Adultery Manhoos se mahan tak - Page 3 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 17

सब की ऑंखें नाम थी सिवाए कामिनी क

वो तो मन में खुश हो रही थे क ाचा हुआ मनहूसियत ताली

घर क आँगन में सबका रोना धोना चल hi रहा था क दरवाज़ा खुलता है और एक शख्स अंदर अत है, सबकी निगाहें उसकी तरफ मुद जाती हैं

अब आगे-

दरवाज़े पर खड़े शख्स को देखते hi गौरी उसकी तरफ दौड़ती है और जाते hi 3-4 थप्पड़ उसके चेहरे पर मर देती है

गौरी- कहाँ चला गया था बोल ? तुझे किसी की परवाह है क नहीं बोल कहाँ था? तुझे ज़रा भी ख्याल नहीं आया क तेरी माँ का क्या होगा?

तूने कभी नहीं सोचा क तेरे बगैर तेरी माँ जियेगी या मर जाएगी बोल?

जी हाँ ये शख्स अमित hi था

अमित: मैं आपके बिना और कहाँ जा सकता हूँ माँ? मेरी दुनिआ आप से hi शुरू आप पर hi ख़तम हो जाती है, आप तो ममता की मूरत हैं जिसने मुझ जैसे मनहूस को गले लगा लिया वर्ण मेरा वजूद तो इस दुनिआ में रहने क काबिल भी नहीं, मुझे माफ़ कर दीजिये माँ

अमित क मुँह से निकला एक एक शब्द उसके दिल का दर्द बयां कर रहा था विजय और अजय तो समझ गए थे मगर गौरी का तो कलेजा hi छन्नी हो गया ये सब सुनकर

आज पहली बार अमित क मुँह से ऐसे शब्द निकले थे

गौरी से बर्दाश्त नहीं हुआ

गौरी: ये सब क्या कह रहा है तू? किसी ने कुछ कहा क्या तुझे? मुझे बता मैं उसकी जान ले लुंगी, तू मेरा बीटा है तेरे से hi तो मेरा संसार है बोल किसने तुझे बोलै क्या कहा तुझे बता मुझे

अमित की आँखों में आंसू थे जिसे देखकर गौरी से बर्दाश्त नहीं हो रहा था आखिर अमित hi तो उसका सबकुछ था हमेशा उसे अपने सेज बेटे क जैसे hi तो प्यार किया था उसने बल्कि वो तो ये भूल hi गयी थे क अमित उसका सागा बीटा नहीं है

विजय जनता था क गौरी अपने आंसुओं से अमित से सच उगलवा लेगी और अगर सचाई बहार आ गयी तो पता नहीं क्या कर बैठेगी, इस लिए वो जल्दी से आगे बढ़ता है

विजय: कहाँ चला गया था मेरे बचे काम से काम एक बार बता तो देता तूने हमारे बारे में एक बार भी नहीं सोचा अजा मेरे गले लग जा

इतना कह कर अमित को गले लगा लेता है और फिर कहता है

चल पहले अंदर चल अभी तक किसी ने खाना तक नहीं खाया तेरे इंतज़ार में चल पहले खाना खले

अमित की माँ जाओ पहले अपने बेटे और हमारे लिए खाना लगाओ कब से भूखा होगा

इतना कह कर विजय अमित को गले लगाए अंदर ले चलता है और गौरी भी खाना लगाने की तैयारी करने लगती है कामिनी भी उसके साथ थी मगर किसी का ध्यान दीपिका की तरफ नहीं गया था जो एक तरफ कड़ी अमित की बातों को सोच रही थी और उसकी आँखों से बहते आंसुओं से अंदाज़ा लगा रही थी उसकी तकलीफ का

विजय अमित से अभी कोई बात नहीं करना चाहता था इस लिए उसने चुपचाप सबको खाना खाने दिया और गौरी को भी समझा दिया क अमित को रेस्ट करने दो हम कल बात करेंगे उससे

खाना खाने क बाद सब अपने कमरों में चले जाते हैं

गौरी को नींद नहीं आ रही थी उसके दिल को अमित क मुँह से निकले शब्द अभी भी दुखी कर रहे थे इस लिए वो अमित क कमरे में जाने क लिए उठती है, विजय भी जनता था इस लिए वो भी गौरी क जाने क कुछ देर बाद पीछे पीछे चला जाता है

गौरी फिर से जानने की कोशिश करती है मगर विजय फिर से गौरी को समझा बुझा क ले जाता है

कमलेश घर नहीं लौटा था मगर इस बात की किसी को टेंशन नहीं थी ये उसकी पहले की आदत बन गयी थी मगर दीपिका को अमित क दिल का दर्द महसूस हो रहा था इस लिए वो सब क सोने क बाद अमित क पास चली जाती है

कमरे में आके दीपिका दरवाज़ा बंद कर लेती है अमित करवट क बल ऑंखें बंद कर क सो रहा था

दीपिका: क्या मुझे भी अपने दिल क ज़ख़्म नहीं दिखाओगे? क्या तुम्हारे दिल में इतनी भी जगह नहीं मेरे लिए?

अमित फिर भी सो रहा था मगर दीपिका जानती थी क वो ऐसे हालत में सो नहीं सकता भला कोई कैसे इतने दर्द क बाद सो सकता है

दीपिका अमित को पकड़ कर सीधा लिटा देती है और उसके होंठो को चूम लेती है

दीपिका: तुम्हे पता है न क मैं अब तुम्हे hi अपना सबकुछ मानती हूँ और सिर्फ तुम्हारे लिए hi इस घर में हूँ, तुमने hi तो रोका था न उसदिन मुझे वर्ण मैं ये घर क्या ये दुनिआ hi छोड़ देती मगर लगता है तुम मुझे उतना प्यार नहीं करते

इतना सुनते hi अमित अपनी ऑंखें खोल लेता है , उसकी ऑंखें रोने से अभी भी लाल थी मगर दीपिका की बातों से उसका दिल भर आया और उसने उठते हुए दीपिका को गले लगा लिया

अमित: ऐसा मत कहिये ममी जी मेरे दिल की गहराईयों में अगर झांक कर देखेंगी तो आपको वहां आपके और माँ क सिवा और कोई नहीं है

दीपिका: तो बता क्या बात है जो तुझे इतना दुःख दे रही है बता मुझे आखिर क्या हुआ है और तू कहाँ चला गया था

अमित दीपिका क सामने अपना दिल खोल देता है और बता देता है जो भी आज हुआ

दीपिका को भी बहुत दुःख होता है और कमलेश क लिए उसके दिल में नफरत बाद जाती है

दीपिका: एक आदमी की वजह से तू कितने लोगो का दिल तोड़ रहा था तुझे ये ख्याल नहीं आया, देखा था क्या हालत हो गयी थी दीदी की और मेरा क्या होता मैं उसी पल खुद को ख़तम कर लेती आखिर तुझसे hi तो अब मेरी दुनिआ है

अमित : मुझे माफ़ कार्डो ममी जी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था बस इसीलिए अकेला तन्हाई में बैठकर दिल को हल्का कर रहा था

दीपिका : अगर दोबारा ऐसा किया तो सोच लेना तेरे पीछे न मैं ज़िंदा रहूंगी न दीदी

अमित : मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा ममी जी

दीपिका: तेरे मां को तो अब सबक सीखना hi पड़ेगा एक रंडी क लिए तुझपर हाथ उठाया उसने तू वो वीडियो बड़े भैया को दिखा नहीं तो मुझे दे मोबाइल मैं दीदी को बताती हूँ और वो भैया को बता देंगी इसे घर से निकलवा देते हैं तभी इसकी अकाल ठिकाने आएगी

अमित : नहीं ममी जी ऐसा किया तो मां हमें hi गलत समझेंगे और मीणा क पास चले जायेंगे और फिर आपका क्या होगा आप पर भी तो सवाल उठ सकते हैं मैं ऐसा बिलकुल नहीं करूँगा,

मगर मां ने मेरा एक भला तो किया मुझे ये बता कर क मेरी एक और फॅमिली है

और अब आप बताएं क आप क्या जानती हैं मेरी दूसरी फॅमिली क बारे में

दीपिका: क्या ? तुम्हारी दूसरी फॅमिली? मगर मैंने तो आजतक बिलकुल नहीं सुना किसी क भी मुँह से

अमित : हम्म तो अब इसका पता लगाना होगा आखिर क्यों मुझे आजतक बताया नहीं गया क्या वजह है इसके बारे में, माँ बाबा ने भी कभी ज़िकर क्यों नहीं किया और न hi कोई कभी मुझसे मिलने आया

दीपिका: मुझे नहीं लगता तुम्हे इस सब को जानना चाहिए अगर दीदी और भैया ने ये बात तुमसे छुपाई है तो इसका एक hi मतलब है क वो लोग अचे नहीं होंगे वर्ण कभी न कभी कोई तो अत और मैंने आजतक न किसी को देखा न किसी से सुना

अमित और दीपिका देर तक बातें करते रहे साडी रत ऐसे hi काट गयी दीपिका ने एक पल भी अमित को उदास नहीं होने दिया और उसे अपनी बाँहों में लेकर बैठी रही और ऐसे hi दोनों एक दूसरे की बाँहों में सो गए,

आज हकीकत में दीपिका ने अमित क दिल क ज़ख्मो को छू लिया था , प्यार भरी बातों से जो दिल क घावों पर मलहम लग सकता है वो सब से परे है

साडी रत दोनों चिपके रहे मगर एक बार भी दोनों क दिल में वासना रत्ती भर भी न जगी

सुबह दोनों देर तक सोते रहे मगर दीपिका अमित से पहले उठकर अपने कमरे में चली गयी वो जानती थी क दीदी कमरे में आ सकती है

गौरी सुबह उठकर नहा कर चाय बना क अमित क कमरे में जाती है जहाँ वो अभी भी सो रहा था

गौरी को रत भर उसकी चिंता सताती रही और सुबह भी भगवन का नाम लेने से पहले वो अमित क पास चली गयी

अमित को सोते हुए देखकर उसके मन को तसल्ली हो रही थी आखिर था तो वो गौरी क कलेजे का टुकड़ा क्या हुआ जो उसने उसे पैदा नहीं किया मगर पला तो सगी माँ से भी बढ़कर है

गौरी अमित क पास बैठ जाती है और उसके सर पर प्यार से हाथ फिरने लगती है

विजय भी तैयार हो कर अमित क कमरे में आ जाता है और गौरी को देखकर वहीँ ठहर जाता है

विजय: अब उठा भी दो उसे क यूँही बैठी रहोगी उसके पास दिन निकल आया है और आज ये कसरत करने भी नहीं गया

गौरी: सोने दीजिये मेरे बेटे को कल क्या कुछ हुआ भूल गए आप, क्या बीती होगी इसके दिल पर कितना दुःख हुआ होगा इसे पता नहीं कौन वो दुश्मन है जो मेरे मासूम से बचे को इतना दुःख दे रहा है

विजय: वो मैं देख लूंगा अभी इसे जगाओ और जल्दी तैयार करो मैंने शहर जाना है और अमित को भी मेरे साथ जाना है

गौरी: आप जाइये जहाँ जाना है मैं इसे कहीं नहीं भेजूंगी

विजय: बच्चों जैसी बात मत करो कागज़ी काम है इसका साथ जाना ज़रूरी है चलो जल्दी करो

इतना कहकर विजय वापिस निचे चला जाता है

गौरी अमित को जगती है , अमित गौरी को देखकर खुश हो जाता है और गौरी उसे बताती है क जल्दी तैयार हो जा तुझे बाबा क साथ शहर जाना है

अमित जल्दी से तैयार हो कर निचे आ जाता है और फिर नाश्ता कर क विजय क साथ निकल पड़ता है

विजय अमित को गाओं क बहार लेजाकर खली जगह में रुकने का कहता है और उससे कल जो भी हुआ सब पूछता है

अमित छिपाने क कोशिश करता है मगर विजय तो अजय से सब जान चूका था इस लिए अमित को भी सच बताना पड़ता है

विजय: तुम मेरी एक बात सुनलो तुम मेरे बेटे हो कोई कुछ भी कहे मेरा जो है सब तुम्हारा है मैं आज hi अपने हिस्से की साडी जायदाद तेरे नाम करवा दूंगा और जो तुझे मनहूस कहता है मेरा उससे कोई रिश्ता नहीं हम ये घर छोड़कर अलग घर में रह लेंगे

अमित : नहीं बाबा आप ऐसा नहीं करेंगे छोटे मां गुस्से में कुछ कह भी गए तो क्या हुआ वो बड़े हैं इतनी स बात क लिए क्या आप रिश्ते ख़तम करदेंगे फिर तो वाक़ई में मैं मनहूस hi तो कहलाऊंगा जो मेरी वजह से घर टूट गया

आप ऐसा कुछ नहीं करेंगे आपको मेरी कसम, रही बात मां की तो मैं जनता हूँ उन्हें भी अपनी गलती का एहसास ज़रूर होगा

विजय : कितना ाचा है तू और एक वो है जिसे हीरे की पहचान hi नहीं है बस अपने आवारा दोस्तों क साथ मौज उडाता फिरता है

अमित : बाबा आपने मुझे कभी नहीं बताया क मेरी कोई और फॅमिली भी है? आपने कभी मुझे इस बारे में क्यों नहीं बताया

विजय: क्या तुझे हमारे प्यार में कोई कमी लगने लगी है? कमलेश की वजह से तू हमारे प्यार पर शक करने लगा है ?

अमित : नहीं नहीं बाबा अपने और माँ ने जितना मुझे प्यार दिया है कोई सेज बेटे को भी इतना प्यार नहीं देता होगा

विजय: ख़बरदार जो खुद को पराया समझा तो भगवन जनता है मैंने हमेशा तुझे अपना सागा बीटा hi समझा है

अमित : मगर मैं जानना चाहता हूँ क मेरी फॅमिली में और कौन कौन है? मैं उनसे मिलना चाहता हूँ क्या आप मुझे उनसे नहीं मिलवाओगे?

विजय: वो लोग इस काबिल नहीं क उनका ज़िकर भी किया जाये, अगर हमने तुम्हे नहीं बताया तो तुझे समझ जाना चाहिए क वो अचे लोग नहीं हैं

और तू अब उनका ज़िकर दोबारा नहीं करना , हमारे लिए वो मर चुके हैं और तू भी उनके लिए मर चूका है आयी बात समझ में अब इसके बाद और कोई बात नहीं होगी अब चल शहर और एक बात , भूलकर भी अपनी माँ से ज़िकर मत करना वर्ण उसके दिल को कितनी ठेस लगेगी तुझे नहीं पता, अब चल

अमित चुपचाप मोटरसाइकिल चलने लगता है, विजय अमित को तहसील ले जाता है जहाँ वो अपनी जायदाद क कागज़ात वकील से मिलकर तैयार करने को कहता है

विजय साडी जायदाद को तीनो भाइयों में बराबर बाँटने को कहता है और अपना हिंसा अमित क नाम करने को बोल देता है

अमित विजय को मना करता रहता है मगर विजय नहीं सुनता

शाम होते दोनों घर लौट एते हैं गौरी अमित को अपने कमरे में ले जाती है और उससे बातों में जानने की कोशिश करती है मगर विजय और अमित बातों को घुमाकर कल की बात पर पर्दा दाल देते हैं

फिर रत का खाना कहते हैं सब आज कमलेश फिर घर नहीं लौटा था

अमित को ये बात खटक रही थी

दरअसल कमलेश और अमित क खेतों से आने क बाद अजय ने रघु को बुलाकर फ़ौरन उसे अपने परिवार समेत उनके गाओं से निकल जाने को बोलै था और न जाने पर उसको अंजाम भुगतने की धमकी दी थी बेचारा हाथ जोड़ता रहा मगर अजय नहीं मन क्यूंकि उसे भी मीणा से नफरत हो गयी थी

बहरहाल रघु मीणा को लेकर गाओं से चला गया था

रत को जब कमलेश मीणा क घर की तरफ गया तो वहां उसे न पाकर जब उसने पता किया तो उसे अजय पर बड़ा गुस्सा आया और सबसे ज्यादा अमित पर

कमलेश तो बचे क मोह में अँधा होकर मीणा को ढूंढ़ता फिर रहा था इसी लिए वो घर नहीं आया था

रत को फिर से दीपिका अमित क पास hi रूकती है मगर दोनों प्यार भरी बातों क इलावा कुछ नहीं करते

अगले दिन अमित रूटीन से अखाड़े और फिर स्कूल चला जाता है मगर जाने से पहले राजू को कमलेश मां का पता करने को बोल देता है

वहीँ विजय और अजय भी कमलेश का पता करते हैं

स्कूल से आकर अमित राजू को साथ लेकर कमलेश को ढूंढ़ने जाता है विजय और अजय को भी अभी तक कमलेश नहीं मिला था

किस्मत से गाओं क बहार जाने वाले रस्ते पर hi अमित को कमलेश मिल जाता है जो गुस्से में था

कमलेश: आखिर तूने कर्ली न अपने दिल की तूने और अजय ने मिलकर मीणा को निकल दिया न, मैं भी उसे ढूंढ़कर रहूँगा और फिर देखता हूँ सबको

अमित : ये आप कैसी बातें कर रहे हैं मां जी, आप को पता भी है वो औरत क्या कर रही थी

कमलेश: जुबान बंद कर अपनी ख़बरदार एक लग्ज़ भी उसके खिलाफ बोलै तो

अमित : मां जी आपको मुझ पर यकीन नहीं है न मगर आप को मेरी कसम आप एक बार ये देख लीजिये उसके बाद आप जो कहेंगे वो मैं करूँगा

कमलेश: मैं क्यों देखूं मुझे तेरी कोई बात नहीं सुन्नी

अमित: आपको ममी की कसम आपको बाबा की कसम प्लीज आप एक बार अपनी आँखों से देख लीजिये

कमलेश अपने गुस्से को काबू करते हुए अमित क हाथो से मोबाइल पकड़ लेता है जिसमे अमित ने मीणा की वो वीडियो प्ले करदी थी जो उसने अजय को दिखाई थी

कमलेश जैसे जैसे वीडियो देखता जाता है उसका खून खौलने लगता है और गुस्से से उसकी आँखों में खून उतर अत है

कमलेश: ये सब तेरी कोई चाल है मीणा ऐसा नहीं कर सकती मैं तेरा खून पि जाऊंगा

कमलेश मोबाइल को फेंकने लगता है मगर अमित उसका हाथ पकड़ लेता है

अमित : अभी लगता है आपको यकीन नहीं हुआ रुकिए एक और सबूत दिखता हूँ

फिर अमित दूसरी वीडियो चला देता है जिसमे मीणा उसके कजिन क साथ चुदाई कर रही थी और कमलेश क बारे में बातें कर रही थी क कैसे वो चुटिया बना रही थी कमलेश को

मीणा की बातें सुनकर कमलेश को झटका लगता है और वो अपना सर पीटने लगता है

कमलेश: हरामज़ादी मेरे साथ खेल खेल रही थी मैं इस रंडी क टुकड़े टुकड़े कर दूंगा

अमित : मां जी जो हुआ भूल जाइये गलती आपकी भी है जो आप अपना घर छोड़कर उसके चक्कर में पद गए

आखिर क्या कमी है ममी में? कहाँ ममी और कहाँ ये गन्दी औरत, आपने एक पल भी न सोचा क्या होगा ममी का क्या बीतेगी उनपर और परिवार की मन मर्यादा का क्या होगा

आपने सब कुछ देव पर लगा दिया

कमलेश को पछतावा होने लगता है क कैसे वो अँधा होकर सबकुछ उस औरत पर लुटाने चला था जो क रण्डिओं से भी बढ़कर थी

कमलेश: सच में मुझसे बड़ी गलती हो गयी, मेरा दिमाग ख़राब हो गया था मगर अब मैं सब ठीक कर दूंगा , मैं दीपिका से माफ़ी मांगूंगा मैंने उसका दिल दुखाया है

अमित : बिलकुल मां जी और एक बात आप सिर्फ इस बात पर उस गन्दी औरत क झांसे में आ गए थे न आप बाप बनना चाहते हैं तो आपकी वो इच्छा भी पूरी हो सकती है आप ममी का इलाज करवाइये डॉ ने बोलै है क ममी माँ बन सकती है

कमलेश: बिलकुल मैं यही करूँगा मैं आज hi उसे डॉ क पास लेकर जाऊंगा

मगर सबसे पहले तू मुझे माफ़ करदे मैंने कल तुझसे बड़ी बदतमीज़ी करदी और तुझपर हाथ उठाया जबकि तू मेरा hi भला सोच रहा था तूने सबकुछ पता होते हुए भी किसी को बताया नहीं

मुझे माफ़ करदे अमित मैं तेरा गुनहगार हूँ

अमित : ये आप क्या कह रहे हैं मां जी आपने मुझे इतना प्यार दिया है क उसके आगे ये तो कुछ भी नहीं वैसे भी माँ बाप और बड़े बुज़ुर्ग हाथ उठा भी दे तो इस बात का गुस्सा नहीं करना चाहिए

कमलेश अमित को गले लगा लेता है

कमलेश: तू कितना ाचा है कितने बड़ा दिल है तेरा वाकई भाभी ने तुझे सबसे अचे संस्कार दिए हैं

फिर दोनों मां भांजा घर को चल पड़ते हैं विजय और अजय भी घर लौट ए थे वो दोनों कमलेश और अमित को साथ मुस्कुराता देखकर समझ जाते हैं क अब सबकुछ ठीक है इसलिए वो भी कोई बात नहीं करते

फिर कमलेश विजय से और अजय से माफ़ी मांगता है अपनी गलती क लिए दोनों उसके पछतावे को देखकर उसे माफ़ कर देते हैं

रत को कमलेश दीपिका से भी माफ़ी मांगता है और उसे मनाता है और उसका डॉ से इलाज करवाने की हामी भर देता है ताकि वो जल्दी माँ बन सके

दीपिका क दिल में जो कड़वाहट आ गयी थी वो भी निकल जाती है मगर डॉ से अब वो इलाज करवाना नहीं चाहती थी क्यूंकि अब तो उसे घर का डॉ मिल गया था जिसने उसके गर्भ में बीज दाल दिया था जिससे क वो माँ बन सकती थी

इस लिए वो कमलेश को कह देती है क डॉ ने जो दवा डी है बस उसी से वो माँ बन जाएगी आप चिंता न करो भगवन पर भरोसा रखो

कमलेश सब सेट होने क बाद दीपिका को चुदाई क लिए मानाने की कोशिश करता है मगर दीपिका तबियत ख़राब का बहाना बना कर सो जाती है और कमलेश भी बात मन जाता है

बातों में वक़्त ज्यादा हो गया था इस लिए दीपिका अमित क पास भी नहीं जा पति और अमित भी चैन की नींद सो जाता है
 
अपडेट 18

कमलेश सब सेट होने क बाद दीपिका को चुदाई क लिए मानाने की कोशिश करता है मगर दीपिका तबियत ख़राब का बहाना बना कर सो जाती है और कमलेश भी बात मन जाता है

बातों में वक़्त ज्यादा हो गया था इस लिए दीपिका अमित क पास भी नहीं जा पति और अमित भी चैन की नींद सो जाता है

अब आगे-

सुबह अमित अपनी रूटीन से अखाड़े से आ कर नाश्ता कर क स्कूल चला जाता है

कमलेश भी दीपिका को खुश करने क लिए उसे शहर ले जाता है शॉपिंग करवाने, विजय और अजय भी कमलेश को देखकर खुश थे क वो घर की तरफ ध्यान दे रहा है और गौरी भी खुश थी

मगर कामिनी की ख़ुशी को तो ग्रहण लग गया था , उसे लग रहा था क अमित शायद कहीं चला जायेगा मगर वो फिर लौट आया इस लिए अब वो ये सोच रही थी क ऐसा क्या किया जाये क इससे पीछा छूटे

स्कूल में मंजरी अमित से बहार मिलने क बारे में कहती है तो अमित आज नदी किनारे मिलने का कह देता है

स्कूल से आने क बाद अमित खाना खाकर मंजरी से मिलने निकल जाता है

पिछले कुछ दिनों से छोटे मां क चक्कर की वजह से अमित मंजरी से अचे तरीके से न बात कर पाया था न hi बहार मिला था, इस लिए आज वो मंजरी क साथ कुछ हसीं पल बिताना चाहता था

नदी किनारे मंजरी अमित का पहले से hi इंतज़ार कर रही थी, अमित को देखकर उसके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान आ जाती है

अमित मंजरी की दिलकश मुस्कान को देखकर सीधा उसे बाँहों में भर लेता है और उसके माथे पर चुम लेता है

मंजरी का जिस्म लरज जाता है

अमित : मंजरी मुझे माफ़ कार्डो इतने दिनों से मैं तुम्हे वक़्त नहीं दे पाया तुम मुझसे नाराज़ तो नहीं न?

मंजरी: कैसी बातें करते हैं आप , भला मैं आपसे कभी नाराज़ हो सकती हूँ

मैं तो प्रेम पुजारिन हूँ और आप मेरे मन मंदिर क देवता हैं

मैं आपसे नाराज़ हो कर कहाँ जाउंगी

अमित का दिल मंजरी की बातों से गड गड हो जाता है, कितनी मासूमियत कितनी गहरायी थी मंजरी की बातों में कितना समर्पण था

सचमुच मंजरी निर्मल मन की भोलीभाली लड़की थी

अमित : इतना भी प्यार मत करो मुझसे मंजरी अगर किस्मत ने हमें न मिलाया तो कहीं ये प्यार hi तुम्हारी जान न लेले

मंजरी: मैं तो अपना तनमन आपको सौंप चुकी हूँ अगर किस्मत ने मुझे आपका न बनाया तो मैं किसी और की भी नहीं हूँगी

इस जिस्म को कोई और छुए उससे पहले मैं अपनी जान देदूंगी

अमित : मंजरी!!!!!!!! नहीं ऐसा मत कहो मैं नहीं चाहता क मेरी वजह से कभी तुम्हारा दिल टूटे, मेरी किस्मत में मनहूसियत क साये कभी भी मुझे तुमसे जुड़ा कर सकते हैं मैं डरता हूँ क किसी रोज़ अगर हम जुड़ा हो गए तो तुम कैसे रहोगी

मेरी तो आदत हो गयी है दुःख दर्द क साथ जीने की मगर तुम तो फूलों से भी कोमल हो तुम कैसे जी पाओगी

मंजरी: मेरा दिल हमेशा आपको चाहेगा और आपके नाम से hi धड़केगा

मैं चाहती हूँ मैं जब तक भी जियूं बस आपकी होकर जियूं

अब आप ऐसी दिल तोड़ने वाली बातें मत कीजिये हमें कल का नहीं आज का सोचना चाहिए

आज हम साथ हैं और आज आप मुझे प्यार कीजिये सिर्फ प्यार

अमित मंजरी क चेहरे को हाथों में लेकर उसकी आँखों में देखते हुए उसके प्यार में डूब जाता है और उसके होंठ मंजरी क होठों से मिल जाते हैं

दोनों ज़माने से बेखबर एक दूसरे को चूमने लगते हैं

दोनों क होंठ आपस में मिले हुए थे और बड़े hi आराम से प्यार में खोये हुए 10 मिनट्स तक दोनों एक दूसरे को चूमते रहे

किश करते करते दोनों की सांस फूलने लगती है इस लिए दोनों किश ख़तम कर क सांस दुरुस्त करते हैं

दोनों का दिल अभी नहीं भरा था इस लिए फिर से एक दूसरे को बाँहों में कास क फिर से किश करने लगते हैं

ऐसे hi एक दूसरे को चूमते हुए दोनों प्यार भरी बातें करते हुए एक घंटे बाद अपने अपने रस्ते हो लेते हैं

मंजरी घर चली जाती है और अमित खेतों में

खेतों में आज विजय और अजय दोनों hi बैठे हुए थे और बातें कर रहे थे

विजय: अजय मैंने फैसला कर लिया है क मैं अपने हिस्से की ज़मीन अमित क नाम कर रहा हूँ और मेरे बाद घर में कोई बात न हो इसलिए एक घर अलग से बनवा दूंगा अमित क लिए

अजय: भैया ये क्या कह रहे हैं आप?

ज़मीनो का हिस्सा करने की बात कहाँ से आ गयी

हमें तो कोई हिस्सा नहीं चाहिए, रही बात अमित की तो वैसे भी हमारे बाद सब कुछ उसी का तो है

विजय: नहीं अजय जो कुछ कमलेश और अमित क बीच हुआ है वो दोबारा भी हो सकता है और मैं नहीं चाहता क मेरे बेटे को कभी ये लगे क वो हमारा नहीं है इसलिए मैं ये करने वाला हूँ

अजय: मगर भैया कमलेश गुस्से में बोल गया था कल आपने देखा न क दोनों साथ में ए और दोनों खुश थे मतलब दोनों को एक दूसरे से कोई गुस्सा नहीं है

विजय: वक़्त और हालत कब बदल जाये कोई नहीं जनता अजय जो कुछ हुआ है वो फिर कभी दोबारा भी हो सकता है इसीलिए मैं ये कर रहा हूँ और तुम भी बात को समझो

अजय: ठीक है भैया अगर ऐसी बात है तो आप मेरा हिस्सा भी अमित क नाम hi करवा देना आखिर उसके इलावा और कौन है हमारा वारिस

विजय अजय की बातों से खुश हो जाता है और उसकी ऑंखें भर अति हैं इतने में अमित भी खेतो में आ जाता है और दोनों क पास बैठ जाता है

खेतों में कोई खास बात नहीं होती फिर शाम में विजय और अजय क साथ अमित घर लौट अत है

कमलेश और दीपिका भी घर आ गए थे कमलेश आज बहुत खुश था उसने आज दीपिका को सारा दिन शहर की सैर करवाई और उसे नई साडी भी दिलवाई थी

दीपिका कमलेश क इस बदले रूप से खुश थी , दीपिका को खुश देखकर अमित और गौरी भी खुश थे

कमलेश आज है है कर सब से बात कर रहा था

रत का खाना खाने क बाद सब सोने चले जाते हैं

कमलेश कमरे में आज दीपिका की चुदाई करने क लिए बहुत उतावला हो रहा था दीपिका उसे गरमा गर्म दूध देती है और कमलेश जल्दी से दूध पि लेता है उसे ख़ुशी थी क दीपिका भी आज मूड में है इसीलिए दूध लेकर आयी है

कमलेश दीपिका को बाँहों में भर क उसे चूमने लगता है और अपने हाथो से उसके दूध और चूतड़ दबाने लगता है

चुम्मा छाती करते हुए वो दीपिका की साडी उतर देता है

दीपिका कमलेश को रुकने का कहती रहती है मगर वो नहीं मंटा और वो दीपिका को नंगी कर लेता है

फिर दीपिका कमलेश को बीएड पर धक्का देकर लेता देती है और कमलेश क ऊपर चढ़कर उसे चूमने लगती है और धीरे धीरे उसके कपडे उतरने लगती है

कमलेश का लैंड चुदाई क लिए मारा जा रहा था, दीपिका उसके लैंड को हाथों में लेकर मसलने लगती है

कमलेश की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वो जल्दी से दीपिका को छोड़ना चाहता था उसकी आँखें नशे में बंद होने लगी थी मगर दीपिका उसके लैंड को मसले जा रही थी

कमलेश से और बर्दाश्त नहीं होता और उसका पानी निकल जाता है और वो नींद की वादिओं में डूब जाता है

दीपिका जल्दी से हाथ साफ कर क फिर से साडी पहन कर अमित क कमरे में पहुँच जाती है

अमित करवट क बल सोया हुआ था दीपिका जल्दी से उसे सीधा करती है और उसका पायजामा निचे खींचकर अंडरवियर भी निचे कर देती है और उसके लैंड को पकड़ कर मुँह में लेकर चूसने लगती है

कमलेश ने दीपिका को बहुत गरम कर दिया था इस लिए दीपिका बिना वक़्त गवाए चुदाई चाहती थी

अमित की आँख खुलती है तो वो ममी को लैंड चूसते हुए देखकर हैरान होता है मगर फिर लैंड चूसै का आनंद लेने लगता है

लैंड क खड़े होते hi दीपिका एक झटके से सदी और पेटीकोट निकल कर जल्दी से अमित क दाएं बाएं घुटने रख कर लैंड को पकड़ कर छूट पर सेट करती है और निचे बैठने लगती है

दीपिका की छूट पहले hi पानी बहा रही थी इसलिए लैंड गीली छूट में घुसने लगता है

दीपिका अपने होठो को डेंटन में दबाये ऑंखें मूंदे लैंड पर बैठती जा रही थी

लैंड पूरा छूट में घुसते hi दीपिका क होठों में दबी सिसकी छूट जाती है

दीपिका: कक्कक्कक्स आआआहहहहहहह म्मम्माआआआ कक्कक्क्स कितना बड़ा है आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स ममममममम

जब भी अंदर जाता है कक्ककक्कक्स ममममममम फाड़ क रख देता है आआआहहहहह

अमित तो बस चुप चाप ममी को देख hi रहा था आज ममी ने उसे कुछ करने का मौका hi नहीं दिया था और सीधा hi उसके लैंड पर टूट पड़ी थी और खुद hi लैंड पर चढ़ गयी थी

अमित को तो ऐसे लग रहा था जैसे ममी आज उसकी ठुकाई कर रही थी

दीपिका लैंड पर ऊपर निचे होने लगती है

और धीरे उसकी स्पीड बढ़ती जाती है

फिर वो पूरे जोश में लैंड पर तेज तेज कूदने लगती है और अपने बाल खुद खींचने लगती है कभी अपने दूध मसलने लगती है

दीपिका: आअह्ह्ह्हह ममममम आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्हह्ह आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह मैं साडी ज़िन्दगी इसी तरह तुम्हारे लैंड की सवारी कक्ककक्कक्स. आआअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह करना चाहती हूँ कक्कक्स आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ोुह्ह्ह्ह म्मम्माआआ

अमित तो बस देखता hi जा रहा था आज ममी बड़े जोश में चुदाई कर रही थी

अमित को कुछ न करता देखकर दीपिका ऑंखें खोल कर उसको देखती है और आँखों से इशारे में पूछती है मगर अमित इंकार में सर हिला देता है

दीपिका जल्दी से अपना ब्लाउज उतर देती है और अपनी कमर को गोल गोल घूमने लगती है

अमित ममी क नंगे दूध देखकर जल्दी से उन्हें थम लेता है और मसलने लगता है

दीपिका: आआह्ह्ह्ह कक्कक्क्स आआह्ह्ह्ह शाबाश ऐसे hi कक्कक्कक्स आअह्ह्ह्ह ाऐसे hi मस्लोवू आआअह्ह्ह्हह ोुह्ह्ह्ह ककक आआह्ह्ह्ह ज़ोर सी आअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स

अमित ज़ोर ज़ोर से ममी क दोनों दूध मसलने लगता है 5 मिनट्स में hi दीपिका का पानी निकल जाता है और अमित की छाती पर लेट जाती है

अमित जल्दी से ममी को पलट कर उसकी टांगों को अपने कंधो पर रख कर धक्के मरने लगता है

ममी के पाऊँ की पायल धक्कों क साथ छम छम का संगीत देती अमित को और उत्तेजित करने लगती है और वो दाएं कंधे पर उठाये हुए ममी क गोर पाऊँ को चूमने चाटने लगता है

दीपिका अमित क द्वारा पाऊँ चाटने से फिर से गरम होकर चुदाई का मज़ा लेने लगती है

अमित बरी बरी से दोनों पाऊँ को पकड़ कर चाट रहा था और धक्के मर रहा था

दीपिका: कक्ककक्कक्स आआह्ह्ह्हह्ह तुम ये क्या क क ककर रहे हो कक्कक्कक्स

टट्टूमंम ममम मुझे पपपगाल कक्कर डोज कक्कक्क्स ह्म्म्मम्म्म्म आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह

दीपिका क ज़ुबान लड़खड़ा रही थी और वो अमित क इस अंदाज़ का मज़ा ले रही थी

अमित की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी

अमित अब धुआंदार चुदाई करना चाहता था इसलिए वो ममी की दोनों टैंगो को दबा कर ममी की छाती से लगा देता है दीपिका की टंगे पूरी उलटी हो कर उसके जिस्म से लग गयी थी और उसके पाऊँ उसके सर क पास पहुँच गए थे

दीपिका थोड़ी तकलीफ होने लगी थी मगर उसने अमित को रोका नहीं

अमित घुटनो पर होकर ममी की टांगों को ज़ोर से दबाये हुए तूफानी धक्के मरने लगता है

दीपिका: आअह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह ुउउइइइइ आअह्ह्ह्ह ककक माआ हम्म्म हम्म्म हम्म्म आआह्ह्ह्ह आह्हः मर गयी मममम आअह्ह्ह्ह हननणमम हणमं उह्ह्ह ुह्ह्ह्ह आअह्ह्ह

अमित : हम्म्म हम्म्म्म हम्म्म आह्हः हम्म्म हम्म्म हम्म्म कक्कक्क्स

दोनों क जिस्म पसीने में भीग गए थे दीपिका की छूट और बर्दाश्त नहीं कर पति और उसकी छूट फिर से पानी बहा देती है

अमित भी और बर्दाश्त नहीं कर पता 10-15 धक्के मरकर आखरी धक्का ज़ोर से मरकर लैंड जड़ तक घुसाए अपना पानी ममी की बच्चेदानी में छोड़ देता है

डिस्चार्ज होने क बाद अमित कुछ देर ममी क ऊपर hi पड़ा रहता है और फिर साइड में लुढ़क जाता है

दीपिका भी इस तूफानी चुदाई से निढाल हो गयी थी और चुदाई करने की उसमे हिम्मत नहीं थी इसलिए वो चुपचाप कपडे पहनकर वापिस अपने कमरे में चली जाती है और फिर अपने कमरे का दरवाज़ा लॉक कर क पूरी नंगी होकर कमलेश क साथ सो जाती है आज उसने अपनी छूट भी साफ़ करने की कोशिश नहीं की अमित का वीर्य अभी भी उसकी छूट क होंठो से रिस रहा था मगर वो घमासान चुदाई क मीठे दर्द में डूबी सो जाती है

सुबह कमलेश की जब आंख खुलती है तो वो दीपिका को साथ ऐसी हालत में देखकर हैरान हो जाता है क्यूंकि हमेशा चुदाई क बाद दीपिका खुद को साफ़ कर क कपडे पहनकर सोती थी मगर आज तो वो मांगी hi बेसुध सो रही थी

कमलेश दीपिका को जगा देता है और दीपिका भी ऑंखें मल्टी उठ जाती है

कमलेश: तुम ठीक तो हो?

दीपिका: क्यों क्या हुआ ?

कमलेश: तुम ऐसे hi सो गयी थी?

दीपिका अपनी हालत देखती है

दीपिका: मुझसे क्या पूछते हो ये आपका hi काम है, क्या हो गया था आपको रत में

तौबा! मेरी तो हड्डी पसली एक करदी

आजतक अपने पहले कभी ऐसी चुदाई नहीं की थी आप तो पूरे जानवर बन गए थे मुझे तो दर था कहीं मेरी चीखें सुनकर कोई उठ न जाये

कमलेश दीपिका क मुँह से अपनी तारीफ सुनकर सीना छोड़ा करने लगता है, मगर उसे रत की चुदाई क बारे में होश नहीं थी

कमलेश: ाचा ? मगर मुझे तो यद् नहीं

दीपिका: तौबा , बकरे की जान चली गयी और खाने वाले को मज़ा नहीं आया.

अगर और थोड़ी देर आप ऐसे करते तो मैं चलने क काबिल hi न रहती

कमलेश: तुम्हे मज़ा आया क नहीं ये बताओ

दीपिका : शर्मा कर ) वो कौन स औरत होगी जो अपने पति की ऐसी चुदाई से मस्त नहीं होगी, मगर आजतक अपने पहले तो कभी ऐसा नहीं किया, कल क्या हो गया था आपको

कमलेश: मुझे तो खुद पता नहीं

दीपिका: लगता है ये उस दवाई का असर है जो डॉ ने आपको देने को बोलै था, रत आपके दूध में मैंने वो गोली दाल दी थी

कमलेश: ाचा! फिर तो वो दवाई वाकई कमल की है

दीपिका: कमल की है ? आफत है आफत रत में मेरा तीन बार पानी निकला और आप तो रुक hi नहीं रहे थे 40 मिनट्स काम से काम अपने मुझे रोंडा अपने निचे

कमलेश दीपिका की बातों से फूला नहीं समै रहा था

कमलेश: तुम रोज़ मुझे वो दवाई दूध में मिलकर देती रहना

दीपिका: न बाबा न मुझे अभी और जीना है

कमलेश: क्या तुम नहीं चाहती क हम जल्दी माँ बाप बने ?

दीपिका: बस इसी लिए तो ये सब कर रही हूँ, चलिए ये सब भी मैं झेल लूंगी मगर आप को मुझ पर थोड़ा रेहम करना होगा

रोज़ रोज़ ऐसे करेंगे तो मेरी हालत पतली हो जाएगी

कमलेश: ठीक है जैसे तुम चाहोगी वैसे hi होगा अब उठो और तैयार हो जाओ जल्दी से

इतना कहकर कमलेश कपडे पहनकर कमरे से बिकल जाता है और दीपिका भी कपडे पहन लेती है

दीपिका: मन में) तुम्हे ऐसे hi रोज़ नींद की गोली देकर चुटिया बनती रहूंगी और अपने अंदर सिर्फ अमित का वीर्य लूंगी

अब मेरे जिस्म पर सिर्फ उसी का हक़ है
 
अपडेट 19

इतना कहकर कमलेश कपडे पहनकर कमरे से बिकल जाता है और दीपिका भी कपडे पहन लेती है

दीपिका: मन में) तुम्हे ऐसे hi रोज़ नींद की गोली देकर चुटिया बनती रहूंगी और अपने अंदर सिर्फ अमित का वीर्य लूंगी

अब मेरे जिस्म पर सिर्फ उसी का हक़ है

अब आगे-

अमित अपनी रूटीन से अखाड़े और फिर स्कूल जाता है अमित की लाइफ ऐसे hi अखाड़े स्कूल और छोटी ममी की चुदाई में hi बीत रही थी 15 दिन बाद घर में एक खुशखबरी आती है

दीपिका को पीरियड आने का समय बीत गया था जब एक हफ्ता बाद भी उसे पीरियड नहीं आये तो उसे पता चल गया क इतने सालो से जिस ख़ुशी का इंतज़ार था वो आ गयी है

फिर भी कन्फर्म करने क लिए वो टेस्ट करवाना चाहती थी इसी लिए वो कमलेश क साथ शहर चली जाती है टेस्ट करवाने

डॉ टेस्ट की रिपोर्ट देते समय बता देता है क दीपिका गर्भवती हो गयी है ये बात सुनकर दीपिका की आँखें ख़ुशी से भर अति हैं

आज उसके सर से बाँझ होने का कलंक हैट गया था और ये सिर्फ अमित की वजह से हो पाया था वो जल्द से जल्द अमित को खुशखबरी सुनना चाहती थी क वो अब बाप बनने वाला है और दीपिका माँ बनने वाली है

कमलेश ये खुशखबरी सुन कर ख़ुशी से फूला नहीं समां रहा था वो हॉस्पिटल में hi नाचने लगा था उसे समझ नहीं आ रहा था वो कैसे खुद को संभाले

कमलेश: आज मैं बहुत खुश हूँ दीपिका आखिरकार भगवन ने हमारी सुनली अब मैं सीना थोक क कह सकूंगा मैं भी किसी का बाप हूँ

चलो अभी दिव्या यहीं रहती है पहले उसको खुशखबरी सुनते हैं वो भी कितनी खुश होगी

दीपिका: खुद को सम्भालिये आपको हो क्या गया है, देखिये आप मेरी बात सुनिए इतने सालो बाद भगवन ने हमारी सुनी है अगर किसी ने नज़र लगा दी तो? अगर बचे को कुछ हो गया तो?

कमलेश: नहीं नहीं ऐसा मत कहो भगवन न करे ऐसा कुछ हो

दीपिका: तो हम अभी किसी को कुछ नहीं बताएँगे, दिव्या तो हमारी अपनी है उसे तो जब चाहे बता दे पर अभी मैं सब से पहले ये खुशखबरी दीदी को सुनना चाहती हूँ ( सबसे पहले तो खुशखबरी बचे क बाप को देनी चाहिए बाकि सब बाद में)

कमलेश: हाँ ये सही है हम पहले घर hi चलते हैं भाभी बहुत खुश होगी

दीपिका: और एक काम कीजिये सब से पहले मिठाई ले लीजिये सबका मुँह मीठा करवाने क लिए और हाँ मिठाई सिर्फ खोये की बर्फी hi लेना ताकि दूध सा गोरा बचा हो ( अमित को बर्फी बहुत पसंद है)

कमलेश रस्ते से बर्फी ले लेता है और दोनों दोपहर क खाने क वक़्त घर लौट एते हैं

अमित भी घर आ चूका था और गौरी क पास बैठा खाना खा रहा था

दीपिका सीधा गौरी क पाऊँ छूती है और आशीर्वाद लेती है

गौरी: चौंकते हुए) आज क्या बात है किस ख़ुशी में पाऊँ छुए जा रहे हैं

दीपिका: क्यों क्या मैं आपके पाऊँ नहीं छू सकती?

गौरी: नहीं ऐसी बात तो नहीं मगर पहले ऐसे बिना वजह तूने कभी पाऊँ नहीं छुए तो बताओ क्या बात है

दीपिका: अमित को देखते हुए) आप दादी बनने वाली हैं

अमित का मुँह खुला रह जाता है और वो एक तक ममी को देखने लगता है

गौरी: मैं और दादी? मैं समझी नहीं

दीपिका: क्या आप भी! भूल गयी न उस दिन मैंने क्या कहा था आप मेरी सास हैं, और जब किसी की बहु माँ बनने वाली हो तो तो फिर वो सास क्या बनेगी? दादी बनेगी क नहीं

गौरी: क्याआआ!!!!! सचहहहहह!!!!!

तुम माँ बनने वाली हो?????

दीपिका हाँ में सर हिला देती है और गौरी उठकर दीपिका को गले लगा कर उसके सर को चूम लेती है

गौरी: तुम्हे बता नहीं सकती क मैं कितनी खुश हूँ छोटी , भगवन ने हमारी सुन ली तुम्हारी सुनी कोख अब हरी भरी हो जाएगी ये आँगन अब छोटे बच्चों की किलकारी से गूंजेगा, तूने इस परिवार पर बड़ा उपकार किया है छोटी

दीपिका अमित की आँखों में देखते हुए

दीपिका: उपकार मैंने नहीं आपके बेटे ने किया है सासु माँ ये सब उसी की मेहरबानी है वर्ण दुनिया वाले तो मुझे बाँझ का ख़िताब दे hi चुके थे ( दीपिका कमलेश को यद् कर क कहती है)

गौरी: कहाँ है कमलेश वो कहाँ रह गया

तभी कमलेश भी आ जाता है वो बाइक कड़ी करने में लेट हो गया था

कमलेश: लो भाभी पहले मुँह मीठा करो

दीपिका: सबसे पहले मुँह मीठा होगा इस घर क छोटे बेटे का ताकि आने वाली संतान भी बीटा hi हो, मैंने ठीक कहा न सासु माँ

कमलेश: क्या? सासु माँ? भाई ये क्या चक्कर है

दीपिका: वो हमारी आपस की बात है आप चुप रहिये

गौरी: बिलकुल छोटी, पहले मेरे बेटे का मुँह मीठा करवाओ ता क इसके जैसा संस्कारी गुणवान बीटा हो

दीपिका जल्दी से बर्फी का पीेछे लेकर अमित क मुँह में डालती है और धीरे से कहती है

दीपिका: मुबारक हो!!!

अमित बहुत खुश था वो बाप बनने वाला है ये सोचकर hi उसके अंदर से अजीब अजीब फीलिंग आ रही थी उससे ख़ुशी कण्ट्रोल नहीं हो रही थी उसका दिल छह रहा था क ममी को बाँहों में भर ले उसका मुँह चुम ले मगर माँ और छोटे मां की मौजूदगी की वजह से वो खुद को कण्ट्रोल करता है और बर्फी कहते हुए कहता है

अमित : मुबारक हो ममी जी आपका बचा आपके जैसा सुन्दर और गुणवान हो

दीपिका अमित की तारीफ से खुश हो जाती है और शर्मीली मुस्कान से कहती है

दीपिका: थैंक्स मगर मुझे तो मेरे बचे क बाप जैसा hi बचा चाहिए

कमलेश ये सुनकर खुश होने लगता है वो सोचता है क दीपिका उसके बारे में कह रही है मगर अमित और दीपिका hi जानते थे क वो किसकी बात कर रही थी

सबके सामने यूँ इंदिरेक्ट्ली अमित की बात करने में दीपिका को बड़ा मज़ा आ रहा था और अमित भी हैरान था क मामी कैसे सबके सामने उसी को पॉइंट करते हुए बात कर रही थी

गौरी: देख छोटी कान खोल कर सुनले अभी इस बारे में कोई किसी को नहीं बताएगा अभी ये बात घर क सदस्यों की इलावा बहार किसी को नहीं पता चलनी चाहिए, क्या पता किसकी नज़र कैसी है

इतने में कामिनी भी आ जाती है जब उसे पता चलता है बात का तो वो भी खुश होती है और दीपिका को गले लगा कर बधाई देती है, मगर उसके दिल क किसी कोने में इस बात से दुःख भी होने लगता है क काश वो भी माँ बन पति इतनी बात दिल में एते hi उसकी नज़र अमित पर पड़ती है और वो अमित को ज़हरीली नज़रों से देखते हुए चली जाती है

कमलेश जल्दी से खुशखबरी अपने बड़े भाइयों को सुनाने खेतो की और निकल जाता है,

गौरी दीपिका का बैठकर हिदायत देनी लगती है

अमित भी अपनी ख़ुशी को बाँटना चाहता था मगर अभी किसी को बताना सही नहीं था माँ ने जो कहा था वो भी सही था

मगर अपने जज़्बात को बाँटने क लिए वो अपने एक मटर दोस्त राजू क पास चला जाता है और उसे मोटरसाइकिल पर बिठा कर घूमने लगता है

राजू: अबे बात क्या है बड़ा खुश नज़र आ रहा है और हम जा कहाँ रहे हैं

अमित : बस यार आज दिल बहुत खुश है अभी मैं तुम्हे बता नहीं सकता माँ ने मना किया है अभी मगर सब से पहले तुझे hi बताऊंगा, चल आज तुझे पार्टी देता हूँ

राजू: क्या बात है पार्टी!!!

चल फिर जल्दी चल, और हाँ तुझे बहुत बहुत मुबारकबाद जो भी तेरी ख़ुशी है भगवन तुझे खुश रखे

दोनों दोस्त एक साथ घूमते हैं और खा पीकर घर लौट एते हैं

अमित क घर आने तक तीनो भाई घर आ चुके थे आज हर कोई खुश था घर में

मगर सबकी ख़ुशी से कामिनी क ज़ख़्म हरे हो गए थे उसका गुस्सा अमित पर बढ़ता hi जा रहा था

रत क खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में कहले जाते हैं और दीपिका रोज़ की तरह कमलेश को सुलाकर अमित क पास पहुँच जाती है

अमित अपने बाप बनने की ख़ुशी में दीपिका की धमाकेदार चुदाई करता है और सुबह तक उसे सोने नहीं देता, दीपिका भी ख़ुशी का जश्न मानते हुए अपनी टाँगे साडी रत उठाई रखती है और अमित का शक्तिशाली अमृत अपनी बच्चेदानी में समाती रहती है

सुबह होने से पहले दीपिका अपने कमरे में आ कर सो जाती है

माँ बनने की फीलिंग से hi दीपिका की मनोदशा बदल गयी थी अब उसे हरवक्त अपने होने वाले बचे और उसके बाप यानि क अमित का hi ख्याल रहता था वहीँ घर क कमलेश भी अब ज्यादा से जयादा वक़्त दीपिका को hi देता था उसने अपने दोस्तों क पास जाना भी छोड़ दिया था और पूरी वफादारी से दीपिका की देखभाल कर रहा था उसकी हर ज़रूरत का ख्याल रख रहा था

ऐसे hi एक महीना और बीत गया

एक दिन अचानक कामिनी क भाई क घर से फ़ोन आया क उसका भतीजा रामु कुछ दिनों क लिए उसके पास रहने आ रहा है, कामिनी बहुत खुश हुई वो बेसब्री से इंतज़ार करने लगी

कामिनी का भाई बहुत दूर रहता था और किसी शहर में एक छोटा सा ढाबा चलता था पिछले 6-7 साल से वो कामिनी से मिला नहीं था बेचारा काम कर में फसा रहता था मगर फ़ोन पर बात कभी कभी हो जाया करती थी

रामु उसका एक लौटा बीटा था जिसकी उम्र अब लगभग 20 साल थी कामिनी ने उसे 7 साल पहले देखा था

और आज उसके आने की खबर से कामिनी बहुत खुश थी

आखिर उसके भाई का एकलौता बीटा था ख़ुशी क्यों न हो इसके इलावा वो अमित पर जो उसका गुस्सा था उसकी वजह से भी वो रामु क आने पर खुश थी ताकि वो अमित को नीचे दिखा सके

अगले दिन दोपहर क वक़्त अजय बस स्टॉप से जाकर रामु को घर ले अत है

( रामु देखने में कुछ खास नहीं था रंग सांवला सा था कद काठी दरम्यानी और जिस्म से भी कुछ खास नहीं था, उसकी नज़र औरतों को hi ताड़ती रहती थी और दिमाग में हमेशा हवस भरी रहती थी अपने घर क पास उसने किसी औरत क साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश की थी जिसकी वजह से लोग उसे मरना चाहते थे इसीलिए उसके बाप ने उसे जल्दी से भगा दिया था अपनी बहिन क पास छुपने क लिए)

अजय जब रामु को लेकर घर अत है तो कामिनी उसे देखकर बहुत खुश होती है और उसे जल्दी से गले लगा लेती है

कामिनी: आ गया मेरा बीटा, तू कितना बड़ा हो गया है कितना बदल गया है, इतना सा था जब आखरी बार देखा था क्या तुझे कभी बुआ की यद् नहीं आयी? अब आया है तो यहीं रहना जब तक मैं न कहूं तू कहीं नहीं जायेगा

रामु तो था hi हवस का पुजारी वो तो कामिनी का रंग रूप और उसकी फिगर देख कर hi खो गया था

जब कामिनी ने उसे गले लगाया तो वो उसके बदन का मज़ा लेते हुए पूरा उससे चिपक गया और अपना नाक उसकी गर्दन पर लेजाकर उसके बदन और बालों की खुशबु लेने लगा

रामु तो कामिनी क जिस्म की खुशबु से hi मदहोश हो गया था और वो उससे अलग होना नहीं चाहता था मगर कामिनी ने उसे जब पीछे हटाया तो वो हैट गया

रामु: बुआ जी आप कभी आयी hi नहीं हमसे मिलने हम तो आपको यद् करते रहते हैं मगर आप hi हमें भूल गयी, अब मैं यहीं रहूँगा और इतने सैलून की कसार निकलूंगा ( क्या मस्त माल है बुआ एक बार मौका मिल जाये तो रगड़ क छोडूंगा)

कामिनी: अब तू यहीं रहना मेरे पास मैं तुझे कहीं नहीं जाने दूंगी

गौरी और दीपिका भी आवाज़ सुनकर चली आती हैं कामिनी क भतीजे से मिलने

कामिनी: रामु ये है मेरी जेठानी गौरी दीदी

रामु: ( क्या मस्त माल है बिलकुल हेमा जय प्रदा जैसी लगती है इसकी अगर मिल जाये तो मज़ा आ जाये ) पौन लागे आंटी जी

गौरी: जीते रो बेटे और मुझे भी अपनी बुआ hi समझ

कामिनी: और ये है मेरी देवरानी दीपिका

रामु : ( ये तो माधुरी दीक्षित है ज़बरदस्त कांचा माल क्या नैन नक्श हैं क्या मस्त दूध हैं इसको तो रगड़ रगड़ क पेलुँगा) पाऊँ लागे आंटी

दीपिका: जीते रो और मैं आंटी नहीं मुझे भी बुआ hi समझ हम तीनो बहनो की तरह रहती हैं और तेरे लिए तीनो बुआ hi हैं

रामु: ( तीनो को एक साथ पेलुँगा बस एक बार मेरा हाथ आ जाओ फिर देखना रामु क लैंड का कमल) जी आंटी जी मतलब बुआ जी

कामिनी रामु को अपने कमरे में ले जाती है और उसकी खातिरदारी करती है

कामिनी रामु को ऊपर अमित क बाजु वाला कमरा दे देती है और उसका सामान वहां रखवाकर उसे आराम करने को कहती है

रामु भी सफर से थक गया था कल से गाड़ी में सफर करते हुए वो थक चूका था इस लिए थकन उतरने क लिए सो जाता है

अमित स्कूल से घर अत है तो रामु क बारे में पता चलता है वो उससे मिलने जाता है मगर रामु दरवाज़ बंद कर क सो रहा था इसलिए अमित वापिस आ जाता है और खाना खा कर खेतों में चला जाता है
 
अपडेट 20

अमित स्कूल से घर अत है तो रामु क बारे में पता चलता है वो उससे मिलने जाता है मगर रामु दरवाज़ बंद कर क सो रहा था इसलिए अमित वापिस आ जाता है और खाना खा कर खेतों में चला जाता है

अब आगे-

शाम को अमित जब घर अत है तो रामु कामिनी ममी क पास बैठा था और ममी उससे है है क बातें कर रही थी दीपिका और गौरी किचन में खाना बना रही थी

अमित रामु को देखकर उससे मिलने जाता है

अमित : प्रणाम भैया

कामिनी: रूखी स आवाज़ में) रामु ये अमित है दीदी का बीटा

रामु: प्रणाम! और क्या हल है भाई क्या करते हो तुम आज पहली बार मिल रहा हूँ तुमसे

अमित : कुछ नई भैया स्कूल में 12तह कर रहा हूँ

रामु : अछि बात है, बॉडी तो अछि बनाई है पहलवानो क जैसे

अमित : अरे कुछ नई भैया ये तो खेतों में काम करते और गाओं की देसी खुराक का कमल है , आप सुनाइए सुना है आप शहर में रहते हैं वहां क बारे में बताइये

रामु : कामिनी गौरी और दीपिका क बारे में सोचते हुए) तूने सही कहा गाओं में जो माल है वो तो शहरों में भी नहीं ा मेरा मतलब गाओं में तो हवा पानी सब शुद्ध है शहरों में ऐसे नज़ारे कहाँ

थोड़ी देर यूँही बातें करने क बाद सब मिलकर खाना कहते हैं

आज रामु की वजह स्पेशल खाना बना था

खाना खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में चले जाते हैं

आज रामु की वजह से दीपिका रिस्क नहीं लेना चाहती थी इस लिए वो अमित क पास नहीं जाती और अमित भी ऐसे रिस्क लेना नहीं चाहता था इसलिए अपने अपने कमरों में सब सो जाते हैं

सुबह अमित अपनी रूटीन से पहले अखाड़े जाता है और फिर नाश्ता कर क स्कूल चला जाता है

घर पर रामु अपनी आदत क मितबिक देर तक सोता है और कामिनी उसे जगाने उसके कमरे में जाती है

कामिनी नहा धोकर त्यार होकर रामु को उठाने गयी थी उसके बाल अभी भी थोड़े थोड़े गीले थे और उसके जिस्म से और बालों से खुशबु महक रही थी

रामु कामिनी क हिलने से उठ जाता है और जब उसकी नज़र कामिनी पर पड़ती है तो उसका लैंड एक hi झटके में खड़ा हो जाता है कामिनी इस वक़्त उसे रति का अवतार लग रही थी

कामिनी: चल उठ जा कितना सोता है तू, क्या थकावट उत्तरी नहीं तेरी ?

रामु जल्दी से उठता है और कामिनी को गले लगा लेता है और उसके जिस्म की खुशबु लेने लगता है

कामिनी: अरे अरे ये क्या कर रहा है चल छोड़ मुझे जा पहले नहा ले और त्यार हो जा अपनी बुआ की नाक कटवाएगा क्या सब कहेंगे कितना सोता है

रामु: बुआ जी क्या बताऊँ मैंने बहुत hi बुरा सपना देखा मैंने देखा आप मुझे अकेला छोड़कर कहीं दूर जा रही हैं और मैं रोटा जा रहा हूँ

आप मुझे छोड़कर कहीं जाएँगी तो नहीं न मैं आपको कहीं नहीं जाने दूंगा

कामिनी रामु क सर पर हाथ फेरते हुए

कमीने: अरे तू सपने मत देखा कर मैं कहीं नहीं जा रही और न तुझे कहीं जाने दूंगी तू यहीं रहेगा मेरे पास

चल अब नीचे बाथरूम में जा कर नहा ले मैं तेरे लिए नाश्ता लगाती हूँ

रामु: बुआ जी आप रोज़ मुझे ऐसे hi सुबह सुबह जल्दी उठा दिया करो मैं नहीं चाहता मेरी वजह मेरी बुआ को कोई बात सुन्नी पड़े मुझे ये बिलकुल ाचा नहीं लगेगा कोई मेरी प्यारी बुआ को कुछ कहे

कमीने: आए मेरा बचा , इतना प्यार करता है अपनी बुआ को तू चिंता न कर मैं रोज़ सुबह तुझे उठाने आया करुँगी

फिर कामिनी उसे त्यार होने का बोल कर नीचे चली जाती है

रामु नहाने क लिए नीचे बाथरूम में जाता है

घर में नीचे एक बाथरूम और एक टॉयलेट था जो सब इस्तेमाल करते थे सिर्फ अमित क कमरे में hi आत्ताच बाथरूम था जो विजय और गौरी ने अमित क लिए स्पेशलय बनवाया था

रामु जब बाथरूम में घुसता है और अपने कपडे उतर कर खूंटी पर टांगता है तो उसे साइड में लेडीज क कपडे पड़े हुए दिखाई देते हैं शायद कोई नहाने क बाद धोने क लिए छोड़ गयी थी

कपड़ों पर नज़र पड़ते hi रामु की आँखों क सामने कामिनी की काया आ जाती है

‘बुआ hi नहा क गयी हो शायद अभी और हो सकता है उसकी कच्ची भी बीच में पड़ी हो ‘

इतना ख्याल एते hi वो जल्दी से कपडे देखने लगता है और उसे एक काले रंग की पेंटी मिल जाती है,

रामु उस पेंटी को अपनी नक् क पास लेजाकर सूंघने लगता है, पेंटी से बड़ी hi मादक खुशबु आ रही थी जो सीधा रामु क दिमाग में घुस जाती है और उसका लैंड झटके से खड़ा हो जाता है

रामु: क्या मस्त खुशबु है तेरी छूट की बुआए , कक्कक्स कितनी मस्त बुर होगी तेरी बुआ, ककक आअह्ह्ह्ह कितना मज़ा आएगा जब तेरी छूट में मेरा लैंड जायेगा ककक हम्म्म देखना तुझे कैसे रगड़ रगड़ क छोड़ता हूँ तेरी छूट का भोसड़ा बना दूंगा सीसीसी हम्म्म तेरी मस्त गांड को और बड़ी कर दूंगा और तेरे दूध से सारा दूध निचोड़ लूँगा ककक आह्ह्ह्ह

साथ में रामु अपने लैंड की मुठ लगता जा रहा था पेंटी सूंघते हुए मुठ मरता और कामिनी को ख्यालों में छोड़ता हुआ रामु अपना पानी निकल देता है तब उसे थोड़ी शांति मिलती है और फिर वो नहा कर त्यार हो जाता है और कामिनी क पास बैठकर नाश्ता करने लगता है

नाश्ता कर क रामु कामिनी क साथ hi उसके कमरे में बैठ कर बातें करने लगता है

रामु : बुआ इतने सालों बाद आपसे मिला हूँ आप अपने बारे में बताइये कुछ

कामिनी: क्या बताऊँ बीटा सब तो तुम्हे पता है

रामु: ाचा बुआ अपने कोई बचा पैदा क्यों नहीं किया कितना ाचा होता मेरा भी कोई भाई या बहिन होता जिसके साथ मैं खेलता

रामु की बात सुनकर कामिनी एक ठंडी आह भर्ती है

कामिनी: क्या करूँ बीटा तेरी बुआ की किस्मत hi ख़राब है , मेरी ज़िन्दगी में बस इसी चीज़ की कमी है, भगवन ने मुझे सब दिया बस बचा hi नहीं दिया

जब एक बार माँ बनने वाली थी तो उस मनहूस की वजह से मेरा बचा पेट में hi मर गया और दुबारा मैं माँ नहीं बन पायी

रामु: किसने आपके साथ ऐसा किया मुझे नाम बताइये मैं उसकी जान ले लूंगा

कामिनी: एक hi तो मनहूस इस घर में वो अमित , तू रहने दे कुछ मत करना बस उससे दूर hi रहना मुझे तो उसकी शकल hi पसंद नहीं

रामु: तुम चिंता मत करो बुआ मैं उसे ऐसा सबक सिखाऊंगा क वो यद् रखेगा और आप चिंता मत करो आज से मैं आपका बीटा हूँ आज से मैं आपकी सेवा करूँगा ( और चुदाई भी करूँगा हीहीही)

कामिनी: जीते रो बीटा ये कहकर तूने मेरा दिल खुश कर दिया

रामु: चलिए टंगे सीधी कीजिये मैं आपके पाऊँ दबाता हूँ

कामिनी : अरे ये क्या, तू रहने दे मुझे कोई ज़रूरत नहीं है मैं कोई बूढ़ी नहीं हुई अभी

रामु: अरे बूढ़े हों आपके दुश्मन आप तो अभी भी जवान लड़कियों को मत देती हैं , मैं तो पाऊँ इस लिए दबाना चाहता हूँ क मैंने सुना हैं क माँ क पाऊँ में जन्नत होती है और मैं वो जन्नत देखना चाहता हूँ ( औरत की छूट hi असली जन्नत है एक बार मुझे जन्नत दिखादो बुआ फिर देख तुझे कैसे जन्नत क नज़ारे देता हूँ)

कामिनी रामु क मुँह से अपने लिए माँ शब्द सुनकर भावुक हो जाती है और उसके सर को चूम लेती है

कामिनी: काश तू मेरा बीटा होता

रामु: मैं आपका hi बीटा हूँ बुआ आप चिंता मत करो मैं आपका ख्याल रखूँगा आज से ( और तेरी छूट का भी)

रामु कामिनी को बीएड पर पाऊँ सीधा कर क लेता देता है और पाऊँ क पास बैठकर पाऊँ दबाने लगता है

रामु सिर्फ दिखावे क लिए hi पाऊँ दबा रहा था असल में वो कामिनी क पाऊँ और टैंगो पर हाथ फिरकर मज़ा लेना चाहता था

कामिनी क गोर नंगे पाऊँ को देखकर रामु की काम वासना फिर से जाग जाती है और वो बीच बीच में अपने हाथ से कामिनी क पाऊँ मसलने लगता है और टंगे दबाते हुए सदी को धीरे धीरे ऊपर सरकने लगता है

सदी को घुटनो क पास तक रामु ऊपर सरका चूका था अब कामिनी गोरी चिकनी टाँगे रामु क सामने थी और रामु का उत्तेजना क मरे बुरा हाल था उसका लैंड पेण्ट फाड़कर बहार आना चाहता था

अब रामु टंगे दबाने क बजाये बस हाथों से मसल hi रहा था

रामु का जी छह रहा था क गोरी चिकनी टैंगो को अपनी जीभ से कहते और चूसे

रामु सदी को और ऊपर उठाना चाहता था मगर इतनी जल्दबाजी से बात बिगड़ भी सकती थी

कामिनी तो ममता वाश ख्यालों में रामु को अपना बीटा मानकर खुश हो रही थी मगर रामु कामिनी को छोड़ने की योजना बना रहा था ऐसे hi आधे घंटे तक रामु पाऊँ दबाता रहता है फिर कामिनी उसे मन कर देती है और कहती है क जा जा क गाओं घूम आ और अपने पास से कुछ पैसे उसे दे देती है

रामु तो और मज़ा लेना चाहता था मगर कामिनी के कहने पर वो पैसे लेकर गाओं घूमने निकल जाता है

रामु गाओं में घूमता हुआ औरतों को ताड़ता रहता है और गाओं क बारे में जानकारी इकठी करता है

दोपहर क खाने क समय रामु भी घर आ जाता है और अमित भी स्कूल से आ चूका था

खाना खाने क बाद गौरी अमित से कहती है क रामु अकेला बोर हो जायेगा इस लिए तू उसे साथ रखा कर और उसे गाओं और खेतों में घुमा लाया कर

अमित माँ का हुकम मान लेता है और खाने क बाद रामु को गाओं और खेत दिखने चल पड़ता है

रामु: यार अमित तुमने अपने बारे में कुछ बताया नहीं

अमित : क्या जानना है भैया आप पूछिए

रामु: यार तू जवान है स्कूल पड़ता है बॉडी सहोदय भी बनायीं है कितनी गफ हैं तेरी?

अमित : शर्मा जाता है) क्या भैया मैं स्कूल पड़ने जाता हूँ ये सब करने नहीं

रामु: अरे इसमें शर्माने की क्या बात है आजकल तो ये आम बात है शहरों में तो लड़के 5-5 गफ बना क रखते हैं और मज़े लेते हैं तूने भी तो बनायीं होगी तू मुझे अपना दोस्त समझ

अमित : नहीं भैया मैं ऐसा नहीं, गाओं में सब बाबा की कितनी इज़्ज़त करते हैं अगर मैंने कोई ऐसा वैसा काम किया तो बड़ी बदनामी होगी

रामु: अरे कुछ नहीं होता एहि तो उम्र है मज़ा करने की बाद में कुछ नहीं होगा

अमित: मेरी छोड़िये भैया आप अपनी सुनाइए लगता है क आपने खूब मज़े लिए हैं

रामु : भाई मैं तो यारों का यार हूँ मैं दोस्तों से कुछ नहीं छुपता

तो सुन, मैंने कई गफ बनाई और चुदाई की है और कई औरतों की भी ( झूठ)

मगर ये बात किसी को बताना मत अब तू भी मत शर्मा और बता दे सच सच कोई न कोई तो तूने भी पता राखी होगी

अमित : नहीं भैया ऐसा कुछ नहीं है मैंने आपको पहले hi सच बताया है और आप चिंता मत करो मैं किसीको कुछ नहीं बताता

रामु: ( ये साला तो लगता है ब्रह्मचारी है इससे बात कर क कोई फायदा नहीं कोई और ढूंढ़ना पड़ेगा जिससे गाओं क माल क बारे में पता लग सके) ाचा गाओं में क्या क्या है देखने लायक

अमित: गाओं में मंदिर है जो बहुत प्राचीन है लोग दूर दूर से यहाँ एते हैं उसके बगल में hi अखाडा है जहाँ गाओं क लड़के सुबह कसरत करते हैं गाओं क बहार एक नदी है और नदी क आगे जंगल है

इसके इलावा कुछ दुकाने हैं और खेत हैं बगीचे हैं

रामु: चल आज मुझे नदी दिखा कर ला हमारे शहर में तो पानी नल से अत है कभी नदी पर जाने का मौका hi नहीं मिला

अमित रामु को नदी पर ले चलता है जहाँ औरतें कपडे धो रही थी

रामु इतनी साडी औरतों और लड़कियों को देखकर पागल हो जाता है और सब को अपनी आँखों से सराय करने लगता है

तभी उसकी नज़र एक लड़की पर जाती है जो उन सब में सब से ज्यादा खूबसूरत थी उसे देखकर तो रामु की लार टपकने लगती है

रामु: ( ए हाय क्या मस्त माल है बिलकुल आलिया भट्ट क जैसी छुईमुई स इस काली को मसलने में मज़ा आएगा)

गाओं की सब औरतें यहीं पर कपडे धोती हैं?

अमित: जी तकरीबन यहीं पर अति हैं सब मगर कुछ घरो में जहाँ पानी का उचित प्रबंध है वो नहीं एते यहाँ जैसे अपने घर में है

रामु: यहाँ सब गाओं की hi औरतें हैं या बहार से भी आयी हैं?

अमित: नहीं सब यहीं की हैं

रामु: ( ये ाचा हुआ इसका मतलब ये माल यहीं का है अब तो इसे मैं फसा क hi डैम लूँगा) ाचा अमित वो लड़की कौन है कब से तुझे hi बार बार देख रही है क्या तेरी गफ तो नहीं?

अमित उस लड़की को देखता है

अमित : अरे वो भैया वो मेरे स्कूल में पड़ती है मंजरी नाम है उसका बहुत hi भोली भली बहुत hi अछि लड़की है

रामु: मुझे तो लग रहा है वो तेरी गफ है

अमित : क्या भैया कुछ भी, मैंने बताया तो आपको मैं ऐसे काम से दूर hi रहता हूँ ( अगर इन्हे पता चल गया तो पक्का कामिनी ममी को शिकायत कर देंगे)

रामु: ाचा फिर तेरी जानकर तो होगी , मेरी भी जान पहचान करवा दे उससे

अमित : भैया ये गाओं है शहर नहीं किसी ने देख लिया तो बखेड़ा खड़ा हो जायेगा, चलिए चलते हैं यहाँ से

रामु तो अभी और आँखों को सकूं देना चाहता था इन नज़रों को देख कर मगर अमित क साथ चल पड़ता है ये सोचकर क अब तो पता चल गया अब तो कभी भी आ सकता हूँ और क्या पता यहाँ नंगी औरतों को नहाते हुए भी देख सकूँ

फिर अमित रामु को खेत और बगीचे दिखने ले चलता है

शाम क वक़्त सब घर लौट एते हैं और रत का खाना खा कर सब अपने कमरों में सोने चले जाते हैं

सुबह रोज़ की तरह अमित पहले अखाड़े और फिर नाश्ता कर क स्कूल चला जाता है

कामिनी रामु को जगती है और रामु फिर से कामिनी को गले लगाके उसके जिस्म की खुशबु लेता है

नाश्ता करने क बाद रामु कुछ देर कामिनी क साथ बातें करता है और फिर नदी की तरफ निकल पड़ता है मगर आज कोई औरत उसे नहीं दिखती वो निराश होकर लौट जाता है मगर घर जाने की बजाये वो स्कूल की तरफ चल पड़ता है

रामु: अमित ने कहा था क मंजरी उसके स्कूल में पड़ती है छुट्टी क वक़्त शायद मुलाकात हो जाये

रामु गेट पर खड़ा होकर मंजरी का इंतज़ार करने लगता है

छुट्टी क वक़्त अमित जब बहार निकलता है तो रामु को सामने पाकर चौंक जाता है

अमित : भैया आप यहाँ?

रामु: घर पर बोर हो रहा था सोचा तुझे जब छुट्टी होगी तो तेरे साथ hi घर चलूँगा

रामु बात अमित से कर रहा था मगर उसकी नज़रें मंजरी को ढून्ढ रही थी और जल्द hi उसे मंजरी नज़र आ जाती है

मंजरी स्कूल क सामने अमित को खड़ा देखती है और साथ में उसे रामु भी नज़र अत है वो समझ जाती है ये वही रिश्तेदार है अमित का जिसका ज़िकर उसने स्कूल में किया था

मंजरी नज़रें नीची कर क चुप चाप निकल जाती है

रामु सोचकर आया था क अमित क साथ होने से वो मंजरी से बात कर पायेगा मगर ऐसा नहीं हुआ

फिर दोनों घर की तरफ चल पड़ते हैं रामु की नज़रें मंजरी का पीछा तब तक करती हैं जब तक क उसका रास्ता जुड़ा नहीं हो जाता

घर आ कर खाना खा कर रामु नींद का रेस्ट करने का बोलकर अपने कमरे में चला जाता है और अमित खेतों में चला जाता है

अमित क जाने क बाद जब सब अपने कमरों में चले जाते हैं तो रामु कुछ देर बाद कामिनी क कमरे में जाता है

जहाँ कामिनी बीएड पर उलटी लेती हुई सो रही थी

कामिनी की गांड ऊपर होने से बड़ी कातिल लग रही थी रामु अपनी हवसी नज़रों से उसे ताड़ने लगता है उसका दिल करता है क जल्दी से वो बुआ की मस्त गांड को मसल डेल

मगर फिर खुद को कण्ट्रोल करते हुए बीएड पर कामिनी क पाऊँ क पास बैठ जाता है एक तंग सीधी और एक बेंड होकर सोने की वजह से कामिनी की सीधी तंग से साडी घुटने तक ऊपर सर्कि हुई थी

रामु कामिनी की मस्त चिकनी गौरी चिट्टी पिंडली को देखकर एक हाथ से अपना लैंड कपड़ो क ऊपर से मसलने लगता है

कामिनी की एक साइड से उठी हुई गांड रामु क दिल पर छुरियन चला रही थी

रामु धीरे से अपना एक हाथ कामिनी की नंगी पिंडली पर लग देता है और धीरे धीरे घुटने से लेकर पाऊँ तक हाथ चलता हुआ कामिनी की सॉफ्ट स्किन का मज़ा लेने लगता है

रामु की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और दूसरे हाथ से वो लैंड को मसले जा रहा था

वासना की अधिकता से रामु का हाथ कामिनी की नंगी पिंडली पर कस जाता है और कामिनी की नींद टूट जाती है

कामिनी झटके से पलट कर सीधी हो जाती है और रामु भी फुर्ती से अपना हाथ हटा लेता है

कामिनी: रामु ? तू इस वक़्त यहाँ क्या कर रहा है?

रामु: वो वो वो मैं मम मैं आपके पाऊँ दबा रहा था

कामिनी: मेरे पाऊँ ?

रामु: आप सारा दिन काम कर क थक जाती हैं और एक बीटा होने क नाते मेरा फ़र्ज़ है आपकी सेवा करना ( सेवा करूँगा तो मेवा मिलेगा यानि क आपकी छूट)

कामिनी: कितना प्यारा है मेरा बीटा कितना ख्याल रखता है मेरा,

मगर तू चिंता मत कर मैं बिलकुल ठीक हूँ और आराम कर रही थी जा तू भी आराम करले कमरे में जा कर

रामु: ठीक है बुआ जी मैं आराम करता हूँ आप भी आराम कीजिये

फिर रामु कामिनी क कमरे से निकल कर अपने कमरे को जाने की बजाये बहार निकल जाता है और सीधा नदी किनारे चला जाता है ये सोचकर क शायद कोई नज़र मिल hi जाये मगर वहां भी कुछ नहीं होता और थक हर कर वो घर लौट अत है

रामु का लैंड कामिनी की नंगी टैंगो को चुने भर से hi गरम हुआ पड़ा था

रामु सीधा कमरे में घुसकर कामिनी की नंगी टैंगो को यद् कर्क और उसकी गांड को यद् कर क मुठ मरने लगता है

उसी वक़्त अमित अपने मां और बाबा क साथ घर लौट अत है गौरी अमित को रामु को बुलाकर लेन को कहती है

अमित जब रामु को बुलाने जाता है तो आवाज़ देने से पहले hi उसे रामु की सिसकी सुनाई देती है और वो चुप चाप कमरे में झाँकने लगता है

दरवाज़े की छोटी सी दरार से वो अंदर देखता है जहाँ रामु तेजी से मुठ मर रहा था और कुछ hi सेकण्ड्स में उसका पानी निकल जाता है

अमित 2 मिनट्स रुक कर दरवाज़ा खत खटता है और रामु को कहता है

अमित : भैया निचे सब आपको बुला रहे हैं

रामु: एक मिनट मैं अभी आया

रामु खुद की हालत ठीक करता है और दरवाज़ा खोलता है सामने अमित खड़ा था

रामु अमित क साथ निचे आ जाता है और सब मिलकर खाना कहते हैं और अपने कमरों में सोने चले जाते हैं

अमित अपने बीएड पर लेता सोच रहा था क लगता है रामु भैया बड़े चुड़क्कड़ किस्म क इंसान हैं

रामु क बारे में सोचते हुए वो कब सो गया उसे पता hi नहीं चला
 
अपडेट 21

रामु खुद की हालत ठीक करता है और दरवाज़ा खोलता है सामने अमित खड़ा था

रामु अमित क साथ निचे आ जाता है और सब मिलकर खाना कहते हैं और अपने कमरों में सोने चले जाते हैं

अमित अपने बीएड पर लेता सोच रहा था क लगता है रामु भैया बड़े चुड़क्कड़ किस्म क इंसान हैं

रामु क बारे में सोचते हुए वो कब सो गया उसे पता hi नहीं चला

अब आगे-

सुबह अमित अखाड़े चला जाता और रामु भी जल्दी उठ जाता है और टॉयलेट को भागता है, टॉयलेट में बैठे हुए रामु को साथ वाले बाथरूम से आवाज़ अति है उसके कान खड़े हो जाते हैं

रामु : लगता है कोई नहाने आया है

अचानक उसके दिमाग में बात अति है

‘ हो सकता है क बुआ नहाने आयी हो सुबह सुबह अगर बुआ हुई तो उसके मस्त दूध और चूतड़ देखने को मिलेंगे ‘

रामु क दिमाग में ये बात एते hi उसका लैंड खड़ा होने लगता है और वो जल्दी से उठता है और देखने लगता अंदर झांकने क लिए जगह

किस्मत से बाथरूम और टॉयलेट क बीच रोशनदान बना हुआ था छोटा सा

रामु जल्दी से दीवारों का सहारा लेकर रोशनदान तक पहुँच जाता है और अंदर देखते hi उसकी आँखे चमक उठती हैं

अंदर एक औरत hi थी जो पेटीकोट और ब्लाउज में कड़ी थी चेहरा दूसरी तरफ था

फिर उस औरत ने अपना ब्लाउज खोला नीचे काली ब्रा थी फिर वो अपना पेटीकोट उतरती है उसकी मस्त गोरी चिकनी टाँगे और काली पेंटी में बंद गोल मटोल गांड देखकर रामु की हलक खुश्क हो जाती है

फिर वो औरत अपने हाथ पीछे कर क अपनी ब्रा खोलकर उतर देती है मगर अभी तक वो पलटी नहीं थी इसलिए उसके दूध नज़र नहीं आ रहे थे

फिर वो औरत अपने बाल खोल लेती है काले घने लम्बे रेशमी बाल खुल कर पीठ पर आ जाते हैं

गोरी दूध सी सफ़ेद पीठ पर काले स्याह बाल देखकर रामु मस्त होकर एक हाथ से लैंड मसलने लगा था फिर वो औरत अपने बदन पर पानी डालने लगती है और फिर साबुन से अपने बदन को मलने लगती है

साबुन लगाने क बाद वो फिर से पानी दाल कर साबुन उतरती है और फिर बदन पोंछने क लिए तौलिया उठाने क लिए जैसे hi घूमती है तो रामु क मुँह से आह निकल जाती है

रामु: ाःह क्या मस्त गदराया जिस्म है ये तो बुआ से भी मस्त दिखती है इसको तो कैसे भी पेलना पड़ेगा

बाथरूम में नहाने वाली वो औरत गौरी थी जो सबसे पहले उठती और नहाती थी रामु उसके गदराये जिस्म को देखकर खुद को रोक नहीं पता और जल्दी से मुठ मरने लगता है

जैसे hi उसका पानी निकलता है वो खुद को संभल नहीं पता और नीचे गिर जाता है

तभी टॉयलेट क दरवाज़े को कोई खत खटता है, रामु आवाज़ सुनकर जल्दी से अपनी हालत ठीक करता है और दरवाज़ा खोलकर बहार निकलता है

सामने दीपिका कड़ी थी रामु जल्दी से नज़र बचाकर अपने कमरे को निकल जाता है

दीपिका को रामु की हरकत देखकर अटपटा सा लगता है और वो टॉयलेट में घुस जाती है

टॉयलेट में बैठे बैठे दीपिका की नज़र दीवारों पर लगे निशान पर पड़ती है तो उसके दिमाग में बात अति है

दीपिका: ये निशान यहाँ कैसे ऐसे लगता है किसी क जूतों से बने हैं और ताज़े लग रहे हैं तभी सामने की रोशनदान वाली दीवार पर उसकी नज़र जाती है लगता है रोशनदान से अंदर झाँकने की कोशिश की गयी है फिर रोशनदान से नीचे देखते हुए उसे पानी क छींटे नज़र एते हैं जब वो गौर से देखती है तो उसे समझ अति है क ये पानी नहीं वीर्य है

दीपिका: हम्म्म इसका मतलब अंदर झांक कर किसी ने अपना पानी निकला है

मगर अभी तो यहाँ रामु था तो इसका मतलब क रामु अंदर झांक कर मुठ मर रहा था

ये तो बड़ा घटिया लड़का लगता है, इसपर नज़र रखनी होगी

दीपिका टॉयलेट से निकलती है तो उसे गौरी आंगन में जाती हुई दिखती है उसको देखकर लगता है क वो अभी नहायी है

दीपिका: तो रामु बड़ी दीदी को देख रहा था, छी!! इसका इलाज करना पड़ेगा मगर अगर किसी को बताया तो कामिनी दीदी समझेगी क मैंने उनकी बजती की है और रामु क खिलाफ वैसे भी बिना सबूत वो कुछ मानेंगी नहीं

दीपिका खुद को ठीक कर क नहा कर अपने कामो में लग जाती है

कामिनी दीपिका क बाद नहा कर त्यार हो कर रामु को जगाने जाती है

रामु तो पहले hi जग रहा था और इस घर में मौजूद औरतों को छोड़ने की प्लानिंग कर रहा था तभी उसे आवाज़ सुनकर पता चल जाता है क बुआ उसे जगाने आ रही है तो जल्दी से वो सोने की एक्टिंग करने लगता है

कामिनी रामु को जगती है तो रामु उठकर कामिनी को गले लगा लेता है और उसके जिस्म को महसूस करने लगता है

कामिनी: चल अब छोड़ और जल्दी नहा धोकर त्यार हो जा, क्या रोज़ रोज़ बच्चों की तरह गले लग जाता है

रामु: मैं ता आपका बचा hi हूँ न बुआ वैसे भी आपको सुबह गले लगा कर दिन ाचा निकलता है

कामिनी उसे त्यार होने का बोलकर चली जाती है और रामु भी त्यार होकर नाश्ता करने पहुँच जाता है

रसोई में गौरी कामिनी और दीपिका तीनो मौजूद थी

रामु पास बैठा तीनो को ताड़ने लगता है

दीपिका को रामु पर शक तो हो hi गया था इस लिए वो चोरी चोरी रामु को देखती है और रामु को कामिनी की गांड को ताड़ते हुए देख लेती है

रामु की नज़र कभी कामिनी की गांड कभी गौरी की गांड कभी दीपिका की गांड को स्कैन कर रही थी

दीपिका भी अनजान बनकर उसकी हरकते नोट कर रही थी

अमित भी त्यार हो कर नाश्ता करने आ जाता है और फिर स्कूल निकल जाता है

रामु कामिनी क कमरे में कुछ देर उससे चिपड़ी चुपड़ी बातें करता है और बहाने से उसके जिस्म को टच करने की कोशिश करता रहता है

कामिनी: रामु एक काम कर मेरे साथ आ स्टोर से थोड़ा सामान निकलना है

रामु कामिनी क साथ स्टोर में जाता है कामिनी उसे ऊपर शेल्फ से बर्तन उतरने को कहती है, शेल्फ थोड़ी ऊँची थी

रामु: बुआ इतनी ऊपर तो मेरा हाथ नहीं पहुंचेगा

कामिनी: जा बहार से स्टूल ले आ

रामु: अरे इतनी से बात क लिए स्टूल क्या करना मैं आपको उठता हूँ आप खींच लेना

कामिनी: रहने दे कहीं गिर गए तो चोट लग जाएगी

रामु: अरे बुआ कैसी बात करती हो अपने बेटे पर इतना भी यकीन नहीं

रामु जान चूका था कामिनी बीटा और माँ शब्द सुनकर किसी बात से इंकार नहीं करती

कामिनी मन जाती है और रामु कामिनी को पीछे से पकड़ कर उठा देता है

कामिनी की गांड रामु क चेहरे क पास थी रामु उसकी गांड में नाक घुसकर सूंघने लगता है

कामिनी बर्तन खींच लेती है और रामु को नीचे उतरने को कहती है

रामु कामिनी को नीचे इटरने क बहाने धीरे धीरे उसे निचे उतरता है और उसके जिस्म पर अपने हाथ फिरता हुआ बगलों से कामिनी क दूध को हल्का सा दबा देता है

कामिनी क जिस्म को झटका सा लगता है मगर वो इस बात को इग्नोर कर देती है

इतनी स हरकत से hi रामु का लैंड अकड़ कर खड़ा हो गया था

रामु कामिनी क साथ जब स्टोर से बहार अत है तो दीपिका उसकी पेण्ट में बने टेंट को देख लेती है

इसी तरह दोपहर हो जाती है और रामु स्कूल की छुट्टी क समय स्कूल क पास पहुँच जाता है मगर आज वो गेट क सामने खड़ा नहीं होता

आज वो उस गली में आगे जा कर खड़ा हो जाता है जिस तरफ उसने कल मंजरी को जाते देखा था

थोड़ी देर में मंजरी अति हुई नज़र अति है तो रामु जल्दी से उसके करीब पहुँच जाता है

रामु: hi मंजरी कैसी हो? मेरा नाम है रमेश प्रसाद प्यार से मुझे रामु कहते हैं तुम भी मुझे रामु कह सकती हो

मंजरी रामु द्वारा ऐसे रोके जाने से घबरा जाती है और मुँह से अपना नाम सुनकर चौंक जाती है

रामु: डरो मत मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ जब से तुम्हे देखा है बस आँखों क सामने तुम्हारा hi चेहरा रहता है हर पल

मैं शहर का रहने वाला हूँ तुम्हे शहर घुमाऊंगा तुम्हे पिक्चर दिखाऊंगा

रामु सोचता हैं मंजरी गाओं की है और शहर का सुनकर उससे पैट जाएगी

मंजरी: देखिये आप नेरा रास्ता छोड़िये वर्ण मैं शोर मचा दूंगी

रामु आगे बढ़कर मंजरी का हाथ पकड़ लेता है

रामु: अरे तुम तो नाराज़ हो गयी मैं कोई बुरा लड़का नहीं हूँ मैं तो अमित का बड़ा भाई हूँ जो तुम्हारे स्कूल में पड़ता है

अमित का नाम सुनकर मंजरी शोर नहीं मचती क्यूंकि बात उनकी फॅमिली की इज़्ज़त पर आ सकती थी मगर रामु बदतमीज़ी पर उतर आया था इस लिए वो रामु को धक्का देकर भाग जाती है

रामु हाथ माल्टा हुआ गुस्से में वहां से निकल जाता है और घर चला अत है

खाना खाने क बाद अमित रामु को खेतो में चलने का पूछता है मगर रामु बहाना बना कर घर में hi रुक जाता है

जब सब अपने कमरों में आराम करने चले जाते हैं तो रामु फिर से कामिनी क पास चला जाता है

वो जनता था इस समय कामिनी सोती है

रामु जब कमरे में गया तो कामिनी सो रही थी आज वो बीएड पर करवट लिए सो रही थी और उसकी सदी का पल्लू साइन से हैट गया था जिसके कारन उसके दूध आधे ब्लाउज से बहार झांक रहे थे

रामु कामिनी की छतियन देखकर लैंड मसलने लगता है मगर जैसे hi वो आगे बढ़ने लगता है तो टेबल पे रखा गिलास उसके साथ लगने से नीचे गिर जाता है और आवाज़ सुनकर कामिनी उठ जाती है

कमीने: रामु बीटा क्या हुआ? कोई काम था?

रामु: वो मैं बस वो मैं सोच रहा था ज़रा बहार हो आऊं

कामिनी: कोई बात नहीं बीटा जा चला जा

रामु: वो मैं सोच रहा था गाओं तो सारा देख लिया आज थोड़ा बहार भी हो अत हूँ

कामिनी: ऐसा कर अपने फूफा का साथ चला जा वो तुझे मोटरसाइकिल से ले जायेंगे

रामु: क्या बुआ , मैं कोई बचा थोड़ा हूँ

मैं खुद चला जाऊंगा आप बस मुझे चाबी दे दीजिये

कामिनी: मगर मोटरसाइकिल तो घर पर नहीं है

रामु: अरे कड़ी तो है आंगन में बुलेट आप चाबी दो मैं निकल लेता हूँ बहार

कामिनी: अरे वो तो उस मनहूस की है तू रहने दे कहीं तुझे चोट वोट लग जाएगी

रामु: बुआ तू बहुत भोली है अरे इससे बड़े बड़े मोटरसाइकिल मैं शहर में चलता हूँ मेरे सब दोस्तों क पास हैं (झूठ)

कामिनी: मगर

Ramu:koi अगर मगर नहीं क्या अपने बेटे की इतनी स बात नहीं मानोगी

कामिनी: तेरी बात कैसे नहीं मानूंगी , तू रुक मैं दीदी से मोटरसाइकिल लेकर अति हूँ

कामिनी गौरी क पास जाती है चाबी लेने

कामिनी: दीदी वो रामु ज़रा घूमने जाना चाहता है

गौरी: अछि बात है अमित को बोल्दो उसे ले जायेगा जहाँ वो कहेगा

कामिनी: दीदी अब इतनी स बात क लिए अमित को घर बुलाने की क्या ज़रूरत है

रामु तो मोटरसाइकिल चलनी जनता है आप उसे अमित की मोटरसाइकिल की चाबी देदीजिये वो खुद चला जायेगा

गौरी: कामिनी तू जानती है न इन्होने (विजय) कितने चाव से अमित क लिए ये मोटरसाइकिल खरीदी है और आज तक उसके इलावा किसी ने उसकी मोटरसाइकिल को चलाया तक नहीं तू मेरी बहिन है मैं तुझे इंकार तो नहीं कर सकती मगर तू रामु को बोल क अमित को साथ लेकर जाये

कामिनी: मैं बोल देती हूँ रामु को आप चिंता मत करो

गौरी बेमन से उसे चाबी दे देती है और कामिनी चाबी लेजाकर रामु को देदेती है

कामिनी: रामु तू ऐसा कर पहले खेत से उस मनहूस को साथ लेता जाना और ये कुछ पैसे रखले काम आएंगे

रामु खुश होता हुआ चाबी और पैसे लेकर बुलेट बहार निकलता है

रामु: आ आज दौडाऊंगा तुझे मेरी रानी कितने दिन से तुझे देख रहा हूँ साला आज तक कभी छानने ता दूर किसी ने बैठने तक नहीं दिया था

रामु बुलेट को किक मर कर निकल जाता है मगर वो खेत जाने की बजाये गाओं से बहार निकल जाता है

उधर राजू अमित को खेतों से बुलाकर अपने साथ ले जाता है पास क टाउन में उसे किसी काम से जाना था इसलिए वो अमित क पास आया क चलो अमित क साथ उसकी बुलेट पर चलेंगे

अमित जब घर अत है उसे बुलेट नहीं दिखती उसे लगता है शायद बाबा लेकर गए होंगे इस लिए वो छोटी ममी को बताकर निकल जाता है

राजू अपने किसी दोस्त से उसकी मोटरसाइकिल मांग लेता है और दोनों दोस्त चल पड़ते हैं

उधर रामु पहली बार बुलेट चलने की ख़ुशी में सपीड बढ़ाता जा रहा था वो लड़कियों को ताड़ता हुआ बुलेट क ताशों में शोखिअन दिखा रहा था ऐसे hi एक मोड़ पर वो बुलेट को संभल नहीं पता और गिर जाता है

रामु को गिरने से चोट लग जाती है टांग पर और बुलेट का भी नुकसान हो जाता है

रामु की साडी शोखी निकल जाती है और ऊपर से बुलेट का भर उससे उठाया नहीं जाता और वो मदद क लिए चिल्लाता है

किस्मत से राजू और अमित भी उसी टाउन में थे और पास से गुज़र रहे थे एक्सीडेंट देख कर दोनों रुक जाते हैं जब वो पास एते हैं तो उन्हें रामु नज़र अत है

अमित पहले रामु फिर अपनी बुलेट को देखता है उसे बुलेट की हालत देख कर बहुत गुस्सा अत है मगर अगले hi पल रामु की चोट की वजह से वो नरम पद जाता है

अमित : भैया आप यहाँ इस हाल में? ये सब कैसे हुआ?

रामु: तड़पता हुआ ) क्या बताऊँ यार यार कोई पीछे से थोक गया मैं तो यहाँ बुआ क काम से आया था तू घर पर नहीं था बुआ ने मुझे भेज दिया और देख मेरी क्या हालत हो गयी

अमित: आप चलो पहले पट्टी करवा लो मोटरसाइकिल मैं देखता हूँ

राजू और अमित रामु को उठाकर डॉ क पास ले जाते हैं और उसकी मलहम पट्टी करवाते हैं , उसके बाद बुलेट को मैकेनिक क पास ले जाते हैं

मैकेनिक बताता है की 2/3 दिन तक ठीक हो जायेगा और उनको पैसे बता देता है

बुलेट की हालत देख कर अमित को बड़ा दुःख होता है कितने प्यार से उसे माँ बाबा ने ये दी थी और छोटी ममी ने खुद उसके लिए पसंद की थी

अमित को इस बुलेट से बहुत प्यार था मगर क्या करता कामिनी ममी तो पहले उससे नाराज़ रहती हैं अगर इस बात क लिए वो कुछ कहेगा तो बात और भी ज्यादा बाद सकती है

राजू और अमित रामु को लेकर घर लौट एते हैं राजू घर चला जाता है

रामु अमित से कहता है वो किसी को ये न बताये क मैं वो अकेला गया था वर्ण बुआ नाराज़ होगी, अमित भी हामी भर देता है

शाम होने वाली थी अभी घर पर सिर्फ दीपिका और कामिनी hi थे, दीपिका रसोई में थी काम कर रही थी और कामिनी आंगन में थी

रामु लड़खड़ाता हुआ जब अंदर अत है तो कामिनी दौड़ कर उसके पास जाती है

कामिनी: चिंता में) ये क्या हो गया तुझे मेरे बेटे? ये चोट कैसे लगी?

रामु: वो बुआ हम मोटरसाइकिल से जा रहे थे एक मोड़ पर अमित से संभाला नहीं और हम गिर गए

कामिनी रामु क मुँह से अमित का नाम सुनकर गुस्से में आ जाती है और खींचकर एक थप्पड़ अमित को मर देती है

कामिनी: तू कब मेरा पीछा छोड़ेगा क्यों नहीं चला जाता मेरी ज़िन्दगी से

पहले मेरी खुशिओं में आग लगाई अब मेरे भाई क एकलौते बेटे को मरने चला है

अमित की आँखों से आंसू बहने लगते हैं मगर मुँह से एक शब्द नहीं निकलता

उधर दीपिका आवाज़ सुनकर रसोई से निकलती है और कामिनी को अमित क मुँह पर थप्पड़ मरते देखती है तो दौड़ कर कामिनी को रोकती है और अमित को उसके कमरे में भेज देती है

दीपिका : क्या दीदी आप बार बार उसपर हाथ उठती रहती हैं वो बचा नहीं है, आखिर हुआ क्या है?

कामिनी: वो मनहूस पहले मेरे पीछे पड़ा था देख आज मेरे बेटे की क्या हालत करदी अगर इसे कुछ हो जाता तो क्या जवाब देती मैं अपने भाई को

दीपिका: मगर रामु तो अकेला गया था न फिर इसमें अमित का कैसे आप कसूर निकल रही हैं

कामिनी : अकेला नहीं गया था उसी मनहूस क साथ गया था

दीपिका: मुझे अछि तरह यद् है रामु क जाने क बाद अमित राजू क साथ घर आया था वो दोनों किसी काम से गए थे

रामु: वो वो आ आंटी हम साथ में hi गए थे मैं अमित को देखने खेत गया था वो वहां था नहीं तो मैं वापिस आ रहा था रस्ते में मिल गया फिर हम साथ में गए और साथ में ए आप राजू से पूछ लीजिये हम एक साथ hi ए हैं

कामिनी: सुन लिया, आ गया यकीन , मैं तो पहले hi कहती हूँ वो है hi मनहूस और तू भी उससे दूर रहा कर कहीं मेरी तरह तेरे साथ भी वो सब न हो जाये ( बचा मर जाये)

और तू (रामु) कहा था न दूर रहना उससे देख लिया नतीजा चल आ मेरा बीटा मैं तुझे हल्दी वाला दूध देती हूँ

कामिनी रामु को अपने कमरे में ले जाती है दीपिका को रामु की बात हज़म नहीं होती ऊपर से जो कामिनी ने किया उसपर उसे बहुत गुस्सा अत है

मगर उसे अभी अमित की टेंशन थी उसके दिल पर क्या बीत रही होगी

दीपिका जल्दी से अमित क पास जाती है जहाँ अमित बीएड पर बैठा आंसू बहा रहा था

दीपिका जाते hi अमित को गले लगा लेती है और उसके आंसू पोंछते हुए उसे चुप करवाने लगती है उसकी आँखों पर किश करती है

दीपिका: चुप हो जा अमित चुप हो जा मुझे साडी बात बता ये सब कैसे हुआ

अमित दीपिका को साडी बात बताता है

साडी बात सुनने क बाद दीपिका कहती है

दीपिका: तो तूने उस वक़्त बोलै क्यों नहीं क रामु अकेला गया था

अमित : ममी ने पुछा न सुना मैं क्या बोलता

दीपिका: पता नहीं क्यों कामिनी दीदी समझती नहीं कब तक पुराणी बातों को दिल से लगाए रखेंगी

और वो रामु, लगता है बड़ा अव्वल दर्जे का कमीना है इसका ध्यान रखना पड़ेगा

और तेरी बुलेट किधर है ? वो तो ठीक है न?

अमित : नहीं ममी जी वो उसका नुकसान हो गया है मैकेनिक क पास छोड़ कर आया हूँ 3 दिन बाद मिलेगी

दीपिका: इस रामु को कीड़े पड़े कितने प्यार से बड़े भैया और दीदी ने तेरे लिए ली थी मैंने कभी कमलेश को तेरी बुलेट नहीं चलने दी और न कभी अजय भैया न विजय भैया ने चलायी, आखिर बड़ी दीदी ने उस कलमुहे को चाबी दी hi क्यों

दीपिका अमित को चुप करवाती है और उसे थोड़ी देर किश वगैरह देकर उसका मूड थोड़ा ठीक करती है

गौरी पड़ोस से जब घर अति है तो कामिनी उसे बताती है क अमित ने रामु को मोटरसाइकिल से गिरा कर घायल कर दिया है

कामिनी: दीदी आप ने अमित को ज्यादा ढील दे राखी है देखो क्या हालत कर दी भगवन न करे अगर रामु को कुछ हो जाता तो क्या जवाब देती मैं भैया को रामु उनका एकलौता बीटा है पहले मुझसे मेरा बचा छीन लिया अब मेरे भाई क चिराग को बुझा देगा

उसे क्यों लेकर दी है मोटरसाइकिल जब वो चलना hi नहीं जनता

गौरी कामिनी की जाली कटी बातों को सुनकर मन hi मन बहुत दुखी होती है मगर कुछ कहती नहीं और रामु का हलचल पूछ कर अमित क पास जाती है जहाँ दीपिका भी बैठी हुई थी

गौरी: ये तूने क्या किया तुझे पता नहीं रामु हमारा मेहमान है और तूने क्या हाल कर दिया उसका आज क बाद तू हाथ भी नहीं लगाएगा मोटरसाइकिल को

गौरी को नाराज़ देखकर दीपिका कुछ बोलने को होती है मगर अमित उसे बोलने नहीं देता

अमित: मुझसे गलती हो गयी माँ ये सब अचानक हो गया था, आप जो कहेंगी मैं वही करूँगा

दीपिका अमित का चेहरा देखने लगती है आखिर उसने सच क्यों नहीं बताया

गौरी पहले कामिनी की बातों से दुखी थी और अब अमित पर गुस्सा निकल कर वो और भी दुखी हो जाती है और जल्दी से अपने कमरे में चली जाती है

दीपिका: आखिर कर क्या रहे हो तुम? क्यों नहीं बता देते सच

अमित: क्या आप चाहती हैं घर में बखेड़ा खड़ा हो जाये? अगर माँ को मैं सच बता देता तो वो रामु क झूठ बोलने पर रामु और कामिनी ममी को क्या कुछ नहीं कहती? और फिर कामिनी ममी मुझसे और नफरत करने लगती

जो हो गया उसे भूल जाइये चलिए आप खाना बनाइये मां भी एते होंगे

विजय अजय और कमलेश जब घर एते हैं तो उन्हें आज क मसले का पता चलता है विजय अमित से नाराज़ होता है मगर अजय और कमलेश कुछ नहीं कहते

बल्कि अजय हैरान था क अमित तो राजू क साथ गया था

जब वो ये बात पूछता है तो कामिनी वही बताती है जो रामु ने दीपिका से कहा था

खाना खा कर सब अपने कमरों में चले जाते हैं

अमित गौरी क पास जा कर उसे मनाता है तो गौरी भी ज्यादा देर नाराज़ नहीं रह पति और अमित को गले लगा लेती है

विजय भी नारजगी छोड़ देता है

वहीँ रामु कमरे में बीएड पर लेता सोच रहा

रामु: साला छूट क चक्कर में क्या क्या नहीं करना पड़ता आज तो अपनी भी गांड फट गयी , पता नहीं साला ये अमित कैसे संभालता है इतनी भरी बाइक को मेरी तो टांग hi टूट जाती, चलो ये ाचा हुआ साडी बात उस चूतिये क सर पर आ गयी वर्ण बाइक का जो नुकसान हुआ है उसके बदले मुझे यहाँ से जाना पड़ता और इस घर की मस्त गदरायी हुई तीनो घोडियन मेरे हाथ से निकल जाती

आज से बहार घूमना बंद अब जल्दी से ये चोट ठीक हो फिर अपना फार्मूला लगता हूँ और तीनो घोडीओन की सवारी करता हूँ

क्या मस्त गदरायी हुई है ये गौरी भी साला लैंड बार बार खड़ा हो जाता है जब उसके नंगे जिस्म को यद् करता हूँ

मुझे जो चाहिए था अब तो वो मिल hi गया है अब मौका देख कर बस पेलना hi है तीनो को

अब तीनो मेरी रखैल बनेंगी और किसी को पता भी नहीं चलेगा हीहीहीही
 
अपडेट 22



वहीँ रामु कमरे में बीएड पर लेता सोच रहा


रामु: साला छूट क चक्कर में क्या क्या नहीं करना पड़ता आज तो अपनी भी गांड फट गयी , पता नहीं साला ये अमित कैसे संभालता है इतनी भरी बाइक को मेरी तो टांग hi टूट जाती, चलो ये ाचा हुआ साडी बात उस चूतिये क सर पर आ गयी वर्ण बाइक का जो नुकसान हुआ है उसके बदले मुझे यहाँ से जाना पड़ता और इस घर की मस्त गदरायी हुई तीनो घोडियन मेरे हाथ से निकल जाती

आज से बहार घूमना बंद अब जल्दी से ये चोट ठीक हो फिर अपना फार्मूला लगता हूँ और तीनो घोडीओन की सवारी करता हूँ

क्या मस्त गदरायी हुई है ये गौरी भी साला लैंड बार बार खड़ा हो जाता है जब उसके नंगे जिस्म को यद् करता हूँ

मुझे जो चाहिए था अब तो वो मिल hi गया है अब मौका देख कर बस पेलना hi है तीनो को

अब तीनो मेरी रखैल बनेंगी और किसी को पता भी नहीं चलेगा हीहीहीही

अब आगे-

अगली सुबह अमित रूटीन से अखाड़े और फिर स्कूल जाता है, रामु चोट की वजह से बिस्तर से नहीं उठता मगर सुबह सुबह कामिनी क जिस्म की खुशबु ज़रूर ले लेता है

स्कूल में मंजरी अमित को रामु की हरकत क बारे में बता देती है जिसे सुनकर अमित को रामु पर और गुस्सा आ जाता है

स्कूल से एते वक़्त अमित राजू से मिलकर साडी बात उसे बताता है और रामु पर नज़र रखने को बोल देता है ताकि उसको सबक सिखाया जा सके, राजू रामु से दोस्ती का आईडिया देता है मगर अमित साफ मन कर देता है दोनों दोस्त अपने अपने दिमाग से आईडिया सोचते हैं मगर किसी नतीजे पर नहीं पहुँचते

वहीँ दीपिका भी रामु को सबक सीखना चाहती थी मगर सीधा सीधा कुछ करना सही नहीं था इससे कामिनी की नज़र में वो गलत साबित हो जाती मगर फिर भी वो कमलेश से इतना ज़रूर कह देती है क मुझे रामु का चाल चलन ठीक नहीं लगता

दोपहर क खाने क वक़्त अमित घर आ जाता है और खाना खा कर थोड़ी देर आराम कर क खेतों में चला जाता है जहाँ अजय मां फिर से उसे कल क बारे में पूछते हैं पर अमित बात को गोलमोल घूमता है जिससे अजय को यकीन नहीं होता

रामु चोट की वजह से अभी चलने फिरने में दिक्कत महसूस कर रहा था इस लिए वो बीएड से ज्यादा उठता नहीं और कामिनी भी उसे दिन को सहारा देकर अपने कमरे में ले अति है जहाँ पर वो कामिनी क सोते समय उसके बदन को टच कर क अपना ठरक पूरा करता है

ऐसे hi तीन दिन निकल जाते हैं पर कुछ खास नहीं होता , अमित की मोटरसाइकिल भी ठीक होकर आ जाती है और रामु भी अब चलने फिरने क लिए फिट हो जाता है

चौथे दिन दोपहर को गौरी दीपिका को साथ लेकर गाओं में किसी क घर फंक्शन पर चली जाती है, कामिनी रामु क लिए घर पर रुक जाती है अमित तो अभी स्कूल में hi था अभी उसे आने में 3 घंटे का वक़्त था

रामु को ये मौका सही लगता है अपनी चल चलने क लिए जब गौरी और दीपिका निकल जाते हैं तो रामु नीचे अत है कामिनी घर क छोटे मोठे कामो में बिजी थी

रामु रसोई घर में जाकर चाय बनाने लगता है, चाय को दो कप में डालने क बाद रामु एक कप में नींद की दो गोलियां दाल देता है

( रामु उस दिन बुलेट से टाउन केमिस्ट की दुकान से नींद की गोलियां कंडोम और वियाग्रा की गोलियां hi लेकर आया था)

और खुद एक वियाग्रा टेबलेट खा लेता है

फिर वो चाय लेकर कामिनी क पास जाता है

रामु: बुआ जी क्या आप सारा दिन अकेली hi घर का सारा काम करती रहती हैं, क्या आप hi ने ठेका ले रखा है सारा?

मेरा बस चले तो आपको सारा दिन बिस्तर से उठने न दूँ ( सारा दिन बिस्तर पर नंगी कर क छोड़ता रहूं) ये लीजिये चाय पीजिये मैंने स्पेशल आपके लिए बनाई है

कामिनी: अरे तू मुझे बोल देता अगर तुझे ज़रूरत थी तो अभी अभी तेरी चोट ठीक हुई है और तू ये सब करने लगा

रामु: बुआ जी मैं तो बेटे का फ़र्ज़ निभा रहा हूँ, लीजिये चाय पीजिये और बताइये कैसी बानी है

कामिनी बहुत खुश होती है क रामु सचमुच उसकी कितनी केयर करता है और वो मन hi मन खुश होती चाय पिने लगती है

चाय पीने क बाद रामु टॉयलेट का बोलकर चला जाता है और 15 मिनट्स बाद वापिस अत है

रामु क वापिस आने तक कामिनी टेबलेट क हाई दोसे से नींद की आगोश में चली जाती है

रामु कामिनी को सोई देखकर अपनी चल की कामयाबी पर खुश हो जाता है मगर वो जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था इसलिए वो और 15 मिनट्स वेट करता है

उसके बाद रामु बहार क गेट को अछि तरह बंद करने क बाद कमरे में आकर दरवाज़ लॉक कर देता है और कामिनी को चेक करने क लिए पहले उसे आवाज़ देता है फिर हिलता है मगर कामिनी कोई रिस्पांस नहीं देती

रामु ख़ुशी से उछाल पड़ता है और फटाफट अपने कपडे उतर देता है

फिर वो कामिनी क कपडे उतरने की सोचता है मगर फिर इरादा बदल लेता है ये सोचकर क अगर कोई आ गया तो वापिस कपडे पहनना मुश्किल होगा

रामु कामिनी क पैरों क पास बैठकर उसके दोनों पैरों को चूमता है

रामु: आह कितने गोर गोर पाऊँ है कितने मुलायम हैं ममम

पाऊँ को चूमने क बाद रामु कामिनी क दोनों पाऊँ उठाकर सदी कमर तक ऊपर सरका देता है

कामिनी की नंगी गोरी चिकनी जांघें रामु को पागल करने लगती हैं और रामु दीवानो की तरह पाऊँ से लेकर जाँघों क जोड़ों तक जीभ से चाटने लगता है

रामु की जीभ की थूक से कामिनी की पूरी टांगें गीली हो गयी थी

फिर रामु दोनों हाथो से कामिनी की पेंटी पकड़ कर धीरे धीरे खींचने लगता है, पेंटी कमर क नीचे फांसी होने की वजह से रामु बड़ी एहतियात से निकलता है कहीं झटके से कामिनी को महसूस न हो कुछ, रामु जनता था क इतनी जल्दी कामिनी उठने वाली नहीं मगर फिर भी वो एहतियात बारात रहा था

पेंटी निकलने क बाद रामु क सामने कामिनी की झांटो वाली बुर आ जाती है

कामिनी की गुलाबी छूट देखकर रामु रामु का दिल गले में आ जाता है

गोरी गुलाबी छूट क ऊपर काली घनी झांटे क्या दिलकश नज़ारा था ऐसी गोरी चिकनी छूट तो बस ब्लू फिल्मो में hi देखने को मिलती है

रामु जल्दी से जीभ निकल कर छूट को चाटने लगता है

रामु: हम्म्म उम्म्म्म क्या मज़ेदार स्वाद है सररर्रूप सररर्रूप सरररररूप हम्म्म उम्म्म्म आअह्ह्ह्ह ककक ऐसे लगता है जैसे कुवारी लड़की की छूट हो

कामिनी अजय की नपुंसकता की वजह से कितने सैलून से चूड़ी नहीं थी इसलिए उसकी छूट टाइट हो चुकी थी कभी कभी वो उंगली कर लेती थी मगर छूट टाइट हो चुकी थी

रामु छूट का स्वाद लेता हुआ 15 मिनट्स तक छूट hi चाट ता रहता है

कामिनी चाहे नींद में बेहोशी की हालत में थी मगर उसका जिस्म छूट चटाई से गरम हो गया था और छूट रिसने लगी थी

छूट चाटने क बाद रामु कामिनी क नरम गुलाबी होंठ चूसने लगता है और उसके होंठो की साडी लिपस्टिक खा जाता है

होंठ चूसने क साथ रामु कामिनी क पूरे चेहरे को चूमता है और फिर उसकी गर्दन पर भी किश करने लगता है

उसके बाद रामु कामिनी क ब्लाउज क बटन खोल कर उसके दूध से सफ़ेद दूध मसलने लगता है

कामिनी क दूध गुरे चित्ते थे और निप्पल हलके ब्राउन थे

रामु से रहा नहीं जाता और वो एक दूध को मुँह में लेकर चूसने लगता है, जितना हो सके वो दूध को मुँह में भर लेता है और दूसरे दूध को मसलता है

थोड़ी देर एक दूध चूसने क बाद वो दूसरे दूध को चुस्त है

अब रुस्तम ब्लू फिल्म क सरे आइडियाज को फॉलो करता हुआ अपने लैंड को कामिनी क होंठो पर लगा देता है

रामु का लैंड कोई ज्यादा खास नहीं था बस 5 इंच का hi था मगर टेबलेट खाने की वजह से लोहे की तरह सख्त हुआ पड़ा था

कामिनी तो बेहोश थी मगर रामु उसके मुँह में लैंड डालने चाहता था फिर कोशिश कर क वो कामिनी का मुँह खुलवाता है और अपना लैंड उसके मुँह में घुसाने लगता है

कामिनी क मुँह में लैंड जाते hi एक झुरझुरी स रामु क जिस्म में दौड़ जाती है अपनी बुआ क हसीं तरीन कोमल लबों में अपना लैंड डालकर वो खुद को जन्नत में उड़ता हुआ महसूस कर रहा था

मज़े से उसके मुँह से सिसकी निकल जाती है

रामु: आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह cccccccccccc buaaaaaaaaaaa क्यययय्यआआ ममममास्त्टटटटट माआआअआलललल है टूउऊउउउउ

कक्ककक्कक्स आआआअह्ह्ह्हह

5 मिनट्स लुंड मुँह में घूमने क बाद रामु हैट जाता है क्यूंकि कामिनी क दांत बार बार लैंड पर लग रहे थे जिससे रामु क लैंड में रगड़ लग रही थी

रामु अब फाइनली अपना मिशन “ बुआ की चुदाई “ पूरा करने वाला था

रामु कामिनी की टांगो को उठाकर अपने कंधो पर रख लेता है और अपने लैंड को बिना कंडोम क hi कामिनी की छूट पर रखता है

रामु ने अभी तक 2/3 बार रण्डिओं की काली कलूटी फटी हुई भोसड़ा टाइप छूट hi छोड़ी थी, कामिनी छूट उसके लिए किसी सपने क सच होने क सामान थी इस लिए वो लैंड डालने से पहले फिर एक बार छूट चाटने लगता है 2 मिनट्स छूट चाटने क बाद वो अपने लैंड पर थूक लगता है और फिर से कामिनी की छूट पर अपना लैंड रखता है

उसी वक़्त बहार का दरवाज़ा ज़ोर ज़ोर से कोई पीटने लगता है

दरवाज़े की इतनी ज़ोरदार आवाज़ से रामु की गांड फैट जाती है

वो समझ जाता है कोई घर का hi मेंबर होगा इसलिए वो फटाफट अपने कपडे पहनता है

तबतक बहार से दरवाज़ा लगातार बजने लगा था

कपडे पहनने क बाद रामु कामिनी की सदी पेटीकोट निचे कर देता है और उसके ब्लाउज क बटन जल्दी से बंद करता है मगर पूरे हो नहीं पते

दरवाज़ा लगातार बज रहा था रामु एक बार नज़र मरकर कमरे से निकलता है और दौड़ता हुआ गेट क पास जाकर सांस ठीक करते हुए गेट खोलता है

सामने दीपिका थी जो रामु को गौर से देख कर अंदाज़ा लगाने लगती है

दीपिका: इतनी देर दरवाज़ा खोलने में? दीदी कहाँ है?

रामु: वो वो मैं मैं ऊपर कमरे में था आप तो जानती हैं आंटी मेरे पाऊँ में चोट अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुई इसलिए मुझे आने में देर लग गयी

दीपिका रामु की बातों से समझ गयी क वो झूठ बोल रहा है, दीपिका की नज़र जब रामु की पेण्ट में खड़े हुए लैंड पर जाती है तो उसे शक होता है

दीपिका: दीदी कहाँ है?

रामु: मुझे क्या पता मैं तो अभी ऊपर से आया हूँ शायद कमरे में हो

दीपिका जल्दी से अंदर अति है और सीधा कामिनी क कमरे में जाती है जहाँ कामिनी बीएड पर सो रही थी

दीपिका कामिनी को आवाज़ देती है मगर कामिनी कोई रिस्पांस नहीं देती

दीपिका: दीदी तो इस वक़्त नहीं सोती फिर आज कैसे सो गयी और मेरी आवाज़ से भी नहीं उठ रही

दीपिका कामिनी को हिलती है मगर कामिनी फिर भी नहीं जगती

दीपिका को लगता है क शायद कामिनी बेहोश हो गयी है इसलिए वो रामु को कहती है वो जल्दी से खेतों से अजय भैया को बुलाकर लाये

रामु बिना वक़्त गवाए घर से भाग जाता है

रामु: भें की लोदी थोड़ा लेट आ जाती तो तेरा क्या जाता, मैं अब तक बुआ को छोड़ चूका होता मगर लगता है तेरी छूट में खुजली कुछ ज्यादा hi है, कोई बात नहीं तेरी भी खुजली मैं hi दूर करूँगा और तेरी तो गांड भी फाड़ूंगा साली ने कलपद कर दिया

रामु दीपिका की मन में गलियां देता हुआ खेतों में पहुंचकर अजय फूफा को दीपिका का सन्देश देता है

अजय रामु को साथ लेकर गाओं में जो देसी कामचलाऊ डॉ था उसके पास पहुँचता है और उसे साथ लेकर घर पहुँच जाता है

रामु क जाने क बाद कामिनी को गौर से देखती है तो उसे नज़र अत है क उसके ब्लाउज क दो बटन खुले हुए थे और उसके होंठो से लिपस्टिक गायब थी

दीपिका साडी बातों पर गौर करती है तो उसे यकीन होने लगता है क इसमें रामु का हाथ है मगर सबूत नहीं था कोई उसके पास ये बात साबित करने क लिए

कामिनी की पेंटी बीएड क नीचे hi गिरी पड़ी थी मगर उसपर दीपिका की नज़र नहीं पड़ी थी क्यूंकि जल्दबाज़ी में रामु का पाऊँ लगने से पेंटी बीएड क नीचे चली गयी थी

इतनी देर में अजय रामु को और डॉ को साथ लाइट घर पहुँच जाता है

डॉ कामिनी को चेक कर क एक इंजेक्शन लगा देता है और कहता है क डरने की बात नहीं

डॉ तो चला गया था मगर दीपिका का दिमाग रामु पर hi लगा हुआ था

रामु वियाग्रा की वजह से उत्तेजित था उसे बस छूट चाहिए थी उसका पानी उसके दिमाग पर चढ़ गया था घर पर तो मामला बिगड़ गया था इसलिए वो घर से निकल जाता है

स्कूल की छुट्टी का वक़्त हो चला था रामु क दिमाग में मंजरी आ जाती है और वो जल्दी से मंजरी क रस्ते में सही ठिकाना देख कर छुप जाता है

छुट्टी होने क बाद मंजरी जब घर जा रही थी तो दोपहर का वक़्त होने की वजह से रोज़ की तरह गली में कोई नहीं था

अचानक एक बंद गली क कोने से एक शख्स उसका मुँह दबाकर उसे उस बंद गली में खींच लेता है इस गली में कोई घर नहीं था बस एक घर का पिछवाड़ा hi था जहाँ गएँ भैंस बाँधी हुई थी और चारे का कमरा था

मंजरी को खींचने वाला रामु hi था जो उसे खींचकर उसे चारे वाले कमरे में ले जाता है

मंजरी क मुँह से आवाज़ नहीं निकल रही थी वो खुद छुड़ाने क लिए जद्दो जिहाद कर रही थी मगर रामु क आगे उसका जोर काम था

मंजरी को अभी तक पता नहीं था क किसने उसे पकड़ रखा है , चारे क कमरे में अँधेरा था

रामु जल्दी से मंजरी को पटक देता है और उसपर टूट पड़ता है मंजरी चिल्लाने की कोशिश करती है मगर रामु फिर से उसका मुँह बंद कर देता है और मंजरी को अपने नीचे दबाते हुए एक हाथ से उसकी सलवार का नाडा खोलने लगता है

मंजरी लगातार छूटने की कोशिश कर रही थी वो रोये जा रही थी और चीखना छाती थी ताकि उसकी मदद को कोई आ सके वो मन hi मन भगवन से मदद मांग रही थी मगर फ़िलहाल मदद मिलती दिख नहीं रही थी

रामु से मंजरी की सलवार का नाडा खुल नहीं रहा था इस लिए वो खींचकर नाडा तोड़ देता है

नाडा टूट ते hi मंजरी को लगता है क अब उसका बलात्कार हो क रहेगा वो और भी ज़्यादा कोशिश करती है छूटने की

हाथ चलते चलते मंजरी क हाथ में एक पत्थर आ जाता है और वो पत्थर उठाकर सीधा अपने ऊपर पड़े शख्स क सर पर मर देती है

मंजरी ने पूरी जोर से पत्थर मारा था जिसकी वजह से रामु को गहरी चोट लग जाती है और उसकी पकड़ ढीली पद जाती है

उसी पल मंजरी रामु को धक्का देकर उसके निचे से निकल कर अपनी सलवार को एक हाथ से पकड़ कर दौड़ जाती है और सीधा घर जाकर hi रूकती है

रामु क सर से खून बहने लगा था वो दर्द से तड़पता हुआ उठता है और डॉ क पास चला जाता है

रामु क साथ दूसरी बार कलपद हो गया था और अब सर की चोट से अलग से गांड फैट रही थी

एक बात तो उसके हक़ में हुई थी क दोनों hi केस में उसको किसी ने देखा नहीं था

पट्टी करवाकर रामु घर अत है तो सब घर पर मौजूद थे अमित स्कूल से आ चूका था विजय कमलेश और गौरी भी कामिनी की बेहोशी का सुनकर लौट ए थे

रामु क सर पर बंधी पट्टी देखकर सब उससे पूछने लगते हैं मगर वो कहता है क पाऊँ फिसलने से गिर गया था और पत्थर पर सर जा लगा

कामिनी भी होश में आ चुकी थी मगर पूरी तरह नार्मल नहीं हुई थी

फिर खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में चले जाते हैं
 
अपडेट 23



रामु क सर पर बंधी पट्टी देखकर सब उससे पूछने लगते हैं मगर वो कहता है क पाऊँ फिसलने से गिर गया था और पत्थर पर सर जा लगा




कामिनी भी होश में आ चुकी थी मगर पूरी तरह नार्मल नहीं हुई थी

फिर खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में चले जाते हैं

अब आगे-

अगले दिन अमित रूटीन से अखाड़े और स्कूल चला जाता है रामु कमरे में रेस्ट करता है

कामिनी की हालत बिलकुल ठीक थी जब वो अपने कमरे में सफाई कर रही होती है तो उसे अपने बीएड क निचे अपनी पेंटी मिलती है

कामिनी: ये पेंटी तो मैंने कल पहनी थी ये कब और कैसे यहाँ आ गयी, कहीं बेहोशी में मैंने खुद hi तो नहीं उतर ली, हाँ ऐसा hi होगा मगर मुझे यद् क्यों नहीं आ रहा उफ़ पता नहीं क्या हो गया था पता नहीं कैसी बीमारी लग गयी है

अमित को आज मंजरी स्कूल में नज़र नहीं अति और वो मंजरी का पता करने क लिए उसके घर जाने का सोचता है

घर आकर अमित खाना खा कर राजू से मिलने चला जाता है, राजू को साथ लेकर अमित मंजरी क घर की तरफ चल पड़ता है मगर मंजरी बहार कहीं नज़र नहीं अति तो अमित राजू को बोलता है क वो रेनू से बोलकर मंजरी का पता करे

राजू रेनू क हाथ मंजरी क घर संदेसा भेज देता है , अमित और राजू नदी किनारे मंजरी और रेनू का इंतज़ार कर रहे थे

आधे घंटे क इंतज़ार क बाद रेनू मंजरी को साथ लेकर नदी किनारे आ जाती है

मंजरी अमित को देखकर दौड़ती हुई अमित क गले लग जाती है और फुट फुट कर रोने लगती है

अमित : मंजरी क्या हुआ? बताओ मुझे तुम ऐसे क्यों रोये जा रही हो? प्लीज बताओ क्या हुआ?

मंजरी: रट हुए) मुझे बचा लो अमित मुझे बचा लो मैं मर जाउंगी

अमित : मंजरी बात क्या है क्या हुआ है तुम्हे बताओ मुझे तुम्हे मेरी कसम खुद को सम्भालो और बात क्या हुई है बताओ मुझे

मंजरी: रोना कण्ट्रोल करते हुए) कल किसी ने मेरी इज़्ज़त लूटने की कोशिश की

अमित: गुस्से में) कौन था वो मुझे नाम बताओ उसका? किसने तुम्हारे साथ ऐसी गन्दी हरकत की

मंजरी : मैं उसका चेहरा नहीं देख पायी उसने मुझे पीछे से पकड़ा और घसीट कर बंद गली में चारे क कमरे में ले गया

अगर मेरे हाथ में वो पत्थर न आ जाता तो मैं किसी मुँह दिखने क लिए ज़िंदा भी न रहती, मेरा दिल अभी तक वो मंज़र यद् कर क दर रहा है

अमित : हौसला रखो मंजरी मैं उस कमीने को छोडूंगा नहीं चाहे वो जो भी हो मैं पता लगा क रहूँगा

इतना बताओ तुमने उसको बिलकुल भी नहीं देखा कोई बात ऐसी जो तुम्हे यद् हो वो बताओ

मंजरी: नहीं मैं इतना दर गयी थी मैं बस उसे पत्थर मरने क बाद धक्का देकर भाग गयी

अमित : तुमने उसको पत्थर कहाँ पर मारा था?

मंजरी: अँधेरा था ठीक से तो पता नहीं मगर शायद उसके सर पर hi कहीं लगा था

मंजरी की बात सुनकर अमित क दिमाग में रामु क सर पर लगी चोट आ जाती है उसने पहले भी मंजरी का रास्ता रोका था

अमित : मन में) लगता है इसमें उसी का हाथ है मगर अछि तरह कन्फर्म करना होगा कहीं गलती हो गयी तो बहुत बड़ा पन्गा हो सकता है कोई सबूत भी तो नहीं है अगर मंजरी ने देखा होता खाल खिंच लेता उसकी

अमित मंजरी को बाँहों में लेकर उसे तसल्ली देता रहता है , एक घंटा मंजरी को बाँहों में लिए अमित उसे प्यार से हौसला देता रहता है

राजू और रेनू भी चिंता में थे क गाओं में ऐसा कोण हो सकता है जो ऐसी हरकत करे

अमित मंजरी और रेनू को घर भेजकर राजू को पता करने को कहता है क रामु को कल किसी ने उस गली क आसपास देखा था क्या और खुद वो घर आ जाता है

अमित इस मसले पर छोटी ममी से मश्वरा करना चाहता था इस लिए वो उसके कमरे में चला जाता है गौरी रामु और कामिनी अपने अपने कमरों में थे

दीपिका: आज तो लगता है भाग खुल गए मेरे जनाब आज खुद मेरे कमरे में तशरीफ़ लाये हैं वो इस वक़्त अकेले में, क्या इरादे हैं? क्या दिन में hi आज प्यार करना है?

अमित : ममी जी मुझे किसी ज़रूरी मुद्दे पर आपकी राय चाहिए मैं बहुत टेंशन में हूँ

दीपिका: क्या हुआ क्या बात है तुम इतनी चिंता में क्यों हो?

अमित दीपिका को मंजरी क साथ हुई घटना क बारे में बताता है और उससे पहले जो रामु ने मंजरी का रास्ता रोका था वो भी बताता है

दीपिका: हम्म बगैर सबूत क अगर उस पर इलज़ाम लगाया तो बात उलटी पद जाएगी

मगर मुझे पूरा यकीन है क वो रामु ऐसी गिरी हुई हरकत कर सकता है मैंने खुद उसे देखा है कामिनी दीदी गौरी दीदी और खुद मेरे जिस्मो को हवसी नज़रों से ताड़ते हुए

और तो और कल कामिनी दीदी जब बेहोश हुई थी तो उस वक़्त एहि घर में था कामिनी दीदी की हालत देखकर मुझे शक हुआ था क किसी ने उनके होंठ चूसे हैं और उनके ब्लाउज क 2 बटन भी खुले हुए थे

और वो बाथरूम वाली घटना भी बता देती है

ये सब सुनकर अमित का पारा चढ़ जाता है और वो रामु क कमरे की तरफ जाने लगता है तो दीपिका उसे रोक लेती है

दीपिका: होश से काम लो अमित अगर तुमने कुछ किया तो कामिनी दीदी तुम्हे hi गलत मानेगी और सबूत न होने की ावेज में तुम्हे सबके गुस्से का सामना करना पड़ेगा

अमित खुद को कण्ट्रोल करता है उसे ममी की बात सही लगती है

अमित : मगर हमे कुछ तो करना होगा उस हरामी को ऐसे hi नहीं छोड़ सकते

दीपिका: हमें सबकुछ सोच समझ कर करना होगा और उसे रेंज हाथ पकड़ना होगा तभी कामिनी दीदी मानेगी

अमित: मगर कैसे वो किसी क सामने तो कुछ करेगा नहीं

दीपिका : बिलकुल हमें यही तो करना है

अमित : मतलब

दीपिका अमित को अपना प्लान बताती है

अमित दीपिका क प्लान पर राज़ी हो जाता है

अमित : मैं उस हरामी की हड्डी पसली तोड़ दूंगा और आप मुझे रोकेंगी नहीं

दीपिका: जो करना ध्यान से करना कहीं कुछ ज्यादा न हो जाये

उसके बाद अमित खेतों में चला जाता है

शाम को सब घर लौट आते हैं और खाना खा कर अपने अपने कमरों में चले जाते हैं

रामु क सर पर लगी चोट ज्यादा गहरी नहीं थी उसका ज़ख़्म तीन दिन में hi काफी हद तक भर गया था

इन तीन दिन में कुछ खास नहीं हुस अमित बस ममी क प्लान को अमल में लेन का इंतज़ार कर रहा था

तीन दिन बाद सुबह जब अमित अखाड़े से आकर खाना खाकर स्कूल चला जाता है तो रामु क सामने दीपिका कामिनी से कहती है

दीपिका : दीदी मुझे ज़रा डॉ क पास जाना है शहर चेकउप करवाने कमलेश तो ज़रूरी काम से गए हैं मैं गौरी दीदी को साथ लेकर जा रही हूँ हम दोपहर बाद लौट आएंगे

कामिनी: ठीक है मैं खाना बना लुंगी तुम चिंता न करना ज़रा ध्यान से जाना

दीपिका इतना कह कर गौरी क कमरे में चली जाती है

रामु दीपिका की बात सुनकर अंदर hi अंदर नाच उठ ता है और कामिनी को छोड़ने की प्लानिंग करने लगता है

रामु: आज आएगा मज़ा आज तो खुला वक़्त है पूरी तसल्ली से आज बुआ क गदराये जिस्म को रगड़ क छोडूंगा और छोड़ छोड़ क छूट का भोसड़ा बना दूंगा

दीपिका गौरी को साथ लेकर जल्दी से घर से निकल जाती है

रामु अपने प्लान को शुरू कर देता है

रामु: बुआ आपको उस दिन चाय कैसी लगी थी?

कामिनी: अछि थी

रामु: चलिए आज फिर आपको अपने हाथ से चाय बना कर पिलाता हूँ

कामिनी: अरे रहने दे, क्या ाचा लगता है क मेरे होते हुए तू रसोई में काम करे

रामु: बुआ जी आप तो रोज़ hi काम करती हैं मगर मुझे कहाँ बार बार मौका मिलेगा सेवा करने का ( आपकी मस्त बुर छोड़ने का)

कामिनी: ाचा ठीक है करले अपने मन की

रामु रसोई में चाय बनाने लगता है और कामिनी घर क काम करने लगती है

रामु कामिनी क कप में नींद की 2 गोलियां दाल कर कामिनी को चाय का कप पकड़ा देता है और खुद भी एक वियाग्रा टेबलेट खा लेता है

चाय पीकर रामु अपने कमरे में चला जाता है और आधे घंटे बाद कामिनी क कमरे में अत है

कामिनी दवा क असर से बेहोशी की हालत में बीएड पर पड़ी थी

आज रामु क पास काफी वक़्त था अमित तो स्कूल से देर से hi आएगा और कामिनी गौरी भी लेट आएंगी रामु आराम से कामिनी को रगड़ कर छोड़ने की फ़िराक में था

रामु पहले अपने कपडे उतरता है और फिर कामिनी को पूरी नंगी कर देता है

कामिनी क दूध से सफ़ेद बेलिबास जिस्म को देखकर रामु की लार टपकने लगती है और वो कामिनी क पूरे जिस्म को चाटने लगता है

रामु कामिनी क जिस्म पर चढ़कर उसे चाट hi रहा था क अचानक कमरे का दरवाज़ा झटके से खुलता है और बिजली की स्पीड से अमित अंदर घुसता है

अमित को देखकर रामु की गांड फैट जाती है मगर वो जल्दी से अमित को गलियां देकर बहार निकलने को कहता है

रामु: ये क्या हरकत है मादरचोद चल बहार निकल मैं तेरी आआअह्ह्ह्ह

रामु क शब्द मुँह में hi रह जाते हैं अमित तेजी से आगे बढ़ता है और एक ज़ोरदार थप्पड़ रामु क मुँह पर पड़ता है

अमित एक क बाद एक लगातार थप्पड़ लात घूंसे मरता जा रहा था

आज रामु को एहसास हो रहा था क अमित जितना नज़र अत था उससे कहीं ज़्यादा ताकतवर था

रामु: आआ मर गयाए आअह्ह्ह माआ मर गया ाआईई छोड़ दे साले छोड़ मुझे मादरचोद आअह्ह्ह

अमित: बहुत गर्मी है सेल तेरे अंदर आज निकलता हूँ साडी गर्मी तेरी

अमित रामु को मार hi रहा था क पीछे से दीपिका भी आ जाती है, कमरे में घुसते hi उसकी नज़र कामिनी क नंगे जिस्म पर पड़ती है तो वो जल्दी से बेडशीट से hi उसे धक् देती है और कामिनी क चेहरे पर पानी दाल कर उसे होश में लाने की कोशिश करती है

अमित रामु की धोबी क कपडे धोने क स्टाइल में धुलाई कर रहा था

दीपिका भी अमित को रोकती नहीं और अमित अपना सारा गुस्सा निकलने लगता है

अमित घर क आँगन में पटक पटक कर रामु की धुलाई कर रहा था और रामु की चीखे पूरे घर में गूँज रही थी

तभी बहार का गेट ज़ोर ज़ोर से बजने लगता है दीपिका दौड़कर गेट खोलती है सामने गौरी थी

गौरी अमित को रामु की बुरी तरह धुलाई करते हुए देखकर घबरा जाती है और तेज़ी से दौड़कर अमित को रोकने की कोशिश करती है मगर अमित रुक नहीं रहा था

रामु का जिस्म लहू लोहान होने लगता है गौरी अमित को थप्पड़ मरती है मगर फिर भी अमित रुकता नहीं उसकी आँखों में तो खून उतर आया था तभी बहार से अजय विजय और कमलेश भी आ जाते हैं

विजय और कमलेश मिलकर अमित को काबू करते हैं और अजय रामु को उठता है

रामु पूरा नंगा था इसलिए अजय जल्दी से पास में hi तार पर लटक रहे तौलिये को पकड़ कर रामु की कमर से बाँध देता है

विजय: ये क्या हरकत है अमित ? घर ए मेहमान क साथ ऐसा सलूक किया जाता है तुम्हारा दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया

अमित: गुस्से में) ये मेहमान नहीं राक्षस है हवस का भूखा भेड़िए है ये सूअर की औलाद

गौरी: गुस्से में) चुप एक शब्द नहीं बोलना मुँह से क्या यही सिखाया है मैंने तुझे

वो कामिनी का भतीजा है चल माफ़ी मांग अभी उससे

अमित : माफ़ी माँगूँ ? मैं तो इसको जान से मर डालूंगा ऐसे गन्दी नाली क कीड़े को ज़िंदा नहीं छोड़ना चाहिए

गौरी आगे बढ़कर फिर से दो थप्पड़ मर देती है अमित को

गौरी: नालायक तुझे रिश्तों की कोई इज़्ज़त नहीं रही दूर हो जा मेरी नज़रों से

दीपिका: ठहरो दीदी आप बिना सचाई जाने अमित पर हाथ उठा रही हैं

सच क्या है मैं बताती हूँ

सब दीपिका की तरफ देखने लगते हैं

गौरी: तू क्या बताएगी तू तो अभी मेरे साथ थी

दीपिका: ये सब मेरा hi प्लान था दीदी

दरअसल मुझे रामु की हरकतों पर शक था उस दिन कामिनी दीदी का बेहोश होना कोई बीमारी की वजह से नहीं था उनकी हालत देख कर मैं समझ गयी थी क कुछ तो गड़बड़ है इस लिए मैंने आज जान बुझ कर कामिनी दीदी को रामु क सामने कहा क मैं और आप शहर जा रहे हैं और देर से आएंगे

अमित को पहले hi मैंने स्कूल न जाने का बोल दिया था और वो घर क पास hi इंतज़ार कर रहा था

कामिनी दीदी को अकेला पाकर इसने अपनी घटिया चल चली और रेंज हाथ आज पकड़ा गया

गौरी: मैं समझी नहीं आखिर तू किस बारे में बात कर रही है

दीपिका: आप अब भी नहीं समझी? देखिये इस कमीने को इसके कपडे कहाँ हैं?

और ज़रा मेरे साथ अंदर चलिए

दीपिका गौरी को कामिनी क कमरे में ले जाती है जहाँ कामिनी बेहोशी की हालत में बेडशीट से ढकी हुई थी

दीपिका कामिनी क जिस्म से बेडशीट उठा देती है और कामिनी का नंगा जिस्म सामने आ जाता है

गौरी: हाय राम! ये क्या , कामिनी बिना कपड़ो क पड़ी है

दीपिका: अब समझी आप मैं क्या कह रही थी और ये देखिये उस हरामी क कपडे वो यहाँ कामिनी दीदी का बलात्कार करने वाला था

फिर दीपिका शुरू से लेकर हर बात बता देती है जिसे सुनकर गौरी क पाऊँ नीचे से ज़मीन खिसक जाती है और उसका गुस्सा प्रचंड हो जाता है

गौरी जल्दी से बहार निकल कर आंगन में पड़ी लेथ उठा लेती है और रामु को पीटने लगती है

गौरी को पहली बार इतने गुस्से में देखकर सभी चौंक जाते हैं विजय आगे बढ़कर गौरी को रोकता है

विजय: ये क्या हरकत है गौरी

गौरी: आप हैट जाइये इसने आज साडी मन मर्यादा सरे रिश्तों को कलंक लगा दिया इसे मैं ज़िंदा नहीं छोडूंगी

विजय गौरी को रोक hi रहा था क अजय क दिमाग में कामिनी का ख्याल अत है वो जल्दी से अंदर कमरे में भागता है

सामने दीपिका कामिनी को सहारा देकर बिठा रही थी और उसके चेहरे पर पानी डालकर उसे होश में ला रही थी कामिनी क कपडे बीएड से नीचे पड़े थे और उसके जिस्म पर केवल बेडशीट थी

अजय: कामिनीईई !!!

अजय को चिंता में चिल्लाते हुए देखकर दीपिका अजय को बहार जाने को बोलती है तो वो बहार निकल जाता है क्यूंकि कामिनी क नंगे जिस्म को ऐसी हालत में औरत hi संभल सकती थी

अजय को मामला समझ में आ गया था इस लिए वो भी बहार निकलते hi रामु की धुलाई शुरू कर देता है कमलेश अजय को रोकने की कोशिश करते है

अजय: हैट जा कमलेश इस कुत्ते ने हमारी इज़्ज़त को दाग लगाने की कोशिश की है

इतना सुनते hi कमलेश अजय को छोड़कर रामु की बजने लगता है और अमित जो इतनी देर से रुका हुआ था वो भी शुरू हो जाता है

रामु इतनी धुलाई सेह नहीं पता और बेहोश हो जाता है

विजय रामु की हालत देख कर दर जाता है कहीं वो मर hi न जाये इसलिए वो अपने भाइयों को और अमित को रोकता है और कमलेश को साथ लेकर रामु को कपडे पहनकर डॉ क पास ले जाता है

कामिनी होश में आ जाती है पर जब वो अपने आप को इस हालत में पति है तो उसकी आँखों से आंसू आने लगते हैं उसे किसी उन्होनी का दर लगने लगता है

दीपिका उसे जल्दी से कपडे पहनती है और बताती है जो रामु ने किया

कामिनी को यकीन नहीं हो रहा था क उसका सागा भतीजा उसके साथ ऐसी हरकत कर सकता है

फिर गौरी और अजय भी कमरे में आ जाते हैं

गौरी और अजय की आँखों में पानी था

गौरी को देखते hi कामिनी उससे चिपक कर फूट फूट कर रोने लगती है

गौरी: मत रो कामिनी मत रो देख हम सब यहाँ हैं न उस कमीने को उसके किये की सजा दे दी है हमने

कामिनी: मैं तो उसे अपने बेटे जैसा hi समझती थी और उसी ने मेरे साथ ऐसा किया

गौरी: तू जी छोटा न कर कामिनी, तुमने थोड़ा कुछ गलत किया है

कामिनी: मैं किसी को मुँह दिखने क काबिल नहीं रही दीदी मुझे मर जाना चाहिए

दीपिका: ये कैसी बातें कर रही हो दीदी ? शुक्र मनाओ अमित का जिसने समय पर आकर आपकी इज़्ज़त बचा ली, आपको कुछ नहीं हुआ है

अमित का नाम सुनकर कामिनी और ज़ोर से रोने लगती है

उसे अमित क साथ किया गया अपना सलूक यद् आने लगता है, जिसे वो हमेशा मनहूस कहकर बेइज़्ज़त करती थी आज उसी ने उसकी इज़्ज़त बचाई है

कामिनी बिना कुछ बोले लगातार रोये जा रही थी दरअसल आज उसे अपनी hi बातों पर रोना आ रहा था गौरी दीपिका और अजय मिलकर उसे सँभालते हैं काफी देर तक रोने क बाद उसका रोना सिसकियों में बदल जाता है और धीरे धीरे वो शांत हो जाती है

अमित अपने कमरे में जा कर दरवाज़ा बंद कर क बीएड पर लेट जाता है

गौरी कामिनी को चुप करवाने क बाद अमित क कमरे में अति है

अमित अभी भी गुस्से में बैठा हुआ था, गौरी अमित क साथ बीएड पर बैठ जाती है

गौरी: मुझे माफ़ करदे मेरे बेटे मैंने बिना वजह जाने तुझपर हाथ उठा दिया, माफ़ करदे अपनी नासमझ माँ को

इतना कहते हुए गौरी अपने कान पकड़ने लगती है तो अमित जल्दी से गौरी क हाथ पकड़ लेता है

अमित: ये क्या कर रही हैं मैं , मैं भला आपसे क्यों नाराज़ होऊंगा

आप तो मेरी माँ हैं और माँ को पूरा हक़ होता है बच्चों पर हाथ उठाने का

गौरी : पर तुझे बुरा तो लगा न क मैंने बेवजह तुम पर हाथ उठाया

अमित : ऐसा कुछ नहीं है माँ मैं आपकी किसी बात का कभी गुस्सा नहीं करता अब आप जाइये और आराम कीजिये

गौरी अमित क सर को चूम कर वापिस चली जाती है

दीपिका भी कामिनी और अजय को अकेला छोड़कर अमित से मिलने आ जाती है

दीपिका : हनजी अब बताइये राजा साहब का गुस्सा उतरा क नहीं

दीपिका क ऐसे मुस्कुरा कर आँखों को नाचते हुए ऐडा से पूछने पर अमित को हंसी आ जाती है

दीपिका : आये हाय जनाब खुश हो गए लगता अब हम गरीबों पर अपने प्यार की बरसात कर देंगे

अमित जल्दी से छोटी ममी को बाँहों में कास लेता है अपने होंठ ममी क होंठो पर रखकर चूमने लगता है

अमित : कहिये तो अभी करदु बरसात?

दीपिका : दिल तो चाहता है मगर अभी सब घर पर हैं , आज रत को करते हैं

अमित : ठीक है फिर अछि तरह त्यार हो कर आइयेगा आज साडी कसार निकल दूंगा

दीपिका : मैं तो अभी से तैयार हूँ

अमित : वैसे आपने मुझे इतनी देर रुकने क क्यों कहा था अगर वो हरामज़ादा कामिनी ममी क साथ कुछ कर देता तो

उसने अपने गंदे हाथो से कामिनी ममी को नंगा किया सिर्फ आपकी वजह से, न आप मुझे रोकती न वो अपने गंदे हाथो से ममी को छू पता

दीपिका : अगर कामिनी दीदी क कपडे वो न उतरता तो कौन यकीन करता क वो कुछ गलत करने वाला था

तू ये सब छोड़ और अभी आराम कर रत को मैं सोने नहीं दूँगी

कुछ देर यूँही बातें करने क बाद दीपिका नीचे चली जाती है और अमित आज जो कुछ हुआ उसे सोचते हुए नींद की आगोश में चला जाता है
 
अपडेट 24



दीपिका : अगर कामिनी दीदी क कपडे वो न उतरता तो कौन यकीन करता क वो कुछ गलत करने वाला था


तू ये सब छोड़ और अभी आराम कर रत को मैं सोने नहीं दूँगी

कुछ देर यूँही बातें करने क बाद दीपिका नीचे चली जाती है और अमित आज जो कुछ हुआ उसे सोचते हुए नींद की आगोश में चला जाता है

अब आगे-

दोपहर को कोई न खाना बनता है न किसी को भूख थी घर क हालत hi ऐसे हो गए थे अमित दीपिका गौरी अपने अपने कमरों में आराम कर रहे थे और कामिनी अभी भी सुबक रही थी , अजय लगातार उसे समझा बुझाकर तसल्ली दे रहा था

अजय : अब खुद को सम्भालो कामिनी जो हो गया उसे भूल जाओ , रामु को उसके किये की सजा मिल गयी है और शुक्र मनाओ अमित वक़्त पर पहुँच गया था वर्ण

अजय अपनी बात पूरी नहीं करता मगर वो जो कहना चाहता था वो कामिनी अछि तरह समझ रही थी

कामिनी : मैंने सपने में भी नहीं सोचा था क रामु क अंदर इतनी गन्दगी है , मैं तो उसे अपना बीटा समझ कर उसे प्यार कर रही थी और उसी ने मेरे साथ वो सब करना चाहा

अजय : तुम्हे अभी तक लोगों की पहचान करना नहीं आया कामिनी , अमित जैसे असली हीरे को तुम हमेशा से ठुकराती और दुत्कारती आयी हो और रामु जैसे घटिया इंसान को तुम बीटा मान कर उसे पलकों पर बिठा रही थी

मुझे तो उसी दिन रामु पर इतना गुस्सा आया था की इसे घर से निकल दूँ जब मुझे राजू से असलियत पता चली थी मोटरसाइकिल क एक्सीडेंट की , ाचा होता अगर मैंने उसी दिन इसे निकल दिया होता

कामिनी अजय की बात सुनकर चौंक जाती है

अजय : हाँ कामिनी रामु ने उस दिन अपनी गलती का इलज़ाम अमित पर दाल दिया था

अमित तो राजू क साथ गया था मेरे सामने जबकि रामु अकेला गया था ये तो गरिमात रही क जब रामु का एक्सीडेंट हुआ तब अमित और राजू भी वहां से गुज़र रहे थे और इसे उठाकर डॉ क पास लेकर इसकी पट्टी करवाई

उस हरामी की वजह से बेचारे अमित की बुलेट का कितना नुकसान हो गया ऊपर से दांत पड़ी वो अलग

कितना फरक है रामु और अमित में , अमित जैसा बीटा तो अचे कर्मो से मिलता है सबका आदर सम्मान करता है गलती न होने पर भी खुद झुक जाता है

काश क अमित हमारा बीटा होता

इतना कहते कहते अजय की आँखों में आंसू आ जाते हैं

वहीँ अजय की बातें सुनते सुनते कामिनी भी रोने लगती है मगर उसकी रोने की वजह अलग थी

कामिनी : (मन में) क्या !!! उस दिन रामु ने झूठ बोलकर सारा इलज़ाम अमित पर दाल दिया था , और मैंने उसदिन उसे सबके सामने थप्पड़ मर दिया और वो बेचारा मेरे आगे एक लफ्ज़ तक न बोलै

मैं जिसे अपना बीटा समझ रही थी उसी ने मेरी इज़्ज़त लूटनी चाही और जिसे आजतक मैं मनहूस कहकर ज़लील करती रही उसीने आज मेरी इज़्ज़त बचाई

मैं कितनी गलत थी जो अमित की अच्हिना आज तक मैं देख न पायी

कामिनी का दिमाग : ये क्या कह रही है तू कामिनी उस मनहूस की वजह से hi तेरा बचा तेरी कोख में मर गया और तू उसके साथ हमदर्दी दिखा रही है

कामिनी का दिल : नहीं इसमें भला उसका क्या दोष है वो तो मैं hi फिसल गयी थी भला इसके लिए कोई और दोषी कैसे हो सकता है

कामिनी का दिमाग : मत भूल उसीकी वजह से अजय नपुंसक हो गया और आज तक तू सुहागन होते हुए भी विधवा की तरह अपनी रातें काट टी है

कामिनी का दिल : वो सिर्फ एक्सीडेंट था इसमें अमित का क्या दोष वो तो खुद एक बचा था

कामिनी का दिमाग : अरे वो है hi मनहूस जो अपने माता पिता को अपने नाना नानी को खा गया

कामिनी का दिल : वो मनहूस नहीं उसके लिए तो वो सब मनहूस था जब उसने इतनी छोटी उम्र में अपने माता पिता को खो दिया

जिस उम्र में बचे को सब से ज्यादा माँ की ज़रूरत होती है तब उस बेचारे क सर से माता पिता का हाथ उठ गया

काश क उस वक़्त मैं उसे माँ का प्यार देती तो आज वो मुझे माँ कहता

दीदी किस्मत वाली है जो अमित उन्हें माँ कहता है

अजय कामिनी को खामोश बैठी सोच में गम देखकर उसे कहता है

अजय : कामिनी मैं जनता हूँ तुम अपने साथ हुई दुर्घटना क लिए हमेशा से अमित को दोष देती आयी हो मगर एक बार वो सब भूलकर साफ़ मन से अमित की अच्छाइयों को देखना तुम्हे खुद एहसास होगा क तुम उस मासूम को कितना दुःख देती आयी हो

मैं जनता हूँ तुम्हारे दिल में उसके लिए जो नफरत है वो तुम नहीं छोड़ोगी मगर आज जो उसने तुम्हारे लिया किया है उसे मत भूलना और उसका ये एहसान यद् रखना

अजय की बातें सुनकर कामिनी फूट फूट कर रोने लगती है अजय समझ जाता है कामिनी को अपनी गलती का एहसास हो रहा है इसलिए वो कामिनी को रोने देता है ताकि कामिनी पश्चाताप कर सके और उसके मन में जो अमित को लेकर मेल है वो धूल जाये

विजय और कमलेश रामु को डॉ क कहने पर पास क टाउन में खैराती हॉस्पिटल में एडमिट करवा देते हैं रामु अभी भी बेहोश था

कमलेश तो विजय से कहता है क मरने दो इसे मगर विजय कहता है क उसके माँ बाप की खातिर हमें इसे बचाना चाहिए

दोनों भाई रामु क होश आने तक हॉस्पिटल में hi रुकने का सोचते हैं

इधर घर पर कामिनी कमरे से बहार निकलना नहीं चाहती थी , गौरी और दीपिका शाम को बरी बरी उसके पास कुछ देर बैठ ते हैं और उसे हौसला देते हैं

रत का खाना दीपिका और गौरी मिलकर बनाते हैं , विजय और कमलेश घर नहीं लौटे थे इस लिए अजय उनके लिए खाना बनवाकर ले जाता है

अब घर में कामिनी गौरी दीपिका और अमित hi थे अजय अमित को घर का ख्याल रखने क लिए छोड़ गया था

दीपिका फिर से कामिनी क पास चली जाती है उसके मन को तसल्ली देने वो जानती थी जब किसी औरत क साथ ऐसी घटना होती है तो वो अंदर से कितना दर जाती है कितना टूट जाती बाई

दीपिका : दीदी आप उन सब बातों को भूल जाइये जो भी हुआ वैसे भी आप सही सलामत हैं भगवन का शुक्रिया ऐडा कीजिये

कामिनी क अंदर तो अब सिर्फ अमित क बारे में hi विचार चल रहे थे उसका दिल बार बार उसे दुत्कार रहा था

कामिनी: किस भगवन का शुक्रिया करूँ दीपिका वो जिसने मुझे बनाया या वो जिसने मुझे बचाया

दीपिका कामिनी की बात का मतलब नहीं समझती और सवालिया नज़रों से कामिनी को देखने लगती है

कामिनी : औरत क मान सम्मान को बचने वाला उसके लिए भगवन hi तो होता है न

और मैं कितनी बुरी हूँ जो साडी उम्र उस भगवन को कोसती रही

दीपिका कामिनी की बातें सुनकर चौंक जाती है, अगले hi पल उसे एहसास हो जाता है क आज की घटना की वजह से कामिनी का मन बदल गया है इस लिए वो कामिनी को टटोलने क लिए कहती है

दीपिका : आप किस की बात कर रही हैं, अमित की ? आप तो कहती हैं वो मनहूस है जिसने आपकी ज़िन्दगी नरक बना दी और उस दिन भी आपने रामु को चोट लगने पर अमित क गाल लाल कर दिए थे और उसकी बेइज़्ज़त की थी

कामिनी : मुझे और शर्मिंदा मत कर मेरी बहन , मैं समझ गयी हूँ क जो भी हुआ मेरे साथ उसमे अमित का दोष नहीं था फिर भी मैं उसे दोष देती रही

और आज देखो वो hi भगवन बन कर मुझे बचने आया

दीपिका : एक बात कहूं दीदी ?

कामिनी : हम्म्म

दीपिका : आप नहीं जानती आजतक आपने जो भी किया अमित क साथ चाहे वो आपका गुस्सा था या गलत फेहमी मगर इस दौरान जो कुछ अमित ने सहा है जो उसके दिल पर बीती है वो मैं hi जानती हूँ

उसने आजतक आप की कही हुई कोई भी बात गौरी दीदी या किसी और को नहीं बताई बल्कि हमेशा अपने अंदर hi दबाकर राखी और उस दर्द को सेहत रहा

उसका दिल तो कई बार घर छोड़कर चले जाने को भी चाहा मगर गौरी दीदी की खातिर वो रुका रहा

अगर आपके मन में अब उसके लिए नफरत नहीं है तो प्लीज आप एक बार अमित की दिल क ज़ख्मों पर प्यार का मलहम लगा दे ताकि उसके दिल को भी सकूं मिले

कामिनी दीपिका की ज़ुबान से जब सुनती है क उसकी वजह से अमित घर छोड़कर जाने तक को त्यार हो गया था तो उसका दिल चीख चीख कर उसे दुत्कारता है और वो रोटी हुई बीएड से उठती है और अमित क कमरे की तरफ दौड़ पड़ती है

कामिनी अपने किये की माफ़ी मांगना चाहती थी अमित से ताकि वो उसे माफ़ कर दे और अपने दिल से हर वो बात निकल दे जो कामिनी क गलत सलूक से पैदा हुई है

कामिनी जब अमित क कमरे में पहुंची तो वो बीएड पर आँखें बंद कर क लेता हुआ था

कामिनी धीरे धीरे अमित क बीएड क पास पहुँचती है और दोनों हाथो से अमित क पाऊँ पकड़ कर अपना माथा उनपर रगड़ती हुई रोने लगती है और अपने आंसुओं से उसके पाऊँ धोने लगती है

अमित अचानक इस हरकत से उठ जाता है और जब वो अपने पाऊँ पर कामिनी को गिरा हुआ देखता है तो जल्दी से अपने पाऊँ खींचने की कोशिश करता है मगर कामिनी पाऊँ नहीं छोड़ रही थी

अमित : ये आप क्या कर रही हैं ममी जी छोड़िये मेरे पाऊँ छोड़िये

कामिनी बस रोये जा रही थी और पाऊँ नहीं छोड़ रही थी

अमित ज़ोर लगाकर अपने पाऊँ छुड़वाता है और उठ कर खड़ा हो जाता है

अमित : ये आप क्या कर रही हैं

कामिनी : मुझे माफ़ कार्डो मैं कितनी बुरी हूँ जो आजतक तुम्हारे साथ इतना गलत सलूक करती रही फिर भी आज तुमने मेरी इज़्ज़त की हिफाज़त की

अमित : वो तो मेरा फ़र्ज़ था आप मेरी माँ सामान हैं भला मैं कैसे ये सब होने देता , आप ऐसे रोइये मत मैं जनता हूँ मैं आपके लिए शुरू से hi मनहूस रहा हूँ पर आप मेरे लिए कल भी माँ सामान थी और आज भी माँ सामान हैं

कामिनी को अमित क शब्द तीर क जैसे चुभे और उसका पापी दिमाग धराशायी हो गया , अमित ने कामिनी को माँ कहकर उसके दिल को पिघला दिया वो तो बेचारी पहले hi अपनी गलतियों पर शर्मिंदा थी अब अमित क ऐसे शब्द सुनकर वो खुद को रोक न पायी और दौड़कर अमित को कास क अपने सीने से लगा लिया और आंसू बहती रही

10 मिनट्स तक कामिनी अमित को सीने से लगाए रोटी रही और उसके सर को चेहरे को चूमती रही

बहार कड़ी दीपिका की आँखों में भी ये सब देखकर आंसू आ गए थे

कामिनी: तुमने मुझे माफ़ कर दिया न ? बोल मेरे बेटे तुमने अपनी माँ को माफ़ कर दिया न बोल ? तू मुझे छोड़कर कहीं नहीं जायेगा न बोल ?

अमित : मैं कहीं नहीं जाऊंगा ममी जी आप ने मुझे आज बीटा कहकर गले लगाकर मेरे दिल को वो सकूं दिया है जिसकी मुझे कब से तलाश थी आप नहीं जानती जब मुझे नफरत और गुस्से से देखती थी तो मेरे दिल पर क्या बीत टी थी

कामिनी : मैं तो पागल थी मेरे बचे मैं कितनी बुरी थी जो कभी तुझे प्यार नहीं दिया मगर आज से मैं तुझे इतना प्यार दूंगी तू सब भूल जायेगा

कामिनी जाने कितनी देर तक अमित को ऐसे hi गले लगाए कड़ी रही और चूमती रही आज दोनों क दिलों में जो नफरत जो कड़वाहट जो दर्द था वो सब एक hi झटके में आँखों क रस्ते आंसू बन कर बह गया

दीपिका जब दोनों को शांत होता देखती है तो दरवाज़े पर दस्तक देती है

कामिनी मनो नींद से जगती है

दीपिका : हम्म बड़ा प्यार हो रहा है ममी भांजे क बीच

कामिनी : मेरा बीटा है मैं प्यार नहीं करुँगी क्या , तुम क्यों आ गयी बीच में क्या नज़र लगनी है ?

दीपिका : ओहो तो भला मैं अब कबाब में हड्डी हो गयी

चलिए अब ये सब बंद कीजिये और अमित को आराम करने दीजिये

कामिनी : आज मैं अपने बेटे क साथ सोऊंगी तुम जाओ

दीपिका : तो भैया क्या अकेले सोयेंगे

कामिनी : मुझे कुछ नहीं पता मैं तो आज अपने बेटे क साथ सोऊंगी

दीपिका कामिनी की बात सुनकर निराश हो जाती है क्यूंकि की आज कितने दिनों बाद वो अमित से छुड़वाने वाली थी

दीपिका : ठीक है भाई अब आप करो आपस में प्यार मैं चलती हूँ कबाब में हड्डी

अमित समझ जाता है क छोटी ममी क्यों निराश हो रही है इस लिए वो जल्दी से कहता है

अमित : ममी जी बुरा न मने तो आप मुझे और ममी जी को दूध का गिलास पीला दे बादाम डालकर

अमित ऐसा कहते hi साथ में आँख मर देता है

दीपिका अमित का इशारा समझ जाती है और खुश होकर जल्दी से रसोई में जाती है दूध गरम कर क दो गिलास में डालती है कामिनी और अमित क लिए मगर कामिनी क दूध में वो नींद की गोली मिला देती है जो वो कमलेश को हर रोज़ दिया करती थी

कामिनी दूध पीकर नींद की आगोश में चली जाती है

और दीपिका अमित को साथ वाले कमरे में लेकर चली जाती है जो रामु को दिया गया था

दीपिका जब कमरे ने जाकर बिस्तर को ठीक करने लगती है तो उसे एक किताब मिलती है जिसमे चुदाई की नंगी तस्वीरें थी दीपिका उन तस्वीरों को देखने लगती है

अमित दीपिका क हाथ में नंगी तस्वीरों की किताब देखकर पास आ जाता है और दीपिका क साथ वो भी गौर से तस्वीरों को देखने लगता है

तस्वीरों में गोर अँगरेज़ अलग अलग पोज़ में लड़कियों की चुदाई कर रहे थे

अमित ने कभी ऐसे ऐसे पोज़ न देखे पहले कभी न सुने थे

दीपिका भी तस्वीरों में खो गयी थी अमित समझ जाता है क ममी भी ऐसे अलग अलग पोज़ में चुदाई चाहती है

इसलिए वो ममी को पीछे से चिपक कर दोनों हाथो से उसके दूध दबाता हुआ उसकी गर्दन को किश करने लगता है

दीपिका भी तस्वीरें देखते हुए गरम हो गयी थी ऊपर से कितने दिनों से वो चुदाई को तरस रही थी इसलिए अमित क हाथ लगते hi वो छुडासी हो जाती है और उसकी आँखें बंद hi जाती हैं साथ hi उसके मुँह से सिसकीअन निकलने लगती हैं

दीपिका : आआह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स मेरे राजायआ कक्कक्क्स आअज्ज्ज्ज मुझे इतना प्यार करो क मेरी साड़ी प्यास बुझ जाये ाः वक्क्क्क ह्म्म्मम्म

अमित दीपिका की साडी धीरे धीरे खोलने लगता है दीपिका भी उसका साथ देती है

साडी उतरने क बाद अमित उसके पेटीकोट का नाडा खोल देता है और पेटीकोट निचे गिर जाता है दीपिका जल्दी से अपना ब्लाउज और ब्रा निकल देती है अब उसके जिस्म पर सिर्फ पेंटी बची थी

अमित घुटनो पर बैठकर दीपिका की पेंटी खींचकर उतर देता है और उसकी आँखों क सामने दीपिका गुलाबी छूट बिना बालों क रास की बूंदों से नहायी चमकती हुई जलवा दिखने लगती है

दीपिका ने अमित क साथ चुदाई का प्रोग्राम सेट होते hi आज छूट क बाल हटा दिए थे

अमित छूट की खूब सुरति को निहारता जल्दी से अपने होंठ छूट क होंठों पर लगा देता है

छूट पर अमित क होठ लगते है दीपिका क मुँह से कामुक सिसकारी छूट जाती है

दीपिका : आअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स. उम्मम्मम्मम आआह्ह्हह्ह्ह्ह कक्कक्कक्स

अमित दीपिका की छूट को होठों से जब छूटा है तो छूट क कामर्स की बूंदे उसके मुँह में चली जाती हैं

अमित को दीपिका का कामर्स टेस्टी लगता है और वो अपनी जीभ छूट में घुसकर सारा रास चाटने की कोशिश करने लगता है

दीपिका का जिस्म लरज जाता है और वो अमित क सर को अपनी छूट पर दबाने लगती है

दीपिका ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पति और 5 मिनट्स में इतने दिने रुका हुआ उसका पानी छूट से निकल कर अमित क मुँह में जाने लगता है

दीपिका से खड़ा होना मुश्किल हो जाता है और वो बीएड पर गिर जाती है

अमित जल्दी से दीपिका की टांगो क बीच अत है और पोजीशन लेकर अपना लैंड छूट पर सेट कर क ज़ोरदार धक्का मरता है

छूट गीली होने की वजह से लैंड फिसलता हुआ पूरा छूट की गहराई में उतर कर बचे दानी पर ठोकर मरता है

दीपिका चीख उठती है

दीपिका : आआअह्हह्ह्ह्हह मम्माआआ म्मार डायललला फातटटटटट ग्ग्ग्ग्य्यीइइइइ मररररीईई कक्कछहःछहुआयत्तत्त

आआअह्हह्ह्ह्हह

अमित दीपिका क दूध को दबाने और चूसने लगता है 2 मिनट्स में hi वो कुछ रिलैक्स होती है तो अमित धक्के लगाने शुरू कर देता है

जल्दी hi दीपिका गरम होने लगती है और अमित का बराबर साथ देते हुए गांड उठाने लगती है

अमित दीपिका को साथ लिए ऐसे hi बीएड से निचे उतर जाता है और दीपिका की टांगो को अपनी कमर पर लपेट कर अपने दोनों हाथ दीपिका की पीठ पर कास क उसे हवा में उठा लेता है और दनादन धक्के मरने लगता है

अमित क लिए दीपिका मनो बचे क जैसे हलकी थी उसे कोई कठिनाई नहीं होती और वो उसे उछाल उछाल कर धक्के पेलने लगता है

दीपिका मज़े की वादियों में खो जाती है और किताब में देखि नंगी तस्वीरों से अपनी चुदाई कपड़े करने लगती है

दीपिका : आआह्ह्ह्ह कक्कक्स आआह्ह्ह्ह ऐसे hi आआह्ह्ह्ह ोुह्ह्हह्ह मममममम और तेज़ज़्ज़ज़ एसससस एससससस ऐसे hi ममममममम आआह्ह्ह्हह

अमित दीपिका को दीवार से लगा कर तूफानी धक्के पेलने लगता है

दीपिका और अमित क जिस्म पसीने से भीग गए थे दीपिका क बाल बिखर गए थे मगर चुदाई क आनद में दोनों दुबे हुए थे

अमित किताब में देखे एक और पोज़ को तरय करने क लिए दीपिका को नीचे उतरता है और उसकी एक टांग उठाकर अपने दये बाज़ू में पकड़ लेता है

एक टांग उठाने से दीपिका की छूट कास जाती है , अमित अपने घुटने बेंड करता है और अपने लैंड को छूट पर सेट कर क करारा धक्का मरता है

छूट इस पोज़ में टाइट होने की वजह से दीपिका की चीख निकल जाती है

दीपिका : aaaaahhhhhhhhhh mmmmmmmaaaaaaaaaa ममममआयररररर ग्ग्ग्ग्य्यययययीईइई

अमित जल्दी से दीपिका क होंठों पर होंठ रख कर उसकी आवाज़ बंद करता है

और तेज़ तेज़ धक्के पेलने लगता है 2 मिनट्स में hi दीपिका को मज़ा आने लगता है

ऐसी धुआंधार चुदाई को दीपिका और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पति और उसका पानी निकल जाता है

अमित भी तस्वीरों में देखे पोज़ को अप्लाई कर क चुदाई करने से ज्यादा एक्साइट हो गया था इस लिए जल्दी hi वो भी लैंड पूरा जड़ तक घुसकर अपने पानी की बरसात ममी की बचे दानी में कर देता है

एक hi दमदार चुदाई से दीपिका पास्ट हो गयी थी अगली चुदाई क लिए उसे रेस्ट चाहिए थी मगर कमलेश विजय और अजय घर लौट सकते थे और कामिनी भी तो अमित क कमरे में थी इस लिए दोनों एक hi राउंड चुदाई कर क अपने अपने कमरों में चले जाते हैं और सो जाते हैं
 
अपडेट 25

एक hi दमदार चुदाई से दीपिका पास्ट हो गयी थी अगली चुदाई क लिए उसे रेस्ट चाहिए थी मगर कमलेश विजय और अजय घर लौट सकते थे और कामिनी भी तो अमित क कमरे में थी इस लिए दोनों एक hi राउंड चुदाई कर क अपने अपने कमरों में चले जाते हैं और सो जाते हैं

अब आगे -

रत को अजय और कमलेश घर लौट आये थे , विजय हॉस्पिटल में hi रुक गया था रामु अभी तक बेहोशी में hi था

सुबह अमित की आँख रोज़ की तरह जल्दी खुल गयी जब उसने उठने की कोशिश की तो उसे अपने ऊपर दूसरे जिस्म का एहसास हुआ और उसने देखा क कामिनी उसके साथ सो रही है , अमित तो भूल hi गया था

अमित ने जब कामिनी क चहरे को देखा तो वो सकूं से सो रही थी और सोते हुए कितनी प्यारी लग रही थी , अमित एक नज़र भर क कामिनी क सुन्दर चहरे को निहारता है

कामिनी अमित से चिपक कर सो रही थी और उसकी दायीं बाज़ू और दायीं टांग अमित क ऊपर थी , अमित सोचता है शायद ममी उसे अजय मां समझ कर ऐसे चिपक कर सो रही है फिर अमित धीरे से उठने लगता है ताकि ममी की नींद ख़राब न हो

अमित बीएड से नीचे उतारकर जब फिर से कामिनी ममी को देखता है तो उसकी नज़र ममी पर ठहर जाती है

कामिनी ने नींद में अपनी तंग अमित पर चढ़ा दी थी जिसके कारन उसकी साडी घुटने तक ऊपर सरक गयी थी और दूसरी टांग भी घुटने तक नुमाया हो गयी थी

अमित कामिनी की गोरी चिकनी टंगे देखने लगता है और उसका दिल उन्हें छूने को होने लगता है

अमित कामिनी की टांगो की सुंदरता में खोया हुआ था उसे पता hi नहीं चला कब उसके हाथ कामिनी की नंगी टांगों पर पहुँच गए और वो कामिनी की टैंगो को सहलाने लगा

कामिनी की टांगों पर हाथ फिरते hi अमित का लैंड खड़ा होने लगता है और काम वासना में डूबने लगता है , अचानक अमित क दिल से आवाज़ अति है की ये सब गलत है और वो अपना हाथ खींच लेता है और जल्दी से उठाकर बहार चला जाता है

अमित अखाड़े चला जाता है और फिर वहां से आकर स्कूल चला जाता है

स्कूल में अमित जब मंजरी को बताता है की कैसे उसने रामु को सजा दी और ये भी क मंजरी क साथ वो हरकत करने वाला भी रामु hi था ( जैसे की राजू ने पता करवाया था गाओं में अपने दोस्तों से जिन्होंने रामु को स्कूल से छुट्टी क समय उस गली में जाते देखा था )

मंजरी अमित द्वारा रामु को सजा देने पर बहुत खुश हो जाती है वो अमित को बाँहों में लेकर चूमना चाहती थी पर स्कूल में ये पॉसिबल नहीं था इस लिए मंजरी अमित से आज नदी किनारे मिलने का कहती है और फिर दोनों अपनी अपनी क्लास में चले जाते हैं

वहीँ घर पर जब कामिनी अजय को खाना खिला रही थी तो अजय कामिनी से कहता है

अजय : क्या बात है आज बहुत खुश नज़र आ रही हो

कामिनी : कुछ नहीं मैं तो रोज़ hi खुश होती हूँ मगर आप क्यों पूछ रहे हैं

अजय : वो इस लिए क तुम्हारे चहरे पर जो आज छुपी हुई मुस्कराहट नज़र आ रही है वो रोज़ नहीं होती

कामिनी : सच कहा आपने मैं वाकई आज बहुत खुश हूँ ऐसा लग रहा है जैसे सीने से बहुत बड़ा बोझ हैट गया हो

अजय : हम्म वो तो मैं समझ गया था जब तुम रत कमरे में नहीं आयी

कामिनी सवालिया नज़रों से अजय को देखती है

अजय : तुमको रत कमरे में न पाकर मैं तुम्हे ढूंढें लगा तो तुम अमित क साथ उसके कमरे में सो रही थी यकीन मनो तुम्हे वहां देखकर मेरे दिल को कितना सुकून मिला ये मैं hi जनता हूँ

कामिनी : कितनी बेवक़ूफ़ थी मैं जो आजतक उसे कॉस्टि रही उसकी अच्छे मैं कभी देख hi नहीं पायी थी शायद मेरे साथ जो भी हुआ वो इसी लिए हुआ क मेरी आँखें खुल सके

अजय : आखिरकार तुमने उसे अपना लिया , कामिनी आज मैं बहुत खुश हूँ

दोनों ऐसे hi बातें करते रहते हैं दोनों hi आज बहुत खुश थे

स्कूल से जब अमित घर अत है तो कामिनी बड़े चाव से अमित को खाना खिलाती है और उसके पास बार बार चक्कर लगाती है गौरी ये सब देख कर हैरान थी और खुश भी थी वहीँ दीपिका अमित को बनावटी गुस्से से देख रही थी

खाना खाने क बाद सब अपने कमरों में चले जाते हैं तब अमित दीपिका क पास अत है नाराज़गी की वजह जानने

अमित : क्या बात है ममी जी आप मुझसे नाराज़ हैं ?

दीपिका : क्यों , नाराज़ नहीं होना चाहिए ?

पता है तुमने रत कैसे जंगली बन कर मेरे साथ किया सुबह से जलन हो रही है ऐसे लगता है जैसे सूज गयी हो

अमित समझ जाता है और मज़े लेते हुए कहता है

अमित : मुझसे गलती हो गयी लाइए इधर कीजिये मैं अभी मालिश कर देता हूँ

दीपिका : दूर हटो , मैं जानती हूँ तुम बहाने से फिर वही सब करोगे मेरे साथ अब तो 2/3 दिन भूल जाओ इतना बुरा हाल किया है मेरा

अमित : सोच लीजिये अगर आप मेरे ऐसा करेंगी तो मैं फिर कभी आपको हाथ भी नहीं लगाऊंगा

दीपिका : नहीं नहीं ऐसा मत कहो मैं तो मज़ाक कर रही थी मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती

दीपिका इतना कहकर अमित को गले लगा लेती है

अमित : मैं भी मज़ाक कर रहा था भला आपको छोड़ कर मैं कहाँ जाऊंगा

इतना कहते हुए अमित अपना हाथ नीचे लेजाकर दीपिका की छूट सदी क ऊपर से hi मसल देता है

दीपिका : ाआउउउच आह्हः

अमित फिर दीपिका को बोल कर नदी किनारे चला जाता है जहाँ मंजरी ने उसे बुलाया था, अमित जब नदी पर पहुंचा तो उसे कोई नज़र नहीं आया इस वक़्त नदी क आसपास कोई नहीं था

अमित अभी खड़ा hi था क दो हाथ पीछे से उसकी आँखें बंद कर देते हैं , अमित अपने हाथों से जब उन हाथों को छूटा है तो उनकी कोमलता से वो समझ जाता है क ये मंजरी है

अमित : तो अब मेरी जान मुझे डराएगी ?

मंजरी : कैसे पता चला क ये मैं हूँ?

अमित : मेरी जान तुम्हे तो मैं तुम्हारी खुशबु से पहचान लेता हूँ

मंजरी : आज मैं बहुत खुश हूँ मेरे दिल को आज अपने इतनी ख़ुशी डी है क मैं ख़ुशी से hi मर जाउंगी

अमित जल्दी से अपना हाथ उसके लबों पर रख कर उसे चुप करवाता है और कहता है

अमित : ऐसा मत कहो मंजरी मुझ बदकिस्मत को तक़दीर ने पहले hi बहुत दुःख दिए हैं अगर तुम भी मुझे छोड़ गयी तो मैं ज़िंदा नहीं रहूँगा

अमित की बातें सुनकर मंजरी भावुक हो जाती है और कास क अमित को गले लगा लेती है

अमित और मंजरी दोनों hi भावुक हो कर एक दूसरे से लिपटे पड़े थे फिर दोनों क होंठ कब आपस में मिल गए उन्हें भी पता न चला और एक प्यार भरी किश दोनों क मध्य शुरू हो गयी

मंजरी : उम्म्म्म उम्म्म माहाम्म्म सर्र्रुप्प्प सररररूपपप मममम मैं कभी आपसे दूर नहीं जाउंगी उम्म्म्म हमेशा आपके साथ रहूंगी उम्म्म्म आपका साया बनकर आपके साथ रहूंगी उम्म्म मममम

दोनों एक दूसरे क प्यार में डूबे होंठो को चूसते जा रहे थे

10 मिनट्स तक एक दुसरे क होंठो को चूसने क बाद दोनों अलग होते हैं और अपनी साँसे दुरुस्त करते हैं

मंजरी और अमित की नज़रे जब आपस में मिलती हैं तो वो दोनों फिर से एक दूसरे को चूमने लगते हैं दोनों क बदन अब गरम होने लगे थे आज मंजरी और अमित दोनों hi आगे बढ़ना चाहते थे दोनों क बीच भावनाओं का बढ़ता जवार आज दोनों को आगे बढ़ने क लिए मजबूर कर रहा था

और फिर दोनों एक दूसरे क होंठ चूसते हुए एक दूसरे की जीभ चूसने लगते हैं

अमित का एक हाथ मंजरी क दूध पर पहुँच जाता है और उसे दबाने लगता है

मंजरी अमित द्वारा दूध को दबाने से मचल जाती है और उसका जिस्म वासना में कांपने लगता है

अमित किश करने क साथ दूध दबाता जा रहा था और मंजरी की वासना बढ़ती जा रही थी

मंजरी क मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी थी और उसकी आँखें मस्ती में बंद होने लगी थी

मंजरी : कक्कक्स आआअह्ह्ह्हह ममममम आअह्ह्ह उम्म्म्म

अमित भी गरम हो चूका था और अब वो सब कुछ कर जाना चाहता था

मंजरी क दूध दबाते दबाते अमित दूसरे हाथ से मंजरी की छूट मसल देता है, छूट पर अमित का हाथ लगते hi मंजरी की टाँगे कांप जाती हैं उससे खड़ा रह पाना मुश्किल हो गया था आज तक उसने खुद भी कभी अपनी छूट से छेड़ छड़ भी की थी और आज अमित क मसलने भर से उसको ये बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया वो नशे में डूबी खुद को संभल नहीं प् रही थी , मंजरी अमित की बाँहों में झूलने लगती है अमित जल्दी से मंजरी को संभालता है और अपना काम जारी रखता है

मंजरी अपने हाथ आगे बड़ा कर अमित का हाथ पकड़ लेती है मगर उसे रोक नहीं पति और अमित लगातार उसकी छूट को मसलने लगता है

मंजरी की छूट छुडासी होने लगती है और उसका जिस्म पूरा गरम हो जाता है उससे ये गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी

मंजरी : आअह्ह्ह्ह ककक ोुह्ह्हह्ह मम्माआ आआह्ह्ह्हह ये मुझे सीसीसी स आआह्ह्ह क्याआआ हो रहा है कक्कक्स

अमित लगातार अपना काम करता जा रहा था मंजरी निचे बैठने लगती है और अमित भी उसके साथ निचे बैठता हुआ उसे लिटा देता है और उसके ऊपर चढ़कर उसके होंठ चुस्त हुआ उसके दूध दबाता है और छूट मसलता है

मंजरी लगातार सिसकियाँ छोड़े जा रही थी तीन तरफ़ा हमला उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था , तभी किसी आहत से अमित खुद को रोकता है और आसपास देखता है मगर कोई नज़र नहीं अत मगर अमित क दिमाग में ये बात अति है क इस जगह ये सब करना खतरे से खली नहीं इसलिए वो मंजरी को हाथ पकड़ कर उठता है और उसे जंगल क अंदर ले जाने लगता है

मंजरी चुप चाप रोबोट की तरह अमित क साथ चलने लगती है वो जानती थी आज दोनों का प्यार हर सीमा तोड़ देगा मगर फिर भी वो खुद को रोक नहीं पति अमित ने रामु को सजा देकर मंजरी का दिल जीत लिया था और मंजरी खुद को आज अमित पर कुर्बान कर देना चाहती थी

अमित मंजरी को खींच कर जंगल में बने उस झोंपड़े में ले जाता है जहाँ उसने छोटे मां और मीणा की चुदाई देखि थी, मंजरी जंगल में बने झोंपड़े को देख कर हैरान होती है मगर चुप चाप चलती रहती है दोनों चलकर अब झोंपड़े क अंदर आ जाते हैं

झोंपड़े में नीचे सुखी घास का बिछोना था और एक तरफ पानी का घड़ा पड़ा हुआ था

अमित मंजरी को उसी घास क बिछोने पर लिटा देता है और उसके ऊपर लेटकर फिर से किश करने लगता है

अमित किश क साथ दूध और छूट दोनों को मसलता जाता है , मंजरी पिछले आधे घंटे की चुम्मा छाती और अब दूध और छूट पर हुए हमले को बर्दाश्त नहीं कर पति और उसकी छूट पानी बहाने लगती है उसका जिस्म अकड़ जाता है और मुँह से एक दबी दबी चीख निकल जाती है

मंजरी : आआअह्ह्ह्हह सीसीसी कक मर गयीईइ आअह्ह्ह्ह

मंजरी का जिस्म झटके खता हुआ शांत होने लगता है और मंजरी आँखें बंद कर क शांत होने लगती है

मंजरी जब शांत हो जाती है तो अमित मंजरी क पाऊँ से जुटी निकल कर उसक पाऊँ उठता है और उसके घागरे को सरका कर ऊपर करने लगता है , मंजरी की दूध स सफ़ेद चिकनी टाँगे अमित क सामने आ जाती हैं

अमित झुक कर उसकी टांगों पर जगह जगह किश करने लगता है

किश करते हुए अमित मंजरी की झांगों पर आ जाता है

मंजरी की झांगों का कोमल एहसास उसे पागल बनता जा रहा था

घागरे को पूरा ऊपर उठाकर अमित मंजरी की पेंटी खींच कर निकल देता है , मंजरी की पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी जो इस बात का सबूत थी क मंजरी पूरी छुडासी हो चुकी थी और अब छोड़ना चाहती थी

पेंटी उतारते hi मंजरी की कोमल गुलाबी अनछुई छूट अमित की आँखों क सामने आ जाती है छूट क ऊपर हलके हलके भूरे बाल थे और छूट क दोनों होंठ आपस में जुड़े हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे कोई लकीर हो मगर पानी की बूंदे उनमे से टपक रही थी

अमित ने अभी तक छोटी ममी और मीणा की hi छूट देखि थी मगर दोनों hi खुली हुई छूट थी जबकि मंजरी की छूट एक डैम टाइट थी

अमित छूट की खूबसूरती में खो जाता है और झुक कर अपने होंठ मंजरी की छूट क होंठो से लगा कर किश करने लगता है मंजरी अभी तक जो अपने पहले चरम सुख का आनंद ले रही थी वो अपनी छूट पर इस कोमल एहसास से तड़प उठती है और सर उठाकर अपनी छूट की तरफ देखती है जहाँ अमित उसकी छूट को किश कर रहा था

एक बार फिर मंजरी का जिस्म गरम होने लगता है और उसके हाथ अमित की सर पर पहुँच जाते हैं , छूट को किश करते हुए अमित अपनी जीभ छूट में घुसाने की कोशिश करने लगता है मगर छूट इतनी टाइट थी क जीभ अंदर नहीं जा प् रही थी

अमित चेहरा ऊपर उठाकर अपने हाथ की उँगलियों से छूट का मुँह खोलने की कोशिश करता है मगर वो ज्यादा नहीं खुल पते अमित फिर दो मिनट्स छूट को चुम कर ऊपर बाद जाता है और मंजरी क दूध मसलते हुए मंजरी की गर्दन पर किश करने लगता है मंजरी आनंद सागर में डूबी सिसकियाँ छोड़ रही थी

अमित मंजरी को पकड़ कर बिठाता है और उसकी चोली खोलने लगता है मंजरी बस कठपुतली की तरह अमित का साथ दिए जा रही थी

चोली उतारते hi मंजरी क संतरे क आकर क गोर सफ़ेद दूध अमित क सामने आ जाते हैं जिनपर गुलाबी निप्पल थे ममी और मीणा क निप्पल भी ऐसे नहीं थे , गुलाबी छोटे छोटे निप्पल अमित को अपनी तरफ बुला रहे थे अमित जल्दी से मंजरी को लेटकर उसके एक निप्पल पर अपनी जीभ फिरने लगता है और दूसरे दूध को हाथ से मसलने लगता है

अमित मंजरी क दूध को मुँह में भर कर अपनी जीब निप्पल पर फिरता है कभी होंठों में निप्पल को पकड़ कर खींचता है

एक दूध को लाल करने क बाद दूसरे दूध क साथ भी यही सब करता है

मंजरी क दिल की धड़कन इतनी बाद चुकी थी क उसे लग रहा था क उसका दिल आज बहार hi आ जायेगा वो किसी भी बात से अमित को रोक नहीं रही थी और एक अलग hi आनंद की अनुभूति में वो खो चुकी थी

अमित 10 मिनट्स तक दूध hi चुस्त रहता है माजरी अपनी कमर उठाने लगती है और अपने हाथो से अमित का सर अपनी छाती पर दबाने लगती है

अमित से अब और रुका नहीं जाता और वो जल्दी से ऊपर उठकर अपने कपडे उतर देता है मंजरी की आँखें मज़े और शर्म से बंद थी

अमित पूरा नंगा हो कर मंजरी की टांगो क बीच आ जाता है और उसकी टांगो को ऊपर करके उसके पेट से लगा देता है और पोजीशन लेकर अपना लैंड एक हाथ से पकड़ कर मंजरी की कुवारी छूट पर सेट कर देता है

छूट पर लैंड लगते hi मंजरी कांप जाती है और एक बार अमित को देखकर फिर से आँखें बंद कर लेती है , अमित समझ रहा था क मंजरी की छोटी स छूट में लैंड आसानी से भी जायेगा और उसे दर्द होगा मगर पहली बार में ये सब तो होता hi है

अमित अपना भर मंजरी पर डालता हुआ लैंड को छूट पर दबाने लगता है और मंजरी की छूट इस दबाव में खुलने लगती है जिससे मंजरी को दर्द होने लगता है और वो सख्ती से अपने होंठ भींचकर दर्द बर्दाश्त करने लगती है

मंजरी पर झुकता हुआ अमित अपने लैंड को एक झटका मर कर छूट में घुसा देता है

छूट में लैंड 2 इंच घुस जाता है तभी मंजरी क मुँह से चीख निकल जाती है

मंजरी : aaaaiiiiiiiiii मममममअअअअअअअ ुउउइइइइइइइइ मररररर गययियीईइ आआअह्हह्ह्ह्ह

जिस छूट में आजतक उंगली भी नहीं गयी थी आज उसमे अमित का मोटा तगड़ा मुसल घुस रहा था दर्द तो होना लाज़मी था , अमित मंजरी की चीख सुनकर रुक जाता है और अपने हाथ आगे बढ़ाकर उसके दूध दबाने लगता है 2 मिनट में मंजरी थोड़ा शांत होती है तो अमित एक और झटका मर देता है , ये झटका थोड़ा तेज़ था जिससे लैंड 5 इंच तक छूट में घुस गया था और इसके साथ मंजरी क मुँह से भयानक चीख निकल जाती है जो उसके लड़की से औरत बनने का एलान थी


मंजरी : aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh aaaaiiiiiiiiii mmmmmaaaaaaaaaaaa आयआईइइइइइइइ aaaaaaahhhhhhhhhhh मंजरी इस चीख क साथ hi बेहोश हो जाती है और अमित जल्दी से पास पड़े घड़े से पानी लेकर उसके चहरे पर डालता है जिससे उसे होश अत है मगर दर्द की वजह से वो ऑंखें नहीं खोलती

मंजरी की बंद आँखों से आंसू बहने लगते हैं नीचे से छूट खून क आंसू बहाने लगती है , मंजरी का जिस्म सर कटे बकरे की तरह तड़प रहा था

अमित मंजरी की तकलीफ दूर करने क लिए उसके दूध दबाता जाता है और झुक कर उसके होंठ चूसने लगता है

मंजरी से दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था फिर भी वो अमित से कुछ नहीं कह रही थी

अमित लगातार मंजरी क दूध दबाता जा रहा था और उसे किश करता जा रहा था 10 मिनट्स बाद मंजरी जब शांत हो जाती है तो अमित अपने लैंड को हिलना शुरू करता है मगर उसका लैंड इतना ज़्यादा टाइट हो कर फस्स गया था क उसे लैंड को बहार खींचते हुए ऐसा लग रहा था क जैसे छूट लैंड से जुड़ गयी है और उसके लैंड क साथ hi अंदर का मॉस बहार आने लगा है

अमित धीरे अपनी कमर हिलाकर लैंड को उतना hi अंदर बहार करने लगता है 5 मिनट्स में हलके धक्कों की वजह से मंजरी को अब ाचा लगने लगता है और छूट भी लैंड को एडजस्ट कर लेती है

धीरे धीरे अमित की स्पीड बढ़ने लगती है और मंजरी भी मज़ा लेती हुई अपने हाथ अमित की पीठ पर घूमने लगती है और अमित को चूमने लगती है

मंजरी: आह्हः आअह्ह्ह उम्म्म्म मममम आह्हः आअह्ह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म्म सीसीसी. ुह्ह्ह्ह आअह्ह्ह उम्मम्मम ककक

मंजरी को मज़े में देख कर अमित एक और झटका मर देता है लैंड 2 इंच और छूट में घुस जाता है मंजरी को फिर से दर्द होता है और एक चीख फिर से उसके मुँह से निकल जाती है

अमित मंजरी को रिलैक्स करता है और फिर धक्के मरने लगता है जल्दी hi फिर मंजरी मज़े में आ जाती है और कमर हिलने लगती है

मंजरी : आह्हः आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह ये मुझे क्या हो रहा है उम्म्म कक्कक्स आअह्ह्ह आह्हः और तेज़ करिये ाःह कक्कक्स उम्म्म्म आजतक ऐसा कभी नहीं हुआ कक्कक्स आआह्ह्ह्ह

झोंपड़े में मंजरी की सिसकारिआं गूँज रही थी और थप थप थप थप थप धक्कों की आवाज़ आ रही थी

मंजरी का जिस्म अकड़ने लगता है और वो फिर से पानी छोड़ देती है

मंजरी : आअह्ह्ह्ह ममममम मुझे कुछ हो रहा है आआह्ह्ह हम्म्म उम्म्म्म ककक और तेज़ज़्ज़ज़ ाऔउर तयतजज़्ज़ज़ करिये और तेज़ आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

मंजरी झटके लेती हुई सिसकारती हुई पानी छोड़ देती है और अमित भी मौका देखकर ज़ोरदार धक्का मरकर पूरा लैंड छूट में घुसा देता है , अमित का लैंड सीधा मंजरी की बचे दानी में जा लगता है और मंजरी की छूट पानी की नदी बहा देती है

मंजरी को दर्द और मज़ा दोनों एक साथ मिलते हैं उसका जिस्म 2 मिनट्स तक कांपता रहता है और मुँह से कोई आवाज़ नहीं निकलती अमित मंजरी क ऊपर लेट जाता है और उसे बाँहों में भर लेता है

कुछ देर में जब मंजरी पूरी तरह शांत हो जाती है तो अमित फिर से पोजीशन में आकर धक्के मरने लगता है मंजरी बेसुध सी पड़ी थी मगर अमित अपना काम कर रहा था क्यूंकि अभी उसका पानी नहीं निकला था 5 मिनट्स में hi मंजरी का जिस्म फिरसे गरम हो जाता है और वो कमर उठाकर अमित का साथ देने लगती है

मंजरी : आअह्ह्ह्ह उम्म्म्म आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह कक्कक्स आआह्ह्ह्ह उम्म्म्म ऐसे hi ऐसे hi करते रहिये और ज़ोर से और ज़ोर से उम्म्म्म कक्कक्स आअह्ह्ह्हह आअह्ह्ह्ह

अमित अपनी स्पीड बड़ा देता है और ज़ोरदार धक्के मरने लगता है पिछले आधे घंटे से रुक रुक कर अमित चुदाई कर रहा था मगर अब वो अपना पानी निकलना चाहता था इस लिए वो फुल स्पीड में धक्के मरता जाता है 5 मिनट्स की इस धुआंदार चुदाई में दोनों अपने चरम पर पहुँच जाते हैं और अमित एक आखरी जोरदार धक्का मरकर लैंड को जड़ तक घुसकर अपना पानी निकलने लगता है


बचे दानी में अमित लैंड की धार पड़ते hi मंजरी भी पानी छोड़ देती है

अमित मंजरी क ऊपर गिर जाता है और मंजरी भी अमित को बाँहों में कास लेती है

10 मिनट्स क बाद दोनों की साँसे कुछ संभालती हैं और अमित मंजरी क ऊपर से हैट जाता है अमित बैठ कर जब मंजरी की तरफ देखता है तो वो अभी भी आँखें बंद कर क पड़ी थी आंसू बहने से उसके चहरे पर निशान पद गए थे

फिर अमित की नज़र जब मंजरी की छूट पर जाती है तो वो देखता है क वहां पर बहुत सारा खून था जो सुखी घास को लाल कर चूका था और छूट क होंठ जो पहले आपस में जुड़े हुए थे अब खुल चुके थे छूट की सिडों पर भी खून लगा हुआ और छूट क अंदर से दोनों का मिश्रित वीर्य और खून बह कर बहार आ रहा था

अमित को मंजरी की हालत और दर्द का अब एहसास हो रहा था वो जल्दी से उठकर घड़े से पानी निकलकर मंजरी को पिलाता है

अमित मंजरी को सहारा देकर उठाने की कोशिश करता है मगर मंजरी से खड़ा नहीं हुआ जा रहा था उसकी छूट में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था अमित को उसकी बहुत चिंता होने लगती है

अमित : मंजरी तुम ठीक तो हो ? क्या तुम चल पाओगी ?

मंजरी अमित को चिंता में देखकर दर्द को बर्दाश्त करते हुए हलकी मुस्कान चेहरे पर लेकर कहती है

मंजरी : मैं ठीक हूँ आप चिंता मत करो

अमित : मुझे खुद को रोकना चाहिए था , मैंने तुम्हे कितना दर्द दिया

मंजरी : आप ऐसा क्यों कह रहे हैं ये दर्द तो हर लड़की को सहना hi पड़ता है और मैं तो खुश हूँ क आज आपने मुझे पूरी तरह अपनी बना लिया

अमित मंजरी क प्यार को देखकर जल्दी से उसे अपने गले लगा लेता है और एक किश उसके होंठो पर देता है

अमित : आज क बाद तुम्हे कभी दर्द नहीं दूंगा कभी नहीं

मंजरी : मगर ये दर्द ( चुदाई ) तो आपको देना hi होगा वर्ण मैं समझूंगी आप मुझसे नाराज़ हैं

अमित फिर से मंजरी को चूम लेता है थोड़ी देर प्यार भरी बातें कर क दोनों अपने कपडे पेहेनते हैं और वापिस घर की तरफ चल पड़ते हैं

मंजरी को चलने में परेशानी हो रही थी मगर वो दर्द बर्दाश्त करती हुई धीरे धीरे चल रही थी उसकी चल बदल गयी थी और वो थोड़े पाऊँ खोलकर चल रही थी

गाओं में पहुंचकर अमित मंजरी से थोड़ा दूर हो जाता है मंजरी को घर जाकर दर्द की दवा खाकर आराम करने को कहता है मंजरी अपने घर चली जाती है और अमित अपने घर

अमित मंजरी की चुदाई से काफी थक गया था इस लिए वो घर जा कर अपने कमरे में आराम करने लगता है
 
अपडेट 26



गाओं में पहुंचकर अमित मंजरी से थोड़ा दूर हो जाता है मंजरी को घर जाकर दर्द की दवा खाकर आराम करने को कहता है मंजरी अपने घर चली जाती है और अमित अपने घर


अमित मंजरी की चुदाई से काफी थक गया था इस लिए वो घर जा कर अपने कमरे में आराम करने लगता है

अब आगे -

आज विजय घर पर था और अजय हॉस्पिटल चला गया था कमलेश अजय को खाना देने चला जाता है

विजय सब को बताता है क रामु को आज होश तो आ गया है मगर उसकी पॉलिओन में ज्यादा चोट आयी जिसकी वजह से कुछ दिन उसे हॉस्पिटल में hi रखना होगा

कामिनी तो अब रामु का नाम तक नहीं सुन्ना चाहती थी इस लिए उसने बात पर कोई प्रति करिया नहीं की

खाना खा कर सब अपने कमरों में चले जाते हैं कमलेश भी अजय का खाना लेकर पहले hi निकल चूका था , आज अजय क घर पर न होने क कारन कामिनी फिर से अमित क पास चली जाती है उसके कमरे में

अमित कामिनी को कमरे में देख कर थोड़ा शॉक तो होता है मगर फिर वो खुश भी हो जाता है क चलो ममी अब उससे नफरत तो नहीं करती है

कामिनी का दिल पूरी तरह बदल चूका था अब वो ये इरादा कर चुकी थी क वो अमित को इतना प्यार देगी क वो पिछली साडी बातें भूल जाये

कामिनी : कल पता नहीं कैसे मुझे नींद आ गयी थी मगर आज मैं साडी रत तुमसे बातें करुँगी और तुम्हे आज सोने नहीं दूँगी

अमित : अगर हम सोयेंगी नहीं तो कल मैं स्कूल कैसे जाऊंगा

कामिनी : वो मैं नहीं जानती पर मैं इतना चाहती हूँ क हम एक नई शुरुआत करें जो कुछ गलतियां मुझसे हुई हैं अब मैं वो ठीक करना चाहती हूँ

अमित : ममी जी जो भी हुआ वो सब मैं भूल चूका हूँ आप भी भूल जाइये

कामिनी : तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है अमित मगर मैंने जो तुम्हे इतने दुःख दिए हैं मैं उन गलतियों क लिए शर्मिंदा हूँ और ये चाहती हूँ क अब तुम मुझे अपने इतने पास जगह दो क मुझे कभी ये न लगे क मेरी किसी गलती पर तुम अभी भी नाराज़ हो

अमित : ममी जी ऐसा कभी भी नहीं होगा मैं हमेशा आपके पास रहूँगा

कामिनी : तो फिर मिलाओ हाथ आज से हम नए रिश्ते की शुरुआत करते हैं

अमित कामिनी से हाथ मिलता है और उसे कामिनी की कोमलता का एहसास होता है

कामिनी : तो बताओ तुम हम तीनो में से किसे सबसे ज्यादा पसंद करते हो?

अमित इस सवाल का क्या जवाब दे उसे समझ नहीं आ रहा था, कुछ देर सोचने क बाद अमित बोलता है

अमित : इस सवाल का जवाब दे पाना बहुत मुश्किल है मगर फिर भी मैं बताता हूँ

आप तीनो में फरक कर पाना मेरे बस में नहीं है जहाँ बड़ी ममी ने मुझे सेज बेटे से बढ़कर प्यार दिया और एक माँ की कमी पूरी की है वहीँ छोटी ममी ने हमेशा मेरे साथ हसी मज़ाक किया मुझे कभी उदास नहीं रहने दिया वो हमेशा एक दोस्त की तरह मेरे से पेश आयी और सब से ज्यादा मुझे अगर किसी ने आगे बढ़ने में मदद की तो वो आप हैं

अपना नाम सुनकर कामिनी चौंक जाती है उसने सोचा भी नहीं था अमित उसके लिए कुछ ाचा बोलेगा क्यूंकि उसने तो हमेशा नफरत hi की थी अमित से

अमित : आपके गुस्से और नाराज़गी की वजह तो मैं नहीं जनता था मगर हर बार आपसे दांत खाने क बाद मैं यही सोचता था क मैं ऐसा बनु क एक दिन आप मेरे साथ अपनी साडी नफरत भूल कर मुझे गले लगा ले

लोग कितने बदनसीब होते हैं जिन्हे माँ का प्यार नहीं मिलता और मैं कितना खुश किस्मत हूँ क मुझे तीन तीन माओ का प्यार मिला

कामिनी अमित की बातों से भावुक हो जाती है और उसकी आँखों से नदिअ बहने लगती है और वो आगे बढ़कर अमित को कास क गले लगा लेती है

अमित भी अपने हाथ ममी की पीठ पर कास लेता है

कामिनी अमित की बातों से पूरी तरह पिघल गयी थी जब अमित ने उसे अपनी माँ सामान दर्जा दिया तो उसके अंदर की ममता जाग उठी

कुछ देर गले मिलने क बाद कामिनी अमित से दूर होती है

कामिनी: मैंने ज़िन्दगी क इतने साल अपनी नासमझी में बर्बाद कर लिए , जिस ख़ुशी ( बीटा ) क लिए मैं बहार ठोकर कहती रही वो तो मेरे पास hi थी और मैं देख न पायी

अमित : कामिनी क आंसू पोंछते हुए ) बस ममी जी अगर आपने और आंसू बहाये तो मैं आपसे बात नहीं करूँगा

कामिनी : बिलकुल नहीं बहाऊँगी और वैसे भी अब क्यों बहाऊँगी अब तो मुझे बीटा मिल गया है

कामिनी और अमित देर तक बातें करते रहते हैं और फिर दोनों एक साथ सो जाते हैं

रत को कामिनी चुदाई का ख्वाब देख रही थी , ख्वाब में एक अनजान आदमी कामिनी कामिनी को नंगा कर क उसके दूध दबा रहा था और कामिनी को एक करवट लिटा कर एक टांग को अपनी टांग पर चढ़ा कर कामिनी की छूट में लैंड पेल रहा था

कामिनी उसका साथ देते हुए अपनी कमर हिला हिला कर लैंड और अंदर लेने की कोशिश कर रही थी ऐसे hi चुदाई करते करते कामिनी का पानी निकल जाता है और उसकी नींद टूट जाती है

कामिनी हड़बड़ा कर जग जाती है और उसकी नज़र अपनी हालत पर जाती है तो उसको शर्म आने लगती है क्यूंकि इस वक़्त कामिनी करवट क बल लेती हुई थी और अमित भी उसकी तरफ करवट लिए सो रहा था , कामिनी की एक टांग अमित क ऊपर से होकर उसकी कमर तक कासी हुई थी और कामिनी की छाती अमित क सीने से लगी हुई थी और कामिनी की छूट अमित क लैंड पर दबी हुई थी जिसने अभी अभी पानी की बरसात की थी

कामिनी को अपनी छूट पर किसी हार्ड चीज़ का एहसास होता है

कामिनी जल्दी से अमित क ऊपर से अपनी टांग हटती है , टांग ऊपर उठने से सदी घुटने तक सरक चुकी थी जिसे कामिनी जल्दी ठीक करती है और बीएड से उठाकर जल्दी बाथरूम की तरफ जाने लगती है तभी रुक कर वो अमित की कमर क पास देखने लगती है वो देखना चाहती थी क आखिर उसे क्या चुभ रहा था हालाँकि उसे पता था क क्या हो सकता है मगर फिर भी वो देखना चाहती थी यकीन करने क लिए और उसका अंदाज़ा सही था ये अमित का लैंड hi था जो पायजामा में पूरा अकड़ क खड़ा था , पायजामे क उभर से कामिनी को अंदाज़ा हो रहा था क अमित अब बड़ा हो चूका है और उसका हथियार भी बड़ा है कमरे में रौशनी थी जिसकी वजह से उसे साफ साफ नज़र आ रहा था उसकी नज़र लैंड क उभर वाली जगह पर पानी क दाग पर जाती है

कामिनी सोचती है क शायद अमित का नींद में hi पानी निकल गया है मगर लैंड तो पूरी शान से खड़ा था तो फिर ?

कामिनी जल्दी से अपनी सदी चेक करती है तो उसे पता चलता है क छूट क सामने से साडी गीली हो चुकी थी , कामिनी क छूट रास ने पंतय पेटीकोट और साडी क साथ साथ अमित का पायजामा भी गीला कर दिया था

कितना पानी था कामिनी की छूट में , हो भी क्यों न कितने सालों से उसकी छूट लैंड को तरस रही थी और लैंड क ज़रा से एहसास से छूट में जमा पानी का बाँध टूट गया था

कामिनी और ज्यादा रुक नहीं पति क्यूंकि उसे बहुत तेज़ पेशाब आ रहा था वो जल्दी से बाथरूम में घुस जाती है

पेशाब करने क बाद कामिनी अमित क साथ सोने क बजाये अपने कमरे में चली जाती है क क्यूंकि वो खुद पर शर्मिंदा हो रही थी

सुबह उठकर अमित अपनी रूटीन से अखाड़े और फिर स्कूल चला जाता है , आज स्कूल में मंजरी उसे दिखाई नहीं देती

अमित को मंजरी की टेंशन होने लगती है कल उसने पहली बार चुदाई करवाई थी जिसमे उसको बहुत दर्द हुआ था और उससे चला भी नहीं जा रहा था ये सब सोच कर अमित को टेंशन होने लगती है

छुट्टी क बाद अमित राजू क पास जाता है और उससे कहता है क वो रेनू को बोल कर मंजरी क बारे में पता करे क वो आज क्यों स्कूल नहीं आयी

राजू से मिल कर अमित घर आ जाता है और खाना खाने लगता है मगर उसका ध्यान मंजरी की तरफ था गौरी कामिनी और दीपिका तीनो को लगता है क अमित को कोई टेंशन है मगर उनके पूछने पर भी अमित कुछ नहीं बताता

खाने से फ्री होकर अमित खेतों का बोल कर निकल जाता है घर से और सीधा राजू क घर जाता है मगर राजू घर नहीं मिलता

अमित पहले सोचता है क वो खुद मंजरी क बारे में पता करे मगर उसके घरवालों क्या सोचेंगे यही सोच कर अमित इरादा बदल लेता है और खेतों में चला जाता है

खेतों में अमित मंजरी क बारे में hi सोचता रहता है शाम जब ढलने लगती है तो राजू उसके पास आ जाता है

राजू को देख कर अमित खुश हो जाता है

अमित : कैसी है मंजरी ? वो ठीक तो है न ? वो आज आयी क्यों नहीं ? कहीं कोई बात तो नहीं उसके घर पर ?

राजू : अरे मेरे मजनू ठहर ज़रा सबर कर इतना उतावला क्यों हो रहा है कुछ नहीं हुआ तेरी लैला को

रेनू बोल रही थी क मंजरी को बस आज हल्का सा बुखार आ गया था कल उसे कोई चोट लग गयी थी गिरने से जिसकी वजह से ये हुआ है और आज उसने सारा दिन रेस्ट की है कल वो जाएगी स्कूल

अमित समझ गया था मंजरी ने चोट का बहाना बनाया था अपनी बिगड़ी हुई चाल को छुपाने क लिए और पहली चुदाई में जो उसकी छूट फटने से उसका खून निकला है शायद उसी से बुखार हो गया हो

अमित को मंजरी की तबियत जान कर तसल्ली मिलती है और उसकी साडी चिंता ख़तम हो जाती है फिर अमित राजू को रामु क बारे में बताता है क कैसे उसने उसकी तबियत से ठुकाई की है तो राजू बहुत खुश होता है मगर अमित ममी वाली बात गायब कर देता है

खेतों से शाम को लौट कर अमित सबके साथ खाना खता है

विजय : 3 दिन में रामु को हॉस्पिटल से छुट्टी मिल जाएगी मगर उसे अभी बीएड रेस्ट चाहिए हम उसे घर तो अब किसी कीमत पर नहीं ला सकते और उसे ऐसे छोड़ना भी गलत होगा इस लिए अजय तुम अपने सेल को बुलवा लो ताकि वो अपने बेटे को आकर ले जाये

अजय : दिल तो करता है अपने हाथो से उसकी जान लेलु मगर उसके माता पिता की वो एक लौटी संतान है इस लिए उनके नाम पर छोड़ दिया

आप चिंता मत कीजिये मैं उनको बोल दूंगा और साथ में उनकी भी अछि खातिरदारी करूँगा जब वो आएंगे पता नहीं कैसे संस्कार दिए हैं

विजय : जाने दो अजय औलाद अगर गन्दी निकल ए तो ये क्या काम सजा है माँ बाप क लिए तुम बस उन्हें बुला लो परसों

खाने से फ्री होकर सब अपने अपने कमरों में चले जाते हैं आज कमलेश हॉस्पिटल में रुकता है

कामिनी कल की हरकत से शर्मिंदा थी इस लिए वो आज अमित क कमरे में नहीं जाती

वहीँ कमलेश क न होने से दीपिका अमित क रूम में चली जाती है और मज़े से दो राउंड चुदाई करवाती है अमित से

चुदाई क दौरान दीपिका अमित से उसकी चिंता का कारन पूछती है अमित पहले इंकार कर देता है मगर दीपिका सच निकलवा hi लेती है

अमित दीपिका को मंजरी क साथ हुई चुदाई क बारे में बता देता है

दीपिका खुश हो जाती है मगर ये भी हिदायत देती है क वो कुंवारी है इस लिए कोई गलती मत करना अपनी पड़े ख़तम होने तक अभी सिर्फ पड़े पर ध्यान दो

ऐसे hi थोड़ी देर बातें करने क बाद दोनों सो जाते हैं

अगले दिन मंजरी स्कूल में अमित से मिलती है अमित उसे देख कर खुश हो जाता है

अमित : तुम कल नहीं आयी मुझे कितनी फ़िक्र हो रही थी , अब कैसी तबियत है आज तुम्हारी ?

मंजरी : पता है आप कितने परेशां थे मेरी वजह से , रेनू को देख कर hi मैं समझ गयी थी क उसे आपने hi भिजवाया है

और ये अछि बात है आपकी खुद hi दर्द देते हो पहले और फिर खुद hi चिंता करने लगते हो

मंजरी अमित को रिलैक्स करने क लिए बात मज़ाक में ताल देती है

अमित : तुम्हे स्कूल में न देख कर मेरे दिमाग में पता नहीं कैसे कैसे विचार आ रहे थे

मंजरी : आप तो ऐसे hi घबरा गए अरे ये सब पहली बार होता hi है मेरी कजिन ने बताया था जब उसकी सुहाग रत थी तो उसके बाद 2 दिन तक वो बिस्तर से नहीं उठी थी मैं तो फिर भी अछि भली हूँ

अमित मंजरी ऐसे hi लंच ब्रेक में बातें कर क अपनी क्लास में चले जाते हैं और फिर अमित स्कूल से घर आ जाता है

सारा दिन ऐसे hi निकल जाता है और रत में फिर दीपिका कमलेश को नींद की दवा देने क बाद अमित क पास जाती है और चुदाई करवा कर वापिस आ जाती है

दीपिका जब चुदाई करवा कर अमित क कमरे से वापिस आ रही थी तो एक शख्स जग रहा था जो दीपिका को अमित क कमरे से रत क 1:30 बजे निकलते हुए देख लेता है

वो शख्स : दीपिका इतनी रत को अमित क कमरे में क्या कर रही थी ? कहीं अमित की तबियत तो नहीं ख़राब ? मगर उसने किसी और को क्यों आवाज़ नहीं दी ? आखिर चल क्या रहा है

कहीं वाकई तो अमित की तबियत ख़राब तो नहीं ? मुझे देख लेना चाहिए

फिर वो शख्स अमित क कमरे की तरफ अत है , दरवाज़ा बंद था मगर लोच नहीं था इस लिए वो शख्स जब दरवाज़े को खोलने की कोशिश करता है तो दरवाज़ा खुल जाता है

कमरे क अंदर नाईट बल्ब की हलकी रौशनी थी मगर वो शख्स अछि तरह देख प् रहा था क अमित का जिस्म कमर से ऊपर बिलकुल नंगा था और वो सो रहा था बिस्तर पर बीएड शीट पूरी अस्त व्यस्त थी

एक नज़र देखने क बाद वो शख्स दरवाज़ा बंद कर क चुप चाप अपने कमरे में लौट अत है और अमित और दीपिका क बारे में सोचते हुए सो जाता है
 
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