Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 32 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 169 बी

लेखक की जुबानी

CHAMANPURA

सिनेमा मे सीट पर बैठते ही अमन के मोबाइल पर सोनल का मैसेज बिप होता है ।

करीब 15 20 मिंट तक अमन ने उसको इग्नोर किया लेकिन थोडी देर बाद फिर सोनल का मैसेज बिप हुआ

वो मोबाईल खोलकर पॉपअप हुआ सोनल का मैसेज देखता है और पूरी तरह से सिहर जाता है । उसके लण्ड की नसे फड़कने लग जाती है और दिल जोरो से धडकनें लगता है



वो निशा से छिपा कर मोबाईल को सामने करके फटाफट मैसेज टाइप करता है और निशा की ओर देखता है जो उसे ही मुस्कुराते हुए निहार रही थी

निशा अपनी भौहे उठाकर हस्ती हुई - क्या हुआ जीजू उम्म्ं

अमन थुक गटकता हुआ - अह कू कुछ नही ,

निशा सब समझ रही यही कि क्या चल रहा है अभी फिर भी उस ने इग्नोर करते हुए चहकति हुई अमन के बाजू के हाथ डाल कर उसको पकड लिया और उससे सटकर बैठते हुए पर्दे की ओर देखने लगी ।

निशा के यू चिपकने से अमन के पाव कापने लगे । वो अगल बगल देखने लगा कि कोई उसके जान पहचान वाला ना देख ले उनको ऐसे ।

मगर हाल के जिस साइड वो लोग बैठे थे वहा पर्दे की लाईट भी नही आ रही थी ,, फिल्म कोई खास थी नही तो ज्यादा भीड़ नही थी ।

पीछे की सीट पूरी खाली थी , दो सीट बाद एक कपल बैठे हुए वो भी शायद अपनी प्राईवसी चाहते थे इसिलिए अमन से दो सीट दुर थे ।

निशा अमन के बाहो मे बाहे डाले हुए उसके कन्धे पर सर रख कर चिपकी हुई थी ।

अमन किसी तरह खुद के जजबात काबू मे किये हुए पर्दे पर निहारे जा रहा था ।

जेब मे उसका मोबाइल घुऊ घुउऊ करके वाईब्रेट हो रहा था ,, कुछ पल अमन ने इग्नोर किया तो सोनल कॉल करने लगी

निशा - अब किसका फोन आ रहा है जीजू

अमन - वो सोनल फोन कर रही है

निशा - क्यू ?

अमन - अरे तुम बाहर गयी हो और वो फ्री है तो उसे मुझसे बाते करनी है ना

निशा हस कर - अरे तो मैसेज से बाते करते रहिये , अब हाल मे काल से कहा बात कर पायेगे ।

अमन हिचक कर - न नही नही , यहा नही कर सकता

निशा आंखे उठा कर मुस्कुराती हुई - कही कुछ प्राईवेट बात तो नही है जो मेरे सामने नही कर सकते हिहिहिही या फिर परसो रात के जैसे नॉनबेज बाते करनी है उम्म्ं

निशा की बाते सुन कर अमन झेप सा गया और हस्ता हुआ - क्या तुम भी निशा , ऐसी कोई बात नही है ।

निशा अमन के हाथ से मोबाइल झपटती हुई - लाओ मै भी तो देखू फिर क्या बाते हो रही है हिहिहिही

अपने हाथ से मोबाइल जाता देख अमन निशा की ओर लपका और निशा अपने हाथ दुर करने लगी ,,,लेकिन वो पहले से ही कोने पर थी तो कही जा नही सकती थी सिवाय हाथ इधर उधर घुमाने के

और अमन उसके ओर लपक कर उससे मोबाइल लेना चाह रहा था

निशा उसको चिढाती हुई - हिहिही लेलो आओ हीही

अमन और निशा के बीच की सीटो हाथ रखने वाला लगा था जिससे अमन निशा की ओर ज्यादा लपक नही पा रहा था और वो नही चाह रहा था कि ज्यादा हसी ठिठौली से वो लोगो की नजर मे आये ।

इसी मौके का फायदा लेकर निशा ने मोबाइल को किनारे पर ले जाकर मैसेज देखने लगी और जैसे ही निशा को मैसेज पढते अमन ने देखा तो वो शर्म और निराशा से भरकर अपनी कुरसी पर बैठ गया ।

निशा अमन के सामने ही उसके और सोनल के मैसेज पढते हुए हसने लगी ।

निशा आखिरी मैसेज पढकर हस्ते हुए - ओह्हो देखो ना बेचारी कित्नी परेशान है और आप हो की उसको तरसा रहे हो

अमन उसके हाथ से मोबाइल लेता हुआ - तु ना एक नम्बर की शैतान लडकी हो ,,

निशा हस्ते हुए - तो भेज दो ना जो माग रही है आपकी होने वाली बीवी

अमन निशा की शरारत भरी कामुक बाते सुन कर हस्ता हुआ - क्या तुम भी , अब यहा कैसे और तुम्हारे सामने कैसे ?

निशा चहकती हुई अमन की ओर लपक कर धीमी आवाज मे - मैने तो आपका देख रखा है हिहिहिह मुझ्से क्या शरमाना

निशा की शरारत भरी बाते और उसका यू सेक्सुअ चीज़ो पर खुलके बाते करने का अंदाज अमन को भितर से कपकपा रहा था । मन ही मन वो निशा को भोगने की लालसा जगा चुका था ।

उसका लण्ड पहले से ज्यादा फुलने लगा था , पैंट मे एठन बढने लगी थी और सुपाड़े मे खुजली सी होने लगी थी ।

अमन ने अन्धेरे मे अपने पैंट के उपर से ही अपनी चुनचुनाती लिंग की चमडी को ऊँगलीयो से मसलते हुए निशा को देखा ।

निशा की आंखो मे चढता नशा अब उसे भी अपनी गिरफत मे ले चुका था और वो मुस्कुरा कर निशा को देखे जा रहा था ।

निशा एक शरारती मुस्कान के साथ - तो मै उधर आ जाऊ और आप यहा कोने मे हिहिहिही

अमन शर्माहत भरी नजरो से मुस्करा कर हामी भर दिया और निशा उठ कर खड़ी हुई और अगल बगल का माहौल देखा । सारे लोग पर्दे पे नजरे जमाये हुए थे ।

किसी ने भी निशा की क्रिया पर ध्यान नही दिया वो उठी और अपने पैर खीसकाते हुए अमन के सामने खड़ी हो गयी ,

निशा की फैली हू चर्बीदार गाड़ और उसके उभरे हुए कुल्हे अमन के चेहरे से महज कुछ इन्च ही दुर से ।

और तो और निशा के कपडो से आती भीनी मादक अत्र की खुस्बु से अमन की सासे चढ़ने लगी थी ।

निशा वही खडे होकर - अरे उठिए ना , क्या देख रहे है आप हिहिहिही

अमन फौरन उठा और निशा से चिपकता हुआ उसके गुदाज कुल्हो को छुता हुआ निशा की सिट पर बैठ गया और निशा भी फौरन अमन की सीट पर आ गयी ।

दोनो अभी थोडा चुप थे , वो अपनी निगाहे आस पास घुमा रहे थे और खासकर बगल वाले कपल पर जो उनसे महज 2 शीट बाद ही बैठा था ।

निशा ने देखा कि वो दोनो भी खुद मे ही व्यस्त है और उनके चेहरे के भाव भी निशा और अमन जैसे ही थे ।

मतलब साफ था कि निचे अंधरे हिस्से मे कुछ काण्ड चालू था ।

निशा खुश हुई और अमन की ओर पलटी फिर आंखो से इशारा करते हुए - चलो जल्दी से फ़ोटो निकाल लो ,,मै उनकी ओर पीठ करके हू हिहिहिही

अमन को अब भी हिचक हो रही थी लेकिन निशा के साथ ने उसको एक अलग ही हिम्म्त दे रखी थी

अमन निशा को देखता हुआ मुस्कुरा कर अपना बेल्ट खोलने लगता है और निशा के दिल की धडकनें तेज होने लगती है ।

बेल्ट के बाद अमन ने अपनी पैंट का बटन खोला और उसके लण्ड को थोडा आराम मिला , वो एक नजर निशा को देखा जो आंखे गडाये उसके हाथो को देख रही थी , लेकिन अन्धेरे मे कुछ भी साफ नही दिख रहा था

अमन ने निशा के चेहरे के भाव पढे और उसकी आंखो मे बढती मदहोशि और एक बेचैनी सी मह्सूस की । निशा का चेहरा फीका पडने लगा था उसकी छातिया फुलने लगी थी ।

अमन मुस्कुराता हुआ निशा के चेहरे के भावो के अनुरूप उसकी उत्सुकता बढाता हुआ अपने पैंट की जीप सरकाने लगा और उसका फूला हुआ सुपाडा ढील पाते ही अंडरबियर मे हरकत किया ।

धुधली छवि मे निशा ने भी मह्सूस किया और गरदन घुमा कर उसने अपने बगल के जोड़े को देखा और मुस्कुराते वापस अमन की ओर मुड़ी ।

इस बार निशा को एक अलग ही खुस्बु उसके नथुनो से टकराई वो समझ गयी कि य अमन ने अपना पुरा लण्ड बाहर निकाल दिया क्योकि गर्म सुपाड़े पर सनी हुई वीर्य की महक से निशा भली भांति परिचित थी ।

वो खुस्बु उसके सासो मे समाते ही उसके चेहरे पर एक अलग भी खुशी दिखाई थी । मुस्कुराहट और फैल गयी ।

निशा अपनी बेताबी छिपाकर - अब तो निकाल लो फ़ोटो , कब तक तरसाओगे बेचारी को हिहिहिही

अमन खुसफुसा कर - अरे यार फ्लैश लाईट जलेगा तो कोई देखे ना

निशा - अरे मै हू ना जीजू कोई नही देख रहा , सिवाय मेरे हिहिहिही

अमन हस कर - यार तुम भी

फिर अमन ने अपना मोबाइल उठाया और एक नजर सब ओर देख कर कैमरा ऑन करके फ्लैश ऑन करते हुए फ़ोटो निकालने के लिए क्लिक किया





अगले ही पल फ्लैश ने अपना फोकस दिखाया और नसो से अक्ड़ा हुआ गीला लाल सुपाड़े वाला अमन का फौलादी लण्ड चमक उठा ।

निशा अमन के 8 इच मोटे और 3 इन्च की घेराब लिये कैन की बोतल जैसे मोटे तगड़े लण्ड को देख के पूरी तरह हिल गयी ।

ये उसका अब तक देखा हुआ सबसे मोटा लण्ड था ।

फ़ोटो क्लिक हो चुकी थी और लाईट भी ऑफ थी लेकिन निशा के आंखो मे फ्लैश की रोशनी मे चमकते लण्ड की छवि अभी भी बनी हुई थी ।

वो अनुमान से अभी भी सास लेते अमन के लण्ड की तपिश मह्सूस कर पा रही थी

इधर अमन ने फ़ोटो भी भेज दिया और कुछ मैसेज टाइप किया । फिर उसने निशा की ओर देखा जो अभी भी उसी अवस्था मे बुत बनकर बैठी हुई थी ।

अमन उसके हालत पर मुस्कुराया और अपना लण्ड अंडरवियर मे घुसाने लगा लेकिन उसका फौलादी लण्ड मे जर भी लचक नही हो पा रही थी ,

दो तिन प्रयास मे जब अमन अपना लण्ड वापस नही घुसा पाया तो उसकी हालत खराब होने लगी , उसकी कसमसाहट से निशा अपने ख्यालो से बाहर आई

निशा - क्या हुआ जीजू

अमन - ऊहह यार ये अन्दर नही जा रहा है उम्म्ं हह

निशा खिलखिलाई - तो क्या हुआ आज ऐसे ही घर चले जाना

अमन थोडा सिरियस होता हुआ - ओह्ह निशा मजाक नही, सच मे ये नही जा रहा है

अब तो निशा को भी थोडी चिंता हुई कि आखिर क्यू ऐसा हो रहा है

निशा ने आस पास नजर घुमाई और तभी उसकी नजर बगल वाले कप्ल पर गयी । जिसमे लडकी लड़के के गोद मे सर रख कर लेती हुई थी और उसका बॉयफ्रेंड अपने जैकेट से उसका सर छिपा रखा था ।

निशा को समझते देर नही लगी कि वहा मुह पेलाई चल रही है

निशा - जीजू , अगर आप गुस्सा ना हो तो मेरे पास एक उपाय है , लेकिन

अमन - अरे बताओ यार कुछ भी ,,इन्टर्वल भी होने वाला

अमन इतना बोला ही था कि हाल की सारी लाईट एक एक करके चालू होने लगी ।

अमन ने फौरन अपने हाथ से अपने लण्ड को छिपाने की नाकाम कोसिस करनी शुरु कर दी ।

निशा को डर था कि कही उन्हे इस हालत मे देख ना , इसलिये उसने देर ना करते हुए अपने गले से चुनरी निकाली और उसको लपेटते हुए अमन की ओर बढा दी

निशा - लो इस्से ढक लो जीजू





अमन ने निशा के हाथ से उसकी चुनरी तो ली लेकिन उसकी आंखे रोशनी के उजाले मे चमकती उसके गोरी गोरी फूली फूली चुचियो की घाटियो मे खो गयी ।

निशा हस कर - अरे ढक लो ना

अमन हडबड़ा कर ढक लेता है और निशा सीधी बैठ जाती है । फिर वो कनअखियो से बगल मे बैठे प्रेमी जोड़े की ओर देखती है तो वो दोनो वहा से गायब थे ।

निशा समझ जाती है कि वो वाशरूम ही गये होगे ।

अमन - अब बोलो निशा क्या उपाय

निशा खड़ी हुई है और आस पास देखा तो ज्यादातर लोग इधर उधर से जा चुके थे ।

निशा - अरे देख क्या रहे है खड़े होकर अब डालिये अन्दर

अमन को भी सही लगा और वो खड़ा होकर पर्दे की ओर पीठ करते हुए निशा की चुनरी को हटाया





बल्ब की रोश्नी मे निशा को एक बार फिर से अमन का तना हुआ मुसल दिख्ने लगा , लण्ड पर एठि हुई मोटी मोटी नसे और आलू जैसा फुला हुआ गुलाबी सुपाडा पुरा तना हुआ था ,,, लण्ड की कठोरता देख कर निशा थुक गटकने की नौबत आ गयी ।

अमन से बड़ी मुश्किल से लण्ड पर अंदरवियर तो चढा लिया लेकिन उसमे बना तम्बू जैसे उसको फ़ाड कर बाहर आ जायेगा ।

अमन अब उसपे पैंट चढाने को कोसिस मे था लेकिन चुस्त पैंट मे ऐसा होना पॉसिबल नही था ।

अमन को परेशान देख कर निशा को भी टेनसन ही रहा था कि कही सच मे दिक्कत ना बढ जाये

इसिलिए उसने हाथ आगे बढा कर अमन के लण्ड के तने को अंडरवियर के उपर से थाम लिया और पैंट को पकड कर उसमे ठूसने लगी ।

निशा के हाथो का अचान्क से स्पर्श पाकर अमन के लण्ड की नसे फड़क उठी जिसे निशा ने भी अपनी हथेली मे मह्सूस किया

निशा पुरा जोर लगा के लण्ड को मोड़ना चाह रही थी लेकिन ऐसा पॉसिबल नही

मानो अमन ने कित्नी वियग्रा खा रखी हो

निशा का हाथ भी दर्द होने लगा और वो लण्ड छोड कर - उफ्फ़ मम्मी क्या है ये , ऐसा भी होता है क्या कीसी का

अमन - पता नही यार मेरा हर बार ऐसा ही होता है ,

निशा - तो ये छोटा कब होता है

अमन - जब ये डिस्चार्ज होता है

निशा - उम्म्ंम लेकिन यहा

अमन - हा यार अब ऐसी हालत मे बाथरूम मे भी नही जा सकता ना

निशा - ऐसा करो आप बैठ जाओ अभी ऐसे खडे ना रहिये

अमन को भी निशा की बात सही लगी और वो बैठ्गया

निशा हिचकती हुई - अह जीजू अगर आप कहो तो मै मदद करु ,,यहा डिस्चार्ज होने मे

अमन चौक कर - क्या!! यहा !! अरे कोई देख लेगा पागल और तुम क्या करने वाली हो ?

निशा - अरे अभी नही ! जब लाईट ऑफ़ होगी तब

अमन - हा लेकिन

निशा - लेकिन वेकिन छोडिए और अभी थोडी देर बैठे रहिये

JAANIPUR

रीना - पापाजी मै कुछ मदद करू ?


अपने बहु की आवाज सुनकर कमलनाथ के पाव जहा थे वही रुक गये उसका दिल जोरो से धडकने लगा ।

रीना दो कदम आगे बढती हुई - हा पापाजी , मै जानती की आपको ऐसे आराम नही आयेगा । आप कमरे मे चलिये मै आती हू

कमलनाथ - लेकिन बहु तुम , नही नही रज्जो ने साफ मना किया है

रीना मुस्कुरा कर - मा जी से मै बात कर लूंगी आप चिंता ना करिये

कमलनाथ थुक गटक कर रीना के हौसले पर ठगा सा रह गया था । उसका लण्ड अब और भी फौलादी हुआ जा रहा था ।

उसने बिना कुछ सवाल जवाब किये सीढि की ओर बढ गया और दो सीढि चढ़ते ही - बहु वो रमन ...

रीना - आप कमरे मे आराम करिये मै उनको खाना खिला कर ही आऊंगी

कमलनाथ फीकी मुस्कान दिखाता हुआ उपर चला गया और रीना भी गहरी सासे लेने गयी ।

मन ही मन वो बड़बड़ा रही थी कि आगे कैसे वो क्या करेगी ।

क्या उसे अभी ही सेक्स कर लेना चाहिए या फिर सिर्फ हिला चुस कर ही छोड देना चाहिए ।

लेकिन पापाजी बहुत मस्त चुदाई करते है उन्के मोटे लन्ड को हाथ मे लेके मै अपनी बुर को तरसा कैसे सकती हू ।

इधर रीना अपने ख्यालो मे व्यस्त थी कि दरवाजे पर घंटी बजती है और वो समझ गयी कि उसका रमन घर आ गया है

CHAMANPURA

इंटरवल खतम होने तक दोनो ज्यादा कुछ बोले बिना बस चुप्पी के साथ बैठे रहे ।

अमन निशा की चुचिया और उसकी चिकनी गदराई जांघ देख कर अभी भी उत्तेजित हुआ जा रहा था ।

और सबसे बढ कर उसे हाल की लाईट बुझने का इन्तेजार था ।

कुछ ही देर सारे लोग अपनी अपनी सीट पर वापस आ चुके थे लेकिन वो दोनो प्रेमी जोड़े नही दिखे और बत्ती भी बुझ गयी ।

निशा समझ गयी कि वो मजे करने के लिए ही आये थे और उनका काम शायद हो गया था

बत्ती बुझते ही अमन चहक कर - लो बत्ती बुझ गयी अब

निशा दबी हुई हसी मे - अरे थोडा सबर करो जीजू , अभी भी लोग आ रहे है

अमन - यार ये तो अब दर्द भी होने लगा है ,





निशा उसकी ओर देख कर अपना हाथ उसके लण्ड को बढा कर अंडरवियर के उपर से थामती हुई उसे सहलाने लगी - बस थोडा देर जीजू , अभी सब सही हो जायेगा

अमन निशा के हाथो का स्पर्श पाकर सिहर उठा

निशा उसके सुपाडे को टटोलती हुई - क्या हुआ जीजू उम्म्ं

अमन अपनी भारी भारी सांसो से - उम्म्ं क कुछ नही कुछ नही आह्ह

करीब 10 से 12 मिंट तक निशा ने आस पास जायजा लेते हुए लगातार अमन के लण्ड के सुपाडे को टटोलती रही और वो मादक सिसकिया लेता रहा ।

फिर निशा उठी और अपना कुरती उठा कर खड़ी हो गयी ।

अमन निशा की इस हरकत से और भी जोश मे आ गया । लेकिन एक डर भी जहन मे उभरने लगा कि ये आगे क्या करने वाली है ।

निशा खड़ी होकर अपने पीछे और बगल की खाली सीटो को देखा और फिर अमन की ओर देखकर उसकी सिट के सामने चली गयी





अब निशा की गदराई गाड़ उसकी चुस्त लेगी मे अमन के ठिक साम्ने थी । निशा ने देर ना करते हुए अपनी गुदाज गाड़ को फैलाते हुए सीधा अमन के लण्ड पर बैठ गयी ।

दोनो एक दुसरे के स्पर्श पाते ही सिहर उठे , निशा की गुदाज चर्बीदार गाड़ की दरारो मे अमन का लण्ड फस गया और निशा उसपे बैठकर अपनी गाड़ को लण्ड पर घिसने लगी ।

दोनो हल्की हल्की मादक सिसकिया लेने लगे ।

निशा ने अब अपना भार अमन के सीने पे दे दिया और हल्की सिसकी लेती हुई - अब दर्द कम हुआ ना जीजू उम्म्ं

अमन अपने सीने मे सासे भरता हुआ - आह्ह हा निशाअह्ह उम्म्ं बहुत जियाआदाअह्ह उम्म्ंम

अमन के हाथ निशा के कमर पर थे और निशा बडी अदा ए अपने चुतडो की दरारो मे अमन का लण्ड घिस रही थी ।

अमन निशा के कमर पर दबोचता हुआ - ओह्ह ऐसे तो दिक्कत और बढेगी ना उम्म्ंम

निशा ने उसके हाथ पकड कर उसे उठाते हुए सीधा अपने मोटे रसीले चुचो पर रख दिया - इसे दबाओ जीजू ,,आपको जल्दी डिस्चार्ज होने को मिलेगा

अमन को उम्मीद ही नही थी की निशा इस हद तक आगे बढ सकती थी , एक तो अमन का ये पहला जिस्मानी अनुभव था वो अपनी होने वाली साली से , उसके जिस्म की गर्मी और बढ रही थी





वो अपने मजबूत पंजे से निशा के नाजुक चुचे कुर्ती के उपर से ही मसलने लगा और निशा उसके सीने पर लोटने लगी

निशा - आह्ह जीजू ऐसे ही उम्म्ंम सीई आह्ह

अमन - निशा धीरे बोलो ,कोई सुन लेगा ,,औए ऐसे काम नही चलेगा ,आह्ह

निशा ने अपनी गतिमान कमर को रोका और खड़ी हो गयी ।

एक पल को अमन को लगा कि कही निशा नाराज तो नही ना हो गयी

लेकिन अगले ही पल निशा उसकी ओर घूम कर किसी तरह खुद को सरकाते हुए अमन के घुटनो के बिच मे बैठ गयी और जल्दी जल्दी उसका लण्ड अंडरवियर से निकालने लगी ।

अमन ने भी उसकी मदद की और लण्ड निकालकर उसके सामने रख दिया ।

निशा आंखे फाडे हुए अपने दोनो हाथो से उसका लण्ड थाम कर अंदाजा लगा रही थी ।

लण्ड की मोटाई और लम्बाई का अंदाज लेने के बाद उसने उसकी चमडी सरकानी शुरु कर दी , उसकी लपल्पाती जीभ लार छोड रही और मन मे बहुत लालच था कि एक बार उसके सुपाड़े को मुह मे भर ले । लेकिन उस्को अप्नी बहन सोनल से किया हुआ वादा याद था ,,इसिलिए उसने उसको हिलाना शुरु कर दिया ।

निशा के हाथो का नरम स्पर्श पाकर अमन पागल हुआ जा रहा था ।

निचे अन्धेरे मे उसे कुछ नही दिख रहा था लेकिन उसकी अभिलासा था कि एक बार वो निशा की नसिली आंखो मे झाक कर उसे अपना लण्ड चुस्ते हुए देखे ।

लेकिन यहा लण्ड को मुह ल्गाना दुर उसने एक बार सुँघा भी नही ,

अमन - आह्ह निशा जल्दी करो ना कोई देख लेगा

निशा उसकी बाते सुनकर वापस से खड़ी हो गयी और इस बार वो अमन के बगल के जगह बनाते हुए किसी तरह सट कर बैठ गयी और उसका लण्ड पकड कर हिलाने लगी ।





अमन - ओह्ह निशा ऐसे ही उम्म्ंम

निशा मुस्कुरा कर अपने आधी खुली चुचिया अमन के मुह के कारिब ले गयी और अमन बदहवास होकर निशा के सिने पर अपना मुह घिसने लगा ।

निशा तेजी से उसका लण्ड सहलाए जा रही थी कि तभी अमन - अह्ह्ह निशा आयेगा आह्ह

निशा ने फौरन अपने बैग से अपनी रुमाल को निकाला और उसको अमन के सुपाडे पर रखते हुए सुपाड़े को मुठियाने लगी

अगले ही पल मे अमन मादक सिसकिया लेते हुए झटके खाने लगा और निशा को अपनी हथेली मे गर्म चिप्चिपाह्त मह्सूस हुई

अमन के गर्म वीर्य से निशा का रुमाल भीग गया था ।

उस्ने अच्छे से अमन का लण्ड उसी रुमाल से साफ किया और उसको फ़ोल्ड करते हुए अपने बैग के एक साइड पॉकेट मे रख दिया ।

कुछ ही पलो मे अमन का लण्ड ढीला होना शुरु हुआ और उसने देर ना करते हुए फौरन उसको अन्दर करके पैंट की जीप चढा ली ।

फिर दोनो अपने अपने सीट पर बैठ गये

अमन तो खुश था लेकिन उसके लण्ड की ठोकरो से निशा की चुत अभी तक बजबजा रही थी ।





निशा ललचाई नजरों से अमन की देख रही थी और ना जाने उसे क्या सुझा उसने लपक कर अमन के होठो से अपने होठ जोड दिये ।

अमन भी खुद को रोक ना पाया और दोनो एक गहरे चुबन कर बाद अलग हुए ।

निशा ने खुद के कपडे सही किये और मुस्कुराती हुई - अब चले जीजू

अमन - हा चलो

फिर दोनो चुपचाप चालू पर्दे को छोड कर अपना काम निपटा कर बाहर चले आये ।

फिर अमन ने निशा को एक इ-रिक्से पर बिठाया और मुस्कुराते हुए बाय किया ।

दोनो के बीच एक दबी हुई भावना ने जन्म ले लिया था ।

बस वो दोनो बिना कुछ बोले एक दुसरे को मुस्कुराते हुए देखे जा रहे थे , निशा का मन था कि अभी दौड़ कर जाये और अमन की बाहो मे खुद को भर ले । लेकिन वो ऐसा नही कर सकती थी , एक मर्यादा मे वो बन्धी हुई थी ।

कुछ पल का मजा लेने के चक्कर मे निशा के दिल को अमन ने छू लिया था ।

लेकिन निशा तो निशा थी , उसकी ना तो शरारते कम होने को थी ना ही मस्तिया ।

रिक्से मे कुछ ही दुर जाने के बाद उसने अमन की मैसेज करना शुरु कर दिया

निशा - kal fir chaloge jiju film dekhne 😁😁

अमन - saali ji kahe aur mai naa bol du

निशा - toh kal sonal ko bhi leke aau 😉

अमन - fir toh mera sandwich ban jaayega 🤣🤣

निशा उसकी बाते पढ कर हसने लग जाती है

निशा - 🤣🤣🤣

निशा - chalo jaao aap , aapki hone waali biwi aapka abhi bhi wait kar rahi hogi 😁 mai bhi ghar a gayi hu bye .. my darling jiju 😉

निशा के मैसेज पढ कर अमन मुस्कुरा कर - achcha ji ek hi din me darling ummm , thank you my sweetheart saali ji 😁

फिर निशा सोनल के घर आ जाती है और अमन अप्ने घर निकल जाता है ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 169 स

लेखक की जुबानी

CHAMANPURA

दोपहर का खाना खाने के बाद राहुल अपने कमरे मे अपनी मा के आने का इंतजार कर रहा था ।

उसकी मा ने उसे कमरे मे आने का बोलकर किचन का काम निपटा रही थी ।

राहुल कमरे मे आते ही अपने सारे कपडे निकाल कर अपना लण्ड मसल मसल कर उसे खड़ा किये हुआ था ।

कि तभी उसके दरवाजे को खोलती हुई शालिनी कमरे मे आती है और सामने राहुल को बिस्तर पर नंगा लेटकर अपना लण्ड सहलाते देखती है ।

अपने बेटे की इस हरकत से शालिनी भी सिहर गयी और उसने कमरा का दरवाजा बन्द करते हुए बडी ही कामुकता से अपनी मैक्सि निकाल दी और पूरी तरह से नंगी होकर इठलाती हुई राहुल की ओर बढने लगी ।





अपनी मा की इस हरकत से राहुल की सासे अटक गयी ,उसके दिल की धडकनें तेज हो गयी । लण्ड का सुपाडा पूरी तरह फुल कर लाल हो गया ।

वो आंखे फाडे अपनी मा के कामुक रस भर नंगे बदन को निहार रहा था ।

36DD की जबरदस्त गोल गोल और कसी हुई चुचिया , शालिनी की मादकता भरी चाल से बहुत ही कामुक ढंग से हिल रही थी ।

उसकी चर्बीदार फैली हुई कमर और गुदाज नाभि से निचे पेड़ू एक शेप मे चुत तक उभरा हुआ था जिस्पे फैली हुई हल्की फुल्की झाटे उस हिस्से को और भी ज्यादा खुबसूरत बना रही थी ।

मांसल चिकनी गोरी चित्ती जान्घे कमरे की रोशनी सबसे ज्यादा चमक रही थी ।

शालिनी बिना रुके राहुल के बगल मे बिस्तर के पास आ कर खड़ी हो गई ।

राहुल के जिस्म की गर्मी अचानक से बढ गयी थी और वो थुक गटक कर अपने पैर निचे उतार कर वही बिसतर पर बैठ गया ।

वो आंखे फाडे अपने ठिक सामने अपनी नंगी मा को निहार रहा था ।

उसने पहले अपना एक हाथ आगे बढाते हुए शालिनी के नंगी कमर के पिछले हिस्से को छुआ और शालिनी सिस्क पडी

अप्नी मा की कामुक सिसकी सुनकर राहुल ने अपना हाथ अपनी मा के पीठ पर उपर सहलाते हुए आगे की ओर दबाया और दुसरे हाथ से सीधा एक चुची को थाम लिया ।

राहुल के स्पर्श से शालिनी का रोम रोम अकड़ चुका था और उसकी चुचियो के निप्प्ल तन कर सीधे खडे हो गये थे ।

राहुल ने अपनी मुह मे लार इकठ्ठा करते हुए अपनी नजरे उपर की और अपनी मा के आंखो मे देखा । अगले ही उसने अपनी आंखे बंद करते हुए अपनी गीली जीभ को उसके निप्प्ल के निचे रखते हुए होठो मे पुरा निप्प्ल भर लिया ।





राहुल की इस हरकत से शालिनी पूरी तरह हिल गयी और अपनी एडिया उचकाकर राहुल के सर पर बड़े प्यार से हाथ फेर कर सिसकी - उम्म्ंम्ं बेटाअह्ह्ह सीईईई

राहुल ने अब एक हाथ से अपनी मा की पीठ सहलाते हुए दुसरे हाथ चुची को पकडे हुए उसको मुह मे चुबलाना शुरु कर दिया ।

राहुल के गीली जीभ लगातार शालिनी के निप्प्ल को छेड़ रही थी और वो राहुल के सर को अपने सीने मे दबाये आहे भर रही थी ।

राहुल ने धीरे धीरे अपना हाथ जो पीठ पर रेंग रहा था उसको निचे की तरफ लाते हुए अपनी मा के कूल्हो को छूना शुरु कर दिया

एक हाथ मे जैसे ही राहुल ने अपनी मा के नरम नरम कुल्हे मह्सूस किये उसने चुची पर दुसरा हाथ भी हटाकर पीछे चुतडो पर ले गया और अब दोनो हाथो से अपनो मा के गाड़ को सहलाने लगा ।

राहुल के ठंडे हाथो का स्पर्श अपने चुतडो पर पाते ही शालिनी ने अपनी गाड़ सख्त करने लगी ।

वही राहुल ने दुसरी चुची पर मुह भिड़ दिया ।

राहुल ने जैसे ही पहले चुची को छोडा शालिनी उसको हाथ मे लेके सहलाते हुए अपनी चुची की लाली को कम करने लगी जो राहुल ने चुस चुस कर किये थे

फिर राहुल ने अच्छे से एक हाथ की कलाई से अपनी मा के गाड़ को जकड़ा और दुसरे हाथ से अपनी मा की चुची पकडते हुए उसको जोर जोर से मसलते हुए चुसने लगा ।

शालिनी सिसकिया भी तेज होने लगी - आह्ह बेटा आअराअम्ं से उम्म्ंम आह्ह उम्म्ंम

राहुल के कानो जैसे जैसे उसके मा की मादक सिसकियाँ पड रही थी वो और भी जोश मे अपने मा के चुचि और गाड को मस्ल रहा था ।

कुछ ही देर मे उसने शालिनी को पल्टा और घुमाते हुए उसको अपने आगे बिसतर पर बिठा दिया और पीछे से उसके पीठ मे अपना सीना सटाते हुए हाथ आगे बढा कर अपनी मा की नंगी चुचियो को थाम लिया

अपनी ठंडी पीठ पे अपने बेटे के सीने की तपिश महसुस कर शालिनी पुरा गनगना गयी और जिस तरह से राहुल उसकी कैस हुई चुचिया मसल रहा था उसे लग रहा था कि आज वो इनकी सारि कसावट निचोड ही लेगा

राहुल उसकी चुचियो के निप्प्ल आगे की ओर खिच के वापस से हथेलियों से उसकी निप्प्ल के साथ ही चुचिया मलने लगता जिससे शालिनी राहुल के जिस्म पर लोटने लगी थी





राहुल ना सिर्फ चुचियो पर बल्कि अब उसका हाथ शालिनी के निचे के जिस्मो को भी छूना शुरु कर चुके थे ।

उसने अपने दोनो हाथ एक लय मे बडी ही कामुकता से सरकाते हुए पहले पेट के किनारो पर फिर कमर से होते हुए उसकी चिकनी गुदाज जांघो को सहलाने ल्गा औ फिर जांघो के भीतरी हिस्सों को अपने पंजो से मसलते हुए उसने चुत के आस पास पेड़ू के निचे हाथ घुमाना शुरु कर दिया ।

राहुल को अपनी चुत की ओर बढता पाकर उसकी चुत बजबजाने लगी थी और जल्द इसका अह्सास राहुल को हुआ जब उसकी उंगलियाँ अपनी मा के बुर के मुहाने को छूती है ।

लसलसाई बुर का स्पर्श पाते ही राहुल उत्तेजना बढ गयी और उसने फौरन एक ऊँगली कच्च से अपनी मा की गर्म बुर मे पेल दी

शालिनी - अह्ह्ह बेटा उह्ह्ह्ह उह्ह्ह उम्म्ं माअह्ह्ह अह्ह्ह

राहुल ने वापस से दुसरे हाथ से अपनी मा की एक चुची को मसलना शुरु कर दिया ।

शालिनी के उपर अब दोहरा वार होने लगा था ।

शालिनी ने भी राहुल के दोनो हाथो पर अपने हाथ रख कर उसकी क्रियाशीलता पर और जोर लगाने लगी साथ ही तेज सिसकिया लेने

अह्ह्ह मह्ह्ह उम्म्ंम्ं सीईई ऐसे ही बेटा अह्ह्ह्ह उम्म्ंम उम्म्ं हा अह अह

शालिनी की चुत मारे उत्तेजना के भर भर के रस बहाने लगी और उसके कमर तेज से झटके खाने लगी

राहुल का पुरा हाथ अपनी मा के काम रस से सना चुका था ।

जैसे ही शालिनी ने शान्त होकर राहुल के हाथ पे अपनी पकड ढीली की ।

राहुल अपनी मा के चुत के रस से सनी हुई उंगलियाँ अपने मुह मे चुभलानी शुरु के दी म

शालिनी अपने बेटे की इस हरकत से थोडी शर्माई - धत्त गन्दा

राहुल - क्यू आप मेरा टेस्ट नही करते हो क्या ,

राहुल की बाते सुन के शालिनी को राहुल के तने हुए लण्ड का ख्याल आया जो कबसे उसकी पीठ पर किसी रॉड की तरह चिपका हुआ था ।

शालिनी मुस्कुराई और अपना हाथ पीछे ले जाके सीधा राहुल के लण्ड को पकड ली

अपनी मा के नरम हथेली का स्पर्श पाते ही राहुल सिस्क पड़ा और शालिनी मुस्कुरा कर उठ गयी ।

फिर वो राहुल के सामने घुटने के बल बैठती हुई उसके लण्ड को हाथो मेलेके मसलने लगी और राहुल मादक सिसकिया लेने लगा

देखते ही देखते शालिनी राहुल का सुपाडा खोल्के उसका लण्ड मे मुह मे भर ली





राहुल ने एक ठंडी आह भरी और उसकी मा ने उसका लण्ड चुसना शुरु कर दिया ।

राहुल - उह्ह्ह मम्मीईई अह्ह्ह ऐसे ही , बहुत अच्छा लग रहा है उम्म्ंम अह्ह्ह

शालिनी राहुल की सिस्किया सुनकर कर मुह मे लण्ड चुबलाते हुए नजरे उठा कर राहुल को देखा । जो आंखे भिचे हुए अपने चुतड उचकाये जा रहा था जिससे ज्यादा ज्यादा लण्ड का हिस्सा अपनी मा के गले मे उतार सके ।

शालिनी ने उसके आड़ो को मसलती हुई लण्ड को गले तक चोक करने लगी ।

जिससे राहुल का लण्ड और भी फुलने लगा । शालिनी के गाल फुलने लगे ।

राहुल के लण्ड मे अचानक से हुए परिवर्तन से शालिनी की चुत फिर से कुलबुलाने लगी और वो सुपाड़े पर जिभ फिराते हुए उसको होठो से चुब्लाने लगी ।





राहुल का लण्ड अब पूरी तरह से तैयार था , लण्ड पर कसी हुई नसे और फुला हुआ लाल सुपाडा तन चुका था , जिसमे से उसके पेसाब की नली का छेद भी फैला हुआ दिख रहा था ।

शालिनी ने अपने बेटे के लिंग की सख्ती देख कर समझ गयी कि अब ये तैयार हो गया है ।

इसिलिए वो मुस्कुरा कर खड़ी हुई

राहुल ने नजरे उठा कर अप्नी मा को देखा और खुद भी लण्ड को सहलाते हुआ खड़ा हो गया ।

शालिनी घूम कर बिस्तर पर लेट गयी और जान्घे खोल्कर अपनी बुर को दबोचा तो उसकी चुत बजबजा उठी ।

फिर उस्ने अपनी चुत के निकले रस को उसके उभरे हुए फाको पर फैलाते हुए राहुल से इशारा किया वो आगे आये

राहुल पूरी मदहोशि से आगे बढ़ कर बिस्तर पर आ गया और अपनी मा के जांघों के बिच आकर अपना लण्ड का सुपाडा अपनी मा ने बुर पर रखा ।

सुपाडा इतना फुला हुआ था कि शालिनी की कमसिन सी चुत छिप गयी थी ।

उसकी जरा सी भी लकीर उपर से नही दिख रही थी

राहुल ने कमर चलाते हुए सुपाड़े का दबाव अपनी मा के चुत के दाने पर बनाया ।

शालिनी - आउह्ह उम्म्ं बेटा उम्म्ंम सीईईई उम्म्ंम

राहुल अपनी मा की हालत देख कर थोडा मुस्कुराया और अपना लण्ड पकड कर अपने सुपाड़े से अपनी मा के चुत के फाको को फैलाने लगा ।





अपने बेटे के तपते सुपाड़े को अपनी नरम गिली चुत पर घिसता पाकर शालिनी पूरी तरह पागल होने लगी ।

वो सिस्क्ते हुए अपने चुचे खुद मसलने लगी ।

राहुल भी अपनी मा की मदहोशि देख कर जोश मे आने लगा और फिर जांघो को उठाते हुए लण्ड को चुत के मुहाने पर लगाते हुए कमर को आगे धकेला

अगले ही पल एक तेज तर्रार धक्के के साथ उस्का लण्ड अपनी मा के गर्म चुत मे फना हो गया ।

शालिनी की चुत की दीवारे चिरता हुआ राहुल का लण्ड जड़ तक अन्दर घुसता चला गया और शालिनी की आंखे मुह सब फैल गये ।

कुछ सेकंड के अंतराल पर एक गहरी आआह भरते हुए शालिनी की सिसकिया शुरु हो गयी और राहुल ने भी लण्ड उपर खीचता हुआ एक बार फिर से वैसे ही जोर का लण्ड अपनी मा के बुर मे पेला

इस बार रही सही कसर भी पूरी हो गयी और लण्ड अपने जगह बनाता हुआ घ्प्प घ्प्प अन्दर जाने लगा





राहुल पुरा का पुरा लण्ड बाहर निकाल कर घप्प घप्प करके जोर जोर से अपनी कमर पटकते हुए अपनी मा के चुत की गहराई मे पले जा रहा था

शालिनी - आह्ह आह्ह बेएएटाआहह उह्ह्ह्ह उम्म्ं आह्ह ऐहहह सेह्ह्ह नाआआअह्ह उम्म्ंम

राहुल ने देखा कि उसकी मा कुछ बोल्ना चाह रही है तो धक्के हल्के करता हुआ चोदना जारी रखता हुआ - क्या हुआ मा उम्म्ं

शालिनी - आह्ह कुछ नही तु तो ऐसे चोद रहा था कि पुरा पेट फाड़ डालेगा मेरा अह्ह्ह उम्म्ंं आअराम से पेल ना बेटा उह्ह्ह कभी किया नही है क्या पहले

अपनी मा के सवाल पर राहुल हस देता और लण्ड को फिर से कस कस के पेलने लगता हौ ।

शालिनी - आह्ह माह्ह उह्ह्ह बोल ना , क्या सच तु आज पहली बार उम्म्ं

राहुल बस मुस्कुराता रहता है और बिना कुछ बोले झुक कर अपनी मा की चुचियो को पकड को मसलता हुआ गचागच पेलने लगता है

शालिनी के सवाल फिर से अटक जाते है और राहुल अपनी मा के दोनो हाथ पकड कर उपर करके सटासत पेलते हुए - उह्ह्ह माआह्ह क्या मस्त चुत है आपकी उह्ह्ह मजा आ रहा है आह्ह

शालिनी अपने आप को बेटे की कैद मे बध कर चुदते हुए बहुत ही उत्तेजित हुई जा रही थी - आह्ह हा बेटा मुझे भी बहुत अह्ह्ह उह्ह्ह्ह ऐसे ही पेल मुझे कस कस के अह्ह्ह तू बहुत अच्चाआह्ह्ह ओह्ह्ह माआह्ह उम्म्ंम

राहुल - आपको अच्छा लग रहा है ना मा , उम्म्ं ओह्ह मुझे भी गाली दो ना पापा के जैसे

शालिनी अपने बेटे की फरमायिश सुन कर हस दी - धत्त हिहिही आह्ह रुक मत पेल ना और तेज्ज्ज अह्ह्ह

राहुल - नही दो ना मुझे भी अह्ह्ह गाली जैसे पापा को देती हो ओह्ह उम्म्ंम्ं

शालिनी - अब तुझे क्या सुनना है बोल तू हीईई उम्म्ंम्ं बता अह्ह्ह ऊहह

राहुल - जो आप्का मन करे , हिहिही दो ना मम्मी प्लीज अह्ह्ह नही तो मै नही चोदूंगा

शालिनी अपनी चुत के छल्ले मे राहुल का लण्ड कसती हुई - मादरचोद रुकना मत पेल जब तक झड़ नही जाता है आह्ह ऐसे ही पेल जैसे तेरा बाप मुझे चोदता है उह्ह्ह अपने पापा के जैसे चोद ना उह्ह्ह

अपनी मा के मुह से जोशिले शब्द सुन्कर राहुल का लन्ड़ और भी अकड़ गया ।वो और भी कस कस के अपनी मा की बुर मे चोदने लगा

राहुल - ओह्ह मम्मी , मुझे बहुत पसंद है ये शब्द अह्ह्ह क्या आप मेरी भी रन्डी बनोगी उह्ह्ह मेरी रन्डी मम्मी बनोगी उह्ह्ह बोलो ना मम्मी

अपने बेटे के मुह से अपने लिये रन्डी शब्द सुन्कर कर शालिनी की चुत बहना शुरु हो गयी और वो अपनी गाड़ उठाकर लण्ड को निचोडती हुई झड़ने लगी

राहुल उस दौरान भी चोद्ते हुए - आह्ह बोलो ना मम्मी , बनोगी ना मेरी रंडी मम्मी ऊहह बोलो मा

शालिनी अपनी कमर झटकते हुए - आह्ह हाअह बेटा सब बनूँगी , तेरी मा रन्डी ही तो है तभी तो तुझ्से चुदवा रही है





शलिनी कसमसा म्ते हुए - आह्ह पेल अपनी रन्डी मा को और तेज ऐसे ही हाह्ह उह्ह्ब माआह्ह रुकना मत ओह्ह ओह्ह हा बेटा उह्ह्ह

शालिनी ने राहुल के लण्ड को पूरी तरह से अप्ने बुर के छल्ले मे कस रखा था और अपनी मा की बाते सुन्कर राहुल भी चरम पर था

राहुल - आह्ह माह्ह मै भी आने वाला हू उह्ह्ह ,

शालिनी - मुझे देना बेटा मुझे चाहिये उह्ह्ब जल्दी कर

राहुल ने जल्दी जल्दी अपना लण्ड निकाला और सुपाड़े को मुट्ठि मे भरके उठ कर अपनी मा के ओर गया

उस्से पहले ही उसका लण्ड की नसो ने उसके हाथो मे ही झटके देने शुरु कर दिये





राहुल जल्दी से अपनी मा के मुह पर लण्ड ले जाकर आखिर के दो पिचकारी देता हुआ - आह्ह मेरी रंडी मा ये लो हहह उह्ह्ब

शालिनी अप्नी जीभ निकाले आखिर बुंद तक मुह खोले रही

और फिर उसने लपक कर राहुल की सनी हुई हथेली पकड कर उसको मुह मे बोर के चुस्ने लगी

फिर उसने राहुल के लण्ड को चुस्ते हुए अच्छे से निचोड़ा ।

राहुल हाफ्ता हुआ अप्नी मा के सिरहाने बैठ गया और उसकी मा नजरे उठा कर अपने बेटे को देख कर मुस्कुराने लगी

राहुल की नजरे जैसे ही अपने मा से मिली वो शर्मा गया क्योकि उसे अब ये सब थोडा अजीब लग रहा था कि उसने अपनी मा से क्या क्या बोला ।

राहुल हस्ता हुआ - सॉरी मम्मी , हिहिही आप मेरी प्यारी मम्मी हो

शालिनी मुस्कुराते हुए राहुल को अपने पास आने को कहा और राहुल सरकता हुआ अपनी मा के पास गया

शालिनी ने उसके चेहरे को थाम कर माथा चूम लिया ।

राहुल - तो आप गुस्सा नही ना हो ,,उसके लिए

शालिनी मुस्कुराती हुई ना मे सर हिलाती है

राहुल भी अपनी मा के गालो को चुम कर उस्से चिपक जाता है ।

JAANIPUR

छत पर अपने कमरे मे टीवी और कुलर चालू कर बैठा कमलनाथ बार बार घड़ी निहारता हुआ अपनी बहु के आने का इन्तेजार कर रहा था ।

उसको उपर आये आधे घंटे से ज्यादा हो चुका था , उसकी बेताबी बढती ही जा रही थी ।

उसने सोचा क्यू ना एक बार निचे का चक्कर काट कर आया जाये और वही थोडी मस्ती कर ली जाये ।

कमलनाथ अपने लण्ड को पजामे मे सेट करके उस्का त्म्बू बनाता हुआ बिसतर से उठा और कमरे से बाहर निकला ही था कि उसको रीना की थोडी खिलखिलाहट सुनाई दी ।

वो आवाज बगल के कमरे से आ रही थी जो उस्की बहु का ही कमरा था ।

कमलनाथ की इन्द्रिया सचेत हुई और उसके पाव अपनी बहू के कमरे के दरवाजे की ओर मुड गये ।

आधा भिड्का हुआ दरवाजा देखकर कमलनाथ की जिज्ञसा बढने लगी


वो कुछ बहुत ही कामुक दृश्य की कल्पना लिये तेज धडकते दिल के साथ आगे बढ़ने लगा ।

और जैसे ही उसने दरवाजे के गैप से अन्दर झाका तो देखा

कि रमन और रीना दोनो बिस्तर पर लेते हुए थे और अचानक से रीना खिलखिलाती हुई बिस्तर से उठ गयी लेकिन रमन ने लपकते हुए उसकी साडी का पल्लू थाम लिया और उसे खिचना शुरु कर दिया





रीना अपनी जगह पर गोल गोल घूमती रही और कुछ ही पल मे उसके कमर से साडी उतर गयी ।

पूरी साडी हाथ मे आते ही रमन के उसको फेक कर झटके से बिस्तर से उठता हुआ रीना की ओर बढा ।

रीना पीछे कमरे दिवाल की ओर हस्ती हुई खिसकने लगी ।

रमन एक मादक नशे मे उसकी ओर बढने लगा ।

दोनो की आंखे एक दुसरे मे अटकी हुई

कमरे का नजारा देख कर कमलनाथ ने पजामे के उपर से अपने लण्ड को जोर से भिन्चा और एक गहरी आह भरते हुए वापस से कमरे मे देखने लगा ।





रमन ने रीना को दिवाल से लगा कर उसके करीब जाकर उसके आंखो मे देखते हुए उसके होठो से अपने होठ जोड लिये और दोनो मे एक गहरा चुंबन होने लगा

जिसे देख कर कमलनाथ के मुह मे भी लार भरने लगा और उसको अपनी जवानी के दिन याद आने लगे जब वो अपनी रज्जो के साथ ऐसे ही रोमैंटिक भरे पल गुजारा करता था और समय ने कैसे उसको हवस मे बदल कर रख दिया ।

ना जाने कित्ने सालो से उसने सिवाय चोदने के उसने रज्जो से कोई रोमांस नही किया ,,, कमरे मे जैसा कुछ चल रहा था वैसा ही कमलनाथ की भी करने की इच्छा होने लगी ।





अन्दर रमन रीना के होठो से सरकता हुआ उसके गुदाज पेट को चूमना शुरु कर चुका था और उसकी चर्बीदार नाभि को मुह के भर उसमे जीभ से कुरेदने लगा

रिना भी आंखे बन्द किये मादक सियकिया भारती हुई रमन के सर को अपने पेट पर दबाए जा रही थी ।

कुछ ही देर मे रमन ने रीना को घुमाया और उसके कमर को चूमने लगा और उपर बढते हुए वो खड़ा होकर पीछे से रीना कन्धे चूमना शुरु कर दिया ।

रीना पूरी तरह से सिरह उठि थी उसकी तेज सासो से उसकी चुचिया ब्लाउज को फाडने को बेताब थी वो पीछे से अपनी गाड को रमन के पैट के उपर घिस भी रही थी ।

वही कमरे के बाहर खड़ा कमलनाथ परेशान हुआ जा रहा था ।

उस्को एक जगह खड़ा होने मे भी दिक्कत होने लगी ,, पुरा शारिर कामोत्तेजना सा क्प्कपा रहा था और उस्के पैर हिल रहे थे ।

उसने अपना लण्ड भीचना शुरु कर दिया

उधर कमरे रमन आगे बढते हुए रीना के ब्लाउज़ खोलने शुरु कर दिये

रीना कसममाटी हुई रमन की बाहो मे ढीली पडने लगी और रमन उसकी चुचियो को मिजने लगा

रीना सिसकिया लेने लगी और रमन के हाथ पर हाथ रख कर अपनी चुचिया मिजवाने लगी ।

वही अपनी बहु का कामुक रूप देख कर कमलनाथ का सुपाडा फूलना शुरु हो गया था ।

रमन ने रीना का ब्लाउज निकाल दीया

अपने पति की इस हरकफ से रीना उसकी बाहो मे सिम्टती चली गयी उस्का रोम रोम खड़ा हो गया ।

चुचियो के निप्प्ल तन गये और उसके जिस्म मे एक कपकपी सी होने लगी ।

हौले से रमन ने बहुत ही धीरे धीरे रिना की बाजुओ से उसके ब्लाउज उतारते हुए उसकी चुचियो को नंगा कर दिया





अपनी बहु को अधनंगी देख कर कमलनाथ के लण्ड से सोमरस की कुछ बुन्दे टपकी

वो थुक गटकते हूए अपनी बहु के गुलाबी तने हुए निप्प्ल निहारे जा रहा था । उसके मोटे मोटे 34DD के गोल गोल चुचे पुरे तने हुए थे ।

रमन ने ब्लाउज अपनी हाथो से सरकाते हुए निचे जमीन पर गिरा दी और निचे से रीना के चुचो को थामते हुए हौले से उन्हे सह्लाया

रिना - उम्म्ंम सीईई बेबी उह्ह्ह्ह

रमन उसके नंगे कन्धों को चुमता हुआ बहुत ही आहिस्ता आहिस्ता उसकी चुचियो को हथेली मे भरने लगा ।

अपने पति की सख्त हथेलियों की खुरच से उसकी नाजुक निप्प्ल टपकने लगे थे और उनमे एक खुजलाहट सी होने लगी थी ।

रीना ने अपने हाथ वापस से रमन के हाथ पर रखके थोडा दबाव बना कर उसे इशारा किया कि वो जरा सख्ती से उसकी चुचियो को मसले

इतना इशारा काफी था कि रमन अपने दोनो हाथ आगे बढा कर बाये हाथ दाहिनी चुची और दाये हाथ से बाई चूची पकडते हुए क्रास कर लिया और वापस अपनी खुरदरी हथेली को रिना के नाजुक निप्प्ल पर रगड़ता हुआ हाथ पीछे खिचने लगा

रीना अपने पति के इस हरकत से पूरी तरह काप गयी और सिस्किने लगी





रमन ने अब भर भर के दोनो हाथो से रीना की चुचिया मसलने लगा ।

रीना भी अपने हाथो से उसकी मदद करने लगी

वही कमलनाथ कमरे के बाहर अपना लण्ड बाहर निकाल्ते हुए उसे हिलाना शुरु कर दिया था ।

वही रमन रीना को पलट पर उसको वापस से दिवाल पर ल्गाते हुए झुक कर उसकी चुचिया चूसने ल्गा और रीना उसके सर अपने सीने मे दफन करने लगी ।

वो बारी बारी से एक एक चुची को मुह मे भर कर चुसने लगा और फिर उपर उठ कर रीना के होठो से अपने होठ जोडकर वापस से उसके होठो को चुसना शुरु कर दिया

इस दौरान उत्तेजना रीना अपने पति के होठो को चुबलाती हुई उसके शर्ट खोलने लगी और रमन भी अपनी बेल्ट खोलता हुआ पैंट निकाल दिया ।

रीना रमन के नंगे सीने से लिपट कर कस के उससे चिपक गयी और एक बार फिर दोनो एक दुसरे के होठ चूसने लगे

अब रमन ने अपने हाथ से रीना के चर्बीदार गाड़ को मसल्ते हुए उसकी आँखों मे देखा और रीना से इशारा किया

रिना ने उसकी आंखो मे देखते हुए धीरे से अपने होठ हिला कर कुछ बोली , जिससे रमन का चेहरा खिल उठा और वो झुक कर रीना को अपनी गोद मे उठा लिया तो रीना खिलखिलाने लगी

कमलनाथ को लगने लगा कि अब एक जबरज्स्ट चुदाई देखने को मिल ही जायेगी लेकिन हुआ उस्का उलटा

रमन रीना को अपनी बाहो मे लेके बिस्तर की ओर तो मगर उस जगह पर कमलनाथ को कुछ भी नजर नही आ रहा था ।

तभी कमरे से रीना की आवाज आई - अरे बुद्धू दरवाजा बंद कर लो ना हिहिहिही

कमलनाथ ने जैसे ही रिना की आवाज सुनी उसकी फट गयी और वो झटके से वहा हट गया और तेजी से अपने कमरे मे घुस गया

तभी उसे रीना के कमरे बंद होने की आवाज आई और वो मन मसोस कर रह गया ।

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पोस्ट क्रेडिट सेंस

खड़ी दुपहरी मे चमनपुरा बस स्टैण्ड पर रन्गीलाल खड़ा होकर एक बस का इन्तेजार कर रहा था और लगातार फोन पर जुड़ा हुआ बाते किये जा रहा था

कि एक बस आकर उससे थोडी दुर रुकती है ,, और बस पर नजरे गडाये रंगीलाल बेताब होकर मोबाइल हाथो मे घुमा रहा था कि तभी उसकी आंखे खिल उठी और चेहरे पर एक मुस्कान फैल गयी ।

सामने एक ट्राली बैग लिये बस से उतरती भिड़ के बिच से नीली साडी मे रज्जो इथलाती मुस्कुराती हुई रन्गीलाल की ओर बढने लगती है ।

जिसे देख कर रंगीलाल की बाहे खिल जाती है और उसकी खुशी का ठिकाना नही होता है ।
 
वर्क इन प्रोजेसस ... :ऑनलाइन:
 
अप्पी होली 2023

:ड्रंक:

सभी गुप्त-ज्ञात , दृश्य-अदृश्य , पंजीकृत एवं मेहमानरुपी योनियो मे इस फोरम तथा मेरी कहानी पर विचरण करने वाले समस्त प्राणी मात्र को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ



 
अपडेट 170


अगली सुबह मै नास्ते के बाद बुआ से यहा विदा लेके घर के लिए निकल पड़ा और अरुण के साथ साथ मीना को भी हिदायत दी कि शिकायत नही मिले किसी को भी । मैने दोनो बुआ को भी समझाया कि आगे से मै अरुण के सम्पर्क मे रहूंगा और उसका ध्यान रखुन्गा । यहा के रहस्य बहुत थे और मेरे पास समय की कमी .... ना बड़ी बुआ ने मुह खोला और ना ही मीना ने कुछ और कहा । वो सही मायने मे घरके लिये वफादार थी बस जिस्म की जरुरत ने उसे बहका रखा था । मगर मेरे दिल मे कही कुछ अट का हुआ था एक चूल सी थी बुआ और फूफा की कहानि जानने की वो शायद बुआ के चमनपुरा आने के बाद अकेले मे उनसे पूछा जा सकता था ।

खैर करीब तीन बजने को थे और मै बस स्टैंड चमनपुरा पर उतर चुका था ।

सप्ताह भर की अपने चमन से दुरी भी जैसे बरसो की जान पड़ रही थी ।

मन मे कौतूहल मचा हुआ था कि अभी कोई जानने वाले मुझसे मेरे बारे मे पुछेगा कि भाई कहा थे इतना दिन , क्या किये हाहाहा मै क्या ही जवाब दूंगा ।

बीते हफ्ते मे जो मजा और अनुभव मैने किया वो मै ही जानता था ।

मन बहुत खुश था और आने वाले पल को लेके हतोत्साहित भी कि अभी घर जाते ही सब मुझे घेर लेंगे ।

मा , दीदी ! हिहिहिही , उन्हे तो मालूम ही नही कि मै घर वाप्स आ गया हू , पता नही क्या क्या तैयारिया हो गयी है क्या बाकी है उसी मे सब व्यस्त होगे ।

पहचान के लोगो से मिलता हुआ मुस्कुराता हुआ मै अपने चौराहे वाले घर की बढा जा रहा था ।

रास्ते मे काजल भाभी का घर देख कर ही बीती यादे ताजा हो गयी , इनसे भी शादी के बाद हिसाब किताब करना बाकी था ।

बस कुछ ही कदम पर मेरा घर ,

हस्ता हुआ मन मे सबको सरप्राईज करने की मन्सा लिये मै धीरे से मेन गेट खोला और गैलरी से होकर हाल मे पहुचा तो देखा कि सोफे के पास एक ट्रॉली बैग खड़ा है और सोफे पर ही एक लेडिज पर्स भी रखा है ।

घर मे नये महिला मेहमान आने की उत्सुकता ने मेरे दिल को और भी गदगद कर दिया था, लेकिन ये बैग और पर्स था किसका ?

पुरा हाल खाली पड़ा था , सारे कमरे के दरवाजे बंद पड़े थे ।

मेरे कमरे मे भी बाहर से चटखनि लगी हुई थी , गेस्ट रूम मे ताला जड़ा हुआ था ।

सिवाय मा के कमरे के जो शायद भिड्का

धडकता दिल मुझे और बेचैन किये जा रहा था । मैने अपने कन्धे से बैग सोफे पर सरका दिया और दबे पाँव मा के कमरे की ओर बढा , दरवाजे से कान लगाते ही खिलखिलाहट भरी आवाज मेरे कानो मे पड़ी

"उंह जमाई बाबू आराम से हिहिही आउच ऊहह काटो मत सीईई , देख ना छोटी समझा ना इह्ह्ह्ह अम्मीईई" ।

तभी मा की खिलखिलाहट भरि आवाज आई - अरे जीजी जब इन्ही के लिए अपना भोसडा चिकना की हो तो कर लेने दो ना इनको मनमानी हिहिहिही

दोनो अवाजे सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नही रहा

मै मन मे - क्या सच मे रज्जो मौसी आ गयी , तो मतलब पापा ने आते ही मौसी को हिहिहिही

ये सोच कर मेरा लण्ड अकड़ने लगा और मैने पैंट के उपर से उसको भीचते हुए सेट किया और मेरे जहन मे रीना भाभी का ख्याल आया कि कही वो छत पर सोनल के साथ तो नही ।

मैने लपक कर बैग उठाया और धीरे से अपने कमरे की चटखनि खोलते हुए बैग फेक कर वापस से बाहर से दरवाजा बन्द करके उपर छत की ओर भागा ।

सोनल के कमरे के सामने आकर मैने अपनी सासे बराबर की और

भिड़के हुए दरवाजे को हौले से खोलते अन्दर झाका तो

कमरे मे बिस्तर पर सोनल के साथ निशा भी लिपटी हुई , दोनो एक दुसरे को मिज रहे थे

निशा - अह्ह्ह सोनल मुझसे अब रहा नही जा रहा है , मेरी चुत को एक मोटा लण्ड चाहिये उह्ह्ह तेरी ये ऊँगलीआ किसी काम की नही उम्म्ंम्ं माअह्ह्ह

निशा की कामुकता से भरी गरम बाते सुनकर मेरा लण्ड तन गया और, मैने इधर उधर देख कर अपना पैंट खोल कर लण्ड निकालते हुए उसे सहलाने लगा ।





और उसे हिलाते हुए कमरे में घुसता हुआ - मेरे हुए ऊँगली क्यू दीदी

मेरी आवाज सुनकर दोनो बहने चौकी और मेरी देख कर चिल्ल्लाई- राज हिहिही तु

फिर वो दौड़ती अधनंगी चुचियो को हिलाती हुई और अपने लोवर उपर करती हुई मेरे ओर आई

दोनो ने झपट कर मुझे कस लिया और मेरे गालो होठो पर चुम्मियो की झड़ी लगा दी ।

सोनल - कहा था तु इत्ने दिन , एक भी बार मुझसे बात नही तुने

मै - तो रात मे रोज ही ट्राई करता थ लेकिन आप ही नही बिजी रहते हो आजकल हिहिही

निशा हस्ती हुई - हा अपने दूल्हे राजा के साथ हिहुहिही

मै - तो अब क्या ऐसे ही खड़ा रहोगे उम्म्ं

निशा और सोनल ने एक दुसरे को मुस्कुराते हुए देखा और फिर सोनल ने निशा को दरवाजा बंद करने का इशारा किया

जैसे ही निशा दरवाजे की ओर बढ़ी , सोनल निचे बैठते हुए मेरा लण्ड अपने मुह मे भरते हुए उसको चुबलाने लगी ।

निशा ने जब उसे ऐसा करते देखा वो ऐसे भागती हुई आई मानो सोनल उस्से हिस्से का लण्ड अकेले ही खा जायेगी





वो सोनल के बगल मे बैठी और ललचाई निगाहो से सोनल को लण्ड चुसते हुए निहारते हुए मेरे आड़ो को छुने लगी

मैने बडे लाड़ मे निशा के बालो को छुआ और उसने भी आगे बढते हुए मेरे आडो मे मुह मे भरके चुबलाना शुरु कर दिया

उनकी कामुक चुसाई और लपलपाती जीभ ने मेरे लण्ड की नसो मे एक अलग ही ऊर्जा भर दी ।

मेरा लण्ड पूरी तरह से तन गया सुपाडा फुल कर लाल हो गया और सोनल उसको सूंघते हुए अपने नथुनो पर लण्ड को नचा रही थी

वही निशा खड़ी होकर अपना टीशर्ट उतारती हुई हाथो मे अपनी चुचियो को मसलती हुई मेरे होठो से अपने होठ जोड लिये

मैने भी लपक कर उसको अपनी बाहो मे भरा और उसके गुदाज चर्बीदार गाड़ की नरम नरम गालो को हथेली मे भरते हुए उसके होठ चुबलाने लगा

वो भी मेरे होठ चुसते हुए मेरे शर्ट को खोले जा रही थी

वही सोनल मेरे लण्ड को कस कर अपनी हथेली मे भरती हुई मेरे सुपाडे को अपने थुक से बजबजाती होठो पर रखकर रगड़ने लगी

मैने देर ना करते हुए निशा को अलग किया और अपना पैंट एड़ियो से निकालते हुए शर्ट खोल कर फेक दिया और निशा को वापस से जकड़ कर अपनी बाहो मे भर लिया

उसका गर्म तपता जिस्म और गुदाज नरम चुचियो के तने हुए निप्प्ल मेरे सीने मे चुब रहे थे और मैने उसके चर्बीदार चुतडो को उसकी शॉर्ट्स मे हाथ घुसेड़ के मसल रहा था

वही सोनल बडी मदहोसी मे अपने जिस्म को नंगा किये जा जा रही थी


लेखक की जुबानी

JAANIPUR

रमन के दुपहर की मस्ती भरी चुदाई मे रीना को अपने ससुर का ख्याल ही नही रहा। वही रमन ने उसको दो राउंड चोद कर सुला दिया और खुद दुकान निकल गया ।

रमन के घर से जाते ही ताख मे बैठा कमलनाथ ने घड़ी पर नजर मारी तो 3 बजने को थे ।

वो चहक कर अपनी बारी के लिए अपना मुसल मसल्ता हुआ कमरे के बाहर आकर रीना के कमरे के भिडके हुए दरवाजे को खोलकर अंदर झाका तो देखा

रीना कमरे मे एक चादर मे लिपटी हुई बेसुध सोई हुई है । उसके कपडे सब यहा वहा बिखरे पड़े हुए थे , चुकी रमन को विश्वास था कि उसका बाप बिना आवाज लगाये उसके कमरे मे नाही जाता इसिलिए रमन ने रीना की नीद खराब ना हो इसके लिए उसने कपडे नही पहनाये थे , बस दरवाजा अच्छे से भिड्का कर दुकान के लिए निकल गया था

वही कमरे मे आते ही कमलनाथ पेट के पल अपनी सोती बहु के मासूम चेहरे को देखकर सारि हवस , ममता मे बदल गयी ।

निचे घुटने के पास से चादर उठी हुई थी जहा से रीना की गोरी चिकनी टांग दिख रही थी ,

कमलनाथ ने आहिस्ता से उसको ढक दिया और मुस्कुरा कर बाहर चला आया ।


राज की जुबानी

इधर निशा और सोनल पूरी तरह से नंगी होकर एक दुसरे के उपर चढ़ी हुई 69 पोजीशन मे एक दुसरे के चुत के होठो पर अपनी थूथ रगड़ रही थी ।

मै उन्के टांगो के बिच मे आकर अपना लण्ड निचे लेटी निशा के बुर के मुहाने पर लगाता हुआ हचाक से लण्ड पेल देता हू

निशा की तेज सिसकी निकल जाती है और लण्ड पुरा का पुरा उसके बुर मे सरकता हुआ चला जाता है , वही उसके उपर चढ़ी हुई सोनल अपनी होठो से निश के चुत के दाने को चुबलाने लगती है





इस दोहरे हमले से निशा अकड़ जाती है और अपनी जान्घे सिकोड़ते हुए गाड़ उचकाने लगती है ।

मुझे खुद अपने लण्ड पर निशा के चुत की कसावट मह्सूस होती है और मै धक्के तेज कर देता हू , वही निशा बदले की भावना मे सोनल की चुत मे अपनी जीभ डाल कर न्चाने लगती है और सोनल उसके उपर ही एठने लगती है ।

पुरा कमरा कामुक सिस्कियो से गूंज रहा था और मै अनवरत लगातार ध्क्क्म पेल करता रहा ,, जल्द ही निशा की चुत के छल्ले फिर से कसने शुरु हुए और वो अपनी गाड़ उठा कर मेरे लण्ड पर झडे जा रही थी ,,वही सोनल उसके चुत को उपर से मसले जा रही थी ,,, निशा की चुत बुरी तरह से लाल हो चुकी थी , मैने भी देर ना करते हुए निशा की चुत से सना हुआ लण्ड बाहर निकाला जैसे कुल्फ़ी को मलाई के बर्तन मे डुबो के बाहर निकालते है

लण्ड बाहर आते ही सोनल ने बड़ा सा मुह खोलते हुए आधे से ज्यादा लण्ड घोट कर उसको सुरकरते हुए सुपाडे तक आई और फिर सीधा अपना मुह निशा की बहती चुत मे दे दिया

वो अपने नथुने को उसके चुत के निचले हिस्सो पर लगा कर लपल्प निशा की चुत साफ करने लगा और मै जगह दुसरी ओर लण्ड हिलाता हुआ सोनल की फैली हुई गाड़ की तरफ चला गया

जैसे ही मै सोनल के जांघो के बीच आया , निचे लेटी निशा ने लपक कर मेरा तना हुआ लण्ड पकड कर मुह मे भर लिया और लेटे लेटे ही गले को चोक करने लगी





मैने भी अपने घुटनो को उचका कर लण्ड के सतहो को दबाते हुए उस्का सुपाडा सीधा सिधा निशा के गले मे उतारने की कोसिस की और फिर निशा ने उसे अच्छे से चुबलाकर सोनल की फूली हुई चुत के मुहाने पर ल्गा कर अपने हाथो से उसके बुर मे ठूंसने लगी ।

लन्ड़ के फुले सुपाडे का अह्सास पाकर सोनल ने भी अपनी गरदन घुमाई और अपनी गाड़ उथा कर मुझे सही पोजीशन दिया ताकी मै आसानी से उसकी बुर मे लंड उतार पाऊ

और मैने देर ना करते हुए लण्ड को उसके चुत के गहराईयो मे कुछ ही धक्को मे लेके चला गया ,,वही निशा निचे से अपनी जुबान निकाल कर

सोनल के बुर के मुहानो पर चलाने लगी ,,, जिससे सोनल की सिस्किया भी तेज होने लगी और वो कस कर मेरे लण्ड को अपनी चुत मे कसने लगी

मैने उसके चर्बीदार कुल्हो को मसलते हुए जोरदार करारे झटके लगाने शुरु कर दिये और वही निशा अपनी गरदन उठा और सोनल की चुत के दाने को अपने होठ और जीभ से छेड़ने लगी ,,,जल्द ही सोनल ने भी अकड़ना शुरु कर दिया और उसकी चुत बजबजाने लगी और मै अपनी बहन की फचफचाइ बुर मे पेलते हुए कस कस के धक्के लगा रहा था





वही सोनल को सुस्त पाकर निशा ने मुझ पर धावा बोल दिया और मेरी जांघो के निचे की ओर सकते हुए मेरे झूलते आड़ो को छेड़ने लगी ,

जिससे मेरे लण्ड की नसे और भी फड़क उठी और मैने पहले से ज्यादा तेज गति से सोनल की बुर फाड़नी शुरु कर दी

वो चिखे जा रही थी और मैने उसकी चर्बीदार गाड़ फैलाये सटास्ट चोदे जा रहा था और आखिर के कुछ झटको के साथ मै भी आहे भरता हुआ अप्ना लण्ड निकाला कर उसे नऐसे ही सोनल की चुत के रस से सना हुआ निशा के मुह हिलाने लगा और झटके खाने लगा





मेरे लण्ड और सोनल की चुत दोनो से कामरस निशा के मुह मे गिरने लगा जिसे निशा से बहुत अच्छे से साफ किया फिर निशा ने गदरन तान कर मेरा लण्ड गले मे उतार लिया और अच्छे से नीचौड़ने लगी ।

फिर मैने अगले दो राउंड जमकर दोनो को चोदा और लिपट कर सो गया ।


लेखक की जुबानी

JAANIPUR

शाम के करीब 5 बजने को थे , अपनी बहु के कमरे से आने के बाद कमलनाथ ने रज्जो की खोज खबर ली और खुद भी सो गया ।

शाम को जब उसकी आंख खुली तो वो उठा और फ्रेश होकर कमरे से बाहर आते ही पहली नजर अपनी बहु के कमरे पर डाली ।

कमरे के दरवाजे पे बाहर से चटखनी लगी हुई थी , जिसका मतलब था कि रीना कमरे से बाहर

कमलनाथ ने जान्चने के लिए एक नजर उपर जाने वाले जीने पर मारी और समझ गया कि बहु निचे गयी है ।

वो मुस्कुराता हुआ निचे उतरा और हाल मे नजर डाली तो वहा भी वो नही दिखी ,,लेकिन किचन से उसकी किसी से फोन पर बात करने की आवाजे आ रही थी ।

जल्द ही कमलनाथ को आभास हो गया कि रीना अपनी सासु मा से बात कर रही है ,, वही रास्ते का हाल चाल और वहा चमनपुरा मे कैसा है क्या है ।

रीना किचन मे मोबाइल हैण्डफ्री करके सब्जिया काट रही थी ,

कमलनाथ किचन के दरवाजे पर खडे होकर उसकी उभरी हुई गाड़ पर कसी हुई साडी देख कर पागल होने लगा ।

साडी के पल्लू के निचे से एक कोने से उसके सूती ब्लाउज मे कसी हुई रीना की चुचिया दिख रही थी, जिनको मसलने के लिए कमलनाथ बेताब हुआ जा रहा था ।

वो हौले से बिना कोई आहट के रीना के बगल मे खड़ा होकर अपना एक हाथ सीधा रीना के साडी मे उभरे हुए चर्बीदार कूल्हो पर धीरे से रखता है

अनजाने स्पर्श से रीना चौक जाती है लेकिन जैसे ही वो अपने बगल मे अपने ससुर को खड़ा पाती है , उसकी दिल की धडकनें और तेज हो जाती है

रीना - अरे पापा जी आप , बैथिये मै पानी देती हू

तभी मोबाइल से रज्जो की आवाज आती है - क्या रमन के पापा है क्या वहा

अपनी सास की आवाज सुनकर रिना मुस्कुराते हुए अपने ससुर की ओर देखती है और हा बोलने को होती है कि कमलनाथ उसको इशारे से ना बोलने को कहता है ।

तो रीना भी मुस्कुराती हुई - हा वो अभी निचे आये है ,, हाल मे है बोलिए आप

रज्जो फोन से - बोलना क्या है , उनका तु जान ही रही है । मै यही कहूँगी तु दुर रहना उनसे ,

अपनी सास की बात सुन्कर रीना की हसी छुट जाती है और वो अपने ससुर को देखती है जो मुस्कुराते हुए उसके नरम कूल्हो को हौले हौले सहलाना शुरु क चुका होता है ।





रीना का जिस्म के रोए अब खडे होने लगते है और उसके दिल की धड़कने तेज होने लगती है और उन्ही तेज धडकनो के साथ रीना अपनी भारी होती सासो को थामती हुई - दूर क्यू मा जी

रज्जो दबी हुई आवाज मे फोन से - देख नही रही हमेशा तम्बू टाने खड़े रहते है

रीना अपनी सास की बाते सुन्कर कर अपनी हसी दबाती हुई अपने ससुर के पजामे मे बने तम्बू को देखती है और फिर नजरे उठा कर अपने ससुर को देखती है ।

दोनो मे एक शरारती मुस्कान साझा हो रही होती है ।

रज्जो फोन से - और सुन तु जरा इधर कुछ दिन वो लेगी सूट मत पहनना

रीना - क्यू !!

रज्जो (फोन से) - अरे क्यू कया , उसमे तेरे कुल्हे मोटे दिखते है और कही उसे देख कर इनको मेरी याद ना आने लगे

अपनी सास की बाते सुन्कर रीना शर्मा जाती है और वही कमलनाथ मौके का फायदा लेता हुआ रीना की गाड़ को हाथो मे भर के उसका जायजा लेता है ।

जिससे रीना की सासे और भी भारी होने लगती है , वो कसमसाती हुई अपनी ही जगह पर एठने लगती है ।

रीना - ऊहह ठिक है मा मै ध्यान रखुंगी , और कुछ

रज्जो (फोन से ) - हा और ये जो साडी आज पहनी है उसे मत पहनना इधर

रीना अचरज से - क्यू

रज्जो - ओहो तुझे तो सब समझाना पडता है ,,अरे बेटी उसमे तेरा जोबन सब झलक रहा था आज सुबह

रीना ने अपनी सास की बात सुनकर अपनी सिफान की साडी को देखा और उसमे से झाकते ब्लाउज को देखकर अपने ससुर को छेड़ने के लिये बोली - तो क्या इसको निकाल दू मा जी !

रज्जो झिझक कर - हा बेटी , जब मै आ जाऊ तो जो चाहे पहन लेना ।

रीना ने लपक कर फौरन हाथ धुला और अपने साडी को कन्धे से उतारते हुए कमर से खिंचने लगी ,,जिसे देख कर कमलनाथ की सासे अटकने लगी ।

अब रीना सिर्फ ब्लाउज और पेतिकोट मे थी ,, सूती ब्लाउज मे बिना ब्रा के उसकी कसी हुई चुचिया तनी हुई थी ।

रीना तेज सासो से अपनी ससुर की आंखो मे देखते हुए फोन पर अपनी सास से - जी मा और कुछ

रज्जो - हा , वो तुने आज सुबह ब्रा क्यू नही पहनी थी बेटा उपर से सूती वाला ब्लाउज डाला था ,,देखा नही तेरे पापा कैसे निहार रहे थे

रीना दो कदम पीछे होती हुई हस के - तो क्या अब ये ब्लाउज भी निकाल दू

रज्जो - हा बेटी , मै तेरे भले के लिए ही कह रही थी समझ तु,

रीना खिलखिलाती हुई अपने हाथ पीछे ले जा कर अपने ब्लाउज की लटकती डोरी को खींचा और ब्लाऊज उसके कम्धो से ढीली पड गयी

कमलनाथ की आंखो की चमक बढ गयी और उसके मुह मे लार भरने लगा वो थुक गटकते हुए आगे बढने लगा और उसकी निगाहे सीधा रीना के 34DD वाले चुचो पे जमी थी वो उसकी ब्लाउज का बोझ बढा रहे थे ।

रीना ने बटन चटकाते हुए एक एक करके सारे खोल दिये लेकिन ब्लाउज नही निकाला

अभी उसकी चुचिया ब्लाउज के निचे छिपी हुई थी , उनकी ज्यादा से ज्यादा झलक कमलनाथ को मिल पा रही थी ।

रीना को इनसब बहुत मजा आ रहा था , उसके लिए अपनी सास से बाते करते हुए पहली बार अपने ससुर के सामने नंगी होने मे बहुत ही रोमांच महसूस हो रहा था , उसके जिस्म के रोए फिर से खडे होने लगे , उसके बदन की सिहरन फिर से बढने लगी और वो खुद पहल करते हुए दो कदम आगे बढ के अपनी ससुर के बाहो मे समाते हुए उसके सीने से लिपट गयी ।

अपनी बहु की इस हरकत से कमलनाथ हिल सा गया और उसके रीना को कस कर अपने बाहो मे भर लिया ।

कमलनाथ रीना को अपने सीने से लगाये उसके पीठ पर अटकी ढीली ब्लाउज पर हाथ घुमा रहा था

रज्जो - और सुन बहु

रीना ने दबी हुई आवाज ने अपने ससुर के कैद से सर बाह निकालते हुए - जी मा जी कहिये

रज्जो हस कर - वो इधर जब तक तु है थोडा रमन का ख्याल रख लेना , क्योकि यहा हम लोग एक हफ्ते से ज्यादा रुकेन्गे ,समझ रही है ना तू

अपनी सास की बाते सुन्कर रीना शर्मा कर हस्ती हुई - जी मा जी , अभी कुछ दोपहर मे ही

रज्जो हस कर - धत्त तु भी ना , चल मै रख रही हू और सबका ख्याल रखना बाय

रीना ने अपने हाथ निचे ले जाते हुए कमलनाथ के मोटे तने को हाथ मे भरते हुए मुस्कुराती हुई - जी मा सबका ख्याल रखुंगी

इधर फोन कटा नही कि कमलनाथ ने झटके से रीना को घुमाया और पीछे से हाथ आगे ले जाकर ब्लाउज को किनारे करता हुआ दोनो हाथो से रीना की रस भरी चुचिया हाथो मे भर लिया

रीना - उह्ह्ह पापा जीईई सीई अह्ह्ह धीरेहहहह मै कही जा थोडी ना अह्ह्ह उह्ह्ह्ह माआअह्ह

कमलनाथ उसके रसभरे चुचो को गारते हुए - आह्ह बहु कबसे इनको निचोडना था इसको उम्म्ंम क्या मस्त कसे दूध है तेरे उह्ह्ह्ह





रीना सिस्क्ती हुई - उह्ह्ह पापा जी कसे है तो क्या आज ही ढीले कर दोगे औह्ह्ह दर्द हो रहा है उम्म्ंम्ं

कमलनाथ - आह्ह बहु कितने नरम है ये ऊहह मन ही नही मानता उह्ह्ह

ये बोलते हुए कमलनाथ ने उसे वाप्स अपनी ओर घुमाया और झुक कर उसके गहरे भूरे निप्प्ल को मुह मे भर कर चुभलाना शुरु कर दिया

रीना अपने ससुर के मोटे होठो मे अपनी चुचियो की नसो को खीचता पाकर पागल सी होने लगी , कमलनाथ रीना की कमर मे हाथ डाले उसके चुचे पकड कर अपनी मोटी जीभ से रीना के नाजुक नाजुक चुचियो के दानो को फ्लिक करने लगा , उसपे अपनी लार से घेरा बनाते हुए बार बार मुह मे भरने ल्गा

अपनी ससुर की इस कला से रीना की चुत बेहिसाब बहे जा रही यही उसकी बिना पैंटी की जान्घे कामरस से भीगी जा रही थी ।

रीना की बढती बेताबी उसकी सासे अटका रखी थी , बहुत कसमसा कर उसने अपने ससुर के होठ अपने चुचियो से छुड़ाए और थोडा पीछे होकर अपनी लाल हुई चुचियो को हौले हौले सहलाते हुए थोडा गुस्से से अपने ससुर को निहारा तो कमलनाथ बेशर्मो की तरह दाँत दिखा दिया

जिससे रीना का चेहरा भी खिल गया और वो अपने बालो की चोटी का जुड़ा बनाती हुई आगे आई और निचे बैठते हुए अपने ससुर के पजामे का नाड़ा खोलने लगी , अपनी बहु की इस हरकत से कमलनाथ का लण्ड और भी सर उठाने लगा ।

पजामे मे बने तम्बू को देख कर रीना ने अपने दिल की बढती आग को हवा दी और अपने होठ भीचते हुए अपने हाथ आगे बढा कर कमलबाथ के लण्ड को पजामे के उपर से हाथो मे भर आड़ो सहित मसलने लगी

कमलनाथ - ऊहह बहु अह्ह्ह उम्म्ंम





रीना नाड़ा खोलते हुए जान्घिये मे कसे हुए अपने ससुर के फौलादी लण्ड को पकड़ा और अपने नथुने उसके करीब ले जाकर उस्के तने को सुँघा और होठ खोलते हुए जान्घिये के उपर से लण्ड के तने को मुह मे भरने लगी ।

कमलनाथ को यकीन ही नही हो रहा था कि उसकी बहु इस कदर हवस मे पागल हो जायेगी और पूरी बेशर्म रंडी के जैसे ही हरकते करने लगेगी

रिना की हर हरकत से कमलनाथ का लण्ड फौलादी हुआ जा रहा था

रीना ने जान्घिये को पकड कर निचे खीचा और लण्ड उछल कर बाहर आ गया ।

रीना थुक गटकते हुए आंखे फ़ाड कर उस काले फ़नकार मारते नाग को निहार रही थी ,,जिस्का काला तना और कथई सुपाडा पुरा फुला हुआ था , लण्ड की नसे पूरी कसी हुई थी , आड़ो की थैली सिकुड कर कस गयी थी ।

रीना ने कापते हुए अपने दोनो हाथो से उस फौलादी तपते लण्ड के सतहो को थामा और वो पूरी तरह से गनगना गयी ।

उसके जिस्म मे सिहरन सी फैल गयी , उसकी बदन के रोए उठ खडे हुए





बस नजर भर उसने अपने ससुर को देखा और फिर आन्खे मुन्दते हुए बड़ा सा मुह खोलकर लण्ड को घोट गयी ।

बड़ी मुश्किल से रीना के मुह आधा लण्ड जा पाया था

रिना उसको मुह मे लेके उसपे अपने होठ सरकाने लगी ।

मुह मे अन्दर ही उसकी जीभ ने सुपाड़े को छेड़ना शुरु कर दिया

जिस्से कमलनाथा का जोश और भी उफान मारने लगा ।

वो रीना के बालो मे हाथ घुमाता हुआ आहे भरने लगा , उसे रीना जे नाजुक होठो की ठंडी मिठास अपने लण्ड पर मह्सूस हो रही थी और वही रीना उसके आड़ो को अपने हाथो मे घुमाते हुए लण्ड को चुबला रही थी ।

कमलनाथ - उह्ह्ह बेटी उह्ह्ह्ह आह्ह क्या मस्त चुस्ती है रे तु ओह्ह्ह उम्म्ंम

रीना अपनी तारिफ सुन्कर कर थोडा शर्माती है और वापस से अपने काम मे लग जाती है ।

कुछ ही देर मे कमलनाथ की हालत खराब होने लगती , रीना की पूरी कोसीस थी कि वो एक बार अपने ससुर का रस निकाल दे , लेकिन कमलनाथ इसी जोश मे उसकी चुदाई चाहता था

कमलनाथ उसके सर को पकड कर उसे रोकते हुए - आह्ह नही बहु रुक जा रुक जाह्ह्ह ऊहह तु तो सब कुछ अभी ही निचोड लेगी उह्ह्ह मुझे भी तो कुछ करने दे

रीना अपने होठ पोछती हुई खड़ी होकर मुस्कुराने लगी ।

कमलनाथ उसके करीब जाकर उसको किचन की रैक से लगाता हुआ उसके कमर मे हाथ डाल कर हल्का सा उठाया

तो रीना खुद ही उछल कर रैक कर बैठ गयी और कमलनाथ ने उसकी आंखो मे देखते हुए उसका पेतिकोट उठाना शुरु कर दिया

जैसे ही कमलनाथ ने पेतिकोट उपर किया तो सामने रीना की चिनकी बिना बालो वाली रस से बजबजाई चुत की लकीरे दिखने लगी ।

उससे आती मादक गन्ध ने कमलनाथ के मुह मे पानी भरने लगा और वो थुक गटकता हुआ झुका कर थोडा सा रीना को आगे खिच कर उसकी जांघो को फैलाया

रीना अपने तेज चलती सासो से उपर निचे होती चुचियो को हाथ से पकडे हुए आंखे भिन्च लेती है और जैसे ही कमलनाथ की मोटी जीभ उसके चुत के फलको को छूटी है वो अपनी जान्घे कसते हुए सिस्क पकड़ी है

कमलनाथ वापस से उसकी जांघो को फैलात हुआ अपने होठ खोल्कर उसके बुर के होठो को मुह मे भरकर एक समूच करता है और निचे से अपनी जीभ को उसके बुर के फाको से रिस्ते रस को चाटते हुए उप दाने पर ले जाता है

जिससे रीना की सिसकिया और बढ जाती है । वो अपने हाथ चुचियो से हटा कर कमलनाथ के बालो को पकड लेती है

कमलनाथ तेजी से उस्के बुर के दाने पर अपनी जीभ घुमाता हुआ लगातार उसके चुत के फाको चुबलाये जा रहा था





रीना - उह्ह्ह पाअपाह्ह्ह्ह ऊहह और चुसो उह्ह्ह अह्ह्ह सीईई उम्म्ंम मम्मीईई उह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह येस्स्स पापाजीईई उह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह

कमलनाथ की क्रियाये अब रिना के सिस्कियो के आधीन हो गयी थी हर बढती सिसकी के साथ कमलनाथ उसके चुत को मुह मे भरता तो कभी उसपे अपनी थूथ रगड़ता और कभी जीभ को बुर के गुलाबी दिवारो पर रगड़ता था ।

जिससे रिना की रस भरी चुत और माल फेकने लगी , कमलनाथ समझ गया कि अब देर नही होनी चाहिये

इसिलिए वो खड़ा हुआ और पाव के पास रखे एक प्लास्टिक स्तूल को अपनी ओर खिचा , जो महज फुट भर ही ऊचा था । जो किचन मे उपर की रैक से समान उतरने के लिए उपयोग मे आता था

कमलनाथ किसी तरह उसपे अपना बैलेंस बना कर खड़ा हुआ और अपनी थुक से सुपाडा चिकना करता हुआ चुत के मुहाने पर लगा दिया

दोनो की दिल की धडकनें तेज हो गयी थी और दोनो एक दुसरे को देख कर आतुर हुए जा रहे थे

कमलनाथ ने लण्ड के सुपाड़े का दबाब रीना की बुर पर बनाते हुए आंखो से इशारा किया तो रीना ने भी नशे मे ही हा मे सर हिलाया

और अगले ही पल उसके ससुर के एक करारा ध्क्का उसकी बुर मे पेल दिया ,,,उसका मोटा खीरे जैसा लण्ड रीना के बुर के दिवारो को चौड़ा करता हुआ आधे से ज्यादा घुस गया ।

रीना - आअह्ह्ह मम्मीईईईईउह्ह्ह उह्ह्ह पाअपाजीईई उह्ह्ह्ह अह्ह्ह सीई

कमलनाथ ने देर ना की और दुबारा से अपना लण्ड एक तेज धक्के के साथ उसकी बुर मे पेल दिया और इस बार पुरा 8 इच का लण्ड रीना की चुत मे समा गया ।

रीना इस उत्तेजना भरे अनुभव से काप रही थी और गाड़ उचका कर अपने ससुर के लण्ड पर ही झडे जा रही थी ।

रीना की आंखे उलट रही थी और वो एक गहरे नशे मे झुम रही थी , कमलनाथ भी उसको मजे देते हुए हलके मादक धक्के लगाता रहा और कुछ पल मे जब उसको लगा कि अब वो भी ज्यादा देर रुक नही पायेवा





तो उसने वापस से करारे धक्के लगाने शुरु कर दिये , रीना की सिसकिया और चिखे शुरु हो गयी - ओह्ह्ह मुम्मीईई उह्ह्ह्ह माअह्ह्ह आह्ह पापाजीईई और पेलो उह्ह्ह कस कस के ऐसे ही अह्ह्ह

कमलनाथ उसकी सिसकिया सुन कर औ ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा और जल्द ही उसकी नसो वीर्य से भरने लगी और सुपाडा जलाने लगा

वो झटके से स्टूल से उतरा , जिससे रिना भी समझ गयी और वो फौरन रैक से कूदती हुई आगे आती है जिससे उसकी चुचिय हवा मे उछल पडती है ।

कमलनाथ इनसब को इग्नोर कर अपना लण्ड मुठियाते हुए रीना के चेहरे पे लाता है - आह्ह बहुउऊउऊ उह्ह्ह लेह्ह्ह आह्ह उम्म्ंम सीई लेह्ह्ह्ह

रीना अपना मुह खोले कमलनाथ के वीर्य को गले मे घोटती रही और आखिर मे लण्ड को थाम कर अच्छे से सूरक लिया ।

जिसे देख कर कमलनाथ को रज्जो की याद आई वो ऐसे ही आखिर मे उसके सुपाड़े को सुरकती थी ।

और कमलनाथ के दिमाग मे कुछ सवाल कौंध गये ।

वो थक कर हाफ्ता हुआ रिना के पास वही किचन के फर्श पर बैठ गया ।

दोनो हस रहे थे और रीना ने अपने ससुर के बाजू को पकड कर उसके कन्धे पर अपने आप को छोड दिया ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 171


निशा और सोनल की चुदाई के बाद शाम को मै उठा तो देखा , दोनो अभी भी सो रहे थे ।

मैने उनको जगाया और खुद अपने कपडे पहन कर निचे आया ।

सामने सोफे पर मम्मी और मौसी बाते करते हुए रात के खाने की तैयारिया कर रही थी ।

जैसे ही रज्जो मौसी की नजरे मुझपर गयी वो खुश हो गयी

मौसी - अरे लल्ला तु

मा ने भी मौसी की आवाज सुनकर मुझे सीढियो से उतरते देखा और खुश होकर खड़ी हो गयी ।

मा उठ कर - अरे राज बेटा तु!!! कब आया हमने तो देखा ही नही

मै हस्ता हुआ आगे बढ कर मम्मी और मौसी का आशीर्वाद लेते हुए धीरे से - कैसे देखते आप लोग तो पापा के साथ हिहिहिहिही

मैने इधर उधर देख कर - वैसे पापा कहा है , गये क्या ?

मेरी बाते सुनकर मा शर्माते हुए - चुप कर पागल कही का , कभी भी शुरु हो जाता है

रज्जो मौसी हस्ते हुए - हा लल्ला वो दुकान गये

मै हस कर आंखे नचाता हुआ - तब मौसी मेरे लिये भी कुछ लाई हो या सिर्फ अपने जमाई के लिए ही सब चिकना की हो

मा चौकी - इसका मतलब तुने सुना सब

मै - हा इसिलिए तो मै छत पर चला गया था कही दीदी लोग ना आ जाये और 2 3घन्टे तक उनको बातो मे उलझाये रखा ताकी आप लोग अपना काम हिहिहिहिही

मेरी बाते सुन्कर मा और मौसी शर्म से मुस्कुराने लगे ।

मा - लेकिन तुने बताया नही कि तु आ रहा है

मै - बस ऐसे ही सरप्राइज हिहिहिही

मा अपना माथा पीट पर - ये आजकल लड़के भी ना दिदी

रज्जो हस कर - क्या तु भी , मेरा लल्ला बहुत समझदार है क्यू बेटा

फिर मुझे सीने से लगा लिया

मै मौसी के चुचो मे अपना सर घुमा कर उन्के जिस्म की खुसबू लेता हुआ - उम्म्ं फुस्लाओ मत मौसी , मुझे भी चाहिये

मा हस कर कटी हुई सब्जी लेके किचन की ओर बढने को हुई - जाओ दीदी अपने लाडले को खुश कर दो हिहिहिही

मैने लपक कर मा की कलाई पकड कर - सिर्फ मौसी ही नही , आप भी । हिहिहिही

मा- क्या मै ! नही नही , अभी लड़किया निचे आ जायेंगी तू कर ले ना दिदी के साथ

मै - देखो ना मौसी , इतने दिन बाद आया हू मम्मी को मेरी फिकर ही नही है

रज्जो - आ जा ना छोटी , लल्ला का मन है तो अभी तो टाईम है खाना बनाने मे आ !

मा लेकिन लेकिन करती रही और मौसी उन्हे पकड कर उन्ही के कमरे मे लेके चली गयी





फिर एक बार फिर से मम्मी का कमरा दो बहनो के सिस्कियो से गूंज उठा ।







ताबड़ तोड धक्को के साथ मैने मौसी और मा दोनो की गाड़ और चुत लाल कर दी और





अपने सोम रसो से नहला दिया , मम्मी जल्दी से फ्रेश होकर कमरे से बाहर चली गयी ।

मै और मौसी थोडा टाईम कमरे मे रहे और इसी टाईम को देख कर मैने मौसी से अपने दिल की बात कह दी ।

मै - मौसी !!

रज्जो - हमम ल्ल्ला बोल

मै - आपको याद है मौसी जब पहली बार मैने आपको और मम्मी को एक साथ .... हिहिहिही

मौसी मुस्कुराकर अपने कपडे सही करती हुई - हम्म्म याद है वो कैसे भुल सकती हू

मै मुस्कुरा कर - तो मैने कहा था कि मै मा को पापा के साथ मिलकर ...

मौसी अपने साड़ी की तह करके पेट पर खोंस्ती हुई - हा वो तुने कबका कर लिया ना

मै आन्खे फाड़ कर मौसी को देखता हुआ -क्या ! मतलब मम्मी ने ये भी बता दिया आपको

मौसी अपना पल्लू लेते हुए मेरी ओर घूम कर - हा और वो कि तुने कैसे बाऊजी के साथ अपनी मा का टांका सेट कर दिया हिहिहिहिही

मै उखड़ कर - याररर आप लोग कुछ भी नही छिपाते क्या आपस मे ,

मौसी मुझे हग करती हुई - हिहिही नही लल्ला कुछ भी नही

मै - तो क्या मौसा जी के साथ मेरा वाला कांड भी

मौसी हस कर - अभी तक तो नही

मै - तो बताना भी मत प्लीज प्लीज

मौसी हस कर - क्यू

मै - बस ऐसे ही मै मम्मी का लाडला होकर के ही रहना चाहता हू , उनका प्यार कभी कम ना हो बस , डर लगता है कही मम्मी को ये सब पसंद नही आया तो ।

मौसी मेरे सर पर हाथ फेर कर - ठिक है बेटा मै नही बताउंगी

मैने मौसी की बाते सुनकर उनको कस के हग कर लिया

मै - हा तो मै ये कह रहा था कि

मौसी - बोल ना लल्ला

मै - वो मेरा मन है कि मै और पापा आपके साथ हिहिहिही

मौसी मुझे आगे करके मेरी आंखो मे देखती हुई

मै खिलखिला कर हस्ता हुआ - प्लीज ना मौसी

मौसी मुस्कुरा कर - लेकिन ये सब होगा कैसे ?

मै खुश होकर - वो मेरे उपर छोड दो । मै सब मैनेज कर लूंगा

मौसी - बेटा मै तो कह रही हू , शादियो का दिन है कुछ दिन रुक जा फिर बाद मे कभी

मै - ओहो मौसी आप टेनस्न ना लो , फिर कहा बार बार ये मौका आयेगा

मौसी - ठिक है जैसा तुझे सही लगे कर , मै तेरे साथ हू

मै मौसी के गालो को चूमा और कमरे से बाहर आ गया ।

फिर फ्रेश होकर अपने भाई अनुज से मिलने के लिए दुकान पर चला गया ।

वो दुकान के ग्राहको मे उलझा हुआ था , उसको अकेले भीड़ के साथ डील करते देख मै बहुत तरस आया कि अभी से उसके मासूम कन्धो पर इतना बोझ डालना ठिक नही है , अब से जब तक मै रहूंगा उसको काम नही करने दूँगा ।

मै हस्ता हुआ दुकान पर चढा और उसके पास जाकर उसके कन्धे को पकड कर - और भाई कैसा है

वो खुश हुआ और हस कर - नस्म्ते भैया , हिहिहिही आप कब आये

मैने उसको गले ल्गाया और बोला - बस थोडा देर पहले ही, चल तु ये सब निबटा मै तेरे लिये कुछ खाने को लाता हू ।

फिर मै कल्लु हल्वाई की दुकान की ओर बढ गया , रास्ते मे करीम दर्जी , फिर रजनी दीदी और फिर जन्गिलाल सबसे हाल चाल लेता हुआ आगे बढा ।

सबने हफते भर बाद मुझे देखा था और सबको मेरी इतनी फिकर देख कर मुझे बहुत खुशी हुई ।

मैने गरमा गर्म समोसे चाय पैक करवाये और वापस आ गया ।

देखा तो दुकान से अभी अभी एक गदराई औरत कुछ समान लेके उतर रही थी और काउंटर पर पैंटीया बिखरी हुई थी ।





मतलब साफ था कि वो आंटी पैंटी लेने आई थी , फिर मैने समोसा वही काउंटर के पास के स्तूल पर निकालना शुरु किया और अनजाने मे मेरी निगाहे अनुज के पैंट मे तने हुए लण्ड पर गयी ।

मै समझ गया वो औरत इतनी गदराई थी जिसको देख कर अनुज के जजबात डोल गये उसपर से पैंटी दिखाना

साइज़ पर नजर डाली तो 42 नम्बर ,उफ्फ्फ एकदम मम्मी के नाप का

मै मुस्कुराया और अनुज का मजा लेता हुआ उसको उसके लण्ड की इशारा करके बोला - क्या हुआ भाई , अभी भी तंग करता है क्या ये उम्म्ं

मेरी बात सुनकर अनुज शर्मा कर मुस्कुरा दिया और ना मे सर हिला दिया

मै - तो फिर ये ऐसे क्यू , किसकी याद आ गयी

मेरी बात सुनकर अनुज थोडा असहज हुआ और फिर हस कर - कि...किसी की नही भैया

मैने उसकी privacy का पुरा सम्मान किया , निशा और पल्लवि के बारे मे जानते हुए भी मैने उनसब का कोई जिक्र नही किया ।

मै हस कर- कोई बात नही , आ नासता करते है ।

फिर मैने उससे हाल चाल लिया और फिर पापा से मिलने के लिए निकल गया ।

अन्धेरा बढ चुका था , मै दुकान पर पहुचा तो देखा

पापा भी काम मे व्यस्त थे , उन्होने मेरी ओर देखा भी नही ।

मै पास की दुकान की ओर गया और एक ग्लास ठंडा फालुदा लेके फटाक से दुकान पर चढ़ गया ।

और पापा के पास बैठते हुए उन्के हाथ से हिसाब वाला मेमो लेके फालुदा का गिलास उनकी ओर बढा कर - आप ये पीयो पापा , ये मै करता हू

मेरी आवाज सुन्कर पापा खिल उठे और चहक कर - अरे मेरा बेटा आ गया , देखो बबलू राज आ गया

दुकान के ग्राहक भी पापा की खुशी और उत्साह देख कर मुस्कुरा दिये

मै उनको बैठा कर शान्त करता हुआ - अरे पापा आराम से , लो पीयो इसको

फिर मैने सबका हिसाब किताब किया और मैने पापा से ढेर से बाते की । शादी की तैयारियो से लेके और भी जो काम अभी तक बाकी थे ।

फिर पापा ने बबलू काका को दुकान बन्द करने का बोल कर खुद मेरे साथ घर के लिए निकल गये ।

रास्ते मे

मै - तो पापा आज रात का क्या सोचा है !!

पापा चहक के - बेटा आज रात तो मै तू और तेरी मम्मी ,,, अरे नही रज्जो जीजी भी तो आई है

मै - वही ना , कैसे होगा ?

पापा कुछ सोच कर - ऐसा करते है , रज्जो जीजी को तेरे कमरे मे सुला देते है और फिर रात मे तू आ जाना मेरे कमरे , लेकिन !

मै - क्या लेकिन !

पापा - वो मै रज्जो जीजी को बोल चुका हू कि आज रात मे मै और तेरी मा साथ मे

मै - ओहो फिर ,

पापा थोडा सोच कर - उम्म्ं अगर किसी तरह से रज्जो जीजी और तेरा काम हो जाये फिर हम तुझे भी शामिल कर लेंगे ।

मै मुस्कुराया और समझ गया कि पापा हम चारो को एक साथ लाने का ट्राई कर रहे है ।

मैने अपना दिमाग दौड़ाया और मुस्कुराकर बोला - हो जायेगा पापा

पापा चहक कर - कैसे ?

फिर मैने पापा को अपना प्लान बताया और वो खुश होकर - ओहो तु तो बड़ा चालू निकला भाई ।

मै हस कर - आपका ही बेटा हू ना पापा

पापा - ये काम करेगा ना बेटा , रिस्की नही है ऐसे घर मे ...

मै - आप उसकी चिंता ना करो मै मैनेज कर लूंगा ,

फिर हम दोनो चौराहे वाले घर पहुच गये ।



लेखक की जुबानी


JAANIPUR

ढलती शाम अब रात का रूप ले रही थी और कमलनाथ रीना को अपने बिस्तर पर लिताए हुए उसके नंगे जिस्मो 3 बार लगातार चोदने के बाद भी चूमे जा रहा था ।

उसकी प्यास बुझने से रही , उसके जादू भरे स्पर्श से रीना भी मदहोश हुई बिस्तर मे अपनी एडिया रगड़ कर अपना सब कुछ कमलनाथ के हवाले कर चुकी थी ,

रसिली नाभि पर चलती उसके ससुर की खुरदरी गीली जीभ उसके जिस्म के हजारो बिजलियां एक साथ दौडा रही थी , उसका अंग अंग अकड़ रहा था , चुत कामरसो से लिभ्डी सनी हुई थी , पसीने से अब दोनो के जिस्मो से गन्ध भी आनी शुरु हो गयी थी ।

लेकिन काम के अंधे दोनो को इसकी सुध कहा , तभी 8 बजने का घन्टा बजा और दिवाल घड़ी के घंटीयो की आवाज से रीना झटके के साथ उठ बैठी ।

कमलनाथ भी असमन्जस भरा गरदन उठा कर रीना को देखा - क्या हुआ बहू !

रीना ने अपने बिखरे बालो का जुड़ा किया और पलंग पर पड़े ब्लाउज़ को उठा कर उसने बाहे भरते हुए - पापा जी जल्दी करिये , रमन आते होंगे और मैने कुछ बनाया नही है ।

रमन का नाम सुनते ही कमलनाथ के भी कान खडे हुए और उसे ध्यान आया कि वो पिछले 3 घंटो से

रीना के जिस्मो को भोगे जा रहा है

वो भी हड़बड़ाहट मे उठा और अपने जांघिये को तालाशने लगा , ना मिलने पर वैसे ही पजाना चढा कर बनियान पहनने लगा

रीना - अरे पापा जी आप भी नहा लो , मै नहाने जा रही हू

नहाने की बात सुन्कर कमलनाथ रीना को देखकर मुस्कुराते हुए - मै भी आऊ बहु

रीना मुसकराते ब्लाउज पेतिकोट मे अपनी साड़ी समेटते हुए- क्या ! नही नही प्लीज पापा जी देर होगी प्लीज

कमलनाथ हसकर - अच्छा ठिक है लेकिन रात का क्या ?

रीना मुस्कुरा कर कमरे से बाहर जाती हुई - भूल गये , मा जी ने रमन का भी ख्याल रखने को कहा था हिहिहिही

इतना बोल कर रीना अपने कमरे मे चली गयी और कमलनाथ वही सोफे पर कुछ देर आराम करने के लिए बैठ गया ।

CHAMANPURA

ढलती रात ने यहा भी लोगो के अरमां भड़का रखे थे । एक ओर जहा राहुल और शालिनी पुरा पुरा दिन एक दुसरे के जिसमो से लिपटे हुए पड़े रहे तो वही जन्गीलाल को आज पुरा दिन कोई खुराक ना मिलने से उसके लण्ड की नसे अलग ही फड़क रही थी ।

वही अनुज शाम को आई दुकान पर उस महिला के बदन की तुलना अपनी मा के जिसमो से करके अलग ही दुनिया मे खोया हुआ था ।

लण्ड की कठोरता ने उसके जिस्म की गर्मी भड़का रखी थी ।

समय देख कर वो भी दुकान बन्द करके घर के लिए निकल पड़ा ।

उसने तय किया कि पहले जाकर वो बाथरूम मे अपनी मा रागिनी की पैंटी को सूंघ सूंघ कर मूठ मारेगा और फिर ठंडे पानी से नहा कर जिस्म की गर्मी को भी शान्त करेगा ।

मन और तन मे आग लिये अनुज तेज कदमो से घर पहुचा और दरवाजे से प्रवेश करने से पहले उसने गहरी सास लेके खुद को थोडा बहुत सम्मान किया और हाल मे प्रवेश किया ।

नजर घुमा कर देखा तो किचन मे रोज का वही दृश्य था । उसकी मा और दोनो बहने किचन मे लगी हुई थी ।

मा के कसे हुए कूल्हो को देख कर अनुज का लण्ड हर बार की तरह फिर से ठुमक उठा ।

उसने आस पास देखा तो कोई नजर नही तो उसने देर ना करते हुए फटाफट अपने कमरे मे गया और कच्छा तौलिया लेके सरपट छत की ओर भागा ।

छत का दरवाजा पहले से खुला पाकर अनुज ने अपनी गति हल्की की और आस पास नजर घुमा कर वहा का जायजा लिया ।

तभी उसे बाथरूम के बंद दरवाजे की जाली से लाईट जलती हुई दिखी ।

उसे लगा कि उसका भइया राज ही होगा जो नहाने के लिए उपर चला आया होगा ।

मुस्कुरा कर वो बाथरूम की ओर बढा और दरवाजे पर जाकर आवाज देता हुआ - भैया कितना टाईम लगेगा

परिस्थितियो से अन्जान अनुज ने आवाज लगाते हुए बाथरूम के दरवाजे पर हाथ लगा कर उसे हलका सा जोर भी दे दिया था ।

नतिजन चोईई की आवाज के साथ दरवाजा खुला और भीतर से तेज टोटी की धार के साथ रज्जो मौसी की चिहुक भरी आवाज भी निकल पड़ी ।

अनुज के कानो मे जैसी ही महिला आवाज पड़ी उसकी इन्द्रियाँ सतर्क हो गयी और वो आवाक होकर खुले दरवाजे के बाहर से बाथरूम मे देखने लगा

सामने पेतिकोट से अपने स्तनो को छिपाने की कोसिस करती उसकी गदराई मालदार मौसी पूरी तरह से शॉवर मे नहाई भीगी सी खड़ी थी ।

उन्के जिस्मो से चिपके हुए पेतिकोट उन्के जिस्मो की कामुकता और बढा रहे थे। अनुज का लण्ड तन तन कर लोवर मे ठोकरे मारे जा रहा था ।

कुछ पलो का ये संयोग ठहर सा गया और जब दोनो की चेतना लौटी और सामने अपने छोटे भतीजे को पाकर रज्जो के स्नायु शान्त हुए

वो हस कर शावर की टोटी बंद करती हुई और तन पर चिपकी हुई पेतिकोट को खिचकर अपने भारी भारी स्तनो पर चढाती हुई - अरे लल्ला मै हू नहा रही हू , तु भी नहायेगा क्या ?

अनुज को अपनी मौसी से ऐसी किसी भी प्रतिक्रिया की कोई उम्मीद नही थी , उसके हिसाब से तो या तो मौसी को दरवाजे के पीछे छिप जाना चाहिए था या दरवाजा ही बंद कर देना चाहिए था ।

लेकिन बजाय इसके वो बिना कोई आपत्ति के सीधे उसी अवस्था ने सीधे उससे बाते कर रही है ।





इधर रज्जो ने वापस से अपना सवाल दुहराया तो अनुज ने अपनी मौसी के मोटे दाने वाले निप्प्ल को जो पेतिकोट पर उभरे हुए थे उनसे नजरे हटाकर हकलाता हुआ - ह ह हा मौसी , मुझे भी नहाना था ।

रज्जो मुस्कुरा कर - ठिक है आजा नहा ले

अनुज असहज होकर - नही आप बाहर आजाओ मै नहा लूंगा फिर

मौसी वही शॉवर से हट कर तौलिया लेके अपने जिस्म को साफ करती हुई - अरे ल्ल्ला आ नहा ले ,

" मुझे अभी देख ये कपडे भी धुलने है , कब तक खड़ा रहेगा तू" , रज्जो ने बाथरूम के फर्श पर पड़ी अपनी ब्लाउज साडी के साथ किनारे को चिपकी ब्रा और पैंटी को दिखाते हुए अनुज से कहा ।

अनुज थुक गटकता हुआ अपने तने हुए लण्ड की एथन को बिना हाथ लगाये अन्दर आ जाता है ।

इधर वो बारी बारी से अपने कपडे निकाल कर बाथरूम के हैंगर पर टांगता है , जिस्की खूंटीयो पर उसके मौसी की एक नाइटी टंगी हुई थी ।

अनुज को समझ आ रहा था कि मौसी रात मे ब्रा पैंटी नही पहनने वाली है , जबकि बाते इसके उलट थी । रज्जो की आदत थी वो नहाने के बाद सिर्फ नाइटी मे ही पहन लेती थी उसके बाद कमरे मे जाकर अपने कपडे बदलती थी ।

थोडा असहज और शर्म भाव से अनुज अपने अंडरवियर मे बने तम्बू को छिपात एडजस्ट करता हुआ शॉवर के निचे खड़ा हो गया , और वही रज्जो उसी गीले पेतिकोट मे अनुज की ओर पीठ करके आगे झुक कर बालटी मे कपडे खन्गालने लगी ।

शॉवर लेते हुए अनुज की निगाहे उस गीले और जिस्म से चिपके पेतिकोट पर गयी , जिसमे झुकने की वजह से उसके मौसी की गाड़ बहुत चौडे मे फैल गयी।

इतनी बड़ी फैली हुई चर्बीदार गाड़ देख कर अनुज का लण्ड और भी बेकाबू होने लगा ।

जैसा भी माहौल था , भले ही अनुज काफी उत्तेजित था लेकिन अभी उसका कलेजा इतना मजबूत नही था कि वो राज की तरह स्वछन्द होकर अपने कामुकता के भिन्न होकर कुछ दिमाग चला सके ।

अभी भी उसमे बचपना भरा था , एक चोरपन का अह्सास उसको डरा रहा था ।

ऐसे मे अनुज ने जल्दी जल्दी नहा कर अपने कपडे लेके बाहर आ गया ।

खुली हवा मे हल्की रोश्नी मे उस्के अपने अंडरवियर बदले और फिर उन्हे धुलने के लिए वो वापस अन्दर जाने को आया तो रज्जो ने उसे टोका

रज्जो - ला मुझे दे , मै धुल देती हू

अनुज हिचक कर - नही मौसी मै धुल दूँगा , आप परेशान ना हो

रज्जो - अरे ला ना , अपने धुल रही हू ना इसी मे डाल दू साफ हो जायेगा

बड़ी हिचक और शर्मिंदगी भरे भाव से अनुज ने अपने कामरस के शुरुवाति रस बिन्दुओ से सने अंडरवियर को थमा और बिना एक भी पल रुके वहा से फौरन निचे अपने कमरे की ओर चला गया ।

रज्जो ने उसे बालटी मे डाल कर खंगाल और कचार कर धुल दिया । फिर अपने ही पैंटी के बगल मे छत की खुली अरगन पर चिमटी से लगा लहराने के लिए बाकी कपड़ो के साथ छोड दिया और निचे आ गई ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 172 ( ा )



लेखक की जुबानी



CHAMANPURA

कमरे मे आकर अनुज अपने ही बिस्तर पर बैठा हाफ रहा था ,

उसे समझ नही आ रहा था मौसी ने आखिर क्यू आम घरेलु महिलाओ जैसे प्रतिक्रिया नही दी । जैसा कि बाकी औरते देती है जब वो गैर मर्द के सामने ऐसी किसी अवस्था मे होती है तो ।

उसकी मौसी के व्यव्हार ने अनुज का डर थोड़ा कम जरुर कर दिया था और भीतर से अब एक हिम्मत आ रही थी कि क्यू ना मौसी के उपर ही ट्राई किया जाये ।

शुरु से वो खुले विचारो वाली रही है और उससे बहुत स्नेह करती आई ,

अनुज अपनी मौसी के साथ बिताने कुछ यादगार पलो को याद करता है जब वो अपनी मौसी से लिपटा हुआ करता था लेकिन उन दिनो उसकी ऐसी कोई भावना नही होती ।

वहा एक सच्चा और प्रेम भरी दुलार पाने की भावना थी ।

उन बीते पलो को याद करते हुए अनुज अपने कपडे पहन रहा था और उसका लण्ड सर उठा रहा था ।

तभी पायलो की खनक उसे जीने पर सुनाई दी और वो समझ गया कि उसकी मौसी सीढियो से निचे आ रही है ।

वो फटाक से अपना टीशर्ट पहना और दरवाजा खोलकर बाहर तो देखा उसकी मौसी हाल से होकर निचे वाले जीने की ओर जा रही थी और उनकी भारी भरकम गाड़ उस कसी हुई नाइटी मे बहुत ही कामुक तरीके से थिरक रही थी ।

दोनो चुतड आपस मे टकराते एक जोरदार कम्पन पैदा कर रहे थे जिसकी मादक झलक नाइटी मे उभर रही थी ।

अपनी मौसी की बड़ी गाड़ को ऐसे हिलता देख अनुज का लण्ड पुरा फौलादी हो गया और वो लण्ड दबाता हुआ वैसे ही अपनी मौसी के चुतडो मे खोया हुआ निचे उतरने लगा ।

जैसे जैसे रज्जो अप्नी गाड़ मटका कर एक एक सीधी उतर रही थी वैसे वैसे अनुज का लण्ड फड़क रहा था ।

वही हाल मे सोफे पर पहले से राज , रन्गीलाल के साथ रागिनी बैठी हुई कुछ बात कर रही थी ।

सीढियो से आती पायलो की आहट से दोनो बाप बेटो ने नजर उठा कर रज्जो को देखा तो सामने बिना ब्रा के नाइटी मे उसकी भारी भारी मोटी मोटी चुचिया हिल्कोरे खा रही थी ।

एक ही पल मे दोनो के लण्ड उनके लोवर मे ठोकरे मारने लगे ।

इधर रज्जो निचे आते ही - छोटी(रागिनी) !! इधर आ तो

फिर रागिनी उठ कर रज्जो के साथ उसके कमरे मे चली गयी ।

वही दोनो बाप बेटो की सीढि पर पीछे से उतरते हुए अनुज पर गयी और दोनो की हवस भरी मुसकान सिकुड गयी और वो आपस मे बाते करने लगे ।

वही अनुज ने जैसे ही साम्ने अपने पापा और भैया को देखा उसकी हालत खराब होने लगी ।

वो किसी तरह से लोवर मे अपना लण्ड सेट करता हुआ निचे उतरा

राज - अरे तुने कंघी नही किया क्या ?

अपने भैया की बात सुनके अनुज को अपने बालो का ख्याल आया और वो अप्ने सर पर हाथ घुमा कर चेक करता है ।

वो जैसे ही वापस कंघी के लिए उपर जाने को होता है तो राज उसे टोक देता - अरे मेरे कमरे कर ले भाई , हाअह्हहा

अनुज भी हस कर शर्माता हुआ दरवाजा खोल कर राज के कमरे मे चला जाता है ।

वहा वो कन्घी कर रहा था और उसके जहन मे बार बार उसकी मौसी के ख्याल चल रहे थे ।

वो कंघी लेके कमरे के दरवाजे पर आकर सामने अपनी मा के कमरे मे झाकता है , जहा उसकी मा उसके मौसी के लिए साड़ी निकाल कर दे रही थी ।

फिर कमरे का दरवाजा बन्द हो जाता है और अनुज हाल मे वापस आ जाता है ।

इधर राज और उसके पापा आने वाले कार्यक्रम की तैयारियो की चर्चाओ मे लगे थे ।

उसके पापा ने चमनपुरा मे कार्ड से जुडे सभी काम कर दिये थे ।

राज ने विमला और सरोजा के लिए भी कार्ड के बारे मे पुछा तो उसके पापा ने कहा कि सन्जिव ठाकुर की पूरी फैमिली को निमंत्रण दिया गया है ।

और विमला भी वापस आ गयी है ।

बातो ही बातो मे पता चला कि रन्गीलाल ने चंदू के बाप रामवीर से बाते करके उसके चौराहे वाले घर की चाबिया ले ली थी ताकी कुछ मेहमानो की व्यवथा उसमे भी की जा सके ।

राज - पापा अभी खाना बनने मे समय है तो क्यू ना चलिये चंदू के घर का वयवस्था ही देख लिया जाये और क्या क्या करने लायाक है वो देख लिया

रंगीलाल - हा बेटा सही कह रहा है , अगर आज देख लेंगे तो कल उसी हिसाब से व्यवस्था कर दिया जायेगा ।

अनुज - मै भी चलू पापा

चुकि रंगीलाल को राज से रात के प्लान को लेके भी कुछ बाते करनी थी इसिलिए वो अनुज को मना कर देता है ये कह कर कि वो आराम करे और दोनो बाप बेटे निकल जाते है बाहर

......******.......*****......*******........*****.....

इधर एक ओर जहा इनकी शादियो की तैयारिया चल रही थी , वही सोनल और निशा दोनो बहाने सुहागरात की तैयारियो को स्पेशल बनाने मे लगी थी ।

किचन मे काम करते हुए निशा और अमन की चैटींग जारि थी ।

जो आज के अनुभव को लेके उसको परेशान किये जा रही थी ।

वही अमन निशा जैसी शरारती लड़की को पाकर उसका लण्ड पुरा समय फुला फुला रहने लगा था ।

लण्ड कसावट उसके लोवर मे तम्बू बनाये हुए थे ।

अपनी स्थिति बेफिकर होकर अमन मुस्कुरात हुआ सोफे पर पैर फैलाकर बैठा हुआ निशा से फोन पर चैटींग कर रहा था और इधर उसकी मा ममता उसको आवाज देने के लिए कमरे मे आ पहुची ।

अमन!!!! क्या कर रहाआ ....!

ममता जैसे ही आवाज लगाते हुए अमन के कमरे मे घुसी कि सामने सीधा उसकी नजरे अमन के लोवर मे बने तम्बू पर गयी और उसकी आंखे फैल गयी ।





एक नजर वो अमन की ओर देखा तो वो मुस्कुरात हुआ मोबाइल मे चैटींग कर रहा था और बार बार अपना तना हुआ मुसल का सुपाडा मिज रहा था ।

ममता को समझते देर नही लगी कि अमन जरुर शादी को लेके उत्साहित है , और वो मुस्कुरा उठी ।

उसने नजरे चुराते हुए अमन को फिर से आवाज दी और अमन चौक कर दरवाजे पर नजरे फेर कर खड़ी अपनी मा को देखा तो उसको अपने तने हुए लण्ड का ख्याल आया और वो झट से पास एक तकिया अपनी गोद मे रखता हुआ बिसतर पर बैठ गया ।

शर्म और लाज से दोनो मा बेटे नजरे चुरा रहे थे और ममता ने मुस्कुरा कर चोर नजरो से अमन को देखा और फिर कमरे से बाहर आती हुई - चली से आ खाना तैयार है , पुरा दिन मोबाईल मे लगा रह्ता है ।

फिर ममता अपना माथा पीटती हुई हस्ती हुई निचे सीढियो की ओर होकर किचन की ओर आ गयी ।

वही अमन तकिये से अपना सर पीटता हुआ अपने आप को कोष रहा था कि ये कैसी बेवकूफ़ी कर दी उसने । अब वो अपनी मा से कैसे नजरे मिलायेगा ।

बहुत शर्म हया के साथ अमन अपना लण्ड सेट करके निचे डायनिंग टेबल पर गया वहा खाना पहले ही परोस कर रखा था ।

उस्के पापा और चाचा खा चुके थे और नजर घुमाने पर पाया कि उसकी मा किचन मे बरतन खाली कर रही है ।

अमन ने मन मारकर खाना खाया और बिना कुछ बोले चुपचाप उठ कर अपने कमरे मे चला गया ।

ममता ने जब ये नोटिस किया तो उसे थोडा दुख हुआ , रात मे सब काम खतम करके वो दूध लेके उपर अमन के कमरे मे गयी ।

कमरे मे अमन पंखे के निचे बिस्तर पर टेक लेके पैर फैला कर बैठा हुआ हाथ मे मोबाइल घुमा रहा था , जैसे किसी गहरी सोच मे खोया हुआ हो ।

ममता की नजरे जब अपने लाड़ले पर गयी तो उसे उस्का उतरा हुआ चेहरा बिल्कुल भी पसन्द नही आया और उसने सोचा कुछ ही दिनो मे शादी है और अगर घर का माहोल ऐसा ही रहा तो कैसे काम चलेगा ।

इसिलिए वो मुस्कुराती हुई दूध का ग्लास लेके अमन के पास पहुची

ममता उसके सर पर हाथ फेर कर - क्या हुआ बेटा, क्या सोच रहा है ?

अपनी मा के मुलायम स्पर्श पाकर अमन सिहर उठा और अपनी मा का मुस्कुराता चेहरा देखने लगा ।

उसकी मा ने फिर अपना सवाल दुहराया तो अमन - सॉरी मा वो मै .... सॉरी

ममता उसके सर को अपने गुदाज पेट से लगा कर उसके बालो को सह्लाती हुई - अरे कोई बात नही बेटा, उम्र है तेरी हो जाता है । उसमे इतना परेशान क्यू हो रहा है ।

ममता - हा लेकिन तुझे अपने कमरे की स्थिति का भी ध्यान होना चाहिए ना बेटा,

अमन अपनी मा से लिपटा हुआ किसी छोटे बच्चे की भाति - जी मा !

ममता उसके गालो को छू कर - और कुछ दिन सबर नही कर सकते तुम दोनो उम्म्ंम !!

अपनी मा की बाते सुन्कर अमन शर्मा कर मुस्कुरा दिया और अपना चेहरा अपनी मा के गुदाज पेट मे लगा कर उसके फैले कमर को पंजो मे कसता हुआ चिपक गया ।

ममता हस के - देखो देखो कैसे अब शर्मा रहा है , पागल कही का , मेरा बच्चा

ये बोल कर ममता ने झुक कर अमन के सर को चूमा और उससे अलग होती हुई - चल अब ये केसर हल्दी वाला दुध पी ले

अमन ने जैसे ही हल्दी वाले दूध की बात सुनी वो मुह बनाते हुए - मम्मी आप ये हल्दी वाला दूध क्यू दे रह हो आप मुझे 4 5 दिन से , इसका टेस्ट नही अच्छा लगता

ममता मुस्कुरा कर - नाटक मत कर अब , चल पी ले ताकत मिलती है इससे

अमन - मम्मी जिम जाता हू रोज , और diet भी करता हू इसकी जरुरत नही है मुझे

ममता - मैने बोला ना है जरुरत तो है

अमन - लेकिन किस लिये

ममता हस के - वही , जिसकी तैयारी मे तु और बहु दोनो बेसबरे हुए जा रहे हो

ये बोल्कर ममता हसती हुई कुल्हे हिलाती हुई कमरे से बाहर आ गयी और अमन कुछ देर तक पहले अपनी मा के व्यंग को समझा और जब समझ आ गया तो उसकी हसी रोके नही रुकी

कि अब तो उसकी मा ही उसके मजे लेने लगी ।

फिर वो दूध का ग्लास खाली करके सोनल के फोन आने का इन्तजार करने लगा ।



राज की जुबानी


सोनल और निशा खाना बना कर गर्मी से परेशान थी इसिलिए फ्रेश होने के लिए छत पर चली गयी थी

नहाने के बाद रज्जो मौसी ने कमरे से जाकर मा से उसकी काटन की साड़ी मांग ली पहनने के लिए और किचन मे खाने के लिए सलाद कातने लगी





सब कुछ मेरी योजना के अनुसार हो रहा था

मा इस समय अभी नहा कर अपने कमरे मे थी ,

पाप और मै जैसे ही हाल मे आये तो हमारी नजर अनुज पर गयी जो उन्हे सोता हुआ दिखा और वो आपस से मुस्कराये

पुनः मैने पापा को इशारा किया और खुद हाल के सोफे पर बैठ कर मोबाईल चलाने मे लग गया ।

पापा धीरे से पीछे गये और रज्जो के बगल मे खड़ा होकर उसके जबरजस्त कूल्हो पर हाथ फेरते हुए कहा- कुछ मेरे लिए भी बनाया है क्या जानू ।





मै बिना अनुज की ओर देखे बस किचन के नजारे निहार रहा था

वही किचन मे मौसी चहकी और पापा की ओर घूमी तो पापा ने भी चौकने का नाटक किया

रंगीलाल - अरे जीजी आप , मुझे ल्गा कि रागिनी

रज्जो तंज कसते हुए - क्यू आपको मेरे और रागिनी के पिछवाड़े मे कोई अन्तर नही मिलता क्या? खुब समझती हू आपकी चालाकिया जमाई बाबू

मौसी की बाते सुन्कर जहा मै हस रहा था

इधर रंगीलाल और रज्जो की वार्ता पुन: चालू हो गयी

रज्जो तुन्क कर - मैने तो सोचा था कि आज आपके कमरे मे सोउन्गी लेकिन हिहिहिही मुझे आपकी नियत ठिक नही लगती जमाई बाबू

रन्गीलाल हस कर - क्या जीजी आप भी बच्चो के सामने ऐसे बोल रही है

रज्जो - तो क्या अब आप मुझे अकेले मे कुछ बात करना चाहते है

पापा ने थोडा साहस करके एक बार मेरी ओर देखा और फिर हस्ते हुए - अरे अपनी बड़ी साली से छिप कर क्यू बात करनी जो कुछ कहना होगा खुल कर कहेन्गे

इतने मै किचन मे जा पहुचा

मै - क्या हुआ पापा , क्या हुआ मौसी

रज्जो - अब क्या ही बताऊ राज बेटा, मुझे तो बहुत डर लग रहा है

राज - क्या हुआ मौसी

रज्जो हस कर - अरे देख तेरे पापा मुझे तेरी मा समझ कर ....।

राज - हस कर क्या आप लोग भी ना , ठिक है ऐसी बात है तो मौसी आप मेरे कमरे मे सोयिये

रज्जो - हा बेटा और क्या , क्या पता रात के अन्धेरे मे तेरे पापा तेरी मा समझ कर मुझे ही पकड कर ना सो जाये हिहिहिहिही

पापा थोडा सा मेरे सामने शर्मिंदा होने का दिखावा करते है

इतने मे मा नहा कर हाल मे आती हुई - अरे आप लोगो को कुछ शर्म लिहाज है या नही , घर मे बच्चो के सामने ही आप दोनो साली जीजा वाला मजाक रुक नही रहा हौ ।

मम्मी के आने पर सब लोगो ने शान्त होने का दिखावा किया लेकिन रज्जो मौसी कहा चुप होने वाली थी ।

रज्जो हस कर पापा का मजा लेते हुए - रागिनी भई तु मेरा बैग राज के कमरे मे रखवा दे मै उसके साथ रहूँगी , भले ही थोडा गर्मी में रह लूंगी कुछ कप्डे उतार के सो जाऊंगी और क्या ?

रागिनी - अब बस भी करो जीजी , राज जा तु सोनल और निशा को बुला ले

मा ने अनुज की ओर देखा - आप लोग अपने मे ही लगे और मेरा बेटा देखो भूखे ही सो गया हौ ।

मा ने बड़ी फिकर से अनुज को सोफे पर गरदन टीकाए सोते हुए देखा ।

फिर मै अपनी बहनो को बुलाने उपर चला गया और मा ने अनुज को जगाया ।

फिर हम सब ने खाना खाया , खाते टाईम मै मौसा मा और पापा स्बके चेहरे पर एक हसी थी ।

फिर सब अपने अपने कमरे मे चले गये

मै और मौसी मेरे कमरे मे , फिर पापा मम्मी अपने कमरे मे



कमरे का दरवाजा बन्द करते ही मौसी खिलखिलाई - जमाई बाबू की तो हालत खराब कर दी मैने आज , तु टाईम पर नही आता तो वो क्या ही बोलते

मै हस कर - हा पापा का क्या हू बोलू , उनकी खराब हालत देख कर ही तो मै जल्दी आ गया उपर से अनुज के जागने का डर भी था

रज्जो - तो फिर अब आगे क्या

मै लपक कर उनकी साडी पकड कर खीच कर उसे उन्के जिस्म से अलग करता हुआ - इसे निकालो और आजाओ बिस्तर पर मजे करेंगे

रज्जो - और वो तेरे पापा के साथ वाला

मै - अरे होगा ना ,थोडा सबको सो जाने दो तक एक राउंड हम लोग अपना तो कर ले

रज्जो मौसी हस कर - तू बड़ा चालू है रे

मैने उनकी ओर बढ कर उनकी कमर मे हाथ डाल कर उनसे लिपट गया ।



लेखक की जुबानी


एक ओर जहा राज रंगीलाल और रज्जो अपनी काम क्रीड़ा की योजनाओ को आगे बढा रहे थे लेकिन इस बात से अंजान कि उनकी इस योजना के प्रभाव से अनुज बुरी तरह से परेशान हो चुका था

दरअसल वो निचे सोफे पर सोने का नाटक कर रहा था और जबसे रज्जो उसकी मा के कमरे से बाहर निकली थी तबसे वो सोने का नाटक कर कनअन्खियो से सारा वृतांत निहार रहा था ।

ना ही खाने मे उसका मन लगा और ना ही सब सोने की इच्छा हो रही थी ।

उसका लण्ड पुरा तना हुआ फौलादी हुआ जा रहा था लेकिन इसके उलट उसके जहन मे एक अलग ही मतभेद वाली जंग जारी थी ।

उसे यकीन नही हो पा रहा था कि मौसी ने क्यो ऐसे ही वो बात मजाक मे निकाल दी ।

माना कि पापा को पता नहीं था कि वहा मा नही मौसी खड़ी है लेकिन मौसी ने क्यू उसके पापा का हाथ आखिर तक अपने कमर रखे रहने दिया और उसपे से कैसी कैसी बातें कर रही थी ,

क्या ये सब जीजा साली के रिश्तो मे जायज है , उसका दिमाग घूम रहा था और ये सोच कर उसका लण्ड और भी बौखला रहा था कि क्या होगा अगर सच मे उसका बाप उसकी मौसी को चोद दे तो

और उसने अपनी ही कल्पना मे लण्ड मसलना शुरु कर दिया

बाथरूम का वो दृश्य याद आने लगा जब रज्जो मौसी उसके सामने सिर्फ एक भिगी हुई पेतिकोट मे खड़ी थी

वो उभरे हुए मोटे अंगूर के दाने जैसे निप्प्ल को याद कर कर के अनुज की हालत खराब होने लगी और तभी उसे रज्जो की ब्रा पैंटी की याद आई

उसने अपना दिमाग झटका और लपक कर हौले से दरवाजा खोल कर सरपट जीने की ओर भागा

छत के दरवाजे ने खोलने पर ना चाहते ही अपनी आवाज निकाल दी लेकिन हवस के अंधे अनुज ने इसकी परवाह नही की और भागकर बाथरूम के पास की अरगन पर गया , जहा उसे ब्रा पैंटी लहराती हुई मिली

अनुज ने फौरन उसे उतारा उसको हाथो मे भर के अपने नथुनो पर लगा कर सूंघने लगा

उसकी मादक गन्ध से अनुज की हालत और खराब होने लगी वो कभी ब्रा को अपने लण्ड पर उपर से घिसता तो कभी पैंटी को सूंघता

उसकी हालत खराब होने लगी और वो समझ गया कि अब रहा नही जायेगा इसिलिए वो लपक कर बाथरूम मे घूस गया





फिर लण्ड मे पैंटी लपेट कर सुपाडे को बाहर रखते हुए तेजी से मुठियाने लगा - अह्ह्ह मौसीईई उह्ह्ह मौसीई आपकी चुची कितनी मस्त है और आपकी गाड़ अह्ह्ह आह्ह मौसी चुदवा लो ना उह्ंम्ंंम उम्म्ं आह्ह खुब भर भर लंड दूँगा आपकी बुर मे उह्ह्ह अपना बुर देदो नाहहह उह्ह्ह मौसी आह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह ओह्हह्ह हा अह्ह्ह

थरथरा कर अपनी एडिया उचका कर अनुज ने गाढी और मोटी पिचकारी बाथरूम के दिवाल पर मारी और झटके खाने ल्गा ।

उसका तन सुस्त होने लगा और उसे बहुत हल्का फुल्का मह्सूस हुआ

लण्ड झाड़ कर उसने अपना बीर्य पानी डाल कर बहा दिया और वाप्स से ब्रा पैंटी टांग कर थोडा समय खुली जगह मे टहला और अपनी बिस्तर मे वापस कर सो गया ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 172 (बी)


एक राउंड की चुदाई पूरी हुई और मैने अपना हाफ चढ़ढा पहन लिया ।

मौसी ने भी अपना खुला ब्लाउज बन्द करती हुई पेतिकोट को घुटने से निचे करती हुई बोली - अब जा दरवाजा खोल दे , तभी ना तेरे पापा आयेंगे

मै मुस्कुराया और कमरे का दरवाजे की चटकनी खोल कर उसको हल्का सा भिड़का दिया ।

फिर हम लोग ऐसे ही चुपचाप अपने नाटक को चालू रखते हुए पापा के आने का इंतजार करने लगे ।

कुछ पल बीता और पापा के कमरे का दरवाजा खुलने की आहट हुई

हम दोनो सतर्क हुए और पापा ने हौले से मेरे कमरे के दरवाजे को खोल कर धीमी आवाज दिया - जीजी जाग रही हो क्या ?

रज्जो कुनमुना कर उठी और हल्की आवाज मे पापा से बात करने लगी - क्या जमाई बाबू आप भी , राज यही सो रहा है और आप है कि

पापा मौसी का हाथ पकड कर बाहर ले जाने लगे तो मौसी ने रोका - कहा ले जा रहे है जमाई बाबू

पापा -ओफो जीजी अब सबर नही होता आजाओ ना देखो राज सो रहा है

मौसी इथलाई - अगर जाग गया तो

पापा - अरे नही जागेगा आओ आप

फिर मौसी और पापा कमरे से बाहर निकल गये ।

वही मै खुशी से चहक उठा ।

कुछ पलो का इन्तेजार करना था मुझे जिसके लिए मेरी बेताबी बढती जा रही थी ।

5 , फिर 7 और फिर 10 मिंट तक मैने कैसे भी करके अपने को कमरे मे चक्कर काटते हुए रोका

लेकिन उसके बाद एक पल भी मुझसे रहा नही गया मै कमरे से बाहर निकल आया

कमरे से बाहर आते ही मै आस पास नजर घुमाई फिर दो कदम चल कर हाल मे आया

अंधेरे मे कुछ दिखा नही लेकिन मादक सिस्कियो की आवाज ने मेरे लण्ड और कान खडे कर दिये

मै समझ गया कि मेरे बाप ने लण्ड घुसेड़ दिया है

मै मेन बोर्ड के पास गया और वहा से हाल की बत्ती जला दी ।

सामने का नजारा बहुत ही लाजवाब और लण्ड फाडने वाला था





सोफे पर मौसी अपना पेतिकोट कमर उठाये झुकी हुई थी और उनकी चुचिया खुले ब्लाउज ने निचे को लटक रही थी

पापा पीछे से उनका चौड़ा कुल्हा थामे उनकी गाड़ की सुराख मे लण्ड पले जा रहे थे ।

जैसे ही बत्ती जली हम तीनो ने ऐसे दिखावा किया जैसे सबकी फट गयी हो

कुछ पल की चुप्पी रही और पापा ने भी कुछ देर के लिए अपने धक्के रोक दिये , मौसी की सिसकिया भी गले मे दब सी गयी

मै - मौसी पापा आप लोग ये ...

इतने मे रज्जो मौसी नाटक करते हुए - देख ना बेटा आखिर तेरे पापा ने जिद कर ही ली , अह्ह्ह देख क्या कर रहे है मेरे साथ,,,, बचा मुझे तू ही

मै आगे बढ कर - पापा आप ये सब ....

पापा जो कि मौसी की चर्बीदार गाड़ मे गोते लगा रहे थे और वो अपना मजा किरकिर करने के मूड मे बिल्कुल भी नही थे

वो अपने दाँत भीचते हुए दो तिन करारे झटके के साथ अपना मुसल मौसी की गाड़ की गहराइयों मे ले जाते हुए बोले - चुप कर साली रंडी, बेटा देख मुझसे अब ये नाटक नही हो पायेगा , आज इस रन्डी के मुह मे अपना लण्ड भर दे

मौसी सिसकिया लेती हुई मुस्कुरा रही थी और पापा को परेशान करती हुई बोली - आह्ह जमाई बाबू ये क्या कह रहे हो आप उह्ह्ह लल्ल्ला के साथ आप , ये कैसे

पापा के जोश भरे वक्तव्य सुनकर मै भी सोचा ये ड्रामा अब बहुत हुआ और अपना लण्ड निकाल कर उसे मसलता हुआ मौसी के मुह के पास लाकर - इसे चुसो फिर बताता हू मौसी

ये बोल कर मैने अपना सुपाडा मौसी के होठो को स्पर्श कराने लगा ।

मौसी ने देर ना करते हुए उसको मुह मे भर किया

मै एक गहरी आह भरते हुए - आह्ह पापाअह्ह सच कर रहे थे आप मौसी के मुह मे जादू है उह्ह्ह क्या चुस्ती हो आप उम्म्ंम्ं मौसीउईई





पापा मौसी की गाड़ की गहराइयों मे अपना लण्ड उतारते हुए - अरे बेटा एक बार अपनी मौसी की गाड़ मार के देख और भी मजा आयेगा उह्ह्ह साली की गाड़ मे बहुत चर्बी है अह्ह्ह देख कैसे कस ले रही है लण्ड मेरा

इधर मौसी ने मेरे मुह ए लण्ड उगल कर - ओहो तो ये क्या सब आप दोनो की मिलीभगत थी उह्ह्ह अह्ह्ह लेकिन आप दोनो ऐसे कबसे साथ मे

इससे पहले मै कोई जवाब देता मम्मी अपने कमरे से ब्लाउज पेतिकोट मे बाहर आकर - आप लोगो को कुछ समझ है या नही , ऐसे खुले मे बत्ती जला कर मजा कर रहे है , कोई उपर से आ गया तो

मम्मी की आवाज सुन्कर मौसी - अरे छोटी अब तु ही रोक इन्हे देख कैसे मुझे अकेले ही पिस रहे है दोनो मिल कर

मम्मी हसती हुई - क्या जीजी कितना ड्रामा करोगी आओ चलो कमरे मे चलते , आप लोग भी आईये

इसके बाद हम सब लोग पापा के कमरे मे चले गये

टिक टिक टिक ...........

समय बीता और मम्मी ने पापा के सामने मौसी को बताया कि वो मुझसे और पापा से चुदती है , राज को ये बात भी पता है कि आप उसके पापा से चुदती है , बस राज की इच्छा थी कि आपको भी हम लोग शामिल करे ।

मौसी - अगर ऐसी बात थी तो जमाई बाबू सीधे क्यू नही बोले ,

पापा - मुझे लगा कि आपको कही दिक्कत ना हो

मौसी हस कर - जब मै खुद मेरे बेटे से चुदती हू तो राज से क्या दिक्कत होती

" भला एक साथ दो लण्ड से मुझे कब ऐतराज होगा " , मौसी ने हम दोनो के लण्ड को थामते हुए कहा ।

मौसी की बाते सुनकर कर हम सब के चेहरे खिल गये और मौसी घुटनो के बल आ कर पापा का लण्ड मुह मे भर ली ।

मै आतुर होकर मा की ओर देखा - आओ ना मम्मी अब आप भी

मा मुस्कुराई और वो भी मौसी के बगल मे बैठ कर मेरा लण्ड पकड कर मुह मे भर के चुबलाने लगी

दोनो बहनो ने हम बाप बेटे के लण्ड को गले तक उतारने लगी





जिससे हमारे लण्ड की उत्तेजना और भी बढने लगी

मै भी अपनी एडिया उठाई और गाड़ पिचका लण्ड को मा के गले मे उतारता हुआ उन्के बालो को खीचने लगा

मै - ओह्ह्ह मा उह्ह्ह उफ्फ़ और लो ना ओह्ह्ह लोह्ह उम्म्ं

मेरे जोशिले हरकतो से पापा और मौसी ने अचंभित होकर हमारि ओर देखा और पापा का लण्ड पहले से ज्यादा कसने लगा

उन्होने भी आवेश मे आकर मौसी के बालो को खीचते हुए अपने लण्ड को पकड कर उन्के होठो पर रगड़ते हुए गालो पर पटकने

मौसी भी लण्ड की भुखी उनके लण्ड के तनो को अपने नरम होठो मे पकडते हुए निचे की तरफ सरकती हुई सीधा पापा के आड़ो मे मुह लगा और

एक हाथ से पापा के लण्ड की चमड़ी खिच कर सुपाडा खोलती हुई उन्के आड़ो मे मुह मे भरने लगी

मौसी की इस कला से पापा भी चिहुके - उह्ह्ह जीजी अह्ह्ह खा जाओगी क्या उह्ह्ह आराम से उम्म्ंम

पापा की आवाज सुनकर मै मा को हलका छोड़ा तो देखा कि पापा की लण्ड पुरा फौलादी हुआ जा रहा था , मानो जिस्म का सारा खुन उन्के सुपाड़े मे भर गया हो ।

सुपाड़े की लाली और आलू जैसा आकार देख कर मै और भी उत्तेजित हुआ जा रहा था कि वही मा ने भी मौसी की देखा देखी मेरे आड़ो मुह मे भरना शुरु कर दिया

अचानक हुए हमले से मै भी अकड़ सा गया और पहली बार मा की आंखो मे मुझे उन्के भितर की छिपी हुई रंडी नजर आई

वो मेरे लण्ड को थामे मेरे आड़ो पर अपनी थुक भरी थूथ रगड़ते हुए अपनी हवस भरी नशिली आखो से मुझे देखे जा रही थी





उनकी आंखो मे झाककर और अपनी कामुक स्थिति को देख कर मेरा दिल जोरो से धडकने ल्गा था

मेरा रोम रोम फड़क रहा था

हम चारो अपने बहसीपने के चरम पर थे , ना किसी का लाज ना किसी की फिकर और ना ही कोई डर

कमरे मे कुलर की तेज हनहनाहट के बावजूद भी मेरी और पापा की सिसकिया उठ रही थी और साथ मे दोनो बह्नो की हवस भरी गुर्राहट ।

हम दोनो का लण्ड लार और विर्य से चख्टा हुआ तना था , पूरी तरह से चुदाई के लिए तैयार और हमने ( मै और पापा ) आपस मे नजरे मिलाई और तय किया अब देर नही करनी चाहिये

क्योकि हम दोनो इस अनुभव से वाक़िफ थे कि औरत जब गर्म हो तो उसको चोदने मे देरी नही करनी चाहिये

हमने मुस्कराकर खुद को उनसे अलग किया और मैने झटके से मा उठाकर सामने सोफे पर धकेल दिया

फिर अपना लण्ड मसलता हुआ आगे बढा

मेरी इस हरकत से मा मुस्कुराई और जल्दी जल्दी अपना पेतिकोट उपर खिच कर अपनी जांघो को फैलाते हुए चुत को सहलाने लगी

मा - अह्ह्ह बेटा अब देर ना कर उह्ह्ह उम्म्ं

इधर मा मादक सिस्किया लेके अपनी बुर सहला रही थी वही मेरे बगल मे पापा खड़े होकर मौसी की चुचिया पीने लगे ।

मौसी मुस्कुराते हुए पापा के सर पर हाथ घुमा रही थी और पापा मौसी के पेतिकोट के उपर से ही उनकी बड़ी चर्बीदार गाड़ सहलाते हुए उन्के निप्प्ल चुस रहे थे

मन तो मेरा भी ललचाया कि झाकते हुए एक चुचे को मै भी दबोच लू लेकिन मा की मादक सिस्कियो ने उन्हे उनकी ओर खिच लिया

और मै घुटने के बल आकर सीधा मे चुत मे अपना मुह दे दिया

चुत के दाने पर मेरे तपते होठो का स्पर्श पाते हुए मा बिद्क कर उछल पड़ी और मैने कस कर उन्की जांघो को थाम्ने हुए उन्के बुर के होठो से अपने होठ मिलाते हुए उसको चुबलाना शुरु कर दिया

मा ने अपनी जान्घे मेरे कान्धो पर फेके हुए मुझे और भी अपनी ओर खिच रही थी साथ ही मेरे सर को अपने बुर पर दबाए जा रही थी ।

मा - ऊहह बेटा अह्ह्ह खा जा मेरी चुत को ऊहह खा जा अपनी मा की बुर को ऊहह सालो पहले तु यही से निकला था घुस जा फ़ाड के फिर से उह्ह्ह माअह्ह्ह उह्ह्ह उह्ह्ब

मा की उत्तेजना भरी बाते सुन कर मै और भी पागल होने लगा और अपनी थूथन को उसके चुत के फाको व दानो पर रगड़ने ल्गा

बौखलाई मा ने अब तेजी से चिल्ल्लाते हुए अपना सर झटक कर अपनी गाड पटकनी शुरु कर दी

जल्द ही एक गर्म मादक गन्ध के साथ उबलता हुआ लावा मा ने झरने से फूट पड़ा और मेरे होठो से लगने लगा

मेरी जीभ से जैसे ही उस गर्म नमकीन स्वाद को चखा मेरी दिल की असन्तुष्टि और बढ गयी और मैने मुह खोलते हुए मा के बुर के होठो मे अपने मुह मे भरते हुए शुरुकने ल्गा

गटागट 4 5 झटके के साथ मा का रस मेरे मुह मे जमा होने ल्गा जिसे मैने मेरे लार से मिलाते हुए घोंट गया औद वापस से जीभ निकाल के मा के बुर से फाको को फैलाते हुए अंडर की सफाई करने लगा





अब मा हाफ रही थी , मैने मा की चुत की अच्छे से सफाई के बाद उठा और सीधा मा के होठो से होठ जोड कर उनकी रसिली बुर को कुरेदने लगा

इधर मुझे पता ही नही चला कि अब पापा ने भी बगल मे ही मौसी को लिटा कर उन्के चिकने भोसड़े को निचोड शुरु कर दिया

मौसी की तेज सिस्किया सुन्कर लण्ड की कसवाट बढने लगी थी

मैने इशारे मे मा से पुछा तो वो अपनी जांघो को खोलती हुई सहमती दे दी और मैने भी देर ना करते हुए उन्की एक टांग उठा कर अपने कन्धे पर रखी और अपना एक घुटना सोफे पर टीका कर लण्ड को उनकी बुर पर घिसने लगा

जिससे मा के बेचैनी और बढने लगी फिर उन्होने खुद पहल करके अपनी गाड़ उठाते हुए लण्ड को पकड कर चुत मे घुसाते हुए - उह्ह्ह क्या नाटक कर रहा है चोद ना ऊहह उम्म्ं

मा की बेताबी देख कर मै मुस्कुराता और आगे झुकता हुआ एक जोर का झटका दिया और एक ही बार मे आधे से ज्यादा लण्ड मा के बुर मे उतर गया

मा हाफ्ते हुए - ओह्ह्ह माह्ह्ह उह्ह्ह उह्ह्ह इतना मोटा कैसे हो गया तेरा आज उह्ह्ह

मै भी मा के चुत की कसावट मह्सूस करके वापस से धक्के ल्गाना चालू कर दिया - आह्ह माहह मुझे भी लग रहा हौ उह्ह्ह शायद मौसी की वजह से

मा सिस्क कर - ऊहह हा बेटा सच कह रहा है जीजी ने तो मजा ही ला दिया उह्ह्ह और पेल उम्म्म्ं उह्ह्ह

हमारी चुदाई की शुरुवात और बातचित सुन्कर पापा ने भी मौसी की चुत से अलग हुए और मुझे आगे देख कर - अरे बेटा साथ साथ चलना चाहिए ना हाहहह्हा

मै - तो आओ ना पापा अभी तो शुरु ही किया है अह्ह्व क्यू माह्ह उम्म्ं

मा मेरे तेज करारे लंड की घिसट अपनी नरम गीली बुर मे महसुस करके आहे भारती हुए - अह हाअह्ह बेटा उह्ह्ह इत्नी जल्दी थोडी ना खतम होगा आज तो पूरी रात मुझे चुदना है ना जाने कब मौका मिले उह्ह्ह

इधर पापा मौसी की चुत मे लण्ड घुसाते हुए - क्यू नही मिलेगा मौका , अब तो जब तक जीजी है हम रोज ऐसे ही मजे करेंगे क्यू जीजी

मौसी पापा के लण्ड को अपनी बुर की गहराइयों मे मह्सुस कर - उह्ह्ह हा जमाई बाबू इसमे कोई शक है क्या उह्ह्ह मै तो रोज चुदून्गी और आज तो मुझे मेरे भतीजे के मोटे लण्ड से भी तो चुदना है

मौसी मा के निप्प्ल को उल्टे हाथो से छुते हुए पूछी - कैसा लग रहा है छोटी मेरे भतीजे का लण्ड, कितना अन्दर जा रहा है उह्ह्ह अह्ह्ह उम्म्ंम सीईई और तेज ओह्ह्ह





मा मौसी की बाते सुन्कर मादक आवाज मे - उह्ह्ह जीजी क्या बताऊ आज तो इसका लण्ड मेरी चुत फ़ाड कर भोस्डा ही बना देगा उह्ह्ह लाला और चोद ना ऊहह रुक मत फ़ाड देआज ऊहह सीई उम्म्ंम माआह्ह ऊहह जिजीईईई उह्ह्ह बहुत मजा आ रहा है

इधर पापा तेज धक्के से मौसी भी चुत को खोल्ते हुए - क्यू जीजी मेरे लण्ड से मजा नही आ रहा है कय उम्म्ंम

जीजी - ओह्ह जमाई बाबू क्या बताऊ आपके लण्ड ने तो खुजली और बढा रखी है जरा और कस से झटके दीजिये ना उह्ह्ह उम्म्ं हा ऐसे ही उह्ह्ह उह्ह्ह उफ्फ़फ्फ सीईईई ओह्ह्ह ओह्ह

पापा - ऐसे ना जीजी उम्म्ं

मौसी - हा हा ऐसे ही उम्म्ंम जमाई बाबू और पेलो उह्ह्ह आज तो सच मे बहुत मजा आ रहा है इतना मजा मैने कभी नही किया उह्ह्ह माअह्ह्ह

मा - आह्ह बेटा थोडा रुक जा

मै - क्या हुआ मा ऊहह

मा - बेटा मेरा पाव दुखने लगा आह्ह थोडा पोजीशन बदल ले

मै खुश होकर - हा क्यू नही

और मा ने देर ना करते हुए उठी और उसी जगह पर घोडी बनते हुए अपनी गाड़ उठा कर जांघो को मेरे सामने खोल दिया ।

मा की चिकनी और चर्बीदार गाड़ को देख कर मैने उसको मसलते हुए वापस से अपना लण्ड उनकी चुत के मुहाने पर लगाया और ग्चाक से अगले ही पल मे पुरा लण्ड उनकी पिघलती बुर मे उतार दिया

मा- आउउचह उह्ह्ह माह्ह अह्ह्ह ओह्ह अफ्फ्फ हा बेटा और घुसा उम्म्ं और कस के पेल मुझे उह्ह्ह बहुत अच्छा लग रहा है उह्ह्ह बेटा





मा मारे उत्तेजना ने खुद भी अपनी गाड़ मेरे उपर फेकने लगी , और मै उन्के कुल्हे थामे हुए कस कस कर चोदने लगा और वही पापा भी मौसी की चुत की गहराईयो मे लगे रहे ।

पापा भी आज मा की उत्तेजना देख के बहुत चकित थे कि आज से पहले से ऐसा रूप मा का नही देखा था , जितना खुल के और इतनी हवस से वो चुदवा रही थी ।

उसके रन्डीपने से पापा को रहा ना गया और उन्होने अपनी जुबानी सेक्स शुरु कर दी ।

वो मौसी की चुत मे पेलते हुए बोले - क्यू मेरी रन्डी मजा आ रहा है ना उम्म्ंम

मा पहले मुस्कुराई और फिर सिस्कियो के भी हा बोली

पापा - अरे तो खुल कर बोल ना साली बहिनचोद ऊहह देख ना आज तेरे सामने तेरी बहिन का बुर फ़ाड रहा हू उह्ह्ह

मा को भी अब रहा ना गया - उह्ह्ह तो फ़ाड लो ना मेरे राजा , मेरी दीदी तो आपसे ही फ़ड़वाने आई है उह्ह्ह सीईई ओह्ह्ह

पापा मम्मी की बाते सुन्कर मै और भी जोश मे आ कर पेलने लगा

पापा - ओह्ह मेरी रन्डी रुक जा अभी तेरी भी फाडून्गा उह्ह्ह पहले तेरी इस रन्डी बहन की बुर को चोद चोद के भोस्डा बना दू ,

"क्यू मेरी रन्डी जीजी" , पापा ने मौसी को चोदते हुए उनकी आन्खो मे झाक कर कहा ।

मौसी मादक सिसकिया लेती हुई - उह्ह्व हा फाड़ डालो ना मेरे जमाई राजा उह्ह्ह और पेलो ना अपनी इस रन्डी को उह्ह्ह्ह उम्म्ं बना दो भोस्डा उह्ह्ह उह्ह्ह

पापा कस कस के धक्के ल्गाते हुए - आह्ह ले और ले बहिनचौद उह्ह्ह ले साली कुतिया उह्ह्ह लेह्ह्ह्ह उम्म्ं

मौसी - अह्ह्ग और चोदो उह्ह्ह रन्डी की तरह चोदो मुझे य्ह्ह्ह मस्त मजा आ रहा है आज उह्ह्ह

मै मा के चुत के धक्के की गति हलकी करता हुआ - क्या मौसी सिर्फ पापा को ही सारे मजे दोगे मुझे नही मिलेगा क्या कुछ

मेरी बात सुन्कर मौसी मुस्कुराई और पापा ने भी अपनी गति रोकदी

फिर पापा ने मुझपर तरस खाते हुए मौसी को इशारा किया ।

मैने भी मा को छोड़ा और पापा सोफे पर टाँगे फर्श पर फैला कर लेटते हुए मा से बोले - आजा मेरी रान्ड आ चुस मेरा लण्ड आह्ह

वही मौसी मुस्कुराती हुई मेरे ओर आई और मैने उन्के गुदाज चर्बीदार गाड़ को छूता हुआ उन्के चुचो को पकड लिया और पीछे होकर उन्हे मसलने लगा

मौसी की 42DD की चुचिया मेरे हाथो मे नही समा रही थी ।

मैने भर भर उनकी चुचियो को मसल रहा था और वही सामने सोफे पर मम्मी पापा के लण्ड को मुह मे लेना शुरु कर चुकी थी ।

मै - ऑफ़ मौसी क्या नरम नरम दूध है आप्का उम्म्ं मन कर इसको ऐसे ही मिजता रहू , कैसे इतना बड़ा कर ली हो

मौसी सिस्क्ती हुई - आह्ह बाप बेटे मे मिल कर बहुत चूसा है मेरी चुचियो को उह्ह्ह और रमन ने इनका दीवाना है लल्ला ऊहह उम्म्ं

मै - अब तो मै भी इनका दिवाना हो जाऊंगा मौसी उम्म्ं उम्म्ं सररर्प्प्प उम्म्ंम क्या मस्त स्वाद है इनका उम्म्ंम्ं

मै सामने आकर मौसी को चुचिया पकड कर उन्हे मुह मे भरने लगा

इत्ने मे पापा मा के बालो को पकड कर उन्के गले तक लण्ड घुसाते हुए बोले - आह्ह जीजी मुझे भूल गयी क्या , पहली मुलाकात से ही मै उनका दीवाना हू

मौसी सिस्क कर - हा जमाई बाबू , आपने ही तो मेरे स्तनो को और भी निखार दिया है

पापा हस कर - बस स्त्नो को ही क्या जीजी हाहहहहा

मैने मौसी को वापस सीधा सोफे पर लिटाया और बिना रुके एक ही बार मे पुरा पुरा का लण्ड मौसी की चुत मे उतार दिया





मौसी चिल्लाई - आह्ह लल्ला उउउह उम्म्ं क्या मोटा लण्ड है रे तेरा उह्ह्ह और घुसा ना उम्म्ंम फ़ाड दे बेटा उह्ह्ह आज बहुत मजा आ रहा हौ ओह्ह हा ऐसे ही उम्म्ं

मैने कस कस के मौसी की बुर मे पेलना शुरु कर दिया

मै बहुत ही उत्तेजना मे कस कस के मौसी की चुत मे धक्के लगाये जा रहा था जिससे मौसी की 42 साइज़ की मोटी मोटी चुचिया हिल रही थी और मौसी मादक सिस्किया लेके चिल्ला रही थी

वही मा पापा के आड़ो को मस्लती हुई उन्के लण्ड को गले तक चोक किये जा रही थी

दोनो तरफ उत्तेजना चरम पर थी

मौसी अब झड़ने के करीब थी और उन्होने अपनी चुत मसलना शुरु कर दिया और अन्दर से मेरे लण्ड को कसने लगी थी

मौसी - ओह्ह बेटा ऊहह हा और तेज रुक मत उह्ह्ह आह्ह मेरा आयेगा हहहह ओह्ह और पेल अह्ह्ह

मै बिना रुके अपनी पूरी ताकत के साथ ताबड़तोड़ धक्के के साथ मौसी की बुर को चोदे जा रहा था

और वही पापा भी चर्म पर आ चुके थे मा ने उन्के लण्ड के सुपाड़े को मुह से छोड़ने को राजी नही थी और कुछ ही पलो मे पापा ने तेज कराह से अपनी गाड़ उचकाते हुए मा के सर को पकड़ कर लण्ड को गले तक भेद दिया





मा की आंखे फैल गयी और होठ फटने को हो गये थे और वही पापा का लण्ड मा के गले मे झटके खाने लगा - ओह्ह्ह मेरी रान्ड़ ले साली मादरचोद उह्ह्ह मेरी रंडी उह्ह्ह ले ऊहह अह्ह्ह आह्ह

इधर पापा की तेज आह के साथ ही मौसी ने भी अपनी गाड़ पटकनी शुरु कर दी और तेजी से मेरे लण्ड पर झड़ने लगी , मैअब पूरी तरह से मौसी के उपर चढ़ कर बस कस कस के अपनी कमर पटक रहा था और मौसी ने मुझे अपने छाती से चिप्काये जकड़े हुए थी





मै अपने ताकत के साथ भीचते हुए - ओह्ह्ह मौसी आने वाला है उह्ह्ह

ये बोलकर मै उठना चाहा तो मौसी ने मुझे कस कर जकड़ लिया - अन्दर की बहा दे बेटा उह्ह्ह भर दे अपनी चुद्क्कड मौसी की बुर को उह्ह्ओह्ह माअह्ह आह्ह भर से मेरी चुत को ओह्ह्ह

मौसी की बात सुनते ही मै खुद को रोक ना पाया और आखिर झटके के साथ ही मौसी के चुत की गहराई मे लण्ड को ले जाकर झटके मारने लगा

जल्द ही मै सुस्त पड़ गया और वैसे ही मौसी के उपर पड़ा हाफ्ता रहा ।

मौसी मुस्करा कर मेरे बालो को सहलाते हुए मुझे दुलारने लगी ।

वही पापा मम्मी भी सोफे पर बैठे हाफ रहे ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 172 ( स )



लेखक की जुबानी



एक ओर जहा निचे का माहौल इतना गर्म हो चुका था वही उपर सोनल के कमरे मे भी माहौल कम कामुक नही था ।

सोनल और अमन की दोपहर की अधूरी नानवेज चैट इतनी रात तक जारी थी ।

बेचैन अमन ने अपने मुसल को हिलाने का विडियो बना कर भेजा था जिसे देख कर सोनल और निशा की हालत और भी खराब हो रही थी दोनो की पनीयाई चुत ने अब उनकी जांघो मे बीच खुजली बढाने लगी थी ।

सोनल से चिपकी हुई निशा ने अपनी भारि सासो से सोनल के हाथ के मोबाइल मे चल रहे वीडियो को देख रही थी जिसमे अमन अपना 9 इंच का कैन जैसा मोटा लण्ड का सुपाडा खोलकर हिलाते हुए दिखा रहा था ।





दोनो बहने की गले की खुस्की बढने लगी और निशा ने कामुकतावश हाथ बढा कर सीधे सोनल की पनीयाई चुत को शोट्स के उपर से छूने लगी

सोनल निशा के मादक स्पर्श से आंखे बन्द कर सिहर उठी और अपने होठ भींच्ते हुए सिसकी - उह्ह्ह निशा क्या कर रही है उम्म्ं

निशा उसके कानो के पास जाकर मादक आवाज मे - देख ना कितना तगडा लण्ड है उह्ह्ह मन कर खा ही जाऊ , कैसे तू लेगी इसको अपनी इस नाजुक चुत मे उह्ह्ह्ह

सोनल एक ठंडीआह भरते हुए मुस्कुराई - उह्ह्ह मै ले लूंगी ना तु क्यू परेशान है उम्म्ंम

निशा ने उसकी चुत के फाको को दबोचते हुए पुछा - क्यू मुझे नही दिलाएगी उह्ह्ह

सोनल - उउहू ये बस मेरा है उह्ह्ह

निशा - लेकिन तु तो मेरी है ना तो तेरा सब कुछ मेरा ही है , क्यू है ना

निशा ने सोनल के शोट्स मे जांघो के पास अन्दर हाथ घुसाकर चुत को टटोलते हुए पुछा ।

निशा की कामुकता भरे स्पर्श से सोनल के हाथो से मोबाईल छिटक गया और वो तड़प उठी ।

निशा ने एक ऊँगली को उसकी चुत मे घुसाई और अपना सवाल दुहराया - बोल ना , है ना मेरा भी हक उसपे उम्म्ं





सोनल ने आंखे खोली और निशा की आंखे मे देखते हुए उसके होठ अपने होठ मे भर लिये और एक गहरा चुंबन लेके -अह्ह्ह हा मेरी जान , मेरा तो सब कुछ तेरा ही है ,

और अगले ही पल दोनो बहने अपनी काम क्रीड़ा मे मगन हो गयी ।



राज की जुबानी


ROUND 02

कमरे मे मौसी सोफे पर अपनी जान्घे फैलाये मादक सिसकिया ले रही थी और उनको दोनो तरफ से मैने और पापा ने जकड़ रखा था

मै और पापा दोनो मौसी की गदराई चर्बी से भरी मोटी मोटी चुचियो सहलाते हुए आगे झुक कर मौसी के कांख को चाट रहे थे ।





मै पूरी तरह से पापा को कॉपी करने मे लगा हुआ था , जब वो मौसी की आर्मपिट चाटते तो मै भी मौसी की आर्मपिट चाटने लगता और जब पापा मौसी की रसिली चुची को पकड कर मुह मे भर लेते तो मै भी उनकी चुची को थाम कर अच्छे से उन्के मुनन्के जैसे दानेदार निप्प्ल को चुबलाता

वही मौसी आहे भरती हुई अपने बदन को ऐठे जा रही थी ।

मौसी हमारे सर को बालो को नोचती हुई - ऊहह लल्ला उम्म्ं ज्माई बाबूउउह्ह और चुसो उमम्म सीईई

इधर मै बड़े चाव से मौसी के चुची को पकड कर चुबला रहा था वही पापा ने अपना हाथ निचे ले जाकर मौसी के जांघो को सहलाते हुए उनको खोलने लगे और अपनी हथेली मे मौसी के फुले हुए बुर की चर्बी को भर भर सहलाने लगे ।

इधर मौसी की सिसकिया तेज हो गयी और कुछ ही पल मे मौसी की चुत बजबजाने लगी और पापा ने तेजी से मौसी की जांघो को फैलाते हुए अपनी 2 उंगलिया बुर मे पेलने लगे

और तेज फचफच की आवाज के साथ मौसी चिल्लाते हुए अकड़ने लगी ।

मै अपना लण्ड पकड कर मस्लाता हुआ अलग हुआ वही पापा भी झटके से अलग होते हुए निचे बैठ कर मौसी की बहती चुत पर अपना मुह लगा सारी मलाई चाटने लगे

मौसी सिस्क्ते हुए उनके सर को पकड कर अपनी बहती बुर पर दबाने लगी ।

मौसी - उह्ह्ह जमाई बाबू अब पेल भी दो ना उम्म्ं कितनी बह रही है मेरी चुत उह्ह्ह पेलो ना

पापा ने भी फुरती दिखाई और उठ खड़े हुए मै भी सोफे से उठ गया

पापा ने मौसी को करवट करके लिटाया और उन्के पीछे जाकर उनकी जांघो को उठाते हुए लण्ड को उनकी चुत मे पेल दिया

सोफ़ा चौड़ा होने पर भी मौसी एक दम मुहाने पर अटकी हुई थी और पापा पीछे से मौसी की बुर गचागच पेले जा रहे थे ।

मै वही मौसी के पास खड़ा लण्ड मसल रहा था कि मौसी ने मुझे पास आने का इशारा किया । मै खुश हुआ और अपना लण्ड सीधा उन्के मुह मे दे दिया

वो पापा के झटके के साथ मेरे लण्ड को गले तक उतारे जा रही थी मै भी उन्के सर को पकडे तेजी से पापा के झटके के साथ ताल मिलाते हुए मुह मे सटासट पले जा रहा था ।





वही पापा मेरा जोश देख कर खुद भी और जोश मे आ गये और मौसी चुत के रस मे सना हुआ अपना लण्ड निकाल कर उसको मौसी की गाड़ मे घुसाते तेजी से मौसी की जांघ उठाकर पेलने लगे ।

कसी हुई गाड़ मे बड़ी मुस्किल से मौसी की जड़ो मे लण्ड जगह बनाने लगा और उनका चेहरा लाल पड़ने लगा

मैने भी कोई रहम नही दिखाया और तेजी उन्के सर को थामे मुह पेलाई जारी रखी , ज्ब्तक की मौसी ने मेरे जांघो को पिटना नही शुरु किया ,

मैने फौरन अपना 8 इन्च का आलू जैसे फुला हुआ लाल हुआ सुपाडा बाहर निकाला और मौसी हाफने लगी , उन्के मुह से लार बह रही थी और उनकी आंखे लाल होने लगी थी मैने अपना गीला लण्ड वापस से मौसी ने नथुनो के आस पास रगड़ने लगा ।

वही पापा लगातार मौसी के छेद बदल कर पेलाई किये जा रहे थे ।

जिस्से मौसी के गाड़ और चुत दोनो खुजली बढने के सिवा घट नही रही थी परेशां होकर मौसी बोल पडी - ऊहह जमाई कोई एक पेलो ना अच्छे से उह्ह्ह आप बस दोनो की खुजली बढा रहे हो

मौसी की बात सुनते ही मेरा दिमाग ठनका क्यो ना मौसी के दोनो छेदो को एक साथ भरा जाये और मैने हस्कर अपना लण्ड उन्के गालो पर घिसते हुए - मौसी चिंता ना करो अब आपके दोनो होलस की खुजली मिटेगी क्यू पापा

मेरी बात सुनते ही पापा चहक उठे और झट से उठ कर बैठ गये , मौसी थोडा असहज हुई

और असम्ज्स भरी नजरो से हमे देखने लगी

पापा ने सोफे पर एक कोना पकड़ा और जान्घे खोल कर लण्ड को सहलाते हुए उसे सीधा करते हुए - सोच क्या रही हो जीजी आओ ना मजा आयेगा

मौसी पापा ने सामने ऐसा दिखावा कर रही थी जैसे ये सब पहली बार हो रहा है जबकि वो मेरे और मौसा जी के साथ दोहरे लण्ड का मजा ले चुकी थी पहले ही ।

मै मुस्कराया और मौसी को आगे बढने का इशारा किया ।

मौसी ने जान्घे फेकते हुए पापा के लण्ड पर बैठ गयी और लण्ड को अपनी चुत की गहराई मे ले जाते हुए अपनी गाड़ फैलाते हुए पापा के उपर झुक गयी ।





मैने भी अपना मसलते हुए आगे बढा और सुपाड़े पर थुक ल्गाते हुए मौसी के गाड़ की सुराख पर अपना सुपाडा टिकाते हुए लंड को मौसी की गाड़ मे घुसेड़ दिया

मौसी सिसकी और मैने आहिस्ता आहिस्ता लंड़ पर जोर देते हुए उनकी गाड़ के सुराख को फैलाते हुए आधे से ज्यादा लण्ड गाड मे पेल दिया ।

हम दोनो का लण्ड मारे उत्तेज्ना के बहुत ही ज्यादा फुला हुआ था और मौसी की सासे भी अब फुलनी शुरु हो गयी थी , क्योकि पापा कहा रुकने वाले थे वो मौसी की लचीली चुत मे निचे से कमर उठा कर सटासट पेलना शुरु कर दिया

पापा के लण्ड की घिसावत मुझे भी अपने लंद की निचली नसो मे मह्सूस हो रही थी और मै भी जोश मे आकर मौसी की गाड़ थामते हुए लण्ड चलाने लगा ।

मौसी की हालत बहुत खराब थी वो दो लण्ड की चुदाई से एक नशे ने झुम रही थी , और मानो हमारे लण्ड ने उनकी खुजली और भड़का थी ।





वो चिल्लाने लगी - उह्ह्ह ज्माआई बाबू उह्ह्ह मजा आ गया ओह्ह्ह लल्ला तु भी कस कस के पेल ना उह्ह्ह काश ऐसे ही रोज रोज दो दो लण्ड मेरे चुत और गाड़ मे जाते ओह्ह्ब माअह मै तो पागल हो जाऊंगी

ओह्ह्ह अह्ह्ह और पेलो मुझे

मौसी चिल्ल्ल्ती हुई पापा के बालो को नोचने लगी । चुदाई की आवाज , और सिसकिया इत्नी तेज हो गयी कि किचन मे हमारे लिए ग्लूकोज़ पानी बनाने के लिए गयी मम्मी भी भागी भागी कमरे मे आ गयी

वो साम्ने मौसी की हालत देख कर हदस गयी, नजारा ही ऐसा था

मै मौसी के बालो को खींचे हुए कस कस के मौसी की गाड़ की गहराईयो मे हुमुच हुमुच कर अपना लण्ड उतार रहा था , वही निचे पापा मौसी के चुची मुह ने भर हुए अपनी कमर उछाल उछाल कर गचग्च ले पेल रहा थे और मौसी चिल्लाअये जा रही थी ।

मा की भी बेचैनी बढ गयी और वो अपनी मैकसी निकाल फेकि और भागकर हमारे बगल मे आ खड़ी हुई

मौसी ने जब मा को अपने पास देख तो मुस्कुराने लगी और हमारे तेज झटको मे हाफते हुए - ओह्ह्ह छोटी ऊहह तू रोज ऐसे ही मजे करती होगीहह उम्म्ं नाह्ह उन्म्ं बोल

मौसी की भुखी आन्खो ने झाक कर अपनी चुची उन्के मुह पर लगाती हुई मा बोली - उह्ह्ह जीजी सच कहू तो आज तक ऐसा इनदोनो ने मुझे नही चोदा ऊहह देखो कैसे भर भर लण्ड दे रहे है आपको उम्म्ंम सीईईई





मौसी ने मा के चुचो को चुस्कर मुह हटाते हुए - ऊहह सच मे छोटी उह्ह्ह माह्ह्ह आज मेरी दोनो छेड़ो का भोसडा बना देंगे ये लोग उह्ह्ह माअह्ह्ह बहुत मजा रहा हौ उम्म्ंम्ं

ये बोल कर मौसी वापस ने मा के चुचियॉ को चुबलाने लगी ।

मा उनसे अलग हुई और बगल के सोफे पर बैठते हुए अपनी चुत को छूने लगी - लेलो जीजी जितने मजे लेना है ,लेकिन अगला राउंड मे अकेले लूंगी उम्म्ं मुझे भी हफते भर से नही मिला ये सुख

पापा - परेशान ना हो मेरी राड़ अगला नम्बर तेरा ही है ओह्ह्ह उन्न्ं

पापा - बेटा, अब जरा मुझे भी जीजी की गाड़ लेने दे ना

मै हस कर खड़ा हुआ - हा क्यू नही पापा ,

फिर पापा ने मौसी को उलटा होने को इशारा किया

पोजिसन वही थी लेकिन बस बीच मे मौसी उल्टी हो गयी थी , इधर निचे से पापा ने मौसी की गाड़ मे लण्ड घुसाया और उपर से मैने चुत मे

कुछ ही पलो मे नॉनस्टॉप ध्क्क्म पेल चुदाई और चिखो की शुरुवात हो गयी ,





हम दोनो के लण्ड लय मे बारी बारी से मौसी की गाड़ और चुत मे अन्दर बाहर हो रहे थे और वही बगल मे मा अपनी जान्घे फैलाये हमे देख कर अपनी बुर मसले जा रही थी

और वो तेजी से अपनी बुर मे ऊँगली करके चिल्ल्लने लगी और कमर उठा कर फव्वारे छोडने लगी जिसे देख कर हम सब का जोश चौगुना हो गया





मै और पापा ने भी अपने लण्ड की नसो को कसा और तन कर हुमुच कर पेलाई करने लगे और आखिरी कुछ झटको के साथ ही पहले मै और फिर पापा भी झड़ने लगे ।

हमने एक बार फिर मौसी के छेदो को डबाडब भर दिया ।

और सुस्त होकर अलग थलग हो कर हाफने लगे ।

कुछ देर बाद मा ने हम सबको ग्लूकोज़ वाला ठंडा पानी दिया और हमने फिर से स्फूर्ति आई ।

फिर मौसी एक चित सो गई और मै भी पापा के साथ मा की दोहरी चुदाई का आखिरी राउंड करके सो गया ।

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आज की ये रात तो बीत गयी लेकिन आने वाला क्या नये सपने लेके आयेगा , इन बचे शादी के 6 दिनो मे क्या धमाके होंगे इनसब के लिए आप सब तैयार रहियेगा ।

एक बात के लिए माफी चाहूँगा : देर से अपडेट के लिए नही :D .... पहली बार कहानी मे फोरसम सेक्स सिन ऐड किया । तो हो सकता है TharkiPo भाई की तरह मजा नामिले लेकिन अब लिख दिया तो एडजस्ट कर लेना ।

बाकी अपडेट के लिए परेशान ना हो

सब समय से होगा

क्योकि कहानी के इस फेज मे मेरे बहुत सपने जुड़े है जिन्हे हकिकत करने के लिए मै भी बेताब हू ।

कहानी जारी रहेगी
 
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