Anita Singh - Story of a Seductive Housewife - Page 12 - SexBaba
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Anita Singh - Story of a Seductive Housewife

अपडेट 92

अनीता हरिया के पेट पर तेल गिरायी वहीँ हरिया अनीता की बाल पकडे अपने टांगों के बीच अपने लुंड के इतने करीब ले आया की फिर से उसका लुंड अनीता की चेहरे पर टिक गया.

अनीता वैसे hi हरिया का लुंड अपनी चेहरे से ठीके रहने दी और हरिया के पेट पर तेल गिराकर उसके पेट से लेकर ऊपरी जांघ तक मालिश करने लगी और साथ hi होंठ को पोत करके कामुक नज़र से हरिया को देखती हुयी उसके लुंड को चूमने लगी.

अनीता को ऐसे अपने लुंड को चूमते देख हरिया का लुंड झटका मारा और हरिया के मुंह से मज़े से "आआह्ह्ह्हह" निकल गया. वह अनीता की बाल छोड़कर सामने टेबल से जूस उठाकर पीने लगा. उसके बाये हाथ में जूस का गिलास था और दया हाथ सोफे के हेडरेस्ट पर फैला दिया जैसे वह कोई मालिक हो और अनीता उसकी रंडी, उसकी रखैल जो उसके लुंड का सेवा कर रही हो.

अनीता को भी यह अच्छा लगा की हरिया आराम से बैठा हुआ जूस पी रहा है और वह उसके लुंड का सेवा कर रही है. उसे हरिया का यह अंदाज़ में मर्दानगी झलक रही थी.

अनीता हरिया के पेट, जांघ के साथ उसके अण्डों और लुंड के जड़ का भी मालिश करने लगी और साथ hi होंठ पोत किये कामुक तरीके से उसके लुंड को चुम रही थी. हरिया का लुंड अकड़ कर झटका मार रहा था अनीता की चेहरे पर और हरिया आराम से बैठा हुआ देख रहा था की कैसे उसका लुंड अनीता के चूमने से अनीता की चेहरे पर झटका मार रहा था. यह दृश्य देख कर उसे मज़ा मिल रहा था की कैसे अनीता जैसी बेहद खूबसूरत औरत जो किसी मॉडल से काम नहीं थी वह एक रंडी की तरह उसके लुंड का सेवा कर रही थी.

लेकिन इसके बावजूद भी हरिया के मैं में अनीता के लिए इज़्ज़त काम नहीं था. उसके अंदर अनीता की जिस्म के लिए हवस था और होता भी क्यों नहीं. अनीता जैसी जवान और बेहद hi खूबसूरत औरत के लिए उसके जैसे तगड़े लुंड वाला मर्द के अंदर हवस कैसे नहीं होता. उसके जैसे मर्द को अगर अनीता जैसी जवान और खूबसूरत औरत को बिस्तर पर रगड़ने का, उसे छोड़ने का, उसे अपनी रंडी, अपनी रखैल बनाने का मैं नहीं हो तो यह तो प्रकृति के नियम के खिलाफ hi होता की किसी मर्द का, खासकर हरिया जैसे तगड़े लुंड वाले मर्द का अनीता जैसी औरत को देखकर खून क्यों नहीं खौलता है, उसके जिस्म के प्रति आकर्षण क्यों नहीं होता है. तो यह प्रकृति का नियम तो हरिया भी समझता था की एक मर्द होने के नाते उसे अनीता जैसी औरत को छोड़ने का, उसे अपनी रंडी, अपनी रखैल बनाने का मैं करेगा hi, लेकिन इसके बावजूद एक इंसान के तौर पर उसके मैं में अनीता के लिए इज़्ज़त थी की कैसे वह इतनी अमीर और पढ़ी लिखी होने के बावजूद सबसे अच्छे से पेश आती है.

वहीँ अनीता को भी हरिया के लुंड का मालिश करना अच्छा लग रहा था. हरिया जैसा तगड़ा और बड़ा लुंड वह ज़िन्दगी में कभी नहीं देखि थी और अब तो जब से वह इस छोटे शहर में आयी थी हरिया का दुमदार लुंड उसे देखने और छूने का मौक़ा मिल रहा था. हरिया का लुंड देखने के बाद से उसे समझ आ रहा था की असली लुंड कैसा होता है और जिस अंदाज़ से शुरू से उसे हरिया बेझिजक छेड़ते आ रहा था उसे एहसास हुआ की असली मर्द किसे कहते हैं. उसे हरिया का लुंड छूकर, उसका मालिश कर और उसके वजन को अपनी चेहरे पर महसूस करके एहसास हो रहा था की असली लुंड का सेवा करने में सच में कितना अच्छा लगता है. ऊपर से हरिया का कॉन्फिडेंस से भी वह आकर्षित थी. उसे भी ख़ुशी होने लगी थी की इस नए शहर में उसकी मुलाक़ात हरिया जैसे मर्द से हुआ है.

हरिया जूस पीते हुए अनीता को देख रहा था वहीँ अनीता हरिया को देखती हुयी उसके लुंड के आस पास मालिश करती हुयी अपनी होंठों को पोत करके उसके लुंड को चुम रही थी.

अनीता उसके लुंड को चुम hi रही थी की तभी ठन्डे गिलास के साइड से थोड़ा पानी हरिया के लुंड पर गिरा और उसका लुंड अनीता की चेहरे पर झटका मारा तो हरिया मुस्कुराने लगा. जवाब में अनीता भी बेशर्मी से मुस्कुरा दी की तभी हरिया के लुंड पर एक बार फिर एक बंध पानी गिरा और उसका लुंड फिर से अनीता की चेहरे पर झटका मारा तो वह दोनों एक दूसरे को देखते हुए मुस्कुरा रहे थे. अनीता अगले पल हरिया के आँखों में देखती हुयी ऐसा काम की जिसका हरिया भी उम्मीद नहीं कर रहा था. वह अपने होंठों को खोल कर हरिया के लुंड पर जिस जगह पानी गिरा था उस जगह से पानी का जो भी अंश बचा था उसे मुंह में ले ली.

हरिया यह देखकर मुस्कुराया तो अनीता मुस्कुराती हुयी उसके लुंड को एक बार और चूमकर उसके लुंड के आस पास मालिश करती रही तो हरिया bola,"Bahot प्यासी लग रही हैं आप मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर उसके लुंड को एक बार और चूमकर उसके लुंड के आए पास मालिश करती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी आप भी टी बहोत प्यासे हैं. और जूस पीजिये न"

हरिया यह सुनकर अपना दया हाथ नीचे लेजाकर अनीता की बायीं चूंकि की ब्लाउज के ऊपर से मुट्ठी में भरकर दबाते हुए bola,"Are मेमसाहेब हमरा प्यास तो इससे बुझेगा, आपकी चूंकि का रास से, आपके दूध से"

अनीता यह सुनकर रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी इतना तो पिया है आपने थोड़ी देर पहले. इतना पीकर भी प्यास नहीं बुझा क्या आपका?"

हरिया उसकी चूंकि दबाते हुए bola,"Are मेमसाहेब कइसन बात करात हैं आप. आपके जवानी से, आपके चूंकि के रास से, आपके दूध से इतना जल्दी प्यास बुझेगा का हमरा. अरे मेमसाहेब हमरा प्यास तो और बढ़त जाट है आपका ी जवानी, आपकी चूंकि और गांड देखकर"

अनीता यह सुनकर कामुक अंदाज़ से उसका लुंड चूमकर रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी और पीने का मैं है क्या आपको?"

हरिया यह सुनकर उसकी चूंकि दबाते हुए puchha,"Kaa मेमसाहेब? का पीने का बात कर रही हैं आप?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Uhhm हरिया जी आप फिर से आप अनजान बनने लगे. बताइये न हरिया जी पीने का मैं कर रहा है क्या?"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर दुबारा puchha,"Are मेमसाहेब बताइयेगा तब तो हम समझूंगा. बोलिये न मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर अपनी आँखों से नीचे अपनी चूँचियों के तरफ इशारा करके कामुक अंदाज़ में boli,"Inko हरिया जी जिसे आप अपने मज़बूत मरदाना हाथ से मसल रहे हैं"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Achha मेमसाहेब तो आप अपनी चूंकि, अपना दूध का थांन का बात कर रहे हैं?"

अनीता यह सुनकर बिना शर्म के हरिया के आँखों में देखती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhhm हाँ हरिया जी" फिर वह आँखों से अपनी चूँचियों के तरफ इशारा करके आगे boli,"Inki hi बात कर रही हूँ"

हरिया यह सुनकर उसकी बायीं चूंकि को बेरहमी से मसल दिया तो अनीता की मुंह से "ाःह" निकल गयी मगर वह आज भी कामुक अंदाज़ में की और फिर अपनी निचली होंठ दांतों के बीच दबा ली.

हरिया उसकी चूंकि को मसलते हुए bola,"Are मेमसाहेब हमरे हाथ में तो आपका एक चूंकि, एक hi दूध का थांन है और आप उनको बोल रही हैं. आपका दूसरा चूंकि, दूसरा दूध का थांन कहाँ है"

अनीता यह सुनकर हरिया को कामुक अंदाज़ से देखती हुयी अपनी दायी चूंकि के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी boli,"Idhar है हरिया जी"

हरिया यह सुनकर अनीता को देखते हुए puchha,"kidhar है memsaheb?Hum तो आपकी यह चूंकि महसूस कर सकत हूँ, दूसरा किधर है आप बताइये न"

अनीता यह सुनकर हरिया के बाये हाथ से गिलास लेकर टेबल पर राखी और उसका हाथ पकड़ कर अपनी दायी चूंकि पर रखकर boli,"To महसूस कीजिये न हरिया जी"

हरिया अपना बया हाथ से अनीता की दायी चूंकि को बेरहमी से मसल दिया तो अनीता रणदीपाने वाली अंदाज़ में "आअह्ह्ह" की और कामुक रणदीपाने वाले अंदाज़ से हरिया को देखि. अनीता की चेहरे पर अभी कोई मुस्कराहट नहीं थी, बल्कि कामुक रणदीपाने वाला भाव था.

वह आह करके रणदीपाने वाली अंदाज़ में puchhi,"Ab समझ आ रहा है न हरिया जी की मैं क्या पीने की बात कर रही हूँ. वही जो अब आपके दोनों मज़बूत हाथों में हैं और जिसे आप इतनी बेरहमी से मसल रहे हैं"

हरिया यह सुनकर उसकी चूँचियों को मसलते हुए bola,"Haan मेमसाहेब आप अपनी ी दोनों दूध का थांन का बात कर रही हैं"

अनीता यह सुनकर boli,"Inhe पीने का मैं है तो पी लीजिये हरिया जी"

हरिया यह सुनकर उसकी दोनों चूँचियों को मसलते हुए bola,"Haan मेमसाहेब ज़रूर पिएंगे. मगर अभी हम भी आपके होंठों पर हमार लौड़ा के लिए प्यास देख रहा हूँ. आप हमार लौड़ा से प्यास बुझा लीजिये ऊके बाद हम आपका दोनों चूंकि को फिर से पियूँगा"

अनीता यह सुनकर कामुक अंदाज़ में puchhi,"Meri होंठों पर आप किस चीज़ की प्यास देख रहे हैं हरिया जी?"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर अपने लुंड के तरफ इशारा करके bola,"Ee हमार लौड़ा का मेमसाहेब जिसे आप कितने प्यास से चुम रही हैं"

अनीता यह सुनकर कामुक अंदाज़ में उसका लुंड चूमती हुयी puchhi,"Kidhar है वह?"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर अपने लुंड में तनाव लाकर झटका मारकर अनीता की चेहरे को लुंड से थपथपाते हुए bola,"Ee है हमार लौड़ा मेमसाहेब देख लीजिये, ेके लिए hi आपका होंठ प्यासा है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर उसके लुंड को देखि और उसे वापस से बाये हाथ से पकड़ कर उसे मालिश करती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी आप भी तो बहोत प्यासे हैं" और फिर अपनी चूँचियों के तरफ इशारा करके boli,"Mere इन दोनों के लिए"

हरिया यह सुनकर उसकी चूँचियों को देखा तो अनीता रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Dekhiye कैसे आप देख रहे हैं इन दोनों को" फिर वह दूसरे हाथ से टेबल से गिलास लेकर हरिया के होंठों के तरफ बढाती हुयी boli,"Lekin अभी तो आप चाहते हैं की मैं आपका हथियार का ख्याल रखूं तो तब तक यह जूस से hi प्यास बुझाइये अपना"

हरिया यह सुनकर अपना मुंह खोल दिया तो अनीता उसे जूस पिलाने लगी. क्यूंकि अनीता बैठी हुयी hi उसे जूस पीला रही थी तो गिलास सही से टिल्टेड न होने के कारण साइड से थोड़ा जूस हरिया के छाती पर गिरकर नीचे पेट के तरफ गिरने लगा और दो बूंद जूस का उसके लुंड पर भी गिर गया.

हरिया आखिरकार गिलास से मुंह हटाया तो अनीता उसे टेबल पर रख दी और फिर हरिया को देखि तो वह bola,"Memsaheb हमार लौड़ा पर जूस गिर गवा है"

अनीता यह सुनकर उसके लुंड के तरफ देखि और होंठ खोलकर उसके लुंड को चूमती हुयी जूस को होंठों के नीचे लेकर पि गयी. यह देखकर हरिया अगले पल गिलास उठाया जिसमे थोड़ा सा जूस था और अनीता को bola,"Munh खोलिये मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर हरिया को सवालिया नज़र से देखि तो हरिया bola,"Ka हुआ मेमसाहेब आप हम ग़रीब का जूठा जूस नहीं पीना चाहती क्या?"

अनीता यह सुनकर थोड़ी नाराज़गी से हरिया को देखती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Offo हरिया जी कैसी बात कर रहे हैं आप. मेरे लिए आप कोई ग़रीब नहीं है, बल्कि आप तो सबसे अमीर है मेरे लिए"

फिर वह उसके लुंड के तरफ इशारा करती हुयी boli,"Itna बड़ा खज़ाना है आपके पास और आप बोलते हैं आप ग़रीब है"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता उसे देखती हुयी अपनी मुंह खोल दी. हरिया अपना लुंड उसके मुंह के ऊपर करके अपने लुंड पर जूस गिराने लगा जो उसके लुंड से टपकते हुए अनीता की मुंह में गिरने लगी. ऐसा होते hi अनीता की बदन में मानो आग लगने लगी और उसकी छूट में बेचैनी बढ़ने लगी. उसे एक अजीब सा मज़ा मिलने लगा.

जब उसके मुंह में थोड़ा सा जूस इकठ्ठा हो गया तो हरिया रोक दिया तो अनीता उसे देखती हुयी जूस पी गयी और रणदीपाने वाली अंदाज़ में अपनी होंठों पर ज़बान फिरकर हरिया को देखि तो हरिया puchha,"Kaisan लगा मेमसाहेब?"

अनीता जवाब में कामुक अंदाज़ से उसके लुंड पर लगे जूस को चूमती हुयी बिना कुछ बोले रणदीपाने वाली अंदाज़ में मुंह खोल दी तो हरिया फिर से अपने लुंड पर जूस गिराने लगा और वह जूस उसके लुंड से होते हुए अनीता की मुंह में जाने लगी और अनीता फिर से वह जूस पी गयी और रणदीपाने वाली अंदाज़ में फिर से होंठों पैट ज़बान फिरा दी.

हरिया अगले पल गिलास लिया और अपने लुंड के नीचे रखकर लुंड पर जूस गिराने लगा और वह जूस गिलास में इकट्ठा होने लगा. अनीता समझ रही थी की क्या होने वाला है. गिलास तीन चौथाई जूस से भर गया तो हरिया जूस का बोतल टेबल पर रखा. अनीता उम्मीद कर रही थी की अब वह उसे पीने के लिए देगा की तभी हरिया अपना लुंड को उस गिलास में डूबा दिया.

अनीता की दिल धड़कने लगी यह देखकर और सोचकर की अब आगे क्या होने वाला है.

हरिया उस में लुंड डूबा कर गिलास अनीता को दिया तो वह उसे पकड़ कर जूस में देखि. उस में जूस के साथ हरिया के लुंड में लगे तेल का अंश भी था और फिर अनीता की नज़र एक चीज़ पर पड़ी तो उसकी दिल जोर से धड़क गई. उसमे दो बाल भी थे. अनीता समझ गयी की वह बाल कहाँ का है. वह उसे देखकर हरिया से boli,"Hariya जी इसमें तो..."

वह पूरा बोलती इससे पहले हरिया bola,"Humaar लौड़ा का बाल है"

अनीता का दिल धड़क गया यह सुनकर. वह आगे कुछ बोलती इससे पहले हरिया bola,"To का हो गया मेमसाहेब. हमार लौड़ा से जुड़ा हर चीज़ तो आपके लिए अमृत है. पी जाइये आपको अच्छा लगेगा"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क रही थी मगर साथ hi एक अजीब सा मज़ा भी आ रहा था. वह एक पल गिलास में देखि और फिर उसे उठाकर अपनी होंठो से लगा कर एक सांस में पी गयी. जूस पीते हुए उस की दिल तेज़ी से धड़क रही थी और एक अजीब सा मज़ा मिल रहा था.
 
ी हैवे मेड सम चंगेस तो अपडेट 87 ों पेज 78. प्लीज रीड तहत अपडेट अगेन. विल मेक सलीगत चंगेस तो उपदटेस 88-92 एंड विल तरय तो पोस्ट ानोथेर अपडेट थिस वीकेंड. थैंक्स
 
ी हैवे मेड चंगेस तो अपडेट 89 ों पेज 85. जस्ट ा सलीगत चेंज तो अलाइन विथ थे चेंज मेड इन अपडेट 87. दो लेट में क्नोव व्हाट यू थिंक ऑफ़ थे नई डेवलपमेंट इन अपडेट 87. थैंक्स.
 
अपडेट 93

अनीता जूस पीकर हरिया को देख hi रही थी की तभी हरिया का मोबाइल बजने लगा. हरिया झुंझला कर पंत के पॉकेट से मोबाइल निकाल कर देखा तो वह रामु का था. हरिया साइलेंस में करके मोबाइल रख दिया और अनीता से bola,"Humaar लौड़ा पर जूस लगा है मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर उसके लुंड को चूमने लगी तो हरिया मालिक के तरह बैठे हुए अनीता के तरफ देखने लगा की तभी उसका दूकान मालिक का फ़ोन आया. हरिया यह देखकर bola,"Yeh मालिक भी हुंका चैन से जीने नहीं देगा" और यह बोलकर वह फ़ोन साइलेंस कर दिया. अनीता चुप चाप उसका लुंड हाथों से हिला रही थी और उसे चुम रही थी.

दो बार और कॉल आया तो अनीता boli,"Utha लीजिये हरिया जी".

हरिया यह सुनकर मोबाइल उठा लिया और मालिक से bola,"Hum अपना एक परसनल काम में बहोत बीजी हूँ. एक घंटा बाद आऊंगा"

दूसरे तरफ से कुछ बात होने पर हरिया जवाब में bola,"Theek है मालिक" और फिर फ़ोन काट गया.

हरिया कुछ बोलता इससे पहले अनीता देखि की किचन का खिड़की जोर से हिलने लगा. वह समझ गयी की हवा तेज़ हो गयी है इसी बीच दरवाज़ा फिर नॉक हुआ और बाहर से आवाज़ aaya,"Hariya काका, मेमसाहेब दरवाज़ा खोलिये. जोर से हवा बहने लगा है. मैं भींग रही हूँ"

अनीता यह सुनकर हरिया को देखती हुयी boli,"Hariya जी लगता है आज आप फिर से मेरी मदद नहीं कर पाएंगे. आपको फ़ोन आ रहा है और चंदा भी भींग रही है. बेचारी का तबियत ख़राब हो जायेगा तो अच्छा नहीं होगा. ग़रीब है इलाज करने में भी पैसे लग जायेंगे उसकी"

हरिया यह सुनकर अनीता को देखकर bola,"Haan मेमसाहेब. सच में आप कितनी अच्छी है जो हम ग़रीबों का भी इज़्ज़त करती है और ख्याल रखती है".

अनीता यह सुनकर हरिया से boli,"Ghareeb भी तो इंसान hi होते हैं हरिया जी" और फिर वह उसके लुंड को देखकर boli,"Agar मैं अमीरी ग़रीबी का सोचती तो आपके जैसे असली मर्द से मुलाक़ात होती क्या? सब तो इंसान hi है हरिया जी"

हरिया यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब"

फिर वह उसकी चूँचियों को पकड़ कर दबाते हुए bola,"Aese मदद नहीं मेमसाहेब, हम आज आपको छोड़ नहीं पाएंगे ी बोलिये"

अनीता यह सुनकर कामुक अंदाज़ में हरिया को देखती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी आप भी सच में क्या क्या बोलते रहते हैं"

हरिया यह सुनकर अनीता की चूँचियों को पकडे ऊपर के तरफ उठाये हुए bola,"Aaiye हमार लौड़ा पर बैठिये पहले"

अनीता अपनी चेहरे पर गर्व का भाव लिए हरिया के गॉड में उसके लुंड पर सिडेवेस बैठ गयी और बायीं हाथ उसके सर के पीछे से लेजाकर उसके बालों में फेरने लगी तो वह उसकी चूंकि पकड़ कर दबाते हुए bola,"Are मेमसाहेब तो का ग़लत बोलै हूँ. मदद तो हम साफ़ सफाई करके कर दिए, अब तो हम आपकी दूसरे तरह से मदद करने वाले थे, आपका जवानी का ख्याल रखकर, और आपका जवानी का हम ख्याल तो आपको छोड़ कर hi रखेंगे"

अनीता कामुक अंदाज़ से हरिया का सीना सहलाती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhmm ठीक है हरिया जी फिर कभी रख लीजियेगा"

हरिया यह सुनकर bola,"Humka तो आपको छोड़ने का मैं था लेकिन हम कउनो 20 साल का लौंडा नहीं हूँ मेमसाहेब. हम हालत समझता हूँ और हम आपको अच्छे से फुर्सत में hi छोडूंगा. आपको भी तो लग्न चाहिए की असली मर्द से छुड़वाने का मतबल का हॉट है"

अनीता यह सुनकर कामुक अंदाज़ में उसके सीने को सहलाती हुयी boli,"Uhhm हरिया जी" की तभी फिर से दरवाज़ा नॉक हुआ और चंदा की आवाज़ आयी तो अनीता boli,"Main कमरे में जाती हूँ. आप कपडा पेहेन कर दरवाज़ा खोल दीजिये".

हरिया अनीता की चूंकि दबाते हुए bola,"Theek है मेमसाहेब" और अनीता उठकर अपनी साड़ी का पल्लू जो नीचे फर्श पर थी उसको ऊपर उठाने लगी तो हरिया उसकी गांड पर थप्पड़ मार दिया. अनीता की चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी और वह अपनी गांड को मटका कर चलने लगी.

वह कमरे में जाकर घूमकर देखि की हरिया उसकी गांड को hi देख रहा है. अनीता मुस्कुराती हुयी उसे दरवाज़े के तरफ इशारा की और फिर कमरे का दरवाज़ा बांध कर दी. हरिया मुस्कुरा कर अनीता को देखा और जल्दी से पंत पहनकर दरवाज़ा खोल दिया और उसे देखकर bola,"Chanda तुम?"

चंदा अंदर आकर boli,"Kaka बहोत जोर से बारिश हो रहा था तो मैं वापस आ गयी"

हरिया दरवाज़ा बांध किया तो वह आगे boli,"Main वापस आकर खिड़की से देखि की आप सोफे पर बैठे हैं"

हरिया यह सुनकर थोड़ा चौंक कर puchha,"Matbal तुम खिड़की से झाँक रही थी?"

चंदा जवाब में boli,"Woh मेमसाहेब बोली थी की वह नाहा रही होगी और आप काम कर रहे होंगे तो मैं दरवाज़ा नहीं खटखटाई और खिड़की खुला देखकर पहले सोची की देखूं आप या मेमसाहेब हैं या नहीं. मैं खिड़की के पास गयी तो देखि की आप सोफे पर बैठे जूस पी रहे थे शायद"

हरिया तुरंत puchha,"Aur कुछ नहीं. जब मैं देखि की आप हैं तो दरवाज़ा खटखटाने चली गयी. बिजली भी नहीं थी की मैं बेल्ल बजाऊं और खटखटाई तो आप दरवाज़ा खोले नहीं और उल्टा खिड़की भी बांध हो गया".

हरिया जवाब में bola,"Are हाँ ु बिजली चला गवा और हुंका सफाई करने जाना था ु स्टोर रूम में तो सोचे की खिड़की बांध कर दे. मेमसाहेब तो अपने कमरे में है नहाने गयी है तो इहाँ कउनो रहता नहीं. ससुरा कउनो ठीक नहीं कउनो चोर hi घुस जाता खिड़की से तो हम बांध कर दिए"

चंदा जवाब में boli,"memsaheb अभी नाहा hi रही है? मुझे तो आप दोनों के हसने का आवाज़ सुनाई दिया"

हरिया यह सुनकर bola,"Are चंदा कितना सवाल करती है तू. रामु जितना hi चुप रहता है उतना hi तुम्हारा मुंह चलता है"

चंदा थोड़ी घबरा गयी हरिया का बात सुनकर. वह जवाब में boli,"Are काका आवाज़ आया तो पूछ रही हूँ.".

हरिया जवाब में bola,"To अब का मेमसाहेब तोहरा से पूछ कर हसेगी?"

चंदा को लगा की वह बेकार में सवाल कर रही है तो वह boli,"Maaf कीजियेगा काका"

हरिया जवाब में bola,"Theek है. लेकिन एक बात सुन्न लो तुम. रामु हमार दोस्त है तो तुमका बोल डेट हूँ. मेमसाहेब दिल की अच्छी है तो इज़्ज़त करती है हम ग़रीब लोगन का ीका मतबल ी नहीं की मेमसाहेब क्या करती है, क्यों करती है ी सब हमलोगां पूछे. ु पढ़ी लिखी और अमीर औरत है. उनका अपना तरीक़ा है ज़िन्दगी जीने का. उनका जो मर्ज़ी ु करे."

चंदा यह सुनकर सर नीचे झुका ली तो हरिया bola,"Achha सुनो, वह मेमसाहेब हुंका जूस दी थी पीने के लिए जो तुम हुंका पीते देखि. जाओ तुम भी पी लो"

चंदा सर हाँ में हिलाकर टेबल के पास गयी और एक गिलास लेकर सीढ़ी पर बैठ गयी. हरिया मालिक की तरह सोफे पर बैठ गया और बीड़ी पीने लगा. चंदा देखि की हरिया कैसे आराम से सोफे पर बैठ कर बीड़ी पी रहा है, जैसे की वह काम करने नहीं आया हो उसका खुद का घर हो. मगर वह बचपन से हरिया को देखते आयी थी तो जानती थी की वह दबंग टाइप का आदमी है जो कॉन्फिडेंस से भरा हुआ रहता है और ऊपर से अनीता दिल की अच्छी थी जो नौकरों का सोफे पर बैठने से बुरा नहीं मानती थी तो चंदा हालात समझी और चुप चाप जूस पीने लगी.

अनीता लगभग आधे घंटे बाद नहाकर वापस लिविंग रूम में आयी तो देखि की चंदा नहीं थी और हरिया सोफे पर शर्ट पेहेन कर बैठा बीड़ी पी रहा था.

अनीता नहाकर फिर से साड़ी पहनी थी और हमेशा के जैसा लौ वैस्ट बंधी थी जिसमे उसकी गोरी पेट पूरी नंगी थी और ब्लाउज बैकलेस थी. वह गांड मटकती हुयी सोफे के तरफ जाती हुयी puchhi,"Chanda चली गयी क्या?"

हरिया जवाब में bola,"Haan मेमसाहेब बारिश रुक गवा तो ु चली गई" और खुद भी सोफे से उठता हुआ bola,"Aur अब हम भी चालत हूँ"

अनीता यह सुनकर "हाँ" में सर हिलती हुयी boli,"Theek है हरिया जी. मैं पैसे लेकर आती हूँ"

हरिया जवाब में bola,"Are मेमसाहेब कहे हुंका शर्मिंदा कर रही हैं. आपका मदद करने के लिए हम पैसा कैसे के सकता हूँ. ी तो हमरा जइसन मरद का फ़राज़ है की आपके जइसन जवान और खबसूरत औरत का ख्याल राखु".

अनीता जवाब में boli,"Haan हरिया जी वह ठीक है और आप एक मर्द की तरह तोह मेरा ख्याल रख hi रहे हैं. लेकिन स्टोर रूम का काम के लिए तो पैसे तो बनते हैं"

फिर अनीता एक ऐडा से boli,"Aap hi तो बोले हरिया जी की स्टोर रूम में आप जो काम किये वह अलग काम है"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Are मेमसाहेब फिर भी हुंका पैसा नहीं चाहिए. आप तो हमरी ख़ास मेमसाहेब हैं. आपका हर तरह से मदद करना हमरा फ़राज़ है".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई और boli,"Theek है आज नहीं देती मगर जब काम पूरा हो जायेगा तो आपको लेना पड़ेगा"

हरिया जवाब में bola,"Are मेमसाहेब हम तो चाहता hi हूँ की हम आपका ले, वह भी अच्छे से घपाघप घपाघप"

अनीता यह सुनकर अपनी आंखें बड़ी करके boli,"Offo हरिया जी" तो हरिया हसने लगा. अनीता भी जवाब में बेशर्मी से खिलखिलाने लगी "हेहेहे".

अनीता अगले पल boli,"Chaliye हरिया जी मैं आपको बाहर तक छोर देती हूँ नहीं तो आप फिर से बातें बनाने लगिएगा हेहेहे"

हरिया यह सुनकर हस्ते हुए अनीता की कमर में हाथ डालकर उसे अपने से चिपकते हुए उसकी कमर सहलाया और फिर हाथ नीचे लेजाकर उसकी गांड थपथपाते हुए bola,"Chaliye मेमसाहेब"

अनीता को हरिया का यूँ उसकी गांड थपथपाकर चलने बोलना अच्छा लगने लगा था. पिछले कुछ दिनों से जब भी चलने का बात होता है तो हरिया उसकी गांड थपथपाकर hi चलने बोलता था जैसे कहना छह रहा हो की अनीता अपनी गांड मटका कर चले.

अनीता गांड थपथपाये जाने पर अपनी चेहरे पर गर्व का भाव लाकर हरिया को देखि तो हरिया जवाब में bola,"Memsaheb माफ़ कीजियेगा आप अभी नाहा कर आयी और हम अपना गन्दा हाथ से आपको छू......"

हरिया पूरा बोलता उससे पहले अनीता अपनी पतली गोरी ऊँगली को उसके होंठों पर रखकर कामुक अंदाज़ में boli,"Ssshhh हरिया जी. आपने गंदे हाथ से छू hi लिया तो क्या हो गया. घर पर hi तो हूँ. साफ़ कर लुंगी. आप ऐसा नहीं करते तो उल्टा मैं सोचती की मैं अच्छी नहीं लग रही क्या जो मेरे हरिया जी मेरे करीब नहीं आ रहे हैं"

हरिया जवाब में bola,"Are मेमसाहेब आप तो पूरा माल लग रही हैं, एक दम मस्त माल"

अनीता यह सुनकर चेहरे पर गर्व का भाव लाकर उसे देखकर boli,"Uhhm हरिया जी आपका भी तारीफ करने का एक अलग hi अंदाज़ है"

हरिया जवाब में अनीता की कमर से नीचे हाथ खिसका कर उसकी हिलती हुयी गांड को पकड़ कर bola,"Are मेमसाहेब अब आप माल लग रही है तो उहे तो बोल रहा हूँ"

फिर वह उसकी जिस्म को देखकर bola,"ek दम सेक्सी मस्त पटाखा माल लग रही हैं आप. सच बताऊँ तो हुंका आपको देखकर छोड़ने का मैं कर रहा है"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़कने लगी मगर वह बेशर्मी से boli,"Offo हरिया जी आप भी न क्या क्या बोलते रहते हैं"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Are मेमसाहेब हम अपने दिल की बात बोल रहे हैं. अब हुंका आपको छोड़ने का मैं कर रहा है तो उहे न बोलेंगे"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराकर boli,"Achha ठीक है हरिया जी मैं समझ गयी आपके दिल की बात."

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"To आपको ी समझ आ गवा न की आप कितना मस्त लग रही है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan हरिया जी समझ आ गया. सच में आप इतना खुलकर सब कुछ बोलते हैं न तो समझ में आएगा hi"

हरिया यह सुनकर puchha,"To पूरा बताइये न मेमसाहेब की आपको क्या समझ में आया."

अनीता यह सुनकर अपनी आंखें बड़ी करके boli,"Offo हरिया जी आप खुद तो खुलकर बोलते हैं hi मुझे भी बुलवाये बिना चैन नहीं मिलेगा आपको"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Are मेमसाहेब आप भी खुलकर नहीं बोलियेगा तो हमको आपके दिल की बात कैसे पता चलेगा. बोलिये न मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Hariya जी मैं इतनी अच्छी लग रही हूँ की मुझे देखकर आपको मुझे ठोकने का मैं कर रहा है"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता अगले पल अपनी बेशर्मी दिखती हुयी हरिया के सीने पर उँगलियाँ फेरती हुयी उसके आँखों में देखकर रणदीपाने वाली आवाज़ में puchhi,"Hariya जी आपने अपने मैं का बात बता दिया की कैसे आपको मुझे ठोकने का मैं कर रहा है फिर भी अपने मुझे अपने गंदे हाथ से थोड़ा छू लिया तो माफ़ी मांगने लगे. अब बताइये की कभी आपको मुझे ठोकने का मौक़ा मिला और उस वक़्त आपके हाथ गंदे रहेंगे तो आप क्या मेरी ठुकाई करने का मौक़ा छोर denge?Uhhm बताइये न तब आपको अपनी मेमसाहेब को ठोकने का मैं नहीं करेगा क्या?"

हरिया यह सुनकर अनीता की दोनों गांड पर हाथ रखकर अपने तरफ घुमाकर उसे अपने सीने से चिपकाया तो अनीता अपनी चूँचियों को उसके सीने पर पिसती हुयी महसूस की. हरिया अनीता की दोनों गांड दबाते हुए bola,"Are मेमसाहेब आपको छोड़ने का मौक़ा हम कैसे छोर सकत है. हम तो बस अच्छा मौक़ा का तलाश कर रहे हैं जब हम फुर्सत से आपको छोड़ सके. हम पहली बार आपको ऐसे छोड़ना चाहते हैं ताकि आपको पता चले की चुदाई किसको कहते हैं"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़कने लगी जिसे हरिया अपने सीने पर महसूस कर सकता था. वह आगे bola,"Nahin तो हम ससुरा 20 साल का लौंडा जइसन आपको अभी तक हड़बड़ी में छोड़ दिए होते. लेकिन हम जानत है की आपके जइसन जवान खबसूरत औरत का लौड़ा का भूख कउनो हड़बड़ी में 20 साल का लौंडा जइसन छोड़ने से नहीं बल्कि हमरे जइसन मर्द जब रात भर आपको छोड़ेगा तब आपका लौड़ा का भूख शांत होगा"

अनीता की दिल यह सुनकर तेज़ी से धड़क रही थी और सांस भी तेज़ होने लगी थी. हरिया ने खुलकर उसे बोल दिया था की वह सिर्फ उसे छोड़ना नहीं चाहता है, बल्कि रात भर छोड़ना चाहता है, उसके साथ रात गुज़ारना चाहता है. अनीता को उसका खुलकर बोलना अच्छा लगा और उसके हिम्मत से वह आकर्षित हुयी. वह हरिया के आँखों में देखती हुयी उसके कंधे पर उँगलियाँ फेरती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी तो आपको जहाँ भी मौक़ा मिलेगा मुझे ठोकने का आप मेरी ठुकाई कर दीजियेगा?"

हरिया यह सुनकर उसकी गांड दबाते हुए bola,"Aur नहीं तो क्या मेमसाहेब? आपके जइसन खबसूरत और गरम औरत को छोड़ने के लिए जगह, नहीं मौक़ा मिलना चाहिए. हुंका जहाँ मौक़ा मिलेगा आपकी चुदाई कर देंगे, ु बाजार में भी"

अनीता यह सुनकर अपनी आँखें बड़ी करके बेशर्मी, बेहयाई से मुस्कुराती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Offo हरिया जी आप भी सच में बाजार में hi मेरी ठुकाई कर देंगे"

हरिया यह सुनकर हसने laga,"Hahaha" तो अनीता भी बेशर्मी से हसने lagi,"Hehehe ओह माय गॉड हरिया जी सच में आपका तो बात और अंदाज़ hi निराला है, जो और किसी मर्द में नहीं हैं उफ्फ्फ आप भी न हेहेहे" और लिविंग रूम में बेशर्मी और बेहयाई की हसी गूंजने लगी.

हरिया यह सुनकर हसी रोकते हुए अनीता को पलट कर पीछे से उसकी गांड से सत्ता कर दोनों चूँचियों को पकड़ कर पीछे से धक्का लगते हुए bola,"Hahaha अरे मेमसाहेब आपको छोड़ने का मौक़ा हम कैसे छोड़ सकत है, जहाँ मौक़ा मिलेगा वहीँ छोड़ेंगे आपको" और वह पीछे ऐ धक्का लगते हुए bola,"Ghapaghap घपाघप घपाघप"

अनीता यह सुनकर और अपनी गांड पर हरिया के लुंड का धक्का महसूस करके बेशर्मी से खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe ओह माय गॉड हरिया जी अब बस कीजिये ुह्ह्हम्म्म हेहेहे हो गया हरिया जी मैं समझ गयी की आप मेरी ठुकाई कैसे करेंगे हहहहए अब बस कीजिये और चलिए ुहम्म"

हरिया दो तीन बार धक्का लगाने के बाद अनीता की चूंकि छोड़ कर उसकी गांड थपथपाकर bola,"Hahaha चलिए मेमसाहेब"

अनीता हरिया के गांड थपथपाने पर हरिया को कामुक अंदाज़ से देखकर boli,"Chaliye हरिया जी" और वह अपनी गांड मटकाकर चलने लगी. हरिया अनीता की गांड को मटक महसूस करके उसकी गांड पकडे अपने से पूरा चिपका लिया, इतना की अनीता की बायीं चूंकि उसके दये सीने से चिपक गयी थी मगर वह बिना शर्म के उससे चिपक कर अपनी गांड मटका कर चलने लगी और उसकी चेहरे पर गर्व की भाव आ गयी जब हरिया उसकी गांड की बायीं भाग को पकड़ कर मसलने लगा.

अनीता जवाब में हरिया को देखि और सर हिलाकर अपनी गांड की मटक बढ़ा कर चलने लगी. हरिया उसकी गांड सहलाते हुए bola,"Uff मेमसाहेब चलते वक़्त आपकी गांड जो हिलती है उफ़ का कहे हम"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी बाहर रखे उसके साइकिल तक गयी और हरिया के सामने कड़ी होकर उसके सीने पर हाथ फेरती हुयी boli,"Hariya जी मेरी मदद करने के लिए थैंक यू. सच में आपके होने से मुझे बहोत मदद मिलती है. आप जितना खुलकर मेरी मदद करते हैं ऐसा करना सबके बस की बात नहीं है. आज कल के ज़माने में कौन किसकी मदद करता है और आप तो सिर्फ मेरी मदद hi नहीं करते हैं बल्कि ख़ास अंदाज़ में मदद करते हैं हेहेहे. आपका मदद करने का अंदाज़ तो सबसे निराला है हेहेहे".

हरिया अनीता को ऐसे बेशर्मी स्व खिलखिलाते देख अनीता की दोनों चूँचियों को पकड़ कर दबाते हुए bola,"Memsaheb मदद करना तो हमरा फ़राज़ है. हुंका तो बुरा लगा की आपको हम छोड़ नहीं पाए. मेमसाहेब हम जानत है की ी जवानी में आप दिन भर अकेली रहती है और शायद साहेब आपको रोज़ छोड़ते भी नहीं होंगे"

अनीता यह सुनकर अपनी आँखें बड़ी करके उसे देखकर boli,"Offo हरिया जी आप भी क्या बोलने लगे प्लीज"

हरिया जवाब में puchha,"Are तो का ग़लत बोले मेमसाहेब. बताइये कल रात आपको साहेब चोदे थे?"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क रही थी. वह हरिया को देखकर उसके सीने पर उँगलियाँ फेरती हुयी boli,"Please हरिया जी यह तो मेरा पर्सनल बात हैं न. यह बात मत कीजिये".

हरिया यह सुनकर अनीता को एक नज़र ऊपर से नीचे देखा तो अनीता उसके सीने पर उँगलियाँ फेरती हुयी puchhi,"Uhhm क्या देख रहे हैं हरिया जी?"

हरिया यह सुनकर अनीता की बदन को देखते हुए bola,"Ihe की आप कितनी मस्त माल हैं मेमसाहेब. एक दम सेक्सी मस्त पटाखा. साहेब बहोत किस्मत वाले हैं की रोज़ रात को आपको छोड़ने का मौक़ा मिलता हैं उनको"

हरिया अनीता की कमर पर हाथ फेरते हुए bola,"Aapki ी पतली कमर पकड़ कर जब आपको पीछे से छोड़ते होंगे और आपकी नंगी गांड को हिलते हुए देखते होंगे तो उनको कितना मज़ा आता होगा"

हरिया आगे उसकी दायी चूंकि पकड़ने के बाद bola,"Aur आपकी यह दोनों चूँचियों को नंगा मुंह में लेकर जब चूसते होंगे तो कितना मज़ा आता होगा उनको"

हरिया यह बोलकर अनीता की बायीं ब्लाउज कप जो साड़ी से आधी ढंकी थी वहां से साड़ी हटाकर उसकी बायीं चूंकि भी पकड़ लिया.

अनीता की सांस तेज़ हो रही थी. उसकी छूट में बेचैनी बढ़ने लगी थी. वह हरिया के सीने पर उंगलियां फेरकर boli,"Hariya जी अब बस कीजिये"

हरिया यह सुनकर अनीता को देखकर "हाँ" में सर हिलाते हुए bola,"Haan मेमसाहेब. हम तो बस ी कहना छह रहे हैं की साहेब किस्मत वाले हैं की रोज़ आपको वह छोड़ते हैं लेकिन ी भी बात है की आपके जइसन गरम औरत को हमरे जइसन मरद का लौड़ा का भी ज़रूरत है"

हरिया यह बोलते हुए अपने पंत के ऊपर से लुंड सेहला दिया. अनीता यह सुनकर उसके लुंड के तरफ देखि तो हरिया bola,"aur हमको बुरा लग रहा है की आपकी वह ज़रूरत हम आज पूरा नहीं कर पाए. आपको हम छोड़ नहीं पाए आज"

अनीता यह सुनकर उसके लुंड को देखि और पंत के ऊपर से पकड़ कर उसके उभर को मुट्ठी में भरकर रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी कैसी बात कर रहे हैं आप. बुरा तो मुझे लग रहा है की आप मेरी इतनी मदद किये और बदले में मैं आपके हथियार को ठंडा भी नहीं कर पायी".

वह उसके लुंड के तरफ देखकर उसे अच्छे से हिलती हुयी रान्दीपना से boli,"Abhi भी कितना बौखलाया हुआ है आपका हथियार."

हरिया यह सुनकर अनीता की चूँचियों को दबाते हुए bola,"Are मेमसाहेब जब आप साथ होंगी तो बौखलायेगा hi".

अनीता यह सुनकर उसके लुंड को हिलती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Umm हरिया जी".

हरिया यह सुनकर दये हाथ से उसकी बायीं चूंकि और बाये हाथ से उसकी गांड पकड़ कर अपने से चिपका कर puchha,"Lekin कउनो बात नहीं, हुंका यक़ीन है की हुंका आपको छोड़ने के लिए सही मौक़ा मिलेगा और तब हम आपको रगड़ कर छोड़ेंगे, बस आपको हमसे खुलकर छुड़वाना है. आप छुडवाइयेगे न हमसे मेमसाहेब?"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क रही थी. उसे हरिया का यूँ खुलकर बोलना अच्छा लग रहा था और उसके अंदर के रान्दीपना थोड़ा बाहर आ रहा था तो वह जवाब में हरिया के आँखों में देखती हुयी उसका लुंड हिलती हुयी रणदीपाने वाली अंदाज़ में boli,"Haan हरिया जी मैं आपसे ठुकवाऊंगी."

हरिया यह सुनकर अनीता को देखा और फिर bola,"Theek है मेमसाहेब. अब चलते हैं"

अनीता यह सुनकर सर हिलायी और हरिया वहां से जाने लगा. अनीता मैं लोहे का गेट तक उसके साथ गयी और हरिया वहां से बाहर निकला तो अनीता एक बार आस पास देखि तो कोई नहीं था. वह यह देखकर मुस्कुराई और हरिया को देखकर बोली,"

हरिया जी"

हरिया यह सुनकर उसके तरफ देखा तो अनीता मुस्कुराती हुयी पलट कर थोड़ी झुककर अपनी गांड उसके तरफ करके हिला दी. हरिया का लुंड यह देखकर तनतना गया. अनीता जैसी बेशर्मी और रान्दीपना वह आज तक किसी औरत में नहीं देखा था, यहाँ तक की रंडियों में भी नहीं. वह अनीता की गांड देखकर bola,"Waah मेमसाहेब ी हुआ न बात" और वह उसकी गांड पर थप्पड़ मार दिया तो अनिते बेशर्मी से खिखिलने lagi,"Aaah हरिया जी हेहेहे" तो हरिया भी हसने लगा "हाहाहा" तो अनीता boli,"Ab जाइये हरिया जी नहीं तो आपके मालिक का फिर फ़ोन आ जायेगा"

हरिया यह सुनकर हस्ते हुए bola,"Are मेमसाहेब अब आप अपनी गांड ऐसे हिलाइयेगा तो हम कैसे जा सकत हैं. आप तो हमें आपको छोड़ने के लिए निमंत्रण दे रहे हैं"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Offo हरिया जी अब जाइये. मैं तो आपको ख़ास तरीके से bye कर रही थी. अब जाइये इससे पहले आपके मालिक का फिर फ़ोन आ जाये"

हरिया यह सुनकर मुस्कुरा कर bola,"Are आ जायेगा तो हम बोल देंगे की अपनी मेमसाहेब का अपना लौड़ा से सेवा कर रहे हैं"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Offo हरिया जी" और फिर खिलखिलाने lagi,"hehehe" और खिलखिलाती हुयी boli,"Ab जाइये हरिया जी हहहहए" तो हरिया वहां से चला गया. अनीता उसे जाते हुए देखती रही. हरिया थोड़ा आगे जाकर पलट कर देखा तो अनीता सिडेवेस कड़ी होकर अपनी गांड को हिलती हुयी कामुक अंदाज़ से उसे देखती हुयी अपनी उँगलियों को सेक्सी अंदाज़ में हिलाकर उसे bye की तो हरिया अपने लुंड पर हाथ फेर दिया. अनीता उसके लुंड के तरफ देखकर अपनी होंठों पर हल्का ज़बान फेरकर अपनी निचली होंठ को डेंटन के बीच दबाकर उसे एक बार और सेक्सी अंदाज़ में उँगलियाँ हिलाकर bye की और दरवाज़ा बांध कर दी. हरिया का खून पूरा खौल रहा था और वह खुद को कैसे संभल रहा था वही जान रहा था. वहीँ अनीता की छूट पूरी गीली हो चुकी थी. वह वापस फिर से नहाने चली गई.
 
अपडेट 94

अनीता मंडे को दाल चावल लेने के लिए पहुंची मगर पिछली बार की तरह दूकान दर होम डिलीवरी के लिए मन कर दिया. अनीता मायूस होकर वहां से चली गयी. वह सोची की अगर हरिया मिल जायेगा तो वह पिछली बार की तरह उसकी मदद कर देगा और एहि उम्मीद से वह बाजार के तरफ जाकर आस पार नज़र दौड़ाई मगर हरिया का अत पता नहीं था. कुछ मिनट इंतज़ार करने के बाद वह थोड़ी मायूसी से ऑटो स्टैंड वापस जाने लगी. उसके पास दो दिन का राशन बचा था तो वह अगले दिन आने का सोची. एक पल के लिए तो उसे ध्यान आया की वह हरिया को कॉल hi करले मगर फिर यह सोच कर छोड़ दी की ज़रूर वह कोई काम में बिजी होगा इसलिए वह दिखाई नहीं दिया वर्ण वह अपने दूकान के आए पास hi घूमता फिरता रहता है और उसके आने पर वह उसे देख hi लेता है.

अनीता अपने रेगुलर रास्ते से जो एक पतला गली था और सुनसान रहता था उधर से hi वापस ऑटो स्टैंड जाने लगी की तभी दूसरे तरफ से हरिया साइकिल से आता दिखाई दिया.

हरिया को देखते hi अनीता के मैं में बहोत ख़ुशी हुयी और हरिया जब दूसरे तरफ से उसे देखकर मुस्कुराया तो अनीता भी मुस्कुरा दी.

हरिया उसके पास आकर साइकिल से उतरा तो अनीता उसे देखकर मुस्कुरा. हरिया उतारते hi दये हाथ से साइकिल पकडे अपना बया हाथ अनीता की नंगी कमर में डालकर उसे सहलाते हुए bola,"Memsaheb हमको लगा आप कल आइयेगा"

अनीता मुस्कुराती हुयी हरिया के सीने पर अपनी दायी हाथ की ऊँगली फेरती हुयी boli,"Haan हरिया जी, लेकिन एक काम आ गया तो सोची आज hi आ जॉन"

हरिया यह सुनकर bola,"Achha हुआ हम आपके जाने से पहले आ गए नहीं तो हम आज आपसे मिल नहीं पते"

हरिया यह बोलकर अनीता की जिस्म को देखने लगा. हरिया जब अनीता किस जिस्म को देखने लगा तो उसे अच्छा लगा. अनीता की नाक में हरिया के बदन से पसीने और शराब की गंध जा रही थी और यह उसको हुए मदहोश कर रही थी. हरिया जैसे मज़दूर के बदन से पसीने और देसी शराब की गंध पता नहीं क्यों उसे अच्छा लगने लगा था और साथ में जब हरिया उसकी जिस्म को गन्दी हवस और भूखे नज़र से देखता था तो उसे और मज़ा आने लगता था.

इस छोटे शहर में तमाम परेशानियों के बावजूद, उतनी सुविधाएँ नहीं रहने के बावजूद उसे यहाँ अच्छा लगने लगा था और उसका कारण हरिया hi था जो उसे एक अलग तरह का थ्रिल और एडवेंचर का एहसास करता था. उसकी जैसी बेशर्म औरत के ज़िन्दगी में शायद हरिया जैसे मर्द की hi ज़रूरत थी जो उसकी बेशर्मी बहाई को खुलकर तराशे और उसके अंदर के रणदीपाने को बाहर निकल कर उसे जवानी का जो मज़ा है उसका एहसास कराये और अनीता को एहि सुख यहाँ मिलता था. यहाँ उसे कोई जानता पहचानता नहीं था तो समाज की चिंता नहीं थी और ऊपर से हरिया जैसा मर्द भी उसे मिल गया था जो खुलकर उसे छेड़ता था. उसके जैसी बेशर्म औरत के ज़िन्दगी में एहि कमी थी जो अब पूरी हो रही थी हरिया जैसे हिम्मत वाले और दबंग मर्द के कारण और हरिया का एहि हिम्मत और दबंगई अनीता को अच्छा लगता था.

अनीता हरिया को खुद की जिस्म को देखते हुए देख उसके सीने पर ऊँगली फेरती हुयी boli,"Haan हरिया जी. मैं भी देखि की आप बाजार में हैं नहीं आज तो सोची की आप काम में बिजी होंगे"

हरिया यह सुनकर उसकी कमर सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब वह हम आज काम पर hi लेट हो गए. वह कल थोड़ा सा रामु के साथ रात में पीने बैठ गए और ज़्यादा चढ़ गया तो उठने में लेट हो गया"

अनीता यह सुनकर कामुक ऐडा से हरिया के सीने पर ऊँगली फेरती हुयी boli,"Kya बात है हरिया जी कुछ ख़ास मौक़ा था क्या कल जो आप कुछ ज़्यादा hi पी लिए"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Are नहीं मेमसाहेब बस ऐसे hi कभी कभी हो जाता है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुरायी तो हरिया उसकी चूंकि को एक नज़र देखकर bola,"Ab मेमसाहेब पिछले कुछ दिनों से हुंका जो चीज़ पीने का आदत लग गवा है उसके बाद ससुरा शराब में इतना मज़ा नहीं आवत है भले hi पीकर हम बेहोश हो जाये"

अनीता यह सुनकर सोचती हुयी हरिया के सीने पर ऊँगली फेरती हुयी puchhi,"Aesa क्या पीने का आदत लग गया है हरिया जी आपको?"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए अनीता की दायी चूंकि के तरफ आँखों से इशारा करके bola,"Aap की चूंकि memsaheb,aapki दूध"

अनीता यह सुनकर आंखें बड़ी करके बेशर्मी से मुस्कुराकर हरिया को देखती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी ओफ्फो" और अगले पल हरिया अनीता की कमर पकडे hi झुककर उसकी दायी चूंकि ब्लाउज के ऊपर से मुंह में लेकर चूसने लगा.

ऐसा होते hi अनीता मुस्कुराती हुयी कामुक रणदीपाने वाली अंदाज़ में boli,"Offo हरिया जी उम्म्म" और जल्दी से आस पास देखकर राहत महसूस की की कोई नहीं था.

हरिया अगले कुछ सेकण्ड्स तक उसकी चूंकि चूसते रहा और अनीता बेशर्मी से उसके सर के बाल में ऊँगली फिरती रही.

अनीता कुछ सेकण्ड्स बाद boli,"Hariya जी हो गया. हम बाहर हैं अभी खुद को सम्भालिये"

हरिया यह सुनकर उसकी चूंकि छोर दिया और उसे देखकर bola,"Bahot रसीला है आपकी चूंकि मेमसाहेब. हुंका पीकर मज़ा आ जाता हैं"

अनीता यह सुनकर मुस्कुरा कर उसके सीने को सहलाती हुयी boli,"Hariya जी आप भी कैसी कैसी बातें बोलते हैं सच में"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर है diya,"Hahaha" तो अनीता भी बेशर्मी से मुस्कुरा दी की हरिया उससे puchha,"Aese मेमसाहेब आप जिस काम से आयी थी वह हो गया"

अनीता यह सुनकर मायूसी से सर न में हिलती हुयी boli,"nahin हरिया जी"

हरिया यह सुनकर उसकी कमर सहलाकर bola,"Kahe मेमसाहेब? हमरा मदद का ज़रूरत है तो बोलिये हम काम कर डेट हूँ"

अनीता यह सुनकर हरिया के सीने पर ऊँगली फेरती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी आप भी सोचेंगे की मेमसाहेब सिर्फ आपसे काम करवाती रहती है"

हरिया दये हाथ से अपना साइकिल एक दीवार के किनारे रखकर दोनों हाथ से अनीता की गांड की दोनों भागों को पकड़ कर उसे अपने से लगभग चिपका लिया और उसकी गांड की दोनों भागो को मसलते हुए bola,"Are मेमसाहेब कहे हुंका शर्मिंदा कर रही हैं आप. आपका मदद करने के लिए hi तो हम हूँ"

अनीता भी उससे चिपक कर अपनी बायीं हाथ उसके सर के बालों में फिरने लगी और दये हाथ से उसके सीने पर फेरती हुयी उसके आँखों में देखि तो हरिया अनीता की चूँचियों को देखते हुए bola,"Aapke जइसन जवान और खबसूरत औरत का मदद हमरे जइसन मरद नहीं करेगा तो कौन करेगा. ी तो हमार फ़र्ज़ है. आप बस बोलिये तो हम का मदद कर सकत है आपका"

हरिया यह बोलकर वापस अनीता की चूंकि मुंह में लेकर चूसने लगा तो अनीता वैसे hi हरिया के बालों में ऊँगली फेरती हुयी अपनी सीने को थोड़ा और आगे करके रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी वही राशन ले जाना है और दूकान वाला फिर बोल रहा है की वह होम डिलीवरी नहीं देता है. मेरे पति को भी उतना टाइम नहीं मिलता है की वह राशन खरीद के रख दे. संडे को तोह वह थके हुए रहते हैं"

हरिया यह सुनकर अनीता की चूंकि मुंह से निकल कर उसे देखकर bola,"Are मेमसाहेब इतना सा बात के लिए आप इतना सोच रही थी. आपको तो हुंका फ़ोन करके hi बोल देना चाहिए था की आपको राशन चाहिए. हमरा रहते हुए आपको अटना परेशान होने का का ज़रूरत है ु भी ससुरे राशन के लिए. अब साहेब बीजी रहते हैं तो कोई मर्द होना चाहिए न आपका ख्याल रखने के लिए और ऊके लिए हम हूँ न"

हरिया यह बोलकर वापस अनीता की चूंकि को मुझ में लेकर चूसने लगा तो अनीता प्यार से हरिया के बाल को सहलाती हुयी boli,"Haan हरिया जी आप तो है hi मेरा ख्याल रखने के लिए और ख्याल तो रखते hi हैं. मगर मैं सोची की आप भी काम में रहते हैं तो आपको क्या परेशान करना"

हरिया यह सुनकर अनीता की चूंकि फिर से मुंह से निकल कर उसे देखते हुए bola,"Are मेमसाहेब आपका मदद करना भी तो हमरा काम है. आपका हर तरीके से मदद करना और ख्याल रखना हमरा ज़िम्मेदारी है"

फिर वह अनीता की चूंकि और नंगी पेट देखकर bola,"Uff मेमसाहेब अइसन ख़बसूरती और जवानी दिया है ऊपर वाले ने आपको, आपका मदद करने का और ख्याल रखने का हमरा मैं कैसे नहीं करेगा. आप हमसे मदद नहीं मांगती है तो हुंका लगता है आपको हमरा मर्दानगी पर भरोसा नहीं है."

हरिया यह बोलकर अनीता की आँखों में देखते हुए उसका दया हाथ जो उसके सीने पर था उसे अपने लुंड पर पंत के ऊपर से रख दिया और उसकी जिस्म को देखने लगा. अनीता देखि की हरिया कैसे बुखा नज़र से उसकी चूंकि देख रहा था. अनीता को उसका ऐसे देखने में कोई बुराई नहीं लगा बल्कि उसे हरिया के हिम्मत, दबंगई और मर्दानगी पर गर्व हो रहा था.

अनीता उसका लुंड पंत के ऊपर से पकड़ कर हिलने लगी और प्यार से उसके सर के बाल में बाये हाथ की उंगलियां फेरती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Offo हरिया जी आप जैसे मर्द की मर्दानगी पर कैसे भरोसा नहीं होगा. मुझे तो ख़ुशी होती है की आप जैसे मर्द हैं मेरा ख्याल रखने के लिए. आप नहीं होते तो पता नहीं मैं अकेले क्या करती इस नए जगह में"

हरिया अनीता की आँखों में देखते हुए bola,"Are मेमसाहेब हमरा होते हुए आप अकेले कैसे हो सकते हैं. हम जानत है की साहेब बीजी रहते हैं और आपको अकेला महसूस होता होगा लेकिन हम तो हैं आपका ख्याल रखने के लिए. ऊपर वाला जानत है की आपके जइसन जवान औरत को हमरे जइसन मरद का ज़रूरत है ीके लिए hi तो हुंका आपसे मिलवाया है."

अनीता यह सुनकर हरिया का लुंड पंत के ऊपर से पकड़ कर हिलती हुयी उसके आँखों में देखती हुयी boli,"Haan हरिया जी जब आप जैसे मर्द हैं तो मैं अकेले कैसे हो सकती हूँ. वही तो बोल रही हूँ की आप नहीं होते तो मैं तो अकेली hi रहती न. मैं जब यहाँ आई थी तो सोची भी नहीं थी की आप जैसे मर्द से मुलाक़ात होगी जो मेरा इतना ख्याल रखेंगे वह भी हर तरीके से"

हरिया जवाब में अनीता की गांड दबाते हुए bola,"Toh फिर जब हम हैं तो आप हमसे हर तरीके से मदद कराया कीजिये न मेमसाहेब"

हरिया यह बोलकर अनीता की गांड पकडे घुमा दिया और फिर कमर पर हाथ रखकर नीचे झुका दिया. जब हरिया अनीता की कमर पर हाथ रखा तो वह समझ गयी की वह उसे झुकना छह रहा है तो वह अपनी कमर आर्च करके झुक गयी जैसे वह हरिया से छोड़ने के लिए झुक रही हो और अगले पल वही हुआ. हरिया पीछे से उसकी गांड से अपना लुंड पंत के ऊपर से hi सत्ता दिया और पतली कमर पकड़ कर धक्का लगते हुए bola,"Har तरीके से मतबल ऐसे भी"

अनीता यह सुनकर झुकी हुयी मुस्कुरा दी और हरिया के धक्का पर कामुक अंदाज़ में boli,"Uhhmm हरिया जी आअह्ह्ह"

हरिया धक्का लगते हुए उसकी पतली कमर पकड़ कर bola,"Uff मेमसाहेब साहेब कितने किस्मत वाले हैं. रोज़ रात को आपको ऐसे hi झुककर आपकी पतली कमर पकड़ कर आपको छोड़ते होंगे और आपकी बड़ी गांड को नंगी देखते होंगे, वह भी चुदाई से हिलते हुए, उफ़ मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर आहें भरकर boli,"Aaahhh हरिया जी आप भी तो वहीँ कर रहे हैं अभी"

हरिया जवाब में bola,"Are मेमसाहेब अभी हम आपको छोड़ कहाँ रहे हैं, चुदाई तो मादरजात नंगा होकर किया जाता है. हम आपको नंगा कहाँ किये हैं अभी. हम तो बस दिखा रहे हैं की हम आपकी ऐसे भी मदद करेंगे, आपकी चुदाई करके. हर तरीके से ख्याल रखेंगे आपका और आपकी जवानी का, रगड़ कर चुदाई करके"

अनीता की छूट में ऐसे hi हलचल हो रही थी हरिया के छेड़छाड़ से और उसे बहोत मज़ा मिल रहा था मगर अभी झुककर धक्के लगाकर ऐसी बातें करने पर उसकी छूट में गीलापन बढ़ने लगी थी और एक अलग hi मज़ा मिल रहा था. हरिया का यूँ खुले में हिम्मत से छेड़ छड़ करने से अनीता को और अच्छा लगता था और उसके हिम्मत, दबंगई और मर्दानगी से वह और उसके तरफ आकर्षित होती थी और हरिया वही करता था, उसे खुले में भी बेझिजक छेड़ता था जो अनीता जैसी बेशर्म औरत को अच्छा लगता था.

अगले पल हरिया अनीता से puchha,"Aap हमसे ऐसे मदद करवाइयेगा तो मेमसाहेब? आप हमसे छुडवाइयेगा तो?"

इस सवाल से अनीता की छूट बेचैन होने लगी. तीन दिन पहले hi वह उसके घर में पीछे से धक्के लगाकर उसे साफ़ साफ़ छोड़ने का बात कर रहा था और आज वह फिर से वैसे hi धक्के लगता हुए साफ़ साफ़ छोड़ने का बात कर रहा था. हरिया अब साफ़ साफ़ हर मुलाकात में जाता रहा था की वह अनीता को छोड़ना चाहता है, उसके साथ रात गुज़ारना चाहता है और हरिया का यूँ खुलकर बोलना hi अनीता को अच्छा लगता था.

अनीता को हरिया का यूँ खुलकर बोलना अच्छा लग रहा था और वह झुकी हुयी hi तेज़ सांस में "हाँ" में सर हिलती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Haan हरिया जी आप मेरा हर तरीके से ख्याल रखिये, अभी जैसे रख रहे हैं ऐसे भी" और अगले पल वह भी अपनी गांड पीछे के तरफ धकेल कर हरिया के साथ ताल से ताल मिलाने लगी.

हरिया यह सुनकर और अनीता को गांड पीछे धकेलते देख झुक कर अनीता की बैकलेस ब्लाउज में नंगी पीठ को चूमने लगा तो अनीता की चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी. वह उसकी पीठ को चूमते हुए puchha,"Aap हमसे छुडवाइयेगा तो मेमसाहेब?"

अनीता यह सुनकर "हाँ" में सर हिलायी की तभी कोई आता हुआ महसूस हुआ और वह सीधा कड़ी होती हुयी boli,"Hariya जी कोई आ रहा है"

हरिया यह सुनकर दूसरे तरफ देखा तो एक भिखारी आते हुए दिखाई दिया. अनीता की दिल तेज़ी से धड़क रही थी और वह खुद की बाल और गांड पर की साड़ी ठीक करके खुद को नार्मल करने लगी वहीँ हरिया bola,"Ee ससुरा कउनो न कउनो आ hi जाता है कबाब में हड्डी बनने"

अनीता की दिल धड़क तो रही थी मगर साथ hi एक एडवेंचर और एक थ्रिल महसूस हो रही थी. वह हरिया का बात सुनकर मुस्कुराती हुयी उसे छेड़ने के अंदाज़ में boli,"Hariya जी अब ऐसे गली में तो कोई भी आ सकता है न"

हरिया यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब जब हम आपकी सेवा कर रहे होते हैं तभी कहे कउनो आता है. अनीता यह सुनकर एक ऐडा से हरिया को छेड़ती हुयी boli,"Ab किसी को क्या पता की आप अपनी मेमसाहेब की सेवा कर रहे होते हैं वह भी अपने ख़ास अंदाज़ में"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता को देखा और फिर उसकी चूंकि को देखा तो अनीता धीरे से boli,"Hariya जी" और फिर हरिया को भिखारी की तरफ आँखों से इशारा को जैसे बोल रही हो की वह आ रहा है ऐसे आप हवस और भूख से उसके सामने मेरी चूँचियों को न देखे.

हरिया यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता boli,"main आपको क्या क्या चाहिए लिस्ट देती हूँ"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर हाँ में सर हिलाया तो अनीता अपनी बैग से छोटा सा नोटबुक निकलने वाली hi होती है की तभी भिखारी वहां पहुँच कर bola,"Memsaheb कुछ पैसे दे दीजिये इस ग़रीब को"

हरिया यह सुनकर दांत कर bola,"Chalo आगे बढ़ो"

भिखारी यह सुनकर हरिया के तरफ देखा तो अनीता हरिया से boli,"Main पैसे दे देती हूँ"

हरिया यह सुनकर अनीता से bola,"Are मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर अपनी बैग से एक 50 का नोट निकल कर उस भिखारी को दी तो वह खुश होकर अनीता को देखा तो वह मुस्कुरा दी. भिखारी ख़ुशी से अनीता को देखता रहा तो हरिया अनीता की कमर में हाथ डालकर भिखारी से bola,"Ab का देख रहा है ससुरा. पैसा मिल गया तो निकल यहाँ से"

अनीता अपनी कमर में हरिया का हाथ महसूस की तो उसकी दिल धड़क गई. हरिया उस भिखारी के सामने hi उसकी कमर में हाथ डालकर उस भिखारी को भगा रहा था जैसे कह रहा हो की अनीता उसकी माल है और वह ऐसे उसे न देखे. अनीता की दिल तो पहले धड़क गयी मगर न जाने क्यों हरिया का यह अंदाज़ उसे अच्छा लगा. उसे शुरू में थोड़ी झिझक तो हुयी मगर उसकी बेशर्मी हरिया के दबगई के कारण उसकी झिझक पर हावी हो गयी और अनीता को ज़रा भी शर्म नहीं आ रही थी की उस भिखारी के सामने hi हरिया उसकी कमर में हाथ डाले सेहला रहा था. बल्कि उसे हरिया का दबंग अंदाज़ और हिम्मत उसके प्रति और आकर्षित करने लगी. उसे याद आने लगा की हरिया जिस दिन चोर को पकड़ा था उस दिन भी कैसे जो बुद्धा उसकी मदद नहीं किया था उसके सामने कैसे सीधा उसकी गांड पर hi हाथ रख दिया था और उतना hi नहीं बल्कि उसकी गांड पर होने अपने लुंड से धक्के भी लगाया था. अनीता को याद आ रहा था की कैसे उसे भी हरिया का यूँ उसके सामने छेड़ना अच्छा लगा था और उसे मज़ा आया था.

भिखारी एक नज़र अनीता की कमर में हरिया का हाथ देखा की तभी हरिया फिर से उस भिखारी से bola,"Ka सुनाई नहीं दिया तुमका?"

भिखारी यह सुनकर चुप चाप वहां से जाने लगा. भिखारी थोड़ा आगे गया तो अनीता हरिया को कुछ बोले बिना अपने बैग से छोटा सा नोटबुक निकलने लगी की तभी हरिया उसकी दायी चूंकि ब्लाउज के ऊपर ऐ मुंह में लेकर चूसने लगा. अनीता घबराकर एक नज़र भिखारी के तरफ देखि तो वह चुप चाप चले जा रहा था. अनीता धीरे से हरिया से boli,"Hariya जी रुक जाइये प्लीज"

हरिया नहीं रुका तो अनीता फिर boli,"Hariya जी प्लीज रुक जाइये" तो हरिया रुक कर अनीता को देखकर bola,"Are मेमसाहेब उस भिखारी में अब हिम्मत नहीं होगा इधर देखने का"

अनीता को पता था की हरिया जिस तरह से डांटा था उसे उसका हिम्मत नहीं होगा तो वह अगले पल boli,"Haan हरिया जी पता है मुझे. आपने उसे ऐसे डांटा है उसके बाद उसमे हिम्मत कहाँ होगी इधर देखने की. मैं तो इस्सलिये रोकी आपको की अभी मुझे घर जाना है और अब इधर दाग लगने लगा है"

अनीता यह बोलकर अपनी आँखों से दायी ब्लाउज कप के तरफ इशारा की. हरिया देखा तो अनीता की दायी ब्लाउज कप पर थोड़ा थूक का निशाँ आने लगा था. हरिया यह देखकर bola,"Haan मेमसाहेब. हुंका ध्यान hi नहीं था. का करे आपकी चूंकि देखकर हमसे रहा नहीं जाता है. मैं करता है खूब चूसे आपकी बड़ी बड़ी चूंकि"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी boli,"Offo हरिया जी आप भी न" तो हरिया मुस्कुरा दिया. अनीता मुस्कुरा कर अपनी सर हिलाकर बैग से नोटबुक निकलकर एक नज़र हरिया के तरफ देखि तो वह उसकी चूँचियों को भूका नज़र से देख रहा था. अनीता की दिल यह देखकर धड़क गयी. वह बेशर्मी से हरिया को देखकर रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी अभी तक आपका मैं नहीं भरा है न"

अगले पल हरिया अनीता की चूंकि से नज़र हटाकर उसे देखकर मुस्कुराया तो अनीता आस पास देखकर अपनी बायीं चूंकि के ब्लाउज कप जो आधी साड़ी के पल्लू से ढंकी थी उस पर से साड़ी को हटाकर हरिया को देखकर अपनी बायीं ब्लाउज के कप के तरफ आँखों से इशारा की.

हरिया समझ गया की अनीता क्या इशारा कर रही है और वह अगले पल झुककर अपने मुंह में अनीता की बायीं चूंकि भरकर चूसने लगा. ऐसा करते hi अनीता की चेहरे पर एक गर्व का भाव आ गया और वह आस पास एक नज़र देखकर एक बार नोटबुक में राशन का लिस्ट जो वह घर से लिखकर लायी थी उसे देखने लगी की सब कुछ लिखी है या कुछ लिखना भूल गयी थी.

अनीता कुछ सेकण्ड्स में लिस्ट देख चुकी थी मगर हरिया उसकी चूंकि चुस्त रहा तो वह चुप चाप नोटबुक से वह पेज फॉर कर नोटबुक बैग में राखी और दये हाथ में पेपर लिए बाये हाथ से फिर हरिया का बाल सहलाने लगी. अगले एक मिनट तक हरिया उसकी बायीं चूंकि को चूसते काटते रहा. अनीता उसके दांतों लो अपनी चूंकि पर महसूस की मगर कुछ नहीं बोली.

अनीता एक मिनट बाद boli,"Hariya जी यह रहा लिस्ट".

हरिया यह सुनकर उसकी बायीं चूंकि मुंह से निकलकर चुप चाप उसकी क्लीवेज में देखा जहाँ पसीना का एक बंध था. हरिया अपना ज़बान निकलकर उसकी क्लीवेज से पसीना चाट कर उसकी स्लीव्ज को चूमने लगा. अनीता यह देखकर एक नज़र आस पास दौड़ाई तो कोई नहीं था तो वह चुप चाप हरिया के बालों में उँगलियाँ फेरती हुयी दये हाथ से कागज़ को हरिया के पंत के पॉकेट में डालकर boli,"Hariya जी मैं लिस्ट आपके पंत के पॉकेट में दाल देती हूँ"

हरिया जवाब में कुछ नहीं बोलै तो अनीता चुप चाप लिस्ट उसके पंत के पॉकेट में डाली तो पॉकेट के अंदर से hi उसे हरिया का लुंड महसूस हुआ. हरिया का लुंड महसूस होते है अनीता की दिल धड़क गयी और वह बिना शर्म के उसका लुंड पंत के पॉकेट के साथ पकड़ कर हिलती हुयी boli,"Uhhm हरिया जी मैंने लिस्ट दाल दिया. अब मुझे चलना चाहिए"

हरिया उसकी क्लीवेज चाटने के बाद अपना चेहरा ऊपर करके उसकी गले को चूमने लगा तो अनीता की सांस तेज़ होने लगी और वह हरिया का लुंड हिलती हुयी दूसरे हाथ से हरिया के बाल सेहला रही थी.

अनीता की सांस तेज़ हो रही थी मगर वह यवह भी जानती थी की वह बाहर है और कोई भी कभी बजी आ सकता था. इससे पहले की बात आगे और बढे वह रोकना ज़रूरी समझी क्यूंकि वह जितनी भी बेशर्म थी, उसके अंदर जितना भी रान्दीपना भरा था, ऐसे खुले में ज़्यादा कुछ नहीं कर सकती थी क्यूंकि वह थी तो एक शरीद घर की बहु बेटी.

अनीता खुद को संभल कर हरिया से boli,"Hariya जी अब चलना चाहिए मुझे. मेरी बाकी सेवा घर आकर कर लीजियेगा"

हरिया यह सुनकर अनीता को देखकर bola,"Theek है मेमसाहेब. आप आराम से जाइये हम लेकर आ जाऊंगा".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर हरिया का लुंड पंत के अंदर से पकडे हिलती हुयी और दूसरे हाथ को उसके बालों में फेरती हुयी कामुकता से boli,"Thank यू हरिया जी"

हरिया यह सुनकर अनीता की बदन को देखकर उसकी कमर पर हाथ फिरते हुए bola,"Aur फिर घर पर आपका सेवा करूँगा"

और फिर वह अपने आँखों से अपने लुंड के तरफ इशारा करके bola,"Ee लौड़ा से"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क गयी और वह हरिया से boli,"Main चलती हूँ हरिया जी"

हरिया यह सुनकर bola,"Theek है मेमसाहेब

चलिए हम आपको ऑटो स्टैंड तक छोर देते हैं"

अनीता यह सुनकर boli,"Hariya जी आपको लेट नहीं हो जाएगी? मेरा मतलब है की आप आज लेट से आये हैं काम पर अभी तक गए नहीं और फिर मेरा राशन भी लाना है"

हरिया अनीता की कमर में हाथ डालकर bola,"Are मेमसाहेब हम मैनेज कर लूंगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई और boli,"Theek है चलिए"

हरिया साइकिल उधर hi लॉक कर दिया और अनीता के साथ ऑटो स्टैंड गया और अनीता अंदर बैठकर अंदर के किनारे वाले सीट पर खिसक गयी. हरिया दूसरे तरफ गया और साइड में अपना पेट सीट के पास करके अपना ज़िप खोलने लगा.

ज़िप खोलने का आवाज़ सुनकर अनीता देखि और boli"Hariya जी यह क्या कर रहे हैं आप?"

यह बोलकर वह आस पास देखने लगी की इतने में हरिया अपना लुंड पंत से बाहर निकल दिया और अनीता जब दये तरफ देखि तो उसकी गाल से टकराकर हरिया का लुंड उसके चेहरे के सामने लहरा रहा था.

अनीता की दिल धड़क रही थी और वह धीरे से boli,"Hariya जी क्या कर रहे हैं कोई देख लेगा"

हरिया यह सुनकर अनीता से bola,"memsaheb जाने से पहले एक बार हमार लौड़ा देख लीजिये न की कैसे आपको छोड़ने के लिए बौखलाया है"

यह सुनकर अनीता की दिल धड़क गयी और वह धीरे से boli,"Offo हरिया जी आपका हथियार तो हर वक़्त बौखलाया hi रहता है. अब अंदर कीजिये इसे"

अनीता आस पास जल्दी से देखकर उसका लुंड पकड़ कर पंत के अंदर करने लगी तो हरिया कमर आगे करके bola,"Ek बार थोड़ा होंठों से प्यार कर दीजिये मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर धड़कते दिल से boli,"Offo हरिया जी आप भी न. कोई देख लेगा"

यह सुनकर हरिया bola,"Are मेमसाहेब कउनो नहीं देखेगा. कउनो आएगा तो हम खुद अपना लौड़ा अंदर कर लूंगा"

अनीता जानती थी की कोई देख नहीं रहा है और कहीं न कहीं उसे इस में एक थ्रिल मिल रहा था. साथ hi वह जानती थी की हरिया सिचुएशन को संभल लेगा. यह सोच कर अनीता आस पास एक नज़र दौड़कर अपनी होंठ हरिया के लुंड पर रखकर उसके लुंड को चुम ली.

हरिया का लुंड अनीता के नरम होंठ महसूस करके झटका मारा जिसे देखकर अनीता की चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी और वह हरिया के लुंड के ऊपरी भाग से लेकर उसके ज़िप तक 4-5 चुम्बन जड़ दी.

अनीता को मज़ा आने लगा था और वह एक बार और आस पास देखकर अपने मुंह से थोड़ा थूक हरिया के लुंड पर गिरा दी. अनीता की थूक लुंड पर गिरते hi हरिया का लुंड झटका मारने लगा.

हरिया का मोटा लम्बा और तगड़े लुंड को ऐसे झटके मारते देख अनीता को अच्छा लग रहा था. अनीता देखि की हरिया का लुंड कितना बड़ा और तगड़ा लग रहा था और उसके चेहरे पर यह देखकर मुस्कराहट आ गई और वह अपनी होंठ थूक पर रखकर होंठों से वह थूक हरिया के लुंड पर फैलाने लगी.

एक साइड उसके लुंड पर थूक फैलाने के बाद अनीता एक बार और आस पास देखि और हरिया के लुंड के ऊपर एक बार और थूक गिरा कर उसे होंठों से फैलाने लगी. हरिया का लुंड अनीता की होंठ महसूस करके लगातार ऊपर नीचे हिल रहा था जिसे देखकर अनीता मुस्कुरा रही थी.

कुछ सेकण्ड्स के बाद हरिया अपना लुंड पकड़ कर पंत के अंदर करते हुए bola,"Kauno आ रहा है मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर अपने बाये तरफ देखि तो एक बूढ़ा ऑटो में चढ़ रहा था और जैसे hi वह चढ़ा अनीता अपनी दायी कान में हरिया के ज़िप बांध होने की आवाज़ सुनी. उसी वक़्त वह बूढ़ा ऑटो में चढ़कर अनीता को देखा और फिर उसके दये तरफ खड़े आदमी को. हालांकि वह हरिया को देख नहीं सका क्यूंकि वह खड़ा था मगर वह उसके पंत को देख पाया और पंत के सामने उभर देखकर उसे अंदाजा हो गया की वहां एक मर्द खड़ा है और वह भी कोई ऐसा वैसा मर्द नहीं बल्कि एक भरपूर मर्द क्यूंकि एक भरपूर मर्द के पंत के सामने hi वैसा उभर हो सकता था.

इस बीच अनीता को एहसास हुआ की उसकी होंठ पर थूक लगे हुए हैं तो वह अपनी ज़बान को होंठों पर फिरकर थूक साफ़ करने की कोशिश की की तभी वह देखि की वह बुद्धा उसे देखने लगा, खासकर उसकी होंठ को. अनीता की दिल उसके देखने से धड़क गयी मगर वह खुद को संभालती हुयी बिना शर्म के उसे देखि.

वह बुद्धा का आँख फिर अनीता की क्लीवेज पर चला गया. वह बुद्धा इतनी बदन दिखाऊ साड़ी पहने हुए औरत को आज तक सिर्फ टीवी पर hi देखा था. और अनीता जैसी खूबसूरत औरत को भी टीवी पर hi देखा था. उसे लग रहा था अनीता कोई मॉडल या एक्ट्रेस है. अनीता उस बुड्ढे को अपनी क्लीवेज देखते हुए देखि तो बिना कोई रिएक्शन के दूसरे तरफ देखकर अपनी होंठ पर लगे थोड़े से थूक को दायी हाथ की अंगूठा से साफ़ की की तभी अनीता आईने में देखि की वह बुद्धा उसे होंठ साफ़ करते देख रहा है. अनीता की दिल धड़क रही थी मगर वह कुछ रिएक्शन नहीं दी.

अनीता उस बुड्ढे को आईने में देखि hi थी की तभी हरिया झुककर अनीता को देखकर bola,"Achha मेमसाहेब हम चालत हैं"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek है" और फिर हरिया चला गया.

अगले पल अनीता उस बुड्ढे को अपने से चिपक कर बैठते हुए महसूस करके उसके तरफ देखि तो वह चुप चाप दूसरे तरफ देख रहा था जहाँ एक पैसेंजर बैठ रहा था. अनीता देखि की वह बूढ़ा का कोहनी उसकी बायीं चूंकि से सत्ता हुआ था लेकिन वह यह भी देखि की उसके बगल वाला पैसेंजर थोड़ा मोटा था तो जगह काम थी.

अनीता कुछ नहीं बोली और अपनी चूंकि पर उस बुड्ढे का कोहनी महसूस करती हुयी चुप चाप बाहर के तरफ देखने लगी.
 
अपडेट 95

अगले 15 मिनट तक अनीता अपनी बायीं चूंकि पर उस बुड्ढे का कोहनी महसूस करती रही मगर कुछ नहीं बोली. 15 मिनट बाद वह बुद्धा उतर गया और दूसरा कोई पैसेंजर नहीं बैठा.

अनीता घर पहुंचकर नहाकर तैयार हो गयी और हरिया का इंतज़ार करने लगी मगर वह नहीं आया. वह शाम के 4 बजे के आस पास हरिया को फ़ोन की तो स्विच ऑफ था. रात को राज आया और अनीता को बिना चोदे सो गया. अनीता जागकर हरिया के बारे में सोचती रही की कैसे वह उसको छोड़ना चाहता है और उसके बड़े हुए मोठे लुंड के बारे में सोचकर उसकी छूट में बेचैनी होने लगी. वह सोचने लगी की हरिया आखिर आया क्यों नहीं. वह सोचने लगी की कहीं हरिया ऐसा तो नहीं सोच रहा है की वह उससे बस अपने घर का काम करवाना चाहती है और उसके साथ कोई रिश्ता नहीं चाहती. एहि सब सोचती हुयी वह सो गयी.

अगले दिन चंदा आयी काम करने तो अनीता सोची की हरिया के बारे में पूछे मगर फिर उसे यह सही नहीं लगा तो वह चुप रह गयी. अगले दिन वेडनेसडे को राज के जाने के बाद वह नाहा ली मगर किचन में लंच बनाने गयी तो पानी नहीं था. उसे समझ नहीं आया की वह क्या करे. एक तो आज राशन भी ख़तम होने वाला था और अब नल में पानी भी नहीं आ रही थी.

उसे हरिया की कमी सच में महसूस होने लगी थी की उसके होने पर इतनी परेशानी नहीं होती. वह कुछ सोचकर हरिया को फ़ोन लगायी मगर फ़ोन स्विच ऑफ hi था.

चंदा अपना काम कर रही थी तो अनीता उसके पास जाकर puchhi,"Chanda तुम किसो प्लम्बर को जानती हो? वह नल में पानी नहीं आ रहा है"

चंदा यह सुनकर boli,"Nahin मेमसाहेब मैं नहीं जानती"

अनीता यह सुनकर थोड़ी परेशां हो गयी की तभी वह कुछ सोचकर puchhi,"Achha उस दिन जो काम करने आये थे, हरिया जी, वह इतने जगह आते जाते रहता हैं काम से, उनको शायद पता होगा"

चंदा यह सुनकर उदास होकर boli,"Are मेमसाहेब हरिया काका तो हस्पताल में हैं"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क गयी और उसे भी थोड़ा बुरा लगा यह सुनकर मगर वह अपनी परेशानी को कण्ट्रोल में करके puchhi,"Kyun? क्या हो गया उनको?"

चंदा यह सुनकर boli,"Woh दो दिन पहले उनका एक्सीडेंट हो गया, उनका साइकिल भी टूट गया मगर अच्छा हुआ की उनको बहोत ज़्यादा चोट नहीं आया, वह पेअर पर साइकिल गिर गया था तो थोड़ा सा फेक्टरी हो गया"

अनीता यह सुनकर उससे puchhi,"zyada सीरियस फ्रैक्चर तो नहीं है? मेरा मतलब है डॉक्टर्स ने क्या बोलै"

चंदा जवाब में boli,"Mujhe पता नहीं मेमसाहेब. बापू बोल रहे थे की घबराने का बात नहीं है कुछ दिन में ठीक हो जायेंगे वह"

अनीता को यह सुनकर राहत मिली तो वह puchhi,"Woh कौन से हॉस्पिटल में हैं, मेरा मतलब अच्छे हॉस्पिटल में होने से अच्छा इंतज़ार होगा"

चंदा जवाब में boli,"Memsaheb हुंका पता नहीं कौन हस्पताल में भर्ती हैं वह मगर कोई सरकारी हस्पताल में hi होंगे. हम घरीं लोगन के लिए तो सरकारी हस्पताल hi है"

अनीता यह सुनकर कुछ नहीं बोली तो चंदा boli,"Memsaheb आप बोले तो मैं बापू से पुछु की वह किसी प्लम्बर को जानते हैं या नहीं"

अनीता यह सुनकर सोची की हरिया उसका मदद करने नहीं आ सकता तो रामु hi सही. वह अपना सर "हाँ" में हिलाकर boli,"Theek है".

चंदा रामु को फ़ोन करके बात करने के बाद अनीता को देखकर boli,"Memsaheb बापू अभी एक जगह माल पहुँचाने गए हैं. वह प्लम्बर को जानते हैं मगर मोबाइल नंबर नहीं है. वह शाम तक उसको लेकर आएंगे"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Thank यू चंदा."

चंदा अनीता के मुंह से थैंक यू सुनकर खुश हो गयी. वह फिर कुछ सोच कर boli,"Memsaheb अगर आपको बुरा न लगे तो एक बात बोलूं?"

अनीता यह सुनकर सवालिया नज़र से चंदा को देखि हुए फिर puchhi,"Haan बोलो"

चंदा कुछ सोचकर मुस्कुराकर boli,"Woh हरिया काका तो अभी बीमार हैं और पता नहीं कब बाकी का स्टोर रूम साफ़ करने आएंगे. मैं बापू को बोल दूँ की वह साफ़ कर दे. दो पैसे आ जायेंगे. मैं हरिया काका का काम नहीं छीनना छह रही मगर उनको ठीक होने में तो टाइम लगेगा. अगर आप हरिया काका से hi काम करना चाहती हैं तो ठीक है"

अनीता को चंदा के बात में समझदारी लगी की वह अपने बाप के लिए दो पैसे कमाने का इंतज़ाम कर रही है मगर वह साथ में हरिया का काम भी छीनना नहीं चाहती थी. अनीता जानती थी की हरिया को ठीक होने में कुछ टाइम तो लग hi जायेगा तो चंदा का बात कोई ग़लत नहीं था. वह यह भी नहीं चाहती थी की चंदा सोचे की वह हरिया से hi काम करवाना चाहती है तो वह मुस्कुराकर boli,"Theek है अगर वह करना चाहते हैं तो बोल देना."

चंदा मुस्कुराकर boli,"Theek है मेमसाहेब"

अनीता मुस्कुराकर अपनी कमरे में चली गयी. वह चंदा के जाने के बाद लंच करने के लिए बाहर चली गयी और उधर से hi 500 रुपये देकर एक दुकान दार से राशन का सामान होम डिलीवरी करवाई.

शाम को 5 बजे घर का बेल्ल बजा तो वह दरवाज़ा खोलकर देखि तो रामु खड़ा था. उसके साथ एक 20-22 साल का लड़का था. रामु अनीता को देखकर bola,"Memsaheb वह प्लम्बर लाये हैं"

अनीता उस लड़के को देखकर "हाँ" में सर हिलायी और उन्हें अंदर आने के लिए बोली. वह लड़का काम कर रहा था तो रामु सोफे के तरफ खड़ा हुए अनीता से bola,"Memsaheb हुंका पता नहीं था की हमार बिटिया इहाँ काम करती है. ु आपका खूब तारीफ कर रही थी की आप बहोत अच्छी है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Chanda भी बहोत अच्छा काम करती है. बहोत ईमानदारी और म्हणत से काम करती है वह"

रामु यह सुनकर मुस्कुराया और bola,"Memsaheb वह बोल रही थी की आपका स्टोर रूम साफ़ करना है"

अनीता यह सुनकर "हाँ" में सर हिलाकर boli,"Haan वह वही स्टोर रूम जहाँ आप पुराण गद्दा रखे थे. एक बार देख लीजिये कितना काम है"

रामु यह सुनकर bola,"Theek है मेमसाहेब" तो अनीता boli,"Main चाबी लेकर आती हूँ" और यह बोलकर वह अपनी कमरे में जाने लगी तो रामु का नज़र अनीता की दूध जैसे गोरी चिकनी नंगी पीठ पर पड़ा तो उसका दिल धड़क गया. अनीता को देखकर उसे एहि लग रहा था जैसे वह किसी मॉडल या एक्ट्रेस को देख रहा हो और वह भी इतने करीब से. न चाहते हुए भी उसका नज़र अनीता की नंगी पीठ से नीचे उसकी हिलती हुयी गांड पर चला गया और तब तक वह अनीता की गांड को देखता रहा जब तक वह कमरे में दाखिल होकर उसके नज़र से ग़ायब नहीं हो गयी.

अनीता के जाने पर रामु जल्दी से उधर से नज़र हटाकर प्लम्बर को देखा जो अपने काम में बिजी था.

थोड़ी देर में अनीता आकर रामु को चाभी देकर boli,"Yeh लीजिये स्टोर रूम का चाभी"

रामु चाभी लेकर स्टोर रूम खोला तो अनीता पीछे पीछे स्टोर रूम के गेट तक गयी. रामु स्टोर रूम देखकर bola,"Memsaheb हरिया ने आधा साफ़ कर hi दिया है, आधा बाकी है"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़कने लगी. अनीता को लगा की हरिया के मन करने के बावजूद चंदा रामु को बता दी तो वह बात को संभालती हुयी मुस्कुरा कर boli,"Haan चंदा तो आपको बताई hi होगी"

रामु यह सुनकर अनीता को देखकर bola,"nahin मेमसाहेब ु हुंका ऐसा कुछ हो नहीं बोली. वह हम तीन चार दिन पहले हरिया को इधर आते देखे तो हुंका लगा की हरिया hi साफ़ किया होगा"

अनीता यह सुनकर धड़कते दिल से मुस्कुरा कर boli,"Haan वह पूछने आये थे की वह मैट्रेस्स आराम दे रहा है या कोई कम्प्लेन है तो मैंने hi उनसे पूछा था की अगर कोई आदमी स्टोर रूम साफ़ करने के लिए मिले तो बताये तो वह खुद hi तैयार हो गए काम करने के लिए".

अनीता को राहत मिली की काम से काम चंदा भरोसे के लायक है और वह अपना ज़बान पर कायम रहती हुयी रामु को हरिया के बारे में कुछ नहीं बताई.

रामु यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब ठीक किया. दो पैसे भी कमा लिया उसने और आपको कोई आदमी खोजने में परेशानी भी नहीं हुयी"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Aap देख लीजिये काम और सोच लीजिये की आप कितना पैसे लेंगे"

रामु यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब हरिया को पूरा काम के लिए जितना देने के लिए बोले उसका आधा हुंका दे दीजियेगा. आधा काम hi तो बचा है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुरा कर boli,"Theek है". वह जानती थी की हरिया से पैसे का बात नहीं हुआ था मगर वह यह रामु को बताना सही नहीं समझी. वह सोच ली की रामु को 1000 रुपये दे देगी.

अनीता स्टोर रूम के गेट पर कड़ी hi थी की तभी वह प्लम्बर आकर बोलै की वह नल ठीक कर दिया. अनीता यह सुनकर अपनी कमरे में जा कर पैसे लेकर आयी और उस प्लम्बर को दे दी. प्लम्बर पैसे लेकर चला गया तो तभी रामु स्टोर रूम से बाहर निकलकर bola,"Hum कल आकर साफ़ कर दूंगा मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek है" और रामु वहां से चला गया. उस रात राज फिर अनीता को नहीं छोड़ा और अनीता रात में हरिया के लुंड के बारे में सोचने लगी. सोचने लगी की हरिया के न होने से उसे कितनी परेशानी हो रही थी कोई काम के लिए. अगर रामु नहीं रहता तो प्लंबिंग को लेकर भी कितनी परेशानी होती उसे. अनीता को लगने लगा की उसे सच में हरिया और रामु जैसे मर्दों की ज़रूरत है इस शहर में वह भी हर तरीके से, चाहे कोई काम के लिए या फिर बिस्तर पर साथ देने के लिए. अनीता को लगने लगा की ऐसी जवानी और ख़ूबसूरती का क्या फायदा की उसका बिस्तर ठंडा रहे. वह सोची की हरिया का बात सही है की इस जवानी में उसे हरिया का ज़रूरत है इसलिए तो ऊपर वाले ने उन दोनों को मिलाया है". अनीता यह सब सोचती हुयी सो गयी.

अगले दिन थर्सडे को रामु स्टोर रूम साफ़ करने आया. अनीता लौ वैस्ट साड़ी और बैकलेस ब्लाउज पहनी थी. उसकी नाभि में बेल्ली बटन रिंग लटक रही थी जो चमक रही थी और उसकी जिस्म को और कामुक बना रही थी. रामु वह देखा तो उसका लुंड भी हरकत करने लगा.

रामु भी 2 घंटे का टाइम लेकर आया था काम करने के लिए. वह 2 घंटे में जितना काम हो सके किये. वह गन्दा होने के वजह से अपना कुरता निकाल कर रख दिया था और सिर्फ धोती पहने सफाई कर रहा था. फर्नीचर इधर उधर करने से और पंखा बांध होने से उसका बदन पसीने से भीग गया था.

अनीता बीच में आकर उसका काम देखती और थोड़ी बात चित करती उससे. रामु जब गद्दा लेकर आया था तभी समझ गया था की अनीता भले hi पढ़ी लिखी, खूबसूरत और अमीर है मगर उसके अंदर घमंड ज़रा भी नहीं है और साथ hi अपनी बेटी चंदा से भी अनीता की तारीफ सुना था की वह दिल की कितनी अच्छी है तो रामु भी थोड़ा कम्फर्टेबले फील करके अनीता से थोड़ा बहोत बात करने लगा. इतनी खूबसूरत औरत से बात करने का मौक़ा वह भी कैसे छोड़ सकता था.

लगभग एक घंटा काम करने के बाद वह अनीता का आवाज़ suna,"Ramu जी आप तो पसीने से पूरा भीग गए हैं"

रामु यह सुनकर पीछे देखा तो स्टोर रूम के गेट के पास अनीता कड़ी उसे देख रही थी. रामु यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब पंखा बांध है न तो..."

रामु जब अपना बात बोल रहा था तो अनीता एक नज़र उसके बदन को देखि. लगभग 45-50 साल के होने के बावजूद भी उसका बदन शेप में था. वह हरिया से पतला तो था मगर उसी के जैसा उसका गठीला बदन था. अनीता देखि की उसके सीने का बाल थोड़ा थोड़ा सफ़ेद हो गया था और धूल और पसीने में सना हुआ था. उसके पेट पर हरिया के तरह एबीएस के हलके हलके कट्स दिखाई दे रहे थे, जो उन दोनों के मज़दूरी करने से बने हुए थे. उसके पेट पर गन्दा पसीना का फिसल रहा था.

रामु अनीता को अपना बदन देखते देखकर bola"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब वह हम कुरता गन्दा होने के कारण निकल दिए"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Are कोई बात नहीं. अच्छा किया आपने निकाल दिया नहीं तो गन्दा तो होता hi, पूरा पसीना से भी भींग जाता. आप लिविंग रूम में आकर थोड़ा आराम कर लीजिये, उधर एक चल रही है"

रामु यह सुनकर एक पल अनीता को देखा और सोचने लगा की सच में वह कितनी अच्छी है. उसके अंदर ज़रा भी घमंड नहीं है और ग़रीबों से भी कितना अच्छा से बात करती है. वह "हाँ" में सर हिलाया और गमछा से बदन पोंछते हुए उसके पास आया तो अनीता घूमकर अपनी गांड मटकती हुयी चलने लगी.

रामु का नज़र अनीता की नंगी पीठ और मटकती गांड पर पड़ा तो उसका लुंड में हरकत होने लगा. रामु को अनीता सोफे दिखती हुयी boli,"Aap आराम कीजिये. आप कुछ पिएंगे? पानी या जूस"

रामु यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब कहे आप परेशान हो रही है"

फिर वह सीढ़ी के तरफ इशारा करते हुए bola,"Hum उधर बैठ जाता हूँ"

अनीता यह सुनकर boli,"Are जब सोफे है तो आप उधर क्यों बैठेंगे? सोफे पर बैठ जाइये"

रामु जानता था की अनीता ग़रीबों को भी सोफे पर hi बैठने बोलती है क्यूंकि चंदा उसे बताओ थी की अनीता उसे पहले दिन सोफे पर hi बैठने बोली थी. चंदा अनीता के बारे में रामु से कभी बात नहीं की थी मगर जब अनीता उसे दो दिन पहले बोली थी की वह रामु को सफाई करने के लिए बोल सकती है तो चंदा अनीता के बारे में रामु को बताई की उसकी मालकिन कितनी अच्छी है और वह यहाँ आकर अच्छे से काम करे.

रामु नहीं चाहता था की वह सोफे गन्दा करे तो वह bola,"Are नहीं मेमसाहेब हमरा बदन अभी गन्दा है. आपका सोफे गन्दा हो जायेगा" और यह बोलकर वह सीढ़ी के तरफ जाने लगा तो अनीता भी कुछ नहीं बोली. रामु जब सीढ़ी पर बैठ गया तो अनीता boli,"Ramu जी मैं आपके लिए जूस लेकर आती हूँ"

रामु यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब कहे परेशान हो रही हैं आप"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Isme परेशानी की क्या बात है. आप बैठिये मैं आती हूँ" और अनीता घूमकर गांड मटकती हुयी किचन के तरफ चली गयी. रामु का नज़र फिर से अनीता की नंगी पीठ हुए हिलती गांड पर चला गया. उसके मैं में अनीता के लिए इज़्ज़त थी मगर था तो वह एक मर्द hi. उसकी बीवी को मरे हुए कई साल हो गया था और अब अनीता जैसी बेहद खूबसूरत और जवाब औरत उसके सामने थी वह भी बदन दिखाऊ कपडे में तो वह खुद को उसे देखने से कैसे रोक पाटा.

अनीता थोड़ी देर में एक ट्रे में जूस का बोतल और एक गिलास लेकर आयी और रामु को दी. देते वक़्त वह थोड़ी झुकी तो उसकी क्लीवेज पर रामु का नज़र गया. अनीता की क्लीवेज छोटे ब्लाउज में ऐसे hi अच्छा खासा दिखती थी और झुकने से और दिखने लगी. इतनी बड़ी बड़ी चूँचियों का क्लीवेज देखकर रामु का लुंड तनतना गया. अनीता वैसे जान बूझकर अपनी चूंकि दिखने के लिए नहीं झुकी थी. वह भले hi बेशर्म औरत थी और उसके अंदर रान्दीपना कूट कूट कर भरा हुआ था मगर वह ऐसे जान बूझकर मर्दों को रिझाने का कोशिश नहीं करती थी. वह तो बस ट्रे रामु को देने के लिए झुकी थी.

अनीता रामु को अपनी क्लीवेज देखते हुए देखि तब उसे एहसास हुआ की झुकने से उसकी क्लीवेज अच्छा ख़ासा दिखने लगी है. मगर फिर अनीता की वही बेशर्म नेचर के कारण वह उसका बुरा नहीं मानी और न hi अपनी क्लीवेज छुपाने का कोशिश की बल्कि वह boli,"Ramu जी जूस"

रामु यह सुनकर घबराकर अनीता को देखा तो वह मुस्कुराकर जूस के ट्रे के तरफ इशारा करके boli,"Ramu जी जूस"

रामु यह देखकर झेंप गया और हड़बड़ा कर bola,"Haan मेमसाहेब" और मुस्कुराने लगा तो अनीता भी बेशर्मी से मुस्कुराकर boli,"To पीजिये न रामु जी. सिर्फ देखेंगे या पिएंगे भी"

रामु यह सुनकर हड़बड़ा कर अनीता को देखा तो अनीता मुस्कुराकर जूस के तरफ इशारा करके boli,"Juice पीजिये रामु जी"

रामु घबराकर अनीता की हाथ से ट्रे लेकर अपने बगल में सीढ़ी पर रख दिया तो अनीता मुस्कुराकर सीढ़ी कड़ी होकर बोली रामु जी आप तो जूस लेने में इतना सोच रहे थे जैसे आपको जूस पीने का मैं hi नहीं हो. कुछ और पीने का मैं है क्या?"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Nahin मेमसाहेब वह बस ऐसे hi" तो अनीता मुस्कुराती हुयी अपनी सर हिलायी और boli,"To पीजिये न जूस"

रामु गिलास में एक गिलास जूस रखकर पीने लगा और अनीता वहीँ कड़ी होकर उससे बात करने लगी. रामु भी धीरे धीरे कम्फर्टेबले हो रहा था. दोनों का बात चंदा के इर्द गिर्द hi था की चंदा कैसे अनीता की तारीफ कर रही थी. अनीता को यह सब सुनकर अच्छा लग रहा था. वहीँ रामु भी धीरे धीरे और कम्फर्टेबले हो रहा था और अनीता जैसी जवान और खूबसूरत औरत को ऐसे इतने करीब से हंस हंस कर बात करता देख उसे भी अच्छा लगने लगा था और उसके मर्दानगी बाहर आ रहा था. वह बात करते करते कभी कभी अनीता की चूँचियों और नंगी चिकनी पेट और नाभि देख लेता था जिसे अनीता भी महसूस की. अनीता को भी बुरा नहीं लग रहा था रामु को ऐसे बेझिझक उसकी जिस्म देखते हुए देख. ऐसे अनीता एक पल के लिए रामु को छेड़ी ज़रूर थी उसे अपनी क्लीवेज देखते हुए देखकर मगर उसका मक़सद रामु को रिझाना नहीं था मगर जब रामु उसकी बदन को देख रहा था तो वह बुरा नहीं मान रही थी.

लगभग 5 मिनट के बात चित के बाद रामु उठकर bola,"Hum काम करने जाट है मेमसाहेब. 2 घंटे का hi फुर्सत है हमरे पास"

अनीता सर हिलायी तो रामु वहां से उठा. उसके उठने से आस पास की हवा में उसके जिस्म के पसीने जी गंध फैल गयी जो अनीता की नाक में गयी और उस गंध में अनीता को वही एहसास हुआ जो हरिया के बदन से पसीने की गंध में होता है और वह एक गहरी सांस लेकर रामु को देखि. अनीता रामु को स्टोर रूम में जाते देखि और फिर झुककर ट्रे उठाकर घूमी तो देखि की रामु उसे hi देख रहा था. रामु दरअसल स्टोर रूम में पहुंचकर जैसे hi अंदर जाने वाला था की उसे साइड के आँख से अनीता झुकी हुयी दिखी. अनीता जैसी बड़ी गांड वाली औरत को ऐसे झुका देख रामु जा लुंड तनतना गया और वह उसकी गांड ध्यान से देखने लगा. इतना ध्यान से की उसे ख्याल hi नहीं रहा की अनीता घूम रही है और वह घूमकर रामु को अपनी गांड देखते हुए देख ली.

अनीता की दिल धड़क गयी यह सोचकर की रामु उसकी गांड देख रहा था मगर वह बिना शर्म के रामु को देखि. रामु अनीता को देखते देख चुप चाप अंदर चला गया. वह जानता था की वह उसे गांड देखते हुए देख ली. रामु के अंदर जाने पर अनीता चुप चाप किचन में ट्रे लेकर चली गयी और फिर अपनी रूम में चली गयी.

लगभग 20 मिनट बाद अनीता एक बार और स्टोर रूम में जा कर देखि तो रामु काम कर रहा था. वह चुप चाप लिविंग रूम में आकर सोफे पर बैठकर मैगज़ीन पढ़ने लगी.

लगभग 25 मिनट बाद रामु कुरता पेहेन कर गमछा से मुंह पोंछते हुए बहार आया और अनीता को देखकर bola,"Memsaheb साफ़ कर दिए हम. एक घंटा का काम और है. किसी और दिन मौक़ा मिलेगा तो आकर कर देंगे. मगर मोटा मोती सब साफ़ हो गया है. बस थोड़ा फर्नीचर पीछे कर देंगे तो आगे और जगह हो जायेगा. आप आकर देख लीजिये"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Are 20-25 मिनट पहले hi तो मैंने देखा था. बार बार क्या देखूं. आपने अच्छा काम किया है"

रामु यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता boli,"Rukiye मैं पैसे लेकर आती हूँ" और वह बैडरूम में जाकर 500 के दो नोट लेकर आकर रामु के पास जाकर दी.

रामु यह देखकर ख़ुशी से ले लिया और bola,"Shukriya मेमसाहेब. हम बाकी का काम फिर कभी आकर कर देंगे"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek है"

रामु यह सुनकर bola,"Woh मेमसाहेब एक गिलास ठंडा पानी मिलेगा?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan क्यों नहीं"

फिर वह कुछ सोचकर अगले पल boli,"Thanda पानी पिएंगे या कुछ और? कुछ और पीने का मैं है तो बोलिये"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Are मेमसाहेब आप जूस तो पीला hi दी. अब ठंडा पानी पीला दीजिये. वह मेमसाहेब अभी काम है तो हम शराब नहीं पी सकते"

अनीता यह जवाब का उम्मीद नहीं की थी. वह यह जवाब सुनकर मुस्कुराकर boli,"Offo रामु जी मैं शराब की बात नहीं कर रही"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब हुंका लगा की आप शराब का बात कर रही हैं". रामु को अपनी बेवकूफी पर शर्मिंदगी महसूस हुयी की वह सोच भी कैसे लिया की शराब जैसा मेहेंगा चीज़ अनीता पिलाएगी वह भी दिन में. मगर वह एहि सोचा था की वह अमीर है तो जैसे मेहमानो को शराब पिलाते होंगे शायद इसलिए उसे भी अनीता शराब ऑफर मर रही होगी.

अनीता मुस्कुराकर boli,"Koi बात नहीं. आप रुकिए मैं पानी लेकर आती हूँ"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर "हाँ" में सर हिला दिया तो अनीता मुस्कुराती हुयी अपनी गांड मटकाकर किचन में चली गयी. रामु फिर से अनीता की नंगी पीठ और हिलती गांड को देखने लगा. उसे थोड़ा राहत मिला था की अनीता उसे अपनी गांड देखते हुए देखने के बावजूद भी कुछ नहीं बोली.

अनीता पानी लेकर आयी और रामु को दी तो वह एक सांस में पानी जातक गया और चुपके से अनीता की क्लीवेज देखने लगा. अनीता उसे अपनी क्लीवेज देखते हुए देख ली और मुस्कुराती हुयी boli,"Lag रहा है आप बहोत प्यासे हैं रामु जी"

रामु यह सुनकर गिलास अनीता को देते हुए bola,"Haan मेमसाहेब"

और वह चुपके से अनीता की चूँचियों को एक बार और देखा तो अनीता boli,"Woh तो मैं देख hi रही हूँ रामु जी की आप कितने प्यासे हैं"

रामु यह सुनकर अनीता की क्लीवेज से नज़र हटाकर उसे देखा तो अनीता मुस्कुरा दी. रामु भी मुस्कुराकर bola,"Ab हम चालत हैं मेमसाहेब"

अनीता मुस्कुराकर boli,"Theek है" और रामु चला गया.

उस रात राज फिर अनीता को नहीं छोड़ा और अनीता हरिया के बारे में और उसके लुंड के बारे में सोचने लगी. साथ hi उसे याद आ रहा था की रामु कैसे उसकी चूँचियों को प्यासा नज़र से देख रहा था. लगभग 50 साल के होने के बावजूद भी वह न सिर्फ अनीता की चूँचियों को प्यास भरा नज़र से देख रहा था बल्कि उसकी गांड को भी देख रहा था. अनीता को हरिया और रामु के साथ होने से अच्छा लगने लगा था. वह अपने पति से प्यार करती थी मगर वह यह भी जानती थी की वह बिजी रहता है ऐसे में इसमें कोई बुराई नहीं है की वह हरिया जैसे मर्द के साथ वक़्त बिताये. भले hi राज उसका पति है मगर हरिया भी एक दुमदार मर्द है और एक दुमदार मर्द के साथ अपनी जवानी के कुछ पल बीतने में कोई बुराई नहीं है. ऊपर वाले ने उसे दुमदार मर्द बनाया है तो कुछ सोच कर hi बनाया है और ऐसे में एक खूबसूरत जवान औरत होने के नाते उसे हरिया जैसे मर्द के साथ भी वक़्त बीतने चाहिए, शायद इसीलिए ऊपर वाले ने हरिया से मुलाक़ात करवाया था ताकि जब उसका पति काम में बिजी रहे तो हरिया जैसा मर्द उसका ख्याल रखे, वह भी हर तरीके से, बिस्तर पर भी"

अनीता की सांस यह सब सोचने से तेज़ हो गयी और वह यह सब सोचती हुयी सो गयी. अगले दिन फ्राइडे को अनीता गूगल मैप से पता लगायी की इस शहर में सरकारी हॉस्पिटल कहाँ है और चंदा के काम करके जाने के बाद वह उस हॉस्पिटल के लिए निकल गयी.
 
अपडेट 96

अनीता हॉस्पिटल पहुँच कर इन्क्वायरी की. वहां रिसेप्शन पर बैठी औरत अनीता को एक नज़र देखकर सोची की उसके जैसी औरत उस छोटे से सरकारी हॉस्पिटल में क्या कर रही है. अनीता को देखकर कोई भी कह सकता था की वह पढ़ी लिखी और अमीर है.

अनीता को वहां आते जाते मर्द भी देख रहे थे. ज़्यादातर मर्द ग़रीब मज़दूर टाइप के थे. सबका नज़र अनीता की बड़ी गांड और उसके ऊपर बैकलेस ब्लाउज में लगभग पूरी नंगी पीठ पर थी. उसकी गोरी चिकनी बदन मर्दों का लुंड में अंगराई ला दे रहा था और उनका लुंड पंत के अंदर बेचैन हो जा रहा था.

अनीता भी देखि की मर्द आते जाते उसे hi देख रहे थे मगर वह बिना शर्म के इन्क्वायरी करने के बाद लिफ्ट में चढ़ गयी. वह पुराने ज़माने का लिफ्ट था और ऑपरेटर एक कोने में छोटे से स्टूल पर बैठा था. वह अनीता को आते देखा तो खुश हो गया. अनीता आखरी में आयी और उसके बगल में कड़ी हो गयी.

लिफ्ट ऑपरेटर लिफ्ट स्टार्ट करके अनीता की नंगी चिकनी कमर और उसके ऊपर बड़ी चूँचियाँ और क्लीवेज देखने लगा. अनीता इससे बेखबर सीधा देखती हुयी कड़ी थी की तभी उसे अपनी गांड पर कुछ महसूस हुआ. वह समझ गयी की उसके पीछे खड़ा मर्द उससे चिपक गया है पीछे से. अनीता चुप चाप कड़ी रही. 2ंद फ्लोर पर सभी उतर गए बस वह लिफ्ट ऑपरेटर और अनीता के पीछे खड़ा मर्द hi था. सबके निकलने से जगह बनने के बावजूद वह आदमी अनीता से चिपके खड़ा रहा और अनीता भी जान रही थी की लिफ्ट में अब जगह है मगर वह आदमी अभी भी उसकी गांड से सटकर खड़ा है. इसके बावजूद वह चुप चाप कड़ी रही और फिर 3रद फ्लोर पर लिफ्ट से बाहर आ गयी.

अनीता के पीछे पीछे वह आदमी भी बाहर निकला मगर एक औरत उसे देखकर boli,"Itna देर कहाँ लगा दिए थे?" वह औरत उसकी बीवी थी और उसको देखकर वह अनीता की तरफ से ध्यान हटाया. अनीता चुप चाप अपनी गांड मटकती हुयी चल रही थी और हरिया का रूम खोज रही थी.

अनीता थोड़े आगे बढ़ी hi थी की वह suni,"Are तुम उस रंडी को क्या देख रहे थे"

फिर वह एक मर्द का आवाज़ suni,"Are क्या बोल रही हो? रंडी यहाँ क्या करेगी? कोई अमीर घर की होगी?"

वह औरत boli,"Tumhe कैसे पता और उसे क्यों देख रहे थे?"

वह आदमी bola,"Are देखने से hi अमीर लग रही है और उसके जैसी अमीर औरत यहाँ क्या कर रही है वही देख रहा था"

वह औरत boli,"Are रंडी होगी, मर्दों को जाल में फंसने के लिए यह कहीं भी जा सकती है, कोई डाक्टर को फंसने आयी होगी. चलो"

अनीता अब तक समझ चुकी थी की उसके बारे में hi बात हो रही है और खुद को रंडी कहे जाने पर वह थोड़ा गुस्से से पीछे मुद कर आवाज़ के तरफ देखि मगर तब तक वह दोनों घूमकर दूसरी तरफ जाने लगे थे.

अनीता को गुस्सा आ रहा था की कैसे वह औरत उसे जज कर रही थी क्यूंकि वह मॉडर्न तरीके से साड़ी पहनी थी जो की आम बात थी आज के ज़माने में मगर उन्हें जाता देख वह कुछ नहीं बोली बस मैं में sochi,"Kaise कैसे लोग है अभी भी. कितने पुराने ख्याल के हैं और औरतें hi दूसरे औरतों को गालियां देती है. काम से काम उसका हस्बैंड तो समझदार है"

अनीता यह सोच hi रही थी की तभी देखि की वह आदमी घूम कर एक नज़र उसे देखा और दोनों की नज़र मिली. अनीता बिना शर्म के उसके आँखों में देखि लेकिन वह आदमी अनीता को देखते हुए देख घबराकर सामने देखने लगा.

अनीता उसे सामने देखकर जाते हुए एक नज़र देखि और फिर खुद हरिया के रूम के तरफ चल दी. वह जब कमरे में पहुंची तो देखि की जनरल कमरा था. 4 मरीज़ उस कमरे में बीएड पर लेते हुए थे. हरिया एक कोने में लेता हुआ था. अनीता की चेहरे पर उसे देखकर मुस्कान आ गयी मगर फिर वह उसके पेअर को देखि तो थोड़ी दुखी हुई और उसकी चेहरे का एक्सप्रेशन बदल गया.

अनीता उसे देखकर उसके पास गयी तो हरिया के बगल वाले बीएड पर लेता एक बूढ़ा पेशेंट उसे देखने लगा. बाकी के दो पेशेंट सोये हुए थे. अनीता उस बूढ़े को देखि मगर बिना कोई एक्सप्रेशन या रिएक्शन दिए चुप चाप हरिया के पास पहुंची तो हरिया उसे देखकर खुश होते हुए bola,"Memsaheb आप?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan हरिया जी. आप कैसे है?"

हरिया जवाब में bola,"Haan मेमसाहेब अभी हम ठीक हैं, बस ससुरा पेअर में चोट लग गवा है तो प्लास्टर करना पड़ा"

अनीता हरिया के दये पेअर के तरफ देखि जो एक प्लास्टर कास्ट में था और उसे थोड़ा दुःख हुआ. अनीता हरिया के पेअर के तरफ देख hi रही थी की हरिया bola,"Memsaheb बैठिये न हमरे पास"

अनीता हरिया का बात सुनकर उसके तरफ देखि तो वह उसको देखने ले बाद उसकी चूंकि को देखने लगा और फिर नंगी पेट को. हरिया के ऐसे देखने पर अनीता की बदन में एक मज़े की लहर दौड़ने लगी. बहोत दिनों बाद उसकी जिस्म को हरिया देख रहा था और हॉस्पिटल में होने के बावजूद भी वह बेझिजक अनीता की जिस्म को देख रहा था.

अनीता कुछ सेकण्ड्स हरिया को खुद की जिस्म देखते हुए देखि और फिर जब वह वापस उसकी चेहरे पर देखि तो वह फिर से अपने बीएड के बगल रखे एक स्टूल पर इशारा करते हुए bola,"Baithiye न मेमसाहेब"

अनीता एक नज़र स्टूल पर देखि और जाकर बैठ गयी. बैठते वक़्त वह देखि की बगल वाले बीएड पर लेता बूढ़ा भी उसे देख रहा था. अनीता की नज़र उस बूढ़े से एक पल के लिए मिली मगर वह चुप चाप स्टूल पर बैठ गयी.

वह स्टूल पर बैठकर अपनी हाथ में एक थैली को बीएड के बगल वाले टेबल पर रखती हुयी boli,"Hariya जी आपके लिए सेब, अंगूर और अनार लायी हूँ"

हरिया यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब ीका का ज़रूरत था. आप हमसे मिलने आयी इहे बहोत है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Zarurat कैसे नहीं है हरिया जी. हॉस्पिटल में है आप और कमज़ोर हो गए होंगे"

हरिया यह सुनकर धीरे से bola,"Are मेमसाहेब इतने भी कमज़ोर नहीं हुए हैं की आपका मदद नहीं कर सकते हैं"

हरिया यह बोलकर अनीता की आँखों में देखा तो अनीता boli,"Haan हरिया जी मैं जानती हूँ, मगर फिर भी आप हॉस्पिटल में हैं. आप जल्दी से स्वस्थ हो जाइये ताकि आप मेरी अच्छे से मदद कर पाए. कितने दिनों से आप मेरी मदद नहीं किये हैं. जल्दी ठीक हो जाइये आप और फिर से आप मेरी अच्छे से मदद कीजिये जैसे करते हैं"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराया और फिर आँख नीचे अनीता को चूँचियों पर ले गया. अनीता देखि की हरिया उसकी चूँचियों को प्यासा नज़र से देखने लगा था. अनीता हरिया के आँखों में उसकी चूँचियों के लिए भूख और प्यास देख सकती थी. अनीता आँखों के कोने से देखि की बगल वाले बीएड का बूढ़ा उसे hi देख रहा था.

हरिया यह सुनकर अनीता की आँखों में देखकर bola,"Haan मेमसाहेब. बहोत दिनों से हम आपका मदद नहीं किये हैं. ऐसे आपको कैसे पता चला की हम इहाँ हूँ?"

अनीता जवाब में पूरी बात बता दी की कैसे हरिया उसकी मदद करने नहीं आ रहा था और ऊपर से उसका नल भी ख़राब हो गया था तो कैसे चंदा से सब कुछ पता चला.

हरिया यह सुनकर जवाब में bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब की आप हमसे मदद करवाना चाहती थी मगर हम नहीं कर पाए"

अनीता जवाब में boli,"Hariya जी माफ़ी क्यों मांग रहे हैं आप. आपका एक्सीडेंट हो गया तो आप कैसे आते मेरी मदद करने"

हरिया जवाब में bola,"Haan मेमसाहेब ठीक होने के बाद आपका हम रगड़ कर मदद करूँगा"

अनीता जवाब में boli,"Haan हरिया जी. लेकिन उसके लिए पहले आपको ठीक होना पड़ेगा. सभी दवाइयां और सेब और अनार ध्यान से खाना होगा"

हरिया जवाब में bola,"Haan मेमसाहेब"

इतने में नर्स आ गयी और बगल वाले बूढ़े को इंजेक्शन दी. फिर वह हरिया के पास आकर अनीता को देखि तो सोच में पद गयी की इतनी खूबसूरत औरत हरिया के बगल में क्या कर रही है, वह भी बैकलेस और डीप नैक ब्लाउज में जिसमे उसकी लगभग पूरी पीठ नंगी थी और क्लीवेज दिख रही थी.

नर्स अनीता को देखकर puchhi,"Ji आप पेशेंट के क्या लगती हैं?"

अनीता यह सुनकर चौंक गयी और जवाब सोचने लगी की तभी हरिया का आवाज़ suni,"Ji मेमसाहेब हमार मालकिन हैं. हम इनके इहाँ काम करते हैं. मेमसाहेब दिल की अच्छी हैं और नौकरों का बहोत ख्याल रखती हैं इसलिए हुंका देखने चली आयी की सब इंतज़ाम ठीक है तो और हुंका कउनो चीज़ का कमी तो नहीं हैं"

नर्स यह सुनकर मुस्कुरा कर boli,"Yeh तो बहोत अच्छी बात है. वर्ण यहाँ गरीबों को कौन पूछता है, नौकरो की तो बात hi छोर दीजिये"

हरिया जवाब में bola,"Humari मेमसाहेब अइसन नहीं है, उनका दिल बहोत बड़ा है, बस नज़र तेज़ होनी चाहिए और परख होनी चाहिए मेमसाहेब का बड़ा दिल देखने के लिए"

हरिया यह बोलते हुए अनीता की चूँचियों को एक नज़र देखने लगा. अनीता यह देखि तो नर्स जवाब में boli,"Tum बहोत किस्मत वाले हो की ऐसी मालकिन मिली, वर्ण नौकरों को कुछ समझा hi नहीं जाता है, पूछना तो दूर की बात है"

हरिया जवाब में bola,"Haan किस्मत वाले तो हम हैं की मेमसाहेब हुंका मिली, नौकर हैं हम लेकिन कभी नौकर जैसा महसूस नहीं हुआ"

अनीता चुप चाप यह सब सुन्न रही थी. नर्स इस बीच सिरिंज में दवाई भर रही थी. वह दवाई भर्ती हुयी boli,"Jitna मेमसाहेब तुम्हारा ख्याल रखती है तुमको भी मेमसाहेब का घर का ख्याल रखना चाहिए, ईमानदारी से काम करना चाहिए."

हरिया जवाब में bola,"Haan हम रखते हैं अच्छे से ख्याल" और बोलकर वह अपना लुंगी का गाँठ खोलने लगा. अनीता यह देखि की तभी हरिया bola,"memsaheb हम रखते हैं तो आपका ख्याल और यह बोलकर वह अपने लुंगी के तरफ इशारा किया. अनीता उसके लुंगी में थोड़ा सा उभर देखि और बेशर्मी से boli,"Haan आप भी मेरा बहोत ख्याल रखते हैं. आप जैसे नौकर मिलने से मुझे कितनी मदद मिलती हैं मैं hi जानती हूँ".

फिर अनीता नर्स को देखकर boli,"Inke बिना तो घर का कोई काम हो hi नहीं पाटा है. यह हॉस्पिटल में है तो मेरी मदद करने के लिए कोई है hi नहीं. आज कल के ज़माने में इनके जैसा कोई मिलता कहाँ है जो हर तरीके से ख्याल रखे"

हरिया जवाब में bola,"Memsaheb चिंता मत कीजिये जिस दिन हम हॉस्पिटल से निकलूंगा उस दिन सब काम कर दूंगा, अच्छे से मदद करूँगा आपका और हर चीज़ का ख्याल रखूँगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुरा और boli,"Haan तो जल्द से जल्द ठीक हो जाइये"

हरिया फिर उसकी चूँचियों को देखा तो अनीता उसे अपनी चूँचियों को प्यासा नज़र से देखते हुए देखि तोह bola,"Haan मेमसाहेब हम दूध पिएंगे तो जल्दी ठीक हो जायेंगे"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क गयी. वह एक नज़र नर्स को देखि जो हरिया का बात सुनकर boli,"Haan दूध पीना ज़रूरी है जल्दी ठीक होने ले लिए"

हरिया जवाब में bola,"Haan हुंका दूध पिए हुए भी बहोत दिन हो गवा"

अनीता यह सुनकर नर्स को देखने के बाद हरिया को देखि तो उसके आँखों में अपनी चूंकि के लिए प्यास देखि. बहोत दिनों से अनीता को अपनी जिस्म पर हरिया का गन्दा, हवस भरा नज़र महसूस नहीं हुयी थी और अभी वह महसूस करके उसे अच्छा लग रहा था. उसे जवान और खूबसूरत होने का एहसास हो रहा था.

हरिया अनीता की चूंकि को देखकर अपने होंठों पर ज़बान फेर दिया जिसे अनीता देखि. अनीता समझ गयी की हरिया को उसकी चूंकि चूसे हुए 5 दिन हो गया है और हॉस्पिटल में बिस्तर पर पड़े पड़े वह 5 दिन से बोर भी हो रहा था. ऐसे में उसकी जवानी, उसकी चूँचियों को देखकर उसके जैसे मर्द को तो उसे चूसने का दिल करेगा hi. अनीता अगले पल एक नज़र उस बूढ़े के तरफ देखि जो उसे hi देख रहा था.

नर्स अगले पल हरिया को इंजेक्शन लगाने लगी और boli,"Ghar जाने के बाद एक महीना रोज़ दूध पीना, जल्दी ताक़त आ जाएगी"

अनीता यह सुनकर नर्स को देखि और फिर वापस हरिया को देखि तो वह उसकी चूंकि को hi देखे जा रहा था और उसकी चूंकि देखने के बाद अनीता को देखकर bola,"Hum इहाँ से जाने के बाद तो दूध खूब पियूँगा hi मगर आज भी हुंका पीने को मिल जाता तो अच्छा होता"

नर्स यह सुनकर boli,"Baba यह सरकारी हस्पताल में दूध नहीं मिलेगा"

अनीता इस बीच आस पास देखकर boli,"Nurse यहाँ पेशेंट के लिए थोड़ी प्राइवेसी तो होनी चाहिए. कोई पर्दा वगैरह नहीं है क्या हर बेड्स के बीच?"

नर्स यह सुनकर अनीता को देखकर boli,"Are है न वह देखिये लकड़ी टेंगा हुआ दो बीएड के बीच. मगर पर्दा धुलने गया है. पेशेंट को भी कोई फरक नहीं पड़ता है यह सब से तो वैसे hi रहता है"

अनीता यह सुनकर boli,"Are तो आप लोगो को ध्यान देना चाहिए न. पेशेंट तो अपने बिस्तर पर पड़े रहते हैं उन्हें इनका क्या ध्यान रहेगा. थोड़ी प्राइवेसी तो होनी चाहिए न. ग़रीब है यह लोग तो इन्हे क्या प्राइवेसी का हक़ नहीं है?"

नर्स यह सुनकर boli,"Are मेमसाहेब इहाँ ग़रीब का सबको आपके जैसा चिंता थोड़े रहता है. बस यहाँ आये और पड़े रहते हैं. इलाज अच्छा मिल जाये वही बड़ा बात है, प्राइवेसी और परदे की किसको चिंता".

अनीता यह सुनकर boli,"To मैं बोल रही हूँ तो आप प्लीज थोड़ा देखिये न" अनीता फिर चुपके से अपने बैग से 500 का नोट निकल कर नर्स को देती हुयी boli,"Aap इनका अच्छे से ख्याल रखियेगा और अभी जाइये एक पर्दा का इंतज़ाम कीजिये"

नर्स यह सुनकर चुप चाप पैसे ले ली और boli,"Main अभी परदे का इंतज़ाम करती हूँ"

नर्स पैसे लेकर वहां से जाने लगी और सोची की अनीता जैसी अमीर औरत अपने नौकर के प्राइवेसी का चिंता क्यों कर रही है की तभी उसे ध्यान आया की बगल वाला बुद्धा अनीता को देखे जा रहा है तो शायद उसे अच्छा नहीं लग रहा होगा इसलिए वह पर्दा चाहती है.
 
व्हेन ी don't अपडेट, रीडर्स गेट फ़्रस्ट्रेटेड. व्हेन ी अपडेट टेकिंग टाइम आउट ऑफ़ माय बिजी लाइफ, मोस्ट रीडर्स बिकम साइलेंट रीडर्स. एटलीस्ट व्रिठे समथिंग व्हेन ी अपडेट. ी don't अपडेट फ्रेक्वेंटली बिकॉज़ ऑफ़ बिजी लाइफ एंड ों टॉप ऑफ़ तहत थे रीडर्स साइलेंस किल्स व्हाटएवर लिटिल मोटिवेशन इस लेफ्ट तो व्रिठे.
 
लेट में क्नोव व्हेदर थे नर्स इस करेक्ट इन थिंकिंग तहत अनीता वांट्स थे कर्टेंस बिकॉज़ शी इस बोथेरेद बी तहत ओल्ड man's गाजे और तेरे इस सम इतर रीज़न. व्हाट कैन बे थे एक्चुअल रीज़न?

आल्सो व्हाट दो यू थिंक ऑफ़ Anita's बिहेवियर इन थे लास्ट फ्यू उपदटेस. हाउ दो यू जज हेर करैक्टर? बे ओपन एंड स्पीक योर मंद आउट.
 
अपडेट 97

नर्स के जाने के बाद अनीता हरिया को देखि तो वह उसकी चूंकि देखने लगा. वह बुद्धा चुप चाप अनीता को देख रहा था और अनीता बिना शर्म के हरिया के पास बैठी रही और उसको अपनी चूंकि को भूखा नज़र से देखते हुए देखती रही.

एक पल हरिया को वह उस बुड्ढे के तरफ देखते हुए बोलते suni,"Ka देख रहे हो चाचा? अपना काम करो, ज़्यादा देखोगे ी बुढ़ापा में तो आँख चौंधिया जायेगा"

अनीता यह सुनकर उस बूढ़े के तरफ देखि जो उसे hi देख रहा था मगर हरिया के बोलने पर चुप चाप दूसरे तरफ घूम गया.

वह बुद्धा जैसे hi दूसरे तरफ घुमा तो हरिया अनीता को देखकर धीरे से bola,"Bahot दिन से हम दूध नहीं पिया हूँ मेमसाहेब" और यह बोलकर वह उसकी चूंकि देखने लगा.

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर हरिया को देखकर धीरे से boli,"Offo हरिया जी"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता की चूंकि देखने लगा तो अनीता अपनी सर हिलाकर मुस्कुराने लगी. कुछ सेकण्ड्स बाद नर्स एक पर्दा लेकर आयी और हरिया और उस बुड्ढे के बीएड के बीच पर्दा लगाने लगी.

अनीता नर्स को पर्दा लगते देखने लगी और फिर एक नज़र हरिया के तरफ देखि तो वह ध्यान से अनीता की चूँचियों को देख रहा था. अनीता उसके आँखों में अपनी चूंकि के लिए हवस, भूख और प्यास देख पा रही थी. उसे हरिया का यूँ उसकी चूंकि को ऐसे भूखा, हवस और प्यास भरे नज़र से देखने में अच्छा लग रहा था. उसे अपनी जवानी और हरिया का दबंगई और हिम्मत पर गर्व हो रहा था.

हरिया अनीता को उसे देखते हुए देखा तो वह मुस्कुरा दिया. अनीता भी एक ऐडा से अपनी बेशर्मी दिखती हुयी मुस्कुराकर उसे देखि तो हरिया फिर से उसकी चूंकि देखने लगा. हरिया को वापस उसकी चूंकि देखते हुए देख अनीता बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी वापस नर्स को पर्दा लगते देखि की तभी उसकी नज़र फिर से वह बुड्ढे के तरफ पड़ी जो वापस घूमकर उसे देखने लगा था. अनीता की दिल यह देखकर धड़क गयी क्यूंकि वह समझ गयी की वह हरिया को उसकी चूंकि देखकर मुस्कुराते हुए और साथ hi उसे भी हरिया को उसकी चूंकि देखने पर मुस्कुराते हुए देख लिया होगा.

अनीता धड़कते दिल से देखि की वह बुद्धा हरिया को भी एक नज़र वापस देखा तो अनीता भी आँखों के कोने से हरिया को देखि जो अभी भी बेझिझक उसकी चूँचियों को देख रहा था. यह देखते hi अनीता की दिल और धड़कने लगी क्यूंकि वह समझ गयी की बुद्धा हरिया को उसकी चूंकि को देखते हुए देख रहा था.

अनीता धड़कते दिल से उस बुड्ढे को देख hi रही थी की तभी नर्स पर्दा लगाकर boli"Memsaheb पर्दा लग गया"

अनीता यह सुनकर वह नर्स के तरफ देखि तो वह उससे boli,"Ab हम इसको पूरा खिंच देते हैं"

नर्स यह बोलने के बाद पर्दा को फैलाने लगी तो अनीता एक नज़र उस बुड्ढे के तरफ देखि और दोनों की नज़र मिली की तभी नर्स पूरा पर्दा फैला दी और हरिया और उस बुड्ढे के बीएड के बीच पर्दा लग गया.

पर्दा लगाकर नर्स अनीता से boli,"Memsaheb अब हम दूसरे पेशेंट को देखने जा रहे हैं. कोई ज़रूरत होगा तो हमको बोलियेगा"

नर्स को अनीता पैसे दी थी तो वह खुश थी. अनीता मुस्कुराकर boli,"Nahin अभी और कोई ज़रूरत नहीं है. मैं थोड़ी देर में चली जाउंगी. मेरे जाने के बाद इनका ख्याल रखियेगा"

नर्स यह सुनकर "हाँ मेमसाहेब" बोलकर मुस्कुराकर चली गयी.

नर्स के जाने के बाद अनीता वापस हरिया को देखि तो वह अनीता को अपने बगल में बैठने का इशारा किया. अनीता स्टूल से उठकर हरिया के बगल में बैठी तो हरिया उसकी कमर पर हाथ रखकर उसे सहलाते हुए थोड़ा सर ऊपर करके अनीता की दायी चूंकि मुंह में भरकर चूसने लगा.

अनीता की दिल इससे धड़क गयी. वह जल्दी से आस पास देखकर धीरे से हरिया को boli,"Hariya जी खुद को सम्भालिये, नर्स अभी hi गयी है"

हरिया यह सुनकर उसकी चूंकि मुंह से निकाल कर उसे देखते हुए bola,"Are मेमसाहेब कउनो नहीं आएगा इहाँ. ु नर्स अब एक दो घंटा बाद hi आएगी, सरकारी अस्पताल में कौन हम ग़रीब लोग का ध्यान देगा और ी पर्दा लगा है तो कउनो देखेगा भी नहीं".

फिर वह अनीता की चूंकि दबाते हुए bola,"Bahot दिन हो गवा मेमसाहेब आपका चूंकि चूसे, आपका दूध पिए" तो अनीता धीरे से boli,"Theek है हरिया जी पि लीजिये" और बेशर्मी से अपनी दायी चूंकि के तरफ इशारा करके धीरे से बोली,"

मगर यह नहीं, इसमें दाग लग जायेगा तो दिखेगा" और फिर अपनी बायीं चूंकि जो आधी साड़ी से ढंकी थी उसके ऊपर से साड़ी हटती हुयी बेशर्मी से हरिया को देखकर अपनी बायीं चूंकि के तरफ आँखों से इशारा की.

हरिया अगले पल अनीता की बायीं चूंकि मुंह में भरकर चूसने लगा तो अनीता उसके बाल में उंगलियां फिरने लगी. हरिया अनीता की चूंकि चूसते हुए उसकी नंगी कमर और पीठ पर हाथ फेर रहा था. लगभग एक मिनट बाद अनीता देखि की वह बुद्धा पर्दा थोड़ा सा खिसका कर उसे hi देख रहा है तो वह घबराकर हरिया का बाल पकड़ कर अपनी चूंकि से अलग कर दी.

हरिया अगले पल आस पास देखकर puchha,"Kya हुआ मेमसाहेब?"

तब तक वह आदमी भी घबराकर पर्दा छोड़कर अपने तरफ सर कर लिया था. अनीता पर्दा का बीएड के सिरहाने वाले छोर के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी धीरे से boli,"Hariya जी वह बूढ़ा देख लिया?"

हरिया यह सुनकर puchha,"Humka आपका चूंकि चूसते हुए?"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से "हाँ" में सर हिलाई तो हरिया bola,"Sasura खुद डर कर छुप गया. छोड़िये कुच्छो नहीं होगा, अब देख नहीं रहा है" और यह बोलकर वह अनीता की चूंकि वापस मुंह में ले लिया तो अनीता चुप चाप वापस उसके सर के बालों में ऊँगली फेरने लगी.

हरिया अनीता की नंगी कमर और पीठ पकडे हुए उसपर हाथ फेरकर उसकी चूंकि चूसने लगा. अनीता भी उसका सर पकड़ कर अपनी चूंकि उसके मुंह में ठूसने लगी तो हरिया मुंह खोलकर अनीता की चूंकि और भरकर चूसने लगा. 2 मिनट बाद अनीता फिर देखि की वह बुद्धा पर्दा हटाकर देख रहा है तो वह फिर से घबराकर हरिया का सर हटाने का कोशिश की तो वह बिना, घबराये अनीता की चूंकि मुंह से निकलकर वैसे hi बया हाथ से उसकी कमर पकडे हुए bola,"Ek मिनट मेमसाहेब" और वैसे hi अनीता की कमर पकडे हुए उसकी चूंकि के सामने सर रखे हुए hi दया हाथ बढाकर पर्दा हटाया तो अनीता की दिल धड़क गयी बूढ़े को देखकर.

हरिया वैसे hi अनीता की कमर सहलाते हुए दये हाथ से पर्दा पकडे हुए अनीता की चूंकि के सामने सर रखे हुए hi उस बूढ़े को देखकर bola,"Ka रे बुढऊ का देख रहा है बार बार. कभी कउनो मरद को औरत का दूध पीते हुए नहीं देखा है का? और तुम जवानी में खुद नहीं पिए हो का?"

हरिया यह बोलते वक़्त बाये हाथ से अनीता की नंगी कमर सेहला रहा था. अनीता को तो पहले अजीब लगा और घबराहट हुयी की हरिया उसकी चूंकि के पास चेहरा रखे उससे चिपक कर उसकी कमर सहलाते हुए hi क्यों पर्दा हटा दिया मगर अब हरिया को उस बूढ़े को अपना दबंगई दिखते हुए डांटते देख उसे हरिया का दबंगई का एहसास हुआ. अनीता जानती थी की वह बूढ़ा हरिया को उसकी चूंकि चूसते हुए देख hi चूका था तो फिर छिपाने का कुछ था नहीं, शायद इसलिए हरिया वैसे hi उसकी चूंकि के सामने चेहरा करके बुड्ढे का दांत रहा था. अनीता को यह अच्छा लगा की हरिया उसे दांत रहा था नहीं तो वह शायद किसी को कह देता की हरिया उसकी चूंकि चूस रहा था.

बुद्धा हरिया का बात सुनकर कुछ नहीं बोलै तो हरिया आगे बोलना जारी rakha,"Sasura हम इधर में का कर रहा हूँ तुमको देखना ज़रूरी है? ु पर्दा कहे लगाए हैं हम?"

फिर हरिया अनीता को देखकर उसकी कमर सहलाते हुए puchha,"U मेमसाहेब का बोले थे आप की पर्दा से का होता है"

अनीता तो बेशर्म थी hi अब हरिया का दबंग रूप और उस बुड्ढे को डांटता देख उसके अंदर की थोड़ी झिझक भी ख़तम हो गयी और वह हरिया को देखती हुयी उसके सर के बाल में उंगलियां फेरती हुयी boli,"Privacy".

हरिया यह सुनकर bola,"Haan ससुरा प्राइवेसी के लिए हम पर्दा लगाया हूँ ताकि हम अपनी मेमसाहेब के साथ थोड़ा वक़्त बीता सकू और तुम ससुरा बार बार घर कर डिस्टर्ब करात हो हुंका, खबरदार ससुरा हुंका डिस्टर्ब किया अब तो. हुंका जानत नहीं हो तुम ससुरा"

बुद्धा यह सुनकर घबरा गया. वहीँ हरिया यह बोलकर पर्दा छोड़ने से पहले hi अनीता की चूंकि वापस मुंह में ले लिया और फिर पर्दा छोर दिया. पर्दा छोड़ने पर फिर से वह फैल गया और बुद्धा अब कुछ नहीं देख सकता था, मगर हरिया के पर्दा छोड़ने से पहले वह देख चूका था की हरिया अनीता की चूंकि वापस मुंह में लेकर चूसने लगा था. अनीता भी उस बुड्ढे को देख रही थी और जब हरिया पर्दा छोड़ने ऐ पहले hi उसकी चूंकि में मुंह लगाया और अनीता को एहसास हुआ की वह बुद्धा देख रहा है हरिया को उसकी चूंकि में मुंह लगते हुए तो उसे एक अजीब सा मज़ा मिला. उसकी छूट में हलचल होने लगी. लेकिन वह बुद्धा एक पल के लिए hi देखा था क्यूंकि हरिया फिर पर्दा छोर दिया था.

अनीता भी अब निश्चिंत हो गयी थी और वह हरिया को देखती हुयी उसके सर के बाल में ऊँगली फेरती हुयी उसके आँखों में देखकर फिर से अपनी चूंकि उसके मुंह में और अंदर तक तुस्टी हुयी अपनी आँखों से अपनी उस चूंकि के तरफ इशारा की तो हरिया अपना पूरा मुंह खोल दिया. अनीता मुस्कुराती हुयी उसके मुंह में अपना चूंकि थुश दी तो हरिया भी मुस्कुराते हुए उसकी चूंकि ब्लाउज के ऊपर से चूसने लगा.

हरिया अनीता की हाथ पकड़ कर अपने लुंगी के ऊपर से लुंड पर रख दिया तो अनीता उसके लुंड को पकड़ कर हिलने लगी.

हरिया 1 मिनट तक अनीता की चूंकि ब्लाउज के ऊपर से चुस्त रहा और फिर अनीता की ब्लाउज की डोरी खोलने का कोशिश किया तो वह धीरे से boli,"Hariya जी प्लीज हम हॉस्पिटल में हैं. ऊपर से hi पि लीजिये जितना पीना है"

हरिया यह सुनकर अनीता की चूंकि मुंह से निकालकर उसे देखकर धीरे से puchha,"Ka पिए हम मेमसाहेब?"

अनीता यह सुनकर आँखें बड़ी करके मुस्कुरा कर धीरे से boli,"Hariya जी वही जो आप पी रहे हैं"

हरिया यह सुनकर हल्का मुस्कुराकर धीरे से puchha,"Haan मेमसाहेब उहे तो हम पूछ रहे हैं की हम का पी रहे थे और का पीये?"

अनीता हरिया का लुंड लुंगी के ऊपर से पकड़ कर हिलती हुयी उसका बात सुनकर अपनी आँख बड़ी की हुयी hi मुस्कुराकर अपनी आँखों से अपनी बायीं चूंकि के तरफ इशारा की तो हरिया मुस्कुराते हुए bola,"Memsaheb बोलिये न एक बार, इहाँ हम दोनों के अलावा कउनो सुनेगा नहीं, प्लीज मेमसाहेब बोलिये न"

हरिया को प्लीज को "प्लीज" बोलते सुन्न अनीता मुस्कुरा दी. वह सोचने लगी की हरिया भले hi अनपढ़ है मगर वह कितना हिम्मत वाला और दबंग है और उसके अंदर मर्दानगी भी कितना है. वह हरिया के वैसे "प्लीज" बोलने पर मुस्कुरार प्यार से हरिया के सर के बाल पर उंगलियां फेरती हुयी अपनी सर हिलायी जैसे वह बोल रही हो की हरिया बिना उसके मुंह से कुछ सुने मैंने वाला नहीं है.

अनीता वैसे hi सर हिलाकर धीरे से रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Offo हरिया जी फिर कभी बोल दूंगी, अभी हम हॉस्पिटल में है और मुझे फिर जाना भी है. आप आइये पी लीजिये न".

अनीता यह बोलकर अपनी बायीं चूंकि के तरफ आँखों से इशारा की तो हरिया का लुंड यह देखकर अकड़ने लगा जिसे अनीता अपनी हाथ में महसूस की. हरिया अनीता की यह बात सुनकर bola,"pilaiye हुंका अपना दूध मेमसाहेब" और फिर से सर उसकी बायीं चूंकि के तरफ करके उसकी बायीं चूंकि मुंह में भर कर चूसने लगा तो अनीता अपनी बायीं चूंकि उसके मुंह में और ठूसने लगी तो हरिया अपना मुंह खोलकर उसकी चूंकि को हवस से चूसने लगा. इस बार वह अनीता की चूंकि को ऐसे चूस रहा था जैसे सच में वह उसकी दूध पी रहा हो और उसकी चूंकि से पूरा दूध निचोड़ लेना चाहता हो. अनीता भी हरिया के अंदर अपनी चूंकि के लिए हवस, भूख और प्यास महसूस कर सकती थी जिस तरीके से वह उसे चूस रहा था.

हरिया को ऐसे अपनी चूंकि चुस्त देख अनीता की तन बदन में आग लगने लगी और उसकी छूट में बेचैनी होने लगी. उसे अच्छा लगने लगा हरिया का ऐसे चूंकि चूसना. हरिया उसकी चूंकि चूसते हुए उसे देखा तो अनीता उसकी बाल में बाये हाथ की उंगलियां फेरती हुयी दये हाथ से लुंगी के ऊपर से उसका लुंड हिलती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhmmm हरिया जी कितने प्यासे हैं आप. नर्स के सामने hi आप कैसे देख रहे थे"

फिर वह अपनी चूंकि के तरफ आँखों से इशारा करके boli,"inhe, साफ़ साफ़ दिख रहा था की आप कितने प्यासे हैं इनके लिए ुह्ह्हम्म्म प्यास बुझा लीजिये हरिया जी"

हरिया यह सुनकर अनीता की चूंकि में दांत गड़ाकर काटने लगा तो अनीता अपनी आँखें बड़ी करके हरिया को देखती हुयी कामुक अंदाज़ mein,"Uhhmmm" की तो हरिया उसे देखते हुए उसकी चूंकि में ब्लाउज के ऊपर से hi दांत गाड़ने लगा. अनीता यह देखकर वैसे hi बड़ी आँखों से उसे देखती हुयी कामुक अंदाज़ mein,"Uhhhmm" करती हुयी हरिया के बालों में ऊँगली फेरने लगी. हरिया तीन चार बार अनीता की चूंकि में ब्लाउज के ऊपर से hi दांत गदया और फिर अगले 2-3 मिनट तक और अनीता की चूंकि चूसते रहा. इस पुरे दौरान वह अपना दोनों हाथ अनीता की मुलायम चिकनी नंगी पीठ और कमर पर फेरते रहा. वह अनीता की लगभग पूरी नंगी पीठ और उसके नीचे नंगी कमर की चिकनाहट और नरमी अपने हाथों में महसूस करता रहा जिससे उसका लुंड और अकड़ रहा था. अनीता भी हरिया का मरदाना खुरदुरा हाथ अपनी नंगी पीठ और कमर पर मेहसुआ कर रही थी और उसे अच्छा लग रहा था ऐसे अपनी मुलायम जिस्म पर हरिया का खुरदुरा मरदाना हाथ महसूस करके.

2-3 मिनट अनीता की चूंकि चूसने के बाद हरिया उसकी पीठ पर हाथ रखकर उसका सहारा लिए hi सर थोड़ा उठाकर उसकी क्लीवेज को चूमने लगा.

अनीता भी हरिया का सर पकड़ कर उसे सहारा देने लगी. हरिया अपना ज़बान निकलकर अनीता की क्लीवेज में फिरने लगा और साथ hi वापस से अपना हाथ अनीता की पीठ पर फेरने लगा. अनीता की सांस धीरे धीरे तेज़ होने लगी. वह तेज़ सांस लेती हुयी हरिया के सर को पकड़ी हुयी दूसरे हाथ से उसका लुंड हिलती रही और थोड़ा आस पास देखने लगी ताकि कोई देख नहीं रहा हो.

अनीता को राहत मिला की कोई देख नहीं रहा था और किसी के देखने का कोई हिसाब भी नहीं था. हरिया का बीएड कमरे के एक कोने में था और उसके बीएड के पास अनीता पर्दा लगवा दी थी. कोई आता भी तो कदमो के आहात से उनको समझ आ जाता और हरिया के बीएड तक उसके आने से पहले उन्हें सँभालने का मौक़ा मिल जाता. दूसरा कोई देख सकता था तो वह बुद्धा था जो वैसे भी देख चूका था और हरिया खुद उसके सामने hi अनीता की चूंकि मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया था. मगर अनीता को उसकी चिंता अब नहीं थी. वह जानती थी की हरिया उसको जैसे धमकाया है उसका हिम्मत नहीं होगा किसी को कुछ बोलने या करने का.

अनीता ऐसे hi आस पास देखती हुयी हरिया का लुंड हिला रही थी और उसके सर को सहारा दी थी ताकि वह मैं भरकर उसकी चूंकि चूस सके उसकी क्लीवेज चाट सके और अपना प्यास बुझा सके. यह जानते हुए भी की वह थोड़ा सेफ थी और किसी के आने से पहले सँभालने का मौक़ा मिल सकता था, अनीता की धड़कन इस बात से तेज़ थी की वह हॉस्पिटल में हैं जहाँ बहोत सारे लोग है और उस हॉस्पिटल के एक कमरे में जहाँ तीन और लोग हैं वहां हरिया उसकी चूंकि चूस रहा था. अनीता को इससे एक थ्रिल एक एडवेंचर का एहसास हो रहा था और यह सोच कर की कैसे हरिया हॉस्पिटल में hi उसकी चूंकि चूस रहा है, उसे एक अलग hi मज़ा मिलने लगा था.

हरिया थोड़ी देर उसकी क्लीवेज चाटने के बाद वापस उसकी बायीं चूंकि थोड़ा सा चूसा उसके बाद सर नीचे करके अनीता की चूंकि के नीचे उसकी पेट को चूमने लगा. हरिया के चेहरे पर हल्का दाढ़ी था. वह जैसे hi अनीता की पेट को चूमा, अनीता को अपनी चिकनी मुलायम पेट पर उसका दाढ़ी का खुरदुरापन मेहुस हुआ जिससे उसे पेट में गुदगुदी लगी और उसको सपाट पेट अंदर को धंस गयी. अनीता को इसमें एक अलग hi मज़ा आया और वह हल्का मुस्कुराती हुयी हरिया को देखती हुयी उसके बाल में उंगलियां फेरती हुयी उसके लुंड को हिलना जारी राखी.

हरिया अनीता की चिकनी मुलायम और गोरी पेट को चूमते हुए धीरे नीचे बढ़ने लगा. वह अनीता की चूंकि के नीचे से लेकर नाभि तक पेट का हर एक हिस्से को चूमा. हर एक हिस्से को चूमने में वह 40-50 चुम्बन अनीता की पेट पर जड़ दिया और हर एक चुम्बन पर अनीता की पेट अंदर को धंस जा रही थी. हरिया के होंठ और उसके दाढ़ी का छुअन अपनी पेट पर अनीता को अच्छा लग रहा था और उसे मज़ा आ रहा था.

हरिया जब चूमते हुए अनीता की नाभि तक पहुंचा तो उसकी नाभि में बेल्ली बटन रिंग देखा जो उसकी पेट पर लटकी हुयी चमक रही थी. अनीता की गहरी नाभि में चमकता हुआ रिंग लटका देख हरिया का लुंड तन तना गया. वह रिंग अनीता की बदन को और कामुक बना रही थी.

अनीता देखि की हरिया कैसे उसकी नाभि देख रहा था तो उसे याद आया की हरिया कैसे शुरू के दोनों में एक बार बोलै था की उसकी नाभि में वह अच्छी लगती है. तभी अनीता को याद आया की कैसे एक दिन वह रिंग नहीं पहनी थी तो हरिया उससे पूछा था की वह "बुली" रिंग नहीं पहनी थी और अनीता कैसे मुस्कुरा दी थी. अनीता की चेहरे पर यह याद आते hi मुस्कराहट आ गयी और वह हरिया को देख hi रही थी की तभी हरिया उसकी नाभि में अपनी मुंह से हवा फूंका. अपनी पेट और नाभि पर हरिया के मुंह से गरम हवा महसूस करके अनीता की कामुक सिसकारी निकल gai,"Uhhmm" और उसकी पेट अंदर धंस गयी. हरिया का यह अंदाज़ उसे अच्छा लगा.

हरिया अगले पल फिर से गरम सांस उसकी नाभि में छोड़ा तो फिर से अनीता की पेट अंदर धंस गयी. अनीता की पेट को ऐसे धंसते देख हरिया का लुंड बौखलाने लगा जिसे अनीता अपनी हाथ पर महसूस की. हरिया के तगड़े लुंड को ऐसे अपनी नाज़ुक हाथ में अकड़ता महसूस करके अनीता को अच्छा लगा और उसकी मुंह से कामुक सिसकारी निकल gayi,"uhhmmm" और वह अपनी नज़र उसके लुंड के तरफ लेजाकर अपनी होंठ को दांतों के नीचे भींच ली और साथ hi उसके लुंड को और अच्छे से अपनी मुट्ठी में भरकर हिलने लगी.

हरिया 3-4 बार और अनीता की नाभि में मुंह से गरम हवा फूंका और हर बार अनीता की पेट अंदर धंस जाती. हरिया फिर अनीता की नाभि के सामने से उसकी लटकी हुयी बेल्ली बटन रिंग को थोड़ा साइड करके उसकी नाभि में ज़बान का नोक घुसा दिया.

अपनी नाभि में हरिया का गरम और गीला ज़बान महसूस करते hi अनीता की पेट अंदर के तरफ हो गयी और बदन में बिजली जैसा महसूस हुआ. साथ hi उसकी मुंह से हलकी सिसकारी निकल gayi,"ssiiii ुह्ह्हम्म". अनीता की छूट में अजीब सी बेचैनी होने लगी. हरिया धीरे धीरे अपना ज़बान अनीता की नाभि में फिरने लगा और अनीता की पेट कांपने लगी और कांपते हुए अंदर बाहर होने लगी. अनीता की मुंह से कामुक सिसकारी निकलने lagi,"Uhhmm" और वह अपनी निचली होंठ दांतों के बीच दबाकर हरिया को अपनी नाभि में ज़बान फिरते देखने लगी.

हरिया अनीता की कामुक सिसकारी और उसे अपनी होंठ को दांतों के बीच दबाता देख उसकी आँखों में देखते हुए ज़बान टाइट करके उसकी नाभि में अंदर बाहर करने लगा. यह देखकर और अपनी नाभि में हरिया का ज़बान अंदर बाहर होते महसूस करके अनीता की पेट वैसे hi अंदर बाहर होती रही और उसकी मुंह से फिर कामुक सिसकारी निकलने lagi,"Uhmmm सीईई" और वह फिर से अपनी निचली होंठ को दांतो के बीच दबा ली.

अनीता की कामुक सिसकारी और होंठ को दांतों के बीच दबाये देख हरिया का लुंड फिर से तनतना कर झटका मारने लगा. अनीता जब अपनी हाथ में हरिया का लुंड का झटका महसूस की तो वह उसके लुंड के तरफ देखि और इस बार वह ऐसे हरिया का लुंड देखने लगी जैसे उसके लुंड को निगल जाएगी. अनीता पूरा रणदीपाने से उसके लुंड को देखि और अपनी होंठों पर हल्का ज़बान फेरकर उसके लुंड को अपनी मुट्ठी में और अच्छे से भरने का कोशिश करने लगी.

हरिया अनीता की चेहरे के एक्सप्रेशन में रान्दीपना साफ़ साफ़ देख सकता था और अनीता का रान्दीपना देखने से उसका लुंड और बौखला कर झटका मारने लगा और हरिया का लुंड को ऐसे झटका मारते देख अनीता भी उसे कामुक नज़र से देखती हुयी अपने हाथ में अच्छे से पकड़ने का कोशिश करने लगी. ऐसे लग रहा था जैसे हरिया का लुंड कोई काला नाग हो जिसे अनीता अपने वश में करना चाहती थी और उसके लुंड को ऐसे देख रही थी जैसे कहना चाहती हो की वह जितना भी बौखला ले जितना भी अपना ताक़त दिखा ले, वह उसे अपने वश में कर लेगी और ज़रूरत पड़ने पर निगल भी लेगी. हरिया आज तक अनीता की चेहरे पर ऐसा एक्सप्रेशन नहीं देखा था. उसे क्या पता था की वह कई दिनों से चूड़ी नहीं थी इसलिए उसके अंदर की छुडास बढ़ रही थी और उसके अंदर का रान्दीपना बाहर आ रहा था.

हरिया अनीता को ऐसे उसके लुंड को देखते देख धीरे से bola,"Memsaheb जितना प्यासा हम आपके चूंकि के लिए थे उतना hi प्यास आपको हमरे लौड़े के लिए हैं. दिख रहा है की आप हमरे लौड़े के लिए कितनी प्यासी हैं, आप हमार लौड़ा के लिए भूखी हैं"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क गयी. वह अपनी तेज़ सांस को काबू करती हुयी धीरे से कामुक अंदाज़ में boli,"Uhhmm हरिया जी मैं तो देख रही हूँ की कैसे आपका हथियार बौखलाने लगा है, उहहं देखिये न कैसे बेचैन हो रहा है आपका हथियार"

अनीता फिर वैसे hi रणदीपाने वाली अंदाज़ में उसके लुंड के उभर को लुंगी के ऊपर से देखती हुयी उसे फिर से अपने हाथ में अच्छे से पकड़ने का कोशिश करती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Uff हरिया जी कितना बौखलाया है आपका हथियार, मेरे तो काबू में hi नहीं आना छह रहा है"

हरिया यह सुन्नते हुए अनीता की नाभि में फिर से ज़बान अंदर बाहर करने लगा. वह अनीता की बात सुनकर धीरे से bola,"Are बौखलायेगा hi मेमसाहेब. ससुरा देख रहा है की हम अपने ज़बान से कैसे आपकी नाभि को छोड़ रहे हैं"

हरिया के मुंह से "छोड़" शब्द सुनकर अनीता की दिल धड़क गयी. हालांकि वह अब हर बार हरिया के मुंह से खुल कर यह शब्द सुन्न रही थी और कोई आपत्ति नहीं कर रही थी मगर हर बार सुनने पर उसकी दिल धड़क जाती थी.

अनीता अपनी सांस को काबू कर hi रही थी की हरिया आगे बोलना जारी rakha,"U देख कर सोच रहा है की एक दिन ी भी आपको छोड़ेगा. जैसे हमरा ज़बान आपकी नाभि को छोड़ रहा है वैसे hi ी हमार लौड़ा आपकी छूट, गांड और मुंह में घुसकर आपकी ु तीनो छेड़ को छोड़ेगा".

हरिया के मुंह से ऐसे खुलकर उसे छोड़ने का बात सुनकर खासकर तीनो छेड़ का नाम लेकर बोलने से अनीता की छूट और बदन में फिर से बेचैनी होने लगी और उसकी छूट फड़कने लगी जैसे उसकी छूट हरिया के लुंड को निमंत्रण दे रही थी की वह इंतज़ार कर रही है हरिया के लुंड के लिए.

अनीता अपनी सांस और धड़कन काबू करती हुयी हरिया के लुंड को बुलाती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Uhhmm हरिया जी धीरे" फिर आस पास देखकर एक कामुक अंदाज़ में boli,"Koi ऐसे बोलता है क्या? वह भी हॉस्पिटल में?"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Are हम अपनी मेमसाहेब को बोल रहे हैं की हम कैसे उनको छोड़ेंगे. आप तो देख hi रही हैं की हमार लौड़ा कैसे बौखलाया हुआ है हमरे ज़बान को आपकी नाभि को छोड़ते हुए देखकर. ससुरा वही तो सोच रहा है की कैसे एक दिन आपके तीनो छेड़ो को यह छोड़ेगा, घपाघप घपाघप घपाघप"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से हरिया के आँखों में देखकर कामुक अंदाज़ में boli,"Offo हरिया जी ुहह्म्म अब हो गया"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Hum कउनो ग़लत बात तो नहीं बोले हैं मेमसाहेब? आप छुडवाइयेगा न हमसे?"

अनीता यह सुनकर अपनी आंखें बड़ी करके बेशर्मी से हल्का मुस्कुराकर धीरे से boli,"Offo हरिया जी हो गया न? अब बस कीजिये"

हरिया तब तक अनीता की नाभि में फिर से ज़बान फेरने लगा था. वह अनीता की बात सुनकर मुस्कुराते हुए उसकी आँखों में देखते हुए puchha,"Boliye न मेमसाहेब, आप हमार लौड़ा से छुडवाइयेगा तो"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराकर अपनी सर हल्का सा "हाँ" में हिलाकर उसके लुंड के उभर को लुंगी के ऊपर से कामुक अंदाज़ में देखि. हरिया अनीता को ऐसे देखते हुए देख मुस्कुराने लगा तो अनीता यह महसूस करके अपनी आंखें बड़ी करके उसे देखि तो वह धीरे से bola,"Are मेमसाहेब मुंह से बोलिये न की आप हमसे छुडवाइयेगा. हम साफ़ साफ़ देख सकत है की आप हमरे लौड़े के लिए कितना भूखी है, कितना प्यासी हैं हमार लौड़े के लिए"

अनीता यह सुनकर धीरे से boli,"Offo हरिया जी एक तो आपका हथियार इतना तगड़ा है, इतना लम्बा और मोटा है की हाथ में आता नहीं है. ऊपर से इतना बौखलाया रहता है तो नज़र तो जाएगी hi न"

हरिया यह सुनकर puchha,"Aur छुड़वाने का मैं नहीं कर रहा का आपको?"

अनीता इस बार पूरी बेशर्मी से हरिया के आँखों में देखती हुयी धीरे से boli,"Haan हरिया जी मैं ठुकवाऊंगी आपसे. अब जल्दी से ठीक हो जाइये उसके बाद जब मौक़ा मिलेगा तो अपनी मेमसाहेब को अच्छे से थोक लीजियेगा"

हरिया यह सुनकर मुस्कुरा कर bola,"Aap इतना ख्याल रखियेगा तो हम ज़रूर जल्दी ठीक हो जाऊंगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई तो हरिया उसकी नाभि में फिर से ज़बान फिरने लगा और अनीता की पेट फिर से अंदर बाहर होने लगी. हरिया तीन चार बार उसकी नाभि में ज़बान फिरने के बाद धीरे से bola,"memsaheb आप हमरे लिए अंगूर लाइ है न?"

अनीता यह सुनकर "हाँ" में सर हिलती हुयी boli,"Haan हरिया जी"

हरिया यह सुनकर मुस्कुरा कर bola,"Humka खिलाइये न मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek है हरिया जी" और फिर बायीं हाथ बढाकर बेडसाइड टेबल से अंगूर का कररयबाग लेकर boli,"Uhhm हरिया जी इसे धोना होगा"

हरिया यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब कउनो ज़रूरत नहीं ऐसे hi खिलाइये न"

अनीता यह सुनकर boli,"Hariya जी आओ बीमार है. ऐसे खाइयेगा तो और तबियत ख़राब हो जाएगी"

हरिया यह सुनकर bola,"Are कुछो नहीं होगा मेमसाहेब, आप खिलाइये तो"

अनीता यह सुनकर सर हिलती हुयी एक अंगूर तोड़कर हरिया के मुंह के तरफ बधाई तो वह उसकी हाथ से अंगूर लेकर bola,"Memsaheb हम ख़ास तरीके से अंगूर खाएंगे"

अनीता यह सुनकर उसे सवालिया नज़र से देखि की अगले पल हरिया वह अंगूर लेकर उसकी नाभि के तरफ बढ़ाया और अंगूर का एक छोर उसकी नाभि में घुसा दिया. अपनी नाभि में अंगूर जाता hi अनीता की पेट फिर से अंदर के तरफ धंस गयी. हरिया वह ांगूस उसकी नाभि में अटका कर अनीता को देखा और उसकी आँखों में देखते हुए अपना मुंह खोलकर अंगूर एक चारो तरफ होंठ रखते हुए अंगूर को अपने होंठों के बीच दबा लिया.

ऐसा करने से अंगूर का कुछ हिस्सा अनीता की नाभि में था, कुछ हिस्सा हरिया के होंठों के बीच और हरिया का होंठ अनीता की नाभि के इर्द गिर्द उसकी पेट पर थी. अनीता जब अपनी पेट पर हरिया का होंठ महसूस की तो उसकी पेट फिर से धंसकर नार्मल हो गयी. हरिया वैसे hi होंठ अनीता की पेट पर रखे हुए ज़बान को अंगूर के चारो तरफ पहिराए जिससे उसके ज़बान को अनीता अपनी नाभि के चारो तरफ पेट पर महसूस की. हरिया अगले पल अपने दांत से अनीता की नाभि के चारो तरफ पेट पर हल्का दबाओ बनाया. अपनी पेट पर अनीता हरिया के दांत को महसूस की तो उसे पेट में गुदगुदी हुयी और उसकी पेट अंदर बाहर होने लगी.

अगले पल हरिया दांतों को उसकी पेट से सताए hi थोड़ा सा अंगूर के चारो तरफ लाकर अंगूर को दांतों के बीच ले लिया. अनीता जब हरिया के दांत को हल्का सा अपनी पेट से घिसकर अंगूर के तरफ जाती महसूस की तो उसकी पेट तेज़ी से अंदर बाहर होने लगी, उसकी सांस और धड़कन तेज़ होने लगी और बदन और छूट में मस्ती की लेहेर दौड़ने लगी. उसकी छूट फड़क रही थी.

हरिया अगले पल वह अंगूर दांतों के बीच दबाकर अनीता की नाभि से अपनी मुंह में खिंच लिया. वह अंगूर अनीता की नाभि के चारो तरफ के चमड़ी से घिसते हुए बाहर निकला जिससे अनीता को एक अलग hi मज़ाआ मिला. ऐसा लग रहा था जैसे उसकी छूट से लुंड निकल रहा हो. वह अंगूर जैसे hi उसकी नाभि से निकला तो उसकी नाभि खली लगने लगी. उसे ऐसा लगा जैसे उसकी छूट से हरिया अपना मोटा लम्बा लुंड निकाल लिया हो. वह सोचने लगी की हरिया का मोटा लम्बा लुंड जब उसकी छूट में जायेगा तो कैसे उसे उसकी छूट भरी हुयी महसूस होगी और जब वह लुंड निकलेगा तो ऐसे hi खली महसूस होगी जैसे अभी उसकी नाभि महसूस हो रही है.

यह सोचकर अनीता उसके लुंड को वापस देखने लगी. वहीँ हरिया अपना होंठ अनीता की पेट और नाभि से सताए अंगूर खाने लगा. उसकी पेट से सटे हुए हरिया का होंठ कहते वक़्त जब हिल रहा था तो अनीता को अपनी पेट पर गुदगुदी लग रही थी और एक अलग hi मज़ा मिल रहा था. उसकी छूट फड़क रही थी और वह हरिया का लुंड का उभर देख रही थी.

हरिया वह अंगूर खाकर अनीता को देखा तो उसे अपने लुंड को देखते हुए देखा. हरिया का लुंड अनीता को ऐसे बेशर्मी से एक रंडी की तरह उसका लुंड देखते हुए देख फिर से झटका मारा तो अनीता हरिया के तरफ देखि तो वह मुस्कुरा दिया. अनीता जानती थी की हरिया उसे अपना लुंड देखते हुए देख लिया है इसलिए मुस्कुरा रहा था तो अनीता भी अपनी बेशर्मी अपनी रान्दीपना दिखती हुयी मुस्कुरा दी जैसे जाताना छह रही हो की हाँ मैं आपका लौड़ा देख रही थी की कैसे वह बौखलाकए हिल रहा है.

हरिया मुस्कुराकर उसे देखा तो अनीता उसे मुस्कुराकर देखि और फिर अंगूर के गुच्छे में देखने लगी. वह एक अंगूर को देख कर उस पर ऊँगली रखकर उसे महसूस करने लगी. वह अब डेट हाथ से हरिया का लुंड महसूस कर रही थी और बाये हाथ से उस अंगूर को. दो तीन बार उस अंगूर पर ऊँगली फिरने के बाद अनीता उसे तोड़ ली और अपने नाभि के तरफ लायी तो हरिया देखा की वह अंगूर बड़ा और मोटा था. यह देखते hi हरिया का लुंड झटका मारने लगा.

वहीँ अनीता हरिया का लुंड की झटका मारते महसूस करके बेशर्मी से मुस्कुरा दी. हरिया अगले पल अनीता की हाथ से वह अंगूर लेने लगा तो अनीता कामुक अंदाज़ में boli,"Hariya जी आप आराम से खाइये. मैं खिलाती हूँ"

अनीता यह बोलकर वह अंगूर का एक छोर अपनी नाभि में घुसाने लगी मगर अंगूर थोड़ा मोटा था तो घुस नहीं रहा था. अनीता तीन चार बार घुसाने को कोशिश की मगर नहीं घुसा तो अनीता अपनी ऊँगली पर हरिया का ऊँगली महसूस करके उसको देखि तो वह bola,"Are मेमसाहेब आप तो घुसने वाला चीज़ को पकड़ कर तो दरवाज़े तक ला सकती है मगर घुसेगा तभी जब हम धक्का देकर अंदर घुसाएँगे, और मोटा चीज़ तो घुसाने में और जोर का धक्का लगेगा"

अनीता की छूट में यह सुनकर खलबली मचने लगी मगर अगले पल अनीता की बात सुनकर हरिया का लुंड फिर से झटका मारने लगा. वह हरिया का बात सुनकर उसके आँखों में देखती हुयी boli,"To घुसाइये न अपना मोटा और लम्बा चीज़ अंदर में". अनीता ये बोलते वक़्त उसके लुंड को ऊपर नीचे कर रही थी और उसके लुंड के झटके को महसूस कर रही थी जो उसको बात सुनकर झटका मार रहा था.

हरिया यह सुनकर खुलकर अपने लुंड के तरफ आँखों से इशारा करते हुए bola,"Aap चाहती हैं की आपके हाथ में जो मोटा लम्बा चीज़ है ु हम आपके अंदर घुसाए?"

अनीता यह सुनकर उसका बाये हाथ में अंगूर लिए दये हाथ से हरिया का लुंड हिलती हुयी बेशर्मी से boli,"Haan हरिया जी मैं चाहती हूँ की मेरे हाथ में जो मोटा लम्बा चीज़ है वह आप अंदर घुसा दीजिये"

हरिया यह सुनकर अपने आँखों से उसकी गॉड के तरफ (जो उसकी नाभि से नीचे थी) आँखों से इशारा करते हुए bola,"ee छेड़ में घुसाए का?"

अनीता की छूट में हलचल हो रही थी वही हरिया का लुंड झटका मार रहा था. अनीता उसका बात सुनकर अपनी आँखों से नीचे के तरफ इशारा करती हुयी boli,"Haan हरिया जी जिस छेड़ में आप घुसना चाहते हैं उस छेड़ में घुसा दीजिये"

हरिया यह सुनकर अपना बया हाथ जिससे वह इतनी देर से अनीता की पूरी नंगी पीठ पर फेर रहा था और उसकी गोरी, चिकनी नंगी और मुलायम पीठ का मज़ा ले रहा था वह हाथ नीचे खिसका कर उसकी गांड के तरफ ले गया और उसकी गांड की ऊपरी भाग को थोड़ा दबाकर बीएड और उसकी गांड के बीच घुसाने का कोशिश करने लगा. अनीता यह महसूस करके अपनी गांड थोड़ा उठा दी तो हरिया अपना बाय हाथ बीएड और उसकी गांड के बीच घुसकर पहले उसकी गांड की बायीं भाग को मसला और फिर दायी भाग को मसलने के बाद हाथ को उसकी दोनों गांड के बीच दरार वाले हिस्से पर साड़ी के ऊपर से हाथ रखकर हल्का दबाते हुए bola,"aap चाहती हैं की हमरा हाथ जहाँ है यहां के छेड़ में हम अपना मोटा और लम्बा चीज़ घुसाए?"

अनीता यह सुनकर धीरे से boli,"Haan हरिया जी जिस छेड़ में आप घुसना चाहते हैं घुसा दीजिये अपना मोटा और लम्बा चीज़ जो मेरी हाथ में हैं"

हरिया यह सुनकर उसकी गांड की दरार में अपना हाथ घिसते हुए मुस्कुराकर puchha,"eehan घुसाए का मेमसाहेब?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी अपनी गांड थोड़ा हिलाकर boli,"Hariya जी आप यहाँ घुसना चाहते हैं तो घुसा दीजिये" लेकिन आँखों से वह अपनी नाभि के तरफ इशारा की.

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Achha मेमसाहेब एक बार और पूछ लेते हैं की हम का चीज़ कहाँ घुसाए नहीं तो आप बोलियेगा की हम ग़लत जगह घुसा दिए"

अनीता यह सुनकर मुस्कुरा दी तो हरिया अपने लुंड के तरफ आँखों से इशारा करके bola,"Aapke हाथ में जो हमरा मोटा और लम्बा चीज़ है" फिर वह बाये हाथ से अनीता की गांड की दरार को अपने बाये हाथ से पकड़ कर bola,"U हमरे हाथ में जो आपका छेड़ है उसमे घुसा दे?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan हरिया जी"

फिर वह हरिया का लुंड पकड़ कर हिलती हुयी boli,"Meri हाथ में जो यह आपका मोटा लम्बा चीज़ है, वह आप मेरी"

फिर वह अपनी गांड उसके हाथ पर थोड़ा हिलाकर boli,"yeh छेड़ जो आपके हाथ में हैं वहां घुसाइये"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Main अच्छे से बोल देती हूँ हरिया जी नहीं तो पता नहीं आप क्या समझेंगे"

फिर वह अंगूर के तरफ इशारा करके boli,"Meri हाथ में जो यह मोटा लम्बा आपका चीज़, यह अंगूर है वह आपके हाथ में मेरी जो छेड़, मतलब मेरी नाभि है उसमे घुसाइये"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता मुस्कुराती हुयी अंगूर और नाभि के तरफ इशारा करती हुयी उसका लुंड पकड़ कर हिलती हुयी boli,"Ab इसको" फिर अपनी गांड को हल्का हिलकर boli,"Iske अंदर घुसाइये न हरिया जी. अब तक एक hi अंगूर खाये हैं आप"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए वह अंगूर अनीता की नाभि में घुसाने लगा लेकिन थोड़ा मुश्किल हो रहा था.

हरिया यह देखकर bola,"Memsaheb जब हम अपना मोटा और लम्बा चीज़ आपके छेड़ में घुसूंगा तो आपको भी अपना छेड़ को पकड़ कर थोड़ा फैलाना होगा"

फिर वह आँखों से उसके गॉड के तरफ इशारा करते हुए bola,"Memsaheb आपको तो ी फैलाने आता होगा जब ीके अंदर कउनो चीज़ घुसता होगा. वैसे hi फैलाइये न अपना छेड़ को"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan हरिया जी जब आप इतना मोटा और लम्बा चीज़ घुसा रहे हैं तो मुझे थोड़ा फैलाना hi होगा नहीं तो अंदर नहीं जायेगा. ओफ्फो इतना मोटा और लम्बा है यह, कितना मुश्किल हो रहा है अंदर घुसाने में"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहेब मोटा और लम्बा मुश्किल से घुसता है मगर घुसने के बाद वही सबसे ज़्यादा मज़ा देता है. आपको भी इहे लगा तब तो आपको इतना मोटा और लम्बा चीज़ पसंद आ गवा"

हरिया यह बोलते वक़्त आँखों से अपने लुंड के तरफ इशारा किया. वह आगे bola,"Aap जब हाथ में इसको लेती हैं तो अच्छा लगता है न मेमसाहेब आपको?"

अनीता मुस्कुराकर उसके लुंड को हिलती हुयी boli,"Haan हरिया जी हाथ में तो अच्छा लगता है की कितना मोटा, लम्बा और तगड़ा है मगर देख hi रहे हैं की अंदर घुस नहीं रहा है"

हरिया यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब घुस जायेगा और जैसे हम अभी बोले की एक बार घुस जायेगा तो आपको मोटा और लम्बा चीज़ से hi मज़ा मिलेगा, आप भी यह जानती है तभी तो आप हमार" फिर वह अपने लुंड के तरफ आँखों से इशारा करते हुए bola,"ee बड़ा और मोटा चीज़ पसंद की"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan हरिया जी, एक बार घुस जायेगा यह बड़ा और मोटा चीज़ तो उसके बाद मज़ा देगा एहि सोचकर मैं यह बड़ा और मोटा अंगूर पसंद की की यह बड़ा और मोटा है तो इसमें जूस ज़्यादा होगा, एक बार घुस जायेगा यह तो आप उसको जब खाएंगे तो आपको अच्छा लगेगा की कितना जूसी है यह"

हरिया यह सुनकर अनीता की गांड मसलते हुए मुस्कुराकर bola,"To मेमसाहेब घुसाने दीजिये न"

फिर वह उसकी गॉड के तरफ आँखों से इशारा करते हुए bola,"Aap उसको जैसे फैलते हैं कोई चीज़ घुसते वक़्त वैसे hi फैलाइये"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर अपनी बाये हाथ की इंडेक्स और मिडिल फिंगर से व् शेप बनाकर अपनी दोनों उँगलियों को को नाभि के दोनों तरफ रखकर दोनों उँगलियों को बाहर के तरफ स्ट्रेच करके अपनी नाभि को फैलती हुयी boli,"Maine फैला दिया हरिया जी, अब घुसाइये अपना मोटा और लम्बा चीज़"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर अंगूर को उसकी नाभि से सटाकर उसकी नाभि के पास थोड़ा थूक गिरा दिया. अनीता जान उसका थूक अपनी नाभि पर महसूस की तो उसकी बदन में बिजली जैसा एक लहर दौड़ गया. अंगूर और नाभि पर थूक पड़ने से दोनों थोड़ा गीला हो गया. हरिया अपना बाय हाथ का मिडिल फिंगर को ऊपर के तरफ किया तो अनीता उसे अपनी गांड के नीचे महसूस की.

हरिया अपना वह ऊँगली हिलाते हुए bola,"Hum घुसा रहे हैं मेमसाहेब" और वह अपना ऊँगली हिलाते हुए दये हाथ से अंगूर अनीता की नाभि में घुसाने लगा. अनीता अपनी गांड थोड़ा हिलने लगी तो हरिया puchha,"Aap अंदर घुसते हुए महसूस कर रही है न मेमसाहेब?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर अपनी गांड हिलती हुयी boli,"Haan हरिया जी" की तभी वह अंगूर अनीता की नाभि में घुस गया. हरिया मुस्कुराकर अनीता को देखा तो वह भी मुस्कुराकर हरिया को देखि. वह अंगूर उसकी नाभि को पूरा स्ट्रेच कर दिया था और नाभि चारो तरफ से उस अंगूर को टाइट से जकड़े हुए था.

अनीता की दिल यह देखकर धड़क रही थी की वो अंगूर उसकी नाभि को पूरा फैला दिया है और कैसे वह अंगूर को टाइट से जकड़े हुए था. हरिया यह देखकर मुस्कुराया तो अनीता अपनी आँखों से अंगूर के तरफ इशारा की. हरिया यह देखकर अपना मुंह खोलकर अंगूर के चारो तरफ होंठ से जकड लिया और उसके होंठ अनीता की पेट से छू गए और अनीता की पेट अंदर धंस गयी और उसकी मुंह से कामुक सिसकारी nikli,"Uhhmm".
 
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