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- Dec 5, 2013
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नुसरत ने दोनों के चेहरे के उड़ते हुए रंग देख कर हंसा और कहा,
"चलो, मान लेती हूँ. पर ध्यान रखना, मेरे भाई के इरादे वैसे भी ठीक नहीं लगते मुझे!"
नवाज़ ने बेसब्री से हंसा और सीना तान कर बोलै,
"अरे, मेरे इरादे हमेशा नेक hi हैं आप! अच्छा, मैं चलता हूँ अब."
नुसरत ने फ़ौरन उसे टोकते हुए कहा,
अरे, कहाँ चले?
दोस्तों के पास
दोस्तों को रहने दो . भाभी पहली बार घर आयी हैं, तोह तुम उन्हें अपना कमरा नहीं दिखाओगे क्या?
आरती यह सुनकर फिर से शर्मा गयी.

नुसरत ने एक शरारत भरी मुस्कान के साथ आगे कहा,
"आख़िरकार वह कमरा आगे चल कर उनका hi तोह है, तोह उसे देखना और theek-thak करना उनकी hi तोह ज़िम्मेवारी है."
आरती ने शरमाते हुए बेहद धीरे से कहा,
"जी..."

नवाज़ ने मौका देखा और आरती का हाथ पकड़ लिया ..आरती का दिल किसी nayi-naveli दुल्हन की तरह dhak-dhak कर रहा tha.wo नवाज़ को देखने लगी..

तब नवाज़ कहता है
चलो आपने कमरे मई
ऐसा कह कर उसे सीढ़ियों से ऊपर अपने कमरे की तरफ खींचने लगा. नुसरत आप नीचे से उन्हें जाते हुए देख कर मुस्कुरा रही थी, उनकी नज़रों में वही शरारत थी जो एक नानन्द की अपनी भाभी के लिए होती है.
कमरे में दाखिल होते hi नवाज़ ने दरवाज़ा पीछे से भिड़ाया और आरती को कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा.
उनके बीच का फैसला फिर से ख़तम हो गया. उसने कमरे के पुराने बीएड और saaze-saamaan की तरफ इशारा करते हुए कुटिलता से फुसफुसाया,
"मैं तोह तेरे साथ सुहागरात यही करना चाहता था रानी... पर क्या करूँ, तूने खेत का प्रोग्राम बनाया है."
आरती ने नवाज़ के सीने पर अपना सर टिकाया और उसके शर्ट के बटन से खेलते हुए नरम आवाज़ में कहा,
"कोई नहीं मेरे राजा... खेत वाला मिलान यादगार होगा. फिर बाद में यहाँ आके भी करेंगे न."
नवाज़ ने उसकी थोड़ी ऊपर उठायी और उसकी आँखों में देखा जो उत्तेजना से चमक रही थी.
"पक्का न? फिर यहाँ जब हम होंगे, तोह आप का डर तोह नहीं लगेगा?"
आरती शर्मा गयी और "जी" कह कर उसके सीने में अपना चेहरा छुपा लिया. नवाज़ ने उसे बीएड की तरफ थोड़ा धकेला और उसके ऊपर झुकते हुए बोलै,
"तोह फिर आज थोड़ी 'प्रैक्टिस' यही हो जाये? कल खेत निकलने से पहले?"
आरती ने नवाज़ के लबों पर अपनी नरम ऊँगली रख दी और बोली,
"नहीं... अभी नीचे आप इंतज़ार कर रही हैं. सबर रखिये, कल खेत में मैं पूरी तरह आपकी हूँ."
नवाज़ ने एक गहरी सांस ली और उसके नरम होंटो पर एक गहरा किश करते हुए बोलै,
"ठीक है रानी... कल की रात हमारी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी रात होगी."
जी
कह के पलट के वो दूर ओपन करने जा रही thi..aur दरवाज़ा जैसे hi ओपन किया की नवाज़ ने उसे पीछे से पकड़ लिया ..

नवाज़ ने जैसे hi देखा की आरती उसके सीने से चिपकी हुई है और उसकी सांसें भरी हो रही हैं, उसने दरवाज़ा पीछे से पूरी तरह लॉक कर दिया.
कमरे में एक अजीब सी ख़ामोशी थी, जो सिर्फ उनकी धड़कनों से टूट रही थी.

नवाज़ ने आरती को कमर से पकड़ कर झटके से बीएड की तरफ धकेला और खुद उसके ऊपर झुक गया. आरती की साड़ी के पल्लू के बीच से उसकी गोरी गर्दन चमक रही थी.
"नवाज़ जी... नीचे आप हैं... प्लीज,"
आरती ने सिसकते हुए कहा, पर उसके हाथ नवाज़ के मज़बूत कन्धों पर जैम गए थे.
नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और उसके कान के पास फुसफुसाया,
"आप को पता है की उनका भाई अपनी 'बेगम' को कमरा दिखा रहा है... उन्हें कोई जल्दी नहीं है."
नवाज़ ने अपने गरम लैब आरती की गर्दन पर रख दिए और वहां एक गहरा किश किया.
आरती ने दर्द और मज़े के मरे अपनी आँखें मूँद ली और उसके बालों को कसके पकड़ लिया.
नवाज़ का एक हाथ अब आरती की साड़ी के नीचे से उसकी नरम और गोरी जांघ पर सरकने लगा, बिलकुल वही जगह जहाँ उसने वाशरूम में उसे तड़पाया था.
"आआह्ह्ह... नवाज़... कल खेत में... सब करने दूँगी... अभी इतना मत तड़पाओ,"
आरती ने भांपते हुए अपना सर तकिये में छुपा लिया.
नवाज़ ने उसके लबों को अपने लबों में भर लिया और एक जुनूनी किश शुरू किया. उसका हाथ अब आरती की जांघ से ऊपर उठकर उसकी नाज़ुक जगह के करीब पहुँच गया था. वो वहां साड़ी के ऊपर से hi थोड़ा दबाव बनाने लगा, जिस से आरती का पूरा बदन कमान की तरह अकड़ गया.
"ये प्रैक्टिस है रानी... कल खेत में तोह मैं तुझे सांस लेने का मौका भी नहीं दूंगा,"
नवाज़ ने किश के बीच में hi भांपते हुए कहा.
आरती ने उसके जूनून को महसूस किया और उसके सीने पर अपना हाथ रख कर उसे और अपने करीब खिंच लिया. दोनों उस पुराने बीएड पर एक दुसरे की गर्मी में खोये हुए थे, कल की सुहागरात का इंतज़ार उन्हें और भी बेचैन कर रहा था.
नवाज़ के कमरे का माहौल अभी गरम hi था की दरवाज़े पर दस्तक हुई .. दूर ठीक से बंद नहीं हुआ था .. इसलिए आप ने पुश किया तो खुल गया ..
और नुसरत आप खुद चाय की ट्रे लेकर अंदर दाखिल हुईं. आरती हड़बड़ाकर नवाज़ से दूर हटी और अपनी साड़ी और बाल सँभालने लगी. उसका चेहरा शर्म से लाल टमाटर हो रहा था.
आरती ने हिचकिचाते हुए कहा,
"आप... आप क्यों लेकर आयीं? मैं वहीँ निचे बना लेती न."
नवाज़ ने मौका देखा और आरती को थोड़ा और छेड़ने के लिए, उसकी कमर पर थोड़ा दबाव डालते हुए और उसकी आँखों में आँखें दाल कर बड़े रॉब से बोलै:
"बनाती न?"
नवाज़ ने थोड़ा ज़ोर देकर पूछा.
आरती ने दबी आवाज़ में कहा,
"जी..."
"फिर बना न! यहाँ क्यों कड़ी है? जाओ किचन में और मेरे लिए एक कड़क चाय और बना कर लाओ,"
नवाज़ ने बड़े 'शौहर' वाले अंदाज़ में हुकुम चलाया.
नवाज़ की ये मरदाना अकड़ देख कर आरती एक पल के लिए ठिठक गयी, पर उसकी आँखों में नवाज़ के लिए चाहत और बढ़ गयी. नुसरत आप ये सब देख कर मुस्कुरा रही थी.
"अरे नवाज़, इतना रोअब मत झाड़ बेचारी पर! पहली बार घर आयी है,"
आप ने हस्ते हुए कहा.
आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका ली और "अभी आयी आप" कह कर किचन की तरफ भाग गयी.
नवाज़ वही खड़ा कुटिलता से मुस्कुरा रहा था. उसने आप की तरफ देख कर एक आँख मारी, जैसे कह रहा हो की उसने अपनी 'मालकिन बेगम' को ढंग से काबू कर लिया है.
नवाज़ ने मन hi मन सोचा, 'आज तोह सिर्फ किचन में चाय बनवा रहा हूँ रानी... कल खेत में तुझसे वो सब करवाऊंगा जो तूने ख्वाबों में भी नहीं सोचा होगा.'
आरती किचन में पहुंची तोह उसके हाथ अभी भी थोड़ा काँप रहे थे. नवाज़ की उस 'मरदाना अकड़' ने उसके अंदर एक अजीब सी हलचल मचा दी थी. नुसरत आप भी उसके peeche-peeche किचन में आ गयी और आरती को चाय की पट्टी ढूँढ़ते देख मुस्कुरा दी.
आरती: (शरमाते हुए)
"आप, नवाज़ जी हमेशा ऐसे hi रोअब जमाते हैं क्या? देखा कैसे हुकुम चला रहे थे मुझ पर."
नुसरत: (हँसते हुए)
"अरे भाभी , वो तोह उसका बचपन का अंदाज़ है. जो उसे अपना लगता है, उसपर वो ऐसे hi हक़ जताता है. बचपन में भी जब उसे कोई खिलौना पसंद आता था, तोह वो किसी को उसे छूने नहीं देता था."
आरती ने अदरक koot-te हुए पूछा,
"आप, ये बचपन में कैसे थे? क्या तब भी इतने hi गुंडे और ज़िद्दी थे?"
नुसरत:
"गुंडा तोह नहीं, पर ढीट बहुत था. एक बार पड़ोस के लड़के ने इसकी साइकिल छू ली थी, तोह इसने पुरे मोहल्ले में हंगामा कर दिया था. पर दिल का साफ़ है. अम्मी और अब्बू का बहुत ख्याल रखता है. बस ये थोड़ा 'रंगीला' हो गया है आज कल, पर जबसे तुम इसकी ज़िन्दगी में आयी हो, इसकी आँखों में एक अलग hi सुकून दीखता है."
आरती ने मुस्कुराकर चाय कप में छन्नी. उसका दिल नवाज़ के लिए और भी पिघल गया. उसे एहसास हुआ की नवाज़ भले hi बहार से सख्त दीखता हो, पर वो अंदर से रिश्तों की कदर करना जानता है.
नुसरत:
"वैसे आरती भाभी एक बात बोलूं? नवाज़ तुमसे बहुत मोहब्बत करता है, पर वो बोलेगा नहीं. बस कल खेत जा रहे हो तोह उसका ध्यान रखना... वो जज़्बात में थोड़ा बहक जाता है."
आरती का चेहरा फिर से लाल हो गया. उसे कल की सुहागरात याद आ गयी. उसने धीरे से कहा,
"जी आप... मैं हूँ न उन्हें सँभालने के लिए."
तभी नवाज़ किचन के दरवाज़े पर आकर खड़ा हो गया और कुटिलता से बोलै,
"क्या बातें हो रही हैं मेरी? चाय बन गयी या सिर्फ मेरी बुराई चल रही है?"
नवाज़ ने जब आरती की आँखों में देखा, तोह उसे समझ आ गया की आप ने उसके दिल में नवाज़ के लिए और जगह बना दी है.
"चलो, मान लेती हूँ. पर ध्यान रखना, मेरे भाई के इरादे वैसे भी ठीक नहीं लगते मुझे!"
नवाज़ ने बेसब्री से हंसा और सीना तान कर बोलै,
"अरे, मेरे इरादे हमेशा नेक hi हैं आप! अच्छा, मैं चलता हूँ अब."
नुसरत ने फ़ौरन उसे टोकते हुए कहा,
अरे, कहाँ चले?
दोस्तों के पास
दोस्तों को रहने दो . भाभी पहली बार घर आयी हैं, तोह तुम उन्हें अपना कमरा नहीं दिखाओगे क्या?
आरती यह सुनकर फिर से शर्मा गयी.

नुसरत ने एक शरारत भरी मुस्कान के साथ आगे कहा,
"आख़िरकार वह कमरा आगे चल कर उनका hi तोह है, तोह उसे देखना और theek-thak करना उनकी hi तोह ज़िम्मेवारी है."
आरती ने शरमाते हुए बेहद धीरे से कहा,
"जी..."

नवाज़ ने मौका देखा और आरती का हाथ पकड़ लिया ..आरती का दिल किसी nayi-naveli दुल्हन की तरह dhak-dhak कर रहा tha.wo नवाज़ को देखने लगी..

तब नवाज़ कहता है
चलो आपने कमरे मई
ऐसा कह कर उसे सीढ़ियों से ऊपर अपने कमरे की तरफ खींचने लगा. नुसरत आप नीचे से उन्हें जाते हुए देख कर मुस्कुरा रही थी, उनकी नज़रों में वही शरारत थी जो एक नानन्द की अपनी भाभी के लिए होती है.
कमरे में दाखिल होते hi नवाज़ ने दरवाज़ा पीछे से भिड़ाया और आरती को कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा.
उनके बीच का फैसला फिर से ख़तम हो गया. उसने कमरे के पुराने बीएड और saaze-saamaan की तरफ इशारा करते हुए कुटिलता से फुसफुसाया,
"मैं तोह तेरे साथ सुहागरात यही करना चाहता था रानी... पर क्या करूँ, तूने खेत का प्रोग्राम बनाया है."
आरती ने नवाज़ के सीने पर अपना सर टिकाया और उसके शर्ट के बटन से खेलते हुए नरम आवाज़ में कहा,
"कोई नहीं मेरे राजा... खेत वाला मिलान यादगार होगा. फिर बाद में यहाँ आके भी करेंगे न."
नवाज़ ने उसकी थोड़ी ऊपर उठायी और उसकी आँखों में देखा जो उत्तेजना से चमक रही थी.
"पक्का न? फिर यहाँ जब हम होंगे, तोह आप का डर तोह नहीं लगेगा?"
आरती शर्मा गयी और "जी" कह कर उसके सीने में अपना चेहरा छुपा लिया. नवाज़ ने उसे बीएड की तरफ थोड़ा धकेला और उसके ऊपर झुकते हुए बोलै,
"तोह फिर आज थोड़ी 'प्रैक्टिस' यही हो जाये? कल खेत निकलने से पहले?"
आरती ने नवाज़ के लबों पर अपनी नरम ऊँगली रख दी और बोली,
"नहीं... अभी नीचे आप इंतज़ार कर रही हैं. सबर रखिये, कल खेत में मैं पूरी तरह आपकी हूँ."
नवाज़ ने एक गहरी सांस ली और उसके नरम होंटो पर एक गहरा किश करते हुए बोलै,
"ठीक है रानी... कल की रात हमारी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी रात होगी."
जी
कह के पलट के वो दूर ओपन करने जा रही thi..aur दरवाज़ा जैसे hi ओपन किया की नवाज़ ने उसे पीछे से पकड़ लिया ..

नवाज़ ने जैसे hi देखा की आरती उसके सीने से चिपकी हुई है और उसकी सांसें भरी हो रही हैं, उसने दरवाज़ा पीछे से पूरी तरह लॉक कर दिया.
कमरे में एक अजीब सी ख़ामोशी थी, जो सिर्फ उनकी धड़कनों से टूट रही थी.

नवाज़ ने आरती को कमर से पकड़ कर झटके से बीएड की तरफ धकेला और खुद उसके ऊपर झुक गया. आरती की साड़ी के पल्लू के बीच से उसकी गोरी गर्दन चमक रही थी.
"नवाज़ जी... नीचे आप हैं... प्लीज,"
आरती ने सिसकते हुए कहा, पर उसके हाथ नवाज़ के मज़बूत कन्धों पर जैम गए थे.
नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और उसके कान के पास फुसफुसाया,
"आप को पता है की उनका भाई अपनी 'बेगम' को कमरा दिखा रहा है... उन्हें कोई जल्दी नहीं है."
नवाज़ ने अपने गरम लैब आरती की गर्दन पर रख दिए और वहां एक गहरा किश किया.
आरती ने दर्द और मज़े के मरे अपनी आँखें मूँद ली और उसके बालों को कसके पकड़ लिया.
नवाज़ का एक हाथ अब आरती की साड़ी के नीचे से उसकी नरम और गोरी जांघ पर सरकने लगा, बिलकुल वही जगह जहाँ उसने वाशरूम में उसे तड़पाया था.
"आआह्ह्ह... नवाज़... कल खेत में... सब करने दूँगी... अभी इतना मत तड़पाओ,"
आरती ने भांपते हुए अपना सर तकिये में छुपा लिया.
नवाज़ ने उसके लबों को अपने लबों में भर लिया और एक जुनूनी किश शुरू किया. उसका हाथ अब आरती की जांघ से ऊपर उठकर उसकी नाज़ुक जगह के करीब पहुँच गया था. वो वहां साड़ी के ऊपर से hi थोड़ा दबाव बनाने लगा, जिस से आरती का पूरा बदन कमान की तरह अकड़ गया.
"ये प्रैक्टिस है रानी... कल खेत में तोह मैं तुझे सांस लेने का मौका भी नहीं दूंगा,"
नवाज़ ने किश के बीच में hi भांपते हुए कहा.
आरती ने उसके जूनून को महसूस किया और उसके सीने पर अपना हाथ रख कर उसे और अपने करीब खिंच लिया. दोनों उस पुराने बीएड पर एक दुसरे की गर्मी में खोये हुए थे, कल की सुहागरात का इंतज़ार उन्हें और भी बेचैन कर रहा था.
नवाज़ के कमरे का माहौल अभी गरम hi था की दरवाज़े पर दस्तक हुई .. दूर ठीक से बंद नहीं हुआ था .. इसलिए आप ने पुश किया तो खुल गया ..
और नुसरत आप खुद चाय की ट्रे लेकर अंदर दाखिल हुईं. आरती हड़बड़ाकर नवाज़ से दूर हटी और अपनी साड़ी और बाल सँभालने लगी. उसका चेहरा शर्म से लाल टमाटर हो रहा था.
आरती ने हिचकिचाते हुए कहा,
"आप... आप क्यों लेकर आयीं? मैं वहीँ निचे बना लेती न."
नवाज़ ने मौका देखा और आरती को थोड़ा और छेड़ने के लिए, उसकी कमर पर थोड़ा दबाव डालते हुए और उसकी आँखों में आँखें दाल कर बड़े रॉब से बोलै:
"बनाती न?"
नवाज़ ने थोड़ा ज़ोर देकर पूछा.
आरती ने दबी आवाज़ में कहा,
"जी..."
"फिर बना न! यहाँ क्यों कड़ी है? जाओ किचन में और मेरे लिए एक कड़क चाय और बना कर लाओ,"
नवाज़ ने बड़े 'शौहर' वाले अंदाज़ में हुकुम चलाया.
नवाज़ की ये मरदाना अकड़ देख कर आरती एक पल के लिए ठिठक गयी, पर उसकी आँखों में नवाज़ के लिए चाहत और बढ़ गयी. नुसरत आप ये सब देख कर मुस्कुरा रही थी.
"अरे नवाज़, इतना रोअब मत झाड़ बेचारी पर! पहली बार घर आयी है,"
आप ने हस्ते हुए कहा.
आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका ली और "अभी आयी आप" कह कर किचन की तरफ भाग गयी.
नवाज़ वही खड़ा कुटिलता से मुस्कुरा रहा था. उसने आप की तरफ देख कर एक आँख मारी, जैसे कह रहा हो की उसने अपनी 'मालकिन बेगम' को ढंग से काबू कर लिया है.
नवाज़ ने मन hi मन सोचा, 'आज तोह सिर्फ किचन में चाय बनवा रहा हूँ रानी... कल खेत में तुझसे वो सब करवाऊंगा जो तूने ख्वाबों में भी नहीं सोचा होगा.'
आरती किचन में पहुंची तोह उसके हाथ अभी भी थोड़ा काँप रहे थे. नवाज़ की उस 'मरदाना अकड़' ने उसके अंदर एक अजीब सी हलचल मचा दी थी. नुसरत आप भी उसके peeche-peeche किचन में आ गयी और आरती को चाय की पट्टी ढूँढ़ते देख मुस्कुरा दी.
आरती: (शरमाते हुए)
"आप, नवाज़ जी हमेशा ऐसे hi रोअब जमाते हैं क्या? देखा कैसे हुकुम चला रहे थे मुझ पर."
नुसरत: (हँसते हुए)
"अरे भाभी , वो तोह उसका बचपन का अंदाज़ है. जो उसे अपना लगता है, उसपर वो ऐसे hi हक़ जताता है. बचपन में भी जब उसे कोई खिलौना पसंद आता था, तोह वो किसी को उसे छूने नहीं देता था."
आरती ने अदरक koot-te हुए पूछा,
"आप, ये बचपन में कैसे थे? क्या तब भी इतने hi गुंडे और ज़िद्दी थे?"
नुसरत:
"गुंडा तोह नहीं, पर ढीट बहुत था. एक बार पड़ोस के लड़के ने इसकी साइकिल छू ली थी, तोह इसने पुरे मोहल्ले में हंगामा कर दिया था. पर दिल का साफ़ है. अम्मी और अब्बू का बहुत ख्याल रखता है. बस ये थोड़ा 'रंगीला' हो गया है आज कल, पर जबसे तुम इसकी ज़िन्दगी में आयी हो, इसकी आँखों में एक अलग hi सुकून दीखता है."
आरती ने मुस्कुराकर चाय कप में छन्नी. उसका दिल नवाज़ के लिए और भी पिघल गया. उसे एहसास हुआ की नवाज़ भले hi बहार से सख्त दीखता हो, पर वो अंदर से रिश्तों की कदर करना जानता है.
नुसरत:
"वैसे आरती भाभी एक बात बोलूं? नवाज़ तुमसे बहुत मोहब्बत करता है, पर वो बोलेगा नहीं. बस कल खेत जा रहे हो तोह उसका ध्यान रखना... वो जज़्बात में थोड़ा बहक जाता है."
आरती का चेहरा फिर से लाल हो गया. उसे कल की सुहागरात याद आ गयी. उसने धीरे से कहा,
"जी आप... मैं हूँ न उन्हें सँभालने के लिए."
तभी नवाज़ किचन के दरवाज़े पर आकर खड़ा हो गया और कुटिलता से बोलै,
"क्या बातें हो रही हैं मेरी? चाय बन गयी या सिर्फ मेरी बुराई चल रही है?"
नवाज़ ने जब आरती की आँखों में देखा, तोह उसे समझ आ गया की आप ने उसके दिल में नवाज़ के लिए और जगह बना दी है.






























