Adultery Raj-- hero of the family - Page 54 - SexBaba
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Adultery Raj-- hero of the family

अपडेट 177—ऑब्स्ट्रशन….

War……countdown……begins

19 ..उपदेट्स तू लेफ्ट …..

“ राज राज रुको भी”

राज —क्या हुवा चुड़ैल ….

अनु — तुममम…

राज — भड़क क्यों रही ह ….मज़ाक कर रहा हु …

अनु — वो मैं ये कह रही थी की….

राज — अरे तू तोह शर्माने लेगी ….जैसे हम …

अनु — की की कितने गंदे हो तुम….

राज-- लो मैं कहा से गन्दा hu…..subhe हे नाहा के आया हु …

अनु — तुम चुप होकर मेरी बात sunoge….phir शरमाते हुवे क्या हम ….आज रात डिनर पर चले ….

राज — ओह …..डेट पर …..

डेट का नाम सुनते हे अनु शर्माने लगी……” वो आज मेरा बर्थडे ह ”

राज ओह …वैरी वैरी हैप्पी बर्थडे फिर तोह पार्टी बनती ह…

राज ने बर्थडे विश करते वक़्त अनु को हुग कर लिया और इसी पल …पूनम कविता मनीषा जो कॉलेज मई एंट्री कर रही थी उन्होंने देख लिया ..और उनकी फीलिंग्स जैसी भी थी पर पूनम के चेहरे पर मुस्कान बरक़रार थी ..जब की दो के दिमाग की गुसाई से सीटी बज रही थी….

राज — ok टुनाइट डिनर ात माय होम मेरे हाथो से…

अनु — रियली तुम कुकिंग जानते हो..

राज - खाके देख लेना फिर यकीं हो जायेगा

दोनों बात करते हुवे अपनी क्लास की तरफ जाने lage..piche कड़ी मनीषा कविता पूनम उन्हें जाता देखती रही …

मनीषा “ देख रही ह कुटी वंहा मधु रिंकी …..और यंहा अनु…… इस लड़के के चारो तरफ हमेसा लड़किया तितली की तरह मंडराती रहती ह …पता नहीं ऐसा क्या दीखता ह इसमे…

कविता — है डीई ….और चुड़ैल को देखो कैसे चिपक रही ह सबके सामने he…..pata लगा जल्द हे भाई की बीवी बांके मिले हमसे…

पूनम खिलखिलाकर हंस पड़ी “ तुम दोनों भी यार इतना भी उन्हें प्रेशर मई मत lao….manisha मेरी बहन तू हे तोह कहती वो एक इमोशनल लड़का ह जो रिलेशनशिप की केयर करता ह …और कुटी तूने श्वेता से सब सूना ह न अपने भाई के बारे मई फिर भी परेशां हो रही ह …राज जी जरूर किसी वजह से उसके पास ह वर्ण इतना तोह मैं भी जान गयी hu…unhe ऐसी लड़किया तोह बिलकुल पसंद नहीं आएंगी …..

कविता — दी प्यार मैं क्या हे कहु आपको आप बहुत भोली ह इस बारे मई…. लंदन मई सुभे ी लव यू तोह रात को प्यार बिस्तर मई हो जाता था ..और आज की इंडियन हाई फि लड़कियों का भी कोई भरोसा नहीं ह अभी ी लव यू तोह रात को प्यार बिस्तर मई ख़तम होता ह…

मनीषा पूनम हैरानी से कविता को देखने लगी जिसकी वजह से कविता को समाज आया की गुसाई मई वो क्या कह गयी ….

पूनम मनीषा को भी जोर से हंसी आगयीईइ

पूनम — जायदा मत सोच कुटी …चल ….क्लास का टाइम हो गया h….ab मूड तीख कर कब तक तू ऐसे हे तीखी मिर्च बानी रहेगी सरे लड़के तुजे हे देख रहे ह….

कविता — diiiiiii…itna कह उसने मू फुला लिया पूनम को जोर से हंसी आगयी और उसे अपने से सत्ता लिया ……..

मुम्बई आउटर….

सभी गुसाई से उबाल रहा थे —मैंने कितनी बार कहा था की गलती मत करना पर नहीं उसे हीरो गिरी करनी ….गधा अभी यंहा होता तोह मोरे.. बना कर पुरे जंगल मई नाचता गधा कंही का…

आग — है है है तुजे भी पता ह तू ऐसा कुछ नहीं करता …

सभी टेडी नज़र से आग को देखने लगे

AAG-tu वजह अचे से जनता h…phir भी ऐसे देख रहा ह…..

सभी — विद्या भाभी …

आग — तोह फिर घटिया सा एक्सप्रेशन क्यों दिया …वो देख किलर्स आर्गेनाईजेशन के लोग…

सभी — मरना नहीं ह उन्हें हमे उनका तिखना ढूँढना ह मैं छोडूंगा नहीं …उस कुत्ते को ….

आग-- तीख चल…. जो तू कहे अब तोह मूड तीख कर

सभी — मुझे मत sikha…chal

और दोनों आगे की जगह स्कैन करते हुवे उनका पीछा करने लगे…….

इन कॉल…

तुझे पूरा यकीं ह…

आदमी — है भाई ….वो बस्ती आगया h….muje आज हे अपने आदमी से इनफार्मेशन मिली ह…

शख्स — मेरे इतनी आदमी मरकर उसे जिन्दा कैसे छोड़ सकता हु …इखट्टा कर सबको कल वो किसी भी हाल मई बचना नहीं चाहिए h….hum घेरकर मरेंगे सेल को कोई मौका नहीं देंगे इस बार बचने ka…usai भी पता लगे टिल्लू से पन्गा लेना कितना भरी पड़ता ह

आदमी — जी भाई मैं इखट्टा करता हु सब .. छोकरे लोगो को….

धारवाई….

शेरदिल — मैं तीख हु माँ….

माँ — तू तीख ह तू मेरी बाते क्यों नहीं सुनता ह …अगर वो खुदा का नेक फरिश्ता न आया होता तोह tu…..itna कह वो रो पड़ी….

शेरदिल — क्या ….अब्बा अभी जिन्दा होते तोह वो ये नहीं करते…..

माँ — वो नहीं ह इसलिए तुजसे कह रही हु हमे हमारा मकसद पूरा करना h……ye सब हमारे मकसद से बहुत छोटा ह और हमरे मकसद के बिच हम किसी और को नहीं आने दे सकते ह….

रिफत - माँ आप फिर सुरु हो गयी भाई को चोट लगी हुवी ह ……वैसे कौन था वो शख्स भाई….

शेरदिल — मेरी भी समाज से बहार h…bolta ह तुजसे लड़ना ह इसलिए बचाया….

रिफत सर खुजलाते हुवे — मतलब खुदकी जान जोखिम दाल के आपको बचाया सिर्फ आपसे लड़ने के लिए…

शेरदिल — है और एक कर दिए ह लड़ने के लिए और बचा कर अपने घर भी लेकर गया ..बहुत बड़ा बंगला tha….aur उसका बॉडी गॉर्ड वो तोह 7 फ़ीट का सांड था …

रिफत — हहहहह….. एक cr…diye…sirf लड़ने के लिए

शेरदिल — अब खाना भी खिलाएगी या इन्क्वारी हे करती rahegi….aur तू स्कूल क्यों नहीं जा रही ह….2 दिन से

रिफत — है अभी बनती हु खाना वो आप नहीं ए घर तोह मन नहीं था स्कूल जाने का…

शेरदिल — एक कर कॅश ह मेरे पास अबकी बार ऐसा किया तोह बोर्डिंग स्कूल भेज दूंगा पड़ी रहना समझी.

रिफ्ट जइब निकलर ीीीे- बड़े ए बोर्डिंग भेजने वाले मेरी जुटती भी न जाये आप दोनों से दूर…

इतना कह दोनों जोर जोर से हसने लगे ..

पर इन्हे क्या पता था की जल्द he….unke सर पर बहुत बड़ी मुसीबत आने वाली ह…..

मुम्बई कॉलेज…

क्लास मई अनु चिप चिप कर राज को हे देख रही thi….aur जैसे हे राज उसकी तरफ देखता वो जीब निकलकर उसे चिढ़ाने लगती …..काफी दिएर से यही सब चलता रहा ….

रजनी — बोथ ऑफ़ यू स्टैंड उप एंड गेटआउट फ्रॉम माय क्लास….

राज ने अनु को घूरा फिर सॉरी बोलता हुवा चुप चाप बहार चला गया और ऐसा हे अनु ने किया….

“अरे रुक जा अकड़ू इंसान…”

राज - क्या कर रही थी क्लास मई अब निकाल कर दिखा तेरी जीब काट के रख दूंगा….

अनु — सॉरी गुसा क्यों होता ह चल कैंटीन ….चलते ह…

राज — तू आज अलग बेहवे कर रही ह सब तीख तोह ह न ….देख मैं …

अनु — चुप ..chup…kuch मत बोलना ….वैसे एक बात बता बस ऐसे हे मान ले …..सिर्फ मन्ना h…..tikh ह na…faltu कुछ मत सोचना बस जस्ट इमेजिन

राज — बोलेगी तोह मानूंगा और इमेजिन करूँगा…

अनु — शरमाते हुवे ….अगर तेरी मेरी शादी हो जाये …..क्या फिर भी तू ऐसे हे तंग करेगा muje….hamesha..

राज झटके से रुका और अनु को देखना लगा फिर सर पर हाथ लगा कर देखा. “ तबियत तोह तीख ह teri…phir बहकी बहकी बाते क्यों कर रही ह”

अनु — पता था तू मज़ाक हे उड़ाएगा …मेरा

राज — तू मुझसे प्यार करती ह ये तोह तूने कहा था पर ….शादी करना चाहती ह ये आज कह रही ह…

अनु — हां ….इतना कह वो गर्दन नीची करके ….कड़ी हो गयी….

राज सीरियस होकर ——तू मुझसे बहुत प्यार करती ह…

अनु — है और आज मैं यही कहने वाली थी की तेरा लड़ना ..तंग करना …मुझे बहुत ाचा लगता ह ….सबको इज़्ज़त देता ह किसी के भी दिल मई जगह बना लेता ह….

राज — है है है है यू मस्ट किडिंग …..तुम मुझसे शादी करना चाहती हो …है है है …..इतनी एक्टिंग…..

अनु आंखे निकलकर— राज ी म सीरियस….

राज — ok तोह तुम सीरियस हो फिर कुछ पल रुक कर मुझसे शादी करने के लिए तुम्हे मेरी एक कंडशन पूरी करनी होगी…..

अनु — क्या ….बोलो न सब करुँगी

राज — तुम पलट जाओगी एक हे मौका दूंगा बस मैं..….

अनु — पलट जाये वो अनु नहीं तुम बस बोलो अब चाँद लेन को कहोगे मुझसे नहीं हो पायेगा…

राज — तुम्हे एक मुंडेर करना होगा….

अनु की आंखे चौड़ी हो gayi..phir चेहरे पर मुस्कान agayi….ab तुम मेरे साथ मज़ाक कर रहे हो…

राज — ी म serious…kisi को मेरी आँखों के सामने गन से शूट करना hoga….tab जाकर मुझे यकीं होगा ह दम ….

अनु राज की आँखों मई देखने लगी और बिना कुछ बोले हे वंहा से चली गयी.,

राज — वक़्त नहीं ह अब मेरे pass…aur अब अनु चली गयी ह अब मुझे दूसरा तरीका अपनाना हे होगा…….

राज जैसे हे कैंटीन पंहुचा वेटर फिर से उसके पास आगया ….

वेटर — ये आपके लिए ….

राज — अरे फिर से तुम राज ने टिफ़िन को ले लिया ….और खोला तोह आज भी उसमे पेपर फोल्ड किया हुवा tha..raj ने ओपन किया तोह …

“नाराजगी तोह h…par शिकायत nahi…ankho मई गहरी नींद ह ….फिर सोये क्यों nahi……mana ki……apna का ख्याल जरुरी h…..phir खुद का ख्याल क्यों नाहीई……..”

“ ये खूबसरा खाना ह अचे से खाइयेगा राज जी और खुद का धयान रखिये…. आपकी दोस्त और बहन का मैं धयान रखूंगी

आपकी दोस्त ….पूनम वैसे …मैं हे दोस्त मानती हु या आप भी मानते हो दोस्त मुझे😌

राज के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान thi….par इस बार ये बड़ी सी मुस्कान देखने के लिए पूनम मौजूद नहीं थी …….और जब वो फ्री लेक्चर मई कैंटीन पहुंची ….

वेटर — दी वो टिफिन तोह वो ले गए ..

पूनम -क्या …कब ….

वेटर — जी दी …सायद कोई क्लास फ्री थी उनकी ….इसलिए सुभे जल्दी हे आगये थे

पूनम राज का रिएक्शन देखना चाहती थी पर उसे दुःख हुवा की वो देख नहीं पयईईई …उसका चेहरा लटक गया और वेटर कॉलेज की तीन ख़ूबसूरत तिगड़ी मई से एक खूसूरत लड़की को कैसे ऐसे देख सकता था

वेटर — दी मुझे पता ह आप उन्हें चिप चिप कर देखती हो …इसलिए ये देखो मैंने उनकी हर पल की फोटो खिंच ली thi…taki आप उदास न हो

पूनम की आंखे खुसी से चमक गयी जब उसने वो साडी पिक्स देखि …….उसमे हर वो पल मौजूद थे जो वो देखना चाहती थी….” थैंक यू सो मच bhai……tum एक अचे दिल के इंसान हो मैं ये हेल्प कभी नहीं बुलंगा..

वेटर — दी बस प्यार से कोई भी 2 बात बोलदे थोड़ी इज़्ज़त दे दे गरीब को इसे ाचा जायदा मुझे कुछ नहीं चाहिए ह…

पूनम — तुम्हे कभी भी जरुरत हो एक बार इस बहन को जरुरत याद करना….

पूनम टेबल पर बैठकर साडी फोटो देख हे रही थी की कविता और मनीषा भी वाश रूम से आगयी…..

कविता और मनीषा को बिलकुल नहीं पता था की पूनम टिफ़िन लेकर आती ह राज के लिए और बॉडी गॉर्ड जो राज ने रखवाया ह उसी के पास से कैंटीन मई पहुँचवा देती h…….poonam के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी …

कविता — ोये होये आज मेरी दी बड़ी मुस्करा रही ह कंही ….कुछ…

पूनम — कतीईई ..बहुत बोलने लगी ह…

मनीषा — गड़बड़ तोह ह कतई …

पूनम अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मनीषा को घूरने लगीई..

मनीषा — कभी तोह बताएगी हे न…..

कविता — क्या दी बताओ na…..muje भी पता लगे की दी क्या छुपा रही ह वो भी मुझसे…

पूनम — No …..बिलकुल नहीं मनीषा ……देख तू मेरी बहन ह…

कविता ने पूनम के मू पर हाथ रख दिए और बोली “बोलै न दी क्या बात ह”

मनीषा- इसे किसी से काफी वक़्त से प्यार ह और अब वो प्यार इसे मिल गया ह पर वो कम्भखत …प्यार से दूर भागता ह….

कविता — वो …डीई….

मनीषा — धीरे कतई सब h…mere करीब आए जरा…

कविता — सॉरी डीई….

मनीषा — वैसे खुस तुजे होना चाहिए ह…

कविता — अरे अफ़्कौर्से ी म तू मच हैप्पी …

पूनम — no no प्लीज मांजा मनीषा ….

मनीषा — और अगर उस लड़के ने हां करदी तोह ….हम तीनो हमेसा साथ rahengi..hamesha

कविता हम तीनो हमेशा साथ रहेंगी ….

पूनम हाथ चलकर मनीषसे को रोकने लगी पर मनीषा कान्हा रूकने वाली थिई….

कविता कन्फूसिओं से मनीषा को देखने लगी ….

मनीषा — क्योकि तू इसकी नानन्द हो जाएगी न….

कविता — नानन्द हो jayegi….kya mat…ll…b…oh माय गॉड …ओह माय गॉड …..ohhh…myyyyy…godddd….ye उसने बहुत जोर से कहा था ….

मनीषा — कंट्रोल कतई चल कैंपस पार्क चलते ह

और जैसे हे पार्क पहुंचे तब कविता ने पूनम को जोर से गले लगा लिया …

कविता — अरे भाई मेरी और श्वेता की बात ताल हे नहीं सकते ह मैं और श्वेता ह न ….हम पूरी हेल्प करेंगे आपकी ….ी म सो हैप्पी ….आप भाभी बन गयी तोह भाई को फिर कभी अकेलापन महसूस नहीं होगा ……..कविता ख़ुशी से नाचने लगी ….और पूनम मनीषा से लड़ने लगी उसे बहुत शर्म आरही थी…

तीनो टिकड़ियो ने लेक्टर्स अटेंड किये और गैप सैप मरने के लिए तीन तिगड़ी आज पूनम के घर हे रुकी हुवी thi….aur आज इस खुसी का सेलिब्रेशन रात को मानाने की तयारी कर रही thi….kavita ने भाभी भाभी कहकर पूनम को शर्म से पानी पानी कर रखा था और मनीषा ने भी पूनम को छेड़ने मई कोई कसार नहीं चौडीइ…….

तोह दूसरी तरफ राज …घर मई पूनम के खाने को गरम करके आराम से खा रहा tha…..usne पूनम के हाथ का खाना तीसरी बार हे खाया था पर उसकी बंद आंखे बता रही थी की उसे खाना कितना स्वादिष्ट लग रहा था ….” अरे 2 टिफ़िन हो गए ह पूनम जी के मुझे उन्हें वापस कर देना चाहिए कल कॉलेज मई कर दूंगा …नहीं नहीं वंहा वो दोनों नहीं चारो होंगी मनीषस कविता अनु और रजनी किसी ने भी देख लिया तोह जान खा जाएँगी मेरी तोह क्या करू अभी वक़्त भी ह अनु का जवाब आने मई फिर मौका नहीं मिलेगा तोह घर देकर अजौ …..पर घर पर ाचा लगेगा ….अनिरुद्ध अंकल क्या सोचेंगे …ओह सहित वो तोह टूर पर गए h….honge आंटी हे होंगी …शामको de…aunga ….फिर सोच कर है यही तीख रहेगा…. पर खली हाथ जाना ाचा नहीं रहता ह …क्या लेकर jau….shweta से पुछु …नहीं दीपिका दी से पुछु ….नहीं गुसा होंगी …मधु जी से पूछता हु” इतना कह उसने कॉल लगा दिया …

मधु — तोह जनाब को 10 दिन बाद याद आयी ह….

राज — आपको पता ह की मेरी जिंदगी मई सुकून नहीं ह वैसे ….जुड़वाँ कैसे ह…

मधु — दुखी करते ह किक मरते ह ….

राज के चेहरे पर मुसकासन आगयी …. “अंकल कैसे ह

मधु — सब अचे ह तुम्हे याद करते ह बोल रहे थे की जब बचो का नामकरण करेंगे तुम्हे बुलाएँगे …अब उन्हें कैसे कहु की बाप को तोह बुलाना हे पड़ेगा न…”

राज — आप खुस हो मैं इसे खुस hu….main आऊंगा आपके pass…aur वक़्त भी बिताऊंगा ाचा मुझे आपकी हेल्प चाहिए…

मधु — मेरी हेल्प ..

राज — अगर किसी लड़की को थैंक यू बोलना हो तोह साथ मई क्या देना चाहिए…

मधु — सो फाइनली मेरे हीरो को लड़की पसंद आगयी…

राज ,- आप भी न आपकी कसम ऐसा कुछ नहीं ह सिर्फ थैंक यू बोलना ह फ्रेंड ह…

मधु —हम्म्म …वैसे लड़की मोर्डर्न हो तोह कोई बैग परफ्यूम या ड्रेस पसंद करती h…aur अगर लड़की सिंपल दिखावटी नहीं ह तोह चॉकलेट …. फ्लावर्स पस्न्द करती ह….

राज — दोनों ले जाऊ तोह

मधु — और भी ाचा ह….

राज — थैंक यू तक ..

मधु — ok मेरे पति देव जो आज्ञा आपकी और कुछ फ़िलहाल तोह कर नहीं सकती हु आपके लिए जब वक़्त मिले तब मिलते रहना…

राज —आप भी न कोई मौका नहीं छोड़ती हो.. ok आऊंगा ….tc…bye अपना धयान रखना ….

मधु - bye मिस यू..

इतना कह राज ने फ़ोन रखा और पोलुशन मास्क लगाकर बहार निकल gaya…rose और चॉकलेट्स लेने… उसने टाइम देखा तोह 4 बज रहे थे ……..अभी वो निकला हे था की उसे अपने तीख सामने अनु कार के बहार कड़ी दिखाई दी…

राज सीरियस हो gaya….anu उसके करीब आयी और बोली …

अनु — मैं तैयार हु तुम्हारी कंडीशन पूरी करने को कार मई गन ह …तुम जिसे कहोगे मैं शूट कर दूंगी …पर एक बात याद रखना अगर तुमने वडा तोडा या मुझे धोखा diya….toh ट्रस्ट में पूरी दुनिया मई छिपने की जगह नहीं मिलेगी ….मेरे पापा बचा लेंगे मुझे और अगर फिर भी पकड़ी गयी तोह भी जेल से लौटकर तुम्हे बर्बाद कर दूंगी …….मेरा प्यार मज़ाक नहीं ह ….इसलिए अब चाहे कातिल कहलाऊ या कुछ मैं सिर्फ तुम्हारी और तुम सिर्फ मेरे रहोगे…

राज बस हैरानी से उसे देखता रहा tha….wo देखना चाहता था की क्या सच मई अनु कर पायेगी सब फ़िलहाल वो राज के पहले टेस्ट मई पास हो गयी थी ….अब बरी थी दूसरे टेस्ट की यानि एक्शन की …..राज चुप चाप कार मई बैठ गया और अस पैर प्लान उसने यमदूत को एक लोकेशन पर भेज दिया और खुद अनु को जान भुज कर देरी करके लेकर वंहा पहुंच गया ……

राज ने यंहा वंहा देखा ….और फिर बोलै ..

राज — उस शख्स को देख रही उसने मुझे बहुत बार बेइज़्ज़त किया ह जब मई मुम्बई आया tha…apne साथियो के साथ मिलकर बहुत मारा था भले हे मैं बिल्डिंग्स पर तेज़ी से चकमा दे कर भाग सकता था पर इसने खुले मैदान मई घेरकर मारा था जिसकी वजह से मैं 20 दिन तक हॉस्पिटल मई एडमिट रहा tha….isliye हे मैंने वो बॉडीगॉर्ड रखा हुवा h…meri नज़र तब से हे ह इस पर..

अनु का गुसा धीरे धीरे राज की बाते सून कर बढ़ gaya…..koyi भी चाहे कोई भी राज को हर्ट नहीं कर सकता था ….उसने डैशबोर्ड मई से गन निकली और दुबारा मागज़ीने को निकल कर चेक करि …

राज — तुम्हे गन चलनी आती ह…

अनु — शूटिंग सीखी ह मैंने…

राज गुड मैं तुम्हारा इंतज़ार घर पर karunga……ab तुम कैसे आती हो कैसे नहीं ये सब तुम पर रहेगा पर शूट करते हे निकल जाना ….

राज वंहा से निकलकर दूर चिप gaya….usai अभी भी डाउट था अनु पर ….पर अनु ने सबकुछ उसके विपरीत किया उसने कार मई से वोडका का मिनीचेर निकला और एक हे घूंट मई पी गयी करीब 10 मिनट मई हे उसकी आँखों मई जो हिचकिचाहट थी वो दूर हो गयी…… “ साला हरामी मेरे प्यार को मरेगा ….आज के बाद तू कभी दुनिया मई दिखेगा हे nahi….”itna कह वो उस शख्स यानि मिरतिदूत के पीछे पहुंची और 2 गोलिया उसकी पीठ मई दाग dii….goliyo की तेज़ आवाज हुवी और आस पास के लोग जो 50 मीटर की हे दुरी पर थे वो अलर्ट हो गए अनु तेज़ी से वापस भागी और कार स्टार्ट हे छोड़ी थी उसने वो तुरंत वंहा से रवाना हो गयी …उसके रवाना होने के बाद हे मिर्त्युदूत कमर को सीधी करता हुवा खड़ा हुवा और बुलेट्स के प्रूफ जो रह गए थे उसे उठाकर छिपा लिए और वो भी गायब हो गया वंहा से ….कोई कुछ भी समाज नहीं पाया…

राज जो दूर से उसे देख रहा था…. “ Good…ab अनु को सच बताया जा सकता ह…. अनु मेरे लिए कुछ भी कर सकती ह ab….isai ये बात तोह साफ़ ह..” ये कहते कहते उसके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी… आखिर हो क्या न इतने दिनों से अपनी ह बहन के साथ प्यार का नाटक जो करना पढ़ रहा tha….aur इस नाटक मई उसने भाई बहन की लिमिट्स से आगे बढ़कर किश तक करि थी…..

अनु कार को भगति हुवी सीधी राज के घर के बहार ले आयी और घर के अंदर फिरज मई दारू ढूंढने lagi…..car मई जब उसने ये सोचा की उसने मर्डर कर दिया ह तोह उसका दिल जोर जोर से धधकने लगा tha…usai जल्द हे किचन के एक कौन मई छिपा कर राखी हुवी वाइन मिल गयी …और राज जब तक मित्युदूत के साथ घर पंहुचा …..तोह वो भी हैरान हो गया सोफे पर अनु तून होकर लड़की हुवी थी और फर्श पर वाइन की खली बोतल गिरी हुवी थी…..

मित्युदूत — लगता ह घबरा गयी ह मिस अनु…

राज — अपने सही कहा इसीलिए ….इसने पी ली ह पर वाइन कान्हा से आयी…

मित्युदूत ने गर्दन घुमा ली

राज - मैं इसे घर छोड़ कर अत hu…ap मेरा एक छोटा सा काम करदेंगे…

मित्युदूत ने गर्दन है मई हिला दी…

राज - मुझे वाइट रोजेज और चॉकलेट्स चाहिए ह खूब सरे….

मित्युदूत ने अपने ऊँगली दाल कर जोर से कान को हिलाया और टूकर टूकर राज को देखने लगा फिर बोलै “ जी मैं लेकर अत हु”

मित्युदूत के जाते हे राज ने अनु को गॉधी मई उठाया और उसके घर पहुंच गया…

अनु माँ-- ये क्या ह…

राज — बर्थडे ह न तोह मेरे साथ ख़ुशी ख़ुशी मई जायदा पिली ….आप चिंता न करे वाइन पि h….raat भर सोयेगी तोह नार्मल हो jayegi…..main इसे रूम मई सुलाकर अत हु ….

अनु माँ राज को ऊपर अनु को लेजाता देख कर “ ये लड़की भी न कितना ाचा लड़का ह अगर इसके ऐसी हे ड्रामे रहे तोह राज दूर न हो जाये इसे “

ऊपर राज ने अनु को सुलाया और फ़ोरेहेअद पर किश करि और स्टिकी नॉट लिख कर छोड़ दिया अनु के liye…..raj ने अनु के घर के बहार आकर टाइम देखा तोह रात के 9 बज गए थे … “ लेट हो गया रहने दू क्या ….पर रोजेज और चॉकलेट …मैं उन्हें कह देता हु वंही ले ayenge…..”inform और कुछ इंस्ट्रक्शंस मित्युदूत को देने के बाद राज टिफ़िन उठाकर जल्दी से पूनम के घर की तरफ निकल गया ….और इधर इस बात से अनजान….

तीनो अकेली घर पर खाना ेट्स तैयार कर रही थी होम थिएटर भी रेडी कर लिया था मूवी के लिए ….जिसमे पूनम आता घूंठ कर जस्ट फ्री हुवी थी उसने हाथ भी साफ़ नहीं किये थे…

कविता-- कस ममता दीदी यंहा होती तोह और मज़ा aajata….unhe पता लगेगा न आपके बारे मई तोह ख़ुशी से झूम uthengiii….waise दी सोचा ह भाई को कैसे मानना ह ..

पूनम — प्यार जबरदस्ती नहीं होता ह कतई वो तोह हो जाता ह ….मैं बस उनको केयर ….अपनी फीलिंग्स दिखा सकती hu….aur जब उनके दिल मई मेरे लिए फीलिंग्स आएंगी तब ….खुद हे पता लग जायेगा …

मनीषा — छोड़ कतई इसका प्यार निराला ह ये सामने से ये कभी नहीं कहेगी ….पर ये उसकी इतनी केयर करेगी की राज को खुद रीलीज़ हो जाये….

कविता — दी मुझे न प्यार समाज हे नहीं अत ह…

पूनम-- प्यार सिर्फ प्यार ह कतई इसमे तेरा मेरा कुछ नहीं …जो जैसा ह उसे वैसा हे उसे अपनाना और साथ देना होता h…ek दूसरे को संजना हे प्यार h…..jab तुजे होगा तब पता लग जायेगा…..

टिंग…… dong….ghar की दूर बेल्ल की आवाज हुवी …..तोह तीनो का धयान गया…

पूनम-- बड़ी माँ और पापा तोह आज आने वाले नहीं ह ….तोह फिर कौन आया ह…

मनीषा — तोह ढक ले जब तक हम तैयार करते ह सब किचन मई …

पूनम जिसके बाल बिखरे और हाथ मई अभी भी आता लगा हुवा था ….वो उसी हालत मई ayi…aur जब उसने दूर खोला तोह उसकी आंखे मई खुसी की चमक आगयीईइ

पूनम “आपपप”

राज हाथ आगे बढ़ कर “hello फ्रेंड पूनम जी कैसी ह आप”

पूनम की तोह वैसे हे राज को देखते हे सोचने समझने के दिमागी पुर्जे हिल जाते थे उसने तुरंत वो आते वाले हाथसे हे हाथ मिला लिया …

राज ने पूनम के हाथ को देखा “ लगता ह आप खाना बना रही थी मैंने डिस्टर्ब कर दिया”

पूनम ने राज के हाथपर आता लगा देखा तोह बोली “हे भगवान् बस एक मिनट” और तुरंत किचन की तरफ भागी पूनम कविता कुछ बोलती उसे पहले हे वो कपडा उठाकर बहार की तरफ भाग गयी ..पीछे कड़ी मनीषा कविता ने एक दूसरे को देखा और किचन से बहार आकर देखा toh…unki चौड़ी हो गयी और मू खुले के खुले रह गए क्योकि पूनम ने राज का हाथ पकड़ रखा था और अपने हाथ मई पकडे कपडे से राज के हाथ को साफ़ कर रही थी….

राज “कोई बात नहीं पूनम जी ….मैं ये टिफिन्स देने आया था.”

Boom….kitchen से जस्ट बहार आयी मनीषा और कविता को झटका सा laga….dono एक दूसरे को देख कर “ टिफ़िन खाना” दोनों दुबारा से राज और पूनम को देखने लगी ….

पूनम “ नहीं राज जी मैं भी न आपके हाथ ख़राब कर दिए ….आप अंदर आईये न …”

राज — ok ….

राज को क्या पता था की उसका ये ok….kya रंग लेन वाले था वो पूनम के पीछे एक कदम हे चला था की पूनम को याद आगया और उसने तुतंत टिफ़िन को साइड मई छिपा दिया ….

राज कुछ बोल पता ….

“ वो टिफ़िन खाना बहुत ख्याल रखा जा रहा ह इस गधे का और तुम मुझसे मिलने का टाइम नहीं ह तुम्हारे पास यंहा टिफ़िन लौटाए जा रहे ह….”

राज ने अपनी जीब दांतो से काट ली और मन हे मन बोलै “ भगवन क्या चाहते हो आप मतलब अब थैंक यू भी नहीं बोल सकता हु kya….wo भी तीख ह और आपको भाभी हे क्यों मिलती ह हर बार ऐसी सिचुएशन मई अब ये छोड़ेंगी नहीं मुझे” तुरंत उसके दिमाग मई आईडिया आया…

राज — अरे आप तोह हुक्का पानी लेकर चढ़ गयी मुझ पर मुझे पता था आप तीनो एक साथ हे हो …

कविता-- वो कैसे पता …

राज — बॉडीगॉर्ड …..बॉडीगॉर्ड रखा ह न आपके पीछे उसी ने बताया…

मनीषा — तोह फिर तीख h…bach गए तुम…

राज मन मई थैंक गॉड बच गया….

मनीषा — और ये टिफ़िन का चक्कर…

राज समाज गया की इनदोनो को टिफ़िन का पता नहीं उसने एक नज़र पूनम को देखा जो घबरा रही थी जैसे उसकी चोरी सामने वाली हो “ टिफ़िन क्या…. वो पूनमजी खाना ाचा बनती ह तोह

पूनम जी को कहकर मंगवाया था अब आप तोह बनती नहीं हो वर्ण आपको कह देता वैसे कब बना कर खिला रही हो”

राज की बात से मनीषा ….बैकफुट पर आगयी “सिख रही हु जल्द हे खिलाऊंगी”

कविता — गले लगते हुवे ी लव यू भाई…

राज - लव यू तू कब्बू…..

कविता — भाई गलत बात खली हाथ कोई ऐसे थैंक यू बोलता ह …..अपने पूनम bh….diii को कुछ नहीं दिया …

राज ओह ी म सॉरी अब क्या करे….

पूनम — कोई बात nahi…..waise एक चॉकलेट तोह बनती हे थी….

राज के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी….

पूनम मैं कॉफ़ी लती हु…..

कविता — भाई …एक बात कहु मन तोह नहीं करोगे….

राज — अरे तू बोलना क्या चाहिए ….

कविता — पक्का न प्लीज मन मत करना …..आप आज रात यही रूक जाओ न अगर आपको काम नहीं हो toh…please भाई …पूनम जो किचन के पास पहुंची थी वो भी कविता की बात सुनकर रूक gayii….aur राज के रिप्लाई का वेट करने लगी…

मनीषा — राज देहरादून की तरह प्लीज न…

राज — पर पूनम जी अकेली h…acha नहीं लगेगा…

मनीषा — बस यही दिकत ह मैं खुद अनिरुद्ध अंकल से पूछ लेती हु …

राज — ok ok आप दोनों जीती ….मैं रूक जाता हु ….

पूनम की तोह ख़ुशी का तीखाना हे नहीं रहा ……उसे और क्या चाहिए था ….वो ख़ुशी खुसी राज के लिए अछि सी कॉफ़ी बना कर ले आयी …..तभी एक बार फिर घर की दूर बेल्ल बजी….

पूनम “ अब कौन होगा “

कविता - दी अब तोह भाई भी यंहा फिर क्यों इतना सोच रही हो…

पूनम और राज की आंखे मिली राज के चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान देख एक पल वो उसे हे देखती रही फिर …दूर ओपन करने के लिए चली गयी…..

सिक्योरिटी गॉर्ड — मम ये आपके लिए ए ह….

पूनम ने बहार झांक कर देखा तोह उसकी आंखे बड़ी बड़ी हो गयी ….बहार खूबसरे फ्रेश वाइट फ्लावर और उसमे रेड फ्लावर्स के मिक्स बूके रखे हुवे थे हर बूके के साथ अलग टाइप्स की बहुत साडी चॉकलेट्स राखी हुवी thi….poonam ने आगे बढ़ कर एक बूके पर टंगे स्टीकर को उठाया जिस पर लिखा था थैंक you…..poonam के चेहरे पर इस वक़्त जो मुस्कान आयी थी अगर कोई भी लड़का देख ले तोह वो अपनी जान देने को भी तैयार हो जाता …..उसने पीछे मुड़कर राज की तरफ देखा जो उसी हे की तरफ मुस्कुराता हुवा देख रहा tha…….poonam की आँखों मई खुसी के आंसू आगये …..क्योकि ये पहली बार था जब उसे ऐसे किसी ने थैंक यू बोलै था …

राज ने भी पूनम की आंसुओ से भीगी आंखे देख ली थी पूनम ने जल्दी से अपने अपने आंसू पूंछे ….और एक बूके और चॉकलेट का पैकेट उठाकर आगयी…..

पूनम — थैंक यू …

राज — थैंक यू तोह मुझे कहना ह और ये थैंक यू उस खाने के आगे कुछ नहीं ह आप रियली बहुत ाचा खाना बनती h….specially ाललउपरथे….

कविता मनीषा — थैंक यू इतनी साडी चॉकलेट और ये बूके …

पूनम — बहार जाकर देखो ….कतई तू बोल रही थी न राज जी कुछ नहीं लाये …

मनीषा और कविता एक के बाद एक खूब सरे बूके और चॉकलेट्स लाते गयी…

राज भी हैरान था वो माथा पीटना चाहता था पर तीनो के चेहरे पर स्पेशलय पूनम को खुस देख कर वो बहुत खुस था……..

रात को सब ने एक साथ खाना खाया और बात करने lage….manisha और कविता बात करते करते सो gayi….poonam ने एक को काम किया और हल्का सा दोनों को कवर कर दिया ताकि ठण्ड न लगे…..

पूनम की नज़र राज पर गयी “ क्या सोच रहे ह राज जी नींद नहीं आरही ह..”

राज नहीं …थक गया हु हल्का सर दर्द ह …अपने आप तीख हो जायेगा आप सो जाईये आप थक गयी ह …

पूनम पहले तोह हिचकिचाई पर वो अपने प्यार को जरा सा भी दर्द मई कैसे देख सकती थी ….

पूनम तुरंत गयी और अनिरुद्ध गोस्वामी के रूम से नवरतन टेल लेकर आगयीईइ…..

पूनम-- आप इधर सोफे पर बैठ जाईये …

राज — पूनम जी रात के एक बज गए ह आप सो जैइए आप भी थक गयी होंगी ….

पूनम — एक दोस्त परेशां ह तोह दूसरे दोस्त को नींद कैसे आएगी भला …

राज — आपसे बातो मई कोई नहीं जीत सकता ह ..

पूनम — तोह बैठ जाईये ….और राज के बैठ ते हे ….

उसने थोड़ा सा टेल राज के सर पर गिरा कर ….मालिश सुरु करदी ….अब पूनम ये मालिश 10 साल की उम्र से हे अपने चाचा के सर पर करती आयी थी एक मिनट मई हे ….राज का सर दर्द दूर हो गया ….

राज - एक बात पुछु …

पूनम — है …

राज — आप कैसे कर लेती हो सब ….

पूनम के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी….. “ जब 7 साल की थी तब एक बार चाचा चची को बात करते सुन लिया की मैं उनकी बेटी नहीं उनके भाई की बेटी हु …..खूब रोई चाचा चची ने बहुत समझाया …पर दुख तोह हुवा हे था पर संभल गयी बूस तबसे ….हे सब बदल गया मैं घर का काम karti…..padhayi karti…chacha चची का धयान रखती…..

राज — कितना बदल जाता ह न जब पता लगे की दुनिया मई अकेला जीना ह….

पूनम — राज ji….kami तोह कोई भी माबाप की पूरी नहीं कर सकता ह पर फिर भी आसपास बहुत से ऐसे भी ह जो हमे बहुत चाहते ह हमे उनके लिए जीना होता ह….

राज — आप बहुत हीमत वाली हो …..

पूनम — आप और मैं एक हे जैसी कश्ती पर सवार ह ….सायद इसीलिए भगवन ने हमे मिलाया ह ….

राज के चेहरे पर मुस्कान आगयी….. “आप जिसकी जिंदगी मई जाओगी वो बहुत खुसनसीब होगा…..

पूनम — प्यार भी नसीब से मिलता ह राज जी ….

राज — प्यार ह कान्हा इस दुनिया मई प्यार मई लोग ….अपनों से जायदा दुसरो पर यकीन करते ह …और सिर्फ पैसो को प्यार से जायदा इम्पोर्टेंस देते ह….

पूनम — राज जी बुरा मत मन्ना ….प्यार मई ग़लतफ़हमी आम ह ….कभी जो दीखता ह वो होता नहीं h…..par हमारी रेस्पोंसिब्लिटी होती हम एक दूसरे पर विस्वास दिखाए …..जरुरी नहीं ह प्यार मई दोनों तरफ हे समझदार हो ….कभी कभी झुखना और समझाना भी पड़ता ह ..तभी प्यार की डोर और मजबूत होती ह

राज पूनम की बात को गहराई से समझता रहा फिर उसने पलट कर पूनम को देखा ….पूनम के चेहरे पर हमेसा की तरह मुस्कराहट thi…..dono एक दूसरे को काफी दिएर तक ऐसे हे देखते रहे ……

पूनम —अब सर दर्द कैसा ह…

राज - बिलकुल गायब हो गया ह थैंक यू सो मच….

पूनम — ाचा दोस्ती मई थैंक यू भी कहते ह….

राज — ok आप जीती इतना कह वो मुस्कुराने लगा….

पूनम — “ बस ये हंसी कभी भी जाने मत dijiyega….kyoki आप की ये हंसी बहुत प्यारी ह …..

राज मन मई “ पता नहीं क्यों पर मैं जब भी पूनम से मिटा हु खुद को उसे अलग हे नहीं कर पता हु क्या कोई रिश्ता ह पुराने जनम का …”

पूनम — कान्हा खो गए राज जी…

राज “ कंही नहीं …आप सो जाइये मैं नहीं चाहता की मेरी दोस्त परेशां हो”…

पूनम “ गुड नाईट राज जी”

राज “ गुड नाईट ….पूनम जी”

पूनम अपने रूम मई जाने के बजाये तीनो के पास हे पड़े सोफे पर लेट गयी कुछ दिएर बाद उसकी निगाहे राज की तरफ गयी तोह राज उसी की तरफ चेहरा करके गहरी नींद मई सो गया tha……half ऑवर बाद पूनम उठी और राज के पास गयी जब उसे यकीं हो गया की राज सो गया ह तोह उसके सर पर हाथ फिरकर फ़ोरेहेअद पर किस करदी ….उसने देखा की राज के पास पानी नहीं ह तोह पानी किचन से लाकर उसके पास रख diya…….aur सोफे पर जाकर सो gayiii…..uske दिल मई गहरा सुकून था क्योकि एक पत्नी की तरह उसने राज का पूरा ख्याल रखा था और राज के दिल मई अपनी गहरी जगह बनती जा रही thi……….jab सुभे उसकी नींद 6 बजे खुली तोह राज का सोता हुवा चेहरा अभी भी उसकी हे तरफ हे tha….wo खुदसे हे बोली “ एक दिन वो आएगा जब रोज मैं राज को अपने सामने पाऊँगी”

दूसरी तरफ अनु की नींद खुली तोह वो उसका सर चक्र रहा tha…..usne टेबल से उठाकर पानी पिया और पस्सपडे स्टिकी नोट को उठाया जिस पर लिखा था “ सब तीख ह जब उठ जाओ 10 बजे घर आकर मिलना बहुत जरुरी बात करनी ह मेरे तुम्हारे रिश्ते को lekar…..Raj”

इधर राज की नींद खुली तोह …उसने टाइम देखा 7 बज रहे थे …..वो मन मई बोलै “ वक़्त आगया ह अब सच पता करने का ….बहुत खेल लिया तू अपनों के साथ मां उर्फ़ विक्टर अब मेरी बरी h….apno का धोखा कैसा लगता ह अब तुजे पता लगेगा”

आज के लिए इतना he….Deri के लिए माफ़ी…

मस्ती मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का ……
 
अपकमिंग मेघा अपडेट ....

गेम बिहाइंड गेम .....
 
अपडेट टोम्मारो night....kosis आज रात की थी बूत मुमकिन नहीं हो पाया
 
अपडेट 178

गेम बिहाइंड गेम.....

War……countdown……begins

18 ..उपदेट्स तू लेफ्ट …..


“ गुड मॉर्निंग राज जी”

राज ने किचन से आरही पूनम की तरफ देखा …और मुस्कुराते हुवे बोलै “वैरी गुड मॉर्निंग पूनम जी ये दोनों ऐसे हे दिएर तक सोती ह …”

पूनम “कल लेट सोई थी और आज संडे ह वर्ण पढ़ाई से फुर्सत कान्हा होती ह इन्हे”

राज — ाचा तोह फिर आप ….

पूनम — मुझे आदत ह सुभे 5 बजे नींद खुल जाती ह फिर पूजा करके नास्ता बनाते बनाते कॉलेज का टाइम हो जाता h…main आपके लिए टिया लेकर आती हु…

राज पूनम को धयान से देख रहा था वो खुदसे हे बोलै “ रात को एक बजे सायद 1.30 बजे हे सोई होगी …और इतनी जल्दी उठकर ब्रेकफास्ट की तयारी कर रही h…kya ऐसी भी लड़किया होती ह दुनिया मई“

पूनम “ क्या देख रहे राज जी“

राज “कुछ भी नहीं ”

तभी उसे पीछे से आवाज सुनाई दी …

“क्यों घूर रहे हो मेरी बहन को”

राज “ घूर नहीं सोच रहा हु की एक वो ह जो कितना काम करती ह और एक आप हो जो सोती रहती ह”

“ अगर तुम्हे सुभे सुभे हे मार कहानी ह तोह ऐसे हे बोल दो वैसे भी बहुत दिन हो गए ह फाइट किये हुवे “


राज -ओह ऐसा क्या ाजाओ आपको ऐसे तोह मैं कुछ कर नहीं सकता हु …फाइट मई हे पीटूंगा “

मनीषा “ ाचा 30 मिनट्स ….ह तुम्हारे पास “ फिर बताती हु तुम्हे इतना कह वो रेडी होने चली गयी …”


पूनम - टिया देते हुवे आप और मनीषा हमेशा हे ऐसे रहते ho…i मैं एक दूसरे को तंग करते हुवे…

राज — nahii…ye प्यार ह हमारा उन्होंने मेरे लिए बहुत कुछ सहा और किया ह मैं जितना उनके लिए करू उतना काम ह ….ऐसा समाज लो ये जीवन कुछ खास जानो के लिए हे …और उनमे से ये बहुत बहुत खास h…dekhna चाहोगी आपकी बहन आखिर क्या ह ….

पूनम — हआ…

राज ने जल्दी से टिया पि और 15 मिनट मई हे बहार गर्दन मई agaya……aur शांति से पूनम के साथ चेयर पर बैठ गया …मनीषस लोअर और टी शर्ट पहन कर आगयीईइ….


मनीषा तोह पीटने को तैयार ….

राज — ाचा किसने कहा मैं आपसे लडूंगा …

मनीषा हैरानी से देखने लगीई….

राज ने हाथ को ऊपर उठाया और निचे कर दिया…

मनीषा और पूनम कन्फूसिओं से राज को देखने लगी तभी मित्युदूत सीधा ऊपर से सीधा मनीषा और राज के आगे आकर कुधा ……मनीषा 2 कदम पीछे हैट गयी और पूनम अचानक मित्युदूत को देख कर पीछे गिरने को हुवी तोह राज ने चेयर पकड़ ली…..

राज — आपको इनसे लड़ना ह….

मनीषा — इनसे लड़ना ह ह कौन ये …..

राज - बॉडी गॉर्ड कहलो या दोस्त …..बस इन्हे कोई मुझे मरे ये पसंद नहीं ह…

और मेरा स्टूडेंट पिटे ये मुझे पसंद नहीं ह आपको इन पर 10 वार बार मरना ह …और ये आपको सिर्फ पुश करेंगे ok


मनीषा — ok…

राज — सो लेटस स्टार्ट…..

मनीषा ने बिना देरी किये हे जम्प कर के फुर्ती से मित्यु दूत की चेस्ट पर जोर से वार किया ….मनीषा का वार देख पूनम की आंखे बड़ी बड़ी हो gayiiii….aur ऐसा हे हाल घर के अंदर खड़े हर बॉडी गॉर्डस का था…. जो तबसे मित्युदूत की पर्सनालिटी से हे हैरान परेशां थे की ये कब से घर के अंदर ह ….और हमे दिखा तक नहीं ….मनीषा की किक को मित्युदूत ने दोनों हाथ से ब्लॉक कर लिया पर मनीषा ने तुरंत हवा मई हे दूसरी किक मित्युदूत के पेट पर मार दी ….और निचे गिरते हे एक जम्प के साथ दुबारा कड़ी हो गयी ….

राज के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आगयी….

मनीषा ने राइट ऊंच मारा तोह मित्युदूत फुर्ती से पंच के पास से डॉज करता हुवा पीछे पंहुचा और लेफ्ट हैंड से पुश कर दिया मनीषा उड़ती हुवी आगे की तरफ गयी पर अपने दोनों हाथ जमीन पर टिकर जम्प के साथ सीधी हो गयी …..मनीषा ने लगातार एक के बाद बाद एक कई सरे पंच किये ….जिसे मित्यु दूत आसानी से डॉज करता रहा ..मित्युदूत ने कितनी हे बार मनीषा को जमीं पर पटका ….पर फाइट मई इतनी बार पीटने के बाद भी मनीषा के चेहरे पर कोई सिकन नहीं थी उसकी आंखे बहुत सीरियस हो राखी थी….

राज “ बस ..

दोनों रुक गए ….


राज “ आपकी पावर मई काफी सुधर हुवा कितनी दिएर प्रेक्टिस करती हो ….और कब …”

मनीषा — मास्टर रात को 9 से 11 बजे तक….

राज — सुभे 4 से 7 ….. जिसमे सुभे हाफ ऑवर योग ….जिसमे बॉडी स्ट्रेचिंग पर पूरा फोकस रखना ह जितने लछुले होगा सरीर उतना आसान होगा ताकतवर दुश्मन से निपटना….

मनीषा - जी मास्टर ….

राज - अब कुछ मूव्स मैं सीखा रहा हु जिन्हे आपको अचे से प्रैक्टिस करना …..इतना कह उसने काफी सरे मूव्स किये ….जिन्हे मनीषा धयान से देखती रही….

राज समाज आया …..

मनीषा जी मास्टर इतना कह उसने मूव्स करने सुरु कर दिए …..

राज वेट राज ने पीछे जा मनीषा के दोनों हाथ पकडे और पेअर से पेअर जोड़ कर मूव करने सुरु कर दिए करीब हाफ ऑवर मई हे मनीषा की स्पीड तेज़ी से बढ़ने लगी …

राज — गुड …अगली बार जब परफेक्ट हो जाओ तोह घर पर रूफ पर पहुंच कर सीटी बजा देना और जो ए उसके साथ अपनी स्किल्स की प्रैक्टिस करना …और उस शख्स के साथ वीक मई एक दिन पूरा देना ह जो वो सिखाये सीखना ह ….

मनीषा जी मास्टर….

पूनम तोह बस …..हैरान परेशां मनीषा को हे देख रही थी जिसके होठो के एक कौन से खून तोह कोहनी चिली हुवी थी पर क्या मज़ाल की उसके मू से उफ़ भी निकल जाये ..

राज ने वक़्त देखा तोह 9 के करीब टाइम हो गया था… “मुझे जाना होगा ….जल्द मिलेंगे ….”फिर पलटकर “ थैंक यू पूनम जी आपके साथ वक़्त बाते करके बहुत ाचा लगा”

पूनम “ मुझे भी बहुत ाचा लगा मैं जितना आपको जानने की कोसिस करती हु उतना काम लगता ह”


राज “दुनिया बहुत बड़ी ह पर मैं सीधा हु बस अपनों की परवाह और अपनों की ख़ुशी चाहता हु …bye जल्द मिलेंगे”

राज के जानने के बाद मनीषा धड़ाम से घास मई गिर कर हाफने लगी..


पूनम तेज़ी से भागकर उसके पास आयी …” क्या हुवा तुजे “

मनीषा घास मई लेट कर “गधा इडियट दुफर कंही का ही कितना मारा उस सांड ने हाथ नहीं हथोड़ा था पूरा सरीर टूट रहा ह”


पूनम - पर राज जी के सामने तोह….

मनीषा- “ अरे वो जब मास्टर बनता ह तब वो राज नहीं होता ह एक गलती की इतनी बड़ी सजा मिलती ह की…24 हॉर्स दर्द सहना पड़ता h…marta भी ह स्टिक से….

पूनम — पर उन्हें तोह तू पीटती रहती ह

मनीषा — उसकी जिंदगी बहुत मुश्किल ह मेरी बहन ….वो यंहा ह पर दिमाग कंही और मन कंही और सोच कुछ और ….उसकी एक बड़ी चूक क्या कर सकती तुजे अंदाज़ा भी नहीं ह फिर अपनी टी शर्ट कप हल्का सा ऊपर करके ये निशान किसका ह…

पूनम - चोट का …

मनीषा — बुलेट का ह …हमे मरने की कोसिस की थी मुझे और शिवानी को गोली लगी थी…

पूनम हैरानी से मनीषा को देखने लगी…

मनीषा — और पता ह तेरे पतिदेव ने क्या किया ….

पूनम — क्या …

मनीषा — उस शख्स को 24 हॉर्स मई धुंध लिया और हेलिकोप्तेर्स बोस्ट्स लेजाकर हमारे हाथो से हे उसी मरवाया ….उसके अपनों को कोई छू नहीं सकता ह और अगर किसी ने छू दिया तोह ….वो Nirr…i मैं वो सामने वाले के पुरे खंडन को तड़पा तड़पा कर मरता ह……

पूनम —तभी मैं सोचु मेरी बहन जो राज जी को तंग करती रहती ह वो अचानक सीधी कैसे हो गयी आखिर राज गुरु के रूप मई सामने जो था…

मनीषा-- अगर तेरी इन्क्वारी हो हाई तोह अंदर ले चल आइस दे देना वर्ण पता नहीं कान्हा से सरीर नीला हो jayega….waise कुछ भी कह तुजे देख कर उसका चेहरा नार्मल हो जाता ह ….वर्ण इतनी आसानी से नहीं छोड़ता वो मुझे ..

पूनम — तोह सुभे क्यों पंगे ले रही थी…

मनीषा — ेयी माँ तोह मुझे क्या पता था की इस बार खुद की जगह वो सांड सा लड़ा देगा ..

पूनम को भी जोर से हंसी agayiii…..par राज की 3 फाइट वो देख चुखी थी उसे पता था की राज की जिंदगी बहुत मुश्किल ह इसलिए वो छोटी छोटी केयर से हे राज को खुस करने की कोसिस कर रही थी…


इधर कार मई

मित्युदूत — मास्टर ये लड़की …

राज — मुझे पसंद ह कैसी लगी…

मितिदूत —स्ट्रांग ह …इतनी मार खाने के बाद भी कड़ी रही ….

राज — इसलिए भाभी बनेगी मेरी….

मित्युदूय ने रोड के बिच हे जोर से ब्रेक मार दिए…..

राज — अरे चलो भीड़ लग jayegi….ap इतना हैरान मत हो ….इन्हे मैंने सुनील के लिए पसंद किया ह बस सही वक़्त का इंतज़ार कर रहा हु……

मित्युदूत — पर मास्टर …वो तोह सीधे साढ़े ह ..वैसे जोड़ी खूब जमेगी…

राज — Ha….isliye अब दादाजी को बता ता हु वो आकर बात करेंगी पर पहले उनकी माँ से मिल लू……..

दोनों जब घर पहुंचे तोह 9.45 हो चुके थे…..

राज — भूक लग गयी ह ..

मित्युदूत — मुझे भी लगी ह …आप नाहा लीजिये मैं देखता हु….

राज — नहीं आप रात से जगे हुवे h….ap सिक्योरिटी अलार्म ों कर दीजिये और रेस्ट करिये मैं तैयार करता हु ब्रेकफास्ट की ……

इधर अनु नहाकर अचे से तैयार होकर पैदल हे राज के घर की तरफ चल diii…uska दिल बहुत खुस था क्योकि सुभे के न्यूज़ पेपर मई कोई भी न्यूज़ नहीं थी मुंडेर की …और उसे जायदा खुस थी वो अपने प्यार राज को प् लेने की ख़ुशी मई ….उसके चेहरे पर रह रह कर मुस्कान आरही थी ….और इस मुस्कान के साथ वो राज के घर पहुंची…….

“आगयी औ ब्रेकफास्ट रेडी किया ह भूक लगी होगी .. रात का डिनर न सही ब्रेकफास्ट तोह कर हे सकते ह साथ मई…

अनु नज़रे नीची करते हुवे चुप चाप बैठ gayi…raj ने उसे सैंडविच और टिया दी “ नास्ता करो मैं अभी अत हु इतना कह वो ब्रेकफास्ट और जूस लेकर मित्युदूत के रूम की तरफ चला गया …अनु ने ब्रेकफास्ट उसके हाथ मई देखा तोह उसे दर लगा की कोई और लड़की तोह नहीं h…uske चेहरे का रंग फीका पड़बे लगा…

“कोई नहीं ह घर पर तुम आराम से नास्ता कर सकती हो”


अनु “ इसे कैसे पता लग गया की मैं क्या सोच रही हु”

कुछ पल बाद राज वापस आगया …..और अनु के पास बैठकर ब्रेकफास्ट करने लगा …अनु नज़र बचाकर राज को देख रही थी और राज सीरियस होकर नास्ता कर रहा tha…..kuch हे दिएर मई अनु को भी रीलीज़ हो गया की राज बहुत बदला हुवा सा ह आज उसके चेहरे पर वो मजाक वो नोख झोक कोई एक्सप्रेशन नहीं ह उसने ब्रेकफास्ट छोड़ दिया ….और राज को सीरियस कर देखने लगी ….


अनु “मैं….”

राज “पहले वडा करो मैं जब तक न बोलू कुछ नहीं कहोगी और सिर्फ सुनोगी ….

अनु छीकते हुवे “ तुम आखिर चाहते क्या हो राज ….मैंने वो किया जो तुमने कहा …

अब सिर्फ ये सरीर बचा ह वो भी तुम्हारा हे ह अब और कैसे खुस करू तुम्हे”


तड़क एक जोरदार थपड अनु को पड़ा ….

“कहने से पहले सोचा करो अनु …..तुम्हे लगता ह मुझे ये चाहिए h…mar जाना पसंद करूँगा ऐसे करने से पहले …..अरे मैं तोह तुम्हे किश करने से हे रोज गिलानी से मर रहा हु…”


अनु रट हुवे “ मुझ मई क्या कमी ह क्या तुम मुझसे अब प्यार नहीं करते हो …आखिर तुम क्यों कर रहे हो ऐसा ”

राज ने अनु को फफक फफक कर रट देखा तोह …आगे बढ़कर उसे गले लग लिया ….. “अनुउउउ… मैं तुमसे जो कहना चाहता हु उसके लिए तुम्हारा शांत होना जरुरी ह …मैं चाहता हु पहले तुम मेरी बात सुनो बस इसलिए कहा था की चाहे कुछ भी हो जाये बिच मई नहीं बोलोगी”

अनु ने सर ऊँचा करके राज को देखा और है मई गर्दन हिला दी राज ने अपने हाथो से उसके आंसू पौंछे और उसे सोफे पर बैठा दिया ……


राज —मैं जो कहने जा रहा हु उसमे लगभग सब सच ह और कुछ बचा ह तोह उसे तुम खुद प्रूफ करोगी अब पहली baat…kal तुमने जिसे मारा वो मेरा आदमी था और वो जिन्दा ह ……दूसरी बात अगर मैं ये कहु की तुम्हारा बहुत बड़ा परिवार ह तुम्हारे चाचा चची दादा दादी ह ………तीसरी बात — तुम्हारे मापापा ने जानभूझकर तुमसे सबकुछ छिपाया ह तोह ….

अनु की आँखों के आंसू बंद हो गए और वो राज हैरानी से देखने लगी वो कहना तोह बहुत कुछ चाहती थी पर राज की बात ने उसे चुप करा रखा था…

“मुझे पता ह तुम्हे बहुत से सवाल पूछने ह पर मेरी बात ख़तम होने का वेट करो …तुम्हारे पापा रेलस्टेटे का हे बिज़नेस नहीं करते ह बल्कि अंडरवर्ल्ड के बहुत बड़े डॉन भी ह..”

अनु “राज तुममम”

“ मेरी बात ख़तम होने दो अब गई सुनो तुम्हे सब नहीं पता ह क्योकि तुमसे सबकुछ छिपाया गया h….tumhare पिता ने कितने घर उजाड़ कर ये दुनिया बनायीं ह तुम सोच भी नहीं सकती हो और उन उजड़े हुवे परिवारों मई उनके अपने परिवार भी ह मुझे मालूम तुम सोच रही होगी की मैं झूठा हु धोखेबाज़ हु पर सच यही ह और तुम्हारे पापा के उजड़े गए परिवारों मई से उनका अपना सागा परिवार भी ह और मैं उसी परिवार का बीटा hu…..raj ने गहरी सांस छोड्दिई और अनु से बोलै अब तुम अपने सवाल पूछ सकती हो..”

अनु कड़ी हुवी और राज के गाल पर एक बाद एक कई थपड जड़ दिया राज ने अनु के थपड से पलके तक नहीं jhapkayi….anu एक तक उसे घूरती रही उसने औरो की तरह कोई रिएक्शन नहीं दिया वो काफी दिएर ऐसे हे राज को घूरती रही …फिर बोली


अनु “ अगर ये बात पापा को बता दू तोह क्या होगा”

राज “ कल कंडीशन यही जाने के लिए हे तोह राखी थी की तुम पर कितना यकीन कर सकता हु और जब यकीन हुवा तोह सचाई बताई”

अनु निचे फर्श पर सर पकड़ कर बैठ गयी उसे यकीन नहीं हो रहा था पर वो राज को भी अचे से जानती थी की राज झूट नहीं बोलेगा उसे …


अनु — तुम्हारा प्यार झूठा था ह न…

राज — नहीं पर…

अनु — बोलो राज जब इतना बोल चुके हो तोह सब बोल दो कुछ भी मत छुपाओ….

राज —सच बर्दास्त नहीं कर पाओगी….

अनु — डोंट वोर्री सुइड वैगरह करने वाली लड़की नहीं hu….agar मरूंगी तोह तुम्हे साथ लेके marungi…ab बताओ की क्या बाकि रह gaya..h..

राज — जब मैं तुमसे मिला मेरा सिर्फ सच जानकार तुमसे दूर जाने का इरादा था पर है अब मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हु पर ये वो प्यार नहीं जो लड़का लड़की के बिच होता ह ….ये ek…ye…ek…

अनु का दिल तोह पहले हे टूट चूका था आंसू बहकर सुख चुके थे वो बस राज की न का हे वेट कर रही थी और सोच रखा था की न सुनते हे वी चुप चाप निकलकर राज को मरवा देगी और खुद भी मर jayegii…..wo राज की न हो सकीय तोह उसे भी वो किसी और का नहीं होने देगी…


राज- मैं तुम्हारी सगी बुआ का लड़का हु और इस रिश्ते से तुम मेरी बहन हो …..

अनु की हालत तोह बहुत बुरी हो गयी थी वो अपने हे भाई से प्यार कितनी हे दिएर उसका दिमाग सूना पड़ा रहा ….…..कुछ पल बाद उसके दिल मई ख्याल आया …की राज को पता था मैं उसकी बहन हु फिर भी ….उसने खड़े होकर गुसाई से कई सरे थपड राज को और मरे और राज के सीने पर जोर जोर से मरने लगीई….” क्यों राज kyo….tumhe पता था मैं तुम्हारी बहन हु फिर भी प्यार का नाटक क्यों क्यों क्यों राज …क्यों किया तुमने ऐसा”


राज क्या हे कहता पर कहना तोह था हे इसलिए उसने कहा “ ी म सॉरी anu….main तुम्हे क्या कहता….. यही की मैं तुम्हारा भाई हु तुम यकीं नहीं करतीय ….क्या कहता मेरे घरवालों की मौत की वजह तुम्हारे पापा ह तुम यकीन करती मुझपर bolo….kya करता मैं तुम हे बताओ इसीलिए हे तोह जब भी तुम लिमिट्स पार करने की कोसिस करती तब मैं तुम्हे रोक देता क्योकि मैं और निचा नहीं गिर सकता था ी म सॉरी अनु तुम जो चाहे मेरे साथ कर सकती हो तुम्हारी कसम मैं उफ़ तक नहीं करूँगा पर सच यही ह हम भाई बहन ह”

अनु राज के हे गले लगी रही ….राज ने उसे सोफे पर बैठा दिया….

5 मिनट,30 मिनट ,एक ऑवर बिट गया, दोनों मई से कोई कुछ नहीं बोलै ….फिर अनु हे बोली…. “राज मेरे पापा बहुत अचे इंसान ह …वो किसी के साथ गलत नहीं कर सकते ह क्या पता कुछ मिस अंडरस्टैंडिंग हुवी हो तुम्हे”


राज - हो सकता ह ाचा एक बात बताओ क्या तुमने गौर किया तुम्हारे घर की सिक्योरिटी इतनी जायदा टाइट क्यों h….kyo तुम्हारा भाई हमेसा हे अलग रहता ह जगदा इतना बड़ा भी नहीं था उस वक़्त जब तुमने नाइफ मारा तुम 14 साल की थी ….…क्या इतने वक़्त मई उसने तुमसे एक बार भी मिलने की कोसिस की nahi…Kyo…..sabke इंटरनेट कनेक्शन सिंपल ह उनकी स्पीड भी अछि होती ह फिर स्पेशलय तुम्हारे घर पर हे प्राइवेट नेटवर्क सिस्टम क्यों ह…..”

अनु राज की बात सुनकर हैरान हो गयी

राज “ ाचा ये सब भी छोड़ो …तुम्हारे घर की इतनी सिक्योरिटी ह तुम्हारे घर के अंदर घुसना नामुनकिन ह फिर भी तुम आराम से अकेली कैसे घूमती हो तुम्हारे साथ एक भी बॉडी गॉर्ड क्यों नहीं h……h जवाब “

अनु “वो..” इतना बोल वो चुप हो गयी

राज “ नहीं ह जवाब अब मैं तुम्हे देता हु जवाब …क्योकि तुम्हारे पीछे दस बॉडी गॉर्ड चुपके से नज़र रखते ह तुम क्या करती हो क्या नहीं किसी मिलती हो किसी nahi…even….. अभी भी मेरे घर के बहार 2 आदमी नज़र रखे हुवे h…aur तुम्हारे पापा ने मेरे बारे मई सबकुछ पता करवाया h….aur मेरा पीछा 2 आदमियों को भी लगवाया हुवा ह”

अनु “ तुम्हे पूरा यकीन ह

राज ने हाथ हिलाया तोह मित्युदूत एक आदमी को घसीट ता हुवा लेकर आया….

राज “ इसे पहचानती हो

अनु “ पापा का सेक्रेटरी ह ये तोह…. पर ये तोह एक्सीडेंट मई मारा गया था”

राज “ दुनिया के लिए मारा गया था पर ये जिन्दा ह …मैं कॉफ़ी लता हु खुद हे पूछ लेनाजाब तक इसे की क्यों निगरानी कर रहा था ये कितने वक़्त से… तुम्हारे पापा ऑफिस कब ऑफिस रहते ह कब नहीं ेट्स ये सब बोलेगा”

राज के जाते हे अनु सब पूछती गयी और जब उसके वहां का शीशा टुटा तोह वो भी टूट gayiii…..uska दिल मई जो उसके बाप की इमेज थी वो बिखर गयी वो ऐसी लग रही थी जैसे गहरी नींद से जगी हो….


राज “ होता ह अनु …अपनों का धोखा ऐसा हे होता h….main तोह अपनों के हे धोखे से बचपन मई अनाथ हो गया था जब माँ बाप की ऊँगली पकड़कर चलना सीखना चाहिए था तब सब खो चूका था ….क्योकि किसी अपने ने हे पीठ मई चुरा घोपा था अरे पैसा चाहिए पावर चाहिए सब ले लेता…. मेरे पापा कभी न नहीं करते par….mujse मेरा बचपन चीन लिया मेरे माँ पापा चीन लिए अनु ….तब से आज तक एक एक को धुंध कर अपने हाथो से सजा दे रहा हु जिसने जैसा किया उसके साथ वैसा हे कर रहा hu….kisi को भी कोई हक़ नहीं था एक दूध पिटे बचे से उसकी माँ का अंचल छीनने का ….कितना दर्द होता ह …kitna…main तुम्हे बता नहीं सकता हु……”

अनु राज की आँखों से गिरते आंसू और उसकी बातो मई छिपे दर्द को समाज रही thi….wo एक तरफ अपने पापा की वजह से दुखी थी तोह एक तरफ राज के भाई और उसके दर्द से दुखी थी काफी दिएर ऐसे हे चुप्पी बानी रही


अनु “ तुम क्या चाहते हो मुझसे”

राज “तुमने मुझे माफ़ कर दिया न मैं सच मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हु मैं खुस की तुम मेरी बहन हो”

अनु के चेहरे पर दर्द भरी मुस्कान आगयी “अब बताओ क्या चाहते हु तुम”

राज “ तुम्हारे घर रूक कर तुम्हारे घर मई तुम्हारे पापा के सीक्रेट मतलब उनका तिखना कान्हा …वो किलर आर्गेनाइजेशन से कैसे कांटेक्ट करते ह …

अनु “ ok ये इजी ह आगे सेमेस्टर एग्जाम ह तुम रात को रूक सकते हो जिस दिन पापा नहीं होंगे उस दिन मैं तुम्हे बुला लुंगी …तब हम अचे से घर मई सर्च कर सकते ह…”

राज “ तुम नहीं सिर्फ मैं और ये इतना आसान नहीं ह उनके रूम के अंदर या आसपास सिक्योरिटी सीटें होगा मैं तुम्हे कुछ डिवाइस दूंगा उन्हें पहले तुम घर के अंदर ले जाना …ok “

अनु “ok”

राज “तुम्हारे दादा दादी का तुम नोर्मल्ली अपनी माँ से पूछना देखते ह क्या कहती ह वो ी होप कुछ बता दे …हम .”

अनु नार्मल होकर “ है …ाचा एक बात बताओगे तुम्हारी गफ ह क्या “

राज “ह भी और नहीं …पर वो ख्याल तेरी तरह हे रखती ह बस तू बातो से लड़ती ह वो बात न करने पर हाथो और लातो से बात करती ह ….हलकी हमने कभी एक दूसरे को गफ बर्फ नहीं मन पर दोस्त से बढ़कर ह वो मेरे लिए…

अनु के चेहरे पर दर्द भरी मुस्कान थी “ कान्हा ह वो “

राज — पता नहीं कान्हा ह फ़िलहाल पर जंहा भी होगी एक बात तय ह

अनु धयान से राज को देखते हुवे “और वो क्या”

राज -मुझे गोली मार देगी देखते हे…

अनु शॉक से “ गुंडई h….kya…”

राज “ है ऐसा कह सकती हो ैप ह वो और अभी तोह भड़की हुवी hogi…kyoki उसे नहीं पता ह मैं यंहा हु”

अनु “चलो ाचा ह जो मैं नहीं कर सकती वो कर degi…waise तुम अगर मेरी बुआ के बेटे यानि मेरे भाई नहीं हुवे या तुम्हारी बाते झूटी निकली तोह मैं खुद तुम्हे मार दूंगी.”

राज “ ok मजूर ह ….मुझे यकीं नहीं हो रहा ह तुम नार्मल हो गयी ….chalo..lunch का टाइम हो गया ह मैं बना देता hu….sath कहते ह…

अनु “ प्यार एक्सेप्ट कर चुके होते और फिर धोखा देते तोह ट्रस्ट में फिर तुम चाहे सेज भाई हे निकलते मसर देती tumhe….waise एक सवाल ह उस रास्त मेरी ड्रेस क्यों बदली फिर तुमने जब तुम्हे पता था की मैं तुम्हारी बहन हु “

राज की आंखे बड़ी हो गयी— बेवक़ूफ़ लड़की एक लगाऊंगा खिंच कर …रजनी मम ने बदले थे तुम्हारे kapde…tu मेरी बहन h….matlb तू अभी भी …वही सब सोच रही थी की मैंने बदले …..बेवक़ूफ़ लड़की….

अनु “ सवाल था तोह पूछ लिया डाउट तोह नहीं रहेगा ….चलो ाचा ह …काम से काम इतनी अकाल तोह थी tumhe….ab सोचती हु तुम गलत नहीं हो…. एक बात तोह साफ़ ह की मेरी माँ को भी सच नहीं पता ह”

राज “ गेम तुम्हारी सोच से बहुत बड़ा ह तुम्हरे बाप को पता लगा तुम सच जानती हो वो पालक झपकाए बिना तुम्हे मार देगा और तुम्हारी माँ को भी”

अनु “ तोह फिर “

राज — मां कंस ह तोह …..मुझे भी कृष्ण बनना होगा बदला लेना ह अपनी माँ का ….अपने बाप ka…..Anu ….ऐसा पैसा किस काम काम का जो अपनों से अपनों को हे चीन ले …30 दिन ह सेमेस्टर सुरु होने मई ….फिर गेम के पीछे हम गेम खेलेंगे …..बस तुम कभी पता मत लगने देना की तुम्हे सब पता ह क्योकि गलती से भी तुम्हारे बाप को भनस्क लग गयी की तुम उनके खिलाफ हो तुम्हारे साथ वो तुम्हारी माँ को भी मार dega……chalo अब खाना फिनिश करो

राज और अनु ने खाना khaya….anu नार्मल हो चुकी thi….dono अभी बात हे कर रहे थे की ….

मित्युदूत — मास्टर ….

राज — सिचुएशन…

मित्युदूत — मास्टर …

राज — बता सकते हो…..

मित्युदूत — मास्टर शेरदिल और उसकी फॅमिली पर अटैक हुवा h…….hume अभी निकलना होगा वर्ण उनका बचना नामुनकिन ह …..

अनु घबरा uthi…..ab भाई हो गया हो चाहे राज पर प्यार तोह करती हे थी wo….isliye उसने जल्दी से उठकर राज की बाजु पकड़ ली….

राज — तुम घर जाओ ……अनु….

अनु कुछ कहना चाहती थी पर कह नहीं पायी….


दूसरी तरफ …धरवाई के अंदर गलियों से अपनी माँ और बहन का हाथ पकडे शेरदिल तेज़ी से भाग रहा tha…aur उसके पीछे थे बहुत सरे गुंडई जिस गल्ली से मुड़ता वंहा वो नज़र आजाते …..

शेरदिल — जल्दी जल्दी ये चारो तरफ ह आपको छुपने की जगह ढूंढनी hogi….taki आप दोनों वंहा सुरक्षित रहो मैं इनका धयान अपनी तरफ खिंच लूंगा ….

रिफत हफ्ते हुवे - भाई ….जिसने उसदिन बचाया था उससे मदद मांगिये…


शेरदिल — नंबर नाहीइ लिए थे उसके ….

माँ — देख हमे कुछ भी हो जाये पर तू मकसद मत बोलना वडा कर मुझे ….तू चुन चुन कर मरेगा उन सबको….

शेरदिल — माँ कुछ नहीं होगा हमे ….

माँ — वडा कर …मुझे …

अपनी माँ की आँखों mai….gusa देखशेरदिल “वडा ह माँ …अब तुम आगे भागो मैं इन्हे रोकता हु इतना कह वो पीछे मुद गया और गुंडों पर लोहे की रोड से टूट पड़ा 6.5 फ़ीट की हिघ्त और सरीर उसी उसके पिता से विरासत मई मिला था उसका एक वार इतनी तस्कत से पड़ा की सर के अंदर रोड धंस गयी उसने दूसरे को गर्दन से पकड़कर ऊपर उठा लिया और लोहे की रोड निचे जबड़े से घुसकर कर ऊपर सर से बहार निकल दी ..और उसे दूर फेंक दिया और एक के वार से बचते हुवे एक पेट मई पूरी ताकत से पंच मारा ….वो उड़ता हुवा पीछे वालो पर गिरा ….शेर दिल ने एक के पेअर को pakadkar…usko घुमाकर दीवार पे दे मारा उसका सर तरभुज की तरह फैट गया उसका रौद्र रूप देखकर बाकि उलटे पाँव वापस भाग गए …..शेरदिल पलट कर चिल्लाते हुवे भगा maaa…..Rifat…..maaa…par उसे कोई जवाब नहीं मिला तभी दो जाने उसके सामने ए तोह शेरदिल ने एक को गले से पकड़कर ऊपर उठाया और निचे जमीन जोर से पटक दिया ….और दूसरे के सीने पर कसकर लास्ट मरी जिसे वो उड़ता हुवा दीवार तोड़ कर घर मई घुस गया शेरदिल गुसाई से ुभल रहा tha….tabhi उसे आवाज सुनाई दी “ तेरी मेरी मेरे पास ह मुन्ना अब बहार अजा बहुत खेल लिए पकड़म pakdayiii…..agar तू जल्दी आगया तोह तेरी मौत सायद तेरी माँ बहन को बचा ले वर्ण ये कान्हा गयी तू सपने मई भी नहीं जान पायेगा”

शेरदिल का दिल बैठ गया आवाज सुनकर ….


इधर राज कार मई सोचते हुवे“ मुझे टाइम लगेगा …क्या करू “…….राज का दिमाग बहुत तेज़ी से दौड़ रहा था….” कितना वक़्त लगेगा “

मिरतिदूत - हाफ ऑवर मास्टर …..

राज — उसे ऊपर लगाओ


मिर्त्युदूत ने फॉरेन नीली बाटी निकलकर ऊपर लगा dii…neeli बाटती के साईरन बचते हे तरफ़ीक पुलिस के कांस्टेबल ने जल्दी जल्दी ट्रैफिक क्लियर करना सुरु कर दिया ब्लैक फोर्टनेर जो राज के लिए बुलेट प्रूफ सुनील ने बनवायी थी वो किसी व्विप की तरह तरफ़ीक को चीरती हुवी जा रही थी….….

धरवाईई….

10 मिनट बाद शेरदिल सबके सामने आगया….

"तोह तू आहे gaya…..bahut तेज़ भागता ह …."

शेरदिल ने घुटनो पर अपनी माँ और बहन को देखा जिनके होठो के कौनो से खून बाह रहा tha….uski आँखों से गुसाई के और बेबसी से आंसू बाह निकले ….

माँ-- अपना वडा याद रख …वो वडा हमरी मौत से बड़ा ह …..तुजे आज यंहा नहीं मरना ह….

शेरदिल अपनी माँ और बहन की हालत देख गुसाई और तड़प से अंदर हे अंदर जल रहा tha….ek तरफ माँ को दिया वादा उनका मकसद था और दूसरी तरफ ….उसकी माँ और बहन का जीवन था…

“ लगता ह तुजे तेरी माँ सुर बहन का जीवन प्यारा नहीं h…..le जाओ रे इस बुढ़िया को ख़तम कार्डो और इसे जिन्दा रखो ये सेवा करने के काम ायेगीइ….”

शेरदिल दहाड़ उठा …. “आज खुदा कसम ातुम मई से एक भी जिन्दा नहीं बचेगा”

“ सही कहा पर उल्टा कह गया हम तोह जिन्दा बचेंगे पर तू नहीं और तेरी मौत से सबको पता लग जायेगा की हमसे टकराने का अंजाम क्या होता ह ले जाओ मार दो इसे और इसके साथ जो करना ह वो करो “

शेरदिल की माँ और बहन ने शेरदिल को ऐसे देखा जैसे आखिरी बार देख रही हो ….. “ अपना वडा याद रखना बीटा”

गुंडे दोनों को घसीटे हुवे पीछे ले गए …और अपनी माँ बहन को अपनी आँखों के आगे से ओझल होते हे वो शेरदिल किसी घायल शेर की तरह दर्द से दहाड़ता हुवा भीड़ गया सबसे उसके दोनों हाथो मई रोड थी जिसे वो अँधा धुन बरसता जा रहा था ….वो बस कैसे भी अपनी माँ और बहन तक पहुंचना चाहता था पर उसके सामने और उसको घेर कर बहुत सरे गुंडे खड़े थे

अंदर ….. शेरदिल की मास

“ इ खुदा मैंने हमेसा सच्चे दिल से तेरी इबादत की ह न मेरे पति ने न हमने कभी किसी के साथ गलत किया ह मैंने दवा मई भी सबकी भलाई चाही तोह क्या तुजसे मेरी एक मुराद भी पूरी नहीं होगी”


गुंडा “मांगले दवा …..मरने से पहले इतना तोह तेरे लिए कर हे सकते ह …और तू जानेमन चिंता मत कर तू मारेगी nahi….tu चाहे रोज दवा मांगना है है है ….”

माँ “ मौत तुम्हारी भी आसान नहीं होगी खुदा ने तुम्हारी मौत भी लिख दी ह …वो कभी अपने नेक बन्दों को अकेला नहीं छोड़ ता ह”

शेरदिल की माँ की बात सुनकर सब जोर से हसने लगे …..उनसब की हंसी से रिफत दर से रोने लगी ….

तभी उन सबकी हंसी को चीरती हुवी आवाज आयी…

“ माँ जो कहती ह वो सच हे कहती h…..khuda कभी अपने नेक बन्दों को अकेला नहीं छोड़ता ह ….”

सभी ने एक साथ पीछे मुड़कर देखा तोह राज खड़ा था……


“ कौन ह बे तू”

“मैं कौन हु वो जरुरी नहीं ह जरुरी ये ह की माँ ने क्या कहा …उन्होंने कहा की तुम्हारी मौत बहुत बुरी होगी ….और सच बोलू तुम्हारी मौत नहीं तुम्हारी जिंदगी बहुत बुरी होगी …मरने तक सोचते तोह मैं तुम सबको मार देता पर …किसी लड़की की इज़्ज़त से खेलना ,जबरदस्ती करना ी हेट आल थी थिंग्स ohhh…tum तोह गंवार हो …”

राज की बात सुनकर गुंडे गुसाई से उबाल रहे थे तोह माँ और रिफत राज को देख रही थी…

Bahar….sherdil को जोर से चीखे सुनाई देने लगी उसने पीछे की तरफ देखा तोह उसको घेर कर खड़े गुंडे को भी पीछे से आवाज सुनाई दी उन्होंने ने भी पीछे मुड़कर देखा तोह ….एक 7 फ़ीट का इंसान हाथ मई तलवार लिए गाजर मूली की तरह सबको कटे जा रहा tha….sherdil ने जब उसे देखा तोह उसकी साँस मई साँस आगयी और वो भी पूरी जान लगाकर सबको मरने लगा अब उसके वार सटीक हो गए थे उसे राज की बाते याद आने लगी उसका हार वार घुटने पर तोह सर पर हो रहा था ..और कुछ हे दिएर मई सरे ढेर पड़े the…..wo निचे पड़े हुवे गुंडों के सर फोड़ने लगा…


लीडर “ तू गया सेल तेरी माँ और बहन मारेंगी पहले …” इतना कह वो अंदर की तरफ रिफत और माँ को मरने भगा ….

शेरदिल भी उसके पीछे भगा तोह मित्युदूत ने रोक दिया ….शेरदिल गुसाई से देखने लगा ….

मितिदूत “यंहा उन्हें आसान मौत मिलती पर अंदर वो जिन्दा तोह रहेंगे पर मौत से बुरी जिंदगी जियेंगे….”

शेरदिल हैरानी से देखने लगा …..

अंदर….

जैसे हे लीडर पंहुचा उसकी बुरी तरह फैट गयी उसके आदमी फर्श पर पड़े हुवे थे और एक शख्स उनकी उंगलिया काट रहा था….

लीडर तू कौन ह बे …

“ मैं कौन हु जरुरी नहीं ह जरुरी ह वो पूरा करना जो माँ ने कहा … पर तू कौन ह”

रिफत “ भाई जान यही वो जिसके कहने पर सब हुवा ह “

राज “ तू बहार से जिन्दा अंदर आगया चल मुझे मर दे और यंहा जो चाहे वो करले “

लीडर “ मारो सेल को”

खच खच खछः की आवाज गूंज हुवी और चीख पुकार मच गयीईइ….5 सेकंड मई ह किसी का हाथ तोह किसी का पेअर कटा हुवा निचे पड़ा था….

लीडर “ इतना हे बड़ा तुर्रमखां ह तोह हाथो सा लड़ फिर देखता हु तुजे “

राज “चल तेरी ये खाविश पूरी करि इतना कह राज ने डैगर को साफ़ किया और पीठ मई लगा लिया…

लीडर ने जैसे हे किक मरी राज ने अपना घुटना उसके घुटने के हल्का सा साइड मई दे मारा कड़क के साथ वो टूट गया फिर पेअर के दूसरे घुटने पर किक दे mari….leader चीख उठा ….

तभी बहार से पुलिस की गाड़ियों की आवाज गूंजने लग गयी पुलिस की कई बोलेरो एक के बाद एक आकर बहार रुकी ….

शेरदिल ने आगे बढ़ने की कोसिस की तोह …

मित्युदूत — हमे अभी निकलना होगा अंदर मास्टर संभल लेंगे…..

शेरदिल पर माँ और बहन..

मित्युदूत — मास्टर ह जल्दी चलो…

अंदर राज लीडर की एक एक हड़िया तोड़ रहा था….

राज “ लो माँ खुदा ने आपकी फरियाद सुनली अगर अभी भी कोई कमी हो तोह बताओ अपने जो दवा मांगी उस साई बुरी सजा मिली ह इन्हे ”

शेरदिल की माँ ने अपने दोनों हाथो को उठाकर राज को दवा डीई..

तभी कई सरे पुलिस वाले घर के अंदर agaye….aur अंदर का सन ढक उनकी हालत ख़राब हो गयी और कईयों ने उलटी भी कर दी….

लीडर “ताम्बे शूट कर इसे “

राज “ ताम्बे मतलब तेरी जबान अभी भी चल रही ह “ इतना कह राज ने उसकी जबान काट दी”

ैप — रूक जाओ वर्ण शूट कर दूंगा…

राज खड़ा होकर ताम्बे के पास गया “ इतनी लाशे देखने के बाद तुजे क्या लगता ह कौन हु मैं ….मेरी टी शिर पर एक खरोच तेरे पुरे खानदान को दुनिया से गायब कर देगी यकीन नहीं कोसिस करले …तेरे ये जो ताम्बे के टारे चमक रहे ह वो भी नहीं बचा पाएंगे”

ैप ताम्बे “ धमकी देता ह सेल”

राज , “ ताम्बे ताम्बे लगता ह तुजे तेरे परिवार की परवाह नहीं h…..tu तेरे कमिश्नर को फ़ोन लगा और मेरी बात करा वर्ण अगले एक ऑवर मई …जो होगा तू उसे सह नहीं पायेगा तू इनसे पैसे खाकर चुप चाप ठाणे मई बैठा रहा और आखिर मई जब पास पलटा जल्दी से आगया “

ताम्बे को गुसा तोह बहुत आया पर उसने कमिश्नर को साडी बात batayiii…commissioner ने राज से बात kari….phir राज ने वापस फ़ोन दे दिया …..

राज पीछे मुड़कर “ आप दोनों को अभी एक फोर्टनेर लेने आएगी उसमे चलो जाना “

रिफत कुछ कहना चाहती थी पर उसकी माँ ने उसे रोक दिया और है मई गर्दन हिला दी ..…..राज पुलिस की गाड़ी मई बैठकर पुलिस स्टेशन आगया और आते हे ताम्बे ने उसे लॉक उप मई दाल दिया …

ताम्बे — इसके ऊपर मर्डर का केस बना सरे प्रूफ ह…..

इंस्पेक्टर — पर कमिश्नर साहब …

ताम्बे — मैं देख लूंगा उन्हें वैसे भी क्रिमिनल्स से नफरत ह वो किसी खुनी को माफ़ नहीं करते ह….

इंस्पेक्टर — यस सर और फिर बना दी

ताम्बे — अब तू कैसे बचेगा और इसका ये नकाब उतरो मैं भी देखु ये कौन ह साला…

राज — ताम्बे आग से मत खेल …..

ताम्बे — निकालो सेल का मास्क मैं भी देखु इसके पीछे कौन हरामी h…aj इसकी साडी अकड़ इसके पिछवाड़े मई घुसा दूंगा…

एक साथ कई पुलिस वाले अंदर घुसाई और राज की तरफ आगे बढे कुछ दिएर बाद हे सभी फर्श पर टूटे हुवे हाथो के साथ निचे दर्द मई कराहते हुवे पड़े थे …

ताम्बे ने गन निकली और राज पर तान दी …

राज “ न न ऐसी गलती मत करना ….तू मुझे यंहा नहीं लाया ह मैं यंहा खुद यंहा आया हु “

ताम्बे - तेरा चेहरा तोह मैं देख कर रहूँगा ……

तभी …..पुलिस की एक साथ कई गाड़िया अंदर आकर रुकी और उसमे से कमिश्नर उतर कर अंदर आया …

कमिश्नर - ताम्बे ये क्या कर रहे हो तुम….

ताम्बे — अंदर देखिये सर सबके हाथ तोड़ दिए ह इसने ….

कमिश्नर - अपनी गन निचे karo….abhi के अभी….

ताम्बे ने गन नीचे करि तोह…. कमिश्नर राज के पास पंहुचा …

राज — डील करे…

कमिश्नर — मैं क्रिमिनल्स के साथ डील नहीं करता hu….aur तुमने तोह आज सबके सामने कितने को मार दिया ह….

वो आगे और कुछ कहता राज बोल उठा …

राज “पता ह मुझे लगा आप बहुत समझदार हो पर अब मुझे आपसे कोई डील नहीं करनी ह और ट्रस्ट में आज के बाद आपको हर पल डील न करने का सिर्फ अफसोस हे होगा की क्यों उस दिन मैंने उसकी बात नहीं सुनी”

कमिश्नर — ताम्बे …प्रूफ कलेक्ट करो केस बनाओ और कोर्ट मई इसे पेश करो

ताम्बे — ख़ुशी के साथ सलूट मरते हुवे यस सर…..

वो आगे कोई और एक्शन लेता तभी ….एक वाइट फोर्टनेर बहार आकर रुकी …..उसमे से एक हल्क जैसा बाँदा उतारकर आया …..और सीधा कमिश्नर के पास गया …

शख्स — थिस इस फॉर यू….

कमिश्नर - हु र यू…

शख्स ने अपना ी कार्ड निकल कर कमिश्नर को दिया जिस पर लिखा हुवा था “सेंट्रल पुलिस… स्पेशल अफसर अभय सिंह”

कमिश्नर ने लिफाफे के अंदर लेटर को पड़ा था उसके चेहरे पर सिकन आगयी ….वो सोच मई पढ़ गया..

अभय — सोचने समझने के लिए आपके पास वक़्त हे वक़्त ह उन्हें बहार निकालिये …

कमिश्नर — गुसाई से ताम्बे ….

ताम्बे ने फटाफट लॉक उप खोला ….

राज उसके पास से निकलते हु …. “मैं कभी झूट नहीं बोलता हु ….या तोह तू अभी खुदको गोली मार लेना वर्ण तेरे घर पहुंचने से पहले तेरे बीवी बचो को मैं मार दूंगा “

ताम्बे वही घुटनो के बल बैठ गया…..

राज “ आपकी ईमानदारी के किसी बहुत सुने थे सोचा था …मिलकर काम करेंगे पर दुख हुवा आपकी सचाई जानकार …..”

कमिश्नर - मैं …

राज मैं ये वो सबका टाइम गया कमिश्नर साहब यू जस्ट मिस्ड it…..main वही शख्स हु जिसकी जानकारी आप लेने ए थे …. जिसके बारे मई आपको मैंने बताया था …

राज तोह चला गया पर कमिश्नर सर पकड़ कर खड़ा रहा gaya….wo खुदसे हे बड़बड़ाता रहा ये निर्वाण ह ….ये ….Nirwana….h….

बहार ….

राज — अभय साडी तैयारियां कैसी चल रही ह…

अभय — मुस्कराकर सब जैसा अपने चाहा वैसा हे हो रहा ह….

राज — वक़्त ारः ह अभय …..जल्द हे हकीकत सामने आने वाली h…phir तुम्हे मौका मिलेगा बदले का…

अभय — इन्ही हाथ से cheerdunga…..sabko…

लाइक्स और रेवोएस मई कंजूसी नहीं रखने का 6.1क वर्ड्स का ह…..


आज के लिए इतना हे …..
 
अपडेट 179

हकीकत

War……countdown……begins

17 ..उपदेट्स तू लेफ्ट

अनु घर के अंदर परेशां होकर घूम रही थी … “मैं उसके लिए क्यों परेशां वो तोह प्यार नहीं करता ह न मुझे …..या इसलिए परेशां हु की वो मुझे प्यार करता ह…..” अनु बहुत परेशां थी क्योकि राज उसे साफ़ कह चूका था की वो उसे सच मई बहुत प्यार करता ह पर बहन की नज़र से ….उसे उसका उसे लड़ना उसे तैसे करना ाचा लगता ह ….अनु अभी इसी उधेड़ भून मई थी ki….uski माँ रूम मई agayiii…..aur अपनी बेटी को यु परेशां होता देख कर …

अनु माँ “ राज से जगदा हो गया ह क्या अनु”

अनु “माँ ap….nahi नहीं उस इडियट से तोह रोज हे जगदा रहता ह…”

अनु माँ मुस्कराकर - बेटी तुजे शादी के लिए पैसे वाले तोह बहुत मिल जायेंगे पर जो तेरी कदर करे वो कोई लाखो करोड़ो मई एक हे milega..….aur राज उन्ही मई से एक ह …जब तू नशे मई पार्टी करके सो गयी थी वो तुजे लेकर घर aya….warna आज के लड़के फायदा पहले उठाते h….par राज को तेरे पैसो मई कोई दिलचस्पी नहीं h….tere पापा के पास पैसा हे पैसा ह पर समय …वो बिलकुल नहीं ह ..मुझे तोह याद भी नहीं ह की आखिरी बार हम बहार साथ घूमने भी कब गए थे ….anuuuu….paiso से जायदा प्यार जरुरी ह ….वर्ण पैसा सिर्फ दूरिया हे लता ह….

अनु अपनी माँ की बाते धयान से सुनती रही और फिर बोली “ ाक्टुअलय माँ वो राज मुझे अपने साथ विरोध आशाराम लेकर गया tha….uska इस दुनिया मई कोई नहीं ह तोह उन्हें हे अपने दादा दादी मंटा ह वो और उन बुजुर्गो का राज के प्रति प्यार देख कर मेरा दिल भी भावुक हो gaya….muje भी लगा खास मेरे भी दादा दादी नाना नानी होते मैं भी किसी को चाचा मां कह पति मेरे भी भाई और बहन होते ….

अनु की बाते सुन अनु की माँ भावुक हो गयी वो बोलना तोह चाहती थी पर बोल नहीं पायी ….पर अनु ने उनके चेहरे पर आरही सिकन और हाव भाव को देख अंदाज़ा लगा लिया की राज सही ह…..

अनु माँ “ चल ये सब छोड़ तू कहे तोह राज के साथ तेरी शादी की बात चलौ तेरे पापा से …वो अकेला ह हमरे साथ हे रहेगा मुझे घर jamayi…aur बीटा मिल जायेगा और तुजे दूर भी नहीं जाना पड़ेगा….

अनु — माँ इतनी जल्दी क्या ह अभी जान तोह लू उसे वैसे माँ अगले मंथ मेरे सेमेस्टर एग्जाम स्टार्ट हो रहे ह मैं उसी घर बुला लू पढ़ाई भी हो जाएगी और उसे अचे से जान भी लुंगी….

अनु माँ मुस्कराकर— सिर्फ पढ़ाई हे करनी h….warna आजकल के बचे काफी एडवांस ह…

अनु — माँ आप…

अनु माँ — ok ok मैं तुम्हारे पापा से पूछूँगी …

अनु — वो मन करदेंगे माँ….

अनु माँ सोचते हुवे — वैसे वो किसी मीटिंग का जिक्र कर रहे the…agle मंथ जाना का … तब तू बुला लेना…….

अनु — लव ु माँ….

अनु माँ — जोडिया किस्मत से हे मिलती ह वैसे थैंक यू वो घर रहेगा इसलिए कह रही ह या इतना कह मुस्कारने लगी और बहार आगयी..

माँ के जाते हे “ अब क्या हे कहु माँ आपसे सोचा तोह बहुत कुछ था पर वो गधा… भाई निकला ….खैर अब तू क्या कर सकती ह anu….teri लाइफ सूचक हो gayiii…kanha तू क्या करने के सपने सोच रही thii….chi ची अनु तू ये क्या बोलने लगी ….बेवक़ूफ़ लड़की वो तेरा भाई ह अब ..….अब ऐसा सोचना भी पाप ह तेरे लिए……..

उधर कमिश्नर …ठाणे मई 3 ऑवर तक सोच मई डूबा raha….usai वाकई अब बहुत पछतावा हो रहा था की उसने क्यों डील नहीं करि पहले लगा उस साई वो शख्स झूट बोल रहा ह पर जब उसने क्राइम सन को देख कर निर्वाण की स्टाइल और सन की सिमिलॅरिटी को चेक किया तोह उसे बहुत कुछ कॉमन मिल गया ….पर अब वो कैसे धुंध सकता था तभी उसे स्पेशल अफसर अभय सिंह का नाम याद आया उसने अपनी पूरी एप्रोच लगा दी अभय तक पहुंचने के लिए और लास्ट मई रात होते होते वो कांटेक्ट करता बनता हुवा चीफ तक पहुंच गया ….

इन कॉल……

कमिश्नर — Hello मैं मुम्बई कमिश्नर बोल रहा हु

चेइफ़ — kahiye….kaise याद किया..

कमिश्नर - मुझे स्पेशल अफसर अभय सिंह से मिलना ह…

चेइफ़ — स्पेशल अफसर अभय सिंह वो तोह सीक्रेट मिशन पर ह और जब तक वो खुद न चाहे उसे तोह sirf….phir hadbadakar…ap कैसे जानते ह अभय को…

फिर कमिश्नर ने साडी बात चीफ को बता दी ….

चेइफ़ लम्बी सांस छोड़कर— आप नहीं जानते की अपने क्या कर दिया ….वो वैसे हे पुलिस के घूसखोरो से नफरत करता ह और अपने उस ैप को सपोर्ट देकर उसे नाराज कर दिया h…waise वो ैप जिन्दा ह या मर गया क्योकि अगर नहीं मारा ह तोह उसकी जिंदगी बहुत दर्द भरी होने वाली ह

कमिश्नर— उसने घर के अंदर सुइड कर्ली ह……

चीफ — है है है आसान मौत मर गया ….वैसे आपकी imandari…ke बारे मई अभय ने उसे बताया hoga….aur इसलिए उसने आपसे मिलने की ीचा ज़ाहिर की होगी वर्ण निर्वाण को जब कोई धुंध हे नहीं पाया तोह उसे पकड़ना बहुत दूर की बात ह कमिशनरसाहब तूफ़ान से बचा करते ह उसे उकसाया नहीं करते h…you..JUST मिस्ड…….

कमिश्नर गहरी साँस छोड़कर एक आखिरी सवाल — वो मुम्बई क्यों ह….

चेइफ़ जोर जोर से हसने लगे ….फिर एक दम से सीरियस होकर “सुनामी के लिए जिसमे जितने भरस्ट पुलिस अफसर पॉलिटिशियन शामिल ह सब साफ़ हो जायेंगे अब आप पर देपेंद करता ह आप किसकी तरफ ह मेरी एक राये ह की कभी कभी सिस्टम से बहार निकलना पड़ता ह जुर्म को मिटने के लिए और आपकी जानकारी के लिए इतना बता दू agar…ek वंहा पहुंच गया ह तोह ….खेल सुरु होने वाला h….uske साथी कहो या उसके चने वाले या चाहे उसके बॉडीगॉर्ड वो भी वंहा जल्द हे पहुंच जायेंगे …..और है एक बात बताना भूल गया उन चाहने वालो मई मैं भी hu….jo उसके एक इशारे पर मतलब एक इशारे पर किसी को भी मार सकते h….Bus दवा करना उसका दूसरा चेहरा निर्वाण बहार नहीं ए वर्ण कत्ले आम बहुत होगा और सबूत एक नहीं मिलेगा बूत ी म suprise…ki उसने नार्मल रूप मई बिना किसी मार्केट के निर्वाण बनकर आपसे मिलना chuna…..ap बहुत बड़ी जुंग के बिच मई हो जितनी जल्दी अपनी साइड चुन लोगो आपके लिए ाचा होगा …और आपके चाहने वाले के लिए…

कॉल कट होते हे कमिश्नर का दिल तेज़ी से धधकने लगा वो खुद से हे बोलै उसके चाहने वाले भी जल्द पहुंच जायेंगे मतलब वो …..उसकी आंखे हैरानी से फ़ैल gayi….wo खुद से हे बोलै आखिर क्या करने वाले हो तुम….…

राज ने क्या kiya….thane से निकलने के बाद….

राज — खाना साथ कहते ह अभय ….

अभय — नहीं राज bhai….khana हम साथ तभी खाएंगे जब उस किलर आर्गेनाइजेशन का नाम इस दुनिया से उखड फेंकेंगे तब मैं श्रुती और अज्जू और सोनाली मम शिवानी मम और आप सब साथ मई खाना खाएंगे…

राज - श्रुति कैसी ह….

अभय — अज्जू का धयान रखती h….aur मार्टिकल आर्ट्स की प्रैक्टिस करती h….wo अज्जू के शिव किसी से बात नहीं करती h….aur अज्जू का आपको पता ह वो अभी तक 50 परसेंट हे रिकवर हुवा h…sab मेरी गलती थी मुझे अलर्ट रहना चाहिए था सुनील भाई ने कहा था की उसने हमे देख लिया h…..par हम हे लापरवाह हो गए…

राज — अभय दुखी मत होवो ….जो बीत गया वो बदला नहीं जा सकता ह….

अभय — सही कहा राज भाई ये पेन ड्राइव लीजिये इसमे अपने जो माँगा सब ह …..मैं जाता हु …..

राज — तीख ह…

अभय के जाते हे राज ने टैक्सी पकड़ी और सीधा पहुंच गया 10 मंजिला ईमारत के सामने …..और लिफ्ट लेकर वो एक फ्लैट के सामने पंहुचा …..

बहार बेल्ल की आवाज सून अंदर बैठी रिफत और उसकी माँ दर गयी उसकी माँ ने हीमत कर गेट के होल से बहार देखा तोह राज खड़ा था जैसी वो पहचान नहीं पायी बहार खड़ा राज भी समाज रहा था इसलिए उसने कोई जल्द बाज़ी नहीं दिखाई और कुछ दिएर इंतज़ार kiya….kuch दिएर बाद दूर ओपन हुवा …

रिफत माँ — कौन हो बीटा ….

राज — इतनी बड़ी सजा दिलवा दी और अब बेटे को पहचान नहीं रही ह….

रिफत की माँ के चेहरे पर मुस्कान agayiii….usne जल्दी से साइड हटकर राज को अंदर आने को कहा …..

रिफत अभी दरी और धयान से राज को देख रही थी…..

रिफत की माँ कुछ बोलना चाहती थी पर राज ने रोक दिया…

राज “ शेर की बहन शेरनी होती ह तुम्हारे भाई का जिगर तोह शेर का ह पर मुझे नहीं पता था की उसकी बहन डरपोक लोमड़ी hogi…..jo दूर बेल्ल से हे दर जाएगी

रिफत-- main…darpok नहीं हु…..

राज “ तोह आप हमे बताये की फिर माँ को दरवाजा क्यों खोलने दिया किचन से एक चाकू हाथ मई उठाकर खुद खोलती और खतरा होने पर उस चाकू से तब तक वार करती जब तक खतरा ताल नहीं जाता…”

रिफत क्या हे बोलती वो चुप हो गयी और अपनी माँ के भागकर गले लग गयी…

माँ — ये वही ह जिन्होंने तेरे भाई की और हमारी जान बचायी थी….

रिफत धयान से राज को देखते हुवे “ तोह आप हमारे भाई से फाइट करने वाले ह और फाइट मई हमारे भाई को मार देंगे इसीलिए बचा रहे ह हमे”

राज के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आगयी “ फाइट करने वाले तोह ह और है मैं उसे मरने वाला भी hu…agar आपको पसंद नहीं तोह नहीं करेंगे हम फाइट ”

रिफत के चेहरे पर मुस्कान आगयी “सच मई अगर हम मन कर दे तोह आप नहीं फाइट करेंगे और हमारे भाई को कुछ नहीं करेंगे “

राज “ बिलकुल नहीं par…….ek बात…… नहीं 2 baat…..manni पड़ेंगी हमारी”

रिफत गहरी सोच मई डूब गयी…

राज “ बस इतना हे प्यार ह भाई से”

रिफत “ हमे आपकी हर बात मंजूर हम हमरे भाई के लिए कुछ भी कर सकते ह”

राज “ फिर तीख ह तोह पहली बात आपको सेल्फ डिफेन्स सीखना पड़ेगा मंजूर ह और मैं बहुत स्ट्रिक्ट हु पिटाई भी करता हु चाहे लड़का हो या लड़की अगर गलती करता ह “

रिफत “ हम डर्टी नहीं h….hume मंजूर ह”

राज “गोड़ तोह अब दूसरी बात ह ये की तुम्हे मेरे…”

रिफत का दिल जोरो से धड़कने लगा की अब क्या बात कहेगा कंही उसे ….उसके sath…uske दिल मई बहुत उलटे सीधे ख्याल आने

राज “ उल्टा सीधा सोच लिया हो तोह मैं बोलू”

रिफत की माँ के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कराहट thi….rifat भी हड़बड़ा गयी…” है बोलिया न मैंने कब रोका ह आप हे नहीं बोल रहे ह “

राज “ जितनी बार मिलोगी हमे छाए पिलानी होगी खुद बनाकर मजूर …”

रिफत खिलखिलाकर हंस पड़ी …और खुसी से बोली “मुझे दोनों बात मंजूर ह….”

राज तोह फिर माँ को क्यों पकड़ रखा ह तोह पिलाओ छाए या बनानी नहीं आती ह…

रिफत “ सब अत ह मुझे मैं अभी लायी पर यंहा सामान होगा”

राज “ यंहा सब ह और नहीं ह तोह एक लिस्ट बनाओ अभी ऑनलाइन आर्डर दाल देते ह … और भी कोई बहाना ह तोह बना लो “

रिफत मू टेड़ा करके “ हम झूट नहीं बोलते ह “

इतना कह वो तोह चली गयी किचन मई पीछे राज मुस्कुराता रह gaya….aur फिर उसके चेहरे से साडी मुस्कान गायब हो गयी …वो पलटकर बोलै “ मैं आपसे सिर्फ एक सवाल पूछूंगा मुझे उम्मीद ह आप सच बोलेंगी”

रिफत माँ “ पूछो बीटा “

राज “ आपका बीटा पैसो के लिए नहीं करता ह सब ….गरीबो के हुक लिए वो बस्ती मई lada..iska मतलब अपने उसकी परवरिश अछि करि ह…”

रिफत “ हां अपने जो कहा वो सच ह”

राज “ तोह मेरा सवाल ह की ….जब वो लोग आपको ले जा रहे थे अपने कहा था अपना वडा याद रखना ….तोह ऐसा क्या वडा ह जो एक माँ को अपनी बेटी की जिंदगी से भी ज्यादा प्यारा ह”

रिफत की माँ तोह जैम सी गयी राज का सवाल सुनके उसे उम्मीद नहीं थी की राज ये सवाल पूछ lega…..rifat की माँ जमी की जमी रह गयी और काफी दिएर तक ऐसे हे शांति रही तब तक रिफत छाए भी लेकर आगयी…

रिफत ये लीजिये ….मैं आपको क्या मतलब किस नाम से बुलाऊ…

राज छाए का कप हाथ मई लेते हुवे अपने भाई को क्या कह कर बुलाती हो वही बुलाओ….

रिफत मुस्कारने लगी “ मैं भाई को भाई हे बुलाती हु…”

राज “ तोह फिर आज से तुम्हारे 2 भाई हो गए देख लेना कही तुम्हारा भाई गुसा न हो जाये की तुमने एक और भाई बना लिया “

रिफत नहीं होंगे हे हे हे वो बहुत अचे ह बस गुसा बहुत जल्दी आजाता ह …पर ये माँ को क्या हुवा

राज “ मेरे सवाल का जवाब धुंध रही ह…..

रिफत की माँ गहरी सोच मई रही फिर बोली “…वडा वडा वडा उसने तीन बार बोलै फिर boli….ye वडा ह मेरे पति और भाई की मौत का ये वडा ह मेरी भाभी और उसके बचे की मौत का …ये वडा h….hamare हँसते खेलते परिवार को उजड़ने वाले हत्यारो की मौत का ….मैंने अपने बेटे को बचपन से सिर्फ बदले के लिए तैयार किया ह अकेले ….ताकि वो सबकी मौत का बदला ले”

राज - आज के हालत देखकर आपको क्या लगा अगर आपका दुश्मन आज वाले लोगो से कमजोर ह तोह यकीनन आपका बदला पूरा होगा …और अगर वो ताकतवर ह तोह आप अपने बेटे को भी खो देंगी फिर वडा कैसे पूरा होगा और परिणाम का सोचा ह अपने ”

रिफत माँ “ परिणाम के बारे मई मुझे सब पता ह और इसके लिए हम तीनो तैयार ह”

राज “ आखिर कौन ह आपका धुंधमान मुझे बताये सायद मैं आपकी कोई मदद कर पाव”

रिफत माँ “ बीटा मुझे पता ह तुम बहुत ताकतवर हो तुम्हारी पहुंच भी ऊँची ह पर सच बोलू मुझे भी नहीं पता ह और इसी सवाल के जवाब मई मैं यंहा वंहा ढूंढ़ती कितने हे सालो से घूम रही हु”

राज “ तोह आपकी फॅमिली के बारे मई बताईये ….”

रिफत माँ “ हमारा परिवार बीटा आज तक पूरी बाते मैंने अपने बेटे को भी नहीं बताई पर आज तुम दोनों को bataungi…..aj से 20 साल पहले उत्तरप्रदेश के गाँव मई हमरा घर हुवा करता था मेरे पति फ़ौज मई नौकरी करते the…unki पोस्टिंग दिल्ली मई थी….. हमारी जिंदगी बहुत अछि गुजर रही थी मैं भी उनके साथ हे दिल्ली रहती thi….kanhi कोई दिकत नहीं थी …मैं उस वक़्त पेट से थी शेरदिल यानि अहसान मेरे पेट मई था ….जनम का समय नज़दीक था मुझे पड़ोस की हे महिला हॉस्पिटल ले कर जा रही thi…tabhi दंगे सुरु हो गए थे सब कुछ जाम हो गया था हम बिच मई बुरी तरह फंस गए और मेरे पेट मई दर्द भी सुरु हो गया …मुझे हमारे बचने की कोई उम्मीद नहीं thi…par उसपल मई मेरा मू बोलै भाई पहली बार मुझसे मिला ….वो हमरी मौत और मेरे बिच मई खड़ा हो गया ….अकेला सिर्फ अकेला निहथ्स सब के सामने खड़ा raha…sher जैसा कलेजा …पहाड़ की तरह अटल …जिसे तूफ़ान से भी हिलाया नहीं जा sake…Koyi भी हिला नहीं सका उसे …..इंसानियत की जीती जगती मिसाल …मुझे और मेरे बचे को उसने उस दिन अकेले अपने दम पर दंगाईयो के बिच से bachaya….aur जब हम हॉस्पिटल पहुंचे तब पहली बार मैंने जाना की वो कोई आम आदमी नहीं ह कितने हे लोग उसके आगे हाथ जोड़ रहे the…jab अहसान इस दुनिया मई आया तोह मैंने उसका नाम अहसान रखा तब उन्होंने कहा की ये बड़ा होकर अपनी सचाई आचायी से सबका दिल जीतेगा …..ये मौत से लड़कर जीता ह ये एक शेर की तरह जियेगा ये एक शेरदिल banega…..isliye इसका प्यार से नाम शेरदिल रखा ….कुछ समय बाद हमरी जिंदगी मई बुरी खबर आयी मेरे पति को झूठे इल्जाम लगा कर फौज से निकल दिया …और वो सब कुछ छोड़ दुखी दिल से घर आगये उनके लिए उनके देश से बढ़कर कुछ नहीं tha..wo बहुत जायदा दुखी रहने लगे तब मैंने उन्हें बहुत समझाया और पर हमेसा एक हे बात कहते थे

अली “ सिर्फ इसलिए की मैं एक मुसलमान हु सिर्फ इसलिए मुझे निकल दिया मेरी बातो पर यकीं नहीं kiya….are….mere खून से पूछो उसमे देखो सिर्फ देशभक्ति ह …अकेले अकेले अपने दोनों हाथ से मसलकर मार सकता हु बहुतो को”

उनको मैं और टूट ते नहीं देख सकती thi…isliye मैंने अपने मू बोले भाई को बुलाया …जब मेरे पति को पता चला वो हिन्दू ह तोह वो नाराज हो गए..

अली “ चले जाओ तुम और ख़बरदार जो दुबारा यंहा दिखे तोह तुम्हरा अहसान ह मुज पर इसलिए जिन्दा छोड़ रहा हु”

पता ह तब उन्होंने क्या कहा ….उन्होंने कहा “ मैंने सुना था की आप बोलते हो देश भक्ति मेरे खून मई h…aur अभी मैं जिस से मिल रहा हु वो तोह हिन्दू मुस्लिम कर रहा h…toh मैं ये समझू की आप सिर्फ बाटे हे करते ह”

अली “ मेरी हर बात सच्ची ह”

भाई “ तोह फिर आपको ये पता होना चाहिए ….जब मैंने आपकी पत्नी और मेरी बहन को बचाया तब मैंने बहुतो को मारा कौन हिन्दू कौन मुस्लिम मुझे नहीं पता और न मुझे पता था की ये मेरी बहन एक मुस्लिम ह… मैं एक निर्दोष को नहीं मरने दे सकता था …और आप तोह एक फौजी ह जिसे यशी सिखाया जाता ह की देश की सेवा और सुरक्षा करे चाहे धुसमान कोई भी हो उसे मार de…..sab एक जैसे नहीं होते h…ap सिर्फ मेरे साथ एक हफ्ते बिना किसी शर्त रहिये आपको कुछ नहीं करना ह बस देखना फिर आपको पता चल जायेगा सब एक जैसे नहीं होते ह….“

अली गहरी संसचोद्कर तीख ह

रिफत माँ “ और बस तब से मेरे पति और भाई एक मिसाल बन गए ….उनकी दोस्ती धरम से परे thi…mere पति के भाई भी इसी नेकी की रह मई शामिल हो गए वो हमारे पुरे परिवार की सुरक्षा करते और वो दोनों अन्याय के विरुद्ध लड़ते …

राज “ सचाई के दुश्मन बहुत होते ह …”

रिफत माँ — है बीटा पर वो दोनों बहुत समझदार थे मैं आजतक नहीं समाज पायी कैसे कोई उन्हें मार सकता ह मेरे पति बहुत ताकत वार थे और भाई के साथ रह कर वो और अचे से लड़ना सिख गए थे और मेरे भाई तोह अकेले 100 पर भरी पद जाये ….

राज “ क्या नाम था आपके पति का ….”

डिंग dong…….gate की दूत बेल्ल बजी….

राज “ मैं देखता हु”

राज ने बहार से दूर खोला तोह खूब सारा घर का सामान tha….raj के चेहरे पर मुस्कराहट agayi…kyoki उसी पता था ये सब अनिरुद्ध अंकल ने भिजवाया h…wo पलटकर “ लो आगया सब सामान …अब तोह दुबारा बहाने नहीं मरोगी…

रिफत भाई मई बहाने नहीं मरती हु..

राज “ तीख तीख ह जाओ इन्हे किचन मई लगा do…..phir रिफत की माँ से है आप बताईये क्या नाम था …”

रिफत माँ “ अली ….”

राज की तोह मणि धड़कन हे रुक गयी उसे ऐसा झटका लगा था की वो बोल नहीं पाया उसे स्टोरी का हरपहलू अपने पिता और चाचा अली से मिलता लग रहा था उसने …..फिर हीमत कर पूछा और आपके भाई का नाम “

रिफत माँ “ सहदेव सिंह”

राज को तोह इतना बड़ा झटका लगा था की वो मनो हिल सा गया ….उसे यकीन नहीं हो रहा था की उसके अली चाचा की फॅमिली जिन्दा ह …..और वो इस वक़्त उसके तीख सामने ह ….

रिफत माँ ….मेरे भाई ने सब दिया l…….hum सब साथ हे रहते थे बस जब ये घटना हुवी मई अपने माँ के पास आयी हुवी thi….khabar मनहूस हे आयी मुझे रिफत और अहसान को लेकर छिपना पड़ा और छिपकर हे तयारी करि और भाई के परिवार को धुनती रही क्योकि मेरे देवर और पति के मरने की खबर फ़ैल चुकी thi….maine थान लिया की मेरे बेटे को इस काबिल बानगी की वो चुन चुन कर बदला लेगा…..

रिफत की माँ बोलती जा रही थी और राज सब कुछ भूलकर उन्हें ख़ुशी के आंसू लिए देख रहा tha…..aur जब उसके इमोशंस कंट्रोल से बहार हो गए तब वो खड़ा होकर बाथरूम की तरफ चला गया और बाथरूम को अंदर से बंद कर liya…..uske चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी…. “ दादाजी मैंने उन्हें ढूंढ लिया ….धुँधलीया दादाजी वो जिन्दा h….ab कुछ तोह सचाई पता लगेगी हमे “राज काफी दिएर बाथ रूम मई रहा और फिर वंही से अनिरुद्ध गोस्वामी से फ़ोन पर बात कर कुछ kaha….aur जब वो बहार आया ….

रिफत माँ “ क्या बात हुवी बीटा “

राज कुछ भी nahi…….ap चलिए मेरे साथ और लोमड़ी तू जल्दी से जो कपडे इनमे से फिट ए पहन ले ….राज दोनों को तैयार करके और अपने साथ लेकर अनिरुद्ध गोस्वामी के ऑफिस के रूफ टॉप पर पहुंच गया जंहा रिफत और उसकी माँ कंफ्यूज थी इतना बड़ा ऑफिस और बिल्डिंग dekhkar….raj के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान अभी तक बरकरार thi….kuch हे पल मई गड़गड़ाहट के साथ हेलीकाप्टर रूफ पर लैंड हुवा…

राज “ माँ चिंता मत करना…… आपकी अग्नि परीक्षा पूरी हुवी और फिर रिफत की तरफ देख कर मुस्कराया और सर पर हाथ फेरा”

रिफत की माँ पूछना बहुत कुछ पिछङा चाहती थी पर पूछ नहीं पायी….

राज “ एक आखिरी सवाल … आखिरी बार आपके भाई और पति से मिलने कौन आया था….

रिफत माँ सोचते हुवे…. “है याद आया रविंदर सिंह”

रिफत की माँ ने पूछ लिया “ तुम कौन हो बीटा”

राज के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आगयी “ वो चिल्लाया आपके भाई का बीटा राज सिंह निर्वाण

रिफत की माँ की आंखे फ़ैल गयी हेलीकाप्टर ऊपर की तरफ उड़ गया और वो ऊपर से निचे की तरफ राज को देखते rahi….uski आँखों मई हैरानी और ख़ुशी के आंसू बाह रहे थे….

दोनों के जाता देख कर ….

राज “रविंदर सिंह ये तोह पापा दोस्त और टीम मई से एक the….toh क्या पापा माँ की मौत से इनका सीधा तालुख ह “

राज ये सोचता हुवा निचे अनिरुद्ध के ऑफिस आगया….

अनिरुद्ध “ रात होने वाली ह अगर काम न हो तोह रात का खाना साथ खाये”

राज “ अंकल एक बात पुछूओ…”

अनिरुद्ध “ बेहिचक जो पूछना ह पूछो”

राज -पापा की इनकम सबसे जायदा किस चीज से होती थी मतलब वो क्या करते थे….

अनिरुद्ध — बीटा तुम्हारे माँ और पापा ने मुझे सिर्फ हॉस्पिटल को सँभालने का जिम्मा दिया था जब तक तुम और ऋचा 21 किए न हो जाये फिर अस पैर लीगल डाक्यूमेंट्स वो तुम दोनों के नाम हो jayega…..wo चाहते थे की तुम दोनों की आगे शादी हो jaye…isliye ये सब उन्होंने तय kiya….aur हॉस्पिटल से उन्हें बहुत अछि इनकम होती थी पर उन्होंने कभी एक रुपया तक नहीं लिया ….और इसके इलावा उनकी एक टीम thi….jo घने जंगलो मई अन्सिएंट जगहों की खोज करते रहते थे और पुराणी चीजों को निकलते थे ताकि ाचा पैसा कमा सके ये 2 तोह मुझे पता ह……..

राज “ पुराणी जगहों पर खुदाई …

अनिरुद्ध — है पता नहीं पर वो जैसे कुछ धुंध रहे the….par क्या ये सिर्फ वो या उनकी टीम हे जानती thi….muje बस इतना हे पता h…ab अगर सहदेव भाई और विद्या भाभी के बारे मई और जानना ह तोह रात को साथ खाना पड़ेगा मंजूर हो तोह बोलो ….

राज — तीख ह जैसा आप चाहे ….

राज ने अपने चेहरे पर वापस मास्क लगा लिया और अनिरुद्ध के साथ ऑफिस से साथ बहार निकल gaya…..aur जब दोनों घर पहुंचे तोह ….पूनम ने दरवाज़ा खोला …” बड़े पापा आप आगये मीटिंग कैसी रही पर आप तोह बोले लेट नाईट हो जाएगी आते आते”

अनिरुद्ध “ सब यही पिच लोगी या इस बड़े बाप को घर के अंदर भी आने डौगी”

पूनम किचन की और जाते हुवे- आईये न मैं छाए और पानी लेकर लाती हु….

अनिरुद्ध — अरे तूफ़ान एक्सप्रेस मेरी भी तोह सुनलिया kar…chaye नहीं खाना हे खाएंगे और राज भी हमारे साथ हे डिनर करेगा….

पूनम के पेअर ठिठक gaye….usne तुरंत पीछे मुड़कर देखा तोह राज उसे देख कर हे मुसकरारहा था…..

पूनम जल्दी से किचन मई बिना रिएक्शन चली गयी….

राज “ अब इसे क्या हुवा अंकल के सामने कुछ और अकेले कुछ और ….सच मई लड़कियों को समझना बहुत मुश्किल ह….

पूनम किचन से “ आप नाहा लीजिये मैं राज जी के लिए जब तक छाए बना देती हु”

अनिरुद्ध - लो भाई घर मई घुसाई नहीं की बेटी के सवाल और आर्डर सुरु हो गए बीवी हो तोह बीवी के आर्डर सुनो ”

राज - दिन भर आर्डर देने के बाद कभी आर्डर लेने भी चाहिए ह…

अनिरुद्ध — तुम बहुत आगे जाओगे बीटा जी ….अरे है ाचा याद दिलाया ….

अनिरुद्ध बोल हे रहे थे की पूनम पीछे से पानी ला रही थी…..

अनिरुद्ध “ बीटा जी मेरी तोह जिंदगी मई एक हे प्यार और एक हे शादी h….tum अपना सोचो तुम्हारी कुंडली मई शादी के बारे मई बताते हुवे पंडितो का सर भी दर्द होने लग गया था…..

राज हैरानी से अनिरुद्ध को देखने लगा …

अनिरुद्ध मुस्कराते हुवे रूम की तरफ चले गए…

पूनम ने जब ये सुना तोह उसका दिल सोच से दुब गया की बड़े पापा क्या बोल तहे ह वो पूछ भी नहीं सकती थी ….तोह अनिरुद्ध के जाते हे

पूनम “ ाचा जी शादी की बड़ी जल्दी ह आपकी अभी उम्र ह पढ़ने की कुछ बनने की“

राज मुस्करा “ मेरी जिंदगी मई कुछ भी सीधे से नहीं होते ह पूनम जी तभी उसने पूनम को छेड़ने के लिए कहा सिवाए एक चीज के”

पूनम “और वो क्या ह”

राज “ एक अछि दोस्त से दोस्ती होने के क्योकि वो खाना हे इतना ाचा बनती ह खुद बा खुद आना पड़ता ह“

पूनम को जैसे हे रीलीज़ हुवा की वो उसी की बात कर रहा ह तोह शर्म और मुस्कराहट उसके चेहरे पर आगयी …और वो वापस किचन मई आगयी …

राज पीछे जोर जोर से हसने लगा पूनम ने झुक कर राज को मुस्कराते हुवे देखा तोह उसका भी दिल ख़ुशी से झूम उठा क्योकि पहली बार उसने राज को इतनी जोर से खिलहिलाकर हँसते हुवे देखा tha….wo खाना बना रही तभी अनिरुद्ध भी आकर सोफे पर बैठ गए…

ीुध —तोह पूछो राज और क्या जाना चाहते हो….

पूनम भी झुक कर साडी बाते सून रही थी…

राज — क्या माँ पापा ने कभी आपसे मेरे नाना नानी या फॅमिली का जिक्र किया ….

अनिरुद्ध — तुम्हारे पापा ने तोह कभी नहीं किया पर तुम्हारी माँ जिक्र करती थी की उनके 4 भाई ह और 2 बहन ह या थी ये मुझे नहीं पता पर वो सबका धयान रखती थी और खासकर तुम्हारे नाना नानी की जान थी…

राज के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी…

अनिरुद्ध — और एक मजे की बात सुनोगे …तुम्हे हंसी आएगी एक बार जब हम उनके घर गए यानि तुम्हारे घर गए हुवे थे तब तुम्हारे पापा अपने साथ वालो से बहुत जरुरी बात कर रहे थे …पर तुम्हारी माँ ने सिर्फ इतना हे कहा था खीर तैयार हो गयी ह चलो ाजाओ सभी और बस फिर kya….sabhi तुम्हारे पापा को अकेला छोड़ खाने के लिए दौड़ पड़े the…..tumhare पापा हैरान रह गए थे …और तुम्हारी माँ उनको देख जोर जोर से हंसती रही …..सभी तुम्हारी माँ की तुम्हारे पापा से जायदा बात मानते the…ek किस्सा सुनाता हु ….तुम्हारे पापा अली भाई के साथ उत्तरप्रदेश गए हुवे तब ….दिल्ली के होम मिनिस्टर जिसने तुम्हारे पापा के दुश्मन से पैसे खा लिए थे उसने तुम्हारे पापा को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस भेजही पर तुम्हारे पापा घर पर थे नहीं …..कुदरती उस दिन विद्या हॉस्पिटल की जमीन फाइनल करने के लिए मैं भी घर आया हुवा था …मैंने इतनी पुलिस वालो को देखा तोह सोच मई रह गया ….ैप चिल्ला कर कह रहा था सहदेव को बहार भेजो वर्ण हमे लाठी चार्ज करना होगा जो तुम सब के लिए ाचा नहीं होगा पर तुम्हारे पापा घर होते तोह एते …..और तुम्हारे पापा के साथियो ने पुलिस तोह दूर उनके जुताई को भी घर के गेट के अंदर नहीं आने दिया था …पर पुलिस को आर्डर थे कमिश्नर ke…..tumhare बड़े पापा जोगिन्दर सिंह ने कमिश्नर तक को भी समझाया पर मिनिस्टर के आगे किसकी चलनी थी …कमिश्नर भी पैसे खाकर बैठा tha……tab तुम्हारी माँ अंदर से बहार आयी …..और तुम्हारी माँ को सभी लोग देवी की तरह पूजते थे ऐसा सायद हे कोई हो जिनकी वो मदद नहीं करती थी इसलिए जैसे वो घर से बहार निकली ….और पुलिस वालो ने उन्हें साथ चलने को कहा तोह लोग बुरी तरह नाराज हो गए उन्होंने पुलिस की गाड़ियों को जला दिया ….पुलिस वालो की जान बचानी मुश्किल हो गयी …भीड़ ने पुलिस को हे गिरफ्तार कर लिया ….4 दिन और रात तक वो ऐसे गेट पर बैठे रहे भरी पुलिस आयी जबरदस्त झड़प हुवी पर पुलिस को अंदर तक नहीं आने दिया …100 200 पुलिस और सामने हज़ारो की भीड़ क्या कर सकते थे तब चीफ मिनिस्टर को खुद आना पड़ा था …..उन सबकी जान बस तुम्हारी माँ की वजह से नहीं गयी

राज “ फिर पापा कब ए”

अनिरुद्ध “ वो घर नहीं ए पर अगले दिन पूरी दिल्ली ने देखा की ैप को रोड के बिच भगा भगा कर सहदेव भाई ने चप्पलो झतो से मारा …..पूरी दिल्ली मई उसे नंगा दौड़ाया …

राज — कमिश्नर और वो मिनिस्टर…

अनिरुद्ध — जोर जोर से हसने लगे ….

राज क्या हुवा….

अनिरुद्ध —उन दोनों के खाने मई नींद की गोलिया मिला दी और उठाकर उन्हें फिर धीरे से राज के कान मई प्रोस्टीटूटे खाने छोड़ ए ….न्यूज़ और मीडिया ने सुभे उनकी बुरी हालत कर दी और तुम्हारे पापा के लोग पहले हे भीड़ मई मौजूद थे उन्होंने उन्दोनो को कपडे तक नहीं पहनने दिया …..और जब ओफ्फिशलय ससपेंड हुवे तब …..सबके सामने घसीट घसीट कर जान से मार दिया…..

राज — तोह फिर वो माँ को लेकर नाना नानी के पास क्यों नहीं गए कभी….

अनिरुद्ध — गए थे ….पर एक इंसान ने तुम्हारे नाना को पट्टी पढ़ा राखी थी …इसलिए उन्होंने हमेसा तुम्हारे माँ पापा को धिकार diya…..par एक बार बात तब बढ़ गयी जब ….तुम्हारी माँ की शादी जिसे होने वाली थी उसने कहा की “विद्या अगर तुम सहदेव को छोड़कर मेरी हो जाओ तोह हम तुम्हे अपना लेंगे” जिस पर तुम्हारे नाना ने भी हामी भर diii…tumhari माँ के मन को गहरा धक्का लगा …..उन्होंने ऊँची आवाज मई कहा “ पिता ईश्वर का रूप होता ह वो अपनी संतान की ख़ुशी चाहता ह …पर आप अपनी हे बेटी का घर उजाड़ना चाहते ह कैसे पिता ह आप “

तुम्हारे नाना ने भी गुसाई मई विद्या भाभी को थपड मार दिया …

तब तुम्हारे पिता तुम्हारे नाना को बस मरने वाले हे थे की वो इंसान बिच मई आगया और इधर तुम्हारी माँ ने सहदेव भाई को रोक लिया ……बस यही सब ह जो मैं जनता हु …..राज तुम्हारे पापा और माँ के बारे मई…..

ये सब बाते करते करते …उन तीनो ने हे खाना खा लिया था ….और रात के 11 बज रहे थे ……

राज — खाने के लिए थैंक यू सो मच मैं अब चलता हु……

अनिरुद्ध — बीटा दिएर रात हो गयी h…aj तुम्हारा बॉडी गॉर्ड भी साथ नहीं ह …..इसलिए यही रूक jao….subhe चले जाना ये भी तोह तुम्हारा हे घर ह …..पूनम बेटी राज के लिए …..रूम तैयार कार्डो…

पूनम ने राज को कुछ कहने का मौका नहीं दिया — आईये रा जी सब तैयार ह ….

राज को लेकर वो कविता मनीषा जिस रूम मई रूकती ह वंहा पहुंची ….. “ये रहा आपका रूम तभी उसी कुछ याद आया वो बोली राज जी आप अपनी आंखे बंद करिये और जब तक मैं न बोलू आंखे नहीं खोलनी ह….”

राज की आंखे बंद होते हे वो इंटरनल गारमेंट्स जो कविता मनीषा ने खुद के लिए रखे थे उन्हें लेकर तुरंत अपने रूम मई रख आयी “ अब आप आंखे खोल लीजिये”

पूनम “ मैं आपके लिए पानी लाती हु “

राज को वंहा छोड़ वो पानी लेने चली गयी और जल्द हे वापस लौट भी आयी ….राज को फिर से गहरी सोच मई देख कर “ पता ह आपके साथ क्या प्रॉब्लम ह …..”

राज - अरे आप आ भी गयी …

पूनम “ मैं तोह आउंगी हे न ….और आप हमेसा सोचते सोचते इतनी गहराई मई क्यों चले जाते ह”

राज — जब कोई रास्ता नहीं मिलता ह तोह गहराई मई उतरना पड़ता ह पूनम जी …

पूनम और राज की आंखे मिली …तब पूनम बोली “ ाचा मुझे तोह आपकी आँखों ढेरो सवाल दीखते ह पर क्या वाकई हर सवाल का जवाब एक साथ जानना जरुरी ह राज ji….maine बड़े पापा की साडी बाते सुनी ….और उस वक़्त आप बहुत खुस भी the….muje पता ह आप अपने मापापा को बहुत याद करते हो ….पर जितना हम याद करेंगे जितना हम सोचेंगे जितनी जल्दी हम करेंगे हम उतनी हे उलझन मई फंसते जाएंगे क्योकि वजह होती ह जलबाज़ी की वजह से मिलने वाले अधूरे जवाब जो सुकून देने की बजाये दुख उलझन हे देते ह…”

राज पूनम की बात सुन उसकी और देखता रहा …पूनम के चेहरे पर बोलते हुवे भी प्यारी सी मुस्कान thi…Aj पहली बार था जब राज ने बहुत हे धयान से पूनम को देखा था …

पूनम “आपको आपके सभी सवालो के जवाब मिलेंगे राज जी पर …आपको भी एक एक करके हे पहेली को हल करना होगा….. वर्ण सिवाए ढक के कुछ नहीं मिलेगा” पूनम का धयान भी राज पर गया राज को अपनी तरफ ऐसे देखते देख वो भी उसे हे देखने लगी…

पूनम “ ाचा एक बात कहु राज जी मानोगे “

राज “ है “

पूनम “मेरे साथ सिरडी साई बाबा के मंदिर चलेंगे मेरी एक मन्नत थी “

राज “एक दोस्त की इतनी सी ीचा भी कोई पूरी न कर सके वो दोस्त kaisa…tikh ह हम चलेंगे “

पूनम के चेहरे पर आयी मुस्कराहट और ख़ुशी ने राज को कुछ पल के लिए उसमे उसे खोने को मजबूर कर दिया ….आज रात भी जब वो गहरी नींद मई था उसे वही सपना आया …जिसमे लड़की का धुंधला धुंदला चेहरा उसे मुस्कुराता हुवा दिखाई दिया ….और बोली “ बहुत दिएर करदी आने मई” अचानक उसकी नींद टूट गयी……

राज “ आखिर कौन हो तुम क्यों हर बार मेरे सपने मई आती हो”

आज के लिए इतना हे …….


मस्ती मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का क्योकि अब पास्ट के कुछ और राज उजागर होने वाले ह …….
 
अपकमिंग अपडेट ों सैटरडे आफ्टर नून की जगह टुडे आफ्टरनून मई 2 पं से पहले पोस्ट कर दिया जायेगा...

हम तुम..
 
अपडेट फिनिश हो गया ह ....
 
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