Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 1

ये कहानी की शुरुवात होती है ऐसे सदी में जब भारत अनेक छोटे छोटे साम्राज्य में बता हुआ tha.Aise हे एक छोटे सा राज्य था उत्तर भारत में जो चारो ओरे पहाड़ो से घिरा था और अब तक क हर विदेशी आक्रमण से बचा था जिस राज्य का नाम था Ghatrashtra.Ghatrashtra में केवल 5000 लोगो की आबादी थी और यहाँ की हरी भरी ज़मीन और वातावरण से यहाँ क जीव जाती को रहने खाने की कोई भी कमी नहीं thi,praja की खुशहाली की वजह यहाँ क राजा राजपाल भी थे जो अपने प्रजा को अपने हृदय से प्रेम करते थे.

गहतराष्ट्रा का राजा

राजपाल सिंह आयु 40 वर्ष

लम्बाई 5.7

राजपाल सिंह की पत्नी

रानी श्रुष्टि 5.5

राजपाल सिंह की माता जी

महारानी जीविका

राजा राज पल सिंह क कोई संतान नहीं थी जिसका उसको अंदर हे अंदर दुःख था और उसको ये चिंता रहती थी क उसके बाद ये राज्य का उत्तराधिकारी कौन होगा जो गहतराष्ट्रा को smbhalega,isi सोच में डूबा राज राज पल क कानो में कुछ आवाज़ आती है और वो नींद से जागते हुए देखता है उसके सामने उसका सेना पति होता है जो एक हाथ में पत्र लय था और वो उस पत्र को राजा को दे क्र कहता है "महाराज ये हमारे पड़ोस क राजा रतन सिंह ने भेजा है में उनके राज्य हो क्र आरहा हु जहा में गहतराष्ट्रा क लये बीज का प्रबंध करने गया था".

राजा rajpal:acha lao...is पत्र को देखु तो क्या सन्देश है राजा रतन ka.or वो अपने सेना पति को जाने का सन्देश दे कर पत्र में डूब जाता है.
 
अपडेट 2

राजा राज पल पत्र पढता है और सोचता है क वो करे तो आखिर क्या करे तभी रानी श्रुष्टि आती है और राजा को चिंतित देख कारन जानने की कोशिश करती है

Shrushti:maharaj क्या हुआ आप चिंतित क्यू है

Maharaj:baat ये है क राजा रतन ने हमे उनके युद्ध में हमे उनका साथ देने का आमंत्रित क्या है

shrushti:to आपने क्या सोचा है?

maharaj:rani.tm तो इस बात को जानती हो क गहतराष्ट्रा हमेशा से हिंसा का खिलाफ रहा है उसके साथ नहीं और ऐसा पिता जी ने भी अपने जीवन में कभी दुसरो क राज्य को उजाड़ क्र अपने राज्य को बढ़ने का नहीं सोचा..

shrushti:mjhe ये सब ज्ञात है महाराज लेकिन आज कल भारत पर विदेशी ताक़त हावी होते जा रही है और हम तो इस जंगल और प्रकृति से घिरे है और एहि हमारे रक्षा करते है जिस से वजह से आज तक यहाँ किसी ने आक्रमण नहीं क्या

Maharaj:tm कहना क्या चाहती हो ?

shrushti:maharaj यदि भविष्य में कही कुछ अनर्थ हो जाये और हम पर आक्रमण हो तो हम हमारी छोटी सी सेना से उनका मुक़ाबला नहीं क्र सकते और हमारे पडोसी राज्य हे हमारी मदद क्र सकते है

महाराज रानी की चतुराई से प्रसन्न हुआ और कहा "ठीक है रानी में राजा रतन का साथ ज़रूर दूंगा और आपके सुझाव क लये में धन्यवाद करता हु."

राजा राज पल इस तरह अपने सम्बन्ध ाचा करने क लये अपनी छोटी सी सेना को ले क्र पर्शिया सीमा पर राजा रतन क साथ युद्ध करने चला gaya.kuch महीनो क युद्ध क बाद राजा रतन सिंह युद्ध जीत गया और युद्ध में अपनी कला का जौहर दिखा क्र राज पल सिंह ने अपने नाम का लोहा manwaya.persia क लोगो में राजा राज पल और राजा रतन का खौफ बैठ गया.

राजा ratan:Raja राज पल हम तम्हारी सैन्य कला से अति प्रभावित हुए है इसका पुरुस्कार हम तम्हे अवश्य देंगे

राजा राज pal:dhanywad राजा रतन जी ये तो आपका बड़प्पन है नहीं तो मेरे गन आपके गन क सामने कुछ नहीं.

राजा ratan:hume तम्हे कुछ देना चाहते है वडा करो तम हमारे परुष्कार को स्वीकार करोगे

राज pal:ji हम वडा करते है

तभी राजा रतन ताली बजता है और एक बूढ़ा व्यक्ति क साथ एक बालिका आती है और वो बूढ़ा व्यक्ति राजा राज पल क पेअर पकड़ लेता है और धन्यवाद् की झरि लगा deta.tab राजा रतन कहता है

राजा ratan:ye वही लोग है जिनके जान बचने क लये हमे यहाँ आना पड़ा और तम्हे ये जान कर ख़ुशी होगी ये बूढ़ा व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि पर्शिया क पूर्व राजा है और ये उनकी पुत्री है देवरानी और ये राजा अपने जान बचने क ख़ुशी में ये अपने बेटी देवरानी का हाथ तम्हारे हाथ में देना चाहते और ये पुरुस्कार क रूप में तम्हे हम देते है राजा राज पल जी

राजा राज pal:par..(man me:ye कैसे हो सकता है ये गहतराष्ट्रा क नियमो का उल्लंघन होगा में दूसरा विवाह कटाई नहीं कर सकता और तो और ये देवरानी मेरे से आधे आयु की लग रही है किसी किशोरवाष्टा बालिका जैसी)

राजा ratan:par वॉर कुछ nahi...tmne वडा क्या था

राजा राज पल सब क सामने वडा क्या था अब मुकरना उसको सोभा नहीं देता और वो देवरानी से विवाह क लये हाँ क्र देता है उसी दिन विवाह का कार्यकर्म रखा जाता hai.or विवाह का कार्यकर्म सम्पन्न होता है और सुहाग रात क लये राजा राज पल अपने कक्षा में जाता है और बिस्तर पर अपनी जूती निकल क्र बैठ ता है और जैसे हे सर उठता है उसकी आखे फटी की फटी रह जाती है सामने का दृश्य देख क

राजकुमारी देवरानी एक सफ़ेद रंग क लिबास में थी जैसा उसका वस्त्र था वैसा हे उसका बदन बिलकुल संग मर मर सा तराशा चमक रहा था उसके हाथ में दूध का गिलास लये राजा की तरफ आ रही थी जैसे हे वो उसके पास पहुंची राजा राज पल तुरंत हे खड़ा हो गया राजा राज पल का कद 5.7 हे था इसलिए उसका सर देवरानी क वक्ष तक हे आरहा था ,देवरानी की लम्बाई देख क्र राजा अचंभित था क इतनी काम उम्र में इतने lambai.raja उसके तीखे नाक ,गहरे आँख फूल से लाल hoth,gol वक्ष ,पतली कमर देख क्र जैसे होश खो दया था तभी

devrani:Lijiye न

rajpal:dhanyawad और उससे दूध ले क्र पी जाता है.

देवरानी जैसे हे गिलास ले क्र पलट क्र रखने जा टी है राजा रानी क पतली कमर क निचे गोल गुब्बारे से अलग अलग दिशा में कूद रहे दोनों चुतर को देखता है और दांग रह जाता hai.devrani गिलास रख क्र मूर्ति ह तभी राजा पीछे से जा क्र उसे दबोच लेता है और पतले छरहरे बदन और लम्बे बदन दूध सा गोरा बदन आज से पहले कभी देखा नहीं था कभी गहतराष्ट me.wo पीछे से देवरानी को दबोचे उसके लम्बे काले घने ज़ुल्फ़ को हटा क्र उसके पीछे गर्दन को चूमने लगता hai.uske ज़ुल्फ़ की खुसबू उसको पागल बना रही थी वो उसके वस्त्र को धीरे से नाड़े को खोल अलग क्र देता अब देवरानी केवल एक छोटे से वस्त्र में थी जिसे उसका स्तन और उसके योनि छुप रहा tha.devrani की जवानी अभी अभी शुरू हुई थी इस झटके से वो अपने आखो को बंद कए आनंद ले रही थी क तभी राजा अपने दोनों हाथो को आगे बढ़ा क्र उसके कठोर वक्ष को दबोच लेता है देवरानी की सिसकी निकल जाती अब राजा देवरानी का हाथ पकडे बिस्तर की ओरे ले जाता है और उसे लिटा देता है और उसके बदन से बचे खुचे वस्त्र निकल देता है और खुद भी अपने वस्त्र निकल देवरानी क वक्ष को दबा दबा क चूसने लगता hai.ab देवरानी सिसकने लगती है और उसकी योनि पानी छोड़ने लगती है .राजा अपना लिंग देवरानी की योनि पर सताता है और धक्का लगता है जैसे हे लिंग अंदर जाता है रानी ज़ोर से चिल्लाती है और उसका शील भांग हो जाता है और उसमे से खून बहने लगता है राजा गईं क 5 बार अंदर बहार करता है और रुक जाता है. पर अब रानी को दर्द नहीं मज़ा आ रहा था वो सोचती है क राजा का लिंग और अंदर जाये और अपने हाथ से राजा क कमर क पाकर क धक्का देती है पर राजा क छोटे लैंड ने जवाब दे दया था और रानी जो क ऊंचे लम्बे कद काम से काम 5.10 की थी उसकी गहराई तक राजा राजपाल का नन्हा सा लिंग भेद नहीं पता और उसका 4 इंच का लिंग चरम सीमा पर पहुंच रानी क योनि में पानी छोर देता है और रानी देवरानी को प्यासी छोर देता hai.iske बाद करवट ले क्र ये सोचते सो जाते hai.or देवरानी अपने ायखो में ासु लये अपने आप को पॉच क्र सो जाती है.
 
अपडेट 3

राजा राजपाल देवरानी को ले क्र अपने राज्य गहतराष्ट्रा आ जाता है जहा उसे समाज और घरवालों क कई तने सहने पड़ते है क्यू क वो नियम का उल्लंघन क्र क दूसरा विवाह क्र लये उसकी पहली पत्नी श्रुष्टि उस से वचन लेती है क वो पहले श्रुष्टि को प्राथिमिकता देगा उसके बाद हे वो दूसरी पत्नी देवरानी ko.shrushti ने साफ क्र दया था बिना उसके आज्ञा क देवरानी क पास न जाये मजबूरन वो उसकी बात मन लेता hai.idhar देवरानी को पूरी खबर उसकी दासी कमला देती है और देवरानी पे जैसे पहाड़ टूट पड़ता hai.udhar राजा रतन अपने राज्य को बढ़ने में लगे थे और युधा में न चाहते हुए भी राजा राज पल को जाना पड़ता था इसलिए राजा राज पल काम समय अपने राज्य में बीतते ,दीं रात युधा करने क वजह से उन्हें शराब की लत लग गई और उन्हें कभी कभी अपने महल में रहने का सौभाग्य मिलता तो श्रुष्टि उसे नहीं छोरती और देवरानी अकेली जीवन यापन करने lagi.mushkil से 6 महीने में एक या दो बार देवरानी से राजा राज पल छुपे छुपाये मिलाप क्र लेते बिना अपने पहली पत्नी क भनक lage.Vivah क 9 महीने बाद हे पारस की राजकुमारी और गहतराष्ट्रा की रानी ,रानी देवरानी ने एक सुन्दर बालक को जनम दया जिसका नाम रखा गया बलदेव सिंह.

18 साल बाद

आज पुरे महल में दिए जलाये गए और हर तरफ ख़ुशी का माहौल था .हो भी क्यू न आज राजकुमार बलदेव सिंह का जन्मदिन जो था और आज हे क दिन वो अपने पिछले पांच वर्ष का शिक्षा ग्रहण क्र अपने गुरु क आश्रम से आया tha.ab राजा राज पल की आयु लगभग 58 वर्ष हो गई thi.Raja राज पल की पहली पत्नी क आयु अब लगभग 48 वर्ष की थी पर लम्बाई काम होने क कारन अभी भी बदन ढला नहीं था पर जहा सब बूढ़े हो रहे थे वही देवरानी दिन बा दिन जवान होते जा रही थी ,देवरानी अब लगभग 35 वर्ष की हे थी और 5.10 वाली पतली छरहरी लड़की अब एक ऊँचे लम्बे कद की स्त्री का रूप धारण क्र लय tha,devika क वक्ष संभाले नहीं संभालते थे जो 44 दद थे जो दो बड़े गुब्बारे की तरह चलने पर हिलते पर ठोस थे कमर पतली और निचे दो मटके की तरह गांड ऊपर से दूध जैसा रंग सिपाही से ले क्र पंडित तक उसको देख क्र आहे भरते the.aaj देवरानी ने काले रंग का ब्लाउज और सदी पहनी थी ब्लाउज इतने टाइट क दो पानी से भरे गुब्बारे किसी शराबी की तरह लड़खड़ाते जब भी देवरानी चलती थी.

देवरानी पूजा की थाली तैयार क्र रही थी तभी उसकी दासी कमला आती है और उसके कहती है "महारानी युवराज aagaye"itna सुनते भर से देवरानी ख़ुशी क मरे थाली ले क्र दरवाज़े पे चली जाती है जहा पर सीधे नज़र युवराज पर पड़ती है जो अपने पिता राजा राजपाल से गले मिल रहा था देवरानी अपने पुत्र को कई वर्षो बाद देख क एक डैम उसके आँख पत्थर से जैम जाते है और मन में "कितना बड़ा हो गया मेरा युवराज मेने इसका नाम बलदेव सही रखा था कितना ऊँचा लम्बा और चौड़ा हो गया है फिर भी कितना हसमुख है ,इसने तो मुछे भी रख लये hai,(tabhi बलदेव अपने मुछो पर तव देता है) देखो कैसे मुछो पर तव दे रहा है जैसे कही का महाराजा हो इसे देख क्र कौन कहेगा क ये केवल 18 वर्ष का hai,dikhne में 30 वर्षीया पुरुष राजा लग रहा है "ऐसे अपने आप को देखते देख बलदेव का भी स्नेह छलक जाता है अपने माँ क प्रति और अपने पास खड़े अपने पिता और बड़ी माँ की तुलना अपने माँ से करता है "मेरी माँ तो इन दोनों क सामने इन दोनों की बेटी लग रही hai,upar उसके तीखे नैन नक्श ,चमकती twacha,uske निचे गठीला बदन ,लम्बा कद kathi,meri माँ को देख क्र कोई ये नहीं कह सकता क ये मेरी माँ है ,कोई अज्ञात लोग देखे तो सब सोचेंगे मेरी छोटी बहिन है और इनकी आयु भी 25 से ज़्यादा नहीं लगती"

तभी राजा राज पल टोकते हुए कहता है

राजा राज pal:bhagywan दोनों माँ और पुत्र ने एक दूसरे को देख लय हो तो आगे की करवाई की jaye,Baldev अपने माँ क पेअर छुओ.

बलदेव तुरंत अपने माँ क पास जा क्र उनके सुन्दर पेअर छूटा है और देवरानी उसे आशीर्वाद देती

पूजा कार्यक्रम देर रात तक चलता hai,pooja ख़त्म होने क बाद सब उठ क्र जाने लगते है देवरानी और कमला मीठे आस पास बटवाने लगती है और बलदेव उठ क्र अपने कक्षा की ओरे चल देता है तभी उसे कुछ बातचीत करने की आवाज़ सुनाई देती है और वो उस तरफ चल देता है और अंतिम में अपने बड़ी माँ श्रुष्टि क क कक्षा क पास रुक जाता है

shrushti:aaj तो ये बलदेव भी आज्ञा अपनी शिक्षा पूरी क्र क

radha:Han महरानी मेने देखा आज बहुत खुश लग रही थी ,कही वो आप से बदला का षड़यंत्र तो नहीं बना रही

रानी shrushti:Radha हो सकता है तम सही हो क्यू क मेने उस से उसके पति का सुख छीना है और वो पारसी बूढी, लगता है क ज़रूर मेरे लये खड़ा खोदेगी

radha:to हमे क्या करना चाहिए महरानी

Shrushti:sahi समय का इंतज़ार ,में बताउंगी क तम्हे क्या करना है राधा अभी तम जाओ महाराज आते हे होंगे.

सब काम ख़त्म करने क बाद बलदेव को ले क्र राजा राजपाल अपने माँ यानि क महरानी जीविका जो अपने ज़िन्दगी क आखिरी दिन गईं रही थी उनके कक्ष में जाता है और बलदेव अपने दादी जो क एक बिस्तर पर लेती जिनका पेअर काम करना बंद क्र दया था इसलिए वो चल नहीं सकती थी पर वो हाथ से ठीक और बोल बी पति थी पर मुश्किल se,baldev दादी को देख खुश होता है और उनके चरण स्पर्श क्र आशीर्वाद लेता है और उनके बगल में बैठ जाता है.

Dadi:Beta बलदेव

Baldev:ji दादी

Dadi:mjhe मुआफ क्र दे में तेरा स्वागत करने दुवार पर न aaski,ab में चल नहीं सकती

Baldev:aap इस राज्य की महारानी है और हम सब आपके संतान है आपकी आज्ञा पर हम हिमालय चढ़ क आ सकते है आपसे मिलने.

Dadi:bas बीटा ,मझे तमसे यही उम्मीद thi,tm गहतराष्ट्रा क भविष्य ho,bhagwan तम्हे एक ाचा और महँ राजा banaye,or तम इतिहास बनाओ.

और बलदेव क सर पर हाथ रख क्र आशीर्वाद देते है और बलदेव और राजा राज पल बहार आते है

Rajpal:putra अब कल सुबह मिलते है अपने कक्षा में जा क्र आराम करो

बलदेव फिर एक बार राजपाल क पेअर छूटा है तो राजपाल अपने पुत्र को गले लगा लेता है और कहता है

rajpal:tu कितना लम्बा हो गया देखते देखते

baldev:kaha पिता jee,bass 6.3 फिट हे हु

rajpal:tere दादा की कद्द काठी भी तेरे जितनी नहीं थी तू अपने माँ पर गया hai,or दोनों हसने लगते है और बलदेव अपने एक ऊँगली से अपने मुछ पर ताव देता है अपनी प्रशंशा सुन क्र

Rajpal:beta अपनी माता को खिला क्र सोना तम्हे तो पता है वो तम्हारे बिना नहीं कहती

Baldev:ji पिता जी

और बलदेव अपने कक्षा और बलदेव अपने माँ क कक्षा की ओरे चल देता है
 
अपडेट 4

बलदेव सिंह मन में कई भाव लये हुए अपने माँ क कक्षा की तरफ बढ़ रहा था ,उसे उसके बड़ी माँ का अपने माँ क खिलाफ बात सुन क्र जैसे परेशां हो गया था और उसे समझ नहीं आरहा था क क्या kare.jaise हे वो पहुँचता है देखता है देवरानी 56 भोग सजा रही है अपने बेटे क लये और अपने बेटे का आभाष प् क्र कहती है

Devrani:aa गए बेटे ..बड़ा देर क्र दया आने में

Baldev:Mata श्री आप थकती नहीं हो ?

Devrani:aisa क्यू पूछ रहा है?

Baldev:Q क मझे पता है आप एक सुबह से काम क्र रही ho,aap विश्राम क्यू नहीं करती..

Devrani:Baldev..Jiska बीटा इतने वर्षो बाद आया है ,वो कैसे थक सकती है?

Baldev.Dasiya है न यहाँ..

और तो और लोग भी है घर me..badi माँ भी है...

Devrani:wo महारानी hai(man me:ye क्या निकल गया मुँह से .

बलदेव जो पहले से हे सब कुछ सुन क आ रहा था उसका दिमाग ख़राब हो गया और कहा

Baldev:Maa,agar बड़ी माँ महारानी है तो क्या आप दासी हो ?

Devrani;baat को संभालते hue)ary नहीं nahi..beta ,मेरा मतलब था क नियम अनुसार बड़ी पत्नी को हे महारानी की उपाधि मिलती है और ऐसा हर राज्य में है.

(मन me:Mjhe महारानी क्या कभी रानी भी नहीं समझा गया)

बलदेव भी चेहरा पढ़ने में देर नहीं लगाया और मन में (कोई बात नहीं माँ अब तक कौन क्या था मझे नहीं पता पर अब महारानी सिर्फ तम rahogi,tmahre पास वो हर कुछ है जो एक महारानी क पास होना chahiye)ye सोच हे रहा था क देवरानी ने कहा

Devrani:Beta अब खाना खा ले ..

दोनों बैठ क 56 भोग पकवान का आनंद लेने लगे

Baldev:Maa आज ऐसा लग रहा है वर्षो बाद भोजन किया hu,kya स्वादिष्ट भोजन है

Devrani:sb मेरे कुंवर कन्हैया क लये hai..pet भर क खाना है तझे ab..ab कही नहीं जाने दूंगी तझे

Baldev:Par माँ मेरे कुछ मित्र गैन तो विदेश जायेंगे वह महा विद्यालय है

Devrani:Har विद्या तो आ हे गई है टमको अब और क्या सीखना है

Baldev:Maa लोग फ्रांस जाते है और इंग्लैंड जाते है ,सुना है वह नए नए अविष्कार करने की शिक्षा दी जाती hai,or वो हम से कई 100 साल आगे है

Devrani:Wo कैसे ..

Baldev:jaise वह पर बिना चित्रकार क कुछ यन्त्र से चित्र निकलते है ,बिना घोड़े क सवारी की जाती है और पानी में बड़े बड़े नव जो कोसो दूर तक हज़ारो लोगो क ले जा सकते है

Devrani;achambhit हो क्र) में तो पारस तक हे देखि हु दुन्या बेटे ..ऐसे ऐसी दुन्या भी है

Baldev:han उनके वेश भूषा भी अलग है बोली चली भी अलग

जिस दिन में महाराजा बन जाऊंगा उस दिन आपकी यात्रा करवाऊंगा ज़रूर

Devrani:Bholu...bina महारानी क महाराजा बन जाओगे

Baldev:Ary है ये तो में सोचा हे नहीं

Devrani:haste हुए ..बुद्धू कही क

इसी बीच दोनों खाना खा लेते है और बलदेव भी थका था तो शुभ रात्रि कह क अपने कक्षा में चला जाता है और सो जाता है इधर देवरानी भी थकी थी और सो जाती है.

(महल)

अगली सुबह सब उठ जाते है .बलदेव सबसे पहले उठ ता है और महल मुआयना करता hai.use महल पहले से और सुन्दर और सजा हुआ दीखता hai.Mahal क आगे दरबार है जहा पर दो बड़ी बड़ी सिंघासन रखे हुई और दोनों सिंघासन क अगल बगल एक एक छोटा आसान tha.dono तरफ से 5 ,5 आसान थे जो मंत्रीओ क लये the.Darbar क एक तरफ सैनिक क अभ्यास क लये जगह और अश्त्र और शाश्त्र क कक्षा थे और एक तरफ अतिथि गृह और रसोई था जहा पर भंडारा बनता था राज्य ka,singhasan क पीछे से दरवाज़ा था राज महल का जहा पर अनेक सैनिक दिन रत पहरेदारी देते the.Baldev महल क लये राजा राज पल ने ऊपर एक मंज़िल बनाया निचे वो खुद का कक्षा और साथ हे महारानी और राजा राज पल अपने माँ को भी निचे हे रखा tha,upar सिर्फ बलदेव रहता tha.seedhi चढ़ते हे सामने दरवाज़ा खुलता जो एक आलिशान कक्षा की ओरे जाता था बीच में पलंग जो की किसी भी समानय पलंग से 3 गुना ज़्यादा बड़ा tha,bistar भी ऐसी क बचा भी बैठे तो धस जाये इतना नरम tha.palang क चारो तरफ कीमती मोतियों से सजा हुआ था, पास में रखे आराम कुर्सी और मेज ,मेज पर रखे कुछ अलग किस्म क जग वही कोने में स्नान घर और शौच जो राजा राज पल ने पर्सिओ राजा क मदद से बनवाया tha.or कालीन भी पारस से हे मंगवाया था जो पुरे महल को अलग हे रूप dete./Mahal)

बलदेव अपना महल देख अंदर हे अंदर खुश हो रहा था फिर उसे कही कोई न दिखने पर वो महल क मुख्या दुवार से बहार आया और सेनापति को पूछा सब कहा है

Senapati:yuvraj वो आज सभा चल रही ह

Baldev:acha ठीक है

Senapati:aap भी तैयार हो क्र आ जाये

Baldev:han हम आते है

बलदेव जाता है और अपने वस्त्र पहनता है और फिर उसपर मोतिओं क हर पहनता है और दरबार की ओरे चल देता है.

दरबार पहुंचते हे देखता है क बरी बरी से सब लोग अपने बात कह रहे है और मंत्री सब की फरियाद को लिख रहा tha.jaise हे किसी की युवराज पर नज़र पड़ती है सब जय जय कर लगाने लगते hai.Baldev देखता है क एक बड़े सिंघासन पर उसके पिता और दूसरे बड़े सिंघासन पर उसके बड़ी माँ बैठी है और छोटे सिंघासन पर उसकी माँ बैठी hai.jise देख क्र बलदेव को अजीब लगता है और वो भी छोटे आसान पर अपने माँ क बगल में जा क्र बैठ जाता hai.ghanto तक सभा चलती है राज्य क हर विषय पर तर्क रखा जाता है और सबकी दुविधा परेशानी सुनी jati.tabhi महारानी षुरूश्ती उठ क्र दरबार से जाने लगती है तो सब दरबारी उठ खड़े होते है और जय जय कर करने लगते hai."maharani श्रुष्टि पधार रही h"),,Devrani जान बुझ क्र नहीं उठ टी जिस से ये बात छुपाई जा सके बलदेव से पर अचानक महाराजा राजपाल कहता है

Rajpal;devrani .आप महल में जाये विश्राम करे

Devrani:(na चाहते हुए bhi)ji

और देवरानी उठ क्र जाने लगती है पर इस बार कोई देवरानी की जय जय कर नहीं करता बास एक महल का पहरेदार कहता है "रानी देवरानी पधार रही है"

baldev:(man me)yehi पहरेदार बड़ी माँ को महारानी कह क सम्बोधित करता hai)aakhir ये भेद भाव q?Na उनको पिता जी क साथ सिंहासन न जय कर न हे कोई महारानी कहता ह.

राज pal:putra

Baldev:aagya पिता श्री

Rajpal:kis सोच में डूबे हो

Baldev:kuch नहीं

Rajpal:sutro से खबर मिली है क अँगरेज़ उत्तर से भारत क सीमा को और लांघने क प्रयास में है

(हर मंत्री आश्चर्य चकित होता है और साथ हे बलदेव भी)

Mantri:To महाराज इसका क्या उपाय है

Rajpal:abhi तक तो नहीं है

Mantri:hum तो आज तक इस ुचे पर्वत और इसके चारो और घने वन ने हमारी रक्षा क्या है पर अँगरेज़ क पास तो आधुनिक यन्त्र है और शाश्त्र भी

Rajpal:hum पडोसी राज्यों से बात कर रहे है देखते है क्या निष्कर्ष निकलता है

मंत्री :जो हुक्म

फिर उसके बाद सभा ख़त्म क्र दी जाती है और हर मंत्री अलग अलग बने हु मंत्री महल में चले जाते हज और राजा राज पल और बलदेव कुछ सैनिको क साथ पीछे राजमहल में आ जाते और सेंक वही द्वार पर पहरा देने लगते है.
 
अपडेट 5

दुपहर क भोजन क बाद बलदेव अपने दादी क कक्षा में जाता है और उनके चरण छू क्र आशीर्वाद लेता है

दादी: जीता रह बीटा

Baldev:dadi आप कैसी है

Dadi:Meri उम्र हो गई अब अब तो बस जाने का वक़्त आ गया है

Baldev:dadi ऐसा मत कहो अभी आप 100 साल और जीयोगे

और ये आपके एक पेअर में तकलीफ है न

Dadi:han

Baldev:to आप ठीक हो सकते ह

और चल भी सकते है

Dadi:wo कैसे

Baldev:Me ऐसे वैध को जनता हु जो ऐसा रोग ठीक क्र दया है और तब तक आप वैशाखी से चल हे सकती हो ,में कल हे आपके लये उस वैध को लता हु

Dadi:dhanywad बीटा मेरे लये इतना सोचने क लये

Baldev:ye मेरा फ़र्ज़ hai,dadi आपसे कुछ बात जान नई थी

Dadi:bol न

Baldev:ye माँ क साथ ये दू व्यवहार क्यू और उसने साडी मन की बात दादी को बता दया

Dadi:ye जीवन ऐसा हे है beta,teri पिता को तेरे माँ से छीना गया ,उसका हक़ छीना गया लेकिन में छह क भी तेरे माँ की मदद नहीं क्र स्की और रोने लगी

baldev:ro मत दादी अब में आ गया हु न में अब सब ठीक क्र दूंगा

Dadi:baldev क सर पैर हाथ रख क "तू है महाराजा बलदेव सिंह गहतराष्ट्रा का राजा तेरी हर बोली होगी पत्थर की लकीर"

ये सुन कर बलदेव को एक अलग हे ऊर्जा मिली और उसने दादी का हाथ में ले क्र कहा "है मई यानि क गहतराष्ट्रा का महाराजा राजा बलदेव सिंह और मेरी हर बोली अब से है पठार की LAKEER"or ये कह कर उसे एक अलग हे ऊर्जा की अनुभति हुई.

Dadi:Beta मझ से एक वडा कर

Baldev:han बोलिये दादी जी आज्ञा

Dadi:Tere माँ कभी मुँह से नहीं कहेगी क उसे क्या ज़रूरत है क्या तकलीफ है उसने बहुत तकलीफ सही hai,me औरत हु उसका दर्द समझ सकती hu,me चाहती हु तू उसका हर कदम पे साथ दे उसके बिना बोले उसके ज़रूरत को समझ क्र पूरा क्र दे जितना उसने दुःख सहा है उसका 10 गुना सुख उसे मिले वडा करो

Baldev:me वडा करता हु में पूरी कोशिश करूंगा उनको हर प्रकार से खुश रखने की

Dadi:Koshish nahi...Beta मझे तम पर पूरा यक़ीन है तम्हारे आखो में ये जलती ज्योति िस्बत की गवाही दे रही है क तम सब ज़िम्मेदारी उठा loge...Bass अपने डिल की सुन्ना और किसी की नहीं ...तभी मेरे मरने क बाद मेरी आत्मा शांत होगी...

Baldev:sochte hue)par दादी क्या करू कैसे कृ?

Dadi:apne आखो में dekh,k तू क्या कर सकता है

और उसके भी आखो में देख उसे क्या चाहिए

Baldev:theek है दादी ,आशीर्वाद बनाये रखे

Dadi:jeete रहो

और बलदेव अपने मन में कई सारा तूफ़ान ले क्र अपने कमरे में आकर सोने की कोशिश करने लगता है

इधर देवरानी एक झीनी सा लिबास पहन कर उल्टा लेती थी उसके गोरी बहे आज़ाद उसके घागरे में उसके मोठे गोल तरबूब जैसे गांड एक डैम लरज़ रहे थे जिसे देख उसकी दासी कमला क मुँह में भी पानी आ गया tha,kamla पिछले 10 मिंट से देवरानी का मालिश क्र रही थी ,जैतून क तेल से ,देवरानी क दोनों तरफ अपने पेअर रख क मालिश क्र रही थी

कमला हे थी जो देवरानी को महारानी कहती थी

Kamla:maharani आप का बदन तप रहा है

Devrani:humm huu(siski लेते हुए)

Kamla:kahi आपको बुखार तो नहीं

और घागरा क निचे उसके पेअर और जांघ तक तेल लगा क मालिश क्र रही थी

देवरानी :nahi..hm कमला

थोड़ा ऊपर और कमला का हाथ पाकर क्र अपने चुतर पर रख देती है

kamla:hay राम इतना गोल और इतना बड़ा दोनों हाथो में तो महारानी का कुछ आता हे नहीं है

Devrani:kya बोली

kamla:kuch nahi,maharani अगर में पुरुष होती तो आपके हाल बुरा क्र देती

Devrani:tu अभी महिला है तो तेरे से मालिश नहीं होती पुरुष होती तो और कुछ नहीं क्र पति और मुस्कुरा देती है

Kamla:ab पलट जाओ

और देवरानी अपने पीठ पर छोटा सा कपडे का टुकड़ा जिस से दूध धक् रहे थे कास लेती है और सीढ़ी हो जाती है

Kamla:jitni चौड़ी पीठ hai,utni मोती दूध भी है इसके और गांड तो मनो बड़े दो तरबूज़े ho(man में बडबडी है)

कमला पेट से ले क्र कंधे तक मालिश करती है और तेल की शीश ले क्र सपाट पेट की नाभि में तेल उढेल देती है और

kamla:haye राम कितना तेल नाभि में रुक गया इतनी गहरी नाभि है तो (मन में छूट की खाई कितनी गहरी hogi.or गांड तो मनो सुरंग से होगी)

देवरानी जब से व्याह क आई थी तब से अपने आग बुझाने क लये कमला का सहारा लेते आई रही है और कमला से दोस्ती सी हो गई थी देवरानी को.

देवरानी अब कमला का हाथ ले क्र अपने बड़े बड़े गेंदों पे ले जाती है और दन्त से अपने होठ काट टी है

कमला दोनों हाथ से एक दूध को पाकर क्र मरोरती है और उस से रहा न जाता और उसके दूध. को चूम लेती है

kamla:haye दय्या इतना बड़ा दूध है महारानी आप दो हाथ में नहीं आरहे इसके लये तो अलग से हाथ बनवाना hoga(or उसके दूध को दबाते रहती है)

Devrani:aisa नहीं है कमला दुन्या में मई अकेली नहीं हु जिसका बदन ऐसा है

Kamla:par और औरतो को तो उसके हिसाब क नाप का मिल जाता है पर आप जैसी घोड़ी को राजा राजपाल जैसे डेढ़ फुटिया मिल गया

Devrani:Koi nahi,hota है

kamla:kaash आपके हिसाब का आपको हाथ और वो मिल जाता तो

devrani:sapna मत देखो

kamla:sapna नहीं मेने तो गहतराष्ट्रा में हे किसी न किसी का इतना लम्बा चौड़ा हाथ देखि जिसमे आपका आकर बैठ जायेगा और हाथ इतना बड़ा है तो वो भी उतना बड़ा हे होगा तो आपके आगे का दरया और पीछे का समुन्दर पार क्र dega..pr मझे यद् नहीं आरहा कौन था वो हाथ वाला

(और देविका क दूध को मसलती रहती है)

देवरानी अब अपने चरम पर थी और उत्तेजना से आँख बंद कए सिसक रही थी)

कमला जो क भुलाकर थी

Kamla:ary हाँ यद् आया वो हाथ तो युवराज बलदेव का हे था

देवरानी ये सोच क्र उतना बड़ा हाथ उसके बेटे का हे है उसके छूट से पिचकारी छूती और वो हाफने लगी

थोड़े देर बाद उसे होश आया

Devrani:Anpadh है तू कमला गवर गुस्सा होते हुए

kamla:ary वो उस दिन युवराज घोड़ सवारी करने जा रहे थे तो अचानक घोडा मिमियाया तो युवराज ने उसके पुरे सर को अपने एक हे हाथ से दबोच लय इतना बड़ा हाथ और वो घोडा शांत हो गया

Devrani:Kamla तू गवर हे रहेगी तझे नहीं पता है कब क्या बात करते है और वैसे वो घोडा नहीं था जिसे बलदेव ने चुप कराया था वो घोड़ी thi(or उसके चेहरे पे एक मुस्कराहट आ जाती hai)or देवरानी झट से स्नान घर में घुस जाती hai.apne अंतर वस्त्र निकल क एक डैम नंगी हो जाती है और आईने क सामने चली जाती जैसे हे उसे अपने तरबूज़े जैसे दूध पर जाती है पतली कमर मोठे गोल मटके जैसे चूतर गोरा बदन अपने लम्बाई और चौरई देख क्र एकक उसके मुँह से निकलता है "घोड़ी कही ki"or फिर वो स्नान ले क्र एक लाल रंग का सदी और काळा रंग का ब्लाउज पहनती है जो मेवाड़ से मंगवाया था और तैयार हो क्र अपने बेटे से मिलने निकल पड़ती है.
 
अपडेट 6

देवरानी सज सवार क्र युवराज बलदेव को ढूंढ़ने निकल जाती पर युवराज अपने कक्षा में नहीं मिलता तो वो महल क बहार आती है जहा मुख्या दुवार पर सैनिक पहरेदारी क्र रहे थे उन्हें महल क अंदर जाने की अनुमति नहीं थी

Devrani:suno क्या तमने बलदेव को देखा है

Sainik:Ji रानी वो अभ्यास क्र रहे है

और सैनिक उसे अभ्यास क्र रहे जगह को इशारे से बता देता hai,jaise हे देवरानी की नज़र बलदेव पर पड़ती है और वो खो जाती है



उसके चौरे छाती और मांसल पेट मजबूत बांहे और कंडे एक हाथ में जंजीर और एक हाथ में तलवार लये अपने अभ्यास में लगा हुआ tha.Devrani जैसे हे उसके हाथ पर बंधे जंजीर को देखती है और उसके हाथ का ताक़त का अंदाज़ा लगाती है और मन में कहती hai:itna बड़ा और इतना मज़बूत (तभी उसके मन में कमला की बात याद आती "युवराज का हाथ हे आपके ये बड़े दूध को एक हाथ से दबोच सकता है और आप क मटके जैसे गांड की नसे ढीली क्र सकता hai,Jab उसका हाथ इतना बड़ा है तो वो इतना बड़ा होगा हे जिस से आपके आगे का दरया और पीछे का समुन्दर पार क्र देगा")

Devrani:(andar हे अंदर शर्म से गारी जाती है और कही न कही मन में सोचती ह क कमला सही कहती है क इस आकर को कुछ इसी प्रकार क शरीर भोग क्र क तृप्त क्र सकता है)

तभी उसके कान में आवाज़ पड़ती है

Baldev:Maa..kya हुआ क्या सोच रही हो



देवरानी बास बलदेव को मुस्कुरा कर देखती है

Baldev:(man में) क्या मुस्कराहट है माँ तुम्हारी और ये सदी कितनी फैब रही ह टमप्र और माँ क ये उभर आगे क पीछे क सब ोरो से कितने अलग है या कितने बड़े है (आर्य ये में क्या सोच रहा हु)

Baldev:maa इतनी दूर क्यू हो पास आओ

Devrani:Han कुछ नहीं हुआ बीटा बास सोच रही थी तू कितना बड़ा हो गया है

Baldev:or तम भी तो कितने बड़े हो गए हो

devrani:kya मतलब tmhara,me बूढी हो गई हु क्या ?

Baldev:ary नहीं मेरा मतलब पहले पतली थी अब मोती हो गयी हो

Devrani:Kya कहा तूने में मोती ho(or उदास सी हो जाती ह बचे की तरह)

Baldev:nahi नहीं तम तो मेरे से भी काम उम्र की लगती हो और वो भी काम आज काम 5 साल छोटी

Devrani:mjhe न उल्लू न समझो

Baldev:Maa क करीब आ क्र उसके हाथ पाकर क्र "माँ तम मोती नहीं पर पहले से सेहतमंद हो gai,islye शरीर भरा भरा लगता है"

देवरानी उसके मन की बात टटोल रही थी और समझ रही थी की बलदेव किस मोटापे की बात क्र रहा है

Devrani:han नहीं तो बूढी में सिर्फ 35 वर्षीया हु

Baldev:or में 18

Devrani:par फिर बी तम कही क राजा लगते हो 30 वर्ष क ,किसी अज्ञात व्यक्ति से पूछ क्र dekhna(tunak क्र बोलती है)

बलदेव तुरंत पास रखे अपने वस्त्र उठा क्र पहना लेता है

Baldev:ab बताओ में कैसा लग रहा हु

Devrani:ab तो पुरे 35 वर्षीया विवाहित पुरुष लग रहे हो "और खिल खिला कर हसने लगती है.

बात करते करते दोनों माँ बीटा उद्यान की ओरे चल देते है जहा हर जगह खूबसूरत फूल खिले हुए थे

Baldev:Maa कही बैठ ते है

Devrani:yaha नहीं वो दूर झील है वह पर पत्थर पर बैठेंगे

दोनों चलते चलते उद्यान पर क्र उस छोटे से झील क किनारे निचे पत्थर पर बैठ जाते है

Baldev:ek गुलाब का फूल जो उसने चलते हुए तोड़ लय था आगे बढ़ क्र माँ क बालो पे लगा देता है

Devrani:dhanyawad बीटा

Baldev:ye तो मेरा फ़र्ज़ है

Devrani:ab तू मझ से कही दूर मत जाना

बलदेव बैठे बैठे दाहिने हाथ से उसके बाये हाथ को पकड़ लेता है

Baldev:kabhi nahi..maa,

Devrani:han में बहुत अकेला महसूस की बीते 5 varsh,kaise गुज़री हु तझे ज्ञात नहीं

Baldev:mjhe पूर्ण ज्ञात है maa,ab से तम्हारे चेहरे पर कभी दुःख नहीं आने dunga,mjhe पता है आपका बलिदान और अब आपकी बरी है अपने हक़ लेने की

Devrani:kya बात क्र रहे हो बीटा

Baldev:Yahi क "महारानी की उपाधि आपको भी मिलनी चाहिए thi"aapki भी जय जय कर दरबार में होनी चाहिए ,राज्य क हर हिट का निर्णय में आपकी सहमति लेनी chahiye.aap दिन रत काम करती हो पकवान से ले क्र वस्त्र तक का ध्यान सबका देती ho,aap दासी नहीं हो माँ.

ये सचाई सुन क्र देवरानी क आखो से ासु चालक जाते है और वो अपना सर बलदेव क कंधे पर रख रोने लगती है

Baldev:ro मत माँ

Devrani:ye ख़ुशी क ासु है बीटा पता है हमारी आयु में इतना काम अंतर क्यू है क्यू क मेरा व्याह काम उम्र में क्र दी गई थी वो भी बिना मेरे निर्णय k,wo तो विवाह क अगले हे साल तम्हारा जन्म हो गया ,नहीं तो मेने थान लय गहतराष्ट्रा छोर क्र कही दूर चले जाने ka,fir तम ने एक नै आशा दी मेरे जीवन में और में अपना मन मार क्र रहने लगी इस महल में

Baldev:ye सुन क्र क्रोधित होते हुए कहता है और में उस बड़ी माँ को भी नहीं छोड़ूंगा जिसने तम्हे पिता जी से दूर क्या

Devrani:aisa कुछ नहीं karna,sb कुछ प्रेम से हासिल क्या जा सकता और वैसे भी में विवाह क बाद तेरे पिता जी को समझ गई क वो सिर्फ श्रुष्टि की बात मानेंगे और मझे उन्होंने मजबूरन व्याह क्र क रख रहे है जो क सिर्फ एक उपहार में मिली वास्तु जैसी हो

ये कह कर वो रोने लगी

बलदेव अपने हाथो से आखो क ासु पॉच रहा था

Devrani:or राजा रतन क साथ तम्हारे पिता भी 6 महीने साल भर युद्ध छेत्र में रहते और जब मेने गुप्त जान से पता क्या तो पता चला वो वह राजा रतन क साथ विदेशी महिलाओ क साथ रंगरलिया मन रहे होते और शराब की लत बी पाकर ली उन्होंने राजा रतन क वजह से.

ये सुन क्र बलदेव कहता है

Baldev:insb क किये की सजा मिलेगी माँ

Devrani:dhairya रखो beta,josh में आकर होश कभी नहीं खोना

Baldev:ji माँ जब तक आप मेरे साथ है भला में कैसे धैर्य खो सकता हु

तम हे मेरी धैर्य हो नींद हो ,ह्रदय की सुकून हो

Devrani:bass बास ...बाते मत बना

और बलदेव मुस्कुरा देता उसे देख देवरानी भी मुस्कुरा देती है

Baldev:acha माँ में अपने पिता जैसा नहीं हु तो किसके जैसा हु

Devrani:tmhe पिता जैसा होना भी नहीं था पुत्र तम अपने नाना और मां पर गए हो

Baldev:kya सच में

Devrani:han वही नैन नक्श कद काठी

baldev:to क्या में उनसे मिल सकता हु

Devrani:tmhare नाना की तो मृत्यु हो गई पर तेरे मां का कुछ अत पता नहीं कई वर्षो से .उन्हें मेने आखिरी बार विवाह क पहले हे देखा था और गुप्त जान से पता चला क वो कही गायब है पारस में तो है हे नहीं

Baldev:to में उनकी खोज करूंगा और उनसे मिलूंगा और तम्हे भी अपने भाई से मिलवाऊंगा

Devrani:han मेरे भाई देवराज की लम्बाई भी तम्हारी तरह है 6.2 और एक वीर योद्धा hai,devraj बचपन में मझे मेरी लम्बाई का मज़ाक उडाता था क "तू कितनी छोटी है बन्दर जैसी"

Baldev:par माँ मेरी लम्बाई 6.3 है

Devrani:han तमसे थोड़ी काम

Baldev:pr तम्हारी लम्बाई भी तो काम नहीं 5.10 का कद तो महिलाओ क लये सबसे ुचा है

Devrani:han बीटा पर पारस में तो ये लम्बाई आम बात है

Baldev:par माँ तब की बात कुछ और थी अब यदि मां तम्हे देख ले तो "बंदरिया" तो कटाई नहीं कह सकते तम्हे देख क

Devrani:han ये तो है उस वक़्त में पतली थी bhut..or अब..

बलदेव बात काट ते हुए हस्ते हुए कहता है

बलदेव: पर माँ अब अगर माँ देखे तो तम्हे घोड़ी ज़रूर कहेंगे सफ़ेद ghodi."ye कह कर बलदेव उठ खड़ा होता है और देवरानी से दूर जाने लगता है और देवरानी उसको मारने क लये दौड़ती है

devrani:ruk जा अभी बताती हु" तू देखा है अपने आप को तू है घोडा

बलदेव पीछे एक झड़ी से टकरा जाता है पास में हे एक मैदान में भागते हुए गिर जाता hai.jise देख कर देवरानी हसने लगती है और तुरंत पेट क बल लेते बलदेव क ऊपर चढ़ जाती है और उसके गर्दन पाकर क्र

Devrani:ab बोल क्या हु में ,तझे पता नहीं में पारस की राजकुमारी हु और तू चूहा है

और पूरी ताक़त से दबोचने से देवरानी हल्का साँस ज़ोर से लेने लगती है.

ये समझ क्र क बलदेव क देवरानी का दौड़ने और बल प्रयोग से सांस तेज़ हुई वो अपना हाथ अपने माँ क बांह को पाकर क्र पलटा है और अब देवरानी सीधा लेती थी और उसके ऊपर दोनों पेअर क घुटनो को देवरानी क दोनों तरफ टिकाये अपने हाथो से बलदेव ने देवरानी क दोनों हाथो को पकड़ा rha.is प्रकिर्या में पालते समय देवरानी क ब्लाउज में फसे दोनों बड़े वक्ष कुछ समय क लये पइसस जाते और देवरानी कुछ सेकण्ड्स क लये आखे बंद होती है

devrani:hummm आह

Baldev:nahi छोड़ूंगा और फिर अपना मज़बूत सीना जो क बड़े दूध को दबा दया था उठता है और देवरानी क आखो में देख क्र

baldev:kaun चूहा है ?

देवरानी क दोनों चुके साँस क साथ ऊपर निचे हो रहे थे जिसे बलदेव भी देख रहा था

devrani:muskura क्र तम चूहा नहीं शेर हो

baldev:fir तमने भी सही टक्कट दी तम भी शेरनी हो घोड़ी नहीं

फिर बलदेव हाथ पाकर क्र देवरानी को उठता है और उसके कान में कहता है

Baldev:Maa आप घोड़ी भी हो और शेरनी भी

ये सुन क्र देवरानी भी उत्तर डाई नहीं मानती और कहती hai"beta ज़रा जिराफ का कान निचे lana"or बलदेव निचे झुकता है और अपना कान देवरानी क होठो क पास ले जाता है

देवरानी :तम भी सिर्फ शेर नहीं हो घोड़े भी हो

उत्तर सुन क बलदेव है देता है और दोनों हस्ते हस्ते महल की ओरे चल देते है.
 
अपडेट 7

देवरानी और बलदेव दोनों घूम क महल आ जाते है और देवरानी अपने कक्षा में चली जाती है और बलदेव स्नान करने चले जाता hai.devrani आ क्र सीधे अपने पलंग पर उल्टा लेट जाती है और आज उसे पहली बार महसूस हुआ था क कोई जिस्म ने उसके जिस्म को किसी मर्द क जिस्म ने पहली बार छुआ और सही ढंग से दबा है ,अपने बेटे क कठोर और बलिष्ठ छाती उसके दूध पर अभी भी देवरानी को दबती हुई महसूस हो रही ,इस आभास भर से हे वो आखे बंद क्र ली और सोचने लगी

Devrani:man में) ये क्या हुआ है मझे ,में क्यू अपने पुत्र क ओरे आकर्षिक हो रही hu,uska छूना और दबाना अलग अहसास क्यू दिला रहा hai.wo है भी तो ऐसा क किसी बूढी का भी डिल बलदेव जैसे पे आ जाये,

हाय राम में ये क्या सोच रही हु मझे अपने आप पैर काबू करना होगा.

उधर स्नान घर में बलदेव पूरा नंगा हो क्र आज की घटना याद क्र रहा था और उसका हाथ उसके 9 इंच क हत्या पर थी जिसे वो आगे पीछे क्र रहा था

Baldev:man में) हाय माँ कितना गदा दर और मुलायम और हलके ठोस चुके है तम्हारे ,मेरी छाती में तो मानव दूध चिपक हे गया था पूरा ,इतने बड़े बड़े तो गाय का भी नहीं होता और तेज़ी से अपने 3 इंच मोठे और 9 इंच लम्बे लौड़ा को हिलने लगा

Baldev:humm आआह और उसके मुँह से एक आवाज़ निकली "devraaaani"or उसके लैंड ने ज्वाला छोर दया ये पहली बार बलदेव ने मुथ्व मारा थापनी ज़िन्दगी की और उसने लगभग इतना पानी छोरा क खुद बलदेव देख क आश्चर्य चकित हो गया काम से काम दो मुठी भर क.

स्नान क्र क अपने वस्त्र पहन क्र अपने कक्षा क सोफे पर बैठ क्र सोचने लगता. है

baldev:man में) क्या ये सही है

मेरे मुँह से माँ का नाम कैसे निकल सकता hai,mene देवरानी कहा ,में कितना बेशरम हु ,सीता जैसी पवित्र माँ को मेने अपवित्र क्र दया

पर मेरे उत्तेजना की बी वजह भी वही थी ,उनसे अगर झील क पास छेड़ छार नहीं होती तो ये सब न होता ,और वो भी तो कितनी आनंदित लग रही thi,mere छूने से ,कई वर्षो बाद उनके चेहरे पर इतनी ख़ुशी देखि है

तो मझे क्या करना चाहिए

ये पाप है पर इस से माँ की ख़ुशी वापस आ सकती है उनको प्रेम की आवस्य्क्ता है प्रेमी की ज़रूरत है ,पर क्या समाज और धर्म इस बात को smjhega,or गहतराष्ट्रा क नियमो क विरुद्ध जाने पैर बहुत बुरा होगा

तभी बलदेव क कण में दादी की बात गूंजती है "डिल की सुन्ना दिमाग की nahi"han डिल तो ये कहता है क माँ को संसार भर का प्रेम दे दू और दिमाग कहता है इसका अधिकार सिर्फ पिता जी को है और ये दुन्या इस बात को कभी नहीं manegi.pr पिता जी ने हे तो इतना दुःख दया है unko,me बचपन से देख रहा हु माँ कैसे रात भर रो रो क्र करवट बदली है अपनी हर इच्छा को अपने मन में दबाया है usne,na कभी वस्त्र का न कभी सोना का न चंडी ka,na महरानी बन ने का मेने तो उनको कई बार बिना खाये सोते हुए देखा है.

अगर में डिल की सुनता हु तो मझे गहतराष्ट्रा से लड़ाई लड़नी होगी और दिमाग से सुनता हु तो माँ का न तो दूसरा विवाह करा सकता हु और वो जीवन भर दुखी हे रहेगी.

किसकी ख़ुशी देखु गहतराष्ट्रा की?

या अपने माँ देवरानी की?

वो ये सोचता हु अपने कक्षा से बहार निकल क्र निचे सीडीओ से उतरता है

तो देखता है



उसकी माँ देवरानी एक लाल रंग की सदी पहनी थी और हरे रंग क ब्लाउज में उसके बड़े चुके कैसे हुए साफ दिख रहे थे ,उसके पेट पैर एक चैन था ,पीछे गोल मोती गांड देख बलदेव का जी ललचा गया और उसका डिल बोल उठा

Baldev:Kya माल है

देवरानी अपने बेटे दुवारा ऐसे निहारे जाने से शर्मा आ जाती है और अंदर हे अंदर खुश होती है

देवरानी: मन में) आज कोई पहली बार मझे किसी ने ऐसा इतने प्यार से देखा है और उसका डिल ज़ोरो से धड़कने लगता है उसे एक अजीब से ख़ुशी होती है

बलदेव और देवरानी एक दूसरे क आखो में खोये हुए थे क तभी वह कमला आ जाती है और दोनों को इस तरह घूरते देख लेती है

और कमला को समझते देर नहीं लगता क ये माँ बीटा वाला प्रेम नहीं कोई और प्रेम है

kamla:Halka सा खासी करते हुए महारानी?

दोनों का ध्यान भांग होता है और

devrani:ha.. है बोलो कमला

बलदेव अपना सर निचे क्र बहार चला जाता है

Kamla:Maharani आप ठीक तो है न

Devrani:ha क्यू

Kamla:baat छुपाते हुए कहती है " में तो मालिश करने आई हु आपकी" "पर आज तो आप बिना मालिश क खिल रही हो"

devrani:kuch भी

Kamla:sachi,mjhe तो लगता है किसी ने आज आपको मसल दया हो

(देवरानी को आज सुबह की बात यद् आती है जब बलदेव ने उसको अपने निचे ले क्र मसल दया था और उसके छूट म चिति रेंगने लगती है)

Devrani:tumhara मतलब

Kamla:yahi क किसी और दासी से मालिश तो नहीं करा लय

Devrani:tmhe तो पता है में तम्हारे सिवा किसी और मालिश नहीं करवाती

18 वर्ष से

Kamla:to इसलिए कहती हु न कोई ढूंढ लो जो आपका ढंग से मालिश क्र दे

ये बात चीत करते दोनों कमला और देवरानी अपने कक्षा में आ जाते है

देवरानी :मज़ाक नहीं

कमला:18 वर्षो में मेने आपकी मालिश की पर इतना खुश कभी नहीं देखो जितनी आज हो आप

देवरानी को ये बात तीर की तरह चुभता है दिल में

devrani:man me)ye तो सब पापी डिल का नशा है जिसने आखो से बलदेव ने पीला दया है )

devrani:andar से मुस्कुराते हुए ". कुछ भी कहती हो कमला"

Kamla:acha तो आप लेट जाइये मालिश क्र दू

Devrani:nahi अभी मालिश नहीं तम बास सिर्फ सर में तेल रख दो

और कमला एक कुर्सी लती है और जिसपे देवरानी बैठती है और कमला आयुर्वेदिक औसधि और तेल ला क्र उसके सर क बल को जो बंधा था खोल देती है और उसके बाल लम्बे काले जो कमर तक थे में तेल लगन लगती है

kamla:aap की सुंदरता अब भी ऐसी ह क कोई भी आपको अपनी रानी बनाना चाहेगा

Devrani:Me इतनी भी जवान नहीं

Kamla:ame तो कहती आप कोशिश करो कोई न कोई तो मिल जायेगा जो आपको जो प्यार कभी नहीं मिला वो दे और लैला मजनू जैसा

Devrani:hmm

Kamla:or आपके ये तरसे हुए बदन की ऐठन को बी दर्द दे कर इसका दर्द काम करे और आपको एक नयी ऊर्जा दे ,विश्वास कीजिये महारानी ऐसा हो गया तो आप जैसे बदन वाली का कभी सर भी न दुखे और न हे माइलिश की अवस्य्क्ता हूँ

देवरानी ये सुन क्र शर्म से आखे झुका लेती है

devrani:na बाबा मझे दर लगता है और वैसे भी ऐसा राजा मिलेगा कहा जो मेरी खुमारी निकल दे और में कहा धुंडु ,मुझे मरना नहीं कमला की बची

Kamla:kahi जाने की आवश्यकता नहीं यही गहतराष्ट्रा में खोजो

Devrani:yaha कोई मेरे हिसाब का नहीं

Kamla:mene बहुत से मर्द देखे है

Devrani:me पारस की रानी हु कमला ये मत. भूल में किसी ैरे गैर को देखती भी नहीं

Kamla:ek बात कहु बुरा नहीं मानोगे वचन दो

Devrani:hum वचन देते है

Kamla:aap क हिसाब का और आप की खुमारी निकलने वाला दम्म तो बास युवराज बलदेव सिंह रखता hai,use हे ये मौक़ा दो

ये सुनते हे देवरानी क छूट में चींटी रेंगी और उसे अहसास अभी थोड़े देर पहले कैसे बलदेव देख रहा था और कैसे उसे मसला था मैदान में

Devrani:Zor से चिल्लाते हुए "कमलाआ तम्हारी इतनी हिम्मत अगर हम वचन न डाई होते तो तम्हारा ये पाप भरे शब्द की सजा तम्हारी जान होती "

देवरानी सोचती है अगर वो ऐसा न कही तो कमला उसके बारे में क्या सोचेगी क और कही और बात पंहुचा दी इस कमला ने तो

Kamla:muaaf क्र दो महारानी

devrani:theek है तम मेरी सहेली हो कमला पर काम से काम सोचो तो क्या कहते हो और एक मुस्कान देती है कमला को.

कमला समझ रही थी देवरानी क छूट में कुछ और मुँह में कुछ है और उसके डिल में प्यार की घंटी बलदेव ने अभी बजा क्र गया था

Kamla:acha तो कोई ाचा राजकुमार ढूंढो आपके हिसाब का और ज़ोर से दोनों है देती है

(कमला अपने मन me"me आपका बुखार नहीं निकलवाया तो मेरा नाम कमला नहीं)

देवरानी: थोड़ा नरम मिजाज़ी दिखते हुए " ाचा देखो"

तभी कमला का काम खत्म होता है और वो विदा ले क्र चली जाती है
 
अपडेट 8

बलदेव जब अपने माँ से आँख लारा क्र क्र कमला क आने क बाद महल से बहार निकलता है उसके दिमाग में वैध जी का ध्यान अत जिसे उसे बुलाना था दादी क इलाज करवाने क लये वो सैनिक को आदेश देता है क उसे जंगल की ओरे जाना है तैयारी kare,kuch देर दो सैनिक एक काळा रंग का घोडा ले क्र आ जाता है जिस पर बड़े आसानी से सवार हो क्र दोनों सैनिको क साथ बलदेव जंगल की ओरे चल पड़ता hai,ghanto क बाद एक कुटिया क पास वो सब रुकते है दोनों सैनिको को कुटिया क बहार रहने का आदेश दे क्र वो खुद दबे पाँव कुटिया क भीतर प्रवेश करता है वो देखता है वैध जी योग आसान में बैठ जप क्र रहे थे वो वही उनके पास बैठ जाता hai,kuch देर बलदेव बैठे रहता है तभी वैध जी आखे खोलते है

Vaidh:bolo बालक

Baldev:vaidh जी मेरा नाम बलदेव सिंह है में. गहतराष्ट्रा का राजकुमार हु

Vaidh:balak वही गहतराष्ट्रा जो राज्य जंगलो और पहाड़ो से छुपा है और कई राजाओ ने छह क्र भी वह का रास्ता न खोज सके ,इसलिए वह किसी ने आक्रमण नै क्या

मेने सुना है वह बहुत सुकून hai,waha कभी खून न बहा

Baldev:aap सही ह वैध ji,mjhe आपके बारे में आचार्य जी ने बताया और उन्होंने कहा था मझे क "तमने संसार की साडी विद्या प्राप्त क्र ली और शरीर से शक्तिशाली हो गए हो पर आत्मा से शक्तिशाली बास वैध जी बना सकते है"

Vaidh:ye तो उनका बड़प्पन hai,me ये समझता हु क जीवन को अचे से जीने क लये अश्त्र शाश्त्र की नहीं मन की शांति होनी अनिवार्य है

Baldev:aap की सोच को प्रणाम गुरु जी

और उनके चरण स्पर्श क्र क बैठ जाता है

baldev:guru जी आप मझे अपना शिष्य बना लीजिये

Vaidh:hum तम्हे अपना शिष्य स्वीकार करते है और वचन देते ह क तम्हे हम अपनी हर कला से मालामाल क्र देंगे और तम अपने आत्मा से खुश रहना सीख जाओगे

Baldev:dhanyawad गुरु जी

आप हमारे साथ महल चलिए और यदि आपको ाचा लगे तो आप वही रह सकते है महल में

Vaidh:nahi बलदेव में महल में कटाई नहीं रह skta,me तो कुटिया में हे रहूंगा अगर मझे गहतराष्ट्रा का वातावरण अनुकूल लगा तो

Baldev:jaisi आपकी इच्छा वैसे मेरी दादी महरानी जीविका अपने पेअर से मजबूर है उन्हें भी आपकी आवश्यकता है

Vaidh:theek है हमे अतिशगरा निकलना चाहिए

और वो सब घोड़े पे बैठ क गहतराष्ट्रा की ओरे निकल पड़ते hai,ghatrashtra पहुचत पहुंचते संध्या हो जाती है और ुचि पहाड़ पर पहुंच क्र घोडा ज़ोर से हिह्याता है और वैध निचे का नज़ारा देख देख

vaidh:Kya सुन्दर दृश्य है पुरे गहतराष्ट्रा दियो से जग मैग क्र रहा है इतने रौशनी है ऐसा लग रहा है दिन है हर जगह कंदील और दिए जल रहे थे

घोड़े की आवाज़ सुन क्र सीमा क सिपाही अपने लैंटर्न ले क्र देखते है क कौन है और युवराज को देख फिर अपने जगह पर जा क्र खड़े हो जाते है

इधर अपने कक्षा में लेती देवरानी क कानो में जैसे हे घोड़े क चिल्लाने की आवाज़ सुनती hai,devrani हो पेट क बल लेती थी तुरंत उठ जाती है

देवरानी: आगया मेरा ghoda(yuvraj baldev)or देवरानी क मुख मुस्कुरा देते है

पहाड़ से उतर क्र अतिथि गृह क तरफ बलदेव वैध जी को ले क्र जाता है और

वैध जी :आज इस घर में विश्राम करे कल सुबह आपके लये कुटिया की वयवस्था क्र दी jayegi"or बलदेव घोड़े से वैध जी का सारा सामान उठा क्र अंदर रख देता है

baldev:aap जब तक थोड़ा विश्राम करे में पिता जी से मिल क्र अत हु फिर आप को में दादी क पास ले क्र चलता हु

Vaidh:theek है

बलदेव श्रुष्टि यानि बड़ी माँ क कक्षा की ओरे जाता है देखता है राजपाल और श्रुष्टि अभी अभी दरबार से आ क्र अपना मुकुट रख रहे थे सर से निकल kr,raja राजपाल का मुकुट कई तरह क रंग जवाहरात क बने थे पर महारानी षुरूश्ती का सिर्फ सफ़ेद रंग क हीरे क बने the,baldev षुरूश्ती का मुकुट देख क्र अपने माँ की यद् आती है

baldev:pita जी

और अपने पिता क पेअर छूटा है

और फिर अपने बड़ी माँ क पेअर छूटा है

pita:beta तम इतनी देर क्यू लगा डाई कहा थे

Baldev:wo में दादी क इलाज क लये वैध जी लेन गया था ,मझे लगता है वो ठीक हो सकती

Rajpal:mjhe टम्पे गर्व है बीटा इतनी छोटी सी उम्र में तमने जिम्मेदारी लेना सीख lya,agar तम चाहो तो में तम्हे आगे की सिक्षा ग्रहण करने हेतु विदेश भी भेज सकता हु राजा रतन की मदद से

baldev:pita जी मेने अभी आगे का नहीं सोचा hai,pehle में घर क मुश्किल हालत ठीक करना चाहता हु और गहतराष्ट्रा का और खास हमारे परिवार क दुःख को दूर करना चाहता हु

ये कह क्र वो पिता से आज्ञा ले क्र फिर वैध क पास चला जाता है

देवरानी अपने कक्षा में बैठ क्र ताली बजती है और ताली सुनते हे कमला अंदर आती है

Kamla:hukam महरानी

Devrani:sainiko से पता करो बलदेव आगया है तो अभी कहा है

कमला चली जाती है और पता लगा क्र वापस आती है

Kamla:maharani युवराज को आये अभी कुछ समय हुए है वो वैध को लाये है उनको भोजन करवाए अपने पिता से मिले फिर वो वैध को ले क्र महारानी जीविका को दिखने ले जा रहे है.

(मन में: एक पल बर्दाश्त. नहीं होता अपने प्रेमी से दूरी और कहती है पाप है ये है वो hai,maharani तू तो प्रेम में धास्ति जा रही है तझे खुद नहीं पता है)

Maharani:man में) आने दो इस घोड़े को बता टी हु क मझ से ज़्यादा महत्तव उसे अपने पिता का हो गया में दिन भर इंतज़ार की और वो मझे छोर क्र सब से मिल लय

बलदेव इधर वैध जी को ले क्र दादी क कक्षा में ले आटा है जहा वैध जी दादी को देश द्वारा लेप लगवाता है और कहता है क वो कल वैशाखी बना क्र देगा जिस से जीविका चल पायेगी

देवरानी का संयम टूट जाता है और वो अतिथि गृह क तरफ जाती है महल से निकल क्र वह कोई नहीं होता तो वही बैठ जाती है क कुछ समय में उसका पुत्र aayega.tbhi उसके सामने एक पोटली दिखती है जिसे वो हाथ लगाती है तो उसे समझते देर नहीं लगता क उसमे पुस्तके है देवरानी ऊपर से दो किताब खींच लेती है और पोटली को बांध देती है और वही कुर्सी पर बैठ जैसे हे पहले पुष्तक का पन्ना पलट टी है उसे पैन में योग क आसान क चित्र और एक पाने उस आसान की विशेषता लिखी हुई थी फिर वो दूसरे पुष्तक को खोलती hai.pushtak खोलते हे उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है क्यू क ये पुष्तक में एक महिला और पुरुष नंगी अवस्था में. थे पुरुष खड़ा हुआ था और उसका लिंग महिला क योनि में घुसा था जो उसके सर को पाकर क्र पुरुष क गोदा में बैठी थी)

ये देख कर देवरानी क माथे पे एक बून्द पसीना आ जाता है और वो चित्र क निचे उस आसान का विश्लेषण पढ़े बिना दोनों पुष्तकों को ले क्र अपने महल में तेज़ी से आ जाती है पर जैसे हे वो अपने कक्षा में जाती है कमला की नज़र उसके हाथ में पुष्तकों पर पड़ती है पर कमला कुछ कहती नहीं

इधर वैध जी जीविका का इलाज क्र क सैनिको क साथ वापस महल से बहार अतिथि गृह में आ जाता है और बलदेव अभी भी दादी क पास बैठा था

Baldev:ab आपको कैसा महसूस हो रहा है दादी

Dadi:bhut ाचा बलदेव और तम्हारा धन्यवाद्

Baldev:kal से आप वैशाखी से चलोगी और में आपको झील भी दिखने ले क्र जाऊंगा

Dadi:aakho में ासु ले क्र तेरे हृदय में कितना प्रेम है

Baldev:mjhe आप बता सकते हो प्रेम क्या है

Dadi:jo तू मेरे लय क्र रहा है वो प्रेम hai,meri ख़ुशी क लये क्र रहा है

Baldev:to क्या किसी को खुश करना प्रेम है

dadi:apne प्रेमी की ख़ुशी से खुश होना भी

Baldev:to क्या तम्हे कभी प्रेम हुआ है

dadi:haste हुए बीटा तेरा दादा मेरी प्रेमी थे जिसके वजह से आज तम सब ho,or तम्हे भी तम्हारी राजकुमारी मिलेगी जिस से टमको प्रेम होगा और तम उसके हर ख़ुशी क लये अपनी जान की बाज़ी लगा डोज तम्हे उसका चलना उसका बोलना हसना पूरी दुन्या से अलग लगेगा जिसको पाकर तम्हारा तन मन प्रसन रहेगा और मझे भरोसा है तम्हारा हृयदाय ऐसा है जो तम्हारी राजकुमारी होगी वो भी पूरी तन मन से तमसे प्रसन्न रहेगी

Baldev:to क्या प्रेम किसी से भी हो सकता है

dadi:han किसी से bhi,prem कोई बंधन मर्यादा जाती या रंग नहीं देखता बास हो जाता hai,jab तम्हे उसे देख क्र देखने का मन हो और लगे तम इस दुन्या क ऊपर उड़ रहे हो

बलदेव को सुबह का अपने माँ देवरानी को देखना याद आता है और मुस्कुरा देता

Baldev:or दादी ये प्रेम पाने क लये क्या करना होता है

Dadi:prayatn ,उसके बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता बस कोशिश से हे मिल सकता है

Baldev:agar समाज और धर्म बढ़ा आये प्रेम में तो

dadi:dharm और ग्रन्थ अनेक है नियम अनेक है पर मनुष्य एक है प्रेम एक है इसलिए सब नियम धरे क धरे रह जाते है अगर मनुष्य खुश न हो to,apne डिल की सुनो और सबको खुश रखो तम खुद खुश रहोगे हमेशा

Baldev:dhanywad दादी मझे मेरा उत्तर मिल गया

इधर देवरानी आकर उन दो पुष्तकों को अपने पलंग क गद्दे क निचे छुपा देती है तभी कमला आ जाती है अंदर

kamla:aapne भोजन क्या महारानी

Devrani:nahi kamla(man में ; में बिना अपने युवराज क नहीं खा सकती)

Kamla:pata है महरानी मेरी बहिन की बेटी किसी क साथ भाग गई

Devrani:kaha भाग गई

Kamla:ab लो क्र लो बात अगर पता होता तो पाकर न लेते हम

Devrani:matlab क्या है

Kamla:mahrani आप न कुछ नहीं जानती भागने का अर्थ ये है क किसी से प्रेम था उसका और वो उसके गहतराष्ट्रा छोर क चली गई

Devrani:kya उसे तो दंड होना चाहिए

Kamla:ary महरानी प्रेम होता हे ऐसा hai,dand क्या संसार भर से युधा क्र लेते है लोग प्रेम पाने क लये

Devrani:han कमला तमने सही कहा मझे प्रेम का क्या पता होगा इतनी काम उम्र में विवाह क्र यह आगयी और उसके बाद का तो जानती हे हो

Kamla:prem आपको पता हो या न हो फिर भी आपको हो सकता है और हो सकता है हो गया हो पर आपको पता न ho,prem वो होता जब एक औरत एक मर्द की एक पल की दूरी भी बर्दाश्त नहीं होती वो हर तरह से मर्द को खुश रखना चाहती है चाहे कितना भी दर्द हो उसे ,जिसे देख क्र डिल कंपनी लगे और हाथ पेअर ढीला पद जाये वो प्रेम होता है

देवरानी आज सुबह की बात यद् क्र क कैसे उसका डिल ज़ोरो से धारक रहा था और उसको एक अलग सा अहसास हुआ था और अपने मन में सोचती है.

Devrani:man में) क्या यही प्यार है???

कमला अब तम जाओ अब में आराम करूंगी.
 
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