Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 41 - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

नुसरत ने दोनों के चेहरे के उड़ते हुए रंग देख कर हंसा और कहा,

"चलो, मान लेती हूँ. पर ध्यान रखना, मेरे भाई के इरादे वैसे भी ठीक नहीं लगते मुझे!"

नवाज़ ने बेसब्री से हंसा और सीना तान कर बोलै,

"अरे, मेरे इरादे हमेशा नेक hi हैं आप! अच्छा, मैं चलता हूँ अब."

नुसरत ने फ़ौरन उसे टोकते हुए कहा,

अरे, कहाँ चले?

दोस्तों के पास

दोस्तों को रहने दो . भाभी पहली बार घर आयी हैं, तोह तुम उन्हें अपना कमरा नहीं दिखाओगे क्या?

आरती यह सुनकर फिर से शर्मा गयी.



नुसरत ने एक शरारत भरी मुस्कान के साथ आगे कहा,

"आख़िरकार वह कमरा आगे चल कर उनका hi तोह है, तोह उसे देखना और theek-thak करना उनकी hi तोह ज़िम्मेवारी है."

आरती ने शरमाते हुए बेहद धीरे से कहा,

"जी..."



नवाज़ ने मौका देखा और आरती का हाथ पकड़ लिया ..आरती का दिल किसी nayi-naveli दुल्हन की तरह dhak-dhak कर रहा tha.wo नवाज़ को देखने लगी..



तब नवाज़ कहता है

चलो आपने कमरे मई

ऐसा कह कर उसे सीढ़ियों से ऊपर अपने कमरे की तरफ खींचने लगा. नुसरत आप नीचे से उन्हें जाते हुए देख कर मुस्कुरा रही थी, उनकी नज़रों में वही शरारत थी जो एक नानन्द की अपनी भाभी के लिए होती है.

कमरे में दाखिल होते hi नवाज़ ने दरवाज़ा पीछे से भिड़ाया और आरती को कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा.



उनके बीच का फैसला फिर से ख़तम हो गया. उसने कमरे के पुराने बीएड और saaze-saamaan की तरफ इशारा करते हुए कुटिलता से फुसफुसाया,

"मैं तोह तेरे साथ सुहागरात यही करना चाहता था रानी... पर क्या करूँ, तूने खेत का प्रोग्राम बनाया है."

आरती ने नवाज़ के सीने पर अपना सर टिकाया और उसके शर्ट के बटन से खेलते हुए नरम आवाज़ में कहा,

"कोई नहीं मेरे राजा... खेत वाला मिलान यादगार होगा. फिर बाद में यहाँ आके भी करेंगे न."

नवाज़ ने उसकी थोड़ी ऊपर उठायी और उसकी आँखों में देखा जो उत्तेजना से चमक रही थी.

"पक्का न? फिर यहाँ जब हम होंगे, तोह आप का डर तोह नहीं लगेगा?"

आरती शर्मा गयी और "जी" कह कर उसके सीने में अपना चेहरा छुपा लिया. नवाज़ ने उसे बीएड की तरफ थोड़ा धकेला और उसके ऊपर झुकते हुए बोलै,

"तोह फिर आज थोड़ी 'प्रैक्टिस' यही हो जाये? कल खेत निकलने से पहले?"

आरती ने नवाज़ के लबों पर अपनी नरम ऊँगली रख दी और बोली,

"नहीं... अभी नीचे आप इंतज़ार कर रही हैं. सबर रखिये, कल खेत में मैं पूरी तरह आपकी हूँ."

नवाज़ ने एक गहरी सांस ली और उसके नरम होंटो पर एक गहरा किश करते हुए बोलै,



"ठीक है रानी... कल की रात हमारी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी रात होगी."

जी

कह के पलट के वो दूर ओपन करने जा रही thi..aur दरवाज़ा जैसे hi ओपन किया की नवाज़ ने उसे पीछे से पकड़ लिया ..



नवाज़ ने जैसे hi देखा की आरती उसके सीने से चिपकी हुई है और उसकी सांसें भरी हो रही हैं, उसने दरवाज़ा पीछे से पूरी तरह लॉक कर दिया.

कमरे में एक अजीब सी ख़ामोशी थी, जो सिर्फ उनकी धड़कनों से टूट रही थी.



नवाज़ ने आरती को कमर से पकड़ कर झटके से बीएड की तरफ धकेला और खुद उसके ऊपर झुक गया. आरती की साड़ी के पल्लू के बीच से उसकी गोरी गर्दन चमक रही थी.

"नवाज़ जी... नीचे आप हैं... प्लीज,"

आरती ने सिसकते हुए कहा, पर उसके हाथ नवाज़ के मज़बूत कन्धों पर जैम गए थे.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और उसके कान के पास फुसफुसाया,

"आप को पता है की उनका भाई अपनी 'बेगम' को कमरा दिखा रहा है... उन्हें कोई जल्दी नहीं है."

नवाज़ ने अपने गरम लैब आरती की गर्दन पर रख दिए और वहां एक गहरा किश किया.

आरती ने दर्द और मज़े के मरे अपनी आँखें मूँद ली और उसके बालों को कसके पकड़ लिया.

नवाज़ का एक हाथ अब आरती की साड़ी के नीचे से उसकी नरम और गोरी जांघ पर सरकने लगा, बिलकुल वही जगह जहाँ उसने वाशरूम में उसे तड़पाया था.

"आआह्ह्ह... नवाज़... कल खेत में... सब करने दूँगी... अभी इतना मत तड़पाओ,"

आरती ने भांपते हुए अपना सर तकिये में छुपा लिया.

नवाज़ ने उसके लबों को अपने लबों में भर लिया और एक जुनूनी किश शुरू किया. उसका हाथ अब आरती की जांघ से ऊपर उठकर उसकी नाज़ुक जगह के करीब पहुँच गया था. वो वहां साड़ी के ऊपर से hi थोड़ा दबाव बनाने लगा, जिस से आरती का पूरा बदन कमान की तरह अकड़ गया.

"ये प्रैक्टिस है रानी... कल खेत में तोह मैं तुझे सांस लेने का मौका भी नहीं दूंगा,"

नवाज़ ने किश के बीच में hi भांपते हुए कहा.

आरती ने उसके जूनून को महसूस किया और उसके सीने पर अपना हाथ रख कर उसे और अपने करीब खिंच लिया. दोनों उस पुराने बीएड पर एक दुसरे की गर्मी में खोये हुए थे, कल की सुहागरात का इंतज़ार उन्हें और भी बेचैन कर रहा था.

नवाज़ के कमरे का माहौल अभी गरम hi था की दरवाज़े पर दस्तक हुई .. दूर ठीक से बंद नहीं हुआ था .. इसलिए आप ने पुश किया तो खुल गया ..

और नुसरत आप खुद चाय की ट्रे लेकर अंदर दाखिल हुईं. आरती हड़बड़ाकर नवाज़ से दूर हटी और अपनी साड़ी और बाल सँभालने लगी. उसका चेहरा शर्म से लाल टमाटर हो रहा था.

आरती ने हिचकिचाते हुए कहा,

"आप... आप क्यों लेकर आयीं? मैं वहीँ निचे बना लेती न."

नवाज़ ने मौका देखा और आरती को थोड़ा और छेड़ने के लिए, उसकी कमर पर थोड़ा दबाव डालते हुए और उसकी आँखों में आँखें दाल कर बड़े रॉब से बोलै:

"बनाती न?"

नवाज़ ने थोड़ा ज़ोर देकर पूछा.

आरती ने दबी आवाज़ में कहा,

"जी..."

"फिर बना न! यहाँ क्यों कड़ी है? जाओ किचन में और मेरे लिए एक कड़क चाय और बना कर लाओ,"

नवाज़ ने बड़े 'शौहर' वाले अंदाज़ में हुकुम चलाया.

नवाज़ की ये मरदाना अकड़ देख कर आरती एक पल के लिए ठिठक गयी, पर उसकी आँखों में नवाज़ के लिए चाहत और बढ़ गयी. नुसरत आप ये सब देख कर मुस्कुरा रही थी.

"अरे नवाज़, इतना रोअब मत झाड़ बेचारी पर! पहली बार घर आयी है,"

आप ने हस्ते हुए कहा.

आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका ली और "अभी आयी आप" कह कर किचन की तरफ भाग गयी.

नवाज़ वही खड़ा कुटिलता से मुस्कुरा रहा था. उसने आप की तरफ देख कर एक आँख मारी, जैसे कह रहा हो की उसने अपनी 'मालकिन बेगम' को ढंग से काबू कर लिया है.

नवाज़ ने मन hi मन सोचा, 'आज तोह सिर्फ किचन में चाय बनवा रहा हूँ रानी... कल खेत में तुझसे वो सब करवाऊंगा जो तूने ख्वाबों में भी नहीं सोचा होगा.'

आरती किचन में पहुंची तोह उसके हाथ अभी भी थोड़ा काँप रहे थे. नवाज़ की उस 'मरदाना अकड़' ने उसके अंदर एक अजीब सी हलचल मचा दी थी. नुसरत आप भी उसके peeche-peeche किचन में आ गयी और आरती को चाय की पट्टी ढूँढ़ते देख मुस्कुरा दी.

आरती: (शरमाते हुए)

"आप, नवाज़ जी हमेशा ऐसे hi रोअब जमाते हैं क्या? देखा कैसे हुकुम चला रहे थे मुझ पर."

नुसरत: (हँसते हुए)

"अरे भाभी , वो तोह उसका बचपन का अंदाज़ है. जो उसे अपना लगता है, उसपर वो ऐसे hi हक़ जताता है. बचपन में भी जब उसे कोई खिलौना पसंद आता था, तोह वो किसी को उसे छूने नहीं देता था."

आरती ने अदरक koot-te हुए पूछा,

"आप, ये बचपन में कैसे थे? क्या तब भी इतने hi गुंडे और ज़िद्दी थे?"

नुसरत:

"गुंडा तोह नहीं, पर ढीट बहुत था. एक बार पड़ोस के लड़के ने इसकी साइकिल छू ली थी, तोह इसने पुरे मोहल्ले में हंगामा कर दिया था. पर दिल का साफ़ है. अम्मी और अब्बू का बहुत ख्याल रखता है. बस ये थोड़ा 'रंगीला' हो गया है आज कल, पर जबसे तुम इसकी ज़िन्दगी में आयी हो, इसकी आँखों में एक अलग hi सुकून दीखता है."

आरती ने मुस्कुराकर चाय कप में छन्नी. उसका दिल नवाज़ के लिए और भी पिघल गया. उसे एहसास हुआ की नवाज़ भले hi बहार से सख्त दीखता हो, पर वो अंदर से रिश्तों की कदर करना जानता है.

नुसरत:

"वैसे आरती भाभी एक बात बोलूं? नवाज़ तुमसे बहुत मोहब्बत करता है, पर वो बोलेगा नहीं. बस कल खेत जा रहे हो तोह उसका ध्यान रखना... वो जज़्बात में थोड़ा बहक जाता है."

आरती का चेहरा फिर से लाल हो गया. उसे कल की सुहागरात याद आ गयी. उसने धीरे से कहा,

"जी आप... मैं हूँ न उन्हें सँभालने के लिए."

तभी नवाज़ किचन के दरवाज़े पर आकर खड़ा हो गया और कुटिलता से बोलै,

"क्या बातें हो रही हैं मेरी? चाय बन गयी या सिर्फ मेरी बुराई चल रही है?"

नवाज़ ने जब आरती की आँखों में देखा, तोह उसे समझ आ गया की आप ने उसके दिल में नवाज़ के लिए और जगह बना दी है.
 
जी आप... मैं हूँ न उन्हें सँभालने के लिए.

तभी नवाज़ किचन के दरवाज़े पर आकर खड़ा हो गया और कुटिलता से बोलै,

"क्या बातें हो रही हैं मेरी? चाय बन गयी या सिर्फ मेरी बुराई चल रही है?"

नवाज़ के ऐसे कहते hi आरती वही गैस स्टोव के पास वैसे hi कड़ी अपनी तेज़ चलती साँसों को संभालती रही. अपने चेहरे पर आयी लाली और बिखरे बालों को ठीक करके जब उसने आपने गर्दन , तोह उसकी आँखें सीधे नवाज़ से जा टकराई



नवाज़ ने जब आरती की आँखों में देखा, तोह उसे साफ़ समझ आ गया की आप ने उसके दिल में नवाज़ के लिए और भी गहरी जगह बना दी है.

आरती एक नए एहसास में डूबी हुई थी. उसने अपनी सरसराती हुई copper-red रंग के कॉटन की साड़ी का पल्लू नए अंदाज़ से संभाला था, जिसमें से उसकी पतली कमर साफ़ झलक रही थी. उसके बाल बड़े hi सलीके से पीठ पर बंधे हुए थे, पर उनकी कुछ लट्ठे अब भी उसके चेहरे और कान के पास सरसरा रही थीं.

उसने खूबसूरत झुमके पहने हुए थे जो उसकी गर्दन के पास हिल रहे थे, और हाथों में पहनी कांच की पतली चूड़ियां नवाज़ के उस नरम टच की गवाही दे रही थी.

आरती ने गैस स्टोव के पास खड़े होकर अपना एक हाथ धीरे से अपने बालों पर फेरा, बिलकुल वैसे hi जैसे तस्वीर में दिख रहा है. उसने मुद कर नवाज़ की तरफ dekha—uski आँखों में अब डर नहीं था, बल्कि एक शर्मीली इजाज़त और गहरी मोहब्बत थी. उसका यह नखरीला और शर्मीला अंदाज़ देख कर नवाज़ का दिल एक बार फिर बेकाबू होने लगा.

नवाज़ ने शरारत से मुस्कुरा कर आँखों hi आँखों में उसे इस खूबसूरती की तारीफ की, जिसे देख कर आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका लीन और मुस्कुराने लगी.



आप उन दोनों के बीच के इस साइलेंट रोमांस को देख कर अंदर hi अंदर मुस्कुरा रही थीं.

आरती ने अपना एक हाथ अपने होठों के पास रखा, जैसे वह अपनी हंसी छुपाने की कोशिश कर रही हो. आरती ने दीवार से थोड़ा टिकते हुए, अपनी आँखों में एक शैतानी और शर्मीली चमक के साथ नवाज़ को जवाब दिया:

"आपकी बुराई करने के लिए वक़्त चाहिए नवाज़ जी, और हमारे पास अभी सिर्फ चाय पीने का वक़्त है. वैसे भी, आप तोह आपकी तारीफ कर रही थी, पर लगता है आपका ज़मीर hi थोड़ा सा भटका हुआ है."

नुसरत आप ने जब आरती का यह धरतेदार और मज़ाक़िया जवाब सुना, तोह वह खिलखिला कर हंस पड़ी. उन्होंने नवाज़ को घूरा और आरती का साथ देते हुए कहा:

"देखा नवाज़! मैंने कहा न, हमारी भाभी जितनी खूबसूरत हैं, उतनी hi होशियार भी हैं. अब चुपचाप वहां खड़े मत रहो, चाय बन गयी है तोह अंदर आओ और चाय पीओ. और ध्यान रखना, अब अगर तुमने भाभी को तंग किया, तोह तुम्हारी खैर नहीं!"

नवाज़ ने आरती के इस नए अंदाज़ और आप की दंति को देखा, तोह वह बस मुस्कुरा कर रह गया. उसका दिल आरती के इस शर्मीले और नखरीले रूप को देख कर एक बार फिर पूरी तरह उसके निशाने पर आ चूका था.

नुसरत आप की बात सुनकर नवाज़ मुस्कुरा कर किचन के अंदर आया. वह आरती के बिलकुल पास आकर खड़ा हुआ, मेज़ से चाय का कप उठाया और बड़े अंदाज़ से चाय की एक चुस्की ली. पर चुस्की लेते hi उसने अपना मुँह गन्दा सा बना लिया, जैसे चाय बोहोत ख़राब बानी हो.

"उफ़... इतनी गन्दी चाय!"

नवाज़ ने कप वापस रखते हुए शिकायत की.

आरती का मुँह उतर गया.



उसने बुरा सा मुँह बनाया और परेशानी में बाजु मई कड़ी नुसरत आप की तरफ देख कर पूछा,



"इतनी गन्दी है क्या चाय आप?"

नुसरत ने झट र से hi जवाब दिया,

"नहीं तोह भाभी! चाय तोह बोहोत अच्छी बानी है."

नवाज़ ने अपनी शरारत बरक़रार रखते हुए कहा,

"अरे, मैं क्या झूट बोल रहा हूँ क्या?"

तभी आप थोड़ा आगे आते हुई नवाज़ को टोकते हुए बोलीं,

"नहीं तोह क्या... मेरी प्यारी भाभी को तुम खामखा परेशां कर रहे हो!"

नवाज़ ने अभी भी हंसी छुपाते हुए कहा,

"नहीं आप, सच में अच्छी नहीं है चाय."

आरती को अब यकीन नहीं हो रहा था. उसने वहां मेज़ से एक दूसरा कप उठाया, उसमें थोड़ी चाय डाली और एक चुस्की लेकर chakhi.aur नवाज़ की और देखते हुई बड़ी नखरे से उसने कहा,



"अच्छी तोह है... इसमें क्या खराबी है?"

नवाज़ ने फिर अपना सर हिलाया,

"नहीं, बिलकुल अच्छी नहीं है."

अब आरती ने आओ देखा न ताव, गुस्से और हड़बड़ाहट में सीधे नवाज़ के हाथ से उसका कप छीन लिया. उसने बिना soche-samjhe नवाज़ के hi कप से चाय की एक गहरी चुस्की ली ताकि पता कर सके की उसके कप में क्या खामी है.

आरती को नवाज़ के hi कप से झूटी चाय पीते देख कर नुसरत आप के चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल आ गयी. वह दोनों को देखते हुए छेड़ने वाले अंदाज़ में बोलीं,

"हाँ हाँ, peeo-peeo... एक दुसरे का झूठा पीने से तोह प्यार और बढ़ता है!"

आप की बात सुनते hi आरती को एहसास हुआ की उसने जल्दबाज़ी में क्या कर दिया है. उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया.



उसने बात को सँभालने की कोशिश करते हुए हड़बड़ा कर कहा,

"अरे... मैं तोह बस देखने के लिए पि रही थी आप... की इनके कप में चाय कैसी है."

नुसरत ने हँसते हुए उन्हें चिढ़ाया,

"हाँ हाँ, ठीक है, मैं सब समझती हूँ!"

आरती ने फिर से नवाज़ की तरफ देखा और थोड़े नखरे से बोली,



"चाय बिलकुल अच्छी तोह है!"

नवाज़ उन दोनों की इस बातचीत पर अंदर hi अंदर बोहोत खुश हो रहा था, क्यूंकि उसका मक़सद आरती को छेड़ना था, जिसमें वह पूरी तरह कामयाब हो चूका था.
 
आरती को परेशां देख कर नुसरत आप आगे बढ़ीं. उन्होंने मेज़ पर से एक दूसरा कप उठाया और चाय की एक गहरी चुस्की ली. उन्होंने थोड़ा सोचते हुए अपना सर हिलाया और बोलिये,

"हाँ भाभी, बात तोह सही है... चाय में थोड़ी सी गड़बड़ तोह है."

आप की बात सुनकर आरती का दिल थोड़ा बैठ गया. उसने जरा डरते हुए और मासूमियत से पूछा,



"क्या गड़बड़ है आप? मैंने तोह सब ठीक से डाला था."

नुसरत ने नवाज़ की तरफ देखा और फिर आरती को छेड़ते हुए बोली,

"भाभी, आपने शायद इसमें अदरक कूट के नहीं डाली थी... इस बदमाश को हमेशा मसाला चाय hi पसंद है."

अच्छा ऐसा क्या ..

आरती ने फ़ौरन सफाई देते हुए कहा,

"डाली तोह थी आप..."

"तोह फिर अच्छे से कूटा नहीं होगा,"

नुसरत ने मुस्कुराते हुए कहा.

आरती ने भोलेपन से अपना हाथ हिलाकर कहा,

"नहीं, मैंने बोहोत अच्छे से कूटा था."

तभी नुसरत आप ने एक बड़ी सी शरारत भरी स्माइल दी और आरती के कान के पास आकर बोलियें,

"तोह फिर पक्का आप इसमें अपना 'प्यार' डालना भूल गयी होगी!"

आप के मुँह से यह सुनते hi आरती का चेहरा एक बार फिर शर्म से बिलकुल लाल टमाटर हो गया.

उसने धरकतो दिल के साथ अपनी नज़रें झुकायीं और थोड़े नखरे और दबी आवाज़ में बोली,



"धत्त आप... आप भी न! कुछ भी बोलती हैं."

आरती ने शरमाते हुए जल्दी से बात को बदला और बोली,

लगता है मुझसे hi गलती हो गयी



फिर कहती है

"अच्छा रुकिए, मैं फिर से चाय बनती हूँ इनके लिए."

उसने फ़ौरन स्टोव की तरफ रुख किया ताकि सबके सामने अपना शर्मीला चेहरा छुपा सके. नवाज़ वहां खड़ा आरती के इस भोलेपन और शर्मीले अंदाज़ को देख कर अंदर hi अंदर बेहद खुश हो रहा था.
 
आरती ने जब फिर से चाय बनाने का फैसला किया, तोह वह किचन के काउंटर के पास गयी.

उसने मसाला चाय बनाने के लिए ऊपर के रैक पर रखे डिब्बों की तरफ अपना एक हाथ badhaya.phir दूसरा .. उसने अपना गोरा और नरम हाथ ऊपर उठाकर शेल्फ से मसाला निकलने की कोशिश की, जिससे उसकी गुलाबी सरसराती हुई साड़ी का पल्लू थोड़ा और सरक गया. उसके पिंक रंग के बैकलेस ब्लाउज से झलकती उसकी खूबसूरत नरम पीठ और पतली कमर साफ़ नज़र आ रही थी. उसके बाल अभी भी थोड़े बिखरे हुए थे और कान में पहने बड़े झुमके उसकी गर्दन के पास लटक रहे थे.

आरती को हाथ ऊपर उठाये मसाला ढूँढ़ते काफी देर हो गयी पर उसे डिब्बा नहीं मिला. तभी उसने अपनी गर्दन घुमा कर, घुरहते हुए दबे पाऊँ पीछे खड़े नवाज़ की तरफ देखा और थोड़े नखरे से पूछा,



"आप... अदरक और मसाला कहाँ रखा है?"

पर आप के मुँह से कोई जवाब नहीं निकला. इधर नवाज़ तोह बस वहीँ खड़ा, अपनी नज़रें आरती के उस बेपरवाह और बेहद आकर्षक रूप पर टिकाये हुए था. उसका हाथ ऊपर उठाना, साड़ी का सरकना और वह कातिलाना nazar—Nawaz इस खूबसूरती को देख कर पूरी तरह मदहोश हो चूका था. उसके दिमाग से चाय, आप और सब डर एक पल में गायब हो गए. उसके अंदर का जूनून एक बार फिर उबाल मरने लगा.

आरती ने जब देखा की नवाज़ उसे बिना पलकें झपकाए बड़ी hi उत्तेजना भरी नज़रों से घूर रहा है, तोह वह समझ गयी की इसका ध्यान कहाँ है. उसका दिल एक बार फिर ज़ोर से धारक उठा और उसने शर्मा कर अपनी नज़रें घूमने की कोशिश की, पर नवाज़ की निगाहें जैसे उसे वहीँ किचन में hi ज़ख़्मी कर रही थीं.

नवाज़ ने जब आरती को उस रूप में ऊपर शेल्फ से डिब्बा ढूँढ़ते हुए देखा, तोह उसकी नज़रें उसकी पतली कमर और खूबसूरत पीठ पर hi टिक गयी थीं. उसने अपनी उन्ही उत्तेजना भरी नज़रों से आरती को देखते हुए, नुसरत आप से कहा:

"आप, जितनी खूबसूरत आरती नार्मल में दिखती है... उससे कहीं ज़्यादा खूबसूरत वह इस वक़्त दिख रही है न?"

नवाज़ का यह खुलेआम तारीफ करना और उसकी नज़रों की गर्मी देख कर आरती ने जल्दी से अपना हाथ नीचे किया और अपनी साड़ी का पल्लू सँभालने लगी. उसने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका लीन



और मैं hi मैं नवाज़ की बेशरमी पर हैरान होने लगी.

नवाज़ के मुँह से अपनी बहिन के सामने यह बात सुनकर आरती का चेहरा शर्म और डर के मारे एक दम लाल हो गया. उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा की नवाज़ कितना बेशरम है, जो आप के सामने भी ऐसी बातें बोल रहा है.

नुसरत आप ने जब अपने भाई के मुँह से यह बात सुनी, तोह उन्होंने पहले आरती के शर्मीले चेहरे को देखा और फिर नवाज़ को चिढ़ाते हुए बोलीं,

"ओहो नवाज़! तू तोह पूरी तरह दीवाने हो चूका है. काम से काम किचन में तोह अपनी भाभी को चैन से चाय बनाने दे! वैसे बात तोह तू सच कह रहा है, हमारी भाभी इस गुलाबी साड़ी में किसी अप्सरा से काम नहीं लग रही हैं."

आरती ने दोनों bhai-behan की यह छेड़छाड़ सुनकर पहले नवाज़ को देखने लगी



और फिर अपने होठों पर हाथ रख लिया और शरमाते हुए बोली,

"आप... आप भी इनकी बातों में आ गयी? जल्दी से मुझे मसाला बताइये कहाँ है, वर्ण मैं चाय नहीं बनाउंगी."

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ आगे बढ़कर ऊपर वाले शेल्फ से मसाला का डिब्बा उठाया और आरती के हाथ में देते वक़्त धीरे से फुसफुसाया,

"मसाला तोह यहाँ है रानी... पर असली मिठास तोह कल खेत में hi आएगी."

नवाज़ ने जैसे hi वह मसाला का डिब्बा आरती के हाथ में दिया और कल खेत में मिलने वाली मिठास के बारे में फुसफुसाया, तोह आरती ने तिरछी और गहरी नज़र से नवाज़ की तरफ देखा.



उसके होठ थोड़े से खुले हुए थे और आँखों में एक ऐसी चमक थी जैसे वह नवाज़ की इस बदमाशी पर उसे डांटना चाहती हो, पर उसकी साँसों की गर्मी उसे ऐसा करने नहीं दे रही thi.aarti की आँखों में अब नवाज़ के लिए एक अजीब सी कशिश और शर्मीली शिकायत साफ़ झलक रही है.

नुसरत आप अभी भी किचन के दुसरे कोने में बर्तन ठीक कर रही थीं, इसीलिए आरती ने मौका देखा और बिलकुल नवाज़ के करीब खिसक आयी. उसने दबे पाऊँ खड़े होकर, नवाज़ के कान के पास बेहद धीरे से फुसफुसाया ताकि आप न सुन सकें:

"आपका ध्यान हमेशा उसी तरफ क्यों रहता है...? काम से काम घर पर तोह थोड़ा सब्र रखिये. अगर आप ने सुन लिया न, तोह मैं अभी के अभी यहाँ से भाग जाउंगी."

नवाज़ ने उसकी इस दंति पर एक हलकी सी हंसी छुपाई और अपना चेहरा उसके और करीब लेकर बोलै,



"भाग कर कहाँ जाओगी रानी? कल तोह वैसे भी मुझे तेरे hi खेत में आना है."

आरती का दिल इस बात पर और ज़ोर से धड़क उठा. उसने डर और एक्ससिटेमेंट के मारे अपनी साड़ी का पल्लू उँगलियों में कास लिया और नवाज़ के सीने पर एक हलकी सी चुटकी kaat-te हुए बेहद धीरे से बोली:

"आप सच में बोहोत बेशरम हैं... पर... पर कल का इंतज़ार मुझे भी है. अब दूर हटिये और मुझे मसाला कूटने दीजिये!"

आरती का यह मज़ाक़िया पर गहरा इक़रार सुनकर नवाज़ का दिल खुश हो गया. वह मुस्कुरा कर दो कदम पीछे हटा और आरती नए जोश के साथ मसाला कुटाने में लग गयी, पर उसकी नज़रें अब भी beech-beech में नवाज़ को hi घूर रही थीं.

नवाज़ और आरती के बीच की वह dabi-dabi बातें चल hi रही थीं की तभी नुसरत आप उनके करीब आयीं और शरारत से मुस्कुरा कर बोलियें,

"क्यों भाभी, चाय बन रही है न...?"

आप की आवाज़ सुनकर आरती एक डैम से थोड़ा हड़बड़ा गयी. उसने जल्दी से किचन काउंटर पर रखा मसाला कूटने वाला okhli-musal संभाला और झुकते हुए बोली,



"हाँ... हाँ, बना रही हूँ आप."

नुसरत ने दोनों के चेहरे देखे और उन्हें छेड़ते हुए पूछा,

"...या यहाँ सिर्फ रोमांस hi चल रहा है?"

आरती का चेहरा तोह शर्म से लाल हुआ hi, पर नवाज़ ने फ़ौरन बात संभालती हुई हंसा और बोलै,

"अरे आप! आपके होते हुए... भला कहाँ रोमांस होगा?"

नुसरत ने नकली गुस्सा दिखते हुए अपने हाथ कमर पर रखे और बोलीं,

"अच्छा! तोह इसका मतलब मैं तुम दोनों के बीच कबाब में हड्डी हूँ? ठीक है, तोह फिर मैं यहाँ से चली जाती हूँ."

यह सुनकर आरती और ज़्यादा डर गयी की आप बुरा न मान जाएं. उसने जल्दी से आप का हाथ थमा और नरम आवाज़ में बोली,

"नहीं नहीं आप... आप रहिये न, ऐसी कोई बात नहीं है."

नुसरत ने आरती को टंगे खींचते हुए देखा और मुस्कुरा कर बोली,

"भाभी, अब आप इतने प्यार से कह रही हो तोह रुख जाती हूँ. पर मुझे पक्का लग रहा है की तुम दोनों के बीच कोई न कोई meethi-meethi बातें चल रही थीं."

आरती ने नज़रें चुराते हुए कहा,

"नहीं तोह आप... कुछ भी नहीं."

नुसरत ने एक आँख दबा कर कहा,

"अरे, कुछ तोह gusu-pusu सुनाई दे रहा था मुझे!"

आप की इस पक्की पकड़ पर आरती के पास अब शर्माने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था. उसने खुद को किचन के कामो में बिजी दिखने के लिए जल्दी से अपना सर झुकाया, बालों की लत को कान के पीछे किया, और काउंटर पर राखी अदरक और मसाला तेज़ी से कूटने लगी ताकि अपनी धड़कनो और शर्मीले चेहरे को छुपा सके. नवाज़ दूर खड़ा आरती के इस भोलेपन और आप की चालाकी पर मजेदारी से मुस्कुरा रहा था.
 
आरती ने बड़े hi जोश के साथ मसाला कूट कर चाय में डाला, और कुछ hi देर में पूरे किचन में अदरक और मसाले की बेहतरीन खुशबु महकने लगी. चाय अब पूरी तरह तैयार थी.

आरती ने दो alag-alag कप में चाय छन्नी .. पहला कप उसने नुसरत आप को दिया और फिर दूसरा कप लेकर वह नवाज़ के पास पहुंची. कप नवाज़ की तरफ बढ़ाते hue,Aarti ने आपने अंदाज़ में अपने एक हाथ को थोड़ी के पास रखा, अपनी सुनहरी घडी को चमकते हुए, और एक नखरीली पर प्यारी मुस्कान के साथ सीधे नवाज़ की आँखों में देखा.



घूर कर देखते हुए उसने पूछा,

"बताइये... कैसी बानी है यह चाय?"

नवाज़ ने आरती के इस खूबसूरत और भोले अंदाज़ को देखा, कप हाथ में लिया और चाय का एक घुट भरा. इस बार उसके चेहरे पर कोई मज़ाक़ नहीं था. उसने गहरी सांस ली और बेहद रोमांटिक अंदाज़ में आरती की आँखों में देखते हुए बोलै:

"उफ़... इस चाय में तोह नशा है रानी. लगता है तुमने अदरक के sath-sath अपनी आँखों का काजल और अपने दिल का सारा प्यार भी इसमें घोल दिया है. इतनी हसीं चाय मैंने ज़िन्दगी में नहीं पी."

नवाज़ के इस खुलेआम और शिद्दत भरे अंदाज़ पर आरती का दिल एक डैम से पिघल गया. उसका चेहरा शर्म से गुलाबी हो गया



और उसने थोड़ा नखरे से अपना सर झटकते हुए कहा,

"आप भी न... बस बातें बनाना जानते हैं!"

अपनी शर्म को छुपाने के लिए आरती जल्दी से मुड़ी और नुसरत आप से पूछा,

"आप, आप बताइये... आपको कैसी लगी चाय?"

नुसरत ने पहले अपने भाई के खोये हुए चेहरे को देखा और फिर खिलखिला कर हँसते हुए आरती से बोली:

"अरे भाभी! जब आपके 'इनको' ने इस चाय को जन्नत बता दिया, तोह मेरे कहने से अब क्या होगा? उन्होंने तोह आपकी चाय के sath-sath आपको भी अपना लिया है, अब मेरी तारीफ की क्या औकात!"

आप के इस ताने पर आरती ने शरमाते हुए अपनी नज़रें झुका लीन और अपनी साड़ी का पल्लू सँभालने लगी, जबकि नवाज़ उन दोनों की इस nok-jhonk का मज़ा लेते हुए चाय की चुस्कियां भरता रहा.

चाय peete-peete नुसरत आप ने अचानक दोनों की तरफ देखा और बड़े hi बेबाक अंदाज़ में पूछा,

"वैसे... तुम दोनों का मिलान हुआ है की नहीं अभी तक?"

आप का यह सवाल सुनते hi आरती के गले में जैसे चाय का घुट अटक गया. उसका चेहरा शर्म के मारे बिलकुल लाल टमाटर हो गया और उसने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका लीन.



नवाज़ ने मौका देखा और बदमाशी से हँसते हुए बोलै,

"अरे नहीं आप! और उसी के लिए तोह आपको हमारी थोड़ी हेल्प करनी होगी... हमारी सुहागरात के लिए!"

"सुहागरात...?! वाह, बड़ी प्लानिंग करके राखी है तुम दोनों ने!"

नुसरत ने अपनी आँखें नचकय्यीन और पूछा,

"अच्छा बताओ, क्या करना है मुझे?"

नवाज़ ने खुश होते हुए बताया,

"कल हम दोनों खेत जाने वाले हैं, तोह वहां हमारे लिए बीएड सजाना है आपको."

नुसरत खिलखिला कर हंस पड़ी,

"अच्छआ! तोह इसीलिए खेत जाने की तयारी हो रही है? मुझे तोह लगा वहां वह बड़े शहर से कोई प्रोजेक्ट वाले लोग आ रहे हैं."

नवाज़ ने आँख मारते हुए कहा,

"अरे, वह प्रोजेक्ट वाले लोग भी आ रहे हैं आप, पर असली प्रोजेक्ट तोह हमारा है."

आरती ने शर्मा कर नवाज़ के कंधे पर एक हलकी सी चपत मारी और दबी आवाज़ में बोली,



"आप चुप नहीं रह सकते क्या...?"

फिर उसने नुसरत की तरफ देखा,

"आप, यह बस मज़ाक़ कर रहे हैं."

नुसरत ने दोनों को देखा और बोली,

"अच्छा, तोह यह प्लान है तुम दोनों का! चल ठीक है नवाज़, मैं कर दूँगी तेरे लिए इतना."

नवाज़ ने चैन की सांस ली,

"थैंक्स आप!"

नुसरत ने फिर आरती की तरफ देखा और बड़े प्यार से बोलै,

"और हाँ, हमारी भाभी को भी तोह सुहागरात के लिए सजाना है न!"

आरती ने शर्म से paani-paani होते हुए जल्दी से कहा,



"नहीं नहीं आप... वह... वह तोह मैं खुद hi कर लुंगी."

नुसरत ने सर हिलाया,

"ऐसे कैसे खुद कर लुंगी? मेरी एक फ्रेंड है शहर में, वह बोहोत अच्छा मेकअप करती है. मैं कल सुबह hi उसको पार्लर से यहाँ बुला लुंगी."

नवाज़ ने फ़ौरन हाँ में हाँ मिलायी,

"हाँ, बिलकुल बुला लो आप! अपनी भाभी के लिए इतना तोह आप कर hi सकती हो."

आरती ने घबरा कर नवाज़ को घूरा,

"कोई ज़रुरत नहीं है जी! मैं आम रहना hi पसंद करती हूँ."

"ऐसे कैसे ज़रुरत नहीं है?"

नवाज़ ने आओ देखा न ताव, आप के सामने hi आगे बढ़ा और आरती के कमर के पीछे अपना मज़बूत हाथ दाल कर उसे झटके से अपने जिस्म से सत्ता लिया. उसने आरती की आँखों में देखते हुए हक़ से कहा,

"मुझे अपनी बेगम को कल सबसे अच्छे से सजा हुआ देखना है."

नवाज़ के इस अचानक टच और आप के सामने इतनी नज़दीकी से आरती का दिल डर और उत्तेजना से zor-zor से धड़कने लगा. उसने शरमाते हुए नवाज़ के सीने पर दोनों हाथ रखे और उसे दूर धकेलते हुए बोली,

"मैं सज लुंगी न... आप टेंशन मत लीजिये. फिर भी ब्यूटी पार्लर वाली को बुलाने की क्या ज़रुरत है..."

नवाज़ ने उसकी पकड़ और कस्ते हुए मज़ाक़ किया,

"बुलाना तोह पड़ेगा रानी!"

आरती ने देखा की बात अब बोहोत आगे बढ़ रही है और शाम ढलने वाली है, तोह उसने जल्दी से खुद को अलग किया और अपनी साड़ी संभालती हुई बोली.. उसे देखते हुई...



"अच्छा अब चलिए... बोहोत लेट हो रहा है, हमें निकलना चाहिए."

आरती की बात सुनकर नुसरत आप ने भी बहार आसमान की तरफ देखा, जहाँ dheere-dheere अँधेरा छ रहा था. उन्होंने नवाज़ से कहा,

"हाँ, भाभी को लेकर जाओ अब... उन्हें जाने में लेट हो जायेगा. रात भी हो गयी है, अगर ज़्यादा देर हुई तोह घर पर 'बड़े मालिक' डाँटेगे."

नवाज़ ने सर हिला कर बात मानी, पर उसके दिमाग में एक और ख्वाहिश थी. उसने आप से कहा,

"हाँ आप, लेकर जाता हूँ... पर पहले इन्हें अम्मी से तोह मिलवा दूँ."

आप ने मुस्कुरा कर हाँ कही,

"हाँ, अम्मी से मिलवाओ ज़रूर... उन्हें भी तोह देखना है अपनी इस प्यारी सी बहु को!"

फिर उन्होंने नवाज़ को सबक़ देते हुए कहा,

"पर ध्यान रखना, अंदर ज़्यादा लेट मत करना. जल्दी से मिलवा कर बहार लेकर आओ."

आरती ने जब सुना की अब अम्मी से मिलना है, तोह उसका दिल एक बार फिर शर्म और थोड़े डर से तेज़ी से धड़कने लगा. उसने अपनी साड़ी का पल्लू एक बार फिर सीधा किया और नवाज़ के peeche-peeche दबे पाऊँ अंदर अम्मी के कमरे की तरफ बढ़ गयी, जहाँ एक नया और जज़्बाती मोड़ उनका इंतज़ार कर रहा था.

नुसरत आप बहार हाल मई hi रुख gayi,aur ये दोनों अम्मी के कमरे मई गए ..

अंदर अम्मी सो रही थी .. नवाज़ ने मौका देखा और दबे पाऊँ आरती के पीछे जेक खड़ा हो गया .. आरती को अपने पीछे एक मरदाना गर्मी महसूस हुई.

नवाज़ ने पीछे से आरती की कमर में अपने दोनों मज़बूत हाथ दाल दिए और उसे झटके से अपने सीने से सत्ता लिया. आरती के मू से जोर से आवाज़ होते होते रह गया .

"नवाज़ जी! छोड़िये... अम्मी सामने hi है और आप बहार hi कड़ी हैं, देख लेंगी!"

आरती ने हड़बड़ाकर फुसफुसाते हुए कहा, पर उसकी आवाज़ में डर से ज़्यादा एक नरम सिसकी थी.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और अपना चेहरा आरती के कान के पास ले गया. उसने वहां अपनी गरम सांसें छोड़ी और उसकी गर्दन पर एक हल्का सा चुम्बन करते हुए बोलै,



"आप को सब पता है रानी... उन्हें पता है की उनका भाई अपनी 'बेगम' के बिना एक पल भी चैन से नहीं रह sakta.aur अम्मी सो रही है .. नींद मई उन कुछ पता नहीं चलता "

आरती का पूरा बदन थरथराने लगा. उसने नवाज़ की कलाइयां पकड़ कर उन्हें हटाने की कोशिश की, पर नवाज़ ने अपनी पकड़ और कास दी. उसका एक हाथ अब आरती की साड़ी के पल्लू को सरकाते हुए उसके पेट पर gol-gol घूमने लगा.

"बड़ी बातें हो रही थी मेरे बारे मई आप के साथ ?"

नवाज़ ने छेड़ते हुए पूछा.

नहीं कोई बाते नहीं हो रही थी .. बस आपने दांते हुई मुझे चाय बनाने को कहा न तब मैंने आप से पूछा था ऐसे ये हमेशा डाँटते है क्या

अच्छा मैंने तुजे डांटा

हां जी

वो तो मेरी शरारत थी ..पर असली जूनून तुजे कल दिखेगा

आरती ने शर्म से अपनी आँखें मूँद ली और पीछे मुड़कर नवाज़ की आँखों में देखा,



जो अब उत्तेजना से लाल हो रही थी.

"आप बहुत बेशरम हैं... कल खेत में क्या होगा मेरा, ये सोच कर hi डर लग रहा है."

नवाज़ ने उसके लबों पर अपनी ऊँगली फेरी और एक शैतानी मुस्कराहट के साथ बोलै,

"वहां तोह मैं तुझे सांस लेने का मौका भी नहीं दूंगा रानी. आज की ये तड़प कल खेत में पूरी तरह से निचोड़ लूँगा."

इतना कह कर नवाज़ ने उसके गाल पर एक ज़ोर की किश कर दी ..
 
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