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बलदेव जब अपने माँ से आँख लारा क्र क्र कमला क आने क बाद महल से बहार निकलता है उसके दिमाग में वैध जी का ध्यान अत जिसे उसे बुलाना था दादी क इलाज करवाने क लये वो सैनिक को आदेश देता है क उसे जंगल की ओरे जाना है तैयारी kare,kuch देर दो सैनिक एक काळा रंग का घोडा ले क्र आ जाता है जिस पर बड़े आसानी से सवार हो क्र दोनों सैनिको क साथ बलदेव जंगल की ओरे चल पड़ता hai,ghanto क बाद एक कुटिया क पास वो सब रुकते है दोनों सैनिको को कुटिया क बहार रहने का आदेश दे क्र वो खुद दबे पाँव कुटिया क भीतर प्रवेश करता है वो देखता है वैध जी योग आसान में बैठ जप क्र रहे थे वो वही उनके पास बैठ जाता hai,kuch देर बलदेव बैठे रहता है तभी वैध जी आखे खोलते है
Vaidh:bolo बालक
Baldev:vaidh जी मेरा नाम बलदेव सिंह है में. गहतराष्ट्रा का राजकुमार हु
Vaidh:balak वही गहतराष्ट्रा जो राज्य जंगलो और पहाड़ो से छुपा है और कई राजाओ ने छह क्र भी वह का रास्ता न खोज सके ,इसलिए वह किसी ने आक्रमण नै क्या
मेने सुना है वह बहुत सुकून hai,waha कभी खून न बहा
Baldev:aap सही ह वैध ji,mjhe आपके बारे में आचार्य जी ने बताया और उन्होंने कहा था मझे क "तमने संसार की साडी विद्या प्राप्त क्र ली और शरीर से शक्तिशाली हो गए हो पर आत्मा से शक्तिशाली बास वैध जी बना सकते है"
Vaidh:ye तो उनका बड़प्पन hai,me ये समझता हु क जीवन को अचे से जीने क लये अश्त्र शाश्त्र की नहीं मन की शांति होनी अनिवार्य है
Baldev:aap की सोच को प्रणाम गुरु जी
और उनके चरण स्पर्श क्र क बैठ जाता है
baldev:guru जी आप मझे अपना शिष्य बना लीजिये
Vaidh:hum तम्हे अपना शिष्य स्वीकार करते है और वचन देते ह क तम्हे हम अपनी हर कला से मालामाल क्र देंगे और तम अपने आत्मा से खुश रहना सीख जाओगे
Baldev:dhanyawad गुरु जी
आप हमारे साथ महल चलिए और यदि आपको ाचा लगे तो आप वही रह सकते है महल में
Vaidh:nahi बलदेव में महल में कटाई नहीं रह skta,me तो कुटिया में हे रहूंगा अगर मझे गहतराष्ट्रा का वातावरण अनुकूल लगा तो
Baldev:jaisi आपकी इच्छा वैसे मेरी दादी महरानी जीविका अपने पेअर से मजबूर है उन्हें भी आपकी आवश्यकता है
Vaidh:theek है हमे अतिशगरा निकलना चाहिए
और वो सब घोड़े पे बैठ क गहतराष्ट्रा की ओरे निकल पड़ते hai,ghatrashtra पहुचत पहुंचते संध्या हो जाती है और ुचि पहाड़ पर पहुंच क्र घोडा ज़ोर से हिह्याता है और वैध निचे का नज़ारा देख देख
vaidh:Kya सुन्दर दृश्य है पुरे गहतराष्ट्रा दियो से जग मैग क्र रहा है इतने रौशनी है ऐसा लग रहा है दिन है हर जगह कंदील और दिए जल रहे थे
घोड़े की आवाज़ सुन क्र सीमा क सिपाही अपने लैंटर्न ले क्र देखते है क कौन है और युवराज को देख फिर अपने जगह पर जा क्र खड़े हो जाते है
इधर अपने कक्षा में लेती देवरानी क कानो में जैसे हे घोड़े क चिल्लाने की आवाज़ सुनती hai,devrani हो पेट क बल लेती थी तुरंत उठ जाती है
देवरानी: आगया मेरा ghoda(yuvraj baldev)or देवरानी क मुख मुस्कुरा देते है
पहाड़ से उतर क्र अतिथि गृह क तरफ बलदेव वैध जी को ले क्र जाता है और
वैध जी :आज इस घर में विश्राम करे कल सुबह आपके लये कुटिया की वयवस्था क्र दी jayegi"or बलदेव घोड़े से वैध जी का सारा सामान उठा क्र अंदर रख देता है
baldev:aap जब तक थोड़ा विश्राम करे में पिता जी से मिल क्र अत हु फिर आप को में दादी क पास ले क्र चलता हु
Vaidh:theek है
बलदेव श्रुष्टि यानि बड़ी माँ क कक्षा की ओरे जाता है देखता है राजपाल और श्रुष्टि अभी अभी दरबार से आ क्र अपना मुकुट रख रहे थे सर से निकल kr,raja राजपाल का मुकुट कई तरह क रंग जवाहरात क बने थे पर महारानी षुरूश्ती का सिर्फ सफ़ेद रंग क हीरे क बने the,baldev षुरूश्ती का मुकुट देख क्र अपने माँ की यद् आती है
baldev

ita जी
और अपने पिता क पेअर छूटा है
और फिर अपने बड़ी माँ क पेअर छूटा है
pita:beta तम इतनी देर क्यू लगा डाई कहा थे
Baldev:wo में दादी क इलाज क लये वैध जी लेन गया था ,मझे लगता है वो ठीक हो सकती
Rajpal:mjhe टम्पे गर्व है बीटा इतनी छोटी सी उम्र में तमने जिम्मेदारी लेना सीख lya,agar तम चाहो तो में तम्हे आगे की सिक्षा ग्रहण करने हेतु विदेश भी भेज सकता हु राजा रतन की मदद से
baldev

ita जी मेने अभी आगे का नहीं सोचा hai,pehle में घर क मुश्किल हालत ठीक करना चाहता हु और गहतराष्ट्रा का और खास हमारे परिवार क दुःख को दूर करना चाहता हु
ये कह क्र वो पिता से आज्ञा ले क्र फिर वैध क पास चला जाता है
देवरानी अपने कक्षा में बैठ क्र ताली बजती है और ताली सुनते हे कमला अंदर आती है
Kamla:hukam महरानी
Devrani:sainiko से पता करो बलदेव आगया है तो अभी कहा है
कमला चली जाती है और पता लगा क्र वापस आती है
Kamla:maharani युवराज को आये अभी कुछ समय हुए है वो वैध को लाये है उनको भोजन करवाए अपने पिता से मिले फिर वो वैध को ले क्र महारानी जीविका को दिखने ले जा रहे है.
(मन में: एक पल बर्दाश्त. नहीं होता अपने प्रेमी से दूरी और कहती है पाप है ये है वो hai,maharani तू तो प्रेम में धास्ति जा रही है तझे खुद नहीं पता है)
Maharani:man में) आने दो इस घोड़े को बता टी हु क मझ से ज़्यादा महत्तव उसे अपने पिता का हो गया में दिन भर इंतज़ार की और वो मझे छोर क्र सब से मिल लय
बलदेव इधर वैध जी को ले क्र दादी क कक्षा में ले आटा है जहा वैध जी दादी को देश द्वारा लेप लगवाता है और कहता है क वो कल वैशाखी बना क्र देगा जिस से जीविका चल पायेगी
देवरानी का संयम टूट जाता है और वो अतिथि गृह क तरफ जाती है महल से निकल क्र वह कोई नहीं होता तो वही बैठ जाती है क कुछ समय में उसका पुत्र aayega.tbhi उसके सामने एक पोटली दिखती है जिसे वो हाथ लगाती है तो उसे समझते देर नहीं लगता क उसमे पुस्तके है देवरानी ऊपर से दो किताब खींच लेती है और पोटली को बांध देती है और वही कुर्सी पर बैठ जैसे हे पहले पुष्तक का पन्ना पलट टी है उसे पैन में योग क आसान क चित्र और एक पाने उस आसान की विशेषता लिखी हुई थी फिर वो दूसरे पुष्तक को खोलती hai.pushtak खोलते हे उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है क्यू क ये पुष्तक में एक महिला और पुरुष नंगी अवस्था में. थे पुरुष खड़ा हुआ था और उसका लिंग महिला क योनि में घुसा था जो उसके सर को पाकर क्र पुरुष क गोदा में बैठी थी)
ये देख कर देवरानी क माथे पे एक बून्द पसीना आ जाता है और वो चित्र क निचे उस आसान का विश्लेषण पढ़े बिना दोनों पुष्तकों को ले क्र अपने महल में तेज़ी से आ जाती है पर जैसे हे वो अपने कक्षा में जाती है कमला की नज़र उसके हाथ में पुष्तकों पर पड़ती है पर कमला कुछ कहती नहीं
इधर वैध जी जीविका का इलाज क्र क सैनिको क साथ वापस महल से बहार अतिथि गृह में आ जाता है और बलदेव अभी भी दादी क पास बैठा था
Baldev:ab आपको कैसा महसूस हो रहा है दादी
Dadi:bhut ाचा बलदेव और तम्हारा धन्यवाद्
Baldev:kal से आप वैशाखी से चलोगी और में आपको झील भी दिखने ले क्र जाऊंगा
Dadi:aakho में ासु ले क्र तेरे हृदय में कितना प्रेम है
Baldev:mjhe आप बता सकते हो प्रेम क्या है
Dadi:jo तू मेरे लय क्र रहा है वो प्रेम hai,meri ख़ुशी क लये क्र रहा है
Baldev:to क्या किसी को खुश करना प्रेम है
dadi:apne प्रेमी की ख़ुशी से खुश होना भी
Baldev:to क्या तम्हे कभी प्रेम हुआ है
dadi:haste हुए बीटा तेरा दादा मेरी प्रेमी थे जिसके वजह से आज तम सब ho,or तम्हे भी तम्हारी राजकुमारी मिलेगी जिस से टमको प्रेम होगा और तम उसके हर ख़ुशी क लये अपनी जान की बाज़ी लगा डोज तम्हे उसका चलना उसका बोलना हसना पूरी दुन्या से अलग लगेगा जिसको पाकर तम्हारा तन मन प्रसन रहेगा और मझे भरोसा है तम्हारा हृयदाय ऐसा है जो तम्हारी राजकुमारी होगी वो भी पूरी तन मन से तमसे प्रसन्न रहेगी
Baldev:to क्या प्रेम किसी से भी हो सकता है
dadi:han किसी से bhi,prem कोई बंधन मर्यादा जाती या रंग नहीं देखता बास हो जाता hai,jab तम्हे उसे देख क्र देखने का मन हो और लगे तम इस दुन्या क ऊपर उड़ रहे हो
बलदेव को सुबह का अपने माँ देवरानी को देखना याद आता है और मुस्कुरा देता
Baldev

r दादी ये प्रेम पाने क लये क्या करना होता है
Dadi

rayatn ,उसके बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता बस कोशिश से हे मिल सकता है
Baldev:agar समाज और धर्म बढ़ा आये प्रेम में तो
dadi:dharm और ग्रन्थ अनेक है नियम अनेक है पर मनुष्य एक है प्रेम एक है इसलिए सब नियम धरे क धरे रह जाते है अगर मनुष्य खुश न हो to,apne डिल की सुनो और सबको खुश रखो तम खुद खुश रहोगे हमेशा
Baldev:dhanywad दादी मझे मेरा उत्तर मिल गया
इधर देवरानी आकर उन दो पुष्तकों को अपने पलंग क गद्दे क निचे छुपा देती है तभी कमला आ जाती है अंदर
kamla:aapne भोजन क्या महारानी
Devrani:nahi kamla(man में ; में बिना अपने युवराज क नहीं खा सकती)
Kamla

ata है महरानी मेरी बहिन की बेटी किसी क साथ भाग गई
Devrani:kaha भाग गई
Kamla:ab लो क्र लो बात अगर पता होता तो पाकर न लेते हम
Devrani:matlab क्या है
Kamla:mahrani आप न कुछ नहीं जानती भागने का अर्थ ये है क किसी से प्रेम था उसका और वो उसके गहतराष्ट्रा छोर क चली गई
Devrani:kya उसे तो दंड होना चाहिए
Kamla:ary महरानी प्रेम होता हे ऐसा hai,dand क्या संसार भर से युधा क्र लेते है लोग प्रेम पाने क लये
Devrani:han कमला तमने सही कहा मझे प्रेम का क्या पता होगा इतनी काम उम्र में विवाह क्र यह आगयी और उसके बाद का तो जानती हे हो
Kamla

rem आपको पता हो या न हो फिर भी आपको हो सकता है और हो सकता है हो गया हो पर आपको पता न ho,prem वो होता जब एक औरत एक मर्द की एक पल की दूरी भी बर्दाश्त नहीं होती वो हर तरह से मर्द को खुश रखना चाहती है चाहे कितना भी दर्द हो उसे ,जिसे देख क्र डिल कंपनी लगे और हाथ पेअर ढीला पद जाये वो प्रेम होता है
देवरानी आज सुबह की बात यद् क्र क कैसे उसका डिल ज़ोरो से धारक रहा था और उसको एक अलग सा अहसास हुआ था और अपने मन में सोचती है.
Devrani:man में) क्या यही प्यार है???
कमला अब तम जाओ अब में आराम करूंगी.