Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 3 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 19

राजा रतन और राजा राजपाल "Kuberi"rajya में जो क राजा रतन ने सोने और जवाहरात से भर क अपने राज्य को हिंदुस्तान का सबसे ढंडी राज्य बना दया tha.Raja रतन को आशंका थी क उन पर कोई हमला कर लूट पात न मचा दे.

यही वजह थी क राजा रतन हर एक प्रयास कर रहा था अपने सैनिक बढ़ने ki.kaio दिनों तक

सबने मिल क्र खतरे का कैसे उत्तर देना उसकी योजना सफलतापूर्वक बना लिया गया.

पर सबसे ज़्यादा अगर डर किसी का था तो वो दो राजाओ का था,

एक तो दिल्ली क तख़्त पर बैठे

बादशाह शाहज़ेब का

दूसरा अरब और फारस या पारस पर अपना सिक्का जमा लये हुए सुल्तान मेरे वाहिद ka,wo मेरे वाहिद जिसने आधी दुन्या से ज़्यादा अब तक फ़तेह कर चूका था

राजा रतन ने इन सब से निपटने क लये अपने सहयोगी हर राज्य से मदद मांगी और सबने उसकी मदद भी kiya,apne राज्य को राजा रतन ने. 50000 से ज़्यादा सैनिको से घेर दया था

राजा राजपाल वैसे तो अपने मित्र राजा रतन की मदद करना चाहते थे पर दूसरी ये भी वजह थी क कई वर्षो से रतन सिंह का साथ देने से विदेशो में ,लोगो ने राजपाल पर भी निशाना बनाना शुरू क्र दया था

राजपाल इस बात से भयभीत था क सिर्फ 5000 की आबादी वाले राज्य जिसमे मुश्किल से 1000 सैनिक बल थे उन बाहरी आक्रमण का सामना कैसे करेंगे ,इसलिए न चाहते हुए भी उसे युधा में साथ देना था

Rajpal:ratan सिंह ,आज सप्ताह बीत गए पर इन में से किसी क हमला करने का सुचना नहीं मिला

रतन :राजपाल तम जानते हे हो क वो कितने शातिर है वो कभी हमले नहीं करते जब उनके दुश्मन तैयार हो

rajpal:aap सही ho,waise यहाँ हमने अछि तैयारी कर दिया है उनके स्वागत क लये

ratan:wo आये तो स्मरण रहे कोई ज़िंदा वापस न जाये

rajpal:wo सब तो ठीक है पर आपको नहीं लगता है क वो आपको कमज़ोर करने क लये आपके सहयोगी पर हमला करे

Ratan:tm कहना क्या चाहते हो

rajpal:aap तो जानते है क मेरे राज्य गहतराष्ट्रा में आपके राज्य कुबेरी से बहुत काम सैनिक है और कही वह हमला हुआ

ratan:sochte हुए तम ठीक कहते हो

rajpal:hume कुछ न कुछ वह क लये भी तैयारी कर लेनी चाहिए

ratan:rajpal गहतराष्ट्रा तक तो बास वही पहुंच सकता है अगर कोई गहतराष्ट्रा का व्यक्ति मदद करे नहीं तो मैंने सुना है वह लोग जाने से पहले हे जंगल में रास्ता भूल जाते है

Rajpal:han ये सत्य है ये हमारे पूर्वज की दें है जो हमारे राज्य को ऐसे जगह बनाया

दोनों ऐसे हे बात चीत करते करते मैखाने की और चल देते है जहा दोनों जी भर बैठ क शराब का लुत्फ़ उठाते है

एक घोडा गहतराष्ट्रा क दिशा में बहुत तेज़ी से दौड़ता जा रहा था और उसपे बैठा व्यक्ति घोड़े क लगाम दिए बिना गहतराष्ट्रा क बाजार तक पहुँचता hai.ye गहतराष्ट्रा का मुख्या बाजार था जहा लोग खरीददारी करने आया करते थे वो अपना घोडा पास हे खेत में बांध kar,bazar क चीज़ो को देखने लगता

"हे ये अमरुद कैसे दया "

dukandar:Do सोने का सिक्का डॉ और 4 अमरुद पाओ

vyakti:baap रे " इतना महंगा

dukandar:ye तो सस्ते श्रीमान पर आपको गहतराष्ट्रा में पहले नहीं देखा

vyakti:Muskurate हुए "हो सकता है"

dukandar:tm बाहरी तो नहीं

vyakti:aisa हे समझ लो,

तम मझे 4 अमरुद देदो बदले में तम्हे सोने क सिक्के देता हु

dukandar:han क्यू नहीं

vyakti:or हाँ ये सिक्के बाहरी हो सकते है

dukandar:chalega

व्यक्ति अमरुद को उठा कर खाने लगता है

और सिक्के अमरुद वाले को देता है

dukandar:ye तो पारसी सिक्के है

तम पारसी हो?

vyakti:han हु

dukandar:tumne गहतराष्ट्रा कैसे ढूंढ लय

vyakti:Ghatrashtra कोई ढूंढ नहीं सकता बच्चे ये तो में बास अपने बुवा क बेटे की बेटी क घर आया हु

दुकानदार समझ नहीं पता और उसे छोर देता है

वो व्यक्ति रात का इंतज़ार करने लगता है

रात होते हे वो रस्सी क मदद से महल पर चढ़ जाता है

वो एक गहतराष्ट्रा क सैनिक का भेस धारण कर लय था वो सीधा देवरानी क कक्षा में घुस जाता है

व्यक्ति :आप हे पारसी रानी देवरानी हो

देवरानी एक नए चेहरे को देख कर समझ नहीं पति क क्या हो रहा है चरण वो पास रखे तलवार को उठा लेती है

Devrani:tum कौन हो

vyakti:ghabraye नहीं मेरे हाथ में कोई हथियार nahi(wo अपना दोनों हाथ दिखता है)

देवरानी चैन की साँस ले कर तलवार निचे करते हुए

devrani:kaun हो बहुरूपिये

vyakti:aapka का कोई गुप्तजन था रामेश्वर

देवरानी फिर से अपने तलवार उठा लेती है

devrani:han बोलो क्या हुआ उसे

vyakti:wo बेचारा मारा गया

देवरानी हल्का गुस्सा होते हुए

vyakti:aha आप गुस्सा न होए में उसका क़ातिल नहीं

devrani:paheliya न बुझाओ बोलो क्या काम है

व्यक्ति अपने चेहरे से नक़ाब हटा ता है



Vyakti:Me शमशेर हु ,मेरे वाहिद का एक लौटा चस्मो चिराग और पारस क साथ उन तमाम मुल्को का युवराज जिसपे हम क़ाबिज़ है

देवरानी ये बात सुनते हे समझ जाती है क वो पारस से आया है और वो मेरे वाहिद का शेह्ज़ादा है

Shamshera:han और तम्हारा गुप्तजन रामेश्वर घोंचू था मारा गया

उसे जासूसी नहीं आती थी.

देवरानी अब समझ गयी थी क उसको इस से कोई खतरा नहीं है इसलिए वो शमशेर को दूर सोफे पैर बैठने का इशारा करती है और खुद भी पास रखे कुर्सी पर बैठ जाती है

Shamshera:wo मरते वक़्त मझसे वडा करवा गया क वो ये सुचना तम तक पंहुचा दे

devrani:par उसको मारा किसने

Shamshera:ab छोरो तम्हे तो पता हे होगा दुसरो क देश में जा कर जासूसी करने का अंजाम,

devrani:suchna क्या दया था उसने

Shamshera:devrani वो कह रहा था क तम कई साल से अपने पिता और अपने भाई को तलाश रही ho,to तम्हारे लिए एक दुःख की बात है

क तम्हारे पिता जी अब नहीं रहे

और तम्हारा भाई देवराज अब हमारे पारस की देखभाल करता है और वो है भी ाचा इसलिए हमने उसे अभी भी पारस क एक राज्य का राजा क़ायम रखा पर वैसे वो अक्सर हमारे साथ जंगो में विदेशो में होता है

देवरानी ये बात सुन क्र गड गड हो जाती है क उसका भाई अभी तक ज़िंदा है

devrani:tmhare सैनिको ने रामेश्वर को मर दया जासूसी में

और तम यहाँ क्या कर रहे हो ?

Shamshera:tm सही में एक पारसी की तरह सोचती ho,waise में भी जासूसी हे कर रहा हु और मझे इसका बचपन से शौक़ है

devrani:or में तम्हे मरवा दू तो

इतने में पुरे महल में हाहाकार मच जाता है और सेना हर तरफ दौड़ने लगते है भागने लगते है

devrani:tmhara उन्हें पता चल गया है ,निकलो यहाँ से और सन्देश पहुंचने क लये धन्यवाद्

शमशेर एक मुस्कराहट क साथ अपना चेहरा ढकता है और उलटे पेअर जाने लगता है तभी उसके सामने

sainik:yaha घुसपैठि है छान मारो महल को

Shamshera:uff हो मेने फिर से रस्सी गिरना भूल गया और पकड़ा गया.

और वो एक खिड़की से कूद कर एक कक्षा में घुस जाता है



शमशेर बास दृश्य देखते हे रह जाता है

जहा पर महरानी षुरूश्ती एआईने क सामने अपने नंगे बदन को निहारती रहती है

shurushti:mere दिन अब कटे नहीं काट ते महाराज अब वो सुख नहीं दे पते मझे अब तो कितने दिन हुए ,पता नहीं कब आएंगे

इतने में उसे पीछे किसी क खड़े रहने का आभास होता है और पीछे मुड़ती है ,शमशेर महल क बहार की खिड़की क तरफ खड़ा था

Shurushti:kaun

Shamshera:muaaf कीजियेगा ऐसे आना पड़ा

"हाँ मैंने कुछ नहीं suna"muskra कर खिड़की से बहार छलांग मर कर घोड़े पे बैठ भाग जाता है.

सैनिक उसका पीछा करते है पर वो उसको पाकर नहीं पते पर देवरानी को इस बात की ख़ुशी थी क उसका भाई देवराज सही सलामत है

बलदेव जो वैध जी को ले कर पास क जंगल में था उसे इस बात का पता बाद में चलता है सुबह वो वैध को ले कर वापस महल में अत है और निर्णय करता है वो एक आखिरी पत्र शेरसिंघ क रूप में लिखेगा और वो पत्र लिख लेता है और कमला को बुलवा कर दे देता hai.baldev थका हरा सो जाता है

दोपहर बलदेव सोया हे था क उसके सर पर कोई हाथ फेरता है और वो नींद से जगता है तो देखता है क उसकी माँ देवरानी है

baldev:kya बात है माँ आज बहुत खुश हो

Devrani:han बहुत ज़्यादा

baldev:par ऐसा क्या हो गया

देवरानी अपने भाई क ज़िंदा होने की खबर सुनती है बलदेव को

baldev:kya मां ज़िंदा है

devrani:han और वो पारस में हे है

काश उनसे में मिल पति

Baldev:aap को में ज़रूर उनसे मिलवाऊंगा

"माँ क्यू न इस बात पर हम कही घूमने जाये"

Devrani:kaha?

Baldev:aaj हम बाजार जायेंगे और मेने सुना है वह मेला भी लगा है

आप शाम को तैयार रहना माँ "ये कह कर वो उठ कर स्नान करने चला जाता है.
 
अपडेट 20

मेला जाने की तैयारी करने देवरानी कक्षा में जाती है और उसे वह कमला दिखाई देती है जो पत्र ले कर कड़ी थी देवरानी उसके हाथ से पत्र ले लेती है और कमला क सामने हे मन में पढ़ने लगती है

प्रिय देवरानी

मेरा ये अंतिम पत्र है टमको इसके बाद में और पत्र नहीं भेजूंगा में चाहता हु क तम हमारे प्यार को समझ नहीं प् रही हो इसलिए में तम्हे आखिरी 7 दिन देता हु ,में रविवार क दिन नदी किनारे तम्हारा इंतज़ार करूँगा अगर तुम नहीं आती हो तो में समझ जाऊंगा की तुम्हारी रूचि नहीं है और आगयी तो तम मेरे साथ मेरे राज्य चलोगी

बास 7 दिन में और ज़्यादा समाय व्यर्थ नहीं कर सकता

शेरसिंघ

ये पढ़ कर कमला से

devrani:suno 7 दिन का समाय दिया है निर्णय लेने का

kamla:kaun सा निर्णय

devrani:yahi क मुझे शेरसिंघ क साथ जाना है या नहीं

kamla:hay दय्या तम हम सब को छोर चली जाओगी

devrani:ab प्यार पाने क लये तो..

kamla:chup रहो मेरा रास्ता सुझाया है मझे हे कह रही हो

devrani:to क्या क्र सकते है

kamla:mujhe तो ठीक है छोर देना ,क्या अपने बलदेव को छोर क तुम खुश रह पाओगी वह

devrani:nahi कभी nahi,baad में उसे भी बुला सकते है हम

kamla:to क्या बलदेव इस से खुश होगा? क उसके माँ जो पतिव्रता hai,ek देवी जैसी है वो इतने सालो से दुःख उठाई और आज एक पुरुष क लये अपने पुत्र को छोर रही है

Devrani:Mere पास कोई चारा नहीं है

Kamla:tm अपने आप में झको और अपने पास जो है उसमे खुसीआ तलाशो ,तुम्हे हर ख़ुशी अपने पास मिलेगी

और ये कह कर कमला चली जाती है

devrani:man me)han तम क्या कहना चाहती हो में समझ रही hu,pr क्या ये पाप नहीं hoga,ye बायत तो सही है दूसरा तो दूसरा हे होता आज कैसे शेर सिंह ने कह दया समय व्यर्थ नहीं करना उसे मेरे ऊपर ,कल हो कर वो मेरा साथ छोर दे तो में न घर की रहूंगी न घाट की

कमला देवरानी क कक्षा से जाते हुए

Kamla:man me)beta बलदेव तूने 7 दिन की बात रख कर अपने पेअर पे कुलहरि मार ली है

"अगर 7 दिन क अंदर देवरानी को तू नहीं पता पाया तो वो शेर सिंह से मिलने जाएगी "

"अगर उसे शेर सिंह चाहिए तो हमे किसी और को वह खड़ा करना पड़ेगा और तो और बलदेव ने खुद प्रतिज्ञा ली है इस बात की"

सूर्य तेज़ी से ढल रहा था उसी क साथ गहतराष्ट्रा क लोग भी आज बहुत जल्दी से अपना काम निपटा कर बाजार जाने की तैयारी कर रहे थे क्यू क आज बाजार में हर साल की तरह मेला लगा था जिसमे तरह तरह jhuley,biscope tha,khane क एक से एक मिठाईया थी ,निर्त्य समारोह था और इस भी बढ़कर रोचक cheeze,Ghatrashtra क नागरिक अपने खेतो से निकल कर गहतराष्ट्रा क मुख्या बाजार में चमचमाते मेले की और बढ़ रहे थे

इधर देवरानी अचे से अपने को रगड़ रगड़ क नहरी है और एक सफ़ेद सदी और लाल ब्लाउज पहन लेती hai,mathe पे सिंदूर पैरो में payal,hotho पे लाल सुर्ख लाली लगा लेती है और निचे खड़े रह कर आवाज़ लगते है

Devrani:Baldev चलो भी

बलदेव भी सज सवार का तैयार था और निचे अत है देवरानी उसे देख सोच में पद जाती है

devrani:tumne ये परिधान मज़दूरों वाला क्यू पहना है

Baldev:Q क एक युवराज मेले में मज़ा नहीं लेता जितना एक आम नागरिक लेता है

devrani:par

baldev:Maa ..में नहीं चाहता क हमारे वह जाने से वह क आम लोगो का मज़ा किरकिरा हो और हमे प्राथिमिकता दी जाये

अगर हम अपने भेस में गए तो वो तो हमारे लये मेला खली कर देंगे और हमे 10 मिंट भी नहीं लगेगा और हम मेला घूम लेंगे

और बेचारे जनता की खुशिओ क बीच रुकावट बन जाएगी

Devrani:tum कितना सोचते हो लोगो क बारे में

Baldev:han भले मेरे बारे में कोई नहीं सोचे और मुस्कुराता है

बलदेव की बात देवरानी को कांटे की तरह चुभती है

baldev:ary किस सोच में हो तुम इस चादर को ओढ़ घूँघट कर लो तम्हे भी कोई नहीं पहचान पायेगा

देवरानी एक बड़ा सा सफ़ेद चादर ले क्र ओढ़ लेती है

देवरानी बहार जाने लगती है तो बलदेव उसे रोक देता है

baldev:maa आज हम आगे से नहीं पीछे क रस्ते से जायेंगे और बिना रथ क

ये सुन कर देवरानी हस्ती है फिर बलदेव भी हसने लगता है दोनों बहार आ कर पैदल नदी की ओरे चलने लगते है क्यू क नदी क उस पार था मेला और आज मेला क वजह से इस पार से उस पार करने क लिए आज नाव भी थी.

दोनों बाते करते हुए चलते रहते है

"बलदेव अगर में तुम्हे छोर क कही और चली जाऊ तो"

बलदेव: तो में भी तुम्हारे पीछे पीछे वह आ जाऊंगा

Devrani:itna चाहता है अपनी माँ को

baldev:han हद्द से ज़्यादा

Devrani:agar तू मझे छोर कर कल किसी रानी क चक्कर में आ कर मुझसे दूर चला जाये तो

Baldev:me अपना जान देना गवारा करूँगा पर जाना नहीं

Devrani:agar वो तुझ से प्रेम करती होगी और तू भी तो?

Baldev:to भी नहीं

देवरानी मन me:sach में कितना पवित्र डिल है इसका और इसका प्रेम भी

Baldev:or माँ तम मुझे छोर क जाओ ऐसी नौबत हे नहीं आएगी

Devrani:wo कैसे भला

Baldev:me तुम्हे इतना प्यार दूंगा जिसे छोर कर जाना तम्हारे लिए कठिन होगा

Devrani:acha जी...

Baldev:han जी

वो नदी क पास पहुंच जाते है और देवरानी वह कड़ी ह कर नदी का मंज़र देख कर अंगड़ाई लेती है



बलदेव देवरानी क खूबसूरत गोल आकर में बंधे दूध और गहरी नाभि देख क्र हिल जाता है और

फिर चल कर दोनों एक नव वाला जो आवाज़ लगा कर कह रहा था मेला चलो जा कर दोनों उस नव में बैठ जाते है देवरानी बैठी हुई थी ऊके सामने बलदेव बैठा था और बलदेव देवरानी को देखता है



जिसका आधा चेहरा दिख रहा था बलदेव क ऐसे देखे जाने देवरानी को डर सा लगता है

devrani:man में) ऐसे देखता है जैसे मझे कभी देखा हे नहीं hai,koi इस बालक को बताये में माँ हु इसकी पत्नी nahi)or खुद अपने सोच से लज्जा जाती है

इन दोनों को कोई और भी था जो देख रहा वो था नाव वाला जो अपने नाव क चप्पू मरते हुए तेज़ गति से नव भगा रहा था

Naavik:ary उस्ताद तम दोनों बड़े शर्मीले लगते हो

बलदेव जैसे सपने से जागते हुए

Baldev:matlab

navik:yahi क आप दोनों को नयी नयी शादी हुई है लगता है इसलिए इतने दूर दूर बैठे हो

बलदेव और देवरानी क आँख फाटे क फाटे रह जाते है उनका ये हाल था क पूरा रोम रोम काँप रहा था लज्जा से

बलदेव ऐसी स्तिथि में था क वो कह भी नहीं सकता था क में युवराज हु और ये मेरी माँ देवरानी है

Baldev:hmm छोरो भी यारो

Naavik:ama यार कैसे छोरे शादी कोणु बार बार होती है एक बार की मिली ज़िंदगानी है ,खूब ऐश कर लेयो

Baldev:sirf हम्म्म करता है मज़बूरी में

और इस बात का मतलब समझ क बलेव अपने माँ से ऐश करने क लये हम्म कह क हामी भर दया ho,devrani का गाला सुख जाता है और दूसरी ओरे उत्तेजित भी हो जाती है

navik:ama यार सोचा थो भैया

जय क बैठा अपना घरवाली क बगल में

अब स्तिथि ये थी क बलदेव को न जाते बन रहा था और न बैठ ते बन रहा था वो सोचा नाविक की बात मान लेने से कही वो चुप बैठ जाये

बलदेव अब उठ क देवरानी क बगल में बैठ जाता है

naavik:ee हुई न बात बबुआ

और नाविक गता है "ू माहाआजही रे "माआजही रे " तोरे बिना ी डिल न लगी रे "

naavik:ary भाईसाहब तम दोनों तो ऐसी बैठे हो जैसे सांप सूंघ लय हो

ी वातावरण का आनंद लियो ,तनिक करीब हो क्र चिपक क बैठो ठंडी ज़्यादा है"

और हस्ता है

बलदेव अब तक समझ गया था क मांझी बलदेव क लये मांझी भगवन का अवतार था जो उसके मदद का रहा था

बलदेव मौक़ा न गवाते हुए अपने माँ क कंधे प हाथ रख कर चिपक जाता है

devrani:man में) उह्ह्ह मन में हलचल सी थी

Naavik:bhaia कभी भाबी जी क लये गण गेट हो क नहीं

Baldev:ab सहज मसहूस करते hu"nahi अभी तक तो नहीं "

Navik:to अभी गयी डॉ ,मौक़ा भी है दस्तूर भी

baldev:pr मुझे. गीत याद नहीं कोई

Naavik:chalo तो फिर हमारे साथ गे लो

Baldev:theek है भैया

naavik:O माझी रे

माझी रे

तोरे बिन ी डिल न लगी रे

बलदेव अब दुहराता है और अपने माँ क आखो में देख

Baldev:O माझी रे माझी रे

तोरे बिना डिल न लगी रे

navik:badhiya गए

बलदेव देवरानी क तरफ देखता है तो पता है वो घूर रही है



और ऐसे घूरते देख उसके दूध में फिर खो जाता है बलदेव और तभी नदी का किनारा आ जाता है देवरानी ख़ामोशी से उतर कर दूसरे तरफ कड़ी हो जाती है

नाविक बलदेव को आवाज़ देता है और उसके कान में कुछ कहता है फिर बलदेव उसे कुछ सोने क सिक्के देता है और देवरानिक पास आ जाता है

तभी नाविक आप चप्पू मारते hu"bhaia अगले साल मेला लगने तक आपके जुड़वे बचे होंगे और उनके साथ तम आओगे"

बलदेव और देवरानी चुप चाप धीरे धीरे चल रहे थे ...

तो बे कंटिन्यू
 
अपडेट 21

देवरानी और बलदेव नव से उतर कर मेले क रंग बिरंगी रौशनी की तरफ चल जा रहे थे और अभी हुई घटना से दोनों का डिल ज़ोरो से धड़क रहा था

तभी बलदेव का पेअर एक छोटे से पठार से टकरा जाता है और उसके मुँह "आह " निकल जाती है क्यू क चोट अंगूठे पर लगी थी

Devrani:"uhh" करती है जैसे चोट बलदेव को और दर्द उसे हुआ हो

Devrani:"Baldev देख कर नहीं चल सकते"

Baldev:Dekh कर हे तो चल रहा हु

Devrani:rasta देख कर चलो मुझे नहीं

(और हल्का सा शर्मा जाती है)

Baldev:Jab तुम जैसी खूबसूरत स्त्री मेरे साथ हो तो में कही और कैसे देख सकता हु

Devrani:chup कर बदमाश

Baldev:wo देखो माँ ऊपर चाँद

Devrani:han तो

Baldev:usme भी दाग है

पर तुम में नहीं

Devrani:hatt ...पागल

बलदेव थोड़ा गंभीर होते हुए

"माँ तुम मनो या न मनो पर सचाई छुपती नहीं"

देवरानी अपनी प्रसंशा सुन कर अंदर हे अंदर खुश हो रही थी पर ऊपर से गुस्सा दिखते हुए आगे चलने लगती है बलदेव क



बलदेव उसके थिरकते गांड देख वही रुक जाता है तो देवरानी पलट क्र उसे देख

devrani:chal pagal,ab रुक क्र देखता रहेगा

(शर्मीली अंदाज़ में)

बलदेव: माँ में तुम्हारे सुंदरता में खो गया था

Devrani:tum मुझे पीछे से घर रहे थे न

Baldev:wo तो बास..

Devrani:Q में आगे से सुन्दर नहीं

देवरानी नखरा कर क सर झुके और अपने दूध उठाई हुई thi,baldev ने देवरानी को देख

Baldev:tmhara हर अंग सुन्दर है

देवरानी अब चुप कर हम मेला में आगये

दोनों मेले क चहल कदमी देख खुश हो जाते है

मेला में खड़े हर एक की नज़र देवरानी क बड़े दूध और चुतर पर पद रही थी वही कुछ दूर खड़े लौंडे ने तो सिटी बजा दी जिसे सुन कर देवरानी को अंदर हे अंदर गुस्सा अत है

Baldev:chalo हम झूला झूलते है

Devrani:hum इस चाकरी पर बैठेंगे

वह लोग भीड़ लगाए थे और अलग अलग जानवर क रूप में बने उस चाकरी पर सवार हो कर सब घूम रहे the,baldev और देवरानी भी क़तर में लग गए और तभी वही लड़का जो थोड़े देर पहले सिटी मारा था आ कर बलदेव क पीछे खड़ा हो गया अब क़तर धीरे धीरे बढ़ता जा रहा था

उस लकड़ी ने एक धक्का दया जिस से बलदेव क आगे कड़ी देवरानी बलदेव से पीछे से चिपक गयी



बलदेव ने एक हाथ से देवरानी क नाभि पर हाथ रखा दूसरा हाथ उसके गांड पद रख दया अब बलदेव का लैंड देवरानी क गांड पर दबा पड़ा था

अचानक इस हमले से देवरानी स्तब्ध थी और अपने पेट और गांड पर बलदेव का हाथ देख वो कुछ सोच पति इस से पहले हे उस लड़के ने एक और धक्का दया. और इस बार बलदेव का लैंड खड़ा सीधा देवरानी क चुतर क दर्द में घुसा

Devrani:uhh ाः" आँख बंद क्र ली

Baldev:ary ो बचे ज़रा ध्यान से आगे महिला है

Ladka:Chacha वो महिला है तो क्या हुआ क़तर में तो सबको धक्का लगता hai,sb पीछे से दे रहे है

Baldev:man में) अभी दूध क दन्त नहीं टूटे. और आगये

Ladka:kya कहा आपने

Baldev:yahi क सीधा खड़े रहो

Ladka:ary वो भैसा क्यू इतना पागल होरहा है

तेरी बीवी को में छुआ नहीं और धक्का कोई ले मज़े तो तू हे ले रहा है

इस बात को सुन तो देवरानी ज़मीन में गड़े जा रही थी और बलदेव भी चुप हो गया

Baldev:O काम उम्र क लड़के तम्हे माता पिता ने शिष्टाचार नहीं सिखाया

Ladka:Nahi सिकहाया (और हसने लगा) ये सुन कर आसपास क लोग भी हसने लगे

devrani:chup करो तुम मत बोलो

Baldev:hmmm

फिर बलदेव देवरानी से पूछता है "तुम किस जानवर पे बैठोगी ?गधे क

"तम बैठो गाढ़ी पे मई तो घोड़े पे बैठूंगी"

Baldev:dekho कही गिर न जाओ मुँह क बल

Devrani:me संभाल लुंगी फिर दोनों झूलने लगते है झूले पर...

झूला झूल कर बड़े मुश्किल से दूसरी तरफ बढ़ते है दोनों भीड़ को चीरते हुए जहा पर बॉयोस्कोप वाला था

Baldev:ye बॉयोस्कोप का कितना सिक्के लोगे

दुकानवाला:10

बलदेव को पास खड़े बूढ़े व्यक्ति दिखाई देते और वो कहता है

Admi:Beta तम इस बॉयोस्कोप में क्या देखोगे

इसमें सिर्फ चित्र है देखना है तो अंदर निर्त्य कला देखो जा कर....
 
अपडेट 22

निर्त्य देखने एक मंडप क पास पहुंच कर वे दोनों जा कर चारो ओरे से सजे मंडप क बीचो बीच जा कर पहले लाइन क कुर्सी पर बैठ जाते है अभी अभी लोगो का आना शुरू हुआ था इसलिए बलदेव और देवरानी आगे वाली जगह मिल गई

सामने एक ुचे जगह मंच सा बना था और एक तरफ कुछ संगीतकार ढोल और ताशे क साथ बैठे थे और बीच में कालीन बिछा था

निर्त्य देखने आये लोगो में सबसे ज़्यादा मर्द थे औरत बहुत काम थी जिस वजह से देवरानी अंदर से असहज महसूस कर रही थी धीरे धीरे लोगो का टाटा लग जाता है और आखिर क लोगो को खड़ा भी रहना होता है

वही एक कोने में बूढ़ा आदमी भांग और तारी मिटटी क बर्तन में बना रहा था और लोग जैसे उसके बुलाने का इंतज़ार कर रहे the,waha आये लोग मदिरा का मज़ा लेने लगते है

एक aadmi:Ary शुरू करो

दूसरा aadmi:han हाँ शुरू करो

संचालक क कान पड़ते ये आवाज़ से वो बेबस हो कर समय से पहले निर्त्य कला का प्रदर्शन शुरू करता है

पर्दा खुलता है और संगीतकार अपना ढोल ताशे बजाते है और सामने एक युवक आ कर लोगो से कहता है "धीरज रखिये हम शुरू करते है आज का कार्यकर्म"

"तो आपके सामने आएगी अब उर्वशी"

और एक पारम्परिक पोषक में निर्त्य करने आती है और सब उसके भारत नाट्यम देखने लगते hai,kuch देर तक उसका निर्त्य देख सब मदिरा पीते हुए आनंद लेने लगते है

बलदेव और देवरानी को भी खूब ाचा लग रहा tha,ab एक एक कर के सब आते है और अपना निर्त्य कला संगीत पर दिखा कर चले जाते है और गीत कर क गीत पर थिरकते है.

तभी एक युवक मंच पर आ कर बीचो बीच खड़ा हो क्र

"देविओ और सज्जनो हमने आपके लिए एक मज़ेदार स्पर्धा रखा है जिसमे आप में से कोई उपहार पा सकते है''

"तो क्या हम वो खेल शुरू करे "

सब लोग एक साथ "हाँ शुरू करो" कहते है बलदेव भी देवरानी की ओरे देख हाँ शुरू करो

"तो सज्जनो आप क देविओ को स्टेज पर भेजिए जो भाग लेना चाहते है "

और कुछ महिलाये अपनी मर्ज़ी से और कुछ अपने पति क कहने पर मंच पर चढ़ जाती है.

तभी बलदेव को कुछ सूझता है और वो देवरानी का हाथ अपने हाथ से उठा देता है जिसे मंच पे खड़े लोग देख लेते है

sanchalak:han आप भी आ जाइये

देवरानी परेशानी से बलदेव क तरफ देखती है क वो अब क्या करे और बलदेव बदले में बास एक मुस्कान दे कर कहता है

Baldev:Ghabraye नहीं जाये

sanchalak:jaldi आ जाओ हमारे पास समय नहीं है

और देवरानी हड़बड़ाते हुए मंच पर चढ़ जाती है

वह कड़ी हर महिला से एक एक प्रश्न पूछा जाता है कुछ इतिहास का कुछ धर्म से जुडी जिसमे देवरानी सही जवाब दे कर स्पर्धा में बानी रहती है

गलत उत्तर देने क वजह से सब महलाइये एक एक कर क खेल से बहार हो रही थी.

अब अंतिम में सिर्फ दो महिलाये बचती है जिसमे से एक को विजेता होना था.

देवरानी जो एक रानी थी उसे हराना इतना आसान नहीं था वो एक जज़्बे से भरी मज़बूत महिला था और शिक्षित भी थी और दूसरी तरफ एक साधारण सी महिला फिर भी देवरानी क मन में एक जीत की लहर दौरति है और वो थान टी है क अपने विपक्षी को कभी काम नहीं आंकना चाहिए

Sanchalak:devio और सज्जनो हमारे इस खेल में विजेता का चुनाव अब निर्त्य से होगा इन दोनों में से जो ाचा करेगी और जिसे ज़्यादा लोग पसंद करेंगे

बलदेव ये सुन कर देवरानी को देखता है और मुस्कुरा देता है देवरानी तुनक कर गुस्सा दिखती है बलदेव को.

अब कुछ लोग गीत संगीत शुरू करते है जिसपर वो महिला सबसे पहले जा कर 10 मिंट तक नाचती है और उसका निर्त्य ख़त्म होते हे सब ताली बजाते है

अब अत है देवरानी की बरी जिसने एक झिझक से मंच क बीच जा कर कड़ी हुई और उसके कान में संगीत बजता है वो बलदेव की ओरे देखती है बलदेव आखो से इशारा करता है शुरू करो.

देवरानी अब जोश में आ कर जीतने की उम्मीद से और बलदेव की हामी से एक अंदाज़ में कड़ी होती है और धीरे से अपना ओढ़नी को उतर निचे फेकती है

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इसे देख बलदेव का मुँह खुल जाता है और सब लोग तालियों और सीटीओ से स्वागत करते hai,uske तने हुए आम देख हे रहे थे लोग क देवरानी पलट कर अपने दोनों गांड को बरी बारी से हिलती है और सब देख

एक aadmi:ohh क्या गांड है

दूसरा aadmi:or इसके गेंद तो एक हाथ में आएंगे हे नहीं चुशी मसलने लायक है

लोगो की तरह तरह बात सुन कर बलदेव को एक पल क लये गुस्सा अत है पर फिर वो माहौल न ख़राब कर निर्त्य का आनंद लेने लगता है

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फिर देवरानी अपना कमर पर हाथ रख क्र झटका देती है और पूरा हुजूम चिल्लाने लगता है और तालिया से गूंज उठ ता है मंडप.

Geet:Tora कमर बलखाती कमर ी जाने मारे हो ललचाती लचक .

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इस लाइन पर देवरानी अपने कमर मटका क अपने चुतर हिला देती है पीछे की ओरे जिसपे सीटीए बजती है

एक aadmi:Bawal है

dusra:peeche से ठोकने वाली माल है.

दोनों कमर पाकर कर बारी बारी सी थिरक रही देवरानी को देख बलदेव का भी बुरा हाल था उसका लिंग में अकड़न शुरू हो गयी थी

तभी

Geet:tora इ दो रास गगरी तरसावे मुझे बेसब्री

और देवरानी तुरानी झुक कर अपने आम को हिलती है

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Geet:tora ी गगरी जान मरे बेदर्दी

ये लाइन पर देवरानी दूसरी तरफ घूम कर फिर से अपने दूध को निचे कर हिलती है

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इस बार वासना से भरी शरीर और चेहरे पर वासना का अंदाज़ देख वह पर कोई ऐसा नहीं था जिसके लैंड ने पानी नहीं छोरा हो

तभी गीत समाप्त होता है और देवरानी अपना ओढ़नी उठा कर क

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एक क़ातिल अंदाज़ में देखती है निचे बैठे बलदेव क आखो में और बलदेव का लैंड तन्न जाता है और उसे अपने बड़ी चादर से छुपा लेता है धक् kar,devrani भी अपना चुन्नी ओढ़ कर अपने वक्ष सब से छुपा लेती है.

Sanchalak:bina किसी मूर्खता से आज की हमारी विजेता है ये

Sanachalak:ary भाई इनका नाम

पूरी भीड़ "हाँ इस गोरी का नाम क्या है"

देवरानी सकपका जाती है क्या कहे तभी बलदेव खड़ा होता है

Baldev:inka नाम रानी है

तब जा कर देवरानी क सांस में सांस आती है

sanchalak:ary आप भी यहाँ आईये

और बलदेव को भी मंच पर बुलाते है

sanchalak:to हम आज पुरुस्कार देते है रानी को

संचालक बलदेव को खुश देखते हुए "वैसे महाशय आप इनके कौन है"

बलदेव को कुछ सूझ नहीं रहा था क्या कहे

sanchalak:boliye भी महाराज

baldev:ye मेरी पत्नी है (कुछ सोच kar)rani और मेरा नाम बल्ली है

देवरानी ये सुन कर अपने निचला होठ दन्त से काट ली

sanchalak:achi जोड़ी है बल्ली नवविवाहित हो हेठे

Baldev:hmm

फिर वो लोग देवरानी को पुरुस्कार देते है और वो लोग मंच से उतर कर दूर जाते है देवरानी फिर से वो चादर ओढ़ लेती है अब मेला धीरे धीरे बंद हो रहा था सुबह क 3 बजे थे

भीड़ जाने क क़तर में ज़्यादा होने की वजह से. बलदेव देवरानी को अपने आगे चलने को कहता है और दोनों धीरे धीरे भीड़ से निकलने लगते है और बलदेव ने अपने दोनों हाथ से गोल आकर बना लय था जिस से क उसको कोई छू नहीं सके

और जब भी भीड़ से धक्का लगता बलदेव का खड़ा लैंड देवरानी क दरार में चिपक जाता है

किसी भी तरह दोनों मेले क तरफ से नदी की ओरे चलने लगते है

बलदेव देखता है क चाँद क रौशनी में देवरानी का मुँह फुला हुआ था वो किसी बचे की तरह गुस्सा से लाल थी

Baldev:maa

देवरानी:

Baldev:maa

Devrani:mat कहो मुझे माँ

Baldev:batao तो क्या हुआ

Devrani:tum नहीं जानते जैसे

Baldev:mjhe न समझ नहीं आरहा

Devrani:wo मांझी तो अज्ञात था जनता नहीं था इसलिए हम दोनों को अलग समझा तो उसने कह दया जो मन में आया वो पर तुमने तो हद्द हे कर दी

Baldev:to ये बात है जी तो सुनो

में क्या कहता ? में तुम्हे इस राज्य क देवरानी नहीं कह सकता था ,और नहीं तुमको अपनी बहिन कह सकता था ,वो क्या कहते बहिन क साथ नाच देखने आया है ,न हे में प्रेमिका कह सकता था वो मुझे नज़र में रख लेते थे और न हे में ये कह सकता क तुम्हे में जनता नहीं आज हे मिले है फिर सब गलत समझते

बलदेव ये कह कर थोड़ा गुस्सा हो जाता है और. आगे की तरफ देख कर चलने लगता hai.devrani को बलदेव का नाराज़ होना ाचा नहीं लगता है और वो सोचती है

Devrani:man me)jane दो वैसे भी हमे कोई नहीं जान पाया क हम राज परिवार है नहीं तो मेरे निर्त्य से क्या से क्या हो जाता था और सबका श्रेय तो बलदेव को हे जाता है

Devrani:suno बलदेव

बलदेव:

devrani:ary लल्ला सुनो

Baldev:kaho

Devrani:tmne हमारी जान बचने क लये हमारी पहचान छुपाया उसके लये धन्यवाद और तुम्हे कैसे पता चला में निर्त्य कर लेती हु?

और शर्मा जाती है

Baldev:maa मैंने बचपन में तुम्हे अकेले निर्त्य करते देखा था तभी से मेरे मन में ये था क आप अपनी कला अपने शौक़ को छुपाती फिरती हो

Devrani:chup चाप सुन रही थी

baldev:islye मैंने सोचा क आज मौक़ा है तो क्यू न आपको अपनी कला प्रस्तुत करने का मौक़ा मिले

देवरानी अपने आखो में ासु ले कर बलदेव से लिपट जाती है

devrani:Dhanywad beta,mere लये कितना सोचता है तू

Baldev:roye नहीं अब आपके रोने क दिन khatm,pata है तुमने इतना ाचा निर्त्य किया क सब तारीफ करते थक नहीं रही थे और सच कहु मैंने भी इतना ाचा निर्त्य कभी नहीं देखा

devrani:dhanywad बीटा

और देवरानी एक चुम्मा अपने बेटे क माथे पे ले लेती है जिस से बलदेव चौक जाता है

baldev:ye भी कोई चूमने की जगह है

उसका मतलब समझ देवरानी तुनक कर बलदेव से दूर होती है

devrani:chal हट बदमाश..

बलदेव और देवरानी नदी पार कर पीछे से महल में घुस कर अपने अपने कक्षा में घुस जाते है और लेट ते हे दोनों थके हारे गहरी नींद में खो जाते है.
 
अपडेट 23

बलदेव और देवरानी मेला से घूम कर आकर चुपके से अपने कक्षा में जा कर सो जाते है पर इन दोनों की हरकत को कोई और था जो बड़े दिनों से निहार रहा था और आज भी उसने इन दोनों को देख लिया था

हुआ ये देर रात तक नींद नहीं आने क कारन महरानी जीविका अपने पलंग पर बैठी थी क उसे किसी क हसी सुनाई दी और वो ये जानने क लये बहार आई तो देखि क बलदेव और देवरानी एक दूसरे से हसी मज़ाक कर रहे है

Jeevika:Ye दोनों पता नहीं क्या गुल खिला कर आ रहे है और तो और दर नाम की चीज़ नहीं इतने रात में बहार से आ कर भी किसी प्रेमी जोड़े. की तरह मस्ती कर रहे है

जीविका ये बात सोचती हुई वापस अपने कक्षा में आ कर लेट गई और अपने बहु और परपोते की करतूत को समझने की कोशिश कर रही थी

{{Devrani:Nahi नहीं ये बहुत बड़ा है मैट डालो..

और देवरानी को झुका कर वो लैंड अंदर दाल देता है

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अभी लैंड आधा हे गया था क देवरानी ज़ोर से चिल्लाने लगती है

devrani:haaye मई मर्डर गयी

और वो लैंड एक और धक्का देता है और महारानी देवरानी की छूट को भेदता हुआ उसके बच्चेदानी की झिल्ली में समां जाता है

devrani:"aaaaaah नाहीईईईई मेरी छूट"

भगवन में मर्डर गयी"

और अब लैंड उसके बुर में धप धप और है है क आवाज़ से अंदर बहार होते हे जा रहा

और देवरानी ज़ोरो से सिसक रही थी अपने आखो में ासु लिए और उसके छूट से खून बह रहा था और वो मज़े से छुड़वा रही थी }}

इधर बलदेव अपने नींद पूरी कर क सब से पहले अपने माँ क कक्षा में जाता है तो उसे सिसकी की आवाज़ आती है और उसकी माँ उल्टा लेती थी

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देवरानी क दोनों हिलते चूतड़ और सिसकी सुन क फ़ौरन बलदेव का लैंड खड़ा हो जाता है ,देवरानी अपने होठ कर रही और अपने गांड ऊपर निचे कर रही थी और अपने दूध को तकिये से मसल रही थी

बलदेव को समझते देर नहीं लगती क देवरानी सपना देख रही है

Baldev:man me:thode दिन और रानी तेरी पूरी छूट की गर्मी झाड़ दूंगा

इतना पेलुँगा क तुम्हारी गांड और दूध को मसल क ढीला कर दूंगा जो पिता जी नहीं क्र सके

Baldev:man में) वो सब तो ठीक है पर ये सपने किसके देख रही उसका पता नहीं और वो चुपके से दरवाज़ा को लगा कर चला जाता है

{{ सपने में devrani:Tumne मेरी बरसो की प्यासी छूट की आग बुझा दी कौन हो तुम"

वो शाक्ष्स अपना चेहरा देवरानी को दिखता ह

Devrani:aascharya से "बलदेव" तुम}}

इतने में देवरानी की आँख खुलती है वो अपने आप को पसीने पसीने पति है और उसे अपने हालत को देखती है उसके गांड पेटीकोट साफ दिख रहे थे और ब्लाउज तो उसके दूध को संभाल पाने में नाकामयाब थे

वो झट से उठ कर बैठ टी है तो उसे निचे कुछ गीला महसूस होता है और वो अपना हाथ लगा क्र उस पानी जैसे तत्त्व को छू कर देखती है और शर्मा जाती है

devrani:hey bhagwan"baldev कैसे सपने में लैंड पेल रहा था याद आजाता है

"आज कई वर्षो बाद छूट ने पानी छोरा वो भी बेटे क सपने से"

कल की घटना को याद क्र. क

देवरानी मन me"kal तो हर कोई हम दोनों को माँ बीटा नहीं पति पत्नी हे समाज रहा था वो माझी ने तो जबरदस्ती बलदेव को मेरे साथ बैठा दया और बलदेव में भी मौक़ा देख मुझसे कितना चिपक रहा था और तो और वो. मेरे लये गीत भी गया" मांझी तो हद्द हे कर दी

जब उसने कहा

"अगले साल आप दोनों बचो क साथ aana"haaye राम तब तो मेरे छूट में चिति रेंगने लगी थी

"और निर्त्य करते हुए मेरे गांड और दूध को कैसे खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था कमीना baldev:fir पूछने पर अपनी पत्नी भी बना लय सबके सामने में"

देवरानी अपना दोनों हाथ से अपना मुँह छुपा लेती hai"kya सच में हम नवविवाहित जोड़े लगते है ,उस आदमी ने जो कहा"

"भगवन तू हे रास्ता दिखा में क्यू बलदेव को रोक नहीं प् रही हु क्यू मुझे ऐस अलग रहा है क वो मेरी हर एक ख़ुशी का ख्याल रख रहा है"

देवरानी अपने आपको सम्भालतेहुए उठ क कड़ी होती और स्नान घर में जाने हे वाली थी क उसे अपने दरवाज़े और खिड़किया बंद दीखते है जो क वो रात में खोल क्र सोई थी

Devrani:aakhir कौन आया था इधर और बंद क्र क गया और आया था तो उसने मेरी हालत को देख समझ हे गया होगा ,,,है राम में तो दिन बा दिन पागल होते जा रही हु

वो स्नान घर जा क्र तैयार होती है और महल से बहार निकलती है तो सामने मैदान में बलदेव अपने कसरती बदन से व्यायाम करते हुए नज़र अत है

देवरानी उसके तरफ बढ़ कर

उसके कसरती बदन को निहारते हुए

Devrani:man में) क्या बदन है इस घोड़े का

किसी भी घोड़ी को पास्ट कर दे ये

Baldev:man में) घर ऐसे रही है जैसे अभी आ कर छुड़वा हे लेगी सपने में तो नहीं घूम रही

Devrani:ary बीटा आज बड़ा सवेरे उठ गए

baldev:haan माँ वो पिता जी का सन्देश आया है क सैनिक बल तैयार करे कभी भी ज़रूरत पद सकती है

देवरानी राजपाल का सुन कर अपना मुँह घुमा कर चुप चाप हो जाती

बलदेव को समझते देर नहीं लगती क ये देवरानी की नफरत थी जो देवरानी अपने पति का नाम भी सुन न पसंद नहीं था

baldev:muskura कर आर्य माँ में कौन सा युधा करने जा रहा हु और वैसे भी वैध जी मझे आयुर्वेदिक जड़ी बूटी डाई है खाने क लये जिसके साथ वयवम काढ़ना उचित है नहीं तो जड़ी बूटी किसी काम का नहीं

devrani:hmm ठीक है

बलदेव अपने माँ क उतरा चेहरा देख कर झट से उसका हाथ पाकर क्र खींचता है

baldev:aao साथ में व्यायाम करे

और देवरानी को अपने आगे ले लेता है

बलदेव का लौरा जो पहले से थोड़ा तन गया था अब अपने माँ क चुतर पर रगड़ रहा था और देवरानी का मुँह खुल जाता है लौड़े क गांड पे अहसास भर से

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Baldev:aap मेरे साथ दंड करे

devrani:par मुझे नहीं अत ये सब में तो बास योग करती हु

baldev:dekho आप को मेरे साथ करना है

देवरानी का हाथ आपने हाथ से पाकर कर

baldev:ab जैसे में बैठु मेरे साथ बैठना है और जैसे में बैठ क उठु तो आपको भी उतना है

देवरानी से अब बलदेव और चिपक जाता है फिर बलदेव और देवरानी एक साथ बैठ ते है और जैसे हे बलदेव फिर खड़ा होता देवरानी थोड़ा देरी से कड़ी होती इस से बलदेव झट से देवरानी का दोनों हाथ पाकर कर अपने लौड़े क बल देवरानी क गांड पे देता है

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देवरानी क गांड में लौड़ा लगता है और उसके ताक़त से देवरानी सीधा थोड़ा ऊपर उठ जाती है एक पल क लये तो देवरानी को लगता है जैसे वो लौड़े पे हे अपने गांड टिकाये हवे में बैठी है

फिर देवरानी और बलदेव ऐसे हे करके उठक बैठक करने लगते है

devrani:tum आज जल्दी उठे मुझे उठाते नहीं

baldev:me आपके कक्षा में गया था पर..

देवरानी को समझते देर नहीं लगती क वो दरवाज़ा और खिड़की बंद करने वाला कोई और नहीं बलदेव हे रहा

devrani:par क्या?

Baldev:aap बहुत नींद में थी तो में वापस aagaya(asal बात छुपा लेता है)

Devrani:sharm से मुस्कुरा रही थी. क कैसे उसके पुत्र ने उसकी सीस्की क साथ उसके आधी नग्न अवस्था में देख लय

देवरानी :मन में) और इस उल्लू को नहीं पता जो मुझे सपने में पेल रहा था वही मुझे हकीकत में देख रहा था

दोनों कुछ 20 बार उठक बैठक कर थक जाते है और जलपान करने वापस महल में आते है.
 
अपडेट 24

देवरानी क गांड पर दबते लैंड उसके छूट क लैब खोल क्र पानी उढेल दया था जिसकी भनक लगते हे देवरानी अपने बेटे क साथ उठक बैठक का खेल रोक कर अपने कक्षा में चली आई

Devrani:man में ) हे राम में क्या करू इस निगोड़ी का जब देखो तब पानी छोर देती है

और छोरे भी क्यू न? अगर कोई दिन रत इसे ुस्कायेगा तो यही हल होगा इसका

रात में सपने में परेशां क्या बलदेव ने और दिन में रगड़ क पानी पानी कर दया

क्या करू इस लड़के का ?

तभी वो एक कपडा उठा क अपने छूट का पानी साफ करती है फिर से अपनी सदी निचे कर रसोई क तरफ आती है और खाने की तैयारी करने लगती है

देवरानी इतनी खुश आज थी इस से पहले कभी नहीं हुई और इस ख़ुशी की वजह बलदेव था

Devrani:man me)aaj तो में बलदेव क लये खुद से उसके पसंद क भोजन बनाउंगी नार कुछ सब्जी ले कर रसोई में काटने लगती. है

तभी वह कमला आ जाती है और देवरानी को ऐसे दिल से काम करता देख

kamla:man me)aaj पहली बार 18 साल में इसे एक बहु की तरह डिल से खाना बनाते देखि हु

kamla:mahrani आप रहने दीजिये में क्र लुंगी

devrani:nahi कोई बात नहीं ये घर तो मेरा भी तो है

kamla:man में) इतने सालो से तेरा घर नहीं था आज कौन पेल दया तुझे जो एक पेले पर सावित्री बहु की तरह खुश हो कर अपना घहर बना लय

devrani:aaj मटर पनीर बना रही हु

Kamla:kis ख़ुशी में

devrani:wo बलदेव को बहुत पसंद है न

kamla:man में) ू तो ये बात है बलदेव हे है इसके ख़ुशी का राज़ पर वैसे मेरा भी डिल रोने को ाअरहा है जो प्यार इसे 18 वर्ष पूर्व मिलना चाहिए था अब उसे मिल रहा है

kamla:maharani में आती हु बहार से कुछ और सब्जिआ ले कर

devrani:theek है jao(muskurate हुए)

कमला निकल जाती है महल से और सोचती है " अभी पेले नहीं हुई तो ये आलम कास क पेल देगा बलदेव तो पूरा महल हाथो पे उठा लेगी"

इधर बलदेव भी अपना व्यायाम कर क स्नान करने जाता है उसके मन में बार बार आज की घटना याद आ रही थी कैसे वो देवरानी को पाकर क उठक बैठक क्या और खूब मसला था पर देवरानी ने उसे कुछ कहा नहीं उल्टा खुश थी

ये सब बाते सोचते हुए क उसे आगे बढ़ना चाहिए बलदेव स्नान कर क अपने कक्षा से निचे उतरता है और उसे चूड़ी की और थक थक की आवाज़ आरही थी

वो रसोई क तरफ देखता है तो देवरानी सब्ज़ी काट रही थी



देवरानी क सुन्दर गांड क दोनों पैट बरी बरी से हिलते जब भी वो सब्ज़ी काट टी जिसे देख

baldev:man me)hey भगवन माँ एक तरफ छुरी से सब्ज़ी काट रही है और इसके ख़रबूज़े ने मेरा डिल छल्ली छल्ली कर दया

"क्या खूबसूरत लग रही है काले घने बाल उसके निचे इतने सुन्दर पीठ और उसके निचे लरजते गांड ,मोती झांग देख तो डिल करता है दबोच लू सुन्दर गोर पेअर"

तभी देवरानी आहात सुन कर पलट टी है

devrani:baldev आगये तुम यहाँ बैठो में खाना बना रही हु

पलट क्र मुस्कुरा कर देखती हुई क़ातिल अंदाज़ में दक्खने से बलदेव अब पूरा घायल हो जाता है

baldev:man में) कितने सुन्दर आखे है झील se,teekhe नाक और भरे गोल गाल को तो काट लू अपने दांतो से निशान बना दू होठ जैसे गुलाब की पंखुरिअ हो निचे वक्ष क क्या कहने ,पुरे गहतराष्ट्रा में न है इतने बड़े और उसके निचे पतली कमर

baldev:man me)sindur और मंगलसूत्र तो और चार चाँद लगते है तुम पे माँ

देवरानी ऐसे बेटे को खोये हुए देख अपने सर को झुका कर अपने पेअर क तरफ देखने लगती है और अपने अंगूठे से जमीन कुरेदने लगती है

बलदेव होश में आते हुए "माँ आज पहली बार खाना बना रही हो "

devrani:man में )इसकी वजह तो तुम हे हो इतना खुश रखते हो मझे क में यहाँ आगे

devrani:beta आज में पहली बार नहीं बना रही हु जब तुम छोटे थे तो में तुम्हारे लिए पकवान बना क्र खिलाती थी

baldev:han माँ मुझे अब भी याद है क आप मुझे किसी और का बना हुआ खाना नहीं देती थी

Devrani:chahakta हुए फिर सब्ज़ी काटने लगती है और उसके दूध अब हिल रहे रहे "तुम्हे याद है बीटा "

baldev:doodh को देखते हुए "हाँ माँ मुझे याद है"

इतने में सब्ज़ी काट रही देवरानी की नज़र अपने बेटे क नज़र पे जाती है जो उसके हिलते दूध को देख रहा था और ध्यान भटकने से उसकी छुरी सब्ज़ी क उसके ऊँगली पर भी वॉर कर देती है

जिस से देवरानी चिहुँक उठ टी है दर्द से

devrani:aakh बंद क्र क अपने ऊँगली पाकर लेती है "आआह"

बलदेव ये देख कर झट से अपनी माँ का ऊँगली पकार्टा है और अपने माँ को दर्द में देख वो उसका ऊँगली ले कर अपने मुँह में रख लेता है



देवरानी की पहले से आँख बंद और ज़ोर से बंद हो जाती है क बलदेव ने उसकी ऊँगली अपने मुँह में ले लय है

बलदेव अब ऊँगली को ले कर उसके मुँह में रख ज़ुबान से छूटा है और चूसने लगता है

देवरानी सिसक उठ टी है और बलदेव उसके ऊँगली पीये जा रहा था ,देवरानी इस से गरम हो जाती है और बलदेव क और करीब आ जाती है

कुछ एक मिंट चूसने क बाद देवरानी अपने आँख खोलती है

Devrani:Baldev..beta बस्स्स अब मझे दर्द नहीं कर रहा

बलदेव भी होश में अत है और

baldev:maa मुझे क्षमा कर दो

Devrani:kshama किस बात की

Baldev:wo आपकी आज्ञा क बिना आपके ऊँगली

Devrani:man में ) कितना शिष्टाचारी है बलदेव कितना सम्मान करता है मेरी

devrani:beta तुमने वही किया जो एक युवराज अपने माँ को दर्द में देख करता ,और उल्टा मुझे तुम्हे धन्यवाद् करना चाहिए क तुम मुझे दर्द में देख कुछ भी करने को तैयार रहते हो

Baldev:haan माँ में तुम्हे दर्द में देख नहीं सकता और तुम्हारे लिए में पूरी दुन्या से लड़ सकता हु

ये बात सुन कर देवरानी क आखो में ासु छलक आते है और वो बलदेव से हलके से अपना सर उसके सर पर. रख

Devrani:ab तू जा मुझे काम करने दे

बलदेव मुस्कुराता हुआ वह से चला जाता है

भोजन का समय होता है और कमला और राधा सबका भोजन लगा देती है सब भोजन कर क चले जाते है

Shurusti:radha तुम मेरे कक्षा में आना काम ख़त्म कर क

थोड़ी देर बाद षुरूश्ती की दासी राधा अपना काम ख़तम कर क महरानी षुरूश्ती क कक्षा में जाती है जहा वो देखती है क वो गहरी सोच में डूबी थी

Radha:Ji महरानी

Shurushti:Radha आज कल इस देवरानी को क्या हुआ है ज़रूरत से ज़्यादा प्रसन्न रहती है

राधा :हाँ महरानी आज कल खुश होती है वो

Shurushti:wo तो हमे भी पता है पर इसकी वजह क्या हो सकती है

radha:shayd महाराज नहीं है इसलिए

shurushti:nahi nahi..aaj मैंने उसे काम से काम 15 वर्षो बाद खुद से खाना बनाते हुए देखा और आज कल वो हमेशा चहकती रहती hai,me चाहती हु

...

radha:kya महारानी षुरूश्ती

Shurushti:tum इस बात का पता करो

radha:theek है

shurshti:suno अगर तुमने ये जानकारी निकल ली तो तुम्हे हम इनाम देंगे

राधा खुश हो कर चली जाती है

इधर कमला सबको खाना खिलने क बाद अपने भरी गांड मटकाये अपना और वैध जी का खाना ले कर वैध जी क पास आ जाती है

दरवाज़ा बंद होने पर ठोकती है "वैध जी"

"ो वैध जी"

वैध जी फिर दरवाज़ा खोलते है

Kamla:lagta है फिर से तेल लगा रहे थे और घर में प्रवेश करती है



कमला क चुके ब्लाउज से झक रहे थे जिसे देख वैध जी अपने होठ पर जबान फेरता है

vaidh:darwaza तो लगा दो

Kamla:q में तुम्हारी पत्नी हु जो दरवाज़ा लागू में सिर्फ खाना देने आई हु

ये कह कर कमला दरवाज़ा लगा देती है

कही न कही कमला क छूट भी खुजली कर रही थी पर वो झूठे नखरे ाचा करना जानती थी

Kamla:chup चाप खाना खाओ

और वो निचे बैठ क खाना लगाने लगती है

वैध ji:patni होती तो दरवाज़ा भी नहीं लगवाता तुमसे तब तो डरता हे नहीं किसी से

और कमला का ये बात सुन कर दूध फूलने लगता है जिसे वैध की नज़र से बचाना मुश्किल था



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खाने लगते हुए कमला क दूध को बड़े गौर से घर रहा था

kamla:me एक विधवा हु अब में कैसे पत्नी बन सकती हु ये समाज तो मुझे ज़िंदा जला dega(mayusi छ जाती है )

Vaidh:kamla तुम कहो तो में विवाह कर लू तुमसे

कमला है कर "बूढ़े अपनी आयु देखि है"

Vaidha:aayu तो 60 क ऊपर है में मंटा हु पर तुमने मेरा लिंग देखा है

ये बात सुन कर कमला शर्मा जाती है

kamla:gande हो

vaidh:ab अपनी उस योनि से पूछो क में कितना जवान हु

kamla:chup करो अब खाना खाओ

दोनों बैठ क खाने लगते है

vaidh:khana आज का स्वादिष्ट है बहुत और अलग है रोज़ से

Kamla:han आज महरानी देवरानी ने जो बनाया है

vaidh:hmm आज किस ख़ुशी में

kamla:man में) अब तुम्हे क्या बताऊ वो अपने बेटे क प्यार पे पड़ने वाली है

Kamla:wo बास अपने बेटे क लिए हे बनाई थी

vaidh:hmm वैसे युवराज को ाचा खाने की आवश्यकता है

kamla:sabko नहीं है? उसको क्यू

vaidh:me उसे हिमालयन की सबसे उत्तम जड़ी बूटी दे रहा हु

kamla:kis लिए

vaidh:q क वो एक जवान है और उसके कद काठी क हिसाब से उसे ज़्यादा पौष्टिक आहार चाहिए जिसकी पूर्ति सिर्फ भोजन से नहीं हो सकती

kamla:aisa और क्या फायदा है उस से

vaidh:use में शिलाजीत जो में खुद हिमालय से लाया था दे रहा हु कुछ और जड़ी मिला कर

kamla:us से क्या होगा

vaidh:haste हुए "उस से उसका अंग अंग जो घोड़े जैसा मजबूत पहले से है वो 10 घोड़े क बराबर मजबूत हो जायेगा और उसका लिंग भी लम्बा और मोटा हो जायेगा"

Kamla:chhi वैध तुम भी न

vaidh:tumhe क्या पता एक राजा को इतना मजबूत होना पड़ता है क वो युधा भी कर सके और युधा से आ कर अपने राणिओ को खुश भी कर सके

kamla:islye राजा इतनी रनिया रखते है

vaidh:han पर हर राजा इतना चतुर नहीं क वो हर रानी की इच्छा पूर्ण कर दे और शिलाजीत तो वरदान है जिसके बारे में सबको नहीं पता और न हे वो सबके हाथ आता है

kamla:itna ताक़तवर है क्या वो तो तुम भी खाओ

vaidh:meri आयु ज़्यादा हो गई इसलिए में उतनी मात्रा में नहीं ले सकता जितना मात्रा में बलदेव खता है और खाने क पश्चात हमे भोजन और वयं भी करना होता है दत्त कर

kamla:to बलदेव तो दस घोड़े क बराबर हो जायेगा तो (कमला ये सोचती है क देवरानी का क्या हाल होगा फिर)

उसका लिंग तो कोई और नहीं ले सकती घोड़ी क अलावा

vaidh:uske साथ जो सहवास करेगी वो जेते जी स्वर्ग अनुभव karegi,jo स्त्री योग करती है कद काठी सही है और सेहत क लये जड़ी बूटी लेती है उसके साथ हे सम्भोग करना उचित होगा बलदेव का किसी साधारण स्त्री में प्रवेश करते हे स्त्री बेहोश हो सकती है

kamla:man में) हाय राम कोई सदाहरण स्त्री तो मर जाएगी fir,acha हुआ बलदेव अपने माँ क पीछे है वही योग और जड़ी बूटी लेती है और कद काठी ुचि है

vaidh:uske लिंग कुछ समय में इतने मज़बूत हो जायेंगे क वो असली घोड़ी को भी पेल दया तो वो भी हेहयाने लगेगी

Kamla:fir तो वो गुदा मैथुन कर हे नहीं सकता

vaidh:tumhe बहुत पता है

kamla:aakhir में वैध की आधी पत्नी जो हु और आँख मरती है

vaidh:han कमला भले से स्त्री कितने भी मजबूत हो पर अगर पीछे से प्रवेश कर दया बलदेव ने तो उस स्त्री की पूछ की हड्डी खिसक या टूट सकती है

दोनों बात हे कर रहे थे क कमला क कानो में आवाज़ पायल क बजने की आती है और वो वैध को चुप होने का इशारा करती है और वो उठ कर दरवाज़ा खोल देखती है तो उसे कोई नहीं दीखता है फिर से वो दरवाज़ा बंद कर क वैध जी क पास अति है

वैध जी को देख वो चौक जाती है क्यू क वो अभी अपना लैंड खोल कर बिस्तर पर बैठे थे और मुस्कुरा रहे थे

Vaidh:hath धो कर आ जाओ

कमला जा कर अपना हाथ धो कर पोछती है और अपना ब्लाउज का बटन खोलती है

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वैध कमला क दूध देख कर अपने लैंड पर तेज़ी से हाथ ऊपर निचे करना शुरू कर देता है.

कमला ब्लाउज खोल कर वैध जी क पास बिस्तर में आ जाती है और वैध का लैंड पाकर लेती है और हिलने लगती है

वैध अपना आँख बंद कर मज़े ले रहा था

अब वैध एक हाथ बढ़ा कर कमला क एक दूध को पाकर क्र सहलाने लगता है और दूसरे हाथ से सिर्फ परिकते में बैठो कमला को अपने लैंड पर बिठा लेता है और फिर उसके होठो को अपने होठो से लगाए चुसना शुरू कर देता है और निचे अपने दोनों हाथो से खूब कास कास क दूध को दबाता है

कमला आँख बंद कए सिसक रही थी और अपने गांड को वैध क लौड़े पे गोल गोल घुमा रही थी

Kamla:"aaaah वैध जी"

Vaidh:tere ये दूध जी करता है तुझे में माँ बना दू और तेरे दूध इसमें भर जाये तो में निचोड़ो

kamla:hay दय्या ये समाज हमे मार देगा

vaidh:tumahre बचे तो तम्हे छोर कर चले गए

और अपना हाथ कमला क गांड पर रख कर दबाता है

kamla:aaaah वैध जी

वैध :तुम्हे एक बचा दे दूंगा तो तम्हारा मन भी लगा रहेगा

ये कह वैध जी कमला को अपने ऊपर से खींच निचे ले लेता है और उसके पेटीकोट को एक झटके में उतर फेकता है और अपना पूरा बदन कमला बदन से रगड़ने लगता है

kamla:aah दय्या में मर्डर गई

वैध अपना लिंग को उसके छूट पर हलके से दो बार रगड़त है और एक झटके से पेल देता है

कमला अपनी आखे भींच लेती है



"आआह वैध जी" "बास वैध जी"

vaidh:"or ले ये मेरी रानी "

"घप्प घप्प" की शोर में भरी दोपहर में वैध कमला की छूट मर रहा था

दस मिंट की चुदाई क बाद वैध अपना वीर्य कमला क छूट में हे छोर देता है और निढाल हो जाता है



वैध जी हफ्ता हुआ दूसरी और अब लेट जाता है

kamla:vaidh तूने अंदर पानी क्यू छोरा

(गुस्से में)

वैध: घबराओ नहीं रानी तुम गर्भवती नहीं होगी

kamla:agar हो गई तो

वैध पास रखे एक कटोरे से एक जड़ी निकल कर कमला को देता है इसका सेवन करो हर दस दिन में एक बार गर्भ नहीं ठहरेगा

कमला वो जड़ी ले क्र खा लेती है और अपने ब्लाउज सदी पहन कर तैयार हो कर अपना पोटला उठा कर जाने लगती है

vaidh:suno अगर गर्भवती हो भी गई तो में पिता बनने तैयार हु

ये सुन कर कमला

kamla:chal हट बूढ़े..

मुस्कुराती हुई अपने गांड मस्ती में मटकते वापस चली जाती है

भोजन क बाद बलदेव और देवरानी अपने अपने कक्षा में आराम कर रहे होते संध्या 5 बजे उठ कर देवरानी उठ कर योग करती है फिर जा कर स्नान कर सदी बदल लेती है

कमला काळा सदी में बाला की खूबसूरत लग रही थी फिर वो बलदेव को खोजने निकल जाती है बलदेव भी तैयार हो कर अपने मंत्री क साथ बैठ कर किसी योजना पर काम कर रहा था और मंत्री उसे गहतराष्ट्रा क भूगोल की जानकारी देते हुए आक्रमण करने की नीति समझा रहे थे

देवरानी उसे निहारते हुए "बलदेव"

बलदेव उसे देख कर खुश हो जाता है और वो मंत्री को "मंत्री जी आप से हम बाद में बात करेंगे"

ये सुन कर मंत्री "जो आज्ञा maharaj"waha से चला जाता है

बलदेव अपनी माँ को देखता है

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उसकी माँ एक काळा सदी में लिपटी थी और उसके पतले से सदी से उसके झाकते हुए दूध साफ़ दिख रहे थे जिसे देख बलदेव की आँख जैम जाती है

kamla:man me)dekh ले मेरे बचे मेने तेरे लिए हे सजती सवारती हु ,और आज कैसे तूने मेरे आने से मंत्री को भगा दया कितना ख्याल है मेरा तुझे

Baldev:aao माँ

उधर क्यू कड़ी हो

Devrani:beta ये सब युधा यन्त्र षड़यंत्र से तुम्हारा मन नहीं भरता थकते नहीं हो

baldev:ye सब एक राजा की ज़िम्मेदारी होती है भला इस से कैसे कोई राजा बच सकता है

devrani:kya राजा की ज़िम्मेदारी बास युधा करना और दुसरो पर विजयी होना होता है उसके लिए उसका परिवार कुछ नहीं

Baldev:nahi माँ युधा तभी की जाती जब उसके परिवार की रक्षा करनी हो और कुछ राजा लोभी होते है जो जीवन भर अपने राज्य को बढ़ने में लगे होते है और अपने परिवार को भूल जाते है

devrani:tum कितने बुद्धिमान हो

baldev:dhanywad पर बीटा तो आपका हे हु

और में अपने परिवार को पहले प्राथिमिकता देता हु जो क छोटे से जीवन में हमारे साथ होते है

Devrani:mazak करते हु "पर तुम तो दिन भर यहाँ व्यस्था थे युधा की षड़यंत्र करते हुए मेरे पास तो आये हे नहीं

baldev:maa तो ये बात है तो चलो हम कही चलते है

Devrani:kaha जायेंगे बीटा को तो बास युधा सीखना है

baldev:maa तुम से बढ़ कर मेरे लये राज पैट नहीं में तो तुम्हारे लिए राज्य भी छोर सकता हु

देवरानी ये सुन कर खुश हो जाती है

devrani:baldev बूम बाग़ में चलते है और वह हम आम देखेंगे

baldev:theek है तो चलो

और दोनों महल से निकल कर अपने बगीचे की तरफ चल देते है जहा पर बहुत से आम क पेड़ थे

आम क पेड़ देख और उसपे लेट कही पर हरे और कही पर पीले आम देख देवरानी ऐसे आम का पेड़ का चुनाव करने लगती है जिसपे सबसे अचे आम हो और वो बलदेव क आगे चल रही थी

devrani:me देखती हु कौन से अचे है



बलदेव की माँ ऊपर आम निहार रही थी और बलदेव निचे उसके गांड तार रहा था उसके कैसे हुए गांड को देख अचानक से बलदेव क मुँह से निकल जाता है

baldev:kya तरबूज है

ये सुन कर देवरानी समझ जाती है क बलदेव उसके पीछे खड़ा है और क्या देख रहा है

devrani:beta यहाँ तरबूज़ नहीं आम है

baldev:han वो उस तरफ तरबूज़ है

devrani:man me)mujhe पता है तुम मेरी गांड को कहा है ,इतने पसंद है तुम्हे ये बलदेव और तरबूज़ तो नहीं है ये बलदेव)

देवरानी मुस्कुरा देती है

Devrani:ye कैसे आम लगे ये दसहरी है

और देवरानी मुड़ती है

देवरानी क मुड़ने से उसके बदन पर से पतला सदी का पल्लू सरकता जाता है और उसका दूध सीधा. बलदेव क सामने आ जाते है



बलदेव देखता है उसके माँ क भरी भरकम दूध उसके ब्लाउज में समां नहीं रहे रहे वो बास उसे देखे जा रहा था

devrani:kaise लगे दसहरी आम

baldev:maa बहुत हे मस्त है बड़े बड़े इन्हे में तो चूस चूस कर खाऊंगा

देवरानी आम में इतना खोयी थी क वो अपने सदी क पल्लू का फ़िक्र हे नहीं था वो जब बलदेव की ये बात सुनती है तो उसका धयान अपने दूध पर जाता है और शर्मा कर अपने दूध को पल्लू से धक् लेती है

devrani:kya इस पेड़ पर से हम आम तुड़वा ले

baldev:han माँ इस पेड़ पे जितने बड़े आम है उतने बड़े मैंने कही नहीं dekhe(baldev अपने माँ को वक्ष को खा जाने वाली नज़र से देखता है)

देवरानी को भी शरारत सूझती है

Devrani:par इस आम को खाने की ीचा तो सब करते है पर खाने की कला सब में नहीं

Baldev:is आम को सिर्फ खूब दबा दबा क इसके ऊपर से पहले इसका दूध निकल कर जो चूसने में में मज़ा है वो किसी और में नहीं

devrani:to तुम्हे पता है इसे कैसे चूसा जाता है और (हल्का शर्मा जाती है)

baldev:han माँ

devrani:par इसे पाना आसान नहीं बालक बड़ी ुचे पेड़ है बड़ी कठिनाई से टूट ते है

Baldev:me भी कोई छोटा बचा नहीं माँ इतने ुचे पेड़ क बड़े आम मुझ जैसा ुचा हाथ कथा क लये हे है मुझे पसंद है और कैसे तोड़ने है मुझे पता है ,बलदेव कभी कठिनाई से नहीं भागता

देवरानी ये बात सुन अपने एक ऊँगली अपने मुँह में दबा लेती है

और बलदेव झट से आम क पेड़ पर चढ़ कर. दो पके हुए आम निचे गिरा देता है

उसके फुर्ती और पेड़ पर चढ़ने की शैली से देवरानी बहुत प्रभावित होती है और वो निचे गिरे दोनों आम जो काफी बड़े थे अपने दोनों हाथो से उठाने क लिए झुकती है और जैसे हे उठ टी है उसके दोनों हाथो में आम थे पर उसका पल्लू इस बार पूरा गिर जाता है



बलदेव पेड़ पे चढ़ा था माँ को झुक क्र आम उठाते हुए देखता है और जैसे हे पल्लू गिरता है उसका लौड़ा खड़ा हो जाता है उसके माँ की दूध क साथ गहरी नाभि और मसल पेट देख कर

देवरानी दोनों हाथ में आम लिए कड़ी रहती है और उसका बीटा उसे देख अपने आखे सीख रहा था

देवरानी को समझ नहीं आरहा था वो क्या kare.baldev झट से पेड़ से निचे उतरता है और अपने की स्थिति पर मुस्कुराते हुए उसके पास जा कर

बलदेव दोनों हाथो में रखे आम को अपने हाथ से पाकर कर देवरानी क आखो में देख कर कहता है

"माँ क्या बड़े और पके आम है"

देवरानी अपना सर निचे कर लेती है

और लज्जा कर अंदर हे अंदर मुस्कुरा रही थी

बलदेव उसके हाथो से आम ले कर एक कपडे में बांध लेता hai,tab तक देवरानी अपना पल्लू ठीक करती है

baldev:maa तुम्हे बाग़ से कोई और फल चाहिए

Devrani:fal तो नहीं पर मुझे गणना पसंद है पर

और वो शरारत भरी मुस्कान देती है

Baldev:par क्या माँ

Devrani:samay ज़्यादा हो गया ,और तुम भी तो तरबूज़ देखे थे

baldev:han वो उस तरफ है

Devrani:shararati मुस्कान se)par वो आम नहीं झट से टूट जाये तुम से उसके खुदाई क लये अभ्यास होनी चाहिए तभी तरबूज़ा हाथ आएगा नहीं तो थक जाओगे कुछ नहीं मिलेगा

Baldev:han पर भले हे मुझे इसका अभ्यास नहीं पर में जी जान से म्हणत करूँगा और तरबूज़ा निकल कर तोड़ क्र उसका रास पीऊंगा

(बलदेव उसके आखो में देख कहता है

देवरानी ये सुन कर अपने दुबका लेती है

मन me"hey भगवन ये तो मेरी गांड फोड़ने की बात करहा है"

devrani:par बलदेव खोदोगे कैसे

baldev:aapko गणना पसंद है न हम पास वाले खेत से ाचा मोटा और लम्बा गणना ले आएंगे और फिर तरबूज़े क लये खुदाई करेंगे

devrani:soch में पर kar"pr इतना मज़बूत और मोटा और लम्बा गणना कहा मिलेगा जिस से हम तरबूज़े खोद सके"

baldev:maine देखा है माँ ऐसा गणना जो ज़मीन को खोदने वाली लोहे की खांटी सा है

ये सुन कर देवरानी की छूट में चींटी रेंग रही थी

devrani:par कही गणना टूट गया तो खुदाई अधूरी रह जाएगी

baldev:mujhe अश्त्र शाश्त्र का ज्ञान है वो गणना उस तरबूज़ को अचे से फोड़ सकता है

devrani:muskurate हुए )इतना भरोसा है

baldev:han पूरा भरोसा और बीच में खुदाई नहीं रुकेगी माँ (और माँ क आखो में देखता है जिसमे एक चिंगारी दिखती है)

baldev:to चलो माँ हम चलते है पहले गन्ने लेने

देवरानी कुछ सोच कर घबरा जाती है अंदर से. और कहती है

"बीटा किसी और दिन तुम उस गन्ने से तरबूज़े खोद क क फिर फोड़ कर खा लेना अभी हम चलते है"

दोनों एक एक हाथ में आम लिए चूसते हुए महल की ओरे बढ़ रहे

कभी बलदेव आम माँ को देख क्र चुस्त तो कभी देवरानी ऐसा करती और दोनों एक दूसरे हसी मज़ाक करते हुए महल वापस आ जाते है.
 
अपडेट 25

महल वापस आ कर बलदेव अपने मंत्री क साथ बात करने लगता है और देवरानी अपने कक्षा में आ कर उल्टा लेट जाती है

देवरानी का रोम रोम आग में जल रहा था और डिल में बेहद ख़ुशी थी पर उसे समझ नहीं आ रहा था क इसे वो वासना समझे या प्रेम ,बलदेव उसे दिन बा दिन अपनी ओरे खींचे जा रहा था और वो भी न चाहते हुए खींची जा रही थी.

पलंग पर लेते हुए देवरानी सोच रही थी "हे राम में ये किस दुविधा में पद गई हु एक तरफ मेरा बीटा है जो मुझे हर तरह से खुश रखता है और शायद अंदर हे अंदर मुझे एक स्त्री क रूप में देखने लगा है और दूसरी तरफ मेरा दीवाना शेर सिंह जो मुझे अपनी रानी बना न चाहता है"

"अगर में शेर सिंह क साथ चली जाती हु तो पुरे राज्य में लोग क्या कहेंगे राज परिवार की क्या इज़्ज़त रह जाएगी और तो और मुझे अपने बेटे से भी जीवन भर क लये दूरी बन जाएगी और वो भी मुझसे घृणा karega,par में अपने बेटे बलदेव क वजह से तो आज जीवित हु मेरे पास जब जीने का कोई वजह नहीं था तो वो मेरे जीवन में आ कर एक नै दिशा दी उसे भला में कैसे छोर सकती हु सिर्फ अपनी शरीर की प्यास बुझाने क लये "

"और दूसरी तरफ अगर में शेर सिंह क साथ नहीं जाती हु तो कही बलदेव और मेरे बीच कुछ उच्च नीच न हो जाये जिस तरह से वो मेरे पीछे पड़ा है और जितना मेरे डिल में उसके लये स्नेह है कही में उसे रोक न पाई तो अनर्थ हो जायेगा और में अधर्मी ,ये समाज क लोग तो मुझे और मेरे बलदेव को भी मार देंगे तो क्या में बलदेव क मरने की वजह बनु?"

देवरानी उठ कर अपने कक्षा में हे बने मंदिर क पास घुटने क बल बैठ जाती है

Devrani:bhagwan मुझे शक्ति दे क में इस प्रस्थिति से निकल सकू में दस दिन का व्रत रखूंगी अगर में इस मुश्किल से निकल गई और मेरे जान सम्मान और मेरे पुत्र बलदेव की जान और सम्मान बची रहे,

और में अपने जीवन भर किसी गरीब को अपने दरवाज़े से खली हाथ नहीं भेजूंगी हर एक गरीब मजबूर का सहारा बनूँगी

"पर कुछ ऐसा कर भगवन क बलदेव और मेरे सम्मान और जान को क्षति नहीं पहुंचे और मेरी हर मनोकामना पूरी हो और मेरे पुत्र की भी"

वो उठ कर छोटा सा घंटी बजती है जो वही रखा था और फिर अपने आखो से ासु पॉच कर मुँह धो कर भोजन की तैयारी में जुट जाती है

रसोई में कमला और देवरानी काम में लगे थे

kamla:ye राधा कभी काम नहीं करती रसोई में

Devrani:chhoro वो महारानी षुरूश्ती की दासी है हमे क्या

kamla:hmm हम हे ज़िम्मेदार है सबके भोजन समय पर देने का

devrani:chhor न

कमला देवरानी का मन भाप कर

Kamla:aaj आप उदास हो

किसी बात की चिंता खाये जा रही है आपको

devrani:kamla तुम्हे तो पता हे है क आज क बाद सिर्फ 4 दिन बाकी है मेरे और शेर सिंह क मिलने क लये

kamla:han मुझे पता है

देवरानी: में क्या करू मुझे समझ नहीं आरहा क्या करू

kamla:aap अपने डिल पे हाथ रख क्र सोचो और जो आपका डिल करे वही करो

devrani:agar डिल कुछ ऐसा कहता हो जिसे समाज और धर्म कभी स्वीकार नहीं सकता तो

kamla:acha तो ये बात hai,mahrani आपको पता है में एक सटी हु और मेरा कोई हके नहीं क में अपने जिस्म की प्यास बुझाउ प्रेम पाव

devrani:han

kamla:par मेरा डिल नहीं मन और मेरा डिल नहीं मन और में उस वैध क गॉड में जा baithi,apne धर्म और समाज क विरुद्धा क्यू क समाज को मेरे डिल का अहसास नहीं पता

अब में खूब मज़े कर रही हु और खुश हु किसी को पता नहीं चला पर जिस दिन पता चला उस दिन क लये भी में और वैध जी तैयार है हम समाज क सामने झुकेंगे नहीं

अब हम स्त्रीयो को लड़ना होगा अपने हके क लये अपनी ख़ुशी क लये अपने हिस्से क लये तब हम इस समाज और इनकी पुराणी परंपरा जिसमे लोग खून क ासु रो क्र अपनी जिज्ञासा भुला कर मर जाते है

devrani:parr

kamla:mahrani आप तो खुद रानी हो आपको भला में कैसे लड़ना सीखा सकती हु पर अगर आपको कुछ पाना है तो लड़ना padega,apni ख़ुशी क लिए

devrani:shayad तुम सही कह रही हो

kamla:han ये अनैतिक कहेंगे ,आप अपने इच्छा को देखना

ये अधर्मी कहेंगे

आप अपने ख़ुशी को देखना

Devrani:man में) बात तो ये सही कह रही है ऐसे समाज और उसकी नैतिकता का क्या जिसमे हम स्त्री खुश नहीं रह सकते

खाना बनाने क बाद सब भोजन करते है और बारी बारी से सब अपने कक्षा में जा कर सो जाते है

देवरानी क ायखो से नींद कोसो दूर थी वो कुर्सी पर बैठे थी और कमला की कही हुई बातो को सोचे जा रही थी

बलदेव देवरानी क कक्षा पे आ कर खटखटा ता है "माँ क्या तुम हो"

देवरानी झट से उठ कर दरवाज़े पे जा कर दरवाज़ा खोलती है और बलदेव अंदर ाआजाता है

Devrani:itne देर रत गए यहाँ

baldev:bass अआप को खाने क समय चिंतित देख क्र आप से पूछने आगया

devani:acha

baldev:abhi तक आप सोये नहीं आधी रात हो गयी मुझे लगा था क आप सो गए हो

devrani:nahi बीटा बास आज नींद नहीं आरही

baldev:kya सोच रही मेरी प्यारी माँ जो उसे नींद नहीं आरही

devrani:bass कभी कभी ये कक्षा खाने को दौड़ता hai.jab तुम छोटे थे तो यही मेरे साथ होते थे ,जैसे हे तुम 7 वर्ष क हुए तुम्हे मुझसे अलग कर दया गया

Baldev:to माँ को अकेलापन महसूस हो रहा है

"आओ मेरा हाथ pakdo"or देवरानी को अपना हाथ पकड़ा कर उसको ले कर बिस्तर पर बैठ जाता है

baldev:ab बताओ आपको चिंता क्यू हो रही है

जब तक में जीवित हु आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं

devrani:hmmm" बलदेव क्या इस समाज से लड़ने की शक्ति है मेरे अंदर"

baldev:han बहुत शक्तिशाली हो आप

devrani:kya में कोई बड़ा निर्णय लेने योग्य हु?

baldev:aap क अंदर हर एक योग्यता है माँ आप को किसी और क सलाह की आवश्यकता nahi,or इस समाज से क्या आप पूरी दुन्या से लड़ सकती हो और जीत भी सकती हो

देवरानी को ये सुन कर ाचा लगता है और उसका मन थोड़ा शांत होता है

devrani:par में अकेली हु

baldev:aisa कभी न कहना में सदैव आपके साथ हु अपनी आखिरी डैम तक

devrani:par तुम्हे कोई अछि रानी मिल जाएगी फिर तुम उस से विवाह कर लोगे और मुझे तो भूल हे जाओगे

baldev:me अपनी जान दे सकता हु पर कभी आपकी जान को तकलीफ में नहीं देख सकता

devrani:waada करो क तुम मेरा साथ नहीं छोड़ोगे

बलदेव अपना हाथ देवरानी क हाथ पर रख "में वादा करता हु माँ क आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा"

Baldev:maa आपकी आखे लाल हो रही है आप सो जाये

देवरानी बलदेव का हाथ पकडे अपना सर बलदेव क सीने पे रख बात कर रही थी

devrani:so जाउंगी आज इस कक्षा में वर्षो बाद में कोई मुझसे वार्तालाप कर रहा hai,mujhe ाचा लग रहा है

बलदेव अपना एक हाथ देवरानी क सर पर रख क थोड़ा पीछे से पलंग पर तक ला लेता है

devrani:beta तुम्हे पता है पिछले 5 वर्ष में मैंने तुम्हे दिन रत यद् किया जब तक शिक्षा ग्रहण करने आचार्य जी क यहाँ गए थे

Baldev:haan माँ मुझे याद है तुम उस दिन बहुत रोई थी

devrani:jab तुम केवल 13 वर्ष क थे और मेरे लिए तुम्हे वन में भेजना बहुत मुश्किल था

baldev:han माँ पर वो भी तो मेरे लिए ज़रूरी tha,shiksha तो लेनी हे पड़ती है

जीवन अचे जीने क लिए

devrani:han अब तो तू बड़ी बड़ी बाते करने लगा है विद्वानों वाली ,एक बचा अब इतना बड़ा हो गया है

baldev:maa ऐसी बात नहीं

devrani:ais बात है जब तुम गए थे तो एक डैम दुबे पतले थे और आज किसी घोड़े की तरह ुचे हो गए हो और इतने मांस है तुम्हारे शरीर पर

baldev:ye सब खाने पीने और व्यायाम का नतीजा है

devrani:aisa नतीजा ...5 वर्ष में न सिर्फ तुम जवान हो गए बल्कि तुम ऐसे जवान हुए क तुम्हे देख सब 30 वर्षीया पुरुष कहता है क्यू क इतने मांसल शरीर और परिपक्त दीखते हो और बाते भी ऐसी हे करते हो

Baldev:han माँ ये सब आचार्य जी क बदौलत हुआ

devrani:me तो आचार्य जी का धन्यवाद कहना चाहूंगी

baldev:maa में तो बदल गया पर माँ तुम आज भी वैसी हे हो जैसी मई बचपन से देखते आ रहा हु

devrani:hmm

baldev:tumhare चेहरे की लाली अब भी उतनी हे है

devrani:man me)is लाली को चूसने वाला कोई भरा नहीं था जो इस फूल क चूस क इसको खिला दे,)

Baldev:tum आज भी 20 से 25 वर्षीया कन्या लगती हो

devrani:har बार तू ये झूट बोल कर मुझे मत behla(jaan बुझ कर नखरा करती है)

baldev:maa तुम्हे पता है जब मई आचार्य जी पास था तो में हर दिन तुम्हे याद किया करता था और अपने दोस्तों को भी बताया करता था क मेरी माँ कितनी अछि hai,mere मित्र जो भी बने सब से अचे मित्र बद्री और श्याम थे ,वो दोनों तो ज़िद्द कर रहे थे आपसे मिलने क lye,aap कहे तो बुलवा लू ?

बलदेव अपनी माँ को चुप पा कर देखता है तो पता है उसकी माँ तो सो चुकी थी

baldev:maa भी न कब सोइ पता हे नहीं चला

बलदेव क सीने पे सर रखो पेअर आधा मोदी देवरानी सो रही रही और बलदेव पलंग पर अपनी पीठ टिकाये बैठा हे था उसे समझ नहीं आरहा था क वो उठे या बैठे रहे फिर वो एक टाक देवरानी क मासूम चेहरे को देखता है

baldev:kitni मासूम है चेहरा इनका

और बलदेव ऐसा हे बैठा रह जाता है देवरानी सोती रहती है

सुबह 5 बजे देवरानी की आँख खुलती है तो पति है क वो अब भी बलदेव क बहो में बाहे दाल अपने सर को बलदेव क सीने में लगाए सोई थी और उसका बीटा आधी आखे खोल झपकी ले रहा था

devrani:man में) हे भगवन ये तो साड़ी रात ऐसे हे बैठा रह गया और सोया भी nahi,meri कितनी परवाह करता है ये लड़का)

देवरानी थोड़ा उचक कर अपने होठ धीरे से बलदेव क माथे पे रख क्र चुम लेती है

"मेरी जान बलदेव"

अधखुली आँख खोल क्र "माँ तुम उठ गई "

devrani:tum ऐसे हे बैठे रहे सोये नहीं

baldev:ab में आपको छोर कर कैसे जाता और में हैट ता तो कही आपकी नींद टूट जाती तो

devrani:baldev ...बीटा तू अपने माँ क लये रत भर जग क सवेरा कर दया

और बड़े प्यार से बलदेव को देखती है

baldev:han माँ

Devrani:ab जाओ और अपने कक्षा में आराम से सोना

और देवरानी बलदेव से अलग होती है बलदेव उठ खड़ा हो जाने लगता है

devrani:or हां तुम रत भर जगे ho,vaidh जी दुवारा हुआ जड़ी बूटी खाना मत भूलना ,फिर सोना( देवरानी ये कह कर मुस्कुरा देती है)

बलदेव नींद में खोया था और उसके दिमाग में ये प्रश्न आता है

बलदेव मन me:ye माँ को वैध जी क जड़ी बूटी का कैसे पता है

पर नींद ज़ोरो से आने क वजह से अपने कक्षा से बहार निकल क्र जाता है जैसे हे वो अपने सीडीओ से ऊपर जाने को होता है उसे उसकी दादी जीविका दिखाई देती है

हुआ ये था हर बार की तरह जीविका सुबह अपने वैशाखी ले कर चल रही रही थी वैध क कहने अनुसार और उसे सामने देवरानी क कक्षा से बलदेव अत दिखाई दया

jeevika:ye इतना सवेरे बलदेव देवरानी क कक्षा से क्यू आरहा है ,इसका मतलब पूरी रात वो देवरानी क साथ tha,f

फिर जैसे हे जीविका की नज़र बलदेव क लाल आखो पर पड़ती है

जीविका मन me:haay राम इसके आखे लाल मतलब साडी रात देवरानी क साथ उसके कक्षा में जगा हुआ था इसका साफ़ मतलब क ये लोग अपने जिस्म की भूक मिटा रहे थे और जीविका को ये सब देख अपने आखो पर विश्वास नहीं हो रहा था

बलदेव झट से दादी क पेअर छूटा है

jeevika:baldev जीते रहो

baldev:dadi मुझे नींद आरही में जाता हु

जीविका :मन me)raat भर कार्यकर्म अपने माँ क साथ क्या और दादी को कह रहा है नींद आरही है सुबह सवेरे ,शर्म बेच कर खा गए बलदेव तुम

दोपहर को बलदेव उठ ता है और खाना खाने क लये कमला को आवाज़ देता है

kamla:kya युवराज अभी तक सो रहे हो

baldev:han कमला कल रत थोड़ा..

बीच में बात कर ते हुए

kamla:kal रात कुछ उच्च नीच तो नहीं कर डाई महरानी क साथ जो सो नहीं पाए

baldev:abhi तक तो नहीं ,पर तुम्हारी महरानी क साथ उच्च और नीच दोनों करूँगा

kamla:bade प्रेम पुजारी बन रहे हो

baldev:han बस तुम्हारी महरानी है हे ऐसी मुझे जैसे को भी पिघला दी उसने

kamla:itna प्रेम करते हो

baldev:hadd से ज़्यादा

kamla:par महरानी को पाना इतना आसान नहीं बहुत पापड़ बेलने होंगे

baldev:har पापड़ बेलुँगा पर आखिर में ताल कर तुम्हारे महरानी को में खाऊंगा और हस्ता है

kamla:hay dayya,tum भूलना मत आज चौथा दिन है दो दिन बाद उसका शेर सिंह से मिलने की बात है

Baldev:mujhe अपने प्यार पर भरोसा है

kamla:agar वो सही में शेर सिंह से मिलने नदी तक पहुंच जाती है तो

baldev:to फिर जैसे हे वो मेरे घोड़े पे बैठ जाएगी इस राज्य को या मुझे छोड़ने क lye,me थोड़े दूर घुड़सवारी करने क बाद उसे एक गुफा में ले जाऊंगा जहा पर पहले से एक आदमी होगा में बहाना बना कर वही कही छुप जाऊंगा

और वो आदमी उस घोड़े की कमान संभाल लेगा और माँ को ले जायेगा

Kamla:haay दय्या वो आदमी कौन है और तुम ये क्या कह रहे हो

Baldev:kamla मैंने पता लगाया हमारे गहतराष्ट्रा क बगल में एक राज्य है जहा पर एक आदमी है जिसका नाम शेर सिंह है और वो उस राज्य का युवराज है ,कोई 40 वर्षीया है

में अपने मित्र क मदद से उसे गुफा में बुलवा लूंगा माँ को ले जाने. क लये

kamla:tum पागल ho,agar उस आदमी ने महरानी क साथ जबरदस्ती की

baldev:maine मेरे मित्र बद्री क मदद से इस आदमी का चयन किया hai,badri उज्जैन का युवराज है जिसके टुकड़े पर शेर सिंह का राज्य चलता है

"हम उसे कह देंगे क तुम्हे मौक़ा है अगर तुम डिल जीत लिए तो जो चाहे वो करना उसके पहले कुछ नहीं"

kamla:par ऐसा हुआ तो राज्य में हुनागमा हो जायेगा सब कहेंगे देवरानी भाग गई अनजान पुरुष क साथ

Baldev:Prathna करो क उस दिन वो शेर सिंह बन क बैठा घोड़े पे मेरे साथ नहीं आये वो..

Kamla:to क्या खुश रह पाओगे तुम युवराज बलदेव

baldev:me जीते जी मर जाऊंगा अगर वो किसी और की हुई

baldev:par कमला हमने माँ को झूट कहा है और अगर माँ खुद चाहती है और निर्णय ले लेती है क उन्हें बहार क पुरुष क साथ सम्बन्ध रखना है तो मेरा बेटे होने का फ़र्ज़ है क में उनके इस दुःख भरे जीवन से आज़ादी दिलाओ और उनकी ख़ुशी क लिए सब कुछ करू

kamla:tu कितना सच्चा और कितनी अछि सोच रखता है अपने माँ क lye,ye वासना नहीं होसकता hai,yehi तो प्रेम है प्यार है

और बलदेव क आँख ासु से भर जाते है

kamla:rona नहीं तुम मेरे बचे जैसे हो बचपन से तुम्हे देखा है ,मेरे रहते हुए महरानी कभी गलत निर्णय नहीं ले सकती.

कमला वह से चली जाती है
 
अपडेट 26

अब देवरानी और शेरसिंघ क मिलने क लिए केवल 3 दिन थे जिसमे बलदेव अपनी पूरी कोशिश कर रहा था क वो अपने माँ को अपने प्यार का अपने मौजूदगी का अहसास दिला दे और उसे रोक ले किसी और पुरुष क साथ जाने से यदि शेर सिंह बने बलदेव क साथ रविवार क रात को देवरानी चली जाती है तो बलदेव उसे अपने मित्र क मदद से खोज किया एक राजा जिसका नाम सच में शेर सिंह था उसके साथ छोर dega,or बलदेव शेर सिंह नमक व्यक्ति को अपने मित्र दुवारा समझा देता है क जब तक क रानी तुमसे विवाह करने तैयार नहीं हो तुम कुछ कर नहीं सकते ऐसा बद्री ने सख्त हिदायत दे दी थी उसे

अब देखना ये था क बलदेव अपनी माँ की क़ुरबानी देता है या वो अपने माँ का प्यार जीत लेता है और अगर जीत भी लेता है तो उसके बाद अपने प्यार को कैसे सब क नज़रो से बचा पायेगा

बलदेव को ये खबर नहीं थी क पहले हे उसकी दादी जीविका और रानी षुरूश्ती और उसकी दासी राधा देवरानी क हर एक कदम उसको जांचते क आखिर देवरानी क ख़ुशी का राज़ क्या है

ये सब से बेखबर राज राजपाल कुबेरी में अपने मित्र रतन सिंह क साथ अय्याशी में लगा था और उनको गुप्त जान से सुचना मिली थी क

दिल्ली क बादशाह शाहज़ेब कभी भी कुबेरी या गहतराष्ट्रा पर कभी भी हमला कर सकते है

पारस क सुल्तान मेरे वाहिद और शमशेर क लये गहतराष्ट्रा और कुबेरी पैर हमला करना दूरी क वजह से नामुमकिन था

Rajpal:ratan सिंह मुझे अपने राज्य की याद सत्ता रही है

ratan:waha पैर ऐसा क्या है जो यहाँ पर नहीं

rajpal:han वह तो बास एक छूट मरता हु यहाँ तो हज़ारो मिल जाती है और दिन रत अय्याशी करू माँ जीविका भी नहीं जो मुझे दांते

और दोनों हसने लगते है

गहतराष्ट्रा में सब भोजन की तैयारी कर रहे थे इतने में महल क दरवाज़े पर से दरबान कुछ कहता है

darban:Yuvraj बलदेव

बलदेव झट से दरबान को अंदर आने को कहता है

baldev:kaho क्या बात है

darban:suchna मिली है क दो राजा कुछ सैनिको क साथ गहतराष्ट्रा की सीमा लाँघ चुके है

ये सुनते हे बलदेव को ख़ुशी हो जाती है

darban:kya हुआ आप खुश हो रहे है

baldev:ghabrane की बात नहीं है वो दोनों मेरे मित्र गैन है जिसे मैंने हे न्योता दया सब तक यह बात पंहुचा दे की उनका धूम धाम से स्वागत हो राज दरबार में

darban:ji युवराज

baldev:man में) आखिर ये बद्री और शयाम आ हे गए

बलदेव अंदर जाता है और सबको कहता है

baldev:aaj जितना हो सके अचे पकवान बनाओ मेरे दोनों परम मित्र पधार रहे है

फिर बलदेव भी तैयार हो कर राज दरबार की ओरे चल देता है और उन दोनों की प्रतीक्षा करने लगता है

बद्री और शयाम दोनों हे बलदेव क आयु क हे थे पर बद्री सांवला था जो उज्जैन क युवराज थे और शयाम गोरा चिता था जो मेवाड़ क युवराज थे

तेज़ी गति से दो घुड़सवार राज दरबार क सामने आ कर रुक जाते है और उनके सैनिक पीच हे रुक जाते है

देश चारो ओरे कड़ी उनके घोड़े से उतारते हे उनके फूलो की बारिश कर देती है और एक दासी गहतराष्ट्रा का गीत गति है

बद्री और शयाम मुस्कुराते हुए उनका धन्यवाद करते है फिर एक दासी

dasi:aap दोनों यहाँ बैठ जाये

दोनों को एक एक कुरिस पर बैठा क उनके पेअर क निचे पानी से भरा थाली रख देते है और दोनों को उसमे पेअर रखने क लये कहते दोनों पेअर रख क्र अपना पेअर धोते है फिर अपनी जुटी पहन कर राज दरबार में चलने लगते है और उनके आगे पीछे गहतराष्ट्रा क सैनिक बल एक गति से चल रहे थे

राज भवन क दरबार में सब मंत्री गैन क साथ साथ बलदेव ,devrani,shurushti भी बैठे थे

जैसे हे बलदेव को दोनों आते हुए दिखाई देते है वो खड़ा हो जाता है उसके साथ हे पुरे मंत्री गैन खड़े हो जाते है

Baldev:swagat है आप दोनों युवराज का गहतराष्ट्रा क इस पवित्र धरती पे

Badri:dhanywad मित्र तुम से यही आशा थी

शयाम :बहुत हे खूबसूरत भवन है

बलदेव और हाँ इतने भव्य स्वागत की क्या आवश्यकता थी हमे तो मित्र है

Baldev:ye मेरा प्रेम है तुम दोनों क लये आए जाओ

बलदेव अपनी बाहे फैलता है और तीनो मित्र एक दूसरे से मिलते है और फिर बलदेव अपने साथ हे उन दोनों को बैठने को कहता है

Shurushti:swagat है युवराज आप दोनों का

devrani:swagat है बद्री और शयाम

Baldev:ye मेरी बड़ी माँ षुरूश्ती है

और ये माँ देवरानी है

शयाम और बद्री उन दोनों का हाथ जोड़ कर प्रणाम करते है

अब राज दरबार की करवाई शुरू होती है और सब अपने अपने दुःख और राज्य की दिक्कत महरानी षुरूश्ती क सामने रखते है

अभी कुछ देर हे हुए थे क बद्री बलदेव को इशारा करता है जाने का

baldev:Maa षुरूश्ती में इन दोनों इनके कक्षा में ले जाता हु ये थक गए होंगे

आज्ञा दीजिये

shurushti:theek है बलदेव तुम लोग जा सकते हो

Baldev:ji बड़ी माँ

बलदेव उन दोनों को ले कर अपने कक्षा क बगल में कक्षा में ले जाता है

baldev:ye रहा तुम दोनों का कक्षा

shyam:ary ये क्या लगता है यहाँ पर कई वर्षो से कोई नै आया

Baldev:upar क एक कक्षा में सिर्फ में रहता हु बाकि सब खली है

वैसे भी में अकेला रहता हु तो तुम दोनों जहा चाहे वह रह सकते हो

shayam:akele क्यू हो दुकेले हो जाओ

baldev:has क्र चल हैट

Badri:shyam सही कह रहा है तुमने शरीर हठी जैसी बना ली है तुम्हारे सामने तो हम बचे लगते है

Baldev:iska क्या मतलब

badri:iska अर्थ ये है क आप शादी कर ले युवराज

और तीनो हसने लगते है

बलदेव उन दोनों को छोर भोजन का प्रबंध करता है

शयाम और बद्री स्नान कर क अपने लाये हुए वस्त्रो में से वस्त्र पहन कर बहार आ कर भोजन करने क लये सब क साथ बैठ ते है

Shayam:kya स्वादिष्ट पनीर है

badri:han मैंने तो इतना स्वादिष्ट कभी नहीं खाया आज तक

Baldev:ye सब माँ देवरानी ने बनाया है

श्याम और बद्री देवरानी जो रसोई में थी उनको धन्यवाद

शयाम और badri:"Dhanywad महारानी हमारे लिए आपने इतना स्वादिष्ट व्यंजन बनाया"

देवरानी बास मुस्कुरा क रह जाती है

ऐसे हे पूरा महल दिखते हुए शयाम और बद्री को रात हो जाती है बलदेव और देवरानी को मिलने का समय बिलकुल मिल नहीं पता देवरानी अंदर हे तड़प रही थी क मिल जाये बलदेव और आखिर कार हार दर क्र सोने चली जाती है

बलदेव अपने मित्रो क साथ गयी गुज़री बात कर. क खूब खुश था

Shayam:yaad है जब हम छुप कर हम अन्तर्वासना और कामसूत्र की पुष्तक पढ़ते थे

Badri:or हाँ एक दिन में तो उसे छुपाना हे भूल गया और आचार्य जी नहीं देख सके नहीं तो

baldev:nahi तो हमे उस दिन हे निकल दया जाता था

Badri:baldev तुम तो बात हे मत करो रात भर जग क पढ़ते थे

shayam:han और सुबह में उठ भी जाते थे महाराज

और फिर सब हसने लगते है

badri:ye बलदेव तो बास सेज सम्बन्धी क सम्भोग की कहानी पढता था

Baldev:susshhh मित्रो ये आचार्य क वन का पाठशाला नहीं ये महल है और दीवारों क भी कण होते है

Badri:acha छोरो ,तुम ये दुसरो क विवाह करने में कब से आतुर हो गए ,कोई नया वयवसाय शुरू क्या है

शयाम है देता है

Baldev:Baat ये है क किसी को दुःख है उसे बस मुक्ति पहुंचना है

Badri:par वो है कौन जिसे तुम छोर आओगे मेरे सम्बन्धी राजा शेर सिंह क पास

क्या उसे भी ये गायत है?

baldev:us स्त्री को बास इतना पता है क वो अपने पापी पति को छोर कर किसी क शरण में जाएगी अगर वो उसे सही बर्ताव करता है तो वो शायद विवाह कर ले

Badri:han मैंने उसे तैयार रहने को कह दया था और चेतावनी दे दी क उसके मर्ज़ी क बिना तुम उसे छू नहीं सकते

Baldev:dhanywad बद्री

badri:par वो है कौन जिसे गहतराष्ट्रा छोड़ जाना है

Baldev:samay आने पर पता चल जायेगा और हाँ उस स्त्री का अभी आखिरी निर्णय लेना बाकि है.

अब तुम दोनों सो जाओ मई भी विश्राम करता हु जा क

बलदेव ये कह कर अपने कक्षा से निचे उतरता है और देवरानी क कक्षा में घुसता है आज फिर घुसते हुए उसकी दादी जीविका उसको देख लेती है

देवरानी सोच में डूबी थी

Baldev:maa

देवरानी चुप रहती है

baldev:maa क्या हुआ कुछ तो बोलो

देवरानी चुप थी

बलदेव जा कर देवरानी का हाथ पकड़ कर

"क्या हुआ है माँ"

devrani:jaao मुझसे बात मत करो

Baldev:Q न करू

Devrani:tumhara कोई हक़ नहीं है

Baldev:sab हक़ है मेरा

devrani:jaao अपने मित्रो क पास

baldev:to ये बात है ,क्षमा कर दो माँ आज मेरे मित्रो क वजह से आपको समय नहीं. दे पाया

देवरानी का गुस्सा थोड़ा ठंडा होता है और वो बलदेव को देख

Devrani:baldev तुम कहते हो जीवन भर साथ रहोगे तुम तो आज हे मुझे भूल गए और सुबह से अभी मुँह दीकहाये

Baldev:maa आपको पता है ये शयाम और बद्री मुझे छोर नहीं रहे थे में प्रयास क्या था और रही भूलने की बात तो मेरी हर सांस में तुम बस्ती हो

देवरानी ये बात सुन कर बलदेव से गले लग जाती है

devrani:man में) तुम्हे कैसे बताऊ मेरे लाल क में किस दुविधा में हु

बलदेव मन में) माँ मुझे पता है क तुम की हाल से गुज़र रही हो

Devrani:aaj क बाद मुझे कभी नज़र अंदाज़ क्या तो

baldev:kya तो आपकी चप्पल मेरा सर

देवरानी हस्स देती है

Baldev:mere मित्र कैसे लगे

Devrani:kaise लगेंगे बचे है

Baldev:wo मेरे हे आयु क है

devrani:par तुम जैसे नहीं वो

baldev:mai कैसा हु

देवरानी बलदेव क आखो में देखते हु

devrani:tum..bhut बड़े हो

Baldev:itne भी नहीं है माँ

Devrani:chup कर मुझे पता है कितने बड़े है

बलदेव हस्स देता है

devrani:agar उन दोनों को हमारे साथ खड़े क्र दो तो वो हमारे बचे लगेंगे

ये सुन कर बलदेव अपनी आखे चौड़ी कर देवरानी को देखता है

और देवरानी भी अपने कहे हुए बात को समझ कर लजा जाती है

devrani:mere कहने का अर्थ

baldev:chhoro माँ होता है जो बात सही है वो है

devrani:or वैसे भी हम अब माँ बेटे बढ़ कर मित्र है

Baldev:ye मित्रता कब हुई

ये सुन कर बलदेव क मोठे बांह पर एक थप्पड़ मरती है देवरानी

Baldev:maa में मज़ाक कर रहा था

Devrani:lo मित्रता भी नहीं है और अपने माँ से मज़ाक कर रहे हो

अब लज्जाने की बारी बलदेव की थी

Devrani:kal शुक्रवार है बलदेव

Baldev:han माँ

Devrani:me सूर्य पूजन क लिए नदी क तात पर जाना चाहती हु

Baldev:tum कितना पूजा पथ करती हो माँ

Devrani:aisa नहीं कहते भगवन को बुरा लगता है

Baldev:bhagwan ने तुम्हे दुःख हे दया इतने सालो का बलिदान तुम्हारा भगवन को नहीं दीखता hai,kya मिला आपको माँ

devrani:Beta बलदेव मेरे जीवन में कुछ नहीं है पर तुम तो हो में तुम्हरे लिए हे जीवित हु और तुम्हारे सिवा मुझे कुछ नहीं चाहिए

बलदेव ये सुन कर माँ को गले लगा लेता है

Baldev:man me)maa तुम्हारा हर दुःख में सुख में बदल दूंगा

Devrani:man me)Kal शुक्रवार है फिर शनिवार फिर रविवार, इन्ही तीन दिनों में मुझे. तुम में और शेरसिंघ में चयन करना hai,(Maine तुम्हारे आखो में वो प्रेम देख लय है)

अगर तुम्हे चुनती हो तो भी अधर्मी कहलाउंगी जिसने समाज क नियम तोड़ी .

अगर शेर सिंह क साथ जाती हु तो भी लोग वही बात कहेंगे

किसी भी रूप से मेरे आगे वाले जीवन में भूचाल आने वाला है.

बलदेव अपने माँ को शुभ रात्रि कह क्र चला जाता है
 
अपडेट 27

गहतराष्ट्रा में कोयल की मधुर आवाज़ से सुबह हुई और सूर्य उदय से पहले हे किसान अपने खेतो पैर काम करने जाने lage,Baldev की आँख खुलती है तो देखता है उसकी माँ उसके पास हे पलंग क कोने में बैठी है

बलदेव उठ कर जाता है और जैसे हे अपने बाहो में भरने का प्रयास करता है वो गिर सा जाता है

baldev:man में) आर्य ये क्या मुझे लगा यहाँ माँ है ये तो भरम था

और मुस्कुराते हुए उसके मुँह से निकलता है

baldev:kya यही प्यार है

बलदेव उठ क जा कर स्नान करता है उसे यद् था आज सूर्य पूजन क लये माँ को नदी क तात पर ले जाना है

देवरानी उठ टी है और स्नान गृह में घुस जाती है और एक छोटा सा कपडा पहन कर नहाने लगती है

जो जो उसके जिस्म पर पानी की बुँदे गिरते है उसके जिस्म से धुवा जैसा भाप निकलता है जैसे किसी ने आग पर पानी मार दया हो

अपने जलते बदन पर हाथ फेरते हु

Devrani:man में) बलदेव कैसे कह रहा था वो आम दबा कर चूस कर खायेगा मेरे दूध को देखते हु

क्या सच में उसके पास इतना बड़ा गणना है क वो मेरे ख़रबूज़े को फोड़ क रास निकल दे"

हाय राम में क्या सोच रही hu,Par ये बलदेव क गन्ने की चुभन तो मुझे दिन रात सताए जा रही है मुझे रात भर मसहूस होता है जैसे वो मेरे पीछे खड़ा अपना गणना मेरे चुतर में लगाया है"

देवरानी का वासना से दोनों आँख बंद हो जाता है उसके कानो में आवाज़ गूंजती है "माँ कहा हो"

बलदेव कक्षा में आगया था और उसे पुकार रहा था



देवरानी तुरंत अपने आखे खोलती hai,apne कपडे ढूंढ़ने लगती है पर उसे वह कोई कपडा नहीं मिलता पास में रखे एक सदी का टुकड़ा को अपने जिस्म पर किसी भी तरह से धक् लेती है

Devrani:hey भगवन में इस अवस्था में बलदेव क सामने कैसे जाऊ आज में सदी अंदर लाना भूल गई

कुछ सोच कर

Devrani:beta आई में नाहा रही हु

वो उस सफ़ेद सदी से अपने आप को सुखानेकी कोशिश कर रही थी क्यू क उसमे से उसके बड़े वक्ष और उसके भरे चुतर साफ पता चल रहे थे

देवरानी अपने आप को आईये में देख बलदेव तो मुझे ऐसा देख आखो से पी हे जायेगा

फिर भी देवरानी हिम्मत कर क स्नान गृह से बहार आती है और अपने कक्षा क सटे हुए छोटे से कक्षा में दाखिल होने क लये फुर्ती दिखती hai,aahat सुन कर देवरानी को तेज़ी से चलते हुए देख

Baldev:Maa



और देवरानी पलट कर बलदेव को देखती है

और कुछ समय क लये अपने क़दम रोक लेती है

जिसे देख बलदेव की साँसे रुक जाती hai,devrani का भरी गांड पतले से कपडे में चिपका साफ दिख रहा था और उसके दूध पे बंधे कपडे से ऊपर उसके थान किसी गे क थान से काम नहीं थे,

Devrani:abhi आई

और तेज़ क़दमों से कक्षा में घुस जाती है

बलदेव उसके चुतर की थिरकन देख सेहम जाता है

baldev:tum सचमुच काम देवी हो ,तुम्हारा अंग अंग इस बात की गवाही दे रहा है

बलदेव अपने खड़े लैंड को हाथ से सेहला कर "धैर्य सब मिलेगा "

देवरानी अंदर जा कर अपना साँस पर काबू पति है और सदी पहन ने लगती है

"हाय राम क्या खा जाने वाली नज़र से देख रहा था कसम से आज अगर थोड़ी देर वैसी हे रह जाती बलदेव तो मेरे साथ जबरदस्ती भी कर सकता था फिर वो अपने आपको सवारती है

"और अपने आपको देख" देवरानी तू है भी तो ऐसी क कोई प्यासा तेरे जैसा कुवा देख अपनी बाल्टी दाल क पानी निकल कर प्यास बुझाने ज़रूर आएगा"

वो अब तैयार हो जाती है और कक्षा से बहार निकलती है



बलदेव सजी सॉरी अपने बालो क लातो को सुलझती देवरानी को देख रहा नहीं जाता और उसके पहले से खड़ा लौड़ा फूलने लगता है

देवरानी ऐडा से चलती हुई आती जब वो देखती है बलदेव उसे घूरे जा रहा है

बलदेव क पास जा कर

Devrani:Kya हुआ लल्लू

Baldev:tumne क्या कहा

Devrani:maine कहा लल्लू अपना मुँह बंद करो मच्छड़ घुस जायेगा

बलदेव रुको अभी बता ता है कौन है लल्लू और देवरानी चहकते हुए वह से भगति है और देवरानी उसको चिढ़ाते हुए दूर जाने लगती है

भागते हुए देवरानी क दोनों बड़े थान मस्ती में झूल रहे थे और कमर क निचे लचक ऐसी क अगर दोनों चुतर क दरार क बीच कुछ आ जाये तो पइसस जायेगा और चूर चूर आ जायेगा

बलदेव पीछे पीछे भागता रहा आखिर कर देवरानी थक जाती है और एक जगह रुक जाती है और बलदेव उसको पीछे से जा कर पकड़ लेता है



बलदेव अपना हाथ कमर पर रख कर देवरानी को अपने ओरे दबाता है फिर अपने हाथ को उसके थान क निचली हिस्सा पे ले जाता है जहा पर देवरानी उसका हाथ अपने दोनों हाथो से रोक लेती है है और बलदेव का हाथ देवरानी क दोनों वक्ष क निचे था और उसके ऊपर देवरानी का हाथ था जो बलदेव क हाथ को सहला रही थी

ये देख क देवरानी ने उसका हाथ दूध तक जाने नहीं दया

Baldev:man में) शयनी घोड़ी " अब बलदेव अपना लौड़ा गोल गोल घूमता है देवरानी की गांड पर और देवरानी एक डैम अलग हे नशा महसूस करती है

Baldev:man में) "ऐसी माल जो दिन रात छोड़ने लायक है मेरा पिता राजपाल जैसा मुर्ख हे छोर सकता है "

"कितनी तदपि है इतने बरसो से ये घोड़ी"

Baldev:Kaun है लल्लू

और एक बार हल्का झटका उसके गांड पर अपने लौड़े से देता है

Devrani:uhh ओह्ह तुम नहीं हो ,तुम तो बल्ली हो

बलदेव को यद् आता है क वो मेले में खुद को बल्ली और माँ को रानी पति पत्नी बताया था

बलदेव खुश हो कर

Baldev:han अगर में बल्ली हु तो तुम रानी हो

देवरानी एक झटके से उस से छूट टी है

Devrani:bada आया रानी बनाने wala,ek दिन याद रखता है दूसरे दिन भूल जाता है

baldev:tumhe रानी नहीं महारानी बनाऊंगा

Devrani:dekhenge वो तो वक़्त हे बताएगा

अभी चलो

देवरानी अपनी पूजा की सामग्री ले लेती है और आज शुक्रवार का सूर्य पूजन करने नदी तात पर जाने लगती है अपने बेटे क साथ

सूर्य की पहली किरण क साथ नदी तात पर देवरानी अपने पूजा में लग जाती है और भजन गाने लगती है फिर श्लोक पढ़ कर दिया जला कर सूर्य देवता का पूजा करती है

कुस्ज 20 मिंट तक पूजा चलता है ,पूजा समाप्त होने पर देवरानी बलदेव को बुलाती है जो थोड़ी दूर पर बैठा देख रहा था

Devrani:idhar आजाओ

Baldev:maa आया

देवरानी उसके माथे पे एक तिलक लगाती है फिर अपने माथे पे भी हल्का सिंदूर डालती है

बलदेव वापस आकर नदी क तात पर बैठ जाता है और देवरानी जा कर नदी में डुबकी लगाने लगती है

Baldev:man में) मेरा पिता जैसा मुर्ख कोई नहीं ऐसी माल को छोर कुबेरी में रतन सिंह क साथ अय्याशी कर रहा है



Baldev:zor से) तुम बहुत सुन्दर हो एक बार फिर निर्त्य कर क दिखाओ जो मेले में क्या था

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देवरानी वैसे हे अपना पल्लू ऊपर करती है और कड़ी रहती है

Devrani:par वह गीत और संगीत भी था

Baldev:me गए देता हु न माँ

Devrani:mera निर्त्य इतना पसंद आगया

Baldev:sirf निर्त्य नहीं तुम भी उतनी हे पसंद हो( ज़ोर से चिल्लाता है )

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ये बात इतने ज़ोर से बोले जाने पर देवरानी है पड़ती है

Devrani:bade गीतकार बन गए हो

Baldev:tumne बना दया है

Baldev:chalo में गता हु

"तोरा ी दो रस गगरी तडपावे मुझे bedardi"or देवरानी क भीगे हुए ब्लाउज में फसे. दोनों थान को निहारता है

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देवरानी जान बुझ क अपने दूध निर्त्य करने क बहाने आगे को करती है जिसे देख बलदेव से रहा नहीं जाता और वो भी पानी में उतर जाता है

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देवरानी तुरंत अपना पल्लू ठीक करने लगती है पर बलदेव उसका पल्लू अपने हाथ से पाकर क

"रानी तोरा दो रस गगरी तडपावे बेदर्दी''

देवरानी को अपनी ओरे खींचता है

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और कस क भरे बदन की देवरानी को रगड़

लेता hai,uska दूध बलदेव क सीने से सात जाते है,

अब थोड़ा दूर हैट टी देवरानी सीधे होते है पर बलदेव अब अपना हाथ उसके बड़े चौड़े गांड क ऊपरी हिस्से पर टिका देता है

देवरानी अपना दोनों हाथ बलदेव क कंधो पद रखती hai,baldev क आखो में देखती है



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देवरानी मन me:aah क्या कर रहा है ये लड़का मेरे बदन की गर्मी को चिंगारी दे रहा

बलदेव मन me:ye तो भीग क ऐसी हो गयी हो जैसी नयी नवेली दुल्हन क्या मोठे दूध और बड़ी गांड है देवरानी तुम्हारे

बलदेव झट से देवरानी क कमर पे हाथ रख माँ को निचे झुकता है ,देवरानी अपने बेटे का सर को अपने ब्याह से पाकर लेती है

बलदेव अब कमर पाकर कर देवरानी क छूट का हिस्सा अपने लैंड पर दबाने की कोशिश करता है



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कुछ देर ऐसे हे रखने क बाद देवरानी को अपने आगे झुका देता है और एक हाथ से उसके कमर पर हाथ रखता है और दूसरे हाथ से एक हाथ देवरानी का पानी पे मरता है

अब बलदेव का लौड़ा तन जाता है है और बलदेव अपनी माँ को अपने ओरे खींचता है

देवरानी जो अब तक मुस्कुरा रही थी और मज़े ले रही थी लौड़ा लगते हे उत्तेजित हो जाती है



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जैसे हे गांड का दरार बलदेव को समझ आता है वो अपने खड़े लैंड को निशाना बना कर देवरानी पर अचे से दबाव बना कर अपनी और चाप लेता है

देवरानी क मुँह से एक हल्का "उठ "निकल जाता है

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बलदेव क आखे बंद थी इसी का फायदा उठा कर देवरानी खिल खिलते हुई बलदेव क क़ैद से भाग निकलती है

बलदेव अपने बहे फैला "रुको माँ"

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देवरानी दौड़ कर नदी क तात पर पहुंच कर बलदेव को अपना अंगूठा दिखती hai,jiska मतलब था क घंटा लो

"मई नहीं आने wali"or अंगूठा दिखा देती है

बलदेव और देवरानी क इस हरकत को छुपे हुए बद्री और शयाम देख रहे थे जो बलदेव को धुन्द्नते हुए नदी तक पहुंच गए थे ...
 
अपडेट 28

नदी क तात पर झाड़िओ में छुपे बद्री और शयाम जो बलदेव को ढूंढ़ते हुए आगये थे उन्होंने माँ बेटे का रंग रलिया देख लिया था

आज शुक्रवार का दिन था और देवरानी अपने बेटे क साथ सूर्य पूजन कर क महल लौट aayi,devrani क पास अब शनिवार हे बचा था क्यू क रविवार को उसका मिलने का दिन तय था शेर सिंह से.

Shyam:Ye बलदेव अपने माँ को क्यू इतना दबोच रहा है

badri:pata नहीं ,ये तो ऐसे प्यार कर रहे हो जैसे माँ बीटा नहीं प्रेमी प्रेमिका हो

shayam:daal में ज़रुरु कुछ कला है

badri:hume किसी भी निर्णय पर जाने क लये एक बार इस बारे में छान बीन करनी होगी

दोनों महल वापस आ जाते है

Baldev:tum दोनों कहा गए थे

Shayam:ary भाई वो हमने पता क्या क तुम नहीं हो महल में तो हम भी पास क उद्यान में टहल आये

शयाम झूट बोलता है क वो उद्यान गए थे हलाकि वो नदी पैर गए थे

Baldev:kisi सैनिक को ले जाना था ये तुम दोनों क लये नया राज्य है

Badri:hum इतने भी कमज़ोर नहीं बलदेव

तीनो मिल कर नाश्ता करने बैठ ते है

और देवरानी गरम गरम जलेबी ला कर दे रही थी

shayam:yaar तुम्हे विवाह कर लेनी चाहिए

Baldev:Q भाई तुम्हे क्यू नहीं करनी चाहिए

Shayam:ary यार अगर तुम्हारी होगी तो हमारे

पिता भी बिना समय गवाए हमारी करवा देंगे

ये सुन कर देवरानी खाना पड़ोस रही कहती है

devrani:q शयाम को बहुत जल्दी है

Shayam:tumhe कैसी लड़की चाहिए

ये सुन कर बलदेव एक नज़र देवरानी की ओरे देखता है



देवरानी ये देख कर थम जाती है और हल्का आखो को निचे कर लेती है

baldev:man में) अब तुम लोगो को क्या पता तुम्हारी भाबी सामने हे है

devrani:man me)aise घूर रहा है जैसे अभी सात फेरे ले लेगा और लज्जा जाती है

shayam:chup क्यू हो बलदेव

Devrani:bolo जल्दी कैसी चाहिए हम वैसे हे ढूंढेंगे (चुटकी लेते हुए)

Baldev:mujhe संस्कारी पत्नी चाहिए जो मेरे घरवाले का ख्याल रखे जैसा क आप रखती हो माँ

भगवन क लये उसके डिल में श्रद्धा हो

खूब सजने सवारने वाली हो

थोड़ी मस्तीखोर हो

वो शरीर से मजबूत हो और प्यार करने से नहीं थके

devrani:apna जबान होठ पैर फेर kr"pyar करने से थक टी है क नहीं वो तो तुम्हे प्यार कर क देखना होगा"

shayam:or कोई भी लड़की वाला बलदेव को ऐसे एक दिन देखने क लये नहीं देगा

baldev:par अगर में लड़की को जनता हु तो

देवरानी तो मूरत सी बन जाती है

shayam:han तब हो सकता है कुछ काम

Badri:man में) ये साला तो अपने माँ पे नज़र रखा है क्यू क ये सरे गन अपने माँ क हे गिनाया है

Badri:waise हमे विवाह पर न्योता डोज क नहीं

देवरानी अब उठ फिर रसोई में जाती है

बलदेव: क्यू नहीं मित्र इसमें कोई शक नहीं

विवाह क बाद जितने दिन मन में हो तुम यही रहना

shayam:par विवाह क बाद तुम हमे कहा मिलोगे तुम तो अपने पत्नी क पल्लू से बंधे रहोगे

Baldev:patni तो ऐसी दिमाग में है क विवाह क बाद दो दिन लगातार उसको प्यार करूँगा तो शांत hogi(dheere से दोनों को कहता है)

पर देवरानी अपना कान लगाए सब सुन रही थी और वो ये बात सुन कर क बलदेव उसके हे बात कर रहा है वो अपने दांतो टेल ऊँगली दबा लेती है

फिर दुपहर को भी कुछ ऐसी छेड़ चढ़ की बात कर सब भोजन कर क अपने अपने कक्षा में जा कर आराम करते है और बलदेव भी आराम कर रहा था

पारस में

कुछ घोड़े की फ़ौज एक राज महल की तरफ बढ़ रहे थे जिसे देख सिन्हासन पर बैठा राजा उठ खड़ा होता है

हवाओ से तेज़ घुड़सवारी करता हुआ राज दरबार की ओरे चलने वाला कोई और नहीं

शमशेर था

सिंहासन पारस क छोटे से राज्य जिसका कार्यभार देव राज क कंधे पर था और वह का राजा हे था

देवराज हे था जो सिंहासन से उठ खड़ा होता है पारस क सुल्तान मेरे वाहिद क बेटे शमशेर क स्वागत क लये

देवराज देवरानी का एकलौता भाई था

Devraj:aayiye युवराज आपका स्वागत

है

Shamshera:Salam देवराज जी

देवराज अपनी सिंहासन क बगल में शमशेर को बैठा ता है

devraj:kahiye में आपके कैसे सेवा करू

Shamshera:sultan का पैगाम ले कर आये है हम

Devraj:kya सन्देश है

Shamshera:Hume ऐसे राज्य का पता चला है जो सोने और चंडी से भरी है

Devraj:kaha का राज्य कौन सा राज्य

Shamshera:Ye हिन्द का एक राज्य है कुबेरी

devraj:kahi ये गहतराष्ट्रा क पास वाला कुबेरी तो नहीं

Shamshera:tumne ठीक पकड़ा

Devraj:To क्या करना है

Shamshera:dekho अब्बा हुज़ूर तुम पे ऐतबार बहुत करते ह देवराज और वो ये भी कह रहे थे क हिन्द पे फ़तेह करना देवराज से बेहतर कोई नहीं जनता

Devraj:par उनसे हमारी कोई शत्रुता नहीं

Shamshera:sawal धन का hai,agar हमने पहले नहीं लूटा उस राज्य को तो दिल्ली का शाहज़ेब लूट ले जायेगा

devraj:Shahzeb से तो मुझे बदला लेना है मेरे पिता की मिर्त्यु का

shamshera:soch लो अगर तुम कुबेरी लूट लेते हो तो शाहज़ेब को तुम बहुत बड़ा झटका डोज और हो सकता है गहतराष्ट्रा को भी इकठे लूट ले

devraj:waha मेरी बहिन बस्ती है देवरानी

shamshera:mujhe पता है वो तुम्हारे लये दवा करती है और मिलना भी चाहती है

devraj:tumhe कैसे पता

shamshera:me मिल कर आया हु

और घबराओ नहीं देवरानी को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगी और सुना है तुम्हारा भांजा भी है

Devraj:han सुना तो था

Shamshera:wo अब बड़ा हो गया और तुम से काम शक्तिशाली नहीं है वो

devraj:aapka जासूसी में कोई तोड़ नहीं

shamshera:shukria देवराज

आप हमारे यहाँ आईये फिर हम सब मिल कर हमले की तैयारी करेंगे

devraj:ji ज़रूर

शमशेर फिर से अपने घोड़े पे बैठ हवा से बाते करते हुए अपने महल की ओरे चल पड़ता है.

एक शानदार महल क आगे अपने घोड़े को रोक वो घोड़े से कूद कर

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राज दरबार की तरफ चल पड़ता है जहा पर बहुत भीड़ थी ,वो अपना तलवार निकल कर अपने सेना को देता है

shamshera:zara इस्पे धार लगा कर लाना

sainik:ji हुज़ूर

सामने शमशेर क पिता बैठे थे

Shamshera:Assalamualaikum सुल्तान

मेरे wahid:Beta शमशेर आओ

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Shamshera:sar झुका कर सुल्तान का इक़बाल बुलंद हो

मेरे वाहिद उसे उठ कर गले से लगा लेता है

Shamshera:abba

मेरे wahid:baitho यहाँ मेरे लाल ,कैसा रहा सफर

Shamshera:bhut ाचा

मेरे wahid:Kya कहा देवराज ने

Shamshera:wo मान गया हमारी बात बहुत जल्द हमारे यह आजायेगा

"बीटा shamshera"ye उसकी माँ थी जो अपने बेटे का आने क बात मालूम होने पर आई थी

शमशेर मुद कर देखता है

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जी हाँ एहि थी 25 वर्षीया शमशेर की माँ जिसकी उम्र 45 वर्ष थी और उसका नाम उसके हुस्न को देख कर रखा गया था हूर जहाँ और प्यार से उसे भूरिया भी कहते the,wo मिश्रा से आई थी

हूर jahan:beta साल भर जासूसी करते हो अपने अब्बा की कुछ वक़्त अपने महल में भी बिताया करो जब देखो तब जंग

Shamshera:assalamoalaikum अम्मी

Hooriya:walaikumsalam

तुम दोनों बाप बेटे एक जैसे हो ,जंगी जहाज़ क लूटेरे

और वह पर बैठे सब लोग हस्ते है

मेरे wahid:han इसलिए तो हमने आपको मिश्रा से चुरा कर ले आये

और अब फिर से हस्ते है

भूरिया: बूढ़े हो गए पर अकाल नहीं आई

Hooriya:beta चलो में तुम्हे खाना खिलाती हु नहीं तो ये तुम्हारे अब्बा तुम्हे भूका जुंग पे भेज देंगे

भूरिया अपने बेटे को ले कर अंदर चली जाती है उसे खाना खिलने...
 
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