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अपडेट 177—ऑब्स्ट्रशन….
War……countdown……begins
19 ..उपदेट्स तू लेफ्ट …..
“ राज राज रुको भी”
राज —क्या हुवा चुड़ैल ….
अनु — तुममम…
राज — भड़क क्यों रही ह ….मज़ाक कर रहा हु …
अनु — वो मैं ये कह रही थी की….
राज — अरे तू तोह शर्माने लेगी ….जैसे हम …
अनु — की की कितने गंदे हो तुम….
राज-- लो मैं कहा से गन्दा hu…..subhe हे नाहा के आया हु …
अनु — तुम चुप होकर मेरी बात sunoge….phir शरमाते हुवे क्या हम ….आज रात डिनर पर चले ….
राज — ओह …..डेट पर …..
डेट का नाम सुनते हे अनु शर्माने लगी……” वो आज मेरा बर्थडे ह ”
राज ओह …वैरी वैरी हैप्पी बर्थडे फिर तोह पार्टी बनती ह…
राज ने बर्थडे विश करते वक़्त अनु को हुग कर लिया और इसी पल …पूनम कविता मनीषा जो कॉलेज मई एंट्री कर रही थी उन्होंने देख लिया ..और उनकी फीलिंग्स जैसी भी थी पर पूनम के चेहरे पर मुस्कान बरक़रार थी ..जब की दो के दिमाग की गुसाई से सीटी बज रही थी….
राज — ok टुनाइट डिनर ात माय होम मेरे हाथो से…
अनु — रियली तुम कुकिंग जानते हो..
राज - खाके देख लेना फिर यकीं हो जायेगा
दोनों बात करते हुवे अपनी क्लास की तरफ जाने lage..piche कड़ी मनीषा कविता पूनम उन्हें जाता देखती रही …
मनीषा “ देख रही ह कुटी वंहा मधु रिंकी …..और यंहा अनु…… इस लड़के के चारो तरफ हमेसा लड़किया तितली की तरह मंडराती रहती ह …पता नहीं ऐसा क्या दीखता ह इसमे…
कविता — है डीई ….और चुड़ैल को देखो कैसे चिपक रही ह सबके सामने he…..pata लगा जल्द हे भाई की बीवी बांके मिले हमसे…
पूनम खिलखिलाकर हंस पड़ी “ तुम दोनों भी यार इतना भी उन्हें प्रेशर मई मत lao….manisha मेरी बहन तू हे तोह कहती वो एक इमोशनल लड़का ह जो रिलेशनशिप की केयर करता ह …और कुटी तूने श्वेता से सब सूना ह न अपने भाई के बारे मई फिर भी परेशां हो रही ह …राज जी जरूर किसी वजह से उसके पास ह वर्ण इतना तोह मैं भी जान गयी hu…unhe ऐसी लड़किया तोह बिलकुल पसंद नहीं आएंगी …..
कविता — दी प्यार मैं क्या हे कहु आपको आप बहुत भोली ह इस बारे मई…. लंदन मई सुभे ी लव यू तोह रात को प्यार बिस्तर मई हो जाता था ..और आज की इंडियन हाई फि लड़कियों का भी कोई भरोसा नहीं ह अभी ी लव यू तोह रात को प्यार बिस्तर मई ख़तम होता ह…
मनीषा पूनम हैरानी से कविता को देखने लगी जिसकी वजह से कविता को समाज आया की गुसाई मई वो क्या कह गयी ….
पूनम मनीषा को भी जोर से हंसी आगयीईइ
पूनम — जायदा मत सोच कुटी …चल ….क्लास का टाइम हो गया h….ab मूड तीख कर कब तक तू ऐसे हे तीखी मिर्च बानी रहेगी सरे लड़के तुजे हे देख रहे ह….
कविता — diiiiiii…itna कह उसने मू फुला लिया पूनम को जोर से हंसी आगयी और उसे अपने से सत्ता लिया ……..
मुम्बई आउटर….
सभी गुसाई से उबाल रहा थे —मैंने कितनी बार कहा था की गलती मत करना पर नहीं उसे हीरो गिरी करनी ….गधा अभी यंहा होता तोह मोरे.. बना कर पुरे जंगल मई नाचता गधा कंही का…
आग — है है है तुजे भी पता ह तू ऐसा कुछ नहीं करता …
सभी टेडी नज़र से आग को देखने लगे
AAG-tu वजह अचे से जनता h…phir भी ऐसे देख रहा ह…..
सभी — विद्या भाभी …
आग — तोह फिर घटिया सा एक्सप्रेशन क्यों दिया …वो देख किलर्स आर्गेनाईजेशन के लोग…
सभी — मरना नहीं ह उन्हें हमे उनका तिखना ढूँढना ह मैं छोडूंगा नहीं …उस कुत्ते को ….
आग-- तीख चल…. जो तू कहे अब तोह मूड तीख कर
सभी — मुझे मत sikha…chal
और दोनों आगे की जगह स्कैन करते हुवे उनका पीछा करने लगे…….
इन कॉल…
तुझे पूरा यकीं ह…
आदमी — है भाई ….वो बस्ती आगया h….muje आज हे अपने आदमी से इनफार्मेशन मिली ह…
शख्स — मेरे इतनी आदमी मरकर उसे जिन्दा कैसे छोड़ सकता हु …इखट्टा कर सबको कल वो किसी भी हाल मई बचना नहीं चाहिए h….hum घेरकर मरेंगे सेल को कोई मौका नहीं देंगे इस बार बचने ka…usai भी पता लगे टिल्लू से पन्गा लेना कितना भरी पड़ता ह
आदमी — जी भाई मैं इखट्टा करता हु सब .. छोकरे लोगो को….
धारवाई….
शेरदिल — मैं तीख हु माँ….
माँ — तू तीख ह तू मेरी बाते क्यों नहीं सुनता ह …अगर वो खुदा का नेक फरिश्ता न आया होता तोह tu…..itna कह वो रो पड़ी….
शेरदिल — क्या ….अब्बा अभी जिन्दा होते तोह वो ये नहीं करते…..
माँ — वो नहीं ह इसलिए तुजसे कह रही हु हमे हमारा मकसद पूरा करना h……ye सब हमारे मकसद से बहुत छोटा ह और हमरे मकसद के बिच हम किसी और को नहीं आने दे सकते ह….
रिफत - माँ आप फिर सुरु हो गयी भाई को चोट लगी हुवी ह ……वैसे कौन था वो शख्स भाई….
शेरदिल — मेरी भी समाज से बहार h…bolta ह तुजसे लड़ना ह इसलिए बचाया….
रिफत सर खुजलाते हुवे — मतलब खुदकी जान जोखिम दाल के आपको बचाया सिर्फ आपसे लड़ने के लिए…
शेरदिल — है और एक कर दिए ह लड़ने के लिए और बचा कर अपने घर भी लेकर गया ..बहुत बड़ा बंगला tha….aur उसका बॉडी गॉर्ड वो तोह 7 फ़ीट का सांड था …
रिफत — हहहहह….. एक cr…diye…sirf लड़ने के लिए
शेरदिल — अब खाना भी खिलाएगी या इन्क्वारी हे करती rahegi….aur तू स्कूल क्यों नहीं जा रही ह….2 दिन से
रिफत — है अभी बनती हु खाना वो आप नहीं ए घर तोह मन नहीं था स्कूल जाने का…
शेरदिल — एक कर कॅश ह मेरे पास अबकी बार ऐसा किया तोह बोर्डिंग स्कूल भेज दूंगा पड़ी रहना समझी.
रिफ्ट जइब निकलर ीीीे- बड़े ए बोर्डिंग भेजने वाले मेरी जुटती भी न जाये आप दोनों से दूर…
इतना कह दोनों जोर जोर से हसने लगे ..
पर इन्हे क्या पता था की जल्द he….unke सर पर बहुत बड़ी मुसीबत आने वाली ह…..
मुम्बई कॉलेज…
क्लास मई अनु चिप चिप कर राज को हे देख रही thi….aur जैसे हे राज उसकी तरफ देखता वो जीब निकलकर उसे चिढ़ाने लगती …..काफी दिएर से यही सब चलता रहा ….
रजनी — बोथ ऑफ़ यू स्टैंड उप एंड गेटआउट फ्रॉम माय क्लास….
राज ने अनु को घूरा फिर सॉरी बोलता हुवा चुप चाप बहार चला गया और ऐसा हे अनु ने किया….
“अरे रुक जा अकड़ू इंसान…”
राज - क्या कर रही थी क्लास मई अब निकाल कर दिखा तेरी जीब काट के रख दूंगा….
अनु — सॉरी गुसा क्यों होता ह चल कैंटीन ….चलते ह…
राज — तू आज अलग बेहवे कर रही ह सब तीख तोह ह न ….देख मैं …
अनु — चुप ..chup…kuch मत बोलना ….वैसे एक बात बता बस ऐसे हे मान ले …..सिर्फ मन्ना h…..tikh ह na…faltu कुछ मत सोचना बस जस्ट इमेजिन
राज — बोलेगी तोह मानूंगा और इमेजिन करूँगा…
अनु — शरमाते हुवे ….अगर तेरी मेरी शादी हो जाये …..क्या फिर भी तू ऐसे हे तंग करेगा muje….hamesha..
राज झटके से रुका और अनु को देखना लगा फिर सर पर हाथ लगा कर देखा. “ तबियत तोह तीख ह teri…phir बहकी बहकी बाते क्यों कर रही ह”
अनु — पता था तू मज़ाक हे उड़ाएगा …मेरा
राज — तू मुझसे प्यार करती ह ये तोह तूने कहा था पर ….शादी करना चाहती ह ये आज कह रही ह…
अनु — हां ….इतना कह वो गर्दन नीची करके ….कड़ी हो गयी….
राज सीरियस होकर ——तू मुझसे बहुत प्यार करती ह…
अनु — है और आज मैं यही कहने वाली थी की तेरा लड़ना ..तंग करना …मुझे बहुत ाचा लगता ह ….सबको इज़्ज़त देता ह किसी के भी दिल मई जगह बना लेता ह….
राज — है है है है यू मस्ट किडिंग …..तुम मुझसे शादी करना चाहती हो …है है है …..इतनी एक्टिंग…..
अनु आंखे निकलकर— राज ी म सीरियस….
राज — ok तोह तुम सीरियस हो फिर कुछ पल रुक कर मुझसे शादी करने के लिए तुम्हे मेरी एक कंडशन पूरी करनी होगी…..
अनु — क्या ….बोलो न सब करुँगी
राज — तुम पलट जाओगी एक हे मौका दूंगा बस मैं..….
अनु — पलट जाये वो अनु नहीं तुम बस बोलो अब चाँद लेन को कहोगे मुझसे नहीं हो पायेगा…
राज — तुम्हे एक मुंडेर करना होगा….
अनु की आंखे चौड़ी हो gayi..phir चेहरे पर मुस्कान agayi….ab तुम मेरे साथ मज़ाक कर रहे हो…
राज — ी म serious…kisi को मेरी आँखों के सामने गन से शूट करना hoga….tab जाकर मुझे यकीं होगा ह दम ….
अनु राज की आँखों मई देखने लगी और बिना कुछ बोले हे वंहा से चली गयी.,
राज — वक़्त नहीं ह अब मेरे pass…aur अब अनु चली गयी ह अब मुझे दूसरा तरीका अपनाना हे होगा…….
राज जैसे हे कैंटीन पंहुचा वेटर फिर से उसके पास आगया ….
वेटर — ये आपके लिए ….
राज — अरे फिर से तुम राज ने टिफ़िन को ले लिया ….और खोला तोह आज भी उसमे पेपर फोल्ड किया हुवा tha..raj ने ओपन किया तोह …
“नाराजगी तोह h…par शिकायत nahi…ankho मई गहरी नींद ह ….फिर सोये क्यों nahi……mana ki……apna का ख्याल जरुरी h…..phir खुद का ख्याल क्यों नाहीई……..”
“ ये खूबसरा खाना ह अचे से खाइयेगा राज जी और खुद का धयान रखिये…. आपकी दोस्त और बहन का मैं धयान रखूंगी
आपकी दोस्त ….पूनम वैसे …मैं हे दोस्त मानती हु या आप भी मानते हो दोस्त मुझे
”
राज के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान thi….par इस बार ये बड़ी सी मुस्कान देखने के लिए पूनम मौजूद नहीं थी …….और जब वो फ्री लेक्चर मई कैंटीन पहुंची ….
वेटर — दी वो टिफिन तोह वो ले गए ..
पूनम -क्या …कब ….
वेटर — जी दी …सायद कोई क्लास फ्री थी उनकी ….इसलिए सुभे जल्दी हे आगये थे
पूनम राज का रिएक्शन देखना चाहती थी पर उसे दुःख हुवा की वो देख नहीं पयईईई …उसका चेहरा लटक गया और वेटर कॉलेज की तीन ख़ूबसूरत तिगड़ी मई से एक खूसूरत लड़की को कैसे ऐसे देख सकता था
वेटर — दी मुझे पता ह आप उन्हें चिप चिप कर देखती हो …इसलिए ये देखो मैंने उनकी हर पल की फोटो खिंच ली thi…taki आप उदास न हो
पूनम की आंखे खुसी से चमक गयी जब उसने वो साडी पिक्स देखि …….उसमे हर वो पल मौजूद थे जो वो देखना चाहती थी….” थैंक यू सो मच bhai……tum एक अचे दिल के इंसान हो मैं ये हेल्प कभी नहीं बुलंगा..
वेटर — दी बस प्यार से कोई भी 2 बात बोलदे थोड़ी इज़्ज़त दे दे गरीब को इसे ाचा जायदा मुझे कुछ नहीं चाहिए ह…
पूनम — तुम्हे कभी भी जरुरत हो एक बार इस बहन को जरुरत याद करना….
पूनम टेबल पर बैठकर साडी फोटो देख हे रही थी की कविता और मनीषा भी वाश रूम से आगयी…..
कविता और मनीषा को बिलकुल नहीं पता था की पूनम टिफ़िन लेकर आती ह राज के लिए और बॉडी गॉर्ड जो राज ने रखवाया ह उसी के पास से कैंटीन मई पहुँचवा देती h…….poonam के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी …
कविता — ोये होये आज मेरी दी बड़ी मुस्करा रही ह कंही ….कुछ…
पूनम — कतीईई ..बहुत बोलने लगी ह…
मनीषा — गड़बड़ तोह ह कतई …
पूनम अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मनीषा को घूरने लगीई..
मनीषा — कभी तोह बताएगी हे न…..
कविता — क्या दी बताओ na…..muje भी पता लगे की दी क्या छुपा रही ह वो भी मुझसे…
पूनम — No …..बिलकुल नहीं मनीषा ……देख तू मेरी बहन ह…
कविता ने पूनम के मू पर हाथ रख दिए और बोली “बोलै न दी क्या बात ह”
मनीषा- इसे किसी से काफी वक़्त से प्यार ह और अब वो प्यार इसे मिल गया ह पर वो कम्भखत …प्यार से दूर भागता ह….
कविता — वो …डीई….
मनीषा — धीरे कतई सब h…mere करीब आए जरा…
कविता — सॉरी डीई….
मनीषा — वैसे खुस तुजे होना चाहिए ह…
कविता — अरे अफ़्कौर्से ी म तू मच हैप्पी …
पूनम — no no प्लीज मांजा मनीषा ….
मनीषा — और अगर उस लड़के ने हां करदी तोह ….हम तीनो हमेसा साथ rahengi..hamesha
कविता हम तीनो हमेशा साथ रहेंगी ….
पूनम हाथ चलकर मनीषसे को रोकने लगी पर मनीषा कान्हा रूकने वाली थिई….
कविता कन्फूसिओं से मनीषा को देखने लगी ….
मनीषा — क्योकि तू इसकी नानन्द हो जाएगी न….
कविता — नानन्द हो jayegi….kya mat…ll…b…oh माय गॉड …ओह माय गॉड …..ohhh…myyyyy…godddd….ye उसने बहुत जोर से कहा था ….
मनीषा — कंट्रोल कतई चल कैंपस पार्क चलते ह
और जैसे हे पार्क पहुंचे तब कविता ने पूनम को जोर से गले लगा लिया …
कविता — अरे भाई मेरी और श्वेता की बात ताल हे नहीं सकते ह मैं और श्वेता ह न ….हम पूरी हेल्प करेंगे आपकी ….ी म सो हैप्पी ….आप भाभी बन गयी तोह भाई को फिर कभी अकेलापन महसूस नहीं होगा ……..कविता ख़ुशी से नाचने लगी ….और पूनम मनीषा से लड़ने लगी उसे बहुत शर्म आरही थी…
तीनो टिकड़ियो ने लेक्टर्स अटेंड किये और गैप सैप मरने के लिए तीन तिगड़ी आज पूनम के घर हे रुकी हुवी thi….aur आज इस खुसी का सेलिब्रेशन रात को मानाने की तयारी कर रही thi….kavita ने भाभी भाभी कहकर पूनम को शर्म से पानी पानी कर रखा था और मनीषा ने भी पूनम को छेड़ने मई कोई कसार नहीं चौडीइ…….
तोह दूसरी तरफ राज …घर मई पूनम के खाने को गरम करके आराम से खा रहा tha…..usne पूनम के हाथ का खाना तीसरी बार हे खाया था पर उसकी बंद आंखे बता रही थी की उसे खाना कितना स्वादिष्ट लग रहा था ….” अरे 2 टिफ़िन हो गए ह पूनम जी के मुझे उन्हें वापस कर देना चाहिए कल कॉलेज मई कर दूंगा …नहीं नहीं वंहा वो दोनों नहीं चारो होंगी मनीषस कविता अनु और रजनी किसी ने भी देख लिया तोह जान खा जाएँगी मेरी तोह क्या करू अभी वक़्त भी ह अनु का जवाब आने मई फिर मौका नहीं मिलेगा तोह घर देकर अजौ …..पर घर पर ाचा लगेगा ….अनिरुद्ध अंकल क्या सोचेंगे …ओह सहित वो तोह टूर पर गए h….honge आंटी हे होंगी …शामको de…aunga ….फिर सोच कर है यही तीख रहेगा…. पर खली हाथ जाना ाचा नहीं रहता ह …क्या लेकर jau….shweta से पुछु …नहीं दीपिका दी से पुछु ….नहीं गुसा होंगी …मधु जी से पूछता हु” इतना कह उसने कॉल लगा दिया …
मधु — तोह जनाब को 10 दिन बाद याद आयी ह….
राज — आपको पता ह की मेरी जिंदगी मई सुकून नहीं ह वैसे ….जुड़वाँ कैसे ह…
मधु — दुखी करते ह किक मरते ह ….
राज के चेहरे पर मुसकासन आगयी …. “अंकल कैसे ह
मधु — सब अचे ह तुम्हे याद करते ह बोल रहे थे की जब बचो का नामकरण करेंगे तुम्हे बुलाएँगे …अब उन्हें कैसे कहु की बाप को तोह बुलाना हे पड़ेगा न…”
राज — आप खुस हो मैं इसे खुस hu….main आऊंगा आपके pass…aur वक़्त भी बिताऊंगा ाचा मुझे आपकी हेल्प चाहिए…
मधु — मेरी हेल्प ..
राज — अगर किसी लड़की को थैंक यू बोलना हो तोह साथ मई क्या देना चाहिए…
मधु — सो फाइनली मेरे हीरो को लड़की पसंद आगयी…
राज ,- आप भी न आपकी कसम ऐसा कुछ नहीं ह सिर्फ थैंक यू बोलना ह फ्रेंड ह…
मधु —हम्म्म …वैसे लड़की मोर्डर्न हो तोह कोई बैग परफ्यूम या ड्रेस पसंद करती h…aur अगर लड़की सिंपल दिखावटी नहीं ह तोह चॉकलेट …. फ्लावर्स पस्न्द करती ह….
राज — दोनों ले जाऊ तोह
मधु — और भी ाचा ह….
राज — थैंक यू तक ..
मधु — ok मेरे पति देव जो आज्ञा आपकी और कुछ फ़िलहाल तोह कर नहीं सकती हु आपके लिए जब वक़्त मिले तब मिलते रहना…
राज —आप भी न कोई मौका नहीं छोड़ती हो.. ok आऊंगा ….tc…bye अपना धयान रखना ….
मधु - bye मिस यू..
इतना कह राज ने फ़ोन रखा और पोलुशन मास्क लगाकर बहार निकल gaya…rose और चॉकलेट्स लेने… उसने टाइम देखा तोह 4 बज रहे थे ……..अभी वो निकला हे था की उसे अपने तीख सामने अनु कार के बहार कड़ी दिखाई दी…
राज सीरियस हो gaya….anu उसके करीब आयी और बोली …
अनु — मैं तैयार हु तुम्हारी कंडीशन पूरी करने को कार मई गन ह …तुम जिसे कहोगे मैं शूट कर दूंगी …पर एक बात याद रखना अगर तुमने वडा तोडा या मुझे धोखा diya….toh ट्रस्ट में पूरी दुनिया मई छिपने की जगह नहीं मिलेगी ….मेरे पापा बचा लेंगे मुझे और अगर फिर भी पकड़ी गयी तोह भी जेल से लौटकर तुम्हे बर्बाद कर दूंगी …….मेरा प्यार मज़ाक नहीं ह ….इसलिए अब चाहे कातिल कहलाऊ या कुछ मैं सिर्फ तुम्हारी और तुम सिर्फ मेरे रहोगे…
राज बस हैरानी से उसे देखता रहा tha….wo देखना चाहता था की क्या सच मई अनु कर पायेगी सब फ़िलहाल वो राज के पहले टेस्ट मई पास हो गयी थी ….अब बरी थी दूसरे टेस्ट की यानि एक्शन की …..राज चुप चाप कार मई बैठ गया और अस पैर प्लान उसने यमदूत को एक लोकेशन पर भेज दिया और खुद अनु को जान भुज कर देरी करके लेकर वंहा पहुंच गया ……
राज ने यंहा वंहा देखा ….और फिर बोलै ..
राज — उस शख्स को देख रही उसने मुझे बहुत बार बेइज़्ज़त किया ह जब मई मुम्बई आया tha…apne साथियो के साथ मिलकर बहुत मारा था भले हे मैं बिल्डिंग्स पर तेज़ी से चकमा दे कर भाग सकता था पर इसने खुले मैदान मई घेरकर मारा था जिसकी वजह से मैं 20 दिन तक हॉस्पिटल मई एडमिट रहा tha….isliye हे मैंने वो बॉडीगॉर्ड रखा हुवा h…meri नज़र तब से हे ह इस पर..
अनु का गुसा धीरे धीरे राज की बाते सून कर बढ़ gaya…..koyi भी चाहे कोई भी राज को हर्ट नहीं कर सकता था ….उसने डैशबोर्ड मई से गन निकली और दुबारा मागज़ीने को निकल कर चेक करि …
राज — तुम्हे गन चलनी आती ह…
अनु — शूटिंग सीखी ह मैंने…
राज गुड मैं तुम्हारा इंतज़ार घर पर karunga……ab तुम कैसे आती हो कैसे नहीं ये सब तुम पर रहेगा पर शूट करते हे निकल जाना ….
राज वंहा से निकलकर दूर चिप gaya….usai अभी भी डाउट था अनु पर ….पर अनु ने सबकुछ उसके विपरीत किया उसने कार मई से वोडका का मिनीचेर निकला और एक हे घूंट मई पी गयी करीब 10 मिनट मई हे उसकी आँखों मई जो हिचकिचाहट थी वो दूर हो गयी…… “ साला हरामी मेरे प्यार को मरेगा ….आज के बाद तू कभी दुनिया मई दिखेगा हे nahi….”itna कह वो उस शख्स यानि मिरतिदूत के पीछे पहुंची और 2 गोलिया उसकी पीठ मई दाग dii….goliyo की तेज़ आवाज हुवी और आस पास के लोग जो 50 मीटर की हे दुरी पर थे वो अलर्ट हो गए अनु तेज़ी से वापस भागी और कार स्टार्ट हे छोड़ी थी उसने वो तुरंत वंहा से रवाना हो गयी …उसके रवाना होने के बाद हे मिर्त्युदूत कमर को सीधी करता हुवा खड़ा हुवा और बुलेट्स के प्रूफ जो रह गए थे उसे उठाकर छिपा लिए और वो भी गायब हो गया वंहा से ….कोई कुछ भी समाज नहीं पाया…
राज जो दूर से उसे देख रहा था…. “ Good…ab अनु को सच बताया जा सकता ह…. अनु मेरे लिए कुछ भी कर सकती ह ab….isai ये बात तोह साफ़ ह..” ये कहते कहते उसके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी… आखिर हो क्या न इतने दिनों से अपनी ह बहन के साथ प्यार का नाटक जो करना पढ़ रहा tha….aur इस नाटक मई उसने भाई बहन की लिमिट्स से आगे बढ़कर किश तक करि थी…..
अनु कार को भगति हुवी सीधी राज के घर के बहार ले आयी और घर के अंदर फिरज मई दारू ढूंढने lagi…..car मई जब उसने ये सोचा की उसने मर्डर कर दिया ह तोह उसका दिल जोर जोर से धधकने लगा tha…usai जल्द हे किचन के एक कौन मई छिपा कर राखी हुवी वाइन मिल गयी …और राज जब तक मित्युदूत के साथ घर पंहुचा …..तोह वो भी हैरान हो गया सोफे पर अनु तून होकर लड़की हुवी थी और फर्श पर वाइन की खली बोतल गिरी हुवी थी…..
मित्युदूत — लगता ह घबरा गयी ह मिस अनु…
राज — अपने सही कहा इसीलिए ….इसने पी ली ह पर वाइन कान्हा से आयी…
मित्युदूत ने गर्दन घुमा ली
राज - मैं इसे घर छोड़ कर अत hu…ap मेरा एक छोटा सा काम करदेंगे…
मित्युदूत ने गर्दन है मई हिला दी…
राज - मुझे वाइट रोजेज और चॉकलेट्स चाहिए ह खूब सरे….
मित्युदूत ने अपने ऊँगली दाल कर जोर से कान को हिलाया और टूकर टूकर राज को देखने लगा फिर बोलै “ जी मैं लेकर अत हु”
मित्युदूत के जाते हे राज ने अनु को गॉधी मई उठाया और उसके घर पहुंच गया…
अनु माँ-- ये क्या ह…
राज — बर्थडे ह न तोह मेरे साथ ख़ुशी ख़ुशी मई जायदा पिली ….आप चिंता न करे वाइन पि h….raat भर सोयेगी तोह नार्मल हो jayegi…..main इसे रूम मई सुलाकर अत हु ….
अनु माँ राज को ऊपर अनु को लेजाता देख कर “ ये लड़की भी न कितना ाचा लड़का ह अगर इसके ऐसी हे ड्रामे रहे तोह राज दूर न हो जाये इसे “
ऊपर राज ने अनु को सुलाया और फ़ोरेहेअद पर किश करि और स्टिकी नॉट लिख कर छोड़ दिया अनु के liye…..raj ने अनु के घर के बहार आकर टाइम देखा तोह रात के 9 बज गए थे … “ लेट हो गया रहने दू क्या ….पर रोजेज और चॉकलेट …मैं उन्हें कह देता हु वंही ले ayenge…..”inform और कुछ इंस्ट्रक्शंस मित्युदूत को देने के बाद राज टिफ़िन उठाकर जल्दी से पूनम के घर की तरफ निकल गया ….और इधर इस बात से अनजान….
तीनो अकेली घर पर खाना ेट्स तैयार कर रही थी होम थिएटर भी रेडी कर लिया था मूवी के लिए ….जिसमे पूनम आता घूंठ कर जस्ट फ्री हुवी थी उसने हाथ भी साफ़ नहीं किये थे…
कविता-- कस ममता दीदी यंहा होती तोह और मज़ा aajata….unhe पता लगेगा न आपके बारे मई तोह ख़ुशी से झूम uthengiii….waise दी सोचा ह भाई को कैसे मानना ह ..
पूनम — प्यार जबरदस्ती नहीं होता ह कतई वो तोह हो जाता ह ….मैं बस उनको केयर ….अपनी फीलिंग्स दिखा सकती hu….aur जब उनके दिल मई मेरे लिए फीलिंग्स आएंगी तब ….खुद हे पता लग जायेगा …
मनीषा — छोड़ कतई इसका प्यार निराला ह ये सामने से ये कभी नहीं कहेगी ….पर ये उसकी इतनी केयर करेगी की राज को खुद रीलीज़ हो जाये….
कविता — दी मुझे न प्यार समाज हे नहीं अत ह…
पूनम-- प्यार सिर्फ प्यार ह कतई इसमे तेरा मेरा कुछ नहीं …जो जैसा ह उसे वैसा हे उसे अपनाना और साथ देना होता h…ek दूसरे को संजना हे प्यार h…..jab तुजे होगा तब पता लग जायेगा…..
टिंग…… dong….ghar की दूर बेल्ल की आवाज हुवी …..तोह तीनो का धयान गया…
पूनम-- बड़ी माँ और पापा तोह आज आने वाले नहीं ह ….तोह फिर कौन आया ह…
मनीषा — तोह ढक ले जब तक हम तैयार करते ह सब किचन मई …
पूनम जिसके बाल बिखरे और हाथ मई अभी भी आता लगा हुवा था ….वो उसी हालत मई ayi…aur जब उसने दूर खोला तोह उसकी आंखे मई खुसी की चमक आगयीईइ
पूनम “आपपप”
राज हाथ आगे बढ़ कर “hello फ्रेंड पूनम जी कैसी ह आप”
पूनम की तोह वैसे हे राज को देखते हे सोचने समझने के दिमागी पुर्जे हिल जाते थे उसने तुरंत वो आते वाले हाथसे हे हाथ मिला लिया …
राज ने पूनम के हाथ को देखा “ लगता ह आप खाना बना रही थी मैंने डिस्टर्ब कर दिया”
पूनम ने राज के हाथपर आता लगा देखा तोह बोली “हे भगवान् बस एक मिनट” और तुरंत किचन की तरफ भागी पूनम कविता कुछ बोलती उसे पहले हे वो कपडा उठाकर बहार की तरफ भाग गयी ..पीछे कड़ी मनीषा कविता ने एक दूसरे को देखा और किचन से बहार आकर देखा toh…unki चौड़ी हो गयी और मू खुले के खुले रह गए क्योकि पूनम ने राज का हाथ पकड़ रखा था और अपने हाथ मई पकडे कपडे से राज के हाथ को साफ़ कर रही थी….
राज “कोई बात नहीं पूनम जी ….मैं ये टिफिन्स देने आया था.”
Boom….kitchen से जस्ट बहार आयी मनीषा और कविता को झटका सा laga….dono एक दूसरे को देख कर “ टिफ़िन खाना” दोनों दुबारा से राज और पूनम को देखने लगी ….
पूनम “ नहीं राज जी मैं भी न आपके हाथ ख़राब कर दिए ….आप अंदर आईये न …”
राज — ok ….
राज को क्या पता था की उसका ये ok….kya रंग लेन वाले था वो पूनम के पीछे एक कदम हे चला था की पूनम को याद आगया और उसने तुतंत टिफ़िन को साइड मई छिपा दिया ….
राज कुछ बोल पता ….
“ वो टिफ़िन खाना बहुत ख्याल रखा जा रहा ह इस गधे का और तुम मुझसे मिलने का टाइम नहीं ह तुम्हारे पास यंहा टिफ़िन लौटाए जा रहे ह….”
राज ने अपनी जीब दांतो से काट ली और मन हे मन बोलै “ भगवन क्या चाहते हो आप मतलब अब थैंक यू भी नहीं बोल सकता हु kya….wo भी तीख ह और आपको भाभी हे क्यों मिलती ह हर बार ऐसी सिचुएशन मई अब ये छोड़ेंगी नहीं मुझे” तुरंत उसके दिमाग मई आईडिया आया…
राज — अरे आप तोह हुक्का पानी लेकर चढ़ गयी मुझ पर मुझे पता था आप तीनो एक साथ हे हो …
कविता-- वो कैसे पता …
राज — बॉडीगॉर्ड …..बॉडीगॉर्ड रखा ह न आपके पीछे उसी ने बताया…
मनीषा — तोह फिर तीख h…bach गए तुम…
राज मन मई थैंक गॉड बच गया….
मनीषा — और ये टिफ़िन का चक्कर…
राज समाज गया की इनदोनो को टिफ़िन का पता नहीं उसने एक नज़र पूनम को देखा जो घबरा रही थी जैसे उसकी चोरी सामने वाली हो “ टिफ़िन क्या…. वो पूनमजी खाना ाचा बनती ह तोह
पूनम जी को कहकर मंगवाया था अब आप तोह बनती नहीं हो वर्ण आपको कह देता वैसे कब बना कर खिला रही हो”
राज की बात से मनीषा ….बैकफुट पर आगयी “सिख रही हु जल्द हे खिलाऊंगी”
कविता — गले लगते हुवे ी लव यू भाई…
राज - लव यू तू कब्बू…..
कविता — भाई गलत बात खली हाथ कोई ऐसे थैंक यू बोलता ह …..अपने पूनम bh….diii को कुछ नहीं दिया …
राज ओह ी म सॉरी अब क्या करे….
पूनम — कोई बात nahi…..waise एक चॉकलेट तोह बनती हे थी….
राज के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी….
पूनम मैं कॉफ़ी लती हु…..
कविता — भाई …एक बात कहु मन तोह नहीं करोगे….
राज — अरे तू बोलना क्या चाहिए ….
कविता — पक्का न प्लीज मन मत करना …..आप आज रात यही रूक जाओ न अगर आपको काम नहीं हो toh…please भाई …पूनम जो किचन के पास पहुंची थी वो भी कविता की बात सुनकर रूक gayii….aur राज के रिप्लाई का वेट करने लगी…
मनीषा — राज देहरादून की तरह प्लीज न…
राज — पर पूनम जी अकेली h…acha नहीं लगेगा…
मनीषा — बस यही दिकत ह मैं खुद अनिरुद्ध अंकल से पूछ लेती हु …
राज — ok ok आप दोनों जीती ….मैं रूक जाता हु ….
पूनम की तोह ख़ुशी का तीखाना हे नहीं रहा ……उसे और क्या चाहिए था ….वो ख़ुशी खुसी राज के लिए अछि सी कॉफ़ी बना कर ले आयी …..तभी एक बार फिर घर की दूर बेल्ल बजी….
पूनम “ अब कौन होगा “
कविता - दी अब तोह भाई भी यंहा फिर क्यों इतना सोच रही हो…
पूनम और राज की आंखे मिली राज के चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान देख एक पल वो उसे हे देखती रही फिर …दूर ओपन करने के लिए चली गयी…..
सिक्योरिटी गॉर्ड — मम ये आपके लिए ए ह….
पूनम ने बहार झांक कर देखा तोह उसकी आंखे बड़ी बड़ी हो गयी ….बहार खूबसरे फ्रेश वाइट फ्लावर और उसमे रेड फ्लावर्स के मिक्स बूके रखे हुवे थे हर बूके के साथ अलग टाइप्स की बहुत साडी चॉकलेट्स राखी हुवी thi….poonam ने आगे बढ़ कर एक बूके पर टंगे स्टीकर को उठाया जिस पर लिखा था थैंक you…..poonam के चेहरे पर इस वक़्त जो मुस्कान आयी थी अगर कोई भी लड़का देख ले तोह वो अपनी जान देने को भी तैयार हो जाता …..उसने पीछे मुड़कर राज की तरफ देखा जो उसी हे की तरफ मुस्कुराता हुवा देख रहा tha…….poonam की आँखों मई खुसी के आंसू आगये …..क्योकि ये पहली बार था जब उसे ऐसे किसी ने थैंक यू बोलै था …
राज ने भी पूनम की आंसुओ से भीगी आंखे देख ली थी पूनम ने जल्दी से अपने अपने आंसू पूंछे ….और एक बूके और चॉकलेट का पैकेट उठाकर आगयी…..
पूनम — थैंक यू …
राज — थैंक यू तोह मुझे कहना ह और ये थैंक यू उस खाने के आगे कुछ नहीं ह आप रियली बहुत ाचा खाना बनती h….specially ाललउपरथे….
कविता मनीषा — थैंक यू इतनी साडी चॉकलेट और ये बूके …
पूनम — बहार जाकर देखो ….कतई तू बोल रही थी न राज जी कुछ नहीं लाये …
मनीषा और कविता एक के बाद एक खूब सरे बूके और चॉकलेट्स लाते गयी…
राज भी हैरान था वो माथा पीटना चाहता था पर तीनो के चेहरे पर स्पेशलय पूनम को खुस देख कर वो बहुत खुस था……..
रात को सब ने एक साथ खाना खाया और बात करने lage….manisha और कविता बात करते करते सो gayi….poonam ने एक को काम किया और हल्का सा दोनों को कवर कर दिया ताकि ठण्ड न लगे…..
पूनम की नज़र राज पर गयी “ क्या सोच रहे ह राज जी नींद नहीं आरही ह..”
राज नहीं …थक गया हु हल्का सर दर्द ह …अपने आप तीख हो जायेगा आप सो जाईये आप थक गयी ह …
पूनम पहले तोह हिचकिचाई पर वो अपने प्यार को जरा सा भी दर्द मई कैसे देख सकती थी ….
पूनम तुरंत गयी और अनिरुद्ध गोस्वामी के रूम से नवरतन टेल लेकर आगयीईइ…..
पूनम-- आप इधर सोफे पर बैठ जाईये …
राज — पूनम जी रात के एक बज गए ह आप सो जैइए आप भी थक गयी होंगी ….
पूनम — एक दोस्त परेशां ह तोह दूसरे दोस्त को नींद कैसे आएगी भला …
राज — आपसे बातो मई कोई नहीं जीत सकता ह ..
पूनम — तोह बैठ जाईये ….और राज के बैठ ते हे ….
उसने थोड़ा सा टेल राज के सर पर गिरा कर ….मालिश सुरु करदी ….अब पूनम ये मालिश 10 साल की उम्र से हे अपने चाचा के सर पर करती आयी थी एक मिनट मई हे ….राज का सर दर्द दूर हो गया ….
राज - एक बात पुछु …
पूनम — है …
राज — आप कैसे कर लेती हो सब ….
पूनम के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी….. “ जब 7 साल की थी तब एक बार चाचा चची को बात करते सुन लिया की मैं उनकी बेटी नहीं उनके भाई की बेटी हु …..खूब रोई चाचा चची ने बहुत समझाया …पर दुख तोह हुवा हे था पर संभल गयी बूस तबसे ….हे सब बदल गया मैं घर का काम karti…..padhayi karti…chacha चची का धयान रखती…..
राज — कितना बदल जाता ह न जब पता लगे की दुनिया मई अकेला जीना ह….
पूनम — राज ji….kami तोह कोई भी माबाप की पूरी नहीं कर सकता ह पर फिर भी आसपास बहुत से ऐसे भी ह जो हमे बहुत चाहते ह हमे उनके लिए जीना होता ह….
राज — आप बहुत हीमत वाली हो …..
पूनम — आप और मैं एक हे जैसी कश्ती पर सवार ह ….सायद इसीलिए भगवन ने हमे मिलाया ह ….
राज के चेहरे पर मुस्कान आगयी….. “आप जिसकी जिंदगी मई जाओगी वो बहुत खुसनसीब होगा…..
पूनम — प्यार भी नसीब से मिलता ह राज जी ….
राज — प्यार ह कान्हा इस दुनिया मई प्यार मई लोग ….अपनों से जायदा दुसरो पर यकीन करते ह …और सिर्फ पैसो को प्यार से जायदा इम्पोर्टेंस देते ह….
पूनम — राज जी बुरा मत मन्ना ….प्यार मई ग़लतफ़हमी आम ह ….कभी जो दीखता ह वो होता नहीं h…..par हमारी रेस्पोंसिब्लिटी होती हम एक दूसरे पर विस्वास दिखाए …..जरुरी नहीं ह प्यार मई दोनों तरफ हे समझदार हो ….कभी कभी झुखना और समझाना भी पड़ता ह ..तभी प्यार की डोर और मजबूत होती ह
राज पूनम की बात को गहराई से समझता रहा फिर उसने पलट कर पूनम को देखा ….पूनम के चेहरे पर हमेसा की तरह मुस्कराहट thi…..dono एक दूसरे को काफी दिएर तक ऐसे हे देखते रहे ……
पूनम —अब सर दर्द कैसा ह…
राज - बिलकुल गायब हो गया ह थैंक यू सो मच….
पूनम — ाचा दोस्ती मई थैंक यू भी कहते ह….
राज — ok आप जीती इतना कह वो मुस्कुराने लगा….
पूनम — “ बस ये हंसी कभी भी जाने मत dijiyega….kyoki आप की ये हंसी बहुत प्यारी ह …..
राज मन मई “ पता नहीं क्यों पर मैं जब भी पूनम से मिटा हु खुद को उसे अलग हे नहीं कर पता हु क्या कोई रिश्ता ह पुराने जनम का …”
पूनम — कान्हा खो गए राज जी…
राज “ कंही नहीं …आप सो जाइये मैं नहीं चाहता की मेरी दोस्त परेशां हो”…
पूनम “ गुड नाईट राज जी”
राज “ गुड नाईट ….पूनम जी”
पूनम अपने रूम मई जाने के बजाये तीनो के पास हे पड़े सोफे पर लेट गयी कुछ दिएर बाद उसकी निगाहे राज की तरफ गयी तोह राज उसी की तरफ चेहरा करके गहरी नींद मई सो गया tha……half ऑवर बाद पूनम उठी और राज के पास गयी जब उसे यकीं हो गया की राज सो गया ह तोह उसके सर पर हाथ फिरकर फ़ोरेहेअद पर किस करदी ….उसने देखा की राज के पास पानी नहीं ह तोह पानी किचन से लाकर उसके पास रख diya…….aur सोफे पर जाकर सो gayiii…..uske दिल मई गहरा सुकून था क्योकि एक पत्नी की तरह उसने राज का पूरा ख्याल रखा था और राज के दिल मई अपनी गहरी जगह बनती जा रही thi……….jab सुभे उसकी नींद 6 बजे खुली तोह राज का सोता हुवा चेहरा अभी भी उसकी हे तरफ हे tha….wo खुदसे हे बोली “ एक दिन वो आएगा जब रोज मैं राज को अपने सामने पाऊँगी”
दूसरी तरफ अनु की नींद खुली तोह वो उसका सर चक्र रहा tha…..usne टेबल से उठाकर पानी पिया और पस्सपडे स्टिकी नोट को उठाया जिस पर लिखा था “ सब तीख ह जब उठ जाओ 10 बजे घर आकर मिलना बहुत जरुरी बात करनी ह मेरे तुम्हारे रिश्ते को lekar…..Raj”
इधर राज की नींद खुली तोह …उसने टाइम देखा 7 बज रहे थे …..वो मन मई बोलै “ वक़्त आगया ह अब सच पता करने का ….बहुत खेल लिया तू अपनों के साथ मां उर्फ़ विक्टर अब मेरी बरी h….apno का धोखा कैसा लगता ह अब तुजे पता लगेगा”
आज के लिए इतना he….Deri के लिए माफ़ी…
मस्ती मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का ……
War……countdown……begins
19 ..उपदेट्स तू लेफ्ट …..
“ राज राज रुको भी”
राज —क्या हुवा चुड़ैल ….
अनु — तुममम…
राज — भड़क क्यों रही ह ….मज़ाक कर रहा हु …
अनु — वो मैं ये कह रही थी की….
राज — अरे तू तोह शर्माने लेगी ….जैसे हम …
अनु — की की कितने गंदे हो तुम….
राज-- लो मैं कहा से गन्दा hu…..subhe हे नाहा के आया हु …
अनु — तुम चुप होकर मेरी बात sunoge….phir शरमाते हुवे क्या हम ….आज रात डिनर पर चले ….
राज — ओह …..डेट पर …..
डेट का नाम सुनते हे अनु शर्माने लगी……” वो आज मेरा बर्थडे ह ”
राज ओह …वैरी वैरी हैप्पी बर्थडे फिर तोह पार्टी बनती ह…
राज ने बर्थडे विश करते वक़्त अनु को हुग कर लिया और इसी पल …पूनम कविता मनीषा जो कॉलेज मई एंट्री कर रही थी उन्होंने देख लिया ..और उनकी फीलिंग्स जैसी भी थी पर पूनम के चेहरे पर मुस्कान बरक़रार थी ..जब की दो के दिमाग की गुसाई से सीटी बज रही थी….
राज — ok टुनाइट डिनर ात माय होम मेरे हाथो से…
अनु — रियली तुम कुकिंग जानते हो..
राज - खाके देख लेना फिर यकीं हो जायेगा
दोनों बात करते हुवे अपनी क्लास की तरफ जाने lage..piche कड़ी मनीषा कविता पूनम उन्हें जाता देखती रही …
मनीषा “ देख रही ह कुटी वंहा मधु रिंकी …..और यंहा अनु…… इस लड़के के चारो तरफ हमेसा लड़किया तितली की तरह मंडराती रहती ह …पता नहीं ऐसा क्या दीखता ह इसमे…
कविता — है डीई ….और चुड़ैल को देखो कैसे चिपक रही ह सबके सामने he…..pata लगा जल्द हे भाई की बीवी बांके मिले हमसे…
पूनम खिलखिलाकर हंस पड़ी “ तुम दोनों भी यार इतना भी उन्हें प्रेशर मई मत lao….manisha मेरी बहन तू हे तोह कहती वो एक इमोशनल लड़का ह जो रिलेशनशिप की केयर करता ह …और कुटी तूने श्वेता से सब सूना ह न अपने भाई के बारे मई फिर भी परेशां हो रही ह …राज जी जरूर किसी वजह से उसके पास ह वर्ण इतना तोह मैं भी जान गयी hu…unhe ऐसी लड़किया तोह बिलकुल पसंद नहीं आएंगी …..
कविता — दी प्यार मैं क्या हे कहु आपको आप बहुत भोली ह इस बारे मई…. लंदन मई सुभे ी लव यू तोह रात को प्यार बिस्तर मई हो जाता था ..और आज की इंडियन हाई फि लड़कियों का भी कोई भरोसा नहीं ह अभी ी लव यू तोह रात को प्यार बिस्तर मई ख़तम होता ह…
मनीषा पूनम हैरानी से कविता को देखने लगी जिसकी वजह से कविता को समाज आया की गुसाई मई वो क्या कह गयी ….
पूनम मनीषा को भी जोर से हंसी आगयीईइ
पूनम — जायदा मत सोच कुटी …चल ….क्लास का टाइम हो गया h….ab मूड तीख कर कब तक तू ऐसे हे तीखी मिर्च बानी रहेगी सरे लड़के तुजे हे देख रहे ह….
कविता — diiiiiii…itna कह उसने मू फुला लिया पूनम को जोर से हंसी आगयी और उसे अपने से सत्ता लिया ……..
मुम्बई आउटर….
सभी गुसाई से उबाल रहा थे —मैंने कितनी बार कहा था की गलती मत करना पर नहीं उसे हीरो गिरी करनी ….गधा अभी यंहा होता तोह मोरे.. बना कर पुरे जंगल मई नाचता गधा कंही का…
आग — है है है तुजे भी पता ह तू ऐसा कुछ नहीं करता …
सभी टेडी नज़र से आग को देखने लगे
AAG-tu वजह अचे से जनता h…phir भी ऐसे देख रहा ह…..
सभी — विद्या भाभी …
आग — तोह फिर घटिया सा एक्सप्रेशन क्यों दिया …वो देख किलर्स आर्गेनाईजेशन के लोग…
सभी — मरना नहीं ह उन्हें हमे उनका तिखना ढूँढना ह मैं छोडूंगा नहीं …उस कुत्ते को ….
आग-- तीख चल…. जो तू कहे अब तोह मूड तीख कर
सभी — मुझे मत sikha…chal
और दोनों आगे की जगह स्कैन करते हुवे उनका पीछा करने लगे…….
इन कॉल…
तुझे पूरा यकीं ह…
आदमी — है भाई ….वो बस्ती आगया h….muje आज हे अपने आदमी से इनफार्मेशन मिली ह…
शख्स — मेरे इतनी आदमी मरकर उसे जिन्दा कैसे छोड़ सकता हु …इखट्टा कर सबको कल वो किसी भी हाल मई बचना नहीं चाहिए h….hum घेरकर मरेंगे सेल को कोई मौका नहीं देंगे इस बार बचने ka…usai भी पता लगे टिल्लू से पन्गा लेना कितना भरी पड़ता ह
आदमी — जी भाई मैं इखट्टा करता हु सब .. छोकरे लोगो को….
धारवाई….
शेरदिल — मैं तीख हु माँ….
माँ — तू तीख ह तू मेरी बाते क्यों नहीं सुनता ह …अगर वो खुदा का नेक फरिश्ता न आया होता तोह tu…..itna कह वो रो पड़ी….
शेरदिल — क्या ….अब्बा अभी जिन्दा होते तोह वो ये नहीं करते…..
माँ — वो नहीं ह इसलिए तुजसे कह रही हु हमे हमारा मकसद पूरा करना h……ye सब हमारे मकसद से बहुत छोटा ह और हमरे मकसद के बिच हम किसी और को नहीं आने दे सकते ह….
रिफत - माँ आप फिर सुरु हो गयी भाई को चोट लगी हुवी ह ……वैसे कौन था वो शख्स भाई….
शेरदिल — मेरी भी समाज से बहार h…bolta ह तुजसे लड़ना ह इसलिए बचाया….
रिफत सर खुजलाते हुवे — मतलब खुदकी जान जोखिम दाल के आपको बचाया सिर्फ आपसे लड़ने के लिए…
शेरदिल — है और एक कर दिए ह लड़ने के लिए और बचा कर अपने घर भी लेकर गया ..बहुत बड़ा बंगला tha….aur उसका बॉडी गॉर्ड वो तोह 7 फ़ीट का सांड था …
रिफत — हहहहह….. एक cr…diye…sirf लड़ने के लिए
शेरदिल — अब खाना भी खिलाएगी या इन्क्वारी हे करती rahegi….aur तू स्कूल क्यों नहीं जा रही ह….2 दिन से
रिफत — है अभी बनती हु खाना वो आप नहीं ए घर तोह मन नहीं था स्कूल जाने का…
शेरदिल — एक कर कॅश ह मेरे पास अबकी बार ऐसा किया तोह बोर्डिंग स्कूल भेज दूंगा पड़ी रहना समझी.
रिफ्ट जइब निकलर ीीीे- बड़े ए बोर्डिंग भेजने वाले मेरी जुटती भी न जाये आप दोनों से दूर…
इतना कह दोनों जोर जोर से हसने लगे ..
पर इन्हे क्या पता था की जल्द he….unke सर पर बहुत बड़ी मुसीबत आने वाली ह…..
मुम्बई कॉलेज…
क्लास मई अनु चिप चिप कर राज को हे देख रही thi….aur जैसे हे राज उसकी तरफ देखता वो जीब निकलकर उसे चिढ़ाने लगती …..काफी दिएर से यही सब चलता रहा ….
रजनी — बोथ ऑफ़ यू स्टैंड उप एंड गेटआउट फ्रॉम माय क्लास….
राज ने अनु को घूरा फिर सॉरी बोलता हुवा चुप चाप बहार चला गया और ऐसा हे अनु ने किया….
“अरे रुक जा अकड़ू इंसान…”
राज - क्या कर रही थी क्लास मई अब निकाल कर दिखा तेरी जीब काट के रख दूंगा….
अनु — सॉरी गुसा क्यों होता ह चल कैंटीन ….चलते ह…
राज — तू आज अलग बेहवे कर रही ह सब तीख तोह ह न ….देख मैं …
अनु — चुप ..chup…kuch मत बोलना ….वैसे एक बात बता बस ऐसे हे मान ले …..सिर्फ मन्ना h…..tikh ह na…faltu कुछ मत सोचना बस जस्ट इमेजिन
राज — बोलेगी तोह मानूंगा और इमेजिन करूँगा…
अनु — शरमाते हुवे ….अगर तेरी मेरी शादी हो जाये …..क्या फिर भी तू ऐसे हे तंग करेगा muje….hamesha..
राज झटके से रुका और अनु को देखना लगा फिर सर पर हाथ लगा कर देखा. “ तबियत तोह तीख ह teri…phir बहकी बहकी बाते क्यों कर रही ह”
अनु — पता था तू मज़ाक हे उड़ाएगा …मेरा
राज — तू मुझसे प्यार करती ह ये तोह तूने कहा था पर ….शादी करना चाहती ह ये आज कह रही ह…
अनु — हां ….इतना कह वो गर्दन नीची करके ….कड़ी हो गयी….
राज सीरियस होकर ——तू मुझसे बहुत प्यार करती ह…
अनु — है और आज मैं यही कहने वाली थी की तेरा लड़ना ..तंग करना …मुझे बहुत ाचा लगता ह ….सबको इज़्ज़त देता ह किसी के भी दिल मई जगह बना लेता ह….
राज — है है है है यू मस्ट किडिंग …..तुम मुझसे शादी करना चाहती हो …है है है …..इतनी एक्टिंग…..
अनु आंखे निकलकर— राज ी म सीरियस….
राज — ok तोह तुम सीरियस हो फिर कुछ पल रुक कर मुझसे शादी करने के लिए तुम्हे मेरी एक कंडशन पूरी करनी होगी…..
अनु — क्या ….बोलो न सब करुँगी
राज — तुम पलट जाओगी एक हे मौका दूंगा बस मैं..….
अनु — पलट जाये वो अनु नहीं तुम बस बोलो अब चाँद लेन को कहोगे मुझसे नहीं हो पायेगा…
राज — तुम्हे एक मुंडेर करना होगा….
अनु की आंखे चौड़ी हो gayi..phir चेहरे पर मुस्कान agayi….ab तुम मेरे साथ मज़ाक कर रहे हो…
राज — ी म serious…kisi को मेरी आँखों के सामने गन से शूट करना hoga….tab जाकर मुझे यकीं होगा ह दम ….
अनु राज की आँखों मई देखने लगी और बिना कुछ बोले हे वंहा से चली गयी.,
राज — वक़्त नहीं ह अब मेरे pass…aur अब अनु चली गयी ह अब मुझे दूसरा तरीका अपनाना हे होगा…….
राज जैसे हे कैंटीन पंहुचा वेटर फिर से उसके पास आगया ….
वेटर — ये आपके लिए ….
राज — अरे फिर से तुम राज ने टिफ़िन को ले लिया ….और खोला तोह आज भी उसमे पेपर फोल्ड किया हुवा tha..raj ने ओपन किया तोह …
“नाराजगी तोह h…par शिकायत nahi…ankho मई गहरी नींद ह ….फिर सोये क्यों nahi……mana ki……apna का ख्याल जरुरी h…..phir खुद का ख्याल क्यों नाहीई……..”
“ ये खूबसरा खाना ह अचे से खाइयेगा राज जी और खुद का धयान रखिये…. आपकी दोस्त और बहन का मैं धयान रखूंगी
आपकी दोस्त ….पूनम वैसे …मैं हे दोस्त मानती हु या आप भी मानते हो दोस्त मुझे
राज के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान thi….par इस बार ये बड़ी सी मुस्कान देखने के लिए पूनम मौजूद नहीं थी …….और जब वो फ्री लेक्चर मई कैंटीन पहुंची ….
वेटर — दी वो टिफिन तोह वो ले गए ..
पूनम -क्या …कब ….
वेटर — जी दी …सायद कोई क्लास फ्री थी उनकी ….इसलिए सुभे जल्दी हे आगये थे
पूनम राज का रिएक्शन देखना चाहती थी पर उसे दुःख हुवा की वो देख नहीं पयईईई …उसका चेहरा लटक गया और वेटर कॉलेज की तीन ख़ूबसूरत तिगड़ी मई से एक खूसूरत लड़की को कैसे ऐसे देख सकता था
वेटर — दी मुझे पता ह आप उन्हें चिप चिप कर देखती हो …इसलिए ये देखो मैंने उनकी हर पल की फोटो खिंच ली thi…taki आप उदास न हो
पूनम की आंखे खुसी से चमक गयी जब उसने वो साडी पिक्स देखि …….उसमे हर वो पल मौजूद थे जो वो देखना चाहती थी….” थैंक यू सो मच bhai……tum एक अचे दिल के इंसान हो मैं ये हेल्प कभी नहीं बुलंगा..
वेटर — दी बस प्यार से कोई भी 2 बात बोलदे थोड़ी इज़्ज़त दे दे गरीब को इसे ाचा जायदा मुझे कुछ नहीं चाहिए ह…
पूनम — तुम्हे कभी भी जरुरत हो एक बार इस बहन को जरुरत याद करना….
पूनम टेबल पर बैठकर साडी फोटो देख हे रही थी की कविता और मनीषा भी वाश रूम से आगयी…..
कविता और मनीषा को बिलकुल नहीं पता था की पूनम टिफ़िन लेकर आती ह राज के लिए और बॉडी गॉर्ड जो राज ने रखवाया ह उसी के पास से कैंटीन मई पहुँचवा देती h…….poonam के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी …
कविता — ोये होये आज मेरी दी बड़ी मुस्करा रही ह कंही ….कुछ…
पूनम — कतीईई ..बहुत बोलने लगी ह…
मनीषा — गड़बड़ तोह ह कतई …
पूनम अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मनीषा को घूरने लगीई..
मनीषा — कभी तोह बताएगी हे न…..
कविता — क्या दी बताओ na…..muje भी पता लगे की दी क्या छुपा रही ह वो भी मुझसे…
पूनम — No …..बिलकुल नहीं मनीषा ……देख तू मेरी बहन ह…
कविता ने पूनम के मू पर हाथ रख दिए और बोली “बोलै न दी क्या बात ह”
मनीषा- इसे किसी से काफी वक़्त से प्यार ह और अब वो प्यार इसे मिल गया ह पर वो कम्भखत …प्यार से दूर भागता ह….
कविता — वो …डीई….
मनीषा — धीरे कतई सब h…mere करीब आए जरा…
कविता — सॉरी डीई….
मनीषा — वैसे खुस तुजे होना चाहिए ह…
कविता — अरे अफ़्कौर्से ी म तू मच हैप्पी …
पूनम — no no प्लीज मांजा मनीषा ….
मनीषा — और अगर उस लड़के ने हां करदी तोह ….हम तीनो हमेसा साथ rahengi..hamesha
कविता हम तीनो हमेशा साथ रहेंगी ….
पूनम हाथ चलकर मनीषसे को रोकने लगी पर मनीषा कान्हा रूकने वाली थिई….
कविता कन्फूसिओं से मनीषा को देखने लगी ….
मनीषा — क्योकि तू इसकी नानन्द हो जाएगी न….
कविता — नानन्द हो jayegi….kya mat…ll…b…oh माय गॉड …ओह माय गॉड …..ohhh…myyyyy…godddd….ye उसने बहुत जोर से कहा था ….
मनीषा — कंट्रोल कतई चल कैंपस पार्क चलते ह
और जैसे हे पार्क पहुंचे तब कविता ने पूनम को जोर से गले लगा लिया …
कविता — अरे भाई मेरी और श्वेता की बात ताल हे नहीं सकते ह मैं और श्वेता ह न ….हम पूरी हेल्प करेंगे आपकी ….ी म सो हैप्पी ….आप भाभी बन गयी तोह भाई को फिर कभी अकेलापन महसूस नहीं होगा ……..कविता ख़ुशी से नाचने लगी ….और पूनम मनीषा से लड़ने लगी उसे बहुत शर्म आरही थी…
तीनो टिकड़ियो ने लेक्टर्स अटेंड किये और गैप सैप मरने के लिए तीन तिगड़ी आज पूनम के घर हे रुकी हुवी thi….aur आज इस खुसी का सेलिब्रेशन रात को मानाने की तयारी कर रही thi….kavita ने भाभी भाभी कहकर पूनम को शर्म से पानी पानी कर रखा था और मनीषा ने भी पूनम को छेड़ने मई कोई कसार नहीं चौडीइ…….
तोह दूसरी तरफ राज …घर मई पूनम के खाने को गरम करके आराम से खा रहा tha…..usne पूनम के हाथ का खाना तीसरी बार हे खाया था पर उसकी बंद आंखे बता रही थी की उसे खाना कितना स्वादिष्ट लग रहा था ….” अरे 2 टिफ़िन हो गए ह पूनम जी के मुझे उन्हें वापस कर देना चाहिए कल कॉलेज मई कर दूंगा …नहीं नहीं वंहा वो दोनों नहीं चारो होंगी मनीषस कविता अनु और रजनी किसी ने भी देख लिया तोह जान खा जाएँगी मेरी तोह क्या करू अभी वक़्त भी ह अनु का जवाब आने मई फिर मौका नहीं मिलेगा तोह घर देकर अजौ …..पर घर पर ाचा लगेगा ….अनिरुद्ध अंकल क्या सोचेंगे …ओह सहित वो तोह टूर पर गए h….honge आंटी हे होंगी …शामको de…aunga ….फिर सोच कर है यही तीख रहेगा…. पर खली हाथ जाना ाचा नहीं रहता ह …क्या लेकर jau….shweta से पुछु …नहीं दीपिका दी से पुछु ….नहीं गुसा होंगी …मधु जी से पूछता हु” इतना कह उसने कॉल लगा दिया …
मधु — तोह जनाब को 10 दिन बाद याद आयी ह….
राज — आपको पता ह की मेरी जिंदगी मई सुकून नहीं ह वैसे ….जुड़वाँ कैसे ह…
मधु — दुखी करते ह किक मरते ह ….
राज के चेहरे पर मुसकासन आगयी …. “अंकल कैसे ह
मधु — सब अचे ह तुम्हे याद करते ह बोल रहे थे की जब बचो का नामकरण करेंगे तुम्हे बुलाएँगे …अब उन्हें कैसे कहु की बाप को तोह बुलाना हे पड़ेगा न…”
राज — आप खुस हो मैं इसे खुस hu….main आऊंगा आपके pass…aur वक़्त भी बिताऊंगा ाचा मुझे आपकी हेल्प चाहिए…
मधु — मेरी हेल्प ..
राज — अगर किसी लड़की को थैंक यू बोलना हो तोह साथ मई क्या देना चाहिए…
मधु — सो फाइनली मेरे हीरो को लड़की पसंद आगयी…
राज ,- आप भी न आपकी कसम ऐसा कुछ नहीं ह सिर्फ थैंक यू बोलना ह फ्रेंड ह…
मधु —हम्म्म …वैसे लड़की मोर्डर्न हो तोह कोई बैग परफ्यूम या ड्रेस पसंद करती h…aur अगर लड़की सिंपल दिखावटी नहीं ह तोह चॉकलेट …. फ्लावर्स पस्न्द करती ह….
राज — दोनों ले जाऊ तोह
मधु — और भी ाचा ह….
राज — थैंक यू तक ..
मधु — ok मेरे पति देव जो आज्ञा आपकी और कुछ फ़िलहाल तोह कर नहीं सकती हु आपके लिए जब वक़्त मिले तब मिलते रहना…
राज —आप भी न कोई मौका नहीं छोड़ती हो.. ok आऊंगा ….tc…bye अपना धयान रखना ….
मधु - bye मिस यू..
इतना कह राज ने फ़ोन रखा और पोलुशन मास्क लगाकर बहार निकल gaya…rose और चॉकलेट्स लेने… उसने टाइम देखा तोह 4 बज रहे थे ……..अभी वो निकला हे था की उसे अपने तीख सामने अनु कार के बहार कड़ी दिखाई दी…
राज सीरियस हो gaya….anu उसके करीब आयी और बोली …
अनु — मैं तैयार हु तुम्हारी कंडीशन पूरी करने को कार मई गन ह …तुम जिसे कहोगे मैं शूट कर दूंगी …पर एक बात याद रखना अगर तुमने वडा तोडा या मुझे धोखा diya….toh ट्रस्ट में पूरी दुनिया मई छिपने की जगह नहीं मिलेगी ….मेरे पापा बचा लेंगे मुझे और अगर फिर भी पकड़ी गयी तोह भी जेल से लौटकर तुम्हे बर्बाद कर दूंगी …….मेरा प्यार मज़ाक नहीं ह ….इसलिए अब चाहे कातिल कहलाऊ या कुछ मैं सिर्फ तुम्हारी और तुम सिर्फ मेरे रहोगे…
राज बस हैरानी से उसे देखता रहा tha….wo देखना चाहता था की क्या सच मई अनु कर पायेगी सब फ़िलहाल वो राज के पहले टेस्ट मई पास हो गयी थी ….अब बरी थी दूसरे टेस्ट की यानि एक्शन की …..राज चुप चाप कार मई बैठ गया और अस पैर प्लान उसने यमदूत को एक लोकेशन पर भेज दिया और खुद अनु को जान भुज कर देरी करके लेकर वंहा पहुंच गया ……
राज ने यंहा वंहा देखा ….और फिर बोलै ..
राज — उस शख्स को देख रही उसने मुझे बहुत बार बेइज़्ज़त किया ह जब मई मुम्बई आया tha…apne साथियो के साथ मिलकर बहुत मारा था भले हे मैं बिल्डिंग्स पर तेज़ी से चकमा दे कर भाग सकता था पर इसने खुले मैदान मई घेरकर मारा था जिसकी वजह से मैं 20 दिन तक हॉस्पिटल मई एडमिट रहा tha….isliye हे मैंने वो बॉडीगॉर्ड रखा हुवा h…meri नज़र तब से हे ह इस पर..
अनु का गुसा धीरे धीरे राज की बाते सून कर बढ़ gaya…..koyi भी चाहे कोई भी राज को हर्ट नहीं कर सकता था ….उसने डैशबोर्ड मई से गन निकली और दुबारा मागज़ीने को निकल कर चेक करि …
राज — तुम्हे गन चलनी आती ह…
अनु — शूटिंग सीखी ह मैंने…
राज गुड मैं तुम्हारा इंतज़ार घर पर karunga……ab तुम कैसे आती हो कैसे नहीं ये सब तुम पर रहेगा पर शूट करते हे निकल जाना ….
राज वंहा से निकलकर दूर चिप gaya….usai अभी भी डाउट था अनु पर ….पर अनु ने सबकुछ उसके विपरीत किया उसने कार मई से वोडका का मिनीचेर निकला और एक हे घूंट मई पी गयी करीब 10 मिनट मई हे उसकी आँखों मई जो हिचकिचाहट थी वो दूर हो गयी…… “ साला हरामी मेरे प्यार को मरेगा ….आज के बाद तू कभी दुनिया मई दिखेगा हे nahi….”itna कह वो उस शख्स यानि मिरतिदूत के पीछे पहुंची और 2 गोलिया उसकी पीठ मई दाग dii….goliyo की तेज़ आवाज हुवी और आस पास के लोग जो 50 मीटर की हे दुरी पर थे वो अलर्ट हो गए अनु तेज़ी से वापस भागी और कार स्टार्ट हे छोड़ी थी उसने वो तुरंत वंहा से रवाना हो गयी …उसके रवाना होने के बाद हे मिर्त्युदूत कमर को सीधी करता हुवा खड़ा हुवा और बुलेट्स के प्रूफ जो रह गए थे उसे उठाकर छिपा लिए और वो भी गायब हो गया वंहा से ….कोई कुछ भी समाज नहीं पाया…
राज जो दूर से उसे देख रहा था…. “ Good…ab अनु को सच बताया जा सकता ह…. अनु मेरे लिए कुछ भी कर सकती ह ab….isai ये बात तोह साफ़ ह..” ये कहते कहते उसके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी… आखिर हो क्या न इतने दिनों से अपनी ह बहन के साथ प्यार का नाटक जो करना पढ़ रहा tha….aur इस नाटक मई उसने भाई बहन की लिमिट्स से आगे बढ़कर किश तक करि थी…..
अनु कार को भगति हुवी सीधी राज के घर के बहार ले आयी और घर के अंदर फिरज मई दारू ढूंढने lagi…..car मई जब उसने ये सोचा की उसने मर्डर कर दिया ह तोह उसका दिल जोर जोर से धधकने लगा tha…usai जल्द हे किचन के एक कौन मई छिपा कर राखी हुवी वाइन मिल गयी …और राज जब तक मित्युदूत के साथ घर पंहुचा …..तोह वो भी हैरान हो गया सोफे पर अनु तून होकर लड़की हुवी थी और फर्श पर वाइन की खली बोतल गिरी हुवी थी…..
मित्युदूत — लगता ह घबरा गयी ह मिस अनु…
राज — अपने सही कहा इसीलिए ….इसने पी ली ह पर वाइन कान्हा से आयी…
मित्युदूत ने गर्दन घुमा ली
राज - मैं इसे घर छोड़ कर अत hu…ap मेरा एक छोटा सा काम करदेंगे…
मित्युदूत ने गर्दन है मई हिला दी…
राज - मुझे वाइट रोजेज और चॉकलेट्स चाहिए ह खूब सरे….
मित्युदूत ने अपने ऊँगली दाल कर जोर से कान को हिलाया और टूकर टूकर राज को देखने लगा फिर बोलै “ जी मैं लेकर अत हु”
मित्युदूत के जाते हे राज ने अनु को गॉधी मई उठाया और उसके घर पहुंच गया…
अनु माँ-- ये क्या ह…
राज — बर्थडे ह न तोह मेरे साथ ख़ुशी ख़ुशी मई जायदा पिली ….आप चिंता न करे वाइन पि h….raat भर सोयेगी तोह नार्मल हो jayegi…..main इसे रूम मई सुलाकर अत हु ….
अनु माँ राज को ऊपर अनु को लेजाता देख कर “ ये लड़की भी न कितना ाचा लड़का ह अगर इसके ऐसी हे ड्रामे रहे तोह राज दूर न हो जाये इसे “
ऊपर राज ने अनु को सुलाया और फ़ोरेहेअद पर किश करि और स्टिकी नॉट लिख कर छोड़ दिया अनु के liye…..raj ने अनु के घर के बहार आकर टाइम देखा तोह रात के 9 बज गए थे … “ लेट हो गया रहने दू क्या ….पर रोजेज और चॉकलेट …मैं उन्हें कह देता हु वंही ले ayenge…..”inform और कुछ इंस्ट्रक्शंस मित्युदूत को देने के बाद राज टिफ़िन उठाकर जल्दी से पूनम के घर की तरफ निकल गया ….और इधर इस बात से अनजान….
तीनो अकेली घर पर खाना ेट्स तैयार कर रही थी होम थिएटर भी रेडी कर लिया था मूवी के लिए ….जिसमे पूनम आता घूंठ कर जस्ट फ्री हुवी थी उसने हाथ भी साफ़ नहीं किये थे…
कविता-- कस ममता दीदी यंहा होती तोह और मज़ा aajata….unhe पता लगेगा न आपके बारे मई तोह ख़ुशी से झूम uthengiii….waise दी सोचा ह भाई को कैसे मानना ह ..
पूनम — प्यार जबरदस्ती नहीं होता ह कतई वो तोह हो जाता ह ….मैं बस उनको केयर ….अपनी फीलिंग्स दिखा सकती hu….aur जब उनके दिल मई मेरे लिए फीलिंग्स आएंगी तब ….खुद हे पता लग जायेगा …
मनीषा — छोड़ कतई इसका प्यार निराला ह ये सामने से ये कभी नहीं कहेगी ….पर ये उसकी इतनी केयर करेगी की राज को खुद रीलीज़ हो जाये….
कविता — दी मुझे न प्यार समाज हे नहीं अत ह…
पूनम-- प्यार सिर्फ प्यार ह कतई इसमे तेरा मेरा कुछ नहीं …जो जैसा ह उसे वैसा हे उसे अपनाना और साथ देना होता h…ek दूसरे को संजना हे प्यार h…..jab तुजे होगा तब पता लग जायेगा…..
टिंग…… dong….ghar की दूर बेल्ल की आवाज हुवी …..तोह तीनो का धयान गया…
पूनम-- बड़ी माँ और पापा तोह आज आने वाले नहीं ह ….तोह फिर कौन आया ह…
मनीषा — तोह ढक ले जब तक हम तैयार करते ह सब किचन मई …
पूनम जिसके बाल बिखरे और हाथ मई अभी भी आता लगा हुवा था ….वो उसी हालत मई ayi…aur जब उसने दूर खोला तोह उसकी आंखे मई खुसी की चमक आगयीईइ
पूनम “आपपप”
राज हाथ आगे बढ़ कर “hello फ्रेंड पूनम जी कैसी ह आप”
पूनम की तोह वैसे हे राज को देखते हे सोचने समझने के दिमागी पुर्जे हिल जाते थे उसने तुरंत वो आते वाले हाथसे हे हाथ मिला लिया …
राज ने पूनम के हाथ को देखा “ लगता ह आप खाना बना रही थी मैंने डिस्टर्ब कर दिया”
पूनम ने राज के हाथपर आता लगा देखा तोह बोली “हे भगवान् बस एक मिनट” और तुरंत किचन की तरफ भागी पूनम कविता कुछ बोलती उसे पहले हे वो कपडा उठाकर बहार की तरफ भाग गयी ..पीछे कड़ी मनीषा कविता ने एक दूसरे को देखा और किचन से बहार आकर देखा toh…unki चौड़ी हो गयी और मू खुले के खुले रह गए क्योकि पूनम ने राज का हाथ पकड़ रखा था और अपने हाथ मई पकडे कपडे से राज के हाथ को साफ़ कर रही थी….
राज “कोई बात नहीं पूनम जी ….मैं ये टिफिन्स देने आया था.”
Boom….kitchen से जस्ट बहार आयी मनीषा और कविता को झटका सा laga….dono एक दूसरे को देख कर “ टिफ़िन खाना” दोनों दुबारा से राज और पूनम को देखने लगी ….
पूनम “ नहीं राज जी मैं भी न आपके हाथ ख़राब कर दिए ….आप अंदर आईये न …”
राज — ok ….
राज को क्या पता था की उसका ये ok….kya रंग लेन वाले था वो पूनम के पीछे एक कदम हे चला था की पूनम को याद आगया और उसने तुतंत टिफ़िन को साइड मई छिपा दिया ….
राज कुछ बोल पता ….
“ वो टिफ़िन खाना बहुत ख्याल रखा जा रहा ह इस गधे का और तुम मुझसे मिलने का टाइम नहीं ह तुम्हारे पास यंहा टिफ़िन लौटाए जा रहे ह….”
राज ने अपनी जीब दांतो से काट ली और मन हे मन बोलै “ भगवन क्या चाहते हो आप मतलब अब थैंक यू भी नहीं बोल सकता हु kya….wo भी तीख ह और आपको भाभी हे क्यों मिलती ह हर बार ऐसी सिचुएशन मई अब ये छोड़ेंगी नहीं मुझे” तुरंत उसके दिमाग मई आईडिया आया…
राज — अरे आप तोह हुक्का पानी लेकर चढ़ गयी मुझ पर मुझे पता था आप तीनो एक साथ हे हो …
कविता-- वो कैसे पता …
राज — बॉडीगॉर्ड …..बॉडीगॉर्ड रखा ह न आपके पीछे उसी ने बताया…
मनीषा — तोह फिर तीख h…bach गए तुम…
राज मन मई थैंक गॉड बच गया….
मनीषा — और ये टिफ़िन का चक्कर…
राज समाज गया की इनदोनो को टिफ़िन का पता नहीं उसने एक नज़र पूनम को देखा जो घबरा रही थी जैसे उसकी चोरी सामने वाली हो “ टिफ़िन क्या…. वो पूनमजी खाना ाचा बनती ह तोह
पूनम जी को कहकर मंगवाया था अब आप तोह बनती नहीं हो वर्ण आपको कह देता वैसे कब बना कर खिला रही हो”
राज की बात से मनीषा ….बैकफुट पर आगयी “सिख रही हु जल्द हे खिलाऊंगी”
कविता — गले लगते हुवे ी लव यू भाई…
राज - लव यू तू कब्बू…..
कविता — भाई गलत बात खली हाथ कोई ऐसे थैंक यू बोलता ह …..अपने पूनम bh….diii को कुछ नहीं दिया …
राज ओह ी म सॉरी अब क्या करे….
पूनम — कोई बात nahi…..waise एक चॉकलेट तोह बनती हे थी….
राज के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी….
पूनम मैं कॉफ़ी लती हु…..
कविता — भाई …एक बात कहु मन तोह नहीं करोगे….
राज — अरे तू बोलना क्या चाहिए ….
कविता — पक्का न प्लीज मन मत करना …..आप आज रात यही रूक जाओ न अगर आपको काम नहीं हो toh…please भाई …पूनम जो किचन के पास पहुंची थी वो भी कविता की बात सुनकर रूक gayii….aur राज के रिप्लाई का वेट करने लगी…
मनीषा — राज देहरादून की तरह प्लीज न…
राज — पर पूनम जी अकेली h…acha नहीं लगेगा…
मनीषा — बस यही दिकत ह मैं खुद अनिरुद्ध अंकल से पूछ लेती हु …
राज — ok ok आप दोनों जीती ….मैं रूक जाता हु ….
पूनम की तोह ख़ुशी का तीखाना हे नहीं रहा ……उसे और क्या चाहिए था ….वो ख़ुशी खुसी राज के लिए अछि सी कॉफ़ी बना कर ले आयी …..तभी एक बार फिर घर की दूर बेल्ल बजी….
पूनम “ अब कौन होगा “
कविता - दी अब तोह भाई भी यंहा फिर क्यों इतना सोच रही हो…
पूनम और राज की आंखे मिली राज के चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान देख एक पल वो उसे हे देखती रही फिर …दूर ओपन करने के लिए चली गयी…..
सिक्योरिटी गॉर्ड — मम ये आपके लिए ए ह….
पूनम ने बहार झांक कर देखा तोह उसकी आंखे बड़ी बड़ी हो गयी ….बहार खूबसरे फ्रेश वाइट फ्लावर और उसमे रेड फ्लावर्स के मिक्स बूके रखे हुवे थे हर बूके के साथ अलग टाइप्स की बहुत साडी चॉकलेट्स राखी हुवी thi….poonam ने आगे बढ़ कर एक बूके पर टंगे स्टीकर को उठाया जिस पर लिखा था थैंक you…..poonam के चेहरे पर इस वक़्त जो मुस्कान आयी थी अगर कोई भी लड़का देख ले तोह वो अपनी जान देने को भी तैयार हो जाता …..उसने पीछे मुड़कर राज की तरफ देखा जो उसी हे की तरफ मुस्कुराता हुवा देख रहा tha…….poonam की आँखों मई खुसी के आंसू आगये …..क्योकि ये पहली बार था जब उसे ऐसे किसी ने थैंक यू बोलै था …
राज ने भी पूनम की आंसुओ से भीगी आंखे देख ली थी पूनम ने जल्दी से अपने अपने आंसू पूंछे ….और एक बूके और चॉकलेट का पैकेट उठाकर आगयी…..
पूनम — थैंक यू …
राज — थैंक यू तोह मुझे कहना ह और ये थैंक यू उस खाने के आगे कुछ नहीं ह आप रियली बहुत ाचा खाना बनती h….specially ाललउपरथे….
कविता मनीषा — थैंक यू इतनी साडी चॉकलेट और ये बूके …
पूनम — बहार जाकर देखो ….कतई तू बोल रही थी न राज जी कुछ नहीं लाये …
मनीषा और कविता एक के बाद एक खूब सरे बूके और चॉकलेट्स लाते गयी…
राज भी हैरान था वो माथा पीटना चाहता था पर तीनो के चेहरे पर स्पेशलय पूनम को खुस देख कर वो बहुत खुस था……..
रात को सब ने एक साथ खाना खाया और बात करने lage….manisha और कविता बात करते करते सो gayi….poonam ने एक को काम किया और हल्का सा दोनों को कवर कर दिया ताकि ठण्ड न लगे…..
पूनम की नज़र राज पर गयी “ क्या सोच रहे ह राज जी नींद नहीं आरही ह..”
राज नहीं …थक गया हु हल्का सर दर्द ह …अपने आप तीख हो जायेगा आप सो जाईये आप थक गयी ह …
पूनम पहले तोह हिचकिचाई पर वो अपने प्यार को जरा सा भी दर्द मई कैसे देख सकती थी ….
पूनम तुरंत गयी और अनिरुद्ध गोस्वामी के रूम से नवरतन टेल लेकर आगयीईइ…..
पूनम-- आप इधर सोफे पर बैठ जाईये …
राज — पूनम जी रात के एक बज गए ह आप सो जैइए आप भी थक गयी होंगी ….
पूनम — एक दोस्त परेशां ह तोह दूसरे दोस्त को नींद कैसे आएगी भला …
राज — आपसे बातो मई कोई नहीं जीत सकता ह ..
पूनम — तोह बैठ जाईये ….और राज के बैठ ते हे ….
उसने थोड़ा सा टेल राज के सर पर गिरा कर ….मालिश सुरु करदी ….अब पूनम ये मालिश 10 साल की उम्र से हे अपने चाचा के सर पर करती आयी थी एक मिनट मई हे ….राज का सर दर्द दूर हो गया ….
राज - एक बात पुछु …
पूनम — है …
राज — आप कैसे कर लेती हो सब ….
पूनम के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी….. “ जब 7 साल की थी तब एक बार चाचा चची को बात करते सुन लिया की मैं उनकी बेटी नहीं उनके भाई की बेटी हु …..खूब रोई चाचा चची ने बहुत समझाया …पर दुख तोह हुवा हे था पर संभल गयी बूस तबसे ….हे सब बदल गया मैं घर का काम karti…..padhayi karti…chacha चची का धयान रखती…..
राज — कितना बदल जाता ह न जब पता लगे की दुनिया मई अकेला जीना ह….
पूनम — राज ji….kami तोह कोई भी माबाप की पूरी नहीं कर सकता ह पर फिर भी आसपास बहुत से ऐसे भी ह जो हमे बहुत चाहते ह हमे उनके लिए जीना होता ह….
राज — आप बहुत हीमत वाली हो …..
पूनम — आप और मैं एक हे जैसी कश्ती पर सवार ह ….सायद इसीलिए भगवन ने हमे मिलाया ह ….
राज के चेहरे पर मुस्कान आगयी….. “आप जिसकी जिंदगी मई जाओगी वो बहुत खुसनसीब होगा…..
पूनम — प्यार भी नसीब से मिलता ह राज जी ….
राज — प्यार ह कान्हा इस दुनिया मई प्यार मई लोग ….अपनों से जायदा दुसरो पर यकीन करते ह …और सिर्फ पैसो को प्यार से जायदा इम्पोर्टेंस देते ह….
पूनम — राज जी बुरा मत मन्ना ….प्यार मई ग़लतफ़हमी आम ह ….कभी जो दीखता ह वो होता नहीं h…..par हमारी रेस्पोंसिब्लिटी होती हम एक दूसरे पर विस्वास दिखाए …..जरुरी नहीं ह प्यार मई दोनों तरफ हे समझदार हो ….कभी कभी झुखना और समझाना भी पड़ता ह ..तभी प्यार की डोर और मजबूत होती ह
राज पूनम की बात को गहराई से समझता रहा फिर उसने पलट कर पूनम को देखा ….पूनम के चेहरे पर हमेसा की तरह मुस्कराहट thi…..dono एक दूसरे को काफी दिएर तक ऐसे हे देखते रहे ……
पूनम —अब सर दर्द कैसा ह…
राज - बिलकुल गायब हो गया ह थैंक यू सो मच….
पूनम — ाचा दोस्ती मई थैंक यू भी कहते ह….
राज — ok आप जीती इतना कह वो मुस्कुराने लगा….
पूनम — “ बस ये हंसी कभी भी जाने मत dijiyega….kyoki आप की ये हंसी बहुत प्यारी ह …..
राज मन मई “ पता नहीं क्यों पर मैं जब भी पूनम से मिटा हु खुद को उसे अलग हे नहीं कर पता हु क्या कोई रिश्ता ह पुराने जनम का …”
पूनम — कान्हा खो गए राज जी…
राज “ कंही नहीं …आप सो जाइये मैं नहीं चाहता की मेरी दोस्त परेशां हो”…
पूनम “ गुड नाईट राज जी”
राज “ गुड नाईट ….पूनम जी”
पूनम अपने रूम मई जाने के बजाये तीनो के पास हे पड़े सोफे पर लेट गयी कुछ दिएर बाद उसकी निगाहे राज की तरफ गयी तोह राज उसी की तरफ चेहरा करके गहरी नींद मई सो गया tha……half ऑवर बाद पूनम उठी और राज के पास गयी जब उसे यकीं हो गया की राज सो गया ह तोह उसके सर पर हाथ फिरकर फ़ोरेहेअद पर किस करदी ….उसने देखा की राज के पास पानी नहीं ह तोह पानी किचन से लाकर उसके पास रख diya…….aur सोफे पर जाकर सो gayiii…..uske दिल मई गहरा सुकून था क्योकि एक पत्नी की तरह उसने राज का पूरा ख्याल रखा था और राज के दिल मई अपनी गहरी जगह बनती जा रही thi……….jab सुभे उसकी नींद 6 बजे खुली तोह राज का सोता हुवा चेहरा अभी भी उसकी हे तरफ हे tha….wo खुदसे हे बोली “ एक दिन वो आएगा जब रोज मैं राज को अपने सामने पाऊँगी”
दूसरी तरफ अनु की नींद खुली तोह वो उसका सर चक्र रहा tha…..usne टेबल से उठाकर पानी पिया और पस्सपडे स्टिकी नोट को उठाया जिस पर लिखा था “ सब तीख ह जब उठ जाओ 10 बजे घर आकर मिलना बहुत जरुरी बात करनी ह मेरे तुम्हारे रिश्ते को lekar…..Raj”
इधर राज की नींद खुली तोह …उसने टाइम देखा 7 बज रहे थे …..वो मन मई बोलै “ वक़्त आगया ह अब सच पता करने का ….बहुत खेल लिया तू अपनों के साथ मां उर्फ़ विक्टर अब मेरी बरी h….apno का धोखा कैसा लगता ह अब तुजे पता लगेगा”
आज के लिए इतना he….Deri के लिए माफ़ी…
मस्ती मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का ……