Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 6 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 47

रात क 2 बज रहे रहे देवरानी और बलदेव अपने गले में गले डाले आहे भर रहे थे पर कोई और था जो उठ गया था

वो था राजपाल जिसे अपने राज्य पर हमले का देर सताये रहता था आज भी वो जग रहा था तभी उसे बहार किसी क दबे पॉ चलने की आवाज़ आती है

Rajpal;man में) ये इतनी रात को बहार दबे पॉ कौन है अगर कोई घर का होता तो उसे ु चोरो की चल चलने की क्या ज़रूरत थी

राजपाल मन में शंका लता है पर तभी वो आवाज़ बंद हो जाती है

इधर बलदेव क बाहो में देवरानी लहरा रही थी

Baldev:kaisa लगा मेरी रानी को पानी

Devrani;chall हट

देवरानी अपने होठ पर हलके बलदेव क लैंड क पानी को चाट ते हुए और खुश होते हुए

Baldev:maa मेरी जान आओ मेरे रूह में समां जाओ

Devrani:mai भी तुम्हारे जिस्म में नहीं तुम्हारे रूह तक अपना नाम लिख देना चाहती हु मेरे प्रेमी पर

Baldev:par क्या माँ

Devrani:thoda धैर्य रखो फल मीठा मिलेगा

Baldev:kitna सब्र तो क्या हुआ

Devrani:thoda और कर lo,or अब जाओ अपने कक्षा में आराम करो सुबह अपने काम पैर जाओ

Baldev:par मुझे तुम्हे छोर क कही जाने का डिल नहीं करता

Devrani:tum दो दिन से दिन रत कक्षा में हे हो सीमा पर भी नहीं जा रहे सब का शक बढ़ता जा रहा है मेरे युवराज

बलदेव थोड़ा गुस्सा होते हुए

“तो बढ़ने दो मेरी जान में इनसब से डरता नहीं”

Devrani:baat को समझो सही समय पर सबकुछ मिलता है पर उसकी प्रतीक्षा मनुष्य को करनी चाहिए

Baldev:aap क जितना धैर्य माँ मैंने नहीं देखा कही पीछे 18 वर्षो से तो आप हर सुख से वंचित रखा अपने आपको और अब भी धैर्य

Devrani:usi धैर्य का हे परिणाम है क मुझे इतना सुन्दर और बलिष्ट प्रेमी मिला है तुम्हारे रूप में

ये सुन कर बलदेव शर्मा जाता है

Baldev;maa दिन बा दिन तुमसे मेरा प्रेम बढ़ता हे जा रहा है

Devrani:bass करो

और बलदेव क माथे पे चुम लेती हु

“जाओ बलदेव अपने कक्षा में”

“तुम्हारे चेहरे से नज़र नहीं हैट टी माँ”

“जाओ तुम्हारे कक्षा में मेरे चित्र को देखते रहना पर यहाँ पर ज़्यादा समय रहना खतरे से खली नहीं “

Devrani;man में) मुआफ कर दो मेरे पिया तड़पा रही हु तुमको

बलदेव जाने लगता है तभी देवरानी उसे रोक कर

“ो मोरे बलमा इतने रात में कक्षा से जाओगे किसी ने देख लय तो क्या समझेगा”

“यही समझेगा देवरानी क एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को प्यार कर क आरहा है”

“पर तुम्हारी दादी जिसे शक हो गया है वो तो समझेगी क ...”

“आर्य माँ यही समझेगी क न में तुम्हारे साथ सो कर आरहा हु”

देवरानी ये सुन कर लज्जा जाती है और अपना सर झुका लेती और अपने पैरो की ऊँगली से जमीन खुरदने लगती है

“बीटा अगर लोग ये समझेंगे क आधी रात बलदेव अपने माँ क साथ सो कर आ रहा है तो सब हमारे दुश्मन हो जायेंगे”

“सरे दुश्मनो को में काट दूंगा पर मई अपनी माँ को अपने साथ ले कर सोना बंद नहीं करूँगा” और मुस्कुराता है

“बड़ा आया ये लो चादर ओढ़ लो ठण्ड भी है और कोई देख क पहचान नहीं पायेगा”

बलदेव उसके हाथ से चादर ले लेता है और ओढ़ लेता है और अपने मुँह को हल्का खोला था

“वैसे माँ तुम्हारे साथ सोने से ठण्ड ज़रा नहीं लग रही थी”

देवरानी बलदेव को हस्ते हुए पाकर कर दरवाज़ा क पार धकेलती है बलदेव बहार निकल जाता है और देवरानी दरवाज़ा बंद करती है

बलदेव दबे पाव सीडीओ क तरफ जाने लगता है

इधर जगा हुआ राजपाल को फिर से वही चोर कदमो की आवाज़ सुनता है और वो उत्सुक्त हो कर अपने बगल में तलवार लगाए बहार निकलता है

जैसे हे बहार आता है उसे हल्का अँधेरे में कोई चादर ओढ़े देवरानी क कक्षा से कोई सीडीओ क तरफ जाते दिखाई देता है

Rajpal;kaun है वह “?

और अपना तलवार खच से निकल कर

Rajpal;ruk जाओ वही

बलदेव ऐसी अवस्था में पकडे जाने से रुक जाता है और राजपाल अपने तलवार लिए बलदेव क करीब आने लगता है

और बलदेव क पीठ क तरफ से आता राजपाल तलवार बलदेव क पीठ पर ले जा रहा था

“कौन हो बहरूपिये”?

बलदेव को राजपाल की चलने की आहात अब सुनाई नहीं देती वो बिना पीछे मुड़े हुए मौक़ा देख कर भागने लगता है

Rajpal:sainiko होशियार घुसपैठिए

ज़ोर से चिल्लाता है

महल में चारो ओरे से सैनिक जग कर अपने तलवारो को निकल कर इधर उधर देखने लगते है

बलदेव मरता क्या न करता झट से सीडीओ से चढ़ कर ऊपर अपने कक्षा क तरफ जाता है और राजपाल जो क उतनी फुर्ती से चढ़ नहीं पता उसका पीछा करते हुए

बलदेव ऊपर जा कर अपने कक्षा क बगल में छोटे कक्षा जिसमे कोई नहीं रहता था सिर्फ पुराने सामान रखे थे उसमे घुस जाता है

Rajpal:baldev उठू महल में घुसपैठ हुआ है उठो बलदेव ....सेनापति

बलदेव ये सुन कर मुस्कुराता है और कक्षा क खिड़की क पास जा कर अपना चादर छोर देता है और खुद खिड़की से अपने कक्षा क खिड़की में छलांग लगा देता है

राजपाल दौड़ता हुआ सामान वाले कक्षा में घुसता है और उसके पीछे से सेनापति और बहार से आये कुछ सैनिक घुसते है तो वो लोग देखते है खिड़की खुला है और वह पर एक चादर गिरी है

राजपाल चादर उठा कर

“सेनापति यहाँ से कूद गया वो नीचे सैनिको को ले कर जाओ वो गहतराष्ट्रा क सीमा को पर न कर सके”

Senapati:Ji महाराज कुछ दिनों पहले भी ऐसे हे एक घुसपैठ हुई थी महल में ज़रूर कोई हमारे खिलाफ षड़यंत्र कर रहा है

बलदेव अपने कक्षा में जा कर अपने नंगे जिस्म पर कुरता पहनता है और निकलता है बहार

“पिता जी कहा हो आप”

और बलदेव राजपाल और सैनिको की आवाज़ सुन कर उनके तरफ जाने लगता है

Senapati:maharaj हम चलते है और वो लोग भी उसी कक्षा क खिड़की से कूद जाते है

बलदेव उन सब को देखते रहता है

अपने बाप क पास पहुंच कर

“क्या हुआ पिता जी इतने रात गए इतना शोर महल में”

“बीटा तुम अब आ रहे हो घुष्पथ हुआ था “

“ऐसा क्या पिता जी में नींद में था क्षमा करे “

“वो भाग गया बलदेव और ये चादर छोड़ गया अगर तुम सही समय पर उठ जाते तो वो पकड़ा जाता “

“हाँ शायद पिता जी वो पकड़ा जाता पर घुसपैठिया शातिर होते है”

“चलो निचे चलो बलदेव”

निचे सब क सब जागे हुए थे जीविका षुरूश्ती और कमला भी

सीढ़ी से निचे उतारते हुए दोनों बाप बीटा को सब देख रहे थे

“बीटा बलदेव एक बात याद रखना एक राजा कभी रत में चैन से नहीं सोता और अपनी प्रजा की रखवाली करता है”

Jeevika;ary क्या हुआ राजपाल क्यू इतना शोर मचाया हुआ

राजपाल और बलदेव अपने परिवार क पास आते है

Rajpal;maa कोई घुसपैठिए था जासूसी करने आया था महल में

Jeevika:bhagwan भला करे तुम अकेले हे दौर जाते हो काम से काम सैनिको को तो साथ लेते

Rajpal:bass वो पकड़ा जाता अगर बलदेव सही समय पर उठ जाता

तभी वह पर देवरानी चल कर आती है और ये बात सुन कर मन में

“तू राजपाल मर्द क नाम पे कलंक है तेरी पत्नी क डिल में घुसपैठ कर लय बलदेव ने तुम्हारे पुत्र ने तो तुम पकड़ नहीं सके तुम क्या घुसपैठ पकड़ोगे”

सब देवरानी को देखते है जो चलते हुए आ रही थी

“क्या हुआ महाराज”

“क्या हुआ बलदेव”

Rajpal:abhi आ रही हो तुम देवरानी आओ

Devrani:ji महाराज

Rajpal;tum बड़ी भोली हो देवरानी ऐसा दृश्य होने का मतलब है महल में घुसपैठ हुआ है

Devrani:Oh ऐसा है महाराज

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“लेकिन घुसपैठ हुआ आपके महल में तो आप ने पकड़ा क्यू नहीं कही कुछ चोरी तो नहीं कर लय”

देवरानी भोली बनती हुई कहती है

बलदेव देवरानी को देख मन me(“ye माँ बड़ी तेज़ है इतनी जल्दी वस्त्र बदल ली और सदी पहन ली और आ कर सटी सावित्री बन रही है”)

Rajpal;tum सही में भोली हो ऐसे घुसपैठ जासूसी करने आते है किसी भी महल का ये चोरी नहीं करते

Devrani;man me)rajpal में भोली हुआ करती थी पर अब नहीं hu..or बलदेव ने घुसपैठ कर क तो डिल चुरा लय है मेरा पर तुम्हे उस से क्या

Devrani;acha महाराज मुझे नहीं पता था

Shurushti:ise कहा समझे रहे हो महाराज ये सब समझने क लये दिमाग होना चाहिए

Rajpal:or ये चादर छोर क भाग गया घुसपैठ

सब की नज़र उस चादर पैर जाती है

Jeevika:man में) ये चादर तो जनि पहचानी लग रही hai,kya जो में सोच रही हु वो सही तो नहीं कही बलदेव..

जीविका का तेज़ दिमाग भांप लेता है

Shurushti:ye चादर तो मैंने कही तो पहले भी देखा है महाराज को बताउंगी

Rajpal:jao अब सब अपने अपने कक्षा में जा कर आराम करो अभी इतनी रत में कोई बहस नहीं चाहता हु और हाँ कमला तुम आज गयी नहीं थी अपने घर

Kamla:wo महाराज में जा रही थी पर

Devrani:wo मई हे रोक ली थी मेरे कमर में दर्द था इसलिए

Devrani:man में) ये कमला का रोक क क्या फायदा कामिनी सो गयी थी जिसके वजह से ये सब हुआ अगर पहले सचेत कर देती तो

Jeevika;man me)lagta है कमर तोड़ क पेलवा रही है रंडी जो कमर की मालिश करवानी रहती है

सब लोग अपने अपने कक्षा में जाने लगते है

Devrani:Saasu माँ चलिए छोर देती हु आपको

Jeevika:mai वैशाखी क सहारे चली जाउंगी

Rajpal:maa अगर वो मदद करना चाहती है आपकी तो चली जाओ न

Jeevika:me इतनी भी बेबस नहीं हुई हु

और देवरानी क ओरे देख क एक गुस्से से झलक देती है

थोड़े देर में सब एक एक कर के वापस सोने चले जाते है

राजपाल सोचते हुए अपने कक्षा में जा रहा था

“ये देवरानी क कक्षा क पास से हे ये घुसपैठि भागना शुरू क्या था”

वो कुछ सोच कर देवरानी क कक्षा की ओरे जाता है

देवरानी क दरवाज़ा थक थकता है

“आर्य महाराज आप”

देवरानी मन me;hey भगवन ये इतनी रत में कही इसका कुछ गलत इरादा तो नहीं कही इसका पति प्रेम तो नहीं जग गया”

“क्या हुआ महाराज कुछ काम था”

“देवरानी क्या दरवाज़े पैर हे राहु अंदर तो आने दो”

“हां आईये न महाराज”

राजपाल आकर कक्षा क चारो ओरे देखता है

Rajpal:devrani क्या तुमने घुशपैठ क आने की या चलने की आवाज़ सुनी थी

Devrani:nahi महाराज नींद में थी

राजपाल मन me:kahi देवरानी का किसी से चक्कर तो नहीं या एहि किसी क सहारे हम पर आक्रमण तो नहीं करवाने का षड़यंत्र कर रही है

देवरानी मन me;yahi तुम्हारा पति धर्म है अपने पत्नी पर शक करना क वो दुश्मनी कर रही है और तुम्हारा जान लेना चाहती है सब षुरूश्ती ने तुम्हारे दिमाग में भर दया है

Rajpal:theek है में जाता हु

राजपाल क जाते हे देवरानी फाटक से दरवाज़ा लगा क लम्बी लम्बी सांस लेने लगती है

“हे भगवन बचा लय तूने नहीं तो अगर राजपाल मेरे साथ कुछ ऊंच नीच करते तो मई उन्हें रोक नहीं पति क्यू क वो अब भी मेरे पति है समाज क सामने और फिर में बलदेव को क्या मुँह दिखती “

“नहीं में राजपाल को छूने भी नहीं देख सकती अपने शरीर को इस्पे सिर्फ बलदेव का हक़ है”

फिर देवरानी मुस्कुराती है

“भगवन क्या हो रहा है मुझे जब बलदेव आया और मेरे साथ रंगरलिया मन कर गया तो मुझे संकोच नहीं हुआ पर राजपाल क आते हे में डरने लगी जैसे कोई गैर पुरुष आगया हो”

“सच में मुझे बलदेव से प्रेम हो गया है”

और जा कर उल्टा लेट कर कामसूत्र पुष्तक उठा कर पढ़ने लगती है

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Devrani:uhh बलदेव एक दिन मुझे भी इस चित्र की तरह अपने गॉड में उठाये खड़े खड़े पेलना इस निगोड़ी बुर ने बहुत तड़पाया है...
 
अपडेट 48

Devrani:uhh बलदेव एक दिन मुझे भी इस चित्र की तरह अपने गॉड में उठाये खड़े खड़े पेलना इस निगोड़ी बुर ने बहुत तड़पाया है...

“बलदेव क लिंग का पानी कितना मज़ेदार था”

छूट को मसलते हुए बिस्तर पर देवरानी आज की घटना को याद कर रही थी कैसे उसे बलदेव ने रगड़ा था और उसका साथ दे कर देवरानी को आज एक अलग हे सुख जा अहसास होरहा था वो किसी भी तरह सो जाती है

बलदेव भी देवरानी पर खूब म्हणत कर क अपना पानी गिरा कर हल्का हो गया था और अपने. बाप दुवारा पकडे जाने से बचने की ख़ुशी भी थी उसे और वो चैन की नींद लेने लगता है

राजपाल क मन में कही न कही शक पैदा हो गया था क कही देवरानी तो नहीं जुडी है इस घुसपैठ क पीछे या कही उसके देवरानी की ओरे ध्यान नहीं देने क वजह से किसी और से सम्बन्ध तो नहीं बना ली देवरानी ने

जीविका तो मन हे मन समझ गयी थी घुसपैठ किसी और ने नहीं बलदेव ने हे की है वो भी अपने माँ क लये और षुरूश्ती क मन में शंका बन गया था क हो न हो ये चादर जो घुसपैठिये ने छोर गया वो देवरानी की हे है

सुबह सब से पहले कमला उठ टी है और घर क काम करने में लग जाती है उसके बाद जीविका उठ टी है और टहलने क लये बाघ में चली जाती है राजपाल भी सुबह जल्दी उठ ता है और महल क बहार टहलने लगता है

षुरूश्ती स्नान घर से निकल कर आती है

Shurushti:kamla कहा हो तुम

kamla:maharani रसोई में हु

षुरूश्ती रसोई क ओरे आ कर

“कमला मेरे कपडे कुछ गंदे हो गए है थोड़ा देख लेना”

“ठीक है महरानी में कर दूंगी साफ़”

कमला रसोई का काम ख़तम कर क

कपडे धोने क लये सब जगह से कपडे इकठा करने लगती है

Kamla:hey भगवन सब उठ गए ये प्रेमी जोड़ा अब तक सो रहे है देखु ज़रा इनको

कमला देवरानी क कक्षा में जाती है

Kamla:mahrani देवरानी हद्द ह अब तक सो रहे है आप

देवरानी एक अंगड़ाई ले कर उठ टी है

“कमला कहो न”

“अब में क्या कहु महरानी उठ जाओ सुबह कब का हुआ “

देवरानी उठ क बैठ जाती है

“कमला मेरा बदन का नस नस दुःख रहा है”

अपनी अधखुली आखो से देवरानी कहती है

“क्यू महरानी कल रात में कुवा खुदवा ली क्या “

“हट पागल kamla”sharma कर फिर लेट जाती है

“अब कर लो बात कुछ क्या भी नहीं और रोम रोम दर्द भी है ऐसा नहीं हो सकता ,कोई बात नहीं महरानी वर्षो बाद प्रेम का खेल खेल रही हो शरीर को धीरे धीरे आदत हो जाएगी”

“चुप कर कमला जाओ अपना काम करो”

“ठीक है महरानी सोती रहो सब पूजा पथ सुबह उठ कर करना भूल गयी ,में जाती हु कपडे धोने ,तुम्हारा कुछ है धोना बताओ”

देवरानी उल्टा लेती अपना मुँह तकिये से दबाये

“हाँ स्नान गृह में देखो ालगणनी पर उतरे वस्त्र है सब धो दो”

“ठीक है महरानी”

कमला सब वस्त्र ले कर चली जाती है महल क एक कोने में जहा पर कल होता है और बड़ी सी जगह पक्के का था वह पर सिर्फ कपडे धोये जाते थे

कमला बरी बारी से कपडे धोने लगती है

कमला अब जैसे हे देवरानी क एक सदी धो कर फिर से बाल्टी में हाथ डालती है उसके हाथ में एक छोटा धोती नुमा कपडा आता है जिसे देख

“है राम ये तो इतना छोटा सा धोती है वो भी रेशमी है ये महरानी कब से पहन ने लगी”

“ाचा रात का कार्यक्रम में यही धारण क्या था महरानी ने “

तभी उसके साथ का ब्लाउज भी निकलती है बाल्टी से “ये देखो इतना छोटा सा ब्लाउज पहन रही है जिसके दूध पहाड़ जैसे हो उसे ये क्या छुपायेगा”

अब कमला उस धोती को पकड़ क जैसे हे पानी मरने वाली थी

Shurushti:kamla ये क्या समय व्यर्थ कर रही हो

सामने से षुरूश्ती आती है

“क्या हुआ महरानी”

“मैंने कहा था तुम्हे मेरा कपडा धोने पुरे राज्य का नहीं”

“ये किसका धो रही हो”

“महरानी देवरानी का है ये”

षुरूश्ती मन me:ye पहन ने से ाचा नंगा हे रह ले देवरानी

तभी षुरूश्ती की पैनी नज़र उस देवरानी क धोती पर पड़ती जहा पर कुछ सफ़ेद दाग लगा था

Shurushti:kamla ये क्या लगा कर धो रही हो इसको?

Kamla:kuch नहीं महरानी

षुरूश्ती अपने ऊँगली दिखा कर

“तो वो क्या है सफ़ेद सा चिपका हुआ”

कमला भी आश्चर्य चकित हो कर देखती है तो पति है कुछ गधा सा चिपका है देवरानी क कपडे पर

“ये क्या लग गया ab”kamla उस पैर एक ऊँगली लगा कर घिसती है पर वो कड़ा हो गया था और अब ज़ोर लगाने से वो और फैल जाता है और लस्सी सा चिपक जाता है कमला क ऊँगली में

Shurushti:chii ये क्या चीज़ है

Kamla:lassa जैसा है

षुरूश्ती मन me:ye लस्सा नहीं वीर्य है और इसके गाढ़ेपन से लग रहा है क ये किसी पुरुष का है अगर देवरानी का होता तो उसके सामने की तरफ लगा होता पर ये पीछे लगा हुआ है

Kamla:man me)ye देवरानी भी न पता नहीं कही ये वीर्य तो नहीं पर अब षुरूश्ती को क्या बोलू

Kamla:Mahrani षुरूश्ती वो में कपडा निचे राखी थी न सब इकठा करने क लये तो कुछ लग गया होगा

Shurushti:acha अच्छा ठीक है

मन me:or ये वस्त्र तो न रात में पहनी थी देवरानी और न हे कल तो ये गन्दा कब हुआ और देवरानी पहनी कब? कही इसके तर रात हुए घुसपैठ से तो नहीं मिलते ..

Shurushti:acha कमला देवरानी अभी तक उठी नहीं

Kamla:han उनके बदन में थोड़ा दर्द है

षुरूश्ती अंदर हे अंदर एक मुस्कान देती है

मन me”ab में सब समझी अगर जो में सोच रही हु वो सही निकला तो मेरी प्यारी देवरानी तुम्हारे प्राण लेने का सही समय आगया है”

इधर देवरानी उठ कर स्नान घर में जाती है और उसे अचानक कुछ याद आता है वो झट से बहार जा कर कक्षा में देखती है फिर आकर अंदर ढूंढ़ने लगती है

“हे भगवन कमला भी न मेरा वो वस्त्र भी ले गयी में तो भूल हे गयी थी और वो तो उसपे दाग भी था बलदेव क लैंड क पानी का”

“किसी ने देख लय तो अब क्या करू “

फिर वो स्नान कर क आती है कपडे बदल क अपने कक्षा में रखे मंदिर क पास हाथ जोड़े कड़ी होजाती है

फिर दिया जलती है मंदिर का और कुछ अगरबत्ती जला लेती है

और मंत्रो को जाप शुरू कर देती है कुछ आधे घंटे तक पूजा करते रहती है फिर

अपने मन में भगवन से प्राथना करने लगती है

“भगवन मेरा कोई नहीं पर तू है तू था और तू रहेगा मेरे जीवन में बलदेव एक नयी खुसी ले कर आया है भगवन हमारे प्यार को किसी की नज़र न लगे”

अपने आखे खोलती है तो सामने कमला कड़ी मुस्कुरा रही थी

देवरानी पूजा की थाली ले कर कमला की ओरे कर क दिया क निकलते धुवे को कमला क तरफ हाथ करती है

और अपने हाथ से उसे प्रसाद देती है

“धन्यवाद महरानी”

“कमला ये लो थाली और सबको प्रसाद बाँट दो”

“महारानी लाओ थाली प्रसाद तो में बाँट हे दूंगी पर उसके पहले”

कमला थाली ले कर पास में हे रख देती है और देवरानी का हाथ पकड़ कर बिस्तर पर बैठा कर

“महरानी आप को कुछ ऐसा धुलवाना था जो आप सब से छुपा कर पहनती हो तो में यही धो देती”

“कमला में समझ रही हु तुम क्या कहोगी में नींद में थी दिमाग से हे उतर गया था मेरे मुझे लग हे रहा था क “

“लग हे नहीं महरानी गड़बड़ हो गया है”

“कैसे कमला क्या हुआ है बताओ”

“महरानी वो आप क प्रेमी का पानी का दाग आपकी धोती पर लगे षुरूश्ती ने देख लय है”

“उफ़ अब क्या करू मई”

देवरानी परेशां होते हुए

“हाँ वो तो शातिर है उसे तो में बेवक़ूफ़ भी नहीं बना सकती थी मुझे लगता है क वो समझ गयी क किसी पुरुष का वीर्य है”

“हे भगवन कमला कही वो महराज को न बता दे”

“हाँ वो रत की बात भी समझ चुकी होगी”

“डरो मत महरानी आज न कल तो पता चलना हे है”

“हम्म वो तो है में नहीं डर्टी किसी से ज़्यादा से ज़्यादा मेरी जान ले लेंगे “

“आर्य छोरो उसे अभी शक हे पैदा हुआ है न उसके पास सुबूत क्या है”

“कमला तुम तो बास चुप हे रहो सब तुम्हारे वजह से हो रहा है कल रत में सो गयी घोडा बेच क महराज क आने का इशारा कर देती तो में बलदेव को बहार न भेजती”

“मेरा बलदेव बाल बाल बचा है नहीं तो पकड़ा जाता”

“महरानी तुम न भेजती बलदेव को बहार पर महाराज को यदि चलने की आवाज़ आ चुकी थी तो वो कही आपके कक्षा को खुलवा कर देखते और तुम दोनों को रेंज हाथ पकड़ लेते तो”

“हम्म वो भी है कमला”

“इसलिए कहती हु महरानी जो होता है अचे क लये होता है मौज करो डरो नहीं मरना तो एक दिन है हे है”

“कमला तू इतना ज्ञान कहा से लती है “

“जैसे तुमने बलदेव का वीर्य अपने कपडे पर लगा लिया वैसे हे मेरे पास ज्ञान आगया”

“चल हट कामिनी कही की वो तो बास”

“क्या बास महरानी”

“महरानी तुम कहती हो कुछ नहीं हुआ और तुम्हारे रोम रोम भी दर्द कर रहा था”

“आर्य कामिनी बास हम कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहते और वो तो बलदेव जोश में आ कर पीछे रगड़ क पानी छोर दया “

देवरानी शर्मा कर अपना मुँह फेर लेती है

“महरानी है हे तुम्हारा पिछवाड़ा ऐसा ाचा क्या खूब मसला बलदेव ने और वैसे महरानी इतना गधा वीर्य मैंने तो कभी नहीं देखा”

“हम्म पता है कमला”

मन me:kamla अब तुम्हे क्या बताऊ क मैंने उस प्यारे वीर्य क अनमोल दानो को मेरे बेटे क बीज को चखा भी है जिसका स्वाद अब तक मेरे मुँह में है

“क्या सोच रही हो महरानी बलदेव का ऐसा गधा डंडीदार वीर्य है क किसी भी महिला को एक बचे नहीं दो बचे की माँ बना दे”

“चुप कर कामिनी कमला”

“जा प्रसाद बाँट दे कमला सबको”

Kamla:mahrani ध्यान से कही बलदेव आपको हे नहीं जुड़वाँ बचे की माँ बना दे

ये कह कर कमला प्रसाद की थाली ले कर भागती है हस्ते हुए

Devrani:kamla की बची और उसके ऊपर हाथ उठाये भगति है

कमला तेज़ी से भाग जाती है और देवरानी ज़ोर से है देती है और आखे बंद क्र क

“हे भगवन ये कमला भी na.”or बलदेव दुवारा गर्भ कर देने जाने वाले बार सोच कर उसका रोअम रोअम सिहर जाता है फिर कुछ सोच कर

“प्यार मेरा है प्रेमी मेरा है वो एक बचे से गर्भवती करे मुझे या जुड़वे से इस कमला को क्या काम उस से”

उधर बलदेव भी अब उठ चूका था फिर व्यायाम कर क स्नान कर तैयार होता है और अपने चूरन खा लेता है उतने में कमला अति है

Kamla:ye लो युवराज प्रसाद

कमला से प्रसाद ले कर श्रद्धा क साथ प्रसाद खा लेता है

Kamla:kab तक चूरन खाओगे प्रसाद खाओ

Baldev:kamla वो तो में बच गया रात नहीं तो तुम तो मुझे मरवा देती

Kamla:apne माँ को ले कर सोना भी है और मज़े करना है और डरते भी हो

Baldev:darte तो हम अपने बाप से भी नहीं है

Kamla:han जानती हु इसलिए तो अपने माँ को पता लिए हो और आधी रात माँ को ले कर उसके हे कक्षा में सो जाते है उसके हे बिस्तर में

Baldev:han कमला हमे कुछ न कुछ सोचना पड़ेगा क्यू क हम और ज़्यादा दिन तक ये छुपी चुप्पै नहीं खेल सकते

Kamla:to युवराज से महाराज बन ने का इरादा है

Baldev:ab तुम्हारी महरानी मेरी हुई तो महाराज तो हो हे गया मई

Kamla:par आधे हुए अभी क्यू क ब्याह तो कए नहीं

Baldev:vivah ः उसका पता नहीं पर मेरे प्रेम में दीवानी है तुम्हारी महरानी

Kamla:chalo जाओ अब प्रसाद खा लये तो में अपना काम करने जा रही हु और कक्षा से जाने लगती है

Baldev:ary सुनो तो ये तो बताती जाओ मेरी रानी कहा है अभी

Kamla:tayyar हो कर बैठी है तुम्हारे लये अपने कक्षा में और हस्ते हुए चली जाती है

बलदेव मन me:ab मुझे अपना असली प्रसाद खाने चलना चाहिए जो भगवन ने सिर्फ मेरे लये बनाया है
 
अपडेट 49

बलदेव अपने माँ से मिलने क लये चल पड़ता है और उसकसे कक्षा में जा कर देखता है परन्तु उसे देवरानी कही दिखाई नहीं देती

"माँ कहा हो "

देवरानी तैयार होकर रसोई घर में आ जाती है अब तक और नाश्ता तैयार करने लगी थी

जैसे हे उसके कानो में बलदे का आवाज़ पड़ता है

मन me:ek पल चैन नहीं मेरे पिया को

"बीटा में रसोई में हु "

और अपने काम में लग जाती है

बलदेव भागता हुआ रसोई की तरफ अत है

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देवरानी कड़ी काम कर रही थी और उसके हर बार हिलने से सुर में उसकी बड़ी गांड भी हिल रही थी सुर में अपनी माँ क गांड को देख

"है माँ कब डौगी मुझे इन्हे मरने इसे पेलने क लये में तरस रहा हु और तुम अब तक मुझे मसलने भी नहीं दी"

देवरानी आहात सुन क

"आजाओ बलदेव वह क्यू खड़े हो"

मन me:mere गांड को हे घूरता रहेगा या..

"माँ आज बहुत महक रही हो आप क्या बात है"

"सच में बलदेव "

"हाँ माँ कौन से साबुन से नहीं हो"

और बलदेव देवरानी क करीब जाता है

"ये तुम्हारे प्यार की खुष्बु है बलदेव तुमने हे तो मेरा अंग अंग महकायाहै"

बलदेव देवरानी से चिपक जाता है

"झुट्टी कही की तुम्हारा बदन तो पहले से चन्दन सा महक है"

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देवरानी क कमर को पकड़ कर क घूमता हुआ अपने से जकड लेता है तो उसके पल्लू निचे गिर जाते है जिस से बड़े वक्ष सामने दिखाई देने लगते है बलदेव अचानक उसपर अपने होठ रख कर चुम लेता है और देवरानी क कमर को मसलते हुए उसके बड़ी गांड को अपने से चिपका लेता है

"हम्म देवरानी क्यू तड़पती हो"

"अह्ह्ह राजा ज़रा आराम से मेरे राजा सुबह सुबह हे शुरू हो गए "

देवरानी अपने दूध पर बलदेव क होठ पड़ते हे सिहर जाती है

"मेरी मर्ज़ी मई कभी भी अपने रानी को प्यार करू"

"पर अभी सुबह का समय है घर पे सब है"

"रात में तो खूब रंग जमाई थी और अभी दर रही हो"

देवरानी अपना पल्लू उठा कर फिर से अपने बड़े वक्ष को धक् लेती है

"है है देखो कैसे छुपा रही हो "ये तुम्हारे छुपाने से छुपने वाली नहीं महरानी जी"

देवरानी लज्जा जाती है

"अहा देखो कैसे शर्मा रही है मेरी रानी"

"बलदेव..."

"हाँ माँ "

"कभी कभी मज़ाक से हैट कर बार कर लय करो"

"कहो न माँ क्यू परेशां हो रही हो आज लगता है कुछ सोच रही हो क्या चिंता है"

देवरानी अपना मुँह गिरा क

"बलदेव रात में तुम फास्ट फास्ट बचे और आज सुबह में मई फास गयी"

"वो कैसे"

"बीटा वो कल तुमने अपना पानी छोर कर धोती ख़राब कर दी थी जिसे कमला धोने ले गयी और षुरूश्ती ने देख लय"

"माँ तो क्या समझ जाएगी वो इस बात से"

"बीटा तुम नहीं समझते वो कितनी शातिर है वो समझ गयी होगी क वीर्य पुरुष का है और वो मेरे पर नज़र रखने लगेगी"

"माँ तो तुमने वो वस्त्र कमला को क्यू ले जाने दया बहार "

"बीटा में क्या करती तुम्हारे रात भर मस्ती की सुबह अंग अंग टूट रहा था तो "

"बास बास हमारा कुछ नहीं कर सकते ये आप निश्चिंत रहे और ये षुरूश्ती को आपके ऊपर सब अत्याचार का उत्तर देना हॉग"

देवरानी अब जा कर थोड़ा चिंता से बहार आती है

बलदेव माहौल बदलने क लये

"वैसे माँ कल तुमने बड़ा जल्दी वस्त्र बदल कर आगयी थी "

देवरानी मुस्कुराती है

"वैसे सटी सावित्री अवतार में भी तुम काम कामुक नहीं लगती हो मेरी पारी"

"चुप कर badmash,sab हम पर शक कर रहे है और तू मुझे रसोई क बहार खड़ा निहार रहा था कोई देख लेता तो"

बलदेव देवरानी क पैरो क निचे बैठ ते हुए

"देवरानी ये तुम्हारे पहाड़ जैसे चुतर मेरे नींद चैन उदा डाई है"

"ची गंदे कही क "

"माँ मई इन्हे दबोच कर खूब मसलना चाहता हु मेरी रानी पर तुम नहीं आगे बढ़ने देती मुझे "

और बलदेव बचे सा मुँह बना लेता है

बलदेव झुक कर देवरानी क गांड क पास अपना मुँह ले जा कर उसे सूंघ कर आँख बंद कए था

"ओह्ह मेरा राजा रात में हे तो तुमने उसपे अपना वो रगड़ क उसपे पानी भी गिरा दया था"

"माँ मुझे इन पहाड़ो को खोद देना है आज "

"राजा तुम इस पहाड़ क मालिक हो अनुमति कैसी"

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बलदेव निचे से अपने बड़े हाथो को माँ क दोनों चुतर क करीब लाता है मस्ती में और देवरानी अपना चुतर हल्का घूमती है

"माँ मई इस पहाड़ क गुफा में घूमना चाहता हु"

"ये गुफा बहुत छोटा है बीटा कैसे घूमोगे"

"माँ अपने घोड़े को घुमाऊंगा"

"पर अंदर अँधेरा है घोडा दर नहीं जाये गहराई देख क"

"मेरा घोडा इसकी गहराई क जड़ तक नाप देगा माँ"

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बलदेव अपना हाथ उसके चुतर पर रख सहला देता है

"आआह बीटा उह्ह्ह आआआह बलदेव"

"उफ़ माँ कितने मुलायम चुतर है कितने मखमली है ये दूध से भी चिकना और गद्देदार"

और बलदेव उसके कमर पर चुम्बन दे देता है

"ाआअह बलदेव जाएं लोगे मेरी"

बलदेव अब हल्का सा हाथ फेरते हुए दोनों हाथो से उसके चुतर को सेहला रहा था

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"ाः माँ इन चुतर ने मेरे दिल क कई टुकड़े कए है इनसे तो में बदला लूंगा"

"ाः बलदेव जान हे ले लोगे क्या इनका "

"माँ इस चुतर ने मेरी साँसे रोक दी है कई बार"

देवरानी अपने चुतर को सहलाने भर से उत्तेजित हो जाती है और बलदेव को पास हे बिस्तर पर गिरा देती है

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"ाः बलदेव इतना पसंद है मेरे ये तुमको"

"हाँ माँ बहुत पसंद उम् क्या मुलायम है"

"अहह बलदेव"

"माँ तुम इन पहाड़ो को ले कर चल कैसे पतों हो भरी नहीं लगता ?"

"उफ़ हट बदमाश "

देवरानी रूस जाती है और कड़ी हो जाती है

"आर्य मेरी रानी बुरा मन गयी"

"माँ तुम्हारे जैसे चुतर दुन्या में नहीं किसी क"

"चल झूठा "

"माँ तुम्हे प्रेमिका बना क में धनि हो गया "

देवरानी समझ जाती है बलदेव मन बाना लय है आज मस्ती का

"वो तो हु में पारस की सब से सुन्दर रानी थी में किसी ज़माने में"

"माँ आप अब भी सबसे सुन्दर हो जब तुम चलती हो तो ये दोनों चुतर इस तरह से सुर में ऊपर निचे होते है क जैसे झगड़ रहे हो आपस में"

"हाँ इसलिए तू घूरता रहता है इन्हे"

बलदेव उठ कर खड़ा होता है

"माँ एक बार चल क दिखाओ न"

"क्यू बाबा अब तुम्हे में चल क क्यू दिखाऊ तुम्हारी पत्नी नहीं हु में "

"माँ एक बार चलो न दो कदम मुझे इस बड़े मनमोह लेने वाले चुतर की थिरकन देखनी है "

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देवरानी ये बात सुन कर शर्म और उत्तेजना से भर कर एक बार बलदेव क आखो में देख क

सोचती है" ये तो अपने बाप से 10 कदम आगे है अभी से इसके अपेक्षा इतनी है आगे ये क्या करेगा जब अभी ये दिन दहाड़े पेलने पे तुला है"

"माँ एक बार हिलाओ न इन्हे"

"ठीक है तो देखो अब तुम इनका कमल"

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देवरानी अपना पल्लू सीधा कर क अपने गांड को बड़े अंदाज़ से गोल गोल घूमने लगती है और उसकी थिरकन बलदेव देखते रह जाता है

"माँ मई तो भूल हे गया था क तुम निर्त्य कला में माहिर हो और तुम्हारे ये चुतर आह"

बलदेव झट से देवरानी को अपने बहो में

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भर लेता है और उसके होठो को चूमने लगता है फिर उसके कमर में हाथ लगा क नाभि को भी चूमने लगता है

"ाः बलदेव उह्ह्ह आआह"

"उमा गलपपपप गलप्प्प माँ मेरी जान"

बलदेव देवरानी को अब अपने बाहो में समेत लेता है " माँ तुम्हारे ये चुतर को खूब मसलो"

"मसल दो बीटा ये चुतर कई वर्षो से तदपि है एक मजबूत हाथ क लये इस्पे तुम्हारा हे हक़ है"

"उफ़ माँ तुम्हारे gaand"ek ज़ोर का चपत देवरानी क एक गांड पर मरता है

देवरानी का दोनों पैट हिल जाता है

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"हे bhagwan...uh बीटा आरामसे"

बलदेव अब अपना लैंड जो खड़ा हो चूका था देवरानी क छूट पर रगड़ता है

"बलदेव तुम कितने गंदे हो गए हो तुमने अभी मेरे चुतर को क्या कहा"

"माँ मैंने इन्हे गांड कहा तुम्हारे नितम्ब को"

"ये भासा कोई भला कोई अपने माँ क साथ प्रयोग करता hai"uhh आआह

"हाँ ये तो नितम्ब नहीं ये गांड हे hai,or ज़ोरो से दोनों हाथो को ले जा कर देवरानी क उन्नत नितम्ब को मसलने लगता है"

"आआह माआ क्या बड़े है ये उफ़"

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"आआह बलदेव नहीं ना बलदेव निशान पद जायेंगे उफ़ नहीं बलदेव आआह्ह्ह मेरे राजा"

"ओह्ह मा निशान क्या मई इन तरबूज़ों को तोड़ दूंगा"

"बड़ा आया तोड़ने वाला उह्ह्ह आअह्ह्ह बलदे.."

देवरानी अब अपना छूट बलदेव क लैंड पर सहलाने लगती है और उसके सर को पकड़ कर बलदेव क बाल खींचती है

"उह्ह्ह आआह बलदेव बास आआह"

"इतनी जल्दी थक गयी मेरी रानी क्या हुआ बड़ी महरानी बनती थी थक्क गयी"

उम् और खूब मसलमे लगता है बलदेव

"बीटा ऐसा कभी तेरे बाप ने नहीं मसला जैसा उह्ह्ह आआह मा उह्ह्ह आआह जैसा तू मसल हआ ाआअह रहा है"

"पिता जी को इसकी मूल्य का अंदाज़ा नहीं है उन्हें नहीं पारा ऐसे नितम्ब और तुम जैसी माल दिया ले कर ढूंढ़ने से नहीं मिलेगी"

"उठ मा क्या गद्देदार गांड है आपके"

"ाः खा जाओ फिर इन्हे इतना हे पसंद है तो ुहभ हे भगवन में मर गयी आआह मेरी राजा ओह"

"बलदेव मेरी रानी तेरे गांड क दरार में अपना झंडा गाड़ दूंगा "

देवरानी शर्मा कर अपना मुँह छुपा लेती है

मन me:mere राजा तुमने मेरे डिल में अपना झंडा गाड़ दया है अब तुम कही भी झंडा गाड़ दो में मन नहीं करुँगी

"माँ मई तुमसे बहुत प्यार करता हु"

"बीटा में भी तुमसे अपने अआप से ज़्यादा पर करती हु कभी धोका मत देना "

बलदेव देवरानी को ज़ोर से कस्ते हुए

"कभी नहीं माँ तुम मेरी महरानी बनोगी"

और एक हाथ अपना पुरे चुतर को पकड़ कर

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मसलते रहता है उफ़ माँ क्या माल हो तुम

देवरानी मन me:kamla सही कहती थी क मेरे इतने बड़े नितम्ब किसी क हाथ में आएंगे वो बलदेव का हाथ हे है"

"ाः मेरे राजा "

देवरानी की गांड को दबा दबा क भुर्जी कर देता है बलदेव और उसे एक दर्द क साथ अलग हे सुख की प्राप्ति होती है

"बलदेव बास मेरे राजा अब और नहीं"

बलदेव अपना मुँह गिरा लेता है

"माँ तुम "

"लो अब मुज गिरा लय अभी ज़्यादा थक गयी तो दिन भर काम नहीं कर पाऊँगी"

बलदेव उसके चुतर छोर देता है

"माँ तुम्हे मेरा कल तुम्हारा वस्त्र ख़राब नहीं करना चाहिए था"

"आर्य बीटा ऐसा क्यू सोचते हो तुम "

"वो मेरे वजह se..or तुम्हे ाचा भी नहीं लगा"

"पागल मेरे राजा मुझे बहुत सुख मिला कल और तुम्हारे हर एक अंग से मुझे प्यार है अगर मुझे बुरा लगता तो क्या में तुम्हारा वीर्य चखती"

और शर्मा कर अपना सर निचे कर लेती है अपने पेअर से ज़मी खुरदने लगती है

"माँ मेरे लये तुम इतना करती हो बोलो तुम्हे मुझसे क्या चाहिए"

"बीटा बास एक स्त्री को प्यार क अलावा कुछ नहीं चाहिए तुम एक सच्चे प्रेमी की तरह रहना और ये भगवन क सामने प्रतिज्ञा लो क तुम मेरा हमेशा साथ डोज मेरे साथ कभी छल नहीं करोगे "

बलदेव माँ की बात सुन कर "माँ मई बलदेव यानि क गहतराष्ट्रा का महाराज अपने रानी देवरानी क सामने भगवन को साक्षी मान कर ये प्रतिज्ञा लेता हु क तुम्हारा साथ जीवन भर दूंगा कभी धोका नहीं दूंगा"

बलदेव और देवरानी दोनों हाथ जोड़ कर देवरानी क कक्षा में बने मंदिर क सामने अपना माथा टेकते है थोड़ा उदास हुई देवरानी क पीछे लग कर

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"माँ आखिर तुमने मुझे बंधन से बाँध हे दया"

"नहीं तो क्या में कोई खेलने की चीज़ नहीं जो आज मेरे शरीर से खेल लो और कल किसी और क साथ रंगरसिया मनाओ सब राजाओ का यही काम है"

"पर माँ में तुम्हारे सिवा न देखा हु किसी को न देखूंगा और ाचा हुआ ये प्रतिज्ञा से कल हो कर अगर मेरा डिल बेईमान होने का सोचा तो भी छह कर पाप नहीं कर पायेगा"

"जिस दिन तुम्हारा डिल बेईमान हुआ न बलदेव उस दिन उसको चीयर क निकल दूंगी हाँ"

"आर्य मेरी शेरनी तो क्रोधित हो गयी "

"में बलदेव अपना सब कुछ छोर कर सब देव पैर लगा दया है तुम्हारे लये karma,dharm,niyam को भूल अपने पति को छोर पूरी दुन्या से लड़ने क लये तैयार हु अब अगर तुम कुछ गलत करोगे तो में बर्दाश्त नहीं कर सकती अब मुझे सिर्फ तुम्हारा साथ चाहिए"

"इतना प्यार करती हो देवरानी"

"हद्द से ज़्यादा "

"माँ में अपने प्रतिज्ञा तोड़ने से पहले अपनी जान देना पसंद करूँगा"

देवरानी ये सुन कर बलदेव क होठो पर अपने हाथ रख देती है

"दुबारा ऐसा नहीं कहना मेरे राजा तुम्हे कुछ हो गया तो में एक पल नहीं जी पाऊँगी"

और दोनों गले लग जाते है...
 
अपडेट 50

दोनों माँ बेटे एक दूसरे क बाहो में खोये थे सुबह सुबह दुन्या से बेखबर

"माँ तुम्हे डरने और घबराने की कतई आवश्यकत नहीं है में तुम्हारे साथ कभी धोका नहीं करूँगा"

"मुझे तुम्हारे प्रेम पैर पूर्ण विश्वास है मेरे भरोसे को कभी मत टूटने देना baldev"devrani अपने तपते हुए होठ बलदेव क होठो

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पर लगाती है और बलदेव अपनी माँ रानी क होठो को अपने दोनों होठो क बीच ले लेता है "आह मा"

दोनों एक लम्बी चुम्बन करते रहते है जब तक उन दोनों क सांस न फूल जाते है

"माँ क्या हुआ साँसे फुल गयी"

देवरानी मन me:tujhe मौक़ा दे दी तो तू तो पेट फुला देगा सांस क्या

"हाँ मेरे राजा तू ऐसे चुस्त है अपने माँ क होठ लगता है तू काट लेगा मेरे होठो को जड़ से"

देवरानी थोड़ा नखरा करते हुए दूर जाती है

"माँ कहा जा रही हो"

देवरानी अपने पल्लू सँभालते हुए

"यही हु मेरे लाल"

"माँ तुमने अपने ख़रबूज़े जैसी नितम्ब का हक़ दे दया पर मेरी पसंदीदा पपीता का नज़ारा नहीं करवाया है"

"चल हट बड़ा आया में तेरी पत्नी नहीं जो रोज़ रोज़ नयी मांग करता है"

"नहीं हो तो बन जाओ न माँ किसने रोका है"

देवरानी शर्म से पानी पानी हो जाती है

"तुझे भगवन का दर नहीं मंदिर है सामने भगवन तुझे देख रहे है"

"भगवन इस बात का साक्षी है क में तुम से कितना प्रेम करता हु और तुम्हे तुम्हारी अंधयारी जीवन से निकल कर कितना खुश कर रहा हु"

"पर मेरे राजा बीटा भगवन ने तो कहा ये पाप है कोई बीटा अपने माँ से vivah.."shar से लाल हो जाती है

"माँ अगर माँ को खुश रखना जो सालो साल अय्याश राजा की नाम की पत्नी रह कर अपने आत्मा को दुःख देती रही ,अगर ऐसे स्त्री को खुश करना पाप है तो मुझे ये पाप और करना है"

"तुम्हारे पास हर प्रश्न का उत्तर है"

"तुम एक प्रश्न हो माँ जिसका उत्तर मेरे पास है वो डेढ़ फुटिया राजपाल नहीं दे पाया तुम जैसी प्रश्न का उत्तर"

देवरानी ये सुन कर खुश हो जाती है

"देखूंगी उत्तर क्या मिलता है वो तो वक़्त हे बताएगा राजा"

"माँ तुम्हारे बड़े बड़े ये गेंद को पल्लू से हटाओ न इसके हर एक बार हिलने से मेरा डिल रुक जाता है धड़कना "

देवरानी शर्माती हुई " ाचा मेरे राजा "

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देवरानी अपने साड़ी का पल्लू उतरती है एक अंदाज़ से और अपने बड़े वक्ष बलदेव को घूरते हुए दिखती है

"माँ क्या सुन्दर और बड़े वक्ष है आपके"

शरमाते हुए

"ऐसे सब क होते है मेरे राजा "

"नहीं होते है में पुरे गहतराष्ट्रा में इतने बड़े वक्ष और आप क जितने बड़े नितम्ब नहीं देखा"

बलदेव अब टहलता हुआ देवरानी क पास पहुंच जाता है और उसको पाकर कर अपने आगे से चिपका लेता है

"आज मेरी रूप की रानी"

"आह बीटा"

बलदेव देवरानी को अपने खड़े लैंड से गांड क दरार में फसता है और उसके कंधो पर चूमता है

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"ाः मा क्या भरी पूरी माल हो"

"तुम्हारे हाथ कितने मरदाना है ऐसे मज़बूती तुम्हारे पिता में भी नहीं थी"

"हम्म मेरी रानी"

"बलदेव तुम सब स्त्रीयो क शरीर पर नज़र रखते हो"

"नहीं माँ तुम्हारे सिवा किसी को देखने का डिल नहीं करता"

"तो फिर कैसे कहा तुमने क सबसे बड़े मेरे है"

"ाः हे भगवानधीरे"

"आर्य मेरी माँ में किसी को घूरता नहीं हु वैसी नज़र से जैसी नज़र से तुमको देखता हु पर सामने स्त्री रहेगी तो दिख हे जायेगा"

"अगर तुमने किसी और को घुरा भी तो जान ले लुंगी"

"घूरना क्या मेरी रानी कह दे तो में आखो पर पट्टी बंद कर किसी भी स्त्री से बात करूँगा"

इस बात पर देवरानी खिल खिला क है देती है और बलदेव देवरानी को बहो में भरे पास में बिस्तर पर ले कर बैठ जाता है उसके गार्डन पर चूमते हुए

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अपने गॉड में लये बैठा बलदेव देवरानी क गहरी घाटी का नज़ारा कर रहा था

"माँ मुझे इन गहरी घाटी में भी अपना घोडा दौड़ना है"

"ाः उठ बीटा दौड़ा lena"or बलदेव को सहलाने लगती है

बलदेव अब देवरानी को सीधा कर गले लग जाता है

"माँ तुम लाखो में एक हो"

"बलदेव तुम्हारे जैसा बलिष्ट शरीर का पुरुष मैंने भी कही नहीं देखा"

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बलदेव देवरानी क पीठ को एक हाथ से दूसरे हाथ से उसके कमर क मांस को दबोचते हुए मज़े से मसल रहा था

"महारानी" ो महारानी"

कमला की आवाज़ थी वो देवरानी क कक्षा में प्रवेश कर ली थी और बलदेव को देखती है क देवरानी क कमर को खूब ज़ोर से पकडे मसल रहा है

Kamla:man में )देखो कैसे अपने कमर और पीठ को मसल रहा है जैसे धर्म पत्नी हो और दरवाज़ा खोल क वो भी

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दरवाज़ा क पास हे कड़ी हो जाती है और अंदर का नज़ारा देख कर दांग थी

देवरानी क कण में अब सुनाई पड़ती है

"बलदेव ये कमला बुला रही है क्या "

"माँ उहहं ऐसे हे रहो"

"मेरे राजा तुमने दरवाज़ा लगाया था"

"नहीं माँ "और अचानक से उसको धयान अत है

बलदेव झट से देखता है आँख खुलते हे सामने दरवाज़े पैर कमला कड़ी नज़र आती है वो समझ जाता है क कमला क पीठ और कमर को मसलते देख ली कमला ने

कमला अपने होठो पर एक कामुक मुस्कान क साथ कड़ी थी

बलदेव हड़बड़ा कर उठ क खड़ा होता है

"माँ में पेशाब कर क आता हु और स्नान घर में घुस जाता है"

कमला मुस्कुराते हुए आती है और देवरानी क पास आकर "क्या नै नवेली दुल्हन की तरह सुबह शाम नहीं देखती हो दरवाज़ा खोल चालू हो जाती हो"

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देवरानी बलदेव को जाते हु देख अपने अस्त व्यस्त साड़ी को पाकर क "आओ न कमला" शर्मा जाती और अपने साड़ी को ठीक करते हुए सीधा बैठने लगती है

कमला मन me:kaise मसल मसल क हालत कर दिया बलदेव ने महरानी की..

अपने अस्त व्यस्त कपड़ो को संभा देवरानी बैठ जाती है मुस्कुराती है

"नयी नवेली की बात नहीं वो बास में सोचती थी क बलदेव ने लगा दया होगा दरवाज़ा और ख्याल हे नहीं रहा "

"अकसर ऐसा होता है बहक जाते है लोग "

"में तो कहती हु महरानी खूब टूट कर प्यार करो और सच में तुम बहुत खिली खिली लग रही हो"

"धन्यवाद् कमला मेरी बहिन"

"हाँ एक समय था जब तुम दुःख और सोच में मुरझाई रहती थी"

"हाँ कमला सब मेरे राजा बीटा बलदेव का अहसान है"

"वो तो है मेरी महरानी जी"

"वैसे तुम्हे ऐसी क्या आवश्यकता पद गयी जो हमारे बीच में आ टपकी"

"ओहो तो अब में बीच में आगयी दूल्हा और दुल्हन क वैसे में नहीं आती कोई और अत तो क्या होता सोच लो इसलिए में सोची चली जाऊ पर नै गई क तुम लोग थोड़ा सचेत रहा करो और

"और क्या कमला"

कमला एक हाथ में अपने पत्र लये

"ये पत्र दया मुझे पारस क दूत ने कहा शमशेर ने भेजा है"

देवरानी शमशेर समझ जाती है ये तो वही है जो जासूसी करने आया था और उसके भाई का सन्देश भी दया था

देवरानी झट से वो पत्र खोल क पढ़ने लगती है

प्रिय बहिन देवरानी

में तुम्हारा अभागा भाई देवराज हु आशा करता हु क तुम कुशल मंगल हो में ये पत्र शमशेर क दूत क माध्यम से पंहुचा रहा हु ,और मुझे शमशेर ने हे बताया क मेरी बहिन देवरानी कितना अपने परिवार अपने भाई से मिलने क लये तड़प रही है और एक में हु जो वर्षो से अपने बहिन को देखा नहीं,

मुझे क्षमा कर दो देवरानी मेरी बहिन तुम्हे मायके आने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ हमारे युधा से और पिता जी भी अब नहीं रहे पर उनके बदले में हु तुम्हारा पिता और तुम्हार भाई दोनों

कृपा कर क तुम हमारे यहाँ पारस आओ हम तुम्हारे सेवा करना चाहते है और हाँ अपने पति यानि मेरे जीजा जी राजपाल को प्रणाम कहना और उन्हें भी साथ ले कर आना ,में अपने बहिन और जीजा से मिलने क लये व्याकुल हु

प्रतीक्षा करूँगा में अपनी बहिन की

तुम्हारा भाई

देवराज

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 51

देवरानी अपने भाई का पत्र कमला से ले कर पढ़ती है और ख़ुशी से उसके आखो में ासु ाएगए थे

"कमला मेरे भाई का पत्र है मेरे भैया देवराज का "

"क्या बात कर रहे महरानी क्या लिखा है आपके भाई ने"

तभी स्नानघर से बलदेव चुपके से निकल कर दबे पाव बहार जाने लगता है अभी हुई घटना से शर्मा जो गया था बलदेव

"बलदेव बीटा कहा जा रहे हो "

"हाँ माँ में आता हु "

"बीटा तुम्हारे मां का पत्र है उन्होंने मुझे मेरे मायके बुलाया है पारस"

देवरानी ख़ुशी क मरे एक सांस में बोल देती है पूरी बात

बलदेव देवरानी क आखो में ासु देख और उसके चेहरे पर ख़ुशी देख रुक जाता है थोड़ा हिचकिचाते हुए कमला और देवरानी क पास आता है

kamla:ary युवराज तुम तो ऐसे मुँह छुपा रहे हो जैसे कमला जानती न हो क तुम दोनों माँ बीटा में क्या धक्काम पेली चालू है

baldev:chup करो कमला शब्दों को संभाल कर उसका इश्तेमाल करना सीखो

देवरानी कमला क मुँह से धक्कमपेली सुन क शर्मा जाती है

"बलदेव जाने दो न क्यू गुस्सा होते हो कमला क मुँह में जो अत है बक देती है"

"हम्म माँ"

"बीटा में बहुत खुश हु जिसका में 18 वर्षो से प्रतीक्षा की वो घडी आगयी है मुझे मेरा राज्य जो मेरा जन्म स्थान है वह जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है"

"माँ आप को इतना खुश देख कर मुझे भी बहुत ख़ुशी हो रही है लगता है भगवन ने आपकी प्राथना सुन ली है"

kamla:bhagwan तो अब महरानी क हे सुनते है जो मांग रहे है मिल रहा है आज कल

"महारानी आपके लये में भी खुश हु आप अपने गाओ जाओ और खूब घूम क्र आओ"

"माँ और क्या लिखा है मां देवराज ने पत्र में"

"उन्होंने कहा है क जीजा जी को प्रणाम कह देने और उनको भी साथ लेन "

देवरानी ये कह कर थोड़ा मायूस हो जाती है

kamla:ama यार अब कहे मायूस हो रही हो महरानी

devrani:kamla वो ..

kamla:abhi समाधान बताते hai...Devraj मां का प्रणाम बलदेव को कह दो क्यू क असल जीजा जी तो देवराज जी क यही है

राजपाल तो नाम क है

ये कह कर हस्ते हुए बलदेव को देख कमला कहती है

"क्यू सही कहा न देवराज क जीजा जी"

बलदेव झट से कमला को पकड़ने क लये झपट ता है

"कमला तुम्हारा प्राण ले लेंगे hum"gusse में कहता है

कमला अपना जान बचाये हस्ते हुए भाग जाती है

दोनों को ऐसे चूहा बिल्ली की तरह लड़ते देख देवरानी मुस्कुरा रही थी और सोचती है

"कमला ने सही तो कहा है देवराज का जीजा तो बलदेव हे है राजपाल तो नाम का है"

और खुद अपनी सोच पर झेप जाती है

"बलदेव तुम कहा जा रहे हो कमला क पीछे छोरो उसे उसका ज़बान ख़राब है"

बलदेव अपनी माँ की बात सुन कर रुक जाता है

"माँ उसे में छोड़ूंगा नहीं"

"बलदेव बीटा ये बात याद रखना आअज हमारे मिलान और प्रेम का श्रेया अगर किसी को जाता है तो वो कमला है"

"हाँ माँ इस बात को भली भंगी जनता हु इसलिए तो कमला को हमेशा मुआफ कर देता हु"

"हाँ कमला बहुत अचे डिल की है बीटा "

"वो सब छोरो आप बताओ आगे क्या करना है पारस कब जाना है"

"बीटा अभी गहतराष्ट्रा पर शत्रुओ क आक्रमण का दर है तुम्हारे पिता राजपाल को और तुम्हारे मां देवराज ने तुम्हारे पिता को भी निमंत्रण भेजा है"

"तो क्या करना है माँ हम चलते है पिता जी से बात कर क .."

"बीटा ये इतना आसान नहीं ऐसे समय में अपना राष्ट्र को छोरना सही नहीं होता है पर हम राजपाल से पूछेंगे क क्या किया जा सकता है"

दोनों पत्र को ले कर राजपाल क कक्षा की ओरे जाते है जहा राजपाल बैठा अपने सेनापति से बात कर रहा रहा

Baldev:pita जी

Rajpal:Han पुत्र कहो क्या बात है

Baldev:kya आप व्यस्त है वो माता देवरानी बहार कड़ी है आपसे कुछ बात करना चाहती है

Rajpal:senapati तुम जाओ और मैंने जैसा कहा है सैनिको को सुचना दे दो नियमो का पालन हो

senapati:Jo आज्ञा महाराज

सेनापति अपना हाथ जोड़ कर झुक कर आज्ञा ले कर कक्षा से बहार चले जाता है और दरवाज़े क पीछे कड़ी देवरानी को देखते हुए बहार चले जाता है

Senapati:Budhi हो गयी आज भी मुँह छुपाती है देवरानी "अपने मन में फुसफुसाता है

ये बात बलदेव क तेज़ कान सुन लेता है

बलदेव अपने पिता क सामने खड़े हो कर

"माँ ाजाओ अंदर सेनापति चला गया"

देवरानी बहार आती है और अपना पर्दा जो सेनापति को देख कर ली थी उठा टी है

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देवरानी एक अंदाज़ से मुस्कुराते हुए

Baldev;man me)Gadhe सेनापति ाचा हुआ तूने पर्दा क उठने क बाद दृश्य नहीं देखा नहीं तो देवरानी की जवानी की गर्मी से जल क रख हो जाता ,मेरी माँ तो अब जा कर जवान हुई है इसे तो में अभी और जवान करूँगा

"महाराज पारस से पत्र आया है देवराज भैया का"

राजपाल अपने आसान से उठ खड़ा होता है

"ाचा सेल साहब ने क्या लिखा है पत्र में"

देवरानी पत्र खोल कर

"आपको प्रणाम कहा है और आपको पारस आने का निमंतरण दया है"

"देवरानी तुम्हे तो पता है न में पिछले 18 वर्षो में पारस नहीं गया क्यू क हमारे शत्रु बहुत है"

"महाराज पता है पर ..आप ये पत्र पढ़िए"

राजपाल पत्र पढ़ कर

"हाँ इसमें तो उसने अनुरोध तो क्या है मिलने की पर ये पत्र शमशेर क दूत से आया है इसका मतलब समझते हो देवरानी"

"नहीं महाराज"

"हम कह नहीं सकते पर सूत्रों से पता चला है क पारस पर अब शमशेर क पिता सुल्तान मेरे वाहिद का राज है और उनके नज़र में कुबेरी का खज़ाना है"

"महाराज पर वो राजा रतन सिंह का दुश्मन होगा "

"देवरानी पूरी दुन्या राजा रतन और मेरी मित्रता से परिचित है और सम्भाना है क कुबेरी को प्राप्त करने हेते हु हमारे गहतराष्ट्रा पर भी आक्रमण क्या जा सकता है"

"महाराज पर मुझे वर्षो हो गए मिले मेरे परिवार से"

"देवरानी वो बात अपने जगह पर है क शमशेर हम पर हमला करेगा या नहीं पर दिल्ली क बादशाह शाजेब ने तो अपने सैनिक गहतराष्ट्रा और कुबेरी पर हमला करने क लये तैयारी भी शुरू कर दी है और कुछ सैनिक इस ओरे आ रहे है"

"देवरानी हमारा जाना खतरे से खली नहीं होगा हम पर कही भी कोई भी आक्रमण कर सकता है अगर हम पश्चिम की ओरे जाते है"

देवरानी का ये सब बात सुन कर खुश चेहरा मुरझा जाता है और अपने पास बलदेव और उसका साथ महसूस कर उसे भी आज रहा नहीं जाता

"महाराज आपने मुझे 18 वर्षो से हमले क दर क वजह से परिवार से दूर रखा आपने और आज भी"

गुस्से में ये शब्द देवरानी क मुँह से फुट पड़ते है

Rajpal:Devraaaaaaaaaani....(rajpal अपना दया हाथ उठता है मरने क लये देवरानी ko)apni मर्यादा में raho,hum से ुचि स्वर में बात करने का परिणाम जानती हो

"बलदेव पुत्र अपने माँ से कहो हम से तर्क वितर्क न करे नहीं तो हम से बुरा कोई नहीं होगा"

देवरानी क ऊपर जैसे हे राजपाल उठा कर उसे दन्त ता है वो दुःख से गाला भर जाता है और उसके आखो में आयसु गिर जाते है

"महाराज हाथ उठाया है तो मार लो मई मन नहीं करुँगी"

"माँ होश में आओ हम इस पर कुछ सोचेंगे"

"चुप कर तू मेरे पिता ने कभी मेरे ऊपर हाथ नहीं उठाया न गुस्सा हुए कभी में रानी थी पारस की पर यहाँ आ कर बास नौकरानी बना डाई मेरी चाहत की कोई नहीं सोचता "

"चुप हो जाओ देवरानी तुम्हारा दिमाग तो ठिकाने पर है न"

देवरानी रट हुए

"नहीं होना चुप मुझे बहुत चुप रह ली जब तुम राजाओ में इतना दम्म नहीं होता तो 10 विवाह क्यू करते हो जब सबकी इच्छा का सम्मान नहीं कर सकते "

"devraaaaaaaaaaani अगर मेरे हाथ में तलवार होता तो अभी में तुम्हारा सर धार से अलग कर देता"

"बलदेव इस पागल को ले जाओ यहाँ से इसको बुढ़ापे क साथ दिमाग भी काम करना बंद हो गया है इसका"

"बलदेव नहीं तो में धक्के मार कर भगाऊंगा इसे"

Baldev:bass पिता जी

देवरानी रट हुए अब ज़मीन पर निचे बैठने लगती है

बलदेव झट से अपने माँ को अपने बहो में पकड़ लेता है

"चलो माँ"

देवरानी सिसकते हुए बलदेव क कंधो पर अपना सर रखती है और बलदेव उसको देवरानी क कक्षा में ले जाता है

राजपाल वापस आसान पर बैठ कर

"aaaaaaaaaaah devraaaaaaaaaani"ek ज़ोरदार चीख क साथ गद्दे पर मरता है और अपने गुस्से पे काबू करने की कोशिश करने लगता है

बलदेव इधर अपने माँ को ला कर बिस्तर पर बैठता है फिर अपने हाथो पैर थोड़ा गुलाब जल ले कर माँ क चेहरा जो ासु से भरा था उसे धोता है और फिर कपडे से पोछता है

Baldev:maa रोना बंद करो

devrani:tumne सुना न कैसे मुझे अपमानित कर क भगाया उसने

बलदेव अपने माँ क आखो पर हाथ फेरते हुए

"रट नहीं मेरी रानी चुप हो जाओ"

"अगर तुम सच में मेरे से प्रेम करती हो तो चुप हो जाओ अब में नहीं कहूंगा चुप होने"

ये सुन कर देवरानी बलदेव से गले लग जाती है और थोड़े देर आखे बंद कए दोनों एक दूसरे क डिल की धड़कन सुनते रहते है

कुछ देर बाद बलदेव चुप्पी तोड़ता है

Baldev:maa तुम चिंता मत करो तुम्हारे हर अपमान का बदला लय जायेगा

devrani:Mujhse अब और सहन नहीं होता बलदेव बहुत सह ली देखा न तुमने कैसे बात कर रहा था वो मुझ से कह रहा रहा "उसको भगा दूंगा " षुरूश्ती को आप कहता है "Unko"kehta है जैसे वो बहुत बुद्धिमान हो

Baldev:aap को सम्मान राजपाल जैसे टुच्चा व्यक्ति से लेने की ज़रूरत नहीं ,अआप्की में सम्मान करता हु आपको हर कोई सम्मान करेगा एक दिन किसी की भी हिम्मत नहीं होगी क वो "tum"keh दे आप को और इसके उसको तो दूर की बात है या अपमान करना

Devrani:baldev क्या करे हम

baldev:maa आप आराम करो में कुछ सोचता हु और प्रयत्न करता हु दोपहर क भोजन क बाद मिलूंगा में उस राजपाल और षुरूश्ती दोनों से ..

दोपहर क भोजन पर गम शूम भोजन कर क उठ जाते है और बलदेव कुछ सोच कर अपने पिता क कक्षा में जाता है

Baldev:pita जी

Rajpal:han बलदेव

थोड़ा धीरे से उखड कर कहता है

"पिता जी बात ये है क मेरे पास एक सुझाव है इस समस्या का"

"क्या सुझाव है बलदेव"

"देखिये आप क हिसाब से शत्रु आप पर आक्रमण कर सकते है पर शत्रु मुझ से और माँ को तो नहीं जानते "

"तुम्हारे कहने का अर्थ क्या है"

"यही पिता जी क आप अगर नहीं जाते है पारस और सिर्फ मई और माँ जाये तो"

"अभी तुम बालक हो मैंने ये पहले हे सोच लय था पर शत्रु हम से कही ज़्यादा शक्तिशाली है वो तुम दोनों को अगवा भी कर सकते है और तुम दोनों की प्राण भी ले सकते है"

बलदेव मन me(ye बालक अब इतना बड़ा हो गया है क तुम्हारे पत्नी को संभल लिया है और तुम्हारे हाथ में जब पत्नी मेरा बालक देगी तब देखूंगा क्या कहते हो)

Rajpal:tumhari बात पूरी हो गयी हो तो जाओ अब सीमा पर और मैंने जो सुचना सेनापति को दया था उसपर कितना काम होरहा है और हमारे गहतराष्ट्रा की सुरक्षा का विवरण लाओ दिन रात अपने बूढी माँ क बातो पर दिमाग मत लगाओ

Baldev:Jo आज्ञा पिता ji(apna सर झुकता है)

मन me:rajpal तुमने अपना कुलहरि अपने पेअर पर मरी है और देवरानी और बूढी ः सत्या तुम गए हो वो नहीं..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 52

बलदेव को सीमा पर भेज कर राजपाल अपने कक्षा में जा कर आज की हुई घटना और देवरानी की बढ़ते हुई हिम्मत राजपाल को गहरी सोच में डुबो देती है

इधर बलदेव अपने घोड़े पैर बैठ क जाता रहता है और सोच रहा था क क्या युक्ति निकली जाये जिस से माँ को में पारस दिखा सकू

बलदेव कुछ समय सोचने क पश्चात अपना घोडा फिर महल की ओरे घुमा देता है

बलदेव मन me:mere पिता राजपाल अपने ऊपर हमले क दर से पारस जाना नहीं चाहते यदि में बड़ी माँ षुरूश्ती क कानो में रख दू क माँ पारस जाना चाहती है अकेले तो वो पक्का चाहेगी क देवरानी पारस जाये अपने जान जोखिम में दाल कर क्यू क हमे पारस जाने क लये दिल्ली क रस्ते से जाना होगा जहा हमारा दुश्मन बादशाह शाहज़ेब है

यही सब बाते सोचते हुए बलदेव महल में आता है और सीधा अपने बड़ी माँ को ढूंढ़ने लगता है

"बड़ी माँ ..बड़ी माँ कहा हो आप"

"सुनो लगता है बलदेव आगया है "



"तुम जाओ यहाँ से"

बलदेव जैसे कक्षा में घुसता है देखता है किसी पुरुष से षुरूश्ती बात कर रही थी और उसके आते हे वो चुप हो गई

"बड़ी माँ आप यहाँ हो "

"आओ बलदेव क्या हुआ बीटा "

बलदेव जाते हुए पुरुष को ऊपर से निचे तक देखता है

"बड़ी माँ ये कौन था इसे आज से पहले कभी नहीं देखा गहतराष्ट्रा में"

"बलदेव यह हमारे पुराने गुप्त जान है गहतराष्ट्रा क हे है "

"ाचा बड़ी माँ आपसे कुछ बात करनी थी"

"तो कहो क्या बात है"

"बड़ी माँ वो मां देवराज ने हमे पत्र लिख कर न्यूजटा दया है पारस आने का और मुझे भी मेरा ननिहाल देखने का जी छह रहा था तो"

"तो समस्या क्या है बलदेव"

"वो बड़ी माँ आप हे है जो मेरी मदद कर सकते हो"

"वो कैसे बलदेव"

"बड़ी माँ पिता जी पारस नहीं जाना चाहते क्यू क उनको दर है कोई हम पर हमला न कर दे क्यू क दिल्ली से बादशाह शाहज़ेब सैनिको को उत्तर की ओरे आने की सुचना मिली है "

"पर बड़ी माँ में चाहता हु क आप पिता जी को मनाये और मुझे और माँ को काम से काम जाने की आज्ञा मिले"

"ाचा तो बलदेव ये बात है"

षुरूश्ती मन में" (में तो मनाऊंगी राजपाल को जिस से तुम दोनों गहतराष्ट्रा से बहार जाओ और तुम दोनों पारस पहुंचने से पहले स्वर्ग लोक पहुंच जाओ")

"बड़ी माँ कृपया कर क मेरे लये इतना कर दीजिये"

बलदेव मन में( "षुरूश्ती तुम यही सोच रही हो न क हम बहार जाये और शत्रु हम पर हमला कर दे और हम मर जाये")

"ठीक है बलदेव में बात करती हु सिर्फ तुम्हारे लिए क्यू क तुम मेरे सब से दुलारे बीटा हो "

षुरूश्ती मन me:(agar मेरा शक ठीक है और उस दिन जो घुसपैठ ने चादर छोर भगा वो देवरानी की थी तो बीटा बलदेव देवरानी का इतने बरसो बाद ख़ुशी और हसी क राज़ तुम हो )

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षुरूश्ती मुस्कुराती है ये सोच कर और मन में कहती है और बलदेव को देखती है

"देवरानी तुम्हे भी अपनी आग बुझाने क लये अपना हे बीटा मिला था तुम दोनों जाओ तो सही पारस वापस लौट क नहीं आओगे"

"बलदेव अब तुम जाओ खड़े क्यू हो में तुम्हारा काम करवा दूंगी"

बलदेव मन में "जी बड़ी माँ"

बलदेव मन में (बड़ी माँ तुम्हारी मनो कामना पूरी नहीं होगी कभी .मेरे माँ क ऊपर में आंच भी नहीं आने दूंगा)

और बलदेव कक्षा से निकल जाता है

षुरूश्ती जाते हुए बलदेव को देख मन में

"देवरानी आखिर कैसे न अपने बेटे से फस्ती इतने लम्बे चौड़े कद काठी का है और ऊपर से महाराज ने पिछले 17 साल से देवरानी को छुए भी नहीं है"

और हस्ती है हाहाहा देवरानी तुम्हे तो में तड़पा तड़पा क मरूंगी अगर तुम्हे गहतराष्ट्रा क शत्रु नहीं मार पाए तो में मरूंगी"

इधर बलदेव कक्षा से निकल कर जा हे रहा था क कुछ याद आता है और वो वापस अपनी बड़ी माँ षुरूश्ती क कक्षा की ओरे आता है और उसको हसी सुन कर वही छुप कर सब देखने लगता है

हस्ते हुए वो पास रखे एक पटरी को खोलती है और उसमे से सांप को निकल कर



"ये सांप तुम्हारे जीवन का अंत करेगा devrani,mahal में तो इसके उपयोग करने क बाद भी लोग तुम्हे बचा लेते पर अब ये तुम्हारे सामान क साथ पारस जायेगा और रस्ते में तुम्हे ये डसेगा जहा पर तुम्हे बचने वाला नहीं होगा न कोई वैध न कोई जड़ी"

बलदेव तो ये देख और षुरूश्ती की बात सुन कर हैरान और परेशां हो जाता है और उसके माथे पे पसीने आना लगता है

षुरूश्ती: "पिछली कई बार तू बच गयी है इस बार तेरे प्राण ले कर रहूंगी देवरानी"

बलदेव दबे पाँव वह से खिसक जाता है

षुरूश्ती वापस से सांप को पेटारे में रख कर मुस्कुराती हुई

"बेचारी देवरानी जीवन में खुशीअ ढूंढ़ने लगी थी और बलदेव क साथ रंगरैलया भी मानाने लगी ,तुम्हे जीवन भर तड़पने का मेरा सपना पूरा हुआ और अब तुम्हे मरना होगा देवरानी ,तुम्हारी हर एक हसी हर ख़ुशी मेरे जिस्म पर कांटे की तरह चुभती है ,मई नहीं चाहती क तुम एक पल भी ख़ुशी से जीयो और जब तुम अपनी ख़ुशी खोज निकली हो बलदेव में तो अब तुम्हे मरना होगा और साथ में बलदेव को भी में नहीं छोड़ूंगी"

ये सब सोचते हुए षुरूश्ती महराज राजपाल क कक्षा में आती है

"आओ महारानी आप को हे याद कर रहे थे"

"महाराज आप की याद में हम यहाँ आगया पर आप हमारी याद में हम कभी हमारे कक्षा में नहीं आते "

"कहो महारानी षुरूश्ती आप की हम क्या सेवा कर सकते है"

"महाराज हमने सुना है क देवराज का पत्र आया है "

"हाँ महारानी हमारे साला साहब का पत्र आया है और उन्होंने हमें और देवरानी को आमंत्रित क्या है पारस पर हम ऐसे स्तिथि में नहीं क जाये"

षुरूश्ती मन me(aapke साला नहीं देवराज अब बलदेव का साला हो गया है ")और एक मुस्कान क साथ

"महाराज हम समझ सकते है क युधा कभी भी हो सकता है और आप यदि जायेंगे तो आप पर हमारे शत्रुओ से आक्रमण का भी खतरा है"

"आप बिलकुल ठीक समझी महारानी"

"पर महाराज आप न जा कर बलदेव और देवरानी को भेज सकते हो न"

ये सब बात अपना कान लगाए बलदेव सुन रहा था क्यू क वो अपने माँ क ऊपर हमले क योजना जान न चाहता था और वो षुरूश्ती का पीछा करते हुए आगया था

"पर महरानी हमारे पास पहले हे काम सैनिक है ये दोनों गए तो हम इन्हे सैनिक कहा से देंगे "

"बिना सैनिक क भी जा सकते है वो दोनों"

"पर महारानी उनके जान को खतरा हो सकता है"

"महाराज अब उन्हें अपने जान जोखिम में डालनी है तो हमे क्या और वैसे भी आपको उनकी चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं"

षुरूश्ती ये बोल कर राजपाल क पास आती है और उस से चिपक कर गले लग जाती है

"महाराज अगर वो दोनों मर भी जाये तो ठीक होगा झंझट ख़त्म हो जाएगी"

राजपाल षुरूश्ती क गले लग कर "आह महरानी आप का शरीर कितना गरम है"

"हाँ मरने दो दोनों माँ बेटे को अगर आप यही चाहती हो महरानी तो में उनको जाने की आज्ञा दे देता हु "

षुरूश्ती राजपाल को जकड़ते हुए

"धन्यवाद महाराज शरीर गरम है तो ठंडा कर दो न"

"कर दूंगा महारानी आज रात में"

षुरूश्ती थोड़ा उदासींसा चेहरा बना क सोचती है "महाराज आप लगभग 60 क हो गए आप से क्या उम्मीद करू क मेरी जवानी आप शांत कर डोज ,कमीनी देवरानी तो अपने बेटे से ठंडा करवा लेती होगी)

बलदेव अपने पिता और अपने बड़ी माँ की बात सुन कर समझ जाता है क यहाँ सब उसके माँ और बलेव क शत्रु है कोई मित्र नहीं और वो अपने बड़ी माँ और पिता की बात सुन कर बहार आकर घोड़े पे बैठ सीमा की ओरे चल देता है

बलदेव मन में ( आज पिता जी मेरे नज़र से और ज़्यादा गिर गए उनके मुँह से ये बात कैसे निकली क हम मर जाये मुझे समझ नहीं आरहा है क में खुश हो या दुखी क्यू क आने वाले दिनों में और कठिन प्रस्थितयो का सामना करना होगा वो भी दुसरो से नहीं हमारे अपनों से "

सीमा पर पहुंच कर बलदेव घोड़े से उतरता है

सेनापति :आइये युवराज आज बहुत दिनों बाद सीमा पर आये है

Baldev:Han सेनापति थोड़े व्यस्त थे हम

senapati:aap तो महल हे थे तो घर में ऐसा क्या काम कर रहे जो व्यस्त होते थे

Baldev:ab तुम्हे हर कारन बताना ज़रूरी नहीं सेनापति सोमनाथ

सेनापति somnath:Are युवराज आप तो अग्रेषित हो गए हम तो बस यही जान न चाहते थे क कही कोई दुविधा तो नहीं हमारे युवराज को यदि हम आप क काम आ सके

Baldev:theek है वो सब छोरो ये बताओ कुछ सुचना मिला है शाहज़ेब की चाल का

सेनापति somnath:nahi युवराज अब तक बास ये पता चला है डिल से एक सैनिको की टुकड़ी उत्तर की ओरे चली है जिसमे काम से काम 2 हज़ार सैनिक बल है और हर एक पास 5 सैनिक क बराबर हथियार है और अनाज भी है इनके पास

Baldev:senapati ये अपने ज़रूरत से ज़्यादा हथियारों का क्या करेंगे और अनाजों की क्या आवश्यकता

senapati:maharaj हम तो कह नहीं सकते क उनके मन में क्या चल रहा है पर मेरे अनुमान से इस बार बादशाह शाहज़ेब सिर्फ कुबेरी पर नहीं पुरे उत्तर भारत को अपना बनाने की मंशा बना रहा होगा

Baldev:is से तो हमारे गहतराष्ट्रा पर हमला करना तो लगभग उसका तय है

Senapati:yuvraj बलदेव आज तक गहतराष्ट पर किसी ने हमला नहीं क्या क्यू क हम सदियों से शांति प्रिय थे और दूसरी वजह ये क हमारा राज्य पहाड़ो से घिरा है और गहतराष्ट्रा तक कितने राजाओ ने पहुंचने का प्रयत्न क्या पर पहुंच नहीं पाए

Baldev:to सेनापति सोमनाथ ऐसे प्रतीति क्यू आगयी जो हम पर सब आक्रमण करना चाहते है हमारे शत्रु बढ़ रहे है

Senapati:ab युवराज यदि आपको बुरा न लगे तो में इसका उत्तर दे सकता हु

Baldev:kaho मुझे जान न है

senapati:baat ये है क आपके दादा चाहते थे क गहतराष्ट्रा संसार का ऐसा राष्ट्र हो जहा पर युद्ध नहीं सिर्फ प्रेम हो और कोई किसी का शत्रु नहीं हो इसलिए उन्होंने अपने जीवन भर किसी क साथ युधा नहीं क्या और न किसी का साथ डाई युधा में जिस वजह से हमारे शत्रु भी हम से मित्रता का हाथ बढ़ाते थे परन्तु

Rajpal:parantu क्या सोमनाथ

somnath:Parantu आपके पिता ने गहतराष्ट्रा की मर्यादा का उललंघन कर अपने पिता की छवि ख़राब कर दी और अनेक युधो में राजा रतन का साथ दया जिस वजह से हमारे शत्रु बढ़ते गए

Baldev:to ये बात hai,theek है जो हुआ सो हुआ पर तुम्हे अपना काम पर ध्यान देना चाहिए क्यू क गहतराष्ट्रा को बचाना हमारा धर्म है

Senapati:ji अवश्य महाराज

सेनापति सोमनाथ मन me(maharaj क वजह से में सालो साल युधा क्या हुआ और आज तक मेरी सम्मान नहीं है राज्य में इसका बदला तो में लूंगा वो भी गहतराष्ट्रा का महाराज बन क)

ऐसे हे संध्या हो जाती है और बलदेव सीमा से महल वापस आता है

बलदेव मन में ठान लेता है क वो अपने माँ क विरुद्धा चल रहे षड़यंत्र माँ को नहीं बताएगा नहीं तो वो दुखी हो सकती है

"माँ कहा हो तुम "

बलदेव देवरानी की कक्षा की ओरे जाते हुए

देवरानी स्नान कर क अभी निकली थी और अपने बालो को सूखा रही थी

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"माँ जल्दी तैयार हो कर बहार आओ"

बलदेव अपने माँ क हल्का भीगा बदन बाल और उठी छुई चुकी देख अपने छोटे बलदेव को मसलता है

जिसे देख देवरानी तिरछी नज़र से देख लेती है

"बदमाश"

बलदेव बहार चला जाता है थोड़े देर बाद तैयार हो कर देवरानी बहार आती है

बलदेव खड़ा अपने माँ का इंतज़ार कर रहा था वो उसको देख

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"क्या हुआ बलदेव बहार क्यू बुलाया तुमने"

"माँ तुम्हारे लये खुश खबरि है"

बलदेव माँ को पाकर कर खींच लेता है

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"क्या खुशखबरी है बीटा"

बलदेव जो पहले से अपना लैंड खड़ा कए हुए था देवरानी को देख क वो अपना लैंड देवरानी क बड़े नितम्बो से रगड़ कर एक हल्का धक्का मरता है

अचानक इस धक्के को देवरानी सेह नहीं पति

"आआआआह "

"बलदेव क्या कर रहे हो हम महल क बीचो बीच है"

फुफुसाती है

बलदेव अब देवरानी का हाथ पकडे अपने पिता क कक्षा की ओरे ले जाता है

"पिता जी क्या आप है "

"आजाओ बलदेव"

देवरानी और बलदेव अंदर आते है देवरानी का गुस्सा अब बी उसके डिल में था वो दरवाज़े पैर हे रुक जाती है

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षुरूश्ती मन me:badi सटी सावित्री बने कड़ी है सबसे छुपा कर छोटे छोटे वस्त्र पहनती है रत में और अपने हे बेटे से रासलीला खेलती है

और बलदेव देखता है अंदर उसके पिता लेते है और उसके पास में हे षुरूश्ती बैठी है

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षुरूश्ती क तरफ बलदेव देखता है और षुरूश्ती अपने दोनों को आखो को बंद कर क बलदेव को अपने पिता से बात करने का इशारा देती है

बलदेव समझ जाता है क अब उसे बात करनी चाहिए

"पिता जी यदि आपकी आज्ञा हो हम बिना सैनिक क माँ को उनका मायका घुमा क ले आय"

राजपाल शुरुश्री की ओरे देख कर

"बीटा हमे तुम्हारे जाने से कोई आपत्ति नहीं पर अकेले कैसे .."

"पिता जी मुझे किसी सैनिक की आवश्यकता नहीं राज्य को ज़्यादा आवश्यकता है में अपन मित्रों को बुला लू बद्री और शयाम को इसी बहाने वो भी घूम लेंगे और हम .."

"बास बॉस बलदेव हम समझ गए तुम्हारी बात को तुम अपने मित्रों को ले कर जा सकते हो जाओ अपने माँ को घुमा लाओ"

"देवरानी तुम जाओ आज्ञा देते है हम और देवराज को कह देना उसके जीजा की ताब्यात ख़राब है इसी लये नहीं ए"

देवरानी मन me:kamine राजपाल तू मेरे भाई का जीजा नहीं है जो असली जीजा है वो जा हे रहा है चिंता मत कर

Devrani:zarur महाराज ,धन्यवाद् महाराज

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देवरानी क आखो में अभी भी अपने अपमान की आग जल रही थी

बलदेव अपने माँ क मन को टटोल लेता और कहता है

"माँ आप जाये हम आपसे मिल कर बताते है क हमे कैसी तैयारी करनी है"

shurushti:waise अभी देवरानी कक्षा में आने से पहले चीखी क्यू थी

Rajpal:han भाई हम भी सुने थे

Baldev:wo माँ को ठेस लग गई थी किसी चीज़ से

षुरूश्ती मन me:(thes लगी थी बलदेव बीटा क अपने माँ को मेस रहा था )

rajpal:han इसे समझाओ बीटा देख कर चलने ,सीखो कुछ अब तो में बूढ़ा हो गया अब तो तुम हे ले कर आया जाया करो अपनी माँ को क्यू षुरूश्ती ?

shurushti:han अब तो बलदेव सँभालने लायक हो हे गया अपने माँ को

baldev:Maa को संभल भी लूंगा और उनको सब कुछ सीखा भी दूंगा पिता जी और में इन पर इतनी म्हणत करूँगा क एक दिन देखना माँ को में बदल दूंगा

ये सुन कर देवरानी अपने पेअर क अंगूठो से अपनी ऊँगली फसा निचे देखने लगती है लज्जा क

devrani:me जा रही हु मुझे पूजा भी करना है इस ख़ुशी क मौके पैर और रसोई भी संभालना है

rajpal:theek है जाओ

देवरानी बलदेव की ओरे देख

"आ जाना "

"भूलूंगा नहीं आज मुझे सब खाना है"

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बलदेव की बात सुन कर मुस्कुराते हुए देवरानी अपना घूँघट ठीक कर क बहार जाने लगती है

षुरूश्ती मन में " बड़ी छिनाल है रे तू देवरानी अपने पति क सामने अपने नए यार अपने बेटे को निमंतरण दे रही है और बीटा भी बेशर्मी से माँ को खाने की बात कर रहा है"

देवरानी क जाने क बाद कुछ देर तक बैठ राजपाल और बलदेव बात करते है राजपाल हर रास्ता समझा देता है और अपने मित्रो को पत्र लिख कर भेजवा देता है

baldev:pita जी आप लोग चिंता मत कीजिये हम ठीक थक वापस आजायेंगे

Shurushti:man में (अगर में आने दूंगी वापस तब न बलदेव )

बलदेव कक्षा से निकल कर अपने माँ क कक्षा में जाता है जहा पर देवरानी भगवन क आराधना में लीं थी

"हे भगवन आज से और अभी से में अपने सच्चे मन से बलदेव को अपना पति मानती हु मुझे शक्ति देना"

देवरानी को पूजा करते देख

"कितनी भोली है मेरी माँ ,इनलोगो को पता नहीं क मैंने माँ को कब का पत्नी क रूप में स्वीकार कर लय है और कोई मेरे प्रेमिका मेरी पत्नी देवरानी पर हमला तो दूर अगर ुचे स्वर में भी बात क्या तो उसका सर उसके धार से अलग कर dunga,Rajpal की गलती की सजा उसे ज़रूर मिलेगी'

तभी देवरानी अपना पूजा ख़तम कर क ात है और बैठे बलदेव को

"ये लो प्रसाद बीटा आखिर कर तुमने अपने मां से मिलने क लये अपने पिता को मन हे लय"

देवरानी निचे झुक कर बलदेव क पैरो में झुक जाती है और अपने हाथ बलदेव क पेअर क तरफ बढाती है बलदेव अपना पेअर खींचता है पर देवरानी अपने हाथ से पेअर सहलाते हुस छूती है और मन में "मेरे पति परमेश्वर"

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baldev:Han कैसे न जाते हम पारस आखिर देवराज मां को उनके नए जीजा से मिलाना था

ये सुन कर देवरानी कड़ी होती है और थाली में रखा रंग बलदेव क मुँह पर मरती है

"बड़ा आया जीजा बन ने वाला"

"आर्य माँ मां ने हे लिखा था न जीजा को साथ लेन क लये तो उनका जीजा तैयार है जाने क लये"

Devrani:Pehle पत्नी तो बना लो बाद में साला बनाना

बलदेव लेट जाता है और अपने माँ को खींचता

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है और उसके बालो में हाथ लगा कर

बलदेव :तुम साथ देते रहो में इस राज्य का महाराजा और तुम मेरी महारानी बनोगी

बलदेव अपने माँ क चेहरे को अपने तरफ झुकाये चला जा रहा था

तभी देवरानी झट से उठती है और भाग कर बहार जाने लगती है

"माँ रुको तो"

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"अगर हाथ आगयी न मेरी प्यारी देवरानी तो तरबूज़ों को फोड़ हे दूंगा "

देवरानी क भागने से उसके बड़े गांड खूब हिले थे

devrani:sushhh घर में सब है..

ये कह कर

देवरानी बहार चली जाती है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 53

देवरानी अपना गांड मटकते हुए बलदेव क चुंगल से छूट कर जा रही थी

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"आह माँ कब तक तडपाओगी अपने प्रेमी को एक न एक दिन तो ये जवानी का मज़ा चखूँगा हे मई मेरी रानी" और अपने लैंड को मसल देता ही

हस्ते हुए देवरानी बहार जाती है जहा कमला रसोई क काम में व्यस्त थी

kamla:kya बात है बड़े हसी ठिठोली हो रही है दोनों माँ बेटे में आज ज़्यादा प्यार आगया क्या माँ को बेटे पे

Devrani:ary वो बास बलदेव को हर समय बास मस्ती सूझता है

Kamla:ab ऐसे इठलान चलोगी तो उसे मस्ती हे सूझेगी न किसी को भी

देवरानी क कान में कहती है

"महरानी वैसे इतने रंगीन मिजाज़ क मर्द मज़ा भी बहुत देते है बिस्तर में"

devran:chup कर कलमुही

Kamla:ab कुछ भी कह लियो महरानी पर आपको अभी से इतना फूल सा खिला दया है जब दिन रत लेगा तो कैसी खिल जाओगी

Devani:han चुप कर अब आ रसोई में

दोनों रसोई क तरफ जाने लगते है

देवरानी मन में ( एक हिसाब से ठीक हे तो कह रही है कमला मेरे चेहरे में पहले जैसी चमक लौट रही है जैसी चमक और डिल में उमंग मेरी शादी होने क समय था)

kamla:ha बोलो महरानी जी महाराजा जी को क्यू तड़पा रही हो

devrani:Maharaja को बता दो अपने क महारानी हु में इतनी जल्दी हाथ नहीं आउंगी मेरे लिए तो पारस में लाखो स्वप्न देखा करते थे

Kamla:Baldev कोई ऐसा वैसा नहीं है वो तो बास एक बार उसका ले लो फिर बार बार लोगे ,मैंने देखा है महरानी बहुत बड़ा है उसका

देवरानी थोड़ा चिंतित होते हुए

"कमला क्या बक रही हो तुम कब देखा कैसे देखा"

देवरानी को हल्का गुस्सा देख

"बड़ा जल्दी गुस्सा हो गयी महरानी मैंने कोई युवराज का लिंग नंगा नहीं देखा है वो तो बास आपको देख उसका लिंग तन्न का सांप बन क्र उठा था जिस दिन मैंने युवराज को रेंज हाथो पकड़ा था "

देवरानी समझ जाती है क ये उस दिन हे देखि थी जब वो स्नान कर क निकली थी और कमला देवरानी क कामसूत्र पुष्तक लिए पढ़ रही थी

"बास सफाई देने की ज़रूरत नहीं और एक बात याद रखना कमला मेरे अलावा कोई मेरे बेटे को देखे ये में सेह नहीं सकती"

"मेरे बेटे क हर अंग पर सिर्फ मेरा हक़ है कभी भी बलदेव क उसपे धयान मत देना"

"अब लो कर लो बात में कहा उसके लिंग निहारते राहु वो तो बास उस दिन अचानक से नज़र पद गयी वैसे भी बलदेव मेरा बीटा जैसा है बचपन से उसकी मालिश की है खिलाया पिलाया है में गन्दी नज़र नहीं रख सकती"

"और वैसे भी महरानी बलदेव को सिर्फ तुम हे देख सकती हो किसी और क बास क बात नहीं"

और हस्ती है

देवरानी ये बात सुन कर शर्मा जाती है

"चल हट कमला की बची"

"वैसे देवरानी आपके पारस जाने का क्या हुआ"

"देवरानी पहले तो महाराज नहीं मान रहे थे फिर बलदेव ने उन्हें मनाया"

देवरानी पूरी बात कमला को बता देती है

"महरानी मेरी बहिन तुमने सही मर्द चुना है जिसके पास मज़बूत शरीर क साथ दिमाग भी है"

"मेरी पसंद हे ऐसी है कमला"

और मुस्कुराते हुए अपने ऊपर गर्व करती है

"हाँ इसलिए तो अभी से हे बेचारा बलदेव पति की दायित्व समझना शुरू कर दया है और अपने प्रेमिका क लये सब कुछ कर रहा है"

"हाँ करेगा हे मेरा बलदेव हे मेरा सब कुछ है"

दोनों बात करते हुए खाना की तैयारी कर देते है

धीरे धीरे सब खाने क लये आसान पर आ कर बैठने लगते है देवरानी राधा और कमला क साथ खाना लगाने लगती है

rajpal,shurushti,jeevika आ कर बैठ जाते है

Rajpal:ye बलदेव कहा रह गया

Jeevika:devrani से पूछो और किसको पता होगा वो कहा है

और अपना मुँह टेढ़ा करती है

rajpal:tumhe बता कर गया था क्या बलदेव

devrani:nahi मैंने नहीं देखा उसे बहार जाते

radha:maharaj मई देखि थी युवराज को बहार जाते हुए कुछ समय पहले

rajpal:is गधे को कब अकाल आएगी षुरूश्ती

कमला मन में (" उस गधे का लैंड जब तेरी पत्नी लेगी तो चीखेगी")

देवरानी मन me("jise तुम गधा कह रहे हो राजपाल वो घोडा है जिसने मेरा दिल चुरा लय है और में कुछ दिन में इस घोड़े की सवारी भी करुँगी पर तुम्हे ये बात समझ नहीं आएगी राजपाल क्यू क असली गधे तुम हो")

Shurushti:maharaj हम खाना शुरू करते है वो जब आएगा तो खा लेगा

और षुरूश्ती खाना शुरू करती है और अपने मन में सोचती है "(महाराज राजपाल गधा नहीं है बलदेव वो चतुर सियार है जिसने तुम्हारे आखो क निचे से तुम्हारी पत्नी को उठा लिया")

तभी बलदेव भागता हुआ पहुँचता है

"क्षमा कीजिये मुझे आने में देरी हो गयी"

राजपाल :ये क्या बलदेव तुम इतने रात में कहा आवारागर्दी कर रहे हो तुम्हे नियमो से दुबारा अवगत करवाना पड़ेगा

Baldev:kshama करे पिता जी वो मुझे कोई काम था

Rajpal:hume मत सिखाओ

थोड़ा गुस्स्सा होते हुए

बलदेव ये सुन कर चुप चाप खड़ा हो जाता है

जीविका मन में (बीटा राजपाल में तुम्हे कैसे बताऊ क ये बलदेव बहार नहीं घर में हे आवारागर्दी कर रहा है वो भी तुम्हारे पत्नी क साथ)

बलदेव क ऊपर गुस्सा होते देख देवरानी का डिल ज़ोर से धड़क रहा था और उस से रहा नहीं गया

devrani:maharaj जवान बेटे को ऐसे दन्त न ठीक नहीं

rajpal:ary तुम अब हमे सीखाओगी क्या करना चाहिए क्या नहीं

shurushti:bass कीजिये महाराज आप को वैध जी ने कहा है गुस्सा नहीं करने आपके ह्रदय रोग क संकेत मिले है आप सब खाना खाओ

"बलदेव तुम भी आओ बैठो"

षुरूश्ती मन me(ye देवरानी को बड़ा जल्दी बुरा लगा अपने यार क ऊपर गुस्सा होते hue,kuch दिन की बात है फिर तुम दोनों स्वर्गगा लोक में प्रेम करना)

बड़ी माँ षुरूश्ती की बात सुन कर सब शांत हो जाते है और बलदेव भी निचे बैठ कर खाने लगता है

shurushti:or बीटा बलदेव तैयारी हुई की नहीं जाने की

jeevika:bahu कहा जाने की तैयारी

shurushti:wo बलदेव अपने ननिहाल जा रहा है अपने माँ को ले कर

jeevika:matlab पारस जा रहे ये dono,bass ये दोनों?

राजपाल?

Rajpal:ji माँ मेरे हे अनुमति से ये दोनों जा रहे है

जीविका मन में ( "बीटा राजपाल ये दोनों क्यों जा रहे है अकेले अब तुम्हे कैसे बताऊ हे भगवन अनर्थ हो जायेगा ")

Baldev:dadi वो यहाँ पर सैनिको की ज़्यादा आवश्यकता है इसलिए में अपने मित्रो श्याम और बद्री को ले का रहा हु साथ

jeevika:oh

और बलदेव को एक तीखे नज़र से देखती है

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जीविका की नज़र देवरानी पर पड़ती ह वो मुस्कुरा रही थी

देवरानी मन में; ("सांसु माँ ये तो मेरे प्रतिशत की सिर्फ एक झलक है")

जीविका मन में; (कामिनी रंडी मुस्कुरा रही है बेशरम बेहया)

Devrani:ary रे सांसु माँ आपके तो पसीने छूट रहे है ,आप कहो तो पंखा झेल दू

जीविका चुप रहती है

devrani:radha कमला पंखा महारानी जीविका मेरी प्यारी सांसु माँ की ओरे झालो तेज़ी से

जीविका अपने बेबसी पर रोने जैसी हो जाती है और अपना सर निचे कए खाने लगती है

जिसे देख देवरानी एक क़ातिल मुस्कान देती है

Baldev:mera खाना तो हो गया

बलदेव देखता है उसके थाली में केला रखा हुआ है उसको शरारत सूझती जय

Baldev:Maa ये मेरा केला लो मेरा खाना हो गया

Devrani:ary खा लो बीटा खाने क बाद फल खाना चाहिए

देवरानी बलदेव को देखती है जो मुस्कुरा रहा था और वो

समझ जाती है

Baldev:le लो न मेरा केला मेरी माता

Rajpal:le लो देवरानी अगर ितं ज़िद्द कर रहा है तो

देवरानी ये सुन कर शर्मा जाती है और फिर उसके मुँह से हसी छूट जाती है

Devrani:laao इधर दो केला ले लेती हु जब इतना कह रहे है

राजपाल देवरानी को हस्ते देख षुरूश्ती क काम में "देखो न देवरानी को बे बात का हस्ती है आज कल उसका दिमाग ठिकाने पर नहीं"

shurushti:hmm और मन में( "घोंचू राजपाल तुम नहीं समझोगे")

baldev:maa आपको पसंद है इसलिए ज़िद्द कर रहा हु

devrani:theek है लाओ खा लू तुम्हारा केला

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देवरानी झुक कर अपना पल्लू गिरती है और

बलदेव क थाली से केला उठा लेती है

baldev:par बदले में अपना पपीता दो मुझे खाने

और एक आँख मरता है

Devrani:papita अभी पके नहीं है दो दिन और लगेंगे

Baldev:dekh क तो नहीं लगता कच्चा होगा बहुत बड़े है

Devrani:beta बड़े है इसलए जल्दी तोड़ लय गया और पपीते अनुसार गर्मी नहीं मिलने पर कच्चा रह गया ,इसे भूसा में दाल दूंगी

Baldev:Maa ठीक है मुझे इसे पका कर खाना है दे दो

devrani:le लो मन किसने क्या है



देवरानी अपनस पल्लू से अपने वक्षो को अचे से धक् लेती है और बलदेव को देख रही थी प्यार से

जीविका और षुरूश्ती को सब समझ आरहा था क ये दोनों क्या गुल खिला रहे है

सब खाना खा कर उठ जाते है फिर देवरानी खाना कहती है बलदेव अपने हाथो में दोनों पपीता को ले कर अपने कक्षा से रख कर आता है

अब माँ रसोई में बर्तन समेंटे लगी बलदेव इधर इधर टहल रहा था

बलदेव मन में " ये माँ भी न बहुत समय लगाती है"

देवरानी रसोई से बहार देखती है बलदेव उतावला हुआ था उस से मिलने क लये

devrani:man में) बहुत बेचैन होरहा है मिलने क लये मेरा प्रेमी जल्दी काम निपटा लेती

हु

devrani:"han आज बलदेव को दही खिलाती हु उसके स्वस्थ क लय ाचा है"

देवरानी रसोई क कोने पे लटके हुए शिखर

जो रस्सी की बानी थी उसपे रखे मटकी में दही उतरने क लये जाती है पहले अपने बाल बांधती है और फिर हल्का सा कूद कर रस्सी को पकड़ती है

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देवरानी का भरी तरबूज़े जैसा दूध एक अंदाज़ से कूदता है

बलदेव जैसे रसोई की ओरे देखता है उसका हलक सुख जाता है उसके माँ दो तीन बार कूदती है पर शिखर की रस्सी ऊपर होने क वजह से उसके हाथ में नहीं आरही थी

Baldev:man me)kitne बड़े वक्ष है माँ इसे तो में आज दबा क रहूँगा जैसा आज सुबह चुतर मसला था मेरी रानी

जैसे हे देवरानी की नज़र बलदेव पर पड़ती है वो कड़ी हो जाती है क्यू क बलदेव उसके बड़े वक्षो को खा जाने वाली नज़र से देख रहा था

देवरानी देखती है बलदेव देखे हे जा रहा है उसके दूध को तो वो लज्जा क बलदेव से नज़रे हटा कर निचे देखने लगती है

बलदेव एक नशे में डूब गया था

वो रसोई में घुसता है जिसे जीविका देख लेती है जो अभी अभी अपने कक्षा से टहलने क लये निकली थी

बलदेव अपने माँ क वक्षो को देखते हुए उसके पास जाता है

"माँ मेरी रानी तुम्हे काम करने की ज़रूरत नहीं"

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देवरानी क भरी गांड को दबोच क बलदेव अपने माँ को उठा लेता है अपने गॉड में

"माँ मुझे तुम्हे प्यार करना है"

देवरानी क गांड पर जैसे बड़े मज़बूत हाथ पड़ते है वो सिहर जाती है और उत्तेजना से अपने आँख बंद कर लेती है

जीविका बड़े सावधानी से छुप जाती है और बलदेव क रसोई में जाते देख अब उसके बहार आने का इंतज़ार कर रही थी

तभी बलदेव अपनी माँ को गॉड में उठाये बहार लाया और बलदेव का हाथ देवरानी की गांड पर था उसका मुँह देवरानी क वक्षो क बीच था

jeevika:"hey भगवन में ये सब देखने से पहले मर्डर क्यू नहीं गयी"

जीविका अपनी आखे बंद कर लेती है

बलदेव गॉड में उठाये देवरानी क कक्षा में घुसता है

Baldev:devrani दरवाज़ा बंद करो..

बलदेव दरवाज़ा क पतों को पीछे ठेलता है और देवरानी कुण्डी लगा लेती है

"बीटा उतरो न अब नीचे "

"नहीं उतरना मेरी जान को"

"तुम्हारे हाथ दुःख जायेगा मेरे प्रेमी"

"तुम्हे तो में ज़िन्दगी भर उठा क रख सकता हु"

"इतना प्रेम करते हो हमसे बलदेव"

"हाँ में तुम्हारा घोडा हु देवरानी तुम जीवन भर मेरे सवारी करो में उफ़ तक नहीं करूँगा "

"बलदेव उतरो न"

बलदेव गांड को खूब मसलते हुए उतर देता है

devrani:aaao अब मेरे साथ मेरे राजा

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देवरानी चल रही थी धीरे से और उसके पीछे उसके हिलते हुए बड़े चुतर को निहारते और वक्षो की थिरकन देखते हुए लैंड मसलते हुए चले जा रहा था बलदेव

इधर जीविका गुस्से से आग बबूला हो जाती है अपने बहु और पोते की हरकत देख कर और वो सीधा राजपाल क कक्षा में जाती है

jeevika:aaj इस रंडी की पोल खोल हे दूंगी

जीविका जैसे पहुँचती है देखती है राजपाल सोया था चैन की नींद जीविका वही कड़ी थोड़ी देर देखते रहती है राजपाल को

जीविका मन में ( राजपाल बीटा तू सोता रह गया और तेरा सब कुछ कोई और लूट रहा है)

जीविका रोने जैसी हो जाती है और अपने कक्षा में देवरानी क बंद दरवाज़े को देख जाने लगती है

इधर बलदेव अपने माँ को खूब ज़ोर से भीचता हुआ गले लग जाता है

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और देवरानी क कमर में हाथ दाल कर उसके रसीले होठ को

उफ़ माँ

"गलपपपपपपपप गलप्प गलप्प्प

उम् सलरपपपपपू गलप्प्प "

आज देवरानी

बीटा िशः

अब देवरानी भी ज़ोर से होठ चूसने लगती है

मेरे राजा

"गलपपपपपप गलप्प गलप्प ुम स्लुर्प गलपपपप गलपपपप गलप्प"

पुरे कक्षा में आवाज़ गूंज रही थी रात क सन्नाटे को चीरती दोनों माँ बेटे क पूछ पूछ की आवाज़ से कोई भी अंदाज़ा लगा सकता था क अंदर क्या होरहा है

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"गलप्प्प उम्म्म्मः गलपपपप सलरपप ुम यह"

देवरानी बलदेव को धकेलती है पलंग पर लिटा देती है "आह मेरे राजा को बहुत जल्दी है आज"

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देवरानी बलदेव क छाती से ले कर चेहरे तक सहलाते हुए अपने अधनंगे दूध को हल्का बलदेव से रगड़ती है

"माँ तुम्हे देखने क बाद मुझे होश नहीं रहता"

तभी बलदेव की नज़र देवरानी क पहने मंगलसूत्र पर पड़ती है

बलदेव अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसके मंगलसूत्र खींचता है और तोड़ देता है

एक झटके में देवरानी का मंगलसूत्र बिखर जाता है

देवरानी जब तक समझती तब तक देर हो चुकी थी

"बलदेव ये क्या किया तुमने "

"माँ तुम उस राजपाल की दी हुई मंगलसूत्र नहीं पहनोगी जो तुम्हारी रद्दी भर सम्मान नहीं करता और जिसने तुम्हे आज इतना रुलाया"

"पर बीटा ..किसी ने बिना मंगलसूत्र क देख लय तो"

"उसका समाधान है मेरे पास तुरंत बलदेव अपने कुर्ते से एक सोने का मंगलसूत्र निकलता है"

"जिसे देख देवरानी की आखे नाम हो जाती है"

"ये मेरी प्यारी प्रेमिका देवरानी क लये है उस बूढ़े का मंगलसूत्र कभी नहीं पहनोगी तुम"



मंगलसूत्र की सुंदरता देख देवरानी की आखे फटी की फटी रह जाती है

"अब जब ले आया है तो पहना भी de"devrani पलंग से उठ कर कड़ी होती है और

और अपने कक्षा में बने मंदिर की ओरे देख

धन्यवाद् भगवन अपने मन में कहती है

बलदेव उठ कर देवरानी क गले में मंगल सूत्र पहना रहा था और देवरानी



अपना हाथ जोड़े बलदेव को देख रही थी

"बलदेव अब आप मेरे लिए पूजनीय हो मेरे जीवनसाथी"

"कैसा लगा मंगलसूत्र मेरी रानी"

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"बहुत सुन्दर है मेरे राजा तुम तो बहुत जल्दी सीख गए खरीदारी करना"

"माँ वैसे आज सीधा तू और तुम से आप कह रही हो"

"क्यू क बलदेव अब हमारा रिश्ता बदल रहा है जिसमे तुम मेरे से ऊपर रहोगे और में तुम्हारी दासी रहूंगी"

"कभी ऐसा न सोचना माँ मेरी रानी कभी दासी नहीं आपको क्या पता में आपको किसी भगवन से ऊपर रख कर मंटा हु बचपन से हे लेकिन अब आपकी पूजा भी करूँगा और आपको भोग बे चढ़ाऊंगा "

"कही वो राजपाल देख न ले बदला हुआ मंगल सूत्र "

"जो करना होगा कर लेगा वो में नहीं डरता उस बूढ़े से"

"तुम उसे बार बार बूढ़ा कह रहे दिन में वो मुझे कैसे बूढी कह रहा था और कह रहा था क मेरा दिमाग सत्या गया है"

"माँ मुझे याद मत दिलाओ मुझे उस क्षण जी छह रहा था राजपाल का वध कर दू पापी का पर में सही समय की प्रतीक्षा करूँगा"

"और रही उसकी बात क वो तुम्हे बूढी कहा तो सुनो तुम्हारे शरीर को कोई पागल भी देख ले तो वो भी अपने होश खो बैठे वो तो तुम अपना पल्लू ओढ़े रहती हो सबके सामने "

"सच्ची में इतनी जवान हु अब भी और तुम क्या चाहते हो क जैसे में तुम्हारे सामने कोई भी वस्त्र में आजाती हु वैसे हे बहार भी राहु"

"कदापि नहीं में कभी नहीं चाहूंगा क मेरी जान की जवानी को देख कोई अपनी आखे सके और तुम सच में जवान हो 35 वर्ष में कोई बूढ़ा नहीं होता और तुम तो 25 की लगती हो"

बलदेव मन में( माँ जब तक प्रेमिका हो तब तक ठीक है जिस दिन मैंने तुम्हे अपने बंधन में बांध लय उस दिन क बाद तो किसी को आपके चेहरे की झलक भी नहीं लेने दूंगा)

"माँ तुम किसी पारी से काम नहीं हो"

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ुम्म्हा देवरानी क सदी को उसके मखमली पेट से अपने दांतो से खींचता है बलदेव

आह बीटा"

बलदेव खड़ा हो कर एक बार फिर अपने भरी गदरायी माँ को अपने बहो में समेत लेता है

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"ुम्म्हा गलप्प्प "

माँ तुम्हारी जवानी मुझे पागल कर देगी"

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देवरानी को खींच कर अपने बाहो में ले लेता है और उसके बड़े बड़े वक्षो क निचली हिस्से को अपने मज़बूत हाथ से दबाते हुए उठा ता है

"आआह बलदेव"

"माँ इतने बड़े वक्ष आपको भरी नहीं लगते चलते हुए"

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"उफ्फ्फ बलदेव ाः हे भगवन ये लड़का भी न"

बलदेव अपने हतेहली अपने माँ क बड़े दूध पर खूब सहला रहा था

"यह बीटा "

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बलदेव अब अपने माँ की मखमली पेट को दबाते हुए देवरानी क कान क निचे चाटने लगता है

"आआह बीटा मेरे प्रेमी उफ़ हम्म"

देवरानी अब बलदेव को अपने निचे लेती है थोड़ी देर ठहर जाओ में कर क आती हु

"क्या माँ"

"पेशाब"

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 54

"माँ आपको भी ये समय हे जाना है"

"संयम रखो मेरे राजा में अभी आयी "

देवरानी उठ कर चली जाती है स्नानघर में और सबसे पहले अपना पेटीकोट उठा कर एक सीटी की आवाज़ से एक तेज़ धार अपने बुर से छोरती है

"ये माँ इतने ज़ोर से सीटी बजा रही है "और ज़ोर से लैंड मसलने लगता है

शौच करने क बाद देवरानी अपना पेटीकोट निकलती है ब्लाउज निकलती है और अपना हाथ अपने छूट पैर ले जाती है

"हे भगवन ये कितना रस छोर रही है"

अपने पेटीकोट से पॉच कर एक धोती पहन लेती है

एक छोटे से वस्त्र से अपने बड़े वक्ष को कस लेती है

"अब देखना मेरे राजा मेरा जलवा"

देवरानी वस्त्र बदल कर अपने आपको सवारती है अपने बाल को बांधती है अपने होठो पे लाली लगाती hai,devrani अपने पास रखे श्रृंगार का हर सामान आज इश्तेमाल कर लेना चाहती थी अपने बेटे को रिझाने क लये

"माँ कहा रह गयी"

"आयी बीटा "

तभी स्नानघर से सामने देवरानी आते दिखाई देते है जिसे बास बलदेव देखता हे रह जाता है

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बलदेव देखता है उसके माँ का सुन्दर वक्ष एक तंग वस्त्र में फसा हुआ है और उसका पूरा आकर दिखाई पद रहा है

बलदेव मन में: माँ क ये ठोस वक्ष तो पुरे आकर में गोल पपीता से दिख रहे है इसे कैसे माँ ब्लाउज में छुपाती है माँ हे जाने

देवरानी अपने आप को यु देखे जाने से थोड़ा लज्जित होते हुए धीरे चलते हुए आरही थी

बलदेव अब देवरानी क निचले हिस्से को देखता है जहा पर देवरानी ने अपने जांघो तक की हे धोती पहनी थी

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बलदेव मन में: उफ़ माँ तुम्हारे गांड क बड़े तरबूज़े क आकर गजब लग रहे है और तुम्हारी जाँघे कितनी कासी हुई है

बलदेव अपना संयम खोने लगता है जिसे देवरानी भी समझ रही थी

"देवरानी मेरी रानी इस अवस्था में अगर तुम राज महल क बहार चली गयी तो तुम्हे कोई पहचान नहीं पायेगा"

"क्यू नहीं पहचान पायेगा"

"क्यू क माँ तुम इस परिधान में स्वर्ग की अप्सरा से काम नहीं लग रही हो"

"वैसे माँ अगर ऐसे तुम्हे राजपाल देख ले तो उसे समझ आजायेगा क कौन बूढ़ा है कौन नहीं"

और बलदेव एक गहरी मुस्कान देता है

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"माँ तुम माल हो "

देवरानी अपना पीठ बलदेव की ओरे कर अपने वक्ष को उस से छुपाने की कोशिश करती है

"बीटा बलदेव उस राजपाल ने कभी मौक़ा हे नहीं दिया मुझे सजने वारने का मेरे सब अरमान मेरे हृदय में हे रह गए उस पापी क वजह से"

"माँ चिंता करने की बात नहीं उस पापी को दण्डित में करूँगा और तुम जो खुशी से वंचित जीवन भर रही वो हर एक ख़ुशी में दूंगा"

देवरानी अभी भी अपना पीठ बलदेव की ओरे कर क कड़ी थी

"माँ तुम इतना सज श्रृंगार कर मुझे दिखने आई हो क किसी और को"

"बीटा में सिर्फ तेरी हु और मेरा सजना सवर्ण सब तेरे लये हे होता है"

"माँ तुम अपने संगमरमरी शरीर को छुपा क भी नहीं छुपा सकती तुम पीछे घूम क मेरा पसंदीदा नितम्ब दिखा रही हो"

देवरानी अपनी बेवकूफी पे लज्जा जाती है

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"इतना पसंद है मेरा नितम्ब क तब से देख रहा है"

"माँ इन्हे तो में खूब मसला हु सुबह में टी समझ नहीं आया कितने प्यारे है ये दोनों तरबूज़े मेरे लये"

"ाचा बलदेव जी"

और अपना साद निचे कर लेती है

"माँ अब आपके बड़े पपीता जैसे वक्ष की बरी है ,मुझे उनसे प्यार करना है"

"करते तो हो हे और मैंने कब मन क्या है"

"बास छुआ हु न अचे से पकड़ा न मसला"

"तो आजाओ मेरे राजा अपनी ये भी इच्छा आज हे पूरी कर लो"

बलदेव पीछे से आकर देवरानी से अपना खड़ा लैंड उसके तरबूज़ों पर लगा देता है

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"आह मा तुम्हारे ये नितम्ब कितने मुलायम है"

देवरानी अपनी प्रशंशा सुन कर मुस्कुरा रही थी

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"ुम्मम्ह यह बलदेव आराम से में भागी नहीं जा रही"

बलदेव अपना लैंड दोनों बड़े ठोस गांड क दरार ढूंढ़ने की कोशिश कर रहता

बलदेव थोड़ा पीछे होता है और झुक कर अपना लैंड देवरानी क गांड क सबसे निचले हिस्से पर रख धीरे धीरे ऊपर होने लगता है

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जो जो देवरानी क गांड में बड़ा लम्बा लौड़ा ऊपर की तरफ जा रहा देवरानी क ठोस चुतरो में फास्ट जाता है

"ाः बलदेव ुहममममम हे भगवन"

देवरानी अपना होठ चबाती हुई अपना आँख बंद कर लेती है

"ाः मा क्या राजपाल ने ऐसा प्यार क्या"

"वो नामर्द क्या प्यार करेगा मुझे जैसा मेरा बीटा कर रहा है आआह बीटा "

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बलदेव अब देवरानी क पीठ पर चूमने लगता

है देवरानी को अपने पीठ पर गरम होठ

की चुम्मिए की बरसात कर देता है

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"ाः मेरे राजा ""

"हाँ मेरी रानी"

"माँ आओ न मेरी गॉड में बैठो न मुझे आपके ये बड़े वक्ष मसलने है"

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देवरानी क गांड क दरार में लैंड पेलते हुए बलदेव कहता है

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"नहीं बैठना तुम्हारे गॉड में वो चुभःता है तुम्हारा "

तभी बलदेव की नज़र अपने माँ क बजते हुए पायल पैर जाती है और उसे दीखता है क देवरानी ने मेहंदी लगाए हुई है

"माँ ये मेहंदी कब लगाई"

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"ये मेहंदी तब लगाई जब मेरे प्रेमी मेरे लये मंगल सूत्र लेन बाजार गए थे"

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"माँ तुम्हारे मेहंदी लगे हुए पेअर अत्यंत सुन्दर दिख रहे है"

"ये सब श्रृंगार मेरे प्रेमी राजा बलदेव क लये है"

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माँ को अपने से और बीच कर

"माँ मुझसे अब और सहा नहीं जाता मुझे विवाह करनी है"

देवरानी झट से दूर हो जाती है बलदेव से

"कुत्ते कमीने तूने ऐसा सोचा भी कैसे क तू विवाह करेगा "

"माँ सुनो तो"

"मुझे नहीं सुन न जिस दिन अगर तूने कर लय में तेरी हे तलवार तेरे पेट में घोप दूंगी देवरानी नाम है मेरा"

बलदेव मुस्कुराते हुए देवरानी को फिर से पकड़ता है

"माँ मुझे आपको संपूर्ण रूप से पाना है"

"और माँ आप पूरी बात तो सुनलो फिर चाहे मेरा सर काट लेना अपने हाथो से "

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"माँ मुझे आपको अपनी दुल्हन बनाना है"

ये सुन कर देवरानी अपना आँख बंद कर लेती है

"आपने सही सुना माँ मुझे आप से विवाह करना है आप क्या सोच रहे थे में किसी और से विवाह करने की बात कर रहा "

देवरानी अपनी गलती पर शर्मा जाती है

"तू किसी और क बारे में सोच भी नहीं सकता बलदेव उस दिन मेरा मारा हुआ मुँह देखेगा"

"माँ मेरे ज़िन्दगी में बास तुम थी हो और रहोगी मेरी रानी मुझे अपनी सब हाडे पार कर देना है और आपकी शरीर से आत्मा तक को अपना बनाना है"

देवरानी थोड़ा चिंतित होते हुए

"पर बलदेव बिना विवाह कए हम पर्सिओ में हम उस स्थिति तक नहीं पहुंच सकते क एक स्त्री अपना सब कुछ सौंप दे"

"माँ मई इस बात से परिचित हु क आप कितनी धार्मिक और आपके माँ बाप ने आपको किस प्रकार क संस्कार डाई है इसलिए मैंने कहा हमे विवाह कर लेना चाहिए"

"पर बीटा ये मुमकिन है"

"माँ मुझ से और बर्दाश्त नहीं होता आप तैयार हो जाओ में दुन्यासे लड़ लूंगा"

"बीटा इतना प्यार करता है अपनी माँ को"

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"जान से भी ज़्यादा"

देवरानी अपना ऊँगली अपने बेटे क होठो पर रख

"इतना मत करना क देवरानी क आग में जल जाये"

"जल मिटने क लये तैयार हु"

देवरानी अपना होठ बलदेव क होठो पर रख अपना जीभ बलदेव क मुँह में रख चूसने लगती है

"ुमहाहहहहहहह अहह बीटा"

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"आआह माँ उम्म्म्म हम्म्म्म सलरपपप

गलप्प्प गलप्प्प गलपपपपपपप"

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देवरानी अब अपना पूरा जीभ बहार नकल कर बलदेव क जीभी में फ़साने लगती है

"ुहममम ाः गलप्प्प गलपपपप गलप्प्प"

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बलदेव से रहा नहीं जाता और देवरानी क ऐसे कामुक होने से वो उसके निचले होठ को अपने दोनों होठो फसा कर चुस्त है

"गलपपपप गलपपपप सलरपपपप हम्म्म"

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देवरानी क बाल पैर हाथ फेरते हुए बलदेव देवरानी क हर कतरे को चूस कर पीरहा था देवरानी भी भरपूर साथ दे रही थी

बलदेव अब देवरानी को अपने आएगी लेता है

"मा यह ममम"

"आह मेरे राजा"

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baldev:maa तुम्हारे ये दो बड़े आजम चूसने है

बलदेव अपने हाथो को बड़े वक्षो पर सहलाता है

"ाआअह उफ्फ्फ बीटा"

"मा कितने बड़े और गोलाकार है ये में खा लू ये"

"हम्म्म्म बीटा यह "

"माँ जब ये तुम्हारे चलने से हिलते थे तो मेरा डिल हिल जाता था यक़ीन नहीं होता अब ये मेरे हाथो क निचे है"

देवरानी बलदेव से छूट कर उसके सामने जाती है

"अभी तुम्हारा डिल फिर से रोक देती हु"

हस्ते हुए कहती है

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देवरानी कड़ी हो कर अपने बड़े वक्षो को हिलती है

"आजा राजा पी लो रास गगरी"

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बलदेव झट से फिर देवरानी को दबोचता है

"माँ क्या हिलती हो अपने दूध को तुम इस गगरी का रास तो मई हे पीऊंगा"

बलदेव देवरानी क गर्दन पर चूमने लगता है

बलदेव अब देवरानी को बहो में लये पलंग पर बैठ जाता है और देवरानी क बड़े गांड को अपने लौड़े पर रख

"बैठ जा मेरे गॉड में मेरी रानी"

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बलदेव का लौड़ा "खछ "से देवरानी क दरार में फिर से उतर जाता है"

"है दय्या धोती में तलवार रखा है क्या रे बलदेव"

देवरानी मरे उत्तेजना क बलदेव को पलट देती है बिस्तर पर खुद उसके ऊपर आजाती है

अपने बड़े वक्ष को उसके सीने में खूब दबती है

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बलदेव अपने हाथ अपनी रानी क बड़े गांड पे ले जा कर सहलाता है

"माँ तुम्हारे ये मांसल जांघ और बड़ी गांड का दीवाना हु में"

बलदेव अपने दोनों हाथो को पुरे गांड को पकड़ क ज़ोर से दबाने लगता है

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"अह्ह्ह मेरे राजा उठ"

"है क्या गांड है माँ"

"अह्ह्ह बीटा मेरा सब कुछ तेरा है मेरे राजा"

बलदेव अब देवरानी क दोनों टैंगो को उठा लेता

है और देवरानी क भरी मांसल जांघो को चूमता है

"ुम्म्हा ुम्हा "

"हम्म्म बीटा यह"

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"माँ तुम्हारे मांसल जांघ कितने चिकने है"

देवरानी अपना हाथ निचे टिकाये थी और अपने बेटे को पूरा सहयोग दे रही थी

बलदेव अब देवरानी को पूरा लिटा देता है और उसके होठो पैर "ुमहाआआ"

"मेरी जान मेरी रानी"

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बलदेव एक तरफ देवरानी को चुम रहा था और दूसरी ओरे उसका लैंड देवरानी क गांड पे चुभ रहा था

बलदेव अब देवरानी को पूरा लिटा देता है और उसके वक्षो की ओरे देख

"माँ आपके पुरे आकर तो दिख हे रहे तो ये वस्त्र क्यू बांध रखा है अपने वक्षो से"

"बीटा क्या कह रहा मुझे शर्म आरही है"

और अपना आखे बंद कर लेती है

"बीटा को रिझाती है छोटे वस्त्र में अपने बड़े दूध को कस क और शर्मा रही है"

"बीटा लाज स्त्र्री का गहना होता है"

"है मेरी रानी इसी ऐडा पे तो में फ़िदा हु तुम पे मेरी महरानी देवरानी"

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बलदेव दोनों हाथो को देवरानी क दोनों बड़े वक्षो को पकड़ लेता है

"आह beta"apni आखे बंद करते हुए

"माँ मसलो इन्हे"

"यह बीटा हां "

"हम्म बहुत तरसी है ये मज़बूत हाथो क लये"

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बलदेव दोनों हाथो से देवरानी क बड़े वक्षो को सहलाते हुए दोनों हथेली में भर हल्का दबाने लगता है

"अह्ह्ह उम्म्म बीटा"

बलदेव एक बार अपने माँ क आखो में देखता है

और फिर अपने दोनों हाथो पर दबाओ बढ़ा कर ज़ोर से दोनों बड़े वक्षो को दबा देता है

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"आआआआह बीटा हे भगवन उफ्फ्फ आआह मेरे राजा"

"ाआअह माआ क्या बड़े है आपके ये दूध इतने बड़े ऊपर से मुलायम अंदर से कड़े है"

"उफ्फ्फ ाः बीटा क्यू क इसे कोई अचे से दबाया हे नहीं तो कैसे न कड़ा रहे"

"माँ मई इसे दबा दबा क नरम और बड़े कर दूंगा"

"अह्हह्ह्ह्ह मेरे राजा ऐसे हे दबाते रह"

"हम्म्म मेरी माँ तू मेरी रानी है अब"

बलदेव अब अपने माँ क वक्षो को छोरता है और देवरानी को देखता है

देवरानी अब भी अपनी आखे बंद कए हुए थी

"माँ अब आओ न मेरी गॉड में"

"आती हु बीटा पर"

"पर वॉर कुछ नहीं वो तो चुभेगा हे"

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"हे भगवन अहह आती हु"

बलदेव देवरानी को अपनी ओरे खींचता है

बलदेव अब देवरानी को खींचते हुए उसके नाभि को चूमता है और अपने जीभ से चाट ता है

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"अह्ह्ह मेरा राजा बीटा"

"आए न इधर मेरी रानी तुझे स्वर्ग दिखता हु"

"अह्ह्ह मेरे राजा"

देवरानी अब भी आखे बंद कए हुई थी

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बलदेव अपना एक हाथ से उसके एक चुकी को पकड़ कर मसल कर भीचता है

"अह्ह्ह मेरे राजा "

देवरानी आखे खोल देती है और एक उत्तेजना से बलदेव को देखती है

बलदेव देवरानी को अपनी ओरे खींचता है

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और देवरानी खिसक क बलदेव क गॉड में आ जाती "माँ थोड़ा सा उठो न"

देवरानी अपना गांड ऊपर उठती है

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बलदेव अपना लौड़ा पाकर कर सीधा करता है

देवरानी सब समझ रही थी और बलदेव क आखो में देख रही थी

"माँ अब धीरे से बैठो"

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"बैठ रही हु बीटा"

धीरे धीरे अपना बड़ा गांड देवरानी निचे लेने लगी और बलदेव दोनों हाथो से देवरानी को थामे बैठा रहा

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"खछ" से देवरानी क दोनों गांड क दरार में बड़ा लोहे सा लौड़ा फास गया

"अह्ह्ह माँ मेरे राजा लोहा रखा है क्या"

"माँ तुम्हारे लये हे लोहा बना रहा

हु इसे"

"मत खा अब वैध जी क चूरन में कैसे सह पाऊँगी"

"माँ तुम्हारे तरबूज़े को इसी लोहे क हथोड़ी से फोड़ूंगा"

और अपना लौड़ा घस्ने लगता है देवरानी क गंडपए

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और देवरानी क कमर पर हाथ रख कर देवरानी को खींचता है अब उसका लौड़ा सीधा देवरानी क छूट से लग रहा था

"अह्ह्ह मेरे राजा"

देवरानी बलदेव का हाथ ले कर अपने वक्ष पर रख देती है

बलदेव इशारा समझ कर

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अपने दोनों हाथो से देवरानी क बड़े तरबूज़े जैसे वक्ष को दोनों हाथो में कस कर छपने लगता है खूब मसलता है

"आआह मेरे राजा उफ़ भगवन"

देवरानी मन me:kamla सही कहती थी बलदेव का हथेली हे मेरे वक्षो अनुकूल है

"ाः माँ आपके वक्ष"

इधर एक बुरे सपने क वजह से षुरूश्ती का नींद टूट जाता है और वो उठ कर ज़ोर ज़ोर से सांस लेने लगती है और पास में रखे गिलास उठती है पानी पीने क लये पर वो गिलास खली था फिर वो जग में देखती है तो उसे कही पानी नहीं मिलता वो उठ कर अपने कक्षा से बहार आती है

षुरूश्ती आधे नींद में हे थी और रसोई में जा कर पानी पीती है और फिर वापस अपने कक्षा की ओरे चलने लगती है तभी उसके कानो में हल्का

"उमठ ाः " उम्म्म हां ाआअह नहीं"

की आवाज़ सुनाई देती है

षुरूश्ती की जैसे पूरी नींद टूट जाती है और वो आवाज़ का पीछा करती है तो वो आवाज़ देवरानी क कक्षा से गूँज रहा था

षुरूश्ती दबे पाव चलते हुए देवरानी क खिड़की क पास आकर कड़ी होती है

इधर बलदेव बुरी तरह से अपने माँ क दूध का मंथन करने में लगा था

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"आह मेरी रानी देवरानी"

"अह्ह्ह मेरा राजा ऐसे हे "

षुरूश्ती कान लगा कर सुन रही थी

"देवरानी मेरे गॉड में बैठ कर अपना वक्ष मसलवाने में कैसा लग रहा है"

"अह्ह्ह मेरे राजा ऐसे हे आह ऐसे हे मत पूछो कितना ाचा लग रहा है"

षुरूश्ती का तो मानव काटो तो खून नहीं वाला हाल हो जाता है एक माँ और बीटा का संवाद सुन क

तभी देवरानी को कुछ आहात सी महसूस होती

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है और बलदेव को वो इशारा से चुप रहने को कहती है

"सुष्ठ"

देवरानी अपनी आखो से खिड़की की ओरे इशारा करती है जिसे बलदेव समझ जाता है

दोनों अब चुप चाप वैसे हे बैठे थे

देवरानी सोचने लगती है

"आखिर कौन हो सकता है"

बलदेव मन me:"Kaun है जिसे हमारा सुराग मिल गया "

और बलदेव और देवरानी एक दूसरे को देख रहे थे और बहार षुरूश्ती भी रुक सी गई थी उसे समझ नहीं आरहा था क वो रुक क्यू गयी..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 55

बलदेव की गोदी में बैठी देवरानी इशारे से बलदेव को खतरे का इशारा कर देती है क्यू क एक आहात देवरानी ने अपने कक्षा क बहार सुन ली थी

दोनों सोच में पड़े थे क आखिर कर कौन है जो जासूसी कर रहा है आधी रात को षुरूश्ती वही कड़ी थी और अंदर का हाल जान ने की कोशिश कर रही थी

षुरूश्ती. मन में: ये दोनों को कही इस बात की भनक तो नहीं लग गई क में यहाँ हु तब से तो खूब उठ आठ कर रहे थे दोनों माँ बेटे

बलदेव देवरानी को इशारा करता है क उठो

देवरानी बलदेव क गॉड से उठ थी है और बलदेव खड़ा होता है

ईशर षुरूश्ती समझ गयी थी क अब यहाँ रुकना ठीक नहीं है और वो दबे पाव अपने पायल की आवाज़ कए बिना चलने की कोशिश करती है और अपने कक्षा की ओरे जाने लगती है

देवरानी बलदेव फुसफुसाती है

"बीटा तुम रुको में देखती हु"

अपनी माँ की बात समझ कर बलदेव रुक जाता है और देवरानी धीरे से उठ कर सबसे पहले एक ओढ़नी उठा कर अपने सीने पर डालती है जो छोटे से ब्लाउज में बहार आने को तैयार थे अपना अंग छुपा कर दरवाज़ा खोलती है दोनों तरफ देखने पर उसे कुछ नहीं दीखता

तभी देवरानी क कण में "khatt"ki दरवाज़ा बंद करने की आवाज़ आती है देवरानी आवाज़ का पीछे करती है तो पाती है क ये षुरूश्ती क कक्षा से आई थी

देवरानी अपने होठो पर एक क़ातिल मुस्कान लेट हुए

"रानी षुरूश्ती तो तुम थी तो तुमने मेरे और मेरे प्रेमी की आवाज़ सुन हे ली जल भून गयी होगी षुरूश्ती तुम तो"

देवरानी को मुस्कुराता देख बलदेव कमरे क दरवाज़े पर आकर धीमे आवाज़ में

"माँ ो माँ"

देवरानी बलदेव की ओरे देखती है

"क्या हुआ माँ इधर आओ"

देवरानी फुसफुसाते हुए

"उधर हे रहो बलदेव आई में"

देवरानी दरवाज़ा लगा लेती है

"माँ मुस्कुरा क्यू रही हो"

"बीटा बात हे कुछ ऐसी है"

"कैसी बात माँ"

"यहाँ पर कड़ी हो कर सब सुन रही थी षुरूश्ती"

बलदेव थोड़ा घबरा जाता है

"क्या माँ"

"हाँ बीटा वो कामिनी जीवन भर मेरे पीछे पड़ी रही"

"पर माँ इसमें मुस्कुराने की क्या बात है"

"बीटा में मुस्कुरा इसलिए रही हु क आज षुरूश्ती क शरीर पर सांप लौट रहे होंगे मेरी ख़ुशी देख क"

"ाचा माँ "

और बलदेव भी मुस्कुरा देता

"बीटा अब तुम जाओ सुबह हमे बद्री और श्याम का भी स्वागत करना है"

"पर माँ मेरा मन नहीं जाने का तुम्हे छोर कर"

"पगले मुझे छोर क तू जा भी नहीं सकता कभी तू मेरे डिल में रहता है"

"माँ .."

बलदेव देवरानी क गले लग जाता है

"ठीक है माँ में जाता हु अपना ख्याल रखना"

बलदेव अपने माँ से विदा ले कर ऊपर अपने कक्षा में चला जाता है और इधर षुरूश्ती आकर अपने बिस्तर पर लेती सोच रही थी उसके कानो में अभी भी देवरानी की सिसकी आरही थी

कुछ देर से षुरूश्ती फिर से सोने की कोशिश कर रही थी पर सो नहीं परही थी

shurushti:man में) देवरानी कैसे मज़ा मार रही थी अपने बेटे क साथ एक मई हे हु जो इस आग में जल रही हु

षुरूश्ती अपना एक हाथ अपने छूट पर ले जाती है "ाः "

षुरूश्ती फिर उठ टी है

अपना कक्षा से बहार निकल कर बहार जाने लगती है

कुछ देर चल क अब षुरूश्ती महाराज राजपाल क कक्षा क सामने थी

"क्या करू क्या अभी राजपाल को जगाना उचित होगा"

षुरूश्ती एक धक्का दरवाज़े पे देती है तो वो खुला हे था षुरूश्ती अब सीधे अंदड़ आजाती है तो राजपाल की खर्राटे की आवाज़ आरही थी और राजपाल बेसुध सोया था

Shurushti:man में) कोई काम क नहीं हो राजपाल अब तुम इस बुढ़ापे में तुम खर्राटे मार रहे हो और तुम्हारी जवान पत्नी की कोई और मर रहा है वैसे वो दोनों का ये अंतिम रात हे होगा

और षुरूश्ती मुस्कुराती है

अब षुरूश्ती अपने बदन क आग से जल रही राजपाल क बगल में बैठ जाती है और राजपाल क सर को सहलाने लगती है और एक हाथ से उसका हाथ पकड़ कर अपने गॉड में रख सहलाने लगती है

राजपाल जैसे नींद से जागते हुए

"कौन है"

और अपने पास राखी तलवार क तरफ हाथ बढ़ा हे रहा था क

"महाराज में हु आपकी पत्नी षुरूश्ती"

"आर्य महारानी अआप"

"जी महाराज "

"आपने तो हमे तो डरा हे दिया था महारानी"

षुरूश्ती मन में: इतनी चौकसी अगर तुम देवरानी क लये करते जितना तुम अपने और अपने महल क लये करते हो तो देवरानी आज मज़े नहीं मार रही होती बलदेव क साथ

"महारानी कहिये आधी रात में ऐसा क्या हो गया जो आपको हमे जगाना पड़ा"

"महाराज आपने दिन में कहा था कुछ"

राजपाल को यद् अत है क दिन में वो वडा क्या था आने का षुरूश्ती क पास

"हाँ क्षमा कर दो महरानी मेरी आँख लग गई थी"

"हाँ में आपकी प्रतिसखा करती रही कही आपको कोई दूसरी तो नहीं मिल गयी महाराज"

"आर्य नहीं मेरी रानी आपके सिवा हम किसी को देखते भी नहीं"

षुरूश्ती मन me:Jhutte राजा रतन क साथ उसके राज्य में तुम क्या क्या कर क आते हो ये किसी से छुपा nahi,tum दोनों का मन वैश्यों से भरता नहीं

षुरूश्ती जो बलदेव और देवरानी क कामुक आवाज़ सुन कर गरम हो गयी थी

राजपाल को सहलाने लगती है

"महाराज मुझे प्यार कीजिए"

"आओ मेरी रानी"

षुरूश्ती राजपाल क ऊपर छ जाती है और राजपाल को सहलाने लगती है

राजपाल भी अपने बाहो में षुरूश्ती को भरने लगता है

राजपाल की छाती को चुम कर षुरूश्ती ऊपर को होती है और राजपाल क होठो से अपने होठ मिला कर ज़ोर से चूमने लगती है

राजपाल अपना हाथ पीछे से कमर पर रख कर सहलाता है षुरूश्ती अपना माध्यम आकर क वक्ष को खूब मसलने लगती है राजपाल क छाती पर

अब षुरूश्ती राजपाल को चूमते हुए राजपाल क दोनों जांघो को सहलाने लगती है और राजपाल क धोती को अपने दोनों हाथो से खोल देती है

राजपाल का मुरझाया लौड़ा देख षुरूश्ती क चेहरे की लाली खो जाती है दो इंच का लैंड मुरझाया हुआ था मरती क्या न करती षुरूश्ती उसके लैंड को सहलाते हुए मोठ्याने लगती है

राजपाल अपने आँख बंद कर क सिसकी ले रहा था

"महाराज आपने कहा था आप कोई औषधि लेंगे अपने लये"

"हाँ औषधि लिया तो था पर वो ख़त्म हो गयी है उसका असर तब तक हे है जब तक हम उसका प्रयोग कर रहे है"

षुरूश्ती अब एक हाथ से राजपाल का लैंड खड़ा कर रही थी दूसरे से उसके छोटे छोटे सूखे हुए ाँद को सेहला रही थी

Rajpal:kya हुआ रानी आज बहुत गरम है ऐसा क्या हुआ जो आज बुढ़ापे में रानी को आधी रात मेरे पास आना पड़ा

Shurushti:chup करो महाराज मेरी आयु अभी 50 की भी नहीं हुई पूरी और तुम बूढ़े हों गए मेरी जवानी अब भी बाकि है अंतिम चरण में है

Rajpal:wo तो ठीक कह रही हो अब में लगभग 60 का हुआ

षुरूश्ती मन me:kaun कहा था अपने से आधी आयु की कन्या से विवाह कर लो आअज देवरानी अपने बेटे क साथ गुलछर्रे उदा रही है

कही न कही षुरूश्ती को बहुत जलन हुई थी देवरानी और बलदेव से इसलिए उसके दिमाग में ये बात आरही थी

षुरूश्ती अब देखती है लौड़ा हल्का सा उठा रहा है राजपाल का षुरूश्ती झट से अपना मुँह खोल उसको चूसने लगती है

"आह षुरूश्ती"

बड़े तेज़ी से चोपे लगते हुए षुरूश्ती अपने ब्लाउज खोल देती है और उसके दूध जो न बड़े थे न छोटे लटकने लगते है

"इसे मसलो महाराज"

राजपाल का हाथ ले कर अपने दूध पर रख देती है

राजपाल उसके दूध को मसलने लगता है

"आह मेरी महरानी षुरूश्ती"

षुरूश्ती देखती है क लौड़े अब अपना सर उठा लय था और अब लगभग 4 इंच का हो गया था

"महाराज जल्दी दाल दो महाराज"

राजपाल षुरूश्ती क गांड को सहलाते हुए लिटा देता है और उसके घागरा को खोल कर उसके दोनों पैरो को उठा देता है

और अपना लौड़ा षुरूश्ती क बुर में एक बार में हे पेल देता है

"ाः महाराज ज़ोर से पेलते रहिये"

राजपाल आगे बढ़ कर षुरूश्ती क दोनों वक्षो को मसलने लगता है और ज़ोर ज़ोर से षुरूश्ती को छोड़ने लगता है

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षुरूश्ती आखे बंद कए हुए सिसक रही होती है

राजपाल झटके मार मार क पसीने तरबतर होगया था और वो अब धीरे धीरे हिलने लगता है

"महाराज ज़ोर से पेलो न अपनी रानी को"

अभी 3 या 4 मिंट की चुदाई हे हुई थी क राजपाल हांफने लगता है षुरूश्ती समझ जाती है क महाराज से अब और न हो पायेगा क्यू क उन्होंने औषधि या जड़ी बूटी भी नहीं लय है

"षुरूश्ती मेरा अब निकलने वाला है"

"महाराज नहीं अभी नहीं महाराज थोड़ी देर और"

"आह षुरूश्ती"

राजपाल दो धक्के मरता है और अपने ाअखे बंद कर लेता है"

"महाराज अपने आप पर काबू कीजिये मत छोड़िये पानी अभी"

राजपाल एक और धक्का मरता है

"aaaaaaaaaaaah षुरूश्ती"

आखे बंद कए हुए कांपते हुए झड़ने लगता है

षुरूश्ती उदास हो कर राजपाल को हे देख रही थी

राजपाल जब पूरा झाड़ जाता है तो षुरूश्ती क ऊपर से हैट कर उसके बगल में लेट जाता है और ज़ोर ज़ोर से सांसे लेने लगता है अपना आँख बंद कए हुए

षुरूश्ती क आखो में ासु आजाते है पर वो अपना ासु छुपाये लेती रहती है

थोड़ी देर बाद राजपाल अपने साँसों पैर काबू पता है तो षुरूश्ती का बुझा मन को देखता है और बेबसी से उसकी नज़र नीचे झुक जाती है

"महाराज आपका तो हो गया पर मेरा "

"मुझे क्षमा कर महरानी में आपका साथ नहीं दे पाया और समय से पहले स्खलित हो गया "

राजपाल अपना धोती उठा कर स्नानघर में घुस जाता है और अपने वस्त्र बदल कर वापस बिस्तर पर आता है

षुरूश्ती अब भी वही पर लेती थी

"षुरूश्ती क्या हुआ कपडे पहन लो अपने"

"महाराज में जाती हु अपने कक्षा में"

राजपाल समझ जाता है क षुरूश्ती दुखी है

"ठीक है जैसी आपकी इच्छा महारानी"

षुरूश्ती अपने ब्लाउज और घागरा पहन कर अपने कक्षा में आ जाती है"

अपने कक्षा में आकर फिर से अपने वस्त्र उतर कर फेक देती है और अपने गरम शरीर को अपने हाथो से सहलाने लगती है और अपनी योनि में ऊँगली कर मारे उत्तेजना से सिसकने लगती है

कुछ देर यु हे अपने अंग से खेल कर अपने योनि का पानी निकल लेती है अपने आपको शांत कर वो भी नींद क आग़ोश में चली जाती है

सुबह होती है आज बलदेव क मित्र जान श्याम मेवाड़ राज्य से और बद्री उज्जैन से आने वाला था जो बलदेव और देवरानी क साथ उनकी सुरक्षा हेतु पारस साथ जायेंगे

सुबह उठ कर बलदेव अपने व्यायाम करने क लये बहार जा रहा था तो सोचता है क्यू न अपने माँ से मिलता हुआ चला जाये और वो अपने माँ क कक्षा क पास आता है तो खुले हुए खिड़की से अंदर देखता है उसकी माँ योग आसान में बैठी थी वो मुस्कुराता हुआ बहार चला जाता है

षुरूश्ती उठ टी है उसका बदन बहुत ज़ोरो से दर्द कर रहा था वो नाहा धो कर बहार आती है

"कमला ो कमला आई की नहीं अब तक"

कमला और राधा सुबह सुबह अपने काम में रसोई में लगी हुई थी

kamla:han महरानी षुरूश्ती बोलिये

Shurushti:Kuch जल्दी बनाओ भूक लगी गयी

Radha:kya हुआ महरानी क्या राज़ है इस थकन का

kamla:me कुछ बनती हु

राजपाल सवेरे उठ कर अपने महल क चारो ओरे रोज़ की तरह टहलने लगता है

तभी सामने से दो घोड़ो पे सवार दो लोग आते हुए दीखते है राजपाल को

राजपाल गौर से देखने क बाद समझ पता है क ये तो बलदेव क मित्र है

श्याम और बद्री

शयाम और बद्री राजपाल क पास आकर घोड़े को रोक घोड़े से उतर जाते है

शयाम और बद्री एक स्वर में: प्रणाम महाराज

दोनों अपना हाथ जोड़े खड़े थे

rajpal:pranam स्वागत है तुम्हारा राजकुमारों

श्याम और बद्री अपने स्वागत कए जाने से खुश हो कर महाराज क पेअर छू लेते है

Rajpal:aha ये क्या कर रहे हो

श्याम और बद्री :आप हमारे पिता सामान है महाराज

राजपाल एक मुस्कराहट क साथ

ताली बजता है

भागता हुआ एक सैनिक उसके पास आता है

"महाराज"

"सुनो इन्हे ले कर जाओ ये हमारे मेहमान है इन्हे किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होनी चाहिए"

sainik:jo आज्ञा महाराज

राजपाल: और सुनो सेनापति सोमनाथ को भेजना
 
थैंक यू भाई स्टोरी पसंद करने क लये

आप असल मायने में समझते है क कहानी क हर सन में हीरो और हीरोइन रहेंगे और उनके बीच में हर अपडेट में सेक्स हो तो कहानी ..कहानी नहीं पोर्न राइटिंग होगी .

.स्टोरी तो अलग अलग किरदारों और इमोशंस वक़्त हालत से बनते है जिस से हम एमोशनालय जुड़ते है और फिर सेक्स हो तो मज़ा आता है

ी लव पोर्न विथ थे स्टोरी लाइन जैसे सॉफ्टके मल्लू मूवीज एंड इन्सेस्ट विंटेज मूवीज जहा पर हम कनेक्ट होते है स्टोरी में और फिर इन्सेस्ट देखने को मिलता hi

आज कल क इन्सेस्ट पोर्न जैसे नहीं जो किसी को भी कुछ भी बना देते है और ओवरएक्टिंग करता हुए दस मिंट में चुदाई करवा देते है और वही पोर्न से ज़्यादातर लोग ुसेड तो है फटाफट वाला

वैसे ये मेरा थॉट है ज़रूरी नहीं सब वही पसंद करे जो मई करता हु

थैंक्स
 
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