से दबाकर एक गहरी सास ली और अपनी टीशर्ट उठा कर अपनी नंगी चुचियो की सेल्फी अमन को भेज दी ।





उधर अमन आंखे फाडे निशा के रसीले चुचो के काले घेरे देख कर सोनल के नाम की मूठ लगा रहा था ।

कुछ मिंट बाद ---

सोनल (निशा) : kya hua achcha nahi hai kya 😥

अमन : ohh baby you are so sexy ummm kya boobs hai tumhaare . Mai to inhe roj chusunga ummm 🤤

सोनल (निशा) : chalo bye mujhe niche jana hai . Nisha bula rahi hai

अमन : Are nisha to tumhare sath thi na 🤨

अमन : Toh kya tumne uske samne hi 😱😱

निशा को एक पल को लगा कि वो पकड़ी ना जाये लेकिन जल्द ही उसने अपनी स्थिति पर काबू पाया

सोनल (निशा) : dhtt nahi wo baahar gayi thi us time . Aap bhi na

सोनल (निशा ): chalo bye 😘

अमन : ok baby 😘

उसके बाद निशा लण्ड की तालाश मे अनुज को खोजती है और मौके से अनुज दुकान से वाप्स आ चुका था ।

फिर निशा उसे इशारे से छत पर जाने को कहती है ।

अनुज जो काफी दिनो से जिस्म का भूखा लण्ड की कसावट से परेशान था वो निशा के प्रपोजल को नजरअंदाज नहीं कर सकता था और दोनो के बीच एक गरमागर्म चुदाई का राउंड शुरु होता है ।

JAANIPUR

रात के खाने के बाद रज्जो और कमलनाथ अपने कमरे मे सोने की तैयारी कर रहे थे ।

कमलनाथ अपने कपडे निकाल कर जांघिया और बनियान मे बिस्तर पर आ चुका था कि दरवाजे पर खटखट होती है ।

कमलनाथ उठ कर तौलिये को अपनी कमर मे लपेटते हुए दरवाजा खोलता है तो सामने रीना हाथ मे सेकाई और मालिश के समान लेके खड़ी थी ।

कमलनाथ समझ जाता है और दरवाजे से हट कर कमरे मे आ जाता है । उसके पीछे रीना भी आ जाती है ।

रीना - वो मा जी आज शाम की मालिश नही ही पाई थी आपकी तो सोचा इस टाईम कर दू !

रज्जो - ओहो ये लड़की भी ना ,,अरे मै ठीक हू अब क्यू तु परेशान हो रही है ।

रीना - आप जिद ना करो मा जी ,, पापा जी समझाओ ना इनको

कमलनाथ - अब मै क्या बोलू ,,, करवा लो ना रमन की मा बहु कह रही है तो , जल्दी अच्छी हो जाओगी तो ठीक ही है ना

रज्जो तुनक कर - हा आपके लिए ठीक ही रहेगा ना हुह

अपनी सास की बात सुन कर रीना मुह फेर कर हस दी और कमलनाथ भी रीना को देख कर खुद को हसने से रोक नही पाया ।

कमलनाथ - अच्छा ठिक है मै थोडा बाहर हू

रीना कमलनाथ को टोकते हुर - पापा जी वो तौलिया !! वो सेकाई के बाद साफ करना होता है ना

कमलनाथ - ओह्ह फिर ऐसे मै बाहर कैसे जा पाऊन्गा

रज्जो खीझ कर - क्या जी आप भी यही बैठ जाओ ना चुप चाप वैसे भी ज्यादा टाईम नही लगेगा ।

"हा ठिक है पर ", कमलनाथ रीना की ओर देख कर बोला ।

रज्जो - बहु तुझे कोई दिक्कत तो नही है ना

रीना अब क्या ही बोल सकती थी तो उसने भी शर्म भरे लहजे मे मुस्कुराते हुए - नही मा जी ,

फिर कमलनाथ सोफे पर बैठ गया और रीना ने रज्जो की गाड़ से मैकसी उपर करते हुए इसके मखमली चुतडो की बर्फ से सेकाई शुरु कर दी ।

रीना शर्म से बिना कमलनाथ की ओर देखे बस अपने काम मे लगी थी और अच्छे से अपनी सास के चुतडो को सेका ।

इस दौरान कमलनाथ का लण्ड इस अजीबोगरीब स्थिति मे भी तन चुका था और अपनी बीवी की गदराई बीवी के चुतड देख कर उसके लण्ड की नसे फुल रही थी ।

ऐसे मे अचानक से रीना ने उसकी ओर देखा और बोली - पापा जी वो तौलिया ।

कमलनाथ थोडा झिझक के साथ खड़ा हुआ और जैसे ही उसने तौलिया खोल कर रीना को पकड़ाया उसे अपने जान्घिये मे तने हुए लण्ड का ख्याल आया और वो फौरन उसे ढकते हुए सोफे पे आ गया ।

रीना ने ये सब देखा और मुस्कुराती रही ।

कमलनाथ के साथ साथ अब रज्जो भी मुस्कुरा रही थी ।

रज्जो हस कर - बहु अब और कितने टाईम की मालिश बाकी है उम्म्ं

रीना मुस्कुरा कर - बस मा जी अब ठिक हो गया है अब आप ....।

इत्ना बोलकर रीना चुप हो गयी और मुस्कुराते लोशन को अपनी सास के चुतडो मे मलने लगी ।

कमलनाथ जो कि छिप छिपकर अपने खड़े लण्ड के सुपाड़े खुजाये जा रहा था और रज्जो को देख कर इशारा करता है कि आज रात वो चुदाई करवा ले ।

रज्जो तुनकते हुए - मुझसे नही बहु से पूछिये

रीना चौकी और आंखे बडी करके - क्या हुआ मा जी

रज्जो शरारत भरी मुस्कुराह्ट के साथ अपने पति को छेड़ते हुए - अब क्या बताऊ बहु , सांड जैसा पति मिला है मुझे जो एक भी पल चैन से बैठने नही देता ,,,आज थोडी ठिक हो रही हू तो फिर से इनकी डिमांड शुरु हो गयी ।

रज्जो की बात सुन कर कमलनाथ रीना से नजरे और लण्ड दोनो छिपाने लगा ।

वही रीना ने एक नजर अपने ससुर को देखा तो उसकी हसी छुट गयी ।

कमलनाथ समझ रहा था कि ऐसे मस्ती करने की रज्जो की पुरानी आदत है लेकिन अपनी बहु के सामने वो थोडा शर्मिंदा मह्सूस कर रहा था और उसका चेहरा उतर चुका था ।

रीना ने भी अपने ससुर का उतरा हुआ चेहरा देख कर थोडा चुप हो गयी ।

रीना उखड़े हुए स्वर मे - सॉरी पापा जी , मै समझ रही हू आपकी परेशानी । लेकिन आपको भी मा जी के बारे थोडा सोचना चाहिए

कमलनाथ चुप रहा और वैसे ही नजरे नीची करके बैठा रहा ।

रीना - देखिये आप प्लीज नाराज ना होयिये । आप लोग ही अब मेरे मम्मी पापा है और मै नही चाहती कि मेरे वजह से मेरे पापा को कुछ तकलिफ हो ।

रीना की भावुक बाते सुन के रज्जो को लगा कि शायद उसने बहु के सामने अपने पति को कुछ ज्यादा ही छेड़ दिया ।

इसिलिए वो भी उठके कमलनाथ के पास आ गयी ।

रज्जो - क्या जी नाराज हो गये मुझ्से उम्म्ंम

कमलनाथ - बात वो नही है रमन की मा । तुम्हारी बात सुनकर बहु मेरे बारे मे यही सोचेगी ना कि मै ...।

रीना अपने ससुर की बात सुनकर उसके पास गयी और उसके पैरो के पास बैठ के उसके नंगे घुटने को छुते हुए - नही नही पापा जी । मैने ऐसा कुछ कभी नही सोचा ।

रीना शर्म से नजरे नीची करके मुस्कुराते हुए - मै तो खुश हू की इस उम्र मे भी आप दोनो मे कितना प्यार है





रिना के स्पर्श और उसकी मीठी बाते सुनके कमलनाथ का लण्ड जान्घिये मे फिर से फुकार मारने लगा । जिसे रीना ने बड़े ही करीब से देखा ।

कमलनाथ प्यार से अपनी बहु के सर पर हाथ फेरते हुए - तु सच मे बहुत प्यारी है मेरी बेटी

रीना चहक के - तो आप मानते है कि मै आपकी ही बेटी हू और मुझे आपकी खुशी का ख्याल रखना चाहिए

कमलनाथ रज्जो को मुस्कुरा कर देखता है फिर रीना से - हा उसमे मानने जैसा क्या है !

रीना शर्म से नजरे निचे करके - तो आपने मुझे मौका क्यू नही दिया कि मै आपको खुश रख सकू ।

रीना की बाते सुन के कमलनाथ और रज्जो दोनो के कान खड़े हो गये और वो भौचके होकर एक दुसरे को देखने लगे ।

कमलनाथ थुक गटक कर अपना लण्ड फुलाते हुए - क्या मतलब मै समझा नही बहु ।

रीना मुस्कुरा कर कमलनाथ की आंखो मे देखते हुए - यही कि जब आपका इतना मन है तो एक बार मुझसे क्यू नही कहा । क्या इतना भी हक नही मेरा कि मै आपको खुश रख सकू ।

कमलनाथ हिचक कर - ये ये तु क्या कह रही है बहु ,, मै तुझसे ये कैसे ?

रज्जो भी चौक कर - हा बहु तू ये क्या बोल रही है ।

रीना - सही तो कह रही हू मा जी । आप मेरी मा जैसी हो और पापा जी मेरे पापा जैसे ।

अगर मा की तबीयत नही ठिक है तो क्या पापा ख्याल रखना उसकी बेटी का फर्ज नही है ।

कमलनाथ झिझकते हुए - वो ठीक है बेटी लेकिन तु जो कह रही है वो मै कैसे ! तु रमन की पत्नी है ।

रीना आंखे नचाकर - और आपकी बहु भी हू । तो क्या बहु का ये फर्ज नही कि वो अपने सास ससुर के तकलीफ़ को समझे उनकी मदद करे ।

रज्जो - तेरी बात ठीक है बेटा लेकिन तु मेरे लिए क्यू ?

रीना मुस्कुरा कर - आप ही के लिए तो कर सकती हू ना

इधर रीना और रज्जो की संस्कारो को लेके अपने अपने मतभेद चल रहे थे और वही कमलनाथ इस कल्पना मे उत्तेजीत हुआ जा रहा था कि रीना उससे खुद से चुदाई करने वाली है ।

इधर इन्की बाते चल रही थी दरवाजे खटखट हुई और सब एक साथ चुप हो गये ।

रज्जो थोडा शान्त होकर - ऐसा है बहु तू अपने कमरे मे जा , रमन इन्तेजार कर रहा होगा ।

रज्जो की बात सुन कर कमलनाथ का सारा नशा ही उतर गया और वो बहुत ही उम्मिद भरी नजरो से रज्जो को देखता है तो रज्जो हस कर - और आप परेशान ना होवो , हिहीहिही

रज्जो रीना से - और बहु तु जा हम फिर कभी इसपे बात करेंगे ।

रीना अपनी सास की बात सुनकर थोडा उदास थी क्योकि दिल ही दिल मे उसने भी कुछ अरमान रखे हुए थे तो आज टुटने जैसे हो रहे थे । तो बेबस होकर कभी अपने ससुर को तो कभी उसके खड़े लण्ड को निहार रही थी इस उम्मिद मे कि शायाद आगे उसे मौका दे ।

जारी है ....
 
अपडेट 165 (बी)


रात के खाने के बाद मै अरुण के कमरे मे गया ।

वहा वो कम्प्यूटर पर बैठा हुआ था और मै उसका ही मोबाईल लेके चेक कर रहा था ।

अरुण ने एक पल को मेरे हाथ अप्ना मोबाईल देखा तो लपक कर मेरे पास गया ।

अरुण चहक कर - मिल गया भैया मोबाईल क्या ?

मै उसको आंखे दिखाता हुआ - हम्म्म लेकिन तुझे ये मोबाइल नही मिलेगा ।

अरुण चेहरा बनाते हुआ - क्यू

मै - तुने मुझसे झूठ क्यू बोला उम्म्ं

अरुण हकला कर - क् क्या झ झूठ बोला मैने

मैने मोबाईल के hide files खोल्कर कर कम्मो बुआ की तस्वीरे उसे दिखाते हुए - ये सब क्या है हम्म्म ? तो यही सब करना है तुझे

अरुण शर्म से नजरे झुका कर बैठ गया

मै - कहा से सीख रहा है ये सब तु बोल ।

अरुण चुप रहा ।

मै जान रहा था कि अरुण की इन हरकतो के बारे मे घर के मर्दो को कोई जानकारी नही थी इसिलिए मै उसे धमकाते हुए - तु सच बता रहा है कि मै फूफा जी ये सब दिखाऊ

अरुण गिडगिडा कर - नही नही भैया प्लीज पापा मारेंगे प्लीज

मै - तो बता सब कुछ कहा से सीखा ये सब

अरुण अटकते हुए - ये सब मा की वजह से ही हुआ है

ये बोलके अरुण रोने लगा ।

मै भौहे सिकोड़ते हुए - तो तु अपनी गलती भी अब बुआ के उपर थोप रहा है ।

अरुण सिस्कते हुए - मै सच कह रहा हू भैया ।

मै - अच्छा ठिक है , बता क्या बात है और इसमे बुआ कैसे शामिल है ।

अरुण हिचक कर - पहले मै ये सब कुछ नहीं जानता था । बस आम लोगो की तरह ही सेक्स के बारे मे मुझे जानकारी थी । लेकिन एक रात मेरी पेसाब के कारन नीद खुल गयी तो मैने पेसाब करने और थोडी हवा खाने के लिए कमरे के बजाय बाहर चला गया क्योकि गर्मी का मौसम था ।

मै पीछे आँगन की ओर चला गया था और वहा मैने पेसाब की । उसी दौरान मुझे कुछ मा के खिलखिलाने की आवाज आई ।

वो आवाज सबसे उपर की टेरिस से आ रही थी ।

चुकि मेरी नीद खुल गयी थी और बाहर हवा भी अच्छी चल रही थी तो मैने सोचा कि क्यू ना मै भी उपर जाकर टहल लू ।

फिर मै अन्धेरे मे ही जीने से होकर उपर जाने लगा ।

जैसे ही मै जीने के आखिरी कुछ सीढियो पर पहुचा मुझे सामने का नजारा देख के यकीन ही नही हुआ कि मेरी मा भी ऐसा कुछ कर सकती है

मै - क्या क्या हो रहा था वहा





अरुण कापते हुए स्वर मे - वहा उपर मेरे पापा और बड़े पापा अपना पैंट खोले खडे थे और मेरी मा वही निचे बैठी हुई उनके पेनिस को पकड़ी हुई हिला रही थी और मेरे बड़े पापा मोबाइल मे फ्लैश जला कर मेरी नंगी मा की लण्ड चूसने की वीडियो बना रहे थे ।

मै चौक कर - क्या तुने ये सब सच मे देखा था

अरुन निराश होकर - हा भैया और उसी के बाद से मै मा को एक पोर्नस्टार समझने लगा । क्योकि इसके बाद मै दो तीन बाद मा को बडे पापा के केबिन मे देखा था , जहा वो लोग रोलप्ले करके सेक्स करते थे । कभी मा उनको जीजा बुलाती तो कभी उनको जेठजी बुलाती और कभी उनको पति बुलाती थी ।

मै - हम्म्म फिर

अरुण - फिर मै धीरे धीरे कब मा के लिए परेशान होने लगा पता ही नही चला और एक रात जब मै चुपके से छत पर मा और बड़े पापा की चुदाई देख रहा था तो मीना ने मुझे पकड लिया और

मै आंखे बडी करके - और क्या ?

अरुण नजरे नीची करके - उसने मेरी चोरी पकड़ी थी तो मुझे धमकी दी और जबरदस्ती मुझसे वो सब करवाया । फिर तबसे जब भी उसका मन होता है वो और मै सेक्स करते है ।

मै उसकी बाते सुन कर एक गहरी आह भरता हूआ - आह्ह ठिक है और कुछ बाकी है तो बता दे

अरुण - नही भैया ,,मम्मी की कसम बस यही बात है । अब देदो ना मोबाईल मेरा

मै - हा ठिक है लेकिन पहले इसमे से सारे वीडियो और बुआ की सारी गंदी तस्वीरे डिलीट कर और वादा कर अब से तू इन्हे नही देखेगा

अरुण उखड़ कर - हा ठिक है भैया

फिर मैने उसे मोबाइल दे दिया और वही लेट कर आगे सोचने लगा । कि अब बुआ से कैसे बात की जाये और इस मीना का कुछ कर पडेगा ।

इसी उधेड़बुन मे मुझे कब नीद आ गयी मुझे पता ही नही चला ।



लेखक की जुबानी


CHAMANPURA

रात के खाने के बाद जंगीलाल अपने कमरे मे जा चुका था और शालिनी किचन मे काम निपटा रही थी । लेकिन राहुल की बेचैनी कम नही हो पा रही थी ।

उसका लंड बैठने का नाम नही ले रहा था ।

ऐसे मे वो अपनी मा को फिर मनाने के लिए किचन मे घुस गया और अपना लण्ड उसकी गाड़ मे चुभोता हुआ उसकी कमर को पकड कर काँधे पर सर रखते हुए बडी ही उदासी से - मम्मीईई सुनो ना

शालिनी राहुल के स्पर्श से सिहर गयी और अगले ही जब उसने राहुल का नाटक देखा तो उसको हसी आई लेकिन वो खुद को सामान्य रखते हुए - हम्म्म्म बोल

राहुल अपनी मा के टीशर्ट मे हाथ बढा कर उसकी नरम नरम पेट पर अपने पंजे कसता हुआ - मम्मी प्लीज मान जाओ ना

शालिनी इतरा कर मुस्कुराते हुए - लेकिन तु आखिर क्यू देखना चाहता है वो सब उम्म्ं

अपनी मा की बात सुन्कर राहुल का लंड थोडा सा फडका जिसे शालिनी ने भी अपनी चुतडो पर मह्सूस किया ।

राहुल अटक कर - वो मुझे अच्छा लगता है

शालिनी उससे अलग होकर उसकी ओर घूम जाती है और इस बार सीधा राहुल के तने हुए लंड को हाथो मे भरते हुए बडी शरारती मुस्कान से - तुझे अच्छा लगता है या इसे

राहुल अपनी मा की हरकत से सिहर जाता है और शर्म से हस देता है ।





वही शालिनी इस आये हुए मौके को बिल्कुल भी नही गवाती और हाथो से मसल कर लोवर के उपर से ही राहुल के लण्ड का जायजा लेती है ।

राहुल सिस्क कर - उम्म्ंम मम्मीईई अह्ह्ह्ह

शालिनी उसके लण्ड को भीचते हुए - आज तुने दो बार मुझे नंगा किया उम्म्ं बोल मै भी कर दू तुझे हा

राहुल अपनी मा की आंखो ने मुस्कुरा कर - हम्म्म कर लो ना मम्मीई

शालिनी मुस्कुराते हुए - खुब समझ रही हू तेरी बदमाशिया ,,, तुझे क्या लगता है मुझे कुछ पता नही चलेगा

राहुल - प्लीज ना मम्मी अह्ह्ह

शालिनी राहुल को परेशान करते हुए उसका लण्ड लोवर के उपर से ही पकड के - अगर इसको शान्त किया तो कमरे मे नही देखने दूँगी ,,,

राहुल के लण्ड उसकी मा के शरारती हरकतो और शब्दों से फड़क रहा था और वो बस आन्खे बंद करके सिसिकिया लिये जा रहा था ।

शालिनी ने एक नजर किचन से बाहर अपने कमरे की देखा और वही बैठ गयी ।





फिर उसने राहुल का लोवर पकड कर निचे खीचा तो उसका मोटा 7 इंच का लण्ड हवा मे झूलने लगा

एक पल को शालिनी भी चौक गयी और फिर मुस्कुरा कर अपने बेटे के लण्ड को हाथो से छुने लगी ।

राहुल को यकीन नहीं हो पा रहा था कि ये सब सच मे हो रहा था

राहुल के लण्ड की नसे पल पल कसती जा रही थी और सुपाडा पुरा फुल चुका था ।

उसके दिल की धडकनें और तेज सासे शालिनी मह्सूस कर पा रही थी ।

राहुल के पुरे बदन का खुन उसके लण्ड मे भरने लगा था और उसका सुपाडा लाल होकर तपने लगा था ।

सुपाड़े की जलन से सिसकता हुआ राहुल ने अपनी मा के सर को पकड कर हल्का सा दबाव बनाते हुए अपने लण्ड को तानता हुआ आगे बढा ।





शालिनी ने शरारत भरी नजरो से मुस्कुराते हुए र जीभ निकाल लण्ड से थोडी ही दुर से उसको चाटने का इशारा किया तो राहुल की तडप पहले से ज्यादा बढ गयी । उसने अपने लण्ड को आगे ले जाकर खुद अपनी मा के होठो को लगा दिया ।





शालिनी उसके लण्ड को थामा और अपने पास करके उसके सुपाड़े पर अपनी ठंडी जीभ फिराई

राहुल उछल पड़ा- ओह्ह्ह मम्मीई चुसो ना उम्म्ंम आह्ह्ह

शालिनी मुस्कुराई और हौले से मुह खोलते हुए आधे से ज्यादा लण्ड गटक गयी ।

इसी के साथ राहुल ने भी एक ठंडी आअहह भरी और अपने मा के बालो मे हाथ फेरने लगा ।

शालिनी अब अपने बेटे के लण्ड को चूसना शुरू कर दिया था और वो उसके आडो को छेड़ते हुए मुह मे लण्ड को घोट रही थी ।

अपनी मा से अपनी मन की करा कर राहुल को गजब का सुख मिल रहा था और वो एडिया उचका कर, अपने गाड़ पिचका कर , अपने नथुने फुला कर आखिर तक जोर लगा कर अपने लण्ड की नसो पर दबाब बनाये हुए था ।

जल्द ही उसकी नसे उसके गरमा गरम वीर्य से भर गयी , सुपाड़े का छेद अब और दबाब झेल पाने के लिए तैयार नही था ।





ऐसे मे राहुल ने अपनी मा के सर को पकड कर दबाव ब्नाया और पुरा का पुरा लण्ड उसके गले मे उतार दिया ।

शालिनी अपनी आंखे फैलाये गुउउऊ गुउऊ करती रही लेकिन राहुल अपने लण्ड आखिरी झटके तक उसके मुह मे रोके रहा

और जब हाथ हटाया तो शालिनी ने जरा भी परेशान हुए वापस से अपने बटे के तने लण्ड को तेजी से मुठियाते हुए चुसने लगी ।

फिर उसने अच्छे से राहुल के लण्ड को साफ किया और खडे होकर सिंक मे अपना मुह धुलने लगी

राहुल जो बहुत खुश था वो अपना लोवर चढा कर अपनी मा को पीछे से अपनी बाहो मे भर लिया और उसके गाल चूमते हुए - थैंक यू मम्मी उम्म्ंम्माआह

शालिनी हस कर अपने गाल पोछते हुए - हो गया ना तेरा अब जा सो जा

राहुल ने थोडा रोना सा मुह बनाया तो शालिनी हस कर - मैने पहले ही बोला था एक ही चीज़ हो पायेगी हिहिही चल जा अब

इतना बोलकर शालिनी अपने कुल्हे मटकाती हुई अपने कमरे मे चली गयी

जाने को तो राहुल भी उसके पिछे पीछे कमरे तक गया लेकिन शालिनी ने फिर वही शरारती हसी के साथ दरवाजा बंद कर दिया और राहुल मुस्कुराता हुआ अपने कमरे मे आ गया ।

भले ही आज भी उसे अपने मम्मी पापा का शो नही देखने को मिला लेकिन आज उसकी मा ने उसे बहुत बडी खुसी दी थी और राहुल अब आगे बढने की कलपनाओ मे खो जाना चाहता था ।

इसिलिए वो अपने बिस्तर पर आकर सोचते सोचते नीद मे खो गया ।
 
अपडेट 166

लेखक की जुबानी

CHAMANPURA

सुबह की अंगड़ाई के साथ राहुल के लण्ड ने भी अपनी करवट बदली और दोनो एक साथ जाग गये ।

रात मे किचन की मस्ती याद करके राहुल ने अपने लण्ड का तना पकड़ा कर गाड़ पिचकाते हुए उसकी नसो भरपुर फैलाते हुए अपनी कमर को मरोडा ,, जिससे उसके लण्ड की सभी नसे अच्छे से खुल गयी ।

राहुल मन मे - अब बस बहुत हो गया ,, आज तो मै मम्मी को चोद कर रहूंगा

वो जल्दी से नहाने गया और नहा कर रोज की तरह अपनी मा को खोजते किचन मे घुस गया ।

बिना कोई आहट के दबे पाव राहुल ने हौले से पीछे से ही अपनी मा के कमर मे हाथ डाला और उससे चिपकते हुए उसके खुली गरदन को चुम लिया





शालिनी ने जैसे ही ये कामुक स्पर्श अपने जिस्म पर मह्सूस हुए वो पूरी तरह से कपकपा गयी और उसकी सासे तेज हो गयी ।

वही राहुल बिना कुछ बोले अपने मुसल को मा की गाड़ मे चुभोता हुआ उसके खुले कन्घे और गरदन के साथ कान के हिस्से मे भी चुम रहा था

शालिनी ने बडी मादकता भरे स्वर मे कहा- उम्म्ंम राहुल बेटा उफ्फ्फ छोड ना काम करना है बहुत सारा

राहुल ने कुनमुनाकर - उहू ना

शालिनी मुस्कुरा के अपने हाथ से अपने बेटे के गाल छुते हुए - बेटा मुझे सच मे बहुत काम है ,, आज मै भी देर से उठी हू ना

राहुल शरारत भरी मुस्कुराहत के साथ - क्यू

राहुल की खिसकी भरी मुस्कुराहट शालिनी के कानो में पडी तो वो हस दी ।

शालिनी - तेरे पापा की वजह से और क्यू ?

राहुल अपने हाथ अपनी मा के नरम पेट पर घुमात हुआ - क्यू उन्होने सोने नही दिया क्या रात भर

शालिनी शर्म से मुस्कुरा कर - हम्म्म

अपनी मा की बात सुनके राहुल का लण्ड और तन गया । जिसको शालिनी ने अच्छे से अपने जांघो के बीच मह्सूस किया ।

अपनी मा से ऐसे गर्म गर्म बाते करके राहुल का लण्ड बहुत तन गया था तो उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और

उसको अपनी मा की जांघो के बीच घुसेड़ दिया





जो उसकी चुत के फलको को रगड़ते हुए सामने की ओर बाहर निकल गया ।

शालिनी ने जैसे ही अपनी चुत की फलको को फैल्ते हुए मह्सूस किया तो चौककर निचे देखा तो उसके लोवर के सामने से उसकी चुत के मुहाने पर राहुल के सुपाडा की टिप दिख रही थी और उसका गर्म मोटा तना उसकी चुत के होठो पर लोवर के उपर से चिपकी हुई थी ।

शालिनी - आह्ह बेटा ये क्याआ कर रहा है उमम्म सीईई तेरे पाआ अह्ह्ह तेरे पापा आ जायेन्गे उन्मममं हटा ना इसे

राहुल पीछे से अपनी मा के जांघो मे अपना लण्ड घिसते हुए - वो दुकान छोड कर नही आयेन्गे मम्मी प्लीज करने दो ना उम्म्ंम

राहुल की इस हरकत से शालिनी चुत की खुजली बढ रही थी ये सोच कर कि जिस लण्ड को शालिनी अपने चुत मे लेने का ख्याल कर रही थी वही लण्ड उसके चुत के उपर घिस रहा था





जिससे उसकी चुत अपना पानी छोडने लगी थी ।

बिना पैंटी के उसका लोवर निचे से गीला होने लगा था और जब राहुल ने अपनी लंड के सतह पर चिपचिपाहट महसूस की तो वो समझ गया कि उसकी मा झड़ रही है इसिलिए उसने अपनी मा कूल्हो को थामते हुए कस कस लंड को उसकी जांघों मे पेलने लगा

शालिनी की चुत अब बुरी तरह से घिसी जा रही थी और वो राहुल के लंड को जांघो मे कस्ते हुए अकड़ने लगी थी इधर लण्ड पर जोर पडने से राहुल का सुपाडा भी फूल चुका था और अब वो कभी भी झड़ सकता था इसिलिए उसने फौरन लण्ड बाहर निकाला और उसे मुथियाते हुए अपनी मा चुतडो पर गिराने लगा





अपने बेटे के वीर्य की गरमी पाकर शालिनी भी अकड़ते हुए अपनी चुत निचोड रही थी ।

राहुल ने अच्छे से लंड को अपनी मा के चुतडो पर पटक पटक कर झाडा

शालिनी कामुकता भरी मुस्कुराहट से - गन्दा कही का , मुझे कपडे बदलने पड़ेगे अब ना

राहुल अपनी मा के कमर मे हाथ डाल कर उसके गाल चुमता हुआ - चलो मै बदल देता हू ना मम्मी

शालिनी तुन्ककर मुस्कुराते हुए - हुह रहने दे मै कर लूंगी ।

ये बोलकर शालिनी अपने कमरे मे चली गयी और राहुल मुस्कुरा कर अपना लण्ड अन्दर करके हाथ धोने लगा ।

JAANIPUR

देर रात तक रज्जो कमलनाथ की आपस मे रीना को लेके बाते चली और सोने से पहले रज्जो ने कमलनाथ से चुदाई कर ली ।

अगली सुबह रीना रोज की दिन चर्या के बाद किचन मे भिड़ी हुई थी और रज्जो निचे आई

रीना ने जैसे ही अपनी सास को देखा - बैठीये मा जी चाय हो गया है ।

रज्जो ने देखा कि रिना के व्यव्हार मे जर भी बदलाव नही है कल रात की बात को लेके , जबकि वो खुद रीना से झिझक मह्सूस कर रही थी ।

रीना की ओर सब सामान्य देख कर रज्जो ने भी अपने व्यव्हार मे कोई नयापन नही दिखाया और वो पहले के जैसे ही रही ।

फिर कुछ समय मे घर के दोनो मर्द भी निचे उतरने लगे ।

फिर रीना ने उन्हे भी चाय नास्ता दिया ।

रीना जैसे ही कमलनाथ के आगे झुकी तो एक बार फिर उसको अपनी बहु के 34D के मोटे चुचो की घाटिया देखने को मिली और उसका लण्ड अकड़ गया ।

वही रीना ने जब अपने ससुर को अपनी चुचिय झांकते देखा वो मुस्कुरा दी और इतराते हुए किचन मे चली गयी ।

नास्ते के बाद रमन दुकान के लिए निकल गया

नास्ते के बाद कमलनाथ वही हाल मे बैठा रज्जो से बाते करने लगा । रज्जो जो रात की चुदाई के बाद से काफी खिली खिली लग रही थी ।

रज्जो - तो ठिक है कल सुबह ही मै चमनपुरा के लिए निकल जाती हू ,

रीना भी वही पास खड़ी सब सुन रही थी ।

कमलनाथ - ठिक है फिर दो दिन बाद मै और बहू सारा समान एक गाड़ी बुक करके चले आयेंगे

रज्जो रीना से - तुझे कोई दिक्कत नही है ना बहु , वैसे रागिनी ने तो हम दोनो को साथ आने को कहा था । लेकिन अगर हम दोनो गये तो इन दोनो के खाने पीने का ख्याल कौन करेगा

रिना मुस्कुरा के - आप बेफिकर होकर जाईए मा जी , मै पापा जी का ख्याल रखुन्गी

रज्जो रीना की बात सुन कर उसे रात की घटना याद आई और वो हस कर - और हा बस खाने पीने का ही ध्यान रखना है ये नही कि ...तु समझ रही है ना

रज्जो की बात पर रीना शर्मा कर नजरे चराते हुए - जी मा जी समझ गयी और प्लीज आप वो बात को भुला दीजिये ना

रीना कमलनाथ को देखकर - वो तो मै पापा जी की तकलिफ के वजह से कहा था ।

रज्जो कमलनाथ का मजा लेते हुए - अरे तु इनकी बातो मे ना आना ये एक नम्बर के चालू आदमी है ।

कमलनाथ हस कर - क्या रमन की मा तुम भी ,,,बस भी करो

और फिर कमलनाथ अपने पजामे मे सर उठाते लण्ड का टोपा खुजाने लगता है जिसको रीना देख लेती है ।

फिर रज्जो उठती है और कमलनाथ को अपने साथ पैकिंग मे मदद के बहाने मे चुदाई करवाने ले कर घुस जाती है ।


राज को जुबानी

अरुण की बाते सुनने के बाद मै समझ गया था कि बात सच मे बहुत बडी थी । इसको सुलझाने के लिए मुझे समय के साथ साथ कुछ जरुरी बाते भी जाननी जरुरी थी जो अभी तक एक परछाई के रूप मे मेरे जहन मे घूम रही थी ।

इसी उधेड़बुन मे मै काफी रात तक जगा रहा और जब सुबह मेरी आंखे खुली थी 9 बज रहे थे ।

मै टीशर्ट और अंडरवियर मे लेटा हुआ था और लण्ड पुरे उफान पर तन कर तम्बू बनाये हुए था । तभी मेरे कानो मे गानो की गुनगुनाहट आई और मैने गरदन उठा कर देखा तो सामने मीना थी जो कमरे मे झाडू पोछा करने आई थी ।

मै लपक कर उठा और बिस्तर पर खड़ा होकर अपना पैंट खोजने लगा ।

तभी मीना मुस्कुराती हुई - क्या खोज रहे है बाबू

मै सकपका कर उसकी ओर देखा जो मेरी नंगी जान्घे निहार रही थी ।

मै - वो वो मेरा ... मिल गया

मैने लपक कर अपना पैन्ट सोफे से उठाया और जल्दी जल्दी पहनने लगा , हड़बड़ी मे मैने ध्यान ही नही दिया कि मैने गलत गलत हिस्से मे पैर डाल दिये और पूरी जीन्स उल्टी हो गयी ।

जिसे देख कर मीना जोर की ठहाक लेके हस दी

मै भी शर्म से लाल होता हुआ वापस से पैंट उतारने लगा ।

वही मीना झाडू लगाते हुए तिरछी नजरो से मुझे देखती रही और जब मै पैंट पहना तो फ्रेश होने के लिए बाथरूम मे चला गया ।

मै जब बाथरूम से बाहर आया तो देखा कि मीना अभी भी कमरे मे ही अरुण के कपडो मे तह लगाते हुए बेड पर झुकी थी और मै अब मीना के इरादो से भरपुर वाकिफ हो चुका था ।





इसिलिए मै भी मस्ती उसके पास से गुजरते हुए अपनी कलाई को उसके झुके हुए कूल्हो पर घिसते हुए कमरे से बाहर निकल गया और वो चौक कर मुझे देखती रही ।

कुछ देर बाद मै नास्ते के बाद बुआ के पास बैठा रहा और उनसे थोडी बाते की ।

मै - बुआ आप भी मेरे साथ ही चलो ना

बुआ - अरे बेटा ऐसे खाली हाथ नही जा सकती , अभी तो सारी खरीदारी करनी है और कम्मो को तो स्कूल से फुर्सत नहीं है ।

मै उखड़ के - तो क्या आप भी शादी के दिन ही आओगे क्या ?

शिला बुआ मुस्कुरा कर - अरे नही रे , बस एक दो बाद मै आ जाऊंगी

मै - पक्का

शिला - हा पक्का

फिर मै बुआ को कस के हग कर लिया ।

और हौले से बुआ के कुल्हे को सहला दिया जिसको कीचन मे खड़ी मीना ने बड़े ही गौर से देखा और मुस्कुराते अपने काम मे लग गयी ।

मै भी मुस्कुराने के सिवा कुछ कर नही सका और फिर बुआ के साथ उनके कमरे मे चला गया ।


लेखक की जुबानी

रात की बेचैनी से सब ही परेशान थे तो अमन कैसे पीछे रह जाता ।

निशा की शरारत के बाद से उसकी तलब और इच्छाये बढ रही थी ।

नास्ते के दौरान रागिनी के सामने ही अमन ने सोनल को 3 4 बार फोन किया तो सोनल ने झिझक कर इशारे से निशा को कहा कि वो बात कर ले ।

निशा खिलखिलाती हुई फोन उठा ली और किचन से बाहर निकल कर फोन उठा कर बाते करते हुए उपर चली गयी

फोन पर

अमन - क्या यार फोन क्यू नही उठा रही हो

निशा खिलखिला कर - उफ्फ्फ मुझे नही पता था जीजू कि आप मुझसे बाते करने के लिए इतने बेताब हो ।

निशा की आवाज सुन कर अमन का प्यार का पैमाना 100 से 10 पर आ गिरा ।

अमन उखड़े हुए स्वर मे - ओह्ह निशा तुम हो ,, सोनल कहा है

निशा - हा हा आपको तो आपकी सोनल जी ही प्यारि लगेगि ना , इतने हसिन हसिन तस्वीरे जो शेयर कर रही है आजकल हिहिहिही

अमन ने जैसे ही निशा की बाते सुनी उसके कान खड़े हो गये कि कही निशा ने कल रात के उसके और सोनल के चैट्स तो नही ना पढ लिये ।

अमन हड़बड़ा कर - क क्या बात कर रही हो तुम निशा उम्म्ं

निशा तुनक कर अमन को छेड़ती हुई - वही जो आपने सुना । हुउह

निशा - अगर वही सब दिखाकर आपसे बात करने को मिल सकता है तो एक बार मुझसे कह कर देखते

अमन हस्ता हुआ - क्या निशा तुम भी ना , तुमको शर्म नही आती हमारी प्राइवेट बाते पढते हुए । गंदी कही की

निशा तुनक कर - हुह गंदी गंदी बाते खुद करो और मुझे गन्दी बना रहे हो , मै तो चल रही हू बडी मम्मी को बताउंगी

अमन की तो अब फट गयी थी कि कहा फस गया - अरे नही नही ये क्या बोल रही हो तुम

निशा - देखिये जीजू अगर आप चाहते है ये सब बाते बडी मम्मी को ना पता चले तो मेरी एक शर्त है ।

अमन जल्दीबाजी भरे लहजे मे - हा हा बोलो बाबा सब मन्जुर है बोलो तुम

निशा - ऐसे नही पहले अपनी होने वाली बीवी की कसम खाओ हिहिहिही

अमन - हे भगवान !!!

निशा खिलखिला कर - भगवान नही भाग्यवान की हाहाहहाहा

अमन हस्ता हुआ - अच्छा बाबा मै अपनी जान सोनल की कसम खा के कह रहा हू तुम्हारी सारी शर्ते मानूँगा । खुश , अब बोलो

निशा मुस्कुरा कर - हम्म्म्म तो पहली शर्त ये है कि आप अपनी सुहागरात का लाइव वीडियो मुझे दिखाओगे हिहिहिही और दुसरी

अमन की आंखे फैल गयी और मन ही मन सोचने लगा कि ये कितनी शैतान है - क्या निशा तुम ये .... अच्छा और दुसरी शर्त क्या है ।

निशा - हिहिहिही और दुसरी शर्त ये है कि कल आप मुझे मूवी दिखाने लिवा चलो सरोजा कॉमप्लेक्स मे

अमन खुश होके - ठिक है सोनल को भी लिवा लेना

निशा तुनककर - नही सिर्फ मै और आप । ये जीजा साली वाला ही शो रहेगा हिहिहिही

अमन हस कर -ठीक है बाबा और कुछ

निशा सोचते हुए और अचानक से - अरे हा मेन बात तो भुल ही गयी

अमन - क्या !

निशा - आप रोज मुझसे सोनल से छिप कर बाते करेंगे हिहिहिही और उसे बिल्कुल भी नही बतायेंगे आपको सोनल की कसम

अमन - क्या यार इसमे भी कसम

निशा - बस बस हो गया ।मै जा रही हू बाय जीजू


हिहिहिही

फिर चहकते हुए निशा ने फोन काट दिया और अमन बेचारा बुरी तरह से फस चुका था ।

इस हवस के जंगल मे वो खुद को उस कबुतर के जैसा मह्सुस के रहा था जो दाने की लालच मे अनजाने मे शिकारी के जाल मे फस गया हो ।

अमन पहले से ही समझ रहा था कि निशा एक चंचल लडकी है लेकिन वो उसकी शरारत के इस चेहरे से वाकिफ नही था ।

उसके जहन मे वो पल आ रहा थे कि जब वो अपनी सुहागरात को वीडियो काल के जरिये निशा को दिखायेगा तो निशा उसके लण्ड को निहारेगी और उसके चुदाई करने के तरीके को भी देखेगी । लेकिन अगले ही उसे याद आता है कि निशा तो पहले ही उसका लण्ड सोनल के मोबाइल मे देख चुकी है ।

ये सब बाते सोच कर अमन का लण्ड बैथने का नाम नही ले रहा था । मस्ती मे ही सही लेकिन निशा की शरारत ने अमन को बेईमान बना दिया था और वो निशा से कल की मुलाकात के लिए बेताब हुआ जा रहा था ।

जारी रहेगी
 
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