Adultery Raj-- hero of the family - Page 74 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Raj-- hero of the family

अपडेट मॉर्निंग मई आएगा थोड़ा सा काम बाकि रह गया ह फिर एडिटिंग बाकी ह टाइम लग जायेगा इसलिए मॉर्निंग मई पढ़ लेना ....
 
अपडेट 225..

क्लैश…

रिकैप…

वंही इनसे अलग ….

“अब तुम तैयार हो शेरदिल तुमने वो कर दिखाया ह जो अचे अचे नहीं कर पाते ह अब वक़्त आगया ह की तुम भी मैदान मई उतर jao…..yudh का समय समीप ारः ह”

शेरदिल “जो आप कहे गुरु देव”

तोह एक घटना और घाट रही थी ….

योगी बाबा के गुप्त आश्रम मई जिसका पता सिर्फ राज के गुरूजी को हे हे था वंहा..

योगी बाबा “पुत्र अभय उठ जाओ….”

अभय ने धीरे धीरे अपनी आंखे खोली और आसपास देखते हुवे बोलै मैं जिन्दा hu…..par मैं तोह निर्वाण के साथ उनसे लड़ रहा था और मेरी मौत हो गयी थी”

योगी बाबा के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और बोले “क्या तुमने कोई सपना देखा”

अभय छोङकर “बाबा आप”

योगी बाबा “कुछ वक़्त बाद युद्ध सुरु होने वाला ह परिवार को तुम्हारी जरुरत होगी जब तक तुम यही रहोगे और तुम्हे तुम्हरे सरे सवालो के जवाब भी मिल जायेंगे”

अभय “जैसा आप कहे”

अब आगई…..

उत्तरप्रदेश के हर बॉर्डर पर साडी जगह अब पूरी तरह से कुंदन और बलराम के चमचे मौजूद थे कोई कार कोई भी गली से बिना बचे हुवे निकलना नमकीन tha….par अभी तक बचो के बारे मई पता न चलने पर टट्टू वाला शख्स बुरी तरह गुसाई से गरम हो रखा था…

और वो बोलै… “बहार नहीं गए तोह गए kanha….dharti निगलगायी या आसमान खा गया….”

बलराम “हो सकता ह की वो बहार जाने की बजाये अंदर उत्तरप्रदेश मई हे कंही चिप गए हो ”

टट्टूवाला शख्स “गुसाई से ….तोह इंतज़ार किसका कर रहा ह ऐसा कह वो अपनी कार मई बैठा और कुंदन की बजाये बलराम को अंदर बैठने का इशारा किया”

और बलराम के बैठने के बाद “पास मई सबसे बड़ा सहर कौन सा ह …”

बलराम “उनके सबसे जायदा छिपने के चान्सेस कानपुर मई हे होंगे क्योकि यंहा से पास मई बड़े सहर मिर्ज़ापुर या कानपुर हे ह जंहा वो चिप सकते ह …और मिर्ज़ापुर मई तोह सरे हमारे आदमी ह तोह वंहा छिपना नामुनकिन होगा ….इसलिए मुझे यकीं ह अगर वो उत्तरप्रदेश मई ह तोह कानपुर हे jayenge…kyoki वंहा पुलिस का सेंट्रल ऑफिस भी ह तोह उन्हें लगेगा की वंहा हम उन्हें जायदा ढूंढेंगे नहीं….

टट्टूवाला शख्स ने जीपीएस मई कानपुर की लोकेशन सेट की और गाड़ी को उस तरफ भागड़िया ….और बलराम ने भी कानपुर मई अपने फार्महाउस पर आने और अर्रंगेमेन्ट्स केलिए कह दिया और साथ हे वंहा के अपने कॉन्टेक्ट्स को इन्फॉर्म कर diya……aur इनके पीछे हे कुंदन भी अपनी गाड़ी मई अपने कॉन्टेक्ट्स को इन्फॉर्म करता हुवा आने लगा ….तभी उसके पास …उत्तरप्रदेश चीफ मिनिस्टर का कॉल आगया जंहा काफी दिएर तक उनकी बात हुवी..

तोह दूसरी तरफ…….


ऋचा “हमे आज हॉस्पिटल जाना ह आपको पता ह न फिर आप दिएर क्यों कर रहे ह”

राज मू बनाकर हो रहा हु न तैयार वैसे भी मेरा मन नहीं करता ह हॉस्पिटल जजनी लिए

ऋचा “अरे …और वो क्यों नहीं करता ह “

Raj“kyoki वंहा वो गन्दी सी मशीन ह जो कान मई जोर जोर से शोर करती ह ऊपर से गन्दी गन्दी नर्स ह …मुझे इंजेक्शन देती ह सकल देखि ह चुड़ैल भी अछि लगे से toh…bus..mujhe नहीं ाचा लगता ह प्लीज रहने देते ह प्लीज nichu…”raj ने दोनों हाथ जोड़कर क्यूट से एक्सप्रेशन बनाकर कहे की ऋचा खिल खिला उठी….

ऋचा खिल खिलाकर हँसते हुवे “तीख ह तीख ह पति देव अबकी बार एक बहुत प्यारी डॉ मिलेंगी आपको जो आपको इंजेक्शन नहीं लगाएंगी …आपसे खूब बाते करेंगी अछि अछि अछि चीजे खिलाएंगी हम दूसरे हॉस्पिटल जायेंगे इस बार ok इस बार हम कानपुर जा रहे h…suprise ह आपके लिए”

राज ख़ुशी से “सच मई प्रॉमिस करो न कोई इंजेक्शन नहीं कोई मशीन नहीं”

ऋचा “प्रॉमिस पर आपको उनकी हर बात माननी होगी आप भी करो प्रॉमिस”

राज ने खुसी से ऋचा को बांहो मई भर लिया और खूब साडी किस्सेस ऋचा के होठो पर ,गलो पर, माथे पर करदी और बोलै “पका पका वाला प्रॉमिस “

ऋचा “गंदे मेरा पूरा चेहरा गिला कर दिया” अभी वो और कुछ कहती तभी बहार से कार के हॉर्न को आवाज आगयी…

ऋचा “ये लो आपकी सिस्टर्स ने कार भी भिजवा दी ह आपके लिए”

राज “सिम्मी निम्मी डिम्पी बहुत अछि ह चलिए अब आपको दिएर नहीं हो रही ह kya”itna कह वो जल्दी से बहार भगा तोह पीछे से ऋचा चिल्लाई “अच्छा जी …रूको मैं बताती हु आपको”

राज और ऋचा हॉस्पिटल के लिए निकल गए जंहा ड्राइवर कार ड्राइव कर रहा था तोह पीछे राज ऋचा के कंधे पर सर रखकर लेता हुवा tha….car जैसे हे गाँव से निकलकर क्रॉस हुवी एक बाइक उनके पीछे लग गयी जिसपर मित्युदूत बैठा हुवा था …और उसने अपने एअर पीेछे मई कहा मास्टर निकल चुके ह ..तोह दिस्री तरफ से दूसरे मित्युदूत की आवाज आयी ….ok..

और फिर दूसरे मित्युदूत ने तुरंत दूर ओपेनकिया ….और फिर मीटिंग कर रही द्दिव्य के पास आकर कान मई kaha“wo निकलचुके ह 2 ऑवर मई आजायेंगे”

दिव्या के चेहरे पर मुस्कान आगयी …और उसने मीटिंग ओवर करि और तुरंत निकलगई मीटिंग रूम से बहार…. और उसके साथ हे उसकी सिक्योरिटी मई लगी टीम भी अलर्ट हो गयी जो उत्तरप्रदेश की गवर्नमेंट ने स्पेशलय उन्हें दी थी…

दिव्या “हम मार्किट जायेंगे ….”

सेकरट्री ने तुरंत कार को निकलने का इशारा किया ..

सेकरट्री कार मई “मम आपको पहले कभी इतना खुस नहीं देखा”

दिव्या “ऋचा बेटी आरही ह इसलिए उसी के लिए सब्जिया …और थोड़ा सामान लेने जा रही हु उसे मेरे हाथ का खाना बहुत पसंद ह”

सेकरट्री “ओह ऋचा मम दिल्ली से आरही ह”

दिव्या “है …मेरे सरे अपॉइंटमेंट्स कैंसिल कर दो …आज ke…aj का दिन सिर्फ उसी के लिए ”

सेकरट्री “यस मम” इतना कह कर उसने सरे अपॉइंटमेंट्स कैंसिल कर दिए तोह…

वंही दिव्या …वेजिटेबल मार्किट से खुद फ्रेश सब्जिया …खीर केलिए सेवईया …ghee….sab लिया क्योकि राज को आज भी रोटी घी और चिन्नी से बना चूरमा और खीर बहुत पसंद thi……aur आज दिव्या भी एक साल बाद राज से मिल रही थी होश मई आने के बाद वो सिर्फ एक बार हे मिली थी जिसमे भी राज के सरीर पर ड्रिप्स ग्लूकोस मेडिसिन की बोतल लगी हुवी थी और उसकी हालत ख़राब thi…uske रोने और बप hi होने की वजह से …..उसे गुरूजी ने योगी बाबा के कहने पर मां किया था मिलने se…isliye राज से मिलने के ख्यालसे हे वो बहुत खुस थी वैसे भी वो माँ थी राज की और माँ पर जो बिट टी ह उसका अंदाज़ा कोई नहीं लगा सकता ह और दिव्या ने तोह खुद राज को उस हालत मई देखा था …जब ऋचा कैंप केलिए गयी हुवी thi…aur उसके पास राज को नदी के पास वाले गाँव के लोग बुरी हालत मई लेकर ए the…aur ऋचा ने दिव्या को साडी कंडीशन बताई thi…….divya अभी ख़ुशी ख़ुशी सब लेकर हॉस्पिटल के ऊपर फ्लोर मई बने अपने अपार्टमेंट मई पहुंची …और तयारी मई लग गयी 2 ऑवर कब बीत गए पता हे नहीं लगा…

मित्युदूत 2 “मम मास्टर 5 मिनट मई पहुंच जायेंगे”

दिव्या तुरंत हाथ धोकर निचे लिफ्ट से ग्राउंड फ्लोर पर मैं दूर पर स्वागत के लिए आगयी और उसका इंतज़ार ख़तम हुवा क्योकि सामने से कार अन्तर होकर मैं एंट्रेंस के पास आकर रुकी और दूर खोलकर पहले उत्तरी ऋचा और फिर उतरा raj…aur राज को देखते हे दिव्या की आंखे भर आयी पर उसने तुरंत खुद पर काबू किया क्योकि आसपास बहुत सा स्टाफ दिव्या को देख कर वंहा आगया था पर दिव्या की नज़र तोह राज और ऋचा पर थी ….

ऋचा “माँ”

दिव्या ने आगे बढ़ तुरंत ऋचा को गले लगा लिया…..

राज शॉक से “ये कौनसा हॉस्पिटल ह माँ आपकी माँ कैसे हो गयी ये”

ऋचा “पहले आप आश्रीवाद लीजिये पाँव चुकार”

राज ने पाँव चुकार आश्रीवाद लिया तोह…

दिव्या “सदा सुखी रहो भगवन तुम्हारी जोड़ी बनाये रखे”

ऋचा “इन्होने हे मुझे पढ़ाया ह धयान रखा ह हमेशा माँ की tarah…aur जब आपको चोट लगी और बेहोश थे तब इन्होने ने हे तोह आपकी केयर करि थी समझे आप”

दिव्या ऋचा को चुप रहने का इशारा करके “Hello दीपू beta….kaise ह आप”

राज ने दिव्या को मुस्करा कर देखा …मैं ाचा हु आंटी मतलब माँ…

दिव्या को हंसी agayi“ao अंदर चले तुम मुझे माँ हे बोलो”

राज रस्ते मई “यंहा कोई मुझे इंजेक्शन नहीं लगाएगा न”

दिव्या प्यार से “बिलकुल भी नहीं …और मेरे सिवाए कोई आपको चेक भी नहीं करेगा …मैं तोह चेक कर सकती हु न आपको…”

राज ने जल्दी से है मई तीन बार गर्दन हिला di…par तभी राज की नज़र पीछे खड़े मित्युदूत पर गयी …और वो उसे घूरकर देखने लगा”

दिव्या ने राज को ऐसा करते देखा तोह मुस्कुरा कर बोली “वो हमारी सेफ्टी के लिए ह वो बहुत अचे ह और आप तोह उन्हें जानते ह न आपकी यादास्त से पहले आप फ्रेंड थे”

राज ने कुछ नहीं कहा और दिव्या के साथ चला गया पर पीछे खड़े मित्युदूत 2 की भी आंखे भीग आयी थी वो भी खुदको दोषी मंटा था इनसबके लिए….

राज ऋचा और दिव्या …अपार्टमेंट मई पहुंचे तोह….

राज “हॉस्पिटल मई घर वो ऐसा भी होता ह क्या”

दिव्या “होता ह न वो इसलिए क्योकि कभी भी इमरजेंसी अजय तोह जाना पड़ता ह इसलिए मैं हॉस्पिटल मई यही रूकती हु ताकि आराम से काम कर सकू..”

राज “तब तोह आप बहुत बड़ी डॉ होंगी क्योकि आपको यंहा घर भी मिला हुवा ह”

दिव्या मुस्कुरा कर “ये मेरी भाभी का हॉस्पिटल ह वो अब इस दुनिया मई नहीं ह तोह अब मैं हे संभालती हु”

राज हैरानी से “इतना बड़ा hospital…apka ह …ये तोह बहुत बड़ा ह ….कितनी बड़ी बिल्डिंग ह”

ऋचा “आप पहले बैठ jaiyiye…phir आराम से बाते करिये और अब आप समाज गए न मैं क्यों कहती थी की बहुत पैसा ह जितना आपको चाहिए मिलेगा और ये क्या आपकी बोतल कान्हा ह”

राज मुस्कुरा कर “ मैंने रस्ते मई जब आपका धयान नहीं था फेंक दी वैसे भी मुझे अब वो पसंद नहीं h…jab देखो पिटे रहो अब तक तीख तोह हुवा नहीं हु”.

ऋचा डांटने हे वाली थी की दिव्या ने तुरंत ऋचा को रूकने का इशारा किया और बोली “ दीपू बीटा सपने अभी भी आते ह क्या”

राज “मुझे पहले भूक लगी ह”

ऋचा “आप”

दिव्या “ कोई बात नहीं ऋचा …मुझे बात करने do…Deepu आप तोह अचे बचे ह न ..पहले आप आंसर दीजिये फिर मैं आपको बहुत साडी चीजे खिलाऊंगी पिंकी प्रॉमिस…”

राज “ ये हुवी न baat…ate ह न अब तोह अलग अलग एते ह” फिर हर बात डिटेल मई बताता चला गया और लास्ट मई बोलै “और अब तोह एक निर्वाण नाम से मेरे जैसा हे दिखाई देता ह जो कहता ह और मौते होंगी तेरे अपनों की सिर्फ तेरी वजह से मुझे बहार आने दे … अब आप हे बताओ मेरा ऋचा के सिवाए कोई ह हे नहीं इस दुनिया मई तोह मेरे अपनों की मौत कैसे होंगी ….ये सपने भी न ….कैसे कैसे एते रहते ह”

दिव्या राज की बात सून कर दुखी और सीरियस हो गयी पर राज को दिखाया नहीं और बोली “ाचा दीपू अबकी बार जब वो निर्वाण ए तोह उसे उल्लू बनाकर बोलना …तू तोह मेरा दोस्त ह न …तोह फिर तू मेरी हेल्प क्यों नहीं करता ह क्यों न हम दोस्त बन जाये और एक हो जाये मिलकर अपनों को बचाये”

राज जोर जोर से हँसते हुवे “आप भी न वो तोह सपना ह सच नहीं और वैसे भी वो गुसैल ह धमकाता ह mujhe….mujhe नहीं करनी उस साई दोस्ती”

दिव्या “आपको पता ह जब हम सोते ह हमारा दूसरा दिमाग एक्टिव हो जाता ह जो जब हम जागते ह वो सोता रहता ह क्या पता वो सच हो ….और वैसे भी आपको तोह उस साई बाते हे तोह करनी ह क्या पता वो आपकी बात मान जाये और फिर आपको परेशां न करे …”

राज “हम्म”

दिव्या “आप भी उसे बोलै करो दोस्त बंजा तू मेरी और मैं तेरी बात मानूंगा”

राज “वो आपकी बार आने दो उसे बहुत तंग करता हु मैं भी उसी तंग कर दूंगा इतना तंग करूँगा की खुद परेशां हो जायेगा”

दिव्या “ाचा तीख ह अब आप हैंडवाश कर के ाजाओ मैं आपके लिए खाना लगाती hu..richa मेरे साथ औ”

ऋचा राज की तरफ देख कर “और आप कोई बदमाशी नहीं करेंगे”

राज ने ऋचा की तरफ जीब निकल दी और हैंड वाश करने चला gaya…par यंहा दिव्या से एक बहुत बड़ी गलती हो gayi…raj हैंड वाश करने तोह गया पर अपार्टमेंट के बहार का नज़ारा देखने लगा और तभी उसकी नज़र दिव्या के रूम की तरफ चली गयी जंहा उसकी और दिव्या की बचपन और जवानी की फोटो लगी हुवी thi…raj के दिल मई देखने की ीचा जाग गयी उसने एक नज़र किचन की तरफ देखा और चुप चाप दिव्या के रूम मई आगया और दिव्या और अपनी फोटो देखने लगा जंहा दिव्या ने उसे गलेलगा रखा था …और वो दिव्या के गाल पर किश कर रहा tha….aur उनके साइड मई एक फोटो सहदेव और विद्या की लगी हुवी thi…jinke ऊपर हार चढ़ा हुवा था …राज ने दोनों को देखा तोह एक पल के लिए देखता हे रह gaya….aur अपने हाथ को उठा कर चुकार dekha….par तभी तीसरी फोटो पर उसकी नज़र पड़ी तोह अचानक उसके सर मई दर्द उठ गया और उसी दर्द मई वो बोलै …. “ये ये तोह वही ह जो मेरे सपने मई अति ह ….मैं इनके साथ क्या कर रहा hu….aur ये लड़की तोह बिलकुल वही लड़की ह जो राज राज चिल्लाते हुवे मुझे पुकार रही thi….ahhhhh मेरा सर …..nahi…iska मतलब वो सब सपना नहीं h….wo सच मई ह …कौन हो तुम” तभी उसके सर मई तेज़ दर्द होने लगा …..और वो दर्द से बिलबिला उठा “अह्ह्ह्हह्हह मेरा सर…….” दर्द से उसकी चीक निकल gayii…kitchen मई दिव्या और ऋचा को आवाज आयी तोह वो तुरंत जल्दी से बहार की तरफ भागी ….पर उन्हें राज नहीं दिखायी दिया …

दिव्या “राज कान्हा ह”

ऋचा “आवाज माँ उनकी हे थी”

दिव्या और ऋचा अंदर रूम्की तरफ भागी और अंदर राज बिस्तर पर तड़फड़ाते हुवे बोल रहा था वो सच ह वो सच ह”

दिव्या “जल्दी एनेस्थेसिया लाओ … वंहा सेकंड ड्रावर मई ह”

ऋचा तुरंत एनेस्थेसिया ले आयी और दिव्या ने तुरंत उसका उसे कर राज को बेहोश कर दिया ….

ऋचा “माँ क्या हो गया ह इन्हे”

दिव्या की नज़र ऊपर फोटोज की तरफ गयी तोह वो बोली “उसे पता लग गया ह की आज तक जिसे वो सपना समझता था ….वो सब हॉकी काट मई ह..

ऋचा “अब क्या होगा माँ”

दिव्या “कुछ दिएर ये बेहोश रहेगा इसे सोने दो तुम बहार औ अब उठने पर हे पता लगेगा”

ऋचा “पर माँ ये अब मुझसे भी नाराज हो जायेंगे …”

दिव्या “नहीं वो नहीं hoga….hosh मई आने पर हे बाकि कन्फर्म होगा और उसके पास होश मई एते हे बहुत सवाल होंगे …जिनका जवाब हमे देना होगा”

ऋचा की आँखों से आंसू गिरने लगे ….

दिव्या उसको गलेलगाकर “पगली …मैं हु न …और अब तोह तुम दोनों पति पत्नी ho…kuch नहीं होगा”

ऋचा और दिव्या बहार तोह आगयी पर गलती तोह हो चुकी थी राज ने आज दवाई यानि गुरूजी का काढ़ा नहीं पीया था….

वंही कानपूर मई कोहराम मचा हुवा था हर गली …हर घर पर निघाये राखी जा रही थी …घर घर जाकर फोटो दिखा दिखाकर लोगो से बचो के बारे मई पूछ रहा था…….

तभी विद्या ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल कानपूर मई एक एम्बुलेंस आकर रुकी और उसमे से एक लेडीज उत्तरी जिसके हाथ मई 2बचे थे और साथ मई दो आदमी ित्रे….

लेडीज “जल्दी करिये बचो को dr's को दिखाईये पता नहीं क्या हो गया ह मेरे बचो को “

साथ आया आदमी जल्दी से अंदर भगा और चिल्लाया “डॉ डॉ”

उसकी आवाज सून वंहा पास मई खड़े कुछ मेडिकल स्टाफ तुरंत भाग कर ए और बचो को तुरंत हाथ मई लेकर अंदर इमरजेंसी रूम्की तरफ आगये…

एक नर्सिंग स्टाफ “ आप वंहा रिसेप्शन पर फॉर्म भरदीजिये और चिंता मत कीजिये उनका ट्रीटमेंट सुरु हो चूका ह”

आदमी ने है मई गर्दन हिलायी और तुरंत रिसेप्शन पर चला gaya…aur नर्स जो पूछ रही थी बताने लगा ….और तभी उसके मू से निकला जुड़वाँ बचे ह….

और उसके मू से ये सुनते हे थर्ड रिसेप्शन काउंटर पर बैठे आदमी की भोंहे सिकुड़ गयी और उसने अपने मोबाइल मई मैसेज देखा जंहा जुड़वाँ बचो के बारे मई पता चलने पर बताने को कहा गया था …उसने तुरंत मोबाइल निकला और बोलै … “ भाई अभी अभी विद्या ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल मई जुड़वाँ बचे ए ह…”

कॉल कट होते हे उसके चेहरे पर मुस्कान आगयी और वो धीरे से बोलै “अब तोह बड़ा इनाम मिलेगा”

और ये बात जल्दी हे चारो तरफ फ़ैल गयी और अंत मई कुंदन और बलराम तक भी पहुंच गयी….

बलराम “ अभी अभी जुड़वाँ बचे विद्या ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल मई ए ह”

टट्टूवाला शख्स “चलो”

इधर ये बात कुंदन तक पहुंची तोह वो सोचते हुवे मन मई हे बोलै “विद्या ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल …. अगर बलराम और उस राख्षस ने वंहा कुछ कर दिया तोह लेने के देने पद jayenge…vidya ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल की पावर पुरे इंडिया मई h….aur इनकी पहुंच भी ऊपर तक ह ….बहुत बड़ा पन्गा हो सकता ह मुझे खुद जाना hoga…”itna सोचते हुवे वो तुरंत जाने के लिए निकल गया ….और साथ हे कमिश्नर को भी आने के लिए बोल दिया ….

वंही ऊपर दिव्या को निचे इमरजेंसी रूम से कॉल aya….jisai दिव्या ने उठाया…

“मम इमरजेंसी केस ह जुड़वाँ बचे ह जिनकी कंडीशन क्रिटिकल ह डॉ शर्मा ावेलिएबले नहीं ह आपको आना होगा मम”

दिव्या “ok मैं आती हु फिर पलट कर ऋचा तुम राज का धयान रखो मैं आती हु”

ऋचा “जी माँ”

दिव्या ने उसके गाल पर हाथ फेरा और निचे आगयी तोह ऋचा वाल पर लगी कक्तव स्क्रीन को देखने लगी और एक बार राज की तरफ भी नज़र रखती निचे दिव्या ने तुरंत बचो का ट्रीटमेंट सुरु कर दिया ….

तोह दिएर बाद बहार एक साथ कई गाड़िया हॉस्पिटल मई एंटर हुवी और गाड़ियों की आवाज सुनते हे दोनों मित्युदूत एक्टिव हो गए पर हथियार नहीं nikale…hospital की सिक्योरिटी स्टाफ एक साथ गेट की तरफ आगया….

सिक्योरिटी चीफ “ap”wo इतना हे बोलै था की बलराम ने उसका गाला पकड़ लिया और एक पंच उसके मू पर मार diya……balram की ये हरकत देखा पूरा सिक्योरिटी स्टाफ आगे आगया तोह बलराम के साथ ए आदमी भी अटैक के लिए आगे agaye….aur दोनों मई धक्का मुकि हो गयी तोह एक मित्युदूत आगे आया और बलराम को रोक दिया …

बलराम “मरना ह क्या आगे से हैट जा”

मित्युदूत कोई एक्शन लेता उसे पहले हे पीछे से आवाज ईई

“कौन हो तुम लोग और क्यों शोर मचा रखा ह”

ये दिव्या थी जो अपना ट्रीटमेंट करके बाकि टीम को केस हैंडओवर करके जस्ट बहार आयी थी और शोर शराबा सुनकर मैं एंट्रेंस की तरफ आगयी थी..

बलराम “डॉ मुझे यंहा बचो को ढूँढना ह”

दिव्या “ये तुम्हारे बाप का घर नहीं ह जो शोरबा मचा रखा ह और ढूँढना ह तुम हो कौन जो ऐसे हे हॉस्पिटल मई घुस कर धुंध लोगे चलो अपने ये किराये के आदमी लो और दफा हो जाओ इसे पहले की तुम्हे पुलिस के हवाले कर दू”

बलराम के ये सुनते हे तनबदन मई आग सी लग गयी और वो आगे दिव्या को थपड मरने के लिए आगे बढ़ा तोह “मित्युदूत ने उसे रोकलिया”

वंही ऋचा ये सब जो कक्तव स्क्रीन पर देखरही थी तुरंत राज को एक बार देखा जो सो रहा था और फिर निचे की तरफ bhagii….par आज कुछ और हे होना था ….वो जल्दबाज़ी मई सिर्फ राज के चेहरे की हे तरफ देख कर भाग गयी उसने ये नहीं देखा की पेअर की उंगलिया हिल रही h…uske जाते हे राज की आंखे खुल गयी जो बिलकुल लाल सुर्ख हो राखी थी ..वो एक फ्लिप के साथ झटके से खड़ा हुवा और फिर दीवार पर लगी हुवी फोटो देखि और बहार आगया उसकी नज़र कक्तव स्क्रीन की तरफ गयी और वो वंहा agaya..aur अंगड़ाई लेने लगा…

निचे …. मित्युदूत को रास्ता रोकता देखा टट्टूवाला शख्स ने मित्युदूत को गले से पकड़कर ऊपर उठाया और एक किक उसकी चेस्ट पर मरी ....जिसकी पावर से वो दूर जाकर गिरा और उसके मू से खून निकल आया ..... टट्टूवाला शख्स दुबारा से आगे बढ़ा और सामने कड़ी दिव्या को मरने के लिए....

वंही ये सब स्क्रीन पर देख रहे राज की आंखे गुसाई से लाल हो गयी और अगले हे पल जैसे वो अपनी जगह से गायब सा हो गया और जब वो दिखा तोह वो टट्टूवाले शख्स के तीख सामने खड़ा था और उसके पंच को अपने एक हाथ से ब्लॉक किये हुवे था...…

टट्टूवाला शख्स भी हैरान हो गया की उसके पंच को एक हाथ से ब्लॉक कर लिया …टट्टूवाले शख्स ने तुरंत अपना हाथ पीछे खिंचा और एक और वार किया ….तोह राज ने भी अपना पंच बनाकर उसपर वार किया दोनों के पंच एक दूसरे से टकराये और दोनों हे दो कदम पीछे हो गए …वंही दूसरा मित्युदूत तुरंत दिव्या को पीछे ले aya…aur अब उसकी आंखे गुसाई से लाल हो गयी तोह दूसरा मित्युदूत भी खड़ा हो gaya…aur एक टूट पड़ा बलराम पर तोह एक टूट पड़ा बाकि आदमियों पर ….और साथ हे सिक्योरिटी स्टाफ भी टूट पड़ा पल भर मई हे घमासान मच गया….

बलराम को मित्युदूत ने झुख कर पेट मई पंच मारा जिसकी वजह से बलराम निचे झुका तोह अगली किक मित्युदूत ने दी उसकी उसके मू पर बलराम पीछे उड़ता हुवा जा कर गिरा …पर बलराम भी पहलवान था …वो भी जल्दी से खड़ा हो गया और मित्युदूत के वार को एक हाथ से रोक लिया तोह मित्युदूत ने एक किक उसके घुटने पर मरी…. और बलराम को उठाकर निचे पटक दिया……

वंही राज और टट्टूवाले के पंचेस और वार एक दूसरे पर इतनी तेज़ी से हो रहे थे की बाकियो को दिखने बंद हो गए the…..tabhi टट्टूवाले की एक किक राज को पड़ी राज पीछे जा कर गिरा….

ऋचा “दीपू…”

ये आवाज सुनते हे राज ने तुरंत ऋचा की तरफ देखा और उसके चेहरे पर एक मुस्कान agayiii….par ये मुस्कान और आंखे देख ऋचा की हालत ख़राब हो गयी और मन हे मैंबोली ….

“ये ये तोह निर्वाण ह पर ये इतना शांत कैसे ह अब इसे सुलाना मुश्किल होगा”

राज मू के कोने से खून पौंछते हुवे बोलै…. “ 2 साल बाद पुरे 2 साल बाद पूरी तरह आज़ाद हुवा हु ..” फिर एक लम्बी सांस ली और तेज़ी से फुट मूवमेंट करते हुवे टट्टूवाले की चेस्ट पर किक मरी और बोलै … “बूढ़े की दवाई काम की h”aur फिर दुबारा से फुट मूवमेंट्स के साथ टट्टूवाले के पेट मई किक मरी ..पर अबकी बार वार टट्टूवाले ने ब्लॉक कर लिया तोह राज की आँखों मई अजीब सी चमक आगे और वो एक झटके मई टट्टूवाले शख्सके पीछे आगया और उसकी पीठ मई घुटनो की मरी जिसको वजह से पहली बार टट्टू वाले के मू से दर्द की वजह से आह्हः निकल गयी …और उसने पलटकर राज का गाला पकड़ लिया तोह राज ने भी टट्टूवाले शख्स का गालपकड liya…aur दोनों एक दूसरे की आँखों मई देखने lage….aaj दोनों मई से एक हे जिन्दा बच सकता था….

तभी ैप और इंस्पेक्टर टीम के साथ वंहा आगया और एते हे गन तान कर बोलै …रूक जाओ और फिर तुरंत बलराम के पास जाकर आप तीख तोह ह सर …

बलराम “ैप पकड़ले सालो को मुझे जान से मरने की कोसिस करि ह”

ैप यस सर

ैप “मित्युदूत की तरफ आगे बढ़ा तोह …”

दिव्या चिल्लाई “ैप पहले जान तोह लो गलती किसकी ह”

ैप “जो कहना हो ठाणे चलकर कहना”

बलराम “बचो को छिपा कर रखा ह इन्होने …किडनेपिंग का केस भी लगा साथ मई”

दिव्या “ाचा ….तेरी किस्मत ह जो अभी तू जिन्दा खंडा ह …वर्ण ये कुछ दिएर और करते तोह तेरी आखरी साँसे इसी हॉस्पिटल मई पूरी होती”

बलराम “चू”

तभी और बहुत सी गाड़िया हॉस्पिटल मई अन्तर हुवी और जिस बात का दर कुंदन को था वही उसने कार से निकलते हुवे देख लिया ….और तुरंत आकर उसने बलराम और ैप को रोका …और कमिश्नर को बोलने का इशारा किया जिसे वो समझा भुझे कर लाया था ..

कमिश्नर “इनके रिलेटिव बचे किडनैप हुवे h..hume इनफार्मेशन मिली ह की वो यंहा हॉस्पिटल मई ह …हमे हॉस्पिटल सर्च करना होगा”

दिव्या “तोह ये अपने गुंडों की फौज लेकर आएगा और जान से मरने की कोसिस करेगा …पावर देखनी ह न आपको मैं दिखती हु आपको पावर और फिर देखूंगी आपका यही अत्तीतूते कितनी दिएर रहता ह और उसने मुड़कर कहा ….हमारे जितने हॉस्पिटल ह उन सबको उत्तरप्रदेश से शिफ्ट कार्डो …और ये मैसेज कृति को भी दे देना”

बस इतना सुनते हे कुंदन को झटका लगा क्योकि वो उत्तरप्रदेश मई जो चाहे कर सकता था पर अगर मामला सेण्टर तक पहुंच गया तोह ….बवाल मच जाना था…

इधर राज ने जोर से एक ढाका टट्टूवाले शख्स को बहार गेट की तरफ दे दिया और फिर सबके सामने हे बलराम को गले से पकड़कर ऊपर उठा लिया और उसका एक हाथ जोर से मरोड़ diya…..jiski वजह से वो दर्द से कराहने लगा पुलिस आगे बढ़ी तोह मित्युदूत भी आगे आगये…

कुंडों “छोड़ दे उसे नहीं तोह जो होगा देखा jayega….par तुम मई से भी आज कोई भी अजयंहा से जिन्दा नहीं जायेगा…”

राज ने बलराम को एक किक मारकर दूर फेंकते हुवे बोलै “हाथ मई दो हड्डिया टूटी ह और 2 पसलियों मई फ्रैक्चर ह ….”

कुंदन “तू मरेगा जरूर मरेगा”

राज “तेरी गिनती तोह मेरे होश मई एते हे सुरु हो गयी h….budhe”

कुंदन को कुछ समाज नहीं आया राज उसे घूरता रहा तोह टट्टूवाला शख्स दुबारा राज के सामने आगया….

कमिश्नर “प्लीज मम”

दिव्या “आपको जो करना ह कीजिये क्योकि एक ऑवर बाद आप सब इस बात के लिए पछताओगे की आज ये सब क्यों हुवा…”

कमिश्नर तुरंत अंदर चला गया और टट्टूवाला शख्स राज को घूरते हुवे अंदर जाने laga…raj उसको रोकने वाला हे था की दिव्या ने उस साई रोक लिया …..कुछ दिएर बाद

कमिश्नर “वो दूसरे जुड़वाँ बचे h…aur ये सुनते हे कुंडों को बहुत गुसा आया और उसने सबके सामने हे बलराम को गुसाई से गुणा सुरु कर दिया वंही राज और टट्टूवाले शख्सकी निघाये एक दूसरे से भिड़ी हुवी थी….

राज ने धीरे से मित्युदूत से कहा … “पता करो क्योकि आज की रात निर्वाण इन्हे तड़पाएगा …तड़पाएगा इनकी रूह को”

और ये सब सुनते हे जैसे दोनों मिर्त्युदूत की ताकत लोट सी आयी और वंही दोनों घुटनो के बलबैठ गए और जी मास्टर बोलते हुवे तुरंत उन सबके पीछे निकलगाये….

पीछे दिव्या ने ये सब देखा तोह हैरान रह गयी तब ऋचा बोली “माँ वो जग गया ह अब क्या करुँगी main….ye मुझसे शाक्त नफरत करता ह …”

दिव्या “रूक मैं बात करती हु तू उसके सामने मत आना“

दिव्या राज के पास जाकर …अनजान बनकर “चलो बहुत मारपीट कर्ली खाना खा लो”

राज ने एक बार दिव्या को देखा और फिर कुछ नहीं kaha…aur दिव्या के साथ चलने लगा”

इधर ऋचा ने कॉल कर तुरंत गुरूजी को साडी बात बता दी और गुरूजी ने तुरंत सभी को योगी बाबा के पास भेज दिया ढूंढने के लिए ताकि वो उन्हें बात बता सके….

इधर मित्युदूत उनका पीछा करते हुवे फार्म हाउस तकपहुंच गए

जंहा पर …टट्टूवाला शख्स “मुझे जाना होगा “

बलराम “ पर आप तोह”

टट्टूवाला शख्स “ अभी उनसे भी जायदा जरुरी सवाल ह दिमाग mai….aur तुम उन बचो को ढूंढो पर मुझे यकीं ह वो नहीं मिलेंगे और तुम लड़ाई मत करना क्योकि उस आदमी ने जो कहा सच कहा ह हाथ मई प्लास्टर करवाओ और आराम करो ये टेबलेट एक दिन छोड़कर एक फिन लेना बहुत जल्दी तीख हो जाओगे” इतना कह वो दूसरे रस्ते से निकलगया …

पीछे बलराम धड़ाम से सोफे पर गिर गया तभी dr's की एक टीम वंहा आयी और बलराम को तुरंत हॉस्पिटल ले गयी ….

तोह इधर दिव्या राज को अपने हाथो से खाना खिला rahii….dono मई से किसी ने कुछ नहीं कहा था …पर खाना खिलने के बाद दिव्या बोली …. “कल चले जाना”

राज ने कुछ नहीं कहा और रूम मई आगया सोफे पर बैठ गया …पर उसकी आंखे खुली थी गुसाई से पल पल लाल और ललहोती जा रही thi….dheere धीरे रात gayii…richa चुप चाप दिव्या के पास सो गयी पर सबके सोते हे राज ने आंखे खोली और 4 तह फ्लोर की विंडो ओपन करि और पाइप्स और विंडो के सहरे निचे उतर गया ….

जंहा उसे मित्युदूत तैयार मिला …

मित्युदूत “मास्टर …..”

राज जो अब पूरी तरह निर्वाण बन चूका था वो बोलै “तुमलोग इतने कमजोर कैसे हो सकते हो वो बूढ़ा तुम्हे लिक्विड क्यों नहीं देता h….apne साथ लेकर जायेगा kya…phir एक कागज़ निकलकर ये लो रोजाना ऐसे हे जैसे इसमे लिखा ह उतनी हे क्वांटिटी मई लिक्विड बनाकर रोज आधा लतर पीना h…tumara मास्टर राज कमजोर ह आज से तुम मुझे फॉलो करोगेसिन बताऊंगा पावर किसी कहते ह”

दोनों कंफ्यूज हो गए क्योकि एक हे तोह बात थी उनके हिसाब se…par फिर भी एक साथ बोले “यस मास्टर”

निर्वाण “कान्हा ह वो बूढ़ा जो जान से मरने की धंखी दे रहा था”

मित्युदूत “वो एक मीटिंग के लिए यंहा सहर से बहार थोड़ी दूर गया ह और उसका बीटा फार्म हाउस पर ह”

निर्वाण “बीटा को नहीं मुझे वो बूढ़ा हे चाहिए ह मुझे उसे कुछ पूछना भी ह ”

निर्वाण और एक मित्युदूत बाइक से रवाना हो गए बाइक दिखने मई सिंपल थी पर उसका इंजन 350 कक का था …जो पूरा कवर किया हुवा था….

.और कुछ हे मिनट्स मई वो वंहा पहुंच गए ….

मित्युदूत ने डैगर देना चाहा तोह ..

निर्वाण “तड़पने का जो मज़ा हाथो मई ह वो इसमे नहीं ह और उसे तोह सिर्फ तड़पना ह”

मेत्युदूत कंफ्यूज हो गया की आखिर करना क्या ह …

निर्वाण ने मू पर मित्युदूत से मास्क लेकर पहना और अंदर कुढ़ गया और मित्युदूत को कमरे ेट्स सब बंद करने का कह दिया …

कुंदन अंदर मीटिंग करते हुवे …. “विद्या ग्रुप ह तोह क्या …सर्कार हमारी ह सेंटर बिच मई ए तोह सर्कार को गिरा तोह और अपोजिट पार्टी की सर्कार बना देंगे … ये उत्तरप्रदेश ह और यंहा के बाहुबली हम ह”

सरे लोग जो सामने बैठे थे और उनमे उत्तरप्रदेश के चांटे हुवे गंगलादेरस भी थे सबने है मई सहमति diii…par तभी दरवाज़े पर नॉक हुवा…”

कुंदन “मक अब कौन ह मन किया ह न मीटिंग चलरही ह देख ज़रा“

पर गेट खोने वाला गया तोह पैरो पर था पर आया उड़कर वापस

कुंदन “ तू कौन ह”

पर सामने से कोई आवाज नहीं आयी ….तोह कुंदन के 2 आदमी निर्वाण की तरफ ए …

पर 2 सेकंड मई हे निर्वाण ने दोनों के दोनों हाथो की साडी उंगलियाटोड दी ….और फिर क़लईया भी….

“अब तीख ह अब ये जिंदगी भर ऐसे हे रहेंगे” फिर बाकि की तरफ देख कर “ एक दो …पांच…20 …40…गुड “

इतना कह सुरु हुवा हुवा खेल तड़पने का सिर्फ काट काट काट की आवाज़ और चीखने की आवाज़े अति रही और उंगलिया और क़लईया टूट टी rahiii…goliya भी चली पर मारा कोई नहीं …..कुछ हे दिएर मई सब फर्श पर दर्द से बिलबिला रहे थे…

निर्वाण “एक ने भी आवाज निकली तोह उसके पेअर का भी यही हाल करूँगा कीप क्वाइट ….बूढ़े कान्हा ह तू” …पर उसकी बात ख़तम होते हे एक जाना दर्द से आवाज करने लगा तोह अगले हे पल निर्वाण उसके सामने tha…dard देना अत ह तोह सहना भी सिख …इतना कह उसका मु खोला और उसकी जीब पकड़ते हुवे bola“yahi आवाज करती ह न ये नहीं रहेगी यह आवाज भी नहीं ayegi”us आदमी की हालत ख़राब हो gayiii…nirwrwana ने झटके से उसकी जबानभर निकली और बोलै ये देखलो ान दुबारा से बोलै कोई बोलै तोह यही हाल होगा फिर “बूढ़े तेरी भी जबान बहुत चलती ह कान्हा छिपा ह”

इधर कुंदन पुलिस को कॉल लगा रहा था ..

“तोह तू यंहा ह” इतना कह उसको गले से पकड़कर ऊपर उठाया और बार काउंटर के पीछे से .सीधा आगे फर्श पर लाकर पटक दिया और खिंच कर मू पर एक किक mari…aur फिर हाथ से गर्दन पकड़कर अपने पास खींचकर … “ सिर्फ एक सवाल वो आदमी कान्हा से था जो साथ आया था हॉस्पिटल”

कुंदन “मुझे नहीं पता”

“है है है कुत्ते की पंच ह तू पर कोई बात नहीं ”

इतना कहते हे निर्वाण ने उसे उठायाऔर अपने घुटनो की रीद की हदी परदे मरी और फिर एक वार गले की खास जगह kiya….kundan की जो चीक जो निकली हे थी बंद हो गयी….

“अब तू तब बोल पायेगा जब मैं चाहूंगा ….”

इतना कह कह निर्वाण ने उसकी हर उंगलियों की हर हड्डी 2 बार तोड़ di….aur बोलै “हम फिर मिलेंगे और अबकी बार तू….15 साल पहले का याद कर करलेना kyoki“sahdev और विद्या का बीटा वापस आगया h…apna हर हिसाब करने …..”

और फिर नाइफ उठाकर सबकी उंगलिया और जीब काट ता गया सिर्फ कुंदन को छोड़ diya….aur फिर गेट से बहार निकलते हुवे खुदसे बोलै “उस औरत को ढूँढना ह मुझे क्योकि वो हे जानती ह की माँ के साथ क्या हुवा एक दिन मैं तुझे धुंध लूंगा कुटिया ….ऊपर से वो बूढ़ा जब dekho…..mujhe दबाये रखता ह इस सरीर मई …तू भी मरेगा बूढ़े yogiiii….ha है है ….अब मैं आज़ाद हु…” निर्वाण बहार आगया और मित्युदूत के साथ निकल गया और कुछ पल बाद हे पुलिस आगयी….

इधर निर्वाण जैसे हे रूम मई एंटर हुवा सामने दिव्या बैठी हुवी थी…

निर्वाण मन मई “ये धरती पर सब औरते जिद्दी क्यों होती ह”

दिव्या को गुसाई से देखता dekh…nirwana कुछ नहीं बोलै क्योकि वो कोई भी हो पर माँ तोह सबकी एक जैसी होती h…..par मन मई वो सब बॉलर अहा था…

“ये भी वैसी हे h.bina बात के अब सुन्ना पड़ेगा….”

पर इसके उलट दिव्या ने कुछ नहीं कहा और निर्वाण के बीएड पर लेत ते हे उसके पास मई चेयर पर आंखे बंद करके लेत गयी

और जैसे हे निर्वाण ने आंखे बंद ki….uske दिमाग मई जुंग चीड़ गयी…. और इस जुंग मई वो कब गहरी नींद मई चला गया उसे पता हे नहीं chala…..subhe डॉ की पूरी team….uska चेक उप कर रही थी…..

ऋचा के आंसू बहे जा रहे थे…..

दिव्या “उसे कुछ नहीं हुवा ह”

ऋचा “ माँ वो जग क्यों नहीं रहे ह 24 ऑवर हो गए ह ”

तभी डॉक्टर्स की टाम्बाहर आकर “ पता नहीं दिव्या ये कैसे हुवा ह इनफैक्ट आज तक ऐसा कोई केस मैंने नहीं देखा न सुना ह हार्ट बीट ….सही ह इंजरी भी नहीं ह …फिर भी पेशेंट कोमा मई चला गया ह”

कोमा का नाम सुनते हे ऋचा की हालत और ख़राब हो गयी और वो दिव्या से लिपट कर फुट फुट कर रोने लगी…

डॉ.. “अब कब तक ये कोमा मई रहेंगे कुछ कह नहीं सकते ह 1दिन या सायद 1 साल … पर ये क्लियर ह की इनकी जान को कोई खतरा नहीं ह क्योकि हर बॉडी part पर्फेक्ट्ली वर्क कर रहा ह ”

दिव्या को भी सदमा सा लगा …पर ऋचा की वजह से खुद को संभल लिया…

डॉ “एक महीने तक यंहा ऑब्जरवेशन मई रखेंगे फिर तुम चाहो तोह इन्हे घर ले जा सकती हो बस कुछ बातो का धयाँरखना होगा ….”इतना कह डॉक्टर्स चले गए…

दिव्या “है अब घर ले जाना हे होगा फिर मन मई बोली …अब मंडावा जाने का वक़्त आगया ह बस एक महीना और”

वंही राज के दिमाग मई कोहराम मचा हुवा था और यादो का एक बड़ा सैलाब बहे जा रहा tha…..jo दोनों दिमाग की यादो को आपस मई जोड़े जा रहा था ……

आज के लिए इतना हे …..
 
अपडेट 225 पोस्टेड मस्ती मई पढ़ने का और सिर्फ लाइक्स ठोकने का

लिखते लिखते मेरी भी आंखे बंद हो गयी thi....subhe खुली तब पूरा किया ह अपडेट ....कई बार अपडेट की एंडिंग समाज से बहार हो जाती ह और काम्प्लेक्स होती जाती ह ..

और हां अगर किसी दोस्त के कमेंट का रिप्लाई रह जाये तोह नाराज न हो मैं बस चाहता हु जो टाइम मिले उसमे आपके लिए अपडेट लिखू
 
चलो आगे का अपडेट लिखता हु 2 क वर्ड्स हो गए तोह जल्दी मिल जायेगा अपडेट
 
अपकमिंग 226... "ऑलवेज में"

ों वेडनेसडे नाईट.....10 पं.... जो पढ़कर एक लिखे तक नहीं दे पाया...

200.gif




उनको नज़र न लगे किसी की....
 
"ऑलवेज में"



इसे क्या प्रेडिक्शन लगता ह अगले अपडेट का ...कसम से जिसका प्रेडिक्शन सही huva...agle अपडेट मई उसकी 1 डिमांड चाहे एक अपडेट जल्दी की हे क्यों न हो पूरी करूँगा 🤔🤔🤔
 


3 क वर्ड्स पुरे हो गए कल 5 क हो जायेंगे परसो अपडेट रेडी फाइट नहीं लिखनी हो तब कुछ रिलीफ मिलता ह लिखने मई ...
 
चलो कल पता लग जायेगा की किसके लिए था ....वैसे मनीषा क्यों नहीं हो सकती थी....🤔
 
Back
Top