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रात क 2 बज रहे रहे देवरानी और बलदेव अपने गले में गले डाले आहे भर रहे थे पर कोई और था जो उठ गया था
वो था राजपाल जिसे अपने राज्य पर हमले का देर सताये रहता था आज भी वो जग रहा था तभी उसे बहार किसी क दबे पॉ चलने की आवाज़ आती है
Rajpal;man में) ये इतनी रात को बहार दबे पॉ कौन है अगर कोई घर का होता तो उसे ु चोरो की चल चलने की क्या ज़रूरत थी
राजपाल मन में शंका लता है पर तभी वो आवाज़ बंद हो जाती है
इधर बलदेव क बाहो में देवरानी लहरा रही थी
Baldev:kaisa लगा मेरी रानी को पानी
Devrani;chall हट
देवरानी अपने होठ पर हलके बलदेव क लैंड क पानी को चाट ते हुए और खुश होते हुए
Baldev:maa मेरी जान आओ मेरे रूह में समां जाओ
Devrani:mai भी तुम्हारे जिस्म में नहीं तुम्हारे रूह तक अपना नाम लिख देना चाहती हु मेरे प्रेमी पर
Baldev
ar क्या माँ
Devrani:thoda धैर्य रखो फल मीठा मिलेगा
Baldev:kitna सब्र तो क्या हुआ
Devrani:thoda और कर lo,or अब जाओ अपने कक्षा में आराम करो सुबह अपने काम पैर जाओ
Baldev
ar मुझे तुम्हे छोर क कही जाने का डिल नहीं करता
Devrani:tum दो दिन से दिन रत कक्षा में हे हो सीमा पर भी नहीं जा रहे सब का शक बढ़ता जा रहा है मेरे युवराज
बलदेव थोड़ा गुस्सा होते हुए
“तो बढ़ने दो मेरी जान में इनसब से डरता नहीं”
Devrani:baat को समझो सही समय पर सबकुछ मिलता है पर उसकी प्रतीक्षा मनुष्य को करनी चाहिए
Baldev:aap क जितना धैर्य माँ मैंने नहीं देखा कही पीछे 18 वर्षो से तो आप हर सुख से वंचित रखा अपने आपको और अब भी धैर्य
Devrani:usi धैर्य का हे परिणाम है क मुझे इतना सुन्दर और बलिष्ट प्रेमी मिला है तुम्हारे रूप में
ये सुन कर बलदेव शर्मा जाता है
Baldev;maa दिन बा दिन तुमसे मेरा प्रेम बढ़ता हे जा रहा है
Devrani:bass करो
और बलदेव क माथे पे चुम लेती हु
“जाओ बलदेव अपने कक्षा में”
“तुम्हारे चेहरे से नज़र नहीं हैट टी माँ”
“जाओ तुम्हारे कक्षा में मेरे चित्र को देखते रहना पर यहाँ पर ज़्यादा समय रहना खतरे से खली नहीं “
Devrani;man में) मुआफ कर दो मेरे पिया तड़पा रही हु तुमको
बलदेव जाने लगता है तभी देवरानी उसे रोक कर
“ो मोरे बलमा इतने रात में कक्षा से जाओगे किसी ने देख लय तो क्या समझेगा”
“यही समझेगा देवरानी क एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को प्यार कर क आरहा है”
“पर तुम्हारी दादी जिसे शक हो गया है वो तो समझेगी क ...”
“आर्य माँ यही समझेगी क न में तुम्हारे साथ सो कर आरहा हु”
देवरानी ये सुन कर लज्जा जाती है और अपना सर झुका लेती और अपने पैरो की ऊँगली से जमीन खुरदने लगती है
“बीटा अगर लोग ये समझेंगे क आधी रात बलदेव अपने माँ क साथ सो कर आ रहा है तो सब हमारे दुश्मन हो जायेंगे”
“सरे दुश्मनो को में काट दूंगा पर मई अपनी माँ को अपने साथ ले कर सोना बंद नहीं करूँगा” और मुस्कुराता है
“बड़ा आया ये लो चादर ओढ़ लो ठण्ड भी है और कोई देख क पहचान नहीं पायेगा”
बलदेव उसके हाथ से चादर ले लेता है और ओढ़ लेता है और अपने मुँह को हल्का खोला था
“वैसे माँ तुम्हारे साथ सोने से ठण्ड ज़रा नहीं लग रही थी”
देवरानी बलदेव को हस्ते हुए पाकर कर दरवाज़ा क पार धकेलती है बलदेव बहार निकल जाता है और देवरानी दरवाज़ा बंद करती है
बलदेव दबे पाव सीडीओ क तरफ जाने लगता है
इधर जगा हुआ राजपाल को फिर से वही चोर कदमो की आवाज़ सुनता है और वो उत्सुक्त हो कर अपने बगल में तलवार लगाए बहार निकलता है
जैसे हे बहार आता है उसे हल्का अँधेरे में कोई चादर ओढ़े देवरानी क कक्षा से कोई सीडीओ क तरफ जाते दिखाई देता है
Rajpal;kaun है वह “?
और अपना तलवार खच से निकल कर
Rajpal;ruk जाओ वही
बलदेव ऐसी अवस्था में पकडे जाने से रुक जाता है और राजपाल अपने तलवार लिए बलदेव क करीब आने लगता है
और बलदेव क पीठ क तरफ से आता राजपाल तलवार बलदेव क पीठ पर ले जा रहा था
“कौन हो बहरूपिये”?
बलदेव को राजपाल की चलने की आहात अब सुनाई नहीं देती वो बिना पीछे मुड़े हुए मौक़ा देख कर भागने लगता है
Rajpal:sainiko होशियार घुसपैठिए
ज़ोर से चिल्लाता है
महल में चारो ओरे से सैनिक जग कर अपने तलवारो को निकल कर इधर उधर देखने लगते है
बलदेव मरता क्या न करता झट से सीडीओ से चढ़ कर ऊपर अपने कक्षा क तरफ जाता है और राजपाल जो क उतनी फुर्ती से चढ़ नहीं पता उसका पीछा करते हुए
बलदेव ऊपर जा कर अपने कक्षा क बगल में छोटे कक्षा जिसमे कोई नहीं रहता था सिर्फ पुराने सामान रखे थे उसमे घुस जाता है
Rajpal:baldev उठू महल में घुसपैठ हुआ है उठो बलदेव ....सेनापति
बलदेव ये सुन कर मुस्कुराता है और कक्षा क खिड़की क पास जा कर अपना चादर छोर देता है और खुद खिड़की से अपने कक्षा क खिड़की में छलांग लगा देता है
राजपाल दौड़ता हुआ सामान वाले कक्षा में घुसता है और उसके पीछे से सेनापति और बहार से आये कुछ सैनिक घुसते है तो वो लोग देखते है खिड़की खुला है और वह पर एक चादर गिरी है
राजपाल चादर उठा कर
“सेनापति यहाँ से कूद गया वो नीचे सैनिको को ले कर जाओ वो गहतराष्ट्रा क सीमा को पर न कर सके”
Senapati:Ji महाराज कुछ दिनों पहले भी ऐसे हे एक घुसपैठ हुई थी महल में ज़रूर कोई हमारे खिलाफ षड़यंत्र कर रहा है
बलदेव अपने कक्षा में जा कर अपने नंगे जिस्म पर कुरता पहनता है और निकलता है बहार
“पिता जी कहा हो आप”
और बलदेव राजपाल और सैनिको की आवाज़ सुन कर उनके तरफ जाने लगता है
Senapati:maharaj हम चलते है और वो लोग भी उसी कक्षा क खिड़की से कूद जाते है
बलदेव उन सब को देखते रहता है
अपने बाप क पास पहुंच कर
“क्या हुआ पिता जी इतने रात गए इतना शोर महल में”
“बीटा तुम अब आ रहे हो घुष्पथ हुआ था “
“ऐसा क्या पिता जी में नींद में था क्षमा करे “
“वो भाग गया बलदेव और ये चादर छोड़ गया अगर तुम सही समय पर उठ जाते तो वो पकड़ा जाता “
“हाँ शायद पिता जी वो पकड़ा जाता पर घुसपैठिया शातिर होते है”
“चलो निचे चलो बलदेव”
निचे सब क सब जागे हुए थे जीविका षुरूश्ती और कमला भी
सीढ़ी से निचे उतारते हुए दोनों बाप बीटा को सब देख रहे थे
“बीटा बलदेव एक बात याद रखना एक राजा कभी रत में चैन से नहीं सोता और अपनी प्रजा की रखवाली करता है”
Jeevika;ary क्या हुआ राजपाल क्यू इतना शोर मचाया हुआ
राजपाल और बलदेव अपने परिवार क पास आते है
Rajpal;maa कोई घुसपैठिए था जासूसी करने आया था महल में
Jeevika:bhagwan भला करे तुम अकेले हे दौर जाते हो काम से काम सैनिको को तो साथ लेते
Rajpal:bass वो पकड़ा जाता अगर बलदेव सही समय पर उठ जाता
तभी वह पर देवरानी चल कर आती है और ये बात सुन कर मन में
“तू राजपाल मर्द क नाम पे कलंक है तेरी पत्नी क डिल में घुसपैठ कर लय बलदेव ने तुम्हारे पुत्र ने तो तुम पकड़ नहीं सके तुम क्या घुसपैठ पकड़ोगे”
सब देवरानी को देखते है जो चलते हुए आ रही थी
“क्या हुआ महाराज”
“क्या हुआ बलदेव”
Rajpal:abhi आ रही हो तुम देवरानी आओ
Devrani:ji महाराज
Rajpal;tum बड़ी भोली हो देवरानी ऐसा दृश्य होने का मतलब है महल में घुसपैठ हुआ है
Devrani:Oh ऐसा है महाराज
“लेकिन घुसपैठ हुआ आपके महल में तो आप ने पकड़ा क्यू नहीं कही कुछ चोरी तो नहीं कर लय”
देवरानी भोली बनती हुई कहती है
बलदेव देवरानी को देख मन me(“ye माँ बड़ी तेज़ है इतनी जल्दी वस्त्र बदल ली और सदी पहन ली और आ कर सटी सावित्री बन रही है”)
Rajpal;tum सही में भोली हो ऐसे घुसपैठ जासूसी करने आते है किसी भी महल का ये चोरी नहीं करते
Devrani;man me)rajpal में भोली हुआ करती थी पर अब नहीं hu..or बलदेव ने घुसपैठ कर क तो डिल चुरा लय है मेरा पर तुम्हे उस से क्या
Devrani;acha महाराज मुझे नहीं पता था
Shurushti:ise कहा समझे रहे हो महाराज ये सब समझने क लये दिमाग होना चाहिए
Rajpal
r ये चादर छोर क भाग गया घुसपैठ
सब की नज़र उस चादर पैर जाती है
Jeevika:man में) ये चादर तो जनि पहचानी लग रही hai,kya जो में सोच रही हु वो सही तो नहीं कही बलदेव..
जीविका का तेज़ दिमाग भांप लेता है
Shurushti:ye चादर तो मैंने कही तो पहले भी देखा है महाराज को बताउंगी
Rajpal:jao अब सब अपने अपने कक्षा में जा कर आराम करो अभी इतनी रत में कोई बहस नहीं चाहता हु और हाँ कमला तुम आज गयी नहीं थी अपने घर
Kamla:wo महाराज में जा रही थी पर
Devrani:wo मई हे रोक ली थी मेरे कमर में दर्द था इसलिए
Devrani:man में) ये कमला का रोक क क्या फायदा कामिनी सो गयी थी जिसके वजह से ये सब हुआ अगर पहले सचेत कर देती तो
Jeevika;man me)lagta है कमर तोड़ क पेलवा रही है रंडी जो कमर की मालिश करवानी रहती है
सब लोग अपने अपने कक्षा में जाने लगते है
Devrani:Saasu माँ चलिए छोर देती हु आपको
Jeevika:mai वैशाखी क सहारे चली जाउंगी
Rajpal:maa अगर वो मदद करना चाहती है आपकी तो चली जाओ न
Jeevika:me इतनी भी बेबस नहीं हुई हु
और देवरानी क ओरे देख क एक गुस्से से झलक देती है
थोड़े देर में सब एक एक कर के वापस सोने चले जाते है
राजपाल सोचते हुए अपने कक्षा में जा रहा था
“ये देवरानी क कक्षा क पास से हे ये घुसपैठि भागना शुरू क्या था”
वो कुछ सोच कर देवरानी क कक्षा की ओरे जाता है
देवरानी क दरवाज़ा थक थकता है
“आर्य महाराज आप”
देवरानी मन me;hey भगवन ये इतनी रत में कही इसका कुछ गलत इरादा तो नहीं कही इसका पति प्रेम तो नहीं जग गया”
“क्या हुआ महाराज कुछ काम था”
“देवरानी क्या दरवाज़े पैर हे राहु अंदर तो आने दो”
“हां आईये न महाराज”
राजपाल आकर कक्षा क चारो ओरे देखता है
Rajpal:devrani क्या तुमने घुशपैठ क आने की या चलने की आवाज़ सुनी थी
Devrani:nahi महाराज नींद में थी
राजपाल मन me:kahi देवरानी का किसी से चक्कर तो नहीं या एहि किसी क सहारे हम पर आक्रमण तो नहीं करवाने का षड़यंत्र कर रही है
देवरानी मन me;yahi तुम्हारा पति धर्म है अपने पत्नी पर शक करना क वो दुश्मनी कर रही है और तुम्हारा जान लेना चाहती है सब षुरूश्ती ने तुम्हारे दिमाग में भर दया है
Rajpal:theek है में जाता हु
राजपाल क जाते हे देवरानी फाटक से दरवाज़ा लगा क लम्बी लम्बी सांस लेने लगती है
“हे भगवन बचा लय तूने नहीं तो अगर राजपाल मेरे साथ कुछ ऊंच नीच करते तो मई उन्हें रोक नहीं पति क्यू क वो अब भी मेरे पति है समाज क सामने और फिर में बलदेव को क्या मुँह दिखती “
“नहीं में राजपाल को छूने भी नहीं देख सकती अपने शरीर को इस्पे सिर्फ बलदेव का हक़ है”
फिर देवरानी मुस्कुराती है
“भगवन क्या हो रहा है मुझे जब बलदेव आया और मेरे साथ रंगरलिया मन कर गया तो मुझे संकोच नहीं हुआ पर राजपाल क आते हे में डरने लगी जैसे कोई गैर पुरुष आगया हो”
“सच में मुझे बलदेव से प्रेम हो गया है”
और जा कर उल्टा लेट कर कामसूत्र पुष्तक उठा कर पढ़ने लगती है
Devrani:uhh बलदेव एक दिन मुझे भी इस चित्र की तरह अपने गॉड में उठाये खड़े खड़े पेलना इस निगोड़ी बुर ने बहुत तड़पाया है...
रात क 2 बज रहे रहे देवरानी और बलदेव अपने गले में गले डाले आहे भर रहे थे पर कोई और था जो उठ गया था
वो था राजपाल जिसे अपने राज्य पर हमले का देर सताये रहता था आज भी वो जग रहा था तभी उसे बहार किसी क दबे पॉ चलने की आवाज़ आती है
Rajpal;man में) ये इतनी रात को बहार दबे पॉ कौन है अगर कोई घर का होता तो उसे ु चोरो की चल चलने की क्या ज़रूरत थी
राजपाल मन में शंका लता है पर तभी वो आवाज़ बंद हो जाती है
इधर बलदेव क बाहो में देवरानी लहरा रही थी
Baldev:kaisa लगा मेरी रानी को पानी
Devrani;chall हट
देवरानी अपने होठ पर हलके बलदेव क लैंड क पानी को चाट ते हुए और खुश होते हुए
Baldev:maa मेरी जान आओ मेरे रूह में समां जाओ
Devrani:mai भी तुम्हारे जिस्म में नहीं तुम्हारे रूह तक अपना नाम लिख देना चाहती हु मेरे प्रेमी पर
Baldev
Devrani:thoda धैर्य रखो फल मीठा मिलेगा
Baldev:kitna सब्र तो क्या हुआ
Devrani:thoda और कर lo,or अब जाओ अपने कक्षा में आराम करो सुबह अपने काम पैर जाओ
Baldev
Devrani:tum दो दिन से दिन रत कक्षा में हे हो सीमा पर भी नहीं जा रहे सब का शक बढ़ता जा रहा है मेरे युवराज
बलदेव थोड़ा गुस्सा होते हुए
“तो बढ़ने दो मेरी जान में इनसब से डरता नहीं”
Devrani:baat को समझो सही समय पर सबकुछ मिलता है पर उसकी प्रतीक्षा मनुष्य को करनी चाहिए
Baldev:aap क जितना धैर्य माँ मैंने नहीं देखा कही पीछे 18 वर्षो से तो आप हर सुख से वंचित रखा अपने आपको और अब भी धैर्य
Devrani:usi धैर्य का हे परिणाम है क मुझे इतना सुन्दर और बलिष्ट प्रेमी मिला है तुम्हारे रूप में
ये सुन कर बलदेव शर्मा जाता है
Baldev;maa दिन बा दिन तुमसे मेरा प्रेम बढ़ता हे जा रहा है
Devrani:bass करो
और बलदेव क माथे पे चुम लेती हु
“जाओ बलदेव अपने कक्षा में”
“तुम्हारे चेहरे से नज़र नहीं हैट टी माँ”
“जाओ तुम्हारे कक्षा में मेरे चित्र को देखते रहना पर यहाँ पर ज़्यादा समय रहना खतरे से खली नहीं “
Devrani;man में) मुआफ कर दो मेरे पिया तड़पा रही हु तुमको
बलदेव जाने लगता है तभी देवरानी उसे रोक कर
“ो मोरे बलमा इतने रात में कक्षा से जाओगे किसी ने देख लय तो क्या समझेगा”
“यही समझेगा देवरानी क एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को प्यार कर क आरहा है”
“पर तुम्हारी दादी जिसे शक हो गया है वो तो समझेगी क ...”
“आर्य माँ यही समझेगी क न में तुम्हारे साथ सो कर आरहा हु”
देवरानी ये सुन कर लज्जा जाती है और अपना सर झुका लेती और अपने पैरो की ऊँगली से जमीन खुरदने लगती है
“बीटा अगर लोग ये समझेंगे क आधी रात बलदेव अपने माँ क साथ सो कर आ रहा है तो सब हमारे दुश्मन हो जायेंगे”
“सरे दुश्मनो को में काट दूंगा पर मई अपनी माँ को अपने साथ ले कर सोना बंद नहीं करूँगा” और मुस्कुराता है
“बड़ा आया ये लो चादर ओढ़ लो ठण्ड भी है और कोई देख क पहचान नहीं पायेगा”
बलदेव उसके हाथ से चादर ले लेता है और ओढ़ लेता है और अपने मुँह को हल्का खोला था
“वैसे माँ तुम्हारे साथ सोने से ठण्ड ज़रा नहीं लग रही थी”
देवरानी बलदेव को हस्ते हुए पाकर कर दरवाज़ा क पार धकेलती है बलदेव बहार निकल जाता है और देवरानी दरवाज़ा बंद करती है
बलदेव दबे पाव सीडीओ क तरफ जाने लगता है
इधर जगा हुआ राजपाल को फिर से वही चोर कदमो की आवाज़ सुनता है और वो उत्सुक्त हो कर अपने बगल में तलवार लगाए बहार निकलता है
जैसे हे बहार आता है उसे हल्का अँधेरे में कोई चादर ओढ़े देवरानी क कक्षा से कोई सीडीओ क तरफ जाते दिखाई देता है
Rajpal;kaun है वह “?
और अपना तलवार खच से निकल कर
Rajpal;ruk जाओ वही
बलदेव ऐसी अवस्था में पकडे जाने से रुक जाता है और राजपाल अपने तलवार लिए बलदेव क करीब आने लगता है
और बलदेव क पीठ क तरफ से आता राजपाल तलवार बलदेव क पीठ पर ले जा रहा था
“कौन हो बहरूपिये”?
बलदेव को राजपाल की चलने की आहात अब सुनाई नहीं देती वो बिना पीछे मुड़े हुए मौक़ा देख कर भागने लगता है
Rajpal:sainiko होशियार घुसपैठिए
ज़ोर से चिल्लाता है
महल में चारो ओरे से सैनिक जग कर अपने तलवारो को निकल कर इधर उधर देखने लगते है
बलदेव मरता क्या न करता झट से सीडीओ से चढ़ कर ऊपर अपने कक्षा क तरफ जाता है और राजपाल जो क उतनी फुर्ती से चढ़ नहीं पता उसका पीछा करते हुए
बलदेव ऊपर जा कर अपने कक्षा क बगल में छोटे कक्षा जिसमे कोई नहीं रहता था सिर्फ पुराने सामान रखे थे उसमे घुस जाता है
Rajpal:baldev उठू महल में घुसपैठ हुआ है उठो बलदेव ....सेनापति
बलदेव ये सुन कर मुस्कुराता है और कक्षा क खिड़की क पास जा कर अपना चादर छोर देता है और खुद खिड़की से अपने कक्षा क खिड़की में छलांग लगा देता है
राजपाल दौड़ता हुआ सामान वाले कक्षा में घुसता है और उसके पीछे से सेनापति और बहार से आये कुछ सैनिक घुसते है तो वो लोग देखते है खिड़की खुला है और वह पर एक चादर गिरी है
राजपाल चादर उठा कर
“सेनापति यहाँ से कूद गया वो नीचे सैनिको को ले कर जाओ वो गहतराष्ट्रा क सीमा को पर न कर सके”
Senapati:Ji महाराज कुछ दिनों पहले भी ऐसे हे एक घुसपैठ हुई थी महल में ज़रूर कोई हमारे खिलाफ षड़यंत्र कर रहा है
बलदेव अपने कक्षा में जा कर अपने नंगे जिस्म पर कुरता पहनता है और निकलता है बहार
“पिता जी कहा हो आप”
और बलदेव राजपाल और सैनिको की आवाज़ सुन कर उनके तरफ जाने लगता है
Senapati:maharaj हम चलते है और वो लोग भी उसी कक्षा क खिड़की से कूद जाते है
बलदेव उन सब को देखते रहता है
अपने बाप क पास पहुंच कर
“क्या हुआ पिता जी इतने रात गए इतना शोर महल में”
“बीटा तुम अब आ रहे हो घुष्पथ हुआ था “
“ऐसा क्या पिता जी में नींद में था क्षमा करे “
“वो भाग गया बलदेव और ये चादर छोड़ गया अगर तुम सही समय पर उठ जाते तो वो पकड़ा जाता “
“हाँ शायद पिता जी वो पकड़ा जाता पर घुसपैठिया शातिर होते है”
“चलो निचे चलो बलदेव”
निचे सब क सब जागे हुए थे जीविका षुरूश्ती और कमला भी
सीढ़ी से निचे उतारते हुए दोनों बाप बीटा को सब देख रहे थे
“बीटा बलदेव एक बात याद रखना एक राजा कभी रत में चैन से नहीं सोता और अपनी प्रजा की रखवाली करता है”
Jeevika;ary क्या हुआ राजपाल क्यू इतना शोर मचाया हुआ
राजपाल और बलदेव अपने परिवार क पास आते है
Rajpal;maa कोई घुसपैठिए था जासूसी करने आया था महल में
Jeevika:bhagwan भला करे तुम अकेले हे दौर जाते हो काम से काम सैनिको को तो साथ लेते
Rajpal:bass वो पकड़ा जाता अगर बलदेव सही समय पर उठ जाता
तभी वह पर देवरानी चल कर आती है और ये बात सुन कर मन में
“तू राजपाल मर्द क नाम पे कलंक है तेरी पत्नी क डिल में घुसपैठ कर लय बलदेव ने तुम्हारे पुत्र ने तो तुम पकड़ नहीं सके तुम क्या घुसपैठ पकड़ोगे”
सब देवरानी को देखते है जो चलते हुए आ रही थी
“क्या हुआ महाराज”
“क्या हुआ बलदेव”
Rajpal:abhi आ रही हो तुम देवरानी आओ
Devrani:ji महाराज
Rajpal;tum बड़ी भोली हो देवरानी ऐसा दृश्य होने का मतलब है महल में घुसपैठ हुआ है
Devrani:Oh ऐसा है महाराज
“लेकिन घुसपैठ हुआ आपके महल में तो आप ने पकड़ा क्यू नहीं कही कुछ चोरी तो नहीं कर लय”
देवरानी भोली बनती हुई कहती है
बलदेव देवरानी को देख मन me(“ye माँ बड़ी तेज़ है इतनी जल्दी वस्त्र बदल ली और सदी पहन ली और आ कर सटी सावित्री बन रही है”)
Rajpal;tum सही में भोली हो ऐसे घुसपैठ जासूसी करने आते है किसी भी महल का ये चोरी नहीं करते
Devrani;man me)rajpal में भोली हुआ करती थी पर अब नहीं hu..or बलदेव ने घुसपैठ कर क तो डिल चुरा लय है मेरा पर तुम्हे उस से क्या
Devrani;acha महाराज मुझे नहीं पता था
Shurushti:ise कहा समझे रहे हो महाराज ये सब समझने क लये दिमाग होना चाहिए
Rajpal
सब की नज़र उस चादर पैर जाती है
Jeevika:man में) ये चादर तो जनि पहचानी लग रही hai,kya जो में सोच रही हु वो सही तो नहीं कही बलदेव..
जीविका का तेज़ दिमाग भांप लेता है
Shurushti:ye चादर तो मैंने कही तो पहले भी देखा है महाराज को बताउंगी
Rajpal:jao अब सब अपने अपने कक्षा में जा कर आराम करो अभी इतनी रत में कोई बहस नहीं चाहता हु और हाँ कमला तुम आज गयी नहीं थी अपने घर
Kamla:wo महाराज में जा रही थी पर
Devrani:wo मई हे रोक ली थी मेरे कमर में दर्द था इसलिए
Devrani:man में) ये कमला का रोक क क्या फायदा कामिनी सो गयी थी जिसके वजह से ये सब हुआ अगर पहले सचेत कर देती तो
Jeevika;man me)lagta है कमर तोड़ क पेलवा रही है रंडी जो कमर की मालिश करवानी रहती है
सब लोग अपने अपने कक्षा में जाने लगते है
Devrani:Saasu माँ चलिए छोर देती हु आपको
Jeevika:mai वैशाखी क सहारे चली जाउंगी
Rajpal:maa अगर वो मदद करना चाहती है आपकी तो चली जाओ न
Jeevika:me इतनी भी बेबस नहीं हुई हु
और देवरानी क ओरे देख क एक गुस्से से झलक देती है
थोड़े देर में सब एक एक कर के वापस सोने चले जाते है
राजपाल सोचते हुए अपने कक्षा में जा रहा था
“ये देवरानी क कक्षा क पास से हे ये घुसपैठि भागना शुरू क्या था”
वो कुछ सोच कर देवरानी क कक्षा की ओरे जाता है
देवरानी क दरवाज़ा थक थकता है
“आर्य महाराज आप”
देवरानी मन me;hey भगवन ये इतनी रत में कही इसका कुछ गलत इरादा तो नहीं कही इसका पति प्रेम तो नहीं जग गया”
“क्या हुआ महाराज कुछ काम था”
“देवरानी क्या दरवाज़े पैर हे राहु अंदर तो आने दो”
“हां आईये न महाराज”
राजपाल आकर कक्षा क चारो ओरे देखता है
Rajpal:devrani क्या तुमने घुशपैठ क आने की या चलने की आवाज़ सुनी थी
Devrani:nahi महाराज नींद में थी
राजपाल मन me:kahi देवरानी का किसी से चक्कर तो नहीं या एहि किसी क सहारे हम पर आक्रमण तो नहीं करवाने का षड़यंत्र कर रही है
देवरानी मन me;yahi तुम्हारा पति धर्म है अपने पत्नी पर शक करना क वो दुश्मनी कर रही है और तुम्हारा जान लेना चाहती है सब षुरूश्ती ने तुम्हारे दिमाग में भर दया है
Rajpal:theek है में जाता हु
राजपाल क जाते हे देवरानी फाटक से दरवाज़ा लगा क लम्बी लम्बी सांस लेने लगती है
“हे भगवन बचा लय तूने नहीं तो अगर राजपाल मेरे साथ कुछ ऊंच नीच करते तो मई उन्हें रोक नहीं पति क्यू क वो अब भी मेरे पति है समाज क सामने और फिर में बलदेव को क्या मुँह दिखती “
“नहीं में राजपाल को छूने भी नहीं देख सकती अपने शरीर को इस्पे सिर्फ बलदेव का हक़ है”
फिर देवरानी मुस्कुराती है
“भगवन क्या हो रहा है मुझे जब बलदेव आया और मेरे साथ रंगरलिया मन कर गया तो मुझे संकोच नहीं हुआ पर राजपाल क आते हे में डरने लगी जैसे कोई गैर पुरुष आगया हो”
“सच में मुझे बलदेव से प्रेम हो गया है”
और जा कर उल्टा लेट कर कामसूत्र पुष्तक उठा कर पढ़ने लगती है
Devrani:uhh बलदेव एक दिन मुझे भी इस चित्र की तरह अपने गॉड में उठाये खड़े खड़े पेलना इस निगोड़ी बुर ने बहुत तड़पाया है...