Adultery Raj-- hero of the family - Page 70 - SexBaba
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Adultery Raj-- hero of the family

अपडेट टोम्मारो नाईट 10 पं ...

पास्ट.....

ी होप एवरीवन हैप्पी
 
सबर रखे भाई लोग कुछ दिएर मई आजायेगा
 
अपडेट 221…

पास्ट…

सरे जाने घर वापस पहुंच गए थे पर ..अभी भी सब हैरान परेशान थे …घर पहुंच कर सबसे पहले ऋचा ने दीपू को चेयर पर बैठकर अपने पर्स से एक छोटी बोतल निकलकर उसको दे दी और उसे चेक करने लगी जब अचे से चेक कर लिया की उसे चोट नहीं लगी तब बोली … “अभी यही पिणि ह और फिर खाना खाना ह जब तक मैं नानी को चेक karlu…phir खाना खाकर हम घर चलेंगे तीख ह”

दीपू ने मुस्कराकर है मई गर्दन हिला di…par ऋचा जब अंदर नानी को चेक करने गयी तोह दीपू खड़ा होकर हॉल मई लगी अपनी माँ की तस्वीर के आगे पहुंच गया और उसे धयान से देखने laga….jaise पहचानने की कोसिस कर रहा हो की ये कौन ह …

कुछ दिएर बाद ऋचा ठाकुर साब


के साथ अंदर रूम से बहार ईई…

ऋचा “ नानाजी अभी वो तीख ह रिकवर कर रही ह उन्हें बस टेंशन से दूर रखिये …जैसा की अपने कहा वो अपनी बेटी को बहुत मिस करती ह …और अभी उन्हें हार्ट अटैक आया ह तोह उन्हें बस अब कोई टेंशन नहीं देनी ह जो भी हो रहा उससे उन्हें दूर रखो”

ठाकुर साब “पूरी कोसिस रहेगी ऋचा beti…par क्या करू …कहते ह न कर्मो की सजा इसी जनम मई मिलती ह बस वही मिल रही ह”

तभी ऋचा की नज़र दीपू पर गयी जो अपनी माँ की फोटो को छू कर देख रहा था …ऋचा ने सहानभूति नज़रो से उसे देखा और उसके पास मई आकर कड़ी हो गयी…

दीपू “मेरी माँ पापा की कोई फोटो क्यों नहीं ह मेरे पास नीचू”

ऋचा “क्योकि आपके बचपन मई हे वो दूसरी दुनिया मई भगवन के पास चले गए थे इसलिए उनकी फोटो नहीं ह”

दीपू “क्या मैं इनसे मिला हु क्या मेरी चोट लगने से pahle….mujhe ये जनि पहचानी सी लग रही ह जैसे मैं इन्हे जनता हु ”

ऋचा “और क्या महसूस हो रहा ह आपको इन्हे देख कर”

दीपू “मुझे दिल मई दर्द सा महसूस हो रहा h..mera मन बहुत भरी सा हो रहा ह …..”

ऋचा “ ाचा अब चलिए आपके खाने का वक़्त हो गया ह फिर आपको इन आंटी के बारे मई नानाजी से कहकर और बाटे सुनवाउंगी इनके बारे मई तब आप इन्हे और जान पाएंगे तीख ह डिअर हस्बैंड”

दीपू ने “हुऊ” कहा एक बार फिर फोटो को चुवा और ऋचा के साथ आकर बैठ गया…

गजेंद्र “एक बात पुछु बेटी”

ऋचा “क्या मां जी”

गजेंद्र “चलो तुमने मां कहना तोह सुरु किया …मैं ये जानना चाहता था की दीपू इतनी अछि फाइटिंग कर लेता h…matlb 30 आदमी सिर्फ 10 मिनट मई कैसे …ये तोह कोई बड़ा सा बड़ा पहलवान भी नहीं कर सकता ह मतलब संसज रही हो न मेरा”

ऋचा के चेहरे पर मुस्कराहट गयी और वो बोली “कुछ बाते छिपी रहे तोह अछि ह फिर भी इतना बता सकती हु अगर ये तीख हो तोह अपने सिर्फ मूवीज मई देखा और सुना होगा ये रियल मई ओने मन आर्मी ह 100 लोग मिलकर भी इन्हे छू नहीं सकते ह…”

गजेंद्र “फिर ये सब कैसे मतलब दीपू की ये हालत कैसे हुवी ”

ऋचा एक गहरी साँस छोड़कर “ ये सब तोह यही बता सकते ह मां जी …इनकी यादास्त चली गयी ह बस इसलिए सबसे दूर अकेली इन्हे लेकर रह रही हु और इनका इलाज कर रही हु ..पता नहीं कैसे ये सब हुवा और ये ऐसे हो गए किसने किया और क्या जिसने किया वो भी भी इनके पीछे ह क्या कुछ पता नहीं ह इसलिए सबसे दूर इन्हे यंहा लायी हु”

गजेंद्र “तोह फिर तुम्हारी शादी पहले हे हो गयी थी क्या दीपू से “

ऋचा दीपू को अपने हाथो से निवाला खिलकर “ये सब समझाना बहुत मुश्किल ह मां जी बस इतना कह और बता सकती हु की इनकी जान मेरी जिंदगी से जुडी हुवी ह इसलिए इन्हे थोड़ा सा होश आया तब मुझे इनसे शादी करनी पड़ी …पुरे रीती रिवाज से तोह नहीं कर पायी पर है मंगलसूत्र और मांग मई सिन्दूर भरके और भगवान् को साक्षी मानकर ये मेरे पति बन गए …ये सब किस्मत का लिखा ह मां जी और हम सब बस मोहरे ह विदाता के खेलके ”

गजेंद्र “पर बेटी तुम्हे तोह कोई भी ाचा लड़का मिल सकता था फिर ये …प्लीज बुरा मत मन्ना बेटी दुख हुवा तुम्हारे लिए इसलिए कहा”

ऋचा के चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कानगयी और बोली “ हो सकता ह और मिल सकता था मां ji…phir दीपू के बालो मई हाथ फिरकर …मेरा जीना मरना सब इनके लिए हे ह मां जी …ये मुझे बहुत प्यार करते ह …और एक लड़की को क्या चाहिए रही बात पैसे की वो मैं कमा लुंगी ये सुभे से शाम तक मेरा ख्याल रखते ह मुझे प्यार करते ह और कोई मुझे चुवे तोह आप देख हे सकते ह ये क्या करते ह …मेरी हर बात मानते ह बस मुझे यही chahiye….gajendra सिंह और सब ऋचा के जवाब सुनकर चुप रह gaye…aur दीपू को तोह एक बार ऋचा को देखने लगे…

ठाकुर साब “पर कमिश्नर का ऐसे भागते हुवे आना और ऐसे गीध गिडाना वो सब क्या था मतलब वो घबराया हुवा था …जैसे बहुत दबाव मई हो wo…ye सब क्या था”

ऋचा “ नानाजी आपके परिवार के बारे मई बहुत सुना ह मैंने आप विस्वास वाला परिवार हो इसलिए एक सच आपको bataungi..wo अभी विद्या ग्रुप का नाम लेने वाली हे थी की चुप हो गयी फिर सोचकर बोली “दीपू क्या करते थे मुझे ये तोह नहीं पता ह पर मुझे हमेशा लगता था जैसे ये कोई सीक्रेट एजेंट ह …बहुत बार मुझे ऐसा लगता ह जैसे हम पर निगरानी राखी जा रही h…aur तोह और मैं दावे से कह सकती हु वो मिश्रा दुबारा नहीं दिखेगा क्योकि जो इनके पीछे अत ह वो अचानक गायब हो जाता ह इनके पीछे बहुत बड़ी पावर ह”

ऋचा की ये बात सून सरे जाने दीपू की तरफ हैरानी से देखने लगे यंहा तक गजेंद्र के सरीर मई भी झुरझुरी सी दौड़ गयी…

डिममपि “वो मूवीज की तरह मतलब ये एक सीक्रेट एजेंट होंगे कोई …या कोई खतरनाक किलर जिनसे दुनिया डर्टी हो और इनकी गैंग इनकी प्रोटेक्शन कर रही हो ..वो तू मच थ्रिलिंग …”

नित्ति “राइट डिम्पी वो बॉडी भी इनकी ऐसी ह क्या पंच मारा था उस इंस्पेक्टर को कैसे उड़कर दूर जा कर गिरा था मतलब आप एक सीक्रेट एजेंट की वाइफ ह वो सो लकी”

ठाकुर साब “चुप होजाओ तुम दोनों और गलती से भी मू से बहार कुछ मत बोलना इस बारे मई”

तीनो ने गर्दन हां मई हिला डीई

डिंप्पी “ खास ये मेरे साथ कॉलेज जाते तोह वो कॉलेज के लड़के छू भी नहीं करते ”

ऋचा “आज का ट्रेलर देख मुझे नहीं लगता ह अब कोई तुम्हारे पास भी आएगा और अत ह toh…phir करेंगे उनका इलाज भी ….”

डिममपी “ दी हो सकता ह क्या ये”

ऋचा “ हो सकता पर मुझे दी कहने के बाजए भाभी बोलो और इन्हे भैया ….अब भाई कैसा भी हो छोटा या बड़ा …या फिर उसकी यादास्त हे क्यों न चली गयी हो अपनी बहन को कुछ थोड़ी हे होने dega…waise भी परसो रक्षा बंधन तुम बना लेना इन्हे भैया khus…phir देखते ह कौन तुम्हे परेशां करता ह”

साडी ख़ुशी से एक साथ चहक उठी …पर सिम्मी के दिल मई दर्द अभी भी था क्योकि वो जानती थी की बस कुछ हे दिनों बाद मई उसकी जिंदगी नरक बनने वाली ह और अगर उसने खुदखुशी की तोह उसका परिणाम उसके पुरे खानदान को भुगतना होगा

ऋचा “नानाजी मुझे विद्या आंटी के बारे मई जानना ह मतलब दीपू जानना चाहते ह बताईये न उनके बारे मई ”

दीपू की भी आँखों मई नाम सुनकर चमक आगयी ये पहली बार था जब उसने किसी बात को सुनने के लिए टीवी के सीरियल या ऋचा के अलावा किसी और के लिए अपनी आंखे उठायी हो…

ठाकुर साब “तोह दीपू बेटे को विद्या के बारे मई जानना ह …” अब ठाकुर साब के की आँखों मई बचपन की तस्वीरें घूमने लगी और वो बोलो…


“ 2 भाई और 2 बहनो के बाद वो पैदा huvi…bahut नटखट बदमास” ये कहते वक़्त उन्होंने गजेंद्र से एल्बम मंगवा लिया अपने कमरे मई से और दीपू और ऋचा को दिखते हुवे आगे बोले “ये फोटो उसके 4 साल की होने पर की h…hamesha मेरी गॉधी मई हे सोती रहती thi….kisi को पास नहीं आने देती मेरे सिवाए और जब जोर नहीं चलता तोह रोने लग जाती ये कहते कहते वो मुस्कराने लग gaye….aur बोले पता ह एक बार जब वो 10 साल की हुवी तोह स्कूल mai…teacher ने उसके इंग्लिश के नंबर काट लिए थे उसे इतना गुसा आया इतना गुसा आया की चुपके से मेरी दोनाली बन्दुक लेकर स्कूल पहुंच गयी thi….bechere टीचर की हालत ख़राब हो gayiii…wo बस किस्मत थी उस दिन बच गया वर्ण विद्या मार हे देती उसे …”

ऋचा के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कराहट थी तोह दीपू फोटो को धयान से देख रहा tha…uske चेहरे पर भी बड़ी सी मुस्कान थी वो कभी फोटो को तोह कभी ठाकुर साब को तक ताकि लगा कर देखता रहा…

ठाकुर साब “ उस दिन मैं भी दर गया tha…tab मैंने कई पंडितो को बुला कर कुंडली दिखाई …तोह वो बोले की शादी के बाद हे विद्या का गुस्सा काम होगा …..जब तक ये ऐसे हे rahegi…badmass नटखट …और धीरे धीरे वो और बदमास होती गयी …और गजेंद्र के सिवाए कोई उसे कुछ कहकर तोह देखे …उसका जीना हराम कर देती thi…pata नहीं कैसे पर जंहा भी जाती इसे साथ लेकर जातीय…

गजेंद्र “पापा सबसे जायदा दन्त भी उसके चाकर मई मुझे हे कहानी पड़ती थी ये क्यों नहीं बोल रहे साथ मई आप”

ठाकुर साब “है है है …एक बार ये दोनों पुलिस ठाणे मई हे पटाखे फोड़ ए थे…. बहुत सरारती थे दोनों मतलब गाँव सहर कोई ऐसा नहीं था जिसे इन दोनों भाई बहन ने परेशां नहीं किया हो”

गजेंद्र शरमाते हुवे “वो बाबूजी”

ठाकुर साब “ और तोह और ये भी सुनो एक दिन शादी की बात आगयी तब भी ये दोनों भाई सबसे लड़ लिए की दोनों हे शादी नहीं करेंगे बस एक दूसरे के साथ ऐसे हे रहेंगे ….और बहाना क्या दिया की तीसरा कोई आएगा हमरे बिच तोह जगदा करवा देगा”

ऋचा “मतलब वो बहुत बदमास थी…”

ठाकुर साब “बिलकुल …अभी तोह और suno…ek दिन एक घर मई एक बचा देख लिया जो उसे बहुत पसंद aagaya…aur आयकर मुझसे जिद करने लगी उसे भी बचा चाहिए ह …क्यूट सा उसकी खुद की तरह ….और बोली मुझे आज के आज चाहिए ह पापा कंही से भी lao…pura एक महीना लगा उसे मानाने मई समझने मई….”

सबको हंसी आगयी …खासकर दीपू ने राज ऋचा के हाथ को पकड़कर जोर जोर से हसने लगा उसने अपनी बोतल भी साइड मई रख diii…bato को सुनने के liye…usai ख़ुशी मिल रही थी विद्या के बारे मई सुनकर …..

ठाकुर साब “ पढ़ाई मई बहुत होशियार थी पुरे इंडिया मई टॉप किया था उसने कहती थी की डॉ बनेगी बड़ी होकर …और यंहा बड़ा सा हॉस्पिटल kholegi…..sirf उसकेलिये यंहा से कॉलेज जाने की व्यवस्था ki…aur वंहा अपने चाचा के पास रहने गयी ताकि आगे की पढ़ाई पूरी कर sake….aur वंहा से भी उसकी शिकायत खूब अति thi….ki आज इसे पिट दिया आज उसे पिट दिया ….ऊपर से मेरा भाई कौन सा काम tha…vidya एक बार मासूम सी सकल बना देती थी और वो बेवक़ूफ़ अपनी पुलिस की वर्दी की धौंस ज़माने कॉलेज पहुंच जाता …मेरे सर मई दर्द करके रख देती thi….tum ये समाज लो की लड़कियों उस वक़्त साइकिल भी चला ले तोह बड़ी बात थी और वो अपने चाचा की राजदूत लेकर चली जाती थी कॉलेज ….”

दीपू “वो मेरी तरह पिटाई करती थी क्या नानाजी ..”

दीपू की बात सुनकर सब हसने लगे तोह वो सबको हैरानी से देखने लगा…

ठाकुर साब “नहीं दीपू वो मुर्गा बना देती थी उठक बैठक करवाती thi…matlb जैसा मोटा आदमी ह तोह उसको पेड़ पर चढ़ने को बोल देती ऐसे ऐसे पनिशमेंट देती की सब दूर भागते थे”

दीपू “मैं भी अब सबको ऐसा हे पनिशमेंट दूंगा बिलकुल इनकी तरह मज़ा आएगा”

अब हैरान होने की बरी ऋचा की थी….

ऋचा “नानाजी इनकी मुलाकात उन फोटो वाले अंकल से कैसे हुवी”

ठाकुर साब सीरियस हो गए “ आज सब बताऊंगा तुम सबको इतना कहकर वो रूम मई गए और एक डायरी उठा कर ले ए और बोले ये डायरी विद्या बेटी ने खुद लिखी ह ….ऋचा बेटी तुम खुद हे पढ़कर sunao….Deepu को”

ऋचा “नानाजी आज पहली बार इन्होने मुझे और अपने टीवी सीरियल को छोड़कर किसी और के बारे मई जानने की ीचा की ह और खुस भी हुवे ह …और मैं खुद भी अब आंटी के बारे मई जानना चाहती हु…”

ऋचा ने डायरी ली और खोलकर देखने लगी और फिर पढ़ना सुरु किया …

अब आगे की कहानी विद्या की जुबानी ायेगीइ…

“Papa…duniya के सबसे अचे ..

प्यारे papa…apki बेटी आपको बहुत बहुत प्यार करती h….jab आपको ये डायरी मिलेगी तोह मैं इस दुनिया मई नहीं होउंगी मैं भी न कैसी बात कर रही हु ये तोह डायरी देने आने वाले ने आपको बता हे दिया होगा मेरे मरने के बाद सायद आप सब सच जानकार मुझे माफ़ kardo…kar डोज न पापा अपनी विद्या को माफ़ वैसे भी मरे हुवे की आखिरी ीचा तोह हर कोई पूरी करता h….ye डायरी मैंने शादी के बाद सिर्फ आपके लिए हे लिखी h….taki आप जान सके की आपकी बेटी क्या करती रही और आपको हर पल कितना याद करती rahi…mujhe पता ह आप मुझसे नाराज ह की मैंने उनके (सहदेव सिंह) के साथ शादी क्यों कर्ली ….पहले आपको आपके इसी सवाल का हे जवाब दूंगी क्योकि अपने कभी अपने मेरी बात सुनी हे nahi….par मुझे यकीं ह आप कभी न कभी तोह ये डायरी पढ़ेंगे he…….papa …आपकी जान उस ठाकुर के बाप ने एक मकसद से बचायी थी या ये कहु की …उसी ने आप पर हमला करवाया tha….pata ह आप मेरी बात नहीं मानोगे …क्योकि वो आपके सामने नेक दिल ाचा और सरीफ बनकर रहते ह …पर हकीकत मई वो एक ज़हरीला सांप ह जो बस अपने सही वक़्त का इंतज़ार कर रहा ह …यही बात मई आपको बताने हमेशा अति रही पर आप मेरी बात सुनते हे नहीं कभी ….मैंने जब कॉलेज मई एडमिशन लिया था ..उसने भी मुझसे एक क्लास ऊपर एडमिशन ले liya…aur आपकी जान पहचान का फायदा उठाकर मेरे पास आने की हमेशा कोसिस karta..rahta..….uska बाप इसीलिए हे तोह स्प्के पास अत रहता था …ताकि वो आपके करीब आसके और आपका साथ पाकर अपने सरे काळा काम को फैला सके …अब आप सोच रहे होंगे की मुझे ये सब कैसे पता ह ….ये सब सहदेव ने हे बताया मुझे papa….agar वो न होते तोह सायद मैं आज उस कमीने इंसान के घटिया जाल मई फंस गयी hotiii….sorry पापा मैंने आपका ट्रस्ट तोडा पर अगर मैं उस साई शादी कर लेती और उसकी सचाई बाद मई आपके सामने अति तोह आप कभी अपने आपको माफ़ नहीं कर पते …इसलिए मुझे मज़बूरी मई इतना कठिन कदम उठाना pada….apki बेटी ..सब सह सकती ह पर आपको जीते जी दुखी नहीं देख सकती ह …गजेंद्र भैया सब जानते ह उस बलराम और उसके बाप के बारे मई पर आप उनकी बात नहीं सुनेगे क्योकि आपकी नज़र मई बड़े भैया और दीदी हे सबकुछ ह …पर बड़े भैया मनोहर को मैंने एक बार उस बलराम से मिलते देखा ह …सहदेव अभी बहार ह जब वो आएंगे तब सच बहार ayega…acha एक खुसखबरी ह papa…ab आपकी बेटी भी माँ बनने वाली ह …जैसे अपने मेरा ख्याल रखा आपकी बेटी भी अपने बचे का वैसे हे ख्याल rakhegiii…isai आपकी तरह बनाएगी …और लड़की हुवी तोह उसे मैं मेरी नन्द दिव्या की तरह बनाउंगी …और आपको पता ह दिव्या ने तोह कह भी दिया ह आपको बीटा होगा और वो मैं लुंगी …चाहे आप नाराज हो jao…yanha सब मुझे बहुत प्यार करते ह और पापा तोह बिलकुल आपकी तरह ह बहुत ख्याल रखते ह मेरा …सहदेव को भी डांटने नहीं देते ह mujhe….par मुझे आपकी बहुत याद आती ह पापा…. ाचा मैं अभी जाती हु आपके दामाद जी अपने दोस्त रविंदर नरपत विपिन के साथ ए ह आज पापा उनकी खूब पिटाई करेंगे …अभी जाना पड़ेगा वर्ण पिटाई हो जाएगी उनकी “

डायरी का पेज खली था निचे

ऋचा “नानाजी जब उन्होंने इतनी बार आपसे माफ़ी मांगी तोह अपने एक बार भी उनकी बात नहीं सुनी …. और मामाजी आपको सब पता था न फिर अपने भी कुछ क्यों नहीं कहा”

ठाकुर साब गहरी सांस छोड़कर “इसकी गलती नहीं ह बेटी …बड़े बेटे मनोहर सिंह के विश्वास और दोस्त की दोस्ती की बातो ने मुझे इतना अँधा कर दिया था की गजेंद्र और दिव्या की बाते भी झूटी लगी मुझे…”

ऋचा “पर नानाजी”

ठाकुर साब “ बेटी वो और सहदेव जब भी ए मेरा दोस्त और उसका बीटा (बलराम का बाप किन्डन) और मेरा बीटा मनोहर भी मौजूद होते थे मनोहर सहदेव का साथ मुझे बिना बताये डी देता था पर पीछे से उसके लड़ाई झगडे और बाकी चिझे के सबूत भी देता tha…mujhe हमेशा यही लगता ह की मेरी बेटी की जिंदगी बर्बाद करदी सहदेव ने और मेरी बेटी ने मेरी जुबान मेरे वचन की परवाह नहीं करि पता होते हुवे भी की मैंने शादी का वचन दिया हुवा था bus…isliye मुझे शर्मान्धी महसूस होती रहती दिन राठौर इन्ही नफरत और गलत फ़हमियों डालने वालो ने धीरे धीरे दिल मई घुसकर नफ़रार डालते gaye…kyoki एक तोह वचन टूटने और सहदेव के विद्या को घर से सबके सामने लेजाने पर मैं वैसे हे खुदको बेइज़्ज़त महसूस करने लगा था और वो आग दिल मई गहराई तक हमेशा जलती रही और इसी का उन्दोनो ने फायदा uthaya…aur मुझे गलत बाते बता कर भड़काते rahe….pure उप मई मेरी कही बात कोई भी मन नहीं कर सकता था …पर उस दिन सहदेव के साथ विद्या ने जाकर मेरी उस इज़्ज़त को सरे आम नीलम कर दिया था …जिसका ढक मुझे इस जिंदगी मई हमेशा rahega….baap था मैं उसका …हमेशा भला हे चाहूंगा न मैं…….”

ये कहते हुवे ठाकुर साब की आँखों मई पानी आगया

दीपू जो बहुत दिएर से चुप बैठा हुवा था वो आखिर बोलै “अपने गलत kiya…ap एक अचे पापा नहीं ho…wo अछि thi….wo बहुत अछि थी …अपने उन्हें रुलाया .. अपने उन्हें रुलाया”

ऋचा “दीपू सब तीख ह उन्हें भी ढक हो रहा ह उनके जाने का”

ऋचा ने डायरी का आगे का पेज khola….jis पर लिखा था

“पापा …क्या बताऊ अभी अभी आपके दामाद जिनके सामने अचे अचे बोलने से डरते ह अभी अभी बचो की तरह पिट ते हुवे चिल्ला रहे थे …चारो को मार पड़ी ह खूब साडी …आज पीकर ए थे …पार्टी मई …मैंने भी पापा को शिकायत करदी ….और खूब साडी नमक मिर्च भी लगा di…he हे हे …मज़ा आगया …आप यंहा होते तोह आपसे भी पिटवाती ….और ये इनके दोस्त खासकर रविंदर तोह बहुत बहुत बदमास ह फाटक से पला बदल लिया और क्या हे चुगली करते h…….par मेरी हर बात मानते ह पापा …ी रियली मिस यू papa…ab बंद करती हु कल दिल्ली जाना ह वंहा खुदका काम सुरु कर रहे ह ….मैंने पढ़ाई तोह छोड़ दी ह पर हॉस्पिटल का सपना याद ह आपका और मेरा….. जिसे मैं जरूर जरूर पूरा करुँगी अब सोती हु गुड नाईट…

ऋचा एक एक करके कई पेज पढ़ती gayi…par एक पेज पर आकर उसकी निगाहे रूक गयी…

“पापा एक बात बहुत बार सोचा नहीं बताऊ पर बता रही hu….ye बात कॉलेज के दिनों की ह जब वो आपके दोस्त का beta…kundan सिंह मेरे पीछे पीछे लगा रहता tha…ek दिन कॉलेज का फंक्शन tha…aur उसे पता था की मुझे कोई दर नहीं ह तोह मई लेट तक रुकूंगी …और इसी बात का फायदा उठाकर उस कुत्ते ने नशे की हालत मई सजाइश रची …और रस्ते मई हे मेरी किडनैपिंग का प्लान किया ताकि वो गलत कर सके पर मेरी किस्मत अछि थी …सहदेव के दोस्त रविंदर को एक जूनियर ने हॉस्टल मई जाकर सब बता दिया ….कुंडों ने मेरे त्येर मई मेरे कार को स्टार्ट करने से जस्ट कुछ सेकंड पहले किल मारकर त्येर को पुनटुरे कर दिया …और मैं रोड पर कुछ 5 मिनट हे आगे तेज़ी से चली की त्येर पुनटुरे हो गयी …बस इसी का फायदा उठाकर वो रुमाल मू पर बांधकर आगया अपने दोस्तों के साथ और मुझे जबरदस्ती उठाकर ले जाने laga….par उनके दोस्त रविंदर अपनी बाइक पर सही समय पर पहुंच गए ……

रविंदर “हाथ मई बहुत खुजली चल रही ह कई दिन se…aj एक एक के ऐसा कांटाप दूंगा की सोते वक़्त पुरे पितृ याद आजायेंगे .. गंदे हाथ हटाओ हमारी भाभी से …साला हमरे रहते तुम्हारी हीमत कैसे हुवी भभ को चुने की ….सुना नहीं क्या बे दूर हटो उनसे”

कुंदन “इसके जायदा चर्भी तोड़ डालो सेल को बड़ा प्रधान बना घूम रहा ह चौड़े मई”

रविंदर “अबे अकेले घूमते ह चौड़े होकर गूढा ह तोह घूमते ह तुम्हारी तरह नहीं जो चुझे साथ लेकर छू छू करने के लिए लिए घूमते ह समझे बकलोल”

कुंदन की तरफ भागे तोह सही पर उन्होंने रविंदर का जिगरा नहीं देखा था ..रविंदर ने बाइक से रोड निकल कर अकेले ने सबको अपने हाथ मई पकड़ी रोड से ऐसा तोडा की वंहा चीखे हे गूंजती रही …खुद को चोट लगी पर बन्दे ने उफ़ तक नहीं की ….और सबको पीटने के बाद….

रविंदर “आज के बाद 50 मीटर आगे और पचास मीटर पीछे दिखना भी मत समझे अब दफा हो jao…aur भाभी आप चलिए हमारे रहते देखता हु कौन आपको परेशां करता ह पर उसका इतना हे कहना था की उसकी अहह निकल गयी क्योकि विद्या ने उसके कान पकड़ लिया और मोड़ दिया थे…

विद्या “आज के बाद अगर ऐसे घूमते देखा तोह तुम्हारी पिटाई मैं कर दूंगी समझे …पढ़ाई किया करो देखे थे किशन कनहिया तुम्हारे नंबर जितने तुम्हारे नंबर एते ह उसे जायदा गोपिया घूमती ह तुम्हारे आगे पीछे”

रविंद्र “आ भाभी दर्द हो रहा ह आपकी कसंपदः रहा था वो तोह बस इन हरामियों का पता लगा तोह आगया”

कविता “गाली…”

रविंदर “सॉरी सॉरी ..भाभी आगे से नहीं दूंगा ..अब इतनी तोह आ हे जाती ह”

विद्या “तुममम”

रविंद्र “सॉरी सॉरी”

विद्या के चेहरे पर बड़ी दी मुस्कराहट आगयी और वो जोर जोर से हसने लगीई और बोली “बस बस बहुत देखती हु तुम्हारी noutanki…ab चलो उस पुनटुरे टायर को चेंज करने मई हेल्प करो”

रविंद्र “हेल्प …अब बस यंहा मेरी इस बाइक पर बैठो मैं अभी चेंज कर देता हु” इतना कह रविंद्र लगा चेंज करने और कुछ हे पालो मई त्येर चेंज कर दिया…”

विद्या अब तुम भी हॉस्टल जाओ …और restkaro…par रविंद्र ने न मई गर्दन हिला दी और बोलै “बस क्या …भाभी …ऐसे कैसे आप अकेली जाओगी और मैं dekhunga…toh फिर लानत ह मुझपर क्या मू दिखाऊंगा भाई को और क्या कहूंगा की अपनी भाभी को रात को अकेले जाने diya…ap कार चलाइये मैं पीछे पीछे अत हु”

विद्या “भाभी की इतनी परवाह ह पर तुम्हारे भाई को तोह नहीं ह जनाब गायब ह”

रविंद्र “भाभी अभी वो अपने काम पर फोकस कर रहे ह फिर स्टडी भी करनी होती हौर वैसे bhi…sab आपके लिए हे तोह कर रहे h…aur मैं हु न …आपकी सेवा के लिए आपका देवर ”

विद्या हसने लगी “तीख मेरे देवरजी …चलिए फिर आईये अपनी भाभी के पीछे पीछे”

डायरी पेज एन्ड…

ऋचा “नानाजी ये रविंदर कौन ह”

ठाकुर साब “ये सहदेव का दोस्त था जो हमेशा उसके साथ रहता था ……कहते ह की दुनिया इधर से उधर हो जाये पर इसके दोस्त ने जो कह दिया वो हे सही ह बस….”

ऋचा डायरी को आगे सीधा बिच से खोलती huvi…padhne लगी और उसकी आंखे फ़ैल गयी…

डायरी पेज 56…

“बाबूजी आज ये मुझे घूमने साउथ मई लेकर ए ह ….कहते ह यंहा नेचर बिलकुल हमरे करीब रहता ह और यंहा के मंदिर बहुत बड़े बड़े h….mujhe बहुत पसंद आयी ह ये jagah……sahdev का बिज़नेस ाचा चल रहा ह और अब वो साउथ मई …भी अपना बिज़नेस फैला रहे h…aj ये पता नहीं मंदिर मंदिर जाकर क्या मांगते ह और ढूंढते ह और पूछने पर कुछ बताते भी नहीं h….aur तोह और ये रविंदर भी न …ये भी कुछ नहीं बताता ह पूछो तोह बोलता ह पता नहीं भाभी ….दोनों एक जैसे ह…….

डायरी के अंदर तीन दिन बाद….. सॉरी पापा पिछले दो दिन का लिख हे नहीं payi…kyoki ये जंगल मई ले गए थे किसी बाबा जी के पास आश्रीवाद दिलाने कहते ह वो बाबा बहुत सालो से जंगल मई ह …पुरे भारत मई घूमते रहते h…kabhi हिमालय तोह कभी बंगाल तोह कभी rajasthan….mujhe ऐसा हे लगे पर उन्होंने मुझे परिवार के बारे मई सब बताया …पर एक बात और बताई की मेरे राज का जीवन मुस्किलो भरा hoga….main दर गयी हु पापा …और ये भी कहा ह की ….मेरे और सहदेव के जीवन मई राज के साथ जीना मुमकिन नहीं h……papa मैं अपने बचे को अकेला कैसे छोड़ सकती हु …मेरे बाद आप इसका ख्याल रखना papa…kyoki इन्होने जो कहा ह और अब तक जो बताया ह उस पर यकीन करू तोह इनकी बाते सच hongi….par मेरा बचा दुनिया मई अकेला कैसे रहेगा पापा …कौन इसका धयान rakhega….papa..meri आंखे तोह अभी से भीगी हुवी ह सोच सोच कर की मेरा बचा हमारे बिना इस दुनिया मई कैसे rahega…meri किस्मत मई हे ऐसा क्यों लिखा था पापा ….मेरा बचा पापा माँ के बिना कैसे रहेगा…”

बहार जब दीपू ये सून रहा था उसका गुसा चरम तक पहुंच गया था और उसने एक वार से टेबल को तोड़ कर दो हीसो मई अलग कर दिया और गुसाई सेबोला… “main…main…launga उन्हें …..चाहे वो कंही भी हो वो नहीं मर सकती h….ye निर्वाण उन्हें धुंध निकलेगा…..”

ऋचा के तोह होश हे उड़ गए थे वो डायरी मई इतना खो गयी थी की भूल गयी थी की दीपू जब तक तीख नहीं हो जाये उसे बोतल कुछ कुछ दिएर मई एक घूँट पिणि ह पर उसने गौर नहीं किया की पिछले एक घंटे से दीपू ने बोतल को टच भी नहीं किया ह और डायरी की बाते सुनकर उससे बहुत तेज़ गुसा ारः ह साथ हे कंकंपी भी हो रही ह गुसाई के मरे….

“लड़की मैंने कहा था न आज़ाद होते हे सबसे पहले तू maregi…aur तू इन सब से झूट बोल रही ह इन्हे सच बता नहीं तोह तू अभी मारेगीइ लड़की”

ऋचा “तोह mardo….par याद रखना फिर तुम्हारा क्या होगा”

एक घुर्राहट सी nikli….richa ने सबको शांत रहने का इशारा किया और बोली “मैं मर गयी तोह वो भी मर jayega….samjhe मेरे बिना ये एक पल नहीं रह सकता ह इसलिए तुम्हारी भलाई इसी मई ह बोतल पियो और सो जाओ”

निर्वाण ने ऋचा का गाला पकड़ लिया और उसे ऊपर उठा दिया ऋचा की साँस उखाड़ने लगी

निर्वाण पलटकर “तुम सब उसके गुनेगार ho…tum सबको उसी माफ़ी मांगनी hogi……wo जिन्दा h….wo ayegi….main लाऊंगा उसे पर पहले ये maregiii…..Ahhhhhhh” तभी निर्वाण के सर मई एक तेज़ दर्द उठा और तड़प उठा और सर पकड़कर छटपटाने लगा ऋचा ने तुरंत सपनी सांस संभल कर बोतल दीपू के मू मई udeldi…aur दीपू भी बेहोश हो गया…

ऋचा “ अब सब तीख ह”

पर क्या तीख था सबकी हालत ख़राब थी किसी को कुछ समाज नहीं ारः था ..

ठाकुर साब ये क्या ह ऋचा बेटी….

ऋचा “अभी सही वक़्त नहीं ह आप और गजेंद्र मां मेरे साथ मेरे घर चलिए इन्हे लेकर वंही बात करेंगे”

ठाकुर साब ने बात को समझा और ऋचा के साथ बिना किसी सवाल के घर आगये वंहा दीपू को बीएड पर लेटाया और उसके सर को सहलाकर ऋचा उनके पास बैठ गयी….

बहार ठाकुर साब और गजेंद्र दोनों ऋचा को हैरानी से देख रहे थे…..

ऋचा “जब आप दोनों विद्या से इतना प्यार करते ह और ये डायरी आपको मिल चुकी थी फिर आज तक विद्या आंटी को ढूंढा क्यों नहीं “

ठाकुर साब “बेटी जब डायरी मिली और मैंने इसे पढ़ा जब तक मेरा बड़ा बीटा मनोहर और बलराम का बाप कुंदन मेरी जड़े काट चुके थे मेरे सरे आदमियों को उन्होंने अपने साथ मिला लिया tha…isliye मई कुछ नहीं कर पाया और यही उलझ कर रह गया पर गजेंद्र उन्हें ढूढ़ने के लिए अपने सरे आदमी लगा दिए पर कुछ नहीं मिला मनो जैसे सहदेव नाम का कोई वजूद हे नहीं रहा हो ….भला रातो रात उनका साम्राज्य गायब हो गया कंही कोई न्यूज़ नहीं thi…koyi इनफार्मेशन नहीं गजेंद्र पुरे 15 साल तक उन्हें खोजता रहा और आज भी हम पता करवाते ह पर निर्वाण परिवार का जैसे वजूद हे नहीं रहा हो दुनिया मई….”

ऋचा “हहम्म्म्म “

गजेंद्र बेटी पर वो दीपू अजीब अजीब बाटे कर रहा था मतलब वो तुम्हे मरने वाला था ….ये कैसे और वो कह रहा था तुम झूटी हो”

ऋचा “आप दोनों विद्या आंटी की कसंख्यायिये की जो बाउंगी वो आप तक रहेगा और बताने के बाद आप ऐसा कोई सवाल नहीं पूछोगे जो मैं बता नहीं पाऊँगी या मनकरदूंगी”

दोनों ने एक दूसरे को हैरानी से देखा और कसम खायी….

ऋचा कुछ बोलने वाली हे थी की उसके मोबाइल मई वाइब्रेशन हुवी और उसने मैसेज पढ़ा …और फिर बोली “राज मारा नहीं h…..aur अंदर जो लेते हुवे ह वही आपकी विद्या के बेटे ह ….जो अपने माँ पापा के गुनगारो को धुंध कर मर रहा h….yanha उसे मैं सिर्फ आपके उस दुश्मन से निपटने के लिए हे लायी hu….aur माफ़ी मांगने ताकि आप सहदेव पापा और विद्या माँ को माफ़ करदे और उनकी आत्मा को शांति मिल सके”

ठाकुर साब और गजेंद्र के तोह होश हे उड़ गए जो अभी सुना उसे सुनकर ….कितनी हे दिएर ख़ामोशी छायी रही कोई भी कुछ नहीं बोलै बस सबकी निघाये लेते हुवे दीपू पर थी…

कुछ दिएर बाद गजेंद्र हे बोले “ पापा ये हमारा राज ह …मेरी विद्या का बीटा ह …देखो कितना बड़ा हो गया ह…..”

ठाकुर साब क्या बोलते उनके पास सब्द नहीं थे …और जो थे वो उनकी बूढी हो चुकी आँखों से बाह रहा रहे the….jo उनके दिल का हाल उनका पश्चाताप उनका दर्द उनका ढक सब भैया कर रहे थे …

ठाकुर साब उठकर राज की यरफ जानेलगे तोह

ऋचा “उन्हें सोने दीजिये नानाजी …भले हे वो अभी मेंटली इलल ह जितना आराम वो करेंगे उतनी जल्दी वो तीख होंगे और फिर अब तोह वो आपके पास हे ह”

गजेंद्र “देखा पापा हमारा सालो का इंतज़ार ख़तम हो गया हमरा राज हमारे सामने ह”

ऋचा “ नानाजी”

ठाकुर साब “तुम हमारी बहु हो…”

ऋचा ने शरमाते हुवे गर्दन नीची कर्ली और बोली “जीई”

ठाकुर साब “ बहुत प्यारी हो”

अचानक उन्हें कुंडों और बलराम का ख्याल आगया और वो बोले “तुम यंहा से चली जाओ बेटी और राज को भी ले जाओ …अगर कुंदन और बलराम को पता लग गया तोह वो तुम्हे छोड़ेगा nahi..tum अभी यंहा से चलो jao…gajendra आज रात हे इन्हे कैसे भी यंहा से बहार निकलना ह”

गजेंद्र “जी पापा”

ऋचा “एक मिनट मां आप सांस लीजिये और नानाजी मुझे पता ह कुंदन कौन ह और उसकी पावर क्या ह पर आपका पोता कौन ह आपको पता ह”

गजेंद्र और ठाकुर दोनों उलझन भरी निघाओ से उसे देखने लगे…

ऋचा “अगर इनके जिन्दा होने का पता इनके पीछे जो ह उन्हें पता लगा जाये तोह क्या होगा”

ठाकुर साब “क्या कहना चाहती हो बेटी साफ़ कहो ..पहेलियाँ मत उलझाओ अब इस बूढ़े की उम्र नहीं ह पहेलियाँ सुलझाने की”

ऋचा “पहेलियाँ ….नानाजी राज खुद एक पहेली h…….agar इनके चाहने वालो को पता लग गया के ये जिन्दा ह और यंहा तोह …कोहराम मच जायेगा….”

गजेंद्र बेसब्र होकर “क्या कहना चाहती हो आखिर राज कौन ह”

ऋचा “आप जानते हो उस नाम ko….har न्यूज़ पेपर हर न्यूज़ चैनल सारा अंडरवर्ल्ड उसे ढूंढता ह”

ऋचा ने एक गहरी सांस ली और दुबारा बोली “निर्वाण…..”

गजेंद्र और ठाकुर साब ने पहले तोह कोई रिएक्शन नहीं दिया ….पर जैसे हे उन्हें कुछ याद आया गजेंद्र खड़े होकर “तुम ने क्या कहा ये निर्वाण ह …तुम झूट बोल रही हो”

ऋचा ने न मई गर्दन हिला दी …

गजेंद्र “ये वो निर्वाण ह जिसने मुम्बई मई अंडरवर्ल्ड को ख़तम कर दिया …हिमाचल देहरादून दिल्ली और पता नहीं कितनी बड़ी घटनाओ के पीछे ह जिसके बारे मई कोई नहीं जनता ह”

ऋचा “है ये वंही निर्वाण ह…”

गजेंद्र सिंह और ठाकुर साब की सोचने की प्रोसेस कई दिएर तक रुकी रही और वो राज को हे देखते रहे …

ऋचा “अभी ये बीमार ह तोह ऐसे ह तोह सोचिये जब ये तीख हो जायेंगे तोह बलराम और कुंदन का क्या होगा…”

ठाकुर “बेटी कुंदन भी कमजोर नहीं ह उसके पीछे किसी बड़ी ताकत का हाथ ह मैंने मिनिस्टर तक का साथ लेकर उसे हारने की कोसिस की पर …अचानक एक रात मेरे सरे साथ देने वाले गायब हो गए ….पुलिस वकील बिज़नेस मन मिनिस्टर्स sab….jab की ये नामुनकिन ह की एक हे रात मई सब गायब हो जाये पर हो गए …. इसलिए उसे कमजोर समझने की भूल नहीं कर सकते h…usne कैसे किया ये सब आज तक एक राज ह पर ये साफ़ ह की उसके पीछे भी कोई बहुत बड़ी पावर ह”

ऋचा “मैं धयान रखूंगी पर जब तक आपको ये सच सबसे छिपा कर रखना ह….”

दोनों ने है मई सर हिला diya…jiske बाद ऋचा के चेहरा पर मुस्कराहट आगयी और वो मुस्कुरा कर बोली ….”ाचा अब नानाजी मामाजी बताईये की मुझे इनसे ाचा दूसरा धुँधलेना चाहिए”

ये बात सून दोनों हड़बड़ा गए और बोले …नहीं हमने ऐसा कब kaha….teene एक साथ हंस पड़े …और फिर ऋचा छाए बना कर ले आयी तीनो के लिए….

ऋचा “एक सवाल ह मेरा”

ठाकुर साब पूछो बेटी

ऋचा “क्या कोई ऐसा ह आपके परिवार मई जिसके साथ papa(sahdev सिंह) जुड़े रहे हो…

ठाकुर साब नाहीइ

गजेंद्र “है ह”

ठाकुर साब “क्या कह रहे हो गजेंद्र ऐसा कौन ह”

गजेंद्र “बड़ी दीदी सीमा वो जीजाजी के साथ उनके किसी बिज़नेस मई इन्वोले थी…”

ठाकुर साब “पर वो तोह विदेश चली गयी थी न“

गजेंद्र “नहीं पापा वो इंडिया हे थी और उनके साथ हे काम कर रही थी मुझे भी ये बहुत बाद मई पता laga….unhe प्राचीन ग्रन्थ और वेदो की नॉलेज थी और वो नयी चीजे जानने को हमेशा इक्छुक रहती थी इसलिए वो सहदेव जीजा के साथ काम करने लगी बस मुझे इतना हे पता ह ..”

गजेंद्र सिंह गुस्सी से गैन्द्र को देखने लगे और गजेंद्र ने नीची गर्दन कर्ली …

ऋचा “अब वो कान्हा ह”

ठाकुर साब “करीब 15-18 पहले उसकी कार का एक्सीडेंट हो गया था और कार गहरी खायी मई गिर गयी थी लाश तक नहीं मिली उसकी…”

ऋचा “Hmmmmm…matlb राज के पास्ट मई सीमा जी का अहम् रोले ह ….”

गजेंद्र “क्या मतलब”

ऋचा “सहदेव पापा को धोखा दिया गया था पास्ट मई और वो उनके अपनों ने हे दिया था ऐसे मई सीमा आंटी का गायब होने उनकी लाश न मिलना ….कुछ सक पैदा करता ह ….”

गजेंद्र “बेटी वो बहुत सिंपल लड़की थी वो भला क्या कुछ कर सकती thi…isliye ये सक छोड़ दो…”

ऋचा “पता नहीं नाना नाना जी कोई तोह ह जो साडी सजाइश रच गया और सबकुछ तहस नहस कर गया पर सवाल आज तक बना हुवा ह आखिर क्यों और वो अब कितना ताकतवार होगा और क्या चाहिए होगा उन्हें सहदेव पापा और विद्या माँ से …”

गजेंद्र “मुझे इस बारे मई कुछ नहीं पता ह बस इतना पता ह वो उनके साथ काम करती thi…aur वो हमेशा टूर पर हे रहती थी मेरी बात भी उसे साल मई एक अध् बार हे होती थी”

ऋचा “पता नहीं मामाजी कैसा चक्रव्यू ह ये पर जिसने भी रचा ह बहुत गहरा राज रचा ह”

इन्हे बात करते हुवे काफी दिएर हो गयी थी तभी राज की नींद मई बड़बड़ाने की आवाज आने लगी ….

ऋचा उसके पास पहुंची ….तभी दीपकी नींद खुल गयीईइ और वो लम्बी लम्बी सांस लेने लगा…

ऋचा ने तुरंत उसे पानी पिलाया और उसके सर पर हाथ फिरकर बोली… “ सपना देखा”

दीपू “वो वो लड़की फिर मुझे बुला रही थी …वो बहुत तकलीफ मई h….aur वंहा बहुत सरे काळा कपडे पहने आदमी भी थे …एक ने उसकी गर्दन पर नाइफ रखा हुवा tha….mujhe मुझे उसे बचाना होगा वो मर जाएगीइ…. निचुउ वो मर जाएगीइ nichuuu….mujhe उसके पास जाना होगा…..”

ऋचा ने उसे अपने सीने से कसकर गले लगा लिया ….और उसे पता था की वो किसकी बात कर रहा था पर वो चाहकर भी बता नहीं सकती थी क्योकि पहले राज का तीख होना जरुरी था…. ऋचा ने ड्रावर से एक दवाई निकली और राज को खिला दी ….राज को दुबारा से गहरी नींद आगयी…

ठाकुर साब ये क्या था बेटी ….

ऋचा “मुझे नहीं पता पर ये उनकी आखिरी घटना की यादाश ह जो उनके सामने हुवी ….और वो जिस लड़की की बात कर रहे ह वो मेरी बहन पूनम ह ..या हो सकता ह आपकी दूसरी bahu…kyoki वो रविंदर सिंह शेखावत अंकल की बेटी ह और इनका रिस्ता बचपन मई हे मेरे रिश्ते के साथ हे तय हो गया tha….wo आखिरी पल जब ये सही थे इनके साथ थी…”

गजेंद्र “तोह उससे पूछ सकते ह न की क्या हुवा था आखिरी वक़्त “

ये सून ऋचा का चेहरा मुरझा गया और उसकी आँखों मई पानी आगया और बोली “खास वो कह पाती नानाजी …वो उस दिन से आज तक एक सब्द नहीं बोली h….bus किसी बेजान गुड़िया की तरह जी रही ह …और इनका इंतज़ार कर रही ह …दुनिया के बड़े से बड़े डॉ को दिखा चुके ह पर सब यही कहते ह की वो कुछ नहीं कर सकते h….par मुझे पता ह वो इनका इंतज़ार कर रही h….maine सायद प्यार नहीं किया पर उसने किया …और nibhaya…aur आज भी इनका हे इंतज़ार कर रही ह…”

गजेंद्र पर तुमने वो किया जो कोई नहीं कर सकता ह….

ऋचा “ये हमारी किस्मत ह नानाजी ….मुझे चाहे ये यादाश आने पर अपनाये या नहीं पर मेरी जिंदगी भी अब इन्ही के नाम ह”

तोह इनसे दूर किसी गाँव मई….

“तुम चले जाओ यंहा से तुम लोगो ने पहले मेरे भाई को खा लिया और उसकी फॅमिली को बर्बड्कर दिया और फिर भी मन नहीं भरा तोह उनकी बची की जिंदगी भी बर्बाद करदी चले जाओ यंहा से”

वैलेंटाइन राइडर ने एक सब्द भी नहीं बोलै और बस एक नज़र अंदर ऊपर के रूम की तरफ डाली जंहापूणम बिखरे बाल के साथ खिड़की मई सर टिकाये बहार की तरफ देख रही थी….

रणवीर सिंह “चले जाओ और कह देना थुकुर साब से मेरी बची को अकेला छोड़ दे”

वैलेंटाइन राइडर “ठाकुर कौन ठाकुर इस लड़की ने मुझे आर्डर दिया ह निर्वाण को ढूंढने का और जब तक वो पूरा नहीं होगा मैं इसे देखने अत रहूँगा और याद रखना …ये इस घर से गायब हुवी तोह तुम सबको मार dunga…”itna कह वैलेंटाइन राइडर अपनी कार से वापस निकल गया…… और उसने रस्ते मई हे एक कॉल लगायी और बोलै “स्टेटस” उसके इतना कहने के कुछ पल बाद हे आवाज ईई…

“सर 2 जाने और भी ह जिनको निर्वाण की बॉडी या निर्वाण की तालाश ह”

वैलेंटाइन राइडर “डिटेल”

सम्मे से “मास्क पहने रहते ह और बॉडी पर स्कॉर्पियन का टैटू ह दोनों अलग अलग होकर साडी जगह धुंध रहे इंडिया मई पर जंहा गए ह वंहा बाद मई सबकी मौत हे हुवी ह”

वैलेंटाइन राइडर “निगरानी रखना दूर से”

प्लेस दिल्ली …..

सिंह ग्रुप ऑफ़ बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स मीटिंग रूम

एक औरत “ मतलब कोई भी अचानक से आजायेगा और सब कुछ टेक ओवर करलेगा ”

दूसरा डायरेक्टर मित्तल “ अरे मैडम सुना ह 21 साल की ह और अभी से हवा मई उड़ रही ह लगता ह नयी नयी जवानी का जोश ह”

तीसरा डायरेक्टर “ कई ए कई गए ….और ाचा ह कुछ एंटरटेनमेंट करेगी”


उसकी बात सून एक और लेडी डायरेक्टर बोली “ सब पता ह कैसे एंटरटेनमेंट की बात कर रहे ह जैसे पिछली वाली ने किया था ..और उसने कैसे किया वो भी पता ह हमे”

कुछ डायरेक्टर जो लॉयल थे वो चुप थे तोह कुछ अपनी प्लानिंग कर रहे the….ki कैसे आगे के स्टेप्स उठाने ह

अब एक डायरेक्टर बोलै वैसे कब आरही ह मैडम जी

लेडी डायरेक्टर “फ्लाइट का टाइम हो चूका ह हाफ ऑवर मई ाजनी चाहिए … पर मैंने पता किया ह सुना ह बड़ी सी बड़ी कम्पनीज उसे अपने साथ जुड़ने का ऑफर दे चुकी ह पर उसने सब को ठुकरा दिया”


कुछ दिएर पहले …एक प्राइवेट पलाइन दिल्ली एयरपोर्ट पर एक प्राइवेट पलाइन लेंड हुवा और कॉकपिट खुलते हे रेसीव करने ए कंपनी के मैनेजर की आंखे चौड़ी हो गयी क्योकि उसमे से पहले 2 लम्बे चौड़े बॉडी गॉर्डस मार्क और मैच उतरे सब की हालत टाइट हो गयी और फिर उत्तरी मोठे सनग्लास लॉन्ग ओने पीेछे ड्रेस मई एक लड़की जिसकी ड्रेस ऑउटफिट और बॉडी फिटनेस स्टाइल पर्फेक्ट्ली उसकी पर्सनालिटी को बांया कर रहा tha…sabke मू खुले रह गए एक बार उसे देख कर …उस लड़की ने एक लम्बी सांस ली और मन मई बोली … “मैं आगयी राज…”

अब मिलते ह दोस्तों
अगस्त मई या उसके बाद
 
वे अरे इन टॉप 15 स्टोरीज...
 
वर्ल्ड कप सेमीफइनल.......
 
आप सबके प्यार और साथ से हो गए और आगे भी बढ़ते जायेंगे ....

बस अब आप सब भाइयो की दुवाओ से जॉब और क्लियर हो जाये फिर आराम से सिर्फ अपडेट पर अपडेट देता रहूँगा.....

जो भाई नए जुड़े ह उनके लिए इनफार्मेशन टॉप पर दी हुवी ह कब तक स्टोरी होल्ड पर h....sath बने रहे क्योकि वापसी का पहला और दूसरा अपडेट हे मेघा और अल्ट्रा मेघा होगा ..


धन्यवाद...
 
आज आयी ह डेट 18 ौग टाइमिंग 2.30 पं
 
ऑफिस असिस्टेंट का 18 को ह और िबप्स क्लर्क की डेट अभी फाइनल नहीं आयी ह ...फिर एक एग्जाम स्पेशल अफसर का ह पर क्लर्क के एग्जाम के बाद अपडेट देने की कोसिस करूँगा ...
 
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