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अपडेट 19
राजा रतन और राजा राजपाल "Kuberi"rajya में जो क राजा रतन ने सोने और जवाहरात से भर क अपने राज्य को हिंदुस्तान का सबसे ढंडी राज्य बना दया tha.Raja रतन को आशंका थी क उन पर कोई हमला कर लूट पात न मचा दे.
यही वजह थी क राजा रतन हर एक प्रयास कर रहा था अपने सैनिक बढ़ने ki.kaio दिनों तक
सबने मिल क्र खतरे का कैसे उत्तर देना उसकी योजना सफलतापूर्वक बना लिया गया.
पर सबसे ज़्यादा अगर डर किसी का था तो वो दो राजाओ का था,
एक तो दिल्ली क तख़्त पर बैठे
बादशाह शाहज़ेब का
दूसरा अरब और फारस या पारस पर अपना सिक्का जमा लये हुए सुल्तान मेरे वाहिद ka,wo मेरे वाहिद जिसने आधी दुन्या से ज़्यादा अब तक फ़तेह कर चूका था
राजा रतन ने इन सब से निपटने क लये अपने सहयोगी हर राज्य से मदद मांगी और सबने उसकी मदद भी kiya,apne राज्य को राजा रतन ने. 50000 से ज़्यादा सैनिको से घेर दया था
राजा राजपाल वैसे तो अपने मित्र राजा रतन की मदद करना चाहते थे पर दूसरी ये भी वजह थी क कई वर्षो से रतन सिंह का साथ देने से विदेशो में ,लोगो ने राजपाल पर भी निशाना बनाना शुरू क्र दया था
राजपाल इस बात से भयभीत था क सिर्फ 5000 की आबादी वाले राज्य जिसमे मुश्किल से 1000 सैनिक बल थे उन बाहरी आक्रमण का सामना कैसे करेंगे ,इसलिए न चाहते हुए भी उसे युधा में साथ देना था
Rajpal:ratan सिंह ,आज सप्ताह बीत गए पर इन में से किसी क हमला करने का सुचना नहीं मिला
रतन :राजपाल तम जानते हे हो क वो कितने शातिर है वो कभी हमले नहीं करते जब उनके दुश्मन तैयार हो
rajpal:aap सही ho,waise यहाँ हमने अछि तैयारी कर दिया है उनके स्वागत क लये
ratan:wo आये तो स्मरण रहे कोई ज़िंदा वापस न जाये
rajpal:wo सब तो ठीक है पर आपको नहीं लगता है क वो आपको कमज़ोर करने क लये आपके सहयोगी पर हमला करे
Ratan:tm कहना क्या चाहते हो
rajpal:aap तो जानते है क मेरे राज्य गहतराष्ट्रा में आपके राज्य कुबेरी से बहुत काम सैनिक है और कही वह हमला हुआ
ratan:sochte हुए तम ठीक कहते हो
rajpal:hume कुछ न कुछ वह क लये भी तैयारी कर लेनी चाहिए
ratan:rajpal गहतराष्ट्रा तक तो बास वही पहुंच सकता है अगर कोई गहतराष्ट्रा का व्यक्ति मदद करे नहीं तो मैंने सुना है वह लोग जाने से पहले हे जंगल में रास्ता भूल जाते है
Rajpal:han ये सत्य है ये हमारे पूर्वज की दें है जो हमारे राज्य को ऐसे जगह बनाया
दोनों ऐसे हे बात चीत करते करते मैखाने की और चल देते है जहा दोनों जी भर बैठ क शराब का लुत्फ़ उठाते है
एक घोडा गहतराष्ट्रा क दिशा में बहुत तेज़ी से दौड़ता जा रहा था और उसपे बैठा व्यक्ति घोड़े क लगाम दिए बिना गहतराष्ट्रा क बाजार तक पहुँचता hai.ye गहतराष्ट्रा का मुख्या बाजार था जहा लोग खरीददारी करने आया करते थे वो अपना घोडा पास हे खेत में बांध kar,bazar क चीज़ो को देखने लगता
"हे ये अमरुद कैसे दया "
dukandar
o सोने का सिक्का डॉ और 4 अमरुद पाओ
vyakti:baap रे " इतना महंगा
dukandar:ye तो सस्ते श्रीमान पर आपको गहतराष्ट्रा में पहले नहीं देखा
vyakti:Muskurate हुए "हो सकता है"
dukandar:tm बाहरी तो नहीं
vyakti:aisa हे समझ लो,
तम मझे 4 अमरुद देदो बदले में तम्हे सोने क सिक्के देता हु
dukandar:han क्यू नहीं
vyakti
r हाँ ये सिक्के बाहरी हो सकते है
dukandar:chalega
व्यक्ति अमरुद को उठा कर खाने लगता है
और सिक्के अमरुद वाले को देता है
dukandar:ye तो पारसी सिक्के है
तम पारसी हो?
vyakti:han हु
dukandar:tumne गहतराष्ट्रा कैसे ढूंढ लय
vyakti:Ghatrashtra कोई ढूंढ नहीं सकता बच्चे ये तो में बास अपने बुवा क बेटे की बेटी क घर आया हु
दुकानदार समझ नहीं पता और उसे छोर देता है
वो व्यक्ति रात का इंतज़ार करने लगता है
रात होते हे वो रस्सी क मदद से महल पर चढ़ जाता है
वो एक गहतराष्ट्रा क सैनिक का भेस धारण कर लय था वो सीधा देवरानी क कक्षा में घुस जाता है
व्यक्ति :आप हे पारसी रानी देवरानी हो
देवरानी एक नए चेहरे को देख कर समझ नहीं पति क क्या हो रहा है चरण वो पास रखे तलवार को उठा लेती है
Devrani:tum कौन हो
vyakti:ghabraye नहीं मेरे हाथ में कोई हथियार nahi(wo अपना दोनों हाथ दिखता है)
देवरानी चैन की साँस ले कर तलवार निचे करते हुए
devrani:kaun हो बहुरूपिये
vyakti:aapka का कोई गुप्तजन था रामेश्वर
देवरानी फिर से अपने तलवार उठा लेती है
devrani:han बोलो क्या हुआ उसे
vyakti:wo बेचारा मारा गया
देवरानी हल्का गुस्सा होते हुए
vyakti:aha आप गुस्सा न होए में उसका क़ातिल नहीं
devrani
aheliya न बुझाओ बोलो क्या काम है
व्यक्ति अपने चेहरे से नक़ाब हटा ता है
Vyakti:Me शमशेर हु ,मेरे वाहिद का एक लौटा चस्मो चिराग और पारस क साथ उन तमाम मुल्को का युवराज जिसपे हम क़ाबिज़ है
देवरानी ये बात सुनते हे समझ जाती है क वो पारस से आया है और वो मेरे वाहिद का शेह्ज़ादा है
Shamshera:han और तम्हारा गुप्तजन रामेश्वर घोंचू था मारा गया
उसे जासूसी नहीं आती थी.
देवरानी अब समझ गयी थी क उसको इस से कोई खतरा नहीं है इसलिए वो शमशेर को दूर सोफे पैर बैठने का इशारा करती है और खुद भी पास रखे कुर्सी पर बैठ जाती है
Shamshera:wo मरते वक़्त मझसे वडा करवा गया क वो ये सुचना तम तक पंहुचा दे
devrani
ar उसको मारा किसने
Shamshera:ab छोरो तम्हे तो पता हे होगा दुसरो क देश में जा कर जासूसी करने का अंजाम,
devrani:suchna क्या दया था उसने
Shamshera:devrani वो कह रहा था क तम कई साल से अपने पिता और अपने भाई को तलाश रही ho,to तम्हारे लिए एक दुःख की बात है
क तम्हारे पिता जी अब नहीं रहे
और तम्हारा भाई देवराज अब हमारे पारस की देखभाल करता है और वो है भी ाचा इसलिए हमने उसे अभी भी पारस क एक राज्य का राजा क़ायम रखा पर वैसे वो अक्सर हमारे साथ जंगो में विदेशो में होता है
देवरानी ये बात सुन क्र गड गड हो जाती है क उसका भाई अभी तक ज़िंदा है
devrani:tmhare सैनिको ने रामेश्वर को मर दया जासूसी में
और तम यहाँ क्या कर रहे हो ?
Shamshera:tm सही में एक पारसी की तरह सोचती ho,waise में भी जासूसी हे कर रहा हु और मझे इसका बचपन से शौक़ है
devrani
r में तम्हे मरवा दू तो
इतने में पुरे महल में हाहाकार मच जाता है और सेना हर तरफ दौड़ने लगते है भागने लगते है
devrani:tmhara उन्हें पता चल गया है ,निकलो यहाँ से और सन्देश पहुंचने क लये धन्यवाद्
शमशेर एक मुस्कराहट क साथ अपना चेहरा ढकता है और उलटे पेअर जाने लगता है तभी उसके सामने
sainik:yaha घुसपैठि है छान मारो महल को
Shamshera:uff हो मेने फिर से रस्सी गिरना भूल गया और पकड़ा गया.
और वो एक खिड़की से कूद कर एक कक्षा में घुस जाता है
शमशेर बास दृश्य देखते हे रह जाता है
जहा पर महरानी षुरूश्ती एआईने क सामने अपने नंगे बदन को निहारती रहती है
shurushti:mere दिन अब कटे नहीं काट ते महाराज अब वो सुख नहीं दे पते मझे अब तो कितने दिन हुए ,पता नहीं कब आएंगे
इतने में उसे पीछे किसी क खड़े रहने का आभास होता है और पीछे मुड़ती है ,शमशेर महल क बहार की खिड़की क तरफ खड़ा था
Shurushti:kaun
Shamshera:muaaf कीजियेगा ऐसे आना पड़ा
"हाँ मैंने कुछ नहीं suna"muskra कर खिड़की से बहार छलांग मर कर घोड़े पे बैठ भाग जाता है.
सैनिक उसका पीछा करते है पर वो उसको पाकर नहीं पते पर देवरानी को इस बात की ख़ुशी थी क उसका भाई देवराज सही सलामत है
बलदेव जो वैध जी को ले कर पास क जंगल में था उसे इस बात का पता बाद में चलता है सुबह वो वैध को ले कर वापस महल में अत है और निर्णय करता है वो एक आखिरी पत्र शेरसिंघ क रूप में लिखेगा और वो पत्र लिख लेता है और कमला को बुलवा कर दे देता hai.baldev थका हरा सो जाता है
दोपहर बलदेव सोया हे था क उसके सर पर कोई हाथ फेरता है और वो नींद से जगता है तो देखता है क उसकी माँ देवरानी है
baldev:kya बात है माँ आज बहुत खुश हो
Devrani:han बहुत ज़्यादा
baldev
ar ऐसा क्या हो गया
देवरानी अपने भाई क ज़िंदा होने की खबर सुनती है बलदेव को
baldev:kya मां ज़िंदा है
devrani:han और वो पारस में हे है
काश उनसे में मिल पति
Baldev:aap को में ज़रूर उनसे मिलवाऊंगा
"माँ क्यू न इस बात पर हम कही घूमने जाये"
Devrani:kaha?
Baldev:aaj हम बाजार जायेंगे और मेने सुना है वह मेला भी लगा है
आप शाम को तैयार रहना माँ "ये कह कर वो उठ कर स्नान करने चला जाता है.
राजा रतन और राजा राजपाल "Kuberi"rajya में जो क राजा रतन ने सोने और जवाहरात से भर क अपने राज्य को हिंदुस्तान का सबसे ढंडी राज्य बना दया tha.Raja रतन को आशंका थी क उन पर कोई हमला कर लूट पात न मचा दे.
यही वजह थी क राजा रतन हर एक प्रयास कर रहा था अपने सैनिक बढ़ने ki.kaio दिनों तक
सबने मिल क्र खतरे का कैसे उत्तर देना उसकी योजना सफलतापूर्वक बना लिया गया.
पर सबसे ज़्यादा अगर डर किसी का था तो वो दो राजाओ का था,
एक तो दिल्ली क तख़्त पर बैठे
बादशाह शाहज़ेब का
दूसरा अरब और फारस या पारस पर अपना सिक्का जमा लये हुए सुल्तान मेरे वाहिद ka,wo मेरे वाहिद जिसने आधी दुन्या से ज़्यादा अब तक फ़तेह कर चूका था
राजा रतन ने इन सब से निपटने क लये अपने सहयोगी हर राज्य से मदद मांगी और सबने उसकी मदद भी kiya,apne राज्य को राजा रतन ने. 50000 से ज़्यादा सैनिको से घेर दया था
राजा राजपाल वैसे तो अपने मित्र राजा रतन की मदद करना चाहते थे पर दूसरी ये भी वजह थी क कई वर्षो से रतन सिंह का साथ देने से विदेशो में ,लोगो ने राजपाल पर भी निशाना बनाना शुरू क्र दया था
राजपाल इस बात से भयभीत था क सिर्फ 5000 की आबादी वाले राज्य जिसमे मुश्किल से 1000 सैनिक बल थे उन बाहरी आक्रमण का सामना कैसे करेंगे ,इसलिए न चाहते हुए भी उसे युधा में साथ देना था
Rajpal:ratan सिंह ,आज सप्ताह बीत गए पर इन में से किसी क हमला करने का सुचना नहीं मिला
रतन :राजपाल तम जानते हे हो क वो कितने शातिर है वो कभी हमले नहीं करते जब उनके दुश्मन तैयार हो
rajpal:aap सही ho,waise यहाँ हमने अछि तैयारी कर दिया है उनके स्वागत क लये
ratan:wo आये तो स्मरण रहे कोई ज़िंदा वापस न जाये
rajpal:wo सब तो ठीक है पर आपको नहीं लगता है क वो आपको कमज़ोर करने क लये आपके सहयोगी पर हमला करे
Ratan:tm कहना क्या चाहते हो
rajpal:aap तो जानते है क मेरे राज्य गहतराष्ट्रा में आपके राज्य कुबेरी से बहुत काम सैनिक है और कही वह हमला हुआ
ratan:sochte हुए तम ठीक कहते हो
rajpal:hume कुछ न कुछ वह क लये भी तैयारी कर लेनी चाहिए
ratan:rajpal गहतराष्ट्रा तक तो बास वही पहुंच सकता है अगर कोई गहतराष्ट्रा का व्यक्ति मदद करे नहीं तो मैंने सुना है वह लोग जाने से पहले हे जंगल में रास्ता भूल जाते है
Rajpal:han ये सत्य है ये हमारे पूर्वज की दें है जो हमारे राज्य को ऐसे जगह बनाया
दोनों ऐसे हे बात चीत करते करते मैखाने की और चल देते है जहा दोनों जी भर बैठ क शराब का लुत्फ़ उठाते है
एक घोडा गहतराष्ट्रा क दिशा में बहुत तेज़ी से दौड़ता जा रहा था और उसपे बैठा व्यक्ति घोड़े क लगाम दिए बिना गहतराष्ट्रा क बाजार तक पहुँचता hai.ye गहतराष्ट्रा का मुख्या बाजार था जहा लोग खरीददारी करने आया करते थे वो अपना घोडा पास हे खेत में बांध kar,bazar क चीज़ो को देखने लगता
"हे ये अमरुद कैसे दया "
dukandar
vyakti:baap रे " इतना महंगा
dukandar:ye तो सस्ते श्रीमान पर आपको गहतराष्ट्रा में पहले नहीं देखा
vyakti:Muskurate हुए "हो सकता है"
dukandar:tm बाहरी तो नहीं
vyakti:aisa हे समझ लो,
तम मझे 4 अमरुद देदो बदले में तम्हे सोने क सिक्के देता हु
dukandar:han क्यू नहीं
vyakti
dukandar:chalega
व्यक्ति अमरुद को उठा कर खाने लगता है
और सिक्के अमरुद वाले को देता है
dukandar:ye तो पारसी सिक्के है
तम पारसी हो?
vyakti:han हु
dukandar:tumne गहतराष्ट्रा कैसे ढूंढ लय
vyakti:Ghatrashtra कोई ढूंढ नहीं सकता बच्चे ये तो में बास अपने बुवा क बेटे की बेटी क घर आया हु
दुकानदार समझ नहीं पता और उसे छोर देता है
वो व्यक्ति रात का इंतज़ार करने लगता है
रात होते हे वो रस्सी क मदद से महल पर चढ़ जाता है
वो एक गहतराष्ट्रा क सैनिक का भेस धारण कर लय था वो सीधा देवरानी क कक्षा में घुस जाता है
व्यक्ति :आप हे पारसी रानी देवरानी हो
देवरानी एक नए चेहरे को देख कर समझ नहीं पति क क्या हो रहा है चरण वो पास रखे तलवार को उठा लेती है
Devrani:tum कौन हो
vyakti:ghabraye नहीं मेरे हाथ में कोई हथियार nahi(wo अपना दोनों हाथ दिखता है)
देवरानी चैन की साँस ले कर तलवार निचे करते हुए
devrani:kaun हो बहुरूपिये
vyakti:aapka का कोई गुप्तजन था रामेश्वर
देवरानी फिर से अपने तलवार उठा लेती है
devrani:han बोलो क्या हुआ उसे
vyakti:wo बेचारा मारा गया
देवरानी हल्का गुस्सा होते हुए
vyakti:aha आप गुस्सा न होए में उसका क़ातिल नहीं
devrani
व्यक्ति अपने चेहरे से नक़ाब हटा ता है
Vyakti:Me शमशेर हु ,मेरे वाहिद का एक लौटा चस्मो चिराग और पारस क साथ उन तमाम मुल्को का युवराज जिसपे हम क़ाबिज़ है
देवरानी ये बात सुनते हे समझ जाती है क वो पारस से आया है और वो मेरे वाहिद का शेह्ज़ादा है
Shamshera:han और तम्हारा गुप्तजन रामेश्वर घोंचू था मारा गया
उसे जासूसी नहीं आती थी.
देवरानी अब समझ गयी थी क उसको इस से कोई खतरा नहीं है इसलिए वो शमशेर को दूर सोफे पैर बैठने का इशारा करती है और खुद भी पास रखे कुर्सी पर बैठ जाती है
Shamshera:wo मरते वक़्त मझसे वडा करवा गया क वो ये सुचना तम तक पंहुचा दे
devrani
Shamshera:ab छोरो तम्हे तो पता हे होगा दुसरो क देश में जा कर जासूसी करने का अंजाम,
devrani:suchna क्या दया था उसने
Shamshera:devrani वो कह रहा था क तम कई साल से अपने पिता और अपने भाई को तलाश रही ho,to तम्हारे लिए एक दुःख की बात है
क तम्हारे पिता जी अब नहीं रहे
और तम्हारा भाई देवराज अब हमारे पारस की देखभाल करता है और वो है भी ाचा इसलिए हमने उसे अभी भी पारस क एक राज्य का राजा क़ायम रखा पर वैसे वो अक्सर हमारे साथ जंगो में विदेशो में होता है
देवरानी ये बात सुन क्र गड गड हो जाती है क उसका भाई अभी तक ज़िंदा है
devrani:tmhare सैनिको ने रामेश्वर को मर दया जासूसी में
और तम यहाँ क्या कर रहे हो ?
Shamshera:tm सही में एक पारसी की तरह सोचती ho,waise में भी जासूसी हे कर रहा हु और मझे इसका बचपन से शौक़ है
devrani
इतने में पुरे महल में हाहाकार मच जाता है और सेना हर तरफ दौड़ने लगते है भागने लगते है
devrani:tmhara उन्हें पता चल गया है ,निकलो यहाँ से और सन्देश पहुंचने क लये धन्यवाद्
शमशेर एक मुस्कराहट क साथ अपना चेहरा ढकता है और उलटे पेअर जाने लगता है तभी उसके सामने
sainik:yaha घुसपैठि है छान मारो महल को
Shamshera:uff हो मेने फिर से रस्सी गिरना भूल गया और पकड़ा गया.
और वो एक खिड़की से कूद कर एक कक्षा में घुस जाता है
शमशेर बास दृश्य देखते हे रह जाता है
जहा पर महरानी षुरूश्ती एआईने क सामने अपने नंगे बदन को निहारती रहती है
shurushti:mere दिन अब कटे नहीं काट ते महाराज अब वो सुख नहीं दे पते मझे अब तो कितने दिन हुए ,पता नहीं कब आएंगे
इतने में उसे पीछे किसी क खड़े रहने का आभास होता है और पीछे मुड़ती है ,शमशेर महल क बहार की खिड़की क तरफ खड़ा था
Shurushti:kaun
Shamshera:muaaf कीजियेगा ऐसे आना पड़ा
"हाँ मैंने कुछ नहीं suna"muskra कर खिड़की से बहार छलांग मर कर घोड़े पे बैठ भाग जाता है.
सैनिक उसका पीछा करते है पर वो उसको पाकर नहीं पते पर देवरानी को इस बात की ख़ुशी थी क उसका भाई देवराज सही सलामत है
बलदेव जो वैध जी को ले कर पास क जंगल में था उसे इस बात का पता बाद में चलता है सुबह वो वैध को ले कर वापस महल में अत है और निर्णय करता है वो एक आखिरी पत्र शेरसिंघ क रूप में लिखेगा और वो पत्र लिख लेता है और कमला को बुलवा कर दे देता hai.baldev थका हरा सो जाता है
दोपहर बलदेव सोया हे था क उसके सर पर कोई हाथ फेरता है और वो नींद से जगता है तो देखता है क उसकी माँ देवरानी है
baldev:kya बात है माँ आज बहुत खुश हो
Devrani:han बहुत ज़्यादा
baldev
देवरानी अपने भाई क ज़िंदा होने की खबर सुनती है बलदेव को
baldev:kya मां ज़िंदा है
devrani:han और वो पारस में हे है
काश उनसे में मिल पति
Baldev:aap को में ज़रूर उनसे मिलवाऊंगा
"माँ क्यू न इस बात पर हम कही घूमने जाये"
Devrani:kaha?
Baldev:aaj हम बाजार जायेंगे और मेने सुना है वह मेला भी लगा है
आप शाम को तैयार रहना माँ "ये कह कर वो उठ कर स्नान करने चला जाता है.