Adultery Manhoos se mahan tak - Page 24 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

भाई थोड़ा वेट करलो आज अपडेट दे दूंगा पक्का
 
अपडेट 179



मैं जब कमरे से बहार आया तो हेमा सामने hi कड़ी मुस्कुरा रही थी .

हेमा : आ गए , चलो अब एक्सरसाइज करते हैं.

वो मुझे अपने साथ छत पर ले गयी. अभी सूरज नहीं निकला था तो हवा में ठंडक थी. खुली छत पर आते hi मैं हाथ पाऊँ खोलने लगा यानि क स्ट्रेचिंग करने लगा. हेमा भी एक्सरसाइज करने लगी . एक्सरसाइज करते वक़्त हेमा का ध्यान मुझ पर hi था . मैं वैसे तो दिखा रहा था क मैं सिर्फ एक्सरसाइज कर रहा हूँ पर हेमा को भी मैं कनखियों से देख रहा था. कोई 15 मिनट्स बाद hi हेमा ने मुझे अपने पास बुला लिया.

हेमा : तुम तो बड़ी जल्दी जल्दी एक्सरसाइज कर रहे हो. इतनी साडी एक्सरसाइज क्या तुम रोज़ करते हो ?

अमित : अभी तो शुरू किया है और आप कह रही हैं इतनी साडी. हम तो एक घंटे से पहले छोड़ते नहीं वर्ण कोच साहब सजा देते हैं.

हेमा : तभी इतनी पावर है और साइज भी इतना बड़ा है.

हेमा ने ये कहते हुए मुझे सर से पाऊँ तक देखा पर उसकी नज़र किस और थी मैं समझ रहा था.

अमित : जी बस ये तो अपने आप हो जाता है.

हेमा : ाचा मुझे भी सीखा दो थोड़ी बहुत एक्सरसाइज.

अमित : अब आप मेरा मज़ाक उदा रही हैं . भला आपको मैं क्या सिखों आप तो पहले से hi सब जानती हैं.

हेमा : अरे नहीं , मुझे ज्यादा कुछ नहीं अत प्लीज थोड़ा सा सीखा दो

हेमा ( मन में ) देखती हूँ कुछ करते भी हो या नहीं.

अमित : ाचा ठीक है क्या सीखना है आपको ?

हेमा : फ़िलहाल तो स्ट्रेचिंग से hi शुरू करो. कुछ और एक्सरसाइज सीखा दो जो मेरे लिए फायदेमंद हो.

अमित : जैसा आप कहें.

अमित ( मन में ) ाचा है खुद hi बोल रही है , अब तुझे वो एक्सरसाइज करवाऊंगा क देखना.

मैंने हेमा को कुछ स्ट्रेचिंग की एक्सरसाइजेज बताई और हेमा को करने को कहा. ये आसान सी बेसिक्स एक्सरसाइजेज थी पर हेमा जानबूझ कर ठीक से नहीं कर रही थी.

हेमा : ये मुझसे ठीक से नहीं रही प्लीज ज़रा मेरी मदद कर दो एक बार

अमित : चलिए मैं आपकी मदद करता हूँ.

हेमा को मैंने झुक कर अपने पाऊँ को हाथ लगाने को कहा पर उसके हाथ पाऊँ तक नहीं पहुँच रहे थे तो मैं उसके पीछे खड़ा हो कर उसकी पीठ को दबाकर उसे झुकाने लगा. ऐसा करते हुए मैंने अपना लैंड हेमा की बहार को उभरी हुई गांड से भिड़ा दिया. मेरा लैंड जो एक्सरसाइज करने की वजह से सो गया था हेमा की गांड से लगते hi उसमे जान आगयी . लोअर क नीचे अंडरवियर तो था नहीं इस लिए लोअर में तम्बू बनने लगा. लैंड खड़ा होते hi हेमा को भी उसका एहसास हो गया .

हेमा : आअह्ह्ह सीसीसी मुझसे नहीं हो रहा है

अमित : फिर से सीधी हो कर दोबारा झुकिए हो जायेगा.

हेमा फिर से सीधी हुई और झुकी तो इस बार झुकते हुए उसने अपनी गांड पीछे को दबायी जिससे लैंड पर उसकी गांड का दबाव पहले से ज्यादा बढ़ गया . मैंने भी मौके का फायदा उठाते हुए उसकी नरम कमर को थामे हुए लैंड को गांड में दबा दिया. क्या बताऊँ क्या मज़ा था दोस्तों . एक डैम नरम सा एहसास बड़ा hi ाचा लग रहा था. मेरा लैंड पूरी औकात पर आ गया और इस बार और भी अचे से चूतड़ों में धंसते हुए नीचे को छूट की तरफ फिसल गया . जिससे हेमा क मुँह से सिसकी निकल गयी .

हेमा : कक्कक्कक्स उम्म्म्म ाचा लग रहा है ऐसे hi करो .

हेमा स्किन टाइट लोअर में थी जिससे उसको मेरे लैंड का एहसास अचे से हो रहा था. उसके मुँह से ये सुनते hi मैंने अपनी कमर को थोड़ा पीछे किया और लैंड का निशाना छूट पर लगते हुए अचे से दबा दिया.

अमित : मज़ा आ रहा है आपको ?

हेमा : कक्कक्स उम्म्म बहुत .... ऐसे hi एक्सरसाइज करवाओ मुझे . बहुत मज़ा आ रहा है . तुम वाकई में एक्सपर्ट लग रहे हो

अमित : जी मैं तो बस आपकी मदद hi कर रहा हूँ जैसे आप कहेंगी वैसे आपकी सेवा कर दूंगा.

मेरे हाथ अब हेमा की कमर से फिसल कर उसके चूतड़ों पर आ गए थे मगर हेमा ने इस बात पर कोई ऐतराज़ अभी दिखाया तो मैं उसके नरम चूतड़ों को धीरे धीरे मसलने और सहलाने लगा . साथ hi मैं ज़ोर लगा कर लैंड को छूट पर रगड़ देता. कहने को तो मैं हेमा को एक्सरसाइज करवा रहा था पर असल में मैं एक तरह से उसकी चुदाई hi कर रहा था बस कपड़ों की एक हलकी सी दीवार दरमियान थी. हेमा की कमर थामे मैंने ज़ोर लगाना जारी रखा तो हेमा की टंगे कम्पनी लगी और वो मुझसे अलग हो गयी . उसका चेहरा लाल हो चूका था. अलग होते hi उसने मेरे लोअर में बने तम्बू को देखा तो उसकी नज़र तो हैं जैम गयी . मैंने भी ज्यादा छुपाने की कोशिश नहीं की.

हेमा : उफ्फफ्फ्फ़ हहहह मैं तो थक गयी यार बहुत स्टैमिना है तुम्हारा .

अमित : जी अभी स्टैमिना अपने देखा hi कहाँ है. आधा घंटा बिना रुके तो कर hi सकता हूँ.

मैंने जान बुझ इंदिरेक्ट्ली अपनी टाइमिंग बता दी तो हेमा चौंक गयी. शायद वो भी समझ गयी थी क मैं क्या बात कर रहा हूँ

हेमा : शॉकेड ) आधा घंटा !!!! रियली ??? इतना स्टैमिना है तुम में ??

अमित : आज़म क देख लीजिये अगर यकीन न हो तो

हेमा : लगता है ज़माना hi पड़ेगा पर अगर गलत निकले तो ?

अमित : और अगर मैं सही निकला तो ??

हेमा : let’s सी . अब तुम चाहो तो एक्ससरसीसे करो मैं जा रही हूँ मुझे नहाना है .

हेमा ने स्माइल क साथ ये कहा और जल्दी से चली गयी . मैंने उसकी मटकती हुई गांड देखि तो हल्का सा गीला पैन नीचे नज़र आया यानि की हेमा का काम हो गया था ऊपर से hi रगड़े करने से . मुझे अपना काम बनता हुआ नज़र आ रहा था . ये काम इतनी आसानी से और इतनी जल्दी हो जायेगा ये मैंने सोचा भी नहीं था. खैर हेमा क नीचे जाते hi मैं भी नीचे आ गया और कमरे में आ कर तैयार होने लगा .

तैयार हो कर मैं अपने बीएड पर बैठा था तो करिश्मा दीदी मेरे कमरे में आ गयी . वो भी तैयार हो चुकी थी .

करिश्मा दीदी : चल जल्दी से नाश्ता कर ले और फिर वापिस निकल ले मैंने ड्राइवर को कह दिया है.

अमित : पर दीदी आंटी और हेमा दीदी क्या कहेंगी ? और मैं तो अभी तक अंकल से भी नहीं मिला. जीजा जी भी तो नहीं हैं.

करिश्मा दीदी : पापा जी नीचे hi हैं मिल ले तू उनसे. माँ जी और दीदी की तू चिंता मत कर , तेरे कॉलेज की पड़े ज्यादा ज़रूरी है . चल अब जल्दी से बैग पैक कर और नीचे आ कर नाश्ता कर ले.

मुझे समझ नहीं आ रही थी क दीदी क्यों मुझे वापिस भेजने पर तुली हुई हैं . खैर अब क्या करता मैंने अपना बैग पैक किया और नीचे आ गया . नीचे आया तो दीदी क ससुर तैयार हो कर नाश्ते क टेबल पर बैठे थे अनुपमा जी भी उनके साथ hi बैठी थी . मैंने जाते hi अंकल क पाऊँ छुए .

राम लाल : जीते रहो बीटा , कैसे हो तुम ?

अमित: बस ठीक हूँ अंकल आप सुनाइए

राम लाल : मैं भी ठीक हूँ बीटा , बस ज़िन्दगी गुज़र रहे हैं. और सुनाओ राघव भाई साहब अब कैसे हैं ?

अमित : बस आपकी दुआएं हैं अंकल वो अब ठीक हैं.

राम लाल : ये सुबह सुबह तुमने बैग क्यों पैक कर लिया? कुछ दिन तो रुको हमारे पास

करिश्मा दीदी : वो पापा इसके कॉलेज भी हैं न तो स्टडी पर असर पड़ेगा

अनुपम : कुछ नहीं होता एक दो दिन यहाँ रह लेगा तो.

‘ ये तुमने बैग क्यों पैक कर लिया ? कहाँ जा रहे हो ? ‘ ऊपर से नीचे आती हुई हेमा ने सवाल किया . मैं तो बस उसे देखता hi रह गया . हाफ स्किन टाइट रेड स्कर्ट में वो कमल की लग रही थी. होंठों रक्तिम लाल और हलके मेकअप क साथ वो कोई मॉडल hi लग रही थी. पाऊँ में हाई हील होने से तो वो मटक मटक चलती हुई नीचे आ रही थी.

करिश्मा दीदी : वो दीदी इसके कॉलेज हैं तो स्टडी पर असर पड़ेगा न अगर छुट्टियां हो गयी तो.

हेमा : ये कहीं नहीं जायेगा आई बात समझ में. और अगर इतनी जल्दी है इसे भेजने की तो तुम भी साथ hi चली जाओ. पहली बार यहाँ आया है तो क्या यहाँ रुक नहीं सकता? वैसे भी मैंने इसे आज अपने साथ ले कर जाना है हमारा शहर दिखने क लिए . इसने खुद मुझे हाँ कहा है और तुम इसे ज़बरदस्ती भेज रही हो.

अनुपमा: ये क्या सुन रही हूँ मैं ? अगर हेमा क साथ उसकी बात हो गयी है तो तुम क्यों इसे भगा रही हो यहाँ से ? क्या मेरी बेटी की बात की कोई कीमत नहीं ? यद् रखो तुमसे पहले हेमा का हक़ है इस घर पर. और तुम्हे उसकी बात का सम्मान करना चाहिए. एक दो दिन छुट्टी करने से कुछ नहीं हो जाता. लड़की वाले तो लड़के वालों को खुश रखने क लिए क्या क्या नहीं करते हैं और ये एक दो दिन छुट्टी नहीं कर सकता . अगर तुम्हे इतनी hi तकलीफ है तो चली जाओ तुम भी . जब छुट्टियां हो तो चली आना.

राम लाल : अरे कैसी बातें कर रही हो तुम भी . बहु ठीक hi तो कह रही है. इसकी पड़े पर असर पड़ेगा .

अनुपमा : आप चुप रहो जी , घर क मामलों में दखल मत दिया करो आप .

अनुपमा तो पल में गुस्से में आ गयी थी . हेमा की बात की क्या कीमत है इस घर में ये एक पल में hi समझ आ गया था मुझे अनुपमा का रवैया देख कर. और अनुपमा क सामने क्या औकात है अंकल की ये भी देख लिया. एक बार कहने से hi वो तो दम दबाकर बैठ गए. इससे पहले क बात और बढ़ती मैं hi बोल पड़ा.

अमित : अरे आप क्यों नाराज़ हो रही हैं? आप जब तक कहेंगी मैं यहाँ रह लूंगा. हेमा जी को भला मैं इंकार कर सकता हूँ. वो तो कॉलेज से फ़ोन आ रहा था मैं जाने को तैयार हो गया था . ये लीजिये रख दिया मैंने बैग.

अनुपमा : जाओ अब जा कर नाश्ता लगाओ देख क्या रही हो?

करिश्मा दीदी मेरी बात पर मुझे देख रही थी तो अनुपमा ने उन्हें देखते हुए नाश्ता लगाने को कहा. मुझे ाचा नहीं लग रहा था अनुपमा जिस तरह से बात कर रही थी और हेमा सीधे सीधे उकसाती थी अनुपमा को ये तो नज़र आ hi रहा था. पर ये सब तो पहले hi आंटी मुझे समझा चुकी थी और इसी बीमारी का hi तो इलाज करने क लिए मुझे यहाँ भेजा था आंटी ने . खैर , करिश्मा दीदी किचन में चली गयी और नौकरानी क साथ मिल कर सबको नाश्ता करवाने लगी . नाश्ता करते hi अंकल चुपचाप निकल लिए.

हेमा : चलो अमित मैं तुम्हे अपना ऑफिस दिखती हूँ और शहर की भी सैर करवा दूंगी.

अमित : जी चलिए .

अनुपमा : बीटा किसी बात की चिंता मत करना . तुम आराम से जाओ और शहर घूमो. मैं बात कर लुंगी अगर कोई कुछ कहेगा तो.

अमित : अरे नहीं उसकी ज़रूरत नहीं पड़ेगी. मैं तो खुद रुकना चाहता था इसी बहाने आप सब को अचे से जान पाउँगा और जीजू से भी मिल लूंगा.

हेमा : चलें ?

अमित : हांजी चलिए.

हेमा मुझे अपने साथ कार में बिठा कर ले चली . कार वो खुद hi चला रही थी और मैं साथ वाली चेयर पर बैठा उसको hi देख रहा था. कभी मैं उसकी गोरी चिकनी नंगी टंगे देखता और कभी उसके कैसे हुए रसीले आमों को. हेमा ने भी नोट कर लिया क मैं कहाँ देख रहा हूँ.

हेमा : तुम वापिस क्यों जा रहे थे ? सुबह हमारी बात हुई थी न फिर तुम बैग उठा कर कहाँ चल पड़े? सच सच बताओ करिश्मा ने hi कहा था न तुम्हे वापिस जाने को ?

अमित : नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं

हेमा : अछि तरह पारा है मुझे उसका क वो कैसी है. तुम उसकी इतनी परवाह क्यों कर रहे हो ? मेरे होते तुम्हे टेंशन लेने की ज़रूरत नहीं .

अमित : अरे मैं टेंशन क्यों लूंगा . वो कौन सा मेरी सही बहिन है . वैसे भी आप कहें तो मैं किसी की भी नाराज़गी मोल ले सकता हूँ करिश्मा क्या चीज़ है .

मैंने जान बुझ कर ऐसे कहा ताकि हेमा मुझ पर विश्वास कर सके. वैसे भी हेमा करिश्मा को पसंद नहीं करती ये तो ज़ाहिर hi था ऐसे में मैंने करिश्मा दीदी की बुराई कर क उसके विचार जानने की कोशिश शुरू कर दी.

हेमा : that’s लिखे ा मन. तुम वाकई में एक डेरिंग लड़के हो. ी लिखे आईटी. अगर मेरी बात मानोगे तो फायदे में hi रहोगे.

अमित : फायदा तो होगा hi जब आप जैसी अप्सरा साथ हो तो . आपके लिए तो ऐसी 100 करिश्मा कुर्बान हैं. वैसे भी मैं तो उसे अचे से जनता तक नहीं. ऊपर से रोअब झाड़ रही है.

हेमा : छोडो उसे वो है hi ऐसी. अपने पति तक को तो खुश करना अत नहीं उसे. इसी लिए अभी तक माँ नहीं बानी और न hi बनेगी.

हेमा की ये बात मेरे दिमाग में घंटे की तरह बजी. इस बात क पीछे कोई न कोई राज़ ज़रूर था जिसे पता करना होगा. हेमा का इतने दावे से ये कहना क करिश्मा दीदी न माँ बानी है न बनेगी ये मुझे किसी साजिश की तरफ इशारा कर रहा था .

अमित : वैसे एक बात कहूं आप बहुत खूबसूरत हैं. मुझे पता चला था क आप जीजा जी से बड़ी हैं पर आप तो किसी भी एंजेल से करिश्मा दीदी से बड़ी नहीं लगती तो जीजा जी से बड़ी कैसे हो सकती हैं. क्या ये सच है या मुझे झूठ बताया गया है.

हेमा : है है है थैंक्स फॉर थे कॉम्पलिमेंट पतों मैं राजीव से बड़ी hi हूँ. एक्सरसाइज करने और खुद को मेन्टेन रखने की वजह से मैं ऐसी दिखती हूँ.

अमित : वैसे अभी तक आपने शादी क्यों नहीं की ? आपके पीछे तो लड़कों की लाइन लगी रहती होगी

हेमा : ी ऍम दिवोर्सीद.

अमित : ओह ी म सॉरी. बूत ये कैसे हुआ ी मैं आप जैसी हूर को तो कोई जाहिल hi दूर जाने देगा.

हेमा : डोंट बे सॉरी इवन ी don’t केयर . वैसे भी मैं शादी से खुश नहीं थी: वो मेरे टाइप का नहीं था. मैं तो खुश हूँ क उस कैदखाने से आज़ाद हो गयी.

अमित : वैसे आपको कमी महसूस नहीं होती कभी साथी की?

हेमा :( मेरी आँखों में देखते हुए) होती है , सच कहूं तो मुझे हमेशा से तलाश थी मेरे ड्रीम बॉय की पर कभी मिला hi नहीं. तुम बिलकुल वैसे हो पर अफ़सोस क हम देर से मिले. अगर कुछ साल पहले मिले होते तो डेफिनिटेली मैं तुम्हे पसंद कर लेती.

अमित :( चौंकने की एक्टिंग करते हुए) रियली ?? क्या सच में आप मुझे अपने काबिल समझती हैं ? मेरा मतलब है कहाँ आप हूर पारी और कहाँ मैं एक आम सा लड़का.

हेमा : यू अरे नॉट ान आर्डिनरी गाए ात लीस्ट थे वे ी फील. तुम परफेक्ट एक्साम्प्ले हो ड्रीम बॉय की. मुझे तो पूरा यकीन है तुम्हारे पीछे लड़कियों की लाइन लगी रहती होगी कॉलेज में और जो एक बार तुम्हारे साथ प्यार कर लेगी वो कभी किसी और क बारे में सोचेगी भी नहीं.

अमित : इतना दावे क साथ कैसे कह सकती हैं आप ?

हेमा :बिकॉज़ ी ऍम एक्सपेरिएंस्ड.

अमित : लगता है आपको कुछ ज्यादा hi एक्सपीरियंस है. तो क्या कुछ एक्सपीरियंस मुझे भी देंगी आप?

हेमा : सोच तो रही हूँ , चेक तो करना बनता hi है क जो नज़र आ रहा है वो सच है या ‘ नाम बड़े और दर्शन छोटे ‘ वाली बात है.

अमित : ये तो मौका देकर hi पता चलेगा . झंडा गाड़ना मैंने भी सीखा है.

हेमा : let’s सी , लो आ गया मेरा ऑफिस .

हेमा ने गाड़ी रोकी तो सामने एक कांच की दीवारों और अलग अलग डिज़ाइनर कपड़ों से सजे सटटूएस से सजी ये एक बहुत hi अछि फैशन गैलरी थी. दरवाज़े पर hi एक दरबान खड़ा था और अंदर कुछ सेल्स गर्ल्स और लेडी टेलर भी थी . अंदर भी मेहेंगे डिज़ाइनर कपड़ों की भरमार थी. पीछे की तरफ सीढ़ियां थी जो ऊपर की तरफ जा रही थी. हमारे अंदर आते hi सब बरी बरी से हम दोनों को विश करने लगे. हेमा ने एक दो काम उन्हें बताये और मुझे साथ लेकर उन सीढ़ियों से ऊपर आ गयी जहाँ एक ऑफिस बना हुआ था और साथ hi रेस्ट रूम भी था. हेमा आते hi अपनी चेयर पर बैठ गयी और मुझे अपने सामने बिठा लिया . कुछ hi देर में एक औरत 2 गिलास जूस क ले आयी. मुझे समझ नहीं आ रहा था क हेमा कर क्या रही है. मैं तो सोच रहा था क वो मेरे साथ चुदाई क लिए तैयार है पर वो ऐसे आराम से बैठी थी जैसे कोई इरादा hi न हो. अब तक हमारी बातें भी इंदिरेक्ट्ली हो रही थी इस लिए मैं सीधा सीधा पूछ भी नहीं सकता था.

हेमा : क्या हुआ क्या सोच रहे हो ?

अमित : कुछ नहीं , मुझे लगा था क हम कहीं और जायेंगे

हेमा : ाचा ! तो कहाँ जायेंगे क्या सोचा था तुमने ?

अमित : पता नहीं , आप अपना काम कीजिये

हेमा : हे हे हे , वेट करो थोड़ा, ऑफिस में भी तो ध्यान रखना पड़ता है न. अभी थोड़ी देर में हम चलते हैं तब तक ये जूस पियो थोड़ी ताकत मिलेगी.

अमित : ताकत की कोई कमी नहीं है हेमा जी बस दिखने का मौका नहीं मिल रहा .

हेमा : मिल जायेगा थोड़ा सबर रखो .

हेमा मुझे देख कर मुस्कुराती हुई मुझे चिढ़ाने की कोशिश कर रही थी पर उसे कहाँ पता था क खेल वो नहीं खेल रही बल्कि मैं उसे खिला रहा हूँ.

उधर सप ऋतू सिंह ने कल रत hi मला सुशिल कुमार क खिलाफ कई ठिकानो पर दबिश कर दी थी और वहां से अवाइड हथियार नशे की खेप क साथ साथ कुछ और भी गौर कानूनी चीज़ें बरामद हुई थी. सुबह की अख़बार में आज ऋतू सिंह और उसकी टीम क एक्शन क बारे में hi ख़बरें भरी पड़ी थी. हालाँकि किसी खबर में मला सुशिल का नाम नहीं था और न hi उसके खिलाफ कोई सीधा एक्शन लिया गया था. मगर इस खबर से बलजीत राइ बहुत खुश था और उसने अपने दोस्त नारायण दस् को भी बता दिया था क काम हो गया है. क्यूंकि उसे पता था पुलिस जल्द hi सुशिल कुमार को शिकंजे में ले लेगी. इस ख़ुशी को सेलिब्रेट करने क लिए सुबह hi बलजीत राइ घर से निकल गया. एक तो उसकी चल कामयाब हो गयी थी दूसरा उसकी बेटी का बर्थडे आ गया था तो उसने प्लानिंग कर ली क इस मौके पर वो बड़ी पार्टी करेगा . इस बहाने वो सप ऋतू सिंह से भी मिलना चाहता था ताकि उसे अपनी तरफ कर सके. बलजीत राइ ने अपने एम्प्लाइज को अर्रंगेमेन्ट्स की ज़िम्मेदारी देदी और शहर की साडी बड़ी हस्तियों को बुलाने को कह दिया साथ hi बड़े सरकारी ऑफिसर्स को भी.

बलजीत राइ घर पर नहीं था तो आज शीना भी कॉलेज चली गयी . शीना को उसके बाप ने बता दिया था क वो उसका बर्थडे धूमधाम से मानना चाहता है इस लिए उसन शीना को अपनी सब फ्रेंड्स और उनकी फैमिलीज़ को भी इन्विते करने को कह दिया था. शीना इस बात से बहुत खुश थी और वो सब से पहले अमित को इनविटेशन देना चाहती थी. मगर जैसे hi वो कॉलेज पहुंची तो उसे पता चला क अमित तो आज आया hi नहीं. शी न ने जल्दी से अमित को फ़ोन लगा दिया .

शीना : कहाँ हो यार आज कॉलेज क्यों नहीं आये ?

अमित : अरे वो मैं ज़रूरी काम से बहार आया हूँ. क्यों कोई ज़रूरी काम था क्या ?

शीना : हाँ , तुम्हे इन्विते करना है अपने बर्थडे पर.

अमित : that’s ग्रेट तुम्हारा बर्थडे है !! हैप्पी बर्थडे

शीना : आज नहीं है , मैंने तुम्हे इन्विते करने क लोट फोन किया है. परसों मेरा बर्थडे है और पापा ने इस बार मेरे बर्थडे पर सबको पार्टी देने का कहा है. मैं सबसे पहले तुम्हे इन्विते करना चाहती थी और तुम आये hi नहीं .

अमित : ओह ाचा , पर यार मैं तो बहार हूँ और शायद मैं तब तक वापिस नहीं आ पाउँगा . तुम बाकि सब को इन्विते कर लो . मेरी तरफ से तुम्हे बहुत साडी शुभकामनाएं

शीना : क्या???? तुम नहीं आओगे ? मैंने तुम्हे बताया था न का इस वीक मेरा बर्थडे है फिर तुम गए hi क्यों? मुझे कुछ नहीं पता अगर तुम न आये तो मैं भी अपना बर्थडे नहीं मनाऊंगी.

अमित : ये क्या बात हुई? किसी एक क न होने से क्या होता है ? बाकि सब तो हैं न वहां. सब क साथ बर्थडे सेलिब्रेट करो. अगर ज़रूरी न होता तो मैं नहीं अत. मेरी मज़बूरी है . प्लीज तरय तो अंडरस्टैंड.

शीना : ऐसी क्या मज़बूरी आ गयी जो तुम ऐसे अचानक भाग गए? एक बार मुझे तो बताते क्या पता मैं कोई मदद कर देती .

अमित : इसमें कोई मदद नहीं कर सकता , बस भगवन से प्रार्थना करो क काम बन जाये बाकि सब मैं आ कर बताऊंगा. और दुआ करता हूँ क तुम्हे हर ख़ुशी मिले.

शीना : सिर्फ दुआओं से काम नहीं चलेगा. मुझे बर्थडे पर गिफ्ट भी चाहिए.

अमित : ok गिफ्ट भी दे दूंगा बोलो क्या चाहिए ?

शीना : वो मैं बाद में बताउंगी और हाँ मैं अपना बर्थडे तुम्हारे साथ सेलिब्रेट करना चाहती थी पर तुम नहीं हो तो सुन लो जैसे hi वापिस आओ मुझसे मिलना होगा. और मेरे साथ मेरा बर्थडे मानना होगा. बाकि सब को तो बर्थडे पार्टी अभी मिल जाएगी पर जब तक तुम्हारे साथ सेलिब्रेट नहीं कर लुंगी मुझे ाचा नहीं लगेगा.

अमित : ाचा ठीक है जैसा तुम कहो वैसा hi होगा. अभी मुझे जाना है मैं बाद में बात करूँगा

शीना : ok bye, टेक केयर

शीना को ाचा तो नहीं लग रहा था अमित क बिना अपना बर्थडे मानना पर अब किया भी क्या जा सकता था . पर इसमें भी शीना को एक नयी रह नज़र आ गयी थी और वो मन में कुछ सोचती हुई मुस्कुराती हुई कैंटीन में चली गयी अपनी टोली को इन्विते करने. तीसरा लेक्चर था तो सब कैंटीन में आ गए थे हालाँकि राधा और रीमा आना तो नहीं चाहती थी पर उन्हें फ़ोन कर क बुला लिया गया और वो भी लाइब्रेरी से सीधा कैंटीन में आ गयी.

रीमा : अरे दीदी आप ? आप तो घर थी न

शीना : हाँ घर थी पर एक ज़रूरी काम से यहाँ आयी हूँ.

शिवानी : ज़रूरी काम ? कैसा ज़रूरी काम वो भी कॉलेज में ?

शीना : तुम सब को इन्विते करने आयी हूँ, परसों मेरे बर्थडे पर पापा ग्रैंड पार्टी दे रहे हैं तो तुम सब क बिना मैं भला कैसे बर्थडे सेलिब्रेट कर सकती हूँ. इस लिए तुम सब को परसों पूरी फॅमिली क साथ आना होगा वर्ण मैं नाराज़ हो जाउंगी जो न आया .

मीनल : ग्रेट , मतलब फुल एन्जॉय होगा. ये तो बहुत अछि खबर सुनाई आपने दीदी . मैं तो सबसे पहले आउंगी और मोहित भी.

शिवानी : मेरी बेस्ट फ्रेंड का बर्थडे है मैं तो सबसे पहले आउंगी, मैंने तो सोचा था इस बार हमारा hi ग्रुप होगा फार्महाउस पार्टी पर . पर यहाँ तो अंकल ने बड़ी पार्टी ऑर्गेनिसे कर दी.

राधा : सॉरी दीदी मैं नहीं आ पाऊँगी

शीना : अरे ये क्या बात हुई ? तुम क्यों नहीं आओगी ?

राधा : वो क्या है दीदी माँ कहीं नहीं जाती और अमित यहाँ नहीं है तो मैं भी नहीं आ सकती.

शीना : मुझे कुछ नहीं सुन्ना, अमित से मेरी बात हो गयी है. वो नहीं आ सकता तो क्या हुआ तुम सबको आना होगा. और अगर तुम न आयी तो मैं खुद तुम्हे लेने आ जाउंगी. आंटी से मैं बात कर लुंगी उन्हें भी आना hi होगा.

राधा : पर दीदी.....

कल्पना : don’t वोर्री दीदी राधा को मैं ले आउंगी. और आंटी को भी. तू टेंशन क्यों लेती है ? वो यहाँ नहीं है तो क्या हुआ मैं तो हूँ न ड्यूटी पर उसकी गैर हाज़िरी में मैं hi स्काउट करुँगी तुम्हे.

शीना : नेहा दीदी आपको करुणा और आंटी को भी आना होगा. निधि दीदी और उनकी फॅमिली को मैं खुद इन्विते कर लुंगी. और शालू तुम भी ज़रूर आना वर्ण मैं तुमसे बात नहीं करुँगी

शालू : मैं कैसे ...

शीना : कोई एक्सक्यूज़ नहीं ok

नेहा : शीना मैं कोशिश करुँगी पर माँ का नै कह सकती .

शीना : सब को आना पड़ेगा. बर्थडे रोज़ रोज़ थोड़ी अत है. ाचा मैं चलती हूँ मुझे बहुत से काम करने हैं.

इतना कह कर शीना वहां से निकल गयी. राधा क चेहरे पर मायूसी देख कर नेहा ने पूछ hi लिया :

नेहा : तुम इतनी उदास क्यों हो राधा ?

राधा : कुछ नहीं दीदी , सब पार्टी में जायेंगे पर अमित नहीं होगा वहां .

रीमा : दिल छोटा क्यों करती हो तुम ? हम सब तो होंगे न तुम्हारे साथ . अगर तुम ऐसे उदास रहोगी तो क्या अमित को ाचा लगेगा ?

कल्पना : बिलकुल सही , वो सब से ज्यादा परवाह तुम्हारी hi करता है और तुम उदास रहोगी तो वो हमसे नाराज़ होगा वापिस आ कर.

मीनल : सही कहा , चलो अब कुछ आर्डर भी करो क आज सिर्फ बातों से पेट भरना है .

कल्पना : तू तो है hi भूखी बुला अपने मजनू को किधर है वो

मीनल : अभी आ जायेगा तब तक कुछ तो मंगवा लो

कैंटीन में इनकी अपनी hi मस्ती चलती रही और उधर ऋतू सिंह अपने ऑफिस में सुबह से फ़ोन पे फ़ोन अटेंड कर कर क परेशां हो रही थी.

ऋतू सिंह : क्या बना उस केस का ? कुछ पता चला किस ठाणे में है वो केस?

इंस्पेक्टर : नहीं मैडम अभी तक कोई इनफार्मेशन नहीं मिली है. पर मैडम आज आपकी कामयाबी क लिए बड़े बड़े अफसर आपको फ़ोन कर रहे हैं और आप वो सब छोड़ कर एक मामूली से केस का पूछ रही हैं वो भी जिसका कोई अत पता भी नहीं. पता नहीं ऐसा कोई केस है भी या नहीं

ऋतू सिंह : ( गुस्से में ) मेरे लिए वो केस इससे ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है शुक्ल जी . किसी भी हल में मुझे उसकी पूरी रिपोर्ट चाहिए. एक फाइल ढूंढने में और कितना वक़्त चाहिए आप लोगों को ? ठीक से रिकॉर्ड नहीं रख सकते तो करो सबको लाइन हाज़िर

इंस्पेक्टर: मैडम आपके आर्डर मिलते hi सभ स्टेशन इंचार्ज लग गए थे पर अभी तक ऐसा कोई केस नहीं मिला है. कुछ और इनफार्मेशन मिल जाती तो शायद कुछ पता चल जाता. किसी भी स्टेशन में ऐसा कोई ऑक्सीड ने का या मर्डर का केस उस महीने में नहीं मिला है जो दर्ज हो. हो सकता है केस दर्ज hi न करवाया गया हो

ऋतू सिंह : केस दर्ज नहीं है तो सभी स्टेशन इन्चार्जेस को मेरे सामने हाज़िर करो. अगर केस नहीं दर्ज हुआ तो इसका जवाब स्टेशन इंचार्ज hi देगा क ऐसा क्यों हुआ . और सब को साफ साफ कह दो क अभी जो कोई अपनी सफाई देना चाहता है दे दे वर्ण अगर मैंने ढूंढ निकला तो उसकी वर्दी मैं उतरवा क दिखाउंगी.

इंस्पेक्टर: समझ गया मैडम , मैं सब को इन्फॉर्म कर देता हूँ .

ऋतू सिंह : अब आप जा सकते हैं. और मुझे शाम तक पूरी इनफार्मेशन चाहिए . नाउ ु लीव

इंस्पेक्टर क जाते hi ऋतू सिंह ने गुस्से में फाइल उठा कर मरी. इतना बिजी होने क बाद भी वो उस केस को ढूंढने में लगी थी जिसका कोई अत पता नहीं था सिर्फ इस लिए क वो अमित क साथ बात कर सके. अपनी ज़िन्दगी में उसने खुद को इतना मजबूर कभी महसूस नहीं किया था. इतनी सख्त और बड़ी अफसर हो कर भी वो खुद को कमज़ोर महसूस कर रही थी . एक आम से लड़के क लिए वो क्यों इतनी परेशां हो रही है ये उसे खुद भी समझ नहीं आ रहा था जबकि वो कभी किसी की परवाह hi नहीं करती थी.

हेमा अपने ज़रूरी काम निपट रही थी और मैंने शीना से बात भी कर ली. मैं शीना से बात कर hi रहा था क हेमा मेरे पास चली आयी और मेरी बातें सुनने की कोशिश करने लगी इस लिए मैंने जल्दी से शीना का फ़ोन काट दिया.

हेमा : कौन थी फ़ोन पर बड़ी खास बातें हो रही थी.

अमित : कोई खास नहीं मेरी क्लास मात है. आप बताइय आप फ्री हुई या नहीं ?

हेमा : हाँ अब फ्री हूँ सॉरी तुम्हे इंतज़ार करना पड़ा.

अमित : इसमें सॉरी की क्या बात है ? सुना है इंतज़ार का फल मीठा hi होता है .

हेमा : हम्म तो तुम्हे मीठा फल चाहिए, चलो फिर चलते हैं तुम्हे तुम्हारा मीठा फल खिलने.



हेमा मुझे फिर से साथ लेकर कार में चल पड़ी अपना शी अगर दिखती हुई .
 
अपडेट 180



एक बड़ी सी बिल्डिंग की पार्किंग में जाकर हेमा ने जब गाड़ी रोकी तो मैंने देखा ये बिल्डिंग में सरे रेजिडेंशियल फ्लैट्स थे.

हेमा : लो पहुँच गए.

अमित : यहाँ किस से मिलना है ?

हेमा : किसी से नहीं मिलना है यहाँ मेरा फ्लैट है. ऑफिस में तो कोई हमें डिस्टर्ब कर सकता था पर यहाँ कोई डिस्टर्बेंस नहीं होगी .

हेमा क साथ मैं लिफ्ट से फ्लैट तक पहुंचा . फ्लैट अंदर से पूरी तरह सही सामान से सजा हुआ था. और देख कर hi लग रहा था क ये इस्तेमाल में रहता है क्यूंकि फ्लैट पूरी तरह से साफ सुथरा था.

हेमा : कुछ लोगे तुम ?

अमित : जी नहीं किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं

हेमा : आँखों में देखते हुए ) सोच लो , क्या वाकई में कुछ नहीं चाहिए ?

अमित : चाहिए तो बहुत कुछ अब ये आप पर है आप क्या देना चाहती हैं .

हेमा : सब कुछ तो सामने है जो चाहिए खुद hi लेलो

अमित : डरता हूँ क कहीं इससे आपकी शान में कोई गुस्ताखी न हो जाये

हेमा : डरने की ज़रूरत नहीं है तुम्हे , अगर ऐसी बात होती तो तुम इस वक़्त यहाँ नहीं होते.

हेमा ने मेरी आँखों में देखते हुए मुझे सीधा इनविटेशन दे दिया . हेमा की आँखों में एक खास चमक थी. मैंने भी अब आगे बढ़ने का फैसला किया और हेमा क करीब जा कर उसकी कमर में हाथ डालते हुए उसे अपने साथ चिपका लिया. हेमा क मुँह से सिसकी निकल गयी जैसे वो मुझे उकसा न छह रही हो

हेमा : अहह कक्कक्स

अमित : तो मुझे इजाज़त है वो लेने की जो मैं चाहता हूँ?

हेमा : इजाज़त कमज़ोर लोग मांगते हैं , जिनमे डैम हो वो खुद hi ले लेते हैं

हेमा क इतना कहते hi मैंने उसके सुर्ख लाल होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसकी लाली चुराने लगा. हेमा भी पूरे जोश से मेरे बालों में हाथ चलते हुए मुझे किश करने लगी. हेमा शायद काफी समय से प्यासी थी इस लिए वो बड़ी जल्दी जोश में आ गयी और मेरे बल नोचने लगी. मेरे हाथ भी उसकी पीठ पर चलते चलते उसके कूल्हों पर पहुँच गए और उन नरम गोश्त क फुटबॉल साइज क कूल्हों को मैं अपने हाथों में भर भर कर मसलने लगा. हेमा किसी माहिर खिलाडी की तरह मुझ पर हावी होने की कोशिश कर रही थी. मेरे साथ चिपकते हुए उसने अपनी तंग घुटने से मोड़ कर मेरे साथ रगड़नी शुरू कर दी तो मैंने भी एक हाथ से उसकी नंगी जांघ को मसलते हुए उसे और भी ज्यादा खुद से चिपका लिया .

उम्म्म उम्म्माह्ह उम्म्म पूछ उम्म्म्म की आवाज़ें इस शांत वातावरण में गूँज रही थी. हेमा की नंगी जांघ को सहलाते हुए मैंने उसे दीवार से लगा दिया और दूसरे हाथ से उसके बूब्स ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा .

हेमा : उम्म्म्म आअह्ह्ह्ह उम्म्म let’s टेक में तो थे बीएड उम्म्म उम्म्म्म

हेमा उछाल कर मेरी गॉड में चढ़ गयी और अपनी टंगे मेरी कमर पर लपेट ली. मैं उसे किश करता उसकी गांड मसलता हुआ उसे बैडरूम में ले गया. हेमा की मिनी स्कर्ट क अंदर हाथ सरका कर मैं उसकी पेंटी क ऊपर से उसके कूल्हे मसलने की कोशिश कर रहा था पर सही से हो नहीं प् रहा था. रूम में जाते hi मैंने हेमा को बीएड पर पटक दिया और अपनी T-shirt उतर दी. हेमा की आँखों में लाल डोरे नज़र आ रहे थे उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया. मेरी नंगी छोड़ी छाती पर हाथ चलते हुए वो और मदहोश हो रही थी.

हेमा : यू अरे सुच ा पावरफुल मन कमाओं शो में योर पावर

मैंने हेमा क बूब्स दोनों हाथों में पकड़ कर ज़ोर से दबा दिए

हेमा : आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह प्लीज आराम से करो उखड डोज क्या इन्हे

अमित : तुम्हे पावर देखनी है न तो आज तुम्हे अपनी पावर अचे से दिखता हूँ .

मैं उसकी परवाह किये बगैर उसके बूब्स मसलने लगा. हेमा मुझे आराम से करने को कहती रही पर मैं अपनी मर्ज़ी करता रहा . हेमा भी शायद वाइल्ड सेक्स पसंद करती थी इस लिए वो मेरे ऐसा करने से और ज्यादा उत्तेजित होने लगी. और मेरी पीठ पर छाती पर अपने नाख़ून रगड़ कर अपनी जांघें भी मेरे साथ रगड़ रही थी. मैंने उसके कन्धों से स्कर्ट को खींच कर उसके कंधे नंगे कर दिए और स्कर्ट को ऐसे hi ऊपर से नीचे खींचने लगा. बूब्स को ऐसे hi मैंने खिंच कर बहार निकल दिया. लाल रंग की ब्रा भी स्कर्ट क साथ hi उलझ कर नीचे हो चुकी थी. हेमा क बूब्स दूधिया सफ़ेद थे और निप्पल गुलाबी. ज़ोर से मसाले जाने से बूब्स लाल हो चुके थे. मैंने बूब्स को नंगे करने क बाद मसलते हुए बरी बरी से गुलाबी निप्पल मुँह में ले कर चूसने शुरू कर दिए.

हेमा : उम्म्म आआह्ह्ह्ह चुसो खा जाओ उम्म्म्म आआह्ह्ह्ह उम्म्म और ज़ोर से करो खा जाओ इन्हे बहुत मज़ा आ रहा दर्द और मज़ा एकसाथ मिल रहा है कक्कक्क्स उफ्फ्फफ्फ्फ़ आअह्ह्ह्हह

अमित : उम्म्म्म उम्म्म अभी तो शुरुआत है डार्लिंग आगे आगे देखो आज तुम्हे क्या क्या मज़ा मिलने वाला है

हेमा : आआह्ह्ह कक्कक्स और करो ऐसे hi उम्म्म ी लिखे आईटी , मुझे ऐसे hi प्यार करना पसंद है कॉमन उम्म्म्म कक्ककक्कक्स

मैं बरी बरी से हेमा क दोनों बूब्स मसलता रहा और चुस्त रहा. हेमा मज़े में पागल हो रही थी. बूब्स अछि तरह लाल करने क बाद मैं नीचे आ गया और स्कर्ट क अंदर में से hi उसकी पेंटी खिंच कर नीचे कर दी. पेंटी को पाऊँ से निकलते हुए मैंने हेमा क हाई हील वाले सेंडल भी निकल दिए . इससे पहले क मैं कुछ और करता हेमा ने मुझे धक्का दे कर बीएड पर गिरा दिया और मेरे ऊपर झपट पड़ी. मेरी छाती पर किश करते हुए उसने मेरे निप्पल को डेंटन में दबाना शुरू कर दिया. मेरा लैंड उत्तेजना से फटने तक की हद तक अकड़ गया . मैं हेमा की इस हरकत से पागल हो रहा था. हेमा किश करती हुई नीचे बड़ी और मेरी पेण्ट को अंडरवियर क साथ hi नीचे खींचने लगी. झांगों तक नीचे करते hi मेरा लैंड स्प्रिंग की तरह उछलता hi बहार आ गया. हेमा का मुँह खुला का खुला रह गया उसे उम्मीद नहीं थी क मेरा लैंड इतना बड़ा हो सकता है.

हेमा : ओह माय गॉड ये क्या है ? इस थिस रियल ? ये तुमने ितं बड़ा कैसे किया ? मैंने आज तक इतना बड़ा नहीं देखा .

अमित : मैंने कुछ नहीं किया ये बस अपने आप ऐसा हो गया. क्यों पसंद नहीं आया ?

हेमा : ी रियली लिखे आईटी पता नहीं मैं कैसे लूंगी पर इसे मैं ले क रहूंगी.

इतना कह कर हेमा ने मेरा लैंड अपने हाथों में पकड़ना और एक बार अचे से उसे ऊपर से नीचे तक अपने हाथों से नापने क बाद उसने अपना सर लैंड पर झुकाते हुए अपने होंठ सुपडे पर रख दिए. हेमा का तो पूरा ध्यान लैंड पर hi था पर मैं उसकी हरकतों को नोटिस कर रहा था. हेमा कितनी कामुक है ये तो नज़र आ hi रहा था पर उसे शीशे में उतरना मेरा टारगेट था. इस लिए मैं उसे पूरा मज़ा देना चाहता था जैसा भी वो चाहे. मैंने हेमा क बाल पकड़ते हुए उसका सर लैंड पर झुकाया और आधा लैंड उसके मुँह में चला गया. लैंड की मोटाई की वजह से हेमा को अपना मुँह पूरा खोलना पद रहा था. मेरी इस हरकत से हेमा ने जल्दी से अपना मुँह ऊपर कर क लैंड बहार निकल लिया और मेरी तरफ देखने लगी .

हेमा : आअह्ह्ह वेट करो मेरी जान मैं कर रही हूँ, एक तो ये इतना मोटा है क मुँह में नहीं जा रहा आराम से और तुम इसे ऐसे अंदर करने. की कोशिश कर रहे हो . थोड़ा सबर रखो मैं खुद सब करुँगी . तुमसे ज्यादा मुझे जल्दी है इसे लेने की .

अमित : क्या करूँ डार्लिंग तुम्हे देख कर सबर hi तो नहीं हो रहा .

हेमा ने मेरी तरफ देखते हुए सुपडे को मुँह में ले लिया. धीरे धीरे उसने आधा लैंड अपने मुँह में ले लिटा और फिर उतने लैंड को hi अंदर बहार करने लगी . साथ hi वो मुँह में अंदर hi सुपडे पर अपनी जीभ से छेड़छाड़ करने लग जाती. मेरी रीढ़ की हड्डी तक सिहरन महसूस होती जब वो ऐसा करती. हेमा पूरी कोशिश कर रही थी क मेरा पानी निकल जाये पर मैं खुद को कण्ट्रोल कर रहा था.

हेमा : हहहहह तुम्हारा अभी तक हुआ नहीं ?? इतनी देर तो कोई भी नहीं टिकता.

अमित : मुझे दूसरों का नहीं पता पर मेरा अभी नहीं हुआ है. और अब मेरी बरी

इतना कह कर मैंने हेमा को पलट कर अपने नीचे ले लिया. हेमा ने भी जल्दी से अपनी ड्रेस और ब्रा उतर दी. मैंने हेमा को लिटा दिया और टंगे खोल कर बीच में आ गया . हम की छूट बिलकुल चिकनी थी और और फांके भी गुलाबी थी . लगता है छूट का खास ध्यान रखती होगी. मैंने नज़र भर क हेमा की छूट को देखा. हेमा मेरी तरफ hi देख रही थी उसने सोचा भी नहीं होगा क मैं करूँगा . वो तो यही सोच रही थी क मैं अब चुदाई करूँगा.

हेमा : देख क्या रहे हो अब करो भी

मैंने हेमा की बात का जवाब देने की बजाये उसकी छूट पर अपने होंठ रख दिए. हेमा को ऐसी उम्मीद नहीं थी पर उसे इतना मज़ा आया क वो तड़प उठी. मैंने उसकी छूट में से बहार को निकले हुए उस मांस क लोथड़े को होंठों में पकड़ लिया और एक उंगली उसकी खुली हुई छूट में अंदर बहार करनी शुरू कर दी

हेमा : ओह माय गॉड आआह्ह्ह्ह कक्कक्स आआह्ह्ह्ह ये क्या आआअह्ह्ह्ह कर रहे हो उम्मम्मम्म

हेमा तड़प उठी और खुद hi अपने बूब्स दबाने लगी. मैंने अब दो उँगलियों से छूट को छोड़ना शुरू कर दिया और जीभ से उसके दाने को कुरेदने लगा. हेमा ने मेरा सर अपनी छूट पर दबा दिया. वो जल बिन मछली क जैसे तड़पने लगी.

हेमा : ुण्णं आआह्ह्ह्ह कक्कक्क्स सूचक सूचक फास्टर एअआहहह उम्म्म्म कक्कक्स डिप्पर डीपर अह्ह्ह्हह उम्मम्मम्म खा जाओ खा जावूओ

मैंने अपना काम जारी रखा हेमा मेरा सर अपनी जांघों में कसने लगी. मैं लगातार उसे उँगलियों से चोदे जा रहा था . हेमा तड़प तड़प कर अपनी कमर उठाने लगी . वो ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पायी और मेरे सर को ज़ोर से अपनी छूट पर दबाये वो झटके लेती हुई झड़ने लगी .

हेमा : ी ऍम सुंम्मिंग स्खककक स्खकककक फास्टर डीपर ुआममम आआह्ह्ह्ह ी ऍम सुंम्मिंग आआअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह

हेमा का पूरा जिस्म लरज रहा था . वो बेहोश सी होती बीएड पर देह गयी. मैंने उसका पानी निकलने दिया. वो ऑंखें बंद किये अपने स्खलन का मज़ा ले रही थी. मैंने ज्यादा देर उसे ऐसा रहने नहीं दिया और टांगों क बीच अपनी पोजीशन बनाते हुए मैंने सुपडे को छूट पर सेट किया और उसके ऊपर झुकते हुए एक तेज़ धक्का पेल दिया. हेमा की छूट खुली हुई थी जिसका मतलब था क वो काफी चुदाई करवा चुकी है पहले hi. ऊपर से अभी पानी निकला था तो छूट गीली भी थी इस लिए लैंड को ज्यादा परेशानी नहीं हुई और एक hi बार में आधे से ज्यादा लैंड छूट में घुस गया . मगर छूट चाहे कितनी भी चूड़ी हुई थी पर मेरे लैंड क लिए वो काम hi थी. इतना मोटा लैंड उसमे पहले नहीं गया था इस लिए छूट पूरी टाइट हो गयी लैंड घुसते hi और हेमा जो अभी तक मज़े में थी वो एक ज़ोरदार चीख क साथ तड़प उठी.

हेमा : आआआईईईई माआआआआ मर्डर गयीईइ

इससे पहले क हेमा कोई हरकत करती मैंने उसे अपने नीचे दबाते हुए थोड़ा सा लैंड बहार निकला और एक ज़बरदस्त धक्के क साथ पूरा लैंड जड़ तक छूट में घुसा दिया. हेमा फिर से चिल्लाना चाहती थी मगर मैंने उसका मुँह बंद कर दिया और लैंड अंदर बहार करने लगा. मेरा लैंड हेमा की छूट में वहां तक पहुँच गया था जहाँ तक पहले कोई नहीं गया था. लैंड पर छूट कासी हुई लग रही थी पर मैंने हेमा को कोई वक़्त नहीं दिया और लगातार धक्के पेलने लगा. हेमा मुझे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी और उसकी आँखों में पानी आ गया था मगर मैंने कोई तरस नहीं खाया और लगातार पेलता रहा . कोई 10 मिनट्स hi ताबड़तोड़ धक्के खाने क बाद छूट कुछ ढीली हुई तो लैंड रवानी से आने जाने लगा. हेमा भी अब नार्मल लग रही थी तो मैंने उसे ढीला छोड़ दिया .

हेमा : आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह फ़क .. फ़क .... फ़क में हर्डर येह फुककककक फास्टर उम्मम्मम डीपर आज तक इतना ज़बरदस्त लैंड मैंने कभी नहीं लिया था . कक्कक्स उम्म्म यू अरे रियली हार्ड मन फ़क में हर्डर फ़क .

अमित : मज़ा आ रहा है डार्लिंग ??? तुम्हारी छूट भी बड़ी मज़ेदार है . बड़ा मज़ा आ रहा है तुम्हे छोड़ने में .

हेमा : और ज़ोर से छोड़ो न फ़ायद दो मेरी छूट को . आअह्ह्ह्ह आज तक इतना मज़ा मुझे का hi नहीं मिला आअह्ह्ह्ह उम्म्म्म और ज़ोर से करो फ़क में लिखे योर सलूट फ़क फ़क

मैंने हेमा क दोनों बूब्स पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए बीएड से उठा लिया और ताबड़तोड़ धक्के पेलने लगा . हेमा खुद hi मेरी गॉड में बैठ गयी और अपनी कमर तेज़ तेज़ हिलने लगी. मैं पीछे को लेट गया और हेमा बीएड पर घुटने टिकाये अपनी कमर हिलती हुई उछलने लगी .

हेमा : यू अरे रियली ा हॉर्स इतना बड़ा किसी आम इंसान का हो hi नहीं सकता आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह अब तो किसी और क साथ मज़ा आएगा hi नहीं आआह्ह्ह उम्म्म्म मुझे रोज़ तुम्हारा लैंड अपनी छूट में चाहिए आअह्ह्ह्ह उम्म्म आअह्ह्ह कक्कक्स

अमित : तुम भी बड़ी मस्त हो हेमा कितने मज़े से चुदाई करवा रही हो लगता है बड़ा एक्सपीरियंस है तुम्हे कितने लैंड ले कक्कक्स चुकी हो आज तक

हेमा : पता नहीं पर तुम्हारे जैसा आआअह्ह्ह आअज तक नहीं लिया . फुकककक फुककककक मैं तो तुम्हारी गुलाम हूँ आआआआआ आअज से

अमित : तो तुम मेर रंडी बनना चाहती हो ??

हेमा : यस यस ी ऍम योर बीच ी ऍम योर सलूट फ़क में हर्डर फुकक फुकक फुकक

मैंने हेमा की गर्दन पकड़ कर उसे अपने ऊपर झुकाते हुए पीछा तो वो उतने हो जोश से मुझे ये सब कहने लगी. मैंने उसके मुँह पर थप्पड़ जड़ दिए मगर हेमा को तो जैसे और भी मज़ा आने लगा . मैंने उसे साइड में पलट दिया और जल्दी से उठ गया.

अमित : चल जल्दी से कुटिया बन जा मेरी रंडी आज तेरी छूट फाड़ कर रख दूंगा.

हेमा : फाड़ दो रोका किसने है ... मैं तो तुम्हारी रंडी हूँ आज से

इतना कहते हुए हेमा जल्दी से घुटनो और हाथों पर चौपाया बन गयी. हेमा को गोरी दूधिया नरम गांड मेरे सामने आ गयी . मैंने तीन चार ज़ोरदार थप्पड़ उसकी गांड पर जड़ दिए.

चटाक चत्ताक छटाक

हेमा : यस बेबी स्लैप में फ़क में एसससस फुककककक

अमित : तुम्हारी गांड बहुत शानदार है मुझे तुम्हारी गांड भी चाहिए बोल मेरी रंडी गांड देगी अपनी मालिक को बोल मेरी कुटिया

मैंने छूट पर लैंड सेट कर क ज़ोरदार धक्का मर कर एक hi बार में पूरा लैंड जड़ तक घुसा दिया. हेमा फिर से चिल्ला उठी पर साथ hi मज़े में चीखने चिल्लाने लगी

हेमा : आआआआहहहहह फुककककक येअहहह फुकककक जो चाहे करो बस मुझे ऐसे hi छोड़ो फ़क में हर्डर

मैंने हेमा की गांड क चीड़ में उंगली घुसा दी और वो एक डैम से आगे को होने लगी तो मैंने उसके बाल पकड़ कर खींच दिया . वो वहीँ रुक गयी पर मैं नहीं रुका. माहि ने एक उंगली गांड में चलते हुए उसके बाल खींचते हुए ज़ोरदार धक्के जारी रखे. हेमा एक बार फिर से झड़ने लगी. उसका बदन झटके खाने लगा

हेमा : फुककक फुककक फुककक ी ऍम सुंम्मिंग सुंम्मिंग ........ उह्ह्ह उम्म्म्म हहहहह

हेमा फिर से ढीली पद गयी पर मैं लगा रहा . कमरे में फुच फुच फुच की आवाज़ें आ रही थी. हेमा बीएड पर गिरना चाहती थी पर मैंने उसकी कमर को दोनों हाथों से थम लिया. हेमा की छूट से बेहटा हुआ पानी उसके घुटनो से बेडशीट पर गिर रहा था. मैंने हेमा क पेट क नीचे दो तकिये रखे ताकि उसकी कमर ऊँची रह सके और उसे उसपर दाल दिया. अब हेमा बीएड पर फिर गयी थी पर उसकी कमर तकियों की वजह से ऊँची थी. मैंने उसकी जांघों क दोनों तरफ अपने घुटने टिकाये और लैंड को फिर से छूट में घुसा दिया. वैसे तो मेरा इरादा हेमा की गांड मरने का हो रहा था पर मैं पहले उसे पूरी तरह अपनी कायल कर लेना चाहता था. वैसे भी उंगली घुसकर मुझे पता चल गया था क उसकी गांड अभी खुली नहीं है तो ऐसे में मेरा मोटा लैंड लेने से उसे बहुत तकलीफ हो सकती थी और वो मुझसे नाराज़ भी हो सकती थी. मैंने हेमा क ऊपर झुकते हुए फिर से ज़ोरदार धक्के पेलने शुरू कर दिए. कुछ देर हेमा ऐसे hi पड़ी रही पर फिर उसे भी मज़ा आने लगा और एक बार फिर से वो रंग में आ गयी.

हेमा : फुकककक फुककक मार डालो मुझी सीसीसी फाड़ डालो आए तक इतनी लम्बी चुदाई किसी ने नहीं की मेरी .

अमित : मेरे साथ मज़ा आ रहा है न मेरी रंडी तुझे ???

हेमा : बहुत मज़ा आ रहा है कक्कक्क्स और ज़ोर से करो फाड़ डालो मेरी छूट को ... आअज असली लैंड मिला है मुझे . इतना मज़ा तो राजीव भी नहीं देता कक्कक्क्स और ज़ोर से करो फ़क में हर्डर लिखे एनिमल एअआहहह याहहह फुककक

हेमा क मुँह से राजीव नाम सुनते hi मुझे झटका लगा . राजीव तो जीजा जी का नाम है. इसका मतलब हेमा अपने hi सेज भाई से छुड़वा रही है?? हेमा अपनी मस्ती में चुदाई का मज़ा ले रही थी उसे शायद पता भी नहीं था क वो क्या बोल गयी. मैंने भी जान बुझ कर इस बात पर सवाल नहीं किया पर अपने hi सेज भाई से छुड़वाने वाली बात दिमाग में ात hi मेरी स्पीड बढ़ गयी और मैं पहले से भी तेज़ झटके मरने लगा.

हेमा : आअह्ह्ह्हह एएससस एसससस फ़क में लिखे एनिमल फुककक फुककक ी ऍम क्युम्मिंग ी ऍम क्युम्मिंग ओह्ह्ह्हह मायआ आइइइइइइ

एक बार फिर से हेमा का पानी निकल गया और मैं भी खुद को रोक नहीं पाया और लैंड को निकल कर हेमा क मुँह क पास आज्ञा और उसके मुँह पर अपना पानी निकल दिया. हेमा का पूरा मुँह मेरे वीर्य से भर गया जिसे वो मज़े से उंगली क साथ साफ कर क मुँह में लेने लगी. मैं भी बीएड पर गिर कर लम्बी लम्बी साँसे लेने लगा. पता hi नहीं चला क कब मेरी आंख लग गयी.

सुशिल कुमार मला क ठिकानो पर राइड पड़ने और गैरकानूनी सामान पकडे जाने क बाद जहाँ एक और बलजीत राइ और नारायण दस् जश्न मानाने की तयारी म लग तह वहीँ सुशिल कुमार भी खुद को बचने क लिए वकीलों की फ़ौज कड़ी कर रहा था. उसे पता चल गया था क ये किसी की साज़िश है पर पहले खुद को बचाना ज़रूरी था इससे पहले क पुलिस उसे अरेस्ट करे. सुशिल कुमार भी कोई नया या का है खिलाडी नहीं था इस लिए वो खुद को बचने की हर संभव कोशिश कर रहा था. सबसे ज़रूरी ये बात थी क अभी तक पुलिस की तरफ से न उसे बुलाया गया था न उसके नाम क कोई अरेस्ट वारंट इशू हुए थे. खुद को बचने क लिए उसने बड़े बड़े वकीलों से एप्रोच कर ली थी. और साथ hi वो पुलिस विभाग में अपने लोगों से पता लगाने की कोशिश कर रहा था क ये सब किस क इशारे से हो रहा है. दस विक्रम राठौर भी ऋतू सिंह क काम से खुश थे और वो अब सुशिल कमर क नाम क वारंट निकलवाने को तैयार भी थे पर अभी तक ऋतू सिंह ने इसके लिए नहीं कहा था.

उधर नारायण दास भी पता लगाने की कोशिश कर रहा था क अभी तक पुलिस ने सुशिल कुमार को अरेस्ट करने की कोशिश क्यों नहीं की. पर ये बात तो सिर्फ ऋतू सिंह hi बता सकती थी और उससे पूछने की हिम्मत कोई कर नहीं सकता था. जबकि ऋतू सिंह क लिए इस वक़्त सुशिल कुमार से ज्यादा इम्पोर्टेन्ट मंजरी का केस था.

बलजीत राइ और नारायण दास अपने ठिकाने पर गुप्त मीटिंग में बिजी थे.

नारायण दास : काम तो तुमने एक डैम सही कर दिया है बल्ली पर ये साला अभी तक पुलिस ने उसे पकड़ा क्यों नहीं ? ऊपर से मैंने पता किया है क अभी तक पुलिस ने उसके खिलाफ वारंट भी नहीं निकलवाया है. कहीं कोई गड़बड़ तो नहीं हो गयी?

बलजीत राइ : कैसी बातें करते हो यार , इतने पक्के साबुत पुलिस क हाथ लगे हैं क वो साला बच hi नहीं सकता. और फिर अपने आदमियों ने भी तो कबूल किया है न उसका नाम. थोड़ा सबर रख , वो कोई आम आदमी नहीं है एक मला है. इतनी आसानी से पुलिस उस पर हाथ नहीं डालेगी. आज नहीं तो कल साला पुलिस क हाथ आ hi जायेगा. तू बस कोई भी किसी किसान का गलत काम न करना न hi ज़ाहिर होने देना क तेरा इस मसले से कोई मतलब है. और जैसे hi वो कहीं मिले या बात हो तो उससे पूरी हमदर्दी दिखाना और मदद करने की बात करना. ताकि उसे भी कोई शक न हो. वैसे अपनी बेटी को जन्मदिन की पार्टी में मैंने उसे भी बुलाया है. अगर तन तक पुलिस ने उसे न उठाया तो वहां मिल लेना अचे से.

नारायण दास : तू तो शुरू से hi रंग बदलने में मास्टर रहा है . साला पता नहीं क्या खा क पैदा किया तेरे माँ बाप ने तुझे . साला तू तो अपने सगों को hi खा गया .

बलजीत राइ : है है है , खुद ज़िंदा रहना है तो कभी कभी अपनी को भी खाना पड़ता है. तू कौन सा काम है . ये सब छोड़ , परसों मेरी बेटी क जन्मदिन की पार्टी में टाइम से आ जाना. मैंने बड़े बड़े लोगों को बुलाया है. कुछ बड़े अफसर और वो सप भी आएगी. अचे से मिल लेना उससे. देखते हैं क वो किस खेत की मूली है.

नारायण दास : उसका तो नाम मत ले साली का, सारा धंधा चौपट हुआ पड़ा है.

बलजीत राइ : दिमाग ठंडा रख अपना , फ़िलहाल वो हमारे काम की है बाद में देखेंगे अगर ज्यादा परेशां करेगी तो ट्रांसफर करवा देंगे.

नारायण दास : अगर मिनिस्ट्री की बात न होती तो साली को अब तक ऊपर ट्रांसफर करवा देता. तू कहता है तो अभी साली को कुछ नहीं कहूंगा बाद में देख लेंगे. चल पहले कुछ मौज मस्ती कर लें. आज इतनी अछि खबर सुनाई है तूने तो पार्टी तो बनती है.

पता नहीं कब तक मैं ऐसे hi बीएड पर पड़ा रहा. जब मेरी आंख खुली तो देखा हेमा मेरे पास hi पड़ी हुई थी वो भी नींद में थी. हेमा दोनों टांगें फैला कर सीधी सो रही थी. मैंने देखा तो उसकी छूट की फांकें कुछ सूजी हुई थी. मैंने उसकी छूट पर हाथ रखा तो वो नींद में hi कसमसाने लगी. मैंने दो उंगलियां छूट में घुसा दी तो वो एक डैम से उठ गयी

हेमा : उईईईईई माआ आअह्ह्ह .... क्या कर रहे हो ? पहले hi मेरी बुरी हालत हुई पड़ी है और तुम और तंग कर रहे हो . देखो क्या हालत कर दी है.

हेमा ने अपनी छूट मुझे दिखते हुए कहा .

अमित : खुद hi तो कह रही थी फाड़ दो , अब शिकायत कर रही हो. मज़ा नहीं आया क्या?

हेमा : मज़ा तो इतना आया क जितना कभी नहीं आया था. तुम सच में असली मर्द हो . एक बार में hi तीन तीन बार मेरी जान निकल दी तुमने. पर तुम्हारा हथियार सुच में एब्नार्मल है. जान निकल दी मेरी.

अमित : ाचा , तब तो बड़े मज़े से कह रही थी फाड़ दो मेरी . वैसे तुम भी बड़ा मज़ा देती हो कहाँ से सीखा ये सब? लगता है बहुत से लैंड ले चुकी हो अब तक.

हेमा : इसमें सिखने वाली क्या बात है , ये सब खुद hi आ जाता है. मैं लाइफ का मज़ा लेने वालों में से हूँ. रही लैंड की बात तो इतने भी नहीं लिए हैं . हाँ अब तक 5-6 क साथ कर चुकी हूँ. पर तुम्हारे जैसा एक भी नहीं मिला था आज तक. सब मुँह में लेते hi झाड़ जाते हैं और तुमने तो आज मेरी बस करवा दी.

अमित : तो फिर आज से तुम मेरी रंडी हो न फिर ?

हेमा : तुम्हारे लिए तो कुछ भी बनने को तैयार हूँ . तुम सच में असली मर्द हो . अब तो तुम्हारे इस लैंड को मैं कहीं नहीं जाने दूंगी , ये सिर्फ अब मेरे अंदर जायेगा.

अमित : ाचा ?? मगर इसके लिए तुम्हे पूरी तरह से मेरी रंडी बनना पड़ेगा तभी ये लैंड तुम्हे मिलेगा.

हेमा : बन तो गयी हूँ तुम्हारी रंडी और क्या करूँ अब इसके लिए ?

अमित : मेरा उसूल है मैं जिसकी छूट मरता हूँ उसकी गांड भी मरता हूँ . जब तक तुम मुझे गांड नहीं डौगी तब तक तुम पूरी तरह से मेरी रंडी नहीं बनोगी.

हेमा : पर तुम्हारा इतना बड़ा मेरी गांड में नहीं जायेगा. ये तो मेरी जान hi ले लेगा.

अमित : सोच लो मंज़ूर है या नहीं . गांड नहीं तो छूट भी नहीं

हेमा : ऐसा मत कहो , ाचा ठीक है गांड भी मर लेना. पर फ़िलहाल अभी तो मेरी छूट का hi बूरा हल है गांड कल कर लेना.

अमित : वैसे एक बात तो बताओ अब तक किस किस का लैंड ले चुकी हो ?

हेमा : ये क्यों पूछ रहे हो?

अमित : बस ऐसे hi , मैं जानना चाहता हूँ क तुम किस किस का लैंड ले चुकी हो और कैसे.

हेमा : सबसे पहला लैंड मैंने अपने बर्फ का लिया था जब मैं स्कूल में थी. उसके बाद कॉलेज में 2-3 बर्फ बनाये और उनके साथ भी मज़ा लिया. एक अपने घर क नौकर क साथ किया था और एक मेरा पति.

अमित : बस इतने hi ? तो आजकल किसके साथ मज़े ले रही हो ? तुम जैसी गरम लड़की बिना लैंड क तो रह नहीं सकती . तो बताओ मुझे आजकल इस छूट की सेवा कौन कर रहा है?

हेमा : है एक मेरा पार्टनर, पर मैं उसके बारे में नहीं बता सकती.

अमित : क्यों ? अभी तो तुम मेरी रंडी बनना चाहती थी और अब मुझे नाम भी नहीं बता सकती . वैसे मैं जनता हूँ वो कौन है जिसका लैंड तुम छूट में ले रही हो आजकल

मेरी इस बात से हेमा हेमा उठ कर बैठ गयी और हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी.

अमित : अपने भाई राजीव क लैंड से चुद रही हो न आजकल?

राजीव का नाम सुनते hi हेमा शॉकेड हो गयी

हेमा : तुम तुम्हे कैसे पता ये ये झूठ है

अमित : कॉमन यार इसमें कौन स बड़ी बात है . अब तुम जैसी गरम लड़की को लैंड तो चाहिए न चाहे भाई का hi क्यों न हो. मैं बस ये जानना चाहता हूँ क एक बहिन ने अपने सेज भाई का लैंड लिया कैसे.

हेमा : ये सब झूठ है . मैंने राजीव क साथ ऐसा कुछ नहीं किया.

अमित : तो तुम नहीं बाँटोगी. ठीक है तुम्हारी मर्ज़ी , आज क बाद दोबारा तुम्हे मेरा लैंड नहीं मिलेगा. अपने भाई से hi चुदवाती रहना.

मैं बीएड से उठने लगा तो हेमा ने मेरा हाथ पकड़ लिया.

हेमा : रुको तो , मैं बताती हूँ . पर ये तुम किसी को बताओगे तो नहीं?

मैं फिर से हेमा क साथ बैठ गया .

अमित : मैं किसी को क्यों बताऊंगा? मेरा इसमें भला क्या फायदा है? मेरी कौन सा रिश्तेदारी है किसी से. तुम बे फ़िक्र हो कर बताओ.

हेमा : मुझे नौकर क साथ करते हुए राजीव ने देख लिया था. तब उसका मुँह बंद करवाने क लिए मैंने उसके साथ भी कर लिया था. फिर मैंने सोचा क मैं बहार भी तो लैंड ढूंढती हूँ तो क्यों न अपने भाई को hi मज़े देदूं . इस से मेरी ज़रूरत भी पूरी हो गयी और राजीव भी मेरी हर बात मैंने लगा. ये सब कॉलेज क दिनों से शुरू हो गया था हमारे बीच. तब राजीव स्कूल में था. शादी क बाद मुझे अपने पति क साथ मज़ा नहीं अत था तो मैं वापिस अपने भाई क पास hi चली आयी. वो भी मुझे बहुत प्यार करता है. उसे करिश्मा क साथ मज़ा नहीं अत इस लिए हम अक्सर यहाँ आकर मज़े करते हैं. मैं तो करिश्मा को कब का घर से निकलने की कोशिश कर रही हूँ पर साली पता नहीं किस मिटटी की बानी है जाती hi नहीं.

अमित : तो इसी लिए तुम उसे परेशां करती हो , वैसे तुम कह रही थी की वो कभी माँ नहीं बनेगी उसका क्या मतलब है ?

हेमा : मैंने राजीव से कहा है क वो करिश्मा को माँ न बनाये . फिर इसी बात का बहाना कर क वो करिश्मा से डाइवोर्स ले लेगा. 2 बार गलती से प्रेग्नेंट हो गयी थी तो मैंने hi राजीव को कह कर उसका बचा गिरवा दिया.

हेमा क मुँह से साडी सचाई सुन कर मुझे गुस्सा तो बहुत आया पर मैंने शो नहीं किया.

अमित : तो फिर अब तुम्हारा क्या इरादा है? अब भी राजीव का डाइवोर्स करवाना चाहती हो या मेरा लैंड चाहिए?

हेमा : सच कहूं तो तुम्हारे लैंड ने मेरा िरा बदल दिया है. अब तो सोच रही हूँ क करिश्मा को यहीं रहने दूँ इसी बहाने तुम एते रहोगे और मुझे 2-2 लैंड मिलते रहेंगे.

अमित : ये भी सही है. तो फिर अब से करिश्मा को ज्यादा परेशां मत करना तभी तो वो मुझे यहाँ आने देगी.

हेमा : वो सब मुझ पर छोड़ दो , उसकी क्या मजाल जो अब तुम्हे यहाँ आने से मन कर सके. देख लेना खुद तुम्हे कहेगी आने को. मैं माँ से कह दूंगी और तुम्हे हर महीने बुलावा लिया करुँगी

अमित : फिर तो मज़ा hi आ जायेगा. तुम्हे तुम्हारे घर में hi छोडूंगा. वैसे एक बात तो है तुम्हारी माँ भी कुछ काम नहीं है . अभी तक जवान है . अंकल तो कुछ लगते hi नहीं उनके सामने पता नहीं वो आंटी को ठंडा भी कर पते होंगे या नहीं

हेमा : बड़े तेज़ हो , बेटी क साथ माँ पर भी नज़र है अब

अमित : अब इतनी तगड़ी घोड़ी सामने हो तो नज़र तो पड़ेगी hi. सोचो कितना मज़ा आएगा जब तुम दोनों माँ बेटी को एक साथ घोड़ी बना कर सवारी करूँगा मैं.

हेमा : खाब देखना छोड़ दो, मेरी माँ बहुत स्ट्रिक्ट है . अब जल्दी उठो वापिस भी जाना है .

अमित : चलते हैं इतनी जल्दी भी क्या है डार्लिंग ज़रा एक बार मेरे लैंड को मुँह में लेकर प्यार तो करो.



मेरे इतना कहते hi हेमा ने मेरी तरफ देखा और फिर झुक कर मेरा लैंड मुँह में ले लिया. हेमा सच में एक रंडी की तरह मेरी बात मन रही थी. फिर हम दोनों तैयार हुए और वापिस निकल गए .
 
अपडेट 181



हेमा की ज़ोरदार चुदाई से एक बार में hi चल बदल गयी थी. वो अब पाऊँ फैला कर धीरे धीरे चल रही थी . छूट में आयी सूजन की वजह से उसे तकलीफ हो रही थी. हम फ्लैट से वापिस हेमा क ऑफिस आ गए. क्यूंकि इस हालत में अभी घर जाना दोनों को मुश्किल में दाल सकता था. मैं हेमा को बार बार तंग कर रहा था उसकी हालत पर मुझे हंसी आ रही थी.

हेमा : हंस लो , मेरी हालत ख़राब हो गयी है और तुम्हे हंसी आ रही है. ऊपर नीचे दोनों जगह सूजन आ गयी है.

अमित: खुद hi तो कह रही थी ज़ोर से करो अब इसमें मेरी क्या गलती है .

हेमा : वो तो उस हालत में मुँह से पता नहीं क्या क्या निकल जाता है इसका मतलब ये तो नहीं जान hi निकल दो. देखो इन्हे अब तो ब्रा भी दर्द दे रही है

अमित : तो उतर दो न क्यों पहनी है.

हेमा : तो क्या सबको दिखती फिरूं , ड्रेस भी ऐसी है क फिर सब पता चल जायेगा देखने वालों को.

अमित : ाचा है न कइयों का काम देखने से hi हो जायेगा

हेमा : दिमाग तो ठीक है तुम्हारा , लोग क्या कहेंगे क मैं कोई रंडी हूँ

अमित : लोगों की छोडो मेरी तो रंडी हो न चलो अब जल्दी से एक बार इसे मुँह में लो

हेमा : कैसी बातें कर रहे हो ये ऑफिस है मेरा

अमित : तो क्या हुआ , यहाँ कौन सा कोई बिना पूछे अचे अंदर आएगा . तुम मेरी रंडी हो यद् है न अब अगर कहना नहीं मानोगी तो फिर ये लैंड भी नहीं मिलेगा दोबारा.

हेमा अपनी चेयर पर बैठी और मैं अपनी चेयर से उठ कर उसके पास आ गया और जिपंखोल कर अपना लैंड उसके मुँह क पास कर दिया. हेमा ने एक बार मेरी तरफ देखा फिर मेरा लैंड पकड़ लिया

हेमा : बड़े ख़राब हो तुम , इसको तो मन कर hi नहीं सकती अब मैं . पर मेरी हालत नहीं इसे फिर से लेने की और तुम्हारा इतनी जल्दी होता नहीं

अमित : चिंता मत करो , बस थोड़ी देर मुँह में ले कर इसे प्यार करो मैंने कौन सा पानी निकलना है . अब जल्दी से मुँह में लो और इसे प्यार करो

मैंने हेमा का सर अपने लैंड पर झुकाते हुए उसके मुँह में लैंड दाल दिया . न चाहते हुए भी हेमा को मेरी बात माननी पड़ी और वो मेरा लैंड चूसने लगी . मैं ये सब इस लिए कर रहा था क हेमा पूरी तरह से मेरी गुलाम बन जाये और मेरी हर बात मने . करिश्मा दीदी क लिए अब मैंने इस बिगड़ी घोड़ी को लगाम लगाने का तरीका सोच लिया था. थोड़ी देर मैंने हेमा से लैंड चुसवाया और फिर अपनी जगह पर बैठ गया. शाम क चार तो हमें फ्लैट पर hi हो गए थे . कुछ देर और हेमा जैसे तैसे ऑफिस में बैठी रही और अपना काम देखा फिर 7 बजे ऑफिस बंद कर क हम घर चल पड़े. कार में घर आते वक़्त भी मैं हेमा क साथ छेड़छाड़ करता रहा . घर आते hi हेमा अपने कमरे में चली गयी ताकि कुछ देर आराम कर सके पर करिश्मा दीदी उसे गौर से देख रही थी और फिर मुझे भी घूर क देखने लगी. मैं भी फ्रेश होने का कह कर अपने कमरे में चला गया. रत क खाने तक मैं अपने कमरे में hi रहा . डिनर क वक़्त भी हेमा ने अपने कमरे में hi अपना खाना मंगवा लिया. करिश्मा दीदी की नज़रें मुझ पर hi थी. मैं उनके इस तरह घूरने से अंदर से घबरा भी रहा था इस लिए मैं अनुपमा क साथ बातों में लगा रहा. खाने क बाद मैं अनुपमा क साथ hi उसके कमरे में चला गया.

अनुपमा : अरे बीटा तुम अब आराम करो थक गए होंगे.

अमित : कैसी बातें करती हैं आप भी , मैं तो यहाँ आया hi आपसे मिलने हूँ. बड़ी तारीफ सुनी थी आपकी . और सच कहूं तो जितना सुना था काम hi सुना था. आप सच में बहुत अछि हैं.

अनुपमा : ाचा क्या सुना था मेरे बारे में ?

अमित : यही क आप बहुत hi अछि हैं. और सच कहूं तो आप अछि होने क साथ साथ बहुत खूबसूरत भी हैं

अनुपमा : मज़ाक ाचा कर लेते हो , मैं कहाँ से खूबसूरत हूँ भला. अब तो बड़ी हो गयी हूँ.

अमित : कोई अँधा hi होगा जो आपके बारे में ऐसा सोचेगा. मुझे तो आप हेमा दीदी की बड़ी बहिन hi लगती हैं. अभी तक आप की जवानी वैसी hi कायम है. सच कहूं तो अंकल आपके सामने कुछ लगते hi नहीं . बुरा मत मानियेगा मेरी बात का पर आप दोनों की जोड़ी मुझे कुछ जमी नहीं . कहाँ आप अभी तक इतनी जवान हैं और कहाँ अंकल बूढ़े से लगते हैं.

अनुपमा की आँखों में ख़ुशी साफ़ झलक रही थी अपनी तारीफ सुन कर . पर वो जान बुझ कर इंकार कर रही थी ताकि मैं और तारीफ करूँ. हर औरत ऐसी hi होती है अपनी तारीफ की भूखी

अनुपमा: इतनी भी खूबसूरत नहीं हूँ जितना तुम कह रहे हो और तेरे अंकल को तो काम क इलावा कुछ पता भी नहीं है इस लिए वो बूढ़े हो गए हैं. उनकी काम में लगन और ईमानदारी देख कर hi मेरी शादी उनसे करवा दी थी मेरे बाप ने वर्ण ...

अमित : मुझे भी ऐसा hi कुछ लगा था वर्ण आपके लिए तो कोई दमदार हैंडसम पति hi चाहिए था . आप बैठी क्यों है लेट जाइये मैं आपके पाऊँ दबा देता हूँ.

अनुपमा: अरे नहीं नहीं तुम हमारे मेहमान हो तुमसे पाऊँ दबवाउंगी क्या

अमित : आपकी सेवा करना तो मेरा फ़र्ज़ है लड़की वालों की तरफ से हूँ न . वैसे इसी बहाने आपके पास रहने का मौका तो मिलेगा.

अनुपमा न न करते हुए भी लेट गयी और मैं उसके पाऊँ क पास बैठ गया . मैंने अनुपमा क पाऊँ पर हाथ रखा और उन्हें सहलाने लगा.

अमित : अनुपमा जी बुरा न मने तो एक बात कहूं ?

अनुपमा : कहो मैं भला क्यों बुरा मानूंगी तुम्हारी बात का , तुम तो इतनी अछि बातें करते हो इतने संस्कारी हो

अमित : आपके पाऊँ बहुत खूबसूरत हैं , अभी भी आप इतनी हसीं है . पता नहीं आप अपनी जवानी में कितनी खूबसूरत रही होंगी.

अनुपमा की आँखों में चमक और बढ़ गयी और चेहरे पर स्माइल आ गयी

अनुपमा : छोडो पुराणी बातें अब तो कितने साल हो गए. वैसे मैं उस टाइम में हेमा जैसी hi थी.

अमित : मतलब हेमा दीदी आप जैसी हैं? हेमा दीदी तो बिलकुल किसी हेरोइन की तरह लगती हैं इसका मतलब आप भी उस टाइम में हेरोइन hi लगती होंगी. पर मैं ताकें से कह सकता हूँ क आप उनसे भी खूबसूरत रही होंगी तभी तो वो इतनी खूबसूरत हैं. वैसे तब आपके पीछे तो लड़कों की लाइन लग जाती होगी फिर अंकल क साथ कैसे ....

अनुपमा : बस बीटा किस्मत hi कह लो इसे. तेरे अंकल मेरे बाप क पास काम करते थे . उनकी म्हणत और ईमानदारी की वजह से मेरे बाप ने मुझे उनके पल्ले बांध दिया ताकि काम भी चलता रहे हो और एक लौटी बेटी उनकी आँखों क सामने रहे . वर्ण मेरे लिए तो एक से एक अचे लड़कों क रिश्ते आते थे.

अमित : आपके पिता जी ने आपके साथ बड़ी नाइंसाफी करदी. अंकल तो किसी एंगल से भी आपके साथ फिट नहीं बैठते. कहाँ आप एक हूर पारी और कहाँ वो ....

मैंने अनुपमा क पाऊँ सहलाते हुए उसकी सदी को धीरे धीरे सरका कर घुटनो तक कर दिया था और उसकी नंगी चिकनी पिंडलियों को प्यार से सेहला रहा था. अनुपमा बातों में इतनी मगन थी की उसने इस तरफ शायद ध्यान नहीं दिया या फिर वो भी मज़ा ले रही थी.

अनुपमा : अब किस्मत में जो लिखा है वो कौन बदल सकता है.

अमित : किस्मत को मैं नहीं मंटा अनुपमा जी. मेरा तो मन्ना है क अपने दिल की सुन्नी चाहिए. जो सही लगे वो करो . लोगों का क्या है वो तो कुछ न कुछ कहते hi रहेंगे. और जहाँ तक आपकी बात है आप तो अभी भी जवान हैं. ज़रा खुद को नए ज़माने क हिसाब से रख कर बहार निकलेंगी तो आज भी आपके पीछे लाइन लग जाएगी.

अनुपमा : ऐसा नहीं है

अमित : ऐसा hi है , आप नहीं जानती. आप में वो हर बात है जो कोई भी मर्द पसंद करता है

अनुपमा : ाचा !! मैं भी तो सुनूं ऐसा क्या है मुझमे जो मर्दों को पसंद है.

अमित : जाने दीजिये अगर मैं कुछ कहूंगा तो आप बुरा मन जाएँगी.

अनुपमा: अरे नहीं मानती मैं बुरा तुम कहो.

अमित : नहीं रहने दीजिये , हमारा रिश्ता ऐसा है क आपको गुस्सा आ जायेगा और फिर मेरी शिकायत कर देंगी आप

अनुपमा : अरे नहीं करती मैं शिकायत तुम कहो तो सही .

अमित : आप सर से पाऊँ तक चलती फिरता खूबसूरती का नमूना हैं. एक तो इतनी अछि हाइट ऊपर से गोरा रंग. ऊपर वाले ने आपको मैं नक्श भी कितने अचे दिए हैं. बस आप ने खुद पर ध्यान नहीं दिया इस लिए थोड़ा सा शरीर भरी हो गया है पर सच कहूं तो ये आपको और भी ज्यादा हॉट बना देता है. ज़रूरी हिस्सों पर चर्बी होना भी ज़रूरी है. कहाँ आज कल की लड़कियां तो हड्डियों का ढांचा hi होती हैं और आप तो परफेक्ट हैं. अगर ज़रा सा खुद पर ध्यान दे तो आज कल की लड़कियां भी आपके सामने पानी भरने लगेंगी .

अनुपमा : सच !! क्या मैं सच में ऐसी हूँ ? कहीं तुम मेरा मज़ाक नॉट नहीं बना रहे?

अमित : आपको मज़ाक लग रहा है ? मेरी एक एक बात दिल से निकली है अनुपमा जी और सच कहूं तो अगर रिश्तों की रुकावट न होती तो ...

अनुपमा : तो ???

अमित : तो पता नहीं मैं क्या कर बैठता.

इतना कहते हुए मैंने अपना हाथ सदी क अंदर घुटनो से थोड़ा ऊपर रख दिया. अनुपमा मेरी आँखों में hi देख रही थी हम दोनों कुछ देर क लिए खामोश हो गए. तभी बहार से अंकल की आवाज़ आयी वो घर वापिस आ गए थे. मैं जल्दी से उठ गया और अनुपमा भी सीधी हो कर बैठ गयी. अंकल कमरे में आ गए और मैं उनसे मिल कर अपने कमरे में वापिस आ गया. मेरा अंदाज़ा सही था अनुपमा अपने पति को पसंद नहीं करती थी इस लिए अपनी तारीफ सुन कर और अपने पति क बारे गलत सुन कर उसे मज़ा आ रहा था. मेरे सहलाने से उसने बुरा नहीं मन मतलब वो भी अपनी बेटी की तरह hi गरम औरत होगी जो मेरे सहलाने से गरम हो रही थी. हो भी क्यों न हेमा जितनी गरम थी ज़रूर माँ का hi असर होगा. ज़रूर ये भी अपने टाइम पर बड़ी कामुक रही होगी तभी बाप ने नौकर क पल्ले बांध दिया. खैर वो सब ज़रूरी नहीं था. ज़रूरी था तो इन दोनों माँ बेटी को काबू करना. आंटी ने तो मुझे हेमा को काबू करने को कहा था पर मैं तो उसकी माँ को भी अब अपने नीचे लेन का सोच रहा था ताकि साडी समस्या जड़ से hi ख़तम हो जाये. खैर उसके बाद मैंने अपने कमरे में आ कर कुछ देर रीमा से बात की और फिर सो गया.

उधर ऋतू सिंह शाम तक बिजी रही सुशिल कुमार क केस की वजह से. सारा दिन बड़े बड़े ऑफिसर्स क फ़ोन आते रहे उससे केस की प्रोग्रेस क बारे में मगर ऋतू सिंह ने कोई भी डिटेल किसी को नहीं दी वो हर बात का गोल मोल जवाब देती रही क्यूंकि वो जानती थी क वो लोग असल में जानना क्या चाहते हैं. ऋतू सिंह इस केस को अलग hi एंगल से देख रही थी क्यूंकि कुछ चीज़ें उसने नोट की थी जो अलग hi कहानी की तरफ इशारा कर रही थी और हल उस तरफ का कोई खास एविडेंस हाथ नहीं आया था सिवाए एक क. शाम तक बिजी रहने क बाद उसने अपने ऑफिस में hi सभी स्टेशन इन्चार्जेस को बुला लिया मंजरी क केस क रिगार्डिंग मगर उम्मीद क उलट किसी ने भी इस तरह का कोई कैसे होने की बात नहीं मणि . जिस वजह से ऋतू का गुस्सा उसके सर चढ़ गया और उसने सबको सीधे सीधे वार्निंग दे दी क वो खुद इस केस क बारे में पता लगाएगी और जिसके भी ठाणे का ये केस हुआ उसे वो ससपेंड करवा देगी. इसके बाद भी किसी ने हामी नहीं भरी. जब कोई बात नहीं बानी तो ऋतू ने मंजू से hi जानना चाहा क्यूंकि उसको लगा क शायद मंजू से अमित ने इस बारे में कोई बात की हो मगर मंजू को भी कुछ पता नहीं था. ऋतू एक बार फिर से निराश हो गयी. एक तरफ उसको शाबाशी मिल रही थी उसकी कामयाबी क लिए पर ऋतू को तो जैसे कोई सरोकार hi न था उस बात से. फ़्रस्ट्रेशन में आज फिर वो अपने सरकारी आवास में अकेली बैठी वीने पिने लगी जैसा क वो अक्सर करती थी इस हालत में. पर अमित क साथ किया गया उसका गलत सलूक और फिर अमित का रिएक्शन उसे और भी तड़पने लगा. ऋतू खुद को बहुत अकेला महसूस कर रही थी. वो मंजू क पास भी नहीं जा सकती थी क्यूंकि उसने खुद hi तो फैसला किया था क अमित को मानाने तक वो मंजू क पास नहीं जाएगी .

दूसरी तरफ रुपाली ने भी बलजीत राइ से बचने क लिए अपनी तबियत का बहाना कर क हॉस्पिटल में एडमिट होना hi ठीक समझा. वैसे भी शीना क बर्थडे पार्टी क चलते उसे दर था क कहीं बलजीत राइ उसे फिर से न दबोच ले. शीना ने भी उसकी मज़बूरी को समझते हुए किसी तरह का सवाल नहीं उठाया. रीना तो अपनी माँ क पास hi हॉस्पिटल में hi रुक गयी. जबकि रीमा को शीना ने अपने साथ रखा .

राधा की तरह दिव्या भी अमित को मिस कर रही थी. करवा चौथ वाले दिन जिस तरह अमित ने दिव्या को मजबूर कर क तैयार करवाया था उससे भी दिव्या क मन में अमित क लिए फीलिंग्स और बढ़ गयी थी . और फिर जो सूट अमित ने उसे दिलवाये थे उसने वो अपने लिए सिलवाने क लिए दे दिए थे. वैसे तो वो अब सूट नहीं पहनती थी पर वो अमित क लिए फिर से वो सब करना चाहती थी जो वो कब की छोड़ चुकी थी सिर्फ उसकी ख़ुशी क लिए. दिव्या अब मन hi मन अमित को बेटे की जगह प्रेमी hi समझने लगी थी जिसमे बहुत हद तक हाथ उसके सपनो का था जिसमे उसे अपनी बहिन दामिनी की आवाज़ hi रास्ता दिखती आयी थी. अब ये आवाज़ दामिनी की थी या उसके दिल क दबे कुचले अरमानों की ये तो वो भी नहीं जानती थी . पर राधा क साथ वो भी अब सपनो में अमित को hi देखती थी. उधर निधि भी करवा चौथ क बाद से अमित को और भी ज्यादा मिस कर रही थी . जिस तरह वो उस दिन अमित की बहिन में सोई थी वो उसे भूल नहीं प् रही थी और रोज़ रत तकिये को अमित समझ कर कास क अपने साइन से लगा कर सोने लगी थी . फ़िलहाल निधि अमित को वापिस आने पर सरप्राइज देना चाहती थी जिसके लिए वो जी जान से म्हणत कर रही थी.

अगले दिन सुबह मैं जल्दी उठ गया और एक्ससरसीसे करने क लिए रेडी हो गया. हेमा भी रेडी हो कर एक्ससरसीसे करने छत पर आ गयी. अब वो बिलकुल ठीक लग रही थी. मुझे देखते hi वो मेरे पास आ गयी. इस वक़्त हेमा एक तक सूट में थी और फिटिंग वाले इस ड्रेस में उसके बूब्स और गांड केहर ध रही थी. उसके आते hi मैंने उसकी गांड मसलनि शुरू कर दी.

अमित : कैसी हो मेरी जान रत तो तुम खाना खाने भी नहीं आयी नीचे .

हेमा : नीचे क्या अति , मेरी हालत कैसी थी पता नहीं तुम्हे ? खामखा किसी को शक हो जाता मेरी हालत देख कर. देखा नहीं था कैसे घूर घूर क देख रही थी करिश्मा.

अमित : चलो वो सब तो ठीक है , आज का क्या विचार है? आज फिर रेडी हो न गांड देने क लिए?

हेमा : ये तुम मेरी गांड क पीछे hi क्यों पड़े हो ?

अमित : इस लिए मेरी हाँ क तुम्हारी ये मस्त गांड जब भी देखता हूँ तो मेरा लैंड खड़ा होने लगता है. इतनी मस्त गांड अगर न मरी तो फिर कुछ भी नहीं किया

हेमा : पर तुम्हारा इतना बड़ा डंडा अंदर लेना मुश्किल होगा मेरे लिए

अमित : उसकी चिंता तुम न करो , वो मैं कर लूंगा . तुम बस रेडी रहो लेने क लिए

हेमा : तुम तो घुसा hi डोज तुम्हारा क्या है , हालत तो मेरी ख़राब हो जाएगी.

अमित : अब मज़े लेने की थोड़ी बहुत कीमत तो चुकानी पड़ेगी न . वैसे भी एक बार hi दर्द होगा उसके बाद तुम्हे भी मज़ा hi आएगा.

हेमा : मज़े का तो पता नहीं गांड ज़रूर फैट जनि है मेरी.

अमित : अब ज्यादा बातें मत बनाओ , ये बताओ गांड कहाँ डौगी ? बहार चल कर या यही घर में ?

हेमा : पागल हो ? यहाँ किया तो सबको पता चल जायेगा. बहार hi चलते हैं. वही जगह सेफ है.

अमित : तो ठीक है पर आज ऑफिस कल की तरह ज्यादा टाइम मत लगाना.

हेमा : नहीं लगाती, तुम नाश्ता कर क तैयार रहना.

अमित : तो अभी क लिए भी थोड़ा बहुत हो जाये.

हेमा : अभी क्या करना है सुबह सुबह

अमित : इधर आओ मैं बताता हूँ.

मैं हेमा को खींच कर उसके गयम में ले गया और उसे वहीँ घुटनो पर बिठा कर उसके मुँह में लैंड पेल दिया. हेमा भी बिना कोई न मुकुर किये लैंड चूसने लगी. थोड़ी देर उससे लैंड चुसवाकर मैंने कपडे ठीक किये और हम दोनों नीचे आ गए. मैंने इस दौरान हेमा को मसल मसल कर पूरा गरम कर दिया था. वो तो छुड़वाने को तैयार हो गयी थी वहीँ पर मैंने जान बुझ कर उसे नहीं छोड़ा. तैयार हो कर नाश्ता करने क लिए जब हम नीचे आये तो अंकल जल्दी से नाश्ता कर क निकल लिए. मुझे देखते hi अनुपमा क चेहरे पर चमक आ गयी.

अनुपमा: अरे आ गए तुम अमित आओ आओ मैं तुम्हारा hi इंतज़ार के रही थी नाश्ते क लिए. करिश्मा जल्दी से नाश्ता लगाओ .

अमित : गुड मॉर्निंग जी आप कैसी हैं?

अनुपमा : मैं तो बिलकुल अछि हूँ. जल्दी से नाश्ता के लो फिर मैं तुम्हे ले कर चलती हूँ आज शॉपिंग करने .

हेमा : शॉपिंग? ये आज शॉपिंग का ख्याल कहाँ से आ गया माँ ?

अनुपमा: वो क्या है न अमित पहली बार यहाँ आया है तो मैं सोच रही थी क आज अमित को शॉपिंग करवा क लती हूँ . आखिर हमारा भी तो कुछ फ़र्ज़ है न उसकी सेवा करने का.

हेमा : ये तो आप ठीक कह रही हैं क हमारा भी कुछ फ़र्ज़ है इसकी सेवा करने का.

हेमा ने इतना कह कर मेरी तरफ कामुक ऐडा से देखा.

हेमा : पर क्या है न माँ क आज मैं अमित को अपने साथ लेकर जा रही हूँ . आप कल ले जाना इसे शॉपिंग क लिए.

हेमा की बात सुनते hi अनुपमा का चेहरा उतर गया .

अनुपमा : बीटा कल तुम लेकर गयी तो थी इसे ? आज मुझे शॉपिंग करवाने दे

हेमा : माँ वो कल एक जगह रह गयी थी आज वहीँ ले कर जाना है इसे . बस आज की बात है कल आप ले जाना.

अमित : मैं तो यहीं हूँ जब तक आप कहेंगी , तो हम कल चल पड़ेंगे

अनुपमा : मायूस होते हुए ) ाचा ठीक है चलो कोई बात नहीं कल सही. आज शाम को मुझे पार्टी में जाना था तो सोचा अमित क साथ साथ अपने लिए भी कुछ देख लेती हूँ.

हेमा : अरे माँ आपके पास तो पहले से hi इतनी साडी कलेक्शन हर तरह की. कोई सा भी पेहेन लो. वैसे भी किटी पार्टी पर hi तो जाना है आपने.

करिश्मा दीदी मेरे आगे खाने की प्लेट रखती हुई मुझे फिर से घूर रही थी. ऐसा लग रहा था क उन्हें मेरा ऐसे है है क हेमा और अनुपमा से बात करना ाचा नहीं लग रहा था. पर उन्हें क्या पता मैं तो उन्ही क लिए ये सब कर रहा था और इन हवस की मरी माँ बेटी को काबू करने क लिए ये सब कर रहा था. हेमा ने बस थोड़ा सा hi नाश्ता किया और मुझे चलने क लिए कहने लगी. मैंने भी जल्दी से नाश्ता ख़तम किया और उसके साथ चल पड़ा. हेमा ने आज लॉन्ग स्कर्ट और टॉप पहना था. शायद इस लिए क उसकी आज गांड फटने वाली थी और वो उसके बाद अपनी बिगड़ी हुई चल छुपाना चाहती हो.

हेमा कल की तरह फिर से मुझे ऑफिस में ले आयी और अपने स्टाफ को काम बताने लगी . मैं ऑफिस में उसके साथ बैठा था और वो फिर कल की तरह टाइम लगा रही थी तो मुझे ाचा नहीं लग रहा था. हेमा ने मुझे फ़्रस्ट्राटे होते देखा तो मुझ पर हसने लगी .

हेमा : क्या हुआ इतने खामोश क्यों हो और ये मुँह कैसा बना रखा है ?

अमित : और कितनी देर लगाओगी , मुझसे और इंतज़ार नहीं हो रहा . जल्दी करो वर्ण मैं यहीं शुरू हो जाऊंगा .

हेमा : थोड़ा सबर रखो यार थोड़ी देर की तो बात है एक बार सारा काम देख लूँ फिर चलते हैं. इतनी भी क्या जल्दी है सारा दिन अपना है .

हेमा जान बुझ कर मुझे चिढ़ाने वाले एक्सप्रेशन बना रही थी तो मुझे भी ताव आ गया और मैं अपनी चेयर से उठ गया

अमित : तो तुम ऐसे नहीं मानोगी , अभी बताता हूँ तुझे .

इतना कह कर मैं हेमा क पास आया और उसे चेयर से उठा कर टेबल पर झुका दिया. इससे पहले क वो कुछ समझती मैंने एक हाथ से पीछे से उसकी स्कर्ट उठा कर कमर पर चढ़ा दी और उसकी पेंटी खिंच कर पाऊँ में गिरा दी. साथ hi अपनी 2 उंगलियां उसकी छूट में घुसा दी.

हेमा. : आअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स उईईई माआआअह्ह्ह्ह ... क्या कर रहे हूऊऊ कोई आए जायेगा आए

अमित : आता है तो आये मुझसे और इंतज़ार नहीं हो रहा. कब से देख रहा हूँ और तू मुझे चिढ़ा रहे है . ये ले

मैंने तेज़ी से उंगलियां अंदर बहार करनी शुरू कर दी. हेमा मुझे पीछे हटाने की कोशिश कर रही थी पर मैंने उसकी पीठ पर दबाव बना कर उसे दबा दिया . कुछ hi पलों में वो गरम हो गयी और सिसकने लगी.

हेमा : उनननममममम आआह्ह्ह्ह कक्कक्क्स अब डाल भी दो करलो जो करना है प्लीज उनननननममम जल्दी से दाल दो.

हेमा जब पूरी गरम हो गयी तो मैंने उसे छोड़ दिया. मैं उसे छोड़ कर पीछे हैट गया और अपनी चेयर की तरफ बढ़ाने लगा तो हेमा ने जल्दी से पलट कर मेरा हाथ पकड़ लिया.

हेमा : रुक क्यों गए ? करो न , मुझे क्यों तड़पा रहे हो ?

अमित : अब पता चला तुम मेरे साथ क्या कर रही हो इतनी देर से.

हेमा : प्लीज एक बार अभी दाल दो देखो मेरा क्या हाल हो रहा है .

अमित : अगर लैंड लेना तो चलो जल्दी , मैं नहीं चाहता क यहाँ सब तुम्हारी चीखें सुने.

हेमा ने जल्दी से अपनी पेंटी ऊपर की और मेरा हाथ पकड़ कर बहार चल पड़ी . हेमा की आग भड़क उठी थी इस लिए उसे जल्दी लैंड चाहिए था छूट में . कार को तेज़ी से चलते हुए वो जल्दी फ्लैट पर ले आयी. तेज़ कदमो से चलती वो मुझे खींचती हुई तेज़ी से अपने फ्लैट में ले आयी. मुझे मन hi मन हेमा की हालत पर हंसी आ रही थी. फ्लैट पर पहुँचते hi हेमा ने दरवाज़ा अंदर से बंद करते hi मुझ पर हमला कर दिया और मुझसे किश करते हुए मेरी पेण्ट खोलने लगी. पेण्ट नीचे कर क वो झट से घुटनो क बल बैठ गयी और मेरा लैंड मुँह में ले कर रंडी की तरह चूसने लगी .

हेमा : उम्म्म्म साररूउप सैरूयप्प उम्म्म आआह्ह्ह उम्मम्मम सारूउप सारिऊप

मैंने हेमा का सर पकड़ा और उसके मुँह में लैंड पेलने लगा. हेमा क मुँह से थूक की पर नीचे गिर रही थी . एक बार मेरा धक्का ज्यादा ज़ोर से लग गया और लैंड उसकी हलक में घुस गया. हेमा की ऑंखें hi बहार आ गयी और वो ज़ोर ज़ोर से खांसने लगी

हेमा : ाखुन ाखुन ाखुन हहहहह ाखुन ाखुन ाखुन हहहहह मरना है क्या

अमित : मरना नहीं मारनी है , तेरी छूट मारनी है मेरी रंडी . चल जल्दी घोड़ी बन जा .

मैंने हेमा को वहीँ हॉल में पड़े सोफे की बैक पर झुकाया और उसकी स्कर्ट कमर पर चढ़ा कर उसकी पेंटी उतर दी. हेमा ऊपर से कपड़ों में थी और नीचे से पूरी नंगी . उसकी नंगी गोरी टांगों को फैला कर मैंने उसके बड़े बड़े खरबूजे जैसे कूल्हों पर ज़ोर ज़ोर से थप्पड़ मरे और उसकी गांड लाल करदी

चटाक चटक चटक

हेमा : आअह्ह्ह्हह ककक अब दाल भी दो क्यों तड़पा रहे हो कब से मेरी छूट तड़प रही है .

अमित : चुप कर रंडी यहाँ आर्डर मैं दूंगा तू नहीं . चटाक चटाक

मैंने 2-4 और थप्पड़ मरे और थोड़े से घुटने बेंड कर क उसकी छूट पर सूपड़ा लगा कर ज़ोरदार धक्का मरते हुए एक hi बार में पूरा लैंड छूट में घुसा दिया

हेमा : आआआईईईई माआआआ माररररर डालललललाआआ आआअह्हह्ह्ह्हह

अमित : क्यों रंडी अभी तो बड़ी तड़प रही थी अब चीख क्यों रही है? ले न अब लैंड यही तो चाहिए था तुझे

हेमा : आआह्ह्ह्ह एक hi बार में आआह्ह्ह्ह ककक क्यों घुसा दिया मेरी छूट फट गयी है

अमित : तेरी छूट hi तो फाड़ने आया हूँ मैं ये ले

मैंने हेमा की कमर दोनों हाथों से पकड़ी और ताबड़तोड़ धक्के मरने शुरू कर दिए . कुछ देर हेमा चीखती रही और फिर अपने रंग में आ कर मुझे और तेज़ धक्के मरने को कहने लगी. पक्की रंडी थी हेमा उसे तो सिर्फ दमदार चुदाई hi चाहिए थी .

हेमा : आह्हः ाःह ाःह आह्हः आह्हः और ज़ोर से करो आअह्ह्ह फ़ायद दो मेरी उम् आअह्ह्ह ककक उफ्फफ्फ्फ़ फ़क फ़क डीपर हर्डर उम्म्म आअह्ह्ह्ह आह्हः

अमित : ये ले रंडी आज तेरी छूट फाड़ कर hi रहूँगा . आज तुझे आगे पीछे दोनों तरफ से फाड़ूंगा

हेमा : ीीेहःहः फ़क फ़क फ़ायद दो जैसे चाहे फाड़ो मेरी आग बुझा दो आअह्ह्ह आअह्ह्ह फुककक

मैंने हेमा का टॉप उतर दिया और उसकी ब्रा से उसके रसीले आम बहार निकल कर ज़ोर ज़ोर से मसलने शुरू कर दिए. हेमा क बूब्स ज़ोर से पकड़ कर मैं ज़ोरदार धक्के मर रहा था. हेमा का काम जल्दी hi हो गया और उसकी टाँगे कम्पनी लगी. झटके लेते हुए वो निढाल हो गयी. उसकी छूट से पानी निकल कर उसकी टांगों क साथ बेहटा हुआ नीचे ज़मीन तक आने लगा. मेरा लैंड उसकी छूट क गर्म पानी से पूरा चिकना तो था hi. मैंने जल्दी से लैंड छूट से बहार निकला और उसकी गांड पर सेट कर क ज़ोरदार धक् में आधा लैंड गांड में घुसा दिया. हेमा तो मदहोश हुई पड़ी थी उसे उम्मीद न थी क मैं एक डैम से इतनी जल्दी गांड में दाल दूंगा. गांड में लैंड घुसते hi वो ज़ोर से चीख पड़ी.

हेमा : आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मायआ कर गयी निकल बहार हरामज़ादे आयआईईईई मरररररर दलाआआअह्ह्ह माआआआ छोड़ड़ड़ दे मुझे .

हेमा दर्द से छटपटा रही थी और मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी. आगे से वो पहले से hi सोफे क साथ लगी हुई थी और पीछे मुझे वो हटा नहीं प् रही थी. वो पूरी तरह से मेरी गिरफ्त में थी. मैंने उसके गाली देते hi गुस्से में एक और धक्का पेल दिया और पूरा लैंड गांड में घुसा दिया . इस धक्के से हेमा एड़ियां उठा कर आगे को भाग निकलने को हुई पर कोई फायदा नहीं हुआ और पूरा लैंड गांड में घुस गया. वो दर्द से तड़पने लगी

हेमा : ाआईईईईई मायआ छोड़ दे कमीने मेरी गांड फट गयी है मादरचोड़द्द आआआह्ह्ह्ह

अमित : चुप साली रंडी आज तेरी अचे से फडंगातकी फिर तुझे कभी खुजली न हो.

मैंने हेमा की गांड पर थप्पड़ मरे और अपना लैंड बहार को खींचा . हेमा की गांड पूरी तरह से गांड पर कासी हुई थी. ऐसे लग रहा था जैसे लैंड किसी पाइप में कास क जकड़ा हो. मैंने लैंड आधा बहार निकल कर फिर से पूरा घुसा दिया. हेमा फिर से चीखे पर मैंने परवान न करते हुए धक्के जारी रखे. कुछ hi मिंटो में गांड में लैंड की जगह बन गयी और लैंड आराम से अंदर बहार होने लगा. हेमा की चीखें अब सिसकियों में बदल चुकी थी. मैंने अपने हाथ उसकी गर्दन क पास से कन्धों पर रखे और उसे ऊपर को करते हुए ज़ोरदार धक्के पेलने लगा.

हेमा : aa..aaa...aa..aaa मार aaa...aaa मार और ज़ोर से मार

अमित : शाबाश मेरी रंडी अब तू बानी है मेरी पक्की वाली रंडी हहहह उम्म्म अब से तेरी छूट और गांड दोनों मरता रहूँगा जब भी जहाँ भी मेरा दिल करेगा तुझे वहीँ छोडूंगा. बोल छुडवायेगी न मुझसे

हेमा : ाःह आअह्ह्ह फुककक एसससस हाँ जहाँ कहोगे वही छुडवाउंगी ककक आह्हः आह्हः

अमित : तेरी माँ क साथ छोडूंगा तुझे दोनों माँ बेटी को एक साथ छोडूंगा उसकी गांड भी बहुत मस्त है

हेमा : आअह्ह्ह आह्हः आह्हः छोड़ लेना मेरी माँ को भी छोड़ लेना आअह्ह्ह आह्हः दोनों को एक साथ छोड़ लेना वो भी कक्कक्क्स बड़ी गरम है मेरे बाप से ठंडी नहीं होती वो इसी लिए तो कितने साल ड्राइवर से चुदवाती आआअह्ह्ह्ह रही है , बड़े दिनों से प्यासी होगी वो भी ककक फुकककक

हेमा क मुँह से अनुपमा क बारे में सुन कर मुझे जोश आ गया और मैंने स्पीड और तेज कर दी. हेमा को भी अब गांड मरवाने में मज़ा आने लगा था. मैंने 15 मिनट्स उसकी गांड मरी और फिर उसकी गांड में hi अपना पानी निकल दिया. हेमा की छूट भी इस दौरान एक बार और पानी निकल चुकी थी . हेमा की छूट में अपना पानी निकलने क बाद मैंने उसकी गांड से लैंड बहार निकला तो उसकी गांड जो पहले बंद थी अब 2 रूपए क सिक्के क जितनी मुँह खोले थी. गांड का छेड़ किनारों से फट गया था. हेमा तो वहीँ सोफे पर hi आगे को गिरी पड़ी थी उसके पाऊँ ज़मीन से उठ चुके थे . हेमा की गांड छत के तरफ सर सोफे की सीट पर और पेअर हवा में उठे हुए बड़ा दिलकश नज़ारा दे रहे थे पर मुझे पता था क इस वक़्त उसका बुरा हल होगा. मैंने हेमा को अपनी गॉड में उठाया और उसे अंदर ले जाकर बीएड पर दाल दिया. जैसे hi उसकी गांड बीएड पर पड़ी वो उछाल कर पलट गयी .

हेमा : आयी माआ मर गयी . बहुत दर्द हो रहा है आअह्ह्ह तुमने सच में मर गांड फाड़ दी .

अमित : सबर करो पहली बार दर्द तो होता hi है . कोई क्रीम है क्या ज़ख्मों पर लगाने वाली ?

हेमा : मेरे पर्स में पड़ी है जाओ ले आओ कक्कक्स उईईई पता था मुझे ऐसा hi होगा कुछ . पैन किलर भी होगी साथ में वो भी ले आना आअह्ह्ह

मैं जल्दी से हॉल में वापिस आया तो दरवाज़े क पास hi ज़मीन पर उसका पर्स गिरा पड़ा था . मैंने उसमे से क्रीम और पैन किलर टेबलेट निकल कर पानी का गिलास साथ लिया और हेमा क पास आ गया. मैंने हेमा को सहारा देकर बिठाया करवट क बल बिठाया और उसे टेबलेट दी. फिर उसे लिटा कर मैंने उसकी गांड पर क्रीम भी लगा दी. हेमा को आराम की ज़रूरत थी इस लिए मैंने उसे आराम करने दिया और खुद भी उसके पास hi लेट गया .

दमदार चुदाई क बाद मुझे भी नींद आ गयी थी. जब मेरी आँख खुली तो देखा शाम क 4 बज चुके थे. हेमा मेरे पास hi उलटी लेती हुई थी. ऊपर से वो नंगी थी और स्कर्ट भी आधी टांगों पर अस्त व्यस्त थी. मैंने स्कर्ट उठा कर उसके चूतड़ नंगे किये और उन्हें फैला कर गांड को चेक करने लगा . मेरे द्वारा चूतड़ पकड़ने से hi हेमा क मुँह से सिसकी निकल गयी और उसकी नींद टूट गयी .

हेमा : आअह्ह्ह दर्द है अभी भी, क्यों तंग कर रहे हो ?

अमित : बस देख रहा था क अब कैसी हालत है. चलो अब उठ जाओ वापिस भी जाना है .

हेमा : रुक जाओ कुछ देर अभी भी दर्द हो रही है . सच में गांड फट गयी है . इतना दर्द तो पहली बार छूट की सील टूटने पर भी नहीं हुआ था. आआह्ह्ह

अमित : एक और टेबलेट खा लो जल्दी आराम आ जायेगा. पहली बार तो दर्द होता hi है . एक दो बार और लोगी तो अपने आप ये भी खुल जाएगी

हेमा : न बाबा अब नहीं ले पाऊँगी मैं. एक hi बार में इतनी बुरी हालत कर दी है.

अमित : गांड तो देनी hi पड़ेगी वर्ण भूल जाओ फिर छूट भी .

हेमा : ये तुम बात बात पर ब्लैकमेल क्यों करते हो? एक तो गधे जितना बड़ा लैंड ले कर घूम रहे हो पता भी है कितना दर्द हो रहा है अभी भी

अमित : तो क्या हुआ जान मज़ा भी तो लिया न तुमने. चिंता मत करो एक दो बार में सब ठीक हो जायेगा . अब ज़रा बताओ क्या बता रही थी तुम अपनी माँ क बारे में ?

हेमा : क्या बता रही थी मैं ?

अमित : यही क तुम्हारी माँ ड्राइवर क साथ ...

हेमा : लगता है मेरी माँ की लिए बगैर नहीं मानोगे तुम .

अमित : सही कहा , तुम्हारी माँ भी मस्त माल है . जब तक उसकी ले नहीं लेता मज़ा नहीं आएगा. और तुम दोनों को एक साथ छोड़ने का सोच कर तो मेरा लैंड भी मस्त होने लगता है . अब बताओ अपनी माँ की गर्मी क बारे में भी

हेमा : मेरी माँ भी बहुत गरम है और उसे देख कर hi मैं भी इतनी गरम बन गयी थी. स्कूल में थी जब मैंने पहली बार अपनी माँ को ड्राइवर क लैंड पर उछालते देखा था. तन तो मुझे पता भी नहीं था क वो क्या कर रही है. पापा तो बस काम में बिजी रहते थे और माँ का तो तुम्हे पता hi है. पापा उनके सामने कहीं भी नहीं ठहरते . हमारा एक ड्राइवर हुआ करता था बहुत सैलून तक उससे अपनी प्यास बुझाती रही फिर वो पता नहीं कहाँ चल गया. ड्राइवर क इलावा भी मेरी माँ ने कई लैंड लिए हैं क्यूंकि उसकी एक लैंड से प्यास नहीं बुझती थी. अब तो बहुत बदल गयी है पर मुझे यकीन है क उसमे आग अभी भी होगी.

अमित : तो इसका मतलब तुम्हारे अंदर हो इतनी गर्मी है वो तुम्हारी माँ से hi है. तभी मैं सोचूं क अंकल तो ऐसे हैं नहीं फिर तुम में इतनी गर्मी कैसे. कहीं तुम्हारा बाप भी कोई और तो नहीं??

हेमा : क्या पता ये तो माँ hi बता सकती है.

अमित : अब तो तुम्हारी माँ की चुदाई किये बिना मैं यहाँ से नहीं जाऊंगा . और तुम दोनों को एक साथ भी छोडूंगा

हेमा : मुझे तो कोई ऐतराज़ नहीं , कहोगे तो खुद पकड़ कर तुम्हारा लैंड अपनी माँ की छूट में डालूंगी . चलो अब ज़रा मेरी मदद करो थोड़ा फ्रेश हो लूँ . आअह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स मायआ बहुत दर्द है कक्कक्स

अमित : एक और टेबलेट खा लो दर्द काम हो जायेगा.

हेमा को मैं सहारा देकर बाथरूम में ले गया. उसके बाद मैंने उसे पैन किलर टेबलेट दी. जब उसे कुछ ाचा लगने लगा तो हम वापिस ऑफिस गए पर हेमा से बैठा नहीं जा रहा था तो हम वापिस घर चल दिए . हेमा को दर्द अभी भी था इस लिए वो धीरे धीरे चल रही थी. हम जब घर पहुंचे तो हेमा फिर सीधा कमरे में चली गयी. कल की तरह आज भी करिश्मा दीदी मुझे और हेमा को घूर रही थी: हेमा गांड बहार को निकल कर चल रही थी जिसे देख कर करिश्मा दीदी की आँखों में थोड़ा गुस्सा भी था मुझे देख कर. हेमा क ऊपर जाते hi करिश्मा दीदी मेरी तरफ बरही क अनुपमा अपने कमरे से बहार निकल आयी . वो किटी पार्टी में जाने क लिए रेडी हो कर आयी थी: हलके मेकअप क साथ वो भी ज़बरदस्त लग रही थी. वैसे तो उसने सदी पहनी थी पर उसका ब्लाउज बड़ा hi आधुनिक था. स्लीवलेस ब्लाउज इतना डीप था क बूब्स आधे साफ़ नज़र आ रहे थे और पूरे कैसे हुए थे. सदी भी ट्रांसपेरेंट थी जिसमे से नंगा पेट नज़र आ रहा था . मैं जान बुझ कर अनुपमा क बूब्स को घूर रहा था . क्यूंकि अब पता तो चल hi चूका था क वो हेमा से भी गरम और प्यासी औरत है तो मैंने भी सोच लिया क उसे एहसास करवा दूँ क मैं उसे किस नज़र से देखता हूँ .

अनुपमा : तुम आ गए बीटा , कैसी लग रही हूँ मैं ?

अमित : ज़बरदस्त!! आप तो सच में खूबसूरती की मिसाल हैं . आज तो पार्टी में सबकी नज़र आप पर hi रहेगी . पता नहीं क्या हल होगा देखने वालों का.

बात करते हुए मैंने 2-3 बार अनुपमा क बूब्स को घूरा जिसे उसने भी नोटिस किया अपनी तारीफ सुन कर उसके चेहरे पर चमक आ गयी. मेरी आँखों का निशान जान कर उसने जान बुझ कर पल्लू ठीक करते हुए सदी का पल्लू बूब्स से ठोस सरका दिया.

अनुपमा : थैंक्स बीटा , तुम भुई साथ चलते तो ाचा लगता अगर कहो तो मैं वेट कर लेती हूँ तुम तैयार हो जाओ

अमित : नहीं नहीं आप जाइये मैं अगर साथ गया तो मुश्किल हो जाएगी ..... मेरा मतलब है मैं थक गया हूँ तो अब थोड़ा आराम करना चाहता हूँ .

अनुपमा भी मेरी आँखों में देखती हुई मेरी बातों का मतलब समझ रही थी. पर वहां करिश्मा दीदी भी थी इस लिए ज्यादा बात नहीं हुई और अनुपमा मुझे आराम करने का कह कर चली गयी बहार. करिश्मा दीदी वहीँ थी. मैं जैसे hi ऊपर जाना लगा तो करिश्मा दीदी ने मुझे रोक लिया .

करिश्मा दीदी : क्या करने आये हो तुम यहाँ ??

अमित : आप क्या कह रही हैं दीदी?

करिश्मा दीदी : सब समझ रही हूँ मैं. चुपचाप अब वापिस चले जाओ मैं नहीं चाहती यहाँ कोई बवाल हो तुम्हारी वजह से .मुझे ज़रा भी उम्मीद नहीं थी तुम ऐसे निकलोगे

अमित : मैं जो भी कर रहा हूँ आपके लिए hi कर रहा हूँ दीदी. आप चाहे कुछ भी समझें .

इतना कह कर मैं सीढ़ियां चढ़ता हुआ अपने कमरे में चला गया . मुझे जो दर था वो hi हुआ . करिश्मा दीदी समझ गयी थी क मैं क्या कर रहा हूँ पर न उन्होंने खुल कर बात की न मैं ये बात उनसे कर सकता था. मैंने कमरे में जा कर आंटी को फ़ोन पर बता दिया क काम कहाँ तक इस पहुंचा है. और ये भी क दीदी को मुझ पर शक हो गया है . आंटी ने कहा क मैं दीदी की टेंशन न लूँ पर मुझे ाचा नहीं लग रहा था .

डिनर क वक़्त hi मैं कमरे से बहार निकला और डिनर कर क वापिस अपने कमरे में आ रहा था क अनुपमा पार्टी से वापिस आ गयी. उसकी चाल देख कर लग रहा था क पार्टी में आज शराब वगैरह पि कर आयी है . मैं सीढ़ियां चढ़ चूका था. अनुपमा को सहारा देने क लिए करिश्मा दीदी जल्दी से उनके पास गयी तो अनुपमा ने ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दिया दीदी क गाल पर

अनुपमा: हॉट पीछे , तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे हाथ लगाने की . नशे में नहीं हूँ मैं . चल जा अपने कमरे में.



करिश्मा दीदी भाग कर रोटी हुई वापिस अपने कमरे में चली गयी. मुझे गुस्सा तो बहुत आया पर मैं चुपचाप साइड हो गया और अनुपमा क कमरे में जाती hi मैं भी अपने कमरे में चला गया. मैं अपने बीएड पर बैठा गुस्से से भरा पड़ा था. अनुपमा को उसकी इस हरकत की सजा देने क बारे में मैं सोच रहा था तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया. घडी पर देखा तो 11 बजने वाले थे. मैं कमरे से बहार निकला तो घर में सन्नाटा था. मैं दबे पाऊँ नीचे उतर कर अनुपमा क कमरे क पास गया. अंकल आज बहार गए थे ये मुझे पहले hi पता था. मैंने अनुपमा क कमरे में झाँकने की कोशिश की तो अंदर का नज़ारा देख कर मेरी आँखों में चमक आ गयी .
 
अपडेट 182



मैंने जब दरवाज़े क के होल से अंदर देखा तो अनुपमा बीएड पर टाँगें फैलाये बैठी थी और अपनी छूट में उंगली कर रही थी. उसने निघ्त्य पहनी हुई थी जो उसने अपनी कमर तक उठायी हुई थी और एक हाथ से अपने बूब्स मसल रही थी. आँखें बंद किये वो मज़े में खोयी थी. मैं उसकी हरकत आराम से देख रहा था . धीरे धीरे अनुपमा की स्पीड बढ़ गयी . अनुपमा क मुँह से तेज़ सिसकियाँ निकल रही थी. इससे पहले की वो अपना पानी निकलती मैंने रंग में भांग डालते हुए दरवाज़ा खटखटा दिया. क्यूंकि अगर उसका पानी निकलने से पहले उसे रोकना ज़रूरी था यही एक मौका था मेरे पास . लोहा गरम था और मुझे बस इस पर चोट करनी थी.

थक थक थक मैंने दरवाज़ा खटखटाया तो अनुपमा ने ऑंखें खोली उसे गुस्सा आ गया था.

अनुपमा : गुस्से में) कौन है ?

अमित : अनुपमा जी मैं हूँ अमित

अनुपमा: रुको एक मिनट

अनुपमा ने जल्दी से निघ्त्य ठीक की और दरवाज़ा खोल दिया. उसकी आँखों में लाल डोरे साफ़ नज़र आ रहे थे और एक झुंझलाहट भी

अनुपमा : क्या हुआ इस वक़्त तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

अमित : मैं नीचे पानी पिने आया था तो मुझे आपकी आवाज़ सुनाई दी , आपको कहीं चोट लगी है क्या

अनुपमा : नं नहीं तो आ आ ऐसा कुछ नहीं है .

अमित : तो फिर वो आपकी चीख कैसे आयी

अनुपमा: मैं कब .... अरे हाँ वो पाऊँ फिसल गया था तो मुँह से आवाज़ निकल गयी होगी. ऐसी कोई बात नहीं है तुम सो जाओ जा कर

अमित : ऐसे कैसे सो जॉन. आप तकलीफ में हैं और मैं सो जॉन. दिखाइए मुझे कहीं मोच तो नहीं आ गयी

अनुपमा : मैं ठीक हूँ तुम जाओ सो जाओ आराम से कुछ नहीं हुआ मुझे

अमित : आप बैठो यहाँ मुझे देखने दो . अंकल भी घर नहीं हैं ऐसे में आपका ख्याल कौन रखेगा.

अनुपमा : मैंने कहा न कुछ नहीं हुआ मुझे तुम जाओ

अमित : आप लेटो यहाँ मैं देख लेता हूँ.

मैंने ज़बरदस्ती अनुपमा को बीएड पर लिटा दिया और उसके पाऊँ क पास बैठ कर उसके पाऊँ को चेक करने क बहाने उसकी निघ्त्य को थोड़ा ऊपर सरका दिया. मैंने जान बुझ कर पाऊँ को हलके हलके दबाते हुए उसकी पिंडलियों तक सहलाना शुरू कर दिया . अनुपमा मुझे hi देख रही थी मैंने उसके पाऊँ को टखने क पास ज़ोर से दबा दिया तो वो चीख पड़ी

अनुपमा : आआअह्ह्ह क्या कर रहे हो दर्द हो रही है

अमित : मैं चेक कर रहा था क प्रॉब्लम कहाँ हैं. बस यहीं पर प्रॉब्लम है . मैं अभी मालिश कर क ठीक कर देता हूँ .

अनुपमा : मैंने खा न कुछ भी नहीं हुआ मुझे तुम रहने दो.

अमित : अरे अनुपमा जी आप मुझ पर भरोसा रखिये मैं आपकी साडी तकलीफ दूर कर दूंगा . मालिश करने में मैं एक्सपर्ट हूँ. देखना आपका ये नाज़ुक बदन कैसे फूलों की तरह हल्का हो जायेगा.

मैंने जल्दी से भाग कर तेल की बोतल पकड़ी और अनुपमा को मौका दिए बगैर उसके पाऊँ पर हल्का सा तेल दाल कर मालिश शुरू कर दी. अनुपमा बेचारी अपना पानी निकलती निकलती रुक गयी थी और अब मैं उसे मौका नहीं दे रहा था. वो थोड़ी फ़्रस्ट्राटे थी पर कुछ कह नहीं प् रही थी. मैं बीएड क ऊपर hi उसके पाऊँ अपनी गॉड में रख कर बैठ गया. पाऊँ की मालिश करने क बहाने मैं अनुपमा की गोरी पिंडलियाँ सेहला रहा था और उसके पाऊँ को अपने लैंड पर रगड़ रहा था. मेरे लैंड में तनाव आने लगा था.

अमित : जो भी कहो अनुपमा जी आप अभी पूरी जवान हैं. आपकी स्किन माखन की तरह कोमल है. मेरे तो हाथ फिसल रहे हैं .

अनुपमा: तुम तो ऐसे hi तारीफ करते रहते हो

अमित : अरे मैं बिलकुल सच कह रहा हूँ. आप को देख कर तो किसी की भी नियत बिगड़ सकती है.

ऐसा कहते हुए मैंने अनुपमा का पाऊँ अपने लैंड पर अचे से रगड़ा ताकि उसे मेरे खड़े लैंड का एहसास अचे से हो. और ऐसा हुआ भी. मैंने जब अनुपमा का पाऊँ छोड़ दिया तो वो खुद hi मेरे लैंड को पाऊँ से सहलाने लगी. अब मैंने अनुपमा का दूसरा पाऊँ पकड़ लिया था.

अनुपमा : मैं कैसे मनु क तुम सच कह रहे हो ? तुम्हे तो कुछ हुआ hi नहीं.

अमित : अब मैं कैसे बताऊँ क मुझे क्या हुआ है क्या नहीं. आप खुद hi समझ लीजिये.

इस बार मैंने अनुपमा का पाऊँ हाथ में थामे हुए अपना लैंड उसके पाऊँ को ताली पर 2-3 बार ज़ोर से रगड़ा. अनुपमा मेरी आँखों में देख रही थी. मैंने अनुपमा की निघ्त्य को घुटनो से भी थोड़ा ऊपर कर दिया. उसकी घुटनो तक टंगे नंगी हो चुकी थी.

अमित : आप कहें तो आपकी कमर की भी मालिश कर दूँ . आपका पूरा बदन हल्का हो जायेगा देख लेना .

अनुपमा: कर लो , पर ज़रा प्यार से करना ज़ोर से नहीं .

अमित : प्यार क साथ ज़ोर भी तो लगाना hi पड़ता है अनुपमा जी . बस मैं ज़ोर वहीँ लगाऊंगा जहाँ ज़रूरत है.

मैंने अनुपमा को पलट दिया अब उसकी बड़ी गांड मेरे सामने थी. अनुपमा की गांड बड़े फुटबॉल की तरह थी . निघ्त्य क नीचे पेंटी तो थी नहीं इस लिए कूल्हे थोड़े फैले हुए थे और निघ्त्य क ऊपर से hi कूल्हों क बीच की घाटी साफ पता चल रही थी. मैंने अनुपमा क दोनों पाऊँ जोड़े और उसकी तालियों में अपना लैंड टिका कर पाऊँ मोड़ कर बैठ गया. फिर अनुपमा की पिंडलियों पर हाथ रख कर धीरे मालिश करता हुआ उसकी निघ्त्य क अंदर जांघों तक हाथ ले जाने लगा. अनुपमा की मांसल जंघे भरी थी और मेरे सहलाने से अनुपमा फिर से गरम होने लगी.

अनुपमा: कक्कक्क्स तुम बहुत अछि मालिश कर रहे हो .

अमित : मैंने कहा था न मैं बहुत अछि मालिश करता हूँ. अभी तो शुरू किया है आगे आगे देखिये

मैं अब अनुपमा की जांघों को hi सेहला रहा था और अंदर की तरफ से hi उसकी जंगों को ज्यादा मसल रहा था. अनुपमा अपनी कमर हिलने लगी थी. साथ hi मेरा लैंड अब और भी ज्यादा उसके पाऊँ क बीच फंसा हुआ था. मैंने अब अपने हाथ और आगे बढ़ाते हुए छूट क पास तक पहुंचा दिए और अंगूठों से जांघों क जोड़ अचे से सेहला दिए .

अनुपमा: आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स ऐसे hi करो उम्म्म

अमित : आपकी निघ्त्य तेल से ख़राब हो जाएगी अगर आप कहें तो थोड़ी सी ऊपर कर दूँ.

अनुपमा: जो करना है करो . बस ऐसे hi मालिश करते रहो

मुझे और क्या चाहिए था मैंने जल्दी से निघ्त्य कमर तक ऊपर कर दी और अनुपमा क बड़े बड़ी चूतड़ मेरी आँखों क सामने नंगे हो गए. एक बार तो मेरे लैंड ने भी ख़ुशी में ललकार मारा. अनुपमा को शायद यद् नहीं था क उसने पेंटी नहीं पहनी हुई है. मैंने अनुपमा क पाऊँ आज़ाद कर क टाँगें फैला दी और उसकी छूट मेरी आँखों क सामने आ गयी . अनुपमा ने अपनी जवानी अचे से एन्जॉय की थी ये उसकी छूट देख कर hi पता चल रहा था. छूट का मुँह अछि तरह खुला हुआ था. छूट पर बल थे मतलब वो चुदाई से महरूम थी.

अनुपमा: क्या हुआ रुक क्यों गए? करो न .

अमित : हह है हाँ हाँ बस कर hi रहा हूँ

मैं तो अनुपमा की छूट और गांड में hi खो गया था. अनुपमा क सवाल करते hi मैं हकला गया. मैंने फिर से अनुपमा की जांघों को सहलाना शुरू कर दिया . मेरी नज़र तो उसकी छूट और गांड पर hi जैम गयी थी. जांघों क जोड़ों पर हाथ पड़ते hi मैं उन्हें फैला कर छूट का अचे से दीदार करता. छूट से पानी की कुछ बूंदे रिस रही थी मतलब साफ था क अनुपमा की छूट लैंड क लिए तड़प रही है. मैंने मालिश करते करते hi एक हाथ से अपना लोअर और अंडरवियर खिसका कर निकल दिया. अनुपमा की जांघों को और ज्यादा फैक्टर हुए उसे घुटनो पर करने की कोशिश करते हुए मैं उसकी टांगों क बीच में आ गया .

अमित : अनुपमा जी आप वाली में बहुत सुन्दर हैं. पता नहीं अंकल ने कौन से पुण्य किये होंगे क आप उन्हें मिल गयी. आप क लिए तो लोग किसी का भी कतल करने को तैयार हो जाएँ.

मैंने अब अपने हाथ अनुपमा क नंगे चूतड़ों पर रख दिए और उन्हें मसल दिया

अनुपमा: आअह्ह्ह्ह कक्कक्स क्या मैं तुम्हे सच में इतनी अछि लगती हूँ ?

अमित : मैं बता नहीं सकता क आप मुझे कितनी अछि लगती हैं. बस समझ लीजिये क आपके लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ अगर आप मुझे एक मौका दे दें तो

अनुपमा की कमर को थोड़ा ऊपर करते हुए मैंने अपना लैंड छूट पर सेट करते हुए बिना धक्का मरे धीरे धीरे अंदर सरकना शुरू कर दिया

अनुपमा: आअह्ह्ह्ह कक्कक्स ये का लग रहा है वहां ??

अमित : ये मालिश करने वाला औज़ार है अनुपमा जी. आपका पूरा बदन हल्का हो जायेगा इससे .

अनुपमा: अचे से मालिश कार्डो कक्कक्स बड़ी जकड़न है पूरे बदन में .

अमित : आज आपकी साडी जकड़न मिटा दूंगा अनुपमा जी . बस आप मुझे रोकना मत

इतना कह कर मैंने हल्का सा धक्का मर दिया और मेरा लैंड आधे से थोड़ा ऊपर छूट में समां गया. अनुपमा की छूट खुली हुई थी पर फिर भी लैंड छूट को फैला रहा था .

अनुपमा: आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स उम्मम्मम बड़ा hi ाचा औज़ार है ककक ऐसे hi मालिश करते रहो उम्म्म

मैंने घुटनो पर हो कर अनुपमा की कमर को दोनों हाथों से थम कर पीछे को खींचा और अनुपमा को भी घुटनो पर कर दिया . अनुपमा की बड़ी गांड की वजह से पूरा लैंड अंदर नहीं जा रहा था. पर इतना भी काफी था उसके लिए .

अनुपमा: ककक तुम्हारा औज़ार तो बहुत बड़ा लग रहा है कक्कक्क्स आआह्ह्ह्ह

अमित : बड़े औज़ार से hi तो सही मालिश होती है अनुपमा जी.

मैंने अब अनुपमा की कमर को थामे धक्के पेलने शुरू कर दिए थे. अनुपमा भी सिसकियाँ लेती अपनी कमर पीछे को धकेल रही थी. अनुपमा क बड़े कूल्हों से मेरी जंघे टकराती तो कमरे में थप थप थप की आवाज़ आती. मैंने अनुपमा क चूतड़ फैला कर देखे तो उसकी गांड क सुराख़ नज़र आया. ब्राउन रंग का सुराख़ देख कर लग रहा था क अनुपमा ने ज़रूर गांड मरवाई होगी पर ज्यादा नहीं .

अनुपमा : आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स उम्म्म ऐसे hi करते रहो कक्कक्क्स पहले पता होता तो उम्म्म कब की मालिश करवा लेती तुमसे . बहुत अछि उम्म्म अछि मालिश करते हो . अब से रोज़ ऐसे hi मालिश करना उम्मम्मम

अमित : रोज़ ऐसे hi करूँगा अनु डार्लिंग बस तुम तैयार रहना . ऐसी ज़ोरदार मालिश करूँगा क तुम्हारी साडी जकड़न दूर कर दूंगा . चलो ज़रा इसे भी अलग कर दो ऊपर से भी मालिश कर देता हूँ.

मैंने अनुपमा की निघ्त्य उतरने की कोशिश की तो उसने जल्दी से खुद hi निघ्त्य उतर कर फेंक दी. अनुपमा का जिस्म भरा हुआ और हेअल्थी था पर लम्बे कद की वजह से वो ज़बरदस्त छोड़ने लायक मॉल थी. मैंने छूट से लैंड बहार निकल कर उसे पलट दिया और सीधा कर दिया. अनुपमा क बड़े बड़े बूब्स पानी से भरे गुबारों की तरह फ़ैल गए. उसकी आँखों के हवस साफ़ नज़र आ रही थी मैंने उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को अपने होंठों में ले लिया और उसके बूब्स मसलने लगा. अनुपमा ने भी ज़ोरदार तरीके से मुझे रिस्पांस देना शुरू कर दिया और अपनी टंगे मेरी कमर पर बांध दी. वो खुद hi अपनी कमर उठा कर लैंड को छूट में लेने की कोशिश कर रही थी. मैं उसे किश करने क बाद उसके बूब्स चूसने लगा जबकि अनुपमा छूट में लैंड लेने क लिए बार बार कोशिश कर रही थी

अनुपमा: आअह्ह्ह्ह कक्कक्स क्यों तड़पा रहे हो अब घुसा भी दो

अमित : क्या घुसा दूँ मेरी जान ?

अनुपमा: अपना ये औज़ार घुसा दो न और में ी मालिश करो ज़ोर से

अमित : इस औज़ार का नाम तो ले पहले अपने मुँह से और बताओ कहाँ घुसना है .

अनुपमा: ककक अब घुसा भी दो आह्हः सीसीसी अपना लैंड घुसा दो मेरी आआह्ह्ह मेरी छूट में . आअह्हह्ह्ह्ह माआआ

अनुपमा की टाँगे फैला कर मैंने पूरे ज़ोर से धक्का मारा और पूरा लैंड एक hi बार में जड़ तक छूट में समां गया. पहले पीछे से पूरा लैंड छूट में नहीं गया था पर इस बार पूरा का पूरा लैंड छूट में घुसा था और अनुपमा को भी अब लैंड की पूरी लम्बाई पता चली थी.

अनुपमा: तुम्हारा लैंड बहुत बड़ा है माआ कक्कक्कक्स पहले कहाँ थे तुम उफ्फ्फ्फ़ कक्कक्स इतना बड़ा तो मैंने आज तक नहीं लिया .

अमित : चिंता मत करो डार्लिंग तुम जैसी घोड़ी क लिए hi तो इतना बड़ा किया है मैंने. अब तुम्हे अपनी रखैल बना कर रखूँगा . बोलो बनोगी न मेरी रखैल

अनुपमा: ये क्या ककक कह रहे हो आह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह मैं तुम्हारी दीदी की सास हूँ

अमित : पर अभी तो मेरा लैंड ले रही हो न , सोच लो लैंड लेना है या नहीं. अगर लैंड लेना है तो रंडी बन जाओ वर्ण मैं लैंड अभी बहार निकल लेता हूँ.

इतना कह कर मैं रुक गया और अपना लैंड बहार निकलने लगा

अनुपमा: नहीं नहीं बहार मत निकालो मुझे अपनी रखैल बना कर छोड़ो . कितने सैलून बाद ऐसा दमदार लैंड मिला है. मुझे जो मर्ज़ी बनाओ बस मुझे आज जी भर क छोड़ो.

अमित : तो तुम करिश्मा की सास हो या मेरी रंडी?

अनुपमा: मैं तुम्हारी रंडी हूँ छोड़ो मुझे

अमित : तो ये लो , अब से तू मेरी रंडी है और जो मैं कहूं वो तुझे करना होगा

अनुपमा: हाँ आह्हः आह्ह्ह्ह आह्हः जो तुम कहोगे वो करूंग़ीीी बस मुझे ठंडी कार्डो आअह्ह्ह्ह कब से तड़प रही हूँ ककक आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह मुझे पता था तुम कुछ खास हो आअह्ह्ह पहले ये मुसल दिखा देते तो अब तक कितनी बार ये लैंड मैं ले चुकी आआह्ह्ह्ह ककक ले चुकी hotiiiiiiiiiii आआह्ह्ह्हह ऐसे hi छोड़ो मुझे और ज़ोर से करो आह्ह्ह्ह माआआ

मैंने अनुपमा बड़े बड़े गिनाते जैसे बूब्स दोनों हाथों में भींचकर उसे बीएड से उठाते हुए ताबड़तोड़ धक्के पेलने लगा. अनुपमा दर्द और मज़े में चीख रही थी. ज्यादा देर वो खुद को रोक नहीं पायी और उसकी छूट से पानी की नदी बहने लगी.

अनुपमा: आअह्ह्ह्ह और ज़ोर से छोड़ो मुझे मार डालो फाड़ डालो मेरी छूट ाः मैं गयी मर गयीईइ अअअअअअअ

अनुपमा झटके लेती हुई झड़ने लगी . मैंने उसकी छूट से लैंड बहार निकला और बीएड से नीचे उतर कर उसे भी घसीट कर किनारे कर दिया . अनुपमा तो हिलना hi नहीं छह रही थी . मैंने उसका सर बीएड से नीचे लटका दिया और उसके मुँह में लैंड पेल दिया. आधा लैंड उसके मुँह में आराम से चला गया. इस एंगल में लैंड उसके गले में आराम से जा रहा था. मेरे अंडकोष उसके मुँह पर लग रहे थे. मैं आराम से उसका मुँह छोड़ने लगा और उसके बूब्स मसलने लगा. कुछ hi देर में अनुपमा फिर से हरकत में आ गयी तो मैंने उसे घसीट कर बीएड से नीचे उतर लिया और उसे बीएड की तरफ झुका कर उसकी एक तंग हवा में उठा कर उसकी छूट पर लैंड सेट कर क एक hi धक्के में पूरा अंदर पेल दिया

अनुपमा: आअह्ह्ह्हह ककक ऐसे hi ज़ोर से छोड़ो

मुझे . बराओं बाद असली मर्द मिला है कक्कक्स ज़ोर से करो फाड़ दो मेरी छूट

अमित : अभी तो तेरी गांड भी छोडूंगा मेरी रंडी . मैं जनता हूँ तू बहुत बड़ी रंडी है. तेरे पति में तो इतना डैम hi नहीं होगा क तुझे ठंडा कर सके

अनुपमा: उसकी कहाँ औकात क मुझे ठंडा कर सके आआअह्ह्ह आआह्ह्ह्ह उम्म्म्म आआह्ह्ह्ह आज तक सेल ने एक बार भी ठंडा नहीं किया मुझे आआह्ह्ह कक्कक्स

अमित : फिर तो तूने बहुत सरे लैंड खाये होंगे रंडी . बता कितनी से चूड़ी है आज तक

अनुपमा: पता नहीं पर तुम्हारे जैसा आज तक नहीं मिला उफ्फ्फ्फ़ आअह्ह्ह्ह आह्हः इतना बड़ा हथियार और इतना स्टैमिना किसी में नहीं थाआआआहहहहह कक्कक्स उम्मम्मम काश तुम मुझे जवानी में मिले होते तो मैं तुम्हारा लैंड कभी छूट से बहार hi नहीं आने देती आअह्ह्ह्ह

अनुपमा मज़े से खुद hi पीछे को कमर धकेल रही थी . मैंने पोज़ चेंज करने क लिए खुद बीएड पर लेट कर अनुपमा को अपने ऊपर आने को कहा तो वो ख़ुशी से मेरे लैंड पर उछलने लगी. मैं भी नीचे से कमर उठा उठा कर उसे छोड़ रहा था. एक बार फिर से अनुपमा का पानी निकल गया. फिर मैंने उसे सीधा लेता दिया और उसकी टंगे उसके पर स लगा कर उसकी गांड को पूरा उभर लिया फिर लैंड को गांड पर सेट कर क ज़ोरदार धक्का मर दिया. अनुपमा की गांड पहले भी बजी हुई थी. इस लिए लैंड बिना खास रुकावट क आधा अंदर घुस गया और दूसरे धक्के में पूरा अंदर चला गया. अनुपमा दर्द से छटपटाई पर मैंने परवाह नहीं की और ढ़ाके मरता गया

अनुपमा: रुक जाओ आअह्ह्ह्ह ाआईई रुक जा न दर्द हो रहा है माआआ रुक जा थोड़ी देर

अमित : चुप कर रंडी तुझे लैंड चाहिए क नहीं चाहिए . मुझे तेरी गांड बहुत पसंद है . अब तो तुझे हर बार गांड देनी होगी वर्ण मैं छूट भी नहीं मरूंगा.

अनुपमा: मर लेना मैं कब मन कर रही हूँ पर फाड़ो तो मत आअह्हह्ह्ह्ह माआ आराम से करो

मैंने दनादन अनुपमा की गांड तब तक मरी जब तक मेरा पानी निकलने को नहीं हुआ. और जैसे hi मुझे लगा मेरा पानी निकलने वाला है तो मैंने उसकी गांड से लैंड निकल कर उसके ऊपर आकर उसके मुँह में पेल दिया और धक्के मरते हुए सारा पानी अनुपमा की हलक में उतर दिया. पानी निकलने क बाद मैं अनुपमा क साथ hi लेट गया. पता नहीं कब मेरी आँख लग गयी. मेरी आँख तब खुली जब मुझे अपने लैंड पर हरकत महसूस हुई. मैंने देखा तो अनुपमा मेरा लैंड चूस रही थी. वाकई में वो बड़ी तगड़ी रंडी थी जो छूट और गांड इतनी किरदार ठुकाई क बाद फिर से लैंड लेने को तैयार थी.

अमित : अभी दिल नहीं भरा रंडी ?

अनुपमा: कैसे भर सकता है उम्म्म्म उम्म्म्म बरसों बाद तो असली मर्द मिला है . अब तो जब तक यहाँ हो मुझे रोज़ से ये लैंड अपनी छूट में चाहिए उम्म्म्म उनममम

अमित: तो तुझे भी मेरी हर बात माननी होगी.

अनुपमा: तुम जो कहा मैं वो करुँगी मेरे सरताज

अमित : करिश्मा दीदी को कभी बुरा भला नहीं कहोगी तुम और न hi किसी और को कहने डौगी. अगर करिश्मा को कोई तकलीफ हुई तो मैं तुम्हे हाथ भी नहीं लगाऊंगा.

अनुपमा: मैं आज क बाद उसे कुछ नहीं कहूँगी और न किसी और को कहने दूंगी

अमित : तुमने करिश्मा दीदी पर हाथ उठाया था न पार्टी से आ कर ? सुबह उठ कर उनसे माफ़ी मांगना.

अनुपमा: मुझे सब मंज़ूर है अब जल्दी से मुझे छोड़ो देखो फिर मेरी छूट पानी बहा रही है

अमित : मैं तेरी बेटी को और तुझे एक साथ छोड़ना चाहता हूँ बोलो तैयार हो

अनुपमा: हेमा ... नहीं नहीं हेमा को क्यों ??.....

अमित : मुझे इंकार रही हो तुम ? तेरी बेटी भी तो तेरी तरह hi गरम है , क्या उसे लैंड नहीं चाहिए होगा ? अगर वो खुद मुझसे छोड़ना चाहे तो बोल क्या तू उसे रोक सकेगी?

अनुपमा: अगर वो छोड़ना hi चाहती है तो मैं कैसे रोक सकती हूँ वैसे भी मुझे पता है वो कितनी गरम है . छोड़ लेना उसे भी छोड़ लेना पर पहले मुझे छोड़ो

बस फिर क्या था एक बार फिर से मैं अनुपमा पर स्वर हो गया. इस गरम घोड़ी की फिर से छूट और गांड का मैंने बंद बजाय. जितने भी पोज़ मैं बना सकता था सब hi तरय कर दिए . अनुपमा भरे शरीर की थी इस लिए उसका बदन भी अछि तरह तोड़ मरोड़ दिया था मैंने . आखिरी बार अनुपमा को अपना पानी पिलाते हुए मैंने टाइम देखा तो 3 बज रहे थे. अनुपमा को वहीँ बीएड पर नंगी छोड़ कर मैं अपने कपडे पेहेन कर अपने कमरे में वापिस आ गया और सो गया .

सुबह मेरी आँख देर से hi खुली. मैं तैयार हो कर बहार निकला तो हेमा भी कमरे से बहार निकल रही थी. मुझे देखते hi उसके चेहरे पर स्माइल आ गयी . मैं वहीँ खड़ा हो गया. और वो चलती हुई मेरे पास आ गयी.

अमित : क्या बात है आज तुम भी देर से उठ रही हो?

हेमा : शुक्र करो अब ठीक हूँ. तुमने तो कल हालत ख़राब कर दी थी.

अमित : तो चलो एक बार फिर से करते हैं .

हेमा : न बाबा न आज ऑफिस में ज़रूरी काम है . न गयी तो नुकसान हो जायेगा

अमित : क्या मुझसे भी ज़रूरी काम है ??

हेमा : नहीं , तुमसे ज़रूरी तो कुछ हो hi नहीं सकता पर काम भी तो देखना है न.

अमित : तो जाओ फिर करलो अपने काम. मैं आज वापिस जा रहा हूँ

मैंने जान बुझ कर मुँह फेरते हुए ये कहा तो हेमा मुझे मानाने लगी.

हेमा : प्लीज ऐसा मत कहो, ाचा ठीक है नहीं जाती मैं ऑफिस.

अमित : अरे अरे मैं तो मज़ाक कर रहा था. मैं बस देख रहा था तुम्हे मेरी कितनी परवाह है.

हेमा : पक्का एहि बात है? तुम सच कह रहे हो?

अमित : अरे हाँ बाबा सच कह रहा हूँ. ाचा जाने से पहले एक काम hi कर दो

हेमा : क्या ??

मैंने हेमा का हाथ पकड़ा और उसे अपने कमरे में खींच लिया . मैंने अपनी पेण्ट अंडरवियर नीचे कर क लैंड बहार निकल लिया और हेमा भी मेरा मतलब समझ कर जल्दी से घुटनो पर बैठ कर मेरा लैंड मुँह में ले कर चूसने लगी. कुछ देर मैंने हेमा से लैंड चुसवाया और उसकी गांड क साथ साथ उसके बूब्स भी मसले. उसे फिर से गरम कर क मैंने छोड़ दिया ताकि वो जल्दी से फिर से मेरा लैंड लेने को तैयार हो जाये . खुद को ठीक कर क हम दोनों नीचे आ गए . करिश्मा दीदी किचन में काम करवा रही थी जबकि आंटी नज़र नहीं आ रही थी .

करिश्मा दीदी : दीदी नाश्ता लगवाऊं ?

हेमा : अरे करिश्मा तुम क्यों टेंशन लेती हो , नौकर हैं नाश्ता करवाने क लिए . तुम मेरे साथ बैठो हम साथ में नाश्ता करते हैं

करिश्मा दीदी तो हेमा क मुँह से ये सुन कर शॉकेड हो गयी. वो ऐसे देख रही थी जैसे कोई अजूबा देख लिया हो .

हेमा : ऐसे क्या देख रही हो चलो बैठो यहाँ पर . माँ कहाँ है ? नज़र नहीं आ रही ?

करिश्मा दीदी : वो मम माँ जी कमरे में हैं . मैं बुलाऊँ ?

‘ कोई ज़रूरत नहीं बेटी मैं खुद hi आ गयी हूँ’ अनुपमा अपने कमरे से बहार आती हुई कहने लगी. अनुपमा एक खुली सी मैक्सी में थी और पाऊँ फैला कर चल रही थी. करिश्मा दीदी तो पहले शॉकेड हुई अनुपमा क इतने प्यार से बात करने पर फिर अनुपमा की बदली हुई चल देख कर चिंता करने लगी

करिश्मा दीदी : क्या हुआ माँ जी आप ऐसे क्यों चल रही हैं ? और अभी तक आप तैयार भी नहीं हुई . आपकी तबियत तो ठीक है?

अनुपमा: ये तो मेरे hi बुरे कर्मो की सजा है बेटी, बाथरूम में स्लिप हो कर गिर गयी थी. घर की लष्मीजी पर हाथ उठाया था न तो ऊपर वाले सजा तो देनी hi थी. मुझे माफ़ कर दो बेटी आज क बाद मैं कभी ऐसा नहीं करुँगी.

करिश्मा दीदी को तो शॉक पे शॉक मिल रहे थे उन्हें समझ नहीं आ रहा था क ये सब क्या हो रहा है.

करिश्मा दीदी : ये आप कैसी बातें कर रही हैं माँ जी . चलिए पहले मैं आपकी मालिश कर दूँ

हेमा : माँ तुमने करिश्मा पर हाथ उठाया था ? आज क बाद अगर ऐसा किया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. करिश्मा मेरी छोटी बहिन है . इसे कोई कुछ नहीं कहेगा .

अनुपमा: तू चुप रह , ये तो मेरी बेटी है इसे मैं क्यों कुछ कहूँगी? मेरी तो ऑंखें hi खुल गयी . आज से तुमसे पहले मेरे लिए करिश्मा है कह देती हूँ हाँ.

खाना खाने क बाद हेमा ऑफिस क लिए निकलने लगी तो उसने मुझे भी चलने को कहा पर मैंने मन कर दिया. मेरे मन करने से अनुपमा क चेहरे पर रौनक आ गयी. हेमा क जाते hi करिश्मा दीदी

करिश्मा दीदी: चलिए माँ जी मैं आपकी मालिश कर देती हूँ

अनुपमा: अरे बेटी तू आराम कर मुझे कुछ नहीं हुआ. बस थोड़ी सी पाऊँ में hi मोच है इतना सा काम तो अमित कर hi देगा . मैं ठीक कह रही हूँ न बीटा ?

अमित : जैसा आप कहें , मुझे तो ख़ुशी होगी आपकी सेवा कर क.

अनुपमा: बड़ा hi संस्कारी है तुम्हारा भाई , भगवन ऐसा ( लैंड ) सबको दे . मैं तो चाहती हूँ क इसे यहीं पर hi रख लूँ

करिश्मा दीदी : पर माँ जी इसके कॉलेज भी तो हैं . मैं तो सोच रही हूँ इसे आज वापिस भेज दूँ

अनुपमा: नहीं नहीं ऐसा मत करना बेटी, अभी तो इसे अचे से जाना है . कुछ दिन तो इसे यहाँ रहने दो ताकि और अचे से समझ सकूँ इसे. तू चल बीटा मेरे साथ चल ज़रा मेरी अचे से मालिश करदे.

मैं अनुपमा क साथ उसके कमरे में चल दिया और करिश्मा दीदी हम दोनों को देखती रही. अनुपमा ने कमरे में आते hi दरवाज़े को कुण्डी लगा ली और मुझसे चिपकने लगी

अनुपमा: ाचा किया तुम हेमा क साथ नहीं गए . चलो ज़रा फिर से मेरी मालिश कार्डो जिस तरह रत को की थी

अमित : ये मालिश मालिश क्या लगा रखा है ? सीधा बोल न क तेरी चुदाई करूँ रंडी. मेरा लैंड चाहिए तो चल पहले इसे खड़ा कर.

अनुपमा : अभी करती हूँ राजा

अनुपमा जल्दी से नीचे बैठ गयी और मेरा लैंड बहार निकल कर मुँह में ले लिया. मैंने अनुपमा का सर पकड़ा और उसके मुँह को छोड़ने लगा. पहले बेटी लैंड चूस क गयी थी और अब माँ अपना कमल दिखा रही थी. मैं ज़ोर से लैंड पेलता तो अनुपमा की हलक तक लैंड चला जाता. अनुपमा तो पक्की रंडी की तरह लैंड चूसे जा रही थी . लैंड हलक में जाता तो थोड़ा सा खांस लेती पर लैंड चूसना नहीं छोड़ा.

अनुपमा : उम्म्म उम्म्म उम्म्म उनममआवह अब जल्दी से घुसा का छोड़ दो मुझे प्लीज

अनुपमा जल्दी से निघ्त्य को कमर तक उठा कर झुक गयी . मैंने भी उस पर तरस कहते हुए उसकी छूट में एक hi झटके में पूरा लैंड घुसा दिया.

अनुपमा: आआह्ह्ह कक्कक्क्स माआआ

अमित : चुप कर रंडी चीख क्यों रही है ?

अनुपमा: तुम्हारा ये मुसल जब अंदर आअह्ह्ह जाता है तो अपने आप चीख निकल जाती है आआ

चटक चटक

अमित : मुँह बंद रख रंडी नहीं तो दीदी आवाज़ सुन लेगी.

मैंने अनुपमा की गांड पर थप्पड़ मर कर उसे फिर से लाल कर दिया. अनुपमा मज़े में फिर से चखने लगी तो मुझे दर लगने लगा कहीं दीदी आवाज़ न सुन ले और हुआ भी वही. अनुपमा चीख रही थी तो करिश्मा दीदी दरवाज़ा खटखटाने लगी.

थक थक थक

करिश्मा दीदी : माँ जी क्या हुआ आप ठीक तो हैं ??

अनुपमा: हह हाँ ... हाँ बहु मम मैं ठीक हूँ

करिश्मा दीदी : कहीं आप को दर्द ज्यादा तो नहीं हो रहा ? अमित दरवाज़ा खोलो

अनुपमा : नहीं बहु मैं ठीक हूँ कुछ नहीं हुआ

करिश्मा दीदी : अमित दरवाज़ा खोलो जल्दी

अमित : आया दीदी ... देखा मैंने कहा था न मुँह बंद रखो अब करती रहना उंगली .

मैंने अनुपमा की छूट से लैंड बहार निकला और अपने कपडे ठीक कर दरवाज़ा खोलने क लिए चल पड़ा. अनुपमा बुरा सा मुँह बना कर अपनी निघ्त्य ठीक कर क बीएड पर लेट गयी . मैंने दरवाज़ा खोला तो करिश्मा दीदी ने मुझे गौर से देखा और फिर जल्दी से अनुपमा क पास चली गयी. मैं नहीं चाहता था क दीदी मुझ पर कोई शक करे . इस लिए मैं जल्दी से निकल गया. अब घर पर टाइम पास कैसे करना था तो मैं ड्राइवर क साथ निकल गया बहार घूमने क लिए .

‘ नहीं शीना मैं नहीं आ सकती प्लीज तुम दिल छोटा मत करो. तुम जानती हो न क मैं वहां नहीं जाना चाहती. तुम मेरी प्यारी बेटी हो न , मेरा प्यार हमेशा तुम्हारे साथ है’ मंजू शीना को अपने पार्टी में न आने का कह रही थी

शीना : बुआ प्लीज मन जाइये न. इतने सैलून बाद आज मौका मिला है एक बार फिर से आपके साथ मैं बर्थडे मानना चाहती हूँ. प्लीज

मंजू : शीना प्लीज मुझे मजबूर मत करो. मैं उस जगह फिर से नहीं जाना चाहती . अगर तुम मेरी थोड़ी सी भी इज़्ज़त करती हो तो मुझे मजबूर मत करो

शीना : ठीक है बुआ , पर मैं आपको बहुत मिस करुँगी .

मंजू : मैं तो हमेशा तेरे साथ हूँ शीना . भगवन तुम्हे हर ख़ुशी दे . ाचा अब मैं क्लास लेने जा रही हूँ .

शीना खास तौर पर मंजू को इन्विते करने क लिए कॉलेज में आयी थी पर मंजू ने साफ मन कर दिया . शीना को पता hi था पर फिर भी वो एक आखिरी कोशिश करना चाहती थी . मायूस हो कर वो वापिस चली गयी.

‘ माँ कारन से कह दो क इसका वहां कोई काम नहीं है. जब आप नहीं जा रही तो ये क्यों पीछे पड़ा है ‘ निधि अपनी माँ रजनी से कारन को न भेजने का कह रही थी जो तैयार हो कर बैठा था शीना क जन्मदिन की पार्टी पर जाने क लिए . निधि उसे साथ नहीं ले कर जाना चाहती थी .

करना : क्यों मैं क्यों नहीं आ सकता ? अगर आप दोनों को किसी ने छेड़ दिया अकेला देख कर तो ??? मैं साथ रहूँगा तो कोई नहीं छेड़ेगा आप लोगों को.

रजनी : ठीक hi तो कह रहा है बीटा ये भी , अगर कोई बात हुई तो ? वैसे भी नै जगह है पता नहीं कैसे लोग हों वहां?

निधि : माँ शीना है न वहां

रजनी : कुछ नहीं होता बेटी ले जा इसे , तुम लोगों ने कौन सा वहां साडी रत रहना है. जल्दी वापिस आ जाना.

निधि: तो कह दो इसे अगर वहां कोई हरकत की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा .

निधि कारन और नैना तीनो तैयार हो रहे थे. कारन तो अंदर से बेसबारा हुआ पड़ा था. बड़े लोगों की पार्टी और ऊपर से शीना का जन्मदिन . करना तो उसे इम्प्रेस करने की पूरी प्लानिंग कर रहा था . एक दो बार उसने शीना क साथ बात करने की कोशिश की थी मगर निधि उसे ज्यादा मौका नहीं देती थी शीना क साथ अकेले रहने का या बात करने का. इस लिए जब कारन भी ड्राइविंग सिखने का कहने लगा तो निधि ने hi शीना की तरफ से इंकार कर दिया था .

उधर रीमा राधा को लेने क लिए खुद उसके घर आयी थी. राधा तैयार हो रही थी और रीमा उसके कमरे में बैठी बोर हो रही थी

रीमा : राधा और कितनी देर लगाएगी नहाने में?

राधा : बस हो रही हूँ बाबा. एक तो मैं जाना नहीं चाहती थी ऊपर से तुम ज़बरदस्ती कर रही हो तो काम से काम वेट तो कर लो.

रीमा : मैं बोर हो रही हूँ यार .

राधा : मेरी अलमारी में एल्बम पड़ी है तब तक वो hi देख ले मैं आती हूँ

रीमा अलमारी से एल्बम देखने लगी तो कपड़ों क पीछे छिपी हुई डेरी पर उसकी नज़र पद गयी . रीमा ने एल्बम को भूल कर उस डेरी को ओपन कर लिया और पहले पैन से को पड़ते hi उसे समझ आ गया क इसके अंदर क्या है. अभी एक दो पैन hi पड़े थे क बाथरूम से कुछ आवाज़ हुई तो उसने जल्दी से वो डायरी वापिस रखते हुए एल्बम उठा ली और अपनी जगह पर बैठ गयी. राधा आराम से नाहा धोकर बहार आयी और तैयार होने लगी .

‘ अरे मौसी आप अभी तक तैयार नहीं हुई , आप ने नहीं जाना क्या ? ‘ कल्पना नेहा और करुणा को साथ लेकर जब घर आयी तो दिव्या को घर क कपड़ों में hi देख कर उसने सवाल किया

दिव्या : न कोई दुआ सलाम न गले मिली , आते hi सवाल शुरू . कैसी हो मेरी बची ?

कल्पना : मैं ठीक हूँ मौसी पर आप तैयार क्यों नहीं हुई?

दिव्या : अब मेरा वहां क्या काम ? तुम सब जा रही हो न , खूब मस्ती करना . और ध्यान रखना राधा का भी . अरे नेहा करुणा तुम आ गयी . आज तो सब की सब बहुत प्यारी लग रही हो तुम

कल्पना : ये गलत बात है मौसी , आप भी नहीं जा रही रीता मौसी भी नहीं जा रही और मुझे पक्का पता है बड़ी मौसी भी नहीं जाएँगी . शीना ने कहा था क सबको लेकर आना है .

दिव्या : बीटा हमे वहां कौन जनता है. इस लिए तुम सब बचे मिलकर खूब मज़े करना. और हाँ सबको सही सलामत वापिस लेन की ज़िम्मेदारी तुम्हारी है समझी .

कल्पना : वो तो ठीक है पर आप को भी चलना चाहिए था. राधा कहाँ है ?

दिव्या : वो तो अंदर रीमा क साथ है , तैयार हो रही होगी .

करुणा : क्या रीमा भी यहीं है .



करुणा भाग कर राधा क कमरे में घुस गयी और फिर रीमा और राधा भी बहार आ गयी . सब आपस में गले मिली और पार्टी पर जाने क लिए निकलने लगी. सब लड़कियां कल्पना और रीमा की कार में बैठ कर निधि क घर की तरफ चल पड़ी .
 
अरे भाई लम्बे सफर से लौटा हूँ बुरा हल हो गया है. देखता हूँ अगर कल को लिख पाया तो
 
अपडेट 183



रीमा राधा नेहा करुणा और कल्पना निधि और नैना को लेने क लिए उनके घर पहुंची तो वो पहले से hi तैयार थी. रीमा ने एक बार रजनी को चलने क लिए मानाने की कोशिश की पर उसने मन कर दिया अपने पैट का बहाना बनाते हुए . कारन कल्पना क साथ तो बैठना नहीं चाहता था इस लिए वो रीमा की गाड़ी में बैठ गया . रीमा राधा क साथ कारन और निधि बैठ गए. जबकि दूसरी कार में कल्पना क साथ नेहा नैना और करुणा बैठ गए. रीमा आज बहुत खूबसूरत लग रही थी सही संवरी हुई और कारन उसे तिरछी नज़रों से ताड़ रहा था. निधि की वजह से और तो कुछ कर नहीं सकता था. आज सब की सब लड़कियां परियां बानी हुई थी. मगर सब अपने अपने मन में अमित को hi मिस कर रही थी.

बलजीत राइ ने अपनी बेटी की बर्थडे पार्टी शहर क सबसे रिसोर्ट में राखी थी जहाँ पर जाने का कोई आम आदमी सोच तक नहीं सकता था और ये रिसोर्ट भी उसका अपना hi था. आज इस पार्टी पर बड़े बड़े लीडर और सरकारी ऑफिसर्स क साथ साथ बड़े बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट आ रहे थे तो सुरक्षा का भी खास इंतज़ाम किया गया था. जैसे hi गाड़ियां रिसोर्ट में पहुंची तो वाइट यूनिफार्म में ड्राइवर गाड़ियों को पार्किंग तक ले जाने क लिए खुद hi आ गए. रीमा और कल्पना क इलावा बाकि सब ये सब देख कर हैरान हो रहे थे. सिर्फ निधि hi थी जो नार्मल थी और हर चीज़ को नार्मल तरीके से hi देख रही थी. रीमा और कल्पना क लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी. एंट्री पर hi हर मेहमान का लिस्ट क हिसाब से नाम चेक किया जा रहा था ताकि कोई बिन बुलाया मेहमान बद्र दाखिल न हो. रीमा क साथ होने की वजह से इन सब को किसी ने रोका टोका नहीं था पर ये बात भी सब ने नोट कर लो थी. गेट से अंदर आते hi फूटबाल क मैदान जितना बड़ा लॉन था जहाँ पर हर तरफ स्टाल लगे थे कहीं खाने क तो कहीं ड्रिंक्स क. पर यहाँ लोग स्टाल्स पर नहीं जा रहे थे क्यूंकि बड़े लोगों को पार्टी थी तो वेटर खुद चल कर उनके पास आ रहे थे. वेटर भी कुछ काम नहीं थे . सब क सब वेल ड्रेस्ड और स्मार्ट थे खास कर क शार्ट ड्रेस पहने लड़कियां जो स्पेशलय मर्दों को ड्रिंक्स सर्वे कर रही थी. कारन तो ललचाई नज़रों से वेट्रेस को hi देखने लगा था . पर उसकी जीभ का पानी और भी बढ़ गया जब उसने पार्टी में आयी औरतों क भड़कीले कपडे देखे. सब की सब मॉडलिंग hi करने आयी थी. बड़े घरों की रईस औरतें थी जो एक दूसरे से ज्यादा खूबसूरत दिखने का अपना hi कम्पटीशन खेल रही थी. रीमा सबको अपने साथ लॉन क आगे बानी शीशमहल नुमा बिल्डिंग में ले आयी जहाँ पर दीवारें शीशों की hi थी और पिल्लेरा राजाओं क ज़माने क डिज़ाइन वाले. कांच क दरवाज़े अंदर कदम रखते hi सफ़ेद संगे मर्मर का चमचमाता फर्श ऊपर लगी लाइट की ऐसी रिफ्लेक्शन दे रहा था मनो फर्श पर भी लाइट्स लगी हो. इस चमचमाते हुए हॉल में हर एक चीज़ शीशे सी चमक रही थी मनो स्वर्ग सा महल बना हुआ हो. और इस स्वर्ग को असली स्वर्ग बना रही थी अंदर मौजूद अप्सराएं. एक से एक भड़कीली ड्रेस में मौजूद ये अप्सराएं मनो खड़े खड़े hi पानी निकलने को आतुर थी देखने वाले का. कारन की तो हलक hi खुश्क हो गयी. सबसे सुन्दर लग रही थी बर्थडे गर्ल शीना. हमेशा अपने बर्थडे पर शार्ट ड्रेस में नज़र आने वाली शीना ने आज एक लम्बा सा गाउन पहना था. ओने पीेछे लॉन्ग ब्लैक ड्रेस में उसका गोरा रंग मनो और भी गोरा हो गया था. शीना को सब लड़कियां घेर कर कड़ी थी पर जैसे hi शीना की नज़र निधि और बाकि सब पर पड़ी तो उसके चेहरे पर वो मुस्कान आ गयी जो अभी तक नदारद थी. अभी तक वो सिर्फ दिखावे की हंसी हंस रही थी मगर अब उसकी आँखों से hi उसकी ख़ुशी पता चल रही थी. शीना सब को छोड़ कर तेज़ कदमो से चलती हुई निधि की तरफ बरही जिससे सब लड़कियों का ध्यान भी उस तरफ हो गया. सब देखने लगी की कौन इतना खास आ गया जिसकी वजह से शीना ने सबको दरकिनार कर दिया. अभी तक करुणा नैना नेहा राधा जो मन में खुद को काम आंक रही थी उनके चेहरे पर भी एक पल को ख़ुशी आ गयी.

शीना : अरे दीदी आप ने कितनी देर लगा दी मैं कब से आप सब का इंतज़ार कर रही थी .

शीना ने निधि को गले से लगा लिया और निधि ने भी दिल से प्यार जताया. वैसे भी कुछ दिनों से दोनों में अछि अंडरस्टैंडिंग हो गयी थी.

निधि : हैप्पी बर्थडे शीना . भगवन करे तुम्हे हर ख़ुशी मिले . और देर कहाँ हुई ? हम तो टाइम से hi आ गए देखो तो अभी 8 भी नहीं बजे .

नैना : हैप्पी बर्थडे शीना , यार सच में आज तो तुम कमल की लग रही हो . पका आज बहुत से पर्पस मिलने वाले हैं तुम्हे .

शीना : मेरी छोडो आज तो आप सब hi कमा क की लग रही हो . वैसे बाकि सब घरवाले कहाँ हैं ?

करुणा : अरे हम हैं न तुम टेंशन क्यों लेती हो. हैप्पी बर्थडे

नेहा : हैप्पी बर्थडे शीना , मान्य मान्य हैप्पी रिटर्न्स ऑफ़ थे डे

राधा : हैप्पी बर्थडे दीदी भगवन आपको हर ख़ुशी दे.

शीना : थैंक्स दीदी और राधा ये ाचा नहीं है तुम आंटी को क्यों नहीं ले कर आयी ?

राधा : वो माँ की तबियत ...

शीना : पता है मुझे वो जानबूझ कर नहीं आयी होंगी . वैसे मुझे ख़ुशी है काम से काम आप सब तो आये.

कल्पना : ो मैडम हूँ भी हैं लाइन में . ( गले लगते हुए ) मान्य मान्य हैप्पी रिटर्न्स ऑफ़ थे डे. वैसे बाकि टीम कहाँ है ?

शीना : थैंक्स कल्पना , वो भी आ hi रही हैं . आओ अब मेरे साथ hi रहना आप सब . वैसे तो यहाँ बहुत से लोग आये हैं पर सब दिखावे क hi हैं . इस लिए आप लोग मेरे साथ hi रहना .

निधि : हमको यहाँ जनता hi कौन है. हम तो तुम्हारे साथ hi रहेंगे और तुम सब भी साथ hi रहना यहाँ वहां मत जाना.

सब से शीना ने मिल लिया था पर अभी तक कारन से नहीं मिली थी. कारन अंदर से मारा जा रहा था शीना से मिलने क लिए पर कल्पना और निधि की वजह से वो पहल नहीं कर प् रहा था. शीना का रूप तो आज उस पर और भी केहर ध रहा था. शीना जैसे hi सबको साथ लेकर आगे बरही तो कारन भी साथ हो लिया मौके की तलाश में.

जैसे जैसे टाइम बीत रहा था बड़े बड़े लोग आते जा रहे थे. बलजीत राइ अपनी hi बेटी को जन्मदिन पार्टी में अभी तक नहीं पहुंचा था. असल में वो मौजूद तो था रिसोर्ट में पर सामने नहीं आ रहा था और एक रूम में अपने दोस्त N.D. क साथ बैठा था. सबके क आने क बाद hi वो अत था ताकि लोगों में उसका विप का रुतबा वैसे hi बना रहे. वहीँ उसकी बीवी यानि क शीना की माँ मेघा अपनी रईस सहेलियों क साथ अपनी hi महफ़िल जमाये बैठी थी पर उसे इंतज़ार था अमित का. उसे लगा था क अमित इस पार्टी में ज़रूर आएगा . इस लिए वो अमित को आज फिर से घेरने की स्कीम बना कर बैठी थी ताकि उसे शीशे में उतर सके.

शीना : ये क्या तुम लोग इतना लेट आ रही हो ? ये कोई बात है ?

शिवानी : अब तेरा बर्थडे था तो क्या ऐसे hi आ जाती? वैसे इस मैडम से पूछो इसी ने देर करवाई है. आ hi नहीं रही थी .

शीना : क्यों शालू ये मैं क्या सुन रही हूँ ?

शालू : सॉरी यार पर मैं ....

शीना : कुछ मत कहो चलो अब

‘ मान्य मान्य हैप्पी रिटर्न्स ऑफ़ तह डे दीदी ‘ मीनल बर्थडे पार्टी में पहुँच गयी थी . शीना ने मीनल को देखा तो उसे भी गले से लगा लिया .

शीना : तू भी लेट आ रही है ? कैसे हो मोहित ?

मोहित : हैप्पी बर्थडे दीदी

शीना : अरे यार तुम तो दीदी मत कहो. वैसे तुम दोनों अकेले क्यों आये हो ?

मीनल : क्या दीदी आप भी , अब अगर घरवालों को लती तो हूँ एन्जॉय कैसे कर पते ? हे हे हे

शीना : चल चल ज्यादा मज़ाक नहीं .

निधि : शीना अब किसका इंतज़ार है?

शीना : किसी का नहीं दीदी वैसे भी जिन्होंने आना था वो तो आ hi गए हैं. मैं माँ डैड को बुलाती हूँ.

शीना ने अपने डैड को फ़ोन किया तो उसने आने का कह दिया और तब तक एंकर ने अन्नोउंस कर दिया क केक काटने वाला है . सब लोग इकठ्ठा हो गए. बलजीत राइ अपने दोस्त ंद क साथ आ गया और मेघा भी अपनी बेटी क साथ आ कर कड़ी हो गयी. मेघा की नज़र अभी भी अमित को तलाश रही थी पर वो नज़र नहीं आ रहा था. जैसे hi शीना ने केक कटा तो सब लड़कियों ने मिल कर शोर मचा दिया और सब शीना को बधाई देने लगे. शीना ने अपने माँ बाप को केक खिलाया और उसके बाद रीमा को फिर उसने केक निधि को खिलाया तो बलजीत राइ की नज़र अब निधि पर पड़ी. एक पल को उसकी नज़र भी निधि पर ठहरा गयी और फिर उसके साथ कड़ी नैना करुणा नेहा राधा पर भी. सब की सब एक नेचुरल ब्यूटी से भरपूर थी जिसे बलजीत राइ की पारखी नज़र ने एक पल में ताड़ लिया. शीना ने जैसे hi निधि को केक खिलाया तो निधि ने भी उसका मुँह मीठा करवाया . इससे पहले क कोई और कुछ करता कारन ने भी मौके का फायदा उठाते हुए केक खुद hi पकड़ कर शीना का मुँह मीठा करवाते हुए उसे विश किया.

कारन : विश यू मान्य मान्य हैप्पी रेतुर्न ऑफ़ थे डे. ा वैरी हैप्पी बर्थडे तो थे मोस्ट ब्यूटीफुल गर्ल ों थे एअरट.

कारन ने शीना को इम्प्रेस करने क लिए उसकी तारीफ की और उसे गिफ्ट भी दिया. शीना ने उसे शुक्रिया कहा और गिफ्ट ले कर साइड में रख लिया. और फिर सब ने बरी बरी से यही किया.

बलजीत राइ : शीना बीटा हमें नहीं मिलवाओगी अपने मेहमानो से ?

बलजीत राइ निधि की खूबसूरती देख कर उसकी तरफ खिचाव महसूस कर रहा था और खुद को रोक न पाया. इस वाट निधि और शीना hi बलजीत राइ क पास थे और बाकि सब 2 कदम पीछे थे

शीना : पापा ये निधि दीदी हैं , मैंने बताया था न आपको वो मैनेजर वाली बात . ये वही हैं.

बलजीत राइ ( मन में ) तो ये है वो .. उसका भी क्या कसूर ये तो चीज़ hi ऐसी है क इसे कोई भी पाने क लिए ललचा जाये . मेरी कंपनी में इतना ज़बरदस्त माल था और मुझे पता hi नहीं. सेल को सजा तो मिलनी hi चाहिए. ये माल तो मेरे नीचे होना चाहिए था. खैर कोई बात नहीं अब भी क्या बिगड़ा है. फिगर से तो लग रहा है अभी खता नहीं खुला इसका .

शीना : पापा .. पापा ,, कहाँ खो गए

बलजीत राइ : कहीं नहीं ... ी ऍम रियली सॉरी निधि क मेरी कंपनी में होते हुए तुम पर किसी ने हालत नज़र डाली . उस मैनेजर को तो मैं ऐसी सजा दिलवाऊंगा क साड़ी उम्र जेल में hi कटेगी उसकी .

निधि : it’s ok सर आपको सॉरी कहने की ज़रूरत नहीं है. उसे पहले hi काफी सजा मिल चुकी है. आप चिंता न करें.

बलजीत राइ : नहीं नहीं ऐसे नहीं चलेगा , मेरी कंपनी में होते हुए तुम पर किसी ने हाथ डाला है तो मेरी ज़िम्मेदारी बनती है उसे सजा दिलाना. वैसे तुम वापिस आ जाओ मैं तुम्हे मैनेजर की पोस्ट ऑफर करता हूँ.

निधि: थैंक यू वैरी मच सर पर अब मैं कहीं और जॉब कर रही हूँ और वहां से अब मैं नहीं छोड़ सकती .

बलजीत राइ : कहाँ पर ?

निधि : रर इंटरनेशनल में सर

बलजीत राइ : मैं तुमको उससे ाचा ऑफर दूंगा और तुम्हे सीधा अपने नीचे रखूँगा , बहुत फायदे में रहोगी .

निधि : नहीं सर इसकी ज़रूरत नहीं है. मैं वहां पर भी अछि पोस्ट पर hi हूँ. डायरेक्टर की सेक्रेटरी की पोस्ट है. वैसे भी मुझे किसी चीज़ की ओछा नहीं क्यूंकि डायरेक्टर बहुत अचे हैं.

बलजीत राइ ( मन में ) तो साला राघव ने इसे सेट कर लिया है . अब तो इसे मैं किसी भी कीमत पर अपनी तरफ कर क hi रहूँगा.

बलजीत राइ : एक बार फिर से सोच लो , मैं तुम्हे घर गाडी और अछि सैलरी दूंगा . उस कंपनी से भी ज्यादा. शीना बीटा तुम hi कहो इन्हे. मुझे ख़ुशी होगी अगर ये हमारे साथ काम करें.

निधि : सर प्लीज मैं वहां से जॉब नहीं छोड़ सकती.

बलजीत राइ : फिर भी जब कभी भी तुम आना चाहो सीधा मुझसे बात करना . वैसे तुम्हारे साथ ये लोग कौन हैं ?

निधि : वो मेरे भाई बहिन हैं सर. पर सर प्लीज उनके सामने कोई बात मत कीजियेगा वो वाली .

बलजीत राइ : ी अंडरस्टैंड , पर मैं उनसे एक बार मिलना ज़रूर चाहूंगा.

निधि : आइये सर , ये है मेरी बहिन नैना , मेरा भाई कारन , नेहा करुणा और राधा .

बलजीत राइ : नीस तो मीट यू . नैना क्या तुम भी जॉब करती हो ?

नैना : नहीं अंकल अभी कॉलेज क लास्ट ईयर में हूँ.

बलजीत राइ : फिर तो तुम्हारे लिए मेरे पास ऑफर है . कॉलेज ख़तम होते hi सीधा मेरी कंपनी में आ जाना . तुम्हे मैं अभी से जॉब ऑफर करता हूँ.

नैना : थैंक यू वैरी मच अंकल .

बलजीत राइ : it’s ok नैना , मुझे तो ख़ुशी होगी क तुम जैसी लड़की मेरी कंपनी में जॉब करे.

( मन में ) चलो इसी से शुरुआत करता हूँ. बाकि सब का भी no. लग hi जायेगा.

कारन : गुड इवनिंग अंकल, जितना सुना था उससे कहीं ज्यादा hi पाया आपको. आप सच में बहुत अचे हैं सर. सारा शहर आपको सलाम करता है . हर कोई आपकी तारीफ करता है. आप तो इस शहर क बेताज बादशाह हैं. मैं कब से आपसे मिलना चाहता था. आज मौका मिल hi गया . शीना इस रियली लकी क आप उसके पापा हैं.

कारन ने तो बलजीत राइ को इम्प्रेस करने क लिए तारीफों की झड़ी लगा दी. और बलजीत राइ भी खुश हो रहा था. पर कारन को अभी अंदाज़ा भी नहीं था क तो वो जिसे इम्प्रेस कर रहा है वो कितना पारखी है. एक hi नज़र में वो कारन को समझ गया था.

बलजीत राइ : थैंक यू यंग मन , तुम मुझे अचे लगे. अगर कभी मेरी ज़रूरत हो तो मुझसे ज़रूर मिलना. वैसे करते क्या हो तुम ?

कारन : सर फाइनल ईयर में हूँ बस अब जॉब hi कर ी है किसी अछि जगह और आपकी कंपनी का नाम तो पूरे देश में है .

बलजीत राइ : बहुत तेज़ हो ी लिखे आईटी. मुझसे मिलना ज़रूर. और आप नेहा, राइट ? आप भी स्टडी कर रही हैं ?

नेहा : जी सर

बलजीत राइ : वैरी गुड , तुम ज़रूर स्टडी में बहुत इंटेलीजेंट होगी .

नेहा बस मुस्कुरा दी पर कोई ज्यादा बात नहीं की.

करुणा : मैं करुणा हूँ अंकल नेहा दीदी की छोटी बहिन और मैं भी स्टडी कर रही हूँ.

बलजीत राइ : वैरी गुड तुम तो बहुत स्मार्ट लगती हो. जब भी जॉब का सोचो तो मेरे पास आना. और तुम.....

राधा को देखते hi बलजीत राइ एक पल को कहीं खो सा गया. राधा की खूबसूरती और उसकी शर्म ऐडा देख कर बलजीत को याद आने लगी उसके भाई की बीवी . राधा का चेहरा चूँकि अपनी माँ दिव्या पर था और दिव्या का चेहरा दामिनी जैसा तो बलजीत राइ की आँखों में वही चेहरा आ गया

रीमा : ताऊ जी ये राधा है मेरी बेस्ट फ्रेंड हूँ एक hi क्लास में हैं .

राधा : नमस्ते अंकल

बलजीत राइ : गुड इवनिंग राधा , तुम वाकई में बहुत खूबसूरत हो.

राधा बलजीत की इस बात से शर्मा सी गयी पर शीना को अपने बाप का ऐसे राधा को देखना ाचा नहीं लगा.

शीना : पापा ये है कल्पना और ये मीनल . और ये है मोहित .

बलजीत राइ उनसे भी मिला पर उसका दिल तो निधि और राधा पर hi अटक गया था. तभी मेघा भी उनके पास आ गयी .

मेघा : शीना बीटा तुमने अपने उस दोस्त को नहीं बुलाया जिसकी तुम बात करती थी क्या नाम था उसका ?

शीना : नहीं माँ मैंने तो बुलाया था पर वो शहर में है hi नहीं वर्ण वो अभी यहीं होता. पापा मैं आपको भी अमित से मिलवाउंगी . आप उससे ज़रूर मिलना. उसी ने मुझे बचाया था. और उस मैनेजर को भी उसी ने सजा दी थी.

बलजीत राइ : हाँ हाँ बीटा मैं ज़रूर मिलूंगा पर वो आये तो. वैसे मैं ज्यादा दिन यहाँ नहीं हूँ तो उसे जल्दी बुला लेना. बस 2 दिन और रुक सकता हूँ ज्यादा नहीं फिर मुझे निकलना है. ाचा तुम लोग एन्जॉय करो मैं ज़रा मेहमानो से मिल लेता हूँ.

बलजीत राइ की नज़र पुलिस यूनिफार्म में कड़ी सप ऋतू सिंह पर पर गयी थी और वो उसकी तरफ बढ़ गया. सप ऋतू सिंह विक्रम राठौर क साथ कोई बात कर रही थी. बलजीत राइ ै मतो दोस्त N.D क साथ उन दोनों क पास आ गया.

बलजीत राइ : वेलकम वेलकम राठौर जी . भाई बड़े चर्चे हैं आप क और आपको पुलिस क . शहर से सरे गुंडे hi भगा दिए हैं आपने और लोगो की सही से सेवा और सिक्योरिटी का ध्यान रख रहे हैं आप.

विक्रम राठौर : बेटी क जन्मदिन की बधाई हो राइ साहब . हम तो बस अपनी ड्यूटी hi कर रहे हैं सर. रही गुंडों को भागने वाली बात तो वो हमारी काबिल अफसर ऋतू जी कर रही hain.Ritu जी मीट बलजीत राइ मद ऑफ़ D.P ग्रुप ऑफ़ कम्पनीज

ऋतू सिंह : नीस तो मीट यू सर. वैसे हम पहले भी मिल चुके हैं पर शायद आपको यद् नहीं होगा.

बलजीत राइ : क्या सच में ?? वैसे आपने सह कहा मुझे यद् नहीं . पर मैं आपकी तारीफ करना चाहूंगा क जिस तरह आपने इस शहर से गुंडों का सफाया किया है वो सच में कबीले तारीफ है. न. डी. साहब और राठौर साहब मैं आप दोनों से रिक्वेस्ट करता हूँ क ऋतू जी को सर्कार की तरफ से इनाम दिलाया जाये जिस तरह इन्होने बहादुरी से जुर्म को ख़तम किया है. सच में ऋतू जी आप ने वो लड़कियां उठाने वाला गिरोह पकड़ कर बहुत बड़ा काम किया है. और बिना किसी पोलिटिकल प्रेशर क आगे हार मने जिस तरह आपने एक बड़े नेता पर शिकंजा कैसा है ी लिखे योर स्पिरिट

ऋतू सिंह : शुक्रिया सर , वैसे मुझे भी आपसे मिलना था ाचा हुआ आपने खुद hi बात कर दी

बलजीत राइ : सच में?? यह तो मेरे लिए ख़ुशी की बात है क मैं कानून की मदद कर सकूँ . कहिये मैं क्या कर सकता हूँ?

ऋतू सिंह : सर मैं जानना चाहती हूँ क आपका सुशिल कुमार क साथ कैसा रिश्ता है ?

बलजीत राइ : वेल कुछ खास नहीं , वो मेरे पास चंदा लेने आते हैं पार्टी फण्ड क नाम पर यान फिर कभी कहीं कोई छोटा मोटा कोई काम ाँ पड़े तो फ़ोन पर बात हो जाती है. इससे ज्यादा कुछ नहीं .

ऋतू सिंह : और लड़कियों को अगवा करने वाले गिरोह क साथ ???

बलजीत राइ : अफसर ये आप क्या कह रही हैं ??

बलजीत राइ को ऋतू की बात पर झटका तो लगा पर उसने थोड़ा सख्त लहजा अपनाते हुए जवाब दिया . वहीँ N.D भी इस बात पर शॉकेड हो गया था.

N.D : ये आप क्या कह रही हैं सप साहिबा? आप इतने बड़े आदमी पर इलज़ाम लगा रही हैं. राठौर साहब आप भी कुछ नहीं कह रहे ?

विक्रम राठौर : नारायण दस् जी ऋतू जी बस राइ साहब की मदद hi तो मांग रही हैं कुछ सवाल पूछ कर . वो कोई इलज़ाम नहीं लगा रही , आप उसकी पूरी बात तो सुन लीजिये.

बलजीत राइ : आप ने ये सवाल किस बिनाह पर पूछा है ? आप जानती हैं न क मैं कौन हूँ ?

ऋतू सिंह: जी सर मैं अछि तरह जानती हूँ. लड़कियों को अगवा कर क उनसे जिस्मफरोशी करवाने वाला गिरोह जिस कंटेनर में लड़कियों को ले जाने वाला था वो ट्रक आपकी कंपनी क नाम से रजिस्टर है और एक्टिव भी. क्या मैं जान सकती हूँ आपकी कंपनी का ट्रक सामान को ले जाने का काम करता है या लड़कियों को?

बलजीत राइ : ( शॉकेड ) क्या??? मेरी कंपनी का ट्रक ?? आप को कोई गलतफहमी तो नहीं हो रही ?

ऋतू सिंह : गलतफहमी की कोई जगह hi नहीं है सर. मैं अपना काम पूरी लगन से करती हूँ. इसी लिए मैं किसी काम में जल्दबाज़ी नहीं करती. अब आप hi बताये क आपकी कंपनी का ट्रक कैसे इसमें शामिल है.

बलजीत राइ : अगर ऐसी बात है तो मेरी तरफ से आपको खुली छूट है आप एक्शन को और पता करो क मेरी कंपनी का ट्रक कैसे वहां पहुंचा. अगर मेरा कोई एम्प्लोयी इसमें इन्वॉल्व है तो उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलवाइये. मेरी कंपनी बिज़नेस करती है ऐसे जुर्म नहीं. आप उस आदमी को ढूंढिए . कानून उसे सजा दे या न दे मैं ज़रूर दूंगा.

ऋतू सिंह : ज़रूर सर , मैं खुद इसी पर काम कर रही हूँ . जल्द hi मैं इसके पीछे हो भी है उस तक पहुँच जाउंगी. अगर कोई ये सोचता है क पुलिस को कुछ लोग झूठ बोल कर गुमराह कर लेंगे तो ये उनकी गलती है. जल्दी hi फिर आपसे मिलूंगी सर और उम्मीद करती हूँ क आप मेरी मदद करेंगे . वैसे आपके एम्प्लाइज और भी बहुत कुछ कर रहे हैं उम्मीद है आपको आपकी बेटी ने बता दिया होगा. चलती हूँ सर मुझे ज़रा एक ज़रूरी काम से जाना है.

इतना कह कर ऋतू सिंह वहां से निकल गयी पर पीछे छोड़ गयी दो फटी हुई गांड और लटके हुए चेहरे. बलजीत राइ और N.D .

निधि और राधा का पार्टी में बिलकुल भी दिल नहीं लग रहा था. पर कारन तो शीना क साथ साथ hi चिपका पड़ा था. आखिर निधि क कहने पर hi सबको वापिस चलना पड़ा. जल्दी जल्दी खाना खा के सब वापिस चल पड़े. कारन बहाना बना कर वहीँ रुक गया. रीमा भी उनके साथ hi चली गयी. एक तो उसकी माँ और बहिन वहां नहीं थी दूसरा पार्टी अभी देर तक चलने वाली थी तो वो राधा क साथ hi चली आयी उसके घर. कल्पना भी बाकि सब को छोड़ने क बाद घर लौट गयी. विक्रम राठौर भी जल्दी निकल गए थे पर बलजीत और N.D दोनों की गांड सुलग रही थी. गुस्से से तमतमाते दोनों पार्टी छोड़ कर बंद कमरे में बैठ गए दारू पिटे हुए भड़ास निकलने

बलजीत राइ : मैंने कहा था हर काम ध्यान से सोच समझ कर किया करो , क्या ज़रूरत थी इस काम में कंपनी का कुछ इस्तेमाल करने की ??

N.D : दिमाग ठंडा कर क्यों उछाल रहा है , पहले भी तो ऐसे hi चल रहा था सब कौन सा पहली बार है ? मुझे तो लग रहा है साली ने इसी लिए सुशिल को अभी तक नहीं पकड़ा पता नहीं और क्या क्या हाथ में आ गया है उसके . लगता है साली का कुछ करना hi पड़ेगा.

बलजीत राइ : दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया तेरा ? उसे कुछ करेगा तो कोई और आ जायेगा . देखा नहीं तो वो साला राठौर भी उसकी सपोर्ट कर रहा है . तू कुछ नहीं करेगा अभी बस शांत रह. अपने किसी एम्प्लोयी पर बात दाल देंगे मेरा कुछ नहीं बिगड़ने वाला. पर मुझे उसके इरादे ठीक नहीं लग रहे . ये यहीं नहीं रुकने वाली . कुछ तो ज़रूर है जो मुझे यद् नहीं आ रहा . उसने कहा था क वो पहले भी मुझसे मिल चुकी है पर कहाँ और कैसे ?? साला ये बात सुलझानी पड़ेगी .

N.D : इसका ट्रांसफर hi करवा देते हैं . सारा मामला ठंडा पद जायेगा .

बलजीत राइ : अभी अभी उसने इतना बड़ा हाथ मारा है तो ट्रांसफर नहीं हो पायेगी उसकी और ऊपर से राठौर ऐसा होने नहीं देगा . तू इन सब बातों से ध्यान हटा अपना. कुछ दिनों में सब अपने आप ठंडा हो जायेगा . बस हमारी तरफ से कोई गड़बड़ नहीं होनी चाहिए. सोचा था इसे अपनी जेब में कर लेंगे पर साली कुछ ज्यादा hi होशिआर है. कोई बात नहीं उसे अभी पता नहीं क मैं चीज़ क्या हूँ .

सबके जाने क बाद कारन शीना क साथ उसकी परछाई बन कर चल रहा था. कारन बहुत कोशिश कर रहा था पर उसकी दाल नहीं गाल रही थी. हौंसला बढ़ाने क लिए उसने चुपके से 2-4 पेग मार लिए. जैसे hi पार्टी से ज्यादातर मेहमान चले गए तो शीना को अकेला देख कर कारन अपनी बात करने पहुँच गया

कारन : शीना , यू क्नोव ? तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की हो . उपरवाले ने तुम्हे फुर्सत से बनाया है. तुम नहीं जानती जब से मैंने तुम्हे देखा है मेरी रातों की नींद उड़ गयी है. मुझे सोते जगत बस तुम hi तुम नज़र आती हो. मैं तुम्हे दिल से चाहने लगा हूँ शीना. तुम्हारे जन्मदिन पर मैं तुम्ह अपना दिल तोहफे में पेश करता हूँ. क्या तुम मुझे अपन दिल में थोड़ी सी जगह डौगी?

शीना : ये तुम क्या कह रहे हो ? क्या तुम सच कह रहे हो ?

कारन : यकीन नहीं होता तो मेरा सीना चीयर कर देख लो . मेरे दिल में सिर्फ तुम hi तुम हो.

शीना : क्या तुम सच में मुझे इतना प्यार करते हो ?

कारन : अपने दिलो जान से भी ज्यादा , तुम्हारे लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ कुछ भी .

शीना : मैं भी तुम्हे बहुत प्यार करती हूँ. मैं कब से ये सुन्ना चाहती थी . पर अमित ....

कारन : तुम उसकी चिंता मत करो उसकी औकात hi क्या है , उसे तो मैं यूँ मसल दूंगा . मनहूस कहीं का उसकी चिंता छोड़ दो तुम . तुम सिर्फ मेरे बारे में सोचो . ी लव यू शीना ी लव यू . उम्मम्मम्मम

दिन भर शहर में घूम फिर कर मैं जब घर पहुंचा तो सब घर पर hi मौजूद थे. सिवाए अंकल और राजीव जीजू क. मेरे आते hi अनुपमा और हेमा क चेहरे पर रौनक आ गयी. दोनों hi सुबह की प्यासी थी. आँखों hi आँखों में दोनों मुझे इशारे करने लगी . वहीँ करिश्मा दीदी मुझे घूर रही थी.

अनुपमा : अरे तुम आ गए बीटा , बड़ी देर लगा दी .

अमित : वो मैंने सोचा क्यों न आज थोड़ा घूम लिया जाये.

अनुपमा : बीटा मुझे कह देते हूँ साथ में hi चले जाते .

अमित ; आपकी तबियत ठीक नहीं थी न तो इस लिए अकेला hi चला गया . वैसे अब आपका दर्द कैसा है ?

अनुपमा: अब तो बिलकुल ठीक है बीटा बस एक बार और अचे से मालिश कर दो तो पूरा ठीक हो जायेगा.

अमित : ज़रूर पर अभी मुझे थोड़ा रेस्ट करनी है. बहुत थक गया हूँ तो थोड़ा रिफ्रेश होने की ज़रूरत है .

अनुपमा: हाँ हाँ ठीक है तुम रेस्ट करो तभी तो अचे से कर पाओगे.

अमित : वैसे अंकल और जीजा जी आये नहीं अभी तक ?

अनुपमा: तेरे अंकल तो लेट hi आते हैं और राजीव कल आ रहा है .

अमित : अछि बात है चलिए मैं अब थोड़ा रेस्ट कर लेता हूँ फिर मिलता हूँ .

इतना कह कर मैं अपने कमरे में चला गया . आज मैंने अकेले शॉपिंग की थी और घूमते हुए कुछ चीज़ें मुझे पसंद आयी हो मैंने सब क लिए अपनी समझ क हिसाब से ली थी. बस इसी लिए थोड़ा थक गया था. मुझे आराम की सख्त ज़रूरत थी . मुझे बीएड पर लेते अभी थोड़ा hi समय हुआ था क कोई मेरे कमरे में आया और दरवाज़ा बंद कर क मेरी पीठ पर लेट गया. अपने ऊपर औरत क नरम जिसम का एहसास होते hi मैं समझ गया क ये हेमा hi है.

अमित : क्या हुआ ? पीछे hi चली आयी. मैंने कहा था न मुझे आराम करना है .

हेमा : उम्म्म्म , मुझे तड़पा कर ज़ालिम खुद आराम कर रहा है. सुबह से मेरा क्या हल है सोचा भी है तुमने. आज का दिन मैंने कैसे कटा है मैं hi जानती हूँ. ऊपर से अभी तक आराम से बैठा भी नहीं जा रहा . चलो न एक बार मेरी प्यास बुझा दो.

अमित : मैं सच में थका हुआ हूँ जान. ऐसे न तुम्हे मज़ा आएगा न मुझे. रत को अचे से करूँगा तुम्हारे साथ. तुम भी अभी रेस्ट कर लो

हेमा : तो चलो पहले मैं तुम्हारी मालिश कर देती हूँ . फिर रत को तुम मेरी कर देना .

अमित : अरे रहने दो न . फिर मेरा मूड बन जायेगा और रत का प्लान कैंसिल करना होगा .

हेमा : ाचा ठीक है फिर तुम रेस्ट hi करो . पर आज रत तुम्हे सोने नहीं दूंगी मैं यद् रखना.

अमित : सोना भी कौन चाहेगा जब तुम जैसी हसीना साथ हो तो. आज की रत तुम्हे पूरा मज़ा आएगा .

हेमा : रत का इंतज़ार कर रही हूँ डार्लिंग तन तक मैं भी सो hi लेती हूँ . उम्मम्माह



इतना कह कर हेमा वापिस चली गयी . और मैं मन में सोचने लगा क दोनों माँ बेटी कितनी गरम हैं . आज दोनों को एक साथ ठंडा करता हूँ . ये सब सोचते हुए मैं भी चैन की नींद सो गया .
 
अपडेट 184



2 घंटे सोने क बाद मुझे करिश्मा दीदी ने जगा दिया. मैं तैयार हो कर बेचे आ गया . अंकल भी आ चुके थे तो हम सब में मिल कर खाना खाया . करिश्मा दीदी को अपने साथ hi डिनर करता देख कर अंकल भी हैरान थे और जिस तरह अनुपमा दीदी का ख्याल रख तो रही थी उससे तो अंकल क साथ खुद दीदी भी हैरान थी. खैर राटा का खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में चला गया. अनुपमा और हेमा दोनों hi प्यासी थी और उनकी नज़रों में हवस साफ़ नज़र आ रही थी पर अंकल आज टाइम से hi घर आ गए थे तो अनुपमा भी मजबूर सी अपने कमरे में चली गयी.

मैं अपने बीएड पर लेता हुआ था क हेमा कमरे में आ गयी और दरवाज़ा लॉक कर क मेरे पास गयी. वो इस वक़्त पिंक निघ्त्य में थी जो पूरी फिटिंग थी और उसके बूब्स पूरी तरह अपनी मौजूदगी बता रहे थे. मेरी आँखों में देखते हुए हेमा ने एक ऐडा क साथ अपनी निघ्त्य को खोल दिया . ये एक तवो पीेछे निघ्त्य थी ऊपर की परत हटते hi अंदर से उसके बूब्स से लेकर पाऊँ तक लॉन्ग निघ्त्य थी कंधे पर पतली सी रानियां थी . ऊपर वाला हिस्सा हटाने क बाद मैं वो मुझे देखती हुई इत्र कर बोली .

हेमा : ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : देख रहा हूँ क हुस्न पूरे शबाब पर है और आज रत केहर की रत है .

हेमा : ये केहर किस पर गिरेगा ये तो वक़्त hi बताएगा. आज रत मैं तुम्हे सोने नहीं दूँगी.

अमित : सोना कौन चाहेगा जब तुम जैसी हसीना पहलु में हो तो.

हेमा : तो देर किस बात की ... आआअह्ह्ह्ह

हेमा की बात पूरी होने से पहले hi मैंने उसे पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया और वो मेरे ऊपर hi बीएड पर आ गिरी.

हेमा : उम्म्म उम्म्म उम्म्म आअह्ह्ह्ह उम्म्म्म खा जाओ मुझे उम्म्म्म आअज रत भर मैं तुमसे छोड़ना चाहती हूँ ककक उम्मम्मम उनममम कल वो आआह्ह्ह्ह सीसीसी कल राजीव आ रहा है उम्म्म्म फिर मुश्किल होगी उम्म्म्म

अमित : उनममम उनममम तो क्या हुआ डार्लिंग आने दो उसे उम्म्म्म अब तो तू मेरी रंडी बन चुकी है न उम्म्म्म वैसे भी उसका लैंड मेरे जितना बड़ा तो नहीं होगा नहीं तो तू मेरे नीचे न आती

हेमा : उम्म्म कक आअह्ह्ह सही कहा उफ्फ्फ उसका तो तुमसे छोटा भी है और पतला भी और तुम्हारे जैसी आअह्ह्ह्ह आराम से आअह्ह्ह ताकत नहीं है उसमे .

अमित : एक बात मानोगी मेरी उम्म्म उम्म्म

हेमा : तुम हुकुम करो उफ्फ्फ हर बात आअह्ह्ह्ह मानूंगी .

अमित : मैं तुम्हारी और राजीव की चुदाई देखना चाहता हूँ अपनी आँखों से .

हेमा : आअह्ह्ह्ह तुम्हारे होते है मैं आअह्ह्ह उससे नहीं छोड़ना चाहती ककक आअह्ह्ह

अमित : तुम मुझे इंकार कर रही हो ???

हेमा : नहीं इंकार नहीं पर अब उसके साथ वो मज़ा नहीं आएगा जो तुममम आअह्ह्ह्ह ककक तुम्हारे साथ अत है .

अमित : अगर ये मज़ा लेती रहना चाहती हो तो मेरी बात माननी होगी . मैं भी तो देखूं कैसे सेज भाई बहिन हो जो आपस में hi मज़े कर रहे हो.

हेमा : आअह्ह्ह ककक देख लेना पर अभी तो मेरी आग बुझाओ मैं सुबह से तड़प रही हूँ आअह्ह्ह्ह

अमित : तो शुरू हो जाओ देर किस बात की , तैयार करो इसे

मैंने अपने लैंड की तरफ इशारा किया जो लोअर में तम्बू बनाये खड़ा था. हेमा मेरे ऊपर से उठी और जल्दी से अपनी निघ्त्य निकल कर फेंक दी. मेरे लोअर को दोनों तरफ से पकड़ कर हेमा ने खिंचा तो मैंने भी कमर उठा दी. अंडरवियर भी लोअर क साथ hi हेमा ने खिंच कर निकल दिया और मेरा लैंड झूलता हुआ बहार आ गया. लैंड को देखते hi हेमा की आँखों में चमक आ गयी . बिना देर किये उसने लैंड को दोनों हाथों में पकड़ा और मुँह में ले लिया .

अमित : आह्हः ककक बड़ी आग लगी है तुझे

हेमा : उम् उम्म्म ुम्माआहहह सारा दिन आज ऑफिस में कैसे निकला है मुझे hi पता है. उम्म्म उम्म्म्म उम्म्म इसने पागल कर दिया है मुझे . हर वक़्त इसे सोच कर गरम होती रहती हूँ उम्मम्मम उनममम .

अमित : शाबाश ऐसे hi चूस इसे कमल की चुदाई करती है तू ककक

हेमा पहले सिर्फ सूपड़ा hi मुँह में ले रही थी फिर उसने आधा लैंड मुँह में लेना शुरू कर दिया . मैं हेमा की इस चूसै से गरम हो गया था. वो अपने मुँह को पूरा कास कर लैंड को वैक्यूम की तरह मुँह में खिंच रही थी.

अमित : आअह्ह्ह साली क्या मुँह में झाड़ देगी , चल जल्दी से टंगे खोल अब तेरी छूट की गर्मी निकलता हूँ.

हेमा : ुम्माआहहह जल्दी करो कब से मेरी छूट गीली हुई पड़ी है .

अमित : अभी तेरी आग ठंडी करता हूँ चल आजा

मैंने हेमा को बीएड पर लिटाया और उसकी टंगे खोल कर बीच में अपनी जगह बना कर एक hi झटके में पूरा लैंड छूट में घुसा दिया .

हेमा : आआअह्हह्ह्ह्ह माआआआ ाराआम से आयआईईई

अमित : बड़ी आग लगी थी न अब क्यों चीख रही है ये ले

मैंने एक बार फिर से लैंड को सुपडे तक बहार खिंचा और फिर से ज़ोरदार झटका कर का जड़ तक घुसा दिया .

हेमा : एआइइइइ मायआ ाराआम से आआआह्ह्ह्ह आराम से करो फाड़ डोज क्या आआह्ह्ह

मैंने हेमा की परवाह न करते हुए ज़ोरदार ढके मरने शुरू कर दिए . हेमा कुछ देर कराहती रही फिर मज़े से छोड़ने लगी. अब वो खुद hi अपनी गांड उठाने लगी थी और मुझे ज़ोर से करने को कहने लगी.

हेमा : आअह्ह्ह आआह्ह्ह उम्म्म आअह्ह्ह और ज़ोर से करो ाःह आह्हः आअह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ कितना तगड़ा लैंड है उम्म्म आआह्ह्ह ाअहह अंदर तक लगता है और तेज़ करो फ़क में हर्डर .

अमित : आज तेरी साडी गर्मी निकल दूंगा जान तू भी क्या यद् करेगी एअआहहह याआठ

‘थक थक थक ‘ ..... थक थक थक

यहाँ मैं हेमा की छूट का भोसड़ा बनाने में लगा था क दरवाज़े पर दस्तक होने लगी. मैं एक डैम से रुक गया. हेमा मज़े की वादियों में उड़ रही थी क उसकी भी गांड फैट गयी.

हेमा : इस वक़्त कौन आ गया ???

अमित : पता नहीं तुम जल्दी से परदे क पीछे चुप जाओ. मैं देखता हूँ .

हेमा जल्दी से उठी और नंगी hi परदे क पीछे छुप गयी. उसके कपडे मैंने उठा के कप्बोर्ड में रखे और खुद टॉवल लपेट कर दरवाज़ा खोलने चला गया. हेमा एक साइड को परदे क पीछे छुट्टी हुई थी जहाँ से दरवाज़े को देखा नहीं जा सकता था. मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने अनुपमा कड़ी थी. अनुपमा उस वक़्त एक निघ्त्य में थी. दरवाज़े खुलते hi वो जल्दी से अंदर आ गयी और फिर से दरवाज़ा बंद कर दिया.

अमित : तुम इस वक़्त यहाँ ??

अनुपमा : क्यों मैं यहाँ नहीं आ सकती क्या ?? तेरे अंकल सो hi नहीं रहे थे इस लिए देर हो गयी वर्ण मैं तो पहले hi आ जाती. अब जल्दी से मेरी आग ठंडी कर दो. सारा दिन कितना बुरा हाल रहा है पूछो hi मत . तुम तो बीच में hi छोड़ कर चले गए थे तब से बस गीली hi हूँ नीचे से . वैसे तुम इस वक़्त टॉवल में क्या कर रहे थे.

अमित : कुछ नहीं डार्लिंग अपनी रंडी का hi इंतज़ार कर रहा था . अब जल्दी से अपना खूबसूरत बदन बेपरवा करो ताकि मैं तेरी गर्मी निकल सकूँ .

अनुपमा ने जल्दी से अपनी निघ्त्य एक hi झटके में उतर दी. निघ्त्य क नीचे उसने कुछ नहीं पहना था उस लिए निघ्त्य निकलते hi उसका गोरा गदराया बदन मेरे सामने आ गया. मैंने हाथ बढ़ा कर उसके बड़े बड़े दूध पकड़ लिए और मसलने लगा.

अनुपमा : आआह्ह्ह ककक चलो बीएड पर जल्दी एक बार अंदर दाल दो फिर हो मर्ज़ी करते रहना.

अमित : ऐसे नहीं डार्लिंग. इस कमरे में तुम मेरी रंडी बन कर hi आ सकती हो. और रंडी क लिए बीएड ज़रूरी नहीं होता. अब जल्दी से इसको मुँह में लो ताकि मैं तेरी आग बुझा सकूँ.

मैंने अपना टॉवल खोलते हुए उसे अपना लैंड दिखाया हो अब थोड़ा ढीला पद गया था. अनुपमा ने मेरा लैंड देखा और तुरंत घुटनो पर बैठ कर लैंड को हाथों में पकड़ कर पास से देखने लगी.

अनुपमा: ये गीला क्यों है ?

अमित : तेरा hi पानी है डार्लिंग भूल गयी? चल जल्दी से इसे मुँह में लेकर तैयार कर.

मैंने अनुपमा का सर लैंड पर दबा दिया और उसने भी मुँह खोल कर लैंड को मुँह में ले लिया. अनुपमा मज़े से लैंड को मुँह में अंदर बहार करने लगी और मेरे लैंड में फिर से जान आ गयी. मैंने अनुपमा का सर पकड़ा और उसके मुँह में hi धक्के मरने लगा .

अनुपमा : उम्म्म उम्म्म ाककक आककककक ाखऊन ाख़ूऊन आआअह्ह्ह्हह खुन्नन खुन्नन खुन्नन

अनुपमा क गले में लैंड की ठोकर लगने से वो खांसने लगी और उसके मुँह से लार ज़मीन पर गिरने लगी . मैंने कन्धों से पकड़ कर खड़ा किया और उसे झुका दिया .

अमित : चल ज़मीन पर हाथ रख ले. यहाँ से बीएड तक तुझे छोड़ते हुए लेकर चलूँगा रंडी .

अनुपमा : आअह्ह्ह मैं कैसे .... ाआईई माआ

अनुपमा से झुका नहीं जा रहा था पर मैंने उसे आगे को धकेलते हुए उसकी छूट पर लैंड सेट किया और एक hi झटके में पूरा घुसा दिया. अनुपमा आगे को गिरने को हुई तो मैंने उसे कमर से पकड़ कर थम लिया और उसके हाथ ज़मीन पर लग गए. अब पोजीशन ये थी क वो आगे को लगभग गिरी हुई थी और उसके हाथ ज़मीन पर थे पर मैंने उसकी कमर थाम कर उसे ऊपर उठाया हुआ था. मैंने वहीँ उसकी छूट में ताबड़तोड़ धक्के मरने शुरू कर दिए .

अनुपमा : आअह्ह्ह्ह आआअह्हह्ह्ह्ह बीएड पर आअह्ह्ह बीएड पर ले चलो आयआईई आअह्ह्ह्ह

अमित : चुप कर रंडी बड़ी आग है न तेरी छूट में . अब जैसे मैं कहता हूँ वैसा कर वर्ण वापिस चली जा .

मैंने अपने दोनों पाऊँ फैला लिए और अनुपमा की टंगे जोड़ कर उसकी छूट में धक्के मरते हुए उसे आगे को बढ़ाना शुरू कर दिया .

अनुपमा : करो आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह करो जैसे दिल करे आआह्ह करो आअह्ह्ह्ह मायआ ऐसा तो कभी किसी ने नहीं आआह्ह आअह्ह्ह किया आठ

मैंने अनुपमा की छूट में धक्के मरता हुआ उसे कमरे क बीच में ले आया . हेमा परदे क पीछे से सब देख रही थी और हैरान भी थी. मैं दोनों माँ बेटी को एक साथ छोड़ना चाहता था इस लिए दरवाज़े से hi अनुपमा को छोड़ता हुआ लाया ताकि वो इंकार न करे . हेमा का तो मुझे पता hi था क वो मन नहीं करने वाली .

अमित : क्यों रंडी मज़ा आ रहा है न बोल येआठ

अनुपमा: आअह्ह्ह्ह बहुत पर मैं ज्यादा देर आअह्ह्ह्ह झुक नहीं सकती बीएड आअह्ह्ह पर आअह्ह्ह

अमित : आज रत बीएड पर नहीं तू मेरे लैंड पर hi उछलेगी . आज तेरे साथ मैं तेरी बेटी को भी छोडूंगा उसको भी बड़ी आग लगी है बोल छुड़ाएगी न अपनी बेटी क साथ ?? बोल ??

मैंने हेमा की तरफ देखते हुए कहा. वो परदे क पीछे से हम दोनों को देख रही थी और हैरान भी हो रही थी अपनी माँ को ऐसे चुड़ते हुए देख कर .

अनुपमा: आअह्ह्ह आआह्ह्ह उसकी क्या ज़रूरत है आअह्ह्ह मैं हूँ न ाःह आह्हः जितना चाहे छोड़ लो मुझे आअह्ह्ह

अमित : क्यों उसकी छूट में गर्मी नहीं है क्या ?? उसे भी तो लैंड चाहिए . अगर वो मुझसे छोड़ना चाहे तो क्या तू मन करेगी ?

अनुपमा: नहीं आअह्ह्ह आअह्ह्ह वो चाहे तो चुद ले तुम्हारे मुसल से ाःह मैं क्यों मन करुँगी आआह्ह्ह वो भी तो जवान है . पर आज तुम सिर्फ मेरी प्यास बुझाओ उसे ाःह बाद में कर लेना . वैसे भी वो इतना बड़ा मुसल कहाँ आआअह्ह्ह ले पायेगी आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह

हेमा को अपनी माँ की ये बात अछि नहीं लगी और वो पर्दा हटा कर सामने आ गयी. अनुपमा अपने सामने हेमा को देख कर सेहम गयी. वो उठना चाहती थी पर मैंने उठने नहीं दिया.

हेमा : ाचा तो सिर्फ तुम hi बड़ा मुसल ले सकती हो मैं नहीं ?? बहुत बड़ी रंडी हो न तुम ?? देख क्या रहे और ज़ोर से मारो फाड़ दो मेरी माँ की छूट को . बड़ी हो चली है पर अभी तक इसकी आग ठंडी नहीं हुई . फाड़ कर रख दो इसे ताकि फिर ये लैंड न मांगे .

अमित : ये लो डार्लिंग देखो मैं कैसे दासता हूँ तेरी माँ की छूट

मैंने अनुपमा को दोनों जांघों से पकड़ कर उसकी टंगे हवा में उठा ली अब उसका वजन उसके हाथों और मेरे हाथों पर था. मैंने उसे हवा में लटकाये उसकी छूट में ताबड़तोड़ धक्के मरने शुरू कर दिए.

अनुपमा: आआह्ह्ह्हह आआअह्ह्ह माआ एआईई धीरे करो आआह्ह धीरे मैं ाःह मैं गिर ाः गिर जाउंगी .

हेमा : क्यों अब क्या हुआ बड़ी आग लगी थी न क्या कह रही थी क ये मुसल सिर्फ तू hi ले सकती है तो अब ले न मैं भी तो देखूं कितना डैम है तेरी छूट में . और ज़ोर से मारो उसकी छूट कोई रेहम न करना .

अनुपमा: आअह्ह्ह शर्म नहीं आती अपनी माँ क आआअह्ह्ह आअह्ह्ह माँ क सामने ऐसे नंगी कड़ी है और ाआईईई अपनी माँ को hi छुड़वा रही है आआह्ह्ह्ह

हेमा : खुद hi तो छोड़ने आयी थी न या मैं लायी थी तुम्हे ? बड़ी आग लगी थी न ? और शर्म तो तुम्हे आणि चाहिए इस उम्र में भी लैंड लेती फिर रही है . ले अब एयर ज़ोर से ले लैंड की भूखी बड़े दिनों से भूखी होगी न . पता नहीं किस किस का लैंड लेती रही है . मुझे तो शक है क मैं भी अपने बाप की औलाद नहीं

अनुपमा : आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह चुप कर बेशर्म आअह्ह्ह मैं गयी आआह्ह्ह आअह्ह्ह माआ आआह्ह्ह

अनुपमा का सारा बदन झटके खाने लगा और वो खुद को संभल नहीं पायी. उसका पानी निकलते hi वो सर क भर ज़मीन पर गिरी तो मैंने भी उसे ज़मीन पर लेता दिया.

हेमा : क्यों , निकल गयी हवा ? बड़ी आग लगी थी अब हो गयी ठंडी? अब तू बड़ी हो गयी है ये जवान लैंड लेने की ताकत नहीं रही अब तुझ में. अब देख मैं इस मुसल को ले सकती हूँ क नहीं.

हेमा : ने अपनी माँ को दिखते हुए मेरा लैंड हाथ में पकड़ा और मुझे बीएड क पास ले जा कर खुद बीएड पर चढ़ कर कुटिया बन गयी और अपनी छूट पर हाथ फेरते हुए मुझे लैंड घुसने को कहने लगी .

हेमा : आअह्ह्ह कक्कक्स के ों आए जाओ फ़क में इस गुड़िया ने सारा मज़ा ख़राब कर दिया फिर से मेरी छूट में घुसा दो ये मुसल आआआआअह्ह्ह्हह

मैंने हेमा की बात मानते हुए एक hi झटके में पूरा लैंड जड़ तक घुसा दिया. और हेमा क बल पकड़ कर खींचते हुए धक्के मरने लगा.

अमित : ये ले मेरी रंडी सच में तू अपनी माँ से भी कड़क माल है. तू hi लैंड क काबिल है तेरी माँ में डैम नहीं है.

हेमा : आआह्ह आआह्ह्ह फ़क फ़क आआअह्ह्ह्ह और ज़ोर से करो आआह्ह्ह्हह उसकी उम्र हो गयी है ऐसे जवान लैंड से छोड़ना उसके बस में नहीं है अब ाआईई आअह्ह्ह फ़क आअह्ह्ह दिखाओ उसे क मैं ये मुसल ले सकती हूँ या नहीं फुककक फुकक

हेमा अनुपमा क सामने कुटिया की तरह ज़ोर से चुद रही थी और खुद hi अपनी कमर को पीछे धकेल रही थी . साथ hi वो अनुपमा को नीचे दिखा कर खुद को ाचा साबित कर रही थी. अनुपमा अब कुछ संभल गयी थी. उसकी साँसे अब नार्मल हो गयी थी. हेमा को चुड़ते हुए देख कर और उसकी बातें सुन कर उसे गुस्सा कर उसे गुस्सा आ गया था. वो गुस्से से तमतमाती हुई उठी और हमारे करीब आ गयी. आते hi उसने हेमा क मुँह पर थप्पड़ मर दिया .

अनुपमा: बड़ी आग है तुझ में कमीनी हाँ ? इतनी hi आग थी तो अपने पति को छोड़ कर यहाँ क्यों आ गयी? मैं भी तो देखूं कितना डैम है तुझ में जो मुझे गुड़िया कह रही है. अमित फाड़ दे इसकी छूट बना दे इसका भोसड़ा. कल की छोकरी मुझे उंगली कर रही है. तेरी इतनी उम्र भी नहीं जितने साल मुझे लैंड लेते हो गए हैं तू क्या जाने चुदाई क्या होती है .

मैं तो दोनों माँ बेटी का ये रूप देख कर हैरान हो रहा था दोनों hi एक दूसरी को नीचे दिखा रही थी. अनुपमा की बातें सुन कर हेमा भी गुस्से में आ गयी .

हेमा : उस गांडू में डैम होता तो आअह्ह्ह आअह्ह्ह क्यों आती यहाँ . साला नामर्द गले आह्हः गले बाँध दिया था तुमने मेरे. यहाँ न आटीईई ाआईई तो क्याआ करती. और तुम भी टूवू आअह्ह्ह अपने पति क होते बहार चुदवाती रही हो कभी अपनी आअह्ह्ह्ह सहेली क पति से से कभी ड्रिवेररररर से हाँ. तू तो बड़ी रनडीईई आअह्ह्ह्ह है न . मैं भी तेरी hi बेटी हूँ . फ़क फ़क और ज़ोर से छोड़ो मुझे दिखाओ इसे क जिसमे डैम है आअह्ह्ह्ह

अनुपमा : कामिनी मुझसे ज़ुबान लड़ती है चटटाखक्क तेरी गर्मी तो अभी निकलती हूँ मैं

हेमा : साली मुझे मरती है ले....

अनुपम ने गुस्से में हेमा क मुँह पर थप्पड़ मर दिया और हेमा भी उससे भीड़ गयी. दोनों माँ बेटी ने एक दूसरे क बाल पकड़ लिए. दोनों सड़क छाप रंडियों की तरह लड़ने लगी तो मैंने जल्दी से दोनों को अलग किया.

अमित : ये क्या कर रही हो तुम दोनों. यहाँ छोड़ने आयी हो या लड़ने? अगर लड़ना है तो अभी बहार निकल जाओ इस कमरे से.

हेमा : इनसे कहो क बहार निकल जाएँ. इनका काम तो हो गया न . वैसे भी मैं पहले आयी थी यहाँ . खामखाह आकर मूड ख़राब कर रही हैं. बूढी घोड़ी लाल लगाम.

अनुपमा: बूढी किसे कहा हाँ बड़ी किसे कहा ? तेरे ज्यादा डैम है मुझ में तू जा यहाँ से . मैं तो साडी रत यहाँ चुदाई करवाउंगी

हेमा : ओहो हो हो बड़ी आयी साडी रत वाली. अभी तो मर रही थी . इस उम्र में हड्डियां तुड़वानी हैं क्या.

अनुपमा: अरे जा जा तुझे क्या पता मर्द को खुश कैसे करते हैं बड़ी आयी

अमित : चुप हो जाओ तुम दोनों . एक डैम चुप. तुम दोनों माँ बेटी हो या गली की रंडियां ? मुझे तो लगा था तुम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करती हो तो तुम्हे ाचा लगेगा एक साथ एक hi लैंड से छोड़ना. अगर तुम दोनों को ऐसे hi लड़ना है तो जाओ.

हेमा : मेरा क्या कसूर है इन्होने hi बात को शुरू किया था. मैंने तो कुछ नहीं कहा था.

अनुपमा : मुझे क्या पता था क तू भी इसका लैंड ले चुकी हो और पहले से hi यहीं हो

अमित : अब शांत हो जाओ. देखो अगर तुम दोनों को मज़ा लेना है तो एक साथ मज़ा लो इसमें तुम दोनों को भी मज़ा आएगा. और मैं भी देखना चाहता हूँ क कौन ज्यादा अचे तरीके से चुदाई का मज़ा दे सकती है मुझे.

अनुपमा: मुझे मंज़ूर है

हेमा : मुझे भी मंज़ूर है

अमित : ऐसे नहीं , इसे मज़ेदार बनाने क लिए क्यों न शर्त राखी जाये .

अनुपमा: कैसी शर्त ?

अमित : तुम दोनों में से जो ज्यादा मज़ा देगी वो मेरी पक्की रंडी बनेगी और जब कहेगी मैं उसे छोडूंगा. हरने वाली जाना होगा.

हेमा : मुझे मंज़ूर है. ये शर्त तो मैं hi जीतूंगी. तुम्हारे जवान लैंड को मेरी जवानी hi संभल सकती है

अनुपमा : मुझे भी मंज़ूर है, मेरे एक्सपीरियंस क आगे ये नहीं टिक पायेगी.

अमित : तो फिर हो जाओ शुरू. और हाँ अब कोई झगड़ा नहीं. दोनों एक साथ मज़ा करो और मज़ा दो. चलो अब ज़रा अब जोश और एक्सपीरियंस दिखाओ इस पर.

मैंने दोनों को अपने लैंड की तरफ इशारा करते हुए कहा तो दोनों hi भूखी बिल्लियों की तरह मेरे लैंड पर टूट पड़ी . हेमा ने जल्दी से लैंड को अपने मुँह में भर लिया तो अनुपमा बॉल्स को चाटने लगी. दोनों बड़े hi जोश में चूस रही थी मेरे मुँह से भी एक बार सिसकी निकल गयी .

अमित : आअह्ह्ह ककक तुम दोनों तो कमल की हो आआह शाबाश मेरी रणदीव अपने जलवे दिखाओ.

हेमा : उम्म्म उम्म्म उम्म्म इस मुसल को तो मैं उम्म्म्म उम्म्म हमेशा मज़े डोंगी

अनुपमा : सारूउप सारूउप सरररूउप ाःह कितने बड़े बॉल्स हैं उम्मम्मम बहुत रास भरा पड़ा है इनमे सारूउप सारूउप

अमित : तुम दोनों की छूट में hi खली करूँगा इन्हे आह्हः शाबाश ऐसे hi चूसो

हेमा : आककककक ायककककक ाक्क्क्क उम्मम्मम्म आआअह्ह्ह्हह ाककककक ाककककक ाकककक

हेमा पूरा लैंड मुँह में ले रही थी . सूपड़ा सीधा उसके गले में ठोकर मर रहा था. पर हेमा तो जैसे अपनी माँ को पिछड़ने क लिए असली रंडी hi बन गयी थी.

अनुपमा : सारा तू hi चूसेगी चल मुझे भी चूसने दे ज़रा ायककककक उम्म्म ाकककक उम्मम्माआहहह ाककक ाककक ाककक

अनुपमा ने हेमा क मुँह से ज़बरदस्ती लैंड बहार निकला और खुद अपने मुँह में लेकर सीधा गले तक ले गयी और चूसने लगी. हेमा क मुकाबले अनुपमा आसानी से लैंड को गले तक लेकर जा रही थी . वाली में अनुपमा को ज्यादा एक्सपीरियंस था लैंड चूसै का

अमित : आअह्ह्ह शाबाश मेरी रंडी तू तो वाली में असली रंडी है. लगता है बहुत लैंड चूसे हैं तुमने .

हेमा : तभी तो इसकी आग अभी तक ठंडी नहीं हुई पक्की रंडी है ये

अनुपमा : ाकककक ाक्क्क्क ायककककक उम्मम्माआहहह मैंने तो पहले hi कहा था क तेरी उतनी उम्र नहीं जितने साल मुझे लैंड से खेलते हो गए हैं उम्म्म ाकककककक ाककककक

अमित : तू बैठी क्या कर रही है चल इस बड़ी रंडी की छूट को चाट . इसकी छूट का भी तो भोसड़ा बनाना है

हेमा : ये तो पहले hi भोसड़ा बानी हुई है और क्या बनाओगे

अमित : चुप साली मेरी बात मन वर्ण तुझे लैंड नहीं मिलेगा

हेमा ने तुरंत मेरी बात मानते हुए अनुपमा को कमर से पकड़ कर पीछे से उठाया और उसे घोड़ी बना कर पीछे बैठ कर उसकी छूट चाटने लगी.

हेमा : सारूउप सारूउप सारूउप देखो ज़रा तुम इसे छूट कहते हो . फैट कर पहले hi भोसड़ा बानी हुई है सारूउप साररूउप

अनुपमा : उम्म्म्म उम्म्म्म इसी भोसड़ा से तू निकली है ये तेरी जन्मस्थली है चुपचाप चाट और इसका एहसान मन इसी ने तुझे दुनिया दिखाई है उम्म्म्म उम्म्म

हेमा : साररूउप साररूउप पता नहीं कैसे कैसे लैंड खाये हैं तुमने और छूट का भोसड़ा बनाया है. साररूउप साररूउप

अनुपमा : उम्म्म उम्म्म चुपचाप चाट समझी बकवास न कर उम्म्म उम्म्म

हेमा : एक बात तो बताओ माँ साररूउप साररूपप मेरा असली बाप कौन है साररूउप सरुपपप मुझे नहीं लगता मैं अपने बाप की hi औलाद हूँ सर्र्रउपप साररूअप्प

अनुपमा : चुप कर उम्म्म्म शर्म नहीं आती अपनी माँ से ऐसे बात करते हुए उम्म्म

अमित : ठीक hi तो कह रही है हहहह आअह्ह्ह सीसीसी जितनी ये गरम है उस हिसाब से ये अंकल की औलाद हो hi नहीं सकती

अनुपमा ने जब मेरी बात का जवाब न दिया तो मैंने उसका सर पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से अनुपमा क मुँह में धक्के मरने शुरू कर दिए और हेमा ने भी अनुपमा की छूट में ज़ोर से उंगलियां चलनी शुरू कर दी . अनुपमा की तो हालत ख़राब हो गयी वो मेरी जाँघों पर हाथ रख कर मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी और उसकी टंगे भी कम्पनी लगी थी.

अनुपमा : ाकककक ाककक ाकककक ाख्यूंन अखुनण खुउन्नन

अमित : बोल साली जवाब क्यों नहीं देती मेरी बात का अगर जवाब नहीं देगी तो तेरा गाला hi फाड़ दूंगा आज

अनुपमा: अख्यूं अख्यूं अख्यूं आआअह्ह्ह हहहहहह हूहहहह बताती हूँ रुक जाओ आआह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह रुक जा रंडी आआह्ह आअह्ह्ह

अनुपमा की हालत ख़राब हो गयी थी. उससे सांस भी नहीं ली जा रही थी. मेरे इशारे पर हेमा ने अपना हाथ रोका तो अनुपमा बोलने लगी

अनुपमा : वो ... वो .. वो मेरा एक बर्फ था शादी क पहले उसी ने मुझे प्रेग्नेंट कर दिया था हहहह मेरे बाप को वो पसंद नहीं था इस लिए मेरे प्रेग्नेंट होने का पता चलते hi हहहह हहहह मेरे बाप ने मेरी शादी अपने नौकर यानि क मेरे पति से कर दी

हेमा : देखा मुझे पहले hi शक था क मैं अपने बाप की औलाद नहीं तेरी अय्याशी की औलाद हूँ. चल हैट पीछे फिर से पानी बहा दिया तूने तो. अजा मेरे राजा इस रंडी क किस्से सुन लिए अब मेरी छूट को भी आराम दो

अमित : क्यों नहीं मेरी रंडी अब तेरी आग बुझाता हूँ

मैंने हेमा को बीएड पर झुकाया और पीछे से उसकी छूट में लैंड एक hi झटके में पूरा घुसा दिया जिससे हेमा चीख पड़ी

हेमा : आआह्ह्ह मायआ ाआईई आराम से ाः

अमित : रोज जैसी रंडी को आराम से नहीं ऐसे hi छोड़ा जाता है ले और ले

मैंने बिना देर किये ताबड़तोड़ धक्के मरने शुरू कर दिए और हेमा की कमर थम कर उसकी छूट का फाड़ना शुरू कर दिया. हेमा को चीखते देख अनुपमा उठ कर पास आ गयी और बीएड पर हेमा क आगे टंगे फैला कर अपनी छूट खोल दी और उसका मुँह अपनी छूट पर लगा दिया

अनुपमा : ले चूस अपनी माँ की छूट को . बड़ी आग है न तेरे में अब चीख और चाट . इस पर कोई रेहम मत करो बना दो इसकी छूट का भी भोसड़ा पता चले इसे भी क छूट भोसड़ा कैसे बनती है.

हेमा : आअह्ह्ह आअह्ह्ह उम्म्म्म साली रंडी तुझे बड़े मज़े आ रहे हैं अभी तुझे आआह्ह बताती हूँ .

अनुपमा : आआआआआईईई साली रंडी आआआआआ माआआ

हेमा ने अनुपमा की छूट का दाना दातों में दबा दिया जिससे अनुपमा ज़ोर से चीख पड़ी और हेमा क मुँह पर थप्पड़ मरने लगी पर हेमा उसे छोड़ने की बजाये अपने हाथ की चरों उंगलियां उसकी छूट सॉरी भोसड़े में अंदर बाहर करने लगी.

अनुपमा: आअह्ह्ह्ह चूस रंडी कमीनी छोड़ड़ड़ आआआ मायआ खा जाएगी क्या आयआईई

मुझे दोनों की हरकतों पर मज़ा आ रहा था और मैं ज़ोर से हेमा की छूट का भोसड़ा बनाने में लगा हुआ था. हेमा दो बार पहले hi अधूरी रह गयी थी इस लिए वो और ज्यादा खुद को रोक नहीं पई और झटके लेती हुई झड़ने लगी. जोश में एक बा फिर उसने अनुपमा की छूट को ज़ोर से काट लिया और अनुपमा फिर से ज़ोर से चिल्लाई. हेमा झड़ते hi नीचे गिर गयी और मैंने पीछे हैट गया. अनुपमा की छूट से खून बहने लगा था कुछ ज्यादा hi ज़ोर से दांत गाढ़ा दिए थे हेमा ने.

अनुपमा : एआईई मायआ मर गयी आआअह्ह्ह मेरी छूट ाआईई साली काट दिया ाआईई

मैंने अनुपमा की छूट को हाथ से मसला जिससे उसे कुछ आराम मिला. फिर मैं उसे पलट कर घुटनो पर चौपाया बना दिया और उसके चूतड़ फैला कर उसकी गांड क छेड़ पर लैंड सेट कर दिया

अमित : छूट में तुझे दर्द होगा चल तेरी गांड hi फाड़ता हूँ ये ले

मैंने अनुपमा की कमर थाम कर ज़ोर से लैंड को अंदर घुसा दिया . एक hi बार में आधा लैंड गांड में घुस गया और अनुपमा क मुँह से चीख निकल गयी.

अनुपमा : आआअह्ह्ह्ह आयआईई फाड़ दी आआआहहह

अनुपमा की चीख सुन कर हेमा फिर से जोश में आ गयी और बीएड पर चढ़ कर अपनी माँ की गांड में मेरा लैंड घुसते हुए देखने लगी.

अमित : क्या हुआ रंडी चीख क्यों रही है पहले भी तो ले चुकी है न

अनुपमा : आआअह्ह्ह मैंने गांड नहीं मरवाई ज्यादा और तुम्हारा आआह्ह्ह ये मुसल कितना बड़ा है आअह्ह्ह्ह कल भी तुमने ओह्ह्ह्ह माआ घुसा दिया था आआआअह्ह्ह्ह

अनुपमा की बात पूरी होते होते मैंने एक और ज़ोरदार झटका मर कर पूरा लैंड गांड में घुसा दिया और वो फिर से चीख पड़ी

हेमा : शाबाश घुसा दो पूरा चीखने दो इसे भी तो पता चले असली लैंड छूट हो या गांड कहीं भी घुस सकता है साली छूट तो पहल hi फटी हुई है आज गांड भी फटेगी तेरी

अनुपमा : आआह्ह्ह चुप कर कामिनी आअह्ह्ह तेरी गांड में जायेगा तो पता चलेगा तुझे आआह्ह्ह मा

अमित : इसकी भी गांड में जायेगा पर पहले तेरी तो तबियत से ले लूँ फिर इसकी भी लूंगा. जो मुझे मज़े से गांड देगी उसे hi मैं अपनी रंडी समझूंगा और हमेशा छोडूंगा.

अनुपमा : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह तो देर किस बात की ज़ोर से करो फाड़ दो मेरी आअह्ह्ह मेरी गांड सिर्फ तुम्हारे लिए hi है आअह्ह्ह

अनुपमा खुद hi अपनी गांड पीछे को धकेलने लगी . ये देख हेमा फिर से जोश में आ गयी और अनुपमा क लटकते हुए बूब्स ज़ोर ज़ोर से मरोड़ने लगी .मैंने उसे पलट कर अनुपमा की पीठ पर hi उल्टा लिटा दिया. और हेमा की गांड को हाथों से खोल कर देखने लगा. मैंने दो उंगलियां एक साथ हेमा की गांड में घुसा दी तो वो भी चीक पड़ी.

हेमा : आआआआईई माआ

अनुपमा: चीख क्यों रही है कमीनी आआह्ह्ह आअह्ह्ह गांड मेरी फैट रही है और चीख तू रही है.

हेमा : मेरी भी गांड आआह्ह्ह

मैंने अनुपमा की गांड से लैंड बहार निकला और ऊपर उठ कर हेमा की गांड में लैंड सेट कर क एक hi झटके म आधा घुसा दिया. अनुपमा क मुकाबले हेमा की गांड ज्यादा टाइट थी. मुझे मज़ा आ रहा था पर हेमा चीख पड़ी.

हेमा : आआअह्ह मर गयी मा बचाओ मेरी गांड

अनुपमा: शाबाश मेरे राजा ऐसे hi फाड़ दे इसकी भी , बड़ा उछाल रही थी

मैं एक और झटका मर कर पूरा लैंड घुसा दिया. हेमा फिर से चीखी पर मैं नहीं रुका और हेमा की गांड मरने लगा. हेमा की गांड मरने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. मेरा भी काम अब होने वाला था. जैसे hi मेरा पानी निकलने को हुआ तो मैंने हेमा की गांड से लैंड बहार निकला और दोनों क ऊपर खड़ा हो कर अपना लैंड हिलने लगा. हेमा और अनुपमा दोनों hi जल्दी से घुटनो पर बैठ गयी

अमित : आआह्ह्ह आआह्ह्ह्ह कौन पियेगा मेरा लैंडर्स जल्दी बोलो ाःह

अनुपमा: मुझे पिलाओ मैं पियूँगी

हेमा : नहीं मुझे दो मेरी गांड ने निकला है इसे मुझे पिलाओ

अमित : दोनों को hi पिलाता हूँ मेरी रंडियों आअऊ आआह्ह्ह ये लो ये लो पियो ाःह

मैंने दोनों क मुँह पर अपना लैंड रास फेंक दिया और दोनों hi मज़े से उसे चाट कर मुँह में भरने लगी. पानी निकलने क बाद मैं आराम से बीएड पर लेट गया. कुछ देर दोनों लैंडर्स छटने क बाद फिर से मेरे पास आ गयी.

अनुपमा : तो कौन पसंद आया तुम्हे दोनों में से

हेमा : हाँ जल्दी बताओ क किसने ज्यादा मज़ा दिया

अमित : तुम दोनों hi कमल की हो . दोनों ने मुझे बहुत मज़ा दिया.

अनुपमा: तो फिर हो जाये एक बार और

अमित : तो फिर इसे तैयार करो

हेमा : सच में माँ तू पूरी रंडी है इतना चूर क भी तू थकी नहीं .

अनुपमा : बेटी ऐसा लैंड पास में हो तो थकना कौन चाहेगा. चल तू भी साथ में मज़े ले इसके

दोनों माँ बेटी फिर से मेरा लैंड चूसने लगी. इस बार दोनों ने झगड़ा नहीं किया बल्कि साथ मिल कर एक दूसरी की छूट चाट ते हुए पूरा मज़ा किया. सुबह क 3 बजे तक हम तीनो चुदाई का खेल खेलते रहे. उसके बाद अनुपमा लंगड़ाती हुई अपने कमरे में वापिस चली गयी पर हेमा वहीँ मेरे साथ सो गयी क्यूंकि उससे तो उठा भी नहीं जा रहा था. मैंने उठ कर दरवाज़ा लॉक किया और अपना मोबाइल उठा कर वापिस अपने पास रख लिया. मैं भी पूरी तरह थक गया था इस लिए बीएड पर आराम से पद गया और नींद की वादियों में पहुँच गया.

उधर कारन को नशे में लड़की क बट क साथ चिपका देख कर देखने वालों की हंसी छूट गयी. वो नशे में क्या कह रहा था ये तो समझ नहीं आ रहा था पर शीना ने अपना नाम सुन लिया था जिसे सुन कर उसे गुस्सा तो बहुत आया पर वो निधि और अमित का भाई था इस लिए उसने अपना गुस्सा दबा लिया. फिर अपने नौकरों से कह कर उसे गाडी में डलवाया और देर रत खुद अपने गार्ड्स को साथ लेकर उसे घर छोड़ने गयी.

रजनी और निधि घर पर परेशां हो रही थी कारन अपना फ़ोन नहीं उठा रहा था और निधि को टेंशन थी क वो कोई हरकत न कर दे. जैसे hi बेल्ल बाकि तो निधि ने भाग कर दरवाज़ा खोला. सामने एक आदमी कारन को पकड़ कर खड़ा था और कारन की हालत देख के hi निधि समझ गयी की वो होश में नहीं है . इससे पहले क वो कोई सवाल करती शीना सामने आ गयी .

शीना : दीदी वो कारन ने ड्रिंक की है शायद इस लिए होश में नहीं है . रत को ये घर कैसे अत इस लिए मैं खुद छोड़ने आ गयी .

निधि : अरे शीना तुमने क्यों तकलीफ की मुझे फ़ोन कर देती. आओ अंदर आओ

वो आदमी कारन को सहारा देकर अंदर ले आया और सोफे पर दाल दिया रजनी तो टेंशन में आ गयी और कारन को आवाज़ देते हुए हिलाकर होश में लेन की कोशिश करने लगी.

रजनी : कारन तुझे क्या हुआ मेरे बेटे तू बोलता क्यों नहीं कारन कारन

निधि : माँ कुछ नहीं हुआ इसे, इसने शराब पि है. सुबह बात करेंगे इससे. शीना ी ऍम रियली सॉरी तुम्हारे बर्थडे वाले दिन तुम्हे ये तकलीफ .....

शीना : इसमें तकलीफ कैसी दीदी ? आप मेरे बहिन जैसी hi तो हो. ाचा अब मैं चलती हूँ. और हाँ मैं कल सुबह नहीं आ पाऊँगी क्यूंकि आज देर हो गयी है और अभी घर भी जाना है .

निधि : it’s ok शीना ी कैन अंडरस्टैंड पर तुम बैठो तो सही

रजनी : हाँ बीटा बैठो तो सही

शीना : नहीं आंटी टाइम बहुत हो गया है पापा मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे. ाचा अब मैं चलती हूँ जल्दी hi मिलेंगे.

शीना इतना बोल कर अपने गार्ड्स क साथ चली गयी. उसके जाने क बाद निधि ने दरवाज़ा लगाया और अपनी माँ से गुस्सा करने लगी.

निधि : देखा माँ , देख ली अपने लाडले की करतूत . इसी लिए मैं मन कर रही थी इसे ले जाने को. हमारा ध्यान ये क्या रखेगा जो अपना ध्यान नहीं रख सकता. और सच तो ये है ज़रूर इसने शीना क साथ कोई हरकत की होगी. मुझे पहले hi शक था इस पर . वो बेचारी दिल की कितनी अछि है इतने बड़े घर की बेटी हो कर हम जैसे मिडिल क्लास लोगों को अपना समझ कर मदद कर रही है और ये क्या सिला दे रहा है उसे. काम से अपना नहीं तो अमित का hi ख्याल कर लेता जिसकी वजह से शीना हमारी इतनी रेस्पेक्ट करती है. क्या सोचेगी वो क कैसे हैं अमित क रिश्तेदार.

रजनी : तू चिंता न कर बेटी इसकी तो मैंने सुबह खबर लेती हूँ. बहुत बिगड़ रहा है ये.

निधि गुस्से से अपने कमरे में चली गयी और रजनी ने कारन को जैसे तैसे गेस्ट रूम में पहुँचाया और खुद अपने कमरे चली गयी.

उधर रीमा राधा क साथ उसके कमरे में थी. दोनों सहेलियां एक hi बीएड पर बाएं के रही थी. रीमा राधा से उसके बचपना की यादें जानने की कोशिश कर रही थी.

रीमा : राधा तुम बचपन से hi अमित क साथ हो न ?

राधा : हम्म्म नं नहीं तो मतलब हाँ. बचपन से वो तो गाओं में hi था. अब जा कर कहीं वो शहर आया है . और मैं तो यहीं थी . साल बाद कहीं मौका मिलता था राखी पर उसे देखने का जब माँ क साथ गाओं जाती थी मां को राखी बांधने

रीमा : तो क्या तुम उसे राखी बांधती थी ?

राधा : नहीं

रीमा : क्यों

राधा : क्यों क्या ? वो बचपन में झगड़ा करता था तो मैंने उसे कभी राखी नहीं बंधी

रीमा : पर अब तो वो ऐसा नहीं है क्या अब उसे राखी बांधती हो?

राधा : ये क्या तुम राखी राखी कर रही हो कोई और बात करो न.

रीना : ाचा एक बात बताओगी ?

राधा : पूछो

रीमा : क्या तुम्हे कोई लड़का पसंद है ?

राधा रीमा की इस बात पर चौंक गयी

राधा : ये ये तुम क्या..

रीमा : मैंने कुछ गलत पूछा क्या ? मैं भी तो तुम्हारी तरह लड़की हूँ न. और तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड भी . हूँ न ?

राधा : हम्म्म

रीमा : तो बताओ फिर क्या तुम्हे कोई लड़का पसंद है ? मतलब तुम जवान हो और इतनी खूबसूरत भी. कॉलेज क कितने लड़के तुम्हे घूरते रहते हैं. तुम्हे भी तो कोई पसंद होगा न.

राधा : वो तो तुम्हे भी घूरते हैं . क्या तुम्हे भी कोई पसंद है ?

रीमा : पहले मैंने पूछा है न तो तुम जवाब दो

राधा : नहीं मुझे कोई पसंद नहीं है .

रीमा : झूठ , मैं जानती हूँ तुम किसी को पसंद करती हो पर मुझे बता नहीं रही . ाचा मैं बताती हूँ. मुझे एक लड़का पसंद है.

राधा : सच में ? कौन है वो मुझे भी तो बताओ

रीना : है एक , पर उसे कोई और भी पसंद करता है. बहुत करता है. डर्टी हूँ कहीं मेरा प्यार अधूरा न रह जाये.

राधा : ऐसे कैसे रह जाये. अगर तुम सच्चा प्यार करती हो तो तुम्हे ज़रूर तुम्हारा प्यार मिलेगा. वैसे वो है कौन?

रीमा : है एक , अपने कॉलेज में hi. पर अभी मैं उसके बारे में नहीं बता सकती और तुम भी फाॅर्स मत करना . जब टाइम आएगा मैं खुद बाटूंगी और प्लीज किसी से मत कहना.

राधा : नहीं कहूँगी. पर तुम भरोसा रखो तुम अगर दिल से चाहती हो तो तुम्हे तुम्हारा प्यार ज़रूर मिलेगा .

रीमा : पर उस लड़की का क्या जो उसे बचपन से चाहती है? क्या वो मुझे प्यार करने देगी ?

राधा : क्या वो लड़का भी उस लड़की को चाहता है?

रीमा : मुझे लगता है क शायद वो भी उसे चाहता है पर उसे अभी पता नहीं.

राधा : ये क्या बात हुई ? ऐसे भला कैसे हो सकता है ?

रीमा : वैसे hi जैसे तुम किसी को चाहती हो और तुम्हे hi नहीं पता .

राधा : ( हड़बड़ा कर ) ये ये तुम क्या कह रही हो ?

रीमा: वो hi जो सच है. ाचा एक बात बताओ तुम जिसे चाहती हो अगर कोई और लड़की भी उसे चाहती हो तो क्या तुम उसे मसूर करोगी ?

रीमा क इस सवाल पर राधा उसे देखने लगी और दोनों hi कुछ देर खामोश रही .

रीमा : तुमने जवाब नहीं दिया

राधा : मम मैं कैसे मतलब मैं ...

रीमा : सोचो ज़रा क जिस लड़के को मैं चाहती हूँ अगर तुम भी उसे चाहती होती तो क्या तुम मेरे साथ अपना प्यार बाँट लेती या फिर मुझसे नफरत करती ?

राधा: तुम तो मेरी बेस्ट फ्रेंड हो अगर ऐसा होता तो तुम्हे भी पता होता न तो फिर कैसे ऐसा होता?

रीमा : सोचो अगर ऐसा हो जाये तो ?

राधा : मुझे नहीं सोचना और न hi मैं किसी लड़के को प्यार करती हूँ समझी. अब सो जाओ देर हो गयी है.

राधा इतना कह कर करवट लेकर लेट गयी पर रीमा सोच में पद गयी.

रीमा ( मन में ) ऐसा hi है राधा. किस्मत ने हमें एक hi दिल दिया है प्यार करने को और तुम जिसे मन नहीं रही हो मैं उसे महसूस कर रही हूँ. मैं तुम्हारा दिल नहीं दिखा सकती राधा पर हम दोनों में से किसी एक का दिल तो ज़रूर टूटेगा. काश क ऐसा न हो .



रीमा भी आराम से लेट गयी और सोचते हुए सो गयी. वहीँ राधा क दिल में भी हलचल मच गयी थी इस सवाल से. उसे दर लगने लगा था क कहीं सच में अमित किसी और को चाहने लगा तो उसका क्या होगा. उसका दिल घबराने लगा और उसे अमित की और भी यद् आने लगी. उसने चुपके से अपने फ़ोन देखा पर अमित का कोई फ़ोन या मैसेज नहीं था. पिछले 2 दिन से अमित से उसकी बात नहीं हुई थी. इस वजह से राधा का दिल बैठा जा रहा था. अमित क बारे में सोचती हुई वो भी सो गयी .
 
अपडेट 185



सुबह मेरी नींद किसी क दरवाज़ा खटखटाने से खुली.

अमित : कौन है ?

करिश्मा दीदी : मैं हूँ , दरवाज़ा खोल देख टाइम क्या हो गया है और अब तक तू सो रहा है . तेरी तबियत तो ठीक है?

करिश्मा दीदी की आवाज़ सुनते hi मैं होश में आया. मैं रत से बिना कपड़ों में hi था. मेरी नज़र साथ में पड़ी हेमा पर गयी . वो भी बिलकुल नंगी पड़ी थी . उसकी गांड छत की तरफ सर उठाये थी. तभी दीदी की फिर से आवाज़ आयी तो मैं जल्दी से उठा.

करिश्मा दीदी : उठ जा अब , देख 9 बज चुके है मैं तीसरी बार तुझे जगाने आयी हूँ. अब उठ भी जा .

अमित : हाँ हाँ मैं उठ गया हूँ दीदी. आप चलिए मैं 5 मिनट्स में नाहा कर अत हूँ.

करिश्मा दीदी : जल्दी आना.

इतना कह कर करिश्मा दीदी चली गयी. मैंने हेमा को जगाने की कोशिश की तो वो उठ hi नहीं रही थी . तभी मैंने उसकी गांड में 2 उंगलियां एक साथ घुसा दी. हेमा कराहती हुई झटके से पलट गयी.

हेमा : आयी मायआ क्या कर रहे हो सुबह सुबह ? आअह्ह्ह्ह रत भर फाड़ कर चैन नहीं मिला क्या ? एआइइइइ

अमित : टाइम देखो 10 बजने वाले हैं . तुम्हे ऑफिस नहीं जाना क्या?

हेमा : क्याआ ?? दस बज गए. हे भगवन. मैं चली .

अमित : चली कहाँ ? अपने कपडे पहनो पहले.

मैंने हेमा को उसकी निघ्त्य दी तो वो जल्दी से निघ्त्य पेहेन कर भाग गयी. मैं भी जल्दी से नाहा कर नीचे आया तो हॉल में सिर्फ करिश्मा दीदी hi थी. मुझे देख कर वो गुस्से में आ गयी .

करिश्मा दीदी : टाइम देखा तूने ? आज तेरे जीजा जी आने वाले हैं और तू ... तू उनसे मिल कर आज hi वापिस चला जा. मुझे और कुछ नहीं सुन्ना. कहीं तेरी हरकतों की वजह से ....

अमित : मैंने क्या किया दीदी वो आज थोड़ा देर तक सोता रहा उसके लिए सॉरी

करिश्मा दीदी : और देर तक सोता क्यों रहा ? क्या कर रहा था रात भर ? चल खाना खा ले अब.

दीदी ने मेरे लिए नाश्ता लगा दिया और मैं चुपचाप बैठ कर नाश्ता करने लगा. तभी ऊपर से हेमा भी जल्दी जल्दी सीढ़ियां उतारते हुए नीचे आने लगी.

हेमा : गुड मॉर्निंग करिश्मा सॉरी यार मैं आज लेट हो गयी . नाश्ता मैं ऑफिस में कर लूंगी. Ok bye मम्मी को बोल देना.

करिश्मा दीदी क कोई जवाब देने से पहले हेमा गांड मटकती बहार निकल गयी .

करिश्मा दीदी ने फिर मुझे गुस्से से देखा पर बोली कुछ नहीं. मैं भी गर्दन नीची कर क नाश्ता करने लगा. मुझे दीदी क रिएक्शन से शक हो रहा था जैसे उन्हें कोई शक हो ता पता चल गया हो पर खैर मेरा काम भी यहाँ ऑलमोस्ट ख़तम hi था. बस मैं आज की रत आखिरी काम कर क कल वापिस निकलने वाला था.

मेरे नाश्ता करते करते करिश्मा दीदी ने अनुपमा को भी जगा दिया और वो भी वैसे hi निघ्त्य में मुँह हाथ धोकर बहार आ गयी. मुझे सामने देख कर उसके चेहरे पर रौनक आ गयी .

अनुपमा : अरे कैसे हो बीटा ? तुम उठ गए मेरी तो आँख hi नहीं खुल रही थी आज .

अनुपमा की बात सुन कर करिश्मा दीदी फिर से मुझे घूरने लगी .

अमित : गुड मॉर्निंग आंटी , मुझे लगा मैं hi देर से उठा हूँ आज पर यहाँ तो आप भी देर से hi उठ रही हैं.

अनुपमा: हाँ वो रत नींद नहीं आ रही थी तो सुबह hi आँख लगी. वैसे तुम कब उठे.

अमित : बस अभी अभी थोड़ी देर पहले.

अनुपमा: करिश्मा बेटी हेमा ऑफिस चली गयी ?

करिश्मा दीदी : हाँ माँ जी अभी अभी गयी हैं वो. वो भी देर से hi उठी हैं. पता नहीं आज वो कैसे इतनी देर तक सोती रही वर्ण वो तो सब से पहले उठ जाती हैं.

अनुपमा : अरे वो थक गयी थी कल कुछ ज्यादा hi . तू चिंता मत कर. ाचा आज राजीव आने वाला है तो उसकी पसंद का खाना बनवा देना. और बीटा तुम क्या करने वाले हो आज ? आज तुम मेरे साथ चलो शॉपिंग करने.

अमित : जैसा आप कहें.

मेरा जवाब सुन कर अनुपमा क चेहरे पर मुस्कान और बढ़ गयी. उसके बाद अनुपमा ने जल्दी से नाश्ता किया और तैयार हो कर मुझे अपने साथ ले गयी. अनुपमा ने मुझे पहले शॉपिंग करवाई और फिर अपने एक फ्लैट पर ले गयी जहाँ मैंने एक बार अचे से उसकी ठुकाई की.

‘ तुमने कल बलजीत राइ से ऐसे क्यों बात की? तुम्हे नहीं लगता क बिना सबूत क तुमने उसे भड़का दिया है ‘ विक्रम राठौर इस वक़्त अपने ऑफिस में सप ऋतू सिंह क साथ खास बातचीत कर रहे थे कल रत पार्टी में हुई बातों पर

ऋतू सिंह : सर मुझे अपना डाउट क्लियर करना था और मेरा तीर सही निशाने पर लगा

विक्रम राठौर : क्या मतलब?

ऋतू सिंह : सर शुशील कुमार केस में ऐसे अचानक से इतने सरे सुबूत मिलना मुझे पहले hi खटक रहा था. और फिर जब मेरी नज़र अचानक उस केस में पकडे गए ट्रक की रजिस्ट्रेशन पर पड़ी तो मुझे समझ नहीं आया क इतनी बड़ी कंपनी का ट्रक आखिर ऐसे काम में कैसे इस्तेमाल हो सकता है. फिर मैंने सुशिल कुमार क पोलिटिकल कर्रिएर पर छान बीन की तो पता चला क वो कैबिनेट में ओहदा पाने क लिए जद्दोजेहद कर रहा है. ऐसे में उसे केस में फ़साना पूरी तरह से राजनीतिक मसला था. तो सवाल ये था क ऐसा कौन करेगा? मैंने पता लगाया क बलजीत राइ अपने दोस्त नारायण दस को मिनिस्टर बनाने क लिए पैसा और पावर का इस्तेमाल कर रहा है . और फिर मैंने उसके बारे में पता लगाया. उसका क्रिमिनल बैकग्राउंड है सर एंड ी ऍम सूरे क वो अभी भी गलत कामो में इन्वॉल्व है. कल किस्मत से दोनों साथ थे तो मैंने जानबूझ कर उनके सामने वो सब कहा और दोनों क फेस इम्प्रैशन देख कर मेरा डाउट क्लियर हो गया. इस सब क पीछे नारायण फस्स और बलजीत राइ hi है. पर अभी हमारे पास सुबूत नहीं है इस लिए अब देखते हैं क क्या सामने अत है.

विक्रम राठौर : वेल दोने ऋतू जी इसी लिए मैं आप पर इतना भरोसा करता हूँ. अब सुशिल कुमार को इन्फॉर्म कर क उसे भी थोड़ी रहत दे देनी चाहिए.

ऋतू सिंह: थैंक यू सर , वैसे आप उसकी चिंता न करें. वो पहले से hi मेरे टच में हैं. ये सब जानकारी मुझे उन्ही से मिली है. अब तो बस इंतज़ार है कब ये लोग कोई गलती करें और मुझे कोई सुबूत मिले. वैसे मैं उन गवाहों को भी तोड़ने की कोशिश करुँगी ज़रा सख्ती से. पुलिस को बेवक़ूफ़ बनाने की कोशिश कर रहे थे.

विक्रम राठौर : वेल जो भी करो ध्यान से करना और मेरा हमेशा सपोर्ट रहेगा .

ऋतू सिंह: थैंक यू सर. अब मैं चलती हूँ

दोपहर की चुदाई क बाद हमने कुछ देर आराम किया और फिर हम शाम को वापिस आ गए . जब हम घर पहुंचे तो राजीव जीजा जी आ चुके थे. हमारे घर पहुँचते hi वो पहले अनुपमा से मिले और फिर मुझसे.

राजीव : और कैसे हो साले साहब ? करिश्मा ने बताया क तुम उनके चाचा क बेटे हो . पहले कभी तुमसे मिलना हुआ नहीं. कैसा लगा अपनी दीदी का ससुराल?

अमित : मैं ठीक हूँ जीजा जी आप सुनाइए. आपका घर बहुत ाचा है और घरवाले तो और भी अचे. पहली बार आया हूँ पर अब तो आता hi रहूँगा अगर आप चाहेंगे तो.

अनुपमा: क्यों नहीं बीटा. राजीव अमित बहुत hi ाचा है. इसके साथ तो पता hi नहीं चलता कब टाइम बीत जाता है. अब देख शॉपिंग करने गए थे और सारा दिन बहार hi निकल गया पर एक पल क लिए भी हम बोर नहीं हुए. बहुत hi ाचा और संस्कारी है अमित.

अनुपमा तो मेरी तारीफ ऐसे कर रही थी जैसे कोई बीवी अपने पति को बड़ाई करती है. करे भी क्यों न अछि तरह चुदाई जो करवा रही थी मुझसे. वैसे राजीव जीजा ठीक थक hi थे. नार्मल कद काठी क थे और रंग भी फेयर था पर करिश्मा दीदी क मुकाबले काम hi थे. बातों से तो लग रहा था क अचे इंसान हैं पर उनके बारे में जो कुछ मैं जान चूका था उस वजह से मेरी नज़र में वो पहले hi गिर चुके थे तो मैंने भी ज्यादा बात नहीं की.

राजीव : अरे वह भाई तुमने तो मेरी माँ को अपने वाश में hi कर लिया है. वर्ण इन्हे तो कोई पसंद hi नहीं अत. ज़रूर कोई खास बात है तुम में. एनीवे तुमसे मिल कर ाचा लगा. आओ बैठो.

अनुपमा तो जल्दी से अपने कमरे में चली गयी और करिश्मा दीदी मेरे लिए पानी ले आयी. वो मुझे देख कर थोड़ा नर्वस सी हो रही थी. पर मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया. कुछ देर फिर राजीव जीजा जी क साथ बातें की और फिर हेमा भी आ गयी. हेमा क आते hi राजीव क चेहरे पर रौनक आ गयी और आते hi हेमा को उसने गले लगा लिया.

राजीव : कैसी हो दीदी ? कितने दिनों बाद देख रहा हूँ आपको?

हेमा : मैं ठीक हूँ भाई तू सुना कैसा रहा टूर ?

राजीव : बहुत ाचा दीदी, आपको बहुत मिस किया मैंने.

हेमा : मैंने भी ाचा मैं ज़रा चेंज कर क आती हूँ. तुम अमित से मिले न? बहुत hi ाचा है ये. इसके साथ टाइम का पता hi नहीं चला. इसने हमारा दिल लगा कर रखा.

राजीव : क्या बात है यार सब hi तारीफ कर रहे हैं इसकी. अभी माँ भी यही कह रही थी और अब आप भी

हेमा : ( मेरी तरफ देखते हुए ) अब तुझे क्या बताऊँ बस समझ ले क लाखों में एक है ये. तू भी इसे अपना दोस्त बना ले और इसे कह दे क यहाँ अत रहे .

राजीव : सुन रहे हो अमित , मेरी दीदी कह रही है तो मतलब तुम्हे आते रहना होगा.

अमित : ज़रूर जीजा जी जब आप कहेंगे मैं आ जाऊंगा.

हेमा : ाचा मैं अति हूँ थोड़ी देर में.

हेमा ऊपर चली गयी और उसके पीछे मैं भी चेंज करने का कह कर चला गया. मैंने जल्दी से अपने कमरे में शॉपिंग बैग रखे और हेमा क कमरे में चला गया. दरवाज़ा खुला hi था तो मैं सीधा अंदर घुस गया. हेमा मुझे देख कर चौंक गयी.

हेमा : क्या कर रहे हो, राजीव घर पर है वो भी आ सकता है.

अमित : जनता हूँ डार्लिंग मैं यही कहने आया था क आज रत मैं तुम दोनों भाई बहिन का लाइव प्रोग्राम देखना चाहता हूँ .

हेमा : ये तुम क्या कह रहे हो , मुझसे नहीं होगा.

मैंने हेमा की गर्दन एक हाथ से दबाते हुए दूसरे हाथ से उसकी छूट मसल दी.

अमित : मैंने पूछा नहीं बताया है मेरी रंडी. और अगर तुमने मेरी बात नहीं मणि तो तेरी ये छूट कभी मेरा लैंड नहीं ले पायेगी.

हेमा : आअह्ह्ह्ह छोडो मुझे आअह्ह्ह . पर तुम्हे क्या मिलेगा देख कर? वैसे भी अब मुझे उसके साथ मज़ा नहीं आएगा. बल्कि उसे लैंड घुसते hi पता चल जायेगा क अब मेरी छूट खुल चुकी है . कल रत hi तो तुम्हारे साथ किया था मैंने.

अमित : मुझे कुछ नहीं पता मैं बस देखना चाहता हूँ कैसे एक सगी बहिन अपने छोटे भाई से चुदवाती है. और हाँ जो भी करना खुल क करना. ताकि मुझे भी मज़ा आये.

हेमा : पर करेंगे कहाँ ?

अमित : मेरे साथ वाले रूम में करना ताकि मैं बहार बालकनी से सब देख सकूँ.

हेमा : पर अगर राजीव को पता चल गया तो. और करिश्मा भी तो घर में है .

अमित : कुछ नहीं होगा. बस आज रत फाइनल ok

हेमा : एक शर्त पर

अमित : क्या ?

हेमा : राजीव क साथ मुझे अब वो मज़ा नहीं आएगा. इस लिए मैं एक hi बार करुँगी उसके साथ. और फिर तुम्हे मेरी आग ठंडी करनी होगी समझे .

अमित : मंज़ूर है मेरी रंडी, तेरी आगे पीछे दोनों तरफ से फाड़ूंगा. चल मैं चलता हूँ तुम राजीव से सेटिंग कर लेना रात 11 बजे ok.

हेमा : ok

फिर मैं अपने कमरे में आ गया और चेंज कर क नीचे चला गया. राजीव मेरे साथ काफी साडी बातें करता रहा. अपनी माँ बहिन का करिश्मा दीदी क साथ बदला हुआ बेहेवियर वो भी नोटिस कर रहा था पर मेरे सामने उसने इस बारे में बात नहीं की. अंकल भी टाइम पर आ गए थे और सब ने एक साथ डिनर किया. डिनर क बाद सब अपने अपने कमरों में चले गए . मैंने अपने रूम में जाते hi बालकनी क रस्ते जा कर अपने लिए साडी सेटिंग कर ली ताकि लव प्रोग्राम देख सकूँ और अपना टारगेट भी पूरा कर सकूँ. ठीक 11 बजे मैं बालकनी में गया तो पीछे से मेरे रूम का दरवाज़ा कोई खटखटाने लगा. मैंने वापिस आ कर दरवाज़ा खोला तो अनुपमा जल्दी से अंदर आ गयी.

अमित ( मन में ) ये साली पक्की रंडी है इसकी आग नहीं बुझ सकती.

अमित : तुम इस वक़्त यहाँ ? दिन में किया था न आज ?

अनुपमा : ( मेरे गले लगते हुए ) तो क्या हुआ ? अब क्या रत भर मैं ऐसे hi रहूं ? जब तक तुम यहाँ हो मैं हर वक़्त तुम्हारे मुसल से छोड़ना चाहती हूँ. बहुत तदपि हूँ में ऐसी दमदार चुदाई क लिए.

अमित : तो ठीक है उतर ये कपडे और बन जा रंडी . आज तुझे भी सरप्राइज देता होना .

अनुपमा : ( कपडे उतारते हुए ) कैसा सरप्राइज?

अमित : बताता हूँ पहले अपना काम शुरू कर

मैंने अनुपमा को नीचे बिठाया और उसके मुँह में लैंड पेल दिया. अनुपमा तो पहले hi भूखी थी. वो जल्दी से मेरा लैंड चूसने लगी. मैं उसे ऐसे hi अपना लैंड छुआते हुए बालकनी में ले गया . और अपनी जगह पर जा कर खड़ा हो गया.

अनुपमा :( लैंड चूसते हुए ) उम्म्म उम्म्म उम्म्म ाककक ाकककक उम्म्म यहाँ क्यों ले आये हो उम्म्म उम्

अमित : तू बस अपना काम कर फिर बताता हूँ.

मैंने खिड़की से अंदर देख रहा था क तभी रूम का दरवाज़ा खुला और हेमा अंदर आ गयी. आते hi उसने खिड़की की तरफ देखा क्यूंकि उसे पता था मैं वहीँ हूँ. मेरी तरफ उसने फ्लाइंग किश की और अपने बूब्स मसलने लगी.

अमित ( मन में ) पक्की रंडी है साली , रुक जा तेरा भी no. लगता हूँ.

कुछ hi पलों में राजीव कमरे में आ गया . आते hi राजीव ने हेमा को बाँहों में भर लिया और उसे किश करते हुए गांड मसलने लगा. दोनों कुछ बात कर रहे थे पर बहार आवाज़ सुनाई नहीं दे रही थी. राजीव कुछ ज्यादा hi उतावला हो रहा था. उसने जल्दी से अपने कपडे उतर दिए और हेमा को भी नंगा कर दिया. राजीव का लैंड 5 इंच क लगभग hi था और मोटा भी नहीं था. हेमा ने नीचे बैठ कर उसका लैंड थोड़ी देर छठा और फिर बीएड पर लेट गयी. राजीव ने हेमा की टंगे उठाई और अपना लैंड हेमा की छूट में घुसा दिया. हेमा राजीव को उत्तेजित करते हुए रंडी की तरह खुद hi अपने बूब्स मसलने लगी. मैंने भी अनुपमा को उठाया और उसे घोड़ी बना कर एक hi बार में अपना लैंड उसकी छूट में घुसा दिया. अनुपमा चीखे न उस लिए मैंने पहले hi उसका मुँह बंद कर दिया था. कुछ hi पलों में अनुपमा मज़े से छोड़ने लगी. अंदर बेटी चुद रही थी और बहार माँ दोनों साली पक्की रंडियां थी. अनुपमा की नज़र अभी अंदर क नज़ारे पर नहीं गयी थी. मैंने उसके बाल पकड़ कर उसे सीढ़ी किया

अमित : देख रंडी तेरी बेटी तुझसे भी बड़ी रंडी है . अपने hi सेज भाई से कैसे छुड़वा रही है.

अनुपमा ने जब अंदर देखा तो उसकी गांड बिना लैंड क फैट गयी.

अनुपमा : ाःह कक्कक्स हे भगवन ये दोनों की की साली ाः ाःह अपने hi सेज भाई क साथ लगी है आअह्ह्ह ाःह रुको मैं इसे .. आअह्ह्ह

अमित : चुप साली , करने दे उन्हें मज़े कौन सा पहली बार कर रहे हैं . ये तो सैलून से चुदाई कर रहे हैं तुझे आज तक पता नहीं चला ?

अनुपमा: क्या आअह्ह्ह ककक आअह्ह्ह सैलून से कर रहे हैं आअह्ह्ह उफ्फ्फ ज़ोर से करो उम्म्म आह्हः घर में hi अपने भाई से hi ओह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ज़ोर से करो मेरा होने वाला है ज़ोर से ाःह

अंदर राज व् भी शायद होने hi वाला था और वो ज़ोर से धक्के कर रहा था इधर अनुपमा की छूट पानी बहाने लगी. शायद कुछ ज्यादा hi गरम हो गयी थी अपनी बेटी और बेटे को चुदाई करते हुए देख कर. तभी कमरे का दरवाज़ा ज़ोर से खुला और सामने करिश्मा दीदी कड़ी थी. करिश्मा दीदी को देख कर राजीव हेमा क साथ साथ में भी शॉकेड हो गया. मेरे अचानक रुक जाने से अनुपमा की नज़र भी अंदर क सन पर गयी तो उसकी भी गांड फैट गयी.

अनुपमा : करिश्मा ,, हे भगवन अब क्या होगा.

अमित : वही तो मैं सोच रहा हूँ.

करिश्मा दीदी की आँखों में आंसू थे और साथ hi गुस्सा भी. वो गुस्से से तमतमाती हुई अंदर घुसी और पता नहीं क्या क्या बोलती हुई दोनों पर टूट पड़ी. हेमा और राजीव दोनों पूरे नंगे थे. करिश्मा दीदी ने आते hi राजीव क मुँह पर थप्पड़ जड़ दिए और हेमा क भी बाल खिंच कर उसे मरने लगी. मैं करिश्मा दीदी का ये रूप देख कर शॉकेड था. पर ये तो होना hi था. कोई भी औरत ऐसा सन देखेगी तो आप खो hi देगी. तभी राजीव ने करिश्मा दीदी को धक्का दिया और उन्हें मरने को हुआ तो मैं अनुपमा को वहीँ छोड़ कर अपने कपडे ठीक करता हुआ अपने कमरे की तरफ से भगा. जैसे hi मैं उस कमरे में पहुंचा तो राजीव करिश्मा दीदी को थप्पड़ मरने वाला था . मैंने जाते hi राजीव क मुँह पर ज़ोरदार थप्पड़ मारा और वो दूर जा गिरा. हेमा बीएड पर चादर में खुद को छुपा रही थी. मुझे देखते hi हेमा की भी हवा टाइट हो गयी राजीव तो पहले hi ज़मीन पर पड़ा था.

अमित ( गुस्से से ) ख़बरदार मेरी बहिन पर हाथ उठाया तो.

राजीव को एक hi थप्पड़ में मेरी ताकत पता चल गयी थी इस लिए वो उठा hi नहीं. जबकि करिश्मा दीदी फिर से गुस्से में राजीव और हेमा को पीटने लगी. मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की पर वो सुन hi नहीं रही थी.

करिश्मा दीदी : रट हुए ) कमीने कुत्ते मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर दी तूने . शर्म नहीं आयी अपनी बहिन क साथ मुँह कला करते हुए . और तू ज़लील औरत अपने पति को छोड़ कर अपने भाई क साथ चीन .. कितने घटिया हो तुम लोग. मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर दी तुम सब ने मिल कर. मुझे कहते थे क मैं मज़ा नहीं देती . यही मज़ा चाहते थे तुम हाँ .. कुत्ते अब चुप क्यों है? इसी लिए मुझे पीट ता था तू हाँ कुत्ते . अगर यही कुछ करना था तो मुझसे शादी क्यों की थी? अब देख तुम लोगों का क्या हल करती हूँ मैं.. साड़ी दुनिया अब तमाशा देखेगी तुम दोनों का.

तभी अनुपमा भी कपडे पहन कर कमरे में आ गयी और करिश्मा को शांत करवाने क लिए आते hi राजीव और हेमा को एक एक थप्पड़ मर कर उन्हें बुरा भला कहने लगी.

अनुपमा : ये सब क्या है राजीव चीन शर्म नहीं आयी तुझे अपनी बहिन क साथ ये सब. और तू , तू तो बड़ी है न इससे फिर भी तूने ये गलती की . चटक चटक . ( करिश्मा को गले लगा कर ) चुप हो जा बेटी चुप हो जा. मैं इन दोनों को सजा दूंगी . मत रो बेटी

करिश्मा दीदी : गुस्से में) रोयेंगे तो ये दोनों और आप भी कौन सा काम हैं . सब जानती हूँ मैं यहाँ क्या हो रहा है. अब देखना मैं क्या करती हूँ .

गुस्से से करिश्मा दीदी कमरे से निकल गयी.

अनुपमा : अमित बीटा तुम hi कुछ करो कहीं करिश्मा गुस्से में कुछ ... उसे रोको बीटा अब हमारी इज़्ज़त तुम्हारे हाथों में है.

मैं भी तुरंत करिश्मा दीदी क पीछे दौड़ा कहीं गुस्से में वो कुछ कर न दें. दीदी अपने कमरे में घुस गयी थी. मैं भी उनके पीछे पीछे कमरे में घुस गया. दीदी ज़ोर ज़ोर से रोटी हुई कमरे का सारा सामान तोड़ फोड़ रही थी. ममें ने जा कर उन्हें अपनी बाँहों में भर कर गले से लगा लिया.

अमित : शांत हो जाओ दीदी शांत हो जाओ. प्लीज खुद को सम्भालो.

करिश्मा दीदी : दूर हटो , छोडो मुझे .

करिश्मा दीदी मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी. पर मैं उन्हें अपने गले से लगाए था.

अमित : प्लीज दीदी खुद को सम्भालिये सब ठीक हो जायेगा आप खुद को सम्भालिये.

करिश्मा दीदी ( खुद को छुड़ाते हुए ) छोड़ छोड़ मुझे . चत्ताक ( मुझे थप्पड़ मरते हुए ) कमीने तेरे होते कुछ ठीक नहीं हो सकता. तू भी तो उसके जैसा hi है. सब जानती हूँ मैं. तेरी शकल न देखूं इसी लिए घर से भाग कर यहाँ आयी थी और तू यहाँ भी चला आया. चटाक चटक कर दी न बर्बाद मेरी ज़िन्दगी. यही करने आया था न तू यहाँ बोल बोलता क्यों नहीं हाँ चटाक चटाक . सब जानती हूँ मैं पहले मेरी माँ क साथ गुलछर्रे उदा रहा था और अब यहाँ इन माँ बेटी क साथ थूः है तुझ पर. पापा तुझे अपना बीटा समझते हैं और तू .... चीन अपनी माँ सामान औरत क साथ hi .... एक बार भी तुझे शर्म नहीं आयी? माँ क साथ वो सब करते हुए. काम से काम अपने माँ बाप क नाम की लाज रख लेता. शर्म आ रही है मुझे तुझ जैसे घटिया इंसान से बात करते हुए भी. इंसान नहीं तू तो हवस का कीड़ा है. जानवर है तू . जा दूर हो जा मेरी नज़रों से.

करिश्मा दीदी ने गुस्से में मुझे थप्पड़ मरे पर मुझे इतना दुःख नहीं हुआ जितना मुझे उनकी बातें सुन कर हुआ. उनकी बातों से साफ़ ज़ाहिर था क उन्हें मेरे और अपनी माँ क बारे में पता चल चूका है. मेरी आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे. मेरा दिल खून क आंसू बहा रहा था. आखिर वही हुआ जिसका मुझे दर था. करिश्मा दीदी ने मुझे सफाई का एक मौका नहीं दिया. और जो कुछ उन्होंने कहा था वो सब सच भी था. आखिर मैंने रमा आंटी क साथ जो सम्बन्ध बनाये थे एक तरह से वो माफ़ी क काबिल नहीं थे. हालाँकि मेरा इसमें कोई पर्सनल फायदा नहीं था मैंने जो भी किया था उनसे गलत रस्ते से बचने क लिए किया था. पर आज करिश्मा दीदी ने मेरी आत्मा को झकझोर दिया था. मैंने अपने माँ बाप क नाम को ख़राब कर दिया था. काम से काम उनकी नज़र में तो आज मेरी औकात गली क कुत्ते से भी गयी गुज़री हो गयी थी. मेरा दिल तो कह रहा था क अभी मुझे मौत आ जाये पर मैंने जैसे तैसे खुद को संभाला और अपने कमरे में चल गया. मैंने अपना सारा सामान पैक किया. तभी अनुपमा और हेमा मेरे कमरे में आ गयी. राजीव दरवाज़े पर hi सर झुकाये खड़ा था. मुझे सामान पैक करता देख कर वो दोनों भी हैरान थी.

अनुपमा : तुम ये सामान क्यों पैक कर रहे हो? क्या हुआ बीटा क्या कहा करिश्मा ने. कुछ तो बोलो

हेमा : प्लीज अमित कुछ तो बोलो , करिश्मा क्या करने वाली है

अमित : गुस्से में ) मुझे कुछ नहीं पता और बेहतर होगा तुम लोग खुद hi उनसे बात करो. पर ये यद् रखना क उनके साथ कुछ भी बुरा किया तो तुम लोगों का वो हल करूँगा क किसी को मुँह दिखने क लायक नहीं रहोगे. चले जाओ यहाँ से मुझे अकेला छोड़ दो.

अनुपमा: पर बीटा....

अमित : गुस्से में ) सुना नहीं तुमने

मुझे गुस्से में देख कर दोनों माँ बेटी सेहम गयी और चुपचाप कमरे से निकल गयी. मैंने अपना सारा सामान पैक किया और उसी वक़्त वापिस जाने क बारे में सोच लिया. पर फिर मुझे लगा क कहीं करिश्मा दीदी खुद क साथ कुछ कर न लें या फिर ये लोग मिल कर उनके साथ कुछ कर न दें तो मैं रुक गया . खैर रही क करिश्मा दीदी ने ऐसा कुछ नहीं किया. पर मैं साडी रत सो नहीं पाया और बस रोटा रहा. मुझे आज किसी अपने की ज़रूरत थी जिसके गले लग कर मैं रो सकूँ. पर मैं अकेला था. जैसे तैसे रत कटी और सुबह हुई. मैं अपना सामान लेकर बहार निकला. अनुपमा अपने पति और राजीव क साथ हॉल में hi बैठी थी. उन लोगों ने मुझे रोक्न की कोशिश की पर मैं नहीं मन. मैंने अपना सामान गाडी में रखा और ड्राइवर को तैयार होने को कहा. मैं फिर से अंदर गया तो करिश्मा दीदी भी रोटी हुई अपना बैग लेकर सीढ़ियां उतर रही थी.

अंकल : रुक जा बेटी तू कहाँ जा रही है ? ये तुम्हारा घर है. तुम कहीं मत जाओ

करिश्मा दीदी : मैं ऐसी जगह नहीं रह सकती जहाँ इंसान नहीं हवस क पुजारी रहते हैं. शायद आप को अभी तक असलियत पता नहीं है तभी आप मुझे रोक रहे हैं वर्ण खुद भी इस घर से चले जाते .

करिश्मा दीदी की बात सुन कर अंकल से शर्मिंदगी से सर झुका लिया.

अनुपमा : बेटी हमें एक मौका तो दो मैं वडा करती हूँ सब ठीक कर दूंगी

करिश्मा दीदी : बेटी ??? पहले तो खुद hi मुझे घर से निकलना चाहती थी आप और अब बेटी?? ये नाटक मेरे सामने मत कीजिये. आपका सारा खेल अपनी आँखों से देख चुकी हूँ मैं. ( मेरी तरफ देखते हुए) जिसकी वजह से ये प्यार दिखा रही हैं उसी से बात कीजिये.

अंकल : बेटी मैं हाथ जोड़ता हूँ तुम्हारे पाऊँ पड़ता हूँ. प्लीज मेरी इज़्ज़त को ....

करिश्मा दीदी : आप पर तो मुझे तरस आता है . इस घर में आपकी भी औकात मेरे जैसी hi है. आपको भी तो पता होगा क यहाँ क्या कुछ होता है आपकी पीठ पीछे. खैर जाने दीजिये. मुझे आपसे शिकायत नहीं है. पर मैं इन लोगों को कभी माफ़ नहीं करुँगी.

इतना कह कर करिश्मा दीदी अपना बैग लेकर बहार आ गयी और कार में बैग रख कर पीछे वाली सीट पर बैठ गयी. मैं चुपचाप आगे वाली सीट पर बैठ गया और ड्राइवर ने गाड़ी चला दी. पूरा रास्ता गाडी में ख़ामोशी रही न मैं कुछ बोलै न करिश्मा दीदी ने कोई बात की. मैं तो उनसे नज़रें hi नहीं मिला रहा था. वो पीछे बैठी रोटी रही और मैं अंदर hi अंदर खून क आंसू बहता रहा. मैंने मन hi मन एक फैसला कर लिया था .

जैसे तैसे हम वापिस घर पहुंचे तो करिश्मा दीदी रोटी हुई गाडी से उतर कर अंदर भाग गयी. मैंने नौकर से अपनी बाइक की चाबी मंगाई और अपना समां और बैग लेकर बहार से hi निकल गया. क्यूंकि मैं करिश्मा दीदी क सामने नहीं जाना चाहता था.

मोहित क घर से निकलने क बाद मुझे समझ नहीं आ रही थी क मैं कहाँ जॉन. ऐसी हालत में मैं घर नहीं जाना चाहता था . क्यूंकि मैं अपने आप में नहीं था और मेरे घरवाले इस हालत में देख कर परेशां हो जाते. इस लिए मैं एक पार्क में जाकर बैठ गया और अपनी ज़िन्दगी क बारे में सोचता रहा .



पता नहीं कितनी देर तक मैं वहीँ एक जगह बैठा अपनी सोच में डूबा रहा. और मेरा ध्यान तब टूटा जब किसी ने मुझे कंधे पकड़ कर हिलाया. सामने वाले शख्स को देख कर मैं चौंका और फिर मेरी ऑंखें जो कब से भरी पड़ी थी एक डैम से छलक आयीं और मैंने उसे गले से लगा लिया.
 
अपडेट 186



मैं जिसे देख कर खुद को रोक नहीं पाया वो शख्स कोई और नहीं मंजू म थी. पता नहीं क्या वजह थी पर उन्हें देख कर ऐसे लगा जैसे मुझे जिसकी ज़रूरत थी वो यही है. मेरे आंसू खुद hi बह निकले और मैंने मंजू म को कास क गले से लगा लिया . मंजू म भी मेरे गले लग कर मुझे सहलाती रही . मुझे आसपास की न परवाह थी न कोई खबर. बस मैं जी भर क रोना चाहता था क अपना मन हल्का कर सकूँ. करिश्मा दीदी की बातों से मेरे दिल को दर्द हुआ था शायद उसका एहि इलाज था. वहीँ मंजू म मुझे इस तरह देख कर हैरान थी और लगातार मुझे सेहला रही थी और शांत करने की कोशिश कर रही थी. मेरी हालत देख कर उनकी ऑंखें भी भर आयी थी .

मंजू म : अमित !!!! क्या हुआ ?? तुम ऐसे ... यहाँ .... प्लीज बताओ क्या हुआ है ? प्लीज खुद को सम्भालो .

मंजू म मुझे चुप करवा रही थी पर मैं कुछ देर तक बस खुद को हल्का करता रहा. और जब मैं कुछ संभाला तो मैंने मंजू म को खुद से अलग किया.

मंजू म : टेंशन में ) अमित तुम यहाँ कैसे ? क्या हुआ है ? प्लीज मुझे बताओ ? मेरा दिल बैठा जा रहा है . कहीं कुछ ...

अमित : ऑंखें साफ़ करते हुए) कुछ नहीं हुआ है . बस मन भरा हुआ था तो आँखें छलक आयी.

मंजू म : पर तुम यहाँ कैसे तुम तो ... ाचा वो सब छोडो और चलो मेरे साथ .

अमित : पर कहाँ ?

मंजू म : घर और कहाँ , चलो अब उठो.

अमित : पर ....

मंजू म : मैं कुछ नहीं सुनूंगी चलो जल्दी करो.

मंजू म ने खुद hi सारा सामान उठाया और मैंने भी उनकी मदद की. फिर हम पार्क से बहार आये और सामान को मंजू म की कार में रखा.

मंजू म : तुम कार में चलोगे या बाइक से?

अमित : मैं बाइक लेकर आता हूँ .

मंजू म कार में और मैं बाइक पे चल पड़ा. घर पहुँचने तक मंजू म ने कार को मेरे पीछे hi रखा. शायद वो मुझ पर नज़र रख रही थी क मैं कहीं रस्ते कहीं और न निकल जॉन. घर पहुँच कर उन्होंने दरवाज़ा खोला और मुझे अंदर ले जा कर दरवाज़ा बंद कर दिया. मैं बस ख़ामोशी से उनका साथ दे रहा था और मुझे सीधा अपने बैडरूम में ले गयी और बीएड पर बिठा दिया .

मंजू म : क्या बात है ? क्या हुआ है तुम्हे ? कहाँ थे तुम ? तुम तो मोहित की सिस्टर को उसके ससुराल छोड़ने गए थे न , तो क्या हो गया ऐसा क तुम इस हालत में वहां अकेले बैठे थे? और तुम वापिस कब आये कहाँ थे अब तक ?

मंजू म मुझसे सवाल कर रही थी पर मैं उन्हें क्या जवाब देता. मुझे तो बताने में भी शर्म आ रही थी . क्या बताता उन्हें क मैं क्या कर क आया हूँ. और क्या सोचती वो मेरे बारे में. पर सच ये भी था क मैं अपने अंदर का सारा गुबार बहार निकलना चाहता था. मगर ऐसा कोई नहीं था जिसे मैं सब कुछ बता सकता. पर पता नहीं क्यों मंजू म को देख कर मैं खुद को रोक नहीं प् रहा था . मेरा दिल छह रहा था क मैं उन्हें आज अपने बारे में सब सच सच बता दूँ. पता नहीं क्या बात थी मंजू म क उनके साथ मेरा कोई रिश्ता न होते हुए भी मेरा दिल खुद hi उनकी तरफ खिंचा चला अत था जैसे वो मेरी अपनी हो.

मंजू म : चुप क्यों हो बोलते क्यों नहीं कुछ ? प्लीज कुछ तो बोलो मेरा दिल बैठा जा रहा है. क्या हुआ है तुम्हारे साथ? अगर मुझे अपना समझते हो तो बताओ क्या बात है ?

मंजू म की ऑंखें भी नाम होने लगी थी. अपने लिए उनकी आँखों में तड़प देख कर मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने फिर से उन्हें अपनी बाँहों में कास लिया. मंजू म ने भी मेरे गले से लग कर मुझे अपने साथ कास लिया.

अमित : मैं बहुत बुरा हूँ ,, बहुत बुरा. मैं किसी क प्यार क लायक नहीं. मुझे मर जाना चाहिए मैं हवस का पुजारी हूँ कमीना हूँ. अपने माँ बाप क नाम पर कलंक हूँ मुझे जीने का कोई हक़ नहीं.

मंजू म : तड़प कर) नहीं ,, नहीं ,, कौन कहता है तुम बुरे हो ? अगर तुम बुरे हो तो इस दुनिया में कोई ाचा हो hi नहीं सकता. किसने कहा है तुमसे ऐसा मुझे बताओ. मैं उसका मुँह नोच लुंगी. तुम कभी गलत हो hi नहीं सकते. जितने एहसान तुमने लोगों पर लिए हैं इतने तो कोई ज़िन्दगी भर अपनों भी नहीं कर सकता. तुम पर तो तुम्हारे माँ बाप को गर्व होगा. ऐसा चिराग तो लाखों में एक होता है जो अपनी रौशनी से पूरे खंडन को रोशन कर दे. सब कितना मानते हैं तुम्हे तुम्हारी बहने तुम्हारे दोस्त. सब कितना यकीन करते हैं तुम पर और तुम ऐसा सोच रहे हो. ज़रूर कोई तुम्हारा दुश्मन hi होगा जो तुम्हारे बारे में ऐसा सोचे.

अमित : मैंने भरोसा तोडा है अपनों का , मैं किसी क भरोसे क लायक नहीं हूँ. मेरी असलियत आप नहीं जानती. मैं .....

मंजू म : शह्ह्ह्हह्ह ... मुझे कुछ नहीं सुन्ना. तुम्हारी असलियत क्या है क्या नहीं. पर मेरा दिल जनता है तुम कभी गलत नहीं हो सकते. तुम्हारे दिल को मैंने महसूस किया है. तुम्हारी आँखों में मैंने हमेशा सचाई देखि है. मुझे मत समझाओ क तुम कैसे हो कैसे नहीं. अगर भगवन भी आकर मुझे ये कहे क तुम गलत हो तो मैं तब भी नहीं मानूंगी . अब अगर मुझे अपना मानते हो तो मुझे बताओ क आखिर हुआ क्या है.

अमित : क्या आप सच सुन पाएंगी ? अगर आप ने सच सुन लिया तो आपको भी मुझसे नफरत हो जाएगी.

मंजू म : तो रहने दो अगर कोई ऐसी बात है जिसे सुन कर मुझे तुम पर गुस्सा आये तो मैं नहीं सुन्ना चाहती. मेरी नज़र में जो तुम हो सो हो.

अमित : पर ....

मंजू म : मैंने कहा न नहीं तो नहीं. मैं किसी क मुँह से भी वो सब नहीं सुन्ना चाहती जो तुम्हारे खिलाफ हो. फिर चाहे तुम खुद hi क्यों न कहो. तुम क्या हो ये मुझे अछि तरह पता है. अब ये सब छोडो पहले बताओ कब से बैठे थे वहां ? कुछ खाया या नहीं ?

मैंने न में सर हिला दिया.

मंजू म : मुझे लगा hi था. बैठो मैं अभी खाना बनती हूँ

मंजू म जल्दी से किचन में चली गयी और मैं उनके बारे में सोचने लगा. वो मुझे कितना मानती थी क मेरे बारे कुछ भी गलत सुनने को तैयार नहीं थी. ज़रूर पिछले जनम का hi कोई सम्बन्ध था उनका मेरे साथ जो उनको देख कर मुझे अपने पैन का एहसास होता था. मेरे दिल पहले से भरा हुआ था और उनका ये प्यार देख कर मेरा दिल हो रहा था क मैं भी उन्हें उतना hi प्यार दूँ जो मैं उन्हें नहीं दे प् रहा था पिछले कुछ समय से.

‘ अमित कहाँ है मोहित ? कल से उसका फ़ोन क्यों बंद आ रहा है ? मुझे बहुत घबराहट हो रही है. प्लीज मुझे बताओ वो ठीक तो है न.’ कैंटीन में राधा रीमा को साथ लिए मोहित क पास आ कर उससे सवाल कर रही थी. पूछ तो राधा रही थी पर एहि सवाल रीमा क भी थे. राधा और रीमा दोनों hi बेचैन थी एक तो 2 दिन से अमित ने बात नहीं की थी दोनों से और अब उसका फ़ोन बंद था तो दोनों क दिल में अंजना दर बैठ गया था.

कल्पना : हाँ यार मैं भी कल तरय कर रही थी पर उसका फ़ोन बंद है. ऊपर से एक बार भी उसने फ़ोन नहीं किया. पता तो के वो है कहाँ?

मोहित : अरे यार तुम लोग ऐसे hi टेंशन ले रहे हो. दीदी क साथ गया है वो उनके ससुराल उसे क्या होगा. अगर ऐसी कोई बात होती तो अब तक दीदी का hi फ़ोन आ जाता. हो सकता है उसका फ़ोन हर्ब हो गया हो.

राधा : मुझे नहीं पता तुम अभी अपनी दीदी को फ़ोन कर क पता करो.

मोहित : अरे यार तुम ऐसे hi टेंशन ले रही हो.

नेहा : मोहित तुम एक बार अपनी दीदी से बात कर क पता करलो न. क्या हो जायेगा इसमें ?

मीनल : करो न फ़ोन क्यों बहाने बना रहे हो .

मोहित : ाचा लो अभी करता हूँ .

मोहित करिश्मा क फ़ोन पर फ़ोन करने लगा. पर उसे कहाँ पता था क करिश्मा घर आ चुकी है. करिश्मा क फ़ोन पर रिंग तो जा रही थी पर वो फ़ोन नहीं उठा रही थी. मोहित ने 2-3 बार तरय किया पर उसने फ़ोन नहीं उठाया .

मोहित : यार दीदी फ़ोन नहीं उठा रही शायद बिजी होगी.

राधा : घबराते हुए ) ज़रूर कुछ तो हुआ है वर्ण वो ऐसा कभी नहीं करता. मेरा दिल कल से hi घबरा रहा है .

नेहा : राधा हौसला रखो तुम दिल मत छोटा करो. कुछ नहीं होता उसे. मोहित तुम किसी और को फ़ोन कर क पता करो न.

मोहित : हाँ मैं अभी करता हूँ मेरे पास जीजा hi का no. है.

मोहित ने राजीव क फ़ोन पर फ़ोन किया पर उसने भी फ़ोन नहीं उठाया तो राधा रीमा क साथ साथ नेहा और कल्पना का भी दिल घबराने लगा. शीना आज कॉलेज नहीं आयी थी और शिवानी शालू भी इस वक़्त यहाँ नहीं थी.

राधा : देखा दीदी कुछ तो बात है वर्ण कोई तो फ़ोन उठता . भगवन करे वो ठीक हो.

नेहा : तुम दिल छोटा मत करो. देखना उसे कुछ नहीं होगा.

राधा : रीमा क्या तुम घर छोड़ डौगी? मेरा दिल नहीं लग रहा यहाँ.

रीमा : हाँ चल मैं भी तेरे साथ चलती हूँ. और मोहित प्लीज जैसे hi कुछ पता चले मुझे फ़ोन कर देना.

रीमा और राधा दोनों घर चली गयी बाकि क लेक्चर बीच में hi छोड़ कर. कल्पना ऊपर से तो नार्मल दिख रही थी और खुद को हमेशा की तरह स्ट्रांग hi दिखा रही थी पर उसका दिल भी अनजाने दर से कम्प रहा था.

उधर करिश्मा जब घर में आयी तो रोटी हुई सीधा अपने कमरे में घुस गयी और बीएड पर गिर कर रोने लगी. रमा करिश्मा की हालत देख कर सकते में आ गयी. ऊपर से नौकर ने बताया क अमित बहार से hi चला गया है तो उसे भी लगा क ज़रूर कुछ बड़ा हुआ है. वो अपनी बेटी से जानने क लिए उसके पास चली गयी.

रमा : क्या हुआ बेटी तू ऐसे रो क्यों रही है ?

करिश्मा : .....

रमा : तू कुछ बोलती क्यों नहीं ? मुझे बताएगी क्या हुआ है जो तू ऐसे अचानक आ गयी? और अमित कहाँ है वो अंदर क्यों नहीं आया ?

करिश्मा : ....

रमा : कुछ तो बोल आखिर हुआ क्या है? अमित अंदर क्यों नहीं आया ? कहाँ चला गया वो ? ऐसा तो वो कभी नहीं करता

करिश्मा : रट हुए ) हाँ हाँ उसी की तो परवाह है आपको क वो क्यों नहीं आया. पापा से ज्यादा आपको अब वो hi प्यारा है . और किसी की तो अब आपको परवाह है hi नहीं.

रमा : ये तुम क्या कह रही हो?

करिश्मा : रट हुए ) वही जो सच है. अछि तरह जानती हूँ मैं क आपको उसकी इतनी चिंता क्यों हो रही है. पापा की जगह दे दी है न आपके उसको. उस कमीने को आपने ... चटाक

रमा : ये क्या बेहूदगी है ? तुम्हारा दिमाग तो ठीक है ? क्या बकवास कर रही हो तुम.

करिश्मा : रट हुए ) ाचा तो मेरा कहना बकवास लग रहा है और जो आप उस कमीने क साथ करती फिर रही हैं वो क्या है ? शर्म नहीं आयी आपको उस कमीने क साथ वो सब करते हुए? अपनी आँखों से देखा था मैंने उस दिन पार्टी में. कैसे उस घटिया इंसान क साथ आप ... चीन . पहले मुझे लगा था क शायद इसमें आप की गलती होगी. पर नहीं वो hi गन्दी नाली का कीड़ा निकला. पहले यहाँ आपको अपने जान में फसाया और फिर वहां मेरी सास और ननद क साथ ..... चीन . इसी लिए भेजा था अपने उसे ? मुझे तो शर्म आ रही है क मैंने उसे भाई समझा. वो पवन अंकल दामिनी आंटी का बीटा नहीं हो सकता ज़रूर कोई बहरूपिया है. किसी गंदे खून की ... चटाक चटाक

रमा : गुस्से में ) एक लफ्ज़ और न निकलना अपने मुँह से उसके बारे में . एक लफ्ज़ भी नहीं समझी

करिश्मा : रट हुए ) क्यों नहीं क्यों न बोलूं. यही सच है और आप मेरी ज़ुबान बंद नहीं कर सकती. वो गन्दी नाली का कीड़ा है कमीना है हवस का भूखा भेड़िया है . चटाक चटाक चटाक

रमा : चुप हो जा चुप हो जा मुझे जो कहना है कह ले पर उसे कुछ मत कह. तू सचाई नहीं जानती. अगर सचाई जानती तो ऐसा क hi नहीं कहती.

करिश्मा : मारो और मारो मुझे आप . पर मैं चीख चीख कर कहूँगी. सब को बताउंगी क वो क्या है .

रमा : भगवन क लिए चुप हो जा. मत बोल ऐसी बातें जिसके लिए बाद में तुझे खुद पर hi शर्म आये.

करिश्मा : शर्म तो उस बेशरम को आणि चाहिए और आप .. आप उसी कमीने को साइड ले रही हैं. क्या जादू कर दिया है उसने आप पर. आज वो आपको इतना प्यारा हो गया क आप ने अपने पति की जगह उसे दे दी है हाँ .

रमा : रट हुए ) भगवन क लिए चुप हो जा. तू सचाई नहीं जानती. कहीं ,, कहीं तूने उसे तो कुछ नहीं कहा ??

करिश्मा : बरी फ़िक्र है उस कमीने की आपको. मेरा बस चलता तो उसे मर मर क घर से भगा देती. मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर दी उस कमीने ने.

रमा : क्या हुआ है बता मुझे? क्या कहा तूने उसे ?

करिश्मा : वही कहा जो सच है . अगर ज़रा भी शर्म होगी तो डूब मरेगा.

रमा ये सुनते hi घबरा गयी. वो जानती थी क अमित कितना इमोशनल है. और करिश्मा की बातों से साफ़ ज़ाहिर था क उसने ज़रूर अमित को बुरा भला कहा होगा. इसमें अमित की कोई गलती नहीं थी वो तो पहले hi मन कर रहा था. रमा ने hi उसे वास्ता दे कर भेजा था. रमा को अब एहसास हो रहा था क उसकी गलती की सजा बेचारे अमित को मिल गयी. उसने जल्दी से फ़ोन उठाया और अमित को फ़ोन करने लगी पर उसका फ़ोन बंद आ रहा था. अब इस बात को वो कैसे किसी से करे क्यूंकि वो सवालों क जवाब नहीं दे सकती थी किसी क. करिश्मा तो रमा की बात सुनने को भी तैयार नहीं थी. फ़िलहाल रमा को अमित की टेंशन होने लगी और वो जल्दी से कमरे से भागी और ड्राइवर को साथ लेकर निकल गयी अमित को ढूंढ़ने. पर ढूंढें तो ढूंढें कहाँ. फिलहाल शहर में अमित क जाने क लिए उसकी तीन मौसियां hi थी. रमा सड़कों पर इधर उधर देखते हुए बरी बरी से तीनो क घर गयी पर अंदर जाने की हिम्मत नहीं थी उसकी. वो बहार से hi देख कर लौट आयी. क्यूंकि अमित अगर किसी क घर होता तो उसकी बाइक बहार कड़ी होती. अंदर जाकर अगर वो अमित का पूछती तो उसे आगे से hi सवाल पूछा जाता क अमित कहाँ है क्यूंकि वो गया तो उसी की बेटी क साथ और उसी क कहने पर. रमा अंदर hi अंदर घबराती हुई रोटी हुई इधर उधर उसे तलाश करती रही पर वो कहीं न मिला. उसका दिल घबरा रहा था. अब अमित को देखने क लिए उसके गाओं जाना उसके लिए मुश्किल था फिर भी उसने बहाने से गौरी को फ़ोन किया .

रमा : hello , कैसी हो भाभी ?

गौरी : मैं तो ठीक हूँ रमा पर तुम्हारी आवाज़ ... तुम ठीक तो हो न ?

रमा : हाँ हाँ मैं ठीक हूँ भाभी. मैंने तो बस आपका हल चल जानने क लिए फ़ोन किया था.

गौरी : फिर तो आज बड़ा ाचा दिन है हो तुमने मुझे यद् किया. वैसे अमित कैसा है ? 2 दिन हो गए उससे बात नहीं हुई . अभी आया क नहीं?

रमा : ( मन में ) इसका मतलब वो घर नहीं गया? तो कहाँ गया होगा ?

रमा : हाँ वो भाभी वो अभी आया नहीं. करिश्मा क ससुराल में फंक्शन था न तो वो वहां बिजी होगा . जैसे hi मेरी बात होगी मैं उसे कहूँगी क वो आपको फ़ोन करे. ाचा भाभी मैं आपको बाद में फ़ोन करती हूँ.

रमा ने जल्दी से फ़ोन काट दिया . क्यूंकि और कोई सवाल अगर गौरी पूछती तो शायद वो जवाब देते फास जाती. रमा 2 घंटे सड़कों पर घूमती फिरती थक हर कर फिर वापिस आ गयी. जब वो वापिस आयी तो करिश्मा ने गुस्से में फिर से उस पर रंज कास दिया.

करिश्मा : क्यों नहीं मिला न वो कमीना. ाचा है कहीं गटर में जा कर डूब मरे. गन्दी नाली का कीड़ा hi ...... चटाक चटक चटक

रमा : रट हुए ) बंद कर अपनी गन्दी ज़ुबान. अगर उसे कुछ हो गया तो मैं भी खुद को ख़तम कर लुंगी. जानती क्या है तू हाँ .. क्या जानती है ? सच सुन्ना है न तुझे तो सुन. उसने जो कुछ भी किया मेरे कहने पर किया. मेरे कहने पर hi वो तेरे साथ गया था. वो तो मन कर रहा था पर मैंने hi उसे भेजा था. तेरे लिए सिर्फ तेरे लिए ताकि तू अपने ससुराल में खुश रह सके. तू तो तलाक लेना नहीं चाहती थी न पर तेरी तकलीफ दूर करने क लिए वो राज़ी हुआ था वहां जाने और वो सब करने क लिए. उसने कुछ भी किसी क साथ ज़बरदस्ती नहीं किया समझी. वो दोनों पहले hi गलत थी अमित ने सिर्फ उन्हें सुधरने की कोशिश की ताकि तू खुश रह सके. और रही मेरी बात तो सुन . इसमें भी उसने कुछ नहीं किया था सब मैंने hi किया था बल्कि उसने तो मुझे हालत रस्ते पर चलने से बचाया था. अगर वो न होता तो आज मैं बर्बाद हो चुकी होती.

फिर रमा ने रानी और अपने नौकर की सामिष क बारे में बताया और किस तरह अमित ने उसे सहारा दिया.

रमा : तेरे पापा की बेकद्री की वजह से मैं बहक गयी थी. तू भी तो एक औरत है क्या तू नहीं समझती क कैसा लगता है जब पति अपनी पत्नी की तरफ ध्यान hi न दे? ऐसे में मैं तो बर्बाद हो hi गयी थी अगर उस वक़्त अमित न होता. और ये भी सुन ले क उसने कभी भी मुझे कुछ करने को नहीं कहा बल्कि मैं hi उसे कहती हूँ हर बार. वो मेरी इज़्ज़त करता है. कभी कभी hi हम मिलते हैं. और जब तुमने देखा उस दिन भी मैं hi उसे फाॅर्स कर रही थी क्यूंकि मैं बहुत दिनों से तड़प रही थी. और तूने बिना सच जाने उसे इतना कुछ कह दिया. अरे तुझे अपनी बहिन मंटा है वो. इसी लिए वो तेरे साथ गया था ताकि वो तुझे सेफ कर सके. अगर वो हवस का भूखा होता तो क्या तेरे साथ न कुछ करता ? बोल ? क्या किया उसने कुछ तेरे साथ . तुझे छुआ भी ? अरे वो वो लड़का है जिसने अपनी जान पर खेल कर लड़कियों की आबरू बचाई. जा कर पूछ लेना अपने भाई से. तू उसके खून पर सवाल उठा रही है न. ये उसका खून hi है क वो हर किसी क साथ ाचा करता है और तूने उसे इतना ज़लील कर दिया. अगर उसने खुद को कुछ कर लिया तो यद् रखना मैं भी खुद को ख़तम कर लुंगी. क्यूंकि उसने जो किया मेरे कहने पर किया था.

इतना कह कर रमा रट हुए अपने कमरे में भाग गयी और दरवाज़ा बंद कर लिया. करिश्मा वही पत्थर हो गयी अपनी माँ की ज़ुबान से सचाई सुन कर. अब उसकी आँखों क सामने साडी पिक्चर फिर से चलने लगी. कैसे अमित की वजह से hi उसकी सास और ननद 2 दिन में hi बदल गयी थी. जो उसे एक आँख नहीं देखना चाहती थी कैसे दोनों प्यार से उसके साथ पेश आने लगी थी . गाओं में भी उसने नोट किया था क कैसे साडी लड़कियां अमित क साथ इतना क्लोज थी. जिसमे हवस तो बिलकुल भी नहीं थी. हर कोई उसकी तारीफ hi करता था तो ऐसा इंसान गलत कैसे हो सकता है. करिश्मा अब तक गुस्से में थी पर अब अपनी माँ क मुँह से सचाई सुन कर उसे रीलीज़ हुआ क वो कितनी गलत थी. अपने आप करिश्मा की आँखों से फिर से आंसू बहने लगे. उसे अपने गलती का एहसास हो रहा था. पर अब तो सब कुछ हो चूका था. रमा की आखिरी बातें उसने क दिमाग में गूंजने लगी क अगर उसने खुद को कुछ कर किया तो वो भी ज़िंदा नहीं रहेगी. करिश्मा को एक डैम से झटका लगा. उसे अब अमित को लेकर दर लगने लगा. पर अब वो करे भी तो क्या करे . उसने जल्दी से अपना फ़ोन उठाया ताकि मोहित से बात करे इतने में उधर से मोहित की आवाज़ आ गयी .

मोहित : माँ .. मा कहाँ हो .

मोहित की आवाज़ सुन कर करिश्मा दौड़ कर अपने कमरे से बहार निकली. उधर से रमा भी अपने कमरे से निकल आयी . दोनों की हालत देख कर मोहित शॉकेड हो गया.

मोहित : दीदी आप यहाँ ? इस हालत में ? और माँ आप ??

करिश्मा : तेरी अमित से बात हुई ? कहाँ है वो ? बोल जल्दी बता ?

मोहित : शॉकेड) अमित ? पर अमित तो आपके साथ था न? क्या हो क्या रहा है ?

करिश्मा : वो सब बाद में बताती हूँ पहले जल्दी चल उसका पता लगते हैं

मोहित : एक मिनट , दीदी बात क्या है? हुआ क्या है ? और आप यहाँ अचानक से कैसे आ गयी? अमित का कल से फ़ोन बंद क्यों है?

करिश्मा : अमित मेरे साथ hi आया था यहाँ आज सुबह hi. मैंने गुस्से में उसे कुछ कह दिया और वो पता नहीं कहाँ चला गया. मुझे उसकी चिंता हो रही है तू चल जल्दी

मोहित : पर आप ने उसे कुछ कहा hi क्यों ? हुआ क्या है?

करिश्मा : वो वो

रमा : बीटा तू पहले अमित को ढूंढ. करिश्मा क ससुराल में थोड़ी दिक्कत हो गयी थी इस लिए ये सब हुआ. पर पहले तू उसे ढूंढ पता नहीं कहाँ चला गया है.

मोहित : मैं देखता हूँ माँ

रमा : पर किसी को शो मत होने देना क अमित कहीं चला गया है बिना बताये. कोई पूछेगा तो हम क्या जवाब देंगे ?

मोहित : मैं देखता हूँ माँ पर दीदी आपने ये बहुत गलत किया है

करिश्मा : मुझ पर बाद में गुस्सा कर लेना पहले चल उसे ढूंढते हैं

दोनों भाई बहिन जल्दी से निकले और मोहित चल पड़ा हर उस जगह पर चेचक करने जहाँ अमित हो सकता था उसके हिसाब से. मोहित पहले स्टेडियम गया क शायद अमित वहां गया हो पर वहां नहीं मिला. नीरज से फ़ोन पर बात हुई पर उसने भी कहा क उसकी बात नहीं हुई अमित से. फिर वो रजनी मौसी क घर गया. रजनी मौसी मोहित और करिश्मा को देख कर खुश हो गयी.

रजनी : अरे मोहित करिश्मा तुम दोनों अचानक आओ आओ बैठो. कैसे हो तुम दोनों?

करिश्मा : हम दोनों अचे हैं मौसी जी बस यहाँ से गुज़र रहे थे तो सोचा निधि दीदी से मिलते चलें.

करिश्मा रजनी से बात कर रही थी पर उसकी नज़रें अमित को ढूंढ रही थी.

रजनी : क्या बात है करिश्मा बेटी तुम ठीक तो हो ? तुम्हारी ऑंखें ....

करिश्मा : मैं ठीक हूँ मौसी वो आँखों में कुछ पद गया था तो इस लिए . निधि दीदी नहीं नज़र आ रही कहाँ हैं वो ?

रजनी : अरे बीटा वो तो अभी ऑफिस में है. तुम बैठो मैं तुम दोनों क लिए कुछ लती हूँ. पर अमित कहाँ हैं वो नहीं आया ? तुम्हारे साथ hi तो गया था न?

करिश्मा रजनी क इस सवाल से हड़बड़ा गयी पर मोहित ने hi बात को संभाला

मोहित : मौसी वो अपने किसी दोस्त से मिलने गया है .

रजनी : कितन दिन हो गए उसे देखा भी नहीं. साडी दुनिया क लिए टाइम है इसके पास . अपनी मौसी क लिए नहीं है.

रजनी किचन में गयी तो करिश्मा फिर से उठ गयी उसे तो एक पल भी बैठना मुश्किल लग रहा था. किचन से रजनी वापिस आयी तो करिश्मा को खड़े देख कर चौंक गयी

रजनी: अरे तुम कड़ी क्यों हो गयी?

करिश्मा : मौसी हम फिर आएंगे वो क्या है न मुझे निधि दीदी से मिलना था तो वो अभी हैं नहीं तो मैं दुबारा आ जाउंगी. अभी मुझे ज़रूरी काम से जाना है . मैं वापिस आती हूँ .

रजनी : अरे बैठो तो सही .....

करिश्मा और मोहित रजनी क बात करते करते बहार निकल गए. यहाँ से निकल कर अब दोनों रीता मौसी क घर को चल दिए पर वहां भी अमित नहीं था तो रह गया दिव्या मौसी का घर. करिश्मा ने मोहित को दिव्या मौसी क घर चलने को कहा तो मोहित मन करने लगा.

मोहित : दीदी, मैं वहां नहीं जाऊंगा. राधा आज मुझसे अमित क बारे में पूछ रही थी . वो टेंशन में थी और नाराज़ भी . उसके कहने पर hi मैंने आपको और जीजा जी को कितनी बार फ़ोन किया पर आप दोनों ने hi फ़ोन नहीं उठाया. अब अगर हम दोनों वहां गए तो वो बहुत गुस्सा होगी. आप बताती क्यों भी क बात क्या है.

करिश्मा: बोलै न बाद में बताउंगी तू पहले चल. क्या पता अमित वहीँ हो. राधा तो कॉलेज में थी न . हो सकता है वो वहीँ गया हो. तू चल मैं बात कर लुंगी.

मोहित ने न चाहते हुए भी गाड़ी को दिव्या मौसी क घर की तरफ घुमा लिया. मोहित घर क बहार hi कार में रुक गया और करिश्मा ने hi बेल्ल बजायी. दिव्य करिश्मा को देख कर खुश हो गयी और उसे अंदर ले गयी.

दिव्या : आओ करिश्मा कैसी हो तुम? अकेली आयी हो ?

करिश्मा : हाँ वो मैं यहाँ से गुज़र रही थी तो सोचा आपसे और राधा से भी मिल लूँ.

दिव्या : ये तुमने ाचा किया, कितने दिनों बाद आज देख रही हूँ तुम्हे. क्या लोगी ?

दरवाज़े पर किसी क आने का पता चलते hi राधा अपने कमरे से भगति हुई आयी इस उम्मीद में क शायद अमित आया है क्यूंकि और तो कोई अत नहीं था उनसे मिलने. राधा भाग केस जब आयी तो अपनी माँ क साथ करिश्मा को देख कर उसके चेहरे पर ख़ुशी आ गयी क्यूंकि करिश्मा आ गयी है तो अमित भी आ गया होगा. एहि सोच कर वो खिलखिलाती हुई करिश्मा से गले मिली.

राधा : कैसी हैं आप दीदी ? आप तो ससुराल गयी थी और ऐसे अचानक ? ( इधर उधर देखते हुए ) वो कहाँ है आपका बॉडीगार्ड आपके साथ hi गया था न ? कहाँ है आज मैं इसकी अचे से खबर लूंगी . खुद को समझता क्या है. 2 दिन से कोई फ़ोन मैसेज नहीं और कल से फ़ोन भी बंद कर रखा है. कहाँ है वो ?

राधा की बातों से करिश्मा समझ गयी क अमित यहाँ भी नहीं आया. वहीँ दिव्या भी किचन से पानी का गिलास लेकर आयी तो राधा की बातें सुन कर उसे हंसी आ गयी.

दिव्या : अरे उसे आने तो दे तू पहले hi गुस्सा कर रही है. हाँ करिश्मा बेटी वो है कहाँ? नाराज़ तो मैं भी हूँ उससे एक बार भी फ़ोन नहीं किया उसने. है कहाँ वो?

करिश्मा : वो .. वो किसी से मिलने गया है . मुझे भी बता कर नहीं गया

करिश्मा ( मन में ) हे भगवन ये मुझसे क्या हो गया कहीं सच में hi उसने खुद को कुछ कर लिया तो ? नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता . शायद वो घर गया हो.

राधा : क्या? किस्से मिलने चला गया ? और कौन है जिसके पास वो जा सकता है? उसका फ़ोन क्यों बंद है . दीदी सच सच बताइये उसे कुछ .....

करिश्मा : नं नहीं नहीं आ ऐसा कुछ नहीं है . वो वो शायद उसका फ़ोन ख़राब हो गया होगा

रद्द की आँखों में पानी आ गया था और उसके जैसा hi हल दिव्या का भी हो गया था एक hi पल में. करिश्मा की घबराहट उसने भी देख ली थी. एक अनजान दर अब दिव्या को भी लगने लगा था. इतने में राधा क कमरे से रीमा भी निकल कर आ गयी. वो राधा को सँभालने लगी. हालाँकि उसकी भी हालत अलग न थी

दिव्या : क्या बात है करिश्मा तुम कुछ छुपा रही हो ? कहाँ है अमित ? सच बताओ ?

करिश्मा : अरे मौसी आप ऐसे hi टेंशन ले रही हो . उसे कुछ नहीं हुआ. मैं अभी पता करती हूँ क वो कहाँ है. बता कर भी नहीं गया नहीं तो मैं आपको बता देती. मैं अभी पता करती हूँ. उसे लेकर आती हूँ मैं अभी आयी

करिश्मा से दिव्या का सामना करना मुश्किल हो रहा था इस लिए वो जल्दी जल्दी निकल गयी . पर दिव्या का शक और भी बढ़ गया. ऊपर से राधा की हालत भी वो समझ रही थी

राधा : देखा माँ , ज़रूर कोई बात है वो ऐसा कभी नहीं करता . मुझे दर लग रहा है माँ कहीं उसे ... कुछ तो हुआ है उसके साथ मुझे कल से hi लग रहा था. मैंने कितनी बार फ़ोन किया पर उसका फ़ोन नहीं लगा.

रीमा : हो सकता है उसका फ़ोन hi ख़राब हो और वो फ़ोन ठीक करवाने गया हो.

राधा : तो बता क जा सकता था न ज़रूर कुछ हुआ है दीदी छुपा रही थी.

दिव्या : तुम दिल छोटा मत करो . कुछ नहीं होगा उसे. भगवन उसके साथ कुछ गलत नहीं कर सकता . तुम अंदर जाओ अपने कमरे में.

दिव्या ( मन में ) दीदी से पूछती हूँ कहीं वहां तो नहीं गया.

दिव्या ने जल्दी से रीता को फ़ोन लगाया और फिर रजनी को पर दोनों जगह से एक hi जवाब मिला. दिव्या की धड़कन भी अब बढ़ गयी. उसे भी बेचैनी होने लगी. फिर उसने गाओं भी फ़ोन किया पर अमित वहां भी नहीं था. ये सुनते hi दिव्या क तो पाऊँ क नीचे की ज़मीन खिसक गयी. अब उसे समझ नहीं आ रहा था क वो कहाँ जाये और किस्से पता करे. कुछ hi पल में घर में मातम सा छ गया. राधा क साथ साथ रीमा की हालत भी ख़राब हो गयी थी पर वो राधा को सँभालने क लिए खुद को मजबूत दिखा रही थी.

दिव्या: हे भगवन उसे कुछ मत होने देना . चाहे तो मेरी जान ले लेना पर उसे कुछ मत होने देना. मैं दामिनी को क्या मुँह दिखाउंगी .

दिव्या अपने कमरे में अकेली बैठी आंसू बहा रही थी. दूसरे कमरे में राधा का भी यही हल था. रीमा क लाख तसल्ली देने पर भी वो खुद को रोक नहीं प् रही थी.

उधर करिश्मा को भी समझ नहीं आ रहा था क अब कहाँ जाएँ. मोहित भी परेशां हो गया था. उसको भी समझ नहीं आ रहा था क अब और कौन सी जगह है क जहाँ अमित हो सकता है. इधर उधर घूमने क बाद वो वापिस घर लौट आया .

रमा : अमित का कुछ पता चला?

मोहित : नहीं माँ वो कहीं नहीं है.

रमा मोहित का जवाब सुनते hi वहीँ धड़ाम से सोफे पर गिर गयी. उसकी अंकों से आंसुओं की धरा बहने लगी.

मोहित : क्या हुआ माँ आप ठीक तो हैं? होश में आओ माँ . बात क्या है .

करिश्मा: माँ खुद को सम्भालिये. कुछ नहीं होगा उसे . वो आ जायेगा. मोहित पापा को फ़ोन लगाओ. उन्हें कहो क वो पता लगाएं किसी से कह कर.

मोहित: गुस्से में ) पर पापा से क्या कहोगी दीदी? अभी तक तो आपने मुझे भी कुछ नहीं बताया . आखिर ऐसा क्या हो गया है क अमित ऐसे चला गया. मुझे सब सच सच बताओ.

करिश्मा : प्लीज भाई तुझे मेरी कसम अभी कुछ मत पूछ . मैं बाद में सब बता दूंगी पर पहले किसी तरह अमित को ढूंढ.

मोहित एक बार फिर से घर से निकल गया अमित को ढूंढने. करिश्मा अपनी माँ को सँभालने की कोशिश करने लगी. वो रो रो कर अपनी गलती क लिए माफ़ी मांग रही थी रमा से. पर रमा रोटी हुई फिर से अपने कमरे में चली गयी. जैसे जैसे वक़्त बीत रहा था सबकी हालत ख़राब होती जा रही थी.

मंजू म ने खाना बनाने क बाद अपने हाथों से मुझे खाना खिलाया. वो एक माँ की तरह मेरा ख्याल रख रही थी. मैं रत से hi सोया नहीं था. इस लिए जब उन्होंने मुझे अपनी गॉड में सर रख कर लेटने को कहा तो एक पल में hi मुझे नींद आ गयी. अपनी साडी परेशानिया भूल कर मैं सुकून की नींद सो गया.



मंजू (मन में ) तुम कभी गलत नहीं हो सकते. जो दूसरों को हमेशा सहारा देता है वो कभी गलत हो hi नहीं सकता . तुम्हारे लिए तो मैं खुद को भी कुर्बान कर सकती हूँ. पता नहीं क्यों पर मुझे हमेशा एहि लगता है क जैसे तुम मेरे अपने hi हो हमेशा से.
 
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