- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 35,517
अपडेट 191 ा
अमन के घर
रिन्की छत पर अपने बाल सुखा रही थी तौलिये से तभी पीछे से किसी के लोवर के उपर से उसके कूल्हो को दबोचा वो चिहुक कर आगे हुए
रिन्की - क्या भाभी आप हो
दुलारि - हम्म देखू तो छुट्की ननदिया मेरी बड़ी हेरोइन बन रही है
रिन्की - हम्म आप तो जैसे बिना नहाये बारात जाने हो ना
"नहा के जाऊ या ना जाऊ मगर तुम्हारी तरह झलकाते हुए तो नही जाऊंगी " , दुलारी ने रिन्की की टीशर्ट मे उभरे हुए निप्प्ल को देखते हुए बोली ।
रिन्की लाज मे हस कर घूम गयी ।
दुलारी ने उसको कन्धे पर धक्का देते हुए बोली - किसकी याद ये संतरे खोल के घूम रही हो ननद रानी
रिन्की तुन्की - है कोई , आप चाहो तो आप भी ऐसे घूमो मजा आयेगा हिहिहुही
दुलारी - हा हा सब समझ रही हु , ऐसे ही अभी अपने भैया को नहलाने जाओगी ना और उन्हे ललचवाओगी ना
रिन्की - भाभीईई भक्क आप बहुत गंदी है ,
दुलारी ने पीछे से हाथ आगे करके रिन्की की क्च्ची अमियां ह्थेली मे भर मसलती हुई बोली - ऐसे हिलाती हुई घुमोगी तो किसी की भी नियत खराब हो जायेगी मेरी लाडो उह्ह्ह
रिन्की दुलारी की बाहो मे कसमसाई- ऊहह भाभी छोड़ो नाआह्ह उम्म्ं सीईई
दुलारी रिन्की के संतरे की टिप मसलती हुई - ओहो देखो तो ये तो काफी बड़े हो गये है , एक बार हमे भी अपने आम चूसा दो रानिब
रिन्की झटके से दुलारी से अलग हुई और हसती हुई जीभ निकाल कर चिढाती हुई - येईई कुछ नही मिलेगा हिहिहिह
फिर रिन्की सरपट जीने से निचे भाग गयी और दुलारि हसते हुए बोली - आज तो तुझे दबोच कर ही दम लुन्गी रुक जा !!
राज के घर
"ओहो ऐसे करेंगे आप लोग तो सारा टाईम यूँ ही बहस मे ही निकल जायेगा " , बॉबी ने उपर के हाल मे शोर मचा रही महिलाओं को शान्त करती हुई बोली ।
बॉबी - लिसेन bride मेरी फ़र्स्ट प्रीओरिटी है और सबसे ज्यादा टाईम उसके पास ही लगेगा तो मै खुद उसका मेकअप करने वाली हूँ , बाकी आप सब लोग अलग अलग कमरों मे बैठ जाईये , भीड़ मे मेरा फोकस distract हो जाता है ।
बॉबी की चपड़चपड़ और मिक्स वाली अंग्रेजी सुनकर कुछ का मन सहमत हुआ तो कुछ को नही ।
फिर बॉबी ने सबका जायजा लिया तो पाया कि घर मे दुल्हन और उसकी मा के साथ रज्जो और शिला को छोड़ कर किसी को उसे समय देने की जरुरत नही थी , बाकी सबको उसकी असिस्टेंट हैंडल कर लेगी ।
फिर क्या सोनल के कमरे मे सोनल और रागिनी को रखा गया
वही रज्जो और शिला को अनुज के कमरे मे बैठाया गया
बाकी सबको बॉबी ने बाल्किनी की ओर अपनी असिस्टेंट रूबी के साथ भेज दिया ।
गीता बबिता को मेकओवर की जरुरत नही थी तो वो दोनो उपर की छत पर चले गये ।
छत पर पहुचते ही बबिता की नजर
निचे सड़क पर लड़को पर गयी जो शादी के लिए स्टाल लगवाने मे मदद कर रहे थे ।
अरुण बड़ी सादगी से फूलों की लरियां उठा उठा कर दे रहा था । जिसकी सादगी पर गीता मोहित हुई पड़ी
गीता - आह्ह यार ये लड़का कितना सीधा है उम्म्ंम्ं
बबिता खिझी - क्या सीधा ?? एक नम्बर का कमीना है ये हुउह
गिता चौकी - क्या मतलब , क्या बदतमिजि की अरुण ने तेरे साथ
बबिता चौकी - अरुण !! मै तो राहुल की बात ?? एक मिंट वहा अरुण कहा है वहा सिर्फ वो राहुल खड़ा है देखो कैसे उस बेचारे काम करने वाले को छेड़ रहा है ।
गीता बबिता की ओर एक कदम बढी और गरदन लफा कर देखा तो स्टाल पर एक खंभे की ओट मे राहुल भी खड़ा था जबकी दुसरी ओर अरुण खड़ा था ।
और बबिता गिता संजोग से ऐसे जगह पर खडी थी कि वहा से उन दोनो को केवल एक ही दिख रहा था ।
गीता को अरुण और बबिता को राहुल ।
गीता मुस्कुराई और फिर अपनी जगह पर आकर बबिता को अपनी ओर खिंच कर अरुण को दिखाया ।
इधर इनकी बाते चल रही थी कि निचे से अचानक से अरुण की नजर छत की बाल्किनी मे हो रही चहल पहल से स्ब्से उपर की छत पर रेलिंग से लग कर खड़ी हुई गीता बबिता पर भी गयी ।
अरुण को अपनी ओर देखता देख गीता मुस्कुरा कर अपने जुल्फो को कानों मे फ्साती हुई दुसरी ओर देखने लगी ।
अरुण ने राहुल का शर्ट खिंच कर उसे इशारे से छत पर देखने को कहा
और जैसे ही राहुल ने उपर रेलिंग की ओर देखा तो बबिता थी और उसने जैसे ही मुस्की लेते राहुल को देखा वो झनकी और तुनक कर मुह फेर लिया ।
गिता - क्या हुआ तुझे
बबिता - चल यहा से देख नही रही कैसे गरदन उठा कर घुर रहे है दोनो
गीता - घुर कहा रहे है अरे उसको देख इतना शर्मीला है कि नजरे उठा कर जी भर देखता ही नही ।
बबिता - हा उसको भी तो देख जिसकी पलके नही टपक रही है हुउह
गीता - यार बबिता शादी मे आये थोड़ी मस्ती कर ले ना , कौन सा हम बार बार मिल रहे है । यहा से जाने के बाद ना कौन किसे याद रखेगा
बबिता - हा लेकिन ये छिछोरे ही रह गये है अब
गीता हस कर - शादी मे सब छिछोरे ही मिलते है यार हिहिहिही
गिता की बात पर बबिता भी हस दी ।
बबिता को मुस्कुराता देख राहुल का दिल उछलने लगा और उसने इशारे अरुण को उपर चलने को बोला और दोनो घर मे आ गये ।
बबिता थोड़ा सहमी हुई - देखा इनको थोड़ा सा भाव दिया अब ये उपर आ रहे है , किसी ने देख लिया तो ??
गीता - अरे कुछ नही होगा , कौन वो लोग हमे खुली छत पर पकड लेंगे हिहिही
इनसब से अलग राज थोड़ा खाली था तो अपने नाना के साथ बैठा हुआ गप्पे हाक रहा था ।
उपर की महिलाओ को बाटने के बाद रंजू ने मेकअप करवाने से मना कर दिया था ये बोल कर कि उसे इस उम्र मे जरुरत नही ।
वो सीढियों ने निचे आ रही थी ।
जीने पर पायल और चुडीयों की आहट से दोनो नाना और नाती का ध्यान खटका ।
राज मुस्कुरा कर अपने नाना से बुदबदाया - वैसे ताई भी आपके हिसाब से सही ही रहेंगी क्यूँ?
बनवारी- तु फिर शुरु हो गया , क्यू पीछे पड़ा है भाई
राज - अरे कल से आप ऐसे ही सूखे सूखे हो हिहिही तो सोचा
बनवारी - तो क्या तेरी ताई इसके लिए मान जायेगी
राज - ऐसा ही कुछ समझो हिहिही
बनवारी ने उपर से निचे तक रंजू को निहारा और उसकी गुदाज चर्बीदार बदन और मोटी गाड़ देख कर उसका लन्ड फड़क उथा ।
इससे पहले बनवारी अपनी प्रतिक्रिया देता रंजू ने उसे देख कर नमस्ते किया
बनवारी- और बैठो
रंजू - जी बाऊजी
राज हस कर - बाऊजी !! क्या ताई , नाना जी को देवर कहो अभी तो ये जवाँ है
रंजू हस कर -चुप बदमाश कही का , ऐसा बोलते है
बनवारी ठहाका लेते हुए राज का कन्धा थपथपाया - अरे मेरा नाती बहुत बिगड़ गया है
रंजू ने भी लाज भरी मुस्कुराहट मे राज को आंखे मारते देखा तो हसी - हा कुछ ज्यादा ही शैतानीयां बढ गयी है अब तो
राज - अच्छा और आपकी शैतानियां , वो बताऊ नानू को उम्म्ं बोलो
रंजू चौकी कि कही राज उसकी खीरे वाली बात तो नही ना कह देगा - क्या है मेरी शैतानी बोल
राज हस कर - पता है नानू आज ताई घर से खिरा लेके आई थी चुपके से हिहिहिही
रंजू ने आंखे चढाकर उसे चुप रहने को बोला तो बनवारी ने हस बोला - अरे बताने दो ना ,
बनवारी- अच्छा फिर क्या बेटा
राज हस कर - अरे वो खिरा रास्ते मे ही गिर गया हाहाहाहा
बनवारी ठहाका लगाता हुआ - फिर तु लाके दे देता खिरा बजार से लाके , अगर तेरी ताई को खीरे इतने पसंद है तो ।
राज इशारे ने भौहे उचका कर मुस्कुराता हुआ - क्यू ताई चाहिये क्या खीरा, लाऊ बगल से
रंजू लाज से मुस्कुरा कर - धत्त बदमाश , चुप कर अब
"और बताईये बाऊजी आप कैसे है " , रन्जू ने बनवारी की ओर रुख किया
बनवारी जो उसके दुधारू मोटे थन जैसी चुचियो की लकिरे देख रहा था वो चौक कर - आह्ह मै , मै ठिक हु तुम बताओ
रंजू समझ गयी कि उसका पल्लू उसके रसदार भारी जोबनो को छिपाने मे नाकाम हो सरक चुका है तो वो मारे लाज मे उसको उठाती हुई - जी मै भी ठिक हु ,
"मै जरा आती हूं " , ये बोलकर रंजू अपनी साडी सही करती हुई उठी और गेस्टरूम मे चली गयी ।
फिर वही से कुछ ही मिंट मे उसने राज को आवाज दी ।
राज उठ कमरे मे गया ।
रंजू - शैतान कही का , क्या बोले जा रहा था बाऊजी के सामने
राज हस कर - अरे मै तो आप लोगो का मेल जोल बढा रहा था हिहिहिही
रंजू - बदमाश कही का , वो देवर लगेंगे मेरे अब
राज हसता हुआ - अरे सईया ही बना लो आज के खीरे का टेन्सन खतम हिहिहिही
रंजू राज के कान ऐठती हुई - तु बहुत बिगड़ गया है , चला ये बता ये बाथरूम कहा है ।
राज - जाओ मेरे कमरे मे है
रंजू राज बाहर आते है और तबतक बनवारी भी हाल उठ कर कही जा चुका होता है ।
राज इशारे से बोलकर अपना कमरा दिखाता है और खुद भी बाहर निकल जाता है ।
इधर रंजू दरवाजा धकेल कर जैसे ही घुस्ती है सामने का नजारा देख कर मारे लाज के वो मुह फेर लेती है ।
और सामने कोई और नही राज के नाना ही थे जो अभी अभी रंजू के भरे जोबन और उसकी थिरकती गाड़ देख कर उत्तेजित ही गये थे , जिससे धोती मे तम्बू बनने से उनकी धोती बिगड़ गयी थी और वो वही सही करने के लिए राज के कमरे मे आये ।

कुर्ते को सामने से उपर खिंच कर उसको अपनी ठुडी मे दबाए हुए बनवारी निचे से पुरा नन्गे धोती की तह बना रहे थे और उनका मोटा काला खिरे जैसा मुसल पूरा तना हुआ खड़ा था ।
रंजू - माफ किजियेगा बाऊजी वो मै आह्ह
इतना बोलकर रंजू जैसे ही दरवाजे की ओर घूमी बनवारी ने फौरन कुर्ता निचे कर धोती को तौलिये के जैसे लपेटता हुआ - रुको जमुना बहू
रंजू के पाव थम गये और उसका जिस्म काप रहा था आंखे बंद करने पर भी बनवारी के काले लन्ड की छवि उसके जहन मे छप गयी थी ।
बनवारी- तुम यहा अचानक कैसे कुछ काम था
रंजू थरथराती हुई - जी नही बाऊजी वो मै , मै , मै जाती हु
बनवारी- क्या हुआ , कोई बात है क्या ? बताओ तो
रंजू तेज धडकते दिल के साथ - जी मै बाथरूम खोज रही थी और मुझे नही पता था कि आप भी यहा ऐसे
बनवारी- अच्छा ठिक है जाओ पहले हो लो तुम , जाओ जाओ
रन्जू - नही बाऊजी ठिक है
बनवारी- जमुना बहू मै बोल रहा हु ना तुम जाओ , मुझे बस ये धोती बान्धनी है
रंजू को पेसाब का प्रेसर था और वो बहुत ठहर नही सकती थी
तो उसने घूम कर बिना बनवारी को देखे सिर्र फर्श निहारती हुई बाथरूम मे चली गयी ।
बाथरूम मे जाते ही उसने अपनी चढती सासे थामी और बैठ कर पेसाब करने लगी ।
इधर बनवारी कुछ देर तक रुका मगर उसका लन्ड बैठने का नाम नही ले रहा था , ऐसी हालत मे वो धोती बिना मदद के नही बाध सकता था ।
कुछ देर मे रंजू आई और उसने नजरे नीची किये कमरे से बाहर जाने लगी तो बनवारी- अच्छा जमुना बहू जरा बाहर राज होगा उसे भेजना काम है थोड़ा ।
रंजू ने हामी भरी और निकल गयी , मगर ना हाल मे ना ही घर के हाते मे और ना ही बाहर उसे राज दिखा तो वो वापस कमरे के दरवाजे पर आई और भिड़का दरवाजा खटखटा कर बोली - बाऊजी राज नही दिखा बाहर
बनवारी- अच्छा देखो कोई और बच्चे होगें किसी को बुला दो
रंजू ने अच्छे से देखा था कि बाहर कोई नही था , क्योकि राहुल और अनुज तो छत की ओर जा चुके थे ।
रंजू - जी बाहर कोई बच्चे नही है कुछ काम था क्या बाऊजी बोलिए मै मदद कर दूँगी ।
रंजू से मदद का सुनते ही बनवारी का लन्ड और फड़का - न नही जामुन बहू , तुम नही कर पाओगी
रंजू को लगा कि बनवारी को सच मे जरुरत है कोई तो वो दरवाजा खोलकर कमरे मे आ गयी और सामने फिर वही नजरा ।
कुर्ता उपर और धोती की तह लगाई जा रही थी ।
रंजू ने झटके से दरवाजा भिड़का दिया ।
बनवारी ने हाथ मे ली धोती दिखा कर इसको तह देना है पहनने के , ये मेरी बहू ने बाजार ने नयी धोती मग्वाई थी पोलीसटर कपडा है इस्का तह नही लग रहा है । अगर तुम मदद कर सको तो ।
रंजू नजरे नीची किये हुए - जी बाऊजी लाइये
रंजू ने हाथ मे धोती ली और कनअखियो से फ़नकारते लन्ड देखा और फिर धोती को हाथ घुमा कर पीछे से आगे ले आकर एक गाठ दी ।
फिर आगे का तह लगाती हुई जैसे ही उसने धोती को निचे से पीछे की तरफ ले जाने लगी , धोती छोटी पड़ गयी ।
कारण आगे की तरफ बनवारी का मुसल लन्ड धोती मे टेन्ट बना कर फिर तह बिगाड़ चुका था ।
रंजू थोडा मुस्कुराइ और नजरे फेरते हुए बोली - बाऊजी आप पहले इस्को सही कर लिजिए , या फिर कोई जांघिया डाल लिजिए
बनवारी भी थोडा असहज होता हुआ - वो क्या है कि मै भीतर जांघिया नही डालता और बाहर वो अचानक से !!
रंजू समझ गयी कि ये सब उसकी कर्मजली सरकति सिफान साड़ी के पल्लू का नतिजा है जिसने बनवारी के अरमान जगा दिये थे ।
रंजू लजाती हुई मुस्कुराई - आप थोड़ा रुक जाईये अभी बैठ जायेगा फिर मै पहना देती हु ।
बनवारी ने रंजू के आंखो की चमक को पढा और राज की बाते याद आई तो उसे लगा क्यू ना प्रयास किया जाये ।
बनवारी ने आगे बढ़कर रन्जू के करीब हुआ और बोला - जमुना बहु अगर बुरा ना मानो तो कुछ कहूँ
रंजू नजरे झुकाये - जी बाऊजी कहिये
बनवारी हिचक कर - वो दरअसल मेरा ये हाल बाहर तुम्हे देख कर ही हुआ , मै सच कह रहा हु । सालों बाद तुम्हे ऐसे देख कर मेरी तन्हाई ने मुझे झकझोर दिया । तुमने मेरी बीवी रूपा की छवि है ।
रंजू काप्ते हुए लहजे मे - ये आआप क्या बोल रहे बाऊजी , मै समझ नही पा रही हु
बनवारी उसको पीछे से उसकी कलाई पर हाथ घुमा कर उसको पकडता हुआ - तुम सब समझ रही हो रंजू उह्ह्ह्ह्ह उम्म्ंम
बनवारी के मुह से अपना नाम सुनकर रंजू सिहर उठी और ऊसके गथिले सुष्क हाथो का स्पर्श से उसके जिस्म का रोम रोम खड़ा हो गया ।
रंजू - उम्म्ंम बाऊजी नहीईई ये गलत आह्ह्ह सीईई रुक जाईयेह्ह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं सीईई ऊहह
बनवारी ने रन्जू की भारी भारी चुचिया पीछे से हाथो मे भर कर मसलने लगा - ऊहह रंजू क्या जोबन है तेरे ऊहह इस उम्र मे भी रस से भरे है उम्म्ंम
रंजू बनवारी की बाहो मे सिस्क्कियां लेने लगी और वही बनवारी का मोटा लन्ड उसकी गाड़ मे ठोकर मारने लगा ।
रंजू - उम्म्ं बाऊजी कोई आ जायेगाह्ह सीईई उम्म्ंम
बनवारी रन्जू का हाथ पकड पर अपने मुसल पर रखते हुए -अह्ह्ह रंजू बस थोडा ही समय लगेगा ओह्ह्ह कितने मुलायम हाथ है अह्ह्ह एक बार चुस लो ना इसे उम्म्ंम
रंजू चौकी - क्याह्ह नहीईई मै न्हीईई आप ऐसे ही वो कर लो
बनवारी रंजू के कड़े रुख से थोडा हिचका कही ये रूठ कर निकल ना जाये नही तो हाथ आया मौका भी निकल जायेगा
बनवारी ने उसे आगे झुकाते हुए उसका साडी पेतिकोट सहित उपर किया और सामने रन्जू का साँवला भोस्डा रसाया हुआ साफ साफ दिखने लगा
बनवारी ने रंजू को वही पास मे पलंग के सहारे झुकाये रखा और उसकी साडी को कमर तक उठा दिया ।
भरी गुदाज फैली हुई गाड़ और हल्के बालों वाली मोटी सावली फान्को वाली बुर को देख बनवारी ने थुक से अपना सुपाडा चिकना किया और रन्जू की बजबजाई के फाको ने दबाब बनाते हुए सट्ट से लन्ड को भेद दिया
रन्जू को मोटा तपता लन्ड भितर पाकर आन्खे उलटने लगि वही बुर की चिन्काई से बनवारी का लन्ड जड़ तक गया
बनवारी ने कुछ छड़ रंजू की तपती चुत की आंच मे अपना लन्ड सेका और फिर एक एक करके कस कस के लन्ड पेलने लगा

रंजू कोहनी बिस्तर पर रख कर हाथो से मुह ब्न्द किये सिस्कने लगी
उसे समझ नही आ रहा था कि ना जाने कैसे वो बहक गयि ,,शायद हफ्तो से लन्ड की तडप ने उस्के जज्बातो को कम्जोर कर दिया था और वो बेबस ये हालत आ चुकी थी
बनवारी उसी तरह रन्जू को झुकाए कस कस के झटके दे रहा था और उस्का लन्ड पुरा अंदर बाहर हो रहा था
सुखा लन्ड रन्जू की गीली चुत मे भी लय बना कर चल रहा था
बनवारी- ओह्ह रंजू तेरी बुर बहुत गर्म है उह्ह्ह क्या मस्त गाड़ है तेरीईई उह्ह्ह
रन्जू - अह्ह्ह सीई बाऊजी मारो मत उह्ह्ह जल्दी से कर लो बस
बनवारी रंजू के खीझने पर मुस्कुराया और उसने एक बार और कस के रन्जू की गाड़ को चाटे से लाल करते हुए बोला - उह्ह्ह मेरी जान समय की कमी है नही तो ऐसी गाड़ मै कभी नही छोड़ता लेह्ह्ह और लेह्ह्ह ऊहह क्या गर्म चुत ह तेरी ओह्ह्ह ओह्ह्ह
रंजू - उम्म्ंम्ं बाऊजी धीरे अह्ह्ह अह्ह्ह सीईई दर्द हो रहा है पैर मे उह्ह्ह धीरे ओह्ह्ह्माह्ह्ह्ह उम्म्ंम सीईई
बनवारी लन्ड की नसो को ताने हुए कस कस कर झटके देते हुए रन्जू को पेल रहा था - बस्स्स रन्जू मेरी जाअन्ंंं उम्म्ंम्ं मेरा हो जायेवा ओह्ह्ह ओह्ह्ह आअह्ह्ह ऐसे ही ओह्ह्ह ओह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं आ रहा है ओह्ह्ह्ह उह्ह्ह
अगले कुछ ही झटको ने बनवारी रंजू की बुर मे झड़ने लगा और हाफने लगा
रंजू तुन्क कर खडी हुई - अन्दर क्यू डाला बाहर नही निकाल सकते थे आप हुउह्ह
बनवारी हस कर - अरे कौन सा तु इस उम्र मे पेट से हो जायेगी हाहाहाहा
इसके बाद बनवारी ने खुद से ही अपनी धोती पहनने का ट्राई किया और वो एकदम आसानी से सेट हो गया - अरे ये तो आराम से तह लग गयी इसकी देखो
रन्जू ने मुह ब्नाया और बोली - ये सब आपका नाटक था और आपने मेरा फाय्दा लिया ।
"तो तुम्हे कौन सा नुकसान हुआ हाहाहाहा " , बनवारी हस कर कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर आता हुआ बोला ।
मगर जैसे ही वो कमरे के बाहर निकला उसी समय रंगीलाल किसी काम से घर मे आया था और वो अपने कमरे मे जा रहा था ।
जैसे ही उसकी नजर अपने ससुर पर गयी उसने भीतर राज के कमरे मे भी देखा जहा रंजू अपनी साडी सेट कर रही थी ।
रंगी ने असमंजस भरे भाव मे अपने ससुर की ओर देखा जो पूरी तरह से शर्मिंदा हुआ खड़ा था ।
रंगी - बाऊजी आप ऐसे यहा ?
बनवारी नजरे फेरता हुआ - हा वो मै !!
रंगी - वो सब ठिक है लेकिन शादी का घर है बाऊजी और आप , अगर मेरी जगह कोई और होता तो ?
बनवारी- माफ करना दमाद बाबू और छोटी ( रागिनी ) से मत कहियेगा मै हाथ जोडता हु
रंगी लपककर अपने ससुर का हाथ थामता हुआ - क्या कर रहे है बाऊजी आप ये सब कोई देख लेगा !! हम बाद मे बात करेंन्गे इसपे मुझे काम है कुछ
रंगी दरवाजा खोलकर अपने कमरे मे चला जाता है और बनवारी थोडा लज्जित होकर वापस एकान्त के लिए राज के कमरे मे चला जाता है वही रंजू जो इनसब से पहले ही खुश नही थी वो भी बनवारी ने नाराज हुई बिना उसकी ओर देखे छत पर चली जाती है
जारी रहेगी
अमन के घर
रिन्की छत पर अपने बाल सुखा रही थी तौलिये से तभी पीछे से किसी के लोवर के उपर से उसके कूल्हो को दबोचा वो चिहुक कर आगे हुए
रिन्की - क्या भाभी आप हो
दुलारि - हम्म देखू तो छुट्की ननदिया मेरी बड़ी हेरोइन बन रही है
रिन्की - हम्म आप तो जैसे बिना नहाये बारात जाने हो ना
"नहा के जाऊ या ना जाऊ मगर तुम्हारी तरह झलकाते हुए तो नही जाऊंगी " , दुलारी ने रिन्की की टीशर्ट मे उभरे हुए निप्प्ल को देखते हुए बोली ।
रिन्की लाज मे हस कर घूम गयी ।
दुलारी ने उसको कन्धे पर धक्का देते हुए बोली - किसकी याद ये संतरे खोल के घूम रही हो ननद रानी
रिन्की तुन्की - है कोई , आप चाहो तो आप भी ऐसे घूमो मजा आयेगा हिहिहुही
दुलारी - हा हा सब समझ रही हु , ऐसे ही अभी अपने भैया को नहलाने जाओगी ना और उन्हे ललचवाओगी ना
रिन्की - भाभीईई भक्क आप बहुत गंदी है ,
दुलारी ने पीछे से हाथ आगे करके रिन्की की क्च्ची अमियां ह्थेली मे भर मसलती हुई बोली - ऐसे हिलाती हुई घुमोगी तो किसी की भी नियत खराब हो जायेगी मेरी लाडो उह्ह्ह
रिन्की दुलारी की बाहो मे कसमसाई- ऊहह भाभी छोड़ो नाआह्ह उम्म्ं सीईई
दुलारी रिन्की के संतरे की टिप मसलती हुई - ओहो देखो तो ये तो काफी बड़े हो गये है , एक बार हमे भी अपने आम चूसा दो रानिब
रिन्की झटके से दुलारी से अलग हुई और हसती हुई जीभ निकाल कर चिढाती हुई - येईई कुछ नही मिलेगा हिहिहिह
फिर रिन्की सरपट जीने से निचे भाग गयी और दुलारि हसते हुए बोली - आज तो तुझे दबोच कर ही दम लुन्गी रुक जा !!
राज के घर
"ओहो ऐसे करेंगे आप लोग तो सारा टाईम यूँ ही बहस मे ही निकल जायेगा " , बॉबी ने उपर के हाल मे शोर मचा रही महिलाओं को शान्त करती हुई बोली ।
बॉबी - लिसेन bride मेरी फ़र्स्ट प्रीओरिटी है और सबसे ज्यादा टाईम उसके पास ही लगेगा तो मै खुद उसका मेकअप करने वाली हूँ , बाकी आप सब लोग अलग अलग कमरों मे बैठ जाईये , भीड़ मे मेरा फोकस distract हो जाता है ।
बॉबी की चपड़चपड़ और मिक्स वाली अंग्रेजी सुनकर कुछ का मन सहमत हुआ तो कुछ को नही ।
फिर बॉबी ने सबका जायजा लिया तो पाया कि घर मे दुल्हन और उसकी मा के साथ रज्जो और शिला को छोड़ कर किसी को उसे समय देने की जरुरत नही थी , बाकी सबको उसकी असिस्टेंट हैंडल कर लेगी ।
फिर क्या सोनल के कमरे मे सोनल और रागिनी को रखा गया
वही रज्जो और शिला को अनुज के कमरे मे बैठाया गया
बाकी सबको बॉबी ने बाल्किनी की ओर अपनी असिस्टेंट रूबी के साथ भेज दिया ।
गीता बबिता को मेकओवर की जरुरत नही थी तो वो दोनो उपर की छत पर चले गये ।
छत पर पहुचते ही बबिता की नजर
निचे सड़क पर लड़को पर गयी जो शादी के लिए स्टाल लगवाने मे मदद कर रहे थे ।
अरुण बड़ी सादगी से फूलों की लरियां उठा उठा कर दे रहा था । जिसकी सादगी पर गीता मोहित हुई पड़ी
गीता - आह्ह यार ये लड़का कितना सीधा है उम्म्ंम्ं
बबिता खिझी - क्या सीधा ?? एक नम्बर का कमीना है ये हुउह
गिता चौकी - क्या मतलब , क्या बदतमिजि की अरुण ने तेरे साथ
बबिता चौकी - अरुण !! मै तो राहुल की बात ?? एक मिंट वहा अरुण कहा है वहा सिर्फ वो राहुल खड़ा है देखो कैसे उस बेचारे काम करने वाले को छेड़ रहा है ।
गीता बबिता की ओर एक कदम बढी और गरदन लफा कर देखा तो स्टाल पर एक खंभे की ओट मे राहुल भी खड़ा था जबकी दुसरी ओर अरुण खड़ा था ।
और बबिता गिता संजोग से ऐसे जगह पर खडी थी कि वहा से उन दोनो को केवल एक ही दिख रहा था ।
गीता को अरुण और बबिता को राहुल ।
गीता मुस्कुराई और फिर अपनी जगह पर आकर बबिता को अपनी ओर खिंच कर अरुण को दिखाया ।
इधर इनकी बाते चल रही थी कि निचे से अचानक से अरुण की नजर छत की बाल्किनी मे हो रही चहल पहल से स्ब्से उपर की छत पर रेलिंग से लग कर खड़ी हुई गीता बबिता पर भी गयी ।
अरुण को अपनी ओर देखता देख गीता मुस्कुरा कर अपने जुल्फो को कानों मे फ्साती हुई दुसरी ओर देखने लगी ।
अरुण ने राहुल का शर्ट खिंच कर उसे इशारे से छत पर देखने को कहा
और जैसे ही राहुल ने उपर रेलिंग की ओर देखा तो बबिता थी और उसने जैसे ही मुस्की लेते राहुल को देखा वो झनकी और तुनक कर मुह फेर लिया ।
गिता - क्या हुआ तुझे
बबिता - चल यहा से देख नही रही कैसे गरदन उठा कर घुर रहे है दोनो
गीता - घुर कहा रहे है अरे उसको देख इतना शर्मीला है कि नजरे उठा कर जी भर देखता ही नही ।
बबिता - हा उसको भी तो देख जिसकी पलके नही टपक रही है हुउह
गीता - यार बबिता शादी मे आये थोड़ी मस्ती कर ले ना , कौन सा हम बार बार मिल रहे है । यहा से जाने के बाद ना कौन किसे याद रखेगा
बबिता - हा लेकिन ये छिछोरे ही रह गये है अब
गीता हस कर - शादी मे सब छिछोरे ही मिलते है यार हिहिहिही
गिता की बात पर बबिता भी हस दी ।
बबिता को मुस्कुराता देख राहुल का दिल उछलने लगा और उसने इशारे अरुण को उपर चलने को बोला और दोनो घर मे आ गये ।
बबिता थोड़ा सहमी हुई - देखा इनको थोड़ा सा भाव दिया अब ये उपर आ रहे है , किसी ने देख लिया तो ??
गीता - अरे कुछ नही होगा , कौन वो लोग हमे खुली छत पर पकड लेंगे हिहिही
इनसब से अलग राज थोड़ा खाली था तो अपने नाना के साथ बैठा हुआ गप्पे हाक रहा था ।
उपर की महिलाओ को बाटने के बाद रंजू ने मेकअप करवाने से मना कर दिया था ये बोल कर कि उसे इस उम्र मे जरुरत नही ।
वो सीढियों ने निचे आ रही थी ।
जीने पर पायल और चुडीयों की आहट से दोनो नाना और नाती का ध्यान खटका ।
राज मुस्कुरा कर अपने नाना से बुदबदाया - वैसे ताई भी आपके हिसाब से सही ही रहेंगी क्यूँ?
बनवारी- तु फिर शुरु हो गया , क्यू पीछे पड़ा है भाई
राज - अरे कल से आप ऐसे ही सूखे सूखे हो हिहिही तो सोचा
बनवारी - तो क्या तेरी ताई इसके लिए मान जायेगी
राज - ऐसा ही कुछ समझो हिहिही
बनवारी ने उपर से निचे तक रंजू को निहारा और उसकी गुदाज चर्बीदार बदन और मोटी गाड़ देख कर उसका लन्ड फड़क उथा ।
इससे पहले बनवारी अपनी प्रतिक्रिया देता रंजू ने उसे देख कर नमस्ते किया
बनवारी- और बैठो
रंजू - जी बाऊजी
राज हस कर - बाऊजी !! क्या ताई , नाना जी को देवर कहो अभी तो ये जवाँ है
रंजू हस कर -चुप बदमाश कही का , ऐसा बोलते है
बनवारी ठहाका लेते हुए राज का कन्धा थपथपाया - अरे मेरा नाती बहुत बिगड़ गया है
रंजू ने भी लाज भरी मुस्कुराहट मे राज को आंखे मारते देखा तो हसी - हा कुछ ज्यादा ही शैतानीयां बढ गयी है अब तो
राज - अच्छा और आपकी शैतानियां , वो बताऊ नानू को उम्म्ं बोलो
रंजू चौकी कि कही राज उसकी खीरे वाली बात तो नही ना कह देगा - क्या है मेरी शैतानी बोल
राज हस कर - पता है नानू आज ताई घर से खिरा लेके आई थी चुपके से हिहिहिही
रंजू ने आंखे चढाकर उसे चुप रहने को बोला तो बनवारी ने हस बोला - अरे बताने दो ना ,
बनवारी- अच्छा फिर क्या बेटा
राज हस कर - अरे वो खिरा रास्ते मे ही गिर गया हाहाहाहा
बनवारी ठहाका लगाता हुआ - फिर तु लाके दे देता खिरा बजार से लाके , अगर तेरी ताई को खीरे इतने पसंद है तो ।
राज इशारे ने भौहे उचका कर मुस्कुराता हुआ - क्यू ताई चाहिये क्या खीरा, लाऊ बगल से
रंजू लाज से मुस्कुरा कर - धत्त बदमाश , चुप कर अब
"और बताईये बाऊजी आप कैसे है " , रन्जू ने बनवारी की ओर रुख किया
बनवारी जो उसके दुधारू मोटे थन जैसी चुचियो की लकिरे देख रहा था वो चौक कर - आह्ह मै , मै ठिक हु तुम बताओ
रंजू समझ गयी कि उसका पल्लू उसके रसदार भारी जोबनो को छिपाने मे नाकाम हो सरक चुका है तो वो मारे लाज मे उसको उठाती हुई - जी मै भी ठिक हु ,
"मै जरा आती हूं " , ये बोलकर रंजू अपनी साडी सही करती हुई उठी और गेस्टरूम मे चली गयी ।
फिर वही से कुछ ही मिंट मे उसने राज को आवाज दी ।
राज उठ कमरे मे गया ।
रंजू - शैतान कही का , क्या बोले जा रहा था बाऊजी के सामने
राज हस कर - अरे मै तो आप लोगो का मेल जोल बढा रहा था हिहिहिही
रंजू - बदमाश कही का , वो देवर लगेंगे मेरे अब
राज हसता हुआ - अरे सईया ही बना लो आज के खीरे का टेन्सन खतम हिहिहिही
रंजू राज के कान ऐठती हुई - तु बहुत बिगड़ गया है , चला ये बता ये बाथरूम कहा है ।
राज - जाओ मेरे कमरे मे है
रंजू राज बाहर आते है और तबतक बनवारी भी हाल उठ कर कही जा चुका होता है ।
राज इशारे से बोलकर अपना कमरा दिखाता है और खुद भी बाहर निकल जाता है ।
इधर रंजू दरवाजा धकेल कर जैसे ही घुस्ती है सामने का नजारा देख कर मारे लाज के वो मुह फेर लेती है ।
और सामने कोई और नही राज के नाना ही थे जो अभी अभी रंजू के भरे जोबन और उसकी थिरकती गाड़ देख कर उत्तेजित ही गये थे , जिससे धोती मे तम्बू बनने से उनकी धोती बिगड़ गयी थी और वो वही सही करने के लिए राज के कमरे मे आये ।

कुर्ते को सामने से उपर खिंच कर उसको अपनी ठुडी मे दबाए हुए बनवारी निचे से पुरा नन्गे धोती की तह बना रहे थे और उनका मोटा काला खिरे जैसा मुसल पूरा तना हुआ खड़ा था ।
रंजू - माफ किजियेगा बाऊजी वो मै आह्ह
इतना बोलकर रंजू जैसे ही दरवाजे की ओर घूमी बनवारी ने फौरन कुर्ता निचे कर धोती को तौलिये के जैसे लपेटता हुआ - रुको जमुना बहू
रंजू के पाव थम गये और उसका जिस्म काप रहा था आंखे बंद करने पर भी बनवारी के काले लन्ड की छवि उसके जहन मे छप गयी थी ।
बनवारी- तुम यहा अचानक कैसे कुछ काम था
रंजू थरथराती हुई - जी नही बाऊजी वो मै , मै , मै जाती हु
बनवारी- क्या हुआ , कोई बात है क्या ? बताओ तो
रंजू तेज धडकते दिल के साथ - जी मै बाथरूम खोज रही थी और मुझे नही पता था कि आप भी यहा ऐसे
बनवारी- अच्छा ठिक है जाओ पहले हो लो तुम , जाओ जाओ
रन्जू - नही बाऊजी ठिक है
बनवारी- जमुना बहू मै बोल रहा हु ना तुम जाओ , मुझे बस ये धोती बान्धनी है
रंजू को पेसाब का प्रेसर था और वो बहुत ठहर नही सकती थी
तो उसने घूम कर बिना बनवारी को देखे सिर्र फर्श निहारती हुई बाथरूम मे चली गयी ।
बाथरूम मे जाते ही उसने अपनी चढती सासे थामी और बैठ कर पेसाब करने लगी ।
इधर बनवारी कुछ देर तक रुका मगर उसका लन्ड बैठने का नाम नही ले रहा था , ऐसी हालत मे वो धोती बिना मदद के नही बाध सकता था ।
कुछ देर मे रंजू आई और उसने नजरे नीची किये कमरे से बाहर जाने लगी तो बनवारी- अच्छा जमुना बहू जरा बाहर राज होगा उसे भेजना काम है थोड़ा ।
रंजू ने हामी भरी और निकल गयी , मगर ना हाल मे ना ही घर के हाते मे और ना ही बाहर उसे राज दिखा तो वो वापस कमरे के दरवाजे पर आई और भिड़का दरवाजा खटखटा कर बोली - बाऊजी राज नही दिखा बाहर
बनवारी- अच्छा देखो कोई और बच्चे होगें किसी को बुला दो
रंजू ने अच्छे से देखा था कि बाहर कोई नही था , क्योकि राहुल और अनुज तो छत की ओर जा चुके थे ।
रंजू - जी बाहर कोई बच्चे नही है कुछ काम था क्या बाऊजी बोलिए मै मदद कर दूँगी ।
रंजू से मदद का सुनते ही बनवारी का लन्ड और फड़का - न नही जामुन बहू , तुम नही कर पाओगी
रंजू को लगा कि बनवारी को सच मे जरुरत है कोई तो वो दरवाजा खोलकर कमरे मे आ गयी और सामने फिर वही नजरा ।
कुर्ता उपर और धोती की तह लगाई जा रही थी ।
रंजू ने झटके से दरवाजा भिड़का दिया ।
बनवारी ने हाथ मे ली धोती दिखा कर इसको तह देना है पहनने के , ये मेरी बहू ने बाजार ने नयी धोती मग्वाई थी पोलीसटर कपडा है इस्का तह नही लग रहा है । अगर तुम मदद कर सको तो ।
रंजू नजरे नीची किये हुए - जी बाऊजी लाइये
रंजू ने हाथ मे धोती ली और कनअखियो से फ़नकारते लन्ड देखा और फिर धोती को हाथ घुमा कर पीछे से आगे ले आकर एक गाठ दी ।
फिर आगे का तह लगाती हुई जैसे ही उसने धोती को निचे से पीछे की तरफ ले जाने लगी , धोती छोटी पड़ गयी ।
कारण आगे की तरफ बनवारी का मुसल लन्ड धोती मे टेन्ट बना कर फिर तह बिगाड़ चुका था ।
रंजू थोडा मुस्कुराइ और नजरे फेरते हुए बोली - बाऊजी आप पहले इस्को सही कर लिजिए , या फिर कोई जांघिया डाल लिजिए
बनवारी भी थोडा असहज होता हुआ - वो क्या है कि मै भीतर जांघिया नही डालता और बाहर वो अचानक से !!
रंजू समझ गयी कि ये सब उसकी कर्मजली सरकति सिफान साड़ी के पल्लू का नतिजा है जिसने बनवारी के अरमान जगा दिये थे ।
रंजू लजाती हुई मुस्कुराई - आप थोड़ा रुक जाईये अभी बैठ जायेगा फिर मै पहना देती हु ।
बनवारी ने रंजू के आंखो की चमक को पढा और राज की बाते याद आई तो उसे लगा क्यू ना प्रयास किया जाये ।
बनवारी ने आगे बढ़कर रन्जू के करीब हुआ और बोला - जमुना बहु अगर बुरा ना मानो तो कुछ कहूँ
रंजू नजरे झुकाये - जी बाऊजी कहिये
बनवारी हिचक कर - वो दरअसल मेरा ये हाल बाहर तुम्हे देख कर ही हुआ , मै सच कह रहा हु । सालों बाद तुम्हे ऐसे देख कर मेरी तन्हाई ने मुझे झकझोर दिया । तुमने मेरी बीवी रूपा की छवि है ।
रंजू काप्ते हुए लहजे मे - ये आआप क्या बोल रहे बाऊजी , मै समझ नही पा रही हु
बनवारी उसको पीछे से उसकी कलाई पर हाथ घुमा कर उसको पकडता हुआ - तुम सब समझ रही हो रंजू उह्ह्ह्ह्ह उम्म्ंम
बनवारी के मुह से अपना नाम सुनकर रंजू सिहर उठी और ऊसके गथिले सुष्क हाथो का स्पर्श से उसके जिस्म का रोम रोम खड़ा हो गया ।
रंजू - उम्म्ंम बाऊजी नहीईई ये गलत आह्ह्ह सीईई रुक जाईयेह्ह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं सीईई ऊहह
बनवारी ने रन्जू की भारी भारी चुचिया पीछे से हाथो मे भर कर मसलने लगा - ऊहह रंजू क्या जोबन है तेरे ऊहह इस उम्र मे भी रस से भरे है उम्म्ंम
रंजू बनवारी की बाहो मे सिस्क्कियां लेने लगी और वही बनवारी का मोटा लन्ड उसकी गाड़ मे ठोकर मारने लगा ।
रंजू - उम्म्ं बाऊजी कोई आ जायेगाह्ह सीईई उम्म्ंम
बनवारी रन्जू का हाथ पकड पर अपने मुसल पर रखते हुए -अह्ह्ह रंजू बस थोडा ही समय लगेगा ओह्ह्ह कितने मुलायम हाथ है अह्ह्ह एक बार चुस लो ना इसे उम्म्ंम
रंजू चौकी - क्याह्ह नहीईई मै न्हीईई आप ऐसे ही वो कर लो
बनवारी रंजू के कड़े रुख से थोडा हिचका कही ये रूठ कर निकल ना जाये नही तो हाथ आया मौका भी निकल जायेगा
बनवारी ने उसे आगे झुकाते हुए उसका साडी पेतिकोट सहित उपर किया और सामने रन्जू का साँवला भोस्डा रसाया हुआ साफ साफ दिखने लगा
बनवारी ने रंजू को वही पास मे पलंग के सहारे झुकाये रखा और उसकी साडी को कमर तक उठा दिया ।
भरी गुदाज फैली हुई गाड़ और हल्के बालों वाली मोटी सावली फान्को वाली बुर को देख बनवारी ने थुक से अपना सुपाडा चिकना किया और रन्जू की बजबजाई के फाको ने दबाब बनाते हुए सट्ट से लन्ड को भेद दिया
रन्जू को मोटा तपता लन्ड भितर पाकर आन्खे उलटने लगि वही बुर की चिन्काई से बनवारी का लन्ड जड़ तक गया
बनवारी ने कुछ छड़ रंजू की तपती चुत की आंच मे अपना लन्ड सेका और फिर एक एक करके कस कस के लन्ड पेलने लगा

रंजू कोहनी बिस्तर पर रख कर हाथो से मुह ब्न्द किये सिस्कने लगी
उसे समझ नही आ रहा था कि ना जाने कैसे वो बहक गयि ,,शायद हफ्तो से लन्ड की तडप ने उस्के जज्बातो को कम्जोर कर दिया था और वो बेबस ये हालत आ चुकी थी
बनवारी उसी तरह रन्जू को झुकाए कस कस के झटके दे रहा था और उस्का लन्ड पुरा अंदर बाहर हो रहा था
सुखा लन्ड रन्जू की गीली चुत मे भी लय बना कर चल रहा था
बनवारी- ओह्ह रंजू तेरी बुर बहुत गर्म है उह्ह्ह क्या मस्त गाड़ है तेरीईई उह्ह्ह
रन्जू - अह्ह्ह सीई बाऊजी मारो मत उह्ह्ह जल्दी से कर लो बस
बनवारी रंजू के खीझने पर मुस्कुराया और उसने एक बार और कस के रन्जू की गाड़ को चाटे से लाल करते हुए बोला - उह्ह्ह मेरी जान समय की कमी है नही तो ऐसी गाड़ मै कभी नही छोड़ता लेह्ह्ह और लेह्ह्ह ऊहह क्या गर्म चुत ह तेरी ओह्ह्ह ओह्ह्ह
रंजू - उम्म्ंम्ं बाऊजी धीरे अह्ह्ह अह्ह्ह सीईई दर्द हो रहा है पैर मे उह्ह्ह धीरे ओह्ह्ह्माह्ह्ह्ह उम्म्ंम सीईई
बनवारी लन्ड की नसो को ताने हुए कस कस कर झटके देते हुए रन्जू को पेल रहा था - बस्स्स रन्जू मेरी जाअन्ंंं उम्म्ंम्ं मेरा हो जायेवा ओह्ह्ह ओह्ह्ह आअह्ह्ह ऐसे ही ओह्ह्ह ओह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं आ रहा है ओह्ह्ह्ह उह्ह्ह
अगले कुछ ही झटको ने बनवारी रंजू की बुर मे झड़ने लगा और हाफने लगा
रंजू तुन्क कर खडी हुई - अन्दर क्यू डाला बाहर नही निकाल सकते थे आप हुउह्ह
बनवारी हस कर - अरे कौन सा तु इस उम्र मे पेट से हो जायेगी हाहाहाहा
इसके बाद बनवारी ने खुद से ही अपनी धोती पहनने का ट्राई किया और वो एकदम आसानी से सेट हो गया - अरे ये तो आराम से तह लग गयी इसकी देखो
रन्जू ने मुह ब्नाया और बोली - ये सब आपका नाटक था और आपने मेरा फाय्दा लिया ।
"तो तुम्हे कौन सा नुकसान हुआ हाहाहाहा " , बनवारी हस कर कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर आता हुआ बोला ।
मगर जैसे ही वो कमरे के बाहर निकला उसी समय रंगीलाल किसी काम से घर मे आया था और वो अपने कमरे मे जा रहा था ।
जैसे ही उसकी नजर अपने ससुर पर गयी उसने भीतर राज के कमरे मे भी देखा जहा रंजू अपनी साडी सेट कर रही थी ।
रंगी ने असमंजस भरे भाव मे अपने ससुर की ओर देखा जो पूरी तरह से शर्मिंदा हुआ खड़ा था ।
रंगी - बाऊजी आप ऐसे यहा ?
बनवारी नजरे फेरता हुआ - हा वो मै !!
रंगी - वो सब ठिक है लेकिन शादी का घर है बाऊजी और आप , अगर मेरी जगह कोई और होता तो ?
बनवारी- माफ करना दमाद बाबू और छोटी ( रागिनी ) से मत कहियेगा मै हाथ जोडता हु
रंगी लपककर अपने ससुर का हाथ थामता हुआ - क्या कर रहे है बाऊजी आप ये सब कोई देख लेगा !! हम बाद मे बात करेंन्गे इसपे मुझे काम है कुछ
रंगी दरवाजा खोलकर अपने कमरे मे चला जाता है और बनवारी थोडा लज्जित होकर वापस एकान्त के लिए राज के कमरे मे चला जाता है वही रंजू जो इनसब से पहले ही खुश नही थी वो भी बनवारी ने नाराज हुई बिना उसकी ओर देखे छत पर चली जाती है
जारी रहेगी















































