Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 31 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 167 (ा)

लेखक की जुबानी

CHAMANPURA

राहुल अब काफी हद तक अपनी मा से खुल चुका था लेकिन शब्दो की मर्यादा दोनो मा बेटे ने अभी तक नही लान्घी थी ।

वासना मे घिरे हुए ही सही लेकिन दोनो मे किसी ने भी खुले शब्दो ये इच्छा जाहिर नही होने दीया कि वो दोनो एक दूसरे से क्या चाहते है ।

मौके का फायदा उठाते हुए राहुल ने दो बार अपनी मा से अपना मुसल चुसवा चुका था लेकिन उसकी बेचैनी घटने का नाम नही ले रही थी ।

वही शालिनी के उपर बेटे के साथ साथ बाप की हवस का बोझ बढ़ रहा था ।

जन्गीलाल ने भी दो तीन बार मौका देखकर शालिनी के अंगो के साथ खेला और लण्ड शान्त किया ।

हालत ये थी कि शालिनी की चुत बहुत ही पानी बहा रही थी लेकिन उसकी गर्मी नही मिट पाई थी वही आज राहुल भी पूरी जिद थी कि उसे मम्मी पापा वाला खेल देखना है ।

वही शालिनी भी चाह रही थी कि राहुल के साथ ये खेल जल्द ही खतम हो जाये क्योकि सोनल की शादी को ज्यादा दिन बाकी भी नही थे और कब उसकी जेठानी के यहा से उसका बुलावा आ जाये कोई पता नही था ।

अभी रात के 9 बज रहे थे ।

घर मे सभी लोग खाना पीना कर चुके थे ।

शालिनी किचन मे बर्तन खंगाल रही थी कि पीछे से राहुल ने एक बार फिर अपने तने हुए लण्ड से शालिनी के गाड़ की दरारो मे दस्तक थी और शालिनी गनगना गयी ।

राहुल अपना लण्ड अपनी मा के गाड़ पर घुमाता हुआ घिस रहा था - मम्मी प्लीज ना सिर्फ आज के लिए

शालिनी कसमसाहत भरी आवाज मे - तुझे क्यू देखना है वो सब

राहुल - बस ऐसे ही मन कर रहा है

शालिनी चिंतित भाव मे - कही तेरे पापा ने देख लिया तो

राहुल - पक्का मै छिप कर रहूंगा , वो नही देख पायेंगे

शालिनी अपने हाथ साफ करके राहुल के लण्ड को पकड कर उससे अलग होते हुए - अच्छा ठिक है लेकिन बस कुछ मिण्ट के लिए ही देखना और फिर वापस कमरे मे ठिक है

राहुल चहक कर - ठिक है मम्मी उम्म्म्माह

शालिनी मुस्कुरा कर - धत्त शैतान कही का अब कमरे मे जा मै बाहर की सारी लाईट बुझाकर ही कमरे मे जाऊंगी

राहुल चहकता हुआ कमरे मे चला गया और शालिनी ने बाहर की सारी लाईट बुझा कर कमरे को हल्का भिड़काते हुए कमरे मे चली गयी ।

अन्दर कमरे मे जंगीलाल ने जैसे ही शालिनी की आहट पाई उसे इस बात की फ़िकर ही नही थी कि कमरे का दरवाजा किस हालत मे है ।

शालिनी जिस तरह से अपने जिस्म को कामुक अदाओ से बल्खाते हुए अपने पति की ओर बढ रही थी वैसे वैसे ही जन्गीलाल के जान्घिये मे लण्ड ने बडी तेजी से तम्बू बनाना शुरु कर दिया था ।

जंगीलाल - ओह्ह्ह जान तुम हर बार मुझे पागल कर देती हो , इतनी नशीली क्यू हो तुम

ये बोलकर जंगीलाल ने लपक कर शालिनी को का हाथ खीच कर उसे अपनी गोद मे बिठा लिया ।

अपने पति के नंगे जिस्मो का स्पर्श पाकर शालिनी सिहर गयी और उसकी धडकनें तो बस राहुल के बारे मे सोच कर ही तेजी से धडक रही थी जिससे उसके चूचे जंगीलाल के सीने पर दबाव बना रहे थे और जन्गीलल भी इसको महसूस कर पा रहा था ।

शालिनी तोड़ा इतराते हुए खुद को छुड़ाने की कोसिस करती हुई - अह्ह्ह छोडिए ना जी ,, आपको तो बस वही सब करना है

जंगीलाल अपनी बिबी के गालो को चूमता हुआ - उम्म्ंम जान तुझे देखने के बाद कुछ सूझता ही नही

शालिनी ने नजरे उठा कर अपने पति को देखा और आंखे दिखाते हुए पुछा- समझ क्या रखा है आपने मुझे उम्म्ं

जंगीलाल शरारत भरी मुस्कुराह्ट के साथ उसके कूल्हो को मसलते हुए बोला - अपनी रंडी

अपने पति के मुह से ऐसे शब्द सुन कर शलिनी का दिल ध्क्क करके रह गया और वो ये सोच रही थी कि कही राहुल ने सुन तो नही लिया ना ,,,

वही कमरे के बाहर खड़ा राहुल ने जब अपने बाप के मुह से ऐसे शब्द सुने तो उसका लण्ड फड़फडा गया ।

राहुल मन मे - अह्ह्ह पापा सही कह रहे हो मम्मी किसी रन्डी से कम नही है उह्ह्ह कुछ करो ना खोलो ना मम्मी की चुचिया उम्म्ं

शालिनी अपने पति की ओर पीठ करती हुई एक नजर दरवाजे पर देखती हुई - धत्त क्या जी आप ऐसे उलटा सीधा बोल रहे हो

जन्गीलाल ने मौका पाया और पीछे से शालिनी के चुचे टीशर्ट के उपर से मसलते हुए - सही तो कह रहा हू मेरी रन्डी है तू

शालिनी अपने चुचो पर पति के हथेली का स्पर्श पाते ही मचल उठी और सिस्कने लगी उसकी आंखे बंद हो गयी थी और वही राहुल के चेहरे के भाव बदलने लगे थे ।

उसे लगने लगा था कि खेल शुरु हो गया है और वो अपना लण्ड भी बाहर निकाल चुका था ।

कमरे मे जंगीलाल ने शालिनी की चुचिया मिजते हुए अपने हाथ उसके टीशर्ट मे घुसा दिये और नंगी नंगी चुचियो को टीशर्ट के अन्दर से मसलने लगा ।

शालिनी अपने पति के सीने पर लोटने लगी थी और उसकी एडिया ऐठने लगी थी ।

शालिनी का जोश आज राहुल की उपस्थिति मे बढ गया था वो पूरी तरह अकड़ रही थी इस कलपना मे कि राहुल के मन मे उसके लिये क्या चल रहा होगा ।

क्या वो अपना लण्ड मसल रहा होगा ये सब देख कर ।

वही जंगीलाल अपनी बिवी की गर्मी से और भी जोश मे आ गया और उसने शलिनि की सरकती जान्घो को पकडते हुए अपनी ओर खिच लिया और सीधा चुत के उपर हाथ रख कर उसकी बुर टटोलने लगा ।

राहुल की हालत भी खराब हो रही थी , वो चाह रहा था कि जल्द से जल्द उसकी मा नंगी हो जाये

लेकिन जंगीलाल के विचार तो कुछ और ही थे क्योकि वो भी सुबह से तडप रहा था और उसका लण्ड भी चुदाई के लिए बेचैन हुआ जा रहा था ।

वही शालिनी की बेताबी देख कर उसे लगा की पहले उसे शालिनी की चुदाई करनी चहिये

बस फिर क्या था

अगले ही पल मे वो और शालिनी खड़े थे ।

फिर जंगीलाल ने उसे बिस्तर पर झुका दिया और उसका लोवर पीछे खिच कर निचे कर दिया ।

इतना सब होने के बाद भी राहुल को शालीनी के गोरे जिस्म की एक भी झलक नही मिल पाई थी ।

शालिनी उसकी ओर मुह करके ही बिस्तर पर झुकी हुई थी और जन्गीलाल पीछे खड़ा अपना जांघिया निकाले लण्ड को उसको गाड की दिवारो मे ठोकरे लगा रहा था ।

राहुल को बस सामने झुकी अपनी मा के टीशर्ट से झाकती चुचियो की झलक मिल पा रही थी वही उसका बाप निचे बैठ कर अपना मुह उसकी मा के गाड मे दे चुका था ।

जंगीलाल के मोटी गीली जीभ को अपनी बुर और गाड़ के छेदो पर नाचता पाकर शालिनी के चेहरे के भाव बदल गये थे ।

जंगीलाल बडी हवस से उसके चुत के फाको को चाट कर खड़ा हुआ और अपना मुसल उसके मुहाने पर सेट करते हुए

अगले ही पल शालिनी की आंखे फैल गयी और उसके चेहरे पे आये भावो को पढ कर राहुल समझ गया कि उसके बाप ने लण्ड घुसा दिया है ।





शालिनी दर्द भरी सिसकिया लेते हुए दरवाजे पर देखती है तो हल्की परछाई मे उसे राहुल के सलेटी लोवर की झलक मिलाती है और उसे फिर से नशा होने लगता है ।

उसकी चुत भलभला कर झड़ना शुरु कर देती है ।

जंगीलाल पीछे से उसको चोद रहा था और उसने भी अपने लण्ड पर गरम गर्म पानी मह्सूस करते ही बोला - ओह्ह जान तुम तो बहुत गरम हो आज ,,,इतना मन था क्या पेलवाने का उम्म्ं बोलो

शालिनी को राहुल के सामने अपने पति से ऐसे बाते करने मे झिझक कर हो रही थी इसिलिए वो चुप रही और आंखे भिचे हुए सिसकिया लेती रही ।

जंगीलाल अपनी बीवी से जवाब ना पाकर अपने चोदने की गति बढा दिया और कमरे मे थप थप थप थप थप की आवाजे होने लगी ।





शालिनी की भी चिखे तेज हो गयी और राहुल भी तेजी से अपना लण्ड हिला रहा था ।

जन्गीलाल उसके कूल्हो को पकडे हुए कस कस के चोदते हुए - बोलो ना जानू चुप क्यू हो

शालिनी - अह्ह्ह क्या बोलू उम्मममं सीईई उफ्फ्फ

जन्गीलाल - यही की मेरी जान को चुदवाने का आज बहुत मन था क्य्स अह्ह्ह

शालिनी फिर से चुप हो गयी तो जंगीलाल थोडा खीझा और कस कस कर शालिनी की चुत मे 8 10 बार लण्ड गहराई मे घुसेडा जिस्से शालिनी की हालात खराब हो गयी और जन्गीलाल गुस्से मे - बोल ना मादरचोद ,ये मेरी रन्डी बोल ना उम्म्ं आज चुदने का बहुत मन था क्या उम्म्ं

शालिनी दर्द से अक्दी हुई दरवाजे पर नजरे गडाये थी कि दरारो से एक तेज पिचकरी आधे कमरे म आ कर गिरी और शालिनी समझ गयी कि अब राहुल चला जायेगा ।

कुछ पल तक जंगीलाल कस कस के शालिनी के चुत मे बक बक करते हुए पेलता रहा और गालिया देता रहा लेकिन शालिनी ने चू तक नही बोला

फिर आखिर मे जब उसे मह्सूस हुआ कि उसका पति अब झड़ जायेगा तो - मुझे मुह मे चाहिये

जंगीलाल - पहले बोल जो मैने पुछा है





शालिनी झटके से उठकर दरवाजे की ओर पीठ करके खड़ी हो जाती है और उसके नंगी फैली हुई गाड़ को राहुल देख कर पागल हो जाता है और उसका लण्ड फिर से सिर उठाने लगता है

शालिनी जो कि इस शक मे थी कि राहुल चला गया होगा वो बडी अदा से अपने पति के लण्ड को मसल्ते हुए धीमी आवाज मे - बेटीचोद !! शान्ति से चोद नही सकता

ये बोलकर शालिनी वही बैठ गयी और अपने पति का लण्ड मुह मे भर लिया

शलिनि की बाते सुन कर जंगीलाल की हालत खराब हो गयी और थोडी ही चुसाई मे वो अपना सारा माल अपने बीवी के मुह मे गिराने लगता है ।

शालिनी मुह मे लण्ड को भरे हुए उसे निचोड रही थी कि दरवाजे पर हल्की सी चूँ की आवाज हुई और शालिनी फौरन अलर्ट हुई । वो समझ गयी कि राहुल अभी गया नही है ।

राहुल वही कमरे मे झाकता हुआ अपना लण्ड मसल रहा था ।





शालिनी ने अपने गालो को पिचकाते हुए लण्ड को सुरक रही थी और उसकी निगाहे अभी भी दरवाजे पर टिकी रही ।

फिर अच्छी तरह से लण्ड को निचोड़ कर वो खड़ी हूई और वापस से दरवाजे की पीठ कर लिया जिससे राहुल को फिर उसकी मा की नंगी गाड़ दिखने लगी ।

शालिनी अपनी उंगलिया चाटती हुई खड़ी हुई और मुस्कुराते- मै जरा साफ करके आती हू

ये बोलते हुए वो उसी हालत मे अपने नंगे चुतडो को हिलाती हुई दरवाजे की ओर बढ़ी कि जन्गिलाल अचरज से - अरे लोवर तो चढा लो , ऐसे ही बाहर जाओगी क्या ?

शालिनी आंख मारते हुए - हा , आपकी रंडी हू ना हिहिही

बस इतना कहने की देरी थी कि जन्गिलाल खुश हो गया और अपना अंडरवियर चढाते बिस्तर की ओर चला गया

और वही राहुल सतर्क होकर दरवाजे से हटकर दिवाल से लग गया

अगले ही पल दरवाजा खुला और शालिनी अपनी लोवर को उपर चढाते हुए बाहर निकली

राहुल उसके बगल मे खड़ा गहरी सासे ले रहा था ।

शालिनी ने फुसफुसाकर से उसको किचन की ओर चलने को कहा

राहुल खुश हुआ और लेकिन जब वो किचन मे पहुचा और बत्ती चालू हुई तो उसका चेहरा उतर गया क्योकि उसकी निगाहे अपनी मा के चुतडो पर ही टिकी हुई थी ।

शालिनी उसका उतरा हुआ चेहरा देख कर मुस्कुराई और उसको छेड़ती हुई बोली - सब ले लिया ना अब क्यू मुह लटका है तेरा

राहुल ने आंखे उठा कर अपनी मा का हस्ता हुआ चेहरा देखा तो उसकी भुनभुनाहट भरि हसी छुट गयी और वो जिद दिखाते हुए - आप इसको उपर क्यू कर ली हो ,, हा नही तो

शालिनी - क्या उपर कर ली हू

राहुल - ये लोवर

शालिनी आंखे नचा कर मुस्कुराती हुई - हा तो क्या वैसे ही खोल कर घुमू क्या

राहुल उखड़े हुए स्वर मे - लेकिन आप तो ऐसे ही खोल कर बाहर आ रही थी ना

शालिनी इतरा कर सिंक की ओर घूम गयी और अपने मुह हाथ धुलने लगी - मेरी मर्जी मै जैसे चाहू रहू , तुने ही कहा था कि मै जो चाहू कर सकती हू

राहुल - हा लेकिन

शालिनी - हा तो अगर मै जो चाहू कर सकती हू तो तु भी जो चाहे नही कर सकता क्या ?

राहुल अपनी मा की बाते सुन कर समझ गया कि ये एक खुला ऑफ़र था उसके लिए और एक ही पल मे उसका लण्ड फौलादी हो गया ।

अगले ही पल वो झट से घुटने के बल हुआ और अपनी मा के कूल्हो से लोवर खीच कर नंगी करता हुआ सीधा अपना मुह अपनी मे गाड़ के दरारो मे घुसा दिया

सब कुछ इतना तेजी से हुआ कि हड़बड़ाहट मे सिंक की टोटी तेज हो गयी और पानी के छीटे शालिनी के हाथो से टकरा कर उसके टीशर्ट पर पड़ने लगे और





राहुल की लपलपाती जीभ अपने गाड़ के सुराख पर रेंगता हुआ पाकर शालिनी अपने चुतडो को सख्त करते हुए आगे की ओर झुकने लगी ।

जिससे पानी उसके चुचो पर को भिगोने लगा

जल्दीबाजी मे किसी तरह शालिनी ने टोटी बन्द की लेकिन तब तक देर हो गयी थी ।

उसकी चुचिया भीग चुकी थी और निप्प्ल उसके जिस्म से चिपकी हुई टीशर्ट से बाहर झाक रही थी ।

शालिनी कसमसाई और अगले ही पल उसने राहुल के सर को झटक कर अलग किया

दोनो की सासे तेजी से बढ रही थी ।

राहुल उठकर खड़ा हुआ और हस रहा था उसके नथुने लाल हो चुके थे जैसे वो पुरा जोर देके अपनी मा के सख्त दरारो मे बिना आक्सीजन के फसा हुआ हो ।

शालिनी तेजी से उसकी ओर घूमी और अपना लोवर उपर खिचती हुई और मुस्कुराते हुए- शैतान नही का , तो यही सब तु चाह रहा था





शालिनी के घुमने पर राहुल की निगाहे उसके तने चुचो पर गयी जो भिगे हुए टीशर्ट मे चिपके हुए थे

राहुल की ललचाती निगाहे शालिनी अच्छे से देख रही थी और उसके चेहरे के कामुक भावो को भी वो पढ सकती थी ।

शालिनी - हो गया ना तेरा अब जा सो जा

राहुल थुक गटक कर मुस्कुरा रहा था और कभी अपनी मा तो कभी उसके नुकीले चुचे देख रहा था । बहुत सारी भावनाये एक साथ उसके जहन मे आ रही थी लेकिन वो क्या बोले उसे समझ नही आ रहा था और शालिनी को टेनसन था कि कही उसका पति आवाज ने दे दे उसको ।

क्योकि राहुल के साथ उसको कल क्या करना था उसने उसकी तैयारी कर ली थी इसिलिए आज की रात भर वो उसे और तड़पने के लिए छोड रही थी

शालिनी मुस्कुराती हुई घूमी और किचन से बाहर जाती हुई - चल अब बत्ती बुझा और सोने जा

राहुल ने कुछ नही किया बस मुस्कुरा वही खड़ा देखता रहा तो परेशान होकर शालिनी ने बत्ती बुझाइ और बोली - तुझे यही रहना है यही रह मै दरवाजा बन्द करके सोने जा रही हू

शालिनी अपने दरवाजे तक गयी लेकिन जब उसे राहुल के आने की आहट नही मिली तो वो किचन की ओर घूमी थी कि राहुल से टकरा गयी ।

राहुल दबे पाव उसके पीछे आकर खड़ा हो गया था

शालिनी ने कुछ बोलना चाहा उससे पहले राहुल ने अपने होठ उसके होठो से चिपका दिया और उसको अपनी बाहो मे भर लिया ।

शालिनी चौकी की राहुल दरवाजे पर ही ये क्या हरकत कर रहा है कही उस्का पति ना आ जाये

शालिनी कसमसाती हुई अपने होठ छुड़ा कर धीमी आवाज मे - क्या कर रहा है छोड मुझे ,तेरे पापा कमरे मे जाग रहे है अभी

राहुल ने बिना कुछ बोले अपनी मा के गरदन को चुमते हुए अपने हाथ पीछे ले जाकर लोवर की लास्टीक को फैलाते हुए नंगी गाड़ को मसलने ल्गा

शालिनी अपने बेटे का दोहरा प्रहार झेल ना सकी और उसकी सासे भारी होने लगी और उसके आवाज मे खुमारि सी बढने लगी । मदहोस लहजे मे धीरे से वो राहुल के पीठ पर अपने हाथ घुमाते हुए बोली - उम्म्ंम बेटा रुक जा ना , यहा नही तेरा पापा अह्ह्ह उम्म्ंम

राहुल ने बिना कुछ बोले अपनी ऊँगली को अपनी मा के गाड़ की दरारो मे रगड़ता हुआ उसकी गाड़ के सुराख को भेदने लगा जिससे शालिनी चिहुक कर अपने गाड़ सख्त करते हुए उंगलियो को छेद से दुर करने लगी तो राहुल ने अपनी उंगली को जोर देते हुए आगे बढाया और अपनी मा के कान के पास एक चुंबन किया

चुंबन का अह्सास पाते ही शालिनी ने अपना पुरा शारिर ढीला छोड दिया वही राहुल की ऊँगली कच्च से उसके गाड़ मे चली गयी

सीईई अह्ह्ह बेटा धीरे , सुखा है वो उम्म्ंं , शालिनी ने अपने बेटे की हरकत पर प्रतिक्रिया दी और फिर उसके कलाई को पकड कर अपने गाड़ से उसके हाथो की दुरी बनाते हुए - बस कर बेटा,, यहा नही





राहुल ने एक भी नही सुना और इस बार सीधा हाथ अपनी मा के भिगे हुए चुचो पर रखा और उन्हे मस्लते हुए अपने होठ वापस से अपनी मा से जोड लिये

शालिनी अब तक बहुत गर्म हो चुकी थी और राहुल के तपते होठो की गर्मी ने उसे भी परेशान कर दीया और वप उसके होठो को खिचते हुए चुबलाने लगी

राहुल भिगे हुए टीशर्ट के उपर से एक हाथ अपनी मा की चुचिया मसल रहा था और दुसरे हाथ से अब भी उसने अपनी मा के कूल्हो को जकड़ रखा था ।

फिर अगले ही पल बिना कोई हैरानी ने राहुल ने अपनी मम्मी से दुरी बनाई और कुल्हे को नचाते हुए उसको पीछे से जकड़ लिया ।

शालिनी को समझ नही आ रहा थ कि राहुल क्या करने की सोच रहा था उसके मन मे अपने पति को लेके डर बना हुआ था लेकिन वो राहुल की कामुक हरकतो से गर्म हुई जा रही थी ।

अभी शालिनी अपनी अवस्था जान्च रही थी कि इतने मे





राहुल ने फिर से उसकी चुचिया पीछे से दबोच ली और उन्हे मसलने लगा । उस्का तना हुआ लण्ड गाड़ पर सास ले रहा था ।

शालिनी की कसमसाहट बढ रही थी और वो अपने जिस्म को राहुल के उपर ही ढीला छोड चुकी थी । कि तभी राहुल ने उसका टीशर्ट खिच कर उपर कर दिया और उसकी नंगी चुचिया उसके हाथो मे आ गयी ।

अपनी मा के रसिले पपीते जैसी भारी चुचिया राहुल के हाथो मे नही समा रही थी





उसने अपनी दोनो हथेली एक साथ अपने मा के तने हुए निप्प्लो पर घुमाई की शालिनी उपर से निचे तक मचल उठी और राहुल वापस से उसकी दोनो चुचिया पकड के मस्लते हुए वापस से शालिनी को अपनी ओर घुमाया और झुक कर उसके निप्प्ल को चुबलाता हुआ दुसरे हाथ से अपना लण्ड भी बाहर निकाल दिया

शालिनी ने जैसे ही अपनी जान्घो पर राहुल के सख्त लण्ड के स्पर्श को मह्सूस किया तो वो टटोलते हुए उसके तने को जकड़ ली औए भीचने लगी ।





अपनी मा के हाथो का स्पर्श पाते ही राहुल तन कर खड़ा हो गया और उसकी आंखे बंद हो गयी , भले ही उसके हाथो मे 36DD की दोनो भारि भारी खर्बुजे जैसी चुचिया लटक रही थी लेकिन उसकी मा के एक स्पर्श ने राहुल को मूरत कर दिया था ।

शालिनी ने जैसे ही ये मह्सुस किया वो खिल उठी और जैसे उसे इस खेल मे अब अपनी चाल चलाने का मौका मिल गया हो

उसने अपनी कामुकता पर जोर देते हुए अपने नुकीले नाखुनो से राहुल के लण्ड की निचली नसो को खरोचा तो राहुल पूरी तरह कापने लगा

उसके पैर जवाब देने लगे थे वो हिल रहा था जैसे किसी अपाहिज की बैशाखी छिन ली गयी हो

राहुल ने हाथ आगे बढा कर अपने मा के कन्धे थाम लिये और शालिनी उसके लण्ड को आगे की ओर भीचने लगी

अब सारा खेल शालिनी के काबू मे आ चुका था

राहुल तेज सासे लेता हुआ अपने एड़ियो के बल खड़ा हुआ जा रहा था और लण्ड की नसे और फुल रही थी

अपनी कपकपाती आवाज मे राहुल बस इतना ही बोल पाया - आह्ह मम्मी चुसो ना उम्म्ंम





शालिनी समझ गयी कि आज के लिए इसको इतना ही चाहिये और अगले ही पल शालिनी वही बैठ गयी और अपना मुह खोलते ही राहुल का आधा लण्ड मुह मे भर लिया ।

राहुल के जैसे ही अपने मा के ठंडे नाजुक होठो का स्पर्श मिला वो निचे से उपर तक सिहर उठा और लड़खड़ा कर उसने अपनी मा के सर को थाम लिया





राहुल की बेताबी ज्यादा देर तक रुक ना पाई और कुछ ही देर मे वो अपनी मा के मुह झड़ने लगा

उसने अपना पुरा लण्ड मा के गले मे उतारते हुए एड़ियो के बल खड़ा हो गया और आखिरी झटके तक लण्ड को घुसाये रखा

शालिनी ने भी अच्छे से अपने बेटे के लण्ड को निचोड़ा और फिर वो खडी हुई ।

राहुल वही दिवाल से लग कर सासे भरने लगा और शालिनी ने मुस्कुरा कर उसके गालो को चूमते हुए - अब सो जायेगा ना

राहुल हाफते हुए स्वर मे - हा थैंक यू मम्मी

शालिनी - जा अब सो जा

ये बोलकर शालिनी ने अपना टीशर्ट निचे किया और कमरे मे चली गयी ।

दरवाजे बंद होने की आहट से झप्किया लेता जन्गीलाल चौक गया और उसकी निगाहे शालिनी के भिगे हुए टीशर्ट पर गयी और उसने मुस्कुरा कर इशारे से कारण पूछा तो शालिनी ने बिना कोई जवाब दिये अपनी भीगी हुई टीशर्ट निकाल दी

अपनी बीवी के नंगी चुचिया देख कर जंगीलाल सारे सवाल भुल गया और दोनो एक बार भी चुदाई के खेल मे शामिल हो गये ।

जारी रहेगी
 
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अपडेट रुक के मिलेगा
 
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अपडेट 167 बी

लेखक की जुबानी

CHAMANPURA

रात ढल चुकी थी और सोनल के घर सारे लोग अपने अपने कमरे मे जा चुके थे ।

लेकिन सोनल के कमरे मे काफी समय से हीही ठिठी भरी फुसफुसाहट जारी थी ।

निशा की शैतानी अब अमन के लिए भारी पड़ गयी थी ।

जिस तरीके से निशा ने अमन को लपेटा था वो बेबस था । उस बेचारे को ये भी नही पता था कि उसको परेशान करने के इस खेल उसकी प्रेमिका सोनल भी शामिल थी ।

दोनो बहने आपस की मिली भगत से अमन को परेशान किये जा रही थी ।

और आज सुबह की सारी बातें जब निशा ने सोनल को बताई तो भी मजे ले ले खुब ठहाके लगा रही थी ।

निशा खिलखिलाती हुई - देखा मैने कहा था ये सारे लड़के एक नम्बर के ठरकी होते है और तेरा अमन हिहिहिही

सोनल - हा यार उसको जबसे तुने अपने दूध दिखाये है वो तो वीडियो काल पर वही देखने की जिद करता रहता है और कितना मोटा है उसका लण्ड यार

निशा हसती हुई - तु कहे तो कल नाप लू क्या हिहिहिही

सोनल निशा को आंखे दिखाती और अगले ही पल हस कर - तु दुर रहियो उससे , कोरा माल है उसकी सील तो मै भी तोडून्गी हिहिहीही

निशा - क्या यार थोडा तो मजे ले लेने दे

सोनल - करना लेकिन उपर उपर से , बस तु उसकी आग भड़का ताकी सुहागरात पर वो मुझे ऐसा पेले ऐसा पेले कीहह

सोनल अपनी चुत खुज्लाती हुई - उह्ह्ह्ह माअह्ह्ह्ह देख ना सोच के ही गीली हो गयी

निशा मुस्कुरा कर उसकी आंखो मे देख कर - रुक ना मै पोछ दे रही हू

ये बोलकर निशा सरककर सोनल के जान्घो के बीच गयी और उसके जांघो से चिपकी शार्टस को फैलाया तो उसे सोनल की चुत का एक हिस्सा दिख्ने लगा

फिर क्या अगले ही भर निशा की चटोरी जीभ सोनल की बुर पर चलने लगी और सोनल की जान्घे अकड़नी शुरु हो गयी ।


राज की जुबानी

बुआ की ठुकाई के बाद मै शाम को अपने कमरे मे चला और अगले दिन की सुबह ही मुझे निकलना था ।

बुआ के घर मे अरुण को लेके जो सम्स्या थी वो सबर और संयम के साथ साथ वक़्त लेके फुरसत से ही ठिक हो सकती थी ।

लेकिन इस बीच के वक़्त मे मेरी जिम्मेदारी बन गयी थी कि अरुण को थोडा सतर्क करु और उसको पढाई पर फोकस करवा कर सेक्स से थोडी दुरी बनाऊ ।

लेकिन इनसब मे बीच की कड़ी थी तो मीना ।

उसको मुझे घर जाने से पहले कुछ सबक सिखाने थे ताकि वो अपनी हवस के लिए अरुण को परेशान ना करे ।

इसिलिए 2 वजे के बाद जब अरुण घर आया तो खाना पीना करने के बाद मैने उससे बंद कमरे मे कुछ बात की ।

तो मुझे पता चला कि बड़े फूफा लगभग रोज रात मे उपर छोटी बुआ के कमरे मे जाते है और इस मीना ने अरुण को अपने हवस मे फासने के लिए अरुण की कमजोरी का फायदा उठाती है

वो उससे मा बेटे का रोल प्ले करके अपनी प्यास बुझाती है और कभी अगर अरुण का मन ना तो उसको डराती धमकाती है जिससे अरुण को मजबूरि मे उसके साथ सेक्स करना पड़ता है ।

अरुण ने मुझे बताया कि डर की वजह से वो रात मे जल्दी खा कर भी कमरा बंद करके सो जाता है और वो हर रोज इसी ताख मे रहती है कि जब भी अरुण अपनी मा की चुदाई देखने के लिए छत पर जाये तो वो उसके साथ अपनी मनमानी ले ।

अरुण की सारी बाते समझने के बाद मै समझ गया था कि मुझे आगे क्या करना है !

रात ढलने का मुझे बेसबरी से इन्तजार था और खाना खाने के बाद मै और अरुण अपने कमरे मे चले गये ।

योजना के अनुसार करीब 10:30 बजे तक मैने अरुण का एक ड्रेस पहन लिया ।

जो कि एक लाल टीशर्ट और सफेद शार्ट था ।

रंग जानबुझ कर मैने चटक चुना ताकि अन्धेरे मे मीना मुझे देखे तो उसको यही भरम हो कि मै अरुण हू ।

फिर समय देख के मै दबे पाव दरवाजा खोला और कमरे से बाहर आकर देखा कि मीना हाल मे ही एक चौकी पर करवट लेके सोयी हुई है ।

मैने जानबुझ कर हल्की फुल्की आहट करते हुए जीने की ओर बढा और मेरा शक सही निकला , जैसे ही मैने दो चार सीढिया चढ़ी थी कि मिना के चूडियो की खनक मुझे मिली ।

मै समझ गया कि उसे भनक लग गयी है ।

मै बिना कोई आहट के आहिस्ता आहिस्ता उपर चला गया और बुआ के कमरे मे खिड़की के पर्दो के बीच से नजर मारी तो मेरी हालत खराब हो गयी थी ।

कमरे मे कम्मो बुआ पूरी नंगी होकर घुटनो के बल बैठी हुई थी और मेरे दोनो फूफा अपना मोटा मोटा मुसल निकाल कर कम्मो बुआ के चेहरे पर रगड़ रहे थे

बुआ के चेहरा बुरी तरह से लाल हो रहा था और उनकी भुखी आंखे उनके रन्डीपने को

साफ साफ दिखा रही थी ।





वो दो मोटे मोटे लण्ड के तने को थामे हुए उन्के सुपाड़े को अपने होठो पर रगड़ रही थी और उनकी बजबजाती थुक से दोनो सुपाडे चमक रहे कि तभी बुआ ने बड़े फुफा का लण्ड मुह मे भर लिया औए गुउऊ गुउऊ करते हुए गले तक ले गयी।

मै पूरी तरह हिल गया । शार्ट मे मेरा लण्ड पुरा तन चुका था और मै उसको पकड कर भीच रहा था ।

मेरी सासे गहरा रही थी ।

कि तभी मेरे हाथ पर एक नरम हाथ का स्पर्श मिला और एक मादक सी सिसकी भरी आवाज ने मेरे कानो को छूआ- क्यू अरुन बाबू आज बहुत दिन बाद आये बाहर उम्म्ंम्ं मम्मी की याद आ रही थी क्या अह्ह्ह क्या मस्त तना हुआ लग रहा है लण्ड





मीना की मादक आवाज और जिस तरह से शार्ट के उपर से वो मेरे लण्ड पर नरम हाथो की हथेली को सख्ती से घीस रही थी मै पूरी तरह गनगना गया ।

मीना ने अब तक मेरा चेहरा नही देखा था वो अभी भी मेरे पीछे ही खड़ी थी और मेरा मुसल पकडते हुए बडबड़ा रही थी - आह्ह अरुण बाबू कभी इस मा की याद नही आती क्या अह्ह्ह उम्म्ंम मुझे क्यू नही मान लेते हो अपनी मा ,,, आपकी छिनाल मा कभी अपना बुर नही खोलेगी आपके सामने ।

मीना अपने चुचे मेरे पीठ पर घिसती हुई - आह्ह देखो कैसे भुखी रंडी के जैसे गले मे लण्ड घोट रही है उम्म्ंम्ं

मीना की आवाज सुन के मैने अंदर नजर डाली तो नजारा बदल चुका था अब क्म्मो बुआ के मुह मे छोटे फुफा का लण्ड था और बडे फूफा क्म्मो बुआ के कन्धे -गले के पास अपना लण्ड घिस रहे थे ।

इधर मेरा ध्यान बाट कर मीना ने लपक कर मेरे शॉर्ट्स मे हाथ घुसा दिया और मेरे तने हुए फौलादी लण्ड को हथेली मे भर लिया

मेरे लण्ड की तपिस और उसकी मोटाई से मीना के बदन मे आग लग गयी और मुझे पीछे से पकड़ कर दोनो हाथ आगे करके मेरे लण्ड बाहर निकालकर उसको मसलने लगी ।

मै भी उसके अनोखे अन्दाज से मदहोश होने लगा

मीना- उफ्फ्फ आज क्या हुआ है आपको अरुण बाबू ,, आपका लण्ड तो अह्ह्ह माआअह्ह

मै समझ गया कि अब समय आ गया है कि मीना को चौकाया जाये और उसी समय मै मीना की ओर घुमगया

कमरे से आती हल्की रोशनी मे मीना ने मेरे चेहरे को देखा और चौक के अलग हो गयी ।

अपने हाथो मे लिभड़े हुए मेरे प्री-कम को जल्दी जल्दी अपने कूल्हो पर पोछते हुए - र राज बाबू आप ,

मैने लपक के उसकी कलाई पकड़ी और जीने की ओर ले जाता हुआ - हा मै

मीना मेरे ह्थेली मे अपनी कलाई छूडाती हुई - अह्ह्ह राज बाबू छोडिए मुझे प्लीज





मै उसको अपनी ओर खिच के उसके कुल्हे मसलता हुआ - ओह्ह हो कहा जाना है ,, जिसके लिए आई हो वो लेलो ना ,

"लो इसको पकड़ो ना आज बहुत फुला हुआ है" , मैने जबरदस्ती करते हुए मीना के हाथ को अपने तने हुए लण्ड पर रखा

मीना अपने पंजे को मुठी बना कर लण्ड से अपने हाथ को दुर कर रही थी- आह्ह प्लीज राज बाबू मुझे जाने दो ना

मै - नही नही , मुझे भी आज अपनी मा चोदनी है आह्ह मम्मी क्या मस्त चुचे है तेरे उम्म्ंम

ये बोलके ब्लाउज के उपर से मैने उसके चुचे मसल दिये

मेरे कड़े हाथो का स्पर्श पाते ही मीना मचल उठी

मैने उसका पल्लू गिराया और पीछे से उसके पपीते जैसे चुचे को ब्लाउज के उपर से ही दबोच लिया

मेरे दोनो सख्त हथेलीयो की रगड़ से उसके निप्प्ल मे तन गये और मीना बुरी तरह से मेरे बाहो मे हाफने लगी ।

मगर अब भी वो मेरी बाहो से आजाद होना चाह रही थी तो - मै देख मीना , अरुण ने मुझे सब बता दिया है और अगर मै चाहू तो तेरि करतुत बडी बुआ को बता कर तुझे इस घर से निकलवा सकता हू


मीना मेरी बाते सुन के शान्त हो गयी और रुआस होती हुई - नही बाबू जी प्लीज ऐसा कुछ मत करना , बडी मुश्किल से मुझे यहा काम मिला है मै आपके हाथ जोड़ती हू ।

मिना गिडगिडाती हुई - मै अब आगे से कभी से अरुण बाबू को तन्ग नही करूंगी

मै - और इस घर मे जो चल रहा है वो किसी और को तो नही ना कहती है तु

मीना सकपका कर - न न नही किसी को नही ,, यहा मुझे बहुत प्यार और इज्जत मिली है बस पति बाहर होने के कारण मैने अरुण बाबू को , प्लीज माफ कर दो

मीना की बाते सुन कर मैने उसपर से पकड ढीली कर दी फिर उसको सामने लाके - तुम्हारी सारी बाते मै मान ले रहा हू लेकिन

मीना अपने आसू पोछते हुए - लेकिन क्या राज बाबू

मै मुस्कुरा कर - क्या तुम मेरे साथ नही कर सकती हो एक बार ,, प्लीज

मेरी गुजारिश भरी बाते सुन के मीना खिल उठी और शर्मा कर मुस्कुराते हुए- धत्त नही , मै आपसे कैसे ?

उसकी शर्माहट ने मुझे मेरा जवाब दे दिया था और मैने उसको वापस से खीच कर अपनी बाहो मे भरा और उसके गाड़ दबोचते हुए - प्लीज ना मीना मान जाओ ना ,

मीना नजरे निचे किये हुए मेरे बाहो मे सिम्टी हुई थी और मुस्कुरा रही थी

मैने उसकी ठूढी उठाई और हौले से अपने होठ उसके होठो से जोड दिये

एक ठंडी सी सिहरन हमारे जिस्म मे फैल गयी और उसने मुझे अपनी बाहो मे कस लिया

उसके नरम रसिले होठो की मिठास मेरे मुह मे घुलने लगी थी और धीरे धीरे उसकी सासे भारी हो रही थी ।

उसने मेरे पीठ पर अपने पंजे चलाने शुरु कर दिये थे और उनकी खसोट से वो मुझे अपनी ओर खीची जा रही थी ।

मैने भी उसकी नंगी कमर मे हाथ फिराया और उसके नरम नरम कूल्हो को मसलना शुरु कर दिया । जिस्से वो आगे की ओर चढ़ते हुए अपनी चुत को मेरे लण्ड के उपर घिसने की कोसीस करने लगी ।

बुर पर लण्ड की चुभन और गाड की दरारो को चौड़ा करती मेरी ऊन्ग्लियो मे उसकी बेचैनी बढा दी और उसने हाथ बढा कर मेरे लण्ड को एक बार फिर अपनी नाजुक हथेली मे भर लिया

जैसे जैसे मीना के हाथ मेरे लण्ड पर कस रहे थे वैसे वैसे मेरी भी सासे भारी हुई जा रही थी और इस दौरान करीब 4 5 मिंट तक चली एक लम्बी चुंबन से हमारे होठ अलग हुए और हम दोनो ने एक साथ अपने सीनो के सासे भरी और वापस से एक गहरा समूच करने लगा

मैने अपने हाथ को उपर ले आया और उसके ब्लाऊज के बटन खोलने लगा और वो लगातार मेरे लण्ड भिचे जा रही थी । मैने ब्लाउज खोलते हुए उसकी ओर बढने लगा और वो मेरे लण्ड मसलते हुए पीछे दिवाल की ओर हटने लगी ।

फिर आखिरी बटन खुलते हुए उसके 34DD के मदमस्त चुचे उछ्ल कर बाहर आ गये और मैने बिल्कुल भी देर ना करते हुए झुक कर दोनो हाथो से उसके चुचे पकडते हुए निप्प्ल को मुह मे भर लिया

अपने चुचियो की नसो को निचुडता पाकर मीना अकड़ गयी और दिवाल से टेक लेते हुए आहे भरने लगी ।

मै झुक कर उसकी चुचीयो को मसल मसल कर चुस रहा था और वो मेरे सर को अपने छाती पर दबाए जा रही थी साथ ही उस्का एक हाथ अभी भी मेरे लण्ड को सहला रहा था ।

गर्मी हम दोनो के जिस्म मे बढ रही थी और उससे कही ज्यादा मेरे लण्ड मे जलन होने लगी थी ऐसे मुझे मीना से अलग होते हुए उसे निचे बिठाना पड़ा ।

मुस्कुरा कर उसने भी मेरा प्रस्ताव स्वीकार किया और घुटनो के बल होते हुए लण्ड को पकड कर मुह मे भर लिया ।





एक लम्बी आह भरते हुए मैने भी मीना के सर को पकड कर उसके मुह मे पेलना शुरु कर दिया ।

उसकी चुचिया लटकती हुई हिली जा रही थी ।

अभी भी मेरे जहन मे बुआ को वो हवस से भूखा चेहरा नाच रहा था और उनकी मादक सिस्किया भी मेरे कानो मे आ रही थी ।

मै समझ गया कि अगर उनकी सिसकिया मेरे तक आ सकती है तो मीना की सिसकिया भी वहा तक जा सकती है

इसिलिए मैने मीना के मुह से लण्ड निकाला और उसको खड़ा करता हुआ - यहा नही कर सकते यहा आवाज जा सकती है

मीना ने सवालिया नजरो से मुझे देखा

मै - चलो तुम्हारे कमरे मे

मीना मुस्करा उठी और जल्दी जल्दी अपना ब्लाऊज बन्द करने लगी तो मैने उसको रोकते हुए- अरे रहने दो ये सब जल्दी चलो

वो थोडा इतराई और फिर हम दोनो निचे उसके कमरे मे चले गये ।

हाल मे जिस चौकी पर मीना सोयी हुई थी उसी जस्ट बगल मे एक कमरे मे हम दोनो आ गये थे ।

बंद कमरे मे हल्की रोशनी वाली बल्ब चालू थी और सब कुछ नीला नीला ही दिख रहा था ।

मैने देर ना करते हुए मीना को पकड़ा और उसके ब्लाऊज को उसके जिस्स्ं से अलग कर दिया और उसकी साड़ी भी कमर से अलग करते हुए वापस से उसको बाहो मे भर लिया ।

थोडा उसकी नाजुक चुचियो को मरोडा और लण्ड को पेतिकोट के उपर से ही उसकी चर्बीदार गाड़ की दरारो मे भेदने लगा

मीना कसमसाइ और मैने उसके पेतिकोट कि डोरी खोल दी । वो तुरन्त सरक के उसके पैरो मे चली गयी और मीना ने जैसे ही मेरे सुपाड़े की तपिश अपने ठन्डे चुतडो पर महसूस की वो मेरी बाहो मे सिमट गयी ।

उसके गाड़ के गाल सख्त हो गये और मैने अपने हाथ से आगे की ओर उसकी बुर को टटोला तो झाटो से भरी पिचपिचाती बुर के होठ मेरे उंगलियो को स्पर्श हुए ।

सही अंदाज पाते ही मैने अपनी हथेली को उसकी बुर पर मसला और उंगलियो का दबाव बनाया तो उसकी चुत मेरे उंगलियो पर बजाबजा उठी

वही मीना अकड़ कर मेरे लण्ड को मजबूती से थामते हुए मसलने लगी ।





अभी भी मेरा हाथ उसकी नरम नरम चुची को मिज रहा था और

मीना मेरा लण्ड मसल्ती हुई तेज आहे भरते हुए मेरी बाहो मे सिसकिया ले रही थी - अह्ह्ह राज बाबू अब और नही उम्म्ंम मुझे चाहिये उम्म्ंम्ं अह्ह्ह सीईई डाल दो ना

मै मुस्कुराया - क्या चाहिये उम्म्ं

मीना मेरे आड़ो को टटोलकर मेरे लण्ड की चमडी आगे पीछे करती हुई - येईह्ह चाहिये उम्म्ंम ये बोल कर वो तेजी से मेरे घूम गयी और लण्ड को पकड कर अपनी चुत के मुहाने पर दरने लगी ।

मैने भी उसकी गाड़ को पकड कर उसको अपनी ओर खीचा और उसके चुत के फाको को रगड़ते हुए उसके जांघो मे पेलने लगा





हर घिसाई के साथ मेरा सुपाडा और फुल रहा था जो अब चुत के साथ साथ उस्के गाड़ सुराख को छेड़ रहा था

वही मीना मेरे लण्ड की सतहो पर अपनी देह का पुरा भार डालती मानो बुर को लण्ड पर नही किसी फौलादी पाइप पर घिस रही थी और मै उसके नुकीले चुचे मुह मे लेके चुबला रहा था

मीना - अह्ह्ह घुसा दो ना बाबू उह्ह्ह प्लीज उह्ह्ह ना डालो ना

मै उसकी बेताबी समझी और उसको पकड कर बिसतर पर लिटाते हुए उसकी जांघो के बीच गया।

फिर अपना लण्ड सेट कर एक करारा धक्का दिया । मेरा लण्ड उसके चुत को फैलाते हुए पुरा का पुरा जड़ मे घुस गया

मीना- अह्ह्ह्ह माआह्ह्ह उम्म्ंम्ं बहुत बड़ा अह्ह्ह

मैने देर ना की और घुटनो के बल होते हुए अपने कमर पटकने शुरु कर दिये

हर करारे झटके के साथ मीना की आंखे और बुर दोनो फैल जा रही थी

उसकी झड़ी हुई चुत से पच्च पच्च की आवाजे आने लगी थी ।

लंड इतनी चिकनाई से अन्दर बाहर हो रहा था जैसे इंजन का पिस्टन

फचर फचर और चौकी की चु चू मीना के तेज सिस्कियो मे दब सी गयी थी ।

मीना- आह्ह हा ऐसे ही उह्ह्ह माअह्ह उम्म्ं बहुत दिन बाद ऐसा लंड अह्ह्ह मीईइलाआह हैई अह्ह्ह उह्ह्ह और पेलो बाबू और हुमच के चोदो अह्ह्ह





मै उसके चुत मे सटासट चोदते हुए - क्यू अरुण का लण्ड इतना मजेदार नही है क्या अह्ह्ह उम्म्ं

मीना - आह्ह वो तो अभी बच्चा है

मै - अच्छा फिर किसके लण्ड की याद आ गयी उम्म्ंम

मीना मुस्कुराई और सिसकिया लेने लगी

मै - बोल ना साली चुप क्यू है बोल बहिनचोद उम्म्ंम तेरा पति तो भड्वा होगा हि ये मुझे पता है क्योकि अगर वो चोद पाता तो तुझसे दुर थोडी ना रहता क्यू सही है ना

मीना मुस्कुरा कर आहे भरते हुए - लण्ड ही नही दिमाग भी ब्डा है आपका बाबू ओह्ह्ह सही कह रहे हो उम्म्ंम सीईई हा ऐसे ही और घुमाओ अंडर अह्ह्ह आह्ह ऐसे ही उम्म्ं

मै - बोल ना तु

मीना- हा सही कह रहे हो आप ,,मेरा पति किसी काम का नही है , ना पैसे कमाने मे ना ही चोदने मे । इसिलिए तो मुझे काम के लिए यहा आना पड़ा

मै उसके बुर मे लण्ड को गहराइ मे ले जाता हुआ - तो वो तगडा लण्ड किसका था बोल ना साली

मीना मुस्कुरा कर - मेरे जीजा का उह्ह्ह्ह सीई

उसकी बाते सुन्कर कर मुझे और भी जोश आ गया

मैने और कस कस के पेलने लगा

मै - सिर्फ जीजा का या और भी कोई है उम्म्ं

मीना- हा जीजा और उनका एक दोस्त है उम्म्ंम्ं दोनो बहुत ही उह्ह्ह्ह

मै - फिर तो तेरी दीदी भी उसके पति के दोस्त से उम्म्ंम

मीना - आह्ह नही नही वो बहुत सीधी है उम्म्ं अह्ह्ह

मै कसकर उसके बुर मे झटके देता हुआ - और तु , तु मादरचोद एक नम्बर की रन्डी है क्यू

मिना - आह्ह हा बाबू मुझसे नही रहा जाता है इसिलिए तो अरुण बाबू से उह्ह्ह और मैने कितनी कोसिस की बड़े मालिक से कुछ हो जाये लेकिन

मै - लेकिन क्या

मीना- वो खुद को परिवार और समाज मे बहुत सीधा दिखाते है लेकिन अपनी ही भाई की उह्ह्ह आप तो देखे ही हो ना


मीना ने वापस से जैसे उस कमरे की याद दिलाई मेरा रोम रोम सिहर उठा और मैने कस कस के उसके बुर की गहराई मे लण्ड उतारने ल्गा

मीना को जैसे मेरी कोई कमजोर नस मिल गयी हो

मीना- आह्ह आपको भी अपनी बुआ पसंद है ना उम्म्ं

मै उसकी बातो से और भी उत्तेजित होने लगा था

मीना- अह्ह्ह काश इस समय मेरी जगह आपकी कम्मो बुआ होती तो क्या करते बाबू आप

मै - साली चुप कर बहुत बोल रही है ,वो होती तो उसकी भी ऐसे ही ऐसे ही अह्ह्ह अह्ह्ह

मीना- अन्दर नही बाबू अंदर नही





मैने भी अपना होश सम्भाला और जल्द से लण्ड बाहर निकालते हुए उसके पेट पर झडने लगा और वो मेरा लण्ड पकड कर मस्लती हुई उसे नीचोड़ने लगी


मै - तु साली बहुत बोलती है बहिनचोद

मीना खिलखिलाती हुई - तो मतलब आप भी अपनी बुआ के हिहिहिही

मीना का हस्ता चेहरा देख कर मै भी हस पड़ा और उठ कर अपने कपडे पहनने लगा

मीना- क्या बस एक ही बार

मै हस कर - और चाहिये

मीना ने हा मे सर हिलाया

मै - इस बार पीछे से भी लूंगा चलेगा फिर

मीना ने शर्माहट भरी मुस्कुराह्ट से अपनी सहमती दे दी और हम दोनो अगले राउंड की तैयारि मे लग गये ।

जारी रहेगी
 
कमेंट की बाढ़ बारिश आये या ना आये

अपडेट तो मिलता ही रहेगा :declare:



अगला अपडेट कुछ ही देर मे मिलेगा
 
अपडेट 168

लेखक की जुबानी

JAANIPUR

आने वाली सुबह सभी के लिए एक नया जोश और एक नये अह्सास के साथ शुरु होने वाली थी ।

वो चाहे कमलनाथ हो या रीना

शालिनी हो या राहुल

निशा हो या अमन

या फिर अपना राज ही क्यू ना हो ।

सब अपने अपने सपनो को हकिकत बनाने की आश लिये अपनी अपनी दिन चर्या मे भीड़ चुके थे ।

कमलनाथ का लण्ड आज सुबह से ही फड़के जा रहा था । लण्ड की नसे इतनी कसावट ले चुकी थी कि आज उसका पेसाब उतरना दुभर हो चुका था । तीन चार गहरी सासे लेने और सुपाडे तेज जलन भरी ऐठन के साथ उसकी पिचकारी छूटी तब कही उसे चैन आया ।





पेसाब के दौरान उसने अपने लण्ड के बुनियादी हिस्सो पर हाथ फेरा तो छोटे छोटे झाटो की चुभन ने उसे थोड़ा संकुचित किया और उसे फौरन अपनी नाजुक और कोमल बहु रीना का ख्याल आया

कमलनाथ मन मे - ओह्ह नही नही ऐसे तो मेरे बहु के हाथो मे चुब जायेंगे , इनको साफ कर लेना चाहिए ।

इसी सोच के साथ कमलनाथ फौरन बाथरूम से बाहर आया और ड्रावर के बक्से खोल खोल कर अपना सेविंग किट खोजने लगा ।

उसने रज्जो से पुछना चाहा लेकिन उसे ख्याल आया कि वो तो नहाने के लिए छत पर जा चुकी है क्योकि उसे कपडे भी धोने होते है सुबह ने ही ।

इधर कमलनाथ बाथरूम आलमारी और कमरे को उतेने जा रहा था और वही उपर के बंद बाथरूम मे रज्जो एक प्लासिक सीट पर मैकसी को पेट तक उठाए निचे से पूरी नंगी होकर अपनी जान्घे फैलाये बैठी हुई अपने पति के ही सेविंग कीट का यूज़ करके अपने भोस्ड़े के बाल साफ कर रही थी ।





अच्छे से अपनी चर्बीदर बुर को साफ करने के बाद दो बार रज्जो ने साबुन से अपने चुत को मल मल के चिकना करके सामने सीसे को अपनी बुर पर फोकस करके देखते हुए - उम्म्ंम अब ठिक है

"जमाई जी को मेरी ये गुलाबी होठ चूसने मे कितना मजा आता है मै ही जानती हूँ " , रज्जो ने अपनी दो उंगलियो से अपने बुर के फाको को फैलाते हुए बड़बड़ाइ और वही उंगलियाँ वापस से चुत मे घोप दिया ।

रज्जो सिस्कती हुई - अह्ह्ह जमाई जी की याद आते ही उह्ह्ह उम्म्ंम ना जाने मुझे क्या होने लगता है उम्म्ं

और अगले कुछ ही देर मे वो अपनी बुर मे उंगलिया पेलती हुई कमर उठा उठा कर झड़ने लगती है ।

इस दौरान वो अपनी ढ़्चकति चुत को सीसे मे देख रही थी और अपनी रसमय हुई उंगलियाँ अपने बुर पर पोछती हुई - उम्म्ंम आज तो ऐसे ही अपनी गीली चुत जमाई जी के मुह पर रखुंगी , अह्ह्ह





फिर रज्जो ने अपनी कलपना मे खोये हुए अपने जांघो को कसते हुए अपनी बुर को निचोड़ा और सामने सीने मे उसकी टपकती हुई बुर चमक रही थी ।

वही कमलनाथ पुरा कमरा उथल पुथल कर उपर के बाथरूम तक आ गया और दरवाजा पिटते हुए - रमन की मा , मेरा सेविंग किट है या यहा उपर

अपने पति की आवाज से पहले तो रज्जो चौक सी गयी लेकिन फिर उसे ध्यान आया कि उसका पति ही तो है हिहिही

रज्जो - हा मै यूज़ कर रही हू

कमलनाथ - तुम क्यू कर रही हो उसको

रज्जो अपने पति का सेविंग कीट धुल कर उठी और अपनी मैक्सि गिरा कर दरवाजा खोलती हुई - ये लो हो गया

कमलनाथ - लेकिन तु क्यू यूज़ कर रही थी इसे

रज्जो हस कर - तो आप क्या चाह रहे हो वहा शादी वाले माहौल मे भी मेरे ये रेशमी बाल मेरी पेतिकोट से झांकते रहे हिहिहिही

रज्जो की बात सुन कर कमलनाथ झेप कर हस दिया - तुमसे तो कुछ पुछना भी बेकार है, अच्छा नहा ली हो तुम

रज्जो - नही बस जा रही हू , क्यू आपको भी आना है क्या हिहिहिही

कमलनाथ - नही मुझे दाढ़ी बनानी है और इसे धुल दी हो ना

रज्जो शरारत भरी मुसकुराहत से - नही , आज तो मैने इसे अपने भोस्ड़े ने बोर दिया है तो अब ब्ताओ ब्नाओगे दाढ़ी इससे हिहिही

कमलनाथ रेजर के हैंडल को मुह मे लेके चुसता हुआ - किधर इधर से डाला था ना

रज्जो अपने पति की बेशरमी भरी हरकत से शर्मा गयी और उसे दरवाजे से हट कर नहाने के लिए बाथरूम का दरवाजा भिड्का दिया और कमलनाथ भी मुस्कुराता हुआ निचे आ गया ।

और बाथरूम मे जाकर अपना जांघिया निकालते हुए कमोड पर बैठ कर अच्छे से अपना लण्ड चिकना किया और फिर नहा धो कर नास्ते के लिए निचे हाल म आ गया ।

अखबार पढते हुए उसकी निगाहे किचन मे खड़ी अपनी बहु रीना के कूल्हो पर जमी थी । जिसपे कसी हुई साड़ी की सीलवटे उसके चुतडो को और भी उभारे हुए थी ।

कुल्हे से उपर रीना की गोरी चिकनी कमर मे फसा हुआ साड़ी का पल्लु कमलनाथ को और भी आकर्षित कर रहा था । खुली कमर से ज्यादा वो रीना के साड़ी से छिपा हिस्सा देखने को व्याकुल था ।





पीछे ब्लाउज की डोरी की लटकन रीना के उभरे हुए चुतडो को छू रही थी ।

बालो के जुड़े से उसकी सुराही दार गरदन की कामुकता साफ झलक रही थी जिस को चुमने को कमलनाथ परेशान हुआ जा रहा था ।

कमलनाथ अपने सपनो की दुनिया मे खोया हुआ था कि तभी सीढियो से खट खट की आवाज के साथ रज्जो ने निचे उतरते हुए रीना को आवाज दी - अरे बहु नासता बन गया कि नही ,, बस छुट जायेगी मेरी ।

रज्जो की आवाज सुनकर पहले कमलनाथ ने फैली हुई आंखो से अपनी बीवी को देखा जिसके मोटे मोटे चुचे सीढियो से निचे आते वक़्त उछल रहे थे और उसके नेवी ब्लू रंग की चन्देरी साडी से बाहर झांकती चर्बीदार नाभि के छेद पर भी बदलाव हो रहे थे ।

कमलनाथ ने थुक गटक कर रज्जो को निहारे जा रहा था कि वही रीना ने भी अपनी सास को जवाब देते हुए दौड़ कर किचन से बाहर निकाली - जी मा जी आईईई

अपनी बहु की आवाज सुनकर कमलनाथ की सतर्क नजरो ने उसकी ओर देखा तो कमलनाथ की हालत खराब हो गयी ।

बिना ब्रा सूती ब्लाउज मे उपर निचे होती रीना की चुचिया और साड़ी के अन्दर से झांकता उसका नंगा गोरा पेट उफफ़फ़फ कमलनाथ उत्तेजना से अपनी जगह पर खड़ा हो गया ।

लण्ड मे तेज कप्ंन हुआ और सुपाड़े मे सुरसूरी सी होने लगी । वो सामने खड़ी दो हसिनाओ को आपस मे बाते करते हुए देखने लगा ।

रज्जो आज जिस तरह से तैयार हुई थी उसको देख कर कमलनाथ की इच्छा थी कि जाने से पहले एक बार उसे चोद कर निकले और वही वो ये भी चाह रहा था कि रज्जो जलड जल्द निकल जाये ताकी वो अपनी कमसिन सी बहु के नाजुक जिस्मो को भोग पाये ।

कमलनाथ आवाक होकर खड़ा था और उसे अपनी स्थिति का जरा भी भान ना था कि उसके पैंट मे लण्ड पुरा तम्बू बना चुका है।

रज्जो ने जैसे ही ये नोटिस किया वो इतराते हुए अपने पति के पास गयी और शरारत भरी मुस्कुराहत के साथ रीना को बोली - बहु जरा अपने पापा को ठण्डा पानी पीने को दे ,,,, बहुत गरमी सी हो रही है इन्हे क्यू ?





ये बोलते हुए रज्जो ने हौले से अपने पति के तने हुए लण्ड को पैंट के उपर से दबोच लिया और रीना खिखियाती हुई अपने हसी को होठो मे दबा कर किचन मे चली गयी ।

कमलनाथ ने जैसे ही अपने तने हुए मुसल पर अपने बीवी के नरम गुदाज हाथो का स्पर्श पाया वो सिहर उठा - आह्ह जान जाने से पहले एक बार उम्म्ंम

रज्जो तुन्ककर हाथ झटकते हुए- बहुत मुश्किल से तैयार हुई हू और अब मै ये सब नही उतारने वाली हु । समझे

तब तक रीना पानी का ग्लास लेके उन दोनो के पास आ गयी - क्या हुआ मम्मी , कुछ दिक्कत है ?

रज्जो शरारती मुस्कान से कमलनाथ को देखा और तो कमलनाथ ना ने सर हिलाने लगा ।

रीना मुस्कुरा कर - अरे बोलो ना क्या हुआ ,,लिजिए पापा जी पानी पीजिए

रज्जो - कुछ नही बहू ,,,ये कह रहे है कि आज मै बहुत हॉट लग रही हू तो बस से ना जाकर कोई प्राइवेट गाड़ी कर लू

अपनी बीवी की शरारत भरी बाते सुन्कर कर कमलनाथ - हा तो सही तो कह रहा हू मै , तुम ही बताओ बहु क्या आज तुम्हारी मा सेक्सी नही लग रही है ।

अपने ससुर के मुह से सेक्सी वर्ड सुन्कर रीना होठो मे ही हस्ती हुई एक नजर रज्जो के कूल्हो और छाती पर कसी हुई चंदेरी साडी को देखा जो सामने नाभि से 5 अंगुल निचे बांधी हुई थी ।

जिससे रज्जो के गाड़ और भी उभरी हुई नजर आ रही थी । वही स्लिव्लेस ब्लाउज और सामने डीप नेक ने उसके 42 साइज़ के चुचो की दरारो को भरपुर झलकाये जा रही थी ।

अपनी सास को अच्छे से ताडने के बाद रीना ने मुस्की लेते हुए कमलनाथ को देखा और फिर रज्जो से - हा मा जी आप बहुत सुन्दर दिख रही है ,, मेरी मानिये तो आप एक गाड़ी कर लिजिए नही तो आजकल के बस ड्राईवर बड़े वो है हिहिहिबी

रीना - कही आपको लेके भाग गये तो पापा जी का क्या होगा हिहिहिही

रज्जो - धत्त तु भी कम नही है ,,इनके साथ रह रह के तु भी इनके जैसी ही हो जा रही है ।

रज्जो की बाते सुन कर दोनो ससुर बहु ने नजरे उठा कर एक दुसरे को देखा और उस बात का दोहरा अर्थ लेके मूसकरा दिये ।

फिर रीना ने अपने सास ससुर के लिए नासता लगाया ।

नासते के बाद कमलनाथ रज्जो को लेके बस स्टैंड के लिये घर से निकलने लगा और रीना भी दरवाजे तक उनके साथ गयी ।

दरवाजे पर खड़ी होकर रीना ने अपनी सास को हाथ दिखा कर बाय किया और तभी बाहर चल रही हल्की हवा के छोके से उसकी साडी उसके गोरे पेट से पल भर के हट गयी और कमलनाथ को अपनी बहु के नरम गुदाज गोरा पेट और निचे उसकी चर्बीदार नाभि की झलक की ।





रीना ने जैसे ही हवा के ठंडे झोके को अपने पेट पर महसूस की वो सिहर उठी और उसने वापस से अपनी साड़ी को खिच कर पेट को धक लिया और मुस्कुराते हुए कमलनाथ को देखने लगी । जो आतुर होकर लालची भाव से उसे ही निहारे जा रहा था ।

फिर रीना ने दरवाजा बन्द कर दिया और दोनो पति पत्नी बस स्टैंड के लिए निकल पड़े ।

CHAMANPURA

सुबह की अन्गडाई के साथ ही राहुल के लण्ड ने भी उबासी भरी और वो अपने लण्ड की नसो को स्ट्रेच करता हुआ खड़ा हुआ और फ्रेश होने के लिए उपर चला गया ।

रोज की तरह शालिनी की दिनचर्य मे कोई बदलाव नही था लेकिन आज दोनो मा बेटे के मन मे एक अलग ही कसक थी ।

दोनो एक दुसरे के बारे मे सोच कर बेचैन थे ।

बीती राते दोनो ने अपनी सारी मर्यादे लाँघ दी थी ।

शालिनी अब खुल कर राहुल के सामने नंगी होकर उसका लण्ड लेने को आतुर हुई थी । इसिलिए आज उसने अपने जिस्म पर सिर्फ एक satin की मैकसी डाल रखी थी ।

वो बस इस इन्तेजार मे थी कि कब उसका बेटा उठे और कब वो उसके साथ एक सार हो जाये ।

वही राहुल के पेट मे भी तितलियाँ उड़ रही थी । उस्का दिल जोरो से धडक रहा था और लण्ड इतना सख्त हो गया था कि उसपे अंडरवियर चढा पाना उसके बस का नही थी ।

बडी मुश्किल से से उसने अपने लोवर की लास्तिक फैला कर लण्ड को उसने घुसाया और एक बड़ा सा तम्बू लेके वो निचे आया ।

हाल मे आते ही उसकी नजर सोफे पर पड़े हुए अपने पापा के फोन पे गयी पहले तो उसने इन्कार किया लेकिन जब उसकी नजरे किचन मे खड़ी हुई मा पर गयी जो एक मैक्सि मे खड़ी थी तो राहुल के जहन मे एक शरारत सुझी ।

उसने अपने लण्ड को दबाते हुए अपने पापा का फोन उठाया और उसका video recording ऑन करके





हौले से बिना कोई आहट के अपने मा के पीछे गया और निचे झुकते हुए उसने मोबाइल को अपनी मा के मैकसी निचे से अन्दर किया ।

अभी रिकार्डिंग चल ही रही थी कि राहुल के पापा के फोन पर किसी का काल आने लगा और तेज रिंग की आवाज सुन कर शालिनी ने अपनी चुचियो से उभरे हुए मैकसी के गैप मे से निचे झाका तो चौक गयी ।





वो फौरन अलग हुई और राहुल भी हड़बड़ा के खड़ा हो गया

शालिनी मुस्कुराते हुए - ये क्या कर रहा था तु

राहुल हसता हुआ - वो मै हिहिहिही

शालिनी - तुझे मैने देखने से मना किया है क्या उम्म्ं बोल और ये तेरे पापा का फोन है कही उन्होने देख लिया तो

शालिनी की बाते राहुल को समझ नही आ रही थी उसको बस सेक्स की च्सक लगी हुई थी और उसके झटके से अपनी मा को घुमाया और पीछे से दोनो चुचिय पकड कर मिजने लगा





शालिनी कसम्सा के - ऊहह राहुल छोड मुझे तेरे पाआह्ह्पाअह उम्म्ंम बस कर ना उह्ंम्ंं बेटा उम्म

राहुल - उम्म्ं मम्मी कितनी सेक्सी हो आप उम्म्ंम क्या मस्त दूध है आपके नरम नरम

राहुल - प्लीज करने दो ना उम्म्ं

शालिनी - अभी नही बेटाहहह मै बोला था दोपहर मे उह्ह्ह मान जा ना सीईई छोड मुझे

शालिनी राहुल से अलग हुई और मुस्कुराते- जा जल्दी से नास्ता करके अपने पापा को भेज और ये वीडियो डिलीट कर देना ,,,बदमाश कही का हिहिहिहिही

राहुल हस्ता हुआ नासता करके दुकान मे चला गया और दोपहर के लिए इन्तजार करने लगा ।

*******************************************

राज के घर भी सुबह से अलग ही तैयारिया चालू थी ।

रंगीलाल के पास सुबह ही राज ने फोन करके बता दिया था कि वो आज घर आने के लिए निकलने वाला है और वही कमलनाथ ने भी बीती रात को ही बता दिया था कि रज्जो भी दोपहर तक चमनपुरा पहुच जायेगी ।


मेहमानो की आने की खुशी मे घर के सभी लोगो के अपना अपना उत्साह था

रंगीलाल को खुशी थी कि रज्जो आ रही है तो उस्की तबियत से चुदाई करने को मिलेगी

वही निशा और सोनल भी राज के सन्ग थ्रीसम की प्लानिंग कर ली ।

अनुज भी राज के आ जाने से थोडा फ्री होकर आज राहुल की खोज खबर लेने की सोच रहा था ।

वही रागिनी भी अपने बेटे के लण्ड के तरस रही थी और अपनी बहन के जिस्मो की मिठास भरी याद ने उसके गले को गीला करना शुरु कर दिया ।

इनसब के बीच सोनल और निशा की अपनी योजना थी आज अमन को तंग करने की और आज दोनो के तय किया था कि सिनेमा जाने से पहले क्यू ना एक बार अमन की हवस को जगा दिया जाये और बाकि का काम निशा खुद करने वाली थी ।

इधर साढ़े गयारह बजने वाले थे । अमन और निशा ने 12 बजे का शो फिक्स किया हुआ था ।

लेकिन निकलने से पहले सोनल ने एक पहले से ही निशा की रिकार्ड की हुई वीडियो अमन के व्हाट्सअप पर भेज दी ।

जिसमे निशा सोनल की एक टीशर्ट को बिना ब्रा के पहने हुई थी जो अमन ने गिफ्ट की हुई थी और उसने अपने चुचो को पुरा भिगो रखा था । जिस्से उसके मोटे मोटे गहरे भूरे रंग के निप्प्ल साफ साफ नजर आ रहे थे ।

उस वीडियो मे निशा अपने चुचो को टीशर्ट मे कसे हुए उससे पानी को बडी कामुकता से गार रही थी । लेकिन उसका चेहरा उसने नही दिख रहा था

वीडियो भेजने के बाद फटाफट सोनल ने अमन को दो बार फोन किया और ऑन लाइन आने को कहा ।

इधर अमन ने जैसे ही व्हाट्सअप खोला उस्का लण्ड उछल पड़ा ।

वीडियो के साथ निचे कैपसन भी गजब का था





सोनल - dekho na babu aapki di hui tishrt me daag lg gaya hai chhut nhi rhaa hai kya karu 🥹😥😥

सोनल - kabse dhul rahi hu isko

घर के बाहर सड़क पर खड़े होकर उसे बहुत ही कामुकता सी मह्सूस होने लगी और लण्ड की अकड़न उसे थोडा असहज भी महसुस होने लगा ।

उसने आस पास देखा और मैसेज टाइप करना शुरु कर दिया

अमन - ahh koi baat nhi jaan mai dusara dila dunga

सोनल - to mai isko nikaal du kya 🥺

अमन ने जैसे ही वो मैसेज पढे उस्का दिल ध्क्क कर गया और लण्ड पुरे जोश मे अकड़ गया और मन ही मन सोनल की नन्गी चुचियो का ख्याल आया

अमन - ha baby nikaal do aur nikal ke foto bhejo

इधर दोनो बहने मैसेज पढ कर खिलखिला पड़ी और निशा हस्ती हुई - देखा एक नम्बर का ठरकी है ,,,अब इसको बिना टीशर्ट वाली मेरी फ़ोटो भेज दे

सोनल भी खिलखिलाई और निशा की नंगे चुचो वाली एक सेल्फी भेज दी और फोटो के कैपशन भी डाल दिया





सोनल - ab thik hai na baabu 🙈😌

इधर अमन ने जैसे ही मोबाइल सोनल का फिर से मैसेज देखा तो वो अपनी जगह खड़ा भी नही रह सका । सबकी नजरो से छिपते हुए तेज धडकते दिल के साथ अपना लण्ड भीचते हुए मन मे बड़बड़ाया - अह्ह्ह सोनल क्या मस्त चुचे है तेरे कितने मोटे और सॉफ़्ट है उम्म्ंम ,,,, क्या करू यारर ये निशा के साथ आज का प्रोग्राम कैन्सिल कर दू । हा यही सही रहेगा । आज तो वीडियो काल पर अपनी सोनल को पुरा नंगा करवाउँगा ।

अमन अभी ये सब सोच रहा था कि उधर से सोनल ने एक और मैसेज भेजा - ummm jaan abhi nisha market ja rahi hai .. mere paas time hai kya aaj tum mujhe 😘❤️

इधर अमन ने फिर से सोनल का मैसेज पढा तो उसकी हालत और खराब हो गयी ।

पैन्त मे उसका लण्ड दर्द हो रहा था और आखिर कार उसने सोनल को हामी कर दी

अमन - haa jaan aj sirf mai aur tum

उधर सोनल और निशा ने जैसे ही मैसेज पढा वो दोनो खिलखिला उठी और निशा ने फौरन अमन को फोन कर दिया ।

निशा का काल आते ही अमन की हड़बड़ाहट और बढ गयी , इससे पहले अमन अपनी सफाई मे कुछ बोल पाता निशा बोल पड़ी - हा जीजू मै निकल गयी हू ,, कहा मिलना है ।

अमन अटकते हुए स्वर मे - अह निशा एक प्रोब्लम है यार मुझे एक जरुरी काम करना है क्या हम फिर कभी नही जा सकते

निशा झ्ल्लती हुई - क्या जीजू मै आपके लिये 2 घन्टे से तैयार हो कर घर से निकल गयी हू और क्या बोलकर वापस जाऊंगी । बोलो

अमन अब धर्मसंकट मे था और मन मारकर - अच्छा ठिक है आओ देखता हू मै क्या हो सकता है

निशा - हा नही तो एक बार आओ एक बार नही आओ, अच्छा बताओ कहा रिसीव करेंगे आप मुझे

अमन - तुम डिरेक्ट सरोजा कॉमप्लेक्स पहुचो ना मै भी वही मिलता हू ,, किसी ने देख लिया तो अच्छा नही लगेगा ना

निशा अमन की बेबसी पर हसती हुई - अच्छा हा सोनल को पता नही लगाना है ना

अमन - हा वही ना , तु पहुचो मै आता हू

इधर अमन का फोन कट हुआ और उसका मैसेज सोनल के मोबाइल पर बिप हुआ

अमन - sorry jaan , wo kya hai na aaj mehmaan bahut aaye hue hai.. thoda busy hu. Raat me karate h n

सोनल - kya yaar , mera bahut man hai aaj to tum jaao rahane do haa nhi to . Massage se bhi to kar skate ho na

अमन बेचारा क्या ही करता । एक ओर वो निशा के जाल मे फसा हुआ था तो दुसरी ओर अपने बीवी के जाल मे भी ऐसे मे उसे सोनल का विचार सही लगा कि खुद ना सही लेकिन सोनल को तो खुश कर सकता हू ना ।

अमन ने हामी भर दी और फिर वो कम्प्लेक्स के लिए निकल गया और वही निशा भी घर से निकल गयी ।

जारी रहेगी
 
बेनचोद 700 पेज हो गये किसी को खुशी ही नही है

मुठ्ठल साले :buttkick:
 
Maa ka chodu beta .... भाई तेरी पोस्ट डिलीट कैसे हो गयी :डी
 
अपडेट 169 ा

लेखक की जुबानी

CHAMANPURA (A)

दोपहर का समय चल रहा था और जंगीलाल अन्दर खाना खाने जा चुका था ।

राहुल दुकान मे बैठा बोर होते हुए अपने बाप के मोबाईल मे गेम खेल रहा था

तभी उसे ध्यान आया कि सुबह वाली रिकार्डिंग उसने डिलीट की ही नही और फौरन वो जल्दी जल्दी फ़ोल्डर खोलने लगा ।

जैसे ही वो वीडियो रिकॉर्डिंग वाले फ़ोल्डर पे क्लिक किया वहा पर पासवर्ड मागने लगा ।

राहुल की तो फटने लगी कि अब क्या करे वो और बेन्चोद उसके बाप ने पुरे मोबाइल मे सिर्फ इस फोल्डर पर क्यू पासवर्ड लगा रखा है ।

राहुल जो अब तक अपने बाप को हवस का चोदा ही समझ रहा था उसके जहन मे अपने बाप के लिए एक अलग ही छवि उभरने लगी थी ।

एक आशंका सी उभर रही थी एक पल को तो वो ये भी सोच रहा था कि शायद गलती से उसका बाप यहा पासवर्ड ल्गा दिया होगा ।

लेकिन अगले ही पल वो इस बात के लिए शंका मे आने लगा कि कुछ तो जरुर है इसमे जो उसका बाप छिपा रहा है ।

राहुल ने सोचा - बात अगर गुप्त है तो इसका मतलब है कि ये फोल्डर रोज रोज नही खुलता होगा और अगर उसे एक दो दिन का समय मिल जाये तो वो इसको अनुज के लैपटाप मे खोल लेगा बडी आसानी से ।

राहुल अपने विचार से चहका और वापस से गेम खेलने मे मस्त हो गया ।

CHAMANPURA (B)

सरोजा कॉम्प्लेक्स के पार्किंग एरिया मे एक आइसक्रीम वाले ठेले के पास खड़ी हुई निशा अपने आस पास के माहौल से थोडा परेशान होकर अमन का इन्तजार कर रही थी ।

अमन को तंग करने के जिस इरादे से उसने आज तंग कपडे पहन हुए थी । वही चुस्त कपडे बाकियों के हवस को जगाने के लिए काफी थी ।

चोर नजरो से जवाँ लड़के क्या लड़किया भी निशा के कूल्हे पर कसी हुई चुस्त लेगी को निहारे जा रही थी ।





पार्किग के चौडे गलियारो मे आती सरसराती हवा निशा के शार्ट कुर्ती को उसकी लेगी की लास्टीक तक उठा दे रही थी जिसे निशा बार बार पकड के अपने उभरे गए गुदाज चुतडो को ढक रही थी ।


उसने उपर से एक नेट वाला दुपट्टा ले रखा था जो उसके गले से चिपकी हुई पीछे उसके चुतडो पर अटकी हुई थी।

और सामने सिने पर कसे हुए उसके चुचे की दरारे उसके गहरे गले वाली कुर्ती से झाक रही थी ।

बेचैन परेशान निशा बार बार मोबाइल का टाईम देखे जा रही थी और मेन गेट पर उसकी निगाहे जमी हुई थी ।

एक दो लड़के उसके अगल बगल उसके पीछे लगभग सटे हुए खडे थे और कोसिस मे थे कि बस एक बार उसके गुदाज गाड़ की चर्बी पर अपने उंगलियाँ घुमा सके ।

निशा अपने पीछे खड़े एक लड़के से थोडी दुरी बना रही थी जो उसकी ओर भी पीठ करके खड़ा था लेकिन दोनो के चुतड आपस मे स्पर्श हो रहे थे ।

निशा ने जैसे ही अपने नरम चुतडो पर उस लड़के की बेल्ट की चुबन मह्सूस की वो चिहुक कर आगे बढ गयी ।

इससे पहले वो उस लडके को कुछ जवाब देती सामने से बुलेट को तड़तड़ाता हुआ अमन पार्किंग मे आ चुका था ।

निशा अमन को देख के बहुत खुश हुई और तेज कदमो से चलती हुई उसके पास गयी ।

अमन ने जैसे ही निशा का कातिलाना रूप देखा वो और भी पागल सा हो गया । पहले से ही वो सोनल से गरमागर्म बाते करके परेशान था और अब निशा की झाकती मोटी चुचियो ने उसके गले मे लार बनाना शुरु कर दिया था ।





निचे से उपर तक अमन से निशा को ताड़ा और उसके शार्ट कुर्ती मे उभरी हुई चुस्त जाघे देख कर अमन मदहोश हो गया ।

निशा - हाय जीजू , कितनी देर लगा दी , मै कबसे अकेली हू यहा

अमन उसके उदास चेहरे पर मुस्कुराया और बाइक पार्क लगाते हुए - अच्छा तुम्हे डर लग रहा था हिहिहिही शैतान कही की । मुझे धमका कर यहा बुलाई हो

निशा चहक कर - हिहिहिही साली हू हक बनता है





अमन उसके थिरकते हुए चर्बीदार गाड़ को देखके अपने मन मे - आह्ह साली हो तो थोडा हक मेरा भी बनता है ना उम्म्ं क्या मस्त गाड़ है इसकी ।

निशा माल की सीढिया चढ़ती हुई पलट कर निचे अमन को देख कर उसके हालत पर हस्ती हुई - आओ ना जीजू , नही तो पसंद वाली सीट नही मिलेगी

अमन - अच्छा ठिक है बाबा चल रहा हू

फिर दोनो सीनेमा वाले साइड की ओर निकल गये और 12 बजे के शो के दो टिकट निकलवाये । निशा ने जिद करके कॉर्नर वाली सीट ली

अमन - कॉर्नर वाली क्यू ली निशा

निशा धीमी आवाज मे हस्ती हुई - स्स्स्स हम दोनो bfgf है ना हिहिहिही

अमन हस्ता हुआ - क्या तुम भी निशा

फिर दोनो अपने सीट पर बैठ गये और वही अमन को सोनल का मैसेज बिप हूआ..

JAANIPUR

अपनी बीवी को बस मे हिफाजत से बिठा कर विदा करने के बाद कमलनाथ घर की ओर निकल पड़ा ।

रास्ते भर उसके जहन मे अपनी बहु के ख्याल आ रहे थे ।

वो आखिरी क्षण जब उसने रीना के साडी से झांकती हुई उसकी गुदाज नाभि देखी ।

वो सोच कर कमलनाथ मे मुह मे लार अभी से भरने लगा था और उसका लण्ड तो आज शान्त होना जान ही नही रहा था ।

तंग जान्घिये मे उसका लण्ड ऐंठ रहा था और उसकी बेचैनी बढ रही थी और बार बार अपना लण्ड भीचने से उसका थोडा सा प्रीकम निकल गया था । लेकिन उसको अभी तक इसका भान ना था । जैसे ही वो अपने मुहल्ले की गली के सामने उरता बाई जांघ के तरफ उसका लण्ड उभर गया ।

कमलनाथ ने आस पास देखा और शर्ट को पैंट से निकाल कर भरसक उसको छिपाना चाहा । मगर पैसे देते समय ई-रिक्से वाले की नजर भी कमलनाथ ने के पैंट पर गयी और वो उस छिपे हुए आलू और उसके छोड़े हुए रस को देख कर मुस्कुरा दिया ।

कमलनाथ ने हड़बड़ी मे पैसे दिये और तेज कदमो से घर की ओर बढ रहा था ।

मेन रोड से 40- 50 मीटर अन्दर था घर उस्का और सड़क पर पुरा आवाजाही लगी हुई थी ।

इतने तनाव पुर्ण माहौल मे भी कमलनाथ के लण्ड के तनाव मे कोई कमी नही आई ।

वो हाफ्ता हुआ तेज कदमो से आगे बढ रहा था और घर के दरवाजे पर बस पहुचने वाला था , अभी तक तो खुद किस्मती थी कि किसी ने उसे टोका नही और ना ही उसके पैंट पर नजर मारी थी ।

लेकिन जैसे ही वो दरवाजे पर खड़ा होकर बेल बजाता है कि रीना आके दरवाजा खोले कि तभी पीछे से एक औरत की आवाज सुन्कर कमलनाथ के पसीने छुट जाते है

महिला - अरे भाईसाहब सुनिएगा

कमलनाथ वो आवाज बखूबी जान रहा था , वो आवाज उसी मुहल्ले की एक खातुन की थी , जो रज्जो की सहेली के साथ साथ उसके कपडे भी सीला करती थी ।

कमलनाथ बिना उसकी ओर घुमे बस गरदन टेढी करके - हा भाभी बोलिए

फातिमा हस कर - अरे सुनिये तो , ये रीना बहु का एक ब्लाउज है उसे दे देंगे क्या आप

रीना की बात सुनते ही कमलनाथ का दिमाग और लण्ड दोनो एक साथ ठुमका ।

वो फौरन उसकी ओर घुमा और अनहोनी हो गयी ।

उस खातुन की निगाहे सीधा कमलनाथ के पैंट मे उभरे हुए उसके सुपाड़े से बहे हुए दाग पर गयी ।

कमलनाथ ने उसकी निगाहो का पीछा किया और उसका लण्ड पैंट मे और तन गया ।

इस्से पहले दोनो के बीच कुछ असहजता भरा संवाद हो पाता कि रीना ने दरवाजा खोला और कमलनाथ को यही सही मौका दिखा

वो लपक कर दरवाजे की ओर घुमा और रीना से उसकी नजरे टकराई

अपने ससुर की हड़बड़ाहट से रीना की नजरे भी अनायास उसके पैंट पर गयी ।





लण्ड का उभार और पैंट पर लगे दाग से रीना को हसी तो आई लेकिन उसने अपने होठ भीच लिये ।

कमलनाथ भी समझ गया कि उसकी बहू ने भी देखा , अगर वो बंद कमरे मे होता तो बेशर्मी दिखा सकता था लेकिन अभी वो घर के मेन दरवाजे पर खड़ा था और उसके पिछे एक महीला भी थी ।

कमलनाथ बिना कुछ बोले तेज कदमो से छत पर चला गया और वो खातुन हस्ते हुए - लग रहा है भाईसाहब को जोरो की आई है हिहिहिजिही

रीना मुस्कुरा कर - क्या काकी आप भी

खातुन रज्जो के साथ काफी समय से रह कर उसके ही जैसे बाचाल हो गयी थी ।

खातुन - अरे देखी नही तुमने कैसे मूतने के लिए उनका वो फड़फडा रहा था

रीना शर्मा कर - धत्त काकी तुम भी ना ,

रीना ब्लाउज खोलाती हुई - अच्छा ये बताओ नाप बराबर है ना इसका , ज्यादा तंग तो नही ना आयेगा । क्योकि हम लोग भो दो दिन बाद चले जायेंगे

खातुन - अरे नाप लेले और मुझे बता देना , कुछ कमी बेसि हुआ तो ठिक कर दूँगी

रीना - ठिक है काकी , मै जरा पापा जी को खाना लगा दू ।

फिर वो खातुन हस्ती हुई अपने घर चली गयी और रीना भी दरवाजा भीड़का कर हाल मे आती है ।

उसने ब्लाउज को हाल के टेबल पर रख कर किचन मे अपने ससुर के लिए खाना परोसना शुरु कर दिया ।

कमलनाथ भी अपने कपडे बदल कर एक बाहदार सैंडो और पाजामा पहने निचे आ गया ।

उसकी नजर टेबल पर रखे ब्लाउज पर गयी और ब्लाउज के बने हुए कप को देख कर उसको दुकान पर रीना के साथ की हुई शॉपिंग याद आने लगी ,

तभी उसने रीना को खोजते हुए आस पास नजरे दौडाई और किचन पर वो खाना परोसती हुई नजर आई

अपनी बहु का तंदुरुस्त पिछवाडा देख कर कमलनाथ का लण्ड फिर से उछल पडा कि तभी रीना खाने की थाली लेके घूमी

रीना ने एक नजर अपने ससुर को देखा और मुस्कुराते हुए - आईये पापा जी खाना लग गया है ।

खाने के बाद कमलनाथ हाथ पोछता हुआ हाल मे आया - वो भाभी जी किस लिये आई थी बहु

रीना - वो पापा मैने ब्लाउज सिलने के लिए दिया था तो वही देने के लिए आई थी

कमलनाथ - तो नाप लिया ना तुमने , साइज़ ठीक है ना

रिना थोडा शर्मा कर - अभी कहा , मै तो निचे ही थी ना

कमलनाथ सोफे पर बैठता हुआ - अरे तो नाप लो ना , कुछ कम ज्यादा हो तो ब्ताना मुझे मै दे आऊंगा फिर से

रीना शर्माती हुई - हममं ठीक है पापा जी , अच्छा आप वो अपना पैंट मुझे दे दीजिये मै धुल देती हू

कमलनाथ असहज होकर - अर रे नही मै धुल दूँगा, उसमे जरा सा दाग लगा है ।

रीना - तो क्या हुआ उसमे , मै धुल दूँगी ना पेसाब का ही दाग है ना ,

कमलनाथ अटक कर नजरे फिराते हुए - अ नही बहु वो पेसाब का नही वो ....

रीना थोडा चुप्पी लेकर - ओह मुझे लगा आपको जोर की लगी थी इसिलिए आप ....

कमलनाथ चुप रहा

रिना - तो क्या आपको अभी भी दिक्कत महसूस हो रही है , रात मे तो मा जी ने ..??

कमलनाथ - अब मै तुमसे क्या कहू बहु इस बारे मे । जब भी रमन की मा कही दुर होती है या हम दोनो का मिलन नही हो पाता , मेरी तलब पता नही कैसे बढ जाती है । मेरा संयम कही खो सा जाता है ।

रीना नजरे झुका - ओह्ह तो फिर क्या आप ऐसे ही परेशान रहेंगे

कमलनाथ खड़ा होकर अपना तना हुआ मुसल पजामे मे सेट करता हुआ - अरे तु परेशान ना हो बहु , ये तो मेरा ह्मेशा का रहा है हाहहहहा , तु भी जा खा ले

ये बोलकर कमलनाथ मुस्कुरा हुआ रीना को क्रॉस करके आगे बढा , उसका दिल जोरो से धडक रहा था और चेहरा पुरा लाल हुआ जा रहा था । जिससे उसकी मुस्कान फीकी सी पड़ गई थी ।

रीना ने जब अपने ससुर को देखा तो उसे लगा कि उस्का ससुर बस दिखावे का मुस्कुरा रहा लेकिन उसको कही न कही सासु माँ के जाने का दुख है ।

बस यही वो पल था जहा कमलनाथ की नियती ने उसका हाथ फिर से थाम लिया और रीना ने झिझक भरे लहजे मे कहा - पापा जी मै कुछ मदद करू !!!

जारी रहेगी
 
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