Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 37 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 191 ा

अमन के घर

रिन्की छत पर अपने बाल सुखा रही थी तौलिये से तभी पीछे से किसी के लोवर के उपर से उसके कूल्हो को दबोचा वो चिहुक कर आगे हुए

रिन्की - क्या भाभी आप हो

दुलारि - हम्म देखू तो छुट्की ननदिया मेरी बड़ी हेरोइन बन रही है

रिन्की - हम्म आप तो जैसे बिना नहाये बारात जाने हो ना

"नहा के जाऊ या ना जाऊ मगर तुम्हारी तरह झलकाते हुए तो नही जाऊंगी " , दुलारी ने रिन्की की टीशर्ट मे उभरे हुए निप्प्ल को देखते हुए बोली ।

रिन्की लाज मे हस कर घूम गयी ।

दुलारी ने उसको कन्धे पर धक्का देते हुए बोली - किसकी याद ये संतरे खोल के घूम रही हो ननद रानी

रिन्की तुन्की - है कोई , आप चाहो तो आप भी ऐसे घूमो मजा आयेगा हिहिहुही

दुलारी - हा हा सब समझ रही हु , ऐसे ही अभी अपने भैया को नहलाने जाओगी ना और उन्हे ललचवाओगी ना

रिन्की - भाभीईई भक्क आप बहुत गंदी है ,

दुलारी ने पीछे से हाथ आगे करके रिन्की की क्च्ची अमियां ह्थेली मे भर मसलती हुई बोली - ऐसे हिलाती हुई घुमोगी तो किसी की भी नियत खराब हो जायेगी मेरी लाडो उह्ह्ह

रिन्की दुलारी की बाहो मे कसमसाई- ऊहह भाभी छोड़ो नाआह्ह उम्म्ं सीईई

दुलारी रिन्की के संतरे की टिप मसलती हुई - ओहो देखो तो ये तो काफी बड़े हो गये है , एक बार हमे भी अपने आम चूसा दो रानिब

रिन्की झटके से दुलारी से अलग हुई और हसती हुई जीभ निकाल कर चिढाती हुई - येईई कुछ नही मिलेगा हिहिहिह

फिर रिन्की सरपट जीने से निचे भाग गयी और दुलारि हसते हुए बोली - आज तो तुझे दबोच कर ही दम लुन्गी रुक जा !!


राज के घर

"ओहो ऐसे करेंगे आप लोग तो सारा टाईम यूँ ही बहस मे ही निकल जायेगा " , बॉबी ने उपर के हाल मे शोर मचा रही महिलाओं को शान्त करती हुई बोली ।

बॉबी - लिसेन bride मेरी फ़र्स्ट प्रीओरिटी है और सबसे ज्यादा टाईम उसके पास ही लगेगा तो मै खुद उसका मेकअप करने वाली हूँ , बाकी आप सब लोग अलग अलग कमरों मे बैठ जाईये , भीड़ मे मेरा फोकस distract हो जाता है ।

बॉबी की चपड़चपड़ और मिक्स वाली अंग्रेजी सुनकर कुछ का मन सहमत हुआ तो कुछ को नही ।

फिर बॉबी ने सबका जायजा लिया तो पाया कि घर मे दुल्हन और उसकी मा के साथ रज्जो और शिला को छोड़ कर किसी को उसे समय देने की जरुरत नही थी , बाकी सबको उसकी असिस्टेंट हैंडल कर लेगी ।

फिर क्या सोनल के कमरे मे सोनल और रागिनी को रखा गया

वही रज्जो और शिला को अनुज के कमरे मे बैठाया गया

बाकी सबको बॉबी ने बाल्किनी की ओर अपनी असिस्टेंट रूबी के साथ भेज दिया ।

गीता बबिता को मेकओवर की जरुरत नही थी तो वो दोनो उपर की छत पर चले गये ।

छत पर पहुचते ही बबिता की नजर

निचे सड़क पर लड़को पर गयी जो शादी के लिए स्टाल लगवाने मे मदद कर रहे थे ।

अरुण बड़ी सादगी से फूलों की लरियां उठा उठा कर दे रहा था । जिसकी सादगी पर गीता मोहित हुई पड़ी

गीता - आह्ह यार ये लड़का कितना सीधा है उम्म्ंम्ं

बबिता खिझी - क्या सीधा ?? एक नम्बर का कमीना है ये हुउह

गिता चौकी - क्या मतलब , क्या बदतमिजि की अरुण ने तेरे साथ

बबिता चौकी - अरुण !! मै तो राहुल की बात ?? एक मिंट वहा अरुण कहा है वहा सिर्फ वो राहुल खड़ा है देखो कैसे उस बेचारे काम करने वाले को छेड़ रहा है ।

गीता बबिता की ओर एक कदम बढी और गरदन लफा कर देखा तो स्टाल पर एक खंभे की ओट मे राहुल भी खड़ा था जबकी दुसरी ओर अरुण खड़ा था ।

और बबिता गिता संजोग से ऐसे जगह पर खडी थी कि वहा से उन दोनो को केवल एक ही दिख रहा था ।

गीता को अरुण और बबिता को राहुल ।

गीता मुस्कुराई और फिर अपनी जगह पर आकर बबिता को अपनी ओर खिंच कर अरुण को दिखाया ।

इधर इनकी बाते चल रही थी कि निचे से अचानक से अरुण की नजर छत की बाल्किनी मे हो रही चहल पहल से स्ब्से उपर की छत पर रेलिंग से लग कर खड़ी हुई गीता बबिता पर भी गयी ।

अरुण को अपनी ओर देखता देख गीता मुस्कुरा कर अपने जुल्फो को कानों मे फ्साती हुई दुसरी ओर देखने लगी ।

अरुण ने राहुल का शर्ट खिंच कर उसे इशारे से छत पर देखने को कहा

और जैसे ही राहुल ने उपर रेलिंग की ओर देखा तो बबिता थी और उसने जैसे ही मुस्की लेते राहुल को देखा वो झनकी और तुनक कर मुह फेर लिया ।

गिता - क्या हुआ तुझे

बबिता - चल यहा से देख नही रही कैसे गरदन उठा कर घुर रहे है दोनो

गीता - घुर कहा रहे है अरे उसको देख इतना शर्मीला है कि नजरे उठा कर जी भर देखता ही नही ।

बबिता - हा उसको भी तो देख जिसकी पलके नही टपक रही है हुउह

गीता - यार बबिता शादी मे आये थोड़ी मस्ती कर ले ना , कौन सा हम बार बार मिल रहे है । यहा से जाने के बाद ना कौन किसे याद रखेगा

बबिता - हा लेकिन ये छिछोरे ही रह गये है अब

गीता हस कर - शादी मे सब छिछोरे ही मिलते है यार हिहिहिही

गिता की बात पर बबिता भी हस दी ।

बबिता को मुस्कुराता देख राहुल का दिल उछलने लगा और उसने इशारे अरुण को उपर चलने को बोला और दोनो घर मे आ गये ।

बबिता थोड़ा सहमी हुई - देखा इनको थोड़ा सा भाव दिया अब ये उपर आ रहे है , किसी ने देख लिया तो ??

गीता - अरे कुछ नही होगा , कौन वो लोग हमे खुली छत पर पकड लेंगे हिहिही

इनसब से अलग राज थोड़ा खाली था तो अपने नाना के साथ बैठा हुआ गप्पे हाक रहा था ।

उपर की महिलाओ को बाटने के बाद रंजू ने मेकअप करवाने से मना कर दिया था ये बोल कर कि उसे इस उम्र मे जरुरत नही ।

वो सीढियों ने निचे आ रही थी ।

जीने पर पायल और चुडीयों की आहट से दोनो नाना और नाती का ध्यान खटका ।

राज मुस्कुरा कर अपने नाना से बुदबदाया - वैसे ताई भी आपके हिसाब से सही ही रहेंगी क्यूँ?

बनवारी- तु फिर शुरु हो गया , क्यू पीछे पड़ा है भाई

राज - अरे कल से आप ऐसे ही सूखे सूखे हो हिहिही तो सोचा

बनवारी - तो क्या तेरी ताई इसके लिए मान जायेगी

राज - ऐसा ही कुछ समझो हिहिही

बनवारी ने उपर से निचे तक रंजू को निहारा और उसकी गुदाज चर्बीदार बदन और मोटी गाड़ देख कर उसका लन्ड फड़क उथा ।

इससे पहले बनवारी अपनी प्रतिक्रिया देता रंजू ने उसे देख कर नमस्ते किया

बनवारी- और बैठो

रंजू - जी बाऊजी

राज हस कर - बाऊजी !! क्या ताई , नाना जी को देवर कहो अभी तो ये जवाँ है

रंजू हस कर -चुप बदमाश कही का , ऐसा बोलते है

बनवारी ठहाका लेते हुए राज का कन्धा थपथपाया - अरे मेरा नाती बहुत बिगड़ गया है

रंजू ने भी लाज भरी मुस्कुराहट मे राज को आंखे मारते देखा तो हसी - हा कुछ ज्यादा ही शैतानीयां बढ गयी है अब तो

राज - अच्छा और आपकी शैतानियां , वो बताऊ नानू को उम्म्ं बोलो

रंजू चौकी कि कही राज उसकी खीरे वाली बात तो नही ना कह देगा - क्या है मेरी शैतानी बोल

राज हस कर - पता है नानू आज ताई घर से खिरा लेके आई थी चुपके से हिहिहिही

रंजू ने आंखे चढाकर उसे चुप रहने को बोला तो बनवारी ने हस बोला - अरे बताने दो ना ,

बनवारी- अच्छा फिर क्या बेटा

राज हस कर - अरे वो खिरा रास्ते मे ही गिर गया हाहाहाहा

बनवारी ठहाका लगाता हुआ - फिर तु लाके दे देता खिरा बजार से लाके , अगर तेरी ताई को खीरे इतने पसंद है तो ।

राज इशारे ने भौहे उचका कर मुस्कुराता हुआ - क्यू ताई चाहिये क्या खीरा, लाऊ बगल से

रंजू लाज से मुस्कुरा कर - धत्त बदमाश , चुप कर अब

"और बताईये बाऊजी आप कैसे है " , रन्जू ने बनवारी की ओर रुख किया

बनवारी जो उसके दुधारू मोटे थन जैसी चुचियो की लकिरे देख रहा था वो चौक कर - आह्ह मै , मै ठिक हु तुम बताओ

रंजू समझ गयी कि उसका पल्लू उसके रसदार भारी जोबनो को छिपाने मे नाकाम हो सरक चुका है तो वो मारे लाज मे उसको उठाती हुई - जी मै भी ठिक हु ,

"मै जरा आती हूं " , ये बोलकर रंजू अपनी साडी सही करती हुई उठी और गेस्टरूम मे चली गयी ।

फिर वही से कुछ ही मिंट मे उसने राज को आवाज दी ।

राज उठ कमरे मे गया ।

रंजू - शैतान कही का , क्या बोले जा रहा था बाऊजी के सामने

राज हस कर - अरे मै तो आप लोगो का मेल जोल बढा रहा था हिहिहिही

रंजू - बदमाश कही का , वो देवर लगेंगे मेरे अब

राज हसता हुआ - अरे सईया ही बना लो आज के खीरे का टेन्सन खतम हिहिहिही

रंजू राज के कान ऐठती हुई - तु बहुत बिगड़ गया है , चला ये बता ये बाथरूम कहा है ।

राज - जाओ मेरे कमरे मे है

रंजू राज बाहर आते है और तबतक बनवारी भी हाल उठ कर कही जा चुका होता है ।

राज इशारे से बोलकर अपना कमरा दिखाता है और खुद भी बाहर निकल जाता है ।

इधर रंजू दरवाजा धकेल कर जैसे ही घुस्ती है सामने का नजारा देख कर मारे लाज के वो मुह फेर लेती है ।

और सामने कोई और नही राज के नाना ही थे जो अभी अभी रंजू के भरे जोबन और उसकी थिरकती गाड़ देख कर उत्तेजित ही गये थे , जिससे धोती मे तम्बू बनने से उनकी धोती बिगड़ गयी थी और वो वही सही करने के लिए राज के कमरे मे आये ।





कुर्ते को सामने से उपर खिंच कर उसको अपनी ठुडी मे दबाए हुए बनवारी निचे से पुरा नन्गे धोती की तह बना रहे थे और उनका मोटा काला खिरे जैसा मुसल पूरा तना हुआ खड़ा था ।

रंजू - माफ किजियेगा बाऊजी वो मै आह्ह

इतना बोलकर रंजू जैसे ही दरवाजे की ओर घूमी बनवारी ने फौरन कुर्ता निचे कर धोती को तौलिये के जैसे लपेटता हुआ - रुको जमुना बहू

रंजू के पाव थम गये और उसका जिस्म काप रहा था आंखे बंद करने पर भी बनवारी के काले लन्ड की छवि उसके जहन मे छप गयी थी ।

बनवारी- तुम यहा अचानक कैसे कुछ काम था

रंजू थरथराती हुई - जी नही बाऊजी वो मै , मै , मै जाती हु

बनवारी- क्या हुआ , कोई बात है क्या ? बताओ तो

रंजू तेज धडकते दिल के साथ - जी मै बाथरूम खोज रही थी और मुझे नही पता था कि आप भी यहा ऐसे

बनवारी- अच्छा ठिक है जाओ पहले हो लो तुम , जाओ जाओ

रन्जू - नही बाऊजी ठिक है

बनवारी- जमुना बहू मै बोल रहा हु ना तुम जाओ , मुझे बस ये धोती बान्धनी है

रंजू को पेसाब का प्रेसर था और वो बहुत ठहर नही सकती थी

तो उसने घूम कर बिना बनवारी को देखे सिर्र फर्श निहारती हुई बाथरूम मे चली गयी ।

बाथरूम मे जाते ही उसने अपनी चढती सासे थामी और बैठ कर पेसाब करने लगी ।

इधर बनवारी कुछ देर तक रुका मगर उसका लन्ड बैठने का नाम नही ले रहा था , ऐसी हालत मे वो धोती बिना मदद के नही बाध सकता था ।

कुछ देर मे रंजू आई और उसने नजरे नीची किये कमरे से बाहर जाने लगी तो बनवारी- अच्छा जमुना बहू जरा बाहर राज होगा उसे भेजना काम है थोड़ा ।

रंजू ने हामी भरी और निकल गयी , मगर ना हाल मे ना ही घर के हाते मे और ना ही बाहर उसे राज दिखा तो वो वापस कमरे के दरवाजे पर आई और भिड़का दरवाजा खटखटा कर बोली - बाऊजी राज नही दिखा बाहर

बनवारी- अच्छा देखो कोई और बच्चे होगें किसी को बुला दो

रंजू ने अच्छे से देखा था कि बाहर कोई नही था , क्योकि राहुल और अनुज तो छत की ओर जा चुके थे ।

रंजू - जी बाहर कोई बच्चे नही है कुछ काम था क्या बाऊजी बोलिए मै मदद कर दूँगी ।

रंजू से मदद का सुनते ही बनवारी का लन्ड और फड़का - न नही जामुन बहू , तुम नही कर पाओगी

रंजू को लगा कि बनवारी को सच मे जरुरत है कोई तो वो दरवाजा खोलकर कमरे मे आ गयी और सामने फिर वही नजरा ।

कुर्ता उपर और धोती की तह लगाई जा रही थी ।

रंजू ने झटके से दरवाजा भिड़का दिया ।

बनवारी ने हाथ मे ली धोती दिखा कर इसको तह देना है पहनने के , ये मेरी बहू ने बाजार ने नयी धोती मग्वाई थी पोलीसटर कपडा है इस्का तह नही लग रहा है । अगर तुम मदद कर सको तो ।

रंजू नजरे नीची किये हुए - जी बाऊजी लाइये

रंजू ने हाथ मे धोती ली और कनअखियो से फ़नकारते लन्ड देखा और फिर धोती को हाथ घुमा कर पीछे से आगे ले आकर एक गाठ दी ।

फिर आगे का तह लगाती हुई जैसे ही उसने धोती को निचे से पीछे की तरफ ले जाने लगी , धोती छोटी पड़ गयी ।

कारण आगे की तरफ बनवारी का मुसल लन्ड धोती मे टेन्ट बना कर फिर तह बिगाड़ चुका था ।

रंजू थोडा मुस्कुराइ और नजरे फेरते हुए बोली - बाऊजी आप पहले इस्को सही कर लिजिए , या फिर कोई जांघिया डाल लिजिए

बनवारी भी थोडा असहज होता हुआ - वो क्या है कि मै भीतर जांघिया नही डालता और बाहर वो अचानक से !!

रंजू समझ गयी कि ये सब उसकी कर्मजली सरकति सिफान साड़ी के पल्लू का नतिजा है जिसने बनवारी के अरमान जगा दिये थे ।

रंजू लजाती हुई मुस्कुराई - आप थोड़ा रुक जाईये अभी बैठ जायेगा फिर मै पहना देती हु ।

बनवारी ने रंजू के आंखो की चमक को पढा और राज की बाते याद आई तो उसे लगा क्यू ना प्रयास किया जाये ।

बनवारी ने आगे बढ़कर रन्जू के करीब हुआ और बोला - जमुना बहु अगर बुरा ना मानो तो कुछ कहूँ

रंजू नजरे झुकाये - जी बाऊजी कहिये

बनवारी हिचक कर - वो दरअसल मेरा ये हाल बाहर तुम्हे देख कर ही हुआ , मै सच कह रहा हु । सालों बाद तुम्हे ऐसे देख कर मेरी तन्हाई ने मुझे झकझोर दिया । तुमने मेरी बीवी रूपा की छवि है ।

रंजू काप्ते हुए लहजे मे - ये आआप क्या बोल रहे बाऊजी , मै समझ नही पा रही हु

बनवारी उसको पीछे से उसकी कलाई पर हाथ घुमा कर उसको पकडता हुआ - तुम सब समझ रही हो रंजू उह्ह्ह्ह्ह उम्म्ंम

बनवारी के मुह से अपना नाम सुनकर रंजू सिहर उठी और ऊसके गथिले सुष्क हाथो का स्पर्श से उसके जिस्म का रोम रोम खड़ा हो गया ।

रंजू - उम्म्ंम बाऊजी नहीईई ये गलत आह्ह्ह सीईई रुक जाईयेह्ह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं सीईई ऊहह

बनवारी ने रन्जू की भारी भारी चुचिया पीछे से हाथो मे भर कर मसलने लगा - ऊहह रंजू क्या जोबन है तेरे ऊहह इस उम्र मे भी रस से भरे है उम्म्ंम

रंजू बनवारी की बाहो मे सिस्क्कियां लेने लगी और वही बनवारी का मोटा लन्ड उसकी गाड़ मे ठोकर मारने लगा ।

रंजू - उम्म्ं बाऊजी कोई आ जायेगाह्ह सीईई उम्म्ंम

बनवारी रन्जू का हाथ पकड पर अपने मुसल पर रखते हुए -अह्ह्ह रंजू बस थोडा ही समय लगेगा ओह्ह्ह कितने मुलायम हाथ है अह्ह्ह एक बार चुस लो ना इसे उम्म्ंम

रंजू चौकी - क्याह्ह नहीईई मै न्हीईई आप ऐसे ही वो कर लो

बनवारी रंजू के कड़े रुख से थोडा हिचका कही ये रूठ कर निकल ना जाये नही तो हाथ आया मौका भी निकल जायेगा

बनवारी ने उसे आगे झुकाते हुए उसका साडी पेतिकोट सहित उपर किया और सामने रन्जू का साँवला भोस्डा रसाया हुआ साफ साफ दिखने लगा

बनवारी ने रंजू को वही पास मे पलंग के सहारे झुकाये रखा और उसकी साडी को कमर तक उठा दिया ।

भरी गुदाज फैली हुई गाड़ और हल्के बालों वाली मोटी सावली फान्को वाली बुर को देख बनवारी ने थुक से अपना सुपाडा चिकना किया और रन्जू की बजबजाई के फाको ने दबाब बनाते हुए सट्ट से लन्ड को भेद दिया

रन्जू को मोटा तपता लन्ड भितर पाकर आन्खे उलटने लगि वही बुर की चिन्काई से बनवारी का लन्ड जड़ तक गया

बनवारी ने कुछ छड़ रंजू की तपती चुत की आंच मे अपना लन्ड सेका और फिर एक एक करके कस कस के लन्ड पेलने लगा





रंजू कोहनी बिस्तर पर रख कर हाथो से मुह ब्न्द किये सिस्कने लगी

उसे समझ नही आ रहा था कि ना जाने कैसे वो बहक गयि ,,शायद हफ्तो से लन्ड की तडप ने उस्के जज्बातो को कम्जोर कर दिया था और वो बेबस ये हालत आ चुकी थी

बनवारी उसी तरह रन्जू को झुकाए कस कस के झटके दे रहा था और उस्का लन्ड पुरा अंदर बाहर हो रहा था

सुखा लन्ड रन्जू की गीली चुत मे भी लय बना कर चल रहा था

बनवारी- ओह्ह रंजू तेरी बुर बहुत गर्म है उह्ह्ह क्या मस्त गाड़ है तेरीईई उह्ह्ह

रन्जू - अह्ह्ह सीई बाऊजी मारो मत उह्ह्ह जल्दी से कर लो बस

बनवारी रंजू के खीझने पर मुस्कुराया और उसने एक बार और कस के रन्जू की गाड़ को चाटे से लाल करते हुए बोला - उह्ह्ह मेरी जान समय की कमी है नही तो ऐसी गाड़ मै कभी नही छोड़ता लेह्ह्ह और लेह्ह्ह ऊहह क्या गर्म चुत ह तेरी ओह्ह्ह ओह्ह्ह

रंजू - उम्म्ंम्ं बाऊजी धीरे अह्ह्ह अह्ह्ह सीईई दर्द हो रहा है पैर मे उह्ह्ह धीरे ओह्ह्ह्माह्ह्ह्ह उम्म्ंम सीईई

बनवारी लन्ड की नसो को ताने हुए कस कस कर झटके देते हुए रन्जू को पेल रहा था - बस्स्स रन्जू मेरी जाअन्ंंं उम्म्ंम्ं मेरा हो जायेवा ओह्ह्ह ओह्ह्ह आअह्ह्ह ऐसे ही ओह्ह्ह ओह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं आ रहा है ओह्ह्ह्ह उह्ह्ह

अगले कुछ ही झटको ने बनवारी रंजू की बुर मे झड़ने लगा और हाफने लगा

रंजू तुन्क कर खडी हुई - अन्दर क्यू डाला बाहर नही निकाल सकते थे आप हुउह्ह

बनवारी हस कर - अरे कौन सा तु इस उम्र मे पेट से हो जायेगी हाहाहाहा

इसके बाद बनवारी ने खुद से ही अपनी धोती पहनने का ट्राई किया और वो एकदम आसानी से सेट हो गया - अरे ये तो आराम से तह लग गयी इसकी देखो

रन्जू ने मुह ब्नाया और बोली - ये सब आपका नाटक था और आपने मेरा फाय्दा लिया ।

"तो तुम्हे कौन सा नुकसान हुआ हाहाहाहा " , बनवारी हस कर कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर आता हुआ बोला ।

मगर जैसे ही वो कमरे के बाहर निकला उसी समय रंगीलाल किसी काम से घर मे आया था और वो अपने कमरे मे जा रहा था ।

जैसे ही उसकी नजर अपने ससुर पर गयी उसने भीतर राज के कमरे मे भी देखा जहा रंजू अपनी साडी सेट कर रही थी ।

रंगी ने असमंजस भरे भाव मे अपने ससुर की ओर देखा जो पूरी तरह से शर्मिंदा हुआ खड़ा था ।

रंगी - बाऊजी आप ऐसे यहा ?

बनवारी नजरे फेरता हुआ - हा वो मै !!

रंगी - वो सब ठिक है लेकिन शादी का घर है बाऊजी और आप , अगर मेरी जगह कोई और होता तो ?

बनवारी- माफ करना दमाद बाबू और छोटी ( रागिनी ) से मत कहियेगा मै हाथ जोडता हु

रंगी लपककर अपने ससुर का हाथ थामता हुआ - क्या कर रहे है बाऊजी आप ये सब कोई देख लेगा !! हम बाद मे बात करेंन्गे इसपे मुझे काम है कुछ

रंगी दरवाजा खोलकर अपने कमरे मे चला जाता है और बनवारी थोडा लज्जित होकर वापस एकान्त के लिए राज के कमरे मे चला जाता है वही रंजू जो इनसब से पहले ही खुश नही थी वो भी बनवारी ने नाराज हुई बिना उसकी ओर देखे छत पर चली जाती है

जारी रहेगी
 
अपडेट 191 बी


राज के घर



सोनल -रागिनी और रज्जो-शिला को बॉबी थोड़ा समय देके दोनो कमरों मे आवा जाहि कर रही थी ।

इधर जंगी और कमलनाथ दोनो बेसबरे होकर उपर आते है और जंगी कमलनाथ को पीछे स्टोररूम मे जाकर दरवाजा खुला रखने को बोलता है ।

इधर जैसे ही बॉबी सोनल के कमरे से बाहर आती है जंगी उसको पकड़ लेता है

बॉबी फुसफुसाती हुई - ऊहह क्या कर रहे हो , कोई आ जायेगा

जन्गी ने उस्का हाथ अपने तने हुए मुसल पर पजामे के उपर से रखते हुए बोला - इसको देखो ये तड़प रहा है , अब और इंतजार नही ।

बॉबी का जिस्म पल भर मे थरथरा गया था और उसके जिस्म मे रोम रोम उभर आया था , वो कसमसाती हुई - ऊहह बस 5 मिंट रुको मै ये वाले रूम मे से आती हु । फेसियल अप्लाई करके आती हु बस प्लीज

जंगी ने बॉबी की मजबूरी समझी और उसे छोड़ दिया और वो सरपट भागती हुई कमरे मे दाखिल हुई ।

रज्जो फेसपैक ल्गाए पहले से ही आंखो पर खिरे की स्लाइस रखे आराम फरमा रही थी

जबकी शिला अपनी बारी के इन्तेजार मे बैठी थी ।

जैसे ही दरवाजे पर आहट हुई उसकी नजर सामने हाफ्ते हुए बॉबी पर गयी जो अपनी टॉप को खिंच कर निचे करती हुई बालों को झटकती हुई मुस्कुरा कर कमरे मे आती है ।

बॉबी शिला के पास खडी होकर - उफ्फ़ ये भागा भागी मे मै तो थक ही जाऊंगी आज हिहिहिहिही

शिला ने बॉबी की बाते सुनी मगर उसके टॉप पर उभरे हुए निप्प्ल के दाने और उसकी गहराती सासो कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही थी , जिसका आभास बॉबी को था ।

बॉबी ने शिला के सामने से उसके करीब होकर उसके बालों को साइड करती है , वही शिला बॉबी की कजरारी आंखो मे देखती है ।

बॉबी की नजरें भी शिला से टकराती है और वो नजरे फेर कर मुस्कुरा देती है ,वही बॉबी के रसिले होठो की मुस्कुराहट देख कर शिला भी मुस्कुरा देती है ।

बॉबी शिला के गले और कान के पास उंगलियाँ फिराती हुई रूखी स्किन का जायजा लेती हुई कहती है - दीदी आपका ये सब हिस्सा स्क्रब करना पड़ेगा , कही धूल मिट्टी वाली जगह पर गयी थी क्या ?

शिला को याद आया कि उस दिन वो गाव की ओर गयी थी बाग से लकड़ीयां लाने जहा नदी से लग कर तेज हवाएं चल रही थी , शिला ने वो बात बॉबी से शेयर की तो उसने कहा- हम्म शायद इसीलिए , ऐसा करिये आप ये कुर्ती निकाल दीजिये ताकी सामने क्लिवेज एरिया भी मै कवर कर दूँगी

शिला - हा लेकिन ये दरवाजा थोड़ा प्लीज ध्यान दिजियेगा

बॉबी - डोंट वॉरी यहा कोई नही आयेगा

शिला उठी और अपनी कुर्ती निकाल कर सिर्फ ब्रा और लेगिज मे आ गयि ।





शिला के भरे हुए जोबन को ब्रा मे फैला हुआ देख कर बॉबी की आंखे चमक गयी ।

शिला थोडा असहज हो रही थी वही बॉबी के लिए ये सब समान्य था ।

बॉबी ने अच्छे से शिला का फेस , बैक और फिर सामने का हिस्सा क्लिवेज के आस पास क्लीन किया ।

बॉबी के हाथो के स्पर्श से शिला के चुचो की घुंडी भी खड़कने लगी और ब्रा मे उभरने लगे ।

बॉबी ने फिर जब मॉसचराईजर अप्लाई किया और सामने आईने मे शिला के तने हुए निप्प्ल देखे तो वो मुस्कुराई , वही बॉबी को मुस्कुराता देख शिला समझ गयी तो वो सफाई देते हुए - हिहिहिही कमरा ठंडा है ना तोह्ह

बॉबी मुस्कुरा कर शिला के सीने पर मालिश करती हुई - कोई नही हो जाता है ऐसा

फिर उसके सामने आके फेस पर अच्छे से उंगलिया घुमाई , बॉबी की सरकति उंगलियाँ शिला की सासें गरम कर दे रही थी ।

फिर उसने स्क्रब अप्लाई किया और शिला को 15 मिंट के लिए छोड़ दिया ।

वही उसने एक बार रज्जो के फेस पर उंगलियाँ चलाई और फिर दोनो को छोड़ कर सोनल के कमरे मे हस्ते हुए भाग गयी क्योकि गलियारे मे जन्गी उस्का इंतजार कर रहा था और वो झल्ला कर रह गया कि बॉबी ने इसे चकमा दे दिया ।

मगर कुछ ही मिन्त मे जैसे ही बॉबी बाहर आई जन्गी ने लपक कर उसको स्टोररूम मे खिंच ले गया ।

बॉबी हाफती हुई - ओहो थोड़ा सा सबर लेते मेरे हीरो हिहिहिही

जंगी जल्दी जल्दी अपना पजामा खोलकर अपना तना हुआ मुसल निकालता हुआ - अह्ह्ह देखो कबसे तैयार बैठा है ,

बॉबी ने जन्गी का खड़ा मुसल देखा तो उसकी भी सासे चढ़ने लगी और उसने हाथ बढ़ा कर जंगी का मुसल थाम लिया ।





जन्गी आन्खे बन्द कर सिस्का और बॉबी सरकति हुई निचे बैठ गयी

अगले ही पल उसने मुह खोलकर जंगी का लन्ड मुह मे भर लिया ।

जन्गी सिस्का - आह्ह उह्ह्ह क्या ठन्ड्क है उह्ंम्ं सीईई ओह्ह्ह

बॉबी मे भी लन्ड की गर्मी और उसकी फौलादीपन से खुमारी चढ रही थी । वो अपने चुचे मसलते हुए जन्गी का लन्ड मुह मे ले रही थी ।

जन्गी ने बॉबी की मदहोशि भापते ही पीछे बोरियों के पास छिपे कमलनाथ को इशारा किया

वही कमलनाथ चुपचाप अपना लन्ड निकाल कर बॉबी के बगल मे खड़ा हो गया ।

अभी तक बॉबी को भनक नही थी वो आंखे मुंडे बडे चाव से जंगी का लन्ड चुबला रही थी , वही कमलनाथ ने निचे झुक कर उसका हाथ पकड़ा और बॉबी को लगा कि वो जंगी का ही हाथ है

मगर जैसे ही उसकी उंगलियो को गर्म और सख्त सतह का अह्सास हुआ उसने मुह मे लन्ड भरे हुए नजरे घुमा कर देखा कि एक दुसरा काला मोटा लन्ड सुपाडा खोले फ़नकार मार रहा है ।

बॉबी मुह से लन्ड निकाल कर - येह्ह सब क्याह्ह है येह्ह कौन है,, हमारी-आपकी बात थी ना

जंगी के बॉबी के मुह मे वापस के लन्ड घुसेड़ कर उंगली अपने मुह पर लगाते हुए - सीई चुप रहो और तुम डबल ले लेना भाई सीई अह्ह्ह

बॉबी मुस्कुराई और उसने कमलनाथ के लन्ड को पकड कर सहलाते हुए मुह खोलकर टोपा चुबलाने लगी ।





कमलनाथ उसके सर को सहलाता हुआ - ऊहह भाईसाहब क्या माल है यार बहुत तगडाआह्ह उह्ह्ह चुस्स्तीईई हैईई उम्म्ंम ओह्ह्ह

इधर बॉबी बारी बारी ने दोनो लन्ड चुबला रही थी तभी उसकी कलाई पर बन्धी स्मार्ट वाच का स्टापवाच बिप करने लगा ।

बॉबी फौरन उठ खडी हुई - मुझे जाना होगा , दुल्हन की मौसी का फेसपेक रेमोव करना है

जंगी बॉबी की गाड़ मसलता हुआ - अरे रुको ना बस 10 मिंट उह्ह्ह प्लीज हो जायेगा हमारा

बॉबी - प्लीज रुको ना मै आ जाऊंगी प्लीज

बॉबी जल्दी से स्टोर रूम से निकली और भागती हुई कमरे मे आई ।

इस्से पहले वो रज्जो का फेसपैक रिमोव करे उसकी नजर खुद की हालत पर गयि ।

उलझे बाल और बिखरी हुई लिपस्टिक

वो जल्दी से अपने बालो का जुड़ा करती है और टीशु पेपर से होठो को साफ कर फिर से लिपस्टिक लगाती है ।

उस्की ये हरकते शिला अपनी अधखुली अनखो से देखती है और मुस्कुराती है कि बाहर कोई तो है जो इसे अच्छे से रगड़ रहा है मगर कौन ।

ये सब सोच कर शिला की चुचिया एक बार फिर तन जाती है और उसकी बुर रसाने लगती है ।

वही बॉबी जल्दी जल्दी रज्जो का फेसपैक उतार कर दुसरा प्रोडक्ट अप्लाई कर देती है और फिर शिला के पास आती है ।

बॉबी शिला का स्क्रब हटाती है फिर क्लीनअप कर फेस पर पानी स्प्रे करती है जो सिसता हु उसके चुचो मे जाकर गीला कर रहा होता है ।

बॉबी जल्दी से टॉवल लेके शिला के चुचो पर सफाई करती है और शिला को देख कर मुस्कुराती है ।

शिला उसको खा जाने वाली नजरो से बड़ी ही मदहोशि से निहारती है और बॉबी के होठो की लाली देखकर थुक गटकती है ।

बॉबी शिला के हरकत से थोडी असहज होती है मगर वो इस बात को इग्नोर करती है ।

वो जल्दी से शिला के चेहरे पर फेसपैक अप्लाई कर सोनल के कमरे मे देखने जाती है ।

वही बॉबी के जाते ही शिला रज्जो से - भाभी सुनो ना भाभीई

रज्जो आंखे खोलकर शिला के ये रूप देखकर हस्ती हुई -क्या हुआ और तुम ऐसे क्यूँ

शिला - वो सब छोडो, मुझे लग रहा है घर में है जो इस बॉबी को बार बार रगड़ रहा है

रज्जो असमन्जस होकर - मतलब

फिर शिला बीते कुछ पलों का अनुभव रज्जो से बाटती है ।

शिला - मै क्या कह रही हूँ भाभी , एक बार चेक करो ना आप बाहर धीरे से

रज्जो - क्या ऐसे ये सब पोत कर

शिला - अरे तो क्या हुआ और ये मेरा मोबाइल लेते जाईये अगर कुछ मिला तो हिहिहिहिब

रज्जो - तुम भी ना हिहिहिही

रज्जो अपनी चेयर से उठी और धीरे से उसने दरवाजा खोला और एक नजर सोनल के भिड़के दरवाजे अन्दर झाका तो वहा मा-बेटी के अलावा कोई नही था

तभी उसकी नजर स्टोररूम से आ रही रोशनी पर गयी

रज्जो दबे पाव हौले से गयी कि पायलों की खनक तक ना उठे और उसने दरवाजे की ओट मे भीतर झांका तो उसकी आंखे फैल गयी ।

भीतर





बोरीयो पर बॉबी की दोनो टाँगे एक ओर करके उसको करवट लिटा कर उसकी जीन्स पैंटी को पैरो तक निचे सरका कर दोनो बड़े बड़े मोटे काले लन्ड उसकी गाड़ और चुत मे सटासट पेले जा रहे थे और बॉबी सिसकियाँ लिये जा रही थी ।

रज्जो ने पीछे से ही दोनो मर्दो को पहचान लिया और मन ही मन बोली - फिर तो आज रात ये जोड़ी कहर ढ़ाएगी हिहिही

मौका देखकर रज्जो ने शिला के मोबाईल मे वीडियो बनाकर चुपचाप निकल गयी ।

शिला वीडियो देखती हुई - हम्म्म्म मतलब मेरा शक सही था भाभीई देखो तो साली कैसे दोहरे लन्ड का मजा ले रही है

रज्जो - फिर क्या इरादा है जीजी उम्म्ं

शिला - तुम तो मेरा इरादा समझती ही हो क्यू हिहिहिहिही

रज्जो मुस्कुरा कर शिला की चुत को लेगी के उपर से सहला कर - कही इसके रसभरे होठो से अपना भोसडा चुसवाने का इरादा तो नही उम्म्ंम्ं

शिला ने सिस्कते हुए रज्जो का हाथ पकड कर उसे अपनी चुत पर और रगड़ दिया ।

वही स्टोर रूम मे

कमलनाथ - ऊहह भाईसाहब सच मे इसकी गाड़ मे बहुत चर्बी है उह्ह्ह देखो तो कैसे झटके दे रही है ओह्ह्ह हा ऐसे ही उह्ह्ह उम्म्म्ं





जंगी बॉबी के मुह लन्ड पेलता हुआ - ओह्ह्ह बॉबी मेरी जान मजा ही ला दिया तुने ऊहह और लेह्ह्ह उह्ह्हा ऐसे ही उम्म्ंम

कमलनाथ बॉबी के कूल्हो को थाम कर कस्कस कर उसके गाड़ मे पेलने लगा - ओह्ह येस्स्स्स ऊहह उह्ह्ह बॉबी आजाआ अह्ह्ह अह्ह्ह जल्दीईईई ओह्ह्ह





कमलनाथ ने झटके से लन्ड बाहर निकाला और बॉबी के मुह पर पिचकारी छोडने लगा वही जंगी भी जोर जोर से अपनी लन्ड की नसो को भीचता हुआ लन्ड झाड़ने लगा ।

बॉबी दोनो के रस से सराबोर होकर उनका लन्ड चुबलाने लगी ।

दोनो खड़े खड़े वही हाफते हुए बोरियॉं का टेक लेके सुस्ताने लगे और बॉबी रुमाल से चेहरा साफ करते हुए बोली - गाइज सच मे मजा आ गया और जन्गी जी आप मुझे गूगल-पे कर देना ओके

जंगी - हा हा ओके ओके हाहहहहा

इधर बॉबी निकल कर सोनल के कमरे मे चली गयी वहा खुद का हाल ठिक किया और फिर वापस रज्जो शिला के पास चली गयी ।

बॉबी के आते ही दोनो सतर्क हुए और करीब 10 से 15 मिंट मे बॉबी ने दोनो का फेस क्लीन करते हुए बोली - हम्म्म अब आप लोग फ्री है हिहिहिही

रज्जो ने शिला को इशारा किया और वो उठी फिर जाकर दरवाजे पर चटखनी लगाती हुई वापस आई

बॉबी इस रूम से अपना समान बैग मे पैक करने मे बिजी थी तो उसे दरवाजा बन्द होने का ध्यान नही रहा ।

इधर रज्जो ने फटाफट अपनी साडी खोलकर पूरी नंगी हो गयी ।

जैसे ही बॉबी पलटती है वो रज्जो को देखकर चौक जाती है - अरेह्ह आप ऐसे क्यू ?

रज्जो इतराई और बोली - देखो हमे जबरदस्ती करने की आदत नही है , लेकिन अभी अभी जो तुम स्टोररूम मे करके आई हो उसके बारे मे हमे पता है

बॉबी की सासे अटकी - मतलब मै समझी नही, म मै कब गयी स्टोर रूम मे , क्यू जाउंगी मै वहा ??

शिला ने टपाटप 3 चार बार मोबाइल टैप किया और वीडियो चला कर स्क्रीन बॉबी की ओर घुमा दी ।

बॉबी वीडियो देखते ही समझ गयी और थोड़ी घबराई

रज्जो उसके करीब आकर उसके होठो को अंगूठे से मस्लती हुई बोली - जी कर रहा है कि अभी इन्हे काट लू , लेकिन

बॉबी सहमी हुई रज्जो के नंगे भरे जिस्म से उठ रही गर्मी को मह्सूस कर गले से थुक गटकती हुई बोली - क्या??

रज्जो ने एक नजर मुस्कुरा कर शिला को देखा और बोली - यही कि हम अभी जो खेल खेलने वाले है तुम उसने खुशी खुशी हमारे साथ शामिल हो जाओ बस

बॉबी कुछ कुछ अनुमान लगाती हुई - कैसा खेल मै समझी नही

रज्जो ने उसका फेस अपने थन जैसे चुचे पर रगड़ती हुई बोली - येह्ह्ह वाला

रज्जो के नरम नरम चुचो के बीच रगड़ा कर बॉबी का चेहरा लाल हो गया , उसकी दूधिया स्किन गुलाबी सी हो गयी और नथुने फुल गये ।

वो हाफ्ती हुई हसने लगी और उसने जीभ निकाल कर रज्जो के निप्प्ल चाट लिये , रज्जो सिसकी ।

उसने शिला को इशारा किया वो अपनी पैंटी निकाले

शिला अपनी जांघो पर कसी हुई लेगी उतारती हुई घोड़ी बन गयी और रज्जो बॉबी के बाल पकडते हुए बोली - तेरी जगह यहा नही , यहा है लेह्ह्ज चाट उह्ह्ह और चाट ऊहह





रज्जो ने बॉबी का सर शिला की चर्बीदार फैली हुई गाड़ के बीच मे दे दिया और बॉबी भी पैंटी के उपर से अपनी थूथ रगड़ रही थी ।

वही शिला बॉबी के मुलायम होथो का स्पर्श पाकर पागल होने लगी और सिसकिया लेने लगी - उह्ह्ज बॉबी चुस्स और चाट उह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं येस्स्स स्क्क मीईई उम्म्ंम येस्स्स बेबीईईई उह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह उम्म्ंम ऑफफ़फ्फ येस्स्स ऊहह

इधर बॉबी शिला के गाड़ मे व्यस्त थी और वही रज्जो ने धीरे धीरे उसका जीन्स खोलकर घुटनो तक कर दिया और फिर उसे खड़ा कर उसको पुरा नंगा कर दिया

रज्जो ने उसके मुलायम रसिले होठो को अपने होठों से चुबलाया और बिसतर पर धक्का दे दिया

बॉबी खिलखिलाइ और अपनी जान्घे खोलकर अपनी गुलाबी बुर सहलाने लगी ।

उसने उंगलियाँ अपने मुह मे डाल कर थुक लिया और चुत के मुह पर लगाती हुई उसे मसलने लगी ।

रज्जो भी बिस्तर पर आकर उसकी जांघो को खोलती हुई अपना मुह सिधा उसकी नरम बुर मे दे दिया





बॉबी सिसकियाँ लेने लगी , रज्जो उसकी बुर मुलायम पतली फाको को मुह मे लेके चुसती हुई खिचने लगी - उह्ह्ह दिदीईई उम्म्ंम और चुसो उह्ह्ह सालों बाद ये मजा मिला है उम्म्ंम्ं सीईई ओह्ह्ह फ्क्क्क मीईई उह्ह्ह्ह सीई येस्स्स फ्क्क्क मीईई

रज्जो अपनी थूथ को उसके बुर के उपर रगड़कर उसकी बहटी रस पर जीभ फिरा कर उसे चाटते हुए उठी और उसने अपनी जान्घे खोलते हुए बॉबी की जांघो को अपने उपर खीचा जिससे दोनो की चुत के फाके आपस मे सट गये

बॉबी - उह्ह्ह दीदी इसमे तो और मजा आयेगाअह्ह्ह उह्ह्ह्ह उम्म्ंम

इधर रज्जो ने बॉबी की जान्घे पकड कर उसको अपने ओर खिंचती हुई उसकी चुत पर अपनी चुत घिस रही थि और दोनो तेज आहे भर रही थी ।





वही शिला अपने बैग से एक दिल्डो निकाल कर उसे चुसती हुई उनके पास खडी होके नजारे देखने लगी

रज्जो - अरे जीजी ये कहा था

शिला मुस्कुराई और उसे अपनी बुर के पास रगड़ती हुई बोली - ये वो वाला नही है ये छोटा है हिहिही मेरे पर्स मे होता है एक सेट

बॉबी ने जब शिला के हाथ मे दिल्डो देखा तो उसकी सासे और चढने लगी वो हस्ती हुई बोली - ऊहह दीदी आप तो सारा समान रखती है

शिला ने झुक के उसके रसीले होठ चूस्ती हुई बोली - मेरी जाँ तुने मेरा कलेक्सन देखा ही कहा है उम्म्म्म्म्माआह

वो घूम कर आई और उसने बैग से अपना strapon निकाल कर पहना और दिल्डो को झुलाती हुई बॉबी के पास आ गयी ।





मौका पाके ही बॉबी ने मुह खोलकर वो लण्ड मुह मे भर लिया और वही रज्जो ये सिन देखकर और जोश मे बॉबी की जान्घे खिचती हुई उसकी चुत पे अपनी चुत मलने लगी ।

रज्जो - उह्ह्ह अह्ह्ह अयेगाह्ह्ह उम्म्ंम सीई ओह्ह्ह आह्ह बोबीईईई उम्म्ंम उफ्फ्फ्फ अह्ह्ह

रज्जो कस कस के झटके खाते हुए झड़ने लगी और वही बॉबी दिल्डो को लन्ड की तरह जीभ फिरा कर उसकी चुसे जा रही थी

शिला ने उसके बालो को सवारते हुए बोली - सवारी करोगी मेरी जान उम्म्ंम

बॉबी ने हा मे गरदन हिलाया और मुस्कुराई

रज्जो उठ गयी और शिला ने बिस्तर पर अपनी पीठ टिकाई उसका लन्ड यू आसमानी तना हुआ था ।

बॉबी ने पाव फेक कर दिल्डो को अपनी गाड़ पे सेटकरने लगी और शिला ने एक बार अपना कमरा झटका

आधा दिल्डो उसकी गाड़ मे फस गया , मोटे लन्ड की कसर आ बॉबी की पूरी हो गयी थी रज्जो उसके चिकनी मुलायम चर्बीदार गाड़ मसलते हुए उसको दिल्डो पर उछाल रहि थी





बॉबी भी दिल्डो पर अपनी गाड़ पटकती हुई चिल्लाने लगी - ओह्ह माअय्य्य उम्म्ंम येस्स्स्स फ्क्क्क्क मीईई उह्ह्ह येस्स्स उएस्स उह्ह्ह कमां कमां एस्स एस्स उह्ह्ह फ्क्क्क्क फ्क्क्क मीई उह्ह्ह उह

शिला ने भी जोश मे जोश मे निचे से झटके मार रही थी क्योकि strap on का नीचला हिस्सा उसकी बुर के दाने को बार बार छेड़ रहा था और वो कुलबुलाहट से शिला को और मजा रहा है

उसने कस कस झटके देने शुरु किये और बॉबी ने भी तेजी से अपनी गाड पटकने लगी -उह्ह्ह माह्ह उह्ह्ह सीईई ऑफफ़फ औह्ह ऐसे ही दिदीईई उमम्मं सीईई अह्ह्ह्ह आह्ह फक्क्क्क फक्क्क येस्स्स एस्स्स्स येस्स्से उम्म्ंम्म्ं उम्म्ंम्म्ं उम्म्ं

बॉबी ने झटके से दिल्डो पर से उठी और अपनी गाड़ उठा कर अपनी चुत मलने लगी , उसकी बुर का फब्बारा फुटा जिसके सारे छीटें शिला के पेट मुह और चुचो पर गिरने लगे ,,जिसे शिला ने भी इंजॉय किया

वही रज्जो ने आगे आकर उसकी बहती पर मुह लगा कर उसको चाटने लगी

शिला भी दिल्डो की दोहरी मार से झड़ चुकी थी ।

बॉबी का दूध की तरह साफ चेहरा लाल हुआ पड़ा था मगर उसके चेहरे पर चरमसुख की अनुभती साफ झलक रही थी

तीनो के कुछ पल आराम किया और फिर सबने कपडे पहने और बाहर निकल गये ।

इस वादे के साथ कि मौका मिलने पर वो फिर कभी ये मजा जरुर दोहरायेन्गे ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 191

अमन के घर



"हिहिही भाभीईई अह्ह्ह न्हीईई उम्म्ंम छोड़ो नाह्ह्ह सीईई धत्त क्याह्ह करती हो उम्म्ंम ", रिन्की दुलारी की बाहों से छ्टकती हुई कमरे मे बिसतर पर चढ गयी ।

दुलारी ने उसको घेरना शुरु किया और भगाते हुए कमरे की दिवाल के तरफ उसको दबोच लिया

"आहा , अब कहा जाओगी !! उम्म्ंम देखू तो कितनी जवानी फूट रही है , उम्म्ंम्ं उफ्फ्फ " , दुलारि ने पीछे से रिन्की के संतरे टॉप के उपर से मस्लते हुए बोली ।

रिन्की - उह्ह्ह भाभीई क्या करती हो आह्ह सीई





दुलारि ने बिना ब्रा वाली रिन्की की टॉप उठा कर उसके गुलाबी निप्प्ल वाले मुलायम दूधिया चुचिया को हाथो के भरते हुए - ऊहह मेरी ननदीया क्या रसिले दूध है तेरे उम्म्ंम

रिन्की अपने तने हुए निप्प्ल पर दुलारि के मुलायम ठंडे हथेली का स्पर्श पाकर आंख उलटने लगी ,- उम्म्ंमम भाभीईई सिह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह

दुलारी ने उसको झटके से घुमाया और झुक कर उसकी चुचि मुह मे भर ली ।

रिन्की - ओफ्फ्फ भभीईई उह्ह्ह उम्म्ंम अह्ह्ह





दुलारि आंखे उठा कर उसकी आंखो के देखते हुए बोली - उम्म्ंम मेरी छुटकी ननदीया कितना रसिल जोबन है , किसी को चखाया कि नही उम्म्ंमम बोल ना

रिन्की कसमसाई - उह्ह्ह ना भाभीई कोई देखता ही नही मुझेह्ह अह्ह्ह सीईई

दुलारी ने उपर होकर उसको घुमाकर दिवाल से लगा दिया

फिर उपर से निचे तक उसको निहारते हुए उसकी कमर से उसका लोवर सरकाते हुए उसकी गुदाज नरम गाड़ को कुदेरने लगी - रस तो तेरे अन्ग अन्ग मे भरा है मेरी जान अह्ह्ह क्या नरम मुनिया है तेरी





रिन्की - अह्ह्ह भाभीईईई उह्ह्ह आराअम्म्ं सेहहह उह्ह्ह्ह उह्ह्ह उम्म्ंमम्ं आह्ह

दुलारी रिन्की की रसबहाती बुर मे उंगलिया पेलती हुई उस्के मुलायम कान काटती हुई बोली - अरे एक बार अपने भैया से बोल के तो देख उह्ह्ह वो तेरी जवानी ऐसेह्ह्ह्ह उम्म्ंम रगड़ कर चुसेगे बोल देगी भैया को अपने उम्म्ंम

रिन्की अपने बुर मे दुलारी की घुमती उंगलियाँ पाकर पागल हो गयी थी वो अपनी एडिया उठा कर गाड़ दुलारि की ओर धकेलती हुई हाफ्ते हुए मुस्कुराई - आपने भी मजा दिया है क्या भैया को उम्म्ंमम

दुलारी अपनी उंगलियों से रिन्की के बुर के मुलायम फाके फैलाती हुई - मै तो रोज देती हु तेरे भैया को , खीरे जैसा तगड़ा लन्ड है बोल लेगीऊहह

रिन्की मुस्कुरा कर सिहरते हुए अकडी - ऊहु मै तो आपके भैया की बात कर रही हुउउऊ नाअह्ह्ह उम्म्ंमम

दुलारी मुस्कुराई और बोली - कसम से मेरा कोई तेरे भैया जैसा भैया होता ना तोह्ह

रिन्की - सीईई उह्ह्ह भाभीईई उन्मममं उफ्फ्फ आह्ह सीईई उह्ह्ह्ह उम्म्ंम उम्म्ंम भाआभीईई ओह्ह

दुलारी ने रिन्की की एक टांग उठा कर उसके चुत के फाको से लेके उसकी गाड़ की सुराख तक जीभ फिराने लगी ।





रिन्की - उह्ह्ह भाभीई उम्म्ंम

दुलारी ने अपनी जीभ को निचे से उसके बुर के फाके फैलाती हुई मलाई चाट कर बोली - देखा ऐसे ही चटवाति उम्म्ंम क्या रसिली बुर है तेरी रिन्की उन्मममं उम्म्ंम्ं

रिन्की - ऊहह भाभीईईई तो मेरे दुसरे भैया से चटवा लोह्ह नाअह्ह उम्म्ंम

"दुसरे भैया मतलब " , दुलारी ने सर पीछे होकर पुछा

"अमन भैया से हिहिहिही उनका हथियार इतना बडा है " रिन्की ने अपनी कलाई उठा पर हाथ भर का इशारा किया ।

दुलारि ने थुक गटका और बोली - वो मुआ एक ही पर मरा जा रहा है ,

उसको कहा घर के माल की फ़िकर

रिन्की अपनी उंगलियो दुलारि की उंगलियाँ पकड कर बुर रगड़ती हुई - आह्ह भभीई रुको नहीईई उम्म्ंम सीईई उह्ह्ह ऐसे ही उह्ह्ह

दुलारी मुस्कुराई और उंगलिया फिराती हुई - फ़िकर ना कर लाडो आज शाम तेरे लिए एक दमदार मुसल खोज ही दूँगी

रिन्की झड़ते हुए- उह्ह्ह हा सच मे भाभीईई उह्ह्ह माह्ह्ह मेरा आ रहा है ऊहह सीईई उम्म्म्ं

रिन्की झटके खाती हुई झड़ने लगी और दुलारी अंत तक उस्की बुर के दाने सहलाती हुई उसे निचोडती रही

दोनो मुस्कुराते हुए सीधे खड़े हुए और इधर रिन्की ने दुलारि को दबोचने का सोचा तबतक दरवाजे पर फिर से आहट हुई और दोनो सतर्क हुए

रिन्की ने जल्दी से खुद के कपडे सही किये और दुलारि ने अपना चेहरा ।

दरवाजा खुला और सामने से भोला कमरे मे आया - अरे बहू तुम

रिन्की दुलारि को सकपकाई देख कर - मैने बुलाया पापा बाल बनवाने के लिए

दुलारी रिन्की की चालाकी पर आंखे उठा कर उसे देखी तो रिन्की ने उसे आंख मारी और भोला तौलिया लेके नहाने घुस गया ।



राज के घर



छत पर शादी के लिये मंडप सेट होने जा रहा था और राहुल - अरुण काम करने वालो को सामान के साथ लेकर उपर आ गये थे ।

इधर टेन्ट लगना शुरू हुआ और अरुण- राहुल की नजरे रेलिंग के पास खड़ी गीता बबिता पर गयी ।

बबिता ने तुनक मिजाजी मे अपना मुह बनाया और दुसरी ओर देखने लगी ।

वही गीता और अरुण एक दुसरे को देख कर छिपी हुई मुस्कान लिये शर्माये ।

राहुल - बहिनचोद ये लम्बी वाली कुछ ज्यादा ही नही ऐठ रही है , इसको सबक सिखाना पड़ेगा

अरुण - भाई कुछ गड़बड़ मत करना यार , मेरा टाका सेट है प्लीज ना !!!

राहुल - चल आ उधर ही चलते हैं

दोनो को अपनी ओर आते देख दोनो बहने सतर्क हुई , दोनो का कलेजा काप रहा था , धड़कने तेज थी ।

राहुल रेलिंग के पास आकर अरुण - तु बात करेगा या मै बात करू

दोनो बहने सतर्क थी और बबिता भन्नाते हुए बोली - क्या बात करनी है जल्दी बोलो तुम

राहुल मुह बिचका कर - देखा देखा , मै बोल रहा था ये लडकी कितनी घमंडी है , इसे अपने प्लान मे नही लेते है लेकिन तु सुनता नही है !

बबिता गीता चौकी और एक साथ - प्लान ? कैसा प्लान ?

अरुण मुस्कुरा कर - अरे आज रात मे जुता चुराइ की रस्म होगी ना तो हिहिहिहिही

बबिता हस्ती हुई - हा तो वो सब हम लड़कीयों का काम है ना

राहुल - तुमको कुछ मालूम भी है अरे निशा दीदी तो पूरी तरह से जीजू के फेवर मे है ,,, वो आसानी से दे देगी जूता

राहुल ने अरुण को आंख मारी

गीता - अरे नही यार , ऐसे कैसे ? और निशा दीदी क्यू करने लगी ऐसा भला ?

राहुल - मैने आज सुबह ही सोनल और निशा दीदी को जीजू से बात करते हुए सुना , निशा दीदी जीजू से कुछ अपनी शर्त मनवाने की बात पर जिद कर रही थी ।

गीता - यार बबिता फिर क्या होगा , हम लोग का मजा बेकार हो जायेगा ना

बबिता - तो फिर कैसे क्या होगा तुम ही बताओ ?

बबिता ने राहुल की ओर देख कर बोली ।

राहुल - हम लोग इस घर मे जूता रखेंगे ही नही ,

गीता - फिर ?

अरुण - हम जुता बगल वाले घर मे रखेंगे जहा हम लोग सोये थे और वो भी दोनो जोड़े अलग अलग जगह पर ।

राहुल - ये बात सिर्फ हम चारो मे ही रहेगी

डन!!

डन!!

डन!!

बबिता गीता और अरुण ने एक एक करके बोला और हसे ।

फिर राहुल और अरुण निकल गये काम करवाने ।

गीता - देखा तू फाल्तू का टेन्सन ले रही थी , ये तो अपने फाएदे की बात थी ना

बबिता दुर खड़े राहुल को घुरती हुई - हम्म्म ठिक है ।

गीता - क्या ठिक है ? क्या बड़बडा रही हो ?

बबिता - क कुछ नही । चलो निचे चलते है ।

सब अपने कामों मे व्यस्त थे ,

वही राज अपने कामों से फ़ुरसत पाकर अपने नाना को खोजता हुआ अपने कमरे मे जा पहूंचा

जहा बनवारी पहले से गहरी सोच मे डूबा था और उसके चेहरा की चमक कही गायब सी थी ।

राज चहकता हुआ घर के बाहर डीजे पर बज रहे गाने के धुन गुनगुनाता हुआ कमरे मे गया तो नाना को देख कर उसे अचरज हुआ ।

राज - क्या हुआ नानू , आप ऐसे क्यू हो ।

"तबियत तो ठिक है ना ", राज अपने नाना के सर और गाल पर हथेली रख कर चेक करता हुआ बोला ।

बनवारी कुछ बोलने को हुआ तो उसके गले से आवाजे फस कर बाहर आई , मानो उस्का गल भर आया हो

गले की खराश को गटककर - नही बेटा मै ठिक हु ।

राज - तो आप परेशान क्यू लग रहे हो ? कही ताइ ने डाट तो नही दिया हिहिहिही

बनवारी मुस्कुराया और फिर सीरियस होकर - नही वो बात नही है ,

राज - क्या नानू ! आप अब मेरे से बाते छिपाओगे

बनवारी थोड़ा सोचकर - कुछ भी बात नही है बेटा , तुम परेशान ना हो

राज - मम्मी को बुलाऊ

बनवारी थोडा हिचक कर - न न नही उसे क्यू परेशान करेगा

राज - तो बताओ क्या बात है उम्म

बनवारी नजरे फेरता हुआ एक गहरी सास लेके - वो अभी अभी कुछ देर पहले जब तु बाहर था तो तेरी ताई और मै यही थे और ...

राज चहक और हस्ता हुआ - मतलब आपने ताई की लेली , हिहिहिही

बनवारी अटकता हुआ - हा वो बस संजोग था

राज - आह्ह नानू क्या मस्त आदमी हो आप , इत्नी ज्लदी ताई पट कैसे गयी ? बोलो ना हिहिहिही

बनवारी- बात वो नही है बेटा, दरअसल जब मै कमरे से बाहर निकला तो तेरे पापा ने मुझे देख लिया और भीतर तेरी ताई कपडे ठिक कर रही थी ?

राज चौक कर - क्या पापा ने ?

बनवारी- हा बेटा, मुझ्से इतनी बड़ी लापरवाही हो गयी कि मै क्या बताउं । मै मेरी बेटी के ससुराल मे मुह दिखाने लायक नही रहा ।

राज कुछ पल तक अपने नाना की बकबक सुनता रहा कि वो खुद को कोसे ही जा रहे थे ।

राज ने एक गहरी सास ली और बोला - नानू आप चिंता ना करो , पापा कुछ नही कहेंगे किसी से ।

बनवारी- हा लेकिन तेरे पापा ने कहा है कि वो इस बारे मे बाते करेंगे

राज - अभी तो नही करेंगे ना ?

बनवारी- नही

राज - ऐसा करना आप शादी के बाद सुबह ही सरक लेना घर के लिए बहाने से

बनवारी- हा मगर बहू और वो मेरी नातिने उनका क्या ?

राज - अरे उनको बाद मे भेज दूँगा मै ना

बनवारी- अच्छा ठीक है , लेकिन तु ये बात किसी से कहना मत

राज मुस्कुरा कर - अरे आप टेन्सन फ्रि रहो नानू , कुछ नही होगा ।

इधर राज नाना से बाते कर रहा था कि हाल मे कुछ चहल पहल हुई और राज उठ कर बाहर आया तो उसकी आंखे चौधियां गयी ।

सामने उसके दोनो फूफा और तीन जवां हसीन लडकियां आई हुई थी ।

जिन्हे देख कर उन्के हाव भाव से समझते देर नही लगी राज को कि वो उसकी बुआ की लड़किया है जो शहर से आई है ।

राज ने आगे बढ़ कर अपने फूफा को नमस्ते किया और

सामने खड़ी लडकियों को उपर से निचे तक निहारता हुआ

राज - लेट मी गेस !!

एक लड़की की ओर देखा और उसके चेहरे की गोलाई और बड़ी बड़ी आंखो वाली उसपे से छोटा कद भरा बदन - चारु दीदी राइट

चारु खुश हुई और उसने लपक कर राज को हग कर लिया - ओहो पहचान लिया तुने हिहिही अब बता इन दोनो मे से नीलू दीदी कौना है ,सोच सोच बता बता ?

राज ने सामने दो लड़कियो को देखा दोनो ने पहले से ही चेहरे पर मास्क और चश्मे चढा रखे थे - उम्म्ं ऐसे कैसे पहले ये चश्मा और मास्क तो हटाओ ?

चारु हस कर - ऊहु , ऐसे ही बता

राज बारी बारि से दोनो लड़कियो को जो एक सी denim जीन्स डाले हुए टॉप मे थी , दोनो का जिस्म लगभग एक शरिखे का था , बस एक की हाईट राज के बराबर थी जबकी दुसरी वाली उससे थोड़ी कम ,

छोटी वाले के घने लम्बे बाल जो कमर तक आ रहे थे तो दुसरी लम्बी वाले के आधी पीठ तक ।

सामने सीने पर दोनो का जोबन अनुमानत: 34 की गोलाई लिये था ।

राज - अच्छा ठिक है सिर्फ चश्मा हटा दो

तभी - उसने लम्बे बालो वाली ने चश्मा

उपर किया और बालो पर टिकाते हुए अपनी आन्खे खोली





राज उसकी कजरारी मोटी भरी भरी हल्की नीली आंखो मे खो सा गया ।

राज को रुका देखा चारु ने उसे झकझोरा - अरे बता ना देख के

तभी राज की नजर बगल वाली ब लड़की पर गयी , जिसके नैन नख्स भी तीखे थे , मगर दुसरी वालीं की आंखो मे एक गजब का नशा था , एक अपनापन सा था जो राज को उसकी ओर खींच रहा था और वो लड़की भी उसे ऐसे देख रही थी मानो कह ही रही हो कि मुझे पहचानो मै ही हु

वही चारु इठलाती हुई उसे हिलाते हुए - अरे बोल ना क्या सारा दिन यही सोचता रहेगा ।

राज - अह हा हा यही है दीदी पक्का !!

राज ने उस लम्बे बालों वाली मोटी अंखियों वाली की ओर इशारा करके बोला ।

तभी बगल मे खड़ी वो लम्बी लड़की तुन्के हुए अपना मास्क हटा कर - अरे बुध्दु मै यहा हु ,

चारु इसपे पर खिलखिला कर हस पड़ी, और राज का पोपट हो गया ।

राज थोड़ा उलझे हुए स्वर मे उस अंजान लड़की की ओर इशारा करके पुछा - तो ये कौन है ?

नीलू ने उस लडकी पकड कर परिचय कराते हुए बोली - ये मेरी बेस्टी है सिम्मी हिहिहिही

और सिम्मी ने हल्की मुस्कान के साथ अपने उंगलियों से मास्क को सरका कर ठुडी के निचे किया ।





उसकी शक्लो सूरत देख कर राज ठिठक कर रह गया ,

सिम्मी ने उससे हाथ मिलाने के लिए अपना दाहिना हाथ आगे किया - हाय मै सिमरनप्रीत कौर

राज के दिल की धड़कने तेज थी और उसके आंखे और गला भरा हुआ था वो उसकी ओर देखता हुआ बेसुध हाथ आगे बढा दिया - हाय जी सिमरन जी म मै आपका राज , मेरा मतलब ... मै राज हूँ

राज की हालत पर उसकी दोनो बहने खिलखिला कर हस दी और नीलू बोली - राज , सोनल दीदी कहा है

राज - वो उपर ही है अपने कमरे मे

नीलू - चल चारु हिहिही , आजा सिम्मी तु भी

दोनो बहने सरपट उपर भागी और सिम्मी भी आगे जाने को हुई

सिम्मी मुस्कुरा कर - राज जी

राज - अह हा जी

सिम्मी - हाथ!!

राज - जी !

सिम्मी अपनी हसी दबाती हुई मुस्कुरा कर राज को इशारा करती हुई - जी मेरा हाथ

राज - ओह हा , स सॉरी जी

सिम्मी मुस्कुराई और जीने से उपर चली गयी ।

वही राज अपना ही हाथ पकड कर उसको देखता हुआ अपने सीने पर ले गया - हय्य सिमरन जी सीईई

राज खुश हुआ और DDLJ फिल्म के संगीत की धुन गुनगुनाता हुआ बाहर निकल गया ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 192 ा


बारात आ गयी !!

बारात आ गयी !!

गीता चहकते हुए उपर हाल मे सब औरतों को आवाज देती है और सारी औरते उपर की बालिकिनी मे कसाकस खड़ी होने लगती है ।

भीड के बीच मे दूल्हे की शेरवानी से लेकर बरातियों के डांस और समधन के कपड़ो की बातें उठ रही थी ।

इधर निचे सड़क मे मुख्य द्वार पर दुल्हन के घर के सभी मर्द निचे आ गये थे स्वागत के लिए

दूल्हे और सम्धी को माला पहना कर स्वागत किया गया ।

सबको मीठा पानी नास्ते के लिए लगा दिया गया ।

अमन भी एक सोफे पर बैठ कर नजर फिराते हुए सोनल को खोजता हुआ गरदन उठा कर बाल्किनी ने देखता है कि वहा लड़कियो की लाईन लगी थी , एक से बढ कर एक हसिन जवान खिले रन्ग बिरंगे गुलाबो का बागीचा का सजा हो मानो ।

बबिता ने हाथ उठा कर इशारा - हाय जीजू हिहिही

अमन लाज के मारे मुस्कुरा कर नजरे फिरा लेता है और बगल मे उसकी पहरेदार बनी रिन्की हस पड़ी ।

वही राज और अनुज दोनो सगे साले अपने जीजा का आवभगत करने ट्रे लेकर उसके पास पहुचे ।

अनुज ने अमन के पाव छू कर उपर देखा तो बगल मे एक बला सी खुबसूरत उसके हम उम्र की लडकी इतराती हुई अपनी पलके स्लो मोशन मे झपकाये अपने चमकीले आई-शैडो दिखा रही थी और आई-लाईनर ने उसकी काली सुरमई आंखो को और भी आकर्षक बना दिया ।





अनुज ने नजर भर उसको देखा और अनुज को खुद की ओर देखता पाकर रिन्की मुस्कुराइ और उसके ट्रे से पानी का गिलास लेके उसके सामने ही उस ग्लास पर अपनी महरुन सुगर-मैट लिपस्टिक की छाप देती हुई पानी का सिप लेते हुए नजरे उठा कर अनुज को देखती है ।

अनुज लाज से नजरे फेर कर आगे बढ़ जाता है , मगर उस्का दिल पुरा काप रहा था ।

रिन्की मुस्कुरा कर अनुज को जाते देखा और खुद पर इतराती हुई दुलारी भौजी को ऐसा कातिलाना लूक देने के थैंकयू बोला ।

दुलारी ने मुस्कुरा कर उसको आंख मारी और काजूकतली की बाइट को अपने सफेद दाँतो से दबाते हुए बड़ी अदा से रिन्की को देखा कि रिन्की को लगा मानो दुलारि ने उसके निप्प्ल काट लिये हो

वो आंख भिंच कर सिहर उथी और मुस्कुराने लगी ।

रंगी - अरे बेटा इधर ला मुझे दे

रन्गी राज के ट्रे से मीठे का प्लेट उठा कर अपनी समधन ममता को देता हुआ - लिजिए भाभी जी

ममता मुस्कुरा कर आंखो ही आंखो मे रंगी को देखा और थोडा नजाकत से उसके हाथो से प्लेट लेते हुए - जी शुक्रिया ।

रन्गी ने देखा कि ये वही ब्लाउज था जिसका डिजाईन रंगी ने सोचा था ,





स्लीवलेस , लो-नेक और वाइड शोल्डर उफ्फ्फ ममता का गुलाबी गोरा जिस्म निखर कर सामने आ गया था उस मरून ब्लाउज मे उसपे से हल्की ट्रासपैरेन्सी वाली ऑरगंजा साडी का पल्लू उसके दूधिया जोबनो को छिपाने वजाय और भी आकर्षक का केंद्र बना रहा था ।

कमर पर बाहर की ओर निकाली चर्बीऔर साड़ियों के प्लिट मे छिपती नाभि की ढलाने उफ्फ़ सब कुछ कामोत्तेजक था इस वक़्त रन्गी के लिए ।

मन और लन्ड दोनो के जज्बात छिपाते हुए रंगी आगे बढ़ कर अपने समधि मुरारी और मदन से मिलने लगा ।

वही उपर की बाल्किनी मे दो बहनों मे अलग ही कौतूहल मचा हुआ था ।

रज्जो - अरे कहा है तेरे समधन की ननद

रागिनी - वो देखो ग्रीन-ब्लू साडी वाली , वहा दामाद बाबू के बाई ओर वाली





रज्जो - कौन वो जिसके हाथ मे वाइट पर्स है

रागिनी - हा वही !

रज्जो - अरे वाह क्या गजब का रसगुल्ला है हिहिहिही

रागिनी हस कर - हा तो जीजू को बोल दो आज इस रसगुल्ला का सारा रस यही निचोड़ना है हिहिहिही

रज्जो - अच्छा तुने अपने देवर से बात की

रागिनी लजाते हुए मुस्कुरा कर - हमम्म

रज्जो - तो क्या बोला ?

रागिनी - हिहिहिही ये मर्द जात कहा पीछे रहेगी वो क्यू मना करते भला

रज्जो - वो तो पहचानता है दूल्हे की बुआ को

रागिनी - हा पहचाते तो है लेकिन मै एक बार इशारा कर दूँगी ।

रज्जो - ठिक है चलो चलते है निचे तैयारियाँ करनी है ।

दोनो सीढियों से निचे जा रही थी ।

रज्जो - अरे ये तेरी देवरानी कहा रह गयी

रागिनी - अरे वो तो ऐसे सज सवर रही है मानो आज समधि के साथ वही फेरे लेगी हाहाहहा

रज्जो भी हसने लगती थी तभी अनुज जीने से होकर उपर आता हुआ दिखा जो अभी कुछ देर पहले बाहर हुए रिन्की के साथ उसके अनुभव से थोड़ा खुश था और वो खाली भी था तो रिन्की को निहारने के लिए छत की बाल्किनी मे जा रहा था ।

रागिनी उसको पकडते हुए - हे रुक कहा जा रहा है ?

अनुज हकला कर - वो वो मै !!

रागिनी - उपर कमरे मे जा रहा है ना ?

अनुज क्या ही बोलता उसने अपनी मा के हां मे हां मिलाया - हा !!

रागिनी - अरे तेरी चाची को बोल दे जल्दी तैयार हो जाये और निचे आये , जा बोल दे जा

अनुज - ठिक है मा

फिर अनुज सरपट जीने से हाल मे आया और सीधा बाल्किनी मे जाने के लिए गैलरी की ओर बढा था कि वापस भन्नाते हुए हाल की ओर घूमता - अरे यार ये मम्मी भी ना , कहा हो चाचीईईई उम्म्ंम

अनुज लपक कर अपने कमरे की ओर बढ़ता है तो उसे बगल मे सोनल के कमरे मे लड़कीयों और औरतों की हसी ठिठोली भरी अवाजे आ रही थी और अनुज की इतनी हिम्मत नही थी कि वो भीतर झान्के तो उसने लपक कर अपने कमरे का भिड़का हुआ दरवाजा हल्का सा खोलकर झाका

भीतर शालिनी अपनी मुलायम satin-silk वाली साड़ी के ड्राप सेट कर रही थी और उसका सीना बिल्कुल खुला पड़ा,





आगे झुकने से उसके बडे गले वाले ब्लाउज से उसकी उजली छातियों की गहरी लकीरें साफ नजर आ रही थी वही पेट पर उसकी गुदाज नाभि अलग ही रसदार छवि बना रही थी ।

अनुज ने थुक गटका और अपने सर उठाते लण्ड को पैंट के उपर से दबाते हुए दरवाजा खोलते हुए झटके से कमरे मे दाखिला

शालिनी चिहुकते हुए अपनी फैली हुई साड़ी के आचल को समेटते हुए अपने खुले सीने को ढकती हुई - हाय्य दैयाअह्ह , अ अनुज बेटा तु है

शालिनी ने आन्खे बन्द कर गहरी सान्स ली और मुस्कुराने लगी ।

अनुज का लन्ड फनफना रहा था ।

शालिनी हाफ्ते हुए मुस्कुरा कर - बेटा जल्दी से दरवाजा लगा दे कोई आ जायेगा ।

अनुज ने झटके से दरवाजा ल्गाया और बोला - चाची चलो मम्मी बुला रही है , बारात आ गयी है ।

शालिनी बेबस भरी हँसी हसने की कोसिस करती हुई - हा बेटा बस 5 मिंट ये साडी का पल्ला सही नही बन रहा है , जरा मदद करेगा बेटा ।

अनुज चौक कर - मै ! मेरा मतलब मुझे कहा आती है साड़ी पहनाने

शालिनी हस कर - अरे पागल तुझे पहनाना नही है ,मै पहन लूंगी , तु बस ये निचे बैठ कर प्लीट पकडकर टाइट करना ठिक है

अनुज ने हा गरदन हिलाया और शालिनी के आगे घुटने के बल बैठ गया ।

शालिनी ने वापस से हाथ मे लिया हुआ आंचल छोड दिया और एक बार फिर उसका सिना खुल गया ।

शालिनी की प्लीट बनाती हुई सेट करके एक एक अनुज की निचे से टाइट करने को कह रही थी ।

"हा बेटा बस इसको छोड और वो बगल से निचे से कोना पकड के निचे खिंच " , शालिनी ने अपने दाहिने ओर साडी के बार्डर की ओर इशारा किया ।

इससे पहले शालिनी अपनी साडी को आगे Tuck करके अनुज को आगे का instructions देती , अनुज ने अपनी उंगलियों से जोर देकर दाहिनी तरफ की साडी का किनारा ऐसा खिंचा कि शालिनी की दाये और पीछे की तरफ उसकी साडी जित्नी भी पेतिकोट मे खोन्सी हुई थी सारी tucking बाहर आ गयी ।

शालिनी - अरे बुधु ये क्या किया तुने , सब बाहर आ गया । इतना जोर से थोड़ी ना खिंचना था ।

अनुज शालिनी को परेशान देख कर खड़ा हुआ - सॉरी चाची अभी अन्दर कर देता हु इसको





अनुज ने जल्दी जल्दी शालिनी की उधडी हुई साड़ियों की टकिंग को वापस से कमर मे खोंसने लगा उसकी उंगलियाँ शालिनी के नंगी कमर और पीछे कूल्हो पर स्पर्श होने लगी ।

शालिनी - ओही रहने दे तुझसे नही होगा मुझे फिर से निकालनी पड़ेगी साडी

शालिनी ने वापस से अपनी कमर से साडी निकालती हुई - ओहो देख ऐसे खिंच की इसकी इस्त्री बिगड़ गयि ।

अनुज उदास मन से - सॉरी चाची ।

शालिनी कुछ सोच कर - मै साडी ही बदल देती हु ये नही पहुन्गी ।

शालिनी वैसे ही ब्लाउज पेतिकोट मे घूमती हुई अपना बैग खोलकर उसमे से साड़ियां निकालने लगी

वही अनुज अपनी चाची को इस रूप मे देख कर पागल हुआ जा रहा था । उसका लन्ड और कडक हो रहा था ।

शालिनी - अब तो इसके ब्लाउज पेतिकोट और चूडियां सब बदलनी पड़ेगी ।

अनुज - तो चाची मै जाउँ

शालिनी उसको डांट कर - कहा जायेगा , जल्दी से मेरी मदद कर ये साडी फ़ोल्ड कर दे तब मै ब्लाउज पेतिकोट बदल लेती हु।

अनुज चाची की डांट पर थोडा सहमा और चुप चाप साडी समेट कर बेड के करीब आया और साडी के सिरे मिलाते हुए उन्हे फ़ोल्ड करने लगा ।

वही शालिनी ने जल्दी अनुज के पीछे खड़े होकर अपने ब्लाउज के हुक चटकाने लगी

वही अनुज को बेड से लगी आलमारी के आईने अपनी चाची की छवि मिल रही थी ।





शालिनी ने झटके से अपना ब्लाउज निकाला तो ब्रा मे कैद उसकी नायाब कड़क मोटी नारियल जैसी चुचियां देख कर अनुज की आंखे चमक उठी ।

उसके हाथ रुक गये थे और वही शालिनी की नजर उसपे गयी - अरे जल्दी कर ना भाई और ये ब्लाउज का हुक लगा कर उसको फ़ोल्ड करना

शालिनी ने ब्लाउज बेड पर अनुज के पास फेकते हुए बोली ।

और जल्दी से अपने पेतिकोट का नाड़ा खोलने लगी , मगर ये क्या अनुज ने जिस तरह से साडी खिंची थी शालिनी के पेतिकोट के डोरी की गांठ कस गयी थी और शालिनी की लाख कोसिस पर वो खुल नही रही थी

"ऊहह इसे क्या हुआ , एक तो लेट हो रहा है और उपर से अह्ह्ह माआह , क्या हुआ इतना आसानी से तो बान्धा था " , शालिनी अपनी उंगलियों से अपने पेतिकोट की डोरी खोलने की कोसिस करती हुई बड़बड़ाइ ।

वही अनुज आईने ने अपनी चाची को परेशान देख कर मस्त था क्योकि हर बितते पल के साथ उसे अपनी झुकी हुई चाची की गोरी छातीया और देरी देखने को मिल रही थी ।

शालिनी ने आगे देखा कि अनुज साडी फ़ोल्ड करके तिरछी नजरों से आईने मे उसे ही निहार रहा था ।

शालिनी - देख क्या रहा है , ये नही कि मदद कर दूँ चाची की

अनुज सकपकाया और थोड़ा हिचक कर अपनी चाची की ओर घुमा - जी !!

शालिनी अनुज के सहमे हुए और भोली प्रतिक्रिया पर हसी - इधर आ पागल कही का , खोल इसे देख खुल नही रहा है ।

अनुज थुक गटक कर सामने खड़ी अपनी रसदार चाची की ब्रा मे कैद दुधारू चुचियों की घाटियों मे खोया हुआ आगे बढ़ता हुआ पास आया ।

अनुज - अरे इसकी गांठ तो इतनी टाइट क्यू कर दीं आपने , इसको काटना पड़ेगा अब

शालिनी - जा फिर चाकू ला जल्दी

अनुज - नही रुको मेरे पास छोटी वाली कैंची है

फिर अनुज लपक कर अपनी आलमारी से कैंची निकालकर लाया और शालिनी का पेतिकोट का नाड़ा काटने लगा ।

अनुज - ह्ह हो गया अब निकाल दो इसे

शालिनी ने घुर के उसको देखा तो अनुज को समझ आया कि वो क्या बोल गया और वो शरम से नजरे चुराने लगा तो शालिनी की हसी छूट गयी ।

शालिनी अपनी हसी दबाती हुई - ला वो मेरा पेतिकोट दे

अनुज बेड से पेतिकोट उठा कर शालिनी को दिया और शालिनी ने पहने हुए पेतिकोट को उठा कर उपर करते हुए दाँतो मे फसाया , जिससे निचे उसकी घुटनो के साथ साथ मांसल सुडौल चिकनी जान्घे भी आगे से दिखने लगी ।

वही शालिनी ने दुसरा पेतिकोट उपर से पहना और उसको सरका कर कमर तक लाई , फिर उसने अपने मुह से वो पेतिकोट छोड़ दिया जो उसके पेट पर आकर अटक गया ।

शालिनी ने उपर से नया पेतिकोट आगे फैलाया और निचे वाला पुराना पेतिकोट हाथो से खोस खोस कर निचे करने लगी , मगर वो निचे पैरो तक नही सरक रही थी

शालिनी ने पैरो से भी कोसी की लेकिन पेतिकोट उपर खिंचने से वो उसके चुतडो पर पीछे से रोल होकर अटक गया था और निचे नही जा रहा था ।

शालिनी परेशान होकर जब उसके हाथ थक गये - देखना बेटा कहा फसा है

अनुज झट से आगे बढ़ के निचे बैठा और उपर वाले पेतिकोट मे निचे से हाथ डाल अन्दर का पेतिकोट खिंचने लगा ।

"चाची ये तो फस गया है , ये वाला उपर करो ", अनुज ने ऊपर वाले नये पेतिकोट को हिलाते हुए अपनी चाची की ओर गरदन उठा कर बोला ।





शालिनी असहज होकर मजबूरी ने आगे झुक कर उपर वाला पेतिकोट को बीच से पकड के उसकी उंगलियों से खिंचते हुए दोनो तरफ से उपर करने लगी ।

शालिनी - दिखा क्या बेटा

अनुज ने गरदन लफाते हुए भीतर पेतिकोट मे झाका और उसे दो पेतिकोट के बीच जांघो के जड़ो मे हल्की काली हरियाली लिये हुए शालिनी के फान्केदार चुत के दरशन हुए ।





अनुज की आंखे फैल गयी कि उसकी चाची ने निचे कुछ नही पहना वही शालिनी अनुज की हरकत से भीतर से विचलित होकर अपनी आंखे भींच ली और खुद पर शर्मिंदा थी कि अबतक शायद अनुज ने उसकी निचली गुफा का दिदार कर लिया होगा ।

अनुज पेतिकोट के अंदर हाथ डाल कर निचे वाला पेतिकोट खिंचता हुआ - मिल गया चाची मिल गया ।

अनुज ने निचे वाला पेतिकोट खिंच कर शलिनी के पैरो मे करते हुए चहक कर - मिल गया चाची हिहिही

शालिनी तुन्की - क्या फाय्दा अब हुउह जब सब गुड गोबर हो गया

अनुज शालिनी की भुनभुनाहट का मतलब समझ गया था और वो अपनी हसी होठो मे दबा कर मुस्कुराया ।

शालिनी उसको देख कर चपत लगाने को होती है मगर उसको भी हसी आ जाती है एक कहावत सोच कर " जिसका जितना जतन उसका उतना पतां " ।

शालिनी - चल जा अब बदमाश कही का

अनुज हस कर - पक्का चाची आपको मेरी जरुरत नही है हिहिहिही

शालिनी के गुस्से पर अनुज की हसी हावी थी और वो भी हस्ती हुई - अब जा तेरी मदद नही चाहिये , काम बिगाडू है तु

अनुज हस कर कमरे से बाहर जाता हुआ - ओके चाची , जल्दी आना

अनुज खिलखिलाता हुआ कमरे से बाहर हाल मेआया और तभी उसको रिन्की का ख्याल आया वो लपक कर बाल्किनी की ओर बढ गया ।

घर मे सारे जेंटस बारात की आवभगत मे लगे थे , मगर बनवारी चुपचाप मारे शर्मिंदगी मे राज के कमरे मे ही था । राज के बार बार कहने पर भी उसने अपने जमाई से नजरे मिलाने की हिम्मत नही थी ।

इधर नासता पानी होने के बाद रिस्तेदारों का आपस मे परिचय का दौर होने लगा और वही जैसे ही मुरारी ने इशारे ने रन्गी को अपनी बड़ी बहन को दिखाया ।

बगल मे खड़ी रागिनी ने हाथ जोड़ कर उससे नमस्ते करते हुए मुस्कुराकर पास मे खड़े अपने देवर की ओर देखा और अंखियों से इशारा किया कि यही है ।

जंगी ने थोड़ी असहजता भरी हसी को थामा और अच्छे से संगीता को उपर से निचे तक स्कैन किया ।

मर्दजात के आंखो का स्पर्श संगीता बखूबी भाप लेती थी और उसने भी तय किया कि आज का शिकार जन्गी ही होगा ।

रंगी - अरे रागिनी बाऊजी कहा है

रागिनी - पता नही मैने तो उन्हे दोपहर से ही नही देखा ।

"दीदी उनकी तबियत तो ठिक है ना " , रागिनी ने फ़िकरमन्द होकर रज्जो को पुछा ।

वही रन्गी जो समझ रहा था कि दोपहर बाद से उसके ससुर के गायब होने का क्या कारण है तो वो खुद पर थोडा लज्जित हुआ ।

उसने सबको बैठने का बोलकर खुद घर मे चला गया ।

हाल पहले ही आस पड़ोस के महिलाओ से भरा हुआ था

उसने गेस्ट रूम चेक किया तो वहा राज के बुआ की पूरी फैमिली भरी हुई थी और उनकी अपनी ही बाते चल रही थी ।

रंगीलाल उनको भी डिस्टर्ब किये बिना सीधा राज के कमरे मे जाता है ।

जहा बनवारी करवट लेके आंखे खोले हुए लेटा था ।

अपने ससुर की हालत पर रंगी भीतर से विचलित हो उठा और उसे समझ आया कि उसने सच मे अपने ससुर से कुछ ज्यादा ही कड़ा रुख कर दिया था ।

वो सहज भाव के बनवारी के पास बैठा और उसके पाव पर हाथ रखते हुए - बाऊजी !!

अपने पाव की एड़ियो पर ठन्डे हाथों का स्पर्श पाकर बनवारी चौका और उसकी सासे तो और तेज हो गयी जब उसने रंगी को सामने पाया ।

बनवारी हड़बड़ा कर उठता हुआ - अरे जमाई बाबू आप !!

बनवारी को परेशान देख रंगी उसको तसल्ली देता हुआ - अरे नही आराम करिये , क्या हुआ आप बाहर नही आये । बारात आ गई है बाऊजी ।

बनवारी कुछ सोचता हुआ - अच्छा, वो जरा आंख लग गयी थी ।

बनवारी का झुठ रंगी अच्छे से समझ रहा था और उसे अपनी गलती का अहसास था वो नजरे फेर कर कमरे के एक कोने मे आंखे टीकाए बोला - बाऊजी मै माफी चाहता हु , मुझे आपसे ऐसे बात नही करनी चाहिए थी । आज मेरी बेटी की शादी है और ले देकर आप ही मेरे पिता समान है , अगर आप ही नही शामिल होंगे ।

अपने दमाद को भावुक होता देख बनवारी आगे बढ़ कर उसका हाथ पकड लिया - अरे अरे जमाई बाबू ये क्या कह रहे है आप !! मेरी नातिन की शादी है मै तो नाचूँगा भी । वो तो बस आज जो हुआ वो सोच कर ....

रंगी - कोई बात नहीं जो हुआ सो हुआ , हम इसपे कोई बात नही करेंगे आगे से और आप भी ध्यान मत दीजिये । आईये चलिये मेरे साथ

बनवारी रंगी का मुह देखता हुआ - तो क्या तुमने मुझे माफ कर दिया बेटा?

रंगी भावुक आंखो से - बाऊजी , आप पिता समान है मेरे मै कौन होता हु आपको माफ करने वाला । गलती मेरी थी कि मै आपकी जरुरतों को समझ नही पाया और काम के टेनसन मे ना जाने क्या ....ह्ह

बनवारी- नही नही जमाई तुम अपनी जगह पर ठिक थे बस लापरवाही हमसे ही हुई थी और उसमे बेचारी जमुना बहू का भी दोष नही है

रंगी - हा भौजी की भी हालत आपके जैसी है मै जानता हु

बनवारी- मतलब ?

रंगी को ध्यान आया वो क्या बोल गया - कुछ नही आप उठिए और चलिये , बाहर सब इन्तेजार कर रहे है ।

फिर रंगी बनवारी को लिवा के बाहर चला आया ।

वही एक ओर राहुल और अरून बारबार घर मे अन्दर बाहर चक्कर काट रहे थे कि कही से उन्हे गीता बबिता की झलक मिल जाये मगर वो दोनो अभी अपनी दुल्हन दीदी के साथ स्टेज पर आने की तैयारियाँ करने मे व्यस्त थी

वही हमारा आशिक आवारा अनुज बाल्किनी मे आकर टहलता हुआ अपनी हीरोइन रिन्की को ताड़ रहा था ।

नेवी व्लू और डार्क ग्रीन मे फ्रील वाली सरारा शूट मे रिन्की गजब की खिल रही थी और उसकी कजरारी आंखे भी अपने एकलौते आशिक़ को ही खोज रही थी कि तभी दुलारी ने हल्के से उसको धक्का दिया ।

रिन्की ने उसकी ओर देखकर आंखो से इशारा किया कि क्या बात है ।

दुलारि मुस्कुराते हुए आन्खे उपर की ओर इशारे करती हुई होठो से बुदबुदाइ - बाल्किनी ।

रिन्की फौरन अपनी जुल्फो को झटकते हुए उपर बाल्किनी की ओर देखा और अनुज फौरन पीछे हट गया

मगर उससे पहले रिन्की उसकी छत से लटकती झालरो की रोशनी मे चमकती जैकेट को देख जाती है ।





रिन्की शर्माते हुए नजरे नीची कर इतराने लगती है और मुस्कुरा कर तिरछी नजर से एक बार फिर उपर देखा तो अनुज वही बाल्किनी की रेलिंग से थोड़ा पीछे खड़ा था जहा छत की झाप के अन्धेरे मे उसका चेहरा साफ तो नही दिख रहा था मगर रिन्की को पुरा यकीन था कि वो अनुज ही है ।

वही अनुज की हालत कम खराब नही थी , रिन्की का यू उसकी ओर आकर्षित हो जाना उसके लिए किसी अजुबे से कम ना था ।

पहली बार कोई लड़की खुद से भाव दे रही थी और उसको समझ नही आ रहा था ।

तभी उसकी नजर अपने भैया राज पर गयी और उसने तय किया कि इस बारे मे वो राज से बात करेगा ।

वही इनसब से अलग राज के दोनो बुआ और फूफा की आपस मे कुछ अलग ही मिटिंग चल रही थी गेस्टरूम ने ।

शिला - नीलू के पापा आप कैसी बाते कर रहे है ? मुझे सच मे टाईम नही मिला उस रात ऑनलाइन जाने का ।

"और क्या ये बातें आज और यही करना जरुरी है " , शिला ने नाराज होते हुए कहा ।

मानसिंह - ओहो तुम नाराज क्यू हो रही हो जान, मै तो बस कैजुअली पुछ रहा हूँ ।

कम्मो- अरे जीजू अभी छोडिए ना ये सब और खुशी की बात है कि दीदी एक क्या मेम्बर जोड़ने वाली है हमारी टीम मे ।

रामसिंह - क्या सच मे भाभी ? कौन है वो ?

शिला इतरा कर - अभी तक मैने उससे इस बारे मे कोई बात नही की है , मुझे वक़्त चाहिये इसके लिए और इस लिये शादी के बाद भी कुछ दिन मै यहा रुकने वाली हु ।

मानसिंह - क्या ?

शिला - हा , कम्मो अब तु ही समझा इन्हे !!

कम्मो - हा जीजू दीदी ठिक कह रही है ।

मानसिंह - लेकिन हमारी ऑनलाइन स्ट्रीम का क्या होगा ? ऐसे तो हमारी ट्रैफिक डाउन होती जायेगी ।

कम्मो - उसकी टेन्सन आप लोग ना लें , दीदी और मैने उसका सॉल्यूशन निकाल लिया है घर पर इस बारे मे हम बातें करेंगे ।

शिला - और फिल्हाल शादी में चलते है , क्या सोचेंगे भैया हमारे बारे मे कि जबसे आये है एक भी बार शकल नही दिखाई आप लोगो ने उन्हे ।

रामसिंह - भैया भाभी बात सही कह रही है , हमे चलना चाहिए अब ।

जारी रहेगी ।
 
अपडेट 192 बी


वरमाला का समय हो चुका था और दोनो एक दुसरे के सामने खुश होकर वरमाला लेके खड़े थे

दूल्हा दुल्हन की फोटो और तस्वीरों को मोबाइल मे कैपचर कर सबको अपना स्टोरी स्टेटस अपडेट करना था ।

ऐसे मे दोनो पक्षो के लोग स्टेज के सामने निचे बिल्कुल अव्यवस्थित और बेकाबू थे । सीटी बाजी और हुल्लड़बाजी से सदभावना भरी धक्कामुक्की भी हल्की फुल्की हो रही थी ।

ऐसे मे कमलनाथ अपने जेब से मोबाइल लेके भीड मे आगे बढता हुआ मोबाइल उपर करके बेधड़क रिकॉर्डिंग करने इस बात से बेखबर की अभी भी उसकी कोहनी से जिसके कन्धे पर धक्का लगा है वो दुल्हे की बुआ संगीता थी ।

संगीता - आउच्च , अरे देखिये ना कैसे धक्का दे रहे है ।

भीड और शोर अक्सर आपकी नैतिकता आपसे छीन कर आपको विवेकहीन बना ही देती है और उम्र का इससे कोई भी लेना देना नही होता ।

शादी जैसे माहौल मे वरमाला जैसा मनमोहक पल जिसमे हसी मजाक होना एक आम बात होती है ऐसी शोर और सिटियाबाजी होती भीड भरे वातावरण मे कमलनाथ के कान मे जैसे ही संगीता की आवाज पड़ी वो उसके शब्दों को दोहरे अर्थ मे ले गया और हस पड़ा ।

कमलनाथ बिना उसकी ओर देखे हसी मे बोला - कौन है भाई जो बिना देखे भाभी जी को धक्का दे रहा है , देख के धक्का दो ।

संगीता कमलनाथ के मजाक को समझ गयी और थोड़ी लाज मे हस भी पड़ी ।

उसकी हसी कानो मे पडते ही कमलनाथ ये जाचने के लिए उसकी ओर घुमा कि देखू तो कौन है और जैसे ही वो गरदन घुमा कर संगीता की ओर देखा , उसकी नजरे सीधा संगिता के गहरे गले वाले नीले ब्लाउज पर गयी और उसकी उभरी हुई गुदाज चुचियॉ की घाटी देख कर उसकी आन्खे फैल गयी ।

"ओ बैनचौं " , कमलनाथ के मुह से इतना ही निकला और वो संगीता को अपनी ओर देखता पाकर चुप होकर सामने देखने लगा ।

कमलनाथ की एक पल के लिए फट ही गयी समझो वही संगीता को कमलनाथ का कॉमप्लीमेंट पसन्द आया और उसने सोचा क्यू ना कमलनाथ को ही लपेटा जाये ।

मगर अगले ही पल उसे जन्गीलाल का ख्याल आया , तो उसने सोचा ट्राई करती हु देखती हु कौन आता है हाथ मे ।

भरी भीड का फायदा संगीता को लेना ही था और जानबुझ कर कमलनाथ की ओर झुकी ,

"अरेह्ह भाभी जी आराम से, कही गिर मत जाईये "

" मेरे प्यार मे " , कमलनाथ आखिर के लब्ज फुसफुसाता हुआ संगीता के हाथ पकड कर उसको सीधा किया ।

संगिता लाज भरी मुस्कुराहट के साथ - सॉरी वो किसी ने पीछे से धक्का दे दिया

कमलनाथ अपने आगे जगह बनाता हुआ - अच्छा आप यहा आ जाईये इधर जगह है

संगीता मुस्कुराई और कमलनाथ के बाई तरफ से उसके पुरे आगे ना आकर उसके बाई जांघ के सीध मे आधा आगे आ गयी ।

कमलनाथ का मुसल अब तक अपना असर छोड़ चुका था , पजामे मे टेन्ट और संगीता के दाये कूल्हो पर स्पर्श ।

सुपाडा रगड़ कर कमलनाथ को जितना मजा आ रहा था वही संगीता की भी कोसिस हो रही थी अपनी

पीठ का स्पर्श कमलनाथ के कंधो और सिनो पर हो सके ।

वही स्टेज पर लड़के लड़कियो मे दूल्हा दुल्हन को घेर रखा था ।

रिन्की भी थोडा अटेन्सन पाने की आस मे अपने दुल्हे भैया का पीछा नही छोड रही थी , वही दुल्हन की ओर से संख्या ज्यादा थी ।

ऐसे मे अनुज सरकते धक्के खाते वीडियो फ्रेम मे आने के प्रयास मे दूल्हे की साइड पहुच गया

"का हो देवर जी माल देख कर बराती साइड हो गईलीं " , पंखुडी भाभी ने अनुज को बगल मे खड़ी रिन्की को लेके छेड़ते हुए बोली ।

सारे लोग हस दिये , ऐसे मे अनुज मारे लाज के हस तो दिया मगर रिन्की से नजरे मिलते ही वो हसी भी गायब हो गयी ।

रिन्की ने भी बगल मे खड़े अनुज को पाया तो उसकी भी बेचैनी बढने लगी , उसने अपनी जुल्फो को कानों मे अटकाकर कनअखियों से उसकी ओर निहारा और सामने देखने लगी ।

वही दुल्हन की ओर खड़े राहुल ने मौका पाकर बबिता से सट रहा था , जिसपर बबिता खीझ रही थी मगर सबके सामने चाह कर भी कुछ बोल नही सकती थी ।

बबिता के बगल मे ही अरून था और उसके बाई तरफ पीछे ही गीता खड़ी थी ।

जो अरून को अपने पास पाकर बहुत खुश थी , हौले से उसने अपना हाथ धीरे से आगे करके उल्टे पंजे से अपनी उंगलियाँ अरून की उंगलियो पर स्पर्श किया ।

जिससे दोनो सिहर गये और अरून झटके से गरदन घुमा कर गीता की ओर देखा तो वो मुस्कुरा रही थी , अरून की सासे भी तेज हुई और उसने हाथ पीछे कर निचे ही गीता की कलाई को पकड़ लिया ।

गीता मानो सहम कर एक पल को पुतला ही बन गयी , आंखे फैली हुई सासे अटकी हुई धड़कन तेज और तभी उसी समय वरमाला हो गया ।

धड़ाधड कर चमकीले एक्सपलोजन दागे गये और तालियाँ सिटियां बजने लगी ।

तब जाके कही गीता को सुध आया और जब उसने वापस अरून की ओर देखा तो वो आगे देखता हुआ तालियां बजा रहा था ।

गीता ने चौक कर निचे देखा तो उसका हाथ वैसे ही खाली है और मानो पल भर के लिए उसने कोई सपना देखा हो ।

गीता मन में बड़बडाने लगी - शायद मेरा भ्रम ही था , अरून ऐसा नही कर सकता उसमे इतनी हिम्मत नही ।

उसके बाद सारे लोग निचे आ गये और आशीर्वाद - सगुन देने का प्रोग्राम चालू हो गया ।

वहीं स्टेज के नीचे कुर्सियों पर जिसको जहा जगह मिली वो बैठ गया ।

इधर संगीता ने आस पास कमलनाथ को देखा तो नजर नही आया और वो कुछ लाईन पीछे बैठा हुआ था ।

मौका देखकर संगीता उठी और कमलनाथ के पास जाने लगी ।

वही मुरारी की नजरे अभी तक अपनी बहन पर जमी हुई थी ।

उसने संगीता को उठ कर कमलनाथ के पास जाते हुए देखा और वहा उसे समझ नही आया कि वो क्या बातें कर रहे है ।

अपनी बहन का पहनावा और उसके हसमुख मिजाज से हो रही बात चीत पर मुरारी परेशान हो रहा था ।

उसने देखा कि संगीता कमलनाथ के मोबाइल पर कुछ टाइप करके मोबाइल उसको दिया और फिर हस्ती हुई कुछ बोल कर वापस आने लगी ।

मुरारी ने नजरे फेर ली दुसरी ओर

ममता ने नोटिस किया कि उसके पति अभी भी कुछ परेशान है तो उसने उनकी ओर देख कर पूछा- क्या हुआ सब ठिक है ना ?

मुरारी ने मुस्कुरा कर हा मे सर हिलाया और धीरे धीरे एक एक करके बारी बारी से सारे लोग स्टेज पर तस्वीरें निकलवा कर निपटारा करने लगे ।

वही संगीता के मोबाईल पर मैसेज बिप होने लगे एक के बाद एक करके

संगीता ने अपना मोबाइल खोला और व्हाट्सअप पर एक नये नम्बर से कुछ वीडियोज़ फोटो आये थे ।

सगीता ने उस नये नम्बर की डीपी देखी और फिर मुस्कुराते हुए गरदन घुमा कर कमलनाथ की ओर देखा ।

कमलनाथ भी उसकी ओर देख कर मुस्कुराते हुए वापस स्टेज की ओर देखने लगा ।

वही मुरारी को बेचैनी हो रही थी कि संगीता - कमलनाथ के बीच क्या खिचड़ी पक रही है ।

संगीता ने कमलनाथ के मदद के लिए उसको व्हाट्सअप पर थैंक्स का मैसेज किया ।

वही कमलनाथ का मैसेज बिप हुआ तो उसने मोबाइल खोल कर संगीता का मैसेज देखकर मुस्कुराया और टाइप करने लगा ।

कमलनाथ - most welcome ji 😊

संगीता - ☺☺

कमलनाथ ने एक नजर संगीता की ओर देखा और वापस मोबाइल मे टाइप करने लगा

कमलनाथ - agar aap kahe to mai aapki bhi aisi hi achchi tasvire nikal sakata hu

संगीता ने मैसेज पढ कर ही कमलनाथ का इरादा समझ गयी और मुस्कुराते हुए मैसेज टाइप करने लगी

संगीता - achcha ji , lekin kaha ?

संगीता - yaha to kitni bhid hai koi dekhega to kya sochega ?

कमलनाथ - abhi nahi thoda sbko khana pina kar lene dijiye , fir ek jagah hai waha chal sakte hai hm log

संगीता की सासे चढ़ने लगी और उसने टाइप किया - hmm ok dekhati hu 🙂

फिर उसने नजरे घुमा कर कमलनाथ की ओर देखा , दोनो की आंखो मे हवस उतर ही चुका था , कमलनाथ बैठे हुए ही अपना मुसल सेट करने लगा कुर्ते के निचे से ।

कुछ देर बाद लोग खाना खाने पर भीड गये वही स्टेज पर दूल्हा दुल्हन का क्लोजअप तस्वीरें के पोजेज हो रहे थे ।

कैमरामेन तरीके तरिके रोमैंटिक पोज बता रहा था और जो कुछ भी हो सकता था अमन और सोनल करने की कोसिस करते थे ।

पास मे खड़ी निशा ने कुछ सोचा और कैमरामैन से बोली - भैया यहा पर ये लोग एक भी अच्छा पोज नही करने वाले देख नही रहे कैसे शर्मा रहे है सबके सामने !!

सोनल मारे लाज मुस्कुरा कर मुह फेर ली और अमन भी हस दिया ।

निशा - ऐसा करती हुई मै इन दोनो को लेके उपर जाती हु और आप भी खाना खा के आजाओ जल्दी से फिर शादी भी होनी है उपर ही

कैमरा मेन ने अपने साथी की ओर देखा तो उसने हामी भर दी और निशा दोनो को लेकर घर मे जाने लगी

दूल्हे के साइड से कुछ लोगो के आपति कि तो उसने निशा ने चहक कर जवाब दिया - जीजू अब हमारे हो गये है आप लोग खाना खा के घर जाओ हिहिहिही

निशा की शरारत भरी बात पर सब हस दिये ।

रागिनी - अरे कहा लेके जा रही है उपर , जमाई बाबू कुछ खायेंगे नही क्या ।

निशा - खायेंगे ना लेकिन शादी के बाद अभी तो इनका फोटोशूट बाकी है उसके लिए उपर लेके जा रही

बबिता - मै भी चलुगी जीजू के साथ हिहिही

निशा डांट कर - नही कोई नही आयेगा , ये लोग पहले से ही इतना शर्मा रहे है और भीड नही चाहिये

राज की मामी ने भी बदले मे बबिता को समझाया और जाने से मना किया, फिर घर के सारे लोग खाना खाने के लिए स्टाल की ओर चले और निशा दोनो को लेके उपर चली गयी

उपर पहुचते ही निशा सोनल और अमन सोनल के कमरे मे चले गये

कमरे मे जाते ही सोनल ने लपक कर अमन को पकडा और उसके होठ चूसने लगी निशा के सामने ही

और अमन को सुरुर चढने लगा उसने भी सोनल के कन्धे थाम कर उसके होठ चुसने लगा ।

निशा दरवाजा भिड़का कर - ओहो लैला मजनू , थोड़ा सबर कर लो हिहिहिही और तु सोनल थोडा अपने मेकअप का ध्यान दे

दोनो हस्ते हुए अपने होठ पर रुमाल रख कर साफ करते हुए अलग हुए

अमन ने पास ही आईने मे अपना मुह देखा तो

सोनल की लिपस्टिक उस्के होठो के उपर निचले लाल कर चुकी थी जिसे देख कर निशा चहकी - हिहिहिही अब जीजू ऐसे ही रहो आप हिहिही

अमन हड़बड़ा कर - अरे नही यार , वाशरूम कहा है

निशा खिलखिला कर - निचे है ,जाना है ऐसे ही

सोनल अमन को परेशान देख - अब परेशान मत कर और इनको उपर वाले बाथरूम मे लेके जा जल्दी ,

निशा हस्ती - चलिये जीजू हिहिही

दोनो जीने से उपर जाने लगे और उपर का दरवाजा खोलकर उसे बाहर से बन्द करते हुए

निशा - तब मेरे डार्लिंग जीजू आपको अपना वादा याद है ना

उपर की छत पर कोई नही था , बस शादी के लिए मंडप सजा हुआ था सारे लोग निचे ही थे ।

अमन - कैसा वादा

निशा ने मौका देख कर झट से अपना हाथ शेरवानी के उपर से अमन का लन्ड दबोचा- अह्ह्ह वही कल सुहागरात वाला , करेंगे का वीडियो काल





अमन का लन्ड पूरी तरह से तनमना गया उसने झटके से निशा को अपनी ओर खिंच और वही जीने के पास ही उसके रसिले होठ चुसने लगा

निशा भी उसका साथ देने लगी ।

अमन अपने हाथ निचे ले जाकर निशा की चर्बीदार गाड़ को उसकी उस्के लहगे के उपर से दबोचना चाह रहा था मगर कोसिस नाकाम थी ।

वही निशा अमन के होठ चुसते हुए अमन की शेरवानी मे हाथ घुमा कर पजामे के उपर से उसका मोटा लन्ड मसल रही थी

अमन - उम्म्ं निशा रुक जाओ ह्ह सीई मै परेशान हो जाऊंगा प्लिज्ज्ज सीईई अह्ह्ह

निशा ने उसकी आंखो मे देखा और उसके आड़ सहलाती हुई बोली - आज नही जीजू

फिर निशा झट से निचे बैठ कर अमन की शेरवाणी उठा कर अपने सर पर कर दिया और उसके पैंट वाली डिजाइन मे बने पजामे के हुक खोलकर उसका चैन निचे किया

फिर अंडरबियर मे हाथ घुसा कर उसका 9 इंच वाला बियर की कैन जैसा मोटा गर्म लन्ड बाहर निकाल लिया ।

अमन की हालत खराब थी और उसे डर भी लग रहा था ।

यूँ खुली छत पर सरेआम एक दुल्हा अपनी ही शादी वाले दिन अपनी साली से लन्ड चुसवा रहा है । वो उत्तेजित डर से घिरा आस पास के घरो की छत पर देख रहा था ।





वही निचे निशा अपना मुह खोल कर उसका सुपाडा मुह मे भर चुकी थी ।

अमन सिस्का - अह्ह्ह निशाह्ह्ह उम्मममं सीईईई

निशा शेरवानी के निचे ही मुह डाले अमन का मोटा लन्ड पकड कर चुसे जा रही थी और अमन आहे भर रहा था ।

निशा ने लन्ड को उठा कर अपनी जीभ को उसकी सुपाडे की निचली गांठ पर जीभ से कुरेदा तो अमन पागल सा हो गया , उसने एक गहरी आह भरी और जीने की दिवाल का सहारा ले लिया ।

निशा ने दोनो हाथो ने उसका लन्ड पकड़ कर चुसने लगी और अमन के लिए ये सब बहुत ही रोमांचक था ।

बीते समय अपनी मा के साथ बिताये रोमांचक पल और अभी खुद की शादी मे साली से मिला सरप्राइज अमन को पुरा उत्तेजित कर दिया ।

उसके लन्ड की खुजली बढ़ने लगी थी





उसने निशा के सर को पकड कर अपने लन्ड पर दबाव बनाने लगा तो निशा भी लन्ड को गले तक उतारने लगी

उसकी लार मे लसराया हुआ अमन का मुसल पुरा फौलादी हुआ पड़ा था और उसका सुपाडा बुरी तरह जल रहा था , उसके अब बर्दाशत होना पॉसिबल नही था





एडिया उचका कर उसने निशा के मुह मे लन्ड को भर दिया और झटके खाने लगा , निशा का मुह पहले से लार छोड रहा और उसका मुह अब अमन मे वीर्य से भरने लगा , गट गट कर वो सारा वीर्य पी गयी और हफते हुए जब अमन शान्त हुआ तो उसने उसका लन्ड साफ कर वापस शेरवानी सेट कर दिया ।

निशा खड़ी होकर अपना मुह हथेली से पोछती हुई हस दी

अमन हस कर - तु बड़ी वो हो ?

निशा - क्या छिनाल ? हिहिहिही

अमन उसकी कमर मे हाथ डाल कर - उससे भी बढ़ कर पोर्नस्टार हो तुम एकदम चुदक्कड़

निशा उसको बाथरूम की ओर ले जाती हुई - अच्छा इतनी जल्दी जान गये मुझे

अमन - अरे साली साहिबा तुम्हे तो हम पहले से ही जानते है , ये चुतड़ कैसे मोटे हुए मै सब समझता हु

निशा हस कर शर्माती हुई - धत्त चलो फ्रेश हो लो , निचे जाना है हमे

अमन हस कर - वैसे कल वीडियो काल क्यू करना , मै तो कह रहा हु कि तुम भी चलो कल , रात मे तुम्हारी दीदी को सुला कर तुम्हारे पास आ जाऊंगा

निशा - ऊहु इतनी भी क्या जल्दी है जीजू , पहले दीदी का दिदार कर लो और मै भी तो देख लू कि आप कितने बडे खिलाड़ी है हिहिहिही

उसके बाद दोनो निचे आ गये , देखा तो निचे राज की मामी खाना लेके आई थी ।

मामी मुस्कुरा कर - अरे इतनी देर लगा दी हाथ धुलाने मे

निशा मजे लेती हुई - क्या करू मामी , जीजू को यहा का बाथरूम इतना पसन्द आया कि वो बाहर ही नही आ रहे थे , वैसे क्या कर रहे थे जीजू

अमन मामी के सामने लजा कर बस मुस्कुरा कर चुप ही रहा ।

वही निचे दूल्हे के पक्ष के खास मेहमानो की खातिरदारी मे लोग लगे हुए थे और ऐसे मे संगीता की निगाहे काफी समय से कमलनाथ को खोज रही थी , उसने दो बार मसेज भी किया मगर उसे कोई रेस्पोंस नही मिला ।

तभी उसकी नजर जंगी पर गयी जो उसकी ओर ही आ रहा था ।

जन्गी - चलिये खाना खा लिजिए

जन्गी को देखकर और कमलनाथ का रिस्पोंस ना पाकर संगीता का मूड स्विन्ग हुआ और उसने जन्गी को लपेटने का सोचा ।

संगीता - जी वो मुझे वाशरूम यूज़ करना था थोड़ा

जंगीलाल - अच्छा आप आईये इधर चलिये

और जन्गी उसे लेकर नजदीक के चंदू के घर मे घुस गया

गलियारे से होकर दोनो पीछे आंगन मे गये और वहा टोइलेट की स्थिति कुछ खास ठिक नही थी ।

संगीता - ओहो ये तो पुरा गन्दा है

जंगीलाल ने भी नजर मारी तो पाया कि किसी ने टोइलेट मे पानी नही डाला था ।

संगीता - आप बाहर जाईये मै आती हु

जन्गीलाल समझ गया कि वो खुले आंगन मे ही पेसाब करने वाली है

जन्गीलाल का मुसल टाइट हुआ और वो गलियारे से बाहर आ गया , मगर उसके दिमाग मे रागिनी से किया वादा और संगीता को पेलने की च्सक उठ रही थी ।

उसका मुसल तन रहा था और वो धीरे धीरे दबे पाव वापस गलियारे से होकर आंगन की ओर जाने लगा ,

आंगन तक पहुचने से पहले ही जंगीलाल ठहर गया उसकी आगे बढ़ने की हिम्मत नही हो रही थी।

वही संगीता पेसाब करने के बाद वही उठ कर खड़ी थी कि इस आश मे कि शायद जंगी आ जाये

संगिता को लगा कि शायद जन्गी उस मिजाज का नही है जैसा वो समझ रही है और उसका मन उतर गया

उसने अपनी साड़ी सही की और फिर वापस गलियारे की ओर आई , जैसे ही गलियारे मे वो दाखिल हुई सामने दिवाल से चिपके जंगी को देख कर वो चौकी - अरे आप यही थे क्या ?

जन्गी हड़बड़ाया - जी नही वो मै अभी आया हु

संगीता मुस्कुराई और जंगी को परेशान देख कर अपना रुख कड़ा किया - ये अच्छी बात नही है , मैने आपपर भरोसा किया था और आप

जन्गी - मै सच कह रहा हु मैने जरा भी नही देखा ,मै आया तब तक उठ चुकी थी

संगीता - मतलब आप देखने के इरादे से ही वापस आये थे ना

जंगी की चोरी पक्डी गयी और वो इस बात से कैसे इन्कार करता - जी वो मै न्हीईई

संगीता मुस्कुरा रही थी और उसको मुस्कुराता देख जंगी को अचरज हुआ - जी सॉरी वो मै बहक गया था , शादी के भागा दौडी भरे माहौल मे आपको देखकर मैने सोचा कि

संगीता की सासे चढ़ने लगी - क्या सोचा आपने , यही कि चोरी से देख लू उम्म्ंम

जंगी - जी बस ऐसा ही कुछ,

संगीता - वैसे क्या करने वाले थे देख कर आप मुझे

जंगी लाल - जी वो मै अह छोडिए ना प्लीज ,चलिये चलते है

संगिता के बार बार ओफर करने पर भी जन्गी की हिम्मत नही हो रही थी और वही उसका मुसल बेताब हुआ जा रहा था ।

संगीता ने नशीली आंखो से उसकी ओर देखा और बोली - बोलिए ना , अगर मेरे लायाक हुआ तो मै मदद कर दूंगी मै

जन्गी ने आंखे बड़ी कर संगीता की ओर देखा और थुक गटक कर बोला - जी बस देख कर हिला लेता और क्या ? इतने दिनो से मेरी बीवी ने मुझसे दुरी की है शादी की वजह से

संगीता को एक पल को जन्गी की वजह वाजीब लगी मगर उसको इससे फर्क नही पडने वाला था और वो पूरी तरह से गर्म हो गयी थी , उसने मुस्कुरा कर वापस आंगन की ओर गयि

जन्गी उसके मटकते मादक मोटे कूल्हो को हिलत देख कर उसकी ओर घूम कर अपना मुसल मसला

संगीता ने इतरा कर आंगन के बिचोबिच खडी होकर गरदन घुमा कर जंगीलाल को देखा और मुस्कुरा कर अपनी साडी उपर करने लगी ।

संगीता की हरकत से जंगी का दिमाग खराब होने लगा वो बौखला उठा , उसका लन्ड फड़कने लगा , उसने जोर से अपना मुसल मसला और थुक गटक कर वही खड़ा रहा ।

संगीता पीछे से अपनी साडी पेतिकोट के साथ बटोरती हुई उपर करने लगी , उसकी जान्घे और उसकी गाड़ और फिर पीछे से पूरी जंगी





फिर वो आगे की जैसे ही झुकी उसकी गाड़ फैल कर जन्गी के सामने थी और बुर की मोटी फाके सफेद रस छोड रही थी

जंगी ने झट से एक नजर बाहर की ओर देखा और अपना पैजामा खोलकर लन्ड बाहर निकाल कर हिलाता हुआ संगीता के पास पहुच्गा - उह्ह्ह भाभीई जीई आपने मेरे लिये उह्ह्ह्ह्ह

संगीता - मुझे किसी का दर्द देखा नही जाता भाईसाहब अह्ह्ह कर लिजिए आप अपना

जंगी ने फौरन जेब से मोबाइल निकाला और रिकॉर्डिंग ऑन करते हुए निचे की ओर फोकस करते हुए सामने संगीता की गाड़ पर फोकस कर उसकी वीडियो बनाता हुआ वापस से कैमरा अपना तनमनाये मुसल पर किया और हाथो मे लेके हिलाने लगा ।





जंगी समझ रहा था ये आज चुद के ही जायेगी इसलिए उसने भी देर ना करते हुए उसकी गिली फाको मे लन्ड भिड़ाते हुए हचाक से लन्ड उसकी बुर मे पेल दिया

संगीता की आंखे उलट सी गयि इस अचानक हमले से , उसे लगा जंगी प्यार ए उसको स्पर्श कर उसकी रसिले फाको को चाट कर उसे दुलार देगा

मगर जन्गी ने उसके उलटे एकदम से अपना मोटा लन्ड उसकी बुर मे उतार दिया

संगीता - अह्ह्ह माह्ह्ह येह्ह्ह क्याह्ह उह्ह्ह्ब उम्म्ं सीईई ओह्ह्ह्ह

जन्गी - चुप कर छिनार साली बनती क्या है बहनचोद येह्ह्ह लेह्ह्ह्ह साली चुदक्कड़ उह्ह्ह क्या गर्म बुर है उह्ह्ह

सन्गिता जन्गी के मुह से गालियां सुनकर और मस्त हो गयि वही

संगीता- अह्ह्ह आराम सेह्ह्ह उम्म्ंम सीईई इह्ह्ह फक्क्क्क मीईई उम्म्ंम्म्ं फ्क्क्क्क मीई येस्स्स एयेस्स

जंगी - ओह्ह तु अंग्रज की चोदी है रुक बताता हु आह्ह लेह्ह्ह अब बोल उह्ह्ह





जंगी ने मोबाईल की कामलायक रिकार्डिंग होने के बाद मोबाइल कुर्ते की जेब मे रख कर उसके कुल्हे पकड कर कस कस लन्ड पेलने लगा

संगीता के लिए ऐसे आगे झुके हुए लन्ड ले पाना कठिन हो रहा था और वही जन्गी के लिए इस पोजीशन मे मजा रहा था , उसका लन्ड खड़े खड़े ही संगीता की बुर मे जड़ तक जा रहा था ,

जंगी - उह्ह्ह एल्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह और लेह्ह्ह उम्म्ं आयेगा आह्ह बता कहा भरू , भर दू तेरी चुत मे बोल ना साली उह्ह्ह आह्ह एल्ह्ह्ह

संगीता - न न्हीईई अंडर न्हीई उह्ह्ह्ह बाहर बाहर निकाल दोह्ह्ह उह्ह्ह

जंगी लाल झट से लन्ड बाहर निकाल कर उसकी गाड़ पर पिचकारी छोड़ने लगा और झाड़ कर पीछे हट गया ।

संगीता बुरी तरह वैसे ही झुकी हुई हाफ रही थी और गाड़ पर

उसके जन्गी का वीर्य रिस्ता हुआ उसकी जांघो पर जाने लगा

संगीता - आरेह्ह जरा साफ करेंगे उस्को

जंगी ने जल्दी आनग्न मे एक तौलिये से अपना वीर्य संगीता की जांघ से साफ किया और उसे एक बालटी मे डाल दिया ।

संगीता खड़ी हुई और मुस्कुरा कर जन्गी की ओर देखा - आप तो बस कुछ और करने वाले थे ना

जंगी - हा लेकिन उसे देख कर रहा नही गया

संगीता - बहुत चालू निकले आप हिहिहिही

जन्गी उस्के पास आकर उसकी गाड़ मस्लता हुआ - अगर फुर्सत मिले तो बताता हु कितना चालू हु

संगीता - धत्त छोडिए अब , कोई आ जायेगा

जंगीलाल ने वही उचित समझा और चुप चाप दोनो बाहर आ गये ।

वही बाहर कमलनाथ के साथ साथ मुरारी की निगाहे भी संगीता को खोज रही थी । मगर कमलनाथ को अपनी आंखो के आगे पाकर मुरारी थोडा निश्चिंत जरुर था ।

मगर कमलनाथ की बेताबी बढ़ रही थी उसने मैसेज का रिप्लाई किया मगर संगीता का कोई रेस्पोन्स नही आया था ।

तो वो कॉल करने लगा ।

जन्गीलाल जैसे ही बाहर आया तो संगीता रुक कर साइड होकर कमलनाथ का फोन पिक की - हा हैलो

कमलनाथ - कहा है आप , दिख नही रही

संगीता इतरा कर स्टाल की ओर कमलनाथ को देखा जो उसे ही खोज रहा था ।

सन्गिता मुस्कुरा कर फोन पर जवाब देते हुए - लेकिन मुझे क्यूँ खोज रहे है आप ?

कमलनाथ - अरे मैने सोचा सब बिजी है तो क्यू ना आपकी तस्वीरे निकाल दूँ

संगीता ने सोचा यही मौका ठिक है और जंगी से जल्दीबाजी मे चुद भी नही पाई थी ।

संगीता - अच्छा ये बगल मे एक मकान है ना जिसपे कलर नही लगा है बस खाली सा पड़ा है

कमलनाथ ने झट से चंदू के घर की ओर देखा और संगीता के साडी से दुर से ही उसे पहचान गया ।

संगीता वही खड़ी थी ।

कमलनाथ - हा हा देख गया

संगीता - आयिये मै अन्दर हु

कमलनाथ का मुसल टाइट हुआ और उसने आस पास देखा और चुपचाप सरकता हुआ चंदू के घर मे घुस गया ।

जारी रहेगी
 
रेगुलर अपडेट प्रोग्राम

जैसा कि मैने कहा था कि जॉब सेटल के बाद से इस कहानी पर रेगुलर अपडेट शुरु हो जायेन्गे तो इसकी शुरुवात हो गयि है

अपडेट रेगुलर का मतलब वीक मे 4-5 अपडेट आ ही जायेंगे ।

बजाय इसके कि मेरा मूड या वर्क लोड आड़े ना आये ।

कोसिस रहेगी रात मे 8-9 बजे तक अपडेट दे पाऊ

बाकी देश काल और परिस्थिति के उपर निर्भर है

तो दिखाईये अपना प्यार इस कहानी के लिए

लाइक कम्मेंट जैसे भी आप दिखा सकते है

मेरे साथ ये आपके लिए भी चुनौती भरा प्रोग्राम होने वाला है :dontknow:
 
अपडेट 192

"अरे लो ना आप !! मै दीदी के लिए भी लाता हूँ " , राज ने खाने से सजी हुई थाली लेके सिम्मी की इंसिस्ट करता हुआ उसके हाथ मे थाली देके बोला ।

फिर भाग कर दो प्लेट लगा कर वापस आया और एक प्लेट नीलू को देते हुए एक प्लेट खुद लेके खाने बैठ गया

नीलू - भाई तेरी पढ़ाई कैसी चल रही है

राज आंखे उठा कर नीलू की ओर देखा - क्या दीदी क्यू मूड की ऐसी तैसी कर रही हो हिहिहिही

राज की बात पर सिम्मी हसी और उसे हस्ता देख कर वो भी मुस्कुराते हुए - हा और क्या ? दुकान और घर की जिम्मेदारीयों से फुर्सत मिले तब तो पढ़ाई में ध्यान दू और वैसे भी मेरा ग्रेजुशन चल रहा है

नीलू - हा लेकिन उसके साथ कोई तैयारी भी कर ना , दुकान जरुरी है क्या तेरे लिये । मामी है ना

राज - मम्मी अकेले कैसे कर पायेंगी दीदी बहुत झंझट है

चारु - भाई झंझट तो आगे चल कर हो जायेगी और तु बता अब के टाईम कौन ऐसी लडकी है जो ऐसे लड़के को पसन्द करेगी जिसके पास अपना कुछ नही वो अपने मा बाप पर ही डीपेंड है

चारु की बातें सुनकर राज के दिमाग में हलचल सी मच गयी क्योकि आज तक उसने जीवन को कभी इस नजरिये से नही देखा था

नीलू - हा चारु सही बोल रही है तु , इन्फैक्ट सोनल दी की लव मैरिज भी जीजू के govt job की वजह से हो रही है

राज का दिमाग ये सब सुन कर सन्न था , वो बस सामने बैठी सिम्मी की ओर देख रहा था उसके जहन मे सवाल उठ रहे थे कि अगर भविष्य मे उसे भी किसी से प्यार हुआ तो क्या वो अपना प्यार जीत पायेगा । उसका अपना परिवार तो राजी हो भी जाये मगर उस लडकी की फैमिली का क्या ? सिम्मी जैसी लड़की के पैरंट्स मुझ जैसे आम से लड़के के लिए क्यू इतना समाजिक दबाव उठाएंगे ।

राज के जहन मे बहुत कुछ चल रहा था

कुछ अपने भविश्य का डर तो कुछ घर की चिंता

थोडा बहुत सिम्मी के करीब जाने और उसकी नजर उसके पसन्द का लड़का बनने की ख्वाईश भी उठ रही थी ।

वही इनसब के बीच मे अपने परिवार नातेदारो के संग उसके हसिन कामुक पल भी उठ कर आ रहे थे ।

"राज राज " कहा खो गया भाई , नीलू ने उसका कन्धा हिलाते हुए बोली

राज मुस्कुरा कर एक नजर सिम्मी को देखा जो उसकी ओर देख रही थी - नही नही कही तो नही

नीलू - भाई तु प्रेशर ना ले , अभी शादी इंजॉय कर मगर इस बारे मे सोचना जरुर

राज - हा दीदी सही कह रहे हो आप

चारु - अच्छा वो सब छोड़ो और ये बताओ इस कैमरे वाले से हम लोगो की तस्वीरे कैसे मिलेगी , अल्बम आने मे तो टाईम लगेगा ना

राज - अरे मै उससे ले लूंगा

चारु - ओके फिर मुझे व्हाट्स कर देना तुम

सिम्मी- मुझे भी

नीलू - मुझे भी

राज अभी सिम्मी के बारे सोच रहा था तभी चारु - अरे सोच मत अपना नम्बर बोल हम तुझे अपने ग्रुप मे ऐड के दे रहे है वही भेज देना ओके

राज - ओके दी

इधर इनकी आंख मिचौली चल रही थी वही खाने के स्टाल के एक दुसरे टेबल पर जुता चुराई की रणनीति बन रही

राहुल अरून गीता बबिता की ।

गीता अभी तक स्टेज वाली बात के लिए परेशान थी वही राहुल बबिता को परेशान करने मे कोई कसर नही छोड रहा था ।

आंखो से इशारे तो कभी कोहनी कोना छू कर

बबिता - यार राहुल तुम प्लीज ध्यान दोगे

राहुल - मेरा ध्यान तो तुम्ही पर है यार

राहुल की बात पर गीता हस दी और अरून ने बबिता का फुला हुआ मुह देख कर धीरे से गीता के हाथ पे हाथ रख कर उसको दबाया ।

गीता ने आंखे बड़ी कर अरून की ओर देखा तो अरून ने बबिता की ओर इशारा किया

गीता चुप हो गयि और मुस्कुराने लगी , वही अरून ने अपना हाथ वापस वैसे ही रखे रहा , करीब 10 मिंट तक बातें चलती रही मगर अरून ने एक बार भी गीता के हाथ से अपना हाथ नही हटाया ।

जब उठने की बारी आई तो गीता ने हाथ हिला कर मुस्कुराते हुए अरून को इशारा किया तो अरून ने लाज मे हाथ हटाते हुए - ओह्ह सॉरी

गीता मुस्कुराई और नजरे निचे किये हुए बबिता के साथ घर की ओर चली गयि ।

और राहुल हस्ता हुआ अरून को ताली देता है - साली मेरी वाली बहुत नखरे बाज है यार

अरून हस कर - नखरेवाली है तो हचक के लेगी भी देखीयो

राहुल - सीई कास ऐसा ही हो तो मजा आ जाये हिहिहिही

अरून - चलो आगे का काम देखते है , शादी भी निपटानि है ना

राहुल - हा भाई चल

वही गेट से घुसते ही संगीता कमलनाथ को गलियारे के मुहाने पर मिल गयी ।

संगीता - अरे आ गये आप , लेकिन यहा लाईट सही नही है

कमलनाथ गलियारे मे जाता हुआ - अरे आईये एक जगह है

कमलनाथ गलियारे के बीच मे उसी कमरे का दरवाजा खोलकर दाखिल होता है जहा कल रात वो सोया हुआ था ।

कमरे की बत्ती चालू कर कमलनाथ - आईये अन्दर आ जाईये

संगीता मुस्कुराती इतराती कमरे मे दाखिल हुई

कमलनाथ कमरे का दरवाजा हल्का सा भिड़काते हुए - जी कहिये कैसा फोटो निकालू

संगीता - वैसे क्या आप फोटोग्राफि करते है पेशे से

कमलनाथ - नही बस थोड़ा बहुत काम किया था बहुत पहले जब काम की तलाश मे लुधियाना गया था ।

संगीता - आह्ह देखीये मुझे कुछ एक्सक्लूसिव तस्वीरे निकलवाणी है मेरे इंस्टा पेज के लिए

कमलनाथ- हा क्यों नही कर दूँगा मै आईये खड़ी हो जाईये

कमलनाथ ने 8 10 तस्वीरें निकालने के बाद थोड़ा सा बेकाबू हुआ जा रहा था ।

सन्गिता की कामुक और नशिली अदाये उसे बुरी तरह रिझा रही थी मगर पहल हो तो हो कैसे ?

वो ये बात भी जान रहा था कि कोई भी संगीता के मिजाज वाली औरत एक अंजान आदमी के साथ इतनी नजदिकियां दिखाती हुई एक खाली घर मे उसके साथ क्यू आयेगी ।

कमलनाथ ने कुछ सोचा और फिर वो मोबाइल संगीता को देता - आह्ह एक मिंट भाभी जी मै अभी आया

संगीता थोडा सोचते हुए उसके हाथ से मोबाइल लेकर तस्वीरें देखने लगी और वही उसके जहन मे अपनी ही बड़बड़ाहट जारी थी ।

उफ्फ़ ये मर्द जात इतना भोला क्यू बनने की कोसीस करते है जैसे मानो हम औरते कुछ समझ नही रही हो ।

ये अमन के ससुराल वाले कुछ ज्यादा ही शर्म लाज का गहना ओढ़े हुए है । लगता है मुझे ही इस बार भी कुछ करना पड़ेगा नही तो आज की रात मुझे परेशान कर डालेगी ।

अभी संगीता अपने ख्यालों मे गुम थी कि तभी दरवाजे से कमलनाथ कमरे मे दाखिल हुआ

संगीता उसको देख के हस पड़ि -अरे क्या हुआ आप ऐसे क्यूँ

कमलनाथ अपने अंडरवियर मे बने तम्बू को मसलता हुआ - आह्ह अब बस भी करो ये नाटक उह्ह्ह मै जानता हूँ हम यहा क्यू मिल रहे है ।

संगीता बिस्तर पर बैठी मुस्कुराई और नजरे निचे करती हुई मुस्कुराने लगी ।

कमलनाथ उसके करीब जाकर उसके सामने खडे होकर हग करने लगता है और उसकी चर्बीदार कमर को मसलता हुआ उसकी साडी के अंडर हाथ घुसा कर गाड़ का जायजा लेता हुआ - अह्ह्ह भाभी क्या मस्त पिछवाडा है





संगीता कमलनाथ के स्पर्श से सीस्कती है - उन्मममं सीईईई

कमलनाथ उसके कूल्हो को मसलता हुआ उसके रसिले होठ चुसने लगा है

संगीता भी उसके होठ चुसते हुए उसकी नंगी जांघ पर हाथ फिराते हुए पीठ सहलाने लगती है

कमलनाथ उसके हाथ पकड कर खड़ा करता है और खुद निचे झुक कर उसकी साडी हटाते हुए उसकी गुदाज नाभि को चुमने लगता है

अपने कूल्हो पर रंगते कमलनाथ के हाथ और पेट पर ठंडी चुंबन ने संगीता का रोम रोम खड़ा कर दिया था ।

उसके पाव कांप रहे थे और वो उसके सर मे हाथ फिराते हुए सिस्कने लगी ।

अह्ह्ह्ह सीईईई उम्म्ंम्ं आराम्म्ंं सेह्ह्ह मेरीईई साडी खराब हो जायेगीईई अह्ह्ह उम्म्ंम्ं " , संगीता बौखलाये कमलनाथ को समझाती हुई बोली ।





कमलनाथ उसके पेट चुमता हुआ उसकी साडी उपर कर उसके भरी भरी मोटी खरबजे जैसी चुचिया बलाऊज के उपर से दबाता हुआ - उह्ह्ह भाभीईई ज्जीईई क्या मुलायम जोबनो का जोडा है अह्ह्ह बहुत रस भरा है इनमे उम्म्ंम उम्म्ंम

कमलनाथ ने अपनी थूथ को उसके दोनो चुचो के बीच ब्लाउज के उपर से रगड़ा ।

संगीता उसके सर को अपने छाती पर दबाए बुर से रस बहाती हुई - उम्म्ंम्ं भाईसाह्ह्ब्ब उह्ह्ह अह्ह्ह अराअम्ंंंं से उम्म्ंम सीईई

कमलनाथ ब्लाऊज के उपर से उसके तने हुए निप्प्ल को होठो के भर कर चुबलाया - अह्ह्ह भाभीईई जबसे आपको देखा है तबसे बेकाबू हुआ जा रहा है मन और उह्ह्ह्ह उंम्ंम्ं

संगीता कमलनाथ के गालों को थामती हुई अपने सीने पर रगड़ा कर - और क्याह्ह्ह उम्म्ंम्ं उह्ह्ह्ह अह्ह्ह माह्ह्ह्ह

संगीता की बात पर कमलनाथ उठ खडा हुआ और उसको कस कर अपने आगे करता हुआ अपने मोटा मुसल से साडी के उपर उसकी पनीयानी बुर के ठोकर मारता हुआ - और ये भीहहह

संगीता अपनी बुर के मुलायम फाको मे कमलनाथ के सुपाड़े की चोट से सिसकी - अह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं

कमलनाथ के उसकी कमर के निचे हाथ ले जाते हुए उसकी गाड़ को पकड़ कर अपनी ओर दबाता हुआ लन्ड को जोरो से उसकी बुर मे चुभो रहा था

और संगीता उससे कस के लिपटी हुई अपनी आंखे उलटते हुए सिस्कने लगी ।

कमलनाथ ने उसकी साडी पीछे से उठाई और गाड़ नंगी कर उसको हाथों मे भरता हुआ उसके गरदन को चुमने लगा





अपनी गाड़ पर कमलनाथ के पंजो की खरोच और गले पर चुंबन से संगीता अपनी जाघे कसने लगी , वो आंखे भिचे कमलनाथ को कसे हुए झटके खाने लगी उसकी बुर भलभला कर रस छोड़ रही थी

कमलनाथ उसकी साडी को उठाये हुए उसके सख्त हुए गाड के गोलों को सहलात हु उसकी गाड़ की दरारों मे उंगलियाँ घुसाने लगा

संगीता - आह्ह रुकिये मेरी साडी खराब हो जायेगी

कमलनाथ ने उसको झटका और उसकी साडी का पल्लू पकड कर उसको घुमाते हुए पूरी साडी अलग कर बिस्तर पर फेक दी

और उसको घुमाते हुए पीछे से पकड कर ब्लाउज के उपर से उसकी मुलायम चुचियां पकडता हुआ - उह्ह्ह भाभीई क्या मस्त चुचियां है , लगता है बहुतों ने मस्ला है इसे उह्ह्ह और तुम हो भी चालू आईटेम उह्ह्ह्ह

संगीता कमलनाथ के बाहों मे कसम्साती हुई - आह्ह प्लिज्ज्ज मान जाईये मेरे ब्लाउज खराब हो जायेंगे उह्ह्ह मह्ह्ह

कमलनाथ गुस्से मे रिझा और हाथ आगे कर उसके ब्लाउज के हुक चटकाता हुआ - बहिनचौद तेरे कप्डे के अलग ही चोचले है , निकाल इसे

सन्गिता - आह्ह आराम्ं से फटे नाह्ह्ह

"चल इसे भी निकाल दे " , कमलनाथ उसकी ब्रा उसके कन्धो से सरकाता हुआ बोला

फिर उसको झटका देके आगे बिस्तर पर धकेलता हुआ - उपर चल ना

संगीता मुस्कुराई - उसे यही तो रूप चाहिये था कमलनाथ , जो एक जानवर जैसे उसे नोच ही डाले आह्ह

संगीता घुटने के बल घिसटती हुई बिस्तर के बिच आ गयि और घोडी बन गयी ।






कमलनाथ भी बिस्तर पर आकर उसको पीछे से पकड कर उसकी नरम नरम पेतिकोट मे फैली हुई बड़ी सी गाड़ को पन्जो से दबोचता हुआ दान्तो से काटने लगा

संगीता मजे से सिसकियाँ लेने लगी - अह्ह्ह मह्ह्ह उह्ह्ह्ह उम्म्ंम फ्क्क्क मीईई येस्स्स्स उह्ह्ह खा जाओ मेरी गाड़ उह्ह्ह फक्क एस्स ईट माय पुसीई प्लीज उह्ह्ह






कमलनाथ संगीता का बदला हुआ रुप देख कर पागल सा हो गया और वो उसका पेतिकोट उठा कर उसकी गदराई जांघो को चुमता हुआ उसके गाड़ के दरारों मे जीभ डाल कर चाटने लगा

उम्म्ंम्ं येस्स्स एस्स आई लाइक इटह्ह उह्ह्ह येआआ उम्म्ंम सक मी लाइक दैट ऊहह येस्स सक माय एस उह्ह्ह्ंंंं ओफ्फ्फ अह्ह्ह

कमलनाथ संगीता की सिस्कियो पर और उत्तेजित होकर उसके बडे बड़े गाड़ के फाको को फैलाते हुए उसकी गाड़ के छेद पर जीभ फिराने लगा

संगीता ने जोर से अपनी गाड़ को कस लिया - ऊहह माह्ह्ह हिहिहिही उम्म्ंम तुम बहुत तेज्ज्ज हो उह्ह्ह करों ना मजा आ रहा है उह्ह्ह येस्स्स स्क माय पुसी उह्ह्ह्ह चाटो ना मेरी बुर उह्ह्ह्ह एस्स

कमलनाथ की लपलपाती जीभ ने संगीता के रसदार बुर की फान्को को चाटने लगा और जीभ डाल के मलाई निकालते हुए - ओह्ह्ह यारर क्या गजब की माल है तु ऊहह मजा आ गया

संगीता इतरा कर आगे बढ़ कर उसकी ओर घूमी और अपनी जान्घे खोलकर अपनी बुर को फैला कर दिखाती हुई - असली मजा तो अब आयेगा मेरे राअजाह्ह्ह आओ नाह्ह उम्म्ंम उह्ह्ह

कमलनाथ संगीता को अपनी बुर मसलते देख कर पागल हो गया और वो जल्दी जल्दी अपना लन्ड बाहर निकाल कर उसके बगल मे आ गया ।

उसकी फैली हुई जांघो को मसल्ते हुए अपनी उंगलिया उसकी गीली बुर पर फिराई और सहलाने लगा

संगीता ने भी बगल मे हाथ बढा कर उसका तना हुआ मुसल पकड कर मुठियाने लगी






संगीता - आह्ह बहुत ही तगड़ा है ये तो उह्ह्ह मेरी बुर की चटनी बन जायेगी आह्ह्ह उह्ह्ह फ्क्क्क मीई डालो नह्ह्ह उम्म्ं उह्ह्ह

कमलनाथ संगिता के बुर मे अपनी बिच वाली उंगली पेले जा रहा था - डाला तो है देखो उह्ह्ह क्या गर्मी है भीतर

संगीता मचलती हहूई अपनी गाड़ पटक कर - आह्ह वो नही इसे डालो नाह्ह उम्म्ं प्लिज्ज्ज ऊहह फक्क्क मीह्ह्ह्ह उह्ह्ह

कमलनाथ मुस्कुराया और अपनी जगह बदलते हुए उसके गदराई जांघो के बिच आ गया और अपना लन्ड सेट करता हुआ अपना टोपा उसके फैले हुए बुर के फाको मे लगाया और आगे झुकते हुए हचाक से लन्ड को उसकी बुर मे जड़ तक पेल दिया






अह्ह्ह्व अम्मीईई उह्ह्ह उह्ह्ह अह्ह्ह एस्स हिहिहिही मजा आ गया ऊहह अब करो नाआह्ह उम्म्ं एस्स फक्क्क मीई उह्ह्ह येस्स्स हार्डर येएह्ह्ह्ह वोहहह उम्म्ंम्ं उम्म फ़क मी लाइक दैट उम्म्ंम

कमलनाथ उसकी उपर चढ कर हचक हचक के पेलने लगा और संगीता जोर जोर से आहे भरने लगी

उसी समय खाने के स्टाल की ओर

" क्या भाभी जी , अरे एक लिजिए प्लीज प्लीज " , रंगी अपनी गदराई समधन को इंसिस्ट करता हुआ उसकी थाली मे गुलाबजामुन के पीस रखता हुआ बोला ।

ममता बस हस कर रह जाती है और रन्गी बाकी सबको सर्व कर रहा होता है ऐसे मे ममता बगल मे बैठे भोला के करीब होकर - अरे मेरी छिनाल ननदिया कहा है दिख नही रही

भोला ने आस पस नजर फिराया और मुस्कुरा कर बोला - शायद शेरनी अपने शिकार पर गयि होगी ।

"अरे भाईसाहब कहा है " , रन्गीलाल ने मुरारी को खाने के टेबल पर ना पाकर ममता से पूछा ।

ममता - अरे अभी यही तो थे लो आ गये ।

ममता मुरारी को देखकर - अरे कहा गये थे आप , सब इन्तेजार कर रहे थे ।

मुरारी का चेहरा पानी से भीगा था वो रुमाल से अपना चेहरा साफ करता हुआ गीले हाथ मे रुमाल घिस कर उसको फ़ोल्ड करता हुआ बिना कुछ बोले कुर्सी पर बैठ गया ।

वहा बैठे सभी मुरारी का विचलित हुआ चेहरा देख कर थे और उसपे गुस्से की भन्नाहट साफ थी ।

ममता ने उसकी जांघ पर हाथ रख कर उसके कान मे बोली - क्या हुआ जी , आप फिर से परेशान लग रहे है , सब देख रहे है ? क्या बात है बतायिये ना ?

मुरारी को अपनी स्थिति का ज्ञान हुआ और वो मुस्कुराता हुआ - अरे कुछ नही आप लोग खायिये ना प्लीज

मदन - अरे ये संगीता दीदी कहा है ?

ममता - रुको मै देख के आती हु यही कही होगी ?

मुरारी संगीता की चर्चा होने पर खडी होती ममता का बाजू पकड कर बिठाता हुआ - अरे बैठो मेरी उससे बात हुई है वो अभी फ्रेश होने गयि है आ जायेगी ।

वही पास मे खड़ा रंगी इस सस्पेंश भरे फैमिली ड्रामे को समझने की कोसिस कर रहा था मगर कोसिस बेकार थी क्योकि उसे बाकियों की भी मेहमान नवाजि देखनी थी ।

खाने के टेबल पर बैठा मुरारी खाते हुए बीच बीच मे चंदू के घर के गेट की ओर देख रहा था इस बात से बेफिकर उसकी हरकतो पर भी कोई और बारीकी से नजर रखे हुए था ।

जो काफी समय से शान्त तो था मगर उस घर मे चल रही आवा जाहि के लिए उसकी जिज्ञासा बढ़ने लगी थी ।

एक घर दो मर्द बारी बारी घर मे गये फिर दूल्हे का बाप भी गया और गुस्से मे वापस आया ।

माजरा समझ से परे था और उसने अपनी कुर्सी छोड़ी और खुद भी उस घर मे दाखिल हुआ , गलियारे घुसते ही बीच गलियारे मे एक दरवाजे से सफेद रोशनी की पतली सी निकली हुई फर्श और दिवाल को रोशन किये हुए थी और साथ मे कुछ फुसफुसाहट भरे लब्ज भी आ रहे थे ।

जैसे ही वो शख्स दरवाजे के पास पहुचा और उसने हल्का सा दरवाजे पर जोर दिया

सामने का नजारा देख कर उसकी आंखे फैल गयी ।

सामने एक बड़ी सी गाड़ वाली औरत एक शख्स के लन्ड पर उछल रही थी और वो शख्स भी कस कस के करारे झटके उसकी बुर मे दे रहा था ।





जिस देख कर दरवाजे पर खड़ा आदमी अपने धोती मे उफनाते मुसल को मसला और थुक गटक कर कुछ पल वो नजारा देखता रहा जब तक कि उस महिला ने झट कर चिल्लाने रोक नही दी

भीतर कमरे मे झड़ते हुए संगीता रुक गयी और कमलनाथ बोला - क्या हुआ जानेमन बस हो गया उह्ह्ह थक गयी

संगीता मुस्कुराइ- ऊहु बस छेद बदलना है अब

कमलनाथ खुश हुआ कि उसे इस गदराई माल के गाड़ भी मारने को मिलेगी और वो झट से उठा घुटने के बल आ गया और संगीता भी घोडी बन कर उसके आगे झुक कर अपनी गाड़ उपर कर दी ।

भीतर का नजारा देख कर बाहर खड़े शख्स के हाथ से लन्ड छूट गया और उसकी सासे तेज हो गयी - जमाई बाबू ??

बनवारी की हालत खराब हो गयी कि उस्का बड़ा दामाद उसकी आंखो के सामने दूल्हे की ही बुआ के गाड़ के सुराख पर अपना सुपाडा सेट कर रहा था ।

कमलनाथ उसके गाड़ के छेद पर अपना लन्ड भीड़ाते हुए एक करारे झटके के साथ लण्ड को उसकी गाड़ मे आधा उतार दिया , लन्ड जाते ही कमलनाथ समझ गया कि ये खेलीखाई गाड़ है इसपे रहम दिखाने की जरुरत नही

कमलनाथ ने उसके कूल्हो को थामा और एक और तगड़े झटके के साथ अपना लन्ड उसकी गाड़ मे पेल दिया

संगीता ने गरदन उठा कर जोर से सिसकि -अह्ह्ह माह्ह्ह उह्ह्ह येस्स्स अफ्फ्फ फ्क्क्क मीई उह्ह्ह बहुत मोताह्ह है उम्म्ं य्स्स फ्क्क मीई ओह्ह्ह






कमलनाथ कस कस के उसकी गाड़ मे पेलता हुआ उसकी गाड़ पर चाटे मार रहा था और संगीता जोर जोर चिखती सिसकिया ले रही थी

भीतर का गर्मागर्म मौहौल देख कर बनवारी का सोया लन्ड फिर से उठने लगा था ,मगर उसकी दिली इच्छा नही हो रही थी कि वो वहा रुके ।

भीतर से उसे ऐसा मह्सुस हो रहा था कि उसकी बड़ी बेटी के साथ उस्का जमाई धोखा कर रहा है और वो एक बार फिर निराश होकर बाहर चला आया

वही कमरे मे कमलनाथ इनसब से बेखबर होकर करारे झटके लगाता हुआ संगीता की गाड़ मे झड़ने ल्गा और संगीता भी आंखे मुंदे कमलनाथ के लावा उगलते उसके लण्ड को अपनी गाड़ मे पाकर मस्त हो गयी थी ।

जल्दी ही दोनो ने अपने कपडे ठिक किये और बारि बारी से बाहर निकल गये ।

वही दुल्हन के घर बाहर खडे मुरारी ने एक बार फिर जब अपनी बहन को चन्दू के घर से बाहर आते देखा तो उसका दबा गुस्सा उभर और वो सीन उसके दिमाग मे नाचने लगे जो कुछ देर पहले उसने देखा , जहा उसकी बहन कमलनाथ की थूथ को अपनी गाड़ मे रगड़वा रही थी ।

मुरारी के जहन वो दृश्य आते ही उसने आंखे भींच कर अपना मन झटका और तन मना कर घर मे चला गया क्योकि उपर शादी का मुहूर्त हो गया था और सब लोग एकत्र होने लगे थे ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 193


"आह छोड़ो उम्म्ंम्ं ये क्या बदतमिजि है राहुल " , बबिता ने राहुल के हाथ से अपनी कलाई छुड़ाते हुए चिल्लाई ।

राहुल ने उसको घुर कर देखा ।

इस वक्त दोनो चंदू के घर के सबसे पीछे वाले उसी कमरे मे थे जहा कल रात वो राहुल और अरून साथ सो रहे थे ।

दोनो इस वक़्त राहुल की योजना के हिसाब से जुते का एक हिस्सा चुरा कर छिपाने के लिए आये थे ।

रात के 3 बज रहे थे ऐन मौके पर घर के सन्नाटे का फायदा राहुल ने उठाने का सोचा जिस्पे बबिता उसपे भड़क गयी ।

बबिता उसपे चिल्लाती हुई - अभी अगर राज भैया को बता दू तो सारी आशिक़ी निकल जायेगी

राहुल को बबिता की धमकी जरा भी पसंद नही आई क्योकि उसके पास पहले से ही बबिता के खिलाफ सबूत थे इसीलिए वो भडकता हुआ बोला - जा ना साली , बड़ा रौब झाड़ रही है जा बोल दे

बबिता गुससे से उबलती हुई राहुल की ओर उंगली करके - राहुल !! तु तमिज से बात करो मुझसे समझे

राहुल - मै ऐसे ही बात करूंगा तुझे जो उखाड़ना है उखाड़ ले , जा बता दे राज भैया को और फिर मै भी उनको ये दिखा दूँगा

राहुल ने जेब से अपनी दीदी का मोबाइल निकाल कर जल्दी जल्दी इंस्टा खोलकर अपनी आईडी स्विच करता हुआ एक चैट्स खोल कर मोबाइल स्क्रीन बबिता की ओर घुमाया ।

मोबाइल मे खुद उसकी आईडी से राहुल को मैसेज आये थे वो भी उसके nude फोटोज , जिनमे से कुछ उसने आज ही भेजे थे ।

चैट्स देख कर बबिता सकपकाई और उसकी घिग्घी बन्ध गयी , उसके पैर कांपने लगे और जुबां लड़खडाने लगी - त त तुम्हे ये कहा से और कैसे ?

राहुल ठहाका लगाते हुए मोबाइल मे वापस से अपनी id स्विच कर मोबाइल जेब मे रखता हुआ - क्यू आ गया ना होश ठिकाने, अब जाओ जो कहना है बोल दो राज भैया को !! जाओ ना

बबिता का दिमाग हिला हुआ था , पहले ही उसने एक बार अपने राज भैया से उस सिलाई वाली आंटी के लड़के से चुदने वाली बात छिपा कर गलती कर दी और अब उसे डर था अगर इस बार फिर कही से उसके नये बॉयफ्रेंड के बारे मे राज को पता चला तो ना जाने क्या होगा ? उपर से फोटो शेयर करने पर मार तो पक्की थी ।

काफी समय उलझन भरे मान्सिक वाद विवाद के बाद बबिता ने अपनी लाल हुई आंख पर उंगली फिरा कर आंसू पोछती हुई - तु क्या चाहते हो राहुल ?

राहुल ने एक नजर बबिता की भरी हुई आंखे देखी तो उसका भी दिल पसीज गया और वो उसके पास आकर उसके कन्धे पर हाथ रखता हुआ - देखो मै ये सब नही करना चाहता था , मै तुम्हे ये सब दिखाने वाला भी नही था

"मत छुओ मुझे " , बबिता ने उस्का हाथ अपने कन्धे से झटकते हुए सिस्कते हुए चिल्लाई ।

राहुल - ओह्ह प्लीज तुम ये ड्रामा बन्द करोगी , मुझे .... मुझे बस थोड़ी सी मस्ती करनी थी चान्स लेना था , तुम मान जाती तो ठिक नही तो कोई बात नही मै तुमसे कोई जबरदस्ती नहीं करने आया था

बबिता राहुल की भड़ास सुन कर शान्त हुई और अपने आसू साफ करती हुई - भाड मे जाओ तुम , हटो यहा से गंदे कही के ।

बबिता गुस्से मे झल्ला कर उस कमरे से रोती हुई निकल गयी ।

वही राहुल खुद के बाल नोचता हुआ - न्हीई न्हीईई न्हीईई शिट ये क्या कर दिया मैने उह्ह्ह, बबिता रुको

राहुल भाग कर उसकी ओर गया ।

एक ओर जहा इनकी लड़ाई चल रही थी वही राज के घर मे गेस्टरूम का सीन कुछ ज्यादा ही रोमैंटिक था

बन्द कमरे के दरवाजे के पास दिवाल से लग कर गीता नजरे उठाये अरून की आंखो मे देख रही थी , जो उसके सामने उससे चिपक कर खड़ा हुआ उसकी कमर को पकडे हुआ था ।

दोनो की नजरे बिना पलके झपकाये एक दुसरे मे खोई हुई थी, अरून ने अपना एक हाथ उसके हाथ मे भरा और पंजो को कस लिया ।

गीता ने आंख भींच कर एक गहरी सास ली और अरून ने उसके क्राप टॉप मे फुल रही रसिली चुचियॉ की घाटी को एक नजर देखा और फिर गीता के खुबसूरत चेहरे को निहारने लगा ।

उसने देखा गीता ने अभी अभी गले से लार घोंटी है और उसके हल्के गुलाबी होठ हलके हल्के फड़क रहे थे मानो उसे ही बुला रहे हो ।

अरून हौले से आगे उसकी ओर झुका , उसने नथुनो की गर्म सासें अपने चेहरे पर पाकर गीता की धड़कने तेज होने लगी , उसने कस के अरून का हाथ पकड लिया और इंतज़ार करने लगी कि अब वो उसे चुमेगा

हर बीतता पल उसकी बेसबरी और पढा रहा था और अरून ने उसके नीचले मोटे रसिले होठ को एक बार किस्स किया ।





गीता का पुरा शरीर कांप उठा , उसका रोम रोम सिहर कर तन गया , शरीर पर रोए उबर आये और वो गहरी लम्बी सासे लेने लगी ।

तभी अरून ने अपना होठ खोलकर उसके निचले होठ को चुबलाते हुए हल्का सा खिंच और गीता सिस्क पड़ी ।

अरून ने होठ दबाए नजरे उठा कर उपर गीता की आंखो मे देखा तो उस्से नजरे मिली और गीता ने मारे लाज वैसे ही आधे होठ से मुस्कुरा दी

अरून अपने हाथ उपर किये औ उसके गुदाज गाल हाथो मे भरता हुआ उसके रस भरे होठ चुसने लगा

अरून के गीले मुलायम ठंडे होठो के स्पर्श से गीता उत्तेजित हो उठी और उसने भी अरून के उपरी होठ चबाने शुरु कर उसको अपनी ओर कस लिया ।

जिस्से अरून का सिना गीता के गुदाज मोटी चुचियो से जा लगा और दोनो की आह्ह निकल गयी ,

अरून ने मुस्कुरा कर उसके सर से अपना सर लगा कर उसकी हाथो को वापस जकड़ने लगा और वापस से किस्स करने को हुआ ही था कि किसी ने जोर से दरवाजा पीटा

" गीता !!! दरवाजा खोल "

दोनो सतर्क हुए और अलग होकर जल्दी से दरवाजा खोला ।

सामने से बबिता बिलखती हुई कमरे मे आई और उसे रोता देख दोनो परेशान हुए और भाग कर उसके पास गये ।

गीता उसको पकड कर - क्या हुआ , तु रो क्यूँ रही है ?

बबिता कुछ बोलती इससे पहले राहुल दरवाजे पर आ चुका था ।

बबिता उसको देख कर गीता से बोली - गीता इसको बोल ये चला जाये यहा से प्लीज , मुझे इस घटिया इन्सान से कोई बात नही करनी

राहुल - ज्बाँ सम्भालो तुम समझी !!

गीता उठ कर राहुल के पास गयी और उसे ताकत के साथ पीछे धकेलती हुई - देखो प्लीज तुम जाओ , मै इसे चुप करवाति हूँ । घर मे किसी को पता चला तो दिक्कत हो जायेगी प्लीज मै हाथ जोड़ रही हूं

राहुल परेशानी भरे लहजे मे - यार मैने तो कुछ किया भी नही , ये खुद से ही भड़क गयी

गीता - हा मै उसका मिजाज जान्ती हु , तुम जाओ अभी मै उसे समझाती हु तुम जाओ प्लीज

राहुल वहा से निकल कर बाहर चला गया खुली हवा में

वही गीता झट से कमरे का दरवाजा बन्द कर वापस बबिता के पास आती है

जहा अरून उसको अपना रुमाल देकर उसका हाल ले रहा था ।

अरून गीता को पास खड़ा देखकर खड़ा हुआ - तुम बैठो मै पानी लेके आता हु

गीता - हम्म ठिक है

अरून फिर कमरे से बाहर पानी के स्टाल की ओर निकल जाता है जहा राहुल पहले से खुद पर पानी के छीटें मारता हुआ अपना गुस्सा उतार रहा था ।

अरून - क्या हुआ यार , क्या बात हो गयी तुम दोनो मे

राहुल डिसपोजल गिलास मे बचे हुए पानी के घूंट गटकता हुआ गिलास को अपने पंजे मे पिचका कर जोर से जमीन पर फेकता हुआ - ह्ह !! बैन्चो पागल है वो लड़की यार

अरून पानी के स्टाल से एक ट्रे मे 4-5 गिलास पानी रखता हुआ - हा लेकिन हुआ क्या ?

राहुल - वही यार हम दोनो उस वाले घर मे गये थे जूते छिपाने और वहा उसे अकेला पाकर और उसकी उभरी हुई गाड़ देखकर .... आअहह बहन्चोद मै ..ह्ह साला मै पागल हो गया जोश जोश मे और मैने उसका हाथ पकड लिया ....

लेकिन वो , वो मादरचोद !!

अरून - भाई चिल्ला मत आराम से बोल

राहुल - वो साली चिल्लाने लगी कि भैया को बता देगी तो मैने भी उसको उसकी ही फोटो दिखा दी , मगर फिर भी उसका नाटक चालू है अभी भी ।

अरून उसके कन्धे को थपथपाकर - देख भाई तु लड़कीयों को अपना गुलाम समझना बन्द कर , वो भी सोच सकती हैं समझ सकती है और अगर कोई एक तुझे आसानी से मिल गयी इसका मतलब सब वैसी नही ना होगी ।

अरून की बात पर राहुल चुप रहा और आसमां कि ओर देखता हुआ गहरी सांस लेते हुआ अरून को देख के - तु कहा जा रहा है, तेरा कुछ हुआ

अरून - साले तेरी वजह से मेरा तो शुरु होने से पहले ही खतम हो गया , और ये पानी लेके जा रहा हु । मिलता हु अभी

राहुल - हा जा ।

फिर अरून पानी लेके कमरे मे जाता है और दोनो बहने चुप बैठी थी । बबिता अब पुरु तरह से शान्त थी ।

अरून ने उसे पानी दिया और बाकी दोनो ने भी पिया ।

अरून - क्या हुआ सब ठिक है ना , उपर चले

गीता - अह नही तुम जाओ , मै इसके साथ रुकून्गी ।

अरून - हम्म ठिक है आराम करने दो इसको कुछ जरुरत होगा तो बताना मै आ जाऊंगा

गीता ने हा मे सर हिलाया और अरून बाहर चला गया ।

बबिता ने अरून को जाते हुए देखा तो गीता से बोली - तुम दोनो लगे हुए थे क्या ?

गीता शर्मा कर मुस्कुराई - कैसे लगी रहती , तुझे मुझसे जलन जो है । चली आई ना देखने क्या कर रही हु मै छिप छिप कर

बबिता गीता की बात पर मुस्की लेके बोली - वो अच्छा लड़का है वैसे

गीता - हाव !! कही पसंद तो नही आ गया , बोल तो छोड़ दूँगी फिर तेरा बॉयफ्रेंड मेरा हिहिही

बबिता हस्ती हुई - धत्त चुप कर पागल

गीता - लेकिन तुने भी एक गलती की है

बबिता - क्या

गीता - तुझे अपने bf को फोटो नही भेजना चाहिए, कही वो भी ऐसे गलत इस्तेमाल कर बलैकमेल करने लगा तो

बबिता - उसकी चिंता ना कर इस बार मिलके उसका मोबाइल ही फारमेट कर दूँगी हिहिही

गीता भी खिलखिला के हँस पड़ी ।

वही उपर छत पर खुले आसमां के नीचे मंडप मे शादी की रस्म अदायगी हो रही थी , मंत्र जप हो रहे थे और वर वधु दोनो पक्ष की ओर हसी ठिठोली चल रही थी ।

कुछ की आंखे तकरार मे व्यस्त थी मगर इकरार हिम्मत नही हो पा रही थी किसी की और कुछ इशारेबाजी से कुछ लोगो को तकलिफ सी हो रही थी ।

कमलनाथ और संगीता के नैन मटक्के पर मुरारी की नजर थी जो जल भुन रहा था और वही मंडप के पास झपकीयां खाता बनवारी भी बीच बीच अपनी बड़े जमाई बाबू की हरकतो से खीझ कर रह जाता ।

इनसब अलग हेरोइन बनी लड़कियां और भाभियाँ मंडप के पास ही कुर्सियाँ लिये बैठी थी ताकी उनकी भी कुछ तस्वीरें कैमरे मे कैद हो पाये ।

जल्द ही रस्म अदायगी पूरी हुई और फेरे होने लगे , दोनो पक्ष के लोग दुल्हा दुल्हन की आड़ मे अपने चहेतो पर भी फुल फेक कर मार रहे थे और हसी ठिठोली भरा माहौल था ।

सब खुश थे मगर जल्द ही बिछड़ने का वक्त हो चला था । सुबह 5 बजने को हो रहे थे और सबकी आंखे नींद खोज रही थी ।

विदाई की तैयारियाँ की जा रही थी , लेनदेन का समान पहले ही गाड़ियों पर तैयार कर दिया गया था ।

एक कन्धे से दुसरे सीने पर अपने सर को टिकाती हुई सोनल बिलखती हुई कार के दरवाजे तक आई जिसने अमन पहले ही बैठा उसकी राह देख रहा था ।

कुछ रस्म अदायगी के बाद समधि मिलन हुआ और लोग पैदल ही घर के लिए निकल गये ।

जाना भी महज किलोमीटर दुर भी नही था ।

नम आसूँओ से घर सराबोर हुआ था ।

सुबह चढ रही थी मगर अगले दिन के लिए काम बहुत था ।आधे से ज्यादा लोग जिसको जहा जगह मिली पसर गये ।

इधर राज के फूफा ने रंगी से इजाजत मागी कि उन्हे भी निकलना है और नीलू चारू को आज शाम की ट्रेन से वापस हॉस्टल जाना है ।

नम आंखो से रन्गीलाल ने उन्हे भी विदा किया और राज के दोनो फूफा , छोटी बुआ के साथ साथ उनकी दोनो बेटियाँ और सिम्मी भी चली गयी ।

अरून गीता के लिए रुक गया ये बहाना करके कि वो अपनी मौसी यानी शिला बुआ के साथ आयेगा ।

आस पास के मेहमां भी विदाई के बाद अपने अपने घर के लिए चले गये ।

घर पर सिर्फ राज के चाचा , मौसा और मामा का परिवार था और उसमे से शिला बुआ अरून के साथ थी ।

रंगी ने सबको दो तीन घन्टे आराम करने को कहा और घर का मेन गेट बन्द कर दिया गया ।

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दोपहर के 1 बजने वाले थे चंदू के घर मे ही आज भी लोगो के लिए खाना बन रहा था ।

टेन्ट वालों घर खाली कर सड़को से स्टाल उतारने शुरू कर दिये थे

घर की औरतें उपर की छत पर नहाना धोना कर रही थी बारी बारी से

वही घर की बाल्किनी मे अनुज गुमसुम सा बैठा हुआ था ।

रात की थकान और शारिरीक हरारत से उसको बाल्किनी की धूप मे आराम मिल रहा था ,

चेहरे को रुमाल से ढके हुए वो एक चेयर पर पैर रख कर अपनी ही कल्पना मे खोया हुआ था ।



"10 घन्टे पहले"



रात के करीब 3 बज रहे थे , शादी के मंत्र जाप हो रहे थे और अनुज वहा से उठ कर निचे जाने लगा पानी पीने के लिए

उसी समय रिन्की भी दुल्हन पक्ष के लोगो से बाथरूम का पुछ कर निचे चली गयी ।

अरून पानी पीने के लिए ग्राउंड फ्लोर पर था , किचन के गलास लेके पानी पी रहा था ।

तभी रिन्की आहट से वो चौक कर उसकी ओर देखा ।

रिन्की उसको देख कर अपनी स्ट्रेट हेयर के जुल्फो को कानो मे फसा कर अपने बड़े से ईयररिंग को दिखाती हुई नजरे नीची की ।

बस इसी रूप पर अनुज का दिल ऐसा धडकता मानो फट ही जायेगा ।

रिन्की ने नजरे उठा कर अनुज की ओर देखा - हाय

अनुज अटक कर - ह हाय , कहिये क कुछ चाहिये क्या त तुम , मतल्ब आपको ?

रिन्की अनुज की स्थिति पर मुस्कुराई - हा मुझे भी पानी चाहिये

अनुज हड़बडा कर अपने हाथ मे लिया हुआ गिलास उसकी ओर बढाता हुआ - हा लिजिए

रिन्की ने उसके हाथ से गिलास लेकर पीने को होती है कि अनुज हड़बडा कर उस्के हाथ से गिलास लेता हुआ - नही नही आप इसे नही पी सकती है , म मै मै दुसरा देता हु

रिन्की उसकी ओर दो कदम चल कर - क्यू क्या हुआ ?

अनुज उसको दुसरे ग्लास मे पानी देता हुआ - जी वो जुठा था ना मेरा

रिन्की - तो क्या हुआ

अनुज की सासे अटक गयी और वो रिन्की की ओर आंखे बडी कर देखता हुआ थुक गटक कर - नही नही वो जुठा पीने से मुह मे छाले हो जाते है , ऐसा मम्मी बोलती है !!

रिन्की पानी के घूंट गटकती हुई लगातार उसकी ओर देख रही थी और अनुज उससे नजरे चुरा कर उसको अपनी ओर घुरता पाकर परेशान होने लगता है ।

इससे पहले रिन्की कुछ बोलती कि

"भैया !! अरे छोटे सेठ जी पैर उठाइए "

अनुज चौक कर उठा और सामने देखा तो टेन्ट वाले मजदूर घर की कुर्सियाँ बटोर रहे थे ।

अनुज - अरे भाई कुर्सिया रहने दो अभी घर पर मेहमां है ना

मजदुर - अरे छोटे सेठ ये गद्दे वाली कुर्सियाँ लेके जा रहे है , आज रात भी बुकिन्ग है ना , बाकी पलासटिक वाली नही लेके जायेंगे

अनुज के मूड डिस्टर्ब हो गया था क्योकि उससे तो रिन्की के साथ के पलो मे खोये रहने मे मजा आ रहा था ।

उसने उस मजदूर की बकबक पर जरा भी ध्यान नही दिया और उबासी लेते हुए उसने सोचा क्यू ना नहा ही लिया जाये ।

अनुज उठा और गैलरी होकर अपने कमरे की ओर कुछ आरामदायक कपडे लेने के लिए बढा

अभी भी उसके जहन मे रिन्की और उसके बिच हुई रात की बात के द्वंद था ।

अनुज मन मे - बहिनचोद मै ही फटटू हु साला , कितना लाईन दे रही थी । अरे नही ज्यादा कुछ तो उसकी गाड़ मसल लेता और चुम्मी मिल ही जाती सीई धत्त , करना चाहिये था यार । उसको वही किचन मे दिवाल से लगा के उसके होठ उह्ह्ह

"ओह्ह छोटे हीरो कहा कहा भाई "

अनुज का ध्यान टूटा और उसने सामने देखा कि वो आया तो सही जगह पर था अपने कमरे मे ही , मगर timing थोड़ी गलत हो गयी ।

सामने उसकी मामी साड़ी ब्लाउज मे खड़ी थी और साडी पहनने वाली थी ।





अपनी मामी को ऐसे हालत मे देख कर अनुज ने नजरे फेर ली - सॉरी मामी , वो मै कपडे लेने आया था

मामी ने मुस्कुरा कर अनुज का मजा लेते हुए - अरे लेकिन मेरे कपडे तुम लेते जाओगे तो मै क्या पहनंगी

अनुज मामी के मजाक पर हस देता है और अपनी मामी ओर देख कर कुछ बोलने को होता है कि उसकी नजर अपनी मामी के भरे हुए दूधिया चुचियों की दरार मे गयी और वही चिकना हल्का उभरा पेट मे चर्वीदार गहरी नाभि देख कर उसके मुह ने पानी आ गया





वो मुह की लार गटकता हुआ - अरे नही मामी वो मै मेरे कपडे लेने आया था , ये रहे

अनुज ने लपक कर दिवाल हैंगर पर टंगे डेली यूज़ वाले टीशर्ट लोवर और जांघिया लेके उपर निकल गया ।

अनुज सीढियों पर पहुचा और उसको अपनी मामी का ख्याल वापस आया

अनुज मन मे ही बडबड़ा कर - धत्त धत्त साला मै एक नम्बर का चुतिया हु , थोड़ा देर और नही रुक सकता था साले वही , अगर मौसी को चोद सकते है तो मामी के साथ भी तो कुछ मस्ती की जा सकती है । मै साला पागल हु बहनचो !! फटटू हु , हर जगह

" क्या हुआ भाई , क्या सोच रहा है " , राज ने अनुज को खुली छत पर रोका ।

अनुज ने राज को देखा जो अभी अभी नहा कर आ रहा था ।

अनुज ने आस पास देखा और बोला - भैया मुझे आपसे बात करनी है

राज - क्या भाई बोल ना

अनुज राज को एक किनारे ले जाता हुआ -इधर आओ

राज - हा बोल ना भाई

अनुज - भैया मेरी हैल्प करो ना , हर बार जव कोई मौका आता है मेरी फट जाती है

राज हसता हुआ - हिहिही मतलब ?

अनुज ने फिर रात वाली बात बतायी जब रिन्की उसके पीछे आई थी और वो निशा के बुलाने पर खसक लिया था ।

राज हस कर - अरे होता है होता है , तु दिल का साफ है ना तो तेरी फटेगी ही हाहाहहा

अनुज - हा भैया और एक बात

राज - क्या ?

अनुज ने इधर उधर देखा और धीरे से बोला - भैया वो कल रात मे जब बारात आई थी तो मैने चाची की बुर देखी

राज आंखे उठा - हा , सच मे !! कैसे ?

अनुज ने सब कुछ बताया और हस्ते हुए बोला - उनकी चालाकी उनका ही नुकसान हुआ ।

राज हस कर - चल कोई नही मजे कर , लेकिन ध्यान रहियो किसी के भी सामने ऐसे खुल कर मत दिल की बात रख देना , सब अपनी मौसी जैसे नही होते

अनुज खुश होकर - आह्ह भैया मौसी की बात याद ना दिलाओ , कितना मजा आया था आपके साथ मे हिहिहिही

राज धीमी आवाज मे आंख दबा कर - मौका मिलने दे फिर करते है मजा हिहिही

अनुज भी उसकी बात सुनकर खिलखिला पड़ा

राज - अब जा नहा ले , महक रहा है तु

अनुज मुह बना कर - क्या भैया !!

राज उसको धकेलता हुआ -अबे जा ना चिपकू चल चल

अनुज भुनक कर नहाने चला गया और राज हस्ता हुआ निचे चला गया ।

घर के बाकी मर्द इधर उधर का काम निपटाने मे लगे थे वही बनवारी राज के कमरे मे लेटा हुआ था ।

सुबह की नीद पूरी होने के बाद वो भी नहा कर लेटा हुआ रात के उस दृश्य के बारे ने सोच रहा था जहा उसका जमाई एक पराई औरत के साथ सेक्स कर रहा था ।

रज्जो के लिए बनवारी को बहुत दुख हो रहा था और उसे अब यहा अच्छा भी नही लग रहा था ।

बार बार उसके जहन मे ये वेदना उठ रही थी कि वो रज्जो को सब सच बता दे , मगर उसे डर था कही उस्का अपने पति से रिश्ता ना बिगड़ जाये ।

ऐसे मे राज अपने कमरे मे दाखिल होता है

राज खिला हुआ चहक कर - अरे वाह नानू नहा लिये आप भी , चलो खाना तैयार है ।

बनवारी अंगड़ाई लेता हुआ - हा बेटा चल जल्दी से खा कर मुझे निकलना है

राज - क्या निकलना है ? अभी रात मे तो आप बोले कि सब ठिक हो गया , पापा से बात हो गयी आपकी ना ?

बनवारी हस कर - हा बेटा लेकिन यहा बैठ कर क्या करुंगा आखिर , घर भी काम पड़ा हुआ है ।

राज - अरे बस आज तो रुक जाओ , प्लीज प्लीज कल चले जाना ना

बनवारी अपने लाडले की बात और जिद टाल ना सका और हस्ता हुआ - अच्छा ठिक है भई तु जीता हाहाहहा

राज हस्ता हुआ - ओके फिर चलो हिहिहिही

दोनो कमरे से बाहर हाल मे आने लगे तो राज अपने नाना के पास होकर फुसफुसाया - मै जान रहा हु रंजू ताई नही है ना इसीलिए आपका मन नही लग रहा है हिहुहिही

बनवारी हस कर - चुप शैतान कही का

राज खिलखिलाता हुआ - अरे सबर करो रात तक कुछ ना कुछ तो मिलेगा ही

बनवारी- अब बस भी कर भाइ हाहहहा

इधर चन्दू के घर मे सारे लोग खाने के लिए जूट गये और सबने खाया पिया ।

राहुल और बबिता एक बार आमने सामने थे , मगर गीता ने उसे रोका हुआ गुस्सा होने से

इसीलिए वो जल्दी से खा कर निकल गयी घर मे

कुछ देर बाद मौका देखकर राहुल भी उसके पीछे हो लिया ।

बबिता सबसे उपर की छत पर थी और बाथरूम के पास फोन पर किसी से बात कर रही थी ।

जीने से उपर आते ही राहुल उसे देख कर समझ गया कि वो अपने बॉयफ्रेंड से लगी हुई थी ।

उसको देख कर राहुल को एक गाना सुझा और वो बहुत हलकी भुनभुनाहट भरी आवाज मे गुनगुनाया -

" अपने लवर को धोखा दो , अरे हमे भी डार्लिंग मौका दो "

गाने के बोल गुनगुना कर राहुल मुस्कुता हुआ अंगड़ाई लेकर बाथरूम की ओर बढ़ने लगा ।

बबिता उसको अपनी ओर आता देख कर भी हिम्मत से बिना उसकी परवाह किये फोन पर लगी रही ।

राहुल उसके पास से निकल कर टोइलेट मे पेसाब करने के लिए घुस गया और वापस निकला तो देखा बबिता अभी बाउंडरी वाल से लग कर हस्ती हुई कुछ बाते बुदबुदा रही थी ।

तभी राहुल को भनक हुई कि दरवाजे से कोई तो उपर आ रहा है ।

राहुल - कोई आ रहा है सुन रही हो

बबिता ने उसको इग्नोर किया और राहुल हाथ पैर धूलने वाथरूम मे चला गया

अगले ही पल रज्जो छत पर आ गयी थी ।

रज्जो ने देखा छत पर बबिता कोने ने खड़ी किसी से हस हस कर बात कर रही थी

रज्जो - गुड़िया क्या कर रही है , किस्से बाते कर रही है ?

बबिता चौकी और अपनी बडी बुआ की आवाज सुनते ही वो सकपका गयी - वो वो बुआ वो मै

रज्जो को शक हुआ कि छत पर अकेली सुनसान ये किस्से बाते कर रही होगी , कही इसका किसी से चक्कर तो नही और उसने लपक कर बबिता के हाथ से मोबाईल लिया , मगर उस्से पहले ही दुसरी ओर फोन कट गया था ।

रज्जो मोबाईल खोलने की कोसीस करती हुई - खोल इसको , किसका मोबाइल है ये और किस्से बात कर रही थी

बाथरूम मे ही राहुल को रज्जो की तेज आवाज आई और वो दौड़ कर बाहर आया - अरे मौसी ये मेरा मोबाईल है ? मैने दिया इनको घर पर किसी सहेली से बात करनी थी , शायद स्कूल का कोई प्रोजेक्ट के बारे मे

राहुल को एक के बाद एक झुठ बोलता देख बबिता अचरज से उसकी ओर देखने लगी ।

रज्जो - अरे तो ये गूँगी हो गयी है क्या , पागल लड़की बोलना चाहिए ना

राहुल हस कर - क्या मौसी आप ऐसे डाटोगे तो मै भी डर जाऊंगा ना हिहिहिही

रज्जो हस कर - हट यहा से मस्तीखोर कही का , ले अपना मोबाइल

फिर रज्जो अरगन से अपनी साड़िया और बाकी उतारने लगी ।

वही राहुल ने धीरे से मोबाइल बबिता को देकर चुपचाप निचे चला गया ।

वही दोपहर के ही एक समय अमन के घर मे .......

"'नही नही अभी नही जाना है"

"मामी देखो ना भैया कमरे मे जा रहे है "

"हिहिहिही"

रिन्की अमन के कमरे के दरवाजे के बाहर गलियारे मे उसके सामने हाथ फैला कर रास्ता रोके हुए खड़ी थी ।

इतने मे अमन की मा ममता आती है और अमन को देख कर - तुझे बोला ना अभी नही शाम को पूजा होने के बाद ही तुझे जाना है

अमन थका हुआ मुह लटका कर - मम्मी प्लीज जाने दो , पैर दुख रहे है मुझे नीद भी आ रही है

ममता - तुझे सोना है तो चल मेरे कमरे मे लेट जा , आ चल ।

फिर ममता अमन को लेके निचे अपने कमरे मे चली जाती है और रिन्की खिलखिला कर हसती हुई चिढाती है ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 194


दोपहर के खाने के बाद लगभग सभी लोग खाली थे खासकर औरतों को तो बिल्कुल भी काम नहीं था ।

वही राज की मामी सुनीता का बडा मन था कि वो चमनपुरा का बाजार घुमे

इसपे रज्जो और शिला ने भी सहमती दिखाई तो बाकी बची महिलाए भी जाने को उत्सुक थी । इधर लड़को के गैंग में राज को छोड़ कर सारे जाने को तैयार हुए ।

मगर राहुल की वजह से बबिता ने घूमने जाने से इंकार कर दिया और ये उसके लिए अच्छा भी था उसे अकेले अपने बॉयफ्रेंड से बात करने का समय भी मिल जाता ।

रागिनी को छोड़ कर घर की सारी औरतें ( रज्जो , सुनिता ,शालिनी , शिला , रीना , निशा ) और तीन लड़के ( अरून राहुल अनुज ) बाजार के लिए निकल गये ।

वही रागिनी घर के बचे खुचे काम निपटाने के लिए रुक गयी ।

वही जंगी और कमलनाथ काफी खुल गये थे तो जंगी उसे अपने साथ अपने दुकान पर ले गया और रंगी अपने शादी के हिसाब किताब के लिए घर पर ही रुक गया ।

राज अपने नाना के साथ फूलपुर गाव की सैर पर निकल गया क्योकि उसके नाना का मन नही लग रहा था ।

"थकान तो नही हो ना नानू " राज ने मुस्कुरा कर बागों मे टहलते हुए बोला ।

बनवारी- अरे क्या तु भी , अरे हम गाव के मर्द है ऐसी हल्की फुल्की सैर से हमे थकान नही होती

राज - तो फिर चले क्या ताई के यहाँ हिहिहिही

बनवारी के मन मे राज के ऑफ़र से थोडा उत्साहित हुआ मगर उसके हाल के अनुभव से वो खुश नही था ।

राज - क्या सोच रहे हो नानू , अरे यहा पापा नही है और मै आपको बेस्ट फ्रेंड हु ना हिहिहिही

बनवारी हस कर - अरे वो बात नही है बेटा, दरअसल कल तेरी ताई कुछ खास खुश नही थी मेरे व्यव्हार से

राज - अरे तो आज मना लो ना नानू चलो चलते हैं

बनवारी- अरे लेकिन घर पर सब होगे ना

राज - अरे इतना टाईम कोई नही होगा , सिवाय पंखुडी भाभी के

बनवारी - फिर कैसे और यू किसी के घर ऐसे जाना अच्छा नही लगता

राज - ओहो नानू आप सोचते बहुत हो मै कह रहा हु ना चलो

बनवारी हस कर रंजू ताई के घर की ओर बढ़ गया ।

साढ़े तीन बजे का वक्त हो रहा था और घर के दरवाजे पर कोई दिखा नही था ।

राज अपने नानू को चुपचाप अन्दर आने को कहा

"अरे कोई देखेगा तो क्या सोचेगा , कि हम लोग कोई चोर है । ऐसे क्यू जा रहा है आवाज दे ना " , बनवारी ने राज का हाथ पकड कर उसको रोकते हुए फूसफुसाया ।

राज हस कर - अरे नानू घर मे ऐसे ही घुसने का मजा ज्यादा है हिहिहिही कुछ ना कुछ देखने को मिल जाता है आजाओ

फिर राज घर का दरवाजा हौले से धकेल कर जैसे भीतर घुसा , बनवारी भी उसके पीछे घुसने लगा तो बनवारी का हाथ दरवाजे के कंडे पर लगा गया

जिसकी आवाज की प्रतिक्रिया मे भीतर आंगन से पायलों की छनक के साथ एक आवाज आई - कौन है ?



अमन के घर



"चल यही आराम कर अब " ममता मुस्कुरा कर अमन से बोली ।

अमन - मम्मी मेरे सर मे दर्द हो रहा है बाम लगा दोगी

ममता ने अपने लाड़ले की हालत को देखा और उसका उतरा हुआ मुह देख कर आलमारी से बाम निकाल कर आई और बिस्तर पर पालथी मारकर बैठते हुए - आजा मेरी गोदी मे

अमन खुश हुआ और अपनी मा के गोद मे उसकी बाई ओर आकर लेट गया ।

गुदाज जांघो मे लेटकर अमन की बहुत आराम मिला - आह्ह मम्मी कितने सोफ्टी हो आप , मेरा आधा दर्द तो ऐसे ही गायब हो गया ।

ममता शर्मा कर हस्ती हुई - चुप कर , आज भर सो ले मेरी गोद मे फिर तो रोज बहू की गोद में निद आयेगी क्यूँ?

अमन नजरे उठा कर अपनी मा को देखता हुआ - ऊहु मै तो मम्मी की गोदी मे ही सोउँगा

ममता - अच्छा तो क्या बहू अकेले रहेगी

अमन - उसका वो जाने शादी मे हमारी साथ सोने वाली बात नही हुई थी हिहिहिही

ममता उसके हस्ते गालो पर चपट लगाती हुई - बदमाश कही का

फिर ममता बाम की सीसी ने उंगली डाल कर अमन के लिलाट पर बाम मलने लगी और अमन आंखे बन्द कर गहरी सासे लेते हुए रिलैक्स होने लगा ।

ममता अपनी उंगलियो से अमन के सर पर मासाज करती हुई - तब कुछ सरप्राइज लाया है बहू के लिए या नही

अमन - सरप्राइज मतलब कुछ गिफ्ट देना होगा क्या ?

ममता - हे भगवान, तुझे कुछ पता भी है । तुने सच मे कोई तैयारी नही की आज रात के लिए

अमन - इसमे तैयारी कैसी मम्मी , जाके सोना ही तो है ना

ममता मुस्कुरा कर अमन के लिलाट पर अपनी उंगलियाँ दरती हुई - अरे पागल पहली रात पर दुल्हन को मुह दिखाई पर कुछ देगा नही

अमन - लेकिन मै तो देख चुका हु ना उसे कई बार

ममता - धत्त शैतान कही का , अरे बुधु ये रस्म होती है कि सुहागरात पर पति अपनी बीवी को निशानी के तौर पर गिफ्ट देता है ।

अमन - अच्छा? तो आपको क्या मिला था

ममता हसती हुई - हे भगवान , तु घूम फिर कर मेरे उपर क्यू आ जाता है ?

अमन - अरे अब अपने मम्मी पापा से नही पूछूंगा तो किस्से पुछूंगा , बताओ ना मम्मी क्या दिये थे पापा आपको

ममता शर्मा कर मुस्कुराने लगी ।

अमन - मम्मी बताओ ना ?

मम्मी - तेरे पापा भी तेरी भुलक्कड़ थे और अगले दिन मेरे लिए गिफ्ट लाये थे

अमन हस्ता हुआ - हिहिहिही सच मे क्या दिये थे आपको फिर

ममता - सोने के कंगन और

अमन अपनी मा को मुस्कुराता देख - और क्या मम्मी बोलो ना ?

ममता - वो तब के समय मे अंदर के कपडे नही पहनती थी गाव मे जब मायके थी क्योकि अम्मा ने कभी दिलाए नही तो हिहिहिही जब सुहागरात पर तेरे पापा को पता चला तो वो हिहिहिही अगले दिन बाजार से लेके आये थे ।

अमन का ये सुनकर लन्ड उफना गया कि उसकी मा ने अपनी बढ़ती जवानी की उम्र बिना अंडरगार्मेंट्स के निकाली थी और अभी भी वो पैंटी नही पहनती ।

अमन हस कर - तो क्या साइज़ सही थे हिहिहिही

ममता - धत्त बदमाश कहि का

अमन - बताओ ना मम्मी हिहिहिही प्लीज

ममता हस्ती हुई - नही !!

अमन - फिर

ममता - फिर अगले दिन नये लेके आये उसके साइज़ थोड़े ढीले थे

अमन हस्कर - हाहाहहा पापा को फिर जाना पड़ा होगा ना हिहिहिही

ममता - नही

अमन - तो क्या आप ढीले अंडरगार्मेंट पहन रहे थे

ममता शर्मा कर हसती हुई - हम्म्म्म

अमन को शक हुआ उसकी मा कुछ छिपा रही थी उसके चेहरे से साफ जाहिर है - मम्मी क्या छिपा रहे हो सच सच बताओ हिहिहिही प्लीज

ममता - तु पागल है , मुझसे यही सब बाते करेगा अब

अमन - ओह मम्मी प्लीज बोलो ना , देखो आपसे बात करके मेरा सर दर्द फुररर हो गया हिहिही प्लीज ना

ममता - बताया तो मै वही अंडरगार्मेंट यूज़ कर रही थी और महीने भर मे वो फीट हो गये थे

अमन अपनी भौहे सिकोड़ कर पल कर आंख मून्दा और फिर आंखे बडी कर - लेकिन कैसे , इतना खाती थी आप कि महीने भर मे मोटी हो गयी

ममता खिलखिला कर हसी - भक्क पगलेट , खा खा कर नही

अमन - तो ?

ममता आंखे चढा कर उसको घूरती हुई हस रही थी - सच मे नही पता तुझे !!

अमन शरारत भरी मुस्कान के साथ ना मे सर हिलाया ।

ममता - शादी के बाद औरतों के शरीर मे थोडा बदलाव आता ही है

अमन- कैसे?

ममता हस कर - जा अपने पापा से पुछ हा नही तो , ये क्यूँ वो कैसे ? हिहिहिही

अमन - मम्मी प्लीज बताओं ना ?

ममता - अरे पागल जैसे सभी औरतें होती हैं मै भी हुई थी , तेरे पापा के प्यार से हिहिही





अमन का मुसल ये सब सोच कर तनमनाया हुआ था - अच्छा तो ऐसे बोलो ना कि ज्यादा सेक्स करने की वजह से

ममता शर्मा कर हसती हुई अपने ललाट पर हाथ रख लेती है ।

अमन - क्या सही नही बोल रहा क्या मै ?

ममता खुद पर हस्ती हुई थोडी लजाती थोड़ी झेपती - चुप कर , कुछ भी बोलता है ।

अमन ने देखा उसकी मा के ब्लाउज मे उसके चुचो के निप्प्ल उभर आये हैं और साफ साफ झलक रहे थे निचे से

अमन का लण्ड और ठूमका ।

अमन ने जिज्ञासु होकर - मम्मी एक बात पूछू

ममता - हा बोल ना ?

अमन - मम्मी क्या पापा ने आपको पहली रात ही .....हिहिहिही

ममता हसते हुए फिर से झेप गयि और अपने बाई ओर मुह फेर कर हसने लगी और तभी उसकी नजर अमन के पजामा मे बने त्म्बू पर गयी जो कुर्ते को पुरा उठाए हुए था ।

ममता समझ गयि कि इसको ये सब बाते करने मे क्यू रस आ रहा है ।

अमन - मम्मी बोलो ना

ममता - हम्म क्या ?

अमन - वही जो पुछा?

ममता - क्या ? अच्छा वो ? हिहिहिही नही

अमन - फिर उनको कैसे पता चला कि आपके पास अंडरगार्मेंट नही थे

ममता शर्मा कर - वो मै रात मे जब साड़ी उतार कर सूट डाल रही थी तब और वो सोने का नाटक कर चुपके से मुझे निहार रहे थे ।

अमन खिलखिलाकर - हिहिही सच मे

ममता हसने लगी ।

अमन - फिर

ममता - फिर क्या ?

अमन - अरे हुआ किस दिन वो सब

ममता लजाती हुई - तीसरी दोपहर को

अमन - दोपहर को ?

ममता हा मे गरदन हिलाया

अमन - दोपहर मे क्यूँ?

ममता लजा कर हस्ती हुई - जा तेरे पापा से पुछ कि दोपहर मे क्यूँ मन हुआ उनका हिहिहिही

अमन ने मह्सूस किया कि उसके मा के शरीर के रोये रोए तन गये हैं और उसका शरीर ठण्डा हो रहा है ।

अमन - तो कैसा लगा था आपको मम्मी उस दिन?

ममता - आज रात तुझे भी पता चल जायेगा , ठिक है । हा नही तो कैसा सवाल है कैसा लगा

अमन हस कर - नही मै भी आज नही करूंगा , मै भी पापा के जैसे तीसरी दोपहर को करूंगा हिहिहिही

"अच्छा, लेकिन इसे देख कर तो लगता नही कि ये रात तक भी इन्तजार करना चाहता है ", ममता ने हस कर अमन के खडे लण्ड के मजे लेते हुए बोली ।

अमन हस के - फिर तो उस हिसाब से आप भी आज पापा के साथ कर के ही मानोगे हिहिहिही

ममता अचरज से हस्ती हुई - तुझे बड़ा पता है , मेरा क्या खड़ा है हिहिहिही





अमन ने लपक कर हाथ उपर कर ममता के साडी के पल्लू के निचे से ममता ब्लाउज के ऊपर से उसकी मोटी चुची पकड कर - येह्ह्ह

ममता अमन के स्पर्श सिहरी और आंख बन्द कर गहरी तेज सासे लेने लगी ।

अमन ने सोचा क्यू ना इस मौके का फाय्दा लिया जाये और वो झट से उठ कर बैठ गया

ममता चौकी और आंखे उठा कर इशारे से पूछी क्या हुआ

अमन मुस्कुरा कर उसके बगल मे बैठता हुआ उसके पीछे हाथ ले जाकर दाये तरफ से कन्धे पर रखता हुआ - मम्मी , एक बात पूछू

ममता - हम्म पुछ ले

अमन - मम्मी क्या उस दोपहर पापा ने ही आपको उपर ब्रा पहनाया था ना

ममता उस पल को याद कर सिहर गयी और चुप रही ।

अमन - बोलो ना मम्मी

ममता - अह क्यू पुछ रहा है ये सब बेटा

अमन हौले से अपना बाया हाथ आगे किया और अपनी मा के पल्लू ने निचे से और ब्लाऊज के उपर से ही उसकी चुची सहलाकर - बस ऐसे ही सुनने का मन कर रहा है , बताओ ना

ममता अमन के स्पर्श से काप गयी थी - हम्म्म बेटा पहनाया उन्होने ही पीछे हुक लगाये थे

अमन - और पैंटी

ममता अमन कि ओर झुकी आंखे बन्द किये मुस्कुराई - धत्त पागल , रहने दे ना क्यू पुछ रहा है !!

अमन ने अपने हाथ आगे बढ़ाते हुए दुसरे चुचे के निप्प्ल पर हथेली को घुमाया - बताओ ना मम्मी

ममता कसमसाई- आह्ह नही उन्होने तो उतारी थी

अमन - कैसे ?

ममता की सासे तेज थी वो पूरी तरह से उस दोपहर के पल मे खोई थी जब उसके पति से उस्का पहला संसर्ग होने को था ।

ममता थुक गटक कर - वो वोह्ह्ह ऊहु न्हीईई बेटा मै नही बता पाऊंगी मुझे शर्म आ रही है

अमन अपनी मा की चुची को हथेली मे कसता हुआ - प्लीज ना मम्मी बताओ ना

ममता कापते हुए स्वर मे - अह्ह्ह बेटा उस दिन घर के लोग यही शिव मंदिर गये थे पूजा के लिए और बस हम दोनो थे उस समय और तेरे पापा बाजार से वही ब्रा पैंटी लेके आये थे । मुझेह्ह

"आह्ह सीईईई मत कर ना नही तो मै नही बताउंगी " , ममता ने अमन को चुचियॉ मिजने से रोकती हुई बोली ।

अमन ने अपने हाथ रोक दिये और वैसे ही उसकी चुची को पकड़े रहा ।

ममता मुस्कुराई और आन्के बन्द किये -

फिर उन्होने मुझे देके बोला कि मैं ट्राई करू , उस समय भी वो बहुत लजा रहे थे और कमरे मे ना आकर बाहर ही बैठे रहे ।

मैने अपनी साडी उठा कर पैंटी ट्राई की तो वो थोड़ी ढीली थी , मगर लास्टीक ठिक थी तो कोई दिक्कत की बात नही थी । फिर मैने ब्लाउज उतार कर ब्रा ट्राई करने लगी मगर हुक मेरे से लग नही रहे थे और मुझे पता नही था कि वो दरवाजे की ओट से भीतर मुझे ही निहार रहे थे ।

मैने बार बार प्रयास किया मगर हुक नही लग पा रहे थे और वो मुझे परेशान देखकर हल्के से दरवाजा खोलकर अन्दर आये ।

दरवाजे पर आहत से मै सहम गयी और उन्हे कमरे मे आता देख मैने झट से वैसे ही साडी का पल्लू लेके अपने आगे ढक लिया और मेरी हिम्मत नही हो रही थी उनसे नजरे मिलाने की ।

वो भी कम काप नही रहे थे और बड़ी हिम्मत करके तो उन्के गले से आवाज आई - लाओ मै लगा देता हु

मै समझ गयी मेरे भोलू हुक लगाने आये थे ।

अमन खिलखिलाया - हिहिहि भोलू

ममता - चुपचाप सुन

अमन- फिर

ममता - फिर उन्होने भी 4 से 5 कोसिस मे किसी तरह हुक लगाये , मगर सामने मैने पल्लू हाथो से पकडा हुआ था तो उन्हे कुछ भी दिखा नही वो उत्तेजित तो थे और उन्होने मौका देख कर मेरी पीठ पर किस्स किया ।

अमन ने भी अपना हाथ अपने लण्ड पर ले जाकर उसे भिन्चा और वापस से ममता के पल्लू के नीचे हाथ डाल कर चुचियो के बिच हाथ गर्म करने लगा ।

ममता ने भी ये चीज नोटिस की और मुस्कुरा कर - फिर कब उन्होने मुझे पीछे से कस लिया और कब वो सब हो गया पता नही चला ।

अमन ने अपने पाव पसार कर पाव के साथ साथ लण्ड की नसो को भी स्ट्रेच करता हुआ - अह्ह्ह मम्मी फिर कितने बार

ममता हसती हुई उसका हाथ अपने कन्धे से उतार कर झटकती हुई अपने बालों का जुड़ा कर - भक्क पागल मै नही बताने वाली कुछ, ये सब कोई पुछता है भला अपनी मा से , तु बहुत बिगड़ गया है

अमन ने जोर की अंगड़ाई ली और अपना तना हुआ सुपाडा खुजाया - हिहिहिही

ममता - चल उठ जा और देख तेरे पापा कहा है

अमन - तो क्या आप अभी दोपहर मे ही हाहाहा

ममता - धत्त पागल , अरे पंडित जी आने वाले है कथा वार्ता होगा ना अभी 3 बजे से

अमन बेड पर खड़ा होकर अपना तना हुआ मुसल दबाते हुए एक जोर की अंगदाई लेके उबासी लेकर - आह्ह हा देखता हु

ममता उसकी हरकत पर हस्ती हुई बैठे हुए ही उसके पिछवाडे पर हाथ मारती है - मस्तीखोर कही का जा अब

अमन खिलखिलाता हुआ बाहर चला गया , अपने पापा को खोजने ।



राज के घर



इधर सारे लोग साथ बाजार थे मगर राहुल का मन नही लग रहा था , घर पर अकेली बबिता को सोच के राहुल का मूड बार बार घर जाने का हो रहा था , इसीलिए मार्केट पहुचने पर भी वो अपने मार्केट वाले मुहल्ले मे जाने के बहाने से निकल लिया ।

अरून और गीता जो समझ रहे थे कि वो क्यू गायब हुआ इसको सोच कर आपस मे मुस्कुरा रहे थे ।

राहुल एक ई रिक्शा किया और 10 मिंट मे पहुच गया ।

घर आकर वो खुद को शान्त किया और हाल मे एंटर होते ही उसने सब जगह चेक किया , कोई कही नजर नही आ रहा था और उसकी बड़ी मम्मी रागिनी के कमरे का दरवाजा बन्द था ।

उसे लगा कि शायद वो सो रही होगी इसीलिए वो खुश हुआ और लपक कर दबे पाव उपर निकल गया ।

उपर पहुचते ही बिना किसी शक के वो अनुज के कमरे के दरवाजे से कान लगा दिया

भीतर से आ रही आवाज से वो थोड़ा चौका और बड़बड़ाया - बहिनचो कौन पेल रहा है उसे यहा ,

राहुल ने वापस अपनी शंका दुर करने के लिए कान लगाया और भीतर से फिर वैसी ही सिसकी सुनाई दी ।

लेकिन इस बार कुछ अलग थी ।

राहुल - ओह बेनचो , ये रो रही है मगर क्यूँ । कही कुछ हुआ तो नही दोनो बाबू सोना मे

राहुल दरवाजे पर हल्का सा जोर दिया और दरवाजा आराम से खुल ही गया

राहुल ने जैसे ही कमरे मे देखा तो बबिता को एक दोपहर वाली ही टॉप स्कर्ट मे सोफे पर बैठे देखा और उसका स्कर्ट एक तरफ से घुटनो तक उठा हुआ था उसकी चिकनी मुलायम जान्घ साफ साफ दिख रही थी ।

बबिता डबडबाई आँखों से सामने राहुल को देखा तो एकदम से चुप हो गयि और स्कर्ट झट से निचे कर लिया

बबिता अपने गाल से बहते आँसूओ को पोछ कर उसकी ओर देखा तो राहुल कमरे मे दाखिल होकर - क्या हुआ तुम रो क्यूँ रही हो ?

बबिता चुप रही

राहुल - ठिक है मै बड़ी मम्मी से बोलता हु

राहुल घूमके कमरे से बाहर जाने के लिए हुआ कि बबिता उसको रोकने के लिए झटके से खड़ी हुई - न्हीई रुको आह्ह म्ममीईईई

वो फौरन अपना घुटना पकड कर बैठ गयी और दर्द से सिस्कने लगी ।

राहुल लपक कर उसकी ओर गया - क्या हुआ दिखाओ

बबिता - नही तुम जाओ कुछ नही हुआ मुझे

राहुल गुस्से मे तमतमाया - अभी एक उलटे हाथ की दूँगा तुम्हारा सारा ड्रामा निकल जायेगा

राहुल के तेज आवाज और उससे इरिटेट मिजाज से बबिता सहमी और बिखलने लगी - वो मै फोन पर बात कर रही थी और तभी बुआ उपर से आ रही थी और जल्दी जल्दी मे मेरा घुटना दरवाजे मे भिड़ गया ।

राहुल थोड़ा शान्त हुआ मगर उसकी भौहे अभी भी तनी हुई थी - दिखाओ मुझे

बबिता - नही वो घुटने के उपर लगा है

राहुल - ओके मै बड़ी मम्मी को भेजता हु ,,वो मलहम लगा देन्गी

बबिता इस डर मे कि कही उसकी बुआ (रागिनी ) सवाल जवाब ना करने लगे और पहले ही वो रज्जो के हत्थे चढ चुकी थी वो रिस्क नही लेना चाहती और घर मे किसी के लिए भी चर्चा का विषय नही बनना चाहती थी ।

बबिता - नही बुआ को नही , क्या तुम

मलहम खोज दोगे मिल नही रहा है और मुझसे चला नही जा रहा है ।

राहुल ने जल्दी जल्दी कमरे मे खोजा मगर उसे ऐसा कुछ नही मिला तो वो भागता हुआ किचन मे आया और बर्फ के क्यूब निकाला । तभी उसकी नजर फ्रिज के उपर ही पड़ी एक लाल बाम की डिबिया और एक दर्द निवारक गोली के पैकेट मिल गयि वो खुश हुआ ।

उसने एक ट्रे लिया उसमे पानी रखा , एक साफ कपड़ा लिया और बर्फ कुछ क्यूब को कटोरी मे लेके उपर चला आया ।

कमरे मे दाखिल होते ही

"ये सब क्या है ", बबिता ने अचरज से पुछा ।

राहुल ने कुछ नही जवाब दिया और एक गिलास पानी के साथ दर्द की दवाई उसको देता हुआ - हम्म्म खाओ इसे

बबिता ने दर्द की गोली पानी से गटक कर गिलास वापस रखा

राहुल के पास बैठ कर - दिखाओ मुझे बर्फ लगा देता हु

बबिता - नही मै कर लूंगी थैंक्स

ये बोल कर बबिता ने जैसे ही ठंडे आइस के गोले छुए वो उसके हाथो से सरक कर फर्श पर मैले हो गये ।

बबिता - अरेह्ह उप्स गिर गया हिहिहिही

राहुल - हसो मत गीला होगा फर्श तो तुम्हे ही साफ करना पड़ेगा

बबिता ने राहुल को अभी भी भौहे ताने हुए ही देखा और वो पुरा सिरिअस नजर आ रहा था तो मन मे बड़बड़ाई- देखो तो कैसे मुह बनाये हुए है जी तो कर रहा है ये बर्फ इसके मुह पर रगड़ दू हुउह

बबिता खुद से बड़बड़ाती हुई जैसे ही दुसरी आईस क्यूब उठाई वो भी उसकी उंगलियो से सरक कर निचे गिर गयी ।

राहुल ने देखा अब आखिर के 2 ही क्यूब थे वो भी पिघल रहे थे जल्दी जल्दी

राहुल ने बबिता की ओर घुर के देखा और आइस क्यूब उठा कर - हटो और दिखाओ कहा है

बबिता तुनक कर मुह बनाती हुई हलके से अपना स्किर्ट थोड़ा हिचक मे लजाती हुई एक टांग पर घुटनो के उपर जांघो तक ले आई ।

राहुल ने बबिता की गोरी गुदाज मखमाली जांघो को देखा जिस्पे एक हल्का लाल निशान सा बना हुआ था और तभी उसकी नजर बबिता के जान्घो के बिच गयी , जहा दिख तो कुछ नही रहा था मगर उसकी उत्सुकता साफ झलक रही थी उन अधियारो ने रोशनी करने की

पहले बबिता ने इस चीज पर ध्यान नही दिया और राहुल ने हल्का आगे झुक कर घाव पर धीरे से फूंक मारकर हौले ने नजरे उठा कर एक नजर वाप्स से उसकी जांघो के बिच देखा तो उसे बबिता की नीली ब्लोमर कच्छी नजर आ गयी ।

उसने नजरे वापस से घाव पर किया और पिघलते बर्फ को उसके घुटने के उपर ही रख कर हल्का हल्का घुमाते हुए मुस्कुरा दिया





बबिता ने जैसे ही उसका मुस्कुराना देखा वो समझ गयी कि इसमे भी राहुल की कोई शरारत छिपी है और जब अगली बार राहुल ने दुबारा नजरे उठाइ वो समझ गयी , उसने झट से अपना स्किर्ट पकडते हुए - तु तुम आगे देखो , इधर नही !

राहुल ने बबिता की बात पर बिना कोई जवाब दिये बर्फ लगाते हुए सामने देखने लगा

उसकी नजरे बिना पलके झुकाये सामने देख रही थी और वही बबिता ने उसको देख कर मन मे सोचा - ये भले ही कमीना है लेकिन चलो इतनी शरफात तो है कि बोलने पर सामने देखने लगा

बबिता अभी ये सोच कर मुस्कुरा रही थी कि राहुल बोल पड़ा- निचे से स्किर्ट दबा लो नही तो गिला हो जायेगा ।

बबिता ने देखा कि राहुल ने ये बात बिना उसकी ओर देखे कही तो वो सोच मे पड़ गयि कि जब उसने मेरे ओर देखा नही तो कैसे इसे पता कि मैने स्किर्ट ढीला छोडा है ।

बबिता - तुम्हे कैसे पता कि गीला हो जायेगा,तुम तो इधर देख नही रहे

राहुल ने मुस्कुरा कर बबिता की ओर देखा और ठिक बिस्तर के सामने और राहुल के आगे आलमारी के सीसे की ओर इशारा किया

बबिता ने जैसे उधर देखा तो पाया कि आलमारी के सीसे मे तो उसकी जान्घे और भी ज्यादा और चुतडो तक दिख रही है ।

वही उसके बगल मे बैठा राहुल आईने मे उसे हाय कर रहा है

बबिता ने झट से अपनी स्किर्ट को निचे से उपर कर लिया और अपनी जान्घे छिपाती हुई - त तुम एक नम्बर के गंदे हो , तुम्हे शर्म नाही आती

राहुल हस कर - तुमही ने तो बोला कि सामने देखो हिहिहिही तो वही किया

बबिता अपने उपर लज्जित थी और उसे हसी भी आ रही थी , वो राहुल की चालाकी पर उसके बाल नोच लेना चाहती थी , मगर उसकी केयर और हैल्प से बन्ध गयी थी ।

बबिता बड़बड़ाती हुई राहुल पर भड़ास निकालती हुई - गंदे कही के , तुमसे अच्छा तो अरून है कितने अच्छे से पेश आता है मेरी बहन से , उसके साथ रहते हो कुछ तो मैनर सिख लेते

राहुल को उसका बड़बड़ाना भाया नही - हा तो तुम कौन सा अपनी बहन जैसी हो , जब भी बात करने जाओ फूट पड़ती हो ज्वालामुखी की तरह , सही नाम है तुम्हारा बबिता ,बड बड़ बड बड यार रुकती ही न्ही शुरु होने के बाद

बबिता राहुल की बात पर थोडा चुप थी

राहुल - अब लगाऊ मल्हम या जाऊ

बबिता - ह्म्म्ं लगा के जाओ

राहुल हसता हुआ उसकी ओर घुमा और रुमाल से उसके पैर पोछ कर साफ किया और बाम निकाल कर लगाते हुए - अब ठिक है , अभी एक दो घन्टे मे आराम हो जायेगा ।

राहुल उठा और ट्रे मे सारा गिरा पिघला बर्फ रखा और कपडे से फर्श पोछ कर कमरे से बाहर जाने लगा तो बबिता ने उसको रोका - सुनो !!

राहुल बिना उसकी ओर घुमे - हम्म बोलो

बबिता मुस्कुरा कर - थैन्क यू

राहुल मुस्कुराया और बिना कुछ बोले निकल गया

राहुल से कोई रिप्लाई ना पाकर तुन्की - हुउह अकड़ू कही का

जारी रहेगी
 
सभी महानुभाव का शुक्रिया

इतने प्यार और इन्तेजार के लिए

बीते महीने 31 को हमारे एक सीनियर रिटायर हुए तो उनकी जगह इसी हफते न्यू अधिकारी आये, जो वर्क प्रोसीजर की ऑडिट ले रहे थे , विभाग का काम था तो हफते भर का समय लग गया ।


कोसिस है आगे अपडेट मिलते रहेंगे

धन्यवाद आपका 😊
 
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